31032006/1100/gpc/akt/1a

 

 

अशोधित प्रति/प्रकाशनार्थ नहीं

 

 

राजस्‍थान विधान सभा की कार्यवाही का वृत्‍तान्‍त

 

 

अंक:5      बारहवीं विधान सभा के पंचम सत्र का बत्‍तीसवां दिवस      संख्‍या: 21

 

शुक्रवार,

31 मार्च, 2006

 

राजस्‍थान विधान सभा की बैठक 1100 बजे

विधान सभा भवन जयपुर में प्रारम्‍भ हुई ।

 

(श्री रामनारायण विश्‍नोई, उपाध्‍यक्ष, पदासीन)

 

तारांकित प्रश्‍नोत्‍तर

श्री उपाध्‍यक्ष:  श्री मदन राठौड़।

वन सीमा पर बसे ग्रामों हेतु सड़क सुविधाएं

328. श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): क्‍या वन मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) क्‍या यह सही है कि वन सीमा पर स्थित ग्रामवासियों के लिए बुनियादी विकास सुविधाएं उपलब्‍ध कराने हेतु एक हैक्‍टेयर से कम वन भूमि की आवश्‍यकता पड़ने पर उपयोग की अनुमति दी गई है? यदि हां, तो कहां-कहां, कितनी व किस प्रयोजनार्थ? विवरण सदन की मेज पर रखें।

(2) क्‍या यह सही है कि 250 की आबादी वाली ढाणियों को बुनियादी सुविधा सड़क मार्ग से जोड़ने में आने वाले वन क्षेत्रों में सड़कें बनाने की अनुमति (अनापत्ति प्रमाण-पत्र) इस आधार पर दी जा सकेगी? यदि नहीं तो क्‍यों?

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): (1) भारत सरकार द्वारा 1 हैक्‍टेयर से कम वन भूमि को निर्धारित शर्तों पर राज्‍य सरकार को प्रत्‍यावर्तन करने को अधिकृत किया है। राज्‍य सरकार द्वारा तीन प्रकरणों में स्‍वीकृति प्रदान की गई है जिनका विवरण संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार सदन की मेज पर रख दिया गया है।

(2) जी नहीं। भारत सरकार द्वारा 11 प्रकार की गतिविधियों संबंधी प्रस्‍तावों हेतु अधिकृत किया है जिसमें सड़क बनाने की योजनाएं सम्मिलित नहीं होने से सड़क बनाने की अनुमति दिया जाना राज्‍य सरकार के स्‍तर से संभव नहीं है।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से जानना चाहता हूं क्‍या वन सीमा में बुनियादी सुविधा विकास हेतु व पीएमजीएसवाई के नियमानुसार भूमि प्राप्ति के लिए आवेदन लम्बित हैं? यदि हां तो उन्‍हें अनुमति क्‍यों नहीं दी जा सकी? दूसरा क्‍या वन सीमा में एनीकट बनाने की अनुमति दी गई है? यदि नहीं तो जो एनीकट बने हैं वे किस आधार पर बिना अनुमति बने हैं तथा अब क्‍या कार्यवाही की जाएगी? तीसरा, भारत सरकार द्वारा राज्‍य सरकार को किन-किन गतिविधियों हेतु वन भूमि आवंटन का अधिकार दिया गया है व केन्‍द्र सरकार द्वारा निर्धारित शर्तें क्‍या हैं?

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, वन संरक्षण अधिनियम, 1980 में वन भूमि को डिरिजर्वेशन का अधिकार वन अधिनियम, 1980 के तहत गवर्नमेंट ऑफ इण्डिया को है। राज्‍य में विकास कार्यों एवं बुनियादी सुविधाओं को उपलब्‍ध कराने हेतु भारत सरकार ने गैर वानिकी उपयोग हेतु कुछ शर्तों के आधार पर एक हैक्‍टेयर से कम भूमि के उपयोग हेतु राज्‍य सरकार को अनुमति प्रदान की गई है, जिसमें स्‍कूल, अस्‍पताल, बिजली व दूरसंचार की लाइनें, पेयजल, जल वर्षा, जल हार्वेस्टिंग की संरचनाएं, लघु सिंचाई, नहर, गैर परम्‍परागत ऊर्जा स्रोत, व्‍यावसायिक प्रशिक्षण केन्‍द्र, विद्युत उप केन्‍द्र, संचार पोस्‍ट, संवेदनशील थाने पर पुलिस स्‍टेशन आउटपोस्‍ट, बोर्डर आउटपोस्‍ट और वाच टावर आदि हैं। सड़क के संबंध में वन भूमि के अनारक्षण हेतु अनुमति भारत सरकार द्वारा जारी की जाती है। माननीय सदस्‍य ने पीएमजीएसवाई सड़क के बारे में पूछा है। राज्‍य सरकार के पास 50 प्रस्‍ताव पीएमजीएसवाई के तहत आये थे उनमें से दो प्रस्‍ताव सही होने पर गवर्नमेंट ऑफ इण्डिया को स्‍वीकृति हेतु भेजे गये हैं और 48 प्रस्‍ताव हैं उनमें कुछ क्‍वेरीज थीं जो चीफ इंजीनियर, पीडब्‍ल्‍यूडी को भेजे गये हैं। क्‍वेरी कंपलीट होने के बाद इन प्रस्‍तावों को पीएमजीएसवाई योजना में स्‍वीकृति हेतु गवर्नमेंट ऑफ इण्डिया को भेजा जाएगा।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं जानना चाहता हूं कि क्‍या बिना अनुमति वन भूमि पर आबादी बस गई है अथवा अन्‍य किसी उपयोग में ले ली गई है उसके लिए क्‍या कार्यवाही की जा रही है और क्‍या करेंगे? दूसरा, क्‍या वन भूमि में जो आबादी बस गई है उनको बिजली, पानी की सुविधा भी दे दी गई है? वह किसकी अनुमति से मिली और मिल गई है तो क्‍या उनको रेगुलराइज कर दिया जाएगा? तीसरा, सरकारी धन से भी वन भूमि में कुछ भवन बने हैं वे किस कारण से बन पाये?

श्री उपाध्‍यक्ष:  माननीय सदस्‍य।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): जो एनीकट्स बने हैं, वन भूमि में कई एनीकट्स एनजीओज् ने बनाये हैं, तो क्‍या उसके लिए अनुमति दी गई है? नहीं दी गई है तो वे किस आधार पर बना दिये गये?

श्री उपाध्‍यक्ष:  माननीय सदस्‍य, यह तो आप जनरल और वेग सवाल पूछ रहे हैं। प्रश्‍न से संबंधित नहीं है।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): नहीं, बिलकुल संबंधित सवाल है। उपाध्‍यक्ष महोदय, वन भूमि में आबादी बस गई है वो किस आधार पर बस गई?

श्री उपाध्‍यक्ष:  वन मंत्रीजी कोई पूरा थोड़े ही ..(व्‍यवधान)..

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): आबादी बस गई, आज भी एनजीओज् अभी भी एनीकट बना रहे हैं। तो क्‍या इनकी जानकारी है और बना रहे हैं तो अनुमति ली गई है, यह इन्‍होंने दर्शाया नहीं है।

श्री जयराम जाटव (खैरथल): मेरा प्रश्‍न इसी से संबंधित है। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍व रिकार्ड में लगभग 500-700 वर्ष पुराने जो गांव हैं, जो गांव रेवेन्‍यू रिकार्ड में हैं और वन विभाग के रिकार्ड में दर्ज हुए हैं वे 50, 40 या 20 वर्ष पहले का वन विभाग का रिकार्ड है। ऐसे गांव 500 वर्ष पुरानी आबादी के गांव हैं, मेरे खुद के विधान सभा क्षेत्र में किशनगढ़बास में 10 करोड़ की मार्केटिंग बोर्ड से एक रोड स्‍वीकृत हुई श्‍यामाका से राता खुर्द और उसमें 400-500 मीटर रहने पर वन विभाग ने कहा यह हमारी जमीन है और इसको रोक दीजिए। वह सारी सड़क अधूरी पड़ी है। माननीय मत्री महोदय, इसमें मेरा निवेदन है जो 400-500 मीटर सड़क रह गई, बाकी सड़क दोनों तरफ से बन गई उस सड़क को बनवाने के लिए आप अपनी तरफ से मुझे आश्‍वस्‍त करेंगे क्‍योंकि वो गांव 500 वर्ष पुराने हैं, वन विभाग का रिकार्ड है 20-30 वर्ष पहले का है इससे पहले रिकार्ड उठाकर देख लें राजस्‍व रिकार्ड में वन भूमि कहीं पहले नहीं थी।

श्री उपाध्‍यक्ष:  माननीय सदस्‍य, आपका यह प्रश्‍न इससे संबंधित नहीं है। ..(व्‍यवधान)..

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैंने जो प्रश्‍न किया है कि आज भी एनीकट बन रहे हैं ..(व्‍यवधान).. उपाध्‍यक्ष महोदय, पहले मेरा तो पूरा हो जाए, मैं मूल प्रश्‍नकर्ता है। आज भी राजीव गांधी फाउंडेशन एनीकट वन भूमि में बना रहा है तो क्‍या उसके लिए अनुमति दी गई है और नहीं दी गई है तो वे किस प्रकार से बना रहे हैं?

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा इसी से संबंधित प्रश्‍न है।

श्री उपाध्‍यक्ष:  बीच में नहीं, अभी ठहरो। पहले आप करें।

श्री भरत सिंह (दीगोद): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मूल प्रश्‍न वन भूमि में सड़कों का है। मैं माननीय वन मंत्रीजी से जानना चाहता हूं कि क्‍या कोटा बाईपास जो चम्‍बल अभयारण्‍य में से होकर निकलेगा उसकी अनुमति वन विभाग ने उसकी सिफारिश केन्‍द्र सरकार को की है बाईपास बनाने की? पहला प्रश्‍न तो यह है।

दूसरा प्रश्‍न यह है कि अगर उसकी अनुमति प्रदान की है तो क्‍या कारण है कि कोटा में कोटा से मण्‍डावरा चम्‍बल पुल के यहां पर वन भूमि में सड़क बन रही है, एक करोड़ 10 लाख रुपये स्‍वीकृत हुए हैं पीडब्‍ल्‍यूडी से मिसिंग लिंक योजना के तहत, जहां आपने वन भूमि में कोटा बाईपास बनाने की स्‍वीकृति प्रदान की है। आपने मण्‍डावरा के ऊपर जो रास्‍ता मिसिंग लिंक का 1 करोड़ 10 लाख से बना रहे हैं उसकी अनुमति क्‍यों नहीं प्रदान की? ..(व्‍यवधान)..

श्री उपाध्‍यक्ष:  पहले जवाब आने दीजिए। ..(व्‍यवधान).. ज्‍यादा हो जाएंगे, पहले जवाब आने दें।

श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्‍डी): एक प्रश्‍न पूछूंगा, साथ में जवाब दे देंगे माननीय मत्री महोदय। 40 साल पहले जो जमीन राजस्‍व की थी काश्‍तकारों के नाम परिवर्तन हो गई, जिसके ऊपर लगातार आज भी खेती कर रहे हैं। बीच में अधिसूचना जारी करके उनको वन विभाग के नाम दर्ज कर दी और उन्‍के खातेदारी अधिकार निरस्‍त कर दिये। इस बारे में सरकार क्‍या कदम उठा रही है? ..(व्‍यवधान)..

श्री उपाध्‍यक्ष:  पहले जवाब आने दीजिए।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय सदस्‍यों को एक जानकारी देना चाहूंगा नेशनल पार्क सेंक्‍चुरी एरिया के अंदर अगर कोई प्रस्‍ताव यूजर एजेन्‍सी के द्वारा राजस्‍थान सरकार को भेजे जाते हैं उनका परीक्षण कर गवर्नमेंट ऑफ इण्डिया को ये प्रस्‍ताव भेजे जाते हैं और भारत सरकार इसकी स्‍वीकृति के पहले स्‍टेट वाइल्‍ड लाइफ की एनओसी और सेंट्रल वाइल्‍ड लाइफ की एनओसी और सुप्रीम कोर्ट की परमिशन प्राप्‍त कर बाद में इसकी स्‍वीकृति जारी की जाती है। पाली से आने वाले माननीय सदस्‍य ने वन भूमि में आबादी की बात की। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जिस तरह से जनसंख्‍या की बढ़ोतरी हो रही है और वास्‍तव में जोधपुर है, जयपुर है ऐसे कई स्‍थान हैं जिन स्‍थानों पर आबादी बढ़ने के कारण वहां पर लोगों ने वन भूमि के अंदर मकान बना दिये, वहां पर जो सुविधाएं होनी चाहिए वे सुविधाएं उपलब्‍ध करा दीं। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय,  मैं अपने विभाग के द्वारा इसका पूरा सर्वेक्षण कर, पूरी जानकारी कर इसको किस हिसाब से डिनोटिफाइड अगर करना हो।

 


mlb/akt/1b/1110/31.3.2006

 

तो डिनोटिफाइड के आधार पर और भारत सरकार ने एक एनपीपी, नेट प्रजेंट वैल्‍यु जो दर निर्धारित की है और एक कमेटी कांस्‍टीट्यूट की है उसमें एक हैक्‍टेयर पर 5ा.80 लाख रुपये मिनिमम और 9.20 लाख रुपये मैक्सिमम यह दर तय की गई है और उस कमेटी के द्वारा जो रिपोर्ट आएगी तो यह कास्‍ट निर्धारित की गई है यह निर्धारित कास्‍ट देने के बाद में इस नेट प्रजेंट वैल्‍यु देने के बाद में इस पर आवश्‍यक कार्यवाही की जा सकती है। वास्‍तव में यह एक गंभीर प्रश्‍न है, राजस्‍थान में है, जोधपुर में है, जयपुर में है, ऐसे अधिकांश स्‍थानों पर ..

श्री उपाध्‍यक्ष: पूरे राजस्‍थान में है।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): लोगों ने आबादी बना दी है। नाथद्वारा में है, नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य ने अभी जिक्र किया है तो इनका पूरा सर्वेक्षण कर इसको किस प्रकार से नेट प्रजेंट वैल्‍यु के आधार पर इवर्नमेंट आफ इण्डिया को प्रस्‍ताव भेजे जाएंगे और प्रस्‍ताव भेजने के बाद में वहां पर स्‍वीकृति आने के बाद में नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न अनुत्‍तरित है अभी।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): उपाध्‍यक्ष महोदय, मुझे आपने परमिशन दी थी। ...(व्‍यवधान)...

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): एक मिनट, मेरा तो प्रश्‍न अभी अनुत्‍तरित है, खारची विधान सभा क्षेत्र की वन भूमि में भीलबेरी के पास में एक बहुत बड़ा भवन बना हुआ है, सरकारी धन से, मेरा प्रश्‍न वेग प्रश्‍न नहीं है उसके लिए अनुमति दी गई है कि नहीं दी गई है। यह बताएं कृपया और इसमें मैंने जितने भी प्रश्‍न किये हैं, सारे संबंधित प्रश्‍न हैं, उपाध्‍यक्ष महोदय। आपने मुझे कहा न कि वेग प्रश्‍न है, वेग कोई भी नहीं, आप मुझे बताएं कृपया कि कौन सा वेग प्रश्‍न था। ...(व्‍यवधान)... 

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा एक प्रश्‍न है।  ...(व्‍यवधान)...

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): खारची विधान सभा क्षेत्र में भीलबेरी के पास में बहुत बड़ा भवन सरकारी धन से बनाया गया था, पूर्व वन मंत्री ने वह भवन बनवाया था तो  उसके लिए क्‍या अनुमति ली गई राज्‍य सरकार से या केन्‍द्र सरकार से उसके लिए बताएं।

श्री उपाध्‍यक्ष: कृपया स्‍थान ग्रहण कीजिए। ...(व्‍यवधान)...

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): इसी से संबंधित है उपाध्‍यक्ष महोदय! ...(व्‍यवधान)... उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से जानना चाहूंगा कि विधान सभा क्षेत्र खारची में एक सड़क निर्माणाधीन है और वन सैंच्‍युअरी में उसी की, उपाध्‍यक्ष महोदय।

श्री उपाध्‍यक्ष: आप अपना अलग से दे दें।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): वह डब्‍ल्‍यूबीएम सड़क बनी हुई है और मात्र एक किलोमीटर उसको डामरीकरण के लिए उसको रोक दी गई है और उसके आगे मन्दिर बन रहे हैं, भवन बन रहे हैं उसको नहीं रोका गया उसको डब्‍ल्‍यूबीएम सड़ बनी हुई है तो उसको रोक दी। मैं माननीय मंत्री महोदय से अनुरोध करना चाहूंगा कि आप उसको स्‍वीकृति प्रदान करें और उपाध्‍यक्ष महोदय, एक मंत्री महोदय उत्‍तर देंगे लेकिन मैं एक जानकारी देना चाहूंगा, अभी सुमेरपुर से आने वाले सदस्‍य ने जो बात कही है राजीव गांधी फाउण्‍डेशन की कि राजीव गांधी फाउण्‍डेशन का कार्य, मैं राजस्‍थान का कोर्डिनेटर हूं और मैं जानकारी देना चाहूंगा कि वन विभाग के ...(व्‍यवधान)... माननीय सदस्‍य, किसी प्रकार का कोई एनीकट निर्माण नहीं हुआ। ...(व्‍यवधान)...

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): जवाब मंत्री जी दे देंगे। ...(व्‍यवधान)...

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न इसी से संबंधित है। ...(व्‍यवधान)...

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): आप कोर्डिनेटर हैं वह ठीक है।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं मंत्री महोदय से जानना चाहता हूं कि अजमेर जिले में सराधना ग्राम की वन भूमि में पी.एच.ई.डी. विभाग एक ट्यूबवैल खोद रहा था जिसे आपने रूकवा दिया, वहां पानी की दिक्‍कत है तो क्‍या आपका विभाग उसकी परमिशन देने की मंशा रखता है? ...(व्‍यवधान)...

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, इसका जवाब नहीं देंगे मंत्री जी, यह स्‍पेसिफिक है आपका सराधना से संबंधित। ...(व्‍यवधान)...

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): मंत्री महोदय, उस सड़क की स्‍वीकृति प्रदान कर दें। ...(व्‍यवधान)...

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): हमार इसी से संबंधित था, साहब।

श्री जयराम जाटव (खैरथल): उपाध्‍यक्ष महोदय, जो सड़क का सवाल था उसका उत्‍तर तो मेरे पास आया नहीं।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय मंत्री जी।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, सड़क की जहां तक बात है 31.8.91 ऐसे वन क्षेत्र में जो वर्तमान में प्रस्‍ताव सड़क को पक्‍का अथवा डामर करने के लिए सुधार किया जाना था प्रस्‍तावित था, सरकार के द्वारा स्‍वीकृति प्रदान की जाती थी, 24.9.2004 के अनुसार जो 1980 के पूर्व जो सड़कों की मरम्‍मत और ब्‍लेक डोपिंग की सशर्त स्‍वीकृति जारी की जाती थी 30 अप्रैल, 2005 को जो 1981 के पूर्व कच्‍चे अथवा निम्‍न शर्तोंधीन पक्‍का किये जानो की अनुमति प्रदान करने की जो शर्तें रखी हैं उसमें मैन एनवायरमेंट की क्लियरेंस लेना नितांत आवश्‍यक है। दूसरा, संरक्षित क्षेत्र जैसे राजस्‍थान उद्यान अभ्‍यारण्‍य और राष्‍ट्रीय वन्‍य जीव बोर्ड एवं माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय की अनुमति नितांत आवश्‍यक है, डामरीकरण के लिए आग पेड़ों एवं वनस्‍पति से सुरक्षित दूरी पर जलाई जाएगी, ये शर्तें हैं, इस प्रकार की जो शर्तें हैं गवर्नमेंट आफ इण्डिया में ले डाउन कर रखी हैं,राज्‍य सरकार इन शर्तों की जो पूर्ति करेगा उनको अपनपी स्‍वीकृति प्रदान की जाएगी और पीएमजीवाई के जो 50 प्रस्‍ताव थे उसमें से दो गवर्नमेंट आफ इण्डिया को भेजे गये हैं, सड़कों के और 48 प्रस्‍ताव हैं जिनमें क्‍वेरीज कम्‍पलीट होने के बाद राजस्‍थान सरकार की तरफ से गवर्नमेंट आफ इण्डिया को भेजे जाएंगे। माननीय सुमेरपुर से आने वाले माननीय सदस्‍य ने जो एनीकट की चर्चा की, मैं निवेदन करना चाहूंगा कि भारत सरकार के वन्‍य संरक्षण अधिनियम, 1980 में भाग दो के तहत जिन कंडीशन के आधार पर जो सामुदायिक व्‍यवस्‍थाओं के लिए, डवलपमेंट के लिए, बुनियादी सुविधाओं के लिए जो राज्‍य सरकार का एक हैक्‍टेयर से कम भूमि के लिए जो अधिकृत किया है उसमें स्‍कूल हैं, अस्‍पताल है, बिजली और दूरसंचार की लाइनें हैं, पेययजल की, जल वर्षा और हारवेस्टिंग की व्‍यवस्‍थाओं पर लघु सिंचाई की योजनाएं हैं और जो सिंचाई बड़े प्रस्‍ताव हैं जो 1980 के बाद के हैं जो प्रस्‍ताव हैं जो प्रस्‍ताव राज्‍य सरकार के पास आते हैं तो राज्‍य सरकार उसकी जो क्‍वेरीज कम्‍पलपीट होने के बाद उनके प्रस्‍ताव की स्‍वीकृति के लिए गवर्नमेंट आफ इण्डिया को प्रस्‍तावित करते हैं। आपके जो एनीकट सकी आपने चर्चा की है यह किसमें है, इस आधार पर अगर वन क्षेत्र में है और अगर इसकी स्‍वीकृति नहीं ली गई तो मैं इसकी जांच करा दूंगा बाकी इर्रिगेशन विभाग निश्चित रूप से राज्‍य सरकार की ओर से स्‍वीकृति लेकर ही यह कार्य करवाया होगा निश्चित रूप से मेरे को ऐसा लगता है।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): एक भीलबेरी वाला रह गया अनुत्‍तरित रह गया, सरकारी धन खर्च किया गया, भवन बनाया हुआ है और खारची विधान सभा में ऐसे और भी कई भवन बने हुए हैं वन भूमि के अन्‍दर तो उसके लिए क्‍या अनुमति ली गई ंहै या नहीं ली गई तो उसके विरूद्ध क्‍या कार्यवाही करने वाले हैं?

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): मैं इसका परीक्षण करवा लूंगा। ...(व्‍यवधान)...

श्री उपाध्‍यक्ष: नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चान, डा. चन्‍द्रशेखर बैद। ...(व्‍यवधान)...

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेराएक प्रश्‍न है। ...(व्‍यवधान)...

श्री उपाध्‍यक्ष: यह आपका इससे संबंधित नहीं है। ...(व्‍यवधान)...

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): एक छोटा सा सवाल है। ...(व्‍यवधान)... जंगल का मामला है और सारे आदिवासी इस समस्‍या से त्रस्‍त हैं। ...(व्‍यवधान)...

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, हाउस में कई बार चर्चा हो चुकी है, यह पूरे राजस्‍थान की समस्‍या है। ...(व्‍यवधान)...

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): और ज्‍यादातर आदिवासी सबसे ज्‍यादा पीडि़त हैं। ...(व्‍यवधान)...

श्री उपाध्‍यक्ष: आदिवासी का मामला अभी इस प्रश्‍न में नहीं है। ...(व्‍यवधान)...

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): मैं आपसे आग्रह करना चाहूंगा कि 40 वर्ष से जो भूमि राजस्‍व रिकार्ड में दर्ज थी परन्‍तु समय समय पर सैटलमेंट होते रहे, राजस्‍व भूमि वन विभाग में दर्ज हो गई है, क्‍या आप पुन: उसको रेवेन्‍यु रिकार्ड में दर्ज कराने का विचार रखते हैं।

श्री उपाध्‍यक्ष: आप स्‍पेसिफिक बताएं।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जो भूमि वन भूमि है उसको तो राजस्‍व रिकार्ड में कराने का प्रश्‍न ही नहीं उठता, जो फोरेस्‍ट की भूमि है और जो फोरेस्‍ट की भूमि अभी तक है उसका अमलदरामद नहीं हुआ है तो मैंने कुछ समय पहले रेवेन्‍यु सेक्रेटरी, एडिशनल सेक्रेटर, मेरे प्रिंसिपल सेक्रेटरी और रेवेन्‍यु के डिवीजनल कमिशनर तमाम सभी लोगों की एक मीटिंग आयोजित की थी और उनको स्‍पष्‍ट निर्देश दिये थे कि जहां पर राजस्‍थान में वन भूमि है जिनका अमलदरामद नहीं हुआ है उसको टाइम बाउण्‍ड प्रोग्राम के आधार पर उनका अमलदरामद कराया जाए।

श्री उपाध्‍यक्ष: डा. चन्‍द्रशेखर बैद।

श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्‍डी): मैं दूसरी बात कर रहा हूं।

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): रेवेन्‍यु भूमि को आपके वन विभाग में दर्ज करने का कहां से आ गया ? ...(व्‍यवधान)...

श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्‍डी): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जो 40 साला किसान को अलाट हो गई, रेवेन्‍यु की जमीन है जिसको खातेदारी के अधिकार मिल गये। ...(व्‍यवधान)...

श्री उपाध्‍यक्ष: मैंने नाम पुकार लिया।

श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्‍डी): 40 साल पहले आवंटित हो गई, खातेदारी अधिकार मिल गये, 40 साल से बैठे हैं, आपने वह अधिसूचित करके वन  विभाग में दर्ज कर दिया, गंभीर मामला है, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र में ऐसे सैकड़ों केस हैं।

श्री उपाध्‍यक्ष: पूरे राजस्‍थान की समस्‍या है।

श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्‍डी): मंत्री जी क्‍या कहना चाहते हैं, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय ?

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): यह बहुत बड़ा मुद्दा है।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, यह तो राजस्‍थान की समस्‍या है, इसमें इस प्रश्‍न के जरिए ज्‍यादा विस्‍तार से बात नहीं होगी।

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): राजस्‍व रिकार्ड है उनके पास पट्टे हैं और वन विभाग में दर्ज हो गई, यह तो मंत्री जी के बस का मामला है।

श्री उपाध्‍यक्ष: आप स्‍पेसिफिक लिख कर दीजिए, कार्यवाही होगी नियमानुसार। डा. चन्‍द्रशेखर बैद।

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): मंत्री जी, जवाब तो दें।

जिला सिरोही की सहकारी समितियों का निरीक्षण

329. श्री शंकर सिंह राजपुरोहित (आहोर): क्‍या सहकारिता मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) क्‍या राजस्‍थान राज्‍य में समितियों के ऑडिट निरीक्षण विभाग के पर्यवेक्षकों द्वारा ही किया जाता है ? यदि हां, तो निरीक्षण हेतु क्‍या मानदण्‍ड निर्धारित हैं तथा किन किन तरह की समितियों में निरीक्षण आवश्‍यक हैं ? विवरण सदन की मेज पर रखें।

(2) वर्तमान में कितने भ्रष्‍टाचार, रिश्‍वतखोरी एवं गबन के प्रकरण जांच प्रक्रियाधीन है ? कितने प्रकरणों में कौन कौन अधिकारी/कर्मचारी दोषी हैं तथा कितने प्रकरणों में किन किन अधिकारी/कर्मचारी को दोषी करार देकर राज्‍य कोष में कितनी राजस्‍व वसूली की गई ? विवरण सदन की मेज पर रखें।

(3) क्‍या यह सही है कि समिति खाम्‍बल एवं भीलबड़ाबास शाखा सिरोही एवं रेवदर का निरीक्षण किया गया है ? यदि हां, तो कब एवं किस किस अधिकारी/कर्मचारी द्वारा व नहीं, तो क्‍यों ?

(4) क्‍या उक्‍त शाखाओं के निरीक्षण में पर्यवेक्षक रेवदर शाखा, खाम्‍बल एवं भीबड़ावास समिकति के व्‍यवस्‍थापक के द्वारा मिली भगत एवं सहभागिता से लाखों के गबन का प्रकरण सरकार के विचाराधीन है 2 यदि हां, तो इस संबंध में अब तक कितनी जांच हो चुकी है तथा जांच के क्‍या परिणाम रहे तथा दोषियों के विरुद्ध अब तिक क्‍या कार्यवाही की गई ? यदि नहीं, तो क्‍यों ? विवरण मय जांच प्रतिवेदन के सदन की मेज पर रखें।

(स्‍थगित)

सार्वजनिक वितरण प्रणाली अन्‍तर्गत खाद्यान्‍न वितरण हेतु वैकल्पिक व्‍यवस्‍था

330. डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): क्‍या खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) क्‍या यह सही है ए.पी.एल. का गेहूं/चावल राज्‍य में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्‍यम से वितरित किया जाता है ? यदि हां, तो इसके अन्‍तर्गत जनवरी, 2005 से अब तक राज्‍य में कितना गेहूं। चावल वितरित किया गया ? माहवार व जिलेवार सूची सदन की मेज पर रखें।

(2) ए.पी.एल. से मिलने वाले गेहूं/चावल प्राप्‍त करने हेतु जनवरी, 2005 के पश्‍चात् राज्‍य सरकार व केन्‍द्र सरकार/ एफ.सी.आई. के मध्‍य हुए पत्राचार की प्रतियां सदन की मेज पर रखें।

(3) ए.पी.एल. का गेहूं/चावल सुचारू मात्रा में समय पर वितरित करने के लिए सरकार द्वारा क्‍या वैकल्पिक व्‍यवस्‍था की गई ? विवरण सदन की मेज पर रखें।

 

skp/akt/31.3.06/1120/1c/1

 

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री (डा. किरोड़ी लाल) : (1) जी हां, यह सही है कि राज्‍य में लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अन्‍तर्गत ए. पी. एल. परिवारों को खाद्यान्‍न (गेहूं और चावल) वितरित किया जाता है।

राज्‍य में जनवरी, 2005 से मार्च, 2006 तक ए पी एल परिवारों को वितरण हेतु 2,82,663 मैट्रिक टन गेहूं और 190 मैट्रिक टन चावल उठाया गया है। जिलेवार माहवार विवरण परिशिष्‍ट-1 पर संलग्‍न है।

(2) ए पी एल राशन कार्ड धारकों द्वारा गेहूँ की बढ़ती मांग, विशेष रूप से नवम्‍बर व दिसम्‍बर, 2005 के पश्‍चात्, को दृष्टिगत रखते हुए केन्‍द्र सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय तथा भारतीय खाद्य निगम के अधिकारियों के साथ निरन्‍तर सम्‍पर्क एवं पत्राचार किया गया है। मुख्‍य-मुख्‍य पत्रों की प्रतियां परिशिष्‍ट-2 के अनुसार प्रस्‍तुत हैं।

(3) लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अन्‍तर्गत भारत सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा खाद्यान्‍न आबंटित किया जाता है एवं भारतीय खाद्य निगम (भारत सरकार के उपक्रम) द्वारा जिलों को रिलीज किया जाता है।

लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली, भारत सरकार की योजना है, अत: इस योजना में खाद्यान्‍न उपलब्‍ध कराने की वैकल्पिक व्‍यवस्‍था राज्‍य स्‍तर पर अपेक्षित नहीं है।

सामान्‍यत: ए पी एल श्रेणी में आवंटन की तुलना में खाद्यान्‍न की मांग अथवा उठाव बहुत सीमित होता है। किन्‍तु नवम्‍बर-दिसम्‍बर, 2005 से खुले बाजार में गेहूं के भाव बढ़ने के कारण ए पी एल परिवारों द्वारा भी गेहूं की मांग की जाने लगी। बढ़ती हुई मांग को देखते हुए भारत सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय और भारतीय खाद्य निगम से खाद्यान्‍न, विशेष रूप से ए पी एल गेहूं उपलब्‍ध कराने हेतु निरन्‍तर चर्चा व पत्राचार किया गया। भारतीय खाद्य निगम के अधिकारियों को निर्देश दिये गये कि वास्‍तविक मांग के अनुसार ए पी एल गेहूं रिलीज करे।

इसके अतिरिक्‍त भारतीय खाद्य निगम की परिवहन व्‍यवस्‍था में भी माह नवम्‍बर-दिसम्‍बर, 2005 से गतिरोध आया एवं जिससे भारतीय खाद्य निगम डिपो पर खाद्यान्‍न उपलब्‍धता में व्‍यवधान हुआ। इसके फलस्‍वरूप डूंगरपुर, बांसवाड़ा, जालौर, सिरोही, राजसमन्‍द और उदयपुर जिले विशेष रूप से प्रभावित हुए। इस सम्‍बन्‍ध में अध्‍यक्ष एवं प्रबन्‍ध निदेशक, भारतीय खाद्य निगम से भी उनके जयपुर प्रवास दिनांक 28.01.2006 के दौरान चर्चा की गई। उनके निर्देशानुसार परिवहन व्‍यवस्‍था को सुचारू रखने के लिए व परिवहन दरें तय करने हेतु जिला कलेक्‍टर को अधिकृत कराया गया। इसके साथ ही परिवहन गतिरोध के कारण, आबंटित खाद्यान्‍नों को उठाव करने की निर्धारित अन्तिम तिथि भी बढ़वाई गई।

ए पी एल राशन कार्ड धारकों को मांग के अनुसार खाद्यान्‍न रिलीज हो, इस हेतु निरन्‍तर प्रयास किये जा रहे हैं।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मैं मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि इन्‍होंने खण्‍ड-1 में जो लिखा है कि जो परिशिष्‍ट-ए में गेहूं का दिया है कि 28,62,638 मैट्रिक टन आवंटन किया गया और आपने 2,82,663 इसका ऑफटेक किया। इसका मतलब आपने सिर्फ 9.87 प्रतिशत का उठाव किया। इसी प्रकार इसके आगे जो सूची आपने संलग्‍न की है जनवरी, 2005 से लेकर मार्च, 2006 तक की जिसमें हर माह के अन्‍दर आपने 16 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 6 प्रतिशत उठाव किया है और इस प्रकार 15 में से 12 महीनों में आपने 15 प्रतिशत से कम उठाव किया है। आपने खण्‍ड तीन में बताया कि नवम्‍बर-दिसम्‍बर, 2005 में गतिरोध आया तो गतिरोध तो जनवरी, 2005 से ही चल रहा था। आपको जितना आवंटन हुआ उसका आप 15 प्रतिशत से कम उठा रहे थे।

दूसरी बात, इसके अलावा जो गेहूं का आवंटन आपको विभिन्‍न दूसरी योजनाओं में किया गया, लाइक मिड-डे मील के अन्‍दर किया गया, वेलफेयर इंस्‍टीट्यूशंस एण्‍ड हॉस्‍टल में किया गया, आपको नेशनल फूड फोर वर्क प्रोग्राम के अन्‍दर आवंटन किया गया उनके अन्‍दर भी आपने सिर्फ 64 प्रतिशत उठाया है दिसम्‍बर तक।

तीसरा, जो माननीय मुख्‍य मंत्री का पत्र आपने साथ में संलग्‍न किया है, इसमें लिखा है कि अन्‍त्‍योदय अन्‍न योजना, बी पी एल, ए पी एल, इसमें आपने मिड-डे मील का जिक्र नहीं किया। मिड-डे मील का पूरे साल के अन्‍दर आपने 60 प्रतिशत उठाया, 50 प्रतिशत उठाया। मिड-डे मील का जिक्र नहीं है, वेलफेयर इंस्‍टीट्यूशंस एण्‍ड हॉस्‍टल जो कि शिड्यूल्‍ड कास्‍ट और शिड्यूल्‍ड ट्राइब के होते हैं उनका जिक्र नहीं है, नेशनल फूड फोर वर्क प्रोग्राम का जिक्र नहीं है और सबसे इम्‍पोर्टेंट योजना अन्‍नपूर्णा योजना का जिक्र नहीं है, इसका आप जवाब दें मंत्री महोदय।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): आपने जो लास्‍ट में पूछा है, मिड-डे मील, सोशल वेलफेयर स्‍कीम, अन्‍नपूर्णा और दूसरी स्‍कीम्‍स हैं, उपाध्‍यक्ष महोदय, वो इससे रिलेटेड नहीं हैं। आपने केवल ए पी एल का पूछा है तो मैं ए पी एल की जानकारी दूं। ए पी एल में आपने जो यह बात उठाई है कि आपका एलोकेशन इतना है, अगस्‍त से पहले राजस्‍थान सरकार का एलेकोशन 2,82,663 मैट्रिक टन था और अगस्‍त के बाद 1,61,219 मैट्रिक टन एलोकेशन हो गया। उपाध्‍यक्ष महोदय जो 1,61,219 हमारा हुआ है इसमें उसके अगैंस्‍ट में नवम्‍बर, 2005 में 33228 मैट्रिक टन गेहूं रिलीज हुआ। माननीय सदस्‍य, एलोकेशन तो उन्‍होंने पेपर्स में पूरा कर दिया लेकिन रिलीज हमें पूरा नहीं हुआ। इसका मैं मंथवाइज रिलीज आपको बता देता हूं कि नवम्‍बर में 33228 रिलीज हुआ, दिसम्‍बर में 12815 रिलीज हुआ, जनवरी में 2129 रिलीज हुआ और फरवरी में 1595 रिलीज हुआ। अलॉटमेंट की तुलना में रिलीज बहुत कम हुआ है। एफ सी आई के गोदाम में गेहूं था ही नहीं और जैसे ही नवम्‍बर-दिसम्‍बर महीने में मार्केट में गेहूं का भाव बढ़ गया तो गेहूं की डिमांड बढ़ गई और गेहूं की डिमांड बढ़ने के कारण एफ सी आई ने भी थोड़ी सख्‍ती बरती और जिस मात्रा में गेहूं हमको मिलना चाहिए था उस मात्रा में गेहूं हमको नहीं मिला। एफ सी आई के गोदाम में स्‍टॉक भी कम था। अगर आप देखोगे तो एक तरफ मैंने स्‍टॉक भी लिख रखे हैं और स्‍टॉक आप चूरू का ही देख लो चूरू में 9582 का स्‍टॉक था जबकि इससे तीन गुना स्‍टॉक हमको मिलना चाहिए था जब हम चूरू को गेहूं सप्‍लाई कर सकते थे। इसलिए इसका सबसे बड़ा कारण यह है। आपने जो पर्सेंटेज दर्शायी है कि आपने ऑफटेक नहीं किया। यह सही है कि हमने जनवरी में 16 प्रतिशत किया, फरवरी में 16.84 प्रतिशत किया, मार्च में 12.38 प्रतिशत किया, अप्रैल में 2.20 प्रतिशत किया, मई में 6.19 प्रतिशत किया, जून में 8.61 प्रतिशत किया, जुलाई में 7.47 प्रतिशत किया, अगस्‍त में 7.75 हो गया, सितम्‍बर में 12.64 हो गया, अक्‍टूबर में 13.97 प्रतिशत हो गया, नवम्‍बर में 20.40 प्रतिशत हो गया लेकिन दिसम्‍बर, जनवरी, फरवरी में यह फिर कम हो गया। दिसम्‍बर में 7.76 प्रतिशत पर आ गया, जनवरी में 0.58 प्रतिशत पर आ गया, फरवरी में 14.52 प्रतिशत हो गया और मार्च में और भी कम चला गया।  इसका सबसे बड़ा कारण माननीय सदस्‍य, यह है कि एलोकेशन तो पेपर्स में हो गया लेकिन हमको गेहूं जिस मात्रा में एलोकेशन हुआ उस मात्रा में रिलीज नहीं हुआ।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): आपने जो पत्रों की सूची संलग्‍न की है उसमें आपने अक्‍टूबर से पत्र लिखना शुरू किया। 26.10.2005 को पत्र लिखा है जबकि आपको मालूम था कि 2005 जनवरी से जितना आवंटन किया था उसका सिर्फ 15 प्रतिशत आप गेहूं उठा पा रहे हैं तो आपके एक साल बाद जाकर के ध्‍यान में आया कि हमको आवंटन कम हो गया है, एफ सी आई के अन्‍दर स्‍टॉक नहीं है।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): ऐसा नहीं है। बैद साहब, इसमें बात यह है कि पहले जो गेहूं हुआ करता था, अगस्‍त से पहले उसमें मार्केट के गेहूं और ए पी एल के गेहूं में फर्क कुछ नहीं था। 6.80 रुपये में ए पी एल गेहूं मिलता था और करीबन इतनी ही मार्केट की वैल्‍यू थी इसलिए लिफ्टिंग, आपको ऐसा लग रहा है कि हमने प्रयास नहीं किया। चूंकि मार्केट के गेहूं और ए पी एल के गेहूं की वैल्‍यू करीबन बराबर थी, यह सबसे बड़ा कारण है।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे यह जानना चाहता हूं कि जब यह पूरे साल के अन्‍दर जो वैरियेशन होता है, यह खाली इसी साल में तो हुआ नहीं, यह तो हर साल के अन्‍दर होता है। जब गेहूं की फसल आती है उसके तीन महीने बाद गेहूं की डिमांड सबसे ज्‍यादा बढ़ती है और अभी अक्‍टूबर, नवम्‍बर, दिसम्‍बर, जनवरी, फरवरी और मार्च के अन्‍दर डिमांड बढ़ती है। इस साल भी इसी समय बढ़ी, आप भी यह स्‍वीकार कर रहे हैं और साथ में आपको यह मालूम था कि केन्‍द्र सरकार की कई केन्‍द्र प्रवर्तित योजनाओं के अन्‍तर्गत गेहूं का आवंटन राज्‍य को दूसरी दिशाओं में होने लगा है जैसे फूड फोर वर्क में हो गया, जैसे और दूसरी ग्रामोदय योजना के अन्‍दर हो गया तो जब यह मालूम था तो शुरू में इसके लिए प्रयास क्‍यों नहीं किया गया ? आपको पता था कि इसमें नवम्‍बर-दिसम्‍बर के अन्‍दर डिमांड बढ़ेगी और पत्र लिखना अपन ने तब शुरू किया है जब डिमांड बढ़ चुकी थी। मेरा अनुरोध यही है कि यही पत्र अगर 6 महीने पहले आगे की डिमांड को देखते हुए लिख दिया जाता तो आज ए पी एल का गेहूं जो आप 6.80 रुपये प्रति किलो में देते हैं, आज बाजार के अन्‍दर साढ़े बारह रुपये प्रति किलो मिल रहा है और सारा का सारा गेहूं, इससे इनडायरेक्‍ट इन्‍फरेंस यह निकलता है कि जो ट्रेडर्स हैं उनको लाभान्वित करने के लिए जान-बूझकर के आपने गेहूं का आवंटन होते हुए भी उसका उठाव नहीं किया।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): बैद साहब, ऐसा नहीं है। एक मोटी सी बात, आप इसमें ध्‍यान देंगे कि जो अगस्‍त से पहले का टाइम है, अगस्‍त से पहले के टाइम पर जो ए पी एल राशन कार्ड होल्‍डर्स थे वो भी मांग नहीं करते थे।...

 

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उनकी मांग नहीं थी, ए.पी.एल. राशनकार्ड होल्‍डर एक करोड़ से ऊपर हैं, जब उनकी मांग नहीं थी तो हमने भारत सरकार को पत्र लिखना ठीक नहीं समझा, नम्‍बर एक। दूसरा, स्‍टाक्स में उस समय गेहूं था, जितनी हमें जरूरत पड़ती थी तो जब भी लगा कि मार्केट में गेहूं जैसे ही बढ़ गया और भारत सरकार ने इम्‍पोर्ट किया तो उसके कारण से भी कुछ फर्क पडा और इम्‍पोर्ट के कारण जैसे ही भाव मार्केट में बढ़ गया तो हमने यह पत्र लिखे और पत्र का बराबर प्रयास किया और उसके बाद भी, आज भी मैं आपको बताऊं, स्‍टाक में एफ.सी.आई. का गेहूं नहीं है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्रीजी से यह जानना चाहता हूं कि आपने अभी जो फिगर दिये कि जनवरी में 2129 एम.टी. रिलीज किया गया, फिर आपने 932 एम.टी. ही क्‍यों उठाया?

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आपने अभी जनवरी का फिगर दिया है माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: एक ही माननीय सदस्‍य बोलें।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): वह मैं हूं या कोई और है? 

श्री सुरेन्‍द्र गोयल (जैतारण): ...14 रुपये किलो गेहूं मिल रहा है तो अब ए.पी;एल. को गेहूं मंत्री महोदय, जैसाकि माननीय सदस्‍य ने कहा, 2800601 एम.टी. अपने को कोटा अलाट हुआ था और इसमें से कहीं पर 10 प्रतिशत, पाँच प्रतिशत, सात प्रतिशत, आठ प्रतिशत आपने उठाया है तो अब मेरा निवेदन है कि गांव में 12-13 रुपये किलो गेहूं मिल नहीं रहा है और गांव में हाहाकार मचा हुआ है गेहूं के लिए तो अब आप गेहूं जो कोटा अलाट हुआ है, वह मंगवा रहे हैं या गांवों में भिजवा रहे हैं या नहीं भिजवा रहे हैं? आप यह स्थिति स्‍पष्‍ट करें।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य बार-बार यह बात कह रहे हैं, मैं संयमजी की बात का जवाब दे दूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: जवाब साथ ही आने दो।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): उपाध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से निवेदन है, मैं यह जानना चाहता हूं, आपने अपने उत्‍तर में कहा है कि दिसम्‍बर, 2005 तक का आप यह बता रहे थे कि इतनी मांग नहीं थी, जनवरी के अन्‍दर आपने अभी उत्‍तर में बताया है कि 2129 एम.टी. आपका गेहूं रिलीज किया गया ए.पी.एल. का, फिर 932 एम.टी. ही क्‍यों उठाया?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): रिलीज नहीं किया है।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): रिलीज नहीं किया।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आपने अभी अपने उत्‍तर में बताया है, आप माहवार बता दो कि आपने रिलीज कितना किया है और आपने उठाया कितना है?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): यह आवंटन किया हुआ है वह है। वह आवंटन का है।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): मैं मंथवाइज बता दूं?

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): हां, बता दो। यह आवंटन का नहीं है, यह रिलीज का है, आवंटन का फिगर दूसरा है, यह मैं बता सकता हूं। आवंटन तो 161219 एम.टी. है।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): अभी मैं बताता हूं। आप बैठ जाओ। मैं जनवरी का ही बता देता हूं।

श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मंत्री महोदय से मैं यह इसी सम्‍बन्‍ध में निवेदन करना चाह रहा हूं। पिछले दो महीने का गेहूं कोटपूतली के लिए नहीं उठाया गया है, कोटपूतली को सप्‍लाई नहीं हुआ है, लोगों में हाहाकार मचा हुआ है, उसके लिए भी आप क्‍या कर रहे हैं? दो महीने का कोटा ही छोड़ दिया गया है, वह उठाया ही नहीं है। (व्‍यवधान)

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): मैं आपके सवाल का जवाब दे दूं? संयमजी के सवाल का जवाब दे दूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य।

श्री मंगलाराम गोदारा (श्रीडूंगरगढ़): माननीय मंत्री महोदय, मेरा भी इसी से जुड़ा़ हुआ सवाल है। जो मेरे डूंगरगढ़ में गेहूं अलाट हुआ, बीकानेर में जो गेहूं बिका, उस पर क्‍या कार्यवाही कर रहे हो, क्‍या कार्यवाही करने जा रहे हो? क्‍या वह गेहूं वापस डूंगरगढ़ को मिलेंगे या नहीं? जिनके खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज हुई है, उनके खिलाफ क्‍या कार्यवाही करने जा रहे हो?

श्री उपाध्‍यक्ष: वह अलग से प्रश्‍न है। माननीय हरिमोहनजी।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): अभी बताता हूं, अभी बताता हूं। जनवरी, 2005 में... संयमजी, आप 2006 का पूछ रहे हो या 2005 का पूछ रहे हो?

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): जनवरी, 2006, मैं 2006 पूछ रहा हूं।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): जनवरी, 2006 में कागजों में आवंटन हुआ 161219 एम.टी. और रिलीज हुआ मात्र 932 एम.टी। वास्‍तव में डिमांड...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): और उठाया आपने 932 एम.टी. है। रिलीज कितना हुआ है, यह बताओ आप तो। आपने उठाया 932 एम.टी., रिलीज 2132 एम.टी. हुआ है, आप वह उठा नहीं सके। नहीं देखिये, यह लिखा है, आपने उठाव 932 एम.टी. का है, यह आपके जवाब में है।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): नहीं, रिलीज है। नहीं, रिलीज है। आपको मैं एक्‍चुअल डिमांड बता देता हूं।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): डिमांड नहीं, आप तो केवल बताओ कि रिलीज कितना हुआ और आपने उठाया कितना?

