Kas/usc/21032007/1100/1a

अशोधित प्रति प्रकाशनार्थ नहीं

 

राजस्‍थान विधान सभा की कार्यवाही का वृतान्‍त

 

अंक 7   बारहवीं विधान सभा के सातवें सत्र का इक्‍कीसवां दिवस   संख्‍या 14

 

बुधवार, 21 मार्च, 2007

 

राजस्‍थान विधान सभा की बैठक 11:00 बजे

विधान सभा भवन जयपुर, में प्रारम्‍भ हुई।

 

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

 

तारांकित प्रश्‍नोत्‍तर

 

श्री अध्‍यक्ष: श्री अर्जुनलाल जीनगर ।

 

191. राजस्‍थान राज्‍य पथ परिवहन निगम के लाभ/हानि के आगार

 

श्री अर्जुन लाल जीनगर (गंगरार): क्‍या यातायात मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) राज्‍य पथ परिवहन निगम के कितने आगार लाभ में व कितने हानि में चल रहे हैं? सूची सदन की मेज पर रखें ।

(2) सरकार द्वारा घाटे में चल रहे आगारों को लाभ में लाने के लिए अब तक क्‍या प्रयास किये गये ?

(3) क्‍या सरकार घाटे में चलने वाले आगार के अधिकारियों के विरूद्ध कार्यवाही करने का विचार रखती है ? यदि हां तो चित्‍तोडगढ आगार प्रबन्‍धक के विरूद्ध अब तक क्‍या कार्यवाही की गई व नहीं तो क्‍यों ?

(4) राजस्‍थान पथ राज्‍य पथ परिवहन निगम की किन किन राज्‍यों में कितनी कितनी बसें चल रही है ? विवरण सदन की मेज पर रखें ।

(5) क्‍या यह सही है कि राजस्‍थान राज्‍य पथ परिवहन निगम में कर्मचारियों की कमी है ? यदि हां तो किस किस श्रेणी के कितने अधिकारी व कर्मचारी कम है ? विवरण सदन की मेज पर रखें ।  

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): (1) वित्‍तीय वर्ष 2006-07 में अप्रैल, 06 से जनवरी, 07 के संकलित शुद्ध लाभ हानि खाते के अनुसार निगम के 48 आगारों में से 4 आगार लाभ में व शेष 44 आगार हानि में है सूची परिशिष्‍ट 1 पर संलग्‍न है ।

(2) निगम स्‍तर पर घाटे में चलने वाले आगारों को लाभ में लाने हेतु किये गये प्रयासों का विवरण परिशिष्‍ट 2 पर संलग्‍न है ।

(3) जी नहीं । घाटे के लिए अनेक कारक उत्‍तरदायी है अंत: सिर्फ अधिकारियों को घाटे के लिए उत्‍तरदायी नहीं ठहराया जा सकता । उपरोक्‍त कारणों में से घाटे के आधार पर चित्‍तौडगढ आगार प्रबंधक के विरुद्ध कार्यवाही नहीं की गई है ।

(4) वर्तमान में राजस्‍थान परिवहन निगम की बसें 11 पडौसी राज्‍यों में संचालित हो रही है, राज्‍यवार दैनिक संचालन हेतु स्‍वीकृत एकल परिचक्रों की संख्‍या दर्शाते हुए विवरण परिशिष्‍ट 3 पर संलग्‍न है ।

(5) जी हां । रिक्‍त पदों की सूची परिशिष्‍ट 4 पर संलग्‍न है ।

श्री अर्जुन लाल जीनगर (गंगरार): अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपसे निवेदन है कि राजस्‍थान में 48 आगारों में से मात्र 4 आगार ही लाभ में है ऐसा धंधा कौन करता है । एक अच्‍छा व्‍यापारी, एक अच्‍छी सरकार कभी ऐसा धंधा नहीं करेगी । लेकिन जो कारण इन्‍होंने बताये हैं कि अभी भी हमारा डिपो घाटे में है और ऐसे प्रयास किये जा रहे हैं जिससे यह लाभ में आ सकते हैं । वाहन उपयोगिता प्रतिदिन इन्‍होंने 10 बताये हैं । वर्ष 2003-04 में 342, 2004-05 में 346 और फिर बाद में बढते बढते यह उपयोगिता 370 हो गई फिर भी घाटे में है । ऐसे इन्‍होंने 6 पाइंट बताये हैं उनमें सारा का सारा ऐसा विवरण है जिससे यह आगार कभी घाटे में जाने ही नहीं चाहिये फिर भी यह घाटे में जा रहे हैं ।  मैं यह पूछना चाहता हूं कि क्‍या सरकार जिन अधिकारियों की वजह से जो रोडवेज को घाटे में ले जा रहे हैं और जिनकी जांच रिपोर्ट आ गई है उसके बाद भी आप कार्यवाही नहीं करना चाह रहे हैं उसके पीछे क्‍या कारण है । दूसरा पिछले वर्षों में हर साल मई जून के महीने में चित्‍तोडगढ आगार की आय अधिक हुई है लेकिन अभी वर्तमान में जो आगार प्रबन्‍धक है उसके रहते हुए यह घाटे में क्‍यों गया । तीसरा क्‍या चित्‍तेडगढ उदयपुर की जो बस है वह 16 रुपये 30 पैसे प्रति किलो मीटर के हिसाब से लाभ पहुंचा रही थी उसको 14 रुपये 33 पैसे में ठेके पर क्‍यों दिया गया । इस कारण से भी पर्टीकूलर लोगों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्‍य से उन्‍होंने यह ठेका पद्धति की है । मैं उनका नाम नहीं लेना चाहता हूं लेकिन इतना काम होने के बाद भी यह घाटे में है । क्‍या अप्रैल मई 2006 में मैरिज सीजन में..

श्री अध्‍यक्ष: आप भाषण दे रहे हैं, प्रश्‍न पूछिए ।

श्री अर्जुन लाल जीनगर (गंगरार): मेरा प्रश्‍न है क्‍या 27 बसे मई 2006 में बारातों के लिये कांट्रेक्‍ट पर दी गई ? क्‍या उनका पूरा पैसा जमा हुआ और पैसा जमा नहीं हुआ, लगभग 9000 रुपये जमा नहीं हुए उसकी लेखा शाखा ने आडिट कर के उसके खिलाफ कार्यवाही करनी चाही फिर भी कार्यवाही नहीं हुई । क्‍या 100 रुपये के गबन होने पर किसी कंडक्टर या अधिकारी को निलंबित किया जाता है तो उसके 9-10 हजार रुपये के गबन करने के बाद भी उसको सस्‍पेंड क्‍यों नहीं किया गया ।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप भाषण दे रहे हो आप सीधी सी बात पूछिए घाटे के कारण क्‍या है ।

श्री अर्जुन लाल जीनगर (गंगरार): चित्‍तोड में पर्टीकूलर घाटे के कारण...

श्री अध्‍यक्ष: वह इनसे पूछो ना ।

श्री अर्जुन लाल जीनगर (गंगरार): आप इसके लिये क्‍या कार्यवाही करना चाहते हैं ।

एक माननीय सदस्‍य: अध्‍यक्ष महोदय, इससे जुडा हुआ मेरा प्रश्‍न है ।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप उनका जवाब आने दीजिए । मंत्री जी घाटे के कारण बताइए ।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): अध्‍यक्ष महोदय, दोनों का साथ ही आ जायेगा मैं भी प्रश्‍नकर्ता हूं ।

श्री अध्‍यक्ष: आपको भी मौका दूंगी, आपको भी दूंगी पहले जवाब आने दीजिए । हां बताइए, आप तो घाटे के कारण बता दो बस और बातें छोडो ।

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, जब से भारतीय जनता पार्टी की सरकार शासन में आई है ।

श्री अध्‍यक्ष: जब से आप ट्रांसपोर्ट मिनिस्‍टर बने हो ।

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): जी हां । लगभग 12 बार डीजल की कीमतें बढी हैं उसके विरुद्ध हमने किसी भी तरीके का किराया नहीं बढाया है । दिसम्‍बर, 03 में जब हम लोग आये थे उसके पश्‍चात् मैंने आपको बताया कि लगभग 12 बार डीजल की दरे बढी । जो डीजल 20 रुपये था वह आज 33 रुपये के करीब हम लोगों को मिल रहा है । महत्‍वपूर्ण जो कारण है वह डीजल की दरों में लगातार होती बढोत्‍तरी है । उस समय में और आज के समय में जो वृद्धि हुई है वह 75 प्रतिशत के लगभग हुई है और किराया 33 पैसा प्रति यात्री प्रति किलो मीटर था उसको आज हमने बढा कर 40 पैसे किया है जो कि मात्र 30-33 प्रतिशत किराया बढाया है । यह जो फर्क है एक तो किराया नहीं बढना, राजस्‍थान की जनता पर किसी तरीके का भार नहीं डालना और समय समय पर इस तरीके से डीजल में बढोत्‍तरी हो जाना यह एक मुख्‍य कारण रहा है जिसकी वजह से निगम के आगार ज्‍यादातर घाटे में गये हैं । अगर हम आंकडों को उठाकर देखें तो हमारे कार्यकाल में जो घाटा हुआ है वह बहुत कम है और जो डीजल में बढोत्‍तरी हुई है वह बहुत ज्‍यादा है ।

श्री अध्‍यक्ष: प्राइवेट वाले सब घाटे में चल रहे हैं क्‍या ?

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): मैं आपसे निवेदन कर दूं सारे ।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): अध्‍यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी से यह पूछना चाहता हूं ... (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मंत्री जी आपकी सरकार ने भी तो डीजल पर सैस 50 पैसे प्रति लीटर लगाया है और 180 करोड़ रुपये सालाना का बोझ राजस्‍थान की जनता पर डाला है । वह उसमें कारण नहीं है क्‍या ? आपकी गवर्नमेंट से सैस हटवा दो ।

श्री अध्‍यक्ष: वह अलग प्रश्‍न है, वह आप इसके साथ जोड रहे हैं ।

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): .(व्‍यवधान) सैस का जो पैसा आता है वह पैसा सडकों के विकास में खर्च करते हैं उससे कोई बहुत ज्‍यादा फर्क नहीं पडा है ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): उससे फायदा हो रहा होगा ?

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): नहीं वह तो जनता के हित में ही लग रहा है जो सैस लगाया है वह अलग से लगाया है । वह कोई रोडवेज ने नहीं लगाया है । (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): रोडवेज के नहीं लगा रहा है, रोडवेज बिना सैस के डीजल ले रही है क्‍या ? (व्‍यवधान)

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): (व्‍यवधान) दोनों बातें कैसे कर रहे हैं आप ।

श्री अध्‍यक्ष: यह अलग से प्रश्‍न है ।

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): (व्‍यवधान) इन्‍होंने रोडवेज के घाटे के कारणों को पूछा है इसलिए मैं निवेदन करुंगा कि हमारे ऊपर लगभग 45 करोड़ रुपये प्रति वर्ष जो भार पडा है वह एक मात्र डीजल से पडा है और आपको पता है आज केन्‍द्र में किस की सरकार है, कितनी बार डीजल बढा है । 75 प्रतिशत लगातार डीजल में बढोत्‍तरी होना ... (व्‍यवधान)

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): अध्‍यक्ष महोदय, जिन बसों में लाभ हो रहा था उनको ठेके पर क्‍यों दी ।

श्री अध्‍यक्ष: मैंने आपको नहीं पुकारा है । बीच में नहीं बोले । (व्‍यवधान)

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): अध्‍यक्ष महोदय, मेरा एक सवाल है।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): अध्‍यक्ष महोदय, मैं मंत्री महोदय से पूछना चाहूंगा ...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अध्‍यक्ष महोदय, जब डीजल के भाव में बढोत्‍तरी से रोडवेज घाटे में आ रहा है तो क्‍या राजस्‍थान सरकार उस सैस को वापस लेगी क्‍या ? उस सैस को वापस लेकर राजस्‍थान रोडवेज को ...

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो ।


श्री हेमराज मीणा (किशनगंज):  000

श्री अध्‍यक्ष: आपकी आवाज कमजोर है मैं क्‍या करूं, आपकी बात तो मुझे सुनाई ही नहीं दे रही है ।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): 000

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो, जिसका नाम मैंने नहीं पुकारा है उसका अंकित नहीं हो।

श्री बद्रीलाल जाट (कपासन): 000

श्री अध्‍यक्ष: मैंने आपका नाम नहीं पुकारा है ।

श्री राकेश मेघवाल (परबतसर): 000

श्री अध्‍यक्ष: मैंने आपका नाम नहीं पुकारा है । श्री मोहनलाल गुप्‍ता ।

 

ans/usc   11.10  1b   21.03.2007  

 

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): अध्‍यक्ष महोदय, पहली प्रायोरिटी तो मुझे मिलनी चाहिये, मैं मूल प्रश्‍नकर्ता हूं। मेरा प्रश्‍न है, आप मोहन लाल जी को बुला रही है।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): साहब मुझे चांस दिया है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): देखिये, मैं मूल प्रश्‍नकर्ता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: सॉरी, मैंने आपका नाम देखा नहीं था। आई एम सॉरी। हां, गुप्‍ता जी एक बार बिराजिए। मोहम्‍मद माहिर आजाद। (व्‍यवधान) मूल प्रश्‍नकर्ता है।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): मैं बोल रहा हूं।

श्री अध्‍यक्ष: आप इनके बाद बोलिये। इनके बाद पूछ ली‍जिएगा।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहता हूं कि कुल 48 आगार है राजस्‍थान में उनमें से 4 आगार तो लाभ में चल रहे हैं,44 घाटे में चल रहे हैं। जिसमें मंत्री जी के खुद के निर्वाचित क्षेत्र डीडवाना की आगार भी घाटे में चल रही है, जो इन्‍होंने अभी मंत्री बनने के बाद खोली थी कि यह बहुत आवश्‍यक है, यात्री परेशान होते हैं, आगार खुल जाएगा तो बड़ा लाभ होगा और यह होगा।

मेरा आपके माध्‍यम से निवेदन है, कुल मिलाकर हमारी चिंता यह है कि रोडवेज को घाटे से कैसे उबारा जाए। मैं मं त्री जी से आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं कि जो सख्‍त कदम आपने जयपुर में उठाए, आपने प्राइवेट बसों को रोका सख्‍ती से, गृहमंत्री जी का भी सहयोग रहा इसलिए यह 3 आगार सांगानेर, डीलक्‍स और जयपुर लाभ  में आई। इन 44 आगारों में भी आ इसी तरीके के सख्‍त कदम उठाये। प्राइवेट बसें तो लाभ उठा रही है1 एक बस वाल दस बस का प‍रमिट लेता है और 30-30 बस संचालित कर रहा है। रोडवेज के अधिकारियों की मिलीभगत से कर रहा है। उसको रोकोंगे तो आपका यह रोडवेज लाभ में आएगा।

दूसरा निवेदन, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से यह निवेदन करना चाहता हूं आप इनके जवाब परिशिष्‍ठ दो पढ़े, कितनी विरोधाभास बात, आप खुद जवाब में दे रहे हैं, आप अपने उत्‍तर में निगम को हानि से उबारने हेतु किये जा रहे प्रयास में, आप क्रम संख्‍या दो पर बता रहे हैं कि राज्‍य सरकार की अधिसूचना दिनांक 6 जुलाई,2006 द्वारा यात्री किराये में वृद्धि की गई है जिससे अब निगम घाटे से उबर सकता है। इसी में बिन्‍दु दस में लिख रहे हैं कि प्रतिस्‍पर्धा में टिकने हेतु युक्तिपूर्ण तरीके से किराये में कमी की जा रही है। मेरे यह समझ में नहीं आ रहा यह  नियम दे रहे हैं आप इसको क्लियरफाई करें कि एक तरफ आप वृद्धि का कारण बता रहे हैं, दूसरी तरफ कमी का भी कारण बता रहे हैं।

तीसरा निवेदन, अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से यह करना चाहता हूं कि एक तरफ यह कह रहे हैं कि हमने तेल कम्‍पनियों से बात कर ली, उससे हमको जो सस्‍ता तेल मिलेगा  तो 4 करोड़ रूपये  प्रतिवर्ष की बचत होगी, यह उपाय आपने लिखा यह उपाय आप तीन साल पहले भी तो कर सकते थे। आज 4 करो़ड रूपये की एक साल में आपको डीजल के कन्‍ज्‍म्‍पशन से डायरेक्‍ट लेने में बचत हो रही है, आप इसकी जांच करवाइये कि यह आज से पहले दो साल में क्‍यों नहीं की या ऊपर ही ऊपर इसका कमीशन लेते रहे, अब रोड़वेज को करने के प्रयास किये जा रहे हैं। अध्‍यक्ष महोदय, सवाल तो स्‍पेसिफिक यह है कि आप  घाटे के कारण, कितना घाटा है और रोडवेज को घाटे से उबारने के लिए क्‍या कठोर प्रयास उठाएंगे वह बता दीजिए।

श्री अध्‍यक्ष: प्रयास तो लिख दिये।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): प्रयास करने की कोशिश कर रहे हैं, करे क्‍या इन्‍होंने ? (व्‍यवधान)

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, वो ही जवाब दे रहा हूं।

श्री अध्‍यक्ष: आप तो अवैध वाहनों पर(व्‍यवधान) सब ठीक हो जाएगा।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): अध्‍यक्ष महोदय, सारे प्रश्‍न आ जाए तब जवाब दे देना।

श्री अध्‍यक्ष: वह जवाब दे रहे हैं, उसके बाद।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): ठीक है।

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, माननीय नगर से आने वाले सदस्‍य ने तीन मुद्दे विशेष रूप से उठाये हैं मैं आपसे निवेदन करूं कि परिशिष्‍ट दो पर जो दूसरे नम्‍बर का पाइंट है उसके लिए  आपने यह कहा, यह बात सही है राजस्‍थान सरकार स्‍टेज केरिज के परमीट राजस्‍थान राज्‍य पथ परिवहन निगम को भी देती है और निजि क्षेत्र में दूसरे ओपरेटर है उनको भी देती है। यह दोनों हमारे यहां पर एक तरीके से राज्‍य सरकार के पास परिवहन विभाग में ओपरेटर के रूप में काम करते हैं, तो किराया बढ़ाने की और न्‍यूनतम रखने की सीमा राज्‍य सरकार तय करती है। जहां तक न्‍यूनतम का सवाल है उसमें राज्‍य सरकार का कोई राइडर नहीं है लेकिन अधिकतम किराये के अंदर राज्‍य सरकार राइडर तय करती है और आज राजस्‍थान के अंदर जो किराया हमने तय किया है पहले 33 पैसा, जैसा मैंने निवेदन किया, पहले 33 प्रतियात्री प्रति किलोमीटर था उसको बढ़ाकर हमने 40 पैसा किया और 40 पैसे से,दूसरी बार जिस पाइंट को आपने अभी उठाया  उसको 40 पैसे प्रति किलोमीटर प्रतियात्री को बढ़ाकर हमने 46 पैसे किया लेकिन उसके पश्‍चात भी रोडवेज ने अपना किराया अभी भी कम कर रखा है और वह लगभग 40 पैसे ले रहा है। एक फ्लेक्सिब्लिटी केबीनेट की बैठक के बाद राज्‍य सरकार ने रोडवेज को दी है वह यह है कि वह अपना राइडर तक किराया अपना स्‍वंय का घटा और बढ़ा सकता है परिस्थितियों के अनुकूल।

दूसरा पाइंट प्रतिस्‍पर्धा का आपने उठाया है, यदि प्रतिस्‍पर्धा आती है तो रोडवेज को यह अधिकार दिया है राज्‍य सरकार ने केबीनेट में फैसला लेकर कि वह अपना किराया बढ़ा और घटा सकती है। ईवन हमने तो यहां तक दिया है कि अगर डीजल की कीमते बढ़े  उसी प्रक्‍योसमेंट में वह अपना किराया बढ़ा सकते हैं। अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे निवेदन करूं कि यह दोनों पाइंट अलग-अलग है। चूंकि राज्‍य सरकार ने उनको परमीशन दी इसलिए उन्‍होंने किराया बढ़ाया, एक किराया बढ़ना भी कारण है उसकी वजह से। जब किराया बढ़ता है तो लोड फैक्‍टर नीचे आता है और जब लोड फैक्‍टर नीचे आता है तो रेवेन्‍यू पर उसका असर पड़ता है। जिस समय डीजल बढ़ता है उस समय अगर यह किराया बढ़ाएंगे  तो निश्चित रूप से इसका असर आयेगा।

प्रतिस्‍पर्धा की बात हमने कही, आपने यह कही, इन्‍होंने यह उपाय किये हैं तीन साल में, कभी इन्‍होंने किराया बढ़ाया है तो घटाया भी है और किराया घटाने से इनका लोडफैक्‍टर बढ़ा है और रोडवेज का रेवेन्‍यू भी बढ़ा है। मैं आपसे निवेदन कर दूं कि प्रतिवर्ष हमने कोई भी तरीके का फ्लीट बढाये बगैर 100 करोड़ रूपये की आय, बिना किराया बढ़ाये  और लोड फैक्‍टर को बढाकर प्रतिवर्ष 100 करोड़ रूपये की आय बढाई।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने जो दूसरा मुद्दा उठाया उसमें हमने यहां जयपुर के अंदर गृहविभाग के सहयोग से इस तरीके का अभियान चलाया और उसमें निश्चित रूप से सफलता मिली। 30 साला से लगातार हमारा सिंधी कैम्‍प बस स्‍टैण्‍ड था उसके सामने इस तरीके से प्राइवेट ओपरेटर रात को बस चलाते थे, उन पर पूरी बंदिश लगाकर हमने उसको रोका, उसका परिणाम (व्‍यवधान) एक मिनिट बिराजिए आप, बिराजे साहब, मेरी बात पूरी होने दीजिए। आपका जवाब दूंगा, बिराजे आप।

श्री अमराराम (धोद): हट गई तो 50 कदम दूर से चल रही है।

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): बिराजिये, मैं आपका जवाब दूंगा ना। आप बिराजिए, मैं जवाब दूंगा ना।

श्री अमराराम (धोद): सिंधी कैम्‍प के सामने से हट गई तो 50 कदम दूर से चल रही है।

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री):बैठो तो सही, उसका भी जवाब दूंगा। आप जो पूछेंगे उसका जवाब दूंगा, मेरे पास सबके जवाब है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय हमने सिंधी कैम्‍प से यह एक्‍सपेरिमेंट किया और यह माननीय नगर से आने वाले सदस्‍य ने जो मुद्दा उठाया उसके लिए में निवेदन करूं कि हमने इस तरीके के आगार और इस तरीके के जिले चिह्नित, परिवहन विभाग के मंत्री होने के नाते तय किए हैं कि कोनसे ऐसे जिले हैं जिनमें इस तरीके का संचालन हो रहा है जो रूकना चाहिये क्‍योंकि उससे राज्‍य सरकार को एक तो अगर कहीं भी अवैध तरीके का संचालन होता है तो आय की हानि होती है, दूसरी तरफ हमारे रोडवेज में भी लोडफैक्‍टर कम आता है तो उससे भी आय में गिरावट आती है। तो हमने अब अप्रैल माह से..(व्‍यवधान)

श्री राकेश मेघवाल (परबतसर): आप मंत्री है, नागौर का ध्‍यान रखना..(व्‍यवधान) आपका जिला है....

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे निवेदन करूंगा दूसरा आपने सवाल उठाया, अब हम अप्रैल माह में जोधपुर, कोटा विशेष रूप से कोटा पूरा सम्‍भाग,जोधपुर सम्‍भाग,बीकानेर पूरा सम्‍भाग अलग-अलग सम्‍भाग में हम इस तरीके का अभियान चलाएंगे। मैं धन्‍यवाद देना चाहूंगा माननीय गृहमंत्री जी को और गृह विभाग को कि आपने सहयोग दिया। एक बात मैं जरूर स्‍वीकार करूंगा कि परिवहन विभाग के अंदर लगभग हमारे पास 365 इंस्‍पेक्‍टर और सब इंस्‍पेक्‍टर का स्‍टाफ है उसमें भी जो राजस्‍व हमारा आता है वह उन्‍हीं पर निर्भर करता है हमारे डी.एफ एस हो या एफ एस उनके माध्‍यम से   हम पैसे का कलेक्‍शन करते हैं।                                                                                      

365 आदमियों को 32 जिलों में  अगर पदस्‍थापन करें तो इस तरीके का सम्‍भव नहीं है इसलिए हमारे के गृहविभाग का सहयोग मिलता है उसके माध्‍यम से हम रोक पाने में सम्‍भव है। 

अब की बार हम विशेष रूप से कोटा और जोधपुर प्रारम्भिक रूप से ले रहे हैं। हम अलग-अलग डिविजन बाई इस तरीके से जो अवैध संचालन हो रहे हैं उनक खिलाफ कार्य करेंगे। एक मुद्दा मैं जरूर निवेदन करना चाहूंगा, राज्‍य सरकार एक कल्‍याणकारी सरकार होती है, उसका मकसद होता है जनता को सुविधाएं देना, आज रोडवेज लगभग 48 आगारों के माध्‍यम से लगभग साढ़े सौलह लाख किलोमीटर प्रतिदिन  गाड़ी चलती है और गांव में भी जाती है।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक निवेदन आपसे जरूर करना चाहूंगा और सभी सदस्‍यों को बताना चाहूंगा आपने प्राइवेट से रोडवेज का कम्‍पेरिजन किया, मैं आपसे कहूंगा कि रोडवेज के अंदर और प्राइवेट के अंदर कोई कम्‍पेरिजन इसलिए नहीं हो सकता, प्राइवेट के अंदर जो लोग गाड़ी चलाते हैं चाहे वो हमारा स्‍टेज केरजि का परमिट लेकर चलाए , चाहे कान्‍ट्रेक्‍ट केरिज का परमिट लेकर चलाए, उस व्‍यक्ति के पास एक ड्राइवर होता है, न्‍यूनतम वेतन के बराबर भी उसको वेतन नहीं मिलता। उसके अलावा उसके पास एक कंडक्‍टर होता है, चाहे जहां रोक लेता है जबकि राजस्‍थान राज्‍य पथ परिवहन निगम स्‍वंय बस स्‍टैण्‍ड की व्‍यवस्‍था करता है, जहां पीने का पानी होता है, जहां बैठने की व्‍यवस्‍था होती है, साफ-सफाई की व्‍यवस्‍था होती है। एक गाड़ी पर लगभग 6 लोगों को लगाए रखते हैं। लगभग साढ़े बाईस हजार लोग,  कुल हमारी जो 4445 गाडियां जो चलती है, 4537 गाडि़यां जो चलती है,6 के औसत से लगभग साढ़े बाईस हजार कर्मचारी रोजगार लिए हुए हैं। उनको प्रोविडेंट फण्‍ड देना पड़ता है, उनको पेंशन देनी पड़ती है। उनको फिफ्थ पे कमीशन के ऊपर कोई इस तरीके का....(व्‍यवधान(

श्री अध्‍यक्ष: माहिर आजाद..

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सैकण्‍ड सप्‍लीमेंट्री, सैकण्‍ड सप्‍लीमेंट्री...(व्‍यवधान) 

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): आपने एक बात कही, डीडवाना निश्चित रूप से मेरा विधान सभा क्षेत्र है।( व्‍यवधान)

 

दुर्गा/चौहान 210307 1120 1c

 

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नगर से आने वाले माननीय सदस्‍य ने एक अहम मुद्दा उठाया है।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे निवेदन करना है।

श्री अध्‍यक्ष: पहले सुनिये, सुनिये। आप विराजें ना।

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इनका उत्‍तर नहीं आयेगा तो फिर ये नाराज हो जाएंगे।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): अध्‍यक्षजी गुप्‍ताजी को बैठा रही हैं, आपको थोड़ी बैठा रही हैं। उन्‍होंने तो गुप्‍ताजी को बैठाया है, आपको थोड़ी बैठाया है। आप तो जवाब दो। गुप्‍ताजी को बैठाया है, आप बैठ जाते हैं बारबार। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण, एक समय में एक ही सदस्‍य बोले।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने मुझे आज्ञा दी थी। आपने मुझे आज्ञा दी है।

श्री अध्‍यक्ष: पहले मोहम्‍मद माहिर आजाद, मूल प्रश्‍नकर्ता हैं। (व्‍यवधान) नो, मैं जिनका नाम पुकारुंगी, उन्‍हीं का अंकित करना है। (व्‍यवधान)

श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली):  000

श्री अध्‍यक्ष: आपका नाम किसने पुकारा है। नो, जवाब देने की कोई आवश्‍यकता नहीं है, अंकित नहीं हो रहा है। जो बिना मेरी आज्ञा के, आसन की आज्ञा के बिना जो बोलना शुरू करेंगे, न उनका प्रश्‍न अंकित होगा, न उसका जवाब दिया जाएगा। इसलिये केवल उन्‍हीं काअंकित होगा जिनका नाम पुकारा जाएगा आसन के द्वारा। मोहम्‍मद माहिर आजाद।

श्री अर्जुन लाल जीनगर (गंगरार): 000

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से सप्‍लीमेंट्री मंत्रीजी से पूछना चाहता हूं, एक तो आपने आयल कम्‍पनियों की जो 4 करोड़ की बचत है, उसका जवाब नहीं दिया। दूसरा मेरासवाल यह है कि आपने परिशिष्‍ठ 4 पर जो कर्मचारियों के रिक्‍त पदों की सूची उपलब्‍ध कराई है, जरा इसका अध्‍ययन करें कि आपके सहायक यांत्रिक अभियंता के 44 में से 23 पद रिक्‍त हैं। आपके जो प्रशासनिक अधिकारी हैं, उनके 28 में से 22 पद रिक्‍त हैं। आपके आगार प्रबन्‍धकों के 46 में से 48 पद, यानि 60 प्रतिशत पद रिक्‍त हैं। कनिष्‍ठ अभियंता के 54 में से 44 पद रिक्‍त हैं। वरिष्‍ठ कार्यालयाध्‍यक्ष के 18 में से 12 पद रिक्‍त हैं। जब ये इतने बड़े-बड़े जो काम के अधिकारी हैं, आपके इंस्‍पेक्‍टरों के उठाकर देखें तो सहायक यातायात निरीक्षकों के 300 में से 140 पद आपके रिक्‍त चल रहे हैं। आपके सुरक्षा प्रहरियों के 200 में से 177 पद रिक्‍त हैं। तो यह यातायात निरीक्षक और दूसरे हैं जिनसे आय बढ़ती है, जो टिकट चेक करते हैं, वह तो इतने लम्‍बे समय से रिक्‍त चल रहे हैं। इनको आप कब तक भर देंगे। एक तो आप यह बता दें। एक वह मैंने आयल कम्‍पनियों का कहा कि 3 साल पहले क्‍यों नहीं आपने डाइरेक्‍ट कांट्रेक्‍ट कर लिया जो और बचत होती। उसका जवाब दे दें। अन्‍त में मेरा आखिरी सवाल यह है कि आप इन 44 जो घाटे में आगार चल रहे हैं, यहां निजी बसों को, जिनका किराया रोडवेज से कम होता है, अच्‍छी बेहतर सुविधा होती है जिनके कारण रोडवेज घाटे में चल रही है। आप गृह विभाग का या यातायात विभाग का सहयोग लेकर प्रभावी कार्यवाही करें ताकि आपका रोडवेज विभाग घाटे से उभर सके।

श्री अध्‍यक्ष: श्री अर्जुन लाल जीनगर।

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): 000

श्री अर्जुन लाल जीनगर (गंगरार): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, चित्‍तोड़ डिपो आगार प्रबन्‍धन के द्वारा जो अनियमितताएं की गयीं, उनके विरुद्ध अब तक क्‍या कार्यवाही की गयी है, या करने का विचार है या नहीं। नम्‍बर-दो, लाभ में चलने वाले रुटों को कम दर पर ठेके पर क्‍यों दिया गया, उनके खिलाफ क्‍या कार्यवाही होने वाली है। तीसरा, चित्‍तोड़-भीलवाड़ा, चित्‍तोड़-उदयपुर रुटों पर जो अवैध वाहन चलते हैं उनको रोकने का सरकार कब तक प्रयास करेगी। अन्‍त में मेरा सवाल है गंगरार कस्‍बे में और सोनियारा कस्‍बे में रोडवेज की लोकल बसें, हमेशा जाती रहीं, पिछले 30 साल से, अब क्‍यों बंद कर दी गयीं, ऐसे क्‍या कारण रहे। इन प्रश्‍नों का जवाब दें। धन्‍यवाद।

श्री अध्‍यक्ष: श्री नाथूसिंह गुर्जर।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): अध्‍यक्ष महोदय, मैं बहुत ही शोर्ट में पूछना चाहूंगा कि क्‍या यह सही है कि आपकी जो बसें हैं वह 10-10, 15-15 साल पुरानी हैं, इसलिये उनके डीजल का एक्‍सपंडीचर और दूसरे एक्‍सपंडीचर ज्‍यादा आ रहे हैं।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल):  000

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): आप बैठ जाएं। स्‍पीकर को चेलेंज नहीं कर सकते हैं। बैठ जाइये। मेरा नाम पुकार लिया, बैठ जाएं।

अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या यह सही है कि बसें 10-10, 15-15 साल पुरानी हैं जिसके कारण, और बसों की संख्‍या कम है उसके कारण आपका खर्चा, डीजल पर और बाकी चीजों पर ज्‍यादा होता है तो एक घाटे का कारण यह है, क्‍या यह सही है। दूसरा आपके डीजल और टायर पर वेट के कारण 4 से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत, टायर पर वेट हो गया। और डीजल पर 13 प्रतिशत हो गया। क्‍या यह सही है। दूसरा, जो आपके 17 कैटेगिरिज हैं, जो कंसेशनल रेट पर ट्रेवल करते हैं जिसके कारण से 25 करोड़ रुपये का आपके ऊपर भार आता है तो इन फेक्‍टर्स को आप हटाने के लिये क्‍या कार्यवाही कर रहे हैं। और मेरा एक अन्तिम प्रश्‍न यह है कि आपने जो आपके पास सेंक्‍शंड स्‍टाफ है, वह है 26332, इसके अगेंस्‍ट में वर्किंग स्‍टाफ 21891 है। तो यह जो वेकेंट पोस्‍टें हैं इसके कारण से उस पर प्रभाव पड़ रहा है। एक जो मिलीभगत से, जो प्राइवेट अभी आपने कहा कि हमने किराया नहीं बढ़ाया इसके कारण, यदि आप किराया बढ़ाने की गलती करेंगे तो आपका लोड-फेक्‍टर प्राइवेट व्‍हीकल्‍स की तरफ डाइवर्ट हो जाएगा और हम और ज्‍यादा घाटे में आएंगे। तो क्‍या मिलीभगत के कारण प्राइवेट बसें और प्राइवेट व्‍हीकल्‍स चल रहे हैं जिसके कारण आपका घाटा है। कहीं तो प्रोफिट में आ गये और कहीं घाटे में चल रहे हैं। आज बीकानेर, कोटा, जोधपुर, कोई चार करोड़ से दो करोड़ घाटे में है। कोई छह करोड़, तो मेरा प्रश्‍न यह है, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से...।

श्री अध्‍यक्ष: आप समाप्‍त करें। हो गया प्रश्‍न।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): आपके माध्‍यम से कि आप रोडवेज को घाटे से उभारने के लिये क्‍या यह सही है कि आपके प्रशासन ने ही लिखकर दिया है कि एक हजार नई बसें हमको दे दो, पुरानी बसों को अलग हटाओ, और जो पुराने सेंक्‍शंड पद हैं...।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप भाषण तो दो मत।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): तो इसको पूरा करने के लिये आप कब तक कार्यवाही करेंगे।

श्री अध्‍यक्ष: हां, मोहनलाल गुप्‍ता। पहले इतने प्रश्‍न पूछ लिये हैं, पहले इनका तो जवाब आ जाने दीजिये।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): मेरा इनसे सम्‍बंधित ही है। आखिरी इन्‍होंने प्रश्‍न पूछ लिया। मैं यह कहना चाहूंगा, माननीय अध्‍यक्ष महोदय कि किसी भी कारपोरेशन में या किसी भी व्‍यापारिक संस्‍थान की दो कोस्‍ट होती है, डाइरेक्‍ट और इनडाइरेक्‍ट कोस्‍ट। मंत्री महोदय ने यह तो बता दिया कि रोडवेज की कई प्रकार की दिक्‍कतें हैं, यात्री-भाड़ा नहीं बढ़या और कई बातें हुईं। मैंने कहा आपकी जो डाइरेक्‍ट कोस्‍ट है, वह प्राइवेट वालों से ज्‍यादा आ रही है। पहली बात डीजल का आपका एवरेज बहुत कम आ रहा है। आपकी कोस्‍ट आफ रनिंग आफ बस, वह बहुत ज्‍यादा आ रही है। डीजल का एवरेज कम आ रहा है, कोस्‍ट आफ रनिंग ज्‍यादा आ रही है। आपके एडमिनिस्‍ट्रेटिव एक्‍सपेसेंज ज्‍यादा हैं। उन एडमिनिस्‍ट्रेटिव एक्‍सपेसेंज की वजह से प्राइवेट लोगों के पास में ..। (व्‍यवधान) बस आप ले जा रहे हैं, आपके एडमिनिस्‍ट्रेटिव एक्‍सपेसेंज को कम करने के लिये आप क्‍या कार्यवाही कर रहे हैं। एवरेज को बढ़ाने के लिये आप क्‍या कर रहे हैं। अन-इकोनोमिकल जो रुट्स हैं, उनको आप इकोनोमिकल रुट बनायें, उसके सम्‍बन्‍ध में आपकी क्‍या-क्‍या योजनाएं हैं। वह भी कृपया बताने का कष्‍ट करें। और क्‍या आपको यह मालूम है कि मध्‍य प्रदेश सरकार ने रोडवेज को बंद कर दिया।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप भाषण मत दें और सीधा प्रश्‍न पूछें।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): रोडवेज को बंद कर दिया। क्‍या ऐसा प्रस्‍ताव भी आपके विचाराधीन है कि हम इस रोडवेज को बंद करके और उसकी जगह घाटे मं चलने वाली बसें हैं, इसको बंद करके उन प्राइवेट लोगों को चालू रखें, क्‍योंकि इसका फायदा नहीं है।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप कृपया स्‍थान ग्रहण करें। सुन लिया। मंत्रीजी, मंत्रीजी। (व्‍यवधान) इतने प्रश्‍न एक साथ पूछ लिये हैं, पहले जवाब देने दें।

श्री जोगेश्‍वर गर्ग (जालौर):  000

श्री बद्रीलाल जाट (कपासन): 000

श्री अध्‍यक्ष: पहले के प्रश्‍नों का जवाब तो आने दीजिये।

श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्‍डी): 000

श्री अध्‍यक्ष: 28 मिनट हो गये हैं, नहीं, अब आप स्‍थान ग्रहण करें। 28 मिनट हो गये हैं। अब इनके जवाब आने दीजिये। मंत्रीजी खड़े हैं जवाब देने के लिये। अंकित नहीं हो।

डा. भंवरलाल  राजपुरोहित (मकराना):  000

श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्‍डी): 000

श्री अध्‍यक्ष: अब मंत्रीजी खड़े हैं जवाब देने के लिये। नहीं, अब नहीं, गुंजल साहब, अब नहीं। आप प्रश्‍न का जवाब सुनें। जो पहले पूछे गये हैं, महत्‍वपूर्ण प्रश्‍न हैं, जवाब सुनिये पहले, नो, नो। (व्‍यवधान)  मंत्रीजी जवाब दीजिये।

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नगर से आने वाले माननीय सदस्‍य ने आयल से सम्‍बन्धित जो बात उठाई, यह बात सही है कि हमारी सरकार आने से पहले इस तरीके का कोई नेगोसिएशन नहीं हुआ।

श्री अध्‍यक्ष: मैंने आपके हाथ को देख लिया।

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): और हम सरकार में आने के बाद हमने जो भारत सरकार की चार आयल कम्‍पनियां हैं उनसे नेगोसिएशन किया और नेगोसिएशन करके डीजल में हमने छूट प्राप्‍त की। और अब भी हम हर वर्ष्‍ं, जब नया वित्‍तीय वर्ष आयेगा तो निश्चित रूप से चारों कम्‍पनियों को बुलाकर के उनके बाकायदा टेण्‍डर इन्‍वाइट करेंगे और उसके बाद में लोएस्‍ट रेट आयेगी उसको हम इस तरीके का देंगे। इसका मैं उदाहरण देकर आपको बताना चाहूंगा कि आज 16.02.2007 को जो डीजल की रेट बाजार के अन्‍दर 33 रुपये 8 पैसे है, वही हम रोडवेज में 30 रुपये 26 पैसे में ले रहे हैं।

 

Vps-usc-21032007-1130-1d

 

अगर आप इससे पहले के आकड़े देखें और यह हमने 2004-05, 2005-06, 2006-07 में इस तरीके से किया है। यह लगभग पौने तीन रुपये के आस-पास हम जो है, बाजार दर से कम पर डीजल ले रहे हैं। इसका भी मतलब हमारे को रोडवेज को लाभ हो रहा है।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने दूसरा बहुत महत्‍वपूर्ण इश्‍यू उठाया कि जो हमारे खाली पद पड़े हैं, विशेष रूप से आपने प्रशासनिक पदों की खाली की बात कही। मैंने आपसे निवेदन किया कि आज रोडवेज जो है उसकी संख्‍या लगभग 4500 के करीब है अगर हम औसत देखें तो 6 व्‍यक्ति प्रति एक बस पर हमारे पास अभी भी है। स्‍टाफ अवेलेबल है। बसें कम हैं और स्‍टाफ ज्‍यादा है इसलिए एक तो चूंकि बेन लगा हुआ है। एक्‍ट लागू है इसलिए नयी भर्तियां नहीं हुईं। दूसरा अभी भर्तियों के अन्‍दर ड्राइवर और कंडक्‍टर पर हम जरूर विचार कर रहे हैं बाकी दूसरे प्रशासनिक अधिकारियों  को ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: इससे तो खर्चा और बढ़ जाएगा आपका। आपका खर्चा और बढ़ जाएगा।

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): थोड़ा सा। तीसरा जो विशेष रूप से ... (व्‍यवधान) नहीं, मैं आपका जवाब दे रहा हूं न, साहब। मैंने लिख रखे हैं। मैं सबका जवाब दूंगा। बीच में बोलने की जरूरत ही नहीं है। विशेष रूप से जो खाली पद हैं, चालक और परिचालक और टेक्निशियन, इस पर हम विचार कर रहे हैं और राज्‍य सरकार से परमिशन मिली तो इन भर्तियों को किया जाएगा बाकी जो प्रशा‍सनिक पद थे, जिस तरीके से एस.पी., डीवाई.एस.पी., एडिशनल एस.पी. उन लोगों को स्‍थानांतरण के बाद में हमने नहीं भरा क्‍योंकि वह एक तरीके से भार था। इंटरनल चैकिंग के माध्‍यम से हमने इस तरीके की जो चोरी हो रही थी उसको रोकने का प्रयास किया है।

दूसरा, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, गंगरार से आने वाले माननीय सदस्‍य ने चित्‍तौड़गढ़ डिपो की बात विशेष रूप से उठायी। मैं आपसे निवेदन करूं कि आपने यह कहा कि कोई अनियमितता हुई है। मैं सदन को और गंगरार से आने वाले माननीय सदस्‍य को बताना चाहूंगा कि अगर किसी भी तरीके की अनियमितता अगर डिपो मेनेजर ने की है तो उसकी हम जांच करवाकर उसके खिलाफ कार्यवाही करेंगे। यह मैं आपको विश्‍वास दिलाना चाहता हूं। जहां तक घाटे का सवाल है ... (व्‍यवधान)

श्री अर्जुन लाल जीनगर (गंगरार): कितने दिनों में करा देंगे?

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): अप्रैल महीने के अन्‍दर ही, विधान सभा सत्र पूरा होने, 15 अप्रैल तक अगर कोई भी तरीके की अनियमितता है, कोई भी शिकायत आयी है तो 15 अप्रैल तक हम उस अधिकारी के खिलाफ सख्‍ती से कार्यवाही करेंगे। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दूसरा आपने अपने स्‍वयं के गांव, जिसका नाम ... (व्‍यवधान) नहीं-नहीं गंगरार नहीं है इनका गांव। आपका खुद का गांव कौनसा है? राशमी गांव।   

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): तीन-तीन साल हो गये हमें भी माननीय मंत्री महोदय।

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): डीडवाना का भी बताऊंगा। डीडवाना की जनता ने यहां भेजा है तो डीडवाना के बारे में भी बताऊंगा। आप विराजिये। डीडवाना की जनता ने यहां पर भेजा है, डीडवाना के बारे में भी बताऊंगा।

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): हमारे विधान सभा क्षेत्र में गाडि़यां नहीं चलतीं। तीन-तीन साल हो गये। तीन-तीन एम.एल.ए. ने आपको लिखकर दिया, आज तक गाडि़यां नहीं चलीं। ... (व्‍यवधान)

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): आप विराजिये। विराजिये।

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): क्‍या विराजिये? आपके आर्डर ही नहीं चलते हैं। आपने आर्डर दिये थे वे चलते ही नहीं हैं।

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): राशमी के बारे में, बसों के बारे में ... (व्‍यवधान) वे खड़े हो जाएंगे अगर आप खड़े होंगे तो। वे पीछे हमारे भी एक हैं। ... (व्‍यवधान)

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): खड़े होने दो। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आपका नाम किसने पुकारा? आपको किसने पुकारा? अंकित नहीं हो। कोई आवश्‍यकता नहीं है जवाब देने की। ... (व्‍यवधान)

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं राशमी के बारे में यह बताना चाहूंगा कि आजकल बसें अगर कोई इंटीरियल में जाती हैं और एक या दो किलोमीटर पर मुख्‍य सड़क मार्ग से अगर कोई गांव है तो वहां पर उस बस में, वह गांव में जाकर वापस आती है। 15-20 मिनट लगते हैं और जो एक्‍सप्रेस या जो सीधे जाने वाले यात्री उन बसों में नहीं बैठते हैं। यह मुख्‍य कारण है इसलिए एक या दो किलोमीटर के अन्‍दर जाने वाली बसों में हमारे लिए संचालन करना मुश्किल है फिर भी गंगरार के माननीय सदस्‍य ने बात कही है ... (व्‍यवधान)

श्री अर्जुन लाल जीनगर (गंगरार): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  30 वर्षों से गंगरार में बस जा रही है।

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): तो उस पर हम विचार करके उस बस का संचालन करेंगे, यह मैं आपको विश्‍वास दिलाना चाहता हूं। दूसरा, हमारे माननीय सदस्‍य नाथूसिंहजी ने वेट के संबंध में इश्‍यू उठाया। ... (व्‍यवधान)

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): 000

श्री अध्‍यक्ष: आप बैठे-बैठे नहीं बोलेंगे। अंकित नहीं हो।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): 000

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): वेट से संबंधित इश्‍यू उठाया है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वेट से संबंधित आपने इश्‍यू उठाया है। ... (व्‍यवधान)

श्री अर्जुन लाल जीनगर (गंगरार): क्‍या आप उस डिपो मेनेजर को हटाकर जांच करेंगे या उसको रखकर करेंगे?

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): हटाकर जांच कर देंगे। उसमें क्‍या है, हटाकर जांच कर देंगे। ... (व्‍यवधान)

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): 000

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री अध्‍यक्ष: आप तो यातायात मंत्रीजी, इतना ही बता दीजिए ... (व्‍यवधान) एक प्रश्‍न है इनका। माननीय सदस्‍य, एक प्रश्‍न पर 35 मिनट हो गये हैं। अं‍कित नहीं हो। माननीय सदस्‍य, अपना-अपना स्‍थान ग्रहण करें। माननीय सदस्‍यगण, अपना-अपना स्‍थान ग्रहण करें। माननीय मंत्रीजी, आप मोटी सी इतनी बात बता दीजिए कि 2004 में कितना घाटा था, वह घाटा आपने कम किया है या वह घाटा और बढ़ गया? बस, इतनी सी बात बता दीजिए। ... (व्‍यवधान)

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): 000

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो। अंकित नहीं हो। ... (व्‍यवधान)

श्री हरीसिंह रावत (भीम): 000

श्री अध्‍यक्ष: आप तो मोटी बात बता दीजिए। अंकित नहीं हो रहा है। जवाब आने दीजिए पहले।

श्री बद्रीलाल जाट (कपासन): 000

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण, अपना-अपना स्‍थान ग्रहण करें। ... (व्‍यवधान) अंकित नहीं हो रहा है। लेट हिम सिट। ... (व्‍यवधान) आप कृपया स्‍थान ग्रहण करें। धोद से आने वाले माननीय सदस्‍य, स्‍थान ग्रहण कीजिए। माननीय सदस्‍यगण, स्‍थान ग्रहण कीजिए। ... (व्‍यवधान)

श्री जोगेश्‍वर गर्ग (जालौर): 000

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): धोद से आने वाले माननीय सदस्‍य, एक मिनट में मैं ... (व्‍यवधान)

श्री हीरालाल (निवाई): 000

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): 000

श्री अध्‍यक्ष: पहले प्रश्‍न का जवाब दे रहे हैं वह। आप कृपया स्‍थान ग्रहण कर लें। धोद से आने वाले माननीय सदस्‍य, आप कृपया स्‍थान ग्रहण कर लें। आप कृपया स्‍थान ग्रहण करें। आसन ने जो कहा है उसका जवाब दे रहे हैं वह। ... (व्‍यवधान) प्‍लीज, बैठिये आप। ... (व्‍यवधान)

श्री जोगेश्‍वर गर्ग (जालौर): 000

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री अध्‍यक्ष: आप एक मिनट, जवाब तो देने दीजिए। ... (व्‍यवधान) स्‍थान ग्रहण करें। ... (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

श्री राकेश मेघवाल (परबतसर): 000

श्री अमराराम (धोद):  000

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो। अंकित नहीं हो रहा है। आप आसन से भी बड़े हो गये कि उनको जवाब नहीं आया अभी तक आसन का और आप बीच में खड़े हो गये, स्‍थान ग्रहण करिये।

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, आपका जवाब बाद में निकलेगा। मैंने कहा स्‍थान ग्रहण करें। आपसे कह रही हूं, स्‍थान ग्रहण करें। मैं आपसे निवेदन कर रही हूं कि आप स्‍थान ग्रहण करें। ... (व्‍यवधान)

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आसन का आदेश हुआ है। मैं निवेदन करूंगा कि 1998 में जब हमारे मित्र सत्‍ता में आये तो ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: अब आप 98 में चले जा रहे हो। ... (व्‍यवधान) 

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): तो कम्‍पेरीजन तो होगा। कम्‍पेरीजन तो होगा। ... (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): 000

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): 000

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं 1998 से 2007 तक का पूरा देता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: इतने महत्‍वपूर्ण प्रश्‍न पर आप इतने आदमी खड़े हो जाते हो। ... (व्‍यवधान) अंकित नहीं हो।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000 

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री):... (व्‍यवधान)  आपने क्‍या-क्‍या किया, क्‍या-क्‍या उपाय किया, कितने लाभ में आये, पहले क्‍या था, दोनों स्थितियों का कम्‍पेरीजन होगा। बेलेंसशीट तो दोनों की ही बतायी जाएगी। रोडवेज ने कोई सजावटी विज्ञापन नहीं दिये हैं हमने। ... (व्‍यवधान)  रोडवेज ने हमारे आने के बाद एक भी सजावटी विज्ञापन नहीं दिये गया है। यह आप असत्‍य बात कह रहे हैं। एक भी सजावटी विज्ञापन नहीं दिया गया। रोडवेज के प्रचार-प्रसार के अलावा कोई भी सजावटी विज्ञापन नहीं दिया। जब हमारी रोडवेज का एक अक्‍टूबर का जन्‍म दिन आता है, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, तो हम विज्ञापन देते हैं। इसके अलावा रोडवेज कभी भी कोई सजावटी विज्ञापन नहीं देती है। आप विज्ञापन भी निकाल कर देख सकते हैं। विज्ञापन निकाल कर देख सकते हैं। जब रोडवेज का जन्‍म दिन आता है, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उस दिन निश्चित रूप से हम अखबारों के माध्‍यम से, मीडिया के माध्‍यम से विज्ञापन देते हैं। मैं आपको कहना चाहूंगा कि हमारे आने के बाद में हमने किसी भी तरीके का कोई विज्ञापन नहीं दिया। सिर्फ सजावटी विज्ञापन वह दिये हैं जब हमारे रोडवेज का जन्‍म दिन था। ... (व्‍यवधान)

 

spp/usc/11.40/1e/21.3.2007(1)

 

श्री अध्‍यक्ष: आप जवाब क्‍यों दे रहे हैं, अंकित ही नहीं हो रहा। जवाब क्‍यों दे रहे हैं आप, मैंने अंकित ही नहीं करने दिया। ...(व्‍यवधान)...

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, आपकी बात का उत्‍तर रह जायेगा। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 1998-99 में 44 करोड़ का घाटा था, आगे 73 करोड़ का घाटा था, मतलब इनके पाँच साल के कार्यकाल में 44 करोड़ का घाटा निगम को हुआ।  ...(व्‍यवधान)...

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): 000

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 000

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): और हमारे आने के बाद में 2004-05 में...(व्‍यवधान)....

