सुरेन्‍द्र/अरुण/26.3.07/11.00/1a

 

अशोधित प्रति प्रकाशनार्थ नहीं

 

राजस्‍थान विधान सभा की कार्यवाही का वृत्‍तान्‍त

 

अंक 7 बारहवीं विधान सभा के सातवें सत्र का छब्‍बीसवां दिवस संख्‍या 17

 

सोमवार, 26 मार्च,2007

 

राजस्‍थान विधान सभा की बैठक 11:00 बजे

विधान सभा भवन जयपुर, में प्रारम्हुई।

 

(श्री रामनारायण विश्‍नोई, उपाध्‍यक्ष, पदासीन)

 

तारांकित प्रश्‍नोत्‍तर

 

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आज तो हाउस को चलाओ, एडजोर्न करने के लिए तो नहीं पधारे?

श्री उपाध्‍यक्ष: आपका सहयोग होगा तो चलेगा।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): नहीं, आपके आसन पर बिराजते ही सीधे स्‍थगन की सूचना आती है।

प्रश्‍न संख्‍या 20

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री लालचन्‍द कटारिया।

(अनुपस्थित : कृपया आगे देखें।)

श्री हीरालाल।

 

विधान सभा क्षेत्र निवाई में सड़क निर्माण/मरम्‍मत कार्य

 

21. श्री हीरालाल (निवाई): क्‍या सार्वजनिक निर्माण मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) विधान सभा क्षेत्र निवाई में दिनांक 1 जनवरी, 2004 से 31 जनवरी, 2007 तक सड़क निर्माण व मरम्‍मत के क्‍या-क्‍या कार्य किस-किस मद में, कहां-कहां व कितनी-कितनी राशि के स्‍वीकृत किये गये? इन कार्यों में से कितने कार्य पूर्ण हुए और कितने अपूर्ण हैं? कार्यों के अपूर्ण रहने के क्‍या कारण हैं और इन्‍हें अब कब तक पूर्ण कर दिया जाएगा?

(2) उक्‍त क्षेत्र में वर्ष 2007-08 में सड़क निर्माण व मरम्‍मत के कौन-कौनसे कार्य किस मद में कितनी-कितनी राशि के प्रस्‍तावित हैं? विवरण सदन की मेज पर रखें।

(3) क्‍या सरकार राष्‍ट्रीय राजमार्ग 12 पर निवाई में रेलवे क्रांसिंग पर ओवरब्रिज निर्माण कराने का विचार रखती है? यदि हां, तो कब तक व नहीं, तो क्‍यों?

(4) क्‍या यह सही है कि उक्‍त विधान सभा क्षेत्र की बनास पुलिया से मण्‍डावर तक बरोनी से शिवाड़ तक की सड़कें क्षतिग्रस्‍त हैं? यदि हां, तो सरकार इनकी मरम्‍मत कब तक कराने का विचार रखती है? यदि नहीं, तो क्‍यों?

सार्वजनिक निर्माण मंत्री (श्री राजेन्‍द्र राठौड़): (1) विधान सभा क्षेत्र निवाई में दिनांक 1 जनवरी, 2004 से 31 जनवरी, 2007 तक सड़क निर्माण व मरम्‍मत के कार्यों का विवरण, स्‍वीकृत राशि, पूर्ण/अपूर्ण सूचना सहित, अपूर्ण रहने का कारण व अपूण कार्यों की पूर्णता की सम्‍भावित तिथि संलग्‍न परिशिष्‍ट ‘’’’ पर दर्शायी गई है।

(2) विधान सभा क्षेत्र निवाई में वर्ष 2007-08 में सड़क निर्माण एवं मरम्‍मत के प्रस्‍तावित कार्य, अनुमानित लागत एवं मद का विवरण संलग्‍न परिशिष्‍ट ‘’’’ पर दर्शाया गया है।

(3) राष्‍ट्रीय राजमार्ग-12 पर निवाई से रेलवे क्रोसिंग पर ओवरब्रिज निर्माण कराने का कोई प्रस्‍ताव वर्तमान में विचाराधीन नहीं है। यह सड़क राष्‍ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा राष्‍ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजनाओं के तृतीय चरण में चिह्नित की गई है। इस निर्माण कार्य को राष्‍ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा ही किया जाना प्रस्‍तावित है।

(4) जी हां। बनास पुलिया से मण्‍डावर तक बरोनी से शिवाड़ पर पराना तक, सड़क पर बजरी के भारी ट्रकों का आवागमन होने के कारण सड़क बार-बार क्षतिग्रस्‍त हो जाती है। बनास पुलिया से मण्‍डावर तक सड़क की कुल लम्‍बाई 17 किलोमीटर है। जिसका नवीनीकरण वर्ष 2002-03 में हुआ था। इस सड़क मार्ग की साधारण मरम्‍मत करवा दी गई है।

विधान सभा क्षेत्र निवाई से बरोनी से शिवाड़ सड़क की कुल लम्‍बाई 16 किलोमीटर है। इसमें से कि.मी. 0/0 से 8/0 पराना तक कुल 8 कि.मी. की पेच मरम्‍मत की जा चुकी है इसका नवीनीकरण वर्ष 2002-03 में हुआ था। किमी 8/0 से 16/0 तक कुल 8 कि.मी. राजस्‍थान राज्‍य कृषि विपणन बोर्ड की सड़क है जिसकी मरम्‍मत कृषि विपणन बोर्ड द्वारा वित्‍तीय संसाधनों की उपलब्‍धता पर निर्भर करेगी। बनास पुलिया से मण्‍डावर तक बरोनी से शिवाड़ तक सड़क नवीनीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य करवाना राज्‍य सरकार के पास उपलब्‍ध वित्‍तीय संसाधनों पर निर्भर करेगा।

श्री हीरालाल (निवाई): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मैं निवेदन करना चाहूंगा कि माननीय पी डब्‍ल्‍यू डी मिनिस्‍टर साहब, अभी बरोनी से शिवाड़ तक सड़क दिखती नहीं है और यहां जयपुर से जो धार्मिक आस्‍था के लोग जाते हैं तो गाडि़यां ही पास नहीं होता। मेरा निवेदन है सरकार से कि जल्‍दी से जल्‍दी यह सड़क बनवाई जाए, निर्मित करवाई जाए।

दूसरा, बनास पुलिया, मंडावर तक पहले तो बनास में बजरी थी तो यहां से बजरी आती थी पर आजकल मंडावर से आगे से बजरी आती है तो सड़क दिखती नहीं है। इसलिए मेरा आपसे निवेदन है कि बनास से मंडावर तक शीघ्र सड़क निर्मित करवाई जाए। साथ ही प्रधान मंत्री सड़क योजना के तहत मेरे विधान सभा क्षेत्र में झिलाई से संग्रामपुरा वर्तमान में सड़क का कार्य चल रहा है लेकिन ठेकेदार ने भी दूसरे ठेकेदार को अपना ठेका दे दिया। सब-ठेकेदार बना दिया और 500 मीटर सड़क ठेकेदार की हठधर्मी से छोड़ दी गई है। उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहूंगा कि जो 500 मीटर रह गई है प्रधान मंत्री सड़क योजना के तहत झिलाई से संग्रामपुरा तक वह तुरन्‍त पूर्ण करवाई जाए। 

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने जो प्रधान मंत्री सड़क योजना की सड़क झिलाई से संग्रामपुरा तक बनाई है, आपने कहा है कि ठेकेदार ने सबलेट कर दिया तो मैं आज ही एडिशनल चीफ इंजीनियर को जांच दे रहा हैं, अगर सबलेटिंग पाई गई क्‍योंकि सबलेटिंग अलाऊ नहीं है, तो उस ठेकेदार को ब्‍लेक लिस्‍टेड भी करूंगा। जो 500 मीटर सड़क जिसका निर्माण बीच में छोड़ दिया इसका निर्माण कार्य भी निश्चित तिथि में पूरा हो जाए यह सुनिश्चित करने का काम भी पूरा किया जाएगा। उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने जिस बरोनी से शिवाड़ 16 किलोमीटर सड़क का जिक्र किया है, मैंने मेरे मूल उत्‍तर में पहले ही निवेदन किया था कि इस सड़क के दो हिस्‍से हैं, एक हिस्‍सा 0 से 8 किलोमीटर है जिसक पी डब्‍ल्‍यू डी ने निर्माण करवाया है, दूसरा हिस्‍सा 8 किलोमीटर से 16 किलोमीटर कृषि उपज मण्‍डी द्वारा इस सड़क का निर्माण करवाया गया है। उपाध्‍यक्ष महोदय, यह सही है कि इस क्षेत्र में बजरी निकलती है, सड़क पर आवागमन ज्‍यादा रहता है। 2002-03 में जब तत्‍कालीन सरकार थी तब इस सड़क का नवीनीकरण करवाया गया था। पी डब्‍ल्‍यू डी ने भी करवाया था और कृषि विपणन बोर्ड ने भी करवाया था। वर्तमान में सड़क क्षतिग्रस्‍त है, निश्चित तौर पर इसका तकमीना बनाकर यह प्रयास करेंगे कि इस सड़क को ठीक किया जाए क्‍योंकि आवागमन की दृष्टि से इस सड़क का काफी महत्‍व है। उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रयास करूंगा और आपने जिस सड़क की चर्चा की है उसकी जांच करवाकर उसमें समुचित कार्यवाही की जाएगी। 

श्री हीरालाल (निवाई): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, संग्रामपुरा गांव के सारे लोग अगर बरसात आयेगी और वह 500 मीटर सड़क नहीं बनती है तो वो अलग-थलग पड़ जाएंगे। दूसरा, ठेकेदार की हठधर्मी यह हो रही है कि पूरा गांव एक तरफ है और ठेकेदार एक तरफ है। उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मांग करना चाहूंगा कि 500 मीटर सड़क है उसका तुरन्‍त निर्माण करवाया जाए। 

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं मेरे एडिशनल चीफ इंजीनियर को कहूंगा कि माननीय सदस्‍य से सम्‍पर्क करेंगे, इनको साथ लेकर जाएंगे और यह जो संग्रामपुरा सड़क है, किस विभाग के कारण यह सड़क नहीं बनी उसकी पूरी छानबीन करके अगर सड़क स्‍वीकृत है तो निश्चित तौर पर सड़क बनाई जाएगी और इसमें जो कोई भी बाधा है उसको दूर करके सड़क निर्माण करेंगे।

श्री हीरालाल (निवाई): धन्‍यवाद।

श्री रामचन्‍द्र सराधना (जमवारामगढ़): उपाध्‍यक्ष महोदय, प्रश्‍न के चौथे खण्‍ड में लिखा है कि बरोनी से शिवाड़ तक की लम्‍बाई 16 किलोमीटर है जिसमें 8 किलोमीटर पी डब्‍ल्‍यू डी ने पूरा कर दिया और 8 किलोमीटर कृषि मण्‍डी ने छोड़ दिया। उपाध्‍यक्ष महोदय, सारे राजस्‍थान में एक ही व्‍यवस्‍था को दो भागों में बांटकर के जनता को परेशान किया जा रहा है। कृषि मण्‍डियां जब रोड बनाती हैं तो केवल पी डब्‍ल्‍यू डी का सहयोग करती है, जनता के लिए रोड बनाती है। लेकिन उनका निर्माण, उनकी रिपेयरिंग कृषि मण्‍डी से नहीं करवाकर पी डब्‍ल्‍यू डी से कराना चाहिए।

दूसरा मेरा प्रश्‍न है कि माननीय मंत्री महोदय ने कहा कि सड़क पर बजरी और भारी ट्रकों के आवागमन से बार-बार टूट जाती है। यह कितने वज़न तक का ट्रक चलने की क्षमता का रोड बनाते हैं जो हर बार टूट जाती है? कितनी गाडि़या आने जाने के लिए बनाते हैं और जितनी ज्‍यादा गाडि़यां आ रही हैं तो उस क्‍वालिटी का रोड क्‍यों नहीं बनरा पाते? क्‍या कारण है कि वह रोड बार-बार टूट जाता है? ज्‍यादा गाडि़यां आना, यह कोई कारण नहीं बनता है। कितने वज़न की गाडि़यों के जाने जाने के लिए राड बनाते हैं?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, 9 टन भार ले जाने के लिए अधिकृत है। उपाध्‍यक्ष महोदय, कौनसी सड़क पर ट्रेफिक कब बढ़ जाएगा इसका सेंसस तो कोई हो नहीं सकता। हालांकि एक निश्चित अंतराल के बाद किस-किस सड़क पर कितना-कितना ट्रेफिक किस रफ्तार से बढ़ रहा है इसकी गणना भी विभाग करवाता है। उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने कहा है, इस राजस्‍थान के अन्‍दर सड़कें पी डब्‍ल्‍यू डी भी बनाता है, राजस्‍थान में सड़क कृषि विपणन बोर्ड भी बनाता है, कुछ सड़कें माइंस की भी हैं, कुछ सड़कें इन्दिरा गांधी नहर परियोजना के अन्‍तर्गत भी बनी हुई है और इनका संधारण भी अलग-अलग हैड्स में होता है। उपाध्‍यक्ष महोदय, हमने इस बार जो योजना बनाई है, हमारा जो पैच रिपेयर का कार्यक्रम चलता है उसके साथ-साथ कृषि उपज मण्‍डी को भी हमने लिखा है और मैं आपके माध्‍यम से माननीय सदस्‍यों को निवेदन करना चाहूंगा कि उसमें प्रयास करेंगे कि सड़कों के संधारण का काम और सड़कों के रिन्‍यूवल का काम दोनों विभाग साथ-साथ करे क्‍योंकि आम व्‍यक्ति को यह मालूम नहीं कि कौनसी सड़क पी डब्‍ल्‍यू ने बनाई है और कौनसी सड़क कृषि विपणन बोर्ड ने बनाई है, उसके दिमाग में तो एक ही बात रहती है कि सड़क सरकार ने बनाई है, य‍ह निश्चित भी है। इसलिए दोनों विभाग मिलकर संधारण की अपनी रूपरेखा और अपने कार्यक्रम में किस तरह से सामंजस्‍य करें इसका प्रयास निश्चित तौर पर करेंगे।

श्री रामचन्‍द्र सराधना (जमवारामगढ़): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न का जवाब आया है, उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न का जवाब नहीं आया है......

श्री उपाध्‍यक्ष: प्रश्‍न निवाई की सड़क से सम्‍बन्धित है। माननीय सदस्‍य, यह जनरल क्‍वेश्‍चन नहीं है, निवाई का है।

श्री रामचन्‍द्र सराधना (जमवारामगढ़): मैं इसलिए पूछ रहा हूं कि जो मंत्री महोदय ने उत्‍तर दिया 9 टन वाला वह सिक्‍स व्‍हील वाली गाडि़यों का था। आज 16 व्‍हील, 18 व्‍हील की गाडि़यां चल रही हैं, उनमें भी बजरी आ रही है तो 9 टन वाला ही नहीं रहा माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री रामचन्‍द्र सराधना (जमवारामगढ़): यह जो रोड टूट रहा है वह 9 टन के कारण नहीं टू रहा, आज तो 16 टन, 18 टन, 20 टन की गाडि़यां चल रही हैं, परिवहन विभाग पास कर रहा है उनको तो रोड उस क्‍वालिटी का बनाया जाए जिसमें 18 और 20 टन की गाडि़यां भी चले।

श्री उपाध्‍यक्ष: प्रश्‍न से सम्‍बन्धित नहीं है।

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से पूछना चाहूंगी कि कोटा से डाबी तक नेशनल हाईवे नम्‍बर 76 है....

 

Lpm/akt/1110/1b/2632007

 

और आपका वहां फोरलेन भी बन रहा है लेकिन अभी जो एग्‍स्टिंग रोड है उसकी हालत अगर आप देखेंगे तो आये दिन ऐक्‍सीडेंट हो रहे हैं,  उसकी मरम्‍मत जब तक फोरलेन में एक-डेढ साल लग जाएग तब तक उसकी मरम्‍मत कराने का इरादा रखते हैं कि नहीं रखते हैं, दूसरी बात आप कह कहते थे माननीय मंत्री महोदय कि जब बूंदी जाते हैं तो अंदर एंटर करते ही निंद खुल जाती है तो वह निंद खुलनी तो आपने बंद कर दी शहर में लेकिन बूंदी विधानसभा क्षेत्र से शुरू में ही जो निंद खुलने लगी है उसका क्‍या होगा? वह जो रोबर्टसन के टाइम का बाइपास है उसकी अगर आप हालत खुद मुलाहिजा फरमाएं तो आप देखेंगे कि बहुत बुरी है तो मैं चाहती हूं कि इन दोनों सड़कों के बारे में आप क्‍या करना चाह रहे हैं?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह निंद आना और निंद नहीं आना, यह तो अलग-अलग आदमी के स्‍वभाव पर निर्भर है। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य को मैंने कई बार देखा है कि जब कहीं भी क्रोस करते हैं आप हमेशा गाड़ी में बैठते ही निंद में चली जाती है और और इनको इस बात का तो धन्‍यवाद देना चाहिए कि वो जब बूंदी में प्रवेश करती है उस समय पहले निंद झटकों से खुलती थी, अब नहीं खुलती है। यह जो आपने सवाल किया है यह एन एच 76 का है माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह एन एच आई के पास है और इसका संधारण का हमें जितना पैसा मिलता है वह भारत सरकार से हमें मिलता है। हम बार-बार लिखते रहते हैं निश्चित तौर पर यह चूंकि यह एन एच आई के पास है, इसके संधारण में पैसा भी वो देते हैं उन्‍होंने राशि कम दी है, फिर भी मैंने मुख्‍यमंत्री जी भी एक पत्र लिखवाया था केन्‍द्रीय मंत्रालय को, मैं खुद भी प्रयास करूंगा और निश्चित तौर पर कोशिश करेंगे कि ये जो पहले बहुत ज्‍यादा हालत खराब थी पिछले दिनों में कुछ ठीक हुई है, इसको और ठीक माननीय सदस्‍य निश्चित तौर पर करेंगे।

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): आप तो उसमें पेचवर्क करा दीजिए तब तक वह फोरलेन तैयार नहीं होता है बस वही बहुत है हमारे लिए, अगर आप यह करा देंगे तो भी बहुत है। वहां 20-20, 25-25 टन के पत्‍थर लेकर के गाडि़यां निकलती हैं, इसलिए यह एक भारी समस्‍या है और आये दिन गाडि़यां पलट जाती हैं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं स्‍वयं इसके देखूंगा और मैं एन एच आई के अधिकारियों से चर्चा करके इसका पेच रिपेयर आगामी माह से प्रारंभ हो जाए, यह सुनिश्चित करने का काम करूंगा।

श्री रामलाल शर्मा (चौमूं): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से यह जानना चाहूंगा कि आप जिस रोड से अपने निर्वाचन क्षेत्र में जाते हैं, उस रोड में जो आधा घंटा आपको  ट्रेफिक में लगता है, कब तक आप चौंमू का बाईपास का निर्माण कराने का विचार रखते हैं?

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य कहां का है बोलने दीजिए यह प्रश्‍न कहां का है?

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): फिर तो हमारा भी जवाब दिलाओ (व्‍यवधान)

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): आगे बढ़ाओ माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, बहुत महत्‍वपूर्ण सवाल लगे हुए हैं (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): या तो निवाई तक सीमित रखा जाए अगर ये पूछ रहे हैं तो हम से भी पूछा जाए (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, यह डिमाण्‍ड नहीं है (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं जानना चाहता हूं कि पाली जिले के अंदर (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य उनका प्रश्‍न क्‍या है पता तो लगना चाहिए?

श्री रामलाल शर्मा (चौमूं): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, चौंमू बाइपास का किसानों का पूरा मुआवजा दिया जा चुका है जो भूमि अवाप्‍त की थी माननीय मंत्री महोदय से मैं जानना चाहूंगा कि चौंमू बाईपास का कब तक निर्माण कर देंगे?

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य यह निवाई से संबंधित नहीं है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): राजस्‍थान की सब सड़कें खराब है यू बोलो फिर तो आप (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री रामनारायण मीणा, आप अपने विधानसभा क्षेत्र से संबंधित हो तो कहिए।

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): मेरे विधानसभा क्षेत्र से संबंधित है (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: यह जनरल बहस नहीं है माननीय सदस्‍य मैं अलाऊ नहीं करूंगा माननीय सदस्‍य।

प्रश्‍न संख्‍या 22

श्री रामनारायण मीणा

(अनुपस्थित : कृपया आगे देखें।)

श्री हरिमोहन शर्मा।

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): क्‍या माननीय मंद्धी यह बताने का कष्‍ट करेंगे कि इंटर स्‍टेट रोड में भादरा-झांझल सड़क की कब स्‍वीकृत हुई, कितने पैसे उसके स्‍वीकृत हुए और वो जो आज बंद पड़ी है उसका करना क्‍या है? 

 

स्‍वायत्‍तशासी संस्‍थाओं के जन प्रतिनिधियों का निलम्‍बन एवं बहाली

 

23. श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली) क्‍या स्‍वायत्‍त शासन मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे-

(1) माह जनवरी,2004 से अब तक राजस्‍थान में कितने महापौर, उप महापौर, अध्‍यक्ष, उपाध्‍यक्ष, वार्ड पार्षद, किस किस आधार पर निलंबित किये गये? कितनों को बर्खास्‍त किया गया तथा वे किस किस राजनैतिक दल से संबंधित थे? विवरण सदन की मेज पर रखे।

(2) उक्‍त में से कितने स्‍वायत्‍तशाषी संस्‍थाओं के सदस्‍यों के विरूद्ध विभिन्‍न  प्रकरणों में जांच विचाराधीन है? विवरण सदन की मेज पर रखे।

राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय (श्री प्रताप सिंह सिंघवी): (1) माह जनवरी,2004 से दिनांक 23.3.07 तक राजस्‍थान में जिन महापौर, उप महापौर, अध्‍यक्ष, उपाध्‍यक्ष, वार्ड पार्षद को निलंबित किया गया, का विवरण परिशिष्‍ट ‘’’’ पर और जिनको बर्खास्‍त किया गया है का विवरण परिशिष्‍ट ‘’’’ पर संलग्‍न है। जिसमें कार्यवाही का आधार व उनके राजनैतिक दल का अंकन है। इस अवधि में कुल 85 को निलंबित और 21 को बर्खास्‍त किया गया है।

(2) वर्तमान में उक्‍त में से 58 के विरूद्ध न्‍यायिक जांच विचाराधीन है, जिसका विवरण परिशिष्‍ट ‘’’’ के कॉलम संख्‍या 8 में अंकित है एवं 4 के विरूद्ध प्राप्‍त अन्‍य शिकायतों में विभागीय स्‍तर पर जांच/परीक्षण लंबित है, जिसका विवरण परिशिष्‍ट ‘’’’ पर है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, निलंबित करने के बाद जांच कितने दिनों में कितने माह में कन्‍क्‍लूड कर ली जाएगी और इसके लिए कोई कानून में कोई प्रावधान है या आपने कोई ऐसे मापदण्‍ड निर्धारित कर रखे हैं कि निलंबित जांच से पूर्व निलंबित करने के पश्‍चात कितने समय में उस जांच का निर्णय आ जाएगा, नम्‍बर-2, 2004 में आपने 44 नगरपालिका के अध्‍यक्षों, उपाध्‍यक्षों और पार्षदों को मुअत्तिल कर दिया, सस्‍पेंड कर दिया, आज तक उनकी जांच पेंडिंग है। 2005 में 8 को कर दिया और आज तक उनकी जांच पेंडिंग है और 2006 में 24 को कर दिया आज तक जांच पेंडिंग है। 2004 से आज तक 44, 8 प्‍लस 24 और 2007 के अध्‍यक्ष इनको आप जोड़ दे तो सस्‍पेंड करने के बाद आपने एक आदमी की भी जांच पूरी सम्‍पन्‍न नहीं करवाई? इसके क्‍या कारण रहे? दूसरा, आपने अपने जवाब में आखिरी जो यह महेश चन्‍द्र यूनानी अध्‍यक्ष, चित्तौड़गढ़, भाजपा, श्रीमती गीता देवी अध्‍यक्ष आबू रोड भाजपा, श्रीमती प्रवीण सैनी अध्‍यक्ष, कामां भाजपा, इनको ट्रेप किस तारीख को किया गया था और आपने इनको कब सस्‍पेंड किया? ट्रेप की तारीख बताइए आप, इनको किस तारीख को ट्रेप किया गया और ट्रेप करने के पश्‍चात इनको जो रैड हैण्‍डेड ट्रेप किया गया इन लोगों को भारतीय जनता पार्टी के अध्‍यक्षों को और इनको आपने सस्‍पेंड किस तारीख को किया?

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): इसमें एक लाइन और जोड़ दीजिए कि सैक्रेटरी ने सस्‍पेंड की फाइल कब भेजी और आपके ऑफिस में कितने दिन रुकी रही? यह और जोड़ दे आप।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय मैं पूछना चाहूंगा कि माननीय मंत्री महोदय से (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): पहले मेरा जवाब मंगवा ले, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा पहले जवाब मंगा ले (व्‍यवधान)

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): कि पाली, किशनगढ़ और सीकर नगरपालिकाओं के अध्‍यक्षों के खिलाफ जांच चली हैं, क्‍या उनको भी सस्‍पेंशन करने की कार्यवाही आपने की? उनकी जांच कम्‍प्‍लीट हो चुकी है, उसके बावजूद भी स्‍वायत्‍त शासन मंत्री की क्‍या कांग्रेस से मिलीभगत है कि वो उनको सस्‍पेंड नहीं कर रहे हैं और उसके अलावा मुझे यह बताइए कि बीजेपी के कितने चैयरमेन्‍स को कांग्रेस के राज में सस्‍पेंशन किया गया?

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य..

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): मंत्री महोदय कृपया बताने का कष्‍ट करें।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, 17.01. (व्‍यवधान)

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): बिलकुल मिले हुए हैं, उनकी जांच कंपलीट हो गई उसके बाद सस्‍पेंड नहीं कर रहे हैं (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): यह तो बहुत बहुत गंभीर मामला है माननीय अध्‍यक्ष महोदय (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): यह गंभीर आरोप लगाया है, बहुत गंभीर आरोप लगाया है (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): कि सत्‍तापक्ष के सदस्‍य ने यह आरोप लगाया है कि कांग्रेस से मिले हुए है, इससे बड़ा भयंकर कोई दुर्भाग्‍य नहीं हो सकता कि सदन के अंदर  रूलिंग पार्टी का एक मेम्‍बर अपनी पार्टी के (व्‍यवधान)

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): बिलकुल ठीक बात है पाली, किशनगढ़ और सीकर को क्‍यों नहीं सस्‍पेंड किया गया? बिलकुल ठीक बात है (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मंत्री के ऊपर यह आरोप लगा रहा है कि यह हमारी पार्टी के खिलाफ मिले हुआ है, मैं समझता हूं कि या तो मंत्री जी को खुद को इस मामले में कोई बात करनी चाहिए (व्‍यवधान)

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): पाली, किशनगढ़ और सीकर के चैयरमेंस को क्‍यों नहीं सस्‍पेंड किया गया? (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): वहीं, पाली, पाली (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, जो बात पार्टी मीटिंग में होनी चाहिए थी, जो बात पार्टी के अध्‍यक्ष के सामने होनी चाहिए वह आपके सामने हो रही है, जो बात पार्टी मीटिंग में पार्टी प्रेसीडेंट के सामने होनी चाहिए वह यहां पर हो रही है इससे बड़ा दुर्भाय नहीं हो सकता माननीय अध्‍यक्ष महोदय (व्‍यवधान)

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): कल आ जाइए आप मेरे पास (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, रूलिंग पार्टी का एक माननीय सदस्‍य अपने मंत्री पर यह आरोप लगाया है कि वह भ्रष्‍टाचार के मामले में प्रतिपक्ष से मिला हुआ है। मैं समझता हूं कि भ्रष्‍टाचार का इससे बड़ा कोई उदाहरण (व्‍यवधान)

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): पाली, किशनगढ़ और सीकर में भ्रष्‍ट कांग्रेस के कितने लोगों को सस्‍पेंड किया गया है? सही किया है, पाली, किशनगढ़ और सीकर के लोगों को बचा रहे हैं आप (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): यह सरकार आपकी है या हमारी है? यदि सरकार हम चला रहे हैं तो इसका आप सर्टिफिकेट दे दो आप (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): आप इसको कहा जो आरोप लगाया है इसकी जांच कराई जाए? (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): यह सरकार अगर हम चला रहे हैं तो सर्टिफिकेट दे दो आप, इससे बड़ी दुर्भाग्‍यपूर्ण स्थिति स्थिति बन नहीं सकती कि सरकार चलाने वाला आदमी अपनी सरकार के ऊपर यह आरोप लगाए कि सरकार हम चला रहे हैं क्‍या? यदि आपके मंत्री पार्टी के साथ न्‍याय नहीं कर रहे हैं तो मैं समझता हूं कि इससे बड़ा कोई दुर्भाग्‍य हो नहीं सकता कि कांग्रेस से मिलकर सरकार चल रही है।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य....

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इसकी जांच करवाई जाए, एक कमेटी बनाकर के जांच करवाई जाए (व्‍यवधान) इन्‍होंने जो आरोप लगाए हैं इस आरोप की जांच करवाई जाए (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): इसकी जांच की जाए, एक कमेटी बनाई जाए अध्‍यक्ष महोदय एक असेम्‍बलि की कमेटी बनाई जाए अध्‍यक्ष महोदय और यह जांच यकरवाई जाए कि मंत्री किन-किन कांग्रेसियों से मिला हुआ है? यह जांच करवाई जाए (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): इसकी जांच कराई जाए, आप यह कार्यवाही कराइए माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): हम तो आपके सदस्‍य की बात बता रहे हैं माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम तो आपके सदस्‍य की बात बता रहे हैं (व्‍यवधान)

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): आपके सदस्‍यों को आप निलंबित करवाना चाहते हैं क्‍या?

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): जी, जी यदि वे बेईमान है तो निलंबित होने चाहिए, यदि हमारी पार्टी के भ्रष्‍ट है तो निलंबित होने चाहिए, हम कहां बचा रहे हैं? आपके सरकार के मंत्री कांग्रेस के भ्रष्‍ट आदमियों को बचा रहे हैं। आप मानो इस बात को (व्‍यवधान) 

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय):  कोई नहीं बच सकता, कार्यवाही हो जाएगी उसके खिलाफ (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आपके सदस्‍य कह रहे हैं कि आपके मंत्री कांग्रेस के भ्रष्‍ट आदमियों को बचा रहे हैं, इससे बड़ा सर्टिफिकेट क्‍या चाहिए?

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य सुने पहले आप।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इसकी जांच करवाई जाए, कोई कमेटी बनाई जाए और इस आरोप की जांच करवाई जाए (व्‍यवधान) और भ्रष्‍टाचार का आरोप लगा रहे है इसकी जांच होनी चाहिए यह क्‍या बात हुई?

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य जवाब नहीं सुनना चाहते आप? (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर):  एक माननीय सदस्‍य ने एक मंत्री के ऊपर खुला आरोप लगा रहे है (व्‍यवधान)

 

Bhs/akt/26.3.07/11.20/1c

 

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): किशनपोल से आने वाले माननीय सदस्‍य बार-बार ...(व्‍यवधान)...

श्री उपाध्‍यक्ष:  प्रश्‍न का जवाब आने दीजिये माननीय सदस्‍य।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): उपाध्‍यक्ष महोदय, इसका कोई फैसला आप पहले करो।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, मंत्री जी जवाब दे रहे हैं आप जवाब सुनिये।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, उनको पूछ रहे हैं इन्‍होंने जो आरोप लगाये उन आरोपों की जांच की जाए।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी जवाब दे रहे हैं, सुनना ही नहीं चाहता कोई सदस्‍य।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, ...(व्‍यवधान)... जितनी नगरपालिकाओं, नगरपरिषदों के चेयरमेनों को निलंबित किया गया वो राजनीतिक आधार पर किया गया और कांग्रेस की सरकार ने केवल भारतीय जनता पार्टी के चेयरमेंस को उस समय निलंबित किया ...(व्‍यवधान)...

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्‍यम से पूरे सदन से निवेदन है ...(व्‍यवधान)...

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): कांग्रेस के शासन में जितने भी चेयरमेंस को निलंबित किया गया, जितने भी पार्षदों को निलंबित किया गया वो केवल भारतीय जनता पार्टी के पार्षदों और चेयरमेंस को निलंबित किया गया।

श्री टीकमचंद कांत (सिवाना): रायपुर से आने वाले माननीय सदस्‍य, ये तो मिलीभगत ...(व्‍यवधान)... की बात अंदर की बात आप कैसे कह रहे हो?

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री टीकमचंद कांत (सिवाना): ये तो अंदर की बात की कोई बात है अन्‍दर की बात को आप उजाले में ला रे हो ...(व्‍यवधान)...

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, जवाब देने दीजिये।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं बहुत पते की बात कह रहा हूं उपाध्‍यक्ष महोदय, पूरे सदन से आपके माध्‍यम से मेरा निवेदन है कि माननीय उपाध्‍यक्ष जी के स्‍वभाव का मिसयूज न करें कम से कम आज  पूरे दिन हाउस बड़ी शांति से चलना चाहिए। यह मेरा निवेदन है।

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): आप ध्‍यान रख लें बाकी सब ठीक हो जाएगा।

श्री उपाध्‍यक्ष: आप बैठिये अपना स्‍थान ग्रहण कीजिये। । आप अपना कोई प्रश्‍न हो तब पूछिये बीच में जरूरत नहीं है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आपको किसने कहा?

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप बाद में पूछना।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आपका अंकित नहीं होगा। आप बिना परमीशन के बोल रहे हैं माननीय सदस्‍य। अंकित नहीं हो।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप प्रश्‍न बाद में पूछना।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, एक तो यह कहना बिलकुल गलत है कि ..।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): 000

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री मोहनलाल गुप्‍ता (किशनपोल): 000

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री मोहनलाल गुप्‍ता (किशनपोल): 000 

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री उपाध्‍यक्ष:  माननीय सदस्‍य, आप बीच में नहीं। माननीय सदस्‍य। अंकित नहीं होगा।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): मैं जवाब देने के लिए तैयार हूं माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय।

श्री उपाध्‍यक्ष: बिना परमिशन के अंकित नहीं होगा।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: आप सुनिये पहले।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, 1.3.07 को ...।

श्री उपाध्‍यक्ष: आप जवाब ही नहीं सुनना चाहते । जवाब ही नहीं सुनना चाहते। 

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, वैसे तो नियमों में साफ प्रावधान है कि जांच का कोई समय निश्चित नहीं है फिर भी हमने इनको तत्‍परता से तीनों हालांकि भारतीय जनता पार्टी के थे फिर भी तीनों दोषी पाये गये थे इनको 1.3.07 को निलंबित कर दिया गया। इन पर आरोप था ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ...(व्‍यवधान)... ट्रेप की डेट बताओ आप ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आपका भाषण अंकित ...। माननीय सदस्‍य।

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): 000

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आप ट्रेप की तारीख बताओ। भारतीय जनता पार्टी के पाँच लोगों को आपने सस्‍पेंड किया वो ट्रेप के कारण किया ...(व्‍यवधान)... पांचों का ।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): इनका ट्रेप किस तारीख को हुआ? यह बतायें आप। ...(व्‍यवधान)...

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): 8.1.07 को एसीडी ने ट्रेप किया गया था। उस मामले में जब हमको शिकायत प्राप्‍त हुई, विभाग को शिकायत प्राप्‍त हुई 13.1.07 को उसके बाद इसकी जाचं चलती रही । जब मेरे पास प्रकरण आया तो मैंने तुरंत इनको 1.3.07 को तीनों अध्‍यक्षों को हालांकि वो भारतीय जनता पार्टी से संबंधित थे, मैंने तीनों को निलंबित कर दिया।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप फिर बोल रहे हैं? आप सप्‍लीमेंट्री पूछना चाहें तो ...(व्‍यवधान)... माननीय सदस्‍य, बीच में नहीं। ...(व्‍यवधान)... अंकित नहीं हो रहा है भाषण आपका। आपका भाषण अंकित नहीं होगा। माननीय सदस्‍य, आप सप्‍लीमेंट्री के जरिये पूछें स्‍पेसिफिक क्‍वेश्‍चन कोई पूछना हो तो यह जनरल बहस थोड़े हो रही है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: आप नियमों को जानते हुए भी नियमों की अवहेलना कर रहे हैं। ...(व्‍यवधान)...    श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: आपको सप्‍लीमेंट्री पूछने का मौका दिया जाएगा माननीय सदस्‍य। भाषण नहीं चलेगा। अंकित नहीं होगा। ...(व्‍यवधान)... माननीय सदस्‍य, आप जवाब सुनिये शांतिपूर्वक।  माननीय सदस्‍य, आसन की अनुमति के बिना अंकित नहीं होगा।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): विभाग को श्रीमती गीता देवी की शिकायत प्राप्‍त हुई है 17.1.07 को उसके बाद में हमने त्‍वरित गति से जांच करवा कर कार्यवाही की है चूंकि अभी तक जांच पेंडिंग है फिर भी हमने चूंकि ये इस तरह का भ्रष्‍टाचार का आरोप था इसलिए हमने निलंबित करते हुए इनकी उच्‍चाधिकारियों के सम्‍मुख जांच कराने के लिए दी है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): रेड हेण्‍डेड पकड़े जाने के बाद जांच विचाराधीन है अभी ।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आपके ही गवर्नमेंट के ऑफिसर्स ने उनको ट्रेप किया और उसकी जांच बाकी है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप बैठिये पहले।

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): 000

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): जांच में दोषी पाये गये। एसीडी ने ट्रेप किया। हमने सस्‍पेंड किया उनको।

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): 000

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): ...(व्‍यवधान)... जाचं हो रही है ...(व्‍यवधान)...

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य बीच में नहीं ।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): माननीय  उपाध्‍यक्ष महोदय, एसीडी जांच कर रही थी।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, प्रश्‍न पूछने वाले प्रश्‍न पूछ रहे हैं और वे जवाब दे रहे हैं आप बीच में नहीं। आप बीच में टोका-टाकी नहीं।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): कुछ नहीं प्रश्‍न लगने के बाद ...(व्‍यवधान)... प्रश्‍न लगने के बाद किया है यह।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): 1.3.07 को कोई प्रश्‍न नहीं था आपका। 1.3.07 को मैंने सस्‍पेंड किया है। उस टाइम पर विधान सभा में कोई प्रश्‍न नहीं था। 

श्री उपाध्‍यक्ष: आपको मौका दिया जाएगा।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जिस प्रकार से आपने पूछा निलंबन के कारण का विवरण । मैं आपको बताना चाहता हूं कि कुल 85 आदमियों को हमने निलंबित किया है उसमें पद के दुरुपयोग के लिए 60 को और 2 से अधिक संतान के 16 को, एसीडी के ट्रेप के लिए 9 को  इस प्रकार कुल 85 सदस्‍यों को निलंबित किया है।  इस प्रकार से माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको निवेदन करना चाहूंगा कि माननीय सदस्‍य ने जिस प्रकार से पूछा हमने हमारी सरकार में अब तक कुल 85 सदस्‍यों में से 11 भारतीय जनता पार्टी के सदस्‍यों को निलंबित किया है जबकि कांग्रेस के राज में 87 में से मात्र 2 बीजेपी के सदस्‍य निलंबित किये थे। कांग्रेस के, सॉरी। सब्‍जैक्‍ट टू करेक्‍शन। ...(व्‍यवधान)...

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (सरकारी उप मुख्‍य सचेतक): 000

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): किसने गुनाह को बचाया?

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (सरकारी उप मुख्‍य सचेतक): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): बचाने की अगर नौबत आती तो 13 भारतीय जनता पार्टी के सदस्‍यों को ...(व्‍यवधान)... मैं सस्‍पेंड नहीं करता।

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): आपके टाइम पर आपने 87 लोगों को सस्‍पेंड किया था जिनमें 85 कांग्रेस के थे।

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): 000

 

कैलाश/      26.3.07  11.30 (1)  1d

 

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): 000

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य ।

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं एक चीज क्लियर करना चाहता हूं यह जो आप फरमा रहे हैं तीनों ट्रेप के, .... (व्‍यवधान) एक ट्रेप का केस है ।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): 2 ट्रेप के केस हैं और एक इल्लिगलिटी का है ।

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): चित्‍तोडगढ से संबंधित जो आ बता रहे हो वह 97 का है उसके बाद पाँच साल तक आप लेकर बैठे रहे ।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): 000

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 85 में से 5 जो भारतीय जनता पार्टी के सस्‍पेंड हुए एसीडी वाले किये और 80 हैं वह कांग्रेस वाले हैं सन 2004 के आज तक उन पर पद के दुरुपयोग का आरोप है । एक मेम्‍बर के अलावा और पेंडिंग जांच 2004 से आज तक है यह तो आपके लिये शर्म की बात नहीं है ना । आपने सस्‍पेंड कर दिया, जांच नहीं करवाई और जांच नहीं करवाने के बाद आज उन 85 में से 80 कांग्रेस के आदमी हैं और जिन 21 को इन्‍होंने स्‍थाई रूप से अयोग्‍य घोषित किया है वह 21 के 21 कांग्रेस के हैं एक भी भारतीय जनता पार्टी का नहीं है । भ्रष्‍टाचार करने वालों को तो आप अलग बचा रहे हो ।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): (व्‍यवधान) उपाध्‍यक्ष महोदय, नगर पालिका का एक भी सदस्‍य ऐसा नहीं है जिसको हमने नोटिस नहीं दिया हो । पहले नोटिस देने के बाद ही निलंबन की कार्यवाही की है ।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य आपने अपना सप्‍लीमेंट्री पूछ लिया (व्‍यवधान) उनका जवाब आने दीजिए ।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): वह 80 जिनके खिलाफ जांच पेंडिंग है वह उसमें दोषी ही नहीं है इसलिए यह उस जांच को टाल रहे हैं । जानबूझ कर जांच नहीं करवाना चाहते । आज तीन साल हो गये उपाध्‍यक्ष महोदय, आपको निर्देश देना चाहिये सन 2004 की जांच आज तक चल रही है 44 आदमियों की । सन 2005 के 8 आदमियों की चल रही है, सन 2006 की 24 आदमियों की चल रही है सरकार को कोई शर्म की बात ही नहीं है और दूसरे मंत्री खडे हो जाते हैं आपने ऐसा किया और उन्‍होंने ऐसा किया । आप साफ कहो कि हम भी उसी लाइन पर चलेंगे हमने जो कर दिया वह कर दिया । यह कहो ना, यह कहने में आपको क्‍या झेंप आ रही है ।

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): आप थोडा शांति से सुन लें कि जितने भी निलंबन है यूडीएच और पंचायती राज में दोनों में एसीबी के कारण होते हैं, आप भी अच्‍छी तरह जानते हैं हम भी जानते हैं लेकिन एसीबी में ट्रेप का और एसीबी में चार्ज फ्रेम होने का यह दोनों अलग अलग चीजें हैं ।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): एसीडी में जांच फ्रेम होने का नहीं है, आईपीसी के कैसेज में जांच फ्रेम होने का है । एसीडी में तो आपको खुद को ही शर्म आ जानी चाहिये कि हमारे पार्टी के सारे अध्‍यक्ष एसीडी के द्वारा पकडे जा रहे हैं उसमें तो जांच का सवाल ही नहीं है । अख़बार में पढते ही सुओमोटो राज्‍य सरकार को कदम उठाकर सस्‍पेंड करना चाहिये और आप जांच कराने की बात कर रहे हो और फिर बहादुरी से कह रहे हो हमारे तो एसीडी में पकडे गये तो भी जांच करवायेंगे ।

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): एसीडी डिपार्टमेंट जांच नहीं करता... (व्‍यवधान)

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): 000

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): नहीं है (व्‍यवधान) पद का दुरूपयोग भी किया है। (व्‍यवधान)

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): 000

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य आप जवाब सुनिए ।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): ... (व्‍यवधान) प्रकरणों की स्थिति इस प्रकार है कांग्रेस 7... (व्‍यवधान) न्‍यायिक जांच पूर्ण एवं अयोग्‍य घोषित कांग्रेस 7 । जांच के बाद बहाल कांग्रेस एक ।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य आप स्‍थान ग्रहण कीजिए । बैठ जाइए ।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): उपाध्‍यक्ष महोदय, अगर हमारी नीयत राजनीतिक होती...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य टोका टाकी नहीं । आप जवाब सुनना नहीं चाहते ।जवाब देने दीजिए ।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय):हमारी नीयत राजनीतिक द्वेषता के कारण किसी को निलंबित करने की होती या उसके खिलाफ कार्यवाही करने की होती तो जिन कांग्रेस के माननीय पार्षद को हमने बहाल किया है, बहाल नहीं करते । हमने जांच कर के कांग्रेस के सदस्‍य को बहाल किया है । हमारा इस प्रकार का कोई मकसद नहीं है कि नगर पालिका में... (व्‍यवधान) अच्‍छा काम हो, अच्‍छे तरीके से हो । (व्‍यवधान)

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): 000

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): जहां तक किशनपोल से आने वाले माननीय सदस्‍य ने पाली किशनगगढ, सीकर की बात कही उपाध्‍यक्ष महोदय, इन प्रकरणों को मैं दिखवा लूंगा और जो भी आवश्‍यक कार्यवाही होगी करने का प्रयास करूंगा ।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य ।

डा.बुलाकीदास कल्‍ला(बीकानेर): उपाध्‍यक्ष महोदय, 85 माननीय पार्षद, अध्‍यक्ष और उपाध्‍यक्षों को निलंबित किया गया है उसमें से 72 कांग्रेस के हैं 8 भाजपा के हैं और 5 निर्दलीय हैं । तमाम अध्‍यक्षों, पार्षदों जो कांग्रेस के थे राजनीतिक आधार पर माननीय मंत्री जी ने दुर्भावना से उनको निलंबित किया है । मैं जानना चाहता हूं कि आप बताइए कि किन लोगों को राजनीतिक दुर्भावना से निलंबित किया और मैं यह भी जानना चाहता हूं कि न्‍यायालय ने कितनों में स्‍थगन आदेश दिया ।

श्री शंकर सिंह राजपुरोहित (आहोर): 000

डा.बुलाकीदास कल्‍ला(बीकानेर): न्‍यायालय ने आपके द्वारा राजनीतिक दुर्भावना से जिन लोगों को हटाया गया उनमें न्‍यायालय ने कितनों में स्‍थगन आदेश दिया ।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य , माननीय सदस्‍य ।

डा.बुलाकीदास कल्‍ला(बीकानेर): यह भी बताये कि हमारे जो सदस्‍य थे उनको केवल राजनीतिक दुर्भावना से आपने निलंबित किया और उसमें कितने लोगों को न्‍यायालय ने स्‍थगन आदेश दिया ।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य जवाब आने दीजिए । माननीय सदस्‍य ।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): 000

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): उपाध्‍यक्ष महोदय, जिन जिन कारणों से माननीय सदस्‍य निलंबित हुए उनका मैं एक एक का कारण बता सकता हूं । जिस प्रकार से जिन्‍होंने जो गडबडी की है इनमें श्रीमती अन्‍नी देवी उदय, अध्‍यक्ष, पुष्‍कर कांग्रेस, कियोस्‍क आबंटन में हेराफेरी । श्रीमती राजकुमारी, अध्‍यक्ष, सरवाड, कांग्रेस वित्‍तीय अनियमितताएं । श्रीमती सीतादेवी, सदस्‍य, अजमेर, भाजपा, एसीबी द्वारा ट्रेप । श्री नाथूलाल अग्रवाल, सदस्‍य, छबडा कांग्रेस, एसीबी द्वारा ट्रेप ।

डा.बुलाकीदास कल्‍ला(बीकानेर): आपने राजनीतिक दुर्भावना से किया है । कांग्रेस के तमाम लोगों को (व्‍यवधान) पूरा सदन इस बात को जानता है (व्‍यवधान) कांग्रेस के लोगों में सुमित्रा कांवटिया जो नीमकाथाना की महिला अध्‍यक्ष थी कभी गाडी नहीं चढी । उसको कहा कि गाडी का दुरुपयोग किया । उसने कभी गाडी को नहीं देखा ही नहीं उसको गाडी के दुरुपयोग के ऊपर हटा दिया ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने जो सवाल किया है उसका एक एक का जवाब दे रहे हैं । आप सुनना ही नहीं चाहते हैं । (व्‍यवधान) उपाध्‍यक्ष महोदय, एक एक का जवाब देने को तैयार हैं ।

श्री हेमाराम चौधरी(गुढामालानी): 000

डा.बुलाकीदास कल्‍ला(बीकानेर): सुमित्रा कांवटिया जो कांग्रेस की चुनी हुई अध्‍यक्ष थी कभी गाडी नहीं चढी उसको कहा गाडी का दुरुपयोग किया, एक बार भी गाडी में नहीं बैठी उसको कोर्ट ने स्‍थगन आदेश देकर ... (व्‍यवधान)

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): यह सब चुने हुए हैं जिनके बारे में जानकारी दे रहे हैं आपकी सीकर की ही नहीं चुनी हुई । यह सारे के सारे मेम्‍बर इलेक्‍टेड हैं ।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आपका थोडे ही है मामला, आपका मामला नहीं है।

डा.बुलाकीदास कल्‍ला(बीकानेर): ... (व्‍यवधान) आपने कांग्रेस के लोगों को राजनीतिक दुर्भावना के आधार पर हटाया और आपके आदेशों की धज्जियां उडाकर आपके आदेशों को स्‍थगित करते हुए उनको बहाल किया ।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): यह धज्जियां आपने उडाई आपका रिकार्ड बताया था अभी मंत्री जी ने, एक एक कारण बताया था । सुनने की क्षमता रखो ।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): जिन 21 लोगों को स्‍थाई रूप से अयोग्‍य घोषित किया वह 21 के 21 कांग्रेस के लोग हैं ।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): उपाध्‍यक्ष महोदय, जिन माननीय सदस्‍यों को निलंबित किया है उनका मेरे पास एक एक का रिकार्ड है । मैं एक एक का बताने को तैयार हूं ।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आप तो यह बता दों नियमित विधि अनुसार मीटिंग राजस्‍थान के किन किन अध्‍यक्षों ने नहीं बुलाई, उनकी सूची पेश करो आप । एक कांग्रेस का था उसको तो आपने इस आधार पर किया कि मीटिंग ठीक समय पर नहीं बुलाई । जितनी नगर पालिकाएं हैं उनमें से अधिकांश में जैसा आप क्‍लेम करते हो भारतीय जनता पार्टी के अध्‍यक्ष हैं एक भी बोर्ड की मीटिंग अगर टाइम पर हुई हैं तो मैं आपको चैलेंज देता हूं । एक भी बोर्ड की मीटिंग नहीं हुई उनके खिलाफ आपको क्‍या सांप सूंघ गया क्‍या । जिन्‍होंने मीटिंग नहीं बुलाई क्‍या सरकार को सांप सूंघ गया। आपके आदमी तो मीटिंग नहीं बुलाये तो वह ठीक औरे दूसरा एक भी नहीं बुलाये, एक महीने लेट हो जाये तो वह सस्‍पेंड । कोई खरीदा है क्‍या । (व्‍यवधान)

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैंने ऐसा कोई नियम विरुद्ध काम नहीं किया है .. (व्‍यवधान) लगातार तीन मीटिंगों में गैर हाजिर रहता है उसको निलंबित किये जाने का प्रावधान है । मैंने जो भी किया है वह नियम सम्‍मत किया है, कानून सम्‍मत किया है ।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आपकी बूंदी की नगर पालिका के अध्‍यक्ष का चीर हरण भारतीय जनता पार्टी का वार्ड पार्षद कर ले उसके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं , वह तो एग्‍जेम्‍ट है । भारतीय जनता पार्टी के वार्ड पार्षद ने भारतीय जनता पार्टी की बूंदी की नगर पालिका के अध्‍यक्ष की सरेआम साडी खींच ली, मुकदमा दर्ज हो गया वहां तो आपको नहीं दिखता । (व्‍यवधान)

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य ।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, आप अगला सवाल पुकरो ।

श्री उपाध्‍यक्ष: मोहम्‍मद माहिर आजाद ।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): उधर देखों ना ।

श्री उपाध्‍यक्ष: आप स्‍थान ग्रहण कीजिए । माननीय मंत्री महोदय आप  स्‍थान ग्रहण कीजिए मैंने दूसरा प्रश्‍न पुकार लिया ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मंत्री जी आप भ्रष्‍टाचार को खुला संरक्षण प्रदान कर रहे हो । 11 जनवरी को भ्रष्‍टाचार ब्यूरो के पुलिस महा निदेशक ने चिट्ठी भेज दी कि हमने ट्रेप कर लिया, सस्‍पेंड कर दो । जनवरी में आपने कुछ नहीं किया, फरवरी में आपने कुछ नहीं किया और जब हमने असेम्‍बली  क्‍वेश्‍चन का नोटिस भेजा तब आपको विवश होकर मार्च में कार्यवाही करनी पडी। दो दो महीने तक आप बीजेपी के जो ट्रेप चेयरमैन हैं उनको लेकर आप बैठे रहे और वहां चर्चा चल रही है कि हमने महीने के पैसे बाँध दिये ।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय जोशी जी स्‍थान ग्रहण कीजिए, जवाब दे रहे हैं ।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): उपाध्‍यक्ष महोदय, जहां तक इन तीनों मामलों का सवाल है चित्तौड़गढ़, कामां और आबूरोड, आबू रोड में तो चेयरमैन 6 हजार रुपये की रिश्‍वत लेते पकड़ी गई उसके खिलाफ हमने कार्यवाही कर दी और सस्‍पेंड कर दिया ।

 

ans/akt   11:40  1e  26.03.2007 

 

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आप तो यह बता दीजिए कि आपके सेक्रेटरी ने आपको पत्रावली कितनी तारीख को भेजी थी ? ( व्‍यवधान)  

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): बाद में आर्डर किस तारीख को निकाला (व्‍यवधान) यह बता दीजिए ताकि आपका यह मालूम पड़ जाए कि आपके दफ्तर से क्या हो रहा है।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): मेरे पास यह जांच आई 17.1.2007 को..(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): फिर डेढ़ महीने लेकर क्‍यों बैठे रहे।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): आखिरी सूचना पर..(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): डेढ़ महीने लेकर क्‍यों बैठे रहे आप  ? (व्‍यवधान)

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): 17.1 2003को(व्‍यवधान) जांच हुई...

