ssy /akt/1a/21032006/1100/1
अशोधित
प्रति/
प्रकाशनार्थ
नहीं
राजस्थान
विधान सभा की
कार्यवाही का
वृत्तान्त
अंक 5
बारहवीं
विधान सभा के
पांचवें सत्र
का बाइसवां
दिवस संख्या 13
मंगलवार;
21
मार्च, 2006
राजस्थान
विधान सभा की
बैठक 1100 बजे
विधान
सभा भवन,जयपुर
में प्रारम्भ
हुई।
(श्रीमती
सुमित्रा
सिंह, अध्यक्ष,
पदासीन)
तारांकित
प्रश्नोत्तर
श्री
अध्यक्ष: श्री
रामचन्द्र
जारोड़ा।
जिला
नागौर में
बढ़ते हुए
अपराधों पर
अंकुश हेतु कार्य-योजना
83.
श्री रामचन्द्र
जारोड़ा
(मेड़ता): क्या
गृह मंत्री यह
बताने की कृपा
करेंगे
:-सरकार
द्वारा जिला
नागौर में
बढ़ते
अपराधों में
कमी हेतु क्या
प्रयास किये
जा रहे हैं ? विवरण
सदन की मेज पर
रखें ।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): जिला
नागौर में
अपराधों में
बढ़ोत्तरी
नहीं हुई है ।
वर्ष 2005 में 2004 की
अपेक्षा 2.40
प्रतिशत
अपराधों में
कमी नागौर
जिले में आई
है । अपराधों
की रोकथाम
हेतु आवश्यक
निरोधात्मक
कार्यवाही,
गश्त व
नाकाबंदी की
जाकर रोकथाम
के प्रयास
जारी हैं ।
इसके साथ ही
अपराधियों पर
अंकुश लगाने
हेतु, केस ऑफिसर
स्कीम, हार्डकोर
अपराधियों का
चिन्हिकरण व 48
घंटे में मौके
की केस डायरी
सुपरवाइजरी
अधिकारी के
पास पहुंचने
की व्यवस्था
आदि कदम उठाये
गये हैं ।
श्री
रामचन्द्र
जारोड़ा
(मेड़ता): अध्यक्ष
महोदय मैं
आपके माध्यम
से गृह मंत्री
जी से यह
जानना
चाहूंगा कि
हार्ड कोर
अपराधियों
में से
कौन-कौनसे
अपराधियों को
चिह्नित किया
आप यह बताने
की कृपा करें
।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): टोटल
सूची तो नहीं
है पर हमने
प्रत्येक
थाने के हिसाब
से जो लगातार
कई अपराधों में
लिप्त हैं
ऐसे सारे
लोगों को हमने
चिह्नित करके
और इसमें से
कइयों को तो
किसी धारा में
पाबंद करके
अंदर किया है
। कुछ लोग ऐसे
हैं जो भगोड़ों
की तरह से थे
उन लोगों को
भी पकड़ने की
कोशिश की है ।
टोटल सूची तो
मैं अभी देने
की हैसियत में
नहीं हूं सारे
जिले में
हार्ड कोर
क्रिमिनल
कौन-कौन हैं ।
वह सूची जिले
की और थाने के
अनुसार बनी हई
है और उसके
अनुसार हम समय-समय
पर उनके खिलाफ
विभिन्न
प्रकार से जो
हमारे रोकने
के जो तरीके
हैं उनको ध्यान
में रखकर उनको
हम बराबर
बदलते हैं ।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): अध्यक्ष
महोदय, मैं मंत्री
महोदय से यह
जानना चाहता
हूं कि आपने
अपने उत्तर
में कहा है कि
नागौर जिले
में 2.40 प्रतिशत
2005 में 2004 की
अपेक्षा कम
हुआ है ।
नागौर जिले
में 2004 की तुलना
में 2005 में चोरी
और नकबजनी के
कितने अपराध
बढ़े हैं और
आपकी रिकवरी
प्रतिशत क्या
रहा है ।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): मैं
पूरे ही नागौर
जिले का एक-एक
चीज के हिसाब
से बताता हूं, आप
तो नोट करते
जायें । 1999 से
लेकर के 2005 तक के
फीगर हैं 2000 में
एक डकैती हुई
और 2001 में दो
डकैती हुई, 2003
में दो हुई, 2004
में दो हुई और 2005
में एक हुई ।
श्री
अध्यक्ष: अब
आप बीच में
नहीं बोलेंगे,
नो, नो, मंत्री
जी बता रहे
हैं, जवाब दे
रहे हैं ।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): अध्यक्ष
महोदय, मैंने स्पेसिफिक
पूछा है । जो 2.40
प्रतिशत इन्होंने
कम बताया है । सिर्फ
दो साल का मैं
पूछ रहा हूं ।
यह पूरी जन्म
पत्री 1999 से पढ़
रहे हैं...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
आपको खड़े
होने की आवश्यकता
नहीं है । सिरोही
से आने वाले
माननीय जब
आपने पूछा कि
कम कैसे हुए
तो उन्होंने
ठेठ आंकड़े 1999
से लेकर के 2005 तक
के बता दिये ।
इसमें आपको क्या
तकलीफ हुई ।
प्लीज, अब आप
बीच में न
बोलें ।
श्री
कालीचरण
सर्राफ
(जौहरी
बाजार): इनको
तकलीफ होगी ।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, मैं
सारे फीगर
पूरे के पूरे
जिले के इसमें
बढ़ोत्तरी
किसी में भी
नहीं हुई है ।
आप चाहें तो
लूट में, हत्या
में, बलात्कार
में, बलवा में
कोई एक भी ऐसा
नहीं है और
टोटल फीगर भी
आप चाहें तो
मैं आपके
सामने रख देता
हूं ।
श्री
अध्यक्ष: उन्होंने
दो का ही पूछा
है । वह दो ही
बतायें बस ।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): 2003 में 5447
टोटल अभियोग
दर्ज हुई, 2004 में
5135 और 2005 में 5012 और
इसके कारण से
मैंने जो
प्रतिशत
बताया, एक-एक
चीज का, थाने
के अनुसार, आप
प्रत्येक
थाने के अनुसार
कौनसे अपराध
बढ़े हैं ।
तीस थाने हैं
जिनमें से
पाँच थाने ऐसे
हैं जिनमें 2005
में 2004 की तुलना
में अपराध
बढ़े हैं ।
अगर आप वह
चाहें तो वह
भी मैं बता
सकता हूं । वह
थाने कौन-कौनसे
हैं ।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): अध्यक्ष
महोदय, मैंने
सिर्फ चोरी और
नकबजनी का
पूछा है कि 2004 की
तुलना में 2005
में क्या हुआ
और रिकवरी
प्रतिशत आपका
क्या है ?
आपसे सिर्फ स्पेसिफिक
पूछा है ।
श्री
अध्यक्ष: ज्यादा
क्यों बताते
हैं आप । वह
नहीं सुनना
चाहें तो क्यों
बताते हैं आप ।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): आप वह
भी सुन लें । 2004
से लेकर के,
नकबजनी के 1999 से
बोलता जा रहा
हूं, आप लिखते
जायें ।
श्री
अध्यक्ष: आप
तो 2004 से
बोलें...(व्यवधान)
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): जब
आपने अपने उत्तर
में 2.40 प्रतिशत
दिया है 2004 की
तुलना में 2005 का
आप प्रतिशत
नकबजनी और
चोरी का
बतायें न ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
माननीय मंत्री
जी, जब उन्होंने
2004 से लेकर 2005 के
बीच में दो ही
चीजों के बारे
में चोरी और
नकबजनी का
पूछा है उसी
का जवाब दीजिये
। बाकी का मत
दीजिये ।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री):
नकबजनी में 2004
में 208 मुकदमे
दर्ज हुए थे ।
श्री
अध्यक्ष: आप
बीच में क्यों
खड़े होते हैं
।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): और अब
हुए 208 की तुलना
में 169, अगर इसका
प्रतिशत
निकालें और भी
ज्यादा इसमें
कमी है । चोरी
के मामले में 2004
में चार सौ
मुकदमे दर्ज
हुए और 2005 में 350
हुए । अगर
प्रतिशत में
लेगें यह तो
टोटल है, 2.40
इसमें भी इन
दोनों
अपराधों में
और भी कमी हुई है
।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): अब
रिकवरी का भी
बता दें । आप
चोरी और
नकबजनी का ।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री):
रिकवरी
प्रतिशत
चाहते हैं
चोरी और नकबजनी
का ।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): चोरी
और नकबजनी का
।
श्री
अध्यक्ष: बैठे-बैठें
नहीं बोलें आप
।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): वह
एकदम अभी मेरे
सामने नहीं है
। अलग से नहीं
है । एक-एक की
रिकवरी का मेरे
सामने नहीं है
।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): अध्यक्ष
महोदय, यह
हकीकत है...(व्यवधान)
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): एग्जेक्ट
फीगर तो नहीं
बता सकता हूं
लेकिन टोटल 29
प्रतिशत
रिकवरी आती है
चोरी और
नकबजनी में जो
हमेशा आज तक 24
प्रतिशत था और
पिछले साल में
पाँच प्रतिशत
था, नकबजनी और चोरी
में चार
प्रतिशत
रिकवरी बढ़ी
है इस जिले
में । आप
चाहेंगे तो
मेरे पास सारे
प्रदेश के
आंकड़े भी हैं
। मैं साथ
लेकर के आया
हूं । प्रदेश
के अंदर
अपराधों में किस-किस
जिले में क्या
है ।
श्री
अध्यक्ष:
जौहरी बाजार
से आने वाले
माननीय सदस्य
बैठे-बैठे
नहीं बोलें...(व्यवधान)
अमराराम धोद ।
श्री
अमराराम(धोद): अध्यक्ष
महोदय, मैं मंत्री
महोदय से
जानना
चाहूंगा कि जो
हार्ड कोर
अपराध हैं
जिनके खिलाफ
लगातार
मुकदमें दर्ज
हुई हैं इसमें
आपने क्या
कार्यवाही की
है । संख्या
तो आप कह रहे
हैं कि मेरे
पास नहीं है
लेकिन उनके
खिलाफ जो
मुकदमें दर्ज
हुए हैं उनके
अलावा क्या
कार्यवाही की
है । उनको
चिह्नित करने
का ही काम
किया है या उन पर
कार्यवाही की
है ।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): मैं
सोचता हूं कि
यह जो हार्ड
कोर क्रिमिनल
हैं इनको हम
विभिन्न जो
सैंक्शन हैं
इनके तहत पाबंद
करते हैं ।
इसमें से भी
संख्या बढ़ी
है । इसमें से
आप देखेंगे कि
पिछली बार 2004
में इस प्रकार
के अभियुक्त
जो अपराध करते
हैं उनके खिलाफ
824 मुकदमें
बनायें 2004 में
और 2005 में 934मुकदमें
ऐसे लोगों के
खिलाफ बनाये
जो आये दिन
कुछ न कुछ इस
प्रकार की
वारदातें करते
रहते हैं जैसे
विशेषकर के
पीटा एक्ट
में भी, ड्रग्स
के लोग
भी इसमें है
और बाकी जो इस
प्रकार के
अपराधी होते
हैं उनको हम
इसमें पाबंद
करते हैं ।
उनको केस बनाकर
के पाबंद करते
हैं । मैं
सोचता हूं कि
यह जो बढ़ोत्तरी
है अपराध में
वह अपराध
इसलिए बढ़े
हैं क्यों कि
अपराधियों को
कंट्रोल करने
के लिए अधिक
मुकदमें
बनाये कि
अपराधियों को
रोकने का प्रयास
किया ।
श्री
अध्यक्ष:
नेकस्ट क्वेश्चन
।
डा.
