Msr/usc/28032007/11.00/1a

 

अशोधित प्रति प्रकाशनार्थ नहीं

 

राजस्‍थान विधान सभा की कार्यवाही का वृत्‍तान्‍त

 

 

अंक 7 बारहवीं विधान सभा के सातवें सत्र का अठाईसवां दिवस   संख्‍या 18

 

 

बुधवार, 28 मार्च,2007

 

राजस्‍थान विधान सभा की बैठक 11:00 बजे

विधान सभा भवन जयपुर, में प्रारम्हुई।

 

 

(श्री रामनारायण विश्‍नोई, उपाध्‍यक्ष, पदासीन)

 

श्री उपाध्‍यक्ष: राम राम सा, राम राम। श्री महीपाल मदेरणा।

 

स्‍थगित प्रश्‍न संख्‍या 152

अल्‍पसंख्‍यकों के उत्‍थान हेतु निर्धारित लक्ष्‍य

152. डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): क्‍या सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) अल्‍पसंख्‍यकों के उत्‍थान हेतु 15 बिंदु कार्यक्रम के सम्‍बन्‍ध में माननीय प्रधानमंत्री महोदय द्वारा दिनांक 10 सितम्‍बर, 2006 को माननीय मुख्‍यमंत्री के नाम लिखे गये पत्र के आधार पर राज्‍य सरकार द्वारा किन-किन कार्यक्रमों के तहत क्‍या-क्‍या लक्ष्‍य निर्धारित किये गये? उक्‍त निर्धारित लक्ष्‍यों के विरुद्ध अब तक क्‍या-क्‍या कार्यवाही की गयी? जिलेवार व कार्यक्रमवार विवरण सदन की मेज पर रखें।

(2) सरकार द्वारा उक्‍त 15 बिंदु कार्यक्रम के अन्‍तर्गत वर्ष 2007 तथा 2008 में निर्धारित लक्ष्‍यों के विरुद्ध किस विभाग में कितनी राशि के क्‍या-क्‍या कार्य सम्‍पादित किये जाने प्रस्‍तावित हैं? विवरण सदन की मेज पर रखें।

(3) राज्‍य सरकार द्वारा केन्‍द्र सरकार को कितने उर्दू अध्‍यापकों की भर्ती हेतु सहायता प्रदान करने का आवेदन किया गया? आवेदन की प्रति सदन की मेज पर रखें।

(4) सरकार द्वारा वर्ष 2004 से अब तक राज्‍य के मदरसों के सुदृढ़ीकरण एवं आधुनिकीकरण हेतु कितनी राशि के कौन-कौनसे कार्य सम्‍पादित किये गये? वर्षवार व जिलेवार विवरण सदन की मेज पर रखें।

(स्‍थगित)

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय। यह जो सवाल है 152 नम्‍बर का यह तीन बार स्‍थगित हो चुका है और आप स्‍वयं गौर फरमाएं, इसके अन्‍दर कोई भी बिंदु ऐसा नहीं है जिसका सरकार जवाब देने में सक्षम नहीं हो और तीन बार स्‍थगित करने के बाद चूंकि इन्‍होंने प्रधानमंत्री द्वारा लिखे गये 15 बिंदु कार्यक्रम के अन्‍तर्गत न तो कोई योजना बनायी न किसी जिला परिषद को भेजी न कोई काम किया और न आगे इनकी कोई काम करने की मंशा है।

इसलिए, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे चाहता हूं कि आप मेरे को संरक्षण प्रदान करें, सरकार के ऊपर दबाव बनाएं कि यह जो सवाल है, जिसको तीन बार स्‍थगित किया गया है इसे सरकार इसी सत्र के अन्‍दर जवाब दे।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, या तो सरकार यह स्‍पष्‍ट कर दे कि माइनोरिटी से सम्‍बन्धित कोई भी मामला है यह सरकार उस पर कंसीडर करने को ही तैयार नहीं है। इसमें ऐसा कोई ना लम्‍बा जवाब आना था, ना कोई दिक्‍कत होनी थी इसमें, पोस्‍टपोन करे जा रहे हैं।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आप सदन को यह आश्‍वस्‍त करें कि इसी चालू सत्र में इस सवाल का जवाब आ जाना चाहिए।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इसी सदन में जवाब दिने का आश्‍वासन दें।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माइनोरिटी का कोई लेना-देना नहीं, काई सम्‍बन्‍ध नहीं, उठा कर के अल्‍पसंख्‍यकों के कल्‍याण से सम्‍बन्धित सवाल है और इसको बारबार स्‍थगित किया जा रहा है, यह सरकार की मानसिकता का परिचायक है। ...(व्‍यवधान)...

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): तीन बार स्‍थगित हो चुका है, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप स्‍थान ग्रहण कीजिए।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): आप कम से कम माननीय मंत्रीजी से यह तो जानकारी दिलवा दें कि इसका जवाब कब देंगे।

श्री उपाध्‍यक्ष: आप सुनिये बात।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): हां।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, यह बात सही है कि यह प्रश्‍न दिनांक 14.03.2007 को सूचीबद्ध हो चुका था परन्‍तु सम्‍बन्धित विभागों से सूचना प्राप्‍त न होने के कारण इस विभाग से सम-संख्‍यक पत्र दिनांक 12.03.2007 द्वारा निवेदन कर स्‍थगित करवाया गया था।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आप इसको स्‍वयं पढ़ें, इसमें ऐसी कौनसी सूचना है जो नहीं मिल सकती?

श्री उपाध्‍यक्ष: इस दिनांक के पश्‍चात् विभाग द्वारा पत्राचार एवं व्‍यक्तिश: सम्‍बन्धित विभागों से कई बार सम्‍पर्क किया गया ...(व्‍यवधान)...

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह बात नहीं है।

श्री उपाध्‍यक्ष: और सूचना प्राप्‍त नहीं हो पाने के कारण ...(व्‍यवधान)...

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): हकीकत में बात यह है, समाज कल्‍याण मंत्रीजी यहां बैठे हैं ...

श्री उपाध्‍यक्ष: सूचना प्राप्‍त नहीं हुई तो ज्‍यादा सूचना प्राप्‍त करने के लिए ...(व्‍यवधान)...

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, एक प्रोग्राम में मैंने खुद ने सुना है, समाज कल्‍याण मंत्रीजी ने कहा कि मैं कोई हिन्‍दुस्‍तान में अल्‍पसंख्‍यक मानता ही नहीं, न यहां कोई अल्‍पसंख्‍यक नाम की चीज है इसलिए यह इसका जवाब नहीं देना चाहते हैं।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, मैंने व्‍यवस्‍था दे दी है, प्रश्‍न स्‍थगित हो चुका। माननीय सदस्‍य। ...(व्‍यवधान)...

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): जिस मंत्री की इस तरीके कि मानसिकता हो, यह कभी भी इसका जवाब इस सदन में नहीं आने देंगे लेकिन हम आसन से प्रोटेक्‍शन चाहे रहे हैं कि आप आश्वस्त करें कि इसका जवाब आयेगा या नहीं आयेगा। ...(व्‍यवधान)...

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री महीपाल मदेरणा।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): हिन्‍दुस्‍तान में अल्‍पसंख्‍यक हम मानते ही नहीं, सभी बहुसंख्‍यक हैं। टोटली बहुसंख्‍यक हैं।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): मैंने ई टी वी के प्रोग्राम में मंत्रीजी मौजूद हैं, इन्‍होंने कहा कि काई अल्‍पसंख्‍यक नहीं मानता हिन्‍दुस्‍तान में। ...(व्‍यवधान)...

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): हम अल्‍पसंख्‍यक मानते ही नहीं हैं किसी को। हिन्‍दुस्‍तान में रहने वाला हर व्‍यक्ति बहुसंख्‍यक है और हम अल्‍पसंख्‍यक किसी को मानते ही नहीं हैं।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, स्‍थगित कर दिया है इसको।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): हमने कहा कांस्टीट्यूशन में प्रोविजन है, इन्‍होंने कहा मैं कुछ नहीं ...(व्‍यवधान)...

