27.3.06/1100/gpc/akt/1a

 

अशोधित प्रति/ प्रकाशनार्थ नहीं

 

राजस्‍थान विधान सभा की कार्यवाही का वृत्‍तान्‍त

 

अंक 5     बारहवीं विधान सभा के पांचवें सत्र का अट्ठाईसवां दिवस     संख्‍या 18

 

 

सोमवार,

27 मार्च, 2006

 

राजस्‍थान विधान सभा की बैठक 11.00 बजे

विधान सभा भवन, जयपुर में प्रारम्‍भ हुई।

 

(श्री रामनारायण विश्‍नोई, उपाध्‍यक्ष, पदासीन)

 

 

तारांकित प्रश्‍नोत्‍तर

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री केसर देव बाबर।

हर्ष पर्वत (सीकर) पर पवन ऊर्जा के स्‍थापित संयंत्र

259. श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): क्‍या ऊर्जा मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) सीकर जिले के हर्ष पर्वत पर पवन ऊर्जा के कितने संयंत्र कब-कब स्‍थापित किये गये एवं उन पर कितनी-कितनी राशि व्‍यय हुई? विवरण सदन की मेज पर रखें।

(2) इन पवन संयंत्रों से पिछले दो वर्ष में कितने-कितने यूनिट विद्युत उत्‍पादन हुआ एवं उत्‍पादन पर प्रति यूनिट कितनी लागत आई? विवरण सदन की मेज पर रखें।

(3) क्‍या यह सही है कि उत्‍पादन लागत के बराबर राशि का भुगतान सरकार द्वारा अब तक किया जा चुका है? यदि नहीं, तो अब तक इन पवन ऊर्जा संयंत्रों से बिजली क्रय करने पर कितनी राशि व्‍यय की जा चुकी है? विवरण सदन की मेज पर रखें।

(4) हर्ष पर्वत पर लगाये गये उक्‍त पवन ऊर्जा संयंत्रों को किन शर्तों पर स्‍थापित करने की अनुमति दी गई एवं क्‍या उनकी अक्षरश: पालना की जा रही है? यदि नहीं, तो क्‍यों?

श्री गजेन्‍द्र सिंह (राज्‍य मंत्री, ऊर्जा): (1) सीकर जिले के हर्ष के 20 संयंत्र निजी क्षेत्र में 16 पवन ऊर्जा उत्‍पादकों द्वारा स्‍थापित किये गए जिनकी स्‍थापना का विवरण परिशिष्‍ट ‘’’’ पर उपलब्‍ध है। इन पर राज्‍य सरकार ने कोई राशि व्‍यय नहीं की है।

(2) इन पवन संयंत्रों से दिसम्‍बर, 2004 से मार्च, 2005 तक 35.11 लाख यूनिट तथा अप्रैल, 2005 से जनवरी, 2006 तक 1.79 करोड़ यूनिट का विद्युत उत्‍पादन हुआ है। उपरोक्‍त संयंत्र निजी क्षेत्र द्वारा लगाए गए हैं जिससे राज्‍य सरकार पर कोई उत्‍पादन लागत नहीं आई है।

(3) जी नहीं। राज्‍य सरकार पर कोई उत्‍पादन लागत नहीं आई है। तथापित अब तक इन पवन ऊर्जा संयंत्रों से बिजली क्रय करने पर व्‍यय की गई राशि का फर्मवार विवरण परिशिष्‍ट ‘’’’ पर उपलब्‍ध है।

(4) हर्ष पर्वत पर लगाए गए पवन ऊर्जा संयंत्रों को स्‍थापित करने की अनुमति राज्‍य सरकार द्वारा घोषित पवन ऊर्जा नीति 2003 में निहित शर्तों पर दी गई जिनकी पालना की जा रही है। पवन ऊर्जा नीति की प्रति परिशिष्‍ट ‘’’’ पर उपलब्‍ध है।

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): उपाध्‍यक्ष महोदय, मंत्री महोदय ने खण्‍डवार जवाब दिया है, मैं थोड़ी जानकारी मंत्री महोदय से और चाहूंगा कि आपने 16 संयंत्रों का जिक्र किया है। जो चार संयंत्र बच गये इसमें इनका जिक्र नहीं है, एक तो यह स्‍पष्‍ट कर दें कि इनकी क्‍या स्थिति है?

दूसरा, क्‍या निजी क्षेत्र में अन्‍य लोग यदि ऐसे संयंत्र लगाना चाहें तो उनके लिए सरकार की अनुमति है? यदि है तो किन शर्तों पर? तीसरा, क्‍या पवन ऊर्जा लगाने के मामले में निजी क्षेत्र के लोग अपने प्रदेश की ओर कम आकर्षित हो रहे हैं? सरकार इनको आकर्षित करने के लिए क्‍या अच्‍छी नीति या अनुदान देने का विचार रखती है ताकि इनसे प्रदेश को अच्‍छी बिजली मिल सके।

श्री गजेन्‍द्र सिंह (राज्‍य मंत्री, ऊर्जा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय विधायक महोदय ने जो पूछा है इसके अंदर जो 16 पार्टीज बतायी हैं, आपने कहा कि 20 पवन चक्कियां लगी हैं तो 16 पार्टीज के नाम हैं। इसमें कई पार्टियों की दो-दो यूनिट्स लगी हुई हैं। इसलिए इसके अंदर टोटल पवन चक्‍की तो 20 लगी हुई हैं और नाम 16 हैं क्‍योंकि दो-दो कई फर्म ने लगायी हैं।

उपाध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान की ओर पवन ऊर्जा के अंदर अभी अच्‍छा थर्स्‍ट आ रहा है और हमने जो केप खोला है 550 मेगावाट जैसलमेर के लिए और इसके अलावा बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर के बाहर जो क्षेत्र हैं इनके अंदर 250 मेगावाट का केप खाला है। हमें पूरी आशा है कि शीघ्र ही यह केप एक साल के अंदर रिलाइज कर लिया जाएगा।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्रीजी से दो बातें जानना चाहता हूं। एक तो यह है कि पॉलिसी फॉर प्रमोशन ऑफ इलेंक्ट्रिसिटी जनरेशन फ्राम विंड, 2003 जिसका आपने जिक्र किया है राज्‍य में वसुंधरा जी की सरकार आने के बाद इस पालिसी की पालना कब रोकी गयी और कब वापस शुरू की गई? रोकने के क्‍या कारण थे और वापस शुरू करने के क्‍या कारण थे?

नम्‍बर दो, यह जो इन्‍वेस्‍टर ऑफ डवलपर हैं इन्‍होंने थर्ड पार्टी को बिजली बेचने के लिए किस-किस ..(व्‍यवधान).. आपने अपने उत्‍तर में जिन 16 का जिक्र किया किस-किस ने थर्ड पार्टी को बिजली बेची है और किस-किस ने आरईआरसी से लाइसेंस लिया है और कितनी बेची है और बिना लाइसेंस के कितनी बिजली बेची गई?

श्री गजेन्‍द्र सिंह (राज्‍य मंत्री, ऊर्जा): उपाध्‍यक्ष महोदय, 1999 से लेकर 2003 तक कुल 285 मेगावाट पावर जनरेट किया गया पवन ऊर्जा से। हमारी सरकार तीन और साढे तीन साल के बीच में ..(व्‍यवधान).. अभी जो मैं बता रहा हूं हमारे जो टार्गेट हैं हम 500 मेगावाट पवन ऊर्जा से बिजली जनरेट कर देंगे within a period of three to three-and-a-half years.

माननीय विधायक महोदय ने जो पूछा 2003 की पालिसी के बारे में। पहली चीज तो आपको कहना चाहूंगा कि प्रश्‍न पूछा गया है सीकर हर्ष पहाड़ी और हर्ष पहाड़ी के अंदर जो विण्‍ड मिल्‍स लगी हैं । ये पालिसी के अंदर जा रहे हैं तो भी मैं इसका जवाब दूंगा 2003 के अंदर हमने रेट 2.91 कर दी क्‍योंकि जो 1999 की कांग्रेस की पालिसी थी, जब इन्‍होंने शुरू किया आज वही बिजली एक रिकार्ड 4 रुपये 04 पैसे आज की रेट हो गई है, बहुत महंगी बिजली हो गई है। तो सरकार ने चाहा 2.91 रेट करके सरकार की बचत की जाए। इसके अलावा कांग्रेस सरकार के समय ट्रांसमिशन सिस्‍टम ही नहीं थे, पंखे चल रहे थे, पीपीए साइन हो गए थे, लेकिन बिजली का उपयोग नहीं हो रहा था। इसलिए 2003 की पालिसी में हमने संशोधन किया।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपने कहा कि 2 रुपये 91 पैसे हमने कर दी और आपका जवाब यह है कि आपने बिजली खरीदी है 2004-05 में 3 रुपये 38 पैसे पर। 2005-06 में 3 रुपये 44 पैसे से। यह कहां से ले आये आप 2 रुपये 91 पैसे। मैंने यह पूछा है कि इस पा‍लिसी पर क्रियान्‍वयन कब रोका, क्‍यों रोका और वापस इसी कांग्रेस सरकार की पालिसी को आपने लागू कब किया और क्‍यों किया?

एक माननीय सदस्‍य: यह तो अलग से प्रश्‍न है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): कोई अलग से प्रश्‍न नहीं है। आपने उत्‍तर में पालिसी का जिक्र किया है। इसमें भ्रष्‍टाचार हुआ है, मैं आरोप लगाना चाहता हूं यह बंद की गई है इसके पीछे सरकार का भ्रष्‍टाचार का आचरण था और वापस चालू की गई उसमें भी भ्रष्‍टाचार हुआ है। ..(व्‍यवधान)..

श्री उपाध्‍यक्ष:  माननीय सदस्‍य।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): यह प्रश्‍नकाल है या कोई भाषण काल है? ..(व्‍यवधान)..

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): ऐसे ही आरोप लगा रहे हो। आपके पास कोई तथ्‍य हैं क्‍या? ..(व्‍यवधान).. आपके पास कोई तथ्‍य है या ऐसे ही आरोप लगा रहे हो ..(व्‍यवधान).. आपने आरोप लगाये कैसे?

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): आरोप लगाना है तो नियमों में आओ। ..(व्‍यवधान)..

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): कोई सबूत है क्‍या? ..(व्‍यवधान)..

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): आरोप लगाना तो इनका धंधा हो गया है। इनको तो आरोप लगाना ही है। ..(व्‍यवधान).. 

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): आपने किस आधार पर आरोप लगाया है, आप स्‍पष्‍ट करें।

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): हम इसे सुधारना चाह रहे हैं। आपका धंधा है आरोप लगाना ..(व्‍यवधान)..

श्री उपाध्‍यक्ष:  माननीय सदस्‍य।

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): आरोप लगाने का माननीय सदस्‍य को अधिकार नहीं है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): सत्‍ता पक्ष के कितने ही विधायक खड़े होकर मुझे इंटरप्‍ट करें सरकार को इस बात का जवाब देना पड़ेगा प्राइस फार पावर ..(व्‍यवधान)..

श्री उपाध्‍यक्ष:  सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य ..(व्‍यवधान)..

एक माननीय सदस्‍य: मूल प्रश्‍न से संबंधित नहीं है।

श्री गजेन्‍द्र सिंह (राज्‍य मंत्री, ऊर्जा): माननीय विधायक ने जो आरोप लगाया है नियमों में आना चाहिए। सरकार पर जो आरोप लगा रहे हैं यह मिथ्‍या आरोप लगा रहे हैं। ..(व्‍यवधान)..

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, सदन को मखौल बना रखा है।

श्री उपाध्‍यक्ष:  जवाब दे रहे हैं वो।

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): उपाध्‍यक्ष महोदय, इस तरह का कोई मामला नहीं है।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): जवाब तो दे रहे हैं ..(व्‍यवधान)..

श्री उपाध्‍यक्ष:  सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य।

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): इनको जानकारी सरकार देती है। ..(व्‍यवधान)..

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): इस तरह से इंटरप्‍ट करने का नहीं चलेगा। बीच में खड़े हो जाते हैं। ..(व्‍यवधान)..

श्री उपाध्‍यक्ष:  माननीय सदस्‍य। ..(व्‍यवधान)..

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): नियमों में आइए और नियमों में सरकार इसकी जानकारी देगी।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): मर्जी आये जो बोल दो ..(व्‍यवधान)..

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): उपाध्‍यक्ष महोदय, इनका आरोप लगाने का काम है और कुछ नहीं।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): यह खाली ब्‍लेकमेल करते हैं।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): किस आधार पर किये हैं? ..(व्‍यवधान).. मेरा आरोप है सरकार के ऊपर ..(व्‍यवधान)..

श्री उपाध्‍यक्ष:  माननीय सदस्‍य।

श्री गजेन्‍द्र सिंह (राज्‍य मंत्री, ऊर्जा): उपाध्‍यक्ष महोदय, ये भ्रष्‍टाचार की क्‍या बात करते हैं इन्‍होंने 3.32 की ..(व्‍यवधान)..

श्री उपाध्‍यक्ष:  माननीय सदस्‍य।

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से बोल रहा हूं, यह भ्रष्‍टाचार का आरोप कैसे लगा दिया? ..(व्‍यवधान)..

 

mlb/akt/1b/1110/27.3.2006

 

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य, मंत्री महोदय ने जवाब तो यह दिया था कि पहले की रेट ज्‍यादा थी, हमने कम की है उसमें भ्रष्‍टाचार कहां से आ गया ? ...(व्‍यवधान)... 

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मैं वही बात फिर दोहराना चाहता हूं । ...(व्‍यवधान)... पहले उपाध्‍यक्ष महोदय, पूरी बात तो सुनिए आप। ...(व्‍यवधान)...

श्री उपाध्‍यक्ष: क्‍या बात है ? अंकित नहीं हो।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

एक माननीय सदस्‍य: ***

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, अपना स्‍थान ग्रहण करें। ...(व्‍यवधान)... 

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): स्‍वयं भ्रष्‍टाचारी हैं, स्‍वयं +++  हैं और दूसरों की बात करते हैं। ...(व्‍यवधान)... 

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप अपना स्‍थान ग्रहण करें। ...(व्‍यवधान)...

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): यदि ये स्‍वयं कहते हैं तो इनको भी सुनना पड़ेगा।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। अंकित नहीं हो।

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: मंत्री महोदय। ...(व्‍यवधान)... 

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य आप अपना स्‍थान ग्रहण करें।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): उपाध्‍यक्ष महोदय, पूरा ट्रेजरी बैंचेज पैरों पर खड़ा हो गया। एक चीफ व्हिप ही काफी हैं किसी को सज़ा दिलवाने के लिए गवर्नमेंट चीफ व्हिप का दायित्‍व बनता है कि अपनी ट्रेजरी बैंचेज को सलाह नहीं दें, आपको सलाह देनी चाहिए, मदन जी दिलावर उठ रहे हैं, राजेन्‍द्र जी राठौड़ का तो कर्तव्‍य बनता है कि ड्यूटी है उनको तो उठना चाहिए। घनश्‍याम जी तिवाड़ी उठ रहे हैं।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): मैं तो नहीं उठा रहा हूं साहब। ...(व्‍यवधान)...

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मान्‍यवर, मैं निवेदन यह करना चाहता था कि गवर्नमेंट चीफ व्हिप का दायित्‍व है कि सत्‍ता पक्ष को संभाले रखे, उनके एक मंत्री जवाब दे रहे थे, सारा सदन जो सत्‍ता पक्ष वाला अपने पैरों पर खड़ा था और हमारे गवर्नमेंट चीफ व्हिप +++ जैसे शब्‍दों का इस्‍तेमाल करते हैं अपनी वाणी से इससे बड़ा असंसदीय आचरण कोई हो नहीं सकता, आप देख लीजिए, आपसे आग्रह करूंगा कि मुख्‍य सचेतक जी ने जो असंसदीय अभद्र भाषा, आपत्तिजनक भाषा +++  जैसी बात कही है उनको सदन की कार्यवाही से निकला जाए।

श्री उपाध्‍यक्ष: +++ शब्‍द को हटा देंगे।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): हां, निकाल दो और उसके लिए मुझे खेद भी है। पर आप यह सुनिए कि माननीय प्रतिपक्ष के नेता ने जो कुछ कहा है उसके प्रति मैं बहुत ही संवेदनशील भी हूं और इनका सम्‍मान भी करता हूं और इनको मानता भी हूं। सदन में इस प्रकार का वातावरण नहीं बनाना चाहिए कि अपने यहां सदन में व्‍यवस्‍था है कि कोई पक्ष भ्रष्‍टाचार का आरापे लगाए या किसी के ऊपर आरोप लगाए तो बाकायदा उसको प्रमाणित आरोप लगाए, नोटिस देकर लगाए , इसमें कोई मनाही नहीं है, मतलब कड़ी से कड़ी बात यहां पर कही जा सकती है और चाहे किसी को बुरी लगे लेकिन बिना प्रमाण के बिना कोई बात के आप इस सदन को इसको व्‍यवधान डालने के लिए या उत्तेजना करने के लिए इस प्रकार के शब्‍दों का प्रयाग करें इसलिए मुझे मजबूर होकर इस प्रकार के शब्‍दों का प्रयोग किया जाता है। मैंने आज भी राजस्‍थान पत्रिका में पढ़ा है, यह टिप्‍पणी पढ़ी है कि मुख्‍य सचेतक ने भी कुछ उन्‍होंने शब्‍दों का प्रयोग किया है उससे भी मुझे आघात लगा है, आप कह रहे हो जिससे भी मुझे आघात लगा है और मुझे खुद को भी आघात लगा है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): लेकिन परनाला वहीं गिरेगा। ...(व्‍यवधान)... 

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): लेकिन उपाध्‍यक महोदय, जब सदन में रूकावट आती है जब उत्‍तेजना फैलती है तो मुझे, मतलब उनको रोकने के लिए कभी कभी ऐसा आवश्‍यक लगता है कि आदमी स्‍वयं के ऊपर नहीं देखता, स्‍वयं स्‍वयं देखता नहीं है और अनाप शनाप आरोप लगाएं और वह व्‍यक्ति आरोप लगाए इसलिए मैं इस बात को आपने जो शब्‍दों को निकालने का जो किया है उसका तो मैं स्‍वागत करता हूं और मैं खेद भी व्‍यक्‍त करता हूं कि मुझे ऐसा नहीं कहना चाहिए। इस सब के बावजूद भी लेकिन मैं यह चाहूंगा कि इस सदन का दुरूपयोग नहीं हो और कहीं दुरूपयोग होता है तो वह रूके।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री गजेन्‍द्र सिंह (राज्‍य मंत्री, ऊर्जा): आपके भ्रष्‍टाचार के आरोप हैं वह हमने सुन लिए, अब मेरी बात सुनिए आप। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, पहली चीज यह जो प्रश्‍न पूछा गया है, इसके जो चारों भाग हैं, it has nothing to do with wind policy. यह हर्ष की पहाड़ी के ऊपर है जो वहां पर लगा है, इसके अलावा मैं आपके माध्‍यम से कहना चाहूंगा कि अभी भ्रष्‍टाचार के आरोप लगा रहे हैं, मैं इनके ऊपर भ्रष्‍टाचार का आरोप क्‍यों लगाना चाहूंगा कि जो बिजली इन्‍होंने उस टाइम लाइसेंसेज दिये, नम्‍बर एक, पहली चीज यह है कि वही बिजली 4 रुपये 4 पैसे में आज पड़ रही है, हमारे सरकार में 3.25 के अन्‍दर संशोधन की बात कर रहे हैं, उस ऊंची रेट को हम 2.91 पर लाए, सरकार का पैसा बचाने के लिए पहल बात आपकी पालिसी तो 4 रुपये 4 पैसे हो गई है, हम 2.91 पर लाए, in the interest of the State­ नम्‍बर वन, दूसरा उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको यह बताना चाहूंगा कि कांग्रेस सरकार के समय इन्‍होंने तीन बारी यह नई पालिसी लाए, हमने चेंज किया उसमें ये रो रहे हैं। दूसरी चीज यह है कि इन्‍होंने लाइसेंसेज दे दिये लेकिन 2003 के अन्‍दर प्राइवेट इन्‍वेस्‍टर्स में विंड विल्‍स चल रही थी, पीपीएस साइन हो गया था उसके बावजूद ग्रिड के अन्‍दर पावर इंजेक्‍ट नहीं हो रहा था, it was waste of resources, waste of money. ये इनकी सरकार के कारनामे बता रहा हूं और आप भ्रष्‍टाचार के आरोप लगाते हैं ? Please come with facts & figures before the House.

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): ***

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप अपना स्‍थान ग्रहण करें।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, यह रिकार्ड नहीं हो रहा है आपका। 

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: आप विषयांतर हो रहे हैं।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री गजेन्‍द्र सिंह (राज्‍य मंत्री, ऊर्जा): इन्‍होंने रेट में 5 परसेंट इक्रीमेंट किया, हमने खाली 2 परसेंट किया। ...(व्‍यवधान)... 

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, मूल प्रश्‍नकर्ता तो खड़े हैं और ये बोल रहे हैं ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, इस प्रश्‍न से आपका संबंधित नहीं है। ...(व्‍यवधान)... 

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

 


skp/akt/27.3.06/1120/1c

 

श्री उपाध्‍यक्ष: यह आपका प्रश्‍न से सम्‍बन्धित नहीं है। (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

एक माननीय सदस्‍य: बिल्‍कुल सम्‍बन्धित नहीं है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): .... यह आरोप लगा रहे हैं। (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य, मैंने यह स्‍पष्‍ट कर दिया था, मंत्री महोदय ने जो जवाब दिया है...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

एक माननीय सदस्‍य: आसन पैरों पर है फिर भी खड़े हैं। फिर आप क्‍यों खड़े हैं?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (संसदीय कार्य मंत्री): इनको बिठाओ। आप खड़े हैं और ये खड़े हैं। (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय श्री बत्‍ती लाल। आप अपना स्‍थान ग्रहण कीजिये। पूछिये आप सीकर से आने वाले माननीय सदस्‍य। पूछने दीजिये। (व्‍यवधान)

श्री महादेव सिंह (खण्‍डेला): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके मार्फत ऊर्जा मंत्री जी से यह जानकारी चाहता हूं कि क्‍या सीकर जिले में ऐसे और भी स्‍थान.... (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: सीकर से सम्‍बन्धित है। I have allowed him.

श्री महादेव सिंह (खण्‍डेला): माननीय ऊर्जा मंत्री जी से जानकारी चाहता हूं...

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं मूल प्रश्‍नकर्ता हूं। उपाध्‍यक्ष महोदय, मुझे जवाब दीजिये। (व्‍यवधान)

श्री महादेव सिंह (खण्‍डेला): कि क्‍या सीकर जिले में ऐसे और भी स्‍थान हैं जहां पवन ऊर्जा संयंत्र लगाये जा सकते हैं? (व्‍यवधान) क्‍या सरकार ऐसे स्‍थान को चिह्नित करना चाहती है ? यदि हां, तो कब तक, और नहीं तो क्‍यों ?

श्री उपाध्‍यक्ष: बैठिये। (व्‍यवधान)

श्री महादेव सिंह (खण्‍डेला): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके मार्फत माननीय मंत्री महोदय से जानना चाहता हूं कि क्‍या सीकर जिले में पवन ऊर्जा संयंत्र लगाने के लिए ऐसे और भी स्‍थान हैं क्‍या ? (व्‍यवधान)

श्री जयराम जाटव (खैरथल): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मूल प्रश्‍नकर्ता का जवाब नहीं आया। (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: बैठ जायें। बीच में नहीं माननीय सदस्‍य। (व्‍यवधान)

श्री जयराम जाटव (खैरथल): आसन से व्‍यवस्‍था चाहते हैं। (व्‍यवधान)

श्री महादेव सिंह (खण्‍डेला): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके मार्फत माननीय बिजली मंत्री महोदय से जानना चाहता हूं....

श्री जयराम जाटव (खैरथल): गलत तथ्‍यों के आधार पर आरोप लगाये जा रहे हैं सरकार के ऊपर और मूल प्रश्‍नकर्ता खड़ा था उसको कोई आसन से व्‍यवस्‍था नहीं है। (व्‍यवधान) 

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, स्‍थान ग्रहण कीजिये आप।

श्री जयराम जाटव (खैरथल): जब मूल प्रश्‍नकर्ता संतुष्‍ट है तो आगे का प्रश्‍न क्‍यों नहीं लेते ? (व्‍यवधान)

श्री महादेव सिंह (खण्‍डेला): आप सारे ही अध्‍यक्षता कर रहे हो क्‍या ? (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह बात सही है कि मूल प्रश्‍नकर्ता को अवसर दिया जाना चाहिए। (व्‍यवधान) ठ‍हरिये आप। (व्‍यवधान)

श्री महादेव सिंह (खण्‍डेला): मैं भी इनकी इजाजत से ही बोल रहा हूं, आपके कहने से नहीं बोल रहा हूं। (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): उपाध्‍यक्ष महोदय, यह संसदीय परम्‍पराओं की आवश्‍यकता है कि मूल प्रश्‍नकर्ता को तीन प्रश्‍न पहले पूछने की इजाजत दी जानी चाहिए और उसके बाद जिस जिले का सम्‍बन्‍ध है उनको मौका दिया जाना चाहिए। आप इसको सख्‍ती से रोकें मान्‍यवर। मूल प्रश्‍नकर्ता को तीन प्रश्‍न पूछने दीजिये और उसके बाद महादेव सिंह जी को मौका दीजिये।

श्री उपाध्‍यक्ष: अभी इनको पूछने दो फिर आप पूछ लेना। अभी इनको पूछने दो फिर आप पूछना।

श्री महादेव सिंह (खण्‍डेला): माननीय सभापति महोदय, मैं आपके मार्फत ऊर्जा मंत्री से पूछना चाहता हूं कि क्‍या सीकर जिले में ऐसे और भी स्‍थान हैं क्‍या कि जहां पवन ऊर्जा संयंत्र लगाये जा सकते हैं ? सरकार ऐसे स्‍थानों को चिह्नित करना चाहती है क्‍या? यदि चाहती है तो कब तक और नहीं तो क्‍यों ?

श्री गजेन्‍द्र सिंह (राज्‍य मंत्री, ऊर्जा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह जब हम साइट्स के बारे में तय करते हैं, इसकी स्‍टडी सैंट्रल गवर्नमेंट करती है और प्राइवेट पार्टीज अपने विंड मास लगाकर के हवा का देखते हैं कि प्‍लांट लोड फैक्‍टर अगर विंड मिल लगाई जाए तो कितना होगा क्‍योंकि यह जो पवन ऊर्जा का इश्‍यू है यह प्‍लांट लोड फैक्‍टर पर डिपेंट करता है। तमिलनाडू के अन्‍दर प्‍लांट लोड फैक्‍टर 30 प्रतिशत तक यानि अगर आप हजार मेगावाट लगायेंगे तो आपको 300 मेगावाट पूरे साल में एवरेज मिलेगा। राजस्‍थान के अन्‍दर जो पी एल एफ है वह 18-19 प्रतिशत के करीब है। अभी सीकर में और कोई साइट आइडेंटिफाई नहीं हुई है, विंड मास की कोई रिपोर्ट्स नहीं है तो अभी कोई विचार नहीं है लेकिन प्राइवेट पार्टीज जैसे विलिंग हो रहा है, लोग जैसलमेर में अपना तंत्र लगा रहे हैं और वो बिजली व्‍हील करके वो जयपुर में कुछ होटल्‍स हैं वो ले रहे हैं, यह ओपन टू पब्लिक है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: आपका प्रश्‍न रिलेवेंट नहीं है। (व्‍यवधान) आप इस प्रश्‍न को दूसरे तरीके से ले रहे हैं। आपने कह दिया कि कोई भ्रष्‍टाचार.... (व्‍यवधान) रिलेवेंट नहीं है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (संसदीय कार्य मंत्री): प्रतिपक्ष के नेता, आपने इस हाउस में कुछ निर्देश दिये हैं, आपने एक दिशा बताई कि पहले मूल प्रश्‍नकर्ता, फिर जिले का ले, अब आपके सदस्‍य नहीं मान रहे हैं। आपके सदस्‍य नहीं मान रहे हैं। वो मूल प्रश्‍नकर्ता खड़े हैं। 

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): उपाध्‍यक्ष महोदय, प्रतिपक्ष के नेता की वो मानते ही नहीं हैं। (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): उपाध्‍यक्ष महोदय, पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्‍टर साहब, नियमों का पालन करवाने का दायित्‍व आपका और मुख्‍य सचेतक जी का है कि आप आसन से उनकी पालना करवायें। मैंने अपनी बात कह दी और वो नियमों के अनुकूल है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (संसदीय कार्य मंत्री): आप जैसे कद्दावर आदमी की परवाह नहीं कर रहे हैं, हमें उसकी तकलीफ है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अब सब लोग मस्‍त हो रहे हैं, मैं क्‍या करूं।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): उपाध्‍यक्ष महोदय, यह माननीय सदस्‍य मान ही नहीं रहे हैं।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: यह प्रश्‍न नहीं है। (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप स्‍थान ग्रहण कीजिये। आपका जवाब आ गया करीब-करीब।

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा जवाब आ गया लेकिन आसन की बात सुनी नहीं, आसन की बात मानी नहीं, इतने सीनियर हैं।

श्री उपाध्‍यक्ष: वह छोड़ो बात। श्री बत्‍ती लाल जी। नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन। आप स्‍थान ग्रहण कीजिये।

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): ठीक है उपाध्‍यक्ष महोदय।

 

विधान सभा क्षेत्र टोडाभीम की स्‍वीकृत सड़कें

260. श्री बत्‍तीलाल (टोडाभीम): क्‍या सार्वजनिक निर्माण मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे-:

(1) विधान सभा क्षेत्र टोडाभीम में वर्ष 2004-05 में कौन-कौनसी सड़कें किस-किस योजना के अन्‍तर्गत स्‍वीकृत की गई ?

(2) विधान सभा क्षेत्र टोडाभीम में और कौन-कौनसी सड़कें स्‍वीकृति की प्रक्रिया में है ? प्रस्‍तावित सड़कों को सरकार कब तक स्‍वीकृति देने का विचार रखती है ? विवरण सदन की मेज पर रखें।

सार्वजनिक निर्माण मंत्री (श्री राजेन्‍द्र राठौड़): (1) विधान सभा क्षेत्र टोडाभीम में वर्ष 2004-05 में विभिन्‍न योजनाओं के अन्‍तर्गत स्‍वीकृत सड़कों की सूची परिशिष्‍ट 'अ' पर संलग्‍न है।

(2) विधान सभा क्षेत्र टोडाभीम में विभिन्‍न योजनाओं के अन्‍तर्गत प्रस्‍तावित सड़कों की सूची परिशिष्‍ट 'ब' पर संलग्‍न है। प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना के अन्‍तर्गत प्रस्‍ताव केन्‍द्र सरकार एवं आर आई डी एफ XI के प्रस्‍ताव नाबार्ड को भेज दिय गये हैं जिनकी स्‍वीकृति अपेक्षित है।

श्री बत्‍तीलाल (टोडाभीम): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री महोदय ने जो यह संलग्‍न किया है उसको देखकर के ऐसा लगता है कि सप्‍लीमेंट्री पूछना ही क्‍या। राष्‍ट्रीय क्‍या यह तो अन्‍तरराष्‍ट्रीय कीर्तिमान है कि दो साल के अन्‍दर सारी सड़क बना देना, यह कोई मामूली सरकारों का काम नहीं है। 40 सड़कें हैं। (व्‍यवधान) शब्‍द ही नहीं है क्‍या प्रश्‍न पूछें, जो धन्‍यवाद दे सकें आपको। यह तो अन्‍तरराष्‍ट्रीय की‍र्तिमान है। यह तो आने वाले टाइम में गिनीज बुक में लिखा जाएगा। 40 बताई हैं, दो साल में 40 सड़कें। अब इससे ज्‍यादा क्‍या हो सकता है, इससे ज्‍यादा लोकप्रिय और बात क्‍या हो सकती है।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री सांगसिंह भाटी।

 

ग्राम छायण, टोटा, अजासर एवं दिधू का उपनिवेशन तहसील परिवर्तन

261. श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): क्‍या राजस्‍व मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) क्‍या यह सही है कि वर्ष 1971 के भारत पाक युद्ध के दौरान जैसलमेर जिले के कई लोग पाकिस्‍तान चले गये थे? यदि हां, तो ऐसे कितने लोगों की कृषि भूमि सरकार द्वारा अधिग्रहीत की गई ? अधिग्रहीत की गई कृषि भूमि का सरकार द्वारा क्‍या उपयोग किया गया ? विवरण सदन की मेज पर रखें।

(2) जिला जैसलमेर के कितने व कौन-कौन से गांवों को परिसीमन के बाद राजस्‍व गांव घोषित किया गया व कौन-कौन से गांव प्रस्‍तावित हैं ? प्रस्‍तावित राजस्‍व गांवों को कब तक राजस्‍व ग्राम घोषित कर दिया जायेगा ? विवरण सदन की मेज पर रखें।

(3) क्‍या यह सही है कि सरकार द्वारा किसान महासभा नाचना में पोकरण तहसील के गांव छायण, टोटा, अजासर, दिधू को उपनिवेशन तहसील बाप से उपनिवेशन तहसील नाचना में लिये जाने की घोषणा की गई थी ? यदि हां, तो क्‍या उक्‍त आदेश जारी किये गये ? यदि नहीं, तो क्‍यों व अब कब तक आदेश जारी कर दिये जाएंगे ?

राजस्‍व मंत्री (श्री रामनारायण डूडी): (1) जी हां। वर्ष 1971 के भारत पाक युद्ध के दौरान पाकिस्‍तान जाने वाले 145 काश्‍तकारों की कुल 7753.18 बीघा कृषि भूमि अधिग्रहीत की गई थी। अधिग्रहीत की गई कृषि भूमि को राजस्‍थान काश्‍तकारी अधिनियम, 1955 की धारा 63 (1) (8) के तहत सिवाय चक घोषित किया गया। जिला जैसलमेर डी पी ए पी के अन्‍तर्गत होने से आबंटन पर रोक के कारण तहसील जैसलमेर की 4135.03 बीघा भूमि आबंटित नहीं की जा सकी। तहसील पोकरण के गांव उपनिवेशन क्षेत्र के अन्‍तर्गत आ जाने के कारण 3618.15 बीघा भूमि में से 1105.02 बीघा भूमि का आबंटन किया जा चुका है। शेष भूमि आबंटन की प्रक्रिया जारी है।

(2) जिला जैसलमेर के 69 गांवों को परिसीमन के बाद राजस्‍व ग्राम घोषित किया गया है। सूची परिशिष्‍ट 'अ' संलग्‍न है। वर्तमान में 10 प्रस्‍ताव विभिन्‍न स्‍तर पर परीक्षणाधीन है। सूची परिशिष्‍ट 'ब' संलग्‍न है।

(3) जी हां। आयुक्‍त उपनिवेशन बीकानेर के आदेश क्रमांक प.6(18)समु./द/98/ 443 दिनांक 16.2.06 के द्वारा पोकरण तहसील के उक्‍त गांवों को उपनिवेशन तहसील बाप से उपनिवेशन तहसील नाचना-2 में सम्मिलित करने के आदेश जारी कर दिये गये हैं।

 

vkj/akt/1130/1d

 

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से यह जानना चाहूंगा कि सन् 1971 की लड़ाई में भारत से निकलकर जो सारे लोग पाकिस्‍तान गये, उनके पीछे बची हुई भूमि, जैसा आपने उत्‍तर दिया है, यह जवाब मेरे पास आपने नहीं भेजा है, यह पढ़ा हुआ नहीं है इसमें, नहीं है मेरे पास लेकिन वह जमीन ऐसी कितनी है जो नाजायज तरीके से उनके वारिस बनकर बैठे हैं, यह सूचना आपके पास नहीं पहुंची, न मेरे पास भेजी। जो पाकिस्‍तान चले गये उनके पीछे नाजायज वारिस बनकर राज्‍य सरकार की भूमि पर कितने परिवार बैठे हैं ये, नम्‍बर एक।

नम्‍बर दो, जैसलमेर में राजस्‍व ग्राम आपने घोषित किये, बहुत-बहुत धन्‍यवाद, 65 गांव राजस्‍व ग्राम घोषित किये लेकिन जैसलमेर का भू-भाग उपनिवेशन विभाग में हजारों बीघा जमीन नये सिरे से एरिया आबाद हो रहा है, उस नये सिरे से आबाद एरिया में कितने राजस्‍व ग्राम घोषित करने की आप मंशा रखते हैं और रखते हैं तो कब तक और नहीं तो क्‍यों नहीं?

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैंने भाग (1) के बाबत जैसलमेर से आने वाले माननीय सदस्‍य को बताया कि आपके यहां से पाकिस्‍तान लोग चले गये और पाकिस्‍तान जाने के बाद में जो भी उनकी भूमि यहां बचती है, रहती है तो यह एक नियम 63(1)(8) के अन्‍दर सीधा प्रावधान है कि उसके अन्‍दर जो लोग चले जाते हैं तो यह सारी सिवाय चक हो जाती है और सिवाय चक होने के बाद में वह जमीन किसी की नहीं रहती, वह सिवाय चक सरकार के खाते में आ जाती है और खाते में आने के बाद के अन्‍दर नियमानुसार ही उनका नियमन किया जाता है। (व्‍यवधान) आप मेरी बात सुन लीजिये, जो नियम है, वही मैं निवेदन कर रहा हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: बैठिये बैठिये। आप जवाब देने दीजिये।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): नियमानुसार ही नियमन किया जाता है मगर जैसलमेर जिला डीपीएपी में होने के कारण, 1974 में डीपीएपी  में घोषित कर दिया गया था और डीपीएपी में होने के कारण वहां किसी प्रकार का जमीन का आवंटन नहीं किया गया और जहां तक पोकरण का सवाल है और पोकरण के अन्‍दर 12 गांव जमीन गई है 3618 बीघा, उनमें से यह प्रक्रिया शुरू की है और 1105 बीघा जमीन जो उस श्रेणी के अन्‍दर योग्‍य थे, जो पात्रता रखते थे, उनको अलाट की जा रही है।

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न पूछने का कारण यह है कि गये हुए पाकिस्‍तान से वापस कितने परिवार आकर बसे हैं? क्‍या बसे हैं या नहीं?

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): नहीं, यह इस सवाल के अन्‍दर आपका जवाब नहीं है। सदस्‍य महोदय, पहला तो यह है कि तीन तरह के सवाल एक ही सवाल में आपने पूछे हैं। एक तो पाकिस्‍तान चले गये, उनका विवरण। दूसरा, कितने गांव राजस्‍व गांव घोषित किये गये, जो अलग नेचर का है। पहला अलग नेचर का है और तीसरा, कोलोनाइजेशन से सम्‍बन्धित है, वह भी एक अलग नेचर का है तो मैंने सारे सवालों को सम्मिलित करते हुए माननीय सदस्‍य को, जो हमारे पास सूचना थी, उनके अनुसार मैंने आपसे यह निवेदन किया कि डीपीएपी 1974 में होने की वजह से हम जैसलमेर जिले के अन्‍दर किसी प्रकार का आवंटन नहीं कर सकते और जो यहां से चले गये, जो बिना सूचना दिये हुए पाकिस्‍तान चले गये, उनकी जितनी भी जमीन, जो खाता था, उस खाते को सारा सिवाय चक में घोषित कर दिया गया जो काश्‍तकारी अधिनियम 1955 की धारा 63(1)(8) के अन्‍तर्गत निहित है।

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह आपके विभाग से सम्‍बन्धित नहीं है क्‍या? रेवेन्‍यु विभाग से सम्‍बन्धित नहीं है क्‍या? अलग प्रश्‍न क्‍या हुआ? भूमि से सम्‍बन्धित है। जो लोग पाकिस्‍तान चले गये उनमें से नाजायज परिवार कितने आकर उस जमीन पर बैठे हैं और उस जमीन को क्‍या उपयोग में आपने लिया है? यह सारा रेवेन्‍यु विभाग का मामला है, अलग से कौनसा प्रश्‍न है, नम्‍बर एक।(व्‍यवधान) आप मेरा सुन लीजिये, मेरा प्रश्‍न सुन लीजिये। सुनिये आप, मेरा प्रश्‍न सुनिये। दूसरा उपनिवेशन विभाग का है। तीन मेरे प्रश्‍न है, तीनों ही आपके विभाग से सम्‍बन्धित है। रेवेन्‍यु विभाग का है, उपनिवेशन विभाग का है और एक पाक आउस्‍टीज का है जो चलाकर के पाक चले गये, उनके परिवार वापस कितने आकर के उस जमीन पर बसे हैं, यह है और उपनिवेशन विभाग के नाचना क्षेत्र में उपनिवेशन के गांव मेरे चार हैं जो बाप में चले गये, इटू, टोटा, अजासर, आसकलरा, इन क्षेत्रों में क्‍या पानी लगेगा? पानी नहीं लग रहा तो उन गांवों में बाप में देने का क्‍या औचित्‍य है? यह सारे आपके उपनिवेशन विभाग के, रेवेन्‍यु विभाग के मामले हैं। मैन प्रश्‍न मेरा यह है कि पाकिस्‍तान चले गये विस्‍थापितों की जमीन पर कितने परिवार वापस आकर बसे हैं और कितने नाजायज बैठे हैं, यह है मेरा मैन प्रश्‍न और उनको हटाना है।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य को जो प्रश्‍न का पहला खण्‍ड है, उनके अन्‍दर मैंने जैसा प्रश्‍न में निवेदन किया उत्‍तर के अन्‍दर, 145 काश्‍तकार जो थे, जो 7753.18 बीघा जमीन उनके काश्‍त में थी, वह पाकिस्‍तान चले गये और उनकी लिस्‍ट मेरे पास है। आपके पास नहीं पहुंची हो तो मैं आपको उपलब्‍ध करवा सकता हूं।

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): नहीं पहुंची है मेरे पास।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): और पोकरण, जैसलमेर, फतेहगढ़, यह सारे 145 काश्‍तकार हैं, वह पाकिस्‍तान चले गये बिना सूचना दिये हुए और बिना सूचना दिये गये वह माइग्रेट कर गये तो उनको माइग्रेट करने के बाद में वैसे ही उनकी जमीन का अवसान हो जाता है, उनके खाते निरस्‍त हो जाते हैं और उनको सिवाय चक घोषित कर दिया जाता है। अब कितने लोग वापस आये, कितने लोग उन पर काबिज हैं, सिवाय चक होने के बाद के अन्‍दर हो सकता है उन पर अतिक्रमण हो गया या उनके वारिस बनकर...(व्‍यवधान) उनके लिए यदि यह अलग से बता दें कि कितने वारिस यहां रह गये या जिनके ओरिजिनल खाते थे, जैसे मैं रामनारायण डूडी, मेरा खाता था, मैं कहीं बाहर चला गया हूं तो मेरी जमीन सिवाय चक में अवसान हो गई और जमीन सिवाय चक हो गई।

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, बहुत गम्‍भीर मुद्दा है यह। 8000 परिवार पाकिस्‍तान गये, भारत से उठकर 8000 परिवार पाकिस्‍तान गये, बहुत बड़ा गम्‍भीर मुद्दा यह है और करोड़ों रुपयों की जमीन के ऊपर आज की तारीख में कितने नाजायज बैठे हैं, क्‍या उनको रकबा राज में वापस लेने की मंशा रखते हैं, रखते हैं तो कब तक और नहीं रखते हैं तो क्‍यों नहीं?

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं, यदि इस प्रकार से जो सप्‍लीमेंट्री के तौर पर माननीय सदस्‍य ने मुझे जो पूछा है, इन्‍होंने केवल इतना पूछा था, कितने लोग चले गये तो मैंने उनको सूची बता दी कि 145 काश्‍तकार चले गये, जिनकी आन रिकार्ड 7053 बीघा जमीन है।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): माननीय मंत्रीजी, ये 8000 लोग बता रहे हैं कि 8000 लोग बाहर गये हैं, उनके खाते की जमीन हैं, वह सिवाय चक हो गई, उन पर अनधिकृत लोग बैठे हैं, उनको हटाने की क्‍या योजना है आपकी? आप माननीय सदस्‍य का सवाल समझ ही नहीं पा रहे हैं। (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): मैं समझ पा रहा हूं। जितना आप कह रहे हैं, उतनी ही बात समझ पा रहा हूं और उतना ही समझ पा रहा हूं जितना मुझे कहना है और कहना इसलिए है कि रिकार्ड के अन्‍दर 1145 लोग यहां से पाकिस्‍तान चले गये बिना इन्‍फोर्मेशन दिये हुए और जिनके खाते रजिस्‍टर्ड थे और उन रजिस्‍टर्ड खातों को आइडेंटिफाई किया गया तथा उनकी जमीन को काश्‍तकारी अधिनियम, 1955 की धारा 63 के अनुसार जमीन को अवसान करके सिवाय चक घोषित कर दिया गया। आपने जैसा पूछा, इसका जवाब यह है। हमारे रिकार्ड में अभी तक 8000 की बात नहीं आई है।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य। मेरी बात सुनिये, मेरी बात सुनिये।

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपसे मेरा निवेदन है कि जो आन रिकार्ड है पुलिस थानों में और पुलिस थानों से पूरा रिकार्ड मंगवाया जाये मंत्री महोदय और इसको सही ढंग से जांच करके तथ्‍य सामने लाये जाये, नम्‍बर एक और एक मेरा निवेदन है कि मेरा जैसलमेर जिला सीमांत जिला है, यह संवेदनशील जिला है, आज की तारीख में उपनिवेशन विभाग में एक नियम है कि राजस्‍थान के बाहर का व्‍यक्ति जैसलमेर जिले के अन्‍दर जमीन नहीं ले सकता, उसकी वोटरलिस्‍ट नहीं है तो वह जमीन नहीं ले सकता.......

 

Jkj/akt/1140/1e/27032006

 

मूल निवास राजस्‍थान का नहीं है तो जमीन नहीं ले सकते।  लेकिन आज की तारीख में, माननीय मंत्री महोदय, बाहर के कितने हैं, जैसलमेर जिला मेरा सीमांत जिला है, उसमें हजार-हजार, दो-दो बीघा की मांग करके गरीबों से जमीन छीनी जा रही है जबकि उपाध्‍यक्ष महोदय..(व्‍यवधान) सभी का मामला है यह। (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।  माननीय सदस्‍य, आप सुन लें। मेरी बात सुनिये।

श्री सांगसिंह भाटी: इसको वोटर लिस्‍ट के आधार पर, मूल निवास प्रमाण-पत्र के आधार पर लेकर बारली, कतली जैसलमेर जिले में कोई भी एक बीघा जमीन नहीं लेवे, इस बात का आप ध्‍यान रखें, सीमांत जिला है। (व्‍यवधान)

डा.एन.एस. गुर्जर:  हो गया। मंत्रीजी, एक मिनट। उपाध्‍यक्ष महोदय, बात बहुत सिम्‍पल है, इतना सा बता दें, युध्‍द शुरू हुआ, लोग छोड़कर चले गये पाकिस्‍तान, सरकार ने सिवाय चक घोषित कर दी जमीन, वापिस वह आकर के उस पर ट्रेसपासर होकर के बैठ गये युध्‍द खत्‍म होते ही..(व्‍यवधान) दूसरे, जो भी हैं, तो आज की डेट में वह गवर्नमेंट लैण्‍ड हुई, गवर्नमेंट क्‍या कार्यवाही कर रही है, कितने लोग हैं, कितने लोगों को, उनको निकालने की क्‍या व्‍यवस्‍था कर रही है, कैसे ट्रेसपासर को हटाने की व्‍यवस्‍था कर रही है, इतना आप बता दें, खत्‍म हुआ मामला। (व्‍यवधान)

श्री सांगसिंह भाटी: यही मामला है।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, अतिक्रमियों के खिलाफ कार्यवाही हो रही है।  माननीय, हो रही है। (व्‍यवधान)

श्री सांगसिंह भाटी: कहां हो रही है, यह तो कहीं नहीं हो रही है। (व्‍यवधान)

श्री जितेन्‍द्र सिंह(अलवर): उजाड़ने की बात हो रही है, बसाने की बात कोई नहीं कर रहा, रेगुलराइज करने की बात नहीं कर रहा कोई।

श्री उपाध्‍यक्ष: ऐसा है, स्‍पेसिफिक प्रश्‍न नहीं है, प्रश्‍न तो जैसलमेर का पूछा था।

श्री रामनारायण डूडी: यह सिम्‍पल सा प्रश्‍न था, कितने लोग चले गये, कितनी जमीन हुई और यदि किसी प्रकार के वह अवैध रूप से वहां बैठे हैं, उनके वारिसान के अलावा, उनके जो वारिस हैं या दूसरे हैं जिनका खाता मैं जो निवेदन कर रहा हूं...