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री हीरालाल (निवाई): 000

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): मैं आपके सत्‍ता में आने के बाद की बात कर रहा हूं, पहले की तो बात ही नहीं कर रहा। पहले तो माननीय भैरोंसिंह जी के राज में रोडवेज प्‍लस में थी। उसको अगर कोई घाटे में लेकर आया तो आपकी सरकार लेकर आई और माननीय भैरोंसिंह जी के शासन में वह प्‍लस में थी और जो 250 करोड़ रुपये का घाटा दिया, वह हमारे को विरासत में मिला। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह कहना चाहूंगा कि 2006-07 में इनके किये हुए पापों को धोकर इस वर्ष यह रोडवेज प्‍लस में आयेगी। यह विश्‍वास मैं सदन को दिलाना चाहता हूं । हम अच्‍छी स्थिति में आये हैं, राजस्‍थान की जनता को नई बसें दी हैं और आज जो राष्‍ट्रीय स्‍तर पर जो सर्वे हुआ है, वह इन तीन राज्‍यों में - उड़ीसा, तमिलनाडु और राजस्‍थान के बीच में कम्‍पीटिशन है और मुझे विश्‍वास है कि आप सब के आशीर्वाद से, जनता के सहयोग से यह राजस्‍थान राज्‍य प‍थ परिवहन निगम अव्‍वल स्‍थान पर इस वर्ष आयेगी और इस वर्ष में हम घाटे से उबरकर पहली बार दस साल बाद में फायदे में आयेंगे, यह स्थिति आज की तारीख में बनी हुई है, यह मैं हमारी विधान सभा में कहना चाहता हूं, धन्‍यवाद।

श्री अध्‍यक्ष: श्री प्रतिभा सिंह, नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन।

श्री जोगेश्‍वर गर्ग (जालौर): अध्‍यक्ष महोदय, पौन घण्‍टे से मेरा हाथ ऊपर है। अध्‍यक्ष महोदय, पौन घण्‍टे से मेरा हाथ ऊपर है और मुझे बहुत अफसोस है, अनुशासन की कोई कद्र नहीं है। नियम पालन करने वाले की कोई कद्र नहीं है। अनुशासन की कोई कद्र नहीं है आपके यहां, सॉरी।

श्री अध्‍यक्ष: एक प्रश्‍न पर 42 मिनट हो गये हैं और सभी के प्रश्‍न महत्‍वपूर्ण हैं।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): माननीय जोगेश्‍वर जी, पिछले पौने तीन साल में माननीय मुख्‍य मंत्रीजी ही नहीं देख पायीं हाथ तो अध्‍यक्ष जी कैसे देख पायेंगी ?

श्री अध्‍यक्ष: श्रीमती प्रतिभा सिंह, आपको प्रश्‍न नहीं पूछना क्‍या ?

श्रीमती प्रतिभा सिंह : माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने प्रश्‍न नम्‍बर बोल दिया।

ग्राम पंचायत क्षेत्र टोडपुरा (नवलगढ़) के विकास हेतु आवंटित राशि

192. श्रीमती प्रतिभा सिंह (नवलगढ़): क्‍या जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे :-

(1) सरकार द्वारा बिखरी जनजाति के विकास हेतु वर्ष 2005-06 एवं 2006-07 में कुल कितना बजट आवंटित किया गया ?

(2) विधान सभा क्षेत्र नवलगढ़ में बिखरी जनजाति के विकास हेतु उक्‍त अविध में कितनी राशि व्‍यय की गयी तथा कितने व्‍यक्तियों को लाभान्वित किया गया ? प्रत्‍येक कार्य एवं राशि सहित विवरण सदन की मेज पर रखें।

(3) क्‍या यह सही है कि विधान सभा क्षेत्र नवलगढ़ की ग्राम पंचायत टोडपुरा में काफी संख्‍या में जनजाति की जनसंख्‍या है ? यदि हां, तो इनके लिये सरकार द्वारा कितनी कितनी राशि आंवटित की गई व नहीं , तो क्‍यों ?

(4) क्‍या सरकार ग्राम पंचायत टोडपुरा पंचायत समिति नवलगढ़ जिला झुन्‍झुनूं को बिखरी जनजाति विकास हेतु अतिरिक्‍त बजट आवंटित करने का विचार रखती   है ? यदि हां, तो कितना एवं कब तक व नहीं तो क्‍यों ?

महिला एवं बाल विकास मंत्री (श्री कनकमल कटारा): (1) सरकार द्वारा बिखरी जनजाति हेतु वर्ष 2005-06 एवं 2006-07 में क्रमश: राशि 1142.83 लाख एवं 1891.31 लाख कुल 3034.14 लाख रुपये का बजट आंवटन किया गया।

(2) विधान सभा क्षेत्र नवलगढ़ में उक्‍त अवधि में व्‍यय की गई राशि एवं लाभान्वित व्‍यक्तियों का विवरण परिशिष्‍ट-1 पर संलग्‍न है।

(3) जी हां, उक्‍त अवधि में ग्राम पंचायत टोडपुरा के लिये राशि रू0 .013 लाख आवंटित किये।

(4) बजट की उपलब्‍धता एवं प्राप्‍त प्रस्‍तावों के अनुसार राशि आवंटित की जाती है।

श्रीमती प्रतिभा सिंह (नवलगढ़): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍मम से मंत्रीजी से पूछना चाहूंगी कि सन् 2006-07 में पूरे नवलगढ़ विधान सभा क्षेत्र में आपने प्रतिभावान छात्रवृत्ति के नाम पर 3500 रुपये दिये । इतने बड़े इलाके में जहां पर पूरी जनजाति क्षेत्र के लिये एक पंचायत आरक्षित हैं, वहां आपको एक ही व्‍यक्ति मिला 3500 रुपये देने के लिये, बड़ी शोचनीय बात है तो इसका कारण बतायेंगे कि पूरे इलाके में एक ही को क्‍यों चुना ?

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रतिभावान छात्र होगा उसको ही मिलेगा, हर किसी को तो मिलेगा नहीं। जो प्रस्‍ताव आया उसके अनुसार आवंटित कर दी।

श्री अध्‍यक्ष: प्रतिभा तो आपके पास आई और प्रतिभावान बचे ही कहां ?

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): प्रतिभा सिंह तो राज्‍यपाल भी हैं, एक ही कैसे हैं।

श्री मुरारीलाल मीणा : माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा एक प्रश्‍न माननीय मंत्री महोदय से पूछना चाहूंगा सन्  2005-06 और 2006-07 में 30.34 लाख रुपये कुल बजट आवंटित हुआ जनजाति बिखरी आबादी के लिये।

श्री अध्‍यक्ष: यह अलग से प्रश्‍न है।

श्री मुरारीलाल मीणा : इसमें से टोटल खर्चा कितना हुआ, पहले कितना था और बैलेंस कितना रहा ?

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अध्‍यक्ष महोदय, नवलगढ़ विधान सभा क्षेत्र में 2005-06 में तो 2 लाख 25 हजार रुपये खर्च किया और 2006-07 में मात्र 3500 रुपये खर्च किये। यह आपने एक साल में इतना भेदभाव सिर्फ इसलिए किया कि ये कांग्रेस की एसोसियेट मैम्‍बर हो गयीं ।

श्री मुरारीलाल मीणा : अध्‍यक्ष महोदय, टोटल राजस्‍थान के लिये 30.34 लाख का बजट ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): यह मंत्रीजी आपका उत्‍तर कह रहा हूं । 2005-06 में आपने 2 लाख 25 हजार रुपये खर्च किये और 2006-07 में मात्र 3500 रुपये खर्च किये। आप राजनैतिक आधार पर भेदभाव कर रहे हो और जो कांग्रेस से जुड़े हुए सदस्‍य हैं, उनके क्षेत्र की उपेक्षा कर रहे हो आप ।

एक माननीय सदस्‍य : यह आरोप असत्‍य है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): यह आपका उत्‍तर कह रहा हूं । ..(व्‍यवधान)..

श्रीमती प्रतिभा सिंह (नवलगढ़): मंत्री महोदय, आपके दिये आंकड़े इस तथ्‍य की पुष्टि कर रहे हैं। ...(व्‍यवधान)....

श्री मुरारीलाल मीणा :  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सारे ट्राइबल की उपेक्षा हो रही है। मैं आपसे निवेदन करना चाहूंगा कि 30.34 लाख रुपये दोनों सालों में आंवटित हुआ, उसमें से पूरे राजस्‍थान में कितना खर्च हुआ और बैलेंस कितना रहा और क्‍यों रहा ?

श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): माननीय अध्‍यक्षजी, क्‍या सरकार के पास बिखरी हुई आबादी ...

श्री अध्‍यक्ष: मैंने जीतमल खांट का नाम पुकारा है।

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): माननीय अध्‍यक्ष जी, मंत्रीजी यह बतायें कि ग्राम पंचायत टोडपुरा में मात्र 13 हजार रुपये खर्च किये हैं । मैं आपके माध्‍यम से पूछना चाहता हूं कि ग्राम पंचायत टोडपुरा में आदिवासी परिवारों की कितनी संख्‍या है ?

श्री अध्‍यक्ष: आदिवासी नहीं, जनजाति हैं। आदिवासी नहीं हैं वहां ।

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): जनजाति हैं, और एक परिवार के हिस्‍से में कितनी राशि आती है, यह आप बता दें।

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष जी, यह आपका कहना कि 13 हजार रुपये किये, यह 1300 रुपये हैं और टोडपुरा में कुल जनसंख्‍या ...(व्‍यवधान)...

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): यह तो बहुत बड़ी तकलीफ है 13 हजार के बजाय 1300 रुपये हैं ।

श्री अध्‍यक्ष: आप सुनो तो सही।

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): टोडपुरा में कुल जनसंख्‍या 4,932 हैं, उसमें जनजाति की हैं 1281, एक गांव और पड़ता है इस पंचायत में किरोड़ी, जिसके अंदर 1526 कुल जनंसख्‍या और उसमें 56 मात्र जनजाति में और इसलिए जो हिस्‍सा राशि जो को-ऑपरेटिव संस्‍था की सदस्‍य बनने को देना था, वह पूरी पीछे 1 से 26 तक जितने भी नाम हैं, चाहें तो मैं पढ़ दूं, यह पूरी की पूरी हिस्‍सा राशि इनको जमा करवा दी है।

श्री अध्‍यक्ष: डॉ.पी.पी.जोशी।   

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान में दो तरह के आदिवासी हो जायेंगे। एक वह आदिवासी जो ट्राइबल सब प्‍लान में रहते हैं, दूसरे आदिवासी, जो ट्राइबल सब प्‍लान में नहीं रहते हैं। क्‍या मंत्री महोदय यह बतायेंगे कि जो आदिवासी ट्राइबल सब प्‍लान में नहीं रहते हैं, खास तौर से मावली, कुम्‍भलगढ़, गोगुन्‍दा और नाथद्वारा और बहुत-से क्षेत्र हैं, बूंदी भी हैं वह जो ट्राइबल सब प्‍लान में नहीं रहने वाले आदिवासी हैं उनकी संख्‍या लगभग 12 लाख से ज्‍यादा हैं। क्‍या राजस्‍थान सरकार को बिखरी हुई जनसंख्‍या, जो आदिवासी की है, वह जनसंख्‍या, उन जनसंख्‍या के आधार पर पैसे का अलोकेशन करने का विचार रखती हैं ?

श्री अध्‍यक्ष: यह तो अलग से प्रश्‍न है आपका ?

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): इसके अंदर है। बिखरी जनसंख्‍या यह हमारी सरकार की बता रहा हूं। बिखरी जनसंख्‍या में राजस्‍थान सरकार और भारत सरकार को पैसा मिलता है । यह राजस्‍थान सरकार और भारत सरकार लिखा है इसमें से केवल मात्र 20 करोड़ रुपये करते थे 12 लाख आदमी के हिस्‍से में 1500 रुपये दे रहे हैं आप तो नोन ट्राइबल इलाके में जितने आदिवासी हैं, उन आदमियों के 100 रुपये हिस्‍से आयेंगे और राजस्‍थान में दो तरह के आदिवासी हो जायेंगे । इससे आप भला नहीं कर पायेंगे। इसलिए बिखरी हुई जनसंख्‍या और माडा में रहने वाली जनसंख्‍या के लिये पैसे की व्‍यवस्‍था करें।

श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री महोदय से यह जानना चाहता हूं कि क्‍या सरकार के पास उन आदिवासियों के लिये कोई प्‍लान है जो ट्राइबल सब प्‍लान में नहीं रहते हैं, जो छितरी हुई आबादी में हैं । हमारे यहां 32 हजार की आबादी है आदिवासियों की और उनके लिये क्‍या प्‍लान है ? क्‍या आप ट्राइबल सब प्‍लान में रहने वाले आदिवासी और उस जनरल कास्‍ट की जगह रहने वाले आदिवासियों में भेद करना चाहते हैं । आखिर आके पास उसके लिये क्‍या प्‍लान है ? क्‍या वह ऐसे का ऐसा रहेगा । आज जनजाति के लिये सारा का सारा प्‍लान है। कहीं पर भी जनजाति का व्‍यक्ति होगा, वह लाभ उठा सकता है।

श्री अध्‍यक्ष: आप भाषण नहीं दें, प्रश्‍न पूछें।

श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): अगर अनुसूचित जाति का व्‍यक्ति हमारे एरिये में है, उसको कोई लाभ नहीं मिल सकता है, उसके लिये किस प्रकार की व्‍यवस्‍था आप करने जा रहे हैं। 

 

Msr/usc/1150/1f/21032007

 

श्री अध्‍यक्ष: भाषण नहीं, आप प्रश्‍न पूछिये। भाषण दे रहे हैं आप।

श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): और अनुसूचित जनजाति का व्‍यक्ति हमारे एरिया में है उसको कोई लाभ नहीं मिल सकता। किस प्रकार की व्‍यवस्‍था आप करने जा रहे हैं।

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य ने बिखरी क्षेत्र और मावली से आने वाले माननीय सदस्‍य ने भी इस पर चिंता जाहिर की है कि बिखरी माडा, टाडा क्षेत्र में रहने वाले ऐसे जनजाति भाइयों के लिए राशि और उस पर व्‍यय कम किया जा रहा है, इनके लिए क्‍या होगा?

श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): नहीं, माननीय मंत्री महोदय, मैं माडा, टाडा की बात नहीं कह रहा हूं, माडा टाडा के अलावा दूसरी आबादी और है। माडा, टाडा में हमारे यहां दो विलेज हैं। केवल डबोक अकेले में 1500 आदीवासी हैं और नाहरमगरा में 2500 लोग हैं जो माडा और टाडा में नहीं आते हैं उनके लिए आपके पास क्‍या प्‍लान है?

श्री अध्‍यक्ष: जवाब तो सुन नहीं रहे हो आप और खड़े हो जाते हो बीच में।

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): माटा, टाडा के अन्‍दर बिखरी योजना के अन्‍तर्गत भी हम ने राशि का प्रावधान इस बार किया है। मैं मुख्‍यमंत्रीजी को बहुत-बहुत आभार, धन्‍यवाद आप सब की ओर से देना चाहूंगा कि पहली बार बहुत अच्‍छा बजट, एक करोड़ 54 लाख का बिखरी जाति के लोगों के लिए दिया है और इसलिए मैं सोच रहा हूं कि इसमें बहुत कुछ, आपके जितने भी प्रस्‍ताव आयेंगे तो बजट की उपलब्‍धता के आधार पर इसमें लेकर आयेंगे। ...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आप क्‍या बात कर रहे हो? आपका टोटल ट्रायबल सब प्‍लान का कितना पैसा है? महाराष्‍ट्र पैटर्न के हिसाब से दस डिपार्टमेंट का आपका यह डेढ़ परसेंट पैसा आ रहा है। आपका बजट है करीब 400, 500 करोड़ रुपये का जो नोन ट्रायबल में रहते हैं, मावली से आने वाले माननीय सदस्‍य ने कहा, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, शिड्यूल्‍ड कास्‍ट का आदमी किसी भी जगह रहे उसको पूरा फायदा मिलता है लेकिन ट्रायबल जो है एस.टी. उसमें ट्रायबल सब प्‍लान के अलावा जो आदिवासी रह रहा है  उसको वो लाभ नहीं मिल रहा, ना व्‍यक्तिगत लाभ मिल रहा है ना एरिया डवलपमेंट का लाभ मिल रहा है।

क्‍या राजस्‍थान सरकार नोन ट्रायबल में रहने वाले राजस्‍थान के जो ट्रायबल हैं, चाहे वो माडा में आएं चाहे स्‍केटर्ड पापुलेशन में आएं चाहे नहीं आएं, उन ट्रायबल को भी एस.सी. की तरह लाभ देने के लिए योजना बनानी रही है? एक करोड़ तो 12 लाख में कोई पैसा ही नहीं है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान सरकार को सिद्धांतत: इस बात की स्‍वीकृति देनी पड़ेगी कि ट्रायबल सब प्‍लान के अलावा जो ट्रायबल हैं उन सब को भी वह लाभ मिले। यह सरकार की मंशा है या नहीं?

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप जब शासन में थे तब भी ...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): हम शासन में थे जब आरती उतार रहे थे। यह 1986 में बिखरी वाला ही हमने किया, यह माडा वाला हमने ही किया, खड़े होकर बताओ सरकार, बिना जानकारी के बात नहीं करते हैं।

राजस्‍थान सरकार को और माननीय कनकमलजी, आप काबिल मंत्री हैं, आप से आशा करते हैं कि राजस्‍थान सरकार से सिद्धांतत: फैसला कराएं कि राजस्‍थान सरकार ट्रायबल सब प्‍लान के अलावा भी राजस्‍थान में जो ट्रायबल रह रहा है चाहे वो माडा में आता है चाहे बिखरी जनसंख्‍या में आता है या नहीं आता है, व्‍यक्तिगत लाभ की योजना भी उन सब आदिवासियों को मिलेगी, इसका हम एलोकेशन करेंगे, यह घोषणा करिये आप।

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपकी चिंता वाजिब है और उसके अनुसार आप जब सरकार में थे उस समय 43 करोड़ रुपये की स्‍वीकृति और अभी भी 81 करोड़ रुपये की स्‍वीकृति का प्रावधान हमने रखा है।

श्रीमती प्रतिभा सिंह (नवलगढ़): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे मूल प्रश्‍नकर्ता के तो कोई जवाब ही नहीं आ रहे हैं। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इतनी देर से हाथ उठा रखा है, आप देख भी नहीं रही हैं।

श्री अध्‍यक्ष: मंत्रीजी खड़े हैं न, तो मंत्रीजी का जवाब तो सुन लो। ...(व्‍यवधान)... बैठ जाइये आप, जवाब सुन कर फिर ...(व्‍यवधान)...

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): और उसके अनुसार ही पिछले समय में उसके अनुसार सभी को लाभ मिलेगा। इसके अलावा छात्रावासों में जितने भी जनजाति छात्र हैं इनको व्‍यक्तिगत लाभ में और छात्रावास में रहने वाले का और जितने भी हैं उनको लाभ अच्‍छी तरह से मिल रहा है। लेकिन फिर भी मैं यह निवेदन करना चाहता हूं कि भारत सरकार की हमें कुछ गाइड लाइन हैं उसके अनुसार जब बी.पी.एल. परिवारों की, यानी कि जो राशि होती है वह जनसंख्‍या के आधार पर होती है और इसीलिए जो व्‍यय करना होता है वह अधिकतर बी.पी.एल. परिवार के हिसाब से हम को व्‍यय करना होता है इसलिए जहां पर माडा और टाडा क्षेत्र और बिखरी जनजाति क्षेत्र हैं वहां बी.पी.एल. की संख्‍या कम और ट्रायबल सब प्‍लान एरिया के अन्‍दर जहां पर उसकी बी.पी.एल. की संख्‍या ज्‍यादा और जनसंख्‍या के आधार पर जब पैसा आता है तो उसके अनुसार हमें उस पैसे को खर्च करने में हमारी तकलीफ होती है और इसलिए आपकी चिंता वाजिब है। हम सोच रहे हैं कि आने वाले समय में, अभी पिछले समय भारत सरकार की मीटिंग थी, मैं गया था, केन्‍द्रीय मंत्रीजी को मैंने कहा था कि यह हमारी आधारभूत समस्‍या है और उसके कारण से हम जनजाति भाइयों को हम लाभ नहीं दे पा रहे हैं, इसके अन्‍दर परिवर्तन करिये। उन्‍होंने कहा है कि यह गाइड लाइन भारत सरकार की पूरे भारत की है, अब एक प्रांत के लिए हम अलग से नहीं फिर भी हम विचार करेंगे कि इसके लिए क्‍या कर सकते हैं। डीटेल में मैंने पूरा बताया था।

इसलिए मैं सोचता हूं आने वाले समय में पूरी तरह से हम कोशिश करेंगे कि इस क्षेत्र की बिखरी और अन्‍य टाडा माडा क्षेत्र में रहने वाले, उसकी राशि और ज्‍यादा बढ़े और उसका खर्च कैसे करें, इसके लिए हम पूरी व्‍यवस्‍था करेंगे। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन। श्री प्रमोद जैन भाया

श्रीमती प्रतिभा सिंह (नवलगढ़): माननीय अध्‍यक्ष महोदय।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नवलगढ़ से आने वाली माननीय सदस्‍या ने प्रश्‍न उठाया उसका तो जवाब दिया नहीं और दूसरी बातों के ऊपर कि आने वाले समय के अन्‍दर करने के लिए आश्‍वासन दे रहे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: दिया कैसे नहीं, दे तो दिया। दे तो दिया जवाब उसका, आप थे ही नहीं, आप तो वहां बैठे थे।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): उसके साथ कैसे भेदभाव हुआ, वो बताइये आप।

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): मैंने जवाब दे दिया।

श्री अध्‍यक्ष: हां, दे दिया जवाब। आप तो वहां पधारे थे, आप यहां थे नहीं। ...(व्‍यवधान)...

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): कहां दे दिया? ...(व्‍यवधान)...

एक माननीय सदस्‍य: आपका ध्‍यान कहीं और था।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): वहां बैठा सुन रहा था पीछे।

श्री अध्‍यक्ष: दे दिया जवाब।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न संख्‍या 6 स्‍थगित प्रश्‍न है।

श्री अध्‍यक्ष: हां, इसलिए मैंने नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन पुकार लिया।

नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन। श्री प्रमोद जैन भाया

श्रीमती प्रतिभा सिंह (नवलगढ़): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे को तो प्रश्‍न करने का मौका दीजिए आप।

श्री अध्‍यक्ष: आपका प्रश्‍न का जवाब दे दिया उन्‍होंने।

श्रीमती प्रतिभा सिंह (नवलगढ़): नहीं दिया, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक ही बिंदु के लिए किया था।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राजनीतिक आधार पर भेदभाव हो रहा है। मंत्रीजी ने खुद ने जवाब में कहा है कि 2005-06 में 2,25,000/- रुपये इनकी कांस्‍टीट्युएंसी में खर्च किये, 2006-07 में मात्र 3500 रुपये किये।

मैंने बहुत स्‍पष्‍ट पूछा है कि यह कांग्रेस के एसोसिएट मैम्‍बर हो गयीं इसलिए राजनीतिक भेदभाव कर रही सरकार। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: मैंने नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन पुकार लिया। ...(व्‍यवधान)... 

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): आप गलत आरोप लगा रहे हैं राजनीतिक आधार पर, विधान सभा वाईज इस तरह से नहीं जो प्रस्‍ताव आते हैं उसके अनुसार हम स्‍वीकार करते हैं। ऐसा थोड़ी हम भेदभाव कर के दे रहे हैं। यह गलत आरोप है। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: मैंने नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन पुकार लिया।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): क्‍या कारण रहा कम करने का?

श्री अध्‍यक्ष: मैंने नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन पुकार लिया।

सहायक अभियंता, बारां द्वारा कचरा कण्‍टेनर क्रय प्रकरण की जांच

193. श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): क्‍या स्‍वायत्‍त शासन मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) वर्ष 2006 में किस-किस नगरपालिका को कितने-कितने कचरा कण्‍टेनर की किस-किस फर्म या कम्‍पनी के माध्‍यम से आपूर्ति की गई? विवरण सदन की मेज पररखें।

(2) उक्‍त कचरा कण्‍टेनर निर्धारित वज़न के नहीं होने की जांच नगर पालिका, बारां के सहायक अभियंता से करवाने के क्‍या परिणाम रहे? जांच रिपोर्ट की प्रति सदन की मेज पर रखें।

(3) सरकार द्वारा निर्धारित मानदण्‍ड अनुसार कचरा कण्‍टेनर की आपूर्ति नहीं देने पर फर्म के विरुद्ध क्‍या कार्यवाही की गई? विवरण सदन की मेज पर रखें।

(4) राज्‍य स्‍तर परखरीदे गये कचरा कण्‍टेनर हेतु कितनी राशि का भुगतान सम्‍बन्धित फर्म को किया गया? विवरण सदन की मेज पर रखें।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): (1) वित्‍तीय वर्ष 2006-07 में अब तक बारहवें वित्‍त आयोग की सिफारिशों के अन्‍तर्गत प्राप्‍त अनुदान से आपूर्ति किये गये कण्‍टेनरों का परिशिष्‍ट पर एवं आर.यू.आई.डी.पी. द्वारा ए.डी.बी. द्वारा वित्‍त पोषित परियोजना के तहत आपूर्ति किये गये कण्‍टेनरों का विवरण परिशिष्‍ट पर संलग्‍न है।

(2) नगर पालिका बांरा द्वारा नेशनल स्‍माल इंडस्‍ट्रीज कारपोरेशन लिमिटेड, जयपुर को जारी क्रय आदेश के क्रम में फर्म द्वारा आपूर्ति किये गये कचरा पात्रों में से एक कचरा पात्र का वज़न दिनांक 29.11.2006 को सहायक अभियंता, नगर पालिका, बारां द्वारा करवाया गया जिसका वज़न 435 किलोग्राम पाया गया, जो निर्धारित वज़न 500 किलोग्राम से कम होने के कारण समस्‍त कचरा पात्र फर्म को लौटाए गए। पुन: दिनांक 11.12.2006 को फर्म द्वारा कण्‍टेनर आपूर्ति करने पर सहायक अभियंता, नगर पालिका बारां द्वारा वज़न कराये जाने पर 24 कण्‍टेनरों का औसत वज़न 488.54 किलोग्राम पाया गया। दोनों जांच रिपोर्ट परिशिष्‍ट पर संलग्‍न है।

(3) नगर पालिका द्वारा कुल 24 कण्‍टेनरों का 275 किलोग्राम वज़न कम पाये जाने पर रुपये 57.80 प्रति किलोग्राम की दर से आनुपातिक कटौती रुपये 15890/- की जा कर फर्म को भुगतान किया गया।

(4) राज्‍य स्‍तर पर कोई भी कण्‍टेनर नहीं खरीदा जाने से ...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): उत्‍तर गलत है, राज्‍य स्‍तर पर ही खरीदी गयी।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): अभी आप बोल देना, मैं चुपचाप आपकी बात सुनूंगा और उसका जवाब भी दूंगा।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): सारे टेण्‍डर राज्‍य स्‍तर पर हुआ है।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): आप मुझे लगता है, हरिमोहनजी, ज्‍यादा मिर्ची खा कर आते हो। ...(व्‍यवधान)...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय मंत्री महोदय मेरा काम तो मिर्ची से ही चल जाता है, आप तो पूरे जे.डी.ए. को ही खा रहे हो तो ही नहीं बोल रहे।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): आप बताओ न, आरोप लगाओ न। आप क्‍या-क्‍या कर रहे हो, मैं खुलासा करूंगा तो यहां बैठ नहीं पाओगे उसके बाद।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): इन टेण्‍डरों के मामले में पाँच करोड़ और 20 लाख रुपये का सीधा यहां से आर्डर दिया है और सब नगर पालिकाओं में भेजा है। वहां कोई नगर पालिका स्‍तर पर कोई खरीद नहीं हुई।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): सब बताऊंगा। ...(व्‍यवधान)...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): और केवल-मात्र 12 का जो तुलवाया और कण्‍टेनरों को आपने नहीं तुलवाया और करोड़ों रुपये का घपला किया है।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): आपको इतनी जल्‍दी क्‍या है, आप जो भी पूछना है पूछ लीजिए, मैं जवाब दूंगा, सक्षम तरीके से जवाब देने की कोशिश करूंगा, आपको संतुष्‍ट करूंगा पर आप थोड़े सीनियर हैं, मेरे पहले वित्‍त मंत्री रह चुके हो, थोड़ा आप छोटों का ख्‍याल किया करो। ...(व्‍यवधान)...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): मिर्ची खने की बात ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): नहीं, मंत्रीजी, आपने कहा हरि मोहनजी मिर्ची खा कर आते हैं, आप यह बताओ कि मिर्ची इन्‍होंने हरी खायी थी, लाल खायी थी या काली खायी थी?

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या तमाशा करते हो आप? यह हरी और लाल, फालतू बात करते हो।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): यह तो आपके साथ खायी थी, आप बता दें कौनसी खायी थी।

(4) राज्‍य स्‍तर पर कोई भी कण्‍टेनर नहीं खरीदा जाने से कोई भुगतान राज्‍य स्‍तर से नहीं किया गया। विभिन्‍न निकायों एवं आर.यू.आई.डी.पी. द्वारा किये गये भुगतान का विवरण बिंदु संख्‍या 1 से सम्‍बन्धित परिशिष्‍ट और में अंकित है।

श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्रीजी से पूछना चाहता हूं कि 25027 कण्‍टेनरों की खरीद 187 निकायों और आर.यू.आई.डी.पी. द्वारा अपने स्‍तर पर करना बताया गया है। कृपया सदन को अवगत करावें कि 187 निकायों एवं आर.यू.आई.डी.पी. ने कण्‍टेनरों की खरीद हेतु निविदाएं कब-कब जारी कीं? क्‍या सभी निकायों में एक ही दरों के टेण्‍डर एक ही फर्म के नाम से लोएस्‍ट आये निविदाएं और तुलनात्‍मक विवरण सदन की मेज पर रखें।

 

Ars/usc/1200/1g/21032007/1

 

नम्‍बर दो, बारां नगरपालिका में प्रत्‍येक कंटेनरों में वज़न कम पाया गया इसलिए यह प्रतीत होता है कि समस्‍त जगह सप्‍लायर एक ही था तो पूरी खरीद में एक करोड़ का घपला स्‍थानीय अधिकारियों द्वारा किया गया है। सरकार उक्‍त फर्म को ब्‍लैक लिस्‍टेड कर पूरी सप्‍लाई की जांच भ्रष्‍टाचार निरोधक विभाग से करवाने का मानस रखती है? अगर हां, तो कब तक और नहीं तो क्‍यों ?

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जिस प्रकार से हमारे पास हमने सब नगरपालिकाओं को इस प्रकार के आदेश पारित किए थे, निविदाएं यहां पर आमंत्रित कीं थीं, चीफ सेक्रेटरी ...(व्‍यवधान) के लेवल पर एक कमेटी बनी थी। कमेटी का एक्‍जामिनेशन करने के लिए एक कमेटी और बनी थी उसके बाद हमने सभी नगरपालिकाओं को यह कह दिया था कि आप अपने लेवल पर इन इन फर्मों से यह कंटेनर खरीद सकते हो।

श्री रामकिशोर मीणा (सिकराय): अब सदन को गुमराह मंत्री जी ने किया है, अब मंत्री जी आप तो साफ बता दीजिए ...(व्‍यवधान)

श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): जब कंटेनर का वज़न कम पाया गया तो फर्म को ब्‍लेक लिस्‍टेड क्‍यों नहीं किया गया और सरकार की  ...(व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): एक मिनट माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: हिण्‍डोली से आने वाले माननीय सदस्‍य क्‍या गुमराह किया, उन्‍होंने कहा ...(व्‍यवधान) हां, निविदाएं आमंत्रित की।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): गुमराह यह किया कि इन्‍होंने कहा कि सब स्‍थान पर लोकल नगरपालिकाओं के द्वारा खरीद की गयी है और टेण्‍डर यहां आमंत्रित किये गये। सब नगरपालिकाओं को यहां से सामान भिजवाया गया और नगरपालिकाओं से कहा गया कि आप सीधा पेमेण्‍ट कर दो, यदि नहीं तो यहां से खरीद करके ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): मैं तो यह जानना चाहता हूं कि यह निर्णय आप करें कि एक ही जगह टेण्‍डर ...(व्‍यवधान)

श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): मेरी बात का जवाब तो आ जाने दो।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): लेकिन जहां तक जांच की बात है तो माननीय मंत्री जी साफ है गड़बड़ घोटाला हुआ कि नहीं हुआ, जांच में साफ हो जाएगा। आप विधायकों की कमेटी बनाओ, आप अधिकारियों की कमेटी बनाओ और मंत्रीमण्‍डल की कमेटी बनाओ। सीधा आरोप लग रहा है कि एक करोड़ का घोटाला हुआ है। कृपा करके इस सदन में घोषणा करें कि घोटाला हुआ कि नहीं हुआ और हुआ है तो जांच करें, नहीं हुआ है तो जांच में साफ हो जाएगा। हम तो इतना सा चाहते हैं यही माननीय सदस्‍य चाहते हैं।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी ने माना है कि बारां के जो कंटेनर हैं उनकी दो बार आपने जांच करवाई, दोनों बार वज़न कम है, यह तो आप मानते हैं, यह आपका उत्‍तर है। इसका मतलब जो कंटेनर बारां में सप्‍लाई हुए हैं वहीं कंटेनर पूरे राजस्‍थान में सप्‍लाई हुए हैं तो उनका वज़न कम है और वज़न कम होने से जो पैसे का मामला है तो वह एक करोड़ रुपए की राशि आती है। इसमें कहां तकलीफ है जांच करवाने में। जब आप कहते हो कि एक तरह के कंटेनर राजस्‍थान की 187 नगरपालिका में हुए और बारां में दो बार जांच कराने के बाद उनका वज़न कम है तो यह क्लियर कट एक्‍जाम्‍पल है अध्‍यक्ष महोदय कि राजस्‍थान में जितने कंटेनर सप्‍लाई हुए हैं उनका वज़न कम था और वज़न कम था तो स्‍पेसीमैन के हिसाब से जितना पैसा बनता है वह एक करोड़ रुपया उससे वसूल करने की आवश्‍यकता है और नहीं वसूल करते हैं तो एक करोड़ रुपए का एक्‍सेस पेमेण्‍ट किया है आपने, इसको मानना चाहिए।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): यह स्‍वीकार करें कि यही टेण्‍डर है ...(व्‍यवधान) और यहीं ....

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): क्‍या तकलीफ है, जांच करवाइये।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): पाँच करोड़ और बीस लाख के नगरपालिकाओं के कंटेनर मंगाए ...(व्‍यवधान) वह जाकर के आप देख लो ...(व्‍यवधान) नगरपालिकाओं में कंटेनर जो हैं ....

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): जवाब सुनिये ...(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय मंत्री जी खुद मानते हैं इस बात को कि कंटेनर का वज़न कम था तो आपने जांच तो दो बार करवाई.......

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): हां, मैं मान रहा हूं इस बात को कि बारां में जो कंटेनर सप्‍लाई हुए उसमें वज़न कम था, इस बात को मैं मान रहा हूं।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): बाकी में ?

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): इसका मैं मान रहा हूं, मैं जवाब दे रहा हूं।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): जब आप खुद कह रहे हो कि सब एक ही फर्म की सप्‍लाई हुई है, सब एक ही फर्म से  ...(व्‍यवधान)  आप जांच करवाइये।

श्री अध्‍यक्ष: आप जवाब तो सुन लो, जवाब तो सुन लीजिए एक बार प्रश्‍न का, ...(व्‍यवधान) आप जवाब ही नहीं सुनना चाहते ।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): आप जवाब तो सुन लो फिर संतुष्‍ट नहीं हों तो, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमने जिस भी नगरपा‍लिका को कहा उसको इस बात के लिए ताकीद किया था कि ट्राई पार्टी इंस्‍पैक्‍शन होने के बाद ही उस कंटेनर को लें। हमने इसके लिए राइट्स संस्‍था है जो भारत सरकार का उपक्रम है, राइट्स भारत सरकार का एक प्रतिष्ठित उपक्रम है जिसका गठन भारत सरकार के सबसे वृहद तकनीकी तंत्र रेल्‍वे में आपूर्ति किये जाने वाले समस्‍त सामग्री के निरीक्षण हेतु किया गया था। कालान्‍तर में अन्‍य विभागों द्वारा भी निरीक्षण कार्य राइट्स के माध्‍यम से करवाया जाना प्रारम्‍भ किया गया है। इसका राइट्स द्वारा सामग्री निरीक्षण कर गुणवत्‍ता सही पाये जाने पर सामग्री पर होलो ...(व्‍यवधान) अंकित किया जाएगा।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मंत्री जी छोडि़ए आप। अध्‍यक्ष जी, आपकी इच्‍छा की चार नगरपालिका की जांच करवा लें। आपूर्ति होने पर सामग्री में बदलाव ...(व्‍यवधान) वज़न कम नहीं हो तो हम बात कर लेंगे ...(व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, आप फैसला कर लीजिए कि राजस्‍थान की चार नगरपालिकाओं के कंटेनर का वज़न करवा दीजिए आप।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): ट्राई पार्टी इंस्‍पैक्‍शन होता है‍जिसमें राइट्स का प्रतिनिधि होता है, नगर निगम का प्रतिनिधि होता है और संबंधित फर्म का इंस्‍पैक्‍शन होता है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, यह सब थ्‍योरिटिकल बातें हैं। राजस्‍थान की चार नगरपालिकाओं के कंटेनर का वज़न करवा दीजिए उसके बाद हम बात कर लेंगे।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): उसमें संबंधित फर्म का इंस्‍पैक्‍शन होता है। रहा जहां तक बारां का सवाल है वहां ट्राई पार्टी इंस्‍पैक्‍शन नहीं हुआ है। सवाल यह पैदा होता है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, जहां के मंत्री हैं वहां की नगरपालिका का वज़न यदि कम है तो दूसरी नगरपालिकाओं की क्‍या हालत होगी ...(व्‍यवधान) आप बताइये जिस जगह का मंत्री है वहां की नगरपालिका में ऐसी माल सप्‍लाई तो बाकी नगरपालिकाओं का क्‍या होगा? बाकी में तो ...(व्‍यवधान)

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको और सदन को विश्‍वास दिलाना चाहता हूं, मेरा कोई रिश्‍तेदार नहीं लगता है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): किसने कहा कि लगता है ...(व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): जांच करवाओ इसकी।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): जिसकी भी शिकायत आएगी निश्चित रूप से उसके खिलाफ जांच करवाकर कड़ी से कड़ी कार्यवाही करुंगा। ...(व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): इनकी तो जांच करवा लो।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या तकलीफ है जांच करवाने में?

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आप एंटी करप्‍शन से ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: प्रश्‍नकाल समाप्‍त हुआ ...(व्‍यवधान) प्रश्‍नकाल समाप्‍त हुआ। ...(व्‍यवधान)  अंकित नहीं हो, अंकित नहीं हो।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): 000

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): 000

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य जो भी चार नगरपालिका बताते हैं वहां के कंटेनर की जांच  ...(व्‍यवधान)  किसी के खिलाफ जो भी कार्यवाही होगी निश्चित रूप से करूंगा।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली):  000

श्री अध्‍यक्ष: कृपया स्‍थान ग्रहण करें। मंत्री जी ने कह दिया, सदन को भरोसा दिला दिया मैं जांच करा लूंगा।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, स्‍थगित प्रश्‍न था।

श्री अध्‍यक्ष: नगर से आने वाले माननीय सदस्‍य, स्‍थगित प्रश्‍नों का कायदा यह है कि यदि वह लिस्‍ट में पहले आते हैं तो मैं करा सकती थी लेकिन अब चूंकि आपका उससे पहले तो दो क्‍वश्‍चन और हैं इसलिए स्‍थगित तो स्‍थगित है। आपको जवाब मिल जाएगा लिखित में। यही है कायदा।

अनुपस्थिति के लिए अनुमति

 

मुझे सदन को सूचित करना है कि गंगाराम चौधरी, ...(व्‍यवधान) नहीं, स्‍थान ग्रहण कर लें, सदस्‍य, विधान सभा ने शारीरिक अस्‍वस्‍थता के कारण दिनांक 20 मार्च, 2007 से सत्रान्‍त तक सदन की बैठकों से अनुपस्थित रहने की अनुमति चाही है।

क्‍या सदन की अनुमति है कि उन्‍हें सदन की बैठकों से अनुपस्थित रहने की अनुमति प्रदान की जाए ? 

(स्‍वीकृत)

सदन की सहमति से अनुमति प्रदान की गयी।

मुझे सदन को सूचित करना है कि श्रीमती उषा पूनिया, पर्यटन राज्‍य मंत्री ने अपनी पुत्री के इलाज के सिलसिले में अमेरिका जाने के कारण दिनांक 21 मार्च,2007 से सत्रान्‍त तक सदन की बैठकों से अनुपस्थित रहने की अनुमति चाही है।

 क्‍या सदन की अनुमति है कि उन्‍हें सदन की बैठकों से अनुपस्थित रहने की अनुमति प्रदान की जाए?

(स्‍वीकृति)

अनुमति प्रदान की गयी। 

vns/usc/12.10/1h/21.3.2007/1

 

स्‍थगन प्रस्‍तावों पर अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍था

श्री अध्‍यक्ष: मुझे माननीय सदस्‍यों को सूचित करना है कि निम्‍नांकित स्‍थगन प्रस्‍तावों की सूचना प्राप्‍त हुई है:-

1 डा.श्रीगोपाल बाहेती एवं दो अन्‍य सदस्‍यों की ओर से पुष्‍कर सरोवर में जलस्‍तर में कमी होने से उत्‍पन्‍न स्थिति के सम्‍बन्‍ध में।

2 श्री जुबेर खान, सदस्‍य की ओर से राज्‍य में लोकायुक्‍त की नियुक्ति अभी तक नहीं किये जाने के सम्‍बन्‍ध में।

3 श्री सी.डी.देवल एवं श्री खुशवीर सिंह, सदस्‍य की ओर से पाली शहर में रँगाई-छपाई उद्योग के कारण फैल रहे प्रदूषण से जन जीवन के भयंकर रूप से त्रस्‍त होने के सम्‍बन्‍ध में।

4 श्री रामनारायण मीणा एवं दो अन्‍य सदस्‍यों की ओर से तहसील नैनवां के ग्राम करवर में संचालित गौशाला को जिला प्रशासन द्वारा हटाने की कथित कार्यवाही के सम्‍बन्‍ध में।

उपरोक्‍त प्रस्‍ताव ऐसे नहीं हैं कि सदन की पूर्व निर्धारित कार्यवाही को रोककर इन पर विचार किया जाय, अंत: अनुमति देने में असमर्थ हूं। लेकिन जुबेर खान द्वारा जो प्रस्‍ताव दिया गया है उसको राज्‍य सरकार के पास उनके जवाब के लिये भेज दिया जायेगा। डा. बाहेती, पुष्‍कर में जल स्‍तर कोई आज कम हो रहा है क्‍या? यह कोई एकदम ... (व्‍यवधान) 

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): अध्‍यक्ष महोदय, मेरा पूरा पढि़ये। इसको आप पूरा पढि़ये।

श्री अध्‍यक्ष: हां पूरा पढ़ दूंगी। पढ़ दूंगी।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): मैंने आपको बताया कि सूर्य ग्रहण के दिन ... (व्‍यवधान) 

श्री अध्‍यक्ष: मैंने पढ़ दिया ... (व्‍यवधान) 

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): इसमें रिसेंट आकरेन्‍स है कि सूर्य ग्रहण के दिन जो स्थिति हुई ... (व्‍यवधान) 

श्री अध्‍यक्ष: जब आसन पाँवों पर होता है तो माननीय सदस्‍यों को अपना स्‍थान ग्रहण कर लेना चाहिये।

5 डा. चन्‍द्रशेखर बैद एवं 4 अन्‍य सदस्‍यों की ओर से राज्‍य के विभिन्‍न निर्माण कार्यों में कार्यरत मजदूरों को भवन व सहनिर्माण कर्मकारक अधिनियम, 1996 के अन्‍तर्गत लाभान्वित करने के सम्‍बन्‍ध में।

6 श्री संयम लोढ़ा, सदस्‍य की ओर से बेगूं कस्‍बे में तनाव की स्थिति के सम्‍बन्‍ध में।

उपरोक्‍त प्रस्‍ताव भी ऐसे नहीं हैं कि सदन की पूर्व निर्धारित कार्यवाही को रोककर इन पर विचार किया जाय, अंत: अनुमति देने में तो असमर्थ हूं फिर भी माननीय सदस्‍य डा. चन्‍द्रशेखर बैद एवं श्री संयम लोढ़ा को तीन-तीन मिनट बोलने की अनुमति होगी।

नियम 295 के अन्‍तर्गत प्राप्‍त विशेष उल्‍लेख की सूचनाएं

1 श्री के.डी.बाबर, सदस्‍य की ओर से शेखावाटी के तीर्थ राज लोहार्गल में सुविधाओं में बढ़ोतरी के सम्‍बन्‍ध में।

2 श्री बंशीलाल खटीक, सदस्‍य की ओर से ईसाई मिशनरियों द्वारा राज्‍य भर में धर्मान्‍तरण के सम्‍बन्‍ध में।

3 श्री खुशवीर सिंह, सदस्‍य की ओर से पश्चिमी राजस्‍थान के पशुपालकों को शस्‍त्र लाइसेंस देने के सम्‍बन्‍ध में।

4 श्री मदनलाल मेघवाल, सदस्‍य की ओर से मंत्रालयिक कर्मचारियों के साथ 28.20.1998 को हुए कथित समझौता को लागू करने के सम्‍बन्‍ध में।

5 श्री रणधीर सिंह भीण्‍डर, सदस्‍य की ओर से मेवाड़ इन्‍फेन्‍ट्री में केवल मेवाड़ के लोगों का चयन किये जाने हेतु केन्‍द्र सरकार से पेशकश करने के सम्‍बन्‍ध में।

6 श्रीमती प्रतिभा सिंह, सदस्‍य की ओर से विधान सभा क्षेत्र नवलगढ़ की सड़कों की स्थिति बहुत ही दयनीय होने के सम्‍बन्‍ध में।

तो नवलगढ़ की सड़कों पर तो विचार हो रहा है ना। आज यह पी डब्‍ल्‍यू डी का ही तो डिपार्टमेंट है।

7 श्री पुष्‍पेन्‍द्र सिंह, सदस्‍य की ओर से बाली के सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र को 100 शय्या एवं फालना के प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र को 50 शय्या का स्‍वीकृत करने के सम्‍बन्‍ध में।

8 श्री ज्ञान चन्‍द पारख, सदस्‍य की ओर से नगर परिषद् पाली के सभापति द्वारा अपने पद का दुरुपयोग करने के सम्‍बन्‍ध में।

9 श्री हरी सिंह रावत, सदस्‍य की ओर से भीम पंचायत को नगर पालिका बनाने के सम्‍बन्‍ध में।

10 श्री हरिमोहन शर्मा, सदस्‍य की ओर से हिण्‍डौली तहसील के 127 ग्रामों की 14872 बीघा भूमि का किस्‍म परिवर्तन कर किसानों को राहत पहुंचाने के सम्‍बन्‍ध में।

11 श्री रामनारायण मीणा, सदस्‍य की ओर से तहसील नैनवां के दुगारी बाँध की ऊँचाई बढ़ाने के सम्‍बन्‍ध में।

12 श्री भरत सिंह, सदस्‍य की ओर से प्रदेश में लुप्‍त प्राय: हो रहे गिद्दों के संरक्षण हेतु कार्य योजना बनाने के सम्‍बन्‍ध में।

माननीय सदस्‍यों को उनके द्वारा दी गई सूचना को पढ़ने की अनुमति होगी। 

डा. चन्‍द्रशेखर बैद।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): आप देखिये कि पुष्‍कर के पानी की स्थिति इतनी दयनीय है। तो यह पानी की स्थिति है ... (व्‍यवधान) 

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): पाली में जैतारण का मामला बहुत इर्म्‍पोटेंट है। लोग मर रहे हैं। शारीरिक ... (व्‍यवधान) 

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): मैंने आपसे निवेदन किया कि मुझे बोलने का अवसर दिया जाए अध्‍यक्ष महोदय ... (व्‍यवधान) 

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण, मुझे आपको निवेदन करना है कि नियम 50 में स्‍थगन प्रस्‍ताव रिसेंट आकरेन्‍स के जो होते हैं केवल उस पर दिया जाता है ... (व्‍यवधान) 

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  मेरा निवेदन आपसे यह है यह रिसेंट आकरेन्‍स ... (व्‍यवधान) 

श्री अध्‍यक्ष: आपकी एक आदत पड़ गयी है कि ... (व्‍यवधान) 

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपसे निवेदन है आप मेरा प्रस्‍ताव पढ़ें। मेरा प्रस्‍ताव पढ़ें आप।

श्री अध्‍यक्ष: आसन पांवों पर है। जो आपकी चाहे मर्जी करें। बात सुन लें पहले ... (व्‍यवधान) 

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): मैं क्‍या करूंगा मैडम ... (व्‍यवधान) 

श्री अध्‍यक्ष: हिण्‍डौली से आने वाले सदस्‍य, आसन पांवों पर है। आसन पांवों पर है ... (व्‍यवधान) 

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  हमारे ऊपर तो नियम लागू होते हैं, अधिकारियों पर लागू नहीं होते ... (व्‍यवधान) 

श्री अध्‍यक्ष: तारानगर से आने वाले माननीय सदस्‍य, एक बार बिराजें आप ... (व्‍यवधान) 

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): यह राज्‍य सरकार सदन से बड़ी नहीं है। राज्‍य सरकार सदन से बड़ी नहीं है ... (व्‍यवधान) 

श्री अध्‍यक्ष: यह जा कौन रहा है ? हूं इज ही ? कौन है यह ? ... (व्‍यवधान) 

श्री अमराराम (धोद): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  उधर देखो आप अधिकारियों का। इधर तो नियम लागू होते हैं लेकिन अधिकारियों पर लागू नहीं होते ... (व्‍यवधान) 

श्री अध्‍यक्ष: सदन जो है वह यहीं तक तो है। हालांकि उन्‍हें भी इस बात का ध्‍यान रखना चाहिये लेकिन सदन के नियम जो हैं वह लागू इधर ही होते हैं ... (व्‍यवधान) 

श्री अमराराम (धोद): अध्‍यक्ष महोदय, परम्‍परा यह रही है कि जब आसन पांवों पर हो तो अधिकारी गैलेरी से भी कोई खड़ा होकर नहीं जाए।

श्री अध्‍यक्ष: हां, परम्‍परा है मैं मानती हूं। परम्‍परा है, उन्‍हें भी इस बात का ध्‍यान रखना चाहिये। परम्‍परा है यह। 

मैं निवेदन कर रही थी कि यह जो अजमेर से आते हैं डाक्‍टर श्रीगोपाल बाहेती, आप 295 में दे सकते थे, आप परची के माध्‍यम से उठा सकते थे। नियम 50 के अन्‍दर केवल रिसेंट आकरेन्‍स और वह भी इतने महत्‍वपूर्ण कि सदन की पूर्व निश्चित कार्यवाही को रोककर के उस पर चर्चा की जाए वह ऐसे आकरेन्‍स आपको लाने चाहिये। पुष्‍कर में पानी कोई एक दिन में तो कम हुआ नहीं है ... (व्‍यवधान)

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): पानी कम होने की बात नहीं है। आप पूरा पढि़ये उसको। सूर्य ग्रहण ... (व्‍यवधान) 

श्री अध्‍यक्ष: जलस्‍तर में कमी होने से उत्‍पन्‍न स्थिति के सम्‍बन्‍ध में।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): नहीं, उसको पूरा पढि़ये आप। सूर्य ग्रहण के दिन वहां मछलियों की मृत्‍यु हुई। हजारों लोग वहां नहा रहे थे और पानी स्थिति देखिये। पानी की स्थिति यह पुष्‍कर की है।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप कैसे खड़े हैं जब मैं खड़ी हूं ? ... (व्‍यवधान) 

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): और ऐसे पवित्र स्‍थान के लिये भी यदि हम दो मिनट का समय नहीं दे सकते सदन का तो वहां क्‍या करेंगे फिर हम ? जो सरकार 2005 के अन्‍दर वहां फोटो खिंचाकर आयी ... (व्‍यवधान) 

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): 000

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री अध्‍यक्ष: नेता प्रतिपक्ष। नेता प्रतिपक्ष, मैं आपसे निवेदन कर रही हूं कि आप अपने सदस्‍यों को समझाएं कि आसन की अवहेलना नहीं करें।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): 000

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  नेता प्रतिपक्ष को सीधी चुनौती उन्‍हीं के माननीय सदस्‍यों ने दी है।

श्री अध्‍यक्ष: बोलने दो। करने दो। इनको भी करने दो। बैठने दो ... (व्‍यवधान) 

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अब किस तरह की निरीह हालत है नेता प्रतिपक्ष की। अध्‍यक्ष महोदय, यह झुंझुनूं के हैं इसलिये आपको नेता प्रतिपक्ष से सहानुभूति होनी चाहिये कि आज जिस तरह के हालात में यह है आज इनकी बात कोई सुनता नहीं। मेरी भी पूरी सहानुभूति है। अब आप देखिये क्‍या हालत बनी है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  पुष्‍कर सरोवर जिस पर करोड़ों आदमियों की श्रद्धा है। उसमें पानी कम हो, स्‍नान के वक्‍त जो लोगों को तकलीफ हुई उस सम्‍बन्‍ध में आपका ध्‍यान आकर्षित किया गया है। आपको सरकार से रिपोर्ट लेनी चाहिये कि क्‍या स्थिति है। यह जो प्रस्‍ताव है राज्‍य सरकार के पास भेजा जाना चाहिये।

श्री अध्‍यक्ष: भेज देंगे।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): जब तक रिपोर्ट नहीं आए, रिपोर्ट आने के बाद ... (व्‍यवधान) 

श्री अध्‍यक्ष: भेजेंगे। सरकार के पास भेजूंगी। इस स्‍थगन प्रस्‍ताव को ऐसे के ऐसे राज्‍य सरकार को भेज दिया जायेगा। साथ ही यह पानी भेज दिया जायेगा। ठीक है। बिराजो आप।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): दूसरा, मैं आपकी मार्फत यह सूचना चाहता हूं कि 20 तारीख को राज्‍य सरकार की तरफ से ओलावृष्टि आदि पर जो नुकसान हुआ उस पर मंत्रियों, राज्‍य मंत्रियों, प्रभारी की जो रिपोर्ट आयी उसके आधार पर मुख्‍यमंत्री जी वक्‍तव्‍य देने वाली थीं सदन में। उसका क्‍या हुआ ? आज भी भीनमाल के अन्‍दर 5-7,000 आदमी इकट्ठे हो रहे हैं और इनमें से 30 आदमी भूख हड़ताल पर हैं। मुझे अभी-अभी जानकारी मिली है ... (व्‍यवधान) 

डा. समर‍जीत सिंह (भीनमाल): अध्‍यक्ष महोदय, 15 तारीख से छह...