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, अल्‍पसंख्‍यक किसी को मानते ही नहीं हैं। नहीं मानते अल्‍पसंख्‍यक किसी को।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा निवेदन सुन लें।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, देखिये।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): आप तो सदन को यह आश्‍वस्‍त कर दें कि इस चालू सत्र में इसका जवाब आ जायेगा कि नहीं आयेगा या आयेगा ही नहीं इसका जवाब, यह बता दें आप तो।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): हिन्‍दुस्‍तान में रहने वाले सभी बहुसंख्‍यक हैं, सब को समान रूप से माना जाता है, कोई अल्‍पसंख्‍यक नहीं है। ...(व्‍यवधान)...

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, हम तो आसन से प्रोटेक्‍शन मांग रहे हैं। आसन इस बात का जवाब दे दे कि इसका जवाब इसी सेशन में आयेगा या नहीं आयेगा? ...(व्‍यवधान)...

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, समाज कल्‍याण मंत्रीजी बतायें कि वो इस सत्र की समाप्ति से पहले-पहले इसका उत्‍तर देंगे कि नहीं? समाज कल्‍याण मंत्रीजी को कहना चाहिए, सारे विभाग यहां पर हैं राजस्‍थान में ...(व्‍यवधान)...

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): आप लोगों को संकीर्ण मानसिकता के आधार पर ...

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): ऐसा काई यह कठिन प्रश्‍न है नहीं कि वो जानकारी दे नहीं सकते।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): आप लोगों को खाली संकीर्ण मानसिकता पर समाज को तोड़ना चाहते हो और बारबार अल्‍पसंख्‍यकवाद इस सदन में उठाया जाता है जबकि देश में किसी प्रकार की कोई भ्रांति नहीं है। ...(व्‍यवधान)... 

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। ...(व्‍यवधान)...

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): इसलिए, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, समाज कल्‍याण मंत्रीजी को बताना चाहिए कि वो जवाब देंगे या नहीं देंगे, आप खड़े होकर बता दें।

श्री उपाध्‍यक्ष: राजसमन्‍द से आने वाले, माननीय सदस्‍य। ...(व्‍यवधान)...  अंकित नहीं हो। अब अंकित नहीं हो रहा है।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप बीच में काहे के लिए बोल रहे हैं।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): 000

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, इस पर कोई बहस नहीं है। ...(व्‍यवधान)...

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, बीच में नहीं।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): 000

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, संभव होगा तो देंगे ...(व्‍यवधान)...

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): 000

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। ...(व्‍यवधान)... अब अंकित नहीं हो रहा है।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: प्रश्‍न स्‍थगित हो चुका है। श्री संयम लोढ़ा।

माननीय सदस्‍य, आसन से व्‍यवस्‍था दी जा चुकी है। अब अंकित नहीं हो रहा है। ...(व्‍यवधान)...

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: कोई अंकित नहीं हो रहा है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आपके कहने से मैं नया कुछ नहीं ...(व्‍यवधान)...

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): 000

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: आप स्‍थान ग्रहण करें।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, स्‍थान ग्रहण करें।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: आप स्‍थान ग्रहण कीजिए, आप बिना परमिशन के अंकित नहीं होगा। बीच में, माननीय सदस्‍य, आप बिना परमिशन लिये क्‍यों बोल रहे हैं?

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आप हमें रोक रहे हो बारबार, प्रश्‍न हमारा है और तीन दफे स्‍थगित कर दिया।

श्री उपाध्‍यक्ष: एक बार स्‍थगित हुआ है, माननीय नेता महोदय, 14.03 को हुआ है लेकिन आज रखा गया था उसके बावजूद भी, पूरे प्रयत्‍न के बावजूद भी सूचनाएं प्राप्‍त नहीं हो पायी हैं।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): कब तक हो जायेगा?

श्री उपाध्‍यक्ष: अब कब तक हो जायेगा ...(व्‍यवधान)...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): यह वहां मुगदर घुमा रहे थे, तैयारी कहां कर रहे थे जवाब की।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): जवाब तो आ रहा है न, सुनो तो सही। क्‍यों स्‍थगित हो रहा है, मान्‍यवर, यह?

श्री उपाध्‍यक्ष: ज्‍यादा सूचनाएं हैं। होता है, कई बार होता है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): तो जवाब नहीं आ रहा है?

श्री उपाध्‍यक्ष: जवाब आया नहीं है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): नहीं आया?

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, एक भी सूचना ऐसी नहीं है जो ज्‍यादा हो। आप देखें।

श्री उपाध्‍यक्ष: नहीं आया और व्‍यक्तिश: भी एप्रोच हो गयी, पूरे प्रयत्‍न हो रहे हैं। ज्‍यादा सूचनाएं एकत्रित करनी थी। बहुत बार होता है ऐसा। ऐसी कौनसी प्रश्‍न के अन्‍दर, अगर प्रश्‍न आ जाए, अब आ जावे तो छिपाने की ऐसी क्‍या बात है? ऐसा काई नहीं है कि जानबूझकर के इसके अन्‍दर सरकार कोई तरह से लापरवाही कर दी गयी ...(व्‍यवधान)...

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप आज क्‍या फरमाते हैं, यह बताओ।

श्री उपाध्‍यक्ष: नहीं, यही कहा कि आज स्‍थगित हुआ है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आज आसन की क्‍या व्‍यवस्‍था है?

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): स्‍थगित कर दिया आसन ने।

श्री उपाध्‍यक्ष: अब यह तो जो सूचनाएं हैं, व्‍यक्तिश: भी कोशिश हो चुकी है। ...(व्‍यवधान)...

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप तो सदन को भी स्‍थगित कर के भाग जाओ लेकिन भागने नहीं देंगें हम। आपकी मंशा इसको भी स्‍थगित कर के ...

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): पहले आप भागोगे उसके बाद हम, हमारी सोचना आप। आज तक तो निहाल किया नहीं आपने।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): एक भी बिंदु ऐसा नहीं है जिसका जवाब पाँच दिन में नहीं दे सकते हो। आप स्‍वयं गौर फरमाएं, जानबूझकर के सरकार गलत नीयत से इसका जवाब नहीं देना चाहती।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): अख़बार लिखते हैं कि प्रतिपक्ष को विधान सभा ढ़ो रही है।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपको इस सेशन में ज्‍यादा नहीं बोलना चाहिए, आपके साथ हमारी संवेदनाएं हैं इसलिए ज्‍यादा मत बोलो आप। हमने आपको संवेदना संदेश भेजा है, हमारे उसकी लिहाज रखो कुछ तो।

आसन की क्‍या व्‍यवस्‍था है, मान्‍यवर, आज की।

श्री उपाध्‍यक्ष: आज तो स्‍थगित कर दिया है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): स्‍थगित कर दिया। नहीं, आप आश्‍वासन दे रहे हैं न कि सरकार से जवाब मंगायेंगे।

श्री उपाध्‍यक्ष: अगर सूचनाएं प्राप्‍त हो गयीं तो इसी सदन के समय में ...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जितनी सूचनाएं उपलब्ध हैं उतनी दिलवा दीजिए। जितनी भी उपलब्‍ध हैं।

श्री उपाध्‍यक्ष: अब जितनी का तो ...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आप के, इस सरकार के पास पूरी सूचना नहीं होंगी, जितनी उपलब्‍ध है वह कह दीजिए आप। क्‍या तकलीफ है?

