Ars/usc/1a/1100/22032006/1

 

अशोधित प्रति/ प्रकाशनार्थ नहीं

 

राजस्थान विधान सभा की कार्यवाही का वृत्तान्

 

अंक 5  बारहवीं विधान सभा के पांचवें सत्र का तेईसवां दिवस  संख्‍या 14

 

 

बुधवार,

22 मार्च, 2006

 

राजस्‍थान विधान सभा की बैठक 1100 बजे

विधान सभा भवन,जयपुर में प्रारम्‍भ हुई।

 

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

 

श्री अध्‍यक्ष: सराड़ा से आने वाले माननीय सदस्‍य, आप कृपया सदन छोड़कर चले जाएं। मुझे बड़ा अफसोस है इस बात का, स्‍थान ग्रहण करें । आप तो बहुत वरिष्‍ठ सदस्‍य हैं राजाखेड़ा से आने वाले माननीय सदसय।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): एक मिनट हुई है, मैं आया हूं और आप खड़ी हो गईं तो उसका क्‍या इलाज है, मैं जा रहा हूं बाहर, आप मुझे भी निकाल दीजिए ....(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): आप इस सदन की सर्वोच्‍च हस्‍ती हैं आप इस मामले पर पुनर्विचार करें। ...(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): यह सदन में पहली बार किस तरह का दृश्‍य पैदा हो रहा है ..(व्‍यवधान) इस गरिमापूर्ण आसन की, इस सर्वोच्‍च आसन की..(व्‍यवधान) किस तरह से व्‍यवहार कर रहे हैं।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): जे.डी.ए. में जो घोटाले किए हैं उस पर चर्चा नहीं कराना चाहते आप और इसलिए खड़े होकर हंगामा कर रहे हो।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, दर्शक दीर्धा से छोटे छोटे बच्‍चे देख रहे हैं।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): पूरे जयपुर को बेचने का काम किया है आपने, करोड़ों रुपए की लूट की है जे.डी.ए के अन्‍दर और इसकी आप चर्चा नहीं करना चाहते । आप भागना चाहते हैं यहां से। ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री):***

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): ***

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री धर्मपाल चौधरी (मुण्‍डावर): ***

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): ***

श्री भवानी सिंह राजावत (संसदीय सचिव): ***

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): ***

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): ***

श्री जुबेर खान (रामगढ़): ***

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): ***

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य...

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): ***

श्री बद्रीलाल जाट (कपासन): ***

श्री अर्जुन सिंह देवड़ा (रानीवाड़ा): ***

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): ***

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य, मुख्‍य सचेतक महोदय

श्री गोविन्‍द राम मेघवाल (नोखा): ***

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, स्‍थान ग्रहण कर लें, स्‍थान ग्रहण करें । माननीय सदस्‍यगण मैं बहुत भारी मन से यह बात कह रही हूं। जन समस्‍याओं के निराकरण का स्‍थान है यह पवित्र सदन और इस पवित्र सदन में जिस प्रकार का व्‍यवहार, जिस प्रकार का आचरण, जिस प्रकार से सदन की गरिमा को जिस प्रकार से आसन की प्रतिष्‍ठा को गिराया जा रहा है, मैं समझता हूं आगे आने वाली पीढ़ी हमें हास्‍य का पात्र बनाएगी इसके लिए कि किस तरह के लोग थे बारहवीं विधान सभा में जहां इस तरह की बातें भी हुआ करती थीं। मैं बहुत विनम्र शब्‍दों में आपसे कह रही हूं यदि आपको चर्चा करानी है, आप जब इतने एलीगेशंस लगा रहे हैं, इतने आरोप लगा रहे हैं जे.डी.ए. के ऊपर तो आपको चाहिए कि आप अपने सदस्‍यों से माफी मंगवा लें और खेद प्रकट करवा लें ताकि आगे की कार्यवाही हो सके। यदि उन्‍होंने कुछ किया है उसका जवाब देंगे वह लेकिन आप यदि नहीं चाहते कि चर्चा हो तो मेरे पास कोई इलाज नहीं है इस बात का कि जब आसन से एक बार व्‍यवस्‍था दी जा चुकी है कि आप सदन से चले जाएं और उसके बावजूद भी आप सदन में बैठे हैं तो मेरे पास इसके अलावा कोई इलाज नहीं है कि मैं प्रश्‍नकाल को आज स्‍थगित कर दूं । इस विधान सभा को इस समय कुछ एक घंटे के लिए और उसके बाद या तो आप चले जाएं छोड़कर के सदन को और नहीं जाते हैं तो मैं मजबूर हूं और इस मजबूरी में मैं 12.00 बजे तक के लिए इस सदन को स्‍थगित कर रही हूं।