श्री अध्‍यक्ष: आपके नेता खड़े हैं और आप 15 तारीख बोलने लगे। क्‍या बात हुई यह ?

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप कृपा करके अकाल राहत मंत्री है, इनसे जानकारी लीजिये कि वहां आपने क्‍या किया ? 

श्‍याम/चौहान   21.03.2007    12.20  1j 

 

27 आदमी भूख-हड़ताल पर हैं और दो-तीन हजार आदमी वहां पर इक्‍ट्ठा हो रहे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: कहां पर।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): भीनमाल में, यह हकीकत है, वास्‍तविकता है।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): यह तय हो गया है कि 23 तारीख को स्‍टेटमेंट देना है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपका एस.डी.ओ. वहां पर गया था।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): 23 को देंगे 23 को।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): एस.डी.ओ. ने कोई कार्यवाही नहीं की, उनसे मिलकर के वापस चला गया, आपके अधिकारियों को आपने इतना बना रखा है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): क्‍या बना रखा है।

श्री अध्‍यक्ष: कमजोर, कमजोर।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपने अधिकारियों को इतना नपुंसक बना रखा है‍कि वह कोई कारगर कार्यवाही ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: नेता, प्रतिपक्ष क्‍या कह रहे हो आप ...(व्‍यवधान)

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): मुहावरा है यह, नेता प्रतिपक्ष का मुहावरा है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): जब आप एम.एल.ए. थे और जो जद्दोजहद आप करते थे, किस तरह से भैरोंसिंह जी को आपने एडि़यों पर खड़ा कर दिया था और आज आपके विभाग में इतनी गिरावट हो रही है। लोग भूखे-प्‍यासे मर रहे हैं। आप कोई खैर-खबर नहीं ले रहे हैं। आपको बताना चाहिए कि क्‍या स्थिति है, कुछ बोलेंगे कि नहीं, कुछ देंगे कि नहीं। कुछ देना है, कुछ लेना है तो कह दें कि यह देंगे, नहीं है तो कह दें कि कुछ नहीं देंगे तो हम हमारा रास्‍ता पकड़ेंगे।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय नेता प्रतिपक्ष, मंत्रि जी ने जब वक्‍तव्‍य दिया था, इनके वक्‍तव्‍य से तो आप संतुष्‍ट होते नहीं हो। उन घोषणाओं को आप मानते नहीं हो। आपने खुद ने ही इस बात का आग्रह किया था कि माननीय मुख्‍यमंत्री जी इस बारे में घोषणा करें तो मुख्‍यमंत्री जी करेंगी घोषणा।

श्री अमराराम (धोद): जब मुख्‍यमंत्री जी ने बयान दिया है कि 21 तारीख को हम कर देंगे और आज 21 तारीख है।

श्री अध्‍यक्ष: कर देंगे, कर देंगे। क्‍या बात है, आजकल में कर देंगे।

श्री अमराराम (धोद): सदन में उन्‍होंने कहा है।

श्री अध्‍यक्ष: आजकल में कर देंगे।

श्री अमराराम (धोद): सदन में उन्‍होंने कहा है कि 20 और 21 तारीख को घोषणा करेंगे।

डा. समर‍जीत सिंह (भीनमाल): मंत्री महोदय आज दिन तो कोई अधिकारी आपका बात करने नहीं आया उनसे ...(व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): यह सवाल आसन का नहीं है ...(व्‍यवधान) सदन की नेता ने यह कहा कि 20 और 21 तारीख को ...(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 23 तारीख को सरकार का वक्‍तव्‍य आयेगा ...(व्‍यवधान) आपने जब आसन से फरमाया था कि 23 तारीख को सरकार वक्‍तव्‍य दे तो 23 तारीख को सरकार वक्‍तव्‍य देगी ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: 23 तारीख को मुख्‍यमंत्री जी इस बारे में जो कुछ राहत पैकेज देगी उसकी घोषणा कर देंगे।

श्री जितेन्‍द्र सिंह (अलवर): अध्‍यक्ष महोदय, यहां लॉ एण्‍ड आर्डर सिचुवेशन पैदा हो जायेगी ...(व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): मुख्‍यमंत्री जी ने हाउस में 20 और 21 तारीख को ...(व्‍यवधान)

श्री जितेन्‍द्र सिंह (अलवर): अध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान में लॉ एण्‍ड आर्डर की सिचुवेशन पैदा हो जायेगी ...(व्‍यवधान) अगर सरकार कुछ बोलती है तो ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: कुछ सूचनाएं आनी बाकी होगी तभी तो ...(व्‍यवधान) सूचना होगी बाकी ...(व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): अध्‍यक्ष महोदय, जैसा मेरी जानकारी में आया है, पूरी रिपोर्ट अभी तक कलेक्‍ट नहीं हुई है, कैलकुलेशन हो रहा है और हम ऐसा मानकर चलते हैं कि काश्‍तकारों को अब की बार ऐसी राहत मिलेगी जो आज तक किसी सरकार ने नहीं दी ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आज बात यह है कि जिस दिन से ...(व्‍यवधान)

श्री अर्जुन सिंह देवड़ा (रानीवाड़ा): अध्‍यक्ष महोदय, जिन-जिनका नुकसान हुआ था उनको पैसा देना शुरू किया गया और वहां पर नुकसान हुआ है, मैं मानता हूं और मैं उस क्षेत्र में भी गया था ...(व्‍यवधान)

डा. समर‍जीत सिंह (भीनमाल): आप वहां से निकले उनको पूछा तक नहीं कि आप भूख-हड़ताल पर क्‍यों बैठे हैं ...(व्‍यवधान)

श्री अर्जुन सिंह देवड़ा (रानीवाड़ा): ऐसा है माननीय विधायक महोदय, आप तो थे ही नहीं ...(व्‍यवधान) आप तो थे ही नहीं ...(व्‍यवधान) मैंने जालौर जाकर के मीटिंग ली है ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मैं लाया था उसकी जानकारी में, उसको पता ही नहीं था  ...(व्‍यवधान)

श्री अर्जुन सिंह देवड़ा (रानीवाड़ा): पाँच करोड़ रूपये मुख्‍यमंत्री जी ने जालौर के उन काश्‍तकारों के लिये जिनका नुकसान हुआ है और सबसे ज्‍यादा ...(व्‍यवधान)

डा. समर‍जीत सिंह (भीनमाल): जो भूख-हड़ताल पर बैठे हुए हैं उनसे आपने पूछा ही नहीं, उनसे आप यह पूछ नहीं सकते ...(व्‍यवधान)

श्री अर्जुन सिंह देवड़ा (रानीवाड़ा): आप तो स्‍वयं ही नहीं थे, आप तो कल-परसों जाकर के आये हैं, मैं तो वहां जाकर के आया ...(व्‍यवधान)

डा. समर‍जीत सिंह (भीनमाल): आप गये तो आप वहां जाते तो यह उनसे ...(व्‍यवधान) आपको सरकार ने भेजा, आप बात तो करते उनसे, आप उनके दु:ख-दर्द तो पूछते। आप पास से ही निकल गये उनसे, 27 लोग अगर भूख-हड़ताल पर बैठे हुए हैं ...(व्‍यवधान)

श्री अर्जुन सिंह देवड़ा (रानीवाड़ा): ऐसा है विधायक महोदय, आप मेरी बात सुनिये। 13 तारीख को ओलावृष्टि हुई ...(व्‍यवधान)

डा. समर‍जीत सिंह (भीनमाल): यह सरकार की संवेदनहीनता है ...(व्‍यवधान) बात ही नहीं करें आप उनसे जाकर के।

श्री अर्जुन सिंह देवड़ा (रानीवाड़ा): 14 तारीख को हमको भेजा, 15-16 को सिरोही उसके बाद में जालौर ...(व्‍यवधान) जाकर के सब जायजा लेकर के जो नुकसान हुआ है ...(व्‍यवधान)

डा. समर‍जीत सिंह (भीनमाल): आज भी आप देखें जा रहे हैं ...(व्‍यवधान)

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): आपने तो ओलावृष्टि में ही ...(व्‍यवधान)

श्री अर्जुन सिंह देवड़ा (रानीवाड़ा): आप उनको भड़काने का प्रयत्‍न कर रहे हैं ...(व्‍यवधान)

डा. समर‍जीत सिंह (भीनमाल): अध्‍यक्ष महोदय, वहां पर लोग बैठे हैं किसी को ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): एक किसान जिसका नाम हरजीराम चौधरी है जो 16 तारीख से उपवास पर है। उसकी आज तबीयत खराब हो गयी ...(व्‍यवधान) आज उसकी तबीयता खराब हो गयी है। मैं आपसे यह निवेदन कर रहा हूं कि 16 तारीख से हरजीराम चौधरी वहां पर उपवास पर बैठा हुआ है, आज छठा दिन है उसके उपवास का ...(व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): अध्‍यक्ष महोदय, घोषणा कर दें ...(व्‍यवधान) तीन दिन की छुट्टी में हमारे मंत्री जायेंगे और मैं जो भी राजस्‍थान के किसानों को ओलावृष्टि से ...(व्‍यवधान)

डा. समर‍जीत सिंह (भीनमाल): बी.जे.पी. का है, भारतीय जनता पार्टी का बैठा है। यह कह रहे हैं कि हम कह रहे हैं, उन्‍हीं के दल के बैठे हुए हैं ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मंत्री जी, कांग्रेस के लोग नहीं हैं, आपके भारतीय किसान संघ के लोग जो आर.एस.एस. की विंग है, उसके लोग बैठे हुए हैं ...(व्‍यवधान)

डा. समर‍जीत सिंह (भीनमाल): आप पूछते ही नहीं जो वहां पर ...(व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): भ्रम पैदा करने की बात की जाये, जो सहायता देने की बात की जा रही है वह तो ऊँट के मुंह में जीरे के समान है। कोई भी किसान इस सहायता को नहीं लेगा ...(व्‍यवधान) 21 तारीख को जायजा लेकर के सहायता की घोषणा कर देंगे। घोषणा के बाद ही वितरण होगा तो सदन की नेता घोषणा करने के बाद उससे मुकर रही हैं। मैं समझता हूं कि इससे ज्‍यादा धोखाधड़ी नहीं हो सकती है, इसलिए सरकार कर रही है ...(व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): अध्‍यक्ष महोदय, पूरे राजस्‍थान के काश्‍तकारों को और इस हाउस को इस बात का आभास है ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अध्‍यक्ष महोदय, एक किसान हरजीराम चौधरी जो पाँच दिन से उपवास पर है भीनमाल में, उसकी आज तबीयत बिगड़ गयी है। दूसरे आठ किसान उसके साथ अनिश्चितकालीन उपवास पर बैठे हुए है। सवाल उन किसानों की जिंदगी बचाने का है।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): उपवास पर तो ममता बनर्जी भी बैठी थी। नंदीग्राम में 17 लोग मारे गये ...(व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): 17 लोग मारे गये ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आप क्‍या नुकसान चाहते हो ...(व्‍यवधान) गोली चलाना चाहते हो आप ...(व्‍यवधान)

डा. समर‍जीत सिंह (भीनमाल): आप वही करना चाहते हो ...(व्‍यवधान) किसानों के साथ ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): चलाओ गोली, आपकी अगर हिम्‍मत है तो ...(व्‍यवधान)

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): मंत्री महोदय, आप भी मारना चाहते हो किसानों को ...(व्‍यवधान) मंत्री महोदय आप भी किसानों को मारना चाहते हो ...(व्‍यवधान) रावला, घड़साना में गोलियां चलाकर के मारा, वहां जालौर में भी मार दो। आप यही चाहते हो। नंदीग्राम में मारे, वही आप भी करना चाहते हो ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अध्‍यक्ष महोदय, हम आपके माध्‍यम से यह फरियाद कर रहे हैं कि किसानों की वहां तबीयत खराब हो गयी है। सरकार को हस्‍तक्षेप करने का निर्देश प्रदान करें। मंत्री जी कह रहे हैं कि नंदीग्राम में 17 लोग गोलियों से मार दिये। अध्‍यक्ष महोदय, यह कोई जवाब है। हम सरकार के नोटिस में भी नहीं ला सकते हैं, यह क्‍या मतलब है ...(व्‍यवधान)

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): कोई नोटिस नहीं आया है और जो ज्‍यादा उपवास से मर रहा है उसको जूस पिलाकर के उठा देंगे ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आर.एस.एस. के लोग बैठे हुए हैं ...(व्‍यवधान) कमाल कर रहे हैं आप ...(व्‍यवधान) भारतीय किसान संघ के लोग जो आपके ...(व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): अध्‍यक्ष महोदय, पहली बार इस सरकार ने ध्‍यान दिया है और काश्‍तकारों को वह सहायता दी जायेगी जो आज तक उपलब्‍ध नहीं करवायी है। इसको कंट्रोवर्सी में डालने से कोई फायदा नहीं है। हम सबको मिलेगा। प्रयास करना चाहिए कि ज्‍यादा से ज्‍यादा मुआवजा काश्‍तकारों को किस तरह से मिले और जो जिंस पहले सम्मिलित नहीं थी उन सब जिंसों को शामिल किया जाये। चाहे केन्‍द्रीय गाइड लाइन में कुछ भी हो, इससे हमें कोई मतलब नहीं है। हमारी तो मांग यह है कि सब तरह की जो फसल हैं, जीरा, धनिया, टमाटर, लहसुन कोई भी फसल नहीं छूटनी चाहिए और अगर सरकार मुआवजा देगी तो मुझे यह कहने की कोई आवश्‍यकता नहीं है कि काश्‍तकार इस सरकार का अहसान मानेंगे और जितना सरकार देगी उसको ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): इनको बैठाया जाये ...(व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): मुझे आभास हो गया है कि यह सरकार देगी ...(व्‍यवधान) आभास हो गया है और यही आपको हो गया है ...(व्‍यवधान) मुझे पता है, यह आभास है कि सरकार सहायता राशि उपलब्‍ध करवायेगी जो आज तक किसी ने नहीं करवायी ...(व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): 21 तारीख की बात करके मुकर रहे हैं ...(व्‍यवधान)

(माननीय अध्‍यक्ष महोदय ने इशारे से अंकित नहीं करने के आदेश प्रदान किये।)

श्री अमराराम (धोद): 000

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): 000

डा. समर‍जीत सिंह (भीनमाल):000

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): 000

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री अमराराम (धोद): 000

गोविनद/यूएस/21.3.7/12.30/1k

 

श्री अमराराम (धोद): 000

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): 000

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): 000

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): 000

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): 000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 000

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): 000

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

श्री सुरेन्‍द्रपाल सिंह टीटी (राज्‍य मंत्री, कृषि): 000

डा. समर‍जीत सिंह (भीनमाल): 000

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री सुरेन्‍द्रपाल सिंह टीटी (राज्‍य मंत्री, कृषि): 000

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): 000

डा. समर‍जीत सिंह (भीनमाल): 000

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही):  000

श्री अध्‍यक्ष: वह आपने कहने का मौका मंत्रीजी को कब दिया? आप स्‍थान ग्रहण करें। आप तो खुद दो-दो, चार-चार एक साथ बोलते हैं। ...(व्‍यवधान)... आप कुछ कहना चाहते हैं?

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): हां, मैं कुछ कहना चाहता हूं। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: नो, नो बैठिए। आप सबको आसन का काम करने की क्‍या आवश्‍यकता है, आसन सक्षम है। ...(व्‍यवधान)... अब आप फिर खड़े हो गए। नो। बैठिए आप, मिस्‍टर जोगाराम, आप बात-बात पर खड़े हो जाते हैं, यह ठीक बात नहीं है। आप आसन का काम करने लगते हैं। ...(व्‍यवधान)...

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): आपने तो हमें निर्देश दिए हैं कि सदस्‍य का आचरण शालीन रहना चाहिए।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, अब आप बैठिए। मंत्रीजी खड़े हैं, यह बहुत गीत बात है। आप बैठिए, पहले सुनिए उनको।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य और नेता प्रतिपक्ष ने सदन को जो जानकारी दी है कि कुछ किसान भूख हड़ताल पर बैठे हैं, उपवास पर बैठे हैं, उनकी हालत खराब हो रही है। ...(व्‍यवधान)... पूरे राजस्‍थान में बैठे हैं।

डा. समर‍जीत सिंह (भीनमाल): पूरे राजस्‍थान में नहीं भीनमाल की मैंने स्‍पेसीफिक सूचना दी है। आप कह रहे हैं पूरे राजस्‍थान की, आप ग्रेविटी से नहीं ले रहे बात को। ...(व्‍यवधान)...

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): हां, भीनमाल की बोल रहा हूं। जहां-जहां भी किसान बैठे हुए हैं उनकी हम जानकारी ले लेते हैं और हम उनसे रिक्‍वेस्‍ट  करेंगे और प्रशासन को निर्देश देंगे कि उनको उठाए और 23 तारीख को वैसे तो हमने पहले भी कोशिश की थी तो उन्‍होंने कोशिश यह की कि हम मंत्री को नहीं सुनना चाहते, मुख्‍य मंत्री को सुनेंगे, मुख्‍य मंत्री आई तो उनको भी नहीं सुना, पता नहीं वह किसको सुनना चाहते हैं लेकिन हम 23 तारीख को, राज्‍य सरकार ने पूरी तैयारी कर रखी है। प्रभारी मंत्री जिनको हमने भेजा था, कल मुख्‍य मंत्रीजी ने मीटिंग बुलाई, हमारी सारी तैयारी है और 23 तारीख को मैं सदन में वक्‍तव्‍य दे दूंगा और जैसे इस बजट से आप निरुत्‍तर हुए वैसे ही हमारे पैकेज से निरुत्‍तर हो जाएंगे, इनके पास कुछ मिलेगा ही नहीं सवाल करने को।

डा. समर‍जीत सिंह (भीनमाल): 23 तारीख को पैकेज दे रहे हैं तब तक  उनसे बात करने का कलेक्‍टर को निर्देश तो दीजिए।

श्री अध्‍यक्ष: कह तो दिया न उन्‍होंने और आप क्‍या चाहते हैं?

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): हमको निरुत्‍तर करने से काम नहीं चलेगा, किसान को जो ओला पीडि़त है उनको निरुत्‍तर करें आप।

श्री अध्‍यक्ष: बस ठीक है, हो गई बात आपकी। डाक्‍टर चन्‍द्रशेखर बैद।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय मंत्रीजी, आप गुस्‍सा न करें, आप जो भी करें अच्‍छा करें, आप अपने स्‍वास्‍थ्‍य का ध्‍यान रखें, बाकी सबका, किसान का भला करें, सरकार का भला करें लेकिन गुस्‍सा करके अपने बी पी को न बढ़ाएं, यही निवेदन है।

श्री अध्‍यक्ष: यह आपका भी कर्तव्‍य है कि आप कोई ऐसी बात न करें जिससे वे गुस्‍सा करें।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): जोशीजी, मेरा बी पी तो सही है लेकिन आप बिना बात बी पी मत बढ़ाओ। मैं इसलिए आपसे प्रार्थना कर रहा हूं कि सरकार ने हर मंत्री और जो भी इलाके में गए हैं, हर जनप्रतिनिधि इलाके में जाकर आया है, नुकसान का जायजा हमारे पास 50 पर्सेण्‍ट तो आ गया है और आना बाकी है और पूरा जायजा लेने के बाद सरकार पूरी तैयारी के साथ आपके पास रिक्‍वेस्‍ट रखेगी लेकिन आपने तो आज तक इस पर कोई बात कही ही नहीं और सदन में कोई बात कही नहीं कि आप क्‍या चाहते हैं, सिर्फ हू हा के तो हू हा ही आएगा।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आपने सुन लिया, आपको जो देना है वह कह देना।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): हमारे रिकार्ड पर है, हू हा के सिवा कुछ आया ही नहीं।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): हम तो आपको बहुत-बहुत धन्‍यवाद देंगे जब भी आप घोषणा करेंगे, आपको ही श्रेय मिलेगा, हम तो आपको धन्‍यवाद देंगे। अभी तो इश्‍यू था कि भीनमाल में किसान पाँच-छह दिन से बैठे हुए हैं। आप अधिकारियों से बात करके कोशिश करें कि उनको समझाए, यह बात करनी चाहिए।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने व्‍यवस्‍था दी लोकायुक्‍त पर, अच्‍छा है लेकिन सरकार से एक दो दिन में उत्‍तर आ जाना चाहिए क्‍योंकि वरिष्‍ठ मंत्री सरकार के सारे यहां बैठे हुए हैं मुख्‍य मंत्री को छोड़कर। महत्‍वपूर्ण मुद्दा है, इनको कहिए एक दो दिन में जवाब दें लोकायुक्‍त के ऊपर।

श्री अध्‍यक्ष: लोकायुक्‍त में केवल गृह मंत्री  जी मैम्‍बर होते हैं, और तो है नहीं मैम्‍बर, इसलिए मुख्‍य मंत्रीजी को जब समय मिलेगा तभी तो मीटिंग होगी।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह नहीं, यह कलेक्टिव रेस्‍पोंसिबिलिटी है, मुख्‍य मंत्री नहीं है तो कुछ नहीं होगा, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माफ करें, आप यह गलत परम्‍परा डाल रही हैं। मुख्‍य मंत्री हो या न हो मंत्रियों की कलेक्टिव रेस्‍पोंसिबिलिटी है। अब मुख्‍य मंत्री नहीं आएंगी तो कुछ नहीं होगा ...(व्‍यवधान)... मैं समझता हूं कि सरकार बैठी हुई है, मुख्‍य मंत्री नहीं है, यह हम बार-बार शेल्‍टर लेते हैं, आप मुख्‍य मंत्रीजी को निर्देश दें कि वे हाउस में रहें। मुख्‍य मंत्री हाउस में नहीं है तो हाउस में कुछ नहीं होगा। आप मेहरबानी करके इस गलत परम्‍परा का निर्वहन न करें। मुख्‍य मंत्री है या नहीं, सरकार है, सरकार की जिम्‍मेदारी बनती है कि लोकायुक्‍त के सम्‍बन्‍ध में दो दिन में जब भी आप चाहें वह इस पर स्‍टेटमेंट दे।

श्री अध्‍यक्ष: इस बारे में पहले ही कह दिया था।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके ध्‍यान में लाना चाहता हूं कि पिछले बजट सत्र में कांग्रेस पार्टी ने यह मामला उठाया था तो मुख्‍य मंत्री महोदय ने इसी सदन में कहा था कि एक सप्‍ताह के अंदर हम लोकायुक्‍त की नियुक्ति कर देंगे और अपनी घोषणा के अनुरूप क्रियान्विति नहीं की। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपसे निवेदन है कि सरकार को आप प्रताडि़त करें।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कभी-कभी तो कर ही दिया करें। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: आसन न तो आपके कहने से उनको प्रताडि़त करेगा और न उनके कहने से आपको प्रताडि़त करेगा।

डाक्‍टर चन्‍द्रशेखर बैद।

स्‍थगन प्रस्‍ताव आदि पर चर्चा

राज्‍य में निर्माण कार्यों में लगे मजदूरों को भवन व सहनिर्माण कार्यकारक अधिनियम 1996 के अन्‍तर्गत लाभान्वित करने बाबत

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से सदन और सरकार का ध्‍यान एक बहुत महत्‍वपूर्ण समस्‍या की तरफ आकृष्‍ट करना चाहता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: विद इन थ्री मिनट्स। हां, तीन मिनट में।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): राजस्‍थान के अंदर तकरीबन 20 लाख लोग मजदूर हैं और शायद उनकी आवाज आज तक इस‍लिए नहीं सुनी गई

Gpc/akt/21032007/1240/1l

 

क्‍योंकि यह पूरा संगठन पूरी तरह से ऑर्गेनाइज्‍ड नहीं है और ये 20 लाख मजदूर जैसा कि स्‍टेटिस्टिकली माना गया है राजस्‍थान में एक परिवार में सदस्‍यों की संख्‍या छह हो तो 6 करोड़ 50 लाख की जनसंख्‍या में एक करोड़ लोग इससे प्रभावित होते हैं। 20 लाख मजदूर जो सरकारी या गैर सरकारी निर्माण कार्यों में लगे हुए हैं इनके लिए सामाजिक सुरक्षा के जो मापदण्‍ड केन्‍द्र सरकार द्वारा 1996 में बनाया गया आज तक पिछले तीन साल से लगातार इस बारे में अनेक बैठकें हुईं, लेकिन अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया। मैं आपके माध्‍यम से यह कहना चाहता हूं कि 1996 के अंदर भवन व सन्निर्माण अधिनियम, 1996, जो केन्‍द्र सरकार ने बनाया उसको दिल्‍ली सरकार ने, मध्‍यप्रदेश सरकार ने, गुजरात सरकार ने, तमिलनाडु व केरल सरकार ने अपने-अपने राज्‍यों के उन मापदण्‍डों के आधार पर कानून बनाकर लागू कर दिया है इसके कारण उन मजदूरों को सामाजिक सहायता भी उपलब्‍ध करायी जा रही है। इन मजदूरों को क्‍या सामाजिक सहायता उपलब्‍ध होगी, अनेक मजदूर जो निर्माण कार्य में लगे हुए हैं दुर्भाग्‍यवश जिनकी मृत्‍यु हो जाती है उनको मुआवजा नहीं मिलता, कोई बीमार हो जाता है उसके लिए कोई साधन नहीं है, उनकी जो पत्नियां हैं उनके प्रसव के समय कोई अनुदान नहीं दिया जाता, उनके बच्‍चों की एजुकेशन के लिए दूसरे राज्‍यों में लोन दिया जाता है वह राजस्‍थान सरकार द्वारा नहीं दिया जाता और उनके लिए जिस प्रकार से पेंशन की सुविधा अन्‍य राज्‍यों में उपलब्‍ध करायी गयी है वह भी उपलब्‍ध नहीं करायी जाती।

मैं आपके माध्‍यम से यह निवेदन करना चाहता हूं कि राजस्‍थान के अंदर तकरीबन दो हजार से 2200 मजदूर एक साल के अंदर निर्माण का कार्य करते समय मृत्‍यु के ग्रास में जाते हैं और तकरीबन साढ़े चार से पाँच हजार मजदूर राजस्‍थान राज्‍य के अंदर प्रतिवर्ष विकलांग होते हैं तो ऐसे मजदूरों को जिनकी मृत्‍यु हो गई, जो विकलांग हो गये राज्‍य सरकार की तरफ से केन्‍द्र सरकार द्वारा पारित किये गये अधिनियम, 1996 के अंतर्गत कोई इस तरह का प्रावधान रखना चाहिए जिससे उनको सामाजिक सहायता उपलब्‍ध करायी जा सके। मैं आपके माध्‍यम से यह भी कहना चाहता हूं कि इससे राज्‍य सरकार के ऊपर कोई अतिरिक्‍त बोझ नहीं पड़ता क्‍योंकि इस अधिनियम के अंतर्गत जो लोग करोड़ों के निर्माण कार्य के अंदर इंगेज होते हैं उसमें दो प्रतिशत सेस लगाने का प्रावधान है और इस सेस के माध्‍यम से जो करोड़ों, अरबों रुपये का निर्माण कार्य हो रहा है, दो प्रतिशत हिस्‍सा अगर निर्माण करने वाला व्‍यक्ति और संस्‍था दे दे तो इतने बड़े कारपस की व्‍यवस्‍था हो जाएगी जिससे गरीबी की रेखा से नीचे रहने वाले 20 लाख परिवारों को लाभान्वित किया जा सकेगा। मैं आपके माध्‍यम से जो अधिनियम बना है इसकी चार लाइनें पढ़कर सुनना चाहता हूं- “To raise a fund for provision of various welfare measures, the main Act provides for construction of Welfare Boards. Their major source of the fund shall be collection of cess at a rate not exceeding 2 per cent.” दो परसेंट आप नहीं लगाना चाहें तो आप आधा परसेंट भी लगा दें तो करोड़ों रुपये के कोरपस का गठन इससे किया जा सकता है।

इसी बाबत जब इस संगठन के कुछ लोगों ने हाईकोर्ट के अंदर केस किया तो हाईकोर्ट ने स्‍पष्‍ट निर्देश दिये कि – “On hearing the learned counsel …” यह माननीय के.एस. राठौड़ और माननीय श्री अनिल देव जी, चीफ जस्टिस के आर्डर की चार लाइनें बताना चाहता हूं जिसकी अवहेलना करने के उपरान्‍त आज तक राज्‍य सरकार ने इस तरह का कोई कानून मजदूरों के लिए नहीं बनाया है। “On hearing the learned counsel for the petitioner, we consider it appropriate to direct the State to discharge their duties as ordained by the Building & Construction Workers (Regulation of Employment and Conditions of Service) Act, 1996.” इन सबके माध्‍यम से यह सारी चीजें बताने के बावजूद मैं यह निवेदन करना चाहता हूं कि जो सेक्‍टर आर्गेनाइज्‍ड नहीं है जिसमें लाखों लोग प्रभावित होते हैं, राज्‍य सरकार का यह दायित्‍व बनता है, बनिस्‍बत एक डिपार्टमेंट से लेबर डिपार्टमेंट से फाइनेंस, फाइनेंस से लेबर में पिछले तीन साल में अनेक मीटिंग हो गई, लेकिन आज तक इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। तो इसको गंभीरता से और संवेदनापूर्वक लेकर राज्‍य सरकार तुरंत कानून बनाए जिससे इन करोड़ों लोगों को लाभान्वित किया जा सके। धन्‍यवाद।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): जब हाईकोर्ट से आपको डाइरेक्‍शन मिल गये ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: नो, नो।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): हाईकोर्ट से 2004 में डाइरेक्‍शन मिल गये और आज तक न तो एडवाइजरी बोर्ड है और न वेलफेयर बोर्ड है। आप इनसे यह तो कहें कि 2004 में जब हाईकोर्ट ने डाइरेक्‍शन दे दिये और उन्‍होंने कहा कि इस एक्‍ट को आप इंप्‍लीमेंट करो, एडवाइजरी बोर्ड बनाओ और वेलफेयर बोर्ड बनाओ, फिर सरकार अब तक मौन क्‍यों बैठी हुई है? आप उनसे यह तो कहें। उन गरीबों के हितों के लिए सरकार को डाइरेक्‍शन तो दें आप। ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: कर रही है।

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, कल कार्यपालिका और न्‍यायपालिका के बारे में चर्चा की थी उसके विपरीत आप स्‍वयं बोल रहे हैं।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): अगर कल के वाद-विवाद को आप यह समझें तो मूल कंसेप्‍ट ही आपका गलत है।

श्री अमराराम (धोद): अध्‍यक्ष महोदय, कानून केन्‍द्र सरकार ने बना दिया और मजदूरों के वेलफेयर के लिए सरकार एक नया पैसा नहीं दे, उसको केवल इंप्लिमेंट करना है, बोर्ड बनाना है और 10 लाख से ऊपर के जो निर्माण कार्य हैं उन पर लागू करना है ..(व्‍यवधान)..

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): न्‍यायपालिका के बिना राज और अधिक निरंकुश हो जाएगा। न्‍यायपालिका भी बहुत आवश्‍यक है, आपकी निरंकुशता पर बेड़ी लगाने के लिए। नहीं तो आप निरंकुश हो जाओ। न्‍यायपालिका बहुत जरूरी है, वह हमारे अधिकारों का अतिक्रमण न करे, कल यह बात थी। आप यह समझ गये कि न्‍यायपालिका के हम खिलाफ हैं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अध्‍यक्ष महोदय, तारानगर से आने वाले माननीय सदस्‍य ने ..(व्‍यवधान)..

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): यह भवन एक्‍ट बनाने के उपरान्‍त ..(व्‍यवधान).. उस आधार पर क्‍यों नहीं देखते? यह लॉ की जानकारी ..(व्‍यवधान)..

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): एक्‍ट सेंट्रल गवर्नमेंट ने बनाया, आपको यह कहा उस एक्‍ट की भावना के अनुसार काम करो। ..(व्‍यवधान)..

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अध्‍यक्ष महोदय, तारानगर से आने वाले माननीय सदस्‍य ने बहुत इंपोर्टेंट सवाल सदन के सामने उठाया है कि वो अनआर्गेनाइज्‍ड लेबर जो राजस्‍थान के अंदर है उसकी कोई सरकार की तरफ से सामाजिक सुरक्षा उनको प्रदान नहीं हो रही है। श्रम मंत्रीजी थे वे बीच में छोड़कर चले गये।

श्री अध्‍यक्ष: श्रम मंत्रीजी को बुलाकर लाएं। आप कहना चाहें तो कह दो। श्रम मंत्री ..(व्‍यवधान).. श्रम और रोजगार में आएगा, वे कैसे कह देंगे।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्‍टर कंपीटेंट हैं।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आप हर बात में बोल रहे हो राठौड़ साहब, इसमें क्‍यों चुप्‍पी साध रखी है आपने?

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपको प्रतिक्रिया देनी चाहिए। भारत सरकार का कानून है उसके तहत सुरक्षा ऐसे लेबर को जो अनऑर्गेनाइज्‍ड हैं, हजारों आदमियों का जिक्र किया है, अपाहिज हो जाते हैं..

श्री अध्‍यक्ष: हजारों नहीं, लाखों का कहा है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): उनके पास जमीन नहीं है, कोई सम्‍पत्ति नहीं है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, यह जो केन्‍द्रीय कानून 1996 के अंतर्गत सरकार का ध्‍यान आकर्षित किया है उसमें यह भी कहा कि दो परसेंट सेस भी लगाओ।

श्री अध्‍यक्ष: आपको नहीं लगाना है। उन भवन के ठेकेदारों पर ..(व्‍यवधान)..

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): हमें ही लगाना है। जो निर्माण कार्य करेंगे उन पर दो परसेंट सेस लगाने की बात की है। निश्चित तौर पर आपकी भावना के अनुसार इसको दिखवाएंगे, जो कुछ किया जा सकता है, उच्‍च न्‍यायालय के आदेश की बात की है उसको भी दिखवाएंगे।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): समय की सीमा हो।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): जल्‍दी दिखवाएंगे।

श्री अध्‍यक्ष: संयम लोढ़ा। इसमें ऐसा है कि आप उनका ही रजिस्‍ट्रेशन करिए, यह कंडीशन उसमें डाल दीजिए, दो परसेंट या एक परसेंट जो भी है उनके वेलफेयर के लिए निकाल दीजिए।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): इसमें मंशा भी वही है, दो परसेंट सेस लगाने की जो मंशा है। ..(व्‍यवधान)..

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): एक छोटी सी बात कहना चाहता हूं इसमें राज्‍य सरकार के ऊपर कोई वित्‍तीय भार नहीं पड़ेगा।

श्री अध्‍यक्ष: वह बात तो हो गई।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): जो अरबों रुपये की बिल्डिंग बन रही हैं उसमें एक परसेंट या डेढ़ परसेंट सेस लगा देंगे तो वह कोरपस बन जाएगा और इन गरीबों को लाभ मिल जाएगा।

श्री अध्‍यक्ष: संयम लोढ़ा।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): क्‍या सहायता हो सकती है आप ऐसा कमजोर वक्‍तव्‍य क्‍यों दे रहे हो? माननीय राठौड़ साहब, आप जो आश्‍वासन, प्रतिक्रिया सरकार की तरफ से दी, थोड़ा राठौड़ी भाषा में दो, क्‍या ऐसी दबी-दबी जबान से बोल रहे हो।

श्री अध्‍यक्ष: वे राठौड़ी में देंगे तब आप कहोगे कि राठौड़ी दिखाते हो।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): राठौड़ी तो अच्‍छी भी कही जाती है, राठौड़ी में अच्‍छी बात भी बोली जाती है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, यह राठौड़ी भाषा, राठौड़ी भाषा, मुझे नहीं मिली, मैं खोज रहा हूं यह भाषा कहां है? प्रतिपक्ष के नेता बता दें कहां है? राजस्‍थान में तो कोई है नहीं।

श्री अध्‍यक्ष: पूछें इनसे।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आजादी के बाद तो बिलकुल है ही नहीं।

श्री अमराराम (धोद): एक महीने की घोषणा कर दो एक महीने में लागू हो जाएगी, यह राठौड़ी है।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): वैसे वे राठौड़ी भाषा बोल सकते हैं, लेकिन यह कानून 1996 का है, शायद आप सब लोगों के ध्‍यान में, पढ़ने में नहीं आया होगा, केवल इस बात के लिए सारा दोष इन पर डालकर आप बात को कह रहे हैं। उन्‍होंने जब यह बात कह दी इस विषय में सोचकर सरकार जो भी कार्यवाही कर सकती है वह कर रही है, लेकिन 1996 से लेकर आपका राज पूरे पाँच साल रह गया तब तो आपको इस गरीब की चिन्‍ता नहीं आयी।

मोहन/अरूण/अशोधित प्रति प्रकाशनार्थ नहीं/21032007/1250/1m

 

परन्‍तु एकदम तीन साल और गुजर जाने के बाद ध्‍यान में आया, जो विषय आपने ध्‍यान में लाया, हम कर रहे हैं।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): लेकिन आपको भी तीन साल तक चिंता नहीं रही। ...(व्‍यवधान)...

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): यह क्‍या बात हुई ? ...(व्‍यवधान)...

एक माननीय सदस्‍य: यह है राठौड़ी भाषा, यह है। ...(व्‍यवधान)...

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): यह क्‍या बात हुई ? ...(व्‍यवधान)...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): कि तीन साल तक आपको भी चिंता नहीं रही, हमको तो नहीं रही, हमको पांच साल नहीं रही, तीन साल तो आपने भी निकाल दिये। ...(व्‍यवधान)...

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): यह तो कोई बात नहीं हुई?

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): हाई कोर्ट का जजमेंट 2004 में आया है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपको ऐसे बोलना शोभा नहीं देता है, आप राजस्‍थान के गृह मंत्री हैं, ऐसे बोलना शोभा नहीं देता कि अब इनको चिंता हुई है, चिंता पहले भी थी, अब भी है और आगे भी रहेगी। ...(व्‍यवधान)... हां, तो क्‍या कह दिया, क्‍या करोगे, बताओ ?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): जो काम आप नहीं कर सके, 1996 के बाद वह हम करने की कोशिश करेंगे, असंगठित श्रमिकों का हित ध्‍यान में रखना सरकार का कर्तव्‍य है, उसको देखने की कोशिश करेंगे, आपने कुछ किया नहीं।

श्री अध्‍यक्ष: आधी राठौड़ी तो बोली है। चलिए, संयम लोढ़ा।

बेगूं कस्‍बे में तनाव की स्थिति विषयक

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, फाल्‍गुन के महीने का हमारे भारतीय जीवन और भारतीय संस्‍कृति में बहुत खास महत्‍व है। प्रेम बांटने और जीवन में उल्‍लास भरने का एक महीना यह निमित्‍त है और इसी महीने की ∙∙∙∙∙∙

श्री अध्‍यक्ष: भूमिका में चले जाओगे, मिनट मिले हैं तीन, अब तनाव में आ जाओ, उल्‍लास तो छोड़ो, तनाव में आओ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मैंने, अध्‍यक्ष महोदय, सद्भाव कायम करने का स्‍थगन प्रस्‍ताव दिया है। ...(व्‍यवधान)... इसलिए मैं उस महीने की और उस रंग तेरस की ∙∙∙∙

श्री अध्‍यक्ष: मेरे सामने जो संयम लोढ़ा ने ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): त्योहार की सांस्‍कृतिक पृष्‍ठभूमि को स्‍पर्श करते हुए अपनी बात कहना चाहता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या है ? दिखाना, इनका क्‍या है, दिखाना मुझे जरा। ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, रंग तेरस के दिन 17 मार्च को चित्‍तौड़गढ़ जिले के बेगूं कस्‍बे में गुलाल उड़ाते चार पांच सौ का एक समूह शहर से निकल रहा था और उसका जो हमेशा रूट होता है, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कि छीपों के मंदिर से होते हुए सिलोरियों की बावड़ी होकर पूर्व विधायक घनश्‍याम जैन के मकान से होकर उसको गुजरना होता है लेकिन छीपों के मंदिर से इस बार वह जुलूस मुसलमानों के मोहल्‍ले में घुस गया और माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वहां घटना हुई, पथराव की घटना हुई, तनाव हुआ लेकिन उसके दो बजे यह पथराव की घटना हुई और उसके बाद शाम को करीब पांच बजे उससे पहले पुलिस को सारी जानकारी मिल चुकी थी कि तनाव हो गया है लेकिन इसके बावजूद शाम को पांच बजे वहां पर 6 मुसलमानों की दुकानों को जला दिया गया और मोटर साइकिल भी, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जलाई गई। इतना ही नहीं, अध्‍यक्ष महोदय, उसके बाद लगातार उस कस्‍बे में अफवाहें फैलती रही, तनाव फैलाने के प्रयास होते रहे, पुलिस का पूरा ज़ाब्ता बुलाया गया लेकिन इसके बावजूद अगले दिन फिर 18 तारीख को फिर मुसलमानों की दुकान जलाई गई। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं कि जब पुलिस को 17 तारीख को दो बजे इस सब घटना की जानकारी मिल गयी तो क्‍या यह पुलिस प्रशासन की शिथिलता और उसका निकम्‍मापन नहीं था कि शाम को पांच बजे अल्‍पसंख्‍यक समुदाय की दुकान जलाने से वह नहीं रोक सकी। इतना ही नहीं, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उसके बाद फिर 18 तारीख को फिर घटना हुई और फिर मुसलमानों की दुकानें जलाई गई।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): हिन्‍दुओं का कितना नुकसान हुआ, ध्‍यान है कि नहीां ? वहां कितने हिन्‍दुओं का नुकसान हुआ, हिन्‍दुओं के ऊपर वहां लाठियां और पत्‍थर बरसाये गये और सही तरीके से जुलूस निकाल रहा था और फाल्‍गुन को जुलूस निकाल रहे थे और शांति से जा रहा था और वहां के मुसलमानों ने उस जुलूस के ऊपर पत्‍थर बरसाये और वहां के लोगों ने मुसलमानों के जुलूस के ऊपर पत्‍थर बरसा कर वहां दंगा भड़काया आप लोगों ने और आप जैसे लोग वहां जाकर उनको भड़का भड़का करके उनको ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: आप बीच में क्‍यों बोल रहे हैं ?

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): और आप मुसलमानों की पैरवी कर रहे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: आप बीच में क्‍यों बोल रहे हैं ?

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह निवेदन कर रहा था, 1993 से लेकर 1998 के बीच बेगूं कस्‍बे में साम्‍प्रदायिक घटनाओं के 9 मुकदमे दर्ज हुए और 1998 से 2003 के बीच कस्‍बे में साम्‍प्रदायिक तनाव का एक भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह सब वातावरण इसलिए खराब होता है कि राजस्‍थान में भारतीय जनता पार्टी की सरकार आने के बाद इन बजरंगियों को एक संरक्षण मिल जाता है और वह अपना रूट चेंज करके मुसलमानों के मोहल्‍ले में घुस जाते हैं। ...(व्‍यवधान)... और यह राजस्‍थान सरकार का रिकार्ड ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): 000

श्री प्रकाश चौधरी (बड़ी सादड़ी): 000

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): 000

श्री प्रकाश चौधरी (बड़ी सादड़ी): 000

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): 000

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): 000

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): 000

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): 000

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री जितेन्‍द्र सिंह (अलवर): 000

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): 000

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): 000

 

सुरेन्‍द्र/अरुण/21.3.2007/13.00/1n/1

 

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): 000

एक माननीय सदस्‍य : 000

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री अध्‍यक्ष: आप इनवाइट करते हो ट्रबल को, खामख्‍वाह में बजरंगी न कहते... (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, आप समझे नहीं, आपने सुना नहीं। मैंने कहा कि आप ट्रबल इनवाइट कर रहे हो। (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री अध्‍यक्ष: मैंने यह कहा था कि आपने बजरंगी कहा उसकी वजह से किया... (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री अध्‍यक्ष: आप विराज जाएं। (व्‍यवधान)

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): 000

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): 000

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): 000

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): 000

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): 000

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 000

डा. भंवरलाल  राजपुरोहित (मकराना): 000

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): 000

डा. भंवरलाल  राजपुरोहित (मकराना): 000

श्री अध्‍यक्ष: कृपया स्‍थान ग्रहण करें। अंकित नहीं हो। (व्‍यवधान) माननीय गृह मंत्री जी। (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 000

डा. भंवरलाल  राजपुरोहित (मकराना): 000

श्री प्रकाश चौधरी (बड़ी सादड़ी): 000

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण, सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य। अंकित नहीं हो रहा।

डा. भंवरलाल  राजपुरोहित (मकराना): 000

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): 000

श्री प्रकाश चौधरी (बड़ी सादड़ी): 000

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण, मकराना से आने वाले माननीय सदस्‍य। बड़ी सादड़ी से आने वाले माननीय सदस्‍य। सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य ने अपना मुद्दा साम्‍प्रदायिक सद्भाव बनाये जाने के लिए रख दिया, तनाव की स्थिति को खत्‍म करके सद्भाव बनाने के लिए रख दिया। मैं माननीय गृह मंत्री जी से अब चाहूंगी कि इस बारे में....

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री अध्‍यक्ष: नो-नो। (व्‍यवधान) मैं अलाऊ नहीं करूंगी। मुद्दे की बात आ गई। अंकित नहीं हो रहा है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही):  000

श्री अध्‍यक्ष: यह क्‍या मतलब हुआ? आपने अपनी बात रख दी।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री अध्‍यक्ष: आपका जो मुद्दा था वह आपने रख दिया, सदन समझ गया, आसन समझ गया, गृह मंत्री जी समझ गये और गृह मंत्री जी जवाब दे रहे हैं।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री अध्‍यक्ष: नो-नो। अन-नेसेसरी... (व्‍यवधान) उत्‍तेजना के कारण सदन का समय बर्बाद हुआ। (व्‍यवधान)

श्री प्रकाश चौधरी (बड़ी सादड़ी): 000

श्री जयराम जाटव (खैरथल): 000

श्री अध्‍यक्ष: विराज जाएं। माननीय मंत्री जी। बड़ी सादड़ी से आने वाले माननीय सदस्‍य स्‍थान ग्रहण करें। स्‍थान ग्रहण करें। मैं कह रही हूं स्‍थान ग्रहण करें। अंकित नहीं हो रहा है। स्‍थान ग्रहण करें। अंकित नहीं हो रहा है। (व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य ने...

श्री प्रकाश चौधरी (बड़ी सादड़ी): 000

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): और जोर से बजाओ जब दे देंगे। आपके बजाते ही दे देंगे। जोर से बजाओ। एक बार जोर से बजा दो न फिर दे देता हूं। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप बात कहें अपनी। माननीय गृह मंत्री जी, आप अपनी बात कहें। बैठिये।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): आपके ताली बजाने से मैं इस्‍तीफा दे दूंगा, मजाक समझ रखा है। (व्‍यवधान)

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): 000

श्री प्रकाश चौधरी (बड़ी सादड़ी): 000

श्री अध्‍यक्ष: खण्‍डार से आने वाले माननीय सदस्‍य। बड़ी सादड़ी से आने वाले माननीय सदस्‍य, स्‍थान ग्रहण कर लें। नेता, प्रतिपक्ष, आप अपने माननीय सदस्‍यों को बिल्‍कुल भी कंट्रोल नहीं कर पाते हैं।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मेरी तरफ के सब लोग अनुशासित हैं लेकिन वक्‍तव्‍य देने से पहले ही होम मिनिस्‍टर साहब आग-बबूला हो रहे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: कहां आग-बबूला हो रहे हैं?

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): कहां हैं? न आग है न बबूला है, आपको कहां दिख रहा है? (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप बोले नहीं उससे पहले आग-बबूला हो रहे हो। आपको तो शां‍त स्‍वभाव से...

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): मैंने तो कहा कि जोर से बजा दो दे देता हूं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप होम मिनिस्‍टर हैं, आपकी वाणी में आग नहीं बरसनी चाहिए, आपकी वाणी में आग नहीं बरसनी चाहिए।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप स्‍थान ग्रहण कर लें बड़ी सादड़ी से आने वाले माननीय सदस्‍य।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य ने साम्‍प्रदायिक सौहार्द्र बनाने की दृष्टि से स्‍थगन प्रस्‍ताव को लेकर के आये, मुझे भी यह मन में लगा कि सारा सदन घटना जो कुछ भी हुई है उस घटना में काफी कुछ शांति के रास्‍ते पर हम बढ़ गये हैं और इसको आग में घी डालने का काम नहीं करेंगे पर दुर्भाग्‍य है कि इस प्रकार की घटनाओं में भी हम पक्ष और विपक्ष हो जाते हैं और उसके कारण से जिस चीज को हम चाहते हैं कि सौहार्द्र बना रहे उसको बिगाड़ने का केवल तुच्‍छ बातों को लेकर के काम करते हैं। न तो इससे किसी राजनीतिक पार्टी का भला होगा न वहां रहने वाले लोगों का भला होगा, न अपना भला होगा। चाहिए यह कि जिसने अपराध किया उसके खिलाफ कार्यवाही हो जाए और उसमें कोई कमी रही है तो वह हो जाए। मैं सोचता हूं कि इन बातों को लेकर फिर उकसाने का अगर क्रम करेंगे तो उससे कोई लाभ नहीं निकलेगा। यह बात जरूर है कि निश्चित रूप से जो कुछ आपने आरोप जड़ दिये उससे न्‍यूज अच्‍छी जरूर बन जाएगी। मैं आपको ईमानदारी से कह रहा हूं कि अगर मैंने मुकदमे हटाये हैं न तो अभी तो मेरे पास चूंकि तुरंत आपने विषय खड़ा कर दिया, बाकी मैं मुसलमानों के विरुद्ध उठाये हुए मुकदमे साम्‍प्रदायिकता के भी मैं पढ़कर के आपको यहां सुना सकता हूं। मैंने हिन्‍दू और मुसलमान नहीं देखा है जो 15-15 साल के मुकदमे हैं, रोज पेशी पर जा रहे हैं, समय बर्बाद हो रहा है और उनके बीच में सौहार्द्र बनने के बनिस्‍बत टकराव की स्थिति रहती है, इस बात को ध्‍यान में रखकर के मैंने जहां-जहां भी संभव हुआ...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री अध्‍यक्ष: अब आप सुनें। (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

 

vkj/akt/21032007/1310/1o

 

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): माननीय सदस्‍य, अब आपने जो विषय केवल इसको राजनैतिक दृष्टि से ले जाने का प्रयास किया है तो मैं आपको बांसवाड़ा का ही बताता हूं। बांसवाड़ा का मुकदमा नम्‍बर 6/2002 आनन्‍दपुर कालू सरकार बनाम मोहम्‍मद अन्‍तर्गत धारा 153, 153बी, 295 भारतीय दण्‍ड संहिता का मुकदमा मैंने उस समय में उसका भी हटाया। इसी तरह से 41/2002 आनन्‍दपुर कालू सरकार बनाम बलदेवाराम अन्‍तर्गत धारा 147, 48, 295, 32, 252, 153, 188 सपठित धारा 149 दंड संहिता(3) पी.डी.पी. एक्‍ट, यह भी मैंने उसके विरुद्ध होते हुए भी हटाया। मेरे पास यह चार थे, जो अभी मैंने निकाल लिये, तुरन्‍त हटाया गया। इसी तरह से तीसरा और भी है, यह नसीराबाद सरकार बनाम अब्‍दुल अजीज, मुकदमा नम्‍बर 29/2001, यह भी मैंने मुकदमा वापस लिया है। इसी तरह से 132/77 यह है पुलिस थाना धान मण्‍डी, उदयपुर सरकार बनाम अब्‍बास अली, यह भी मैंने वापस लिया है। यह तो मैंने तुरन्‍त जो मेरे पास थे, ऐसे मैंने कई मुकदमे हटाये जहां दोनों ही समुदायों के 12-12 वर्षों से मुकदमे चल रहे हैं। घटना हो चुकी है और उसका मैंने दोनों का ही विदड्रा किया है। ऐसा नहीं है कि केवल आरोप जड़ दें, आप चाहो तो झडि़ये, कोई चिंता नहीं है लेकिन यह सच्‍चाई नहीं है। मैं यह कह रहा हूं कि आपने तुरन्‍त यहां से शुरू किया क्‍योंकि जुलूस का रास्‍ता बदला, इस कारण से हो गया। माननीय सदस्‍य, यह सच्‍चाई नहीं है। 1997 से अभी तक इसी रास्‍ते से यह रंग तेरस का जुलूस जाता है। पुलिस जितनी क्‍योंकि...

श्री प्रकाश चौधरी (बड़ी सादड़ी): 000

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या रह रहे हो आप लोग?