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): ऐसे निलंबन तो (व्‍यवधान) पाँच-पाँच साल निकल गए, यह महीने- डेढ़ महीने की क्‍या बात कर रहे हो पाँच पाँच साल भी निकल गए और उसके बाद जांच भी चल रही है।(व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 2004 की जांच आज तक चल रही है।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): उपाध्‍यक्ष महोदय, यह गांम  पंचायत का दफ्तर नहीं है, राजस्‍थान सरकार का दफ्तर है स्‍वायत्‍त शासन विभाग का, तो इतना समय तो लगता स्‍वाभाविक है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 2004 की जांच अभी तक नहीं (व्‍यवधान) 2004 की जांच अभी तक नहीं...

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। (व्‍यवधान)

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): किसी का भी निलंबन, किसी  की भी शिकायत प्राप्‍त करो तो उसके पहले जांच कराई जाती है, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, 17.1.2007 को इस प्रकार की शिकायत हमारे विभाग को प्राप्‍त हुई और हमने 1.3.2007 को उसको निलंबित कर दिया, बीच में जो भी कुछ  (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: इतना डिटेल में बताने की आवश्‍यकता नहीं है। मैंने दूसरा प्रश्‍न कॉल कर लिया है।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): बीच में जो कुछ भी प्रशासनिक कार्यवाही होती है(व्‍यवधान)उसमें जरूर समय लगा है। मेरे पास जिस प्रकार से पत्रावली आई..

श्री उपाध्‍यक्ष: मोहम्‍मद माहिर आजाद।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): मैंने एक मिनट का भी समय नहीं लगाया। जो भी इस प्रकार का मामला था, मैंने तुरंत सस्‍पैण्‍ड किया है। (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): पूरा जवाब आने दे (व्‍यवधान) उपाध्यक्ष महोदय, 74 अमेंडमेंट के बाद क्‍या राजस्‍थान सरकार, क्‍योंकि इतने आदमी आपने सस्‍पैण्‍ड किये, पार्टी लाइन पर नहीं है, क्‍या राजस्‍थान सरकार इस विधान सभा को यह आश्‍वस्‍त करने की स्थिति में है  कि आप जब सस्‍पैण्‍ड करें  उसके कितने समय में उसके खिलाफ  कार्यवाही सम्‍पन्‍न हो जाएगी। 

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): इस प्रकार का नियमों में प्रावधान नहीं है, समय सीमा नहीं दी..(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): नहीं मालूम है, 74 अमेंडमेंट के बाद क्‍या राजस्‍थान सरकार नियमों में परिवर्तन करके यह राजनीतिक भेदभाव खतम करने का मानस रखती है या नहीं रखती, इसका जवाब दीजिए।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): नियमों में, जो, एक तो उसमें प्रावधान नहीं है, उसमें कितनी समय सीमा...(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): नियम यह है कि कांग्रेस जो करेगी वो ही बीजेपी करेगी, यही नियम है क्‍या ? जो कांग्रेस करेगी वह बीजेपी कर रही है, यह कोई नियम है ?(व्‍यवधान) उपाध्‍यक्ष महोदय, 74 अमेंडमेंट के बाद इस सरकार की मनमर्जी पर चुने हुए प्रतिनिधि को सस्‍पैण्‍ड नहीं किया जा सकता इसलिए हमारी पार्टी मांग करती है कि राजस्‍थान सरकार इसमें अमेंडमेंट लाए। सस्‍पैण्‍ड करने का अधिकार है तो कम से कम आको उसको डिस्‍पोज करने का भी अधिकार होना चाहिये।। 2004 से लगाकर आज दिन तक कांग्रेस के   सस्‍पैण्‍ड किये हुए आदमियों के खिलाफ  कार्यवाही सम्‍पन्‍न नहीं करे यह लोकतंत्र में आपको अधिकार नहीं है। आपको खड़े होकर कहना पड़ेगा हम इसे(व्‍यवधान) सम्‍पन्‍न करेंगे। 

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): सी पी साहब आपके राज में जब हम (व्‍यवधान) मैम्‍बर को सस्‍पैण्‍ड किया जब आप नहीं..(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा):  मेरे राज में मैं आरती नहीं उतार रहा था मुख्‍यमंत्री की। (व्‍यवधान) मेरे राज में मुख्‍यमंत्री की आरती नहीं उतार रहा था। मेरा राज और आपका राज क्‍या होता है, राज तो आपका और हमारा सबका चलेगा(व्‍यवधान) 74 अमेडमेंट के बाद सरकार को आगे आकर यह कहना पड़ेगा कि 74 अमेंडमेंट के बाद चुने हुए प्रतिनिधि किसी भी पार्टी के हो उनका सम्‍मान हो। सस्‍पैण्‍ड का अधिकार यदि सरकार के पास हो(व्‍यवधान) लेकिन टाइम पीरियड का डिस्‍पोजल कीजिए, यह बात क्‍यों नहीं कहते आप, इसमें क्‍या तकलीफ है आपको। कांग्रेस ने नहीं किया, फलां नहीं किया, यह  उदाहरण है कोई आपका ? (व्‍यवधान) आप कांग्रेस का यह कहकर अपने भ्रष्‍टाचार को नहीं छिपा सकते। (व्‍यवधान) कांग्रेस  का यह कहकर माननीय मंत्री जी आप अपने भ्रष्‍टाचार को नहीं छुपा सकते। 2004 से लगाकर आज दिन तक जो सस्‍पैण्‍ड सरपंच है, चेयर पर्सन है यदि उनको आप रीइंस्‍टेट करने का काम नहीं करते तो लोकतंत्र का इससे बड़ा मजाक नहीं हो सकता इससे अच्‍छा होगा कि बंदर करो इस लोकतंत्र को। (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): राजस्‍थान नगरपालिका अधिनियम..(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, सरकार  के जवाब से कहीं संतोष करने की कोई वजह नहीं है। 85 जन प्रतिनिधियों को आपने सस्‍पैण्‍ड किया..(व्‍यवधान)

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): उसमें बीजेपी और निर्दलीय भी शामिल है । (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): 80 में से 72 कांग्रेस के है, 8 आपके बीजेपी के हे जिसमें तीन को अपने आप सस्‍पैण्‍ड किया जब विधान सभा का आपको नोटिस मिल गया। जिस तरीके से राजस्‍थान सरकार, उपाध्‍यक्ष महोदय, यह मंत्री महोदय खुद इनके, रंजिश से और बेरहमी से काम कर रहे हैं, कानून कायदे सब छोड़कर, राजनीतिक आधार के ऊपर फैसले  कर रहे हैं (व्‍यवधान) यह आपके लिए शर्म की बात है, सत्‍ता पक्ष के लिए और मंत्री महोदय खुद के लिए भी।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय..

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): सुनो, सुनो आप।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):  आपके जवाब से हमें असंतोष है और बहुत दुःख है। (व्‍यवधान)

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): आपका इतिहास देखिये पहले पाँच साल का।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): हम आपके विभाग का उत्‍तर सुनने के बाद, आपका स्‍पष्‍टीकरण लेने के बाद..(व्‍यवधान)

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): बीजेपी वालों को निलंबित किया उस समय आपको शर्म नहीं आई (व्‍यवधान) आज तो न्‍याय हो रहा है जिसने गलती की उन सबको सस्‍पैण्‍ड कर रहे हैं चाहे बीजेपी का हो चाहे कांग्रेस का हो चाहे निर्दलीय हो। आपने एक तरफा कार्यवाही की पाँच साल में, इतिहास बता दिया आपका। 

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): राजनीतिक भेदभाव का हक नहीं है। राजनीतिक आधार पर  सरपंच को, पंचों को जन प्रतिनिधियों को आप सस्‍पैण्‍ड कर रहे हैं और जो रेडहैंडेड पकड़े गए पैसे लेते हुए, जो बीपेजी के हैं उनके ऊपर आप दया कर रहे हो, यह भेदभाव निदंनीय है,इसके खिलाफ  निंदा करते हुए हम बर्हिगमन करते हैं।

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा बर्हिगमन)

 

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): सौ चूहे खाकर बिल्‍ली हज को चली। (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, सौ चूहे खाकर बिल्‍ली हज करने जा रही है। यह भूल गए जब यह शासन में थे, इन्‍होंने 85  स्‍वायत्‍त शासन संस्‍थाओं के सदस्‍यों को, अध्‍यक्षों को निलंबित किया, 87 हैं उसमें मात्र दो कांग्रेस के थे और 85 बीजेपी के थे। एक तरफ तो इनका यह आचरण है और हमने जिनको निलंबित किया 13 बीजेपी  के अध्यक्षों को और 13 बीजेपी के उपाध्यक्षों को जिन पर करप्‍शन के चार्जेज थे, हमने इन्‍हें निलंबित करके पारदर्शिता दिखाई कि यहां न्‍याय है, यहां पर जो गड़बड़ करेगा      जो वित्‍तीय अनियमितता करेगा वह चाहे किसी पक्ष का हो, बराबर में तोलने का काम हमारी सरकार ने किया(व्‍यवधान) सौ चूहे खाकर बिल्‍ली हज को चली। (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): यह काहे पर बोल रहे हैं उपाध्‍यक्ष महोदय।

श्री उपाध्‍यक्ष: मोहम्‍मद माहिर आजाद।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): यह काहे पर बोल रहे हैं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आपके कर्मों पर बोल रहा हूं, आपके कर्मों प बोल रहा हूं। (व्‍यवधान)

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): उपाध्‍यक्ष महोदय, हमने किसी प्रकार की गलती नहीं की।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): प्रश्‍न संख्‍या 24

प्रो. बीरूसिंह राठौड़ (बनीपार्क): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जिस प्रकार एक मछली पानी में रहते हुए कब पानी पी जाती है दुनिया का कोई वैज्ञानिक सिद्ध नहीं कर सकता, पिछले 50 साल में इस कांग्रेस पार्टी ने ऐसी लाखों मछलियां पाल रखी है जो भ्रष्‍टाचार के रूप में कब भ्रष्‍टाचार कर जाती है पता नहीं लगता है। (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): मेरा नाम पुकार लिया, मैंने प्रश्‍न बोल दिय यह अभी भी जवाब दे रहे हें। अभी भी जवाब दे रहे हो आप। (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): दूसरा प्रश्‍न पूछ लिया, वह खड़े हो गए फिर जवाब दे रहे हो आप। (व्‍यवधा)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): आपको धन्‍यवाद दे रहा हूं आपने वाकआउट नहीं किया कम से कम कांग्रेस का साथ छोड़ दिया आपने आज। (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): मैं गेट तक जाकर वापस आ गया, यह मत कहो।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मित्रता निभाने के लिए, इनका भाषण सुनने के कि लए..(व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आपके कैबिनेट मंत्री आपकी कैबिनेट मीटिंग से वाकआउट कर जाए जब तो आपने कुछ नहीं कहा ना । (व्‍यवधान)

 

जिला-मुख्‍यालयों पर प्राकृतिक/यूनानी चिकित्‍सा केन्‍द्रों की स्‍थापना

 

24. मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर):क्‍या आयुर्वेद मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) क्‍या यह सही है कि प्रदेश में आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्‍सकों एवं चिकित्‍सा कर्मियों के पद रिक्‍त है ? यदि हां तो कहां कहां व कब से ?  विवरण सदन की मेज पर रखें।

(2) क्‍या सरकार इन रिक्‍त पदों को भरने का विचार रखती है ? यदि हां तो कब तक व नहीं तो क्‍यों ?

(3) क्‍या सरकार प्रत्‍येक जिले में योग एवं प्राकृतिक चिकित्‍सा केन्‍द्र स्‍थापित करने का विचार रखती है ? यदि हां तो कब तक ?

(4) क्‍या सरकार आयुर्वेद विश्‍वविद्यालय में यूनानी विभाग भी खेलने का विचार रखती है ? 

आयुर्वेद मंत्री (डा. दिगम्‍बर सिंह): (1) जी हां, आयुर्वेद व यूनानी चिकित्‍सकों तथा नर्स/कम्‍पाउण्‍डरों के रिक्‍त पदों का चिकित्‍सालय/औषधालय वार विवरण परिषिष्‍ठ क मैं सदन की मेज पर  रख दिया गया है।

(2) आयुर्वेद चिकित्‍सकों की नवीन नियुक्ति पर मा. राजस्‍थान उच्‍च न्‍यायालय की रोक है। यूनानी चिकित्सकों  के 30 रिक्त पद की पूर्ति हेतु अर्थना भेजने की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। नर्स/ कम्‍पाउण्‍डर के 219 रिक्‍त पदों की भर्ती हेतु अर्थना राजस्‍थान लोक सेवा आयोग को भिजवाई जा चुकी है।

(3) ऐसा कोई प्रस्‍ताव नहीं है।

(4) राजस्‍थान आयुर्वेद विश्‍वविद्यालय जोधपुर में यूनानी का पृथक संकाय है तथा राज्‍य में स्‍नातक स्‍तर के दो यूनानी महाविद्यालय उक्‍त विश्‍वविद्यालय से सम्‍बद्धता प्राप्‍त है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय आयुर्वेद मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि आपने  आपके प्रश्‍न के खण्‍ड एक में जवाब दिया है कि 219 रिक्‍त पदों को भरने के लिए आरपीएससी  को अर्थना भेज दी, कृपया यह बताये कि यह अर्थना कब भेजी, नम्‍बर एक। दूसरा, आपने लिख 30 यूनानी पदों के लिए भेजने की प्रक्रिया चल रही है, यह आप कब तक भेज देंगे। दूसरा मेरा सवाल यह है कि मैंने पूछा था‍कि क्‍या सरकार प्रत्‍येक जिले में योग एवं प्राकृतिक चिकित्‍सा केन्‍द्र खोलने का विचार रखती है, आपने जवाब दिया है कि ऐसा कोई प्रस्‍ताव नहीं है। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, एक तरफ तो आप बाबा रामदेव जी को यहां बुलाकर विधान सभा में भी विधायकों को योग और प्राकृतिक चिकित्‍सा के लिए  प्रशिक्षण दिलवाते हैं।

 

दुर्गा/त्रिपाठी 260307 1150 1f

 

पूरे राजस्‍थान में इस कार्यक्रम को जगह-जगह आप प्रायोजित करते हैं। अब यहां के बाद जब अपने-अपने जिलों में जाएंगे और प्राकृतिक चिकित्‍सा के केन्‍द्र नहीं होंगे तो जब हमने प्राकृतिक चिकित्‍सा पद्धति को अपनाने का काम किया है तो हम वहां पर इलाज कहां करवाएंगे। प्राकृतिक चिकित्‍सालयों के अन्‍दर जो चिकित्‍सा कराते हैं उनका पुनर्भरण भी नहीं करते हैं। इसलिये मेरा आपसे निवेदन है कि आप हर जिले के अन्‍दर योग एवं प्राकृतिक चिकित्‍सालय के केन्‍द्र अगर खोलने का आपका कोई प्रावधान नहीं है तो आप इस पर पुनर्विचार कीजिये और खोलने का काम कीजिये।

एक निवेदन मैं आपके माध्‍यम से करना चाहता हूं कि आपने लिखा है कि राजस्‍थान आयुर्वेदिक विश्‍वविद्याल, जोधपुर में यूनानी का अलग विभाग है और इसमें आपने लिखा है कि 2 कालेज इससे सम्‍बद्ध हैं। वह दो एफिलिएटेड कालेज कौन-कौन से हैं। उनके नाम बता दीजिये, उसकी जानकारी मुझे दे दें। तीसरा, मैं निवेदन यह करना चाहता हूं कि आपने जो जवाब दिया है इस जवाब में पेज 14 पर देखिये, इस पेज 14 पर आपने बालघाट को आज भी सवाई माधोपुर में लिख रखा है। बालघाट तो, अब करौली जिला बन गया और करौली में आ रहा है। आपका विभाग अभी भी इतना पीछे चल रहा है कि कहां पर है बालघाट। तीसरा मैं निवेदन करना चाहता हूं कि इसका पेज 15 देखें कि श्रेणी के जो आयुर्वेदिक और यूनानी चिकित्‍सालय हैं, जैसे आपके चार पद हैं पिड़ावा में तो वहां पर चारों के चारों पद खाली हो गये। अजमेर में श्रेणी आयुर्वेदिक चिकित्‍सालय में पांच पद हैं पांचों पद खाली हैं। आपके सीकर के अन्‍दर दादिया में 3 पद हैं, तीनों खाली हैं। गंगानगर में तीन पद हैं तीनों खाली हैं। तो मेरा निवेदन यह है जहां पर आयुर्वेद और यूनानी चिकित्‍सक और कम्‍पाउण्‍डर के दोनों पद रिक्‍त हैं, फिर वह दवाखाना कहां का है, वहां कोई गाय-भैंस बांधें क्‍या लाकर। इसलिये वहां एक तो लगाएं, जहां 5-5 पद हैं और पांचों पद ही सन 99,2000,2001,2002 और 2004 से खाली चल रहे हैं। तो वहां 1-2 चिकित्‍सक हों तो कम से कम चिकित्‍सालय का नाम तो हो। तो यह असमानता जो है, इसको आप कब तक दूर कर देंगे। आप बताने का कष्‍ट करें।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, नगर से आने वाले माननीय सदस्‍य ने चाहा है कि 219 आदमी जो कम्‍पाउण्‍डरों की आर.पी.एस.सी. को अभ्‍यर्थना भेजी है वह कौनसी तारीख को भेजी है। मैं सदन को यह जानकारी देना चाहता हूं कि 27 फरवरी, 2007 को यह रिक्विजिशन गयी है। राजस्‍थान आयुर्वेदिक यूनिवर्सिटी के साथ कौन-कौन से यूनानी के कालेज एफिलिएटेड हैं, उनका भी आपने ब्‍यौरा चाहा था। तो, एक राजपूताना यूनानी मेडिकल कालेज, अस्‍पताल एवं रिसर्च सेण्‍टर, खण्‍डार का रास्‍ता, जयपुर और दूसरा राजस्‍थान यूनानी मेडिकल कालेज एवं अस्‍पताल, आगरा रोड, जयपुर। यह दोनों यूनानी चिकित्‍सालय हैं जो आयुर्वेदिक यूनिवर्सिटी है, उससे एफिलिएटेड हैं।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): एक तो बंद पडा है। कई सालों से एक ही चल रहा है। राजस्‍थान में तीन कालेज थे। एक राजपूताना और एक राजस्‍थान, दो जयपुर के और एक जुबेरिया यूनानी चिकित्‍सालय, जोधपुर। तो एक ही चल रहा है, दो बंद पड़े हैं। आप करेक्‍ट कर लेना आपकी सूचना। (व्‍यवधान) एफिलिएटेड थे।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): यह दो कालेज एफिलिएटेड हैं, यूनिवर्सिटी से, इतना मैं आपको जानकारी देना चाहता हूं। आपने प्राकृतिक चिकित्‍सा एवं योग के बारे में काफी गम्‍भीरता से अपने विचार रखे हैं। मैं आपकी बात से सहमत हूं। अभी तक इस तरह का कोई विचार, कोई प्रावधान विभाग में नहीं है। परन्‍तु मैं समझता हूं कि जिस तरह से आज आस्‍था लोगों की इस प्राकृतिक चिकित्‍सा एवं योग में है तो इसको मैं एक बार निश्चित रूप से, आपको इतना आश्वासन तो नहीं देना चाहता हूं परन्‍तु निश्चित रूप से गम्‍भीरता से विचार हम करेंगे। रिक्‍त पदों का आपने बताया। मैंने इसकी पूरी लिस्‍ट भी सदन की मेज पर रखी हुई है। इसमें वेकेंसीज जरूर हैं परन्‍तु निश्चित रूप से आने वाले समय में इन वेकेंसीज को भरने का पूरा-पूरा प्रयास मैं कर रहा हूं। और मैं समझता हूं जल्‍दी इसमें सफल होंगे।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से सप्‍लीमेंट्रीज के जरिये यह भी पूछना चाहता हूं कि क्‍या यह सही है कि विगत सरकार ने यूनानी 50 नये चिकित्‍सालय खोलने की घोषणा यहां पर बजट भाषण के अन्‍दर सन 2001 में की थी। तो हाकिम बदल जाता है, हुक्‍म नहीं बदलता है। 50 यूनानी चिकित्‍सालय खोलने की जब इन्दिरा मायारामजी आयुर्वेद मंत्रीजी थीं, उस वक्‍त क्‍या यह घोषणा की थी। और उसके बाद अब आप 50 को 10 पर ले गये। क्‍या पुरानी जो घोषणा है, उसको ही वापस लागू करके...। (व्‍यवधान) संसदीय कार्य मंत्रीजी, सबको आप ही डिक्‍टेट करेंगे क्‍या। एक स्‍कूल-कालेज खोल लो इसका। यह भी 3-3, 4-4 साल में, आपके चूरू में खाली पड़े हैं जो तो आपसे भरवाये नहीं जा रहे। सबसे ज्‍यादा चूरू में खाली पड़े हुए हैं। सबको डिक्‍टेट करते हैं आप। थोड़ी-बहुत बुद्धि सब में है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): उपाध्‍यक्ष महोदय, चूरू में एक कालेज खोला जाए, कोचिंग, इसमें मुख्‍य मंत्री के नजदीक कैसे रहें, वह ट्रेनिंग वहां हो सके, यह कालेज खोलने की आवश्‍यकता है। मुख्‍य मंत्री चाहे कोई भी रहें, उनके नजदीक रहने की जो कला है, वह इम्‍पार्ट करना जरूरी है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): वह नाथद्वारा में भी खोला जा सकता है। क्‍योंकि पिछली बार आप भी यहीं विराजते थे। नाथद्वारा में भी खोला जा सकता है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मेरा अनुभव कम है आपसे। आपका अनुभव ज्‍यादा है। आपके अनुभव का लाभ सबको मिल जाए, भारतीय जनता पार्टी सदस्‍यों को तो लाभ होगा पार्टी को।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): उसमें ट्यूटर आपको लगाया जाएगा।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, यह ठीक है। कालेज चाहे वहां खोल लें परन्‍तु ट्यूटर वहां डाक्‍टर सी.पी.जोशी होने चाहिए उसके।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मैं ट्यूटर नहीं बनता हूं, मैं प्रिंसिपल बनता हूं। यह काम आपको सौंपा है। मैं ट्यूटर नहीं बनता है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): विजिटिंग प्रोफेसर। विजिटिंग प्रोफेसर तो आपको मंजूर है ना, विजिटिंग प्रोफेसर।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): उपाध्‍यक्ष महोदय, सवाल यह था कि पिछली सरकार ने बजट में 50 यूनानी चिकित्‍सालय खोलने की घोषणा की थी और अब आप 10 पर आ गये तो आज जो यूनानी चिकित्‍सकों के पद रिक्‍त हैं वह अलग। जो रिटायर हो गये या डेथ हो गयी, उनकी और जगह खाली पड़ी हुई है। यह 79-80 के करीब बनेंगे और आप केवल 30 की भर्ती कर रहे हैं। इससे काम चलने वाला नहीं है। मेरा यह सवाल हैं आपसे।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा बहुत महत्‍वपूर्ण प्रश्‍न, आगे नम्‍बर आ रहा है।

श्री उपाध्‍यक्ष: आपका नम्‍बर आ रहा है, आ रहा है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): एक मिनट, उपाध्‍यक्ष महोदय, एक तो कम्प्लीट हो जाए।

एक सवाल यह भी है कि जिन लोगों ने, चाहे वह आयुर्वेद में, चाहे यूनानी में पहले एप्‍लाई कर रखा है और उच्‍च न्‍यायालय के स्‍थगन के कारण भर्ती नहीं हो पाई तो तो क्‍या उनको आप आयु में छूट देंगे, उनकी उस वक्‍त की जो पात्रता थी, उसको जब स्‍टेट वेकेट हो जाएगा तब मानेंगे, यह दो सवालों का जवाब और दे दें।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, विगत सरकार का जो आपने बजट भाषण का जिक्र किया, उसी से आपको यह जानकारी इसकी होनी चाहिए। क्‍योंकि मुझे कई बार खुद को ताज्‍जुब होता है, पिछली बार मैं कुछ कागज देख रहा था मेरे चिकित्‍सा से सम्‍बन्धित, हमारी जोधपुर से आने वाली माननीय सदस्‍या, सूर्यकान्‍ताजी आयी थीं।

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): उपाध्‍यक्ष महोदय, मंत्रीजी का माइक लम्‍बा करवा दो। आवाज नहीं आ रही है। या तो लम्‍बा करवा दो या इनसे कहें कि झुक कर बात करें थोड़ी।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): मैं झुक कर बात कर लूंगा।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): आप मंत्रीजी को झुकाना क्‍यों चाहते हो, आप मंत्रीजी को झुकाना क्‍यों चाहते हो।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, जिन्‍दगी में झुकना हमेशा अच्‍छा रहता है।

तो मैं यह देख रहा था, आज राजाखेड़ा से आने वाले माननीय सदस्‍य यहां नहीं हैं। आप वित्‍त मंत्री थे, शायद आपके बजट भाषण में घोषणा थी कि जोधपुर में महिला बाग़ को 50 बेडेड सेटेलाइट हास्पिटल बनाया जाएगा। यह मैंने खुद ने एक बजट भाषण में, और सूर्यकान्‍ताजी आज भी परेशान हैं, जो जोधपुर से आती हैं, हमारी माननीय सदस्‍या कि महिला बाग़ को सेटेलाइट हास्पिटल, उसको 50 बेडेड हास्पिटल हमने किया। तो उस समय क्‍या-क्‍या घोषणाएं आप लोगों ने कीं और उस पर अमल नहीं किया। शायद उसी के कारण आज यह दिन देखना पड़ रहे हैं, उसका कारण यही है। परन्‍तु इस पर मैं आपको इतना ही निवेदन करना चाह रहा हूं कि इन तीन सालों में यूनानी चिकित्‍सा को हम बिलकुल साथ में लेकर चले हैं। 14 यूनानी चिकित्‍सालय हमने पहले खोले। इस बार भी हमारी मुख्‍य मंत्रीजी ने 10 यूनानी चिकित्‍सालय खोलने का इस बार बजट भाषण में घोषणा की है। और हम यह निश्चित रूप से यह पूरे 10 पहले और 14 आज के, यह 10 वाले भी इस बार हम खोल देंगे। 50 जो तत्‍कालीन सरकार द्वारा घोषणा के अनुरूप औषधालय उसी सरकार के समय नहीं कर पाये, चूंकि उस समय घोषणा तो कर दी परन्‍तु बजट प्रावधान उस समय ने कुछ नहीं किया था। इसलिये खोले नहीं गये। परन्‍तु हमने जो कुछ घोषणाएं की हैं, उसका निश्चित रूप से अक्षरशः पालना करेंगे और उसकी पूर्ति करेंगे।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): नहीं, आयु वाला तो बता दें। जिन्‍होंने उस वक्‍त भरे हुए हैं और स्‍टे आ गया तो उनको आप आयु सीमा में छूट देंगे। उनकी पात्रता मानेंगे या नहीं मानेंगे। नहीं तो वह ओवरएज हो गये, फार्म भरे हुए, बेकार हो जाएंगे।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): देखिये, आयुर्वेद में, आयुर्वेदिक चिकित्‍सकों के लिये आयु सीमा का रिलेक्‍सेशन हमारी सरकार ने पहले से किया है। उसको काफी रिलेक्‍स किया है और मेरे ख्‍याल से 45 साल उसकी आयु सीमा हमने उसकी कर दी है, जहां तक मैं सही हूं, तो 45 साल आयु रिलेक्‍सेशन आयुर्वेद में हम पहले कर चुके हैं। इसलिये उन लोगों को मेरे ख्‍याल से कोई दिक्‍कत इस तरह की आयेगी नहीं।

 

Vps-usc-26032007-1200-1g-1

 

परन्‍तु मैं इतना निवेदन करना चाहूंगा कि यूनानी, होम्‍योपैथ और आयुर्वेद, यह तीनों चिकित्‍साएं, जो पिछली सरकार के टाइम पर बिलकुल मृतप्राय: हो गया था डिपार्टमैंट, न तो एक भी आयुर्वेद का औषधालय नया खोला और न एक भी यूनानी का औषधालय नया खोला पाँच साल के अन्‍दर और न ही कोई यूनानी का चिकित्‍सालय एक भी खोला। ... (व्‍यवधान)

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा भी प्रश्‍न है।

श्री उपाध्‍यक्ष: अब नहीं आएगा।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): एक भी चिकित्‍सालय नहीं खोला। हमने 65 पिछले वर्ष खोले, पिछले 3 साल में 65 आयुर्वेद के खोले और इस बार 30 और नये आयुर्वेद के खोलने वाले हैं हम। उससे पहले हमने 35 होम्‍योपैथी के खोले, इस बार 30 होम्‍योपैथी की डिस्‍पेंसरीज हम और खोलने वाले हैं। 14 हमने यूनानी के खोले और 10 यूनानी के चिकित्‍सालय और खोलने वाले हैं तो हम तो सरकार जो कुछ घोषणाएं करती है उस पर निश्चित रूप से अमल करते हैं और इसकी क्रियान्वित भी बहुत जल्‍दी ही हम करेंगे। बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

श्री उपाध्‍यक्ष: प्रश्‍न काल समाप्‍त।

 

स्‍थगन प्रस्‍तावों पर अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍था

 

मुझ माननीय सदस्‍यों को सूचित करना है कि निम्‍नांकित स्‍थगन प्रस्‍तावों की सूचना प्राप्‍त हुई है:-

1 श्री रणवीर सिंह गुढ़ा, सदस्‍य की ओर से नवलगढ़ की मस्जिद के अन्‍दर गैर के जुलूस द्वारा रंग के गुब्‍बारे एवं गंदा पानी फेंके जाने के संबंध में।

2 श्री संयम लोढ़ा, सदस्‍य की ओर से जिला जालौर के थाना नोसरा एवं भाद्राजून चौकी में दिनांक 16 मार्च को एक निर्दोष युवक पर पुलिस द्वारा अत्‍याचार करने के संबंध में।

उपरोक्‍त प्रस्‍ताव ऐसे नहीं हैं कि सदन की पूर्व निर्धारित कार्यवाही को रोककर इन पर विचार किया जाए अत: अनुमति देने में असमर्थ हूं। दिनांक 20.03.20207 को पुलिस विभाग की मांग पर चर्चा के समय माननीय सदस्‍य को पर्याप्‍त अवसर उपलब्‍ध था।

3 श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा, सदस्‍य की ओर से सब्‍जी पर आढ़त दर 6 प्रतिशत से घटाकर 3 प्रतिशत करने से सैकड़ों व्‍यापारियों के समक्ष आजीविका का संकट खड़ा होने के संबंध में।

आज कृषि विभाग की मांग पर चर्चा हो रही है। माननीय सदस्‍य को इस विषय पर बोलने का अवसर उपलब्‍ध है। अत: अनुमति देने में असमर्थ हूं।    

4 श्री महिपाल सिंह यादव एवं 3 अन्‍य सदस्‍यों की ओर से राजधानी जयपुर में 9 लड़कियों एवं 6 विवाहित महिलाओं के लापता होने के संबंध में।

उपरोक्‍त स्‍थगन प्रस्‍ताव के संबंध में राज्‍य सरकार से जानकारी प्राप्‍त की जा रही है और जानकारी प्राप्‍त होने पर निर्णय लिया जाएगा।

 

5 श्री हरिमोहन शार्मा एवं 7 अन्‍य सदस्‍यों की ओर से विकलांग व्‍यक्तियों के चयन हो जाने के उपरान्‍त भी उनका आस्‍था कार्ड नहीं बनाने के कारण सहायता से वंचित होने के संबं‍ध में।

6 श्री सी.डी. देवल एवं दो अन्‍य सदस्‍यों की ओर से राष्‍ट्रीय राजमार्ग संख्‍या 14 पर झाला की चौकी (तहसील रायपुर) में चबूतरा बना दिये जाने से आवागमन में हो रही असुविधा के संबंध में।

7 श्री रघुवीर सिंह मीणा एवं 6 अन्‍य सदस्‍यों की और से विधान सभा क्षेत्र सराड़ा के कन्‍तोड़ा गांव में ओलावृष्टि से एक व्‍यक्ति की मृत्‍यु होने के संबंध में।

उपरोक्‍त प्रस्‍ताव भी ऐसे नहीं हैं कि सदन की पूर्व निर्धारित कार्यवाही को रोककर  इन पर विचार किया जाए अत: अनुमति देने में तो असमर्थ हूं। फिर भी माननीय सदस्‍य श्री हरिमोहन शर्मा, श्री सी.डी. देवल एवं श्री रघुवीर सिंह मीणा को दो-दो मिनट अपने-अपने प्रस्‍ताव पर बोलने की अनुमति होगी।

मुझे माननीय सदस्‍यों को यह भी सूचित करना है कि निम्‍न स्‍थगन प्रस्‍ताव के संबंध में राज्‍य सरकार से जानकारी प्राप्‍त हुई है:-

श्री जुबेर खान, सदस्‍य की ओर से राज्‍य में लोकायुक्‍त की नियुक्ति अभी तक नहीं किये जाने के संबंध में।

उपरोक्‍त प्रस्‍ताव ऐसा नहीं है कि सदन की पूर्व निर्धारित कार्यवाही को रोककर इस पर विचार किया जाए अत: अनुमति देने में असमर्थ हूं। फिर भी विषय की गम्‍भीरता को देखते हुए माननीय सदस्‍य श्री जुबेर खान को दो मिनट बोलने की अनुमति होगी।

 

प्रक्रिया के नियम 295 के अन्‍तर्गत प्राप्‍त विशेष उल्‍लेख की सूचनाएं

 

1 श्री प्रभुलाल वर्मा, सदस्‍य की ओर से विधान सभा क्षेत्र पीपल्‍दा में तकनीकी स्‍वरोजगार प्रशिक्षण संस्‍था की स्‍थापना के संबंध में।

2 श्रीमती राजकुमारी शर्मा, सदस्‍य की ओर से सीकर शहर में राजस्‍थान आवासन मण्‍डल की आवासीय कॉलोनी की दुर्दशा के संबंध में।

3 श्री जीवाराम चौधरी, सदस्‍य की ओर से विधान सभा क्षेत्र सांचोर में ओलावृष्टि व बेमौसमी वर्षा के कारण किसानों के हुए नुकसान का सर्वे करवाकर मुआवजा देने के संबंध में।

4 श्री बद्रीलाल जाट, सदस्‍य की ओर से सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र कपासन को सामान्‍य चिकित्‍सालय में क्रमोन्‍नत करने के संबंध में।

5 श्री पुष्‍पेन्‍द्र सिंह, सदस्‍य की ओर से परिवहन निगम के फालना आगार को नवीन बसें एवं स्‍टाफ उपलब्‍ध करवाने के संबंध में।

6 श्री लक्ष्‍मीनारायण बैरवा, सदस्‍य की ओर से तहसील चाकसू में औद्योगिक प्रशिक्षण केन्‍द्र खोलने के संबंध में।

7 श्रीमती प्रतिभा सिंह, सदस्‍य की ओर से विधान सभा क्षेत्र नवलगढ़ की ग्राम पंचायत चिराना के सरपंच द्वारा पहाड़ी क्षेत्र में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई करने के संबंध में।

8 श्री बीरूसिंह राठौड़, सदस्‍य की ओर से जयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा हार्डवेयर व्‍यावसायियों को आवंटित भूमि का कब्‍जा देने के संबंध में।

9 श्री अशोक नागपाल, सदस्‍य की ओर से सूरतगढ़ से जैतसर, श्री विजयनगर होते हुए सड़क का पुनर्निर्माण करने के संबंध में।

10 श्री अशोक कुमार नवलखा, सदस्‍य की ओर से विधान सभा क्षेत्र निम्‍बाहेड़ा के मांगरोल चौराहा में 132 के.वी. जी.एस.एस. का निर्माण करने के संबंध में।

11 श्री शिवजीराम मीणा, सदस्‍य की ओर से विधान सभा क्षेत्र जहाजपुर के ग्राम बेई, नाथूण एवं घेवरिया को सड़क योजना से जोड़ने के संबंध में।

12 डा. श्रीगोपाल बाहेती, सदस्‍य की ओर से राज्‍य में मूक-बधिर-नेत्रहीन व मानसिक विमंदित बच्‍चों की शिक्षा के लिए संचालित संस्‍थाओं को शत-प्रतिशत अनुदान देने के संबंध में।

माननीय सदस्‍यों को उनके द्वारा दी गई उपरोक्‍त सूचना को पढ़ने की अनुमति होगी।

श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, ... (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: आपको टाइम देंगे। श्री हरिमोहन शर्मा।

श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा एक मिनट का ही विषय है। यह बहुत इम्‍पोर्टेंट है, लाखों जो छोटे व्‍यापारियों को इससे बड़ी समस्‍या हो रही है ... (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, मांग पर बोलने का समय दे देंगे आपको। माननीय सदस्‍य, आपको समय दे देंगे मांग पर बोलने का। श्री हरिमोहन शर्मा।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, ... (व्‍यवधान)

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपसे मेरा अनुरोध है कि जो गैर के जुलूस के माध्‍यम से मस्जिद के अन्‍दर शराब की बोतलें फेंकी गयी थीं, यह गम्‍भीर विषय है ... (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। माननीय सदस्‍य, गृह विभाग की ... (व्‍यवधान) माननीय सदस्‍य। अंकित नहीं होगा। माननीय सदस्‍य, आपका अंकित नहीं होगा। मैंने आपको परमिशन नहीं दी है। अंकित नहीं होगा।

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): 000

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं सदन का ध्‍यान इस ओर ... (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आपका अंकित नहीं होगा। माननीय सदस्‍य। गृह विभाग पर भी चर्चा हो चुकी है। सारी बातें आपको कहने का मौका था। माननीय सदस्‍य, आसन की तरफ से यह व्‍यवस्‍था दी जा चुकी है। अब आप इसलिए अपना स्‍थान ग्रहण कर लीजिए। माननीय सदस्‍य, नहीं। माननीय सदस्‍य, गृह विभाग पर चर्चा हो चुकी थी, समय था आपको बोलने का और भी आपकी कोई बात होगी तो कह सकते हैं, गृह मंत्रीजी से। ... (व्‍यवधान) आपको इस पर समय नहीं देंगे।

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा):  000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, यह अंकित नहीं हो रहा है। आप समय बरबाद नहीं कीजिए। माननीय सदस्‍य खड़े हुए हैं। आप अपना स्‍थान ग्रहण कर लीजिए।

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: कोई पाबंदी का सवाल नहीं है। माननीय सदस्‍य। माननीय सदस्‍य, आपका ऐसा था नहीं प्रस्‍ताव इस कारण से। कोई गम्‍भीर नहीं है इस पर ... (व्‍यवधान) माननीय सदस्‍य, कार्यवाही की जाएगी ... (व्‍यवधान) ऐसी कोई बात है तो कार्यवाही होगी पर कार्यवाही नियमानुसार होगी, माननीय सदस्‍य। आप अपना स्‍थान ग्रहण कीजिए। आपका अंकित नहीं हो रहा है। माननीय सदस्‍य। अंकित नहीं हो। माननीय सदस्‍य खड़े हैं, आप उन्‍हें बोलने का पहले मौका दीजिए। उनको ... (व्‍यवधान)

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा):  000

श्री उपाध्‍यक्ष: आप अपना स्‍थान ग्रहण कीजिए। कह दिया न। मैंने कह दिया कि आपको बोलने की अनुमति नहीं दी है। ... (व्‍यवधान)

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: कह दिया। आपने कह दिया। मैंने भी कह दिया है। आसन की तरफ से यह व्‍यवस्‍था दे दी गयी है। माननीय सदस्‍य, आप अपना स्‍थान ग्रहण कीजिए। माननीय सदय, आप अपना स्‍थान ग्रहण कीजिए। ... (व्‍यवधान)

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: अब गृह मंत्रीजी खड़े हो गये, आप अपना स्‍थान ग्रहण कीजिए।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इस बात पर ... (व्‍यवधान) माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं अगर आपकी इजाजत हो? जो भी माननीय सदस्‍य कह रहे हैं, एक परसेंट भी सच्‍चाई नहीं है। न तो कोई गुलाल मस्जिद में फेंकी गयी है। केवल इन्‍होंने नवलगढ़ में एक हव्‍वा खड़ा करने के लिए जा कर लोगों को उकसा कर यह जुलूस इसके यहां से नहीं निकलना चाहिए जो 100 साल से निकल रहा है। वहां के लोग संतुष्‍ट हैं। किसी को कोई तकलीफ नहीं हुई। शांति समिति की बैठक हुई। सबने स्‍वीकार किया फिर इन्‍होंने भड़काने का काम किया इसलिए उनको उस राज को इनको गिरफ्तार किया, दूसरे दिन जुलूस निकलने के बाद, शांति पर, जुलूस के बाद इनको छोड़ा है। किसी भी प्रकार की कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। कोई उसके बारे में एक निशान भी यह नहीं कह सकता कि कोई गुलाल फेंकी गयी हो या मजिस्‍द में किसी प्रकार की कोई, केवल एक सनसनीखेज बनाकर अब वह अपनी विधान सभा क्षेत्र परिवर्तन करना चाहते हैं इसलिए नवलगढ़ की तरफ इशारा हो रहा है।

 

spp/usc/12.10/1h/26.3.2007 (1)

 

और इसके कारण स्‍टंट किया। एक प्रतिशत भी सच्‍चाई नहीं है।

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप अपना स्‍थान ग्रहण करें। माननीय सदस्‍य जो आवश्‍यक कार्यवाही थी, वह पुलिस कर रही है। .(व्‍यवधान).....

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): 000

श्री उपाध्‍यक्ष : माननीय सदस्‍य, आवश्‍यक कार्यवाही पुलिस कर रही है।

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा):

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, गृज मंत्रीजी ने कह दिया, इसके बाद भी आप सन्‍तुष्‍ट नहीं हैं । ...(व्‍यवधान).... आपका अंकित नहीं हो रहा है। माननीय सदस्‍य, आपको बिलकुल स्‍पष्‍ट जवाब दे दिया गया है। ...(व्‍यवधान)....

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: कर लेंगे जांच। माननीय सदस्‍य, आवश्‍यकता होती तो जांच भी हो जायेगी। ...(व्‍यवधान)....

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आपको अंकित नहीं हो रहा है। आपको आसन ने परमिशन नहीं दी है बोलने की। मंत्रीजी ने आपको स्थिति बता दी है। आप मानेंगे नहीं क्‍या ? ...(व्‍यवधान)....

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: गृह मंत्रीजी ने कहा है आप सुनने को तैयार नहीं हैं। माननीय सदस्‍य, आपको अंकित नहीं हो रहा है। बिना परमिशन के ही बोल रहे हैं। ...(व्‍यवधान)....

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो रहा है माननीय सदस्‍य। ...(व्‍यवधान).... आपका अंकित नहीं हो रहा है। आप बिना परमिशन के बोल रहे हैं। मंत्रीजी ने स्‍पष्‍ट कर दिया। इसका कोई अंत नहीं है। ...(व्‍यवधान)....

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप अपना स्‍थान ग्रहण कर लीजिये। मंत्रीजी ने इस पर स्थिति स्‍पष्‍ट कर दी। सदन में आज अभी मांग पर चर्चा होगी। आप स्‍थान ग्रहण कर लें। ...(व्‍यवधान).... कह दिया, गृह मंत्रीजी को जो कहना था, आपके कहने से नहीं कहेंगे। ...(व्‍यवधान)....

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा):  000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप अपना स्‍थान ग्रहण कर लें।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): उपाध्‍यक्ष महोदय, आपकी आज्ञा शिरोधार्य है। आप अगर मुझे इजाजत नहीं देंगे तो मैं नहीं बोलूंगा। मैंने स्‍थगन प्रस्‍ताव के माध्‍यम से ध्‍यान आकृष्‍ट करने की कोशिश की है तो गृह मंत्रीजी को यह तो फरमा दें कि आप इसकी जानकारी लेलें। एक आदमी के साथ थाने में मारपीट हुई, उसका मेडिकल हुआ है। मैं कोई राजनीति नहीं करना चाहता।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, जानकारी देने में और लेने में मुझे कहीं कोई हिचक नहीं है। पर जो मैंने जानकारी ली, मैं माननीय सदस्‍यों से भी प्रार्थना करना चाहूंगा जिस व्‍यक्ति को थाने पर बुलाया । उस पर 6 केस आलरेडी कोर्ट में चल रहे हैं। उसमें 5 चोरी के हैं, एक नकबजनी का है और 2005 में ही पाँच केस दर्ज हुए। जब एक चोरी का मुकद्मा दर्ज हुआ तो जैसे सामान्‍यत: पुलिस उन पुराने लोगों को बुलाती है, वैसे ही उसको बुलाया गया है। अगर आप चाहते हैं कि चोरी की किसी वारदात को कबूल कराने के लिये अगर उसको थाने पर नहीं बुलायें तो मैं सोचता हूं अच्‍छा नहीं होगा। जो कुछ पुलिस ने किया, अपनी सीमा में रहकर एक पुराने अभियुक्‍त को बुलाकर नई वारदात को खोलने के लिये उन्‍होंने जरूर बुलाया। उसमें किसी प्रकार की कोई विशेष बात नहीं है। उसके बाद भी आपको लगता है कोई भी अनफेयर बात हुई है तो मैं उसको निश्चित रूप से देख लूंगा। लेकिन मैं चाहूंगा इस प्रकार से अगर अपना विधान सभा का उपयोग करेंगे तो मैं सोचता हूं पुलिस एकदम काम करवाने में असमर्थ हो जायेगी और वह स्थिति अच्‍छी नहीं रहेगी कि पुलिस के बिलकुल हाथ ही बाँध देंगे कि चोरी की वारदात खोलने के लिये भी वह अभियुक्‍त, जिसके ऊपर मुकद्मे हों, उस व्‍यक्ति को बुलाकर नहीं पूछ सकें तो यह दुर्भाग्‍य होगा। मैं सोचता हूं उन्‍होंने मंशा से किया किसी प्रकार, फिर भी अगर उसके साथ और दृष्टि से कुछ हुआ है तो मैं उसे दिखवा लूंगा । मैं इतना सदन के सभी माननीय सदस्‍यों से निवेदन करना चाहता हूं कृपा करके इस प्रकार के अभियुक्‍तों को बचाने के लिये सदन का उपयोग नहीं करें।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): नहीं गृह मंत्रीजी, अभियुक्‍तों को बचाने का कोई सवाल नहीं है। अगर उसके साथ बेरहमी से मारपीट नहीं हुई है, उसके बाल नोंचे नहीं गये तो आपने वहां से ए.एस.आई. को क्‍यों हटाया ?