 

(तदनन्‍तर सदन की बैठक 11.06 बजे 12.00 बजे तक के लिए स्‍थगित हुई।)

 

(पुन: समवेत् होने पर)

(समय: 12.00 बजे)

 (श्री रामनारायण विश्‍नोई, उपाध्‍यक्ष, पदासीन)

 

श्री उपाध्‍यक्ष: सदन की कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्‍थगित की जाती है।

 

(तदनन्‍तर सदन की बैठक 12.00 बजे 12.30 बजे तक के लिए स्‍थगित हुई।)

 

ssy/akt/1230/1k

(पुन:समवेत होने पर )

(समय:12.30 बजे)

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

 

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण, मुझे आपको सूचित करना है कि निम्‍नांकित स्‍थगन प्रस्‍तावों की सूचना प्राप्‍त हुई है :-

श्री महादेव सिंह एवं पाँच अन्‍य सदस्‍यों की और से खण्‍डेला में विद्युत ग्रिड सब स्‍टेशन की स्‍थापना करने के संबंध में ।

श्री अमराराम धोद एवं सात अन्‍य सदस्‍यों की और से राज्‍य में किसानों को कृषि विद्युत कनेक्‍शन देने पर रोक होने के संबंध में ।

स्‍थगन प्रस्‍ताव की श्रेणी में नहीं आते हैं अत: अनुमति देने में तो असमर्थ हूं फिर भी माननीय सदस्‍य श्री महदेव सिंह व श्री अमराराम धोद को अपने-अपने प्रस्‍ताव पर दो-दो मिनिट बोलने की अनुमति होगी।

वैसे महादेव सिंह जी यदि इस बारे में इसके बजाय पिटीशन देते तो ज्‍यादा उचित होता फिर भी दो मिनिट के लिए बोलने की अनुमति होगी ।

         

नियम 295 के अन्‍तर्गत प्राप्‍त सूचनाएं

1. श्री नवनीत लाल नीनामा, सदस्‍य की और से पंचायत समिति पीपलखूंट में रोजगार गारंटी कार्यक्रम के साथ-साथ पीने के पानी की व्‍यवस्‍था करने के संबंध में ।

2. श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौड़, सदस्‍य की और से धानका समाज को अनुसूचित जनजाति के प्रमाण पत्र जारी करवाने के संबंध में ।

3. श्री ज्ञानचन्‍द पारख, सदस्‍य की ओर से पाली के कपड़े की रँगाई-छपाई के उद्योग के प्रदूषण से भूमि के बंजर होने के संबंध में ।

4. श्री हीरालाल(निवाई), सदस्‍य की और से जिला ग्रामीण विकास के कर्मचारियों को राज्‍य कर्मचारी घोषित करने के संबंध में ।

5. श्री धर्मपाल चौधरी, सदस्‍य की और से जिला अलवर के एन.सी.आर. में होने के उपरान्‍त भी एन.सी.आर. की सुविधाएं उपलब्‍ध नहीं होने के संबंध में।

श्री सी.डी.देवल: अध्‍यक्ष महोदय, चारों तरफ लोग-बाग़ खड़े हैं अगर दो मिनट आप बिराजें तो लोग अंदर आ सकें ।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, जब आसन से कोई व्‍यवस्‍था दी जा रही हो तो उस समय माननीय सदस्‍य को नहीं बोलना चाहिए ।