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): अगर इसमें भी कोई गलती है, अगर यहां पर मैं जो सूचना दे रहा हूं कि 1997 के बाद इसी रास्‍ते से जुलूस निकलता है तथा इसमें कोई अगर भिन्‍नता है, आप निश्चित रूप से लायें, जिस अधिकारी ने मुझे यह सूचना भेजी, मैं उसके विरुद्ध कार्यवाही करूंगा। यानी मैं कोई बिना सूचना के नहीं बोल रहा हूं। आपने जो सूचना दी कि 1997 के बाद लगातार इसी रास्‍ते से जुलूस निकलता है। निश्चित रूप से घटना हुई है। एक थोड़ी सी उसमें, जो जुलूस था, लोग रंग तेरस खेल रहे थे, कुछ पत्‍थरबाजी हो जाने के कारण से आपस में दोनों वहां भिड़ गये थे। सामान्‍यतया क्‍योंकि रंग तेरस हमारे यहां कई गांवों में खेली जाती है तो पुलिस की बहुत ज्‍यादा व्‍यवस्‍था नहीं थी, फिर भी वहां पर थी। बेगूं में हमने एक्‍स्‍ट्रा पुलिस भेजी हुई थी क्‍योंकि वहां इस प्रकार के तनाव कई बार बीच-बीच में होते रहते हैं। लेकिन सीमित थी, बहुत ज्‍यादा पुलिस नहीं थी। वहां दोनों में पत्‍थरबाजी होने से भी, दोनों को समझाइश करके जुलूस को आगे बढ़ा दिया। जुलूस खतम हो गया। वापस लौटकर आया, उसके बाद पाँच बजे निश्चित रूप से छह दुकानें जली हैं, इसमें कोई दो राय नहीं है, मैं उसको कोई मना नहीं कर रहा हूं, छह दुकानें जली हैं। उदयपुर से जो हमारी खैरवाड़ा की प्‍लाटून वहां से रवाना हुई, आई.जी. स्‍वयं वहां से रवाना हुआ, हमारे ए.एस.पी. जो चित्‍तौड़गढ़ हैडक्‍वार्टर पर था, वह शाम को रवाना हुआ। जो कुछ आसपास में पुलिस फोर्स मिली, उसे लेकर रवाना हुआ। रात भर तक बिलकुल शांति, अमन-चैन, बातचीत चलती रही लेकिन ठीक बात है कि 18 तारीख को दो जगह अटैम्‍प्‍ट हुए। एक हिन्‍दू की दुकान में भी आग लगाने का प्रयास हुआ और एक मुसलमान की दुकान को भी बाद में, जो शहर को छोड़कर काफी दूर थी, वह उसमें हुई है और उस समय आई.जी. वहां स्‍वयं मौजूद था, उसको कंट्रोल किया, किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ यानी चार मुकदमे उसमें दर्ज हुए हैं। उन चार मुकदमों में लगभग 64 लोगों को हमने उनमें गिरफ्तार किया है। ऐसा नहीं है कि हमने, उसमें मैं यह गिनती भी नहीं बता सकता कि कितने हिन्‍दू हैं और कितने मुसलमान हैं? अगर आप गिनती निकालोगे तो अधिकांश हिन्‍दू हैं जो गिरफ्तार हैं उन 64 में से। हमने यह भेदभाव नहीं किया कि 12 इधर से कर लो, 12 उधर से कर लो, यह नाटकबाजी नहीं, जो वास्‍तव में इसके दोषी हैं, उसको हमने इसलिए पकड़ा है और उनके खिलाफ चार मुकदमे बनाये हैं। यह अभी जो जिन 64 लोगों को हमने पकड़ा, उसमें से 41 लोग जे.सी. में हैं और बाकी लोगों को हमने छोड़ दिया है और उसके बाद भी जो मुकदमे बने हैं। अभी इसमें किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं हुई। वह तो केवल 151 में, उस भीड़ में से जिन लोगों को हमने पकड़ा है, वही हैं, बाकी सारे के सारे पेंडिंग हैं। हमने इस बात की कोशिश की है कि घटना हो गई, लोग आगे नहीं बढ़ सके, कि वह विकराल रूप धारण न करें, इसके लिए हमने शांति समिति की बार-बार बैठक की। 19 तारीख की रात को भी बैठक हुई। सारे लोगों ने, शांति समिति ने सहमत होकर 20 तारीख को उन्‍होंने दुकान खोलने के लिए कहा था लेकिन वहां का व्‍यापार मण्‍डल इस बात पर अड़ गया कि आप हमें यह कहो कि यह जितने भी मुकदमे बने हैं, इसमें कोई कार्यवाही नहीं होगी। यह जो हुआ, इसमें कोई कार्यवाही नहीं होगी, तब जाकर हम खोलेंगे। हमने कहा कि आपकी सुरक्षा की गारंटी तो हम दे सकते हैं लेकिन जो मुकदमे बने हैं, उन मुकदमों के दबाव में आप इसमें एफ.आर. लगाकर अगर हमसे करेंगे, यह हमारे लिए संभव नहीं है। हम इसको कानूनी दृष्टि से जो कुछ हो सकता है, वह हम करने के लिए तैयार हैं, लेकिन बाद में समझाइश के आधार पर वह तैयार हुए और आज 21 तारीख को 10 बजे वहां सारा का सारा मार्केट खुला है और मुझे तो अफसोस यह है कि जब शांति कायम हो गई, उसके बाद में उसमें पलीता लगाने का काम करना, यह समझदारी का काम नहीं है, यह समझदारी का काम नहीं है। (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री प्रकाश चौधरी (बड़ी सादड़ी): 000

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): क्‍या कार्यवाही करेंगे? कार्यवाही क्‍या करेंगे? (व्‍यवधान) क्‍या बात है। केवल आपको बोलने के लिए बोलना है तो बात अलग है। (व्‍यवधान) आपके दबाव में कार्यवाही करूंगा क्‍या?

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री प्रकाश चौधरी (बड़ी सादड़ी): 000

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

अनेक माननीय सदस्‍य: 000

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): अगर आप सुनना ही चाहते हो...(व्‍यवधान) मैं आपको बताता हूं कि यह जो केस नम्‍बर 74/07 है, यह वहां पर जो अब्‍दुल रहमान है, उसके घर से 11 तलवारें और चार हथियार बरामद किये हैं कल वाली घटना में। (व्‍यवधान)

श्री प्रकाश चौधरी (बड़ी सादड़ी): 000

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): इसके घर से हथियार बरामद हुए, वह कौन है? उसके बारे में तो नहीं बोलते हो जिसके घर से 11 तलवारे और हथियार बरामद हुए हैं। (व्‍यवधान)

श्री प्रकाश चौधरी (बड़ी सादड़ी): 000

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): उसके बारे में नहीं बोलना चाहते हो। इस प्रकार से हथियार रखने वाले को, उसको पकड़वाना नहीं चाहते हो। (व्‍यवधान) लेकिन यह अवैध हथियार रखकर, इस तरह से हमला करने वाला व्‍यक्ति, उसके बारे में आप एक शब्‍द नहीं बोल सकते हो जिसके घर से इतने हथियार बरामद हुए, उसके बारे में एक शब्‍द भी कहने में आपको झिझक लगती है। (व्‍यवधान)

श्री प्रकाश चौधरी (बड़ी सादड़ी): 000

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): बार-बार समझाइश के बाद दोनों समुदायों में शांति, अमन-चैन रहने के लिए वहां शांति समिति की बैठक हुई है। (व्‍यवधान)

श्री प्रकाश चौधरी (बड़ी सादड़ी): 000

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): उसके बाद सारा बाजार खुला है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री प्रकाश चौधरी (बड़ी सादड़ी): 000

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): आप क्‍या जानते हो बेगूं के बारे में? कभी बेगूं देखा भी है या नहीं देखा है? (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: चर्चा समाप्‍त हुई। अंकित नहीं हो। चर्चा समाप्‍त। चर्चा समाप्‍त हुई।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): यह कोई डोडे-चूरे की गाड़ी नहीं है। यह कोई डोडे-चूरे की गाड़ी नहीं है जिसको बेगूं में बेच दिया है। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय मंत्रीजी, माननीय मंत्रीजी, चर्चा समाप्‍त हुई।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री अध्‍यक्ष: कोई अंकित नहीं हो। आपको मंत्रीजी ने जवाब दे दिया। मंत्रीजी ने जवाब दे दिया।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री अध्‍यक्ष: अब जो करेगा, अंकित नहीं होगा।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): आपके राज में कितने साम्‍प्रदायिक दंगे हुए और कल आपके सामने मैंने एक-एक फिगर पढ़ा है। 18 लोगों की मौत हुई गोली चलने से, कल मैंने एक-एक आंकड़ा देकर यह प्रूव किया कि हमारे टाइम में साम्‍प्रदायिक सौहार्द्र ज्‍यादा अच्‍छा है। कांग्रेस के समय में मैंने कहा, कल मैंने आपको आंकड़े दिये सारे के सारे, मैंने कोई चीज नहीं छिपाई। आपके शासन में दंगों में 18 लोगों की गोली चलने से मौत हुई है। क्‍या बात करते हो? (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री प्रकाश चौधरी (बड़ी सादड़ी): 000

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): केवल बात को उठा लेने से, इस तरह पलीता लगाने से कोई फायदा नहीं होता है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

श्री अध्‍यक्ष: चर्चा समाप्‍त हुई। स्‍थान ग्रहण करें। मैंने कहा, चर्चा समाप्‍त हुई।

राजसमन्‍द से आने वाले माननीय सदस्‍य।

प्रो. बीरूसिंह राठौड़ (बनीपार्क):  000 

श्री अध्‍यक्ष: बनीपार्क से आने वाले माननीय सदस्‍य, चर्चा समाप्‍त हुई।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): 000

नियम 295 के अन्‍तर्गत प्राप्‍त विशेष उल्‍लेख की सूचनाएं

श्री अध्‍यक्ष: आज चूंकि बहुत महत्‍वपूर्ण मांग पर आपको विचार करना है, इसलिए मैं चाहूंगी कि 295 के जो प्रस्‍ताव दिये हैं, इन्‍हें पढ़ा हुआ मान लिया जाये और इसके साथ ही मैं एक और निवेदन करना चाहूंगी कि केवल 250 शब्‍दों तक 295 सीमित रहना चाहिए।

 

Jkj/akt/13.20/1p/21.3.2007

 

कुछ माननीय सदस्‍य हजार-हजार शब्‍द लिख देते हैं, इतना बड़ा लिखते हैं, इसलिए केवल ढाई सौ शब्‍द ही अलाऊ हैं उसी में आप अपनी बात को, संक्षेप में अपनी बात लिखा करें। परची पर, मैं तीन मिनट से अधिक समय परची पर नहीं दूंगी, इसलिए, सबसे पहले रामरतन बैरवा।

श्री जुबेर खान: अध्‍यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है आसन से कि मांग पर दस से पन्‍द्रह मिनट से ज्‍यादा किसी को बोलने नहीं दें, आसन से ऐसी व्‍यवस्‍था हो ताकि ज्‍यादा से ज्‍यादा मांगों पर अपनी बात रख सकें, दस और पन्‍द्रह मिनट के बीच में बाइंड-अप हो जाना चाहिए।(व्‍यवधान) अगर आप भी आसन पर नहीं रहें, अन्‍य कोई आसन पर आता है तो उनको भी ऐसा ही आप कहो....

श्री अध्‍यक्ष: जो कोई भी होगा, वह इस बात का पालन करेगा कि समय जो नियत किया गया है उस नियत समय के अंदर, आप अपनी तरफ से सूची दे दें, उस सूची के मुताबिक वह समय को रेस्ट्रिक्‍ट करेंगे। यदि आपके पाँच बोलना चाहेंगे, इधर से दस बोलना चाहेंगे, दो-चार इंडिपेंडेंट या अन्‍य पार्टी वाले बोलना चाहेंगे, उस हिसाब से समय का वितरण करके और उसी हिसाब से समय दिया जायेगा। (व्‍यवधान) मैं नहीं, वह जो कोई भी बैठेगा यहां पर, उसी हिसाब से करेगा। रामरतन बैरवा।

 

 

पर्ची के माध्‍यम से उठाये गये मुद्दे

जयपुर-अजमेर मेगा हाई-वे का शाहपुरा तहसील में स्‍थान परिवर्तन

श्री रामरतन बैरवा(शाहपुरा): आदरणीय अध्‍यक्ष महोदय, एक बार अपने यहां से शिष्‍टमंडल संयुक्‍त राज्‍य अमेरिका गया विकास देखने के लिए और वहां जाकर विकासकर्ताओं से बात की कि आपका विकसित राष्‍ट्र है इसलिए शानदार सड़कें हैं। वहां के विकासकर्ताओं ने यह कहा हम विकसित राष्‍ट्र हैं इसलिए शानदार सड़क नहीं है, शानदार सड़कें हैं इसलिए हम विकसित राष्‍ट्र हैं और यही सोच हमारे राष्‍ट्रनायक अटलजी का लक्ष्‍य बनीं और उसी सोच के तहत वर्तमान हमारी यशस्‍वी मुख्‍य मंत्री के आशीर्वाद से हमारे यहां जयपुर से.......

श्री अध्‍यक्ष: आप मेगा हाईवे पर आ जाओ। हां, बस। तीन मिनट का समय है, मेगा हाईवे पर आओ।

श्री रामरतन बैरवा: कांकरोली का मेगा हाईवे स्‍वीकृत हुआ बड़ा भारी-भरकम वाला।(व्‍यवधान) वह मेगा हाईवे स्‍वीकृत हुआ और राजमार्ग, स्‍टेट हाईवे नम्‍बर बारह पर स्‍वीकृत हुआ है वह, जो जयपुर से अजमेर चौराहे तक बनेगा, वह हमारी शाहपुरा तहसील में गुजरेगा, एक शानदार मेगा हाईवे पर चमचमाहट करती हुई सड़क बनेगी। (व्‍यवधान) बनेगी और उससे शाहपुरा तहसील का विकास होगा।  जिस मार्ग पर निकलेगा वहां आलरेडी एक पाँच-छह मीटर की चौड़ाई की सड़क है और वह भी शानदार सड़क है। मैं चाहूंगा कि यह सड़क उस जो वर्तमान में स्‍वीकृत है, वहां से नहीं निकल करके वाया फुलिया कलां जो मेरी तहसीलका शाहपुरा कस्‍बे के बाद में सबसे बड़ा ग्राम है और उप तहसील है, प्रसिध्‍द शक्ति पीठ दीनाब माताजी का मंदिर है और एक तरफ खारी मानसी त्रिवेणी संगम पर धानेश्‍वर महादेव का स्‍थान है।  अगर यह इधर निकलेगा तो पूरे क्षेत्र का विकास होगा, छह ग्राम पंचायतें तो हमारी शाहपुरा तहसील की इससे जुड़ी हुई है और इतनी की इतनी हमारी केकड़ी तहसील की ग्राम पंचायतें जुड़ी हुई हैं, तो उनका विकास होगा और एक तहसील में दो ऐसे हाईवे हो जायेंगे, डबल मार्ग हो जायेगा तो ज्‍यादा विकास होगा। और एक तरफ डबल मार्ग है उसी में परिवर्तन होगा तो यह सिंगल रोड ही रह जायेगी। मैं चाहूंगा मंत्री महोदय से, आपके आशीर्वाद से मंत्री महोदयजी से मेरा निवेदन है कि मेरा आप यह थोड़ा सुन लो और शाहपुरा की जनता के ऊपर आप कृपा करें। यह राजमार्ग मेगा हाईवे शाहपुरा तहसील में फुलिया कलां होकर के निकले तो अच्‍छा विकास होगा। वैसे शाहपुरा कोई परिचय का मोहताज नहीं है, हमारे यहां प्रसिध्‍द स्‍वतंत्रता सेनानी हुए हैं, बारेठ परिवार के हिसाब से पूरा भारत जानता है, ऐसे प्रसिध्‍द क्रांतिकारियों की जन्‍मस्‍थली है और जितना रियासतों का विलय हुआ है, वह हमारे राजाधिराजजी ने सर्वप्रथम अपनी शाहपुरा स्‍टेट का उसमें विलय कराया, तो शाहपुरा मोहताज नहीं है परिचय का।  तो आपके आशीर्वाद से मंत्रीजी से मेरा निवेदन है कि मैं चाह रहा हूं, यह मेगा हाईवे इधर निकले जिससे हमारे शाहपुरा का विकास हो सकेगा। जय हिन्‍द।

श्री अध्‍यक्ष: धन्‍यवाद। धन्‍यवाद। श्री राव राजेन्‍द्र सिंह।

खुदरा व्‍यवसाय में मल्‍टीनेशनल्‍स के प्रवेश का प्रभाव

श्री राव राजेन्‍द्र सिंह(बैराठ):  आदरणीय अध्‍यक्ष महोदय, जिस विषय को सीमित समय में मैं निवेदन करना चाहूंगा, बेसिकली यह उस चीज से रिलेटेड है कि आर्गेनाइज्‍ड बिजनस कार्पोरेशंस, मल्‍टी नेशनल्‍स जिस तरीके से रिटेल बिजनस के अंदर आ रहे हैं, इसका जो इम्‍पेक्‍ट हमारे रिटेल बिजनस होल्‍डर्स पर और उनके लाइवलीहुड पर और एम्‍पलायमेंट पर पड़ेगा उससे यह सीधा कनेक्‍टेड है।  कोई साइंटिफिक सर्वे या स्‍टडी नहीं हुई है लेकिन पेनसिलवेनियन यूनिवर्सिटी ने जब इसकी सर्वे करी और उन्‍होंने यह पाया कि जहां से इस सोच को हम अपने यहां, अपने देश में और अपने प्रदेश में प्रतिपादित करने जा रहे हैं उसकी स्‍टडी इसके बारे में क्‍या कहती है और उसका इम्‍पेक्‍ट कितने लोगों पर पड़ेगा। आपकी जो स्‍टडी है वह यह कहती है कि there are at least 12 million small shopkeepers. There are 40 million hawkers. Out of 600 million small farmers, there are 200 million who are directly connected with it. जब यह मल्‍टी नेशनल कम्‍पनीज रिटेल बिजनस में आयेंगी तो you will have companies like Walmart coming into India. You will have companies like Morrison coming into India. और इस चीज के तरीके से हमारे जो कार्पोरेट वर्ल्‍ड हैं वह भी रिटेल बिजनस के अंदर आने लग गये हैं। अब अगर इसकी स्‍टडी जो, जहां से इस सोच को हम यहां इम्‍पोर्ट कर रहे हैं इसकी स्‍टडी जब अमेरिका में की गई तो यह पाया कि इसके रिसर्च पर 1987 से 1999 का जो पीरियड था, in just first half of 1980s, इस फर्स्‍ट हाफ आफ द नाइंटीन एटीज के अंदर जिस वक्‍त यह आर्गेनाइज्‍ड सेक्‍टर रिटेल बिजनस में गया उसके बाद में जब 1999 में उसका सर्वे हुआ तो poverty ratio in these developed countries rose up.

(     बजे)

(श्री रामनारायण मीणा, सभापति, पदासीन)

और 1987 से 1995 में जितनी फेडरल स्‍टेट्स हैं अमेरिका की, उन्‍होंने जब वोल्‍मार्ट के एनक्रोचमेंट को अपने यहां देखा और उन्‍होंने सर्वे कराया तो वह भी चौंकाने वाले रिजल्‍ट्स आये कि poverty ratio went up. Now we are talking in the context of a country which is already suffering from unemployment and poverty. इसके साथ-साथ एक सर्वे आया है वर्ल्‍ड बैंक का। World Bank says that global poverty estimates report the number of people living on less than one dollar to 2 dollar a day but the purchasing power disparity जिसको अपन पीपीपी कहते हैं, if negotiated and co-related in India, we have people who are living on .20 dollar to .50 dollar which is basically 20 cents to 60 cents. You have a scene which is already there, as transparent as it used to be.  And here you have these multinationals encroaching upon livelihood of people, 12 million people who depend on what they are doing everyday from morning till evening. At least these people are termed to be those individuals who are earning a livelihood in a decent and self-respectful manner. You will render 12 million more people unemployed. You will render 200 million farmers totally dependant on these multinationals.  और एक सर्वे आई है जिसकी तीन चीज है, जब यह मल्‍टी नेशनल्‍स आर्गेनाइज्‍ड रिटेल बिजनस में गई तो वहां जो अमेरिका के अंदर खुदरा व्‍यापारी है जिसको अपन यहां खुदरा व्‍यापारी कहते हैं, those shops are known as ‘Mom and Pop’ shops, mother and father’s shops. एक तो उन पर जो इफेक्‍ट पडा. Those shops which were having a socio-economic bearing on their society, वह खुद के लिए भी नहीं कमाते थे, उसकी कमाई का कुछ अंश सोसाइटी को जाता था, सोशियल वहां पर अपब्रिंगिंग को जाता था। दो मिनट मैं, सभापति महोदय, लूंगा, बिकाज अल्‍टीमेटली इसके इम्‍पेक्‍ट का पता नहीं पड़ेगा। उसके अंदर they were rendered unemployed. They were forced to seek employment in these multinationals like Walmart which are supposed to be retail outlets where their salary was dictated by the person concerned.  उनका जो सोशियल इकोनोमिक फाल आउट हुआ उससे इवन एजुकेशनल पर्सेंटेज का रेश्‍यो, children who were seeking higher education, may be going in for research, because in developed countries, education is a very expensive affair, even they were rendered forfeited.  इसका जब फाल आउट इंडिया पर देखा गया कि what would be the scene in India and I am talking about Rajasthan because we have already seen corporate world moving into this. रिलायंस फ्रेश आने लग गया है, it will soon be time when Walmart will start coming into it. आपने कभी देखा है कि आपका सब्‍जी वाला या आपका हाकर, जो आपका आम बिजनसमेन है उसका पूरा परिवार उस पर डिपेंडेंट है, अगर आप एक वोल्‍मार्ट को यहां ले आये या एक रिलायंस फ्रेश आयेगा, कितने सब्‍जी वाले, कितने हाकर्स और कितने फार्मर्स, जहां से यह सीधे सब्‍जी खरीद कर लेकर आते हैं, जिस मंडी से लेकर आते हैं, मंडी के बीच का जो आ‍ढ़तिया होता है, यह पूरे के पूरे एक ट्रेड की एम्‍पलायमेंट की जो चेन है, किस तरह से इसका डिस्‍टर्ब होगा। आपका खुद का सर्वे इस बात को कहता है कि जिस कम्‍पनी के, और यह 2006 में जब मौजूदा राष्‍ट्रपति जार्ज बुश इंडिया आये और हैदराबाद के अंदर जिसको गवर्नमेंट आफ इंडिया ने कहा है, this is the soft launch of the second green revolution. Do you know, who are the members in the Indo-US Economic Forum and Education Forum? Walmart is one of them. Mozart is one of them.

 

Lpm/akt/1330/1q/2132007

 

आये है एग्रीकल्‍चर रिसर्च के नाम पर, आये है एजुकेशन के नाम पर और उनके बोर्ड 63ण्‍आफ डायरेक्‍टर्स की मीटिंग में वो कहा, we are not interested in agriculture research, we are not interested in experimenting it. We are only interested in sending our products to India. You render the Indian population, the younger generation unemployed and you bring in more poverty and these Walmart people in their Board of Directors meetings … and they are also members of the Governing Board of Indo-US research ये सारी की सारी चीजे इसके अंदर हैं। अगर ये वाकई में लागू हो गई तो आपको अपनी गली के अंदर अन-एम्‍प्‍लोई बच्‍चे घुमते हुए मिलेंगे। इन एयरकंडीशन रिटेल मॉल्‍स में जाकर सब्‍जी खरीदना फैशन जरूर है लेकिन इस फैशन के पीछे कितने लोग घर से बेघर हो जाएंगे, कितने बच्‍चों को सुबह से शाम की रोटी नहीं मिलेगी और कितने ऐसे स्‍मॉल फार्मर्स है जो बड़ी मछलियों के निवाले बन जाएंगे? यह अपने आपमें बहुत बड़ी चीज है. Agriculture Department, the Department of Industries, who go to see it ….

श्री सभापति: आपने पाँच मिनट ले लिया।

श्री राव राजेन्‍द्र सिंह (बैराठ): I am sorry, आप अगर फरमाये तो I will conclude it. Because this is a matter which is related to …which is multi-dimensional …

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): सभापति महोदय बात बहुत पते की बोल रहे हैं पर बोल इंगलिश में रहे हैं यह मेरी पीड़ा है बाकी बात तो बहुत बढि़या है।

श्री राव राजेन्‍द्र सिंह (बैराठ): मैं एक उदाहरण देना चाहूंगा इस बात का क्‍योंकि यह सीधी सेन्‍ट्रल गवर्नमेंट से रिलेटिड है इसकी सीरियसनेस पर जब कांग्रेस पार्टी की प्रेसीडेंट मिसेज सोनिया गांधी ने जो चिट्ठी लिखी, उस चिट्ठी का मैं आपको एक वर्जन देना चाहता हूं – “In her letter, Mrs. Gandhi expressed the concern of the aam adami the common man and has received a suggestion from many quarters about the desirability for a study to the possible impact of transitional phase of supermarket. Though I would convey this to you that they have considered, having the relevant issue, properly but unfortunately for Manmohan Singh, it is commerce rather than economics which matters a lot.”

We are living in a materialistic world but you cannot forego, you cannot ignore your social obligations towards the masses of this country. This country needs to be taken into confidence, the Government needs to take people of the country into confidence. And the Rajasthan Government should see to it that this does not filter into our federal State.  We should put a stop to it. You do it in such a way that if they come here, they pay through their noses. Those who are affluent and rich enough can go and buy there. Otherwise common hawkers, common shopkeepers should not be deprived of a respectful livelihood.

Thank you very much.

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): सभापति महोदय, यह विषय बहुत इम्‍पोर्टेंट है (व्‍यवधान) पूरी विधान सभा को पार्टी बाजी छोड़कर के फैसला करना चाहिए और निर्णय लेना चाहिए कि राजस्‍थान में वॉल-मार्ट या रिलायंस को इस सब्‍जी में या परचूनी मार्केट में परमिशन नहीं दी जाए क्‍योंकि वास्‍तव में इतनी भयंकर स्थिति होने वाली है यह वॉल-मार्ट के आने के बाद अगर किसान, यहां का मजदूर और यहां का डेली-विजेज वाला व्‍यक्ति बेघर हो जाएगा और बजाय धंधे के वह क्राईम करेगा (व्‍यवधान) बहुत नुकसानदेह होगा। इसलिए मेरा आपसे सजेशन यह है कि पूरी विधानसभा में यह प्रस्‍ताव पास करके सरकार यह घोषणा करे कि हम वॉल-मार्ट को या रिलायंस को या किसी भी एजेंसी को इस फिल्‍ड में परमिशन नहीं देंगे।

श्री सभापति: सरकार चाहे तो कर सकती है। श्री तगाराम चौधरी।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): (व्‍यवधान) का काम छीना जा रहा है इस व्‍यवस्‍था से हजारों लोगों का काम छीना जा रहा है, बेरोजगार हो रहे हैं लोग।

बाड़मेर नगर के मध्‍य से निकलने वाली रेलवे लाइन से होने वाली असुविधा

श्री तगाराम चौधरी (बाड़मेर): मेरे को बोलने दीजिए, माननीय सभापति महोदय, आपकी अनुमति से मैं मेरे विधानसभा क्षेत्र बाड़मेर के जिला मुख्‍यावास और नगर बाड़मेर की जनता और आणंद से दूर-दूर से आने वाली सभी जनता जो बाड़मेर से आती है उनकी विकट समस्‍या की और मैं माननीय मुख्‍यमंत्री जी और माननीय निर्माण मंत्री जी का ध्‍यान आकर्षित करना चाहूंगा। बाड़मेर नगर की लंबाई है ज्‍यादा उसके बीचों-बीच ब्रॉड गेज रेलवे लाईन निकलती है और आगे पाकिस्‍तान की तरफ भी जाती है, जो अन्‍तर-राष्‍ट्रीय मार्ग भी कहा जा सकता है। रेल मार्ग पर इतनी गाडि़या आती हैं, जाती हैं, सात गाडि़या आना और सात गाडि़यां जाना तो अभी है और फिर बढ़ने की संभावना है, उसको देखते हुए नगरवासियों को चौबीसों घंटे रेल पार करने में बड़ी भारी कठिनाई उत्‍पन्‍न हुई है और उसका सामना करना पड़ रहा है हमको। मैं निवेदन करना चाहूंगा कि पाँच समपार है लेकिन उसमें से चार समपार ऐसे हैं जो एक तो कांडला से पठानकोट जाने वाला राष्‍ट्रीय राजमार्ग नम्‍बर-15, बाड़मेर के सर्किट हाउस के पास वाला समपार, दूसरा है चिलम बस स्‍टेशन और विवेकानंद चौराहे से सिंदरी रोड जाने वाला समपार, तीसरा है किसान छात्रावास से नेहरू नगर जाने वाला समपार, चौ‍था है ढाणी बाजार से चौहटन जाने वाली सड़क के ऊपर रेलवे समपार। इन चार समपार पर चाहे ऊपरी पुलिया निर्माण किया जाए तो वह तो तकनीकी अधिकारी तय करेंगे या भूमिगत इन चार समपार को जब तक नहीं निर्माण किया जाएगा तब तक बाड़मेर की जनता और दूर दूर से आने वाली पठानकोट से कांडला की नेशनल हाईवे भी है, दूसरी रोड भी हैं, सभी पार होती है तथा बहुत वाहन पार होते है, जनता पार होती है तो उनकी सुविधा के लिए मैं माननीय निर्माण मंत्री महोदय से करबद्ध प्रार्थना करूंगा कि आप अपने अधिकार का पूरा प्रयोग करके और रेलवे से भी और सरकार क्‍या कर सकती है इसके बारे में, यह विकट समस्‍या जिनको दूर करने का पूरा भरोसा दिलाये और आश्‍वासन मिले तब जाकर के मैं यह कहने लायक होऊंगा कि मेरी यह समस्‍या है उसका कुछ न कुछ होगा।

श्री सभापति: आज डिमाण्‍ड भी है इस पर।

श्री तगाराम चौधरी (बाड़मेर): डिमाण्‍ड तो है ही परंतु पर्ची के माध्‍यम से मैं वहां की विकट समस्‍या है उसके बारे में (व्‍यवधान)

श्री सभापति: ठीक है, आप बिराजे। बोलना चाह रहे हैं आपके बारे में।

श्री तगाराम चौधरी (बाड़मेर): आपका समय लिया, बिलकुल दो मिनट ही लिया ज्‍यादा नहीं लिया, आपने समय दिया इसलिए आपका बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): सभापति महोदय, बाड़मेर से आने वाली माननीय सदस्‍य ने बाड़मेर जैसलमेर का जो नेशनल हाईवे है, नेशनल हाईवे नम्‍बर-15 जो शहर के मध्‍य से गुजरता है उसमें आर ओ बी बनाने की मांग की है और एक स्‍टेट हाईवे 40 है यह भी शहर के मध्‍य से गुजरता है इसमें भी आर ओ बी बनाने की मांग की है। दो अन्‍य स्‍थानों का उल्‍लेख भी आपने किया है। सभापति महोदय, जो नियम बने हुए हैं एक लाख ट्रेन व्‍हीकल यूनिट यानी जो आपका रेलवे फाटक है वह 24 घंटे में कितने घंटे बंद रहा और उसमें कितना ट्रेफिक रुकता है इसका एक रेलवे मंत्रालय ने एक निर्धारित मापदण्‍डों के अनुयार इसकी स्‍टडी करवाता है और उसमे एक लाख ट्रेन व्‍हीकल यूनिट तो होनी चाहिए। राष्‍ट्रीय राजमार्ग के जिस आर ओ बी का आपने जिक्र किया है उसमें भी जो स्‍टडी हुई है उसमें 67,314 है मैं इसको फिर दिखवा रहा हूं। अगर किसी के अंदर भी मापदण्‍ड पूरा करता है चूंकि इसमें आधा पैसा केन्‍द्रीय सरकार रेलवे मंत्रालय के मार्फत देती है और आधा पैसा राज्‍य सरकार का है। इसलिए जो भी मापदण्‍ड पूरा करोगे उसमें निश्चित तौर पर कार्यवाही करेंगे।

श्री सभापति: श्री राकेश मेघवाल, अनुपस्थित।

सदन की मेज पर रखे गये पत्र

आउटकम बजट वर्ष 2005-06 व 2006-07

श्रीमती वसुंधरा राजे, मुख्‍यमंत्री आउटकम बजट वर्ष 2005-2006 एवं वर्ष 2006-2007 सदन की मेज पर रखेंगी

श्री वीरेन्‍द्र मीणा (राज्‍य मंत्री, वित्‍त एवं करारोपण): माननीय सभापति महोदय, मैं आउटकम बजट वर्ष 2005-2006 एवं वर्ष 2006-2007 सदन की मेज पर रखता हूं।

 

 

 

श्री सभापति: श्री मोहन मेघवाल, सभापति, अनुसूचित जाति कल्‍याण समिति, 2006-2007 समिति के दो प्रतिवेदन उपस्‍थापन करेंगे।

(अनुपस्थित)

याचिकाओं का उपस्‍थापन

डा. श्रीगोपाल बाहेती, सदस्‍य विधान सभा तीन याचिकाओं का उपस्‍थापन करेंगे।

 

Bhs/akt/21.3.07/13.40/2a

 

डॉ.श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर):  सभापति महोदय, मैं श्री पुष्‍कर राज से डबल फाटक ब्‍यावर रोड तक सड़क का निर्माण करने बाबत दो व्‍यक्तियों द्वारा हस्‍ताक्षरित, II.जिला अजमेर के ग्राम पीसांगन में बीसलपुर से पानी सप्‍लाई किये जाने बाबत चार व्‍यक्तियों द्वारा हस्‍ताक्षरित  एवं जिला अजमेर श्री पुष्‍करजी में राजकीय महाविद्यालय खोलने बाबत पाँच व्‍यक्तियों द्वारा हस्‍ताक्षरित याचिकाएं उपस्‍थापित करता हूं।

श्री सभापति: श्री हीरालाल (बामनवास), सदस्‍य, विधान सभा तीन याचिकाएं उपस्‍थापित करेंगे।

श्री हीरालाल (बामनवास): सभापति महोदय, मैं आपकी अनुमति से विधान सभा क्षेत्र बामनवास में नालों से बेकार बहकर जाने वाले पानी को रोक कर एनीकट बनवाने बाबत पाँच व्‍यक्तियों द्वारा हस्‍ताक्षरित II. विधान सभा क्षेत्र बामनवास के कस्‍बा बौंली को चरपक्‍या दय योजना से पीने का पानी उपलब्‍ध करवाने बाबत पाँच व्‍यक्तियों द्वारा हस्‍ताक्षरित एवं तहसील बौंली जिला सवाईमाधोपुर में बोरदा नाले की क्षतिग्रस्‍त पुलिया का पुन: निर्माण करवाने बाबत पाँच व्‍यक्तियों द्वारा हस्‍ताक्षरित याचिकाएं उपस्‍थापित करता हूं।

श्री सभापति: श्री अशोक बैरवा खण्‍डार, सदस्‍य, विधान सभा दो याचिकाएं उपस्‍थापित करेंगे।

श्री अशोक बैरवा खण्‍डार (खण्‍डार): सभापति महोदय, मैं विधान सभा क्षेत्र खण्‍डार के ग्राम टोडरा फलौदी से श्री कमलेश्‍वर महादेव तक सड़क एवं पुलिया निर्माण बाबत पाँच व्‍यक्तियों द्वारा हस्‍ताक्षरित एवं विधान सभा क्षेत्र खण्‍डार के ग्राम टोडरा फलौदी को रेल्‍वे स्‍टेशन खाजना डूंगर से जोड़ने हेतु सड़क निर्माण बाबत पाँच व्‍यक्तियों द्वारा हस्‍ताक्षरित याचिकाएं उपस्‍थापित करता हूं।

श्री सभापति: श्री बंशीलाल खटीक, सदस्‍य, विधान सभा दो याचिकाएं उपस्‍थापित करेंगे।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): माननीय सभापति महोदय, विधान सभा क्षेत्र राजसमन्‍द की विभिन्न सड़कों के निर्माण बाबत पाँच व्‍यक्तियों द्वारा हस्‍ताक्षरित एवं जिला राजसमन्‍द में केन्‍द्रीय सहकारी बैंक की स्‍थापना करने बाबत पाँच व्‍यक्तियों द्वारा हस्‍ताक्षरित याचिकाएं उपस्‍थापित करता हूं।

श्री सभापति: विधायी कार्य। पुर:स्‍थापित किये जाने वाला विधेयक

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे, प्रभारी मंत्री प्रस्‍ताव करेंगी कि राजस्‍थान मूल्‍य परिवर्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2007 को पुर:स्‍थापित करने की आज्ञा प्रदान की जाय।

विधायी कार्य: विधेयक का पुर:स्‍थापन

राजस्‍थान मूल्‍य परिवर्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2007

 

श्री वीरेन्‍द्र मीणा (राज्‍य मंत्री, वित्‍त एवं करारोपण): सभापति महोदय, मैं राजस्‍थान मूल्‍य परिवर्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2007 को पुर:स्‍थापित करने की आज्ञा के लिए प्रस्‍ताव करता हूं।

श्री सभापति: प्रश्‍न यह है कि राजस्‍थान मूल्‍य परिवर्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2007 को पुर:स्‍थापित करने की आज्ञा प्रदान की जाय?

(स्‍वीकृत)

विधेयक को पुर:स्‍थापित करने की आज्ञा प्रदान की गई।

श्री वीरेन्‍द्र मीणा (राज्‍य मंत्री, वित्‍त एवं करारोपण): सभापति महोदय, मैं राजस्‍थान मूल्‍य परिवर्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2007 को पुर:स्‍थापित करता हूं।

सभापति महोदय, मैं प्रक्रिया के नियम 63(1) के अंतर्गत राजस्‍थान मूल्‍य परिवर्धित कर (संशोधन) अध्‍यादेश, 2006 (वर्ष 2006 का अध्‍यादेश संख्‍या-5) को जारी करने के कारणों का विवरण भी सदन की मेज पर रखता हूं।

श्री सभापति: आय-व्‍ययक अनुमान वर्ष 2007-08, द्वितीय अवस्‍था ।

अनुदान की मांगों पर विचार एवं मतदान

श्री राजेन्‍द्र राठौड़, सार्वजनिक निर्माण मंत्री, अनुदान की मांग संख्‍या 19 एवं 21 तथा श्री कनकमल कटारा, जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री अनुदान की मांग संख्‍या-30 विचार एवं मतदान हेतु प्रस्‍तुत करेंगे।

अनुदान की मांग

मांग संख्‍या 19 लोक निर्माण कार्य की प्रस्‍तुति

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): सभापति महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूं कि मांग संख्‍या-19 लोक निर्माण कार्य के संबंध में 31 मार्च, 2008 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 3,72,11,81,000/- (तीन अरब बहत्‍तर करोड़ ग्‍यारह लाख इक्‍यासी हजार) तक की राशि प्रदान की जाय।

 

 

 

मांग संख्‍या 21 सड़कें एवं पुल की प्रस्‍तुति

सभापति महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूं कि मांग संख्‍या-21 सड़क एवं पुल के संबंध में 31 मार्च, 2008 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 13,10,35,19,000/- (तेरह अरब दस करोड़ पैंतीस लाख उन्‍नीस हजार) तक की राशि प्रदान की जाय।

मांग संख्‍या 30 जनजाति क्षेत्रीय विकास की प्रस्‍तुति

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): माननीय सभापति महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूं कि मांग संख्‍या-30 जनजाति क्षेत्रीय विकास के संबंध में 31 मार्च, 2008 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 8,93,37,25,000/- (आठ अरब तिरानवे करोड़ सैंतीस लाख पच्‍चीस हजार) तक की राशि प्रदान की जाय।

श्री सभापति: श्री भंवरलाल राजपुरोहित।

मांग संख्‍या 19, 21 व 30 पर विचार

डा. भंवरलाल  राजपुरोहित (मकराना): सभापति महोदय, मैं आज सड़क की मांग का समर्थन करते हुए मेरी बात रख रहा हूं। सभापति महोदय, किसी भी देश और राज्‍य में जहां अच्‍छी सड़कें हों, अच्‍छे पुल हों, अच्‍छे मकान हों वो प्रगतिशील प्रदेश कहलाता है और वह प्रदेश प्रगति का द्योतक भी कहलाता है। राजस्थान प्रदेश में आज की तारीख में सबसे अग्रणी है सड़क। सभापति महोदय, मैं एक बात कहना चाहता हूं कि एक शिक्षक ने कक्षा में बच्‍चों के सामने ब्‍लेक बोर्ड पर एक लाइन खींच कर पूछा कि इस लाइन को बिना मिटाये तुम छोटी कर दो, तो बड़ा संकट हो गया बच्‍चों के। बिना मिटाए बड़ी कैसे की जा सकती है, लेकिन एक विद्वान छात्र ने उस लाइन के पास एक चॉक लेकर के एक बड़ी लाइन खींच दी तो यह साबित हो गया कि ये लाइन छोटी है। इसी तरह मैं यह बात कहना चाहता हूं सभाप‍ति महोदय, राजस्‍थान की पूर्व सरकार के बाद जब वर्तमान सरकार की हमारी यशस्‍वी मुख्‍यमंत्री ने राज सँभाला तो अच्‍छे-अच्‍छे कर्मठ और व्‍यक्तित्‍व के धनी अच्‍छे-अच्‍छे मंत्रियों को नियुक्ति दी। उससे आज नतीजा यह निकला कि आज के तीन साल पहले से देखता हूं और मैं तो देखता ही आ रहा हूं राजस्‍थान में सड़कें बिलकुल टूटी हुई थीं और नहीं के बराबर सड़कें थीं और आज की तारीख में सभापति महोदय, मैं आंकड़ों से बताना चाहता हूं कि जिस राजस्‍थान 3,42,000 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और गांवों में 70 प्रतिशत आबादी रहती है 32 जिले और 241 तहसीलें हैं, 237 पंचायतें हैं वहां 1949 में कुल 13553 किलोमीटर डामर की सड़कें थी और 4350 किलोमीटर मैटल सड़कें थीं और कुल 230 किलोमीटर ग्रेवल सड़कें थीं। एक लाख  जनसंख्‍या पर 80.25 किलोमीटर की सड़कें थीं। कई जिला मुख्‍यालयों पर 32 जिलों में से 16 जिलों में सड़कें नहीं थीं ये तो मैं देखता आ रहा हूं । राज्‍य में 2006 तक कुल सड़कों की लंबाई 1,67,128 किलोमीटर हो गयी थी जिसमें 1,12,200 किलोमीटर डामर और 4980 किलोमीटर मैटल और 44,300 ग्रेवल सड़कें थीं। राज्‍य में घनत्‍व के हिसाब से 48.83 किलोमीटर प्रति सौ किलोमीटर में ये घनत्‍व है उसका। पाँच वर्ष के कार्यकाल में पूर्व सरकार के पास 1904 करोड़ का निवेश था। हमने 4055 करोड़ निवेश किया यानी पूर्व सरकार के निवेश से हमने तीन गुना ज्‍यादा निवेश सड़कों के लिए किया। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अन्‍तर्गत 18660 किलोमीटर सड़कों का निर्माण हुआ। 5538 गांवों को सड़कों से जोड़ा गया। 14724  डामर सड़क का निर्माण किया गया। 4600 किलोमीटर गांवों को जोड़ा गया। पूर्व सरकार ने सिर्फ 3936 किलोमीटर डामर का कार्य किया वो भी जर्जर और जिसकी गुणवत्‍ता की भी गारंटी नहीं थी। सभापति महोदय, केवल 918 किलोमीटर गांवों को जोड़ा। हम प्रति वर्ष 430 किलोमीटर लंबाई में सुदृढ़ीकरण एवं नवीनीकरण का कार्य करवा रहे हैं। मुख्‍यमंत्री सड़क योजना में सभापति महोदय, 7 अक्‍टूबर, 2005 से सड़क योजना शुरू की गई। मेगा हाइवे परियोजना प्रथम पाँच राजमार्ग जो 1053 किलोमीटर सड़कों का चौड़ाईकरण  एवं नवीनीकरण भी किया गया। 11 ओवरब्रिज  भी बनाये गये, 28 बाईपास का निर्माण प्रगति पर है।

 

कैलाश/अरुण       21.3.07  13.50  (1) 2b

 

सभापति महोदय, इन सडकों में पूर्व सरकार ने कभी इस बात का ध्‍यान नहीं दिया जहां भी डामर की सड़क बनाई और वहां गांव आग गया गांव में जो जल बहता था उससे सड़कें टूट जाती थी और लाखों करोडों रुपये का प्रतिवर्ष का नुकसान होता था । हमारी सरकार ने इस बात पर ध्‍यान दिया, हमारे इजीनियरों ने इस पर ध्‍यान दिया और जिन गांवों में डामर रोड थी उनमें सीमेंट कांकरीट पत्‍थर की 238 किलो मीटर की सडकों पर 171 करोड़ रुपये खर्च किये गये । सभापति महोदय, राज्‍य में 4600 किलो मीटर मेटल रोड के डामरीकरण हेतु 458 करोड़ की स्‍वीकृतियां की है उन पर कार्य हो रहा है । इतना ही नहीं हमारी सरकार  जितने भी धार्मिक स्‍थान है उनको भी नहीं छोड रही है क्‍योंकि वह जनता की भावनाओं से जुडा हुआ है इसलिए हमारी सरकार ने धार्मिक पर्यटन स्‍थलों को भी 544 किलो मीटर लंबी सडके बनाकर जोडा है जिस पर 79 करोड़ रुपया खर्च होगा ।

मान्‍यवर, हमने कई आदर्श सडकों का निर्माण किया और हमने 17 ओवर ब्रीज, 8 रेलवे ओवर ब्रीज का कार्य हमने शुरू कर रखा है जो प्रगति पर है । राजस्‍थान सरकार ने अभी जितनी भी रोड बनाई है वह इतनी रोड बनाई जिसमें कई मिस लिंक बाकी रह गई । हमारी सरकार ने इस ओर ध्‍यान दिया और हमारी सरकार में हम लोगोंने मांग रखी है कि ऐसी मिस लिंक को जोडना जरूरी हो गया है क्‍योंकि उसके बगैर आधा मामला हो जायेगा, कई गाडियां दो-दो, तीन-तीन किलो मीटर पार नहीं कर पायेगी इससे कई तकलीफें आयेंगी । इसलिए हमारी सरकार ने इसी बजट में 3 हजार करोड़ रुपये की स्‍वीकृति दी है । 2000 करोड़ रुपये सडकों में और 78 कृषि उपज मंडी के खाते में, मतलब 3000 करोड़ रुपये की सडकें बनेंगी जिससे मुझे विश्‍वास है राजस्‍थान की काफी सडके मिल लिंक से जुड जायेंगी । सभापति महोदय, मैं राजस्‍थान की सडकों के बारे में एक बात कहना चाहता हूं यह काली काली सडके इस बात को दर्शाती है, आज इन सडकों पर कोई भी आता है वह सभी लोग इस बात की सराहना करते हैं कि गुजरात, यूपी और मध्‍य प्रदेश की कम्‍पेरीजन में हमारे राजस्‍थान की सडके इतनी सुंदर है, लोग मजाक में कहते थे सडके ऐसी बननी चाहिये जो हेमा मालिनी के गालों की तरह हो । यह तो उससे भी सुंदर सडके बनी है और इस बात का सबूत है ।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): यह पुरानी बातें हो गई, नई बात करो । माननीय मंत्री जी के गाल जैसी होनी चाहिये कहां हेमा मालिनी की बात कर रहे हैं ।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): आपको क्‍या मालूम राजेन्‍द्र जी के गाल कैसे हैं ।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): वह तो सबको पता है सफेद है । कलर सफेद है सबको पता है रोड का तो कलर काला होता है ।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): जो राजेन्‍द्र जी के गाल का कलर है वही सड़क का कलर है कोई तकलीफ है आपको । जो राजेन्‍द्र जी के गाल का रंग है वैसा राजस्‍थान की सड़क का रंग है तकलीफ क्‍या है आपको । कोई तकलीफ है क्‍या आपको ।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल): राजेन्‍द्र जी आपके गाल पर हाथ फेरते हैं क्‍या ?

डा. भंवरलाल  राजपुरोहित (मकराना): बहुत सुंदर है और गाल की तरह आपको दिखाते हैं । आप उदयपुर के निवासी हैं आप देखिए जो नेशनल हाई वे जो रोड उदयपुर जाती है कितनी सुंदर है, देखने लायक है । रात को तो देखने लायक ही होती है वह सड़क । आपको किसने मना किया था, कौनसी सरकार ने मना किया, कौनसी जनता ने मना किया कि आप काम मत करो । रुपया कोई बरसात से ही पैदा हो गया था क्‍या, यह प्रधान मंत्री ग्रामीण सड़क योजना तो पहले भी थी आपने तत्‍परता से काम नहीं कराया, कराया तो गुणवत्‍ता नहीं थी । गुणवत्‍ता नहीं होने से आज सडके टूट गई । टूटने से आज कितना नुकसान हुआ, अरबों रुपये तो रिपेयरिंग में लग गये । हमारी सरकार इस बात का दावा करती है कि जो सडके बनी हैं उसमें गुणवत्‍ता है । सभापति महोदय, मैं कहना चाहता हूं और विश्‍वास के साथ कहना चाहता हूं कि हमारी सरकार ने जो सडके बनाई है उसमें गुणवत्‍ता सबसे बडी बात है और जो टार्गेंट हमने लिया है उसको हम पूरा करेंगे । वही तो सफल सरकार कहलाती है जो पैसा सरकार को मिलता है, जनता देती है या विधान सभा देती है उसका अच्‍छा पसर्टेंज खर्च करे । हमारे व्‍यय का पसर्टेंज बहुत अच्‍छा है । इसलिए सभापति महोदय, मैं यही बात कहना चाहता हूं कि हमारी सरकार आगे बढ रही है ।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): माननीय सदस्‍य सड़क जहां बन रही थी वहां मंत्री खडे थे या इंजीनियर खडे थे ।

डा. भंवरलाल  राजपुरोहित (मकराना): मंत्री जी का ऐसा आदेश कि मंत्री के आदेश से वर्तमान के इंजीनियर कांपते हैं । उनको पैसा खाने में तकलीफ होती है । पहले जो मिलकर पैसा खा जाते थे, 50 प्रतिशत पैसा भी नहीं लगता था इस बात का सबूत है । हमारे यहां सड़कें बनी है, मैं आज से नहीं 40 साल से राजनीति में हूं मैं जानता हूं कि सडके कैसे बनी थी । आज के हमारे जो मंत्री हैं उनके आगे इंजीनियर, आज का ठेकेदार पैसा खाते डरता है । पैसा खाता है तो उसको एक साल में वापस बनानी पडती है ।

श्री महादेव सिंह (खण्‍डेला): चीफ इंजीनियर डरते नहीं हैं । चीफ इंजीनियर खुद ही ईमानदार है और अपनी ईमानदारी की वजह से ... (व्‍यवधान)

डा. भंवरलाल  राजपुरोहित (मकराना): मुझे इस बात का पक्‍का विश्‍वास है कि आज भी तीन साल तो मुझे हो गये, मैं मेरे क्षेत्र की बात कहता हूं मेरे यहां साढे तीन सौ किलो मीटर सड़कें हो गई । इतनी सड़कें मैं सपने में भी नहीं सोच सकता हूं । मेरा कोई गांव नहीं बचा है । मेरी जनता सरकार की आभारी है कि मेरे मकराना क्षेत्र में साढे तीन सौ किलो मीटर से ज्‍यादा सड़कें हो गई । 6-6 करोड़ रुपये मेरे मकराना क्षेत्र में लग गये । कोई गांव नहीं बचा है सिर्फ मिस लिंक बची है । मैं यह कह सकता हूं कि कोई एक तहसील है जो सब सड़कों से जुडी हुई है । सभापति महोदय, मैं फिर भी मिस लिंक के लिये सरकार से निवेदन करना चाहूंगा सरकार मेरे कुछ श्रेत्र में जो मिस लिंक बची हैं उनका मैं यहां नाम बताना चाहता हूं उन मिस लिंक को जोड दिया जाये जो तीन तीन किलो मीटर की मिस लिंक है । उनका नाम है:-    (1) बोरावड से कोला डूंगरी (2) बोरावड से बील्‍लू  (3) हरनावा  तोसीणा से कलौलिया (4) जिवाविया से धाननवा       (5) लाडोली से सिरसू (6) लाडपुर से गेलासर (7) मकराना से गांगवा (8) मकराना से कुचामन (9) नावद से तोसीना

सभापति महोदय, यह सड़कें यदि मकराना क्षेत्र में हो जायेगी तो कई तहसीलों से जुड जायेगी । मैं डीडवाना, कुचामन, परबतसर से जुड जाऊंगा । इन सडकों के बारे में मैं सरकार से निवेदन करना चाहता हूं कि यह जो मिस लिंक हैं आप कृपया इन मिस लिंक का ध्‍यान दें तो चारों तरफ से विकास हो जायेगा । सभापति महोदय, आपने जो मुझे बोलने का समय दिया मैं बहुत ही संक्षेप में बोला हूं क्‍योंकि मैं जानता हूं कि मेरे साथ जो नये विधायक बन कर आये हैं उनको भी बोलना है इसलिए मुझे जो आपने मौका दिया उसके लिये मैं बहुत बहुत धन्‍यवाद देता हूं और इस मांग का मैं समर्थन करता हूं, धन्‍यवाद ।

श्री सभापति: श्री शिवजी राम मीणा ।

श्री शिवजीराम मीणा (जहाजपुर): सभापति महोदय, वित्‍त वर्ष 2007-08  की अनुदान की मांग संख्‍या 19, 21 और 30 पर विचार प्रकट करने के लिये मुझे अवसर दिया उसके लिये मैं आपका आभार व्‍यक्‍त करता हूं । सभापति महोदय, राज्‍य सरकार ने गत तीन वर्षों में सड़क निर्माण का जो इतिहास लिखा है वह किसी से छिपा हुआ नहीं है । सड़कों के क्षेत्र में जो काम हुआ है इस पूरे हिन्‍दुस्‍तान में राजस्थान में एक अनूठा कार्य किया गया है । सभापति महोदय, गत पाँच वर्षों में प्रदेश में मात्र 1904 करोड़ का निवेश किया गया उसकी तुलना में इन तीन वर्षों में माननीय मंत्री जी ने जो कार्य किया है 4055 करोड़ रुपये का कार्य करवा कर एक यशस्‍वी कार्य किया है जो गत वर्ष की तुलना में तीन गुना ज्‍यादा है । प्रधान मंत्री सड़क योजना में दिसम्‍बर, 06 तक कुल 18092 किलो मीटर का सड़कों का निर्माण किया गया । उसमें से इन तीन वर्षों में इस सरकार के आने के बाद 14176 किलो मीटर सडकों का निर्माण किया गया है और करीब 4276 गांवों को सडकों से जोडा गया है । सभापति महोदय, इस सरकार द्वारा गत तीन वर्षों में जो सड़क बनाने की गति रही प्रति दिन 12 किलो मीटर सड़क बनाकर चार गांवों को जोडने का कार्य किया गया है । इसी प्रकार 7 अक्‍टूबर, 05 से मुख्‍य मंत्री सड़क योजना प्रारंभ की गई और उसके माध्‍यम से पाँच मेगा हाई वे जो स्‍टेट हाई वे हैं वह प्रारंभ किये गये। 1053 किलो मीटर सड़कों का निर्माण हाथ में लिया है उसमें सुदृढ़ीकरण उन्‍नयनीकरण का कार्य किया जा रहा है वह बहुत ही सराहनीय है । सभापति महोदय, पहले मेटल रोड को डामर से जोडते नहीं थे । पूर्ववर्ती सरकार में जहां मेटल रोड थी उसी को सड़क से जुडा हुआ मान लिया गया था । लेकिन इस सरकार ने मेटल सड़कों का डामरीकरण किया और उन गांवों में जहां पहले मेटल रोड थी उनमें भी सड़क बनाने का कार्य किया है । सभापति महोदय, वर्ष 2007-08 के लिये कुल 608 करोड़ रुपये की व्‍यवस्‍था की गई है जिसमें कई सड़कें बनाने की व्‍यवस्‍था की गई है । मैं मंत्री जी से यह निवेदन करना चाहूंगा

 

ans/  usc  14.00  2c  21.03.2007

 

8 जून 2006 को माननीय मुख्‍यमंत्री जल चेतना यात्रा में मेरे क्षेत्र में गई थी उस समय देवली से जहाजपुर की जो सड़क है एम डी आर-7 उसके सुदृढीकरण और नवीनीकरण की घोषणा की गई थी। सभापति महोदय, मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं माननीय मंत्री जी जब रिप्‍लाई दे तो उस सड़क का भी जिक्र  उसमें हो !