श्री सांगसिंह भाटी: आप बाद में दे देना, कोई दिक्‍कत नहीं है, बाद में दे देना।

श्री रामनारायण डूडी: मैं इसको मतलब कितना क्‍या है, यह सारी स्थिति मंगा लूंगा और उनके मुताबिक कार्यवाही कर दी जायेगी।

श्री उपाध्‍यक्ष: आप बता देवें, आप सूची दे देवें। (व्‍यवधान)

श्री सांगसिंह भाटी: सही तथ्‍य मंगाकर बाद में सही ढंग से रिकार्ड आप दे देना, कोई दिक्‍कत नहीं है।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, सूची दे देंगे, अपन कर लेंगे। (व्‍यवधान)

श्री जालमसिंह रावलोत(शिव): क्‍योंकि जैसलमेर जिले का मामला है, मैं जैसलमेर का रहने वाला हूं, जैसलमेर से आने वाले माननीय सदस्‍य ने जो विषय उठाया है, बहुत गम्‍भीर है, मेरा इसमें इतना पूछना है कि जो लोग पाकिस्‍तान गये, और वापिस भारत में आये उनको वापिस बसाने में और उनको उस जगह स्‍थापित करने में किन-किन नेताओं का हाथ है और वह किस पार्टी से जुड़े हुए लोग हैं, इसका पता करना भी जरूरी है, इसका उत्‍तर भी आना चाहिए, यह भी ऑन रिकार्ड है।  जिला प्रशासन के यहां और पुलिस थानों में यह भी रिकार्ड है कि कांग्रेस के लोगों ने ही उनको बसाया, कांग्रेस के लोगों ने ही उनको प्रोत्‍साहित किया।

श्री उपाध्‍यक्ष: शिव से आने वाले माननीय सदस्‍य, यह प्रश्‍न अलग है। (व्‍यवधान)श्री प्रहलाद गुंजल, नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन। (व्‍यवधान)

एक माननीय सदस्‍य: बड़ा गम्‍भीर मामला है।

श्री उपाध्‍यक्ष: जैसलमेर का है यह। (व्‍यवधान) कासनियाजी, जैसलमेर से संबंधित है यह। (व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया: जैसलमेर से संबंधित तो है पर इस इश्‍यू का थोड़ा ज्ञान है मुझे।

श्री लालचन्‍द मेघवाल: माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से निवेदन है कि जो लोग 25-30 सालों से लगातार नाजायज काश्‍त कर रहे हैं, क्‍या सरकार उनको रेगुलराइज करने की मंशा रखती है? यदि हां, तो बतायें।

श्री उपाध्‍यक्ष: यह अलग से प्रश्‍न है । (व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया: पहले से ही प्रावधान है। उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने जो प्रश्‍न पूछा है, बहुत सीधा-सीधा है और...

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री प्रहलाद गुंजल।

 

जिला कोटा के पोषाहार वितरण केन्‍द्र

262.श्री प्रहलाद गुंजल(रामगंजमंडी): क्‍या महिला एवं बाल विकास मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

कोटा जिले के कितने केन्‍द्रों पर पोषाहार का वितरण किया जाता है?  तहसीलवार सूची सदन की मेज पर रखें।

1. प्रत्‍येक केन्‍द्र पर प्रतिदिन कितने बालकों एवं गर्भवती महिलाओं को पोषाहार वितरित किया जाता है?  संख्‍या विवरण सदन की मेज पर रखें।

श्री कनकमल कटारा(महिला एवं बाल विकास मंत्री): (1) वर्तमान में कोटा जिले में कुल 992 आंगनबाड़ी केन्‍द्र स्‍वीकृत हैं जिनमें से 848 केन्‍द्रों पर पोषाहार वितरण किया जा रहा है। तहसीलवार विवरण निम्‍नानुसार है:-

रामगंजमंडी 143, पीपल्‍दा 127, दीगोद 124, सांगोद 123, लाडपुरा 110, कोटा शहर 221, कुल 848 ।  तहसीलवार केन्‍द्रों की सूची परिशिष्‍ट अ पर संलग्‍न है।

(2) कोटा जिले में 848 आंगनबाड़ी केन्‍द्रों के माध्‍यम से कुल 75,764 बालकों एवं गर्भवती महिलाओं को पंजीकृत किया गया है, जिन्‍हें प्रतिदिन पूरक पोषाहार वितरण किया जाता है।  केन्‍द्रवार लाभान्वित बालकों एवं गर्भवती महिलाओं का संख्‍या विवरण परिशिष्‍ट अ पर संलग्‍न है।

श्री प्रहलाद गुंजल: माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्रीजी से यह जानना चाहूंगा कि क्‍या पोषाहार वितरण में सर्वोच्‍च न्‍यायालय के दिशा निर्देशों की शत-प्रतिशत पालना हो रही है और आपने कोटा जिले में 848 केन्‍द्रों पर पोषाहार वितरण की जो सूचना दी है, क्‍या यह सच है कि इसमें 40 से 50 प्रतिशत केन्‍द्र बंद पड़े हैं और आपने प्रत्‍येक केन्‍द्र पर जो बालकों की और गर्भवती महिलाओं को पोषाहार वितरण की व्‍यवस्‍था और संख्‍या बताई है, क्‍या यह भी सच है कि यह संख्‍या मिथ्‍या है और 20 परसेंट से अधिक संख्‍या पोषाहार केन्‍द्रों पर पोषाहार प्राप्‍त करने के लिए नहीं आती है, इस बारे में आपने कभी भौतिक सत्‍यापन भी कराया है, मैं माननीय मंत्री महोदय से जानना चाहता हूं।

श्री कनकमल कटारा:  माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने प्रश्‍न किया है कि सर्वोच्‍च न्‍यायालय के नियमों के अनुसार पोषाहार वितरण किया जा रहा है, माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय के निर्देशानुसार पोषाहार निश्चित रूप से वितरण किया जा रहा है और नियमित रूप से बच्‍चे उसका लाभ ले रहे हैं।  आपने जो बताया है कि जो पंजीकृत किये हुए 75,764, उसमें से अभी कुल 992 केन्‍द्रों पर, इसमें 136, यह जो केन्‍द्र हैं और उसमें आपने बताया कि बाकी जो केन्‍द्र हैं वहां पर नहीं हो रहा है, उसमें यह प्रक्रियाधीन है अभी।  आंगनबाड़ी सेंटर ग्‍यारह हजार स्‍वीकृत हुए हैं, इसके अन्‍तर्गत नये आंगनबाड़ी सेंटर भी यहां पर स्‍वीकृत हुए हैं, इनकी कार्यवाही अभी चल रही है और निश्चित रूप से माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय के निर्देशानुसार ही इन केन्‍द्रों पर आंगनबाड़ी सेंटर पर पोषाहार वितरण किया जा रहा है।

श्री प्रहलाद गुंजल: माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपने परिशिष्‍ट अ पर जो सूची संलग्‍न की है उसमें लाडपुरा तहसील में क्रम संख्‍या 21, 22 और 31 पर मेरे गांव के संदर्भ में वर्णन किया है, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री महोदय से जानना चाहता हूं, यह जो संख्‍या बताई है, एकदम मिथ्‍या है, कभी भी किसी केन्‍द्र पर दस-बारह से ज्‍यादा बालक नहीं आते और महीने में पन्‍द्रह दिन केन्‍द्र बंद पड़े रहते हैं, क्‍या आप इस बारे में जांच करवाना चाहते हैं, पहले भी पूर्व में मैंने यह मामला उठाया था, पचास परसेंट से ज्‍यादा केन्‍द्र लगातार बंद रहते हैं, जो चालीस-चालीस, पचास-पचास की संख्‍या जो तीन साल के बच्‍चों की, छह साल के बच्‍चों की और गर्भवती महिलाओं की बताई है, यह हण्‍ड्रेड परसेंट मिथ्‍या है, किसी भी केन्‍द्र पर बताई गई संख्‍या की 25 परसेंट से ज्‍यादा संख्‍या नहीं आती।  इस दिशा में सरकार क्‍यों नहीं जांच करवाना चाहती, तीस परसेंट से ज्‍यादा संख्‍या नहीं आती।

श्री कनकमल कटारा: उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय सदस्‍य की भावना पर अवगत कराना चाहूंगा कि वाकई में अगर ऐसी परिस्थिति है तो आप निश्चित रूप‍से मेरे ध्‍यान में यह लायें, मैं इसकी निश्चित रूप से जांच करवाकर उसमें आवश्‍यक कार्यवाही करूंगा।

श्री हरिमोहन शर्मा: माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, पहले भी...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: पहले एक आदमी। आपको बोलने दें।

श्री हरिमोहन शर्मा: पहले भी, माननीय, इस विषय पर गम्‍भीरता से बहुत चर्चा हुई और जिस जांच की माननीय गुंजल साहब बात कर रहे हैं, सदन की समिति बनाई गई, उस सदन की समिति का क्‍या निर्णय आया, जांच का क्‍या आया, माननीय मंत्री महोदय वह बता दें ताकि दोबारा जांच आपको नहीं करवानी पड़े।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: उपाध्‍यक्ष महोदय, सवाल का स्‍कोप अगर आप देखे, एक लाडपुरा और उससे संबंधित पूछा है, कितने पोषाहार केन्‍द्र हैं, कितने में और यह गांव की जांच की बात कर रहे हैं। मतलब, स्‍कोप में ही नहीं है कोई बात।

श्री उपाध्‍यक्ष: इसी से संबंधित है, बता देंगे। (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा: इसी की जांच की मांग माननीय सदस्‍य कर रहे हैं और जांच सब एक है, प्रकरण सब एक हैं, उस प्रकरण से क्‍यों मुंह मोड़ना चाहती है सरकार।

श्री कनकमल कटारा:  माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इसकी जांच पूरी विभागीय, जैसे अभी करनी थी, उसकी कर ली, इसके बाद में पूरी तरह से उसका वक्‍तव्‍य मैं पहले भी दे चुका हूं, अभी इसमें कोई किसी प्रकार की कोई बात नहीं, उसके अनुसार कार्यवाही पूरी हो रही है और उसमें पोषाहार वितरण किया जा रहा है।

श्री हरिमोहन शर्मा: विभागीय जांच का नहीं है, संसदीय समिति बनी थी विधान सभा की। उसकी जांच का है, उसने क्‍या रिपोर्ट दी....

एक माननीय सदस्‍य: पैसे का आरोप झूठा है। (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन‍शर्मा: वह सदन के पटल पर रखो आप, क्‍या हुआ उसमें, क्‍या किया। 

श्री रामनारायण मीणा: माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्रीजी से, यह प्रश्‍न कि सदन की कमेटी बनी, वह की, उसके बारे में माननीय सदस्‍य जाने और आप सब लोग जानें, मैं एक बात जानना चाहूंगा आपके माध्‍यम से, मंत्रीजी, यह फील्‍ड में जाने का हमारा सभी माननीय सदस्‍यों का काम पड़ता है और हम देखते हैं, जो संख्‍या फील्‍ड के रजिस्‍टर में बताई जाती है, वास्‍तव में वह संख्‍या आपकी वास्‍तव में वहां नहीं होती।  इसलिए कृपा करके, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं सरकार से भी जानना चाहूंगा और यह वास्‍तविकता भी है, क्‍या सेन्‍ट्रल कोई मानीटरिंग का या एट रेण्‍डम चैकिंग का आपने अभी तक कोई सिस्‍टम नहीं बनाया।  कृपा करके इस तरह का सिस्‍टम यदि सरकार बनायेगी तो जो शिकायतें आती हैं, हर जिले में आती हैं हर सेंटर में.....

 

Bhs/akt/3.16.2007/1150/1f/1

 

उन पर आपका कंट्रोल भी होगा और सरकार भी इसके बारे में सतर्क रहेगी।

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, विभाग की कंट्रोलिंग की जहां बात है विभाग बिलकुल इसकी व्‍यवस्‍था कर रहा है डिप्‍टी डाइरेक्‍टर डीडी हमारे जिले का होता है, सीडीपी होता है इसके नीचे एलएस होती है, सुपरवाइजर होती है आंगनबाड़ी उसकी बराबर नियमित रूप से मंथली जंत करती हैं लेकिन जैसा आपने निवेदन किया है कि आंगनबाड़ी सेन्‍टर पर बच्‍चों की संख्‍या कम पायी जाती है वो तो आपको अपने क्षेत्र में निश्चित रूप से ध्‍यान में आता होगा कि जो बच्‍चे सौ की संख्‍या का आकलन किया है इसमें से 18 तो गर्भवती धात्रि माता और दो किशोरी उसमें चालीस जो 3 से 6 वर्ष की आयु के हैं इन बच्‍चों का साप्‍ता‍हिक एक साथ और पन्‍द्रह दिन में पूरा जिसमें चालीस बच्‍चे ही सेन्‍टर पर रहते हैं और नियमित रूप से इनको ही जीरो से तीन वर्ष के बच्‍चों को ही लिया जाता है और बाकी को उनको दिया जाता है इसलिए सौ का पूरा टारगेट आंगनबाड़ी सेन्‍टर पर है इनको दिया जाता है।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): हमारा तो यह कहना है एक मिनट।  हमारा तो यह कहना है कि जितने पोषाहार का आप खर्च बताते हो, आप समझो जितना पोषाहार खर्च आप बताते हो उतना खर्च होता नहीं है रिकार्ड में मेन्‍टेन करना पड़ता है क्‍योंकि संख्‍या ज्‍यादा बतायी जाती है।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इसका यह है कि जो छोटे-मोटे बच जाते हैं उनको अगले महीने दिया जाता है इसमें कहां ऐसा...।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा):  उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से यह जानना चाहता हूं कि ये जो आंगनबाड़ी केन्‍द्र हैं इनमें कोई अब नहीं लगातार जब से ये आंगनबाड़ी केन्‍द्र खुले हैं इनमें बच्‍चों की जो संख्‍या है वो बिलकुल असत्‍य है सही नहीं है अगर सौ बच्‍चे अंकित है तो मौके पर चालीस बच्‍चे मिलेंगे।

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री):  मैंने निवेदन किया कि चालीस बच्‍चे नियमित रूप से आते हैं बाकी को ...(व्‍यवधान)... ।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): दूसरा प्रश्‍न मेरा, कुए में भाँग पड़ी हुई है मंत्री महोदय आपके समय की बात नहीं कर रहा हूं।  माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इस विभाग के अन्‍दर स्‍कीम तो बहुत अच्‍छी है मंत्री महोदय पर इसके अन्‍दर जो गड़बड़ घोटाला हो रहा है उसको आप बंद करने का विचार रखते हैं क्‍या?  ये पचास प्रतिशत सेन्‍टर बिलकुल कागजों में चल रहे हैं और अब से नहीं वर्षों से चल रहे हैं।

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री):  माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य की जानकारी में अगर कोई विषय ऐसा आता है कोई केन्‍द्र ऐसा है तो मुझे बतायें मैं निश्चित रूप से जांच कराके दंडित करूंगा।

श्री उपाध्‍यक्ष: नैक्‍स्‍ट प्रश्‍न श्री कैलाश त्रिवेदी।

विधान सभा क्षेत्र सहाड़ा के चिकित्‍सालयों में जांच सुविधाएं

263. श्री कैलास त्रिवेदी (सहाड़ा): क्‍या चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(।) विधान सभा क्षेत्र सहाड़ा में कौन-कौन से चिकित्‍सालयों में एक्‍सरे एवं अन्‍य कौन-कौन सी जांच मशीनें उपलब्‍ध हैं?

(2) पिछले एक वर्ष में किन-किन चिकित्‍सालयों में कितने कितने  एक्‍सरे हुए एवं किन किन रोगियों की जांच की गई? माहवार संख्‍या विवरण जनवरी, 2000 से आज तक का सदन की मेज पर रखें।

राज्‍य मंत्री, चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य (श्री भवानी जोशी): (1) विधान सभा क्षेत्र सहाड़ा में सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र गंगापुर व रायपुर में एक्‍सरे मशीन ई.सी.जी., माईक्रोस्‍कोप, हिमोग्‍लोबीनमीटर, ई.एस.आर. स्‍टेण्‍ड, न्‍यूबार्स चैम्‍बर आदि उपकरण उपलब्‍ध हैं।  शेष सभी सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों व प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों पर सिर्फ माईक्रोस्‍कोप, हिमोग्‍लोबीनमीटर, ई.एस.आर. स्‍टेण्‍ड, न्‍यूबार्स चैम्‍बर आदि उपकरण उपलब्‍ध हैं सूचना परिशिष्‍ट   पर संलग्‍न है।

(2) पिछले एक वर्ष (सन् 2005) में सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र गंगापुर में 768 रोगियों के 803 एक्‍सरे एवं रायपुर में 32 रोगियों के 32 एक्‍सरे किये गये एवं जिन रोगियों की एक्‍सरे जांच की गयी उनकी सूची परिशिष्‍ट ब पर संलग्‍न है।  जनवरी 2000 से माहवार एक्‍सरे का विवरण परिशिष्‍ट स पर संलग्‍न कर प्रस्‍तुत है।

श्री कैलास त्रिवेदी (सहाड़ा): माननीय मंत्री महोदय, आपने परिशिष्‍ट स पर जो बताया है वर्ष 2000 में गंगापुर में 1282, 2001 में 1846, 2002 में 1813, 2003 में 1056 और 2004 में 1064 गंगापुर में व रायपुर में 252, 2005 में गंगापुर में 803 और रायपुर में 32 । यह एक्‍सरे और ये सारी जो जांचें हैं डाक्‍टरों के द्वारा प्रस्‍तावित की जाती हैं नंबर-1 और डॉक्‍टरों द्वारा जो जांचें प्रस्‍तावित की जाती हैं वर्ष 2000 से दिन ब दिन रोगियों की संख्‍या मेरे क्षेत्र में कम पड़ती जा रही है।  क्‍या आपने उस क्षेत्र में सारे डॉक्‍टरों को हटा कर के और ये उपलब्धि हासिल आपके विभाग ने की है? क्‍या इसके लिए रायपुर में सामुदायिक भवन में पाँच डॉक्‍टरों के पद थे वो पांचों के पांचों रिक्‍त पड़े हैं, क्‍या पांचों रिक्‍त पदों को भरने के लिए पूरी तहसील के लोगों ने आंदोलन किया पाँच दिन तक मार्केट बंद रहे? क्‍या वहां की रायपुर की सरपंच ने पाँच-सात दिन तक भूख हड़ताल की उसके बाद भी आपने कोई वहां डॉक्‍टरों की नियुक्ति नहीं की? गंगापुर में 10 में से 3 डॉक्‍टर हैं वहां भी आपने नियुक्ति नहीं की। इन मशीनों को क्‍या आप जंग लगाने का विचार रखते हैं जिन मशीनों को हमने दानदाताओं से लिया उनको आप वापस लौटाने का विचार रखते हैं ...(व्‍यवधान)... क्‍या आप इतना होने के बावजूद आपने सारे डॉक्‍टरों को हटा करके जो उपलब्धि हासिल की है और जो विभाग ने अपनी उपलब्धियां किताब में लिखी हैं उसमें रायपुर सामुदायिक भवन का जो चिकित्‍सा अधिकारी की जगह कार्यकारी चिकित्‍सा अधिकारी एक प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र के अधिकारी को उसमें नाम छाप कर और मेरे यहां भेजा है क्‍या यह आपकी सरकार की उपलब्धि है? इन सब पर आप बताइये।

श्री भवानी जोशी (राज्‍य मंत्री, चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, सवा दो वर्षों में राज्‍य सरकार के आने के बाद में जैसा माननीय सदस्‍य ने बताया कि रोगियों की संख्‍या कम हूई है तो अच्‍छी बात है कि रोगियों की संख्‍या कम ही होनी चाहिए ...(व्‍यवधान)...

श्री कैलास त्रिवेदी (सहाड़ा): डाक्‍टर हट गये तो रोगी आने ही नहीं है जांच कौन प्रस्‍तावित करेगा ...(व्‍यवधान)... धर्मशाला हो गयी कौन आएगा?

श्री भवानी जोशी (राज्‍य मंत्री, चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य): दूसरा 369 चिकित्‍सकों का आरपीएससी से चयन हो चुका है और सूची प्राप्‍त होते ही ग्रामीण क्षेत्रों में रिक्‍त पदों को भरा जा सकेगा। उन पीएचसीज पर जहां एकमात्र चिकित्‍सक है एवं पद खाली है उन पर भरने की प्राथमिकता दी जाएगी।  माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से यह निवेदन करना चाहता हूं कि राज्‍य में रेडियोग्राफर ऑपरेटर के अभाव में जो मशीनें संचालित नहीं हो पा रही हैं उन पर 30 जून, 2006 तक प्रशिक्षित ऑपरेटर्स की व्‍यवस्‍था कर दी जाएगी।

श्री कैलास त्रिवेदी (सहाड़ा): आपके कैबिनेट मंत्री महोदय ने पिछले साल में चार बार मैंने क्‍वेश्‍चन लगाया तो चार बार सदन में आश्‍वस्‍त किया कि डॉक्‍टर लगायेंगे ढाई साल तो हो गये आपने क्‍या ढाई साल और नहीं लगाने की कसम खा रखी है? यह बतायें आप। ...(व्‍यवधान)... आपकी आरपीएससी होगी और नहीं होगी +++  थे उनको आपने क्‍यों हटाया? लगे हुए थे उनको क्‍यों हटाया? मुझे तो नये लगाने की जरूरत ही नहीं थी आपने लगे हुए थे उनको क्‍यों हटाया?  इसके बारे में जवाब दें और जो हटाये उनको वापस लगाने का विचार रखते हो कि नहीं? या उस क्षेत्र के लोगों को आप मौत के मुंह में सुलाने का विचार रखते हो? उस क्षेत्र के लोगों ने आंदोलन किया महिला सरपंच भूख हड़ताल पर बैठी लेकिन आपने कोई सुनवाई नहीं की।

श्री शंकर सिंह राजपुरोहित (आहोर):  ...(व्‍यवधान)... रोगी हमारे यहां कम हो गये आपने पहले ही बोला है।

श्री कैलास त्रिवेदी (सहाड़ा): आपके मंत्री जी दे देंगे न।

श्री भवानी जोशी (राज्‍य मंत्री, चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने जैसा बताया ...।

श्री कैलास त्रिवेदी (सहाड़ा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरे क्षेत्र के लोग मौत के मुंह में जा रहे हैं और सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र भीलवाड़ा रैफर होते हैं रास्‍ते में मौत के मुंह में जा रहे हैं और ये मंत्री जो हैं कसम खाकर बैठे हुए हैं और सरकार कसम खाकर बैठी है कि डॉक्‍टर नहीं लगाना अगर नहीं लगाना है तो आप खुला कहो कि नहीं लगायेंगे मुझे कोई तकलीफ नहीं है।  आप उन होस्पिटलों को सामुदायिक नाम हटाकरके और उनको धर्मशाला कर दें जो दानदाताओं ने अस्‍पताल बनाया है मेरे यहां ...(व्‍यवधान)...

श्री भवानी जोशी (राज्‍य मंत्री, चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य): हां मैं बता रहा हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री प्रमोद जैन भाया।

श्री कैलास त्रिवेदी (सहाड़ा): मंत्री जी जवाब दें।  मंत्री महोदय जवाब दें।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री प्रमोद जैन भाया।  अब ये जवाब आ गया।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): ...(व्‍यवधान)... लोग भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं और आपने नैक्‍स्‍ट प्रश्‍न पुकार लिया।

श्री कैलास त्रिवेदी (सहाड़ा): मंत्री महोदय आप जवाब दें।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): उपाध्‍यक्ष महोदय, इनसे जवाब दिलवाओ।

श्री उपाध्‍यक्ष: आ गया जवाब।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): चिकित्‍सा मंत्री जी बैठे हुए हैं आप इनसे जवाब दिलवा दीजिये क्‍योंकि इनके हाथ में तो कुछ लगाना है नहीं।

श्री उपाध्‍यक्ष: ...(व्‍यवधान)... जवाब दे दिया मंत्री महोदय ने जल्‍दी पोस्टिंग हो रही है। ...(व्‍यवधान)...

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): उपाध्‍यक्ष महोदय, राज्‍य मंत्री के हाथ में कुछ नहीं है।  ये माननीय मंत्री जी बैठे हैं इनसे जवाब दिलवाइये।

श्री कैलास त्रिवेदी (सहाड़ा): ...(व्‍यवधान)... सदन में और सदन के बाहर और नियुक्ति बताते हैं और नियुक्ति में कोई डॉक्‍टर नहीं रहता है वहां।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): ये राज्‍य मंत्री के हाथ में कुछ है नहीं इसलिए इनसे जवाब दिलवाने से क्‍या फायदा है?

श्री कैलास त्रिवेदी (सहाड़ा): राज्‍य मंत्री के हाथ में नहीं है कैबिनेट मंत्री जी के हाथ में है और केबिनेट मंत्री जी ...(व्‍यवधान)...

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जवाब तो दिलवाइये साहब लोग मर रहे हैं भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं और आप जवाब नहीं दिलवा रहे हैं ...(व्‍यवधान)...

श्री कैलास त्रिवेदी (सहाड़ा): आप ये एक्‍सरे मशीन का जवाब नहीं दे रहे हैं वो मशीनों पर जंग लग रहा है।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): ...(व्‍यवधान)... राज्‍य मंत्री से केवल प्रश्‍नों का जवाब दिलवा रहे हैं इसके अलावा इनके पास कोई अधिकार नहीं है।

श्री कैलास त्रिवेदी (सहाड़ा): ...(व्‍यवधान)... यह सरकारी की उपल‍ब्धि है।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): ...(व्‍यवधान)... राज्‍य मंत्री जी आपको पॉवर ही नहीं है। ...(व्‍यवधान)...

श्री भवानी जोशी (राज्‍य मंत्री, चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य): मैं जवाब दे रहा हूं ...(व्‍यवधान)...

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): चिकित्‍सा मंत्री जी को कहिये जवाब दें।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): बड़े मंत्री जी से जवाब दिलवा दें बगैर पॉवर के हो आप तो।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): आप तो बगैर पॉवर के हो मंत्री जी आप क्‍या जवाब दे रहे हैं, बड़े मंत्री जी से दिलवाते जिनको पॉवर है ।

श्री भवानी जोशी (राज्‍य मंत्री, चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य): क्‍यों मैं दूंगा न ।  वो डॉक्‍टर ...(व्‍यवधान)...

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): दिलवा दो।  जवाब दिलवा दो।

श्री कैलास त्रिवेदी (सहाड़ा):  आपको डॉक्‍टर लगाने का अधिकार ही नहीं है।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): चिकित्‍सा मंत्री जी जवाब दें ...(व्‍यवधान)...

श्री कैलास त्रिवेदी (सहाड़ा): चिकित्‍सा मंत्री लगायेंगे डॉक्‍टर आपको कोई अधिकार ही नहीं है।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): ...(व्‍यवधान)... इससे कोई फायदा ही नहीं है।

श्री उपाध्‍यक्ष: आप काहे के लिए? सब हो चुका है।  माननीय सदस्‍य।

श्री कैलास त्रिवेदी (सहाड़ा): उन्‍होंने तो आश्‍वासन दे दिया मैं थक गया अब आप काहे को परेशान हो रहे हो? आपके पॉवर में ही नहीं है।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप क्‍या कहना चाहते हैं?

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): उपाध्‍यक्ष महोदय, राज्‍य मंत्री तो खुद ही दुःखी हैं उनके हाथ में कुछ भी नहीं है केवल ...(व्‍यवधान)...

श्री कैलास त्रिवेदी (सहाड़ा): ...(व्‍यवधान)... कैबिनेट मंत्री को चाहिए ...(व्‍यवधान)... वो डॉक्‍टर ...(व्‍यवधान)...

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): ये क्‍या जवाब देंगे इनके पास कोई पॉवर नहीं है ये घोषणा भी कर देंगे तो चिकित्‍सा मंत्री जी नहीं करेंगे। ...(व्‍यवधान)...

 

kas\akt\27-3-06\1200\1g

 

श्री भवानी जोशी (राज्‍य मंत्री, चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं जो भी कहूंगा वह कर के दिखाऊंगा । (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: प्रश्‍नकाल समाप्‍त । माननीय सदस्‍य प्रश्‍नकाल समाप्‍त हुआ ।

 

स्‍थगन प्रस्‍तावों पर व्‍यवस्‍था

मुझे माननीय सदस्‍यों को सूचित करना है कि निम्‍न स्‍थगन प्रस्‍तावों की सूचना प्राप्‍त हुई है :-

श्री मोहम्‍मद माहिर आजाद एवं पाँच अन्‍य सदस्‍यों की और से भरतपुर जिले की सिंचाई व्‍यवस्‍था के साथ खिलवाड से किसानों में व्‍याप्‍त आक्रोष के संबंध में ।

स्‍थगन प्रस्‍ताव पर अनुमति देने में असमर्थ हूं फिर भी माननीय सदस्‍य श्री माहिर आजाद को दो मिनट में अपनी बात रखने की अनुमति होगी ।

2. श्री हरिमोहन शर्मा एवं छ: अन्‍य सदस्‍यों की ओर से जहाजपुर की मूलभूत सुविधाओं को लेकर किये जा रहे प्रदर्शन को विफल करने के संबंध में।

गृह विभाग की मांग पर आज चर्चा हो रही है, माननीय सदस्‍य को अपनी बात रखने का अवसर उपलब्‍ध है, अंत: अनुमति देने में असमर्थ हूं ।

प्रक्रिया के नियम 295 के अंतर्गत प्राप्‍त सूचनाएं

श्री शिवजीराम मीणा, सदस्‍य की और से शक्‍करगढ-बिजौलियां सड़क के अधूरे कार्य को पूर्ण करने के संबंध में ।

श्री जोगाराम पटेल, सदस्‍य की और से विधान सभा क्षेत्र लूणी के विद्यालयों के भवन  जीर्ण शीर्ण होने के संबंध में ।

श्री बद्रीलाल जाट, सदस्‍य की और से अफीम में हुये भारी नुकसान में किसानों की मदद करने के संबंध में ।

श्री लक्ष्‍मीनारायण बैरवा, सदस्‍य की और से तहसील फागी में बिजली का 132 केवी ग्रिड स्‍टेशन स्‍थापित करने के संबंध में ।

श्री मोहन मेघवाली, सदस्‍य की और से जौधपुर के चिकित्‍सालयों में सुविधाओं एवं उपकरणों का अभाव होने के संबंध में ।

श्री बाबूसिंह राठौड, सदस्‍य की और से तहसील शेरगढ की ग्राम पंचायत बेलवा व चामू में समाज कल्‍याण छात्रावास के भवन हेतु बजट स्‍वीकृत करने के संबंध में ।

श्री अर्जुन लाल जीनगर, सदस्‍य की और से विधान सभा क्षेत्र गंगरार के धार्मिक स्‍थलों  को डामीरकृत सडकों से जोडने के संबंध में ।

श्री राजकुमारी सदस्‍य की और से उप नगर नियोजक का मुख्‍यालय जयपुर की बजाय सीकर में करने के संबंध में ।

श्री हरज्ञान सिंह, सदस्‍य की और से  महवा के सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र के भवन की स्थिति जीर्ण-शीर्ण होने के संबंध में ।

श्री प्रभुलाल वर्मा, सदस्‍य की और से तहसील पीपल्‍दा के कस्‍बा इटावा की सडकों की स्थिति खराब होने के संबंध में ।

श्री हरीश कुमावत, सदस्‍य की और से ग्राम जवानपुरा पंचायत श्‍यामगढ तहसील नावां के आग दुर्घटना पीडित लोगों को सहायता प्रदान करने के संबंध में ।

श्री रणधीर सिंह भीण्‍डर, सदस्‍य की और से पाठ्य पुस्‍तकों में हरावल नाम के पाठ को पुन: शामिल करने के संबंध में ।

माननीय सदस्‍यों को उनके द्वारा दी गई सूचना को पढने की अनुमति होगी ।

श्री मोहम्‍मद माहिर आजाद ।

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): उपाध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान में जिन जिलों में ओलावृष्टि हुई थी माननीय मंत्री महोदय वक्‍तव्‍य देने वाले थे और बीच में सदन तीन चार दिन चला नहीं मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं कि जिन किसानों का नुकसान हुआ है ओलावृष्टि से उनके संबंध में मंत्री महोदय क्‍या कहना चाहते हैं । इस संबंध में कुछ व्‍यवस्‍था दे रहे हैं आप ?

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य वैसे तो अकाल पर चर्चा के लिये ....

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (केसरीसिंहपुर): उपाध्‍यक्ष महोदय, आई एम ओन ए पाइंट ऑफ इन्‍फोरमेशन ।

एक माननीय सदस्‍य : उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र में भी ओलावृष्टि हुई है ।

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (केसरीसिंहपुर): उपाध्‍यक्ष महोदय, परसों रात को गंगानगर जिले में तेज आंधी तुफान और वर्षा के कारण से मेरे विधान सभा क्षेत्र के गांव ततारसा और करणपुर में ओलावृष्टि से सरसों की कटी हुई फसल और गेहूँ की खडी फसल  को भारी नुकसान हुआ है । उपाध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मेरा सरकार से अनुरोध है कि तत्‍काल इसकी गिरदावरी करवा कर किसानों को उचित मुआवजा दिया जाये, धन्‍यवाद ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं एक निवेदन करना चाह रहा था आज समाचार पत्रों में समाचार प्रकाशित हुआ है इस सदन के तीन बार सदस्‍य रहे, संसद के सदस्‍य रहे, इस प्रदेश के नामी किसान नेता श्री श्‍योपतसिंह जी का देहांत हो गया है । मैं निवेदन करुंगा चूंकि सदन चल रहा है तो उन्‍हें श्रद्धांजलि देने का काम किया जाये ।

मोहम्‍मद माहिर आजाद : दाह संस्‍कार से पहले ही दे दोगे क्‍या । मुख्‍य मंत्री जी और विधान सभा अध्‍यक्ष वहां गई हैं । आज एक बजे तो उनका दाह संस्कार है उससे पहले ही दे दोगे क्‍या आप । वाह भाई संसदीय कार्य मंत्री जी।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): उपाध्‍यक्ष महोदय, हमारा जो स्‍थगन प्रस्‍ताव था ओलावृष्टि से नुकसान के संबंध । आसन ने निर्देश दिये थे माननीय मंत्री महोदय को कि वह इस संबंध में वक्‍तव्‍य दें । मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि मंत्री जी से वक्‍तव्‍य दिलाया जाये ।

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): उपाध्‍यक्ष महोदय, ओलावृष्टि के संबंध में आप कुछ कह दें सरकार की तरफ से क्‍या मदद हो रही है । क्‍या करने जा रहे हैं । उपाध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी कह रहे हैं ।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यों को सूचित करना है कि श्री श्‍योपत सिंह जी के निधन की अभी तक अधिकृत सूचना सदन को नहीं मिली है और दाह संस्कार भी आज हो रहा है इसलिए इसको कल लिया जा सकेगा ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): उपाध्‍यक्ष महोदय, किसानों को जो ओलावृष्टि से नुकसान हुआ था उस संबंध में हमारे स्‍थगन प्रस्‍ताव पर आसन ने मंत्री महोदय को निर्देश दिया था वक्‍तव्‍य देने का । मैं आपसे अनुरोध करना चाहता हूं कि मंत्री महोदय से वक्‍तव्‍य दिलाया जाये ।

श्री उपाध्‍यक्ष: आप सुनो तो सही ।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): उपाध्‍यक्ष महोदय, पहले मेरी एक बात सुने । श्‍योपतसिंह जी इतने वरिष्‍ठ आदमी का देहावसान हुआ, मुख्‍य मंत्री जी और स्‍पीकर वहां जा रही है । इस सदन को सूचित करने के लिये कौन व्‍यक्ति दोषी है जिसने सूचना नहीं दी आपको और आप उसके खिलाफ क्‍या कार्यवाही कर रहे हैं । मुख्‍य मंत्री जी वहां पहुंच गईं और आपको सूचित तक नहीं किया गया इसके लिये कौन दोषी है ।

श्री उपाध्‍यक्ष: कलेक्‍टर से लिखित में सूचना आती है ।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): तो कलेक्‍टर के खिलाफ कार्यवाही कीजिए कि उन्‍होंने विधान सभा को सूचित क्‍यों नहीं किया ।

श्री उपाध्‍यक्ष: पुरानी परम्‍परा रही हुई है ।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, ओलावृष्टि पर सदन में पहले चिंता व्‍यक्‍त की गई थी, आज भी है । आप कोई समय तय कर दें उसे समय मैं ओलावृष्टि पर अपना वक्‍तव्‍य दे दूंगा ।

श्री उपाध्‍यक्ष: मुझे माननीय सदस्‍यों को सूचित करना है कि अकाल के संबंध में एक दिन पूरी विस्‍तृत चर्चा होगी उसमें यह सारे विषय लिये जा सकते हैं । अकाल और आपदा दोनो आ जायेंगे उसमें ।

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): उपाध्‍यक्ष महोदय, यह ओलावृष्टि का मामला है और किसान के नुकसान का मामला है, बहुत गंभीर मामला है । (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: अलग से तो कोई होगा नहीं ।

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): मंत्री जी वक्‍तव्‍य देने के लिये तैयार है ।

श्री उपाध्‍यक्ष: अलग से देने में उसकी कोई उपयोगिता नहीं होगी ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): उपाध्‍यक्ष महोदय, यह जानकारी मिलनी चाहिये सरकार कहां कहां पर किसानों को क्‍या दे रही है ।

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): उपाध्‍यक्ष महोदय, क्‍या सरकार की तरफ से कोई राहत पहुंचाई जा रही है हम यह जानना चाहते हैं ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): और जब मंत्री जी तैयार है तो मैं आपसे निवेदन करता हूं कि आप टाइम तय कर दीजिए चार बजे का ।

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): आप वक्‍तव्‍य दिलवाइए । (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: कोई समय तय कर दें (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): उपाध्‍यक्ष महोदय, जब मंत्री जी तैयार हैं तो क्‍या दिक्‍कत है ।

श्री उपाध्‍यक्ष: मंत्री जी यह कह रहे हैं कि मैं तैयार हूं पर कोई समय तय कर दीजिए।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): तो आज का चार बजे का कर दो, आज चार बजे दिलवा दो आप ।

श्री उपाध्‍यक्ष: अकाल पर चर्चा के लिये दिन तय है ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अकाल पर चर्चा सात दिन बाद है । 

श्री उपाध्‍यक्ष: इस पर काफी सदस्‍य बोलने वाले हैं ..(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): उपाध्‍यक्ष महोदय, इसका अकाल से ताल्‍लुक नहीं है किसान बरबाद हो गया । उपाध्‍यक्ष महोदय, आप टाइम तय करो । आज चार बजे करवा दो आप ।

श्री उपाध्‍यक्ष: अभी तय कर देते हैं ।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): आप कल का समय तय कर दो ।

श्री उपाध्‍यक्ष: आप बात सुनिए । कार्य सलाहकार समिति द्वारा तय हो गया है कि अकाल और प्राकृतिक आपदा के संबंध में पूरी चर्चा की जायेगी इस सदन में और यह बेहतर होगा ..(व्‍यवधान)

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): अकाल का ओलावृष्टि से क्‍या संबंध है साहब।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): उपाध्‍यक्ष महोदय, आसन ने निर्देश दिये थे मंत्री जी  को कि वह सदन में वक्‍तव्‍य देंगे । हम आपसे आसन के निर्देशों की पालना का अनुरोध कर रहे हैं ।

श्री उपाध्‍यक्ष: उस पर चर्चा होगी और उस चर्चा में सब सदस्‍यों को कहने का मौका मिलेगा ।

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): ओलावृष्टि पर वक्‍तव्‍य देने के लिये मंत्री जी तैयार हैं ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): उपाध्‍यक्ष महोदय, आप वक्‍तव्‍य दिलवाओ ।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मान्‍यवर, ओलावृष्टि से किसान बरबाद हो गये 10 जिलो में और मंत्री जी गुमसुम बैठे हैं । आप जब पहले एम एल ए नहीं थे तब कैसे दहाडते थे, बहुत आंदोलन करते थे किसानों के लिये अब आपको क्‍या होगया, सांप सूंघ गया क्‍या आपको ।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): जब पहले मैं दहाडता था तब आप नहीं थे अब आप आ गये हो इसलिए मुझे डर लगता है ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): उपाध्‍यक्ष महोदय, आप तो टाइम तय करो आज जो भी आप टाइम देना चाहे ।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, अगर अकाल के अलावा इसमें व्‍यवस्‍था देना चाहते हैं आज या कल में तो मैं तैयार हूं ओलावृष्टि पर स्‍टेटमेंट देने के लिये आप मेरे को समय दे दें ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): उपाध्‍यक्ष महोदय, आज चार बजे करवा दें । किसान से जरूरी है क्‍या होम, आधे घंटे में क्‍या जा रहा है, आप 12 बजे तक बैठना ।   

 

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श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण, मेरा आपसे निवेदन यह है कि इसको अकाल से अलग चर्चा के लिए जितना आवश्‍यक समझते हैं, अकाल और प्राकृतिक आपदा पर पूरी चर्चा होगी और पूरा दिन यहां हाउस के अंदर सब सदस्‍यों को बोलने का मौका मिलेगा, इसके बावजूद अगर यह चाहते हैं तो  मंत्री महोदय कल स्‍टेटमेंट दे देंगे। (व्‍यवधान) आज गृह मंत्रालय की मांग है इसलिए थोड़ा समय इसके अंदर लगेगा।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, रायपुर से आने वाले माननीय सदस्‍य ने आसन को इंगित करके यार शब्‍द कहा है, अनपार्लियामेंट्री है इसलिए एक्‍सपंज किया जाए।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आपके निरन्‍तर सम्‍पर्क में रहने बाद भी यह स्थिति है ?(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: मोहम्‍मद माहिर आजाद।

स्‍थगन प्रस्‍ताव आदि पर चर्चा

भरतपुर जिले में सिंचाई व्‍यवस्‍था विषयक

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान को जलवायु की दृष्टि से तीन भागों में बांटा गया है एक शुष्‍क जिसमें पश्चिमी राजस्‍थान आता है, दूसरा आध्र जिसमें मैवाड़ और हाडौती क्षेत्र आता है, तीसरा अर्धशुष्‍क जिसमें भरतपुरर सम्‍भाँग, भरतपुर, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर और दौसा का कुछ हिस्‍सा आता है।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से सदन को, सिंचाई मंत्री जी तो नहीं है लेकिन सिंचाई राज्‍य मंत्री  जी यहां विराजमान है, मैं निवेदन करना चाहता हूं कि एक तरफ, बाकी के राजस्‍थान में हजारों, करोड़ों रूपये खर्च करके इंदिरा गांधी नहर, भांखड़ा, माही, चम्‍बल और गंगकैनाल का निर्माण कर वहां के किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्‍ध कराई गई। दूसरी तरफ पूर्वी राजस्‍थान भरतपुर, अलवर, धौलपुर, करौली, सवाईमाधोपुर, दौसा इसमें बाकी के राजस्‍थान   के मुकाबले में केवल पार्वती डेम, धौलपुर, जगरका बाँध हिण्‍डौन, जमवारामगढ़ जयपुर, जयसमंद अलवर, बंध बारेठभ भरतपुर जो भी रियासत काल के बने हुए हैं, आजादी के बाद राजस्‍थान में इस भरतपुर सम्‍भाग के किसानों को प्‍यासी धरती माता की प्‍यास बुझाने के लिए सिंचाई के साधनों का कोई विकास नहीं किया गया बल्कि गुडगांवा केनाल से भरतपुर को जो पानी मिलना चाहिये था किसी भी तरह से हासिल नहीं किया गया। 

इतना ही नहीं यह जो कुछ, चंद पानी के स्‍त्रोत थे इनका उपयोग भी पेयजल के लिए किया जाता रहा है जबकि पेयजल के लिए  अलग से कोई व्‍यवस्‍था की जानी चाहिये थी। सम्‍वत् 1956 और सम्‍वत् 1962 में भी जब भंयकर  अकाल पडा तब भी हमारा  यह क्षेत्र इतना दुःख नहीं झेल पाया जितना आज,जब गम्‍भीर, बाणगंगा, रूपरैल जो केवल मात्र  नदियां, जिससे भरतपुर का पानी मिलता था आज स्थिति यह हो गई कि जिसको संसार का यूनिकइरिगेशन सिस्‍टम कहा जाता था आज गम्‍भीर पर पांचना में बाँध बनाकर पानी रोक दिया गया। बाणगंगा पर महावीर जी में एनिकट  बनाकर पानी रोका जा रहा है और रूपरेल पर तरूण भारत संघ ने अलवर में लरकाबांस पिछले वर्ष, पिछले वर्षों में बाँध बनाकर हमारे सिकरी सिस्‍टम और ककड़ा बाँध जिसमें डीग, नगर और नदबई तहसील का पानी मिलता था इसको पूरी तरह प्रभावित कर दिया है।

उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं कि भरतपुर को जो पानी मिलता था रूपरेल का पानी रोका गया। पांचना से गम्‍भीर का पानी रोका गया और अब जो बची खुची बाणगंगा है उस पर महुवा के पाली और हुडियाना में और  उधर महावीर जी में एनीकट्स की स्‍वीकृति दी जा रही है अगर यह पानी भी रोक दिया गया तो  न हमारी हरेला कैनाल में  पानी मिलेगा न घना पक्षी विहार जो अन्‍तरराष्‍ट्रीय स्‍तर का ख्‍यातिप्राप्‍त एक अन्‍तरराष्‍ट्रीय पर्यटन स्‍थल है उसको पानी मिलेगा। (व्‍यवधान) वह आप लाओंगे तब तक आपका कोई नामो निशान  ही नहीं मिलेगा। एक मिनिट, गम्‍भीरता से बात को सुन ले। 

उपाध्‍यक्ष महोदय, निवेदन केवल इतना है कि भरतपुर जो काश्‍ताकरों का प्रधान जिला है, सरसों और दूसरी खेतियों में राज्‍य में राजस्‍व का बड़ा हिस्‍सा देता है केवलादेव घना पक्षी विहार वहां पर है उसका अगर पानी रोका गया और भरतपुर को रेगिस्‍तान बनाने की जो साजिश की जा रही है इसको भरतपुर जिले का किसान किसी भी सूरत में बरदाश्‍त नहीं करेगा1 मैं आपके माध्‍यम से सिंचाई राज्‍य मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं, यहां चिकि'त्‍सा मंत्री जी बैठे हैं जो कुम्‍हेर से आते हैं, यहां पर भरतपुर के डीग के माननीय सदस्‍य भी बैठे हैं। पूरे जिले के किसानों में इस चीज को लेकर भंयकर आक्रोश है, अगर समय रहते भरतपुर जैसे शांतिप्रिय जिले के किसानों की इस समस्‍या यपर ध्‍यान नहीं दिया गया, उनकी रोजी रोटी की समस्‍या खड़ी हो जाएगी। भरतपुर रेगिस्‍तान में तब्‍दील होने की स्थिति में आ गया तो भरतपुर के किसानों को मजबूरन कानून और व्‍यवस्‍था की स्थिति को हाथ में लेना पड़ेगा और जीवन मरण के इस प्रश्‍न के ऊपर कुछ न कुछ आंदोलित रूख अख्तियार करना पड़ेगा इसलिए माननीय उपाध्‍यक्षम महोदय, आपके माध्‍यम से  सिंचाई राज्‍य मंत्री जी इस सदन के जरिये भरतपुर जिले के किसानों को यह आश्‍वस्‍त करें कि भरतपुर को किसी भी सूरत में रेगिस्‍तान नहीं बनने दिया जाएगा।। उसकी सिंचाई की व्‍यवस्‍था को यथावत,  उस जिले के पानी को नहीं रोका जाएगा।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री शिवजीराम मीणा। 

श्री विजय बंसल (भरतपुर): मंत्री जी जवाब तो दें। (व्‍यवधान)

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): न तो सिंचाई मंत्री जी है न राज्‍य मंत्री...(व्‍यवधान)

श्रीमती कृष्‍णेन्‍द्र कौर (नदबई):  यह बहुत गम्‍भीर मामला है।

श्री विजय बंसल (भरतपुर): भरतपुर में उद्योग बंद पड़े हुए हैं(व्‍यवधान) उसका भी पानी रोक दिया जाएगा तो निश्चित रूप से बोर्डर इलाका होने के नाम पर....

श्रीमती कृष्‍णेन्‍द्र कौर (नदबई): पांचना डेम से भी पानी नहीं मिल पाता(व्‍यवधान) 

श्री विजय बंसल (भरतपुर): उपाध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से जानना चाहूंगा कि जो अभी एनीकट बन रहे हैं, उनकी स्‍वीकृति है क्‍या उनको  रूकवाकर रेगिस्‍तान से बचायेंगे ? (व्‍यवधान) 

श्रीमती कृष्‍णेन्‍द्र कौर (नदबई): काम भी चालू हो गया, उस पर रोक लगाई जाए, इसकी चर्चा....(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो।

श्री विजय बंसल (भरतपुर):***

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): ***

श्री विजय बंसल (भरतपुर): ***

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): ***

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौड़ (राज्‍य मंत्री, सिंचाई): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, भरतपुर से आने वाले माननीय सदस्‍य ने अपनी भावना से सदन को अवगत कराया, निश्चित तौर पर इनकी भावना पर  सहानुभूति पूर्वक विचार करेंगे।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ***

श्री विजय बंसल (भरतपुर): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, अब आ गया। आपकी बात....(व्‍यवधान)

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): ***

श्री विजय बंसल (भरतपुर): ***

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): *** 

श्री विजय बंसल (भरतपुर): ***

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, एक वर्ष हो गया भारत सरकार को 109 करोड़ रूपये की योजना राजस्‍थान सरकार द्वारा भेजी गई है1 कैवलादेवी से चम्‍ब्‍ल से पानी देने के लिए भारत सरकार इस पर अभी तक गम्‍भीर नहीं है और इसके कारण यह समस्‍या बन रही है इसलिए मैं माननीय सदस्‍यों को निवेदन करना चाहता हूं और प्रतिपक्ष के नेता को भी  कि भारत सरकार को इसके बारे में....