श्री सी.डी.देवल: अध्‍यक्ष महोदय, हमने तो आसन से निवेदन ही किया है कि बाहर लोग खड़े हुए हैं आपकी व्‍यवस्‍था सुनने को आतुर हैं । आप उनकी बात को सुनें(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप आई.ए.एस. रह चुके हैं आप सदन के नियमों की जानकारी करिये ।

श्री सी.डी.देवल: आई.ए.एस. की वजह से कोई फर्क नहीं पड़ता है । हम तो हाथ जोड़ रहे हैं कि अगर आसन स्‍थान ग्रहण करे तो बाहर से लोग अंदर आवें नहीं तो सारे लोग बाहर खड़े हुए हैं ।

श्री अध्‍यक्ष: सदन के नियमों की जानकारी करें आप । सदन के नियमों की जानकारी करें आप ।

श्री सी.डी.देवल: आप व्‍यवस्‍था सदस्‍यों के लिए दे रही हैं, सारे सदस्‍य बाहर खड़े हुए हैं ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप सदन के नियमों की जानकारी करें पहले ।

श्री सी.डी.देवल: मैं तो हाथ जोड़ रहा हूं । आप दो मिनट बिराज जायें ताकि लोग अंदर आ सकें ।

श्री अध्‍यक्ष: कोई हाथ जोड़ने की आवश्‍यकता नहीं है ।

श्री सी.डी.देवल: हम आपको आदेश तो देते नहीं हैं हम तो प्रार्थना करते हैं ।

श्री अध्‍यक्ष: सदन के नियमों की जानकारी करें आप ।

श्री सी.डी.देवल: लोग अंदर आकर के आपकी बात को सुन सकें ।

श्री अध्‍यक्ष: मुझे आप मजबूर कर रहे हैं । सदन के नियमों की जानकारी करें   आप । जब आसन पावों पर हो तो किसी भी सदस्‍य को खड़े होने का अधिकार नहीं होता है । यह नियमों के विपरीत है ।

  6. श्रीमती अनिता भदेल, सदस्‍य की और से सहकारी समिति दूदोड़(पाली) में 1999-2000 के दौरान आहरित फर्जी ऋणों की जांच करवाने के संबंध में ।

  7. श्री लालचन्‍द मेघवाल, सदस्‍य की और से विधान सभा क्षेत्र रायसिंह नगर में राजकीय कर्मचारियों के सरकारी आवास के संबंध में ।

  8. श्री दाताराम गुर्जर, सदस्‍य की और से महर्षि दयानन्‍द सरस्‍वती विश्‍वविद्यालय अजमेर की प्री बी.एड. परीक्षा के आवेदकों को मूल निवास स्‍थान प्रमाण पत्र की औपचारिकता से राहत प्रदान करने के संबंध में ।

  9. श्री हरीश कुमावत, सदस्‍य की और से कुचामन सिटी में निर्मित सुलभ काम्‍पलेक्‍स को जनहितार्थ चालू कराने के संबंध में ।

  10. श्री सी.डी.देवल, सदस्‍य की और से तहसील सांगानेर के ग्राम केसुपुरा में जयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा ट्रक टर्मिनल के लिए अवाप्‍त की गई भूमि का मुआवजा कम देने के संबंध में ।

  11. श्री धर्मेन्‍द्र कुमार मोची, सदस्‍य की और से विधान सभा क्षेत्र टिब्‍बी की घग्‍घर(जी.डी.सी.) पर क्षतिग्रस्‍त पुलों को पुन: निर्माण करने के संबंध में ।

  12. श्री रामकिशोर मीणा, सदस्‍य की और से मेंहदीपुर बालाजी मोड़ पर प्रस्‍तावित अंडरपास से जनता को होने वाली परेशानी के संबंध में ।

        माननीय सदस्‍यों को उनके द्वारा दी गई सूचनाओं को पढ़ने की अनुमति  होगी । 

      श्री महादेव सिंह ।

        (अनुपस्थित)

        श्री अमराराम(धोद)

