mlb/akt/1a/1100/23032006/1

 

अशोधित प्रति/ प्रकाशनार्थ नहीं

 

राजस्‍थान विधान सभा की कार्यवाही का वृत्‍तान्‍त

 

अंक  5   बारहवीं विधान सभा के पांचवें सत्र का चौबीसवां दिवस  संख्‍या  15

 

 

गुरूवार,

23 मार्च, 2006

 

राजस्‍थान विधान सभा की बैठक 1100 बजे

विधान सभा भवन, जयपुर में प्रारम्‍भ हुई।

 

(श्री रामनारायण विश्‍नोई, उपाध्‍यक्ष, पदासीन)

 

 

श्री उपाध्‍यक्ष: सदन की बैठक आधे घंटे के लिए स्‍थगित की जाती है।

(तदनन्‍तर सदन की बैठक 11.01 बजे आधे घंटे के लिए स्‍थगित हुई)

 

skp/akt/1130/1d/23.3.2006

(11.30 बजे)

(पुन: समवेत् होने पर)

(श्री रामनारायण विश्‍नोई, उपाध्‍यक्ष, पदासीन)

 

श्री उपाध्‍यक्ष: सदन की कार्यवाही एक घंटे के लिए स्‍थगित की जाती है।

 

(तदनन्‍तर सदन की बैठक 11.30 बजे 12.30 बजे तक के लिए स्‍थगित हुई।)

 

vkj/usc/1230/1k/23.3.2006

(12.30 बजे)

(पुन: समवेत् होने पर)

(श्री रामनारायण विश्‍नोई, उपाध्‍यक्ष, पदासीन)

 

श्री उपाध्‍यक्ष: सदन की कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्‍थगित की जाती है।

 

(तदनन्‍तर सदन की बैठक 12.30 बजे 13.00 बजे तक के लिए स्‍थगित हुई।)


Jkj/usc/1300/1n/23032006

 

(13.00 बजे)

( पुन: समवेत् होने पर )

( श्री रामनारायण विश्‍नोई, उपाध्‍यक्ष,पदासीन )

सदन की मेज पर रखे गये पत्र

प्रतिवेदन

राष्‍ट्रीय विधि विश्‍वविद्यालय, जोधपुर का प्रतिवेदन 2004-05

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री घनश्‍याम तिवाड़ी, शिक्षा मंत्री राष्‍ट्रीय विधि विश्‍वविद्यालय, जोधपुर का वार्षिक प्रतिवेदन सदन की मेज पर रखेंगे। (व्‍यवधान) 

    (प्रतिपक्ष के अनेक माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन कूप में नारेबाजी)

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी(शिक्षा मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी आज्ञा से राष्‍ट्रीय विधि विश्‍वविद्यालय, जोधपुर अधिनियम की धारा 25 के अन्‍तर्गत राष्‍ट्रीय विधि विश्‍वविद्यालय, जोधपुर का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2004-2005 सदन की मेज पर रखता हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: अनुदान की मांगों पर विचार एवं पारण।  श्री नरपत सिंह..(व्‍यवधान) समिति के प्रतिवेदनों का उपस्‍थापन।  श्री नन्‍दलाल मीणा। (व्‍यवधान)

समिति का प्रतिवेदन
अनुसूचित जनजाति कल्‍याण समिति (सं.2)

श्री नन्‍दलाल मीणा(सभापति अनुसूचित जाति कल्‍याण समिति): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से अनुसूचित जनजाति कल्‍याण समिति, 2005-2006  के द्वितीय प्रतिवेदन का उपस्‍थापन करता हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष:  श्री हरलाल सिंह खर्रा।

प्रश्‍न एवं संदर्भ समिति (सं.3)

श्री हरलाल सिंह खर्रा(सभापति, प्रश्‍न एवं संदर्भ समिति): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से प्रश्‍न एवं संदर्भ समिति, 2005-2006 समिति के तृतीय प्रतिवेदन का उपस्‍थापन करता हूं।

याचिकाओं का उपस्‍थापन

श्री उपाध्‍यक्ष: याचिकाओं का उपस्‍थापन।  श्री बनवारीलाल शर्मा।  श्री जीतराम।

श्री जीतराम(मालपुरा): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से कार्य सूची में किये गये उल्‍लेखानुसार दो याचिकाओं का उपस्‍थापन करता हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री हरीसिंह रावत।

श्री हरीसिंह रावत(भीम): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से कार्य सूची में किये गये उल्‍लेख के अनुसार दो याचिकाओं का उपस्‍थापन करता हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री तगाराम चौधरी।  श्री राकेश मेघवाल। (व्‍यवधान)

श्री राकेश मेघवाल(परबतसर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से कार्य सूची में किये गये उल्‍लेख के अनुसार दो याचिकाओं का उपस्‍थापन करता हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष:  श्री बीरूसिंह राठौड़।

प्रो.बीरूसिंह राठौड़(बनीपार्क): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से अवैध थडि़यों/ठेलों को हटवाकर महेश नगर 80 फीट रोड़ पर पार्क (रामलीला मैदान) विकसित करने बाबत याचिका का उपस्‍थापन करता हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल।  (व्‍यवधान) ध्‍यानाकर्षण प्रस्‍ताव। प्रक्रिया के नियम 131 के अन्‍तर्गत माननीय राजस्‍व मंत्री..(व्‍यवधान) श्रीमती सूर्यकान्‍ता व्‍यास।

