कैलाश/चौहान 23.3.07 11.00 (1)1a

 

अशोधित प्रति प्रकाशनार्थ नहीं

 

राजस्‍थान विधान सभा की कार्यवाही का वृतान्‍त

 

अंक 7     बारहवीं विधान सभा के सातवें सत्र का तेईसवां दिवस      संख्‍या 16

 

शक्रवार,  23 मार्च, 2007

 

राजस्‍थान विधान सभा की बैठक 11:00 बजे

विधान सभा भवन जयपुर, में प्रारम्हुई।

 

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

 

तारांकित प्रश्नोत्तर

 

 

श्री अध्‍यक्ष: श्री मदन राठोड ।

पाली क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण हेतु योजना

232. श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): क्‍या पर्यावरण मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) क्‍या यह सही है कि केन्‍द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पाली क्षेत्र को अत्‍यंत प्रदूषित क्षेत्र मानते हुए देश के 22 समस्‍याग्रस्‍त क्षेत्रों में शामिल कर दिया है ? यदि हां, तो गत 5 वर्षों में राजस्‍थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा इस संबंध में किए गए उपायों का विवरण सदन की मेज पर रखें ।

(2) क्‍या यह भी सही है कि वर्ष 2006 के अंत तक इस क्षेत्र में करोडों रुपये राज्‍य सरकार व उद्यमियों द्वारा व्‍यय करने के उपरांत भी प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं हो पाया है ? यदि हां, तो क्‍यों व अब सरकार प्रदूषण नियंत्रण हेतु क्‍या कार्यवाही करने का विचार रखती है ।

वन एवं पर्यावरण मंत्री (श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे): (1) जी हां । राजस्‍थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा पाली के जल प्रदूषण के निवारण हेतु गत 5 वर्षों में की गई मुख्‍य कार्यवाही का विवरण संलग्‍नक अ' पर उपलब्‍ध है ।

(2) यह सही है कि पाली स्थित तीनों संयुक्‍त उपचार संयंत्रों की तकनीकी एवं संचालन संबंधी खामियों के कारण संपूर्ण औद्योगिक उच्छिष्‍ट को निर्धारित मानकों तक उपचारित करना संभव नहीं हो पा रहा है । गैर औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत 246 जलप्रदूषक उद्योगों से हो रहे प्रदूषण के प्रभावी नियंत्रण के लिए राजस्‍थान राज्‍य प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने जल अधिनियम, 1974 की धारा 33 ए के अंतर्गत बंद करने के निर्देश जारी किये थे, किन्‍तु उक्‍त निर्देशों के क्रियान्‍वयन के विरुद्ध संबंधित उद्योगों द्वारा माननीय उच्‍च न्‍यायालय से स्‍थगन आदेश प्राप्‍त कर रखें हैं ।

औद्योगिक क्षेत्र (प्रथम एवं द्वितीय) में कार्यरत 63 जल प्रदूषक उद्योगों को, जो संयुक्‍त उपचार संयंत्रों से नहीं जुडे थे को राजस्‍थान राज्‍य प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने जल अधिनियम 1974 की धारा 33 ए के अंतर्गत बंद करने के निर्देश जारी किये, किन्‍तु राजस्‍थान राज्‍य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के इन निर्देशों के क्रियान्‍वयन के विरुद्ध संबंधित उद्योगों द्वारा माननीय उच्‍च न्‍यायालय से स्‍थगन आदेश प्राप्‍त कर रखें है ।

इस समस्‍या के निवारण हेतु रुपये 18.865 करोड की स्‍वीकृति योजना में किये जाने वाले कार्यों का विवरण निम्‍न प्रकार है:-

a.                          तीनों संयंत्रों का उन्‍नयन

b.                          संयंत्र यूनिट नं.4 का नया निर्माण

c.                           नाला निर्माण

d.                          स्‍लज डिस्‍पोजल हेतु भूमि का विकास ।

पाली जल प्रदूषण नियंत्रण, परिशोधन एवं अनुसंधान फाउंडेशन पाली द्वारा करवाये जा रहे कार्यों का विवरण संलग्‍नक पर उपलब्‍ध है ।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से यह जानना चाहूंगा कि जब पाली देश के 22 समस्‍याग्रस्‍त क्षेत्रों में शुमार हो गया तो वह कौन कौन अधिकारी हैं जिनके कार्यकाल में उनकी लापरवाही से इतनी बडी मात्रा में अब तक इस प्रकार का प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयां स्‍थापित हो सकी और उनके विरुद्ध क्‍या कार्यवाही की जा रही है । दूसरा क्‍या यह सही है कि पाली में औद्योगिक क्षेत्र फेज तृतीय है, आपने अभी फैज प्रथम और द्वितीय का दिया है । फेज तृतीय में बहुत अधिक उद्योग स्‍थापित हैं । जहां भी जल प्रदूषण उद्योग स्‍थापित है यदि हां तो कितने हैं और उनके बारे में क्‍या विचार है । तीसरा आपके उत्‍तर में संलग्‍नक अ' के क्रम संख्‍या 1 के अनुसार उक्‍त अधिनियम 1974 कब लागू किया गया तथा नये उद्योग स्‍थापित करने हेतु सम्‍मति कब से नहीं दी जा रही है ।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, फेज तृतीय में कुल 325 उद्योग हैं । अध्‍यक्ष महोदय, तीनों संयंत्रों के अपग्रेडेशन हेतु दिनांक 12.12.05 को एडवेंट एनवायरो केयर टैक्‍नोलोजी प्राइवेट लिमिटेड  के द्वारा  8.283 करोड रुपये का एग्रीमेंट किया गया जिसमें फैज द्वितीय जो ट्रीटमेंट प्‍लांट है उसका कार्य पूर्ण हो चुका है । फेज प्रथम में ट्रीटमेंट प्‍लांट और तृतीय ट्रीटमेंट प्‍लांट इनका कार्य 31 मार्च, 07 तक पूरा हो जायेगा । अध्‍यक्ष महोदय, पिछले तीन वर्षों में राज्‍य सरकार द्वारा अधिक प्रदूषण बढने से रोकने के लिये जो नयी ईकाइयां लग रही हैं उन ईकाइयों को हमने अनुमति देने से इंकार कर दिया है । सीईटीपी के अपग्रेडेशन की कार्यवाही जो मैंने आपसे अर्ज की 31 मार्च, 07 तक पूरी कर दी जायेगी  और 12.12.05 को केयर टैक्‍नोलोजी प्राइवेट लिमिटेड के द्वारा जो ठेका दिया गया था उसका काम 31 मार्च तक पूरा हो जायेगा । वास्‍तव में यह बात मानने में कोई गुरेज नहीं है कुछ तो ऐसे गैर औद्योगिक क्षेत्र थे 246 जो बिलकुल ही सीईटीपी से जुडे हुए नहीं थे । हमने जल अधिनियम की धारा 33 ए के तहत उनको नोटिस दिया और उन गैर औद्योगिक क्षेत्रों को बंद करने का नोटिस धारा 33 ए में दिया जो राजस्‍थान उच्‍च न्‍यायालय द्वारा है, स्‍थगन आदेश उन्‍होंने प्राप्‍त कर लिया । इसी तरह 63 और ऐसे उद्योग हैं जिनको हमने 33 ए के तहत बंद करने की कार्यवाही की है परन्‍तु यह मामले राजस्‍थान उच्‍च न्‍यायालय में विचाराधीन हैं । अध्‍यक्ष महोदय, पूर्व में यह सूती वस्‍त्र उद्योग रँगाई छपाई के उद्योग, इन वस्‍त्रों की रँगाई छपाई के प्रोसेस में कास्टिक सोढा काम में लिया जाता था । निरी नागपुर नेशनल एनवायरमेंट इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्‍टीट्यूट द्वारा संयुक्‍त उपचार संयंत्र के अध्‍ययन में यह पाया गया कि सीईटीपी में आने वाले कास्टिक युक्‍त पानी को उपचारित करने के लिये इसे न्‍युट्रलाइज करने के लिये एसिड के माध्‍यम से इसको न्‍युट्रलाइज किया जाये परंतु इस प्रक्रिया के लिये प्रयुक्‍त होने वाले सलफ्युरिक एसिड की कास्‍ट ज्‍यादा पडती थी इसलिए वस्‍त्र उद्योगों को प्रोत्‍साहित किये जाने के लिये एसिड बेस्‍ड वाटर जनित हो, यह एसिड बेस्‍ड वाटर सूची वस्‍त्र उद्योगों के जनित कास्टिक बेस्‍ड की प्रकृति को न्‍यट्रलाइज करने के लिये यह जितने भी उद्योग हैं इनमें न्‍युट्रलाइज करने का हमने कहा । अध्‍यक्ष महोदय, इसमें जो रँगाई छपाई होती है इनमें रँगाई छपाई के द्वारा इसको  सलफ्युरिक एसिड से ट्रीट किया जाता था । जो काटन होती थी उसको एसिड करने से उसका काटन जल जाती थी और इससे अमलीय एसिड निकलता था इसको बंद करने के लिये राजस्‍थान उच्‍च न्‍यायालय द्वारा आदेश प्रसारित किये गये उसके द्वारा हमने इसको बंद करने का आदेश दिया । अध्‍यक्ष महोदय, सिंथेटिक कपडों का बढता चलन और मैकेनाइज प्रोसेस को काम में लेने के कारण पहले की तुलना में कई गुना अधिक सिंथेटिक कपडों की रँगाई छपाई होने लगी है । इसलिए अब जो सिंथेटिक कपडों को काम में लाया जा रहा है इसमें काटन नहीं है । ऐसे अनेक प्रकार के सिंथेटिक यान द्वारा कपड़ा बनाया जा रहा है इसलिए सलफ्युरिक एसिड का कम से कम मात्रा में उपयोग किया जाता है । मात्र इसको न्‍युट्रलाइज करने के लिये एसिड का उपयोग किया जाता है ।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अध्‍यक्ष महोदय, मेरे एक भी प्रश्‍न का उत्‍तर नहीं दिया इन्‍होंने । मैंने पहला प्रश्‍न पूछा था इतनी लापरवाही जिन्‍होंने की है उनके विरुद्ध क्‍या कार्यवाही करेंगे, उसका इन्‍होंने कोई उत्‍तर नहीं दिया । दूसरा मैंने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र तृतीय में जो उद्योग स्‍थापित हैं उनके लिये आपने कोई नोटिस दिया, क्‍या किया, उसके लिये भी इन्‍होंने कोई उत्‍तर नहीं दिया । तीसरा मैंने पूछा कि अधिनियम, 1974 आपने कब लागू किया और सम्‍मति कब से जारी नहीं करने का निर्णय लिया है । अध्‍यक्ष महोदय, इन तीनों में से किसी एक का भी उत्‍तर नहीं दिया । पहले तीनों में से एक का तो उत्‍तर दें । मेरे पूरक प्रश्‍नों में से एक का भी उत्‍तर इन्‍होंने नहीं दिया ।

