spp/usc/11.00/1a/29.3.2007(1)

 

अशोधित प्रति प्रकाशनार्थ नहीं

 

राजस्‍थान विधान सभा की कार्यवाही का वृत्‍तान्‍त

 

 

अंक 7 बारहवीं विधान सभा के सातवें सत्र का उनतीसवां दिवस   संख्‍या 19

 

 

गुरुवार, 29 मार्च,2007

 

राजस्‍थान विधान सभा की बैठक 11:00 बजे

विधान सभा भवन जयपुर, में प्रारम्हुई।

 

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, ध्‍यक्ष, पदासीन)

 

 

अनेक माननीय सदस्‍य : राम-राम सा।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, पहले कभी इधर भी कर लिया करें।

श्री अध्‍यक्ष: ऐसा है, कायदा है, परम्‍परा यही है कि अध्‍यक्ष पहले बाईं तरफ, प्रतिपक्ष की तरफ करता है और फिर सत्‍ता पक्ष की ओर करता है, क्‍योंकि वह निष्‍पक्ष है ..(व्‍यवधान)... क्‍योंकि चेयर निष्‍पक्ष होता है। इसलिए यदि इधर ही इधर करें तो फिर वह पक्ष नजर आ जायेगा ना।

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): एक दिन इधर, एक दिन उधर।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): संस्‍कृत में एक श्‍लोक है कि ''दुर्जनम् प्रथमम् वन्‍दे, सज्‍जनम् तदनन्‍तरम्''

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): यहां कोई दुर्जन नहीं है, दुर्जन-वुर्जन कुछ नहीं है, यह गलत बात कह रहे हैं। सब माननीय सदस्‍य बराबर हैं।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): बराबर तो हैं ही।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, तुलसीदासजी ने कहा है न सज्‍जन कहकर छाडि़ये।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): यह कह सकते हैं निन्‍दक नियरे राखिये, आँगन कुटी छवाय ।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): सही है। ..(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष : श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल। लेकिन आज उपस्थिति इतनी क्षीण क्‍यों हैं ?

 

 

पी.बी.एम.चिकित्‍सालय बीकानेर में उपलब्‍ध चिकित्‍सा सुविधाएं/उपकरण

173. श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): क्‍या उच्‍च शिक्षा (चिकित्‍सा) मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे :-

(1) क्‍या यह सही है कि दिनांक 01 मई, 2006 से 31 दिसम्‍बर, 2006 के मध्‍य राज्‍य में मच्‍छरों के प्रकोप के कारण अनेक बीमारियां यथा - मलेरिया, डेंगू, चि‍कनगुनिया जैसे रोगों से पीडि़त होकर बड़ी संख्‍या में रोगी अस्‍पतालों में भर्ती हुए? यदि हां, तो उक्‍त रोगों से पीडि़त मेडिकल कालेज से सम्‍बद्ध अस्‍पतालों में भर्ती मरीजों की संख्‍यावार सूची सदन की मेज पर रखते हुए यह बतायें कि क्‍या इलाज के दौरान किन्‍हीं रोगियों की मृत्‍यु भी हुई ? यदि हां, तो किन-किन अस्‍पतालों में किन-किन अस्‍पतालों में किन किन मरीजों की ?

(2) क्या यह सही है कि जिला बीकानेर के पी.बी.एम. अस्‍पताल में भी उक्‍त रोगों से पीडि़त अनेक मरीज भर्ती हुए ? यदि हां, तो कितने ?

(3) क्‍या उक्‍त/अनेक रोगियों को जांच/इलाज की समुचित सुविधाएं उपलबध न होने के कारण भर्ती नहीं किया गया/अन्‍य अस्‍पतालों को रेफर किया गया ? यदि हां, तो ऐसी कौनसी जांच थी/कौनसे उपकरण थे जो पी.बी.एम.अस्‍पताल बीकानेर में उपलब्‍ध नहीं थे ?

राज्‍य मंत्री, चिकित्‍सा शिक्षा (श्री वासुदेव देवनानी): (1) 01 मई, 2006 से 31 दिसम्‍बर, 2006के मध्‍य मलेरिया, डेंगू व चिकनगुनिया के रोगी राज्‍य के विभिन्‍न मेडिकल कालेजों  से सम्‍बद्ध चिकित्‍सालयों में भर्ती हुए रोगियों का मेडिकल कॉलेजवार विवरण परिशिष्‍ट 'अ' के रूप में सदन के पटल पर रख दिया गया है। मृतकों की अस्‍पतालवार सूची परिशिष्‍ट 'ब' के रूप में सदन के पटल पर रख दी गयी है ।

(2) जिला बीकानेर के पी.बी.एम.अस्‍पताल में उक्‍त रोगों से पीडि़त जो मरीज भर्ती हुए, उनका विवरण प्रश्‍न के भाग एक के उत्‍तर में वर्णित है।

(3) उक्‍त रोगों की जांच व इलाज की अधिकांश सुविधाएं पी.बी.एम. अस्‍पताल, बीकानेर में उपलब्‍ध है। अस्‍पताल में ब्‍लड सेपरेटर उपलब्‍ध नहीं होने के कारण डेंगू के दो मरीजों को अन्‍यत्र रेफर किया गया। चिकनगुनिया वायरस की जांच की सुविधा पी.बी.एम. अस्‍पताल बीकानेर में उपलब्‍ध नहीं है।

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से  मंत्री महोदय से जानकारी चाहूंगा कि आपने प्रश्‍न के खण्‍ड संख्‍या 3 में उक्‍त रोगों की जांच व इलाज की अधिकांश सुविधाएं पी.बी.एम. अस्‍पताल, बीकानेर में उपलब्‍ध हैं। अस्‍पताल में ब्‍लड सेल सेपरेटर उपलब्‍ध नहीं होने के कारण डेंगू के दो मरीजों को अन्‍यत्र रेफर किया गया, यह बात आपने फरमाई है। मैं आपसे जानकारी चाहता हूं कि ब्‍लड सेल सेपरेटर वहां पर नहीं है तो क्‍यों नहीं है ? क्‍या यह सही है कि ब्‍लड सेल सेपरेटर के क्रय किये जाने के लिये स्‍थानीय सांसद ने वर्ष 2004 में आपको राशि उपलब्‍ध करवा दी थी ? अगर हां, तो वर्ष 2004 में उपलब्‍ध हुई राशि के उपयोग को करते हुए आपने वहां पर ब्‍लड सेल सेपरेटर क्‍यों नहीं स्‍थापित किया गया ? नम्‍बर दो, आपने जांच का किट 1.1.2006 से 31.12.2006 के बीच  में कितने जांच किट क्रय किये, कितनी राशि के क्रय किये, कितने जांच किटों का आपने उपयोग किया और कितने आपके स्‍टॉक में हैं ? नम्‍बर तीन, मैं आपसे यह जानना चाहूंगा कि यह जो ब्‍लड सेल सेपरेटर है उसको इंस्‍टाल करने की क्‍या प्रक्रिया है, जिस प्रक्रिया की पूर्ति आप नहीं कर पाये? कृपया आप इसको स्‍पष्‍ट करें ।

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): अध्‍यक्ष महोदय, सेल सेपरेटर बीकानेर में वर्तमान में नहीं है व जयपुर और जोधपुर में उपलब्‍ध है। बीकानेर के लिये सही है कि वहां के सांसद ने 2004 में 23 लाख रुपये उपलब्‍ध कराये। चूंकि सेपरेटर के लिये कम से कम 39 लाख रुपये चाहिये थे, उनसे निवेदन किया । उन्‍होंने उसके काफी समय बाद 16 लाख रुपये उपलब्‍ध करवाये । अभी हमने वह ब्‍लड सेल सेपरेटर खरीद लिया है । 18.11.2006 को उसको इंस्‍टाल भी कर दिया गया है और 1.3.2007 को लाइसेंस के लिये सारा इसंपेक्‍शन हो गया है। हमें उम्‍मीद है कि बहुत जल्‍दी ही वह लाइसेंस मिल जायेगा और यह सुविधा इनके बीकानेर अस्‍पताल में उपलब्‍ध हो जायेगी।

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री महोदय से जानना चाहता हूं कि जिस राशि का आप जिक्र फरमा रहे हैं, आपको आवश्‍यक राशि उपलब्ध कराये हुए डेढ़ वर्ष हो गये, उस राशिका उपयोग नहीं करने के लिये क्‍या किन्‍हीं अधिकारियों की जिम्‍मेवारी बनती है ? क्‍या यह सही है कि डेंगू के अनेक पेशेंट को महज इसलिए जयपुर रेफर किया गया कि आप वहां उनको इलाज की सुविधा नहीं देना चाहते थे। इससे अलग हटते हुए मैं आरोप लगाता हूं उन डॉक्‍टरों के ऊपर कि उन्‍होंने प्राइवेट अस्‍पतालों की प्रेक्टिस कराने के नाम पर यहां पर यह व्‍यवस्‍था नहीं बनाई और सैंकड़ों निर्दोष लोगों के लाखों रुपये आपने खर्च करवाकर उनको पीड़ा पहुंचाई और अनेक लोग मौत का शिकार हुए। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसके इलाज की आवश्‍यकता सिर्फ डेंगू के लिये ही नहीं बल्कि जो पाइल्‍स के पेशेंट होते हैं, उनके लिये भी हमें सेल सेपरेटर की आवश्‍यकता होती है।