श्रीमती सूर्यकान्‍ता व्‍यास(जोधपुर): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं विधान सभा क्षेत्र, जोधपुर शहर परकोटे के अन्‍दर नवचौकियां डिसपेंसरी को 20 बैड में क्रमोन्‍नत करने बाबत याचिका का उपस्‍थापन करती हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री बंशीलाल खटीक।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं राजसमन्‍द में पुराने चिकित्‍सा भवन में सिटी डिस्‍पेंसरी खुलवाने बाबत याचिका का उपस्‍थापन करता हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल। (व्‍यवधान)श्री रामनारायण डूडी, राजस्‍व मंत्री। (व्‍यवधान) हां, 131।  (व्‍यवधान)

ध्‍यानाकर्षण प्रस्‍ताव

लम्‍बे समय से काश्‍त कर रहे किसानों को

मंदिर मूर्ति भूमि पर खातेदारी अधिकार

माननीय सदस्‍य, माननीय मंत्री महोदय।  प्रक्रिया के नियम 131 के अन्‍तर्गत श्री अमराराम(धोद), श्री संयम लोढ़ा, श्री फतेहसिंह, श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा, श्री रामचन्‍द्र जारोड़ा, श्री कन्‍हैया लाल मीणा, श्री रणवीर सिंह गुढ़ा, श्री बहादुर सिंह गोदारा सदस्‍य विधान सभा लम्‍बे समय से काश्‍त करते आ रहे किसानों की मंदिर मूर्ति भूमि का किसानों को खातेदारी अधिकार देने के संबंध में राजस्‍व मंत्री का ध्‍यान आकर्षित करेंगे। (व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन: श्री कन्‍हैया लाल मीणा, ध्‍यान आकर्षित...

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री नरपत सिंह राजवी। (व्‍यवधान)

श्री कन्‍हैया लाल मीणा(बस्‍सी): सम्‍माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं ध्‍यानाकर्षण प्रस्‍ताव का प्रस्‍ताव करता हूं।  मैं राजस्‍व मंत्री का प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमों के नियम 131 के अन्‍तर्गत ध्‍यानाकर्षित करता हूं। (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं विधान सभा क्षेत्र कोटपूतली, धोद, मेड़ता, कुशलगढ़....(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन: आपको तो कोई मतलब नहीं है, आपने ध्‍यानाकर्षण प्रस्‍ताव रखा है।  होहल्‍ला ही करेंगे, हाँ-हुल्‍लड़ ही, जन समस्‍याओं से कोई मतलब नहीं है..(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): बस्‍सी, गुढ़ा, सिरोही और नोहर से आने वाले माननीय सदस्‍यगण का मंदिर मूर्ति की भूमि पर पीढि़यों से काश्‍त करते आ रहे किसानों की समस्‍या के समाधान हेतु अपने सुझाव देने के लिए सर्वप्रथम तो मैं उन्‍हें धन्‍यवाद देना चाहूंगा।  इस संदर्भ में सरकार पहले से ही कार्यवाही कर रही है।  नये काश्‍तकारी अधिनियम बनाने के लिए माननीय मुख्‍य मंत्री महोदया द्वारा एक मंत्रीमण्‍डलीय उप समिति का गठन किया गया है जिसमें मेरे साथ ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।  (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण डूडी: नगरीय विकास मंत्री एवं जन जाति क्षेत्रीय विकास मंत्री को भी शामिल किया गया है।  इस समिति की अब तक चार बैठकें हो चुकी हैं।  उन बैठकों में अन्‍य बिंदुओं के साथ-साथ इस बिंदु पर भी विचार विमर्श किया जा रहा है।  राजस्‍थान काश्‍तकारी अधिनियम, 1955 की धारा 46 में यह प्रावधान है कि नाबालिग की भूमि का हस्‍तान्‍तरण किसी को नहीं हो सकता।  माननीय उच्‍च न्‍यायालय एवं उच्‍चतम न्‍यायालय ने अपने निर्णयों में मंदिर मूर्ति को शाश्‍वत नाबालिग माना है जिसके कारण मंदिर मूर्ति की भूमि पर अन्‍य को हस्‍तान्‍तरित नहीं की जा सकती तथा खातेदारी अधिकार भी नहीं दिये जा सकते है...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण।  कृपया स्‍थान ग्रहण करिये। (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण डूडी: जैसाए कि माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय एवं माननीय सदस्‍यगण को अवगत ही है कि राजस्‍थान काश्‍तकारी अधिनियम, 1955 के बनने से पूर्व ही विभिन्‍न रियासतों ने अपने-अपने राजस्‍व नियम व अधिनियम बनाए हुए थे तत्‍समय मंदिर से संबंधित तीन प्रकार की भूमि होती थी-

1.    पुजारी या महन्‍त या सेवायत के नाम की भूमि

2.    मंदिर मूर्ति के स्‍वयं के खुदकाश्‍त की भूमि तथा

3.    मंदिर माफी की भूमि जिन पर काश्‍तकारों द्वारा काश्‍त की जाती थी परंतु उनका लगान मंदिर को दिया जाता था जिससे मंदिर की देखरेख एवं पूजा-सेवा का कार्य चलता था।

कालान्‍तर में मंदिर मूर्ति की भूमि पुजारियों या महन्‍त या सेवायत के नाम कर दी गई एवं उनके द्वारा दूसरे व्‍यक्तियों को विक्रय कर देने पर दूसरे काश्‍तकारों के नाम हो गई और लम्‍बे समय तक उनके द्वारा काश्‍त की जाती रही।....