Ddm/usc/270306/1220/1j

 

आप कन्विंस करें ताकि 109 करोड़ की योजना जो केवलादेव की बनाकर राजस्‍थान सरकार ने एक वर्ष पूर्व भेजी थी उसको स्‍वीकार करावें।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): नहीं, एक मिनट (व्‍यवधान) अब तो आपकी आर्थिक स्थिति, राज्‍य की तो बहुत बढि़या है। भारत सरकार पर डिपेण्‍ड क्‍यों कर रहे हैं। आप अपना काम शुरू कीजिए। (व्‍यवधान) आप हर चीज के लिये भारत सरकार को कहते हैं।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): भारत सरकार इसमें अहसान नहीं कर रही है। भारत सरकार को राजस्‍थान सरकार की तरफ से वन विभाग की तरफ से जो योजना भेजी गयी, ऊँट के मुंह में जीरे के समान, मात्र 16  प्रतिश्‍ंत की स्‍वीकृति मात्र जारी की है, मात्र 16 प्रतिशत।

श्री उपाध्‍यक्ष: दोनों सरकारों के सहयोग से अच्‍छा हो सकता है।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, घना एक नेशनल पार्क है और वर्ल्‍ड में फेमस चिडि़यों का एक स्‍थान है और मुझे बड़ा ताज्‍जुब हो रहा है कि आप कह रहे हैं कि केन्‍द्र सरकार के ऊपर क्‍यों देखें। नेशनल पार्क में तो केन्‍द्र सरकार के बिना कुछ हो नहीं सकता है। इसलिये केन्‍द्र सरकार को..(व्‍यवधान)..मेरी एक मिनट सुन लें। उसमें पानी लगातार रहे, इसकी व्‍यवस्‍था के लिये केन्‍द्र सरकार को कुछ न कुछ सोचना पड़ेगा और राजस्‍थान सरकार ने जो भी प्रस्‍ताव वहां भेजे हैं, एक बार आप मेहरबानी करके बात करके उसको निश्चित रूप से आप करवाएंगे तो भरतपुर का घना बच सकेगा।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): माननीय चिकित्‍सा मंत्रीजी, (व्‍यवधान) एक मिनट, नेता महोदय, मैं आपसे निवेदन करना चाहूंगा बड़े आदर के साथ, मैं आपको कंट्राडिक्‍ट करने के लिये नहीं और ह्यूमिलिएट करने के लिये नहीं कह रहा है, अगर आप इस साल के प्‍लान में इसको डलवा देते तो बेहतर रहता। आप कब तक इंतजार करेंगे भारत सरकार से। एक तो भागेश्‍वरी की कृपा से, आज राज्‍य सरकार की आर्थिक स्थिति, केन्‍द्र सरकार के सहयोग से, 12वें वित्‍त आयोग और केन्‍द्र सरकार के विभिन्‍न मंत्रालयों के से जो अनुदान प्राप्‍त हो रहा है, एक तरफ तो आप डींग हांकते हैं कि हमारी स्थिति बहुत अच्‍छी है और एक तरफ हर चीज के लिये  आपने भारत सरकार, हमने फलां योजना भारत सरकार को भेज दी, सरिस्‍का की योजना भारत सरकार को भेज दी, केवलादेव की योजना भारत सरकार को भेज दी, रणथम्‍भौर की योजना हमने भारत सरकार को भेज दी। आप तो हर चीज के लिये भारत सरकार के ऊपर रहना चाहते हैं।

श्री उपाध्‍यक्ष:  भारत सरकार कोई अलग से थोड़े ही है।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा):  इसलिये, आप अपने साधनों से अगले साल के प्‍लान के अन्‍दर, जब आप एडिशनल प्‍लान की बात करते हैं तो आपको अपने सोर्सेज के आधार पर उसको प्‍लान में डलवाना चाहिए और इस पार्क को सुरक्षित रखने की दृष्टि से आपको कार्य करना चाहिए। यही मैं आपसे निवेदन करना चाहूंगा। (व्‍यवधान)

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान सरकार ने प्रपोजल तो भेज ही रखे हैं। राजाखेड़ा से आने वाले माननीय सदस्‍य को ध्‍यान है कि राजस्‍थान पत्रिका में अभी एक कार्यक्रम हुआ था उसमें केन्‍द्रीय  वन एवं पर्यावरण मंत्रीजी, नमोनारायणजी ने बारबार कहा था कि राजस्‍थान की सरकार जो भी, जितने भी हमको प्रस्‍ताव भेजेगी उतना हम सेंक्‍शन करेंगे। इसलिये, ये भी कह रहे हैं, मैं भी कह रहा हूं, भरतपुर के माननीय सदस्‍य भी कह रहे हैं, दिगम्‍बरजी भी कह रहे हैं, आप कृपया जोर लगाइये।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): आपकी नमोनारायणजी से तकलीफ तो मैं समझ सकता हूं। इसलिये आप जो कह रहे हैं वह आपकी तकलीफ...(व्‍यवधान) लेकिन यह जो बात चली थी राजस्‍थान पत्रिका फंक्‍शन में यह सरिस्‍का को लेकर चली थी। (व्‍यवधान)

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): मात्र नमोनारायणजी नहीं, वन एवं पर्यावरण मंत्रीजी नहीं, भारत सरकार के प्रधान मंत्रीजी जब रणथम्‍भोर में आये थे उन्‍होंने भी आश्‍वासन दिया था कि जो केन्‍द्रीय प्रवर्तित योजना राजस्‍थान सरकार के द्वारा भेजी जाएगी, उसको हम सहर्ष स्‍वीकार करेंगे। तो राजाखेड़ा से आने वाले माननीय सदस्‍य, स्‍वीकार कराइये।

श्री उपाध्‍यक्ष: कोई अस्‍वीकार थोड़े ही कर रहे हैं, ये। इनका सहयोग होगा। (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्रीजी ने जो कुछ भी कहा है...(व्‍यवधान)

श्री विजय बंसल (भरतपुर): उपाध्‍यक्ष महोदय, केन्‍द्र सरकार कोई अहसान करती है क्‍या, केन्‍द्र सरकार कोई अहसान करती है क्‍या, राज्‍य से टैक्‍स का हिस्‍सा नहीं लेती है, सेण्‍ट्रल एक्‍साइज का हिस्‍सा नहीं लेती है?

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, बैठिये, बैठिये।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मान्‍यवर, केन्‍द्र सरकार और राजस्‍थान   का सरकार जो कुछ भी धनराशि खर्च करती है वह योजनानुसार खर्च होता है। राजस्‍थान सरकार के भी अनलिमिटेड फण्‍ड हैं, भारत सरकार के पास भी लिमिटेड फण्‍ड हैं। वहां भी अनलिमिटेड नहीं है। आप जो काम करवाना चाहते हैं, अपनी योजना में शामिल करके मंजूरी ले लीजिए। कर रहे हैं ना राजेन्‍द्रसिंहजी राठौड़। गांवों में  सड़कों को जोड़ रहे हैं। एक योजना है, उस योजना के हिसाब से फायदा उठा रहे हैं। अब आप योजनाओं का तो फायदा उठाते नहीं हैं और भाषण यह दिया कि भारत सरकार को बनाकर भेज दी थी 12 महीने पहले। भारत सरकार कोई पोस्‍ट आफिस है जो आपने लैटर डाल दिया था । भारत सरकार कोई लैटर बाक्‍स नहीं है जहां आप डाल आये। आपको जो प्‍लान के पैसे मिलते हैं उस प्‍लान के अन्‍दर एडजस्‍ट कीजिए उसको। आपके राजेन्‍द्रजी राठौड़ करते हैं। कायदे से करते हैं। यहां आकर थोड़े ही कहते हैं, भारत सरकार, भारत सरकार।

श्री उपाध्‍यक्ष: नया टैक्‍स नहीं लगाना चाहते हैं। (व्‍यवधान)

श्रीमती कृष्‍णेन्‍द्र कौर (नदबई): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मुद्दा दूसरा था।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): प्रतिपक्ष के नेता महोदय, इसकी जानकारी आपको नहीं है। यह केन्‍द्रीय प्रवर्तित योजना है, इसमें प्‍लान में नहीं हो सकता है, केन्‍द्रीय प्रवर्तित योजना है। भारत सरकार देती है तो कोई अहसान नहीं करती है। गवर्नमेंट आफ इण्डिया को जो प्रस्‍ताव भेजे मात्र 16 प्रतिशत स्‍वीकृति दी है। प्रधानमंत्रीजी ने आश्‍वासन दिया था। नमोनारायणजी, केन्‍द्रीय मंत्रीजी ने बारबार कहा था, आप हमको प्रस्‍ताव बनाकर भेजो। जो प्रस्‍ताव भेजे हैं, अभी तक केन्‍द्र सरकार के पास लम्बित हैं।

श्रीमती कृष्‍णेन्‍द्र कौर (नदबई): उपाध्‍यक्ष महोदय, हमारा मुद्दा यह था, बाणगंगा नदी के ऊपर जो 2 एनिकट बनने जा रहे हैं ...(व्‍यवधान)

एक माननीय सदस्‍य: माननीय वन मंत्रीजी, आप यह बताने की कृपा करें कि सरिस्‍का और रणथम्‍भौर में केन्‍द्र सरकार ने इतना पैसा दिया, आप उसको खर्च भी नहीं कर पाये और यू.सी. भी नहीं दे पाये, जिससे अगला बजट और आता। (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: यह वाद-विवाद का विषय नहीं है। श्री शिवजीराम मीणा। (व्‍यवधान) माननीय सदस्‍य, विराजिये, माहिर साहब, विराजिये। (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): एक मिनट, उपाध्‍यक्ष महोदय, आप विराजिये। (व्‍यवधान) एक मिनट, आप विरा‍जिये, विवाद की बात नहीं कह रहा हूं मैं। हमारा मुद्दा यह नहीं था। माननीय वन मंत्रीजी, हमारा मुद्दा यह नहीं था कि आप स्‍पेशियली घना के लिये कौनसी योजना भारत सरकार को भेज रहे हैं और स्‍वीकृत करवाकर ला रहे हैं। (व्‍यवधान) यह अलग बात हो सकती है आपकी, पहले सुनिये। माननीय वन मंत्रीजी, हमारा मुद्दा यह है कि भारतपुर का प्राकृतिक रूप से, सैद्धांतिक रूप से, न्‍यायिक रूप से जिन नदियों पर अधिकार है, जो पानी सदा से, जिन नदियों के जरिये भरतपुर को आता रहा है, उनके ऊपर एनिकट बनाकर भरतपुर का पानी रोका जा रहा है, हम इसको बर्दाश्‍त नहीं करेंगे, वह पानी नहीं रुकना चाहिए। यह हमारा मुद्दा है। उसके बारे में क्‍या कह रही है सरकार, हम तो यह जानना चाहते हैं। (व्‍यवधान) आपने तो उसको उलझा दिया कि हम यह कर देंगे, वहां से आ रहा है, यह कर देंगे, उलझाइये मत, हमारा जो पानी आज तक हमको पिछले सौ साल से मिलता रहा है, वह क्‍यों रोका जा रहा है, यह बताइये।

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, यह वास्‍तव में एक गम्‍भीर मामला है। इस पर गम्‍भीर चिन्‍तन होना चाहिए। माननीय प्रतिपक्ष के नेता का इस और ध्‍यान आकर्षित करना चाहूंगा।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मेरा क्‍यों?

श्री उपाध्‍यक्ष: आप लीडर हैं इ‍सलिये, आप नेता हैं।

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): आप विपक्ष के नेता हैं, इसलिये। आप प्रतिपक्ष के नेता हैं, इसलिये ध्‍यान आकर्षित करना चाहूंगा।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): न मैं भारत सरकार में हूं, न राजस्‍थान सरकार में हूं।

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): नहीं, वह सरकार की बात नहीं है।

श्री उपाध्‍यक्ष: आप प्रतिपक्ष के नेता हैं, इसलिये आपको कहा है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मैंने तो यह नियम की बात कही है। आप भी वही कर सकते हैं जो प्‍लान में है। ये भी वही कर सकते हैं जो प्‍लान में दिया है। घनश्‍याम तिवाड़ीजी भी वही स्‍कूल खोलेंगे, जो प्‍लान में इनको पैसा मिला है। यह भी वही काम करें, जो प्‍लान में पैसा मिला है।

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): नहीं, मैं निवेदन ही दूसरी बात कर रहा हूं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): उसके बाद में उससे ऊपर आप प्‍लान ही क्‍यों बनाकर भेजते हैं। क्‍यों लोगों को राज़ी करने की कोशिश करते हैं। उनको समझा दीजिए कि अगले वर्ष्‍ं आयेगा, हम ऐसा कर देंगे।

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): यह सैस का और केन्‍द्र के प्‍लान की बात नहीं है। मैं इतना ध्‍यान आकर्षित करना चाहता हूं कि जहां तक राइपेरियन थ्‍योरी में केचमेंट एरिया, एज-ए-होल को डवलप किया जाता है, एक पर्टिकूलर पार्ट को नहीं, बाँध या बाँध की डाउन-स्‍ट्रीम को नहीं। डेम की अप-स्‍ट्रीम को भी नहीं किया जाता है। जहां-जहां उसका उल्‍लंघन हुआ है, वहीं पर नुकसान हुआ है। यह सदन इस बात का साक्षी है। रिकार्ड है कि पांचना बाँध की जब हाइट बढ़ाई जा रही थी तब भारतीय जनता पार्टी ने विरोध किया था कि भरतपुर चोक होगा, तब माना सुनाई नहीं दिया।

आज भी हम निवेदन करना चाहेंगे, सदन इस बात पर गम्‍भीरता से विचार करे कि राइपेरियन थ्‍योरी के आधार पर, सभी एरिया को थोड़ा पानी मिल जाए, डाउन स्‍ट्रीम और अप स्‍ट्रीम, दोनों चोक नहीं हों तब तो पार पड़ जाएगी, वरना वहां पर चाहे केन्‍द्र से पैसा ले आयें, चाहे कहीं से ले आयें, न तो भरतपुर सुरक्षित रह पायेगा, न अलवर, वहां पर डेम सुरक्षित रह पायेंगे, हकीकत तो है यह। केन्‍द्र से पैसे का नहीं है, हमारी मानसिकता चेंज करनी पड़ेगी।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): यह किसके हाथ में है, यह किसके हाथ में है। राजस्‍थान सरकार के हाथ में है, आपके हाथ में है।

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): वह बाँध तोड़ना, हमारे हाथ में है क्‍या?

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): नहीं, आप तो यह बताओ, उपाध्‍यक्ष महोदय, इन्‍होंने समर्थन तो किया है, समाधान क्‍या है। सरकार उसके लिये आश्‍वस्‍त करे हमको कि भरतपुर के साथ ना-इंसाफी नहीं होनी चाहिए। (व्‍यवधान)

श्री विजय बंसल (भरतपुर): जो पांचना बाँध बन गया, उसको तो निश्चित मात्रा में पानी छोड़ा जाए। (व्‍यवधान) भविष्‍य में और नये एनिकट नहीं बनाये जाएं, यह इसका समाधान है, मंत्री महोदय।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, चर्चा समाप्‍त हो गयी, चर्चा बहुत हो गयी। 

श्री मुरारी लाल मीणा (बांदीकुई): उपाध्‍यक्ष महोदय, हमारे एरिये का पानी जो जा रहा था उसमें नदियों में सब जगह एनिकट बना रहे हैं, अब एनिकट नहीं बने हमारा पानी कैसे रुकेगा, सारा पानी बहकर भरतपुर में जा रहा है।

श्री उपाध्‍यक्ष: नियम 295 के तहत सूचनाएं, श्री शिवजीराम मीणा, अनुपस्थित। श्री जोगाराम पटेल। (व्‍यवधान) बीच में नहीं, बीच में नहीं। (व्‍यवधान)

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह चार जिलों का मामला है और माननीय मंत्रीजी ने हमारी बात का समर्थन किया है। (व्‍यवधान) आप जवाब तो दिलवाएं। (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: बीच में नहीं, माननीय सदस्‍य, क्‍या जवाब सुनना चाहते हैं।

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): मैंने राइपेरियन थ्‍योरी की बात कही है।

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): पूर्वी राजस्‍थान में स्‍टेट टाइम के बाँध बने हुए हैं।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): मंत्रीजी, हमको आश्‍वासन दें, नहीं तो हम धरना देते हैं।

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): इस सरकार ने एक भी बाँध बनाया हो तो बता दें। पूरे स्‍टेट टाइम के बाँध हैं। सारे सूखे पड़े हैं, पानी रोका जा रहा है रेगिस्‍तान बनता जा रहा है। आप नदबई में रहते हैं। (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): मंत्रीजी, हमको आश्‍वासन दिलाएं ना। चिकित्‍सा मंत्रीजी, भरतपुर की जनता माफ नहीं करेगी आपको। कुम्‍हेर रिजर्व हो गया है, आपको नदबई और डीग में भी माफ नहीं करेगी।              

 

Vps/usc/27-03-2006/1230/1k/1

 

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): यह ढपोरसंख सरकार कोई जवाब तो दे। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, सरकार जवाब तो दे। यह डपोरसंख है। मंत्री नहीं है इनका कोई? ... (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): जब उद्योग मंत्रीजी समर्थन कर सकते हैं तो आप भी तो बता सकते हैं या नहीं? यह सही है कि भरतपुर का पानी नहीं रोका जाना चाहिए। ... (व्‍यवधान)

श्री सुरेश मीणा (करौली): ... (व्‍यवधान) कोई भी पानी नहीं छोड़ा जाए, यह हमारी मांग है आपसे । ... (व्‍यवधान)

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर):  माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, पूर्वी राजस्‍थान के साथ भयंकर शोषण किया जा रहा है।

श्री उपाध्‍यक्ष: विराजिये।

श्री हरज्ञान सिंह गुर्जर (महुवा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जब पांचना बाँध बांधा जा रहा था तो पूरे भरतपुर  ने उसका समर्थन किया था और आज उसका विरोध कर रहे हैं ... (व्‍यवधान)

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जवाब दिलवाइये।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री हरज्ञान सिंह गुर्जर (महुवा): यह कह रहे हैं एनिकट। आपने समर्थन किया था तब पांचना ... (व्‍यवधान) हम सबको इसका दु:ख है। ... (व्‍यवधान)

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): इस सरकार के उद्योग मंत्री समर्थन कर रहे हैं। जवाब दिलवाइये आप। ... (व्‍यवधान)

श्री हरज्ञान सिंह गुर्जर (महुवा): भरतपुर ने समर्थन किया तब पांचना बाँध बांधा गया । ... (व्‍यवधान)

श्रीमती कृष्‍णेन्‍द्र कौर (नदबई): जो एनिकट बन रहे हैं उनको रोका जाए। ... (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष:  अंकित नहीं हो। ... (व्‍यवधान)

श्री हरज्ञान सिंह गुर्जर (महुवा): ***

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: अंकित नहीं होगा यह। ... (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ***

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): ***

श्री विजय बंसल (भरतपुर): ***

श्री मुरारी लाल मीणा (बांदीकुई): ***

श्री सुरेश मीणा (करौली): ***

श्री हरज्ञान सिंह गुर्जर (महुवा): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, इस पर चर्चा समाप्‍त हुई। आगे अलाऊ नहीं करूंगा मैं। ... (व्‍यवधान)

श्री मुरारी लाल मीणा (बांदीकुई): ***

श्री सुरेश मीणा (करौली): ***

श्री हरज्ञान सिंह गुर्जर (महुवा): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, क्‍यों समय बरबाद कर रहे हैं? चर्चा समाप्‍त हुई।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ***

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: विराजिये आप।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ***

श्रीमती कृष्‍णेन्‍द्र कौर (नदबई): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, अभी कोई तय थोड़े ही हो रहा है यहां पर। विराजिये। ... (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ***

श्री हरज्ञान सिंह गुर्जर (महुवा): ***

श्री विजय बंसल (भरतपुर): ***

श्री मुरारी लाल मीणा (बांदीकुई): ***

श्रीमती कृष्‍णेन्‍द्र कौर (नदबई): ***

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, कह दिया मंत्रीजी ने।  माननीय सदस्‍य, विराजिये। आज कोई इस पर ... (व्‍यवधान)

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौड़ (राज्‍य मंत्री, सिंचाई): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, भरतपुर के साथ ऐसा कोई अन्‍याय नहीं होगा। हम सब मिल बैठकर जो भी रास्‍ता निकल सकता है वह रास्‍ता निकालने का प्रयास करेंगे। ... (व्‍यवधान)

 

लूणी विधान सभा के माध्‍यमिक व उच्‍च माध्‍यमिक
विद्यालय भवनों की मरम्‍मत

 

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं राजस्‍थान विधान सभा की कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 295 के तहत शिक्षा विभाग के जीर्ण-शीर्ण भवनों के संबंध में निवेदन करना चाहता हूं।

महोदय, नींव बिना भवन नहीं, शिक्षा बिना जीवन नहीं। शिक्षा वि‍हीन नर पशु समान होता है। शिक्षा से मानव के व्‍यक्तित्‍व का निर्माण होता है। बिना शिक्षा के मानव क अनगढ़ पत्‍थर के समान है। शिक्षा रूपी औजार से गढ़कर शिक्षक रूपी कारीगर उस अनगढ़ पत्‍थर को मनचाही साकार मूर्ति के रूप में तैयार कर लेता है।

शिक्षा व शिक्षा मंदिरों अर्थात् विद्यालयों की व्‍यवस्‍था करना सरकार का कर्तव्‍य व दायित्‍व है। पूर्ववर्ती सरकार ने इस क्षेत्र में पाँच वर्ष में कुछ नहीं किया। सिर्फ खजाना खाली है का रोना रोती रही। पाँच वर्ष में एक भी अध्‍यापक की भर्ती नहीं की। राजीव गांधी पाठशालाओं में पैरा टीचर के नाम पर बेरोजगार शिक्षकों का शोषण किया व उनका अपमान करती रही। जीर्ण-शीर्ण, टूटी-फूटी व जर्जर अवस्‍था में स्थित विद्यालयों भवनों की मरम्‍मत तक नहीं करवाई गई, नये विद्यालय भवन बनाना तो दूर की बात है।

वर्तमान भाजपा सरकार ने यशस्‍वी मुख्‍य मंत्रीजी वसुन्‍धराजी राजे के नेतृत्‍व में राज्‍य की बागडोर सम्‍भालते ही अपने घोषणा-पत्र में किये गये वादे के मुताबिक 40 हजार शिक्षकों की भर्ती कर पूरे भारत में एक ऐतिहासिक कदम उठाया। आज तक आजादी के बाद पूरे देश में किसी भी राज्‍य सरकार द्वारा इतनी बड़ी संख्‍या में एक साथ शिक्षकों की भर्ती नहीं की। इस ऐतिहासिक कार्य के लिए मुख्‍य मंत्रीजी व शिक्षा मंत्रीजी साधुवाद के पात्र हैं। मेरी व प्रदेश की जनता की तरफ से इस ऐतिहासिक कदम के लिए मैं हार्दिक बधाई देता हूं।

श्री रमेश खींची (कठूमर): 295 है क्‍या यह ?

श्री उपाध्‍यक्ष: आप विराजिये, बीच में नहीं, 295 हो रहा है। ... (व्‍यवधान)

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): लूणी विधान सभा के अधिकांश माध्‍यमिक व उच्‍च माध्‍यमिक विद्यालय भवन जीर्ण-शीर्ण व जर्जर इमारतों में संचालित हो रहे हैं। भवन विस्‍तार की आवश्‍यकता है। जोधपुर क्षेत्र की लूणी विधान सभा क्षेत्र के माध्‍यमिक व उच्‍च माध्‍यमिक विद्यालयों के जीर्ण-शीर्ण भवनों की मरम्‍मत करवाने की महती आवश्‍यकता है। कई विद्यालयों में भवन की कमी है, उसको भी पूरा किया जाए। राजकीय उच्‍च माध्‍यमिक विद्यालय, लूणी का भवन आजादी से पूर्व निर्मित हुआ था। लम्‍बे अरसे से इस भवन की मरम्‍मत नहीं होने से पूरा भवन जर्जर अवस्‍था में पहुंच गया है और किसी भी वक्‍त गिर कर भारी जान माल की हानि कर सकता है। विधान सभा क्षेत्र लूणी की नव-क्रमोन्‍नत एक मात्र राजकीय बालिका उच्‍च माध्‍यमिक विद्यालय, लूणी में भवन की कमी है, जिससे छात्राओं को अध्‍ययन कार्य में बाधा उत्‍पन्‍न होती है। यह स्थिति लगभग सभी माध्‍यमिक व उच्‍च माध्‍यमिक विद्यालय भवनों की है। इन विद्यालयों भवनों की तुरन्‍त मरम्‍मत करवाना व आवश्‍यकता वाले विद्यालयों में भवन विस्‍तार का कार्य करवाना बहुत ही आवश्‍यक, न्‍याय संगत व जनहित में जरूरी है। आशा है इस संबंध में भी सरकार ध्‍यान देकर कार्य योजना बनायेगी। धन्‍यवाद।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री बद्रीलाल जाट । ( अनुपस्थित)

श्री लक्ष्‍मीनारायण बैरवा ।

 

तहसील फागी में 132 के.वी. ग्रिड सब स्‍टेशन
स्‍थापित करने विषयक

 

श्री लक्ष्‍मीनारायण बैरवा (फागी): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं राजस्‍थान विधान सभा की कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 295 के तहत तहसील फागी में बिजली की 132 के.वी. ग्रेड स्‍थापित करने बाबत निवेदन करना चाहता हूं।

महोदय, उपरोक्‍त विषयान्‍तर्गत निवेदन है कि मेरे विधान सभा क्षेत्र की तहसील फागी जिला जयपुर में कई वर्षों से बिजली की गम्‍भीर समस्‍या है। यहां पर 40-50 किलोमीटर लम्‍बी बिजली की लाइन झूल रही है जिसके कारण जब तेज हवाएं चलती हैं तो बिजली के तार आपस में भिड़ जाते हैं जिसके कारण तारों में फाल्‍ट हो जाता है। फाल्‍ट होने पर करीब दो-तीन दिनों तक बिजली की सप्‍लाई बंद हो जाती है। बिजली की लम्‍बी लाइन होने के कारण एक जगह भी फाल्‍ट हो जाने पर सम्‍पूर्ण तहसील की बिजली बंद करनी पड़ती है। पूरा पावर सप्‍लाई नहीं होने के कारण ग्रामीण किसानों की मोटरें प्राय: जल जाती हैं। बिजली नहीं आने के कारण ग्रामीण जनता, किसानों व व्‍यापारियों को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है।

अत: माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, के माध्‍यम से आदरणीय मुख्‍य मंत्री महोदया एवं ऊर्जा मंत्री महोदय से निवेदन है कि तहसील फागी में बिजली की गम्‍भीर समस्‍या को देखते हुए बिजली की 132 के.वी. ग्रेड अतिशीघ्र स्‍थापित करवाने की कृपा करें ताकि ग्रामीण जनता, किसानों व व्‍यापारियों की बिजली की समस्‍या का समाधान हो सके। धन्‍यवाद।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री मोहन मेघवाल। श्री बाबूसिंह। श्री मोहन मेघवाल।

 

जोधपुर स्थित महात्‍मा गांधी चिकित्‍सालय में सुविधाओं की कमी

 

श्री मोहन मेघवाल (सूरसागर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं राजस्‍थान विधान सभा की कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 295 के तहत निवेदन करना चाहता हूं।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मुख्‍य मंत्रीजी, चिकित्‍सा मंत्री एवं कॉलेज शिक्षा मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहता हूं कि जोधपुर शहर राजस्‍थान राज्‍य का दूसरा सबसे बड़ा जिला है जिसमें लगभग 10 लाख की आबादी निवास कर रही है। इसके अतिरिक्‍त यह भी उल्‍लेख करना चाहता हूं कि जोधपुर जिला मुख्‍यालय सम्‍पूर्ण पश्चिमी राजस्‍थान का मुख्‍यालय है। इस जिला मुख्‍यालय पर व्‍याप्‍त सुविधाओं का फायदा राज्‍य के लगभग 13-14 जिलों को सीधे तौर पर मिल रहा है। जोधपुर जिला मुख्‍यालय पर वर्तमान में सबसे बड़ा अस्‍पताल महात्‍मा गांधी चिकित्‍सालय के नाम से स्थिति है इसके अतिरिक्‍त उम्‍मेद महिला चिकित्‍सालय एवं एम.डी.एम. चिकित्‍सालय भी स्थित है। जोधपुर में स्थित चिकित्‍सालयों में यदि रोगियों की आवक को दृष्टिगोचर रखा जाए तो सभी प्रकार की बीमारियों से ग्रसित रोगी बड़ी तादाद में यहां पर पहुंचते हैं। जिनकी विभिन्‍न जांचें व उपचार की सम्‍पूर्ण सुविधा नहीं होने से अन्‍यत्र राज्‍यों अथवा एस.एम.एस; अस्‍पताल, जयपुर तक आना पड़ता है।

अभी हाल ही में माननीय मुख्‍य मंत्री महोदया, चिकित्‍सा मंत्री एवं कॉलेज शिक्षा मंत्री के जोधपुर प्रवास के दौरान इन चिकित्‍सालयों में व्‍याप्‍त सुविधाओं एवं उपकरणों की जानकारी प्राप्‍त की गई जिसमें आपने यह माना कि जोधपुर स्थिति चिकित्‍सालयों में एस.एम.एस. चिकित्‍सालय के मुकाबले महात्‍मा गांधी चिकित्‍सालय में सुविधाओं एवं उपकरणों का अभाव है।

अत: मैं आपके माध्‍यम से माननीय मुख्‍य मंत्री महोदया, चिकित्‍सा मंत्री एवं कॉलेज शिक्षा मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहता हूं कि सम्‍पूर्ण पश्चिमी राजस्‍थान की जनता की अपेक्षाओं को ध्‍यान में रखते हुए सवाई मानसिंह चिकित्‍सालय के बराबर जोधपुर स्थित महात्‍मा गांधी चिकित्‍सालय में सुविधाएं उपलब्‍ध करवाई जाए। इसके अतिरिक्‍त जोधपुर के अस्‍पातालों में रोगियों की तादाद को देखते हुए कम से कम दो मेडिकल यूनिट बढ़ाई जाए तथा इन अस्‍पतालों में रोगियों के अनुपात में नव पद सृजित करते हुए रिक्‍त पदों को प्राथमिकता से भरा जाए। साथ ही मैं एक सुझाव यहां और प्रस्‍तुत करना चाहता हूं कि महात्‍मा गांधी अस्‍पताल में वर्तमान में भूमि की कमी महसूस की जा रही है। इस हेतु मेरा निवेदन है कि अस्‍पताल परिसर में स्थित आवासीय कालोनी को एम.डी.एम. अस्पताल परिसर में स्‍थानांतरित कर दी जाए तथा आवासीय कालोनी के स्‍थान पर अस्पताल भवन का विस्‍तार किया जाए ताकि जोधपुर शहर ही नहीं अपितु सम्‍पूर्ण पश्चिमी राजस्‍थान के नागरिकों को उच्‍च स्‍तरीय चिकित्‍सा सुविधाएं मिल सके तथा रोगियों को अनावश्‍यक रूप से राज्‍य के बाहर एवं जयपुर स्‍तर पर उपचारार्थ नहीं भटकना पड़े। धन्‍यवाद।

 

Spp/usc/27.3.2006/1240/1l (1)

 

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री बाबूसिंह राठौड़।

 

ग्राम पंचायत बेलवा, चामू, पंचायत समिति बालेसर,
तहसील शेरगढ़ में समाज कल्‍याण छात्रावास के भवन निर्माण बाबत

 

श्री बाबूसिंह राठौड़ (शेरगढ़): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, विधान सभा के प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियम 295 के तहत विशेष उल्‍लेख प्रस्‍ताव में ग्राम पंचायत बेलवा व ग्राम पंचायत चामू, पंचायत समिति बालेसर, तहसील शेरगढ़, जिला जोधपुर में समाज कल्‍याण छात्रावास के भवन निर्माण हेतु बजट स्‍वीकृति बाबत् निवेदन करना चाहता हूं।

महोदय, लेख है कि वर्तमान में ग्राम पंचायत बेलवा व ग्राम पंचायत चामू, पंचायत समिति बालेसर, तहसील शेरगढ़, जिला जोधपुर में समाज कल्‍याण विभाग द्वारा अनुसूचित जाति/जनजाति के छात्रों हेतु क्रमश: वर्ष 1991 व 2005 से छात्रावास एक किराये के भवन में संचालित हो रहे हैं, जिसमें बेलवा छात्रावास तीन कमरें व एक झोंपड़ा तथा एक रसोईघर में संचालित हो रहा है तथा चामू छात्रावास पाँच कमरे, एक रसोईघर तथा एक स्‍नानघर में संचालित हो रहा है। उक्‍त दोनों ही छात्रावास में शौचालय का अभाव होने के कारण छात्रावास के छात्रों को खुले में शौचालय जाना पड़ता है। इसके कारण छात्रों को कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान में बेलवा छात्रावास में 35 एवं चामू छात्रावास में 25 छात्र अध्‍ययनरत हैं।

बेलवा छात्रावास के राजकीय भवन हेतु जिला कलेक्‍टर महोदय द्वारा गांव में दो बीघा भूमि का नि:शुल्‍क वर्ष 1998 में आवंटन किया जा चुका है, परन्‍तु विभाग द्वारा भवन निर्माण हेतु आज दिनांक तक बजट जारी नहीं किया गया है, जबकि गत वर्ष जिला जोधपुर में चार छात्रावास नये स्‍वीकृत किये गये जिसमें वर्ष 1991 से ग्राम पंचायत बेलवा में चल रहे पुराने छात्रावास के भवन निर्माण को प्राथमिकता न देकर नव सृजित नवीन छात्रावास के भवन निर्माण हेतु बजट स्‍वीकृत किया गया है, जिससे यहां के स्‍थानीय ग्रामवासियों में गहरा रोष व्‍याप्‍त है एवं ग्रामीणों ने प्रमुख समाचार पत्रों में इस खबर को सचित्र छपवाकर अपना रोष व्‍यक्‍त किया है।

चामू छात्रावास हेतु ग्राम पंचायत द्वारा चार बीघा भूमि आवंटित है लेकिन छात्रावास भवन हेतु बजट आवंटन के अभाव में आज दिनांक तक आवंटित भूमि पर छात्रावास का भवन नहीं बन पाया है। भूमि आवंटन के पश्‍चात् भी समय पर बजट आवंटन नहीं होने से स्‍थानीय ग्रामवासियों में भंयकर रोष व्‍याप्‍त है।

आदरणीया मुख्‍य मंत्रीजी ने वर्ष 2006-07 के बजट में भवन विहीन समाज कल्‍याण विभाग के छात्रावासों के भवन निर्माण के लिये प्रति छात्रावास 35 लाख रुपये बजट देने की घोषणा की है।

अंत: उक्‍त दोनों छात्रावासों के भवन निर्माण हेतु अविलम्‍ब 35-35 लाख रुपये का बजट स्‍वीकृत करवाकर किराये के मकान में रह रहे छात्रावास के छात्रों को राहत प्रदान करवाने का श्रम करें। धन्‍यवाद।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री अर्जुनलाल जीनगर।

 

सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा धार्मिक स्‍थलों का डामरीकरण

 

श्री अर्जुन लाल जीनगर (गंगरार): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, विधान सभा के प्रक्रिया एवं कार्य संचालन संबंधी नियम 295 के तहत विशेष उल्‍लेख प्रस्‍ताव के जरिये निवेदन करना चाहता हूं। उपाध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान सरकार के निर्देशानुसार सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा धार्मिक स्‍थलों तक डामरीकरण सड़कों से जोड़ने के प्रस्‍ताव तैयार किये जा रहे हैं। मेरे विधान सभा क्षेत्र के अति-महत्‍व के धार्मिक स्‍थलों को भी डामरीकरण सड़कों से जोड़ना अति आवश्‍यक है, अत: विभाग को निर्देश दिलवाकर निम्‍न धार्मिक स्‍थलों को डामरीकरण सड़कों से जोड़ने की राशि स्‍वीकृत कराने का अनुरोध करता हूं:-

 

1. मितिया महादेव बल्‍दरखा

2. सगरा माता मेडीखेड़ा

3. चावण्‍डा माता बोरदा

4. मतवाली माता राश्‍मी

5. जाड़ेश्‍वर महादेव राश्‍मी 

6. मोती सिंह जी बावजी पहुंना

7. देवदण्‍डा जी भालोटा की खेड़ी

8. दाता का बावजी रतन खेड़ी

9. खाखल कावली मिरदाखेड़ी

10.गोल टेकरी खारखन्‍दा

11.रूचला माता रूद

12.देवनारायण जी देवदा

 

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री राजकुमारी शर्मा।

 

उप नगर नियोजक की सीकर नगर परिषद् के कार्यों में भूमिका

 

श्रीमती राजकुमारी शर्मा (सीकर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं राजस्‍थान विधान सभा के प्रक्रिया एवं कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 295 के तहत विशेष उल्‍लेख के जरिये सीकर नगर के विकास में उप नगर नियोजक की भूमिका के संबंध में निवेदन करना चाहूंगी।

सीकर नगर परिषद् के विकास, वित्‍त एवं अन्‍य महत्‍वपूर्ण कार्यों में उप नगर नियोजक की महत्‍वपूर्ण भूमिका है। चाहे पट्टे जारी करने हेतु पेराफेरी का प्रकरण हो, कार्यों के मूल्‍यांकन का प्रकरण हो या अधिक राशि के चैक जारी करने का प्रकरण हो, उप नगर नियोजक की महत्‍वपूर्ण भूमिका होती है। सीकर नगर परिषद् के ज्‍यादातर मामले टिप्‍पणी हेतु या समीक्षा हेतु उप नगर नियोजक के पास ही आते हैं। इन मामलों के निस्‍तारण हेतु बार बार नगर परिषद् के स्‍टॉफ को उप नगर नियोजक से ही सम्‍पर्क करना पड़ता है। इसी प्रकार जिस व्‍यक्ति का कार्य हो, वह भी उप नगर नियोजक से सम्‍पर्क करना चाहता है।

परन्‍तु प्रकरण में महत्‍वपूर्ण बात यह है कि उप नगर नियोजक का मुख्‍यालय सीकर के बजाय जयपुर में है। उप नगर नियोजक सीकर प्रवास पर जाते नहीं हैं। मात्र जब उनकी मीटिंग होती है तभी सीकर प्रवास पर जाते हैं जिसके कारण आम लोगों के कार्य होने में या किसी को भुगतान मिलने में बड़ी परेशानी होती है तथा सीकर की जनता को जयपुर आकर कार्य करवाने के लिये मजबूर होना पड़ता है तथा स्‍थल पर कार्यों की तकनीकी रिपोर्ट भी दी जानी सम्‍भव नहीं हो पाती है व कार्यों में अनावश्‍यक विलम्‍ब होता रहता है। सीकर विधान सभा क्षेत्र में मुख्‍य क्षेत्र सीकर ही है जिसमें नगर परिषद् के कार्य मुख्‍य हैं। ऐसे यदि उप नगर नियोजक का मुख्‍यालय जयपुर हो तो ये कार्य होने दुर्लभ होते हैं व जनता को परेशानी होती रहती है। सीकर की जनता बार बार कार्य करवाने हेतु विधायक के यहां भी सम्‍पर्क करती रहती है तथा यह मांग भी करती है कि उप नगर नियोजक का मुख्‍यालय सीकर होना चाहिये। मैं माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय से मांग करना चाहूंगी कि उप नगर नियोजक का मुख्‍यालय या तो सीकर किया जास, यदि अन्‍य जिलों का कार्य भी उप नगर नियोजक के पास है तो कम से कम लगातार 15 दिवस इनका प्रवास सीकर किया जाकर यह व्‍यवस्‍था की जानी चाहिये कि वे सीकर प्रवास पर रहकर ही अपने कार्य निपटाये जिससे बार-बार इनके पास न केवल नगर परिषद् सीकर के कार्मिकों को अपितु सीकर की जनता को भी कार्य करवाने के लिये इनके पास जयपुर नहीं आना पड़े तथा कार्य में अनावश्‍यक विलम्‍ब भी न हो।

अन्‍त में, मैं पुरजोर शब्‍दों में उप नगर नियोजक का मुख्‍यालय जयपुर के बजाय सीकर में करने व जयपुर के बजाय सीकर मुख्‍यालय पर उपस्थित रहकर ही नगर परिषद् सीकर के कार्यों के निपटारे बाबत उपाध्‍यक्ष महोदय के मार्फत सरकार से निवेदन करती हूं । इससे एक तरफ तो नगर परिषद् सीकर के कार्मिकों को बार-बार जयपुर प्रवास पर नहीं आना पड़ेगा तथा दूसरी और सम्‍बन्धित व्‍यक्तियों को अपने कार्य करवाने के लिये जयपुर नहीं आना पड़ेगा व कार्य भी समय पर सम्‍पन्‍न हो सकेंगे। धन्‍यवाद। 

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री हरज्ञान सिंह।

 

महुवा मुख्‍यालय स्थित सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र का भवन

 

श्री हरज्ञान सिंह गुर्जर (महुवा): उपाध्‍यक्ष महोदय, विधान सभा के प्रक्रिया के नियम 295 के अन्‍तर्गत ध्‍यान आकर्षित करना चाहता हूं। उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं विधान सभा क्षेत्र महुवा मुख्‍यालय स्थित सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र के भवन की ओर सरकार का ध्‍यान आकर्षित कर अनुरोध करना चाहूंगा कि तत्‍कालीन राजा-महाराजाओं के जमाने में निर्मित भवन में सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र संचालित है जो बिल्‍कुल जर्जर एवं जीर्ण-शीर्ण स्थिति में है। जहां डॉक्‍टरों को बैठने हेतु पर्याप्‍त जगह नहीं है तथा सरकार ने उक्‍त सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र नेशनल हाइवे 11 पर स्थित होने एवं आये दिन भंयकर एक्‍सीडेंट की दुर्घटनाओं को ध्‍यान में रखकर ट्रोमा यूनिट स्‍वीकृत की है। तत्‍कालीन सरकार के नुमाइंदों ने अपने निजी व्‍यक्तियों की दुकानों को लाभ पहुंचाने की दृष्टि से उसी जीर्ण-शीर्ण भवन के कोने में ट्रोमा यूनिट संचालित करवा दी जबकि इसके लिये भारी बजट स्‍वीकृत किया है लेकिन भवन एवं पर्याप्‍त जगह के अभाव में आमजन को पूर्ण सुविधा प्राप्‍त नहीं हो रही है। मैं अनुरोध करना चाहूंगा कि महुवा मुख्‍यालय पर स्थित सार्वजनिक निर्माण विभाग का विश्राम गृह, जोकि काफी दिनों से उपयोग में नहीं आ रहा है, को चिकित्‍सा विभाग को हस्‍तान्‍तरण करवा दें तो सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र भवन का निर्माण इस स्‍थान करवाया जाकर आमजन को पूर्ण सुविधाओं का लाभ प्राप्‍त हो सकेगा।

 

msr/usc/27302006/1250/1m

 

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री प्रभुलाल वर्मा।

 

विधान सभा क्षेत्र पीपल्‍दा के कस्‍बा इटावा में खराब सड़कें

श्री प्रभुलाल वर्मा (पीपल्‍दा): उपाध्‍यक्ष महोदय, विधान सभा के प्रक्रिया एवं कार्य संचालन सम्‍बन्‍धी नियम 295 के तहत ध्‍यानाकर्षण करना चाहता हूं।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र के कस्‍बा इटावा तहसील पीपल्‍दा, जिसकी आबादी करीब 28,000 के लगभग है, यहां से अनेक बसें, जीपें, ट्रक, ट्रेक्‍टर कस्‍बे के मध्‍य होकर गुजरते हैं। इटावा कस्‍बे के मध्‍य रोड की दशा खराब है, जगह-जगह पर गड्डे पड़े हुए हैं, इससे आवागमन में भारी परेशानियां आती हैं। रोड पर जगह-जगह पानी भरा रहता है तथा दो पहिया वाहन की तो इतनी दशा खराब हो जाती है कि देखते ही पता चलता है कि यह इटावा से आये हैं।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपसे निवेदन है कि इस कस्‍बे इटावा में सी.सी. रोड मय नाली के प्रस्‍ताव 247 लाख के बना कर भिजवाये जा चुके हैं लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं की गयी है।

अत: मैं आपके माध्‍यम से निवेदेने करता हूं कि इटावा कस्‍बे की तहसील पीपल्‍दा का मुख्‍य कस्‍बा है, यहां मण्‍डी भी लगती है, इससे ट्रैफिक का भारी दबाव बना रहता है। उपरोक्‍त भेजे गये प्रस्‍ताव को स्‍वीकृत कर सी.सी. रोड मय नाली के निर्माण करवाने की कृपा करें। धन्‍यवाद।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री हरिश्‍चन्‍द्र कुमावत।

 

ग्राम जवानपुरा, पंचायत श्‍यामगढ़, तहसील नावां (नागौर) में
आग दुर्घटना से पीडि़त लोगों को सहायता

श्री हरिशचन्‍द्र (नावां): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, ग्राम जवानपुरा पंचायतश्‍यामगढ़ तहसील नावां (नागौर) में आगे दुर्घटना से पीडि़त लोगों को सरकारी सहायता प्रदान कराने के सम्‍बन्‍ध में कार्य संचालन एवं प्रक्रिया नियम 295 के अन्‍तर्गत विशेष उल्‍लेख प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत कर रहा हूं।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, दिनांक 20.03.2006 को ग्राम जवानपुरा में लगी आग से एक मेघवाल परिवार तथा 23 गुर्जर परिवार को काफी नुकसान हुआ है। ये अनुसूचित तथा पिछड़ी जाति के निर्धन, असहाय एवं कमजोर पीडि़त परिवार निम्‍न हैं:-

 

1.

श्री ज्‍यूताराम गुर्जर

2.                    

श्री बाबू लाल गुर्जर

3.

श्री जेताराम गुर्जर

4.

श्री लादूराम मेघवाल

5.

श्री जीवाराम गुर्जर

6.

श्री गोमाराम गुर्जर

7.

श्री बाबूराम गुर्जर

8.

श्री छोटूराम गुर्जर

9.

श्री भागीरथ गुर्जर

10.

श्री मोतीराम गुर्जर

11.

श्री मोनाराम गुर्जर

12.

श्री सीताराम गुर्जर पुत्र श्री मानाराम गुर्जर

13.

श्री श्रवणराम पुत्र बन्‍नाराम गुर्जर

14.

श्री दीपाराम गुर्जर

15.

श्री बाबूराम गुर्जर

16.

श्री बन्‍नाराम गुर्जर

17.

श्री बाथाराम गुर्जर

18.

श्री हेमाराम गुर्जर

19.

श्री किसनाराम गुर्जर

20.

श्री मांगूराम गुर्जर

21.

श्री सुन्‍नाराम गुर्जर

22.

श्री प्रेमाराम गुर्जर

23.

श्रीमती राजेश्‍वरी

 

 

 

इनमें श्री ज्‍यूताराम गुर्जर, बाबूराम गुर्जर, लादूराम मेघवाल, श्री सीताराम पुत्र मानाराम गुर्जर के अत्‍यधिक नुकसान हुआ है तथा निम्‍न सात परिवार ऐसे हैं जिनके कच्‍चे मकान थे, वे पूर्णतया जलकरराख हो गये हैं। श्री बाबूलाल गुर्जर, श्री लादूराम मेघवाल, श्री सीताराम पुत्र श्री मानाराम गुर्जर, बन्‍नाराम पुत्र श्री जेताराम गुर्जर, छोटूराम पुत्र श्री सुजाराम गुर्जर, श्री किसानारा गुर्जर, श्री मांगूराम गुर्जर के कच्‍चे मकान थे, वे पूर्णतया जलकर राख हो गये हैं और वे बेघर हो गये हैं। इनमें दो परिवार बी.पी.एल. चयनित हैं परन्‍तु जिनके घर जलकर सब कुछ समाप्‍त हो गयाउनकी स्थिति आज की स्थिति में बी.पी.एल. से भी कमजोर हो गयी है।

मैं स्‍वमं मौके पर जाकर आया हूं। दांतारामगढ़ की स्‍वयं सेवी संस्‍था तथा राज्‍य के प्रशासनिक अधिकारियों ने तात्‍कालिक सहायता देकर सांत्‍वना दी है। श्रीमान् जिला कलेक्‍टर, अतिरिक्‍त कलेक्‍टर, तहसीलदार नावां, उप पुलिस अधीक्षक कुचामन, नावां व मारोठ के थानेदार, पटवारी, राजस्‍व अधिकारी, विकास अधिकारी, सरपंच व श्‍यामगढ़ व मारोठ के लोगों ने आग बुझाने में तत्‍परता से कार्य किया व श्रीमती रामेश्‍वरी गुर्जर ने तत्‍काल सूचना भिजवा कर सराहनीय कार्य किया है।

ऐसे पीडि़त परिवारों को वहां के स्‍वयंसेवी, समाज सेवी लोगों ने तात्‍कालिक सहायता देकर सांत्‍वना दी है परन्‍तु जो नुकसान हुआ है, सरकारी सहायता के रूप में जिनके घर जलकर बिलकुल नष्‍ट हो गये, ऐसे सभी अग्नि पीडि़तों को बी.पी.एल. परिवारों की भांति ही मानकर मकान बनवाये जावें तथा शेष सभी पीडि़तों को दस-दस हजार रुपये प्रत्‍येक की सहायता दी जाकर इस संकट के समय में अनुसूचित एवं पिछड़ी एवं निर्धन परिवारों को सहायता प्रदान करावें। इस ओर इस विशेष उल्‍लेख प्रस्‍ताव के जरिये मैं राज्‍य सरकार का ध्‍यान आकर्षित कर रहा हूं। धन्‍यवाद।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री रणधीर सिंह भीण्‍डर।

पाठ्य-पुस्‍तकों में एतिहासिक महत्‍व के पाठ शामिल करने विषयक

 

श्री रणधीर सिंह भीण्‍डर (वल्‍लभनगर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं राजस्‍थान विधान सभा के प्रक्रिया एवं कार्य संचालन सम्‍बन्‍धी नियम 295 के तहत ध्‍यान आकर्षित करना चाहता हूं।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, कुछ वर्षों पूर्व तक पाठ्य पुस्‍तकों में 'हरावल' नाम से एक पाठ होता था जो हम सब ने अपने बचपन में पढ़ा होगा। उस पाठ में जिस सच्‍ची घटना का वर्णन किया गया था वैसी ही घटना विश्‍व में और कहीं नहीं घटी थी। देश के ऊपर बलिदान होने में होड़ लगाने की यह अनूठी मिसाल है।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेवाड़ के महाराणा अमर सिंह के राज के दौरान शक्‍तावतों और चुण्‍डावतों में ठन गई कि हरावल में, यानि की युद्ध में अगली पंक्ति में, कौन रहे। शुरू से हरावल में चुण्‍डावत रहते आये थे और शक्‍तावतों ने इसके लिए अपना दावा पेश किया। महाराणा ने कहा कि ऊंटाला दुर्ग जो कि मुगलों के कब्‍जे में था, उस पर जो पहले कब्‍जा करके अन्‍दर घुसेगा उसी को हरावल में रहने का दर्जा मिलेगा। शक्‍तावत और चुण्‍डावत, दोनों दुर्ग पर टूट पड़े और मुगलों से खूब जोर आजमाइश कर लड़ाई की। शक्‍तावत दुर्ग के द्वार पर पहुंचे और हाथी की टक्‍कर से दुर्ग का द्वार खुलवाने लगे परन्‍तु द्वार पर लगे लोहे के कांटों की चुभन से हाथी जोर नहीं लगा पाये। बल्‍लू शक्‍तावत कांटों के आगे खड़े हो गये और फिर हाथी से टक्‍कर लगवाई और द्वार टूट गये। बल्‍लूजी शक्‍तावत शहीद हो गये। दूसरी ओर चुण्‍डावत सरदार बांस की सीढ़ी की सहायता से किले पर चढ़ गये और अपना सिर कटवा कर किले के अन्‍दर फैंक दिया। दुर्ग पर कब्‍जा हो गया।

ऐसी ऐतिहासिक घटना का वर्णन उस पाठ में था परन्‍तु पूर्व सरकार ने इसे हटा दिया जो कि इतिहास के पुरुषों का अपमान है। मेरा सरकार से अनुरोध है कि वह पाठ पुन: पाठ्यक्रम में शामिल किया जाये ताकि आने वाली पीढ़ी देश के लिए समर्पित होने की भावना से ओत-प्रोत हो जावे और इसको उदाहरण की तरह लेकर नौजवानों में देश के लिए मर-मिटने की होड़ लग जाए। धन्‍यवाद।

 

श्री उपाध्‍यक्ष: पर्ची के माध्‍यम से उठाये जाने वाले विषय। श्री संयम लोढ़ा।

पर्ची के माध्‍यम से उठाये गये मुद्दे

मानपुर माचेडी में रीको द्वारा बूचड़खाने हेतु भू-आबंटन

 

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय उद्योग मंत्रीजी का ध्‍यान एक ऐसे विषय की ओर आकर्षित कर रहा हूं जो न-केवल जयपुर बल्कि सम्‍पूर्ण राजस्‍थान के लोगों की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा हुआ है।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह एक यांत्रिक बूचड़खाने से सम्‍बन्धित मसला है। मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं कि वर्ष 2000 में मुलाई माह में आई.डी.सी. कमेटी की जो मीटिंग हुई रीको की और उसमें इसके सम्‍बन्‍ध में जब प्रस्‍ताव पर चर्चा की गयी और राज्‍य सरकार से प्रस्‍ताव की अनुमति की अपेक्षा की गयी और जो रीको की आई.डी.सी. कमेटी ने इस यांत्रिक बूचड़खाने के सम्‍बन्‍ध में प्रस्‍ताव लिया, में उसका एक छोटासा अंश आपके सामने निवेदन करना चाहता हूं “The committee discussed the position as brought out in the agenda note. The Committee discussed the proposal of the company for allotment of land for setting up of a slaughter house. After detailed discussions the Committee observed that although the public opinion is against the setting up of a slaughter house, however since 40,000 animals are slaughtered per day under the unhygienic conditions it would be in the interest of the environment and the health of the people, that the slaughtering of the animals is done at the specified place under controlled conditions. In view of the above, the Committee decided to make provision for allotment of land for establishment of slaughter houses provided that applicant obtains permission from Local Authority, District administration, and Rajasthan Pollution Control Board, and the land would be allotted only in the Leather Complex.”