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, कह दिया आपने।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ए.एस.आई. को फिर किसलिये हटाया ? आप यह बता दीजिये।

श्री उपाध्‍यक्ष: अब कह दिया उसमें।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): नहीं, उपाध्‍यक्ष महोदय, यह कोई बात थोड़ी हुई। हम कोई चोरी की पैरवी करने के लिये खड़े हुए हैं। किसी चोरी के मुकद्मे में इन्‍वॉल्‍ब था। किसने अधिकार दे दिया पुलिस को कि पाँच दिन थाने में लाकर रखेंगे और रात-दिन उसके साथ मारपीट करेंगे, उसको लहूलुहान कर देंगे। यह किसने अधिकार दिया पुलिस को ? एक चोर के भी मानवाधिकार हैं गृह मंत्रीजी। एक चोर के भी मानवाधिकार हैं। यह अधिकार आपको नहीं है, यह देखिये किस तरह से पुलिस ने मारपीट की है।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): सदन में कह रहा हूं पाँच मुकद्मे उसके ऊपर हैं और उससे पूछना पड़ेगा । एक साल में पाँच चोरियां और मुजरिम, जिसके खिलाफ पाँच चालान पेश हुए हैं। 2005 में 67/2005 का चालान पेश हुआ है ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): इससे क्‍या हो गया ?

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): 73 में हुआ, 76 में हुआ चालान 184 में हुआ । अगर ऐसे अभियुक्‍त को बुलाकर पूछताछ नहीं करेंगे ? पुलिस पूछताछ करेगी, पुलिस पूछताछ करेगी । क्‍या बात करते हो ?

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ऐसा है, यह लहूलुहान करने का हक नहीं दिया आपको। चोरी कर ली तो क्‍या हो गया, आप मुकद्मे में बंद कीजिये। ..(व्‍यवधान)..

श्री बंशीलाल खटीक : चोरों को सज़ा दे रहे हैं और उन चोरों का आप सरंक्षण कर रहे हो। पाँच-पाँच, छह-छह केसों में, चोरी-नकबजनी में फंसे हुए लोगों को सरंक्षण देते हो।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): कोई व्‍यक्ति हत्‍या कर देगा, लेकिन यह पुलिस को अधिकार किसने दिया कि वह लहूलुहान कर दे। ..(व्‍यवधान).. पुलिस को अधिकार किसने दिया ?

श्री बंशीलाल खटीक : चोरों को क्‍या ..(व्‍यवधान).. उनके साथ वह बर्ताव करना पड़ेगा और पाँच पाचं , छह छह केसों में फंसे हुए लोगों को उल्‍टा सम्‍मान किया जायेगा क्‍या ? ऐसे चोरों को इसी प्रकार किया जायेगा  । उन चोरों का संरक्षण कर रहे हो आप ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से यह प्रार्थना कर रहा हूं कि हत्‍यारा भी है उसके भी अपने मानवाधिकार हैं। उसके भी अपने मानवाधिकार हैं। आपको कोई अधिकार नहीं हैं कि आप किसी के बाल नोच लें इस तरह से और बेरहमी के साथ मारपीट करें। यह मेडिकल रिपोर्ट मेरे पास पड़ी है। उसके पाँच चोटें आई हैं पाँच जगह। ..(व्‍यवधान)..

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, अब आपका अंकित नहीं हो रहा है। अंकित नहीं होगा। गृह मंत्रीजी ने कह दिया कि पुलिस को जो आवश्‍यक कार्यवाही होगी, वह करेगी।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री बंशीलाल खटीक : 000

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री शंकरसिंह राजपुरोहित : 000

श्री बंशीलाल खटीक : 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, स्‍थान ग्रहण कीजिये।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप क्‍या बात कह रहे हो ? बिना परमिशन के माननीय सदस्‍य अंकित नहीं होगा । ..(व्‍यवधान).. आप फिर डिस्‍टर्ब कर रहे हो। ..(व्‍यवधान)....

श्री शंकरसिंह राजपुरोहित : 000

श्री रघुवीर सिंह (सराड़ा) : 000

 

Msr/usc/1220/1j/26032007

 

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, फिर वोही काम कर रहे हैं।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा):  000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप बिना अलमति के बोल रहे हैं, आपका अंकित नहीं हो रहा है। आप बीच में ही ...(व्‍यवधान)...

स्‍थगन प्रस्‍तावों आदि पर चर्चा

विकलांग व्‍यक्तियों के आस्‍था कार्ड बनवाने विषयक

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं सदन का ध्‍यान और सरकार का ध्‍यान इस महत्‍वपूर्ण सरकार द्वारा के गयी घोषणाओं की ओर आकर्षित करना चाहता हूं।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, अच्‍छा तो यह होता कि माननीय समाज कल्‍याण मंत्रीजी यहां पर विराजते और आश्‍चर्यजनक घटनाक्रम यह है कि मुझे तो ऐसा लगता है कि सम्‍माननीय महावीरजी, मुख्‍य सचेतक और सम्‍माननीय समाज कल्‍याण मंत्रीजी, मदन दिलावर को यह असहास करा दिया राजस्‍थान की मुख्‍यमंत्री ने कि वो इनको अपने पदों से हटाने वाली हैं और इसके कारण से लगातार ...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, खेद की बात है अबर किसी के घर में कोई गमी हो जाए और अब यह क्‍या कोई बात हुई? इस तरह की बात कर के किसी माननीय सदस्‍य की भावनाएं हैं उसे आहत करने काम करता है। कम सेकम इतना तो हमारा सोच छोड़ा नहीं होना चाहिए।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): हटा दो आप तो।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): बिना छुट्टी का आवेदन किये और वो अनुपस्थित हैं तो राजनीतिक दृष्टिकोण से जिस प्रकार के आपस में आपके मधुर सम्‍बन्‍ध हैं उससे यही कयास लगाया जायेगा कि उनकी छुट्टी होने वाली है और सरकार, माननीय मुख्‍यमंत्रीजी तो उनकी छुट्टी करने वाले हैं। ...(व्‍यवधान)...

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जो सदन में नहीं हैं उनके लिए तो, उनके बारे में बोलने का हक नहीं है यहां। यह आपको मालूम है कि नहीं? ...(व्‍यवधान)...

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, 12 जुलाई, 2004 राजस्‍थान की माननीय वर्तमान मुख्‍यमंत्री ने अपने बजट भाषण के पैरा नम्‍बर 33 में कहा नि:शक्‍तजनों को रोजगार उपलब्‍ध करवाने की दृष्टि से विश्‍वास स्‍व:रोजगार सहायता योजना लागू की जायेगी जिसके अन्‍तर्गत वित्‍तीय संस्‍थानो से 40 हजार रुपये तक के ऋण की व्‍यवस्‍था कराई जायेगी एवं साथ-साथ 10 हजार रुपये का अनुदान दिया जायेगा। एक और पहल के तहत ऐसे परिवारों में जिनमें दो या अधिक व्‍यक्ति शारीरिक रूप से विकलांग हैं, उनकी पहचान की जायेगी तथा उन्‍हें बी.पी.एल. परिवारों के समान सुविधाएं उपलब्‍ध करवाई जायेगी। यह घोषणा मुख्‍यमंत्रीजी ने अपने पहले बजट भाषण दिनांक 12 जुलाई, 2004 को की।

इसके साथ राज्‍यपाल महोदय ने अपने अभिभाषण दिनांक 03.02.2005 को पैरा नम्‍बर 111 में कहा कि- नि:शक्‍त (विकलांग) व्‍यक्तियों के लिए स्‍वयं का रोजगार प्रारम्‍भ करने के लिए विश्‍वास स्‍व:रोजगार सहायता योजना तथा नि:शक्‍त निर्धन परिवारों को बी.पी.एल. परिवारों को दी जाने वाली समान सहायता उपलब्‍ध कराये जाने के लिए आस्‍था योजना लागू की गीय।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, 2004 में मुख्‍यमंत्रीने कहा, 2005 में माननीय राज्‍यपाल से उनके अभिभाषण में यह तथ्‍य उनसे कहलवाया गया लेकिन आज तक जो राजस्‍थान में नि:शक्‍तजनों की, एक परिवार में दो नि:शक्‍तजन हैं उनके मामले में आज तक राजस्‍थान की सरकार, राजस्‍थान का समाज कल्‍याण विभाग कतई सक्रीय नहीं है, इस अपनी निसक्रीय भूमिका को इन तीन सालों में निभा रहा है लेकिन इसका परिणाम यह है कि जहां तक कि विधान सभा में अपने प्रश्‍नों का जवाब जो देते हैं वो भी अलग-अलग है। एक प्रश्‍न मैंने लगाया उसमें तो इन्‍होंने कहा की, नहीं, बी.पी.एल. में उनकी गिनती नहीं की जायेगी। दूसरे में यह कहा कि बी.पी.एल. परिवारों को मिलने वाला आस्‍था कार्ड उनको दिया जायेगा, उनको दो रुपये किलो का गेहूं दिया जायेगा, उनको ग्रामीण विकास के अन्‍तर्गत जो भी सुविधाएं विकलांगों को और बी.पी.एल. परिवारों को दी जाती है वो दी जायेगी।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, अभी तक केवल मात्र जो इन्‍होंने अभी घोषणा की है इसी माह में मेरे प्रश्‍न के जवाब में, केवल मात्र इन्‍होंने अभी तक 2939 आस्‍था कार्ड जारी किये, चयन किया है इनके हिसाब से अभी तक 3672 का और 743 ऐसे लोग हैं कि जिनके अभी तक आपको जानकारी दूं कि कि भरतपुर में 101 ऐसे लोग हैं जिनके आस्‍था कार्ड इन्‍होंने नहीं बनाये, घोषणा के अनुसार जो इन्‍होंने चयन किये, जैसलमेर में 10 हैं, जालौर में 6 हैं और, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय अध्‍यक्ष महोदय के निवास झुन्‍झुनूं में 117 ऐसे व्‍यक्ति हैं, टोंक में जहां से कृषि मंत्रीजी विराजमान हैं, माननीय महावीरजी हैं और भी बहुत हैं, निवाई के विधायक बहुत कर्तव्‍य निभाते रहते हें समय-समय पर, इनके अपने जिले में 131 ऐसे विकलांग परिवार हैं जिनका चयन करने के बाद भी आज तक यह आस्‍था कार्ड नहीं बना पाये, करौली में 242 हैं और हनुमानगढ़ में 127 हैं। यह सूची तो वो है, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, 743 उन लोगों की इन्‍होंने चयन सालभर पहले, दो साल पहले चयन करने के बाद उनको आज तक भी बी.पी.एल. परिवारों को जो सुविधा दी जाती है, जो उनके इलाज की व्‍यवस्‍था की जाती है, जो उनको दो रुपये किलो गेहूं दिया जाता है और जो उनको सामाजिक सहायता के अन्‍तर्गत बी.पी.एल. परिवार को जो सहायता उपलब्‍ध होती है वो दी जाती है, उनसे इन 743 को तो इन्‍होंने महरूम कर रखा है लेकिन जिन लोगों के कार्ड बना दिये, आज की तारीख में भी राजस्‍थान सरकार ने न तो उनके इलाज के लिए कोई कार्ड वितरित किये गये हैं न उनको दो रुपये किलो का गेहूं उपलब्‍ध करा रही है और न उनको ग्रामीण विकास योजनाओं के अन्‍तर्गत किसी भी प्रकार का वहां लाभ नहीं पहुंचा रही है।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं एक चीज आपके ध्‍यान में लाना चाहूंगा कि राजस्‍थान में कुल 6.5 करोड़ आबादी है और राज्‍य सरकार ने स्‍वयं यह स्‍वीकार किया है कि 1.70 परसेंट विकलांगों का है 6.5 करोड़ में और उनमें 11 लाख करीब ऐसे विकलांग लोगों की उन्‍होंने श्रेणी निकाली और उनमें से 11 हजार ऐसे परिवार हैं जिनमें एक से अधिक, दो विकलांग व्‍यक्ति हैं। 11 हजार परिवारों का चयन करना तो दूर लेकिन जो इन्‍होंने 3500 परिवारों का चयन किया उसमें से भी 1000 परिवारों को यह आस्‍था कार्ड उपलब्‍ध नहीं करा पाये और अभी तक जिनको कार्ड दिये उनको न तो गेहूं उपलब्‍ध करा पा रहे हैं और न उनको इलाज के लिए कार्ड बना पा रहे हैं।

इस प्रकार यह पूरी की पूरी राजस्‍थान सरकार अपनी घोषणा करने में तो माहिर है, 2004 में मुख्‍यमंत्रीजी ने कहा, 2005 में राज्‍यपाल महोदय ने अभिभाषण में दिया लेकिन आज की तारीख तक, यह 2007 का मार्च समाप्‍त होने जा रहा है, अब तक भी अपनी घोषणा के अनुरूप यह गरीब लोगों को सहायता नहीं दे रही है ओर इस प्रकार इनकी घोषणा से यह मुकर रही है और उनको किसी भी प्रकार की सहायता इसके लिए राज्‍य सरकार, समाज कल्‍याण विभाग और घोषणा करन वाले ऐसी झूठी और असत्‍य घोषणाएं सदन में न करें जिसके आधार पर इन लोगों को सहायता दी जाए।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्‍यम से विनम्र अनुरोध और प्रार्थना है

श्री उपाध्‍यक्ष: आ गयी आपकी बात।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपसे विनम्र अनुरोध और प्रार्थना है कि राज्‍य सरकार को आप निर्देशित करें कि वो तत्‍काल 11 हजार परिवारों को चयनित कर उनके कार्ड दे, जिनके कार्ड बन गये हैं उनको सुविधा उपलब्‍ध कराये और जिनके कार्ड अभी तक चयन के पश्‍चात् नहीं बने हैं उनको भी कार्ड बनाने का आप निदे्रश दें।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपने मुझे अवसर दिया, धन्‍यवाद।

श्री उपाध्‍यक्ष: धन्‍यवाद। श्री सी.डी.देवल।

एक माननीय सदस्‍य: जवाब तो दें।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आप दे रहे हो क्‍या समाज कल्‍याण का जवाब ...(व्‍यवधान)...

श्री उपाध्‍यक्ष: रिकार्ड पर आगयी बात आपकी।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): हैं ही नहीं समाज कल्‍याण मंत्रीजी।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): समाज कल्‍याण ही गायब कर दिया क्‍या?

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): महकमा दूसरे को देने के बाद जवाब आयेगा।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): राठौड़ साहब बोलेंगे? बाकी सब का तो बोल रहे हो आप।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): सबसे पहले समाज कल्‍याण गायब हो गया। ...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): नि:शक्‍त पर तो बोलो आप। बाकी सब पर बोल रहे हैं, सशक्‍त पर तो बोल रहे हैं, नि:शक्‍त पर बोलो। सशक्‍त पर तो बारबार बोलते हो आप, नि:शक्‍त पर बोलो कुछ आप।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): राठौड़ साहब, बोलो न। दे रहे हो क्‍या? माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, सरकार इस महत्‍वपूर्ण बात पर भी जवाब देने की स्थिति में नहीं है, मंत्रीजी गायब हैं।

श्री उपाध्‍यक्ष: यह विस्‍तार से रिकार्ड पर आ गया ...(व्‍यवधान)...

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): मंत्रीजी को हटा रहे हैं, दूसरे मंत्री आयेंगे जब जवाब आ जायेगा।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): संसदीय कार्य मंत्री इसलिए जवाब नहीं दे रहे कि मदद दिलावर से जुड़ा हुआ सवाल है, और से होता तो दे देते।

श्री उपाध्‍यक्ष: आ जायेगा। ...(व्‍यवधान)...

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): मदन दिलावरजी को हटा रहे हैं फिर दे देंगे।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): राठौड़ साहब तो इसलिए नहीं दे रहे कि विभाग मदन दिलावरजी के पास है और आफत मूल नहीं लेना चाहते। ...(व्‍यवधान)...

श्री उपाध्‍यक्ष: अब इस पर टीका-टिप्‍पणी की आवश्‍यकता नहीं है।

 

राष्‍ट्रीय राजमार्ग संख्‍या 14 पर झाला की चौकी (तहसील रायपुर) में चबूतरा निर्माण विषयक

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रक्रिया के नियम 50 के अन्‍तर्गत राजस्‍थान सरकार का आपके माध्‍यम से ध्‍यान आकर्षित करना चाहता हूं कि राष्‍ट्रीय राजमार्ग नम्‍बर 14 पर झाला की चौकी एक गांव आया हुआ है, जहां से एक सड़क राष्‍ट्रीय राजमार्ग नम्‍बर 8 पर जाकर के मिलती है जैसाखेड़ा पर और ब्‍यावर से 17 माईल के स्‍टोन पर। उस सड़क के बीच व्‍यक्ति विशेष ने एक चबूतरा बनवा दिया और उनका यह विचार है कि इस पर मैं मेरे पिताजी की फोटो लगवाऊं। पिताजी की फोटो लगाने की हर औलाद की मंशा रहती है लेकिन राष्‍ट्रीय राजमार्ग पर और राजमार्ग पर किसी चबूतरे, अवरोध को खड़ा करने में, मूर्ति लगाने में राजस्‍थान सरकार की या भारत सरकार की अनुमति आवश्‍यक है। जिला स्‍तर पर एक कमेटी बनी हुई है जो स्‍थान तय करती है कि किस जगह पर मूर्ति लगायी जाए।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, उस चबूतरे को खड़ा करने के बाद यह सारी उस चबूतरे की फोटो हैं जो राष्‍ट्रीय राजमार्ग और उस मार्ग को अवरोध करती है, यह तो सदन के पटल पर रखूंगा।

 

Ars/usc/1230/1k/26032007/1

 

लेकिन इसके बनाने के बाद मैंने कोई बीसों जगह सार्वजनिक निर्माण मंत्री जी के यहां लगाये और एक बार माननीय मुख्‍यमंत्री जी से मिला लेकिन मुझे यह कहते हुए बहुत अफसोस है कि पता नहीं माननीय मंत्री जी पर किस बात का दबाव है आज तक उस चबूतरे को नहीं हटाया। जबकि राष्‍ट्रीय राजमार्ग से जुड़ताहुआ उसकी सीमा में आता हुआ कोई अवरोध, बिना भारत सरकार की अनुमति के नहीं बन सकता लेकिन सार्वजनिक निर्माण मंत्री जी इस पर टालमटोल कर रहे हैं। वह पार्टी बर के न्‍यायालय में गयी, न्‍यायालय ने स्‍थगन आदेश खारिज कर दिया लेकिन आज तक अवरोध नहीं हट रहे हैं1 मैं तो केवल इतना निवेदन करना चाहता हूं कि इस अवरोध को आप तुरन्‍त हटवा दें और यदि आप इस पोजिशन में नहीं हैं तो राजस्‍थान में इस बात की छूट दे दें कि जो भी सड़के हैं, जो चाहे वहां पर चबूतरा बनाए, चाहे जिसकी फोटो लगाए। इस‍की आप व्‍यवस्‍था कर दें कि जो नियम विरूद्ध कार्य हो रहे हैं और जिन अधिकारियों को जो दोषी हैं उनके खिलाफ सरकार कार्यवाही करे, मेरी तो आपसे इतनी सी इल्‍तजा है और यह फोटो मैं सदन के पटल पर रख रहा हूं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, जिस चबूतरे का जिक्र माननीय सदस्‍य ने किया है यह नेशनल हाईवे पर नहीं बनकर नेशनल हाई वे से जो सम्‍पर्क सड़का कानूजा जाती है उस पर छोटा सा चबूतरा बना हुआ है। उपाध्‍यक्ष महोदय, आज की बात नहीं जिस जगह पर यह चबूतरा बना है गांव गांव के अति प्रतिष्ठित नाथूसिंह जी का एक सड़क दुर्घटना में देहान्‍त हो गया था।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): उस गांव के हैं ही नहीं, वहां से दस किलोमीटर दूर के रहने वाले हैं। उनकी क्‍वालिफिकेशन एक है कि आपकी भारती जनता पार्टी के हैं, क्‍या वह स्‍वतंत्रता सैनानी थे, क्‍या वार्ड पंच थे, कुछ थे आखिर किसी भी प्रतिष्ठित व्‍यक्ति का होना चाहिए । उपाध्‍यक्ष महोदय, गलत जवाब दे रहे हैं मंत्री जी। ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: पहले से है। ...(व्‍यवधान) आप जवाब सुनें पहले।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): ...(व्‍यवधान) वह काना की चौकी के रहने वाले हैं ही नहीं वहां से दस किलोमीटर है उनका गांव।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, फिर गांव में क्मिवदंति जिस तरह चलती है, चल गया कि इनका अगर हम यहां छोटा चबूतरा बना लें और उसकी पूजा कर लें तो शायद वहां दुर्घटनाएं कम हो जाएं। यह गांवों के अन्‍दर अंधविश्‍वास है उसी के निमित्‍त उन्‍होंने उस चबूतरे को बनवाया और जब यह विभाग की जानकारी में आया तब हमने इस चबूतरे को हटवाने के लिए कार्यवाही भी प्रारम्‍भ की। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इसके लिए ए.ई.एन, एक्‍स. ईएन की और संबंधित एस.डी.एम. की तीनों की टीम बनाकर वहां भेजा भी पर इसमें बाद में यह हुआ कि पहले तो ग्राम पंचायत ने वहां चबूतरा बनाने का प्रस्‍ताव ले लिया हालांकि ग्राम पंचायत प्रस्‍ताव ले ले उसके अनुसार कोई किसी सड़क के पास कोई चबूतरा बने, जरूरी नहीं है। उसके बाद यह मामला न्‍यायालय में चला गया। दीवानी, सिविल वाद संख्‍या 42/2005, बालूसिंह सरपंच वर्सेज राजस्‍थान सरकार। अभी वहां चल रहा है पर फिर भी आपने जो कहा मैं खुद मानता हूं कि नियम बने हुए हैं उन नियमों के अन्‍तर्गत ही चबूतरे बनते हैं, स्‍मारक बनते हैं।

पर जहां तक पूर्व में मेरी जानकारी थी पूर्व में तो यह बात थी कि जब यह बना तब इसका उद्घाटन कौन करे, शायद माननीय सदस्‍य से भी ग्रामीण जन ने सम्‍पर्क किया था। मेरे दिमाग में यह बात थी कि कोई उद्घाटन वगैरहा का मामला होगा पर आज बात स्‍पष्‍ट हो गई है तो मैं दिखवा लेता हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री रघुवीर सिंह मीणा।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): हटवा रहे हैं क्‍या आश्‍वासन दे दें। न्‍यायालय में तो कोई स्‍थगन आदेश नहीं है और ग्राम पंचायत का प्रस्‍ताव है कि, मंत्री महोदय आप स्‍पष्‍ट कर दें कि ग्राम पंचायत प्रस्‍ताव करे और वहां पर चबूतरा बन जाए, मुझे कोई एतराज नहीं है। आप इस अन्‍तरराष्‍ट्रीय स्‍मारक को रखिये। मैं माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से कहना चाहता हूं कि व्‍यक्ति विशेष क्‍योंकि भारतीय जनता पार्टी का नेता है इसलिए वह अपने पिता की मूर्ति लगाना चाहता है, उसका गांव वहां से दस किलोमीटर है ...(व्‍यवधान) आप कृपया सुन लीजिए।मैं कोई पोकरण में नहीं ...(व्‍यवधान) 

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): आपको पीड़ा क्‍यों हुई यह बताओ ना?

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): मैं तो वहां केवल चबूतरा ...(व्‍यवधान)  चाहता हूं।

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): यह चबूतरे की आपको पीड़ा क्‍या है, आपको किस बात की पीड़ा है, भारतीय जनता पार्टी का कोई भी है तो उसका चबूतरा बनाए, आपको पीड़ा किस बात की ...(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): उसका तरीका यह है कि माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय,  ...(व्‍यवधान) क्‍या हुआ था बता दूं ।

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): आप तो सदन का समय गंवा रहे हो, चबूतरा, चबूतरा क्‍या पीड़ा है आपको चबूतरे की ...(व्‍यवधान) चबूतरा नहीं बनेगा ...(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): बता दिया ना चबूतरा ... 

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): उससे भावना जुड़ी हुई है, नहीं हटेगा वह ...(व्‍यवधान) उसके साथ जन भावना जुड़ी हुई है चबूतरा नहीं हटेगा ...(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): आपकी साइज का ही है ...(व्‍यवधान) सवा पाँच फुट का ।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह सीधे उलझ रहे हैं यह ठीक नहीं है।

श्री उपाध्‍यक्ष: बैठिये, बैठिये आप। ...(व्‍यवधान)

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): यह हमेशा के लिए आदत खराब है ।

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): यह चबूतरा जैसा कि जन भावना उससे जुड़ी हुई है ...(व्‍यवधान) माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जन भावना जुड़ी हुई है चबूतरा कैसे हटेगा वहां ...(व्‍यवधान)

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): यहां पर किसी को धमकाने की जरुरत नहीं है। आप सदन में जो माननीय सदस्‍य को ...(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह मंत्री महोदय से फैसला करा दें कि ग्राम पंचायत और जनता चाहेवहां चबूतरा बना सकती है, मुझे उसको हटाने की कोई आवश्‍यकता नहीं है, अन्‍यथा इस चबूतरे को हटाया जाए।

श्री उपाध्‍यक्ष: ठीक है।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): क्‍योंकि सारे नियम कानून को ताक पर रखकर यह चबूतरा बना है और अगर कोई किसी का स्‍मारक भी बने, उनका तर्क यह मंत्री जी स्‍वयं जानते हैं। मेरे पिताजी का एक्‍सीडैंट हो गया, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, वहां चालीस आदमियों के एक्‍सीडैंट हुए हैं तो चालीस फोटो लगाकर के उसको लगाया जाए।

श्री उपाध्‍यक्ष: आइन्‍दा नहीं होगा इसकी व्‍यवस्‍था ...(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): तो आप उसको हटवाएं जो नियम विरूद्ध काम है, उसको संरक्षण सरकार नहीं दे। मेरी तो इतनी इल्‍तजा है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, संरक्षण का कोई मामला है ही नहीं। मैंने पहले कहा कि इसमें चूंकि न्‍यायालय में वाद है फिर भी मैं दिखवा लेता हूं।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): न्‍यायालय से कोई स्‍थगन आदेश नहीं है अगर न्‍यायालय से स्‍थगन आदेश हो तो माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं विधान सभा से इस्‍तीफा दे दूं। आप पता कर लें इसके बावजूद भी इसको संरक्षण दिया जा रहा है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैंने जिस न्‍यायालय में न्‍यायिक विवाद की बात कही है.....

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): आपने स्‍वयं ने उस चबूतरे को देखा है, आप जब दौरे पर गये ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): दीवानी संख्‍या /42, जिसका मैंने कहा है बालूसिंह सरपंच बनाम राजस्‍थान सरकार, यह चल रहा है।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): चल रहा है तो स्‍थगन आदेश तो नहीं आये।

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी):  (हिण्‍डौली): ...(व्‍यवधान) केवल वाद कायम होने से ही उसका अधिकार बनता है  ...(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): केवल न्‍यायालय में पेश करने से क्‍या होता है ।

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): स्‍टे नहीं मिला तो आप सक्षम हैं अगर गलत काम हो रहा है, स्‍टे नहीं है तो आप सक्षम हैं। आप इनका हवाला देकर के कार्यवाही नहीं करना चाहते हैं और वाद का बहाना ले लिया ...(व्‍यवधान) हम उस बहाने से ..

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, बात इतनी सी है मंत्री जी अगर न्‍यायालय का स्‍थगन आदेश नहीं है या पंचायत का प्रस्‍ताव नहीं है, आप उसको हटवा देंगे क्‍या ?

श्री उपाध्‍यक्ष: कह दिया दिखवा लेंगे इसको।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, सब लोग जो सदन में आये हैं हर किसी ने किसी न किसी के विरूद्ध चुनाव लड़ा है  मतलब छोटी छोटी बातों को लेकर के स्‍थगन ...(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): सड़क के बीच में अवरोधक दे दिया कौनसी छोटी बात है ?

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): आपने कहा न्‍यायालय का स्‍थगन है अगर न्‍यायालय का स्‍थगन नहीं है और ग्राम पंचायत का प्रस्‍ताव भी नहीं है तो उसे हटवा देंगे क्‍या ?

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): आप इस सदन में खड़े होकर ...(व्‍यवधान) बात सुनें आप सदन में खड़े होकर कह दीजिए ...(व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): आज इतना सा कह दीजिए कि न्‍यायालय का स्‍थगन आदेश नहीं है और ग्राम पंचायत भी नहीं चाहती है तो उसको हटा देंगे, खतम बात ...(व्‍यवधान)

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): भारतीय जनता पार्टी का कार्यकर्ता, उस गांव का मुअज्‍जीज व्‍यक्ति ...(व्‍यवधान) उसके अगर चबूतरे में इनको यह पीड़ा है, उनमें जन भावना जुड़ी हुई है ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य...

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): काहे की जुड़ी हुई है?

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): पूरी पंचायत उससे जुड़ी हुई है और वह भारतीय जनता पार्टी के कार्याकर्ता उसको  ...(व्‍यवधान) आप सड़क से उतरवाना चाहते हो यह कभी नहीं हो सकता ।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): आपकी साइज का ही है ...(व्‍यवधान)

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): यह कभी नहीं हो सकता, वहां जन भावना जुड़ी हुई है सारे गांव की, वहां पूरी पंचायत की  भावना जुड़ी हुई है ...(व्‍यवधान) न्‍यायालय आदेश दे या नहीं दे लेकिन गांव की भावना को ध्‍यान में रखते हुए किसी हालत में चबूतरा नहीं टूटना चाहिए ...(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): माननीय मंत्री जी आप ो यह कह दें ...(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं तो माननीय सदस्‍य से यही पूछना चाहता हूं क्‍या यह सही नहीं है कि उस चबूतरे पर जाकर आपने भी दो तीन बार फूल चढ़ाये हैं, अब उस आस्‍था का मैं क्‍या करूं माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, ...(व्‍यवधान)  कानून व्‍यवस्‍था की बात आ जाती है, वहां लोगों ने आस्‍था का केन्‍द्र बना लिया।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): मैंने कोई धोक नहीं लगाई ...(व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): गांव का आदमी नहीं चाहता है सारा का सारा गांव खिलाफ है ...(व्‍यवधान)

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): वहीं हमारे सदस्‍यों ने ...(व्‍यवधान) आप खुद के चुनाव के अन्‍दर उसी चबूतरे पर जाकर माथा टेककर आये और आज वही चबूतरा तुड़वा रहे हैं।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): उस चबूतरे को आप जैसलमेर ले जाओ, उस चबूतरे को आप जैसलमेर ट्रांसफर करवा दो।

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): आप तो ट्रांसफर ...(व्‍यवधान) कब्र करवा दो, आप तो किसी की कब्र खुदी हुई है तो जैसलमेर में ट्रांसफर करा दो, चबूतरा ही ट्रांसफर हो जाएगा, अगर कब्र आप ट्रांसफर करा देंगे तो चबूतरा ही ट्रांसफर हो जाएगा ...(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): सड़क से हट जाएगा हम तो यह नहीं चाहते कि वहां अशांति फैले वरना तो ...(व्‍यवधान)

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): आपने अपने चुनाव के अन्‍दर वहां के उस चबूतरे पर माथा टेका, वहां के चबूतरे के ऊपर दण्‍डवत की, कैसे भी चुनाव जीतें, अब जीतने के बाद चबूतरा तुड़वा रहे हैं ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, या तो सरकार हटा दे नहीं तो आम पब्लिक हटा देगी। हम क्षेत्र में अशांति नहीं चाहते हैं, मंत्री जी ने स्‍वयं उस चबूतरे को देखा है, कानून हम हाथ में नहीं लेना चाहते इसलिए आप से बार बार विनतीकर रहे हैं आप उसको हटवा दें।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): मैं दिखवा लूंगा इसको।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, पिछली बारह तारीख की रात को ओलावृष्टि से जिस तरह से त्राहि मची उस त्राहि में एक गरीब आदिवासी जो ओलावृष्टि से मर गया उसके साथ अन्‍याय हो रहा है उसको मदद नहीं मिलने वाली, ऐसी संभावना है इसलिए मैं चाहूंगा आपके माध्‍यम से सरकार से कि गौर करें और उस व्‍यक्ति को मदद दिलाएं।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, 12 तारीख रात को ओलावृष्टि हुई और इतनी ओलावृष्टि हुई कि पंखेरू जी, राष्‍ट्रीय पक्षी मोर, बैल, कुत्‍ते, जानवर जो भी थे वह चार चारसौ ग्राम के ओले थे और मर गये और ऐसे मकानों में छेद हो गये जैसे कोई गोली मारी हो।

श्री उपाध्‍यक्ष: इस सम्‍बन्‍ध में सरकार द्वारा विस्‍तृत क्‍या मुआवजा दिया जाएगा, क्‍या नहीं दिया जाएगा, यह वकत्‍व्‍य में आ गया सारा।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): मैं निवेदन कर रहा हूं जिस क्षेत्र में दक्षिणी राजस्‍थान में जहां बारह तेरह साल बाद इतनी जबर्दस्‍त बरसात हुई जो इस साल हुई । बारह तेरह साल तक वहां का किसान अकाल से पीडि़त रहा। फसल होती नहीं थी और जैसे तैसे अपना गुजारा चलाते थे। अभी इस वर्ष बरसात इतनी अधिक हुई कि किसान की फसल नष्‍ट हो गयी ।

 

vns/usc/12.40/1l/26.3.2007/1

 

फिर किसान को यह उम्‍मीद बंधी कि जयसमन्‍द डेम भरा है जिसके नीचे सरवाड़, सलूम्‍बर का क्षेत्र सिंचित होता है और यहां के किसान बड़े किसान हैं उनसे छोटे जो मजदूरी करते हैं कमजोर तबके के लोग हैं। वह लोग जमीन किराये से लेकर 25,000, 10,000, 7,000, 15,000 उस खेत की कीमत तय करके फिर उस काश्‍तकार से ठेका लेते हैं। अभी इस तरह से टमाटर, गेहूँ, चना आदि जो फसलें थीं वह इसी तरह से किराये पर लेकर काश्‍तकार कर रहे थे तो ... (व्‍यवधान) 

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, सरकार द्वारा जो घोषणा की गयी हैं इसमें राहत देने में सब मामले कवर हो जाते हैं उसके अनुसार लोगों को राशि देनी शुरू कर दी गयी है। यह प्रक्रिया चालू हैं।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): निवेदन तो सुन लो। आप सुन तो लें मेरी बात। संतुष्‍ट नहीं हों तो आप मुझे टोकना। हमारा पिता थावरा नाम का व्‍यक्ति, निवासी गंतोडा, 35 साल का नौजवान था। उसके तीन बच्‍चे भी हैं। मां-बाप हैं, पत्‍नी है और वह व्‍यक्ति किसी गावरी की जमीन किराये लेकर उसने खेती की थी। पिछली फसल भी चौपट हो गयी थी। मजदूरी पर ही आधारित था। रात को ओले से पूरी फसल नष्‍ट हो गयी। सुबह ज्योंही खेत पर गया, देखते ही हार्ट अटैक हो गया और खतम हो गया। अब आदिवासी इलाके में इतनी अशिक्षा की वजह से न तो पोस्‍टमार्टम कराया, कुछ नहीं कराया और लाश जला दी। दूसरे दिन 13 तारीख को 10.30 बजे यहां से मैंने तहसीलदार जी को टेलीफोन किया। तहसीलदार कहते हैं कि अभी आफिस का थोड़ा काम निपटा कर फिर जा रहा हूं। दूसरे दिन 10.00-11.00 बजे तक भी तहसीलदार मौके पर नहीं गये। उन्‍होंने सिर्फ पटवारी और इनके भरोसे छोड़ दिया। तहसीलदार तो अभी भी मौके पर नहीं गये क्‍योंकि पटवारियों ने जो रिपोर्ट भेजी है, मैं यह निवेदन इसलिये कर रहा हूं कि उस गरीब के साथ न्‍याय नहीं होने वाला है जिस तरह से रिपोर्ट भेजी है कलेक्‍टर ने। उदयपुर जिले में आप भी सुनकर ताज्‍जुब करेंगे जैसे यह सरकार कहती है कि मुख्‍यमंत्री जी के आने के बाद खूब बरसात हुई। बरसात तो हुई। उदयपुर जिले में 10 विधान सभा क्षेत्र हैं और 10 विधान सभा क्षेत्रों में 2 ही कांग्रेस के हैं। एक सराड़ा और दूसरा गोगुन्‍दा। यह जो ओलावृष्टि हुई दो ही विधान सभा क्षेत्र में हुई गोगुन्‍दा और सराड़ा। अब यह भी आपकी मेहरबानी मानें। अब 10 गांव तो सराड़ा के और 5 गोगुन्‍दा के हैं। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इन्‍होंने जो रिपोर्ट भेजी है उसमें न पशुओं का हवाला दिया, न राष्‍ट्रीय पक्षी का हवाला दिया, न किसी व्‍यक्ति के मरने का हवाला दिया। इन्‍होंने मात्र यही लिखा है कि 50 प्रतिशत और उससे अधिक फसल खराबा। तो इसका मतलब इसमें किसी तरह से भी यह कलेक्‍टर ने जो रिपोर्ट भेजी है उपायुक्‍त, आपदा बंधन सहायता विभाग को तो उस व्‍यक्ति को किसी भी तरह से सहायता मिलने की संभावना है नहीं और जिसके पशु मर गये उनकी भी कोई गणना नहीं की गयी है इसलिये मेरा आपके माध्‍यम से निवेदन है कि पुन: जांच करा कर जिन-जिनको जो नुकसान हुआ है और जो व्‍यक्ति मर गये हैं इन्‍हें सी आर एफ के अलावा भी सरकार अपने कोष से और क्‍या सहायता मिलाकर इसको मदद करेगी ? यह थोड़ा बताने क कृपा करें। निःशक्त में तो कोई बताने वाला था नहीं। अकाल के मामले में संसदीय कार्य मंत्री जी आप बता देंगे कि इसके बारे में क्‍या आप विचार कर रहे हैं। बताने की कृपा करें।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री जुबेर खान।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): बोलें। बोले ना। सी आर एफ के नार्म्‍स के अलावा भी कुछ इसको मदद करेंगे ?

श्री उपाध्‍यक्ष: गवर्नमेंट की तरफ से बहुत विस्‍तृत होती है जांच।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): आपके कलेक्‍टर ने जो रिपोर्ट भेजी है उसमें ... (व्‍यवधान) 

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने बात कही है वह इम्‍पोर्टेंट इसलिये है कि कटारिया साहब खुद जानते हैं कि सराड़ा के इलाके में एक किसान की जो मौत हुई है, माननीय सदस्‍य कह रहे हैं कि ओले गिरने के कारण से हुई है। या तो जांच करवा लें और जांच करवाने के बाद यदि यह मालूम पड़े कि उसकी सदमे के कारण हुई है तो सरकार को कुछ सहायता करनी चाहिये। यह माननीय सदस्‍य कह रहे हैं आप जांच करवा लें। 

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): पटवारियों की तो बदनीयत बताऊं। गृह मंत्रीजी, पटवारी की बदनीयत बताऊं मैं। 15 तारीख को रजिस्‍टर्ड किया ... (व्‍यवधान) 

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): आप जो कह रहे हैं अभी जानकारी में यह विषय नहीं है क्‍योंकि आज आपने यह विषय उठाया। मैं भी कल और परसों दो दिन वहीं था लेकिन मेरे भी ध्‍यान नहीं आया कि ऐसी कोई घटना अपने उस क्षेत्र में इसके कारण से ओलावृष्टि से हुई है। नुकसान के कारण से हुई है। पता कर लेंगे। अगर उसमें से नुकसान हुआ है, कोई बात हुई तो आगे उसको जो भी राहत है, पर अभी तक जानकारी में नहीं आया कि ऐसा कुछ हुआ है।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री जुबेर खान।

 

राज्‍य में लोकायुक्‍त की नियुक्ति विषयक

श्री जुबेर खान (रामगढ़): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करूंगा कि राजस्‍थान स्‍टेट और राजस्‍थान विधान सभा उन विधान सभाओं में है जिन्‍होंने सबसे अग्रणी होकर राजस्‍थान लोकायुक्‍त एण्‍ड उप लोकायुक्‍त एक्‍ट 1973 में पास किया। 1973 में पास किया और महामहिम राष्‍ट्रपति की 26 मार्च, 1978 को इस पर कंसेंट मिली। उसके बाद उपाध्‍यक्ष महोदय, इस एक्‍ट में साफ है “An Act to make provisions for the appointment and functions of certain authorities for the investigation of allegations against the Ministers and Public Servants in certain cases and for matters connected herewith.”

मैं निवेदन करना चाहूंगा कि इसमें एक्‍ट के अन्‍तर्गत जिन लोगों के खिलाफ लोकायुक्‍त या उप लोकायुक्‍त जांच कर सकते हैं भ्रष्‍टाचार की उसमें मुख्‍यमंत्री को छोड़कर पूरी काउंसिल आफ मिनिस्‍टर्स आते हैं। चीफ सेक्रेटरी को छोड़कर सारे सेक्रेटरीज आते हैं। पब्लिक सर्वेण्‍टस आते हैं। म्‍युनिसपेलिटी के चेयरमैन, वाईस चेयरमैन आते हैं। जिला प्रमुख, पंचायत के चेयरमैन, वाईस चेयरमैन आते हैं। तो जितने भी जन-प्रतिनिधि हैं लोकायुक्‍त महोदय के मार्फत ही उनके खिलाफ भ्रष्‍टाचार की कोई जांच हो सकती है।

मैं आपसे निवेदन करना चाहूंगा कि माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इसमें जो अपाइंटमेंट देना है लोकायुक्‍त एक्‍ट में प्रोविजन है कि “Fort the purpose of conducting the investigations in accordance with the provisions of this Act, the Governor shall, by warrant under his hand and seal, appoint a person to be known as the Lokayukta and may be similar warrant for the appointment for one or more persons to be known as Up Lokayaukta or Up Lokayauktas.” मैं यहां निवेदन करना चाहूंगा और 1973 में यह प्रावधान किया  कि इसका अपाइंटमेंट भी कितना पारदर्शी होना चाहिये “The Lokayukta shall be appointed after consultation with the Chief Justice of the High Court and the Leader of the Opposition in the Legislative Assembly or if there is no such Leader a person elected in his behalf by the Member of the Opposition in the House in such a manner as the Speaker may direct.” और इसी तरह से लोकायुक्‍त की कंसल्‍टेशन से उप लोकायुक्‍त का अपाइंटमेंट महामहिम गवर्नर करेंगे। उपाध्‍यक्ष महोदय, यहां तक है एक लोकायुक्‍त का संवैधानिक पद कि गवर्नर भी उनको जब तक किसी हाई कोर्ट के जज से जांच, इंक्‍वायरी नहीं करा लेते और दोषी पाया जाता है तब तक उसको संसपैंड नहीं कर सकते। पद से रिमूव नहीं कर सकते और अगर उसको पद से रिमूव भी करते हैं तो उपाध्‍यक्ष महोदय, “Notwithstanding anything contained in Sub-section 1, the Governor shall not remove the Lokayukta or an Up Lokayukta unless and until addressed by the House of the State Legislature supported by a majority of the total Members of the House and a majority of not less than 2/3rd of the Members of that House present and voting has been presented to the Governor in the same session for such removal.” यहां तक है कि लोकायुक्‍त और उप लोकायुक्‍त जब तक विधान सभा उस बात से सहमत नहीं हो 2/3 मैजोरिटी से जब तक उसको पद से नहीं हटा सकता यहां तक है। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, एक तरफ तो हमने इतना बनाया, यह अधिनियम बनाया और इसको स्‍ट्रेंथन करने के लिये राजस्‍थान में 1974 में, 80 में अमेंडमेंट भी आए। नियम और कानून भी बने। कंडीशन आफ सर्विस, कंडीशन आफ प्रोसीडिंग्‍स सारी इस एक्‍ट में बनी हुई हैं। मैं आपसे निवेदन करना चाहूंगा एक बात कि जब वैकेंसी हो जाती है तो यह एक्‍ट क्‍या कहता है “Where the Office of the Lokayukta becomes vacant or where he is unable to perform the duties of his office and there is no  Up Lokayukta by  Judge of the High Court of jurisdiction for Rajasthan nominated by the Chief Justice of High Court on a request of the Governor.” यानि कि लोकायुक्‍त की जगह खाली हो गयी है किसी कारणवश तो महामहिम राज्‍यपाल के कहने से एक सिटिंग हाई कोर्ट के जज को उसका चार्ज देना चाहिये। मैं यहां यह भी कहना चाहूंगा “provided that the Judge so nominated  shall perform the duties of the Lokayukta in addition to his own duties as a Judge of the High Court and nothing contained in the provisions of Act Section 3 sub section 4 shall apply on him.” यह है। 

अब मैं निवेदन करना चाहूंगा कि राजस्‍थान में गत दो साल से लोकायुक्‍त, उप लोकायुक्‍त के सारे पद वेकेंट पड़े हैं। किसी की नियुक्ति नहीं की जा रही। 

 

श्‍याम    26.03.2007    12.50   1m 

 

क्‍या हम यह समझें कि हम अधिकारियों के खिलाफ तो और छोटे जन-प्रतिनिधियों के खिलाफ, संरपंचों के खिलाफ, पार्षदों के खिलाफ, प्रमुखों के खिलाफ और चेयरमैन, म्‍युनिसपेलिटी के खिलाफ तो सरकार भ्रष्‍टाचार के आरोप लगाकर के उनको सस्‍पैंड कर रही हैं, निलंबन कर रही है और जो इस लोकायुक्‍त के अधीन आते हैं, Secretaries to the Government of Rajasthan, Ministers of the Council of Ministers of Rajasthan, उनके लिए कोई प्रावधान नहीं है। वह खुले आम चाहे भ्रष्‍टाचार करें, कुछ भी करें। अगर कोई आदमी उनके खिलाफ भ्रष्‍टाचार की शिकायत करता है तो वह जायेगा कहां, जब लोकायुक्‍त हमारे यहां नहीं है। क्‍या हम यह समझें कि राजस्‍थान में यह मौजूदा सरकार अपने मंत्रियों और अधिकारियों के भ्रष्‍टाचार को छिपाने के लिए कि वह जनता के बीच नहीं आयें, उनके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हो, इसलिए लोकायुक्‍त को अपांइट नहीं कर रही। गत सत्र में भी यह बात आयी और स्‍पीकर साहब ने कहा कि नेता, प्रतिपक्ष समय नहीं दे रहे हैं तो उन्‍होंने तुरंत कहा कि मेरे पास समय है। आप जब चाहें मीटिंग कर लें, मैं आपके माध्‍यम से जानना चाहूंगा या तो यह सरकार इस पर कदम उठाये, लोकायुक्‍त और उप लोकायुक्‍त की नियुक्ति करें, नहीं तो हमारे पास इस संविधान के बनाये हुए अधिनियम और एक्‍ट के अनुसार, कानून के अनुसार यही रास्‍ता बचता है कि हम महामहिम गवर्नर साहब के पास जाकर के अपील करें कि आपको यह अधिकार है कि हाई कोर्ट के माननीय सीटिंग जज को लोकायुक्‍त नियुक्‍त करके यह जो सरकार के मंत्री और बड़े अधिकारी भ्रष्‍टाचार कर रहे हैं, जनता के पैसे को लूट रहे हैं, इधर-उधर लगा रहे हैं। उनके खिलाफ जांच बैठायी जाये।

उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे एक और निवेदन करना चाहूंगा, विधान सभा में जब गत सत्र में, एक साल पहले यह तय हो गया कि एक हफ्ते के अंदर-अंदर मीटिंग करके लोकायुक्‍त को नियुक्‍त कर दिया जायेगा और आज एक साल से ऊपर हो गया है। सरकार लोकायुक्‍त को नियुक्‍त नहीं कर रही है, आखिर इस सरकार की मंशा क्‍या है। यह चाहती क्‍या है। एक तरफ तो कहते हैं, बड़े-बड़े होर्डिंग लगा रखे हैं, पारदर्शिता, ईमानदारी ...(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, आपने दो मिनट के लिए सदन का ध्‍यानाकर्षित करने के लिए व्‍यवस्‍था दी है। एक घंटे के भाषण का समय थोड़े दे दिया ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: आपकी बात आ गयी है ...(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): व्‍यवस्‍था आपने दी है, आप खुद फरमा दें ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मंत्रि जी, आप तो पहले जवाब दें ...(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मंत्री जी दो घंटे तक बोलेंगे ...(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): असमर्थ हैं ...(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मंत्री जी, हमारे पास इतने बड़े-बड़े पर्चे घूम रहे हैं इनको कहीं न कहीं फैसला होगा कि नहीं ...(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आपने इनको दो मिनट बोलने की अनुमति दी ...(व्‍यवधान) और नियमों में आते ...(व्‍यवधान) अगर यह मानते हैं कि इतना महत्‍वपूर्ण विषय है, एक मिनट ...(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): इतने बड़े-बड़े सरकार के हमारे पास घूम रहे हैं, इनका कोई फैसला होगा कि नहीं होगा ...(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अगर इस विषय को इतना गंभीर समझते हैं, एक मिनट ...(व्‍यवधान) अगर इस विषय को इतना गंभीर समझते हैं तो नियम और प्रक्रिया में नोटिस देकर के आ जायें ना ...(व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं अपनी बात समअप करना चाहूंगा ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: अब आप समाप्‍त कीजिये ...(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): नियमों और प्रक्रिया में नोटिस देकर के आ जायें। यह क्‍या हुआ कि दो मिनट के नाम पर भाषण चालू कर दिया, डिबेट चालू कर दी ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आप तो ऐसी बात कर रहे हैं ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: आ गयी आपकी पूरी बात।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): उपाध्‍यक्ष महोदय, एक निवेदन और करना चाहूंगा कि यह महत्‍वपूर्ण क्‍यों है मसला ...(व्‍यवधान) मैं समअप कर रहा हूं। उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं वाइंड अप कर रहा हूं, एक बात और है कि – “The Lokayukta and UpLokayukta shall present annually a consolidated report on the performance of their functions ….to the Governor.” नेकस्‍ट क्‍लॉज क्‍या कहता है एक्‍ट का – “On receipt of a special report under sub-section (iii) or the annual report under sub-section (iv), the Governor shall cause a copy thereof together with an explanatory memorandum to be laid before the House of the State Assembly.” इस तरह ये विधायिका, यह विधान सभा इस बात से दो साल से वंचित है कि लोकायुक्‍त और उप लोकायुक्‍त की एनवल रिपोर्ट और उनके द्वारा ली गयी भ्रष्‍टाचार पर जो कार्यवाही है, वह महामहिम गवर्नर महोदय के माध्‍यम से इस सदन में आनी चाहिए। जो पिछले गत दो साल से नहीं आ रही है इसलिए यह महत्‍वपूर्ण मुद्दा है और संसदीय कार्य मंत्रि जी कह रहे हैं, इससे बड़ा मुद्दा क्‍या होगा  ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: आ गयी आपकी बात ...(व्‍यवधान) कह दिया आपके ...(व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): आप कर्मचारियों को एसीडी से पकड़वा दें, आप सरपंचों को पकड़वा दें, औरों को पकड़वा दें, क्‍या यह मंत्रि महोदय और सेक्रेटरी महोदय इस पब्लिक के प्रति, इस हाउस के प्रति उत्‍तरदायी हैं या नहीं हैं। अगर हैं तो लोकायुक्‍त की नियुक्ति के लिए आप डायरेक्‍शन दीजिये गवर्नमेंट को। यह संवैधानिक पद है और इसकी वजह से जनता में जो मैसेज जा रहा है कि बड़े-बड़े लोग, मंत्रि और सेक्रेटरी अपने भ्रष्‍टाचार को छुपाने के लिए लोकायुक्‍त की नियुक्ति नहीं कर रहे हैं।

श्री उपाध्‍यक्ष: कह दिया आपने।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): इससे सरकार की संवेदनशीलता के प्रति प्रश्‍न चिन्‍ह लग रहा है कि यह सरकार भ्रष्‍टाचार को बढ़ावा दे रही है। अपने मंत्रियों और सेक्रेटरियों से भ्रष्‍टाचार करवा रही है लोकायुक्‍त की गैर मौजुदगी में। आप लोकायुक्‍त की नियुक्ति करेंगे तो इनके चिट्ठे सामने आ जायेंगे।

श्री उपाध्‍यक्ष: मैं आपसे यह निवेदन करना चाहता हूं। माननीय सदन स्‍थान ग्रहण कर लीजिये ...(व्‍यवधान) बीच में नहीं, अपना स्‍थान ग्रहण कर लें, मैं इस पर बहस नहीं होने दूंगा ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): हमारा स्‍थगन प्रस्‍ताव था।

श्री उपाध्‍यक्ष: आप स्‍थान ग्रहण कर लीजिये ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आपने चर्चा की अनुमति हमारे सचेतक को दी है तो हमारा भी तो अधिकार बनता है ना बोलने का ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: कोई अधिकार नहीं बनता है ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): हमने दस्‍तखत किये हैं उस पर ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: नहीं बनता है आपका अधिकार ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): हमने दस्‍तखत किये हैं प्रस्‍ताव पर ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: उस दस्‍तखत पर परमिशन नहीं दी है ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): उपाध्‍यक्ष महोदय, आज सात दिन हो गये सरकार को प्रस्‍ताव भेजे हुए ...(व्‍यवधान)

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): सदन का मामला इसलिए बनता है कि दो साल से लोकायुक्‍त का ऑफिस खाली पडा हु  आ है और यहां पर जो रिपोर्ट आनी चाहिए वह दो साल से नहीं आ रही है इसलिए हमारा अधिकार है कि राजस्‍थान के मंत्रि खुले हाथों से भ्रष्‍टाचार कर रहे हैं ...(व्‍यवधान) उनके ऊपर कोई अंकुश नहीं है।

श्री उपाध्‍यक्ष: यह एक्‍सरसाइज नियमों के बिना नहीं कर सकते हैं आप ...(व्‍यवधान)

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): यह क्‍या बात है, इसलिए माननीय गृह मंत्रि जी को जवाब देना चाहिए कि वह कब तक लोकायुक्‍त की नियुक्ति करेंगे या नहीं करेंगे तो इसके लिए कौन जिम्‍मेदार है ...(व्‍यवधान) उसके खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिए।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, बिराजें ...(व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं जो बात ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): कटारिया साहब, एक मिनट, एक मिनट ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप बात सुन लें ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): सिर्फ दो बिन्‍दु ...(व्‍यवधान) उपाध्‍यक्ष महोदय, आपकी जानकारी में दो बिन्‍दु लाना चाहता हूं ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: उसकी चर्चा मैंने अलाऊ नहीं की है ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आप देखें, ऐसे अंकित नहीं हो, अंकित नहीं हो करेंगे तो फिर एक घंटा खड़ा रहूंगा मैं यहां पर ...(व्‍यवधान)

डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): खड़े रहें कौन मना कर रहा हँ आपको खड़े रहें ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): यह कोई तरीका नहीं हुआ ...(व्‍यवधान) हम नियमों में आये हुए हैं, नियमों में आपने हमारे प्रस्‍ताव को अलाऊ किया है, दो मिनट के लिए ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आपका नाम नहीं है इसके अंदर, स्‍थगन प्रस्‍ताव में अलाऊ नहीं करूंगा मैं आपको ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मेरे दस्‍तखत हैं, आप प्रस्‍ताव मंगाकर के देखें इसमें ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: स्‍थगन प्रस्‍ताव पर नाम अकेले का है ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): हाउस में अलाऊ करने के बाद यह हाउस की प्रापर्टी है।

श्री उपाध्‍यक्ष: यह अकेले का नाम है ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मैम्‍बर इसमें पार्टिसिपेट कर सकते हैं, जब आपने एक बार गवर्नमेंट को भेज दिया । उसके बाद जब भी चर्चा होगी, हर मेम्‍बर का अधिकार है उस पर अपनी बात कहने का ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप बिराजें ...(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): हर मेम्‍बर का अधिकार है लेकिन नियम और प्रक्रिया में अधिकार है, ऐसा नहीं कि खड़े होकर के कोई भाषण देना चालू कर दे ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): नियम और प्रक्रिया में अधिकार है ना तो 131 में ...(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आप लाते दूसरे नियमों में ...(व्‍यवधान) उपाध्‍यक्ष महोदय, आपने व्‍यवस्‍था दी है, दो मिनट दे दिये ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: आपका काम नहीं है ...(व्‍यवधान)

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): आप लूट रहे हैं, जनता का पैसा खा रहे हैं, यह जेलों में होते, लोकायुक्‍त इनको जेलों में डाल देता ...(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आप अपनी व्‍यवस्‍था को फरमाया था ...(व्‍यवधान) यहां मत बोलें, यहां मत बोलें, अपनी सीट पर जायें ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: पहले आप अपना स्‍थान ग्रहण कीजिये ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ऑनरेबल पार्लियामेन्‍ट्री अफेयर मिनिस्‍टर, ओ हुजुर ...(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, आप अपनी व्‍यवस्‍था का मुलाहिजा फरमा लें ...(व्‍यवधान) आपने दो मिनट बोलने के लिए कहा ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप अपना स्‍थान ग्रहण कर लें ...(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): गृह मंत्रि जी, रिएक्‍ट कर रहे हैं ...(व्‍यवधान) गृह मंत्रि जी को पहले सुना जाये।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप बैठें ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ऐसा है आप जिन नियमों को फरमा रहे हैं, हमने 131 में कितने नोटिस भिजवायें, लगे क्‍या इस विधान सभा में, नियमों की बात कर रहे हैं ...(व्‍यवधान) 49 में चर्चा का नोटिस दिया लेकिन क्‍या एक भी ...(व्‍यवधान) नियमों की आप बात कर रहे हैं ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप बिराजें ...(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): विधान सभा की कार्यवाही के लिए यहां बात नहीं की जा सकती है। आप वैश्‍म में बात करिये। अगर आप विधान सभा सचिवालय पर किसी तरह का आक्षेप लगा रहे हैं, आप नहीं कर सकते हैं यहां ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): स्‍थगन प्रस्‍ताव नियमों में ही तो दिये हैं ...(व्‍यवधान) ठीक है, कटारिया जी बोलेंगे उसके बाद बोलूंगा मैं ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: बैठिये, आप स्‍थान ग्रहण कीजिये ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): इनके बाद बोलूंगा मैं ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: बैठिये, स्‍थान ग्रहण कीजिये ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): यह पूरे राजस्‍थान की जनता का सवाल है, पूरे राजस्‍थान में भ्रष्‍टाचार हो रहा है ...(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): यह कैसे बोलेंगे ...(व्‍यवधान) आप अपनी व्‍यवस्‍था का मुलाहिजा फरमा लें, ऐसे कैसे बोलेंगे यह ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): यह लूट के खा रहे हैं ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: यह बिना परमिशन के नहीं बोल सकेंगे, आवश्‍यकता होगी तो परमिशन मिलेगी आपको ...(व्‍यवधान)

एक माननीय सदस्‍य: बिना आसन की व्‍यवस्‍था के बोलेंगे ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): क्‍या पर्यटन विभाग, क्‍या ऊर्जा विभाग, क्‍या नगरीय विकास विभाग, लूट मची हुई है ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, बिराजें ...(व्‍यवधान) आप गृह मंत्रि जी का जवाब नहीं सुनना चाहते हैं, माननीय सदस्‍य, आपका अंकित नहीं हो रहा है, आप सदन का समय बर्बाद कर रहे हैं ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): सदन की टेबल करिये आप ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही):  000

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): सदन की टेबल करिये आप। अगर आपके पास सबूत है तो ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): आरोप लगाये आपनें ...(व्‍यवधान) बगैर सबूत, बिना तथ्‍य कह रहे हैं कि भ्रष्‍टाचार कर रहे हैं मंत्रि ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): अगर आपके पास कोई सबूत हैं तो टेबल करें आप ...(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): यह कैसे बोल रहे हैं, आपको दो मिनट की परमिशन दी है ...(व्‍यवधान)

श्री नन्‍दलाल बंशीवाल (दौसा): माननीय सदस्‍य को इस तरह का आरोप लगाना का कोई अधिकार नहीं है ...(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): गृह मंत्रि जी रिएक्‍ट कर रहे हैं ...(व्‍यवधान)

श्री नन्‍दलाल बंशीवाल (दौसा): इनको आरोप लगाने का कोई अधिकार नहीं है ...(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): यह क्‍या बात हुई ...(व्‍यवधान)

श्री नन्‍दलाल बंशीवाल (दौसा): आप नियमों के अंदर आकर के आरोप लगायें, ऐसे कैसे आरोप लगा रहे हैं आप ...(व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैं सदन के माननीय सदस्‍यों की इस भावना से सहमत हूं कि लोकायुक्‍त के पर पर निश्चित रूप से नियुक्ति होनी चाहिए। कुछ इसमें विलंब हुआ है इसमें कोई दो राय नहीं है। विलंब हुआ है और यह सिद्वांत‍त: हमने स्‍वीकार इसलिए किया है लोकायुक्‍त को 73 के एक्‍ट के आधार पर हम इसी भावना से लाये थे कि जिन लोगों को भी इसके दायरे में आयें, उनकी जांच हो सके। भावना से और आपकी बात से कोई असहमत नहीं है। लेकिन यह बात निश्चित है कि 2004 के बाद उनकी नियुक्ति नहीं हुई। नियुक्ति की प्रक्रिया क्‍या है वह आपने पढ़ी है, उसमें विद दी कंसलटेशन हैं, जब तक कसंलटेशन करके उनकी नियुक्ति होती है, विलंब हुआ है, जितनी जल्‍दी से जल्‍दी हो सकेगी इसकी प्रक्रिया करेंगे और ऐसा नहीं है कि हमारे टाइम पर लेट हुई है। पिछली बार आपके समय भी पुरानी अपनी लिस्‍ट उठाकर के देख लें तो भी इसी तरह हो चुकी है।

 

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1982 से 1984 तक भी इस प्रकार का समय रहा है जब लोकायु‍क्‍त की नियुक्ति नहीं हो सकी। हमारे इस पीरियड में भी है। मैं तर्क के आधार पर यह नहीं कहना चाहता कि लोकायुक्‍त की नियुक्ति नहीं होनी चाहिए, लोकायुक्‍त की नियुक्ति जल्‍दी से जल्‍दी हो इस बात के लिए हम प्रयत्‍नशील हैं। निश्चित रूप से मैं आपकी भावना का सम्‍मान करते हुए ...(व्‍यवधान)... ।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): पिछली बार भी माननीय मुख्‍य मंत्रीजी ने आश्‍वासन दिया था सदन में कि हम एक महीने में कर देंगे, यह आश्‍वासन इस पवित्र सदन में देने के बाद भी नहीं हुई। आप एक टाइम फ्रेम बता दीजिए कि एक महीने में, एक साल में, दो साल में...।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): मैं चूंकि मुख्‍य मंत्रीजी यहां नहीं है, मैं उनसे बिना पूछे समयावधि एकदम बताने की स्थिति में नहीं हूं। जो बताऊंगा तो वह बिलकुल पुख्‍ता करके पर मैं आपकी इस भावना को यह कहूंगा कि जल्‍दी से जल्‍दी लोकायुक्‍त की नियुक्ति हो, इसके लिए सरकार प्रयत्‍नशील है। ...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): कह दीजिए सदन की समाप्ति के पहले बता देंगे।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): नहीं, एकदम नहीं बता सकता।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): नहीं आज नहीं, सदन, सत्र की समाप्ति के पहले सरकार यह घोषणा करे कि इस अमुक तारीख तक हम लोकायुक्‍त नियुक्‍त कर देंगे।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): मैं उनसे बिना बात किए हुए आपको समयावधि नहीं बता सकती। ...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आप सहमत हैं?

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): इस बात का कोई झगड़ा नहीं है कि लोकायुक्‍त की नियुक्ति नहीं होनी चाहिए, होनी चाहिए, जल्‍दी हो इसके लिए मुख्‍य मंत्रीजी से बात करके जितनी जल्‍दी हो सकेगा उनकी नियुक्ति कराएंगे। ...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आपकी भावना ऐसी है क्‍या, मुख्‍य मंत्रीजी से बात करने के बाद आप, मतलब मंत्रिमण्‍डल का संयुक्‍त उत्‍तरदायित्‍व है, हमें आप यह आश्‍वस्‍त करें कि मुख्‍य मंत्रीजी आज नहीं हैं। मोबाइल है, आप बात कर सकते हैं, आज नहीं, कल नहीं, इस सत्र की समाप्ति के पहले क्‍या सरकार यह घोषणा करने की स्थिति में है कि अमुक तारीख तक, अमुक महीने तक, अमुक साल तक हम लोकायुक्‍त नियुक्‍त कर देंगे।

श्री उपाध्‍यक्ष: वह कह दिया।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): यह बात अभी यहां इस समय मैं कहने की स्थिति में नहीं हूं। मैं उनसे कंसल्‍ट करने के बाद ही इस बारे में कोई जवाब दे सकूंगा।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): हां, ठीक है, 29 तारीख को एप्रोप्रिएशन बिल और फाइनेंस बिल पर जवाब देते समय दे देना।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): 29 तारीख को फाइनेंस बिल और एप्रोप्रिएशन बिल है, उस दिन तो कर देंगे, उस दिन तो कर दीजिए, तब तो बात करके कर दीजिए, कह तो कहो। ...(व्‍यवधान)...

श्री उपाध्‍यक्ष: आ गई बात, वह उन्‍होंने कह दिया।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): बायकाट करो इस पर, बोलो यह भी कोई तरीका थोड़े है?

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, हमारी पार्टी गृह मंत्री महोदय ने जो यह कहा कि 2 साल से लोकायुक्‍त का पद खाली है, लगभग 3 साल से, पूरे हिन्दुस्तान में कहीं पर भी कोई ऐसा राज्‍य नहीं है जहां पर लोकायुक्‍त का पद लम्‍बे समय से खाली हो। अभी तक गृह मंत्रीजी यह आश्‍वासन नहीं दे पाए हैं कि इस पद को कब तक भर देंगे।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): दिल्‍ली में क्‍या है, आप जरा जानकारी तो कर लें।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): मैं आपके ध्‍यान में यह भी बात लाना चा‍हता हूं कि इसके लिए कोई मीटिंग आयोजित नहीं की गई। मैं स्‍वयं विपक्ष का नेता था तब भी इस बात के लिए कोई मीटिंग आयोजित नहीं की गई और अभी हमारे रामनारायणजी चौधरी प्रतिपक्ष के नेता हैं, एक भी मीटिंग इसके लिए आयोजित नहीं की गई। इसका मतलब साफ है कि राज्‍य सरकार जानबूझकर लोकायुक्‍त की नियुक्ति नहीं कर रही है। अतएव मैं मंत्रीजी को और बड़े पदों पर जो लोग बैठे हुए हैं उनको सरकार भ्रष्‍टाचार को संरक्षण दे रही है, इस भ्रष्‍टाचार को संरक्षण देने वाली सरकार के खिलाफ मैं और मेरा दल बहिर्गमन करते हैं और यह प्रोटेस्‍ट करते हुए कि तत्‍काल राजस्‍थान में लोकायुक्‍त की नियुक्ति की जाए नहीं तो कांग्रेस पार्टी सदन और सदन के बाहर भी सरकार को यह मजबूर कर देगी कि लोकायु‍क्‍त की नियुक्ति की जाए और इसके लिए यदि हमें अनशन या आमरण अनशन करना पड़े तो वह भी करेंगे लेकिन सरकार को मजबूर कर देंगे कि लोकायुक्‍त की नियुक्ति की जाए।

(कांग्रेस पार्टी के माननीय सदस्‍यों द्वारा बहिर्गमन)

श्री उपाध्‍यक्ष: सरकार करेगी, कोई मजबूर करने की आवश्‍यकता नहीं है।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह केवल घड़ियाली आंसू बहाने वाली बात है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): यह घड़ियाली आंसू क्‍या होता है। पिछले समय भी यह कहा था कि कर देंगे। ...(व्‍यवधान)...

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): इनके कार्यकाल में मैंने यह बताया कि 8.8.82 से लेकर 3.4.84 तक, कांग्रेस के अपने राज में भी लोकायुक्‍त नियुक्‍त नहीं कर सके। आप जो यह बात कह रहे थे मीटिंग बुलाने की तो मीटिंग का इसमें कोई प्रोविजन नहीं है। “The Lokayukta shall be appointed after consultation with the Chief Justice of the High Court and the Leader of Opposition in the Legislative Assembly.” कंसल्‍टेशन है, कोई मीटिंग बुलाने की आवश्‍यकता नहीं है। इसलिए बात के लिए बात कहना है। लोकायुक्‍त की नियुक्ति होनी चाहिए, लोकायुक्‍त की नियुक्ति से किसी को कोई एतराज नहीं हो सकता है। मैंने पहले भी कहा कि यह केवल अपनी बात के लिए अड़ने वाली बात है और जो गलती इनकी टाइम पर हुई वह एक गलती न हो इसके लिए मैं मुख्‍य मंत्रीजी से जरूर कहूंगा कि और जितनी जल्‍दी सम्‍भव हो सकेगा नियुक्ति हो।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह भी शाश्‍वत सत्‍य है कि लोकायुक्‍त की कितनी ही रिपोर्ट इनके शासन काल में धूल चाटती रही, यह अपने आपको पारदर्शी कहने वाले लोग भूल जाते हैं कि जब-जब इनका शासन आया, दो-दो साल तक लोकायुक्‍त की बात करी नहीं और जब इनको मालूम पड़ गया कि लोकायुक्‍त की नियुक्ति के लिए सरकार प्रयत्‍नशील है, सरकार कंसल्‍ट कर रही है चीफ जस्टिस से और किसी से बात कर रही है तो सदन के बाहर यह दिखाने के लिए कि हम हिमायती हैं, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जिनका खुद का दामन छींटों से भरा हो वह हमें शिक्षा देने की बात कर रहा है।

श्री विष्‍णु मोदी (मसूदा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, अगर कांग्रेस ने लोकायुक्‍त की नियुक्ति नहीं की तो क्‍या यह वाजिब है कि हम भी न करें? कांग्रेस ने लोकायुक्‍त की रिपोर्ट पर कोई कार्यवाही नहीं की तो क्‍या हमारा कोई दायित्‍व नहीं बनता कि हम लोकायुक्‍त की नियुक्ति न करें। जहां तक सवाल है कि मुख्‍य मंत्रीजी नहीं हैं, मैं समझता हूं कि गृह मंत्रीजी, आपकी अपनी सीमाएं हैं लेकिन मुख्‍य मंत्रीजी से सम्‍पर्क करना आज के युग में कोई ऐसी बड़ी बात नहीं है और मैं कोई कांग्रेस की बात नहीं कर रहा हूं लेकिन लोकायुक्‍त की नियुक्ति राज्‍य के लिए नितान्‍त आवश्‍यक है और इसके अन्‍दर हमें जितनी जल्‍दी हो सके, करनी चाहिए मैं आपके माध्‍यम से यह निवेदन करना चाहता हूं।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): मैंने सदन में आप सबके सामने जो भावना आपकी है उस भावना में मैंने अपनी भावना मिलाकर पूरी बात कही है। मैंने कोई बात इसमें यह नहीं कहा कि नियुक्ति नहीं होनी चाहिए लेकिन जब तक उनसे कंसल्‍ट न हो, यह बताना मेरे लिए सम्‍भव नहीं है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): गृह मंत्रीजी, आप जैसा व्‍यक्ति यह कहे, आप जैसा मजबूत आदमी यह कहे कि मैं उनसे बात करे बिना, इतना तो आप कह सकते हैं कि अभी एक हफ़्ते सदन है, इस बीच में हम जरूर निश्चित रूप से घोषणा कर देंगे लेकिन आज मुझे पता पडा कि आप इतने कमजोर गृह मंत्री हैं। 

श्री उपाध्‍यक्ष: 295 । प्रभुलाल वर्मा, श्री राजकुमार रिणवा, बद्रीलाल जाट।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, सरकार से आप जवाब मांगे कि लोकायुक्‍त के मसले पर...।

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (उप मुख्‍य सचेतक): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जिस विषय पर यह बहिर्गमन करके गए हैं उसी विषय पर वापस आकर बोलने का कहीं कोई नियम नहीं है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): कौनसा नियम है बताओ जरा?

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (उप मुख्‍य सचेतक): बर्हिगमन जिस विषय को लेकर किया है, आप बता दीजिए कि‍आप किस नियम से बोल रहे हैं? कोई नियम नहीं है, जिस विषय पर बर्हिगमन करके गए हैं उसी विषय पर डिबेट कर रहे हैं, उस विषय पर डिबेट खतम हो चुकी है।

श्री उपाध्‍यक्ष: बाबूलाल बैरवा। श्रीमती प्रतिभा सिंह।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): हर वक्‍त बोलने का नियम है। नियम नहीं है यह पहली बार सुना।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, स्‍थान ग्रहण करें।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, 295 में आपने नाम पुकारे हैं?

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा स्‍थगन प्रस्‍ताव है कि इस शहर में 9 लड़किया और 6 महिलाएं...।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, इसकी परमीशन मैंने नहीं दी है। इसको जानकारी के लिए भेजा है।

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): नहीं, नहीं, नव वर्ष भी मन गया है, महिलाओं का राज है, महिला समर्पित बजट है, 15 परिवार बेघर हैं, उन औरतों का आजतक पता नहीं है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): इसीलिए महिलाओं को बोलने दो आप।

श्री उपाध्‍यक्ष: आप यहां नहीं थे जब जवाब दिया था कि गृह मंत्रालय को भेजा है जानकारी के लिए, इसलिए हो गई बात। 

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): जानकारी कब आनी है, विधान सभा तो दो दिन और चलेगी।

श्री उपाध्‍यक्ष: आपकी भावना से चिंतित है सरकार।

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): 29 को भग जाएंगे।

श्री उपाध्‍यक्ष: आ जाएगा।

श्रीमती प्रतिभा सिंह (नवलगढ़): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, प्रक्रिया के नियम 295 के अंतर्गत..।

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): इस राजधानी में विधान सभा की नाक के नीचे महिला का अपहरण हुआ और लापता हुई है, एक का पता नहीं लगा है।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आपकी बात आ गई है। ...(व्‍यवधान)...

श्री धर्मपाल चौधरी (मुण्‍डावर): एक महिला के साथ और अत्‍याचार क्‍यों कर रहे हैं आप?

श्रीमती प्रतिभा सिंह (नवलगढ़): आप कृपा करके महिला को सदस्‍य ही समझिए, उनको व्‍यक्तिगत रूप में देखें, क्‍या महिला-महिला होती है? कमजोर होती है  क्‍या महिला? ...(व्‍यवधान)...

श्री उपाध्‍यक्ष: आप मौजूद नहीं थे।

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): 9 लड़कियां और 6 महिलाएं इसी महीने अपहृत हुई हैं। इसी राजधानी में हुई है, विधान सभा की नाक के नीचे, एक का पता नहीं लगा, तीन महीने हो गए।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, इस पर व्‍यवस्‍था दे दी गई है।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इनके मन में अगर यही है तो मुझे भी कोई दिक्‍कत नहीं है बताने में, कोई ऐसा नहीं है 27 लड़कियां लापता हुई उनमें से 17 बरामद कर ली गई। 27 में से 17 लड़कियां बरामद कर ली गई हैं। यह जो विवाहिता है वह 16 मुकदमे दर्ज हुए उनमें से भी 9 वापस आ गई हैं, बरामद हो गई है, कुछ बाकी हैं। ऐसा नहीं है कि आज गई और अभी दो मिनट में लेकर आ जाएं, इतना जादू किसी के पास नहीं है। पुलिस बराबर प्रयत्‍नशील है, 27 में से जब 17 बच्चियां लेकर आए हैं तो बाकी को भी लाने का प्रयास कर रहे हैं, ऐसा कुछ नहीं है कि हमने कुछ नहीं किया, हम जो कर सकते थे किया और आगे भी हम करेंगे, यह हमारी जिम्‍मेदारी है।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्रीमती प्रतिभा सिंह। ...(व्‍यवधान)... बीच में नहीं। आप बार-बार खड़े हो जाती हैं, किस बात पर?

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा पाइण्‍ट ऑफ इन्‍फोर्मेश्‍ंन है।

श्री उपाध्‍यक्ष: किस बात के ऊपर?

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा):इस सदन के माननीय सदस्‍य इस सदन की प्रोपर्टी हैं और सभी माननीय सदस्‍यों और सदन की जिम्‍मेदारी है कि हम एक दूसरे पर नजर रखें कि कहां हैं। तीन माननीय सदस्‍य सर्किट हाउस में लिफ्ट में फंस गए एक घण्‍टे तक।

श्री उपाध्‍यक्ष: यह क्‍या पाइण्‍ट ऑफ ऑर्डर है माननीय सदस्‍य?

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): पाइण्‍ट ऑफ इन्‍फोर्मेशन।

श्री उपाध्‍यक्ष: कोई नहीं, इसकी सबको इन्‍फोर्मेशन है।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): और तीनों सदस्‍य आज सदन में नहीं हैं, इसलिए हम यह जानना चाहते हैं कि यह माननीय सदस्‍य कहां हैं? प्रकाशजी चौधरी, हंगामीलाल जी मेवाड़ा, और जगन्‍नाथजी वर्मा नहीं हैं।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, अभी लिफ्ट में बैठे हैं क्‍या?

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): मन में शंका है कि यह माननीय सदस्‍य कहां हैं, एक घण्‍टे तक लिफ्ट में फंसे रहे। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, बहुत रिस्‍की होता है। तीन महीने में यह दूसरी घटना है इसलिए माननीय सदस्‍यों की रक्षा की जाए।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप सदन का समय खराब कर रहे हैं, आप इसमें गम्‍भीर नहीं हैं। यह क्‍यों फालतू...। 

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): फालतू बात कह रहे हैं इसको, घण्‍टे भर तक अगर कोई लिफ्ट में फंस जाए तो उसका दम घुट जाए, मर जाए, लाखों लोगों में से छंट कर एक माननीय सदस्‍य इस सदन में पहुंचता है।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप विराजें।

 

Gpc/akt/ 26032007/1310/1o

 

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा) उसके बारे में हम जानकारी दे रहे हैं। सरकार यह बताए कि माननीय सदस्‍य सुरक्षित हैं या नहीं हैं।

श्री उपाध्‍यक्ष:  माननीय सदस्‍य, आपने अपने बात कही दी। ..(व्‍यवधान).. माननीय सदस्‍य, आप वरिष्‍ठ सदस्‍य हैं ऐसी कोई बात नहीं है। माननीय सदस्‍य, आप ..(व्‍यवधान).. अंकित न हो।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): 000

श्री उपाध्‍यक्ष:  माननीय सदस्‍य, आप समय बर्बाद न करें। कोई अंकित नहीं होगा।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): 000

श्री उपाध्‍यक्ष:  विराजिए। ..(व्‍यवधान).. आपको सब मालूम है। आपको मालूम है स्थिति क्‍या मालूम करावें। ..(व्‍यवधान)..

श्रीमती प्रतिभा सिंह।

नियम 295 के तहत विशेष उल्‍लेख

नवलगढ़ की ग्राम पंचायत चिराना के सरपंच द्वारा पहाड़ी क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई

 

श्रीमती प्रतिभा सिंह (नवलगढ़): प्रक्रिया के नियम 295 के तहत सरकार का ध्‍यान आकर्षित करते हुए निवेदन है कि विधान सभा क्षेत्र नवलगढ़ में ग्राम पंचायत चिराना क्षेत्र में करीब 300-400 वर्ष पुराना रास्‍ता पूर्व राजा चन्‍द्रसेन ने चिराना से किरोड़ी तीर्थ स्‍थान जाने के लिए पहाडि़यों से होते हुए बनवाया था। यह रास्‍ता पवित्र तीर्थ लोहार्गल की चौबीस कोसीय परिक्रमा को जोड़ता था। इसी रास्‍ते में पूर्व सरपंच कमला गुर्जर के समय में अकाल राहत कार्य में इसकी चौड़ाई 8 फीट से बढ़ाकर 16 फीट की गई थी।

इस रास्‍ते के किनारे बहुत बड़ा बरगद का एवं एक बहुत बड़ा नीम का पेड़ भी था, उनके नीचे राहगीर विश्राम किया करते थे। अब कुछ समय पूर्व वर्तमान सरपंच ग्राम पंचायत चिराना द्वारा अपनी स्‍वयं की जी.सी.बी. मशीन लगाकर सरकारी राशि से उस रास्‍ते से पहाड़ी क्षेत्र की अंधाधुंध कटाई करके कहां से निकाली गयी खनन सामग्री को पीएमजीएसवाई की सड़कों में बेच दिया था, दोनों बड़े पेड़ों की कटाई करके भी बेच दिया। पहाड़ों की कटाई इतनी ज्‍यादा कर दी गई कि वह रास्‍ता वहां से अस्तित्‍व में नहीं रहा। पहाडि़यों पर रहने वाले जंगली जानवर चराई करने वाले पशु एवं भेड़-बकरियां गहरी खाई में गिर जाते हैं तथा मर जाते हैं। खाई लगभग 30 फुट गहरी एवं 500 फुट लम्‍बी है। चिराना ग्राम में बसे हुए बहुत ही गरीब तबके के लोग जिनमें मेहतर, रैगर एवं बलाई हैं के प्रवेश का मुख्‍य रास्‍ता भी वही था, जो अब बंद कर दिया गया है।

मान्‍यवर, एक तरफ राज्‍य सरकार गरीबों की सुविधा, पवित्र तीर्थ स्‍थलों की रक्षा, वन सम्‍पदा की रक्षा, अवैध खनन पर कार्यवाही करती है। दूसरी तरफ ग्राम पंचायत चिराना के सरपंच द्वारा अपने निजी स्‍वार्थ से प्रेरित होकर किये गये कार्य के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की गई जबकि ग्रामीणों द्वारा प्रशासन को कई बार निवेदन किया जा चुका है। अत: मेरा सरकार से अनुरोध है कि इस संबंध में आवश्‍यक कार्यवाही की जाए।

फालना परिवहन आगार के लिए नयी बसों व स्‍टाफ की व्‍यवस्‍था

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री पुष्‍पेन्‍द्र सिंह।

श्री पुष्‍पेन्‍द्र सिंह (बाली): जोधपुर डिवीजन के फालना परिवहन आगार को नवीन सवारी बसें, आवश्‍यकतानुसार स्‍टाफ एवं लम्‍बी दूरी के रूट की बस सेवा उपलब्‍ध करवाने हेतु नियम 295 के तहत विशेष उल्‍लेख का प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत करना चाहता हूं।

जोधपुर डिवीजन के अति महत्‍वपूर्ण गेट वे ऑफ गौड़वाड़ फालना का परिवहन बस आगार गौड़वाड़ क्षेत्र के यात्रियों को वर्षों से बस परिवहन सेवा उपलब्‍ध करवाकर अपनी महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। गौड़वाड़ के यात्रीगणों के लिए रेल, बस सेवा का फालना भौगोलिक एवं अन्‍य दृष्टिकोणों से केन्‍द्र बिन्‍दु बना हुआ है। पिछले कुछ वर्षों से यहां 15 पुरानी बसें वर्ष 1997-98 मॉडल जो परिवहन निगम के निर्धारित नोर्म्‍स पूरे कर 9-10 लाख किलोमीटर से कहीं ज्‍यादा चलकर कंडम हो चुकी है। दूसरी ओर यहां 20 परिचालक एवं लगभग 7 से 10 लिपिकवर्गीय स्‍टाफ की कमी बनी हुई है। यहां केवलमात्र 5-6 बसें ही लंबी दूरी के रूट पर चलती हैं जो आय अर्जन की दृष्टि से नाममात्र की ही है। ऐसी विपरीत परिस्थितियों में भी यह आगार जोधपुर डिवीजन के अन्‍य आगारों से नाममात्र के कम घाटे पर जैसे-तैसे चलाया जा रहा है। बार-बार नई बसें मांगने पर मात्र 4 बसें ही वर्ष 2006 मॉडल की उपलब्‍ध करायी गई। वर्तमान में इस आगार में प्रतिदिन 17,513 किलोमीटर बस संचालन किया जा रहा है। इस आगार की कंडमप्राय हो चुकी 15 बसों के स्‍थान पर नवीन बसें कम से कम 5 अतिरिक्‍त लम्‍बी दूरी की बस सेवाएं 20 परिचालक, 7 से 10 लिपिक वर्गीय स्‍टाफ व यहां कम से कम 21000 किलोमीटर प्रतिदिन बस संचालन किया जाए, अन्‍य तीन आवश्‍यक सुविधा उपलब्‍ध करायी जाए तो निश्चित रूप से यह आगार घाटे के स्‍थान पर मुनाफे में संचालित हो सकेगा। पिछले चार वर्षों में फालना आगार को अन्‍य आगारों की तुलना में सुविधा जैसे नवीन बसें, स्‍टाफ बंद किया गया है जबकि सालाना दो करोड़ के लगभग घाटा देने वाले जोधपुर आगार को प्रतिवर्ष नई गाडि़यां व स्‍टाफ दिये जाते रहे हैं। अत: फालना आगार को नवीन सवारी बसें, आवश्‍यकतानुसार स्‍टाफ लम्‍बी दूरी की बस सेवाएं उपलब्‍ध करायी जाए।

श्री उपाध्‍यक्ष:  श्री बीरूसिंह राठौड़।

प्रो. बीरूसिंह राठौड़ (बनीपार्क): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरे मन में एक शंका है। हर साल हम 295 विधान सभा के अंदर बोलते हैं उस कागज को कंसर्निंग डिपार्टमेंट डम्‍प कर देता है, उस पर कार्यवाही नहीं होती है। इसलिए मैं बोलूं या नहीं बोलूं?

श्री उपाध्‍यक्ष:  कार्यवाही होती है।

प्रो. बीरूसिंह राठौड़ (बनीपार्क): अभी तो कार्यवाही हुई नहीं। ..(व्‍यवधान)..

श्री पुष्‍पेन्‍द्र सिंह (बाली): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य जो कह रहे हैं उस पर ध्‍यान दिया जाए।

श्री उपाध्‍यक्ष: जवाब आता है, कार्यवाही होती है।

प्रो. बीरूसिंह राठौड़ (बनीपार्क): आप अधिकारियों को पाबंद करें।

श्री पुष्‍पेन्‍द्र सिंह (बाली): यह जवाब दें या इस पर कोई आश्‍वासन दें, कोई न कोई कार्यवाही करें।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): सरकार में रूलिंग पार्टी के विधायक की यह हालत है। हम जो कह रहे हैं वह सही कह रहे हैं या नहीं कि सरकार कुछ नहीं करती है।

प्रो. बीरूसिंह राठौड़ (बनीपार्क): सूचना के लिए धन्‍यवाद।

जयपुर में हार्डवेयर व्‍यापारियों को आवंटित भूखण्‍ड का कब्‍जा

विधान सभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन के नियमों के नियम 295 के तहत विशेष उल्‍लेख का प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत कर निवेदन है कि 23 जून, 2003 को जयपुर विकास प्राधिकरण परिसर में लाटरी द्वारा हार्डवेयर व्‍यवसाय से संबंधित सदस्‍यों को भूखण्‍ड आवंटन किया गया था। अक्‍टूबर, 2003 में तत्‍कालीन आयुक्‍त, जयपुर विकास प्राधिकरण श्रीमती उषा शर्मा के आश्‍वासन पर हार्डवेयर मण्‍डी की जमीन का विकास व अन्‍य सम्‍पूर्ण पैसा जमा कर भूखण्‍डों का पट्टा प्राप्‍त कर लिया व भूखण्‍डों की रजिस्‍ट्री करवा ली। उक्‍त आवंटियों द्वारा लगभग 4.25 करोड़ रुपये जयपुर विकास प्राधिकरण को भुगतान किये जा चुके हैं तथा 50 लाख रुपया रजिस्‍ट्री के जमा कराये जा चुके हैं, किन्‍तु खेद है कि उक्‍त आवंटियों को आज तक जमीन का भौतिक कब्‍जा नहीं संभलाया गया है। तीन साल तक कब्‍जा नहीं मिलने के बावजूद सदस्‍यों द्वारा 2.5 करोड़ रुपये ब्‍याज की हानि उठानी पड़ रही है।

अत: सदन से अनुरोध है कि आवंटियों को मौके पर भौतिक कब्‍जा दिलाया जाए अन्‍यथा किसी अन्‍य स्‍थान पर भूखण्‍ड आवंटन की कार्यवाही की जाए। पिछले सत्र में भी मैंने 295 लगाया था, आज तक कार्यवाही नहीं हुई है।

श्री उपाध्‍यक्ष:  श्री अशोक नागपाल

(अनुपस्थित)

निम्‍बाहेड़ा के मांगरोल चौराहा पर 132 के वी जी एस एस का निर्माण

श्री अशोक कुमार नवलखा।

श्री अशोक कुमार नवलखा (निम्‍बाहेड़ा): प्रक्रिया के नियम 295 के तहत निवेदन है कि मेरे विधान सभा क्षेत्र निम्‍बाहेड़ा, चित्‍तौड़गढ़ राष्‍ट्रीय राजमार्ग नं. 79 पर मांगरोल चौराहा स्थित है। मांगरोल ग्राम पंचायत मुख्‍यालय होने के साथ यहां का चौराहा करीब 12 ग्राम पंचायतों का केन्‍द्र बिन्‍दु है। ग्राम पंचायत सतखण्‍डा, भादलीया, कारूण्‍डा, फलवा, लसडावन फाचर अहीरान, बडोलोघाटा, टाई, अरनिया जोशी, उखलिया, अरनोदा, मांगरोल के करीब 50 गांवों की विद्युत समस्‍या पिछले काफी समय से बनी हुई है। आये दिन विद्युत भार की कमी से किसानों व ग्रामीणों को अघोषित विद्युत कटौती का सामना करना पड़ता है।

मांगरोल चौराहे पर विद्युत भार की आवश्‍यकता के कारण पिछले काफी समय से 132 केवी ग्रिड सब स्‍टेशन बनाये जाने की मांग की जाती रही है। इस जीएसएस का निर्माण हो जाने से मांगरोल सहित 12 ग्राम पंचायतों के करीब 50 गांवों के किसानों व आम जनता की विद्युत समस्‍या का समाधान हो सकेगा तथा किसानों को पर्याप्‍त बिजली उपलब्‍ध हो सकेगी।

अत: व्‍यापक जनहित में मेरा राज्‍य सरकार व माननीय ऊर्जा मंत्री महोदय से आग्रह है कि मांगरोल चौराह पंचायत समिति निम्‍बाहेड़ा में 132 केवी जीएसएस का निर्माण करवाने की स्‍वीकृति शीघ्र प्रदान करावे।

श्री उपाध्‍यक्ष:  श्री शिवजीराम मीणा।

 

मोहन/अरूण/अशोधित प्रति प्रकाशनार्थ नहीं/26032007/1320/1p

 

जहाजपुर के ग्राम बेई, नाथूण व घेवरिया का सड़क से जुड़ाव

श्री शिवजीराम मीणा (जहाजपुर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियम, 295 के अन्‍तर्गत विशेष उल्‍लेख।

        महोदय, मैं राजस्‍थान विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियम, 295 के अन्‍तर्गत विशेष उल्‍लेख द्वारा ऐसा विषय सदन में उठाना चाहता हूं जो अत्‍यन्‍त लोक महत्‍व का है। जैसा कि प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 201 की जनगणना के अनुसार 500 से अधिक की जनसंख्‍या वाले सभी ग्रामों को सड़क से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। किन्‍तु मरे विधान सभा क्षेत्र जहाजपुर के तीन ऐसे राजस्‍व ग्राम बेई, नाथूण एवं घेवरिया हैं जिनकी जनसंख्‍या क्रमश: 1133, 1099 एवं 926 होने के बावजूद इन्‍हें सड़क से जोड़ने की योजना में सम्मिलित नहीं किया गया है।

        मैं यहां पर यह भी निवेदन करना चाहूंगा कि उक्‍त गांवों के छोटे छोटे मजरों से होकर गुजरने वाली सड़कों के आधार पर ही इन गांवों को सड़क से जुड़ा हुआ मान लिया गया है, जब कि मूल गांव में रहने वाले लोगों को अब भी सड़क के अभाव में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

        अत: मेरा सरकार से आग्रह है कि जहाजपुर विधान सभा क्षेत्र के ग्राम3 बेई, नाथूण एवं घेवरिया को प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना के अन्‍तर्गत सड़क से जोडऩे की व्‍यवस्‍था करावें ताकि ग्रामीणों को सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके।


मूक-बधिर, नेत्रहीन व विमंदित बच्‍चों की

शिक्षा के लिए संचालित संस्‍थानों को शत-प्रतिशत अनुदान

श्री उपाध्‍यक्ष: डाश्री गोपाल बाहेती।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): उपाध्‍यक्ष महोदय, विधान सभा प्रक्रिया नियम 295 के तहत निवेदन है कि समाज में मूक-बधिर, नेत्रहीन व मानसिक विमन्दित बच्‍चों की समस्‍या भयावह है तथा समाज का यह वर्ग विशेष अटेंशन चाहता है। इस प्रकार के निश्चित रूप से :शक्‍त वर्ग के छात्रों का विकास व पालन पोषण समाज का दायित्‍व है तथा वह संस्‍थाएं वास्‍तव में प्रशंसनीय हैं जो इन बच्‍चों को निश्चित रूप से :शुल्‍क शिक्षा देने वाली संस्‍थाओं को सरकार अपने आदेश क्रमांक प16(13)शिक्षा-6/99 जयपुर, दिनांक 25 जून, 1999 द्वारा शत प्रतिशत अनुदान दिया जाता था जिससे ये संस्‍थाएं समाज के इस निशक्‍त वर्ग को शिक्षाण का कार्य करती थी। आज भी ये संस्‍थाएं इन निश्चित रूप से :शक्‍त बच्‍चों के शिक्षण का काम कर रही हैं।

राज्‍य सरकार द्वारा सामान्‍य श्रेणी के अनुदानित विद्यालायों की अनुदान कटौती के लिए जारी अध्‍यादेश क्रमांक प(74)शिक्षा-5/91 पार्ट, जयपुर दिनांक 2432006 द्वारा आदेश जारीा किये थे। अनुदान कटौती के उक्‍त आदेशों को इन विशिष्‍ठ संस्‍थाओं पर भी प्रभावी माना जाकर उनके अनुदान में भी कटौती की गई।

समाज सेवा की भावना से संचालित मूक-बधिर, नेत्रहीन व मानसिक विमन्दित बच्‍चों को निश्चित रूप से :शुल्‍क शिक्षा एवं शिल्‍प प्रशिक्षण प्रदान करने वाली यह संस्‍थाएं अनुदान कटौती के करण विकट आर्थिक कठिनाई में हैं। अनुदान कटौती से इन संस्‍थाओं का विकास तो बाधित हो ही रहा ाहै बल्कि विद्यमानशिक्षण शिल्‍प प्रशिक्षण के स्‍तर को संभाल पाना कठिन हो रहा है। वैसे तो सरकार को अनुदानित शिक्षण संस्‍थाओं के फ्रीज किए अनुदान को भी तत्‍कालदेना चाहिए वह तो दूर उल्‍टा सामान्‍ज्ञय श्रेणी की अनुदानित संस्‍थाओं की अनुदान कटौती के संबंध में जारी उक्‍त अध्‍यादेश के दायरे में मूक-बधिर, नेत्रहीन व मानसिक विमन्दित बच्‍चों की शिक्षा के लिए संचालित अनुदानित संस्‍थाओं को भी ले लिया। जिससे विकलांग बच्‍चों को शिक्षण प्रशिक्षण के अवसर एवं सुविधाएं मिलना भी मुश्किल है। माननीय शिक्षा मंत्री जी से निवेदन है कि मूक-बधिर, नेत्रहीन व मानसिक विमन्दित बच्‍चों की शिक्षा के लिए संचालित, शिक्षा विभाग से मान्‍यता व सहायता प्राप्‍त सभी 14 विशिष्‍ठ संस्‍थाओं को राज्‍यादेश क्रमांक प17(74) शिक्षा-5/91 पार्ट, जयपुर दिनांक 2432006 के दायरे से बाहर माने जाने के संशोाधित आदेश जारीा करा पूर्व की भांति शत प्रतिशत अनुदान जारी कराएं।

श्री उपाध्‍यक्ष: पर्ची के माध्‍यम से उठाये जाने वाले विषय।

श्री मदन राठौड़।

(अनुपस्थित)

 

पर्ची के माध्‍यम से उठाये गये मुद्दे

जैसलमेर जिले में भू-आवण्‍टन के लम्बित प्रार्थना पत्रों पर कार्यवाही

श्री सांगसिंह भाटी।

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से राजस्‍व मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहूंगा कि मेरे जैसलमेर जिले में भूमिहीनों के आवेदन पत्र 63 हजार तीन सालों से विचाराधीन हैं और लगभग 22 हजार आवेदन पत्र जो वीरानी भूमि के, भूमिहीन काश्‍तकारों के भरे हुए विचाराधीन हैं। यह आजीविका का साधन कृषकों के लिए सिर्फ भूमि ही है और उपाध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री महोदय से मैं निवेदन करना चाहूंगा कि किसानों से जुड़ा हुआ मुद्दा है और वह भी भूमिहीन किसान जिसके पास एक बीघा भी जमीन न हो और सिर्फ आजीविका का साधन ही जमीन है तो मेरा निवेदन है कि वहां एक्‍स्‍ट्रा अधिकारी, अतिरिक्‍त अधिकारी लगवा कर, विभाग में तहसीलदारों की पोस्‍ट खाली है, आवंटन अधिकारियों की पोस्‍टें खाली हैं, ये अधिकारी लगवा कर इन जमीनों का तुरन्‍त प्रभाव से आवंटन कराने की कृपा करें। उपाध्‍यक्ष महोदय, आपने मुझे समय दिया, उसके लिए बहुत बहुत धन्‍यवाद।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री जयराम जाटव

(अनुपस्थित)

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): उपाध्‍यक्ष महोदय, मुझे इस विषय पर मंत्री जी से थोड़ा आश्‍वासन तो दिला दो।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री कालीचरण सर्राफ। उनसे मिल लेना आप।