मेरे क्षेत्र में तीन गांव ऐसे हैं ग्राम नाथून, बेई और गेवरिया जिनकी जनसंख्‍या क्रमश: 1033,1099 और 926 हैं उसके बावजूद भी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से नहीं जोड़ी गई है। बार-बार निवेदन करने के पश्‍चात भी इस और, माननीय मंत्री जी से मैंने निवेदन किया लेकिन इसमें कोई प्रगति नहीं हो रही इसलिए मेरा आपसे निवेदन है कि इन सड़कों को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से जोड़ने का कष्‍ट करें।

माननीय मंत्री महोदय, मैं सभापति जी के माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं मेरे क्षेत्र की जो एम डी आर सड़के हैं कोटडी से ककरोला घाटी, कोटडी से बीगोद, नंदराय और शकरगढ़ से बिजोला उनका कई वर्षों से नवीनीकरण नहीं  हो रहा है, वह साइकिल में आ रही है, तो मेरा आपसे निवेदन है कि इन सड़कों   का भी नवीनीकरण कराने का कष्‍ट करें इसी बजट में।

माननीय सभापति महोदय, मेरे क्षेत्र की केवल एक सड़क है स्‍टेट हाइवे नागौर से शतूरे, उसकी स्थिति इतनी खराब है न उसकी चौड़ाई बढ़ाई जा रही है न उसको सुदृढीकरण किया जा रहा है इसलिए मेरा आपके माध्‍यम से निवेदन है इस सड़क पर भी काम कराने का कष्‍ट करें।

इसी प्रकार जहाजपुर में उपखंड कार्यालय होते हुए भी, पिछले 6 साल से उपखंड कार्यालय चल रहा है वहां उसका आफिस नहीं है, उपखंड अधिकारी के रहने का आवास नहीं है। 6 वर्षों से यह कार्य चल रहा है लेकिन उसके कार्यालय की व्‍यवस्‍था नहीं है, इसलिए मेरा आपके माध्‍यम से निवेदन है जहाजपुर में एस डी ओ कार्यालय बने, एस डी ओ के रहने का आवास बने।

इसी प्रकार से कई वर्षों से बाल विकास परियोजना संचालित की जा रही है लेकिन उनका कार्यालय सरकारी भवन नहीं है, कई वर्षों से किराये के भवन में चल रहा है, इसलिए मेरी  आपके माध्‍यम से प्रार्थना है जहाजपुर में सीडीबीओ का कार्यालय बनाने का कष्‍ट करें।

इसी प्रकार कुछ सड़कों की रिपेयरिंग नहीं हो रही है1 कोटडी से देवरिया की जो सड़क है उसमें कई वर्षों से रिपेयरिंग नहीं हो रही है, सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं उस सड़क का इसी साल में नवीनीकरण कराने  की व्‍यवस्‍था करे। माननीय सभापति महोदय, आपने बोलने का समय दिया उसके लिए आभार,धन्‍यवाद।

श्री सभापति: श्री रघुवीर सिंह मीणा।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): सभापति महोदय, मांग संख्‍या21, मांग संख्‍या 19 और मांग संख्‍या 30 पर  वाद-विवाद हो रहा है उसमें मैं भी अपने आपको सम्मिलित करते हुए आपके माध्‍यम से  सरकार को कुछ निवेदन करना चाहूंगा, सुझाव भी देना चाहूंगा और कुछ अनियमितता और कमियां हैं उनके बारे में कुछ कमियों को उजागर करना चाहूंगा।

सभापति महोदय, सबसे पहले मैं मांग संख्‍या 30 जिस क्षेत्र से मैं आता हूं, उस क्षेत्र की मुख्‍य मांग है, उसके सन्‍दर्भ में कुछ निवेदन करना चाहूंगा। सभापति महोदय, जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग, इसका 1975 में गठन हुआ और मुख्‍य तौर पर सम्‍पूर्ण राजस्‍थान के जनजातियों के विकास के लिए क्षेत्र पोकेट्स बनाया गया। उसमें अनुसूचित क्षेत्र जो उदयपुर सम्‍भाग की 23 पंचायत समितियों का आता है जिसमें बांसवाड़ा, डूंगरपुर, उदयपुर, चित्‍तोड की दो पंचायत समितियां और सिरोही की एक पंचायत समिति। मांडा क्षेत्र तीसरा, मांडा कलस्‍टर योजना क्षेत्र, चौथा बिखरी जनजाति, बिखरी जनजाति योजना क्षेत्र, पाँचवाँ सहरिया आदिम जाति क्षेत्र इन सबका नियंत्रण उदयपुर सम्‍भागीय आयुक्‍त कार्यालय से होता है। सम्‍भागीय आयुक्‍त इसका पूरा नियंत्रण रखते हैं। लंबे समय से हम, चूंकि यह विभाग बहुत बड़ा भी  है और सम्‍भागीय आयुक्‍त के पास बहुत लंबा चौडा कार्यक्षेत्र भी होता है, डिविजन का काम भी देखना और जनजाति का काम भी देखना  है इसलिए समय समय पर हम मांग भी करते आए हैं कि जनजाति कमिश्‍नर अलग से किया जाए। सम्‍भागीय आयुक्‍त का काम बहुत विशाल होता है, पर सरकार को पता नहीं क्‍या दिक्‍कत है। कई विभागों के जहां राजस्‍थान में एक आई. जी. बैठा करते थे वहां 46-46 आई. जी. बन गये पर...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): सभापति महोदय, सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य सदन में अख़बार पढ़ रहे हें, इनको कुछ तो सिखाइये।(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अख़बार नहीं पढ़ रहे, अख़बार उलट पुलट कर रहे हैं।

श्री सभापति: माननीय संसदीय कार्य मंत्री जी आप नियम जानते हो अखबार उठाकर नहीं पढ रहे। (व्‍यवधान) अब आप जानते हैं, आप रघुवीर सिंह जी का टाइम क्‍यों ले रहे हैं।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): इस सरकार ने अखबरों में अपने गीत छपवाने की जो व्‍यवस्‍था कर रखी है मैं उसका अध्‍ययन करने की कोशिश कर रहा हूं।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्‍ययन कर रहे हैं कि क्‍या मसाला ढूढे कि आप लोगों को उकसाया जा सके और आपके ऊपर भाटे फोडे जा सके। (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): सभापति महोदय, सार्वजनिक निर्माण मंत्री महोदय  हमारे जो सराड़ा से आने वाले माननीय सदस्‍य आपके विभाग से संबंधित बात कह रहे हैं  वह तो नोट नहीं कर रहे और ध्‍यान आपका सिरोही के सदस्‍य की तरफ जा रहा है। जो आपका काम है वह करें। आपको तो वह ही वह दिखते हैं।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): सभापति महोदय, मेरा समय कम हो जाएगा। सभापति महोदय, मैं जिक्र कर रहा था कि इस विभाग के माध्‍यम से जो खर्चा होता है, वह विशेष केन्‍द्रीय सहायता जो केन्‍द्र सरकार से मिलता है उसके माध्‍यम से संविधान की धारा 275-1, जो केन्‍द्र से विशेष सहायता मिलती है और राज्‍य योजना इसमें टी ए डी ए और महाराष्‍ट्र पेटर्न है मुख्‍य तौर पर, चौथी योजना है केन्‍द्र प्रवर्तित योजना के माध्‍यम से राशि अभी आती है उससे विकास कार्य होता है।

अब मेरा निवेदन है कि पिछले समय में 2005-6 और 2006-7 में जो पैसा सरकार के पास आया है और जिस तरह सरकार ने बड़े-बड़े वादे किये थे इन लोगों से, बड़ी-बडी डींग हांकी थी उसके अनुरूप जो विकास कार्य किया, उसमें जो खर्च किया उस पर मैं आपका ध्‍यान आकर्षित करना चाहूंगा।

विशेष केन्‍द्रीय सहायता के तहत 2005-6 में 31 करोड़ 77 लाख 49 हजार रूपये आये थे उसमें व्‍यय किए 19 करोड़ 78 लाख 87 हजार, आधे के आसपास खचाग्‍किया। 2006-7 में 32 करोड़ 84 लाख 60 हजार रूपये आए उसमें से खर्च किया दिसम्‍बर तक 16 करोड़ 27 लाख 55 हजार, आधा खर्च 50 प्रतिशत खर्च। इसी तरह संविधान की धारा 275-1 के तहत जो पैसा आया 2005-6 में 9 करोड़ 93लाख 94 हजार, खर्च किया 28 करोड, 48 लाख। 2006-7 में 22 करोड रूपये आए और खर्च किया 10 करोड़, आधे से भी कम खर्च1 आगे महाराष्‍ट्र पैटर्न में हम देखे तो 77 करोड़ 33 लाख,11 हजार के अगेन्‍स्‍ट में 48 करोड 51 लाख 97 हजार रूपये खर्च किए। 2006-7 में 75 करोड़ 50 लाख 1 हजार में से 38 करोड़ 61 लाख रूपये खर्च करके यह सरकार पता नहीं क्‍या करना चाह रही है। मेरे कहने का तात्‍पर्य यह है कि इसके आगे इन्‍होंने, जैसा इन्‍हीं के प्रतिवेदन में, जो विकास के काम करते हैं उसमें सब्‍जी विकास कार्यक्रम के लिए प्रावधान रखा था,1640 कृषक लाभान्वित करने के लक्ष्‍य के विरूद्ध  माह दिसम्‍बर 2006 तक 4 लाख 32 हजार रूपये खर्च किये जबकि प्रावधान था 18 लाख 19 हजार, मतलब वन फोर्थ खर्च किया और 1640 कृषकों के अगेन्‍स्‍ट 671 कृषकों को लाभान्वित किया।

दुर्गा/चौहान 210307 1410 2d

 

और 1640 कृषकों के अगेंस्‍ट में 671 कृषकों को इन्‍होंने लाभान्वित किया। वेब के माध्‍यम से उद्यान विकास के लिये जो वहां के काश्‍तकारों के आर्थिक आधार को मजबूत करने के लिये बहुत लाभदायी सिद्ध हो सकता है, 2006-07 में 155 लाख 48 हजार रुपये का आबंटन किया गया था। इसके विरुद्ध दिसम्‍बर, 2006 तक 22 लाख 24 हजार खर्च किये। 155 लाख और 22 लाख खर्च किये। और पता नहीं यह सरकार और क्‍या करना चाह रही है। आगे मैं आपका ध्‍यान महाराष्‍ट्र पैटर्न की तरफ आकर्षित करना चाहूंगा। मूल रूप से महाराष्‍ट्र पैटर्न की जो भावना थी, पिछली सरकार के समय में नहीं जाना चाहूंगा, क्‍या किया, क्‍या नहीं किया। परन्‍तु अब जो शासन में हैं उनकी विशेष ड्यूटी रहेगी कि इसमें किस तरह से...। (व्‍यवधान) आप बोल लेना, भाई, आप बोल लेना।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): पिछले समय में 44 करोड़ रुपये ही दिये थे। 119 करोड़ रुपये दिये हैं 3 साल में। इनके भी 3 साल में 44 करोड़ थे। (व्‍यवधान)

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): सभापति महोदय, अशोक गहलोत सरकार ने ही महाराष्‍ट्र पैटर्न लागू किया था। हो सकता है, सही रूप से वह लागू नहीं हो पाया हो, वह अलग बात है। परन्‍तु मैं आपके माध्‍यम से यह निवेदन करना चाहता हूं कि महाराष्‍ट्र पैटर्न में यह प्रावधान है कि जितने पर्सेण्‍ट पापुलेशन है उसके अगेंस्‍ट में डिविजेबल फण्‍ड जो भी है, बजट का, वह पूरा का पूरा ट्रांसफर करना चाहिए। 10 करोड़, 20 करोड़, 50 करोड़, यह जो टोकन मनी देते हैं यह महाराष्‍ट्र पैटर्न की मूल भावना नहीं है। फिर भी इन्‍होंने जिस तरीके से जो प्रावधान रखे थे उसके अगेंस्‍ट में जो काम करते हैं, आश्रम छात्रावास संचालन के लिये, बच्‍चों को, विद्यार्थियों को छात्रावास में रहने के लिये पोशाकें आदि देते हैं। 2006-07 में 18 करोड़ 61 लाख के अगेंस्‍ट में आबंटन जो था उसके अगेंस्‍ट में इन्‍होंने दिसम्‍बर, 2006 तक 9 करोड़ 63 लाख रुपये खर्च किये। 18 करोड़ में से 9 करोड़ खर्च किये, इसका मतलब 50 प्रतिशत खर्च किया। अब छात्र गृह किराया योजना, इसमें बच्‍चों को किराया, डेढ़ सौ रुपये प्रति माह, आज कोई कमरा मिलता है क्‍या? इन्‍होंने 2006-07 में 10 हजार छात्र-छात्राओं को लाभान्वित करने के लिये प्रावधान रखा था और 90 लाख रुपये का रखा था। उसके अगेंस्‍ट में, दिसम्‍बर, 2006 तक 4 लाख 70 हजार, आप देखिये 90 लाख के अगेंस्‍ट में 4 लाख रुपये खर्च करके यह सरकार कह रही है कि हम आदिवासियों का बहुत उत्‍थान करने वाले हैं, और 80 विद्यार्थियों को लाभान्वित किया। 10 हजार बच्‍चों का जहां टार्गेट रखा था, वहां 80 विद्यार्थियों को लाभान्वित किया है। आगे चलते हैं, एकलव्‍य खेल छात्रावासों का संचालन किया। आपके पास भी है, किताब आपके पास भी है। एकलव्‍य छात्रावास का संचालन, मंत्रीजी बता दें, जब आप जवाब दें, आपने इसमें प्रावधान किया है कि इन छात्रावासों में दक्ष विशेषज्ञों द्वारा तीरंदाजी एवं एथलेटिक विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिया जाता है। आपके कौन-कौन वहां खेरवाड़ा में, कौन-कौन दक्ष आपके प्रशिक्षक हैं, भीलवाड़ा में कौन हैं, उदयपुर में कौन हैं। यह आप जब जवाब दें तो निश्चित तौर पर बतायेंगे तो आपकी स्थिति के बारे में जान पायेंगे। छात्रावासों में विशेष कोचिंग चलती है। सभापति महोदय, आप गौर करेंगे कि एक हजार रुपये प्रति माह जो सब्‍जेक्‍ट टीचर होते हैं, मेथ्‍स, इंग्लिश या साइंस के, कोई भी सब्‍जेक्‍ट है, उनको कोचिंग के लिये 3 महीने का प्रावधान होता है, 10वीं, 11वीं, 12वीं के बच्‍चों के लिये। जहां 2006-07 में 141 आश्रम छात्रावासों में विद्यार्थियों को उक्‍त योजना में लाभान्वित करने हेतु दिसम्‍बर तक प्रावधान था रखा था, इन्‍होंने 141 आश्रम छात्रावासों के विद्यार्थियों के लिये, और खर्च कितना किया, 40 हजार रुपये। 40 हजार रुपये में कितने, 141 छात्रावासों में कितने बच्‍चे होंगे और 40 हजार रुपये मात्र खर्च किये हैं, पूरे साल में दिसम्‍बर तक। अगर दो महीने और भी कर लेंगे तो कितना हो जाएगा। यह हाल है, इस विभाग का। मैं इस बात के लिये तो आपको निश्चित तौर पर धन्‍यवाद दूंगा कि जनजाति बालिकाओं को आपने साइकिलें दीं 6200 बालिकाओं को साइकिलें दीं। आपने स्‍कूटी दी, 12 स्‍कूटी दीं, उसके लिये भी आपको धन्‍यवाद। जहां धन्‍यवाद के पात्र हैं आप, निश्चित तौर पर धन्‍यवाद तो देना ही देना है। परन्‍तु सभापति महोदय, आपका ध्‍यान बहुत महत्‍वपूर्ण विषय पर ले जाना चाहूंगा। मंत्रीजी, आयोडीन युक्‍त नमक वितरित करना था जनजाति क्षेत्र  में और यह नमक करीब साढे 5 लाख परिवारों के, साढे 5 लाख परिवारों से भी ज्‍यादा लोगों को वितरित करना था, इनको और किया, इसमें आपने 120 लाख रुपये का प्रावधान रखा और आपने जो नमक बांटा, वह नमक सभापति महोदय, गरीबों के नमक में सरकारी सेंध मारी। नमक बांटने में भी नमक हलाली नहीं करते, नमक-हरामी कर दी। नमक में भी नमक हरामी कर दी इस सरकार ने। और मैं निश्चित तौर पर चाहूंगा माननीय मंत्रीजी, कि जब आप जवाब दें तो इस मामले को स्‍पष्‍ट करें कि कितने घोटाले हुए हैं इसमें और जिन लोगों ने घोटाला किया, उनके विरुद्ध आप क्‍या-क्‍या कार्यवाही करेंगे। यह नमक खाने योग्‍य भी नहीं था। 563317 परिवारों को आपने नमक बांटा है। उसमें यह नमक घटिया था। इतना बड़ा घपला था सभापति महोदय कि 20 प्रतिशत आयोडीन की कमी थी, सोडियम क्‍लोराइड कम था। कानून का खुला-खुला उल्‍लंघन हुआ है। सांभर साल्‍ट लिमिटेड ने कडाना की एक कम्‍पनी को माइक्रो न्‍यूट्रिशन इनिशिएटिव के सहयोग से अप्रैल, 2006 में सांभर में उच्‍च गुणवत्‍ता के नमक उत्‍पादन के लिये एक प्‍लाण्‍ट लगाया और उस प्‍लाण्‍ट से जो नमक पैदा होना था वह प्रदेश के गरीब तबके के लोगों को पहुंचाना था। उच्‍च गुणवत्‍ता का नमक पैदा होना था। 4 सितम्‍बर, 2006 तक इस प्‍लाण्‍ट से 7 हजार मीट्रिक टन उच्‍च कोटि का नमक तैयार हुआ। लेकिन सांभर साल्‍ट लिमिटेड ने बिना आयोडाइज्‍ड किये नमक एक निजी कम्‍पनी को, नवाकार साल्‍ट को लाभ कमाने के उद्देश्‍य से दे दिया। नावां की एक अन्‍य कम्‍पनी से मंहगी दरों का नमक खरीदा और बांटने के लिये एक वर्ष का ठेका दे दिया। अरिहन्‍त से खरीदा गया नमक 1686 मीट्रिक टन नमक अगस्‍त तक आदिवासी बाहुल्‍य क्षेत्र में बांट दिया। सभापति महोदय, यह कृत्‍य...।

श्री सभापति: घ‍डि़यां चल रही हैं, घडि़यां चल रही हैं आपकी।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): चल रही हैं, चल रही हैं। सभापतिजी, आज तो पहली बार ही बोल रहा हूं मैं।

यह कृत्‍य भी ....... जो 1974 के मानदण्‍डों का खुला उल्‍लंघन है। मंत्रीजी, आप मुझे बताएंगे कि आप इस बारे में क्‍या कार्यवाही करेंगे और आपकी जानकारी में अभी आया कि नहीं आया। आपने अभी तक क्‍या कार्यवाही की है। जनजाति क्षेत्र का विकास खाली रुपयों का प्रावधान रखने से या किताबों में छापने से नहीं होगा। मेरा सुझाव यह है कि हमारी मानसिकता भी ठीक होनी चाहिए। मन भी साफ होना चाहिए और वहां काम सही ढंग से हो रहे हैं कि नहीं हो रहे हैं उसकी मोनिटरिंग प्रोपर जब तक नहीं होगी तब तक कुछ नहीं होगा। अभी जनजाति उप योजना क्षेत्र के लिये आपने अनुकृति योजना का प्रावधान रखा है। उसमें आई.ए.एस., आई.पी.एस. के लिये जो बच्‍चे ट्रेनिंग करते हैं उनके लिये एक लाख रुपये का जो बच्‍चों के लिये प्रावधान रखा है, 25 हजार पहले देते हैं, फिर मेन के लिये 50 हजार देते हैं, फिर 25 हजार रुपये इंटरव्‍यू के समय देते हैं। परन्‍तु एक मात्र ऐसे इंस्‍टीट्यूट को अधिकृत किया है, जहां बच्‍चे तो पढ़ते नहीं हैं। बच्‍चे चाहे दिल्‍ली में कोचिंग लेंगे, परन्‍तु सर्टिफिकेट यहां से लेना पडा और पैसा यह देंगे और 18 हजार रुपये उससे काट देंगे कमीशन के। उसका तो शोषण हो ही रहा है। क्‍यों नहीं आप इसको और विचार करके और कोई तरीके से इसका समाधान कर सकते हैं। दूसरा जहां, हमारे ट्राइबल सब प्‍लान इलाके का जो प्रावधान है, महामहिम राज्‍यपाल महोदय के सीधे ही, उनके अधीन में आता है और संविधान की धारा 244 के तहत जो उनका नियंत्रण है उनके हाथ में होता है। उन्‍होंने प्रावधान कर रखा है कैटेगिरी 1-6 तक, 7 और 9 सर्विसेज में वहां के टोटल रिक्रूटमेंट का 45 प्रतिशत उनको रिजर्वेशन देना है।

Vps-usc-21032007-1420-2e-1

 

परन्‍तु इसका खुला उल्‍लंघन हो रहा है इसके लिए अगर हम कोई प्रावधान नहीं करेंगे तो निश्चित तौर पर इसका फायदा वहां के लोगों को कोई हो नहीं पाएगा। अभी हाल ही सरकार ने अपने भाषण में, मुख्‍य मंत्रीजी ने कहा है कि स्‍टेट सर्विसेज के अतिरिक्‍त जितनी भी सर्विसेज हैं, इसको मंत्रीजी क्यिलर करें जब भी आप जवाब दें क्‍योंकि स्‍टेट सर्विसेज के अतिरिक्‍त कौन-कौन सी सर्विसेज हैं जो आप उनका बेनिफिट वह 45 परसेंट उस क्षेत्र के लोगों को देना चाह रहे हैं ताकि वहां के लोग भी उसका फायदा उठा पाएं और कब से लागू करेंगे? यह भी बतायें। अभी क्‍योंकि यह बात चली है तो माननीय सभापति महोदय, मैं आपका ध्‍यान आकर्षित करना चाहूंगा, उदाहरण के तौर पर बात चल रही है अभी 1.3.2007 को कोई विज्ञप्ति निकली, उसमें 512 पद हैं, महानिदेशक, कारागार, राजस्‍थान के और उसमें सामान्‍य के हैं 256 पद, महिला के 109, अनुसूचित जाति के मात्र 3, महिलाओं के कोई नहीं, अनुसूचित जनजाति के 34 और महिलाओं के 44, 48 पद मात्र रखे हैं जबकि प्रावधान के हिसाब से देखें, रिज़र्वेशन के अगर 12 परसेंट और 16 परसेंट ही देखें तो एस.टी. के 61 पद होते हैं और एस.सी. के 82 पद होते हैं परन्‍तु यह जो विज्ञप्ति निकली है, यह त्रुटिपूर्ण है। एक बार हो जाने के बाद वह लोग कभी इसका फायदा नहीं उठा पाएंगे तो मैं निश्चित तौर पर क्‍योंकि मंत्रीजी खुद ही इसका मोनेटरिंग करते हैं, इस विभाग का तो आप निश्चित तौर पर इसका ध्‍यान रखें। ट्राइबल सब प्‍लान इलाके में एक और विज्ञप्ति भी निकली है। ट्राइबल सब प्‍लान इलाके का मैं जिक्र कर रहा हूं। उसमें प्रावधान तो यह है कि 45 परसेंट रिज़र्वेशन देना है परन्‍तु 463, फोर सिक्‍स थ्री, टीचर्स और थर्ड ग्रेड टीचर्स की भर्ती हो गयी उसमें एस.टी के 18 महिलाएं और 23 पुरुष, 41, 463 में से 41 पद अध्‍यापकों के, जबकि होने चाहिए थे 45 परसेंट के तहत 205 तो यह टीचरों के नहीं अपने पुलिस कर्मियों के। ट्राइबल सब प्‍लान इलाके में प्रावधान यह है कि 45 परसेंट रिजर्वेशन होना चाहिए अगर इसको देखें तो हम न तो आपके यह फुलफिल हो पाता है और न कुछ भी नहीं इसलिए मेरा निवेदन यह है कि आप निश्चित तौर पर इस पर ध्‍यान देकर और आगे की कार्यवाही करेंगे ताकि इन लोगों का फायदा हो सकेगा।

एक एकीकृत जनजाति विकास योजना है। विकास कार्यक्रम है। अनुसूचित क्षेत्र में, वहां आपने कितना-कितना खर्चा किया है? कृषि एवं सम्‍बद्ध सेवाओं में प्रावधान है दो हजार, 6452.22 लाख, उसके अगेंस्‍ट में 1954.25 खर्चा किया है। विशेष क्षेत्रीय परियोजना में आपने आवंटन तो किया है 360.80 लाख और खर्चा किया है निल। क्‍यों? 

इसी तरह से उद्योग एवं खनिज में, माननीय सभापति महोदय, खनिज जनजाति उप योजना क्षेत्र में ट्राइबल सब प्‍लान इलाक़े में मार्बल की ढेरों-ढेर खाने हैं परन्‍तु वहां के लोकल लोगों को आज तक उसका फायदा नहीं मिला। क्‍या हमारा जनजाति डिपार्टमैंट इस बारे में कोई विचार नहीं कर सकता? वहां के लोगों को सेठ नहीं बनाना चाहता। मजदूर ही बनाकर रखना चाहता है क्‍या? आज 1996 में सुप्रीम कोर्ट का जो फैसला हुआ है, समता बनाम आन्‍ध्रा एण्‍ड अदर स्‍टेट, वह फैसला आज तक आप लागू क्‍यों नहीं कर रहे हैं। आज तक क्‍यों अटकाया रखा है? क्‍यों वेरियर गाड़ रखे हैं। माइंसों का अलाटमैंट बंद कर रखा है। न वहां के लोगों को कोई बेनिफिट दिया जा रहा है तो मैं जानना चाहूंगा कि मंत्रीजी इस बारे में क्‍या करना चाहेंगे?

माननीय सभापति महोदय, आप बारबार घड़ी भी देख रहे हैं। समय भी, घंटी बजा देंगे। एक बात मैं ध्‍यान में लाना चाह रहा हूं कि छात्राओं, छात्रों व आश्रम छात्रावासों के लिए राजस्‍थान सरकार ने भारत सरकार को 2006 से आज तक कोई प्रस्‍ताव नहीं भेजा है जो विशेष चिन्‍ता की बात है। किसी तरह का कोई प्रस्‍ताव आपने नहीं भेजा है, क्‍यों? आप बतायें जरा।

माननीय सभापति महोदय, मैं मांग संख्‍या-21 पर भी निवेदन करना चाहूंगा कि सड़क और जैसे ही सरकार अपने आप को, खुद ही पीठ थपथपाती है परन्‍तु सड़कों का हाल क्‍या है? मेरे विधान सभा क्षेत्र का ही उदाहरण देना चाहूंगा कि प्रधान मंत्री सड़क योजना में सड़कें स्‍वीकृत हैं 23, उसके लिए रुपयों का प्रावधान है 1768 लाख 66 हजार और अभी तक खर्च किया है 832.48 लाख। 8 करोड़ 32 लाख रुपये और 17 करोड़ के अगेंस्‍ट में कितना खर्च किया है? अभी काम कितने स्‍पीड से चल रहे हैं? डब्‍ल्‍यू.बी.एम. बी.टी फेज- II, 2 सड़कें स्‍वीकृत हैं, 63 लाख के विरुद्ध खर्चा किया 21 लाख 44 हजार रुपये। डब्‍ल्‍यू.बी.एम. बी.टी फेज- III में 5 स्‍वीकृत सड़कें हैं, 192 लाख रुपये स्‍वीकृत है और खर्च किया मात्र 57.17 लाख रुपये। टी.एफ.सी.-3054 के तहत, 17 सड़कें स्‍वीकृत हैं, 235.75 लाख रुपये स्‍वीकृत है और 23.22 लाख रुपये खर्च किये हैं अभी तो फरवरी, 2007 तक। 3054-टी.एफ.सी. सी.सी. रोड एक स्‍वीकृत है, 26 लाख का, वह भी काम स्‍टार्ट नहीं किया है। बाढ़ सहायता-2245 के तहत 13 सड़कें स्‍वीकृत हैं 60 लाख रुपये का प्रावधान है। 23 लाख 56 हजार रुपये खर्च किये हैं। 3054-विशेष मरम्‍मत, बाढ़ सहायता, ऋषभदेव, सराड़ा, जयसमंद, जगत, इस तरह से चार सड़कें स्‍वीकृत हैं उसमें से स्‍वीकृत है 9 लाख 50 हजार और खर्च किया 1.26 लाख, 8443-डिपोजिट बाढ़ सहायता, 6 सड़कें स्‍वीकृत हैं। स्‍वीकृत है रुपये 24 लाख 35 हजार, खर्च किये 8 लाख 72 हजार।   8443-डिपोजिट तृतीय एन.आर.आई.जी.एच., 74.24 लाख स्‍वीकृत है, खर्च किये 4.75 लाख। मंत्रीजी, सुनना नहीं है आपको? सुनना है तो सुन लो। बिल्डिंग वर्क्‍स चल रहे हैं। चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य-4210 के तहत 3, उसमें 10 लाख 60 हजार स्‍वीकृत है और 3 लाख 13 हजार खर्च किये हैं। डिपोजिट एन.आर.आई.ए.एच.एम., डाक्‍टर्स, नर्सिंग, वार्ड ब्‍वाय क्‍वार्टर्स, झाड़ोल और सेमारी में स्‍वीकृत है, 92 लाख 30 हजार स्‍वीकृत है और खर्च किया जीरो।

8443-डिपोजिट टी.ए.डी. कन्‍या छात्रावास का 33 लाख 37 हजार का कार्य स्‍वीकृत है और खर्च किये है 22 लाख 80 हजार का। कोई ऐसा काम नहीं है जिसमें आपने आपकी स्‍वीकृति के मुताबिक, मार्च महीना यह चल रहा है, इतना 50 प्रतिशत भी पैसा आपका खर्च नहीं हुआ है और आप कैसे कह सकते हो कि बहुत अच्‍छा काम कर रहा है और हम सब क्षेत्र का विकास कर देंगे, जनजातियों का विकास कर देंगे, रोडों का विकास कर देंगे? आपकी स्‍वीकृत सड़कें और जो कार्य हुए हैं, माननीय सभापति महोदय, मुझे भी घूमने का काम पड़ता है। मैं कुछ जगह गया हूं। सार्वजनिक निर्माण विभाग की सड़कों का जो हाल है, खैरवाड़ा में कल्‍याणपुर का एक बाईपास है।

spp/usc/14.30/2f/21.3.2007(1)

वह बाई पास बना और चालू नहीं हुआ उसके पहले वह उखड़ गया, खत्‍म हो गया। आपमें से कोई मंत्रीजी गये होंगे बांसवाड़ा वाले, कभी इधर-उधर घुस जाते हैं तो निश्चित तौर पर गये होंगे, वह रोड बिलकुल साफ हो गया है झाडोल से अमरपुरा। यह झाडोल-फलासिया की बात कर रहा हूं। झाडोल से अमरपुरा सड़क, झाडोल से अडोल सड़क, दो वर्ष हुए हैं और आज उसकी स्थिति यह है कि बैलगाड़ी भी नहीं जा सकती। झाडोल से गोगुन्‍दा रोड, अभी चल भी रहा है। आप मंत्रीजी जाकर जांच कर लें, उसकी क्‍या स्थिति है तो मेरा निवेदन यह है कि आप बड़ी-बड़ी घोषणाएं करें, बड़ी-बड़ी किताबें छपवायें, खूब आंकड़े छपवायें, हमें कोई एतराज नहीं है परन्‍तु अगर धरती पर देखें तो उसका कोई रिजल्‍ट नहीं है। आपका किसी भी तरह से इन लोगों को फायदा देने का कोई इरादा नहीं है, इसलिए अब आप सावधान हो जाओ, डूंगरपुर में अभी आपको झटका देकर हमारी वहां की जनता ने सावधान कर दिया। आपने बहुत कोशिश की कि वहां किसी भी तरह से इनको ललचाया जाये और किसी तरह आपके कब्‍जे में आ जायें पर वह लोग आपके कब्‍जे में नहीं आये और डेढ़ साल बाद जो चुनाव आ रहे हैं, आपको उसका रिजल्‍ट भुगतना पड़ेगा। आपको उधर से उठकर इधर आना पड़ेगा। यह मैं अभी से निवेदन करना चाहता हूं । सभापित महोदय, आपने बोलने के समय दिया, इसके लिये धन्‍यवाद।

श्री सभापति: श्री ह‍रीश कुमावत। ..(व्‍यवधान).. माननीय हेमराज जी,आप कुछ समय पहले उधर बैठे थे।

श्री हरीश कुमावत(नावां) : माननीय सभापति महोदय, मैं मांग संख्‍या-19 के संबंध में अपने विचार व्‍यक्‍त करना चाहता हूं। मैं सबसे पहले तो माननीय राजेन्‍द्र सिंह जी राठौड़ और माननीय मुख्‍य मंत्री महोदया को धन्‍यवाद देऊंगा कि इन्‍होंने हमारे विधान सभा क्षेत्र में इतने काम किये है, उसकी अगर मैं पूरी लिस्‍ट गिनाऊं तो बहुत लम्‍बी होगी । परन्‍तु मैं तीन साल के समय में मिसिंग लिंक, डब्‍ल्‍यू.बी.एम. से बी.टी.रोड, आर.बी.एम.फर्स्‍ट का काम, सॉल्‍ट रोड, प्रधान मंत्री रोड, सी.आर.एफ. रोड, एस.आर.एफ.रोड और यह सारा जो काम किया है, वह हमारे विधान सभा क्षेत्र में इन तीन साल के समय में 18 करोड 22 लाख का काम कर दिया है और इसके साथ अभी जो काम चालू है, वह साढ़े 11 करोड़ का काम चालू है और इस काम के अतिरिक्‍त यह तो सड़कें हैं ही इनके अलावा मेगा हाइवे, जो हमारे किशनगढ़ से रतनगढ़ तक का बनेगा, वह 207 कि.मी., उसमें भी हमारे परबतसर, कुचामन, डीडवाना, लाडनूं, यह कस्‍बे सम्मिलित हैं और उसमें करीब 219 करोड़ रुपया खर्च होगा। इस प्रकार यह सारे मेगा हाइवे का काम अभी द्रुत गति से चालू है और काफी अच्‍छी सड़क बन रही है।

इसके साथ साथ हमारे यहां पर दूसरे मेगा हाइवे भी सैकण्‍ड फेज में जो स्‍वीकृत हुए हैं, वह भी नारनौल - कोटपूतली- नीमकाथाना - सीकर होकर कुचामन सिटी भी आयेगा। तीसरा मेगा हाइवे जयपुर-जोबनेर-नावां-कुचामन होकर खाटू होकर नागौर जायेगा। यह मेगा हाइवे बनने के बाद हमारे यहां भी इम्‍पोर्टेन्‍ट बहुत बढ़ जायेगी। इसलिए मैं माननीय मंत्री महोदय को, मुख्‍य मंत्री महोदया को बहुत बहुत धन्‍यवाद देता हूं कि इस प्रकार से इन्‍होंने मेगा हाइवे को जोड़कर हमारे यहां का विकास करने में बहुत कुछ इसको आगे बढ़ाया।

इसी के साथ साथ हमारे यहां पर सड़कों के काम के साथ बिल्डिंग कार्य जो हुआ है, वैसे पुलिस लाइन के हमारे यहां पर डिप्‍टी आफिस का काम हुआ, पुलिस थानों पर काम हुआ और यह साढ़े 55 लाख का काम हुआ, जो निर्धारित समय में पूरा कर दिया और आज हमें गर्व है कि इन्‍होंने इस प्रकार का काम किया।

इसके साथ साथ सी आर एफ में 46 जो रोड्स हैं उनके लिये भी अभी अभी हमारे यहां पर 86 लाख रुपये मंजूर किये और उसके अलावा हमारे जो राजलिया, मुहाना, कुचामन होकर जो स्‍टेट हाइवे नम्‍बर 19 है, उसके लिये भी 1.86 लाख रुपया स्‍वीकृत किया, उसके लिये भी माननीय मंत्री महोदया को धन्‍यवाद देऊंगा।

इसके साथ साथ हमारे यहां जो एम डी आर 46 रोड है, उनके लिये मैं निवेदन करना चाहूंगा कि कुचामन से जो चितावा तक है, यह 86 लाख रुपये स्‍वीकृत किये, अच्‍छी सड़क बन जायेगी। उसके बाद चितावा से लालास तक की सड़क और बचती है, उसमें भी कुछ सड़क जो आबादी क्षेत्र की है, वहां पर जो क्षेत्र है, वह टूटा-फूटा है। इसलिए उसको भी सीमेंटेड रोड बनाये और इस रोड को यदि आप स्‍टेट हाइवे घोषित कर देंगे तो उसका हमको बहुत लाभ होगा, क्‍योंकि यह सीकर से आने वाला जो मुख्‍य मार्ग है, उससे यह जुड़ेगा और कुचामन-लालसा जो है, एम डी आर 46 रोड है, उसको स्‍टेट हाइवे घोषित करें। यह मेरा अनुरोध है ताकि एक आने - जाने का सीकर और दिल्‍ली-जयपुर इसका अच्‍छा मार्ग बन जायेगा और सारी सुविधाएं बढ़ जायेंगी। खुर्द से सीकर, सीकर से नीमकाथाना आगे चली जायेगी।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): यह तो बना हुआ है।

श्री हरीश कुमावत : नहीं, यह तो बना हुआ है लेकिन हमारे कुचामन और लालसा के बीच का हिस्‍सा है, यह बन जाये तो आगे। तो यह जो स्‍टेट हाइवे हैं चह बनाने का कष्‍ट करें।

इसी के साथ साथ मैं अनुरोध करूंगा कि जो पिछली सरकार के समय में गांवों की सड़कें उन्‍होंने रिपेयर तो कराई लेकिन जो आबादी का क्षेत्र है वो वैसे का वैसा छोड़ दिया। आज भी कुछ जगह ऐसा छूटा हुआ है अभी जो बरसात आई थी उस समय वहां पर आने जाने की काफी तकलीफ बढ़ गयी। आने जाने में बहुत तकलीफ होती है और वहां जो लोग रहते हैं उनके लिये भी काफी तकलीफदायक है। वह सड़कें मींडा, देवली जो है वह सड़क है, इसमें देदियाबास और शम्‍भुपुरा वहां की करीब एक कि.मी.सड़क ऐसी है जो टूटी फूटी है और आने जाने में काफी तकलीफ होती है। इसलिए माननीय मंत्री महोदय से यह निवेदन करूंगा कि जो आबादी का क्षेत्र है उसमें सीमेंट रोड मंजूर करायें ताकि उनको आने जाने की सुविधा बढ़ जाये और वहां पर जो कीचड़ है, वह भी नहीं रहे, इस प्रकार की वहां पर व्‍यवस्‍था कराई जाये।

इसी प्रकार से कुचामन-राजलिया सड़क के लिये आपने पैसा दिया। वह पहले भी एक करोड़ चार लाख रुपये मंजूर किये और अब 1.86 करोड़ रुपये और मंजूर किये हैं। उससे यह सारा रास्‍ता अच्‍छा बन रहा है। वह स्‍टेट हाइवे नम्‍बर 19 घोषित भी हो गया है। इसलिए हमारे यहां से आने जाने की सुविधा और बढ़ जायेगी । उसके लिये भी मैं आपको धन्‍यवाद देना चाहता हूं।

इसी के साथ मैं आपसे अनुरोध करना चाहूंगा कि पिछली सरकार के समय में प्रधान मंत्री सड़क योजना जो चालू है उसमें कुछ गांवों को छोड़ दिया गया, वह गांव ऐसे हैं कि वह गांव तो हैं और रेवेन्‍यू विलेज हैं लेकिन उनका नाम इस प्रकार का जैसे - रेवासा, दलीलपुरा है और रेवासा दलीलपुरा, जो रेवासा है वह गांव रेवेन्‍यू विलेज है, दलीलपुरा रेवेन्‍यू विलज नहीं है। वह पहचान के लिये उसके साथ जोड़ दिया गया और वहां से यह स्‍टेट हाइवे 19 निकलता है और दलीलपुरा की कुछ बस्‍ती उस सड़क पर बनी हुई है इसलिए उसको ही रेवेन्‍यू विलेज मान लिया, इसलिए रेवासा वंचित रह गया। वह डेढ़ कि.मी.अन्‍दर की तरफ है । वहां मिडल स्‍कूल बनी हुई है। वहां पर वाटर वर्क्‍स की जो योजना है वह बनी हुई है। बस्‍ती वहां पर है इसलिए जो ऐसे गांव छूट गये हैं, उनको भी प्रधान मंत्री सड़क में जोड़ा जाये ताकि वहां सड़क बन सके। इसी प्रकार से देवला देवली, देवला गांव अलग रेवेन्‍यू विलेज हैं अब वहां मींडा, जो रोड जाती है , उस पर उपासिया होकर जाती है , लेकिन गांव जो अन्‍दर है, एक कि.मी. वहां पर सड़क नहीं बनायी गयी है इसलिए जो ऐसे स्‍थान छूट गये हैं ' देवला छूट गया, दादियाबास छूट गया, रेवासा छूट गया। मैं माननीय मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहूंगा कि इन गांवों में जो छोड़े गये हैं और रेवेन्‍यू विलेज पहले से घोषित है, उनकी आबादी भी अधिक है । वहां पर यह प्रधान मंत्री सड़क में इसको शामिल किया जाये और वहां पर वह सड़क बने। इसी प्रकार जो हमारे यहां पर इतना सारा काम हो रहा है, वह सारे इस प्रकार से काम चल रहे हैं तो कुचामन क्षेत्र ऐसा है कि वहां पर अधिशासी अभियन्‍ता का आफिस होना जरूरी है क्‍योंकि केवल सहायक अभियन्‍ता के कारण से वहां सारे काम की देखभाल नहीं हो सकती। हमारा हो सहायक अधिशासी अभियन्‍ता का कार्यालय है वह दूर है इसलिए अभियन्‍ता का कार्यालय भी कुचामन बनाया जाये जिससे सारे निर्माण कार्य ठीक प्रकार से चल सके और वहां पर व्‍यवस्थित काम चल सके। इसी प्रकार से जो डब्‍ल्‍यू बी एम बी टी रोड जो सब क्षेत्रों की सड़कों के हिसाब से लिया गया है, लेकिन हमारे नागौर जिले की डब्‍ल्‍यू.बी.एम. बी.टी. रोड बनाने का था, उसको छोड़ दिया गया है । उन रोड को, नागौर जिले की जो रोड डब्‍ल्‍यू बी एम है, उनको शामिल किया जाये, उनकी भी स्‍वीकृति जारी की जाये । नागौर जिले में इसी प्रकार की रोड है, वह वंचित नहीं रहे।

Msr/usc/1440/2g/21032007

इसके साथ-साथ हमारे जो नावां से कुचामन शहर है उस शहर में भीतर जो सड़कें बनी हैं, अभी हमने देखा कि अभी आपके जो सांभर में, फुलेरा में अच्‍छी सीमेन्‍ट की सड़कें बनी रही हैं लेकिन जब नाचां में आते हैं तो वहां पर यह सड़क है वो नहीं बन रही। उसका कारण वो बता रहे हैं कि यह तो, साहब, आपके स्‍टेट हाई-वे, मेगा हाई-वे बनेगा। अब पता नहीं मेगा हाई-वे कब बनेगा और कब उसकी मन्‍जूरी होगी लेकिन शहरी पोर्शन है वह अभी छूटा हुआ है और मेगा हाई-वे बनेगा और तब ही वो बाईपास हो कर जायेगा नावां के अन्‍दर नहीं आयेगा। अभी रोड पी.डब्‍ल्‍यू.डी. की है इसलिए नावां के फाटक से लेकर उधर आगे कुचामन मोड़ तक की सड़क है ताकि नावां शहर का विकास भी हो वहां पर चौड़ी सीमेन्‍टेड सड़क बने, वहां लाइटिंग भी लगे। इस प्रकार की व्‍यवस्‍था वहां पर करवाएं। इसी प्रकार से कुचामन में करवाएं।

इसी प्रकार से राजास और गोविन्‍दी, जहां पर नमक का उद्योग है, नमक बनता है और स्‍टेट हाई-वे नम्‍बर सात है लेकिन बरसात जो आती है तो इतना पानी भर जाता है कि छोटी-छोटी गाडि़यां तो उनसे पार ही नहीं हो पाती हैं क्‍योंकि दोनों तरफ नमक उद्योग की इंडस्‍ट्री लगी गयीं और आने-जाने का रास्‍ता है नहीं। इसलिए वहां पर सीमेन्‍टेड रोड अभी बनायी जाए क्‍योंकि यह जो मेगा हाई-वे वगैरह है वह सेकण्‍ड फेज में है और बाद में बनेगा तब तक हमारे बहुत कठिनाइयां होती हैं इसलिए वहां पर यह सीमेन्‍टेड रोड बनायी जाए जिससे आने-जाने की सुविधा हो।

इसके साथ-साथ अभी जो हमारे खाकड़दी है, जिसको कभी लंका कहते थे, वहां पर आने-जाने की बहुत दुविधा थी और आपने अच्‍छी सड़क बना भी दी है, तीन करोड़ रुपये वहां पर खर्च कर के उसको जोड़ भी दिया है, सड़क भी बन गयी है लेकिन मैं यह अनुरोध करना चाहूंगा ...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): लंका क्‍यों कहते थे?

श्री हरिशचन्‍द्र (नावां): लंका इसलिए कहते थे कि वहां नमक की झील है, केवल वो एक गांव है धूड़ता बाकी पानी भरा रहता था इसलिए उसको कहते थे लंका। यहां नावां के लिए आने के लिए पहले परबतसर होकर चक्‍कर लगा कर आना पड़ता था, सीधा रास्‍ता नहीं था कोई लेकिन यह जो रोड आपने बना दी तीन करोड़ की सीधी रोड जुड़ गयी तो 8 किलोमीटर में हमारा काम चल गया और यह रोड बन गयी है। इनके जो ठेकेदार लोग हैं वो पैकेज आप बड़े-बड़े ठेकेदारों को देते हैं।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय सदस्‍य, माफी चाहता हूं, लंका की रोड तो जोड़ दी पर आपकी रोड नहीं जोड़ी सरकार ने, वो उस रोड की बात करो, लंका वाली रोड से काम नहीं होगा। ...(व्‍यवधान)...

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): अब तो मिसिंग लिंक जोड़ने का टाइम है। ...(व्‍यवधान)...

