Lpm/akt/1100/1a/2232007

 

अशोधित प्रति प्रकाशनार्थ नहीं

 

राजस्‍थान विधान सभा की कार्यवाही का वृतान्‍त

 

अंक 7    बारहवीं विधान सभा के सातवें सत्र का बाईसवां दिवस      संख्‍या 15

 

गुरूवार, 22 मार्च,2007

 

राजस्‍थान विधान सभा की बैठक 11:00 बजे

विधान सभा भवन जयपुर, में प्रारम्हुई।

 

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

 

तारांकित प्रश्‍नोत्‍तर

श्री अध्‍यक्ष: श्री केसर देव बाबर।

लक्ष्‍मणगढ़ (सीकर) में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्‍थान

211. श्री केसर देव बाबर: क्‍या तकनीकी शिक्षा मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) जिला सीकर में कितने औद्योगिक प्रशिक्षण संस्‍थान कब से कार्यरत हैं एवं उनमें किस किस विषय का प्रशिक्षण दिया जाता है? विवरण सदन की मेज पर रखे।

(2) क्‍या सरकार सीकर जिले में नये औद्योगिक प्रशिक्षण संस्‍थान स्‍थपित करने का विचार रखती है? यदि हां, तो किस-किस स्‍थान पर कब तक व नहीं, तो क्‍यों?

(3) क्‍या सरकार लक्ष्‍मणगढ़ कस्‍बे में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्‍थान स्‍थापित करने का विचार रखती है? यदि नहीं, तो क्‍यों?

राज्‍य मंत्री, तकनीकी शिक्षा(श्री वासुदेव देवनानी): (1) जिला सीकर में वर्तमान में कार्यरत औद्योगिक प्रशिक्षण संस्‍थानों की सूची परिशिष्‍ट-1 पर संलग्‍न है।

(2) जी नहीं। वित्‍तीय संसाधनों की सीमितता के कारण राज्‍य सरकार निजी क्षेत्र में आई टी आई की स्‍थापना हेतु नि:शुल्‍क जमीन देने जैसी सुविधाएं प्रदान कर रही है।

(3) जी नहीं। राज्‍य सरकार द्वारा जारी योजना के अंतर्गत ऐसे पंचायत समिति क्षेत्र जहां औद्योगिक  प्रशिक्षण संस्‍थान नहीं है वहां निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्‍थान हेतु राज्‍य सरकार नि:शुल्‍क भूमि उपलब्‍ध करायेगी। इस योजना के अंतर्गत लक्ष्‍मणगढ़ हेतु प्रस्‍ताव का चयन कर आशय पत्र जारी किया जा चुका है तथा भूमि आवंटित की जा चुकी है।

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री महोदय ने जवाब ना में दिया है, परसों तो आप आई आई टी मांग रहे थे शेखावाटी क्षेत्र में...

श्री अध्‍यक्ष: आई आई टी नहीं आई टी आई।

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, मैं यही तो कहने जा रहा हूं (व्‍यवधान) मैं आई टी आई मांग रहा हूं और आप दो दिन पहले शेखावाटी क्षेत्र के लिए आई आई टी मांग रहे थे, इसलिए मैं आपका प्रोटेक्‍शन चाहता हूं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष जी को मांगने की जरूरत नहीं है, अध्‍यक्ष जी को हुकूम देना पड़ता है (व्‍यवधान)

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, हुकूम दे दिया अब पूरा करो (व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से यह निवेदन करूंगा कि..

श्री अमराराम (धोद): जमीन तो तैयार है आप तो लागू करो।

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): क्‍या यह सही है कि प्रत्‍येक तहसील में कम से कम एक आई टी आई खोलने की राज्‍य सरकार ने घोषणा की थी, यदि हां, तो सीकर जिले में शेष तहसीलों में कब तक खोलने का विचार रखती है? क्‍या यह सही है कि सरकार रोजगारोन्‍मुख शिक्षा पर जोर देना चाहती है? यदि हां, तो आई टी आई खोलने के लिए वित्‍तीय संसाधन कब तक उपलब्‍ध हो जाएंगे?

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राज्‍य सरकार ने यह घोषणा की थी कि प्रत्‍येक पंचायत समिति पर कम से कम एक आई टी आई हो, उसके अंतर्गत राजस्‍थान में 237 उपखण्‍ड है, 124 उपखण्‍डों पर गत वर्ष तक आई टी आई थे..

श्री अध्‍यक्ष: 237 उपखण्‍ड हैं।

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): 113 ऐसी पंचायत समितियां थी जहां पर आई टी आई नहीं थी, उनमें से पब्लिक प्राईवेट पार्टनरशिप, पी.पी. मोड़ के अंतर्गत 104 पंचायत समितियों पर आई टी आई के प्रस्‍ताव आ चुके हैं और उनको हमने आशय पत्र जारी कर दिये हैं। अब केवल 9 उपखण्‍ड ऐसे बचे हैं जिनको भी हमने दुबारा विज्ञापित किये हैं। इसके आधार पर हम जो राष्‍ट्रीय औसत पर एक लाख जनसंख्‍या पर 70 सीटे हैं, राजस्‍थान में केवल 40 सीटे थी, इस प्रस्‍ताव के आधार पर हम राष्‍ट्रीय स्‍तर को भी क्रोस कर जाएंगे। राजस्‍थान में हमने 498 आशय पत्र जारी कर दिये हैं। मैं समझता हूं उसके बाद जो अभी 22 हजार सीटे हैं उसमें 48 हजार की वृद्धि होकर के 70 हजार सीटे आई टी आई की राजस्‍थान में हो जाएंगी जो भूतो न: भविष्‍यति, आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ। जहां तक इनके सीकर जिले की बात है उसमें मैं बता दूं कि चार इनके पंचायत समितियों पर जिनमें से तीन में राजकीय और एक में प्राईवेट आई टी आई था, बाकी चारों के लिए भी आशय पत्र जारी कर हो गये हैं, जिनमें इनका भी लक्ष्‍मणगढ़ क्षेत्र आता है।

श्री हरीसिंह रावत (भीम): मंत्री महोदय, कोटा जिले में पंचायत समिति इटावा में क्‍या प्रस्‍ताव आये हैं? (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: प्‍लीज मूल प्रश्‍नकर्ता को पूछने दीजिए।

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री महोदय ने जवाब दिया  है ...

श्री अध्‍यक्ष: आपके तो खुल गया न, अब कह दिया है उन्‍होंने, अब क्‍या पूछोगे?

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, मैं मंत्री महोदय से आपके माध्‍यम से पूछना चाहूंगा कि आजकल आधुनिक युग है, सन् 1965 में जो विषय खोले गये थे सीकर में वो के वो विषय ही आज चल रहे हैं। इसलिए मैं आपके माध्‍यम से यह पूछना चाहूंगा, जी हां, आई टी आई चालू है सीकर में वहां मोबाइल, कम्‍प्‍यूटर, डीजल मैकेनिक आदि के विषय चालू करने में कितने वित्‍तीय संसाधनों की आवश्‍यकता रहेगी और ये वित्‍तीय व्‍यवस्‍था कब तक उपलब्‍ध हो जाएगी एक, दो आपने खण्‍ड-3  के उत्‍तर में भूमि आवंटन करने की बात कही है, मैं आपसे यह भी निवेदन करूंगा कि कितनी भूमि आवंटित की गई है और किस फर्म को यह भूमि आवंटित की गई है और कब तक शुरू हो जाएगा?

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सरकार का यह विचार था कि पहले हम आई टी आई शिक्षा का विस्‍तार करे और साथ-साथ धीरे-धीरे उसका सुदृढ़ीकरण भी करें। हमने पिछली बार टोटल 81 ऐसे यूनिट थी जो एस.सी.वी.टी. में थी उसमें से हमने 51 यूनिट को एन.सी.वी.टी. में कन्‍वर्ट करके इनको क्रमोन्‍नत किया है और उसमें पाँच करोड़ रुपए राज्‍य सरकार ने व्‍यय किए हैं। जिसके कारण से आधुनिकतम के सारे उपकरण भी उसमें खरीदे गये हैं, 30 केवल एस.सी.वी.टी. के बाकी कोर्सेज यूनिट्स जिनको भी धीरे-धीरे सभी एन.सी.वी.टी. में बदलने का सरकार का विचार है। जहां तक इन्‍होंने पूछा प्रत्‍येक आई टी आई जो पी पी मोड में खोल रहे हैं उसमें पाँच बीघा जमीन राज्‍य सरकार नि:शुल्‍क उपलब्‍ध करा रही है। उसमें हमने एक कमेटी बना रखी है प्रिंसिपल सैक्रेटरी, टेक्‍नीकल एजुकेशन की अध्‍यक्षता में उसमें डायरेक्‍टर, टेक्‍नीकल एजुकेशन है, एकाउंट्स ऑफिसर है, ओएसडी है, जितने भी प्रस्‍ताव आते हैं उसमें प्रायोरिटी के आधार पर हमारे माप-दण्‍ड तय है, जिसको इण्‍डस्‍ट्री  चलाने का अनुभव है, उसका भी एजुकेशन बैकग्राउण्‍ड है और उनकी क्षमता है, फाइनेंसियल साउंडनैस है, ऐसे मुद्दों को देखते हुए हमने इतने सारे आई टी आईज. को जमीन उपलब्‍ध करा के आई टी आई आशय पत्र जारी कर दिये हैं।

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, मेरी बात जो मूल थी वह रह गई, क्‍या मोबाईल, कंप्‍यूटर, डीजल मैकेनिक आदि विषय चालू करने पर सरकार पर कितना वित्‍तीय भार पड़ेगा और यह कब तक चालू हो जाएंगे? सीकर में जो आई टी आई स्थित है उसके बारे में पूछ रहा हूं और दूसरा यह कि जो जमीन आवंटित की गई है, कौनसे फर्म या किस फर्म को की गई है?