प्रदेश में बांग्‍लादेशियों की अवैध घुसपैठ

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं पर्ची के माध्‍यम से राजस्‍थान प्रदेश में लगभग दो लाख से ज्‍यादा बांग्‍लादेशी घुसपैठिए अवैध रूप से रह रहे हैं, इसकी ओर राज्‍य सरकार का ध्‍यान आकर्षित करना चाहूंगा। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह जो दो लाख बांग्‍लादेशी अवैध रूप से अभी राजस्‍थान में रह रहे हैं, इनके कारण विभिन्‍न शहरों में कच्‍ची बस्तियां पनप रही हैं, ये लोग गंभीर अपराधों में लिप्‍त हैं। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, चोरी, जासूसी, नकबजनी, लूटपाट, मादक पदार्थों की तस्‍करी, जिस्‍मफरोशी के धंधे में इनकी युवतियां लिप्‍त हैं और शांति भंग के अनेक मामलों में इनकी समय समय पर संलिप्‍तता उजागर हो चुकी है। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं ध्‍यान दिलाना चाहूंगा आपके माध्‍यम से गृह मंत्री जी का कि जयपुर शहर में पिछले वर्ष जवाहर नगर और सेठी कालोनी में जो डकैती की घटनाएं हुई हैं, जो लूट की घटनाएं हुई हैं, उनमें भी पुलिस ने इन्‍वेस्‍टीगेशन किया तो इन लोगों की संलिप्‍तता उसमें पायी गई।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इतना ही नहीं, केन्‍द्रीय गृह मंत्रालय ने भी राज्‍य सरकार को इस बात के लिए चेताया है कि पाकिस्‍तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई बांग्‍लादेश में आतंकवादियों के कैम्‍प लगाकर और वहां बांग्‍लादेशियों को आतंकवाद की ट्रेनिंग दे रही है और आतंकवाद की ट्रेनिंग लेने के बाद यह बांग्‍लादेशी हमारे देश में घुसपैठ कर रहे हैं। कई सैकड़ों बांग्‍लादेशी घुसपैठिए पाकिस्‍तान और भारत की सीमा पर हमारे राजस्‍थान में भी पकड़े गये हैं। अभी जो गृह मंत्रालय ने भी जो रिपोर्ट दी थी, पुलिस रिपोर्ट, उसमें इस बात का जिक्र है कि कई बांग्‍लादेशी भारत पाक सीमा पर पकड़े गये हैं। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह बहुत गंभीर मामला है और यह देश की एकता और अखण्‍डता को चुनौती देने का प्रयास बांग्‍लादेशियों के माध्‍यम से किया जा रहा है। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जयपुर, जोधपुर, कोटा, अजमेर आदि जो बड़े शहर हैं प्रदेश के उनमें हजारों की संख्‍या में यह बांग्‍लादेशी रह रहे हैं। अभी जयपुर शहर में लगभग 40 हजार इस प्रकार के बांग्‍लादेशी आज कच्‍ची बस्तियों में रह रहे हैं। जयपुर शहर में बगराना, आजाद नगर कच्‍ची बस्‍ती, जवाहर नगर कच्‍ची बस्‍ती,बास बदनपुरा, झोटवाड़ा, विश्‍वकर्मा, रामगंज, मनोहरपुरा कच्‍ची बस्‍ती, शास्‍त्री नगर की भट्ठा बस्‍ती, जयपुर दिल्‍ली बाईपास कमेला गोदाम की पुरानी बस्‍ती, बास बदनपुरा के नाले पर यह झोंपडि़यां बनाकर, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, हजारों की संख्‍या में रह रहे हैं। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, पिछली सरकार ने तो बहुत कमाल का काम किया। जो कालवाड़ स्‍कीम गोपालबाड़ी रेलवे स्‍टेशन के बगल में जहां हजारों की तादाद में लगभग 4-5 हजार बांग्‍लादेशी रहते थे उनको बांग्‍लादेश भेजने के बजाय बस्‍सी के पास बगराना गांव में उनको व्‍यवस्थित रूप से बसाया, उनको पट्टे दिये। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, स्‍थानीय नागरिकों ने इसका विरोध किया उसके बाद भी जबरदस्‍ती ऐसे बांग्‍लादेशियों को वहां बसाया गया और उनको जो पट्टे दिये गये। उनके आधार पर उनको आज स्‍थानीय नागरिकता मिल गई। इतना ही नहीं, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इन्‍होंने राशन कार्ड बनवा लिये, वोटर लिस्‍ट में अपने नाम जुड़वा लिये और ड्राइविंग लाइसेंस जिन लोगों के बन गये।

 

सुरेन्‍द्र/अरुण/26.3.07/13.30/1q

 

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से राज्‍य सरकार से यह मांग करना चाहूंगा कि ऐसे बांग्‍लादेशी जो देश की एकता और अखण्‍डता को चुनौती बने हुए हैं, जो अपराधिक गतिविधियों में लिप्‍त हैं और आज राजस्‍थान जैसे शांत प्रदेश में आपराधिक गतिविधियां इन लोगों के कारण बढ़ रही है, ऐसे लोगों को चिह्नित किया जाए, उनकी पहचान की जाए और केन्‍द्रीय सरकार से बात करके उनको किस प्रकार से वापस बांग्‍लादेश खदेड़ा जाए इस बात की व्‍यवस्‍था राज्‍य सरकार को करनी चाहिए। पिछली सरकार ने तो इनके राशन-कार्ड बनवा दिये, इनके वोटर लिस्‍टर में नाम शामिल करवा दिये, इनको पट्टे दे दिये और आप आश्‍चर्य करेंगे कि जहां बगराना में इनको बसाया वहां पर जे डी ए ने पांच हैण्‍डपम्‍प लगवाये हैं।

एक माननीय सदस्‍य : यह देश वैसे धर्मशाला है।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, गृह मंत्री जी यहां बैठे हैं, मैं आपके माध्‍यम से उनसे यह अनुरोध करना चाहूंगा कि जो इनके कारण से एकता और अखण्‍डता को चुनौती दी जा रही है इन पर अंकुश लगायें, इनको चिह्नित करें, इनकी पहचान करें और इनको किस प्रकार से वापस बांग्‍लादेश भेजा जा सकता है उसकी व्‍यवस्‍था करें। कई तो इस प्रकार की सूचना आई है कि बांग्‍लादेश भेजने के लिए यहां से भेजते हैं और फिर वो वापस आ जाते हैं तो केन्‍द्रीय सरकार से बातचीत करके इसका मुकम्‍मल इंतजाम किया जाए यह मैं आपके माध्‍यम से बात रखना चाहूंगा। धन्‍यवाद।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, वास्‍तव में यह बहुत गंभीर समस्‍या है और राजस्‍थान सरकार बहुत इस पर निरन्‍तर चिंतित है। हम लोगों ने प्रयास भी किया, कुछ लोगों को यहां से हमने वापस भेजने के लिए ठेठ बोर्डर तक भी पहुंचाया, वहां बी एस एफ ने इसके लिए कोशिश की लेकिन इसमें नियम इतने कमजोर हैं कि जब तक बांग्‍लादेश उनको स्‍वीकार नहीं करता है कि वे हमारे नागरिक हैं तब तक वो बोर्डर पर जाकर के अपने आप रुक जाते हैं। कई बार जाते हैं, कई बार वापस लौटकर के आ जाते हैं। कानून भी इतना कमजोर है, हमने केन्‍द्र सरकार को समय-समय पर चिट्ठी भी लिखी है कि जो पाकिस्‍तान से आता है उसका तो वीजा और सब समय के हिसाब से देखा जाता है और आवश्‍यक होता है, बांग्‍लोदशी जो इस प्रकार से आते हैं अगर वो बिना वीजा के भी आते हैं तो कानून इतना लचर है कि उसके खिलाफ कोई विशेष कार्यवाही नहीं की जा सकती। यह भी सच है कि इन लोगों के राशनकार्ड भी बने हैं, इन लोगों के वोटर लिस्‍ट में नाम भी लिखे हैं, मैं इतना कह सकता हूं कि जहां-जहां भी ये लोग हैं, जहां राशनकार्ड बने हैं तो उनको रिजैक्‍ट कराने के लिए तो पुलिस कार्यवाही कर सकते हैं। अगर आप सब लोगों का सहयोग रहेगा तो निश्चित रूप से उनके जो राशन-कार्ड बनाये हैं उनको निरस्‍त करायेंगे, जो वोटर लिस्‍ट में उनके नाम दर्ज हुए हैं, अगर सही सर्वे होकर सही ढंग से आयेगा तो उसको भी हम करेंगे। लेकिन इनको भेजना, जब तक केन्‍द्र सरकार का सहयोग नहीं मिलेगा यहां से भेजना हमारे लिए संभव नहीं हो रहा है। हम लगातार, हमने पिछले साल 2005 में भी और उसके बाद निरन्‍तर चिट्ठियां केन्‍द्र सरकार को इस बारे में लिख रहे हैं कि एक बहुत बड़ी समस्‍या से हम जूझ रहे हैं और विशेषकर जयपुर में जितने गंभीर अपराध हुए हैं उनमें से लगभग 30 प्रतिशत अपराध केवल इन्‍हीं लोगों के द्वारा किया गया है जो अब तक हमने ट्रेस किया है। एक गंभीर समस्‍या है, मैं चाहूंगा कि सदन के सब माननीय सदस्‍य भी सहयोग करें और इनके राशन-कार्ड और वोटर लिस्‍ट से नाम हटाने में हमारी मदद करें। हम केन्‍द्र सरकार से आग्रह कर रहे हैं, प्रतिपक्ष के बंधुओं से भी प्रार्थना है कि वो केन्‍द्र सरकार पर भी इस बात का दबाव डालें कि इस प्रकार के जो लोग यहां आकर के लाखों की संख्‍या में राजस्‍थान में रह रहे हैं इन्‍हें वापस बांग्‍लादेश भेजने की व्‍यवस्‍था में सरकार कोई न कोई ऐसा कानून बनाये कि उनकी ठीक प्रकार से आइडेंटिफिकेशन होने के बाद उनको वापस लौटाया जाए।

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इस प्रकार के राशन-कार्ड बनाने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी आप क्‍या कार्यवाही कर रहे हैं वो भी आप सदन में खुलासा करें।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, ऑफिशियली संकल्‍प ले आइये आप विधान सभा में। हां, इस बात के लिए सब तैयार हैं। (व्‍यवधान) लेकिन आपके कई माननीय सदस्‍य हैं जिनके सर्वेंट क्‍वार्टर्स हैं उनमें बांग्‍लादेशी बसा रखे हैं। पहले उनसे भी कहिये कि उनको भी हटायें। आप संकल्‍प ले आइये बिल्‍कुल। (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): तैयार हो? (व्‍यवधान) किसने दे रखे हैं किसने नहीं दे रखे हैं, आपने एक प्रस्‍ताव रखा कि हम एक संकल्‍प ले आयें तो तैयार हैं, अपने क्‍या है। (व्‍यवधान) आपको बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

एक माननीय सदस्‍य : यह तो बहुत बढि़या बात है। (व्‍यवधान)

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): आप लाओ न, आप लाओ, हम तैयार हैं। (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आप जैसे विचारों के लोगों की जरूरत है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): यह कोई संकल्‍प की बात नहीं है, पहले आप अपने घर में जो रह रहे हैं सर्वेंट क्‍वार्टर में उनको तो निकालो। (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इन्‍होंने क्‍या किया जरा यह ही बता दें न, संकल्‍प की कहां बात हो गई। राजस्‍थान में 8 साल तक भाजपा की सरकार रही, तीन साल से यह सरकार है, केन्‍द्र में एन डी ए की पांच साल सरकार रही तब तो कुछ किया नहीं और हर बात में संकल्‍प। आपकी सरकार है, करिये, कौन रोक रहा है? (व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): बचाव पक्ष में मत आओ। (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): यह प्रस्‍ताव आपका नहीं है? (व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): बांग्‍लादेशियों के बचाव पक्ष में मत आओ सचेतक जी। (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं स्‍वयं इस बात से सहमत हूं कि इस तरह के लोग जो विदेशी लोग हमारे यहां आ रहे हैं, घुसपैठ कर रहे हैं वो नहीं करनी चाहिए और ऐसे आदमियों को यहां शेल्‍टर नहीं देना चाहिए। (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): सरकार किसलिए बैठी है यहां पर आपकी? हर बात में आप संकल्‍प। जो यहां पास कर रखे हैं लोकायुक्‍त नियुक्‍त करो वो तो कर नहीं रहे हो और संक्‍लप से काम करोगे आप। (व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): संकल्‍प लाने में आपको क्‍या तकलीफ हो रही है? संकल्‍प लाना चाहिए बांग्‍लादेशियों को वापस भेजने के लिए। (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, कच्‍ची बस्‍ती में रहने वाले सभी लोग बांग्‍लादेशी नहीं हैं। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, कच्‍ची बस्‍ती में रहने वाले सभी बांग्‍लादेशी नहीं है। (व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): हम सब के लिए नहीं कह रहे हैं। (व्‍यवधान)

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): यह किसी ने नहीं कहा कि बांग्‍लादेशी हैं पर मैं यह कह रहा हूं कि ये कच्‍ची बस्तियों में रहते हैं। (व्‍यवधान)

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): 30 प्रतिशत अपराध उनके द्वारा हुए हैं तो आप अपने-अपने सर्वेंट क्‍वार्टर्स से तो निकालिये पहले। बसा तो आपने रखे हैं। (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): यह आपका राष्‍ट्रवादी सोच है कि आपने खुद ने आगे बढ़कर के कहा कि सरकार संकल्‍प लेकर के आये। यह हमारा नहीं, आपका प्रस्‍ताव है। आपके जैसे राष्‍ट्रवादी सोच के लोगों को करना ही चाहिए। अब यह दुर्भाग्‍य है कि आप ही की पार्टी के सचेतक आपकी इस सोच का विरोध करेंगे। यह दुर्भाग्‍य है। (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): .... आप यह बताइये कि आप पिछले तीन साल में क्‍या कर रहे थे। (व्‍यवधान) 1990 से 1998 तक आपने क्‍या किया? (व्‍यवधान) आपने दिल्‍ली में क्‍या किया? पहले आपकी सरकार थी। (व्‍यवधान)

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): उनका सोच यह है कि तीन साल से जो अपराध हो रहे हैं उनके बारे में आपने क्‍या किया? कुछ नहीं किया।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): हम आपकी इस बात का स्‍वागत करते हैं। ममता जी, आपकी सोच का स्‍वागत करते हैं। (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): आप वक्‍तव्‍य तो दे दीजिये। आज अगर किसी का गृह मंत्री.... (व्‍यवधान) माननीय मंत्री महोदय, आज गृह मंत्री जी जानते हैं कि कोई आदमी 10 साल लगातार रहता है तब उसका राशन-कार्ड बनता है तो आपकी सरकार थी, आपने क्‍यों रहने दिया? (व्‍यवधान) आज कांग्रेस इसका विरोध नहीं कर रही है। आप निकालिये, आप जिसको चाहे निकालिये।

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): यह राजस्‍थान की समस्‍या है, हिन्‍दुस्‍तान की समस्‍या है। सबको मिलकर के संकल्‍प लेना चाहिए इसमें। (व्‍यवधान)

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): उपाध्‍यक्ष जी, आप परमिट करें तो मैं बोलूं। आप एक मिनट मुझे परमिट करिये। मेरा नाम लीजिये ताकि मैं बोल सकूं। एक मिनट के लिए मैं बोलना चाहता हूं।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): उपाध्‍यक्ष महोदय, बांग्‍लादेशियों का संरक्षण कांग्रेस करती आई है। (व्‍यवधान) वोटर लिस्‍ट में उनके नाम व राशन-कार्ड कांग्रेस के लोगों ने बनवाये हैं अपना वोट बैंक बनाने के लिए। (व्‍यवधान)

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं समझता हूं कि शायद प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍य भी इस बात से सहमत होंगे.....

श्री उपाध्‍यक्ष: वह राय नहीं बनी इनकी।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): एक मिनट। ये भी इस बात से सहमत होंगे, यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है कि ये विरोध करें या हम पक्ष में करें या विरोध करें, यह राजनीतिक मुद्दा नहीं है। आज चेरापूंजी के पास जहां मेघालय का बोर्डर है, सब माननीय सदस्‍य जानते हैं कि वहां पर भी यह समस्‍या थी लेकिन मेघालय सरकार ने और केन्‍द्र सरकार का सहयोग लेकर के वहां पर उन्‍होंने उसकी व्‍यवस्‍था की कि बांग्‍लादेशी वहां से नहीं घुस पाये। मैं समझता हूं कि किसी भी तरह से चाहे हमारे शासन में चाहे आपके शासन में, किसी भी तरह से एक बार घुस गये और कई जगह उन्‍होंने राशन-कार्ड बना लिये। राशन-कार्ड बनाने के बाद आज यह स्थिति हो गई कि पता ही नहीं लग रहा है कि कौन इंडियन है और कौन बांग्‍लादेशी है। उसके बाद मंत्री जी ने माना है, 30 प्रतिशत तो ऑन रिकार्ड इन्‍होंने माना है कि अपराध उनके द्वारा किये जाते हैं और मेरे हिसाब से जहां तक है, 50 प्रतिशत से ज्‍यादा अपराधों में वो लोग सम्मिलित हैं। जो बच्‍चे हैं....

श्री उपाध्‍यक्ष: वह आ गया।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): उपाध्‍यक्ष महोदय, एक मिनट। जो छोटे-छोटे बच्‍चे हैं, कल आपने टी. वी. में एक कार्यक्रम देखा होगा, बच्‍चों को ट्रेनिंग दी जा रही है जेब काटने की। लड़के-लड़कियों को, महिलाओं को ट्रेनिंग दी जाती है और यह जेब काटना, चोरियां करना और दूसरे छोटे-मोटे अपराध करना, बच्‍चे-बच्चियों को इसमें संलग्‍न कर दिया जाता है। इसलिए गंभीर मसला है और राष्‍ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ सवाल है इसलिए पक्ष-प्रतिपक्ष में मत बांटिये इस हाउस को और यह मत करिये कि दिल्‍ली में किसकी सरकार थी और किसी नहीं थी। हमारी जब सरकार थी तो हमारी भी कुछ मजबूरियां रही होंगी, आपकी सरकार है तो आपकी भी कोई मजबूरियां रही होंगी लेकिन अब यदि पहले आपने नहीं किया, हमने नहीं किया उसके कारण यह इसमें दुहाई देकर के कि पहले से ऐसा नहीं हुआ इसलिए अब हम नहीं करें, अब समय आ गया है कि इस पर आज प्रत्‍येक राष्‍ट्र अपनी-अपनी सुरक्षा के लिए कदम उठा रहे हैं, क्‍या हम आज वर्तमान परिप्रेक्ष्‍य में इस तरह के कदम नहीं उठा सकते हैं। इसलिए मैं समझता हूं कि पक्ष-विपक्ष को मिलकर के इस समस्‍या का समाधान कैसे निकले इस पर हमको राजनीति परिदृश्‍य से ऊपर उठकर के विचार करना चाहिए और इस समस्‍या का समाधान करना चाहिए। आपने बोलने का मौका दिया, धन्‍यवाद।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): इस बात के लिए कौन रोक रहा है वो कार्यवाही करे। (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे निवेदन करना चाहूंगा कि सरकार या तो यह कह दे कि सरकार अकर्मण्‍य है, सरकार इन-एफिशिएंट है, अगर सरकार नहीं कर पाती है तब यहां संकल्‍प की आवश्‍यकता है। आप सरकार लेकर के बैठे हो। (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): पहले संकल्‍प लेकर के आये? भारत सरकार के विदेश मंत्री आतंकवादियों को जेल से छुड़ाकर कंधार छोड़कर के आये उसका निन्‍दा का प्रस्‍ताव भी यहां पर लाइये। (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): गृह मंत्रालय की जिम्‍मेदारी है.....

 

Lpm/akt/1340/2a/2632007

 

कि राजस्‍थान में कितने (व्‍यवधान)

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): कांग्रेस पीडीपी के साथ कश्‍मीर में सरकार चला रहे हैं और पीडीपी मांग कर रही हैं कि वहां से सेना को हटाया जाए, आतंकवादियों को प्रश्रय दे रहे हैं और आज कह रहे हैं कि आपने कंधार में यह किया (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, हम इस बात से सहमत नहीं है, या तो सरकार कह दे हम निकम्मे हैं, हम असमर्थ है, हमारे बस का कुछ नहीं है, हम कुछ नहीं कर सकते, हम नकारा है, तब यह सदन संकल्‍प लाएगा।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य...

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं एक बात कह रहा हूं कि यह जयपुर का या जयपुर के अंदर छोटे-मोटे अपराध हो रहे हो या जेब कट रही हो उसका प्रश्‍न नहीं है। माननीय सदस्‍य ने तो यहां तक कहा है कि पाकिस्‍तान, बांग्‍लादेश के अंदर इन लोगों को आतंकवाद की ट्रेनिंग देकर अंदर भेज रहा है....

श्री उपाध्‍यक्ष: यह है सब जगह पर।

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): यह बहुत बड़ी बात है, राष्‍ट्रीय सुरक्षा की बात है और यह टालमटोल वाली बात नहीं है और एक दूसरे के ऊपर जो आक्षेप लगाने वाली जो बात है कि आप सरकार है, निकम्‍में है, वह नहीं हम सबको एक होना पड़ेगा इस मामले के अंदर हम कितने निकम्‍में है और कितने नहीं है? इस देश का भी थोड़ा ख्‍याल करना पड़ेगा और आपको इसको जातियों के अंदर और पक्ष और विपक्ष के अंदर नहीं बांटना चाहिए और हमको पूर्णतया संकल्‍प ले लेना चाहिए इस सदन के अंदर की इन बांग्‍लादेशियों को बाहर भगावो।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने कहा था कि बांग्‍लादेशियों को (व्‍यवधान)

श्री भागीरथ चौधरी (किशनगढ़): उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा यह कहना है कि जो अभी प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍य ने एक संकल्‍प के लिए यह बात कहीं है और उसको प्रतिपक्ष वाले सब दबा रहे हैं (व्‍यवधान)

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): सरकार को कार्यवाही करने से कौन रोक रहा है? इसमें कांग्रेस भाजपा सब सहमत है (व्‍यवधान) इस पर कार्यवाही करके बताइए (व्‍यवधान)

श्री भागीरथ चौधरी (किशनगढ़): उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा यह कहना है कि यह बहुत गंभीर विषय है और इसके ऊपर संकल्‍प आना चाहिए, आप वोटों की खातिर इतना एक, इस देश के लिए एक खतरा बना हुआ है (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य आप स्‍थान ग्रहण करें।

श्री भागीरथ चौधरी (किशनगढ़): मेरा यह कहना है कि प्रतिपक्ष की महिला सदस्‍य ने एक संकल्‍प के लिए इन्‍होंने एक वाजिब बात कहीं है, प्रतिपक्ष वाले इस बात को दबा रहे हैं। मुझे ऐसा लगता है कि महिलाओं को इनको (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: अब आप स्‍थान ग्रहण करिए माननीय सदस्‍य।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपके पास पूरी सरकार है, पूरा तंत्र है आप चाहे कार्यवाही करिए आप कार्यवाही करना चाहते नहीं है और संकल्‍प का नाम लेकर (व्‍यवधान) चाहते हैं यह अनुचित है। मैं सरकार से मांग करता हूं कि इस पर कार्यवाही करें और इस कार्यवाही के अंदर किसी को पता भी न चले, यह बात भी सही है कि सदन ने इस संदर्भ में चिंता जाहिर की है। बांग्‍लादेशियों की घुसैपेठ यदि सरकार चाहेगी तो रोक पायेगी और सरकार इनको रोके तो संकल्‍प की बात तो बहुत बाद की बात है। धन्‍यवाद।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह जो एम एल ए क्‍वाटर्स में जो अवैध रूप से रह रहे हैं इनको खाली करवाओ पहले आप (व्‍यवधान)

श्री भागीरथ चौधरी (किशनगढ़): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, संकल्‍प आना चाहिए, यह गंभीर विषय है इस पर संकल्‍प आना चाहिए। प्रतिपक्ष की माननीय महिला सदस्‍य ने यह बात उठाई है यह वाजिब है और उनको दबा रहे है, यह संकल्‍प आना चाहिए, यह बड़ा गंभीर विषय है।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य....

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, चार बार तो मेरे खुद के फ्लैट में चोरी हो गई है, यह एम एल ए क्‍वाटर्स में जो अवैध रूप से रह रहे हैं उनको तो पहले निकलवा दो फिर बात करना बांग्‍लादेशियों की, उनको तो निकाल नहीं सकते आप।

श्री उपाध्‍यक्ष: अब कोई शिकायत आयेगी तो निकाल देंगे। 

श्री जयराम जाटव (खैरथल): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं पर्ची पर बोलना चाहता हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: हां, बोलिए आप।

अलवर जिले में सरकारी भूमि की अतिक्रमण से मुक्ति

श्री जयराम जाटव (खैरथल): माननीय उपाध्‍यक्ष जी, अलवर जिले में मैंने राजस्‍व में चाहे वह किसी भी तरह का चाहे गांव में खेल मैदान हो या रास्‍ते हो, उस पर अतिक्रमण रोकने के लिए मैंने पर्ची दी थी। मैं आपके माध्‍यम से माननीय रेवेन्‍यू मंत्री जी बैठे हैं इनसे निवेदन करना चाहता हूं कि ये 59 साल की आजादी के बाद में आज तक कही स्‍कूल का फील्‍ड है उसके ऊपर अतिक्रमण कर लिया लोगों ने, कहीं रास्‍ते हैं उस में तामीर करना चाहते हैं। हम या पी डब्‍ल्‍यू डी या मार्केटिंग बोर्ड के द्वारा कही रोड दिया जाता हैं, रेवेन्‍यू रिकार्ड में वह जाता है, वो जाकर के स्‍टे ले आते हैं अदालत के द्वारा, यह रास्ता अभी तो पुराना नहीं है, पहले का हमारा अतिक्रमण है, पक्‍की तामीर कर ली। माननीय मंत्री जी मैं आपसे आग्रह करना चाहता हूं कि यह मामला इतना गंभीर है कि गांव-गांव में झगड़े होने चालू हो गये और करते क्‍या हैं नगरपालिका मेरे खैरथल में माननीय मंत्री जी बैठे हैं, नगरीय आवासन एवं स्‍वायत्‍त शासन मंत्री जी बैठे है, 80 बीघा जमीन नगरपालिका के पास है, 80 बीघा जमीन में देखा कि यह खाली पड़ी है लोगों ने छप्‍पर बना लिये और हम वहां सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र के लिए जमीन देना चाहते हैं जो मैन रोड की जमीन है, उसके ऊपर अतिक्रमण है। इसमें माननीय स्‍वायत्‍त शासन मंत्री मुझे आश्वस्त करें कि उस जमीन को हम खाली करा देंगे। यह मामला एक नगरपालिका का नहीं है, पूरे जिले में हमारा अलवर जो जिला है वह दिल्‍ली से लगता हुआ है, जमीन इतनी महंगी हो गई है कि रोड की जमीन तो लगभग करोड़ रुपए बीघा की कीमत से बिक रही है और रास्‍ते, तालाबों पर या जो श्मशान घाट के लिए जो रास्‍ते जाते हैं या श्‍मशान घाट की भूमि है उसको भी तोड़ दिया। इसलिए आपके माध्‍यम से मैं यह निवेदन करना चाहता हूं कि माननीय राजस्‍व मंत्री जी यह आश्‍वस्‍त करें कि जो जितनी सरकारी भूमियां हैं, जो रिकार्ड में है उन सब भूमियों के रास्‍ते या जोहड़ तालाब या श्‍मशान घाट हो और विशेष तौर से मेरे खैरथल का आग्रह करता हूं कि जो नगरपालिका की भूमि है उसको अतिक्रमण से बचाया जाए और वहां हमारा जो किस तरह का चाहे वो हम बिल्डिंग बनाना चाहते हैं हॉस्पिटल की हो या कॉलेज की बात करना चाहते हैं या आई टी आई के लिए जमीन देना चाहते हैं,  तो वह अतिक्रमण जब तक हटेगा नहीं जब तक वो काम नहीं हो पाएगा। मैं अपनी लंबी बात नहीं कह कर के दोनों मंत्रियों से निवेदन करना चाहता हूं कि इन पर जो अतिक्रमण है उनको हटाने के लिए मुझे आश्‍वासन दे दे। बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने जो पर्ची दी है वह पर्ची है अलवर जिले में सरकारी भूमियों को अतिक्रमण से मुक्‍त कराने बाबत। फिर भी माननीय सदस्‍य ने नगरपालिका खैरथल में अतिक्रमण से संबंधित बात की है मैं उसको दिखवा लूंगा, निश्चित रूप से उस पर कार्यवाही करवा दूंगा। 

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री शिवजीराम मीणा।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय खैरथल से आने वाले सदस्‍य द्वारा सरकारी भूमि पर हो रहे अतिक्रमण बाबत चिंता जाहिर की है और इस संबंध में मैं इतना ही निवेदन करना चाहूंगा कि वह राजस्‍थान भू-राजस्‍व अधिनियम,1956 की धारा 91 के तहत बहुत व्‍यापक अधिकार बने हुए हैं, सक्षम अधिकारी के लेवल पर समय समय पर अतिक्रमियों को हटाने की कार्यवाही की जा रही है और जो भी यदि स्‍थान विशेष से बात है तो उसके अंदर यदि आप बता रहे हें तो उसमें मतलब कार्यवाही की जाएगी। वह तो निरंतर प्रक्रिया है इस कार्यवाही की, 91 के अंदर जो मतलब सक्षम अधिकारियों द्वारा और यदि न्‍यायिक मामले के अंदर वह चले गये हैं तो उनका अलग से मामला देखा जाता है तो मेरा निवेदन है कि अलवर के अंदर जो माननीय सदस्य ने जो बात उठाई है उसकी बाबत पूरी निगरानी के साथ कार्यवाही की जाएगी।

श्री जयराम जाटव (खैरथल): माननीय मंत्री जी (व्‍यवधान) वहां तो तीन तीन गट्टे जो रास्‍ते हैं वह सब तोड़ दिए, जमीन इतनी महंगी हो गई है (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): जितने भी हैं उन सबको देखा जाएगा।


समिति का प्रतिवेदन

अनुसूचित जनजाति कल्‍याण समिति (सं0 4)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्य यह समस्‍या सब जगह है अतिक्रमियों की, यह बहुत बड़ा मुश्किल काम है। श्री शिवजीराम मीणा, अनुसूचित जनजाति कल्‍याण समिति,2006-2007 समिति के चतुर्थ प्रतिवेदन का उपस्‍थापन करेंगे।

श्री शिवजीराम मीणा (जहाजपुर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से अनुसूचित जनजाति कल्‍याण समिति,2006-2007 समिति के चतुर्थ प्रतिवेदन का उपस्‍थापन करता हूं।

याचिकाओं का उपस्थापन

 

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री बनवारी लाल, सदस्‍य, विधानसभा 12 याचिकाओं का उपस्‍थापन करेंगे।

श्री बनवारी लाल (धौलपुर):  उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से कार्यसूची में किए गए उल्‍लेख के अनुसार निम्‍नांकित 12 याचिकाओं का उपस्‍थापन करता हूं:

विधान सभा क्षेत्र धौलपुर के ग्राम छावनी, भागीरथपुरा रतनकापुरा, खनपुरा, उमरारा, वरखेड़ा, दरियापुर, विश्नोदा एवं गुन्नाकापुरा के विद्यालयों को क्रमोन्नत करने बाबत् नौ याचिकाएं ; तथा

विधान सभा क्षेत्र धौलपुर के ग्राम विश्नोदा, मौरोली एवं करीमपुर में पशु चिकित्सालय खोलने बाबत् तीन याचिकाएं

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री शंकरसिंह राजपुरोहित, सदस्‍य विधानसभा तीन याचिकाओं का उपस्‍थापन करेंगे।

 श्री शंकर सिंह राजपुरोहित (आहोर): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से निम्नांकित याचिकाओं का उपस्थापन करता हूं :

विधान सभा क्षेत्र आहोर के मालगढ़ से रूण्डमाल की ढाणी तक सड़क-डामरीकरण करने बाबत्

पंचायत समिति आहोर के ग्राम चरली से माढ़ा भाखरी तक सम्पर्क सड़क का डामरीकरण करने बाबत्

आहोर (जालौर) में स्टेडियम का निर्माण करने बाबत्

 

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री राकेश मेघवाल, सदस्‍य विधानसभा दो याचिकाएं उपस्थापित करेंगे

(अनुपस्थित)

श्री टीकमचंद कांत, सदस्‍य विधानसभा एक याचिका उपस्‍थापित करेंगे।

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति तहसील गुढ़ामालानी जिला बाड़मेर की भाटा से सिणधरी पेयजल योजना को स्‍वीकृत कराने बाबत तीन व्‍यक्तियों द्वारा हस्‍तारित एक याचिका का उपस्‍थापन करता हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री हीरालाल (निवाई) सदस्‍य, विधानसभा एक याचिका का उपस्‍थापन करेंगे।

श्री हीरालाल (निवाई): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से तहसील निवाई (टोंक) के ग्राम भावंता एवं संग्रामपुरा पंचायत समिति बलवाड़ी के बीच एनीकट निर्माण कराने बाबत तीन व्‍यक्तियों द्वारा हस्‍ताक्षरित एक याचिका का उपस्‍थापन करता हूं।

अनुदान की मांगों पर विचार एवं मतदान ।

श्री उपाध्‍यक्ष: अनुदान की मांगों पर विचार एवं मतदान। श्री प्रभुलाल सैनी कृषि मंत्री अनुदान की मांग संख्‍या-37 व 39, श्री कालूलाल गुर्जर, पंचायती राज मंत्री अनुदान की मांग संख्‍या-28 विचार एवं मतदान हेतु प्रस्‍तुत करेंगे। श्री प्रभुलाल सैनी।

अनुदान की मांग

मांग संख्‍या 37 कृषि की प्रस्‍तुति

श्री प्रभुलाल सैनी (कृषि मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूं कि मांग संख्‍या-37 कृषि के संबंध में 31 मार्च,2008 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किए जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को 3,03,25,23,000 (रुपए तीन अरब, तीन करोड़, पच्‍चीस लाख, तेईस हजार) तक की राशि प्रदान की जावे।

 

Bhs/akt/26.3.07/13.50/2b

 

मांग संख्‍या 39 - पशुपालन एवं चिकित्‍सा की प्रस्‍तुति

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूं कि मांग संख्‍या 39 पशुपालन एवं चिकित्‍सा के संबंध में 31 मार्च, 2008 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 1,72,50,58,000/- (एक अरब, बहत्‍तर करोड़ पचास लाख अठावन हजार) तक की राशि प्रदान की जाय।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री कालूलाल गुर्जर।

मांग संख्‍या 28 - ग्रामीण विकास के विशेष कार्यक्रम की प्रस्‍तुति

श्री कालूलाल गुर्जर  (ग्रामीण  विकास एवं पंचायती  राज मंत्री):      माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूं कि मांग संख्‍या 28 ग्रामीण विकास के विशेष कार्यक्रम के संबंध में 31 मार्च, 2008 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 1,31,38,13,000/- (एक अरब, इकत्‍तीस करोड़ अड़तीस लाख तेरह हजार) तक की राशि प्रदान की जाय।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री मदन राठौड़।

मांग संख्‍या 28, 37 व 39 पर विचार

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं मांग संख्‍या 28,37 और 39 पर कुछ निवेदन करना चाहूंगा। उपाध्‍यक्ष महोदय, इस बार हमारे इलाके में बहुत अच्‍छी बरसात हुई और कुछ खाद की कमी जब महसूस हुई तो मैं इफको के कार्यालय में गया और जब वहां पर जाकर मैंने कहा कि यह खाद हमको चाहिए इफको की तो उन्‍होंने कहा कि खाद तैयार है लेकिन हमको केन्‍द्र सरकार रेलवे वेगन्‍स नहीं दे रही है क्‍योंकि व्‍हीट इम्‍पोर्ट हो रहा है। मुझे आश्‍चर्य हुआ कि व्‍हीट इम्‍पोर्ट हो रहा है । पहले कभी सुना था  तीस वर्ष पहले जब गेहूं आयात किया करते 

(     बजे)

(श्री सुरेन्‍द्र गोयल, सभापति, पदासीन।)

थे लेकिन इन तीस वर्षों में तो कभी ऐसी स्थिति नहीं आयी कि गेहूं भी हमको बाहर से मंगवाना पड़े, विदेशों से गेहूं मंगवाना पड़े।  तीस वर्ष हो गये, तीस वर्ष पहले इन्‍होंने मंगवाये थे जब माइलो गेहूं हिन्‍दुस्‍तान को खाना पडा था लेकिन अभी फिर से गेहूं आयात करना पडा और गेहूं आयात करने के लिए सारे रेलवे वेगन्‍स वहां लगा दिये गये। यह आश्‍चर्य की बात है। सभापति महोदय, आश्‍चर्य इस बात का है कि जब हमारे किसान, क्‍या गेहूं का उत्‍पादन करना उसने बंद कर दिया? क्‍या ऐसी स्थिति पैदा हो गयी? तो इस पर थोड़ा विचार करने की आवश्‍यकता है। फिर मैंने थोड़ा चिन्‍तन किया कि ऐसी क्‍यों‍परिस्थितियां आ गयीं कि किसान की रीढ़ तोड़ने का काम केन्‍द्र सरकार ने किया। किसान ने जो अन्‍न पैदा किया उस अन्‍न का किसान को उसकी उपज का उचित मूल्‍य नहीं मिलता। किसान के सामने बिजली की समस्‍या पैदा हो जाती है। किसान अपनी खेती के लिए जो भी ऋण प्राप्‍त करते हैं उस पर ब्‍याज अधिक होता था। किसान अपने उपकरण लेते थे उस पर भी जो टैक्‍स लगता था उसके कारण से किसान पर बहुत भार बढ़ गया था लेकिन मैं धन्‍यवाद देना चाहूंगा आपके माध्‍यम से राजस्‍थान सरकार को जिसने कृषि के उपयोग में आने वाले उपकरणों पर टैक्‍स फ्री किया। ये पहली बार अभी किया है इससे पहले किसान का कर्जा भी माफ किया था राजस्‍थान में तो भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने किया था।  कांग्रेस की सरकार जब-जब भी आयी है उसने किसान की रीढ़ तोड़ने का प्रयास किया। किसान के हित के लिए कभी भी इन्‍होंने चिन्‍ता नहीं की। 

मैं आपके माध्‍यम से धन्‍यवाद देना चाहूंगा सहकारिता विभाग को भी, सहकारिता में भी अभी आपको ध्‍यान होगा सभापति महोदय, सेन्‍ट्रल कोओपरेटिव बैंक से जो कर्जा लिया गया था उस पर चौदह-पन्‍द्रह प्रतिशत ब्‍याज लिया जाता था लेकिन अभी हमने सात प्रतिशत के ब्‍याज पर किसान को ऋण उपलब्‍ध कराने की जो घोषणा की है ये निश्चित रूप से किसान के दर्द को कम करने का प्रयास किया और इसके लिए मैं आपके माध्‍यम से धन्‍यवाद देना चाहूंगा। किसान की चिन्‍ता किसी ने की है तो भारतीय जनता पार्टी की इस राजस्‍थान की सरकार ने की है। पहले किसी ने परवाह नहीं की। किसान के सामने बहुत समस्‍या है। सभापति महोदय, किसान की भूमि में पानी भी नहीं है। पानी की भी तकलीफ रहती है तो इसके लिए भी क्‍या प्रयास किया जाना चाहिए किसी ने कभी भी चिन्‍ता नहीं की। पहली बार राजस्‍थान में भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने चिन्‍ता की । श्रद्धेय मुख्‍यमंत्री जी ने कुछ किसानों को चुन कर के इजराइल भेजा जहां पर पानी कम रहता है । कम पानी में भी किस प्रकार से वहां अधिक उपज ली जा सकती है इस प्रकार का जो प्रयास किया तो ऐसे कुछ लोगों को वहां पर भेजा इजराइल ताकि वहां पर ...। 

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): काश्‍तकार गये थे क्‍या?

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): हां काश्‍तकार गये थे और उन काश्‍तकारों ने...।

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): आपको नहीं लेकर गये इसलिए नाराजगी मत प्रकट करो। काश्‍तकार गये थे जो वहां से सीख कर के आये और उन्‍होंने यहां पर प्रशिक्षण देने का प्रयास किया।  तो सभापति महोदय, इजराइल में प्रशिक्षण लेकर वहां से वे सीख कर आये और उन्‍होंने बताया कि किस प्रकार से वहां पर कम पानी में अधिक उपज ली जा सकती है किस प्रकार से हाईब्रिड खेती वो लोग कर लेते हैं यानी किस प्रकार, यानी मुझे यह आश्‍चर्य हुआ जब उन्‍होंने बताया कि पेड़ पर भी इंजेक्‍शन लगते हैं पेड़ के तने में इंजेक्‍शन लगते हैं जिससे वहां पर जो फल प्राप्‍त होते हैं वो बहुत अच्‍छी बड़ी मात्रा में यानी नींबू भी कहते हैं अमरूद जैसा इतना बड़ा नींबू उन्‍होंने पैदा किया। यही नहीं वहां पर बूंद-बूंद खेती के माध्‍यम से यानी पानी का पूरा उपयोग करने की जो वहां से सीख प्राप्‍त करके वो आये वो उन्‍होंने यहाँ पर और अपने क्षेत्र में इसका लाभ यहां की जनता को दिया।

सभापति महोदय, इसमें आधुनिक तकनीक अपनायी जानी चाहिए इसके लिए भी प्रयास किये जाने चाहिए। केन्‍द्र ने राजस्‍थान को सहयोग नहीं किया लेकिन फिर भी राज्‍य में जो बजट 2003-04 में कृषि के निमित्‍त जो बजट था वो 43.43 करोड़ था केवल लेकिन जब से भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी है इन्‍होंने बजट भी बढ़ाया और 132.03 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान इन्‍होंने किया और वैज्ञानिक सोच के आधार पर खेती के लिए प्रयास किया। जो जमीन हमारी उर्वरा नहीं है उसकी उर्वरा क्षमता बढ़ाने के लिए कहां जिप्‍सम का उपयोग करना चाहिए, कहां पर किस प्रकार का खाद मिलाना चाहिए इस प्रकार के भी प्रयास किये। इसके लिए इन्‍होंने टास्‍क फोर्स का भी गठन किया । इस प्रकार से मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहूंगा कि हमने अपनी उपज को बढ़ाया है इसके लिए भी कई प्रयोग किये और इसके लिए कुछ क्षेत्र चिह्नित किये उन क्षेत्रों में कौन सी फसल अच्‍छी मात्रा में पैदा हो सकती है इसके लिए प्रयास किये। जैसे मूंगफली इस बार हमने 2005-06 में 491 लाख मीट्रिक टन मूंगफली पैदा की, जौ 4.58 लाख मीट्रिक टन, सरसों 43.86 लाख मीट्रिक टन और सरसों की तो हमारे क्षेत्र में बहुत अच्‍छी उपज हुई है।  आज हालत यह है कि वहां पर किसान ट्रेक्‍टर लेकर आ रहे हैं खूब और कृषि उपज मंडी समिति में नंबर बड़ी मुश्किल से आ रहा है। यह स्थिति हमारे क्षेत्र में भी है। बहुत अधिक उत्‍पादन बढ़ाने का प्रयास किया इसके लिए मैं कृषि मंत्री जी की उनके प्रयासों के लिए सराहना करना चाहूंगा। 

सभापति महोदय, हमने प्रयास किया सरसों का और भरतपुर जिले में कहते हैं सरसों पहले 13.7 क्विंटल प्रति हैक्‍टेयर उपज हुआ करती थी लेकिन इस जब प्रयास किये कुछ और तरीके अपनाये उनको खाद और जो कीटनाशक वगैरह समय पर देने चाहिए थे वो दिये तो वहां पर बीस क्विंटल प्रति हैक्‍टेयर उन्‍होंने उत्‍पादन लिया है।  मैं इसके अलावा यह भी कहना चाहूंगा कि मेरे सुमेरपुर में भी इस बार 20.24 क्विंटल प्रति हैक्‍टेयर उपज हुई है। इसके लिए और निश्चित रूप से जो हमें समय पर खाद चाहिए था वो उपलब्‍ध कराया, व्‍हीट इम्‍पोर्ट के कारण वैगन्‍स हमको नहीं मिले होंगे लेकिन ट्रकों के माध्‍यम से हमने खाद मंगवाया और कीटनाशक भी मंगाये इसके कारण से बहुत अधिक उपज हम ले पाये इसके लिए भी अच्‍छे प्रयास रहे।

सभापति महोदय, ठीक इसी प्रकार से और बीज, उर्वरक, जिप्‍सम और तकनीकी ये अपनाने का जो प्रयास किया इसके कारण इसका लाभ हमको मिला है।  इस बार 7160 क्विंटल उपचारित बीज किसानों को उपलब्‍ध कराया गया। यह पहली बार किया गया इसके लिए निश्चित रूप से सराहना की जानी चाहिए। 

सभापति महोदय, किसानों को प्रशिक्षण देने के लिए ...।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): माननीय सभापति महोदय, मैं बहुत देर से इंतजार कर रहा था हिण्‍डौली से आने वाले सदस्‍य का। हिण्‍डौली से आने वाले सदस्‍य मेरे बहुत परम मित्र हैं और इनकी सहानुभूति मेरे प्रति काफी है इसके लिए मैं इनको धन्‍यवाद ज्ञापित करता हूं कि मेरी मां के बराबर जो भाभीजी थीं उनका देहांत हो गया उस पर बैठने और संवेदना प्रकट करने तो आये नहीं परन्‍तु यहां इन्‍होंने संवेदना प्रकट की उसके लिए, मैं वैसे बहुत ज्‍यादा उम्‍मीद नहीं करता हूं क्‍योंकि जब इनके नेताओं को श्रद्धांजलि दी जा र‍ही थी उस समय लोगों ने देखा है। जब इनके नेताओं के प्रति ये समर्पित नहीं हैं तो मेरे प्रति तो क्‍या दोस्‍ती निभायेंगे। आपने जो भावनाएं प्रकट कीं उसके लिए और मैं पीछे से वार भी नहीं करता मतलब ममता जी की तरह और रामनारायण जी की तरह जैसे आप अन्‍दर ही अन्‍दर से करते हो ऐसे मैं अन्‍दर ही अन्‍दर कुछ करता नहीं हूं। यह मैं आपको बता देना चाहता हूं। इतना ही मेरा निवेदन है। आपने कृपापूर्वक जो श्रद्धांजलि दी उसके लिए बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय मुख्‍य सचेतक महोदय, हमारी जो शंका थी वो आपने निर्मूल साबित की और यथावत इसी स्‍थान पर विराजे रहेंगे। हम तो प्रसन्‍न है इससे।

श्री सभापति: ठीक है धन्‍यवाद।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): हमारी शंकाओं को निर्मूल साबित आपने किया हम बहुत प्रसन्‍न हैं कि आप यथावत इसी स्‍थान पर विराज रहे हैं हमको कभी कभी कष्‍ट हो जाता है आप यहां नहीं रहते हो तब।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): आप बिलकुल चिन्‍ता मत करो। आप अपनी चिन्‍ता करेंगे तो ज्‍यादा उचित रहेगा। 

श्री सभापति: धन्‍यवाद।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): सभापति महोदय, मैं निवेदन कर रहा था कि किसानों को प्रशिक्षण देने के लिए ...