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, स्‍थगित होते हैं। ऐसी परम्‍परा है। ...(व्‍यवधान)... इसमें कोई नयी बात नहीं है। ...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आपके पास जितनी सूचना उपलब्‍ध है उतनी सूचना कर दीजिए, बात खतम हुई।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपकी व्‍यवस्‍था के बाद में सरकार मजबूर हो जायेगी और वो देगी आपको। आप व्‍यवस्‍था दे दीजिए।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): वेश्म में मिलो।

श्री उपाध्‍यक्ष: कोशिश की जायेगी, माननीय नेता प्रतिपक्ष।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): हैं?

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय नेता प्रतिपक्ष, जवाब, कोशिश है बराबर, अगर सूचनाएं प्राप्‍त होंगी तो लगा दिया जायेगा। 14 तारीख से आज की तारीख निश्चित कर के लगाया था।

 

Ars/usc/1110/1b/28032007/1

 

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप अलाऊ तो कर दीजिए कि हम पूरी कोशिश करेंगे कि जवाब आए।

श्री उपाध्‍यक्ष: कोशिश करेंगे, बराबर कोशिश करेंगे, इसमें कोई टालने की नीयत थोड़े ही है। श्री संयम लोढ़ा।

जयपुर विकास प्राधिकरण क्षेत्राधिकार

की नीलामी योग्‍य सम्‍पत्ति हेतु गठित समिति

153. श्री महीपाल मदेरणा (भोपालगढ़) व श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): क्‍या नगरीय विकास एवं आवासन राज्‍य मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) क्‍या यह सही है कि जयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा प्राधिकरण क्षेत्राधिकार में नीलामी योग्‍य सम्‍पत्ति का ब्‍यौरा प्राप्‍त करने हेतु समिति का गठन किया गया है? यदि हां, तो उक्‍त समिति का गठन कब हुआ तथा उक्‍त की बैठकें किसकी अध्‍यक्षता में होती हैं ? उक्‍त समिति में कौन कौनसे अधिकारी सदस्‍य हैं ? नाम व पद सहित विवरण सदन की मेज पर रखें।

(2) माह अगस्‍त, 2006 से दिसम्‍बर,2006 तक उक्‍त समिति की बैठकें कितनी बार व कब कब हुई ?

(3) क्‍या यह सही है कि जोन संख्‍या- 9 के उपायुक्‍त द्वारा ग्राम टीलावाला योजना (जयपुर विकास प्राधिकरण कर्मचारी/अधिकारी योजना) के व्यावसायिक भूखण्‍डों की नीलामी हेतु भूखण्‍डों की सूची उक्‍त समिति की बैठकों में प्रस्‍तुत की गई है ?यदि हां, तो सूची कब व कौनसी बैठकों में प्रस्‍तुत की गई ? यदि नहीं, तो उक्‍त अधिकारी द्वारा करोड़ों की राशि के भूखण्‍ड की सूचना नीलामी हेतु अब तक क्‍यों नहीं दी गई तथा विभाग द्वारा उक्‍त उपायुक्‍त के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की गई ?

(4) जोन संख्‍या- 9 के उपायुक्‍त द्वारा उक्‍त अवधि के दौरान कितनी सम्‍पत्ति का ब्‍यौरा नीलामी हेतु दिया गया ? विवरण सदन की मेज पर रखें।

राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय (श्री प्रताप सिंह सिंघवी): (1) जी नहीं।

(2) प्रश्‍न के खण्‍ड एक के उत्‍तर अनुसार समिति का गठन नहीं होने से बैठक होने का प्रश्‍न ही नहीं है।

(3) जी नहीं, ग्राम टीलावाला योजना में व्यावसायिक भूखण्‍डों के लिए चार ब्‍लॉक सृजित हैं। इन ब्‍लॉकों को विस्‍थापितों/ हितधारकों को पुनर्वासित / क्षति पूर्ति स्‍वरूप देने हेतु आरक्षित किया हुआ है। खुली नीलामी हेतु इन व्‍यवसायिक ब्‍लॉकों को निर्धारित नहीं किया हुआ है। अत: उपायुक्‍त जोन 9 के विरूद्ध कार्यवाही करने का प्रश्‍न ही नहीं उठता है।

(4) माह अगस्‍त, 2006 से दिसम्‍बर, 2006 तक की अवधि में उपायुक्‍त जोन 9 द्वारा महल योजना के भूखण्‍ड संख्‍या सी- 43, 44, 70, 71, 89 ,150 ,152, 155, 156 ,160, 166, 171 व डी- 20, 70, 93, 94, 101, 192, 117 व 219 नीलामी शाखा को प्रस्‍तुत किये गये हैं। इनमें से भूखण्‍ड संख्‍या सी- 43, 44, 70, 71, 155, 156, 159, 160, 166 व 171 का नीलामी द्वारा निस्‍तारण किया जा चुका है। शेष भूखण्‍डों की नीलामी की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। 

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय,  मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहता हूं कि प्रश्‍न के पहले और दूसरे भाग में जो मैंने पूछा है उसमें मेरा पूरा स्‍ट्रेस नीलामी पर है और सिर्फ चार महीने की अवधि की जानकारी मैंने मांगी है और दोनों की जानकारी आपने जी नहीं, जी नहीं में दे दी। आपके जयपुर विकास प्राधिकरण की 15 दिसम्‍बर को जो बैठक हुई है उसके कार्यवाही विवरण की सिर्फ पहली तीन लाइनें मैं आपको सुना देता हूं। जयपुर विकास प्राधिकरण, जयपुर कार्यवाही विवरण, नीलामी हेतु सम्‍पत्तियों की समीक्षा के क्रम में आज दिनांक 15.12.06 को प्रात: 11.30 बजे आयुक्‍त महोदय की अध्‍यक्षता में मीटिंग का आयोजन किया गया। मीटिंग में उपस्थित होने वाले अधिकारियों की सूची परिशिष्‍ट- अपर संलग्‍न है। उसके बाद में पूरी डिटेल है।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, बहुत स्‍पेसिफिक, बहुत पाइन्‍टेड नीलामी के बारे में बात पूछी थी और दोनों बात का उत्‍तर छिपाने के पीछे मंत्री महोदय की क्‍या मंशा है, यह तो वही बता सकते हैं।

दूसरा, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से यह जानना चाहता हूं यह टीलावाला योजना 2003 में बनी तो विस्‍थापितों को यह व्‍यावसायिक भूमि देने का फैसला जे. डी. ए. ने किस तारीख को किया और राज्‍य सरकार ने उसकी स्‍वीकृति किस तारीख को प्रदान की, दोनों पत्र एक साथ कापी टेबल पर रख देना, जवाब इसका दे देना और जिन लोगों को आपने इसमें यह व्‍यावसायिक भूखण्‍ड दिये हैं इसका क्‍या आपने कोई सर्वे करवाया था और करवाया था तो उसकी सर्वे सूची क्‍या है ? वह टेबल पर रख दो और सर्वे नहीं करवाया तो आपने जिन लोगों के पास कोई पट्टा नहीं था, जिन लोगों के पास स्‍वामित्‍व नहीं था, कोई अधिकार नहीं था, उनको भूखण्‍ड देने का फैसला आपने किस आधार पर किया?

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इस प्रकार की कोई बैठक नहीं हुई है, समिति की मीटिंग नहीं हुई है। जिस प्रकार का मैंने प्रश्‍न में जवाब दिया है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): नहीं, मेरे पास है, उसकी माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इजाजत हो तो मैं टेबल कर दूं यह प्रोसीडिंग्स का पेपर।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): यह रुटीन की बैठक थी, समीक्षात्‍मक बैठक थी और जे. डी. ए. की सम्‍पत्तियों के चिन्‍हीकरण व निस्‍तारण बाबत थी।

दूसरा, आपने निवेदन किया कि किस प्रकार से टीलावाला योजना में यह जो जगतपुरा के विस्‍थापित हैं उनको जमीन किस प्रकार से आबंटित की गयी या किस प्रकार से दी गई। मैं माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपको निवेदन करना चाहूंगा कि धारा 44 में इस प्रकार के जे. डी. ए. को पावर हैं कि वह लैण्‍ड फार लैण्‍ड, दे सकता है, जमीन के बदले जमीन दे सकता है, इस प्रकार का है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): जमीन के बदले जमीन तो दे सकते हैं पर मालिकाना हक तो होना जरूरी है, बिना टाइटल के आप जमीन कैसे दे सकते हैं ?