एन. एस. गुर्जर
(टोडारायसिंह):
अध्यक्ष
महोदय, इसमें
एक सवाल है
मेरा ।
श्री
अध्यक्ष:
नहीं नहीं,
मैंने नेक्स्ट
क्वेश्चन
पुकार लिया है
। श्री
प्रहलाद
गुंजल ।
राजस्थान
उपभोक्ता
कल्याण
समिति द्वारा
कैरोसीन
मूल्य
समानीकरण
हेतु जमा राशि
84.श्री
प्रहलाद
गुंजल
(रामगंजमण्डी):
क्या खाद्य
एवं नागरिक
आपूर्ति मंत्री
यह बताने की
कृपा करेंगे :-
(1). क्या
वर्ष 2003 में
खाद्य सचिव
द्वारा राजस्थान
उपभोक्ता
कल्याण
समिति का गठन
किया गया था ?
(2) क्या
यह भी सही है
कि इसमें
कैरोसीन के
मूल्य के
समानीकरण के
नाम पर 12 करोड़
रूपये से अधिक
की राशि जमा
की गई ? यदि हां,
तो उक्त राशि
को किस-किस मद
में
कितना-कितना खर्च
किया गया ?
विवरण सदन की
मेज पर रखें।
डा.
किरोड़ी लाल (खाद्य
एवं नागरिक
आपूर्ति
मंत्री): (1). जी
हां, विभाग
द्वारा राजस्थान
उपभोक्ता
कल्याण
समिति का गठन
किया गया है
किन्तु वर्ष
2003 में नहीं
बल्कि इस
समिति का गठन 16
अप्रैल,2004 को
हुआ है ।
(2) जी
हां। यह सही
है कि केरोसीन
के दर
समानीकरण से
प्राप्त
राशि से
फरवरी,2006 तक
प्राप्त
राशि रूपये
12,91,72,443(बारह करोड़
इक्यानवे
लाख बहत्तर
हजार चार सौ
तियालीस) इस
समिति द्वारा
संचालित
पी.डी.खाते
में जमा कराई
गयी है ।
3. खण्ड
3, केरोसीन दर
समानीकरण कोष
के मद से माह
फरवरी,2006 तक...
श्री
अध्यक्ष: तीन
कहां हैं, दो
ही तो हैं
इसमें, तीसरा
है ही नहीं ।
डा.
किरोड़ी लाल (खाद्य
एवं नागरिक
आपूर्ति
मंत्री): खण्ड
तीन हैं ।
श्री
अध्यक्ष: खध्ण्ड
दो ही हैं यह
तो ।
डा.
किरोड़ी लाल (खाद्य
एवं नागरिक
आपूर्ति
मंत्री): नहीं,
तीन हैं, तीन
हैं ।
श्री
अध्यक्ष: दो
ही हैं ।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): खण्ड
दो का भाग
दो...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: भाग
है ही नहीं,
खण्ड दो ही
हैं । आप किसे
तीन कह रहे
हों...(व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): दो का
पैरा दूसरा है
।
श्री
अध्यक्ष: दो
ही हैं ।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): यह कल
का लेकर के आ
गये हैं...(व्यवधान)
श्री
प्रहलाद
गुंजल
(रामगंजमण्डी):
अध्यक्ष
महोदय, खण्ड
दो का ही
पार्ट है खण्ड
तीन, माननीय मंत्री
जी ने कर दिया
है ।
jyg//2136/1110/1b
...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष: आप
तीन कर दें,
इसमें तो दो
ही है। ...(व्यवधान)...
वह अलग चीज
है।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): यह विस्तृत
बता रहे हैं
उसके लिए तो
आप इनको धन्यवाद
दें।
डा.
किरोड़ी लाल (खाद्य
एवं नागरिक
आपूर्ति
मंत्री): खण्ड
2 में केरासिन
दर समानीकरण
कोष के मद से
माह फरवरी,06 तक
कुल रुपए 2,93,30,000 (दो
करोड़
तिरानवे लाख
तीस हजार) व्यय
करने की स्वीकृति
दी गई है। व्यय
हेतु स्वीकृत
की गई राशि का
विस्तृत
विवरण
परिशिष्ट ‘क’ पर
संलग्न है।
श्री
प्रहलाद
गुंजल
(रामगंजमण्डी):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से मंत्री
महोदय से
जानकरी करना
चाहता हूं कि आपने
राजस्थान
उपभोक्ता
कल्याण
समिति का गठन
किया है और
खण्ड 2 के
परिशिष्ट ‘क’ पर
जो राशि खर्च
करने का उल्लेख
किया है, मैं
यह जानना
चाहता हूं कि
उपभोक्ताओं
के कल्याण पर
इसमें
कितनी-कितनी
राशि खर्च हुई
है और इस संस्था
का विधिक स्वरूप
क्या है, किन
नियमों के तहत
इस संस्था का
गठन किया गया
है और इस संस्था
के सदस्य
कौन-कौन हैं
और उपभोक्ता
के वास्तविक
कल्याण की
दृष्टि से इस
संस्था के
उद्देश्य क्या
हैं, इस बारे
में माननीय
मंत्रीजी से
मैं आपके माध्यम
से अनुरोध
करूंगा कि वे
मेरे प्रश्न
का उत्तर
दें1
डा.
किरोड़ी लाल (खाद्य
एवं नागरिक
आपूर्ति
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
माननीय सदस्य
ने पूछा कि
उपभोक्ता के
हित में क्या-क्या
खर्च किया।
इसमें सेल्फ
एक्सप्लेनेटरी
है कि हमने
राशन टिकट
मुद्रण
करवाये, जो
संलग्न ‘क’ पर
लिखा हुआ है। 32
लाख रुपए
इसमें खर्च
हुए। माननीय
अध्यक्ष
महोदय,
राजस्थान
में राशन टिकट
योजना लागू की
है। राजस्थान
में पी डी एस
के गेहूं का
आम तौर पर
लीकेज हुआ
करता था, उस
लीकेज को
रोकने के लिए
हमने राशन
टिकट योजना
लागू की है।
मैं सदन को इस
बात की सूचना
देना चाहता
हूं, मुझे
बहुत हर्ष है
कि देश में यह
पहली योजना है
जो राजस्थान
में लागू हुई
है और उससे 30
प्रतिशत
डाइवर्जन
रुका है। एक
तो यह हमने
काम किया है
और उपभोक्ता
कल्याण
समिति के
कार्यालय का
स्ट्रेंथन
करने के लिए
जैसे जिला
लेवल पर डी एस ओ
है उसको
कंजूमर ऑफिसर
मानकर हमने
उसके ऑफिस का
स्ट्रेंथन
किया है। इसके
अलावा
खाद्यान
परिवहन का जो
पुराना
भुगतान था,
करीब 4 करोड़
के बराबर था
इससे पी डी एस
पेरेलाइज
होने की
स्थिति में था
उसका हमने 1
करोड़ 98 लाख
रुपए के करीब
भुगतान किया
है। इसके
अलावा माननीय
अध्यक्ष
महोदय, हमने
उपभोक्ताओं
के हित,
निर्धन और
असक्षम
उपभोक्ताओं
के लिए विधिक
सहायता, स्वैच्छिक
उपभोक्ता
संगठनों के
सशक्तिकरण के
लिए 4 लाख 20 हजार
रुपए खर्च
किए। प्रथम
चरण में
उपभोक्ता क्लबों
के लिए 30 लाख
रुपए, द्वितीय
चरण के लिए 50
लाख रुपए,
राज्य आयोग
के स्ट्रेंथन
के लिए 5 लाख
रुपए और राष्ट्रीय
एवं विश्व
उपभोक्ता
दिवस के लिए 6
लाख रुपए, इस
ढंग से हमने
कंजूमर
मूवमेण्ट को
सशक्त बनाने
के लिए यह
खर्च किया है।
इसके
अलावा माननीय
सदस्य, ने यह पूछा
है कि इसका
उद्देश्य क्या
है। इसका मूल
उद्देश्य तो
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
कंजूमर
मूवमेण्ट को
तेज करने का
है और
कोआपरेटिव
एक्ट के हित
यह समिति
रजिस्टर्ड
हुई है और यह
हमारे घोषणा
पत्र में भी
है कि उपभोक्ता
कल्याण कोष
बनाया जाए
इसलिए हमने
उपभोक्ता
कल्याण कोष
बनाया है।
भारत सरकार के
डाइरेक्शन
भी कई बार आए
कि उपभोक्ता
कल्याण कोष
बनाया जाए
इसलिए भारत
सरकार के
डाइरेक्शन
में हमने
उपभोक्ता
कल्याण कोष
बनाए हैं।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
अध्यक्ष
महोदय।
श्री
अध्यक्ष: डा.
चन्द्रशेखर
बैद।
डा.
चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से माननीय
मंत्रीजी से
यह जानना
चाहता हूं कि
आपने बताया कि
पी डी एस में
राशन टिकट
जारी करने के
बाद डाइवर्जन
30 प्रतिशत रोक
दिया गया। आप
कृपा करके यह
बताएं कि 30
प्रतिशत आपने
रोक दिया तो
टोटल डाइवर्जन
कितना हो रहा
है जिसमें से 30
प्रतिशत आपने
रोक दिया है। इसकी
जानकारी
सरकार को है
या नहीं कि
डाइवर्जन
टोटल कितना
होता है जिसका
30 प्रतिशत रोक
दिया?
डा.
किरोड़ी लाल (खाद्य
एवं नागरिक
आपूर्ति
मंत्री):
माननीय सदस्य, डाइवर्जन
हो रहा था,
लीकेज ज्यादा
था, गेहूं या
अन्य खाद्य
पदार्थों का
इसलिए हमने यह
रास्ता
निकाला। इसके
बाद हमारे पास
जो डेटा आए
हैं उनके
अनुसार करीब 30
प्रतिशत
लीकेज हमने
रोका है।
डा.
चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर):
आप कितना
मानते थे? डाइवर्जन
कितना हो रहा
था जिसमें से 30
प्रतिशत कम कर
दिया गया। अभी
आप कितना
मानते हैं,
कितने
प्रतिशत डाइवर्जन
हो रहा है?
डा.
किरोड़ी लाल (खाद्य
एवं नागरिक
आपूर्ति
मंत्री): अभी
हम मानते हैं
कि 60-70 प्रतिशत
के करीब
उपभोक्ता के
पास पहुंचता
था। आज की
तारीख में मैं
कह सकता हूं
कि अब 100
प्रतिशत
उपभोक्ता के
पास गेहूं और
खाद्यान
पहुंच रहा है1
डा.
चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर):
यह तो कण्ट्राडिक्ट्री
हो गया। 100
प्रतिशत कैसे?
जब आपने बोला
कि 30 प्रतिशत
डाइवर्जन कम
हो गया है,
मतलब 70 प्रतिशत
डाइवर्जन अभी
भी हो रहा है।
वह 70 प्रतिशत
डाइवर्जन किस
कारण से हो
रहा है, सरकार
की क्या
योजना है, यह
बहुत महत्वपूर्ण
चीज है।
डा.