श्री सुरेन्‍द्र गोयल (जैतारण): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके मार्फत मंत्री जी से यह निवेदन करना चाहता हूं जब इनको पता है कि गवर्नमेंट ने जो आदेश दिया उसके खिलाफ....

श्री अध्‍यक्ष: पहले मूल प्रश्‍नकर्ता का जवाब आने दीजिए उसके बाद आपको मौका दूंगी ।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): तीनों में से एक का भी उत्‍तर नहीं आया अभी तो मेरे और पूरक प्रश्‍न हैं ।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, आपने सम्‍मति की जो बात की है यह 2006 में पाली जल प्रदूषण नियंत्रण परिशोधन अनुसंधान फाउंडेशन यह जो तीनों ट्रीटमेंट प्‍लांट है इनको बंद करने का, सम्‍मति नहीं देने का आदेश दिया था उसके पश्‍चात् ....

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): कारखाना स्‍थापित करने की सम्‍मति दी जाती है आपके बोर्ड के द्वारा, आपके बार्ड से यह सम्‍मति मिलती है तभी कोई कारखाना लगाया जा सकता है । परमिशन टू एस्‍टेबिलिशमेंट और फिर ओपरेट । एनओसी टू एस्‍टेबिलिशमेंट एण्‍ड एनओसी टू ओपरेशन ।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, यह जिस सम्‍मति की बात कर रहे हैं जो गैर औद्योगिक क्षेत्र इंडस्‍ट्री थी उनको जल अधिनियम, 1974 की धारा 33 ए के तहत हमने आदेश दिया था और उस आदेश के विपरीत उन्‍होंने राजस्‍थान उच्‍च न्‍यायालय से स्‍थगन प्राप्‍त किया है ।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): मैं पूछ रहा हूं आपने यह लागू कब किया और कब से सम्‍मति नहीं दे रहे हैं । यह तो क्लियर करें कि लागू कब से किया और सम्‍मति कब से नहीं दे रहे हैं ।

               

ans/usc   11.10  1b   23.03.2007

 

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): 23  मार्च,1974 को लागू किया गया।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): 1974 को, तो उसके बाद सम्‍मति देना कब से बंद किया और इसके दरमियान यदि सम्‍मति दी तो क्‍यों दी ? बिना सम्‍मति के उद्योग लगे उनके लिए क्‍या सोच रहे हैं आप ?  मैंने  पहला प्रश्‍न किया .... 

श्री अध्‍यक्ष: 1974 में तो आपका अधिनियम लागू हुआ, वह यह पूछ रहे हैं कि इसका मुताबिक 33-ए जो उसकी धारा है उसके मुताबिक  आपने उनको नोटिस कब दिया।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): हां, यह पूछ रहा हूं कि कब यह लागू  किया और कब से आपने सम्‍मति देना बंद किया। तीनों प्रश्‍नों के, उत्‍तर एक का भी नहीं आया।

श्री अध्‍यक्ष: उनके पास सूचना थी वह दे दी।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): यह भी सूचना नहीं है , तो उन अधिकारियों के खिलाफ क्‍या कार्यवाही करेंगे जिनकी लापरवाही से ऐसे  उद्योग स्‍थापित हो गए।  यह तो आप दे दें

श्री अध्‍यक्ष: आप सुनिये तो सही, आप मंत्री जी को सुनिये।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): मैं सुमेरपुर  के सदस्‍य को यह जानकारी देना चाहता हूं  बिना कन्‍सेंट के गैर औद्योगिक क्षेत्र के अंदर जो यूनिट थी..(व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): नहीं औद्योगिक क्षेत्र में। मैं गैर औद्योगिक की बात नहीं कर रहा। उसका तो आपने दे दिया और उसमें हाई कोर्ट का स्‍टे भी हो गया। मैं औद्योगिक क्षेत्र की बात कर रहा हूं जो बिना सम्‍मति के लगे और जिन्‍होंने लापरवाही की उनके विरूद्ध क्‍या कार्यवाही करेंगे यह तो बताइये। उन अधिकारियों के खिलाफ...

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पुन: निवेदन करना चाहता हूं...

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): आप इसको टाल क्‍यों रहे हैं ? अध्‍यक्ष महोदय, यह टाल रहे हैं। जिनकी लापरवाही से या जिन्‍होंने सम्‍मति दी, आपने जब यह लागू  कर दिया अधिनियम, उसके बाद में भी जिन्‍होंने सम्‍मति दी उन अधिकारियों के विरूद्ध, जिन्‍होंने लापरवाही से सम्‍मति दी उनके विरूद्ध क्‍या कार्यवाही करेंगे, क्या उसकी जांच करेंगे, यह आप स्‍पष्‍ट तो करें।

श्री अध्‍यक्ष: जांच करेंगे..(व्‍यवधान)

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सुमेरपुर से आने वाले माननीय सदस्‍य को पुन: जानकारी देना चाहता हूं फर्स्‍ट और सैकण्‍ड फैज में63 ऐसे उद्योग है..(व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): फर्स्‍ट सैकण्‍ड तो आपने दे दिया और उसका हाईकोर्ट का स्‍टे भी आ गया।

श्री अध्‍यक्ष: आप सुनिये तो सही इन्‍हें। (व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): थर्ड फेज में जिसमें 325 उद्योग स्‍थापित है, पहले तो यह बताए, दूसरा जिन्‍होंने सम्‍मति  दी या जिनकी लापरवाही से ऐसे एसिडिक एफ्यूलेंट फैलाने वाली फैक्‍ट्रियां लग गई जबकि आपका ट्रीटमेंट प्‍लांट इसके लिए सक्षम नहीं था। जिन्‍होंने यह सम्‍मति दी ऐसे अधिकारियों के विरूद्ध जांच करके आप क्‍या कार्यवाही करने जा रहे हैं वह तो स्‍पष्‍ट करें।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैं पुन: सुमेरपुर से आने वाले माननीय सदस्‍य से निवेदन करना चाहता हूं कि जिन लोगों को हमने सम्‍मति नहीं दी..(व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): मैं लोगों की बात फिर भी नहीं कर रहा हूं, मैं इण्‍डस्ट्रियलिस्‍ट के खिलाफ में नहीं हूं, मैं फैक्ट्रियों के खिलाफ भी नहीं हूं। मैं यह कह  रहा हूं जिन्‍होंने लगाने दी उन अधिकारियों के विरूद्ध, उनका क्‍यों बचाना चाहते हैं यह समझ में नहीं आई।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप सुन ले। 

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अध्‍यक्ष महोदय, यह घुमा फिराकर वो ही कर रहे हैं। मैं निवेदन करना चाहता हूं कि यह घुमा फिराकर फिर वही कर रहे हैं। (व्‍यवधान)

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, 2004 से किसी उद्योग को हमने..(व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): कोर्ट का स्‍टे उनके विरूद्ध नहीं है।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप सुनिये, वह कह रहे हैं, जवाब दे रहे हैं, आप सुनिये। (व्‍यवधान)

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): इसी क्‍वेश्‍चन का उत्‍तर आयेगा, इसी क्‍वेश्‍चन को रिपिट कर रहा हूं..(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): पार्टी मिटिंग के फैसले विधान सभा में  क्‍यों कर रहे हैं ?