                                                      


Bhs/akt/4.5.2006/13.10/1o

 

 

ऐसे मामलों के निस्‍तारण हेतु दिशा-निर्देश जारी किये गये और काबिज व्‍यक्तियों को उक्‍त राशि लेकर खातेदारी अधिकार दिये गये।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, बहुत महत्‍वपूर्ण वक्‍तव्‍य दिया जा रहा है, आप अपना स्‍थान ग्रहण कीजिये। बहुत महत्‍वपूर्ण वक्‍तव्‍य दिया जा रहा है।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): परन्‍तु उपाध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍व विभाग के पत्रांक एफ 21 (97)राज/1/79 दिनांक 15.10.87 के द्वारा उक्‍त 1982 के आदेश को वापस ले लिया गया।  1982 के आदेश के उपरांत जिन लोगों को खातेदारी अधिकार मिल गये थे उन्‍होंने खेत को विकसित किया, कुएं आदि बनाये ...। सुन लो सुन लो आपके काम का मामला है।

श्री उपाध्‍यक्ष: किसानों के संबंध में माननीय मंत्री जी द्वारा बहुत महत्‍वपूर्ण वक्‍तव्‍य दिया जा रहा है माननीय सदस्‍यगण शांतिपूर्वक सुनिये। बहुत महत्‍वपूर्ण मुद्दे पर वक्‍तव्‍य दिया जा रहा है।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): ....कुएं आदि बनाये एवं अपनी भूमि को विकसित करने के लिए ऋण आदि भी प्राप्‍त किये।  1987 के परिपत्र से वापस उनके खातेदारी अधिकार समाप्‍त होने से यह समस्‍या उत्‍पन्‍न हो गई।  इसके अलावा राजस्‍व विभाग द्वारा दिनांक 13.12.1991 को एक परिपत्र जारी कर दिशा-निर्देश जारी किये गये कि मंदिर मूर्ति के मामलों में खातेदारी केवल मंदिर मूर्ति के नाम ही दर्ज होनी चाहिए और उसमें पुजारी का नाम अलग से रजिस्‍टर में लिख लिया जावे। परन्‍तु इस आधार पर बहुत से मामलों में जो भूमि महन्‍त के नाम थी या मंदिर माफी की भूमि, जिनमें केवल मात्र लगान मंदिर को प्राप्‍त होता था वह भूमि भी मंदिर मूर्ति के नाम दर्ज कर दी गई।

उपाध्‍यक्ष महोदय, देवस्‍थान विभाग द्वारा वर्ष 2003 में परिपत्र क्रमांक एफ 12(22)देव/91 दिनांक 06.3.2003 जारी किया जिसमें उन्‍होंने निर्देश दिया कि 1982 के परिपत्र के माध्‍यम से ...।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप शांतिपूर्वक सुनिये।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): ... जिन लोगों को खातेदारी अधिकार दे दिये गये थे उन सब को मंदिर मूर्ति के नाम कर दिया जावे।  इस परिपत्र के आधार पर काश्‍तकार खातेदारों की खातेदारी भूमि मंदिर मूर्ति के नाम कर दी गई और आज भी की जा रही है।  इस समस्‍त से व्‍यथित होकर खातेदार ... सुनिये, खातेदार विभिन्‍न  न्‍यायालयों में गये।  राजस्‍व मंडल में आज भी 233 मामले लंबित हैं।  इसके अलावा इसी अनुपात में उच्‍च न्‍यायालय एवं उच्‍चतम न्‍यायालय में भी मामले लंबित हैं और इनसे भी अधिक मामले अधीनस्‍थ न्‍यायालयों में चल रहे हैं। जिला स्‍तर से इस समस्‍या से संबंधित कुछ आंकड़े उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको बताना चाहूंगा और एक सूचना के आधार पर 1,27,297 मि. संयम लोढ़ा, ये आपने पूछा है 1,27,297 काश्‍तकारों का 2,21,360 हैक्‍टेयर भूमि पर कब्‍जा व काश्‍त है जिससे स्‍पष्‍ट है कि माननीय सदस्‍यगण द्वारा जिस समस्‍या पर चिंता व्‍यक्‍त की गई है उससे भी बड़ी संख्‍या में मंदिर मूर्ति एवं काश्‍तकार प्रभावित हैं।