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): अध्‍यक्ष महोदय, लक्ष्‍मणगढ़ में एक पारिवाला वोकेशनल ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्‍टीट्यूट है लक्ष्‍मणगढ़ का, उसे पीपी मोड़ में जमीन अलाट की गई है। जहां तक इनके सीकर के जो आई टी आई का प्रश्‍न है वहां पर छह आई टी आई चल रहे हैं, वहां जिन नये हमने आई टी आई को दिया है, उसमें सब आधुनिकतम व्‍यवसाय है। सरकार के इस आई टी आई के अंदर नये अभी हमने विस्‍तार किया है धीरे-धीरे यह विचाराधीन है, वित्‍तीय संसाधनों की उपलब्‍धता पर इनमें नये कोर्स भी शुरू होंगे लेकिन जितने भी नये आई टी आईज. खोल रहे हैं उन सब में इस प्रकार के मोबाईल और बाकी जो प्रकार के कोर्सेज आधुनिकतम है उन्‍हीं को ही हम प्रायोरिटी से दे रहे हैं और वहीं खोले जा रहे हैं।

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, मेरी बात का जवाब नहीं आया, एक तो मैं यह कहना चाह रहा  हूं कि जैसे इन विषयों को चालू करने में कितना खर्चा आ सकता है, एक जो लक्ष्‍मणगढ़ में...

श्री अध्‍यक्ष: खर्चें के बारे में पूछा ही नहीं आपने?

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): पूछा है अध्‍यक्ष महोदय, मैंने पूछा है कि मोबाइल, कंप्‍यूटर और डीजल मैकेनिक इन तीन विषयों को खोलने में सरकार पर कितना वित्‍तीय भार बढ़ेगा? (व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, पूरक प्रश्‍न है मेरा यह।

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): हर ट्रेड के लिए अलग-अलग है, मोबाईल के लिए पाँच से दस लाख के बीच में आधुनिकतम उपकरणों की आवश्‍यकता होती है, हर ट्रेड का अलग-अलग है, कोई इलेक्ट्रिशियन का है, कोई कंप्‍यूटर का है, कंप्‍यूटर में सबसे कम होता है तो हमने कई जगह कंप्‍यूटर ट्रेस भी खोले हैं और सबसे पहले सरकार के पास प्रायोरिटी है कि यह आई टी आई की सुविधा हर जगह उपलब्‍ध हो जाए और साथ में जितने एस.सी.वी.टी. कोर्सेज है ये एन.सी.वी.टी. में कन्‍वर्ट हो जाए, उसके बाद हम धीरे-धीरे नये कोर्सेज बढ़ाएंगे।

श्री अध्‍यक्ष: श्री सी.पी.जोशी।

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, एक निवेदन है मेरा (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आपने तीन मिनट ले लिया (व्‍यवधान)

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपसे मैं प्रोटेक्‍शन चाहूंगा (व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: बैठिये राजसमन्‍द से आने वाले माननीय सदस्‍य, मैं आपको बोलने का मौका दूंगी, पहले इनको बोलने दीजिए।

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं कहूंगा कि सरकारी आई टी आई जो लक्ष्‍मणगढ़ क्षेत्र में है वो रिजर्व सीट है, वहां पर एससी, एसटी के लोग ज्‍यादा रहते हैं, पैसे वाले लोग नहीं रहते हैं। इसलिए सरकारी आई टी आई खुलेगी तभी वहां रोजगार बच्‍चों को मिलेगा। यह जो तकनीकी शिक्षा मंत्री महोदय है (व्‍यवधान) आपके माध्‍यम से मैं निवेदन करूंगा कि थोड़ा आश्‍वासन दे दे कि यह जो शेखावाटी क्षेत्र है इसमें सरकारी आई टी आई खोली जाएगी (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप बाद में बोल लीजिएगा।

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जहां आई टी आई नहीं खोले थे हमारी सरकार ने 20 नये आई टी आई सरकार क्षेत्र में गत वर्ष खोले हैं।

श्री अध्‍यक्ष: आप एक साथ जवाब दे दीजिएगा। श्री सी.पी.जोशी।

 

Bhs/usc/22.3.07/11.10/1b

 

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या यह सच है ...।

श्री प्रभुलाल वर्मा (पीपल्‍दा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा भी प्रश्‍न है।

श्री अध्‍यक्ष: मैंने नाम सी.पी.जोशी का ले लिया। आप स्‍थान ग्रहण करें।

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या यह बताने की कृपा करेंगे कि क्‍या यह सच है कि सत्र 2006-07 के बजट भाषण में सरकार ने पीपी मोड़ में आईआईटी लगाने की बात की थी? आपने खाली आशय पत्र जारी किये हैं । आप यह बतायें कि 2006-07 में कितने एक्‍चुअल आईआईटी लगे। नंबर-1. नंबर-2 भारत सरकार आपको कितना पैसा दे रही है जो आज दिन तक नहीं मिला उसकी राशि कितनी है? वो बता दें आप।

श्री लालचन्‍द मेघवाल (रायसिंहनगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से ...।

श्री अध्‍यक्ष: पहले जवाब आ जाने दो इसका।

श्री लालचन्‍द मेघवाल (रायसिंहनगर): मैं कब से हाथ खड़ा कर रहा हूं।

श्री अध्‍यक्ष: बाद में। पहले जवाब आने दीजिये।

श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): सबका एक साथ ही आ जाएगा माननीय अध्‍यक्ष महोदय।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): आप उसको उलझाना क्‍यों चाहते हैं? आप उसको उलझाना चाहते हैं ...(व्‍यवधान)... आप इसका स्‍पेसिफिक जवाब दीजिये।

श्री मोहनलाल गुप्‍ता (किशनपोल): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह पूछना चाहता हूं कि जयपुर शहर में कोई आईटीआई खोलने की योजना है क्‍या?

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): सरकार ने केवल मात्र पीपी मोड़ में केवल मात्र आशाय पत्र दिये हैं एक्‍चुअल में पीपी मोड़ में राजस्‍थान में सरकार की घोषणा करने के बाद में नहीं लगी संस्‍थान । - नंबर-1. नंबर-2 भारत सरकार आपको स्‍ट्रेन्‍थन करने के लिए जितना पैसा दे रही है उतने पैसे का भी हम उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।

श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी से मैं यह पूछना चाहता हूं कि रेलमगरा तहसील में जिला राजसमंद में कब तक आईटीआई खोल देंगे। राजसमंद जिले में रेलमगरा में आज तक आईटीआई नहीं है।

श्री अध्‍यक्ष: मावली से आने वाले माननीय सदस्‍य, यह अलग से प्रश्‍न है आपका प्रश्‍न इस प्रश्‍न से संबंधित नहीं है।

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): पीपी मोड़ में 2006-07 के अन्‍दर 11 आईटीआई प्रारंभ हो चुके हैं और बाकी आईटीआई जुलाई से शुरू हो जाएंगे।

श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि मंत्री जी ने बताया कि हम सब जगह खोल रहे हैं तो रेलमगरा में कब तक खोलेंगे ...(व्‍यवधान)...

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): 149 की आपने आशय पत्र दिये हैं 149 के आपने जवाब दिया है। 149 के आपने आशय पत्र दिये हैं और उन 149 के अगेंस्‍ट में केवल 11 लगे हैं और उन 11 में भी अध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं यह एक रैकेट है इसको समझने की आवश्‍यकता है जो लोग पीपी मोड़ में सरकार से जमीन को लेकर बुक कर रहे हैं और जमीन बुक करने के बाद जमीन की कोस्‍ट बढ़ जाएगी और दूसरे को जाकर सरेण्‍डर करेंगे । क्‍या सरकार यह एश्‍योर करेगी कि जिनको पीपी मोड़ में आईआईटी के लिए आप आशय पत्र दे रहे हैं यदि वो एक साल में या 6 महीने में नहीं लगायें तो उनको कैंसिल करेंगे? यह आपने फैसला किया क्‍या?

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): निश्चित रूप से सरकार ने जहां पर आईटीआई के लिए जमीन दी है उसका उपयोग आईटीआई के लिए होगा यदि कोई नहीं खोलेगा तो सरकार उससे जमीन जो है लेगी। 

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): कितने साल में? आप कितने समय में, 149 के आप आशय पत्र दे चुके हैं आपके इस साल तक 11 खुले हैं  बाकी जगहों पर जमीन बुक करवा दी लोगों ने और इसके करने के बाद एक भी जगह आईटीआई नहीं खुली है इसके लिए सरकार को नियम नहीं बनाना चाहिए क्‍या कि 6 महीने,8 महीने में आप ...(व्‍यवधान)...

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): आप शिक्षा से जुड़े व्‍यक्ति हैं आईटीआई के आशय पत्र जारी होने के पश्‍चात् आईटीआई के सारे प्रस्‍तावों पर एक कमेटी जिसमें भारत सरकार का प्रतिनिधि होता है उसका निरीक्षण करती है निरीक्षण करने के बाद उसकी अनुमति के बाद ही आईटीआई खुलता है वह प्रोसेस चालू है। निश्चित रूप से इस जमीन का दुरुपयोग नहीं होगा यह मैं आपसे कहता हूं।

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय मंत्री जी, एक साल से कह रहे हो एक साल से बजट भाषण में घोषणा की है कि पीपी मोड़ में हम लगायेंगे। भारत सरकार अभी तो एक साल से ...(व्‍यवधान)... आपके नहीं आया।

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): हमने नीति की घोषणा की थी उस समय आशाय पत्र कहां आये हुए हैं आशाय पत्र उसके बाद जारी हुए हैं वो प्रोसेस है।

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): इसका मतलब सरकार जो घोषणा करती है और प्रैक्टिकल करने में दो साल लगते हैं?