यह, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, वर्ष 2000 में आई.डी.सी., जो रीको की कमेटी है उसने प्रपोजल लिया, 2003 तक जब तत्‍कालीन कांग्रेस की सरकार थी, इस प्रस्‍ताव को किसी तरह की कोई स्‍वीकृति, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, प्रदान नहीं की गयी लेकिन जैसे ही हिन्‍दुत्‍व के नाम पर पूरे देश में राजनीति करने वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार राजस्‍थान की सत्‍ता पर काबिज हुई और गोवध संरक्षण के नाम पर पूरे राजस्‍थान और पूरे हिन्‍दुस्‍तान के जनमानस को प्रभावित करने का दावा करने वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार राजस्‍थान की सत्‍ता पर काबिज हुई, राजस्‍थान की सत्‍ता में बैठे हुए लोगों ने उन लोगों के साथ एक सांठगांठ की और इस पूरे प्रस्‍ताव को किस तरीके से क्रियान्वित किया जाए, इसमें पूरी सरकार, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, लग गयी।

2004 में सरकार के आने के साथ ही चर्चा हो गयी लेकिन ब्‍यूरो ऑफ प्रमोशन से रीको को एक रिकमण्‍डेशन पत्र सबसे पहले इसके लिए लिखवाया गया कि इसको भूमि आबंटित कर दी जाए लेकिन रीको के जो रूल्‍स लैण्‍ड अलाटमेंट के सम्‍बन्‍ध में बने हुए हैं उसकी जो शर्त संख्‍या पाँच जिसमें ऐसा कोई भी उद्योग जिससे जन-भावनाएं आहत होने की सम्‍भावना हो, उसके सम्‍बन्‍ध में राज्‍य सरकार की अनुमति लेना आवश्‍यक है तो इन्‍होंने आई.डी.सी. के अन्‍दर उस रूल को भी चेन्‍ज करवा दिया और मानपुर माचेड़ी में कत्‍लखाने की स्‍थापना के लिए, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, भूमि आबंटित कर दी।

अब मैं निवेदन करना चाहूंगा कि यह जो रीको का यह क्‍लॉज नम्‍बर पाँच के सम्‍बन्‍ध में जो प्रोसिडिंग है, में उसका एक अंश आपको सुनाना चाहता हूं

 “Further keeping in view the sentiments of the local people, it was stipulated that the allottee will furnish an undertaking (Clause No. 5) to the effect that it will not at any stage takes such action which affects the sentiments of the local people. The company has objected to this condition on the ground that such undertaking may become a constant source of trouble leading to unnecessary harassment and blackmail by any small group of local people. BIP has also requested for suitable amendment in the undertaking.”

 

Ars/usc/1n/1300/27032006/1

 

मतलब एक जो प्रावधान था कि अगर इस कत्‍लखाने की स्‍थापना से स्‍थानीय लोगों की भावनाएं आहत होती हों तो उसके सम्‍बन्‍ध में एक अंडरटेकिंग ली गई थी कि वह कम्‍पनी ऐसा नहीं करेगी । पर क्‍या कमाल किया रीको ने, उसको हटा दिया और जैसा वह कम्‍पनी चाहती थी वह सारे प्रावधान उसको करके दे दिए। राजस्‍थान की जनता सोई हुई नहीं है। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इस सरकार ने तो अपने जो कर्म करने थे कर दिए, कत्‍लखाने के लिए भूमि आबंटित कर दी, ग्राम पंचायत से दबाव डलवाकर उसकी एन ओ सी दी, काम चालू करवा दिया लेकिन लोग सड़क पर आए और सड़क पर आकर सरकार के इस धर्म विरोधी कृत्‍य का विरोध किया। जिस हिन्‍दुत्‍व की बुनियाद पर यह सरकार काम कर रही है उसका विरोध किया, काम रुक गया लेकिन आज तक उस यांत्रिक कत्‍लखाने के लिए जो भूमि माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, लोगों की जन भावनाओं पर कुठाराघात करते हुए आबंटित की गई है, सरकार ने आज तक वह भूमि निरस्‍त नहीं की है । मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि 2000 में जो प्रस्‍ताव भेजा गया था तत्‍कालीन कांग्रेस सरकार ने उसका अनुमोदन नहीं किया। फिर इस सरकार को क्‍या जरूरत पड़ गई थी । जनता के बीच में आपके दावे आपके दूसरी तरह के, जनता के बीच में आपकी बातें दूसरी तरह की। खाली एक उस कम्‍पनी नेशनल नैचुरल फ्रोजन फ्रूट्स एक्‍सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड के सिर्फ इस एफेडेविट के आधार पर कि वह गायों का कत्‍ल नहीं करेगा, सरकार ने यह कैसे मान लिया? उस कत्‍लखाने के अन्‍दर गायें कत्‍ल नहीं हों यह बात सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने क्‍या व्‍यवस्‍था की? खाली एक एफेडेविट उसका आधार, जो बकरियों को काट सकता है, भेड़ों को काट सकता है उस आदमी की मानसिकता किस तरह की होगी, वह गायों को क्‍यों नहीं काट सकता । आपने किस तरह की व्‍यवस्‍था की इसको रोकने के लिए ?

इसलिए, उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं कि चाहे किसी तरह का कोई भी मामला हुआ हो, वह कौनसे कारण हैं कि सरकार को इस लाबी के सामने घुटने टेकने पर विवश होना पडा। हजारों हजार, लाखों लाख राजस्‍थान के लोगों की भावनाओं को दरकिनार करते हुए भूमि आबंटन के लिए विवश होना पड़ा और इतना जबर्दस्‍त विरोध होने के बाद आज वह सिद्धराज जी ढड्ढा इस दुनिया में नहीं हैं जिन्‍होंने राजस्‍थान और हिन्‍दुस्‍तान को आजाद कराने के लिए लड़ाई लड़ी और उस आन्‍दोलन के अन्‍दर वह भी शामिल थे । आज उनकी पुण्‍य स्‍मृति को याद करते हुए मैं आपके माध्‍यम से सरकार से निवेदन करना चाहता हूं कि इसी सदन के अन्‍दर उस यांत्रिक कत्‍लखाने के लिए जो भूमि आबंटित कीगई है उसको निरस्‍त करने की घोषणा करें।

श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (गंगापुर): बूचड़खाने की स्‍वीकृति निरस्‍त होनी चाहिए। आदरणीय उद्योग मन्‍त्री जी इस विषय में अभी निर्देश दें ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: आप क्‍यों बीच में ....

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): उपाध्‍यक्ष महोदय, मंत्री महोदय कोई व्‍यवस्‍था करें यह बहुत अहम सवाल है।

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, इस समस्‍या का समाधान जरूर करेंगे । सबसे पहले तो मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं यह जमीन अलॉट अभी नहीं हुई है, पैकेजिंग के लिए 1996 में हुई थी और 2000 में सबसे पहले तत्‍कालीन उद्योग मंत्री की सहमति से उसके नालेज में लाने के बाद यह हुआ है । मेरे तो ना तो नालेज  में लाया गया, उस समय मैं था नहीं, न चैंज की आज तक कोई अनुमति हमने दी है। जहां तक स्‍लाटर हाउसेज का प्रश्‍न है, स्‍लाटर हाउस रीको इंडस्ट्रियल एरिए में हम डिसकरेज करना चाहते हैं । आई डी सी के अन्‍दर दुबारा इस विषय को ले जाकर। हमारा इंडस्ट्रियलाइजेशन का प्रोसेस है । पैकेजिंग वाला पार्ट इसमें आ सकता है लकिन स्‍लाटर हाउसेज न तो हमारे बायलाज में है न हम यह चाहते हैं और ना हम यह होने देंगे ।

जहां तक प्रश्‍न 2000 के आई डी सी का कहा उसमें एक पत्र भी आप डी सी सामन्‍त साहब का पढ़ लेते जो 29 जुलाई को लिखा गया, 5 जुलाई, 2000 को आई डी सी से एप्रूव हुआ एजेंडा नम्‍बर 21 और उसके बाद “Accordingly, we propose that the Office Order as per the draft enclosed be issued. Considering the sensitivities involved in the matter, I request you to praise the Hon’ble Minister on the issue before the order is issued.”

तो उनकी जानकारी में इश्‍यु हुआ और जानकारी में इश्‍यु हुआ है तो उस समय चाहे प्रत्‍यक्ष रूप से मानें या परोक्ष रूप से मानें सरकार की उस समय सहमति थी । स्‍लाटर हाउसेज के सम्‍बन्‍ध में ना हमारी सहमति आज है । यह इसलिए अटका हुआ है कैंसिलेशन का मामला एक जीव कल्‍याण परिषद ने माननीय उच्‍च न्‍यायालय में 3359/05 का पी आई आर दायर हो चुकी है । उसकी बाउण्‍ड्री वाल का निर्माण आरम्‍भ किया था उस समय मैंने स्‍वयं ने इनीशिएटिव लेकर मुख्‍यमंत्री जी से बात करके उसको रुकवाया यह क्‍या निर्णय कोर्ट का होता है, इसमें जीव कल्‍याण परिषद ने किया है और भी कई संस्‍थाओं ने किया है । निश्चित तौर पर उनकी क्रियान्विति होगी और मैं डिस्‍करेज करूंगा। मैं स्‍लाटर हाउसेज को रीको एरिया में नहीं होने दूंगा।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): क्‍लाज नम्‍बर 5 तो आपने हटाया ना ?यह जो मैं पढ़ रहा हूं “Keeping in view the sentiments of the local people, it was stipulated that the allottee will furnish an undertaking (Clause No. 5) to the effect that it will not at any stage takes such action which affects the sentiments of the local people.”

यह आपने हटाया, यह आपकी 10.11.2004 की मीटिंग में आपने हटवाया और आप कह रहे हो हम प्रमोट नहीं करना चाहते । सदन को गुमराह कर रहे हो आप।

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): सदन को गुमराह करने की स्थिति नहीं है ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मैं यह, उपाध्‍यक्ष महोदय, आप चाहें तो सदन की टेबल पर रख सकता हूं । आप साफ साफ घोषणा क्‍यों नहीं करते कि आप निरस्‍त करोगे उस आबंटन को। अगर आपकी सरकार की मंशा नहीं है तो ...

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, ऐसे ना तो मैं किसी के दबाव में आकर घोषणा करूंगा..

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): दबाव की क्‍या बात होती है ? आप सपोर्ट कर रहे हो यह डाकूमैंट जाहिर करता है कि राजस्‍थान सरकार मिली हुई है।

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): जब तक हाई कोर्ट का निर्णय नहीं हो इसके ऊपर हम एक्‍शन अभी लेने की स्थिति में नहीं हैं।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, कोई स्‍टे है क्‍या हाई कोर्ट का कि आप निरस्‍त नहीं करेंगे लैण्‍ड अलॉटमैंट ...(व्‍यवधान)  स्‍टे है क्‍या ...(व्‍यवधान)

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): माननीय उद्योग मन्‍त्री जी, आपसे तो उम्‍मीद है । आपतो रामजी की गाय नहीं हो आप तो स्‍पष्‍ट कहो।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): अब तो बोलो दिलावर साहब ...(व्‍यवधान) गोशाला का मामला है बराबर में बैठे हो करवाओ घोषणा ...(व्‍यवधान)

श्री महीपाल मदेरणा (भोपालगढ़): स्‍पष्‍ट कहो भावना, धर्म की बात करते हो आप इस बूचड़खाने को तो रोको, आपसे तो भारी उम्‍मीद है हमको ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): इन्‍होंने वह क्‍लाज भी हटा दिया ...(व्‍यवधान) वह क्‍लाज भी हटा दिया जो जनता की भावनाओं को आघात पहुंचाने देने के लिए रुका हुआ था। इसका मतलब आप वहां गायें कटवाना चाहते हो ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: मंत्री महोदय ने जवाब दे दिया।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): इसका साफ मतलब यही है ...(व्‍यवधान) इसका साफ मतलब यही है आप वहां पर गो वंश को कटवाना चाहते हो ।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): अब सही कर लो।

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): मन में राम बगल में छुरी, आप तो रामजी की गाय नहीं हो, दबंग आदमी हो, आप घोषणा करो कि इन बूचड़खानों को बंद करेंगे, इस जयपुर को भी सड़ाओगे क्‍या ? ...(व्‍यवधान)

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): कत्‍लखाने का मामला है, सरकार को कहकर बंद करवाओ ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, बात तो सुनें ...(व्‍यवधान) माननीय सदस्‍य, वह जवाब दे रहे हैं जवाब तो देने दें।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, सदन को मन्‍त्री जी गुमराह कर रहे हैं । मैंने आपके सामने वह क्‍लाज पढ़कर सुना दिया कि इन्‍होंने वह क्‍लाज हटाया है । जन भावनाओं को आहत करने के सम्‍बन्‍ध में जो क्‍लाज था उस कम्‍पनी के मालिक के कहने से वह हटाया है इसका मतलब साफ है कि यह गायों को कटवाना चाहते हैं मैं यह आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं  ...(व्‍यवधान)

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): यह माननीय सदस्‍य कहना चाहते हैं परन्‍तु इनकी भावना को दबा दिया, हमारी मांग है इस पर निर्णय करें ।

श्री उपाध्‍यक्ष: क्‍या कहना चाहते हैं पहले सुनें तो सही आप।

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): मैंने सारी स्थिति स्‍पष्‍ट कर दी 2002 में इन्‍होंने स्‍लाटर हाउस का रीको के द्वारा अलॉट करने की पहले इन्‍होंने की उसके बाद में कंडीशन हटाने की बात कहते हैं ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 2003 तक कोई स्‍वीकृति नहीं दी गई।

श्री उपाध्‍यक्ष: आप सुनो तो ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आपकी सरकार में आने के बाद कन्‍स्‍ट्रक्‍शन की पंचायत से एन ओ सी दिलवाई है और आपने यह जन भावनाओं को आहत करने वाला क्‍लाज आपने हटवाया है ...(व्‍यवधान) और इसलिए हटवाया है कि यह भारतीय जनता पार्टी कीसरकार गायों को काटने की छूट देना चाहती है इसलिए आपने उस क्‍लाज को हटवाया है ।

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): यह बोल दें उसके बाद जवाब दे दूंगा।

श्री उपाध्‍यक्ष: आप सुनें तो सही ।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): भारतीय जनता पार्टी के सदस्‍य आप ही परेशान हैं ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आज इनकी अन्‍तरआत्‍मा को क्‍या हो गया है, आज इस केसरिया कपड़े को क्‍या हो गया है, यह क्‍लाज हटा दिया, यह क्‍लाज हटा दिया, कल गायें कटेंगी, कौन रोकेगा उनको ...(व्‍यवधान)

एक माननीय सदस्‍य, क्‍लाज हटा दिया, हटा दिया होगा ...(व्‍यवधान)

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): क्‍लाज हटाया, सरकार का उसमें कुछ नहीं है ...(व्‍यवधान) 

 

Vns/usc/1310/1o/27.3.2006

 

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही):  कटारिया साहब, आज आपकी आत्‍मा को क्‍या हो गया ? आर.एस.एस. के वीरों आपको क्‍या हो गया है ? आपकी आत्‍मा कहां जा रही है ? यह आपकी सरकार ने क्‍लाज हटा दिया। महंत जी, आप तो कुछ करो। यह सरकार गायों को काटने जा रही है, बाबाजी ... (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य ... (व्‍यवधान) आप स्‍थान ग्रहण कीजिये ... (व्‍यवधान) माननीय सदस्‍य, वह बता रहे हैं ... (व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): मैं आपके पक्ष में हूं और जो उद्योग मंत्रीजी ने कहा कि उसको डिसकरेज करेंगे ... (व्‍यवधान)

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): गाय तो आप लोगों ने कटवायी है। गाय किसी भी कीमत पर नहीं कटेगी, राजस्‍थान में नहीं कटेगी ... (व्‍यवधान)

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): आपकी भावनाएं ऐसी लगी कि कटेगी। आपकी भावनाएं बता रही हैं, कटेगी, जरूर कटेगी और मंत्रीजी का यह कहना कि ... (व्‍यवधान)

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): नहीं कटेगी।

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): आप एक दिन पहले तैयार करा रहे हो। गर्व से कहो हम हिन्‍दू हैं ... (व्‍यवधान) बाहर कटेंगी ... (व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): पहले हम कटेंगे, गाय बाद में कटेंगी ... (व्‍यवधान) पहले हम कटेंगे, राजस्‍थान में गाय बाद में कटेगी ... (व्‍यवधान)

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह बहुत गंभीर मामला है। इनवेस्‍ट के नाम पर, गाय की रक्षा के नाम पर तुरन्‍त प्रभाव से सदस्‍य महोदय को आश्‍वासन दिया जाना चाहिये मंत्री महोदय द्वारा ... (व्‍यवधान)

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): गाय काटने वाले, गाय काटने वालों, बूचड़खाने वालों। बूचड़खाने बनाओगे गायों को काटने के लिये। ऐसे ही राम का नाम लेते हो। गर्व से कहो हम हिन्‍दू हैं। हिन्‍दू राष्‍ट्र बनाया ही नहीं, कहां गया आपका ढोंग ... (व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): हम पहले कटेंगे, गाय बाद में कटेंगी। राजस्‍थान में गाय नहीं कटेगी। गाय के साथ हम कट जायेंगे ... (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): शर्म आनी चाहिये सिर्फ आपकी विचारधारा कि ... (व्‍यवधान) इस गाय ने आपका हर तरह से पोषण किया है ... (व्‍यवधान)  सत्‍ता में आने के बाद राजस्‍थान के छह करोड़ लोगों की भावनाओं पर कुठाराघात करने का काम आप लोग कर रहे हैं और आपको जनता माफ करने वाली नहीं है ... (व्‍यवधान)

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आर.एस.एस. के सभी कार्यकर्ता दुःखी हैं। भारतीय जनता पार्टी के सभी‍सदस्‍य दुःखी हैं। इनकी आत्‍मा दुःख रही है परन्‍तु यह सरकार फिर भी इनके इशारे पर कार्य कर रही है। सरकार का निर्णय है ... (व्‍यवधान) सरकार के दो चेहरे हैं ... (व्‍यवधान)

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): यह सरकार ऐसा लगता है कि हर जिले में एक बूचड़खाना खोल देगी ... (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो ... (व्‍यवधान) अंकित नहीं हो रहा है माननीय सदस्‍य ... (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): ***

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: आप बीच में किसी परमीशन से बोल रहे हैं ? माननीय सदस्‍य, आप क्‍यों बिना परमीशन के बोल रहे हैं। आप स्‍थान ग्रहण कीजिये।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): ***

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: परमीशन से नहीं बोल रहे हैं, अंकित नहीं हो रहा है।

श्री अर्जुन सिंह देवड़ा (रानीवाड़ा): ***

श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (गंगापुर): ***

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): ***

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): ***

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): ***

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): ***

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: आप स्‍थान ग्रहण कीजिये माननीय सदस्‍य। आसन पैरों पर है ... (व्‍यवधान) किसी का अंकित नहीं हो रहा है ... (व्‍यवधान) माननीय सदस्‍य, आसन पैरों पर। आप स्‍थान ग्रहण करें ... (व्‍यवधान) माननीय सदस्‍य, अंकित नहीं हो रहा है ... (व्‍यवधान)

श्री शंकर सिंह राजपुरोहित (आहोर): ***

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): ***

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): ***

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: मंत्रीजी को आप सुनना नहीं चाहते हैं, गलत बात यह। आप स्‍थान ग्रहण करिये। एक एक आदमी को सुनेंगे हम, बैठिये आप ... (व्‍यवधान) अब सुनिये पहले आप। जवाब नहीं सुनना चाहते हैं आप। आप स्‍थान ग्रहण कीजिये। सुनना नहीं चाहते आप ... (व्‍यवधान) माननीय सदस्‍य, आसन पैरों पर ... (व्‍यवधान)

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): ***

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): ***

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य ... (व्‍यवधान) माननीय सदस्‍य, आप बीच में क्‍यों बोल रहे हैं ... (व्‍यवधान) 

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ***

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): ***

श्री शंकर सिंह राजपुरोहित (आहोर): ***

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): ***

श्री अर्जुन सिंह देवड़ा (रानीवाड़ा): ***

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): ***

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, पहले आप स्‍थान ग्रहण करें ... (व्‍यवधान) सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य ... (व्‍यवधान) सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य, मैं आपसे सह निवेदन करना चाहता हूं आप 2004 का आदेश बता रहे हैं और 2004 के बाद तो काफी समय निकल चुका। माननीय मंत्री महोदय ने यह कहा कि हम इसके ऊपर पूरी कार्यवाही करेंगे, किसी प्रकार की कोई परमीशन देने की मंशा नहीं है ... (व्‍यवधान) 

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: इसके बाद की परमीशन का बता रहे हैं आपको। सुनिये आप बता देंगे ... (व्‍यवधान) तो सुनिये आप। माननीय मंत्री महोदय।

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, कहना तो बहुत कुछ चाहते हैं यह लेकिन घुमा फिराकर गौ हत्‍या पर लाना चाहते हैं। गौ हत्‍या न राजस्‍थान में हम जब तक हैं, हमारी गर्दन कट सकती है, गौ हत्‍या नहीं होगी चाहे कितनी कोशिश कर लें ... (व्‍यवधान) 

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): ***

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): ***

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): गौ हत्‍या नहीं होगी हमारी सरकार में ... (व्‍यवधान) वह सबसे पहले आप लेकर आये हो ... (व्‍यवधान) हम सुना रहे हैं उसके बावजूद भी सुनने को तैयार नहीं हैं ... (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य ... (व्‍यवधान) 

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): सरकार की नीयत आपकी तरह नहीं है, सरकार की नीयत बहुत साफ है। न पहले स्‍लाटर हाउस हमने अलाट किया, आपने 2000 में पहले  ... (व्‍यवधान) किया है ... (व्‍यवधान) 

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): *** 

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): कौन गुमराह कर रहा है ? कौन डिनाय कर रहा है? उसके बाद में रोका भी हमने है ... (व्‍यवधान) खानपुरा, मासेड़ी में सबसे पहले परमीशन आपकी सरकार ने दी है। सबसे पहले आपकी सरकार के टाइम पर हुआ है ... (व्‍यवधान) 2000 से पहले कभी था क्‍या इस प्रकार का ? आपकी सरकार ने किया ही क्‍यों ऐसा गलत काम ? आपने अगर गलत काम किया है उसको सुधारेंगे हम ... (व्‍यवधान) 

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य ... (व्‍यवधान) माननीय सदस्‍य, आप काहे के लिये बीच में बोल रहे हैं ... (व्‍यवधान) 

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): महीपाल जी, आपको पता नहीं है, 1996 में यह मिल गयी थी। उसके बाद यह लैंड अलाट 1996 में हो गयी थी। आपको जानकारी पूरी नहीं है। ... (व्‍यवधान)

 

ssy/usc/1320/1p

 

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, बीच में ना बोलें ।

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): महिपाल जी, आपको पता नहीं है । यह लैंड अलॉट 1996 में हो गयी थी । आपको पूरी जानकारी नहीं है और 2000 में आईडीसी ने स्‍लाटर हाउस के लिए परमीशन दी है । उसमें अगर क्‍लाज किया है और क्‍लाज चेंज करने से होता है...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): आप कोशिश करके इस सरकार की भी परमीशन की अगर प्रति ला देते हैं तो मैं इस्‍तीफा दे दूंगा ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य,बिराजें ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): ***

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: आपने बहुत समय ले लिया ।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: अब आप अपना स्‍थान ग्रहण कीजिये । आप दूसरे तरीके से   आयें । श्री मांगीलाल गरासिया ।

 

सर्व शिक्षा अभियान के अन्‍तर्गत कोटड़ा में कक्षा-कक्षों का निर्माण

श्री मांगीलाल गरासिया (गोगुन्‍दा): उपाध्‍यक्ष महोदय, आपने मुझे जो समय दिया उसके लिए धन्‍यवाद। मैं विधान सभा क्षेत्र गोगुन्‍दा की पंचायत समिति कोटड़ा का निवेदन करना चाहता हूं । कोटड़ा में भारत सरकार के माध्‍यम से शिक्षा का आमूलचूल परिवर्तन करने के लिए और कक्षा-कक्षों का निर्माण करने के लिए जो स्‍वीकृतियां जारी की गयी थी और राज्‍य सरकार के माध्‍यम से जिस तरह से सहभागिता प्राप्‍त करके स्‍वीकृतियां जारी करके सर्व शिक्षा अभियान को बढ़ावा देने का काम किया है। कोटड़ा का पूरा ही क्षेत्र दूरगामी क्षेत्र है और बिखरी आबादी का क्षेत्र है और उस क्षेत्र में बालकों की संख्‍या जिस तरह से बढ़ी और जिस तरह से जीर्ण अवस्‍था में कक्षा-कक्ष थे उनको ठीक करने के लिए और अतिरिक्‍त कक्षों का निर्माण किये जाने की स्‍वीकृतियां सर्व शिक्षा अभियान से करने के लिए हमें 50 स्‍वीकृतियां मिल गयी । वहां स्‍वीकृतियां मिलने के बाद में दस कक्षा-कक्षों की स्‍वीकृतियों का निरस्‍त कर दिया गया । बड़े अफसोस की बात है कि जो स्‍वीकृतियां निरस्‍त की गयी उनमें से प्राथमिक विद्यालय खेकरा, मगरा, बड़ला, गांधी सरना, पावटी खुर्द, कुंती का लेवा, कुकड़ा खेड़ा, पड़लाई और उच्‍च प्राथमिक विद्यालय बाढ़ेर, लुकड़, मांडवा यह निरस्‍त किये गये । यह क्‍यों निरस्‍त किये गये ? इसलिए मुझे खेद है कि जब कुछ स्‍कूलें निरस्‍त की गयी और जो कक्षा-कक्षों का निर्माण निरस्‍त किया गया और हमें अब 50 स्‍वीकृतियां मिल गयी थी सर्व शिक्षा अभियान के माध्‍यम से तो इनका निर्माण जो एसडीएमसी के माध्‍यम से किया जाना था वह उसके माध्‍यम से काम नहीं करके यह सभी सर्व शिक्षा अभियान में कक्षा-कक्षों का निर्माण और क्षतिग्रस्‍त विद्यालयों की मरम्‍मत करने के लिए सभी काम ठेके पर दिये गये । एसडीएमसी के माध्‍यम से काम होना था परंतु ठेके पर हुआ । उससे पहले भी कई कक्षा-कक्षों का निर्माण कार्य ठेके पर दिया गया ।

उपाध्‍यक्ष महोदय, तकलीफ मुझे इस बात की है कि सुलाव जो आजना फलां में विद्यालय है और उसमें 3 लाख 60 हजार की स्‍वीकृति मिली और जो ठेकेदार है कक्षा-कक्षों के निर्माण के लिये उसको ठेके पर दिया 2 लाख 60 हजार पर दे दिया गया और लाखों का उसमें घोटला करवाया गया । यही नहीं पड़ावली कलां में विद्यालय भवन निर्माण का काम जो स्‍वीकृति 3 लाख 60 हजार में मिला और उसमें वहां अध्‍यापक भूरसिंह है उसी को ठेके पर दिया गया और यह 2 लाख 75 हजार में दिया गया । यही नहीं मुण्‍डावली में रोहिला कलां जो है, पड़ावली कला का यह विद्यालय है उसमें मोहनसिंह जो ठेकेदार को उसको नियुक्‍त किया गया, उसको 3 लाख 60 हजार के बजाय 2 लाख 60 हजार के ठेके पर दे दिया । वास में राघूगा यह है इसमें 3 लाख 60 हजार की स्‍वीकृति मिली और इंद्रलाल को 1 लाख 50 हजार में ठेके पर दे दिया ।

उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय शिक्षा मंत्रि जी से निवेदन करना चाहता हूं कि इस तरह से कई विद्यालयों को ठेके पर देकर के बहुत बड़ा घोटाला किया गया था और यह जो 10 कक्षा-कक्षों के निर्माण कराने की स्‍वीकृतियां मिल गयी, 50 में से 10 को निरस्‍त किया और वह निरस्‍त इसलिए किया कि उनको जो 15 प्रतिशत कमीशन मिलने का मामला था वह तय नहीं हुआ और इस 15 प्रतिशत कमीशन को एसडीएमसी के लोगों ने मना कर दिया  कि काम को ठेके पर नहीं कराया जायेगा । उनको इसलिए निरस्‍त किया गया ।

उपाध्‍यक्ष महोदय, मुझे बड़ा अफसोस है कि इस तरह से सर्व शिक्षा अभियान में कक्षा-कक्षों के निमार्ण का कार्य कोटड़ा पंचायत समिति में, विधान सभा क्षेत्र गोगुन्‍दा में हो रहा है । वहां पर घटिया सामग्री का उपयोग हो रहा है और इस तरह से आने वाले टाइम में कक्षा-कक्षों का निर्माण किस तरह से हो जायेगा और वहां जो माल घटिया उपयोग में लिया जा रहा है उससे हमारे पढ़ने वाले बालिक-बालिकाएं उसके नीचे आ नहीं जायें, मुझे चिंता है इस बात की ।

श्री उपाध्‍यक्ष: ऐसे कौन आने देगा ।

श्री मांगीलाल गरासिया (गोगुन्‍दा): उपाध्‍यक्ष महोदय, यह हुआ है । उसमें कई तरह की तकलीफे हुई हैं । प्राथमिक विद्यालय भँवरा खेत का सर्व शिक्षा अभियान में काम किया गया । उन लोगों को पेमेंट नहीं किया, उन मजदूरों का भी पेमेंट नहीं किया गया । उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करूंगा कि ऐसे कार्यों की जब तक जांच नहीं की जायेगी तो यह आने वाले वक्‍त में उन बच्‍चों के हित में यह काम ठीक नहीं हो रहा है ।

श्री उपाध्‍यक्ष: आ गयी आपकी बात । कह दिया आपने जो कहना था ।

श्री मांगीलाल गरासिया (गोगुन्‍दा): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं कहना चाहूंगा कि यह जो 50 कक्षा-कक्षों के निर्माण में से 10 कक्षा-कक्षों को निरस्‍त किया गया । उसमें पुन: काम शुरू करवाया जाये और जिस तरह से घोटाले हो रहे हैं । वहां पर जो कमीशन के माध्‍यम से काम हो रहा है । ठेकेदारों के माध्‍यम से काम हो रहे हैं उससे आने वाले टाइम में बहुत बड़ा खामियाजा उस एरिये को भुगतना होगा ।

उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय शिक्षा मंत्रि जी भी यहां बिराज रहे हें, पंचायत मंत्रि जी यहां नहीं है । मैं उपाध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से सरकार से चाहूंगा कि इस तरह से जो भ्रष्‍टाचार फैल रहा है, मैं सरकार पर आरोप लगाता हूं कि इस तरह से भ्रष्‍टाचार को बढ़ावा मिल रहा है वह ठीक नहीं है । इसलिए पंचायत समिति कोटड़ा में जिस तरह से सर्व शिक्षा अभियान में जो काम हो रहा है ठेके के माध्‍यम से इस तरह से बहुत बड़ी तकलीफ मुझे और उस एरिये के लोगों को है । यह घपला कम नहीं है ।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, यह पूरी बात आ गयी । विस्‍तार से आ गयी   है ।

श्री मांगीलाल गरासिया (गोगुन्‍दा): लाखों रूपयों का घोटाला हो रहा है । उसे रोकने का काम करें । यह पूरा आदिवासी अंचल का क्षेत्र है ।

श्री उपाध्‍यक्ष: पूरी बात आ गयी ।

श्री मांगीलाल गरासिया (गोगुन्‍दा): मैं आपसे प्रोटेक्‍शन चाहूंगा, हमारी सरकार की और से मुझे जो उत्‍तर दिया है...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: आप बीच में नहीं बोलें ।

श्री मांगीलाल गरासिया (गोगुन्‍दा): उपाध्‍यक्ष महोदय, इसमें लाखों का मसला...(व्‍यवधान)

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): उपाध्‍यक्ष महोदय, यह उदयपुर संभाग से जुड़ा हुआ मामला है...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: बीच में नहीं बोलें...(व्‍यवधान)

 

jyg//2736/1330/1q

 

श्री मांगीलाल गरासिया (गोगुन्‍दा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मुझे सरकार की तरफ से उत्‍तर दिलाया जाए। ...(व्‍यवधान)...

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय मंत्रीजी उत्‍तर देंगे जरूरत होगी तो, आप बीच में न बोलें।

श्री मांगीलाल गरासिया (गोगुन्‍दा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आप इसकी जांच ए सी डी से कराएं या सदन की कमेटी बनाकर उससे जांच कराने की घोषणा करें। ...(व्‍यवधान)...

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, अब आप विराज जाएं। ...(व्‍यवधान)...

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं सरकार को धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि सर्व शिक्षा अभियान के तहत ...(व्‍यवधान)... ।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इसमें भ्रष्‍टाचार तो हुआ है। प्रधानाध्‍यापक ही वहां ठेका लेकर कक्षा कक्ष बनवा रहा है, सारा प्रमाण है, सरकार भ्रष्‍टाचार मिटाने की बात करती है और सरकार सुन रही है, 3 लाख का काम 2 लाख में हो रहा है, 1 लाख रुपए कमीशन का है। ...(व्‍यवधान)...

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): यही नहीं जहां 3 लाख 60 हजार रुपए का काम है और 1 लाख रुपए कमीशन का है, उस काम का क्‍या होगा? ...(व्‍यवधान)...

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य ने कह दिया न। ...(व्‍यवधान)...

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह गोगुन्‍दा विधान सभा क्षेत्र का ही मामला नहीं है, पूरे ट्राइबल सब प्‍लान एरिया में यही हालत चल रही है। इसके लिए प्रभावी तरीके से कोई कदम उठाए जाएं वरना आने वाले समय में पूरे सम्‍भाग में, जनजाति सम्‍भाग के बच्‍चों के भविष्‍य के साथ खिलवाड़ होगा। ...(व्‍यवधान)...

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य ने पर्ची के मार्फत ध्‍यान आकर्षित कर दिया इस पर, सरकार जो उचित होगी वह कार्यवाही करेगी। ...(व्‍यवधान)...

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): यह गोगुन्‍दा विधान सभा क्षेत्र का मामला नहीं है, पूरे राजस्‍थान का मामला है, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह आदिवासी क्षेत्र के बच्‍चों के साथ खिलवाड़ है। ...(व्‍यवधान)...

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्रीजी सदन की कमेटी बनाने की यहां खड़े होकर घोषणा करे।

श्री मांगीलाल गरासिया (गोगुन्‍दा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, हम शिक्षा मंत्रीजी से चाहेंगे कि घटिया सामग्री से जो निर्माण हो रहे हैं, वह गोगुन्‍दा में ही नहीं पूरे राजस्‍थान में हो रहे हैं, हालत बड़ी खराब है, हम आसन से चाहेंगे ...(व्‍यवधान)... ।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह पूरे राजस्‍थान की समस्‍या है, आप जनता के लिए आखिर क्‍या व्‍यवस्‍था कर रहे हैं? कक्षा कक्ष निर्माण में भ्रष्‍टाचार हो रहा है।...(व्‍यवधान)...  आपका एक मास्‍टर वर्षों से वहां ऐसे ही लगा हुआ है, इसलिए आप कोई शिक्षा की व्‍यवस्‍था कराएं। ...(व्‍यवधान)...

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, अंकित नहीं हो रहा है। कोई बात अंकित नहीं हो रही है।

श्री मांगीलाल गरासिया (गोगुन्‍दा): ***

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): ***

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): ***

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने कहा कि कोटड़ा में 50 कार्य हुए हैं, 50 नहीं आपके 111 कार्य स्‍वीकृत हुए हैं 107.55 लाख रुपए की लागत से। पूरे उदयपुर जिले में 1440 कार्य स्‍वीकृत हैं। जहां तक तीन-चार जगहों का आपने नाम लिया है, यह सही है कि तीन-चार जगहों पर जो काम स्‍वीकृत हुए थे, वह निरस्‍त हुए हैं उसका कारण भी मैं आपको बता देता हूं। एक काम खोकरा मगरा में हुआ, वह विद्यालय अस्तित्‍व में नहीं होने के कारण से हुआ। एक राजकीय प्राथमिक विद्यालय, बड़ला में हुआ, यहां भी विद्यालय अस्तित्‍व में नहीं होने के कारण से हुआ। और भी दो-तीन काम हुए हैं। लेकिन जो बात माननीय सदस्‍य ने कही, वह बहुत गम्‍भीर है। सारा काम जो कराना था वह शाला विकास समिति के माध्‍यम से होना था। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, सर्व शिक्षा अभियान में जो काम होता है उसमें राज्‍य सरकार का हस्‍तक्षेप नहीं है, इसकी सारी गाइड लाइन भारत सरकार के द्वारा सर्व शिक्षा अभियान में तय है, उसके अन्‍दर एक एस डी एम सी, स्‍कूल डवलपमेण्‍ट एण्‍ड मैनेजमेण्‍ट कमेटी का गठन होता है, उसमें 13 आदमी होते हैं, उसमें माननीय विधायकों द्वारा नियुक्‍त आदमी भी हैं।

कई माननीय सदस्‍य: नहीं हैं।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): सुनो तो सही। यह नियम है लेकिन इस नियम की जिन-जिन जगहों पर पालना नहीं हुई है ...(व्‍यवधान)... सुनो तो सही, आप सुनना चाहते हो?

समस्‍त जो नई प्राथमिक पाठशालाएं खुलेंगी, उच्‍च प्राथमिक पाठशालाएं खुलेंगी, उनमें जो निर्माण का काम होगा और जो शाला विकास समिति बनेगी उसमें एक-एक सदस्‍य माननीय विधायकों के द्वारा नियुक्‍त आदमी होगा। दूसरा, इन सारे की जांच होती है उसमें जो प्रधान होता है वह संस्‍था प्रधान होता है, वह जो प्रधानाध्‍यापक है वह होता है, सचिव उसका अध्‍यापक होता है और दो सदस्‍यों की नियुक्ति जन प्रतिनिधियों के कहने से होती है, उसमें एम एल ए और एम पी होते हैं। इसी प्रकार महिला सदस्‍य, एस सी और ए सटी के सदस्‍य की नियुक्ति भी होती है और कम्‍यूनिटी कंस्‍ट्रक्‍शन सहभागिता के आधार पर उसका काम कराया जाता है और उसको ब्‍लॉक लेवल पर देखने के लिए कनिष्ठ अभियंता नियुक्‍त है, डिस्ट्रिक्‍ट लेवल पर देखने के लिए सहायक अभियंता नियुक्‍त है और स्‍टेट लेवल पर देखने के लिए मुख्‍य अभियंता को नियुक्‍त कर रखा है, ये सब प्रतिनियुक्ति पर हमारे पास आए हुए हैं और जिला कलेक्‍टर की अध्‍यक्षता में कमेटी बनाई हुई है जो इन सारे कामों को देखती है। फिर भी कोटड़ा की जो आपकी शिकायत आई है ठेके पर देने वाली, वह मैंने नोट की है, कल सर्व शिक्षा अभियान की मीटिंग है और मैं चाहूंगा कि उसकी जांच भी मैं करा लूंगा और आगे से इस अभियान के अन्‍तर्गत बढिया कंस्‍ट्रक्‍शन हो उसके लिए जो भी समुचित व्‍यवस्‍था की जा सकती है वह कल डिमाण्‍ड पर बहस के जवाब देते समय इसकी व्‍यवस्‍था करने का पूरा प्रयत्‍न करूंगा।

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): माननीय मंत्रीजी, अन्‍य जिलों में भी है। उदयपुर और डूंगरपुर जिलों में भी है।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): सारे राजस्‍थान के लिए करेंगे।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): हां, माननीय मंत्रीजी, आज तक जो डाइरेक्‍शन आपने जारी किए हैं, एक भी जिले में, किसी भी स्‍थान पर किसी भी प्राइमरी स्‍कूल में इसकी इम्‍प्‍लीमेण्‍ट जिला कलेक्‍टर ने और किसी ने नहीं किया है।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): कल मैं डिमाण्‍ड पर शाला विकास समिति का ढांचा और कराए जाने वाले काम और भविष्‍य में इसकी किस प्रकार रूपरेखा बनाई जाए ताकि ठीक ढंग से आप लोगों की देखरेख में काम हो सके, इसकी व्‍यवस्‍था करूंगा और प्रदेश स्‍तर पर मैं आज ही एक सतर्कता प्रकोष्‍ठ के गठन की घोषणा करता हूं जो माननीय सदस्‍यों के द्वारा किसी भी विद्यालय भवन के बारे में शिकायत प्राप्‍त होगी तुरन्‍त उसकी जांच सात दिन में करने के आदेश और मुझे अवगत कराए, इसके लिए सतर्कता प्रकोष्‍ठ का गठन भी कर रहे हैं और कोटड़ा का आपने जो मामला उठाया है, उसकी विशेष जांच कराने का आपको निवेदन करता हूं। धन्‍यवाद।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): डी पी ई पी के माध्‍यम से भी काफी निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं, इस सम्‍बन्‍ध में भी आप कोई व्‍यवस्‍था कराएं। डी पी ई पी के ऊपर भी कोई चैक लगे। जनप्रतिनिधियों को भी आप कम से कम जानकारी तो दें कि आप कहां-कहां काम करा रहे हैं।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): वह दोनों शामिल हो जाएंगे, डी पी ई पी और सर्व शिक्षा अभियान। ...(व्‍यवधान)...

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): सारे अध्‍यापक एक ही काम करते हैं, पट्टियां खरीद रहे हैं, टेण्‍डर दे रहे हैं, इसको आप रोकें। ...(व्‍यवधान)...

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): कल मैं इसकी सारी रूपरेखा आपको बताऊंगा। ...(व्‍यवधान)...

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): वह बहस का विषय नहीं है।

श्री उपाध्‍यक्ष: यह बात बिलकुल सही है कि अभी तक जन प्रतिनिधियों को इस बात की सूचना नहीं थी कि जन प्रतिनिधियों के कहने से...।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): जन प्रतिनिधियों का मतलब उसमें डिफाइन नहीं है। मैं कह रहा हूं कि अब हम यह व्‍यवस्‍था करेंगे कि माननीय विधायकों के कहने से एक-एक आदमी, पंचायत के लोग होते हैं, जिला परिषद के लोग होते हैं, सब होते हैं, अध्‍यापक और सारे जो मिलकर नियुक्‍त करते हैं, कल सारी विस्‍तृत रूपरेखा बता देंगे।

माननीय सदस्‍य, इसमें मैम्‍बर होते हैं, एक प्रधानाध्‍यापक होता है अध्‍यक्ष, अभिभावकों की सभा द्वारा मनोनीत 3 सदस्‍य होते हैं, इनमें एक महिला है और एक एस सी और एक एस टी का होना आवश्‍यक होता है। इसी प्रकार निर्वाचित जन प्रतिनिधियों में पंचायती राज व्‍यवस्‍था के, नगरपालिका व्‍यवस्‍था के सदस्‍य, ब्‍लाक प्रारम्भिक शिक्षा अधिकारी द्वारा मनोनीत तीन सदस्‍य जिनमें भी एक महिला, एक एस सी और एक एस टी का होता है। इसी प्रकार राज्‍य और सम्‍भागीय, जिला स्‍तर पर सम्‍मानित सर्वाधिक राशि देने वाले भामाशाह भी होते हैं, एक उनमें से होता है, संस्‍था प्रधान द्वारा सदस्‍य मनोनीत होता है, कुल मिलाकर एम एल ए और एम पी द्वारा भी इसके अन्‍दर व्‍यवस्‍था हो तो कल मैं सारी व्‍यवस्‍था करके आपको बता दूंगा ताकि ...।

श्री मांगीलाल गरासिया (गोगुन्‍दा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, वहां पर खुद संस्‍था प्रधान है उसी ने ठेका ले लिया है।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): यह अलग मामला है, इसकी जांच भी करा लेंगे, संस्‍था प्रधान ठेका ले नहीं सकता, यह बात जो कही...। ...(व्‍यवधान)...