राज्‍य सरकार का कर्तव्‍य है  श्री संयम लोढ़ा, कि दोनों ही पक्षों के हितों की रक्षा हो।  सरकार यह चाहती है कि जहां काश्‍तकारों को सुविधा मिले वहां मंदिर की भूमि भी नहीं जाए और उन मंदिर मूर्ति  जो शाश्‍वत नाबालिग हैं, जिनका संरक्षक पुजारियों को माना गया है और यदि पुजारियों द्वारा उनकी रक्षा नहीं की जाती है तो राज्‍य सरकार का कर्तव्‍य है कि उन शाश्‍वत नाबालिग के अधिकारों की रक्षा स्‍वयं के स्‍तर पर करावें इस हेतु देवस्‍थान विभाग द्वारा परिपत्र जारी कर नायब तहसीलदार की अध्‍यक्षता में कमेटी का गठन किया गया, निर्देश दिये गये  और इस प्रकार काश्‍तकार के हितों की रक्षा  आवश्‍यक है। जैसा कि मैं अवगत करा चुका हूं कि माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, नये काश्‍तकारी अधिनियम को संशोधित करने के लिए जो मंत्रीमंडलीय उप समिति का गठन किया गया है उसमें इस पर गहन विचार-विमर्श किया जायेगा।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): ... और मैं माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, के माध्‍यम से सदन को आश्‍वस्‍त करवाना चाहूंगा कि जहां ...श्री उपाध्‍यक्ष:  मेरी बिना परमीशन के जो बोल रहे हैं, रिकार्ड नहीं होगा।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): ... एक और मंदिर मूर्ति के हितों और अधिकारों की रक्षा की जायेगी वहीं किसानों के हितों को भी अनदेखा नहीं किया जायेगा और मेरा सभी माननीय सदस्‍यों से ...।

श्री उपाध्‍यक्ष: आसन की बिना परमीशन के...।  आप अपने स्‍थान पर जाकर बोलिये, रिकार्ड नहीं होगा।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): सदन के माननीय सदस्‍य आप अपने बहुत ही अमूल्‍य सुझाव  समिति को भेजें ताकि आपके अनुसार राजस्‍थान के लाखों काश्‍तकारों के जो अभी जो मामले ...।

श्री उपाध्‍यक्ष: अपने स्‍थान पर जाकर बोलिये।  अपने स्‍थान पर जाकर बोलिये नहीं यहां वैल में कोई नहीं होगा। स्‍थान पर जाकर बोलिये।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): ...पेंडिंग हैं और न्‍यायालय में उलझे हैं, उनका समाधान किया जा सके। बहुत बहुत धन्‍यवाद।  जय हिन्‍द।  जय भारत। ...(व्‍यवधान)... ये क्‍या कर रहे हैं ? ठीक से रहना  नहीं तो ...(व्‍यवधान)...

श्री उपाध्‍यक्ष:  माननीय सदस्‍य।  श्री नरपतसिंह राजवी, उद्योग मंत्री अनुदान की मांग संख्‍या-42

अनुदान की मांग

मांग संख्‍या 42 उद्योग की प्रस्‍तुति

 

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से प्रस्‍ताव करता हूं कि मांग संख्‍या -42 उद्योग के संबंध में 31 मार्च, 2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 71,14,86,000/- (इकहत्‍तर करोड़ चौदह लाख छियासी हजार) तक की राशि प्रदान की जावे।

मांग संख्‍या 43 खनिज की प्रस्‍तुति

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे।

श्री लक्ष्‍मीनारायण बैरवा (फागी): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से प्रस्‍ताव करता हूं कि मांग संख्‍या-43 खनिज के संबंध में 31 मार्च, 2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 36,53,92,000/- (छत्‍तीस करोड़ तिरपन लाख बानवे हजार) तक की राशि प्रदान की जावे।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री बत्‍तीलाल मीणा। माननीय सदस्यगण, आप अपना स्‍थान ग्रहण कीजिये।

मांग संख्‍या 42 व 43 पर विचार

श्री बत्‍तीलाल (टोडाभीम): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, हमारे राज्‍य में यदि ऊर्जा हमारी अर्थव्‍यवस्‍था की प्राणवायु है तो यातायात के साधन ...।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍गण से अनुरोध है ...।

श्री बत्‍तीलाल (टोडाभीम):... राज्‍य की अर्थव्‍यवस्‍था की रीढ़ की हड्डी के समान है मान्‍यवर, ...(व्‍यवधान)...

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री प्रहलाद गुंजल।

श्री बत्‍तीलाल (टोडाभीम): ...(व्‍यवधान)... मान्‍यवर, उद्योग-धंधे हमारे राज्‍य की रीढ़ की हड्डी के समान हैं जिन लोगों ने हमारे काश्‍तकरों की मांग को नहीं सुना एक बवंडर मचा रखा है।  ये देश की प्रगति और राज्‍य की प्रगति के सबसे बड़े दुश्‍मन हैं।  मान्‍यवर, सदन का उपयोग इस बात के लिए हो-हुल्‍ल्‍ड़ के लिए किया जा रहा है। ये ड्रामेटिक मामला करके हमारी कृषि की मांगों पर इन्‍होंने विचार नहीं होने दिया है। इन्‍होंने वनों के मामले में नहीं होने दिया है।  यदि अनुसूचित जनजाति  के हितों के लिए कोई इस तरह की हड़ताल करते तो हम मानते कि ये हितैषी हैं।  इन्‍होंने ड्रामेटिक मामला करके इतनी इम्‍पोर्टेंट मांगों को अवोड किया है।  ये देश की और प्रदेश की जनता के साथ महान गद्दारी है।  आने वाला इतिहास इस बात का साक्षी रहेगा कि ये लोग किस तरह के ड्रामेटिक हैं ये लोग एक तमाशा बनाते हैं।  एक सीधे सादे अंजान अनुसूचित जनजाति के व्‍यक्ति को लेकर के इन्‍होंने एक ड्रामा मचा रखा है।  पूरे राज्‍य की जनता इस बात को देख रही है।