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): मेरा क्‍वेश्‍चन यह है कि जब आपका ट्रीटमेंट प्‍लांट फैल था अकार्डिंग टू योअर आफिसर रिपोर्ट, ट्रीटमेंट प्‍लांट फैल था (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: यह क्‍या बात हुई ?

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): ट्रीटमेंट प्‍लांट फैल होने के बाद फिर उन थर्ड फैज में उन इण्‍डस्‍ट्री क्‍यों लगने दिया गया जब उनके पास बोर्ड की एनओसी नहीं थी, यह इनका क्‍वेश्‍चन है, जब ट्रीटमेंट प्‍लांट फैल की रिपोर्ट आ गई ट्रीटमेंट प्‍लांट फैल है तो फिर थर्ड फैज में उन लोगों को इण्‍डस्‍ट्री क्‍यों लगाने दी गई जिन इण्‍डस्‍ट्री पर एनओसी नहीं थी।

श्री अध्‍यक्ष: आप पाली वालों को पूछ लेने दीजिए। (व्‍यवधान) आप तो बिराजो, पाली वालों को पूछ लेने दो।

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, क्‍योंकि यह उद्योग विभाग से संबंधित है, थोड़ा सा क्लियरिफाई करूंगा माननीय सदस्‍य को कि पहले काटन लेटेड यार्न बनता था उसकी प्रोसेसिंग होती थी उन्‍हीं इण्‍डस्‍ट्री को उन्‍होंने सिंथेटिक यार्न में कन्‍वर्ट किया  है उस प्रोसेस में कॉमन ट्रीटमेंट प्‍लांट का, ट्रीटमेंट फेसेलिटी वही रही जबकि उन्‍होंने सिंथेटिक यार्न किया इसलिए एसेडिक यह चेंज हुआ है।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): बिल्‍कुल सही कह रहे हैं। मैं यही निवेदन कर रहा हूं, मैं यह जानना चाहता हूं कि जिनकी लापरवाही से....

श्री अध्‍यक्ष: जवाब दे दिया इन्‍होंने।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): इतने आदमी, एसिडिक फैलाने वाली फैक्ट्रियां लग गई उन अधिकारियों के खिलाफ  जांच करके आप क्‍या कार्यवाही करना चाहते हैं, एक तो यह क्लियर करें। दसूरा,आपने फर्स्‍ट और सैकण्‍ड को तो बना दिया और उनको आपने नोटिस भी दे दिया और उनको हाई कोर्ट से उन्‍होंने स्‍टे भी प्राप्‍त कर लिया लेकिन थर्ड फैज के कहीं कोई नोटिस नहीं, कोई स्‍टे नहीं। 

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): मेरा इसी से संबंधित प्रश्‍न है।

श्री अध्‍यक्ष: श्री सुरेन्‍द्र गोयल।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): 325 इण्‍डस्‍ट्रीज हैं उसका तो क्लियर कर दीजिए।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): मुझे एक प्रश्‍न पूछना है..( व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): नहीं, पहले मेरा...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: श्री सुरेन्‍द्र गोयल।

श्री सुरेन्‍द्र गोयल (जैतारण): मेरा नाम पुकार लिया।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): मेरा तो आप क्लियर होने दें। मैंने तीन पूरक प्रश्‍न किए, जवाब एक का भी नहीं आया।

श्री अध्‍यक्ष: वह सबके जवाब एक साथ देंगे। आपने पूछ लिया, अब उनको भी पूछने  दो (व्‍यवधान) जवाब देंगे वह ।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): मैं यह जानना चाहता हूं क्‍या यह सही है कि मेयड़ा बाँध में पाली के कारखानों का प्रदूषित जल एकत्रित हो गया , उस बाँध में प्रदूषित जल एकत्रित हो गया, अगर हां तो क्‍यों, उसको रोकने का क्‍या उपाय है, जिन किसानों की भूमि बंजर हुई है उनको मुआवजा देने की क्‍या योजना है?(व्‍यवधान)

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): इसी बाँध का पानी निकाला गया(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष:  ना-ना, मैंने आपका  नाम नहीं पुकारा।

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): यह क्‍वेश्‍चन एक ही क्‍वेश्‍चन है, बाँध का निकाला गया..(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: मैंने आपका नाम नहीं पुकारा। मत लिखना, अंकित नहीं हो।

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): 000

श्री सुरेन्‍द्र गोयल (जैतारण): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं मंत्री महोदय से यह निवेदन कर रहा हूं, जानना चाहता हूं कि हाई कोर्ट से स्‍टे कितने वर्ष पहले लिया गया  और हाई कोर्ट का स्‍टे लेने के बाद में क्‍या राज्‍य सरकार उस स्‍टे के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में गई है क्‍या , और सुप्रीम कोर्ट में नहीं गई तो..(व्‍यवधान)  तो इसके पीछे क्‍या कारण है और इतने सालों से लोगों के जान माल का नुकसान हो रहा है और पूरा पाली प्रदूषित हो रहा है, ऐसे हालात है कि वहाँ पर आदमी खड़ा नहीं रह सकता। रात को सो नहीं सकता। इस प्रकार का पोल्‍यूशन पूरे पाली में है। तो मेरा निवेदन है उस हाई कोर्ट का स्‍टे लिया हुआ है उसके खिलाफ कब राज्‍य सरकार सुप्रीम कोर्ट में जाकर के उस स्‍टे को वेकेट कराने की कार्यवाही कर रही है, नहीं कर रही है।

श्री अध्‍यक्ष: आप डी बी में गये क्‍या (व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): स्‍टे के लिए 6-6 महीने बाद यह पत्र लिख रहे हैं। 5.1.2006 को लिखा फिर 8.1.2007 को लिख तो 6-6 महीने बाद में क्‍यों दे रहे हैं, तुरंत कार्यवाही क्‍यों नहीं होती है। प्रश्‍न का उत्‍तर दिलवाइये। (व्‍यवधान)

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): इस संबंध में मेरा..

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): क्‍या कार्यवाही कर रहे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: मिस्‍टर देवल।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अधिकारियों के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही कर रहे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: पहले पाली के..(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर):आपके तो सारे प्रदूषित हो गए, हमको बोलने दीजिए। अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से यह जानना चाहता हूं कि प्रदूषण बोर्ड का पाली में कोई आफिस है, है तो 2003 से7 तक कितने मामलों में उन्‍होंने चालान किया नम्‍बर एक, नम्‍बर दो, क्‍या यह सही है कि जिन जल प्रदूषण नियंत्रण संयंत्र कास्टिक युक्‍त पानी के लिए लगाये गए थे तो फिर उनमें एसिडिक पानी को छोडा गया और यह संयंत्र है इसका वहां पेरिनियल रिवर के लिए छोडा जाता है तो फिर यह बाणी नदी जो कभी कभी साल में एक दो बार ही आती है उसमें  क्‍यों छोड़ा जा रहा है। 

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न का उत्‍तर दिलावाइये ना।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): अध्‍यक्ष महोदय, इसी से संबंधित है मैंरा।

श्री अध्‍यक्ष: मंत्री जी, खुशवीर सिंह जी को भी पूछ लेने दीजिए।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): अध्‍यक्ष महोदय, मैं मंत्री महोदय से जानना चाहता हूं कि सी ई पी टी के नोर्म्‍स बने हुए हैं वह नोर्म्‍स, जो मानक है वह पेरिनियल रिवर्स के  है या सीजनल रिवर के है, एक तो मुझे यह जवाब दें, एक जो प्रश्‍न पहले में आपने जो जवाब दिया है विवरण अ उसमें यह लिखा संयंत्र का संचालन 24 घंटे चालू रखने हेतु जनरेटर सैट 600 केवीए के लगाए गए, क्‍या वह जनरेटर सैट चल रहे हैं, या वह सिर्फ स्‍थापित किए इसका जवाब दें।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सुमेरपुर से आने वाले माननीय सदस्‍य ने जो जानकारी पूछी, मैं आपको जानकारी देना चाहता हूं 2004 से एडजेस्टिंग यूनिट थी उनको हमने सम्‍मति जारी नहीं की। दूसरा अध्‍यक्ष महोदय, मंडिया रोड स्थित इकाईयां चूंकि सीईपीटी से जुडी हुई है इसलिए उनको बंद करने का प्रश्‍न ही पैदा नहीं होता।(व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): जब आपका सीईपीटी फैल है तो...(व्‍यवधान) जब आपके सीईपीटी फैल है...