        (अनुपस्थित)

        प्रक्रिया के नियम 295 के अंतर्गत श्री नवनीत लाल नीनामा ।

श्री नवनीत नीनामा (घाटोल): अध्‍यक्ष महोदय, मैं बोल रहा हूं, नवनीत लाल नीनामा हाजिर है ।

श्री अध्‍यक्ष: हां, बोलो, नवनीत लाल नीनामा हाजिर हैं तो पढि़ये ।

श्री नवनीत नीनामा (घाटोल): अध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान विधान सभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालनों के नियम 295 के अंतर्गत निवेदन है कि दक्षिणी राजस्‍थान जिला बांसवाड़ा में माही डेम के पूर्व का क्षेत्र पंचायत समिति पीपलखूंट एक सूखा क्षेत्र है ।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आसन से एक बार व्‍यवस्‍था दी जा चुकी है मैं पुन: सराड़ा से आने वाले माननीय सदस्‍य से बहुत नम्र शब्‍दों में इस सदन की गरिमा को बनाये रखने के लिए, आसन की प्रतिष्‍ठा कायम रखने के लिए पुन: अनुरोध कर रही हूं कि या तो वह खेद प्रकट करें या सदन से उठकर चले   जायें ।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): अध्‍यक्ष महोदय, मैंने ऐसा क्‍या अपराध कर दिया है कि जो खेद व्‍यक्‍त करने की आवश्‍यकता पड़ गयी है । आपने टी.वी. देख लिया, मेरे सारे सबूत देख लिये ।

श्री अध्‍यक्ष: टी.वी. देखने के बाद ही आसन ने व्‍यवस्‍था दी है । आप फिर अपराध कर रहे हैं । चेयर लेग्‍स पर हैं आप फिर अपराध कर रहे हैं । आप फिर नियमों की पालना नहीं कर रहे हैं । आपको खेद प्रकट करना है तो आप खेद प्रकट करने के लिए खड़े हो सकते हैं वरना आप सदन से चले जायें । मैं आपसे पुन: आग्रह करता हूं कि आप मुझे मजबूर नहीं करें ।

श्री सी.डी.देवल: अध्‍यक्ष महोदय, आसन तो पैरों पर ही रहता है ।

श्री अध्‍यक्ष: मैं किसी की भी नहीं सुनना चाहती हूं । अंकित नहीं हो, अंकित नहीं  हो ।

श्री सी.डी.देवल:   ***

श्री अध्‍यक्ष: आपको यदि क्षमा मांगनी है, खेद प्रकट करना है तो आप खेद प्रकट कर सकते हैं, नहीं करना है तो आप अपने स्‍थान से उठकर चले जायें । आपको खेद प्रकट करना है ?

एक माननीय सदस्‍य:***

श्री अध्‍यक्ष: खेद प्रकट करना है ।

श्री सी.डी.देवल: ***

श्री अध्‍यक्ष: आपको बीच में खड़े होने की आवश्‍यकता नहीं है ।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): ***

श्री अध्‍यक्ष: आप कौन हो आसन को कहने वाले, आप बैठिये, आप हो  कौन ?

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): ***

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य यदि आपको खेद प्रकट करना है (व्‍यवधान)

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): ***

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, प्‍लीज सिट डाउन, माननीय सदस्‍य कोई विशेष नहीं हो आप । गुढ़ा से आने वाले माननीय सदस्‍य please sit down. I say, please sit down.

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): ***

श्री अध्‍यक्ष: मैं कह रहा हूं स्‍थान ग्रहण कर लें । रोज-रोज तमाशा ना  बनायें । चाहे जब खड़े हो जाते हैं । माननीय सदस्‍य मैं आपसे फिर निवेदन कर रही हूं, अपील कर रही हूं कि यदि आपको खेद प्रकट करना है तो मैं बैठ जाती हूं, खेद नहीं प्रकट करना है तो आप मेहरबानी करके सदन छोड़कर के चले  जायें ।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा):   ***