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): मैं आपको बता रहा हूं ना ।

श्री उपाध्‍यक्ष: आप पहले जवाब आने दीजिए।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, पूरा सम्‍बन्धित मामला रेल्‍वे ओवर ब्रिज से है। जगतपुरा में जो ओवर ब्रिज बन रहा है वहां पर कुछ दुकानें और कुछ मकानात आ गये थे। हमको पब्लिक इंट्रेस्‍ट में उन दुकानों को और मकानों को हटाना आवश्‍यक था और इस स्‍ट्रक्‍चर को हटाने का निर्णय इन्‍हीं की सरकार के टाइम पर हुआ था। उपाध्‍यक्ष महोदय, इसमें 133 दुकानें और 38 मकानों का शेष चिन्‍हीकरण रह गया है बाकी सब हटा दिये हैं हमने और उसके बदले में हमने इनको जो भी आबंटित हैं इनको टीलावाला में पहले आओ पहले पाओ की नीति के आधार पर हमने इनको आबंटन किया है फिर भी मैं आपको यह भी निवेदन करना चाहूंगा कि टीलावालामें कुल चार व्‍यवसायिक ब्‍लॉक में कुल क्षेत्रफल 4225.07 वर्ग मीटर भूमि में पच्‍चीस विस्‍थापितों को 749.62 वर्ग मीटर भूमि आबंटित की गई है बाकी चार को आनन्‍द विहार में 99.38 वर्ग मीटर व्‍यवसायिक भू खण्‍ड आबंटित किये गये हैं तथा दस विस्‍थापितों को महल विस्‍तार योजना में आवासीय भूखण्‍ड आबंटित किये गये हैं।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह अलग अलग देने का निश्‍चय हमको इसलिए करना पडा कि उनकी खुद की चॉइस थी और पहले आओ और पहले पाओ की नीति के तहत उन्‍होंने जहां पर भी हमको भूखण्‍ड मांगा, उसको हमने दिया है। मैं माननीय सदस्‍य को यह निवेदन करना चाहूंगा कि इसमें किसी भी प्रकार की कोई गलती हमारी तरफ से नहीं रही है, ना ही जोन आयुक्‍त की बात कर रहे हैं डीसी 9 की, उस मामले को मैंने काफी गम्‍भीरता से देखा है, किसी प्रकार की गल्‍ती नहीं पाई है फिर भी माननीय सदस्‍य इस प्रकार का जो डी सी 9 के लिए बात कर रहे हैं कि उन्‍होंने इसमें कुछ गड़बडि़यां करके किसी को आबंटन में आगे पीछे किया है तो निश्चित रूप से वह मेरे को अवगत करा दें, अगर गलती पाई गई तो निश्चित रूप से कार्यवाही करूंगा।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मैंने दो पाइन्‍टेड सवाल पूछे हैं।

श्री उपाध्‍यक्ष: जवाब दे दिया ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): उपाध्‍यक्ष महोदय, दो पाइन्‍टेड सवाल पूछे हैं। जयपुर विकास प्राधिकरण ने इन विस्‍थापितों को टीलावाला योजना में भूखण्‍ड देने का फैसला किस तारीख को किया, राज्‍य सरकार को किस तारीख को प्रस्‍ताव भेजा, राज्‍य सरकार ने किस तारीख को इसकी स्‍वीकृति प्रदान की? मैंने दूसरी सूचना पूछी है कि जब आपने कोई सर्वे नहीं करवाया, कोई सूची नहीं बनाई तो यह पहले आओ पहले पाओ में माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से सरकार का ध्‍यान आकृष्‍ट करने के पीछे वह सैकड़ों शिकायतें हैं जो भ्रष्‍टाचार इसके अन्‍दर हुआ है, मर्जी आए जिसको पैसे लेकर के जमीन दे दी, मर्जी आए जिसको आगे पीछे कर दिया, सारे लोगों के ....

श्री उपाध्‍यक्ष: आप प्रश्‍न पूछ रहे हैं या भाषण दे रहे हैं?

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आप बता दीजिए। उपाध्‍यक्ष महोदय, भाषण देने का कोई सवाल नहीं है, मैंने स्पेसिफिक पूछा है।

श्री उपाध्‍यक्ष: स्‍पेसिफिक जवाब आ जाएगा।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आप बात तो सुनिये, जिन लोगों के पास कोई स्‍वामित्‍व नहीं था, कोई पट्टा नहीं था ...(व्‍यवधान) तो वही तो उपाध्‍यक्ष महोदय से कह रहा हूं तो सर्वे के अलावा कौनसा माध्‍यम हो सकता है उनको देने का ? यह खुद कह रहे हैं कि अगर हुई है तो मैं जांच करा लूंगा, यह क्‍या बात हुई ?

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैंने इस मामले को काफी गम्‍भीरता से देखा है, माननीय सदस्‍य का प्रश्‍न लगने के बावजूद मुझे किसी भी प्रकार की डी सी 9 की कोई गलती नहीं पाई गई है फिर भी माननीय सदस्‍य किसी स्‍पेसिफिक बात को मेरे को बताएंगे तो मैं निश्चित रूप से जांच करा लूंगा। जहां तक बैठक का सवाल है, बैठक में यह जो निर्णय हुआ है यह 22.12.06 को निर्णय हुआ और सरकार ने 27.9.2006 को ....

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): उससे पहले तो आपने दे दिये, उससे पहले तो कब्‍जा करा दिया आपने वहां पर। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह प्रश्‍न मैं पिछले सत्र में भी लगा चुका हूं । दिसम्‍बर के अन्‍दर तो उन्‍होंने फैसला किया, दो महीने पहले यह फैसला भी तब हुआ...............

 

 

vns/usc/11.20/1c/28.3.2007/1

 

जब पिछले छठे सत्र में मैंने विधान सभा में प्रश्‍न लगा दिया था उसके बाद सिर्फ सारी कार्यवाही से बचने के लिये जे.डी.ए. के अन्‍दर यह फैसला कराया गया। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, उससे पहले ही यह सारा भ्रष्‍टाचार हो चुका है। सारे पैसे हड़पे जा चुके हैं। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इस तरह से ... (व्‍यवधान) 

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप कोई एक्‍सप्‍लेनेशन मांगना चाहे तो मांगिये बाकी जवाब आ चुका है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): यह कौनसी बात हुई ? 2003 की यह हो जाए और एक अन्‍दर फैंसला करा रहे हो ... (व्‍यवधान) 

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मंत्री महोदय, यह बता दें कि क्‍या यह सच है कि 22 तारीख के पहले वहां पर लोग काबिज हो गये ? इसकी जांच करवा दें आप। खाली इसकी जांच करवा लें। आपने फैंसला 22 तारीख को किया है। 22.12 के पहले यदि वहां पर लोग काबिज हो गये, जिन लोगों को जिम्‍मेदारी थी कि वहां काबिज नहीं हो क्‍या उनके खिलाफ आप कार्यवाही करेंगे ?