श्री अध्‍यक्ष: आप बीच में नहीं बोले।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री):मैंने अभी कहा था यह सीईपीटी अपग्रेडेशन के कार्य जो एक तो सीईपीटी सैकण्‍ड  जिसका काम पूरा हो चुका हैं एक फर्स्‍ट और थर्ड है वह 31 मार्च,2007 तक पूरा हो जाएगा। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने हाईकोर्ट की जो चर्चा की, हाईकोर्ट ने जो डायरेक्‍शन दिये  हैंऔर कौनसी तारीख को डायरेक्‍शन दिये पाली डी पी रिट पीटिशन 559/2002 महावीर नगर विकास समिति बनाम राज्‍य सरकार ने एक   जो पी आई एल जो पेश  की उसमें राजस्‍थान उच्‍च न्‍यायालय के द्वारा 9.3.2006 को निम्‍न आदेश दिए राज्‍य  में प्रदूषण नियंत्रण नये सिरे से पाली एवम आस पास के क्षेत्र  के वस्‍त्र उद्योग का निरीक्षण  करेगा दूसरा जो उद्योग प्रदूषण फैला रहे हैं उन्‍हें प्रदूषण नियंत्रण हेतु उचित व्‍यवस्‍था अपनानी चाहिये।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): यह इररिलेवेंट, मैं जो पूछ रहा हूं उसका तो जवाब नहीं दे रहे।

दुर्गा/चौहान 230307 1120 1c

 

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कार्बोनाइज्‍ड, जो इण्‍डस्‍ट्रीज इस याचिका में, उच्‍च न्‍यायालय ने दिनांक 14.05.2004 को यह निर्देश भी पारित किये हैं कि जो कार्बोनाइज्‍ड इंडस्‍ट्रीज हैं, उनको बंद की जाए तो उस पर हमने एक्‍शन लिया, 246 यूनिट्स को हमने 33-ए का नोटिस दिया, 63 यूनिट को हमने 33-ए का नोटिस दिया और 3 यूनिट को जो कार्बनडाइज्‍ड कर रही थीं उनको हमने 33-ए का नोटिस देकर तुरन्‍त कार्यवाही की। (व्‍यवधान)

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): माननीय मंत्री महोदय, स्‍टे वेकेट कराने के लिये आपने क्‍या कार्यवाही की?

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): एक यूनिट ने हाई कोर्ट को एश्‍योरेंस दिया है कि मैं कार्बोनाइज्‍ड नहीं करुंगा, सल्‍फरिक एसिड यूज नहीं करुंगा। इस कण्‍डीशन पर हाई कोर्ट ने उसको चलाने की अनुमति दी। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वास्‍तव में पाली के अन्‍दर प्रदूषण का मामला निश्चित रूप से गम्‍भीर है और हाई कोर्ट ने एक प्रकार का, एक्‍सपर्ट के द्वारा जांच कराने का आदेश दिया। हमने एक्‍सपर्ट को, एन.पी.सी. को नियुक्‍त किया और वह इस माह तक, उन्‍होंने कहा कि एक माह के अन्‍दर-अन्‍दर अपनी रिपोर्ट प्रस्‍तुत करेंगे, जो वहां पर प्रदूषण फैल रहा है, जिससे नुकसान हो रहा है, भूमि का जो परिवर्तन हो रहा है, इसके बारे में एक एक्‍सपर्ट जो दिल्‍ली के द्वारा है, वह अपनी एक माह के अन्‍दर एन.पी.सी. के द्वारा जो गठित की गयी कमेटी के द्वारा रिपोर्ट दे दी जाएगी और राजस्‍थान हाई कोर्ट में वह रिपोर्ट पेश की जाएगी। मामला उच्‍च न्‍यायालय के समक्ष विचाराधीन है, राज्‍य सरकार ने...। (व्‍यवधान)

श्री सुरेन्‍द्र गोयल (जैतारण): कब तक करेंगे?

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): निश्चित रूप से, यह भी माननीय सदस्‍य, जैतारण से आने वाले माननीय सदस्‍य... (व्‍यवधान)

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): स्‍टे वेकेट कराने के लिये क्‍या कार्यवाही हुई अब तक और जिन अधिकारियों ने नहीं करवाई उनके विरुद्ध आप क्‍या कार्यवाही कर रहे हैं?

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): जो स्‍थगन आदेश राजस्‍थान उच्‍च न्‍यायालय के द्वारा मिला है उस स्‍थगन आदेश के विरुद्ध हमने अर्जेण्‍ट हियरिंग की 2 बार एप्‍लीकेशन दी है और जब अर्जेण्‍ट हियरिंग के लिये निश्चित रूप से अपनी तरफ से हम प्रयासरत हैं। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह जो समस्‍या है, जिसमें 3 सी.पी.टी. हैं, जिनकी क्षमता 22700 किलोलीटर है जबकि डिस्‍चार्ज उस यूनिट से 28800 किलोलीटर हो रहा है। उद्योगों के उत्‍पादन और प्रोसेस की जो व्‍यवस्‍था है इसके बदलने के कारण... (व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अध्‍यक्ष महोदय, एक भी सवाल का जवाब नहीं आया। मेरे एक सवाल का भी जवाब नहीं दे रहे हैं। (व्‍यवधान)

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): अब आप यह कह रहे हैं कि एक का जवाब नहीं दे रहे हैं। सब जवाब आपको दे चुका हूं।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): मैंने जब कहा कि जिनकी लापरवाही से...(व्‍यवधान)

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): कौनसा ऐसा जवाब है जो नहीं, आपने हाइकोर्ट का पूछा, हाइकोर्ट का आपको बता दिया। अर्जेण्‍ट एप्‍लीकेशन लगी हुई है। हियरिंग की एप्‍लीकेशन दी है और हाइकोर्ट ने जो डाइरेक्‍शन दिये... (व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अध्‍यक्ष महोदय, मेरा पहला पूरक प्रश्‍न, पहले 3 पूरक प्रश्‍नों में से एक का भी जवाब नहीं दिया।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): हाई कोर्ट के डाइरेक्‍शन के आधार पर हमने एक्टिविटिज कीं, 33-ए की कार्यवाही की।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): मुझे वह नहीं चाहिए, मुझे वह नहीं चाहिए। मुझे वह चाहिए कि पहला जो मेरा पूरक प्रश्‍न था कि पाली में प्रदूषण की समस्‍या आ गयी तो किन की लापरवाही से ऐसे उद्योग लगे, उनके विरुद्ध क्‍या कार्यवाही करना चाहते हैं। एक तो यह, इसका जवाब दें। दूसरा मैंने पूरक प्रश्‍न किया था। (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): अध्‍यक्ष महोदय, काश्‍तकारों को मुआवजे दिये जाने की भी बात करो। सैंकड़ों बीघा जमीन खराब हो गयी। मेयड़ा बाँध, यह लूणी से आने वाले माननीय सदस्‍य बता रहे हैं, उसकी वजह से सैंकड़ों बीघा जमीन खराब हो गयी है। क्‍या सरकार उन काश्‍तकारों को मुआवजा देने का विचार रखती है। क्‍या सरकार इन उद्योगों के लिये...(व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): मैंने अगला प्रश्‍न किया, हां, मेरे प्रश्‍न का उत्‍तर तो आने दें। यह दे नहीं रहे हैं मंत्रीजी। मंत्रीजी, आप क्‍यों नहीं बोल रहे हैं, आप बतायें।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): मंत्री महोदय, क्‍या यह प्रदूषण की वीडियोग्राफी कराएंगे?