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): मिसिंग लिंक की घोषणा इस बजट में हो गयी।

श्री हरिशचन्‍द्र (नावां): छोटे ठेकेदार उसको ठीक प्रकार से नहीं करते इसलिए वहां पर पुलिया वगैरह जो बनी है उसमें कुछ जगह टूटफूट हो गयी, उसको भी ठीक करवाएं।

इसके साथ-साथ अभी जो मिसिंग लिंग की बात चली, अभी आपने कहा कि मिसिंग लिंक की भी आपने दी है, उसके लिए तो बहुत धन्‍यवाद दूंगा कि आपने मिसिंग लिंक का यह कहा, 200 करोड़ पी.डब्‍ल्‍यू.डी. से 100 करोड़ कृषि मण्‍डी से यह राशि आपने आवंटित कीहै लेकिन इससे सारी विधान सभाओं में बंटवारा करेंगे तो दस-दस किलोमीटर हमारे हिस्‍से में आयेगी और वह बहुत कम है इसलिए मिसिंग रोड हैं वह जरूरी भी हो गया है क्‍योंकि आज जो आपने विकास किया है और प्रधानमंत्री सड़क से जो गांवों में सड़कें बन गयी हैं तो इधर भी सड़क बन गयी उधर भी सड़क बन गयी, मिसिंग रोड का बहुत लाभ होने वाला है इसलिए इसका कुछ बढ़ाया जाए और जो मिसिंग रोड है वो कम से कम हमें 25 किलोमीटर सड़क तो देनी चाहिए क्‍योंकि आज इतनी आप सड़क नहीं देंगे तो हम किसी को राज़ी करेंगे, किसी को नाराज करेंगे, इतनी हमारे लिए बहुत दुविधा हो जायेगी इसलिए सड़क को भी बढ़ाया जाए।

मैं अनुरोध करना चाहूंगा कि जिस प्रकार से प्रधानमंत्री सड़क का बोर्ड लगता है उसी हिसाब से मुख्‍यमंत्री सड़क का भी उस पर बोर्ड लगे और मिसिंग लिंग है वो भी उस हिसाब से बने ताकि आने-जाने वाले लोगों के लिए सारी सुविधा हो जाए और यह सारी सब तकलीफ मिट जाए। इस प्रकार का वहां पर आप काम कराएं, यह मेरा निवेदन है।

साथ ही मेरा जो सुझाव था कि यह जो आप पैकेज दे रहे हैं वो पैकेज छोटे ठेकेदार को भी दें ताकि उनकी जिम्‍मेदारी रहे। आज बड़े ठेकेदार ठेके ले लेते हैं और फिर वो अपना टेण्‍डर है वो दूसरे को, छोटे आदमी को दे देते हैं, सड़क का काम वो करतो है, आपस में कांट्रेक्‍ट होता नहीं और वो सड़क ठीक बनती है कि नहीं बनती, उसकी संभाल होती नहीं इसलिए इसके पैकेज आप छोटे ठेकेदार को देने के बनाएं ताकि छोटे ठेकेदार को भी लाभ मिल सके।

आपने यह इतना सारा काम कर के और हमारे यहां विकास के काम में पूरा-पूरा योगदान दिया और विकास के लिए भरपूर सहयोग दिया, उसके लिए मैं आपका बहुत-बहुत आभार प्रकट करता हूं और साथ ही पुन: निवेदन करना चाहता हूं कि हमारी जो लिंक रोड है इसको बनाएं, हमारे जो गांव छूट गये, रेवेन्‍यू विलेज, उनको प्रधानमंत्री सड़क से जोड़ें और हमारे यहां पर कुचामन सिटि में अधिशासी अभियंता का कार्यालय बनाएं और हमारे जो स्‍टेट हाई-वे है उसको घोषित करवाएं कुचामन-लालास सड़क को, यह मेरा अनुरोध है।

इसके साथ-साथ मैं आपको धन्‍यवाद देता हूं और इस मांग पर अपना समर्थन व्‍यक्‍त करता हुए इसे पास कराएं, ऐसा अनुरोध करता हूं। जय भारत।

श्री सभापति: श्रीमती प्रतिभा सिंह।

श्रीमती प्रतिभा सिंह (नवलगढ़): सभापति महोदय, आपका बहुत-बहुत धन्‍यवाद, आपने मेरे को बोलने का वक्‍त दिया। ...(व्‍यवधान)... आसन के ऊपर उठा रहे हैं आप अंगुलि।

एक माननीय सदस्‍य: नहीं, नहीं, बिलकुल नहीं। मैंने आसन को कुछ नहीं कहा।

श्रीमती प्रतिभा सिंह (नवलगढ़): सभापति महोदय, मैं मांग संख्‍या 21 एवं मांग संख्‍या 30 पर अपने विचार रखना चाहती हूं। सभापति महोदय, आपके माध्‍यम से मंत्रीजी का ध्‍यान आकर्षित करूंगी और कुछ सुझाव मैं मेरी तरफ से देना चाहूंगा कि वो अपने सिस्‍टम को कैसे स्‍ट्रेन्‍थन करें।

सभापति महोदय, सड़क निर्माण में इन्‍जीनियरिंग पहलुओं की शुरू से ही अनदेखी करनी शुरू हो जाती है। उसका नतीजा यह होता है कि सड़क पर पानी भरा होता है और उससे डामर की सड़कें अधिकांश जगह पर टूट जाती हैं। तो शुरू में जब हम इनको बनाएं उसी समय इनके किनारों की तरफ इनका स्‍लोब बने और किनारों पर पानी बहाव की प्रोपर व्‍यवस्‍था होनी चाहिए ताकि इन पर बारबार पैसा लग कर खराब नहीं हो।

दूसरा, सभापति महोदय, आपके माध्‍यम से मेरा सुझाव है कि बिजनी, पानी की लाइन, कभी टेलीफोन की लाइन, कभी पाईप लाइन, इनके लिए बारबार अधिकांश सड़कें हमें खुदती हुई मिलती हैं। यह करीब-करीब पूरे राजस्‍थान के अन्‍दर ऐसा ही माहौल रहता है। इसके लिए बारबार हम उस पर खर्चा करें, तोड़फोड़ करें, खुदाई करें तो हमें सड़क निर्माण के समय ही इन सुविधाओं के लिए डक्‍स छोड़ने चाहिए, उन डक्‍स को छोड़ने से जो बारबार उस पर अनावश्‍यक खर्चा होता है जनता के पैसे का वो नहीं होगा।

तीसरा मेरा सुझाव है कि आर.सी.आर.डी.एस.सी. व सार्वजनिक निर्माण विभाग के कार्यों का अलग-अलग वर्गीकरण हो। बिलकुल, करेक्‍टली।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): पूरा।

श्रीमती प्रतिभा सिंह (नवलगढ़): जैसा कहते हो वैसा ही रहोगे क्‍या आप पूरा? ठीक है।

श्री सभापति: आप बोलिये, आपका समय खराब हो रहा है।

श्रीमती प्रतिभा सिंह (नवलगढ़): सरकार हैरिटेज संरक्षण व नव-निर्माण पर तो ध्‍यान दे रही है कि परिसम्‍पत्तियां बना रहे हैं, यह बना रहे हैं लेकिन जो पुराने सार्वजनिक भवन हैं उनके रख-रखाव की ओर आपका ध्‍यान नहीं है बल्कि उनको ओने-पौने दामों पर कई जगह निकालने में लगे हुए हैं। इसलिए सरकार इस तरफ ध्‍यान दे कि अपनी पुरानी परिसम्‍पत्तियों को भी जो जर्जर अवस्‍था में हो चुकी हैं, उनको बचायें।

शहरी सड़कों के सौन्‍दर्यीकरण पर किये जाने वाले खर्च में बारबार एक ही स्‍थान पर अलग-अलग तरह का कार्य करवाया जा रहा है और उसको पसंद नहीं आने पर बारबार तोड़ा जा रहा है और बारबार बदला जा रहा है। इससे श्रम और सामग्री दोनों का दुरुपयोग हो रहा है।

( समय:     बजे )

( श्री रामनारायण विश्‍नोई, उपाध्‍यक्ष, पदासीन )

 

आज साईंस का युग है, सरकार कम्‍प्‍यूटर पर पहले डिपार्टमेंट से डिजाइन तैयार करवाए और यह जो बारबार रिपीटेशन होता है उस प्रवृत्ति को रोकें। सड़कों के किनारे लगे पेड़ों में जल भराव के लिए जो घेरे हैं उनको कच्‍ची मिट्टी के घेरों को बढ़ा किया जाए और उसके बाद जो सोलिड कंस्‍ट्रक्‍शन है वो बाद में किया जाए, उनके घेरों का जो व्‍यास है वो बढ़ाया जाए ताकि पेडों तक प्रोपर पानी पहुंच सके।

कुछ डिपार्टमेंट द्वारा ऐसी जगहों को आइडेंटिफाइड किया जाए जहां पर पानी के बहाव में बराबर निरन्‍तरता रहती हो। ऐसे स्‍थानों पर सड़कें डामर के बजाय सीमेन्‍ट की बनायी जाए ताकि बारबार लगने वाला रुपया वहां पर नहीं लगे।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, पी.डब्‍ल्‍यू.डी. द्वारा कराये जाने वाले निर्माण कार्यों की जब भी शिकायत की जाती है तो जांच भी एक जो मैन प्रोब्‍लम है, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जांच भी उन्‍हीं अधिकारियों द्वारा की जाती है।

Ars/usc/1450/2h/21032007/1

 

जो वहां से लगे होते हैं और जिनकी मिली भगत से ही वह घटिया निर्माण सामग्री वहां पर काम में ली जाती है यानि कि जो लोग जिस चीज के लिए जिम्‍मेदार हैं और वही उसकी जांच करेंगे तो आप सोच सकते हैं कि जांच का क्‍या हश्र होगा। तो इन शिकायतों की लीपापोती न हो, इनकी जांच दूसरे लोगों से कराई जाए जो इनके निर्माण से संबंधित नहीं हों। ऐसा मेरा सुझाव है। दूसरा, गारण्‍टी अवधि में कोई भी मरम्‍मत कार्य नहीं किया जाता है, ऐसा अमूमन हम देखते हैं। इन सड़कों की ठेकेदार को मरम्‍मत के लिए इसलिए नहीं कहते हैं अधिकारी लोग कि ठेकेदारों की राजनीतिक पहुंच होती है और अधिकारियों से उनकी क्‍या रिलेशनशिप होती है इसको मैं मेरे मुंह से नहीं कहना चाहूंगी, वह सभी लोग जानते हैं। इसलिए दो कारण हैं, राजनीतिक पहुंच और अधिकारियों से उनकी मिली भगत की वजह से वह बिल्‍कुल भी, कहीं बहुत ज्‍यादा प्रेशर आ जाए तब ही सड़क की मरम्‍मत का कार्य टाइमली करते हैं अन्‍यथा नहीं करते हैं।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, इसमें तो सैण्‍टर से भी टीम आती है, सैण्‍टर के भी अधिकारी वगैरह आकर के देखकर के जाते हैं।

श्रीमती प्रतिभा सिंह (नवलगढ़): मैं इससे इन्‍कार नहीं करती मगर आप जानते हैं कि जितनी जांच यहां की टीम से कराना सफिशिएंट है उतना सैण्‍टर तक कई पापड़ बेलने पड़ते हैं तो जो यहां वाले हैं वही सही करके दें तो इसलिए हम यहां के अधिकारियों को थोड़े ही ना छोड़ सकते हैं कि सैण्‍टर की टीम आए वही सही करे। हमें अपना सिस्‍टम भी स्‍ट्रेन्‍थन करना चाहिए। गारण्‍टी अवधि समाप्‍त होने पर सड़कों की दुर्दशा रहती है, उसके लिए विभाग के पास बजट का अभाव रहता है और उस अभाव की वजह से यह हालत है कि छोटी मोटी मरम्‍मत से जो सड़क शुरु में दुरूस्‍त हो सकती थी वह बाद में इतना बड़ा घाव बन जाता है कि उन सड़कों का अस्तित्‍व ही उड़ जाता है। इसलिए डिपार्टमैंट के अन्‍दर इन छोटी मोटी दुर्दशाओं को, छोटी मोटी मरम्‍मत के लिए पर्याप्‍त बजट होना चाहिए, ऐसा मेरा मानना है।

अब मैं आपके माध्‍यम से विधान सभा क्षेत्र नवलगढ़ के बारे में अर्ज करूंगी कि डूमरा से सोटवारा और डूंडलोद मिर्जवास दो सड़कें ऐसी हैं जिनकी प्रत्‍येक की लम्‍बाई तीन तीन किलोमीटर है और निर्माण को करीब बीस साल हो गये हैं लेकिन आज तक भी रिपेयरिंग उनकी नहीं होने की वजह से वह सड़क के नाम पर मजाक ही है लोगों के साथ। तो माननीय मंत्री महोदय से मेरा आग्रह है कि आप कृपया उनकी मरम्‍मत करवाइये, ठीक करवाइये।

दूसरा नवलगढ़ के अन्‍दर माननीय मंत्री महोदय, पी. एम. जी. एस. वाई. में सड़क बनी थी जो पुजारी की ढाणी से प्रधानमंत्री सड़क योजना के अन्‍तर्गत जोड़ने का प्रस्‍ताव था। पंचायत समिति नवलगढ़ की साधारण सभा की मीटिंग, जिला परिषद झुन्‍झुनूं की मीटिंग, दोनों ने नवलगढ़ गुढ़ा रोड से बाय तक पुजारी की ढाणी को जोड़ने की सिफारिश की थी। जो नम्‍बरिंग का आपका सिस्‍टम है कि वहां पर हाई स्‍कूल होना चाहिए, वहां पर हास्पिटल होना चाहिए, वह सारी चीजें भी बाय में ज्‍यादा थीं वनिस्‍पत गोठड़ा के लेकिन आपने वहां पर अपनी राठौड़ी काम में ली और उस सड़क को गोठड़ा से जुड़वा दिया ...(व्‍यवधान)

एक माननीय सदस्‍य: यह राठौड़ी क्‍या होती है?

श्रीमती प्रतिभा सिंह (नवलगढ़): वह राठौड़ साहब जानते हैं जब काम में लेते हैं तब मालूम होता है। तो यह सारे पंचायत समिति के, जिला परिषद के और नम्‍बरों में माननीय मंत्री महोदय सारी चीजें पुजारी की ढाणी से बाय के फेवर में होने के बावजूद भी आपने गोठड़ा तक बना दी, यह तो बहुत अच्‍छा किया लेकिन कम से कम अब इस पुजारी की ढाणी से बाय तक की सड़क पर भी विचार कर लें तो ठीक रहेगा।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): यह इस सीट का ही प्रभाव है। कभी राजेन्‍द्र सिंह जी राठौड़ बैठते हैं, कभी खेतसिंह जी राठौड़ बैठते हैं। यह सीट का ही प्रभाव है।

श्रीमती प्रतिभा सिंह (नवलगढ़): माननीय मंत्री महोदय, मैं कहना चाहूंगी कि यह सत्‍ताधारी दल का नशा जो आपके ऊपर हो रहा है इस मृग जल की मरीचिका से थोड़ा निकलो और पार्टीवाद, पक्षपात, यह वाद, वह वाद इन पगडंडियों को छोड़ो और मानवता के राजमार्ग पर चलो और सभी विधायकों को एक आँख से देखने की प्रथा डालो ...(व्‍यवधान) यह हंसने की चीज नहीं है। दो तरीके से नहीं एक आँख का मतलब है समदृष्टि से देखने की प्रथा को विकसित करो। भाव को समझो। आपके तो कुत्सित कुछ मन में है जो यह है, भाव को समझो आप।

श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल (देसूरी): उनके दो आंखें हैं और एक तीसरा नेत्र भी रखते हैं नजर रखने के लिए।

श्रीमती प्रतिभा सिंह (नवलगढ़): दिव्‍य दृष्टि है क्‍या उनके पास? इसीलिए सारी पार्टी उन्‍हीं के पीछे पड़ी हुई है, चाहे विपक्ष वाले हों चाहे साथ रहने वाले हों सी. एम. के, सभी पीछे सलटाने में लगे हुए हैं।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): लेकिन आपका जब तक समर्थन है हम कुछ नहीं बिगाड़ सकते।

श्रीमती प्रतिभा सिंह (नवलगढ़): मेरा समर्थन नहीं है माननीय घनश्‍याम जी आप बिगाड़ सको तो मेरा समर्थन बिल्‍कुल आपके साथ है यदि मेरे समर्थन से ही काम चले तो।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): यह भरोसा नहीं था प्रतिभा जी मुझे। यह भरोसा नहीं था मैं तो मृग मरीचिका में ही था।

श्रीमती प्रतिभा सिंह (नवलगढ़): आपने तो कई बार मेरी पीठ में छुरी लगाई है, मौका आए तो मुझे भी लगानी चाहिए।

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): माननीय मंत्री महोदय, आपकी गलतफहमी दूर कर दी उन्‍होंने एक बार में ही।

श्रीमती प्रतिभा सिंह (नवलगढ़): नहीं, ममता जी, मेरी उनसे कभी कोई गहरी नहीं रही, आप घबराइये मत।

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): यह तो बहुत अच्‍छी बात है।

श्रीमती प्रतिभा सिंह (नवलगढ़): उपाध्‍यक्ष महोदय, सीकर लुहारू रोड जो बी. ओ. टी. के तहत उसके बारे में यह जानकारी मिली है कि जो अनुबंध के समय इसकी समयावधि रखी गई थी उसको बढ़ाने की कार्यवाही की जा रही है जबकि उसकी जो रिपोर्ट्स हैं नीचे से वह फेवरेबल नहीं आई हैं फिर भी मालूम नहीं आप किन लोगों को बेनीफिट देना चाहते हैं कि सर्वे रिपोर्ट की भी अनदेखी करके उसकी समयावधि बढ़ाना चाहते हैं, ऐसा न करें क्‍योंकि यह नियम विपरीत है।

मैं अब मांग संख्‍या-30 के बारे में बोलना चाहूंगी कि जो आदिवासियों का जीवन है वह स्‍याह काली रात होती है उसकी परतों की भांति है यानि कि शैक्षिक, मानसिक, राजनीतिक तो कोई सवाल ही नहीं, आर्थिक हर क्षेत्र में वह लोग पिछड़े हुए होते हैं ...(व्‍यवधान) तो वह तो सुरक्षित क्षेत्रों से जीतकर आए हैं, कोई वैसे जिताकर भेजा है क्‍या ? उनका वहां पर बहुमत है इसलिए आ गये और खाली राजनीतिक लोग यहां पहुंचने से ही कोई उनकी पूरी जाति लाभान्वित होती हो ऐसा भी नहीं है। उनकी बहुत दयनीय दशा है और कोई भी सरकार रही, हमेशा उनके भोलेपन का फायदा उठाया। उन्‍हें एक वोट बैंक समझा और उस वोट बैंक की परिणति यह रही कि आज तक भी आदिवासी हर क्षेत्र में उपेक्षित है। जब तक शिक्षा उनके अन्‍दर नहीं आएगी, जागरुकता उनके अन्‍दर नहीं आएगी तब तक खाली बजट एक उनको आदत यह डाल देना कि कमा कर नहीं खाओ और इस तरह से ही अपना भरण पोषण करो, यह बहुत गलत चीज है। हमें उन्‍हें स्‍ट्रेन्‍थन करना चाहिए कि वह पढ़े लिखें, जागरुक बनें और अपनी यह जो सुविधाएं हैं उससे अपनी इकनोमिक इंडिपेन्‍डेंस खुद लें। इसलिए सरकार का इन योजनाओं को इम्‍पलीमैंट करने के लिए, जन‍जाति क्षेत्र के लिए खाली बजट बढ़ा देने से उनकी समस्‍याएं कम नहीं होने वाली हैं जब तक प्रोपर इम्‍पलीमेंटेशन उसका टाइम टू टाइम नहीं होगा तब तक सारा पैसा बेकार है ।

आज तक आजादी के इतने साल बाद वह उसी स्थिति में क्‍यों है? इसलिए मेरा उपाध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से सरकार से आग्रह है, मंत्री जी से आग्रह है कि वह इम्‍पलीमेंटेशन पर ज्‍यादा जोर दें। दूसरा एक जो असंगठित एक तो संगठित क्षेत्र है जैसे उदयपुर है और भी कई बैल्‍ट हैं जिसकी मेरे को पूरी जानकारी नहीं है कि जहां पर आदिवासी और जनजाति यह लोग संगठित हैं इसलिए उनके यहां बजट लगने में बहुत आसानी है लेकिन पूरे राजस्‍थान के अन्‍दर असंगठित क्षेत्र में भी छोटे छोटे समूहों के अन्‍दर एस.सी. के लोग हैं, आदिवासी लोग हैं उनके लिए भी सरकार को नया सि‍स्‍टम अब तक नहीं हुआ तो क्‍या आगे भी नहीं होने वाला है। ऐसा नहीं होना चाहिए। एक सिस्‍टम अभी हमें और डवलप करना चाहिए कि यह जो असंगठित क्षेत्र में जनजाति के लोग हैं उन लोगों के लिए भी हम बजटिंग की व्‍यवस्‍था करें ताकि वह भी समाज की मुख्‍य धारा के साथ आगे आ सकें, उनका भी विकास हो सके।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका धन्‍यवाद करूंगी कि आपने मुझे बोलने का मौका दिया।

 

vns/usc/15.00/2j/21.3.2007/1

 

श्री उपाध्‍यक्ष: श्रीमती वन्‍दना मीणा।

श्रीमती वन्‍दना मीणा (उदयपुर ग्रामीण): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मांग संख्‍या 30 बाबत आज जनजाति की चर्चा करूंगी। जनजाति बाहुल्‍य क्षेत्र व जनजाति उप योजना में आने वाले क्षेत्र उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, सिरोही और अभी-अभी जो सरकार ने नया जिला बनाया है प्रतापगढ़ इसमें लिये मैं माननीय मुख्‍यमंत्री महोदया व माननीय मंत्री महोदय का पूरे जनजाति बाहुल्‍य क्षेत्र की जनता की ओर से व अपनी और से आभार व्‍यक्‍त करती हूं कि एक नया जिला बनाकर जनजाति के लोगों को एक विकास का मार्ग दिखाया है।

 आज जनजाति के बारे में पूर्व में माननीय सदस्‍यों ने काफी चर्चाएं भी की हैं। मैं तीन वर्ष में जनजाति उप योजना क्षेत्र में जो बजट आया है वाकई में पिछली सरकार में इतना बजट नहीं आया। इस तीन साल के कार्यकाल में जनजाति क्षेत्र में इतना विकास हुआ है। चाहे शिक्षा की दृष्टि से हो, चाहे छात्रावास के लिये हो। पिछली सरकार जो बैकलॉग छोड़कर गयी थी, दस हजार से अधिक का वह बैकलॉग मुख्‍यमंत्री जी ने तीन साल में पूरा करके दिखाया है और पाँच साल तक यह बैकलॉग शून्‍य करके जायेंगे। ... (व्‍यवधान) माननीय सदस्‍य महोदय, बीच में बोलने की कृपा न करें।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, बीच में आप डिस्‍टर्ब मत कीजिये।

श्रीमती वन्‍दना मीणा (उदयपुर ग्रामीण): उसके साथ-साथ मैं मुख्‍यमंत्री जी व मंत्रीजी का भी आभार व्‍यक्‍त करती हूं कि इस संभाग में जो बेणेश्‍वर धाम है वह जनजाति लोगों के लिये एक संगम स्‍थान है। इसके जीर्णोद्धार और सुधार के लिये करीबन दो करोड़ रुपये उपलब्‍ध करवाये हैं। 

जनजाति विभाग के द्वारा कई छात्रावास भी चल रहे हैं। माननीय मंत्रीजी ने दो दिवसीय हॉस्‍टल वार्डनों का प्रशिक्षण दिया इसके लिये भी मैं आभार व्‍यक्‍त करती हूं कि प्रशिक्षण देकर हॉस्‍टल में बच्‍चों के लिये सुधार की व्‍यवस्‍था की जानकारी दी। सरकार जनजाति छात्रों के लिये कई तरह की सुविधाएं कर रही है पर मेरा एक सुझाव है कि जनजाति के बालक-बालिकाएं जो पढ़ते हैं उनके लिये एक टेबल और कुर्सी की भी व्‍यवस्‍था हो जाए ताकि पलंग पर झुककर पढ़ना न पड़े। इतना सब कुछ कर रहे हैं तो टेबल और कुर्सी कोई बड़ी बात नहीं है।

माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने 1 से 9 तक विभिन्‍न सेवाओं की वेतन शृंखला में आरक्षण किया है इसके लिये तो मैं धन्‍यवाद देना चाहूंगी पर मैं निवेदन करना चाहूंगी राज्‍य सेवा के सभी वेतन श्रृंखला में भी किया जाए ताकि जनजाति के जितने भी कर्मचारी, अधिकारी हैं उनको फायदा मिले।

आज कई तरह की कमियां निकालते हैं। माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहूंगी कि कमियों की जब बात आती है तो कहीं न कहीं इधर-उधर चाहे शिक्षा विभाग हो, चाहे दूसरे विभाग से काम करवाना पड़ता है तब बात आती है। मैं प्रशंसा करना चाहूंगी कि अभी पहली बार माननीय मुख्‍यमंत्री महोदया जी ने जो अलग से सेक्रेटरी साहब लगाये हैं जनजाति विभाग में। कोटा सहरिया संभाग में वहां देखभाल नहीं होती इसके लिये भी अलग से कमिश्‍नर साहब लगाये हैं, इसके लिये भी मंत्रीजी का आभार व्‍यक्‍त करती हूं। जो कमियां अब बता रहे हैं वह शायद अब कमियां नहीं आएंगी।

एक सुझाव है माननीय मंत्री जी व माननीय मुख्‍यमंत्री महोदया जी हो कि जनजाति विभाग अलग से अपना एक कैडर बनाए ताकि इस उप योजना में और चहुंमुखी विकास हो सके। जब हॉस्‍टल वार्डन की बात आती है तो शिक्षा विभाग से लेना पड़ता है। वह बनकर आ तो जाते हैं हॉस्‍टल में लेकिन बच्‍चों की देखभाल नहीं हो पाती है और वह अपने हाल में मस्‍त रहते हैं इसलिये मेरा आपसे निवेदन है या तो अलग से इसकी भर्ती की जाए ताकि स्‍थायी रूप से वह सेवा दे सकें। आज शिक्षा की बात जनजाति क्षेत्र में करते हैं लेकिन वहां टीचर कहीं शहर से आते हैं। कहीं और और से भी आते हैं बाहर से। वह सही ढंग से नहीं पढ़ा पाते इस वजह से मेरा निवेदन है कि स्‍थानीय लोग जो चयनित होकर आते हैं जनजाति से उनको जनजाति क्षेत्र में ही लगाया जाए। अब की बार जुलाई में उनका चयन किया जाए। वह दूसरे जिले में न लगाये जाकर उदयपुर संभाग में ही लगाये जाएं मेरा ऐसा आपसे निवेदन है।

आज जनजाति उप योजना क्षेत्र में कई तरह की योजनाएं चल रही हैं। माननीय मुख्‍यमंत्री महोदया व मंत्रीजी ने जनजाति के लोगों को कैसे ऊपर उठाया जाए इसके लिये अभी नयी एक योजना चलायी है। केशवबाड़ी योजना हाथ में ली है। एक अच्‍छी योजना की घोषणा माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने की है ताकि वहां की गरीब जनता को फायदा मिलेगा। काफी लम्‍बे समय से ऐसी योजनाओं की घोषणा हुई है। वाकई में दो-ढाई बीघा जमीन पर आधारित है उन लोगों को इससे सबसे ज्‍यादा फायदा मिलेगा।

 

श्‍याम/चौहान   21.03.2007  15.10  2k 

 

जनजाति क्षेत्र में जनजाति बस्तियों में विद्युतिकरण की बात आती है, मैं माननीय मुख्‍यमंत्री जी से निवेदन करना चाहूंगी कि काफी बस्तियों में कनेक्‍शन भी हुए हैं लेकिन थोड़े दिन बाद उनकी लाइटें लगती हैं, पर सवाल वही आता है कि वापिस विद्युत विभाग वाले जाकर के कनेक्‍शन काट देते हैं। उदयपुर संभाग वास्‍तव में इतना संपन्‍न नहीं है कि वह लोग समय-समय पर बिल जमा कर सकें। ऐसी परिस्थिति में मेरा निवेदन है कि क्‍यों नहीं ट्राइबल जोन में बिजली फ्री कर दी जाये ताकि यह झंझट ही हमेशा-हमेशा के लिए ही खत्‍म हो जाये। जिस तरह गुजरात में बिजली फ्री है, इसी तरह से जनजाति एरिये में राजस्‍थान भी करे तो वाकई में सारा जनजाति बाहुल्‍य क्षेत्र आपको याद करेगा।

उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र की कुछ बात करना चाहूंगी, मेरे विधान सभा क्षेत्र में दो पंचायत समितियां पड़ती हैं, गिरवा और बड़गांव पंचायत समिति। गिरवा पंचायत समिति टाडा क्षेत्र में आती है और बड़गांव पंचायत समिति के कुछ ही गांव माड़ा में हैं, उसमें 105 गांव हैं जिसमें से मात्र 36 गांव माड़ा में सम्मिलित हैं। यह जो बचे हुए गांव हैं उसको भी माड़ा में सम्मिलित किया जाये ताकि वहां की जो बिखरी हुई आबादी है उनको जो योजनाएं माड़ा के तहत चल रही है उनका लाभ मिल सके।

उपाध्‍यक्ष महोदय, मांग संख्‍या 21 पर भी मैं थोड़ा सा निवेदन करना चाहूंगी कि उदयपुर जिले में जो रोडें बनी हुई हैं, वाकई में वह बहुत ही तारीफे काबिल हैं। उनकी जितनी भी तारीफ करूं उतनी कम है। चाहे पीएमजीएसवाई हो, चाहे स्‍टेट हाइवे हो लेकिन मेरे विधान सभा क्षेत्र की बात करूंगी कि गत वर्ष बहुत बारिश होने की वजह से एक तो उदयपुर से झाडौल रोड के बीच में सीसारमा पुलिया है, उसकी दयनीय स्थिति है और उस पुलिया को बनाना बहुत जरूरी है क्‍योंकि आगे झाडौल यह रोड जाता है और स्‍टेट हाइवे घोषित हो चुका है। उसके साथ-साथ पंचायत बाड़ा में मोरवानिया करके एक गांव है वहां भी एक छोटा सा पुलिया बना हुआ है। पहले इतनी बारिश कभी हुई नहीं थी लेकिन इस वर्ष इतनी बारिश हुई जो बड़े तालाब का पानी वहां तक इतना आया कि प्रशासन को वहां पर नावें चलाने की स्थिति बनी। यह भी पुलिया आपके माध्‍यम से बनी जाये ताकि वहां की जनता को राहत मिलेगी।

उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहूंगा कि पीएमजीएसवाई की जो रोडें बनी हैं, मेरे क्षेत्र में भी करोड़ों की रोडें चल रही हैं। लेकिन ठेकेदार कहीं-कहीं वाकई में घटिया किस्‍म का काम कर रहे हैं। वह भी थोड़ा देखने की जरूरत है ताकि वहां जो काम हो रहा है वह सही रूप से होवे। कई बार ...(व्‍यवधान) यह हकीकत वाली बात छोड़ो, वैसे तो पाँच साल का इनका समय होता कि यदि टूट जाये तो रिपेयर करने की जिम्‍मेदारी इनकी ही रहती है, वही करेंगे, लेकिन फिर भी दूसरी बार बनाने का भी मौका नहीं मिले। आज मैं दोनों मंत्रियों और मुख्‍यमंत्री महोदय का सबका आभार व्‍यक्‍त करती हूं कि उदयपुर संभाग का जो चहुंमुखी विकास हो रहा है। वाकई में बहुत अच्‍छा हो रहा है। इसी तरह से जो छोटी-छोटी रोड भी हैं, मिसिंग लिंक में भी आप हमें बजट देंगे ताकि वहां भी गांव जुड़ जायें। आपने मुझे आज बोलने का मौका दिया इसके लिए बहुत-बहुत धन्‍यवाद। जय हिन्‍द, जय भारत।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्रीमती स्‍नेहलता।

श्रीमती स्‍नेहलता (डग): उपाध्‍यक्ष महोदय, मांग संख्‍या 19, 21 एवं 30 पर बोलने का मौका दिया, आपको बहुत-बहुत धन्‍यवाद। मेरे डग विधान सभा क्षेत्र में इन तीन वर्षों में सड़कों का रिकार्ड तोड़ काम हुआ है। गांव-गांव तक सड़कें पहुंचा दी गयी हैं। आज तक 196.21 किलोमीटर सड़कें बन चुकी हैं। इसमें कुछ तो मिसिंग लिकं हैं, रूरल रोड हैं, कुछ सम विकास में बनी हैं और भी रोडें बनी हैं, इंटर स्‍टेट रोड भी बनी हैं। सीआरएफ में कई सड़कें चौड़ी की गयी हैं। इसके लिए तो मैं माननीय मुख्‍यमंत्री जी एवं पी.डब्‍ल्‍यु.डी. मंत्री जी को धन्‍यवाद देती हूं और भूरि-भूरि प्रशंसा करती हूं कि मेरे डग विधान सभा क्षेत्र में सड़कों का इतना जाल बिछा दिया गया जो कांग्रेस सरकार ने कभी कोई ध्‍यान ही नहीं दिया था।

उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहूंगा कि मेरे विधान सभा क्षेत्र में सिर्फ दो रोड और बननी बाकी रह गयी हैं। उनके बारे में मैं मुख्‍यमंत्री जी और पी.डब्‍ल्‍यु.डी. मंत्रि जी का ध्‍यानाकर्षित करना चाहूंगी, रामनगर से लेकर पचपहाड़ तक बाइपास रोड बनाने की मांग बहुत लंबे समय से करते चले आ रहे हैं। यह रोड मात्र चार किलोमीटर है। भवानी मंडी शहर एवं भवानी मंडी ग्रामीण की जनता की यह आवश्‍यक मांग है इसलिए यह रोड बनाना बहुत जरूरी है। भवानी मंडी में मेन मार्केट से भारी वाहन निकलते हैं। कृषि उपज मंडी में जाने वाले भारी वाहन जैसे ट्रेक्‍टर, ट्रोला आदि बीच मार्केट से गुजरते हैं। मार्केट में कई स्‍कूल मेन रोड पर बने हुए हैं, स्‍कूल की छुट्टी के समय बच्‍चों के एक्‍सीडेंट होने की संभावनाएं बनी रहती हैं। भवानी मंडी ग्रामीण के लोगों को कृषि उपज मंडी में अपने वाहन ले जाने हेतु तीन किलोमीटर घूमकर जाना पड़ता है। इस रोड के बार-बार टेंडर होते हैं लेकिन कोई टेंडर नहीं डालता है। इसी वर्ष में 15 जनवरी से 30 जनवरी तक टेडर लगाने की तारीख थी और 3 फरवरी को टेंडर खुलने थे परन्‍तु किसी ने टेंडर नहीं डाला। यह टेंडर बी.ओ.टी. में डाले गये थे। मुझे ऐसा लगता है कि बी.ओ.टी. में यह टेंडर नहीं हो पायेंगे। इसलिए मैं माननीय मुख्‍यमंत्री जी एंव सार्वजनिक निर्माण मंत्रि जी से निवेदन करना चाहूंगी कि यह भवानी मंडी में रामनगर से पचपहाड़ तक बाइपास मुख्‍यमंत्री सड़क योजना में बनाने की कृपा करें तो हमारी भवानी मंडी की जनता हमेशा याद रखेगी। भवानी मंडी में बहुत सकड़ी-सकड़ी सड़कें बनी हुई हैं और वहां इतनी भीड़ रहती हैं, इतना ट्रेफिक रहता है कि पूरी जनता बहुत सालों से परेशान है।

 

जयगोविन्‍द/यूएस/21.3.7/15.20/2l

 

अभी हमारे विधायक दल की मीटिंग हुई थी तब भी मैंने मुख्‍य मंत्रीजी को एक एप्‍लीकेशन दी है और उसमें एस्‍टीमेट भी सम्मिलित करके दिया है, वह 4 करोड़ 70 लाख का बना है। सार्वजनिक निर्माण मंत्रीजी यहां बैठे हैं, मैं आपसे करबद्ध निवेदन करना चाहूंगी कि मेरे भवानी मण्‍डी की यह बाइपास रोड रामनगर से पचपाड़ तक मात्र 4 किलोमीटर की है, अपनी सरकार के इसी कार्यकाल में यह रोड बनवा दी जाएगी तो आपको बहुत-बहुत धन्‍यवाद। मेरे डग विधान सभा क्षेत्र में मात्र एक नगरपालिका क्षेत्र है और वहां एक ही रोड की मांग है जो आप बनवाने की कृपा करें। माननीय मंत्रीजी, मैं एक निवेदन और करना चाहूंगी कि मेरे डग विधान सभा क्षेत्र में गंगधार गुफा शरीफ मात्र दो किलोमीटर की सड़क है इसे भी आप बनवा देंगे तो यह धार्मिक स्‍थल है और वहां के सभी लोगों की बहुत मांग है।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा डग विधान सभा क्षेत्र पिछले 50 सालों से पिछड़ा हुआ रहा है, अब हमारी सरकार ने चारों तरफ सड़कों का इतना जाल बिछा दिया है कि जो क्षेत्र कभी सड़कों में पिछड़ा हुआ था, जब हम चुनाव प्रचार के लिए क्षेत्र में घूमते थे और गांव-गांव में जाते थे तो कितनी ही, 40-45 सड़कों के टुकड़े दो-दो, ढ़ाई-ढ़ाई किलोमीटर के थे उनकी हमने लिस्‍ट बनाकर हमारे मुख्‍य मंत्रीजी को दी थी और हमारी मुख्‍य मंत्रीजी ने यह सारी ही रोडे़ बनवाकर कम्‍पलीट कर दी है। मेरा डग विधान सभा क्षेत्र जो 50-55 वर्षों से विकास में पिछड़ा हुआ था, बहुत बैकवर्ड था वहां इतनी विकास की गंगा बहाई है कि वह हमेशा माननीय मुख्‍य मंत्रीजी का आभार व्‍यक्‍त करता है और करता रहेगा। धन्‍यवाद।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री रामनारायण मीणा।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, काफी सारगर्भित बातें हुई। मैं ज्‍यादा नहीं कहकर कुछ‍बिन्‍दुओं पर अपनी बात कहना चाहूंगा। यह सही है कि हिन्‍दुस्‍तान में  गांवों के विकास के लिए बहुत ज्‍यादा पैसा खर्च हो रहा है। जब से प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना की स्‍वीकृतियां जारी हुई है, यह सही है सार्वजनिक निर्माण निर्माण मंत्रीजी, आपके अधिकारी थोड़े सक्रिय हैं इस मामले में, जिस स्‍टेट के अधिकारी सक्रिय न हो वहां काम नहीं होता है लेकिन इन सारी बातों को देखते हुए हमें देखना पड़ेगा कि क्‍वालिटेटिवली आपका काम कैसा हो रहा है। यह सही है कि 5 साल यह देखेंगे, काम करेंगे, जितना होगा, सब ठीक होगा लेकिन यह बहुत ही खेदजनक है कि श्रेय लेने के साथ ही कुछ कार्यों में गुणवत्‍ता की दृष्टि से कुछ काम किया जाए। आप करेंगे कि नहीं करेंगे लेकिन माननीय मंत्रीजी, मेरा सुझाव है कि आपके पास देखिए पिरामिड उल्‍टा चल रहा है। मैं आपको बताना चाहता हूं कि आपके जो इन्‍जीनियर्स हैं, मुख्‍य अभियंता 3, अधीक्षण अभियंता 3, अतिरिक्‍त मुख्‍य अभियंता 8, आपके सिविल में सहायक अभियंता 752 हैं, वहां आकर आप कमजोर पड़ते हो। हम आपसे कहें कि अमुक सड़क का कार्य ठीक नहीं हो रहा है, आप किससे काम करवाएंगे? माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, वह समय गया जब 10 वर्ष पहले सार्वजनिक निर्माण विभाग में मेक मिस्‍त्री हुआ करते थे, अधिकारियों का काम मेक मिस्‍त्री भी निकाल दिया करते थे और आज आप देखिए, चूंकि वह बात मैं बाद में कहूंगा लेकिन आपको एक बात बताता हूं माननीय मंत्रीजी, आपने मुख्‍य मंत्री सड़क योजना कैसे चलाई, उसका फण्‍ड कहां से आएगा, गुणगान करना तो आता ही है, देखिए नम्‍बर दो बनना होगा तो कुछ न कुछ तो करना ही पड़ेगा नहीं तो पिछड़ जाएंगे लेकिन आपको मैं पूरी तरह से चैलेंज के साथ कहता हूं, दावे के साथ कहता हूं कि राजस्‍थान में आपकी एक भी सीमेण्‍टेड सड़क सही नहीं है, आप उसकी जांच करवा लो। अब इसके लिए हम किसको दोष दें? ...(व्‍यवधान)... गर्ग साहब, आप तो बड़े समझदार माननीय सदस्‍य हो।

श्री जोगेश्‍वर गर्ग (जालौर): ऐसी सी सी रोड बन रही है जो 50 साल के इतिहास में नहीं बनी और श्रेष्‍ठ क्‍वालिटी की, दुनिया की किसी भी लेबोरेट्री से जांच करवा लो, मैं चैलेंज करता हूं।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): वह तो नम्‍बर दो बनेंगे कि नहीं बनेंगे पर आपका नम्‍बर कट जाएगा। आप बैठो। मैं कह रहा हूं।

श्री बद्रीलाल जाट (कपासन): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह जिन्‍दा हैं तब तक रोड नहीं टूटेगी मेरी यह गारण्‍टी है।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, वह सही है।

श्री अर्जुन सिंह (दानपुर): इसका उदाहरण सुनना है तो माननीय मंत्रीजी बैठे हुए हैं, सागवाड़ा के पास देख लो, 6 महीने पहले वह सी सी सड़क बनी है, बांसवाड़ा रोड पर और जाकर देख लो, कमेटी बनाकर, 6 महीने नहीं हुए अभी बने हुए। ...(व्‍यवधान)...

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको कहना चाहता हूं, खैर, जो भी है, आप मेरी बात सुन लें। आपसे कालूरामजी, मैंने पहले भी कहा है, मैं सजेस्टिव कहूंगा, आपके पास लेबोरेट्री नहीं है, आप अधिकारियों का कितना ही दोष निकालो, आप चीफ इन्‍जीनियर से कहेंगे तो वह तो वहां जाकर देखने से रहा, आप तो सीधी बात करेंगे तो चीफ इन्‍जीनियर से करेंगे, आपके प्रयोगशाला ही सही काम नहीं कर रही है, जिस प्रयोगशाला में ईमानदार अफसर चाहिए वहां आप कूड़ा करकट डाल रहे हो, जिसको आप निकम्‍मा मानते हैं आप उसको प्रयोगशाला में डाल रहे हो। आपके केन्‍द्रीय स्‍तर पर कोई भी लेबोरेट्री नहीं है कि शिकायत आने पर वहां जांच के लिए भेजा जा सके। नहीं भेज पाएंगे तो काम तो जैसा होगा वैसा ही होगा। जैसा अभी गर्ग साहब कह रहे थे कि बहुत अच्‍छा काम हो रहा है, गर्ग साहब, मैं आपसे कहना चाहता हूं, माननीय मंत्रीजी, मैं आपको याद दिला रहा था कि आपके ओवरसीयर जो फील्‍ड में रहकर काम करता है, उसकी 899 पोस्‍टें हैं, वह जमाना गया जब एक पुलिया बनती थी तो एक्‍सईएन वहां खड़ा रहता था, आज आपके पास 899 पद स्‍वीकृत हैं लेकिन है कितने आपके पास, आपके पास पद ही नहीं है। मेक मिस्‍त्री जो फील्‍ड में रहता है, गर्मी में काम करवाता है ठेकेदार से तो यह जो स्थिति है माननीय मंत्रीजी, इसको कैसे सुधारा जाए, कैसे ठीक किया जाए, यह आप जाने, आप क्‍या कर पाएंगे, क्‍या नहीं कर पाएंगे, आप बताएंगे लेकिन यह जो आपने सुधार कर लिया तो श्रेय आपको मिलेगा नहीं तो श्रेय तो भारत सरकार को मिल रहा है, वह केन्‍द्रीय सड़क नीति हो, प्रधान मंत्री सड़क योजना हो, इसलिए मैं आपसे अर्ज करना चाहता हूं कि माननीय मंत्रीजी, एक तो यह सही है कि आपने ठेके बड़े लेवल पर देने शुरू कर दिए हैं, एक ठेकेदार के पास 20 सड़क मिलेगी, 25 सड़क मिलेगी। यह व्‍यवस्‍था जैसे शराब के ठेके होते हैं बड़े-बड़े गिरोह बन जाते हैं, मुझे याद है कि पिछले दिनों कोटा में टेण्‍डर के लिए मारपीट हुई। आपके डिपार्टमेंट की यह औकात नहीं थी, हिम्‍मत नहीं थी कि वह मुकदमा दर्ज करवा सके। टेण्‍डर 30 प्रतिशत जाता है अबोव और उसको सब लेट किया जाता है 30 प्रतिशत बिलो पर। आप राजस्‍थान की पूरी सड़कों में अपने ढंग से अपने आदमी भेज कर जांच करवा लीजिए कि जब 30 प्रतिशत अबोव पर टेण्‍डर जाता है, 30 प्रतिशत बिलो पर वहां काम मिल रहा है जो फील्‍ड में काम कर रहे हैं, 80 प्रतिशत केसेज में आपको कहना चाहता हूं कि जितने भी अबोव टेण्‍डर जाएगा उससे उतना ही बिलो पर टेण्‍डर जा रहा है। यह बहुत महत्‍वपूर्ण बात है, इस बात को आप देखने की स्थिति में नहीं है। जब आप इस बात को देखने की स्थिति में नहीं हैं  तो माननीय मंत्रीजी, काम कैसे ठीक होगा, स्‍टाफ पूरा नहीं है, मेरा अर्ज करना है कि सड़कवाइज, छोटी सड़क है तो ठेकेदार की वह क्षमता रखे, बड़ी सड़क है तो उसके अनुसार ठेकेदार हो लेकिन ऐसा कोई काम नहीं होने दें जिससे आपका टेण्‍डर का फार्म ही सही आदमी को नहीं मिल पाए और वह सब लेट हो। मेरी आपसे अर्ज है माननीय मंत्रीजी, कि यह जो चार्ट दिया है इसको आप कैसे ठीक करेंगे, इसका श्रेय अफसरों को नहीं जाता है, श्रेय तो सरकार को जाता है, सरकार में आप हो। खैर, जो भी है।

एक और अर्ज करना चाहूंगा चूंकि आपका मामला है, मैं राजस्‍थान राज्‍य अन्‍वेषण ब्‍यूरो की तो बात नहीं करना चाहता हूं लेकिन आप भी यदि किसी मामले में ए सी डी को कहेंगे तो आपके इन्‍जीनियर तो परेशान हो जाएंगे, ठेकेदार भी परेशान हो जाएंगे, वहां केस रजिस्‍टर नहीं होगा, जो परिस्थितियां बनी है, कुछ केसेज में आपको देखना चाहिए और देखेंगे तो शायद कुछ सुधार हो पाएगा।

एक बात और बताना चाहता हूं माननीय मंत्रीजी, आप मेगा हाईवे का बहुत प्रचार ले रहे हैं और बहुत ज्‍यादा गैन उसमें ले रहे हैं, यह मेगा हाईवे क्‍या बीमारी है और क्‍या यह करप्‍शन का अड्डा है, अगर ईमानदारी से आप राजस्‍थान का विकास कर रहे हैं तो ठीक है, मुख्‍य मंत्री सड़क योजना में आपने 50 पैसे सेस लगा दिया..।

 

Gpc/usc/21032007/1530/2m

 

पैसा इकट्ठा करने की कोशिश की, लेकिन जो मेगा हाईवे हैं इसकी स्थिति क्‍या है, आपने देखा? आपने इस मामले में पारदर्शिता को देखा, आपने कोई टेण्‍डर कॉल किये या कुछ सलेक्‍टेड पार्टीज को आपने बुलाया? जो कंपनी एक बार 2004 में रजिस्‍टर्ड होती है उस कंपनी को आप 239 करोड़ रुपया ब्‍याजमुक्‍त दे रहे हो बिना किसी बात के। उसमें आप डाइरेक्‍टर भी उसके ही डाल रहे हो और आप कहते हैं आपका नियंत्रण है। आपका  चीफ इंजीनियर उस मेगा हाईवे को जाकर देख ले, चपरासी की औकात मानते हो, आपके चीफ इंजीनियर की नहीं मानते। जब यह स्थिति बन रही है, मैं नहीं कहता कोई करप्‍शन का अड्डा है, आपने किस भावना से किया है, मैं आपके ऊपर एलिगेशन नहीं लगाता माननीय मंत्रीजी, लेकिन और भी कोई काम करो सोचकर करो, पारदर्शिता से काम क्‍यों नहीं किया? हम जनता के प्रति जवाबदेह हैं इसलिए इन बातों को देखकर हम कुछ करेंगे तो थोड़ा ठीक हो पाएगा। रिडकोर जैसी संस्‍थाएं बुलायी हैं, खैर जो भी है मैं तो इस मामले को यही कहकर खत्‍म करूंगा आप 1053 किलोमीटर सड़क बना रहे हो, मंत्रीजी अगर आप टेण्‍डर कॉल करते, पारदर्शिता रखते तो 40-45 लाख से ज्‍यादा टेण्‍डर नहीं जाता और बड़े से बड़े ईमानदार ठेकेदार आपको काम करने को मिलते। आप एक करोड़ रुपया एक किलोमीटर का दे रहे हो, कैसे दे रहे हो आप जानो, लेकिन मुझे तो डाउट है कि पारदर्शिता तोड़ने की हद हो रही है आपके विभाग में। इस तरह के और भी मामले हैं। अभी मैं कुछ दिन पहले देख रहा था, एक बहुत बड़ा ठेका था, जो रिफाइनरी का क्रूड ऑयल निकलता है उसको डामर में मिलाकर काम करते हैं, कोई देखभाल नहीं। इसलिए माननीय मंत्रीजी, यही बात ..(व्‍यवधान)..

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): कहना क्‍या चाहते हो?

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): मैं कहना यह चाहता हूं जिस तरह की भी शिकायत आये उसकी जांच के लिए आपको तैयार होना चाहिए। जैसा मैंने मेगा हाईवे के लिए कहा आप पता कर लीजिए 50 लाख से कम में एक किलोमीटर सड़क मिल जाएगी। आप एक करोड़ रुपया दे रहे हो मैं यह कहना चाहता हूं। यह पारदर्शिता है, इसलिए आपको बताना चाहता हूं और आप समझदार हो।

अभी बात हो रही थी सीमेंटेड रोड की। मेरा आपसे आग्रह है आप सीमेंटेड रोड को चैक करिए, यह एक मसला है, पाँच साल बाद जब उसका समय खत्‍म होगा उस सीमेंटेड रोड को चैक कराइए स्‍टेट में और उससे आपको समझने का मौका मिले। मैं नहीं कहता आपके इंजीनियर्स उसमें शामिल हैं। सब लेट हो रहा है, ठेकेदार बड़े हैं, 20-20 रोड्स जा रही हैं। मेरे वहां खटकड़ में जाकर देख लीजिएगा। ज्‍यों ही नदी चढ़ोगे आप नैनवां की तरफ से जाओगे, जिस रास्‍ते से मैं आता-जाता हूं वह टूटने लग गया। खैर, यह सही है कि नैनवा में जांच हो रही है, आपका डिपार्टमेंट सो नहीं रहा, लेकिन यह एक ऐसा मसला है जिसका आप प्रचार कर रहे हो। छह महीने बाद में यदि कलर साबित हो गया तो उसकी गालियां भी पड़ सकती है। खैर जो भी स्थिति हो।

लिंक रोड्स के बारे में बात कर रहे हैं, मेरा एक अनुरोध है, हम लोग भी उसको कहेंगे, आप भी कुछ करने की कोशिश करोगे, लेकिन लिंक रोड्स जो भी हैं इन लिंक रोड्स के बारे में क्‍या आप सर्वे कर पाओगे? मैं आपको एक उदाहरण देता हूं बूंदी जिले में तहसील बूंदी में गोखपुरा से जेसल, खोरलदेवर आती है। हमने सीएडी वालों से कहा, सीएडी के मंत्रीजी यहां बैठे हैं, यह बूंदी से जेसल जैसे कामर्शियल कस्‍बे को जोड़ने का एक साधन है। वह केशोरायपाटन विधान सभा क्षेत्र को भी जोड़ता है, बूंदी विधान सभा क्षेत्र को भी जोड़ता है और नैनवां को भी जोड़ता है। इस तरह का आप लें, अभी कृषि मंत्रीजी शायद यहां नहीं हैं, बिजलवा से बालूंदा नैनवां और टौंक के बीच में एक लिंक है। इस तरह का काम हो पाएगा, लेकिन यह काम तभी हो पाएगा जब आपका काम सही होगा।

मंत्रीजी, मैं आपसे एक अनुरोध करूंगा कि आपके डिपार्टमेंट में जो गड़बड़ हो रही है उसका मुख्‍य कारण है आपकी शराफत। छबड़ा से आपने एक्‍स.ईएन. को हटाया। ..(व्‍यवधान).. यह तीसरे नम्‍बर पर हैं, दूसरे नम्‍बर पर भी नहीं हैं, इसलिए इनको नहीं कहूंगा, या तो दूसरे नम्‍बर को कहूं तो पहले की बात करें या होड़ में हो तो उससे बात करें। मेरा तो आपसे ही बात करने का है, घनश्‍याम जी पक्‍के पंडित हैं। ये आशीर्वाद मन से दे दें तो पार हो जाएंगे और यदि इन्‍होंने गड़बड़ कर दी तो तकलीफ भी हो सकती है, इसलिए पण्डित को और घनश्‍यामजी जैसे को धार्मिक मामले में नहीं छेड़ रहा हूं, मैं छेड़ने की स्थिति में नहीं हूं ..(व्‍यवधान).. ये भस्‍मासुर तो नहीं हैं, लेकिन भगवान की इनके ऊपर कृपा है कि एक का तो विभाग छिन गया और दूसरा दादा बनकर बैठा है अभी तक। खैर, जो भी स्थिति है, यह छबड़ा का प्रकरण हुआ, आपने मंत्री के कहने से एक्‍सईएन को हटाया या क्‍या किया, लेकिन ठेकेदारों का रोल आपके यहां ज्‍यादा चल रहा है अधिकारियां को हटाने में। आप देख नहीं पाते, आपके पास संसदीय कार्य विभाग है, खैर जो भी स्थिति है। ..(व्‍यवधान).. जो सब लेटिंग का सिस्‍टम आपको बताया माननीय मंत्रीजी, जैसा आपने सीमेंटेड रोड के लिए कहा, मैं आपको तीन-चार रोड का उदाहरण देता हूं जो मेरे क्षेत्र में है, आप जांच करवा लें आपकी गिट्टी भी 75 एमएम की मिलनी चाहिए, वह नहीं मिलेगी। आप लिखिए हरियाली ..(व्‍यवधान)..

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आप तो तारीख बता दो, आपके साथ एडिशनल चीफ इंजीनियर को भेजूंगा, आप खुद साथ जाएंगे और जांच करवाएंगे।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): मैं तो आपको बता देता हूं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): तारीख बता दो किस दिन जाएंगे?

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): आप लिखिए, मैं तो अभी चला जाऊंगा। ..(व्‍यवधान).. जोगारामजी ..(व्‍यवधान)..

श्री कालूलाल गुर्जर  (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री): ये तो मंत्रीजी, आपसे बोलकर सड़कें लेना चाहते हैं, इनको न तो जांच करानी हैं, ये तो केवल भूमिका बनाकर आपसे सड़क लेना चाहते हैं। ..(व्‍यवधान)..

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): मैं गलतफहमी में नहीं हूं, भारत सरकार ने इंतजाम किया है प्रधानमंत्रीजी ने आबादी के हिसाब से सड़कें दी हैं और आबादी के हिसाब से सड़कें मिलेंगी। मुख्‍यमंत्री सड़क का तो फण्‍ड ही नहीं है। इसलिए मेरा आपसे अनुरोध है  प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में हरियाली, खूरी, मीणों की झौपड़ी, ये तहसील नैनवां की बता रहा हूं। 25 सड़कें बनी होंगी, तीन-चार आपको बता रहा हूं। आप तीन की ही कर लीजिए, 10-20 का नाम तो मैं बता दूंगा, आप जांच कर लीजिए। दुबारा रिपीट कर रहा हूं हरियाली, खूरी, मीणों की झौपड़ी। ..(व्‍यवधान).. आप खड़े होकर बात किया करो। खैर, जो भी स्थिति है, मैं तो माननीय मंत्रीजी, आपको एक बात कहना चाहूंगा मेरे क्षेत्र में आपका विभाग काम कर रहा है, लेकिन कहीं-कहीं ऐसा काम हो रहा है, मेरे यहां सरवर में छात्रावास बन रहा है। उसमें सीमेंट लग रही है या रेत से बना रहे हैं पता नहीं चल पा रहा है। इसी तरह से आपके विभाग का एक गर्ल्‍स कालेज बूंदी में बना है। कैसे बना है, मैं नहीं कह सकता, उसकी फोटो मेरे पास है, अभी से टूटने लग गया। कुल मिलाकर सेंट्रल लेबोरेटरी वाली बात कही, मंत्रीजी, इन सारी बातों का एक ही जवाब है। ..(व्‍यवधान)..