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): यह रिलीज ही है। मतलब गेहूं है नहीं। जितना आ रहा है, उतना ही हम उठा रहे हैं।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अभी तो आपने जवाब में जब तारानगर से आने वाले माननीय सदस्‍य पूछ रहे थे, तब आपने जनवरी का जो फिगर दिया है, वह 2129 एम.टी. दिया है और अपने ही फिगर से पलट रहे हो आप। (व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): गेहूं होगा तो उठायेंगे ना। कृत्रिम अभाव बनाया गया और जो आटा मिल वाले है, उनको केन्‍द्र ने गेहूं दिया है और उसमें घोटाला हुआ है यह, कृत्रिम अभाव बनाया गया है और गरीबों का गेहूं है, वह बड़े लोगों को दिया गया है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मंत्री महोदय कमजोर नहीं है। आप बिराजो। आपकी जरूरत नहीं है मंत्री को।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): इसकी जांच होनी चाहिए। असली बात तो यह है कि गेहूं रिलीज तो करते हैं और कोटे में गेहूं है नहीं, यह धोखा किया है केन्‍द्र सरकार ने।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): संयमजी, हमारी जो डिमांड है...

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): आप जनवरी में गेहूं नहीं उठा सके। वह गेहूं किसने बेचा था केन्‍द्र सरकार ने? एन.डी.ए. सरकार ने बेचा था। डीलरों को गेहूं किसने बेचा था? एन.डी.ए. सरकार ने बेचा था।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): हमने तो कलक्‍टर्स और....

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): अभी एन.डी.ए. सरकार ने भेजा है। 2006 में एन.डी.ए. सरकार ने गेहूं भेजा है, वह उठाया नहीं। आपके पास किराये के पैसे नहीं है, वह गेहूं पडा रहा सड़कों पर, वह रूलता रहा, आपने व्‍यवस्‍था नहीं की। (व्‍यवधान)

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): आपने जो गेहूं नहीं उठाया है...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): पूरे राजस्‍थान के अन्‍दर घोटाले करवा रहे हो मिड-डे मील के अन्‍दर। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैंने बहुत स्‍पेसिफिक पूछा है कि रिलीज कितना हुआ और उठाया कितना है? जवाब तो दिलाओ आप।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय,...

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, मंत्री महोदय जवाब दे रहे हैं। वे जवाब दे रहे हैं।

श्री अमराराम (धोद): उपाध्‍यक्ष महोदय, यह ए.पी.एल. और बी.पी.एल. की दरों को अलग-अलग करने का काम किस सरकार ने किया था? ये सारा बता रहे हैं, मेरा एक सवाल है। यह ए.पी.एल. और बी.पी.एल. की दरों को अलग-अलग करने का कौनसी सरकार ने निर्णय किया था जबकि पूरे देश में एक ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली थी और बी.पी.एल. और ए.पी.एल. की अलग-अलग दरों को करने का निर्णय किस सरकार में किया था, वह भी बता दो आप।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य।

श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली): पिछले दो महीने से जो गेहूं सप्‍लाई नहीं हुआ, वह आटा मिल को सप्‍लाई हो गया। मैं यह भी मानूं कि पिछले दो महीने का गेहूं सप्‍लाई नहीं हुआ, वह किसी आटा मिल को चला गया, लोगों को नहीं मिला, हाहाकार मचा हुआ है कोटपूतली विधान सभा क्षेत्र में।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। श्री हरिमोहन जी।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): हरिमोहनजी, आप एक मिनट बैठो। संयमजी ने जो प्रश्‍न पूछा है, उसका जवाब दे दूं।

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, दो-तीन महीने से पंचायतों में कोटा नहीं उठाया जा रहा है और मैं बताना चाहता हूं, बी.पी.एल. के गरीब लोगों का गेहूं चार-चार महीनों से, पाँच-पाँच महीनों से राशन के जो डीलर हैं, वह खा जाते हैं गेहूं।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): यह मामला ए.पी.एल. का है, बी.पी.एल. का नहीं है।

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): ए.पी.एल. की भी यही हालत है, गेहूं उठ नहीं रहा है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): यह मामला ए.पी.एल. का है, बी.पी.एल. का नहीं है।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय संयमजी ने पूछा है, आपको अलाट हुआ 161913 एम.टी. और एक्‍चुअल डिमांड थी...

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): रिलीज कितना हुआ?

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): एक्‍चुअल डिमांड थी 78874 एम.टी., जब इतना गेहूं यह एफ.सी.आई. में नहीं था और हमने पैसा जमा कराया और पैसा जमा कराने के बाद में हमको मात्र 932 एम.टी. गेहूं मिला। (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आप घुमाइये मत, आप यह बताओ, सरकार में रिलीज कितना हुआ? 2129 एम.टी. गेहूं भारत सरकार से रिलीज हुआ और आप मात्र 932 एम.टी. गेहूं उठा सके, यह है सरकार के निकम्‍मेपन का सबूत। जितना गेहूं रिलीज किया, उतना आप उठा नहीं सके। क्‍या आंकड़े बता रहे हो आप?

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, बैठ जाओ।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा एक प्रश्‍न है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपने 15 महीनों के अन्‍दर जितना गेहूं रिलीज किया गया भारत सरकार के द्वारा, उतना गेहूं उठाया नहीं गया और राजस्‍थान का आम आदमी उस महंगाई के बोझ से दबता रहा, आप फिगर बता दो। मिस-कोट कर रहे हैं, घुमा रहे हैं। आप बताओ, रिलीज कितना हुआ, माहवार बताओ आप।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): आप भाषण तो दो मत। आप जवाब मेरे से ले लो। (व्‍यवधान) मेरे पास सभी 32 जिलों के फिगर हैं। उनका डी.डी. जमा है, उसका पैसा जमा है और 932 एम.टी. गेहूं दिया और हम मांग रहे हैं, हमारी 78000 एम.टी. रोज की मांग है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मेरी मंत्रीजी को चुनौती है, 2129 एम.टी. गेहूं रिलीज किया गया जनवरी के अन्‍दर और आपने 932 एम.टी. उठाया।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): मैं दुबारा कह रहा हूं, 78000 एम.टी. गेहूं रोज, आप बैठ जाओ, जवाब सुन लो।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आप वह बताओ। आवंटन उठाया, रिलीज कितना हुआ?

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): आप जवाब सुन लो। मैं जवाब दे रहा हूं, आप सुन लो। मैं कह रहा हूं, जवाब सुन लो, भाषण मत दो। जवाब सुन लो। उपाध्‍यक्षजी, आप यह क्‍या कर रहे हैं? आप इनको बैठाओ। ऐसे ही करते हैं रोज। जवाब सुनना नहीं चाहते।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ऐसे मुझे धमकाने की कोशिश मत करो। आप ऐसे मुझे धमकाने की कोशिश मत करो।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): मैं आपसे निवेदन कर रहा हूं, आप मेरा जवाब सुन लो। मैं निवेदन कर रहा हूं...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अपनी कमजोरी को छिपाने के लिए सदन में उत्‍तेजना फैलाने की कोशिश मत करो मंत्रीजी। (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य, बीच में नहीं उत्‍तेजना। जब मंत्री महोदय जवाब दे रहे हैं, बीच में उत्‍तेजना नहीं हो। (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा मंत्रीजी से एक प्रश्‍न है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): हमारे प्रश्‍न का जवाब नहीं आया है। सरकार रिलीज और उठाव के फिगर बता दे, नहीं तो मैंने फिगर बताये हैं आपको।

श्री उपाध्‍यक्ष: वह जवाब दे रहे हैं सारा।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जितना गेहूं अलाट किया गया, जितना रिलीज किया गया, उतना उठाया ही नहीं आपने।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, अब मेरी बात तो सुन लो आप।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य, आप जवाब सुन लो।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍य से हाथ जोड़कर निवेदन करना चाहता हूं, मेरी हाथ जोड़कर प्रार्थना है, मैं इसका कोई राजनीतिकरण नहीं देना चाहता।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप जवाब सुन लो।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): आवंटन हुआ है 161000 एम.टी., हमने कलक्‍टर्स और कमिशनर्स से सूचना मांगी तो उनकी वास्‍तविक डिमांड थी 78000 एम.टी. और हमें दिया उन्‍होंने मात्र 932 एम.टी. गेहूं। अब जितना दिया, उतना ही उठाया, उतना ही रिलीज हुआ, उतने का पैसा दे दिया।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, ये सदन को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, कई विषय ऐसे होते हैं जो राजनीति से ऊपर उठकर विचार करने के होते हैं। हम सब लोगों को मिलकर केन्‍द्र सरकार पर दबाव बनाना चाहिए कि राजस्‍थान के गरीब लोगों को गेहूं मिले।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): जनवरी महीने में 2129 एम.टी. गेहूं रिलीज किया गया और इसके विपरीत सरकार वह गेहूं उठा नहीं सकी और मात्र 932 एम.टी. इस सरकार ने गेहूं उठाया है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मंत्री महोदय से मेरा तो एक ही प्रश्‍न है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, यह सिद्ध हो गया, केन्‍द्र सरकार गेहूं नहीं दे रही है। हम सबको मिलकर कोशिश करनी चाहिए, हम सबको मिलकर कोशिश करनी चाहिए....

 

Jkj/akt/1140/1e/31032006

 

पैसे जमा है, डीडी जमा है, पैसे और डीडी जमा है, आप केवल घडि़याली आंसू बहा रहे हैं, उपाध्‍यक्ष महोदय, यह कैसा राजनीतिक वह है, केन्‍द्र सरकार गेहूं नहीं दे रही है और हमारे ऊपर बोझ डाल रहे हैं...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री अमरा राम(धोद): मंत्री महोदय ने आयात करने की भी बात असत्‍य कही है। (व्‍यवधान) अभी जो केन्‍द्र सरकार ने पाँच लाख मैट्रिक टन आयात करने का आदेश दिया है, वह भी आयात अभी तक नहीं हुआ है।  (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: आप स्‍थान ग्रहण कीजिये।  (व्‍यवधान) एक आदमी।  माननीय सदस्‍य, पहले आपको बोलने दीजिये।

श्री हरिमोहन शर्मा(हिण्‍डौली): हां, मैं बोल रहा हूं। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इस महत्‍वपूर्ण प्रश्‍न को अपने-अपने ढंग से राजनैतिक रूप से प्रस्‍तुत कर रही है यह सरकार।  मेरा विनम्र अनुरोध है कि जो आंकड़े आपने दिये हैं, 28 लाख 62 हजार 638 का जो आवंटन किया है और यह आपके कलेक्‍टर्स सने और डिस्ट्रिक्‍ट जो आफिसर्स हैं उन्‍होंने 2 लाख 82 हजार पूरे साल में उठाया है तो भारत सरकार ने तो पूरा आपको कोटा आवंटित कर दिया, उठाया आपने नहीं और राजनैतिक रूप से आप यह कहते हैं नवम्‍बर-दिसम्‍बर में जाकर कि केन्‍द्र सरकार ने नहीं दिया, यह आपका जवाब है...(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: आवंटन केन्‍द्र सरकार ने नहीं किया। (व्‍यवधान) यह आवंटन करके उन्‍होंने गेहूं दिया क्‍या, बात करते हो आप। (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा: यह आपका रिकार्ड है, निकालो यह आप। यह आपका रिकार्ड है। (व्‍यवधान) आप केन्‍द्र सरकार के द्वारा दिये गये गेहूं को उठा नहीं पाये। (व्‍यवधान) आप उठा नहीं पाये उसको।

श्री अमरा राम(धोद): राजस्‍थान की जनता का गेहूं नहीं उठाकर(व्‍यवधान) राजस्‍थान की जनता के लिए गेहूं नहीं उठाकर राजस्‍थान की सरकार ने अपवित्र कार्य किया है और खड़े होकर...(व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा: यह रिकार्ड है, आप उस गेहूं को उठा नहीं पाये और अपनी गलतियां छिपाने की बात करते हैं। (व्‍यवधान)

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे: माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह सिध्‍द हो गया कि भारत सरकार राजस्‍थान की गरीब जनता पर अत्‍याचार कर रही है...(व्‍यवधान)

श्री मदन दिलावर:  माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, केन्‍द्र सरकार ने गेहूं नहीं दिया है, उसका दोषारोपण राजस्‍थान सरकार पर करना चाहते हैं, यह नहीं चलेगा उपाध्‍यक्ष महोदय। (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा: आप उठा नहीं पाये।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप अपना स्‍थान ग्रहण कीजिये। (व्‍यवधान)

श्री मदन दिलावर: पाप केन्‍द्र सरकार ने किया है और दोषारोपण हमारे ऊपर कर रहे हैं, यह ठीक नहीं है माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय। पाप इन्‍होंने किया है उपाध्‍यक्ष महोदय, दोषारोपण हमारे ऊपर कर रहे हैं..(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य, स्‍थान ग्रहण करें । (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: घडि़याली आंसू बहा रहे हैं। (व्‍यवधान) आप असत्‍य बोल रहे हैं। (व्‍यवधान) और खुद ही बात करो...(व्‍यवधान)

श्री अमरा राम(धोद): 22 लाख टन आवंटित हुआ और 2 लाख उठाया, ऊपर से यह कह रहे हैं कि अलाटमेंट नहीं हुआ..(व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक: केन्‍द्र की कांग्रेस सरकार राज्‍य सरकार के प्रति दोगला रवैया अपनाकर वह गेहूं का कोटा पूरा रिलीज नहीं कर रही है और राजस्‍थान सरकार को मतलब केन्‍द्र सरकार ने...(व्‍यवधान) आप अपने आकाओं को केन्‍द्र में पूछो कि गेहूं का कोटा पूरा दें। (व्‍यवधान) 

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।  माननीय सदस्‍य। (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा: माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह अपनी अकर्मण्‍यता छिपाने के लिए..(व्‍यवधान) यह गवर्नमेंट का रिकार्ड है। (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य।  माननीय सदस्‍य, बैठिये। (व्‍यवधान) सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य। (व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक: गेहूं का कोटा पहले पूरा दो। (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा: चावल नहीं उठा पाये...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, बात सुनिये आप पहले।

श्री बंशीलाल खटीक: केन्‍द्र की केन्‍द्रीय सरकार राजस्‍थान की सरकार के प्रति दोगला रवैया रख रही है और अपना निर्धारित कोटा रिलीज करे और फिर बाद में यह बोलें। (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: पहले आप बैठिये। (व्‍यवधान)

श्री अमरा राम(धोद): उपाध्‍यक्ष महोदय, एपीएल के लोग चौदह रूपये किलो में गेहूं खरीद कर खा रहे हैं...(व्‍यवधान) सरकार ने उठाया नहीं, ढाई लाख  अलाट और मात्र नौ लाख..(व्‍यवधान) राज्‍य के व्‍यापारियों के हितों को सुरक्षित करने के लिए, यह चौदह रूपये किलो खरीद कर के एपीएल के लोग गेहूं खा रहे हैं, यह राजस्‍थान की सरकार ढाई लाख के अलाटमेंट के विरूध्‍द...(व्‍यवधान) उन व्‍यापारियों को मुनाफा देने की नीयत से गेहूं नहीं उठाकर राजस्‍थान की जनता के साथ विश्‍वासघात किया है राज्‍य सरकार ने। (व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन: एपीएल, बीपीएल और अन्‍त्‍योदय योजना में चूरू जिले के...(व्‍यवधान)

श्री बृजकिशोर शर्मा: एक स्‍पेसिफिक क्‍वेश्‍चन है, मंत्रीजी यह बता दें कि...(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन: इन्‍होंने टोंक जिले में एपीएल परिवारों को गेहूं देने बाबत...(व्‍यवधान) आप पढ़ो इसको।

श्री उपाध्‍यक्ष: बता रहे हैं। (व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन: यह बार-बार केन्‍द्र सरकार को (व्‍यवधान) गेहूं नहीं दिया गया, केवल आवंटन किया गया और गरीबों का गेहूं अमीरों को देकर और उनको...(व्‍यवधान) और उनको बचाने की कोशिश कर रहे हैं और गरीबों के नाम पर केवल यहां पर भाषण कर रहे हैं। (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा: आप महावीरजी, खाद्य मंत्री...

श्री बृजकिशोर शर्मा: माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, एक स्‍पेसिफिक क्‍वेश्‍चन पूछता हूं। (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य, आप स्‍थान ग्रहण कीजिये पहले। पहले स्‍थान ग्रहण कीजिये। नहीं सुनूंगा। पहले स्‍थान ग्रहण कीजिये।

श्री रामनारायण मीणा: एक मिनट उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा एक प्रश्‍न है।  क्‍या खाद्य मंत्रीजी अक्षम हैं जो मुख्‍य सचेतक को जवाब देना पड़ रहा है।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य।

श्री रामनारायण मीणा: क्‍या आप खाद्य मंत्रीजी को अक्षम मानते हैं? अक्षम।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। (व्‍यवधान) आप स्‍थान ग्रहण कीजिये, अपना स्‍थान ग्रहण कीजिये। माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य, पहले बैठिये आप। बैठिये माननीय सदस्‍य, पहले स्‍थान ग्रहण कीजिये। मंत्री महोदय का जवाब सुन लीजिये पहले। (व्‍यवधान)

श्री बद्रीलाल जाट: किसानों के साथ अन्‍याय हो रहा है...(व्‍यवधान)

श्री बृजकिशोर शर्मा: माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, सिर्फ एक क्‍वेश्‍चन यह है कि क्‍या सरकार को 2129 टन मिला ..(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: पहले जवाब सुनें। (व्‍यवधान) पहले आपकी बात सुनें। बाकी की बात किसी की रिकार्ड नहीं होगी। आप उनको सुनें पहले माननीय सदस्‍य।

श्री बृजकिशोर शर्मा: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: देंगे। पहले आप बैठिये, आप।

डा. किरोड़ी लाल: उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी सुरक्षा चाहूंगा, थोड़ा तसल्‍ली से सुन लें। मैं ज्‍यादा नहीं, 32 जिलों के कलेक्‍टर्स के लैटर...

श्री बृजकिशोर शर्मा: ***

डा. किरोड़ी लाल: फिर चिल्‍ला रहे हैं। मैं 32 जिलों के कलेक्‍टर, केवल तीन-चार कलेक्‍टर्स के आपको लैटर पढ़कर सुनाऊंगा।

श्री बृजकिशोर शर्मा:***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, बैठिये पहले।

श्री बृजकिशोर शर्मा: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य।

श्री बृजकिशोर शर्मा:   ***

श्री उपाध्‍यक्ष: आप चाहते क्‍या हैं? माननीय सदस्‍य, क्‍या चाहते हैं। (व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक: *** (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य।

श्री बंशीलाल खटीक: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य।

श्री बद्रीलाल जाट: *** (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: आप बीच में व्‍यवधान मत करें, आप नहीं, बीच में नहीं। (व्‍यवधान) मैं आपको अलाउ नहीं कर रहा हूं, मैं अलाउ नहीं कर रहा हूं आपको, माननीय सदस्‍य।

श्री बृजकिशोर शर्मा : ***

श्री उपाध्‍यक्ष:  माननीय सदस्‍य, आपको किस ने कहा, माननीय सदस्‍य, आप किसकी परमिशन से बोल रहे हैं। (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ : ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण, मंत्री महोदय जवाब दे रहे हैं, आपकी बात सुनें आप पहले। (व्‍यवधान)

श्री बृजकिशोर शर्मा: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: आप जवाब सुनना नहीं चाहते हैं। यह आंकड़े इन्‍होंने बता दिये, कितना रिलीज हुआ, कितनी डिमांड हुई थी, इसमें विवाद किस बात का है। I am calling next question.

डा. चन्‍द्रशेखर बैद:  *** (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री धर्मपाल चौधरी।   

श्री संयम लोढ़ा: ***

श्री बृजकिशोर शर्मा: *** (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: क्‍या विवाद है इसके अंदर, किस बात की सूचना चाहते हैं।

श्री संयम लोढ़ा: ***

श्री महावीर प्रसाद जैन: *** (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: *** 

श्री धर्मपाल चौधरी: ***

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: ***

श्री बृजकिशोर शर्मा: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: पहले सुन लीजिये आप। जवाब आप तसल्‍ली से सुन लीजिये। इसमें आपको कोई आंकड़ों में गलती हो तो बतायें।

श्री संयम लोढ़ा: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: कौन सी गलत बताई...

श्री संयम लोढ़ा: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: आप सुनिये पहले।

श्री हीरालाल निवाई: ***

श्री संयम लोढ़ा: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य। (व्‍यवधान)

डा. किरोड़ी लाल: दिल्‍ली की सरकार दोषी है।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, स्‍थान ग्रहण कीजिये। (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य, स्‍थान ग्रहण कीजिये आप। आप अपना स्‍थान ग्रहण कीजिये।

श्री रामनारायण मीणा: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: तो काहे से संतुष्‍ट होंगे, जवाब देने से संतुष्‍ट नहीं होंगे।

श्री रामनारायण मीणा: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: जवाब तो लिखित में जो आ रहा है...

श्री रामनारायण मीणा: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: तो क्‍या है, और क्‍या है।

श्री रामनारायण मीणा: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: आप अपना स्‍थान ग्रहण कीजिये। माननीय सदस्‍य। (व्‍यवधान)।  आपका प्रश्‍न क्‍या है।  माननीय सदस्‍य, आप क्‍या प्रश्‍न पूछना चाहते हैं, आप प्रश्‍न स्‍पेसिफिक क्‍या पूछना चाहते हैं, भाषण नहीं, आप भाषण दे रहे हैं, आप प्रश्‍न क्‍या पूछना चाहते हैं, बताइये आप, कोई है तो।

श्री रामनारायण मीणा: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: हां, बताइये।

श्री रामनारायण मीणा: सरकार को डाइरेक्‍शन दें कि वह कलेक्‍टर की चिट्ठी नहीं, जवाब ढंग से देंगे, कृपा कर...(व्‍यवधान)

डा. किरोड़ी लाल: विराजो, विराजो, मैं देता हूं जवाब, आपको पता ही नहीं, सवाल क्‍या है।  आपको पता ही नहीं सवाल क्‍या है। (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा: यह दिल्‍ली में किस की सरकार है, यह संघीय शासन है, संघीय शासन, मंत्रीजी, दिल्‍ली की भी सरकार प्रजातंत्र है, यहां भी आपकी है...(व्‍यवधान)

डा. किरोड़ी लाल: बिराजो, आपको पता ही नहीं सवाल का, बैठ जाओ।  आप भाषण मत दो, बैठो, बैठो। (व्‍यवधान) विराजो, विराजो।

श्री रामनारायण मीणा: केन्‍द्रीय सहायता का सवाल नहीं है, आप देश को तोड़ने की बात करें, पार्टी की बात...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप बीच में...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा: उसने यह कह दिया, उसने यह कह दिया...

डा. किरोड़ी लाल: अब विराज जाओ।  आपके हाथ जोड़ रहा हूं, विराज जाओ।

श्री रामनारायण मीणा: इसलिए कृपा करके सही जवाब दीजिये।

डा. किरोड़ी लाल: माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, एक कलेक्‍टर, बांसवाड़ा का मैं लैटर पढ़ता हूं...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा: *** (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप बीच में नहीं बोलें। (व्‍यवधान) बात सुनना नहीं चाहते। आप मंत्रीजी को सुनना नहीं चाहते। (व्‍यवधान)

श्रीमती ममता शर्मा : ***

 

Bhs/akt/4.7.2006/1150/1f/1

 

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): ***  

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी):***   

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप अपना स्‍थान ग्रहण कीजिये।   

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: ...(व्‍यवधान)... आप सुनेंगे तो जवाब दिया जायेगा पूरा।

श्री अमराराम (धोद): ***   

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ***   

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप सुनना ही नहीं चाहते । आप सुनिये। ...(व्‍यवधान)... माननीय सदस्‍य, सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य, मंत्री जी जवाब दे रहे हैं लिखित में कलेक्‍टर ने क्‍या लिखा है क्‍या कोरेस्‍पोंडेंस हुई । आप बोलने ही नहीं देते ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: आप काहें के लिए रोकते हैं बीच में?  जवाब देंगे अपने तरीके से।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: आप डिक्‍टेट नहीं कर सकते कि  जवाब किस तरह से देना है।  आप बीच में डिक्‍टेट कैसे कर रहे हो? यह कोई बात है क्‍या?

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री ओम बिरला (संसदीय सचिव): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: आप बीच में नहीं।

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: आप बीच में जवाब देते वक्‍त यह नहीं कह सकते कि जवाब में इस प्रकार लैटर क्‍यों पढ़ रहे हो। यह तरीका नहीं है। माननीय सदस्‍य, सुनिये जवाब सुनिये आप।

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: जवाब सुनें।  आप सुनना ही नहीं चाहते। जवाब पूरा सुनें आप। जवाब पूरा सुनें ।  माननीय सदस्‍य। माननीय मंत्री महोदय।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: बीच में नहीं बैठ जाइये आप।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): ***

श्री ओम बिरला (संसदीय सचिव): ***  

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): ***   

श्री कन्‍हैया लाल मीणा (बस्‍सी): ***

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। ...(व्‍यवधान)...

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री):***   

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): ***

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): ***

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): ***

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, अपना स्‍थान ग्रहण कीजिये।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): ***

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): ***

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय मंत्री। ...(व्‍यवधान)...  माननीय सदस्‍य, अगर जवाब नहीं सुनना चाहते हैं शांतिपूर्वक तो आपकी मर्जी है। आप जवाब नहीं सुनकर बीच में हर मामले में खड़े होते हैं ऐसे भी उचित नहीं है। ...(व्‍यवधान)...

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष जी, धोद से आने वाले माननीय सदस्‍य ने पूछा उसका मैं पहले जवाब दे देता हूं। वैसे 32 कलेक्‍टरों के लैटर हैं बराबर हम गेहूं मांग रहे हैं हमारे प्रमुख शासन सचिव मांग रहे हैं, मैं मांग रहा हूं, मुख्‍यमंत्री जी का पत्र जा रहा है।   बराबर हम चिन्‍ता कर रहे हैं र्को 22 पत्र चले गये।  इस लिस्‍ट में शायद पन्‍द्रह पत्र हैं और 78 एट लीस्‍ट 78 हजार मीट्रिक टन हमारी मांग है पर मंथ  और 1 लाख 61 हजार मीट्रिक टन उन्‍होंने कागजों में अलॉटमेंट कर दिया और दिया मात्र 932 है। ...(व्‍यवधान)...  उपाध्‍यक्ष महोदय, आप जितना देंगे उतना ही तो उठायेंगे। हमने इनका पैसा जमा कराया ... थोड़ा ध्‍यान से सुन लें, अजमेर ने पैसा जमा कराया 24-12-05 को, अलवर ने कराया 19-12-05 को ...(व्‍यवधान)... बता रहे हूं सुनें तो सही आप।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): ***   

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): ***

श्री जुबेर खान (रामगढ़): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री धर्मपाल चौधरी।  नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): पहले मैं आपका जवाब दे दूं।   श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ***  

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय मंत्री जी।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री धर्मपाल चौधरी (मुण्‍डावर): प्रश्‍न संख्‍या 63. ...(व्‍यवधान)... आपकी सरकार ने केन्‍द्र में सरकार है उसने गेहूं दिया नहीं और अगला प्रश्‍न किसानों से संबंधित है बैठ जाओ।

श्री उपाध्‍यक्ष: मैंने अगला प्रश्‍न पुकार लिया माननीय सदस्‍य।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय मंत्री महोदय।

श्री धर्मपाल चौधरी (मुण्‍डावर): प्रश्‍न संख्‍या 63 माननीय मंत्री जी।  माननीय उपाध्‍यक्ष जी, प्रश्‍न संख्‍या 63 बहुत महत्‍वपूर्ण प्रश्‍न है किसानों के हित में। ये केन्‍द्र सरकार ने गेहूं दिया नहीं और केन्‍द्र सरकार देती नहीं है और यह महत्‍वपूर्ण प्रश्‍न है किसानों के लिए।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय मंत्री जी, स्‍थान ग्रहण कर लीजिये।  मैंने नैक्‍स्‍ट क्‍वेचश्‍न पुकार लिया है।

श्री धर्मपाल चौधरी (मुण्‍डावर): इनका किसानों कि हित से कोई ताल्लुक़ात नहीं है।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।  दूसरे प्रश्‍न का जवाब आ रहा है।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: आप बीच में काहे को...।

जिला अलवर की कस्‍टोडियन भूमि के गैर खातेदारों को जारी पट्टे

63. श्री धर्मपाल चौधरी (मुण्‍डावर): क्‍या पुनर्वास मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) जिला अलवर में कस्‍टोडियन भूमि कितनी है? सूची सदन सदन की मेज पर रखें।

(2) वर्ष 2004 में पूर्व सरकार द्वारा कस्‍टोडियन भूमि के पट्टे किस दर पर जारी किये गये और उसके बाद क्‍या दर तय की गई? विवरण सदन की मेज पर रखें।

(3) सरकार द्वारा नई दर तय करने के बाद कितने किसानों ने कस्‍टोडियन भूमि पर गैर खातेदार के रूप में कब्‍जाधारी होने के बाद नई दर से पट्टे जारी करवाये? सूची सदन की मेज पर रखें।

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री, डा. किरोड़ी लाल: (1) अलवर जिले में 53,665 बीघा 15 बिस्‍वा कस्‍टोडियन भूमि है।  तहसीलवार सूची परिशिष्‍ट पर उपलब्‍ध है।

(2). (A) वर्ष 2004 से पूर्व कस्‍टोडियन भूमि पर काबिज अथवा आबंटियों को तीन श्रेणियों में विभाजित कर पट्टा जारी करने की कार्यवाही की गई है- 1. दावेदार विस्‍थापित व्‍यक्ति 2. गैर दावेदार विस्‍थापित व्‍यक्ति    3. स्‍थानीय काश्‍तकार/पट्टेदार 

(1) उक्‍त प्रथम श्रेणी के दावेदार विस्‍थापितों का नि:शुल्‍क पट्टे जारी किये गये हैं।

(2) दूसरी श्रेणी के गैर दावेदार विस्‍थापितों/ आबंटियों को रुपये 150/- प्रति स्‍टेण्‍डर्ड एकड़ की दर से जारी किये गये हैं।

(2) तीसरी श्रेणी में कस्‍टोडियन भूमियों पर काबिज स्‍थानीय पट्टेदारों को अवधि/कट ऑफ डेट के आधार पर खातेदारी अधिकार देने हेतु पाँच श्रेणियां बनाई गई:-

(i) भारत विभाजन 1947 के समय 12 वर्ष से अधिक समय से काबिज काश्‍तकार।

नि:शुल्‍क

(ii) भारत विभाजन के समय 12 वर्ष से कम समय से काबिज काश्‍तकार।

रुपये 450 प्रति एकड़

(iii) भारत विभाजन के बाद परन्‍तु 1.7.1957 से पूर्व के आबंटी/स्‍थानीय काश्‍तकार।

रुपये 450 प्रति एकड़

(iv) 1.7.57 के बाद एवं 31.12.76 से पूर्व के आबंटी/ स्‍थानीय पट्टेदार  

रुपये 900 प्रति एकड़

(v) 31.12.76 के बाद के आबंटी काश्‍तकार

रुपये 1000 प्रति एकड़

 

B­. वर्ष 2004 के बाद नये नियम राजस्‍थान भू राजस्‍व (निष्‍कान्‍त कृषि भूमि के स्‍थायी आवंटन द्वारा निक्‍क्रान्‍त कृषि भूमि के आवंटी द्वारा अवैध हस्‍तान्‍तरण/ कीमत चुकाने में विफल आवंटी/अनाधिकृत कब्‍जे की भूमि के नियमन तथा खाली भूमियों के आवंटन हेतु संबंधित क्षेत्र की बाजार दर की अलग अलग दरों के साथ शास्ति सहित राशि निर्धारित की गई है तथा एससी/एसटी/बीपीएल व्‍यक्तियों से उक्‍त कीमत की 50 प्रतिशत राशि निर्धारित की गई है । उक्‍त विभिन्‍न दरें पूर्ण विवरण के साथ परिशिष्‍ट पर संलग्‍न है ।

3. अलवर जिले में 18 गैर खातेदार किसानों को पट्टे नई दर से जारी हुए थ । सूची परिशिष्‍ट पर उपलब्‍ध है ।

श्री धर्मपाल चौधरी (मुण्‍डावर): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि 19.2.2005 से पहले जो जमीन किसानों को अलाट की जा रही थी वह सवा छ: सौ रुपये कीमत और सवा छ: सौ रुपये ब्‍याज लेकर साढे बारह सौ पर की जा रही थी । आप 2004 में एक नई कमेटी बनाकर उन किसानों से जो भारत सरकार ने आपको भूमि दी थी, राजस्‍थान को दी थी सवा छ: सौ रुपये बीघा में दी थी । उस भूमि पर जो किसान 50 साल से काबिज है, गैर खातेदार के रूप में अपनी कृषि भूमि पर कब्‍जा करके खेती कर रहे हैं आप उन किसानों से क्‍या सरकार को इतना बड़ा धन उपलब्‍ध करा कर कहां ले जाना चाहते हो उन गरीब किसानों का पैसा लेकर ।

दूसरा, आपने 2004 में कानून लागू किया उसके बाद पूरे अलवर जिले में आपके पास जो जमीन है वह 53665 बीघा 15 बिस्‍वा और आपके पास 18 नहीं जो लिस्‍ट आपने दी है वह 8 आदमियों की दी है और े8 आदमियों ने 14 बीघा जमीन आपसे खातेदार के रूप में कराई है । पूरे राजस्‍थान में यह अलवर जिले में अकेला ऐसे पूरे राजस्‍थान में कस्‍टोडियन भूमि पर किसानों का पिछले 50 साल से कब्‍जा है और उन किसानों ने अगर आपने पट्टा नहीं आवंटन नहीं किया तो पूरे राजस्‍थान में एक तरह से आंदोलन हो जायेगा । अभी तक किसानों को यह है कि क्‍योंकि हम सब जनप्रतिनिधि कहते हैं कि सरकार इस पर पुनर्विचार  करेंगी । उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्‍यम से यह निवेदन है कि इस पर सरकार को पुनर्विचार करना चाहिये जो कीमत आपने किसानों की 25 परसेंट और 50 परसेंट रखी है यह गलत है इस पर आप पुनर्विचार रखते हैं या नहीं रखते ।

(    बजे)

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, एक बार मैं इनका जवाब दे दूं आप विराज जाये ।

श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली): अध्‍यक्ष महोदय, कस्‍टोडियन में मेरे भी 15 गांव आ रहे हैं । अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से यह निवेदन करना चाहता हूं कि वर्तमान में आपने जो रेट तय की है 20-20 हजार रुपये प्रति बीघा  जमीन पर पड रहा है कोई भी काश्‍तकार 5-5 बीघा के एक-एक, दो-दो लाख रुपये जमा करा कर उस जमीन का मालिक नहीं बन सकता जो पिछले 50 साल से उस जमीन पर काबिज है । अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से यह निवेदन करना चाहता हूं और माननीय मुख्‍य मंत्री जी भी यहां विराजी हुई हैं, कि राजस्‍थान के किसानों का मामला है आप सहानुभूति पूर्वक, 2004 से पूर्व की जो स्थिति है उसका ब्‍याज लगाकर अगर सरकार ले ले तो किसानों का बहुत भला होगा कस्‍टोडियन के मामले में मंत्री जी आप बताये ।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, इसमें एक मौटा सा जवाब यह है कि यह जो एक्‍ट है इसको भारत सरकार ने रिपील कर दिया । जब भारत सरकार ने रिपील किया तो उसमें राजस्‍थान की सरकार कुछ नहीं कर सकती । जब तक कोई एक्‍ट नहीं बनाये तब तक कोई रूल नहीं बन सकता इसलिए अब राजस्‍थान की सरकार के लेवल पर अलाटमेंट किया जाना संभव नहीं है । (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: प्रश्‍नकाल समाप्‍त हुआ । प्रश्‍नकाल समाप्‍त हुआ । माननीय सदस्‍यगण प्रश्‍नकाल समाप्‍त हुआ । 12 बजकर तीन मिनट हों गये प्रश्‍नकाल 12 बजे तक के लिये ही है ।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, जो स्‍थानीय काश्‍तकार हैं उनके लिये केन्‍द्र सरकार .. (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो । (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़):***

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): ***

श्री अध्‍यक्ष: प्रश्‍नकाल समाप्‍त हुआ अब आप कृपया स्‍थान ग्रहण करें, आसन पांवों पर है ।

शोकाभिव्‍यक्ति

माननीय सदस्‍यगण, शोकाभिव्‍यक्ति के इस अवसर पर मैं हाल ही में दिवंगत हुए हरियाणा के पूर्व मुख्‍य मंत्री श्री बंशीलाल के प्रति संवेदना व्‍यक्‍त करते हुए यह शोक प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत करती हूं ।

हरियाणा के पूर्व मुख्‍य मंत्री श्री बंशीलाल का जन्‍म 26 अगस्‍त,1927 को भिवानी जिले के गोलागढ ग्राम में हुआ । आपने पंजाब विश्‍व विद्यालय से बी.ए. तथा एलएल.बी. की उपाधियां प्राप्‍त की । आपको कुरूक्षेत्र विश्‍व विद्यालय द्वारा डाक्‍टर आफ ला तथा हरियाणा कृषि विश्‍व विद्यालय द्वारा डाक्‍टर आप साइंस की मानद उपाधि से सम्‍मानित किया गया ।

श्री बंशीलाल वर्ष 1967, 1968, 1972, 1986, 1991, 1996 तथा 2000 में हरियाणा विधान सभा के विधायक निर्वाचित हुए । आपने मई, 1968 से मार्च, 1972 मार्च, मार्च 1972 से नवम्‍बर, 1975, जून, 1986 से जून 1987 तथा मई, 1996 से जुलाई, 1999 तक हरियाणा के मुख्‍य मंत्री पद पर आसीन रहे । आपके नेतृत्‍व में हरियाणा में विकास के नये आयाम स्‍थापित हुए । आप वर्ष 1960 तथा 1976 में पंजाब से राज्‍य सभा के सदस्‍य निर्वाचित हुए । आप सातवीं, आठवीं एवं नौवीं लोक सभा में हरियाणा के भिवानी निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस के सांसद रहे । श्री बंशीलाल वर्ष 1975 से 1977 तक केन्‍द्रीय रक्षा मंत्री एवं 1984 से 1986 तक केन्‍द्रीय रेल तथा परिवहन मंत्री रहे । आप संसद की राजकीय उपक्रम स‍मिति तथा प्राक्‍कलन समिति के सभापति भी रहे ।

कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता श्री बंशीलाल जिला कांग्रेस कमेटी, हिसार, कांग्रेस कार्यकारिणी समिति तथा कांग्रेस संसदीय बोर्ड के प्रसीडेंट रहे । आपने वर्ष 1996 में हरियाणा विकास पार्टी का गठन किया । अधिवक्‍ता रहे श्री बंशीलाल 1957-58 में भिवानी बार एसोसिएशन के प्रेसीडेंट रहे । आप वर्ष 1943-44 में प्रजा मंडल, लोहारू स्‍टेट के सचिव भी रहे । आपको आपातकाल के पश्‍चात् जेल की सज़ा भुगतनी पडी ।

श्री बंशीलाल जी का दिनांक 28 मार्च, 2006 को निधन हो गया । श्री बंशीलाल जी के निधन से हरियाणा में एक दबंग एवं विकास को समर्पित लोकप्रिय जन नेता एवं कुशल प्रशासक की कमी महसूस की जाती रहेगी ।

मैं, दिवंगत श्री बंशीलाल जी को अपनी ओर से तथा इस सदन के सभा माननीय सदस्‍यों की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित करती हूं तथा ईश्‍वर से प्रार्थना करती हूं कि दिवंगत की आत्‍मा को शांति प्रदान करें तथा उनके शोकसंतप्‍त परिजनों को उनका बिछोह सहन करने की शक्ति दे ।

माननीय सदस्‍यगण कृपया दो मिनट खड़े रहकर दिवंगत आत्‍मा की शांति के लिये प्रार्थना करें ।

(तदनन्‍तर सदन ने मौन खडे रहकर दिवंगत आत्‍मा को श्रद्धांजलि अर्पित की)

 

सदन की कार्यवाही 12.25 बजे तक के लिये स्‍थगित की जाती है ।

(तदनन्‍तर सदन की बैठक 12.08 बजे 12.25 बजे तक के लिये स्‍थगित हुई)

ans\usc\31.3.2006\1220\1j\1

 

(समय: 12.25 बजे)

(पुन: समवेत होने पर)

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

स्‍थगन प्रस्‍तावों पर अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍था

श्री अध्‍यक्ष: मुझे माननीय सदयों को सूचित करना है कि निम्‍न स्‍थगन प्रस्‍तावों की सूचना प्राप्‍त हुई है:-

(1) श्री जितेन्‍द्र सिंह एवम श्री जुबेर खान सदस्‍य की और से जिला अलवरा के ग्राम मुसाखेड़ा थाना किशनगढ़बास में दिनांक 24.11.05 को दो परिवारें में हुए झगड़े से उत्‍पन्‍न स्थिति के सम्‍बन्‍ध में।

(2) श्री जीतमल खांट एवम तीन अन्‍य सदस्‍यों  की और से माही परियोजना का पानी जालौर ले जाने से पूर्व बांसवाड़ा-डूंगरगढ़ जिलों की भूमि सिंचित करने के सम्‍बन्‍ध में।

उपरोक्‍त प्रस्‍ताव स्‍थगन प्रस्‍तावों की परिधि में नहीं आते अंत: इन पर अनुमति देने में असमर्थ हूं लेकिन फिर भी श्री जीतमल खांट को दो  मिनिट में अपनी बात कहने की अनुमति होगी। 

दो परिवारों के झगड़े में आप क्‍यों पड़ रहे हैं मेरे समझ में नहीं आ रही है बात?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): वह भी 2005 का। 

श्री जुबेर खान (रामगढ़): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, झगड़ा नहीं, एक मिनिट का समय देंगे तो आपको  स्‍वंय को लगेगा । (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: यह सदन जो है किसी खास, किसी भी पक्ष की पैरवी के लिए नहीं है। दो परिवारें  के झगड़े के अंदर आप...(व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, आप इसको आगे पूरा पढ़ते तो आपको स्‍वंय को लग जाता...

श्री अध्‍यक्ष: श्री जीतमल खांट।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): मैं आपके चैम्‍बर में आकर दुबारा निवेदन कर दूंगा। यह झगड़े की बात नहीं है, चार महीने से बच्‍चे और औरते घरों से बाहर है उनको बसाने के...(व्‍यवधान)

श्री अमराराम चौधरी (राज्‍य मंत्री, गृह):  अध्‍यक्ष महोदय, यहां डिसकस नहीं होगा क्‍योंकि कोर्ट के अंदर विचाराधीन है मामला । (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: वैसे भी कोर्ट  में विचाराधीन है तो आपको यहां उठाना ही नहीं चाहिये।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, विचाराधीन आप एक मिनिट (व्‍यवधान) सवाल, मुकदमें की बात ही नहीं कर रहा मैं तो यह कह रहा हूं ...(व्‍यवधान) 

श्री अध्‍यक्ष: नौ- नौ, अंकित नहीं हो।

श्री जुबेर खान (रामगढ़):***

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं होगा। अंकित नहीं होगा, कोई आवश्‍यकता नहीं है जवाब देने की। अंकित नहीं हो रहा।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): ***

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा):  हमारे स्‍थगन प्रस्‍ताव की व्‍यवस्‍था, आप कल स्‍टेटमेंट...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: पहले जीतमल खांट को दो मिनिट बोलने दे। आपका, चार बजे मंत्री जी  इस बारे में वक्‍तव्‍य देंगे। श्री जीतमल खांट। 

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पांइट आफ ओब्‍जेक्‍शन (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान की विधान सभा में पहली बार नई बात आई है। पहली बार नई बात सुन रहे हैं  पाइंट आफ ओब्‍जेक्‍शन ।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): हां नई ।

श्री अध्‍यक्ष: गलत बात है। नियमों के विरूद्ध .....(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): पाइंट आफ आर्डर सुना है, पाइंट आफ इनफोरमेशन सुना है, नई बात  पाइंट आफ ओब्‍जेक्‍शन..(व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): हां, नई आयेगी। 

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): पाइंट आफ ओब्‍जेक्‍शन किस रूल में है ?

स्‍थगन प्रस्‍ताव आदि पर चर्चा

माही का पानी जालौर ले जाने के लिए सर्वे

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका भी ध्‍यान आकर्षित कराना चाहूंगा और मंत्री जी का भी । राजस्‍थान के सभी समाचार पत्रों में एक खबर छपी, उस खबर का टाइटल था बांसवाड़ा जिले की प्रमुख नदी माही का पानी जालौर ले जाने के लिए सर्वे। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके  ध्‍यान में लाना चाहूंगा...

Ddm/usc/310306/1230/1k

 

कि राजस्‍थान का दक्षिणी सुदूरवर्ती बांसवाड़ा और डूंगरपुर, दोनों जिलों के बीच जो राजस्‍थान की प्रमुख नदी है, और उस बांसवाड़ा, डूंगरपुर जिले में माही का जो निर्माण 1960 के आसपास तत्‍कालीन वित्‍त मंत्रीजी मोरारजी देसाई के करकमलों के द्वारा वहां का शिलान्‍यास हुआ।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप भूमिका पर मत जाओ, अब आप अपनी बात कहो।

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): और माही बजाज सागर परियोजना बांसवाड़ा जिले के अन्‍दर, राजस्‍थान और गुजरात सरकारों के मध्‍य एक समझौता हुआ और उस समझौते के तहत बाँध का निर्माण हुआ। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहूंगा कि बांसवाड़ा जिले का जो भौगोलिक क्षेत्र है 506279 हैक्‍टेयर भूमि है, जिसमें से खरीफ की फसल लगभग 2 लाख 32 हजार हैक्‍टेयर पर एवं रबी की फसल एक लाख 20 हजार हैक्‍टेयर पर हो रही है। लेकिन मैं अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय का ध्‍यान इस और आकर्षित करना चाहूंगा कि माही डेम से सिंचाई केवल 60-70 हजार भूमि पर हो रही है। बांसवाड़ा जिले में कुशलगढ़, सज्‍जनगढ़, पीपलखूंट, यह जो पंचायत समितियां मैं आपके सामने पेश कर रहा हूं, बांसवाड़ा जिले की मैं एक स्थिति स्‍पष्‍ट कर दूं, बांसवाड़ा की इन पंचायत समिति क्षेत्रों के अन्‍दर एक इंच भूमि के अन्‍दर वहां पर सिंचाई नहीं होती है। दूसरी ओर जिन बांसवाड़ा जिले की घाटोल, बागीडोरा, बांसवाड़ा अनन्‍तपुरी और गढ़ी पंचायत समितियों के अन्‍दर माही डेम के पानी से मात्र 40 और 30 फीसदी पानी से ही वहां पर सिंचाई होती है। इतना ही नहीं, अध्‍यक्ष महोदय, इस माही डेम पर जो बांसवाड़ा, डूंगरपुर से होते हुए, यह जो बहुत बड़ी दोनों जिलों की एक प्रमुख नदी है, जो डूंगरपुर जिले की आसपुर, सागवाड़ा, सीमलवाड़ा तहसीलों के पास से होकर गुजरती है और गुजरात के सीमावर्ती इलाके पंचमहल के अन्‍दर वहां पर कडाणा डेम पर भी, वहां पर एक बहुत बड़ा डेम बंधा हुआ है। अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहूंगा कि राजस्‍थान का और पूरे हिन्‍दुस्‍तान का, कश्‍मीर से कन्‍याकुमारी तक भारत एक है। किसी भी बड़ी नदी, नाले का पानी कहीं भी सरकार पहुंचाये लेकिन मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहूंगा कि पूरे बांसवाड़ा जिले के अन्‍दर 5 लाख हैक्‍टेयर भूमि है और माही डेम से मात्र हमें 65 और 70 हजार हैक्‍टेयर सिंचाई हो रही है। सरकार ने पत्र-‍पत्रिकाओं के माध्‍यम से जिस तरीके से माही बेसिन का सरप्‍लस पानी बताकर जालौर और बाड़मेर में ले जाने की एक महत्‍वाकांक्षी योजना तैयार की है, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहूंगा, इसी सदन के अन्‍दर आये दिन भुखमरी, गरीबी, बेकारी, लाचारी, बेबसी की हालत का बारबार यहां जिक्र किया जाता है और बारबार भूख और कुपोषण का शिकार होकर आदिवासी की इस हालत में मौत हो गयी। यह बारबार इस सदन में जिक्र किया जाता रहा है। मैं आपके माध्‍यम से चाहूंगा कि हमारा माही का सरप्‍लस जो पानी है वह सबसे पहले बांसवाड़ा, डूंगरपुर की असिंचित धरती को पहले पानी मिले।

श्री अध्‍यक्ष: आपको 2 मिनट दिये थे, आप आधे मिनट में पूरा करिये।

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): और उसके बाद माही का सरप्‍लस पानी चाहे बाड़मेर ले जाएं, जालौर ले जाएं, कहीं भी ले जाएं। लेकिन यह बांसवाड़ा, डूंगरपुर और अरनौद, और प्रतापगढ़ का कम से कम 30 लाख जनता का भविष्‍य नदी के साथ में जुड़ा हुआ है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे आग्रह करना चाहूंगा कि बांसवाड़ा, डूंगरपुर के सारे किसानों में बहुत बड़ा रोष व्‍याप्‍त है कि हम तो घर के लोग भूखे मर रहे हैं और पड़ौस को पानी देने की बात कर रहे हैं1 मैं आपसे आग्रह करना चाहूंगा कि हमारा बांसवाड़ा, डूंगरपुर, उदयपुर ट्राइबल सब-प्‍लान का पूरा इलाका शांतिप्रिय इलाका है। हम जब भी सरकार की कोई योजना हो, कार्यक्रम हो, हम पूरा सहयोग करते हैं।

श्री अध्‍यक्ष: कृपया, आप समाप्‍त करें। कृपया समाप्‍त करें।

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): लेकिन जब हमारे घर के सदस्‍य भूखे रहें, घर के लोग भूखे रहें और हमारा पानी बाड़मेर और जालौर जाए यह हमारे लिये कितने शर्म की बात है।..(व्‍यवधान)...