श्री अध्‍यक्ष: भाषण नहीं, माननीय सदस्‍य, प्रश्‍न पूछें।

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): मैं यही प्रश्‍न पूछना चाहता हूं कि क्‍या यह सही है कि महज डेंगू का नाम लेकर इस सेल सेपरेटर को इंस्‍टाल नहीं करने के नाम पर जिन प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्‍मेवारी बनती है, क्‍या आप उनके खिलाफ कोई कार्यवाही करेंगे ? राशि उपलब्‍ध होने के बावजूद राशि का उपयोग नहीं होने व घोर अनियमितता करने वाले अधिकारियों के खिलाफ आप क्‍या कार्यवाही करेंगे ? यह बताने का कष्‍ट करें।

श्री अध्‍यक्ष: मंत्रीजी आप एक जवाब और दीजियेगा । यह दीजियेगा कि 48 पेशेंट डेंगू के आपके विभिन्‍न अस्‍पतालों में हुए और 46 मर गये, केवल दो को आप बचा सके। आखिर इसका कोई कारण होगा, डेंगू वाले प्राइवेट अस्‍पतालों में बहुत से बचे हैं।

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान में कुल 2568 डेंगू के मरीज भर्ती हुए, उसमें से 35 की मृत्‍यु हुई । कोई भी सरकार चाहे विपक्ष की सरकार हो या हम हों, कोई भी नहीं चाहता कि किसी की मृत्‍यु हो। इसलिए डॉक्‍टर उसे बचाना चाहता है और हमने उसकी पूरी व्‍यवस्‍थाएं भी कीं। इसलिए बीकानेर में भी किसी की डेंगू से मृत्‍यु नहीं हुई। केवल दो डेंगू मरीजों को दूसरी जगह रेफर इस सेल सेपरेटर के न होने के कारण किया गया। कोई बड़ी संख्‍या नहीं थी, केवल दो ही मरीज थे, जिनको हमने रेफर किया है। बाकी जहां तक दूसरों की बात है इन्‍होंने कई बीमारियों के लिये कहा। मलेरिया के बारे में मैं निवेदन करना चाहूंगा कि 2993 मरीज जरूर भर्ती हुए, उनमें से 233 की मृत्‍यु हुई, यह सत्‍य है। लेकिन इसके पहले भी मलेरिया फैलता रहा है। सन् 2002 - 2003 में भी फैला। 2002 में 290 मलेरिया के कारण डेथ हुई और 2003 में 178 हुई।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 2002-2003 में मरे इसलिए 2007-2008 में मरेंगे, यह हम नहीं सुनेंगे। ...(व्‍यवधान)... बार-बार 2002 पर आ जाते हो आप। आप 2006-07 की बात करें। तीन साल से आपकी सरकार है। 2002 में मर गये इसलिए अब भी मरेंगे। ...(व्‍यवधान).. अध्‍यक्ष महोदय, 2002 में मर गये तो अब भी मरेंगे, यह क्‍या उत्‍तर है ? आप अपनी जिम्‍मेदारी लीजिये।

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): मैंने कहा कोई भी सरकार नहीं चाहती कि एक भी आदमी मरे।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): एक भी आदमी मरे तो जिम्‍मेदारी आपकी है। 2002 में आदमी मरे, इससे  ...(व्‍यवधान).. यह कोई आर्गुमेंट है ? यह कोई तर्क है ? ...(व्‍यवधान).. आप अपनी जिम्‍मेदारी को ऑन करिये । आपकी सरकार आने के बाद एक भी आदमी मलेरिया से मरता है तो जिम्‍मेदारी आपकी है ।  ...(व्‍यवधान).. पिछले साल में मरे, यह आर्गुमेंट है आपका ।  ...(व्‍यवधान).. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस तरह का जवाब देकर आप सदन में क्‍या करना चाहते हैं ? सरकार यह मानती है कि 2006-07 में 200 से ज्‍यादा आदमी मलेरिया से मरे। यह सरकार की जिम्‍मेदारी नहीं है क्‍यों मरे आदमी ? 2004 में इससे कम मरे हैं । मरेंगे, यह क्‍या तर्क है ? ...(व्‍यवधान).. आप अपनी जिम्‍मेदारी को ऑन करिये ।  ...(व्‍यवधान)..

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): कोई भी सरकार नहीं चाहती कि किसी इंसान की डेथ हो । सरकार पूरी तरह प्रयत्‍न करती है, डॉक्‍टर भी प्रयत्‍न करते हैं।  ...(व्‍यवधान)..

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): कोई नहीं करती ।   ...(व्‍यवधान).. यह डेंगू के इतने आदमी मरे हैं। आपका रिकार्ड सही नहीं है । डेंगू के मरीज को पहचान नहीं पाये आप। इतने डेंगू से राजस्‍थान में मौतें हुई हैं । आपने डेंगू को क्‍लासिफाई नहीं किया। केवल कहा 37 आदमी मरे हैं। एक एक जिले के अंदर 37 से ज्‍यादा आदमी मरे हैं।  ...(व्‍यवधान).. माननीय मंत्रीजी, आपका विभाग डेंगू को पहचानने में असफल रहा है।  ...(व्‍यवधान).. यह अखबारों में स्‍टेटमेंट है विभाग के डॉक्‍टर डेंगू के लक्षण को पहचानने में असफल रहे और डेंगू के मरीज को आइडेंटिफाई नहीं कर पाये। राजस्‍थान में जितनी मौतें डेंगू के नाम पर हुई हैं, उतनी आज तक मौतें नहीं हुईं और डेंगू में 37 आदमी मरे हैं। इससे बड़ी दुर्भाग्‍यपूर्ण स्थिति नहीं बन सकती।

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): मैंने छहों मेडिकल कालेज के बारे में कहा, जो आंकड़े बिलकुल सत्‍य हैं ।

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने जो प्रश्‍न किया था माननीय मंत्रीजी ने उसका जवाब नहीं दिया । मैंने आपसे यह जानकारी चाही थी कि कितने किट इसके लिये क्रय किये गये, कितने किट का इस्‍तेमाल हुआ और कितने स्‍टॉक में हैं । इसके साथ साथ आपने जो जवाब दिया है एक भी मौत नहीं हुई। आपकी सूचना को मैं दुरूस्‍त करना चाहूंगा आपके दिये जवाब से। आपने क्रम संख्‍या 12 पर सतबीर सिंह नाम के एक पेशेंट की डेथ बताई है ।

 

Msr/usc/1110/1b/29032007

 

इसके बाद में आपके इस जवाब के अन्‍दर गलत आपने यह दिया 28 नम्‍बर पर फिर सतवीर सिंह का ही नाम लिख रहे हैं। एक ही पेशेंट की डैथ को दो जगह लिस्‍ट कर रहे हैं। एक तो यह आप देख लीजिए। दूसरा, जो यह संलग्‍न सूची है इसमें जे.के.लोन अस्‍पताल का आप बता रहे हैं क्रम संख्‍या 14 पर नोखा का एक 14 साल के बालक की डैथ हो रही है, वो भी डेंगू से डैथ हो रही है।

यह वो डैथ हैं, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो यह विभाग खुद मान रहा है। मैं पुन: आपको यह कहना चाहता हूं यहां पर गुरु को शिष्‍य बचा रहा है, अधिकारी को बचाने के अन्‍दर बहुत से लोग लिप्‍त हैं। जांच की व्‍यवस्‍था का सही चित्रण नहीं हो पा रहा, कितने किट क्रय किये गये, यह बात स्‍पष्‍ट नहीं हो पा रही।

श्री अध्‍यक्ष: आप प्रश्‍न पूछें, भाषण नहीं दें।

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): सैंकड़ों लोगों की जांच कर के उनको रैफर किया गया प्राइवेट हास्पिटल्‍स में और यह जो प्रक्रिया है, क्‍या यह सही हे कि स्‍थानीय स्‍तर पर डाक्‍टर्स के घरों में अधिकांश पेशेंट ने एप्रोच कर के और अपने आप को वहां इलाज की व्‍यवस्‍था नहीं होने के कारण डाइरेक्‍ट रैफर कराया? इसका रिकार्ड भी आपको उपलब्‍ध कराया जा सकता है।

आप यह बताएं कि कितने किट आपने परचेज किये थे? पी.बी.एम. अस्‍पताल में अण्‍डर सी.एम.एच.ओ. कितने किट परचेज किये गये, डेंगू की जांच के कितनी राशि के क्रय किये गये, यह तो आप बताएं।

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): प्रश्‍न मेडिकल एजुकेशन का है और मेडिकल कालेज का है।

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): पी.बी.एम. अस्‍पताल का बता दीजिए।

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): हां, वो मेडिकल कालेज का बता रहा हूं।

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): बता दीजिए।

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): इस हास्पिटल में डेंगू के 983 लोगों की जांच की गयी और प्रत्‍येक जांच पर 400 रुपये का खर्चा आया 3,93,200 रुपये, निशुल्‍क सरकार ने वहां पर जांच की व्‍यवस्‍था की है।

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 983 पेशेंट की जांच वहां की गयी है, 983 पेशेंट की जांच करने के बाद उनको रैफर किया गया है वहां से या उनको छुट्टी दे दी गयी है, उसके लिए इलाज नहीं हो। 983 लोगों ने अपने परिजनों के साथ एस.एम.एस. अस्‍पताल में इलाज कराने के लिए वहां से पलायन किया है। एक-एक व्‍यक्ति ने कितने-कितने हजार रुपये खर्च किये हैं, क्‍या इसके प्रति किसी की जिम्‍मेदारी बनती है? क्‍या प्रशासनिक स्‍तर पर वो डाक्‍टर्स, जब यह डेंगू अपनी पीक पर था, विदेशों में भ्रमण कर रहे थे, वहां का प्रिंसिपल, वहां का सुपरिन्‍टेन्‍डेंट, वहां का डिप्‍टी सुररिन्‍टेन्‍डेंट, क्‍या उनकी कोई जिम्‍मेदारी बनती है?