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): अगर इस प्रकार का भी कोई प्रकरण है तो उसकी भी मैं जांच कराऊंगा। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जहां तक स्‍वामित्‍व की जांच है, जिन लोगों का स्‍वामित्‍व था उन लोगों की जमीन आबंटित की है। जिन लोगों को भूखण्‍ड आबंटित किये हैं उसके अलावा किसी और को नहीं दिये हैं।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री सी.डी.देवल।

महिला एवं बाल विकास परियोजना

अधिकारी के पद पर पदस्‍थापित कृषि पर्यवेक्षक

154. श्री सी. डी. देवल (रायपुर): क्‍या महिला एवं बाल विकास मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) क्‍या यह सही है कि महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी(सी.डी.पी.ओ.) के पद पर प्रतिनियुक्ति पद अन्‍य विभागों से अधिकारी पदस्‍थापित किये जाते हैं ? यदि हां, तो किस-किस श्रेणी के अधिकारी व किस विभाग के अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर लगाये जाते हैं ? इस सम्‍बन्‍ध में जारी नियम व परिपत्रों की प्रति सदन की मेज पर रखे।

(2) क्‍या यह सही है कि महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी(सी.डी.पी.ओ.) के पद पर कृषि पर्यवेक्षकों को लगाया गया है ? यदि हां, तो सूची सदन की मेज पर रखें।

(3) क्‍या यह सही है कि कृषि विभाग से जिन कृषि पर्यवेक्षकों को महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी(सी.डी.पी.ओ.) बनाया गया है, उनके लिये कृषि विभाग से सहमति नहीं ली गयी ? यदि सह‍मति ली गयी तो सहमति पत्र की प्रति सदन की मेज पर रखें और यदि सहमति नहीं ली गयी तो क्‍यों ? इसके लिये कौन अधिकारी दोषी है ? सरकार इन दोषी अधिकारियों के विरुद्ध क्‍या कार्यवाही करने का विचार रखती है ? विवरण सदन की मेज पर रखें।

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): (1) जी हां। निम्‍न श्रेणी के अधिकारी बाल विकास परियोजना अधिकारी के पद पर प्रतिनियुक्ति पर लगाये गये हैं:-

क्रम संख्‍या

श्रेणी

विभाग जिससे अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर लिये गये

1 

राजस्‍थान शिक्षा सेवा  

माध्‍यमिक शिक्षा विभाग

2

राजस्‍थान आयुर्वेद सेवा

आयुर्वेद विभाग

3

राजस्‍थान कृषि सेवा   

कृषि विभाग    

4

राजस्‍थान सिंचाई सेवा  

सिंचाई विभाग  

5

राजस्‍थान चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य सेवा

चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य 

6

राजस्‍थान उच्‍च शिक्षा सेवा    

कॉलेज शिक्षा विभाग   

7

पशुपालन विभाग

पशुपालन विभाग  

 

नियमों की प्रति परिशिष्‍ट- पर संलग्‍न है।

(2) कृषि पर्यवेक्षकों को सहायक बाल विकास परियोजना अधिकारी के पद पर प्रतिनियुक्ति पर लगाया गया है। वर्तमान में दो कृषि पर्यवेक्षक सर्वश्री अनोप सिंह व हनुवन्‍त सिंह, सहायक बाल विकास परियोजना अधिकारी के पद पर प्रतिनियुक्‍त हैं, जिन्‍हें बाल विकास परियोजना अधिकारी के पद के विरुद्ध अस्‍थाई तौर पर लगाया गया है।

(3) कृषि पर्यवेक्षकों को कृषि विभाग की सहमति से ही इस विभाग में बाल विकास परियोजना अधिकारी के पद पर प्रतिनियुक्ति पर लगाया गया है (आदेशों की प्रति संलग्‍न है) विभागीय गतिविधियों के संचालन हेतु एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी के पद रिक्‍त होने के फलस्‍वरूप वर्तमान में इन्‍हें बाल विकास परियोजना अधिकारी के पद के विरुद्ध अस्‍थाई तौर पर लगाया हुआ है।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से जनना चाहता हूं कि आयुर्वेद विभाग, पशुपालन विभाग और कृषि विभाग के अधिकारियों को सहायक बाल विकास परियोजना अधिकारी के पद पर प्रतिनियुक्ति पर लिया गया है। वह कौनसे नियम के तहत लिया गया है और सरकार ने नियमों में किस-किस सेवा से प्रतिनियुक्ति पर लेने का प्रावधान रखा है?

नम्‍बर दो, जब विभाग के अन्‍दर महिला पर्यवेक्षक उपलब्‍ध हैं जिनकी बीस-बीस साल से पदोन्‍नति नहीं हुई है और महिला बाल विकास परियोजना अधिकारी का पद पदोन्‍नति का है तो इस पर फिर आपने प्रतिनियुक्ति पर क्‍यों लिया?

नम्‍बर तीन, प्रतिनियुक्ति पर रखने की अवधि आपके नियमों में कितनी है और जिन दो कृषि पर्यवेक्षकों का मैंने प्रश्‍न किया है इनको प्रतिनियुक्ति पर आये कितने साल हो गये हैं?

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जो पद रिक्‍त थे इस पर प्रतिनियुक्ति पर लगाया गया है व कृषि विभाग से लगाये गये हैं और वे दोनों ही 2002-2003 से लगाये गये हैं। इसके बाद हमने कभी भी इस प्रकार की नियुक्ति नहीं दी है। यह तो पद रिक्‍त थे। हमारी तकलीफ यह है कि महिला बाल विकास विभाग प्रतिनियुक्तियों पर लेकर ही चलाता है इसीलिए हमने ... (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): इसीलिए मुख्‍य मंत्री को भी प्रतिनियुक्ति पर लिया है। ... (व्‍यवधान)

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): क्‍या?

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): इसीलिए मुख्‍य मंत्री को भी प्रतिनियुक्‍ति पर लिया है। ... (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा सवाल यह है कि ए.सी.डी.पी.ओ. का पद पदोन्‍नति का पद है तो उनके विरुद्ध आपने प्रतिनियुक्ति पर क्‍यों दिया? दूसरा, जो नियम है इस नियम के 32 में अर्जेंट अस्‍थाई नियुक्ति का प्रावधान है उसमें तीन साल है। इनको आपने 2002-2003 में लिया है तो इनको तीन साल पूरे हो गये। अब इनको आप कब हटाना चाहते हैं? वापस इनकी सेवाएं कृषि को कब भेजेंगे?

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): मैं बताता हूं। ऐसा है कि जो इनको प्रतिनियुक्ति पर लिया गया है, रिक्‍त स्‍थान है, मूल वेतन पर उनको हमने, उसका लाभ वेतन पर नहीं दिया है और आपके समय का जब लगाया हुआ है, हमारे पद रिक्‍त हैं तो उसको उसी मूल वेतन पर कार्य संचालन की दृष्टि से लगाया गया है उससे हम काम ले रहे हैं और इसीलिए इसमें कहीं दिक्‍कत नहीं आ रही है, मूल वेतन पर ही हमने लगाया है उसको ... (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, नियम-32 जो परिशिष्‍ट में दिया है, वह बहुत स्‍पष्‍ट है कि प्रतिनियुक्ति की अवधि सिर्फ एक साल हो सकती है। अर्जेंट एक साल हो सकती है अधिकतम तीन साल हो सकती है तो इन दोनों कृषि पर्यवेक्षकों को तीन-तीन, चार-चार साल हो गये इस तरह और यह अनियमितता बरतने के दोषी है ... (व्‍यवधान)

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): कहीं पद का लाभ, सी.डी.पी.ओ. के पद का लाभ नहीं दिया है उसका पावर है वह भी डी.डी.ओ. के पास है, पावर भी नहीं दिया है । पद रिक्‍त होने के स्थिति में हमने इनको लगाया है। वह तब से ही लगे हुए हैं। उसके बाद हमने नहीं लगाया है। तब से ही लगे हुए हैं जब से आपने लगा रखा है। वह भी उसी मूल वेतन पर लगाया है। ऐसे नहीं लगाया है।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): प्रश्‍न यह नहीं है, माननीय मंत्रीजी, मेरा प्रश्‍न यह नहीं है कि मूल वेतन पर लगाया या नहीं लगाया ... (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: अब आप हटाना चाहते हो? ... (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): आपने लगा दिया, हालांकि ए.सी.डी.पी.ओ. के पद जिस किसी ने भी लगाया, चाहे हमारी सरकार ने लगाया, चाहे आपने लगाया, जिन्‍होंने भी लगाया गलत लगाया। ए.सी.डी.पी.ओ. के लिए लेडीज सुपरवाइजर की नियुक्ति की जाए। जब इनकी अधिकतम अवधि तीन साल आपके नियमों में है तो नियम विरुद्ध तरीके से इनको क्‍यों रखा जा रहा है? इसके लिए आप क्‍या कर रहे हैं, क्‍यों नहीं हटाते इनको?