किरोड़ी लाल (खाद्य
एवं नागरिक
आपूर्ति
मंत्री):
माननीय सदस्य, मैं आपको
स्पष्ट कर
देता हूं, आप
बैठ जाएं। 70
प्रतिशत
डाइवर्जन हो
नहीं रहा है।
माननीय अध्यक्ष
महोदय, पहले
जो डाइवर्जन
होता था, हमने
राशन टिकट चलाए
जो आपकी
जानकारी में
भी होगा, राशन
टिकट हमने दो
तरह के उपभोक्ताओं
को दिए, एक बीस
किलो का और एक
पन्द्रह
किलो का।
पैंतीस किलो
का राशन टिकट
उपभोक्ता
लेकर पी डी एस
की दुकान पर
जाता है और वह
पी डी एस की
दुकान पर टिकट
जमा कराता है
और उतना गेहूं
प्राप्त
करता है। पैसा
जमा कराकर
उसका डी एस ओ
ऑफिस में
रिकंसाइलेशन
किया जाता है।
इसलिए आज की
तारीख में मैं
कह सकता हूं
कि एक दाना
गेहूं का भी
लीक नहीं हो
सकता, यह मैं
बड़े विश्वास
के साथ कह
सकता हूं और
भारत सरकार ने
भी इस बात के
लिए, राशन
टिकट योजना के
लिए हमारी प्रशंसा
की है।
श्री
अध्यक्ष:
श्री बाबूलाल
नागर।
नैक्स्ट
क्वेश्चन।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
माननीय
मंत्रीजी से
मैं आपके माध्यम
से यह जानकारी
चाहता हूं कि
किस कानून के
तहत आपने यह
पैसा कलेशन
करने का आदेश
दिया, किस नियम
के तहत आपने
यह पैसा कलेक्ट
करके और फण्ड
क्रिएट करने
का तय किया।
आपने
को-आपरेटिव सोसायटी
एक्ट के तहत
जिस समय को
रजिस्टर्ड
बता रहे हैं,
उसको पैसा
ट्रांसफर
करने का
अधिकार आपको
है?
श्री
अध्यक्ष:
प्रश्न
पूछें भाषण
नहीं। आपने
पूछ लिया कि
किस कानून के
तहत किया है?
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
हां, मैं
प्रश्न ही
पूछ रहा हूं।
आपने जिस
को-आपरेटिव
एक्ट के तहत
सोसायटी का
रजिस्ट्रेशन
करवाया है
उसको यह सारा
पैसा ट्रांसफर
करने का
अधिकार किसको
है? 13 करोड़
रुपए, लगातार
करोड़ों रुपए
इस गलत ढंग से
इकट्ठा करके,
मनमाने ढंग से
उसको खर्च
किया जा रहा
है।
श्री
अध्यक्ष: आप
आप जवाब
सुनें।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
कोई कानूनी
पाबन्दी
नहीं है, कोई
नियम नहीं है,
कोई संविधान
नहीं है, कोई
कानून नहीं
है, स्वविवेवक
से चाहे जो कर
दो, ऐसा चलने
वाला नहीं है,
आप बताइए किस
नियम के तहत
है? ...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष:
प्रश्नकाल
में आप भाषण
देते हैं।
डा.
किरोड़ी लाल (खाद्य
एवं नागरिक
आपूर्ति
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
चूंकि भारत
सरकार का
बार-बार स्ट्रेस
आ रहा था।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आप
तो नियम बता
दो।
डा.
किरोड़ी लाल (खाद्य
एवं नागरिक
आपूर्ति
मंत्री): वह
मैं बता रहा
हूं, सब बता
रहा हूं। शरद
यादवजी ने एक
पत्र लिखा था, 19
सितम्बर,2003 को
अशोक गहलोत
साहब को और
उसके बाद दो
पत्र और लिखे
थे और भारत
सरकार द्वारा
बार-बार यह
प्रेशराइज
किया गया कि
कंजूमर
वेलफेयर फण्ड
बनाया जाए।
कंजूमर
वेलफेयर फण्ड
बनाने के लिए
कांग्रेस के
राज में एक
समिति का भी
गठन हुआ था,
उसको हमने आगे
बढाकर यह समिति
बनाई है, उसके
बाद आप चाहे
तो डिटेल दे
दूंगा।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आप नियम का
हवाला दो,
चाहे
कांग्रेस का राज
हो, चाहे बी जे
पी का राज हो,
किस नियम के
तहत आपने
किया, वह बताओ
आप।
श्री
अध्यक्ष:
गवर्नमेण्ट
ऑफ इण्डिया को
लिखा है।
डा.
किरोड़ी लाल (खाद्य
एवं नागरिक
आपूर्ति
मंत्री): नियम
बता रहा हूं।
21.5.2005 को....।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
इस पत्र से
नियम थोड़े बन
जाएंगे साहब।
...(व्यवधान)...
हां, भले ही
केन्द्र
सरकार का हो,
चाहे अन्तर्राष्ट्रीय
हो।
डा.
किरोड़ी लाल (खाद्य
एवं नागरिक
आपूर्ति
मंत्री):
केरासिन
उपभोग पर
निरबन्धन
कीमत नियतन
आदेश, 1993 जो सेण्टर
का है, के खण्ड
2 डी 1 में
प्रदत्त
शक्तियों का
प्रयोग करते
हुए राज्य
सरकार
एतद्द्वारा
लक्षित
सार्वजनिक
वितरण
प्रणाली के
अन्दर
करोसिन ब्लू
डाइट के
विक्रय पर
दिनांक 1 जून, 2005
से सम्पूर्ण
राज्य में
रुपए दस प्रति
लीटर
निर्धारित
करती है।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
यह तो
निर्धारित
करती है,
कौनसा कानून हुआ?
श्री
अध्यक्ष:
नैक्स्ट क्वेश्चन।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
नहीं, माननीय
अध्यक्ष
महोदय।
प्रश्न
संख्या 85
श्री
अध्यक्ष:
नैक्स्ट क्वेश्चन,
श्री बाबूलाल नागर।
(अनुपस्थित)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
यह करोड़ों
रुपयों का
मामला है और
इसको अगर
कानूनी रूप से
जवाब नहीं दे
पाए और माननीय
अध्यक्ष
महोदय, आप
जवाब दिलवाइए,
इससे ज्यादा
क्या हो सकता
है? आप कानून
बताइए।
श्री
अध्यक्ष:
श्री
शान्तिलाल
चपलोत।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
किस नियम के
तहत आप
ट्रांसफर कर
सकते हैं,
कौनसे नियम
हैं, आप कैसे
ट्रांसफर कर
सकते हैं?
श्री
अध्यक्ष:
अंकित न हो,
मैंने नैक्स्ट
क्वेश्चन
पुकार लिया
है, अंकित न
हो। मैंने
नैक्स्ट क्वेश्चन
पुकार लिया
है।
श्री
हरिमोहन शर्मा
(हिण्डौली): ***
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा): ***
श्री
अध्यक्ष:
मैंने नैक्स्ट
क्वेश्चन
पुकार लिया
है,
शान्तिलालजी
चपलोत।
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा): ***
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
***
श्री
अध्यक्ष: बता
तो दिया।
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा): ***
डा.
किरोड़ी लाल (खाद्य
एवं नागरिक
आपूर्ति
मंत्री):
माननीय सदस्य, यह इसलिए
नहीं हो रहा
कि हमने पूरे
राजस्थान भर
की रेट देखी
तो कई जगह
रेटों में
फर्क था 9.32 से
लेकर 10.35 तक,
रेगिस्तानी
और आदिवासी
इलाकों में
कहीं 10.35 था तो
कहीं 10.40 था, कहीं
कम था तो हमने
इसका इक्वेलाइजेशन
किया, क्योंकि
वह पैसा
उपभोक्ता का
था।
21.3.06/1120/gpc/akt/1c
(व्यवधान)..
डीलर की जेब
में जाता था।
आपके पास 10-20 रुपये
देकर जाऊंगा
तो आप 68 पैसे दे
दोगे क्या?
इसलिए उपभोक्ता
के शोषण को
रोकने की
दृष्टि से
उपभोक्ता
एक्टिविटीज
को प्रभावी
बनाने की
दृष्टि से यह
केरोसीन रेट
इक्वलाइजेशन
कोष बनाया है।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
***
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा): ***
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा): ***
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा): ***
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
***
श्री
अमराराम (धोद):
केरोसीन की दर
समान करने की
बात समझ में
आती है बराबर
मिले, लेकिन
इस नाम पर केरोसीन
लेने वालों से
13 करोड़ रुपये
वसूल करके यह
कहां तक न्यायोचित
है कि उन
विभागों में
कम्प्यूटर
खरीदने के लिए
उसका खर्चा कर
रहे हैं। कोष
बनाना था,
उपभोक्ताओं
को संरक्षण
देने के लिए
और उन उपभोक्ताओं
से एक साल में
..(व्यवधान)..
श्री
अध्यक्ष: भाषण
नहीं, आप
प्रश्न पूछ
लो। भाषण
नहीं।
श्री
अमराराम (धोद):
अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से मंत्री
महोदय से
जानना चाहता
हूं कि
केरोसीन मूल्य
समानीकरण के
नाम से राजस्थान
के उपभोक्ताओं
से 13 करोड़ के
लगभग जो वसूली
की गई है और उसका
सरकार अपने
कार्यालयों
को सुदृढ़
करने के लिए
काम कर रही है
..(व्यवधान)..
श्री
अध्यक्ष: आप फिर
भाषण देने लग
गये हैं।
श्री
अमराराम (धोद):
क्या यह उचित
है?
श्री
अध्यक्ष: बस हो
गया, बता
देंगे उचित है
या नहीं।
श्री
अमराराम (धोद):
आपने 13 करोड़
रुपये वसूल
किये नाजायज
रूप से,
समानीकरण ज्यादा-कम
वाले को बराबर
करते उनको
देते, इसकी बजाय
13 करोड़ रुपये
की वसूली करके
अपने विभागों
को सुदृढ़
करने का काम
कर रहे हैं।
क्या यह न्यायोचित
है?
डा.
किरोड़ी लाल (खाद्य
एवं नागरिक
आपूर्ति
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, ऐसा
नहीं है, मैं
सदन को सूचना
देना चाहता
हूं कि जितना
राजस्थान
में कंज्युमर
मूवमेंट तेजी
से चला है
उसका परिणाम
यह है कि
नेशनल लेवल पर
राजस्थान के
दो छात्रों को
अवार्ड दिया
है। राजस्थान
एक ऐसा राज्य
है जो कंज्युमर
मूवमेंट में
महाराष्ट्र
के बाद दूसरे
नम्बर पर
हमारे यहां की
एक छात्रा आई
है, एक बच्चा
यहां पर आया
है और जो यह कह
रहे हैं कोई
एकाध फोटोस्टेट
मशीन डीएसओ या
स्टेट लेवल
पर आफिस को स्ट्रेंथन
करने के लिए
खरीद ली हो वह
बात अलग है
वरना हमने
एनजीओ का सशक्तीकरण
किया है, हमने
डीएसओज् की स्ट्रेंथनिंग
की है, हमने
राशन टिकट
चलाया है, लम्बित
खाद्यान्न
परियोजनाओं
..(व्यवधान)..
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
इससे क्या
लेना-देना? आप
सरकारी पैसे
को उस रलिस्टर्ड
सोसाइटी को
कैसे
ट्रांसफर कर
सकते हैं, किस
नियम के तहत
आप ट्रांसफर
करते हैं
पैसा? आप किस
नियम के तहत
पैसा
ट्रांसफर
करते हैं?
श्री
अमराराम (धोद):
जनता से
केरोसीन का ज्यादा
पैसा वसूल
करके डीएसओ
कार्यालय के
कंप्यूटर के
लिए दो करोड़
रुपये ..(व्यवधान)..