श्री अध्‍यक्ष: आप भाषण देने लग जाते हैं, प्रश्‍न नहीं पूछते हैं।

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): निश्चित रूप से डेंगू की जांच के लिए वहां पर 983 में से 35 लोगों को भर्ती किया गया। इन 35 भर्ती वालों में से इलाज किया गया और वहां पर आई.जी.जी., आई.जी.एम. और डिटेक्‍शन किट व उपकरण पर्याप्‍त मात्रा में वहां पर उपलब्‍ध हैं, इन तीनों के कारण किसी भी मरीज को वहां से लौटाया नहीं गया, सब की जांच की गयी और जो भर्ती योग्‍य थे उनको भर्ती किया गया। वहां से केवल दो लोगों को बाहर भेजा, कोई अपनी इच्‍छा से बाहर गया हो उसके बारे में तो मैं नहीं कह सकता लेकिन इतना आपको आश्‍वस्‍त कर सकता हूं कि सरकार इसके लिए भी प्रतिबद्ध है कि सरकार सोशल वैलफेयर सरकार है, सरकार सब के चिकित्‍सा का प्रबन्‍ध करती है और करने में कोई कोताही नहीं बरती है लेकिन फिर भी यदि कोई आपके पास इस तरह का प्रमाण हो कि पर्टिकुलर कोई डाक्‍टर ने या अपने किसी बीमार का कोई केस हो, आप बतायेंगे मैं जांच करवा कर के दोषी लोगों को निश्चित रूप से सज़ा दूंगा।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह जानना चाहता हूं कि ब्‍लड सैपरेटर मशीन कब आयी और कितने महीने तक वो वहां पड़ी हुई है, डम्‍प हुई हुई है, उसको नहीं लगाने के पीछे कौन दोषी है?

दूसरी बात मैं यह कहना चाहूंगा कि बीकानेर में कितने लोग डेंगू से मरे, कितनो को रैफर किया?

तीसरा, यह कि आपने मलेरिया और डेंगू के मच्‍छरों को और उनके लार्वा को एक तरीके से फैलने नहीं दने के लिए क्‍या उपाय किये? क्‍या आपने डी.डी.टी. या कोई स्‍प्रे वगैरह का काम किया?

मैं स्‍पष्‍ट कहना चाहता हूं, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पूरे राजस्‍थान में डेंगू और मलेरिया के बचाव के लिए जो स्‍प्रे का कार्यक्रम होता है वो सरकार ने ड्राप कर दिया। इसके कारण से यह सारी चीज हुई। इसका उत्‍तर दें कि क्‍या आपने कोई स्‍प्रे या डी.डी.टी. छिड़काव कार्यक्रम किया था?

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जहां तक इनके सैपरेटर की बात है, सैपरेटर 18.11.06 को इन्‍स्‍टाल किया गया। 01.03.07 को इसकी जांच पूरी की गयी ...

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): आपने खरीदा कब, यह बताएं।

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): और आज वो लाइसेंस की प्रतीक्षा में है, मुझे लगता है कि जल्‍दी लाइसेंस उपलब्‍ध होने पर हम इसकी सेवाएं ले पायेंगे।

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): खरीदा कब, यह बताएं न।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): खरीदा कब था? ...(व्‍यवधान)...

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): आया कब?

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): खरीदा, इन्‍स्‍टाल करने के साथ ही तो खरीदा है।

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): जी नहीं। जी नहीं, यह गलत बयानी कर रहे हैं।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): यह 2004 में 23 लाख आपके पास आ गये और छठे महीने में फिर 16 लाख दे दिये, माननीय लोक सभा सदस्‍य ने और फिर भी आप नहीं खरीद पाये।

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): 2006 में दिये हैं 16 लाख, तो 2006 में ही तो खरीदा है हमने। ...(व्‍यवधान)...

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): 2006 में नहीं दिये, 2005 में दिये हैं।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ...(व्‍यवधान)... 2004 में फिर भी आप नहीं खरीद पाये।

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): 2004 में दिये हैं फिर 2005 में दिये हैं। उसको क्रय नहीं करने की, उसको इन्‍स्‍टाल नहीं करने की जिम्‍मेदारी किस की है?

श्री अध्‍यक्ष: हिण्‍डौली से आने वाले माननीय सदस्‍य।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): जिम्‍मेदारी किसकी है जिसके कारण मरीजों को आपको शिफ्ट करना पडा जांच के अभाव में? इसकी जिम्‍मेदारी किसकी है? ...(व्‍यवधान)...

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): क्‍या यह सही है कि जब इमरजेंसी होती है तो ड्यूटीज जो होती हैं, जो छुट्टियों पर होते हैं उनकी छुट्टियों को निरस्‍त करते हैं? यदि हां, तो क्‍या वहां पर जो डाक्‍टर्स से प्रिंसिपल, सुपरिन्टेन्डेंट, डिप्‍टी सुपरिन्‍टेन्‍डेंट जो विदेश यात्रा कर रहे थे सरकार के पैसे पर, क्‍या आपने उनकी ड्यूटीज को निरस्‍त किया?

श्री अध्‍यक्ष: आप एक के बाद एक खड़े हो जाते हैं, आने देते नहीं हैं, पहले प्रश्‍न का उत्‍तर ही नहीं आने देते हैं।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसी से जुड़ा हुआ है एक।

श्री अध्‍यक्ष: खड़े हैं न मंत्रीजी।

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सांसद महोदय ने दो अलग-अलग चरणों में, अक्‍टुबर, 2004 से जुलाई, 2006 के मध्‍य धनराशि उपलब्‍ध करायी। जब जुलाई, 2006 के मध्‍य उपलब्‍ध करायी, आर्डर देंगे और नवम्‍बर तक आ गयी और नवम्‍बर में हमने उसको इन्‍स्‍टाल कर दिया तो निश्चित रूप से कोई अधिक समय नहीं लगा है।

जहां तक डाक्‍टर्स की बात है, आपने कहा कि डाक्‍टर्स के लिए क्‍या किया, हमारे छ: मेडिकल कालेज ने बीस दल बना कर के बाकी स्‍थानों के लिए भी रवाना किये ताकि इन तीनों में, जो एक प्राकृतिक आपदा पहली बार डेंगू औरे चिकनगुनिया का पहली बार हमारे यहां पर यह आये, हमने इसकी व्‍यवस्‍था की हे।

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): आप तो बीकानेर का जवाब दीजिए न कि आपने क्‍या किया? वो ठीक है और जो आप फरमा रहे हैं।

मैं फिर स्‍पष्‍ट कहना चाहूंगा, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने जो प्रश्‍न किया, 2004 में 23 लाख रुपया, 23.05.05 को 13 लाख रुपये की प्रशासनिक स्‍वीकृति पुन: जारी हो गयी तो आप कैसे कहते हैं कि 2006 में राशि मिली और जिसकी स्‍वीकृति जारी हो गयी है 2005 में। इसकी जिम्‍मेदारी किनकी बनती है? यह आप स्‍पष्‍ट करें और उन पर क्‍या कार्यवाही कर रहे हैं, यह स्‍पष्‍ट करें।

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): मैं निश्चित रूप से आपने जो डेट बतायी है इसका पता करूंगा, यदि कहीं कोई लैप्‍स हुआ होगा तो मैं कार्यवाही करूंगा।

श्री अध्‍यक्ष: बस हो गयी बात। नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इन्‍होंने कोई पूरे राजस्‍थान में एक जगह डी.डी.टी. की और मलेरिया और डेंगू निरोधक दवाओं का कहीं छिड़काव नहीं किया, इसके बारे में तो जवाब दें कि कहां-कहां किया और कितनी-कितनी राशि खर्च की?

श्री अध्‍यक्ष: डेंगू का मच्‍छर तो साफ जगह होता है। साफ जगह होता है, यह तो असेम्‍बलि में भी हो सकता है। ...(व्‍यवधान)...