कैलाश/     26.3.07  14.00  (1)  2c

 

हमने राजस्‍थान में किसान महोत्‍सव मनाया और जल चेतना यात्रा 10 मई से 16 जून तक निकाली और सभी ग्राम पंचायत स्‍तर तक हमने अपनी टीम भेजी और इसमें 32-33 विभागों के कर्मचारी साथ में लगे इसका भी बहुत बड़ा लाभ हमारे किसानों को मिला है । मैं सोचता हूं कि इस प्रकार के प्रयास निरन्‍तर जारी रहेंगे तो निश्चित रूप से हमारे किसानों को लाभ मिलेगा । इसके माध्‍यम से 9189 ग्राम पंचायतों में और 304 जल चेतना रथ निकाले और उस रथ में सभी प्रकार का प्रशिक्षण देने के लिये प्रदर्शनी टाइप लगाने का प्रयास किया, उसके सार्थक प्रयास हुए हैं। इसमें किट दिये गये 2.73 लाख मिनी किट वितरित किये और उन्‍नत बीज, पुस्तिकाएं और कई पैम्‍पलेट्स भी किसानों को दिये इससे किसान प्रेरित होता है उसका लाभ भी किसान ले सके इस प्रकार के प्रयास किये । हमारे यहां फव्‍वारा पद्धति अपनाने के लिये जो जोर डाला गया, गत पाँच वर्षों में जब कांग्रेस की सरकार थी तब 11700 किसानों को इन्‍होंने फव्‍वारा पद्धति अपनाने के लिये प्रेरित किया लेकिन हमारा प्रतिवर्ष जो औसत आया है वह 36374 है । इनके पाँच वर्षों में कुल संख्‍या देखें तो 83735 किसानों को इन्‍होंने प्रेरित किया । हमने केवल तीन वर्ष में ही 80404 किसानों को प्रेरित किया जिन्‍होंने यह लगाई । पाइप लाइन में पाँच वर्षों का इनका जो औसत था वह 1462 किलो मीटर प्रतिवर्ष था लेकिन हमारे तीन वर्षों में 5657 किलो मीटर प्रतिवर्ष का औसत आया है । यानी पाँच वर्षों में इन्‍होंने केवल 58.07 लाख मीटर पाइप लगाये हैं, हमने तीन वर्षों में 128.53 लाख मीटर पाइप किसानों को दिये हैं जिसका लाभ निश्चित रूप से हमारे किसानों को मिला है ।

बूंद बूंद सिंचाई के लिये पाँच वर्षों में आप का जो औसत था वह 705.70 हैक्‍टेयर था जबकि केवल 205-06 में हमारा औसत आया है 1672 हैक्‍टेयर । यानी प्रयास जो करें उसकी सराहना निश्चित रूप से की जानी चाहिये । डिग्‍गी बनाने के लिये भी किसानों को प्रेरित किया । सभापति महोदय, मैं बताना चाहूंगा जब बाँध से पानी आता है और बाँध से नहरों के माध्‍यम से जब पानी जाता है तो जितना किसान का खेत होता है उसमें जो क्‍यार बना होता है उस क्‍यार को ऊपर तक भरने का प्रयास करता है इसलिए बहुत पानी व्‍यर्थ हो जाता है । इस प्रकार के प्रयास किये जाने चाहिये कि किसान बूंद बूंद सिंचाई कर सके । लेकिन किसान के पास साधन नहीं है । जब नहरे चलती हैं तो मैंने  भी एक निवेदन किया था कि 8-10 किसानों के खेतों के बीच में कोई बड़ा होद बना दिया जाये और वह किसान वहां पर जितना पानी उसको तय है, तय सीमा में किसान को जितना पानी आप देना चाहते हैं उतना एमसीएफटी पानी उस टेंक में डाल दें और वहां पर वह अपना टुल्‍लू पम्‍प लगा कर पाइप के माध्‍यम से अपने खेत में बूंद बूंद सिंचाई करें तो मैं सोचता हूं जितना नहरों के माध्‍यम से जितने क्षेत्रफल में वह सिंचाई करता है उससे ढाई गुना क्षेत्र में वह बूंद बूंद से कर सकता है । अधिक क्षेत्रफल में इस प्रकार की सिंचाई का लाभ हम ले सकते हैं । मैं सोचता हूं कि इस प्रकार का प्रयास हम करें । किसान वह होद बना नहीं सकता है तो उसको उसके लिये कर्जा दिया जाना चाहिये । यदि इस प्रकार की व्‍यवस्‍था हो जाये कि उसको 50 प्रतिशत कर्जा बिना ब्‍याज किसान को दिया जा सके और 50 प्रतिशत हम अपने किसी निधि से चाहे एमएलए लेड से हो, चाहे एमपी लेड से हो और किसी भी माध्‍यम से किसान को दे सकें तो इसका लाभ भी निश्चित रूप से किसान को मिलेगा ।

सभापति महोदय, इन्‍होंने उन्‍नत बीज वितरण के लिये कोई सार्थक प्रयास नहीं किये थे । हमने तीन गुना वितरण किया। इन्‍होंने जितना वितरण किया उससे तीन गुना अधिक उन्‍नत बीज वितरित किये । यही नहीं परीक्षण के लिये इन्‍होंने कोई प्रयोगशाला नहीं बनाई थी । हमने इस बार 12 प्रयोगशालाएँ राजस्‍थान में बनावाई । इन्‍होंने पाँच वर्ष में एक भी प्रयोगशाला विकसित नहीं की । किसानों के हितों की यह बात करते हैं मैं सोचता हूं यह केवल थोथी बात है किसी भी प्रकार से इन्‍होंने ऐसा प्रयास नहीं किया । बीज वितरण के लिये जो प्रयोगशाला होनी चाहिये इन्‍होंने पाँच वर्षों में कोई नई विकसित नहीं की । हमने दो प्रयोगशाला बनाई एक अलवर में और एक जौधपुर में । इस प्रकार बीज परीक्षण प्रयोगशाला बनाई । ठीक इसी प्रकार कीट नाशक प्रयोगशालाएं कोटा और अलवर में की । सभापति महोदय, आपको मालूम है कि हम कोई भी निर्यात करते हैं तो वह जो निर्यातक देश है वह फाइटोसैनेटरी प्रमाण पत्र मांगता है कि क्‍या आपके यहां कीट नाशक प्रयोगशाला है और उससे आपने यह प्रमाण पत्र प्राप्‍त कर लिया है । यदि हमने प्राप्‍त कर लिया जो प्रमाण पत्र साथ में देना पडता है तब जाकर हम अपनी उपज निर्यात कर सकते हैं । इसके लिये हमने दो प्रयोगशालाएं विकसित की, हमने किसानों की चिंता की । सभापति महोदय, यह पहले सुविधा नहीं थी जो अवशेष हैं उसकी भी जांच की जानी चाहिये, यह पहले व्यवस्था नहीं थी । इस प्रकार की व्‍यवस्‍था हमने विकसित की । इसके लिये भी मैं मंत्री महोदय का धन्‍यवाद देना चाहूंगा । सभापति महोदय, जयपुर में भी हम एक प्रयोगशाला बनाना चाहते हैं लगभग 4 करोड की लागत की यह बनेगी जिससे हम विश्‍व प्रतिस्‍पर्द्धा में आ सकेंगे । आज डब्‍ल्‍युटीओ लागू हो गया और सभी क्षेत्रों में प्रतिस्‍पर्द्धा का युग है तो हमको भी प्रतिस्‍पर्द्धा में आगे आना पडेगा और इसके लिये भी हमें सार्थक प्रयास करने पडेंगे, हमारे किसानों को भी मजबूत करना पडेगा ताकि वह भी अपनी उपज का उचित मूल्‍य ले सके ।

सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहूंगा कि किसान को एक बहुत बडी समस्‍या रहती है वह समस्‍या रहती है किसान जब अपनी पैदावार करता है आज कोई उद्यमी अपना प्रोडेक्‍शनर करता है तो वह पहले माल बेचता है उसके बाद उसके अनुरूप अपने क्षेत्र में अपने कारखाने में माल पैदा करता है ताकि उसका माल तैयार होने के बाद पडा नहीं रह जाये । वह तैयार करते ही तुरंत पैक कर के भेज दें जिस किसी भी क्षेत्र में उसने पहले से आर्डर ले रखे हैं । इस प्रकार जब उद्यमी प्रयास कर सकता है तो हमारे किसान के सामने बहुत बडी समस्‍या रहती है क्‍योंकि वह बरसात पर निर्भर करता है और मानसून आता है तब किसान एक साथ बुआई शुरू करता है तो पैदावार भी एक साथ आती है । जब चारों ओर से पैदावार एक साथ मार्केट में आ जाती है तो उसके भाव गिर जाते हैं । चूंकि किसान ने पहले कर्जा ले रखा है, चाहे उसने ट्रेक्‍टर चलाने के लिये लिया होगा, चाहे बीज के लिये चाहे खाद के लिये उसने कई स्‍थानों से कर्जा ले रखा होता है । जब उपज चारों ओर से मार्केट में आती है तो मार्केट में जो खरीददार होते हैं वह भाव गिरा देते हैं । जब भाव गिर जाते हैं तो किसान को उचित मूल्‍य नहीं मिलता है और किसान को आनन फानन में मजबूरन कम रेट पर प्रतिस्‍पर्द्धा में अपना माल मार्केट में बेचना पडता है । इससे किसान को नुकसान होता है । मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहूंगा एक तो जो संविदा खेती है जो आपने कुछ जींसों में शुरू की है जिसमें औषधि, फलो पर, फूलों पर इस प्रकार से किया है । संविदा खेती का बहुत बड़ा लाभ है यदि इसमें और कुछ विस्‍तार कर सके तो इसके बारे में थोडा विचार करने की आवश्‍यकता है । सभापति महोदय, दूसरा मैं निवेदन करना चाहूंगा यदि किसान अपनी जो उपज है उसको किसी बैंक के गोदाम में रख या कृषि उपज मंडी के गोदाम में रख दे और जितना उसने अपना माल रखा है उसकी आधी कीमत बिना ब्‍याज के किसान को मिल जाये, उसका माल तो आपके पास सुरक्षित पडा ही है, माल लेकर वह भाग नहीं रहा है, किसान आपको धोखा दे नहीं सकता क्‍योंकि माल आपके गोदाम में सुरक्षित पडा है । लेकिन किसान का कर्जा चुकाना जरूरी है, साहूकार उसके पीछे लगा रहता है, बैंक उसके पीछे लगी रहती हैं तो उसको आधी कीमत के बराबर राशि उपलब्‍ध करा दी जाये तो इससे हमारे किसान को मजबूती मिलेगी । इसके लिये भी हमें और प्रयास करने चाहिये । यदि इस प्रकार के प्रयास आप कर सकें तो निश्चित रूप से इसमें और सार्थकता रहेगी ।

सभापति महोदय, हमने एक और प्रयास किया कृषि योजनाएं आपके द्वार । यह 15 सितम्‍बर से 15 अक्‍टूबर तक हमने की । इसके माध्‍यम से इसमें कई पुस्‍तकें भी वितरित की, टीवी, रेडियों पर भी कई प्रसारण किये जैसे कृषि दर्शन, नवांकुर इस प्रकार के प्रयास राजस्‍थान सरकार कर रही है इसका भी बहुत बड़ा लाभ मिला है । महिला सशक्‍तीकरण के लिये भी हमने अच्‍छे प्रयास किये हैं । सभापति महोदय, इस बार जब यह किट दिये गये तो हमने यह प्रयास किया कि महिलाओं को ही किट दिये जाये । यह जो बीज और खाद के किट क्षेत्रों में दिये गये वह महिलाओं के नाम से ही हमने दिये हैं । इससे क्‍या हुआ महिला की इज्‍जत, महिला का सम्‍मान उस परिवार में बढा ।

 

ans/usc   26.03.2007  14.10  2d 

 

इस प्रकार के जो प्रयास किये इसके लिए मैं इनकी सराहना करना चाहूंगा। इस बार कृषि मंत्रालय ने एक और काम किया, कृषि विभाग ने, वह यह किया कि कोई भी लड़की कृषि विभाग  में अध्‍ययनरत है, तो उसको भी प्रोत्‍साहन राशि बढ़ाई, निश्चित रूप से मैं इसके लिए आपको बहुत बहुत धन्‍यवाद देना चाहूंगा।  

महिला कृषक को अंतराष्‍ट्रीय भ्रमण के लिए भेजा। महिला कृषक को, यह प्रयास भी सार्थक रहा, इसके लिए भी मंत्री महोदय को धन्‍यवाद देना चाहूंगा। पहले फसल बीमा लागू नहीं थी, जब कांग्रेस  का राज था तो फसल बीमा से यह भागते रहे, देश में लागू हो गई थी लेकिन हमारे यहां कांग्रेस के राज  में फसल बीमा को लागू नहीं किया गया था लेकिन जब से भारतीय जनता पार्टी की सरकार राजस्‍थान में आई है, वसुन्‍धरा जी मुख्‍यमंत्री बनी और प्रभूलाल जी सैनी मंत्री बने तो सबसे पहला काम इन्‍होंने यह किया कि कृषि बीमा लागू किया और कृषि   बीमा का लाभ भी हमारे किसानों को मिला, इसके लिए भी  मैं इनको धन्‍यवाद देना चाहूंगा।

मौसम बीमा योजना, यह भी लागू की गई। यह भी सार्थक प्रयास किया। जब असमय वर्षा हो जाए और  तापमान कम हो जाए तो उनकी फसल बरबाद हो जाती है इस प्रकार के बीमा की भी व्‍यवस्‍था की। बागवानी मिशन भी 13 जिलों में लागू किया और मैं धन्‍यवाद देना चाहूंगा कि हमारे पाली में भी यह मिशन लागू किया गया, इसके लिए भी मैं आपकी सराहना करना चाहूंगा।

सभापति महोदय, हम जो सब्जियों का निर्यात करते थे इसके लिए इन्‍होंने हवाई भाड़े में   कमी की। पहले हवाई भाड़ा 45 रूपये प्रति किलो था। दुबई अगर जाए, जयपुर से दुबई काई अपनी अपनी उपज भेजना चाहे, कोई सब्‍जी भेजना चाहे तो 45 रूपये की रेट थी जो  जिसे घटाकर 23 रूपये 15 पैसे प्रति किलो की, इसके लिए मैं आपकी सराहना करना चाहूंगा, इसके लिए आपने बहुत अच्‍छा प्रयास किया। 

आपने सांगानेर हवाई अड्डे के पास में कुलिंग सेंटर लगाया, पैक हाउस लगाया। पैक हाउस एक तो चौमू में, एक जयपुर में। चौमू में 3.80 लाख और जयपुर में 3.60 लाख। ठीक इसी प्रकार से आपने कई ऐसी मण्डियां राजस्‍थान में विकसित की जो विशिष्‍ट कृषि मण्डिया रही, जैसे सोजत में मेहँदी, इसका लाभ भी मेरे पाली जिले को मिला इसके लिए मैं आपको धन्‍यवाद देना चाहूंगा।

आपने साझा खेती को प्रोत्‍साहित करने का प्रयास किया। हमारे किसान के पास में थोड़ी जमीन कम होने लग गई। ज्‍यों ज्‍यों परिवार का विस्‍तार होने लगा जमीन के टुकड़े होने लग गए। छोटे-छोटे टुकड़ों में न तो अच्‍छी तरह से खेती हो पाती है  लेकिन आपने साझा खेती को प्रोत्‍साहित करने का प्रयास किया इसका लाभ राजस्‍थान की जनता को मिला, इसके लिए मैं आपको बहुत धन्‍यवाद देना चाहूंगा।

आपने किसान कल्‍याण कोष स्‍थापित किया और उसमें  आपने, कोई किसान की मृत्‍यु हो जाए तो उसको 50 हजार और कोई अंग भंग हो जाए उसमें 25हजार। इसमें एक  सुझाव आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय को देना चाहूंगा कि कोई भी  किसान अगर कोमा में चला जाए,  सिर में चोट लग जाए और कोमा में चला जाए तो उसको भी आप 25 हजार रूपये देते हैं, मैं सोचता हूं कि यह  ठीक नहीं है। कोमा में काई चला जाए तो मैं सोचता हूं उसके परिवार पर और ज्‍यादा, कोमा में काफी  लंबे समय तक व्‍यक्ति रहता है, बीमार व्‍यक्ति कोमा में लंबे समय तक रहता है तो पूरा परिवार भी उसकी सेवा में लग जाता है, तो निश्चित रूप से कोमा में अगर कोई व्‍यक्ति चला गया तो वह मरने से कम नहीं है। मृत्‍यु पर आप 50 हजार देते हैं और कोमा पर 25 हजार रूपये देते हैं तो मैं सोचता हूं कि इसमें आपको यह प्रयास करना चाहिये कि कोमा में यदि गया है तो उसको भी 50 हजार रूपये दिया जाना चाहिये, इसके लिए मैं निवेदन करना चाहूंगा। एक अंग यदि कट जाए तो 12500 रूपये देते हैं, एक अंगुलि कट जाय तो 3 हजार, इस प्रकार का, आपने वृद्धि की है यह ठीक बात है।

कृषि उपज मण्‍डी के चुनाव भी आपने करवाए1 मैं सोचता हूं कि कई वर्षों तक चुनाव नहीं  हुए जिसमें 30-30 वर्षों से यह भागते रहे चुनाव से और चुनाव नहीं करवाए। आपने कृषि उपज मण्‍डी के चुनाव करवाये इसके लिए भी...(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): यह जब्‍त कराओ। सभापति महोदय, यह जब्‍त कराओ। यह राजस्‍थान विधान सभा है कोई पब्लिक पार्क नहीं है। (व्‍यवधान) नहीं, सभापति महोदय,   इसको जब्‍त करवाइये मेरी आपको प्रार्थना है।

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य।

श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): सॉरी।

श्री सभापति:  सॉरी कहने से नहीं, आप यहां लाकर रख दीजिए।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय मंत्री जी, यह राजस्‍थान की विधान सभा है इस और थोड़ा माननीय मुख्‍यमंत्री जी का ध्‍यान आक्रष्‍ट करो1 वह आधा घंटा  सदन में दिया करे जिससे इस सदन की व्‍यवस्‍था ठीक चले। (व्‍यवधान)

श्री कालूलाल गुर्जर  (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री): अशोक जी गहलोत कितना बैठा करते थे ?  आप ज्ञान बता   रहे हो।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा):  पाँच साल होने को आए (व्‍यवधान) मेहरबानी करके बंद करो।

श्री कालूलाल गुर्जर  (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री): आप एक तर्क दे रहे हो खुद तो गुड़ खाने से परहेज करे, दूसरों को गुलगुले खिला रहे हो।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): राजस्‍थानसरकार ने गौ-पालक बीमा योजना (व्‍यवधान) यह लागू किया, यह पहली बार हुआ है ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही):  आपको तो मंत्री जी, आप लोगों को तो नींद में भी अशोक जी गहलोत का भूत दिखता होगा।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): कामधेनु बीमा योजना लागू की जिसमें 2 वर्ष से 10 वर्ष तक उम्र की गाय है उसका बीमा किया जाता है। इसमें 4 प्रतिशत प्रीमियम जिसमें 25 प्रतिशत केन्‍द्र देती है,इस प्रकार का यह राजस्‍थान में लागू किया, यह भी किसानों के हित में है। गौ-पालक बीमा जिसमें 200 रूपये प्रतिवर्ष, 100 रूपये केन्‍द्र देती है और 25 रूपये राज्‍य सरकार देती है और 25 गौ-पालक खुद देता है, इसमें निश्चित रूप से किसानों को लाभ मिल सकेगा। गौ-रक्षक बीमा योजना जिसकी प्रीमियम राशि 25 प्रतिशत राजस्‍थान सरकार देती है, इसके लिए राजस्‍थान सरकार की  भी सराहना की जानी चाहिये। एक आदर्श गौशाला प्रत्‍येक जिले में, आपने घोषणा की है इसके लिए भी निश्चित रूप से सराहना की जानी चाहिये।

श्री सभापति: आप कन्‍क्‍ल्‍यूड करें।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर):  आपने पशु प्रजनन नीति, इसके लिए राठी, थारपारकर, गीर, कांकरेज (व्‍यवधान) यह बात ठीक है आपकी, आपने  किसी भी प्रकार का...

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, आपस में बात नहीं करें।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): सभापति महोदय,डेयरी के मामले में भी  हमने और अच्‍छे प्रयास किए1 डयेरी में भी अभूतपूर्व यानि पहले कभी भी, उससे 30 प्रतिशत अधिक दूध संकलन हमने शुरू किया1 पहले जितना दूध एकत्रित करते थे इस बार 30 प्रतिशत अधिक डेयरी ने भी सफलता प्राप्‍त की है। एक निवेदन करना चाहूंगा कि अभी जो खेल  हुए थे क्रिकेट के उसमें मैं समझता हूं कि सरस डेयरी का उत्‍पादन यदि उसमें विक्रय किया जाता तो और लोगों को भी लाभ मिलता। इस प्रकार का प्रयास निश्चित रूप से होना चाहिये, ऐसा अवसर हमको खोना नहीं चाहिये। (व्‍यवधान) जो भी सशुल्‍क, सशुल्‍क की बात है, वहां पर जो वितरण किया गया मतलब सशुल्‍क उपलबध करवाया गया उसमें लोगों को बहुत तकलीफ रही, अगर हम इस प्रकार का प्रयास करते ता निश्चित रूप से इसमें  भी सफलता मिलती।

श्री सभापति: धन्‍यवाद।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): सभापति महोदय, दो-तीन निवेदन और करना चाहूंगा।

श्री सभापति: वाइंडप करें।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): एक तो विषय रह ही गया, सीआरएफ की गाइड लाइन । मैं इसमें भी निवेदन करना चाहूंगा राजस्‍थान सरकार ने बहुत प्रयास किया कि सीआरएफ की गाइड लाइन में कुछ परिवर्तन किया जाना चाहिये लेकिन मैं सोचता हूं कि राजस्‍थान सरकार ने कोई 10-12 पत्र भी लिखे होगे, उन पत्रों की प्रतियां भी हमारे पास है, इन्‍होंने इस प्रकार के प्रयास किये लेकिन केन्‍द्र सरकार ने कतई परवाह नहीं की। पहले, अब कोई यदि हानि हो जाए, ओलावृष्टि हुई, ओलावृष्टि में भी और केन्‍द्र सरकार के नोर्म्‍स के अनुरूप यदि किसान को कोई राहत देते हैं तो मैं सोचता हूं कि ऊँट के मुंह में जीरे के समान था और राजस्‍थान सरकार ने आगे बढ़कर इस प्रकार का प्रयास किया कि किसान के हितों की चिंता इन्‍होंने की। सीआरएफ की गाइड लाइन से हटकर, उससे हटकर, आगे बढ़कर अपने खुद के कोष से 100 करोड रूपये दिये हैं इसके लिए भी राजस्‍थान सरकार की प्रशंसा करना चाहूंगा।

सभापति महोदय, एक निवेदन और करना चाहूंगा कि टीएफसी और एसएफसी या  एसजीआरवाई में आरसीसी की जो रोड्स है वह बंद कर दी, मैं सोचता कि इसके केन्‍द्र सरकार को, और उसके ऊपर दवाब भी डालना चाहिये कि आज गांव में..(व्‍यवधान) केन्‍द्र सरकार से निर्देश हुआ है माननीय सदस्‍य, केन्‍द्र ने बंद किया है , उसने गाइड लाइन दी है उसने वहां से, उन्‍होंने आरसीसी की सड़के, आरसीसी के रोड्स जो अपने गांवों में हम लोग बनवाया करते थे वह बंद कर दिये, वह निश्चित रूप से चालू होने चाहिये, इस प्रकार आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं। 

श्री सभापति: धन्‍यवाद।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): दीनदयाल उपाध्‍याय आदर्श गांव, यह विकसित करने का प्रयास किया इसमें सभी प्रकार की सुविधाएं और यह गांव में रहे , आज व्‍यक्ति गांव से भागकर शहर में आने का प्रयास करता है, शहर की और दौड़ता है, यह रोकने का जो प्रयास किया मैं सोचता हूं कि यह बहुत अच्‍छी बात है। ठीक इसी प्रकार से यह भी निवेदन है, शहरों में आधारभूत सुविधाएं विकसित करने के जो प्रयास किया, इस प्रकार की आपने पुरा के माध्‍यम से  जो योजनाएं दी है उसका लाभ भी अधिक से अधिक गांव को मिल सके इस प्रकार का हमें और प्रयास करना चाहिये। एक बहुत अच्‍छी इस बार केशवबाड़ी योजना आपने लागू कि  जिसमें आपने चुना कि एक कोई भी जनजाति का व्‍यक्ति है और  अपने क्षेत्र में  उसके पास न तो पर्याप्‍त साधन है....

 

दुर्गा/चौहान 260307 1420 2e

 

वह अपने क्षेत्र को विकसित नहीं कर सकता लेकिन आपने केशवबाड़ी योजना के माध्‍यम से उसके क्षेत्र को विकसित करने का जो बीडा उठाया है , आपने वहां पर किसी प्रकार से उसकी जमीन उर्वरक बनाई जाए, किसी प्रकार से वहां पौधे लगाये जाएं। राज्‍य सरकार अपनी मद से अपनी व्‍यवस्‍था से वहां पौधे लगाकर उस क्षेत्र को विकसित करके उस किसान को वापस जब सुपुर्द करेगी तो निश्चित रूप से उसका लाभ उस किसान को मिलेगा। वह परिवार तो निश्चित रूप से लाभान्वित होग और खड़ा हो जाएगा। ठीक उसी प्रकार से मैं एक निवेदन और करना चाहूंगा कि कृषि उपज मण्‍डी समिति से जो आय होती है उसका व्‍यय उस क्षेत्र के विकास के लिये हो, इस प्रकार का आप प्रयास करें। जैसे मेरे नोवी में वह पुल टूट गया। (व्‍यवधान)

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, आप बारबार बीच-बीच में बैठे-बैठे बोल रहे हैं। (व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): जब कभी भी हम लिखकर देते हैं तो आपके यहां से यही आता है कि कोई किसी प्रकार का फण्‍ड उपलब्‍ध नहीं है। जब हमारे पास फण्‍ड है। अभी सुमेरपुर कृषि उपज मण्‍डी समिति के पास में लगभग सौ करोड़ रुपये का फण्‍ड है। जब इतना पैसा है तो यह पैसा हमारे क्षेत्र में लगे तो उसका लाभ भी निश्चित रूप से हमारे क्षेत्र को मिलेगा।

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, कन्‍क्‍लूड करें।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अभी बाला में एक जैसे हमने पत्र लिखा, उसमें 4 लाख कुछ का खर्चा था और उसके लिये भी यह जवाब आये कि पैसा नहीं है तो ठीक नहीं है। बहुत छोटे-छोटे काम हैं। यह तो निश्चित रूप से कर ही लेना चाहिए। ठीक उसी प्रकार से मिसिंग लिंक की भी हम घोषणा कर सकें, कृषि उपज मण्‍डी समिति के पास...।

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, अब आप कन्‍क्‍लूड करें।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): नहीं, माननीय सभापति महोदय, मैंने इस विषय पर तो अभी बोला ही नहीं है।

श्री सभापति: जैसे अब जो भी है, समय की सीमा है।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अच्‍छा, मैं बाहर से आया और नाम आ गया। तो जहां से मुझे शुरू करना था, आज माननीय सदस्‍य ने कहा कि आपका भाषण सही नहीं रहा। तो उसका एक मात्र कारण है कि जहां से मुझे शुरू करना था तो वह तो रह ही गया विषय।

श्री सभापति: अब आप समाप्‍त करें।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): तो जिससे समाप्‍त करना था, उससे शुरू किया। तो थोड़ा उलटा हो गया। तो जब उलटा हो जाता है तो सब कुछ उलटा-पुलटा हो जाता है। तो इसमें आप...।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): माननीय सदस्‍य, अच्‍छा बोल रहे हैं। लेकिन लम्‍बा बोलने से लोग उब जाते है और फिर आप बोलने में ऐसा करते हो कि कौनसी योजना बनाई है केशवजी के नाम से। केशवजी के नाम से कौनसी योजना बनाई है।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): केशवबाड़ी योजना।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अच्‍छा, केशवबाड़ी योजना। केशवजी कौन हैं? कोई किसान से ताल्‍लुक रहा है क्‍या उनका।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): केशवजी कौन हैं, यह तो मैं आपको बता सकता हूं। ऐसा है कि डाक्‍टर केशवराव हेडगेवार...।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): यह योजनाएं आपके नाम की वजह से ही जल जाएंगी। क्‍योंकि कृषि मंत्रीजी, किसी भी कृषक का नाम जोड़ते तो बात समझ में आती है। जिन लागों का कृषि से कोई लेना-देना नहीं रहा उनका नाम आपने जोड़ रखा है, केशवबाड़ी। तो यह....। (व्‍यवधान) कैसे आप लोगों को बोलना कैसे आता है इतना।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): इसका मतलब तो यह हुआ कि आप, माननीय नेता प्रतिपक्ष को यह मालूम है कि केशव कौन है।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): आप विराजें थोड़ा तो,... (व्‍यवधान) माननीय प्रतिपक्ष के नेता महोदय, (व्‍यवधान) माननीय प्रतिपक्ष के नेता महोदय, केशवराव बलिराम हेडगेवार, उन्‍हीं के द्वारा दुनिया जीवित है। वह केशवराव बलिराम हेडगेवार है।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): आप बैठें ना, आप बैठिये, मैं समझा सकता हूं। (व्‍यवधान)

ऐसा है, आपको मालूम है। इनको भी पता है, यह आपको बताने की भी जरुरत नहीं है। तभी इन्‍होंने कहा कि किसी किसान के नाम से करते। लेकिन मैं आपको जानकारी दूं कि वे किसान परिवार से थे, डाक्‍टर केशवराम बलिराम हेडगेवार। इन्‍होंने राष्‍ट्रीय स्‍वयं सेवक संघ की 1925 में स्‍थापना की। यह जानकारी आपको है। यह बात नहीं है। आप यदि कोई अच्‍छा काम करें, काम की प्रशंसा होनी चाहिए। उनके नाम से जो काम किया, आज यह कहें कि दीनदयाल उपाध्‍याय आदर्श गांव... तो वह गांव विकसित होगा ही हागा। (व्‍यवधान) इसमें जो कार्य है उसकी प्रशंसा की जानी चाहिए।

श्री सभापति: अब आप समाप्‍त करें, माननीय सदस्‍य, अब आप विराजें। माननीय श्री बंशीलाल खटीक।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आजादी के बाद वे सामने आये हैं। किस बात की प्रशंसा कर रहे हो और किस नाम से उनकी योजना चला रहे हो, उनके नाम से। (व्‍यवधान) हमें क्‍या एतराज है।

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, आप विराजिये ना।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): आपने क्‍या पूछा। माननीय नेता, प्रतिपक्ष, आपने पूछा, केशव किसका नाम था, वह मैंने बता दिया।

श्री सभापति: अब आप समाप्‍त करें, आप विराजें। माननीय श्री बंशीलाल खटीक।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): माननीय सभापति महोदय, मांग संख्‍या 37- कृषि, पशुपालन एवं चिकित्‍सा-39 और ग्रामीण विकास-28, आज इनके ऊपर बोलने का जो आपने मौका दिया उसके लिये आपको बहुत-बहुत धन्‍यवाद। मैं प्रतिपक्ष से ही शुरू करता हूं, हमारे प्रतिपक्ष के माननीय नेता, पूजनीय, उन्‍होंने एक बहुत अच्‍छे...।

श्री सभापति: आप तो विषय पर बोलें, विषय पर।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): हां, मैं वहीं आ रहा हूं।

श्री सभापति: हां, विषय पर ही बोलें आप।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): हां, विषय पर ही आ रहा हूं।

हम माननीय प्रतिपक्ष के नेता की, उनके सम्‍मान में किसी प्रकार की कमी नहीं रखना चाहते हैं। हम तो उनके एक पोते के बराबर हैं। हम उनके सामने क्‍या बोलेंगे। अगर कोई ऐसी बात होती है कि यदि दादा नहीं जानता है, पोते को कोई नई सीख मिल गयी है तो दादा को वह बता देनी चाहिए।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): भारतीय संस्‍कृति में तो पोता दादा के सामने बोलता ही नहीं है। बाप के सामने नहीं बोलता तो दादा के सामने बोलने का तो सवाल ही नहीं है।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): दादा को जो जानकारी नहीं है वह जानकारी तो देगा पोता।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): दादा का जो परामर्श है वह सर्वोपरि है। वह पूरे परिवार में प्रवेल करेगा। और वह प्रवेल ही नहीं करेगा पूरे गांव में उसकी शोहरत हो जाएगी। (व्‍यवधान)

श्री रामलाल शर्मा (चौमूं): अपनी बात निवेदन करने का तो अधिकार है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): निवेदन करने का सबको अधिकार है। वह मुझे भी तो अधिकार है। आप अकेले को ही है क्‍या अधिकार। या उनको अकेले को है। जो बात मुझे नहीं जंची, मैंने सुझाव दे दिया। अब क्‍या आपत्ति है।

श्री भागीरथ चौधरी (किशनगढ़): सभापति महोदय, प्रतिपक्ष के नेता को यह समझना चाहिए जो बोलेगा...।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपत्ति हो तो मेरी बात मानोगे थोड़ी आप। मैं तो कहता हूं अशुभ नाम जोड़ोगे तो वह शुभ काम भी नष्‍ट हो जाएगा। खेती काश्‍तकारों की नष्‍ट हो जाएगी इसके नाम से। (व्‍यवधान)

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, आप नहीं बोलें।

श्री भागीरथ चौधरी (किशनगढ़): अशुभ नाम कैसे है।

श्री सभापति: कोई बात नहीं।

श्री भागीरथ चौधरी (किशनगढ़): अशुभ नाम कैसे है। हम भी किसान के बेटे हैं। पर अशुभ नाम इस तरह से नहीं, हम आपका आदर करते हैं, आपको ऐसे...।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): तो आप भैरोंसिंहजी शेखावत के नाम, जो यहां के सदन के नेता रहे हैं, चीफ मिनिस्‍टर रहे हैं, उनका नाम जोड़ देते, क्‍या बात करते हैं आप। जीती मक्‍खी मत निगलो।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): माननीय सभापति महोदय, मैंने प्रतिपक्ष के माननीय नेता से सम्‍मान से बात कही है। (व्‍यवधान)

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य आपस में बातें नहीं करें।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): माननीय सभापति महोदय, मैंने आपको निवेदन किया है, इसमें कोई बुरा लगा हो तो मैं आपसे क्षमा-प्रार्थी हूं।

माननीय सभापति महोदय, हमारा देश एक कृषि प्रधान देश है। कृषि और ऋषि  हमारे देश की पहचान है। कृषि के खेत्र में, हमारे देश के किसान जब देश आजाद हुआ उससे आज तक लगातार हमारे किसान कर्ज में जन्‍म लेता है और कर्ज में ही मर जाता है। माननीय सभापति महोदय, आज दिन तक हिन्‍दुस्‍तान के उन अन्‍नदाताओं की चिन्‍ता वर्तमान के महामहिम उप राष्‍ट्रपति और उस समय के मुख्‍य मंत्री माननीय भैरोंसिंहजी शेखावत ने हमारे प्रदेश के किसानों की चिन्‍ता की थी। इतिहास गवाह है कि हमारे किसानों के ऊपर कई प्रकार की परेशानियां आती थीं। कई विपदाएं आती थीं। एक प्राकृतिक विपदा है, एक कर्ज की विपदा है। उन सब विपदाओं को माननीय भैंरोंसिंहजी शेखावत ने देखा और उसका निराकरण उस समय हमारे माननीय मुख्‍य मंत्रीजी भैंरोंसिंहजी शेखावत ने बारानी लगान माफ कर और किसान के 10 हजार तक के कर्ज माफ कर उस समय हमारे किसानों को एक संजीवनी बूटी दी थी। उस तर्ज के ऊपर माननीय मुख्‍य मंत्री महोदय, वसुन्‍धरा राजेजी आज उसी तर्ज पर हमारे प्रदेश के किसानों के ऊपर, जब परिवर्तन यात्रा के समय उन्‍होंने गांव-गांव, ढाणी-ढाणी, मजरे तक जब वे स्‍वयं पहुंची और प्रत्‍यक्ष को प्रमाण की आवश्‍यकता नहीं होती, उन्‍होंने अपनी आंखों से किसान की हालत देखी।

 

Vps-usc-26032007-1430-2f-1

 

और उन्‍होंने ईश्‍वर से कामना की कि हे प्रभु, मुझे इन दीन-हीन जो किसान हैं, उनकी इस चिन्‍ता से, उनके दु:ख-दर्द को मिटाने का मुझे समय दे और प्रभु ने माननीय मुख्‍य मंत्रीजी की आवाज सुनी और आज इस पवित्र सदन में हमारी माननीय मुख्‍य मंत्री हैं। उनके पास अधिकार आने के बाद हमारे कृषकों के ऊपर जो आमूल-चूल परिवर्तन किया, उनके जन-हित में जो प्रयास किये जो किसी से छुपा हुआ नहीं है। मुझे आकड़े देने की आवश्‍यकता नहीं है। यह भी प्रतिपक्ष के सभी माननीय सदस्‍य भी जानते हैं और प्रदेश की आम जनता जानती है कि माननीय मुख्‍य मंत्री महोदया ने किसानों के साथ में कितना बड़ा सहयोग किया। आज हमारे किसान खुशहाली के कगार पर है। वर्तमान में जब ओलावृष्टि हुई, कई नुकसान हुआ। यह पूरा प्रदेश जान रहा है और वह तो जिस किसान के मन में जो दर्द है वही जानता है और जब माननीय मुख्‍य मंत्री महोदया ने तत्‍काल जो उनको सहयोग देने की जो घोषणा की, भूतों न भविष्‍यति, आज दिन तक ऐसा पैकेज हमारे किसानों को जो ओलावृष्टि का, जो मुआवजा, जो सहयोग माननीय मुख्‍य मंत्री महोदया ने दिया है उसकी आज दिन तक कोई बराबरी नहीं कर सकता।

माननीय सभापति महोदय, भले ही प्रतिपक्ष के लोग, माननीय सदस्‍य घड़ियाली आंसू बहा-बहा कर बहिर्गमन कर दें, सरकार पर आरोप-प्रत्‍यारोप कर दें, इसे आम जनता जान चुकी है। ऐसे नाटक पैदा करने से आम जनता सब पहचान चुकी है कि‍अंधेरे में यदि गुड़ को खाया जाए तो वह मीठा लगता है। भले ही उसको छुपा कर खाया जाए पर उसकी जो गुणवत्‍ता है, जो मिठास है वह किसी से छुपती नहीं है और उसको नकारा नहीं जाता है, प्रतिपक्ष के माननीय नेताजी।

माननीय सभापति महोदय, मैं प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों का बहुत सम्‍मान करता हूं। ऐसी बात नहीं है कि हम ... (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): बहुत परिवर्तन आया है।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): परिवर्तन समय की मांग है और वह परिवर्तन हमने करके दिखाया है और परिवर्तन यात्रा के समय आपको अदला-बदली कर दी। यही परिवर्तन का रूप है। माननीय हरिमोहनजी शर्मा की भावनाओं का मैं सम्‍मान करता हूं।

श्री भवानी जोशी (राज्‍य मंत्री, चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य): बढि़या बोल रहे हैं, आज।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): माननीय सभापति महोदय, किसानों का दु:ख जो माननीय मुख्‍य मंत्री महोदया ने जाना है, मैं इस पूरे सदन के माध्‍यम से, मैं उनको बहुत-बहुत धन्‍यवाद ज्ञापित करना चाहता हूं कि हमारे किसान का दु:ख-दर्द उन्‍होंने सुना और आज हमारा किसान जिनका नुकसान हुआ है उनके चेहरे पर खुशहाली है वरना इस प्रदेश में कई राज आये, ज्‍यादातर प्रतिपक्ष के लोगों ने, माननीय सदस्‍यों ने, कांग्रेस ने ही हमारे प्रदेश पर राज किया। मुझे प्रमाण बता दें, आज दिन तक के इतिहास में किसानों के ऊपर उन्‍होंने क्‍या सहयोग किया और आज का इतिहास, आज का वर्तमान का मिला लें, आ जाए आमने-सामने, हम जवाब देने के लिए तैयार हैं। हम प्रमाण के तौर पर यह कहते हैं आपको। हम ईश्‍वर से कामना करते हैं कि यह सद्बुद्धि आपको भी मिले और जब-जब भी आपको समय मिले किसानों के हित में हमेशा आप कदम उठायें। भले ही प्रतिपक्ष में कई किसान के नेता हैं। कई किसान हैं पर आज दिन तक उन्‍होंने वोटों की राजनीति करने के अलावा किसान का भला नहीं किया। एक दूरदराज झोंपड़ी में बैठा हुआ किसान, गरीब, उसको खाली झुनझुना पकड़ा देते हैं। उनको ललचाने के लिए खम्‍भे डाल देते हैं। वोट जब पड़ते हैं वहां तक वे खम्‍भे पड़े रहते हैं। जब उन गरीबों से वोट लेकर अपनी सत्‍ता बना देते हैं और उन खम्‍भों को वापस जहां से लाये हैं वहां रख देते हैं। ऐसा हमारी जनता के प्रति आप सभी ने जो कुठाराघात किया है यह कुठाराघात का प्रतिरूप स्‍वरूप ही है कि आप प्रतिपक्ष में बैठे हुए हैं। यह जनता ने निर्णय करके आपको सही निर्णय दिया। जनता के निर्णय को आपको मानना चाहिए और आगे आने वाले समय में यदि आप अपने में परिवर्तन कर सकें तो अपने आप में करें।

माननीय सभापति महोदय, कृषि के क्षेत्र में आज जो प्रदेश में कई ऐसे बड़े-बड़े संयत्र, कई कृषि अनुसंधान केन्‍द्र हमारे प्रदेश में हमारी सरकार ने लगाये हैं। मैं इस अवसर पर माननीय सभापति महोदय, आपके माध्‍यम से माननीय कृषि मंत्रीजी से निवेदन करना चाहता हूं कि मेरा विधान सभा क्षेत्र एक कृषि बहुल क्षेत्र है और उसका एक भाग रेलमगरा क्षेत्र जो कृषि क्षेत्र में एक बहुत जुड़ा हुआ है। मैं उस राजसमन्‍द रेलमगरा क्षेत्र में कृषि अनुसंधान केन्‍द्र की मांग करता हूं कि आप हमारे वहां पर एक कृषि अनुसंधान केन्‍द्र लगाएं ताकि हमारे कृषकों को जो उनकी आवश्‍यकताएं हैं, जो उनकी समस्‍याएं हैं उस अनुसंधान केन्‍द्र से वे अपनी पूरी कर सकें।

माननीय सभापति महोदय, कृषि के क्षेत्र में हमारी सरकार ने जिस प्रकार कृषि कार्य करते हुए यदि किसान किन्‍हीं कारणों से या ज़हरीले जानवर से या खेती कार्य करने से यदि मौत हो जाती है तो हमारी सरकार ने पचास हजार रुपये उस कृषक के परिवार को देने की जो व्‍यवस्‍था की है मैं इस बात के लिए भी माननीय कृषि मंत्रीजी को और हमारे माननीय मुख्‍य मंत्रीजी को बहुत-बहुत साधुवाद प्रेषित करना चाहता हूं। आपने एक परिवर्तन किया कि खेजड़ी से पड़ने पर ही, कृषि कार्य करने वाला, उसको जो सहयोग किया जाता है उसमें परिवर्तन आपने, खेजड़ी की जगह पेड़ किया है इसके लिए आपको बहुत-बहुत धन्‍यवाद क्‍योंकि हर क्षेत्र में खेजड़ी हो नहीं सकती और कई ऐसे पेड़ होते हैं, हमारे खेतों के ऊपर तो काम करते हुए यदि हमारा कृषक मौत के कगार पर चला जाता है तो उसको, उसमें आपने परिवर्तन किया, इसके लिए बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

(समय-समाप्ति-सूचक-घंटी)

 

माननीय सभापति महोदय, यह विषय, अभी कृषि ही है। दो विषय और हैं, मुझे समय दें। आज के बाद जितनी मांगें गयी है, मेरा पहला नम्‍बर है उसको प्‍लस करते हुए मुझे समय दें। अभी समय बहुत है इसलिए आप मुझे घंटी बजाकर, क्षमा करें। ऐसा नहीं करें।

श्री सभापति: अब आप पाँच मिनट में कंक्‍लुड कर दो।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): हां, माननीय सभापति महोदय, मैं निवेदन के साथ में कह रहा हूं। मैं तीन मांगों पर नहीं बोला हूं। मुझे प्‍लस करके समय दें।

श्री सभापति: पाँच मिनट में पूरा करें।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): माननीय सभापति महोदय, कृषि उपज मंडी समिति के मंडी क्षेत्र की सम्‍पर्क सड़कों के बारे में मैं कहूंगा। मेरे विधान सभा क्षेत्र राजसमंद रेजमगरा में कृषि, कृषि उपज मंडी की जो सम्‍पर्क सड़कें हैं जितनी भी प्रस्‍तावित हैं उन सभी सड़कों को आप स्‍वीकृति प्रदान कराएं। ऐसा मेरा आपसे निवेदन है।

माननीय सभापति महोदय, राजसमंद रेलमगरा क्षेत्र, मैंने पूर्व में कहा कि कृषि प्रधान क्षेत्र है। फल एवं बागवानी मिशन से मेरे इस क्षेत्र को आप जोड़ें ताकि इसमें हमारे किसान कहीं से लाभ ले सकेंगे। ऐसा मेरा आपसे निवेदन है। मेरे क्षेत्र में मैंने आपसे कई पशु चिकित्‍सालय के लिए निवेदन किया है और प्रस्‍तावित है। मैंने प्रस्‍तावित योजना, आपके समक्ष मैंने निवेदन किया है उन सबको स्‍वीकृति प्रदान कराएं, ऐसा मेरा आपसे निवेदन है।

माननीय सभापति महोदय, कृषि पर्यवेक्षकों की बहुत कमी है। मेरे क्षेत्र में कई कृषि पर्यवेक्षकों के पद रिक्‍त चल रहे हैं। उन रिक्‍त पदों को जल्‍दी से जल्‍दी भरा जाए। इसमें मैं एक सुझाव देना चाहता हूं कि जहां कृषि नहीं है और वहां कृषि पर्यवेक्षक लगे हुए हैं उन कृषि पर्यवेक्षकों को कृषि क्षेत्र में लगायें ताकि वह कृषि पर्यवेक्षकों के लिए ठीक रहेगा और किसानों के लिए भी ठीक रहेगा।

माननीय सभापति महोदय, पशुपालन हमारे देश का एक बहुत बड़ा ध्‍येय है।

 

spp/usc/14.40/2g/26.3.2007(1)

 

हमारे देश की सर्व देवमयी गौमाता, जो हमारे देश की एक पहचान है, जिसको हमारी संस्‍कृति ने माता माना है। मैं आपके माध्‍यम से माननीय कृषि एवं पशुपालन मंत्रीजी से निवेदन करना चाहता हूं कि जिसको हम संस्‍कृति में मानते हैं, सर्व देवमयी गौमाता मानते हैं और गौशालाओं में आप जितना अनुदान दे सकें, मैं तो इस अवसर पर यही कहना चाहूंगा कि मैं इस सदन में जिनकी बदौलत हूं, जिनके आशीर्वाद से हूं और जिनसे पहचाना जाता हूं, वह एक ही है मेरी गौमाता और गौमाता के हिसाब से मुझे जनता ने इस सदन में पहुंचाया है। मेरा आपसे करबत्र निवेदन है कि हमारे देश की गौमाता है, वेदों में भी साफ साफ लिखा हुआ है, यदि गौमाता को कोई कष्‍ट पहुंचाता है तो उसको शीशे की गोली से मार देना चाहिये। माननीय सभापति महोदय, इसलिए मैं सरकार से और आप सबसे करबद्ध निवेदन करना चाहता हूं कि जितना अनुदान ज्‍यादा से ज्‍यादा हो, सभी योजनाओं से कम से प्रतिशत ज्‍यादा हो, अनुदान दिया जाये। विधायक मद से गौशालाओं के सहयोग करने के लिये एक व्‍यवस्‍था होनी चाहिये कि हम गौशालाओं में विधायक मद से हम गौशालाओं की बाउण्‍ड्री, गौशालाओं का शेड आदि बनाने की हमें स्‍वीकृति प्रदान करें तो हम हमारे इन अधिकारों का सही उपयोग कर सकेंगे। माननीय सभापति महोदय, गौमाता के बारे में मैंने आपको बताया और सर्वसम्‍मति ...