श्री अध्‍यक्ष: खेद प्रकट करना है, आप खेद प्रकट कर रहे हैं तो ठीक है नहीं तो नहीं, आप यदि खेद नहीं प्रकट करना चाहते हैं तो कोई बात नहीं है (व्‍यवधान)

एक माननीय सदस्‍य: ***

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): ***

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): ***

श्री अध्‍यक्ष: अब आप स्‍थान ग्रहण कर लें ।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा):  अध्‍यक्ष महोदय, कल जो सदन में घटना घटी है उसके बारे में आपने जो कड़ा निर्णय सुनाया है उसके बारे में मुझे निवेदन करना है कि मैं पहली बार सदन में नहीं आया हूं, मैं तीसरा बार विधायक बना हूं, आज तक रिकार्ड में देखा जाये कि कभी भी मैंने असंसदीय भाषा का उपयोग नहीं किया न ही कभी व्‍यवहार ऐसा रहा जिसकी वजह से पूरे सदन में वातावरण बिगड़ा हो ।

 

jyg/2236/1240/1l

 

या किसी माननीय सदस्‍य के प्रति मेरा ऐसा व्‍यवहार रहा हो, आज तक ऐसा हुआ नहीं। यही नहीं मेरे पिताजी भी विधायक रहे हैं, लम्‍बे समय तक मेरे पिताजी विधायक रहे हैं। मेरे पिताजी जब विधायक बने उस समय मैं पैदा हुआ और 89 तक विधायक रहे, अलग-अलग क्षेत्रों से। मैं जब से समझदार हुआ तब से विधान सभा की कार्यवाही अमूमन देखता आया हूं, क्‍या परम्‍पराएं होती हैं, क्‍या नियम होते हैं, थोड़ी जानकारी तो मैं रखता ही हूं परन्‍तु कल जिस तरह से रौब किया, प्रतिपक्ष के सभी माननीय सदस्‍यों ने यह कहा, सत्‍ता पक्ष के सदस्‍यों की तरफ से कि ईसाइयों की औलाद है, हिन्‍दुओं की औलाद नहीं हो, आपके शरीर में हिन्‍दुओं का खून नहीं है, अगर इस तरह से हमको ललकारा गया उसकी वजह से तनाव हुआ, जिससे सभी सदस्‍य उत्‍तेजित हुए और न हम कहीं उधर गए, कुछ भी नहीं गए, फिर भी आपने सदन की कार्यवाही देखी, टी वी पर देखी, सब कुछ किया, उसके बाद भी आप संतुष्‍ट होने के बाद भी अगर मुझे उतना ही दण्‍ड देने की बात करते हैं जितना प्रोवोक करने वाले व्‍यक्ति को दिया गया तो यह मेरे ख्‍याल से हमारे साथ न्‍याय नहीं हो रहा है। मैं निवेदन कर रहा हूं कि आप अपने फैसले पर पुनर्विचार करें। मैंने ऐसा कोई कृत्‍य नहीं किया जिसकी वजह से सदन की गरिमा गिरी हो, ऐसा कोई कृत्‍य नहीं किया जिसकी वजह से आपका अपमान हुआ।

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है, ठीक है, हो गया।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): आपके आदेश की पालना करता हूं हमेशा, परन्‍तु मेहरबानी करके, आपसे हाथ जोड़कर निवेदन है कि कोई भी व्‍यक्ति अपना राजनीतिक जीवन मेहनत करके अपनी इज्‍जत बनाता है, आप ऐसा कोई फैसला न सुनाएं जिसकी वजह से हमारी राजनीति पर असर पड़ सकता है।

श्री अध्‍यक्ष: मैं आपसे पुन: निवेदन कर रही हूं, अपील कर रही हूं, विनम्र शब्‍दों में कह रही हूं कि आप मेहरबानी करके, ...(व्‍यवधान)... ।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): इसलिए मैं निवेदन करूंगा कि माफी मांगने जैसी कोई है नहीं ऐसी बात और प्रतिपक्ष के नेता महोदय ने ...(व्‍यवधान)... ।