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): ऐसा है कि मच्‍छरों को मारने के लिए प्रोग्राम चलाते हैं, घर-घर, गांव-गांव के अन्‍दर मलेरिया को रोकने के लिए, डेंगू को रोकने के लिए छिड़काव होता है लेकिन सरकार ने बिलकुल नहीं किया।

श्री अध्‍यक्ष: यह डेंगू वाला साफ जगह में रहता है।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय कल्‍ला साहब ने जो पूछा है ...

श्री अध्‍यक्ष: मंत्रीजी कह रहे हैं। ...(व्‍यवधान)... मंत्रीजी खड़े हैं न।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मच्‍छर तो हमारे क्‍वार्टरों में ही इतना ज्‍यादा हैं जिसकी कोई सीमा ही नहीं। मच्‍छरों पर तो काबू ना पहले हुआ और ना अब हो रहा है।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक निवेदन करना चाह रहा था। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: आप सुनें तो सही मंत्रीजी को।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं एक निवेदन करना चाह रहा था। आपने मलेरिया के बारे में बात की, आपने मच्‍छरों के बारे में बात की, मलेरिया, डेंगू के माननीय सी.पी. जोशी साहब ने भी कहा कि राजस्‍थान सरकार की जिम्‍मेदारी है। मैं मानता हूं सरकार की जिम्‍मेदारी है। अगर एक भी डैथ चाहे मलेरिया से हो, चाहे डेंगू से हो जिम्‍मेदारी राजस्‍थान सरकार की है। हम इस जिम्‍मेदारी से दूर नहीं हो रहे बल्कि इसको मानते हैं पर निवेदन यह करना चाहता हूं कि डी.डी.टी. स्‍प्रे के एक नियम-कायदे तय होते हैं सेण्‍टर गवर्नमेंट के स्‍तर पर। वो मैं आपको निवेदन करना चाहता हूं। पहले 2.5 ए.पी.आई. पर डी.डी.टी. का स्‍प्रे हुआ करता था। 2.5 ए.पी.आई. का मतलब एनुअल पैरासाइट इन्‍डैक्‍स वहां उस एरिया का जिसका होता था...

श्री अध्‍यक्ष: मंत्रीजी, गवर्नमेंट ऑफ इंडिया पर स्‍वास्‍थ्‍य का मामला न छोड़ें आप। नो, नो, आपकी भी जिम्‍मेदारी है। 

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, डी.डी.टी. सप्‍लाई गवर्नमेंट ऑफ इंडिया करती है, डी.डी.टी. कभी राजस्‍थान गवर्नमेंट परचेज नहीं करती है।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): आपने मांगी थी क्‍या भारत सरकार से?

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): हां, बिलकुल, मैं वही निवेदन करना चाहता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: कोई जरूरी थोड़ी ही है भारत सरकार से।

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): सारा मामला भारत सरकार पर छोड़ दिया।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): मैंने माननीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री महोदय के साथ में मीटिंग में निवेदन किया था जो 2.5 ए.पी.आई. पर डी.डी.टी. स्‍प्रे हुआ करता था उसके दो राउंड्स हुआ करते थे, उसको 5 ए.पी.आई. पर राजस्‍थान में कर दिया गया इसलिए बहुत सारा एरिया ऐसा है जो स्‍प्रे उस पर नहीं हो पाता है।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, भारत सरकार की तरफ से यह हे क्‍या कि आप खरीद नहीं सकते और आप छिड़काव नहीं कर सकते?

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): नहीं खरीद सकते, वो ही सप्‍लाई करते हैं।

श्री अध्‍यक्ष: अच्‍छा, तब बात है।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): वो ही सप्‍लाई करते हैं और वो उस हिसाब से ही सप्‍लाई करते हैं इसलिए वो पूरा एक साथ नहीं हो पाता है।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, लेकिन यदि आप आवश्‍यक समझो तो क्‍या नहीं खरीद सकते?

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): तो मैंने माननीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रीजी से निवेदन भी किया  था कि राजस्‍थान में 2.5 ए.पी.आई. इसको हम को वापस से एप्‍लाई करें। इसलिए यह जो बात कह रहे हैं यह बात है, बाइलोजिकल कंट्रोल भी हम कर ही रहे हैं।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह तो साइकलिकल ट्रेंड हे, इसमें ऐसे नहीं कि हमारे स्‍तर में कहीं प्रयास में कोई कमी हुई हो परन्‍तु यह बात निश्चित है कि जितना कवरेज डी.डी.टी. का होना चाहिए था, जो राउंड्स होना चाहिए थे वो पूरा कवरेज नहीं हो पा रहा है। ...(व्‍यवधान)...

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): जो सैपरेटर इन्‍स्‍टाल के लिये उसके लिए स्‍टॉफ आज तक पी.बी.एम. हास्पिटल में नहीं है। आपके महकमे से उधार लेकर के इन्‍होंने इंस्‍पेक्‍शन करवाये हैं। आज तक इनके पास स्‍टॉफ नहीं है, कहां आप सुविधाओं की बात करते हैं, मंत्री महोदय।

श्री अध्‍यक्ष: नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन। श्री लालचंद कटारिया।

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं एक प्रश्‍न पूछना चाहता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, अगला पुकार लिया मैंने। श्री लालचंद कटारिया।

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): मैं एक प्रश्‍न पूछना चाहता हूं कि आर्डर कब लिया, किस कम्‍पनी को दिया, वो कम्‍पनी भारतीय है या विदेशी है?

 

Ars/usc/1120/1c/29032007/1

 

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, कोई आवश्‍यकता नहीं है। श्री लालचन्‍द कटारिया।

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): और आर्डर देने और माल सप्‍लाई करने में जो विलम्‍ब हुआ वह कम्‍पनी की तरफ से हुआ या हमारी तरफ से हुआ है ?

श्री अध्‍यक्ष: श्री लालचन्‍द कटारिया।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): चिकनगुनिया से बाल उड़ रहे हैं। अब सरकार को कम से कम इतनी अनप्रीसिडेंटल घटना हुई, राजस्‍थान में डेगूं और चिकनगुनिया, आज अख़बार में खबर है, उन पेशेण्‍ट्स के बाल उड़ रहे हैं। मैं सरकार से अपेक्षा करूंगा कि सरकार ऐसी अनप्रीसिडेंटल बीमारियों को मीट आउट करने के लिए अपने लेवल पर आगे आकर ऐसा काम करें जिससे राजस्‍थान की जनता को एश्‍योरेंस मिले कि डेंगू हो या चिकनगुनिया हो, चाहे उसके फाल आउट से कोई भी बीमारी हो, सरकार मुस्‍तैदी से काम करके इनको बचाएगी, यह आपको तैयारी करने की जरूरत है।

प्रश्‍न संख्‍या- 174

श्री अध्‍यक्ष: श्री लालचन्‍द कटारिया।

(अनुपस्थित: कृपया आगे देखें)

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): इसमें अध्‍यक्ष महोदय, मैं इनकी एक बात का उत्‍तर दूंगा, सरकार निश्चित रूप से, हम इसका जन जागरण अभियान भी चलायेंगे, विशेषज्ञ दल भी गठित करेंगे।

श्री अध्‍यक्ष: नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन, मैंने नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन पुकार लिया। श्री रिछपाल सिंह मिर्धा।

विधान सभा क्षेत्र डेगाना में केन्‍द्रीय सड़क निधि

योजनान्‍तर्गत स्‍वीकृत सड़कें

 

175. श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): क्‍या सार्वजनिक निर्माण मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे :-

(1) केन्‍द्रीय सड़क निधि के अन्‍तर्गत डामरीकृत सड़कें स्‍वीकृत करने की क्‍या नीति निर्धारित है ? विवरण सदन की मेज पर रखें।

(2) वर्ष 2004-05, 2005-06 एवं 2006-07 के दौरान विधान सभा क्षेत्र डेगाना में इस योजना के अन्‍तर्गत कितने किलोमीटर सड़कें कहां कहां पर स्‍वीकृत की गई ? विवरण स्‍थान एवं राशि तथा सड़कों की लम्‍बाई सहित सदन की मेज पर रखें।

(3) अगले वित्‍तीय वर्ष के दौरान विधान सभा क्षेत्र डेगाना के कितनी आबादी तक के ग्राम पक्‍की सड़कों से उक्‍त योजनान्‍तर्गत जोड़ दिये जायेंगे? ग्रामवार सूची सदन की मेज पर रखें।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): (1) केन्‍द्रीय सड़क निधि योजना के अन्‍तर्गत डामरीकृत सड़कें स्‍वीकृत करने की नीति, भारत सरकार के पोत सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, नई दिल्‍ली के पत्रांक आर. डब्‍ल्‍यू/ एन.एच. 28030/1/ 2001- पी एण्‍ड एम दिनांक 13 जुलाई, 2001 द्वारा राज्‍य स्‍तरीय सड़कों के विकास हेतु निर्धारित की गई है। जिसकी प्रति परिशिष्‍ट पर संलग्‍न है।

(2) वित्‍तीय वर्ष 2004-05, 2005-06 एवं 2006-07 के दौरान विधान सभा क्षेत्र डेगाना के अन्‍तर्गत केन्‍द्रीय सड़क निधि योजना में कोई भी सड़क की स्‍वीकृति प्राप्‍त नहीं हुई है।

(3) केन्‍द्रीय सड़क निधि योजना के तहत ग्रामों को पक्‍की सड़क से जोड़ने का कोई प्रावधान नहीं है।

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री महोदय से यह जानना चाहूंगा कि केन्‍द्रीय निधि सड़क योजना के तहत डेगाना में कोई स्‍वीकृति प्राप्‍त नहीं हुई, अन्‍य जगह कितनी स्‍वीकृतियां प्राप्‍त हुई हैं जिले में ? यह भी आप बता दें।

दूसरा, कौन कौनसी सड़कें केन्‍द्रीय सड़क निधि योजना के अन्‍तर्गत डेगाना की आती हैं और उनकी वर्तमान में क्‍या स्थिति है ?