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): और यह अधिनियम आपने कब लागू किया और कब से सम्‍मति लेना बंद किया। लागू करने और सम्‍मति लेने के बीच जिनको दी गयी, उनके खिलाफ में क्‍या कार्यवाही कर रहे हैं? (व्‍यवधान)

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 98 और रायपुर से आने वाले माननीय सदस्‍य ने कहा है तो निश्चित रूप से मैंने पूर्व में भी अपने अधिकारियों को डाइरेक्‍शन दिये हैं, जिस हिसाब से यह प्रदूषण की समस्‍या बढ़ रही है तो मैंने उनको डाइरेक्‍शन दिये और आज भी सदन में डाइरेक्‍शन दे रहा हूं कि एक माह के अन्‍दर जितनी यूनिट हैं, जो एक्‍सपान हो रहा है, इसकी निश्चित रूप से वीडियोग्राफी की जाएगी और जो आपने कहा है कि उनके मुआवजे के लिये क्‍या व्‍यवस्‍था है। यह तो हाइकोर्ट ने जो डाइरेक्‍शन दिये हैं, हाइकोर्ट के डाइरेक्‍शन से हमने एक्‍सपर्ट को एन.पी.सी. की, जिसने कि एक माह में रिपोर्ट पेशन करने का हमें आश्‍वासन दिया है, उनके अन्‍दर मुआवजा भी है, उसके अन्‍दर वहां पर जल प्रदूषण के बारे में पूरी रिपोर्ट प्रस्‍तुत कर हाइकोर्ट के अन्‍दर सब्मिट करने के बाद में जो अनुदान राशि और उच्‍च न्‍यायालय के जो आदेश प्राप्‍त होंगे, कमेटी का फोर्मेशन हो चुका है, एक माह में कमेटी अपनी रिपोर्ट प्रस्‍तुत कर रही है, रिपोर्ट के बाद में जो भी निर्णय होगा, निश्चित रूप से हम पालन करेंगे। (व्‍यवधान)

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): एक क्‍वश्‍चन मेरा, पहले एक क्‍वश्‍चन है, मंत्रीजी। (व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): पहले 3 में से एक का भी उत्‍तर नहीं है। पहले अधिकारियों के बारे में जांच करने के की क्‍या कार्यवाही करेंगे, वह बोलें ना आप। (व्‍यवधान)

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सुमेरपुर से आने वाले माननीय सदस्‍य ने, जो सलफरिक एसिड की जो फेक्ट्रियां, मैंने आपको कहा है कि निरी के आदेश के द्वारा इसको न्‍यूट्रलाइज करने के लिये सलफरिक एसिड, कास्टिक सोडा और सलफरिक एसिड को न्‍यूट्रलाइज करने के लिये निरी ने आदेश दिये थे उसके आदेश के आधार पर सलफरिक एसिड, 20 प्रतिशत सलफरिक एसिड को काम में ले रहे हैं और उसके पश्‍चात, 20 प्रतिशत के अलावा जिन लोगों ने सलफरिक एसिड को काम में लिया, जिन यूनिट ने, तो निश्चित रूप से मैं इसकी जांच कराऊंगा।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): नहीं, गलत बात। बिलकुल ही गलत है।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न का जवाब नहीं दिया आपने।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): जिन अधिकारियों ने लगाने दी, आप देखिये, घुमाइये मत प्रश्‍न को। आप उन फैक्ट्रियों के खिलाफ कार्यवाही करना चाहते हैं। (व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, बिना कलक्‍टर के या बिना सक्षम अधिकारियों की कन्‍सेंट के एस्टिब्लिश नहीं हो सकती है। (व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): एन.ओ.सी. जिन्‍होंने दी, अध्‍यक्ष महोदय, एक मिनट, इसका जवाब दिला दें कि जिन्‍होंने, 20 प्रतिशत से अधिक एसिड आ रही है तो अधिक एसिड-युक्‍त पानी छोड़ने वाली फैक्ट्रियों को जिन्‍होंने एन.ओ.सी. दी, उनके खिलाफ जांच करके क्‍या कार्यवाही करेंगे, यह तो बतायें। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: मंत्रीजी के पास जो सूचना थी, वह उन्‍होंने दे दी।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर):  नहीं दी।

श्री अध्‍यक्ष: आप समझते हैं कि पूरी सूचना नहीं दी या अधूरी दी या गलत दी तो आप दूसरे माध्‍यमों से आइये।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): नहीं, गलत नहीं कह रहा हूं। ये टाल रहे हैं। मंत्री महोदय, आप इसका जवाब दीजिये। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: देखिये, आसन भी कम्‍पेल नहीं कर सकता है। आपका तो सवाल ही नहीं है। (व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): नहीं, नहीं, मैं आपसे निवेदन कर रहा हूं।

श्री अध्‍यक्ष: आसन भी मंत्री को कम्‍पेल नहीं कर सकता है जवाब देने के लिये।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अध्‍यक्ष महोदय, मेरे तीनों पूरक प्रश्‍नों में से एक का भी उत्‍तर नहीं है, वह कृपया दिलवायें। मैंने जो पहला सवाल किया। (व्‍यवधान) पहला, दूसरा, तीसरा, जो तीनों सवाल किये ..(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां):  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक सवाल, आपकी इजाजत हो तो.. (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप भी मन की निकाल दीजिये।

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): मेरा निवेदन यह था कि सेक्‍शन 33 के तहत जो नोटिस इश्‍यू किये गये उनके खिलाफ स्‍टे आर्डर है।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, जब सम्‍मति दी नहीं तो कार्यवाही क्‍या करें।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अच्‍छा सम्‍मति नहीं दी, या तो आप घोषणा कर दें कि नहीं दी, मंत्री महोदय, यह घोषणा कर दें। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: सुमेरपुर से आने वाले माननीय सदस्‍य, अब आप कृपया विराजें। उनका भी इस सम्‍बन्‍ध में प्रश्‍न है। एक सप्‍लीमेंट्री उनको भी पूछने दीजिये।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): इसी सम्‍बन्‍ध में है।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अध्‍यक्ष महोदय, मैं एक निवेदन करुं कि मंत्रीजी यह घोषणा कर दें कि इस प्रकार की सम्‍मति नहीं दी। यह कह दें तो मैं मान जाऊंगा। और सम्‍मति दी तो उनके खिलाफ कार्यवाही क्‍या करेंगे। दो छोटी सी बातें हैं। आप अधिकारियों को क्‍यों बचाना चाहते हैं और फैक्‍ट्री वालों के खिलाफ में क्‍यों कार्यवाही करना चाहते हैं। (व्‍यवधान) मैं फैक्‍ट्री वालों के खिलाफ नहीं हूं। मैं फैक्‍ट्री वालों के खिलाफ नहीं हूं। मेरा यह कहना है कि जिन्‍होंने सम्‍मति दी, या तो आप कहें कि बिलकुल नहीं दी। एसेडिक पानी फैलाने वाली फैक्ट्रियों को सम्‍मति नहीं दी, या तो यह घोषणा कर दें या फिर जिन्‍होंने दी, उनके खिलाफ क्‍या कार्यवाही करेंगे, यह सीधा सा सवाल है।

श्री अध्‍यक्ष: विराजिये, आप विराजिये।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्रीजी से एक बात जानना चाहूंगा। मंत्रीजी यह तो साफ है कि आपके प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अतिरिक्‍त भारत सरकार के प्रदूषण्‍ं नियंत्रण बोर्ड द्वारा भी आज से काफी वर्षों पहले जोधपुर और पाली को चिह्नित किया हुआ है। राज्‍य सरकार जो भी बातें कर रही है, हम उसमें नहीं जाते। उसके बाद में उद्योग लगे, उसके बाद ट्रीटमेंट प्‍लाण्‍ट फेल हुए जो भी स्थिति है, मैं तो यही साफ प्रश्‍न करना चाहता हूं कि यह सब कुछ होने के बाद भी आपके प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी एन.ओ.सी. दे रहे हैं, इण्‍डस्‍ट्रीज लग रही हैं। माननीय सदस्‍य यही जानना चाहते हैं कि गलती किसने की। पाली और जोधपुर प्रदूषित होते जा रहे हैं। आप कह रहे हैं, हमने कार्यवाही कर दी।

श्री अध्‍यक्ष: आप प्रश्‍न पूछ लीजिये, भाषण नहीं दें।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): अब तक कार्यवाही नहीं करने का क्‍या कारण है और उसके लिये कौन दोषी हैं। यही हम जवाब चाह रहे हैं उसके ऊपर आप कब तक कार्यवाही कर देंगे। हमें तो इतनी सी बात बता दो और वह आथंटिक कार्यवाही होगी किस तरीके से, यह बता दो हमें।