श्री अध्‍यक्ष: सदन में खेद प्रकट करने से किसी का राजनीतिक जीवन खराब नहीं होता है। माननीय उपराष्‍ट्रपति, माननीय भैरोंसिंहजी शेखावत ने न जाने कितनी बार सदन में क्षमा याचना की है और आज वह उपराष्‍ट्रपति बने हैं, वे इसी जनतंत्र की, इसी लोकतंत्र की, इसी विधान सभा के प्रोडक्‍ट हैं। सदन में खेद प्रकट करने से कभी कोई गरिमा गिरती नहीं है बल्कि बढ़ती है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही):  ***

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): ***

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूं कि प्रक्रिया के नियम 295 के अंतर्गत....।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): ***

श्री अध्‍यक्ष: सदन की गरिमा, आसन की प्रतिष्‍ठा तो उनके खेद प्रकट करने से बढ़ेगी, बाकी नहीं बढ़ेगी।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): ***

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम लगातार यह कोशिश कर रहे हैं कि  प्रतिपक्ष यहां पर जनहित के मुद्दों को उठाए, हम लगातार यह कोशिश कर रहे हैं, इनके हर प्रस्‍ताव को, इतने दिन डिमाण्‍ड पर चर्चा हो, हम यह चाहते हैं, लगातार इस पर चर्चा हो। ...(व्‍यवधान)... 

श्री अध्‍यक्ष: मिस्‍टर देवल बीच में डिस्‍टर्ब नहीं।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): लेकिन यदि प्रोवोक  करने का काम किसी ने किया है, आप स्‍वयं जानते हैं, आपको पता है कि गृह मंत्रीजी ने जब उन तथ्‍यों को पढ़ना चाहा उस किताब में से, उस समय इस सदन ने यह महसूस किया और कांग्रेस के चीफ व्हिप ने यह कहा कि आप उन तथ्‍यों को नहीं पढें, इससे उत्‍तेजना पैदा होगी। हमने आप सबकी बात को मानकर वहीं पर इसको ड्रोप किया। इसके बाद अचानक हिण्‍डौली से आने वाले माननीय सदस्‍य ने जिस प्रकार सारे सदस्‍यों को प्रोवोक किया, जिस प्रकार लोगों की भावनाओं को आहत किया उसके कारण यह घटना घटी उसके कारण माननीय सदस्‍य मारने के लिए दौड़े, ऐसी स्थिति आ गई।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर):  ***

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह संसदीय परम्‍परा है कि कोई सदस्‍य अपनी सीट से खड़ा होकर दूसरी सीट पर नहीं जाएगा, इसमें यह भी है कि कोई माननीय सदस्‍य अपनी सीट को छोड़कर दूसरी सीट पर जाएगा...। ...(व्‍यवधान)...

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): ***

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): उसकी सदस्‍यता समाप्‍त हो जाती है, इतने कड़े नियम है, इतने कड़े नियम है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय की बिना मरजी के कोई सदस्‍य उठ नहीं सकता, खड़ा नहीं हो सकता, केवल आई कैच कर सकता है और माननीय अध्‍यक्ष महोदय जब तक अनुमति नहीं दे तब तक कोई खड़ा नहीं हो सकता। यहां पर लगातार जनहित के मुद्दों की बात तो की जाती है लेकिन यहां पर केवल स्‍वार्थ सिद्धि के लिए, केवल कुछ लोगों की दलाली के लिए, कुछ लोगों से मिलकर ऐसे मुद्दे उठाए जाते हैं जिनका जनहित से कोई लेना-देना नहीं है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ***