श्री नन्‍दलाल मीणा (प्रतापगढ़): आती नहीं है।

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): आती कैसे नहीं है, आपको मालूम है, मंत्री जी जवाब देंगे कि आप देंगे, आती नहीं है, यहां बैठे हैं सक्षम हैं मंत्री जी जवाब देने में।

श्री अध्‍यक्ष: बीच में बैठे नहीं बोलें और बात सही है मंत्री जी की जगह आप कैसे जवाब देते हैं।

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): या आप दे दो जवाब, मंत्री जी दे रहे हैं जवाब बीच में कहते हैं आती नहीं है । मेरे क्षेत्र का मेरे को पता है कि आपको पता है। प्रश्‍नकाल में ही करने लग जाते हैं।

श्री अध्‍यक्ष: आप प्रश्‍न पूछो।

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): मैं पूछ रहा हूं, प्रश्‍न ही पूछ रहा हूं।

श्री अध्‍यक्ष: आप पूछो कोई दिक्‍कत नहीं है।

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): उक्‍त योजना के अन्‍तर्गत डेगाना में आने वाली सड़कों के लिए क्‍या कोई प्रस्‍ताव बनाये, यदि नहीं बनाये तो क्‍यों नहीं बनाये, इसका जवाब भी आप दें। जबकि आपके घोषित मापदण्‍डों के अनुसार मेजर डिस्ट्रिक्‍ट रोड, अन्‍य महत्‍वपूर्ण सड़कें आती हैं तो इनके प्रस्‍ताव आपने क्‍यों नहीं बनाये? स्‍टेट हाई वे 59 जो टहला से सूदवाड़ तक जाता है वह कच्‍ची सड़क है उसको आप कब तक पक्‍का करने की योजना बना रहे हैं या नहीं बना रहे हैं ?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने यह जानना चाहा है कि नागौर और डेगाना जिले में कितने किलोमीटर सड़क ऐसी है जो इन सी आर एफ के मापदण्‍डों के अनुसार जिनका नवीनीकरण, सुदृढ़ीकरण किया जा सकता है, अध्‍यक्ष महोदय, नागौर जिले में 955 किलोमीटर सड़क स्‍टेट हाई वे है सी आर एफ के फण्‍ड से इसमें 419 किलोमीटर सड़क का नवीनीकरण और सुदृढ़ीकरण कर दिया गया है। मेजर डिस्ट्रिक्‍ट रोड नागौर जिले में 377 किलोमीटर है, 113 किलोमीटर का सुदृढ़ीकरण और नवीनीकरण कर दिया गया है। डेगाना विधान सभा में राज्‍य राजमार्ग 139 किलोमीटर है और मुख्‍य जिला सड़क 31 किलोमीटर है।

अध्‍यक्ष महोदय, मैंने जिस तरह पहले निवेदन किया कि सी आर एफ के तहत जो मापदण्‍ड राज्‍य सरकार के बने हुए हैं इनमें राज मार्ग स्‍टेट हाई वे, मुख्‍य जिला सड़क इनका सुदृढीकरण और नवीनीकरण का काम हम लेते हैं, कोई मुख्‍य ब्रिज अगर टूट गया तो उसको भी लेते हैं। अध्‍यक्ष महोदय, यह सही है कि पिछले वर्षो में सी आर एफ के तहत जो राशि हमें मिल रही है वह राशि हमारे सैस के तहत जो हमारा हिस्‍सा है उसके अनुसार मिल रही है और उस राशि से जो रिन्‍युअल साइकल में जो सड़कें आती हैं, जिन सड़कों की आयु छह वर्ष से आठ वर्ष स्‍टेट हाईवे में और मेजर डिस्ट्रिक्‍ट रोड में दस से बारह वर्ष हो गयी है, वह इस मापदण्‍ड में नहीं आती है। वह राशि कम पड़ती है इसीलिए अध्‍यक्ष महोदय, हमने एक योजना बनायी है 325 करोड़ की और 1500 किलोमीटर सड़कें ऐसी हैं राजस्‍थान के अन्‍दर जो 1996 में बनी थीं जिनका अभी तक नवीनीकरण हम नहीं कर पाये। इनका स्‍टेट हाई वे और एम डी आर इन सारी सड़कों का 325 करोड़ की जो योजना बनायी है उनके तहत हम नवीनीकरण भी करेंगे और इनका सुदृढ़ीकरण भी करेंगे।

अध्‍यक्ष महोदय, आपने कहा कि कौन कौनसी ऐसी सड़कें हैं जो रह गयी, मैंने पहले निवेदन किया डेगाना के अन्‍दर पहले बड़ी घाटी, तिरणाउ, डीड़वाना, चालीस किलोमीटर सड़क, चार करोड़ रुपये स्‍वीकृत हुए थे, जो काम पूरा हो गया और नौ किलोमीटर सड़क इसी में इस पर 42 लाख रुपये स्‍वीकृत हुए थे और इसी तरह नागौर जिले के अन्‍दर भी इस सी आर एफ के तहत अब तक 42 करोड़ की स्‍वीकृति हमने जारी की है।

अध्‍यक्ष महोदय, जो हमने योजना बनाई है उस योजना के तहत माननीय सदस्‍य को मैं विश्‍वास दिलाना चाहूंगा कि इनकी जो भी सड़कें आएंगी इस बार जो हमने 325 करोड़ की योजना बनायी है...

श्री अध्‍यक्ष: सी आर एफ की एक दो सड़कें इनकी भी ले लीजिए। बात तो इतनी सी है और क्‍या है बहुत बड़ी बात थोड़े ही है कुछ।

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): कहां ले रहे हैं, इसकी तो पीड़ा है मेरे को। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं नीतिगत प्रश्‍न पूछ रहा हूं रिन्‍युअल करने का समय, आपके माध्‍यम से मैं यह जानना चाहता हूं कि क्‍या यह सही है कि उक्‍त योजना के अन्‍तर्गत डेगाना में स्‍टेट हाईवे 59 व 82 किलोमीटर स्‍टेट हाई 60 की 64 किलोमीटर इस योजना के अनतर्गत आती है। रिन्‍युअल की क्‍या समय सीमा है? लंगोर से बामणा आठ मिलोमीटर सड़क ग्‍यारह वर्ष पूर्व रिन्‍युअल की गयी थी, बाद में क्‍यों नहीं हुई ? स्‍टेट हाईवे डेगाना किरोधा सड़क की चौड़ाई तीन मीटर है जबकि इनके मापदण्‍ड़ाके आधार पर 3.75 मीटर होनी चाहिए, एम डी आर 24 जैतारण, मेड़ता, डेगाना सड़क की चौड़ाई तीन मीटर है जबकि कम से कम 3.75 मीटर होनी चाहिए। इन सड़कों की चौड़ाई तीन मीटर ही क्‍यों है? इनके मापदण्‍ड़ों के अनुसार अध्‍यक्ष महोदय, 3.75 है तो इसका जवाब दे दें कि इन सड़कों की चौड़ाई कम क्‍यों है ? यह भी बता दें और आपने अब जो तीनसौ और कुछ करोड़ रुपये की योजना बनायी है उसमें मेरे विधान क्षेत्र की कौन कौनसी सड़कें आप ले रहे हो, कृपा करके यह भी बता दें।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, यह जो सड़कें हैं यह स्‍टेट हाई वे और मेजर डिस्ट्रिक्‍ट रोड हैं यह दो प्रकार की सड़कें इस योजना के अन्‍दर हम ले सकते हैं। यह सारी सड़क जो पहले आर्डिनरी डिस्ट्रिक्‍ट रोड होती है उससे क्रमोन्‍नत करके वह सैंसस जो हम करते हैं ट्रेफिक का उसके अनुसार मेजर डिस्ट्रिक्‍ट रोड बनाते हैं और मेजर डिस्ट्रिक्‍ट रोड पर जब यातायात का दवाब ज्‍यादा होता है तो उन्‍हीं में क्रमोन्‍नत करके हम स्‍टेट हाईवे बनाते हैं।