श्री अध्‍यक्ष: हां, बता देंगे।

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): मंत्री महोदय, प्रदूषण हो रहा है। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: जवाब आने दीजिये ना आप उनका।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): मंत्रीजी जवाब तो दे दें। मंत्रीजी जवाब दे दें। या तो यह कह दें कि सम्‍मति नहीं दी तो बात समझ में आ जाएगी। या दी, उनके खिलाफ क्‍या कार्यवाही कर रहे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: आप उनको कम्‍पेल नहीं कर सकते हैं।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं पुन: माननीय सदस्‍य से निवेदन करना चाहूंगा कि 2-3 प्‍लाण्‍ट हैं, जिनकी केपेसिटी 22 हजार कुछ है और डिस्‍चार्ज वहां 28 हजार का था। हमने अपग्रेडेशन के लिये प्रयास किये, 18 करोड़ रुपये की राशि स्‍वीकृत हुई, अपग्रेडेशन की कार्यवाही कम्‍पलीशन पर ही। एक प्‍लाण्‍ट सैकिण्‍ड स्‍टेज का कम्‍पलीट हो चुका है। फर्स्‍ट और थर्ड ट्रीटमेंट प्‍लाण्‍ट 31 मार्च तक कम्‍पलीट हो जाएंगे। जब यह कम्‍पलीट हो जाएंगे। हमने जहां पर कच्‍ची नालियों के द्वारा जहां पानी आता था उसके लिये हमने नाले का प्रबन्‍ध किया।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अध्‍यक्ष महोदय, फिर घुमा रहे हैं सवाल को। मैं सीधा ही सवाल पूछ रहा हूं।

श्री अध्‍यक्ष: आप 31 तारीख बता रहे हैं। आप 31.03.07 बता रहे हैं। उसके बाद भी विधान सभा चलेगी। तो 31 को आप श्‍योर तो हो लीजिये कि 31 तक कम्‍पलीट हो जाएगा, यह तो कर लीजिये आप।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): कम्‍पलीट हो जाएगा। अध्‍यक्ष महोदय, यह 31 मार्च तक, प्‍लाण्‍ट नम्‍बर 2 कम्‍पलीट हो चुका है और नम्‍बर एक व तीन 31 मार्च तक कम्‍पलीट हो जाएंगे।

 

Vps-akt-23032007-1130-1d-1

 

इनके के साथ में हमने हाईकोर्ट के एक डाइरेकशन से एन.पी.सी. की कमेटी बनायी, एक्‍सपार्ट्स की बनायी, जो नुकसान हो रहा है। पोल्‍यूटेड हो रहा है उसको कैसे रोके इस बारे में भी वह ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आपने दिखवा लिया क्‍या?

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): सीधा सा सवाल है यह फिर छिपा रहे हैं। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सीधा सा सवाल है कि या तो बतायें कि सहमति नहीं दी ... (व्‍यवधान)

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): और जितनी जिसकी केपेसिटी है, उसकी केपेसिटी बढ़ेगी। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आपने इनको तो कह दिया कि 31 तारीख तक हो जाएगा। 31 तारीख तक हो जाएगा क्‍या? 31 तारीख कहा है आपने। ... (व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): और या दी है तो उनके खिलाफ क्‍या कार्यवाही करेंगे, यह सीधा सा सवाल है।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): जिन्‍होंने बिना कंसेंट, जिन्‍होंने बिना कंसेट के ... (व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): यह फिर घूमा करके, यह फिर घूमा रहे हैं सवाल को ... (व्‍यवधान)

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): जिन्‍होंने बिना कंसेंट के ... (व्‍यवधान)  औद्योगिक क्षेत्र के अन्‍दर जिन्‍होंने इंडस्‍ट्रीज लगायी है उनको हमने सहमति नहीं दी है और ... (व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): नहीं, जिन्‍होंने सहमति दी है ... (व्‍यवधान)

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): उनको केन्सिलेशन के लिए 33-ए के नोटिस दिये हैं। ऐसे 63 और यूनिट्स हैं जो बिना कंसेंट के हैं उनको 33-ए में नोटिस दिया है बंद करने का, लाइट-पानी काटने का। जो कार्बोनाइज ... (व्‍यवधान) इण्‍डस्‍ट्रीज थी उसको हमने बंद किया ... (व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): वह बात नहीं है। वह बात नहीं पूछ रहा हूं। जिन्‍होंने एन.ओ.सी. दी उनके खिलाफ क्‍या करना चाहते हैं? जिन्‍होंने एन.ओ.सी. दी, जिन्‍होंने सहमति दी वह तो उनका बताओ या तो यह बता दो कि सहमति नहीं दी। सीधी सी बात है।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): सहमति तो माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एन.ओ.सी. उन औद्योगिक क्षेत्रों को और उन इण्‍डस्‍ट्रीज को दी जाती है जिनका ट्रीटमैंट प्‍लांट के अन्‍दर बराबर वहां पानी, एफ्लुएंट पानी आता है, ठीक करने के लिए। क्‍या बात करते हो आप? ... (व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): आपका ट्रीटमैंट प्‍लांट फेल है। फेल है ट्रीटमैंट प्‍लांट।  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह जवाब नहीं दे रहे हैं। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन श्री शंकर सिंह राजपुरोहित।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा सीधा सा सवाल है। मेरा सीधा सा सवाल है।

श्री अध्‍यक्ष: 31 मिनट हो गये हैं1

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा सीधा सा सवाल है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कृपया, कृपा करके यह किसानों के हितों की बात है ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: एक प्रश्‍न पर आधा घंटे से अधिक का समय हो गया है, नहीं। ... (व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): किसानों की भूमि बंजर हो गयी है। किसान बरबाद हो गये हैं, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इतना सीधा सा सवाल है। नहीं, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्‍लीज। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: एक प्रश्‍न पर 31 मिनट हो चुके हैं। नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): किसानों का मुआवजा का कह दिया और अब क्‍या होगा? कह दिया।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह तो मेरा अनुत्तरित रह गया।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): किसानों को मुआवजा दे रहे हैं और क्‍या होगा?

एक माननीय सदस्‍य: उनको मुआवजा मिल जाएगा, बात तो वही है न, क्‍यों रिपीट कर रहे हो?

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा सीधा सा सवाल है। सीधा सवाल का उत्‍तर नहीं दे रहे हैं, अध्‍यक्ष महोदय। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन। नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन। मैंने दूसरा प्रश्‍न पुकार लिया है।

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जन स्‍वास्‍थ्‍य से जुड़ा हुआ, पर्यावरण, प्रदूषण का यह एक प्रश्‍न है।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह क्‍यों बचाना चाहते हैं, यह समझ में नहीं आ रहा है? ... (व्‍यवधान)

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): जो राजस्‍थान के जन स्‍वास्‍थ्‍य के लिए काफी महत्‍वपूर्ण है और इस पर मेरे ख्‍याल से आधा घंटा क्‍या, चाहे एक घंटा लग जाए, इस पर हर सवाल का जवाब आना चाहिए।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसका तो आप उत्‍तर दिलवाइये, प्‍लीज।

श्री अध्‍यक्ष: नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन। आप आपस में बातचीत बंद करें, जवाब सुनने दें।

 


जिला जालौर के धार्मिक स्‍थलों में चोरी की घटनाओं पर रोक

233. श्री शंकर सिंह राजपुरोहित (आहोर): क्‍या गृह मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) जिला जालौर के विभिन्‍न थानों में वर्ष 2003 से फरवरी, 2007 तक मंदिरों में हुई चोरियों के कितने मुकदमे दर्ज किये गये? थानेवार/ वर्षवार सूची सदन की मेज पर रखें।

(2)उक्‍त मामलों में कितने मुलजिम गिरफ्तार किये गये तथा कितनों में माल बरामदगी की गई? कितनों में माल बरामदगी शेष है तथा कितनों में चालान पेश कर दिये गये? थानेवार सूची सदन की मेज पर रखें।

(3)क्‍या सरकार मंदिरों में बढ़ती हुई चोरियों की वारदातों को रोकने हेतु कार्य योजना बनाने का विचार रखती है? यदि हां, तो क्‍या और नहीं, तो क्‍यों?