मान्‍यवर, उनको इन्‍होंने टारगेट बनाया है और इन्‍होंने हमारी अनुसूचित जनजाति के लिए कौन सा, क्‍या इन्‍होंने हमारी भुखमरी के लिए धरना दिया है, क्‍या उनके कपड़ा, रोटी और मकान के लिए धरना दिया है, क्‍या उनके रोजगार के लिए धरना दिया है? इन्‍होंने धरना दिया है केवल एक ड्रामेटिक मामला करने के लिए उनके हितों पर कुठाराघात करने के लिए।  इनको राज्‍य की जनता देखती है।  आज एक सीधा सादा आदिवासी मिल गया इन लोगों को और उनको मोटीवेट करके किस तरह का ड्रामा ये लोग कर रहे हैं, जहां पर कृषि की मांगों पर विचार होना चाहिए, किसानों के हितों पर विचार होना चाहिए वहां ये लोग क्‍या कर रहे हैं। राज्‍य की जनता इन लोगों को देख रही है।  ये लोग इस तरह के लोग हैं जिन्‍होंने वास्‍तव में चकमा देकर हिन्‍दुस्‍तान का राज किया है।  इनके दिमाग में किसी तरह की नीति नहीं है किसी तरह की हितों की बात नहीं है ये केवल फिजीकल एक्‍शन यहां इस सदन में कर रहे हैं इनकी बुद्धि का दिवाला हो गया है दिमाग का।

मान्‍यवर, सदन तर्कों के आधार पर चलता है, सदन इस तरह नहीं चलता कि फिजीकल एक्‍शन किया जाए।  इनके पास कोई तर्क हो तो दीजिये।  हमारी सरकार, हमारी लोककल्‍याणकारी सरकार, हमारी जनहितकारी सरकार, जनता का हित करना चाहती है मगर ये हित नहीं करने देना चाहते ये लोग।  हमारी एससी/एसटी का बैकलॉग पूरा करने की बात पूछी थी तो ये धरना देते पर नहीं एससी/एसटी से इनका कोई मतलब नहीं है।  आज गरीबी को  सबसे ज्‍यादा बढ़ाने वाले ये लोग हैं।  देश की दुर्गति करने वाले ये लोग हैं। प्रगति के मार्ग में ...(व्‍यवधान)... ये लोग हैं। इन लोगों में दिमाग नाम की कोई चीज नहीं है।  मान्‍यवर, ये चकमा दे रहे हैं राज्‍य की जनता को। 

 

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पूरे राजस्‍थान की जनता देखेगी कि यह किस तरह के नाटकबाज हैं। इन लोगों के दिमाग में क्‍या है। इन्‍होंने 40 साल शासन करके देश की यह दुर्गति कर दी कि हमारी अर्थव्‍यवस्‍था बिलकुल चौपट हो गई है। उद्योगधंधे बिलकुल रुग्‍ण स्थिति में पहुंच गये हैं। हमारा प्रदेश भिखारियों की लाइन में खड़ा हो गया।

श्री श्रवणकुमार (पिलानी):  ***

श्री बत्‍तीलाल (टोडाभीम): क्‍या हैं यह लोग, क्‍या ड्रामा है। (व्‍यवधान)  इस तरह के लोग आ गये, अच्‍छे लोग इनके साथ में लग गये उनको नहीं लगना चाहिये। (व्‍यवधान) इन लोगों ने सदन का मजाक उडा रखा है। (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री बत्‍तीलाल (टोडाभीम):  इन्‍होंने देश का निजीकरण किया .. (व्‍यवधान) 50 साल से देश को किस तरह से बिगाडा है। (व्‍यवधान) समझते हो कितना महत्‍वपूर्ण मामला है। (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***  

श्री हीरालाल (निवाई): एससी, एसटी के दुश्‍मन हो, आप घडियाली आंसू बहा रहे हो। आज अगर आप कोई रचनात्‍मक काम के लिये आंदोलन करते, रचनात्‍मक काम के लिये धरना देते, इस थामस से क्‍या मतलब है आपको जिन्‍होंने हमारे देवी देवताओं के लिये अपशब्‍द कहे। अगर कोई रचनात्‍मक काम एससी, एसटी के लिये, बैक लाग के लिये, एससी,एसटी के रोजगार के लिये अगर आप धरना देते तो राजस्‍थान की जनता भूरि भूरि प्रशंसा करती लेकिन आपको तो खाली यह चाहिये कि सोनिया गांधी कैसे खुश हो। आपको यह काम करना है ... (व्‍यवधान)