श्री नवनीत नीनामा (घाटोल): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे को भी इस पर बोलने का मौका दिया जाए। यह बांसवाड़ा जिले का मामला है। मेरे को...

श्री अध्‍यक्ष: पर्ची पर सबको नहीं बोलने दिया जाता है। पर्ची के माध्‍यम से आपने अपनी बात उठायी।...(व्‍यवधान)

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): मैं कहना चाहूंगा, यह हमारे बांसवाड़ा, डूंगरपुर, अरनौद, प्रतापगढ़ की पूरी जनता के साथ जुड़ा हुआ मसला है।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, अब आप स्‍थान ग्रहण करें। आप स्‍थान ग्रहण करें। (व्‍यवधान) आप स्‍थान ग्रहण करें।

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे एक करबद्ध निवेदन करना चाहूंगा और हमारे मंत्रीजी यहां विराजमान हैं, क्‍योंकि 30 लाख जनता का भविष्‍य इसके साथ जुड़ा हुआ है।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप अपना स्‍थान ग्रहण करें। आपने अपनी बात कह दी, स्‍थान ग्रहण करें, आप। 

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): मैं आग्रह करना चाहूंगा कि आज भी वहां पर लागों की हालत ऐसी है कि आज भी दो टाइम उनको रोटी नहीं मिलती है।

श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली): अध्‍यक्ष महोदय, यह किसानों का मामला है और माननीय मंत्रीजी विरजामान हैं। बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिलों को पानी नहीं मिले और दूसरे जिलों में पानी जाए, उन जिलों में पहले पानी देकर के बाकी को भी दे दें। माननीय मंत्रीजी, माननीय सदस्‍य की बात को गहराई से लें।

श्री अध्‍यक्ष: आर्डर, आर्डर, कृपया स्‍थान ग्रहण करें।

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): मेवाड़ के स्‍वाभिमान को जिंदा रखने के लिये महाराणा प्रताप के साथ हम लोगों ने.....(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: मैंने आपको दो मिनट का समय दिया था, अब आप बैठ ही नहीं रहे हैं।

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): अब मैं कहना चाहूंगा कि हमारे बांसवाड़ा, डूंगरपुर और पूरे इलाके के आदिवासी काश्‍तकारों का हित जुड़ा हुआ है।

श्री अध्‍यक्ष:  अब मैं कहूंगी कि अंकित नहीं करें। (व्‍यवधान) माननीय सदस्‍य का अंकित नहीं करें, अंकित नहीं होगा।

श्री नवनीत नीनामा (घाटोल): एक मिनट बोलने का मेरे को मौका दिया जाए, एक मिनट, एक मिनट।

श्री अध्‍यक्ष: एक मिनट में उन्‍होंने कह दी ना बात तो।

श्री नवनीत नीनामा (घाटोल): एक मिनट बोलने का मौका दिया जाए। 

श्री अध्‍यक्ष: आपको एक नहीं मैं दो मिनट देती हूं। 12 बजकर 38 मिनट पर बैठ जाना पड़ेगा आपको। 12.38 पर बैठ जाना पड़ेगा, चलिये, बोलिये। 

श्री नवनीत नीनामा (घाटोल): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बागीडोरा से आने वाले माननीय सदस्‍य के प्रवचन में स्‍वयं को इसमें शामिल करता हुआ बोलना चाह रहा हूं कि मेरा ऐसा आग्रह है कि सन 1991 में यह राजस्‍थान की विधान सभा में         तय हुआ था कि मध्‍य प्रदेश में गांधी सागर का पानी माही डेम में डाला जाएगा, इसके बाद यह जालौर के सर्वे पर विचार किया जाए, ऐसा निर्णय था। अत: मेरा यह आग्रह है कि गांधी सागर का पानी अभी माही डेम में नहीं आया है और मध्‍य प्रदेश में जगह-जगह डेम बनाये जाकर नदी-नालों का आना रोक दिया गया है। माही में अभी पूरा पानी नहीं आ रहा है। अत: मेरा आग्रह है कि बांसवाड़ा जिले की जो जमीन सूखी पड़ी हुई है तो माही डेम में पानी अन्‍य प्रान्‍त से आने से रोक लगी हुई है। ऐसी स्थिति में मेरा आग्रह है कि जालौर के सर्वे को अभी रोक दिया जाए। ऐसा मेरा निवेदन है।

श्री अध्‍यक्ष: प्रक्रिया के नियम 295 के अन्‍तर्गत जो सूचनाएं प्राप्‍त हुई हैं वह आज पढ़ी हुई मान ली गयीं। क्‍योंकि आज कई संकल्‍पों पर विचार होना है।

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  यहां पर सिंचाई मंत्रीजी विराजे हुए हैं। बांसवाड़ा, डूंगरपुर का भविष्‍य जुड़ा हुआ है और वहां पर 30 लाख जनता के साथ, आदिवासी लोगों के साथ खिलवाड़ होकर के...(व्‍यवधान) मंत्रीजी जवाब दे रहे हैं।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, आपकी अनुमति हो तो मैं थोड़ी स्थिति स्‍पष्‍ट करना चाहता हूं। माननीय सदस्‍य ने बांसवाड़ा, डूंगरपुर क्षेत्र का पानी जालौर-बाड़मेर की तरफ ले जाने के ऊपर एतराज किया है। आजकल माननीय सदस्‍य ही नहीं हर जगह यह एतराज, क्‍योंकि हमारी सोच दिन-प्रतिदिन बनती जा रही है, इसमें कोई आपका और मेरा मसूर नहीं है। लगभग सब जगह यही है कि एक प्रान्‍त का पानी दूसरे प्रान्‍त पर, एक जिले का दूसरे जिले में, एक गांव का दूसरे गांव में... तो थोड़ा सा इसमें व्‍यापक दृष्टिकोण लाने की बात है। (व्‍यवधान) मेरी पूरी बात तो सुन लीजिए आप। जहां तक माही के पानी का सवाल है, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अभी तक हम बहुत कम पानी रोक पाये हैं और जो भी पानी हमने रोका है, उसमें लगभग 80 हजार हैक्‍टेयर के अन्‍दर तो आपके एरिये को हमने लिया है। सागवाड़ा कैनाल जो 21 हजार हैक्‍टेयर को सिंचाई सुविधा उदयपुर और बांसवाड़ा जिले के अन्‍दर सिंचाई करेगी इसके अलावा माननीय सदस्‍य, जो पीछे खड़े थे, उनके एरिये का खमेरा और पीपलखूंट उसमें आ जाएगा। जब नर्मदा बना था तब हमारा समझौता हुआ था गुजरात से कि नर्मदा के पानी से जो माही के पानी से इर्रिगेट गुजरात की जमीन हो रही है, वह उससे होने लग जाएगी उसके बाद उस पानी के ऊपर भी हमारा अधिकार है। यह सरप्‍लस वाटर भी हम लेंगे और इसके बारे में हमने कार्यवाही चालू कर दी है। इसे अलावा भी मैं आपको निवेदन करना चाह रहा हूं कि हमारा केचमेंट पूरे एरिये का पानी कडाणा और गुजरात होकर समुन्‍द्र के अन्‍दर जाता है तो हमारा यह प्रयास रहेगा कि इस पानी को रोकें राजस्‍थान की सीमा में।

Vps/usc/31-3-2006/1240/1l/1

 

रोकने के बाद में पहले जो आपके जिले हैं जहां पर पानी पहुंच सकता है, चाहे कुशलगढ़ हो, चाहे दूसरा एरिया हो, लिफ्टिंग के द्वारा भी, हां, कोई भी एरिया हो, मैं यही तो कह रहा हूं, निवेदन कर रहा हूं आपसे, लिफ्ट से भी जरूरत होगी तो वह वहां पहुंचाएंगे और उसके बाद अगर सरप्‍लस पानी है तो उसको तो राजस्‍थान में इस्‍तेमाल करने की इजाजत आप दीजिए अगर वह पानी समुद्र में जाएगा तो उसमें तो हम किसी को लाभ नहीं होगा।

श्री अमराराम (धोद): उसका आब्‍जेक्‍शन नहीं है। वहां जितना पानी का उपयोग हो सकता है, उसको करने के बाद अगर बचता है तो जालौर ले जाए। 6500 करोड़ की योजना ... (व्‍यवधान)

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): मैं कह रहा हूं कि जितना सम्‍भव होगा पहले उस क्षेत्र में काम लेंगे और उसके बाद सरप्‍लस वाटर को ले जाएंगे।

श्री अमराराम (धोद): बाद में बचता है तो ले जाएं।

श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली): बाद में बचा हुआ पानी ले जाएं। बिलकुल बहुत-बहुत धन्‍यवाद इसके लिए । ... (व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 6500 करोड़ रुपये बांसवाड़ा और डूंगरपुर की ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: स्‍थगन प्रस्‍ताव पर इस तरह से चर्चा नहीं हुआ करती है।

श्री अमराराम (धोद): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा निवेदन यह है कि ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: श्री शंकर सिंह राजपुरोहित।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पानी का ... (व्‍यवधान) हमने सर्वे कराने की कार्यवाही चालू कर दी है।

श्री अध्‍यक्ष: अब पर्ची पर है। नो, अब कोई नहीं बोलेगा। ... (व्‍यवधान)

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): सर्वे के बाद सारी स्थिति और बता दूंगा। ... (व्‍यवधान) सदन में आप और हम रहेंगे । ... (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: स्‍थगन प्रस्‍ताव पर इस तरह की चर्चा नहीं हुआ करती है। उन्‍होंने कहा कि दो मिनट में अपनी बात कहने का मौका दें और मैंने उन्‍हें दे दिया लेकिन स्‍थगन प्रस्‍ताव पर इस प्रकार न मंत्री का उत्‍तर होता है और न इस प्रकार से चर्चा होती है। पर्ची पर श्री शंकर सिंह राजपुरोहित।  

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप बीच में नहीं, आप पर्ची होने दें। श्री शंकर सिंह राजपुरोहित। देखिये आपको तीन मिनट में अपनी बात कहनी है।

श्री शंकर सिंह राजपुरोहित (आहोर): दो मिनट में कह देता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: सब हठधर्मी करने लग जाएंगे, इस तरह से तो काम चलेगा ही नहीं।

पर्ची के माध्‍यम से उठाये गये मुद्दे

अधिकारियों के वाहन पर लाल बत्‍ती निषेध करने विषयक

श्री शंकर सिंह राजपुरोहित (आहोर): दो मिनट में करता हूं। आपका आदेश। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा एक विषय यह है कि गांवों में, हर एक गांव के बीच में कोई न कोई एक ऐसा धर्म स्‍थान होता है, धर्म स्‍थल होता है, मंदिर होता है, जिस मंदिर के साथ में पूरे गांव की अस्मिता जुड़ी हुई होती है। पूरा गांव उस मंदिर से केन्द्रित रहता है अगर उस मंदिर में किसी भी कारण से अँधेरा रहे तो यह उस गांव के साथ बहुत बड़ा दुर्भाग्‍य रहता है इसलिए मेरा एक निवेदन है कि यह मंदिरों में जो कॉमर्शियल चार्ज इलेक्ट्रिक का लगता है, जिससे मंदिरों के बिल है, वे चार हजार, पाँच हजार, छह हजार रुपये आते हैं। गांवों के मंदिरों में कोई आय नहीं होती है। वह मंदिर भर नहीं पाते हैं और कनेक्‍शन कट जाता है इसलिए मेरा आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री महोदय और सरकार से निवेदन है कि यह जो गांव में जो भी देवस्‍थान हैं, जो पूजा स्‍थल हैं, जो हमारे अराध्‍य स्‍थल हैं, उन स्‍थानों पर डोमेस्टिक चार्ज, फ्री नहीं करें तो कम से कम घरेलू चार्ज जो लगता है, वह उसमें बिलों पर लगाया जाए जिससे उन मंदिरों में उजाला रहे और गांवों का जो आराधना केन्‍द्र है वह अच्‍छा आराधना केन्‍द्र बने, यही मेरा निवेदन है।

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है। बहुत-बहुत धन्‍यवाद। श्री मदन राठौड़ (अनुपस्थि‍त)      श्री खुशवीर सिंह ।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, लगभग सैकड़ों वर्षों के संघर्ष के बाद में हमारा राष्‍ट्र बड़ा मुश्किल से आजाद हुआ और प्रजातंत्र की स्‍थापना हुई और हमने सोचा कि प्रजातंत्र में जो जनता के प्रतिनिधि हैं, शासन उनके हाथों में होगा लेकिन मुझे बड़े दुःख के साथ कहना पड़ रहा है माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जिस तरह आजादी से पूर्व अंग्रेज हुकूमत में जब उनका लार्ड साहब जिसको कहते थे वायसराय, वह निकलता था तो हिन्‍दुस्‍तान के वासियों को अपने हाथों में मशालें लेकर उलटे खड़े रहना पड़ता था। मुंह भी सामने नहीं कर सकते थे और आज उसी की तर्ज पर इस राष्‍ट्र के अन्‍दर वही शासन की बागडोर जन-प्रतिनिधियों के हाथ में नहीं होकर इन अधिकारियों के हाथ में है।

मैं आपका ध्‍यान आकर्षित करना चाहूंगा माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 15 अगस्‍त पिछली जो गयी, उसमें मैं और मेरे साथ एक माननीय सदस्‍य और थे, हम भी सवाई मानसिंह स्‍टेडियम में पहुंचे और यह देखने के लिए कि राष्‍ट्रीय कार्यक्रम, लेकिन मुझे यह ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य बात नहीं करें। ... (व्‍यवधान)

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): बड़े दु:ख के साथ कहना पड़ रहा है, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कि जो मुख्‍य द्वार था और जो प्रवेश करने की बात थी वहां पर तो बड़े अधिकारी, बड़े बाबू लोगों को जाने का अधिकार था और माननीय विधायकों को 23 नम्‍बर द्वार से जो सामान्‍य द्वार था, वहां से उनको प्रवेश करने की अनुमति दी गयी थी और बैठने के लिए कोई व्‍यवस्‍था नहीं थी और उनके लिए बाकायदा सोफे लगे हुए थे । मैं आपका ध्‍यान इस और आकर्षित करना चाहूंगा, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कि आज प्रोटोकोल की सूची में अगर हम देखते हैं तो विधायक मुख्‍य सचिव से भी ऊपर आता है और मुख्‍य सचिव के लाल-बत्‍ती लगती है। सैक्रेटरीज के लाल-बत्‍ती लगती है और जिला कलेक्‍टर के लाल-बत्‍ती लगती है।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, आपके कहने का मतलब लाल-बत्‍ती आपके भी लगायी जाए?

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): नहीं, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे लाल-बत्‍ती, हमारे लाल-बत्‍ती लगाने की बात नहीं है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बात नौकरशाही हावी हो रही है उसकी है। आज जन-प्रतिनिधियों, मुख्‍य मंत्री के, राष्‍ट्रपति के, प्रधान मंत्री के, गवर्नर के और माननीय अध्‍यक्ष महोदय के और मंत्रियों के लाल-बत्‍ती की तो बात समझ में आती है। न्‍यायाधीशों के लाल-बत्‍ती लगती है तो बात समझ में आती है लेकिन उन अधिकारियों के लाल-बत्‍ती किस बात पर? आप क्‍या मैसेज देना चाहते हो इस स्‍वतंत्र भारत को कि आप इन अधिकारियों को लाल-बत्‍ती लगा रहे है। मेरा आपसे पुरजोर शब्‍दों में अनुरोध है, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इनकी लाल-बत्‍ती बंद की जाए, उतारी जाए और गुजरात की तर्ज पर पीली बत्‍ती लगायी जाए जिससे यह कम से कम पता चलेगा कि यह न्‍यायाधीश के लाल-बत्‍ती है, हमारे जन प्रतिनिधि, जो मंत्री है, मुख्‍य मंत्री है, राष्‍ट्रपति है, गवर्नर्स हैं, उनके लाल-बत्‍ती है, पता चलेगा और इन अधिकारियों के अगर लगानी ही है तो आप पीली बत्‍ती लगाइये, लाल-बत्‍ती नहीं। मेरा सभी माननीय सदस्‍यों से अनुरोध है और इसमें मेरे ख्‍याल से राजस्‍थान की विधान सभा के 200 यह पूरे, मेरी इस बात से सहमत होंगे, क्‍योंकि दोनों तरफ से मेजें थपथपाई जा रही है।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसकी गम्‍भीरता का आप खुद स्‍वयं पता लगा सकती हैं। मैं आपको अनुरोध करना चाहूंगा कि जिला प्रमुख के जब लाल-बत्‍ती लगती है, जो मात्र दस हजार, पन्‍द्रह हजार वोटों से जीतकर आता है। एक म्‍यूनिसिपल  अध्‍यक्ष के अगर लाल-बत्‍ती लग सकती है तो क्‍यों नहीं आपके इन विधायकों के लाल-बत्‍ती लगायी जाए?

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा पुरजोर शब्‍दों में सदन से अनुरोध है कि आज यह निर्णय लिया जाए और इन अधिकारियों की लाल-बत्‍ती तुरन्‍त बंद करवायी जाए और इसकी जगह पीली बत्‍ती लगायी जाए। यही मैं अनुरोध करना चाहूंगा। अधिकारियों के और नहीं तो पीली बत्‍ती, नहीं तो लाल-बत्‍ती तो कम से कम बंद करवा दें।

यह आजाद भारत है। आप क्‍या मैसेज देना चाहते हो इस स्‍वतंत्र भारत की जनता को? क्‍या आज अधिकारी, वही अंग्रेजों  की हुकूमत में जो होता था, वही हुकूमत इनकी है, हम तो मात्र एक जन-प्रतिनिधि होने के नाते एक दिखावे में हम कार्य कर रहे हैं?

श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली): आपकी बात का समर्थन करता हूं। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अगर 15 अगस्‍त, 26 जनवरी के दिन माननीय सदस्‍य से इस प्रकार का व्‍यवहार किया गया है कि इनको वहां साधारण दरवाजे से जाना और आम आदमी की तरह ट्रीट करना तो माननीय सदस्‍य की स्थिति क्‍या रहेगी? यह गम्‍भीर प्रश्‍न है। माननीय सदस्‍य ने जो बात उठायी है, मैं आपसे निवेदन करूंगा, आपकी आज्ञानुसार हम वही आचरण करेंगे लेकिन हम आपसे निवेदन करते हैं कि यह गम्‍भीर मामला है और निश्चित रूप से माननीय सदस्‍य का स्‍वाभिमान और जन-प्रतिनिधि होने के नाते उनकी जो जिम्‍मेदारियां हैं, वह बरकरार रहनी चाहिए और सम्‍मान होना चाहिए।

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं इस बात की ताईद करता हूं कि हमारा, मैं जा रहा था एक बार कार्यक्रम में ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: कृपया स्‍थान ग्रहण करें, आपने अपनी बात कह दी। ... (व्‍यवधान)

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): कल के कार्यक्रम में माननीय मुख्‍य मंत्रीजी ने जन-प्रतिनिधियों के बैठने के लिए अलग से व्‍यवस्‍था की, हालांकि मैं नहीं पहुंच पाया जरूरी काम से चला गया था, उसके लिए मैं धन्‍यवाद देना चाहूंगा।

श्री अध्‍यक्ष: आपने अपनी बात कह दी। वह पर्ची की तो केवल आपके ... (व्‍यवधान)

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): अधिकारियों के लिए अलग थी और जन-प्रतिनिधियों के लिए अलग व्‍यवस्‍था की, उसका तो मैं धन्‍यवाद दूंगा।

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है, ठीक है आपकी बात।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: अब आप सुनिये तो सही, आसन की तो व्‍यवस्‍था सुन लीजिए।

वैसे तो गृह मंत्रीजी यहां पर बैठे हुए हैं। गृह मंत्रीजी, कुछ विधायकों ने तो लगा रखी है लाल-बत्‍ती वैसे भी। मुझे मालूम है, मैं यह नहीं बताऊंगी कि किसने लगा रखी है लेकिन ... (व्‍यवधान) नहीं, कुछ विधायकों ने लगा रखी है, सब जानते हैं आप लोग, देखते हो रोजाना। मैं क्‍या बताऊं? कुछ विधायकों ने लगा रखी है या तो वह बत्तियां हटाई जाए, कायदे की बात है और वरना फिर सबको ही परमिशन दी जाए कि भाई, जो चाहे लगा लें क्‍योंकि कोई धींगामस्‍ती करें और अपनी मर्जी से लगा लें। चाहे रुतबे के लिए लगाये, चाहे किसी और वजह से लगाये, कोई उलटा धंधा करने की वजह से लगाता होगा या कोई रुतबे के कारण से लगाता होगा।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): यह तो अधिकारी भी कर सकते हैं उलटे धंधें तो ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: या तो उनको हटा दी जाए और नहीं हटाये तो फिर सबको लगाने की इजाजत दी जाए, बात तो सही है तो ... (व्‍यवधान)

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह तो दूसरे भी कर सकते है। यह आजकल हाईवे पर आने-जाने के लिए बहुत तकलीफ होती है, ट्रेफिक इतना रहता है कि वहां पर ... (व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): विधायक तो प्रोटोकोल में चीफ सैक्रेटरी से ऊपर होने के बाद भी ... (व्‍यवधान) माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अधिकारी से जो प्रोटोकोल में ऊपर है। प्रोटोकोल में ऊपर है। उनकी तो लाल-बत्‍ती ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: उतारने को कह रहे हैं। मंत्रीजी कुछ कह रहे हैं। प्रोटोकोल के मुताबिक व्‍यवस्‍था होगी।

श्री अमराराम (धोद): हमारे पास तो गाडि़यां ही नहीं हैं। ... (व्‍यवधान)

Spp/usc/31.3.2006/1250/1m

 

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): अध्‍यक्ष महोदय, हरियाणा प्रदेश में विधायकों को भी लाल बत्‍ती लगाने की अनुमति है। इसलिए राजस्‍थान में भी अगर किसी ने लगा रखी है तो खुद के पैसे से लगा रखी है। ..(व्‍यवधान)..

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): यह लाल बत्‍ती अहंकार की प्रतीक है और जन प्रतिनिधि जनता के प्रथम सेवक हैं इसलिए लाल बत्‍ती विधायकों को नहीं दी जानी चाहिये। विधायकों को नहीं दी जानी चाहिये। ..(व्‍यवधान)..

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, लाल बत्‍ती लगे या हरी लगे या कैसी लगे, जो नियमों में प्रावधान है उसी के अनुसार लगनी चाहिये। कुछ लोग इसका दुरूपयोग जरूर कर रहे हैं । एक तो यह हो सकता है कि इसका टोटल दुरूपयोग बंद कर दिया जाये, चाहे आप हो, चाहे कोई भी हो, एक रास्‍ता तो यह है। दूसरा, य‍दि अपन यह चाहते हैं कि जन प्रतिनिधि को दें तो अब जन प्रतिनिधियों की लिस्‍ट अपना शुरू करेंगे तो मैं समझता हूं उसकी सीमाएं बांधना इतना आसान नहीं होगा। आज अगर हम करेंगे तो कल जिला प्रमुख मांगेंगे, प्रधान मांगेंगे ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: जिला प्रमुख तो है आलरेडी। जिला प्रमुख के तो आलरेडी है।..(व्‍यवधान)..

श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली): जिला प्रमुख तो आलरेडी लगाते हैं।..(व्‍यवधान)..

श्री अमराराम (धोद): नहीं, हमारे तो मत लगाओ लेकिन हमारे से प्रोटोकोल में जो नीचे हैं, उनकी तो उतार दो आप।..(व्‍यवधान)..

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): वह मेरे से नाम निकल गया होगा जिला प्रमुख का। मेरा मतलब है प्रधान भी है, नगर पालिका का चेयरमैन भी है, पार्षद भी है, कल सरपंच भी मांगेगा और भी मांगेंगे । जन प्रतिनिधि तो सारे ही हैं। इसलिए फिर भी इस विषय को गंभीरता से हम बैठकर विचार करेंगे कि इन सबमें क्‍या कर सकते हैं और किस तरह से कर सकते हैं । जो भी हमको बैठने के बाद लगेगा कि यह इस तरह से किया जा सकता है वह जरूर करेंगे और अगर वह नहीं किया तो कम से कम आपकी इस बात से तो मैं सहमत हूं जिसको आज की तारीख में जिस प्रकार की बत्‍ती लगाने का अधिकार है, वह उसका दुरूपयोग न करें, चाहे आप हों, मैं हूं, कोई भी हों, दोनों में से कोई रास्‍ता जरूर तय होगा।

श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपसे निवेदन है..(व्‍यवधान)..

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): अध्‍यक्ष महोदय, मैं इसमें एक सुझाव देना चाहता हूं ..(व्‍यवधान)..सुभाष जी, एक मिनटा..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: आप दो एक साथ बोल रहे हैं। ..(व्‍यवधान)..

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): नाम गिनवाये हैं । अध्‍यक्ष महोदय, गृह मंत्रीजी ने जितने नाम गिनाये हैं उनके सबके लाल बत्‍ती लगती है चाहे वह जिला प्रमुख हो, चाहे प्रधान हो, चाहे नगर पालिका के चेयरमैन हों, उन्‍होंने पहले से ही लगा रखी है। इसलिए अध्‍यक्ष महोदय, निवेदन है कि विधायकों को ही बाकी रख रखा है ।..(व्‍यवधान)..

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): अध्‍यक्ष महोदय, यह इस कानून में विसंगति है । मैं आपका ध्‍यान दिलाना चाहूंगा एक प्रोटोकोल बुक बनी हुई है और प्रोटोकोल बुक में कौन ऊपर रहेगा, कौन नीचे रहेगा, यह कानून बना हुआ है। मेजर बेस प्रोटोकोल माना जाता है और उस प्रोटोकोल बुक को छोड़कर नये नियम बना दिये गये, जिसमें कौन बत्‍ती लगायेगा, कौन नहीं लगायेगा। इस लाल बत्‍ती लगाने का परपज माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह है कि हाइवे है, विदेशों की तरह हमारे यहां हाइवेज और सड़कों का निर्माण नहीं हुआ था तो ट्रक बहुत ज्‍यादा चलते हैं, जन प्रतिनिधियों को दौरे करने के लिये एक स्‍थान से लम्‍बी दूरी तय करनी पड़ती है कई बार दिन में, कई बार रात में तो इसलिए उनको ट्रक साइड नहीं देते हैं, कई बार बस साइड नहीं देती, कई बार फंस जाते हैं ट्रेफिक में और कई लोगों के साथ जो दुर्घटनाएं होती हैं हमारे सदस्‍यों के साथ, चाहे एम.पीज. हों चाहे एम.एल.ए. हैं, मैं आपसे अनुरोध करना चाहूंगा जैसा माननीय गृह मंत्रीजी ने कहा आज म्‍युनिसिपैलिटी के चेयरमैन को जरूरत ही नहीं है क्‍योंकि वह शहर शहर के अंदर घूमेंगे । अध्‍यक्ष महोदय, आप पंचायत समिति ..(व्‍यवधान)..

( व्‍यवस्‍था सूचक घण्‍टी )

 श्री अध्‍यक्ष: आपकी पर्ची थोड़े ही है इस पर। आपकी पर्ची नहीं है। आप सर्वश्रेष्‍ठ विधायक हो, आपकी पर्ची नहीं है।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): मैं यही तो कह रहा हूं उसको दे रखी है। देखिये, विषय बहुत गंभीर आ गया तो मैंने कानूनन बात आपको कही है। यह कानून में विसंगति है। इस कानून की विसंगति को आप दूर करिये। छोटे-छोटे अधिकारी बत्‍ती लगाकर घूम रहे हैं और लोकतंत्र के अंदर जो पुराने नियम बने हुए हैं, उनमें आप परिवर्तन करिये। यह मैं आपसे अनुरोध करना चाहता हूं। धन्‍यवाद।

श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली): अध्‍यक्ष महोदय, मेरा इससे हटकर थोड़ा सा निवेदन है। थोडा हटकर निवेदन यह है कि माननीय सदस्‍यों की इज्‍जत का सवाल है..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: नौ-नौ, अब कोई चर्चा नहीं होगी। अब इस विषय पर चर्चा बंद। एक पर्ची श्री मदन राठौड़ की आई थी। मैंने जब नाम पुकारा तब आप थे नहीं।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): मैं माफी चाहता हूं, मैं थोड़ा गया था।

श्री अध्‍यक्ष: यू हैव मिस योअर अपार्चुनिटी, फिर भी आप दो मिनट में अपनी बात को बोलेंगे। दो मिनट से तीसरा मिनट नहीं। दो मिनट में आपकी बात खत्‍म हो जाएगी 12.56 पर।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): बहुत-बहुत धन्‍यवाद अध्‍यक्ष महोदय।

श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली): अध्‍यक्ष महोदय, आपकी इजाजत हो तो आधा मिनट लूंगा। मैं यह निवेदन करना चाह रहा हूं कि माननीय सदस्‍यों के साथ जिस प्रकार का व्‍यवहार ब्‍यूरोक्रेसी करती है, यह उनके सम्‍मान के लिये ठीक नहीं और हर जगह देखने में ऐसा मौका मिलता है। एक तरफ ब्‍यूरोक्रेसी में आप सबसे ऊपर बताते हैं दूसरी तरफ यही ब्‍यूरोक्रेसी हमारे माननीय सदस्‍यों के साथ ऐसा व्‍यवहार करती है। मैं आपसे, आसन से यह निवेदन करना चाहता हूं कि सरकार को इस प्रकार के निर्देश दें कि माननीय विधायकों, सांसदों के सम्‍मान में कोई किसी प्रकार की ..

(व्‍यवस्‍था सूचक घण्‍टी)

श्री अध्‍यक्ष: आप बोलते ही चले गये। अब आपने शुरू ही कर दिया। श्री मदन राठौड़।

अकाल राहत कार्यों में कथित घोटाला विषयक

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अध्‍यक्ष महोदय, मैं अभी श्री गौतम जी मंदिर, सिरोही में दर्शन करने के लिये जा रहा था कि रास्‍ते में पोसालिया और छीपागांव के बीच में नदी पर रपट टूटी हुई थी। थोड़ा आगे गया तो आगे एक पत्‍थर लगा हुआ था शिलालेख और उस शिलालेख पर यह लिखा हुआ था कि यह सड़क 2003 में बन चुकी, जिसका उदघाटन हुआ था, उस पर लिखा हुआ है मुख्‍य अतिथि माननीय सरदार बूटासिंह, अध्‍यक्षता श्रीमान् संयम लोढ़ा, विधायक, विशिष्‍ट अतिथि श्रीमान् राजेश यादव, जिला कलेक्‍टर सिरोही और इसमें, अध्‍यक्ष महोदय, फिर मैंने पता किया कि यह सड़क तो है नहीं, रपट भी बनी हुई नहीं, थोड़ी बहुत बनी हुई है, जो टूटी हुई थी। मैं कलेक्‍ट्रेट में गया और मैंने वहां पता किया कि क्‍या हुआ इस रपट का। अध्‍यक्ष महोदय, बहुत आश्‍चर्यजनक तथ्‍य सामने आये कि अकाल राहत के तहत 91 लाख 95 हजार रुपये अकाल राहत के तहत स्‍वीकृत हुआ था और यह ठेके से काम करवाया गया । थोड़ा काम ठेके में हुआ फिर बरसात आ गयी और बहकर चली गयी वहां पर आश्‍चर्यजनक स्थिति यह बन गयी कि वहां एम.एल.ए. ने सात हजार रुपये स्‍वीकृत किये अपने फण्‍ड से और तीस हजार रुपये यानि समझ में नहीं आया 41 लाख 95 हजार स्‍वीकृत हुआ था और सड़क वहां बनी नहीं, रपट बनी नहीं, ठेके से काम किया तो उसके बाद जब मैंने वहां पता किया तो हलचल मच गयी। अध्‍यक्ष महोदय, इससे भी ज्‍यादा आश्‍चर्यजनक बात तो अब हुई कि जब वहां पर चर्चा हो गयी, जब वहां हलचल मच गयी तो आनन-फानन अब वहां काम करवाया जा रहा है। अब वहां पर रातों-रात काम चल रहा है जिसकी फोटोग्राफी मैं करवा कर लाया हूं। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं सदन के पटल पर रखना चाहूंगा।

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): इन नूरा पहलवान जी से पूछा जाये, संयम लोढ़ा जी से ।(व्‍यवधान)...

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): नहीं, मशीनें लगी हुई हैं, वहां पर काम चल रहा है। रात और दिन काम चल रहा है। अभी मैं चाहूंगा अध्‍यक्ष महोदय व्‍यवस्‍था दें । इसकी जांच होनी चाहिये। अकाल राहत का काम ठेके से कैसे करवा दिया ? मस्‍टरोल फर्जी तैयार किये गये और यह सरकार भी इस बात को स्‍वीकार कर रही है कि काम ठेके पर हुआ, आश्‍चर्यजन‍क स्थिति है। मैं यह सदन के पटल पर रखना चाहूंगा फोटोग्राफ, जिसमें वहां पर अभी सीमेंट की बोरियां पड़ी हैं, मशीनें लगी हुई है, मशीनों से काम हो रहा है । ताजी सड़क का निर्माण हो रहा है। आठ-दस मजदूर दिन-रात काम कर रहे हैं और इसकी जांच करवायेंगे तो सच्‍चाई सामने आ जाएगी। अध्‍यक्ष महोदय, जब मैंने वहां पर आंकड़ा लेना चाहा तो एक मद में एम एल ए फण्‍ड से 33 हजार रुपये स्‍वीकृत हुआ, एक मद में 7 हजार रुपये तो मैं सोचता हूं 7 हजार रुपये तो इस शिलालेख पर खर्च हुआ होगा, इससे ज्‍यादा तो कुछ लगता नहीं। अध्‍यक्ष महोदय, इससे भी ज्‍यादा स्थिति और उन दोनों की है कि जब लगभग 84,913 क्विंटल गेहूं का गबन हुआ था कांग्रेस सरकार में और जिसमें से हमारी सरकार ने लगभग 13,738 क्विंटल गेहूं वापस बरामद भी किया । यही नहीं लगभग 23 लाख 44 हजार 305 रुपये हमारी सरकार ने उस समय गबनकर्ताओं से वसूला। यही नहीं कइयों के लाइसेंस भी जब्‍त किये लेकिन, अध्‍यक्ष महोदय, अभी तो यह विषय मैं चाहूंगा, वह तो जांच हो रही है और जांच हो जाएगी लेकिन अब जो काम हो रहा है, वह किस मद में हो रहा है, कहां की स्‍वीकृति है ? बिना स्‍वीकृति के काम हो रहा है। मैं आपके माध्‍यम से हमारी सरकार से निवेदन करना चाहूंगा कि इसकी निश्चित रूप से जांच करवायें और यह मैं सदन के पटल पर फोटोग्राफ रखना चाहूंगा।

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): मैं माननीय सदस्‍य के जवाब में यह कहना चाह रहा हूं (व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: श्री गुलाबचन्‍द कटारिया। (व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अध्‍यक्ष महोदय, मेरी पर्ची खोली थी।(व्‍यवधान)...

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अध्‍यक्ष महोदय, इसमें व्‍यवस्‍था दिलायें। माननीय मंत्री बिराजमान हैं अध्‍यक्ष महोदय, (व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, मैं चाहूंगा इसमें आप कुछ निर्देश दिलाइये। इसमें जांच करवाने की व्‍यवस्‍था करें।

श्री अध्‍यक्ष: आपने बात खत्‍म कर दी। आपने अपनी बात कह दी। मंत्रीजी हैं नहीं किससे जांच करायें।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): सार्वजनिक निर्माण मंत्रीजी हैं यहां पर।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मंत्रीजी के पास इनकी भावना पहुंचा देंगे, बता देंगे।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अध्‍यक्ष महोदय, सुमेरपुर से आने वाले माननीय सदस्‍य ने मेरे क्षेत्र का मामला उठाया है, मैं सरकार से निवेदन करूंगा कि राजस्‍थान हाई कोर्ट के वर्तमान न्‍यायाधीश से इसकी जांच करवा लें। (व्‍यवधान)...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): न्‍यायाधीश से जांच तो नहीं करवा पायेंगे अगर आप कहोगे तो जांच करवा लेंगे।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप स्‍थान ग्रहण करें। (व्‍यवधान)..

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (श्रीगंगानगर): यह तो नूरा कुश्‍ती की जांच होनी चाहिये।(व्‍यवधान)..

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अध्‍यक्ष महोदय, पी.डब्‍ल्‍यू.डी. के एस.ई. से करवा दें। पी डब्‍ल्‍यू डी से करवा दें।(व्‍यवधान)..

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): हां, जांच करवा देंगे।श्री अध्‍यक्ष: श्री संयम लोढ़ा, आपने जो अपनी पर्ची के माध्‍यम से विषय उठाया है, एक सप्‍ताह में आप दो बार पर्ची के माध्‍यम से उठा चुके हैं।

msr/usc/31032006/1300/1n

 

और जब एक सप्‍ताह में दो बार आपकी पर्चियां आ गयी हैं तो मैं तीसरी बार आपकी पर्ची के माध्‍यम से आपको इस प्रश्‍न को उठाने की अनुमति देने में असमर्थ हूं। ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा निवदेन यह है कि एप्रोप्रिएशन बिल पर ...(व्‍यवधान)...

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): अध्‍यक्ष महोदय, एक मिनट बोलने की अनुमति दें।

श्री अध्‍यक्ष: आप सप्‍ताह में दो बार पर्ची के माध्‍यम से उठा चुके हैं।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): एप्रोप्रिएशनऔर फाइनेंस बिल पर भी मेरा नाम दिया था मुझे बोलने का मौका आसने ने नहीं दिया और अब यह एक्‍साइज पालिसी के माध्‍यम से ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: नियमों में है, क्‍या करूं, मेरी मजबूरी है। ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस सरकार के घोटालों के 15 ध्‍यानाकर्षण हमने दिये हुए हैं, नियम में तीन दिन में सरकार को जवाब देना चाहिए, 35-35 दिन हो गये सरकार जवाब नहीं देती, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, तो क्‍या करें?

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): तीन साल बाद तो आप अब काम कर रहे हैं। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, तीन साल बाद यह अब काम करवा रहे हैं। तीन साल बाद पहले जो काम स्‍वीकृत हो गया, अकाल राहत के तहत तीन साल पहले जो काम पूरा हुआ ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: आप बोलते बहुत अच्‍छा हैं लेकिन आसन की अवहेलना करते हैं आप, उससे मैं आपको आगाह करना चाहती हूं।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पाँच मिनट।

श्री अध्‍यक्ष: कि आपको भी कभी बेस्‍ट लेजिस्‍लेटर का मिल सकता है अवार्ड लेकिन आप आसन की अवहेलना कर के इसे खो लेते हैं। ...(व्‍यवधान)...

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): माननीय सदस्‍य, विषयान्‍तर करने की कोशिश नहीं करें।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पाँच मिनट का समय, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी प्रार्थना है आपसे पाँच मिनट। दो मिनट।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, अब आपको बोलने का नहीं कुछ भी। ...(व्‍यवधान)...

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक महत्‍वपूर्ण बिंदु है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पाँच मिनट का समय दें।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, अब नहीं। मैं नियमों के विपरीत अब कैसे जा सकती हूं। यह आसन तो नियमों से बंधा हुआ है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अब तीन पर्ची इनको लगानी ही नहीं चाहिए, आपने दो बार मौका दे दिया। ...(व्‍यवधान)... तीन पर्ची लगानी ही नहीं चाहिए।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): इतना बड़ा एक्‍साइज पॉलिसी में घोटाला किया आपने, घोटाला एक्‍साइज के अन्‍दर फिर मुझे बोलने देना नहीं चाहते आप। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: मैं क्षमा चाहती हूं, आसन नियमों से बंधा हुआ है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): नहीं, आप सोमवार को आगो। सोमवार को पधारो, सोमवार को आओ न। ...(व्‍यवधान)...

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौड़ (राज्‍य मंत्री, सिंचाई): नहीं, आपने उसका हिसाब-किताब क्‍यों नहीं दिया इनको।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक महत्‍वपूर्ण बात है।

श्री अध्‍यक्ष: अब आपको क्‍या तकलीफ हो गयी। क्‍या है?

माध्‍यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर द्वारा नवीं कक्षा हेतु

स्‍वीकृत हिन्‍दी पुस्‍तक में आपत्तिजनक टिप्‍पणियां

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यहां पर माननीय शिक्षा मंत्रीजी बिराजे हुए हैं, राजस्‍थान का शिक्षा विभाग किस प्रकार की शिक्षा दे रहा है? एक पुस्‍तक है कक्षा नौ के लिऐ जो माध्‍यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्‍थान, अजमेर द्वारा भारती भाग नम्‍बर एक गद्य पद्य संग्रह पढ़ायी जाती है। शिक्षा मंत्रीजी, इसमें एक लेख है पाठ सात पर कि अगर गधे के सिर पर सींग होते, गोपाल प्रसादजी व्‍यास इसके राइटर हैं और इसमें जो आगे लिखा हुआ है, जो बच्‍चों को शिक्षा दी जा रही है वो मैं आपके सामने पढ़ कर के सुनाता हूं और उसमें यह लिखा है कि हमारे यहां पशुओं में गाय को बढ़ा मान दिया गया है, हम हिन्‍दू उसकी मां की तरह पूजा करते हैं पर यह कैसी माता है जो बिना चारे-पानी के दूध नहीं देती? गाय मरने पर वैतरणी पार कराती होगी, हमारे सहज सिद्ध गर्धवराज तो अपने आश्रयदाता को लाडी सहित इस जीवन में वैतरणी पार कराते रहते हैं।

अब महत्‍वपूर्ण इसके बाद दूसरा, 'भारतीय नेताओं की तरह गधे की खाल बहुत मोटी होती है। कोई कुछ कह दे, कोई कुछ लगा दे मगर यह एकदम निश्‍चल और निर्विकार, नेता तो मौके-बेमौके रैंक कर ...

एक माननीय सदस्‍य- रैंक कर।

श्री अध्‍यक्ष: हां, रैंक कर।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): रैंक कर मुसिबत खड़ी कर देता है लेकिन हमारे गधे देवता तो ऐसी खरात आदत नहीं, वो कभी भी बेमौके भाषण नहीं देते। नेता तो जिम्‍मेदारी की कुर्सी पाकर , यानि उनके शब्‍दों में...

श्री अध्‍यक्ष: आप बेमौके भाषण क्‍यों दे रहे हो, आप बेमौके क्‍यों दे रहे हो भाषण?

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): यह प्रमाणित कर रहे हैं। ...(व्‍यवधान)... उन्‍होंने लिखा है वो प्रमाणित कर रहे हैं।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): मैं प्रमाणित नहीं कर रहा हूं, भारतीय राष्‍ट्रीय नेता, चाहे उसमें अटल बिहारी वाजपेयी हों, चाहे उसमें पंडित जवाहर लाल नेहरू हों, चाहे इन्दिरा गांधी हों, चाहे राजीव गांधी हों और चाहे वी.पी.सिंह हों और चाहे आडवाणीजी हों, उन नेता, भारतीय नेताओं का गधे से तुलनात्‍मक अध्‍ययन करने के बाद अगर मुख्‍य सचेतक इस बात की पैरवी करें और राजस्‍थान के बालकों को इस प्रकार की शिक्षा दी जाती रहे और इसकी पैरवी करें तो इससे ज्‍यादा शर्मनाक बात नहीं हो सकती। ...(व्‍यवधान)... मैं निवेदन करना चाहता हूं ...

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): मैं पैरवी तो नहीं करता पर मैं यह जरूर कहता हूं कि नेताओं की कवि सम्‍मेलन में, जगह-जगह टिप्णियां की जाती हैं, उस पर विचार करना चाहिए।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आप सुनिये तो सही।

श्री अमराराम (धोद): यह तो पुस्‍तक है, यह पाठ्य पुस्‍तक है, कवि सम्‍मेलन नहीं है। पाठ्य पुस्‍तक का मतलब करोड़ों विद्यार्थियों को आप पढ़ा रहे हैं। कवि सम्‍मेलन तो एक क्षण के लिए किसी शहर में होता है। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, यह तो आपको सपोर्ट कर रहे हैं। आपको सपोर्ट किया है ...(व्‍यवधान)... अब आप प्‍लीज स्‍थान ग्रहण करिये।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसके साथ एक पैरा और है जो नेताओं की जिम्‍मेदारी की कुर्सी पाकर, यानि उनके शब्‍दों में सेवा का फल मिलते ही आंखें भी फेर लेता है और हाथ नहीं रखने देता।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अब आप कृपा करो, आप और हमारी जमात एक ही है। कृपा करो। ...(व्‍यवधान)... नहीं, आपकी और हमारी जमात एक है, हम सभी के लिए कहा है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आप इसको सुनो। मगा गधों पर जैसे-जैसे उत्‍तरदायित्‍व आता है, आप सुनो इसको, जैसे-जैसे उत्‍तरदायित्‍व आता है, यानि बोझ पड़ता है वैसे ही विनय, सेवाभावी होता जाता है।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): कवि बहुत ज्‍यादा कहते हैं। ...(व्‍यवधान)... आपको और हमारे को सोचने की जरूरत है। यह अख़बार भी लिखते हैं। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अख़बार भी लिखते हैं, साहित्‍यकार भी लिखते हैं, कवि भी बोलते हैं ...(व्‍यवधान)... अभी तो लिखते ही हैं, लोग गधे की तरह घसीटते थे हम को। यह भी सोचना चाहिए।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): तो नेता तो केवल चुनाव के वक्‍त काबू में आता है और गधे को जब चाहो टाँग पकड़ कर खींच लीजिए, वह अत्‍यन्‍त सेवाभावी है। ...(व्‍यवधान)... माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यही नहीं, परसों के रोज कक्षा नौ के पाठ्यक्रम में जो उनका एग्‍जामिनेशन था, उसके पेपर सैटर  ने उन बच्‍चों से प्रश्‍न संख्‍या 29 के माध्‍यम से यह सारा उद्धरण, निम्‍नलिखित गद्यांश की स:प्रसंग व्‍याख्‍या कीजिए:- 'भारतीय नेताओं की तरह गधे की खाल बहुत मोटी होती है', जो मैंने पढ़ा वो बच्‍चों को है, माननीय शिक्षा मंत्रीजी ..

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आन ए पाइंट ऑफ आर्डर।

श्री अध्‍यक्ष: हां, पाइंट ऑफ आर्डर। ...(व्‍यवधान)...

श्री अमराराम (धोद): बच्‍चे पढ़ रहे हैं। ...(व्‍यवधान)... कवि सम्‍मेलन नहीं, करोड़ों बच्‍चे पढ़ रहे हैं नवीं के। ...(व्‍यवधान)...

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): कवि इससे भी ज्‍यादा कहते हैं। ...(व्‍यवधान)... हमारे को सोचने की जरूरत है।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। (समय समाप्ति सूचक घण्‍टी)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): शिक्षा मंत्रीजी यहां बैठे हैं, अगर आप भारतीय नेताओं की, जिन्‍होंने आजादी दिलाये, इस देश को मार्गदर्शन दिया।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। (समय समाप्ति सूचक घण्‍टी) माननीय सदस्‍य।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): इस देश को रास्‍ता दिखाया, इस देश को मंजिल पर पहुंचाया, उनकी तुलना गधे से करने की बात बच्‍चों को पढ़ाना चाहते हैं तो मैं दावे के साथ कहता हूं कि आप राजस्‍थान के बच्‍चों को गलत शिक्षा दे रहे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: हिण्‍डौली से आने वाले माननीय सदस्‍य, आपने बात कह दी अपनी।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): दुर्भावनापूर्वक उनको गलत रास्‍ते पर ले जाना चाहते हैं और उन नेताओं की तुलना करने के बाद अगर माननीय शिक्षा मंत्रीजी चुप बैठे रहें तो हमारे लिए इससे शर्म की बात अभी कुछ नहीं हो सकती।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): मेरा पाइंट ऑफ आर्डर यह है, माननीय अध्‍यक्ष महोदय।

श्री अध्‍यक्ष: पाइंट ऑफ आर्डर। सरकारी मुख्‍य सचेतक ने पाइंट ऑफ आर्डर उठाया है। नो नौ, बैठिये आप।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,, जीरो आवर में अलाऊ करेंगी न पाइंट ऑफ आर्डर।

श्री अध्‍यक्ष: जीरो आवर खतम हो गया।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): जीरो आवर में आप पाइंट ऑफ आर्डर अलाऊ करेंगी?