गृह मंत्री (श्री गुलाब चन्‍द कटारिया): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, (1) जिला जालौर में विभिन्‍न थानों में वर्ष 2003 से फरवरी, 2007 तक कुल 83 मुकदमे मंदिरों में चोरियों से संबंधित दर्ज हुए। वर्षवार व थानेवार सूची पिरिशिष्‍ट में संलग्‍न है।

(2) उक्‍त मामलों में 94 मुलजिम गिरफ्तार किये गये तथा 44 अभियोगों में माल बरामद किया गया, 39 अभियोगों में बरामदगी शेष है तथा 45 अभियोगों में चालान पेश न्‍यायालय में किये गये। थानेवार सूची परिशिष्‍ट में संलग्‍न है।

(3) मंदिरों में चोरियों की घटनाओं की रोकथाम पर स्‍थानीय पुलिस के स्‍तर पर प्रयास किये गये हैं एवं बीट पेट्रोलिंग व चोरी की घटनाओं में तत्‍परता से अनुसंधान एवं निस्‍तारण कर चोरियों की रोकथाम हेतु विशेष प्रयास किये जाते हैं।

श्री शंकर सिंह राजपुरोहित (आहोर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री महोदय का जवाब लगभग पूरा है लेकिन एक बात खाली, यह विषय है कि जिन चोरियों में माल बरामद नहीं हुआ उसके बावजूद भी वहां पर उस केस में एफ.आर. लगा दी गयी। मतलब उस केस को ही खतम कर दिया गया और उसमें यह मंदिरों वाला जो विषय है यह एक आस्‍था से जुड़ा हुआ विषय है और बहुत ही सेंसेटिव विषय है। अभी जैसे पिछले दिनों फरवरी में भीनमाल के शंकरी माता मंदिर में चोरी हुई और चोरी के साथ-साथ चौकीदार की हत्‍या कर दी गयी और माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अभी पिछले 6 महीने पहले शंकरी माता मंदिर के प्रांगण में एक मेला हुआ जिसमें एक लाख से अधिक वहां पब्लिक इकट्ठी हुई। भक्‍तगण इकट्ठे हुए एक लाख से अधिक, अब यह जन-भावना अगर कहीं इलाके में फैल गयी तो यह एक अशांति का वातावरण फैल सकता है और शंकरी माता मंदिर में चोरी हुई और चोरी के साथ-साथ चौकीदार की हत्‍या भी हुई। अभी तक उस केस की प्रोग्रेस नहीं हुई है और नहीं हुई है तो क्‍या कारण है और कितनी जल्‍दी कर पाएंगे और मुख्‍य विषय यह है कि जो बरामदगी, बिना बरामदगी के एफ.आर. लगा दी जाती है, उस विषय में आपका क्‍या कहना है?

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): प्रश्‍न तो जालौर से संबंधित था, आपने भीनमाल के बारे में पूछा है।

श्री शंकर सिंह राजपुरोहित (आहोर): जालौर जिला है न। जालौर जिला है, साहब। 

श्री अध्‍यक्ष: जिला जालौर का पूछा है। जिला जालौर, हां।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): जालौर जिले से था। जालौर जिले से था। इसमें वर्षवार सूची मैंने आपको दी है। जिसमें कुल कितने मुकदमे बने, कितने लोग गिरफ्तार हुए, जिनमें कोई मुलजिम नहीं मिलता है, एक लम्‍बे समय तक भी और बरामदगी के कोई अवसर नहीं होते हैं तो उसमें एफ.आर. लगाते हैं और यह प्रक्रिया हमेशा से यह एफ.आर. लगाने की है। जैसे मैं आपको 2003 से, सारे राजस्‍थान में भी अदम-वकुआ जिसमें कोई सबूत ही नहीं मिलता है उसमें एफ.आर. लगती है और कहीं पर ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, कितने समय बाद लगती है, यह बता दीजिए। ... (व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): क्‍या?

श्री अध्‍यक्ष: यदि कोई माल बरामद आपको नहीं हो तो कितने दिनों बाद लगा देते हो एफ.आर.? ... (व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): कोशिश करते हैं, कई बार साल के अन्‍त तक तो फिर जाकर निर्णय करते ही हैं। जब जिस मुकदमे में साल भर तक तफतीश करने के बाद भी नहीं लगता है उसमें हम करते हैं, एफ.आर. देते हैं।

श्री अध्‍यक्ष: तो सालभर में लगा देते हो?

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): और फिर दुबारा जब कभी भी कोई घटना होती है तो उसके साथ उस केस को भी जोड़कर वैसे कोई एकदम समय की सीमा तो नहीं है लेकिन जितनी भी आपकी चोरियां हुई हैं उसमें से अधिकांश बरामद हुई हैं। माल भी बरामद हुआ है केवल दो में मूर्ति चोरी हुई, वह मूर्ति भी बरामद हुई है तो फिर भी छोटे-मोटे केस है, यानी जो आपको मैंने सारे प्रकरण आपके जिले के जो दिये हैं उनमें मैंने पूरी सूची में आपको, कितने का माल है, कितनी बरामदगी हुई। कितने उसमें से बाकी रहे हैं तो सारी की सारी सूची आपके साथ है। यह सारे प्रदेश में भी जिस प्रकार की जो मूर्ति चोरियां होती हैं उसमें भी बरामदगी की कोशिश तो करते हैं लेकिन कई बार जब सफलता नहीं मिलती है तो अन्‍त में जा कर उसमें अदम-तफतीश पूरी नहीं हुई उसमें हमने एफ.आर. जरूर लगायी है। फिर कभी नया केस खुलता है तो उसके लिए फिर उसको जोड़ते हुए मूर्ति चोरी के बारे में फिर से हम तफतीश प्रारम्‍भ करते हैं।

डा. समर‍जीत सिंह (भीनमाल): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जालौर में मूर्ति चोरी की घटनाएं बराबर हो रही हैं और अभी जो भीनमाल का आहोर से आने वाले माननीय विधायक ने मामला उठाया है, 6 महीने पहले चोरी होती है। फरवरी महीने में वहां पर चोरी के साथ में चौकीदार की हत्‍या कर दी जाती है और अब यह महीना भर हो गया, उसकी कोई, किसी तरह की कोई गिरफ्तारी नहीं, कोई पूछताछ नहीं और जहां हत्‍या हुई है उससे पचास मीटर पर आपकी पुलिस की चौकी, वायरलैस की चौकी है। वहां पर सिपाही सो रहे हैं। उसके बावजूद भी लोगों की हत्‍याएं हो जाती हैं। चोरी की घटनाएं जालौर जिले में बहुत तेजी से बढ़ती जा रही है। आप इस पर गम्‍भीरता से सोचें, वहां के प्रशासन के बारे में नहीं तो ... (व्‍यवधान) 

श्री अध्‍यक्ष: एक बार जवाब आप सुनिये।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): एक मिनट। ... (व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): भीनमाल का है। एक विषय थोड़ा सा भीनमाल का पहले मैं  ... (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह बांसी में और गुढ़ादेवजी में ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण। ... (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): यह राजस्‍थान का सवाल है।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): ऐसा है कि आपने यह वैसे भी पर्ची लगा रखी है उस पर बैठकर बाद में बात कर लेंगे। ... (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): ठीक है, उसके बारे में, बांसी के मामले में तो आपसे बात कर लेंगे लेकिन ... (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नहीं-नहीं, यह चरण संख्‍या-3 है। यह चरण संख्‍या-3 में चोरियों के लिए आपने राजस्‍थान में क्‍या व्‍यवस्‍था की है, यह पूरे राजस्‍थान का है और जब आपका यह प्रश्‍न का चरण संख्‍या-3 है, यह पूछा है कि मंदिरों में चोरियों के संबंध में आपने क्‍या-क्‍या कदम उठायें? यह जालौर से संबंधित नहीं है, यह पूरे राजस्‍थान से संबंधित है।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): मैं बता रहा हूं।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): और माननीय गृह मंत्रीजी, एक मिनट, मैं आपसे पूछ लूं। माननीय गृह मंत्रीजी, लगातार बूंदी जिले में इतनी चोरियां एक संगठित गिरोह के द्वारा मूर्तियों के लिए राजस्‍थान में कोई न कोई ऐसा संगठित गिरोह है जो करोड़ों रुपये की मूर्तियों को चुरा कर ले जाता है। आपको याद है बांसी में, अभी कुछ ही दिन पहले ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप बोल रहे हैं न बाद में ... (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बांसी में एक ऐसी कीमती मूर्ति चोरी हुई। लगातार धरना है, आज भी प्रतिनिधिमण्‍डल आपसे मिलने आया है। वहां पर एक आदमी को आत्‍मदाह करना पडा भावावेश में। भावावेश में उसने कह दिया कि मंदिर में मूर्ति की बरामदगी नहीं हुई तो मैं आत्‍मदाह करता हूं। केरोसीन छिड़क लिया और वह मर गया। मेरा आपसे विनम्र अनुरोध है कि ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: यह चर्चा यहां पर हो चुकी है। यह चर्चा हो चुकी है यहां पर ... (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): चर्चा तो हो चुकी लेकिन इससे रिलेटेड है न, साहब। मूर्ति तो बरामद ही नहीं हुई।

श्री अध्‍यक्ष: क्‍यों बारबार दोहरा रहे हैं आप? बारबार क्‍यों दोहरा रहे हैं?