श्री सभापति: अब आप समाप्‍त करें, प्‍लीज। अब बोल लिये आप ।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): अभी तो एक और विषय बाकी है हुक्‍म। माननीय सभापति महोदय, मैं आज निवेदन के साथ जिद करूंगा कि आप मुझे थोड़ा बोलने दें। कई दिनों से मैं तैयारी में हूं और इस सत्र में मैं पहली बार बोल रहा हूं तो आप भी मुझे थोड़ा प्रोटक्‍शन दें, थोड़ा सहयोग करावें। माननीय सभापति महोदय, इसमें अब ग्रामीण विकास के बारे में कहूंगा, मैं शार्ट कर देता हूं । अब ग्रामीण विकास के विशेष कार्यक्रम में आज हमारे इस प्रदेश में हमारे कई जिलो को रोजगार गारंटी से जोड़ा गया जबकि राजसमन्‍द जिले को नहीं जोड़ा गया है। मैं इस अवसर पर पंचायती राज मंत्रीजी से निवेदन करना चाहता हूं कि राजसमन्‍द जिले को रोजगार गारण्‍टी से जोड़ा जाये ताकि राजसमन्‍द एक ऐसा मार्बल बाहुल्‍य क्षेत्र है और कई बार हमारे मजदूर वर्ग इतनी संख्‍या में बढ़ जाते हैं कि हम वहां रोजगार नहीं दे पाते हैं इसलिए मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि राजसमन्‍द जिले को रोजगार गारण्‍टी में जोड़ने का प्रयास करावें।

माननीय सभापति महोदय, हमारे ग्राम सेवक, जो ग्राम सचिव होते हैं, जहां जहां भी स्‍थानीय जिले के हैं, उन सबको जो राजस्‍थान के किसी जिले में हैं जैसे राजसमन्‍द जिले का कोई हो तो उनको राजसमन्‍द जिले में ही कार्य दे दिया जाये, जैसे ग्राम सेवक हैं, हैण्‍डपम्‍प मिस्‍त्री हैं। इनको प्रायोरिटी अपने जिले में देंगे तो हमारा पंचायत राज का काम अच्‍छा होगा।

माननीय सभापति महोदय, मैं पंचायती राज मंत्रीजी से आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं कि विद्या भारती द्वारा संचालित आदर्श विद्या मंदिर के अंदर विधायक मद से हम जो राशि देना चाहते हैं। हमारे क्षेत्र में विद्या निकेतन है और जयपुर क्षेत्र में आदर्श विद्या मंदिर है । मेरा आपके माध्‍यम से पंचायती राज मंत्रीजी से निवेदन है कि आदर्श विद्या मंदिर एवं उसमें विद्या निकेतन और जोड़ दिया जाये ताकि हम हमारे विधायक मद से इन संस्‍थाओं को सहयोग कर सके।

माननीय सभापति महोदय, हमारे कई रेबारी भाई अलग अलग क्षेत्र में भेड़ लेकर जाते हैं तो उनको भी सरंक्षण देना चाहिये। उनके ऊपर कई विपदायें आती हैं इसलिए उनको भी सरंक्षण देना चाहिये।

माननीय सभापति महोदय, आपने मुझे इस अवसर पर जो एक ऐसे आम जनता से जुड़े हुए विषय में चर्चा करने का मौका दिया इसके लिये मैं आपका बहुत बहुत साधुवाद प्रेषित करता हूं। इन्‍हीं मंगल भावनाओं के साथ जय हिन्‍द। वंदेमातरम्।

श्री सभापति : धन्‍यवाद। माननीय श्री रिछपाल मिर्धा।

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): माननीय सभापति महोदय, आज सदन में मांग संख्‍या 37 एवं मांग संख्‍या 39 पशुपालन एवं चिकित्‍सा पर चर्चा हो रही है, मैं भी उसमें मेरे विचार रखना चाहूंगा। आज राजस्‍थान में मैं किसी पर आरोप-प्रत्‍यारोप नहीं करूंगा, आज राजस्‍थान में अगर सबसे ज्‍यादा दु:खी है तो किसान है। कैसे है, सभापति महोदय, अब इसी साल का आप देख लें। इस साल जब फसल पककर तैयार होने वाली थी और अब की इस फसल में कोई बीमारी नहीं थी, उस समय ऐसी ओलावृष्टि हुई और ऐसी बारिश हुई कि इस प्रदेश के जिन इलाकों में फसल थी, वह तबाह हो गयी । हालांकि मैं यह भी कहना चाहूंगा कि राज्‍य सरकार ने उनको मदद दी है, दूसरे पैकेज की भी घोषणा हुई है, वह कब जारी होगा, यह तो आगे आने वाले समय में पता लगेगा। सभापति महोदय, मेरे से पूर्व वक्‍ता कह रहे थे कि राजस्‍थान का किसान निहाल हो गया, राजस्‍थान का किसान तरक्‍की कर रहा है, राजस्‍थान का किसान खुशी में है। सभापति महोदय, मैं आपको यह बात कहना चाहता हूं कि आज राजस्‍थान के किसान की फसल का उचित मूल्‍य उसको दिलाने में कई सरकारें बदली हैं पर व्‍यवस्‍थाएं नहीं बदली हैं। सरकार बदलती है, व्‍यवस्‍था वही रहती है। मैं किसान की हिमायत उस सरकार को मानता हूं जो किसान की उपज का विधान सभा में कानून बनाकर उसको उपज का सही मूल्‍य दिला दे। वह किसान की‍हिमायती सरकार है। सभापति महोदय, अभी पिछले वर्ष जब राजस्‍थान सरकार की तरफ से एक कृषि अध्‍ययन दल इजरायल गया था तो हम भी कांग्रेस के तीन माननीय सदस्‍य रामगढ़ से आने वाले सदस्‍य, खण्‍डेला से आने सदस्‍य एवं मैं, माननीय मुख्‍य मंत्रीजी और माननीय नेता प्रतिपक्ष की तरफ से जाने का मौका मिला था। सभापति महोदय, इजरायल में जो खेती देखी, उस खेती का हम तो अदांज लगाते हैं, वह तो हम 100 साल में नहीं कर सकते। जो वहां की तकनीकी देखी, जो वहां के फ्रूट्स देखे, खेती देखी, उगा हुआ धान देखा, आज मैं आपके माध्‍यम से मंत्रीजी से यह निवेदन करना चाहता हूं कि वैसी तकनीकी के बारे में यहां पर प्रचार-प्रसार हो, वह तकनीक आये। कम पानी में किसान ज्‍यादा पैदावार कैसे ले सके और वह फव्‍वारा सिस्‍टम और वह पानी की एक बूंद का भी खराबा होते नहीं देखा। आज यहां देखो धोरो में पानी जाते जाते आधा पानी क्‍यारी में पहुंचता है, आधा उससे पहले समाप्‍त हो जाता है तो कई बातें वहां देखीं। सभापति महोदय, जो काश्‍तकार के हित की बातें हैं, मंत्रीजी और माननीय अध्‍यक्षजी भी हमारे साथ थे, वहां एक बूंद, जो जैतून के प्‍लाण्‍टेशन में हमने देखी तो उसमें यह नहीं लग रहा कि यह पानी कहां से पी रहा है । सभापति महोदय, उस इजरायल की तकनीक के बारे में मुझे पता नहीं माननीय मंत्रीजी के पास दोनों ही महत्‍वपूर्ण विभाग हैं, जो राजस्‍थान के किसान से संबंध रखते हैं, मंत्रीजी ने जरूर प्रयास किये होगें, इनके नीचे के अधिकारियों ने किये होंगे। मैं इन पाँच-सात सालों की बात कह रहा हूं, इनके विभाग के अधिकारी करीब करीब लगभग पूर्ण रूप से निष्क्रिय लग रहे हैं। आज प्रचार-प्रसार की कमी है। जो योजनाएं बनती हैं उनका लाभ किसान तक नहीं पहुंचता। आज तीन तरह के किसान हैं। एक तो जो शौक से खेती करता है, उसको फर्क नहीं पड़ता, उसकी खेती जल जाये या उसमें कुछ नुकसान हो जाये। एक तो हकीकत में काश्‍तकार हैं जिसके पास 10-20 बीघा जमीन है, मध्‍यम श्रेणी का काश्‍तकार है, उसको फर्क पड़ता है, माननीय सभापति महोदय, क्‍योंकि 75 प्रतिशत लोगों का इस खेती और पशुपालन पर जीवन-यापन निर्भर करता है।

 

Msr/usc/1450/2h/26032007

 

 

आज गांव में जाकर दशा देखें लोगों की, किसानों की, उनके खाने-पीने लायक साधन बचा है कि नहीं बचा है। इस ओलावृष्टि से जो नुकसान हुआ यह वर्षों से जिसका तो अब ऊपर वाला मालिक है, सभापति महोदय, सरकार जितनी मदद कर सकती है करती है पर मैं आपके माध्‍यम से यह कहना चाहता हूं कि जो इजराइल में तरीका देखा है, कुछ बातें ऐसी राजस्‍थान के किसानों को नहीं बतायेंगे, पश्चिमी राजस्‍थान का तो मैं कह सकता हूं, सभापति महोदय, करीब-करीब काश्‍तकार कंगाल हो चुका है।

सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं कि यहां खेती के लिए जो बातें अभी मेरे से पूर्व दो ही वक्‍ता बोले थे, उन्‍होंने भी बतायी, में ज्‍यादा विस्‍तार से नहीं कहना चाहता, जो माननीय सदस्‍य खेती से सम्‍बन्‍ध रखते हैं उनको भी सब प्रकार की जानकारी है, आपको भी है, आप भी ग्रामीण इलाके से आते हैं, आपको पूर्ण रूप से जानकारी है। मैं इस सम्‍बन्‍ध में यही कहना चाहता हूं कि जो पानी का लेवल आज है, मैं मेरे जिस जिले से आता हूं उसमें तो, सभापति महोदय, पैदावार का प्रतिशत दिन प्रति दिन घट रहा है, पानी खराब हो गया, पीने लायक पानी नहीं है, उपज कम हो गयी, काश्‍तकार पैदा करे तो पैदा हो नहीं, खेत खराब होने लग गये। इस सम्‍बन्‍ध में सरकार अगर काश्‍तकारों की कोई मदद कर सके तो ऐसी योजना बनाये जिससे छोटे टुकड़ों में खेती कर के काश्‍तकार उस उपज को ज्‍यादा पैदावार कर के उपज काक मूल्‍य ले सके।

सभापति महोदय, गेहूं पाँच क्विंटल पर बीघा आता है 3500 रुपये उसमे खर्चा होता है, रायड़ा तीन क्विंटल प्रति बीघा आता है उसमें 3000 रुपये खर्चा आता है, ईसबगोल तीन क्विंटल पर बीघा और उसमें 8500 रुपये खर्चा आता है, जीरा एक से दो क्विंटल और 5500 रुपये खर्चा आता है, चना दो क्विंटल 3000 रुपये खर्चा आता है। तो, सभापति महोदय, काश्‍तकार को जब तक अपनी उपज का सही मूल्‍य नहीं मिलेगा जब तक प्रदेश तरक्‍की नहीं करेगा, देश तरक्‍की नहीं करेगा और देश और प्रदेश की तरक्‍की का रास्‍ता खेत और खलिहान से ही निकलता है। किसान की जब में कुछ होगा तो वह बाजार में आयेगा अन्‍यथा प्रदेश और देश कंगाल होते जायेंगे।

सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से यह भी निवेदन करना चाहूंगा कि जितने नकली बीज बिक रहे हैं उनकी रोकथाम होनी चाहिए। नकली खाद बिकती है, उन पर रोक लगनी चाहिए और जो यह कालाबाजारी कर के माल बाजार में पहुंचाते हैं उनके खिलाफ पुलिस में मुकदमे करनी चाहिए और उनको कड़ी से कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए।

सभापति महोदय, अब मैं जिस जिले से आता हूं, राजस्‍थान में पाँच करोड़ से अधिक पशुधन है और राजस्‍थान में दस पशु मेले लगते हैं, मुख्‍य पशु मेले दस लगते हैं, इसमें से तीन हमारे नागौर में लगते हैं और वो मेले बर्बाद होने का मुख्‍य कारण है कि पिछले दस वर्षों से मैं यह मांग कर रहा हूं 2000 में एक हाई कोर्ट से रोक लगी थी कि तीन साल तक कम उम्र के बछड़े को बाहर नहीं ले जाया जा सकता, तो सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्रीजी से यह निवेदन करूंगा, संसदीय कार्य मंत्रीजी भी विराजमान हैं, यह निवेदन करूंगा कि पश्चिमी राजस्‍थान के किसान का जीने-मरने का सवाल है, अगर आज भी उस कमेटी में यह फैसला कर के उस कानून में संशोधन कर दें कि तीन साल से कम उम्र का बछड़ा बाहर का है, हमारे जो बछड़े बाहर जाते हैं सब खेत के लिए जाते हैं। नागौर के बैलों की जोड़ी एक लाख से लगा कर 30 हजार तक बिकी हुई है और नागौर के बैल या नागौर का बछड़ा कभी भी आज तक कटने नहीं गया। मैं आपको यह विश्‍वास दिलाना चाहता हूं, सभापति महोदय, जो भी बछड़ा मेले से बिक कर जायेगा वो खेती के लिए आयेगा। राजस्‍थान के मेलों में, नागौर के मेलों में, सभापति महोदय, महाराष्‍ट्र के व्‍यापारी आते, उत्‍तर प्रदेश के व्‍यापारी आते, हरियाणा के व्‍यापारी आते, गुजरात के व्‍यापारी आते, इतने प्रसिद्ध मेले थे, गाय की वैसे ही दुर्दशा हो गयी, माननीय सदस्‍य अभी कह रहे थे कि वहां तो गाएं लोगों ने पहले ही छोड़ दी थी अब इस बछड़े की रोक लगने से जब बछड़े खरीदते ही नहीं हैं तो कौन गाय पालेगा? तो मेरा, सभापति महोदय, आपके माध्‍यम से मंत्रीजी से यह विशेष रूप से निवेदन है कि आप इसमें संशोधन कर के जो रोग लगी हुई है उसको हटाने का काम करे तो हमारे मेले वापस बहाल हो सकते हैं।

सभापति महोदय, डेयरी के बारे में निवेदन है कि हमारे नागौर जिले का दूध ...

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): इसमें यह प्रमाणित हो कि वह कत्‍लखाने में नहीं जाए। कैसे प्रमाणित करेंगे?

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य।

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): नहीं जाती है। ...(व्‍यवधान)...

माननीय सदस्‍य, हमारे जिले का बैल, गाय और बछड़ा कभी आज तक कटने नहीं गया।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): यह हमें प्रमाणित करना पड़ेगा। विश्‍वास के साथ में करना चाहिए।

श्री सभापति: आप विराजो।

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): प्रमाणित का अधिकार आपको दे देना, सभापति महोदय, आप कर देना।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): नहीं, यह आपको, हम सब को देना है।

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, आप विराजें।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द):  सभापति महोदय, मेलों में कई ऐसे लोग जरूर आते हैं अहमदाबाद और मुम्‍बई से कत्‍लखानों के लोग आते हैं और वो बछड़ों को डबल स्‍तर पर अपने स्‍थानों में ले जाते हैं और निर्ममता से ले जाते हैं और उनका वध कर दिया जाता है।

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, मंत्रीजी अपने आप सक्षम हैं, वो अपने आप जवाब दे देंगे, आप विराजो।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): इसलिए, सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से इनको कहना चाहता हूं कि कम से कम यह प्रमाणित हो कि वो कत्‍लखाने में नहीं जाएं।

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): माननीय सदस्‍य, मैं आपकी बात का खुलासा कर देता हूं, जो ले जाते हैं वो लोग हैं साटिये, सांसी और अन्‍य यह कोई छोटे लोग जो लेते हैं 500, 700 रुपये की खरीद करते हैं, दस हजार से लगा कर एक लाख खरीद करने वाला व्‍यापारी नहीं है। मैं यह निवेदन कर रहा हूं और इस नस्‍ल के हमारे जो नागौर के बैलों की नस्‍ल है वो हिन्‍दुस्‍तान में मशहूर है, आज तक कटने नहीं गया और पश्चिमी राजस्‍थान में किसानों का मुख्‍य धंधा है तो खेती और पशुपालन है इसलिए मैं निवेदन कर रहा हूं।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): कम से कम आप संतुष्‍ट हो जाएं कि यह कत्‍लखाने में नहीं जा रहा है तो हमें विश्‍वास है।

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, विराजें।

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): मैं पूर्ण रूप से संतुष्‍ट हूं। मैं आप से ज्‍यादा गाय को मानता हं, मैं तीन गोशाला चलाता हूं। आप आकर देखना मेरे यहां कभी कि कैसे गाय रखते हैं और कैसे 800 गाएं रखते हैं, तीन गोशाला चलती है मेरे यहां ...(व्‍यवधान)... हां।

तो, सभापति महोदय, यह मांग मैं नहीं करता कि जो कटने जाते हैं उनको, मैं तो यह मांग करता हूं कि जो कृषि योग्‍य बछड़े हैं उन पर जो रोक लगी है उसको हटा दें तो पश्चिमी राजस्‍थान का किसान काक जो आमदनी का जरिया है, पेट पालने का जरिया है वो बहाल हो सकता है। यह निवेदन है मेरा।

सभापति महोदय, अब मैं डेयरी से सम्‍बन्धित कुछ सुझाव माननीय मंत्रीजी को देना चाहूंगा कि आज नागौर जिले में खेती गयी, पशुपालन कम हो गया तो अब लोग दूध बेच कर के अपना जीवन-यापन करने में लगे हुए हैं। नागौर का दूध आधा अजमेर जिले में जाता है, आधा जोधपुर में जाता है तो, सभापति महोदय, में आपके माध्‍यम से यह निवेदन करूंगा कि जो मुख्‍य सेण्‍टरहै मेरा क्षेत्र डेगाना वो अजमेर के नजदीक है और उसमें डेयरी की उत्‍पादक संघ की स्‍थापना की जाए ताकि उसका लोगों को, छोटे किसानों को फायदा मिले एवं दूध वहां देकर अजमेर भेज सकें। आधा जोधपुर पहले ही जा रहा है तो इससे जो लोग दूध बेचने वाले हैं उनको काफी फायदा मिलेगा।

मैं आपके माध्‍यम से यह भी निवेदन करना चाहता हूं, सभापति महोदय, जब हमने इजराइल में मंत्रीजी का ज्ञान देखा तो मैं तो, मेरे खुद के व्‍यक्तिगत विचार हैं कि मंत्रीजी को कृषि और पशुपालन के बारे में पूरी जानकारी है और मंत्रीजी को लगन भी है कि राजस्‍थान के किसान के लिए, राजस्‍थान के पशुपालन के लिए कुछ कर के दिखाएं। अब अंत में मैं आपके माध्‍यम से यही निवेदन करता हूं कि डेढ़ साल का समय मंत्रीजी के पास बचा है अगर मंत्रीजी को काश्‍तकार का बेटा होने का कोई झण्‍डा ऊँचा करना है तो यह कर के दिखाएं कि राजस्‍थान के किसानों के लिए और राजस्‍थान के पशुपालन के लिए मैंने यह-यह काम किये हैं तो राजस्‍थान की जनता और पश्चिमी राजस्‍थान का किसान हमेशा इनको याद रखेगा।

सभापति महोदय, में इतना ही कह कर मेरी बात समाप्‍त करता हूं, आपने जो समय दिया उसके लिए मैं आपका आभरी हूं। धन्‍यवाद।

श्री सभापति: धन्‍यवाद। श्री भंवरलाल राजपुरोहित।

डा. भंवरलाल  राजपुरोहित (मकराना): सभापति महोदय, आज कृषि, पशुपालन और ग्रामीण विकास के सम्‍बन्‍ध में मांग पर विचार हो रहा है। सभापति महोदय, यह देश किसान, कृषि प्रधान देश है। मैं भी एक कृषक हूं। एक बात बिलकुल सही है कि राजस्‍थान हो चाहे देश हो, कृषि के मामले में जो हम कृषक हैं वो हमेशा ही माइनस में रहते हैं। आज तक कोई भी सरकार यह बात तय नहीं कर सकी कि काश्‍तकार जो खेती करता है उसकी खेती में जो धान पैदा होता है उसकी कोस्‍ट काई भी निर्धारित नहीं कर पाया और उसके अनुकूल कभी उसके भावों को निर्धारित नहीं कर पाया। जो काश्‍तकार धान पैदा करता है उसके लेवल से लगा कर, सूड़ से लगा कर के, बीज से लगा कर के तब तक जितना खर्चा पड़ता है यह बिलकुल तयशुदा बात है कि यह सब से खर्चिला मामला है और आज तक यही कारण है कि छोटे किसान आज तक दब कर के रहे।

 

Ars/usc/2j/1500/26032007/1

 

मैं तो उस सरकार को प्रगतिशील सरकार मानता हूं जो सरकार इन काश्‍तकारों के बारे में विचार करे। हमारी सरकार में यह बिल्‍कुल सत्‍य बात है पिछली सरकार में मैं खुद एक काश्‍तकार हूं, मुझे मालूम है कि बीज के मामले में मैं खुद भुक्‍तभोगी हूं, मेरे पास काफी जमीन है, हम हमेशा ही हताश हैं कि जो भी बीज उन्‍नत बीज के नाम से दिया उसमें हमेशा गड़बड़ी निकाली और हम तो कह कहकर थक गये, किसी ने पैनल्‍टी नहीं की। जितनी भी उन्‍नत बीज के नाम से जो दुकानें थीं या इन्‍सेक्टिसाइड्स थे वह सारे के सारे, अधिकांश दुकानें जो हैं पता नहीं क्‍या मैनिपु‍लैटिंग करके हमने कई अफसरों को पकड़वाया भी है इसमें, उन्‍होंने बीज गलत दे दिया । यदि किसान को बीज गलत दे दिया जाता है तो उसके तो कर्म फूट जाते हैं। बीज जब उगता ही नहीं है तो उसकी तो सारी मेहनत विफल हो जाती है। हमारी सरकार ने उन्‍नत बीज इतना अणगुणत बीज सप्‍लाई किया है वह है विशेष अभियान सरसों में टारगेट बीस हुए, एक सौ पचास पर्सेण्‍ट उन्‍नत कृषि बीजों की जानकारी दी है, यह था उनका कि जन जन तक लाभ पहुंचे ।

इस सरकार ने सबसे बड़ा काम यह किया कि जल चेतना यात्रा और यह कृषि अभियान जो चलाया गया, यह सरकार ने पहला काम किया, गांव गांव, ढाणी ढाणी तक इस प्रोग्राम को पहुंचाया। उसमें कई बातों का पता लगाया कि जमीन की किस्‍म क्‍या है, यह बहुत बड़ा एक सर्वे हुआ राजस्‍थान में कौनसी किस्‍म की जमीन है, इस जमीन में कौनसा बीज काम में लिया जा सकता है और इसमें कौन कौनसी जमीन में क्‍या क्‍या मैन्‍युअल की जरुरत पड़ेगी, यह सारा का सारा इस पूरे अभियान के अन्‍दर जो सरकार ने चलाया। पहली सरकार ने आज तक इस बात पर ध्‍यान नहीं दिया। मैं आपसे कहता हूं पानी आज इतना नीचे चला गया है, मेरे नागौर जिले में तो एक हजार फुट पानी चला गया है, इतना गहरा पानी, इससे इर्रिगेशन करने में हमको बड़ी मुश्किल आती है। तो इस सरकार ने कई उन्‍नत बीजों को अबके बंटवाया है और पहले की सरकार के मेरे पास आंकड़े हैं, तीन गुना तो इन्‍होंने उर्वरक बांटा है, तीन गुना से ज्‍यादा इन्‍होंने उन्‍नत बीज बांटा है। यह इस बात का द्योतक है कि सरकार कृषि की ओर कितना ज्‍यादा ध्‍यान देती है। कौन मना कर रहा था इनको बीज बांटने में, कौन मना कर रहा था पहले वाली सरकार को कि आप अच्‍छा बीज मत बांटो लेकिन इन्‍होंने इस ओर ध्‍यान नहीं दिया और अपने आपको कृषि विशेषज्ञ मानते थे।

मैं तो यह मानता हूं कि यह हमारे लिए सौभाग्‍य की बात है कि इस सरकार ने बहुत ही विद्वान मंत्री को जो कृषक के घर से पैदा हुआ है उसको यहां मंत्री बनाया है, उसको इस बात की चीस है, उसको इस बात की कशिश है कि मेरे विभाग में कुछ होना चाहिए । तो मैं सरकार को यह बात कहना चाहता हूं ...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): यह आपने महावीर जी और नाथूसिंह जी से पूछ लिया ना ?

डा. भंवरलाल  राजपुरोहित (मकराना): नहीं, उनका मामला और हो सकता है लेकिन पर्सनली जानता हूं, उनकी कुछ ग्रिवेन्‍सेज हो सकती हैं अलग लेकिन मैं इस बात को जानता हूं कि हमारा कृषि मंत्री, मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि आज इस सदन में जो बैठे हैं उनमें कृषि के बारे में यदि कोई जानता है तो उनका नाम प्रभुलाल सैनी है। यहां मैं इस बात को जानता हूं क्‍योंकि मैं खुद एक कृषक हूं, क्‍योंकि इन्‍होंने हर बात में पेन लिया है। केवल कृषि में क्‍या, आपके फलों में क्‍या, आपके बागवानी में क्‍या, हर मामले में इन्‍होंने इन्‍ट्रेस्‍ट लिया है । इसलिए उन्‍होंने जो आज तक इस मामले में वृद्धि की है, आपके आंकड़ों में वृद्धि हुई है और कार्य में वृद्धि हुई है, हमको अच्‍छा बीज मिला इस साल, हमको अच्‍छा खाद मिला इस साल। इसलिए यह कौन कह सकता है कोई आदमी यह नहीं कह सकता, आप विपक्ष वाले भी यह बात नहीं कह सकते। मैं आंकड़ों से साबित कर सकता हूं कि इन्‍होंने बीज अच्‍छा दिया, अब की साल अच्‍छा उर्वरक दिया। खेती में दो चीजें होती हैं । एक तो अच्‍छा बीज और वर्षा तो भगवान के हाथ में है, इर्रिगेशन भगवान के हाथ में है। दो चीजें सरकार दे सकती है, बीज दे सकती है और उर्वरक अच्‍छी दे सकती है तो सब कुछ हो सकता है, मेहनत करने वाले तो हम हैं ।

इसलिए माननीय सभापति महोदय, मैं कृषि मंत्री जी को बहुत बहुत धन्‍यवाद देता हूं कि इन्‍होंने विशेषकर कृषि विषय में अपना बहुत योगदान दिया है और यहां के कृषक उनके बहुत ही आभारी हैं । एक मेरी पर्सनल शिकायत यह है कि यह जितने भी इजरायल गये थे, मैं खुद खेती करता हूं, मैं ट्रेक्‍टर से खुद खेती करता हूं, मेरे पाँच सौ बीघा जमीन है और मैं कृषि के बारे में बहुत ज्‍यादा जानता हूं लेकिन मुझे इन्‍होंने इजरायल नहीं दिखाया, यह तो मेरी पर्सनल शिकायत हो सकती है, मैं असली काश्‍तकार हूं और मैं इस बात को जानता हूं ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय सदस्‍य, पाँच सौ बीघा जमीन कैसे हो सकती है सीलिंग के अन्‍दर ...(व्‍यवधान) सीलिंग से ज्‍यादा जमीन ले रखी है आपने, आप स्‍वीकार कर रहे हो यहां सदन में ...(व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): मैं भी उससे वंचित रह गया।

श्री सुरेश मीणा (करौली): पाँच सौ बीघा जमीन किसी के हो नहीं सकती, सीलिंग में लग जाए वह जमीन ...(व्‍यवधान)

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य।

डा. भंवरलाल  राजपुरोहित (मकराना): मैं इसको डिनाई नहीं कर सकता। वह मेरे दादा तीन पोतों के नाम पहले कर गये थे पर वह है मेरी, मैं झूंठ क्‍यों बोलूं मेरे दादा ने दे दी थी जमीन तो मेरे पास है, सही है, मेरे दादा ने तीन जगह बांट दी थी। जमीन तो बंट गई लेकिन मैं हूं आज भी उसका मैं मालिक हूं लेकिन मैं एक बात कहना चाहूंगा, मैं कृषि के बारे में ज्‍यादा जानता हूं। इसलिए मेरा निवेदन यह है कि मेरी कोई ग्रिवेंस नहीं लेकिन मैंने एक बात के हिसाब से कह दिया ...(व्‍यवधान) मैं कृषि मंत्री जी आपको कहना चाहूंगा, आप यहां अच्‍छी टेक्निक, जानकारी आप यदि ट्रेन्‍ड करें तो वास्‍तव में काश्‍तकारों को ट्रेन करें ...(व्‍यवधान) मैं आपकी सेवा में हाजिर हूं मैं व्‍यक्तिगत रूप से ....

श्री सभापति: माइक को सामने रखें।

डा. भंवरलाल  राजपुरोहित (मकराना): यह माइक मुझे छोटा पड़ता है माननीय सभापति महोदय,  एनीमल हस्‍बैंड्री के बारे में बात करना चाहता हूं। पशुपालन के बारे में मेरा स्‍पष्‍ट कहना यह है कि सरकार इस बात का पूरा ध्‍यान दें आज कि एक टेन्‍डेंसी हो गई है पूरे राजस्‍थान में या पूरे हिन्‍दुस्‍तान में कि यह गाय और भैंस जो हैं यह अनइकोनोमिक हैं और अनइकोनोमिक होने से आज चारा बहुत कम लोगों को यहां के सत्‍तर प्रतिशत लोगों को पता नहीं कि चारे का क्‍या भाव है, आज लूंग आता है दो सो रुपये मण का भाव है, कुतर भी आती है एकसौ पचास रुपये मण का भाव है अब चार रुपये किलो कोई आदमी गाय को खिलाकर जिंदा रख सकता है क्‍या ? यह या तो उसमें कट्टर धार्मिकता है वह जैसा बंशीलाल जी भाई कह रहे थे वह या जिसके पास थारपारकर ब्रीड हो तो अन्‍यथा तो हमारी नागौरी गाय जो राजस्‍थान में नहीं इण्डिया का सबसे अच्‍छा पशुधन, जो अच्‍छा सबसे बढि़या बछड़ा होता है, सबसे सुन्‍दर बछड़ा हमारे नागौर डिस्ट्रिक्‍ट में नागौरी गाय का होता है तो नागौरी गाय का बछड़ा तो बहुत अच्‍छा होता है लेकिन हालत यह हो गई है कि जैसे कि हमारे यहां अभी मिर्धा जी कह रहे थे, आज नागौर का बछड़ा बिकना बंद हो गया, दो साल से एक रोक लग गयी कि इसको काटते हैं। इसलिए काटने के नाम से मैं खुद भुक्‍तभोगी हूं । हमारे तीन बड़े बड़े पशु मेले भरते हैं नागौर में और यह जानकर के एक दो जने जिसको कहें साठिये हो सकते हैं बागरे हो सकते हैं लेकिन इसके नाम से एक ऐसी रोक लगा दी कि पशु वहां पर मेले में बिकना बंद हो गया। आज डेढ़ साल के टोगडी को कौन पाले, महीने का दो हजार रुपये का चारा कौन खिलाए, इसलिए वह अनइकोनोमिक हो गया। यह बहुत बड़ा बुलक जो है वह बुलक हमारा आज नाकाम हो गया।

इसलिए सरकार को चाहिए कि इस पर ध्‍यान दे। हमारे दो बड़ी बड़ी ब्रीड है उनको डवलप करें, उसका इन्‍सेमीनेशन करावें, मुझे फक्र है कि हमारे मन्‍त्री जी ने बहुत इस साल में तीन गुणा इन्‍सेमीनेशन करवाया, जो पिछली सरकार के इन्‍सेमीनेशन हुए थे, मैं एक बात कहता हूं, आपको रोक कौन रहा था, आपने यह कार्य क्‍यों नहीं किया, आपके क्‍या सरकारी अमला नहीं था, आपके पास लैबोरेट्री नहीं थी क्‍या, आपके पास डाक्‍टर वहां अवेलेबल नहीं थे क्‍या, यह काम मैं अभी आंकड़ों के हिसाब से कह रहा हूं, यह काम तो आप ही करवा सकते थे, यह सरकार तिगुना काम करवा रही है। यह तो एक उपलब्धि है और एक दो गलती हो जाती है उस पर आप लोग इतना इसको एक्‍सपोज करके कहते हैं । एक घर की हमारी अर्द्धांगिनी है हमारी औरत यदि खाना बनाती है और पन्‍द्रह फुलके अच्‍छे बनाती है और यदि एक फुल्‍का जल जाए भूल से अनजाने से तो क्‍या उसको यह कहना चाहिए कि तू तो *** है, तू नालायक है, तेरा मान मामला खराब है, यह कोई बात हुई, एक छोटी सी गलती से छोटी सी चीज को इतना बड़ा हाइलाइट करके आप यह कहते हैं जैसे कोई उपलब्धि हो ही नहीं। यह उपलब्धि तो आपके सामने है, इतने बुलक आये, इतने इन्‍सेमीनेशन हुए, इतना कास्‍टेशन हुआ, इतना एलोकेशन हुआ, यह आपके सामने है। आपके पास तो सारी बुक्‍स सामने हैं।

इसलिए मैं कहना चाहूंगा कि मैं सरकार को धन्‍यवाद देता हूं और मंत्री जी को विशेष धन्‍यवाद देता हूं कि उनकी मानी‍टरिंग बहुत बढि़या है, हमारी सरकार की मानीटरिंग बहुत बढि़या है, यह बहुत बड़ी उपलब्धि है।

मैं डवलपमैंट के बारे में निवेदन करना चाहता हूं डवलपमैंट विभाग जो है उनके मंत्री हमारे बड़े सजग हैं। आज तक कई मामलों में इतना पैसा लगाया। जैसे आज बी पी एल में, हमारे बी पी एल की सेंट परसेंट उपयोगिता है, रोजगार गारंटी की उपयोगिता है। मैं ज्‍यादा आंकड़ों में इस सदन को नहीं उलझाना चाहता, मैं एक ही बात कहना चाहता हूं, आज पंचायत राज का जो ढांचा है, थोड़ा उसको आपको आधारभूत सुधारना पड़ेगा। आज पंचायत राज ढांचे में मैं जो सबसे बड़ी कमी देख रहा हूं, हर पंचायत समिति में ग्राम सेवक कम हैं, ग्राम सेवक ऐसे आ गये, कोई तो फोरेस्‍टर आ गया, कोई नाकेदार आ गया, कोई चुंगीदार आ गया जिनको पंचायत राज की और डवलपमैंट की ए बी सी का पता नहीं और पंचायत के नियमों का पता नहीं जो पंचायत का सैक्रेटरी बना बैठा है और स्थिति यह हो गयी है कि वहां आदमी नहीं होने से, वहां ग्राम सेवक आठ आठ, दस दस कम होने की वजह से पंचायत राज पंगु हो गया है। आप इसमें विशेष ध्‍यान दें।

मैं मुख्‍यमंत्री होती तो निवेदन करता, आपने पटवारियों की संख्‍या बढ़ाई है, आपने फोरेस्‍टर की संख्‍या बढ़ाई है, आपने सिपाही की संख्‍या बढ़ाई है, आपको ग्राम सेवक जो हैं बहुत ज्‍यादा लेने चाहिए थे, ग्राम सेवक के बिना पंचायत नहीं चलेंगी। एक एक ग्राम सेवक को चार चार पंचायतें, अलॉटमैंट वह कुछ कर नहीं सकते और वह बिल्‍कुल अनभिज्ञ हैं इसलिए पंचायतें पंगु हुई हैं। मैं एक बात यह भी निवेदन करना चाहता हूं , मैं 18 साल प्रधान रहा हूं, मुझे मालूम है कि पंचायत समिति क्‍या समिति क्‍या होती है, पंचायत समिति में 73 वें संशोधन करने के बाद आपने यह पंचायत समिति के मैम्‍बर बनाये.....

 

vns/usc/15.10/ 2k/26.3.2007/1

 

एक पंचायत समिति का सदस्‍य तीन पंचायतों में से बनता है और उसको आप क्‍या देते हो, फाइनेंशियल खर्चे के लिये क्‍या अधिकार है उसको ? 70,000 रुपये। बहुत कम है। आज जिला परिषद् का सदस्‍य जिसके कम से कम 20 पंचायत होती है वह आधी विधान सभा के वोटर्स के वोट लेता है। उसको एक लाख देते हो या डेढ़ लाख रुपये देते हो। मैं सरकार से निवेदन करना चाहता हूं कि ऐसा तो नहीं चलेगा। इससे पंचायत राज पंगु हो जायेगा। पंचायत राज संस्‍थाओं को अपने को मजबूत करना पड़ेगा। पंचायत राज संस्थाएँ हमारी स्‍तम्‍भ हैं। पंचायत राज, ठेठ पंचायत राज यदि इनकी सहभागिता होगी, आज पंचायत का वार्ड पंच तगड़ा होगा, यदि पंचायत राज का सरपंच तगड़ा होगा, यदि प्रधान और जिला परिषद् के सदस्‍य तगड़े होंगे तो आपका पंचायत राज सुदृढ़ बनेगा। इसलिये मैं सरकार से निवेदन करना चाहता हूं कि इस पर ध्‍यान दें। यह ध्‍यान रखने की बात है। इनके मानदेय बढ़ाने की कृपा करें। क्‍योंकि आप म्‍युनिसपेलिटी के मैम्‍बर को जो रुपये देते हो, मानदेय देते हो उससे आधा पंचायत समिति सदस्‍य को देते हो। जिला परिषद् की तो बात ही नहीं कर रहे हो आप।

(समय समाप्ति सूचक घण्‍टी)

मैं विकास के बारे में बहुत कुछ कहना चाहता था लेकिन निवेदन मेरा इतना ही है कि हमारी योजनाएं बहुत सफलतापूर्वक हैं। हमारी राजस्‍थान सरकार हर मामले में, मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि हम विकास की तरफ बढ़ रहे हैं। हमारा राजस्‍थान दो साल में, कहते हैं कि यह तो एक उदाहरण ही है दो साल में तो हम आपको बहुत करके दिखायेंगे। सरकार किसको कहते हैं वह साबित हो जायेगा। मैं मानता हूं कि हमारी सरकार जनता की सरकार है और जनता को आगे ले जायेगी। हर समूह को, हर व्‍यक्ति को, हर पंगु को, हर लूले को, हर बच्‍चे को, हर लड़की को, हर बुड्ढ़े को, हर परित्‍यक्‍ता को, सरकार ने किसको नहीं टच किया है ? सरकार ने बहुत कुछ काम किया है और सरकार बहुत काम करेगी। आपने मुझे मौका दिया इसके लिये बहुत-बहुत धन्‍यवाद। जय हिन्‍द।

श्री सभापति: बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

श्रीमती प्रतिभा सिंह (नवलगढ़): माननीय सभापति महोदय,  माननीय सदस्‍य  बोल रहे थे उन्‍होंने *** शब्‍द का प्रयोग स्त्रियों के लिये किया, वह बहुत अशोभनीय, असंसदीय है। कृपया उसको कार्यवाही से निकाला जाए। 

डा. भंवरलाल  राजपुरोहित (मकराना): हम लोग कहते हैं। गुस्‍से में औरतों को कह देते हैं ... (व्‍यवधान) 

श्रीमती प्रतिभा सिंह (नवलगढ़): नहीं वह आप जैसे भद्र पुरुष, इतने पढ़ें-लिखे एज वाइज सीनियर स्त्रियों के लिये ऐसे शब्‍दों का प्रयोग करेंगे तो इस मातृ शक्ति का क्‍या होने वाला है यह बताइये।

डा. भंवरलाल  राजपुरोहित (मकराना): गांव में बहुत कहते हैं, अब उसको क्‍या कहो, यह तो उनकी भाषा है। वह तो सिर्फ बात है। स्त्रियों को जानते हैं हम ... (व्‍यवधान) वह तो इकरार नहीं है यह तो भावना की बात है।

श्री सभापति: अगर इस प्रकार का शब्‍द आया है तो वह कार्यवाही से निकाल दिया जायेगा। माननीय श्री रामलाल शर्मा।

श्री रामलाल शर्मा (चौमूं): माननीय सभापति महोदय,  आज राजस्‍थान के लगभग 70 प्रतिशत जनता से जुड़े हुए लोगों की मांग संख्‍या-37-कृषि, मांग संख्‍या-28-ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज और मांग संख्‍या-39-पशुपालन के संबंध में चर्चा में शामिल होते हुए कुछ सुझाव राजस्‍थान के इस पवित्र सदन में रखना चाहूंगा।

माननीय सभापति महोदय,  सबसे पहले मैं धन्‍यवाद देना चाहूंगा प्रदेश की माननीय मुख्‍य मंत्री और कृषि मंत्री महोदय को कि राजस्‍थान में आयी इस आपदा की घड़ी के अन्‍दर किसान की भावनाओं को समझते हुए, किसान की पीड़ा को समझते हुए व किसान के दु:ख दर्द को समझते हुए इतनी शीघ्र राजस्‍थान में पहली बार एक विशेष पैकेज ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के लिए दिया। उस किसान के लिए दिया जिसकी चिन्‍ता कोई नहीं करता। इसलिए मैं इस पवित्र सदन के अन्‍दर माननीय मुख्‍य मंत्री महोदया और कृषि मंत्री महोदय को धन्‍यवाद देता हूं।

माननीय सभापति महोदय,  आज के समय के अन्‍दर हो सकता है कि किसान की पीड़ा से संबंधित सभी माननीय सदस्‍य चर्चा करेंगे लेकिन यह चर्चा इसी सदन तक बन कर नहीं रह जाए उस चर्चा की सकारात्‍मक रूप से क्रियान्विति होना भी नितान्‍त आवश्‍यक है। पूरे भारतवर्ष के अन्‍दर हरित क्रांति के नाम पर उत्‍पादन बढ़ाने का एक अभियान चला। उस अभियान के तहत सभी किसान उत्‍पादन बढ़ाने में अपनी शक्ति समर्थ रूप से लगाते हुए और रासायनिक खादों का जिस तीव्र गति से उपयोग करते हुए, आज हमने उत्‍पादन के क्षेत्र में तो काफी वृद्धि कर ली लेकिन उस उत्‍पादन की वजह से मनुष्‍य के जीवन के ऊपर जो साइड इफेक्‍ट पड़ रहे हैं उनके बारे में भी हम सबको चिन्‍ता करनी चाहिए। इसलिए माननीय सभापति महोदय,  मेरा निवेदन है कि मनुष्‍य का जीवन सुरक्षित रह सके इसलिए जैविक खेती को प्रोत्‍साहन के लिए सरकार भी विशेष रूप से जितना मैं समझता हूं अभी तक जो घोषणा की है जैविक खेती में वृद्धि के लिए वह नितांत कम है। जैविक खेती में वृद्धि के लिए अलग से योजना बनाकर चलने की आवश्‍यकता है।

माननीय सभापति महोदय,  दूसरी बात मैं आपके सामने रखना चाहूंगा। एक तरफ जो भी व्‍यक्ति व्‍यापार करता है, व्‍यापार करने से पहले वह आकलन करता है कि मैं जिस चीज का व्‍यापार कर रहा हूं उस व्‍यापार के अन्‍दर नफा होने वाला है या नुकसान होने वाला है। मैं आपके माध्‍यम से कहना चाहूंगा कि मात्र किसान ऐसा है जो जुए का काम करता है। जिसको खुद को पता नहीं रहता कि मैं जो खेती करूंगा उसमें फायदा होगा या नुकसान होगा? मैं जो खेती कर रहा हूं उस खेती के अन्‍दर क्‍या मैं सुरक्षित रूप से इस फसल को मंडी तक बेचने का काम कर पाऊंगा या नहीं कर पाऊंगा। इस अप्राकृतिक रूप से प्रकृति के प्रकोप की वजह से जब तक मंडी के अन्‍दर बेचान नहीं कर देता अपनी फसल का तब तक उसको चैन नहीं मिलता। माननीय सभापति महोदय,  मैं आपके माध्‍यम से कहना चाहूंगा कि हमेशा छह महीने का कठिन परिश्रम करके जब किसान पूरे परिवार की शक्ति लगाते हैं, खुद अकेला मेहनत नहीं करता, उसकी पत्‍नी खेत के अन्‍दर मेहनत करती है। उसके बच्‍चे खेत के अन्‍दर मेहनत करते हैं और छह महीने के कठिन परिश्रम के बाद वह मंडी के अन्‍दर अपनी फसल को बेचने के लिए जाता है या अपनी छह महीने की कठिन परिश्रम से तैयार की हुई सब्‍जी को बेचने के लिए जाता है तो किसान की दयनीय हालत उस समय होती है कि छह महीने के कठिन परिश्रम के बावजूद भी अपनी मनमर्जी का भाव नहीं दे सकता। मंडी के अन्‍दर व्‍यापारी के द्वारा जो भाव लगाया जाता है किसान की मजबूरी होती है कि उस फसल को, उस सब्‍जी को उसी भाव में बेचना पड़ता है। पहली बार मैं धन्‍यवाद देना चाहूंगा कृषि मंत्री महोदय को कि किसान की पीड़ा को समझते हुए राजस्‍थान में दो पैक-हाउस जो एक मेरे विधान सभा क्षेत्र चौमू में भी बन रहा है। किसान को मजबूरी में अपनी सब्‍जी बेचने की आवश्‍यकता नहीं है। मंडी में व्‍यापारी कहता है कि आप तो टमाटर एक रुपये किलो में बेचोगे क्‍या? तो उसे मजबूरी में बेचने की आवश्‍यकता नहीं है। आज किसान यह कहने का हकदार है कि मैं मेरे टमाटर या प्‍याज चाहे दो महीने बाद बेच दूंगा जब मेरे को उचित मूल्‍य मिलेगा उस समय बेच दूंगा। किसान के प्‍याज, टमाटर  व सब्‍जी को सुरक्षित रखने के लिए पैक-हाउस का निर्माण चल रहा है।

माननीय सभापति महोदय,  मैं आपको निवेदन करना चाहूंगा कि साढ़े तीन करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह किसानों के सपनों को साकार करेगा और उसको फसल मजबूरी में बेचने की आवश्‍यकता नहीं पड़ेगी। माननीय सभापति महोदय,  मैं आपके माध्‍यम से एक और निवेदन करना चाहूंगा कि पहली बार इस राजस्‍थान की सरकार ने जिंस के ऊपर आधारित विशेष मंडियों का प्रोविजन किया है। लगभग 16 मंडिया पूरे राजस्‍थान में हैं। चाहे वह टमाटर की मंडी हो। चाहे वह प्‍याज की मंडी हो। चाहे वह आंवले की मंडी हो। चाहे वह जीरे की मंडी हो। पहली बार पूरे भारतवर्ष से व्‍यापारी आकर विशेष मंडियों के अन्‍दर अपनी खरीद कर सकें। इसका लाभ भी आज किसान को उचित मूल्‍य मिले, यह मिल रहा है। आज पहली बार और माननीय सदस्‍यों ने भी चिंता जाहिर की है कि किसान के साथ हमेशा धोखा होता है। नकली बीज लाने की वजह से। चार-पाँच महीने की उसकी कठिन परिश्रम की फसल, कठिन मेहनत से तैयार की हुई फसल बरबाद होती है। इसलिए मैं आपको इस सदन के माध्‍यम से निवेदन करना चाहूंगा कि किसानों को उचित व प्रामाणिक बीज मिल सके, ताकि उसको कोई धोखा नहीं हो इसलिए जो भी लोग किसान के साथ धोखा करने की कोशिश करें उनके साथ कड़ी से कड़ी कार्यवाही नितांत रूप से करें।

माननीय सभापति महोदय,  एक और निवेदन आपके माध्‍यम से करना चाहूंगा। किसान कल्‍याण कोष के अन्‍दर खेत में काम करता हुआ यदि कोई व्‍यक्ति शारीरिक रूप से चाहे विकलांग हो, चाहे उसकी मृत्‍यु हो, चाहे कोई दुर्घटना हो तो किसान कल्‍याण कोष में उसको सहायता देने का प्रावधान है। किसान जो एग्रीकल्‍चर भूमि के अन्‍दर झोंपड़ी बनाकर रहता है वह भी किसान से जुड़ा हुआ है। दुर्घटना हो सकती है। किसान के खेत के अन्‍दर झोंपड़ी बनी हुई होती है। उस झोंपड़ी में आग लगती है, सरकार के द्वारा मात्र पाँच सौ रुपये उस अग्नि कांड पीडि़त व्‍यक्ति को मुआवजे के तौर पर दिये जाते हैं। मेरा आपसे निवेदन है कि अग्नि पीडि़त व्‍यक्तियों को भी किसान कल्‍याण कोष के दायरे में लाकर आर्थिक मदद मिलनी चाहिए। जो गरीब है उसी के खेत के अन्‍दर झोंपड़ी रहती है। अमीर आदमी के झोंपड़ी नहीं रहती इसलिए मेरा आपके माध्‍यम से निवेदन है कि कृषि कल्‍याण कोष के अन्‍दर अग्नि पीडि़त व्‍यक्ति को मदद के दायरे में लाना चाहिए।

माननीय सभापति महोदय,  आपके माध्‍यम से एक और निवेदन करना चाहूंगा कि सरकार ने किसान महोत्‍सव के माध्‍यम से लगभग लाखों किसानों को इस अभियान से जोड़ा है, पानी बचाने के लिए भी, जल संरक्षण के लिए भी। इस अभियान से जाग्रति फैलाने के लिए काफी लोगों को लाभ मिला है। इस अभियान के दौरान जिन किसानों को विभाग के द्वारा एक पम्‍पलेट दिया गया था उस पम्‍पलेट में यह उल्‍लेख था ...