मेरा आपसे यह भी निवेदन है कि आपका जो केन्‍द्रीय सड़क निधि का पैसा आ रहा है उसका आप किस ढंग से उपयोग कर रहे हो। मुख्‍यमंत्री सड़क निधि का पैसा आ रहा है उसका स्‍टेट के लिए किस तरह से उपयोग कर रहे हो इन सारी बातों को देखकर आप कु्छ कर पाएंगे तो मेरा खयाल है कि वह ठीक होगा। मैं आपसे अर्ज करूं राष्‍ट्रीय राजमार्ग में कितने फुट तक कामर्शियल काम नहीं होना चाहिए।

 

मोहन/अरूण/अशोधित प्रति प्रकाशनार्थ नहीं/21032007/1540/2n

 

आबादी नहीं बढ़नी चाहिए। मैं एक बीसलपुर की नहर है, मंत्री जी, आप भी देखते होंगे, वहां मैं एक दिन निकला और उस नहर पर कुछ भी नहीं था, दूसरे दिन निकला, उस नहर पर मजार नजर आ गई, न कोई आदमी मरा, न किसी को दफनाया गया, न किसी को जलाया गया, एक ऐसा सेंसेटिव मामला है जिसको आपका डिपार्टर्मेंट क्‍या हम कोई नहीं देख पाते हैं। मकान बन रहा है, बाईपास बनाना पड़ रहा है, आपकी एक सीमा है, आप उसको बदलने के लिए आपसे जवाब मांगा जाता है, आप जवाब नहीं दे पाते हो, शहरी विकास मंत्रालय या जहां से भी होता है, वह सारा का सारा हो रहा है तो इन सारी बातों को कर पाओगे तो मेरा जहां तक ख्याल है, ठीक रहेगा।

मैं माननीय जनजाति विकास मंत्री जी से भी निवेदन करन चाहूंगा। मंत्री जी, आप सरकार में हो, अभी बात आई और यह आया कि सी पी जोशी साहब ने भी कहा, ट्राईबल्‍स के मामले में ज्‍यादा भेदभाव नहीं होना चाहिए। आप जो भेजते हो, अभी महाराष्‍ट्र पेटर्न की बात आई, क्‍या महाराष्‍ट्र पेटर्न पर नहीं है।

श्री केसरदेव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): उपाध्‍यक्ष महोदय, आधा घंटा हो गया, सुबह यह तय हुआ था कि प्रत्‍येक सदस्‍य 10 मिनट बोलेगा। ...(व्‍यवधान)... आपसे निवेदन है।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): कि आबादी की दृष्टि से जितनी आबादी है उस आबादी के रेश्‍यो के हिसाब से आप पैसा बजट का दोगे।  क्‍या राजस्‍थान में ऐसा हो रहा है ? जब राजस्‍थान में ऐसा नहीं हो रहा है तो उससे क्‍या नुकसान हो रहा है ? माननीय मंत्री जी, माडा योजना में जो आपका एरिया है, मैंने आपसे इस मामले में जानकारी भी चाही थी, 90 परसेंट आपकी लिफ्ट योजनाएं खराब हैं, आप पैसा नहीं दे पा रहे हैं, आपकी मंशा गलत नहीं हो सकती लेकिन जब 90, 80 परसेंट आपकी लिफ्ट योजनाएं खराब हैं, माडा योजना के बारे में क्‍वेश्‍चन था तो वह योजनाएं आपकी कब चालू होंगी ? क्‍यों नहीं चालू हो रही हैं और आदिवासी लोगों से चाहोगे, मेरे कल्‍याणपुरा की योजना है, बिजली का बिल नहीं चुका पाते, आप उनसे चाहोगे कि वह अपने जेब से पैसा दें जिसके पास 2 बीघा जमीन है इसलिए मेरा आपसे अर्ज करना है, छोटी छोटी लिफ्ट योजनाएं जब बंद हैं, आप कृपा करके अपने बजट का हिस्‍सा उनको दें, उनको चालू कराएं, प्रोडक्‍शन बढ़े, यह मेरा आपसे अनुरोध है, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इन सारी बातों के साथ ही मैं एक बात अर्ज करना चाहूंगा कि मंत्री जी, अभी फोरेस्‍ट के मामले आपके बहुत उलझे हुए हैं और वह भारत सरकार ने भी गजट नोटिफिकेशन कर दिया, साल 6 महीने में कुछ न कुछ होगा लेकिन मैं आपसे अनुरोध करूंगा कि ऐसे मामलों में, नहीं, आप को-आपरेट कर रहे हो ...(व्‍यवधान)... लेकिन ऐसे मामलों में आप फोरेस्‍ट मंत्री जी से बैठ कर के अधिकारी आपके हैं भारत सरकार कहां बीच में आ गई ? आपके अधिकारी रिपोर्ट नहीं करेंगे फोरेस्‍ट वाले तो कौन कोर्ट तकलीफ करेगा इसलिए कृपा करके मंत्री जी, जहां पांच सौ साल से आबादी बस रही है, दो सौ साल से आबादी है, फोरेस्‍ट वाले जाते हैं, ठेकेदार को परेशान करते हैं, ठेकेदार उनसे बात कर लेता है ढंग से, काम चल जाता है इसलिए मेरा जहां तक ख्‍याल है, आप दोनों बैठ कर के मुख्‍य मंत्री जी के साथ बैठ कर के जो जो रिजनेबल चीज है, अभी बूंदी की माननीय विधायक कह रही थी, मैं उसकी गड़पेड़ा की सड़क है, कहीं न कहीं, कोई न कोई है और इससे आपकी जो केपेसिटी दिख रही है, राजस्‍थान में उसमें अवरोध आता है, इन सारी बातों का आप ध्‍यान रखेंगे।

इसके साथ, मैं माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपको धन्‍यवाद देता हूं, मैंने पहले ही कहा था, मैं आज वहां बैठ गया था, देख नहीं पाया लेकिन कुल मिलाकर आप विभाग में नाम कमा सकते हो, भारत सरकार हिन्‍दुस्‍तान के रोड्स को जितना पैसा दे रही है और प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना में यदि आप इसी तरह से गति पकड़ते गये, साढ़े तीन की आबादी आ जाएगी, 2800 की आबादी आ जाएगी लेकिन सड़क बने और पांच साल बाद टूटे, सीमेंटेड रोड के बाद नाम कमाने की बात करो, 6 महीने के बाद उसकी मरम्‍मत करनी पड़े, यह सब ठीक करोगे तो मेरा जहां तक ख्‍याल है, राजस्‍थान का विकास होगा और जनजाति मंत्री जी, मैं तो आपसे बात कहना चाहूंगा, आपकी भावना है गरीबों के प्रति लेकिन इनको कितना दे पाते हो, बजट से निकाल कर इनसे लड़ झगड़ कर के जितना ले पाओगे उतना ही गरीब आगे बढ़ सके, आपका नाम रहेगा। इन्‍हीं शब्‍दों के साथ ही मैं आपको धन्‍यवाद देता हूं, बहुत बहुत धन्‍यवाद।

श्री उपाध्‍यक्ष: धन्‍यवाद, श्री कन्‍हैया लाल पाटीदार।

श्री कन्‍हैया लाल पाटीदार (पिड़ावा): उपाध्‍यक्ष महोदय, किसी भी प्रदेश की उन्‍नति उसमें स्थित रोड्स की दशा देख कर लगायी जा सकती है और आज मैं फर्क के साथ कह सकता हूं कि हमारे राजस्‍थान प्रदेश की जो सड़कें हैं, वे एक गरिमापूर्ण स्थिति में हैं। उसका श्रेय जाता है माननीय मुख्‍य मंत्री महोदया को, माननीय सार्वजनिक निर्माण मंत्री महोदय को, मैं आप दोनों का हृदय से आभार प्रकट करता हूं।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, 93 से 98 में जब माननीय भैरोंसिंह जी शेखावत की भारतीय जनता पार्टी की सरकार हमारे प्रदेश में कार्यरत थी उस समय उन्‍होंने हर पंचायत मुख्‍यालय को सड़क से जोड़ने का एक महत्‍वपूर्ण निर्णय लिया था। उससे पहले ग्रामीण अंचल की सड़कों के बारे में किसी भी सरकार ने कभी नहीं सोचा था। केवल मुख्‍य सड़क जो कस्‍बे से कस्‍बे तक जाती थी या कस्‍बे से जिला मुख्‍यालय तक जाती थी उन्‍हीं रोड्स की रिपेयर होती थी, उन्‍हीं की देखभाल होती थी और ग्रामीण अंचल की सड़क बनाने का यदि किसी सरकार ने सोचा है तो पहली बार तत्कालीन मुख्‍य मंत्री महोदय भैरोंसिंह जी शेखावत ने इसके बारे में सोचा और प्रत्‍येक पंचायत मुख्‍यालय तक सड़क पहुंचाने में उन्‍होंने सफलता प्राप्‍त की। उसके बाद, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, पीएमजीएसवाई, प्रधान मंत्री सड़क योजना है, इतनी महत्‍ती सड़क योजना हमारे माननीय प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जो तत्‍कालीन भा.ज.पा. की केन्‍द्रीय सरकार के प्रधान मंत्री थे, उन्‍होनें हमारे देश को दी और उस योजना के माध्‍यम से हमारे पूरे भारतवर्ष के लगभग 500 की आबादी तक के गांव अभी उस उस योजना में सड़क से जुड़ चुके हैं। हम माननीय अटल बिहारी जी वाजपेयी का हृदय से स्‍वागत करते हैं और बहुत बहुत धन्‍यवाद देते हैं।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, परिवर्तन यात्रा के माध्‍यम से हमारी माननीय मुख्‍य मंत्री महोदया ने पूरे प्रदेश का एक गहन सर्वे करवाया था, उन्‍होंने स्‍वयं सर्वे किया था कि हमारे प्रदेश में ऐसी कौन कौन सी समस्‍याएं हैं, चाहे वह सड़क की हो, बिजली की जो, पेयजल की हो, सिंचाई की हो या अन्‍यान्‍य, उन सब समस्‍याओं का उन्‍होंने गहन अध्‍ययन किया और एक सपना उन्‍होंने हमारे प्रदेश को उन्‍नति के शिखर पर ले जाने का दोखा। आज उसी सपने को साकार करने में हमारी मुख्‍य मंत्री महोदया और उनका मंत्रिमण्‍डल निरन्‍तर लगा हुआ है। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, हमारी पूर्ववर्ती सरकार ने कितनी ही बार ऐसे स्‍टेटमेंट दिये थे कि हमारा खजाना खाली है, हम प्रदेश का विकास कैसे करें। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं कहना चाहूंगा कि जो भी सरकार अपना कार्यकाल पूरा करने को जा रही होती है, अपने खजाने में जो कुछ होता है, विकास में खर्च करना चाहती है। जब हमने सत्‍ता संभाली उस समय भी कोई खजाना भरा हुआ नहीं था लेकिन हमने एक दिन भी यह नहीं कहा कि हमारा खजाना खाली है और कैसे कहते क्‍योंकि यह मारे प्रदेश की गरिमा से संबंधित था, हमारे प्रदेश के लिए हमारे शेष देश में अच्‍छा मैसेज नहीं जाता और माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, खजाना खाली हो या भरा हो, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, कार्य करने वाले की इच्‍छा शक्ति मजबूत होनी चाहिए, उसका उद्देश्‍य पवित्र होना चाहिए तो खजाना तो भर लिया जाता है, वित्‍तीय संसाधन उत्‍पन्‍न कर लिये जाते हैं और ऐसी दृढ़ इच्‍छा शक्ति हमारे मुख्‍य मंत्री महोदया ने दृढ़ इच्‍छा शक्ति का प्रदर्शन करते हुए प्रदेश को बहबूदी कायम रखने के लिए उसकी बहबूदी को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में निरन्‍तर वह कार्य कर रही हैं।

 

सुरेन्‍द्र/अरुण/21.3.2007/15.50/2o/1

 

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं अपने क्षेत्र से सम्‍बन्धित सड़क और पुलिया की कुछ मांगें माननीय सार्वजनिक निर्माण मंत्री महोदय के समक्ष प्रस्‍तुत करना चाहूंगा। सर्वप्रथम तो मैं आपका आभार प्रकट करना चाहूंगा कि मेरे क्षेत्र में सूलिया चौकी से सुनेल तक 60 मीटर की रोड चौड़ा करने का काम आपने किया। इसके लिए मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं। साथ ही सुनेल से पिड़ावा जो लगभग 25 किलोमीटर की रोड है उसकी स्‍वीकृति भी आपने 60 मीटर की रोड बनाने की जारी कर दी इसलिए मैं आपको और मुख्‍य मंत्री महोदया बहुत-बहुत धन्‍यवाद देता हूं और आभार प्रकट करता हूं कि जो वर्षों से हमारी मांग चली आ रही थी उस मांग को पूरा करने में हमें सहयोग प्रदान किया। शेष रही मात्र 8 किलोमीटर पिड़ावा से एम.पी. सीमा तक की रोड को और चौड़ा कर दिया जाए तो मैं सोचता हूं कि एम.पी. में आने जाने के हमारे आवागमन के साधन और वहां की रिश्‍तेदारियां निभाने के लिए हमें काफी सहयोग मिलेगा। चूंकि मेरा पिड़ावा विधान सभा क्षेत्र एम. पी. सीमा से जुड़ा हुआ है, मेरे विधान सभा क्षेत्र में तीन तरफ एम.प्‍ी. लगा हुआ है। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, एक नीमच जो मध्‍य प्रदेश का कस्‍बा है वहां से लेकर के मेरे क्षेत्र का अंतिम गांव जो मध्‍य प्रदेश की सीमा से लगा हुआ है झालावाड़ा रोड, वहां तक एक मेगा हाइवे का निर्माण हो रहा है और झालावाड़ से आगड़ जाने वाली स्‍टेट हाइवे बनी हुई है, मैं सार्वजनिक निर्माण मंत्री महोदय से अनुरोध करना चाहूंगा कि इस स्‍टेट हाइवे तक उस मेगा हाइवे की स्‍वीकृति प्रदान करें ताकि स्‍टेट हाईवे पर निकलने वाले वाहन और स्‍टेट हाईवे के द्वारा एम.पी. में जाने का साधन सुगम हो सके।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, 1993 से 1998 में हमारी सरकार थी उस समय वर्तमान सार्वजनिक निर्माण मंत्री महोदय चिकित्‍सा मंत्री थे और आपने मेरे क्षेत्र की 5 पी एच सी बिल्डिंग की स्‍वीकृति लगभग 20-20 लाख की की थी। उनमें कुछ काम शेष रह गया था और पूर्ववर्ती सरकार ने जो काम शेष रह गया 5 साल तक, उन पांचों पी एच सी की कोई दशा नहीं संभाली और न उनके ऊपर कोई बजट दिया। अब मैं सार्वजनिक निर्माण मंत्री महोदय से अनुरोध करना चाहूंगा कि थोड़ा-थोड़ा काम उन पी एच सी में शेष है उस काम को पूर्ण करवा लिया जाए और चिकित्‍सा विभाग को उन्‍हें हस्‍तांतरित कर दिया जाए तो जो इतना रुपया हमारी राज्‍य सरकार का उसमें लगा है उसका सदुपयोग हो सके।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, सुनेल कस्‍बा मेरे पिड़ावा विधान सभा क्षेत्र का बहुत बड़ा कस्‍बा है। वहां आहू नदी बसती है और उसके ऊपर एक संकड़ी पुलिया है। उस पुलिया को बने हुए लगभग 30-40 वर्ष हो गये हैं। उसमें एक टाइम में केवल एक ही वाहन गुजर सकता है। दो वाहन गुजरेंगे तो निश्चित रूप से एक वाहन वाले को पीछे लेना पड़ेगा लेकिन कभी-कभी गलतफहमी में, हेकड़ी में वाहन चालक यदि जबरन करते हैं तो काफी संभावना है कि दुर्घटना हो सकती है। इस पुलिया के ऊपर एक बहुत बड़ा हादसा गुजरा है। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, 1978 से 1980 में हमारे क्षेत्र से एक निर्दलीय विधायक श्‍योदानसिंह जी हुआ करते थे और इस पुलिया के संकड़ा होने से उनकी जीप नदी में गिर गई और हमारे क्षेत्र के तत्‍कालीन विधायक महोदय का निधन हो गया। एक-दो बार मोटर साइकिलें इस पुलिया से नदी में गिरीं। एक बार बैलगाड़ी गिरी तथा आये दिन इस तरह की दुर्घटनाएं इस पुलिया के ऊपर होती रहती हैं। मैं सार्वजनिक निर्माण मंत्री महोदय से अनुरोध करूंगा कि इस पुलिया को जनहित में चौड़ा कराया जाना अति आवश्‍यक है।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र में तीन डाक-बंगले हैं जो पूर्व से प्रचलित थे, पिड़ावा, रायपुर और सुनेल। तीनों की जर्जर अवस्‍था है। साथ ही यदि कोई बाहर से वी. आई. पी. आ जाए तो इन तीनों कस्‍बों में उन्‍हें ठहराने के लिए उनके योग्‍य कोई स्‍थान नहीं है। ऐसी दशा में इन तीनों डाक-बंगलों का पुनरुद्धार कर उन्‍हें आवास के लायक बनाया जाए।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, अभी डग क्षेत्र की विधायक माननीया स्‍नेहलता जिस बाई-पास का जिक्र कर रही थीं, मेरे पिड़ावा विधान सभा के सम्‍पूर्ण किसान भवानीमंडी में ही अपनी जिंस बेचने जाते हैं और भवानीमंडी में इतने संकड़े रास्‍ते हैं कि हर घंटे-दो घंटे में भवानीमंडी के रास्‍तों में जाम लग जाता है कि कभी-कभी तो मोटर साइकिल का निकलना तक दूभर हो जाता है। ऐसी स्थिति में जब बाहर का किसान ट्रेक्‍टर ट्रॉली और बैलगाड़ी लेकर के अपनी जिंस बेचने मंडी जाएगा तो अड्डे का समय ही निकल जाएगा, बोली ही खत्‍म हो जाएगी जब तक वो अड्डे में नहीं पहुंच पायेगा। ऐसी हालत में इस बाईपास, रामनगर से पचपाड़ तक जो 4 किलोमीटर की दूरी है, बाईपास का निर्माण होना अति आवश्‍यक है। हमने मुख्‍य मंत्री महोदया से भी इसके बारे में निवेदन किया है, उन्‍होंने हमें आश्‍वस्‍त किया है कि निश्चित रूप से यह बाईपास मैं आपको दूंगी। माननीय सार्वजनिक निर्माण मंत्री महोदय से भी मैं अनुरोध करूंगा कि आप हमारे सहायक बनकर इस रोड को पास कराने में हमारी पूरी-पूरी मदद करें।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री कन्‍हैया लाल पाटीदार (पिड़ावा): एक मिनट और मिसिंग लिंक के बारे में बोल रहा हूं। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरे पिड़ावा में आपका एक सब-डिवीजन है, ए. ईएन. ऑफिस है। ए. ईएन. वहां है लेकिन जे. ईएन. लगभग साल भर से इस सब-डिवीजन  पर नहीं है जिसकी वजह से कितने इस प्रकार के कार्य बाधित होते हैं क्‍योंकि सड़कों का तो आपने एक तरह से जाल बिछाया हुआ है और उनकी देखरेख के लिए हमारे पास कोई ऐसा टेक्‍नीकल व्‍यक्ति जो हर साइट पर जा सके, उपलब्‍ध नहीं है। कृपया एक जे. ईएन. हमें दें।

  दूसरा, मैं अपने क्षेत्र की कुछ मिसिंग लिंक्‍स के बारे में आपसे निवेदन करना चाहूंगा....

श्री उपाध्‍यक्ष: वो आप लिखकर के दे देना माननीय सदस्‍य।

श्री कन्‍हैया लाल पाटीदार (पिड़ावा): मात्र दो मिनट। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, डग विधान सभा क्षेत्र की विधायक माननीया स्‍नेहलता जी मेरे पास विराजमान हैं। इनके क्षेत्र के 4 गांव हैं हरिपुरा, लखाड़ी, सादडि़या और काली तलाई, इन चारों गांवों के ग्रामवासियों के लिए पिड़ावा विधान सभा क्षेत्र के गांव सिरपोई में इनकी चिकित्‍सा सुविधा है, इनका बस स्‍टैण्‍ड सिरपोई में है, इनका नजदीकी सीनियर हायर सैकण्‍डरी स्‍कूल सिरपोई में है और ये बाजार भी सिरपोई में आकर करते हैं। तो मेरा सार्वजनिक निर्माण मंत्री महोदय से निवेदन है कि मात्र 2 किलोमीटर की एक मिसिंग लिंक और आहू नदी पर रपट की स्‍वीकृति दे दी जाए तो इन 4 गांवों के ग्रामवासियों को हर प्रकार की सुविधाएं उपलब्‍ध हो सकती हैं। मैं निश्चित रूप से आपका आभारी रहूंगा यदि इस रोड और पुलिया की हमें स्‍वीकृति दे दी जाती है।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मिसिंग लिंक में सामरिया से सिरपोई, धारोनिया से सरोनिया, गोविंदपुरा से आवर, ओसाव से हिम्‍मतगढ़, दूगलिया से गुराडि़या और ओसाव से ओरियाखेड़ी, ये मिसिंग लिंक हमारे क्षेत्र में बनने अति आवश्‍यक है। 2-3 रोड रिपेयर के हैं उनके बारे में आपसे अनुरोध करना चाहूंगा कि सुनेल से पाटन रोड जो काफी वर्षों पहले बना था और आधा रोड माननीय मुख्‍य मंत्री महोदया के क्षेत्र में आता है और आधा रोड मेरे विधान सभा क्षेत्र में आता है तो आधी रोड का काम तो प्रारम्‍भ हो चुका है इसलिए मैं सार्वजनिक निर्माण मंत्री महोदय से अनुरोध करना चाहूंगा कि पिड़ावा विधान सभा क्षेत्र में जो सुनेल से पाटन रोड जाता है उसका भी पुनरुद्धार करावें। साथ ही पिड़ावा से ढाबलाभोज और पिड़ावा से पटपड़ा जो एम. पी. जाने का रास्‍ता है, इन दोनों रोड की भी रिपेयर करायें। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, पिड़ावा से पटपड़ा तक, पटपड़ा एम. पी. का है पिड़ावा हमारा है, इसको रिपेयर करवाना है, रोड तो बना हुआ है। इसके अलावा पिड़ावा से ढाबलाभोज, ये हमारे क्षेत्र के रोड हैं लेकिन गड्ढे पड़ गये हैं। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपने जो बोलने का समय दिया उसके लिए मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं। धन्‍यवाद।

vkj/akt/21032007/1600/2p

 

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री हेमराज मीणा।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मांग संख्‍या 30, 19 व 21 पर अपने विचार सम्मिलित करते हुए मैं कुछ निवेदन करना चाहूंगा। उपाध्‍यक्ष महोदय, अभी सराड़ा से आने वाले माननीय सदस्‍य ने बहुत सारी बातें यहां सरकार के लिए कही। मैं उनको कुछ बातें बताना चाहता हूं।

उपाध्‍यक्ष महोदय, 1998 से 2003 तक इनकी सरकार थी। 326.68 करोड़ रुपये का बजट एलोकेशन हुआ, यह केवल इनके पाँच साल में हुआ बजट एलोकेशन और हमारे समय में बजट एलोकेशन हुआ, तीन साल में 348.38 करोड़ रुपये का बजट एलोकेशन हुआ। ये कहना चाहते हैं कि बजट एलोकेशन कम है। मैं फिर कहना चाहूंगा उपाध्‍यक्ष महोदय, दोनों सरकारों के मुकाबले 70.77 प्रतिशत बजट हमने ज्‍यादा ट्राइबल एरिया में खर्च किया है। इन्‍होंने एक साल में 69.59 करोड़ रुपये खर्च किये, हमने एक वर्ष में 119.33 करोड़ खर्च किये और आवंटन किये। गत सरकार के मुकाबले में 71.48 प्रतिशत धनराशि ज्‍यादा आवंटित हमारी सरकार ने की है। सभापति महोदय,...

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): आपकी सरकार कहां है?

श्रीमती प्रतिभा सिंह (नवलगढ़): यह निर्दलीयों की सरकार है क्‍या? यह आप कैसे कह सकते हैं कि यह आपकी सरकार है? आप तो निर्दलीय हो। यह निर्दलीयों की सरकार है क्‍या?

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): यह डबल रोल चलने वाला नहीं है। या तो साफ कहो कि इनके साथ हो। अपने आपको निर्दलीय बताते हो और तारीफें इधर-उधर करते हो।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): यह राम और श्‍याम है।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): मैं आपसे डिस्‍टर्ब नहीं हो रहा हूं हरिमोहन जी। सभापति महोदय, मैं महत्‍वपूर्ण बात बताना चाहूंगा...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): उन्‍होंने टिकट तक नहीं दिया। आपको बाहर फेंक दिया था, फिर भी चमचागीरी।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): ...महाराष्‍ट्र पैटर्न कांग्रेस के जमाने में लागू हुई और तीन साल तक बजट एलोकेशन कांग्रेस के जमाने में इन लोगों ने किया। कांग्रेस के राज में आप लोगों ने एलोकेशन, जो सराड़ा से आने वाले माननीय सदस्‍य हैं, इनकी सरकार ने...

(           )

(श्री राव राजेन्‍द्र सिंह, सभापति, पदासीन)

...महाराष्‍ट्र पैटर्न में 44.65 करोड़ रुपये आवंटन किये तीन सालों में, जब ये मंत्री थे, खेल-कूद मंत्री थे, ये नहीं कर पाये अपने इलाके के लिए। सभापति महोदय, मैं आपको कहना चाहूंगा कि तीन वर्षों में हमारी सरकार ने 184.03 करोड़ रुपये का बजट आवंटन किया। यह स्‍टेट प्‍लान से किया और गत वर्ष के मुकाबले 412.16 प्रतिशत बजट हमने ज्‍यादा आवंटन किया। आपको वह भी बताऊंगा कि भौतिक उपलब्धियां हमारी क्‍या रही हैं, आप चिंता मत करिये। प्रतिवर्ष व्‍यय की स्थिति, आपने 47.41 करोड रुपये किये आपके पाँच सालों में और हमारे तीन सालों में 96.89 करोड़ रुपये खर्च किये और आवंटन किये।

सभापति महोदय, अब माननीय सदस्‍य ने यहां यह भी बात कही है कि बजट आवंटन तो हो गया परन्‍तु भौतिक लक्ष्‍यों की प्राप्ति नहीं हुई। सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय सदस्‍य को कहना चाहूंगा कि उन्‍नत खाद के प्रदर्शन में लाभान्वित व्‍यक्तियों, सभापति महोदय, एक-एक स्‍कीम का बताऊंगा, आपके 1998 से 2003 तक 3107 व्‍यक्तियों को आपने लाभान्वित किया, हमने तीन साल में 6434 व्‍यक्तियों को लाभान्वित किया।

स्‍टोरेज बीज वितरण में आपने 1520 व्‍यक्तियों को लाभान्वित किया, हमने 6630 व्‍यक्तियों को लाभान्वित किया। उद्यानिकी के कार्यक्रम में 17331 व्‍यक्तियों को आपने लाभान्वित किया आपके पाँच सालों में और हमारे तीन सालों में 19162 व्‍यक्तियों को हमने लाभान्वित किया।

सभापति महोदय, यह तीन सालों में हमने इतना काम कर दिया, जो कांग्रेस पिछले पाँच सालों में भी नहीं कर पाई और न 40 वर्षों में कर पाई। वह भी मैं आपके सामने रखना चाहूंगा। बस्‍ती के विद्युतीकरण के लिए आपके समय में जितना इलेक्ट्रिफिकेशन हुआ, उसमें केवल 190 बस्तियां पिछले पाँच सालों में आपने कीं, हमने तीन सालों में 204 बस्तियां इलेक्ट्रिफाइड कीं। डीज़ल पम्‍पसैट में 3253 व्‍यक्तियों को आपने लाभ दिया। इसी तरह से छात्रगृह किराया योजना में हमारे यहां 20964 छात्रों को लाभ मिला। छात्राओं को उच्‍च शिक्षा में छात्रवृत्ति के लिए 8780 छात्राओं को लाभ मिला और हमारे समय में यानी इन तीन सालों की मैं बता रहा हूं आपको कि 8931 छात्राओं को लाभ मिला और सबमें आपसे अधिक है।

प्रथम श्रेणी उत्‍तीर्ण बोर्ड एवं विश्‍वविद्यालय छात्रों को प्रोत्‍साहन, इस योजना में 6147 छात्रों को आपके टाइम में लाभ मिला गत 1998 से 2003 तक और 2003 से 2006 तक 5923 छात्रों को लाभ मिला।

स्‍वरोजगार योजना में लाभान्वित होने वाले 6224 व्‍यक्तियों को आपके पाँच साल में लाभ मिला, हमारे तीन साल में 10915 व्‍यक्तियों को लाभ मिला। सम्‍पर्क सड़क के माध्‍यम से आपने केवल 21 सड़कें बनाई और तीन सालों में ट्राइबल क्षेत्र में 115 सम्‍पर्क सड़कें हमारी सरकार ने बनाई।

छात्राओं को मुफ्त साइकिल वितरण करने की योजना आपकी सरकार ने बनाई थी। हमने 18837 छात्राओं को साइकिल वितरण की। हम ट्राइबल के बजट से सड़कें बनाते हैं हिण्‍डौली से आने वाले माननीय सदस्‍य, हम ट्राइबल से साइकिल भी देते हैं और सड़क भी बनाते हैं, डीजल पम्‍पसैट भी देते हैं, इलेक्ट्रिक पम्‍प भी देते हैं। छात्राओं को मुफ्त स्‍कूटी का वितरण योजना में 12 छात्राओं को हमने स्‍कूटी का‍वितरण किया।

सभापति महोदय, मैं आपको यह निवेदन करना चाहूंगा, ट्राइबल के क्षेत्र में हमारी सरकार ने पिछले तीन वर्षों में आशातीत प्रगति की है और हमने भौतिक लक्ष्‍यों की भी प्राप्ति की है। माननीय सदस्‍य यह कह रहे हैं कि आपका बजट एलोकेशन खर्च कम हुआ। 2003-2004 में बजट एलोकेशन खर्च हुआ हमारा 100 प्रतिशत, 2004-2005 में 100 प्रतिशत और 2005-2006 में 57 प्रतिशत और 2006-2007 में 50 प्रतिशत।

यह मैं बताना चाहूंगा आपको और यह बात भी मैं क्लियर करना चाहूंगा सभापति महोदय, जिस समय हमारी सरकार थी, उस समय जो आपका बजट आवंटन हुआ था तो उस समय ट्राइबल की किस्‍त समय पर आती थी। अभी हमारे सामने समस्‍या यह है कि केन्‍द्र सरकार से बजट एलोकेशन आता है, वह दिसम्‍बर के महीने में आता है और खर्च करना होता है, मार्च-अप्रैल के महीने तक हिसाब देना पड़ता है तो यह सबसे बड़ी दुविधा हमारी सरकार के सामने है और हमारे मंत्रीजी के सामने भी है। यदि यह बजट एलोकेशन प्रारम्‍भ में हमें मिल जाये तो पूरे वर्ष भर में हम 100 प्रतिशत भौतिक उपलब्धि इसकी प्राप्‍त कर सकते हैं।

माननीय सभापति महोदय, मैं एक निवेदन और करना चाहूंगा कि महाराष्‍ट्र पैटर्न पर हमको 44.65 करोड़ रुपये दिये और हमने 184 करोड़ रुपये दिये जो 112.6 प्रतिशत आपसे अधिक है। यह स्‍टेट प्‍लान का पैसा है और मैं यह कहना चाहूंगा कि महाराष्‍ट्र पैटर्न को वैसे तो जो एडोप्‍ट किया है आपने, वह एडोप्‍ट करने के बाद सब विभागों का आठ प्रतिशत ट्राइबल एरिया को मिलना चाहिए और ट्राइबल एरिया के माध्‍यम से खर्च होना चाहिए लेकिन अभी मैं माननीय मंत्री महोदय को कहना चाहूंगा और माननीय मुख्‍य मंत्रीजी के ध्‍यान में भी यह बात डालना चाहूंगा कि अभी हमको बजट मिल तो 184 करोड़ रुपये रहा है लेकिन अभी भी वह कम है। यह बजट और हमारा बढ़ना चाहिए। आठ प्रतिशत महाराष्‍ट्र प्रणाली के अन्‍तर्गत ट्राइबल एरिया पर खर्च हो ताकि ट्राइबल का पूर्ण रूप से डवलपमेंट हो सके।

सभापति महोदय, उपयोजना क्षेत्र में कितने काम किये हैं। सरकारी नौकरियों के लिए उपयोजना क्षेत्र और सहरिया क्षेत्र के लिए

 

Jkj/akt/16.10/2q/21.3.2007

 

एक से नौ तक की जो सर्विस है उनमें 45 प्रतिशत हमारा आरक्षण किया है और राज्‍य सेवा तक की सब सर्विसेज को हम ले रहे हैं, सहरिया क्षेत्र में 25 प्रतिशत किया है, एक से नौ से ऊपर की जितनी भी राज्‍य सेवा के अन्‍तर्गत है....

श्री रघुवीर सिंह मीणा: एक से नौ इन्‍होंने किया? उन्‍होंने किया? (व्‍यवधान)

श्री हेमराज मीणा: एक से नौ से ऊपर किया हमने। एक से नौ तक के ऊपर भी राज्‍य सेवा के अलावा जितनी भी सर्विसेज हैं उनमें हमने ट्राइबल क्षेत्र में, उप योजना क्षेत्र में 45 प्रतिशत किया, सहरिया क्षेत्र में 25 प्रतिशत करने का प्रावधान रखा, उसको हम पूरा करेंगे और मैं बधाई देना चाहूंगा मुख्‍य मंत्रीजी को, आपकी बोलती बंद करी है। तीन साल से आप बार-बार उचक-उचक करते थे कि बेकलाग पूरा करो, बेकलाग पूरा करो, बेकलाग पूरा करो, मैं बधाई देना चाहता हूं मुख्‍य मंत्रीजी को कि जिन्‍होंने बजट में 2008 तक पूरा, 2008 तक जितना बेकलाग है उसको शून्‍य कर दिया जायेगा, हमारे पूरे समय में, साल के अंत तक, यह मुख्‍य मंत्रीजी ने अनाउंस किया। लेकिन इसमें मैं एक सुझाव देना चाहूंगा। मेरा सुझाव यह था बेकलाग वाले मामले में सभापति महोदय, आपके माध्‍यम से, कि बेकलाग हमारा लगभग चालीस हजार है, यह बेकलाग भरने में सरकार की मंशा ठीक है, हमारी सरकार करना चाहती है, मुख्‍य मंत्रीजी की भी मंशा है, मंत्री मण्‍डल भी चाहता है कि बेकलाग पूरा हो, लेकिन कुछ सरकारी अधिकारी इसमें रोड़ा, अडंगा बने हुए हैं। मैं, सभापति महोदय, आपके माध्‍यम से यह बात कहना चाहता हूं...(व्‍यवधान) आप बिराजिये।

श्री हरिमोहन शर्मा: आपके कहने का मतलब यह है सरकारी अधिकारियों के सामने मुख्‍य मंत्रीजी की नहीं चलती है? 

श्री हेमराज मीणा: आप विराजिये, मैं सुझाव दे रहा हूं।

श्री हरिमोहन शर्मा: कैसा राज कर रहे हैं, मुख्‍य मंत्रीजी की सरकारी अधिकारियों के सामने नहीं चले, इससे ज्‍यादा शर्मनाक बात क्‍या हो सकती है।

श्री हेमराज मीणा: आप विराजिये। यह इतना बड़ा लवाजमा है, इस लवाजमे में सब तरह के लोग मौजूद हैं। हिण्‍डौली से आने वाले माननीय सदस्‍य, मैं इस बात को यों कहना चाहूंगा कि जो यह बेकलाग पूरा करने का जो अनाउंस किया है, यह जल्‍दी हो, इसके लिए रिव्‍यू कमेटी बनाई जानी चाहिए। इस रिव्‍यू कमेटी में या यों कहना चाहिए कि इसकी कोई ऐसी व्‍यवस्‍था हो जिसमें पाँच-सात सदस्‍य कोई अधिकारियों की कमेटी बने और बेकलाग कमेटी हो, उसमें एक एसटी का प्रतिनिधि, एक एससी, एक ओबीसी का और दो सामान्‍य वर्ग के अधिकारी हों ताकि वह बैठ करके सब डिपार्टमेंट को रिव्‍यू करें ताकि उसका लाभ आम जो अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग का व्‍यक्ति है उसको, सभापति महोदय, यह लाभ मिले तो निश्चित रूप से राज्‍य में और अच्‍छा मैसेज जायेगा और इसका बहुत बड़ा लाभ गरीब तबके को होगा क्‍योंकि यह बहुत, इनका राज रहा, चालीस-पैंतालीस साल तक राज रहा, यह भी बेकलाग की मांग करते रहे इनके राज में, इनके एमएलए भी मांग करते रहे, हमने भी तीन साल से मांग की लेकिन मुख्‍य मंत्रीजी ने, सरकार ने हमारी बात को सुना और 2008 तक पूरा करने का जो निर्णय किया है, यह बहुत बड़ा स्‍वागत करने योग्‍य सरकार का है, मैं इसके लिए बहुत-बहुत बधाई देना चाहूंगा।  सभापति महोदय, यह धन्‍यवाद नहीं देंगे, यह धन्‍यवाद नहीं देना चाहते। (व्‍यवधान) नहीं, मैंने चुपचाप बात की थी....

श्री रघुवीर सिंह मीणा: आप बोलते तो धन्‍यवाद देता। यह बीच के आदमी हैं। जबरदस्‍ती में मक्‍खन लगा रहे हैं। (व्‍यवधान)

श्री हेमराज मीणा: सभापति महोदय, वैसे सराड़ा से आने वाले माननीय सदस्‍य की मैं पोल खोलना चाहता हूं एक। पोल खोल देता हूं। अभी इनके बोलने के बाद यह मेरे पास आये, मैंने इनसे कहा, आप मेरे पड़ोसी हो, सबके सामने तो मत बोलो लेकिन चुपचाप तो मेरी बात मान लो कि भाई आपकी बात मैंने पूरी मान ली, लेकिन यह कहना मेरी मजबूरी है, सरकार की आलोचना करना मेरी मजबूरी है। यह माननीय सदस्‍य कह रहे थे। इसलिए मन से तो यह इस बात को मान रहे हैं कि ट्राइबल के एरिया में जितना बजट दिया है उतना बजट पिछली सरकारों में, चालीस साल, पैंतालीस साल में इतना बजट कभी नहीं आया।  लेकिन उसके बाद भी कुछ कमियां हैं उनको हम सब मिल करके दूर करेंगे। सभापति महोदय, एक हमने नई शिक्षा की योजना शुरू की है, सहरिया....

श्री सभापति: चौदह मिनट हो गये आपको। Start concluding it. Come to the point now.

श्री हेमराज मीणा: सभापति महोदय, बहुत लम्‍बी-चौड़ी रामायण है और मैं उसी तबके का हूं, इस तबके को सरकार कुछ कर रही है, कुछ अपनी बात कहने दीजिये, सभापति महोदय, टाइम बढ़ा दीजिये मेरा।

श्री सभापति: जो आपका प्रिफेस है वह ज्‍यादा आपने कह दिया, आप अपने सब्‍जेक्‍ट मैटर पर आ जाओ।

श्री रघुवीर सिंह मीणा: जो सत्‍य बात कहे उसको तो बोलने दें, आप यों ही बोलने लगेंगे तो कौन बोलने देगा।

श्री हेमराज मीणा: सभापति महोदय, सहरिया और केथोड़ी जनजाति क्षेत्र में 135 मां बाड़ी केन्‍द्र खोले हैं। सभापति महोदय, कम से कम 4500 विद्यार्थियों को रेगुलर उसका लाभ मिला है और उससे शिक्षा के काम में हमने बहुत बढ़ोत्‍तरी की है। हम आगे बढ़ते जा रहे हैं उसमें। आवासी विद्यालय हमने खोले, आश्रम छात्रावास हमने खोले, स्‍वास्‍थ्‍य उप केन्‍द्र के लिए हमने एएनएम की भर्ती भी ट्राइबल के माध्‍यम से की। मैं बधाई देना चाहता हूं, आदिवासियों का बेणेश्‍वर बहुत बड़ा धाम है जिसके प्रति आम आदिवासी की बहुत श्रध्‍दा है, सरकार ने उसके लिए चार करोड़ रूपये का बजट का प्रावधान किया। सभापति महोदय, हर प्रकार से हमने प्रगति की है। अब मैं, सभापति महोदय, इधर विपक्ष के सब लोगों को कुछ सहरिया क्षेत्र की और ले जाना चाहूंगा। सहरिया क्षेत्र में 2003 में 22 लोग भूख से मारे गये थे।  सभापति महोदय, 22 लोग भूख से मारे गये थे और सारे मीडिया ने, सब ने इस बात को लिखा था, इलेक्‍ट्रानिक मीडिया को मैं धन्‍यवाद देना चाहता हूं जिन्‍होंने इस बात को जोर से उठाया और हमारी मुख्‍य मंत्रीजी ने भी उस समय प्रदेशाध्‍यक्ष थीं, उन्‍होंने भी इस बात को उठाया। जब उनको ऐसा लगा कि कांग्रेस राज कर रही है पैंतालीस साल, बयालीस साल से लेकिन आज दिन तक इन सहरियाओं के लिए कुछ नहीं कर पाई, मुख्‍य मंत्रीजी ने सबसे पहले बजट में पहले एलोकेशन में निर्णय किया कि सारे बीस हजार परिवार जो आदिवासियों के हैं उनको एक आदेश में बीपीएल में सम्मिलित करके बीस हजार परिवारों को दो रूपये किलो गेहूं अंत्‍योदय योजना में शामिल करके दिया और बीपीएल की सुविधाएं उनको मुहैया करवाई। सौ दिन का रोजगार उन आदिवासियों को दिया और रोजगार के लिए वन जनशक्ति क्‍लोजर के रूप में बनाये, आज सौ परिवारों के लिए सौ क्‍लोजर वन जनशक्ति के नाम से बनाये। सभापति महोदय, न रोजगार की कमी रही, न खाने की कमी रही और न शिक्षा की कमी रही। यह पूरा प्रयत्‍न पैंतालीस साल के बाद नहीं कर पाये, हमने तीन साल में किया, हमारी सरकार ने किया, माननीय मुख्‍य मंत्रीजी ने किया। वह इसलिए किया कि माननीय मुख्‍य मंत्रीजी स्‍वयं उस इलाके से पार्लियामेंट की मेम्‍बर रही हैं पिछले चार-पाँच बार लगातार, इसलिए उनको यह सब बातें ध्‍यान में थीं इसलिए उन्‍होंने यह किया। सभापति महोदय, डीपीईपी के द्वारा चालीस हजार आवास बनाये, कई आदिवासियों को हमने आवास बनाकर दिये। उन्‍होंने मजदूरी की, सरकार ने पैसा दिया, मजदूरी का भी पैसा दिया, मेटेरियल कम्‍पोनेंट का भी पैसा दिया। सभापति महोदय, कुछ बातें मैं आपके माध्‍यम से मंत्रीजी से निवेदन करना चाहूंगा। कुछ बातें हैं, ज्‍यादा नहीं हैं। सभापति महोदय, छात्रावास संचालन का काम चल रहा है, छात्रावासों के संचालन के काम में हमको बहुत बड़ी तकलीफ हो रही है क्‍योंकि जनजाति विभाग को बजट तो सरकार दे रही है लेकिन बजट देने के बाद में अपाइंटमेंट करने की अथारिटी ट्राइबल डिपार्टमेंट के हाथ में नहीं है। पैसा तो दे रहे हैं लेकिन अपाइंटमेंट करने की अथारिटी हमारे पास नहीं है। आज कई सारे छात्रावास ऐसे हैं सभापति महोदय, उन छात्रावासों में जगह खाली पड़ी हुई हैं क्‍योंकि हमारे पास एजुकेशन से अध्‍यापक आते हैं डेपुटेशन पर, उन डेपुटेशन वालों को हम वार्डन का काम देते हैं। आज अगर जनजाति विभाग का एक कैडर बने, छात्रावास भर्ती करने का अधिकार मिले, रेजिडेंशियल होस्‍टल में अधिकारी-कर्मचारी लगाने का कैडर बने तो निश्चित रूप से हमको लाभ होगा और हमारे होस्‍टल में जो छोटी-मोटी कमियां रहती हैं वह दूर हो सकेंगी। तो मैं आपके माध्‍यम से मंत्रीजी से कहूंगा, माननीय मुख्‍य मंत्रीजी भी कहीं न कहीं बैठी होंगी जो सुन रही होंगी, कि ट्राइबल डवलपमेंट के लिए यह भी आवश्‍यक है कि एक हमारा कैडर बन जाय, होस्‍टल वार्डन की भर्ती हो, रसोइयों की भर्ती हो, सब टेम्‍परेरी लोग चलरहे हैं, बेचारे इतने कम पैसे में काम कर रहे हैं तो वह भी तनख्‍वाह, रसोइयों की, चौकीदारों की, उनकी भी तनख्‍वाह बढ़ाई जानी चाहिए। सभापति महोदय, इतना ही नहीं, पैसा दे रहे हैं हम रेजिडेंशियल होस्‍टल के लिए, स्‍कूल भी उसमें चलता है और रहने की व्‍यवस्‍था भी है, लेकिन हमारे साथ समस्‍या यह आ गई, हमको टीचर मिलेगा एजुकेशन से मिलेगा, हमको वार्डन मिलेगा एजुकेशन से मिलेगा। तो मैं कहना चाहता हूं कि इसके कारण से हमको बहुत बाधा आ रही है। क्‍योंकि अभी एजुकेशन में इतनी भर्ती होने के बाद भी उनकी भी जगह पूरी नहीं हो पा रही है तो आज मैं समझता हूं कि यह एक अलग से कैडर बनाने का प्रावधान किया जाना चाहिए सरकार की और से ताकि इनको लाभ हो सके।  सभापति महोदय, एक तकलीफ और है।  हमारे जितना बजट एलोकेशन आता है, हम बजट ट्रांसफर करते हैं पंचायत समितियों में, बजट ट्रांसफर करते हैं इर्रिगेशन में, पीडब्‍लूडी में,, सरकारी विभागों में।  सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से यह कहना चाहता हूं मंत्रीजी से कि हमारे यहां तकनीकी अधिकारियों के अभाव में हम कोई काम खुद नहीं कर पाते हैं।  आज सारा पैसा हमको डिपार्टमेंट को देना पड़ता है।  डिपार्टमेंट को देने की वजह से हमको, सभापति महोदय, बहुत तकलीफ का सामना करना पड़ता है कि वह डिपार्टमेंट वाले अपना काम तो फर्स्‍ट प्रायोरिटी पर करेंगे, परंतु वह हमारा काम सेकण्‍ड प्रायोरिटी पर करेंगे। आज जो एलोकेशन बताया था, चर्चा की थी, उसमें साठ प्रतिशत पैसा खर्च होना बताया है जो हमारा बजट एलोकेशन है, यदि यूसीसी हमारे पास और आ जाती, पैसा हमारा जा चुका तो हमारे बजट का व्‍यय अस्‍सी प्रतिशत पर जाकर बैठेगा सभापति महोदय। मैं कहना चाहूंगा कि जनजाति विभाग में तकनीकी अधिकारियों को हम भर्ती करें, भर्ती करके या डेपुटेशन पर लेकर के उनके माध्‍यम से यह विकास की योजनाएं संचालित हों।

 

Lpm/akt/1620/3a/2132007

 

तो निश्चित रूप से जनजाति क्षेत्र में उसका विकास भी हो जाएगा। वहां के सामान्‍य व्‍यक्ति को भी इसका लाभ मिलेगा। सभापति महोदय, एक निवेदन और...

श्री सभापति: अब आप कन्‍क्‍लूड करो।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): स्‍वच्‍छ परियोजना, अभी मेरी साहब पी डब्‍लू डी तो बाकी है...

श्री सभापति: It has already been 20 minutes.

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): स्‍वच्‍छ परियोजना टी ए डी की एक संस्‍था है, कमिश्‍नर साहब उसके चैयरमेन है...

श्री सभापति: Two more minutes. I give you two more minutes and then I will call the next name.

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): सभापति महोदय, बस दो मिनट यह टी डी वाली बात है अब दो मिनट में करता हूं। यह सोशल डिपार्टमेंट जो है कमिश्नर हमारे जो बैठते हैं उदयपुर में, उदयपुर में बैठकर के सारी संस्‍था का संचालन करते हैं। अब मैं चाहता हूं कि कोटा वाला कमिश्‍नर को जो चार्ज दिया है उनको भी यह अधिकार दिया जाए कि वह सारा संचालन करे। इसमें भर्ती प्रक्रिया होती ही, ऊपर से अपाइन्‍टमेंट हो जाते है जिसका पता नहीं है, इसको प्रक्रिया में लाने के लिए सहरिया परियोजना बनी हुई है बारां जिले में कलक्‍टर उसका अध्‍यक्ष है, उनको अधिकार दिया जाए ताकि वह अपनी भर्ती कर सके और सही लोगों को रोजगार मिल सके। सभापति महोदय, यह बहुत आवश्‍यक है अब मैं यह कहना चाहूंगा सभापति महोदय कुछ आपको रोड़ के बारे में मेरी मांग संख्‍या 19 और 21 के बारे में और थोड़ा सा निवेदन करूंगा, पाँच दस मिनट में अपनी बात खत्‍म करूंगा, सभापति महोदय, पाँच मिनट में कर दूंगा....

श्री सभापति: One more minute.

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): वैसे सार्वजनिक निर्माण मंत्री जी ने जितना राजस्‍थान में पी डब्‍लू डी के क्षेत्र में काम किया है वह बहुत बड़ी उपलब्धि है, हर क्षेत्र में उन्‍होंने किया है...

श्री सभापति: आप लिखकर के दे देना. He is not even present here.

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): लेकिन मैं कहना चाहूंगा कि प्रधानमंत्री सड़क योजना में किया, डी ओ टी का भी एक अच्‍छा आइडिया उन्‍होंने बनाया, मिसलिंग भी अब लेने वाले हैं, कई सारी बातें उन्‍होंने अच्‍छी ली है। उसका लाभ मेरी कनस्टिट्युअन्सि को सबसे ज्‍यादा मिला है। मैं एक निवेदन करना चाहता हूं लेकिन मुझे एक तकलीफ भी है, मुझे तकलीफ है ट्राईबल का एरिया है, उप योजना क्षेत्र है उसको तो भारत सरकार ने सड़क निर्माण में ढ़ाई सौ की आबादी के अंतर्गत ले लिया लेकिन सहरिया क्षेत्र को छोड़ दिया। मैं आपके माध्‍यम से मंत्री जी को कहूंगा, मुख्‍यमंत्री जी को भी कहूंगा कि ट्राईबल एरिया का अगर ढ़ाई सौ की आबादी तक के गावों को सम्मिलित किया सड़क निर्माण करने के लिए तो यह मेरा जो सहरिया क्षेत्र है उसको भी ट्राईबल में माना जाता है   स्‍पेशल सेन्‍ट्रल गवर्नमेंट (व्‍यवधान) वहां आती है तो उसको भी सम्मिलित किया जाना चाहिए।

सभापति महोदय, आपके माध्‍यम से मैं चाहूंगा  कि सरकार भी प्रस्‍ताव भेजे और इधर बैठने वाले लोगों को भी कहूंगा कि जरा सहरिया पर भी कृपा करे ताकि कुछ काम हो सके।  सभापति महोदय, दो तीन रोड़ों के बारे में सुझाव बजरंग गढ़ से किशनगंज रोड़ तो बन चुका सभापति महोदय लेकिन रोड़ की इतनी हालत खराब है कि इसको दुबारा भी रिपेयर करना पड़ेगा तो मैं चाहूंगा कि मंत्री जी इसमें कुछ पैसा देवे। सभापति महोदय, जलवाड़ा से बराणा रोड तो बन गया लेकिन पार्वती का पुल नहीं बना इसके कारण बरसात में रास्‍ता बंद हो जाता है तो पार्वती पुल का निर्माण हो ताकि जलवाडा से बराणा रोड ठीक प्रकार से चले। सभापति महोदय, रामगढ़ से मांगरोल रोड अभी बनाया इन्‍होंने, कौन से मद से बनाया? मेरे ख्‍याल से वर्ल्‍ड बैंक से या सी आर जी किसी से बनाया होगा लेकिन रोड तो बन गया, रोड बहुत अच्‍छा बना है लेकिन सभापति महोदय, बीच में एक पुलिया है, उस पुलिया के न होने के कारण रास्‍ता पूरे बरसात में बंद रहता है तो मैं कहना चाहूंगा मंत्री जी जो यहां नहीं सुन रहे हैं लेकिन जो भी मंत्री बैठे हैं वो मेरी बात को सुन ले मंत्री जी तक पहुंचा दे ताकि यह एक पुल बन जाए। केलवाडा से खंडेला रोड तो सरकार ने बना दिया लेकिन वहां पर खेडला की एक पुलिया है उसके कारण बरसात में रास्‍ता बंद रहता है, इसी तरह का कस्‍बा तानाशीया आगर, कस्‍बा तानाशीया आगर के बीच में एक नदी है, रोड बने बरस हो गये लेकिन उस नदी के कारण से पूरे बरसात में रास्‍ता बंद रहता है तो सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से कहना चाहूंगा ये जो मेरे कुछ अधूरे काम पड़े हैं वो आपके माध्‍यम से पूरे हो, एक पिनपॉइन्‍ट बात कहना चाहूंगा सभापति महोदय मेरे क्षेत्र में...

श्री सभापति: अब आप धन्‍यवाद दे दे मेरे ख्‍याल से।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): बस दो बातें कहूंगा सभापति महोदय, दो बात कह कर के अपनी बात खत्‍म करूंगा..

श्री सभापति: You have already taken 5 minutes, asking for 2 minutes.

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): सभापति महोदय, मेरे यहां  एन एच 76 रोड  बन रहा है सभापति महोदय, एन एच 76 रोड मेरे यहां बन रहा है उसके लिए बधाई सेंट्रल गवर्नमेंट को भी और स्‍टेट को भी लेकिन वहां पर 2-3 कम्‍पनियां काम कर रही हैं, उन कम्‍पनियों ने क्‍या किया सभापति महोदय, उन्‍होंने जितना काम किया है उनके डम्‍पर और ट्रक चलने की वजह से मेरे कम से 10-12 रोड तो बिलकुल खत्‍म हो गये तो मैं चाहूंगा कि वहां जिला प्रशासन की तो काफी मिलीभगत सी लगती है, जो पी डब्‍ल्‍यू डी के अधिकारी यहां बैठे होंगे, मंत्री जी को कहूंगा यदि अगर हमने एल एन टी और केएमसी को दबाव देकर के यह नहीं कहा कि रोड की वे रिपेयर करे अन्‍यथा करोड़ों रुपए का नुकसान राज्‍य सरकार को भोगना पड़ेगा, उसकी मरम्‍मत राज्‍य सरकार को करनी पड़ेगी तो सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से यह भी कहना चाहूंगा कि इस बात को प्राथमिकता से लिया जाए...

श्री सभापति: चलिए थैक्‍यू वैरी मच, खुशवीरसिंह जी, अब आप कन्‍क्‍लूड कर दे, थैंक्‍यू वैरी मच।

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): सभापति महोदय, मेरी एक छोटी सी बात है एन एच 90 जो बारां से एकलेरा के लिए अनाउंस किया है 

श्री सभापति: There are others who are running out of time. This is like you are being selfish.