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): मैंने वही निवेदन किया, माननीय सदस्‍य। पद रिक्‍त होने की वजह से समय-समय पर उसकी आवश्‍यकता को ध्‍यान में रखते हुए हमने अवधि बढ़ाकर रखी है और जब भी यह हमने प्रयास किये हैं ... (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): अब नियम 32 है आपका। परमानेंट आप लगा ही नहीं सकते। अवधि बढ़ाने के ... (व्‍यवधान)

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): तो अभी जो प्रयास किये हैं आपको तो धन्‍यवाद देना चाहिए कि आपके सरकार के समय में ... (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): बिलकुल धन्‍यवाद देते हैं आपको कि आपने न्‍याय किया है।

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): धन्‍यवाद देना चाहिए कि हमने दो सी.डी.पी.ओ. इनके ए.सी.डी.पी.ओ. और डी.डी.ओ. इनको पदोन्‍नत करके पहली बार इतनी संख्‍या में हमने लगाया है। ... (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): मैं आपको धन्‍यवाद देता हूं लेकिन यह आप नियम विरुद्ध कार्य क्‍यों कर रहे हैं? नियम विरुद्ध कार्य करने का क्‍या कारण है? आपने ही नियम बनाये। नियम 32 स्‍पष्‍ट है उसके अन्‍दर तीन साल से ज्‍यादा रह नहीं सकते। इनको तीन-तीन साल हो गये ... (व्‍यवधान)

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): नियम विरुद्ध नहीं है। विभाग की आवश्‍यकता के कारण होता है, पिछले साल तक की इसकी अवधि ... (व्‍यवधान) चार साल की अवधि तक के हम लेते हैं आवश्‍यकता पड़ने पर। ऐसी आवश्यकता है कि नियमित रूप से कार्य-संचालन की दृष्टि से हमने इसको लगाया है ... (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): एक आदमी ... (व्‍यवधान) कोई आवश्‍यकता नहीं है। ऐसी अर्जेंट आवश्‍यकता में अधिकतम तीन साल है। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, अर्जेण्‍ट आवश्‍यकता में अवधि तीन साल है अब आप इसको नियम विरुद्ध क्‍यों रखते हैं?

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): अगर आप चाहते हैं कि आपके यहां पर खाली रहे, कोई काम नहीं हो तो फिर हमको कोई एतराज़ नहीं है, आप बतायें जैसा भी ... (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): आप खाली की बात करते हो। आपने जो नियमित आपके विभाग का सी.डी.पी.ओ. था उसको तो हटा दिया। ए.पी.ओ. कर दिया, उसकी जगह आपने जो कृषि पर्यवेक्षक था उसको चार्ज दिला दिया, यह कौनसा न्‍याय है आपका?

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, जवाब आ चुका है1

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): आज जब आपके विभाग का सी.डी.पी.ओ. है उसको आपने ए.पी.ओ. कर दिया ... (व्‍यवधान)

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): माननीय सदस्‍य, यह जो आपकी राजनीति चल रही है न उसी आधार पर ही हो गया है बाकी ऐसा नहीं है, आप नहीं चाहो, दूसरे माननीय सदस्‍य नहीं चाहे तो यह विवाद ही खड़ा नहीं हो या राजनीतिक स्‍टंट नहीं बनायें। ... (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): हम तो यह चाहते हैं कि जिनको तीन साल पूरे हो गये, नियम विरुद्ध काम कर रहे हैं उनको आप वापस विभाग में भेजिये। किसी को भी लगाओ आपकी मर्जी ... (व्‍यवधान)

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): यह विभाग की आवश्‍यकताओं को देखते हुए कि उसके ऊपर मूल वेतन पर कार्य-संचालन की दृष्टि से लगाया गया ... (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): यह कौनसा नियम है? नियम बता दें। ... (व्‍यवधान)

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): अगर आप नहीं चाहते कि आपके एरिया में यह खाली रहे, कार्य-संचालन नहीं हो तो फिर हमको कोई एतराज़ नहीं है, आप जैसा भी कहें। ... (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आप नियमों से बंधे हुए हैं, नियम बता दें कि इसके तहत आप उनको रख रहे हैं, मुझे कोई एतराज़ नहीं है ... (व्‍यवधान)

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): अब तो बढ़ाई है अवधि, जैसी विभाग की आवश्‍यकता थी उसके अनुसार बढ़ाया है। ... (व्‍यवधान)

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): मैं मंत्री महोदय से जानना चाहूंगा कि देसूरी सी.डी.पी.ओ. को स्‍थानांतरण की रोक के बावजूद किस आधार पर हटाया गया और कृषि पर्यवेक्षक को वहां पर लगाया गया? ... (व्‍यवधान) मंत्री महोदय से जानना चाहूंगा कि किस कारण से सी.डी.पी.ओ. को हटाया गया देसूरी में ? ... (व्‍यवधान)

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैंने यही निवेदन किया, माननीय देवल साहब और अन्‍य माननीय सदस्‍य अगर राजनीतिक भूमिका वहां पर नहीं रखें, कार्य सम्‍पादन की दृष्टि से, संचालन की दृष्टि से, तो मैं यह सोच रहा हूं कि हटाने का विषय नहीं था। एक दूसरे का यह विवाद चल रहा है कि इनको लगाना है। आज कल एक चपरासी, एक मामूली ड्राइवर और मामूली सी.डी.पी.ओ. के लिये अगर कोई माननीय सदस्‍य आपस में एक दूसरे को हटाना है, इसको नहीं लगाना, इस प्रकार का विवाद करें तो विभाग कैसे काम कर सकता है। मैं निवेदन करना चाहता हूं कि इस प्रकार हमें राजनीति से ऊपर उठ कर काम करना चाहिये ... (व्‍यवधान) आपको धन्‍यवाद देना चाहिये था इसके लिये तो ... (व्‍यवधान) यह आपके द्वारा ही लगाया था ... (व्‍यवधान) हमारा विषय ही नहीं है ... (व्‍यवधान) 

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): मेरा प्रश्‍न तो केवल यह है कि आपने नियमों के तहत इनको लगाया बहुत अच्‍छी बात है लेकिन इनको चार-चार साल हो गये। तीन साल से ज्‍यादा आपके इन नियमों के तहत कहीं प्रावधान नहीं है कि तीन साल ज्‍यादा आप बढ़ा सकते हैं ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।

श्री उपाध्‍यक्ष: वह आ गया।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): तो आप इनको क्‍यों नहीं हटाते हो ? आप किसको लगाओ आप जानो हमने तो आपको न तो उस सी.डी.पी.ओ. को लगाने का कहा, न बाबू लगाने का कहा और न चपरासी लगाने का कहा। जो नियमानुसार है वह काम करें आप।

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): रिक्तियों को ध्‍यान में रखते हुए किया। उस वजह से किया है ... (व्‍यवधान) 

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): तीन साल हो गये, इनको हटाएं। मेरा तो प्रश्‍न सिर्फ यह था। या तो नियमों में संशोधन कर दे। आप या तो नियमों में संशोधन कर दें ... (व्‍यवधान) 

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): मंत्री महोदय, या तो नियमों में संशोधन कर दें या इनको हटा दें ... (व्‍यवधान) 

श्‍याम/चौहान   28.03.2007   11.30   1d 

 

 