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): दो साल नहीं हुए। एक साल भी पूरा नहीं हुआ है।

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): राजस्‍थान की जनता को, पिछले बजट में घोषणा की अध्‍यक्ष महोदय, कि पीपी मोड़ में हायर एजुकेशन में जाएंगे, पीपी मोड़ में कॉलेज में जाएंगे, पीपी मोड़ में मेडिकल में जाएंगे, पीपी मोड़ में आईआईटी में जाएंगे और  राजस्‍थान सरकार की ये स्थिति है कि पिछले साल दस प्रतिशत जगह भी आपने न तो हायर एजुकेशन में, न टैक्निकल एजुकेशन में, न मेडिकल फील्‍ड में पीपी मोड़ में आप इंस्टिट्यूट खड़े कर सके, केवल मात्र लोगों ने जमीन अलॉटमेंट कराकर लाखों करोड़ों रुपये की जमीन को बुक कर लिया अध्‍यक्ष महोदय।

श्री अध्‍यक्ष: कोई समय तो तय होना चाहिए ...(व्‍यवधान)... ये तो होना चाहिए।

श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राजमसंद जिले में रेलमगरा तहसील है और पंचायत हैडक्‍वार्टर भी है..।

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आशय पत्र जारी होने की तिथि के एक साल के अन्‍दर उसको खोलना है ।

श्री अध्‍यक्ष: प्‍लीज, वो बोल रहे हैं।

श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): पंचायत हैडक्‍वार्टर भी है वहां आप कब तक खोलने का विचार रखते हैं।

श्री अध्‍यक्ष: मंत्री जी जवाब दे रहे हैं और आप खड़े हैं।

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): जिस तारीख को आशय पत्र जारी होगा ...(व्‍यवधान)... जिस तारीख को संस्‍था का आशय पत्र जारी होगा उसके एक साल के अन्‍दर वो खुलेगा।

श्री अमराराम (धोद): नहीं खुलेगा तो वो निरस्‍त हो जाएगा।

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): नहीं खुलेगा तो फिर उस पर हम नियमानुसार कार्यवाही करेंगे।  

श्री अध्‍यक्ष: नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नियमानुसार क्‍या है ...(व्‍यवधान)... आप यह कहिये कि एक साल में नहीं खुलेगा तो जमीन का आबंटन निरस्‍त करेंगे।

श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): ...(व्‍यवधान)... यह एक अहम मुद्दा है, आप रेलमगरा में में कब तक खोल देंगे?

श्री मोहनलाल गुप्‍ता (किशनपोल): .(व्‍यवधान)... जयपुर में आईआईटी खोली जाए उसके लिए जमीन चिह्नित की जाए और इसके साथ साथ चूंकि ये अन्‍तर्राष्‍ट्रीय हवाई अड्डा भी यहीं है । जयपुर में आईआईटी खोलने की मैं मांग करता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: मंत्री जी जवाब दे रहे हैं।

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): ये आईआईटी का मुद्दा नहीं है आईटीआई का है, आईआईटी का कंफ्यूजन कर रहे हैं।

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): ...(व्‍यवधान)... उनको तो आईआईटी दे दो आप जयपुर में।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): इनके सवाल का राजस्‍थान का इन्‍होंने जवाब दिया है मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूं ...।

श्री अध्‍यक्ष: मैंने जिसका नाम नहीं पुकारा उसका अंकित नहीं होगा।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री लालचन्‍द मेघवाल (रायसिंहनगर): 000

श्री अध्‍यक्ष: आपका नाम किसने पुकारा?

श्री लालचन्‍द मेघवाल (रायसिंहनगर): 000

श्री अध्‍यक्ष: मैंने नहीं पुकारा। डॉ.चन्‍द्रशेखर बैद।

श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): 000

श्री अध्‍यक्ष: अब आप दूसरा प्रश्‍न करके जानना ये।  डॉ. चन्‍द्रशेखर बैद।

श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): 000

श्री अध्‍यक्ष: आज डिमाण्‍ड है एजुकेशन की यदि आप उससे अधिक कोई बात प्‍लीज, आज एजुकेशन की डिमाण्‍ड है शिक्षा की, तकनीकी शिक्षा भी उसमें है आपको यदि कोई और बात कहनी है तो उस वक्‍त कहियेगा आप। लेकिन इस एक प्रश्‍न के ऊपर बाकी प्रश्‍नों को आने नहीं दें यह कहां का तरीका है?

श्री सी. डी. देवल (रायपुर):  000

श्री अध्‍यक्ष: जो अनुशासन नहीं मानेगा उसको बोलने का अवसर नहीं दिया जाएगा।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री अध्‍यक्ष: जो अनुशासन में रहेगा उसी को अवसर दिया जाएगा।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर):  000

श्री अध्‍यक्ष: आप स्‍थान ग्रहण करें।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री अध्‍यक्ष: आप स्‍थान ग्रहण करें। ...(व्‍यवधान)...

पंजाब राज्‍य से सिंचाई हेतु उपलब्‍ध पानी

212. डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): क्‍या इंदिरा गांधी नहर मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे :-

(1) वर्ष 2004 से अब तक इंदिरा गांधी नहर परियोजनान्‍तर्गत पंजाब से राज्‍य को कितना पानी उपलब्‍ध कराया गया? माहवार विवरण सदन की मेज पर रखें।

(2) वर्ष 2004 से अब तक उक्‍त परियोजनान्‍तर्गत फेज प्र‍थम तथा फेज द्वितीय -को सिंचाई हेतु कितना पानी उपलब्‍ध कराया गया? माहवार विवरण सदन की मेज पर रखें।

(3) उक्‍त योजनान्‍तर्गत कौन-कौनसी पेयजल योजना हेतु कितना पानी उपलब्‍ध कराया जा रहा है? माहवार विवरण सदन की मेज पर रखें।

(4) वर्ष 2007 तथा 2008 में कौन-कौनसी नवीन सिंचाई तथा पेयजल योजनाओं हेतु कितना पानी उपलब्‍ध कराये जाने की योजना है? विवरण सदन की मेज पर रखें।

इंदिरा गांधी नहर मंत्री (श्री सांवर लाल) :  अध्‍यक्ष महोदय, (1) वर्ष 2004-05 से वर्ष 2006-07  (माह फरवरी तक) इंदिरा गांधी नहर परियोजनान्‍तर्गत राज्‍य को उपलब्‍ध कराये गये पानी का माहवार विवरण परिशिष्‍ट अ  पर संलग्‍न है।

(2) उपरोक्‍त अवधि में इंदिरा गांधी नहर परियोजना के प्रथम चरण में बहाव क्षेत्र को 5.23 क्‍यूसेक्‍स/1000 एकड़ एवं जलोत्‍थान क्षेत्र को 3.90 क्‍यूसेक्‍स/1000 एकड़ जलांक के अनुसार पानी दिया जा रहा है तथा द्वितीय चरण के बहाव क्षेत्र में 3.00 क्‍यूसेक्‍स/1000 एकड़ एवं जलोत्‍थान क्षेत्र में 2.00 क्‍यूसेक्‍स/1000 एकड़ जलांक से दिया जा रहा है। वर्ष 2004-05 से वर्ष 2006-07 (माह फरवरी) तक दिये गये पानी का विवरण परिशिष्‍ट ब पर संलग्‍न है।

(3) उक्‍त योजनान्‍तर्गत पेयजल योजनाओं को उपलब्‍ध कराये गये पानी का माहवार विवरण परिशिष्‍ट स पर संलग्‍न है।

(4) उक्‍त परियोजनान्‍तर्गत वर्ष 2007-08 में 48000 हैक्‍टेयर क्षेत्र को सिंचाई हेतु खोलना प्रस्‍तावित है।  इसी परियोजना से जन स्‍वास्‍थ्‍य अभियांत्रिकी विभाग को वर्ष 2007-08 में 139 नवीन पेयजल योजनाओं के लिए लगभग 87 क्‍यूसेक पानी और उपलब्‍ध कराया जाना प्रस्‍तावित है।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि इसमें है  पंजाब से 2004-05 पानी मिला 4.31 एमएएफ, 2005-06 में मिला 6.21 एमएएफ, 2006-07 में मिला 4.67 एमएएफ अभी तक।  जब आपको पानी पंजाब से प्राप्‍त होना चाहिए यह आपको मालूम है पोंग डेम के लेवल के आधार पर आपको पानी की मात्रा तय की जाती है, पहला मेरा सप्‍लीमेंट्री क्‍वेश्‍चन यह है कि पोंग डेम के लेवल के आधार पर 2004-05,2005-06 और 2006-07 के अंदर कितने पानी की मात्रा राजस्‍थान को दिये जाने के लिए निर्धारण किया गया और उसके अगेंस्‍ट में आपको कितना पानी मिला? यदि पानी आपको कम मिला तो उसके लिए आपने पंजाब सरकार को कब-कब, क्‍या-क्‍या पत्र लिखे या क्‍या-क्‍या प्रयास किये?

सप्‍लीमेंट्री क्‍वेश्‍चन नं-2 है कि आपने किसानों के साथ 11 दिसम्‍बर, 2004 को समझौता किया उस समझौते के आधार पर आपने फेज-1 और फेज-2 को पानी का प्रतिशत वितरित किया वो उस समझौते के पहले कितना था और समझौते के बाद में कितना था? क्‍वेश्‍चन नं.3 कि आपने पेयजल योजनाओं के लिए 2005-06 के   अंदर ...।

श्री अध्‍यक्ष: आप एक-एक करके पूछें एक साथ करेंगे तो...।

श्री सांवर लाल: पूछो एक बार में। और पूछने दो। पूछो।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): पेयजल योजनाओं के लिए जो आपने परिशिष्‍ट ब के 1 खंड में जो आपने लिखा है कि 28076 क्‍यूसेक डेज और वो ही पानी 2006 के अन्‍दर 25202 क्‍यूसेक डेज कर दिया तो ये पेयजल योजनाओं में पानी की कटौती आपने क्‍यों की?