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
अध्यक्ष
महोदय, इसके
पीछे सरकार की
मंशा यह थी कि इस
रुपये को
सरकार वसूल
करे और क्वाइटली
इसको
ट्रांसफर कर
दे एक सोसाइटी
को। क्योंकि
सोसाइटी का
अकाउंट होगा वह
सीएजी के परव्यू
से बाहर
रहेगा।
मनमाने तरीके
से आप इसको खर्च
करो, वरना
सरकार इस पैसे
को खर्च करती,
सरकार भी खर्च
कर सकती थी
कंज्युमर
मूवमेंट के
लिए। ऐसा कुछ
नहीं है आप ..(व्यवधान)..
आप एक मिनट
सुन लीजिए।
डा.
किरोड़ी लाल (खाद्य
एवं नागरिक
आपूर्ति
मंत्री): मैं
आपको बताऊं
हमारा चार
करोड़ रुपया
बार-बार पडा
रहा, हम कहते
रहे और हमको
चार करोड़
रुपया नहीं
मिला, आने के
बाद हमने वह
निपटा दिया और
50 परसेंट जो
सेंटर का शेयर
था वह शेयर
हमको नहीं
मिला तो मात्र
27 लाख रुपये
सेंटर का शेयर
मिला।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
माननीय
मंत्री महोदय, इसके
अंदर आपकी
सीधी भावना है
कि इस पैसे को
आप खर्च करने
की स्थिति में
सरकार नहीं
थी। सीधी बात
यह है कि आप
आडिट के परव्यू
में आते इससे
बचने के लिए
आपने क्वाइटली
रास्ता, गली
निकाली कि एक
सोसाइटी बना
दो और सोसाइटी
के माध्यम से
इस पैसे को
आराम से हम
खर्च कर
देंगे, मेरा
आपसे यह कहना
है कि कृपया
आप देखें।
श्री
अध्यक्ष: कहना
नहीं अब आप
प्रश्न
पूछें।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
दो-तीन बातें
यहां पर और कहीं
..(व्यवधान)..
श्री
अध्यक्ष: Question Hour is meant to seek the
information.
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
कि हमने कंज्युमर्स
के लिए लीगल
एड दी। आपने
कंज्युमर को
कहां दी?
श्री
अध्यक्ष: भाषण के
लिए नहीं। Question Hour is only to seek the
information
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
अध्यक्ष
महोदय, हम
इंफार्मेशन
ही ले रहे
हैं। हमारा
सीधा सरकार के
ऊपर आरोप है
कि सोसाइटी के
माध्यम से
सरकार अपने
चहेते एनजीओज.
को, अपने चहेते
लोगों को लाभ
पहुंचाने का
कार्य कर रही
है।
श्री
अध्यक्ष: आप भाषण
दे रहे हैं।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
मेरा यह आरोप
है। अगर नहीं है
तो आप कृपया
इसका उत्तर
दें।
श्री
अध्यक्ष: आप क्वश्चन
ऑवर का
दुरुपयोग कर
रहे हैं।
डा.
किरोड़ी लाल (खाद्य
एवं नागरिक
आपूर्ति
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, राजाखेड़ा
से आने वाले
माननीय सदस्य
ने जो चार्ज
लगाया कि अपने
एनजीओज् को
पैसा दे रहे
हैं, ऐसी कोई
बात नहीं है।
न हमारे एनजीओ
हैं, न इनके
कोई एनजीओ
हैं, एनजीओ
वही हैं जो
उपभोक्ता
कल्याण के
क्षेत्र में
काम करते हैं
जिनका आउटस्टेंडिंग
वर्क होता है
उसको भारत
सरकार 50 हजार रुपये
से ज्यादा
देती है उसमें
50 परसेंट
हमारा होता है
50 परसेंट उनका
होता है। एक
भी एनजीओ ऐसा
नहीं मिलेगा
जिसको हमने
पैसा दिया हो।
जो आपने बताया
है कि हमने
आडिट से बचने
के लिए यह किया
है, इसमें
डिप्टी
सेक्रेट्री,
फाइनेंस सदस्य
हैं और यह
जीएफ एण्ड आर
रूल्स का
सारा पालन कर
रहे हैं और
फाइनेंस की
अप्रूवल से यह
समिति बनी है,
इसलिए ऐसी कोई
बात नहीं है
कि हम इसका
दुरुपयोग कर
रहे हैं और
गैर संवैधानिक
है।
श्री
अध्यक्ष: श्री
शांतिलाल
चपलोत।
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
सोसाइटी कंज्युमर
बनाएंगे,
सरकार कैसे
बनाएगी? अध्यक्ष
महोदय, सोसाइटी
कंज्युमर की
है तो कंज्युमर
बनाएंगे, कंज्युमर
मेम्बर
थोड़े ही हैं
इसमें।
श्री
अध्यक्ष: नेक्स्ट
क्वश्चन।
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
आप कंज्युमर
का पैसा ले
रहे हैं तो
कंज्युमर
उसको शेयर
बनाएंगे।
का-आपरेटिव
मिनिस्टर
बैठे हुए हैं,
उपभोक्ता के
बिहाफ पर आप
सोसाइटी कैसे
बनाएंगे? उपभोक्ता
का यदि पैसा
है, उस पैसे से
बचाकर आप काम
कर रहे हैं तो
सोसाइटी का
उपभोक्ता ही
मेम्बर
बनाएगा।
डा.
किरोड़ी लाल (खाद्य
एवं नागरिक
आपूर्ति
मंत्री): अब एक
तरफ तो ये कह
रहे हैं
राजाखेड़ा से
आने वाले
माननीय सदस्य
कि आप एनजीओज्
को ..(व्यवधान)..
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
मैं यह नहीं
कह रहा हूं।
डा.
किरोड़ी लाल (खाद्य
एवं नागरिक
आपूर्ति
मंत्री): वे कह
रहे हैं।
श्री
अध्यक्ष: मैंने
नेक्स्ट क्वश्चन
पुकार लिया।
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
आपने खुद ने
उत्तर में
कहा है कि
अलग-अलग पैसे
की कीमत थी,
उसको करने के
लिए कहा है।
वह पैसा कंज्युमर
का था।
श्री
शांतिलाल
चपलोत (मावली):
प्रश्न संख्या
86 ।
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
कंज्युमर
मेम्बर बनकर
सोसाइटी
बनाये तब तो
समझ में आता
है, आप
सोसाइटी कंज्युमर
की तो बना
नहीं रहे और
कंज्युमर से
पैसे लेकर कर
रहे हो आप।
डा.
किरोड़ी लाल (खाद्य
एवं नागरिक
आपूर्ति मंत्री):
मैंने आपको
निवेदन कर
दिया।
श्री
अध्यक्ष: मैंने
नेक्स्ट क्वश्चन
पुकार लिया।
डा.
किरोड़ी लाल (खाद्य
एवं नागरिक
आपूर्ति
मंत्री):
जितना पैसा
आया वह कंज्युमर
के हित में
हमने खर्च
किया है। एक
पार्टी
दांये-बांये
हो गई तो मैं
कान पकड़कर
आपको मुर्गा
बनने के लिए
तैयार ..(व्यवधान)..
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
जो आदमी
को-आपरेटिव सोसाइटी
का मेम्बर हो
उसका हित होना
चाहिए।
श्री
अध्यक्ष: मैंने
दूसरा क्वश्चन
पुकार लिया।
..(व्यवधान)..
अंकित नहीं
हो। क्वश्चन
ऑवर तो
इंफार्मेशन सीक
करने के लिए
होती है। अब
आप आरोप कर
रहे हो इन पर।
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा): ***
श्री
अध्यक्ष: नेक्स्ट
क्वश्चन,
श्री
शान्तिलाल
चपरोत।
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा): ***
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): ***
श्री
अध्यक्ष: आप क्यों
खड़े हो रहे
हैं। I
have called the next question.
श्री
शान्तिलाल चपलोत।
गैर
शिक्षण
कार्यों हेतु
प्रतिनियुक्त
अध्यापक
86.
श्री
शांतिलाल
चपलोत (मावली):
क्या शिक्षा
मंत्री यह
बताने की कृपा
करेंगे:-
(1)
प्रदेश में
भिन्न-भिन्न
शिक्षकों के
कितने-कितने
पद कहां-कहां
रिक्त हैं?
जिलेवार संख्या
सूची सदन की
मेज पर रखें।
(2)
क्या यह भी
सही है कि कई
अध्यापक
विभिन्न
विभागों में
प्रतिनियुक्ति
पर हैं? यदि
हां, तो
कौन-कौन से
अध्यापक
कहां-कहां
प्रतिनियुक्त
हैं? विवरण
सदन की मेज पर
रखें।
(3)
क्या यह सही
है कि उक्त
स्थिति से
विद्यालयों
में अध्यापन
कार्य में
प्रतिकूल
प्रभाव पड़
रहा है? यदि
हां, तो क्या
सरकार तत्काल
उक्त अध्यापकों
की
प्रतिनियुक्ति
समाप्त कर
उन्हें अध्यापन
कार्य में
लगाने का
विचार रखती
है? यदि हां, तो
कब तक व नहीं,
तो क्यों?
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा): (1)
शिक्षकों के
रिक्त पदों
का विवरण
जिलेवार
परिशिष्ट ‘’क’’
संलग्न है।
(2)
जी हां।
प्रतिनियुक्त
अध्यापकों
का विवरण
परिशिष्ट ‘’ख’’
संलग्न है।
(3)
जी नहीं।
प्रतिनियुक्ति
से रिक्त हुए
पदों की
वैकल्पिक व्यवस्था
की जाकर
शिक्षण कार्य
को सुचारू रूप
से सम्पन्न
कराया जा रहा
है। अध्यापकों
की
प्रतिनियुक्ति
डीपीईपी, सर्व
शिक्षा योजना,
महिला बाल
विकास एवं
समाज कल्याण
के आवासीय
विद्यालयों
में की हुई है
जो समस्त
शिक्षा से
जुड़े आयामों
में ही कार्य
कर रहे हैं।
श्री
शांतिलाल
चपलोत (मावली):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपकी अनुमति
से माननीय
मंत्रीजी से
पूछना चाहता
हूं कि आपने
परिशिष्ट ‘’क’’
में सेकण्ड
ग्रेड और थर्ड
ग्रेड अध्यापकों
के रिक्त
पदों की संख्या
सारे राजस्थान
में 5778 और 20595
बतायी है। यह
परिशिष्ट क
पर है और उसकी
कुल संख्या 26173
होती है।
दूसरी तरफ
आपने परिशिष्ट
क एक दूसरा और
है उसमें आपने
बताया है कि
सारे राजस्थान
में व्याख्याता
के 4601, वरिष्ठ
अध्यापक के 7970
और दूसरे अध्यापकों
के थर्ड ग्रेड
के 3123 पद खाली
हैं। मुझे यह
समझ में नहीं
आया आपका यह
परिशिष्ट
सही है या यह
सही है? उस परिशिष्ट
से पहला जो
परिशिष्ट है
उससे तो कुल
मिलाकर 26173 पद
रिक्त आते
हैं और जो
परिशिष्ट है
उसके हिसाब से
15694 पद ही आते
हैं। उसमें से
कौनसा सही है
यह माननीय
मत्री महोदय,
स्पष्ट
करने का कष्ट
करें।
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
माननीय सदस्य
को जानकारी
देना चाहूंगा
कि जो पहला
परिशिष्ट है
वह प्रारंभिक
शिक्षा का है।
उसमें कुल 1,87,530 स्वीकृत
पद हैं जिसमें
से 20595 पद रिक्त
हैं वह केवल 11
परसेंट है।
इसी तरह से
सेकण्ड
ग्रेड के 18430 पद
स्वीकृत हैं
उसमें से 5778
रिक्त पद
हैं। सैकण्डरी
सैट अप में जो
जानकारी आपके
पास हमने भिजवायी
है परिशिष्ट
ख पर उसमें व्याख्याता
के 17763 पद स्वीकृत
हैं उसमें से 4601
रिक्त हैं।
वरिष्ठ अध्यापकों
के 36324 पद स्वीकृत
हैं उसमें से 7970
रिक्त हैं।
mlb/akt/1d/1130.21.3.2006
अध्यापकों
के 14383 पद स्वीकृत
हैं इनमें से 3123
पद रिक्त हैं
इनमें से केवल
1720 पद
प्रतिनियुक्ति
पर हैं जो
केवल 0.8 परसेंट
है। ...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष: मूल
प्रश्नकर्ता।
...(व्यवधान)...