श्री बत्‍तीलाल (टोडाभीम): ... (व्‍यवधान) अन्‍तरराष्‍ट्रीय, राष्‍ट्रीय व्‍यक्तित्‍व के व्‍यक्ति मौजूद हैं। ­­­... (व्‍यवधान)

श्री अर्जुन सिंह (दानपुर): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य (व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया: उपाध्‍यक्ष महोदय, हमारा गला घुट गया बीच वालों का।

श्री कन्‍हैया लाल मीणा (बस्‍सी): .. (व्‍यवधान) इसलिए विपक्ष के माननीय सदस्‍य अभी थोथे नारे लगा रहे हैं किसानों के लिये। किसानों की बात कोई सुनने को तैयार नहीं है। (व्‍यवधान) यह किसी बात को सुनने को तैयार नहीं है। अगर इनको किसानों के प्रति थोडा बहुत भी दुःख हो, दर्द हो यह सब लोग किसान हैं जिनकी भूमि... (व्‍यवधान) यह लोग उस मामले में हल्‍ला मचा रहे हैं 1 इन लोगों को किसानों का साथ देना चाहिये। भूमि किसानों के नाम लिखनी चाहिये। जो किसाना 50-60 वर्ष से उस पर पैदा करता आ रहा है और उस बात को लेकर इन लोगों को हंसी सूझ रही है। एक तरफ कह रहे हैं हम किसानों के हमदर्दी हैं, एक तरफ कह रहे हैं कि हम गरीबों के हमदर्दी हैं, एक तरफ कह रहे हैं कि हम एससी, एसटी के हमदर्दी हैं आज हमारे एसटी के भाई को बाहर निकालने का काम किया है तो यह प्रतिपक्ष के लोगों ने किया है। (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य। श्री प्रहलाल गुंजल।

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): ***

श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्‍डी): उपाध्‍यक्ष महोदय, आज खनिज और उद्योग  की डिमांड पर चर्चा हो रही है। उपाध्‍यक्ष महोदय, पिछले दो दिनों से लगातार किस प्रकार से सदन में हालात पैदा हो रहे हैं इससे बड़ा दुर्भाग्‍य इस सदन का और राजस्‍थान की जनता का नहीं हो सकता। उपाध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान की जनता ने हमको यहां पर चुनकर भेजा है कि हम उसके अधिकार की रक्षा करें और उसके हक और हुकुमत की बात करें। (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्‍डी): लेकिन किसी व्‍यक्ति के अहम को संतुष्‍ट करने के लिये  .. (व्‍यवधान) मर्यादा को तोड कर जिस प्रकार का आचरण आज राजस्‍थान की विधान सभा का कांग्रेस के लोग पिछले दो दिन से कर रहे हैं, उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आज आपसे कहना चाहता हूं राजस्‍थान की 12वीं विधान सभा के इस सत्र के इन दिनों को याद किया जायेगा, लोकतंत्र के इतिहास में काले अध्‍याय के रूप में पढा जायेगा। राजस्‍थान की जनता राजस्‍थान का जनमानस जब इस काले अध्‍याय को पढेगा तो राजस्‍थान के किसी माननीय सदस्‍य को माफ करने की स्थिति राजस्‍थान की जनता में नहीं होगी। (व्‍यवधान) आज हम इस प्रकार का व्‍यवहार करके राजस्‍थान की जनता की माफी से बच नहीं सकते। उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍य (व्‍यवधान) राजस्‍थान की जनता के हितों की चर्चा करना चाहते हैं। बडे जोर से कल प्रतिपक्ष के सदस्‍य इस बात का दावा कर रहे थे ... (व्‍यवधान) मंत्री को बचाने के लिये सदन में चर्चा नहीं कराने के लिये इस प्रकार का वातावरण बनया। (व्‍यवधान) राजस्‍थान का विपक्ष मुद्दा विहीन विपक्ष हो चुका है। (व्‍यवधान)

 

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मांग पर सदन में चर्चा हो रही है(व्‍यवधान) राजस्‍थान की सरकार, राजस्‍थान के कल्‍याण के लिए(व्‍यवधान) असली प्रतिनिधि का दायित्‍व निभा रहे हैं, हम संदेश देना चाहते हैं। (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा: ***

श्री रणवीर सिंह गुढा: *** 

श्री प्रहलाद गुंजल: राजस्‍थान की जनता के हितों के विपरित है। विपक्ष का रवैय्या सदन की मर्यादाओं के खिलाफ  है। उद्योग जैसी महत्‍वपूर्ण मांग है। आज महत्‍वपूर्ण मांग पर प्रान्‍त की खुशहाली का(व्‍यवधान) उद्योग कितना फलफूल रहा है, उद्योग को, तकलीफ समाप्‍त करने के लिए सरकार ने(व्‍यवधान) उद्योग जब फलता है तो राजस्‍थान के बेकार नौजवानों को रोजगार मिलता है। नीतियों के बारे में चर्चा होनी चाहिये। इसके बारे में विचार किया जाना चाहिये। ,खुशहाली के लिए व्‍यापक विचार विमर्श होना चाहिये। (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा: ***