श्री मांगीलाल गरासिया (गोगुन्‍दा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, सबकी जांच कराने की घोषणा कराएं।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): हां, करा देंगे।

श्री उपाध्‍यक्ष: शिकायत जहां होगी, वहां सब जगह जांच होगी, जहां शिकायत होती है वहां जांच तो होती ही है। ...(व्‍यवधान)... श्री बाबूसिंह राठौड़।

 

पश्चिमी राजस्‍थान में गौशालाओं को अनुदान व अकाल राहत के कार्य

 

श्री बाबूसिंह राठौड़ (शेरगढ़): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, अभी जो अकाल घोषित हुआ है विशेषकर पश्चिम राजस्‍थान में, बाड़मेर, जैसलमेर और जोधपुर जिलों में अधिकतर जगहों पर 90 से 10 प्रतिशत तक अकाल घोषित हुआ है। मैं आपसे निवेदन करना चाहूंगा कि सीमावर्ती जिलों में, जोधपुर जिले में भी सभी जगह जहां मुख्‍य व्‍यवसाय पशुपालन है, इस वजह से वहां पर गौशालाओं को अनुदान मिलना चाहिए और वह अनुदान आज दिन तक नहीं मिल रहा है। मैं राज्‍य सरकार का आभार व्‍यक्‍त करना चाहूंगा कि पिछले अकाल के समय में गौशालाओं और कैटल कैम्‍पों को जो अनुदान राशि दी जा रही थी उसके अन्‍दर बड़े पशुओं को 12 से 18 रुपए और छोटे पशुओं के लिए 9 से 18 रुपए अनुदान किया।

 

27.03.06/13.40/gpc/akt/2a

 

अब मैं यह निवेदन करना चाहूंगा कि पशुपालन जिनका व्‍यवसाय है और हालत यह है कि रेगिस्‍तान के अंदर आंधियां चल रही हैं, गर्मियां पड़ रही है, पशुओं की हालत दयनीय है। इसलिए मैं निवेदन करना चाहूंगा कि जहां अकाल है वहां पर पशु शिविर, केटल कैम्‍प खोलकर पशुओं को बचाने की कार्यवाही सरकार को अविलम्‍ब करनी चाहिए और जहां पर अकाल नहीं है वहां पर जो गौशालाएं हैं उन गौशालाओं को सरकार की तरफ से अनुदान 1 अप्रैल से शीघ्र देना चाहिए जो अनुदान अभी नहीं मिल रहा है। दूसरा निवेदन मैं यह करना चाहूंगा कि जो चारा डिपो अभी खुले हैं उन चारा डिपो के अंदर 50 हजार रुपये बिना ब्‍याज देने की घोषणा हुई है, लेकिन अभी वह 50 हजार रुपये चारा डिपो के लिए नहीं मिल रहा है उसके लिए भी शीघ्र घोषणा होनी चाहिए।

मैं आपसे निवेदन करना चाहूंगा कि जो अकाल राहत के काम पूर्व में चले हैं उनमें व्‍यक्तिगत लाभ योजना के कार्य करवाये जाने चाहिए। उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे कहना चाहूंगा कि पिछली बार अकाल राहत में बहुत जोरदार काम हुआ है और बहुत ही अनुशासित तरीके से काम हुआ, उस काम के अंदर जितना गेहूं पिछले वर्ष दिया गया उससे पहले अकाल में इतना गेहूं नहीं दिया गया और इतने अकाल राहत कार्य नहीं खोले गये। मैं आपसे निवेदन करना चाहूंगा कि जितने काम और गेहूं नाडियां खोदने के लिए दिये गये हैं, नाडियों पर जितना गेहूं दिया गया उतनी तगारी रेत नहीं डाली। इसलिए मैं आपसे निवेदन करना चाहूंगा ज्‍यादातर व्‍यक्तिगत लाभ योजना के कार्य दिये जाने चाहिए जो पूर्व में ऐसे कार्य किये जा चुके हैं। मैं आपसे निवेदन करना चाहूंगा व्‍यक्तिगत लाभ योजना में जैसे टीनशैड के कार्य हैं, टांके के कार्य हैं, मकान बनाने के कार्य हैं। उपाध्‍यक्ष महोदय, हमारे वहां कई जगह अधिकतर गर्मी पड़ने की वजह से आग स्‍वत: लगती है और जो कच्‍चे झूंपे हैं, कच्‍ची ढाणियां हैं उनकी पूरी-पूरी ढाणियां जल जाती हैं1 मैं आपसे निवेदन करना चाहूंगा पूर्व में जो अकाल राहत में व्‍यक्तिगत लाभ योजना के काम हुए हैं टांके के अंदर 18 क्विंटल गेहूं श्रम मद में दिया है और सामग्री मद जो मैटेरियल कंपोनेंट होता है वह व्‍यक्ति ने स्‍वयं ने वहन किया है। इस प्रकार टीनशैड और मकानों के अंदर भी 36 क्विंटल गेहूं श्रम मद से दिये हैं और आगे सामग्री मद का पैसा है वह व्‍यक्ति स्‍वयं देता है। इसलिए मैं निवेदन करना चाहूंगा कि गेहूं तो 18 क्विंटल, 36 क्विंटल, 40 क्विंटल हर घर में गया है, लेकिन वह दिख नहीं रहा है। मुख्‍यमंत्रीजी की भी घोषणा है, उनकी अपील है, उनका आह्वान है कि स्‍थायी परिसम्‍पत्तियों का निर्माण होना चाहिए। ऐसे समय में व्‍यक्तिगत लाभ योजना जैसे टांके हैं, टीनशैड हैं अगर वे काम दिये जाएंगे तो वे नजर आएंगे। इसलिए मैं आपसे निवेदन करना चाहूंगा कि श्रम मद में आप अकाल राहत के व्‍यकितगत लाभ योजना के काम कर दें और सामग्री मद व्‍यक्ति खुद उठाने के लिए तैयार है। अकाल राहत के अंदर प्‍लांटेशन के कार्य भी अगर आप कराएं तो प्‍लांटेशन से भी अच्‍छा कार्य होगा। मेरा आपसे दूसरा निवेदन है कि अभी आपने जोधपुर जिले के लिए 17 हजार लेबर पक्‍के कार्यों में डवटेल करने के लिए दी है। अब उस 17 हजार में से केवलमात्र 4 हजार श्रमिक अभी लगे हुए हैं। वे चार हजार श्रमिक इसलिए लगे हुए हैं कि आपने पूर्व में जितने काम चल रहे थे वे अकाल राहत के कार्य जिसमें श्रम मद होता है कुशल और अकुशल श्रमिक वह पूरा श्रम मद जिसमें 40-50 परसेंट लम्‍प सम होता है पूरा देते थे। इस वजह से लेबर लगती थी। अब आपने उसमें अकुशल को कम कर दिया, अकुशल दे रहे हैं और कुशल को नहीं दे रहे हैं इस कारण से चार हजार है। अगर कुशल और अकुशल दोनों श्रमिक देते तो 17 हजार पूरी लेबर अभी काम कर रही होती। पिछले जितने अकाल राहत के कार्य हुए हैं ..(व्‍यवधान).. डेगाना से आने वाले माननीय विधायक महोदय, यह गंभीर मुद्दा है, मंत्रीजी बैठे हैं, मेरी बात सुन रहे हैं आप बाद में बात करना, आपका भी इसमें मुद्दा शामिल है। मैं आपसे निवेदन करना चाहूंगा कि पिछले वर्ष 2005-06 में मेरे पास 18 लाख रुपये एमएलए लैड में थे। अब 18 लाख को 31 दिसम्‍बर तक डवटेल करके उसकी स्‍वीकृतियां पूर्व की भांति निकाल दी गईं। उसमें कुल कार्य लागत 30 लाख के कार्य निकाले। अब 30 लाख में 12 लाख रुपये उसमें पूरे डवटेल किये गये थे। आपके यहां से एक पत्र गया और वह पत्र 18.1.2006 का है वह आपदा प्रबंधन और सहायता विभाग से है। ‘’राहत कार्य संवत 2062, अंतर्गत कुशल श्रमिकों के भुगतान बाबत। महोदय, उपरोक्‍त विषयान्‍तर्गत लेख है कि कई जिला कलक्‍टर वर्तमान डवटेल नीति अंतर्गत चल रहे कार्यों में कुशल श्रमिक निर्माण कारीगर की दरों बाबत विभाग से स्‍पष्‍टीकरण चाहते रहते हैं विभाग द्वारा जारी राहत कार्य निर्देशिका में केवल अकुशल श्रमिकों की दरों बाबत स्थिति दी गई है वह राहत कार्य नीति में इन्‍हें भी लाभान्वित करने का प्रावधान है। पक्‍के कार्यों में कुशल श्रमिक कारीगर को देय राशि संबंधित विभाग द्वारा सामग्री मद से वहन की जाएगी। राहत मद अंतर्गत कुशल श्रमिक को भुगतान देय नहीं है।‘’ यह पत्र दे दिया और हमारे सेंक्‍शन निकल गई। उस 30 लाख की कुल लागत में से 3 हजार रुपये अकुशल को देंगे, अब 9 लाख रुपये बच गये। अब उसका भुगतान कहां से होगा? तीन महीने से जनवरी, फरवरी, मार्च का तीन महीने का काम रुका हुआ है। मैं आपसे निवेदन करना चाहूंगा कि पूर्व की भांति जब अकाल राहत में पूरा डवटेल हो रहा था उसी हिसाब से काम निकाले हैं और उन कामों को बंद कराने के लिए लेटर दे दिया और उसका एक पत्र और जाता है 23.1.2006 को जिसमें आपदा प्रबंधन सहायता विभाग लिखता है- ‘’राहत कार्य संवत 2062 अंतर्गत मरम्‍मत कार्य स्‍वीकृत करने बाबत। महोदय, उपरोक्‍त विषयान्‍तर्गत लेख है कि आपदा प्रबंधन एवं सहायता निर्देशिका दिनांक 1.9.2005 के बिन्‍दु संख्‍या 3.3.2 के अंतर्गत राज्‍य की सम्‍पत्तियां सृजित करने का प्रावधान है। अब उक्‍त बिन्‍दु अंतर्गत राजकीय स्‍कूलों में मरम्‍मत के कार्य भी कराये जा सकते हैं बशर्ते कि मैटेरियल कंपोनेंट स्‍कूल या किसी अन्‍य योजना, चाहे एमएलए, एमपी या दूसरी योजना से स्‍वीकृत कराएं जाएं। श्रम घटक राहत मद से देय होगा, पूरा श्रम घटक। अब यह और आदेश निकला। पहले आदेश की वजह से हमारे अधिकारी भयभीत हैं और हमने जब इन स्‍कूलों की मरम्‍मत के कार्य और स्‍कूलों में कमरे बनाने के काम निकाले हैं और 31 दिसम्‍बर से पहले उन कामों को इन्‍होंने रोक दिया, जैसे नाथरू में चारदीवारी फेंसिंग कार्य है, बन्‍नौ के बास में मरम्‍मत कार्य है, लोड़ता असलावता में मरम्‍मत कार्य है, नाथरोल के राजकीय उच्‍च माध्‍यमिक विद्यालय में मरम्‍मत और रंग-रोगन का कार्य है। मरम्‍मत कार्यों में यह पूरा डवटेल कर नहीं रहे हैं। इसलिए मेरा आपसे निवेदन है कि पहले जितने काम हुए हैं उन कार्यों के अंदर 7.5.2005 को चामू में सार्वजनिक सभा भवन सहित बाबूराम चौधरी स्‍मारक के पास इसके अंदर परियोजना की कुल लागत सवा लाख थी, सामग्री राशि से 71 हजार दिये गये और श्रम राशि से 47 हजार, उसमें कुशल और अकुशल दोनों श्रमिक दिये गये। इस प्रकार के काम हुए हैं। जितने काम पिछले वर्ष हुए हैं उसके अंदर पूरे कार्य आपके समय में पूरे कुशल और अकुश्‍ंल देते हुए पूरे श्रम मद राहत कोष में से दिये हैं और शेष राशि हमने मैटेरियल कंपोनेंट में एमएलए लैड, एमपी लैड या अन्‍य योजनाओं में से दी है। यह इतनी लंबी-चौड़ी लिस्‍ट है इस लिस्‍ट के माध्‍यम से हमने पिछली बार अकाल राहत के कार्य कराये हैं और जैसे आपकी मंशा है, मुख्‍यमंत्रीजी की मंशा है कि स्‍थायी परिसम्‍पत्तियां बनें ऐसी अपील है, ऐसा आह्वान है, इस वजह से हमने सारे काम दिये और उसकी वजह से इतने अच्‍छे काम हुए, समय पर काम हुए और आपको अकाल राहत का पैसा आज दिख रहा है जिसके अंदर बोर्ड लगता है एमएलए लैड प्‍लस अकाल राहत। यह आपका काम दिख रहा है और बाकी कितने काम नाडी के नहीं हुए। मैं कहना चाहता हूं पुरानी जितनी नाडियां हैं उनमें पानी ठहरता है, चि‍कनी मिट्टी है, उसको खोद दिया गया है, पानी रुकता नहीं है। अब स्थिति नाडियों में बराबर नहीं है। अच्‍छे तालाब खोदे जाएं। मैं चाहूंगा आप ज्‍यादा से ज्‍यादा पक्‍के कार्यों में दें। दूसरा मेरा आपसे निवेदन है कि अभी जो स्‍वीकृतियां निकली हैं 31.12.2005 को अकाल राहत का जो पैसा बचा था उसमें ये स्‍वीकृतियां निकली, राजकीय माध्‍यमिक विद्यालय, चाबा में एक हाल और बरामदा सामग्री राशि 83 हजार, श्रम की राशि 42 हजार। इसी प्रकार से गोस्‍वामी बाबा मंदिर के पास सामुदायिक सभा भवन सामग्री राशि 80 हजार और श्रम की राशि 45 हजार। सार्वजनिक सभा भवन नाहरसिंहनगर में 79 हजार सामग्री और श्रम में 46 हजार। इस प्रकार के काम काफी हमारे निकले हैं। इसी प्रकार 31.12 को और स्‍वीकृतियां निकलीं और कुछ काम ऐसे हैं जो टीएफसी मद से निकाले हैं, एम पी लैड के काम भी निकाले हैं। टीएफसी मद में 31.12.2005 को करीबन 93 कार्य स्‍वीकृत किये गये और गुरु गोलवलकर में 31 दिसम्‍बर तक डवटेल होकर कार्य निकाले हैं। अब यह आदेश आने से जो काम चल रहे हैं उन कामों के अंदर कुशल को अलग करके अकुशल को मजदूरी देने का वापस यहां से वायरलैस गया है इसलिए यह असमंजस की स्थिति हो गई है। मैं आपसे निवेदन करना चाहूंगा (समय समाप्ति सूचक घण्‍टी) गंभीर मुद्दा है और आपके जिले में भी अकाल राहत के काम चल रहे हैं, मुझे यह स्‍पष्‍ट करने दीजिए।

श्री उपाध्‍यक्ष:  आ गई बात, सारी आ गई।

श्री बाबूसिंह राठौड़ (शेरगढ़): अकाल राहत के अंदर भी आपदा प्रबंधन एवं सहायता विभाग ने लिखा है राहत कार्य प्रारंभ करने से पूर्व यह सुनिश्चित किया जाए जहां तक संभव हो कार्य स्‍थायी प्रकृति के संपादित हों जिनके लिए सामग्री अंश की व्‍यवस्‍था अन्‍य विभिन्‍न योजनाओं की राशि से डवटेल करके की जाए क्‍योंकि राहत प्रबंधन में सामग्री अंश, श्रम अंश की राशि उपलब्‍ध कराये जाने की व्‍यवस्‍था है। सामग्री राशि अन्‍य विभागों, योजनाओं से डवटेल करने से कार्यों की संख्‍या भी बढ़ जाती है एवं स्‍थायी प्रकृति के कार्य संपादित किये जाते हैं। डवटेल व्‍यवस्‍था में संपूर्ण श्रम राशि जिसमें 25 प्रतिशत नकद श्रम भुगतान एवं शेष 25 प्रतिशत श्रम भुगतान एसजीआरवाई के गेहूं में किया जाता है। इस प्रकार डवटेल में पूरा लिखा है। दूसरा यह भी लिखा है कि स्‍थानीय निकाय, सहकारिता विभाग, बोर्ड, राजकीय उपक्रम, अन्‍य राजक्रीय उपक्रम आदि स्‍थायी सम्‍पत्तियां अभावग्रस्‍त क्षेत्रों में बनायी जा सकती हैं, परंतु इन कार्यों में लगने वाली समस्‍त सामग्री राशि संबंधित डवटेल अभिकरण को स्‍वयं के मद से वहन करनी पड़ेगी। राहत कार्यों के अंतर्गत उनके श्रम भुगतान में 76 प्रतिशत भाग गेहूं के रूप में एसजीआरवाई के गेहूं में और 25 प्रतिशत नकद भुगतान दिया जाएगा।

श्री उपाध्‍यक्ष:  माननीय सदस्‍य।

श्री बाबूसिंह राठौड़ (शेरगढ़): मैं आपसे निवेदन करना चाहूंगा एक और पूर्व में सेंक्‍शन निकाली गई है राहतकार्यों के अंतर्गत पटवार घर, प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र, उप स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र, राजकीय भवनों में पूरी श्रम मद राहत मद में से दी जाती है। 7 नम्‍बर में यह लिखा है कि सांसद, विधायक क्षेत्रीय विकास योजना के कार्य जिसमें सामग्री मद हेतु पूरी राशि उक्‍त योजना से प्राप्‍त हो सके तथा श्रम राशि अकाल राहत से व्‍यय होगी।

 


mlb/akt/2b/1350/27.3.2006

 

इसमें भी लिख्रा है, अब मैं आपसे निवेदन करना चाहूंगा कि एक और इसमें लिखा है कि जहां ऊँट गाड़ी है उनको श्रम के अन्‍दर मानते हुए ग्रेवल सड़कें बनाई जाएंगी उसके अन्‍दर भी हमारी स्‍वीकृतियां निकली हैं और उसके अन्‍दर ऊँट गाड़ी को मानव दिवस मानते हुए जैसे ऊँट गाड़ी मानव 133 दो सौ रुपये के हिसाब से 26,600 और कुल लागत आती है एक लाख 32 हजार, 3 किलोमीटर में 3 लाख 96 हजार यह पूरा का पूरा श्रम में से दिया जाता है, इससे हमारे वहां ग्रेवल सड़कें बनती हैं और नजदीक होने से ऊँट छकड़े लेकर के काम होता है और ऊँट छकड़े की वजह से पूरे श्रम का पैसा देकर वह ग्रेवल सड़कें बनती हैं जहां पर लोगों के चलने का रास्‍ता आसान होता है इसलिए मैं आपसे निवेदन करना चाहूंगां कि आगे भी लिखा है कि जिन जिला में बैल ऊँट गाड़ी उसका भी है तो ऊँट लिखा है। ...(व्‍यवधान)... और दूसरा मेरा आपसे निवेदन है कि .....

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य , आपको मौका मिलेगा।

श्री बाबूसिंह राठौड़ (शेरगढ़): यह पूरा मैं आपसे निवेदन करना चाहूंगा कि ..

श्री उपाध्‍यक्ष: आप अकाल पर चर्चा कर लें। ...(व्‍यवधान)...

श्री बाबूसिंह राठौड़ (शेरगढ़): अकाल राहत का काम है, मैं आपसे निवेदन करना चाहूंगा,माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, कि अभी तक अकाल राहत के काम गांवों में खुले नहीं हैं, वहां की स्थितियां खराब हैं, वहां पर अनुदान भी मिलता है और लेबर सिलिंग सीमा भी आपको बढ़ानी चाहिए और एक तारी से आपको अकाल राहत के काम शुरू कराने चाहिए, यह मेरा आपसे निवेदन रहेगा और जो कुछ भी हमारा काम है अभी एक अप्रैल से एमएलए और एमपी लेड का पैसा और आएगा, अगर आप अपनी राशि में से राजस्‍थान सरकार के अकाल राहत आपदा कोष में से दे देंगे तो काम ज्‍यादा हो सकेंगे, पक्‍के काम होंगे, मेरा आपसे निवेदन है कि पूर्व में भी एक बार शून्‍यकाल में पर्ची लगाई खुशवीर सिंह जी खारची से आने वाले सदस्‍य ने तो आपने कहा कि सीआरएफ के निर्देश आए हैं, अब सीआरएफ के निर्देश तो पहले से हैं लेकिन मैं आपसे कहना चाहूंगा कि डवटेल तो हमेशा होते रहे हैं, चाहे राज कांग्रेस क रहा है, चाहे बी.जे.पी. का रहा है लेकिन पूरा पैसा श्रम की पूरी  लेबर कम्‍पोनेंट देते थे, मेटेरियल कम्‍पोनेंट यहां से होता था, अगर आप पक्‍के निर्माण की स्‍थाई परिसम्‍पतियां करना चाहते हैं तो पूरी लेबर सीमा, आपके कोष में से अगर आपके पास पैसा बचा है या कैसे भी व्‍यवस्‍था कराएं, यह मेरा निवेदन है और मैं आपको एक सूचना देना चाहूंगा , एक और सूचना है, उपाध्‍यक्ष महोदय!

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, अकाल पर चर्चा होगी।

श्री बाबूसिंह राठौड़ (शेरगढ़): अभी यहां पर राजस्‍थान राज्‍य राशन विक्रेता महासंघ का बाहर प्रदर्शन  और रैली चल रही है, उस रैली के अन्‍दर डीलर्स आए हैं, वह केरोसिन तेल कमीशन बढ़ाने की बात कर रहे हैं, गेहूं पर प्रति क्विंटल कमीशन बढ़ाने की भी बात कर रहे हैं, अकाल राहत गेहूं पर एक परसेंट छीजत दिलवाने सहित कई मुद्दों पर प्रदर्शन चल रहा है, कई मुद्दे हैं इसलिए मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहूंगा कि अब बहुत जल्‍दी एक अप्रैल से ही क्‍योंकि 5 तारीख को इसकी चर्चा होगी। ...(व्‍यवधान)... तो 5 तारीख के बाद में 11 तारीख को पखवाड़ा होगा उससे काम चालू होगा लेकिन आज ही  यहां घोषणा कर दो कि एक तारीख को लेबर सीमा बढ़ेगी, व्‍यक्तिगत लाभ योजना के काम होंगे और आपके पक्‍के कार्यों में सर्व मद लेकर कम्‍पोनेंट पूरा दिया जाएगा। जय हिन्‍द जय भारत।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): मंत्री महोदय, यह तो राजस्‍थान के इतिहास में पहली बार हो रहा है।

श्री बाबूसिंह राठौड़ (शेरगढ़): मंत्री महोदय जवाब दीजिए।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): तो हम तो आपसे चाहेंगे कि यह सभी माननीयउ सदस्‍यों का मुद्दा है, हम दो सदस्‍यों कां ही नहीं है तो कृपया करके अगर आप घोषणा करते हैं तो इससे बढ़कर और कोई अकाल राहत के लिए अच्‍छा कार्य नहीं होगा। ...(व्‍यवधान)...

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): मंत्री महोदय, कुछ पक्ष में जवाब दीजिए। ...(व्‍यवधान)...

श्री उपाध्‍यक्ष: पूरा बहस का समय दिया जाएगा। ...(व्‍यवधान)...

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): उपाध्‍यक्ष महोदय, मंत्री महोदय, जवाब देना चाह रहे हैं। ...(व्‍यवधान)...

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): उपाध्‍यक्ष महोदय, दो मिनट का समय लगेगा मंत्री महोदय विराजमान हैं। ...(व्‍यवधान)...

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): योग्‍य मंत्री हैं। ...(व्‍यवधान)...

श्री उपाध्‍यक्ष: कुछ कहना है क्‍या मंत्री महोदय, मंत्री महोदय क्‍या जवाब देते हैं? ...(व्‍यवधान)...

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): अगला नाम पुकार लिया आपने और फिर कह रहे हैं, जवाब दे रहे हैं तो सभी माननीय सदस्‍य जो पर्ची पर बोले हैं कृपया आप सब का जवाब दिलवा दें। ...(व्‍यवधान)...

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): मंत्री महोदय, हमारा इतना निवेदन तो स्‍वीकार करिए आप। आप जो एक पक्ष में आदेश जारी कर रहे हैं, उस आदेश की जानकारी सदन में आ जाए। ...(व्‍यवधान)...

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय मंत्री महोदय, आप, अकाल पर पूरी चर्चा होगी, उसमें सारी बातें आ जाएंगी। ...(व्‍यवधान)...

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): एक घोषणा तो मैं कर ही देता हूं, बाकी बाद में जवाब दे दूंगा अकाल के दिन एक अप्रैल से जो लेबर हम लगा रहे हैं वह है संख्‍या 8 लाख कच्‍चे कामों के लिए, अजमेर में 50 हजार, अलवर में 4 हजार, बांसवाड़ा में 60 हजार।

श्री उपाध्‍यक्ष: यह कहीं गड़बड़ हो जाएगी।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): बारां में 9 हजार 500, बाड़मेर में 71 हजार, भीलवाड़ा में 45 हजार, बीकानेर में 45 हजार, चित्‍तौड़गढ़ में 33 हजार, चूरू में 45 हजार, डूंगरपुर में 60 हजार और गंगानगर में 4 हजार, हनुमानगढ़ में 3 हजार, जयपुर में 26 हजार, जैसलमेर में 53 हजार, जालौर में 37 हजार, जोधपुर में 60 हजार, नागौर में 38 हजार, पाली में 45 हजार, राजसमंद में 40 हजार, सीकर में 7 हजार, सिरोही में 3500, उदयुपर में 61 हजार, इस ढंग से 8 लाख लेबर एक अप्रैल से काम चालू करेंगी।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री सांगसिंह भाटी।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): मंत्री महोदय, मुख्‍य बात भी बता दें, यह पक्‍के कामों वाली, हम आपसे उम्‍मीद रखते हैं, आप योग्‍य कागिल मंत्री हैं।

श्री बाबूसिंह राठौड़ (शेरगढ़): काम रूके हुए तीन महीने हो गये उनको भुगतान नहीं हुआ 1 ...(व्‍यवधान)...

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): और हमें आप पर पूरा विश्‍वास है।

श्री बाबूसिंह राठौड़ (शेरगढ़): तीन महीने से मंत्री महोदय, काम बंद पड़े हैं, आपसे निवेदन है कि पक्‍के कार्यों को पूरा करवाया जाए। ...(व्‍यवधान)...

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): हमारे सोजत से आने वाले सदस्‍य भी यही चाहते हैं।

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): सभी सदस्‍य पैसे लिए बैठे हैं, आप इसकी घोषणा करेंगे डवटेल इसका लेबर स्‍कील्‍ड और अनस्‍कील्‍ड दोनों को जोड़ेंगे तो राशि आपके यहां पर ज्‍यादा आएगी, सब सहयोग करने को तैयार हैं।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री जी का ध्‍यान आकर्षित करवाना चाहता हूं कि ..

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): मंत्री महोदय जवाब दे दें, आप तो हमें आपसे पूरी उम्‍मीद है।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): कच्‍चे काम हैं इनका कोई रिजल्‍ट नहीं आता जीरो परसेंट भी तो आप पक्‍के काम करवाइए ताकि राजस्‍थान के हित में रहें ये पक्‍के कार्य 1 ...(व्‍यवधान)... यह मिट्टी तो हवा में उड़ गई, पानी में बह गई। ...(व्‍यवधान)... यह सारा घोटाला होगा और फर्जी मस्‍टर-रोल भरे जाएंगे, होना जाना कुछ नहीं है। ...(व्‍यवधान)...

श्री बाबूसिंह राठौड़ (शेरगढ़): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, पक्‍के कार्यों के लिए नोटों की बात करें। ...(व्‍यवधान)... तीन महीने से काम बंद पड़े हैं और भुगतान नहीं हो रहा है, उनकी पक्‍के कामों की अगर घोषणा कर देंगे आप। ...(व्‍यवधान)...

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): मंत्री महोदय घोषणा करें। ...(व्‍यवधान)...

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं पांच तारीख को विस्‍तृत जानकारी देकर घोषणा कर दूंगा। ...(व्‍यवधान)...

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी ने यह कहा कि एक तारीख को काम शुरू करेंगे और आज कह रहे हैं कि पांच तारीख को घोषणा करूंगा, आपने स्‍वयं ने कहा माननीय मंत्री जी कि एक तारीख को कच्‍चे काम शुरू किए जाएंगे राजस्‍थान में और आप अपनी बात से मुकर रहे हो कि पांच तारीख से शुरू करेंगे। ...(व्‍यवधान)... एक तारीख को काम क्‍यों नहीं शुरू करते हो? ...(व्‍यवधान)...

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): उन्‍होंने मेटेरियल कम्‍पोनेंट सकी बात करी है। ...(व्‍यवधान)... देवल जी, यह तो एक अप्रैल से हो ही रहे हैं। ...(व्‍यवधान)... साहब, दो मिनट बिराज जाएं। आपने बड़ी जिद की थी कि जो दूसरी स्‍कीम्‍स हैं उससे आप डवटेल करके काम कर रहे हैं और कच्‍चे काम नहीं हो रहे हैं, आपकी जिद के कारण हमने यह घोषणा की है कि एक अप्रैल से काम चालू हैं तो यह तो हो ही गये, आदेश चले गये हमारे। ...(व्‍यवधान)...

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): अभी आपने कहा कि पांच तारीख को करेंगे।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): बाकी जो बात उन्‍होंने बताई थी न राठौड़ साहब ने उन्‍होंने जो दूसरी बात कही है कि पक्‍के काम और किस ढंग से हो सकते हैं।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): आप पक्‍के काम करें कि नहीं करें गरीब को मजदूरी मिलनी चाहिए हमारा मतलब यह है, अगर सरकार के पास पैसे नहीं हैं तो आप पक्‍के काम कराइए। ...(व्‍यवधान)...

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): यही तो कह रहा हूं, ये खिलाफत कर रहे हैं क्‍या आपकी ? आपकी बात को सपोर्ट ासयनहीं कररहे हैं। ...(व्‍यवधान)...

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): उपाध्‍यक्ष महोदय, ना कोई गरीब का भला होगा, फर्जी मस्‍टर-रोल भरे जाएंगे। ...(व्‍यवधान)...

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): आप जैसे व्‍यक्तित्‍व से हमको उम्‍मीद है। ...(व्‍यवधान)...

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): उपाध्‍यक्ष महोदय, ना तो पहले कभी हुआ है और ना होने रवाला है, जो भी काम अकाल राहत के हों वह स्‍थाई सम्‍पति के हों और पक्‍के कार्य होने चाहिए। फर्जी मस्‍टर-रोल ना भरे जाएं। ...(व्‍यवधान)...

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): और वह मजदूरी पक्‍के कामों के माध्‍यम से ही मिल सकती है इसलिए माननीय मंत्री जी, इन बिचौलियों की बात पर ध्‍यान नहीं दें और आप काम कराएं। ...(व्‍यवधान)...

सीमान्‍त क्षेत्र के खेतों में बिछी माइंस से हुई क्षति का मुआवजा

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका ध्‍यान एक सीमांत क्षेत्र के गरीब किसान परिवार आज से कम से कम तीन साल पूर्व जब भारत पाक सीमा पर अशांति पैदा हुई उस समय आर्मी द्वारा सीमांत क्षेत्र में माइंस बिछाई गई, बम बिछाये गये और जब वापस शांति स्‍थाई हुई तो बमों को वापस निकाला गया लेकिन आर्मी की चाहे लापरवाही कह दें, चाहे धोरों की धरती पर रेत आने के कारण आर्मी को नहीं मिले, इस ढंग से बम एक किसान के खेत में गढ़ा हुआ रहा, खाजूवाला क्षेत्र में चक 25 केवाईडी में।

skp/akt/27.3.06/1400/2c/1

 

सत्‍तू सिंह पुत्र प्रेम सिंह कुम्‍हार, उसका लड़का ट्रेक्‍टर चला रहा था उसके ट्रेक्‍टर के टुकड़े-टुकड़े हो गये, उसका एक हाथ चला गया। जान उसकी बच गई लेकिन दुर्भाग्‍यपूर्ण साढ़े तीन वर्ष पहले की बात है, किसान हक की बात करने वाले मेरे साथी, प्रतिपक्ष के नेता उस समय सत्‍ता में बैठे थे और किसानों की आज हमदर्दी करने वाले साल-डेढ़ साल उनको किसी भी तरीके की कोई सहायता नहीं मिली। इसलिए माननीय मंत्री महोदय विराजे हैं, उपाध्‍यक्ष महोदय, यह बहुत गंभीर मुद्दा है और मैं आज पर्ची के माध्‍यम से यह भी जानना चाहता हूं कि ऐसे सीमांत जिले में राजस्‍थान में ऐसे कितने केस हैं जिसमें माइंस से किसी के पैर टूट गये, किसी के हाथ टूट गये, कोई विकलांग हो गया, कोई खतम हो गया ? उनको सहायता आज दिन तक किसी प्रकार की नहीं मिली है तो मैं माननीय मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहूंगा कि वह सहायता जिनको नहीं मिली है उनको तत्‍काल प्रभाव से दिलाई जाए। धन्‍यवाद।

समिति का प्रतिवेदन

जन लेखा समिति का 134वां से 139वां प्रतिवेदन

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री संयम लोढ़ा डाक्‍टर बुलाकीदास कल्‍ला की तरफ से जन लेखा समिति, 2005-06 के 6 प्रतिवेदन उपस्‍थापित करेंगे।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से जन लेखा समिति, 2005-06 के निम्‍न 6 प्रतिवेदन उपस्‍थापित करता हूं:-

(1) भारत के नियंत्रक-महालेखा परीक्षक के प्रतवेदन (सिविल) में समाविष्‍ट चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य विभाग से संबंधित अंकेक्षण प्रतिवेदन वर्ष 2000-2001 का अनुच्‍छेद संख्‍या 3.7.1.1 से 3.7.1.13 राष्‍ट्रीय अन्‍धता नियंत्रण कार्यक्रम से सम्‍बन्धित मामलों पर समिति का 134वां प्रतिवेदन।

(2) भारत के नियंत्रक-महालेखा परीक्षक के प्रतवेदन (सिविल) में समाविष्‍ट चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य विभाग से संबंधित अंकेक्षण प्रतिवेदन वर्ष 2000-2001 (राष्‍ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम) अनुच्‍छेद संख्‍या 3.7.2.1 से 3.7.2.12 से सम्‍बन्धित मामलों पर समिति का 135वां प्रतिवेदन।

(3) विनियोग लेखे वर्ष 2001-2002 में बताये गये दत्‍तमत अनुदानों एवं प्रभृत्‍त विनियोगों में अतिरेक के मामलों पर समिति का 136वां प्रतिवेदन।

(4) विनियोग लेखे वर्ष 2002-2003 में बताये गये दत्‍तमत अनुदानों एवं प्रभृत्‍त विनियोगों पर अतिरेक के मामलों पर समिति का 137वां प्रतिवेदन।

(5) वर्ष 2000-2001 के लिए भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक के प्रतिवेदन (राजस्‍व प्राप्तियां) में समाविष्‍ट पंजीयन एवं मुद्रांक कर विभाग से सम्‍बन्धित मामलों पर समिति का 138वां प्रतिवेदन।

(6) वर्ष 2001-2002 के लिए भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक के प्रतिवेदन (राजस्‍व प्राप्तियां) में समाविष्‍ट मुद्रांक कर एवं पंजीयन शुल्‍क विभाग से सम्‍बन्धित मामलों पर समिति का 139वां प्रतिवेदन।

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): उपाध्‍यक्ष महोदय, यह बहुत बड़ा गंभीर मुद्दा था। वो बेचारे विकलांग हो गये, मंत्री महोदय विराजे हुए हैं, सहायता आपसे जुड़ा हुआ है, किससे जुड़ा हुआ मुद्दा है ? यह बहुत ही गम्‍भीर मुद्दा है।

 

पिछड़े वर्ग के कल्‍याण संबंधी समिति का प्रथम प्रतिवेदन

पिछड़े वर्ग के व्‍यक्तियों को राजकीय सेवाओं में दिये जा रहे प्रतिनिधित्‍व तथा उनके सर्वांगीण विकास के संबंध में किये जा रहे कार्य-कलापों से संबंधित

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री धर्मपाल चौधरी, पिछड़े वर्ग के कल्‍याण सम्‍बन्‍धी समिति का प्रतिवेदन उपस्‍थापित करेंगे।

श्री धर्मपाल चौधरी (सभापति, पिछड़े वर्ग के कल्‍याण संबंधी समिति): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से समाज कल्‍याण विभाग द्वारा पिछड़े वर्ग के व्‍यक्तियों को राजकीय सेवाओं में दिये जा रहे प्रतिनिधित्‍व तथा उनके सर्वांगीण विकास के संबंध में किये जा रहे कार्य-कलापों से संबंधित प्रथम प्रतिवेदन (11वीं विधान सभा) में समाविष्‍ट सिफारिशों पर राज्‍य सरकार द्वारा की गई कार्यवाही विषयक् समिति का प्रथम प्रतिवेदन उपस्‍थापित करता हूं।

 

अनुसूचित जाति कल्‍याण समिति का प्रथम प्रतिवेदन

ग्रामीण विकास विभाग द्वारा संचालित योजनाओं के कार्य-कलापों से सम्‍बन्धित तृतीय प्रतिवेदन में समाविष्‍ट सिफारिशों पर शासन द्वारा की गई कार्यवाही विषयक्

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री मोहन मेघवाल, अनुसूचित जाति कल्‍याण समिति, 2005-06 का प्रथम प्रतिवेदन उपस्‍थापित करेंगे।

श्री मोहन मेघवाल (सभापति, अनुसूचित जाति कल्‍याण समिति): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से ग्रामीण विकास विभाग द्वारा संचालित योजनाओं के कार्य-कलापों से सम्‍बन्धित अनुसूचित जाति कल्‍याण समिति, 2002-2003 (11वीं विधान सभा) के तृतीय प्रतिवेदन में समाविष्‍ट सिफारिशों पर शासन द्वारा की गई कार्यवाही विषयक् समिति का प्रथम प्रतिवेदन उपस्‍थापित करता हूं।

 

प्राक्‍कलन समिति 'क' का 11 से 13वां प्रतिवेदन एवं विधि एवं संसदीय कार्य विभाग
से संबंधित सिफारिशों पर शासन द्वारा की गई कार्यवाही विषयक् 14वां प्रतिवेदन

 

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री कालीचरण सर्राफ, सभापति, प्राक्‍कलन समिति 'क', 2005-06 समिति के चार प्रतिवेदन उपस्‍थापित करेंगे।

श्री कालीचरण सर्राफ  (सभापति, प्राक्‍कलन समिति 'क'): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से प्राक्‍कलन समिति 'क', 2005-06 समिति के निम्‍न चार प्रतिवेदन उपस्‍थापित करता हूं:-

(1) नगरीय विकास एवं आवासन विभाग से संबंधित समिति का 11वां प्रतिवेदन।

(2) स्‍वायत्‍त शासन विभाग से संबंधित समिति का 12वां प्रतिवेदन।

(3) सामान्‍य प्रशासन विभाग से संबंधित समिति का 13वां प्रतिवेदन।

(4) प्राक्‍कलन समिति 'क' 2003-2004 के 32वें प्रतिवेदन में समाविष्‍ट विधि एवं संसदीय कार्य विभाग से संबंधित सिफारिशों पर शासन द्वारा की गई कार्यवाही विषयक् समिति का 14वां प्रतिवेदन।

याचिकाओं का उपस्‍थापन

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री बनवारी लाल शर्मा, सदस्‍य, विधान सभा 6 याचिकाएं उपस्‍थापित करेंगे।

श्री बनवारी लाल (धौलपुर): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से निम्‍न 6 याचिकाओं का उपस्‍थापन करता हूं:-

(1) धौलपुर जिला मुख्‍यालय पर बाल न्‍यायालय खोलने बाबत्।

(2) धौलपुर जिले की सेपऊ तहसील को क्रमोन्‍नत कर उपखण्‍ड बनाने बाबत्।

(3) जिला धौलपुर में विपरपुर से मानपुर वाया लंगोटपुरा अधूरी सड़क को मानपुर तक पूरा बनवाया जाकर उस पर डामरीकरण करने बाबत्।

(4) धौलपुर जिले की विपरपुर से मानपुर सड़क पर ग्राम ठेकुली के पास पारबती नदी पर वायर कटेस डालकर अस्‍थायी पुलिया (काजवेज) बनाने बाबत्।

(5) धौलपुर जिला मुख्‍यालय पर श्रम न्‍यायालय खोलने बाबत्।

(6) ग्राम कोलारी आर. आई. सी. (गिरदावर सर्किल) तहसील सेपऊ जिला धौलपुर को उप तहसील बनाने बाबत्।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल, सदस्‍य विधान सभा तीन याचिकाएं उपस्‍थापित करेंगे।

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से निम्‍न तीन याचिकाएं उपस्‍थापित करता हूं:-

(1) राजकीय उच्‍च प्राथमिक विद्यालय, सुरनाणा, पंचायत समिति लूणकरणसर को माध्‍यमिक विद्यालय में क्रमोन्‍नत करने बाबत्।

(2) आर.डी. 609 मेन कैनाल से भुजलाई तलाई एवं रावलपुरा उर्फ दुडिया आबादी ग्राम पंचायत केला तहसील छतरगढ़ बीकानेर जिला आबादी के लिए पानी की पाइप लाइन बिछाने बाबत्।

(3) राजकीय प्रवेशिका संस्‍कृत विद्यालय खोडाला, तहसील लूणकरणसर को वरिष्‍ठ उपाध्‍याय में क्रमोन्‍नत करने बा‍बत्।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री खुशवीर सिंह जोजावर, सदस्‍य, विधान सभा तीन याचिकाएं उपस्‍थापित करेंगे।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से निम्‍न तीन याचिकाएं उपस्‍थापित करता हूं:-

(1) पी.एच.सी. जोजावर जिला पाली को सी.एच.सी. में क्रमोन्‍नत कराने बाबत्।

(2) विधान सभा क्षेत्र खारची (पाली) में कन्‍या माध्‍यमिक विद्यालय खोले जाने बाबत्।

(3) जिला पाली के खिवाड़ा बाईपास सड़क के निर्माण बाबत्।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री दाताराम गुर्जर, सदस्‍य विधान सभा एक याचिका उपस्‍थापित करेंगे।

श्री दाताराम  गुर्जर (खेतड़ी): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से मिंया राणी गौ सेवा समिति बाजटा तहसील केकड़ी जिला अजमेर में गौशाला की चारदीवारी का निर्माण व चारा गोदाम बनाने बाबत् दो व्‍यक्तियों द्वारा हस्‍ताक्षरित याचिका का उपस्‍थापन करता हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री जीतराम, सदस्‍य, विधान सभा एक याचिका उपस्‍थापित करेंगे।

श्री जीतराम (मालपुरा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से विधान सभा क्षेत्र मालपुरा (टोंक) में आई.टी.आई. संस्‍थान खुलवाने बाबत् पाँच व्‍यक्तियों द्वारा हस्‍ता‍क्षरित याचिका का उपस्‍थापन करता हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री रिछपाल सिंह मिर्धा, सदस्‍य, विधान सभा एक याचिका उपस्‍थापित करेंगे।

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से राज बिहार कॉलोनी, मधु पब्लिक स्‍कूल के पास, गांधीपथ, वैशाली नगर, जयपुर में सार्वजनिक हैण्‍डपम्‍प लगवाने बाबत् 4 व्‍यक्तियों द्वारा हस्‍ताक्षरित एक याचिका उपस्‍थापित करता हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: प्रो. बीरूसिंह राठौड़, सदस्‍य, विधान सभा एक याचिका का उपस्‍थापन करेंगे।

प्रो. बीरूसिंह राठौड़ (बनीपार्क): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से विधान सभा क्षेत्र बनीपार्क के झोटवाड़ा क्षेत्र की लक्ष्‍मीनगर, महेशपुरी, शांतिनगर, संजय नगर-डी, बाल विहार, राणी कॉलोनी, परमानन्‍द आश्रम आदि आवासीय कॉलोनी के रिहायशी मकानों के ऊपर से होकर गुजर रही हाईटेंशन विद्युत लाइनें सरकारी खर्चे पर शिफ्ट करवाये जाने बाबत् पाँच व्‍यक्तियों द्वारा हस्‍ताक्षरित याचिका का उपस्‍थापन करता हूं।


अनुदान की मांगें
मांग संख्‍या 16-पुलिस व 17-कारागार की प्रस्‍तुति

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री गुलाबचन्‍द कटारिया, गृह मंत्री, अनुदान की मांग संख्‍या 16 एवं 17 विचार एवं मतदान हेतु प्रस्‍तुत करेंगे।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से प्रस्‍ताव करता हूं कि मांग संख्‍या 16 - पुलिस के सम्‍बन्‍ध में 31 मार्च, 2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 9,67,01,84,000/- (रुपये नौ अरब सडसठ करोड़ एक लाख चौरासी हजार) तक की राशि प्रदान की जाए।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री अमरा राम चौधरी मांग संख्‍या 17 विचार एवं मतदान हेतु प्रस्‍तुत करेंगे।

श्री अमराराम चौधरी (राज्‍य मंत्री, गृह): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से प्रस्‍ताव करता हूं कि मांग संख्‍या 17 - कारागार के सम्‍बन्‍ध में 31 मार्च, 2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 38,21,10,000/- (रुपये अड़तीस करोड़ इक्‍कीस लाख दस हजार) तक कीश्‍राशि प्रदान की जाए।

 

मांग संख्‍या 16 एवं 17 पर विचार

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री कालीचरण सर्राफ।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आज सदन में मांग संख्‍या 16 और मांग संख्‍या 17 पर चर्चा हो रही है। मैं मांग संख्‍या 16 - पुलिस, प्रदेश की कानून व्‍यवस्‍था की स्थिति पर अपने विचार प्रकट करना चाहता हूं।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, 1999 से लेकर 2003 तक हमारे प्रदेश में कांग्रेस की सरकार रही। कांग्रेसी शासन के दौरान पाँच साल में प्रदेश की कानून व्‍यवस्‍था की स्थिति का यदि विवेचन किया जाए तो यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि पाँच साल के कांग्रेस के राज में प्रदेश की कानून व्‍यवस्‍था इतनी बदतर थी कि देश स्‍वतंत्र होने के बाद 1952 से लेकर आज तक इतनी खराब कानून व्‍यवस्‍था हमारे प्रदेश में कभी नहीं रही और यह बात मैं आंकड़ों के माध्‍यम से बताना चाहूंगा। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, कांग्रेस के राज में पाँच साल के दौरान 5590 महिलाओं के साथ प्रदेश में बलात्‍कार किया गया। 6830 प्रदेश में हत्‍याएं हुईं, 4508 लूट की घटनाएं हुईं, 351 डकैती की घटनाएं हुईं, 54729 बलवे की घटनाएं हुईं, 36953 नकबजनी की घटनाएं हुईं, 84464 चोरी की घटनाएं हुईं, 587459 अन्‍य आपराधिक घटनाएं हमारे प्रदेश में कांग्रेस के राज में घटित हुईं और कुल प्रदेश की यदि हम संख्‍या देखें तो 780884 आपराधिक घटनाएं कांग्रेस के पाँच साल के राज में हुईं।

इतना ही नहीं, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, अनुसूचित जाति, जनजाति, जिनके बारे में ये कहते हैं कि हम अनुसूचित जाति के बड़े खैरख्‍वाह हैं, अनुसूचित जाति का हित हम ही कर सकते हैं, उनके आप आंकड़े देखिये। अनुसूचित जाति से सम्‍बन्धित आंकड़ों को देखा जाए तो 30138 आपराधिक घटनाएं केवल शिड्यूल्‍ड कास्‍ट और शिड्यूल्‍ड ट्राइब के लोगों के साथ इस प्रदेश में घटित हुईं। कांग्रेस के राज में 20 लोगों की पुलिस हिरासत में मौत हुई। ....

vkj/akt/1410/2d

 

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इसी प्रकार अनुसूचित जाति के दूल्‍हों को घोड़ी से उतारने की पिछले पाँच साल में 37 घटनाएं घटित हुईं। 2000 से 2003 तक के चार साल के यदि आंकड़े देखें तो 172 अनुसूचित जाति के लोगों की हत्‍याएं की गईं, 508 महिलाओं के साथ बलात्‍कार किया गया और अनुसूचित जनजाति के 47 लोगों की हत्‍याएं की गईं और 150 महिलाओं के साथ बलात्‍कार किया गया।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, भारतीय जनता पार्टी साम्‍प्रदायिक पार्टी है, भारतीय जनता पार्टी फिरकापरस्‍त पार्टी है, कांग्रेस का हर नेता अपने भाषणों में इस प्रकार की बात कहकर मुसलिम समुदाय में असुरक्षा की भावना पैदा करने की कोशिश करता है। अब साम्‍प्रदायिक घटनाओं की स्थिति देखिये पाँच साल में, कांग्रेस के पाँच साल के राज में 70 साम्‍प्रदायिक घटनाएं हुईं प्रदेश में। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, वक्‍त ने करवट ली, दिसम्‍बर, 2003 में प्रदेश में विधान सभा के चुनाव हुए.....