श्री सांवर लाल: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य से मैं अर्ज करना चाहता हूं कि पोंग डेम के लेवल एक्‍सपेक्‍टेड इनफ्लोज के आधार पर राजस्‍थान का जो हिस्‍सा है उसकी मांग हम करते हैं। 4 ग्रुप में से दो चल सकते हैं तो उसके आधार पर फर्स्‍ट फेज और से‍कंड फेज के लिए पानी लेते हैं। अगर पानी का हिस्‍सा उससे कम हमारे को लगता है तो तीन में से एक ग्रुप चलाकर उस हिसाब से पानी लेते हैं ...

 

कैलाश/    22.3.07  11.20  (1) 1c

 

मैं आपसे अर्ज करना चाहता हूं कुछ समय का फ्लेक्‍चुअलेशन आया हो, फ्लेक्‍चुअलेशन में कभी हमको ज्‍यादा पानी भी मिलता है कभी थोडा बहुत कम भी हो जाता है बाकी जितना पानी हमने मांगा है उसी हिसाब से यह पानी मिला है । दो पीरियड होते हैं एक तो फिलिंग पीरियड और एक होता है डिप्‍लेशन पीरियड । डिप्‍लेशन पीरियड में भी हमारी मांग के हिसाब से होता है और बांध में जितना पानी आने की संभावना है और जितना भर जाता है उन दोनों को देखते हुए फिर डिप्‍लीट करने के लिये 20 मई तक जो पानी लिया जाता है वह फैसलों के हिसाब से लिया जाता है । खरीफ में 21 मई से लगाकर 20 सितम्‍बर तक जो पानी है वह फर्स्‍ट स्‍टेज और सैकंड स्‍टेज में जितनी मांग करते हैं उसके आधार पर पानी देते हैं । उसी आधार पर पानी लिया गया और मैं आपसे यह कहना चाहता हूं कि जितना पानी हमने हमारे हिसाब से अनुमानित किया हमारे हिस्‍से का पूरा पानी हमको मिला है । इसके अलावा दूसरी बात आपने कही है कि 11 दिसम्‍बर को जेल में समझौता हुआ उसके पहले का वाटर अलाउंस प्रति हजार एकड का फर्स्‍ट स्‍टेज का 5.23 था, सैकंड स्‍टेज का 3 एकड प्रति है और लिफ्ट योजना है कंवर सेन का 3.9 है और बाकी दूसरी का 2 प्रति हजार एकड के हिसाब से पानी उपलब्‍ध करवा रहे हैं । इसमें मैं अर्ज करना चाहता हूं जो स्‍टेज है इसमें 5.43 लाख हैक्‍टेयर के लगभग एरिया है जिसमें पानी दिया जा रहा है । इसकी इंटेनसिटी भी 119 प्रतिशत है । सैकंड स्‍टेज का जो एरिया है उसमें लगभग 3 लाख 40 हजार हैक्‍टेयर पानी मिल रहा है और 3 क्‍यूसेक के हिसाब से हम पानी ले रहे हैं । इसमें जो अनुपात है वह जो मिल रहा था उसी हिसाब से मिल रहा है । आप अगर चाहे तो मैं आपको जानकारी दे सकता हूं ।

श्री अध्‍यक्ष: जितना पूछा है उतनी ही जानकारी दो आप ।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): 1999-2000 में फर्स्‍ट स्‍टेज को मिला टोटल 7 लाख 12396 और द्वितीय चरण को मिला 2 लाख 4500, लगभग 9 लाख । इसी प्रकार 2001-02 से भी हमारे पास डिटेल है । मैं यह कह सकता हूं कि पिछली सरकार के कार्यकाल में सैकंड स्‍टेज को जो औसत एरिया फीड हुआ 1 लाख 78248 हैक्‍टेयर और हमारे टाइम में हुआ 2 लाख 64849 हैक्‍टेयर । यह एरिया भी बढा है और इस वर्ष हवा लिफ्ट में लगभग 15 हजार एरिया को हमने पानी उपलब्‍ध कराया जाना प्रारंभ किया है । इसके अलावा पेयजल के लिये भी कहीं फ्लेक्‍चुअलेशन की बात अलग है बाकी ड्रिंकिंग वाटर कहीं सफर नहीं कर रहा है मैं आपको कह सकता हूं जिस जिस का हिस्‍सा है उसके हिसाब से पानी उपलब्‍ध कराया जा रहा है । आपकी जानकारी के लिये बता दूं रावतसर में लगभग 56 क्‍यूसेक हम देते हैं । इसी प्रकार कंवर सेन लिफ्ट को हम ढाई सौ देते हैं । उसमें भी कई बार हमको थोडा ज्‍यादा पानी देना पडता है । इसी प्रकार सावा लिफ्ट है उसमें 30 क्‍यूसेक दिया जाता है । जौधपुर लिफ्ट के लिये लगभग 155 क्‍यूसेक दिया जा रहा है और जैसलमेर के लिये 30 क्‍यूसेक पीने का पानी ग्रामीण क्षेत्र के लिये 70 क्‍यूसेक है । इसके अलावा गंगानगर हनुमानगढ का जो ग्रामीण और शहरी एरिया है उसको भी पानी उपलब्‍ध कराया जाता है ।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): मैंने पहला सप्‍लीमेंट्री क्‍वेश्‍चन यह पूछा था जैसे पहले साल आपको 2004 में मिला 4.31 । आपने यह कहा कि जितना मांगा उतना पानी मिल गया । जब आपको अलाटेड 8 एमएएफ है तो आपका निर्धारण कितना किया गया था और आपको मिला कितना ? दूसरे साल में आपको मिला 6.21, तीसरे साल मिला 4.67 तो आपने कम पानी की मांग क्‍यों कि जबकि आपका हक 8 एमएएफ पानी पर है । पोंग डेम का लेवल पिछले दो साल से ठीक चल रहा था तो आपने कम पानी की मांग क्‍यों की । दूसरा जब समझौता आपने किया तो उस समझौते में आपने यह लिखा था कि इंदिरा गांधी नहर परियोजना क्षेत्र में प्रतिवर्ष मिलने वाले कुल पानी 14100 क्‍यूसेक क्षमता वाली नहरों का वितरण प्रथम व द्वितीय चरण में 8200 और 5900 के हिसाब से किया जायेगा । समझौते के पहले जो आप पानी दे रहे थे फेज वन और फेज टू को, फेज वन को दे रहे थे 67.5, फेज टू को दे रहे थे 32.5 । इस प्रतिशत में पिछले तीन साल में कोई फर्क नहीं पडा । जितना फेज वन को मिल रहा था उतना ही फेज वन को मिल रहा है, जितना फेज टू को मिल रहा था उतना ही फेज टू को मिल रहा है और एक सब से महत्‍वपूर्ण चीज एक तरफ आप बार बार यह कह रहे हैं कि सतही जल का प्रयोग पेयजल योजनाओं के लिये किया जायेगा लेकिन आपने पेयजल योजनाओं के लिये यदि आप प्रतिशत निकाले तो टोटल प्रतिशत पेयजल योजनाओं में आप व्‍यय करते हैं उसमें पहले साल आपने दिया 3 प्रतिशत पानी । जितना टोटल पानी आपको मिला उसका 3 प्रतिशत आपने पेयजल में दिया ।

श्री अध्‍यक्ष: आप प्रश्‍न पूछिये ।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): दूसरे साल इन्‍होंने दिया 2.6 प्रतिशत । तो यह कटौती क्‍यों की गई जबकि पेयजल में आपको पानी ज्‍यादा आबंटित करना चाहिये ।

श्री अध्‍यक्ष: हां यह कहो कि कटौती क्‍यों की ।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, एक तो माननीय सदस्‍य बडे विद्वान है ।