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य स्‍थान ग्रहण करें1(व्‍यवधान) श्री मदन राठौड़।

श्री  हरिमोहन शर्मा:***

श्री उपाध्‍यक्ष: अपने स्‍थान से बोले। (व्‍यवधान) अंकित नहीं हो।

श्री हरिमोहन शर्मा: ***

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं मांग संख्‍या 42 और 43 पर राजस्‍थान विधान सभा में अपने विचार रखना चाहूंगा। (व्‍यवधान)  उपाध्‍यक्ष महोदय, ऐसा लगता है कि विपक्ष जनता की समस्‍याओं के प्रति गैर जवाबदार है, गैर जिम्‍मेदार है। यह सारगर्भी(व्‍यवधान) बहस होनी चाहिये, यह उससे भागना चाहते हैं।

श्री हरिमोहन शर्मा:***

श्री रणवीरसिंह गुढा: ***

श्री मदन राठौड़: यह बहस में भाग नहीं लेना चाहते। केवल हंगामा करना चाहते हैं। इनके पास कहने के लिए कुछ नहीं है, बोलने के लिए कुछ नहीं है, केवल हंगामा खड़ा करके सुर्खियों में आना चाहते हैं। (व्‍यवधान) 

श्री हरिमोहन शर्मा: ***

श्री मदन राठौड़: लेकिन राजस्‍थान की जनता इन्‍हें कभी मांफ करने वाली नहीं है। (व्‍यवधान) मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं कि जब हमारे भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी, जिसने एकल खिड़की योजना शुरू की और अप्रवासी राजस्‍थानियों को राजस्‍थान में आकर यहां  पर निवेश करने के लिए, आंमत्रित करने के लिए सिंगल विंडो स्‍कीम शुरू की। उसकी बहुत बहुत प्रशंसा करना चाहूंगा। (व्‍यवधान)

श्री अर्जुन सिंह (दानपुर): ***

श्री हरिमोहन शर्मा: ***  

श्री मदन राठौड: उपाध्‍यक्ष महोदय, इन्‍होंने कुछ नहीं किया है। भारतीय  जनता पार्टी की जब से राजस्‍थान में सरकार बनी है, मैं उद्योग मंत्री जी को भी बहुत बहुत साधुवाद देना चाहूंगा, धन्‍यवाद देना चाहूंगा(व्‍यवधान) कि उन्‍होंने एकल खिड़की योजना को सार्थक करने का प्रयास किया औरा यहां पर जो अप्रवासी राजस्‍थानी है(व्‍यवधान) स्‍थापित करने के लिए आमंत्रित किया। उपाध्‍यक्ष महोदय, कभी भी कोई(व्‍यवधान) बाहर से आकर राजस्‍थान में  निवेश करना चाहेगा तो उसको केवल फार्म भरना पड़ेगा(व्‍यवधान)

श्री अर्जुन सिंह (दानपुर): ***

श्री हरिमोहन शर्मा: ****(व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड:  और वहां पर एकल खिड़की के माध्‍यम से वह फार्म भरकर देगा, वहां का अधिकारी स्‍वंय जायेगा उस उद्योगपति के पास(व्‍यवधान) उसको कहां कहां जमीन चाहिये, जमीन के लिए उसे(व्‍यवधान) किसी को लोन चाहिये लेने के लिए, किसी ने बैंक में और विभिन्‍न(व्‍यवधान) प्रोत्‍साहित करेंगे। जिला कलेक्‍टर के माध्‍यम से बराबरी(व्‍यवधान) उन्‍होंने क्‍या क्‍या सहयोग किया, इसके लिए मैं राजस्‍थान की मुख्‍यमंत्री और उद्योग मंत्री जी को बहुत बहुत धन्‍यवाद देना चाहता हूं। प्रधानमंत्री रोजगार योजना है, उन्‍होंने कुछ नहीं किया(व्‍यवधान) बहुत कम प्रतिशत रहा लेकिन मैं कहना चाहूंगा कि(व्‍यवधान) प्रधानमंत्री रोजगार योजना, हमने पूरा प्रयास किया प्रधानमंत्री रोजगार योजना के माध्‍यम से बेरोजगारों को(व्‍यवधान) सहयोग किया जाए, यह हमारी सरकार ने किया है।(व्‍यवधान) सहयोग नहीं लेना चाहते लेकिन हमने तुरंत किया। उद्योग मंत्री जी ने मोनिटरिंग की(व्‍यवधान) प्रधानमंत्री से आग्रह करके कि इसके माध्‍यम से प्रधानमंत्री रोजगार योजना को सार्थक किया जाए। यही नहीं बुनकरों के लिए भी हमारी सरकार ने बीमा योयजना शुरू की। (व्‍यवधान) यही नहीं बुनकरों के लिए भी हमारी सरकार ने बीमा योजना शुरू की। (व्‍यवधान) यह पहली बार हुआ है राजस्‍थान में, बुनकर बीमा योजना जिसके माध्‍यम से प्रिमियम और जिसमें 60 रूपये केन्‍द्र सरकार का और 40 रूपये  राजस्‍थान सरकार  वहन करेंगी, यदि कोई बुनकर(व्‍यवधान)20,000 का भुगतान(व्‍यवधान) 80,000 का भुगतान किया जाएगा। जब यह लोग सत्‍ता में थे आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहूंगा, इन्‍होंने जिस प्रकार कांग्रेस के राज में(व्‍यवधान) हमने, अवैध खनन को रोकने में सार्थक प्रयास किया, मुलजिमों को सज़ा दी। (व्‍यवधान) बहुत बहुत धन्‍यवाद।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री रामप्रताप कासनिया।(व्‍यवधान)