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): जो करने वाले थे, उन घटनाओं को भड़काने वाले, वे उधर आ गये इसलिए अपने आप बन्‍द हो गई।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): ठीक बात है, जनता समझती है इस बात को।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, 2003 में राजस्‍थान विधान सभा के चुनाव हुए, हम इधर आ गये, वे उधर चले गये और हमारी सरकार बनने के बाद, हमारी सरकार की नीतियां, पुलिस की सक्रियता और सजगता, उसका यह कारण है कि पिछले दो वर्षों में प्रदेश में कानून-व्‍यवस्‍था में निरन्‍तर सुधार आता जा रहा है, आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगा है। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष सभी अपराधों में कमी आई है। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं बताना चाहूंगा, कुल अपराधों में नौ प्रतिशत की कमी आई है। दहेज मृत्‍यु, महिला उत्‍पीड़न, छेड़छाड़, बलात्‍कार और अपहरण जैसे अपराधों में 10 प्रतिशत की कमी आई है। अनुसूचित जाति अत्‍याचारों के अपराधों में 12.96 प्रतिशत की कमी आई है और अनुसूचित जनजाति पर जो अत्‍याचार हुए, उसमें 16.29 प्रतिशत की कमी आई है हमारा राज आने के बाद और प्रदेश में जैसा मैंने पहले कहा, कांग्रेस के राज में जहां 70 साम्‍प्रदायिक घटनाएं इस प्रदेश में घटित हुईं, हमारा राज आने के बाद 2004 में दो घटनाएं और 2005 में भी केवल दो घटनाएं हुईं और पिछले दो सालों में साम्‍प्रदायिक दंगा एक भी हमारे प्रदेश में नहीं हुआ, एक भी मौत साम्‍प्रदायिक दंगों के कारण नहीं हुई। इतना ही नहीं, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, भरतपुर, धौलपुर, सवाई माधोपुर, करौली क्षेत्र में डकैती, लूट, हत्‍या और अपहरण जैसे जघन्‍य अपराधों में लिप्‍त 12 इनामी डकैतों सहित 33 डकैत हमने दो साल में गिरफ्तार किये।

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(डा. एन.एस. गुर्जर, सभापति, पदासीन)

श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (गंगापुर): करौली में तो अब भी डकैती पड़ रही है।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): जब आपका समय आए, तब आप बोल लेना। जब आपका टाइम आये तो बोलना। मैंने यह नहीं कहा कि सारे अपराध कम हो गये। मैंने कहा है कि अपराधों में कमी आई है। आप जब नम्‍बर आये तब बोल लेना।

इसी प्रकार से माननीय सभापति महोदय, पुलिस की सजगता के कारण यह पहला साल है 2005 जिसमें प्रदेश में कोई आतंककारी घटना घटित नहीं हुई। जम्‍मू-कश्‍मीर लिबरेशन फ्रंट और हिजबुल मुजाहिदीन आतंककारी संगठन के कुख्‍यात आतंककारी शब्‍बीर अहमद को अजमेर में एक ट्रक में तीन ए.के.-47 राइफल, 15 डेटोनेटर और 299 कारतूस सहित गिरफ्तार किया गया। इतना ही नहीं, माननीय सभापति महोदय, भारत-पाक सीमा पर 91 व्‍यक्तियों को अवैध रूप से सीमा पार करते हुए गिरफ्तार किया गया। छह घुसपेठिये मुठभेड़ में मारे गये। 137 अवैध बांग्‍लादेशी नागरिक पाकिस्‍तान जाते हुए पकड़े गये जिनमें से 126 को निष्‍कासित कर दिया गया। इसी प्रकार से दो वर्षों में महिलाओं के साथ बलात्‍कार में भी कमी आई है। मैं आंकड़ों के माध्‍यम से बताना चाहूंगा कि 2002 में 1051 महिलाओं के साथ बलात्‍कार किया गया, हरिमोहनजी, सुनिये, और 2003 में 1050 महिलाओं के साथ बलात्‍कार, उस समय कांग्रेस का राज था। 2004 में हमारा राज आने के बाद 1038 महिलाओं के साथ बलात्‍कार हुआ जो 2002-2003 से कम है और इसी प्रकार वर्ष 2005 में और कमी आई और हमारे प्रदेश में केवल मात्र 993 महिलाओं के साथ बलात्‍कार हुआ। इसी प्रकार से बलवे की जो घटनाएं हुईं, 2002 में 7178, 2003 में 4052 और 2004 में 3101 और 2005 में केवल 2290, बलवे की घटना में भी कमी हुई। इसी प्रकार से नकबजनी में घटनाओं में,2002 में 6661, 2003 में 6072, 2004 में 5911 और 2005 में केवल 5227, इसी प्रकार से दहेज मृत्‍यु की स्थिति देखिये, 2002 में 399 और 2003 में 389, हमारा राज आया, 2004 में 379 और 2005 में केवल 361, इसमें भी कमी आई है। इसी प्रकार से महिलाओं पर उत्‍पीड़न में 2002 में 2022, 2003 में 1750, 2004 में 1881 और 2005 में 1549. माननीय सभापति महोदय, 2005 में 166782 आपराधिक प्रकरणों में निस्‍तारण कराया गया, जिनमें से 92099 आपराधिक प्रकरणों में अभियुक्‍तों को सज़ा मिली जो अपने आपमें रिकार्ड है। मैं इस बात पर माननीय गृह मंत्रीजी और मुख्‍य मंत्री महोदय को धन्‍यवाद देना चाहता हूं, बधाई देना चाहता हूं। प्रमुख रूप से और पिछले दो साल में इतने अपराधों को खोला, उसकी जांच की, अनुसंधान किया जिसके कारण अपराधी पकड़ में आये, उसकी मैं यह बानगी आपके सामने बताना चाहूंगा। जैसलमेर जिले में सम में 11 किलो हेरोइन बरामद हुई। जालौर में तिहरा हत्‍याकांड का खुलासा हुआ। बाड़मेर में पाँच लाख के नकली नोट, 15 किलो हेरोइन, ह‍थियार बरामद हुए। बाड़मेर में ही बालोतरा के कविता हत्‍याकांड का खुलासा हुआ। बाड़मेर में गुजरात के मोस्‍ट वांटेड दो अभियुक्‍त गिरफ्तार हुए और पाली में सुमेरपुर जैन मंदिर में लूट व हत्‍या के प्रकरण का 12 घंटे में खुलासा हुआ। पाली में पाली शहर में ब‍च्चियों के साथ बलात्‍कार के अभियुक्‍त गिरफ्तार हुए। बीकानेर में नकली नोट बरामद हुए, तीन लाख के लूटे हुए हीरे बरामद हुए। हनुमानगढ़ में बैंक लूट की घटनाओं का खुलासा हुआ। चूरू में राजगढ़ रोडवेज बस डकैती के अभियुक्‍त गिरफ्तार हुए। 25,000 रुपये का इनामी अभियुक्‍त सुभाष विश्‍नोई मुठभेड़ में गंगानगर में मारा गया। पाँच वर्षीय बालक प्रांजल के अपहर्त्‍ता गंगानगर में गिरफ्तार हुए। जयपुर ग्रामीण में चंदवाजी थाना इलाके में सुपारी लेकर प्रोपर्टी डीलर की हत्‍या करने वाले गिरफ्तार हुए। जयपुर ग्रामीण इलाके में कानोता में बच्‍ची से बलात्‍कार व हत्‍या के अभियुक्‍त गिरफ्तार हुए। कोटा शहर में वैभव अपहरण कांड का खुलासा हुआ। जयपुर ग्रामीण में दादू जैन मंदिर मूर्ति चोर प्रकरण पकड़ा गया। यदि यह फेहरिस्‍त पढ़ूं तो इस प्रकार की इतनी घटनाएं हैं जिनमें  हमने अपराधियों को पकड़ा। माननीय सभापति महोदय, यह केवल मैं नहीं कह रहा हूं, यह राज्‍य सरकार के गृह मंत्रीजी नहीं कह रहे हैं, जो नेशनल क्राइम ब्‍यूरो ने हमारे प्रदेश की कानून-व्‍यवस्‍था को अन्‍य राज्‍यों की तुलना में बेहतरीन बताया है। मैं बताना चाहूंगा माननीय सभापति महोदय, राजस्‍थान की पब्लिक आर्डर क्राइम रेट 10 प्रतिशत से घटकर 2.7 फीसदी प्रति लाख रह गई है। राजस्‍थान के क्राइम रेट की तुलना में महाराष्‍ट्र में 6.8 फीसदी, बिहार में 10.2 फीसदी, असम में 14.09 फीसदी, केरल में 22.11 फीसदी, कर्नाटक में 11.4 फीसदी और हिमाचल में 11.7 फीसदी प्रति लाख है और हमारे यहां 10 प्रतिशत थी, वह घटकर 2.7 प्रतिशत प्रति लाख हो गई। यह इस बात का द्योतक है कि हमारे प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार आने के बाद कानून-व्‍यवस्‍था की स्थिति में सुधार हुआ है। अपराधों पर हमने नियंत्रण प्राप्‍त करने में सफलता हासिल की है।

माननीय सभापति महोदय, राज्‍य में पुलिस बल आवश्‍यकता से बहुत कम है। हमारा प्रदेश 3.42 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। राजस्‍थान में पुलिस बल का औसत प्रति 100 वर्ग किलोमीटर भू-क्षेत्र के पीछे केवल 18.7 पुलिसकर्मी का है जबकि आन्‍ध्र में यह 26.9 प्र‍तिशत है और बिहार में 55.8 प्रतिशत है, यू.पी. में 65 है और वेस्‍ट बंगाल में 93 है। बढ़ती जनसंख्‍या के अनुपात में पुलिस बल की संख्‍या इतनी कम है कि जितना ज्‍यादा हम पुलिस बल में बढ़ोतरी करेंगे, उतना ही हम अपराधों पर और अंकुश लगा पायेंगे..... 

 

Jkj/akt/1420/2e/27032006

 

माननीय सभापति महोदय, जब 1971 में कुल दर्ज अपराध 36743 थे उस समय पुलिस बल की संख्‍या हमारे यहां 38800 थी।  आज अपराध डेढ़ लाख यानि पाँच गुना बढ़ गये जबकि पुलिस बल की संख्‍या में केवल दुगनी वृध्दि हुई है जबकि अपराध पाँच गुना बढ़ गये।  मैं धन्‍यवाद देना चाहता हूं माननीय गृह मंत्रीजी को, माननीय मुख्‍य मंत्रीजी को कि 2005 में आपने छह हजार कांस्‍टेबल्‍स के पदों को भरने का निर्णय लिया और 1418 एएसआई के पद बढ़ाये और 90 थानों में महिला डेस्‍क भी बनाई।  मुझे आशा है कि जिस प्रकार पुलिस बल में बढ़ोत्‍तरी का निर्णय आपने 2005 में लिया, इस वर्ष में भी आप पुलिस बल में बढ़ोतरी की घोषणा सदन के माध्‍यम से करेंगे।

माननीय सभापति महोदय, मैं प्रदेश में बांगलादेशी घुसपैठियों की समस्‍या के बारे में कुछ कहना चाहूंगा।  मेरी सूचना के हिसाब से अभी राज्‍य में लगभग दो लाख बांगलादेशी अवैध रूप से रह रहे हैं।  इनकी वजह से न केवल राजस्‍थान के शहरों में कच्‍ची बस्तियां पनप रही है अपितु गम्‍भीर अपराधों में भी बढ़ोत्‍तरी हो रही है।  इनमें से कई लोग जासूसी, आतंकवादी गतिविधि, मादक द्रव्‍यों की तस्‍करी में भी लिप्‍त पाये गये हैं।  अकेले जयपुर में, माननीय सभापति महोदय, 35 हजार से ज्‍यादा बांगलादेशी निवास कर रहे हैं।  जोधपुर, कोटा, अजमेर, बीकानेर यानि हर शहर में आज बांगलादेशी रह रहे हैं।  पिछली सरकार ने हमारे जयपुर में स्‍टेशन के पास गोपालबाड़ी कालवाड़ स्‍कीम में जो बांगलादेशी रहते थे उनको वहां से खाली करवाया और उनको यहां से केन्‍द्र सरकार से बात करके वापिस बांगलादेश नहीं भेजा, बस्‍सी के पास बगराना में उनको बसा दिया।  आज बगराना के आस-पास के जो निवासी हैं, जो ग्रामीण जनता है, वह इनके अपराधों से त्रस्‍त हैं।  माननीय सभापति महोदय, यह बांगलादेशी केवल यहां रह रहे हैं, ऐसा नहीं है, इन्‍होंने राशन कार्ड भी बनवा लिये, वोटर लिस्‍ट में नाम भी लिखवा लिया और जब भी कोई बड़ी घटना होती है प्रदेश में और विशेषकर जयपुर में, तो जब अनुसंधान किया जाता है तो बांगलादेशियों के नाम उसमें शामिल होते हैं। पिछले दिनों सेठी कालोनी और जवाहर नगर में जो लूट की वारदात हुई हमारे जयपुर में, उसमें भी यह बांगलादेशी शामिल थे।  मैं मांग करना चाहूंगा, सभापति महोदय, आपके माध्‍यम से माननीय गृह मंत्रीजी से, कि पूरा एक सर्वे करवा कर पूरे राज्‍य में कितने बांगलादेशी कहां-कहां, किस-किस स्थिति में रह रहे हैं इसको चिह्नित किया जाय, इनका सर्वे करवाया जाय और केन्‍द्र सरकार से बात करके इनको किस प्रकार से बांगलादेश भेजा जा सकता है, जितना जल्‍दी हो सके इनको बांगलादेश भेजने जाने की व्‍यवस्‍था की जानी चाहिए।  माननीय सभापति महोदय, आज इनके कारण जिस प्रकार की स्थिति हमारे प्रदेश में उत्‍पन्‍न हो रही है, यह बहुत ही चिंताजनक है।  जितना जल्‍दी हम बांगलादेशी समस्‍या से छुटकारा पायेंगे, उतना ही प्रदेश के लिए श्रेयस्‍कर होगा।

माननीय सभापति महोदय, दूसरी समस्‍या जो प्रदेश में कुछ लोगों द्वारा, कुछ संस्‍थाओं के द्वारा हिन्‍दू देवी-देवताओं की किताबों के बारे में अनर्गल बातें जो की जा रही हैं, जो धर्मान्‍तरण का षडयंत्र किया जा रहा है, हमारे दलित भाई जो गरीब हैं, जो मजबूर हैं, उनकी गरीबी का फायदा उठाकर उनको सब्‍जबाग दिखाकर, कई-कई जगह तो यह भी शिकायत मिली है कि बलपूर्वक उनका धर्मान्‍तरण किया जा रहा है।  मैं बधाई देना चाहूंगा इस बात के लिए तो कि अभी परसों केबिनेट की मीटिंग में इस बात का निर्णय हुआ है कि धर्मान्‍तरण विरोधी विधेयक लाया जायेगा परंतु मैं माननीय गृह मंत्रीजी से अनुरोध करूंगा कि यह विधेयक इसी सत्र में आये तो उचित होगा।  माननीय सभापति महोदय, कोटा में इमानुअल संस्‍था जो गरीब, अनाथ बच्‍चों का धर्मान्‍तरण कर रही है, हकीकत पुस्‍तक जिसमें हिन्‍दू देवी-देवताओं के बारे में अभद्र, अश्‍लील, भद्दी, अनर्गल बातें छापी गई हैं, इसकी जो वेबसाइट है होपगिवर इंटरनेशनल, इंटरनेट पर आपको आश्‍चर्य होगा कि इन्‍होंने जम्‍मू कश्‍मीर के बिना भारत का नक्‍शा प्रसारित किया है। यह इस बात का द्योतक है कि यह राष्‍ट्रद्रोह में भी लिप्‍त हैं।  मैं इस बात के लिए तो बधाई देना चाहूंगा कि आपने इमानुअल संस्‍था की जांच करवाई है और अनियमितता पाये जाने पर इसका पंजीकरण आपने रद्द किया है।  संस्‍थापक थामस और उसके लड़के की गिरफ्तारी के आपने आदेश दिये हैं परंतु अभी तक लड़का ही गिरफ्तार हुआ है, वह मेन जो थामस है, अभी तक गिरफ्तार नहीं हुआ। मैं, माननीय गृह मंत्रीजी, आपको यह कहना चाहूंगा कि यह कांग्रेस के हमारे नेता अपनी आका सोनिया गांधीजी को राज़ी करने के लिए घडि़याली आंसू बहायेंगे, थामस को रिहा करने की बात करेंगे, ईसाई मिशनरी पर हमला हो रहा है, इस प्रकार का प्रपोगंडा करेंगे, अन्‍तर्राष्‍ट्रीय दवाब भी आपके ऊपर बनायेंगे, परंतु आप किसी भी प्रकार के दवाब में नहीं आयें और जो इस प्रकार का जघन्‍य अपराध कर रहे हैं, जो इस प्रकार के जघन्‍य अपराधों में लिप्‍त हैं, उनको निश्चित रूप से कड़े से कड़ा दण्‍ड मिले, इस बात की आप व्‍यवस्‍था करेंगे।

माननीय सभापति महोदय, जहां तक जयपुर शहर का सवाल है, भारतीय जनता पार्टी का राज आने के बाद जयपुर शहर की कानून-व्‍यवस्‍था में भी सुधार आया है, अपराधों पर अंकुश लगा है।  मैं बताना चाहूंगा आंकड़ों के माध्‍यम से कि 2004 में कुल जयपुर शहर में अपराध दर्ज हुए 13224, 2005 में इसमें कमी आई और 13131 अपराध दर्ज हुए।  गम्‍भीर प्रकृति के जैसे हत्‍या, बलात्‍कार, डकैती, लूट, नकबजनी, चोरी, इनके कुल 2004 में 4214 अपराध दर्ज हुए और 2005 में 4096, इसमें भी कमी आई।  हत्‍या- 2003 में जहां 50 हत्‍याएं हुईं जयपुर में, 2004 में 47 और 2005 में 46 और सबसे बढि़या बात यह रही है कि हमारा राज आने के बाद में जहां 2003 में 50 हत्‍याओं में से केवल 81 प्रतिशत मामले खोले गये, हमारा राज आने के बाद 2004 में 90 प्रतिशत मामले हमने खोले हत्‍या के और 2005 में 96 प्रतिशत मामले हत्‍या के हमने खोले।  इसी प्रकार डकैती में 2004 में जहां 4 डकैतियां हुईं, 2005 में एक भी डकैती जयपुर शहर में नहीं हुई, इसके लिए मैं बधाई देना चाहूंगा।  लूट की घटनाओं की स्थिति देखिए, 2004 में जहां 42 लूट की घटनाएं हुईं और 68 प्रतिशत लूट की घटनाएं खुलीं, 2005 में केवल 30 घटनाएं हुईं और उसमें से 73 प्रतिशत घटनाओं को हमने खोल दिया।  इसी प्रकार से नकबजनी की स्थिति देखिए, 2004 में 695 घटनाएं हुईं, 21 प्रतिशत खुलीं और 2005 में 634 घटनाएं हुईं और 49 प्रतिशत नकबजनी की घटनाओं को हमने खोल दिया।  इसी प्रकार से चोरी की घटनाएं 2004 में 3370, 17 प्रतिशत खुलीं और 2005 में 3319, 24 प्रतिशत खुलीं।  महिलाओं के विरूध्‍द अपराधों की स्थिति देखिए, जहां 2004 में 823 अपराध हुए, 2005 में इसकी भी संख्‍या गिरी और 783 अपराध हुए।  शिड्यूल कास्‍ट, शिड्यूल ट्राइब में जहां 2004 में 181 और 2005 में 151 ।  माननीय सभापति महोदय, महिलाओं की चेन तोड़ने की घटनाएं आये दिन अखबारों में हमको पढ़ने को मिलती हैं।  (समय समाप्ति सूचक घंटी) माननीय अभी तो, दस मिनट प्‍लीज।  महिलाओं की चेन तोड़ने की घटनाओं के बारे में आये दिन हमको कांग्रेस के नेताओं का स्‍टेटमेंट पढ़ने को मिलता है कि जब से भारतीय जनता पार्टी का राज आया है, महिलाओं का रास्‍ते में निकलना दूभर हो गया है, महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं, उनकी चेन तोड़ने की घटनाएं निरंतर बढ़ती जा रही हैं।  मैं आपको बताना चाहूंगा आंकड़ों के माध्‍यम से कि जयपुर शहर में जब प्रदेश में कांग्रेस का राज था, 2002-03 में महिलाओं की चेन तोड़ने की 131 घटनाएं हुई और उनमें से केवल 36 घटनाओं के अपराधी पकड़े गये और जब भारतीय जनता पार्टी का राज आया 2004-05 में, 131 की तुलना में घटनाएं हुई 130, यानि एक कम और उनमें से 50 घटनाओं के अपराधियों को हमने पकड़ लिया। (व्‍यवधान)

श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल: आप रिपोर्ट ही दर्ज नहीं करते।

श्री कालीचरण सराफ: अच्‍छा, रिकार्ड नहीं करते, आप रिकार्ड करते थे।

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, आप प्‍लीज, आपस में बैठे-बैठे बातें नहीं।  माननीय सदस्‍य, आपस में बैठे-बैठे नहीं।

श्री कालीचरण सराफ:  और माननीय सभापति महोदय, यदि कुल अपराधों की तुलना में गम्‍भीर अपराधों का प्रतिशत देखा जाय तो भी जयपुर शहर शांत शहरों की श्रेणी में आता है ।  यह देखिये आप, कलकत्‍ता में 614 अपराध हुए.....

Bhs/akt/3.16.2007/1430/2F/1

 

टोटल 10714 में से यानी 5.74 प्रतिशत गंभीर प्रकृति के अपराध, चैन्‍नई में 525 हुए 8580 में से यानी 6.12 प्रतिशत, बोम्‍बे में 985 हुए 25866 में से 3.83 प्रतिशत, लखनऊ में 415, 4277 में से 9.70 प्रतिशत, नागपुर में 449, 7357- 6.10 प्रतिशत,पटना में 1578, 6545 में से 24.11 प्रतिशत और पूणे में 379, 8813 में से 4.30 प्रतिशत और हमारे  दिल्‍ली में आप देखिये 2805 अपराध हुए गंभीर प्रकृति के 41961 में से यानी 6.68 प्रतिशत और जयपुर में 11579 अपराधों में से गंभीर प्रकृति के अपराध हुए 415 यानी 3.58 प्रतिशत।  सबसे कम कलकत्‍ता में 5.74, चैन्‍नई में 6.12, मुम्‍बई में 3.83, लखनऊ में 9.70 यानी सबसे कम 3.58 और हमारे भारतवर्ष का जो एवरेज है वो है 6.29 प्रतिशत तो उस हिसाब से हम यह कह सकते हैं कि हमारा राज आने के बाद जयपुर शहर में शांति रही, कानून व्‍यवस्‍था पर हमने अंकुश लगाया, आपराधिक गतिविधियों में कमी हुई।  माननीय मैं जयपुर शहर की दो सालों में कुछ उपलब्धियां हुई उनके बारे में बताना चाहूंगा।  कार चोर गिरोह से 30 कारें बरामद की गईं, लाखन गिरोह को गिरफ्तार कर 15 अवैध हथियार बरामद किये गये, 8 अभियुक्‍तों को गिरफ्तार कर करीब 6 लाख रुपये के नकली नोट बरामद किये गये।  वन्‍य जीव तस्‍कर संसारचंद से चीते की खाले बरामद की गईं। तेज़ाब कांड व बालिका बलात्‍कार कांड व हत्‍यांकाड के अपराधी पकड़े गये, एटीएम से नौ लाख रुपये की चोरी की वारदात का पर्दाफाश हुआ, होटलों को बम से उड़ाने की धमकी देने वाला गिरफ्तार हुआ, फाइबर क्राइम के तहत पहली बार प्रभावी कार्यवाही, जालूपुरा में जो हुआ था उसको मने खोला।  मगनसिह की हत्‍या के प्रकरण में मुल्जिमान को नामजद कर गिरफ्तार किया। टैक्‍सी चालक की हत्‍या प्रकरण में मुल्जिम गिरफ्तार हुए। दवा व्‍यवसायी अमित चौधरी की हत्‍या का दो वर्ष बाद पर्दाफाश हुआ।  जेलर चंदकांत गोठवाल पर हमले के अपराधी पकड़े गये।  मनीष जौहरी हत्‍याकांड खुला उसके अपराधी पकड़े गये।  कट्टा दिखा कर व्‍यापारी से एक लाख रुपये की लट के अपराधी पकड़े गये।  बैंक के चपरासी की हत्‍या व बाई लाख रुपये की लूट के अपराधी पकड़े गये। युवराज पांड्या की हत्‍या जो ट्रांसपोर्ट नगर थाने में हुई थी उसके अपराधी पकड़े गये।  मानसरोवर डकैती का खुलासा किया । पुराने हत्‍या के प्रकरण खोले गये। विदेशी युवती से छेड़छाड़ प्रकरण में सज़ा करवायी गयी।  बालक रोनित के अपहरण को 6 घंटे में खुलासा किया गया।

(समय समाप्ति सूचक घंटी)

माननीय सभापति महोदय, पाँच मिनट तो देवें साहब आप तो घंटी पर घंटी बजा रहे हो।

श्री सभापति: 25 minutes you have taken.

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): अभी तो पहला वक्‍ता हूं साहब।

श्री सभापति: डिमाण्‍ड  पर बहुत टाइम होता है इतना। Please sumup.

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): अब मैं जयपुर शहर के लिए कुछ सुझाव देना चाहूंगा।  पाँच मिनट का समय और दीजिये।    श्री सभापति: समअप-समअप, जल्‍दी करें।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): ...(व्‍यवधान)... डिस्‍टर्ब मत करें प्‍लीज।  माननीय सभापति महोदय, हमारी सरकार ने पिछले दो वर्षों में जयपुर शहर में कानून व्‍यवस्‍था को सुधारने में, अपराधों पर अंकुश लगाने में सफलता प्राप्‍त की है।  सराहनीय प्रयास भी किये हैं पर इतना ही केवल पर्याप्‍त नहीं है अपराधों पर पूर्ण नियंत्रण के लिए हमें कुछ कदम उठाने होंगे ।    माननीय सभापति महोदय, आज शहर का जिस तेजी के साथ विस्‍तार हो रहा है जहां पहले हमारे शहर का क्षेत्रफल 18 वर्गकिलोमीटर था वो बढ़कर अब 55 किलोमीटर हो गया है।  महानगरीय संस्‍कृति पनप रही है । राजधानी होने के कारण सैंकड़ों सरकारी कार्यालय हैं सरकारी कर्मचारियों के कार्यालय यहां पर हैं।  चालीस के लगभग कॉलेजेज और सैंकड़ों स्‍कूल जयपुर शहर में हैं।  ट्रेड युनियनों द्वारा आये दिन आंदोलन की घटनाएं हो रही हैं। 2005 में राजनीतिक, धार्मिक जुलूस और शोभायात्राओं का यदि  हम रिकार्ड देखें तो 465  पूरे एक साल में शोभायात्राएं निकाली गयीं ।  इसी प्रकार से यह प्रमुख पर्यटन केन्‍द्र होने के कारण पिछले साल देशी और विदेशी लगभग डेढ़ करोड़ पर्यटक जयपुर शहर में आये ।  ब्रॉडगेज से यह जुड़ गया इसके कारण अपराधी आता है और अपराध करके ब्रॉडगेज से चला जाता है। पता ही नहीं लगता है।  वीवीआईपीज का आना जाना यहां लगा रहता है पिछले साल का यदि आप काउंटिंग करें तो गत वर्ष 347 बार वीवीआईपीज जयपुर में आये और गये।  कभी कोई देश के राष्‍ट्राध्‍यक्ष आ रहे हैं कभी महामहिम उपराष्‍ट्रपति जी आ रहे हैं यानी वीआईपीज का आना जाना यहां लगा रहता है।  इसी प्रकार से यातायात व्‍यवस्‍था में जहां पहले हजारों में वाहन हुआ करते थे वहीं नौ लाख वाहहन हमारे जयपुर शहर में अभी पंजीकृत हुए हैं इस साल।  मेरे इनके प्रभावी नियंत्रण के लिए कुछ सुझाव हैं। पहला सुझाव तो यह है माननीय सभापति महोदय, जयपुर शहर में पुलिस कमिश्‍नर पद्धति लागू की जानी चाहिए। 1978 में पुलिस राष्‍ट्रीय आयोग ने भी यह सिफारिश की हुई है कि 10 लाख से ऊपर की जनसंख्‍या वाले शहरों में कमिश्‍नर पद्धति लागू होनी चाहिए।  इसी प्रकार से केन्‍द्रीय सरकार ने 2003 में पुलिस व्‍यवस्‍था में सुधार के लिए मलीमथ कमीशन का गठन किया था उसने भी यह सिफारिश की है कि पाँच लाख से ऊपर जितने भी शहर हैं उनमें पुलिस कमिश्‍नर सिस्‍टम लागू होना चाहिए।  माननीय सभापति महोदय, पुलिस कमिश्‍नर सिस्‍टम लागू होने से धारा 107,116,109,151 और 110 के तहत जो मुक़दमे होंगे उनके निस्तारण की पॉवर पुलिस को मिल जाएगी। आदतन अपराधियों को जिलाबदर करने का पॉवर भी पुलिस को मिल जाएगा।  हमारे जो हजारों मुकदमे इन धाराओं में आज पेंडिंग हैं उनसे हमारे जयपुर शहर को निजात मिलेगी।  आज मद्रास, कलकत्‍ता, बोम्‍बे, दिल्‍ली, बंगलौर में पुलिस कमिश्‍नर सिस्‍टम चल रहा है और सफलतापूर्वक चल रहा है और वहां अपराधों पर अंकुश लगा हुआ है इस कारण तो मैं पूछना चाहता हूं कि जयपुर शहर में ऐसी क्‍या दिक्‍कत आ रही है कि आप पुलिस कमिश्‍नर सिस्‍टम जयपुर में लागू नहीं कर रहे ? और दूसरा सुझाव देना चाहता हूं जयपुर शहर में आये दिन वीआईपीज का आना, आये दिन जो जुलूस, धरने, आंदोलन के समय, शोभायात्राएं और ये धरने होते हैं तो कानून व्‍यवस्‍था और अपराधों के इन्‍वेस्टिगेशन को अलग-अलग करना चाहिए। आज स्थिति क्‍या है कोई वीआईपी आता है और उस समय कोई अपराध घटित हो जाए तो फोन करते हैं सांगानेर थाने पर तो जवाब मिलता है कि वीआईपीज आये हुए हैं वहां गये हैं।  मालवीयनगर थाने पर फोन करते हैं कि इंचार्ज साहब कहां हैं तो जवाब मिलता है कि साहब एयरपोर्ट गये हैं।  बजाजनगर थाने पर फोन करेंगे तो जवाब मिलेगा कि कोई वीआईपी आये हुए हैं, एयरपोर्ट गये हैं।  सारे थाने खाली हो जाते हैं तो मेरा कहना यह है कि जयपुर शहर में यहां वीवीआईपीज तो आते जाते रहते हैं 347 बार वीआईपीज आये हैं तो एक वीआईपी स्‍क्‍वॉड का गठन कर लें अलग से तो वो वीआईपीज के आने जाने का काम करे, शोभायात्राएं, जुलूस निकलते हैं उनके बारे में करे और अपराधों का जो अनुसंधान होता है उसके लिए अलग से व्‍यवस्‍था हो इसी प्रकार से मैं यह कहना चाहूंगा कि आज जयपुर शहर में अधिकारी तो बढ़ा दिये पहले एक एसपी होता था अब आपने तीन एसपी कर दिये।  एक हैडक्‍वार्टर एसपी कर दिया, एक ट्रेफिक का एसपी अलग कर दिया। एक आईजी उन पर बैठा दिया परन्‍तु जो नीचे जो मैन काम करते हैं कांस्टेबल-हैड कांस्‍टेबल उनकी संख्‍या में आपने बढ़ोतरी नहीं की।  इनकी संख्‍या में भी निश्चित रूप से बढ़ोतरी की जानी चाहिए।  इसी प्रकार से जयपुर शहर में थानों की संख्‍या कम है।  आज जो बाहरी इलाके हैं वहां पाँच-पाँच, दस-दस किलोमीटर की रैंज में भी एक एक थाना है।  जैसे मालवीय नगर थाना है उसका कार्यक्षेत्र पड़ता है खोनागोरियान, आगरा रोड तक और गोनेर के पास तक है। वहां यदि कोई घटना होगी तो मालवीयनगर से पुलिस पहुंचने में भी वहां कम से कम आधा पौन घंटा लग जाएगा इतने में तो अपराधी भाग जाएगा। तो मेरे कहना यह है कि इस प्रकार की गतिविधियों को रोकने के लिए थानों की संख्‍या में वृद्धि होनी चाहिए।  इसी प्रकार से मैं एक बात और कहना चाहूंगा जयपुर शहर में कई संवेदनशील इलाके हैं जहां पुलिस चौकियां नहीं हैं।  पुलिस चौकियां ऐसे संवेदनशील इलाकों में बनें इस बात की भी मैं चाहूंगा कि माननीय गृह मंत्री जी इस बारे में काग्‍नीजेंस लें।  इसी प्रकार से यहां आये दिन आप अखबारों में पढ़ते हैं कि फलाने नौकर ने मकान मालिक अकेला था या गृहिणी अकेली थी उसका मर्डर कर दिया या उसको लूट करके चला गया। यहां यह बात सही है कि पुलिस ने यह आग्रह किया है लोगों से कि जो भी नौकर रखें उसकी पूरी जानकारी थाने में आप फार्म भर कर दें।                       

(समय समाप्ति सूचक घंटी)

 परन्‍तु यह सब मुकम्‍मल रूप से नहीं हो रहा है तो मैं गृह मंत्री जी से आपके माध्‍यम से कहना चाहूंगा कि पुलिस को ये सख्‍त इंस्‍ट्रक्‍शंस होने चाहिए कि जहां भी इस प्रकार का कोई नौकर रखता है अपने यहां तो आप अनिवार्य रूप से ...।

श्री सभापति: समअप करें प्‍लीज।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): ...उसका पूरा बॉयोडेटा वहां पर होना चाहिए।  मैं बस ट्रेफिक के बारे में दो मिनट और बोलना चाहूंगा। बस दो ही मिनट।

माननीय सभापति महोदय, मैं ट्रेफिक पुलिस के बारे में दो तीन बातें कहना चाहूंगा 1981-82 में हमारे यहां 81262 वाहन पंजीकृत थे और 90-91 में ये संख्‍या बढ़कर हो गयी 2,66,254 और 99-00  में हो गयी 5,97,000  और अब ये 2005 में ये सब वाहनों की संख्‍या हो गयी 9 लाख से ऊपर और सड़क दुघटनाओं की आप स्थिति देखें 2001 में 224 लाख सड़क दुर्घटनाओं में जयपुर शहर में मरे, 1810 घायल हुए।  2002 में 312 मरे, 1688 घायल हुए। 2003 में 318 मरे 1896 घायल हुए।  2004 में 298 मरे, 1634 घायल हुए।

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1634 घायल हुए और 2005 में 353 मरे और 1861 घायल हुए । माननीय गृह मंत्री जी मैं यह सारी बात इसलिए कह रहा हूं कि कांस्‍टेबलों की संख्‍या 1997 में 600 थी और आज भी उतनी ही है जबकि वाहनों की संख्‍या 1997 के कम्‍पेरिजन में डबल हो गई । दूसरी बात यह है कि यातायात पुलिस के पास अपना कोई बजट नहीं है 1 मैं यह कहना चाहूंगा माननीय गृह मंत्री जी कि आंध्रप्रदेश में जिस प्रकार का प्रावधान उन्‍होने कर रखा है कि यातायात पुलिस जुर्माने के रूप में जो राशि वसूल करती है उसका 30 परसेंट पैसा यातायात पुलिस के फंड में जमा हो जाता है । यहां पर भी आपको इस प्रकार की व्‍यवस्‍था करनी चाहिये कि जयपुर शहर में ट्रेफिक पुलिस जो दो ढाई करोड का प्रतिवर्ष जुर्माना वसूल करती है जनता से उसका 50 प्रतिशत पैसा यदि ट्रेफिक पुलिस के कोष में जमा करायेंगे तो निश्चित रूप से यातायात की बढिया व्‍यवस्‍था जयपुर में हो सकती है । यहां ट्रेफिक पुलिस की यह हालत है कि उनके पास वायर लैस के सैट नहीं है । 200 पाइंट यहां ट्रेफिक के उनमें से केवल 90 के पास वायर लैस के सैट हैं बाकी 110 के पास वायर लैस के सैट नहीं है ।

मैं यह कहना चाहूंगा कि जो सारी व्‍यवस्‍थाएं मैंने बताई हैं उसके बारे में निश्चित रूप से आप विचार करेंगे और एक महत्‍वपूर्ण समस्‍या जो जयपुर में निरन्‍तर बढती जा रही है जो परकोटे के अंदर के इलाके जहां मुसलिम बाहुल्य इलाके हैं विशेष रूप से वहां से धीरे धीरे हिन्‍दू पापुलेश का पलायन होता जा रहा है और इससे केवल हिन्‍दू ही चिंतित नहीं है वहां का जो लोकल मुसलिम समुदाय का व्‍यक्ति है वह भी इससे चिंतित है । हो क्‍या रहा है कि यूपी, बिहार के मुसलिम आकर दोगुणे, तीन गुणे, चार गुणे दामों पर यहां प्रोपर्टी खरीद रहे हैं, भय दिखाकर यह प्रोपर्टी खरीद रहे हैं । जब भैरोंसिंह जी राजस्‍थान के मुख्‍य मंत्री थे उस समय रजिस्ट्रियों पर रोक लगी हुई थी । कानूनन तो हम रोक नहीं लगा सकते परन्‍तु सख्‍ती के साथ रजिस्‍ट्री होती थी इसके कारण खरीद फरोख्‍त पर रोक लगी हुई थी । परन्‍तु पिछले सात साल से रजिस्ट्रियां बिना किसी रोक टोक के हो रही है और उसका यह परिणाम है कि वहां से धीरे धीरे हिन्‍दू पलायन करते जा रहे हैं । मैं यह मांग करना चाहूंगा माननीय गृह मंत्री जी से कि एक तो यह जो दोगुणे दामों पर बाहर के लोग आकर प्रोपर्टी खरीद रहे हैं उसकी जांच की जाये कि यह किस प्रकार से यह प्रोपर्टी खरीद रहे हैं । यह पैसा कहां से आ रहा है और दूसरा इसकी जांच होनी चाहिये और रोक लगती चाहिये चाहे अघोशित रूप से आप रोक लगाये । आप यह कहेंगे क़ानूनन तो हम कोई रोक नहीं लगा सकते परन्‍तु यदि कोई समस्‍या विकराल रूप धारण करती जा रही है तो निश्चित रूप से उस पर रोक लगनी चाहिये ।

अंत में मैं यही कहना चाहूंगा कि दो साल में आप जो कानून व्‍यवस्‍था की स्थिति में सुधार लाये हैं, अपराधों पर जो अंकुश आपने लगाया है उसके लिये आपको बहुत बहुत बधाई । इस आशा और विश्‍वास के साथ कि जिस गति के साथ अपराधों पर अंकुश लग रहा है उसी हिसाब से आप अपराधों पर और अंकुश लगायेंगे, प्रदेश की कानून व्‍यवस्‍था की स्थिति और सुदृढ होगी, धन्‍यवाद ।

श्री सभापति: श्री सुंदरलाल जी ।

श्री सुन्‍दर लाल (सूरजगढ़): आदरणीय सभापति महोदय, अपराधों में 9 परसेंट की कमी आई इसके लिये गृह मंत्री जी को धन्‍यवाद । मैं जैसलमेर और बाडमेर के दौरे पर तीन बार गया हूं । एक बार महामहिम भैरोंसिंह जी ने एक कमेटी गठित की थी जिसमें राजेन्‍द्र राठौड, किरोडीलाल मीणा, धर्मपाल चौधरी और मैं था । उस पूरे दौरे में हम देखकर आये, इस बार भी गृह मंत्री जी के साथ गया पर वहां कहीं तो तार ढीले पडे हैं । कहीं ज्‍यादा मिट्टी आ गई तो तार नीचे दब गये । उसी की वजह से बांग्‍लादेश और पाकिस्‍तान से घुसपैठ होती है । उसकी व्‍यवस्‍था आपको करनी चाहिये । यह स्थिति है आप हमारे साथ गये थे । मेरे से पहले बोलने वाले वक्‍ता कह रहे थे कि बांग्‍लादेश से लोग आ गये इसके लिये वहां से आने का रास्‍ता हमको बंद करना पडेगा । वहां पर क्‍या स्थिति है कहीं तो तार ढीले पड़े हुए हैं, कई लोग वहां से आ रहे हैं । इसलिए सबसे पहली व्‍यवस्‍था उसकी होनी चाहिये । इसके अलावा गृह मंत्री महोदय, हकीकत क्‍या है कि डीजी 3, एडीजी 5, आईजी 18 और कांस्‍टेबल वही के वही, इसमें आप तब्‍दीली कब करोगे । हमें कोई एतराज नहीं आप आईजी चाहे 40 करा दो परन्‍तु पुलिस कांस्‍टेबल भी बढाओ । पहले भी एक थाने में 11 पुलिस वाले थे और आज भी वही है । उनकी बंदूकों की यह स्थिति है कि उनमें टाटिये घुस रहे हैं, कई वर्षों से पडी हुई है, उनके जंग लग रहा है । इसलिए इसमें भी सुधार करने की आवश्‍यकता है । दूसरा आप कहते हैं कि रिटर्न टेस्‍ट में पास होना जरूरी है और रिटर्न टेस्‍ट में पास होने के बाद कहते हैं कि छाती कम है, यह फैसला ही गलत है । अगर चोरो को पकडना है तो मोटे मजबूत लोगों को लेना चाहिये जो भाग कर चोर को पकड़ ले । हमारे समझ में नहीं आता कि आप चाहते क्‍या हो । आपका फैसला क्‍या है । मैं आपसे कहना चाहता हूं मैंने पहले भी यह कहा है कि पुलिस में मजबूत सिपाही चाहिये जो जाकर चोर को पकड सके । आप मुझे जवाब दो कि आप क्‍या करोगे । कल एक लड़का मेरे पास आया और कहा कि मैं रिटर्न टेस्‍ट में तो पास हो गया लेकिन वह 50 किलो वज़न मांग रहे हैं मेरा 40 किलो ही है । मैने कहा मैं क्‍या कर सकता हूं । इसमें आपने यह जो बात लगाई है इसमें बडी दिक्‍कत है 1 (व्‍यवधान) मैं कभी बोलता नहीं हूं आप बीच में व्‍यवधान नहीं करें । इसलिए आप इस बात पर भी विचार करें । इसके अलावा आप पुलिस विभाग में 6000 भर्ती की कह तो रहे हो लेकिन इसे जल्‍दी से जल्‍दी लगाओ । आपके विभाग में कसूर करते हैं ऊपर वाले और आप सस्‍पेंड करते हो सिपाहियों को । कसूर क्‍या सिपाही ही करता है ऊपर वाले सब ठीक है क्‍या । इसलिए आप इस बात को भी देखो । आप मजबूती लाओ सबके साथ में, आप ईमानदार हो इसमें कोई शक नहीं है लेकिन आप मजबूती से काम करो । गलत काम में कोई सुनवाई नहीं होनी चाहिये । पुलिस में नियम मत लगाओ, नियम शिक्षा में लगाओ पुलिस में इसका क्‍या काम है। मेरी समझ में नहीं आ रहा है यह नियम आप कहां से ले आये मैं पांचवीं बार एमएलए बन चुका हूं  । नियम से मत चलो इसमें तो जब जिसकी जरूरत हो उसी समय एडजेस्‍टमेंट करो । इस साल आपने पूरे राजस्‍थान में 14 जीप खरीदी है और दो एम्‍बुलेंस खरीदी है । कैसे इससे काम चलेगा, क्‍या तो आपका धंधा है क्‍या कर रहे हो । आप दो तीन गाडी तो हमारे यहां ठीक दो । मेरे 104 किलो मीटर बार्डर हरियाणा लगता है वहां पर जाकर आप हालात देखिए दो दो मण के तो सिपाही और 6-6 फीट उनकी लंबाई है ।

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अपने पेंट सम्‍भालने में, कि क्‍या बात हुई? कहा कि दो ड्रम रखे हुए है, मैंने कहा  क्‍यों खड़े हो बोले कि ऊपर से आदेश आया रास्‍ता रोकने के लिए, मैंने पूछा किस लिए, बोले चोरी हो गई। तो क्‍या ड्रम  से रूकेगी ? आप इस तरह की व्‍यवस्‍था फिर कब करेंगे? आप इस बात को मजाक में टालते हैं, इसकी व्‍यवस्‍था कब करेंगे?

इसके अलावा सीकर,झुन्‍झूनू, चुरू में एक नई बात और है। हमारे इन जिलों में विदेश के नाम से चार-चार, पाँच-पाँच लाख रूपये एक-एक आदमी से ले लेते हैं। बीजा के नाम से। कहते हैं बीजा दिला देंगे। तीन-तीन मंजिल की कोठियां बना ली। पुलिस में जो हैं तो कह देते हैं कि यह बात कानून में नहीं आती। इसके ऊपर आप रोक लगाइये। कई लाखों रूपये ले गये। किसी को धक्‍के मारकर भेज दें तो वहीं से टेलीफोन आता है मुझे जैल में भेज दिया। चार-चार लाख रूपये देकर दूसरे देश में जाकर भी जेल में, मजाक नहीं हैं, मैं आपको सबूत लाकर दे दूंगा कि लोग जेल में पड़े हैं। इस पूरे कानून में कई ऐसे हैं,जिनको आप सम्‍भाले, ऐसे कैसे लोंगों के पैसे लेकर बैठ गए। चार-चार,पाँच-पाँच लाख एक-एक आदमी से ले लेता है कि आपको बीजा बना दूंगा। टयूरिस्‍ट बीजा है वहां व्‍यवसाय करने लग जाना, तीन जिलों में, सीकर, झुन्‍झूनू, चुरू में तो यह ज्‍यादा है। यह दो तो मंत्री बन गये इसलिए नहीं बोलते, और कोई बोलता नहीं है और मैं बोलता हूं तो मेरी बात पर आप विचार नहीं करते। आप इस बात पर व्‍यवस्‍था करिये।

गृहमंत्री जी, आपने दो ही मीटिंग बुलाई। एक-एक महीने में एक बार मीटिंग  बुलाकर हमारे सुझाव तो लीजिए कि हम क्‍या कर सकते हैं। मंत्री तो नहीं बन सके लेकिन सुझाव देने में क्‍या दिक्‍कत आएगी। उसमें कोई दिक्‍कत थोड़े ही आएगी। हम बतायेंगे, हमें जानकारी है। फ्री की सलाह। उस दिन के चार सौ रूपये यहां मिलते हैं वह चवन्‍नी भी नहीं मिले। आप कंजूसी करें, न तो आप चाय पिलाते हैं ना ही बिस्किट, इसलिए दो बार ही बुलाई है। हम बाड़मेर, जैसलमेर गये तो आपसे खर्चा मांगा क्‍या, हमारे खर्चें से गये। बाड़मेर में भी आपका, दो-तीन और चार महीने के बाद में दौरा, उससे फर्क पड़ता है, आपने जाकर वहां जायजा लिया। राजस्‍थान पुलिस का जो वहां आई.जी. था उसने जवाब सही दिया। दुसरे पुलिस वाले थे उनको पता ही नहीं कहां है, उनको न तो नक्‍शा समझ में आया। मैं सारी बात समझता हूं। कहीं यह समझे कि कम पढ़ा लिखा हूं और समझता नहीं हूं। आंकड़े वाली बात है यह भी पूरी ध्‍यान में है लेकिन कहां बताये, ध्‍यान ही नहीं करते हो।

आप लोगों से एक बात करूं, आपकी ईमानदारी पर विपक्ष वाले भी नहीं कह सकते कि गड़बड़ है। इसमें कोई दिक्‍कत नहीं है। पर गड़बड़ यही है कि  आप जो नम्र बोलते हो इससे लोगों को यह लगता है कि धीरे बोल रहे हैं, आप कड़क बोला करिये। ताकत बहुत है। मुक्‍का करते हो तो हमारी तरफ भी करते हो कई बार, पुलिस वालों की तरफ मुक्‍का नहीं करते। इन्‍हें सीधा रखते हो, इसलिए उधर भी किया करो कि मैं ठीक कर दूंगा आपको, यह बोला करिये, जब जाकर काम जंचेगा नहीं तो नहीं जंचेगा।

इसके अलावा मैं आपसे कहना चाहता हूं कि मंत्रिमण्‍डल में यह फैसला लीजिए कि पुलिस डिपार्टमेंट में  कभी भी बैन नहीं लगेगा। इस बात को भी देखे कि  पुलिस में नीचे से बढ़ाओ। पहले राजस्‍थान में एक आई.जी. हुआ करता था, अब 18 कर दिये। सारे डीआईजी थे उन्‍हें उप सरपंच बना दिया। बताइये डीआईजी का क्‍या काम है, हमें बताइये तो सही? हम पढ़े-‍लिखे तो कम है लेकिन यह समझाइये कि डीआईजी का क्‍या काम है? रें ज में तो आई.जी. लगा दिये अब डीआईजी कहता है हमारी जगह भी करो, तो अब जगह कहां कराये, क्‍या अब आपका अलग से पाकिस्‍ता न बनवाये क्‍या।  आप इसको देखेंगे तो, जिलों में डीआईजी लगाइये।  सिपाही नहीं,वो ही11 वह आदम के जमाने में 11 थे 12 नहीं कर सके। थाने में एक कुर्सी नहीं मिलती। कोई थानेदार लगेगा और जब जायेगा तो सबको साथ ले जाएगा। बिजली के तार भी उतार लेगा, पंखे भी उतार लेगा। लगता ही नहीं है कि थाना है इसलिए आप इस बात पर व्‍यवस्‍था करिये 1

इसके अलावा, मैंने एक प्रस्‍ताव भी दिया है। सिवाणा का थाना बिल्‍कुल शहर के बीच में है। अलग से थाना करा दीजिए, वह जमीन पाँच करोड़ की बिक सकती है। थाने की जो जमीन है वह पाँच करोड़ में ले लेंगे और आपका डेढ़ करोड़ में थाना, इसलिए यह व्‍यवस्‍था कराइये। थाने के बीच में सारे दिन धारा बताते रहते हैं। पुलिस का थाना दूर होना चाहिये ताकि कोई रिपोर्ट करने जाये तो यह सोचे कि क्‍यों झगड़ किया, वापस चलना चाहिये। कुआं गांव से दूर होना चाहिये, कुए में गिरना हो तो वापस घर आ जाये। श्‍मशान भूमि गांव के नजदीक होनी चाहिये, आदमी सोचे कि एक दिन मेरे को यहां आना पड़ेगा। थाना तो दूर ही रहना चाहिये। घर-घर में थाना रहना अच्‍छी बात नहीं है, इसलिए हमारा जो थाना है उसे थोड़ा दूर करवाइये।

इसके अलावा मैं आपसे कहना चाहता हूं कि  पुलिस की भर्ती में यह लगा रखा है कि जो रिर्टन में पास होगा वह ही होगा। रिर्टन पास होगा तो एक भी चोर नहीं पकड़ेगा। यह तय कर लीजिए। 50 किलो वज़न का पास हो, लड़के में वज़न 38 किलो ही, पास करना पड़ेगा। पढ़ने वालो को अच्‍छा काम बताइये। आरएएस में, आईएएस में, मास्‍टर में उसको लगाइये। सिपाही तो लाठी मारने के लिए चाहिये।

महिला आयोग बना दिये, और दूसरे आयोग, यह आयोग भी पुलिस के बैरी है। यह आयोग हटाइये नहीं तो पुलिस कामयाब नहीं होगी। दुश्‍मन है इन लोगों का। यह आयोग बिठा दिये। मैं तेरे को मारूंगा तो नहीं, नहीं मारे तो यह काबू में नहीं आयेगा। पुलिस मार सकती नहीं फिर होगा क्‍या? उनको बटेऊ बनाकर बिठाये रखे तो वह चोरी करने वाला क्‍यों बताएंगा कि मैंने यह चोरी की है। चोरी के मामले में थानेदार कहेगा कि मेरी तो नौकरी का सवाल है, मैं इसके मारू तो नहीं, तो भई गीत गंवा ले और तो क्‍या करूं। आपको क्‍या यह  इसलिए विचार  करना चाहिये। एक भी थानेदार, डीएसपी मार नहीं सकता, वह हाथ नहीं लगा सकता, फिर वह बतायेगा क्‍यों, उसका क्‍या मतलब।  आप इन बातों को रद्दोबदल नहीं करोंगे, यह आयोग बिठा दिये,यह आयोग से ऐसे डरते हैं जैसे भूतनी से डरते हैं। आयोग से सारे के सारे थानेदार, डीएसपी, एसपी, सब डरते हैं।  इसलिए आप इस बात पर ध्‍यान दें। 

दूसरी चीज यह है कि आपने किसी को भर्ती कर दिया, भर्ती कर दिया ठीक है, वह सिपाही बाड़मेर में भर्ती कर दिया, तो उसमें क्राइटएरिया तय करिये कि पाँच साल तक रहेगा। कोई न कोई फैसला तो रखे आप। कई सिपाही है जो काम नहीं करते। कल प्रदर्शन देखा, उसमें कई बातें अच्‍छी थी। कल वाला प्रदर्शन देखकर सारी पुलिस की बडाई करता हूं, गांव में यह बूढे बूढे सिपाही पेंट खींचते देखता हूं तो बुराई करूं, क्‍या करूं मेरी समझ में यह बात नहीं आई। आप इस बात को देखकर,मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं, आपकी ईमानदारी पर कोई शक नहीं है, आप ईमानदार आदमी हो, आप भले भी हो। आप पुलिस के लिए थोड़ी मजबूती से कामयाबी करिये यही कहना चाहता हूं, धन्‍यवाद, जयहिन्‍द।

श्री सभापति: मोहम्‍मद माहिर आजाद।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय सभापति महोदय, आज यह सदन मांग संख्‍या 16 पुलिस और मांग संख्‍या17 कारागार पर विचार कर रहा है। अब से कुछ देर पहले जौहरी बाजार से आने वाले माननीय सदस्‍य ने गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष किन-किन महत्‍वपूर्ण घटनाओं में अपराधियों को पकड़ने, अपराधों की गुत्‍थी सुलझाने का काम किया, जो पुलिस की वार्षिक प्रतिवेदन में, प्रोग्रेस रिपोर्ट में हमको आलरेडी आपने वितरित कर दिया है उनको पढ़करे यहां पर सुनाने का काम किया और बड़े जोर-शोर से यह बात भी कही कि राजस्‍थान में जहां पिछले वर्ष 2004 की तुलना में अपराधों में 7.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी वहीं गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष अपराधों में कुछ प्रतिशत की कमी हुई है। 

सभापति महोदय, मैं इन आंकड़ों की जगलरी में नहीं जाना चाहता। उन्‍होंने साथ में कलकत्‍ता,दिल्‍ली, पूना, मद्रास और दूसरे राज्‍यों की तुलना राजस्‍थान में होने वाले अपराधों से भी की। मुझे बड़ी हंसी आ रही थी लेकिन मेरी आदत नहीं कि मैं किसी सदस्‍य के...