श्री
शांतिलाल
चपलोत (मावली):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं आपके
माध्यम से यह
जानना चाहता
हूं कि सैकण्डरी
स्कूल में और
हायर सैकण्डरी
स्कूल में व्याख्याता
होते हैं,
हायर सैकण्डरी
स्कूल में,
अब 4601 पद आप रिक्त
रखो और सैकण्ड
ग्रेड के भी
इतने हैं 7970 पद
रिक्त रखे
हैं तो किस
प्रकार से
शिक्षण कार्य चल
पाएगा इसीलिए
कई विषयों में
अध्यापक
नहीं होने से
बच्चों को
अभी इम्तिहान
में काफी
तकलीफ आ रही
है। मैं
माननीय
मंत्री महोदय
से यह जाना
चाहता हूं कि
आप यह रिक्त
पद कुल मिलाकर
26 हजार या
जितने भी
बताये हैं, यह
आप कब तक भर
देंगे ?
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, हमारी
सरकार आने के
बाद हमने 2838
डीपीसी के
द्वारा और 1019
तदर्थ पदोन्नति
के द्वारा व्याख्याताओं
के पद भरे हैं,
साथ में 1407 पद
आरपीएससी के द्वारा
भरे जा रहे
हैं, 18 विषयों
के जिनकी स्वीकृति
आनी शुरू हो
गई है उसमें
से पहली सूची
में 34 पद आये
हैं जिनका हमने
पदस्थापन कर
दिया है। इसी
तरह वरिष्ठ
अध्यापकों
के भी 1762 पद हमने
सीधी भर्ती के
द्वारा भरे
हैं और 1618 पद
डी.पी.ई.पी. के
द्वारा, इस
तरह 3380 पद भरे
गये हैं, फिर
अभी बजट में
माननीय मुख्य
मंत्री जी ने
घोषणा की है
कि हम 26 हजार पद
थर्ड ग्रेड के
और 5 हजार सैकण्ड
ग्रेड के हम
भरने के लिए
जा रहे हैं।
मैं एक जानकारी
आपको और देना
चाहूंगा कि जब
बीजेपी की सरकार
माननीय
भैरोंसिंह जी
मुख्य
मंत्री थे उस
समय 21736 पद भरे
गये, कांग्रेस
के पाँच साल
के अन्दर
केवल 443 पद भरे
गये और पिछले
दो साल में 35560 पद
भरे गये और 31
हजार पद हम और
भरने के लिए
जा रहे हैं।
...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष:
माहिर आजाद ।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं आपके
माध्यम से
माननीय
शिक्षा राज्य
मंत्री जी से
यह पूछना
चाहता हूं कि
इस सवाल का
जवाब लगभग सौ
पेजों पर आपने
दिया है, आपके
पास भी होगा,
आपने इन अध्यापकों
को
प्रतिनियुक्ति
पर महिला बाल
विकास विकास
में, समाज कल्याण
में, सर्व
शिक्षा योजना
में और दूसरे
विभागों में
लगा रखा है।
मैं आपके माध्यम
से यह जानना
चाहता हूं कि
यह अध्यापक
प्रतिनियुक्ति
पर कब से लगे
हुए हैं, क्या
इनमें कुछ ऐसे
अध्यापक भी
हैं जो 2-2, 3-3 साल
से दूसरे
विभाग में
लगातार
प्रतिनियुक्तियों
पर हैं और
शैक्षणिक कार्य
उससे
प्रभावित हो
रहा है। दूसरा
आपने जो सूची
दी है, जवाब
दिया है।
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आपके माध्यम
से मैं यह
जानना चाहता
हूं कि
बाड़मेर में तो
सैकण्ड
ग्रेड के 283 और
थर्ड ग्रेड के
1914 पद रिक्त
हैं, समझ में
आता है, चित्तौड़
में सैकण्ड
ग्रेड के 290 और
थर्ड ग्रेड के
1360 हैं, नागौर
में सैकण्ड
ग्रेड के 388 और
थर्ड ग्रेड के
1182 हैं लेकिन
झुंझुनूं
जिला जहां तो
शिक्षकों की
बहुतायत है,
जो शिक्षा के
क्षेत्र में
अग्रणीय है,
वहां भी आपने
पाँच सौ अध्यापकों
के रिक्त पद
छोड़े हुए हैं
और फिर वहां
के अध्यापकों
को भी दूसरे
विभाग में
आपने
प्रतिनियुक्ति
पर लगा रखा
है। माननीय
मावली से आने
वाले सदस्य
ने स्पेसिफिक
सवाल यह पूछा
था कि आप इन
प्रतिनियुक्तियों
को समाप्त
करके इन अध्यापकों
को वापस इनके
विभाग में और
विद्यालयों
में भेजने का
इरादा रखते
हैं ? यदि हां,
तो कब तक और
नहीं तो क्यों
?
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं आपके
माध्यम से
सिर्फ दो
बातें माननीय
मंत्री जी से
जानना चाहता
हूं कि एक तो
आपने जो पद
भरे हैं उसमें
प्लान में
कितने पद भरे
हैं और नॉन प्लान
में कितने पद
भरे हैं, यह
जानकारी दे
दें और दूसरा
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मंत्री
महोदय ने जो
उत्तर दिया
है कि आपने यह
सारी शिक्षकों
की
प्रतिनियुक्ति
शिक्षा के
आयामों से जुड़े
हुए विभागों
में है, वह गलत
है, आपने
एसडीएम आफिस
पर, आपने
एडीएम और
बीडीओ आफिस
में भी शिक्षकों
की
प्रतिनियुक्ति
की हुई है तो
क्या सरकार
जो यह राजस्व
अधिकारियों
के
कार्यालयों
में शिक्षकों
की
प्रतिनियुक्ति
की है, क्या
उसको निरस्त
करने का विचार
रखती है ?
श्री
अध्यक्ष:
डी.पी.ई.पी. में
भी कर रखी है।
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, जो
माननीय सदस्य
का प्रश्न
था, कुल
प्रारम्भिक
शिक्षा में 1720
पद प्रतिनियुक्ति
पर शिक्षक हैं
जिनमें से 1579
डी.पी.ई.पी. में
हैं, साक्षरता
में 8 हैं, महिला
बाल विकास
विभाग में 7
हैं, समाज कल्याण
आवासीय
विद्यालय
छात्रावास
में 60 हैं। इस
तरह 1654 शिक्षा
से जुड़े हुए
कामों से ही
हैं, केवल 66 लोग
सारे जिसमें
एसडीएम, रसद
विभाग, निर्वाचन
कार्यालय, नगर
निगम, जिला
परिषद्,
तहसील, पंचायत
समिति, कुल
मिलाकर के 2
लाख 30
कर्मचारियों
में से केवल 66
कर्मचारी हैं
। इसी तरह
सैकण्डरी
सैट-अप में
कुल 582
प्रतिनियुक्ति
पर हैं उसमें
से केवल 4 ऐसे
हैं जो
शैक्षणिक
कार्यों में
नहीं हैं,
बाकी सारे के
सारे
शैक्षणिक
कार्यों में
हैं, यह जाकर
के .1 या .2 परसेंट
भी नहीं होते
। इसीलिए इसका
शैक्षणिक
कार्यों में
किसी प्रकार का
कोई असर नहीं
होता, आवश्यकता
हुई, हमने
पिछले दिनों
सैकण्डरी
सैट-अप में 4660
लोगों को
शैक्षणिक काम
में ही भेजा
था उनको वापस 28
फरवरी को हमने
उनकी नियुक्ति
समाप्त करके
ओरिजनल स्थान
पर भेज दिया
है। ...(व्यवधान)...
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): मेरे
दोनों प्रश्नों
का आपने जवाब
नहीं दिया
मंत्री जी।
...(व्यवधान)... पहला तो
मेरा प्रश्न
यह है कि
कितनी पोस्ट
आपने प्लान
में भरी और
कितनी नॉन प्लान
में भरी, पहला
तो क्वेश्चन
यह है, इसका
जवाब दो आप और
जो
प्रतिनियुक्ति
गैर शैक्षणिक
कार्यों में
की है, एक
शिक्षक को
आपने ऐसे
विभाग में लगा
दिया जहां
शिक्षा का काम
नहीं है तो
उसकी पूरी
प्रतिभा नष्ट
हो जाएगी।
इसलिए क्या
इनको वापस
बुलाने का
विचार रखते हो
? दोनों स्पेसिफिक
बात पूछी है।
...(व्यवधान)...
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): अध्यक्ष
महोदय, मेरा तो
स्पेसिफिक
सवाल यह था कि
क्या इनमें
से दो वर्ष से
ज्यादा समय
से
प्रतिनियुक्ति
पर कितने गअध्यापक
हैं और आप क्या
इनकी
प्रतिनियुक्ति
समाप्त करके
इनको इनके
मूलविभाग में
भेजने का
विचार रखते
हैं क्या ? ...(व्यवधान)...
श्री
सुभाष चन्द्र
शर्मा
(कोटपूतली):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
मंत्री जी से
एक बात निवेदन
करना चाहता हूं
कि डी.पी.ई.पी.
में जितने
पदों की
नियुक्ति राजस्थान
सरकार ने दी
है, डी.पी.ई.पी.
के अध्यापक
अध्यापन कार्य
से हट कर केवल
भवन निर्माण
में लग गये हैं,
क्या राजस्थान
सरकार यह नीति
निर्धारित
करना चाहती है
कि डी.पी.ई.पी.
की नियुक्ति
के लिए कोई और
कैडर के अधिकारी
और कर्मचारी
नियुक्त करे
और उन अध्यापकों
को वापस मूल
विभाग में भेज
कर शिक्षा अध्ययन
का काम पूरा करवाए,
क्या सरकार
यह करना चाहती
है ?
डा. ओ.
पी. महेन्द्रा
(केसरीसिंहपुर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से माननीय
मंत्री जी से
जानना चाहता
हूं कि गत
वर्ष
आरपीएससी में
जितने रिक्त
पदों के लिए
आरपीएससी के
माध्यम से
नियुक्ति के
लिए परिपत्र
भेजा गया था
उसमें से
कितने अध्यापकों
को नियुक्ति
दे दी गई, शेष
जो बचे क्या
यह अनुसूचित
जाति, जनजाति
के पद रिक्त
हैं, मैं तो
मंत्री जी से
यह जानना
चाहता हूं कि
जो शेष बचे
हैं जिनके
बारे में मुझे
मालूम हुआ है
कि अनुसूचित
जाति, जनजाति
के हैं क्या
उनको आरपीएससी
के माध्यम से
नियुक्त
करने का प्रस्ताव
रखते हैं या
नहीं ? ...(व्यवधान)...