श्री अध्‍यक्ष: विद्वान तो आप भी कम नहीं हो ।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): आपने जो यह पढा है 12100 क्‍यूसेक को दो भागों में बांटने का जो पढा है इतना पानी नहीं चलाया जायेगा । हमने यह लिखा है कि उपलब्‍ध पानी को इतनी क्षमता की नहरों के माध्‍यम से उपलब्‍ध कराया जायेगा। जो शेयर डिसाइडेड होता है, पोंग में अवेलिबिलिटी प्‍लस इनफ्लोज के आधार पर जो आपके टाइम में यह समझौता हुआ 1981 का, टोटल अवेलिबिलिटी 17.17 एमएएफ मानते हुए ।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): वह ठीक है साहब, मेरे को तो यह बता दो कि कितने पानी की मांग की और कितना पानी आपको मिला ।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): आपको ही बता रहा हूं और किस को बता रहा हूं पूरी जानकारी ।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): जब 8 एमएएफ पानी मिलना चाहिये तो 4.31, 6.21, 4.67 यह कम क्‍यों मिला आपको, उसके लिये आपने क्‍या किया ।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): माननीय सदस्‍य आपको मैं समझाने की कोशि‍श कर रहा हूं कम नहीं मिला और आप कहोगे तो पाँच साल के आंकडे भी बता दूंगा । मैं यह कह रहा हूं पानी की उपलब्‍धता जो भी पोंग डेम प्‍लस इनफ्लोज आयेगा फिलिंग पीरियड में 20 मई तक उसका हिसाब लगाकर फिर इसको भी हम मार्च में रिव्‍यु करेंगे । अगर हमने ड्राई पेटर्न पर अनुमानित किया उससे ज्‍यादा आयेगा तो फिर पानी की और मांग कर लेंगे । राजस्‍थान के हिस्‍से का पानी कम मांगे यह कभी संभव नहीं है । हर महीने हम हमारा डिमांड चार्ट देते हैं । 17.17 को अधिकतम पानी की संभावना मानी गई है । अवेलिबिलिटी पोंगे डेम, रणजीत सागर प्‍लस आपका इनफ्लोज Share of Punjab 4.22, share of Haryana 3.5, share of Rajasthan 8.6, Delhi water supply .2 mf, share of Jammu and Kashmir .65 mf यह समझौता होने के बाद ”Until such time as Rajasthan is in a position to utilize it full share, Punjab shall be free to utilize the water surplus to Rajasthan requirement. As Rajasthan will soon be able to utilize its share, Punjab shall make adequate alternative arrangements expeditiously for irrigation of its own land by the time Rajasthan is in a position to utilize the full share…” और पंजाब का शेयर होगा 4.82 उसके बाद हम मांग कर रहे हैं यह तो हमको नहीं मिला बाकी आपका यह कहना कि इस साल इतना कम क्‍यों मिला, इस साल ज्‍यादा क्‍यों मिला, माननीय सदस्‍य मैंने बताया कि अवेलिबिलिटी आफ वाटर होगी उसी को इस अनुपात में बांट कर लिया जा रहा है । उसमें राजस्‍थान के हिस्‍से का पूरा पानी लिया जा रहा है मैं सदन को आश्‍वस्‍त करना चाहता हूं कि एक क्‍यूसेक पानी भी कम नहीं ले रहे हैं और यह इंडिकेट करता है टेल एण्‍ड तक हमने पानी पहुंचाया है और इर्रिगेटेड एरिया का जो आंकडा हमने दिया वह भी लगातार बढ रहा है । इसलिए यह कहना बिलकुल उचित नहीं है कि पानी का पूरा हिस्‍सा हम नहीं ले रहे हैं ।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): मैं आपकी थोडी सी मदद चाहता हूं । मैंने मौटे रूप में यह पूछा कि वर्ष 2004-05 व 2005-06 में राजस्‍थान ने कितने पानी की मांग की है और उसकी एवज में आपको कितना पानी मिला और दूसरा आपने पेयजल योजनाओं में पानी की कटौती क्‍यों की । क्‍योंकि जो चार्ट आपने दिया है उसमें आपने परिशिष्‍ट ब के पहले पृष्‍ट पर आप देखें टोटल पानी का आबंटन पेयजल योजनाओं के लिये किया है 28076 क्‍यूसेक डेज और उसके अगले साल 2006 में किया है 25202 क्‍यूसेक डेज । यह कटौती आपने क्‍यों की ।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): मैं आपसे यही अर्ज कर रहा हूं कि ड्रिंकिंग वाटर की जहां जहां जितनी जरूरत है पानी दिया गया । डिसाइडेड शेयर आपको बता दिया है । इसमें कई बार कंवर सेन लिफ्ट में ज्‍यादा देना पड सकता है उसकी वजह से वह ज्‍यादा दिया होगा इसलिए कभी आंकडा ज्‍यादा हो गया बाकी कहीं पर भी कोई कटौती नहीं की है । आरएलजीसी जौधपुर को पहले हम 110 देते थे अभी इन्‍होंने डिमांड की तो हमने 155 देना शुरू कर दिया । अगर ऐसा कहीं संकट आता है तो माननीय सदस्‍य उस एरिया के लोग बाग़ ड्रिंकिंग वाटर के लिये इस नहर पर निर्भर है तो ऐसी कोई स्थिति नहीं है यह मैं आपसे अर्ज करना चाह रहा हूं ।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): 50 प्रतिशत एरिया राजस्‍थान का डार्क जोन में आ गया और पेयजल योजनाओं के लिये जो सतही जल उपलब्‍ध है उसमें आप कटौती कर दें और आप कह रहे हैं कि कटौती नहीं की । आप स्‍वयं ही देख लें आपने परिशिष्‍ट स (2) में जो चार्ट दिया है उसका टोटल लगाकर मैं बता रहा हूं, 28 हजार से कम कर के आपने 25 हजार क्‍यूसेक डेज कर दिया । मतलब 3 हजार क्‍यूसेक डेज कम कर दिया । जबकि आपको पेयजल योजनाओं के लिये पानी बढाना चाहिये और अभी मेरे पहले प्रश्‍न का जवाब भी नहीं मिला कि आपने मांग कितने की की थी और मांग की एवज में आपको कितना मिला ।

 

ans/usc  22.03.2007  11:30  1d

 

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): मैं जब आपको बार-बार यह कह रहा हूं जितना मांग किया हर महीने उसी हिसाब से  पानी चलता है, तो पानी मिला आपको वह बता दिया, वही मांग है। आप और क्‍या पूछना चाह  रहे हो मेरे समझ में नहीं आ रहा।

श्री अध्‍यक्ष: अमराराम जी।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): आपके कहने का मतलब यह है कि टोटल पानी जो निर्धारित किया गया था वह 4.31 ही था क्‍या, टोटल 2004-5 में 4.31 ही निर्धारित किया था, 2005-6 में 6.21 ही निर्धारित किया  गया था, आपने इतनी मांग की और आपको इतना ही मिल गया, यह तीनों फीगर एक ही है क्या ?

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री):  डाक्‍टर  साहब, मैं आपको समझाने की पूरी कोशिश कर रहा हूं कि हर महीने यह निर्धारण होता है, हर महीने इनफ्लोज का हम स्‍टडी करते हैं उसके आधार पर अगर शेयर बढ़ जाता है तो उसी हिसाब से हम बढ़ाकर मांग करते हैं। अब आप पता नहीं क्‍या पूछना चाह रहे हैं।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): पूरे साल की, पूरे की बात कर रहा हूं।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): अब आप बिराजिए, मैं एक मिनिट...(व्‍यवधान)

  डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): पूरे साल का जो टोटल है उसकी बात कर रहा हूं। पूरे साल का टोटल 4.31 ही था क्‍या आपका 2004-5 में, और 2005-6 में 6.21 ही था क्‍या ?

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री):आप बिराजिए, मैं बता रहा हूं आपको। 2004-5 में हमने  मांगा 21 लाख 75 हजार 352 और वह मिला फिर उसके बाद में मांग 31 लाख 32 हजार 647 और वह मिल गया। फिर मांगा 23 लाख 56 हजार 108 जो अभी वर्ष चल रहा है, मई तक और डिमांड करेंगे, मार्च में रिव्‍यू  करेंगे, अगर हमारा हिस्‍सा बढ़ जाएगा इनफ्लोज  की वजह से तो और बढा़कर मांग लेगे। अब आप क्‍या चाह रहे हो, मेरे समझ में नहीं आ रहा। आप क्‍या यह मान रहे हो क्‍या कि पहले साल का पानी...(व्‍यवधान)

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): उसमें आपने लिखा है, अब आप बता रहे हो क्‍यूसेक के हिसाब से आप यह बता दो जितना एम ए एफ मांगा उतना मिल गया क्‍या ?

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): यह क्‍यूसेक को हमने एमएएफ  में बदल दिया।

श्री अध्‍यक्ष: श्री अमराराम।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): क्‍यूसेक को हमने एमएएफ में इसलिए बदला, हमारे..(व्‍यवधान) 8 आया, 8 के बावजूद जो एवेलेबिलिटी है उसके हिसाब से हमारा हिस्‍सा 4.31 बना है वह हमको मिला, यह 6.3 बढ़ा वह हमको मिला और 4.67 अभी तक फरवरी तक का हमने दिया है उसके बाद और बढ़ेगा और जोड़ देंगे इसमें।

श्री अध्‍यक्ष: श्री अमराराम जी।

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, तारानगर से आने वाले...

श्री अध्‍यक्ष: स्‍थान ग्रहण कीजिए। ( व्‍यवधान)

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): तारानगर से आने वाले माननीय सदस्‍य ने अभी आंकड़ों के हिसाब से यह बताया कि....

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो।

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): 000

श्री अध्‍यक्ष: मैंने नाम पुकारा है अमराराम।

डा. सुरेश चौधरी (भादरा):000

श्री अध्‍यक्ष: मैंने नाम पुकारा है अमराराम।

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): 000

श्री अध्‍यक्ष: भादरा से आने वाले माननीय सदस्‍य, अंकित नहीं होगा। यह अंकित नहीं हो रहा। नहीं करना अंकित।

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): 000

श्री अमराराम (धोद): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से जानना चाहूंगा कि आपने अजमेर जेल में जो समझौता किया उसमें इस परियोजना के प्रथम और द्वितीय चरण  के रेगूलाइज को अलग करने के लिए प्रथम चरण का रेगूलेशन चीफ  इंजीनियर हनुमानगढ़ के पास रहेगा और द्वितीय चरण का रेगूलेशन चीफ इंजीनियर जैसलमेर के साथ रहेगा यह आपने उस समझौते में किया और वह इसलिए किया कि दोनों चरणों में फसल की किस्‍म अलग-अलग है, बुवाई का समय अलग-अलग है और इसलिए उस पानी का सदुपयोग हो सके इसलिए वहां के किसानों की संघर्ष समिति और व्‍यापारी संघर्ष समिति के साथ आपने दोनों चरणों का रेगूलेशन अलग-अलग करने का समझौता किया था। क्‍या आपने इनका रेगेलेशन आज तक भी अलग नहीं किया है ?(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप बीच में क्‍यों खड़े हो।  मंत्री जी, आप क्‍यों खड़ हो गए बीच में।

श्री अमराराम (धोद): अध्‍यक्ष महोदय, पहला प्रश्‍न है कि आपने समझौते में रेगूलेशन अलग-अलग करने का समझौता किया था वह आज की तारीख तक भी, आपने उस समझौते को लागू नहीं किया है। दूसरा, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से जानना चाहूंगा कि आपने 48 हजार हैक्‍टेयर जमीन इस साल और प्रस्‍तावित है सिंचाई के लिए खोलने का, क्‍या मंत्री महोदय यह बताएंगे कि इस 48 हजार हैक्‍टेयर भूमि इस साल सिंचाई के लिए खोलेगे, इसके लिए अतिरिक्‍त पानी की कोई व्‍यवस्‍था की है या इन्‍हीं किसानों की,  जहां पानी के लिए मारामारी हो रही है उसी पानी में से काटकर इनके लिए सिंचाई की सुविधा करेंगे।  और यह जो आपने दिया है मैं समझता हूं 2005-6 में  इस डेम की फुल केपेसिटी इनफ्लो भी थी और आपने 6.21 एमएएफ पानी लिया है जबकि राजस्‍थान का हिस्‍सा 8.6 एमएएफ है, उसकी बजाए आपने केवल 6.21 एमएएफ ही लिया है। यह राजस्‍थान के हिस्‍से में, जबकि इसमें वह पानी भी है जो आखिरी पिलाई के लिए आपने पंजाब से दो  (व्‍यवधान) लिया।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप भाषण न दे, प्रश्‍न पूछ लीजिए।

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): अध्‍यक्ष महोदय, एक सवाल..