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): सभापति महोदय यह रोड एन एच 76 को जोड़ता है, सभापति महोदय, एन एच 76 को जोड़ता है तो यह जो हमारा 96 वाला रोड है एन एच 76 वाला यह एन एच 12 को जोड़ता है तो सभापति महोदय, वह जो टुकड़ा बचा हुआ है मैं चाहूंगा मंत्री जी इस एन एच 96 को चालू करवाये ताकि खड्डे मिटे ताकि लोगों को आसानी हो सके। सभापति महोदय, आपने मुझे बोलने का समय दिया उसके लिए बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

श्री सभापति: थैंक्‍यू वैरी मच, श्री खुशवीर सिंहजी।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): सभापति महोदय, मैं मांग संख्‍या 19 और 21 पर अपने विचार प्रकट कर रहा हूं। सभापति महोदय, किसी भी राष्‍ट्र के विकास की कल्‍पना बिना सड़क यातायात के अधूरी है, समय कम है मैं मेरे कुछ महत्‍वपूर्ण बिन्‍दु है, सुझाव है वह मैं देना चाहूंगा। सभापति महोदय, सबसे महत्‍वपूर्ण बात जो माननीय सभी सदस्‍यों ने अपने वक्‍तव्‍य में बताया सड़क बनना जरूरी है उससे भी ज्‍यादा जरूरी है उसकी गुणवत्‍ता पर ध्‍यान दिया जाए। हो क्‍या रहा है हकीकत में कई माननीय सदस्‍यों ने इसके बारे में जानकारी दी है सदन में, सबसे पहले हम बात करते हैं सभापति महोदय, जो ये पैकेज बनाकर तब से ये रोड का जो कॉन्‍ट्रेक्‍ट दिया जा रहा है उसमें भ्रष्‍टाचार बढ़ रहा है और वह पैकेज बनाकर जिन बड़े ठेकेदारों को सड़क मिलती है वह सबलेट कर लेते हैं, यह सबको मालूम है और उसके साथ-साथ कुछ ठेकेदार पुल बनाकर पूल नहीं, पुल बनाकर जो कॉन्‍ट्रेक्‍ट ले रहे हैं वो भी भ्रष्‍टाचार की ओर अग्रसर हो रहे हैं तथा उसके ऊपर अंकुश लगाना बहुत ही जरूरी है। सभापति महोदय, अगर हम डेनसिटी ऑफ रोड्स हम देखे और राष्‍ट्रीय जो हमारी घनत्‍व क्‍या है सड़को का, उसके अनुपात में अभी हमें बहुत कुछ करना है। हम 50 प्रतिशत भी कम है इस घनत्‍व में सड़को के, इसके साथ में मैं निवेदन करना चाहूंगा सभापति महोदय, जो हमारी कुल राज्‍य में 1 लाख 67 हजार कि.मी. सड़के हैं उनमें से राष्‍ट्रीय राजमार्ग 5655 और राज्‍यीय राजमार्ग जो करीब 11 हजार कि.मी. है उनको हम छोड़ दे तो बाकी सड़कों की देखरेख, बाकी सड़कों का पेचवर्क, बाकी सड़कों की रिपेयरिंग की तरफ सरकार का ध्‍यान कम जा रहा है और जब तक गांव के अंदर सही सड़क, सही आवागमन के साधन सही नहीं होगें तब तक विकास की कल्‍पना करना मंत्री महोदय अधूरी है।

माननीय सभापति महोदय, अगर हम मौटे तौर पर देंखे तो हमारे लगभग 40 हजार के करीब गांव हैं राज्‍य में और उनमें से लगभग 25 हजार गांव सड़कों से जुड़े हैं। यह कह सकते हैं कि हर चौथा गांव अभी जोड़ना बाकी है। सभापति महोदय, मैं माननीय मंत्री महोदय का इस ओर भी ध्‍यान आकर्षित करना चाहूंगा कि इनके विभाग द्वारा जो सड़कें बनाई जा रही हैं उसमें मेरे कुछ सुझाव है, सभापति महोदय, और वह सुझाव है सबसे पहला मंत्री महोदय आप अपने विभाग के साथ-साथ यह जो कृषि उपज मंडी की ये जो आप ले रहे हैं कि हम कृषि उपज मण्‍डी की सड़कें भी हम बनाएंगे, क्‍यों नहीं उनका काम उनको करने दे, अपना काम आप करे, मैं आपका स्थिति बताता हूं कि कृषि उपज मण्‍डी द्वारा मेरे विधान सभा क्षेत्र में जितनी भी सड़कें बनी हैं उनकी देखरेख, उनका मेंटेनेंस, रिपेयरिंग नहीं हो रही है, हम आपको लिखते हैं आप यह लिख देते है कि यह हमारी सड़क नहीं है, यह कृषि विभाग की है, कृषि विभाग को हम लिखते हैं तब यह कहते हैं कि साहब यह बजट नहीं है हमारे पास में तो

Bhs/akt/21.3.07/16.30/3b

 

तो इस चीज का समाधान मंत्री महोदय, आप खुद सक्षम हैं कर सकते हैं। आपने जिस तरह जो प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना को राजस्‍थान में आपको जो पारितोषित किया है और आप सक्षम हैं तो आप इस समस्‍या का भी समाधान करें। उसके साथ सभापति महोदय, इस विभाग के साथ मंत्री महोदय, उद्यान विभाग भी आपसे जुड़ा हुआ है और उसकी ओर पिछले लंबे अर्से से मैं आप ही का नहीं कह रहा हूं, विभाग ने कभी ध्‍यान नहीं दिया। रियासतकाल के जितने भी उद्यान थे और जिस कंडीशन में आपको सौंपे गये अगर आज उन उद्यानों की स्थिति हम देखते हैं तो आप खुद अपने दिल पर हाथ रख कर सोच सकते हैं कि क्‍या स्थिति है उनकी। पिछली बार सभापति महोदय, मैंने मंत्री महोदय को कुछ सुझाव दिये थे इसी से संबंधित जुड़े हुए सुझाव मैं दुबारा देना चाहूंगा। जितनी भी माननीय सभापति महोदय, सड़कों का निर्माण हो रहा है उसके दोनों तरफ आज जटिल समस्या हो गयी है हमारे सामने जूलीफ्लोरा की, अंग्रेजी बबूल की। मंत्री महोदय उस अंग्रेजी बबूल से एक्‍सीडेंट होने का खतरा बन गया और मोड़ पर जितने भी मोड़ हैं उन मोड़ों पर तो बहुत ही आवश्‍यक है उनको आप बिलकुल जड़ मूल से निकालें। 

सभापति महोदय, उसके साथ-साथ मैंने पिछली बार एक सुझाव भी दिया था कि जो भी व्‍यक्ति या संस्‍था सड़कों के दोनों तरफ सघन वृक्षारोपण करते हैं उसके लिए कुछ योजना आप बनायें और वृक्षारोपण कर कर अगर वो व्‍यक्ति या वो संस्‍था जिसके नाम से उस सड़क का नामकरण करना चाहे तो आपके विभाग का खर्चा भी नहीं होगा और सघन वृक्षारोपण भी हो जाए और सड़क का नाम उनके नाम से जो वो चाहे, वो सुझाव दे उसके ऊपर कर लिया जाए तो मेरे ख्‍याल से एक पर्यावरण की समस्‍या का समाधान भी होगा।  उसके साथ जो जेट्रोफा की बात चल रही है, रतनजोत की तो मंत्री महोदय, बहुत ही महत्‍वपूर्ण है यह और आपकी सरकार इसकी ओर जो कदम बढ़ा रही है तो आप भी शुरूआत अपने विभाग से सड़कों के दोनों तरफ जेट्रोफा लगाकर कर लें तो उससे आय भी होगी और पर्यावरण की समस्‍या का भी समाधान निश्चित रूप से होगा। 

माननीय सभापति महोदय, कुछ सुझाव हैं मेरे विधान सभा क्षेत्र से संबंधित मैं निवेदन करना चाहूंगा कि जो सरकार ने पिछली बार कहा था कि डब्‍ल्‍यूबीएम से बीटी में सड़कों का निर्माण करेंगे, जो डब्‍ल्‍यूबीएम बनी हुई है तो विभाग ने विभाग द्वारा जो निर्मित डब्‍ल्‍यूबीएम थी वो तो सभापति महोदय, करीब-करीब मेरे विधान सभा क्षेत्र में बन चुकी हैं लेकिन जो अकाल राहत के तहत डब्‍ल्‍यूबीएम का निर्माण हुआ मंत्री महोदय, उसको आपका विभाग मान ही नहीं रहा है कि यह डब्‍ल्‍यूबीएम है और आपके विभाग के अन्‍दर आज भी ग्रेवल सड़क के नाम से दर्ज है और जबकि वो हकीकत में अकाल राहत के तहत डब्‍ल्‍यूबीएम पंचायत राज द्वारा या अन्‍य किसी एजेंसी द्वारा निर्मित हो चुकी थी तो मेरा आपसे अनुरोध है कि जो मेरे विधान सभा क्षेत्र में ऐसी सड़कें हैं उनको डब्‍ल्‍यूबीएम टू बीटी योजना के तहत आप लें। उसके साथ ही जो सड़कें, मैं नाम नहीं बताऊंगा गांवों का लेकिन हाल ही में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत जितनी भी सड़कों का निर्माण हुआ है अगर उसमें हम जाते हैं तो लगता है कि वास्‍तव में कोई ये सड़क है और उसकी चौड़ाई भी 3.75 मीटर्स है लेकिन उससे जो मुख्‍य रोड पर जब हम आते हैं तो लगता है कि जैसे पगडंडी पर चल रहे हैं तो आपने ये सड़कों का जाल प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत तो चल रहा है लेकिन जब मुख्‍य मार्ग पर आते हैं तो पगडंडी सी लगती है हमें तो मैं चाहूंगा कि आप जो कोरनेट वाली सड़क की बात कर रहे हैं थ्रू रूट्स की तो उसके तहत जितने भी प्रस्‍ताव अभी लिये थे उसमें एक भी माननीय विधायक को नहीं पूछा गया, न विधायक की सलाह ली गयी और न इसकी हमें कोई जानकारी दी गयी। अधिकारियों ने अपने स्‍तर पर ही जो उनको ध्‍यान में आया वैसे दिये तो मैं आपसे चाहूंगा मंत्री महोदय, उसमें हमारे सुझाव भी, हम भी महत्‍वपूर्ण सुझाव दे सकते हैं ताकि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत जितनी भी सड़कें बनीं उन सड़कों का लाभ मिल सके। एक जो सड़कें राष्‍ट्रीय राजमार्ग और राज्‍य मार्ग से जुड़ रही हैं उन सड़कों की ओर भी आपको ध्‍यान देना होगा कि उन सड़कों की स्थिति भी किस तरह हम सुदृढ़ कर सकें।

मंत्री महोदय, अंत में, मैं निवेदन करना चाहूंगा कि कुछ मेरे विधान सभा क्षेत्र में ओवरब्रिज की आवश्‍यकता है और दो राज्‍य मार्ग भी पिछले वर्ष आपने घोषित किये हैं उसके लिए धन्‍यवाद है लेकिन मंत्री महोदय, अभी तक उन दोनों राज्‍य मार्गों पर कार्य प्रारंभ नहीं हुआ है तो मैं चाहूंगा कि आप बिना किसी दबाव में बिना किसी भेदभाव से इन राज्‍य मार्गों का कार्य तो प्रारम्‍भ करें। वहां पर सभी लोग गुजरते हैं कोई विधायक कांग्रेस का होने से मंत्री महोदय, कांग्रेस के व्‍यक्ति नहीं जाते हैं वो सड़क सबके लिये है। एक साल से लंबित पड़ी है घोषणा हो गयी लेकिन उस पर मेरे विधान सभा क्षेत्र में कार्य प्रारंभ नहीं हुआ है इसलिए मुझे लग रहा है ऐसा। ऐसा महसूस हो रहा है मुझे।  मैंने धन्‍यवाद तो दे ही दिया।  दो राज्‍य मार्ग दिये इसके लिए मैंने धन्‍यवाद दे दिया आपको मंत्री महोदय।  उसके साथ-साथ मंत्री महोदय, कुछ ऐसी बातें हैं मैं नाम नहीं लूंगा लेकिन सीसी सड़कों का...

(समय समाप्ति सूचक घंटी)

एक मिनट में कंक्‍लूड कर रहा हूं।   सीसी सड़कें जहां भी स्‍वीकृत हुई हैं उनकी लंबाई घटा दी गयी है मेरे वहां, तो आप इसकी ओर ध्‍यान दें कि वो लंबाई कम करके कहां बनाई गयी। क्‍या एक स्‍थान से दूसरे स्‍थान पर कम करके ले जायी जा सकती है?  मेरे पास में स्‍वीकृति के पत्र हैं। जो मैंने याचिका लगाई उसका भी मेरे पास में जवाब है और उसके आधार पर वो सड़कें मौके पर कम है उस स्‍थान पर।

मैं मंत्री महोदय, अंत में, मेरी बात समाप्‍त करते हुए आपसे निवेदन करना चाहूंगा कि जो गांव वंचित रह गये हैं सड़कों से जो पूर्व में बनी हुई हैं उन गांवों के अन्‍दर लो फ्लाइंग एरियाज हैं गांवों में वहां पर सीसी सड़क के लिए स्‍वीकृति आप प्रदान करें, ताकि बारबार वो सड़कें टूटे नहीं और उसके साथ ही अंत में, पिछली बार माननीय अशोक गहलोत की सरकार के वक्‍त में माननीय अशोक गहलोत साहब ने सभी विधायकों को बिना भेदभाव के बीस-बीस किलामीटर सड़कें दी थीं तो हम चाहेंगे कि इस बार आप कम से कम मिसिंग लिंक जो एक गांव से दूसरे गांव के दो किलोमीटर तीन किलोमीटर जुड़ने से तीस-चालीस किलोमीटर तक की लंबाई कम हो सकती है तो इस बार भी आप मिसिंग लिंक्‍स  के नाम से हमें पच्‍चीस किलोमीटर दें सभी विधायकों को तो लगभग सभी विधान सभा क्षेत्रों की अस्‍सी प्रतिशत समस्‍या का समाधान हो जाएगा।  

माननीय मंत्री महोदय, आपका धन्‍यवाद, आभार इस विश्‍वास के साथ कि आप हमें मिसिंग लिंक्‍स  इस बार जरूर देंगे। धन्‍यवाद।

श्री सभापति: श्री अर्जुन लाल मीणा।

श्री अर्जुन लाल मीणा (सलूम्‍बर): माननीय सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मांग संख्‍या- 19, 21 और 30 पर चर्चा में भाग लेते हुए सर्वप्रथम मैं मांग संख्‍या-30 पर जनजाति क्षेत्रीय विकास की चर्चा में भाग लेते हुए मैं माननीय मुख्‍यमंत्री जी और माननीय जनजाति मंत्री जी का और सरकार का धन्‍यवाद ज्ञापित करना चाहता हूं

कैलाश/    21.3.07   16.40  (1) 3c

 

कि सरकार के कुशल वित्‍तीय प्रबन्‍धन के माध्‍यम से उस दक्षिणी राजस्‍थान का वह आदिवासी क्षेत्र जो 45 साल से छूटा हुआ था, गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे थे उस क्षेत्र की जनता की तरफ हमारी जो वर्तमान सरकार है, हमारे जो जनजाति मंत्री है माननीय मुख्‍य मंत्री जी को उस समस्‍त जनता की तरफ से धन्‍यवाद ज्ञापित करना चाहता हूं कि उन्‍होंने सरकारी नौकरियों में पूर्व में 1 से 9 स्‍केल तक के पदों में जो आरक्षण की व्‍यवस्‍था की गई थी माननीय महामहिम उप राष्‍ट्रपति महोदय जब राजस्‍थान प्रदेश के मुख्‍य मंत्री थे उनके शासन काल में जो 1 से 9 तक की स्‍केल में आरक्षण की व्‍यवस्‍था की गई थी, सभापति महोदय, मैं माननीय मुख्‍य मंत्री जी का धन्‍यवाद ज्ञापित करना चाहता हूं उन्‍होंने उस क्षेत्र की जनता की आवाज को सुन कर, उस जनता की मांग को ध्‍यान में रखते हुए 1 से 9 तक की स्‍केल के साथ साथ राज्‍य की समस्‍त सेवाओं में आरक्षण के प्रावधान की जो घोषणा की है मैं समझता हूं कि निश्चित रूप से उस क्षेत्र की जनता के, उन बेरोजगार भाइयों और जो अध्‍यापन कार्य कर रहे हैं, जो बीएड की डिग्री ले रहे हैं, टैक्निकल एजुकेशन में जो प्रशिक्षण प्राप्‍त कर रहे हैं और प्रतियोगी परीक्षा की जो तैयारी कर रहे हैं उन सब की तरफ से मैं धन्‍यवाद ज्ञापित करना चाहता हूं । मैं तीन साल की सरकार की उपलब्धियों के बारे में ज्‍यादा आंकडों में नहीं जाना चाहता हूं लेकिन मैं शिक्षा विभाग में जहां पिछली सरकार ने लगभग 20 हजार का बैकलाग छोडा था और मैं माननीय शिक्षा मंत्री जी को और हमारे जनजाति मंत्री जी को धन्‍यवाद ज्ञापित करना चाहता हूं कि उन्‍होंने शिक्षा विभाग में लगभग चार हजार अध्‍यापकों को थर्ड ग्रेड में नियुक्ति दे कर एक रिकार्ड कायम किया है । इसके लिये मैं जनजाति मंत्री जी को, माननीय मुख्‍य मंत्री जही को धन्‍यवाद देना चाहता हूं । साथ ही साथ चिकित्‍सा विभाग में 1119 एएनएम को नौकरी देकर, जनजाति बहनों को एएनएम के पदों पर स्‍थाई नियुक्ति देकर सरकार ने 45 परसेंट के आरक्षण की व्‍यवस्‍था के माध्‍यम से नौकरियों में जो उनको भागीदारी दी है निश्चित रूप से क्षेत्र की जनता सरकार की आभारी है । इसके साथ साथ शारीरिक शिक्षक, कम्‍पाउंडर, आयुर्वेदिक कम्‍पाउंडर, पुलिस कांस्‍टेबल और विभिन्‍न विभागों की भर्ती में जो 45 पर्सेंट का जो आरक्षण था उसके माध्‍यम से सरकारी नौकरियों में उनकी भागीदारी सुनिश्चित हुई है । उनको जो अवसर मिला है निश्चित रूप से वह सभी लोग सरकार के आभारी है । मैं माननीय जनजाति मंत्री जी से यह निवेदन करना चाहता हूं और माननीय मुख्‍य मंत्री जी से यह निवेदन करना चाहता हूं कि आपने इस बजट में जो घोषणा की है कि राज्‍य की अन्‍य सेवाओं में भी 45 परसेंट आरक्षण जनजाति उप योजना क्षेत्र में दिया जायेगा । मैं निवेदन करना चाहता हूं कि जब देश आजाद हुआ तब से हमारे पूरे राजस्‍थान प्रदेश में 74 आरएएस एसटी वर्ग से है । उसमें मात्र 2 आरएएस उस शिड्युल एरिये से है इसलिए मैं निवेदन करना चाहता हूं यदि सरकार आरएएस और आरपीएस में भी यह 45 परसेंट आरक्षण की व्‍यवस्‍था में उस क्षेत्र से लिये जाये तो निश्चित रूप से जो उस क्षेत्र में और इस क्षेत्र में एक खाई है उस खाई को पाटने का एक काम किया जायेगा । सभापति महोदय, मैं मुख्‍य मंत्री जी को इस बात के लिये भी धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि पिछले साल में जो पीएमटी में रिज़र्वेशन का आंध्र प्रदेश का सुप्रिम कोर्ट का एक मामला आया था और उस मामले को लेकर हमारे उच्‍च शिक्षा मंत्री जी माननीय घनश्‍याम तिवाडी साहब, माननीय कनकमल कटारा साहब और मुख्‍य मंत्री जी ने आदिवासियों के प्रति एक अहम भूमिका निभाते हुए, उनके प्रति चिंता करते हुए आरक्षण में जो सुप्रिम कोर्ट की एक गाइड लाइन दी थी उसको सही रूप में आदिवासियों की चिंता करते हुए 5 प्रतिशत का आरक्षण आरपीएमटी में उन्‍होंने दिया । मैं उस क्षेत्र के समस्‍त युवाओं की तरफ से और जो एमबीबीएस में प्रवेश कर रहे हैं उन समस्‍त छात्र छात्राओं की तरफ से भी धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि उन्‍होंने वह रिजर्वेंशन कायम रखा । मैं सरकार को भी धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि 45 साल के बाद इस सरकार ने उस क्षेत्र के लोगों की चिंता की है । निश्चित रूप से गरीबी की , आर्थिक स्थिति की, सामाजिक स्थिति की जो चिंता की है उसके लिये मैं सरकार को धन्‍यवाद देना चाहता हूं ।

सभापति महोदय, हमारे टीएसपी क्षेत्र में जो होस्‍टल खुले हुए हैं लगभग 170 होस्‍टल वहां खुले हुए हैं । उन 170 होस्‍टलों में से बालक के 122 होस्‍टल है और 48 बालिकाओं के हैं । कुल 170 टीएसपी क्षेत्र में होस्‍टल खुले हुए हैं । जिसमें पाँच जिले है उदयपुर, डूंगरपुर, चित्‍तोडगढ, सिरोही यह पाँच जिले सम्मिलित है । इसमें लगभग 11571 लडके और लडकियां इन छात्रावासों में निवास करते हैं । 9 आवासीय विद्यालय प्रदेश में खुले हुए हैं । उन आवासीय विद्यालयों में और आश्रम छात्रावासों में पिछले तीन साल में अध्‍यापकों की, होस्‍टल वार्डन की और कोच की कमी थी । लेकिन इन पाँच सालों में, मैं माननीय जनजाति मंत्री जी का आभार प्रकट करना चाहता हूं कि इन्‍होंने अपने प्रयास कर के होस्‍टलों में जो वार्डन के पद खाली थे, अध्‍यापकों के पद खाली थे, विषय अध्‍यापकों के पद खाली थे उनको भरने का पूरा प्रयास किया है । लेकिन फिर भी अभी उन आवासीय विद्यालयों में और होस्‍टलों में अध्‍यापकों के पद खाली हैं । सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं कि इन होस्‍टलों और आवासीय विद्यालयों में जो अध्‍यापक लगाये जाते हैं वह उधार के अध्‍यापक हैं, शिक्षा विभाग से लिये जाते हैं । हमारे किशनगंज से आने वाले माननीय सदस्‍य और सराडा से आने वाले माननीय सदस्‍य ने जिक्र किया था उस बात को मैं पुरज़ोर शब्‍दो में निवेदन करना चाहता हूं कि जब तक सरकार अपने खुद का कैडर स्‍ट्रेंथ नहीं कर देती, जब तक अपने खुद के अध्‍यापक नियुक्‍त नहीं कर देती है, भर्ती नहीं कर देती है तब तक उन छात्रावासों में, उन आवासीय विद्यालयों में शिक्षा का गुणात्‍मक परिणाम जो हम चाहते हैं वह परिणाम हमें नहीं मिलेंगे । सभापति महोदय, सरकार ने प्रयास किया है लेकिन शिक्षा विभाग से डेपुटेशन पर कोई अध्‍यापक आता है, कोई लैक्‍चरर आता है, कोई होस्‍टल वार्डन आता है उसको 6-6 महीने तक एनओसी नहीं मिलती है । यदि एनओसी मिलती है तो अध्‍यापक नहीं आता है और अध्‍यापक आता है तो वह होस्‍टलों में रहते नहीं है । सभापति महोदय, मेरा आपके माध्‍यम से यह निवेदन है कि जब तक टीएडी विभाग अपना खुद का कैडर स्‍ट्रेंथ नहीं कर देता है तब तक इस समस्‍या का स्‍थाई समाधान नहीं हो सकता है । ट्राइबल एडवाइजरी कमेटी की चार बार बैठक हो चुकी है और उस बैठक में हमने बार बार यह प्रस्‍ताव पास कर के माननीय राज्‍यपाल महोदय को और सरकार को भेजा है उसमें कुछ बातें तो हमारी मान ली गई है लेकिन जो आवासीय विद्यालयों में और आश्रम छात्रावासों में जो अध्‍यापकों की कमी है इस बात की पूर्ति करायी जाये ऐसा मेरा निवेदन है । सभापति महोदय, इन तीन साल के शासनकाल में शिक्षा विभाग में अध्‍यापकों की भर्ती, निशुल्‍क साइकल वितरण का कार्यक्रम और स्‍कूटी वितरण का कार्यक्रम, शिक्षा को प्रोत्‍साहन देने वाले अनूठे कार्यक्रम सरकार ने हाथ में लिये हैं और उस प्रोत्‍साहन के माध्‍यम से बालक और बालिकाएं स्‍कूल में पढने गईं, कालेज में पढने गये । मेरा आपके माध्‍यम से निवेदन है कि इस क्षेत्र में और भी ऐसी अनेक लघु सिंचाई योजना हाथ में लेने की जरूरत है और ऐसी कई तरह की योजनाएं हैं जिसको यदि सरकार हाथ में लेती है, लघु सिंचाई योजनाएं हैं, जिस तरह से लिफ्ट इर्रिगेशन योजना है, पिछली सरकार में लिफ्ट इर्रिगेशन का काम बंद पडा हुआ था । वर्तमान में तीन साल के शासनकाल में जितने लिफ्ट इर्रिगेशन की योजना हमारे इस क्षेत्र में बंद पडी हुई थी तीन साल में वह सारी लिफ्ट इर्रिगेशन योजनाएं पुन: चालू की गई है और उसके माध्‍यम से जितने छोटे छोटे किसान थे, जो गरीब किसान थे, ट्राइबल किसान थे उनको उसका पूरा लाभ मिला है । मेरा आपसे निवेदन है कि जिस क्षेत्र में सिंचाई की व्‍यवस्‍था नहीं है वहां छोटे छोटे एनिकट बनाकर, छोटे लघु सिंचाई बाँध बनाकर उस क्षेत्र की जनता को लाभ दिया जा सकता है ।

ans/akt  16.50  21.3.2007  3d 

 

जिस तरह से  जो हमारा जयसंमद बाँध बना हुआ है, सराड़ा और सलूम्‍बर के क्षेत्र को एरिगेट करता है लेकिन उस बाँध के ऊपर जो गांव है, जो क्षेत्र रहता है, मेवल क्षेत्र है उसमें वहां किसी तरह की सिंचाई योजना नहीं है यदि खरका नदी पर एक छोटा एनीकट बना दिया जाए जिस तरह से बेणेश्‍वर धाम पर एनीकट का निर्माण कराया गया है उसी तरह से यदि उस खरका नदी पर एक छोटा एनीकट का निर्माण कराया जाता है तो मेवल क्षेत्र के लगभग 30 से 40 गांव है, जो छोटे किसान है उनको निश्चित रूप से उस परियोजना का लाभ मिल सकता है।

माननीय सभापति महोदय आपके माध्‍यम से मैं यह भी निवेदन करना चाहता हूं कि टी ए डी विभाग में हमारे सम्‍भागीय आयुक्‍त बैठते हैं वह टी ए डी कमिश्‍नर भी है और सम्‍भागीय आयुक्‍त भी है। मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं कि हमारे जिले में पी.ओज काम करते हैं, परियोजना अधिकारी काम करते हैं, परियोजना अधिकारी बहुत से जिलों में आर.ए.एस. अधिकारी लगे हुए हैं और बहुत से जिलों में कहीं दूसरी जगह से लिये हुए इंजीनियर और एक्‍स.ईएन. है वह  उस पद पर बिठाया गया है। यह एक बहुत बड़ा अंतर है। एक जगह एक आर ए एस अधिकारी काम करता है और उसी पोस्‍ट पर उसी पी.ओज पोस्‍ट पर एक इंजीनियर काम करता है। मेरा माननीय मंत्री महोदय से यह निवेदन है कि सभी पीओज की पोस्‍ट सीनियर हायर आरएएस की पोस्‍ट करके उस पर डिप्‍टी कमिश्‍नर या एडिशनल कमिश्‍नर का पद दिया जाकर उन परियोजना अधिकारी के पद पर उस परियोजना अधिकारी का पद बदलकर डिप्‍टी कमिश्‍नर का पद सृजित किया जाए तो निश्‍चित रूप से उस जिले को,जितने भी टी ए डी विभाग में जितनी  विभिन्‍न योजनाएं चलती है, व्‍यक्तिगत लाभ  की योजना चलती  है, अनेक अन्‍य योजनाएं चलती है , इर्रिगेशन की योजना चलती है, शिक्षा विभाग की योजना चलती है, सड़क की योजना चलती हे, व्‍यक्तिगत लाभ की कई तरह की योजना चलती है उन सब योजनाओं का प्रोपर्ली मोनीटरिंग हो पाएगा यदि वहां आर ए एस अधिकारी लग जाए और उन आर.ए.एस. अधिकारी उस पीओटी कार्यालय में जिन सुविधाओं का अभाव है हमने टीएसी की बैठक में पीओज के पास गाड़ी नहीं है, यदि वह सुपरवीजन का काम करेंगे तो कैसे करेंगे1 उनके पास महीने में दस दिन गाड़ी किराये पर लेने का प्रावधान किया है।

सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहूंगा कि सभी पीओज की पोस्‍ट आरएएस, सीनियर आर.ए.एस. की लगाई जाए और जो हमारा कमिश्‍नर का पद है वह ट्राइबल कमिश्‍नर अलग से नियु‍क्‍त किया जाए। मैं सरकार को धन्‍यवाद देना चाहता हूं, माननीय मुख्‍यमंत्री जी को  धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि पहली बार राजस्‍थान में प्रिंसिपल सैक्रेटरी का पद टी.ए.डी. में करके पूरे  जनजाति विभाग को एक अच्‍छा काम देने का, सुव्‍यवस्थित काम और योजना क्रियान्‍वयन करने का काम किया है, निश्चित रूप से मैं सरकार को धन्‍यवाद देना चाहता हूं। बस दो मिनिट में।

माननीय सभापति महोदय,  एक-दो बात और कहना चाहता था कि भारत सरकार  ने जो पिसा एक्‍ट लागू किया है, ग्राम पंचायतों को जो अधिकार देने का काम किया है निश्चित रूप से ग्राम सभाओं में, जो हमारे क्षेत्र में जो वन उपज है, जैसे गोंद, तेंदूपत्‍ता, पत्‍तल है उसको बेचेने का और उसको सही मूल्‍य मिले इसके लिए ग्राम पंचायतों को उसका पूरा अधिकार दिया जाए और टी.ए.डी. विभाग यह तय करें कि किस तरह से इसका संग्रहण करके किस तरह से इसकी मार्केटिंग करके, किस तरह से उन गरीबों को   जो तेंदूपत्‍ता, पत्‍तल-दोने, जो बांस का काम करते हैं उनको किस तरह से उचित मूल्‍य मिले इस तरह का काम भी टी ए डी विभाग करें।

मैं माननीय सभापति महोदय, माननीय सार्वजनिक निर्माण मंत्री की, मांग 19 और  21 पर मेरे क्षेत्र की जो दो-'तीन बड़ी-बड़ी मांगे हैं उस पर बात करके मैं अपनी बात को यही समाप्‍त करूंगा। पीएमजीएसवाई में 500 के ऊपर के जितने भी गांव थे सारे जुड़ गए हैं। लगभग 23 गांवों में यह, 23 सड़कों काम काम चल रहा है, मैं माननीय सार्वजनिक मंत्री महोदय को धन्‍यवाद देना चाहता हूं। 250 के ऊपर की आबादी के गांव जुड़ रहे हैं अभी, इस बात के लिए भी धन्‍यवाद देना चाहता हूं।

मैं माननीय मंत्री महोदय से यह मांग करना चाहता हूं कि एन.एच.- 76 जो चित्‍तोड़ से उदयपुर जाता है वहां से कीर की चौकी से भिण्‍डर और सलूम्‍बर से  कल्‍याणपुर और खेरवाड़ा एन.एच.- 8 को मिलता है, वह स्‍टेट हाइवे घोषित हो चुका है। मैं माननीय मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहता हूं कि उस रोड़ का निर्माण सीआरएफ में जो भी बजट मिले हमें उस पर उपलब्‍ध कराकर इस रोड का, ताकि अहमदाबाद और गुजरात जाने वाला व्‍यक्ति है वह सीधा सलूम्‍बर और खेरवाड़ा निकल जाएगा। इस रोड़ की हालत अभी ठीक नहीं है, इस रोड़ का निर्माण कराने की मांग करता हूं।

दूसरा, सलूम्‍बर कस्‍बे के दोनों तरफ  बाईपास का निर्माण कराने की भी मांग करता है। दूसरा, मिसिंग लिंक में 8-10 गांव जो मेरे जुड़ने है मानननी मंत्री महोदय को प्रस्‍ताव दे दूंगा, उसको भी जोड़ने का कष्‍ट करें। धन्‍यवाद।

 

(सदन की कार्यवाही)

विधान सभा की बैठक के निर्धारित समय में वृद्धि

 

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (सरकारी उप मुख्‍य सचेतक): सभापति महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूं कि सदन का समय सात बजे तक के लिए बढ़ाया जाए। 

श्री सभापति: क्‍या सदन की अनुमति है ?

(स्‍वीकृत)

 

सदन का समय सात बजे तक के लिए बढ़ाया गया।

श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल।

अनुदान की मांगों पर अग्रेतर विचार

श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल (देसूरी): माननीय सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से आज मांग संख्‍या 19 और 21 के बाबत अपने विचार व्‍यक्‍त करना चाहती हूं1 माननीय सभापति महोदय, सड़कें विकास का द्वार कही जाती हैं और राजस्‍थान में सड़कों के मामले में आज जिस प्रकार का जबरदस्‍त काम हुआ है निश्चित रूप से बहुत ही काबिले तारीफ है। 

अगर गांवों की सोची, हिन्‍दुस्‍तान के गांवों की सोची तो प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जो पूर्व प्रधानमंत्री थे उन्‍होंने सोची और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना बनाई। उसके तहत आज पूरे राजस्‍थान में बहुत ही अच्‍छा काम हो रहा है। इसके तहत 4620 सड़कों को जोड़ा गया है और यह हमारे सार्वजनिक निर्माण मंत्री जी की कार्य कुशलता का परिणाम है, हमारी वसुन्‍धरा जी की कार्यकुशलता का परिणाम है कि 500 की आबादी वाले गांव जुड़े हैं, 250 की आबादी वाले गांवों का नम्‍बर  आयेगा ।

अभी विपक्ष में विराजमान जो भी माननीय सदस्‍य हैं वह भी बोल रहे थे कि यह तो प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत पैसा मिल रहा है इसलिए सड़कों के मामले में इतना अच्‍छा काम हो रहा है। क्‍या प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत बिहार को पैसा नहीं मिल रहा ? वहां एक हजार की आबादी वाले गांवों का भी नम्‍बर नहीं आया है, यह तो हमारी मुख्‍यमंत्री साहिबा और हमारे सार्वजनिक निर्माण मंत्री जी की कार्यकुशलता का परिणाम है कि 500 की आबादी वाले जुडे़ हैं और 250 की आबादी वाले जुड़ेगे।

मुख्‍यमंत्री सड़क योजना, जिसके तहत पहली बार मुख्‍यमंत्री जी ने चार वर्ष के लिए मुख्‍यमंत्री सड़क योजना शुरू की है निश्चित रूप से इसमें जितने भी राजमार्ग है और उन राजमार्गो के रास्‍ते पर पड़ने वाले जो भी गांव हैं उन गांवों में सी.सी. सड़क बनी है और सी.सी. सड़कों का बहुत ही सुंदर जाल पूरे राजस्‍थान में बिछा है ।       मुख्‍यमंत्री सड़क योजना के तहत मैं मेरे पाली जिले की बात करती हूं, मुख्‍यमंत्री सड़क योजना के तहत काफी गांव पाली जिले के  जुड़े हैं और मेरे देसूरी विधान सभा क्षेत्र के कम से कम इसमें 20 गांव जुड़े  हैं। 

       

दुर्गा/त्रिपाठी 210307 1700 3e

 

और प्रधान मंत्री सड़क योजना के तहत 16 गांव जुड़े हैं, 78 गांव प्रधान मंत्री सड़क योजना के तहत पाली जिले के जुड़े, उसमें 16 गांव मेरे जुड़े हैं। आपके भी जुड़े होंगे मगर आपको प्रशंसा करनी नहीं है। विपक्ष में बैठे हैं, विपक्ष के धर्म का पालन करना है, विरोध में तो बोलना ही पड़ेगा। अगर गांव की सोची है तो अटल बिहारी वाजपेयी ने सोची पूरी हिन्‍दुस्‍तान के गांवों की और राजस्‍थान के गांवों की सोची तो हमारी वसुन्‍धराजी ने और सार्वजनिक निर्माण मंत्री ने सोची है। यह उसी के तहत है। अभी आप कहेंगे, आपके मंत्री हैं, केन्‍द्रीय मंत्री, रघुवंश प्रसादजी ने, उन्‍होंने भी इस बारे में राजस्‍थान की प्रशंसा की है। क्‍योंकि वह जानते हैं कि अच्‍छी चीज की प्रशंसा की जानी चाहिए। वह भारतीय हैं और भारतीयों की आदत है कि अच्‍छी चीज की प्रशंसा करते हैं, बुराइयों की प्रशंसा नहीं करते हैं। मैं उनको अच्‍छा कह रही हूं। जो नहीं करते हैं, वह अपने को आंक लें, वे कहां हैं। भारतीयों की यह ए‍बेलिटी होती है कि अच्‍छी बात, भारतीय संस्‍कृति में, मैं बताती हूं आपको, भारतीय संस्‍कृति में यह चीजें हैं। अभी मैंने कहा था, जब नवलगढ़ से आने वाली मेरी बहन बोल रही थीं, माननीय सदस्‍या, तब इन्‍होंने कहा कि आप एक आँख से देखते हो। एक आँख से नहीं, दो आखें हैं। एक आँख से तो...।

श्रीमती प्रतिभा सिंह (नवलगढ़): घुमा-फिराकर के तो देखा करो। यह भी तो कहा था।

श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल (देसूरी):  हां, आपने यह भी कहा था।

श्रीमती प्रतिभा सिंह (नवलगढ़): एक आँख कहां, 4 आंखें हैं। (व्‍यवधान)

श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल (देसूरी): सम-दृष्टि से, मैंने कहा था हमारे...। (व्‍यवधान) जो ईश्‍वर को मानते हैं।

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): दो आखें हैं हमारे, 8-10....।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): सभापति महोदय, सदन में मेरी डिमाण्‍ड पर चर्चा हो, सदन में मेरे विभाग के बारे में चर्चा हो, राजस्‍थान की सड़कों के बारे में चर्चा हो। यह मेरी आंखों के बारे में चर्चा, यह कौनसा मुद्दा हो गया। और सभापति महोदय, एक आँख से इस उम्र में देखना...। (व्‍यवधान)

श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल (देसूरी): भारतीय संस्‍कृति की बात कर रही हूं मैं।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): कारण यह है कि आप झुंझुनूं के प्रभारी मंत्री हैं।

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): इसी पर तो चर्चा हो रही है कि इस उम्र में एक आँख से देखा जाए। इसलिये तो चर्चा हो रही है। 

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): सभापति महोदय, अभी दिग्विजयसिंहजी ने और मैंने फैसला किया है कि 2 सदस्‍यीय जांच कमेटी बैठाई जाए कि इनकी आंखों के बारे में चर्चा क्‍यों होती है।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): जब आप राजस्‍थान की यूनिवर्सिटी के अध्‍यक्ष थे, मंत्री महोदय, तब आपकी आंखें बड़ी खतरनाक थीं। उनको तब की याद आ गयी होगी।

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): माननीय नाथूसिंहजी ने और स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रीजी ने बैठकर चर्चा कर ली थी कि क्‍यों आंखों के बारे में चर्चा हो रही है।

श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल (देसूरी): मैं तो भारतीय संस्‍कृति की चर्चा कर रही हूं। हमारी वसुन्‍धराजी और हमारी भारतीय संस्‍कृति। वसुन्‍धराजी ईश्‍वर को मानने वाली हैं। और राजस्‍थान में आप भी ईश्‍वर को मानने वाले हो, हमारे सार्वजनिक निर्माण मंत्रीजी। राजस्‍थान में 3 साल पूर्व जो सत्‍ता राजस्‍थान की जनता ने जिस वजह से वसुन्‍धराजी को दी...।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): आपने इनको कभी मंदिर में देखा। आप कहते हैं कि भगवान को मानने वाले हैं, ईश्‍वर को मानने वाले हैं। आप तो 3 साल से देख रही हो, मैं 12 साल साथ रहा हूं और मैंने 12 साल में...। (व्‍यवधान) इनको कभी घुसते नहीं देखा। (व्‍यवधान)

श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल (देसूरी): माननीय सभापतिजी, मैं जो.... (व्‍यवधान) देवियों की पूजा तो करते हैं। मंदिर में नहीं जाने से कोई यह सिद्ध नहीं हो जाता कि वे ईश्‍वर के प्रति आस्‍थावान नहीं हैं। भगवान तो मन में विराजमान होते हैं। ईश्‍वर हमेशा मन में विराजमान होते हैं। मंदिर में जाने से कोई प्रदर्शित नहीं होता। कोई प्रोपेगण्‍डा करते हैं, कोई नहीं करते।

श्रीमती प्रतिभा सिंह (नवलगढ़): देसूरी से आने वाली माननीय सदस्‍या ने मुझे बहन कहा है तो थोड़ा सजेशन दे दूं बड़ी बहन होने के नाते। इनकी ज्‍या बढ़ाई नहीं करो, कई दुश्‍मन हो जाएंगे आपके।

श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल (देसूरी): आप तो नहीं होंगी ना?

श्रीमती प्रतिभा सिंह (नवलगढ़): मैं सत्‍ता में नहीं हूं। लेकिन जो उधर बैठे हैं ना, बहुत सारे, वह सब दुश्‍मन हो जाएंगे आपके।

श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल (देसूरी): उसकी मैं चिन्‍ता नहीं करती हूं। जब काम किया है तो उसको अच्‍छा कहना ही पड़ेगा। आप उसका कुछ भी समझें।

श्रीमती प्रतिभा सिंह (नवलगढ़): यह तो इन्‍होंने.... (व्‍यवधान) ठीक है, आप न डरें तो आपकी मर्जी, बाकी आपको आगाह करना मैं मेरा फर्ज समझती हूं।

श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल (देसूरी): कम से कम आप से तो यह उम्‍मीद नहीं है कि आप, नारी-शक्ति किसी से डरती नहीं है। इसलिये आपसे तो यह उम्‍मीद नहीं है कि आप मुझे यह सजेशन दें। अगर अच्‍छा काम करेंगे तो उसकी प्रशंसा करनी पड़ेगी।

श्रीमती प्रतिभा सिंह (नवलगढ़): मैं तो खतरों से आगाह कर रही हूं आपको।

श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल (देसूरी): खतरे और जीवन एक ही चीज है। खतरों से क्‍या घबराना।

मैं भारतीय संस्‍कृति पर आती हूं वापस। हमारी वसुन्‍धराजी ने जब 3 साल पहले राज सम्‍भाला तब राजस्‍थान की जनता ने उन्‍हें जिस वजह से इस सर्वोच्‍च पद पर बैठाया, उसी के अनुरूप आज गांव, ढाणी में सड़कें बनी हैं और इसका परिणाम देखना आप, इसका परिणाम निश्चित रूप से अच्‍छा आयेगा। गांव, ढाणी में बहुत अच्‍छी सी.सी. सड़कें बनी हैं और कांग्रेसी, जो वहां के कार्यकर्ता हैं, वे भी इसके लिये हमें धन्‍यवाद देते हैं, वह इतनी सड़कें मेरी कांस्‍टीट्एंसी में घोषित की हैं, इसके लिये धन्‍यवाद। वह यह कहते हैं कि हम बरसों तक, 50 साल तक हमारा राज रहा और हम यह चीज नहीं करवा सके और आपने करवाया, इसके लिये आपको धन्‍यवाद।

श्रीमती प्रतिभा सिंह (नवलगढ़): देसूरी से आने वाली मेरी बहन, एक बात और बता दूं आपको कि आप इनका हश्र भी अटलबिहारीजी वाला ही करना चाहती हो क्‍या। उन्‍होंने बहुत सड़कें बनाई लेकिन परिणाम क्‍या रहा, आते चुनाव में उनको प्रधान मंत्री की गद्दी से हटना पडा। तो वही माननीय राजेन्‍द्रसिंहजी के साथ करना चाह रही हो क्‍या आप।

श्री कालूलाल गुर्जर  (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री): कांग्रेस ने इनको टिकट नहीं दिया, अब क्‍या करें, यह तो दुर्भाग्‍य की बात है।

श्रीमती प्रतिभा सिंह (नवलगढ़): आपकी जानकारी अधूरी है, मैंने कांग्रेस का टिकट मांगा नहीं था। मांगा नहीं था, मैंने कांग्रेस का टिकट।

श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल (देसूरी): ऐसा है, भारतीय जनता पार्टी की सरकार जब भी बनती है, वह अच्‍छी विचारधारा, अच्‍छे काम करने के लिये ही बनती है। 

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): माननीय सभापति महोदय, देसूरी से आने वाली महिला ने कही है, यह बात मुझे बड़ी पसन्‍द है। ...(व्‍यवधान)

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): महिला नहीं, माननीय सदस्‍य कहें। यह महिला क्‍या कह रहे हैं।

श्री राकेश मेघवाल (परबतसर):  महिला कहना गलत है, माननीय सदस्‍य हैं वह, महिला नहीं हैं। सभापति महोदय, महिला नहीं है, वह माननीय सदस्‍य हैं।

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): हां, माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य। माननीय सदस्‍य ने जो कहा।

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): एक जिले से एक बार में एक ही सदस्‍य बोल सकता है, वह बोल रही हैं, नवलगढ़ से माननीय सदस्‍य बोल रही हैं। एक जिले से एक ही सदस्‍य बोल सकता है।

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): इनके पक्ष में ही बोलूंगा, इनके पक्ष में बोलूंगा। बात तो सुनो एक बार। इसी पर मैं एक बात कहना चाहता हूं।

तकलीफें जिन्‍हें सहने की आदत नहीं,

तूफानों से उसको टकराने की जरुरत नहीं

जो लोग जिया करते हैं दूसरों के सहारे,

उसे जमाने की जरुरत नहीं।

इसलिये सीधे-सीधे बोलते रहा करो।

श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल (देसूरी): प्रत्‍यक्ष को प्रमाण की जरुरत नहीं होती।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): आपको यह शेर पहले क्‍यों नहीं याद आया।

श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल (देसूरी): अभी मैंने, अभी मैंने बात की कि मेरे कांग्रेसी कार्यकर्ता हैं, उन्‍होंने इस चीज को सराहा है और फिर श्रवणजी, जो कांग्रेस के विधायक हैं, उन्‍होंने भी इस चीज को सराहा है। तो यह चीजें तो सराही जाती रहेंगी। (व्‍यवधान) आप चिन्‍ता क्‍यों करते हैं, मुझे बोलने दें ना।

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): आपको एक्‍सपीरियंस दे रही हैं सीनियरिटी का।

श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल (देसूरी): आपने तो जो डबल्‍यू.बी.एम. रोड बनायी थीं, उनके वहीं पर वह कलेक्‍शन करके ही छोड़ दिया था। जितनी भी डबल्‍यू.बी.एम. रोड हैं उनको सारा डम्‍बपर वसुन्‍धराजी ने और सार्वजनिक निर्माण मंत्रीजी ने ही कराया है। आप तो सुनें और सुनकर जाओ, और अपनी कांस्‍टीट्एंसी में जाकर जनता से बात करें। ऐसे ही ख्‍याली पुलाव मत बनाइये आप।

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): माननीय सदस्‍य, आप हमारी सिफारिश तो करें, जाएं कहां।

श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल (देसूरी): मेरे को बोलने देंगे कि नहीं देंगे आप। अभी अतिवृष्टि, अप्रैल में जब अतिवृष्टि हुई...।

श्री राकेश मेघवाल (परबतसर): यह श्रवणजी को कहा है, कांग्रेस को नहीं कहा है। श्रवणजी पक्‍के कांग्रेसी भी नहीं हैं। (व्‍यवधान)

एक माननीय सदस्‍य: वहां पर जाकर देखा था क्‍या?

श्री राकेश मेघवाल (परबतसर): हां, यह पहले मेरे साथ में एम.एल.ए. थे, निर्दलीय थे। (व्‍यवधान)

श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल (देसूरी): अभी 2 महीने पहले जो अतिवृष्टि हुई...

 

Vps-usc-21032007-1710-3f-1

 

उससे भी जहां पर ज्‍यादा बारिश हुई वहां पर सड़कों पर गड्ढे पड़ गये पानी की वजह से। उसमें भी मैं धन्‍यवाद देना चाहूंगी सार्वजनिक निर्माण मंत्रीजी को, उनके सारे स्‍टाफ को। उन्‍होंने स्‍पष्‍ट रूप से मानसून जो सितम्‍बर में चला जाता है, उसके बाद में जो गड्ढे पड़े उन्‍होंने स्‍पष्‍ट रूप से विभाग के अपने अधिकारियों को कह दिया कि अक्‍टूबर तक यह सारी सड़कें ठीक हो जानी चाहिए और उसके अनुरूप जहां पर भी इस प्रकार से क्षति हुई वह सारी सड़कें ठीक हो गयीं। कुछ पुल टूटे, वह भी ठीक हुए। मेरे विधान सभा क्षेत्र में भी रोड्स की हालत इस अति वृष्टि की वजह से बहुत खराब हो गयी। चलो, हाथों-हाथ मैं धन्‍यवाद देना चाहूंगी। देवली की पुलिया कहो, चाहे सोड़ावास की सड़क कहो, चाहे सोना-ए-माजी की सड़क कहो, इस प्रकार से नाडोल की पुलिया कहो, सारे जो बारिश की वजह से सड़कें और पुलिया टूट गयी थी वह भी हाथों-हाथ तीन महीने में ऐसा कभी नहीं हुआ राजस्‍थान के इतिहास में। बाँध मेरे यहां फूटा, ऐसे भी कभी नहीं हुआ जब डिमांड्स पर आएंगे तो सिंचाई मंत्रीजी को भी धन्‍यवाद दूंगी, उनको भी। तीन महीने में ही जो पुलिया और सड़कें बनी। टूटी, उनके पैसे मिल गये और काम स्‍टार्ट हो गया और काम प्रगति पर है और कहीं पर तो काम खतम भी हो गया। मेरे विधान सभा क्षेत्र में सड़कों का इतना जबरदस्‍त जाल बिछा है। गत वर्ष अजमेर सड़कों के मामले में पूरे राजस्‍थान में प्रथम था और इस वर्ष पाली जिला प्रथम है और देसूरी में बहुत ज्‍यादा, बहुत अच्‍छी सड़कें बनी हैं। बहुत से गांव जुड़े हैं सी.सी. रोड्स बनी हैं और इस बजट में मिसिंग लिंक की घोषणा कर दी तो कुछ मिसिंग लिंक बाकी है वे भी बन जाएंगी और इसमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं है। आपके भी उतनी की उतनी सड़कें बनी हैं जितनी हमारे बनी हैं। यह दिव्‍य दृष्टि और सम्‍यक दृष्टि की बात है कि जो भगवान को पूजा करते हैं वे सबको समान दृष्टि से देखते हैं। जिनके मन में भारतीय संस्‍कृति रची-बसी होती है वह सबको देखते हैं। ठीक है, कहीं खान-पान खराब हो जाता है तो उनके संस्‍कार भी खराब हो जाते हैं। भारतीय ... (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): यह राठौड़ साहब पूजा करते हैं क्‍या? उनके संस्‍कार बिलकुल ठीक है पूजा नहीं करते हैं तो भी ... (व्‍यवधान)

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): राठौड़ साहब कौनसे देवता की पूजा करते हैं? ... (व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): समय जाया होता जा रहा है, वाद-विवाद नहीं हो तो उचित रहेगा। ... (व्‍यवधान)

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): अगली बार जीतकर आना तब मजा आएगा।

श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल (देसूरी): क्‍या? आएंगे।

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): अगली बार जीतकर आएंगे तब मजा आएगा। सड़कों का मजा तब ही आएगा जब अगली बार जीतकर आओगे। ... (व्‍यवधान)

श्री जीवराम चौधरी (सांचौर): यह तो आ जाएंगी लेकिन आप नहीं आये तो?

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): मैं विशिष्‍ट दीर्घा में बैठा देख लूंगा। मैं वहां देख लूंगा बैठकर ... (व्‍यवधान)

श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल (देसूरी): हमारी सरकार वापस आएगी, यह निश्चित मानकर चलो। आप मन में ख्‍याली पुलाव मत बनाओ। ठीक है आप ... (व्‍यवधान) देसूरी विधान सभा क्षेत्र में ... (व्‍यवधान) मैं बोल रही थी कि देसूरी विधान सभा क्षेत्र में सड़कों का बहुत जबरदस्‍त काम हुआ है। सादड़ी, जो रणकपुर वहां का पर्यटन स्‍थल है। परसराम  महादेव पर्यटन स्‍थल है। आशापुराजी अंछी बाई का मंदिर है। कुछेला महावीरजी का मंदिर है, जैन तीर्थ है, वहां पर पंचतीर्थ है और जहां पर भी रोड्स हैं वहां पर री-कारपेट मांगी तो री-कारपेट हो गयी और सादड़ी में तो इतना सुन्‍दर काम हुआ है कि हमारे एक कांग्रेसी मित्र कहते हैं, वैसे तो कांग्रेसियों से भी मेरी अच्‍छी बनती है।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): उधर डेपुटेशन पर हो क्‍या?

श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल (देसूरी): नहीं-नहीं, वह तो आप पता करो, मैं तो पहली बार ही जीतकर आयी हूं। मेरी सभी से अच्‍छी बनती है। वे कांग्रेसी मित्र कहते हैं कि सादड़ी में इतनी बढि़या जोरदार सड़कें, आपने बहुत सुन्‍दर सड़कें बना दी हैं तो अब तो बहनजी, आप ऐसा करें कि इनके बीच-बीच में, क्‍या कहते हैं वह बीच-बीच में?  डिवाइडर लगा दो आप, स्‍पीड ब्रेकर। तो मैंने उन