श्री अध्‍यक्ष: जीरो आवर खतम हो गया।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): बस ठीक है।

श्री अध्‍यक्ष: जब उन्‍होंने पाइंट ऑफ आर्डर उठाया तब ही खतम हो गया था नहीं क्‍यों उठाने देती मैं उन्‍हें।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): मेरा पाइंट ऑफ आर्डर यह है कि यह जो जिसने भी लिखा है उसको तो शिक्षा मंत्रीजी देखेंगे, लिखा जाए कि नहीं लिखा जाए पर जो इन्‍होंने बोल दिया, यहां वो तो पूरी प्रोसिडिंग पूरी की पूरी यों की यों आयेगी कि भारतीय, हमारे नेता कैसे हैं। ...(व्‍यवधान)...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): मैंने तो वो बोला है जो बच्‍चों ने पढ़ा है यहां और जो आपके किताब में है। ...(व्‍यवधान)... यह गलत नहीं है।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): बिलकुल गलत लिखा है ...(व्‍यवधान)... आप इसको देखो। जो लिखा है, बच्‍चों को पढ़ाया है, बहुत गलत है। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: बच्‍चों को पढ़ायी जा रही है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): बच्‍चों को पढ़ाया जा रही है, यह किताब है। यह बच्‍चों को पढ़ायी जा रही है। ...(व्‍यवधान)... प्रश्‍न पत्र है।

एक माननीय सदस्‍य: इसकी जांच कराओ, उसके खिलाफ कार्यवाही कीजिए।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): खेद व्‍यक्‍त करिये ...(व्‍यवधान)... आप तो खेद व्‍यक्‍त कीजिए।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): ऐसे पाठ को हटाया जाए, इस पाठ का समर्थन हम कोई नहीं करते हैं। ऐसे पाठ को हटाया जाए। ...(व्‍यवधान)...

श्री अमराराम (धोद): इस बोर्ड ने, शिक्षा के पाठ्यक्रम को, ऐसा पाठ पढ़ाने के लिए जिसने भी इसको एप्रूव किया है उनके खिलाफ कार्यवाही की जाए। बच्‍चों को ऐसा नहीं सिखया जाए।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): और उस लेखक के खिलाफ, माननीय मंत्रीजी, आप कार्यवाही करें। उस लेखक के खिलाफ कार्यवाही की जाए जिसने इस प्रकार की भाषा लिखी है और यह पाठ्यक्रम जिसने सलैक्‍ट किया है उसके खिलाफ भी कार्यवाही की जाए।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): यही नहीं है, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसी पाठ में, यह आदमी सातवीं कक्षा तक पढ़ा है, उसके पास सर्टिफिकेट नहीं है, नौवीं की किताब है, आगे लिखता है कि भारत की पतिव्रता स्‍त्रियों के बारे में जिस तरह का कमेंट किया है, यह खतम हो गयी हैं। गऊ के लिए कहा है, जिसको भारतवासी मां मानते हैं, आप और हम सब मानते हैं कि अमृत देती है इसके लिए इसी पाठ में लिखा हुआ है और इस तरह की बात सातवीं पास ने, किसने यह जारी की...

श्री अध्‍यक्ष: अब उठा दिया उन्‍होंने, अब आप क्‍या कहना चाहते हो?

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): किसने यह जारी की, किसने रिकमण्‍ड किया, आप कृपा कर के मुकदमा दर्ज कराकर के, माननीय शिक्षा मंत्रीजी ...

श्री सुरेन्‍द्र गोयल (जैतारण): इन्‍होंने जो कहा, बिलकुल सही बात है, अगर वाकय में सत्‍यता है तो इसकी जांच कराओ, उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही करो। 

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): यह लिखा हुआ है।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): शिक्षा मंत्रीजी, आप जवाब दीजिए। गृह मंत्रीजी, आप बोलिये। ...(व्‍यवधान)...

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): गऊ माता का अपमान, नेताओं का अपमान इसलिए, माननीय मंत्रीजी आप मुकदमा दर्ज कराते हो गलत किताब के मामले में।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): वो बोल रहे हैं न, बोलने दो। ...(व्‍यवधान)...

एक माननीय सदस्‍य: मंत्रीजी, बताइये।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): गऊ के लिए कहा है, पतिव्रता स्त्रियों के लिए भर्त्‍सना की है, आप कृपा कर के मुकदमा दर्ज करायेंगे इसका, उसको सज़ा देंगे।

श्री अध्‍यक्ष: वो कह रहे हैं, वो खड़े होकर कुछ कहना चाहते हैं, आप मौका ही नहीं दे रहे हो। (समय समाप्ति सूचक घण्‍टी)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): किसने जारी की है, उसके बारे में किसने रिकमण्‍ड किया है ...(व्‍यवधान)...

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस पर प्रिविलेज मोशन लाया जाना चाहिए, इसके खिलाफ कार्यवाही की जानी चाहिए, उसको खड़ा किया जाना चाहिए बुलाकर। ...(व्‍यवधान)...

श्री जुबेर खान (रामगढ़): सही सजेशन। कार्यवाही होनी चाहिए।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): आप कार्यवाही करिये, इस तरह की भर्त्‍सना करना, क्‍या भारत को भविष्‍य बना रहे हैं यह।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): मंत्रीजी, खड़े होइये और कुछ बोलिये।

एक माननीय सदस्‍य: तुरन्‍त इस पाठ को हटाया जाए। ...(व्‍यवधान)...

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): पेज नम्‍बर 79 है ...

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो। अंकित नहीं हो।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): ***

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): ***

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): ***

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पाठ्य पुस्‍तकों का चयन का एक तरीका बना हुआ है। चार आदमियों की कमेटी बनती है ..... (व्‍यवधान) ......  No, no, I am not …… मैं प्रक्रिया बता रहा हूं कि मंत्री के पास सारा, जानकारी मुझे नहीं रहती इसलिए कह रहा हूं। समिति बनती है फिर बोर्ड ऑफ सेकण्‍डरी एजुकेशन और पाठ्य पुस्‍तक मण्‍डल अपने आप में विषयों का और पाठ्यक्रम का चयन करते हैं।

 

Ars/usc/1o/1310/31032006/1

 

हमने अब एक कमेटी राज्‍य स्‍तर पर भी बना दी है कि उनकी चयन की भी पुस्‍तक आने के बाद में उस पर एक एक बारीकी से देख लेते हैं ताकि किसी को मानहानि का और किसी सम्‍प्रदाय के खिलाफ या किसी महापुरुष के खिलाफ कोई बात नहीं आए। इसका तय करने के लिए माननीय सदस्‍य अभी मेरे ध्‍यान में लाए हैं। मुझे अभी यह पता नहीं है कि यह कौनसी पुस्‍तक है । आपने नाम बताया है मैं उस पुस्‍तक को मंगवा लेता हूं । दो प्रकार की पुस्‍तकें हैं एक तो जिस दिन कल्‍ला साहब बता रहे थे वह आती है ना पासबुक सीरीज वाली वह है तो उन पर तो हमारा कोई नियंत्रण नहीं है ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप सुनिए तो सही ।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): आप सुनो तो सही। अगर यह बोर्ड आफ सैकण्‍डरी एजुकेशन द्वारा पाठ्य पुस्‍तक मण्‍डल में प्रस्‍तावित है और पढ़ाई जा रही है फिर आपने जिस लेखक का नाम लिया है गोपाल प्रसाद जी व्‍यास एक बहुत बड़े लेखक व्‍यंग्‍यकार भी है उनकी है या दूसरे गोपाल प्रसाद जी व्‍यास है ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): व्‍यंग्‍यकार ही हैं व्‍यंग में ही लिखी गई है ।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): व्‍यंग्‍यकार बहुत बड़े हैं आप भी जानते होंगे। यत्र तत्र सर्वत्र हिन्‍दुस्‍तान में बहुत वर्षो तक उनका चलता रहा है। पद्म विभूषण और पद्म श्री भी उनको मिला है तो वह गोपाल प्रसाद जी हैं या एक दूसरे गोपाल प्रसाद जी हैं जिन्‍होंने आपके बारे में ऐसी बात लिखी है ।

श्री अमराराम (धोद): आप बच गए क्‍या ?

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): आप बैठो तो सही । तो मैं इसको देखूंगा और कल तो है नहीं विधान सभा दो या तीन तारीख को तब इसके बारे में सारी बात आपको स्‍पष्‍ट करूंगा और इसलिए इसमें कोई चिन्‍ता करने की जरूरत नहीं है आपके सम्‍मान की पूरी रक्षा करेंगे ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): तुलना गलत कैसे की है ?

श्री अध्‍यक्ष: श्री गुलाबचन्‍द कटारिया।

विधायी कार्य विधेयक का पुर:स्‍थापन

राजस्‍थान धर्म स्‍वतंत्र्य विधेयक, 2006

 

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं राजस्‍थान धर्म स्‍वातंत्र्य विधेयक,2006 को पुर:स्‍थापित करने की आज्ञा के लिए प्रस्‍ताव करता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: प्रश्‍न यह है कि राजस्‍थान धर्म स्‍वातंत्र्य विधेयक,2006 को पुर:स्‍थापित करने की आज्ञा प्रदान की जाए ?

जो पक्ष में हों हां कहें ।

अनेक माननीय सदस्‍य: हां।

अनेक माननीय सदस्‍य: नौ।

श्री अध्‍यक्ष: Do you want division ?

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): yes.

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): अपने यहां नियम नहीं है पुर:स्‍थापित पर डिवीजन नहीं होता है ।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): इसमें क्‍या त‍कलीफ है ? ...(व्‍यवधान)

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): पुर:स्‍थापित पर अपने यहां परम्‍परा नहीं है विचारार्थ पर कर लेंगे ।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): पुर:स्‍थापित पर नहीं होता ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: बाद में कर लेना ।

(स्‍वीकृत)

पुर:स्‍थापित करने की आज्ञा प्रदान की गयी। प्रभारी मंत्री ।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैं राजस्‍थान धर्म स्‍वातंत्र्य विधेयक, 2006 को पुर:स्‍थापित करता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: श्री घनश्‍याम तिवाड़ी ।

राजस्‍थान सार्वजनिक पुस्‍तकालय विधेयक, 2006

 

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री):  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं राजस्‍थान सार्वजनिक पुस्‍तकालय विधेयक, 2006 को पुर:स्‍थापित करने की आज्ञा के लिए प्रस्‍ताव करता हूं ।

श्री अध्‍यक्ष: प्रश्‍न यह है कि राजस्‍थान सार्वजनिक पुस्‍तकालय विधेयक, 2006 को पुर:स्‍थापित करने की आज्ञा प्रदान की जाए ?

(स्‍वीकृत)

विधेयक को पुर:स्‍थापित करने की आज्ञा प्रदान की गयी । प्रभारी मंत्री जी ।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैं राजस्‍थान सार्वजनिक पुस्‍तकालय विधेयक, 2006 को पुर:स्‍थापित करता हूं ।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा):  अध्‍यक्ष महोदय, पाइण्‍ट आफ आर्डर उठाया था, आपने रूलिंग रिजर्व कर दी थी । आप आज देंगे या कल, जैसा आप उचित समझें ।

श्री अध्‍यक्ष: मैं इस पर तीन तारीख को दूंगी ।

सूचना

सीकर से आने वाली माननीय सदस्‍या के पति के अपहरण का प्रयास

श्री अमराराम (धोद): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक ऐसा विषय है जो हमारे सीकर से माननीय विधायक राजकुमारी शर्मा आती हैं उनके पति को इसलिए अपहरण करने की कोशिश की गई क्‍योंकि इस सदन में कोई भी माननीय सदस्‍य वह जनता की दुःख और तकलीफ की आवाज को यहां उठाएं और उसको मानसिक रूप से प्रताडित करके इस बात के लिए भयभीत किया जाए कि वह ऐसे अपराधी लोगों के खिलाफ इस सदन में आवाज नहीं उठाएं। वह परसों गृह मंत्री जी के सामने सीकर के एक कपड़े के व्‍यपारी कान्‍हाराम जिसका 21 तारीख को अपहरण हुआ और आज तक उन अपहरणकर्ताओं का पुलिस पता नहीं लगा पाई है और न उन अपराधियों को पकड़ पाई है 21 से 31 तारीख हो गई और उन्‍होंने यहां रखा है। वेलेन्‍टाइन डे के दिन कुछ असामाजिक तत्‍वों ने सीकर की किसी दुकान में तोड़ फोड़ की, उन्‍होंने उनके खिलाफ किया उनका सहारा लेकर के वह अपराधी जो कान्‍हाराम एक व्‍यापारी का 21 तारीख को अपहरण किया उनका एक दिन का अपहरण नहीं है। सीकर जिले में अनेक अपहरण करके, हत्‍या करके उनको जला कर उसकी राख को बिखेरने गये। मंगलूना के एक वृद्ध जोधाराम का मर्डर किया और जीण माता में लाकर उसको जलाया, उसकी राख को बिखेर दिया, उसके सबूत मिटा दिए। भानूडा में एक रामेश्‍वर की हत्‍या की, दातारामगढ़ में हत्‍या की, मौलासर में नागौर में ले जाकर जला कर उसकी राख को ...

श्री अध्‍यक्ष: आप अपहरण की करते करते आगे बढ़ रहे हो, जलाने तक पहुंच गये।

श्री अमराराम (धोद): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसीलिए कि सदन के माननीय सदस्‍यों का..

श्री अध्‍यक्ष: अपहरण का है ।

श्री अमराराम (धोद): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम 200 माननीय सदस्‍य जनता की आवाज निर्भीकता से इस सदन में उठा पाएं और वह अपराधी उन माननीय सदस्‍यों के परिवारजनों को अपहरण करने की कोशिश करें और वह भी एक जुलूस में से जिला हैडक्‍वार्टर पर उनके परिवार जनों को अपहरण करने की कोशिश करें। वह तो गनीमत है कि लोगों ने उनको छुड़वा लिया, अपहरण नहीं करने दिया वरना अगर वह अपहरण करने में सफल हो जाते तो वही घटना जो जोधाराम और रामेश्‍वर की और दूसरे साथियों के साथ हुई है वही घटना मैं समझता हूं रामअवतार जी शर्मा के साथ होती । यह केवल साधारण घटना नहीं है। एक माननीय सदस्‍य के पति के अपहरण की घटना है इसलिए क्‍योंकि सीकर में जिस तरह की घटनाएं हो रही हैं, रोज रोज जो घटनाएं हो रही हैं, नाबालिग लड़कियों के साथ बलात्‍कार हो, अपराधी पकड़े नहीं जाएं, उनके खिलाफ कोई आवाज उठाए उनको इस तरह से मानसिक रूप से प्रताडि़त किया जाए, मैं समझता हूं यह सदन के माननीय सदस्‍यों का सबसे बड़ा अपमान है ।

श्री अध्‍यक्ष: पाइंट आफ इन्‍फार्मेशन दे दिया।

श्री अमराराम (धोद): वह निर्भिकता से अपना दायित्‍व इस सदन में नहीं उठा पाएं क्‍योंकि ..

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है विधायक का मामला है गृह मंत्री जी ध्‍यान देंगे इस पर ।

श्री अमराराम (धोद): क्‍योंकि नौ महीने से जो अपराधी हैं जो अपराध में ...

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): आप पूरी कहानी क्‍यों कह रहे हैं?

श्री अमराराम (धोद): कहानी नहीं, मैं गृह मंत्री जी को एक ही निवेदन करना चाहता हूं कि कान्‍हाराम के अपहरण में जो अपराधी इन्‍होंने चिह्नित किए हैं उनका एक नहीं चार अपहरण हैं ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप क्‍यों बीच में बोलते हैं ?

श्री अमराराम (धोद): नौ महीने पहले एक मर्डर हुआ विजयपाल का राणोली के थाने पर हुआ, नौ महीने में नहीं पकड़ा गया ।

श्री अध्‍यक्ष: हो गई बात आपकी, आपने बात उठा दी, जवाब तो देने दीजिए मंत्री जी को ।

श्री अमराराम (धोद): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, तीन उनके मर्डर हैं अपहरण के केस हैं आज तक उन पर कार्यवाही नहीं हुई और यह भी अपहरण की कार्यवाही उनके माध्‍यम से ही है । यह अपराधी गिरोह जो भू माफिया के इशारे पर कृत्‍य करते हैं इनके खिलाफ अगर कार्यवाही नहीं करेंगे तो सीकर की आम जनता तो खौफनाक है और अपराधी खुले घूम रहे हैं क्‍योंकि 302 के मुकदमें होने के बाद ग्‍यारह दिन पहले आकर के धमकी दी है .. 

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): महावीर सरपंच को ...

श्री अध्‍यक्ष: माननीय मंत्री जी खड़े हैं ...(व्‍यवधान) नौ, नौ,अंकित नहीं होगा।

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): ***

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): ***

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): ***

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): ***

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): ***

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): ***

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, धोद से आने वाले माननीय सदस्‍य ने जो घटना उठाई कि माननीय सदस्‍या के पति का अपहरण और उनके कपड़े फाड़ने की घटना हुई निश्चित रूप से हुई उसके खिलाफ 74/6 मुकदमा दर्ज हुआ, 143, 382, 323,427,151 और इसमें मुलजिम जो हैं दो मुलजिमों को गिरफ्तार कर लिया, मुलजिम जगदीश पुत्र गंगाराम नायक 19 वर्ष, महेन्‍द्र पुत्र मांगीलाल नायक उम्र 18 वर्ष इन दो को गिरफ्तार कर लिया गया है । मैं सोचता हूं कि घटना हुई इसको मैं ना नहीं कह रहा हूं पर घटना के होने के बाद जो कार्यवाही पुलिस को करनी चाहिए वह पुलिस ने कार्यवाही की है। आपने जो आज सारी घटनाएं सुनाईं और आप मुझे पहले किसी नोटिस के द्वारा देते तो मैं इसमें से प्रत्‍येक का जवाब देने की स्थिति में हूं लेकिन चूंकि आपने एट रेण्‍डम उठाया यह विषय तो चूंकि आज अख़बार में आया था आपने एकदम खड़ा किया लेकिन फिर भी मैंने इसकी जानकारी पहले से ही कर ली थी यह विषय आ सकता है तो जिन्‍होंने अपराध किया है उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया, उनको गिरफ्तार किया ....

 

Vns/usc/1320/1p/31.3.2006

 

मैं सोचता हूं इससे अधिक और कोई कार्यवाही हो नहीं सकती और बिना आपकी पूर्व सूचना के भी मैं सामने लेकर सदन में उपस्थित हुआ हूं। बाकी जो घटनाएं हैं आपकी, उन कई घटनाओं में मैंने कार्यवाही की है। आपकी शायद हो सकता है अपेक्षा के अनुसार नहीं हुई। पर मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं आज भी मैं इस बात पर वचनबद्ध हूं कि कोई भी अपराधी नहीं बचेगा। यह मैं आपके माध्‍यम से विश्‍वास दिलाता हूं। कभी-कभी किन्‍हीं कारणों से जांच में देरी होने का प्रकरण जरूर चल पड़ता है लेकिन अपराधी नहीं बचेगा, यह मैं आपको पूरा यकीन दिलवाता हूं। इसके अलावा मैं और कुछ नहीं कह सकता।

श्री अमराराम (धोद): गृह मंत्रीजी, मैं यह नहीं कह रहा कि इसमें आपने नहीं पकड़ा। जिस तरह के दिन दहाड़े सीकर में अपहरण हो रहे हैं बेबाराम काण्‍ड, कानाराम काण्‍ड ... (व्‍यवधान) 

श्री अध्‍यक्ष: सवाल जवाब होने लगे।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): मैं आपके सीकर जिले की स्थिति समझ रहा हूं और मैं आपको सदन में विश्‍वास दिला रहा हूं।

श्री अध्‍यक्ष: पाइंट आफ इनफोर्मेशन के नाम पर यह प्रश्‍न उठाया, मंत्रीजी ने जवाब दे दिया, अब आप क्‍या प्रश्‍न जवाब कर रहे हैं ?

श्री अमराराम (धोद): नहीं, प्रश्‍न नहीं कर रहा हूं मैं ... (व्‍यवधान) 

श्री अध्‍यक्ष: तो फिर पाइंट आफ इनफोर्मेशन से यह होगा ? मुझे बताइये पाइंट आफ इनफोर्मेशन से व्‍यवस्‍था होती है क्‍या ?

श्री अमराराम (धोद): मैं उनके ध्‍यान में लाना चाहता हूं कि जिस तरह के अपहरण रोज हो रहे हैं, अपहरण करके मर्डर, एक घटना नहीं है और माननीय सदस्‍य ने आपके पास रखा..

श्री अध्‍यक्ष: अब अंकित नहीं हो।

श्री अमराराम (धोद):***

श्री अध्‍यक्ष: आपको मौका मिला था पुलिस की डिमांड के रोज। पुलिस की मांग के रोज आपको मौका मिला था। उस दिन तो सारी की सारी बात आपने कहीं नहीं और आज आप उठा रहे हैं पाइंट आफ इनफोर्मेशन के आधार पर।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैं उसके बाद भी सीकर से आने वाले माननीय सदस्‍य, निश्चित रूप से सीकर जिले में ऐसे कुछ अपराध हैं जो हम अभी भी आइडेंटिफाई नहीं कर पाये हैं। मैं आपके माध्‍यम से सदन को यह आश्‍वस्‍त कर रहा हूं सारे प्रकरण, जो भी सीकर में पिछले एक साल में दर्ज हुए हैं, जो अनट्रेस्‍ड है उन सबको इकट्ठा करके उसकी मानीटरिंग करूंगा और उसमें जिसका भी दोष होगा, बड़े से बड़ा अधिकारी भी अगर दोषी होगा तो निश्चित रूप से उसे दंड मिलेगा। इसमें कोई छूट नहीं होगी।

श्री राव राजेन्‍द्र सिंह (बैराठ): आदरणीय अध्‍यक्ष महोदय ... (व्‍यवधान) 

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): अध्‍यक्ष महोदय, मैं तो बोलना नहीं चाहता। मैं तो आपके माध्‍यम से गृह मंत्रीजी से यह निवेदन करना चाहता हूं कि इतने गंभीर मुद्दे और एक विधायक के पति का अपहरण करने की कोशिश करके, अन्‍य प्रान्‍तों में विधायकों को जो गनमैन दिये हुए हैं, गनमैन उपलब्‍ध कराओ ना आप एम.एल.ए. को।

श्री अध्‍यक्ष: गनमैन तो विधायक के साथ रहेगा, पति के साथ थोड़े ही रहेगा।

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): वह पति की भी डर से कर देगा। पति की भी सुरक्षा कर देगा वह ... (व्‍यवधान) 

श्री अध्‍यक्ष: साथ होना अलग बात है। साथ होना अलग बात है।

श्री अमराराम (धोद): अध्‍यक्ष महोदय, विधायक महोदया भी उसी जुलूस में थीं और उनके पति भी उसी जुलूस में थे।

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): अध्‍यक्ष महोदय, एम.एल.ए. को गनमैन उपलब्‍ध कराओ ना। सुरक्षा की दृष्टि से अगर गनमैन दिया जाए तो उसका क्‍या दुरुपयोग होता है ?

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): अध्‍यक्ष महोदय, पाइंट आफ इनफोर्मेशन।

श्री अध्‍यक्ष: नौ, अब कोई पाइंट आफ इनफोर्मेशन नहीं।

श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली): अध्‍यक्ष महोदय, मेरी सूचना मैंने पहले कई बार आपको निवेदन किया है ... (व्‍यवधान) 

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): बहुत ही महत्‍वपूर्ण सूचना है। मेरे पास में सबूत ... (व्‍यवधान) 

श्री अध्‍यक्ष: कोई पाइंट आफ इनफोर्मेशन नहीं। अब नहीं। कोई बात नहीं, अब कुछ नहीं ... (व्‍यवधान) 

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): मैं टेबल करना चाहता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, अब सूचना नहीं। मैं आपको, कोई सूचना नहीं। ... (व्‍यवधान) 

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): अध्‍यक्ष महोदय, यह पाली के पोल्‍यूशन का मामला है ... (व्‍यवधान) 

श्री अध्‍यक्ष: प्रक्रिया के ... (व्‍यवधान) अब कुछ नहीं। संकल्‍पों पर विचार होगा।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): वह टेबल पर रखना चाहते हैं, उसको आप टेबल पर रखें। सबको बोलने का मौका देते हैं ना। पाली जिले के प्रदूषण का मामला है। हजारों काश्‍तकार बर्बाद हो रहे हैं ... (व्‍यवधान) 

श्री अध्‍यक्ष: गैर सरकारी दिवस है और गैर सरकारी दिवस में गैर सरकारी संकल्‍प आये हैं उन संकल्‍पों पर मैं चर्चा कराना चाहती हूं इसलिये मैं एक..

श्री राव राजेन्‍द्र सिंह (बैराठ): अध्‍यक्ष महोदय, एक मिनट ... (व्‍यवधान) 

श्री अध्‍यक्ष: एक सेकिंड। पिछले सवा दो साल से पहला गैर सरकारी दिवस आज है। उस पर कई संकल्‍प आये हुए हैं। मैं चाहूंगी उन संकल्‍पों पर अब चर्चा प्रारम्‍भ की जाए। संकल्‍प पाँच आये हैं ... (व्‍यवधान) 

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): अध्‍यक्ष महोदय, दो मिनट का ही मामला है ..(व्‍यवधान) माननीय सदस्‍य, दो मिनट में ही बोल रहे हैं1 प्रदूषण का मसला है। पाली के हजारों काश्‍तकार बर्बाद हो रहे हैं, जहरीला पानी पी रहे हैं..

श्री अध्‍यक्ष: रायपुर से आने वाले माननीय सदस्‍य, आपको मैंने..(व्‍यवधान) पिछली बार..(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): और आप उनकी बात दो मिनट में सुन लें..(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैं एक निवेदन कर रहा था। एक मिनट बिराजो। मैं निवेदन कर रहा था। दो गैर सरकारी संकल्‍प पहले के हैं जिन पर विचार अभी अधूरा है और तीन अब नये इंट्रोड्यूस हुए हैं। जो तीन अब नये अभी आये हैं इनको तो आप इंट्रोड्यूज करा दें और दो जो पहले के पैंडिंग हैं उन पर आप चर्चा करवा लें और दोनों को मिलाकर चर्चा करवा लें। पुराने जो आपके पास हैं, दोनों को मिलाकर चर्चा करा लें, तीन को इंट्रोड्यूज करा लें।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): अध्‍यक्ष महोदय, हमार विनम्र निवेदन है कि आप पाली ... (व्‍यवधान) 

श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, परम्‍परा नहीं है जो अधूरे रहे गये उन पर दुबारा चर्चा करायी जाए। आज जो संकल्‍प निकले है इन पर ही चर्चा होनी चाहिये। यह कभी पहले नहीं हुआ। ... (व्‍यवधान) 

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ई टीवी द्वारा जो सीडी बनायी गयी है जिसके अन्‍दर हजारों काश्‍तकार ... (व्‍यवधान)  

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): ई टीवी ने बहुत ही मेहनत करके यह बहुत महत्‍वपूर्ण सीडी बनायी है और इसको हम आपको टेबल करना चाहते हैं। सूचना बहुत ही महत्‍वपूर्ण है। अध्‍यक्ष महोदय, कल ई टीवी की न्‍यूज में था एक वेबसाइट के बारे में भी , वह भी मैं आपको जानकारी देना चाहता हूं अगर आप अनुमति दें तो और एक सूचना मैं देना चाहता हूं राजस्‍थान सरकार के सचेतक बदल गये हैं। उसकी मैं जानकारी देना चाहता हूं कि श्री लालकृष्‍ण आड़वाणी राजस्‍थान सरकार के नये मुख्य सचेतक हैं। मेरे पास में, मेरे हाथ में पत्र है और यह श्री महावीर प्रसाद जी जैन का लिखा हुआ है कि माननीय श्री लालकृष्‍ण आड़वाणी राजस्‍थान के मुख्‍य सचेतक की यात्रा ... (व्‍यवधान) 

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): क्‍या लिखा हुआ है ?

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): आपके हाथ का लिखा हुआ पत्र है ... (व्‍यवधान) 

श्री अध्‍यक्ष: यह संकल्‍प जो है यह पिछले सदन में था ... (व्‍यवधान) 

श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली): अध्‍यक्ष महोदय, मेरी एक सूचना है, मैं बहुत देर से आपसे निवेदन कर रहा हूं ... (व्‍यवधान) 

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): यह क्‍या है ... (व्‍यवधान) 

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): आपका पत्र लिखा हुआ है श्री लालकृष्‍ण आड़वाणी मुख्‍य सचेतक ... (व्‍यवधान) 

श्री अध्‍यक्ष: मैंने नाम पुकारा है शाहपुरा से आने वाले माननीय सदस्‍य।

श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पाइंट आफ इनफोर्मेशन।

श्री अध्‍यक्ष: आप स्‍थान ग्रहण करें।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): खारची से आने वाले माननीय सदस्‍य यह कह रहे हैं कि लालकृष्‍ण आड़वाणी, मुख्‍य सचेतक, यह आपके हाथ का लिखा हुआ है। ऐसी असत्‍य सूचनाएं हैं ... (व्‍यवधान) 

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): मेरे पास में प्रतिलिपि है, मैं टेबल करता हूं। आप पढ़कर सुना दें अध्‍यक्ष महोदय।

श्री अध्‍यक्ष: आप मुझे दीजिये। यहां रखिये।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): पहले तो आप माननीय अध्‍यक्षजी को दीजिये।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अगर यह गलत निकला तो इनको प्रताडि़त करना अध्‍यक्ष महोदय। 

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): और सही निकली तो ? और सही निकली तो क्‍या होगा ?

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): प्रताडि़त कर देना और सही निकली तो आप क्‍या करोगे ? 

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): सही निकली तो क्‍या करोगे आप ? 

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): नहीं निकलेगी। हम ... (व्‍यवधान) करेंगे। हम अपनी बता को वापस ले लेंगे। हम अपनी बात वापस ले लेंगे। नहीं निकली तो हम अपनी बात को वापस ले लेंगे ... (व्‍यवधान) 

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): मैं यह कहूंगा जो कर लें ... (व्‍यवधान) 

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): बिलकुल मैं तैयार हूं। प्रताडि़त अगर किया जाता है गलत हो तो ... (व्‍यवधान) 

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): अगर गलत हो तो आप प्रताडि़त करना, नहीं तो मुख्‍य सचेतक जी को हटाना।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): इसको पढ़कर सुनाओ, अब सदन को बताओ क्‍या है ... (व्‍यवधान) 

श्री अध्‍यक्ष: इसमें इन्‍होंने कब कहा कि मैं मुख्‍य सचेतक हूं उनका ? कहां कहा है ?

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): अध्‍यक्ष महोदय, हमें पढ़कर सुनाएं। आप पढ़कर सुना दो। आप अध्‍यक्ष महोदय, पढ़कर सुनाओ ... (व्‍यवधान) 

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): आपने जो कहा था ... (व्‍यवधान) पहले कहा है कि मुख्‍य सचेतक लालकृष्‍ण आड़वाणी होंगे ... (व्‍यवधान) 

श्री अध्‍यक्ष: अब आपने जो कुछ कहा, आसन के लिये कोई आवश्‍यक नहीं है कि उसे पढ़कर सुनाएं। शाहपुरा से आने वाले माननीय सदस्‍य।

एक विशेष समुदाय के बारे में एक वैबसाइट पर जारी आपत्तिजनक सामग्री

श्री राव राजेन्‍द्र सिंह (बैराठ): I am on a point of information. एक वेबसाइट है राजपूताना. एचटीएमएल .कोम। इस वेबसाइट के माध्‍यम से एक विशेष वर्ग को राजस्‍थान को जिसमें राजपूत नाम से ऐसी कमेंट्रीज हैं under the topic of “Needs for Sovereign”, “Destruction of Rajasthani Language”, “any relation of Rajput families” जिसमें later the first Prime Minister of India Mr. Nehru and Brahamin families ko और कम्‍युनिटीज के बारे में इतनी रांग इनफोर्मेशन इतनी इरोनियस इनफोर्मेशन फ्लाट की जा रही हैं यह स्‍क्रोअल्‍स पिछले कुछ दिनों से यहां ई टीवी चैनल्‍स भी प्‍ले कर रहा है। इतनी आपत्तिजनक चीज है, लिटरेचर है कि मैं यह चाहता हूं कि कम से कम होम डिपार्टमेंट, आदरणीय गृह मंत्रीजी इस चीज को दिखाएं। इससे सारी की सारी जो वैमनस्‍यता फैलायी जा रही है सामाजिक समरसता के अन्‍दर। इस तरीके की जो इनफोर्मेशन आती है, यह लिटरेचर आता है, हमारे डिसप्‍यूटस पैदा करते हैं।  It is totally erroneous. It is a character as such initiated of a community at large. Somebody, I donn’t know with not proper antecedent is aware what he is doing. मैं आपके माध्‍यम से यह चाहता हूं इसके बारे में जो भी ... (व्‍यवधान) 

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): जैसे ही कल यह ध्‍यान में आया, हमने अपने विभाग को इसके बारे में जानकारी करके किसके द्वारा यह सारा षडयंत्र हुआ और ई टीवी पर यह कैसे आया, उसकी जांच हम कर रहे हैं। जांच के बाद जहां से भी इसका सोर्स पकड़ में आयेगा, निश्चित रूप से उसके खिलाफ कार्यवाही करेंगे। हमने जैसे ही इसको देखा, देखने के  साथ ही कार्यवाही शुरू कर दी।

श्री अध्‍यक्ष: ठीक।

बी पी एल सूची की स्‍पष्‍टता के अभाव में चिकित्‍सा में होने वाली परेशानी

श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली): अध्‍यक्ष महोदय, मैं भी एक सूचना निवेदन कर रहा हूं बी पी एल परिवारों के बारे में। मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाह रहा हूं, बहुत ही आवश्‍यक सूचना है। उनकी चिकित्‍सा नहीं हो पा रही है। आपके माध्‍यम से सरकार का ध्‍यान आकृष्‍ट कराना चाहता हूं कि बी पी एल परिवारों का सर्वे हो रहा है। मई तक सूची जारी होगी और जो परिवार इस वक्‍त इलाज कराने के लिये अस्‍पतालों में जा रहे हैं उनके लिये राज्‍य सरकार ने यह सूचना भेज दी है कि पुरानी सूची निरस्‍त कर दी गयी है। अब जो परिवार बी पी एल हैं, उनको न तो पुरानी सूची से चिकित्‍सा मिल रही है और न वर्तमान सूची में उनका नाम आया है। आपके माध्‍यम से अध्‍यक्ष महोदय, यह बड़ा संवेदनशील मामला है।

 


ssy/usc/1330/1q

 

अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से सरकार का ध्‍यानाकर्षित करना चाहता हूं कि उन गरीब परिवारों को, जब सरपंच यह लिखित में दे रहा है कि इनका नई सर्वे सूची के क्रम संख्‍या इतने पर नाम दर्ज कर दिया है और संबंधित विधायक भी उसको प्रमाणित कर रहा है तो मैं आपके माध्‍यम से चाहूंगा कि राज्‍य सरकार उस सूची का प्रमाणित माने या कोई और तरीका निकालकर के उस बीपीएल परिवार को चिकित्‍सा का लाभ दिलायें । मेरे यहां का मालौजी पंचायत का बसई क्षेत्र का दयाराम बावरिया पुत्र मिशाराम बावरिया है । उसको इलाज के लिए मैने खुद ने सर्टिफाई करके दिया है । ग्राम पंचायत के सरपंच द्वारा करा जा चुका है और अस्‍पताल के अधीक्षक से हमारी बात हो गयी । इतना सब कुछ होने के बाद अब उन्‍होंने इलाज करने के लिए मना कर दिया । ऐसे बीपीएल और गरीब परिवारों की चिकित्‍सा के लिए सरकार कोई न कोई निर्देश जारी करें वरना दो महिने में तो इस गरीब परिवार की हालत दयनीय हो जायेगी और ज्‍यादातर गरीब इलाज के अभाव में मृत्‍यु के कगार पर पहुंच जायेंगे । अध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं कि  कि आप निर्देश देंगे ।

अशासकीय संकल्‍प

राज्‍य में बढ़ते हुए जल प्रदूषण की रोकथाम व

जल संरक्षण के लिए आवश्‍यक कानूनी कदम

श्री अध्‍यक्ष: तारीख 21 अप्रैल,2005 को जिन गैर सरकारी संकल्‍पों में विचार-विमर्श यहां हुआ था, वाद-विवाद, वह श्री रामनारायण मीणा एवं श्री रामकिशोर मीणा इन दोनों द्वारा दिया गया था और वह था कि यह सदन संकल्‍प करता है कि सरकार राज्‍य में बढ़ते हुए प्रदूषण की रोकथाम हेतु कोई व्‍यवस्‍था करें यह था श्री रामनारायण मीणा की और से और श्री रामकिशोर मीणा का था कि यह सदन संकल्‍प करता है कि राज्‍य में जल की अत्‍यधिक कमी को देखते हुए सरकर जल संरक्षण के लिए आवश्‍यक कानूनी कदम उठायें । इन दोनों पर श्री नाथूसिंह जी गुर्जर अपनी चर्चा कर रहे थे । उनकी चर्चा अधूरी थी इसलिए माननीय सदस्‍य, आप पहले बोल चुके हैं, आप दस मिनट में अपनी बात समाप्‍त कर दें, चर्चा प्रारंभ की जाये ।   

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): अध्‍यक्ष महोदय, 15 मिनट दे दें ।

श्री अध्‍यक्ष: आप प्रारंभ तो करें ।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): अध्‍यक्ष महोदय, आपने मुझे समय दिया उसके लिए मैं आपके प्रति आभार व्‍यक्‍त करता हूं । यह बहुत ही महत्‍वपूर्ण विषय है और इसमें हम तो आज चिंता जाहिर कर रहे हैं । समय-समय पर बड़ी-बड़ी एजेंसीज ने भी इसमें चिंता जाहिर की है । अध्‍यक्ष महोदय, प्रकृति में पूरे भू-मंडल में दो तिहाई भाग पर जल है तो एक तिहाई भाग पर धरातल है । प्रकृति में व्‍याप्‍त इस जल का 97.2 प्रतिशत भाग यह जितने भी महासागर हैं इनमे हैं और 2.2 प्रतिशत भाग यह बर्फ के रूप में हैं और बाकी पानी या तो खारा है और कुछ पीने लायक है वह मिलाकर के कुल 1.2 प्रतिशत के आसपास है । केवल एक प्रतिशत से भी कम पानी मानव के उपयोग के लिए है । यह जितने भी लोगों ने इस पर रिसर्च की है, तीन स्रोत हैं जल के एक धरातलीय स्रोत हैं, भूमिगत जल है और सामान्‍य जल है । इसमें धरातलीय स्रोत हैं, नदियां, झीलें, तालाब, जलाशय, कुण्डिकायें, संचित वर्षा जल में टांकें, तलाई, कुंड आदि हैं । भूमिगत जल में कुए और झरने आदि हैं । सागर के अंदर 97 प्रतिशत के आसपास पानी स्थित है और मानव उपयोग की दृष्टि से केवल नदियां, झीलें, तालाब, झरने, कुए आदि ही पीने के लिए काम आते हैं ।

अध्‍यक्ष महोदय, यह जो रिपोर्टस हैं, अभी डब्‍ल्‍यु.एच.ओ. की रिपोर्ट है, उनके निर्धारित मानदंड आये हैं । वर्ल्‍ड बैंक ने इस पर रिपोर्ट दी है । मैं इसके आधार पर जिन्‍होंने इसका आंकलन करवाया और उन्‍होंने कहा कि प्रति व्‍यक्ति जल की उपलब्‍धता, मैं भारत पर आ रहा हूं 1760 घन मीटर प्रतिवर्ष और जल संसाधनों की गुणवत्‍ता आंकलन में भारत का स्‍थान 180 देशों में 120 वां है । भारत की आबादी जहां विश्‍व की आबादी की 16 प्रतिशत है, वहां जल संसाधन मात्र 2.45 प्रतिशत हैं । मैं राज्‍य पर आता हूं, राज्‍य का क्षेत्रफल 10.4 प्रतिशत है, आबादी 5.4 है । मैं आंकड़े इसलिए दे रहा हूं कि इस विषय की गंभीरता को बताने के लिए कि आगे क्‍या स्थिति होने वाली है । बार-बार लोग कह रहे हैं कि तीसरा विश्‍व युद्व होगा तो जल को लेकर होगा । पानी को लेकर होगा इसलिए कितनी गंभीर स्थिति है । इसलिए मैं आंकड़े सदन की जानकारी के लिए देना चाहता हूं । यहां पर हमारी आबादी राजस्‍थान की 5.4 प्रतिश्‍ंत है, पशुधन 18.7 प्रतिशत और सतही जल उपलब्‍धता केवल 11.6 प्रतिशह है जिसका 60 प्रतिशत सतही जल हम उपयोग नहीं कर रहे हैं । अब जो भू-जल है वह 1.7 प्रतिशत है जो राष्‍ट्रीय औसत है वर्षा का वह है 1200 मिली मीटर प्रतिवर्ष है । वहीं राज्‍य की वार्षिक वर्षा का औसत 531 मिली मीटर प्रति वर्ष है ।

अध्‍यक्ष महोदय, पिछले 50 वर्षों में कहीं न कहीं राज्‍य में 43 बार अकाल पडा है अगर पिछले 50 वर्षों का लेखा-जोखा देंखें । राज्‍य का दो तिहाई भाग मरूस्‍थलीय   है । जो थार मरूस्‍थल का हिस्‍सा है । यह एक पैटर्न है कि हर पाँच साल में केवल एक साल वर्षा होती है । चार साल अकाल की स्थिति में रहते हैं । कहीं न कहीं अकाल रहता है । राज्‍य में कुल 14-15 नदियों के बेसिन हैं । यहां यह सभी वर्षा पर निर्भर हैं । राज्‍य के 13 डिस्ट्रिक्‍ट मरूस्‍थलीय है । उसमें वर्षा का औसत 150 मिली मीटर से 2450 मिली मीटर के मध्‍य में है और इसका टोटल औसत देखा जाये तो 318 मिली मीटर बैठता है । इसी तरह से सभी 13 जिलों में वर्षा का औसत 400 से 950 मिली मीटर के मध्‍यम मैं है । यह औसत 688 मिली मीटर बैठता है । सतही जल की कुल उपलब्‍धता 21.71 है डीसीएम के हिसाब से देखें तो यह है जिसमें से केवल 16.05 डीसीएम ही उपयोग में लिया जा सकता है । जो उपलब्‍ध है उसमें से भी, बाकी औद्योगिक, तकनीकी एवं भौगोलिक, आर्थिक दृष्टि से उपयोग नहीं हो रहा  है । इसका जो बाकी है इसके विरूद्व राज्‍य का सतही जल की भंडारण क्षमता केवल 11.29 डीसीएम है । अगर इस सतही जल का भंडारण हम करें तो मैं यह आंकड़े इसलिए दे रहा हूं कि कितनी भयावह स्थिति है । शेष जल को संग्रहित किया जाता है और इसके लिए जहां प्रति व्‍यक्ति न्‍यूनतम जल की आवश्‍यकता आंकी गयी है यह एक हजार क्‍युबिक मीटर प्रतिवर्ष प्रति व्‍यक्ति है । यह नेशनल है । वही राज्‍य में इसकी उपलब्‍धता मात्र, यह तो आवश्‍यकता बतायी है प्रति व्‍यक्ति और राज्‍य की जो उपलब्‍धता है वह 800 क्‍युबिक मीटर प्रति व्‍यक्ति प्रतिवर्ष है । उससे भी कम है । आज कितनी गंभीर स्थिति राजस्‍थान में पानी की है ।

अध्‍यक्ष महोदय, एक अनुमान के अनुसार वर्ष 2045 में जल की उपलब्‍धता केवल 436 क्‍युबिक मीटर प्रति व्‍यक्ति प्रति वर्ष होने की संभावना है । आज हमें एक हजार क्‍युबिक मीटर प्रति व्‍यक्ति प्रति वर्ष की आवश्‍यकता है और कहीं 436 यानि आधे से भी कम है । जितनी आवश्‍यकताएं हैं उससे पानी की उपलब्‍धता हमारे पास रहेगी । यह बहुत ही चिंता का विषय है हमारे लिये । यदि हम भू-जल की स्थिति देखें सतही जल के बारे में बतायें, भूमि जल की स्थिति और भी कम है । आज ग्रामीण क्षेत्रों में जो पेयजल की उपलब्‍धता है, जो निर्भर है वह भू-जल पर 85 प्रतिशत निर्भर है । वहीं शहरी क्षेत्रों में 55प्रतिशत  इसके ऊपर निर्भर है । 237 ब्‍लाक्‍स में से 220 ब्‍लाक्‍स में भू-जल निरंतर गिर रहा है । केवल 32 ब्‍लाक्‍स ही ऐसे हैं 237 में से जो असुरक्षित नहीं है । भू-जल का का दोहन इतना ज्‍यादा होने लग गया कि एक तरफ तो आबादी बढ़ रही है दूसरी तरफ भू-जल नीचे जा रहा है । उसकी उपलब्‍धता कम हो रही है और उसका दोहन बढ़ रहा है ।

अध्‍यक्ष महोदय, जहां 1984 में 35 प्रतिशत भू-जल का दोहन था ।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य यह कम है तभी तो यह संकल्‍प लाये हैं ।डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): कितना कम है ।

श्री अध्‍यक्ष: आप तो संरक्षण कैसे किया जाये यह बतायें ।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): मैं आ रहा हूं, उस पर आ रहा हूं ।

श्री अध्‍यक्ष: उसी पर आ जायें आप तो ।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): मैं दो मिनट में ही आ रहा हूं । लेकिन बैक ग्रांउंड की भी बता रहा हूं...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय प्रतिपक्ष के नेता कह रहे हैं कि सर्वश्रेष्‍ठ विधायक हैं और यह तो पढ़ रहे हैं ।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): मैं पढ़ नहीं रहा हूं, मैं आकंड़े ही पढ़कर के बताऊंगा । आंकड़े भी कभी टिप्‍स पर याद रहते हैं क्‍या..(व्‍यवधान)                                                                  

 

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श्री अध्‍यक्ष: प्रतिपक्ष के नेता ने जो बात कही है वह तो मुझे कहनी ही पड़ेगी कि प्रतिपक्ष के नेता आपको यह कहना चा‍हते हैं, इसलिए आप मुद्दे पर आ जाओ।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपको अवार्ड इसलिए दिया है कि पढ़कर बोलो?

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं पढ़कर नहीं बोल रहा हूं। मैं केवल आंकड़ों को पढ़कर बोल रहा हूं, इसके अलावा कोई पढ़कर नहीं। मैं पार्लियामेण्‍ट में भी रहा हूं और इस सदन में भी वर्षों रहा हूं अगर आंकड़े कोई देखता, अगर मैं आंकड़े वैसे बोलूंगा, फेंका फांकी मारूंगा और आंकड़े गलत रिकार्ड में आ गए तो उसके लिए कौन जिम्‍मेदार होगा? वह जिम्‍मेदारी मेरी होगी इसलिए मैं यह आंकड़े देखकर बोल रहा हूं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, चिट ले सकते हैं, इतना बड़ा कागज लेकर खड़े नहीं हो सकते, आंकड़े नोट कर लो उस पर, चिट ले लो, आंकड़े ले लो, हम कोई आपत्ति नहीं करेंगे लेकिन ऐसा नहीं हो सकता कि आप पूरा खरड़ा पढ़ रहे हो, अगर पूरा खरड़ा पढ़ने की अनुमति देते हैं तो मर्जी है आपकी, हमको तो कोई आपत्ति नहीं, हमने तो आपको पाइण्‍ट आउट किया है।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): मैंने पूरे लम्‍बे कागज में आंकड़े लिख लिए, इन्‍होंने कहा कि पर्ची में लिखते हैं, मुझे समझ में नहीं आ रहा, आगे से कम्‍प्‍यूटर ले आउंगा आप कहेंगे तो छोटा।

श्री अध्‍यक्ष: नेता प्रतिपक्ष और मेरी उम्र को देखते हुए तो आंकड़े याद नहीं रहे तो समझ में आती है बात लेकिन आपको तो आंकड़े याद भी रहने चाहिए।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): याद रहने चाहिए लेकिन इतने सारे आंकड़े हैं माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इतने सारे आंकड़े कौन याद रख सकता है?