 

श्‍याम/चौहान    26.03.2007   15.20  2l 

 

उस पम्‍पलेट में यह लिखा था कि किसान यदि ड्रीप इर्रिगेशन के संयंत्र को अपनायेगा या फव्‍वारा पद्वति के संयंत्र क्रय करेगा तो उन्‍हें फिक्‍स सब्सिडी देने की बात की गयी थी जो पम्‍पलेट में उल्‍लेख किया गया था। उस पम्‍पलेट में लिखा गया था कि किसान के लिए यह आवश्‍यक नहीं है कि उसके द्वारा खरीदा गया यंत्र चाहे कितने ही मूल्‍य को उसके लिए एक फिक्‍स सब्सिडी दी जायेगी। जब किसानों के द्वारा उन फव्‍वारें के सैटों की या ड्रीप इर्रिगेशन के सैटों का क्रय किया गया तो बाद में किसानों को कहा गया कि सरकार के मापदंड के अनुसार 50 प्रतिशत से अधिक सब्सिडी नहीं दे सकते हैं। जो पम्‍पलेट में घोषणाएं सरकार के द्वारा की गयी थी, उस घोषणा की पालना कम से कम उन किसानों को जरूर करें क्‍योंकि उन्‍होंने पम्‍पलेट देखकर के उसका क्रय किया था।

सभापति महोदय, एक बात और है कि आज राजस्‍थान में कुछ मंडियां ऐसी हैं, आज कोटपूतली से आने वाले माननीय सदस्‍य ने भी अपनी बात रखने का प्रयास किया था। सरकार की यह मंशा रही है कि किसान को जो आढ़त के रूप में 6 प्रतिशत राशि दी जाती थी उसमें 3 प्रतिशत कमी की गयी है। सरकार की मंशा भी किसान को लाभ पहुंचाने की रह है। लेकिन कुछ मंडियां राजस्‍थान में ऐसी हैं जहां पर किसान से कोई आढ़त नहीं ली जाती। मात्र व्‍यापार करने वाले जो व्‍यापारी हैं उनसे ही आढ़त ली जाती हैं। उनमें मेरी चौमूं मंडी भी एक है, जहां पर किसान से कोई आढ़त नहीं ली जाती है। सिर्फ व्‍यापारियों से ही आढ़त ली जाती है। इसलिए कृषि मंत्रि महोदय से निवेदन है कि जिन मंडियों में किसानों से आढ़त नहीं ली जाती है उन मंडियों में आर्थिक रूप से सक्षम वह व्‍यापारी बनी रहें, उनके भविष्‍य के साथ कोई खिलवाड़ नहीं हो, उनसे 6 प्रतिशत ही यदि आढ़त रखी जाती है तो मैं समझता हूं कि उनके साथ उचित रहेगा।

सभापति महोदय, मैं एक बात और कह कर अपनी बात को समाप्‍त करूंगा। अभी राजस्‍थान सरकार के द्वारा सभी पंचायत समितियों के विकास अधिकारियों को एक परिपत्र पंचायत राज विभाग द्वारा दिया गया, कि ग्रामीण क्षेत्र में जो सी.सी. रोड का निर्माण किया जाता है, उनकी गुणवत्‍ता ठीक नहीं रहती हैं। पंचायतों के पास ऐसे संसाधन नहीं रहते जिसकी वजह से यह सड़कें ठीक से नहीं बनती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की काफी समस्‍या रहती है, रास्‍तों में गंदा पानी भरा रहता है, उस गंदगी को दूर करने के लिए सी.सी.रोड ही बनना अति आवश्‍यक है। इसलिए सरकार द्वारा सी.सी. रोड़ बनाने पर जो रोक लगायी है, मैं माननीय मंत्रि महोदय से निवेदन करना चाहूंगा कि अविलम्‍ब उन रोक को हटायें ताकि ग्रामीण क्षेत्र में स्‍वच्‍छ गांव बन सकें उसके लिए सी.सी. रोड बनना अति आवश्‍यक है।

सभापति महोदय, ज्‍यादा कुछ निवेदन नहीं करना चाहता हूं, आपके माध्‍यम से इतना ही निवेदन करना चाहूंगा कि रासायनिक खादों का उपयोग तीव्र गति से बढ़ रहा है, उनका मनुष्‍य पर जो विपरीत प्रभाव पड़ रहा है वह जितनी जल्‍दी हो सके उसको रोकने का प्रयास हम करें। आपने मुझे समय दिया, बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

श्री सभापति: माननीय श्री बहादुर सिंह।

श्री बहादुर सिंह गोदारा (नोहर): सभापति महोदय, मैं आज हाउस में जो मांग संख्‍या 28, 37 और 39 पर चर्चा हो रही है, यह तीनों ही मांगें ग्रामीण विकास से संबंधित हैं। कृषि, पशु पालन और ग्रामीण विकास यह आपस में संबंधित मांगे हैं। सरकार ने इसके लिए जो राशि मांगी हैं वह भी काफी बड़ी राशि है। सरकार ने बजट में ग्रामीण विकास के लिए, कृषि के लिए, पशु पालन के लिए काफी प्रावधान किये हैं। उसके लिए तो मैं सरकार को धन्‍यवाद देता हूं।

सभापति महोदय, लेकिन इतना बजट लगाने के बावजूद भी आज हम देख रहे हैं कि गांव के लोगों का जिनमें ज्‍यादातर खेतीहर भी होते हैं, मजदूर भी होते हैं, उनका आज शहरों में मेला लगता है। गांव के लोग रोजाना विवश होकर, मजबूर होकर शहरों में आकर के रोजी-रोटी की तलाश करते हैं। अगर जो सुविधाएं शहरों में हैं वहीं सुविधाएं अगर गांवों में क्रिएट कर दी जायें तो गांव के लोग यहां आकर के सड़कों पर मेले नहीं लगायें। यह हमारे प्रशासन के लिए बहुत शर्म की बात है। आज हरियाणा और पंजाब का काश्‍तकार शहरों में आकर के मेले नहीं लगाता। शहर के लोग आज हरियाणा और पंजाब के गांवों में जाकर के बसना चाहते हैं और यहां सारा का सारा उलटा हो रहा है, इसलिए कि जिन साधनों की जो कि विकास के आधार हैं उनकी गांवों में आज भी नितांत अभाव है।

सभापति महोदय, मैं सरकार का ध्‍यान इस और दिलाना चाहता हूं कि विकास की सबसे बड़ी सीढ़ी तो शिक्षा है। गांव में आज 20-20 साल से प्राइमरी स्‍कूल खुले हुए हैं वह मिडिल नहीं हो रहे हैं, 15-15 साल से जो स्‍कूल मिडिल थे वह दसवीं के नहीं हो रहे हैं। जो दसवीं के थे वे बारहवीं के नहीं हो रहे हैं और टेक्निकल शिक्षा का तो नामो-निशान नहीं है।

श्री सभापति: आज शिक्षा की डिमांड नहीं है।

श्री बहादुर सिंह गोदारा (नोहर): सभापति महोदय, मेरे कहने का मतलब यह है कि ग्रामीण विकास के जो आधार है, उनका गांवों में नितांत अभाव है। जब तक वह आधार मजबूत नहीं किये जायेंगे, रोजगार के साधन उपलब्‍ध नहीं करवाये जायेंगे तब तक गांवों का सही विकास नहीं हो सकता है।

सभापति महोदय, पहले तो जैसा माननीय सदस्‍यों ने भी सुझाव दिये थे, मैं भी सुझाव देना चाहूंगा कि गांवों में एकमात्र  खेती की पैदावार है और वह पैदावार भी हम ले जाकर दूसरों के दरवाजों के आगे डाल देते हैं और अगला एक, दो और तीन कहकर के यतीम के माल की तरह से उठा ले जाता है। उसकी कोई कास्‍ट ऑफ प्रोडक्‍शन नहीं है। आप बतायें कि विकास कैसे होगा। किसान की खुदकुशी कैसे रूकेगी। किसान जो आज समाज का सबसे गरीब तबका है। वह ऊपर उठकर के वहां तक कैसे आये, जब किसान की अच्‍छी फसल होती है तो भाव नीचे चले जाते हैं, उसे कुछ नहीं मिलेगा और जब बुरी फसल होती है तो उसे मिलता ही क्‍या है। रोजगार के सारे के सारे साधन शहरों में क्रिएट किये जाते हैं। गांवों में नहीं किये जाते हैं। आज के दिन कारखाने लगाने में गांवों में क्‍या दिक्‍कत है। लेकिन कारखाने भी शहरों में लगते हैं। सेज में जो इनवेस्‍टमेंट किया जाता है वह भी शहर के नजदीक किया जाता है, क्‍यों नहीं गांवों के साथ जो बंजड़ भूमि पड़ी है और जो भूमि काबिले काश्‍त नहीं है, ऐसी भूमि पर सेज का काम क्रिएट किया जायेगा तो लोगों को रोजगार भी मिलेगा। पिछड़े हुए इलाकों में इनवेस्‍टमेंट भी बढ़ेगा। सुविधा भी बढ़ेगी तो उन इलाकों का विकास भी हो सकता है। लेकिन हमारी सरकार का अभी तक वह दृष्टिकोण नहीं है कि गांवों को आगे लेकर जायें। मैं सरकार का ध्‍यान इस और भी दिलाना चाहूंगा कि जो साधन-सुविधाएं उद्योगों को दी जा रही हैं, वही साधन-सुविधाएं खेती को क्‍यों नहीं उद्योग मानकर के दी जा रही हैं। वही साधन-सुविधाएं डेयरी को उद्योग मानकर क्‍यों नहीं दी जाती हैं। कृषि पैदावार की कीमत भी औद्योगिक आधार पर क्‍यों नहीं तय की जाती। आज फैक्‍ट्री से माल निकलता है उस आधार पर उस माल की जो कीमत तय की जाती है वही अगर खेत से पैदावार आती है, उसी आधार पर अगर उसकी कीमत तय की जाये तो किसान गरीब नहीं रहेगा। गांव के विकास को कोई रोक नहीं सकता है, सभापति महोदय, इसलिए मेरा आपसे निवेदन है कि सरकार को इस और ध्‍यान देना चाहिए। माननीय हमारे उप कृषि मंत्रि जी खुद किसान भी हैं, इनको सारी बातों का मालूम भी है। लेकिन कर कुछ भी नहीं पा रहे हैं, आवाज भी नहीं उठा रहे हैं और इसलिए किसान दबता जा रहा है एवं पिछड़ता जा रहा है। किसान खुदकुशी के कगार पर खड़ा है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): बहादुर सिंह जी, गोदारा साहब, सवारियां चैक करने के बाद इनकी सोने की पुरानी आदत है ...(व्‍यवधान) मैंने कहा सवारियां चैक करने के बाद सोने की इनकी पुरानी आदत है।

श्री बहादुर सिंह गोदारा (नोहर): सभापति महोदय, मैं सरकार से निवेदन करना चाहूंगा कि किसान को पूरी कीमत मिले। आज किसान को सरकार मजबूर कर रही है।                                                     

 

jyg/akt/26.3.7/15.30/2m

 

कृषि पैदावार की बीमा पॉलिसी बनाई और किसान से इण्‍डीजुअल किश्‍ते ली जा रही है और तहसील को इकाई मानकर उसको हर्जाना दिया जाता है। क्‍यों नहीं जब एक किसान से किश्‍ते ली जा रही है, उसी किसान को इकाई मानकर नुकसान का हर्जाना क्‍यों न दिया जाए। आज जब मोटर साइकिल का बीमा हो सकता है, कार का बीमा हो सकता है, छोटे से कारखाने का बीमा हो सकता है तो खेत का बीमा क्‍यों नहीं हो सकता, जिस तरह से उनको क्‍लेम दिया जा सकता है तो उसी तरह से काश्‍तकारों को क्‍लेम क्‍यों नहीं दिया जा सकता? लेकिन इसलिए कि काश्‍तकार की तरफ कोई ध्‍यान ही नहीं है, ग्रामीण विकास के नारे जरूर लगाते हैं, किसानों के नारे लगाते हैं लेकिन किसान की तरफ ध्‍यान किसी का नहीं जाता है, न इस सरकार का गया न उस सरकार का गया।

मैं इस साल तो कम से कम केन्‍द्रीय सरकार को इस बात के लिए धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि उसने सौ रुपए गेहूं पर बोनस देना तय किया है। हमारी सरकार को भी पचास-सौ रुपए बोनस देना चाहिए था एक क्विंटल के ऊपर ताकि किसान को अच्‍छी कीमत मिले और इस बढ़ती हुई महंगाई में कुछ तो अपनी पैदावार से पैसा लेकर आए और अपनी रोटी रोजी का जुगाड़ बिठा सके।

किसान का खर्चा पूरा नहीं होता। पुराने वक्‍त में तो एक बात और थी कि किसान को जमीन अलोट हो जाती थी, सस्‍ती अलोट हो जाती थी और आज अगर एक किला जमीन खेती में जोड़ने के लिए किसान खरीदता है तो लाख रुपए लगते हैं और उसका ब्‍याज भी घर वाले मेहनत करते हैं, खर्चा लगाते हैं उसके बाद भी उस रकम का ब्‍याज नहीं उतरता है, उस पैदावार से किसान निरन्‍तर घाटे में जा रहा है, इसलिए किसान का यह घाटा निरन्‍तर बढ़ता जा रहा है। मेरा सरकार से अनुरोध है कि  जिस तरह से आपने कारखानों को छूट दे रखी है, सुविधाएं दे रखी हैं, वे सारी की सारी सुविधाएं किसानों को भी दी जाए, खेती को भी दी जाए, डेयरी को भी दी जाए। आज बड़े-बड़े कारखाने लग रहे हैं वह कारखानेदारों के पैसों से नहीं लग रहे हैं, उसे पैसा देने वाली एजेंसियों के मार्फत सुविधाएं दी जा रही है इसलिए इतने बड़े कारखाने लग रहे हैं। किसान के अगर एक गाय टळ जाती है और उसे धीणे की आवश्‍यकता होती है तो वह दूसरी गाय नहीं खरीद सकता है। अगर वही सुविधा किसान को मिल जाए तो किसान के घर में भी पशु की कमी नहीं आएगी किसान के घर भी साधनों की कमी नहीं आएगी।

मैं एक सुझाव देना चाहता हूं। माननीय राजेन्‍द्र सिंह जी राठौड़ जो चूरू से आते हैं वह जानते हैं कि हमारे यहां एक ऐसा कल्‍प वृक्ष है जो राजस्‍थान के बढ़ते हुए रेगिस्‍तान को रोक सकता है और अकाल से भी हमारा पीछा छुड़ा सकता है। मैं मेरे गांव में एक किसान के यहां बैठने के लिए गया था। उसने कहा कि बहादुरसिंहजी, अकाल पड़ता नहीं, अकाल गेरते हैं, मेरे खेत में 132 क्विंटल लूंग हुई है, इस भयंकर अकाल में न साढ़ी बीजी गई न सावणी बीजी गई और 132 क्विंटल लूंग में से मैंने 100 क्विंटल लूंग 40 हजार में बेच दी, 32 क्विंटल लूंग मैं कुछ और कचरा मिलाकर अपने दो-तीन पशु जीवा दूंगा। अगर इसी खेजड़ी को काश्‍तकारों को प्रोत्‍साहन देकर रो में लगाया जाए तो न तो कल्‍टीवेशन में दिक्‍कत आएगी और रेगिस्‍तान बढ़ने देगी, न हरियाली में कमी आएगी, न चारे में कमी आएगी। आज हमारी खेजड़ी की लकड़ी एक कॉमर्शियल लकड़ी बन गई है। यह केवल जलाऊ लकड़ी नहीं है। आज इसकी लकड़ी से बना हुआ फर्नीचर विदेशों में जाकर सागवान की लकड़ी की कीमत के बराबर बिक रहा है। खेजड़ी में जो एक कमी होती थी कि इसके कीड़ा लगता था, बीध जाती थी इसलिए यह लकड़ी काम में नहीं आती थी लेकिन आज अगर इसे भाप में पका लिया जाए, इसके ऊपर केमिकल लगा दिया जाए तो यही खेजड़ी की लकड़ी सागवान की लकड़ी के बराबर हो जाती है और उसी से बना हुआ फर्नीचर आज पूरे विश्‍व के अन्‍दर जा रहा है। हमारे रामगढ़ शेखावाटी के पास जो बड़े कारखाने लगे हुए हैं उनमें यह हमारी लोकल लकड़ी काम आती है और उनसे लाखों करोड़ों रुपए कमाए जा रहे हैं। इसलिए मैं सरकार से इस बात के लिए भी अनुरोध करूंगा कि इस कल्‍प वृक्ष को आप बढ़ाएं, खेतों के अन्‍दर रो में लगाएं, न चारे की कमी आएगी, न हरियाली की कमी आएगी, न ईन्‍धन की कमी आएगी और यह आपकी कॉमर्शियल लकड़ी भी मिलेगी।

मेरा आपके माध्‍यम से सरकार से अनुरोध है कि केवल बजट पास करवाने से काम नहीं चलेगा, किसान को भी वही सुविधाएं दी जाए तो आपने कल कारखाने वाले लोगों को दे रखी है। आपने मुझे समय दिया उसके लिए धन्‍यवाद।

श्री सभापति: बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

माननीय श्री संयम लोढ़ा।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय सभापति महोदय, ग्रामीण विकास, कृषि, पशुपालन से सम्‍बन्धित मांगों पर आज सदन में चर्चा हो रही है और आपने मुझे बोलने का अवसर दिया है, मैं आपका आभारी हूं।

माननीय सभापति महोदय, अपने महबूब नेता स्‍वर्गीय राजीव गांधी का समरण करते हुए मैं अपनी बात शुरू करना चाहता हूं। नवें दशक में जब उन्‍होंने देश का नेतृत्‍व सम्‍भाला तो उनके रूप में एक 21वीं सदी का ऐसा स्‍वप्‍नदृष्‍टा देश को मिला जिसने हर विषय को छूने की कोशिश की। आप, हम और पूरे देश की जनता जानती है कि चाहे नई शिक्षा नीति का मसला हो, चाहे नवोदय विद्यालयों के माध्‍यम से ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाओं का मसला हो, उपभोक्‍ता अधिकारों के संरक्षण के कानून का मसला हो, चाहे राष्‍ट्रीय युवा नीति का मसला हो, उन्‍होंने इस बात की पूरी कोशिश की कि देश को एक नई दृष्टि से सम्‍पन्‍न किया जाए।

माननीय सभापति महोदय, आज ग्रामीण विकास की मांगों पर चर्चा जिसके क्रियान्‍वयन का दायित्‍व हमारा पंचायती राज विभाग निभाता है और जब स्‍वर्गीय राजीव गांधी ने यह कहा था कि मैं गांवों के विकास के लिए एक रुपया भेजता हूं लेकिन पन्‍द्रह पैसे ही वहां तक पहुंचता है।  आज जिस ढंग से सदन में हमारे कुछ प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍य शेम-शेम की बात कह रहे थे, उस वक्‍त भी जब राजीव गांधी ने यह बात कही थी तो भारतीय जनता पार्टी के लोगों ने उनका मजाक उड़ाने की कोशिश की थी।

श्री तगाराम चौधरी (बाड़मेर): यह बात उन्‍होंने प्रधान मंत्री रहते हुए कही थी।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): वह एक आदमी की ऐसी ईमानदार कोशिश थी जो व्‍यवस्‍था परिवर्तन करके देश के वास्‍तविक आदमी तक इन योजनाओं, इन सुविधाओं का लाभ पहुंचाने की प्रतिबद्धता रखता था और इसीलिए माननीय सभापति महोदय, स्‍वर्गीय राजीव गांधी की पहल पर 73वां संविधान संशोधन विधेयक देश की संसद में रखा गया, वह लोक सभा में पारित हो गया, राज्‍य सभा में चूंकि कांग्रेस का बहुमत नहीं था, उस वजह से गिर गया और वह लागू नहीं हो सका लेकिन 1991 में जब कांग्रेस पार्टी की फिर से सरकार बनी तो अपने नेता दिवंगत स्‍वर्गीय राजीव गांधी के सपने को साकार करने के लिए तत्‍कालीन कांग्रेस पार्टी की सरकार ने वह संविधान संशोधन विधेयक पारित किया।

माननीय सभापति महोदय, यह राजीव गांधी की सत्‍ता के विकेन्‍द्रीकरण की बहुत ईमानदार कोशिश थी। वह गरीब तबका, दलित वर्ग का आदमी, आदिवासी वर्ग का आदमी, पिछड़ी जातियों का आदमी, महिलाएं, ये सारे लोग जो सैकड़ों सालों से निर्णय में भागीदारी की प्रक्रिया से अलग बने रहे, स्‍वर्गीय राजीव गांधी ने उन सारे लोगों को निर्णय की प्रक्रिया से जोड़ने की कोशिश की।

माननीय सभापति महोदय, हम आज जिस सोशल ऑडिट की बात करते हैं, सामाजिक अंकेक्षण के मुद्दे पर आज अगर सरकार के मंत्री और मुख्‍य मंत्री अपने बजट भाषण, अभिभाषण और इससे पहले प्रेस कांफ्रेंस के माध्‍यम से जानकारी देने की कोशिश करते हैं, वह सोशल ऑडिट राजीव गांधी के उसी वक्‍तव्‍य का नतीजा है जिसमें उन्‍होंने कहा था कि मैं आज एक रुपया भेजता हूं और पन्‍द्रह पैसे ही गांव तक पहुंचते हैं।

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): राजीव गांधी-राजीव गांधी यह गाने बंद करो, बोफोर्स था ईमानदारी का पुतला।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय सभापति महोदय, हमारे प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों को राजीव गांधी के नाम पर इतनी ज्‍यादा तकलीफ हो रही हे तो मैं देश के तत्‍कालीन प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का नाम लेना चाहता हूं। देश के तत्‍कालीन प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और ग्रामीण विकास मंत्री वैंकेया नायड़ू जिन्‍होंने 2003 में नई दिल्‍ली में देश भर के पंचायतीराज मंत्रियों का सम्‍मेलन बुलाया और उस सम्‍मेलन में अटल बिहारी वाजपेयी ने यह भाषण दिया और यह कहा कि पंचायती राज संस्‍थाओं को अधिकारों का विकेन्‍द्रीकरण स्‍वर्गीय राजीव गांधी ने किया, यह रिकार्ड पर है। माननीय सभापति महोदय, उसके बाद कांग्रेस पार्टी की अध्‍यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी ने भी गौहाटी में कांग्रेस शासिल राज्‍यों के मुख्‍य मंत्रियों का सम्‍मेलन किया।

 

Gpc/akt/ 26032007/1540/2n

 

और यह निर्देश दिये ..(व्‍यवधान).. अध्‍यक्ष महोदय, मुझे थोड़ा संरक्षण प्रदान करें।

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, आपस में बैठकर यहां पर कमेंट पास न करें।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): और उसका नतीजा था, माननीय सभापति महोदय, आप भी इसी सदन में थे, दो दिन का विशेष सत्र 2003 में इस सदन में बुलाया गया कि पंचायती राज संस्‍थाओं को और अधिकारसंपन्‍न कैसे बनाया जाए और आम जनता की भावनाओं के अनुरूप विकास में आम जनता की भागीदारी को कैसे बढाया जाए। उस दो दिन के सम्‍मेलन के बाद तत्‍कालीन कांग्रेस सरकार ने जो ग्‍यारहवीं सूची में 19 विषय दिये गये हैं उनके अधिकार पंचायती राज संस्‍थाओं को हस्‍तान्‍तरित कर दिये। इसके संबंध में राजस्‍थान सरकार के मुख्‍य सचिव ने 19 जून, 2003 को आदेश जारी कर दिये थे।

मैं कहना चाहता हूं कि राजस्‍थान की वर्तमान भारतीय जनता पार्टी की सरकार अपने नेता अटल बिहारी वाजपेयी की भावनाओं के, सपनों के अनुरूप काम नहीं कर रही है और उसी का नतीजा यह हुआ कि इस सरकार के शासन में आते ही 15 जनवरी, 2004 को राजस्‍थान सरकार के मुख्‍य सचिव ने एक आदेश जारी करके 19 जून, 2003 को पंचायती राज संस्‍थाओं को जो अधिकार दिये गये थे उसमें से जन स्‍वास्‍थ्‍य अभियांत्रिकी विभाग और ये हमारे संसदीय कार्य मंत्री, जो इस सरकार के सबसे अधिक खैरख्‍वाह बने हुए हैं, सार्वजनिक निर्माण विभाग एवं खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग के हस्‍तांतरित अधिकारों को संबंधित विभागों को वापस सौंप दिया। यह फैसला आपने किया। दूसरे जिन विभागों के संबंध में अधिकार दिये जाने चाहिए थे इन सवा तीन साल में उन अधिकारों को देने के लिए रिकार्ड पर किसी तरह की कोई कार्यवाही नहीं की गई और उसी लुंज-पुंज हालत के अंदर पंचायती राज संस्‍थाओं को छोड़ दिया गया।

माननीय सभापति महोदय, इतना ही नहीं, प्रारंभिक शिक्षा के संबंध में मैं आपको निवेदन करना चाहता हूं 19 जून, 2003 को यह आदेश जारी किया गया था, मैं पढ़कर सुनाना चाहूंगा, प्रारंभिक शि‍क्षा पूर्ण रूपेण पंचायती राज संस्‍थाओं के अधीन, खण्‍ड शिक्षा अधिकारी पंचायत समिति व जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक शिक्षा जिला परिषद के अधीन, निदेशक माध्‍यमिक शिक्षा जिला परिषद के माध्‍यम से कार्यवाही करेंगे। हस्‍तांतरित अध्‍यापकों के स्‍थानान्‍तरण एवं 17 सीसीए के तहत कार्यवाही करने के अधिकार पंचायत समिति, जिला परिषद की प्रशासन एवं स्‍थापना समिति में निहित होंगे। शिक्षकों की भर्ती की कार्यवाही जिला परिषद की स्‍थायी समिति के माध्‍यम से होगी।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): कब का है?

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 19 जनवरी, 2003 का।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 19 जनवरी, 2003 के साथ 8.9.2003 का आदेश पढ़कर सुना दें जब आपने आदेश वापस लिए हैं। आप इन संस्‍थाओं को दंतहीन करके ..(व्‍यवधान)..

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 8.9.2003 के आदेश को आप टेबल कर देना।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 8.9.2003 को आदेश वापस लिये।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आप टेबल कर देना।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): हां, टेबल कर दूंगा। आप यों ही चेप रहे हो।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): कर देना, यों ही नहीं कह रहा हूं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आपने वापस लिये। आपने आदेश एक हाथ से दिये, दूसरे हाथ से सीपी जोशी साहब ने दबाव बनाया, अशोक गहलोत ने वापस लिये।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मैं तो पंचायती राज मंत्री था। आपको याद है 2003 में मैं पंचायती राज मंत्री था या नहीं था, ऐसे ही कपोल कल्पित बात करके इस राज को डुबोओगे आप।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): मैं टेबल कर दूंगा।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मुख्‍यमंत्री को ऐसी राय देते हो। आप डुबोने का काम करते हो।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आपने पंचायती राज संस्‍थाओं को झुनझुना पकड़ाने का काम किया था माननीय सदस्‍य।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मुख्‍यमंत्री को ..(व्‍यवधान).. बनाकर भारतीय जनता पार्टी को डुबोने का काम कर रहे हैं तो ये मंत्री कर रहे हैं, और कोई मंत्री नहीं कर रहे हैं। ..(व्‍यवधान).. जब राजस्‍थान का इतिहास लिखा जाएगा तो राजस्‍थान के मुख्‍यमंत्री को गुमराह करके किसी ने कमजोर किया तो राजेन्‍द्र जी राठौड़ ने किया।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): एक तरफ आदेश देते हो दूसरी तरफ आदेश वापस लेते हो। ..(व्‍यवधान)..

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय सभापति महोदय, राठौड़ साहब को पीड़ा हो रही है, मैं आपकी सरकार का एक और आदेश पढ़कर सुनाना चाहता हूं, आपकी शंका का समाधान हो जाएगा। पंचायती राज संस्‍थाओं से अध्‍यापकों के स्‍थानान्‍तरण और भर्ती के अधिकार वापस लेने के संबंध में क्‍या आदेश आपकी सरकार ने जारी किये हैं। कार्मिक विभाग द्वारा जारी स्‍थानान्‍तरण नीति दिनांक 31.5.2005 के पैरा 5 के अनुसार पंचायती राज विभाग के नियंत्रण में प्राथमिक व उच्‍च प्राथमिक विद्यालयों के अध्‍यापकों के स्‍थानान्‍तरण के अधिकार जिला शिक्षा अधिकारी को दिये गये। 2005 में तो सीपी जोशी साहब नहीं थे, आप ही थे, ये मुख्‍यमंत्री ही कार्मिक मंत्री भी हैं, उन्‍हीं के फाइल पर दस्‍तख्‍त से आदेश निकले हैं, पंचायती राज संस्‍थाओं के जन-प्रतिनिधियों का गला घोंटने का काम इसी मुख्‍यमंत्री ने किया है।

श्री तगाराम चौधरी (बाड़मेर): माननीय सभापति महोदय, पाँच साल के राज के अंदर अध्‍यापक कितने नियुक्‍त किये? मैं आपके माध्‍यम से माननीय सदस्‍य से जानना चाहता हूं ..(व्‍यवधान)..

श्री सभापति: आप विराजें।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 1500 राजीव गांधी स्‍कूल एक सिंगल कलम से खोली हैं। ..(व्‍यवधान).. बातें कर रहे हो खामख्‍वाह आप।

श्री तगाराम चौधरी (बाड़मेर): ये प्राथमिक विद्यालय नहीं है।

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य।

श्री तगाराम चौधरी (बाड़मेर): शिक्षा का स्‍वरूप बिगाड़ दिया।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): स्‍वरूप आपने बिगाड़ा है जो बीजेपी में आना पडा आपको कांग्रेस से। हमारा स्‍वरूप नहीं बिगड़ा, आपको आना पडा इधर।

श्री तगाराम चौधरी (बाड़मेर): आपने आते ही शिक्षा का स्‍वरूप बिगाड़ दिया। नींव को वापस मजबूत करनी है।

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, आपस में बातें न करें।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय सभापति महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं पंचायती राज अधिनियम की धारा 89 के अंतर्गत जो शिक्षकों की भर्ती का अधिकार जिला परिषद की स्‍थापना समिति को दिया गया था इस सरकार ने भी उसको वापस लेकर आरपीएससी को सौंप दिया। एक के बाद एक फैसले इस सरकार ने ऐसे किये हैं जिसके माध्‍यम से राजस्‍थान में पंचायती राज संस्‍थाओं का गला घोंटने का काम हुआ है।

माननीय सभापति महोदय, आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं इस सरकार ने अपनी वार्षिक योजना के आकार को लेकर एक ऐसा वातावरण बनाने की चेष्‍टा की है, लेकिन उसकी असलियत क्‍या है ..(व्‍यवधान)..

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): आपका आधार क्‍या है?

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आप तो अपने आधार की चिन्‍ता करें जो पूरे राजस्‍थान में बढ़ता ही जा रहा है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आप मंत्री नहीं थे तब और अब मंत्री बनने के बाद 15 किलो वज़न बढ़ा है और 15 किलो राठौड़ साहब का बढ़ा है। पता है या नहीं, सब रिकार्ड है यहां पर। बातें कर रहे हैं आप।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): माननीय सभापति महोदय, मेरा मंत्री बनने के बाद 8 किलो वज़न कम हुआ है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): सभापति महोदय, अगर मेरा एक किलो भी बढ़ा हो तो मैं आपकी बात मानने को तैयार हूं।

श्री सभापति: आपका वेट बढ़ा या कम हुआ या इनका वज़न बढ़ा, इससे कोई लेना-देना नहीं है ..(व्‍यवधान)..

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आपका वज़न नहीं बढ़ा तो फिर इतना हल्‍ला-गुल्‍ला आपके मिनिस्‍टर कैसे कर रहे हैं?

श्री सभापति: आप विराजें माननीय सदस्‍य।

एक माननीय सदस्‍य: आपका कद बढ़ गया, वज़न नहीं बढ़ा। कद बढ़ गया।

श्री सभापति: आप वेट बढ़ने से सदन का समय खराब मत कीजिए।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): इनका वेट घटा दो, सरकार अच्‍छी चलेगी। आपकी भावना व्‍यक्‍त कर रहे हैं हम तो। इनका वज़न कम करें, सरकार ठीक चलेगी, इनके वज़न से सरकार डूब जाएगी। ..(व्‍यवधान)..

श्री सभापति: आप विराजें।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय सभापति महोदय, हो सकता है इनका शारीरिक वज़न नहीं बढ़ा हो, पर अदृश्‍य वज़न जरूर बढ़ गया है।

श्री सभापति: आप कनक्लूड करें दो मिनट में।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): क्‍या दो मिनट में? मेरी पार्टी का टाइम है, मैं बोलूंगा।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): सभापति महोदय, आज ये पहली बार बोलते हुए मुस्‍कराये। आज पहली बार मुस्‍कराये हैं, इनकी मुस्‍कान देखें। ..(व्‍यवधान)..

श्री सभापति: माननीय सभापति महोदय, 2007-08 के बजट प्रावधान के संबंध में मैं एक बिन्‍दु आपको पढ़कर सुना रहा हूं ग्राम विकास का। आर्थिक सेवाओं की विभिन्‍न मदों पर जो टोटल रेवेन्‍यू एक्‍सपेंडिचर है 2006-07 में उसका बजट एस्‍टीमेट 1146.41 करोड़ था और 2007-08 में यह घटकर 1169.86 करोड़ रह गया। इसी तरह से आर्थिक सेवाओं की विभिन्‍न मदों पर टोटल कैपिटल एक्‍सपेंडिचर में ग्राम विकास का बजट एस्‍टीमेट 2006-07 का 211.53 करोड़ था 2007-08 के बजट एस्‍टीमेट में घटकर 139.50 करोड़ हो गया है। माननीय सभापति महोदय, इस सरकार का सोच और इस सरकार का विचार गांवों के विकास के प्रति क्‍या है वह दर्शाने के लिए बहुत पर्याप्‍त है।

माननीय सभापति महोदय, आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहूंगा हिन्‍दुस्‍तान की जनता को पहली बार एक क्रान्तिकारी अधिकार मिला कि जब भारत की संसद ने रोजगार गारण्‍टी का अधिकार कानून पारित किया और राजस्‍थान के छह जिलों को उस योजना में सम्मिलित किया गया और उनके माध्‍यम से उनको लाभान्वित किये जाने की चेष्‍टा की जा रही है। माननीय सभापति महोदय, आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं उस योजना में आज 9 बजे से लेकर 5 बजे तक मजदूर से काम लिया जा रहा है जो कि टाइम बेस्‍ड है 9 से 5 बजे तक। मजदूरी क्‍या दी जा रही है टास्‍क बेस। यह सरकार दोनों प्रावधान लागू करके राजस्‍थान के उन लाखों मजदूरों का शोषण कर रही है जो टाइम बेस के आधार पर तो उनसे हाजिरी लेते हैं सुबह 9 बजे से लेकर 5 बजे तक और टास्‍क बेस पर पेमेंट कर रहे हैं। सभापति महोदय, इस कानून की भावना के ..(व्‍यवधान)..

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): सभापति महोदय, यह रोजगार गारण्‍टी कहां से आयी?

श्री सभापति: आप विराजें।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): केन्‍द्र से आयी और ये लागू कर रहे हैं। आपके नोर्म्‍स ही परेशानी कर रहे हैं।

 

मोहन/अरूण/अशोधित प्रति प्रकाशनार्थ नहीं/26032007/1550/2o

 

श्री सभापति: आप बिराजें, मंत्री जी सक्षम हैं जवाब देने में।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): और आज उसी का नतीजा है, माननीय सभापति महोदय, ...(व्‍यवधान)... हाजिरी ले रहे हैं उनकी और टास्‍क बेस के आधार पर पेमेंट करके 25 रुपये से कम, 20 रुपये से कम, 30 रुपये से कम राजस्‍थान के लाखों मजदूरों का शोषण करने का काम यह सरकार कर रही है और माननीय सभापति महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं, बड़ी डींगें हाकते हैं हम देश के अन्‍दर फलां नम्‍बर पर चलरहे हैं । आपके फीगर बता रहे हैं कि इस पूरे साल के अन्‍दर सौ दिन का रजिस्‍ट्रेशन तो आपके पास है 15 लाख 13 हजार 739 लोगों को जॉब कार्ड आपने दिये हैं, आपसे काम मांगा है 11 लाख 45 हजार 985 लोगों ने और आपने पूरे सौ दिन काम कितने लोगों को दिया है, मात्र 3,62,313 लोगों को सौ दिन पूरे काम दिया है, मतलब उन 6 जिलों के अन्‍दर 15 लाख के आवेदन करने के बाद भी सौ दिन आप लोगों को काम पूरा उपलब्‍ध नहीं करा सके और इतना ही नहीं, माननीय सभापति महोदय, सबसे बड़ा असंवैधानिक काम राजस्‍थान की सरकार ने इस रोजगार गारंटी योजना से कर रही है, भारत सरकार ने पिछले साल फरवरी महीने में 23 करोड़ रुपये इनको दे दिये, 2 हजार कर्मचारियों को रोजगार गारंटी योजना में काम के लिए भर्ती करो। माननीय सभापति महोदय, उन दो हजार पदों के अन्‍दर कोई का रिजर्वेशन नहीं, कोई एस.टी. का रिजर्वेशन नहीं, कोई ओ.बी.सी. का रिजर्वेशन नहीं, प्‍लेसमेंट एजेंसी के माध्‍यम से उन लोगों को काम पर लगाया जा रहा है और जो राजस्‍थान का बेरोजगार नवयुवक जिसका अधिकार था, इसके अन्‍दर लगने का, भारत सरकार ने जिसका पूरा पैसा दिया हुआ है, शिड्यूल्‍ड कास्‍ट, शिड्यूल्‍ड ट्राइब्‍स और ओ.बी.सी. के लोगों के शोषण करने का काम यह सरकार कर रही है। एक तरफ रोजगार गारंटी योजना में आप टास्‍क-बेस के आधार पर पेमेंट कर रहे हैं और आप ही की इस किताब के माध्‍यम से मैं बताना चाहता हूं, माननीय सभापति महोदय, तकनीकी सहायता जो इनको पंचायत समिति के स्‍तर पर भर्ती करने थे, ये बांसवाड़ा तकनीकी सहायता आपको 8 लगाने थे, आज तक आप यह किताब विधान सभा में पेश करने तक एक भी तकनीकी सहायक नहीं लगा पाये। इसी तरीके से सिरोही में आपको 5 तकनीकी सहायक लगाने थे, आप पंचायत समिति के स्‍तर पर सिर्फ एक ही लगा पाये। इसी तरह से, ग्राम पंचायत के स्‍तर पर 33 तकनीकी सहायक लगाने थे, माननीय सभापति महोदय, बांसवाड़ा के अन्‍दर लगाये कितने जीरो। डूंगरपुर में 25 लगाने थे, लगाये कितने दो, झालावाड़ जो मुख्‍य मंत्री का गृह जिला है, जहां से पांच बार लोगों ने भारत की लोक सभा में मुख्‍य मंत्री को जिता कर भेजा, वहां पैसा मिलने के बाद भी 26 तकनीकी सहायक लगाने थे, लगाये कितने जीरो और सिरोही में 15 लगाने थे, लगाये कितने जीरो, उदयपुर में 50 लगाने थे और लगाये कितने 8 और टोटल 173 के अगेंस्‍ट में मात्र 21 लोगों को लगाया गया, माननीय सभापति महोदय, और जब तकनीकी सहायता नहीं हैं, माननीय सभापति महोदय, तो मजदूरों के काम का निर्धारण कौन करेगा, कौन आकलन करेगा, आज जो घर बैठे बैठे जो जेईएन बैठे हुए हैं, आपके आफिस में बैठ कर के मांड देते हैं कि इतना काम किया, बाद में रोते रहो, प्रदर्शन करते रहो, कोई सुनने वाला नहीं है। माननीय सभापति महोदय, इसलिए मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं , हमारा मंतव्‍य यहां कोई राजनीति करने का नहीं है। माननीय सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से सरकार से फरियाद करना चाहता हूं कि जिन 2060 पदों पर भारत सरकार ने आपको पैसा दिया, लगाने के लिए, संविधान के प्रावधानों की पालना करते हुए अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ी जाति, उनके आरक्षण के प्रावधान की पालना करते हुए, आप नियमित लोगों को लगाइए जिससे ग्रामीण क्षेत्र के लोगों का जीवन स्‍तर ऊँचा उठाने का सपना श्रीमती सोनिया गांधी का है, रोजगार गारंटी योजना के माध्‍यम से, उस सपने को साकार किया जा सके।

माननीय सभापति महोदय, अब मैं सम्‍बल ग्राम योजना का एक बिन्‍दु आपको निवेदन करना चाहता हूं। सम्‍बल ग्राम वह है जहां 50 प्रतिशत से ज्‍यादा आबादी जिस गांव के अन्‍दर शिड्यूल्‍ड कास्‍ट की है, वह सम्‍बल ग्राम है और सम्‍बल ग्राम विकास योजना राज्‍य के 32 जिले उसके अन्‍दर आते हैं और इन 32 जिलों में से 19 जिलों को, माननीय सभापति महोदय, फूटी कोड़ी सरकार ने नहीं दी। फूटी कोड़ी और टोटल 1 करोड़ 28 लाख रुपये मात्र इन्‍होंने स्‍वीकृत किया है और उसमें से भी 50 लाख रुपये कहां दिये, मुख्‍य मंत्री के बेटे के निर्वाचन क्षेत्र बारां में, 1 करोड़ 28 लाख में से और बाकी का 24 लाख 23 लाख तो करौली और सवाई माधोपुर के उत्‍तर के बाकी के जिलों को एक एक लाख रुपये पकड़ाये हैं और 19 जिलों में फूटी कोड़ी इस सरकार ने नहीं दी है। माननीय सभापति महोदय, और 2463 गांव राजस्‍थान के हैं जो इस सम्‍बल ग्राम योजना के अन्‍दर आते हैं। आज मैं पूछना चाहता हूं आपको, भारतीय जनता पार्टी के 40-45 विधायक हैं शिड्यूल्‍ड कास्‍ट और शिड्यूल्‍ड ट्राइब्‍स के, हजारों के तादाद में गांव हैं जिनको फूटी कोड़ी नहीं दी उस योजना में इसलिए आपके माध्‍यम से मैं निवेदन करना चाहता हूं माननीय सभापति महोदय, कि यह सरकार वास्‍तव में की किसी भी स्‍तर में हितैषी है तो एक एक गांव के अन्‍दर इस सरकार को पैसे देने का काम करना चाहिए, दलित वर्ग की बस्तियों में सुविधाओं में इजाफा करने का काम करना चाहिए, उनके जीवन स्‍तर को ऊँचा उठाने का काम करना चाहिए और माननीय सभापति महोदय, मैं आपको निवेदन करना चाहता हूं रूरल डवलपमेंट डिपार्टमेंट की एक फीगर पर डीआरडीए एडमिनिस्‍ट्रेशन इसमें इसका 2006-07 में प्रोविजन था 535 करोड़ का एलोकेशन है और इन्‍होंने एक्‍चुअल रिसीट है 1 करोड़ 94 लाख की, 5 करोड़ 35 लाख के अगेंस्‍ट में 1 करोड़ 94 लाख की रिसीट है लेकिन खर्चा कितना किया, माननीय सभापति महोदय, 17 करोड़, वेस्‍टफुल एक्‍सपेंडीचर, 310 परसेंट खर्चा ज्‍यादा खर्चा डीआरडीए एडमिनिस्‍ट्रेशन के ऊपर इस सरकार ने किया है। दलितों के काम के लिए पैसा नहीं है, गरीबों के काम के लिए पैसा नहीं, उड़ाने के लिए पैसा है आपके पास? और माननीय सभापति महोदय ...(व्‍यवधान)... 

श्री जोगेश्‍वर गर्ग (जालौर): नये आंकड़े बना लिये क्‍या आप कहां से यह ?

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मैं टेबल पर रख दूंगा अगर इन आंकड़ों को मंत्री जी चुनौती दे दें, अगर आंकड़े गलत हैं तो, माननीय सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं, स्‍टेट स्‍कीम के बारे में एमएलए लैड के 120 करोड़ के प्रोविजन के अगेंस्‍ट में रिलीज किये कितने 91 करोड़ और मेवात के अन्‍दर 275 करोड़ का एलोकेशन था, रिलीज कितने हुए 126 करोड़ और खर्चा कितना मात्र 40 परसेंट जीजीजेडीवाई में 10 करोड़ उन्‍हें रिलीज करना था, और 5 करोड़ इन्‍होंने जारी किये। स्‍वविवेक, स्‍वविवेक में 5 करोड़ का प्रावधान इन्‍होंने किया और खर्चा कितना किया, माननीय सभापति महोदय, मात्र 12 लाख रुपये, यह फरवरी तक के आंकड़े हैं, मेरे पास में डांग के अन्‍दर 5 करोड़ रुपये रिलीज किये और खर्चा कितना किया, टोटल मिला कर, दोनों का मिला कर 1 करोड़ 52 लाख अभी भी बचा हुआ है आपके पास। मगरा में 4 करोड़ रिलीज किये और 6188 खर्चा किया और एक इश्‍यु मैं और आपके माध्‍यम से लाना चाहता हूं, माननीय सभापति महोदय, यह सरकार पिछले दो साल से लगातार राजस्‍थान की जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही है कि सहरिया आदिवासियों का जीवन स्‍तर ऊँचा उठाने के लिए हमारी सरकार ने प्रतिबद्धता के साथ काम किया है। मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं माननीय सभापति महोदय, जितना फंड अवेलेबल था, सहरिया के लिए उसका मात्र 40 परसेंट इस सरकार ने खर्चा किया है और 29 फरवरी को टोटल प्रोविजन के अगेंस्‍ट में 3 करोड़ 84 लाख रुपये, माननीय सभापति महोदय, इस सरकार के पास बचा हुआ पड़ा है, जो अपने आप में यह जाहिर कतर है कि सहरिया आदिवासियों के प्रति जो इनकी सहानुभूति है वह खाली दिखावा है, खाली खोखली नीति है। जिस सहरिया आदिवासी ने पांच बार भारत की लोक सभा में वसुंधरा राज को पहुंचाया उसके जीवन स्‍तर को ऊँचा उठाने के प्रति उनके बच्चों के भविष्‍य के प्रति ∙∙∙∙

श्री सभापति: अब आप समाप्‍त करें , प्‍लीज।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): ये सहरियाओं के लिए बिलकुल गलत बोल रहे हैं। सहरिया के जीवन स्‍तर में जितना सुधार हुआ है और जितनी सुविधाएं इस सरकार ने दी हैं, आज दिन तक 45 साल, 47 साल में कांग्रेस जीरो भी नहीं कर पाई। मैं बिलकुल आंकड़े देकर बता सकता हूं। सहरिया के लिए जो काम ये कर रहे हैं।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): और माननीय सभापति महोदय, मैंने तो यह फीगर रखा है।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): सभापति महोदय, यह ए सी इतना ज्‍यादा ठण्‍डा चलाने का अभी मौसम नहीं है। कई सदस्‍यों ने मेरे को कहा है कि बहुत ही ज्‍यादा है। यह तो मई जून का सा टेम्‍परेचर है।

श्री सभापति: अब आप, माननीय सदस्‍य, आपको 20 मिनट हो गये, कन्‍क्‍लूड करें।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मैं अभी कर रहा हूं, मैं सिर्फ डवलपमेंट की एक चीज आपको कोट करना चाहता हूं। यह रूरल डवलपमेंट डिपार्टमेंट के स्‍टेट की पोजीशन मेरे पास है जिलावाइज और राजस्‍थान के अन्‍दर माननीय सभापति महोदय, जहां से पांच बार राज्‍य की मुख्‍य मंत्री निर्वाचित हुई हैं, झालावाड़ लोक सभा क्षेत्र का बारां जिला राजस्‍थान के अन्‍दर 31वें नम्‍बर पर है, माननीय सभापति महोदय, और मात्र 52 परसेंट पैसा राजस्‍थान में यह सरकार पूरी ताकत लगाने के बाद मात्र 52 परसेंट पैसा वहां खर्च पाई है और जहां से यह मंत्री जी आते हैं, ग्रामीण विकास से, उनका अपना झालावाड़ जिला माननीय सभापति महोदय, राजस्‍थान में 15वीं जगह पर खड़ा है।

सुरेन्‍द्र/अरुण/26.3.07/16.00/2p

 

मैं आपके माध्‍यम से दो बातें कृषि के ऊपर निवेदन करना चाहता हूं।

श्री सभापति: अब और नहीं, प्‍लीज। वांइड-अप करें अब।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अभी तो एक डिपार्टमेंट हुआ है। 2-5 मिनट में खत्‍म कर रहा हूं। (व्‍यवधान)

श्री सभापति: आप दो मिनट में कन्‍क्‍लूड करें।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 5 मिनट तो मुझे दें। माननीय सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से.... (व्‍यवधान) राठौड़ साहब, आप इस तरह से इशारा मत करें। आप इस तरह से आसन को डिक्‍टेट कर रहे हो यह ठीक बात नहीं है। मेरे 10 मिनट तो आपने खराब कर दिये। (व्‍यवधान)

श्री सभापति: कोई डिक्‍टेट नहीं है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): मैंने कब इशारा किया? (व्‍यवधान)

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, आसन को कोई डिक्‍टेट नहीं करता। (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं कृषि विपणन की एक बात कहना चाहता हूं और मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि आपने भरतपुर मण्‍डी के सम्‍बन्‍ध में जो प्रस्‍ताव जमीन एक्‍वायर करने का भेजा था उसमें सैक्‍शन 4 की कार्यवाही हो गई और उसके बाद में अभी तक आपने सैक्‍शन 6 की कार्यवाही क्‍यों नहीं की? ये मंत्रीजी आ गये। आपने वह प्रस्‍ताव अधरझूल में लटका दिया और इसलिए लटका दिया कि इसके अन्‍दर जो मण्‍डी ने प्रस्‍ताव भेजा उसमें यह पटाखा फैक्‍ट्री आ रही थी। आपको यह मालूम होना चाहिए कि उस पटाखा फैक्‍ट्री को 1949 में जमीन मुफ्त दी हुई है और आपने प्रस्‍ताव निरस्‍त भी किया तो आपने मण्‍डी समिति को क्‍यों नहीं भेजा वापस? मैं आपके माध्‍यम से यह भी निवेदन करना चाहता हूं कि खाली यह ही नहीं, रामगंज मण्‍डी के अन्‍दर भी जो जमीन की कार्यवाही हुई है उसके अंदर भी सैक्‍शन 6 की कार्यवाही हो गई, 4 की हो गई उसके बाद में आपने अभी तक मुआवजा नहीं दिया। किसके दबाव में आप काम कर रहे हो? किसके दबाव में आप रुके हुए हो? वो कौनसी ताकतें हैं, किसकी जमीन बाहर निकालना चाहती हैं? कौन सरकार के फैसले को प्रभावित करना चाहता है? जब आप जवाब दें मंत्री जी तो इन बातों का जवाब दें।

श्री सभापति: अब आप समाप्‍त करें प्‍लीज। नो-नो। अब आप विराजें। माननीय श्री अशोक नवलखा।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): सभापति महोदय, चूंकि भरतपुर से आता हूं और भरतपुर की मण्‍डी के बारे में आपने जिक्र किया उस बारे में थोड़ी सी बात कहना चाहता हूं।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): डाक्‍टर साहब, करेक्‍ट कर लें। करेक्‍ट कर लें, आप भरतपुर से नहीं आते हैं, आप कुम्‍हेर से आते हैं। भरतपुर से कहां आते हैं? इसमें जिले का कहां आता है? (व्‍यवधान)

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): भारतपुर मण्‍डी के पास 120 बीघा जमीन आज भी खाली है। मण्‍डी के कितने भी विस्‍तार के लिए आज भी 130 बीघा जमीन भरतपुर में खाली है तो भरतपुर की मण्‍डी का जिक्र करने का मेरे ख्‍याल से कोई औचित्‍य नहीं है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): सभापति महोदय, 5 मिनट में मैं वाइंड-अप कर रहा हूं। बीकानेर कृषि विश्‍वविद्यालय....

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय सभापति महोदय, आप सुनिये, मैं कोई फालतू की बात नहीं कह रहा हूं।

श्री सुन्‍दर लाल (सूरजगढ़): ये एक भी बात काम की नहीं, सारी फालतू की है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय सभापति महोदय, बीकानेर कृषि विश्‍वविद्यालय की रैंकिंग 30वें नम्‍बर पर आ गई है। लगातार इस सरकार ने उस विश्‍वविद्यालय की यह हालत बना रखी है कि वह विश्‍वविद्यालय लगातार पिछड़ता जा रहा है। 11वीं पंचवर्षीय योजना में जो अंतरिम राहत 80 करोड़ रुपये की इस यूनिवर्सिटी को मिलनी चाहिए थी वह इस वजह से मात्र 20 करोड़ रुपये उसको मिले हैं। माननीय सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से यह निवेदन करना चाहता हूं और सरकार से पूछना चाहता हूं कि आप बड़े-बड़े दावे सारे कर रहे हो लेकिन इसके बावजूद कृषि का क्षेत्र क्‍यों घट रहा है? उत्‍पादन क्‍यों घट रहा है