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): ...(व्‍यवधान)... यहां पर कल जनहित का मुद्दा था, राजस्‍व के मामले थे, उनको उठाना था, जनहित का मुद्दा था, सब लोग उद्वेलित थे कि राजस्‍थान में वन के क्षेत्र में क्‍या हो रहा है, खानों पर किस प्रकार से कब्‍जा कर रखा है, इन सारे मुद्दों को भूलकर केवल अनावश्‍यक बातों को जिस बात पर इन्‍होंने कल वह आचरण किया, वह अध्‍यक्ष की गरिमा के लिए सरकार से लड़े कोई दिक्‍कत नहीं है, सरकार की आलोचना करे, कोई दिक्‍कत नहीं है। ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): जनहित के मुद्दों पर गम्‍भीर नहीं है तो मैं प्रस्‍ताव करता हूं, जब बार-बार प्रतिपक्ष अध्‍यक्ष की अवहेलना हो रही है, मैं प्रस्‍ताव करता हूं...।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ***

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

सदस्‍य का निलम्‍बनरघुवीर सिंह मीणा श्री का सत्र की शेष अवधि के लिएश्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): ...दिनांक 21 मार्च, 2006 को सदन की कार्यवाही प्रारम्‍भ हुई तो प्रश्‍नकाल समाप्‍त होते ही शून्‍यकाल में चर्चा के दौरान प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍य श्री रघुवीर सिंह मीणा ने अत्‍यंत शोर मचाया व आक्रामक रूख अपनाकर हाथ से मारने का आशय रखते हुए माननीय सदस्‍य श्री बंशीलाल की तरफ झपटे, उनका यह कृत्‍य संसदीय परम्‍पराओं तथा सदन का अपमान है तथा सदन की अवमानना है।  इस पर आसन द्वारा यह व्‍यवस्‍था दी गई कि श्री मीणा सदन में अपने इस कृत्‍य के लिए क्षमा मांगे तथा खेद व्‍यक्‍त करे अन्‍यथा सदन छोड़ दें। इस व्‍यवस्‍था के उपरान्‍त भी श्री मीणा सदन में बैठे रहे और आसन की अवहेलना करते रहे। श्री मीणा आज दिनांक 22 मार्च,206 को सदन की कार्यवाही प्रारम्‍भ होते ही सदन में उपस्थित हो गए और आसन द्वारा पुकारे जाने पर भी सदन से बाहर नहीं गए जिसके कारण से सदन की कार्यवाही में निरन्‍तर व्‍यवधान उत्‍पन्‍न होता रहा और आसन द्वारा सदन की कार्यवाही एक घण्‍टे तथा पुन: आधा घण्‍टे के लिए स्‍थगित करनी पड़ी। श्री मीणा इस प्रकार आसन की जानबूझकर लगातार अवहेलना करते रहे और सदन की कार्यवाही में व्‍यवधान उत्‍पन्‍न करते रहे। जो कि अमर्यादित, अशिष्‍ट एवं नियमों तथा संसदीय प्रक्रियाओं का खुला उल्‍लंघन करने वाला रहा है। मैं प्रस्‍ताव करता हूं कि संसदीय परम्‍पराओं तथा मर्यादाओं की रक्षा के लिए प्रक्रिया के नियम 292 के तहत उक्‍त आचरण हेतु माननीय सदस्‍य श्री रघुवीर मीणा को सत्र की शेष अवधि के लिए सदन से निलम्बित किया जाए।

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या सदन की अनुमति है कि सराड़ा से आने वाले माननीय सदस्‍य श्री रघुवीर मीणा को इस सत्र की समाप्ति तक के लिए निलम्बित कर दिया जाए? (स्‍वीकृत)

सत्र की समाप्ति तक के लिए रघुवीर मीणा, इस सत्र की समाप्ति तक के लिए सदन से निलम्बित किया जाता है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही):  ***

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): ***

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): ***

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): ***

श्री अध्‍यक्ष: यह जीरो ऑवर है, यहां कोई पाइण्‍ट ऑफ ऑर्डर नहीं होता। जीरो ऑवर में, यह जीरो ऑवर चल रहा है, कोई पाइण्‍ट ऑफ ऑर्डर नहीं होगा।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): ***

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): ***

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): ***

 

22.3.06/1250/gpc/akt/1m

 

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): ***

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): ***

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): ***

श्री अध्‍यक्ष: श्री कालूलाल गुर्जर, मांग प्रस्‍तुत करेंगे।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ***