1988 में बढ़कर यह 69 प्रतिशत हो गया, 2001 में 104 प्रतिशत हो गया और 2004 में यह 125 प्रतिशत हो गया। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, भूजल इसलिए लगातार नीचे जा रहा है, मैं यह बता रहा हूं कि उसका दोहन कितना बढ़ गया है। इसके लिए जो कृषि योग्‍य भूमि है वह 257 लाख हैक्‍टेयर है हमारे राजस्‍थान में। इसमें से जल से सिंचाई अधिकतम 51 लाख हैक्‍टेयर भूमि में हो सकती है और इस समय इसके विरुद्ध हमारे यहां 31.66 लाख हैक्‍टेयर में सिंचाई की पूरी व्‍यवस्‍था को हम अर्जित कर रहे हैं। शेष वर्षा या भूजल पर निर्भर है। इसलिए नहरों से सिंचाई की क्षमता केवल 20 लाख हैक्‍टेयर की है।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं इसलिए कहना चाहता हूं कि एक तो उत्‍तरदायित्‍व, जाग्रति की कमी व एजूकेशन नहीं होने से परम्‍परागत तरीकों से सिंचाई करते हैं, पानी को फैला कर सिंचाई करते हैं खेतों में, जिसके कारण हमारा सिंचाई का पानी वेस्‍ट जाता है और भूजल का अधिक दोहन होता है, उसका पूरा उपयोग नहीं हो पाता है। ज्‍यादा सिंचाई करने से कई जगह सेम की समस्‍या, वाटर लोगिंग की समस्‍या पैदा हो गई है। बिकॉज ऑफ टू रीजन्‍स, उत्‍तरदायित्‍व, एजूकेशन और जाग्रति का अभाव। उक्‍त उपलब्‍ध जल के गुणवत्‍ता में सुधार की आवश्‍यकता इसलिए है क्‍योंकि पानी के लिए

श्री अध्‍यक्ष: आप तो संरक्षण पर आओ अब।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं संरक्षण पर ही आ रहा हूं। खारा पानी है। आज हमारे यहां जापानी बैंक्‍स ऑफ इन्‍टरनेशनल कारपोरेशन ने 415 लघु सिंचाई परियोजनाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए 612 करोड़ रुपए की राशि स्‍वीकृत की है।

श्री अध्‍यक्ष: आप तो आज एक दूसरे से होड़ कर रहे हो, प्रतिस्‍पर्धा हो रही है आपकी तो जैकिटो में। ...(व्‍यवधान)...

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): पहले राव राजा थे, वह दो बनवाया करते थे, अब हमारे यजमान हैं, दो बनवाते हैं, एक हमको दे देते हैं, एक खुद पहन लेते हैं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): ...(व्‍यवधान)... एक उसमें से लेकर आते हैं, इनके यजमान जिन्‍दाबाद।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): आप भी तो उनमें ही हो।

श्री अध्‍यक्ष: यजमान आप ही तो हो इनके।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): आप ही तो हो हमारे।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): इनके अनेक हैं।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): सब ही म्‍हारा है, म्‍हे खुद कोनी, बाकी सब है।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय मंत्रीजी, क्‍या आप सारे कपड़े यजमानों के दिए हुए ही पहनते हो?

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): इसमें ईमानदारी की बात तो यही है।  

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): यह ब्राह्मण ब्राह्मण कार्य वाला नहीं है, वास्‍तविकता तो बोलो सदन में, सत्‍य बात बताओ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): यजमानों से कुछ लेने का आपका अधिकार ही नहीं है। माननीय शिक्षा मंत्रीजी ने कहा कि यजमानों का दिया हुआ कपड़ा पहनते हैं, इनको अधिकार ही नहीं है। यह कर्मकाण्‍डी ब्राह्मण ही नहीं है, यह पूजा पाठी ही नहीं है। ...(व्‍यवधान)... नहीं, नहीं, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सदन में इस तरह की बात कहें तो या तो यह अपने शब्‍द वापस लें या मुझे भी इस तरह की बनवाकर दें।

श्री अध्‍यक्ष: किसी यजमान से लेकर इनको भी दे देना।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): दे देंगे।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह ब्राह्मण तो दूसरों से पूजा पाठ करवाने वाले हैं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप तो खुद दाता हो।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): नहीं साहब, लाकर तो दे देता लेकिन हमारी स्थिति यह हो गई कि हमारे जितने भी यजमान हैं वह तो हो गए पिछड़े और हम रह गए अगड़े, हमारी सबसे बड़ी समस्‍या यह हो गई।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): लेकिन आप तो दूसरों से पूजा पाठ करवाते हो न?

श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय को सम्‍बोधित करके कह रहे हैं, यह कोई अच्‍छी बात नहीं है।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): यह ब्राह्मण तो दूसरों को दक्षिणा देने वाले हैं, आप वास्‍तविकता पर आओ, मैं गवाह हूं इसका।

श्री अध्‍यक्ष: मावली से आने वाले माननीय सदस्‍य, वह केवल अध्‍यक्ष की तरफ नहीं, आप भी यजमान हो उनके।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्रीजी के आशीर्वाद का ही परिणाम है कि आप पिछड़े हो गए और ये अगड़े रह गए।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पानी अगड़ों के भी काम आता है और पिछड़ों के भी काम आता है।

जापानी बैंक्‍स ऑफ इन्‍टरनेशनल कारपोरेशन के साथ एक समझौता हुआ 415 लघु सिंचाई परियोजनाओं के लिए, 612 करोड़ रुपए की उन्‍होंने सहमति प्रदान की। मैं सुझाव देना चाहता हूं कि राज्‍य सरकार जो पैसा आया है उस पैसे का तुरन्‍त सदुपयोग करके काम शुरू करे ताकि पानी का संरक्षण हो सके।

जितने भी इन्‍टर स्‍टेट समझौते हैं और उनमें राजस्‍थान को जितना पानी मिला हुआ है, मध्‍य प्रदेश के साथ हमारा समझौता है, गांधी सागर में आज पानी कम हो गया, 150 के आसपास उन्‍होंने एनीकट बना लिए, इसके बाद मध्‍य प्रदेश के साथ एक समझौता हुआ, एक बार राजस्‍थान ने पानी को रोका, कि आपने कैसे बना लिए उन्‍होंने कहा कि हम तोड़ देंगे, उन्‍होंने तोड़े नहीं  और उसके बाद एक बैठक हुई पिछले दिनों, मैं धन्‍यवाद देना चाहूंगा इसके लिए माननीय मुख्‍य मंत्रीजी को कि  उन्‍होंने एक बैठक करके जो तीन नदियां थी पार्वती, काली सिन्‍ध और चम्‍बल उनको बनास से लिंक करने के लिए एक समझौता किया ताकि केवलादेव में आज पानी का जो संकट है वह भी मिट जाए और जो झगड़े चल रहे हैं, अजमेर, टोंक और भीलवाड़ा में, इनका भी पानी जो फालतू जा रहा है, चम्‍बल नदी में उसका उपयोग हो सके। उसके लिए भी सहमति बनी है लेकिन समझौता नहीं हुआ है। मैं सुझाव देना चाहता हूं और सरकार से मांग भी करना चाहता हूं कि इसका समझौता तुरन्‍त किया जाकर इसको एक्‍जीक्‍यूट करने की तरफ कदम जल्‍दी से जल्‍दी बढ़ाएं।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसी तरह सालदा, यमुदा, साबरमती नदियों को जोड़कर लिंक नहर बनाई जाए ताकि राज्‍य को अतिरिक्‍त पानी उपलब्‍ध हो । माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पंजाब के साथ हमारा समझौता हुआ 1981 में, माननीय शिवचरणजी माथुर, चीफ मिनिस्‍टर थे। 1.06 एम ए एफ जल राजस्‍थान को आवंटित हुआ और उसमें एक शर्त जोड़ दी कि जब तक राजस्‍थान अपना इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर इसको यूज करने के लिए तैयार नहीं करेगा, इस एक्‍सेस पानी को पंजाब यूज करता रहेगा। आज हमारा इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर बनकर तैयार हो गया लेकिन पंजाब हमको पानी नहीं दे रहा है और इसके लिए बार-बार हमने यहां प्रस्‍ताव भी पास किए हैं, दिल्‍ली भी जा रहे हैं, दिल्‍ली की केन्‍द्र सरकार पर भी पक्ष और विपक्ष मिलकर दबाव बनाए इस बात की आवश्‍यकता है, ताकि वह पंजाब से कहे कि जितना हमारा हिस्‍से का पानी है वह हमको दे। इसका एक नुकसान हमें और हो गया। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हरियाणा के साथ हमारा यमुना नदी को लेकर समझौता हुआ....।

श्री अध्‍यक्ष: आप जल संरक्षण पर तो आओ।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): संरक्षण पर ही आ रहा हूं।

श्री अध्‍यक्ष: यह संरक्षण नहीं है।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): यह पानी तभी तो उपलब्‍ध हो पाएगा, हमारा जो पानी छूटा हुआ है, यह पानी उपलब्‍ध होगा तभी तो होगा।

श्री अध्‍यक्ष: इन्‍टरस्‍टेट नदी जल विवाद जो चल रहे हैं, उनसे पानी नहीं मिलेगा। यह जल संरक्षण नहीं है।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): पानी कैसे लें।

श्री अध्‍यक्ष: नो, नो, नो।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): पानी आएगा तभी तो संरक्षण होगा।

श्री अध्‍यक्ष: पानी जो बरसता है, उसे कैसे संरक्षित करें प्रश्‍न यह है।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उस पर भी आ रहा हूं।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमें जो मिला है 1.119 बी सी एम पानी है यमुना का। हरियाणा कह रहा है कि पंजाब नहीं दे रहा है इसलिए हम भी नहीं देंगे। यह खुशी की बात है कि पिछले दिनों नरेन्‍द्र मोदी यहां आए और उन्‍होंने कहा कि गुजरात पानी देने को तैयार है इसलिए गुजरात से 0.617 बी सी एम पानी जून, 2006 तक राजस्‍थान को मिलना प्रारम्‍भ हो जाएगा।

श्री अध्‍यक्ष: अब समाप्‍त करें।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो आप कह रही थी, उस पर मैं सुझाव देना चाहता हूं कि रिमोट सेंसिंग से हमने जल संरक्षण का एक नक्‍शा तैयार करवाया है कि कहां-कहां और कितना हो सकता है। इसके आंकड़े राजस्‍थान सरकार के पास उपलब्‍ध है। मैं चाहूंगा कि एक तो हमारे जो ट्रेडिशनल रिसोर्सेज हैं, गांवों की बावडि़यां हैं, उनकी सफाई करवाकर यदि उनके पानी में कुछ गड़बड़ हो गई है तो उसको दवाई डालकर ठीक कैसे किया जाए।

 

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उसको पीने के योग्‍य बनाया जाए, इस तरह का कदम सरकार को उठाना चाहिए।

इसी तरह से सतही जल का संग्रहण करने के लिए जगह-जगह व्‍यवस्‍था करें। किसानों को बताएं खेतों में वे संरक्षण करें। जहां नाले बहकर आते हैं वहां अधिक से अधिक एनीकट्स बनाये जाएं। पहाड़ों से बहकर जो पानी आता है उस पानी को रोकने की व्‍यवस्‍था सरकार करे। इसके साथ-साथ शहरों के अंदर भी जो बड़-बड़े मकान हैं, बड़ी-बड़ी बिल्डिंग्‍स हैं उनके पानी को रोककर उस पानी का संरक्षण किया जाए। इसी तरह से गांवों में किसानों के खेतों के अंदर कई जगह ऊँचा-नीचा है, फालतू में पानी बहकर चला जाता है उनको इस बात की ट्रेनिंग दी जाए कि आजकल जैसे भूजल के दोहन के लिए टेंक बना लिया है उस तरह अगर जमीन के अंदर वे टैंक बना लें और उसके बाद इंजन से सिंचाई में काम लें, पीने के पानी में काम लें तो वह संरक्षण किया जा सकता है।

अध्‍यक्ष महोदय, जैसे पुराने जमाने में, आप तो अच्‍छी तरह से जानते हैं गांव में कुओं का पानी निकालकर लोग स्‍नान करते थे और एक खेली बना देते थे। सारा पानी उस खेली में जाता था और पशु और पक्षी उसमें पानी पीते थे। आज वह सिस्‍टम बंद हो गया, आज हैण्‍ड-पम्‍प लग गये। हैण्‍ड-पम्‍प का पानी बेकार जाता है, अगर साथ में नाली के सहारे खेलियां बना दी जाएं तो जो पानी बेकार जाता है उस पानी का यूज होगा और इसके संरक्षण की व्‍यवस्‍था सरकार करेगी।

इसी तरह से पानी का संरक्षण करने के लिए सरकार कानून तो बनाये, लेकिन कानून के साथ-साथ उस कानून में यह चीज भी जोड़े कि जितनी भी म्‍युनिसिपैलिटीज हैं, जितनी भी पंचायत राज संस्‍थाएं हैं, जितने एनजीओज् हैं, जितने और इंस्‍टीट्युशंस हैं उन सबको इससे जोड़ा जाए, जोडकर इसमें मास पार्टिसिपेशन का  सहयोग लिया जाए ताकि हर क्षेत्र में पानी का संरक्षण हो सके और हम जल का संरक्षण कर सकें।

अध्‍यक्ष महोदय, इसके साथ-साथ प्रदेश में वर्षा हो, चाहे पंचायत हो, म्‍युनिसिपैलिटीज् हो, सरकारी विभाग हों उनको सरकार को निर्देश देने चाहिए, सरकार जल संरक्षण का कानून बनाए उसमें इस बात का प्रोविजन करें कि ज्‍यादा से ज्‍यादा वे पेड़ लगाएं और वे पेड़ लगाएंगे तो हमारे यहां वर्षा ज्‍यादा होगी (समय समाप्ति सूचक घण्‍टी) और जल संरक्षण अपने आप ही होगा। अध्‍यक्ष महोदय, एक मिनट में बात समाप्‍त कर रहा हूं। दो मिनट आपसे चाहूंगा, अगर आप समय दें तो मैं दो मिनट में समाप्‍त कर रहा हूं।

श्री अध्‍यक्ष: आप संरक्षण पर तो आ नहीं रहे हैं, और-और बात कर रहे हैं आप।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): यही कह रहा हूं किस तरह से किया जाएगा। संरक्षण के लिए पानी किस तरह से बचाएं यही तो संरक्षण हुआ। उसका संग्रहण कैसे करें यही तो संरक्षण हुआ। इसके लिए हमारा जो फसल चक्र है उस फसल चक्र को भी बदलने की आवश्‍यकता है ताकि ज्‍यादा पानी नष्‍ट न हो। अध्‍यक्ष महोदय, इसकी मोनीटरिंग के लिए एनीकट्स बन रहे हैं, भू-संरक्षण के, पानी को रोकने के, संग्रहीत करने के जगह-जगह काम चल रहे हैं। इसमें बहुत भारी भ्रष्‍टाचार हुआ है और इसलिए जितना पानी रुकना चाहिए वह पानी रुक नहीं सकता। मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि राज्‍य सरकार इस पर कोई मोनीटरिंग की व्‍यवस्‍था करें।

आज  करोड़ो रुपया भू-संरक्षण के नाम पर खर्च हो रहा है। केन्‍द्र से डेजर्ट समाप्‍त करने की योजना आ रही है, दूसरी आ रही है। पानी का संरक्षण तब होगा जब मोनीटरिंग की हम अच्‍छी व्‍यवस्‍था करेंगे। इसके लिए ठीक ढंग का कानून बनाया जाए और उस कानून में सारी चीजों का समावेश करके जो हमारी पुरानी संस्‍कृति है उसके आधार पर जल का संरक्षण किया जाना चाहिए। इन्‍हीं शब्‍दों के साथ आपने मुझे समय दिया इसके लिए मैं आपका आभार व्‍यक्‍त करता हूं, धन्‍यवाद।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मोनी‍टरिंग वाली बात कही, आप मोनीटरिंग वाले कहां से लाआगे मोनीटरिंग करने के लिए? कहां से उनको इंपोर्ट करोगे?

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): मोनीटरिंग के लिए कमेटी बनायी जा सकती है जिसमें जन-प्रतिनिधियों को शामिल किया जा सकता है। मोनीटरिंग के लिए जन-प्रतिनिधियों की एक कमेटी बनाकर पंचायत समिति स्‍तर पर, जिला स्‍तर पर, म्‍युनिसिपैलिटी स्‍तर पर, गांवों में पंचायत स्‍तर पर यदि जन-सहभागिता से आफिसर्स और जन-प्रतिनिधियों की कमेटी बना दी जाए तो वे लोग अपने आप ही इस पर अंकुश कर लेंगे।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): ये भी जन-प्रतिनिधि हैं। आप भ्रष्‍टाचार की बात कर रहे हो, ये जन-प्रतिनिधि ही हैं। एनीकट्स ग्राम पंचायतें, पंचायत समितियां, जिला परिषदें बना रही हैं, इन पर किसको बिठाओगे?

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): कई जगह देखें, अगर वो भी भ्रष्‍टाचार कर रहे हैं तो आप सबकी मिली-जुली कमेटी बना देंगे तो नहीं होगी, यह प्रोविजन भी है पंचायत राज एक्‍ट में।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अध्‍यक्ष महोदय, इसमें यह होगा कि ठिकाना बिसाऊ के 175 गांव हैं वहां ठिकाने में दूध आता था। दूध के अंदर पानी की मिलावट आने लग गई तो दरबार, बिसाऊ ने यह कहा कि कामदार जी, दूध पतला कैसे आ रहा है, तो बोले, महाराज, कल एक सुपरवाइजर बिठा देंगे। एक सुपरवाइजर और बिठा दिया। फिर दो दिन बाद पूछा, वह तो उससे भी पतला आ रहा है, यह क्‍या बात हुई? हुई क्‍या वह सुपरवाइजर और मिल गया, वह अपना हिस्‍से का पानी और मिलाने लग गया।

श्री अध्‍यक्ष: सुपरवाइजर एक गिलास पी लेता और एक गिलास पानी मिला देता।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अब ये सुपरवाइजर बिठा रहे हैं वह कहां से लाओगे? हर साख पर उल्‍लू बैठा है, एक ही उल्‍लू काफी है बर्बादे गुलिस्‍तां

श्री अध्‍यक्ष: शेर तो अधूरा ही पढ़ा। आपने शेर तो पढ़ा, लेकिन अधूरा पढ़ा। ..(व्‍यवधान).. हर साख पर उल्‍लू बैठा है बर्बादे गुलिस्‍तां करने को।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मेरी एक प्रार्थना है पूरे सभासद प्रतिपक्ष के नेता से इस शेर को दुबारा सुनना चाहते हैं, सब लोगों की इच्‍छा है। इतना सामयिक शेर है, सुनाओ।

श्री अध्‍यक्ष: कह दिया उन्‍होंने।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): जो इसमें मूल तत्‍व था वह यह था इन्‍होंने संबोधित करके कहा कि एक ही उल्‍लू काफी है। ..(व्‍यवधान)..

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): गुलिस्‍तां को बर्बाद करने के लिए एक ही उल्‍लू काफी है और यहां तो हर साख पर उल्‍लू बैठा है।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): आप टोडारायसिंह से आने वाले माननीय सदस्‍य को मंत्री तो बना नहीं रहे हैं ऐसे क्‍या शब्‍द बोल रहे हो? ..(व्‍यवधान).. आप उनके रास्‍ते में सहायक बनो, अवरोधक मत बनो। ..(व्‍यवधान)..

(श्री रामनारायण विश्‍नोई, उपाध्‍यक्ष, पदासीन)

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): उपाध्‍यक्ष महोदय, प्रतिपक्ष के नेता बहुत माननीय हैं, ये जो बोल देते हैं, जो भी सुझाव दें वह बहुत महत्‍वपूर्ण है। ..(व्‍यवधान).. मेरे लिए नहीं, मैंने तो जनरल बात कही है, मैं तो यह कह रहा हूं कि जितने आप यहां बोल रहे हैं इन सबका एक संग्रह करके एक पुस्‍तक छाप दी जाए और जनता के अंदर बंटवाई जाए कि ये कितने महान हैं, कितने महत्‍वपूर्ण सुझाव आपके सदन में आते हैं, बहुत अनुभवी हैं और इनके विधान सभा क्षेत्र में भी बंटवायी जाए ताकि वहां लोग गुणी हों, ज्ञानी हों और सबको उसका लाभ मिले और जितने माननीय सदस्‍य बुद्धिजीवी हैं इसलिए उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं कह रहा हूं हमारी सतर्कता समितियां पंचायत व्‍यवस्‍था है ..(व्‍यवधान)..

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): सर्वश्रेष्‍ठ विधायक महोदय, मेरा विधान सभा क्षेत्र टोडारायसिंह नहीं है, राजेन्‍द्र सिंह जी राठौड़ जानते हैं। यह टोडारायसिंह नहीं है, एक बार जीत गये, एक बार हार गये, एक बार जीत गये और एक बार हार गये।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): मैं तो इसलिए आपकी तारीफ कर रहा हूं आप तो बहुत प्रकाण्‍ड हैं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): वहां बंटवाने की जरूरत नहीं है वहां सब जानते हैं।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): वहां गुर्जर नहीं है। गुर्जर और जाट का बैलेंस नहीं है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): राजेन्‍द्र सिंहजी तो जानते हैं क्‍या बंटवाओगे वहां।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं इसलिए कह रहा हूं आलरेडी पंचायत राज ..(व्‍यवधान).. केन्‍द्र जब 73वां व 74वां अमेण्‍डमेंट लाया ..(व्‍यवधान).. माननीय प्रतिपक्ष के नेता, आपकी जानकारी के लिए बताना चाहता हूं कि जब 73वां और 74वां अमेण्‍डमेंड आया इसमें सतर्कता समितियों की व्‍यवस्‍था है, लेकिन सतर्कता समितियां या तो बनती नहीं, अगर बनती हैं तो उनसे इफेक्टिव काम नहीं लिया जाता। वे क्‍यों बनायीं? इसलिए बनायीं कि यह पंचायत राज संस्‍थाएं भी गलत काम करें ..(व्‍यवधान)..

 श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): सर्वश्रेष्‍ठ विधायक महोदय, मुझे मालूम है, मैं यह कह रहा हूं सतर्कता समितियों के पर्सोनल को कहां से इंपोर्ट करोगे, कहां से लाओगे? इस देश में, इस प्रदेश से ही तो लाओगे? जब जनप्रतिनिधियों पर आप आरोप लगाते हो कि भारी भ्रष्‍टाचार है तो क्‍या सतर्कता बिठाओगे?

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): मैंने तो नहीं लगाया आरोप।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपने लगाया कि एनीकट्स में बड़ी भारी धांधली हो रही है, भ्रष्‍टाचार हो रहा है।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): मैंने यह नहीं कहा।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपने यह कहा है।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): मैंने उस योजना के बारे में कहा जहां-जहां भी भ्रष्‍टाचार हो रहा है। आप यह चाहते हैं कि भ्रष्‍टाचार होता रहे?

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): हम तो नहीं चाहते।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): मैंने सुझाव दिया है, मैं तो चाहूंगा आप इस पर बोलेंगे कि जहां-जहां भी भ्रष्‍टाचार हो रहा है उसको रोकने के लिए इस तरह की समितियां बने। जो नदियां जोड़ने का कार्यक्रम पिछली केन्‍द्र सरकार ने शुरू किया था अगर राजस्‍थान को बचाना है तो नदियां जोड़ने का काम जो पिछली सरकार ने किया था, राज्‍य सरकार को दबाव डालकर नदियों को जोड़ने की योजना अगर लागू हो गई, एक तरफ तो असम के अंदर बाढ़ आ रही है और एक तरफ यहां सूखा पड़ रहा है इसलिए वहां बाढ़ रुकेगी और यहां सूखा रुकेगा, इसका उपयोग होगा। इसलिए मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि इस तरह से सरकार जल संरक्षण के लिए कानून बनाए ताकि राजस्‍थान में पीने का पानी जनता को उपलब्‍ध हो सके, सिंचाई के लिए उपलब्‍ध हो सके, इसके लिए व्‍यवस्‍था करें। आपने मुझे समय दिया इसके लिए बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

श्री उपाध्‍यक्ष:  श्री भरत सिंह।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप बोल रहे थे बाढ़ का पानी बंद कर रहे हो। जहां बाढ़ आती थी वहां रुक गई तो वहां हालत देखो क्‍या है?

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हमारे कांटली नदी यहां से बहती थी, पूरे जिले के अन्‍दर बह कर जाती थी राजगढ़ तक जाती थी, अब उसको बंद कर दिया, हमारा पानी की शार्टेज हो गई, कुए सूख गये और जहां आप बाढ़ रूकवा रहे हो, जब रूक जाएं तब देखना वहां क्‍या हालत बनेगी। बाढ़ के भी फायदे हैं उसके भी बेनिफिट्स हैं, डिस-एडवांटेज ही नहीं, एडवांटेज भी हैं उसके, दोनों बराबर चलते हैं, बाढ़  रोक दो, बाढ़ रोक दो, क्‍या रोक दो ? पढ़ो जिओग्राफी आप।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): आप तो सब को ही बंद करवा दो, आप तो ऊपर जाकर सुझाव दो कि जो चला रखा है उन सब को ही जाकर बंद कर दो।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मैंने सुझाव दो रखा है।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): आप तो यह कह दो और आप यह भी कहो  श्री उपाध्‍यक्ष: श्री भरतसिंह ।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): कि यह सतर्कता समितियों की व्‍यवस्‍था कानून में भी है, कांस्‍टीट्यूशन में इसको भी ये उठा लें। ...(व्‍यवधान)...

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): पंचायती राज बढि़या काम कर रहा है, पंचायत राज इतना बढि़या काम कर रहा है, उनके ऊपर सतर्कता समिति किसकी बैठाओगे ? यह आईएएस, आईपीएस इनको बैठाओगे ? जब पंचायती राज में जनप्रतिनिधि बैठे हैं, पंचायत में बैठे हैं, पंचायत समिति में बैठे हैं, जिला परिषद् में बैठे हैं, यहां पर हम बैठे हैं विधान सभा में और पार्लियामेंट के अन्‍दर हमारे एमपी बैठे हैं, पूरा तंत्र एक दूसरे से जुड़ा हुआ है, इस पर किसको बैठाओगे लाकर ? ...(व्‍यवधान)...

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह):आप चाहते क्‍या हो, मुझे समझ में ही नहीं आता। ...(व्‍यवधान)... 

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): यह नहीं समझ आएगा आपके ।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): नहीं, मेरे समझ में नहीं आ सकता, आपके आ गया होगा, मेरे तो नहीं आ सकता। ...(व्‍यवधान)...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): जो बात आप इनकी अनुपस्थिति में कह चुके हो, अब दुबारा बोलो वही बात। बोलो देखें। ...(व्‍यवधान)...

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): सर्वश्रेष्‍ठ के ऊपर क्‍या है ? ...(व्‍यवधान)... सर्वश्रेष्‍ठ कोई चीज  हो जाए उसके ऊपर क्‍या है बताइए, समझ में कैसे आएगा जब आप सर्वश्रेष्‍ठ के ऊपर पहुंच गये, अब ऊपर कहां जाओगे ? ...(व्‍यवधान)... हां, कहां है, आकाश है यह भ्रम है, स्‍पेस है फिर तो उड़ते रहो, सर्वश्रेष्‍ठ आप बन गये उसके बाद क्‍या है ?

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): ये सर्वश्रेष्‍ठ के बाद भी मंत्री तो आपको बनावें नहीं क्‍योंकि आपको प्रदेश में उपाध्‍यक्ष बना दिया।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): आपके ज्ञान का लाभ उठाना चाहते हैं।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): यह सब लोग बैठे हैं, आपको मंत्री तो बनने नहीं देंगे। यह तय है।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): आपके ज्ञान का लाभ उठाना चाहते हैं।

श्री भरत सिंह (दीगोद): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आज एक अत्‍यन्‍त महत्‍वपूर्ण विष्‍य के ऊपर इस सदन में चर्चा हो रही है, दुर्भाग्‍य से उससे संबंधित मंत्री नहीं हैं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): नहीं, मैं हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: नोट कर रहे हैं।

श्री भरत सिंह (दीगोद): नहीं, आप हैं तो स्‍वागत है, मैं तो निवेदन कर रहा हूं कि माननीय सिंचाई मंत्री और पी.एच.ई.डी. मंत्री अगर सदन में उपस्थित होते क्‍योंकि अभी राजस्‍थान ठीक एक जल नीति बननी है और एक जल अभियान पूरे राजस्‍थान में चल रहा है, जगह जगह जिलों में रैलियां निकल रही हैं और एक अत्‍यन्‍त गंभीर विषय को हम एड्रेस कर रहे हैं, दुर्भाग्‍य से आज सदन में इस महत्‍वपूर्ण विषय पर जितने सदस्‍य चर्चा में भाग लेने चाहिए वह नहीं हैं मगर मैं बहुत संक्षेप में अपनी बात रखूंगा कि जब हम जल की बात करते हैं तो जल की कल्‍पना राजस्‍थान वह प्रदेश है जिसमें वर्षा का अभाव है, अकाल इस साल भी 22 जिलों के अन्‍दर अकाल है और पिछले 50 साल में जैसा कि अभी एक सदस्‍य ने बताया कि 40 साल से ज्‍यादा इस प्रदेश में अकाल रहा है इसमें सबसे ज्‍यादा चिंता की बात तो हमारी जो नीति की इसमें जो हमारा केन्‍द्रीत विचार होना चाहिए वह यह है कि हमें राजस्‍थान में जब 1.6 प्रतिशत ही वर्षा जल उपलब्‍ध है और आजादी के 6 दशक बाद हम उस वर्षा जल को उस 1.6 प्रतिशत वर्षा जल को रोकने में जिसमें पिछली सरकार और यह सरकार, सरकारें पलट रही हैं मगर हम उस 1.6 परसेंट जल वर्षा जल का 60 प्रतिशत या 55 प्रतिशत पानी बहकर इस राजस्‍थान से बाहर जा रहा है तो इस प्रदेश के लिए और खास कर के इस प्रदेश में शासन करने वाले लोगों के लिए सबसे ज्‍यादा शर्म की बात यह है कि हम जो कुदरत ने जितना सा पानी दिया है उसको रोकने में हम विफल रहे हैं, हम सफल रहे हैं इस बात में कि हमको जो दूसरे प्रदेश से पानी मिलना चाहिए उसको लाने के लिए तो हम सफल रहे हैं और उसके लिए हम संकल्‍प भी पारित कर रहे हैं हमारे हिस्‍से का पानी पंजाब में अगर रूक जाता है तो हम संकल्‍प पारित कर उस पानी को लेने की तो चिंता जाहिर कर रहे हैं मगर जो हमारे प्रदेश का पानी बह कर जा रहे है जिसके बारे में हमको किसी भी कोई संकल्‍प पारित नहीं करना, हमें अपने आपसे संकल्‍प पारित करना है वह संकल्‍प हमने कभी मन में नहीं लिया और खास कर के उस जिले में जहां से मुख्‍य मंत्री आती हैं उस जिले में सबसे ज्‍यादा चिंताजनक स्थिति है कि वहां का 80 प्रतिशत वर्षा जल बहकर जा रहा है और वहां पर जो जितने बड़ी योजनाएं हैं उनका पिछले तीन बजट में कोई उल्‍लेख नहीं है इसलिए मैं समझता हूं कि जिसके हाथ में लगाम है वही घोड़े को दिशा नहीं दे सकता तो इससे दुर्भाग्‍यपूर्ण स्थिति क्‍या होगी ? दूसरी बात इसके ऊपर ध्‍यान दिलाना चाहूंगा कि हमने क्‍योंकि सिंचाई विभाग का नाम ही जल संसाधन विभाग किया है, मैं इसका स्‍वागत करता हूं कि आपका मकसद राजस्‍थान का जो लक्ष्‍य होना चाहिए वह सिंचाई ही नहीं क्‍योंकि आपकी अधिकांश सिंचाई जो हो रही है 68 प्रतिशत आपकी भूजल से सिंचाई हो रही है और भूजल से सिंचाई होने के कारण ही इस अकाल के साल के अन्‍दर भी हमारा जो रबी का प्रोडक्‍शन है वह प्रभावित नहीं हुआ है, हमारे जो जिले अकाल से प्रभावित हुए हैं उसमें भी हमने इस अकाल के साल के अन्‍दर पिछले साल से ज्‍यादा उत्‍पादन पैदा किया है इसलिए किसान खरीफ के अन्‍दर तो उसके हाथ में नहीं है क्‍यों वर्षा के ऊपर निर्भर है उसमें हमारा प्रोडक्‍शन डाउन है मगर रबी का सवाल है, किसान ने अपने साधनों से जमीन के अन्‍दर पानी सींच रहा है और जमीन का ग्राउण्‍ड वाटर लेवल बैठता जा रहा है इसलिए प्रदेश में आवश्‍यकता यह है कि ग्राउण्‍ड वाटर रिचार्ज हो क्‍योंकि अधिकांश लोग बाग़ ग्राउण्‍ड वाटर के ऊपर डिपेंडेंट है, सबसे ज्‍यादा खेती का जो खर्चा आता है वह अपने सिंचाई के जो साधन कर रहे हैं ग्राउण्‍ड वाटर से जो पानी निकाल रहे हैं जो बिजली के पम्‍प चला रहे हैं, डीजल के पम्‍प चला रहे हैं, उनके खर्चा का जो फ्लो इर्रिगेशन का आता है जो सिंचाई सरकार के माध्‍यम से हो रही है वह तो जहां ही है और जो आदमी अपने खून पसीने से पैसा लगाकर पैसा कमाई कर रहा है उस पर सरकार का ध्‍यान नहीं है इसलिए सरकार का ध्‍यान केन्‍द्रीय इस बात पर होना चाहिए कि अधिक से अधिक हम पानी रोकें आप जो पानी रोकने की जो लघु सिंचाई योजना की बात करते हैं वह सिंचाई नाम हटा दीजिए जहां भी पानी रोकने की आवश्‍यकता है उसको कास्‍ट से नहीं जोड़ें और सरफेस वाटर को जहां भी रोका जा सकता है उसको पानी रोकें क्‍योंकि वह इनडाइरेक्‍टली पानी ग्राउण्‍ड वाटर को चार्ज करेगा और उससे पानी लोग बाग़ जमीन से पानी निकाल रहे हैं उसको उसका लाभ मिलेगा।

दूसरी चीज, हमारे प्रदेश में प्राथमिकता कम पानी से पैदा होने वाली फसल को देनी चाहिए और राजस्‍थान के किसानों ने कम पानी से पैदा होने वाली फसल को अपनाया और पूरे हिन्‍दुस्‍तान में एक कीर्तिमान स्‍थापित किया शायद सरसों के अन्‍दर सबसे ज्‍यादा सरसों की खेती 45 प्रतिशत, 35 से 40 प्रतिशत सरसों जो पैदा होती है इस देश के अन्‍दर पिछले 25 साल के अन्‍दर किसानों ने उस दिशा में प्रगति कर और आज हिन्‍दुस्‍तान में राजस्‍थान एक मस्‍टर्ड स्‍टेट कहलाता है मगर क्‍या बीती उस किसान के साथ, कहां राजस्‍थान के विधायकों ने और कहां सांसदों ने हमने हमारे किसानों को लेट डाउन किया है, हमने इस सदन के दो सौ सदस्‍य और मेम्‍बर आफ पार्लियामेंट ने कभी इकट्ठा होकर हमारी बात केन्‍द्र सरकार के सामने इस रूप में नहीं रखी कि इसको मस्‍टर्ड के सामने जो कठिनाइयां आ रही हैं, सरसों की खेती के मामले में किसानों के सामने जो परेशानियां आ रही हैं उनको दूर करें, आवश्‍यकता थी कि नेपाल और श्रीलंका से तेल का बिना उसकी रोक टोक के जो आयात हो रहा है उससे हमारे किसान प्रभावित हो रहे हैं। आज समर्थन मूल्‍य के ऊपर खरीद करने की व्यवस्था सरकार को इसलिए करनी पड़ रही है, समर्थन मूल्‍य क्‍या होता है मिनिमम सपोर्ट प्राइस और जब मिनिमम सपोर्ट प्राइस मैक्सिमम मार्केट प्राइस हो जाए तो यह स्थिति पैदा होती है। आज हम सर्कस में देखते हैं कि वहां पर जो हवा में झूले में काम करते हैं उनके लिए नीचे जाल रहता है अब अगर कहीं ऊपर से सर्कस में झूले में झूलने वाला आदमी गिर जाए तो जमीन पर नहीं गिरे और उस जाली पर रह जाता है ताकि उसकी मृत्‍यु नहीं हो, सपोर्ट प्राइस तो उस जाल के समान है मगर यहां तो पूरा सर्कस ही जाल पर हो रहा है, पूरी दावेदारी उस सपोर्ट प्राइस के ऊपर हो रही है। नतीजा यह हो रहा है कि आपके आज की तारीख में राजस्‍थान का काश्‍तकार जिसने सहकारी के माध्‍यम से तो आप तीन परसेंट बैंक की व्‍यवस्‍था कर दें बाकी बाजार में व्‍यवस्‍था, आड़तिये से, व्‍यापारी से साहूकारों से लेकर किसान को करनी पड़ती है और आज मैंने कल ही आंकड़े लिये हैं कम से कम जितनी सपोर्ट प्राइस उस आधार पर आपने सरसों खरीदी है उतनी सरसों काश्‍तकारों ने खुले बाजार के अन्‍दर व्‍यापारियों को 1400, साढ़े 1400 रुपये की कीमत पर बेची है। आप किसान को अगर सरसों की पैदावार में हतोत्‍साहित करेंगे, बाजार की व्‍यवस्‍था उसको हतोत्‍साहित करेगी तो उसे मजबूर होकर गेहूं जैसी फसल करनी पड़ेगी जो पानी ज्‍यादा उपयोग करती है और जब ज्‍यादा पानी उपयोग करती है तो हम जिस दिशा में ले जाना चाहते हैं जिस विषय पर चर्चा चल रही है उसके विपरीत हम जाएंगे इसलिए आवश्‍यकता यह है कि कम पैदावार की जो सरसों की फसल करनी है उस संरक्षण इस राजस्‍थान की विधान सभा में यहां से संकल्‍प पारित किया जाए और कलेक्टिवली कांग्रेस और बी.जे.पी. जो भी पार्टीज हैं वह लोग बाग़ दिल्‍ली में इस बात पर जोर दें कि हमारे राजस्‍थान जैसे सूखे प्रदेश को इसके लिए आवश्‍यक है कि यह बिना बेहिसाब 8 हजार करोड़ का एडिबल आयल जो हम इम्‍पोर्ट कर रहे हैं, नॉन एडिबल आयल भी आ रहा है, एक जोधपुर के सदस्‍य ने कहा था कि तेल से कुछ बनाते हैं तो वह जम जाता है।  

skp/akt/31.3.06/1410/2d/1

 

इसलिए जम जाता है कि नॉन एडीबल ऑयल, हर किस्‍म का ऑयल बाजार में आ रहा है और बाजार में जब व्‍यक्ति जाता है तो दो पैसे जिसके कम लगते हैं वह चीज लेने की कोशिश करता है क्‍योंकि उसका बजट सीमित है।

इसके अलावा, मैं आपसे निवेदन करूंगा कि राजस्‍थान में जो यह जल अभियान चलाया गया, इसमें जो स्‍टेट लेवल पर कमेटी बनाई, जिला लेवल पर कमेटी बनाई, वन मंत्री यहां विराजमान हैं, मुझे आश्‍चर्य है कि फोरेस्‍ट डिपार्टमेंट को उस जल अभियान से जोड़ा ही नहीं है, न तो स्‍टेट लेवल पर जोड़ा है और न डिस्ट्रिक्‍ट लेवल पर जोड़ा है। आप कल्‍पना कैसे कर सकते हैं पानी की, अगर आप वनों का संरक्षण नहीं करेंगे। वनों के साथ साथ जो मार्जिनल लैण्‍ड थी, जो मार्जिनल आपकी भूमि है, चाहे चरागाह की भूमि है, चाहे बंजर भूमि है उसको भी वृक्षों के ऊपर, जितना भी आपके स्‍टेट का बजट कंजरवेशन ऑफ फोरेस्‍ट और कंजरवेशन ऑफ वेस्‍ट लैण्‍ड पर केन्द्रित करेंगे तो वर्षों से आपको उसका लाभ मिलेगा।

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, सरकार तो बातों में मशगूल है और कितने महत्‍वपूर्ण सुझाव माननीय सदस्‍य दे रहे हैं, कोई ध्‍यान नहीं दिया जा रहा है।

श्री उपाध्‍यक्ष: सब दे रहे हैं ध्‍यान।

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): बहुत महत्‍वपूर्ण सुझाव हैं इनके, आप बातों में मशगूल हो रहे हो।

श्री भरत सिंह (दीगोद): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं यह निवेदन कर रहा हूं कि आपके यहां प्रदेश में यह हो रहा है, मैं निवेदन करना चाहूंगा कि हमारे यहां पर अधिक ध्‍यान जो बैंक से लोन भी लिया जाता है, चाहे विश्‍व बैंक से लिया, अब यह जापान बैंक से लोन की बात करें, 600 करोड़ का हम लोन ले रहे हैं पर लोन किसके लिए ले रहे हो ? जो एग्‍जीस्टिंग सिंचाई परियोजनाएं हैं उनको हम चलाकर उनसे राशि वसूल नहीं कर सके। एक व्‍यवस्‍था जो हमने क्रियेट की उसी के ऊपर हम दूसरा लोन लेकर के खराब काम को ठीक करने के लिए लोन ले रहे हैं। नई दिशा में तो हम बढ़ ही नहीं पा रहे हैं। जो चीज हमने डवलप कर ली, आज जब तक सिंचाई विभाग जो शुल्‍क वसूल करता है उससे और जो पम्‍प के माध्‍यम से ग्राउंड वाटर से जो सिंचाई होती है उसमें जो खर्चा होता है, जब तक इसमें कहीं न कहीं संतुलन नहीं होगा वहां तक उन किसानों के साथ घोर अन्‍याय है जो अपने बलबूते के ऊपर ग्राउंड वाटर से अपनी खेती कर रहे हैं। रात-दिन का अन्‍तर है। जो किसान फ्लो इर्रिगेशन से काश्‍त कर रहा है उसको जो चार्जेज देने पड़ते हैं उसकी तुलना में जो ग्राउंड वाटर से सिंचाई कर रहा है उसको चार्जेज देने पड़ते हैं उनमें बहुत अन्‍तर है और उसके बाद अभी सिंचाई खतम हुई, बिजली के बिल आ जाएंगे, दुनिया भर की वसूली होगी और जो लोन भी लिया जाता है वह भी सिंचाई विभाग के लिए। सिंचाई विभाग तो एग्जिस्‍ट ही उन लोगों के लिए कर रहा है जो ग्राउंड वाटर से सिंचाई नहीं कर रहे हैं। इसलिए मेरा आपसे यह निवेदन है कि जो भू-जल डिपार्टमेंट है, भू-जल डिपार्टमेंट का काम ही सिर्फ जल का दोहन करना रह गया है। एक हैण्‍डपम्‍प लगाता है उसमें 50 हजार रुपये खर्च कर रहा है। भू-जल डिपार्टमेंट का जो साल का खर्चा स्‍टेट में होता है उसका लगभग आधा खर्चा जल संरक्षण विभाग पर विभाग करे। वह तो जल दोहन डिपार्टमेंट हो गया। उस डिपार्टमेंट का काम ही यह रह गया कि हम किस तरह से पानी निकाल सकें। जाना तो हमें एक दिशा में है और हम जा दूसरी दिशा में रहे हैं और हम उम्‍मीद करते हैं कि जल संरक्षण हो। इसलिए माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं काफी निवेदन कर जाऊंगा, और भी माननीय सदस्‍य विचार रखना चाहेंगे, मैं तो आपसे निवेदन करता हूं कि जब भी यह जल नीति राज्‍य सरकार बनाये, जब भी कोई लाये इसके लिए यह पर्याप्‍त नहीं है कि आपने एम एल ए से सुझाव पूछ लिये क्‍योंकि पूरी अक्‍ल एम एल ए में ही नहीं धरी हुई है। आपकी जो भी योजना है उसको समाचार पत्र में प्रकाशित करें और पूरे राजस्‍थान की जनता से सुझाव मांगे। जिला परिषद में जाए यह महत्‍वपूर्ण विषय है, उस सम्‍बन्धित विभाग के मंत्री जाएं और जिला परिषद के सम्‍भाग स्‍तर पर बैठक लें क्‍योंकि जो योजना हाड़ौती में लागू हो सकती है वह बीकानेर के लिए कारगर नहीं होगी और जो वहां कारगर होगी वह हमारे यहां लागू नहीं होगी। इसलिए पूरे राजस्‍थान में अलग-अलग जो डिवीजन हैं उस हिसाब से आपको इस पर चिंतन करना पड़ेगा। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपने मुझे समय दिया, धन्‍यवाद।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य श्री राजेन्‍द्र राठौड़। एक व्‍यवस्‍था सुनिये थोड़ी। राठौड़ साहब, एक मिनट। माननीय सदस्‍य श्री राजेन्‍द्र राठौड़ और श्री सुभाषचन्‍द्र शर्मा, दोनों की तरफ से बोलने के लिए पर्ची आई है पर मैं निवेदन यह करना चाहूंगा कि पिछली बार आप इस विषय पर बोल चुके हैं इसलिए अब असमर्थता जाहिर है। अन्‍य कोई सदस्‍य बोलना चाहें।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अनुमति नहीं है क्‍या उपाध्‍यक्ष महोदय?

श्री उपाध्‍यक्ष: नहीं है। श्री मदन राठौड़ और डा. जालमसिंह रावलोत संशोधन प्रस्‍तुत करेंगे।

संकल्‍प

राज्‍य में जल संरक्षण एवं प्रदूषण निवारण सुनिश्चित करने विषयक

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूं कि संकल्‍प संख्‍या 14/2005 के स्‍थान पर निम्‍न प्रकार प्रतिस्‍थापित किया जाय...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): दूसरा तथ्‍य रखना चाह रहा था।

श्री उपाध्‍यक्ष: बात तो वो की वो है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): सारी स्थिति बदल गई है। सरकार कानून लेकर के आ गई। जिस मंतव्‍य के साथ माननीय सदस्‍य ने यह संकल्‍प रखा था उसके बाद सरकार ने उस सन्‍दर्भ में कानून बना लिया। सारी स्थिति बदल गई है। अगर आप अनुमति दें तो बोलूं, अनुमति नहीं दें तो कोई खास बात नहीं है।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री मदन राठौड़।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): नहीं, आप जल संसाधन मंत्री हो क्‍या ?

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): ''यह सदन संकल्‍प करता है कि सरकार राज्‍य में पुदूषण निवारण सुनिश्चित करे।''

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): प्राइवेट मैम्‍बर डे में एक सदस्‍य के नाते मेरा अधिकार है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): हां, है। यस, राइट। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, एक मिनट। मदन जी, एक मिनट। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, हम यह व्‍यवस्‍था आपसे चाहते हैं, यह तो चर्चा कर रहे हैं सदन में जो पुराने संकल्‍प थे उन पर। ये जो नये लाटरी में संकल्‍प निकले हैं इन संकल्‍पों को आप प्रस्‍तुत करायेंगे क्‍या ? क्‍या होगा इसके बारे में तो कोई व्‍यवस्‍था दें। सारे सदस्‍यों में यह भ्रांति है, कुछ तय ही नहीं किया आपके सैक्रेटेरिएट ने।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, इस पर वादविवाद, बहस पूरी होने के बाद में दूसरे संकल्‍प लिये जाएंगे।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): आज ही लिये जाएंगे न ?

श्री उपाध्‍यक्ष: आज ही लिये जाएंगे।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): हम यह चाहते थे कि आप रख तो दें क्‍योंकि ये लैप्‍स तो होते नहीं। जब कभी भी प्राइवेट मैम्‍बर डे आयेगा उस पर चर्चा हो जाएगी अकोर्डिंग टू असेम्‍बली रूल्‍स। ये संकल्‍प रखवा लेने चाहिए थे।

श्री उपाध्‍यक्ष: आज ही रखवा लेंगे।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूं कि संकल्‍प संख्‍या 14/2005 के स्‍थान पर निम्‍न प्रकार प्रतिस्‍थापित किया जाय:- ''यह सदन संकल्‍प करता है कि सरकार राज्‍य में प्रदूषण निवारण सुनिश्चित करे।''

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, यह आपकी व्‍यवस्‍था फाइनल है क्‍या ?