श्री
कन्हैया लाल
मीणा (बस्सी):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से निवेदन
करना चाहूंगा
माननीय
मंत्री महोदय
से ... ...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष:
मैंने आपका
नाम कब पुकारा
? ...(व्यवधान)...
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): अध्यक्ष
महोदय,
हमारे सवाल का
जवाब तो
दिलवाएं। ...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष:
इनका जवाब
पहले आने
दीजिए।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): हमारा
जवाब आया ही
नहीं कि यह प्रतिनियुक्ति
पर कब से गये
हुए हैं, आप यह
तो बताओ कि कब
से लग रहे हैं
ये।
श्री
अध्यक्ष:
जवाब आने
दीजिए।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): कब से
प्रतिनियुक्ति
पर हैं और कब
खतम करेंगे यह
बताइए।
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा): अध्यक्ष
महोदय,
प्रतिनियुक्ति
पर संबंधित
विभागों के
द्वारा मांगे
जाने पर दी
जाती है उसकी
कोई समय अवधि
नहीं है, कोई
साल से है, कोई
दो साल से है,
कोई तीन साल
से है, जब भी
विभाग को,
चूंकि मैंने
गिनती करके
बताये हैं कि
दो लाख में से
केवल 50 या 60 लोग हैं
जब आवश्यकता
होगी सरकार
निश्चित रूप
से उनको
बुलाएगी, इतना
मैं आश्वस्त
कर सकता हूं
बाकी जहां तक
प्लान नॉन प्लान
टोटल को ध्यान
में धरे, इसको
अलग से बताने
की कोई आवश्यकता
नहीं है। ...(व्यवधान)...
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): कैसे
आवश्यकता
नहीं है, आप
फालतू की
डींगें हांक
रहे हो। ...(व्यवधान)...
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): आपके पास
कोई जानकारी
नहीं है तो बाद
में गिनती
करके बता दें
आप। ...(व्यवधान)...
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही):
राजस्थान
सरकार का
कितना पैसा
खर्च किया
आपने, बताइए
आप। ...(व्यवधान)...
सारे पैसे
खाली पड़े हुए
हैं आज। ...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्यगण,
सिरोही आने
वाले माननीय
सदस्य
मंत्री जी, एक
अवधि होती है
डेपुटेशन की,
तीन साल से ज्यादा
नहीं लग सकते
और उसके बाद
एक साल का एक्सटेंशन
दे सकते हो
उससे अधिक
नहीं रख सकते।
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा):
साधारणतया
इससे ज्यादा
नहीं हैं फिर
भी यदि कोई
होगा तो उसकी
जांच करके हम
बुला लेंगे।
श्री
सुभाष चन्द्र
शर्मा
(कोटपूतली):
अध्यक्ष
महोदय,
डी.पी.ई.पी. के
लिए कोई कैडर
निर्धारित
करने के लिए
माननीय
मंत्री जी ने
कोई जवाब नहीं
दिया, डी.पी.ई.पी.
के लिए कोई
कैडर
निर्धारित
करेंगे क्या
और उन अध्यापकों
को मूल विभाग
में भेजने का
काम करेंगे क्या
? ...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष:
आपने जो लिस्ट
दी है उस लिस्ट
को ही देख
लीजिए, सन् 2001 से
बैठे हुए हैं
कई लोग तो।
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा): मैं
इनको जो भी
चार वर्ष से
ज्यादा
होंगे इनकी
करके निश्चित
रूप से हम
इनको वापस
बुलाएंगे।
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री):
डेपुटेशन पर
पाँच साल तक
रह सकते हैं।
...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष:
नहीं, आप गलत
कह रहे हैं।
...(व्यवधान)...
तीन साल है और
एक साल का एक्सटेंशन
है।
श्री
अमराराम (धोद):
अध्यक्ष
महोदय, यह
जो डी.पी.ई.पी.
के 1700 अध्यापकों
को
प्रतिनियुक्ति
पर लगा रखा
है। ...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष: अब
बात हो गई है,
उन्होंने कह
दिया, आप स्थान
ग्रहण करें।
...(व्यवधान)...
डा. ओ.
पी. महेन्द्रा
(केसरीसिंहपुर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
हमारे प्रश्न
का जवाब नहीं
आया। ...(व्यवधान)...
माननीय अध्यक्ष
महोदय, एक
प्रश्न पूछा
था। ...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष: स्थान
ग्रहण कीजिए।
...(व्यवधान)... अब
मैं किसी को
अलाउ नहीं
करूंगी, स्थान
ग्रहण करें।
skp/akt/21.3.06/1140/1e
श्री
अमराराम (धोद):
डी पी ई पी
योजना थी वह
दिसम्बर, 2005
में समाप्त
हो गई है और आप
उत्तर दे रहे
हैं कि अभी भी 1700
अध्यापक डी
पी ई पी योजना
में
प्रतिनियुक्ति
पर हैं। योजना
ही दिसम्बर, 2005
में जब समाप्त
हो गई है...
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा): 2007 तक
बढ़ गई है।
एक
माननीय सदस्य:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैंने
आपके माध्यम
से प्रश्न
किया था कि आर
पी एस सी के
माध्यम से
कितनी रिक्वीजिशन
भेजी थी और
कितने अध्यापकों
को
नियुक्तियां
दे दी और शेष
जो बचे है एस
सी, एस टी के
उनको कब तक
नियुक्ति
देने का विचार
रखते हैं। (व्यवधान)
श्री
सुभाष चन्द्र
शर्मा
(कोटपूतली):
मंत्री महोदय
ने जवाब नहीं
दिया कि दूसरा
कैडर रखेंगे
क्या आप डी
पी ई पी में ?
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा): आर
पी एस सी के
पास 1820 पदों के
आवेदन मांगे
हैं, जब भी
प्राप्त
होते हैं हम
नियुक्तियां
दे देंगे। (व्यवधान)
श्री
सुभाष चन्द्र
शर्मा
(कोटपूतली): आप
डी पी ई पी में
दूसरा कैडर
बना रहे हैं
या नहीं ? एक तो
मंत्री महोदय
इसका जवाब
दीजिये और अध्यापकों
को मूल विभाग
में भेज रहे
हैं या नहीं भेज
रहे हैं ? (व्यवधान)
श्री
रघुवीर सिंह
मीणा (सराड़ा):
मंत्री महोदय,
प्लान से
कितने पद भरे
हैं और नॉन प्लान
से कितने पद
भरे हैं, यह तो
बता ही नहीं
रहे हैं आप।
(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
अंकित नहीं
हो।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ***
श्री
कन्हैया लाल
मीणा (बस्सी): ***
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ***
श्री
अध्यक्ष: आसन
ने एक बार, ये
चार साल से
अधिक जो भी होंगे
उनकी
प्रतिनियुक्ति
खतम हो जाएगी,
यह बात आ गई।
(व्यवधान)
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ***
श्री
रघुवीर सिंह
मीणा (सराड़ा): ***
श्री
कन्हैया लाल
मीणा (बस्सी): ***
श्री
अध्यक्ष: आसन
को तो सुनाई
नहीं देता, आप
एक साथ बोलते
हैं। (व्यवधान)
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ***
श्री
शंकर सिंह
राजपुरोहित
(आहोर): ***
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्यगण,
सिरोही से
आने वाले
माननीय सदस्य,
आप कोई विशेष
हो क्या कि
आसन खड़ा होता
है और आप परवाह
ही नहीं करते
इस बात की।
सिरोही से आने
वाले माननीय
सदस्य, आप
प्रश्न को
फिर से
पढि़ये।
इसमें कहीं
नॉन प्लान और
प्लान में
कितने-कितने
हैं, आपने कोई
पूछा नहीं है
और जो उनके
पास इन्फार्मेशन
थी वो उन्होंने
दे दी। मैं
बाध्य नहीं
कर सकती
मंत्री जी को
इस बात के लिए
कि जो प्रश्न
में पूछा नहीं
गया है उससे
अतिरिक्त भी
वो आपको सूचना
दें। मैं बाध्य
नहीं कर सकती।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ***
श्री
अध्यक्ष: कोई
आवश्यक नहीं
है। गलत बात
है। नहीं, अब
कुछ नहीं। चर्चा
समाप्त।
नैक्स्ट क्वेश्चन।
समाप्त हो गया।
श्री बहादुर
सिंह गोदारा।
स्थान ग्रहण
कर लें। स्थान
ग्रहण करें।
रेगिस्तान
प्रसार के रोक
हेतु
कार्य-योजना
87.
श्री बहादुर
सिंह गोदारा
(नोहर): क्या
वन मंत्री यह
बताने की कृपा
करेंगे:-
(1)
सरकार द्वारा
गत पाँच
वर्षों में
बढ़ते हुए रेगिस्तान
को रोकने के
लिए क्या
उपाय
कहां-कहां
किये गये तथा
इससे कहां-कहां
कितने
क्षेत्र में
बढ़ता रेगिस्तान
रुका?
(2) क्या
सरकार उन
वृक्षों, जो
सूख गये हैं,
अन्धड़ से
गिर जाते हैं
अथवा जिनकी
अंधाधुंध कटाई
हो रही है, को
रोकने का
विचार रखती है
? यदि हां, तो कब
तक व कैसे? यदि
नहीं, तो क्यों
?
(3) क्या
सरकार यह वन
भूमि जिसमें न
वृक्ष हैं न
घास है, का
समुचित उपयोग
करने का विचार
रखती है ? यदि
हां, तो कैसे व
कब तक तथा
नहीं, तो क्यों
?