श्री अर्जुन सिंह (दानपुर): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप अपने स्‍थान पर जाकर...(व्‍यवधान(

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): उपाध्‍यक्ष महोदय, पिछले दो दिनों से हाउस के अंदर जिस तरह का वातावरण हो रहा है, राजस्‍थान की जनता के खून पसीने की गाड़ी कमाई का मिसयूज हो रहा है।(व्‍यवधान) उपाध्‍यक्ष महोदय, मौटे रूप में अगर इस विधान सभा को चलाना है तो एक ही चारा है कि   हु-हुल्‍लड़ करने वालो की, चाहे पक्ष के हो या विपक्ष के हो किसी की भी बात को प्रेस और मिडिया में स्‍थान नहीं मिलेगा। (व्‍यवधान)  

श्री अर्जुन सिंह (दानपुर): ***

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: उपाध्‍यक्ष महोदय, यह  सदन के अंदर मोबाइल से बात कर रहे हैं। (व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया: इस देश के प्रजातंत्र को बचाना है तो हु-हुल्‍लड़ करने वालों को प्रथम पेज पर स्‍थान नहीं मिलना चाहिये। हैड लाइन पर उसको नहीं छापा जाना चाहिये। उपाध्‍यक्ष महोदय, अगर इस तरह से विधान सभा चलती रही तो राजस्‍थान की जनता को न्‍याय नहीं मिलेगा।

 

Ddm/usc/230306/1340/2a/

 

(व्‍यवधान) पिछले 3 दिन से एक छोटी-सी बात को लेकर हो-हल्‍ला किया जा रहा है। माफी मांगने वाला इन्‍सान कभी भी छोटा नहीं होता है। माफी मांगने से....(व्‍यवधान)...धन्‍यवाद।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री नरपतसिंह राजवी। (व्‍यवधान)

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं रिप्‍लाई लिखित में लेकर आया हूं। मैं निवेदन करना चाहता हूं कि भू-माफियाओं ....(व्‍यवधान) मैं रिप्‍लाई सदन के पटल पर रखता हूं। (व्‍यवधान) इसलिये मैं निवेदन करना चाहता हूं कि उद्योग विभाग से सम्‍बन्धित मांग पारित की जाए। 

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री लक्ष्‍मीनारायण जी दवे। (व्‍यवधान)

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (खनिज मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, ईश्‍वर बड़ा दयालु है। (व्‍यवधान) राजस्‍थान की ऐसी भौगोलिक परिस्थिति में...(व्‍यवधान) गरीबों को, अनुसूचित जाति के लोगों की...(व्‍यवधान)...पशुपालन आधारित...(व्‍यवधान)..... पिछले दो सालों से .. (व्‍यवधान) .. इन्‍होंने ही माइनिंग को रोका था। उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं रिप्‍लाई को सदन की मेज पर रखता हूं  (व्‍यवधान) ... माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करूंगा कि मांग पारित की जाए। (व्‍यवधान)


मांग संख्‍या 42 का पारण

श्री उपाध्‍यक्ष: प्रश्‍न यह है कि मांग संख्‍या 42-उद्योग के सम्‍बन्‍ध में 31 मार्च,2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 71,14,86,000/- (अक्षरे-इकहत्‍तर करोड़ चौदह लाख छियासी हजार) तक की राशि प्रदान की जाए?

(स्‍वीकृत)

मांग पारित की गयी।

मांग संख्‍या 43 का पारण

  प्रश्‍न यह है कि मांग संख्‍या 43 - खनिज के सम्‍बन्‍ध में 31 मार्च,2007 को समाप्‍त होने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 36,53,92000/- (अक्षरे-छत्‍तीस करोड़ तिरपन लाख बयानवे हजार) तक की राशि प्रदान की जाए?

(स्‍वीकृत)

मांग पारित की गयी।

सदन की बैठक शुक्रवार, दिनांक 24 मार्च,2006 के प्रात:11 बजे तक के लिये स्‍थगित की जाती है।

 

(तदनन्‍तर सदन की बैठक 1344 बजे 24 मार्च,2006
के 1100 बजे तक के लिये स्‍थगित हुई)



*** अध्‍यक्षपीठ के आदेशानुसार अंकित नहीं किया गया।

*** अध्‍यक्षपीठ के आदेशानुसार अंकित नहीं किया गया।

*** अध्‍यक्षपीठ के आदेशानुसार अंकित नहीं किया गया।

 

*** अध्‍यक्षपीठ के आदेशानुसार अंकित नहीं किया गया।

 

*** अध्‍यक्षपीठ के आदेशानुसार अंकित नहीं किया गया।