श्री अध्‍यक्ष: जवाब आने दे। मिस्‍टर भाटी, जवाब आने दे।

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहूंगा कि पानी का बंटवारा जमीन के आधार पर होना चाहिये।जितना रकबा जमीन फर्स्‍ट फेज में है तो उस हिसाब से पानी का बंटवारा आना चाहिये। सैकण्‍ड फेज में  जितना बीघे, जितना एकड जमीन है जमीन के हिसाब से पानी मिलना चाहिये, यही मेरा निवेदन है।

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है, बढि़या।मंत्री जी।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री):धोद से आने वाले सदस्‍य ने बहुत महत्‍वपूर्ण सवाला किया है, नोर्थ चीफ इंजीनियर और जैसलमेर चीफ इंजीनियर दोनों जगह यह रेगेलेशन, माननीय सदस्‍य सारे उसके मैम्‍बर है वहां पर जाकर, होता है, वह ही उसका नियंत्रण करते हैं। समझौता है हमने उसकी पालना कर दी है उसकी प्रति अगर आपको नहीं मिली, हालांकि हमने अख़बार में भी...(व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): पानी का रेगूलेशन अलग अलग करने की बात है। रेगूलेशन अभी भी आज की तारीख में एक ही है महत्‍वपूर्ण बात है कि अलग-अलग सिंचाई है..

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): मेरी बात तो सुनिये, आप अपनी ही अपनी..

श्री अमराराम (धोद): अलग-अलग कर दिया क्‍या ? 

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): आप अपनी तो कह चुके हो।

श्री अमराराम (धोद): माननीय सदस्‍य विधान सभा के सदस्‍य है,प्रधान है, प्रमुख है मैं इस बात पर नहीं जा रहा, आपने उनकी कमेटी की मीटिंग भी ली, मैं इसमें नहीं जा रहा। मैं इस बात को पूछ रहा हूं))

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): मैं यही समझाने की कोशिश कर रहा हूं।

श्री अमराराम (धोद): कि आपने रेगूलेशन अलग-अलग करने के लिए(व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, यह है कि  यहां कपास की बुवाई और वहां ग्‍वार की बुवाई होती है, वह अप्रैल में होती है, यह जुलाई में होती है और जो रेगूलेशन अलग-अलग चलते हैं, जब ग्‍वार की बिजाई नहीं होती जबकि द्वितीय चरण में जो आप पानी देते हैं..(व्‍यवधान)

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): जैसलमेर में कपास नरमा होता है किसने कह दिया ग्‍वार होता है। दूसरा, अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से यह कहना चाहता हूं(व्‍यवधान) सैकण्‍ड फेज और फर्स्‍ट फेज यह कब बने, सैकण्‍ड फैज चालू नहीं हुआ, सैकण्‍ड फेज में नहरों में पानी नहीं चला, सैकण्‍ड फेज में अलाटमेंट नहीं हुआ,नहरें नहीं बनी, पहले था सैकण्‍ड और फर्स्‍ट। अब तो पूरी नहरें कम्‍पलीट हो चुकी है, माइनर बन चुके। अब सैकण्‍ड फेज की लड़ाई यह राजस्‍थान में क्‍यों डाल रहे हैं।

श्री गोविन्‍द राम मेघवाल (नोखा): अध्‍यक्ष महोदय, मेरा इसमें और भी निवेदन है, जब नहर का पानी लिमिटेड हो चुका है तो हम तो यह कहेंगे कि पानी पूरा नहीं हो रहा, तो नई-नई नहरें भी नहीं निकाली जानी चाहिये।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): बिराजे तो सही। माननीय सदस्‍य से मैं अनुरोध करना चाहूंगा कि मैंने स्‍पष्‍ट कहा है, लिखित में  भी बांटा हुआ है और लिखित में हमारे पास है, आदेश निकाला है, नोर्थ चीफ इंजीनियर हनुमानगढ़ वहां का रेगूलेशन जारी करता है और  वह सारी चीजे, माननीय सदस्‍य उसके मैम्‍बर हैं  वह उसके रेगूलेशन को देखते हैं, जैसलमेर वाला जारी करता है वह देखता है1 मैं बार- बार कहूंगा तो भी आपको  तो जो बात कहनी है वह तो कहेंगे ही। मेरी बात को भी समझने की कोशिश करो।सरकारें कोई समझौते करती है, अगर कोई लागू नहीं होता, यह पंजाब का और हमारा नहीं चल रहा कोर्ट के अंदर, सुप्रीम कोर्ट के अंदर रेफरेंस हुआ। अगर आपको कही लगता है तो पधारो ना, कौई मना थोड़े ही कर रहा है। मैं यह कह रहा हूं कि सरकार ने समझौते को लागू कर दिया। दूसरा यह कि पानी तो फिक्‍स है 8.6, अब आप सभी माननीय सदस्‍यों की भावना भी यही है, हमने सर्वसम्‍मति से यहां संकल्‍प भी पास किया, हमारे हिस्‍से का .6 एमएएफ जो नहीं दिया जा रहा वह दिया जाए, इसके लिए आप सबका मैं सहयोग चाहूंगा।बार-बार हम लिख-पढी करेंगे, दवाब बनाएंगे, निश्चित रूप से 8.6 के आधार पर हमारा जो हिस्‍सा है वह रेस्‍टोर हो जाएगा, यह हमको प्रयास करना चाहिये, ज्‍यादा पानी मिलेगा।

दूसरा, यह तो स्‍पष्‍ट है कि  जो पानी मिलना है वाटर अलाउंस जमीन के आधार पर तय है तो जैसे-जैसे एरिया डवलप होते जाएंगे उसी हिसाब से  वह पानी आपको उपलब्‍ध होता जाएगा। अभी सैकण्‍ड स्‍टेज के एरिया में बहुत कम खाले और दूसरे सिस्‍टम डवलप होने हैं, तो यह काम लगातार चल रहा है, जैसे ही डवलप हो जाएगा पानी जो पोंग डेम में भराव और उसके बाद इनफ्लोज पर आएगा हिस्‍सा उसके आधार पर दे देंगे। यह 48 हजार हैक्‍टेयर जो भी है उसको भी पानी दिया जाएगा। अ गर आप नहीं चाहते हो तो मुझे बता दीजिए, जो पानी उपलब्‍ध है उसमें से ही दिया जाएगा पानी तो, कोई नया बाँध तो आयेगा नहीं।

श्री अध्‍यक्ष: नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन।

श्री अमराराम (धोद): इसमें काटकर देंगे, यह तो कह रहे हैं कि जो हिस्‍सा है...(व्‍यवधान)

श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली): प्रश्‍न संख्‍या 213

श्री अध्‍यक्ष: नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन।(व्‍यवधान)

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): किसी का हिस्‍सा नहीं कटेगा जब वाटर अलाउंस तय है तो, सबको अपना अपना एरिया खुलता जाएगा उसके आधार पर पानी उपलब्‍ध होगा वह मिलेगा

श्री अमराराम (धोद): कहां से आएगा, काटकर देंगे?

श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली): प्रश्‍न संख्‍या 213

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): बाँध में से आएगा बता दिया ना, घर में से थोड़े ही आएगा। (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): सरकार यह बताए कि 8.6 एमएएफ केपेसिटी खड़ी कर दी..(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: मैंने नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन पुकार लिया है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आपने केपेसिटी खड़ी क दी, हम आरोप लगाते हैं( व्‍यवधान) दो चीजे हैं, नम्‍बर एक, क्‍या राजस्‍थान सरकार ने अभी तक 1.6 एमएएफ पानी यूटिलाइज करने की केपेसिटी पैदा कर दी ? नम्‍बर दो, आप जो पंजाब से पानी ले रहे हैं.......