 

Ddm/usc/270306/1500/2j

 

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, आपस में बात नहीं करें।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): उसके विचार व्‍यक्‍त करते समय टोका-टाकी का काम करुं, लेकिन जौहरी बाजार से आने वाले माननीय सदस्‍य ठीक उस तरह से बात का यहां बखान कर रहे थे कि मेरे पड़ोसी का लड़का 10वीं की परीक्षा में 7 विषयों में फैल हुआ है और मेरा बच्‍चा तो केवल 4 ही विषयों में फैल हुआ है। क्‍या दूसरी जगह अपराध ज्‍यादा हैं या हमारे यहां अपराध दूसरे राज्‍यों के बनिस्‍पत कम हैं, यह कहकर के क्‍या हम कहना चाहते है कि हमने राजस्‍थान को बिलकुल अपराध मुक्‍त कर दिया है। क्‍या राजस्‍थान में चोरी, डकैती, अपराध, बलात्‍कार, बलवे, चैन तोड़ने की घटनाएं समाप्‍त हो गयी हैं। क्‍या ऐसे राज्‍य नहीं हैं जिनमें हमसे भी कम घटनाएं इस तरीके की हो रही हैं । उन्‍होंने कुछ बानगी पेश की। आप इजाजत दें तो कुछ बानगी मैं पेश करना चाहता हूं।

श्री सभापति: बैठे-बैठे, नो कमेण्‍ट्स प्‍लीज।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर):  माननीय सभापति महोदय, स्थिति साफ है, पुलिस पकड़ती है और कानून छोड़ देता , चैन तोड़ने वाले शातिर अपराधी विनोद लाम्‍बा ने जेल से आकर वारदात की, शिनाख्‍त परेड में जाने से कतराती हैं महिलाएं।  आज चैन तोड़ने वाले अपराधियों को सज़ा क्‍यों नहीं होती है, सभापति महोदय, इस पर हमको गम्‍भीरता से सोचना चाहिए। इसका कारण है कि चैन तोड़ने की शिकार महिलाएं जेल में अभियुक्‍तों की पहचान के लिये जाने से कतराती हैं। इससे अभियुक्‍तों को आसानी से जमानत मिल जाती है। हर बार विनोद को उसके साथी अदालत से जमानत पर छुड़ाकर ले जाते थे, पुलिस हाथ मलती रह जाती थी। चैन तोड़ने की वारदात के चश्‍मदीद गवाह नहीं मिल पाते थे और उस वजह से उनकी जमानत हो जाती थी। इतना ही नहीं, पुलिस ने हार्डिंग पर लाश टंगी देख, इलाके में सनसनी, गोपालबाड़ी शहर का पॉश इलाका है वहां पर किस तरीके से 19 वर्षीय युवक की लाश टंगी हुई मिली। हत्‍याओं पर भी हत्‍याएं, यू.पी., बिहार के नक्‍शे-कदम पर चल रहा है जयपुर। 3 वर्ष 2 माह में 212 हत्‍याओं को  अंजाम दे दिया गया और अपराध के तरीके भी बदल लिये गये हैं। जौहरी भयभीत, प्रशासन से खफा हैं, पुराने शातिरों की तलाश जारी है। क्‍या माननीय गृह मंत्रीजी, यह सही नहीं  कि राज्‍य में खुले-आम घूम रहे हैं 50 हजार अपराधी। चोरी गये वाहनों की सूची इंटरनेट पर रहेगी, अफसरों को बनाया जाएगा अधिक जिम्‍मेदार। केवल घोषणाएं कर देने से काम नहीं चलता है। आप उठा कर देख लीजिए, क्‍या स्थिति है कि इस साल आप अपराधों का तो कह दें कि हमने कुछ प्रतिशत की कमी कर ली। लेकिन यह कहने से काम नहीं चलेगा। आज तक अपराधी पुलिस की पकड़ से बाहर क्‍यों हैं। पानी मांगा गया, देवली और दूनी में लाठी-भाटा जंग करा दी।  एक दर्जन लोग घायल हो गये।  भाड़े की कार और सवार पाकेट-मार। आज क्‍या स्थिति राजस्‍थान में है। नगर में अवैध हथियारों की फैक्‍टरी नहीं पकड़ी गयी? क्‍या हुआ इसमें। माफियाओं ने पनपाया हथियारों का बाजार। आप एक तरफ जहां अपनी उपलब्धि बता रहे हैं वहां माननीय गृह मंत्रीजी, आपको हमारी जो कमी रही है, उस तरफ भी ध्‍यान देना चाहिए।

सभापति महोदय, जयपुर, जो राजधानी है, जहां पुलिस का सारा अमला रहता है, आपको जिस कालोनी का पट्टा चाहिए उस कालोनी का पट्टा हाजिर। भू-माफिया लालचन्‍द की निशानदेही पर जामडोली के पास फार्म हाउस पर छपी मिली डुप्‍लीकेट मोहरें और जन्‍म से लेकर मृत्‍यु तक के जितने प्रमाण-पत्र  चाहिए, जिसके नाम जमीन है उसको मार देंगे, वारिस की मोहर बना देंगे और आपको पट्टा मिल जाएगा।

श्री जुबेर खान (रामगढ़):  सभापति महोदय, एक पाइण्‍ट आफ इन्‍फार्मेशन है। आज पुलिस पर चर्चा हो रही है। जैसे जौहरी बाजार से आने वाले माननीय सदस्‍य ने कहा था कि यहां पर इतने वी.आई.पी. आते हैं, इतने बाहर के अतिथि आते हैं। मेरा आरोप है, मैं आपके माध्‍यम से जानकारी देना चाहता हूं कि झारखण्‍ड के 40-40  एम.एल.ए. को राजस्‍थान की पुलिस, राजस्‍थान का स्‍टेट गेस्‍ट बनाकर बार्डर से रिसीव करके दिल्‍ली और बहरोड़ के बीच में उनको लायी, मिड-वे बहरोड़ में खाना खिलाया। यहां के संसदीय सचिव और यहां पदों पर बैठे हुए लोग उनकी अगवानी करें, उनको लेकर राजस्‍थान के फाइव स्‍टार होटल-आमेर क्‍लार्क्‍स में रखने की तैयारी की जाए, उनके माध्‍यम से राजस्‍थान की संस्‍कृति को बिगाड़ा जाए, उनके लिये +++ यह दुर्भाग्‍य है राजस्‍थान की जनता के लिये...(व्‍यवधान) 40-40 झारखण्‍ड के विधायकों को...

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): माननीय सभापति महोदय, माननीय सभापति महोदय, आरोप लगाये जा रहे हैं। (व्‍यवधान)

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, विराजिये, आप बैठिये, आप बैठिये। आप बैठिये।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): क्‍या राजस्‍थान की पुलिस झारखण्‍ड के विधायकों की महमाननवाजी के लिये है, क्‍या राजस्‍थान की जनता का पैसा इसलिये है कि झारखण्‍ड के विधायकों को सरकारी मेहमान बनाकर...(व्‍यवधान)

श्री सभापति: आप बैठिये, आप बैठिये,  अंकित नहीं होगा। (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): ***

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): ***

श्री हीरालाल (निवाई): ***

श्री सभापति: बैठिये, बैठिये, मैं खड़ा हूं। मैं खड़ा हूं। 

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ***

श्री सभापति: मैं कर रहा हूं, आप बैठिये ना, मैं कर रहा हूं, मैं व्‍यवस्‍था दे रहा हूं।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): ***

श्री सभापति: बैठिये, बैठिये। आप बैठिये, प्‍लीज। प्‍लीज बैठिये। मैं खड़ा हूं। आप सुन नहीं रहे हैं क्‍या, मैं खड़ा हूं। मैं बोलना चाह रहा हूं और आप बीच में, आप बीच-बीच में ही ख्‍ंड़े होकर क्‍या हो-हुल्‍लड़ कर देते हो । जब मैं चैक कर रहा हूं उनको, तो आप बीच में क्‍या बोलते हैं। You are not in the chair. क्‍या बात है यह। जब आसन पैरों पर खड़ा होता है तो यह सबकी जिम्‍मेदारी है कि वे बैठ जाते हैं।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): सभापति महोदय, यह पहली बार ही पता लगा है कि आसन पैरों पर खड़ा होता है।

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, आपने केवल इंफार्मेशन देने की इजाजत मांगी थी। कोई इंफार्मेशन दी आपने? मैंने रोका नहीं कि आप इंफार्मेशन दे रहे हैं। लेकिन उसके बाद में जो आरोप लगाये हैं बेवजह, और आरोप की कोई बात होती तो आरोप लगाने का नियमों में प्रावधान है, आप सूचना यहां लिखित में मुझे देते। मैं सरकार से पूछता, मैं आपको इजाजत देता समय तय करके कि आप आरोप लगा सकते हैं। इसलिये जो आपने आरोप लगाये हैं, मैं एक्‍सपंज करता हूं और आप इस तरह के आरोप नहीं लगाएंगे। आगे कोई भी माननीय सदस्‍य, बिना सूचना के आरोप लगायेगा तो आसन उसको इजाजत नहीं देगा। आपने सूचना दे दी। प्‍लीज कंटीन्‍यू।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): ***

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ***

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): ***

श्री सभापति: बैठिये, बैठिये, देखिये, आप विराज जाइये। आप लिखित में दीजिए इसे। आप लिखित में तो दीजिए। उसके बाद लगाइये आरोप। Nothing will go on record.

श्री जुबेर खान (रामगढ़): ***

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): ***

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ***

श्री सभापति: मैं रोक रहा हूं, मैं रोक रहा हूं।

 

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

 

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, कृपया बैठ जाएं।

 

Vps/usc/27-3-06/1510/2k/1

 

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ***

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ***

श्री जुबेर खान (रामगढ़): ***

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): ***

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण। रामगढ़ से आने वाले माननीय सदस्‍य, रामगढ़ से आने वाले माननीय सदस्‍य, रामगढ़ से आने वाले माननीय सदस्‍य। ... (व्‍यवधान)

माननीय सदस्‍य, जब मांग पर चर्चा हो रही है तो झारखण्‍ड के विधायक कहां से आ गये यह तो बताइये। ... (व्‍यवधान) अंकित नहीं करें।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ***

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ***

श्री जुबेर खान (रामगढ़): ***

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): ***

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): ***

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): ***

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, देखिये इस समय बहस चल रही है पुलिस की मांग पर। यह झारखण्‍ड के विधायक कहां से आ गये उसमें ? अंकित नहीं हो।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): ***

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): ***

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ***

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो। रामगढ़ से आने वाले माननीय सदस्‍य। कोई अंकित नहीं हो। ... (व्‍यवधान) रामगढ़ से आने वाले माननीय सदस्‍य।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): ***

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): ***

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): ***

श्री अध्‍यक्ष: राजसमन्‍द से आने वाले माननीय सदस्‍य। राजसमन्‍द से आने वाले माननीय सदस्‍य। गुढ़ा से आने वाले माननीय सदस्‍य, आप स्‍थान ग्रहण करें। अंकित नहीं हो, अंकित नहीं हो, अंकित नहीं हो। ... (व्‍यवधान) देखिये, दूसरे प्रान्‍तों से यहां पर कमेटीज आती रहती है। कोई आयी, कोई भी आ सकता है, क्‍या दिक्‍कत है इसमें? स्‍थान ग्रहण करें। ... (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): ***

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): ***

श्री हीरालाल (निवाई): ***

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ***

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): ***

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): ***

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर):  ***

श्री जयराम जाटव (खैरथल): ***

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): ***

श्री अध्‍यक्ष: राजसमन्‍द से आने वाले माननीय सदस्‍य।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): ***

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): ***

श्री अध्‍यक्ष: मेरी बिना अनुमति जो भी बोलें अंकित नहीं हो। ... (व्‍यवधान)

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): ***

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): ***

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): ***

श्री कन्‍हैया लाल मीणा (बस्‍सी): ***

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): ***

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण। राजसमन्‍द से आने वाले माननीय सदस्‍य, स्‍थान ग्रहण कर लें। ... (व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): ***

श्री जुबेर खान (रामगढ़): ***

श्री अध्‍यक्ष: स्‍थान ग्रहण करें। स्‍थान ग्रहण करें। स्‍थान ग्रहण करें। गुढ़ा से आने वाले माननीय सदस्‍य, आप आसन की भी बात नहीं सुनते। मुख्‍य सचेतक खड़े हैं, कुछ वे अपना नया बता रहे हैं, उनकी भी नहीं सुनते । ... (व्‍यवधान) सार्थक बहस करें। आज की मांग जो है उस पर बहस करें। उसके बारे में कुछ कहें, कहां बीच में ही आप लोग किसी और प्रश्‍न पर जाकर और यूं ही सदन का समय जाया करते हैं। ... (व्‍यवधान) मैं आपसे यह निवेदन करना चाहती हूं। अंकित नहीं हो। ... (व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): ***

श्री जयराम जाटव (खैरथल): ***

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): ***

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): ***

श्री अध्‍यक्ष: इनका अंकित करें।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बाहर से आने वाले अतिथि के बारे में राजस्‍थान की एक विशेष परम्‍परा है और हिन्‍दुस्‍तान में कोई कहीं भी जा सकता है और कोई मंत्री और कोई विधायक हो ... (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर):***

श्री अध्‍यक्ष: आप बीच में नहीं बोलें, माननीय सदस्‍य। माननीय सदस्‍य, बीच में नहीं बोलें। अंकित नहीं हो इनका।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): ***

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): कल दिल्‍ली में सरकार थी, ... (व्‍यवधान) कांग्रेसी विधायक वहां पर गये और वहां पर सोनिया गांधी को बचाने के लिए और उनकी मतलब पूजा करने के लिए, उनकी आरती उतारने के लिए ... (व्‍यवधान)

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): ***श्री जुबेर खान (रामगढ़): ***

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): ***

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): ***श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): ***

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): ... (व्‍यवधान) उसके बावजूद भी सदन की कार्यवाही रोकी जा रही है। छह-छह माननीय सदस्‍य निलम्बित हुए हैं। छह-छह माननीय सदस्‍य निलम्बित हुए और उसके बाद भी ... (व्‍यवधान) माफियां मांगी और उसके बाद भी समझ में नहीं आती। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह बारबार व्‍यवधान डालकर और आपकी सहृदयता का लाभ उठाकर कि अध्‍यक्ष महोदय हमको माफ कर देंगी। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: यह काम भी आप ही कर रहे हैं। यह काम भी आप ही करते हैं।... (व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): मैं तो आपकी बिना अनुमति के यहां कोई काम नहीं करता। आपकी सहृदयता ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप ही प्रस्‍ताव लाते हैं और आप ही इसे रिवोक करने का कहते हैं।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): आपने सहृदयता से और यहां पर आकर इनको कहा कि आप प्रस्‍ताव लाओ, अब बहुत हो गया।

 

Spp/usc/27.3.2006/1520/2l(1)

 

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): जारी...अब अपनी बहुत उच्‍च परम्‍परा रही है कि यहां पर कोई क्षमा मांग ले या कोई यह महसूस कर ले तो उसके बाद उसको माफ कर दिया जाता है।

( अध्‍यक्ष महोदय ने इशारे से अंकित करने से मना किया।)

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): ***

श्री अध्‍यक्ष: गुढ़ा से आने वाले माननीय सदस्‍य बहुत बड़े नेता हैं, हम सब मान रहे हैं आपको। हर बार खड़े हो जाते हैं, बिना किसी बात के खड़े हो जाते हैं, बात ही नहीं सुनते आप किसी की।

डॉ.एन.एस.गुर्जर: ***

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): मैं यही निवेदन करता हूं कि गृह विभाग पर और लॉ एण्‍ड आर्डर पर जो आपकी समस्‍या है और इस पर भी यदि कहीं कोई दुरूपयोग हो रहा है तो उसमें बोल सकते हैं। पाइंट आफ इन्‍फोर्मेशन करके उत्‍तेजना पैदा करके सदन न चले और कोई सार्थक चर्चा नहीं हो, यह जो बार-बार प्रयास किये जा रहे हैं, यह अपने सदन व नियमों की परम्‍परा नहीं है। अपने यहां पर 269 से लेकर 273 तक आचरणीय नियम हैं कि किस प्रकार सदन में माननीय सदस्‍य आचरण करेंगे, किस प्रकार बोलेंगे, किसी पर आरोप लगायेंगे तो नोटिस देकर परमिशन लेंगे। आसन की परमिशन की कोई जरूरत नहीं है। इन नियमों को कहीं पर भी डाल दो। जो अव्‍यवस्‍था हो रही है और जो 273 में आपको परमिशन लेनी पड़ती है, यदि किसी पर आरोप लगाएं तो ..(व्‍यवधान)...

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): ***

श्री जुबेर खान (रामगढ़): ***

श्री अध्‍यक्ष: रामगढ़ से आने वाले माननीय सदस्‍य, आप बात तो कम्‍पलीट कर लेने दीजिये उन्‍हें। आप बाद में भी खड़े हो सकते हैं। यह क्‍या तरीका है कि आप बीच में ही खड़े हो जाते हैं। आज से पूर्व मैंने तो इसी असेम्‍बली में यह देखा है इससे पहले कभी कोई खड़ा होकर बोलता था और दूसरा सदस्‍य बीच में खड़ा होता था तो वह एक ही बात कहते थे I am on the possession of the Floor या यह प्रांगण मेरे कब्‍जे में है और दूसरा एकदम बैठता था। अब पता नहीं आप लोगों को क्‍या हो गया है कि एक के साथ पाँच-पाँच, सात-सात, दस-दस खड़े होकर बोलते हैं । अंकित भी नहीं होता है फिर भी बोले चले जाते हैं। रिलेवेंट बात करिये। इतनी महत्‍वपूर्ण मांग है, कानून और व्‍यवस्‍था का सवाल है। कहीं कोई व्‍यवस्‍था नहीं हो पा रही है, कहीं कोई बात है तो उस पर चर्चा कीजिये। आप कहां, जिस चीज की कोई रिलेवेंसी ही नहीं, उस चीज को लेकर बैठे हैं, इतनी देर हो गयी। सदन का समय खामख्‍वाह में ही गंवा रहे हैं।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको सुनाना चाहता हूं 272 (7) में यह है।

श्री अध्‍यक्ष: मुझे तो मत सुनाइये, सदन के माननीय सदस्‍यों को सुनाइये आप।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): हां, मैं आपके माध्‍यम से माननीय सदस्‍यों को सुनाना चाहता हूं 272(7) में अभिद्रोहात्‍मक, राजद्रोहात्‍मक या मान हानिकारक शब्‍द नहीं कहेंगे। अपने भाषण के अधिकार का उपयोग सदन के कार्य में बाधा डालने के प्रयोजन के लिये नहीं करेंगे। अध्‍यक्ष को हटाने के मूल प्रस्‍ताव के माध्‍यम को छोड़कर उनके आचरण पर आक्षेप नहीं करेंगे। यह 272 के 7, 8, 9 में हैं।

श्री अध्‍यक्ष: यह पढ़ें जब ना। सवाल तो इनके पढ़ने का है, यह पढ़े जब ना।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): अब 273 में माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह व्‍यवस्‍था है कि किसी व्‍यक्ति के विरूद्ध आरोप के बारे में प्रक्रिया-किसी सदस्‍य द्वारा किसी व्‍यक्ति के विरूद्ध मान हानिकारक या अपराधात्‍मक प्रकृति का आरोप नहीं लगाया जायेगा जब तब ‍कि सदस्‍य ने अध्‍यक्ष को तथा संबंधित मंत्री को पूर्व सूचना ना दे दी हो जिससे कि मंत्री उत्‍तर के प्रयोजन के लिये विषय की जांच कर सके।यह इसमें अपने यहां व्‍यवस्‍था है। अब यह व्‍यवस्‍था का पालन नहीं करके और यह उत्‍तेजना का वातावरण पैदा कर रहे हैं। इसके बावजूद सबने यह महसूस किया, प्रतिपक्ष के नेता ने या हाउस के नेता ने, सब नेताओं ने यह महसूस किया कि यह कार्यवाही ठीक नहीं हो रही है और रोज-रोज यहां पर टेलीकास्‍ट करवाया जाए, इसके लिये तो मैं समझता हूं यह उचित नहीं है। अपन यहां सार्थक बहस करें, कुछ निकालें। कुछ निकालकर इस प्रकार का लाएं तो मैं समझता हूं बहुत अच्‍छा होगा। सरकार को, यदि कहीं पर लेप्‍सेज हैं, सरकार की गलतियां हैं, उसके लिये किसने कहा है। अभी एक माननीय सदस्‍य ने यहां मामला उठाया था तो हमने कहा कि हम इनके साथ हैं। यदि सरकार का विरोध करना पड़े तो करेंगे। गाय कटने का मामला आया तो मैंने कहा गाय बाद में कटेगी, पहले हम कटेंगे और यदि विरोध में आयेगा तो हम करेंगे। ऐसा नहीं कि सरकार अनुचित काम करेगी तो हम उसका विरोध नहीं करेंगे, ऐसा नहीं है। इसलिए जरूरी नहीं कि हम एक ही पक्ष लेकर जबरन उनका घेराव करना ही है । अब यहां पर कोई आता है यह हमारे राजस्‍थान की विशेष परम्‍परा है कि सम्‍माननीय कोई अतिथि आते हैं तो उनका सम्‍मान करना चाहिये। इस प्रकार कोई सुनेगा तो क्‍या कहेगा?

श्री अध्‍यक्ष: अब छोडि़ये इस बात को आप, ठीक है।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): कोई क्‍या कहेगा माननीय अध्‍यक्ष महोदय?

श्री जोगेश्‍वर गर्ग (जालौर): अध्‍यक्ष महोदय, पाइंट आफ आर्डर। (व्‍यवधान)..

श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, इन्‍होंने 273 का हवाला दिया। (व्‍यवधान)... अध्‍यक्ष महोदय, इन्‍होंने रूल 273 का हवाला दिया है।(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: आप कौनसे रूल का हवाला दे रहे हैं? (व्‍यवधान)...नहीं, आप कौनसे रूल का हवाला दे रहे हैं?

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 273 का ही मैं कह रहा हूं। इसमें है कि किसी व्‍यक्ति के विरूद्ध आरोप के बारे में प्रक्रिया मैंने किसी भी व्‍यक्ति या माननीय सदस्‍य के ऊपर कोई आरोप की बात ही नहीं की।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आपने सत्‍यनारायण गुप्‍ता का नाम लिया है। (व्‍यवधान)...सत्‍यनारायण गुप्‍ता का नाम लिया आपने।(व्‍यवधान)...

श्री जुबेर खान (रामगढ़): (व्‍यवधान)...पुलिस की मौजूदगी में, संसदीय कार्य सचिव की मौजूदगी में, जन अभाव अभियोग के अध्‍यक्ष की मौजूदगी में झारखण्‍ड के विधायकों को यहां लेकर आये। मैंने सरकार पर आरोप लगाया है और सरकार पर आरोप लगाते समय किसी नोटिस की आवश्‍यकता नहीं है। आप भी नौ बार रहकर आए हैं अध्‍यक्ष महोदय।(व्‍यवधान)...हम हमेशा भाषणों में कहते हैं मेरा सरकार के ऊपर यह आरोप है, लेकिन मैंने किसी व्‍यक्ति का नाम नहीं लिया है, न किसी माननीय सदस्‍य का नाम लिया है। मैंने सरकार के लिये कहा है कि सरकार झारखण्‍ड के विधायकों को लाई है। माननीय मुख्‍य सचेतक जी ने कहा हमारी परम्‍परा है, हमारी यह परम्‍परा नहीं है कि बाहर के विधायकों को लाकर पाँच सितारा में लाकर उनको शराब परोसी जाए, जो हमारे संस्‍कारों में नहीं है, जो हमारे रीति-रिवाजों में नहीं है। इस तरह की पहले भी सी.डी. बन चुकी है। मेरा यह आरोप है कि उनको मेहमान बनाकर शराब परोसी गयी (व्‍यवधान).... यह मेरा आरोप है। (व्‍यवधान)...

एक माननीय सदस्‍य: सत्‍यनारायण गुप्‍ता पर आरोप लगाया था। (व्‍यवधान)...

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): दारू की पार्टियां की, हमने तो नहीं कहा। आप क्‍यों गये? वहां दारू पी, गाडि़या भगाई, कुछ भी किया, आप उनकी सेवा में गये। सोनिया गांधीजी को बचाने के लिये गये, उनकी वाहवाही करने गये।(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: वह तो बची हुई हैं, उनको क्या बचाना?

श्री जुबेर खान (रामगढ़): आप तो पाँच सितारा होटल में ला रहे हो उनको। आप तो अपनी धरती पर लाकर पाँच सितारा होटल में लाकर उनसे ऐसी करतूतें कराओगे जिसकी सी.डी. हमारे पास है। पहले भी आप झारखण्‍ड के विधायकों को लाए थे।(व्‍यवधान)... +++

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या हो रहा है यह? (व्‍यवधान)...

श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, बड़ा गंभीर मामला है।(व्‍यवधान)...

एक माननीय सदस्‍य: हमने डाक बंगलों में ही नहीं ठहराया किसी को।(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: आप मर्जी आए सो ही बोलेंगे। (व्‍यवधान)...

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): काल्‍पनिक बातें विधान सभा में नहीं की जाती हैं। (व्‍यवधान)...

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): अध्‍यक्ष महोदय, यह कोई नई .. (व्‍यवधान)...

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): अनर्गल आरोप लगाये जाते हैं, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह ठीक नहीं है।(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: राजसमन्‍द से आने वाले माननीय सदस्‍य, आपका बोलना आवश्‍यक नहीं है। क्‍यों बोलते हैं आप? आसन पॉवों पर है। (व्‍यवधान)...

श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): मुझे ऐसा लग रहा है कि माननीय सदस्‍यों को आज इतनी इम्‍पोर्टेन्‍ट मांग पर बहस करने की इच्‍छा नहीं हो रही है।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): आज भाषण देने वाले पहले खुद तो सोच लें कि हम कैसे हैं। (व्‍यवधान)...

श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): यह बेमतलब की बात करके क्‍यों समय जाया करना चाह रहे हैं? क्‍या मतलब है इन सबका? मेरे घर में मेरा मेहमान आया, क्‍या मतलब है उससे किसी को? समझ में ही नहीं आ रहा है। कोई बात हो, कोई इश्‍यू हो तो आप उसको उठायें। बेमतलब की बात कर रहे हैं आप? (व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: हां, जोगेश्‍वर गर्ग, आप क्‍या कहना चाहते हैं? (व्‍यवधान)... हाउस में रिलेवेंट बात करनी चाहिये।(व्‍यवधान)...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, अगर आपने इस विषय पर बहस की अनुमति दे दी है­­(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: किसी विषय पर चर्चा होनी चाहिये, इर्रिलेवेंट बहस का कोई मतलब नहीं होता।(व्‍यवधान)...

श्री जुबेर खान (रामगढ़): यह रिलेवेंट नहीं ला रहे। आज सरकार यह कह दे कि इसमें कोई सच्‍चाई नहीं है।(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: आप सचेतक हैं, आसन पॉवों पर है और आप खड़े हो जाते हैं।(व्‍यवधान)...

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): अध्‍यक्ष महोदय, पाइंट ऑफ आर्डर। अध्‍यक्ष महोदय, मेरा पाइंट ऑफ आर्डर यह है कि पाइंट ऑफ इन्‍फोर्मेशन पर कभी भी हाउस के अंदर बहस नहीं हो सकती। पाइंट ऑफ इन्‍फोर्मेशन कोई बहुत ही अकेरेंस, अचानक कोई घटना घटित हो गयी और जिसकी तरफ सरकार का ध्‍यान दिलाना होता है।(व्‍यवधान)...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): अचानक ही तो है।(व्‍यवधान)...

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): एक मिनट, आप सुन लीजिए, मैं बता रहा हूं। आप विद्वान हो सकते हैं लेकिन (व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: हां,हो गयी, इन्‍फोर्मेशन देदी, खत्‍म हुई बात।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): अध्‍यक्ष महोदय, तो उस पर केवल इन्‍फोर्मेशन देकर माननीय सदस्‍य बैठ जाते हैं। उस पर कभी बहस नहीं होती सदन में। यह मैं पहली बार इस सदन में देख रहा हूं कि पाइंट ऑफ इन्‍फोर्मेशन करके उस पर बहस शुरू कर देते हैं माननीय सदस्‍य। आधा घण्‍टा इस बात पर खराब हो गया। आपने कोई सूचना थी, देदी उसके बाद जब आरोप लगाने लगे तो एक्‍सपंज कर दिया आसन ने। उसके बाद बात खत्‍म हो जानी चाहिये थी, अब उस पर आप लगातार बहस करने की कोशिश कर रहे हैं। मैं समझता हूं अध्‍यक्ष महोदय, इस प्रकरण को समाप्‍त करके आप बहस शुरू करवाइये गृह विभाग की मांग है। बहुत से माननीय सदस्‍य बोलेंगे। बहुत महत्‍वपूर्ण विषय है। आप बहस शुरू करवाइये । यह आपसे मेरा निवेदन है।

 

msr/usc/27032006/1530/2m

 

श्री अध्‍यक्ष: श्री जोगेश्‍वर गर्ग, आपका पाइण्‍ट ऑफ आर्डर क्‍या है? हां।

श्री जोगेश्‍वर गर्ग (जालौर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस पुस्‍तक में एक से लेकर 308 नियम बनाये हुए हैं इस हाउस को चलाने के लिए। उन 308 नियमों में एक भी नियम ऐसा नहीं है जिसमें पाइण्‍ट ऑफ इन्‍फोर्मेशन कवर होता हो लेकिन परिपाटी के तहत और हम उठाते रहे हें और इस प्रकार के व्‍यवधान, इस प्रकार की परिस्थितियां पहले भी निर्माण हुईं और उस समय मुझे याद आ रहा है कि माननीय हरिशंकरजी भाभड़ा अध्‍यक्ष विराजते थे, उन्‍होंने ऐसी परिस्थिति में एक व्‍यवस्‍था दी थी कि पाइण्‍ट ऑफ इन्‍फोर्मेशन कोई माननीय सदस्‍य रेज करनाचाहे तो पहले आसन को सूचित करे कि क्‍या सूचना है उसके पास और फिर आसन उचित समझे कि यह सूचना देने लायक है और तत्‍काल देने लायक है तभी वह उनको अलाऊ करें। ऐसी व्‍यवस्‍था वापस निर्माण की जानी चाहिए ताकि इस तरह की अनर्गल बातें पाइण्‍ट ऑफ इन्‍फोर्मेशन के माध्‍यम से नहीं आ जाए। ...(व्‍यवधान)...

एक माननीय सदस्‍य: यह अनर्गल बातें हैं?

श्री अध्‍यक्ष: कौन माननीय सदस्‍य बोल रहे थे?

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): मोहम्‍मद माहिर आजाद।

श्री अध्‍यक्ष: आप  कन्‍टीन्‍यू करें, मोहम्‍मद माहिर आजाद।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पुलिस और कारागर की डिमाण्‍ड पर मैं अपनी बात कह रहा था। मैं निवेदन कर रहा था आपके माध्‍यम से कि आज जयपुर राजधानी में फर्जी मोहरों से जिस कॉलोनी का भी आपको पट्टा चाहिए उसका पट्टा हाजिर करने वाले लोगों का एक बड़ा गिरोह जयपुर में भू-माफिया के रूप में कार्यरत है। इतना ही नहीं, अभी पुलिस की निगाह में एक ऐसे लोगों का गिरोह भी सामने आया है जो फर्जी दस्‍तावेजों से कुख्‍यात अपराधियों की जमानत कराता है और यह काम कोई आज नहीं कई वर्षों से यह गोरखधंधा चल रहा है। इसमें सरकारी कर्मचारी भी लिप्‍त थे जो जमानत देते थे। जमीप जायजाद के, स्‍थाई सम्‍पत्तियों के फर्जी दस्‍तावेज बना कर और अपराधियों को न्‍यायालय की पकड़ से छुड़वाने का काम यह करते थे।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जोहरी बाजार से आने वाले माननीय सदस्‍य अभी यहां विराजमान हैं, बड़े जोर-शोर से कह रहे थे कि दूसरे राज्‍यों की तुलना में हमारे यहां अपराध कुछ कम हैं। मैंने आपकी गैरमौजूदगी में भी बात कही थी कि आपकी यह बात ठीक उस तरीके से है कि आप यह कहो कि मेरे पड़ोसी का बच्‍चा दसवीं में सात विषयों में फेल हो गया है मेरा बच्‍चा तो कम से कम पाँच ही विषयों में फेल हुआ है। यह कोई खुशी की बात है? यह अब आये हैं इसलिए मैंने कहा, मैं वापस आपको यह बात उद्धृत कर के कह रहा हूं।

आज जयपुर में तो स्थिति यह है कि अपहरण की घटनाएं बढ़ रही हैं। कहीं अपहरण महामारी नहीं बन जाए।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): उनके तो पोते फेल होंगे। अब इनके अगर फेल होंगे तो पोते होंगे।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): मैंने केवल उदाहरण दिया है, माननीय घनश्‍यामजी। आज भी कानून और व्‍यवस्‍था की स्थिति देखिये।

श्री अध्‍यक्ष: पोते तो होंगे कि नहीं होंगे आप फेल हो रहे हो।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): हमें तो पास करना आपके हाथ में है, जचे तो पास करना जचे तो फेल करना।

श्री अध्‍यक्ष: आप पधारो। पधारो, आप बाहर जा रहे थे, पधारो।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): बड़ी खाटू में क्‍या हुआ, भागकर बचे कलेक्‍टर। हत्‍या के बाद तनाव हो गया, एस.पी. समेत तीन दर्जन पुलिसकर्मी घायल हो गये। पत्‍थर चले, लाठियां भांजी गयी, आंसू गैस के गोले छोड़े गये और कलेक्‍टर को भी भागकर अपनी जान बचानी पड़ी। इतना ही नहीं, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो गये कि दौसा में पुलिस दल पर पथराव कर दिया और आंखों में मिर्ची झोंककर मुल्जिम छुड़ा कर लेकर भाग गये पुलिस से। ट्रेनें रोक रहे हैं, सिग्‍नल तोड़ रहे हैं। और हद तो यह हो गयी, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पिछले दिनों जयपुर में राजस्‍थान के व्‍यापारी संविदा खेती के विरोध में जुटे। व्‍यापारियों को यह गलतफहमी थी कि कांग्रेस तो किसानों की, गरीबों की, दलितों की, अल्‍पसंख्‍यकों की, वीकर सेक्‍शन की पार्टी है, आ गये महावीरजी, ओम बिड़लाजी और जोहरी बाजार से आने वाले माननीय सदस्‍य के चक्‍कर में और जयपुर में अपनी मांगों को लेकर आये और इस गलतफहमी से आये कि यह सरकार तो हमारी है और हमारी जरूर सुनेगी और यह सरकार, जिसके गृह मंत्री भी इसी व्‍यापारी वर्ग से आते हैं, ऐसी स्थिति करी, ऐसी लाठियां भांजी बेचारों पर कि जूते-चप्‍पल छोड़ कर भाग गये, कुछ तो आज भी कहीं न कहीं इधर-उधर पड़ी मिली होगी और ले जाकर के अशोक नगर थाने में बंद कर दिया। जब इत्‍तेला मिली तो हमारे तत्‍कालीन नेता प्रतिपक्ष, आदरणीय कल्‍लाजी, सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य और हम कुछ लोग वहां पहुंच गये। जाकर देखा तो एक छोटासा कमरा और उसमें ऐसे खचाखच भर रहे थे जैसे कमेले के अन्‍दर बकरा-बकरी और भेड़ भरी रहती हैं। कल्‍ला साहब ने उनसे पूछा कि तुम्‍हारे पानी पीने की व्‍यवस्‍था है कि नहीं, कहने लगे कि पानी पीने की छोड़ो, पेशाब तो उतरवा दो, हम को तो पेशाब करने नहीं जाने दिया जा रहा है। यह स्थिति है व्‍यापारी वर्ग के साथ में। मैं पूछना चाहता हूं ...(व्‍यवधान)... आप खामोशी से सुन लें।

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या बोल रहे हो? क्‍या बोल रहे हो बीच में?

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): पहले, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सुन लें मेरी बात।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, यह तो इन्‍होंने प्रूव कर दिया न कि भाई, यह तो गरीबों की ही पार्टी है। यह तो प्रूव कर दिया न कि हम कोई व्‍यापारी की परवाह नहीं करते हैं, व्‍यापारियों की परवाह नहीं करते हैं।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): किसी की नहीं की, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह तो आपका इन्‍ट्रैप्‍शन है, यह तो आपका कयास है।

श्री अध्‍यक्ष: आप व्‍यापारियों की पार्टी बता रहे हो और व्‍यापारियों के प्रति कोई हमदर्दी दिखायी नहीं तो फिर क्‍या मतलब हुआ।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): इन्‍होंने तो यह कह दिया कि हम किसी के सगे नहीं हैं। जिधर देखी भरी परात उधर बितायी सारी रात। यह साबित कर दिया कि हम तुम्‍हारे भी नहीं हैं, जब तुम से चंदा लेना होगा, वोट लेना होगा जब तुम्‍हारे बनने की बात करेंगे बाकी हम तो किसी के नहीं हैं। यह सातिबत कर दिया इन्‍होंने।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं कि एकदम बड़े जोर-शोर से यह बात कही गयी कि महिला सशक्‍तीकरण वर्ष, महिला मुख्‍यमंत्री और महिला विधान सभा अध्‍यक्ष और महिला राज्‍यपाल महोदय, यहां गृह मंत्रीजी विराजमान नहीं हैं, गृह राज्‍य मंत्रीजी बैठे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, इन्‍होंने तो सहानुभूति बटोर ली व्‍यापारियों की, यह कह कर के आपने तो जरूर सहानुभूति बटोर ली है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): धन्‍यवाद, माननीय अध्‍यक्ष महोदय।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): दो दिन पहले इनकी भी हालत आपने यही कर दी। दो दिन पहले इनकी भी हालत यही हुई।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): मुझे 90 परसेंट वोट मिले हैं 90 परसेंट, आप आंकड़े उठा कर देख लो। ...(व्‍यवधान)... 

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): न आपको दलित वोट दें और न आपको शिड्यूल्‍ड कास्‍ट के लोग वोट दें और न व्‍यापारी दें।

श्री अध्‍यक्ष: बीच में व्‍यवधान नहीं। बीच में व्‍यवधान नहीं।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): मुझे तो जीरो वोट पर ही जीत कर आ गया ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: बीच में व्‍यवधान नहीं डालें।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह पहली बार आये हैं, अभी मैं कुछ कहूंगा तो फिर बुरी लगेगी।

श्री अध्‍यक्ष: बीच में व्‍यवधान नहीं डालें।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): जौहरी बाजार से आने वाले माननीय सदस्‍य ने बोला तो मैंने एक शब्‍द कहा, बताइये आप। मैं अब कह रहा हूं तो मेरी बात सुनें।

श्री अध्‍यक्ष: सुन लें, बीच में व्‍यवधान नहीं। सुमेरपुर से आने वाले माननीय सदस्‍य, बीच में व्‍यवधान नहीं डालें।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): जरूरी नहीं है कि आप मेरी बात से सहमत हों। आप मेरे मुह में शब्‍द नहीं डाल सकते, मैं वो ही कहूंगा जो मैं उचित समझता हूं।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपकी परमिशन हो, जब मैं बोल रहा था तो इन्‍होंने बहुत डिस्‍टर्ब किया था, परमिशन दें तो आज मैं भी इनको डिस्‍टर्ब करूं क्‍या?

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): आप कर सकते हो।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, माननीय सदस्‍य, नहीं। आप श्रेष्‍ठ विधायक हैं, आप ऐसा कैसे कर सकते हैं।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): इसीलिए मैंने इजाजत ली है आपकी, माननीय अध्‍यक्ष महोदय।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बलात्‍कार की घटनाएं कम हों ज्‍यादा हों, मैं इस गहराई में जाना नहीं चाहता लेकिन बलात्‍कार की घटनाएं नहीं होनी चाहिए। आज हमारी स्थिति यह हो गयी कि छ: साल से लेकर साठ साल तक की महिला सुरक्षित नहीं। अस्‍पताल में सुरक्षित नहीं, थाने में सुरक्षित नहीं और तो और जोधपुर के रणछोड़दास मन्दिर में सुरक्षित नहीं। कौनसी जगह हमारी मां और बहन जायेगी, क हां उसकी इज्‍जत सुरक्षित है यह मैं आपके माध्‍यम से पूछना चाहता हूं। गृह मंत्रीजी, जयपुर में तो ऐसी घिनौनी घटना हुई कि साढ़े चार वर्षीय बालिका सना, जो कोतवाली थाना क्षेत्र में रहती थी, उसका अपहरण हुआ और तीनदिन बाद उसके साथ रेप करने के बाद उसकी लाश को दरबार स्‍कूल में छोड़ कर चले गये।

यह ऐसी घटनाएं समाज पर कलंक हैं इसलिए मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं कि आज कितना हैवान होता जा रहा है इन्‍सान। आज बलात्‍कार के जो दर्ज मुकदमें हैं वह अजमेर रेंज में 116, जयपुर रेंज प्रथम में 82, जयपुर रेंज द्वितीय में 64, बीकानेर रेंज में 129, भरतपुर रेंज में 168, जोधपुर रेंज में 114, कोटा रेंज में 166,  उदयपुर रेंज में 152 और अजमेर रेलवे क्षेत्र में दो, यानि 993 इस तरीके की घटनाएं आज भी राजस्‍थान में हुई हैं। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं कि आखिर कब जाकर के इस हैवानियत से राजस्‍थान को निजात मिलेगी?

इतना ही नहीं, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से कुछ और निवेदन करना चाहता हूं। आतंक से एक विकलांग का पलायन, फागी तहसील के रेनवाळ के एक विकलांक कमरुद्दीन को आतंकवादी और भू-माफियाओं के डर से पलायन करना पडा।

 

 Ars/usc/2n/27032006/1540/1

 

सी एम आफिस से भी 23 मार्च,05 को ओ एस डी ने एक चिट्ठी लिखी कि इसका पुनर्वास किया जाए। सब जगह चला गया, यातायात मंत्री जी ने जयपुर कलैक्‍टर ने, जयपुर एस पी ने, आई जी ने सबने लिखी । आप कहें तो मैं यह इतने पत्रों का पुलिंदा मेरे पास है, आप कहेंगे तो मैं इसको टेबल कर दूंगा।

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या हुआ फिर ? चिट्ठी क्‍यों लिखी , हुआ क्‍या फिर यह तो बताइये।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): कोई कार्यवाही नहीं हुई आज तक, उसको कोई वहां बसने नहीं दे रहा है, यही तो मैं निवेदन कर रहा हूं कि कोई रिजल्‍ट नहीं निकला उसका । एफ आई आर133-043 पुलिस थाना गच्‍छीपुरा नागौर, प्रार्थी लाल मोहम्‍मद लुहार इसको कोई न्‍याय नहीं मिला। सीकर में एफ आई आर 7805 पुलिस थाना सदर अलवर  राजेश सैनी की हत्‍या हो गई, उसका बूढ़ा बाप न्‍याय के लिए इधर से उधर रोता फिर रहा है लेकिन आज तक एक भी अपराधी को कोई उसमें सज़ा नहीं मिली बल्कि उसके अन्‍दर एफ आर लगाने का काम किया है । मेरे निर्वाचन क्षेत्र गोपालगढ़ थाना क्षेत्र बरखेड़ा में वहां एक हरिराम जो अपने खेत में चने काटने के लिए जा रहा था, जुरेडा के अन्‍दर उत्‍तर प्रदेश के कोई बदमाश आए, वायरलैस पर मैसेज आ रहा था कि वह बदमाश सफेद मारूती वेन के अन्‍दर भगे हैं, यहय अपने खेत में चने उखाड़ने के लिए जा रहा था पर कोई अमरूका के लिए सफेद दूसरी मारूति वेन जा रही थी, इसने हाथ दिया कि मुझे मेरा खेत दो किलोमीटर दूर है वहां छोड़ देना उन्‍होंने इसको बैठा लिया, यह उतरकर अपने खेत में जाने लगा कि इसको पकड़ने की कोशिश की। न कुछ किया, 19 साल का लड़का था, कोई 107, 116 का कभी इसके खिलाफ मुकदमा नहीं है मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि अगर कहीं भी जरा सी भी किसी को गाली बकने की भी शिकायत हो तो मैं इस सदन की सदस्‍यता छोड़ने के लिए तैयार हूं लेकिन सिर्फ इसलिए कि मैसेज यह आ रहा था कि सफेद मारूति वेन में भगे हैं, यह उतरा और खट उधर से कोतवाल जी आ रहे थे और उन्‍होंने उठाकर गोली मार दी और वहीं का वहीं मर गया और इसकी मां कह रही है चिल्‍ला चिल्‍ला कर मेरा बेटा बेकसूर था, कोई उसके खिलाफ मामला नहीं है, गोपालगढ़ बंद हो रहा है, आस पास के कस्‍बे बंद हो रहे हैं, लोगों में पुलिस के खिलाफ बड़ा आक्रोश हैऔर पुलिस के अधिकारी जाकर उसकी मां को कह रहे हैं कुछ पैसे लेने हों तो ले ले..

श्री विजय बंसल (भरतपुर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह बिल्‍कुल सत्‍य केस है और एस पी भरतपुर द्वारा पैसे देकर इस मामले को शांत करने का प्रयास किया जा रहा है । मेरा माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से निवेदन है कि इसकी सत्‍यता की जांच कराकर उस मृतक के परिवार को कम से कम सांत्‍वना मिलनी चाहिए।

श्री अध्‍यक्ष: गृह राज्‍य मंत्री जी नोट करिए।

श्री अमराराम चौधरी (राज्‍य मंत्री, गृह): ऐसा है ऐसी घटना अगर घटी है ..

श्री विजय बंसल (भरतपुर): इस पर आंदोलन हो रहे हैं, पंचायत हो रही है, लॉ एण्‍ड आर्डर बिगड़ने की संभावना है।

श्री अध्‍यक्ष: सुनिए तो सही क्‍या कह रहे हैं वह।

श्री अमराराम चौधरी (राज्‍य मंत्री, गृह): जो कुछ घटना घटी हैउसके लिए तो बड़ा दुःख है और यह नोट कर लिया है उसके लिए पूरी कार्यवाही होगी, आप चिन्‍ता नहीं करें निष्‍पक्ष रूप से ..

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बिल्‍कुल बेकसूर आदमी, आज इस घटना को दस दिन हो गये, होम मिनिस्‍टर साहब के नोटिस में है, आपके नोटिस में तो नहीं है, उनकी जानकारी में ..

श्री अध्‍यक्ष: वह जांच करा लेंगे।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): उनकी जानकारी में है मैं उनसे उस रोज भी मिला था। मैंने उनको बताया था उन्‍होंने रिपोर्ट मांगी है लेकिन मैं यह हकीकत बता रहा हूं आपको कि बेवा औरत के पास पुलिस की गाड़ी भरकर गयी और पुलिस वालों ने कहा कि इस कागज पर दस्‍तखत कर दे कि मुझे कोई मुकदमा दर्ज नहीं कराना। पुलिस से तू एक भी पैसा ले सकती है क्‍या हम तेरे को यह टाइम निकल जाए तो कुछ पैसा दे देंगे और तू राजीनामा कर ले। इस तरीके से आप मारने के बाद मारो भी और रोने भी मत दो । यह काहे का न्‍याय है, यह काहे का कानून है ?