इसमें यह भी बात सही है कि कई ऐसी सड़क भी हैं जिनका क्रमोन्‍नयन तो हो गया परन्‍तु जिनकी चौड़ाई इन मापदण्‍डों के अनुसार नहीं हो रही या नवीनीकरण नहीं हुआ, इसीलिए अध्‍यक्ष महोदय, मैंने निवेदन किया कि हमने राज्‍य स्‍तर पर जो योजना बनायी है उस योजना के अन्‍दर हम इन सारी चीजों को शामिल कर रहे हैं। जिस तरह मैंने पहले निवेदन किया राज्‍य उच्‍च मार्ग में छह वर्ष आठ वर्ष के बीच में जो सड़क बन जाती है उनको रिन्‍युअल करने का काम होता है उसकी आयु निर्धारित की हुई है और मुख्‍य जिला सड़क में आठ दस वर्ष तक, मैं अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से माननीय सदस्‍य से निवेदन करना चाहता हूं इन्‍होंने कुछ सड़कों का नाम लिया है, उन सड़कों की कैटेगरी क्‍या है, इसकी पूरी जानकारी तो मुझे नहीं है परन्‍तु उन सारी सड़कों में जो जो सड़कें इस मापदण्‍ड के अनुसार आती हैं, निश्चित तौर पर उन पर विचार करेंगे और नये प्रस्‍तावों में हम उनको शामिल करके हम भारत सरकार को निश्चित तौर पर भेजेंगे।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): मन्‍त्री जी आपने स्‍वयं ने जो सवाल के उत्‍तर के साथ दिया है All State roads including State Highways, Major District roads and other roads of importance….तो अदर रोड आफ इम्‍पार्टेंस हो सकती है तो उस कैटेगरी के अन्‍तर्गत माननीय सदस्‍य के क्षेत्र में आप सड़क कर सकते हैं। आप यह क्‍यों बहाना ले रहे हैं कि क्राइटेरिया में नहीं आती हैं In other important roads, you can take any road.

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): माननीय मंत्री महोदय, यह बताएं कि चार से छह वर्ष जो स्‍टेट हाईवे या स्‍टेट हाईवे के रिन्‍युअल का टाइम है और एम डी आर का आठ से दस का जो आप बता रहे हैं अतिवृष्टि से भीलवाड़ा, गंगापुर, कांकरोली मार्ग जो पूरा खतम हो चुका, छह महीने में सौ एक्‍सीडैंट हो चुके हैं ।

श्री अध्‍यक्ष: करौली बीच में कहां आ गया डेगाना के ?

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): जो स्‍टेट हाई वे है और राजस्‍थान के स्‍टेट हाईवे ..

श्री अध्‍यक्ष: No. I will not allow.

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): केन्‍द्रीय रोड नीति का मैटर है, राजस्‍थान की रोड नीति की बात हो रही है।

श्री अध्‍यक्ष: अलग से प्रश्‍न है, अलग से प्रश्‍न है ।

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): इसलिए मैं यह बात कह रहा हूं कि क्‍या चार से छह वर्ष का जो रिन्‍युअल टाइम है उससे पहले जो सड़कें क्षतिग्रस्‍त हुई हैं उनको भी आप ठीक करने का केन्‍द्रीय रोड नीति में विचार रखते हैं ? रखते हैं तो कब तक ?

श्री अध्‍यक्ष: अलग से प्रश्‍न है।

श्री सुरेन्‍द्र गोयल (जैतारण): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा एक निवेदन है कि माननीय मंत्री महोदय, अदर डिस्ट्रिक्‍ट को जोड़ने वाली रोड हैं ................... 

 

vns/usc/11.30/1d/29.3.2007/1

 

उनके बीच में जो आबादी बसी हुई है, गांव बसे हुए हैं। गांव के बीच में रोड इतनी खराब है कि उसका मैं मूल्‍यांकन नहीं कर सकता तो उनको सी.सी. रोड में बनाने का इस वर्ष में प्रावधान है या नहीं है ? 

श्री अध्‍यक्ष: वह एम.एल.ए. को कहते हैं बनाओ अपनी सीमेण्‍ट की सड़क।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): आप तो डेगाना के बारे में बताइये। आप तो डेगाना ... (व्‍यवधान) 

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  जो मेजर डिस्ट्रिक्‍ट रोड और स्‍टेट हाईवे हैं, जो आबादी क्षेत्र से गुजरते हैं यह सही है कि आबादी क्षेत्र में इनकी हालत खराब रहती है इसीलिये हमने 100 करोड़ रुपये की योजना बनायी है और जितने भी राजस्‍थान में स्‍टेट हाईवे, मेजर डिस्ट्रिक्‍ट रोड्स हैं जो किसी भी आबादी क्षेत्र से गुजरती है उन सबको आगामी वित्‍तीय वर्ष के अन्‍दर हम सीमेण्‍ट रोड में बदलने का काम करेंगे।

श्री अध्‍यक्ष: बहुत अच्‍छा।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  अब तक जो हमें राशि प्राप्‍त हुई है सी.आर.एफ. के तहत वह राशि लगभग हमें 80 करोड़ से लेकर 102 करोड़ के बीच प्राप्त होती है। यह हमारा सैस में हिस्‍सा है वह है। हमें 635 करोड़ रुपये प्राप्‍त हुई हैं और उसमें से 522 करोड़ रुपये हमने व्‍यय कर दिये हैं। 7431 किलोमीटर सड़क का रिन्‍युअल कर दिया, 112 काम प्रगति पर हैं।

इसके पश्‍चात् माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  जिस तरह मैंने कहा 8000 किलोमीटर सड़कें ऐसी थीं स्‍टेट हाईवे की जिनको योजनाबद्ध तरीके से सी.आर.एफ. में और हमने जो सैस में लिया है उस राशि में इन सबको मिलाकर सारा रिन्‍युअल करने के काम को हाथ में लिया था। 1500 किलोमीटर आगामी वित्‍तीय वर्ष में करेंगे और उसमें माननीय सदस्‍य ने जो कहा और यह सही है जैसा रामगढ़ से आने वाले माननीय सदस्‍य कह रहे हैं कि जो गाइड लाइन है उस गाइड लाइन के अन्‍दर हम अदर इम्‍पोर्टेंट रोड, जो बहुत महत्‍वपूर्ण रोड हैं उनको भी ले सकते हैं। तो निश्चित तौर से रोड की सूची मैं आपसे ले लूंगा और उस पर गुणावगुण के आधार पर विचार करके जो कर पाऊंगा वह करूंगा।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): अब आपने तो स्‍वयं ने हमको दिया है।

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): माननीय मंत्रीजी, सी.आर.एफ. से ही जुड़ा हुआ है। 40-45 गांव मेरी कांस्‍टीट्वेंसी के इससे प्रभावित हैं ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: No. I will not allow.

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहूंगा माननीय मंत्रीजी से ... (व्‍यवधान) 

श्री अध्‍यक्ष: नौ-नौ।

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): क्‍या यह सही है कि भादरा झासर सड़क सी.आर.एफ. में मंजूर हुई ? यदि हां, तो इसकी मंजूरी कब मिली ? इसका कार्य कब तक होना चाहिये था? अब तक कार्य पूरे नहीं होने के क्‍या कारण रहे ? ... (व्‍यवधान)  

श्री अध्‍यक्ष: No. I have called next question.

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): और तीसरा स्‍पेसिफिक है मंत्रीजी कि अब तक जो भी कार्य, आगे यह सड़क कब तक पूरी हो जायेगी ?

श्री अध्‍यक्ष: श्री जोगाराम पटेल।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  न तो यह गवर्नमेंट सी.सी. रोड बनाती है। एम.एल.ए. फण्‍ड से जो भी बना उनको भी बंद कर दिया। कम से कम यह तो बता दें कि सी.सी. रोड बनाएंगे कि नहीं?

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  मैंने जो रिन्‍यूअल का जिक्र किया। ग्‍यारह साल से जो सड़क पर रिन्‍यूअल नहीं हुआ उसका तो मंत्रीजी कृपा करके कह दें कि इस साल करवा देंगे अपन। ... (व्‍यवधान) सड़क काम नाम भी बताया। सड़क ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: मंत्रीजी आप ... (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  1996 तक के जो भी स्‍टेट हाई वे और मेजर डिस्ट्रिक्‍ट रोड होगी उन सारी को हम इसी वित्‍तीय वर्ष में ले लेंगे। 1996 तक की उसमें आपकी सड़क भी काफी आ रही है।

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है। आ जाएगी।

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): ठीक है साहब।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): यह सी.सी.रोड का भी जवाब दें माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  हमारे जेतारण से आने वाले माननीय सदस्‍य ने पूछा है। गांवों में न यह तो सी.सी.रोड बनाते हैं और एम.एल.ए. ने बनाकर दिया उसको भी बंद कर दिया।

श्री अध्‍यक्ष: श्री जोगाराम पटेल।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): यहां न तो मरने देते हैं और न जीने देते हैं। ... (व्‍यवधान) उनसे कहें वहां पर बनायें और नहीं बनायें तो इनको कम्‍प्‍लीट तो कर दें। न तो जीने देते हैं और न मरने देते हैं। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: No. I have called next question.