वन
एवं पर्यावरण
मंत्री (श्री
लक्ष्मीनारायण
दवे): (1) बढ़ते
रेगिस्तान
को रोकने के
लिये गत पाँच
वर्षों में
विभिन्न
योजनाओं के
अन्तर्गत 12
मरूस्थलीय
जिलों में 1.03
लाख हैक्टर
क्षेत्र में
वृक्षारोपण
का कार्य
करवाया गया
है। कृषि
वानिकी के
अंतर्गत इन
जिलों में 221.46
लाख पौधों का
वितरण किया
गया है।
जिलेवार विवरण
संलग्न
परिशिष्ट 'क'
में दर्शाया
गया है। किस
स्थान पर
कितने
क्षेत्र में
बढ़ता रेगिस्तान
रूका इसका कोई
वैज्ञानिक
अध्ययन नहीं
कराया गया है।
कराये गये
कार्यों से मरूस्थलीय
क्षेत्रों की
हरितिमा में
वृद्धि हुई है।
साथ ही इन
क्षेत्रों
में मिट्टी
उड़ने एवं धूल
भरी आंधियां
चलने में भी
कमी आई है।
(2)
इन्दिरा
गांधी नहर
परियोजना के
प्रथम चरण क्षेत्र
में भारत
सरकार द्वारा
स्वीकृत
कार्य योजना
के अनुसार
परिपक्व
वृक्षों का
विदोहन कराया
जा रहा है।
आंधी, तूफान
से गिरे पड़े
वृक्षों की
लकड़ी,
विभागीय कार्य
इकाईयों को
संभलायी जा
रही है।
विभागीय कार्य
इकाईयों
द्वारा
एकत्रित
लकड़ी का
नियमानुसार
निस्तारण
किया जा रहा
है। वृक्षों
के अवैध कटान
की रोकथाम के
कार्य स्थानीय
वनकर्मियों
एवं गश्ती
दलों द्वारा
किया जा रहा
है।
(3)
वृक्ष विहीन
एवं कम वनस्पति
वाले वन
क्षेत्रों को
उपलब्ध वित्तीय
संसाधनों के क्षेत्र
विशेष की
स्थिति के
अनुसार
वृक्षारोपण
एवं चरागाह
विकास के
कार्य करवाये
जाकर विकसित
किया जा रहा
है।
श्री
बहादुर सिंह
गोदारा (नोहर):
अध्यक्ष
महोदय, मैं
माननीय
मंत्री जी से
जानना चाहता
हूं कि आपने
केवल इतना ही
बताया है कि
हमने इतने
वृक्ष लगाये
हैं। आपने यह
नहीं बताया कि
आपने रेगिस्तान
रोकने के लिए
क्या उपाय
किये हैं।
केवल आपने
सड़कों के
किनारे, नहरों
के किनारे,
गोचर भूमि में
वृक्ष लगवा दिये
उससे रेगिस्तान
नहीं रुक
सकता। काश्तकार
के खेतों से
रेत का उठाव
हो रहा है और
उससे रेगिस्तान
फैलता जा रहा
है। उसको
रोकने के लिए
आपने कहीं कोई
उपाय नहीं किये।
दूसरा,
आपने जवाब
दिया कि किस
स्थान पर
कितने
क्षेत्र में
बढ़ता रेगिस्तान
रुका, इसका
वैज्ञानिक
अध्ययन नहीं
कराया गया है।
आपने इतना
भारी भरकम खर्च
करने के
बावजूद आज
इतने सालों के
बावजूद यह
असैस करने की
कोशिश ही नहीं
की कि रेगिस्तान
बढ़ता हुआ
कहां रुका है,
कितने
क्षेत्र में
रुका है। इसका
मतलब यह हुआ
कि आपने आज तक
जो रेगिस्तान
रोकने के लिए
पैसा खर्च
किया है वह
पैसा बर्बाद
हुआ है और
उसका कोई
रिजल्ट नहीं
निकला है।
श्री
अध्यक्ष:
भाषण नहीं, आप
प्रश्न
पूछिये।
प्रश्न
पूछिये।
श्री
बहादुर सिंह
गोदारा (नोहर):
रेगिस्तान
बढ़ता जा रहा
है, रुकने का
नाम नहीं ले
रहा है और
आपका यह सारा
पैसा बेकार
गया है।
श्री
अध्यक्ष:
प्रश्न
पूछिये।
श्री
बहादुर सिंह
गोदारा (नोहर):
क्या आप इसे
रोकने का कोई
उपाय करने का
विचार रखते हैं
?
श्री
लक्ष्मीनारायण
दवे (वन एवं
पर्यावरण
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, राजस्थान
का 2/3 भाग मरूस्थलीय
क्षेत्र है और
वह करीब 2 लाख 10
हजार वर्ग किलोमीटर
क्षेत्र है।
माननीय सदस्य
ने रेगिस्तान
को रोकने के
लिए जो बात
कही है, टीबा
स्थिरीकरण की
योजनाएं
करीबन 1500 वर्ग
किलोमीटर
क्षेत्र के
अन्दर यह
कार्य राज्य
सरकार के
द्वारा कराया
गया और मरू
प्रसार योजना,
मरू गोचर
योजना और
राजस्थान
जैव विविधता
परियोजना के
तहत कार्य
किये जा रहे
हैं। माननीय
अध्यक्ष
महोदय, राजस्थान
के इन 12 जिलों
में मरू
प्रसार रोकने
की जो योजना
है यह निजी
काश्तकारों
के लिए नहीं
है। जहां
चरागाह भूमि
है, सिवाय चक
लैंड है उन
लैण्ड में
रोकने के लिए
इन योजनाओं के
तहत मरू प्रसार
योजना है, मरू
गोचर योजना
का, राजस्थान
जैव विविधता
योजना के
द्वारा कार्य
कराया जा रहा
है। माननीय
सदस्य जो चाहते
हैं, 1978 और 1980 में
एक व्यक्तिगत
लाभार्थ
योजना
प्रारम्भ की
गई थी उसके
अन्दर किसान
अपने खेत के
अन्दर अगर प्लांट
लगाता था तो
एक योजना थी
कि उस योजना
के अन्दर
अनुदान के रूप
में दो रुपये
प्रति व्यक्ति
मिलते थे।
अगले वर्ष अगर
वो पेड़ सरवाइव
होता था तो एक
रुपया अनुदान
और दिया जाता
था और उसके अगले
वर्ष अगर वह
पेड़ सरवाइव
होता तो एक
रुपया और दिया
जाता था। यह
योजना 1980 तक थी
उसके बाद में
यह योजना
समाप्त हो
गई।
श्री
बहादुर सिंह
गोदारा (नोहर):
मैं माननीय
मंत्री जी से
यह भी जानना
चाहता हूं,
इंदिरा गांधी नहर
योजना में कई
जगह जहां आपने
सड़कों के किनारे
वृक्ष लगाये
वे वृक्ष सूख
रहे हैं,
आंधी-तूफान से
गिर जाते हैं,
आये दिन लोग
लकड़ी चुराकर
के ले जाते
हैं, दिन-रात
देखते हैं।
मैंने आपको कई
बार लिख कर भी
दिया है पर उन
वृक्षों को बचाने
के लिए आप कोई
उपाय नहीं कर रहे
हैं जहां
करोड़ों
रुपये का आपका
नुकसान हो रहा
है। दूसरा
मेरा आपसे
निवेदन है कि...
श्री
अध्यक्ष: आप
प्रश्न
पूछिये न।
आपने यह तो
पूछ लिया।
श्री
बहादुर सिंह
गोदारा (नोहर):
मैं एक सवाल
और पूछना
चाहता हूं कि
हमारे एक कोला
फार्म है
जिसकी हजारों
एकड़ बहुत ही
उपयोगी जमीन
है। उसमें न
तो आपके वृक्ष
लगे हुए हैं, न
आप उसका उपयोग
कर रहे हैं।
आपने उस जमीन
को रोककर रख
रखा है और
उसके ऊपर आपका
विभाग भी
तैनात है,
उसमें आपके
कर्मचारी भी
तैनात हैं।
जैतसीसर का
फार्म है, इसी
तरह से
जैसलमेर का
फार्म है।
वहां आपके
करोड़ रुपये
सालाना खर्च
हो रहे हैं
लेकिन उस जमीन
का कोई उपयोग
नहीं हो रहा
है।
श्री
अध्यक्ष: वन
की मांग है उस
पर बोलना आप
यह सब। आज वन की
भी मांग है उस
पर आप खूब
बोलना, यह बात
उस समय कहना।
श्री
जयराम जाटव
(खैरथल):
माननीय अध्यक्ष
जी, मेरा एक
सप्लीमेंट्री
क्वेश्चन
है। माननीय
मंत्री जी के
माध्यम से
मैं थोड़ी
जानकारी
चाहता हूं कि
वन का जो
क्षेत्र
राजस्व
रिकार्ड में, 500
वर्षों से,
हजार वर्षों
से राजस्व
रिकार्ड में
जो गांव बसे
हुए हैं,
आबादी है, हजार
की, 1500 की आबादी
है...
श्री
अध्यक्ष:
रेगिस्तान
के प्रसार के
रोक हेतु है
यह कार्य
योजना।
श्री
जयराम जाटव
(खैरथल): उनके
बीच में 400-500
मीटर की दूरी
में वन विभाग
आ जाता है। उन
रोड को रोक
दिया गया। ऐसे
गांवों के
हालात अब तक 500
साल के बाद भी
जर्जर हैं।
उनकी क्या व्यवस्था
है ? मंत्री
महोदय, यह
जवाब दें।
vkj/akt/1150/1f
श्री
अध्यक्ष:
बिराजिये। स्थान
ग्रहण करें।
श्री
लक्ष्मीनारायण
दवे (वन एवं
पर्यावरण
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, राजस्थान
में वन
क्षेत्र में 1980
के पूर्व...
श्री
अध्यक्ष:
नहीं, आज वन पर
विचार भी हो
रहा है, उस समय
आप अपनी बात
कहना।
श्री
लक्ष्मीनारायण
दवे (वन एवं
पर्यावरण
मंत्री): 1980 के पूर्व
वन क्षेत्र,
वन आबादी में
जो लोग रहते
थे, कल्टीवेशन
करते थे, उनके
नियमन की
कार्यवाही,
ऐसे 5466 प्रकरण
थे, उनको राज्य
सरकार द्वारा
नियमन करने के
लिए भारत
सरकार को भेजा
गया था और
भारत सरकार ने
नियमन की
प्रक्रिया प्रारम्भ
की थी पर
सुप्रीम
कोर्ट के आदेश
के कारण स्थगन
आदेश प्राप्त
हुआ, इसके
कारण भी मामले
लम्बित हैं,
सुप्रीम
कोर्ट के आदेश
के बाद में
इनके नियमन की
कार्यवाही की
जायेगी।
श्री
अध्यक्ष:
श्री जुबेर
खान।
विधान
सभा क्षेत्र
रामगढ़(अलवर)
में कंसखाल
नहर की स्वीकृति
88.
श्री जुबेर
खान (रामगढ़):
क्या सिंचाई
मंत्री यह
बताने की कृपा
करेंगे:-
(1)
क्या यह सही
है कि विधान
सभा क्षेत्र
रामगढ़(अलवर)
में कंसखाल
नहर योजना की
स्वीकृति
हेतु तकमीना
भेजा गया है?
यदि हां, तो उपरोक्त
योजना हेतु
कितनी राशि की
आवश्यकता
होगी? विवरण
सदन की मेज पर
रखें।
(2)
सरकार उपरोक्त
योजना की स्वीकृति
कब तक जारी
करने का विचार
रखती है? यदि नहीं,
तो क्यों?
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): (1) जी
हां। इस कार्य
पर 90.00 लाख रुपये
का व्यय होने
का अनुमान है।
(2)
परीक्षण के
बाद निर्णय
लिया जायेगा।
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, खण्ड
'अ' में तो
मंत्री महोदय
ने माना है कि
एक ऐसी समस्या
है, कंसखाल एक
योजना है
जिससे 25-30
गांवों के लिए
बरसात का पानी
जो पहाड़ों से
बहकर आता था,
उन गांवों में
जाता था और उन
गांवों में
गेहूं बगैर
पानी के होता
था, ढहरी
इलाका था,
लेकिन 1995 में
बाढ़ आने के
कारण इसका
डाइवर्सन हो
गया और यह
सारा पानी
रूपारेल में
गिरकर निकल
जाता है।
श्री
अध्यक्ष:
प्रश्न
पूछो,प्रश्न
पूछो।
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): आप
जिले के
प्रभारी भी
हो। यह लम्बे
समय से मांग
चल रही है।
मेरा आपसे
निवेदन है कि
आप किसान हो
और आपके बारे
में यह भी है
कि आप किसान
के बारे में
चिंतित हो। जब
जहां 20-25 गांवों
का भला हो
सकता है, पानी
वेस्ट जा रहा
है, वह इसमें आ
सकता है, आप
इसको कब तक बनवाने
का विचार रखते
हो? आज इसकी स्वीकृत
करने की घोषणा
करिये मंत्री
महोदय, जहां
पानी के
संरक्षण के
लिए आप
तरह-तरह के
सेमिनार कर रहे
हैं, जन जागरण
अभियान चला
रहे हैं,
विभाग का नाम
बदल रहे हैं
और यह ऐसा
मुद्दा है, आप
उसके ऊपर क्या
कार्यवाही
करने जा रहे
हो?
श्री
अध्यक्ष:
प्रश्न
पूछिये
माननीय सदस्य।
प्रश्न
पूछिये।
अंकित नहीं
हो। आप प्रश्न
पूछिये। आप
भाषण देने लग
जाते हो।
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): ***
श्री
अध्यक्ष:
कहां पूछा?