श्री अध्‍यक्ष: पुलिस ने थोड़े ही मारा था, पुलिस से थोड़े ही मरा है वह ।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): पुलिस की गोली से ही तो, पुलिस ने ही तो मारा है और बात क्‍या है । पुलिस ने मारा है खुद ने और बिल्‍कुल इन्‍नोसेंट बच्‍चा था, कोई उसका लेना देना नहीं, कुछ नहीं था।

मैं माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से यह निवेदन करना चाहता हूं कि आपने फील्‍ड पोस्टिंग के लिए सब इन्‍सपैक्‍टर, सी आई, डी वाई एस पी, एडिशनल एस पी, एस पी इनकी कोई टर्म तय कर रखी है क्‍या कि इनको एक निश्चित थाने पर इतनी समयावधि से ज्‍यादा नहीं रखा जाएगा। कोई एक साल, दो साल, तीन साल कोई समय तो तय कर रखा होगा कि एक एक जगह एक एक अधिकारी पाँच पाँच साल, चार चार साल कंटीन्‍यू बैठा रहेगा और एक तरु आप अभी सही कह रहे थे सूरजगढ़ से आने वाले माननीय सदस्‍य कि पुलिस विभाग में आप बैन लगा दें तो यह छूट मिल जाती है उसको कि ट्रांसफर तो मेरा हो नहीं सकता चाहे जितना लूटूं और चाहे जो कर लूं। इसलिए आप वहां ए पी ओ करने की तो आपको पावर है। आपके पास शिकायत आए और यह तस्‍दीक हो जाए कि हां, इसने गड़बड़ी की है तो उसको बैन की आड़ के अन्‍दर छूट नहीं मिलनी चाहिए।

मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जयपुर के विधायक पुरी थाने का आपने आदर्श थाना घोषित कर रखा है और हम भी चाहते हैं राजस्‍थान में हर जिले में एक आदर्श थाना बनें ताकि और दूसरे लोगों को प्रोत्‍साहन मिले लेकिन आदर्श थाने का एस एच ओ भी तो आदर्श व्‍यक्ति होना चाहिए। क्‍या विधायक पुरी थाने में जो एस एच ओ लगा रखे हैं मैं उसकी गहराई में नहीं जाना चाहता लेकिन कुछ केस जिसमें माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके झुन्‍झुनूं से ही शुरू है कि जब थाना झुन्‍झुनूं में तैनाती के समय एक निर्दोष जो जन्‍मजात आंखों से अंधा था, नैतराम वह एन डी पी एस एक्‍ट में गिरफ्तार कर लिया बाद में उच्‍च अधिकारियों ने तफ्तीश की और उसको गलत मानकर 179 सी आर पी सी में उसको रिहाई दी। थाना वैशाली नगर में शिवानी जडेजा कांड में दो निर्दोष व्‍यक्ति गिरफ्तार कर लिए, जिनको उच्‍च अधिकारी ने 169 में छूट दी। ऐसे दस केस हैं जिन दस केसों में उनके उच्‍च अधिकारी ने यह माना कि मेरे से नीचे वाले अधिकारी ने यह गलत काम किए हैं । आप कहोगे तो मैं इसकी प्रति माननीय मन्‍त्री जी को उपलब्‍ध करा दूंगा।

श्री अध्‍यक्ष: इसको देने की जरूरत नहीं है यह तो ठीक है इसमें क्‍या बात है । सत्‍यता का पता लग गया तो उन्‍होंने कर दिया, इसमें क्‍या बात हुई ।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): मैं माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से विधि विज्ञान प्रयोगशाला एफ एस एल जिस पर हमारे सारे अपराध जो आज की तारीख में हो रहे हैं उनकी जड़ रहती है कि इसमें हत्‍या, बलात्‍कार, चोरी, डकैती, हिंसा, आगजनी, विस्‍फोट, मादक पदार्थ, धोखा धड़ी आदि का मामला एफ एस एल की जांच से प्रमाणित होता है । आज स्थिति क्‍या है ? एफ एस एल में आपके पास स्‍वीकृत पद हैं 366, मैं डिटेल में नहीं जाता कि डायरेक्‍टर के कितने हैं औरों के कितने हैं लेकिन 366 में मात्र 137 पदों पर वर्तमान में आदमी काम कर रहे हैं और आपके 199 पद माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पिछले साल भी 199 पद रिक्‍त थे और इस साल भी 199 पद रिक्‍त हैं । यानि एक भी पद आप भर नहीं पाये और पिछली साल जो आपके मामले थे पैण्डिंग इस साल फिर आपके वर्ष 2005 में 18,344 नये प्रकरण आपको प्राप्‍त हुए हैं जांच के लिए जो पिछले वर्ष की अपेक्षा 263 ज्‍यादा हैं। इसकी पैण्‍डेंसी बढ़ रही है। आप कितनी भी त्‍वरित गति से कार्यवाही करें लेकिन फिर भी आपकी जो तीनों प्रयोगशालाएं हैं जयपुर, जोधपुर और उदयपुर, मेरा आपके माध्‍यम से निवेदन यह है कि इसमें जो रिक्‍तियां हैं इनको भरा जाना चाहिए और इसमें आपने बेशकीमती मशीनें और उपकरण मांग रखे हैं उनका सही मायने के अन्‍दर आपको इस्‍तेमाल करना चाहिए।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं एंटी करप्‍शन डिपार्टमैंट के बारे में तो यह कहना चाहूंगा, भ्रष्‍टाचार निरोधक ब्‍यूरो में परिवादों का निपटारा होने लगा है लेकिन फिर भी जिस गति से होना चाहिए, कहीं न्‍यायालय के मामले आ जाते हैं, कहीं सरकार की तरफ से परमिशन नहीं मिलती है । जो कुछ भी हो त्‍वरित गति से कार्यवाही करके भ्रष्‍टाचारियों पर सख्‍त से सख्‍त कार्यवाही की जानी चाहिए ताकि राजस्‍थान से हम भ्रष्‍टाचार को जड़ मूल से खतम कर सकें।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं नागरिक सुरक्षा होमगार्ड के बारे में भी एक महत्‍वपूर्ण सुझाव देना चाहूंगा। हमारे यहां राजस्‍थान में तीन तरीके के होमगार्ड हैं। बोर्डर होमगार्ड, अरबन होमगार्ड और ग्रामीण बोर्डर में जैसलमेर, बाड़मेर, गंगानगर और बीकानेर चार जिले आते हैं और अरबन और रूरल ..

(समयसमाप्तिसूचकघंटी)

श्री अध्‍यक्ष: आज बोलने वाले बहुत हैं थोड़ा आप कन्‍क्‍लूड करने की कोशिश करें।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): मैं कर रहा हूं। हां, आधा घंटा तो लगेगा। मैं निवेदन कर रहा था अरबन और रूरल होम गार्ड प्रत्‍येक जिले में हैं और माननीय अध्‍यक्ष महोदय, करीब एक हजार महिलाएं जो होमगार्ड की प्रशिक्षित महिलाएं हैं, जो पुरूष होमगार्ड हैं उनकी तो महीने में लगभग बीस दिन ड्यूटी बराबर लगती रहती है लेकिन जो महिला होमगार्ड हैं उनकी नियुक्ति केवल चुनाव के समय होती है बाकी समय में वह क्‍या करें ? इसलिए मेरा आपसे यह निवेदन है कि इसमें कुछ स्‍थान ऐसे हैं जैसे जनाना अस्‍पताल, महिला छात्रावास, महिला कालेज, महिला नर्सिंग होम....

 

Vns/usc/1550/2o/27.3.2206

 

महिला थाने, सेण्‍ट्रल जेल की महिला भी, रोड़वेज वर्कशाप की महिला भी, इन जगहों पर आपको चुनावों के अलावा भी महिला होम गार्डस की ड्यूटी देने का काम करना चाहिये ताकि उनकी आर्थिक तंगी भी दूर हो और दूसरी जो हमारी महिलाएं हैं उनको भी होम गार्ड के प्रति प्रेरणा मिले, वह होम गार्ड के प्रशिक्षण की तरफ आगे बढ़ पायें।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आज पुलिस के बारे में एक और निवेदन करना चाहूंगा कि माननीय गृह मंत्रीजी ने घोषणा की थी कि प्रत्‍येक जिले में जाकर हम पुलिस के थानावार काम काज की समीक्षा करेंगे। यह एक अच्‍छा कदम था। मैं इसकी प्रशंसा करता हूं लेकिन अभी जैसा मेरे से पहले वक्‍ता कह रहे थे हमारे भरतपुर में भी आये और एक बार मीटिंग ली और कहा कि हर तिहाई में मीटिंग होगी लेकिन एक बार मीटिंग नहीं हो पायी। हमारे पुलिस महा निदेशक महोदय ने भी कहा था कि पुलिस का जन सहभागिता अभियान चलाया जायेगा और इस जन सहभागिता अभियान में पुलिस के साथ समन्‍वय के लाभों से अवगत कराया जायेगा। पुलिस के मददगार लोगों को चिंहित किया जायेगा। बदमाशों की गतिविधियों की जानकारी कर तसदीक की जायेगी। छोटी-छोटी समस्‍याओं का मौके पर ही निपटारा किया जायेगा। आपसी झगड़ों और विचाराधीन मामलों के निपटारे का प्रयास किया जायेगा। लोक अराजकता के मामलों का निपटारा किया जायेगा। स्‍कूल, कालेज एवं अन्‍य संस्‍थानों में अभियान की जानकारी दी जायेगी। इस अभियान के अच्‍छे परिणाम आ रहे थे लेकिन इस अभियान का क्‍या हुआ ? मुझे जानकारी नहीं है। माननीय गृह मंत्रीजी जब भी अपना जवाब देंगे, मैं उम्‍मीद करता हूं कि इसके बारे में भी कहेंगे।

मैं माननीय गृह मंत्रीजी, आपको सुझाव और देना चाहता हूं कि जो बयान होते हैं , उन बयानों की नकल का भी आपको प्रावधान करना चाहिये। इसकी नकल नहीं मिल पाती है। बयानों की नकल का प्रावधान एफ.आई.आर. की तरह किया जाये क्‍योंकि आई.ओ. बयान लिखता है, उसके बाद दस्‍तखत करा देता है। उसकी नकल मिले, बाकायदा हो, ताकि उसमें किसी तरह की गड़बड़ी नहीं हो और न पेचीदगी आगे रहे ... (व्‍यवधान) 

श्री अमराराम चौधरी (राज्‍य मंत्री, गृह): माननीय माहिर आजादजी, आप तो वकील हैं, कब दस्‍तखत होते हैं उस पर ? 161 के बयान हैं और उसमें नहीं होते और आपको थोड़ा ध्‍यान नहीं है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): होते हैं, लेकिन वह लिखता वही है। 161 में नहीं होते हैं। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं...

श्री अध्‍यक्ष: अब आप प्‍लीज कनक्‍लूड करें।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): पाँच मिनट।

श्री अध्‍यक्ष: पाँच मिनट नहीं, अब बहुत देर हो गयी है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): सिर्फ पाँच मिनट।

श्री अध्‍यक्ष: बहुत सदस्‍य हैं बोलने वाले।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): मुझे एक तो कारागार पर बोलना है और कुछ बहुमूल्‍य सुझाव देने हैं।

श्री अध्‍यक्ष: 45 मैम्‍बर्स, अभी सदस्‍य बाकी हैं 45...

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): पाँच मिनट तो बोल लूं मैं। मेरा तो सारा समय माननीय अध्‍यक्ष महोदय, डिस्‍टर्बेंस में चला गया। सिर्फ पाँच मिनट, आप घड़ी देख लें।

श्री अध्‍यक्ष: डिस्‍टर्बेंस में तो आपके पाँच-दस मिनट गये हैं, बाकी बोल भी लिये काफी आप। बोले भी काफी हैं।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): पाँच मिनट।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप जरा देखिये। उत्‍तर प्रदेश में एक लाख लोगों पर 77 अपराध हैं। एक लाख लोगों की आबादी पर सतहत्‍तर अपराध और राजस्‍थान में एक लाख लोगों पर दो सौ पच्‍चीस अपराध। उत्‍तर प्रदेश के एक थाने में 40 से लेकर 70 तक पुलिस कर्मी हैं ... (व्‍यवधान) फिर आपके बीमारी हो रही है कुछ। पता नहीं आपको क्‍या, समझ में नहीं आती बात मेरे। कुछ दिमाग घर रखकर आते हो क्‍या ? ... (व्‍यवधान) आप पूरा सुनोगे। फिर टाइम ... (व्‍यवधान) सुनिये ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: बीच में व्‍यवधान जितना ही डालोगे उतना ही यह अधिक समय कंजूम करेंगे। क्‍या फायदा ?

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): बिलकुल। मैं निवेदन यह कर रहा हूं कि उत्‍तर प्रदेश में 1 लाख पर 77 अपराध और राजस्‍थान में 1 लाख पर 255। यू.पी. में एक थाने में 40 से लेकर 70 तक सिपाही और राजस्‍थान में एक थाने में 12 और 15, 16 भी नहीं। उत्‍तर प्रदेश में एक थाने में चार-पाँच व्हिकल और राजस्‍थान के अन्‍दर एक की भी कैसी स्थिति है, वह सूरतगढ़ से आने वाले माननीय सदस्‍य ने बता दिया। हरियाणा हमारा सीमावर्ती राज्‍य है। हरियाणा में एक थाने पर 30 से 40 सिपाही और 3 व्हिकल और आधुनिकतम हथियार भी । हरियाणा में 30 किलोमीटर के ऊपर एक हाईवे पैट्रोलिंग और राजस्‍थान में 70 जिले के सौ किलोमीटर तक एक हाईवे पैट्रोलिंग। मुझे बताइये कैसे राजस्‍थान की पुलिस अपराधियों का जो यू.पी. में अपराध करके यहां आ जाते है, जो हरियाणा में अपराध करके यहां आ जाते हैं, मुकाबला कर पायेगी। न उनके पास नफरी ज्‍यादा, न उनके पास आधुनिकतम हथियार, न उनके पास व्हिकल्‍स। हमारे यहां तो स्थिति यह है कि 14 का थाना है, एक चला जाता है कोर्ट ड्यूटी में, दो रहते हैं एल.सी. की  ड्यूटी में। चार संतरी, दो वायरलैस में, दो तफतीश पुलिंदा के साथ और तीन छुट्टी पर। 14, क्‍या बीट में किसी ड्यूटी लगेगी, सम्‍मन की तामील कराने कौन जायेगा, वी.आई.पीज. की ड्यूटी में कौन जायेगा ? इसलिये मेरा निवेदन है कि राजस्‍थान के अन्‍दर पुलिस की नफरी को बढ़ाया जाना चाहिये।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अब मैं अंत में कारागार विभाग के बारे में अपनी कुछ राय देना चाहूंगा। मेरे कटमोशन भी हैं..

श्री अध्‍यक्ष: अब आप कारागार को तो रहने ही दो। अब बहुत हो लिया। बहुत हो लिया।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): शार्ट में दे दूंगा।

श्री अध्‍यक्ष: अब क्‍या शार्ट में कहेंगे आप ?

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): यही है कि जो आपने पैरोल के लिये और जेलों के निरीक्षण के लिये और जो जेलों में कमेटी बन रही है उस कमेटी की समय पर मीटिंग होनी चाहिये। जेलों में जो आजीवन कारावास के कैदी हैं उनका साम्राज्‍य रहता है, उस साम्राज्‍य को आपको रोकना चाहिये।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं कि राजस्‍थान की भारतीय जनता पार्टी की सरकार अपने एक हिडन एजेंडे पर चल रही है। आपने पहले अल्‍पसंख्‍यकों मुसलमानों के खिलाफ कर्जा लिया। मांडल, भीलवाड़ा, खानपुर, इकलेरा, मलारना डूंगर, सबलाना, धोलेड़, कामां, वहां आपने जो यह प्रयास किया उनका हेरेसमेंट करने का लेकिन जब मुसलमान आपके वश में नहीं आये तो अब आपने ईसाईयों के ऊपर अत्‍याचार करने का, आतंक करने का काम शुरू कर दिया है। हकीकत की आड़ में, जिसने भी हकीकत पुस्‍तक के अन्‍दर जो कुछ भी गलत टिप्‍पणी की है हमारे देवी देवताओं के प्रति आप उनको सज़ा दें, उसमें हमको कोई ऐतराज नहीं है लेकिन एक पूरे समाज की शिक्षण संस्‍थाओं पर जिनमें वी.आई.पीज. के बच्‍चे पढ़ते हैं, आपमें से भी अधिकांश के बच्‍चे पढ़ते हैं, उनकी सारी शिक्षण संस्‍थाओं पर केवल इस बात के लिये  आप कुठाराघात करने का काम करें कि इनका ताल्‍लुक ईसाई समुदाय से है। इस हिन्‍दू एजेंडे के ऊपर आप चलेंगे तो राजस्‍थान की कानून और व्‍यवस्‍था बिगड़ेगी। किसी भी स्थिति में कानून और व्‍यवस्‍था की स्थिति को नहीं सुधार सकते।

आपने माननीय गृह मंत्रीजी, पिछली साल भी इस सदन में छाती ठोक कर कहा था कि हम धर्मान्‍तरण विरोधी विधेयक लायेंगे। लाये क्‍या आप ? अब आप ला रहे हैं लेकिन आप दूसरी जगह तो कोई धर्म सम्‍मेलन करे तो उसका आप विरोध करते हैं और सख्‍ती से कुचलने का काम करते है लेकिन जब आपके के.सी. सुदर्शन जी ब्‍यावर के अन्‍दर आते हैं तब आप वहां पर काठात और चीतामेराज में शुद्धिकरण के नाम पर उनका धर्म परिवर्तन कराते हैं ... (व्‍यवधान) पर उपदेश कुशल बहुतेरे। आप दूसरों को तो नसीहत दें और खुद आप अमल करने का काम नहीं करें, यह दोनों बातें एक साथ नहीं चल सकती हैं इसलिये ... (व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): हिन्‍दू एजेंडे का नाम लेकर इस प्रकार का यह माहौल किया जाता है, इनसे कहा जाये कि वह अपने कटमोशन पर सही बोलें वरना यह हम सहन नहीं करेंगे।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): एक मिनट आप बैठो।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): आप सहन करो, या नहीं करो, मैं माननीय अध्‍यक्ष महोदय, से निवेदन यहां कर रहा हूं। मैं अध्‍यक्ष महोदय, निवेदन करना चाह रहा हूं ... (व्‍यवधान) 

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): अध्‍यक्ष महोदय, बोलने का अधिकार नहीं है हिन्‍दुओं के ऊपर। हिन्‍दुओं के ऊपर आपको बोलने का अधिकार नहीं है। क्‍या बोल रहे हो आप ? हिन्‍दू देवी-देवताओं का अपमान करने वालों का आप सपोर्ट कर रहे हो और यह बात आप यहां बोलने जा रहे हो, कोई रोक नहीं रहा। आपका क्‍या यहां कोई धणी धोरी नहीं है। हम कहते हैं ... (व्‍यवधान) हिन्‍दुओं पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है हिन्‍दुओं का अपमान करने के ऊपर, हिन्‍दू देवी-देवताओं का अपमान किया है, उसका समर्थन कर रहे हो आप लोग। शर्म आनी चाहिये ... (व्‍यवधान) 

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय सदस्‍य से एक बात पूछना चाहता हूं ... (व्‍यवधान) 

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन यही कर रहा हूं समान सख्‍ती का काम करना चाहिये, समान व्‍यवहार करना चाहिये। अगर दोहरे मापदंड अपनाओगे, दोहरी नीतियां अगर आप अपनाओगे तो मैं ... (व्‍यवधान) उससे आपकी कानून और व्‍यवस्‍था की स्थिति सुदृढ़ नहीं रह सकती ... (व्‍यवधान) 

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): इतनी हिम्‍मत कैसे आ सकती है हिन्‍दुओं के खिलाफ बोलने की ... (व्‍यवधान) 

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): राजस्‍थान में इन्‍हीं दोहरे मापदंडों के कारण ... (व्‍यवधान) 

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अध्‍यक्ष महोदय, मैं इनसे एक बात पूछना चाहता हूं माननीय सदस्‍य, कृपा करके बतायें कि अपने जीवन में आपने कितनी बार नाम बदला। यह कृपया आप सदन के सामने स्‍पष्‍ट करें।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): आप मेरे मौलवी साहब और पंडि़त जी से पूछ लेना ... (व्‍यवधान) 

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): आप अपना बता दें अपने बारे में। आप केवल अपने बारे में बता दें कि आपने अलग अलग नामों से कितनी बार कुकृत्‍य किये, आपने अलग-अलग नामों से क्‍या-क्‍या कारनामे किये ? कितनी बार अपने नाम बदले।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): छोड़ो आप। मैं आपसे बात नहीं कर रहा हूं, अध्यक्ष जी से बात कर रहा हूं।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): पहले अपने गिरेबान में झांक कर देखो, ईश्‍वर का नाम लो ... (व्‍यवधान) 

श्री राकेश मेघवाल (परबतसर): पार्टियां भी कितनी बदली यह भी बता दें ... (व्‍यवधान) 

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): आपकी सरकार है, जांच कराओ।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अपना नाम कितनी बार बदला ? नाम कितनी बार बदला, कृपया यह आप सदन में स्‍पष्‍ट कर दें। आप पर तो आरोप लगे है, जरा आप अपने गिरेबान में झांक करके देखो ... (व्‍यवधान) 

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस प्रकार यह भी कहा गया कि आप सदन में बढ़ाओ बात ... (व्‍यवधान) माननीय सदस्‍य को यहां सचेत कर रहे हैं कि ऐसी कोई भावना, हमको ठेस पहुंचाने वाली बात नहीं कहें। यह खुला कह रहे हैं हिन्‍दू एजेंडे पर ... (व्‍यवधान) 

श्री अध्‍यक्ष: कृपया कनक्‍लूड कर दें। ... (व्‍यवधान) राजसमंद से आने वाले माननीय सदस्‍य, हर बात पर टिप्‍पणी करना आवश्यकता नहीं है। आप क्‍यों टिप्‍पणी करते हैं हर बात पर ? शांति से बैठे रहा करें। आप जब समय, मौका आए, आपका अवसर आए बोलने का तब बुलायेंगे। ऐसे क्‍यों खड़े होते हैं आप बीच-बीच में ... (व्‍यवधान) 

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): भाग जाते हैं यह। तब तो सुनने के लिये तैयार नहीं होते, भाग जाते हैं मैदान छोड़कर ... (व्‍यवधान) 

श्री अध्‍यक्ष: सुमेरपुर से आने वाले माननीय सदस्‍य, बीच में व्‍यवधान न डालें1 आप। अब आपको दो मिनट का समय दे रही हूं।  Within two minutes please conclude your speech.

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ठीक है। दो मिनट के बजाय अभी एक मिनट में ... (व्‍यवधान)

 

 

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श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, यह गंभीर मामला है, पता नहीं क्‍या-क्‍या कारनामे करे थे, नाम बदल लेते हैं ताकि पुलिस को पता नहीं चले ..(व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): जांच कराओ जांच, जांच करा लो...(व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): आप तो सदन के अंदर बता दो कि आपने नाम कितनी बार बदले...(व्‍यवधान) मैं दूंगा सबूत ।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): जांच करा लो जांच ।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): पहले आप बोलें कि कितनी बार आपने नाम बदले हैं और हर नाम पर आपने क्‍या-क्‍या किया है । यह भी बतायें सदन में ...(व्‍यवधान)

श्री जोगाराम पटेल: इसकी भी जांच होनी चाहिए ।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): यह गृह मंत्रि जी बैठे हैं आप जांच करा लें ...(व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): खास कारनामे हैं आपके ...(व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): अध्‍यक्ष महोदय, यह मेरा समय अभी शुरू नहीं हुआ है...(व्‍यवधान)

डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): यह बहुत गंभीर मामला है, आपसे अनुरोध करते हैं कि यह पूरी बात सदन के सामने आनी चाहिए...(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): क्‍या इस्‍लाम धर्म से परिवर्तन करता है तो उसे सज़ा ए मौत होती है ।

श्री अध्‍यक्ष: सज़ा ए मौत ?

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): सज़ा ए मौत का प्रावधान है इस्‍लाम  में ।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): यह देखें, मैं तैयार हूं आप कुछ करें तो सही।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): है की नहीं है, आज ही अख़बार में आपने पढ़ा होगा, आज ही आया है ।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): पढ़ना आता है आपको । बड़ी खुशी की बात है...(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): कोई यदि इस्‍लाम से परिवर्तन करता है तो उसको सज़ा ए मौत है और उसको सज़ा सुनायी गयी है मौत की ।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): अध्‍यक्ष महोदय, आप खुद देखें, यह दो मिनट कैसे खत्‍म होंगे ।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): सज़ा ए मौत ही क्‍यो ? आप तो इनको पैदा ही मत होने दें जो झगड़ा ही नहीं रहे...(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): मैं तो उसकी बात कर रहा हूं ।

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या बोल देते हैं, हिण्‍डौली से आने वाले माननीय सदस्‍य आप क्‍या बोल देते हैं । आपको खुद को ही पता नहीं है कि आप क्‍या कह गये ...(व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): यह क्‍या बोल रहे हें ...(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): मैं तो क्‍या कहता हूं और यह इसका क्‍या अर्थ लगाने लग गये...(व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): अध्‍यक्ष महोदय, मैं अंत में यह निवेदन कर रहा हूं कि दोहरे मानदंड अगर हम रखेंगे तो कानून व्‍यवस्‍थाा नहीं रह सकती है । हमें मानदंड एक रखने पड़ेंगे । चाहे हम ईसाइयों को कनवर्जन करने से रोकें, चाहे हम मुसलमान को रोकें, चाहे हम हिन्‍दु धर्म के लोगों को रोकें । कोई भी करे, कनवर्जन करना अगर कानूनन अपराध है तो आपको एक मानदंड रखना पड़ेगा और एक डंडे से सबको हांकना पड़ेगा । अगर आप गलत-गलत मानदंड अपनाओगें , दोहरे मानदंड अपनायेंगे तो आप कानून व्‍यवस्‍था की स्थिति को बेहतर नहीं बना सकते हैं । मैं अंत में एक शेर सुनाकर अपनी बात खत्‍म करना चाहूंगा । एक शायर ने सही कहा  है ।

श्री अध्‍यक्ष: बीच में नहीं बोलें ।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): अब यह देखें ।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): अध्‍यक्ष महोदय, अब इसमें प्रावधान यह है कि यदि कोई काननू...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: वह शेर सुना रहे हें और आप बीच में प्रावधान बता रहे हैं ...(व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): शेर आता है तो गीदड़ तो भागते ही हैं ।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): शेर तो सुनूंगा, लेकिन कोई पहले गलती से धर्म परिवर्तन कर लिया, मजबूरी में या दबाव में तो वह वापस आ सकता है ।

श्री अध्‍यक्ष: इन्‍होंने किया है क्‍या ? इन्‍होंने किया है क्‍या ?

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): इसमें कोई दिक्‍कत नहीं है ।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): बहुत ठीक है, बिलकुल ठीक है ।

श्री अध्‍यक्ष: आप स्‍थान ग्रहण कर लें ...(व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): मैं आखिर में शेर सुनाकर अपनी बात खत्‍म कर रहा हूं ,एक जाम मोहब्‍बत का भी पीने नहीं देंगे, यह आप पर कह रहा हूं मदन दिलावर जी, एक जाम मोहब्‍बत का भी पीने नहीं देंगे, रोना भी अगर हम चाहे तो रोने नहीं देंगे । जीना है अगर तुमको तो हालात बदल दो, हरिमोहन जी, वरना तुम्‍हें यह लोग चैन से जीने भी नहीं देंगे । धन्‍यवाद, जय हिन्‍द ।

श्री अध्‍यक्ष: अब आपने सुना दिया । लेकिन इस विधान सभा की जो इस समय हालत हो गयी है उसमें मुझे भी याद आ गया, एक शेर सुना देती हूं ।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): इरशाद, इरशाद ।

श्री अध्‍यक्ष: कभी पीकर जितना छोड़ देते थे पैमाने में,

अब तो उतना भी नहीं रहा तेरे मयखाने में ।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): अध्‍यक्ष महोदय, अब इसका तो जवाब सुनिये आप,

आंसू से कहो टपके मगर रोये नहीं,

शबनम से कहो बरसे मगर खोये नहीं,

पीने का मजा तो तब है यारों,

मयखाने में सभी झूमें मगर पिये नहीं ।

श्री अध्‍यक्ष: चलिये । श्री प्रहलाद गुंजल ।

श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्‍डी): अध्‍यक्ष महोदय, अनुदान की मांग संख्‍या 16 पुलिस और 17 कारागर पर चर्चा हो रही है 1 पुलिस महकमा राज्‍य प्रशासन की दाहिनी भुजा है । प्रशासन की व्‍यवस्‍था में एक ऐसा महकमा जिसमें यदा-कदा अवसरों को छोड़कर सर्वत्र आलोचना का शिकार होना पड़ता है ।

अध्‍यक्ष महोदय, अभी मेरे से पहले नगर से आने वाले माननीय सदस्‍य और जौहरी बाजार से आने वाले माननीय सदस्‍य पुलिस पर चर्चा करते समय विभिन्‍न प्रकार की घटनाओं का संदर्भ व्‍यवस्‍था के पक्ष और विपक्ष में जोड़कर उसका वर्णन कर र‍हे थे । मैं यहां उल्‍लेख करना उचित समझता हूं कि हम पुलिस को उसके कामकाज और व्‍यवहार के कारण आलोचना का शिकार तो बनाते हैं लेकिन आज हमें यह भी विचार करना पड़ेगा कि हमने 1974 में पुलिस पुर्नगठन योजना बनायी और उसको रिफ्रेमेशन 1994 में किया । उसके बाद क्‍या हम इस दिशा में सार्थक रूप से आगे बढ़े हैं । जहां 1971 में 664 व्‍यक्तियों पर एक पुलिस कर्मी हुआ करता था । आज उसकी संख्‍या बढ़कर 2004 में लगभग 950 व्‍यक्तियों पर एक पुलिस कर्मी है । इतना ही नहीं लोकतंत्र की इस व्‍यवस्‍था में वैलफेयर कंसेप्‍ट को लागू करने के लिए पुलिस की भुमिका को हमने बढ़ाया है, लॉ इंर्फोमेशन एजेंसी के रूप में हम पुलिस को उपयोग में लाते हैं और पुलिस का खाली कानून व्‍यवस्‍थ पर नियंत्रण, शांति और सौहार्द बनाना ही नहीं है ।

अध्‍यक्ष महोदय, अभी जौहरी बाजार से आने वाले माननीय सदस्‍य चर्चा कर रहे थे। वीआईपी की डयुटी हो तो पुलिस का महकमा जायेगा, समाज में होने वाले तमाम प्रकार के धार्मिक, सांस्‍कृतिक, राजनीतिक कार्यक्रम आज इसके लिए भी पुलिस जरूरी हो गयी है । नगर से आने वाले माननीय सदस्‍य कह रहे थे कि एक तरफ तो हमने नफरी बढ़ायी नहीं और दूसरी तरफ पुलिस के काम इतने बढ़ गये, कानून व्‍यवस्‍था के नियंत्रण से लेकर के 50 प्रकार की डयुटी पर आज पुलिस को काम करना पड़ता है । लेकिन इस हालात में जब हम कभी यह चर्चा करते हैं देश के अन्‍य प्रांतों में अपराध का ग्राफ जिस प्रकार से बढ़ा रहा है । कानून-व्‍यवस्‍था और समाज में शांति-व्‍यवस्‍था की बात पर जब चर्चा करते हैं तो यह हमारे लिए बहुत सुखद स्थिति है कि हमारा प्रांत आज भी देश के शांतिपूर्ण प्रांतों में गिना जाता है ।

अध्‍यक्ष महोदय, मैं आज इस अवसर पर राजस्‍थान के गृह मंत्रि और उनके महकमे को बधाई देना चाहता हूं । अपराध और अपराध की प्रवृत्ति जब बढ़ती है वह तब बढ़ती है जब समाज में अपराध घटित हो जाये और अपराध घटित हो जाने के बाद उस पर सख्‍ती से कार्यवाही नहीं हो । अपराधी के खिलाफ गंभीरतापूर्वक कार्यवाही नहीं हो । उसको दंडित नहीं किया जाये । कानून प्रक्रिया की शिथिलता के कारण जब न्‍याय प्रक्रिया के विलंब से अपराधी दोषमुक्‍त हो जाता है तो उसका हौसला बढ़ता है । लेकिन इस दिशा में राजस्‍थान की पुलिस ने पिछले सालों में बहुत उल्‍लेखनीय काम किये हैं और उसका नतीजा रहा है कि 2005 में जो महत्‍वपूर्ण काम हुए 24.11.05 विधायक पुरी में विदेशी महिला से छेड़छाड़ मामले में घटना के तीन दिन में चालान और उसी दिन न्‍यायालय ने 6 माह का कारावास किया । 26.12.05 को अमेरिकी महिला के अपहरण और छेड़छाड़ के मामले में त्‍वरित कार्यवाही करके अभियुक्‍तों को सात-सात साल का कारावास और ऐसी कई सारी घटनाएं हैं जिनमें एक सप्‍ताह के अंदर फैसला हुआ । पुलिस ने तत्‍परता दिखायी और इस बात का संदेश सारे समाज में गया । 

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राजस्‍थान की पुलिस और राजस्‍थान की सरकार हर तरीके से अपराधों पर नियंत्रण करके आपराधिक मानसिकता को कुचलना चाहती है और इस दिशा में यह पहला अवसर होगा कि जब एक नहीं, एक साथ दर्जनों मुकदमों में पुलिस ने दो दिन, तीन दिन, एक सप्‍ताह के भीतर-भीतर चालान किया और त्‍वरित गति से न केवल न्‍यायालय में चालान पेश किया बल्कि प्रोसीक्‍यूशन की कार्यवाही को भी पूरा कराकर अपराधियों को दण्डित करवाया। इस दिशा में लगातार सरकार के प्रयासों के बाद हालात यह बने कि आंकड़ों में अपराधों में गिरावट आई है, अपराधियों में भय पैदा हुआ, अपराधियों की मानसिक स्थिति में पुलिस का भय पैदा हुआ और हम देखते हैं कि पिछले सालों की तुलना में इस बार अपराधों में माइनस नौ प्रतिशत की गिरावट आई है लेकिन इसके बाद भी समाज में जिस प्रकार से पुलिस के व्‍यवहार को लेकर चर्चा होती है, मैं आज उसके बारे में कहना चाहता हूं। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं समझता हूं कि पुलिस के व्‍यवहार और कार्यप्रणाली के बारे में आज समाज में किसी भी प्रकार से जाकर चर्चा कर लें कोई व्‍यक्ति संतुष्‍ट नजर नहीं आएगा। थानों में जब फरियादी जाता है तो उसको एफ आई आर दर्ज करवाने का पैसा देना पड़ता है। मुलजिम को पैसा देना पड़ता है और समाज में पुलिस के बारे में इस प्रकार की धारणा बन गई कि पुलिस का महकमा इतना शक्तिशाली बन गया कि इस महकमे में काम कराना है तो यहां कोई राजनी‍तिक सिफारिश काम नहीं आएगी यहां तो केवल पैसे को आधार बनाकर ही काम कराया जा सकता है लेकिन पुलिस के इस व्‍यवहार को, पुलिस की समाज में आलोचना को दूर करने के लिए पिछले सालों में राजस्‍थान पुलिस ने सराहनीय कदम उठाए हैं और एक कार्यक्रम चलाया है, जन सहभागिता  कार्यक्रम। डाइरेक्‍टर जनरल ऑफ पुलिस ने राजस्‍थान के तमाम अधिकारियों को निर्देशित किया कि समाज में पुलिस की आलोचना कम होनी चाहिए इसके लिए पुलिस जाकर के गांव के दरवाजे पर पहुंचे और गांव की चौपाल पर बैठकर अपने व्‍यवहार और काम के बारे में लोगों के साथ पारदर्शी व्‍यवहार करे और जब इस प्रकार का कार्यक्रम समाज के बीच में हो तो इस इलाके के अधिकारियों के अतिरिक्‍त पुलिस के बड़े अधिकारी मौजूद हो तो उनकी उपस्थिति के अन्‍दर समाज के उस गरीब तबके को थाने में होने वाले व्‍यवहार की जानकारी मिले, यह जानकारी जब पुलिस के आला अधिकारियों के ध्‍यान में आए तो पुलिस के व्‍यवहार को सुधारने के बारे में आवश्‍यक कदम उठाए जाए लेकिन दुर्भाग्‍य से माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ऐसा करने से पुलिस के आचरण की पोल खुलती है। डी जी साहब के आदेश के बाद कुछ दिनों तक तो इस प्रकार की कार्यवाही चली लेकिन बाद में इसमें कोई प्रगति नहीं हुई। आज इस दिशा में कोई सार्थक कदम नहीं। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहता हूं कि जिस संवेदनशीलता के साथ आपने यह कार्यक्रम चलाया उसका ईमानदारी से पालन होना चाहिए था और ईमानदारी से पालन होने के साथ-साथ यह तय किया जाना चाहिए कि जब आप जन सहभागिता सभा का आयोजन करें उस सभा में सी आई के साथ-साथ उस जिले का सुपरिन्‍टेण्‍डेण्‍ट ऑफ पुलिस मौजूद रहे, उस इलाके का एडीशनल एस पी मौजूद रहे और गांव के व्‍यक्ति को स्‍वच्‍छंदता के साथ अपने साथ होने वाले बरताव के बारे में कहने का अवसर प्रदान करें। जब इस प्रकार की व्‍यवस्‍था होगी तो निश्चित रूप से गांव में पुलिस के बारे में धारणा बदलने लगेगी, आम व्‍यक्ति की, फरियादी की पुलिस के बारे में धारण बदलेगी लेकिन माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम कभी-कभी पुलिस को केवल उसके व्‍यवहार के कारण दोषी ठहराते हैं। आज हमें यह भी चिन्‍ता करनी पड़ेगी कि उसके सामने किस प्रकार की तकलीफें हैं, 24 घण्‍टे की हार्ड ड्यूटी पर काम करने वाला व्‍यक्ति...

श्री अध्‍यक्ष:  माननीय सदस्‍य, मैं क्षमा चाहूंगी आपसे, बोलने वाले 41 माननीय सदस्‍य, है इसलिए 10 मिनट से अधिक बोलने का समय किसी को नहीं दिया जाएगा। आपके 10 मिनट तो हो गए हैं।

श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्‍डी): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे से पूर्व बोलने वाले माननीय सदस्‍य 40 मिनट बोले हैं।

श्री अध्‍यक्ष: आप सुनिए तो मेरी बात, यद्यपि आपके 10 मिनट हो गए हैं लेकिन आप दो मिनट में अपनी बात को समाप्‍त करें।

श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्‍डी): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं 10 मिनट और बोलूंगा, मेरे से पहले बोलने वाले माननीय सदस्‍य, 40 मिनट बोले हैं। मैं आपका को-आपरेशन चाहूंगा, मैं 10 मिनट बोलूंगा।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, इसीलिए मैं दो मिनट आपको दे रही हूं एक्‍स्‍ट्रा। आप दस मिनट तो बोल लिए लेकिन दो मिनट में अपनी बात समाप्‍त कर दें, 41 माननीय सदस्‍य और अभी बाकी हैं बोलने वाले, अब यदि दस-दस मिनट भी दिए जाएंगे तो कितना समय होगा, आप बताइए?

श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्‍डी): थोड़ी देर में कन्‍क्लूड कर दूंगा।

श्री अध्‍यक्ष: दो मिनट में अपनी बात कह दें।

श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्‍डी): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आलोचना को आधार बनाकर उस एजेन्‍सी के बारे में जिस पर समाज में सारी व्‍यवस्‍था कराना हाथ में है, केवल चर्चा करेंगे तो यह ठीक नहीं होगा। हमको इस दिशा में भी चर्चा करनी पड़ेगी कि उसके सामने कौनसी मौलिक समस्‍याएं हैं, वह 24 घण्‍टे की हार्ड ड्यूटी समाज के बारे में देते हुए अपना सामाजिक दायित्‍व और अपना पारिवारिक दायित्‍व ठीक प्रकार से निभा पाए, उसके सामने यह तकलीफ रहती है कि उसके बच्‍चे की एजूकेशन अच्‍छी हो, उसके रहने की व्‍यवस्‍था अच्‍छी हो और इस दिशा में पहली बार राजस्‍थान के गृह मंत्रीजी ने सोचा और पिछले बजट में एक हजार आवास बनाने का उन्‍होंने निर्णय लिया। मैं उसके लिए उनको बधाई देना चाहता हूं लेकिन कई प्रकार की विसंगतियां ऐसी हैं माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बड़ी भारी पुलिस के जवानों की नफरी, मैं अभी पिछले दिनों पुलिस के कुछ अधिकारियों से चर्चा कर रहा था और उन्‍होंने एक बात कही कि जो पुलिस के महकमे में रात दिन जान लड़ाकर सुबह से शाम तक ड्यूटी करता है और अपनी जान की बाजी लड़ाकर जो सिपाही बड़ी-बड़ी मुठभेड़ों में डाकुओं से झगड़ा करता है, उन अपराधियों को गिरफ्तार करने के लिए अपनी जान को जोखिम में लगाता है, वह सिपाही जिसकी नौकरी को बीस-बीस, पच्‍चीस-पच्‍चीस साल हो गए और जिसको ए एस आई के बराबर तनख्‍वाह मिल रही है, हैड कांस्‍टेबल के बराबर तनख्‍वाह मिल रही है लेकिन उसके परमोशन के बारे में जिसका राज्‍य सरकार पर कोई अतिरिक्‍त व्‍यय भार नहीं पड़ रहा है, जिससे जाब्‍ते की संख्‍या में कोई घटोत्‍तरी या बढ़ोत्‍तरी पर कोई अतिरिक्‍त भार नहीं पड़ रहा, मैं समझता हूं कि इस दिशा में भी गृह मंत्रीजी, जो कांस्‍टेबल बरसों से, बीस साल की नौकरी करके हैड कांस्‍टेबल का वेतन पा रहा है, ए एस आई का वेतन पा रहा है, ऐसे कांस्‍टेबल को परमोशन के बारे में नीति निर्धारित करनी चाहिए और नीति निर्धारित करने से उसका मनोबल बढ़ेगा और काम की क्षमता बढ़ेगी।

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श्री रामनारायण विश्‍नोई, उपाध्‍यक्ष, पदासीन

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, कई बार जाने अनजाने में इस प्रकार के फैसले लिए जाते हैं जिनसे पुलिस जाब्‍ते के बड़े भारी मनोबल गिरने की स्थितियों का निर्माण होता है। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय गृह मंत्रीजी के ध्‍यान में यह मामला लाना चाहता हूं। पुलिस में जो बहादुरी का काम करते हैं उसके लिए गैलेण्‍ट्री परमोशन का तरीका रखा गया है। 14 नवम्‍बर, 2005 को राजस्‍थान के गृह सचिव महोदय ने एक आदेश जारी किया कि गैलेण्‍ट्री परमोशन एक साल में एक को देंगे और उसका आधार बनाया, कुख्‍यात डकैतों के साथ मुठभेड़ की हो, कानून और व्‍यवस्‍था के लिए जान को जोखिम में डाला हो, अन्‍तर्राष्‍ट्रीय स्‍मगलिंग गैंग का पर्दाफाश किया हो। लेकिन क्‍या हुआ माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, उस आदेश को आपने 2005 में ही, 3 दिसम्‍बर को दुबारा आदेश दे दिया कि दो व्‍यक्तियों को परमोशन किया जा सकता है। फिर कुछ दिन बाद आपने फिर दुबारा आदेश और जारी कर दिया और दो व्‍यक्तियों को परमोशन और कर दिया जाए लेकिन इसके लिए क्‍या आधार बना? थाने में साफ-सफाई एक इन्‍सपेक्‍टर बहुत अच्‍छे तरीके से करा रहा है, जे डी ए के अतिक्रमण दस्‍ते में बहुत बढिया काम कर रहा था, क्‍या थाने की साफ सफाई करना और अतिक्रमण दस्‍ते में रूटीन में काम करना पुलिस की जिम्‍मेदारी में नहीं आता? इसमें कौनसा ऐतिहासिक वीरता का काम हो गया?

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से गृह मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहता हूं कि आप देओ परमोशन, कोई तकलीफ नहीं है, परमोशन दीजिए, मनोबल बढेगा लेकिन यह पद्धति मत डालो कि पुलिस जाब्‍ते में यह संदेश चला जाए कि मुझे परमोशन लेने के लिए वीरता का काम करने की जरूरत नहीं है, नेताओं की गणेश परिक्रमा करने की आवश्‍यकता है तो फिर पुलिस का कोई जवान और पुलिस का कोई अधिकारी जब उसके मन में यह संशय हो जाएगा कि गणेश परिक्रमा के आधार पर पद्दोन्‍नति मिलती है तो वह फिर किसी भी सूरत में वीरता का काम हाथ में लेगा नहीं।

कोटा में कई प्रकार के केस हुए, वैभव अपहरण काण्‍ड का मामला हुआ, हकीकत के अपराधियों को गिरफ्तार करने का मामला हुआ। यहां तक कि जिस विषय को लेकर पिछली बार सदन में बहुत गम्‍भीरतापूर्वक विचार हुआ, बाघों के शिकार करने के कारण रणथम्‍भौर खाली हो रहा है, सरिस्‍का खाली हो रहा है, उन अपराधियों को पकड़ने के लिए कोटा की पुलिस ने ऐतिहासिक काम किया। किन्‍तु न आज तक उनको परमोशन नहीं दिया गया। क्‍यों नहीं उनको सम्‍मानित किया गया? माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से राजस्‍थान के गृह मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहता हूं कि जिस वैभव अपहरण काण्‍ड में पुलिस ने तत्‍परता के साथ ऐतिहासिक काम किया, उनको उत्‍तर प्रदेश की पुलिस ने दस घण्‍टे में सम्‍मानित किया, उनको दिल्‍ली पुलिस ने एक सप्‍ताह में सम्‍मानित किया  लेकिन आज तक उस वैभव अपहरण काण्‍ड में वैभव को बरामद किया, तीन करोड़ रुपए की राशि बरामद हुई, एक साल से ज्‍यादा का समय हो गया लेकिन राज्‍य सरकार ने आज तक विचार नहीं किया। इस प्रकार जान जोखिम में डालकर वीरता का काम करने वाले लोगों को सम्‍मानित किया जाना चाहिए, उनके विषय में कोई कदम उठाए जाने चाहिए।

27.3.06/1620/gpc/akt/3a

 

उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से कहना चाहता हूं पुलिस के साथ-साथ आज जेल की मांग है और जेलों की व्‍यवस्‍था के बारे में कहना चाहता हूं। अभी मैं माननीय सदस्‍यों के कट मोशन पढ़ रहा था, जेलों में किस प्रकार की स्थितियों का निर्माण हो गया। अपराधी जेल में बैठकर गैंग का संचालन करते हैं, वहां बैठकर अपराध की गतिविधियों पर बाहर नियंत्रण करते हैं। इस व्‍यवस्‍था में सुधार कब आएगा, इस व्‍यवस्‍था में सुधार के लिए कौन चिन्‍ता करेगा? उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से राजस्‍थान के गृह मंत्री जी से कहना चाहता हं आज जेल के कैडर में सुधार करने की आवश्‍यकता है और जेल के कैडर में सुधार करने के लिए आज आपको तय करना पड़ेगा कि जेल अधीक्षक स्‍तर का अधिकारी डीआईजी रैंक का व्‍यक्ति हो और राजस्‍थान की जेलों को डीआईजी रैंक के अधिकारियों को सुपुर्द किया जाना चाहिए। सेंट्रल जेलों में डीआईजी रैंक के अधिकारी लगाये जाने चाहिए ताकि वहां बैठकर अपराधियों पर अंकुश लग सके, जेल में होने वाली आपराधिक गतिविधियों पर नियंत्रण रख सकें।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, पिछली बार भी जब मैं पुलिस डिमाण्‍ड पर चर्चा कर रहा था एक गंभीर मामला आपके माध्‍यम से रखा था कि जेल के सिपाही और पुलिस के सिपाही के बीच में वेतन विसंगति है। 1998 से पहले जेल के सिपाही और अधिकारी राजस्‍थान पुलिस के सिपाही और अधिकारी के बराबर वेतन पाते थे, लेकिन 1998 में एक परिपत्र जारी करके इनके बीच में वेतन विसंगति पैदा कर दी। आज उनके वेतन की स्थिति यह है कि अन्‍य प्रांतों की जेल की पुलिस की तुलना में राजस्‍थान के सिपाही की तनख्‍वाह कम है, राजस्‍थान के अधिकाएरी की तनख्‍वाह कम है और जब वे इस बारे में अपने काम का मूल्‍यांकन करते हैं कि मैं जो काम कर रहा हूं उसका पारितोषिक के रूप में राजस्‍थान की सरकार मुझे पुलिस से कम तनख्‍वाह दे रही है, अन्‍य प्रान्‍तों की जेल के प्रहरियों से मुझे तनख्‍वाह कम मिल रही है तो निश्चित रूप से उसकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है। पिछली बार भी माननीय गृह मंत्रीजी ने इस सदन में सार्थक कदम उठाने का आश्‍वासन दिया था।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जेलों की स्थिति के बारे में मैं आज आपसे कहना चाहता हूं न केवल जेलों में अपराधी बढ़ रहे हैं, जेलों में मादक पदार्थ भेजे जा रहे हैं, जेलों के अंदर अपराधी गुटों के झगड़े होते हैं, धारदार हथियारों का इस्‍तेमाल किया जाता है। इस व्‍यवस्‍था के लचीलेपन को कब तक दूर नहीं करेंगे? इस व्‍यवस्‍था के लचीलेपन को दूर करने के लिए जब तक हम कठोर कदम नहीं उठाएंगे, जब तक हम ताकत के साथ अपराधियों पर नियंत्रण करने के लिए और जेलों में जिस प्रकार से अ‍पराधियों को पनाह देने की रीति-नीति स्‍थापित हो गई, जेल के प्रहरी आज अपराधियों को मादक पदार्थों की सप्‍लाई करते हैं, उनके खाने और कपड़ों के साथ उनको नाना प्रकार की चीजें पहुंचाते हैं जब तक इस व्‍यवस्‍था में तब्‍दीली के लिए सार्थक कदम नहीं उठाये जाएंगे और सख्‍ती के साथ लागू नहीं करेंगे तब तक अपराधी जेल में बैठकर भी एक माफिया तंत्र का संचालन करते रहेंगे। आज जेलों में उनको मोबाइल की सुविधा उपलब्‍ध है, जेल से वे पूरे हिन्‍दुस्‍तान में अपने नेट पर सम्‍पर्क करता है, यह चिन्‍ताजनक स्थिति है।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, हम बहुत आग&