श्री उपाध्‍यक्ष: हां, इस सम्‍बन्‍ध में फाइनल ही मानें। संशोधन वगैरह आ रहे हैं, कोई बोलना चाहेंगे तो बुला देंगे।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, इस सम्‍बन्‍ध में अपने यहां नियम बना हुआ है कि स्‍पीकर वो सर्वश्रेष्‍ठ है जो सबसे कम बोले और आप सबसे कम बोलते हो और आपने यों कर दिया। (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री जालम सिंह रावलोत। हां, मदन जी, आपने रख दिया ?

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): मैंने एक रखा है, दूसरा भी रखना है। उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूं कि संकल्‍प संख्‍या 16/2005 के स्‍थान पर निम्‍न प्रकार प्रतिस्‍थापित करें:- ''यह सदन संकल्‍प करता है कि सरकार राज्‍य में जल संरक्षण सुनिश्चित करे।''  पहला मैंने रखा था कि ''यह सदन संकल्‍प करता है कि सरकार राज्‍य में प्रदूषण निवारण सुनिश्चित करे।'' बोलने की अनुमति नहीं है ?

श्री उपाध्‍यक्ष: रखने दो यह। डाक्‍टर जालम सिंह रावलोत।

डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूं कि संकल्‍प संख्‍या 16/2005 की तृतीय पंक्ति में प्रयुक्‍त शब्‍द ''के लिये आवश्‍यक कानून बनावें'' के स्‍थान पर शब्‍द ''को सुनिश्चित करें।'' प्रतिस्‍थापित किया जाय।

श्री उपाध्‍यक्ष: इस सम्‍बन्‍ध में कोई सदस्‍य बोलना चाहे ? संशोधन जो उन्‍होंने दिया है, आप बोलिये।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): उपाध्‍यक्ष महोदय, प्रदूषण की समस्‍या बहुत गंभीर है। केवल अपन जयपुर को ही देखना चाहें वायु प्रदूषण के बारे में तो एम आई रोड और उसके आस-पास में जो लोग निवास करते हैं उन्‍होंने भी बहुत शिकायतें की हैं। स्‍वयं पर्यावरण मंत्री जी भी पहले एम आई रोड के पास में किसी क्‍वार्टर में, नम्‍बर तो मझे ध्‍यान नहीं, वहां रहते थे तो वहां के लोग यह बताया करते हैं कि जब वो अपने मकानों के ऊपर या मकानों में कपड़े सुखाते हैं तो चिटकनी लगाते हैं तो जहां चिटकनी लगी होती है उसका कलर अलग रह जाता है और बाकी कपड़े का कलर अलग हो जाता है। यानि यह बहुत गंभीर समस्‍या है वायु प्रदूषण की। जल प्रदूषण के बारे में भी हम जानते हैं कि कई कारखाने इस प्रकार के हैं, कोई तो एल्‍कोहलिक वाटर निकालते हैं, कोई एसेडिक वाटर निकालते हैं। यह बहुत बड़ी समस्‍या है। जल प्रदूषण के बारे में अभी ई टीवी में भी कई माननीय सदस्‍य बता रहे थे, कई स्‍थानों के कारखानों के बारे में बताया कि वहां जमीन बंजर हो रही है। उस पानी में यदि कोई जानवर निकल जाए तो उसके खुर खराब हो जाते हैं। यही नहीं, कुओं में भी कलर्ड वाटर निकलता है, रंगीन पानी कुओं में भी मिल रहा है। तो इसका समाधान निश्चित रूप से किया जाना चाहिए। यद्यपि हमारी सरकार बहुत सावधान है, वह प्रयास कर रही है, जल प्रदूषण निवारण संयंत्र लगा रही है, करोड़ों रुपये लगाकर के इस प्रकार के संयंत्र तैयार किये जा रहे हैं लेकिन इसमें भी एक बहुत बड़ी समस्‍या है।...

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उपाध्‍यक्ष महोदय, जहां पर एल्‍कोहलिक वाटर को शुद्ध करने के लिए जो संयंत्र लगाये जा रहे हैं, वहां पर एसिडिक वाटर को निकालने के लिए जो सिंथेटिक इकाई लगी हुई है, सिंथेटिक इकाई उसका पानी निकाल रही है, एसिडिक वाटर को वहां पर निकाल रही है, यह बात बिलकुल सही है कि इसका भी अनुपात बराबर हो तो न्‍यूट्रल होकर पानी के शुद्ध होने की सम्‍भावना बनती है लेकिन आजकल सिंथेटिक कपड़े बनाने के कारखाने बहुत ज्‍यादा लग गये हैं तो सिंथेटिक कपडा़ जहां तैयार होता है तो वह एसिडिक वाटर बाहर निकलता है तो एसिडिक वाटर बाहर निकालने के लिए प्रदूषण निवारण संयंत्र बिलकुल फेल है। इस प्रकार की समस्‍या बहुत देखने में आई है।

उपाध्‍यक्ष महोदय, पाली जिले में एक बाँध बना हुआ है नेड़ा बाँध, उस बाँध को यदि आप जाकर देखें तो उस बाँध पर पूरा का पूरा रंगीन पानी फैला हुआ है, उस बाँध पर एसिडिक पानी फैला हुआ है। वास्‍तव में यह बात बिलकुल सही है। इसके निवारण की समुचित व्‍यवस्‍था होनी चाहिए।

उपाध्‍यक्ष महोदय, आज एक बहुत बड़ी समस्‍या है ध्‍वनि प्रदूषण की। यदि कहीं भी किसी प्रकार का भोंपू बजायेंगे तो हम जानते हैं कि आज कई वैज्ञानिक काम कर रहे हैं और वैज्ञानिक खोज भी कर रहे हैं और वह इस प्रकार की खोज कर रहे हैं कि रामायण काल के भगवान राम के शब्‍दों को पकड़ने का प्रयास कर रहे हैं। भगवान श्रीकृष्‍ण ने क्‍या बोला था, उन शब्‍दों को भी पकड़ने की कोशिश कर रहे हैं और पकड़ पाने में सफल भी हुए हैं तो आपके माध्‍यम से मेरा निवेदन करना यह है कि जब उस काल में बोले हुए शब्‍दों को भी पकड़ने की कोशिश चल रही है तथा इस पर भी खोज चल रही है, इसका मतलब है कि हम जो बोल रहे हैं, वह ध्‍वनि वातावरण में निश्चित रूप से विद्यमान रहती है, वह समाप्‍त नहीं होती है तो आज जिस प्रकार की ध्‍वनि चारों ओर से, माइक के माध्‍यम से, भोंपू के माध्‍यम से, हार्न के माध्‍यम से जो ध्‍वनि फैलती जा रही है, यह ध्‍वनि निश्चित रूप से वातावरण में गुंजायमान है और वातावरण में गुंजायमान है तब यह स्थिति एक समय आएगी कि पूरा वातावरण, पूरा आभा मण्‍डल सब जगह यह ध्‍वनि आपस में टकराकर क्‍या स्थिति बनेगी, इसकी कल्‍पना की जा सकती है। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इसके बारे में निश्चित रूप से चिंता करने की आवश्‍यकता है। यह रोक लगी हुई है कि आपके कहीं अस्‍पताल हो, उसके बाहर भोंपू नहीं बजायेंगे। कहीं स्‍कूल-विद्यालय हो तो वहां भोंपू नहीं बजायेंगे लेकिन मैं आपके माध्‍यम से जानना चाहूंगा, आजकल कितने भोंपू बजाने वालों के खिलाफ में कोई चालान किया गया? तो मैं सोचता हूं कि इस बारे में कोई चालान नहीं किया गया, इसकी अनदेखी की जा रही है, यह ठीक नहीं है। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं चाहूंगा कि यह ध्‍वनि प्रदूषण, जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण, इन पर रोक लगाई जानी चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इस बारे में प्रदूषण नहीं फैलने दिया जाये। हालांकि उपाध्‍यक्ष महोदय, आजकल हम यह देख रहे हैं कि  एक सांस्‍कृतिक प्रदूषण भी हो रहा है। यह भी एक प्रदूषण है, इस पर...(व्‍यवधान) नहीं बोलूं इस पर? तो ये मना कर रहे हैं, सांस्‍कृतिक प्रदूषण से शायद इन्‍हीं के ऊपर चोट हो सकती है। सांस्‍कृतिक प्रदूषण भी बहुत खतरनाक है। उपाध्‍यक्ष महोदय, जहां सांस्‍कृतिक प्रदूषण की बात है, हमको एक बात यह समझनी पड़ेगी....

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): चोट वाली बात मत बोलो, बिना चोट के ही अपनी बात कह दो। (व्‍यवधान) प्रतिपक्ष के नेता महोदय, यह गैर सरकारी संकल्‍प पर विशेष जोर देकर के, प्रतिपक्ष के नेता महोदय, मैं निवेदन कर रहा हूं कि यह शुक्रवार को गैर मेम्‍बर डे रहा है, इसके लिए बहुत जोर था कांग्रेस पार्टी की ओर से और माननीय अध्‍यक्ष महोदय भी इस बात को चाहती थी कि यह संकल्‍प का दिन होना चाहिए, लेकिन मुझे यह लगता है कि कांग्रेस पार्टी गम्‍भीर नहीं है, इस विषय पर न तो कोई अमेंडमेंट आये हैं, न बोलने वालों की लिस्‍ट है। अब इसका मतलब यह है कि यदि यह सदन पाँच बजे चला जायेगा तो यह होगा कि आपका इरादा ठीक नहीं है इसलिए कम से कम, नहीं और हैं, पहले इस पर डिसीजन होगा। अब डिसीजन होगा तो....(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): उपाध्‍यक्ष महोदय, सरकारी मुख्‍य सचेतक से स्‍टेटमेंट से मैं सहमत नहीं हूं कि हम सक्रिय नहीं हैं, सजग नहीं हैं, विजिलेंट नहीं हैं। आपका प्रस्‍ताव इतना अच्‍छा है, अपने आपमें वह कम्‍प्‍लीट है, परफेक्‍ट है, इसमें संशोधन की जरूरत नहीं है और कोई जरूरत नहीं होती है कि संशोधन आये। कोई कमी हो तो ही संशोधन आते हैं। आप इसमें सीधी बहस करवा दीजिये, हम तैयार हैं।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): तो बहस में ही भाग नहीं ले रहे हैं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): हम भाग लेंगे। हम बैठे हैं।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): आप यह कम्‍प्‍लीट है तो फिर बताओ तो सही कि क्‍यों कम्‍प्‍लीट है? यह रामनारायणजी ने रखा है प्रस्‍ताव, वह यहां है नहीं, प्रस्‍तावक ही नहीं है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मैं कह रहा हूं कि रामनारायणजी ने रखा है या महावीरजी ने रखा है...

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): आप 120 में से 20 हो। नहीं नहीं, आप 120 में से 20 हो और हम 55 में से 10 हैं, देख लो आप संख्‍या, कौन गम्‍भीर है और कौन नहीं है मुख्‍य सचेतक महोदय।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): वह रामनारायणजी नहीं है तो दूसरे रामनारायणजी तो हैं। (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): हम आपके मूल प्रस्‍ताव पर ही सहमत हैं।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): उपाध्‍यक्ष महोदय, अभी टोडारायसिंह से आने वाले माननीय सदस्‍य ने जल संरक्षण के बारे में आंकड़े प्रस्‍तुत किये....

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): मैं जगे हुए की बात कर रहा हूं, सोने वालों की बात नहीं कर रहा हूं।

एक माननीय सदस्‍य: हम सब जगे हुए हैं, कोई नहीं सो रहा है।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। आप जालमसिंह जी को बोलने दीजिये। आपकी बात आ गई।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): नहीं, जल संरक्षण की बात रह गई।

श्री उपाध्‍यक्ष: जल संरक्षण की बात एक ही है। श्री जालमसिंह जी रावलोत। (व्‍यवधान)

डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): उपाध्‍यक्ष महोदय, जल ही जीवन है, जल है तो कल है। हमारे राजस्‍थान प्रांत में जल की बहुत कमी है, जल बहुत सीमित है। मानव जीवन में आक्‍सीजन के बाद में सबसे ज्‍यादा किसी चीज की जरूरत रहती है तो वह पानी की रहती है और उसके लिए निश्चित रूप से यह संकल्‍प उचित है और सदन की भी इस बारे में चिंता स्‍वाभाविक है। कई माननीय सदस्‍यों ने जल संरक्षण के बारे में जो चिंता व्‍यक्‍त की है, मैं उसी विषय पर आना चाहता हूं पर पिछली बार जब यह संकल्‍प आया, उसके बाद में हमारी सरकार ने जल अभियान चालू किया है, वह उसी भाव को ध्‍यान में रखते हुए किया है और आज जल अभियान का पहला चरण पूर्ण होने जा रहा है और दूसरा चरण कल से चालू होने वाला है। उसके माध्‍यम से सरकार, जल अभियान के माध्‍यम से राजस्‍थान में जयपुर जैसे बड़े शहर से लेकर गांव-ढाणी तक इस जल अभियान के माध्‍यम से जल संरक्षण की ओर पूरा ध्‍यान दिया गया है और इसमें सभी जन प्रतिनिधियों का समावेश किया गया है और पूरे सरकारी तंत्र को इसमें लगाया गया है, मैं उसका स्‍वागत करता हूं और वह काफी हद तक सफल हो रहा है। चूंकि हमारा राजस्‍थान क्षेत्रफल के हिसाब से देश का सबसे बड़ा राज्‍य है और जनसंख्‍या का भी बड़ा हिस्‍सा राजस्‍थान में रहता है लेकिन पानी की अतिरिक्त आवश्‍यकता है, उसको देखते हुए पूरे प्रयत्‍न सरकार ने किये हैं चाहे वह नर्बदा जल का मामला हो चाहे पंजाब-हरियाणा से पानी लाने का मामला हो या अभी जैसा टोडारायसिंह से आने वाले माननीय सदस्‍य ने कहा है, मध्‍यप्रदेश से भी जल को लाने के प्रयत्‍न हो रहे हैं लेकिन मुख्‍य विषय जल संरक्षण का है, उस बारे में भी हमें चिंता व्‍यक्‍त करनी है और उसके माध्‍यम से कोई हल निकालना है। जैसे हमारे यहां पर एनीकट निर्माण कार्य, बांधों का निर्माण कार्य और खास तौर से जो परम्‍परागत जल स्रोत हमारे राजस्‍थान में मुख्‍य आधार थे जल स्रोत के रूप में और वह काफी समय से खास तौर से पीएचईडी को काम पता है, उसकी ओर पूरा ध्‍यान नहीं दिया जा रहा है यानी बहुत कम ध्‍यान दिया जा रहा है। गांव में मुख्‍य आधार भी कुए और बावडि़यां ही रही हैं। अब इनकी ओर ज्‍यादा ध्‍यान देने की आवश्‍यकता है। खास तौर से जल संरक्षण के हिसाब से, एकदम जन जागरण के रूप में यह काम लिया जाना चाहिए।  उपाध्‍यक्षय महोदय, प्राचीन समय में हम सबको जानकारी है कि हमारे गांवों में जल संरक्षण के हिसाब से कितने शानदार कानून थे जिनके माध्‍यम से कोई व्‍यक्ति जल संरक्षण में बाधा पहुंचाता था तो कड़ा कानून उस पर लागू होता था लेकिन वर्तमान समय में जितनी जल की आवश्‍यकता है, जल संरक्षण की आवश्‍यकता है, उसको ध्‍यान में रखते हुए हमको ग्रामीण स्‍तर पर कानून, पंचायत के द्वारा या सामान्‍य स्‍तर पर जो ग्रामीणों द्वारा बनाये जाते हैं, उसकी सिविल न्‍यायालय के द्वारा, एक तरह से रक्षण होना चाहिए नहीं तो गांव में तो कोई किसी को जेल डालने का प्रावधान या आर्थिक दण्‍ड का प्रावधान हो लेकिन सिविल न्‍यायालय के द्वारा उसका यदि संरक्षण नहीं होता है तो फिर वह कारगर नहीं हो पाता है। उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा यह निवेदन है कि सदन में यह संकल्‍प को पारित करायें ताकि हमारे यहां जल संरक्षण के कार्य को प्रभावी बनाया जा सके।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री बंशीलाल खटीक।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय,...

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): उपाध्‍यक्ष महोदय, संशोधन के बारे में, वह चूंकि मैं संकल्‍प रखने वाला हूं, मेरे संकल्‍प को आपने स्‍वीकार किया, उसके बाद में मैं बोलूंगा या सबको बुलाकर आप मेरी बात सुनेंगे?

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): नहीं, संशोधन के पक्ष में, विपक्ष में आप बोलेंगे कि संशोधन रखा है या नहीं रखा है।

श्री उपाध्‍यक्ष: संशोधन पर आप बोलेंगे, बुलायेंगे आपको।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): यहां तो आप प्रभारी मंत्री की तरह जवाब दोगे। यह संकल्‍प आपने रखा है। जैसे किसी बिल पर कोई संशोधन रखता है तो मंत्री कहता है कि संशोधन सही है या नहीं। यह किताब देख लीजिये, आपके प्रस्‍ताव पर, संकल्‍प पर चूंकि संशोधन किसी ने रखा है, आप उससे एग्री हो या नहीं हो, जवाब आपको देना है। 

Jkj/akt/1430/2f/31032006

 

आप उससे एग्री हो या नहीं हो, यह आपको देना है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: आपने संकल्‍प प्रस्‍तुत किया है, जवाब तो देने वाले देंगे।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: जवाब यही देंगे, आप नहीं देंगे, देख लीजिये आप।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: नहीं-नहीं। (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद: इसमें आप देख लीजिये नियम, यह जिसने संकल्‍प रखा है, उसका संशोधन सही है या नहीं है, वह देगा जवाब।  यह, संसदीय कार्य मंत्रीजी, आपको जानकारी सही नहीं है, यही देंगे खुद ही।  यह गैर सरकारी का और मतलब क्‍या हुआ।

श्री उपाध्‍यक्ष: सब जानकारी है, यह जान बूझ कर...

मोहम्‍मद माहिर आजाद: नहीं-नहीं, यह अभी संसदीय कार्य मंत्रीजी कह रहे थे कि जवाब तो हम देंगे, इनको यह गलतफहमी है कि यह गैर सरकारी बिल का जो, यह बिल के रूप में रखा जाता है और यह बिल जिस मेम्‍बर ने रखा है उसके बारे में जो अमेण्‍डमेंट आये हैं, उन अमेण्‍डमेंट्स से वह एग्री करता है या नहीं करता है, डिसएग्री करता है तो किस आधार पर करता है, वो ही यहां पर जवाब देगा।

श्री उपाध्‍यक्ष: हां, यह आपके बोलने के बाद में जवाब देना है, कह रहे हैं।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: हां, बिलकुल।

श्री रामनारायण मीणा:  माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं, माननीय सदस्‍य ने जो इसका संशोधन प्रस्‍ताव पेश किया है उसके बारे में आपको दो बात करूंगा।  माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मूल संकल्‍प है, यह सदन संकल्‍प करता है कि राज्‍य सरकार राज्‍य में बढ़ते हुए प्रदूषण की रोकथाम हेतु समुचित व्‍यवस्‍था करे, इनका इसमें संशोधन है, यह सदन संकल्‍प करता है कि सरकार राज्‍य में प्रदूषण निवारण सुनिश्चित करे।  दोनों भावनाएं एक ही हैं माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय।  यह वास्‍तविकता है शिक्षा मंत्रीजी और आप भी मानते हैं और हम भी मानते हैं, दिल्‍ली में चार-पाँच साल पहले जब आदरणीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने फैसलानहीं दिया था सीएनजी बसें चलाने का, कितना प्रदूषण था।  आज सीएनजी बसें चलीं, सरकार ने अपनी जिम्‍मेदारी निभाई, सरकार कोई सी भी हो दिल्‍ली की, किस पार्टी की थी, मैं इसमें नहीं जाना चाहता, चूंकि आप समझदार हैं और कुछ कर सकते हैं मंत्रिमण्‍डल में बैठकर, उस आधार पर आपको अर्ज कर रहा हूं माननीय शिक्षा मंत्रीजी, गृह मंत्रीजी विराजमान हैं ही, सरकार की जिम्‍मेदारी है।  जिस प्रकार से हमारा देश आजाद हुआ, गांधीजी ने यही तो कहा था, हर सिर के ऊपर छप्पर होगा, पाठशाला होगी और पंचायत होगी।  आज जमाना बदल गया।  यदि प्रदूषणमुक्‍त आपका एनवायर्नमेंट नहीं हुआ, पाली की बात कह रहे थे राठौड़ साहब, बिलकुल सही है माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, पाली में जो स्थिति है, आज सिल्‍क के कपड़ों की, इनकी जो इण्‍डस्‍ट्रीज चल रही हैं, जिस तरह से बाँध में पानी पोल्‍यूटेड हो गया पूरे का पूरा, सिंचाई के लिए काम नहीं आ सकता, तो यह जो स्थितियां हैं, इन स्थितियों में क्‍या किया जायेगा सरकार के द्वारा, क्‍या किस तरह से अपने मूल एक्‍ट में संशोधन करके पूरे सदन को विश्‍वास में लेकर के हमने हमारी भावना अर्ज आपको की है माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, ऐसी स्थिति में आप देखिये, सरकार बिना कानून देखे, मैं गया था बारां, यहां पर्यावरण मंत्रीजी बैठे हैं, काली सिंध में एनीकट बन गया, नीचे के मोतीकुआ और दूसरे गांव जो हैं, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, उनके बच्‍चे अपाहिज पैदा हो रहे हैं, खुजलियां चल रही हैं, इतना पोल्‍यूशन हो गया, जो पानी बहकर जा रहा था उस पानी में अवरोध आ गया।  सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है, बहती नदियों में इस तरह से किसी भी इण्‍डस्‍ट्री को फायदा पहुंचाने के लिए न एनीकट बनाया जायेगा, न अवरोध पैदा किया जायेगा।  जगह-जगह अवरोध पैदा हो रहे हैं।  आप जयपुर में देख लीजिये, ना‍लियां नहीं बहती तो आज कितना, आपके इस नाले में कितना गंदा पानी आ गया, जंगल कट रहे हैं, आपने, माननीय शिक्षा मंत्रीजी, आपकी भावना से मैं प्रसन्‍न हूं, आपने सेज का मामला इसलिए उठाया था कि कोई तो ग्रीन लैण्‍ड होगी, कोई तो एरिया होगा, जयपुर के आसपास जिस तरह से अंधाधुंध तरीके से प्‍लाट काटे जा रहे हैं, जिस तरह से अंधाधुंध तरीके से ग्रीन लैण्‍ड को खत्‍म किया जा रहा है, हरा-भरा जयपुर, मुझे तो कागजों में भी दिखाई नहीं देगा थोड़े दिनों बाद।  इसलिए, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं तो यही अर्ज करना चाहूंगा आपके माध्‍यम से सदन से और सरकार से कि जो तरीका अपनाया जा रहा है, मेरा जहां तक ख्‍याल है मेरी बात से गृह मंत्रीजी भी इत्‍तफाक करेंगे, जयपुर की बसावट जैसी हिन्‍दुस्‍तान के या वर्ल्‍ड के नगरों में शायद ही किसी की हो।  आज जयपुर इसीलिए पिंक सिटी कहलाया जाता है कि यहां जिस तरह से चौड़े हैं, पहाडि़यां हैं, एनवायर्नमेंट मिलता है हमारे को, उस एनवायर्नमेंट का क्‍या होगा माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इसलिए सरकार की जिम्‍मेदारी है कि ग्रीनरी रहे, ग्रीन लैण्‍ड रहे, पैराफेरी बेल्‍ट रहे।  भवनों को आप चार-चार, पाँच-पाँच मंजिल पहुंचा रहे हैं आस-पास, उसकी कोई रोकथाम नहीं, इसलिए मेरा आपसे अर्ज करना है उपाध्‍यक्ष महोदय, जो संकल्‍प पेश किया है माननीय मदनजी राठौड़ ने, प्रदूषण निवारण का संशोधन प्रस्‍तुत करा, मूल संकल्‍प में रोकथाम हेतु समुचित व्‍यवस्‍था करे, इसमें कोई विशेष बात नहीं है, इसलिए इस संशोधन के मूल जो प्रस्‍ताव हैं, उन्‍हीं की भावना के अनुरूप मैंने पेश किया है, उन्‍हीं की भावना नहीं है, पूरे राजस्‍थानवासियों की भावना देखते हुए, सदन की भावना है, इसलिए मेरा आपसे अर्ज करना है कि जो यह प्रस्‍ताव है, इसको मूल का मूल ही रहने दिया जाय और इसके बारे में हम सुनिश्चित करें, सरकार को आदेशित करे यह सदन कि इसके बारे में जो भी उचित हो, सरकार के द्वारा किये जाने योग्‍य हो, उसको करे और राज्‍य में बढ़ते हुए प्रदूषण की रोकथाम हेतु समुचित व्‍यवस्‍था करने की जिम्‍मेदारी सरकार की है और इसके ऊपर जो भी करना हो, इस सदन का अधिकार है, उस सदन की भावना के मुताबिक सरकार काम करे और बढ़ते हुए प्रदूषण की रोकथाम के लिए समुचित व्‍यवस्‍था करे, यह मेरा आपसे अर्ज करना है और इसी भावना के साथ मैं आग्रह करूंगा सदन से भी, सरकार से भी कि यह हमारी भावना को समझे, यह भावना मेरे अकेले की नहीं है, पूरे राजस्‍थान की है। इसी के साथ, धन्‍यवाद।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री लक्ष्‍मी नारायण दवे।

श्री लक्ष्‍मी नारायण दवे(वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जो आपने प्रस्‍ताव किया है, आज मात्र राजस्‍थान और हिन्‍दुस्‍तान के लिए ही चिंता का विषय नहीं है, पूरे विश्‍व के लिए पर्यावरण प्रदूषण, यह हमारे लिए चिंता का विषय है।

Bhs/akt/4.7.2006/1440/2g

पिछली बार बॉयोमेडिकल व्‍यवस्‍था के बारे में पूरे एक वर्ष तक बॉयो मेडिकल वेस्‍ट के बारे में चर्चा की गयी थी और राज्‍य सरकार के द्वारा पर्यावरण मंत्रालय के द्वारा बॉयो मेडिकल वेस्‍ट के बारे में हमने जगह-जगह अपनी तरफ से प्रयास किये ।  राज्‍य सरकार ने जल के प्रदूषण को रोकने के लिए जल प्रदूषण अधिनियम, 1974, वायु प्रदूषण अधिनियम, 1971, पर्यावरण अधिनियम, 1976 और परिसंकटमय अपशिष्‍ट नियम, 1989, जैव चिकित्‍सा अपशिष्‍ट नियम, 1998  और नगरीय ठोस अपशिष्‍ट नियम, 2000, ध्‍वनि प्रदूषण नियम, 2000 इत्‍यादि जो लागू किये हैं इनका राज्‍य सरकार अपनी तरफ से प्रयास कर रही है कि जल प्रदूषण नहीं होवे, वायु प्रदूषण नहीं होवे और ध्‍वनि प्रदूषण नहीं होवे।  माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, अभी चर्चा की गयी थी पाली के लिए जो उद्योग हैं उन उद्योगों के बारे में मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि पाली में कुल उद्योग 667 हैं जिसमें रेड लाइन में 582 और नारंगी 85 हैं ।  संयुक्‍त उच्छिष्ट की मात्रा और घ्रुणता में परिवर्तन लाने के लिए राज्‍य सरकार ने अपनी तरफ से प्रयास कर और इसको अपग्रेडेशन के लिए एक कार्ययोजना बनाकर भारत सरकार को भेजी और उस कार्ययोजना के आधार पर कार्य प्रारम्‍भ कर दिया गया है और 2007 तक पाली के अन्‍दर उच्छिष्ट अपग्रेडेशन ट्रीटमेंट का अपग्रेडेशन हो जाएगा।  राज्‍य सरकार पूरी तरह प्रयासरत है राजस्‍थान में ध्‍वनि प्रदूषण हो चाहे वायु प्रदूषण हो चाहे जल प्रदूषण हो जहां-जहां छोटे-छोटे उद्योग हैं वहां पर संयुक्‍त उपचार संयंत्र लगाने के लिए हम पूरी तरह प्रयासरत हैं चाहे जसोल के अन्‍दर और पाली के अन्‍दर।  माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जहां पर 270 लघु वस्‍त्र हैं जो रेड लाइन में थे हमने 33 ए के तहत उनको जल और बिजली के कनेक्‍शन काटने के लिए आदेश पारित किये थे।  कुछ ऐसे प्रकरण जो राजस्‍थान उच्‍च न्‍यायालय और सुप्रीम कोर्ट के द्वारा स्‍थगन आदेश प्राप्‍त हैं स्‍थगन आदेश प्राप्‍त होने के कारण हम अपनी तरफ से पूरा प्रयास कर रहे हैं राज्‍य के अन्‍दर वायु प्रदूषण जल प्रदूषण अपनी तरफ से जीरा जल प्रदूषण तो हम नहीं कह सकते इसका तो आश्‍वासन नहीं दे सकते पर अपनी तरफ से पूरा प्रयास कर रहे हैं ताकि खेतों में आने वाले जल के अन्‍दर जो प्रदूषण हो रहा है उसके फैलाव को हम अपनी तरफ से रोकने का पूरा प्रयास कर रहे हैं।  माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं कि राजस्‍थान में जिस तरह से यह वातावरण बन रहा है यह वातावरण को सुधारने का दायित्‍व अगर कोई है तो पूरे राजस्‍थान के तमाम माननीय सदस्‍यों का है राजस्‍थान की 6 करोड़ जनता का है । हर व्‍यक्ति से इस प्रकार की जागृति आनी चाहिए, हर लोगों में सहभागिता की व्‍यवस्‍था होनी चाहिए ताकि एक अच्‍छा राजस्‍थान बने।  राजस्‍थान की जो भौ‍गोलिक परिस्थिति है जिसमें सौ साल से 26 साल अकाल पडा, बारिश की मात्रा औसतन से भी कम बारिश है और राजस्‍थान में फोरेस्‍टेशन 9.49 है।  हम अपनी तरफ से प्रयास कर रहे हैं। भारत सरकार के केन्‍द्रीय वन और पर्यावरण मंत्री जी की अध्‍यक्षता में पूरे भारतवर्ष के वन मंत्रियों की कांफ्रेंस हुई थी उस कांफ्रेंस में भी मैंने अपनी तरफ से निवेदन किया कि आप जो कल्‍पना करते हैं कि राजस्‍थान में 33 प्रतिशत का फोरेस्‍टेशन हो वो तब हो सकता है जब भारत सरकार पूर्वांचल के प्रदेश हैं उनको जिस हिसाब से पैकेज देती है उसी तरह राजस्‍थान को अन्‍य प्रदेशों को और राजस्‍थान का जो विस्‍तृत भौगोलिक क्षेत्रफल जहां दो तिहाई मरुस्‍थलीय क्षेत्रफल है इसको दृष्टिगत रखते हुए राजस्‍थान को स्‍पेशल दर्जा दिया जाना चाहिए।  राजस्‍थान को स्‍पेशल पैकेज दिया जाना चाहिए ताकि राजस्‍थान में फोरेस्‍टेशन बढ़े और एक ऐसा अच्‍छा वातावरण मिले। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, ऑक्‍सीजन हमारी प्राणवायु है और इसको अगर कोई गुरुत्‍तर दायित्‍व संभालते हैं तो हमारे वन अधिकारी, हमारे फोरेस्‍ट के अधिकारी और  35-40 किलोमीटर वन क्षेत्र में एक फोरेस्‍ट हमें मिला हुआ है।  1986 के बाद में अभी तक भर्ती नहीं हुई है राजस्‍थान सरकार से हम पूरा प्रयास कर रहे हैं ताकि पर्यावरण की व्‍यवस्‍था सुव्‍यवस्थित हो सके अच्‍छा फोरेस्‍टेशन हो सके और 9.49 फोरेस्‍टेशन की बढ़ोतरी और जहां राज्‍य सरकार के विद्यालय हैं जहां चिकित्‍सालय हैं जहां चारागाह है जहां राजकीय भूमि है उस भूमि में भी हम पलांटेशन को बढ़ाने के लिए व्‍यवस्‍था कर रहे हैं इसके साथ में हम यह भी कर रहे हैं कि जिन गांवों के पास में फोरेस्‍ट है उन गांवों के अन्‍दर वन सुरक्षा समितियों की भी व्‍यवस्‍था करने जा रहे हैं। राजस्‍थान में 4244 सुरक्षा समितियां हैं जो अच्‍छे ढंग से वहां पर वनों की देखभाल करती है जिन क्षेत्रों में नहीं हैं उसके लिए भी हम अपनी तरफ से प्रयास कर रहे हैं।  मैं आपसे निवेदन करना चाहूंगा कि माननीय सदस्‍यों ने जो यह चिन्‍ता प्रकट कर यह जो प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत किया है राज्‍य सरकार कानून सम्‍मत जो 1974 और एयर एक्‍ट, वाटर एक्‍ट के जो भी प्रावधान हैं उनको पूर्णतया लागू करने का अपनी तरफ से पूरा प्रयास कर रहे हैं इसलिए मैं चाहूंगा कि जो आपने प्रस्‍ताव किया इसको पारित किया जाए तो इसमें कोई एतराज नहीं।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री राजेन्‍द्र जी राठौड़।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, श्री रामकिशोर जी मीणा, सदस्‍य विधान सभा...।

श्री रामकिशोर मीणा (सिकराय): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं इसमें थोड़ा... माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जो संशोधन आये थे इसके बारे में मुझे निवेदन करना है।  दो माननीय सदस्‍यों ने संशोधन दिये थे कि इसमें जल...।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): इसमें 112 है माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, रूल 112 आप पढ़े कि उसी टाइम पर संशोधन प्रस्‍ताव जो होना था हो गया अब दुबारा होना नहीं चाहिए था मैं यहां के सकेटेरिएट की काबिलीयत के बारे में कोई बात नहीं करना चाहता लेकिन इतने दिनों बाद में कोई संशोधन प्रस्‍ताव पास नहीं होता है जो संशोधन प्रस्‍ताव होना था उसी टाइम हो गया इसलिए कृपा करके जो संशोधन प्रस्‍ताव वो तो इसी से मिलता जुलता है अलग भी नहीं है...।

श्री उपाध्‍यक्ष: अलग नहीं है।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): ...इसलिए यह मूल प्रस्‍ताव को एज इट इज मेरा जहां तक ख्‍याल है रामकिशोर जी मैं कोई गलती नहीं कर रहा हूं क्‍योंकि हो गया और संशोधन प्रस्‍ताव दे दिया वो अभी कागज में आ गया बाकी वास्‍तव में अब इतने दिनों बाद में संशोधन प्रस्‍ताव का इन संकल्‍पों में कोई नहीं होता है रूल्‍स के हिसाब से ।

श्री उपाध्‍यक्ष: कर रहे हैं उसको वैसे भी अस्‍वीकार कर रह रहे हैं। श्री राजेन्‍द्रजी राठौड़।

श्री रामकिशोर मीणा (सिकराय): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, दो माननीय सदस्‍यों ने ....।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): मुझे पुकारा है।

श्री उपाध्‍यक्ष: इस संशोधन के बारे में ही बोलना चाहते हैं?

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): मैं यह जो संशोधन है और जो प्रस्‍ताव आया है उसके बारे में बोलना चाहता हूं कि जो यह संकल्‍प प्रस्‍तुत किया गया है जल संरक्षण का जल संरक्षण हेतु आवश्‍यक कानून बनाया जाए एवं बढ़ते हुए प्रदूषण की रोकथाम हेतु समुचित व्‍यवस्‍था करें। यह बहुत प्रोग्रेसिव और एक अच्‍छा संकल्‍प है।  जैसा माननीय मंत्री जी ने भी स्‍वीकार किया है कि आज हमारा, वैसे जल संरक्षण और पर्यावरण एक दूसरे से मिलता हुआ विषय है लेकिन आज तक इस प्रदूषण नियंत्रण पर और जल सरंक्षण पर किसी प्रकार का भी ध्‍यान नहीं दिया गया इसकी वजह से हमारा प्रदूषित वातावरण बिगड़ता चला गया।  इस कारण से जो हमारे जल संरक्षण के कदम उठाये गये वो निष्‍फल हो गये इसलिए यह चिन्‍ता जो की गयी है यदि प्रारम्‍भ से, क्‍योंकि हम जानते हैं कि हमारे यहां हिन्‍दुस्‍तान का क्षेत्रफल के हिसाब से दस प्रतिशत हिस्‍सा राजस्‍थान का है और पानी के हिसाब से एक प्रतिशत पानी राजस्‍थान में आता है इसलिए हमारे यहां पर विशेष ध्‍यान देने की आवश्‍यकता रहती है लेकिन दुर्भाग्‍य है कि ये हम नियंत्रण की बात करते हैं और उसके सुपरविजन की बात करते हैं लेकिन वास्‍तव में जो सुपरविजन हमको राजस्‍थान विधान सभा के हिसाब से जो कमेटियां हैं जो हमारे मंत्रिमंडल को करना चाहिए था वो नहीं करके हमने केवल भाषणों  से अपनी इतिश्री कर ली है।  हमने प्रयास भी किया हिन्‍दुस्‍तान सरकार ने राजस्‍थान सरकार ने प्रयास किये हमारी इस दृष्टि से इंदिरा गांधी कैनाल बनायी गयी।  इस दृष्टि से हमारे यहां पर माही डेम बनाया गया और जल संरक्षण को किया गया लेकिन कहीं पर्यावरण के नाम पर कहीं इस नाम पर पर्यावरण यदि जल संरक्षण होता है तो पर्यावरण बढ़ता है परन्‍तु वहाँ पर पानी रोकने की बात आये तो हम रोकने की इजाजत नहीं देते, इस प्रकार की विसंगतियां हमारे कानून में रह जाती है जिसका हमने आज तक ध्‍यान नहीं दिया और इस पानी के उपयोग के ऊपर ध्‍यान नहीं दिया।  माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि 1962 में जो इंदिरा गांधी कैनाल और जिसका हमारे पानी का उपयोग हमको करना चाहिए था और सात साल में यह योजना पूरी हो जानी चाहिए थी, यह कह कर पूर्व सरकारों ने कि हमारे पास, वहां तो सांप हैं, बिच्‍छू हैं, कंछले हैं और हमारे इंजीनियर्स काम नहीं कर सकते। प्रभावी ढंग से तो हमने नियंत्रण नहीं किया और जो केवल 67-62 करोड़ रुपये की योजना थी आज उसमें लगभग दो हजार करोड़ रुपये खर्च हो गये।  एक तरफ तो हम पैसे की बचत  की बात करते हैं और दूसरी तरफ अनाप-शनाप पैसा हमने खर्च किया। इसी प्रकार माही डेम का हम देखते हैं...                                                  

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माही डेम जो इतना बड़ा डेम है जिसमें आधा हिस्‍सा हमारा और आधा हिस्‍सा गुजरात का है । 1983 में जो माही डेम बनाया गया , 1983 में वह डेम बनकर पूरा हो गया उसमें 80 हजार हैक्‍टेयर क्षेत्र सिंचित होना था उसके बाद 1 लाख 24 हजार हैक्‍टेयर क्षेत्र का उसमें विस्‍तार करना था लेकिन उस पानी को पडा हुआ रखा, उस के उपयोग की किसी ने नहीं सोची । हम अपराधी हैं एक तरह से यह हमने देरी से विचार किया । आज आ यह कह रहे हो इसका मैं समर्थन कर रहा हूं लेकिन हमने इसमें सुधार किया, हमने इसको माना कि नहीं, इसको लाना चाहिये । इतना पानी हमारे पास पडा हुआ है हम एक तरफ तो कहते हैं कि पानी की कमी है, राजस्‍थान में सरफेस पानी नहीं है और दूसरी तरफ जो पानी है उसका उपयोग नहीं किया, केवल 10 परसेंट पानी का हमने उपयोग किया है । जो उसकी नहरें बन जानी चाहिये थी आज उस माही डे पर एक पेयजल की स्‍कीम नहीं है और इतना पानी है । बीसलपुर में जितना पानी है उससे दोगुना पानी माही डेम में है । बीसलपुर में 1/3 पानी केवल सिंचाई के लिये है और 2/3 पानी ड्रिकिंग वाटर के लिये है लेकिन माही डेम में दोगुना पानी होते हुए भी बीसलपुर का जितना 1/3 भाग जो सिंचाई के लिये है उतना पानी माही डेम में केवल 80 हजार हैक्‍टेयर पानी का उसमें रखा है वह 80 हजार हैक्‍टेयर भी आज तक 1982 में बाँध बनने के बाद आज तक 80 हजार हैक्‍टेयर की सिंचाई भी हम नहीं कर सके इसके लिये कौन दोषी है । हम केवल भाषणों से ठीक नहीं कर सकते हमको कहीं न कहीं कडे कदम उठाने पडेंगे 1 हमको इसके लिये रेस्‍पोंसेंबिलिटी फिक्‍स करनी पडेगी । जब तक हम यह रेस्‍पोंसेबिलिटी फिक्‍स नहीं करेंगे कि जो इसके लिये जिम्‍मेदार है उसको कडी सज़ा के प्रावधान किये जाने चाहिये । मैं कहता हूं कि जो बीसलपुर बाँध है यह पिछले 12 साल से, यह केवल राजनीतिक मुद्दे बन जाते हैं पिछले 12-15 साल से बीसलपुर के बाँध में पानी भरा हुआ है । हम यहां पर मजाक करते हैं ।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): टोडी सागर वाला भी बता दें ।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको डिस्‍टर्ब नहीं कर रहा हूं, मुझे याद है 90 में भारतीय जनता पार्टी की सरकार आई थी और 98 तक रही थी । 8-9 साल वो थे और 5-7 साल यह थे इसलिए किसी पार्टी को और व्‍यक्ति को दोष नहीं दें अपन ।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): पार्टी को कौन दोष दे रहा है ।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): आपने कहा ना कि यह पूर्ववर्ती सरकार । पूर्ववर्ती सरकार के तो वहां उप राष्‍ट्रपति बन गये । इसलिए कृपया करके लाइन में चलिए, वैसे भी आप सरकार के मुख्‍य सचेतक हैं ।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): टोडी सागर तक ले जाने का था वह भी बताना आप ।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): वह भी बताऊंगा । आपको तो कुछ नोलेज है नहीं ।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): आप मेरे पर कृपा करोगे कि नहीं करोगे । मेरे नैनवां के 110 गांवों को जोडो कृपा कर के आप सरकार में बैठे हो ।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): इनको ख्‍याल नहीं है कि आप कहां बोल रहे हो । पूर्ववर्ती सरकार 20 साल तक रही है जिसमें 10 साल आपका है और 10 साल इधर का है । 10 साल में आपने भी कुछ नहीं किया ।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): पूर्ववर्ती सरकार 50 साल 20 साल नहीं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): 8 साल तक तो भैरोंसिंह जी राज करके गये हैं और ढाई साल से अब आप कर रहे हो, साढे 10 साल और कांग्रेस की सरकार रही 82 के बाद 90 तक, 8 साल ।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): हम सन् 52  से बात करें ।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): 52 की कहां बात कर रहे हो, बात आपकी हो रही है ।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): यह जो इंदिरा गांधी केनाल है वह तो 62 में शुरू हुई है ।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): 82 के बाद की बात है ।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): आप कांग्रेस की सरकार का समय ही घटा रहे हो ।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): कांग्रेस की सरकार ने ही यह सब कुछ किया है आपने कुछ नहीं किया महाराज ।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): आप अपने स्‍वार्थ के कारण कांग्रेस की सरकार का समय ही कम कर रहे हो ।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): कांग्रेस की सरकार का ही सब कुछ किया हुआ है यह डेम, सागर, महासागर सब कांग्रेस का ही किया हुआ है आ तो उसी में से खींच खींच कर नालिया निकाल रहे हो, कांग्रेस का ही किया हुआ है, आपने क्‍या किया बताइए । दिल्‍ली में भी आप 8 साल रहे, आप नदियों को बांधते बांधते चले गये । 20 साल में गरीबी मिटाना था इधर चले गये , यहीं छोड गये । आपने जो नूर बरसाये वह बता दो कि हमने यह नूर बरसाये थे, कुछ है ही नहीं ।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): टोडीसागर भी खाली रख दिया ।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): उपाध्‍यक्ष महोदय, प्रतिपक्ष के नेता ने मुझे याद दिलाया कि आपने क्‍या नूर बरसाये । प्रतिपक्ष के नेता से मैं निवेदन करना चाहता हूं कि 52 से लेकर 77 तक तो बिना व्‍यवधान के आपने एक छत्र राज किया।  सारी योजनाएं आपने बनाई हम इसको स्‍वीकार करते हैं ।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): इंदिरा गांधी किसकी है ।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): यह भी मैं स्‍वीकार कर रहा हूं, मैं कह रहा हूं लेकिन उसको हमने समय पर पूरा नहीं किया इसके लिये कौन अपराधी है । उसमें पैसे का दुरुपयोग हुआ उसके लिये कौन अपराधी है । यह माही डेम आपके समय का है उसके पानी का उपयोग नहीं हुआ उसके लिये कौन अपराधी है । आज बिजली वहां पैदा हो सकती थी वहां बिजली पैदा नहीं की इसके लिये कौन अपराधी है । यही मैं कहना चाहता हूं कि 77 के पहले कोई मोनेटरिंग नहीं थी । जब भारतीय जनता पार्टी की सरकार आई ..

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): उपाध्‍यक्ष महोदय, यह तो यह चाहते थें कि सारा काम हम ही पूरा कर दें और इनके लिये कुछ नहीं बचे केवल राज के मजे लेते रहे । कुछ परिश्रम करो आप भी ।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): उपाध्‍यक्ष महोदय, सन् 77 में जब हम सत्‍ता में आये तब यह देखा कि सारी सिंचाई की योजनाएं बंद पडी है । मैं चैलेंज के साथ कहता हूं कि कि 77 से पहले इन योजनाओं पर किसी ने मोनेटरिंग नहीं की । हमारे नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य और मेवाड से आने वाले माननीय सदस्‍य इस बात से इत्‍तफाक करेंगे कि पानी के जितने सोर्सेज वहां पर है, जितने बाँध के प्रस्‍ताव वहां पर विचाराधीन थे वह सारे प्रस्‍ताव थे उस पर थोडा थोडा पैसा खर्च कर के उन योजनाओं को ...

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): सोमकमला आपने बनाया, माही आपने बनाया एक तो नाम बताओ । मेवाड वालों ने कुछ नहीं किया, एक दो नाम तो बताओ । खाली बात कर रहे हो ।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): मैं यही कह रहा हूं कि सोम काडर, माही यह सारा आपने बनाया लेकिन जो योजनाएं थीं उस योजना का 10 गुणा, 20 गुणा पैसा खर्च किया उसमें जो भ्रष्‍टाचार हुआ, जो समय पर योजनाएं पूरी नहीं हुई, जो उसका लाभ मिलना चाहिये वह नहीं मिला उसके लिये मैं निवेदन कर रहा हूं कि जो कमियां हम में रह गईं वह हम न करें इसके लिये कह रहा हूं । हमारे राजस्‍थान में आपने जो कमियां छोड दीं और मौज मस्‍ती आपने की, मौज मस्‍ती नहीं करते ...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): यह पूरा सप्‍ताह मौज मस्‍ती हम ही कर रहे होंगे और आप देख रहे होंगे, बात कर रहे हो ।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप पैरलर राजस्‍थान केनाल निकाल दो।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): पैरलर राजस्‍थान केनाल नहीं, 7 साल का प्रोजेक्‍ट था यह । माननीय राम नारायण जी चौधरी साहब आप उस समय मंत्री थे । आपने सोचा नहीं और यदि सोचा तो आप बोले नहीं । उस समय केवल आप प्रशासन तंत्र से बंधे हुए थे । रामायण काल और महाभारत काल में जिस प्रकार वह सारे पात्र मौन थे कि हम तो राज सत्‍ता से बंधे हुए हैं उस प्रकार आप केवल उनके गुलाम बन कर रहे, अगर आपने किया होता तो आज हमको यह दिन देखने नहीं पडते ।

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): आपको कल बुलाया गया क्‍या अलबर्ट हाल में। जिन लोगों ने हमारे देश को गुलाम बनाया उस पर आप फूल बरसा रहे थे ।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): कौन बरसा रहा था, मैं तो वहां गया ही नहीं ।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): यह सही है कि आप वहां नहीं गये लेकिन उन्‍होंने तो किया ना ।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): आप गये वहां फूल बरसाने, आप जिस विदेशी की बात करते हो, मैं स्‍टेज पर बैठता तो सरकार के मेहमान की तरह बैठता मेरी सीट ऊपर थी आपसे, आप चले गये वहां देखने, फूल बरसाने आप वहां चले गये और मुझे कह रहे हो ।

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): इन्‍होंने भारत की आर्थिक व्‍यवस्‍था को चौपट कर दिया । इतने पटाखे छोडे कि विद्याधर नगर में सांस लेना दूभर हो गया ।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आपकी बहादुरी के क़ायल हैं कि निमंत्रण होने के बावजूद भी ठीक ढंग से आपने उस आयोजन का मूक रहकर उसका बहिष्‍कार करके विरोध किया, यह हिम्‍मत आप में ही है इसकी तो हम तारीफ करते हैं ।

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): आपको तो बहुत पीछे धकेल रखा था ।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): मुझे न तो आपकी तारीफ चाहिये न मेरे को विरोध की चिंता है ।

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): जिनके पुरखों ने भारत को गुलाम रखा, आप किसी मित्र सेना के राष्‍ट्र के नायक को बुलाते, राष्‍ट्राध्‍यक्ष को बुलाते आप जगुआर से फूल बरसा रहे हो, बड़े दुर्भाग्‍य की बात है जैन साहब और आप तो पीछे बैठे थे आपको तो कोई पूछ ही नहीं रहा था ।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): फिर वही कह रहे हो मैं नहीं गया वहां (व्‍यवधान) मैं बता रहा हूं, मैं बता रहा हूं ..