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): मूर्ति तो बरामद नहीं हुई। अभी भी धरना है। मूर्ति बरामद नहीं हुई है। मूर्ति तो बरामद करवा दो आप।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): एक बार जितने भी सवाल आये हैं उनका जवाब दे दूं। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: बैठिये।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): मूर्ति तो बरामद करा दो आप।  (व्‍यवधान) सारा ही काम चंगा हो जाएगा, आप मूर्ति बरामद करवा दो।

श्री अध्‍यक्ष: आप बारबार यह क्‍यों कह रहे हैं? ... (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): यही नहीं वहां पर आपके गार्ड लगे हुए थे, पुलिस थी उसके बावजूद भी मस्जिद की दान पेटी में से ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप भाषण देना बंद करिये अब।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): चोर करके और आदमी चोरी का सामान, चोरी करके ले गये उसी गांव में ... (व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा एक छोटा सा सवाल है।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक बार पहले सवाल का जवाब दे दूं फिर आप पूछ लेना, कोई हर्जा नहीं है।

श्री अध्‍यक्ष: पहले जवाब दे दें।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): भीनमाल के बारे में आपने सवाल पूछा। 2003 से लेकर 2007 तक भीनमाल में 14 चोरियां हुई हैं। 14 में से 11 चोरियां बरामद हुई हैं। यह जो अभी 2007 वाली जो 3 चोरियां हैं, इसमें से केवल एक चोरी में हमको सफलता मिली, दो अभी भी पेंडिंग है इसमें अभी हमको सफलता नहीं मिली। जहां तक बूंदी के सवाल के बारे में आपने कहा कि बहुत चोरियां हुईं, ऐसा नहीं है। कुल बूंदी में 13 चोरियां 2004 से लेकर अब तक 2007 तक हुई हैं उसमें से 5 चोरियां बरामद हुई हैं बाकी अभी भी बरामद नहीं हुई हैं। 

 

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और जहां बांसी के बारे में कोई स्‍थगन या पर्ची कुछ लगाई हुई है, वैसे पहले मैंने जवाब दे दिया। यह विषय उठ चुका था। उसमें अभी तक हम बरामदगी नहीं कर सकते। आज हम निश्चित रूप से एक नई टीम गठित करके और लगायेंगे । वैसे भी हमने वहां जिले स्‍तर पर तो टीम गठित कर रखी है,लेकिन उसमें सफलता नहीं मिली। निश्चित रूप से वहां चारभुजा के मंदिर के साथ लोगों का बहुत जुड़ाव है, लोग उद्वेलित हैं, धरना चल रहा है। आज कोई नई टीम लगाकर यहां से उसकी जांच करवायेंगे।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): एक बात बता दूं उस गिर्राज को पाँच लाख ..(व्‍यवधान)..

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): हाँ, उस मृतक को हमारे पुलिस एक्‍ट के हिसाब से मदद करेंगे।...(व्‍यवधान)....

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): आपने कहा था जब ओर जगह पाँच लाख रुपये दे रहे हैं, वह धार्मिक भावना से ओत-प्रोत होकर उसने इहलीला समाप्‍त की है, आत्‍महत्‍या नहीं की। आपके बिड़ला जी भी वहां गये हैं। आपसे भी बात हुई मेरी दो तीन दफा। कृपा करके उसको पाँच लाख रुपये देने का जो हमारा निवेदन है, वह दें। दूसरा आप टास्‍क फोर्स जयपुर से गठित करें इसलिए कृपा करके आप तो यह बता दीजिये कि जयपुर से टास्‍क फोर्स गठित करेंगे तो वहां वह रहकर काम करेगी, वह कहां से है, आन्‍ध्रा से है, उनकी बोली कहां की है, वह पकड़ा जाये। करौली के हैं, कहां के हैं ? यह बहुत ही भावना से जुड़ा हुआ मुद्दा है। इतना धरना कभी नहीं हुआ मंत्रीजी, इसलिये आप दोनों बात बता दो । एक तो पाँच लाख रुपये देने हैं, दूसरा यह जो फोर्स गठित करेंगे, इसका हैड किस स्‍तर का अधिकारी होगा और कब तक कार्यवाही करके आपको रिजल्‍ट दे देगा।

श्री गुलाबचन्‍द कटारिया : अभी जो प्रश्‍न है, वह जालौर से संबंधित है। आपका प्रश्‍न आये तब आप उठाना। उसके बारे में फिर आपको बताऊंगा पाँच नहीं और ज्‍यादा कितना दे सकते हैं, आपने गलती से पाँच ही क्‍यों मांगे, आप 10-20 मांग लेते तो और अच्‍छा होता। आपने गलती की है। 

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): हम पुलिस के प्रावधानों के हिसाब से उसकी आर्थिक मदद जरूर करेंगे तो क्‍या मदद करने क आपका इरादा है, आपने ही कहा था इस सदन में।

श्री गुलाबचन्‍द कटारिया : अभी जो प्रश्‍न है वह जालौर से संबंधित है।

श्री समरजीत सिंह : माननीय मंत्री महोदय, मैंने आपका ध्‍यान आकर्षित किया कि मंदिर जो खेमगरी माता का मंदिर है, उससे 50-100 मीटर पर पुलिस की चौकी है और उसी की नाक के नीचे इस तरह की घटना हो जाये, चोरी हो जाये फिर मर्डर हो जाये और आपके जालौर जिले की पुलिस नारकोटिक्‍स के मामले बनाने में बिजी है। मैं खुला कहता हूं यह। यह मामले बनाने में लगी है, जो हकीकत काम है, उसको करने में कोई ध्‍यान नहीं है। आप इस तरफ ध्‍यान दें, मैं उम्‍मीद करता हूं।

श्री गुलाबचन्‍द कटारिया : अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से भीनमाल से जो माननीय सदस्‍य आये हैं, आपको आमंत्रित कर रहा हूं, अगर आपको मेरी पुलिस के किसी अधिकारी के बारे में कोई भी शिकायत है आप दीजिये। जो कुछ मेरे से हो सकता है अगर वह गलत है तो मैं निश्चित रूप से जांच कराकर, अगर वह दोषी पाया जायेगा तो दण्डित जरूर होगा। बिना कुछ दिये तो मुझे सारी चीजों की जानकारी नहीं रहती। अगर आप किसी के बारे में पर्टीकूलर देंगे, कोई केस देंगे, उसका सबूत देंगे तो निश्चित रूप से उसकी जांच करके उसको उचित दण्‍ड देंगे।

श्री समरजीत सिंह: व्‍यक्ति पर मैं आरोप नहीं लगाना चाह रहा हूं। मैं कह रहा हूं कि इस तरह की घटनाएं हो रही हैं तब पुलिस की नाक के नीचे चोरी-मर्डर हो रहे हैं तो अपन को ध्‍यान रखना चाहिये।

श्री अध्‍यक्ष: अशोक कुमार नवलखा । नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन।

 

जिला चित्‍तौड़गढ़ में बाढ़ से क्षतिग्रस्‍त निर्माण कार्यों की मरम्‍मत

 

234. श्री अशोक कुमार नवलखा (निम्‍बाहेड़ा): क्‍या सहायता मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे :-

(1) क्‍या यह सही है कि इस वर्ष हुई व्‍यापक वर्षा, अतिवृष्टि व बाढ़ से जिला चित्‍तौड़गढ़ के अनेक गांवों में व्‍यापक नुकसान हुआ है ? यदि हां, तो ग्रामीण क्षेत्र में कितनी सड़कें, तालाब, एनीकट, पुलिया तलाइयां आदि क्षतिग्रस्‍त हुईं। पंचायत समितिवार विवरण सदन की मेज पर रखें।

(2) क्‍या यह सही है कि सरकार द्वारा इस नुकसान का सर्वे करवाया गया है ? यदि हां, तो सर्वे रिपोर्ट की प्रति सदन की मेज पर रखें व सर्वे नहीं कराया गया, तो क्‍यों ?

(3) क्‍या यह सही है कि सरकार द्वारा पंचायत समिति/ग्राम पंचायतों को उनके क्षेत्र में हुए नुकसान का मुआवजा दिया गया है ? यदि हां, तो कितना व नहीं, तो क्‍यों ? पंचायत समितिवार विवरण सदन की मेज पर रखें।

सहायता मंत्री (डा. किरोड़ी लाल): (1) जी हां, यह सही है। ग्रामीण क्षेत्र में सड़कें, तालाब, एनीकट, तलाइयां, पुलिया आदि के क्षतिग्रस्‍त होने का पंचायत समितिवार विवरण संलग्‍न है। (परिशिष्‍ट-अ)

(2) जी हां, उक्‍त नुकसान का सर्वे करवाया गया है। सर्वे रिपोर्ट के अनुसार पंचायत समितिवार नुकसान की सूची संलग्‍न है। (परिशिष्‍ट-ब)

(3) जी नहीं, क्‍योंकि सी.आर.एफ. नोर्म्‍स के अनुसार नुकसान का मुआवजा देय नहीं है। तात्‍कालिक मरम्‍मत हेतु राशि स्‍वीकृत की जाती है। इस हेतु जिले में क्षतिग्रस्‍त तालाबों की मरम्‍मत के लिये पंचायत समिति/ग्राम पंचायतों को आवंटित राशि का विवरण संलग्‍न है। (परि