 


दुर्गा/चौहान 220307 1140 1e

 

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): हम पानी ले रहे हैं वह 8 एम.ए.एफ. के आधार पर ले रहे हैं या 8.6 एम.ए.एफ. के आधार पर मांग कर रहे हैं। (व्‍यवधान)

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): नहीं, आप बैठो तो सही, मैं देता हूं जवाब।

श्री अध्‍यक्ष: काहे को बोल रहे हैं, मैंने दूसरा क्‍वश्‍चन पुकार लिया।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): मेरी बात सुनिये। माननीय सदस्‍य ने यह सवाल उठाया है। यह पानी लेने के लिये हम सक्षम हैं। यह आपकी सरकार के टाइम भी लिखा है और हम भी ले सकते हैं। (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): वही तो हम कह रहे हैं ना।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): आज अगर पानी मिल जाता है तो हम पानी का उपयोग कर लेंगे।

श्री अध्‍यक्ष: नेक्‍स्‍ट क्‍वश्‍चन, श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): दूसरा यह है कि पानी जो मिल रहा है, वह 8 एम.ए.एफ. के हिसाब से मिल रहा है। (व्‍यवधान)

श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली): प्रश्‍न संख्‍या 213. (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): यही तो कह रहा हूं मैं। अध्‍यक्ष महोदय, अभी तक राजस्‍थान को पानी 8 एम.ए.एफ. के आधार पर मिल रहा है, 8.6 एम.ए.एफ. के आधार पर नहीं मिल रहा है। हमारी मांग यह होनी चाहिए कि 8.6 के आधार पर पानी मिले तब 40 हजार हैक्‍टेयर की बात करें। (व्‍यवधान)

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): इसके लिये मैंने आप सबका सहयोग मांगा है कि आप सब सहयोग करें। भारत सरकार पर दबाव हम बनाएंगे। (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): तो यह तो आप मांग ही नहीं कर रहे हैं। (व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, मेन मुद्दा यह है कि राजस्‍थान सरकार को 8 एम.ए.एफ. के आधार पर ही पानी मिल रहा है जबकि हमारी पानी की मांग 8.6 एम.ए.एफ. के आधार पर करनी चाहिए।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आप जैसे विचार आपके नेताओं के नहीं हैं। (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): कैसे नहीं हैं। (व्‍यवधान) आपके 3 साल हो गये। (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आप कैसे कह सकते हैं कि हमारे नेताओं के नहीं हैं। (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, सरकार को फिर निवेदन करना चाहते हैं, हमने सर्वसम्‍मति से प्रस्‍ताव पास किया है, फिर निवेदन करना चाहता हूं, आज भी सरकार का स्‍टेण्‍ड यह होना चाहिए कि हमें 8.6 एम.ए.एफ. के आधार पर हमें पानी मिलना चाहिए।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): हम सहमत हैं। हम स्‍वागत करते हैं आपकी बात का। करो ना संघर्ष। (व्‍यवधान)

श्री गोविन्‍द राम मेघवाल (नोखा): कांग्रेस के राज में किसानों को बिलकुल पानी नहीं मिला। (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 3 साल से बैठे हुए हैं। (व्‍यवधान)

श्री बद्रीलाल जाट (कपासन): कांग्रेस के राज में पानी बिलकुल नहीं मिलता था पहले तो। (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): पंजाब सरकार पानी लेकर बैठी हुई है, ये बोलते नहीं कुछ भी। (व्‍यवधान)

श्री बद्रीलाल जाट (कपासन): कांग्रेस के राज में किसानों को पानी बिलकुल नहीं मिला। (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): हम स्‍वागत करते हैं जोशी साहब आपकी बात का। (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): और पंजाब में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के कारण अब 8.6 एम.ए.एफ....। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

श्री गोविन्‍द राम मेघवाल (नोखा): 000

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): 000

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): एक मिनट, 3 साल से क्‍या किया, यह भी मैं आपको अर्ज करना चाह रहा हूं। यह मामला 3 साल का नहीं है। माननीय सदस्‍य, 1981 में जो समझौता हुआ उसके बाद में हिस्‍सा डिसाइड होने के बाद सरेण्‍डर हुआ। मैंने आपको पढ़कर सुनाया। उसके बाद में बराबर दबाव बना रहे हैं। चिट्ठियां लिख रहे हैं। अब आप किस तरीके से चाहते हो। (व्‍यवधान) सरकार सरकार होती है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): 000

श्री गोविन्‍द राम मेघवाल (नोखा): 000

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह निवेदन करना चाह रहा हूं, यह जो मोटी किताब आपको दिखा रहा हूं, यह पंजाब और राजस्‍थान से सम्‍बन्धित नहीं है। यह भारत सरकार के स्‍तर पर बैठक हुई है, वहीं पर यह निर्णय हुआ है। (व्‍यवधान) आप सुनिये, आप सुनिये।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): भारत सरकार को लिखा जाए कि भारत सरकार इंटरविन करे और राजस्‍थान को हिस्‍सा दिलाये। (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

(व्‍यवस्‍था-सूचक-घण्‍टी)

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): सरकार कांग्रेस की थी। (व्‍यवधान) राजस्‍थान के हिस्‍से के लिये भारत सरकार को इंटरविन करना पड़ेगा। भारत सरकार का निर्णय था। तत्‍कालीन मंत्रीजी के लेवल पर यह निर्णय हुआ था, सरेण्‍डर करने का, इसलिये भारत सरकार हस्‍तक्षेप करे और राजस्‍थान का 0.6 एम.ए.एफ. का हिस्‍सा दिया जाए। (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): 000

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण, माननीय सदस्‍यगण...(व्‍यवधान) माननीय सदस्‍यगण, माननीय मंत्रीजी, (व्‍यवधान) माननीय सदस्‍यगण, टोडरायसिंह से आने वाले माननीय सदस्‍य, एक बार आप स्‍थान ग्रहण करें। क्‍वश्‍चन-अवर, प्रश्‍नकाल इंफार्मेशन सीक करने के लिये होता है। आरोप-प्रत्‍यारोप करने के लिये बहुत समय है। आपको आगे भी मिलेगा, जब आप आरोप-प्रत्‍यारोप एक-दूसरे पर लगाते हैं। यह प्रश्‍नकाल जो है केवल इंफार्मेशन सीक करने के लिये होता है। इसलिये जो इंफार्मेशन इनके पास थी, वह उन्‍होंने दे दी। आरोप-प्रत्‍यारोप इस समय नहीं होना चाहिए।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): 000

श्री अध्‍यक्ष: No,no, next question. श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

श्री अध्‍यक्ष: Please sit down.


विधान सभा क्षेत्र कोटपूतली की क्षतिग्रस्‍त/शोल्‍डर रहित सड़कें

213. श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली): क्‍या सार्वजनिक निर्माण मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:

(1) विधान सभा क्षेत्र कोटपूतली की कौन-कौनसी सड़कें कहां-कहां से, कब से व कितनी क्षतिग्रस्‍त हैं या उनके दोनों ओर के किनारे टूट चुके हैं? मय चैनेज प्रत्‍येक सड़क की लम्‍बाई का विवरण सदन की मेज पर रखें।

(2) क्‍यासरकार द्वारा राज्‍य में नई सड़कों के निर्माण के समय डामरीकृत सीमा के अलावा सड़कों के दोनों ओर शोल्‍डर निर्माण की नीति बनाई गई है? यदि हां, तो नीति की प्रति सदन की मेज पर रखें।

(3) गत पाँच वर्षों में विधान सभा क्षेत्र कोटपूतली में कितनी नई सड़कों का निर्माण हुआ और उनके शोल्‍डर नहीं बांधे गये, जिस कारण सड़कें क्षतिग्रस्‍त होना शुरू हो गईं? ग्रामवार किलोमीटर सहित सूची सदन की मेज पर रखें।

(4) क्‍या यह सही है कि विधान सभा क्षेत्र कोटपूतली में पूर्व में बनी सड़कों के शोल्‍डर नहीं बांधे गये थे, जिस कारण सड़कों के दोनों ओर काफी गहरे गढ्ढे हो गये और आये दिन दुर्घटना घटने का अंदेशा बना रहता है? क्‍या सरकार उनसभी सड़कों के शोल्‍डर बांधकर यातायात सुगम करने का विचार रखती है? यदि हां, तो कब तक व नहीं, तो क्‍यों?

(5) क्‍या यह सही है कि पिछले पाँच वर्षों में सरकार द्वारा विधान सभा क्षेत्र कोटपूतली की सड़कों के पुनर्निर्माण में ठेकेदार को ठेका देते समय सी.सी. या डामरीकृत क्षेत्र के अलावा सड़कों के दोनों ओर शोल्‍डर बांधे जाने की शर्तें भी शामिल की गई थीं। यदि हां, तो उक्‍त वर्षों में कितनी सड़कों का, कहां-कहां पर, कितनी दूरी तक पुर्ननिर्माण हुआ तथा किन-किन सड़कों के शोल्‍डर नहीं बांधे गये? विवरण सदन की मेज पर रखें।

(6) क्‍या सरकार संबंधित ठेकेदार जिसने पुनर्निर्मित सड़कों के शोल्‍डर नहीं बांधे, जिसके कारण सड़कें पुन: क्षतिग्रस्‍त हो गई, के विरुद्ध कार्यवाही करने का विचार रखती है? यदि हां, तो कब तक व नहीं, तो क्‍यों?

(7) क्‍या सरकार उक्‍त सड़कों की मरम्‍मत, पेचवर्क, कटे हुए किनारों को सही कराने व पुन: सड़कों का डामरीकरण करवाने का विचार रखती है? यदि हां, तो कब तक?