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): ***

श्री अध्‍यक्ष: श्री रघुवीर सिंह मीणा ..(व्‍यवधान).. मुझे आप मजबूर कर रहे हैं मार्शल से निकलवाने के लिए। ..(व्‍यवधान).. सराड़ा से आने वाले माननीय सदस्‍य, आप कृपया सदन से बाहर चले जाएं। मार्शल। सार्जेंट-एट-आर्म्‍स।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

(माननीय सदस्‍य श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा) को मार्शल द्वारा सदन से बाहर निकाला गया)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): ***

श्री अध्‍यक्ष:  श्री कालूलाल गुर्जर, पंचायत राज मंत्री अनुदान की मांग रखें।

श्री कालूलाल गुर्जर  (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  मैं आपकी अनुमति से प्रस्‍ताव करता हूं कि मांग संख्‍या- 28 ग्रामीण विकास के विशेष कार्यक्रम के संबंध में 31 मार्च, 2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 1,54,40,07,000/- (एक अरब चौवन करोड़ चालीस लाख सात हजार) तक की राशि प्रदान की जाए।

श्री अध्‍यक्ष: श्री प्रताप सिंह सिंघवी।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से प्रस्‍ताव करता हूं कि मांग संख्‍या 29 नगर आयोजना एवं प्रादेशिक विकास के संबंध में 31 मार्च, 2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 13,61,76,07,000/- (तेरह अरब इकसठ करोड़ छिहतर लाख सात हजार) तक की राशि प्रदान की जाय।

श्री अध्‍यक्ष: मांग संख्‍या 20, आवास।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  मैं आपकी अनुमति से प्रस्‍ताव करता हूं कि मांग संख्‍या 20- आवास के संबंध में 31 मार्च, 2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 37,33,95,000/- (सैंतीस करोड़ तैतीस लाख पिचानवे हजार) तक की राशि प्रदान की जाय।

श्री मुरारी लाल मीणा (बांदीकुई): ***

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री अध्‍यक्ष: प्रश्‍न यह है कि मांग संख्‍या- 28 ग्रामीण विकास के विशेष कार्यक्रम के संबंध में 31 मार्च, 2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 1,54,40,07,000/- (एक अरब चौवन करोड़ चालीस लाख सात हजार) तक की राशि प्रदान की जाए?

        (स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

  प्रश्‍न यह है कि मांग संख्‍या 29- नगर आयोजना एवं प्रादेशिक विकास के संबंध में 31 मार्च, 2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 13,61,76,07,000/- (तेरह अरब इकसठ करोड़ छिहतर लाख सात हजार) तक की राशि प्रदान की जाय?

        (स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

  प्रश्‍न यह है कि मांग संख्‍या- 20 आवास के संबंध में 31 मार्च, 2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 37,33,95,000/- (सैंतीस करोड़ तैतीस लाख पिचानवे हजार) तक की राशि प्रदान की जाय?

        (स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

सदन की बैठक गुरुवार, दिनांक 23 मार्च, 2006 के प्रात: 11.00 बजे तक के लिए स्‍थगित की जाती है।

 

(तदनन्‍तर सदन की बैठक 12.55 बजे गुरुवार, 23 मार्च, 2006 के 11.00 बजे तक के लिए स्‍थगित हुई)

 



*** अध्‍यक्षपीठ के आदेशानुसार अंकित नहीं किया गया।

*** अध्‍यक्षपीठ के आदेशानुसार अंकित नहीं किया गया ।

*** अध्‍यक्षपीठ के आदेशानुसार अंकित नहीं किया गया ।

*** अध्‍यक्षपीठ के आदेशानुसार अंकित नहीं किया गया ।

 

*** अध्‍यक्षपीठ के आदेशानुसार अंकित नहीं किया गया ।

 

*** अध्‍यक्षपीठ के आदेशानुसार अंकित नहीं किया गया ।

 

*** अध्‍यक्षपीठ के आदेशानुसार अंकित नहीं किया गया ।

 

*** अध्‍यक्षपीठ के आदेशानुसार अंकित नहीं किया गया ।