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): तीन साल के बाद से नये आदेशों से   प्रतिनियुक्ति की अवधि क्‍या बढ़ायी गयी है और बढ़ायी गयी है तो वह कितनी बढ़ायी गयी है, इसका जवाब आप दें ना ...(व्‍यवधान)  

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): यह लगाने और हटाने के लिए विधान सभा में सवाल लगाये गये हैं, यह स्‍वयं के हित से जुड़ा हुआ मामला है ...(व्‍यवधान)

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): अवधि बढ़ाई है समय-समय पर, इसके आदेश भी मेरे पास यहां मौजूद हैं, अगर आप चाहें तो मैं पूरा पढ़ दूं ...(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): यह ट्रांसफर विधायक का कोई अधिकार नहीं है ...(व्‍यवधान) उपाध्‍यक्ष महोदय, क्‍या देख रहे हैं आप ...(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): अवधि बढ़ाने की प्रति सदन के पटल पर रख दें ...(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): यह विधान सभा का उपयोग किस तरह से किया जा रहा है ...(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): यह विधान सभा नियमों के उपयोग के लिए हो रही है, डुबकी लगाने के लिए नहीं हो रही है ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, बिराजें। जवाब आ गया है ...(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): यह इन नियमों के तहत हो रहे हैं ...(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): यह आप *** कर रहे हैं ...(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): आप जो गलत काम कर रहे हैं उसको रोकने के लिए यह विधान सभा है ताकि आप पर अंकुश लग सके और आपकी गलत ग‍तिविधियों पर अंकुश लग सके ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री प्रमोद जैन भाया ...(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): जो नियम हैं उनका पालन होना चाहिए, हमारा तो कहना इतना सा है।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, श्री प्रमोद जैनभाया

जिला खेल अधिकारी/कोच के रिक्‍त पद

155.श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): क्‍या युवा एंव खेलकूद मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) 33 वें राष्‍ट्रीय खेल 2007 में राज्‍य के खिलाडि़यों को कितने स्‍वर्ण पदक किस-किस खेल में प्राप्‍त हुए। विवरण सदन की मेज पर रखें।

(2) राज्‍य के किस-किस जिले में जिला खेल अधिकारी के पद कब-कब से रिक्‍त चल रहे हैं। विवरण सदन की मेज पर रखें।

(3) राज्‍य के किस-किस जिले में किस-किस खेल के कोच के कितने-कितने पद कब से रिक्‍त हैं। विवरण सदन की मेज पर रखें।

(4) राज्‍य के किस-किस जिला मुख्‍यालय एवं उपखण्‍ड मुख्‍यालय पर खेल स्‍टेडियम नहीं हैं। विवरण सदन की मेज पर रखें।

खेल मंत्री (श्री युनुस खान): (1) 33वें राष्‍ट्रीय खेल 2007 में राज्‍य के श्री जुबिन कुमार एवं कुमारी विशाखा विजय ने मिश्रित युगल टेबिल टेनिस खेल में स्‍वर्ण पदक प्राप्‍त किया है।

(2) राज्‍य के निम्‍नलिखित जिलों में खेल अधिकारी के पद रिक्‍त हैं:-

  क्र.सं.        जिले का नाम       रिक्‍त रहने की दिनांक     

  1.           अजमेर            01.05.2001

  2.          अलवर             13.03.2000

  3.          बांसवाड़ा           30.03.1999

  4.          बारां               05.08.2000

  5.          भरतपुर            05.05.1999

  6.          बूंदी               20.12.1997

  7.          धौलपुर            14.11.2000

  8.          दौसा              03.07.2001

  9.          डूंगरपुर            02.11.1994

  10.         हनुमानगढ़          14.11.2002

  11.          जैसलमेर           09.05.1988

  12.         जालौर             21.12.1995

  13.         करौली             17.07.2001

  14.         सिरोही             19.06.1999

  15.         बाड़मेर             22.04.2003

  16.         सवाई माधोपुर       15.12.2000

  17.         टौंक               30.06.1999

(3) राज्‍य में जिले वार प्रशिक्षकों(कोच) के पद स्‍वीकृत नहीं किये जाते हैं।

(4) राज्‍य में ऐसा कोई जिला मुख्‍यालय नहीं हैं जहां स्‍टेडियम नहीं है। परिशिष्‍ट संलग्‍न सूची में अंकित राज्‍य के उप खण्‍ड मुख्‍यालयों के अतिरिक्‍त अन्‍य उप खण्‍ड मुख्‍यालयों पर स्‍टेडियम नहीं है।

श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री महोदय के जवाब में जो बताया कि 33 वें राष्‍ट्रीय खेल प्रतियोगिता में राजस्‍थान को स्‍वर्ण पदक मिला। यह चीज हम सबके लिए एक सोच का विषय है, मणिपुर जो एक छोटा सा राज्‍य है जिसकी आबादी और क्षेत्रफल जयपुर शहर के बराबर है। वहां के खिलाडि़यों ने 51 स्‍वर्ण पदक प्राप्‍त किये। मैं इस संदर्भ में माननीय मंत्री महोदय से जानना चाहता हूं कि 33 वें राष्‍ट्रीय खेलों में राज्‍य का पदक तालिका में 24 वां स्‍थान, स्‍वर्ण पदकों की संख्‍या एक, राजस्‍थान के रणबाकुंरों का सिर गर्व से उठेगा या झुकेगा, सदन को अवगत करायें।

दूसरा, 17 जिलों में आपने उत्‍तर में बताया है कि खेल अधिकारियों के पद रिक्‍त हैं, इसमें से जैसलमेर में 19 वर्षों से, डूंगरपुर में 13 वर्षों से, बारां में 7 वर्ष से खेल अधिकारी नहीं है, विभाग पदस्‍थापन के स्‍थान पर वर्षों से रिक्‍त पद रखकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्‍ड रिकार्ड में नाम दर्ज कराने की भावना से कार्य कर रहा है या अन्‍य कोई कारण से, सदन को अवगत करायें।

तीसरा, खिलाडि़यों का वर्ष दर वर्ष घटिया प्रदर्शन, 33 वें राष्‍ट्रीय खेलों में राजस्‍थान को प्राप्‍त स्‍वर्ण पदकों की कम संख्‍या के लिए दोषी कौन है। खेल नीति, संसाधन एवं प्रशिक्षकों की कमी या खिलाडि़यों के चयन में भाई-भतीजावाद या माननीय मंत्री महोदय के पास खेलों के विकास और नीति बनाने हेतु समय का अभाव, कृपया सदन को अवगत करायें।

श्री उपाध्‍यक्ष: इनका जवाब आने दें।

श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): इनका जवाब दिला दें ...(व्‍यवधान)

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, बारां से आने वाले माननीय सदस्‍य ने जो चिंता व्‍यक्‍त की है, यह बात सही है कि राजस्‍थान एक जमाने में खेलों का सिरमौर हुआ करता था और शनै:-शनै: राजस्‍थान की स्थिति खेलों की दृष्टि से कमजोर हुई। मात्र राजस्‍थान की ही नहीं, अगर हम ओलंपिक, एशियाड या किसी भी तरह की अन्‍तरराष्‍ट्रीय स्‍तर की प्रतिस्‍पर्धा देखें और आपने देखा होगा कि अभी-अभी वर्ल्‍ड कप हुआ है क्रिकेट का।

श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): हम तो हमारे प्रदेश की देखें। राष्‍ट्रीय स्‍तर पर जो, प्रदेश की स्थिति है उसमें बतायें आप तो ...(व्‍यवधान) वर्ल्‍ड कप की तो सबको याद है इंडिया की टीम ने जो दुर्गति की है वह तो सबके सामने हैं। आप तो अपने प्रदेश को तो संभालें, जिसके आप मालिक हैं ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: आप सुनें पहले।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): क्रिकेट का तो कोई मैच ही नहीं है ...(व्‍यवधान)