 

ans\usc\31.3.2006\1500\2j\1 

 

जिसमें हमारे स्‍वर्गीय सरदारबल्‍लभ भाई पटेल, जिन्‍होंने राजस्‍थान की एकता की नींव डाली, जिन्‍होंने एकीकरण किया उस गुलामी से मुक्‍त होने का। जो प्रोग्राम था...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली):  आपने बहिष्‍कार क्‍यों किया, आप क्‍यों नहीं गये? आपने कहा मैं नहीं जाऊ इस प्रोगाम में । 

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक):  नहीं गया अलग बात है, पर मैंने बहिष्‍कार...(व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): मैं ऐसे प्रोग्राम में नहीं जाता हूं, आप कह रहे हो ना।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): आप अपनी जबान को मेरी जबान में डालना चाहो यह तो होगा नहीं ।

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): हमारे शिक्षा मंत्री जी उदास थे। देखो यह बहुत गड़बड हुआ है। (व्‍यवधान) अनाप-शनाप पैसा खर्च हुआ है, उस समय   जब देश में, प्रदेश में अकाल पड़ रहा है।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक):  गलत बोल रहा हूं क्‍या ?

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य ।

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): आप तो हमारी भावनाओं से थे इसलिए तो बहिष्‍कार किया आपने ।  (व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक):  माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं यह कहना चाहता हूं कि राजस्‍थान में यदि वन  क्षेत्र घटा है, यदि राजस्‍थान में जल का संरक्षण नहीं हुआ, राजस्‍थान में जल का संरक्षण हुआ और उसका उपयोग नहीं हुआ तो यह इसका बहुत ठोस कारण है जिस पर जाने की आवश्‍यकता है। मैं कोई राजनीति से बात नहीं करता। 

हमारी सरकार में यदि ठीक प्रकार से काम नहीं होता है तो मैं उन व्‍यक्तियों में हूं जो हमारी सरकार को कहने में न तो शंका करता हूं  और न ही करूंगा। मुझे यहां पर छोड़कर जाना पडे तो चला जाऊगा लेकिन मैं गुलामों की तरह नहीं रहूंगा, यह मैं आपको निवेदन करना चाहता हूं।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): यह बात राठौड़ साहब को दुबारा कहिये, सुना नहीं है।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक):  राठौड़ साहब तो स्‍वाभिमान के प्रतीक है, आप इनकी क्‍या होड़ कर सकते हो। (व्‍यवधान) यह तो यहां की शान है।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): उपाध्‍यक्ष महोदय, यह काई गोरे और कालो की लड़ाई थोड़े ही है ।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): उपाध्‍यक्ष महोदय, जितना चिंता का विषय है, पानी के कारण, पर्यावरण के कारण, मैं यह कहना चाहता हूं कि यह प्रोग्रेसिव, मैं तो समर्थन कर रहा हूं, रामनारायण जी और रामकिशोर जी  जिस प्रस्‍ताव को लेकर आये उसका समर्थन कर रहा हूं लेकिन उसके लिए तर्क तो देना पड़ेगा कि हमारी कहां कमियां रह गई, यदि हम कमियों को नहीं ढूंढेगे तो...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):  पास करा दीजिए ना।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): पास तो हो जाएगा लेकिन हम उन भावनाओं में नहीं जाएंगे, पास होने में कोई दिक्‍कत नहीं है, आप और हम सब जब एक मत है तो पास होने में क्‍या दिक्‍कत है 1 पर जब तक इन भावनाओं पर नहीं जाएंगे कि कहां कमी-खामियां रह गई, जब तक उस पर नहीं जाएंगे तब तक राजस्‍थान का भला नहीं करेंगे।

आज पर्यावरण नष्‍ट हो रहा है, इसमें कौन योगदान कर रहा है, इतने कठोर कानून है, जंगलात में कोई घुस जाए अब  हम क्‍या करते हैं, हमारे यहां स्‍टाफ  की कमी है, सिपाही की कमी है। एक सिपाही से लोग इतना डरते हैं, जितना एसपी से नहीं डरते उतना एक गार्ड से डरते हैं, केटल गार्ड से डरते हैं । हमारे पास इतने पावर दिये हुए हैं उसका उपयोग तो करते नहीं है और केवल कोई न कोई बहाना ढूंढते हैं।

मैं निवेदन करना चाहता हूं कि अगर वन कटता है तो कहीं न कहीं जिम्‍मेदारी पंचायत को देते हैं, पंचायत स्‍वंय पेड़ काटने में लग जाती है। एक तरफ हम लाखों-करोड़ों  रूपये खर्च करके पेड़ लगाते हैं दूसरी तरफ पंचायत, सरपंच  उनको बेच रहे हैं अब  उसकी कोई जिम्‍मेदारी नहीं ठहराएंगे हम, केटल गार्ड कहेगा, वहां का डीएफओ कहेगा कि मेरी जिम्‍मेदारी नहीं है हमने तो ट्रान्‍सफर कर दिया पंचायत को, यह कहकर हरेक आदमी बचने की कोशिश करता है।  मैं निवेदन करना चाहता हूं कि बचने की कोशिश नहीं करें।  हमारे ऊपर विश्‍वास करके जनता हमें भेजती है, हमारे ऊपर लोगों का विश्‍वास है। जिस दिन यह विश्‍वास खतम हो जाएगा उस दिन इस विधान सभा और लोकसभा की कोई कीमत नहीं होगी, इसलिए यह विश्‍वास बना रहे उसके लिए हमको अपनी और से शुरू करना पड़ेगा।  हम जो अपनी जिम्‍मेदारी दूसरों को ट्रान्‍सफर करते हैं उस जिम्‍मेदारी को हम अपने ऊपर  जब तक लागू  नहीं करेगें, अब हम भ्रष्‍टाचार रोकने की बात करें, चाहे पानी के सरंक्षण की बात करें, चाहे  किसी भी कानून की बात करें, हम यदि बात करना चाहते हैं तो इससे पहले स्‍वंय को संकल्‍प लेना पड़ेगा ।  हम राजनीति से ऊपर उठकर, राजनीति ठीक है अपने स्‍थान पर है, यह संसदीय व्‍यवस्‍था भी है कि आप हमेशा सत्‍ता के लिए संघर्ष करते रहे लेकिन सत्‍ता आपको नजदीक दिखाई देती हो तो संघर्ष करो, बिल्‍कुल ऐसी स्थिति आ रही है कि हमारी जा रही है तो आप इधर आने की कोशिश करो कहां दिक्‍कत है लेकिन कोई इश्‍यू ही नहीं है। सरकार परिवर्तन होती नहीं, होगी नहीं । जब यह जानते हैं तो आप  केवल विरोध करें और हम पक्ष में रहे इसकी बजाए ऐसे विषयों पर गम्‍भीरता से चर्चा करें जिससे लोगों का भला हो। अब इसमें हम नहीं करके हर मामले में राजनीति, अब मैं बोल रहा हूं, मान लीजिए कि पिछली सरकार की कमियां रह गई तो उसको कहो ही मत, बोलने ही नहीं दे रहे। मैं कोई आपसे विद्वान भी नहीं हूं यह बात भी सही है । मैं आप सबसे कम योग्‍य हूं यह बात भी सही है, परन्‍तु अपनी बात  कहने का मुझे अधिकार है  कि नहीं ?

मैं आपसे निवेदन यह करना चाहता हूं कि हमारी जो कमियां रह गई उसको स्‍वीकार करने में हमें कोई दिक्‍कत नहीं होनी चाहिये और आगे  कोई कमियां नहीं रहे । मेरा इसके पीछे एक ही उद्देश्‍य है कि चाहे अब हम, नये हैण्‍डपम्‍प लगाने की बात है, एक तरफ हम कहते हैं कि पानी का दोहन हो रहा है, जलस्‍तर नीचे जा रहा है, क्‍वालिटी खराब हो रही है, एक तरफ यदि हमारी जेब से हजार रूपये भी खर्च करने पड़े तो हम उसमें खर्च नहीं करे क्‍योंकि हैण्‍डपम्‍प , बड़ी मात्रा में हमारे को अधिकार दे दिया, जहां आवश्‍यक नहीं है, अच्‍छा पानी  भी नहीं है, कोई मांग कर रहा है उसको खुश करने के लिए हैण्‍डपम्‍प लगा  रहे हैं।

एक तरफ जल का दोहन कर रहे हैं दूसरी तरफ संख्‍या बढ़ा रहे हैं अनावश्‍यक। आवश्‍यक हो वह जरूर करें ले किन अनावश्‍यक रूप से हम जल का दोहन करेंगे तो क्या स्थिति बनेगी ? पानी का सवाल नहीं है हमारा अण्‍डरग्राउण्‍ड वाटर इतना नीचे जा चुका है जो कि चिंता का विषय है, अब उसको रिचार्ज करना बहुत आवश्‍यक है, रिचार्ज कहां हो सकता है उसके लिए भी  हम प्रयत्‍न नहीं करते। मान लीजिए हमारे पास माही में पानी भरा हुआ है, बीसलपुर में पानी भरा हुआ है उसकी चिंता नहीं करते।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): पीना बंद कर दे क्‍या ?

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): पियो तो सही लेकिन ढोलो मत।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): कहां ढोलते हैं ।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक):  ढोलते हैं। जयपुर में बीसलपुर का पानी 2001 में ले आएंगे, बीसलपुर का पानी हम यहां ले आयेगे, वहां पर शिलान्‍यास कर आये सांगानेर में, हम शिलान्‍यास कर आये रामनिवास बाग़ में, क्‍यों लोगों को मूर्ख बना रहे हो ? बीसलपुर का पानी, हम घोषणा कर आते हैं, हमारी विश्‍वसनीयता समाप्‍त हो रही है। (व्‍यवधान)

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर):  टोरडी सागर बाँध में पानी पहुंचाने की बात भी बताना।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक):  वह भी बता रहा हूं ना। तारानगर से आने वाले माननीय सदस्‍य, टोडी सागर, आपने आपकी सरकार के समय यह तय कर दिया कि बीसलपुर में कितना पानी किसको मिलेगा। उसमें आपने यह तय कर दिया कि 2/3 पानी पेयजल के लिए, 1/3 सिंचाई के लिए । अब 2/3 पानी अजमेर, ब्‍यावर, किशनगढ़ और बीच में पड़ने वाले गांव और जयपुर में आपका वह पानी आये। 2021 में जो जनसंख्‍या होगी उसमें कितने पानी की  आवश्‍यकता होगी उसका केलकुलेट करके आपने कह दिया कि 16 टीएमसी पानी तो हम जयपुर, अजमेर इनमें देंगे और 8 टीएमसी पानी हम सिंचाई के लिए देंगे। सिंचाई के लिए पानी था उसमें आपने सारा क्षेत्र खोल दिया। उसमें 80 हजार नहीं, एक लाख हैक्‍टेयर जमीन से वहां पर, सिंचाई हो गई यह हमारे आते ही हमने सबसे बड़ी उपलब्धि की है। 

बीसलपुर का पानी बेकार पडा था वह एक लाख बीघा जमीन इस साल और पिछले साल, आते ही मैंने संकल्‍प किया था कि बीसलपुर का पानी यदि हम नहीं लाएंगे तो विधान सभा में नहीं जाएंगे। हम एक साल में पानी लेकर आए। एक लाख बीघा जमीन सिंचित की, 500 करोड़ रूपये की अतिरिक्‍त पैदा हागी, आप वहां जाओ, फसल लहरा रही है। (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां):  आदरणीय, मैं आपको डिस्‍ट्रब नहीं कर रहा, आप बांसी भी जाते हो, नेनवां भी जाते हो, आपके रिश्‍तेदार भी है ...(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): रिश्‍तेदार से क्‍या लेना देना है ?  (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): मैं भी आपका रिश्‍तेदार हूं। आपके भाईबंध है...

श्री महावीर प्रसाद जैन: यह कहिये न मेरे रिश्‍तेदार हो आप।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): कृपया करके 110, राइटमेन केनाल थी पूरी की पूरी, 110 गांव उडाने में आप....(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: अब काहे के लिए उस स्‍कीम में जा रहे हो ?

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): यह बहुत महत्‍वपूर्ण व्‍यक्ति है । मुख्‍यसचेतक है सरकार के, आप हमारा ध्‍यान रखोंगे कि नहीं रखोंगे यह बता दीजिए ?

श्री उपाध्‍यक्ष: अब आप तो उसमे चले गए, पूरी योजना में ही।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): आप हमारा ध्‍यान रखोंगे कि नहीं रखोंगे ? रखेंगे न वादा तो करो।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक):: अभी जो मामला उठा है, मैं निवेदन करना चाहता हूं कि जो पानी है, ईसदरा डेम में दो प्रावधान है। ईसरदा डेम बनाकर जयपुर में पानी लाया जाए और बीसलपुर से पानी लाया जाए। बीसलपुर से पानी लाने का काम  तो प्रारम्‍भ हो रहा है। सैकण्‍ड फैज में, ईसरदा से पानी लाया जाए, वह ईसदरा डेम आपने यहां देखा कि  स्‍वीकृत हो गया । यदि ईसरदा डेम जल्‍दी बन जाए, मेरा यह मानना है, मैं न तो सिंचाई मंत्री हूं, न मुझे अधिकृत रूप से इसकी कोई जानकारी है ।

 

Ddm/usc/310306/1510/2k

 

पर जितना मोटा-मोटा मैं जानता हूं, उतना कह सकता हूं कि यदि ईसरदा से जयपुर में पानी लाया जा सकता है और उसमें इतना पानी है कि जयपुर में पर्याप्‍त मात्रा में पानी आ सकता है तो बीसलपुर का जो पानी बचा हुआ है, जो ड्रिंकिंग वाटर, जो जयपुर लाना चाहते है, अजमेर ले जाना चाहते हैं उस पानी से और अतिरिक्‍त सिंचाई जिसमें चाहे रामनारायणजी कह रहे हैं, चाहे वह टोरडी सागर का मामला, टोरडी सागर के बारे में इतनाही निवेदन करना चाहता हूं कि हमारे बहुत प्रयत्‍न चल रहे थे, इसमें बाधा उत्‍पन्‍न की कांग्रेस पार्टी ने, बिना सोचे समझे उसमें लोगों को उकसाया, लोगों को लाठी और तलवारों से लेकर... (व्‍यवधान)

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): आप यह बता दो कि प्रिंसिपली आप एग्री करते हो क्‍या..(व्‍यवधान) प्रिंसिपली आप... (व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): आपने केवल उकसाया है। मैं यह निवेदन करना चाहता हूं कि किसानों को उकसाकर आ गये और उनको छोड़ दिया अपने हाल पर, कांग्रेस नेतृत्‍व गायब हो गया। सोयला में इतने लोगों को इकट्ठा कर दिया, लाठियां और फर्सियां लेकर, बंदूकें और तलवारें लेकर, जब आप यह समझिये कि जब बंदूकें चलेंगी, जब पत्‍थर बरसाये जाएंगे, जब लाठियां लेकर खड़े हो जाएंगे तो यह स्थिति किसने बिगाड़ी। हम बहुत दुःखी हैं कि वहां जो कुछ हुआ, वह अच्‍छा नहीं हुआ। (व्‍यवधान) लेकिन उसके लिये मैं यह कहना चाहता हूं कि कांग्रेस पार्टी को उकसाकर बिना योजना के प्रदूषण को भड़काया और वहां पर आन्‍दोलन करवाया। खुद भाग गये, किसानों को मरवा दिया। वहां पर सोनिया गांधीजी को ले गये आसूं बहाने के लिये। किया कुछ है नहीं। अब आप ले आओ। केन्‍द्र से अब करवा दो। इसलिये मैं चाहता हं कि यह दोनों प्रस्‍ताव...।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, फालतू की बात नहीं। संकल्‍प के विषय पर बोलें।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): फालतू की बात है क्‍या यह? बिलकुल संकल्‍प का विषय है। इसलिये मैं निवेदन करना चाहता हूं कि यह दोनों प्रस्‍ताव प्रोग्रेसिव हैं।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): इसका मतलब आप टोरडी सागर में बीसलपुर का पानी पहुंचाएंगे। 

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): पर आप व्‍यवस्‍थाएं तो गड़बड़ कर आये। आपने जो फिक्‍स किया, सिंचाई के लिये तो केवल आपने 8 टी.एम.सी. पानी स्‍वी‍कृत किया है। जो 32 टी.एम.सी. पानी आप माही डेम से 80 हजार हैक्‍टेयर को सिंचित करवा रहे हो, 8 टी.एम.सी. पानी में एक लाख बीघा सिंचित कर रहे हैं। कोई गुनाह कर रहे हैं?

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपने जितना मांगा था, उतना मिल गया। (व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): कितना मांगा था, वह तो आपके समय तय हुआ है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): हां तो उतना मिल गया।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): 1982 में प्रोजेक्‍ट बना।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): तो धन्‍यवाद देना चाहिए नेता प्रतिपक्ष को कि आपने जितना मांगा था, उन्‍होंने दिलाया।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): 1984 में शिवचरणजी माथुर उसका शिलान्‍यास करके आये। भाटा लगाकर आये, फिर उखाड़ा वह, फिर 86 में लगा।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, वहां पर सर्वसम्‍मति से प्रस्‍ताव पास करके जितना पानी मांगा था, वह आपको मिल गया। उसके लिये धन्‍यवाद नहीं देंगे।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): सर्वसम्‍मति से क्‍या?

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): संकल्‍प जो पारित किया था, तो धन्‍यवाद नहीं देंगे आप?

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): हां, यह संकल्‍प, विधान सभा में जो संकल्‍प पारित किया कि यह पानी का हमारा अधिकार है, उसमें कांग्रेस पार्टी ने भी सहयोग किया। उसके लिये मैं बहुत आभार प्रकट करता हूं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): सहयोग नहीं, पानी दिलवाया आपको।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): दिलवाया नहीं, वह तो चलती नहीं आपकी वहां। लेकिन मैं  कहना यह चाहता हूं कि संकल्‍प के कारण आपके हमारे साथ रहने के कारण उसमें और जोर आया। वरना तो हम कई बातें कहें, लाओ स्‍वीकार करा लाओ। वहां मिलने का तो समय ही नहीं देते और आप कहते हो, हम करवा लाये।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, अब विराजें जरा।

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): इसलिये अध्‍यक्ष महोदय, क्‍योंकि दोनों प्रस्‍ताव ऐसे प्रगतिशील प्रस्‍ताव हैं और आज की आवश्‍यकताओं को देखकर इस संकल्‍प को पास कराने में हमको मैं समझता हूं कोई दिक्‍कत नहीं है और जिन बातों की ओर मैंने इंगित किया है इस पर जरा विचार करके इसका अच्‍छा प्रयत्‍न करना चाहिए। इन्‍हीं शब्‍दों के साथ अपने विचार प्रकट करता हूं, आपने बोलने की अनुमति दी, इसके लिये धन्‍यवाद।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सिकराय से आने वाले माननीय सदस्‍य ने जो प्रस्‍ताव रखा है, मैं उस संकल्‍प के साथ अपनी भावनाएं सम्मिलित करते हुए कुछ निवेदन करना चाहूंगा। अध्‍यक्ष महोदय, यह सही है कि यह ....(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: बोलिये।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: अध्‍यक्ष महोदय, सिकराय से आने वाले माननीय सदस्‍य ने जो गैर सरकारी संकल्‍प इस सदन में प्रस्‍तुत किया है, उसके साथ मैं अपनी भावनाएं मिलाते हुए कुछ निवेदन करना चाहता हूं। अध्‍यक्ष महोदय, जल संरक्षण आज की आवश्‍यकता है । आवश्‍यकता इसलिये भी है कि अगर समय रहते हुए हमने इस ओर समुचित कदम नहीं बढ़ाये तो मानव सभ्‍यता के सम्‍मुख एक बड़ी चिन्‍ता खड़ी हो जाएगी। यही कारण है कि हमारी चिन्‍ता उस समय और बढ़ जाती है जब पर्यावरणविद् यह बात करते हैं कि जल का संकट और अगले विश्‍व युद्ध की बुनियाद इस पानी को लेकर होगी। अध्‍यक्ष महोदय, अभी पाकिस्‍तान के राष्‍ट्राध्‍यक्ष मुशर्रफ भी यहां हिन्‍दुस्‍तान में आये थे। उन्‍होंने भी बयान में एक बात कही, उन्‍होंने यह कहा था कि पाकिस्‍तान को कश्‍मीर से ज्‍यादा चिन्‍ता कश्‍मीर से बहकर आने वाले उस पानी की है जो कश्‍मीर से पाकिस्‍तान की तरफ आता है। यही करण है कि आज पूरा विश्‍व इस जल संकट से त्रस्‍त है और उसकी चर्चाएं अलग-अलग मंचों पर चल रही हैं। अध्‍यक्ष महोदय, देश के अन्‍दर प्रति व्‍यक्ति जल की उपलब्‍धता जिस तेजी से गिरी है, हमारे सामने सबसे बड़ी चिन्‍ता की बात है। 1950 में 5000 क्‍यूबिक मीटर प्रति व्‍यक्ति जल उपलब्‍धता थी। 2005 में घटकर 1869 हो गया। निश्चित रूप से जब हम राजस्‍थान की चर्चा करते हैं तो हम सभी जानते हैं कि अब देश के अन्‍दर क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा प्रदेश 10.4 प्रतिशत और जनंसख्‍या की दृष्टि से 5.5 प्रतिशत और सतही जल की दृष्टि से सबसे गरीब प्रदेश मात्र 1.16 प्रतिशत। अध्‍यक्ष महोदय, इसलिये आज जो सतही जल प्रदेश में उपलब्‍ध रहता है, वर्तमान कठिन परि‍स्थितियों के अन्‍दर भी उसका उपयोग मात्र 52 प्रतिशत होता है। शेष जल या तो बहकर चला जाता है या वाष्‍प बनकर उड़ जाता है। अध्‍यक्ष महोदय, भू-जल का अति दोहन, इस दोहन से मैं समझता हूं सदन के सारे सदस्‍य चिंतित भी हैं और परिचित भी हैं। भू-जल पर हमारी जो निर्भरता है, वह निर्भरता भी चाहे पेयजल की दृष्टि से हो, सिंचाई की दृष्टि से हो वह निर्भरता भी बहुत अधिक है, लगभग 90 प्रतिशत पेयजल की उपलब्‍धता राजस्‍थान के अन्‍दर भू-जल पर निर्भर करती है। चाहे वह क्षेत्रीय जल प्रदाय योजना बने, या गांव के ट्रेडिशनल सोर्स को इलेक्ट्रिफाइड करके उससे पानी लेने की बात करें। आज जितना इर्रिगेशन हो रहा है, सिंचाई हो रही है चाहे किसी योजना-परियोजना से हो, 79 प्रतिशत सिंचाई हमारी बिजली से हो रही है, शेष सतही जल से हो रही है। अध्‍यक्ष महोदय, सब परिचित हैं कि भूगर्भ के अन्‍दर जितना जल वह एक तरह से बैंक के अन्‍दर हम जितनी राशि डालते हैं और उतनी निकालें तो उतनी ही रहती है। अगर दोहन ज्‍यादा करें और पुनर्भरण कम होगा तो निश्चित तौर पर जल नीचे गिरता चला जाएगा । आज स्थिति ऐसी है कि सबसे नीचे की सतह जिसको हम डीप इको अफेक्‍ट कहते हैं वहां भी हम पाताल तोड़ कुआं लगाकर पानी खींच रहे हैं, लगातार वाटर टेबल ज्‍यों-ज्‍यों नीचे जा रहा है, त्‍यों-त्‍यों हम बड़ी से बड़ी मोटर लगाकर नीचे का पानी ऊपर ले रहे हैं। इन सभी को देखते हुए राजस्‍थान सरकार ने सभी माननीय सदस्‍यों की चिन्‍ता के साथ अपनी चिन्‍ता मिलाते हुए The Rajasthan Regulation And Control Of The Development And management Of The Ground Water Bill, 2006 इसका आर्डिनेंस पारित किया है। इसके पीछे मंतव्‍य यह है कि कि तक आँखें मूंदे यह देखते रहेंगे कि आज नहीं तो कल बढ़ती हुई जनंसख्‍या और विकास की दृष्टि से जो भी काम हो, इन सब कामों की सबसे पहली आवश्‍यकता है तो इसकी आवश्‍यकता है पानी। पानी के अन्‍दर जैसे मैंने पहले निवेदन किया कि सबसे अधिक पानी का दोहन कहीं हमारा है और हमारी निर्भरता है तो वह है हमारे भू-जल पर। अध्‍यक्ष महोदय 2001 के अन्‍दर पूरे राजस्‍थान के अन्‍दर अलग-अलग जोनों के अन्‍दर, भू-जल कितना-कितना है इसका एक भू-जल विभाग ने सर्वे करवाया था। उसमें पूरे राजस्‍थान के अन्‍दर जो 236 पंचायत समितियां हैं, उसमें 2001 में मात्र 21 प्रतिशत पंचायत समितियां सुरक्षित श्रेणी में थीं और उसमें 79 प्रतिशत या तो सेमी क्रिटिकल जोन में थीं या क्रिटिकल जोन में थीं या ओवर-एक्‍सप्‍लोयटेड जोन, अति दोहित जोन में थीं। इसके पीछे मुख्‍य कारण भी यह रहा कि हम जितना जल निकाल रहे हैं उसके एवज में जो वास्‍तविक भू-जल पुनर्भरण है वह मात्र .......प्रतिशत है। अभी 2004 में 31 मार्च, 2004 में जो भू-जल विभाग ने अपनी रिपोर्ट प्रस्‍तुत की है उसमें हमारी चिन्‍ता और बढ़ना स्‍वाभाविक है। आज 236 पंचायत समिति में मात्र 14 प्रतिशत पंचायत समितियां ऐसी हैं जिसको हम सुरक्षित जोन कह सकते हैं । जहां से जल का दोहन हम कर सकते हैं। शेष 86 प्रतिशत पंचायत समितियां क्रिटिकल जोन में, सेमी क्रिटिकल, ओवर एक्‍सप्‍लोयटेड जोन में आ गयीं।                                                     

 

Vps/usc/31-3-2006/1520/2l/1

 

ऐसी स्थिति के अन्‍दर माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बहुत बड़ी आवश्‍यकता हो गयी कि निश्चित तौर पर इसके बारे में चिन्‍ता व्‍यक्‍त की जाए। जिस तरह से सिकराय से आने वाले माननीय सदस्‍य ने एक गैर सरकारी संकल्‍प के माध्‍यम से सदन में चिन्‍ता की है और उन्‍हीं भावनाओं को लेकर राजस्‍थान की सरकार यह कानून लेकर आ रही है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 2004 के अन्‍दर जो संरक्षण है, उसमें चिन्‍ता इसलिए भी और बढ़ जाती है कि उसमें प्रतिवर्ष जल दोहन और जलग्रहण की जो तुलना है उसमें से 125 परसेंट हम जल का दोहन कर रहे हैं और उसकी एवज में जो जलग्रहण हो रहा है, पुनर्भरण हो रहा है, वह कम हो रहा है। आज स्थिति यह बन गयी है कि 2001 के अन्‍दर जो सुरक्षित क्षेत्र हमारे 49 थे, वे घट कर 32 हो गये। सेमी क्रिटिकल क्षेत्र जो 21 थे वे घट कर 14 हो गये क्‍योंकि उनमें बहुत से ओवर एक्‍सप्‍लायटेड जोन में चले गये। क्रिटिकल जोन 80 थे वे घट कर 50 हो गये पर सबसे बड़ी चिन्‍ता जिसको हम कहते हैं कि अति दोहित जोन, जहां पर इतना दोहन हमने कर लिया जल का कि अब वाटर टेबल भी इतनी तेजी से नीचे चली गयी कि अब और जल का दोहन करना वहां पर सम्‍भव नहीं हो सकेगा। आज नहीं तो कल इस भू-गर्भ में जितना जल है वह भू-गर्भ का जल अगर हम सारा निकाल लेंगे तो कल को ऐसी स्थिति भी पैदा हो जाएगी कि कुछ ऐसे जोन हैं, ओवर एक्‍सप्‍लायटेड जोन है, जिनमें जल की मात्रा भू-गर्भ में भी बिलकुल सीमित रह जाएगी, वह 140 हो गये। अब माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप अन्‍दाजा लगायें कि 236 में से इस राजस्‍थान की धरती पर 140 जोन ऐसे हैं जो अति दोहित हैं। अब हम कहां ले जाना चाहते हैं और इसलिए आज जो हम पूरी पंचायत समितियों को देखें तो उनकी संख्‍या में भी 21 परसेंट में, 2001 में पंचायत समिति, राजस्‍थान की पंचायत समिति के जो क्षेत्र है उसमें 21 परसेंट ऐसी जगह थी, जिसको हम सुरक्षित जोन कह सकते हैं, वह घट कर 14 परसेंट रह गये और लगातार राजस्‍थान के अन्‍दर जो 24 सेंटीमीटर प्रतिवर्ष के हिसाब से 1984 से वाटर टेबल नीचे गिर रही है। आप अन्‍दाजा लगा लें, कोई वर्ष नहीं, चाहे वर्षा ज्‍यादा हुई हो, कम हुई हो और उसका पूरा औसत निकला, जब उसमें 24 सेंटीमीटर प्रतिवर्ष की दर से गिरावट आ गयी और हमारे देखते-देखते जल स्‍तर कई मीटर नीचे चला गया और इसके पीछे मुख्‍य कारण यह रहा कि कुछ तो हमारी भौगोलिक परिस्थिति ऐसी है, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आज राजस्‍थान के अन्‍दर चाहे हम कुछ भी कहें, जिस ग्‍लोब पर राजस्‍थान स्थित है, उस ग्‍लोब में आज आप वर्षा का आकलन कर लें, बरसात हमेशा, हमारी नियति रही है कि बरसात कम होती है और एरिड जोन हो या सेमी एरिड जोन हो, आज सबसे बड़ा संकट यह आ गया कि सिंचाई के क्षेत्र में यह आवश्‍यकता महसूस की गयी कि जल का अति दोहन कम होना चाहिए। सरकार चाहे किसी भी पक्ष की रही हो, कहीं ड्रिप इर्रिगेशन की बात हुई, स्प्रिंकलर की बात हुई, यह जरूर आ गये, क्षेत्र जरूर बढ़ गया पर जल का दोहन कम नहीं हुआ। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अब आप तो स्‍वयं उस क्षेत्र से पधारते हैं, आपने देखा होगा कि चूरू और झुन्‍झुनूं में ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: स्प्रिंकलर में तो जल और खराब होता है क्‍योंकि आपरेट ज्‍यादा होता है। ऑपरेशन ज्‍यादा होता है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: आपरेशन ज्‍यादा होता है पर उसमें ज्‍यादा क्षेत्र के अन्‍दर माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सिंचाई भी होती है पर उसमें उन क्षेत्रों में जहां टीले थे, जहां पर कोई कल्‍पना नहीं कर सकता था उन टीलों के अन्‍दर भी गेहूं की फसल होने लग गयी। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यही कारण रहा कि एक तरफ जब हम ड्रिप इर्रिगेशन की बात करते हैं, एक तरफ जब हम स्प्रिंकलर की बात करते हैं और दूसरी तरफ, यह स्‍वाभाविक भी है कि हमारे खुद की सबकी मंशा रहती है कि ज्‍यादा क्षेत्र में सिंचाई के साधन उपलब्‍ध हो, ज्‍यादा उपज हो तो यह ज्‍यों-ज्‍यों क्षेत्र ज्‍यादा बढ़ता रहा, उसके साथ-साथ जो हमारा जल स्‍तर था उस क्षेत्र का वहां नीचे जाता चला गया और आज राजस्‍थान की स्थिति क्‍या है, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: नहीं आप एक्‍सप्‍लायटेशन की बात तो बता रहे हैं कि बहुत हो रहा है। आप जरा यह भी बताइये कि जब संकल्‍प को आप प्रस्‍तुत कराएंगे तो क्‍या-क्‍या स्‍टेप्‍स लिये जाने चाहिए, जल संरक्षण के लिए यह जरूरी है। आवश्‍यकता तो यह है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं इसी पर आ रहा हूं।

श्री अध्‍यक्ष: हां, वह बताइये आप।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सबसे बड़ा जो संकल्‍प आया है, इस संकल्‍प के साथ राजस्‍थान की सरकार ने अपनी चिन्‍ता को मिलाते हुए द राजस्‍थान रेगुलेशन एण्‍ड कण्‍ट्रोल आफ द डवलपमेंट एण्‍ड मेनेजमेंट आफ ग्राउण्‍ड वाटर बिल, 2006, मंत्रिमण्‍डल ने इसको पारित कर दिया और इसके अन्‍दर सारे वह प्रावधान किये, हमने राज्‍य के अन्‍दर भू-जल प्राधिकरण का गठन कर दिया। हमने पूरे राजस्‍थान के अन्‍दर जल संवर्द्धन के लिए जल संसाधनों का मैक्सिमम उपयोग कैसे हो, इसके लिए हम अभियान चला रहे हैं। राजस्‍थान के अन्‍दर एक नहीं, राजस्‍थान के अन्‍दर हमने 200 करोड़ रुपये खर्च करके 2165 वाटर हार्वेस्टिंग के कार्य स्‍वीकृत कर दिये और इसके पीछे मंशा यही है कि हमारा जो भूजल है वह धीरे-धीरे आगे बढ़े। हमारे वह पुराने ट्रेडिशनल सोर्स, जिन सोर्स के आधार पर हमारे पुरखों ने कभी सिंचाई की थी, जिसका पानी पीया था, उनका पुनर्निर्माण करने का काम सरकार ने हाथ में लिया है और मैं समझता हूं कि माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जिस तरह की महती आवश्‍यकता और जिस तरह का आर्डिनैंस राजस्‍थान की सरकार लेकर आयी है, इन्‍हीं भावनाओं के साथ निश्चित तौर पर यह सर्व-सम्‍मत संकल्‍प पारित होना चाहिए और सर्व-सम्‍मत संकल्‍प पारित ही नहीं राजस्‍थान के अन्‍दर जिस तरह माननीय मुख्‍य मंत्रीजी की मंशा है, जो जल अभियान वे चला रही हैं, उस जल अभियान के साथ हम राजनीति परिधि से ऊपर उठ कर हम सब जुड़े। राजस्‍थान के आम-अवाम को हम यह कहें कि यह जल राजस्‍थान का एक तरह से प्राण है। यह प्राण जब नहीं रहेगा तो मानव सभ्‍यता और संस्‍कृति के सामने बड़ा सवाल खड़ा हो जाएगा और इस चीज की चिन्‍ता कोई राजस्‍थान में ही नहीं है, पूरे संसार में की जा रही है। एक तरफ जल तेजी से नीचे जा रहा है वहीं दूसरी ओर जल स्‍तर प्रदूषित भी हो रहा है। अब आवश्‍यकता इस बात की आ गयी, अब वह समय आ गया माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जब हमें वाटर हार्वेस्टिंग के साथ-साथ रि-साइकिलिंग आफ वाटर की बात भी करें। अब जिस तरह की राजस्‍थान की स्थिति है, राजस्‍थान की सरकार ने प्रोफेसर व्‍यास की अध्‍यक्षता में एक समिति बनायी थी। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रोफेसर व्‍यास की अध्‍यक्षता में जो समिति बनी, उसकी रिकमण्‍डेशन राजस्‍थान की सरकार के पास आयी है और उसका अध्‍ययन भी कर रहे हैं और उसी के अनुसार यह पहला जो बिल, मैंने जिस तरह कहा, द राजस्‍थान रेगुलेशन एण्‍ड कण्‍ट्रोल आफ द डवलपमेंट एण्‍ड मेनेजमेंट आफ ग्राउण्‍ड वाटर बिल, इसी आधार पर वह बिल लेकर आये हैं और उसमें सबसे बड़ी बात जा प्रोफेसर व्‍यास ने की है कि जल संवर्द्धन, जल संरक्षण कोई सरकार के माध्‍यम से नहीं, जन चेतना से होगा।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अब आप देख रहे हैं कि जिस तेजी से हमारा शहरीकरण बढ़ता जा रहा है, आज गांव के गांव सिमट कर शहरों में सम्मिलित होते जा रहे हैं और शहरों के अन्‍दर जो मकान बन रहे हैं, शहरों के अन्‍दर जिस तरह का निर्माण कार्य हो रहा है, शहरों के अन्‍दर जिस तरह से इसके साथ-साथ औद्योगिकरण की जब हम बात करें, चाहे शहरीकरण हो और औद्योगिकरण हो, इन सबकी बुनियाद पानी पर है और पानी का उपयोग ज्‍यादा से ज्‍यादा हो, इसके संवर्द्धन के लिए, संरक्षण के लिए बहुत बड़ी आवश्‍यकता है कि एक जन-चेतना के माध्‍यम से हम लोगों को यह भी बतायें कि अपनी छत का पानी हो या अपने घर का पानी हो, उसका भी समुचित उपयोग हो और इसके लिए मैं समझता हूं कि जो संकल्‍प आप लेकर आये हैं, निश्चित तौर पर वह स्‍वागत योग्‍य है और सरकार उसी मंशा के अनुसार उसी दिशा में कदम भी बढ़ा रही है और हम सब लोगों को मिलकर राजस्‍थान में जन-चेतना के लिए राजनीतिक विचारों से ऊपर उठ कर सबको कोशिश करनी चाहिए, यही मेरा निवेदन है।

श्री अध्‍यक्ष: श्री सी.पी.जोशी।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो संकल्‍प माननीय सदस्‍यों ने प्रस्‍तुत किया है उसकी महत्‍ता को कोई चैलेंज नहीं कर सकता है पर प्रश्‍न यह उठता है कि पचास साल में जो हम सरकार में रहे हैं और सरकार के बाहर रहे हैं, वे क्या स्‍टेप उठा सकते हैं, इस पर हम चर्चा नहीं कर रहे हैं। यह क्रिटिकल जोन कितनी पंचायत समितियों में है, कितना पानी घट रहा है, यह हम सरकार में थे तो हमें भी जानकारी है, आज आप सरकार में हो तो आपको भी जानकारी है। वह कानून, आप सुनिये। ... (व्‍यवधान) कानून का कोई मतलब नहीं है, कानून समझना पड़ेगा। सरकार जो, स्‍वयं सरकार है, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सुनिये। ... (व्‍यवधान) उस सरकार को कुछ अपने आप में निर्णय करने पड़ेंगे, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, और सबसे पहले यह निर्णय करना पड़ेगा राजस्‍थान की,  क्‍या राजस्‍थान में हम एग्रीकल्‍चर के क्षेत्र को बढ़ायें या हम राजस्‍थान को एनिमल हस्‍बेंड्री का बेस बनायें।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह राजस्‍थान की जो सारी इकोनोमी है वह पहले से एनिमल हस्‍बेंड्री के ऊपर बेस्‍ड थी और आजादी के बाद हमने एक टेम्‍पटेशन ले लिया कि इंदिरा गांधी केनाल का पानी लाएंगे हम। इंदिरा गांधी केनाल के पानी से हम एग्रीकल्‍चर की पद्धति को बढ़ाएंगे और एग्रीकल्‍चर का क्षेत्र बढ़ाएंगे। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आज इंदिरा गांधी केनाल का पानी राजस्‍थान में केवल मात्र ड्रिकिंग वाटर की नीड्स को केटर करने के लिए है। आने वाले समय में जिस तरह की पापुलेशन का एक्‍सप्‍लोजन हुआ है, आप इंदिरा गांधी केनाल से खेती नहीं कर सकते। जब इंदिरा गांधी केनाल से आप खेती नहीं कर सकते तो आज राजस्‍थान सरकार को यह फैसला करना पड़ेगा कि हम इंदिरा गांधी केनाल से कैसे ड्रिकिंग वाटर की नीड्स केटर करें। यदि आपका प्रोजेक्‍शन अगले 10-15 साल का है तो मैं यह कहना चाहता हूं कि वाटर अलाउंसेज का जो आप सोच रहे हैं, उसके संबंध में आपको दूसरी बार नया निर्धारण करना पड़ेगा। अभी तो गंगानगर का आन्‍दोलन खड़ा हुआ है, आप जब आगे बढ़ेंगे तो आन्‍दोलन और आगे बढ़ेगा। आज राजस्‍थान सरकार को संकल्‍प लाकर लोगों में जाग्रति लाने की आवश्‍यकता है कि राजस्‍थान केनाल आने वाले वर्षों में ड्रिकिंग वाटर के अलावा कोई नया एग्रीकल्‍चर के फील्‍ड को केटर नहीं कर सकता। हम यह काम नहीं करना चाहते हैं, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम हमारे जो राइट्स हैं, एस्‍टेब्लिश्‍ड   हैं, 8.06 एम.ए.एफ. पानी का, उसमें आज मैं पढ़ रहा था एक मिस्‍टर सिंघवी ने केस किया, जो रिटायर इर्रिगेशन इंजीनियर हैं, उसमें राजस्‍थान सरकार को जो स्‍टेप लेनी चाहिए थी, वह स्‍टेप आज हमने नहीं ली राजस्‍थान सरकार ने। आज 1981 जो राजस्‍थान का जो  एग्रीमेंट बना हुआ था, वह एग्रीमेंट आज रेलेवेंट है या नहीं है? क्‍या इस एग्रीमेंट को खतम करवाना चाहिए या नहीं करवाना चाहिए, राजस्‍थान के पानी का जो हिस्‍सा था, 1955 में नाथूरामजी मिर्धा जब इर्रिगेशन मिनिस्‍टर थे वह राजस्‍थान का सबसे बड़ा हिस्‍सा था, उस हिस्‍से के बाद पंजाब बना, पंजाब के बाद हरियाणा बना, हरियाणा के बाद हिमाचल प्रदेश बना, पेप्‍सू बना। आज राजस्‍थान का जो हिस्‍सा है, वह सब इस नये एग्रीमेंट के बाद कम हुआ है। क्‍या राजस्‍थान सरकार इस बारे में सोचने के लिए तैयार है कि जितना वाटर, इण्‍टर-रिवर में पानी का हमारा जो शेयर बनना चाहिए, क्‍या हम उस पानी को लाने की स्थिति में हैं? क्‍या आज पंजाब हमारे पानी का उपयोग नहीं कर रहा है? क्‍या बी.बी.एम.बी. के अन्‍दर जो हैड-वर्क्‍स हैं, वे हमारे कण्‍ट्रोल में हैं? मैं समझता हूं कि सबसे पहले तो हमारा जो पानी का हिस्‍सा है, उस हिस्‍से को एस्‍टेब्लिश्‍ड करने के लिए हमें एक संकल्‍प लेकर निर्णय करना पड़ेगा कि हम राजस्‍थान के इण्‍ट्रेस्‍ट को कैसे प्रोटेक्‍ट करें और उसके बाद में राजस्‍थान में यह फैसला करना पड़ेगा कि राजस्‍थान में आने वाले वर्षों में उस एग्रीकल्‍चर प्रोड्यूस की प्राइस कम करनी पड़ेगी जो ज्‍यादा पानी से पैदा होती है।

 

Spp/usc/31.3.2006/1530/2m(1)

 

कम पानी में खेती से जो फसल होती है, उसका मिनिमम सपोर्ट प्राइस रखकर राजस्‍थान सरकार को इंसेंटिव देना पड़ेगा। हम तो यह काम नहीं कर रहे थे, अध्‍यक्ष महोदय, इस सरकार ने मैं कहना चाहता हूं जिस सरकार में पार्लियामेंट अफेयर्स मिनिस्‍टर हैं,आपकी सरकार ने फैसला किया है, आज वेस्‍टर्न राजस्‍थान में अण्‍डर ग्राउंड से पानी लाने के लिये 50 हॉर्स पॉवर, 75 हॉर्स पॉवर की आप परमिशन दे रहे हो। आपको जब मालूम है पानी अवेलेबल नहीं है तो फिर 85 हॉर्स पॉवर के कनेक्‍शन क्‍यों दे रहे हो? क्‍या टेम्‍पटेशन ले रहे हैं ? हमने हर साल 80 हजार कुओं को एनरजाइज कर दिया, यह हमारा अचीवमेंट है। राजस्‍थान में यदि पानी अवेलेबल नहीं है तो हमें ब्‍लेकेंट फैसला करना पड़ेगा कि आने वाले समय में कुओं को एनरजाइज करें या नहीं करें। यदि हम राजस्‍थान में कुओं को एनरजाइज करना चाहते हैं , हमारी बिजली का गैप बढ़ाना चाहते हैं तो मैं समझता हूं राजस्‍थान की इकोनोमी को हम कैसे ठीक करना चाहते हैं। सबसे पहले आवश्‍यकता इस बात की है माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान में पीने के पानी की व्‍यवस्‍था कैसे करें ? पीने के पानी की व्‍यवस्‍था के लिये सरफेस वाटर का उपयोग लें। पीने के पानी के वास्‍ते अंडर ग्राउंड वाटर की स्‍कीम लें, पीने के पानी के लिये हैण्‍डपम्‍प का उपयोग लें। पिछले दस साल के आंकड़े उठाकर देख लें माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हर साल राजस्‍थान में जितने हैण्‍डपम्‍प ड्राई हो रहे हैं, उनका हिसाब किताब लगायें तो अभी तक राजस्‍थान में करीब 500 करोड़ रूपये खर्च कर चुके हैं हैण्‍डपम्‍प के नाम पर। आज आपके पास ट्रेडीशनल सोर्स था, कुए थे, बावड़ी थी, उसको हमने रिनोवेट नहीं किया। हैण्‍डपम्‍प के नाम पर एक नया काम शुरू कर दिया और हैण्‍डपम्‍प पानी जितना नीचे जाता है अध्‍यक्ष महोदय, उसमें जो मिनरल कंटेन आते हैं वह हैल्‍थ के लिये हर्जाडियस होते हैं। हम काहे को इस चीज पर जाना चाहते हैं कि हम हैण्‍डपम्‍प से पानी पिलायेंगे। हमें फैसला करना पड़ेगा, हम हैण्‍डपम्‍प से पानी नहीं पिलायेंगे। आज भी हिन्‍दुस्‍तान में ऐसा कोई गांव नहीं जहां हेवीटेशन के साथ पानी की व्‍यवस्‍था नहीं। किसी भी गांव में चले जाएं आप, वहां कुआ होगा, बावड़ी होगी और यदि रॉ-मैटेरियल का उपयोग करने के लिये वहां सब जगह देखिये वहां पर उन्‍होंने नाडी बना रखी है, तालाब बना रखा है। हमने एक वेस्‍टर्न कान्‍सेप्‍ट ले लिया कि रॉ-मैटेरियल का उपयोग उसी तरह करेंगे जिस तरह से पानी को प्‍यूरीफाई करके कर रहे हैं। यदि आपने नई योजना बनाई दीनदयाल उपाध्‍याय के नाम पर तो आइये नया उदाहरण दीजिये राजस्‍थान के अंदर कि राजस्‍थान के अंदर इन गांवों में हम रॉ-वाटर का उपयोग ड्रिकिंग वाटर के उपयोग के अंदर अन्‍तर करेंगे। यदि राजस्‍थान में ड्रिकिंग वाटर का उपयोग और रॉ-वाटर के उपयोग में अंतर नहीं किया तो आने वाले समय में पानी की समस्‍या और ज्‍यादा खड़ी होगी । कैसे हम बीसलपुर का पानी जयपुर में ला रहे हैं, कैसे जोधपुर में इंदिरा गांधी कैनाल का पानी ला रहे हैं, कैसे मानसी-वाकल का पानी उदयपुर में ला रहे हैं ? what is the per unit cost? क्‍या हम एफोर्ट कर सकते हैं? गांव के गरीब आदमी की औरत चार कि.मी., पाँच कि.मी. की दूरी से सिर पर पानी लेकर आये और शहर में रहने वाले की औरत घर पर नल से पानी लेगी, इसकी कॉस्‍ट क्‍या आ रही है? क्‍या राजस्‍थान में विषमता पैदा नहीं होगी, क्‍या कॉस्‍ट को इक्‍वेट करने की स्थिति में नहीं है। इसलिए अध्‍यक्ष महोदय, सबसे पहले सरकार को, कोई भी सरकार हो, सबसे पहले करना पड़ेगा कि ड्रिकिंग वाटर की हमारी पॉलिसी क्‍या बने? ड्रिकिंग वाटर की पॉलिसी में हमने ठीक ढंग से काम नहीं किया, अध्‍यक्ष महोदय, तो अंडर ग्राउंड वाटर को तो हमने हार्वेस्‍ट कर लिया, आने वाले समय में सरफेस वाटर को भी हार्वेस्‍ट कर लेंगे तो और ज्‍यादा प्राब्‍लम खडी हो जायेगी। इसलिए सबसे पहले ड्रिकिंग वाटर की पॉलिसी सदन के बीच में आनी चाहिये कि ड्रिकिंग वाटर की हमारी स्‍कीम क्‍या है?