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): सी.आर.एफ. का ही है माननीय मंत्रीजी, जवाब देने के लिए खड़े हुए हैं1

श्री अध्‍यक्ष: मैंने नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन पुकार लिया। ... (व्‍यवधान)

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  अन्‍तरराज्‍यीय सड़क का मामला है। राजस्‍थान और हरियाणा से जुड़ा हुआ मामला है और राजस्‍थान की इज्‍जत और बेइज्‍जती का भी मामला है। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: मैंने कहा कि यह इस प्रश्‍न से संबंधित नहीं है ... (व्‍यवधान) आपका सप्‍लीमैंट्री मूल प्रश्‍न से संबंधित नहीं है ... (व्‍यवधान)

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): हरियाणा से जब भी राजस्‍थान में प्रवेश करते हैं भादरा-दुमपर रोड से तो उस समय यह रोड बीच में आती है और हरियाणा से आने वाला हर व्‍यक्ति ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं होगा। ... (व्‍यवधान) नो-नो ... (व्‍यवधान)

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): 000

श्री अर्जुन सिंह (दानपुर): 000

श्री अध्‍यक्ष: मूल प्रश्‍न से संबंधित आपका सप्‍लीमैंट्री नहीं है इसलिए मंत्री के लिए कोई आवश्‍यक नहीं है। ... (व्‍यवधान)

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): 000

श्री अर्जुन सिंह (दानपुर): 000

श्री अध्‍यक्ष: श्री जोगाराम पटेल। ... (व्‍यवधान) कह दिया न उन्‍होंने। मंत्रीजी। 

 

राजस्‍व कार्यालयो का गठन/पुनर्सीमांकन

 

176. श्री जोगाराम पटेल (लूणी): क्‍या राजस्‍व मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) क्‍या सरकार पटवार-मंडलों, राजस्‍व मंडलों, उप-तहसीलों व तहसीलों का पुन: सीमांकन करने का विचार रखती है? यदि हां, तो कब क व नहीं हों, तो क्‍यों?

(2) क्‍या सरकार नये पटवार-मंडलों, राजस्‍व निरीक्षक मंडलों, उप तहसीलों व तहसीलों के गठन का विचार रखती है? यदि हां, तो कब तक व नहीं तो क्‍यों? 

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): (1) जी, नहीं।

(2) जी, नहीं।

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  मैं माननीय मंत्री महोदय से आपके माध्‍यम से दो प्रश्‍न निवेदन करना चाहूंगा। मेरे प्रश्‍न के दो भाग थे। एक भाग तो क्‍या सरकार पटवार-मंडलों, राजस्‍व मंडलों, उप-तहसीलों व तहसीलों का पुन: सीमांकन करने का विचार रखती है? और दूसरे भाग में यदि नहीं तो क्‍यों नहीं। इन दोनों प्रश्‍नों में दूसरे भाग का उत्‍तर क्‍यों नहीं दिया? पहला मेरा प्रश्‍न तो यह है। नहीं करने का तो जी, नहीं कर दिया पर क्‍यों नहीं करना चाहते हैं इसका कोई उत्‍तर नहीं दिया।

मेरा पहला प्रश्‍न आपके माध्‍यम से है कि जो मेरा हाफ द क्‍वेश्‍चन है उसका ऑनसर नहीं दिया। उत्‍तर नहीं देने का क्‍या कारण है? दूसरा प्रश्‍न मेरा यह है कि राजस्‍थान लैंड रेवेन्‍यू, लैंड रिकार्ड रूल्‍स के कौनसे प्रोविजन के तहत आखिरी बार राजस्‍थान में पटवार सर्कल, आर.आई.सर्कल और तहसीलों का गठन और पुनर्गठन किया हुआ इन दोनों का जवाब दें। एक प्रश्‍न मेरा पेंडिंग रहेगा।

श्री अध्‍यक्ष: दें, क्‍यों का जवाब दीजिए। क्‍यों नहीं का बता दें।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  जब पुन:सीमांकन का हो ही नहीं रहा है। पूर्व के सरकार के संसाधन और वित्‍तीय स्थिति को देखते हुए और क्षेत्र के सारे मामले को देखते हुए जितनी अभी व्‍यवस्‍थाएं हैं उनको ठीक समझा जा रहा है। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: पर्याप्‍त माना जा रहा है। ... (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): सैकिण्‍ड में मैं यह निवेदन करना चाह रहा हूं कि दूसरे प्रश्‍न में इन्‍होंने यह पूछा है कि  क्‍या सरकार नये पटवार-मंडलों, राजस्‍व निरीक्षक मंडलों, उप तहसीलों व तहसीलों के गठन का विचार रखती है? और मैंने इसके उत्‍तर में भी जी नहीं कहा है। वर्तमान में सरकार के सामने जो स्थिति है उसमें किसी प्रकार का भी विचार नहीं किया जा रहा है। फिर भी माननीय सदस्‍य और जनता की जगह-जगह से मांगों पर हमें सारी जो फार्मलिटी वगैरह है उनके लिए हमने तहसील नये पटवार मंडल बनाना है या नहीं बनाना है। निरीक्षक मंडल बनाने है इस सारे की जहां-जहां से भी एप्‍लीकेशन वगैरह तहसील, उप तहसील की आयी है, उनका एग्‍जामिनेशन राजस्‍व स्‍तर पर किया जा रहा है।

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है, बढि़या।

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): मेरा दूसरा प्रश्‍न का जवाब नहीं दिया, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कि आखिरी बार राजस्‍थान में पटवार सर्कल, आर.आई. सर्कल और तहसील का गठन या पुनर्गठन कब हुआ? अब इसके साथ ही मैं एक प्रश्‍न और एड कर लेता हूं कि आर.आई. सर्कल, पटवार सर्कल, तहसील सर्कल के गठन या पुनर्गठन की बेसिक रिक्‍वायरमैंट कौनसे प्रोविजन में किया है? यह बेसिक रिक्‍वायरमैंट है कि एरियावाइज हो, खातेदारवाइज हो व ऐसी कोई बेसिक पॉलिसी या लॉ में कोई रिक्‍वायरमैंट जिसको बेसिक रिक्‍वायरमैंट बोलते हैं वह जो बेसिक रिक्‍वायरमैंट फुलफिल करता है वही गठन या पुनर्गठन एक पटवार सर्कल के दो हो सकते हैं तो बेसिक रिक्‍वायरमैंट क्‍या है? आखिरी मेरा प्रश्‍न है कि इस बेसिक रिक्‍वायरमैंट के अनुसार राजस्‍थान में, मैं यह भी पूछ रहा हूं, मेरे विधान सभा क्षेत्र लूणी में कितने पटवार सर्कल, आर.ई. सर्किल और तहसीलें गठन या पुनर्गठन करने योग्‍य है?

श्री अध्‍यक्ष: कह दिया न कोई विचाराधीन नहीं है उनके।

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): यह जवाब नहीं दिया। इसमें विचाराधीन नहीं, का जवाब नहीं दिया। आखिरी बार कब हुआ? बेसिक रिक्‍वायरमैंट क्‍या है? बेसिक रिक्‍वायरमैंट में हमारे यहां पर बनते हैं या नहीं बनते हैं यह तीन बात है।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  इन इकाइयों के गठन ... (व्‍यवधान) मैं बताता हूं। ... (व्‍यवधान)

श्री कन्‍हैया लाल मीणा (बस्‍सी): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  एक मिनट। मंत्री महोदय, एक मिनट मैं, माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहूंगा कि ऐसे रेवेन्‍यू पटवार सर्कल जहां पर नक्‍शे फट चुके हैं बिलकुल और नक्‍शे फट जाने की वजह से वहां पर किसानों में बहुत भारी विवाद रास्‍ते को लेकर, सीमांकन को लेकर रहता है। जहां नक्‍शे फटे हुए हैं ऐसे रेवेन्‍यू सर्कल्‍स का आप सीमांकन करवाने की कृपा करेंगे? ... (व्‍यवधान) नक्‍शे बनाएंगे या ठीक करेंगे?