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, सब जगह खेलों की स्थिति भारत में खराब है और राजस्‍थान में भी यह कहा कि अभी 33वीं राष्‍ट्रीय खेलकूद प्रतियोगिता हुई उसमें जो स्‍टैंडर्ड रहा खेलों का उसमें भी चूंकि जिन लोगों ने पार्टिसिपेट किया उन्‍हीं में से चुन लिया। जहां तक राजस्‍थान का सवाल है, राजस्‍थान में खेल अधिनियम 2005 हम लेकर के आये। उसकी बदौलत ओलंपिक संघ ने राजस्‍थान के बहुत सारे खेलों पर प्रतिबंध लगा रखा है। हमारी राजस्‍थान की टीमें उसमें हिस्‍सा नहीं ले सकती हैं और राजस्‍थान की टीम जिसमें बास्‍केटबाल, वालीबाल और एथलीट जिनमें हमारे पास अन्‍तरराष्‍ट्रीय स्‍तर के भी प्‍लेयर हैं, जो अच्‍छा स्‍टैंडर्ड रखते हैं शूटिंग वगैरह में, उन लोगों को भी पार्टिसिपेट नहीं करने दिया है और आज हमारी बास्‍केटबाल और दो टीमें भी थी जो बाहर दूसरी प्रतिस्‍पर्धा में गयी हुई थी उसकी वजह से यह कमजोर रहा।

उपाध्‍यक्ष महोदय, यह बात सही है और माननीय सदस्‍य की चिंता भी सही है कि राजस्‍थान की स्थिति खेलों की दृष्टि से कमजोर है। पिछले वर्षों में यह देखा जाये तो बजट की कमी होना और दूसरे कारणों में खेल अधिकारियों, कोचेज की भी कमी रही क्‍योंकि पिछले कुछ वर्षों में भर्ती नहीं हुई। भर्ती नहीं होने का भी महत्‍वपूर्ण कारण यह है कि राजस्‍थान में खेल सेवा नियम नहीं बने हुए हैं और जो भर्ती पुराने समय में हुई थी उसके पश्‍चात नई भर्तियां नहीं हुई। हमने नये खेल सेवा नियम बनाये हैं उनके तहत हम अब भर्ती करेंगे। माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने अभी-अभी जो बजट इसी वर्ष में पेश किया है।

श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): भर्ती कब तक करेंगे।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य बीच में नहीं बोलें।

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): आप बैठें तो सही। अभी बजट जो पेश किया है उसमें पहली बार राजस्‍थान में खेलों के प्रति रूझान किसी वित्‍त मंत्रि के रूप में किसी ने रखा है तो हमारी माननीय मुख्‍यमंत्री जी वसुन्‍धरा राजे जी ने रखा है। गांवों तक खेलों को ले जाने के लिए, जिन गांवों में पाँच हजार की जनसंख्‍या है उनमें यह भर्तियां की जायेंगी। माननीय सदस्‍य ने कारण पूछा है, हमारा सबसे बड़ा कारण तो यह रहा है कि ओलंपिक संघ ने हमारी बहुत सारी टीमों को अलाऊ ही नहीं किया, जहां तक 33 वें राष्‍ट्रीय खेलों की स्थिति है क्‍योंकि हमारा पार्टिसिपेट यहीं से ही कम हुआ। इसमें स्‍वतंत्र रूप से खेल संघ अपनी टीमों को भेजते हैं और हमरे बार-बार आग्रह किया और इसी चिंता की वजह से इस बार शुरूआत से ही खेल संघों के साथ बैठकर और जो खिलाड़ी जिनमें दक्षता है, योग्‍यता है उनको चर्चा करके शुरू से ही प्रशिक्षण देंगे और नये प्रशिक्षक जब तक नयी भर्ती नहीं होंगे, अप्रैल, मई और अलग-अलग शिड्युल के मुताबिक हम कांट्रेक्‍ट पर भर्ती लेंगे। हर खिलाड़ी इस तरह से प्रशिक्षण लेगा जो राष्‍ट्रीय स्‍तर पर दक्ष हैं, उनको नये प्रशिक्षक लगाकर के हम प्रशिक्षण देंगे। जहां तक पदोन्‍नति और भर्ती का सवाल है, इस वर्ष तो हमारी यह मंशा है कि हम कांट्रेक्‍ट पर लेंगे और निश्चित रूप से नयी भर्ती भी 2007-08 में राज्‍य सरकार करने का प्रयास कर रही है। इसमें खेल सेवा नियम भी बन जायें और हमारी खेल नीति भी अंतिम दौर में है। उसके कुछ पार्ट माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने इस बजट में घोषित कर दिये हैं और माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने बजट के अंदर यह भी कहा है कि 30 जून तक हमारी यह खेल नीति सम्‍पूर्ण रूप से राजस्‍थान प्रदेश में आ जायेगी। पहली बार यह हमारी खेल नीति राजस्‍थान में लागू होगी जिससे खिलाडि़यों को प्रोत्‍साहन मिलेगा। राज्‍य सरकार का प्रयास है कि खिलाडि़यों को भी प्रोत्‍साहन मिले। खेलों का इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर भी विकसित करें। पिछले तीन सालों में सरकार ने इसका प्रयास किया है। आपने देखा होगा कि अंर्तराष्‍ट्रीय स्‍तर का इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर हमारे एस.एम.एस. स्‍टेडियम में है, वरन एस.एम.एस. स्‍टेडियम ही नहीं हमारे जितने भी डिवीजनल हैडक्‍वार्टर हैं उनमें बाकायदा ...(व्‍यवधान)

श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): आपके तीन साल के प्रयास तो यह पदक तालिका बता रही है मंत्री महोदय।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, बिराजें। बीच में नहीं बोलें ...(व्‍यवधान)

श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): तीन साल का ही है आपका मंत्री महोदय ...(व्‍यवधान) कि इसमें राजस्‍थान की स्थिति क्‍या रही, आपको और हम सबको शर्म के मारे चुल्‍लू भर पानी में डूब कर मर जाना चाहिए ...(व्‍यवधान)

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): उनके लिए क्‍या कर रहे हैं, आप यह तो बतायें ...(व्‍यवधान)

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): चिंता करके राजस्‍थान को वापिस हम खेल जगत में ला रहे हैं। खिलाडि़यों को भी प्रोत्‍साहित कर रहे हैं। खेल की संस्‍था भी तैयार कर रहे हैं और आने वाले समय में, आने वाले वर्षों में जब भी राष्‍ट्रीय और अंर्तराष्‍ट्रीय स्‍तर की प्रतिस्‍पर्धा होगी उनमें हमारा स्‍टेट आगे आयेगा।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्रि जी से जानना चाहूंगा कि जो अंर्तराष्‍ट्रीय प्रतिस्‍पर्धाएं हैं, उनको क्रम वाइज गिनकर बतायें और उसके लिए आपने जो पैकेज दिया है वह भी बतायें। अंर्तराष्‍ट्रीय खेल प्रतियोगिता होती हैं उसकी सूची भी बतायें और उनके लिए हाल ही में जो पैकेज मुख्‍यमंत्री जी ने अनाउंस किया है वह बतायें। दूसरा, आप यहां राजस्‍थान के खेलों में बैलगाड़ी दौड़ाकर, सितोलिया खिलाकर और उनको प्रोत्‍साहित करके दूसरे खेलों को रोकना चाह रहे हैं।

 

jyg/akt/28.3.7/11.40/1e

 

रोक रहे हैं और रोकना चाह रहे हैं। ...(व्‍यवधान)...

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न भी इसी से सम्‍बन्धित है। मैं माननीय मंत्रीजी से यह पूछना चाहता हूं कि अन्तरराष्ट्रीय स्‍तर के जो खिलाड़ी हैं, जो ओलम्पिक में पोजिशन ला सकते हैं, उê