दूसरा, एग्रीकल्‍चर के संबंध में सरकार को फैसला करना पड़ेगा कि एग्रीकल्‍चर में हम कुओं को एनरजाइज करें कि नहीं करें, हमें फैसला करना पड़ेगा कि यदि किसान कम पानी से जो फसल की खेती कर रहा है, उसको मिनिमम सपोर्ट राजस्‍थान सरकार इंसेंटिव देगी तो किसान अपना क्रोप पैटर्न बदलेगा क्‍योंकि सरफेस पानी उपलब्‍ध हो गया तो पंजाब की गवर्नमेंट क्रोप पैटर्न को बदलने के लिये लोगों को मोटीवेट कर रही है और राजस्‍थान की सरकार पानी कम होने के बाद क्रोप पैटर्न को बदलने की बात नहीं कर रही है। आपको दूसरा सबसे बड़ा फैसला करना पड़ेगा कि क्रोप पैटर्न को बदलने के लिये राजस्‍थान में कम पानी से जो फसलें उगती हैं, उसको राजस्‍थान सरकार सपोर्ट प्राइस देगी तब किसान डाइवर्ट होगा उन फसलों से, जो ज्‍यादा पानी से पैदा होती है। आपको दूसरा फैसला करना पड़ेगा एग्रीकल्‍चर में। तीसरा फैसला करना पड़ेगा अध्‍यक्ष महोदय, आपको कि पिछले वर्षों में जब पानी जैसलमेर और बाड़मेर में नहीं होता था तो रैन वाटर को रीटेन करने के लिये, उसको बचाने के लिये टांके की स्‍कीम बना रखी थी और लोग उस पानी का उपयोग करते थे। अब साउथ राजस्‍थान में पानी की प्राब्‍लम आ गयी है।आज राजसमंद जिले में पानी की भयंकर प्राब्‍लम है। अब हमको लोगों को मोटीवेट करना पड़ेगा कि जैसे जैसलमेर और बाड़मेर में 100 साल के पहले लोग पानी को रिटेन करते थे बरसात में, क्‍या हम उसी स्‍कीम को मोडिफाई करके राजसमंद में उस स्‍कीम को लागू करना चाहते हैं? हम खाली कह दें कि वाटर हार्वेस्टिंग होना चाहिये, पर वाटर हार्वेस्टिंग की नई तकनीक आज दिन तक ईजाद नहीं कर सके जो जैसलमेर और बाड़मेर में वाटर हार्वेस्‍टर स्‍ट्रक्‍चर से बैटर हो। यदि सरकार यह काम करे और यह कहे कि आने वाले वर्षों में वाटर हार्वेस्‍टर का यह काम करना पड़ेगा तो लोग मोटीवेट होंगे और रैन वाटर को हार्वेस्‍ट करने के लिये आगे आयेंगे। इसलिये सबसे बड़ी आवश्‍यकता है आज सर्व शिक्षा अभियान में आपको पैसा मिल रहा है। आप हर स्‍कूल में जो आज सर्व शिक्षा अभियान के स्‍कूल हैं उनमें आप वाटर हार्वेस्‍टर का एक स्‍ट्रक्‍चर खड़ा करिये। उसका पार्ट बनाइये जिससे छोटा बच्‍चा पढ़ने के साथ समझ सके कि बरसात के पानी को कैसे रोक सकते हैं? कम से कम स्‍कूल में उससे पेड़ लगाने के लिये काम कर सकें तो समझ में आयेगा। बरसात के पानी को हम दो महीने की जगह बारह महीने रख सकते हैं। इसलिए आपको दूसरा सबसे बड़ा काम करना पड़ेगा कि जो सरकारी बिल्डिंग है और खास तौर से स्‍कूल की बिल्डिंग, जहां भारत सरकार बहुत पैसा दे रही है आपको, उस पैसे से वाटर हार्वेस्‍टर का आप प्रोविजो करिये जिससे छोटा बच्‍चा इस बात को समझ सके।

अध्‍यक्ष महोदय, मैं ज्‍यादा डिबेट नहीं करना चाहता, सब माननीय सदस्‍यों ने राय व्‍यक्‍त की है पर प्रेक्टिकल सरकार को आगे आकर बताना पड़ेगा । हमने यह वाटर का बिल पास कर दिया । इस बिल में क्‍या पास किया, इस बिल में कोई इंसेंटिव आपने नहीं दिया है कि आदमी कम पानी उपयोग में लेगा तो क्‍या करेंगे। आज ट्यूरिज्‍म की दृष्टि से राजस्‍थान में फाइव स्‍टार, सिक्‍स स्‍टार की होटल लेकर आ रहे हैं। आज राजविलास की होटल है, होरिजेंटल होटल बनी हुई है, कितना पानी वह हार्वेस्‍ट कर रहे हैं, कितना पानी का पैसा वह चार्ज कर रहे हैं? आपको फैसला करना पड़ेगा कि जो फाइव स्‍टार और थ्री स्‍टार होटल हैं, इनमें ठहरने वाला आदमी यदि पानी का कंजम्‍पशन कर रहा है, उस पर टैक्‍स की रेट लगायेंगे हम बनिस्‍पत उस गरीब आदमी के बजाय । आपको फैसला करना पड़ेगा हम ट्यूरिज्‍म के नाम से होटल बना रहे हैं, उसको बेतहाशा पानी का उपयोग करने का मौका देना चाहते हैं, वह पूरा प्रोफिट उठाकर चला जाये और हम कहें कि राजस्‍थान में पानी एक प्रतिशत है तो हमें नये सिरे से सोचना पड़ेगा कि हम कैसे इस पर टैक्‍स लगायें। इसलिए, अध्‍यक्ष महोदय, मैं तो सरकार ने जो स्‍टेप लिये जैसे ग्रीन टैक्‍स का आपने प्रस्‍ताव लिया, मैं सहमत हूं। आपने जो व्हिकल है उस पर टैक्‍स लगाकर जागरूकता पैदा करने की कोशिश की, प्रदूषण रूके। ठीक इसी प्रकार राजस्‍थान में यदि पानी के संबंध में हमें चर्चा करनी है तो सरकार को ब्‍लू प्रिन्‍ट लेकर आगे आना पड़ेगा कि सरकार की क्‍या स्थितियां बनी हुई हैं, तब जाकर हम लोगों को मोटीवेट कर सकेंगे। सरकार बात करे कि हमने व्‍यास कमेटी बना दी है, व्‍यास कमेटी एन.जी.ओ. के माध्‍यम से कर लेगी। जन चेतना बनानी पड़ेगी।अध्‍यक्ष महोदय, आप स्‍वयं जानती हैं आजादी के बाद से शराबबंदी को रोकने के लिये हम जन चेतना कर रहे हैं पचास साल से और पचास साल से रेवेन्‍यू जनरेट करने के लिये दारू के ठेके दे रहे हैं। ऐसी पॉलिसी बनाकर हम लोगों को जन चेतना के माध्‍यम से पीने के पानी की व्‍यवस्‍था के बारे में हम जागरूक करना चाहते हैं तो सरकारें पचास साल पहले भी फेल हो गयी हैं, आने वाले पचास साल में भी फेल हो जायेंगी। इसलिए, अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं एक अच्‍छे उद्देश्‍य से जो संकल्‍प रखा गया है, उस अच्‍छे उद्देश्‍य के संकल्‍प को पारित करने के लिये सरकार की जिम्‍मेदारी ज्‍यादा आती है। सरकार ब्‍लू प्रिन्‍ट लेकर आये कि इस संकल्‍प को लागू करने के लिये सरकार के मन में क्‍या कल्‍पना है ? यदि वह आगे बढ़कर काम करेगी तो निश्चित तौर पर जो हम विपक्ष में बैठे हुए हैं, वह जन जागृति में आपके साथ भागीदारी निभायेंगे। सरकार आपके पास है, बजट आपको बनाना है, बजट का प्रोविजन आपको करना है, आपको आगे आकर सरकार को प्रेक्टिकल बताना पड़ेगा कि हमने यह स्‍टेप लिये । मैं समझता हूं इस दृष्टि से यदि सरकार आगे बढ़ेगी तो निश्चित तौर पर आने वाले समय में हम राजस्‍थान में पानी के संरक्षण में उचित कदम उठा पायेंगे और मुझे पूरा विश्‍वास है कि राजस्‍थान पानी के संरक्षण के बारे में दुनिया को एक उदाहरण प्रस्‍तुत कर चुका है जैसलमेर और बाड़मेर में। उस उदाहरण का लाभ उठाकर हम राजस्‍थान में जन चेतना के माध्‍यम से संरक्षण का तो काम करें और सरकार आगे बढ़कर ऐसी पॉलिसी बनाये जिससे पानी का ज्‍यादा दुरूपयोग हो तो दोनों एक दूसरे के विपरीत स्थिति बनेगी । इसलिये सरकार स्‍वयं आगे आकर उस तरह की नीति बनाये कि चाहे वह एग्रीकल्‍चर के कनेक्‍शन का सवाल हो, चाहे एग्रीकल्‍चर के मिनिमम सपोर्ट प्राइस का सवाल हो, चाहे वाटर स्‍कीम के अन्‍तर्गत सरफेस वाटर के लिये पानी की व्‍यवस्‍था करने की बात हो । सरकार आगे आकर कुछ मूलभूत चीजों के सामने ब्‍लू प्रिंट रखेगी तो संकल्‍प की सार्थकता होगी और अंत में यही कहना चाहता हूं अध्‍यक्ष महोदय, इंटर वाटर रीवर में राजस्‍थान सरकार को आगे आकर कदम उठाना चाहिये जिससे आने वाले समय में पानी का जो अधिकार है, वह पानी हमारे पास मिलेगा। आज नर्मदा का पानी आ रहा है तो जालौर में उसका फायदा मिलेगा। आने वाले समय में माही के पानी का गुजरात से बचाकर उसका उपयोग लेना चाहते हैं, उसका फायदा मिलेगा।  पाइंट 6 एम.एफ. पानी मिलता है, एडिशनल उसका फायदा राजस्‍थान को मिलेगा । इस दृष्टि से हमें तात्‍कालिक दृष्टि से और दीर्घकालीन स्‍टेप उठाकर हमारे राइट्स के प्रति भी जागरूकता अपनानी चाहिये जिससे पानी का आने वाले समय में सदुपयोग कर सकें । मुझे पूरा भरोसा है इस संकल्‍प की सार्थकता के लिये सरकार कुछ आगे आकर कदम उठायेगी जिससे लोग मोटीवेट होंगे और आने वाले समय में हम पानी का संरक्षण कर सकेंगे, धन्‍यवाद।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय सदस्‍य को एक निवेदन करना चाहूंगा।

श्री अध्‍यक्ष: राजाखेड़ा से आने वाले माननीय सदस्‍य श्री प्रद्युम्‍न सिंहजी।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): सिर्फ एक-दो मिनट में समाप्‍त कर दूंगा। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह डार्क जोन की बात, अंडर ग्राउंड वाटर कम हो रहा है। इसके मूल में कारण क्‍या है और बारिश कम हो रही है, पानी का दोहन ज्‍यादा हो रहा है। यह बात सही है लेकिन एक आसपेक्‍ट जो बड़ा इम्‍पोर्टेन्‍ट आसपेक्‍ट है, उसको मैं अभी सोच रहा था बैठा-बैठा कि चौधरी चरण सिंह जी जब उत्‍तर प्रदेश के राजस्‍व मंत्री थे, उन्‍होंने वह चकबन्‍दी कानून बनाया था । चकबन्‍दी कानून का फायदा क्‍या था कि उत्‍तर प्रदेश के अंदर उपजाऊ जमीन, घनी आबादी और जमीन का पिगमेंटेशन होता चला रहा था। आज यहां राजस्‍थान के अंदर भी वही स्थिति है, आबादी बढ़ रही है। बदकिस्‍मती से राजस्‍थान के अंदर देश के अन्‍य प्रान्‍तों की तुलना में आबादी ज्‍यादा बढ़ रही है और जमीन का बंटवारा होता जा रहा है। आज चार भाई हैं , वह अलग हुए। पहले एक कुए से सारी सिंचाई होती थी, भाइयों में प्रेम न रहने के कारण सबको अलग कुए चाहिये। एक कुए से पानी हो सकता था, जब ज्‍यादा पानी का दोहन होगा तो निश्चित रूप से पानी का दुरूपयोग होगा। यहां स्प्रिंकलर सिस्‍टम की बात कर रहे हैं। सरकार सब्सिडी दे रही है, किसान लाभ उठाये। कई समस्‍याएं हैं लेकिन चकबन्‍दी कानून का मेरा आपसे निवेदन है कि प्रदेश के अंदर अगर आप चकबन्‍दी कानून बनायेंगे तो लोगों की एक होल्डिंग हो जाएगी। चकबन्‍दी सिस्‍टम का मूल सिद्धान्‍त क्‍या है कि जगह जगह लोगों की जमीन पड़ी हुई है । वह एक स्‍थान के ऊपर ही उसका एक चक बना दिया जाता है।

 

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और लोग वहां जमीन मिल जाती है तो मैं निश्चित रूप से मानता हूं कि जो पानी का दुरुपयोग हो रहा है, खेती के लिए वेस्‍ट जा रहा है वाटर  वह वेस्‍ट पानी नहीं जायेगा, पानी की बचत होगी इसलिए सरकार को इसके बारे में भी, चकबंदी कानून के बारे में भी अन्‍य उपायों के साथ प्रदेश के अन्‍दर चकबंदी कानून, और उत्‍तर प्रदेश में सफलता मिली, एक विफलता का कारण वहां पर लिटिगेशन बढ़ा कि लोग जमीन को बड़ी मुश्किल से पार्टविद करना चाहते हैं, यह लोगों की जमीन वहां पर होल्डिंग्‍स पहले से ही छोटी थी, जब होल्डिंग पहले से ही छोटी थी तो लोगों के अन्‍दर झगड़े हुए, टंटे हुए लेकिन आखिर में सफलतापूर्वक उसका क्रियान्‍वयन हुआ। राजस्‍थान के अन्‍दर 1962 के अन्‍दर कई जिलों के अन्‍दर चकबंदी की शुरूआत हो गयी थी लेकिन किन्‍हीं कारणों से उस वक्‍त इसको ड्राप कर दिया गया उत्‍तर प्रदेश के लड़ाई-झगड़े को देखते हुए तो आप किन्‍हीं जिलों के अन्‍दर, जहां पर कि जमीन के ऊपर आबादी का भार ज्‍यादा है आप उन जिलों के अन्‍दर इस चकबंदी कानून को एक जिले में मॉडल के रूप के अन्‍दर अगर प्रारम्‍भ कर सकें तो इसके निश्चित रूप से नतीजे अच्‍छे आयेंगे, पानी का दोहन कम होगा और उसका दुरुपयोग रुकेगा।

यही छोटासा सुझाव में सरकार को देना चाहता हूं और सरकार इसके ऊपर विचार करेगी, यह मैं मानकर चलता हूं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं धन्‍यवाद देना चाहूंगा नाथद्वारा से आने वाली माननीय सदस्‍य का और राजाखेड़ा से आने वाले माननीय सदस्‍य का, उन्‍होंने बड़े महत्‍वपूर्ण सुझाव दिये।

चूंकि आपको ध्‍यान होगा, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कि इस बार बजट के अन्‍दर माननीय मुख्‍यमंत्री महोदय ने राज्‍य भू-जल प्राधिकरण के गठन की घोषणा की थी, उसके पीछे मन्‍तव्‍य यही था जिस तरह से नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य कह रहे थे कि पाँच सितारा होटलों के अन्‍दर पानी का उपयोग या दुरुपयोग ज्‍यादा हो, तो कहीं न कहीं इस चीज पर पूरे वातावरण को देख कर के कहीं न कहीं इंसेंटिव-डीइंसेंटिव की बात हमें प्रारम्‍भ करनी पड़ेगी इसीलिए उद्योगों पर वाणिज्यिक उपयोग पर शुल्‍क लगाने के लिए सरकार ने इस राज्‍य भू-जल प्राधिकरण के माध्‍यम से यह कार्यवाही प्रारम्‍भ की थी।

श्री अध्‍यक्ष: तो यह प्रस्‍ताव, संकल्‍प आप मंत्री की हैसियत से बोल रहे हैं या प्राइवेट हैसियत से?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): नहीं, मंत्री की हैसियत से।

श्री अध्‍यक्ष: मंत्री की हैसियत से।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उत्‍तर देना था आज, सिंचाई मंत्री महोदय को कहीं जाना पड़ गया।

श्री अध्‍यक्ष: तो वो तो वही बोलेंगे, आप कैसे बोलेंगे?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): नहीं, मैंने आज्ञा लेकर, आज्ञा लेकर बोला है।

श्री अध्‍यक्ष: संकल्‍प तो उनका है। नहीं, आप तो बोल चुके ना, संकल्‍प तो उनका है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): नहीं, बिना आज्ञा तो बोल ही नहीं सकता। में आपका, आसन है...

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, बोलें आप। नहीं, लेकिन मैं कह रही हूं संकल्‍प उनका, कायदे से तो उनको बोलना चाहिए।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, असल में पहले ध्‍यान नहीं था कि सरकार की तरफ से उसका उत्‍तर भी आता है इसलिए जब मुख्‍य सचेतकजी ने अभी अधिकृत किया कि आप कहो इसलिए कहा। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, वो तो ठीक है, सांवर लालजी की जगह बोलें उसमें कोई एतराज नहीं है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): डबल रोल में हो आप, पहले तो राजेन्‍द्र सिंहजी बोले अब सिंचाई मंत्रीजी की हैसियत से बोल रहे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, आप जलदाय मंत्री की जगह बोलें, इसमें मुझे कोई एतराज नहीं है लेकिन चूंकि यह संकल्‍प तो प्राइवेट है इसलिए इसको पायलेट करने की जिम्‍मेदारी भी प्राइवेट मैम्‍बर की है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): वो उन्‍होंने किया न।

श्री अध्‍यक्ष: आप अपनी राय से वाकिफ करा सकते हैं कि, भाई, सरकार..

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): हां, सरकार की, मैं सरकार की राय से ही वाकिफ करा रहा हूं।

श्री अध्‍यक्ष: हां, वो ठीक है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आज यह डबल रोल में हैं, पहले तो बोल हैं राजेन्‍द्र सिंहजी मंत्री की हैसियत से अब राजेन्‍द्र सिंहजी इर्रिगेशन मिनिस्‍टर के हिसाब से बोल रहे हैं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): नहीं, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप मुझे वर्षों से जानते हैं, मैं तो कभी डबल रोल और सिंगल रोल, मेरा जैसा सीधा-सादा आदमी राजस्‍थान की विधान सभा में ...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मंत्री और सदस्‍य ...(व्‍यवधान)... मुबारक हो।

श्री अध्‍यक्ष: आदमी तो सीधा-सादा हूं लेकिन रोल सब प्‍ले कर लेता हूं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं इस बात के लिए नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य को धन्‍यवाद दूंगा कि इन्‍होंने बड़ी चिंता व्‍यक्‍त की है। 1981 में रावी-व्‍यास के जल के सम्‍बन्‍ध में जो समझौता हुआ, 8.6 एम.ए.एफ. पानी की जगह 0.6 एम.ए.एफ. पानी उस वक्‍त तत्‍कालीन किन्‍हीं परिस्थितियों के अन्‍दर छोड़ कर आ गये, उसकी भी आपने चिंता व्‍यक्‍त की है।

मैं आप से निवेदन करना चाहूंगा कि अभी नोर्थ जोन कौंसिल हुई थी उस नोर्थ जोन कौंसिल में पंजाब के सामने जब हमने यह सारी बात रखी कि हमारे किस्‍से का पानी क्‍यों नहीं देते तो उन्‍होंने कहा उस वक्‍त आपके तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री और नेताओं ने यह कहा था कि आपके पास सिस्‍टम डवलप नहीं है और जब आपके पास सिस्‍टम डवलप हो जायेगा पंजाब राजस्‍थान के हिस्‍से का पानी दे देगा। हमने उस वक्‍त भी जोरदार तरीके से कहा था कि हमने सिस्‍टम डवलप कर लिया है और उन्‍होंने यह हमें आश्‍वस्‍त भी किया था कि अगर राजस्‍थान सिस्‍टम डवलप कर लेता है तो 0.6 एम.ए.एफ. पानी दे देंगे, उसके मिनिट्स भी आ गये परन्‍तु अभी भी पंजाब के साथ हमारा झगड़ा जारी है।

इसी तरह से यमुना वाटर की चिंता भी व्‍यक्‍त की, निश्चित रूप से, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप तो उस ऐतिहासिक समझौते की साक्षी रहीं हैं, 1994 में हमें 1.116 बी.सी.एम. पानी यमुना से मिलना था, समझौता हो गया, अब हरियाणा की सरकार आज उस एम.ओ.यू. पर हस्‍ताक्षर नहीं कर रही और यही नहीं, हरियाणा सरकार यही नहीं कर रही, उस समझौते के बाद जिस बाँध से हमें पानी दिया जाना चाहिए था उसकी स्‍ट्रीम में कई दूसरे बाँध लगा कर पावर जनरेशन करने के लिए हाइडल पावर प्रोजेक्‍ट लगा लिया। अब हमारा यह भी झगड़ा चल रहा है कि उन हाइडल पावर प्रोजेक्‍ट में भी हमारा हिस्‍सा हमें मिलना चाहिए।

तो मैं समझता हूं कि यह जो दोनों भावनाएं हैं बिलकुल ठीक है, अन्‍तरराज्‍जीय विवाद के अन्‍दर जहां कहीं भी राजस्‍थान का हिस्‍सा है उस हिस्‍से को प्राप्‍त करने के लिए पहले भी कोशिश गी गयी थी और आगे भी कोशिश की जाती रहेगी और मैं तो यह कहूंगा बी.बी.एम.बी. पर भी हमारा कंट्रोल पंजाब री-आर्गेनाइजेशन एक्‍ट, 1966 के तहत उसी वक्‍त हो जाना चाहिए था स्‍वतंत्र इकाई का, आज भी पंजाब बी.बी.एम.बी. पर अपना कंट्रोल कर के इस पूरे पानी का रेगुलेशन जैसा चाहे वैसा करता है इसी कारण कई बार पंजाब सरकार से हमें प्रार्थना करनी पड़ती है। और मैं तो धन्‍यवाद दूंगा कि इस बार सर्वसम्‍मत संकल्‍प पारित कर के राजस्‍थान की आम अवाम की आवाज को दिल्‍ली की और पंजाब की सरकार तक पहुंचाने के लिए पूरे सदन ने कार्यवाही की।

इसलिए मैं आपसे यही निवेदन करूंगा कि यह प्रोग्रेसिव बात है, राजस्‍थान की सरकार इसके लिए कानून लेकर भी आर ही है, इसको सदन को सर्वसम्‍मति से पारित करना चाहिए।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): माननीय मंत्री महोदय, एक मिनट। आपने पानी की बात बतायी लेकिन चम्‍बल के बारे में भी बता दो, 152 एनीकट मध्‍य प्रदेश में बने हुए हैं जिसमें चम्‍बल का पानी रुक रहा है। इसको वापस छुड़ाने के लिए क्‍या कार्यवाही करेगी सरकार?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): जरा आप यह मालूम करक लें कि वो एनीकट बने कब थे।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): आपकी सरकार ने पूछा है उसका ...(व्‍यवधान)...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): नहीं, नहीं, यह आपकी जानकारी नहीं है नहीं तो आप जरा नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य से पूछ लो इसके बारे में पहले सदन में चर्चा हो चुकी है, वो उधर भी आप विराज रहे थे और इधर भी आप विराज रहे थे।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): एनीकट हटाने के बारे में कोई प्रस्‍ताव तो लाओ।

श्री अध्‍यक्ष: बोलिये खुशवरी सिंहजी।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने बोलने का समय दिया, ध्‍न्‍यवाद।

माननीय मंत्री महोदय, मैं आपका ध्‍यान इस ओर आकर्षित करना चाहूंगा कि बात जल के अत्‍यधिक दोहन की है और इसमें मेरे छोटे-छोटे सुझाव हैं। सबसे महत्‍वपूर्ण बात तो यह है कि जो रेन वाटर हार्वेस्टिंग की हम बात कर रहे हैं वो तो बहुत अच्‍छी बात है लेकिन बारिश आयेगी कहां से, इसके बारे में हमें सोचना होगा। पहले जो बारिश होती थी जंगलों में तो वह बारिश जाड़ी की वजह से, घास की वजह से जमीन के अन्‍दर पानी जाता और कुएं में, अण्‍डर ग्राउण्‍ट वाटर चार्ज होता लेकिन आज बढ़ते हुए इस अंग्रेजी बबूल की वजह से पूरी की पूरी घास समाप्‍त हो चुकी है, नष्‍ट हो गयी और जो पानी बरसता है वो यों की यो बह कर आगे चला जाता है। तो मेरा आपसे अनुरोध है कि जहां जंगल हैं वहां इन अंग्रेजी बबूल को जड़ मूल से नष्‍ट करवाएं तब वापस घास होने की संभावनाएं पैदा होंगी और घास होगी तो निश्चित रूप से पानी जमीन में जायेगा।

दूसरा, में आपको अनुरोध करना चाहूंगा कि नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य ने जो सुझाव दिये हैं बहुत ही महत्‍वपूर्ण हैं। इसी में मेरा एक अनुरोध है कि हम जो फसलें फ्लड इर्रिगेशन द्वारा पिलाई कर रहे हैं अगर वही फसल हम बूंद-बूंद सिस्‍टम से अगर सिंचाई करें, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जब मैं इजराईल गया और वहां पर हमें बताया गया कि जहां 100 लीटर पानी का उपयोग फ्लड इर्रिगेशन से हम पौधों में करते हैं और वो ही पानी अगर  बूंद-बूंद ड्रिप इर्रिगेशन सिस्‍टम से अगर हम काम लें तो आठ से बारह लीटर पानी के अन्‍दर उससे ज्‍यादा सुव्‍यवस्थित ढंग से और अच्‍छी यील्‍ड वो पौधा दे सकता है।

तो मेरा आपसे अनुरोध है कि इसके बारे में आप विचार करें और अधिक से अधिक, हालांकि कुछ फलोद्यान के लिए व्‍यवस्‍थाएं राज्‍य सरकार ने अनुदान की बात कही है लेकिन उसमें मेरा एक सुझाव है कि इसके लिए आप ड्रिप इर्रिगेशन में अधिक से अधिक अनुदान दें उनको ताकि हर किसान इसको उपयोग में ले सके।

दूसरी बात मैं अनुरोध करना चाहूंगा कि जिस तरह, जिस गति से जल की दुर्गति हो रही है, इसके ऊपर कोई न कोई कठोर कदम उठाना पड़ेगा। मर्जी आये जो जितना 1000 फिट, 800 फिट, जिसके पास पैसे हैं उसके हिसाब से वह ट्यूबवैल खोद कर उस पानी का दोहन कर रहे हैं, दुरुपयोग हो रहा है उस जल का तो उसके लिए कोई न कोई नीति बनानी होगी कि जितने डैफ्त तक, गहराई तक ट्यूबवैल इससे अधिक नहीं खोदे जाएं और हैं तो उनको तुरन्‍त बंद किया जाए।

 

Ars/usc/2o/1550/31032006/1

 

इसके लिए सबसे महत्‍वपूर्ण बात यह है माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कि जल आएगा कहां से इसके लिए हमें सोचना पड़ेगा। मैं आपको एक उदाहरण देना चाहता हूं और साक्षात अगर आप वहां जाए येरूशलम शहर के ईस्‍ट में एक पहाड़ी है वहां हम खड़े हो जाते हैं और वहां से अगर हम देखते हैं तो पूरी नेकेड हिल से तो उस तरफ बरसात का औसत बीस से चालीस मिलीमीटर है और उसके वेस्‍ट में जब हम नजर घुमाते हैं घूम कर तो हरा भरा सा शहर है और खूब झाड़ी है हालांकि वहां पौधे जमीन राक्‍स के अन्‍दर ट्यूबवैल की तरह ड्रिल करके मिट्टी डालकर पौधे लगाए हैं उन्‍होंने इतनी मेहनत करके इतना हरा भरा कर दिया। उन्‍होंने झाड़ी लगाई है, वहां 400 से 600 मिलीमीटर बरसात सालाना होती है यह प्रत्‍यक्ष है चाहे आप सभी सदस्‍य वहां जाकर देख सकते हैं कि जब तक हमारे जंगल नहीं होंगे, वृक्ष नहीं होंगे और झाड़ी नहीं होगी और घास नहीं होगी तब तक कुछ नहीं हो सकता है और यह जो बारिश होती है यूं का यूं बहकर पानी चला जाता है। जितनी भी सरकारी बिल्डिंग्‍स हैं और प्राइवेट हैं उन सबके लिए एक कम्‍पलसरी कर दिया जाना चाहिए कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग तो होना ही है चाहे प्राइवेट भी हों, बड़ी होटल्‍स हैं, बड़े बड़े जितने भी मकान हैं उन सब पर यह रेन वाटर हार्वेस्टिंग का ताकि पानी का पूरा जमीन के अन्‍दर जाए सीधा तब ही चार्ज होगा क्‍योंकि नदियां बहनी बंद हो गई हैं । नदियों के अन्‍दर हम यह जो मार्बल और जितनी भी पत्‍थर की पिसाई होती है उसका जो स्‍लेरीज है वह नदियों में डाला जा रहा है और उससे वह छिद्र बंद हो रहे हैं । जब तक पानी नदी में नहीं बहेगा तब तक जमीन के अन्‍दर पानी चार्ज नहीं हो सकता है । अन्‍य दूसरी जमीन पर कितना ही पानी आ जाए लेकिन जमीन के अन्‍दर वह पानी नहीं जाएगा। पानी जमीन के अन्‍दर तो नदियों के द्वारा ही जाएगा।

इसलिए मेरा आपसे अनुरोध है कि इसकी भी व्‍यवस्‍था की जाए कि नदियों में जो यह मलबा डाला जा रहा है उनको भी किसी न किसी प्रकार से ऐसा सख्‍त कानून बनाकर रोका जाए क्‍योंकि नदियों के द्वारा ही जमीन में पानी चार्ज होता है। आपने मुझे समय दिया इसके लिए धन्‍यवाद।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान के अन्‍दर जो जल अभियान चल रहा है जिसकी अगुवाई मुख्‍यमंत्री जी कर रहे हैं वह सब में सारी अवेयरनैस उसी के लिए सारे कदम उठाए जा रहे हैं और इसीलिए यह प्रगतिशील कानून हम लेकर आ रहे हैं और इसीलिए हमने राज्‍य भू-जल प्राधिकरण का गठन किया है ।

श्री अध्‍यक्ष: कानून तो आप जब लाओगे न जब संकल्‍प पास हो जाएगा। यह तब लाओगे न कानून तो ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): मंत्रिमण्‍डल की स्‍वीकृति हो चुकी है विधान सभा में लेकर ...

श्री अध्‍यक्ष: संकल्‍प जब पास हो जाएगा उसके बाद लाओगे न कानून तो आप। कानून तो बाद में लाओगे।

श्री रामकिशोर मीणा (सिकराय): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे संकल्‍प पर पिछले सेशन में भी माननीय सदस्‍यों ने बहुत गंभीरता से विचार करके इस आज के समय की महत्‍वपूर्ण आवश्‍यकता को ध्‍यान में रखते हुए जल का किस प्रकार से संरक्षण किया जाए इसके ऊपर अपने बहुमूल्‍य सुझाव दिए हैं । चाहे वह पक्ष के हों चाहे विपक्ष के हों सभी माननीय सदस्‍यों ने वैसे तो पूरे विश्‍व में आज जल संरक्षण की आवश्‍यकता है लेकिन जिस प्रकार की परिस्थितियां राजस्‍थान में हैं उन परिस्थितियों को देखते हुए इसके ऊपर कानून बनाना आवश्‍यक है । सरकार की ओर से भी माननीय संसदीय कार्य मंत्री जी ने आश्‍वस्‍त किया है कि इस बारे में सरकार जल्‍दी ही कानून बना रही है लेकिन जिस पकार से माननीय सदस्‍यों ने विचार प्रकट किए हैं कि इस कानून में इन सारी चीजों का जब तक समावेश नहीं किया जाएगा राजस्‍थान की परिस्थितियों को ध्‍यान में रखते हुए तब तक हम उसका पूरा वातावरण बनाकर के उसको जब तक हम अमली जामा नहीं पहनाएंगे तब तक हमारा जो बहुत ही अच्‍छा संकल्‍प है उसके उद्देश्‍य की पूर्ति नहीं हो पाएगी।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आज राजस्‍थान में ज्‍यादा पानी वाली खेती को हतोत्‍साहित करने की जरूरत है उसके लिए इस प्रकार की खेती की नीति बनानी पड़ेगी जिसके कारण से शुष्‍क खेती और विशेष तौर से कम पानी के द्वारा उपज देने वाली खेती को हम जल्‍दी से जल्‍दी प्रोत्‍साहित करके सरकार की तरफ से प्रोत्‍साहन देंगे तो कानून बनाने के द्वार पर इसमें हमको बहुत ज्‍यादा फायदा मिलेगा। इसी प्रकार से खेती के साथ साथ राजस्‍थान में पशुधन हमारी अर्थव्‍यवस्‍था का बहुत बड़ा मुख्‍य आधार है और उसके लिए भी हमको इस प्रकार की व्‍यवस्‍था करनी पड़ेगी जैसे बाड़मेर और जैसलमेर में सेवण घास है उसको खाने के बाद जानवर बहुत कम पानी पीते हैं । इस प्रकार से जैसे यह सेवण घास है इस प्रकार के और भी चिंतन करके और कोई इस प्रकार की पद्धति डवलप की जा सके जिससे कम पानी के द्वारा हमारे पशुधन को हम ज्‍यादा से ज्‍यादा आगे बढ़ा सकें इस प्रकार की भी हमको व्‍यवस्‍था करनी पड़ेगी।

पेड़ जितने प्रकार के पहले हमारे वन विभाग ने लगाये हैं, पहले हमारे यहां पर दलदल वाली स्थिति रहती थी, पानी की ज्‍यादा आवक रहती थी उस समय सफेदे के पेड़ों को ज्‍यादा लगाया था सरकार अब नहीं लगा रही है लेकिन इस प्रकार के पेड़ जिनके कारण से नीम है, पीपल है, बिल्‍वपत्र है इस प्रकार के पेड़ों को ज्‍यादा से ज्‍यादा सरकार लगाए तो एक तो हमारी अर्थव्‍यवस्‍था में वह योगदान देंगे ही लेकिन इसके साथ साथ वाष्‍प बनाकर के वातावरण को ठीक करके ज्‍यादा वर्षा राजस्‍थान में हो सकेगी, इस प्रकार की भी व्‍यवस्‍था उसमें हो सकेगी।

इन सारी बातों को ध्‍यान में रखते हुए माननीय मुख्‍यमंत्री महोदय ने भी 10 दिसम्‍बर को एक इस बारे में जल अभियान की बहुत बड़ी यहां पर गोष्‍ठी की और इसकी महत्‍ता को ध्‍यान में रखते हुए आज पूरे प्रदेश में चाहे जन प्रतिनिधियों के मार्फत हो चाहे सरकारी कार्यक्रमों के मार्फत हो, जल संरक्षण की बात बढ़ चढ़कर की जा रही है। जन जागरण का एक बहुत बड़ा आधार तैयार किया जा रहा है। विभाग भी इसका एक किया गया है ताकि इसको सुचारू ढंग से किया जा सके।

जो संकल्‍प माननीय सदस्‍यों ने दिया है ..

श्री अध्‍यक्ष: संशोधन, संकल्‍प तो आपका ही है, संशोधन।

श्री रामकिशोर मीणा (सिकराय): संशोधन दिए हैं उनके बारे में निवेदन है कि जो माननीय श्री मदन जी राठौड़ ने दिए हैं जल संरक्षण सुनिश्चित करें, केवल सुनिश्चित करना ही पर्याप्‍त नहीं होगा जब तक कानून बनाकर के उसको दायरे में नहीं लायेंगे तब तक हमारे लक्ष्‍य की प्राप्ति नहीं कर पाएंगे। इसी प्रकार से डा.जालम सिंह जी ने जो संकल्‍प में संशोधन किए हैं कि वह आवश्‍यक कानून बनाने की जगह पर सुनिश्चित करें शब्‍द को प्रतिस्‍थापित करने को कहा है इसको भी मैं समझता हूं ज्‍यादा ठीक नहीं रहेगा। मैं माननीय सदस्‍यों से निवेदन करूंगा कि वह अपने संकल्‍प में जो संशोधन दिए हैं उनको वापस करें । मैं सरकार का तथा माननीय जितने भी सदस्‍यों ने समस्‍त सदन का जिन्‍होंने इसकी गम्‍भीरता को लेकर और आप स्‍वयं इस मामले की गम्‍भीरता को देखकर इसको सर्वोच्‍च प्राथमिकता देकर के सरकार जो कानून बनाने जा रही है उसके लिए मैं बहुत ज्‍यादा आभार व्‍यक्‍त करता हूं तथा राजस्‍थान के हित में इस कानून को जल्‍दी से जल्‍दी लागू किया जाए और सारी बातें जो माननीय सदस्‍यों ने अपनी भावनाएं व्‍यक्‍त की हैं उनको इसमें समाहित किया जाए तो वह बहुत ज्‍यादा बेहतर होगा।

मैं पुन: आपसे निवेदन करता हूं माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कि इस संकल्‍प को पारित किया जाए।

श्री कन्‍हैया लाल मीणा (बस्‍सी): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं दो सुझाव देना चाहता हूं । मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं ..

श्री अध्‍यक्ष: वैसे तो माननीय सदस्‍य जिन्‍होंने संकल्‍प रखा था, जवाब दे दिया।

श्री कन्‍हैया लाल मीणा (बस्‍सी): दो मिनट में कह दूंगा मैं। मेरा निवेदन है कि एक तो जिस भी गांव में चरागाह सिवाय चक के ऊपर पेड़ लगाए गए हैं उसके लिए मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहता हूं कि यह प्रस्‍ताव लाएं ऐसी सख्‍ती की जाए उन लोगों पर जो उन पेड़ों को धड़ा धड़ काट रहे हैं, निश्चित रूप से सारे पेड़ काटकर के एकदम वहां पर जंगल साफ हो गए हैं। साथ ही मैं निवेदन करना चाहूंगा कि जो हैण्‍ड पम्‍प का पानी है, आज हैण्‍ड पम्‍प का पानी पूरी तो रोड को तोड़ रहा है, रोड के ऊपर पानी चला जाता है, आना जाना बंद हो रहा है या तो सोफ्ते की कोई व्‍यवस्‍था, ऐसा कोई प्रावधान किया जाए जिससे पंचायतें उसमें सोफ्ते में वह पानी जमीन के अन्‍दर जा सके, बहकर के बेकार जाता है । खेली बनाते हैं तो उसमें भी साबुन का पानी भी डाल देते हैं तो पशु पानी भी नहीं पी सकते इसलिए खेली का प्रावधान नहीं करके उसमें जमीन के अन्‍दर वह पानी जा सके । साथ ही मेरा निवेदन है कि जो जयपुर का पूरा पानी गटर लाइनों का भी जो गंदा पानी जाता है नदी में ढूंढ नदी में जाकर के मिल जाता है पानी और इस पानी के लिए लोग झगड़ते हैं आपस में । उससे जो अनाज पैदा होता है झगड़ने वाले लोग न तो उस अनाज को खाते, जितने भी गांव हैं वह खाते नहीं हैं ।

 

Vns/usc/1600/2p/31.3.2006

 

श्री कन्‍हैया लाल मीणा (बस्‍सी): जारी....तो इस प्रकार से प्रदूषित जो पानी है उसको सही करने के लिये ट्रीटमेंट प्‍लांट लगाया जाए। इस पानी से इतने मच्‍छर पैदा हो गये हैं, बहुत ज्‍यादा लोग बीमार हो रहे हैं इसलिये मैं निवेदन करना चाहूंगा ऐसे पानी के लिये कोई व्‍यवस्‍था की जाए जिससे पानी जो बहकर जा रहा है उसका भी कोई ट्रीटमेंट प्‍लांट बनाकर स्‍वच्‍छ पानी बनाया जाए।

साथ ही मैं निवेदन करना चाहूंगा जो भी टंकियां बनी हुई हैं...

श्री अध्‍यक्ष: आप तो एक मिनट में बात कर रहे थे। आप तो एक मिनट में ही बात कह रहे थे। एक मिनट में ही बात समाप्‍त कर रहे थे।

श्री कन्‍हैया लाल मीणा (बस्‍सी): जैसे हमारे ज्‍योति नगर में जो टंकियां हैं । पानी एक-एक घंटे तक खुला रहता है। पानी ऊपर से बहता रहता है। टंकियों के ऊपर वाल्‍व नहीं लगे हुए हैं। कई बार कहा जाता है, नहीं रोका जाता है तो मैं माननीय अध्‍यक्ष महोदय, निवेदन करना चाहूंगा कि इसके ऊपर भी कण्‍ट्रोल किया जाए। एक तरफ तो पानी नहीं है और एक तरु पानी फालतू बह रहा है। धन्‍यवाद।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, चार बजे स्‍टेटमेंट का था। चार बजे आपने स्‍थगन प्रस्‍ताव पर स्‍टेटमेंट देने के लिये बोला था।

श्री अध्‍यक्ष: बस इसको कर लें पूरा उसके बाद लेंगे।

श्री रामकिशोर मीणा (सिकराय): अध्‍यक्ष महोदय, जो माननीय सदस्‍यों ने सुझाव दिया है, उन सब सुझावों को सम्मिलित करते हुए  इसको पारित किया जाए। यही निवेदन है।

श्री अध्‍यक्ष: यह बात सही है कि जब यदि सरकार अपना बिल लाए, वह तो संकल्‍प प्रस्‍तुत किया है। सरकार लायेगी क्‍योंकि सरकार मान रही है कि लायेंगे हम, तब जो-जो सुझाव हैं उन सबको सम्मिलित किया जाए। क्‍योंकि जल के संरक्षण के तो बहुत सुझाव हैं, मुझे तो मालूम नहीं। मैं तो थी नहीं, सारा मैंने सुना नहीं...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): सरकार विचार करेगी। सबको सम्मिलित करने वाली बात ... (व्‍यवधान) इस सदन में बात आ जायेगी जब ही विचार कर दिया। आप संकल्‍प तो पारित करा दें।

श्री अध्‍यक्ष: मैं यहां तो कह रही हूं इन सबको ... (व्‍यवधान) यह कह रही हूं मैं तो।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, इसमें ऐसा है कि माननीय मुख्‍य मंत्रीजी ने अपने बजट भाषण में इसका उल्‍लेख किया था कि  इस विधान सभा के सत्र में वह बिल लेकर आयेंगे। आज सदन में इतनी सारी चर्चा हो गयी है, सबको सम्मिलित करें तो कानून बहुत बड़ा हो जायेगा इसलिये इन पर विचार करके जो आवश्‍यक हो और जल संरक्षण में उनको सम्मिलित करके सरकार लाए तो वह बात समझ में आती है।

श्री अध्‍यक्ष: तो संरक्षण के लिए जो आवश्‍यक सुझाव हैं उन्‍हीं को तो लाओगे।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): सारे नहीं होंगे।

श्री अध्‍यक्ष: और क्‍या मतलब है ... (व्‍यवधान) अब आप क्‍या कहना चाहते हो? वह तो कह दिया, उन्‍होंने जवाब दे दिया ... (व्‍यवधान) कायदा यह है वह दे दिया उन्‍होंने। मैं ... (व्‍यवधान) 

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): पहला मेरा है।

श्री अध्‍यक्ष: प्रश्‍न यह है कि जो संशोधन श्री मदन राठौड़ एवं डा. जालम सिंह रावलोत ने प्रस्‍तुत किया है, उसे स्‍वीकार किया जाए ?

(अस्‍वीकृत)

संशोधन अस्‍वीकार किया गया। 

प्रश्‍न यह है कि जो संकल्‍प श्री रामनारायण मीणा ने प्रस्‍तुत किया है, उसे स्‍वीकार किया जाए ?

(स्‍वीकृत)

संकल्‍प स्‍वीकार किया गया।  

प्रश्‍न यह है कि जो संकल्‍प श्री रामकिशोर मीणा ने प्रस्‍तुत किया है, उसे स्‍वीकार किया जाए ?

यदि सरकार स्‍वीकार कर रही है तो आप कह रहे हैं ना तो ... (व्‍यवधान) 

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैंने जो अपनी भावनाएं व्‍यक्‍त की, हम पूर्व में कानून लेकर आ गये हैं जिस कानून को अमली जामा पहनाने के लिये शीघ्र ही विधेयक पेश विधान सभा में करेंगे और निश्चित तौर पर यह समय की मांग भी है और इसके सरकार आवश्‍यक कदम उठायेगी।

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है। जो संकल्‍प श्री रामकिशोर मीणा ने प्रस्‍तुत किया है, उसे स्‍वीकार किया जाए ?

(स्‍वीकृत)

संकल्‍प स्‍वीकार किया गया। ... (व्‍यवधान)

हां, मैं समझ गयी हूं। सुनिये। अब मैं चाहूंगी कि चार संकल्‍प और प्रस्‍तावित हुए हैं ... (व्‍यवधान) पहले आप स्‍टेटमेंट दे दें।

शासकीय वक्‍तव्‍य

 

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, स्‍टेटमेंट देने से पहले मैं इनसे एक बार सुन लूं। मेरी समझ में ही नहीं आ रही है इसलिये। मेरी सारी तैयारी है पर एक बार इनसे सुन तो लूं बात क्‍या है ?

श्री अध्‍यक्ष: हां, सुन लीजिये। हां, ठीक है। सुन लीजिये।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, 2.6.2004 को राजस्‍थान सरकार ने राजस्‍थान लोक सेवा आयोग के माध्‍यम से शिक्षकों की भर्ती का एडवरटाइजमेंट निकाला और उसके परिप्रेक्ष्‍य में सलेक्‍शन भी किया पर राजस्‍थान सरकार ने फेजेज में अपाइंटमेंट दिये इस कारण 1 जून, 2005 से कुछ लोग कोर्ट में चले गये और कोर्ट के कारण उनकी नियुक्ति नहीं हो सकी। राजस्‍थान सरकार ने इस बीच में 11.3.2006 को गवर्नमेंट आफ राजस्‍थान फाइनेंस डिपार्टमेंट रूल्‍स डिवीजन में रूल्‍स मोडिफाई कर दिये। रूल्‍स मोडिफाई करने के कारण 2.6.2004 के अन्‍तर्गत जो भर्ती हो रही हैं उसमें विसंगतियां पैदा हो गयी। 1 जून, 2005 के कोर्ट के आर्डर के पहले तो थर्ड ग्रेड के टीचर बन गये उनको तो पूरी पे स्‍केल मिलेगी और कोर्ट के आर्डर के बाद जिनको अपाइंटमेंट दे रहे हो, जिनकी संख्‍या लगभग तीन हजार है उनको कंसोलिडेटेड पे मिलेगी। यह एनोमोलीज आपने जो रूल्‍स में अमेंडमेंट किया उसके कारण हो गयी है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्रीजी का ध्‍यान 309 का जो रेफरेंस दिया उसकी तरफ आकर्षित करना चाहता हूं। यह कांस्‍टीट्यूशन में 309 का जो प्रोविजन है। वह प्रोविजन करता है कि

“309. Recruitment and conditions of service of persons serving the Union or a State. Subject to the provisions of this Constitution, Acts of the appropriate Legislature may regulate the recruitment, and conditions of service of persons appointed, to public services and posts in connection with the affairs of the Union or of any State.”

यह‍जो 2.6.2004 को आपने विज्ञप्ति निकाली इस विज्ञप्ति से आप शिक्षक भर्ती कर रहे हैं उनकी दो तरह की सर्विस कंडी&#