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  पूरे राजस्‍थान के अन्‍दर ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: अब आप ... (व्‍यवधान)

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  एक सवाल है।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं। ... (व्‍यवधान)

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): पॉलिसी की नीतिगत बात पूछ रहा हूं। मैं यह पूछना चाहता हूं कि ... (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): पहले जोगारामजी के, मूल प्रश्‍नकर्ता हैं, उनका जवाब दे दें तब ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप केवल उन्‍हीं के प्रश्‍न का जवाब दीजिए।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  एक सवाल इसी से संबंधित है। पटवार सर्कल, कानूनगो सर्कल और तहसील बनाने की सरकार की क्‍या नीति बनी हुई है? क्‍या पॉलिसी बना रखी है उस पॉलिसी के अन्‍तर्गत कैसे बना है? वह बता दें।

श्री अध्‍यक्ष: मूल प्रश्‍नकर्ता का जवाब तो आने दीजिए। मूल प्रश्‍नकर्ता का जवाब आने दीजिए। ... (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  पूर्व में भनोत कमेटी एक बनी हुई थी। ... (व्‍यवधान)

 

श्‍याम/चौहान   29.03.2007  11.40  1e 

 

अध्‍यक्ष महोदय, पूर्व में भानावत कमेटी बनी हुई थी, उसकी 1995 में सिफारिशें आयी थी उसमें 771 नये पटवार मंडल जिसमें उपनिवेशन भी शामिल था, सृजित करने की अभिशंषा की गयी थी और उस वक्‍त में 1996-97 में 140 और 1998-99 में 100 और 1999-2000 में 175 कुल 415 पटवार मंडल स्‍वीकृत किये गये थे और उसके पश्‍चात 263 पटवार मंडल स्‍वीकृत नहीं किये जा सके 415 में से। इसी प्रकार भानावत कमेटी ने 406 भू-अभिलेख सर्किलों के संरक्षण की सिफारिश की थी और 1996-97 में 77, 1998-99 में 50 और 1999-2000 में 23 कुल 150 भू-अभिलेख निरीक्ष्‍ंक सर्किल स्‍वीकृत किये गये थे। उसमें भी 256 भू-अभिलेख सर्किल स्‍वीकृत नहीं किये जा सके और इसके अंदर जो संसाधन और सरकार के पास जिस हिसाब से फाइनेंस की रिक्‍वायरमेंट थी उस हिसाब से 256 नहीं बन पाये, केवल 150 भू-अभिलेख सर्किल बनाये गये ...(व्‍यवधान)

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): कितनी आबादी हो गयी, कितने सर्किल होंगे, कितनी तहसीलें ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): 1956 से लेकर 1989 तक तहसीलों, उप तहसीलों की संख्‍या वृद्वि होती रही। इस प्रकार से 1989 को आधार मानकर के मजीठिया कमेटी का गठन किया गया और उसकी रिपोर्ट के आधार पर 1991 में 213 तहसीलें, 87 उप तहसीलें कार्यरत थी और उसी के आधार पर इस कमेटी के द्वारा तहसीलें, उप तहसीलों के पुनर्गठन के संबंध में इस प्रकार सिफारिश की गयी थी। सामान्‍य क्षेत्र में एक नयी तहसील के सृजन हेतु 40 पटवार सर्किल, रेगिस्‍तानी क्षेत्र में 30 तथा अनुसूचित जाति, जनजाति ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: मूल प्रश्‍नकर्ता, संतुष्‍ट हो गये ना आप। आप संतुष्‍ट हो गये ना। नेकस्‍ट क्‍वेश्‍चन लूं ...(व्‍यवधान)

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): एक मिनट, वह इनफोर्मेशन दे रहे हैं, खड़े कैसे हैं ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अभी तो 1956 पर आये हैं यह, 1956 से कहना चालू किया है 2007 तक तो पता नहीं कब आयेंगे ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): मैं बता रहा हूं ना ...(व्‍यवधान) इन्‍होंने कहा है कि एक तहसील में कितने पटवार सर्किल होने चाहिए तो मैं यह निवेदन कर रहा हूं कि 40 पटवार सर्किल होने चाहिंए।

श्री अध्‍यक्ष: आप इसकी डिटेल क्‍यों पढ़ते हैं। आप सीधी सी बात बतायें, ना कोई प्रस्‍ताव है, ना कोई आवश्‍यकता है, खत्‍म हुई बात।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): इन्‍होंने कहा है कितने चाहिंए। एक तहसील के लिए कितने पटवार सर्किल चाहिंए।

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): पटवार सर्किल के लिए, आर.आई. सर्किल के लिए और तहसील के लिए बेसिक रिक्‍वायरमेंट क्‍या है कि यह मिनिमम होनी चाहिए। वह क्लियर कर दें, वह बता दें।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): वही तो बता रहा हूं कि एक तहसील के लिए 40 की जरूरत है और रेगिस्‍तानी और अनुसूचित जाति और जनजाति क्षेत्र में 30 पटवार मंडल की जरूरत है और पहाड़ी क्षेत्र के अंदर 20 पटवार सर्किल होने चाहिंए।

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): पटवार सर्किल बताये हैं, एक पटवार सर्किल और आर.आई. सर्किल के लिए बेसिक रिक्‍वायरमेंट क्‍या है ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): इसी के आधार पर किया जाता है ...(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): जानकारी प्राप्‍त करने का ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, अभी 241 तहसीले काम कर रही हैं।

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है।

श्री अर्जुन सिंह (दानपुर): अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मंत्री जी से जानना चाहूंगा ...(व्‍यवधान)

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): अध्‍यक्ष महोदय, मेरा पूरा हो जाये फिर आप पूछ लेना ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: मूल प्रश्‍नकर्ता संतुष्‍ट हैं ...(व्‍यवधान)

श्री अर्जुन सिंह (दानपुर): बांसवाड़ा जिले में 5 तहसीलों में से 3 तहसीलों में ...(व्‍यवधान) 

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): पटवार मंडल में बेसिक रिक्‍वायरमेंट क्‍या है ...(व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय मेरा प्रश्‍न है उसका उत्‍तर आ जाये ...(व्‍यवधान)

श्री अर्जुन सिंह (दानपुर): 5 में से 3 तहसील में सैटलमेंट हुआ है और दो तहसीलों का बाकी है ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आपका प्रश्‍न नीतिगत है ...(व्‍यवधान)

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): इनको रोको ना ...(व्‍यवधान)

श्री अर्जुन सिंह (दानपुर): क्‍या मंत्री जी, जिनका सर्वे बाकी है वह कराना चाहते हैं या नहीं ...(व्‍यवधान) 5 तहसीलों में से 3 का सैटलमेंट हो चुका है, 2 का बाकी है, क्‍या मंत्री जी उसमें सैटलमेंट कराना चाहते हैं, 2 तहसीलों का बाकी है ...(व्‍यवधान)

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): मैं आपका संरक्षण चाहता हूं। मेरा प्रश्‍न है कि पटवार सर्किल और आर.आई. सर्किल के गठन या पुर्नगठन की बेसिक रिक्‍वायरमेंट क्‍या है, वह बता दें ...(व्‍यवधान)

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): इसी से संबंधित है मेरा प्रश्‍न ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: वह कह रहे हैं जी नहीं, कोई आवश्‍यकता नहीं है। कोई प्रस्‍ताव नहीं है ...(व्‍यवधान)

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): बेसिक रिक्‍वायरमेंट क्‍या है ...(व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): मंत्री महोदय, यह क्राइटेरिया तो कांग्रेस सरकार के टाइम का बताया है। इस सरकार में आप बैठे हैं इनका क्राइटेरिया क्‍या है। यह जरा बता दीजिये ...(व्‍यवधान)

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री महोदय, यह बताने का कष्‍ट करें ...(व्‍यवधान)

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): अध्‍यक्ष महोदय, बेसिक रिक्‍वायरमेंट पटवार सर्किल और आर.आई. सर्किल की क्‍या है ...(व्‍यवधान)

श्री अर्जुन सिंह (दानपुर): अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न का भी जवाब दिला दें ...(व्‍यवधान) 5 तहसीलों में से 3 का सैटलमेंट हो चुका है, 2 का बाकी है और वहां से पूरा स्‍टाफ ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, अभी गठन का कोई मामला ही नहीं चल रहा है और पूर्व में दो कमेटियां बनी हुई थी, एक तो भानावत कमेटी के आधार पर और एक मजीठिया कमेटी के आधार पर, पूर्व में जो गठन किया गया था, वह किया गया है।

श्री अर्जुन सिंह (दानपुर): अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न भी साथ-साथ ले लें ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप यह कमेटी कब बैठाते हैं, यह बतायें कि कब बैठायी जाती है कमेटी, जब आवश्‍यकता अनुभव करते हैं तब ना ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): एक तो पूर्व में बनाई हुई थी और उसी के आधार पर सिफारिश आयी थी, राजस्‍व मंडल के चेयरमैन उन पर विचार करते हैं।

श्री अध्‍यक्ष: वही तो मैं कह रही हूं।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): वह किस प्रकार से होते हैं, अभी कोई विचार नहीं है बनाने का, इसलिए कोई मामला ही नहीं है।

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): मेरा इसमें निवेदन है कि राजस्‍थान लैंड रेवेन्‍यु रूल्‍स में कौनसे प्रोविजन ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, अल्‍प सूचना काल प्रश्‍न है मेरे पास, शोर्ट नोटिस क्‍वेश्‍चन और वह आवश्‍यक है पूछा जाना इसलिए मैं अब उसे कॉल कर रही हूं।

श्री अर्जुन सिंह (दानपुर): अध्‍यक्ष महोदय, सैटलमेंट की बात है, मंत्री जी करना चाहते हैं कि नहीं करना चाहते हैं। 5 में से 3 का हो गया, 2 का बाकी है ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): आप अलग से पूछ लेना सैटलमेंट का ...(व्‍यवधान)

अल्‍प सूचना प्रश्‍न