सार्वजनिक निर्माण मंत्री (श्री राजेन्‍द्र राठौड़): (1) विधान सभा क्षेत्र कोटपूतली की क्षतिग्रस्‍त सड़कों की लम्‍बाई, क्षतिग्रस्‍त भाग, टूटे किनारों की स्थिति मय चेनेज व कब से क्षतिग्रस्‍त है, इसका सम्‍पूर्ण विवरण परिशिष्‍ट पर संलग्‍न है।

(2) नई सड़कों के निर्माण के समय डामरीकृत क्षेत्र के अलावा सड़कों के दोनों ओर शोल्‍डर निर्माण किया जाना आवश्‍यक है। शोल्‍डर निर्माण की कोई अलग से नीति नहीं है। यह शोल्‍डर निर्माण सड़क का एक आवश्‍यक भाग है।

(3) गत 5 वर्षों में विधान सभा क्षेत्र कोटपूतली में ऐसी कोई सड़क का निर्माण नहीं हआ है जिसमें शोल्‍डर नहीं बनाये गये हों। गत 5 वर्षों में विधान सभा क्षेत्र कोटपूतली में 38 नई सड़कों (32 सड़कें सा.नि.वि. द्वारा व 6 सड़कें राज. राज्‍य कृषि विपणन बोर्ड द्वारा)  का निर्माण किया गया है। इन सभी सड़कों पर शोल्‍डर का निर्माण किया गया है।

(4) जी नहीं। पूर्व में पुरानी निर्मित सभी सड़कों के निर्माण के समय मिट्टी के शोल्‍डर बांधे गये थे। यातायात के दबाव एवं कई वर्षों की बरसात के कारण कुछ सड़कों के शोल्‍डर डामर सड़क से नीचे हो गये हैं जिनमें ग्रेवल के शोल्‍डर निर्माण कार्य राज्‍य के उपलब्‍ध वित्‍तीय संसाधनों एवं पारस्‍परिक प्राथमिकता पर निर्भर करते हैं।

(5) जी हां। पिछले 5 वर्षों में सरकार द्वारा विधान सभा क्षेत्र कोटपूतली की 26 (सा.नि.विभाग द्वारा 13 सड़कें व रा.रा.कृषि विपणन बोर्ड द्वारा 13 सड़कें) सड़कों के पुनर्निर्माण (नवीनीकरण) का कार्य मय शोल्‍डर बांधे जाने सहित किया गया। इन सड़कों के नाम, नवीनीकरण, लम्‍बाई मय चैनेज परिशिष्‍ट पर सलंग्‍न है। गत 5 वर्षों में ऐसी कोई सड़क का पुनर्निर्माण नहीं किया गया जिसमें शोल्‍डर नहीं बांधे गये हों।

(6) जी नहीं। ठेकेदार द्वारा सभी पुनर्निर्माण सड़कों के साथ शोल्‍डर का कार्य भी किया गया है।

(7) जी हां। विधान सभा क्षेत्र कोटपूतली की क्षतिग्रस्‍त सड़कों का विवरण परिशिष्‍ट में दर्शाया गया है जिसमें क्रम संख्‍या 1 से 4 तक के कार्य आर.एम.यू.पी. फेज तृतीय में स्‍वीकृत हैं तथा कार्य प्रगति पर हैं क्रम संख्‍या 5 व 6 के कार्य नाबार्ड के आर.आई.डी.एफ.-XII में स्‍वीकृत हैं। जिसकी निविदाएं आमंत्रित की गई हैं। क्रम संख्‍या 7 पर पावटा-नारेडा सड़क पर कि.मी. 0/0 से 7/0 तक सुदृढीकरण व नवीनीकरण कार्य आर.आई.डी.एफ.-XII में स्‍वीकृत हैं तथा निविदाएं आमंत्रित की गई हैं। सभी स्‍वीकृत/प्रगतिरत कार्य वर्ष 2007-08 में पूर्ण होना सम्‍भावित है। शेष सड़कों की मरम्‍मत, पेचवर्क, कटे हुए किनारों को सही करने व पुन: सड़कों का डामरीकरण कार्य राज्‍य के उपलब्‍ध वित्‍तीय संसाधनों एवं पारस्‍परिक प्राथमिकता पर निर्भर करता है।

 

 

 

 

 

 

Vps-usc-22032007-1150-1f-1

 

 

श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री महोदय से यह जानना चाहता हूं कि क्‍या सड़कों के दोनों तरफ बांधे जाने वाले शोल्‍डर केवल मिट्टी के बांधे जाते हैं या ग्रेवल के बांधे जाते हैं या ईंटों से बाँध कर उनको किया जाता है?

दूसरी बात मैं यह निवेदन करना चाहता हूं कि माननीय मंत्री महोदय, आपने जवाब में परिशिष्‍ट में लिखा कि ऐसी कोई भी सड़क नहीं है जिसके शोल्‍डर नहीं बांधे गये। मैं यह बताना चाहता हूं कि फेज- 2003-04, 2004-05, 2005-06 में जितनी भी सड़कें बनीं और जितनी भी पुनर्निर्मित सड़कें हुईं उनके किसी के शोल्‍डर नहीं बांधे गये। आपने जो जानकारी दी है, यह जानकारी बिलकुल गलत है और निश्चित रूप से आप मौके पर अब देखेंगे इसकी स्थिति तो वास्‍तव में आपको यह पता लगेगा कि एक भी सड़क शोल्‍डर  बांधी हुई नहीं है तो आप कृपया, यह बताने की कृपा करें कि क्‍या इन सड़कों की स्थिति जो खराब है। इन सड़कों की जो स्थिति खराब है उस खराब स्थिति को सुधारने के लिए राज्‍य सरकार क्‍या करना चाहती है और सड़कों के दोनों तरफ जो शोल्‍डर बांधने की स्थिति है वह ग्रेवल या मिट्टी की है? यह बताने की कृपा करें।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने मेरे उत्‍तर में पहले ही कहा है और माननीय सदस्‍य को जो परिशिष्‍ट उपलब्‍ध कराया है उसमें जिन सड़कों का जिक्र आपने किया है, जो नवीनीकरण और उन्‍नयन का कार्य जिनमें 2002-03 से जो शुरू हुआ है, उसमें भी लिखा है कि मिट्टी की पटरी बनायी गयी है। यह शोल्‍डर माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मिट्टी के भी बनाये जाते हैं और ग्रेवल के भी बनाये जाते हैं। जिन सड़कों का जिक्र आपने किया है, जिनका रिन्‍यूवल किया गया है उनमें सड़कें, सड़क पर मिट्टी के शोल्‍डर बनाये गये हैं।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसमें कोई शक नहीं है कि जिन सड़कों का आपने जिक्र किया, वहां इन दिनों के अन्‍दर कुछ ऐसे प्‍लांट लग गये और कुछ ईंट के भट्टे लग गये कोटपूतली क्षेत्र में पावटा से नारेड़ा, दूदावास इन सब पर हरियाणा बोर्डर तक माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 26 बजरी के प्‍लांट लग गये और 9 स्‍टोन क्रेशर लग गये इनके कारण से यातायात का दबाव बढ़ा और यातायात के दबाव के बढ़ने के कारण से यह जो मिट्टी के शोल्‍डर, जो हमने यह पटरियां बांधी थीं इनके अन्‍दर निश्चित तौर पर नुकसान होना स्‍वाभाविक है और मैं माननीय सदस्‍य को आश्‍वस्‍त करना चाहता हूं कि आपके क्षेत्र में जितनी भी सड़कें बनी हैं, उन सड़कों का आप कहो तो मैं एक-एक सड़क का जिक्र कर दूं, अधिकांश सड़कों को हमने रिन्‍यूवल में भी ले लिया है और जहां शोल्‍डर जिनके खराब है, उनके भी निश्चित तौर पर हमारे संसाधन को देखेंगे, चूंकि मिट्टी की पटरी है माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसमें कोई ग्रेवल बनायी नहीं गयी थी ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: उस पाँच साल में तो जो बनी है सड़कें, उनके तो आपने शोल्‍डर बनाये हैं। उसके डामरीकरण का काम हुआ तो ... (व्‍यवधान) वे तो पाँच ही साल की पूछ रहे हैं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ग्रेवल के। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 2002-03 में ... (व्‍यवधान)

श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली): यही मैं कहना चाह रहा हूं। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं यही कहना चाह रहा हूं कि पिछले तीन साल में या पाँच साल में जो सड़कें निर्मित हुई हैं उनमें ग्रेवल के शोल्‍डर बनाये जाने चाहिए थे जो नहीं बनाये गये और हालत यह हो गये कि वहां पर डेढ़-डेढ़, दो-दो फुट के गड्ढे सड़क के दोनों तरफ है। चौकी गोरधनपुरा से राजनोता सड़क जो जा रही है, एक परावपुरा से पाछुड़ाला सड़क जा रही है, पावटा से नारेड़ा सड़क जा रही है, इन सड़कों की हालत बड़ी दयनीय है और उसमें ग्रेवल के शोल्‍डर नहीं बनाये गये हैं। यह मैं कहना चाहता हूं कि आप मिट्टी ही मिट्टी के शोल्‍डर की बात कह रहे हैं इसमें ग्रेवल के शोल्‍डर बनाये जाने चाहिए थे जो नहीं बनाये गये हैं1

श्री अध्‍यक्ष: जानकारी कर लीजिए। जानकारी कर लीजिए, क्‍या दिक्‍कत है?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो यह सड़के बनीं, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो नयी सड़कें बनती हैं। माननीय सदस्‍य जिन सड़कों का जिक्र कर रहे हैं इन सड़कों का नवीनीकरण किया गया था 2002-03 में भी किया गया, 2003-04 में भी किया गया और अब भी किया गया। जो नवीनीकरण जिन सड़कों का किया उनका पहले जिनके शोल्‍डर बन गये थे ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: पर आप तो जवाब में दूसरी बात कह रहे हो। इन्‍होंने प्रश्‍न भी नई सड़कों का पूछा है और आपने जवाब भी नई सड़कों का दिया है, माननीय मंत्रीजी।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): नहीं-नहीं।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय मंत्रीजी, दिया है आपने।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): नहीं, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इन्‍होंने पाँच वर्ष की सड़कों का जिक्र किया था।

श्री अध्‍यक्ष: हां तो पाँच वर्ष में आपका भी योगदान है। आपका भी था। 

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): तो पाँच वर्ष में दो केटेगरी है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इन पाँच वर्षों के अन्‍दर जो 26 नई सड़कें बनी हैं, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उनके तो शोल्‍डर ग्रेवल के बने हैं और इन्‍हीं पाँच वर्षों में जो पुरानी सड़कें थीं, जिनका नवीनीकरण हमने किया है उन सड़कों के शोल्‍डर पूर्व में मिट्टी से बने हुए थे और उनमें कोई क्षतिग्रस्‍त हो गये है तो माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय सदस्‍य को आश्‍वस्‍त करना चाहता हूं कि किसी न किसी योजना में लेकर उन शोल्‍डर को हम ठीक करवा देंगे और प्राथमिकता भी माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं इन से पूछ लूंगा।

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): क्‍योंकि उनको ज्‍यादा जानकारी है।

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है। नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन। क्‍या