नहीं पूछा।
प्रश्न
पूछने में कोई
भूमिका बनाई
जाती है? ठीक
है।
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): ***
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, पानी
के सम्बन्ध
में जो स्थिति
बता रहे हैं,
बिलकुल ठीक
है। पूरे
राजस्थान
में, हिन्दुस्तान
में, दुनिया
में यह समस्या
है। आपने जो
बात बताई है,
उसके बाद ही
मैंने इसका
एस्टीमेट
मंगवाया है,
इससे पहले
इसका कोई
तकमीना भी
नहीं बना।
मैंने कहा कि
माननीय सदस्य
इतनी चिंता कर
रहे हैं तो
निश्चित रूप
से यह जानकारी
हमारे पास
होनी चाहिए।
आपने 20-25 गांवों
का बताया,
हमारे पास जो
जानकारी है,
मेरे हिसाब से
लगभग 17 गांवों
को इससे फायदा
मिलेगा। भूजल
स्तर ऊपर
आएगा अगर
भगवान ने
बरसात की तो।
अब इसमें तीन
पार्ट हैं, एक
तो इस नाले के
किनारे पर एक
मकान बना हुआ
है और उस मकान
को सुरक्षित रखने
की सरकार की
जिम्मेदारी
है। इसके लिए
एक प्रोटेक्शन
वाल बनेगी,
उसके लिए 15 लाख
रुपये लगेगा,
यह हम कर
देंगे। अब
गांव के सरपंच
साहब ने यह
लिखकर दिया कि
एनीकट बनने के
बाद में कुछ
ऊँचा लेवल है,
वहां पर हम
हमारे द्वारा
या पंचायत के
द्वारा उसको
ठीक करवाकर
पानी उस नाले
के अन्दर
ओरिजिनल जो
पहले जाता था,
हम डाइवर्ट
करवा देंगे पर
हमारे पास जो
की-फैक्टर
है, वह यह है कि एनीकट
बनता है,
इसमें लगभग दो
एमसीएफटी
पानी आयेगा और
लगातार चलता
रहेगा। अब
जबकि आपने यह
बात शुरू की
कि यहां पर यह
बनेगा, तब से
वहां के काश्तकार
कहने लग गये
कि हमको
मुआवजा
दीजिये और एनीकट
बनाने के लिए
आज तक किसी को
कोई मुआवजा देने
का प्रावधान
नियमों में
नहीं है। यदि
मैं अगर इसमें
नियम भी बना
दूंगा तो आपके
माननीय सदस्य
या कोई भी
कहेगा कि
पर्टिकुलर के
लिए आपने नियम
बना दिये,
जैसी अभी बात
आई इसलिए मेरा
निवेदन यह है
कि आप इसमें
सहयोग करिये,
उन किसानों को
जिनकी डूब में
आ रही है, उनको
भी कोई नुकसान
होने वाला
नहीं है। अगर
वह मुआवजा
नहीं लेंगे,
मैं आपको विश्वास
दिलाता हूं कि
इससे कई तो
कुओं का जलस्तर
ऊपर आएगा।
हमारे
पीएचईडी के
ट्यूबवैल और हैण्डपम्प
जो उस क्षेत्र
के अन्दर
हैं, उनको भी
फायदा मिलेगा
और कुल मिलाकर
भूजल स्तर
बढ़े, सरकार
का यह उद्देश्य
है। माननीय
मुख्य
मंत्रीजी ने
जल अभियान भी
शुरू किया पर
यह जो लिमिटिंग
फैक्टर है,
इसमें आप
सहयोग करिये
तो मैं आपको
विश्वास
दिलाता हूं कि
तत्काल
प्रभाव से हम
यह कार्यवाही
कर देंगे।
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): ***
श्री
अध्यक्ष:
श्री रामचन्द्र
सराधना। नैक्स्ट
प्रश्न।
श्री रामचन्द्र
सराधना।
माननीय
मंत्रीजी।
भारतीय
शिल्प
उद्यमिता
प्रबन्ध एवं
विकास संस्थान
का निजीकरण
89.
श्री रामचन्द्र
सराधना
(जमवारामगढ़):
क्या उद्योग
मंत्री यह
बताने की कृपा
करेंगे:-
(1)
स्वायतशासी
संस्थान के
रूप में
कार्यरत
भारतीय शिल्प
संस्थान और
उद्यमिता एवं
प्रबन्ध
विकास संस्थान
में राज्य
सरकार की हिस्सेदारी
कितनी है?
विवरण सदन की
मेज पर रखें।
(2)
उक्त संस्थानों
के पास क्या-क्या
परिसम्पत्तियां
हैं और उनका
वर्तमान
बाजार मूल्य
कितना है?
विवरण सदन की
मेज पर रखें।
(3)
क्या सरकार
उक्त संस्थानों
के निजीकरण का
विचार रखती
है? यदि हां, तो
कब तक और इसके
लिए किस
औद्योगिक
समूह से वार्ता
की जा रही है?
विवरण सदन की
मेज पर रखें।
श्री
नरपत सिंह
राजवी (उद्योग
मंत्री): (1)
भारतीय शिल्प
संस्थान एवं
उद्यमिता एवं
प्रबन्ध
विकास संस्थान,
जयपुर, राजस्थान
सोसायटी एक्ट,
1958 के तहत
पंजीकृत संस्थाएं
हैं। उक्त
दोनों संस्थानों
पर राज्य
सरकार का स्वामित्व
नहीं है। राज्य
सरकार द्वारा
कारपस फण्ड,
भूमि, भवन, कम्प्यूटर,
फर्नीचर एवं
आवर्तक व्यय
के लिए वित्तीय
सहायता
प्रदान की
जाती है। राज्य
सरकार द्वारा
दोनों संस्थाओं
को दी गई वित्तीय
सहायता का
विवरण
परिशिष्ट 'क'
पर उपलब्ध
है।
(2)
भारतीय शिल्प
संस्थान एवं
उद्यमिता एवं
प्रबन्ध
विकास संस्थान,
जयपुर की
परिसम्पत्तियों
का वर्तमान
बाजार मूल्य
निर्धारित
नहीं किया गया
है लेकिन इन
संस्थाओं की
परिसम्पत्तियों
का संस्थान
की लागत के
अनुसार मूल्यांकन
परिशिष्ट 'ख'
पर उपलब्ध
है।
(3)
गुजरात अम्बूजा
सीमेंट लि.
द्वारा संस्थापित
अम्बूजा
एजुकेशनल
इंस्टीट्यूट
जो कि कम्पनी
एक्ट की धारा
25-ए के अन्तर्गत
पंजीबद्ध
नोन-प्रोफिट
कम्पनी है,
द्वारा
संचालन करने
का प्रस्ताव
राज्य सरकार
को दिया है, जो
विचाराधीन
है।
श्री
रामचन्द्र
सराधना
(जमवारामगढ़):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैंने
प्रश्न पूछा
था, माननीय
मंत्री महोदय
से यह जानना चाहा
था कि दोनों
संस्थानों
के निदेशक
आई.ए.एस. आफिसर
हैं और इनकी
परिसम्पत्तियो
का कितना
विवरण है,
कीमत कितनी
है, आपने इनकी
लागत बता दी
लेकिन बाजार
मूल्य नहीं
बताया जिसके
कारण सात एकड़
जमीन पर, विशाल
भू-भाग पर बनी
हुई इन परिसम्पत्तियों
की, जो अरबों
रुपयों की सम्पत्ति
है, ऐसी सम्पत्ति
वाले संस्थानों
को आप
प्राइवेट
देना चाहते
हैं, मैं आपसे
यह प्रश्न
पूछना चाह रहा
था कि इनकी
परिसम्पत्तियों
में अचल सम्पत्तियों
के साथ चल सम्पत्तियों
का विवरण तो
आपने दिया
नहीं, कितनी एफ.डी.
है और कितना
इनके पास में
बैंक बैलेंस
है, एक बात।
माननीय अध्यक्ष
महोदय, दूसरा
प्रश्न मेरा
यह है कि संस्थानों
का निजीकरण हो
रहा है, क्या
संस्थान
उद्देश्य
पूरा करने में
असफल रहे हैं?
यदि हां तो क्या-क्या
कारण रहे और
उनको दूर करने
के क्या-क्या
उपाय किये
गये, दो।
माननीय अध्यक्ष
महोदय, तीसरा
प्रश्न यह है
कि ग्रामीण
क्षेत्र के
बेरोजगार
युवाओं को
तकनीकी ज्ञान
देने के लिए,
प्रशिक्षण देने
के लिए संस्थान
कायम किये गये
हैं, इन
प्रशिक्षण
संस्थानों
को अचानक
गुजरात अम्बूजा
सीमेंट लि. को
देने का विचार
क्यों आया?
क्या इसमें
प्रतिस्पर्द्धात्मक
प्रक्रिया
अपनाई गई है
या आपका खुद
का विचार है
क्योंकि यह
आपके जिले से
आता है यह
गुजरात अम्बूजा
सीमेंट वाला?
आपका विचार
कैसे बना अम्बूजा
सीमेंट को
देने का या
उनको कैसे
मालूम पडा कि
आप इसको
प्राइवेट
देना चाहते
हैं? क्या और
भी संस्थानों
ने, प्राइवेट
कम्पनियों
ने एप्लाई
किया है?
श्री
नरपत सिंह
राजवी (उद्योग
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, इंडियन
इंस्टीट्यूट
आफ क्राफ्ट एण्ड
डिजाइन 20.4.1995 को
रजिस्टर की
गई और उसका
कारपस फण्ड
डेढ़ करोड़ का
है। ई.एम.आई. 1996
में रजिस्टर
की गई और उसका
कारपस फण्ड
दो करोड़ का
है और इसके
अलावा जो उनको
ट्रेनिंग के
आधार पर कोई न
कोई स्पोन्सर
करता है, कभी
वर्ल्ड बैंक
के माध्यम
से, कभी कोई
एन.जी.ओज. के
माध्यम से,
उसमें हमने इस
वर्ष 1700
ट्रेनीज को...
श्री
रामचन्द्र
सराधना
(जमवारामगढ़):
माननीय
मंत्रजी, आप समय
बरबाद नहीं
करें। मैंने
आपसे यह नहीं
पूछा, यह आपने
लिखकर दे
दिया, मैंने
उसे पढ़ लिया।
मैं जो आगे
नहीं पढ़ सका,
वह आपसे पूछ
रहा हूं।
श्री
नरपत सिंह
राजवी (उद्योग
मंत्री): आपने
कारपस फण्ड
का नहीं पूछा
था।
श्री
रामचन्द्र
सराधना
(जमवारामगढ़):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मेरा
पूछना यह था
कि आपने भूमि,
भवन, कम्प्यूटर,
फर्नीचर तो दे
दिये, आपने यह
नहीं बताया कि
इनकी अचल सम्पत्ति
कितनी हैं? कितनी
एफ.डी. है आज की
तारीख में और
कितना बैंक बैलेंस
है इनका, एक तो
यह नहीं
बताया। दूसरा,
मैंने आपसे यह
पूछा है कि इन
संस्थानों
को प्राइवेट
देने का,
निजीकरण करने
का क्या
उद्देश्य था,
क्या ये संस्थान
अपने उद्देश्य
अपने उद्देश्य
में असफल रहे
या असफल रहे
तो कब से रहे
और उनको सफल
करने के लिए
क्या-क्या
उपाय कर चुके
अब से पहले?
श्री
नरपत सिंह
राजवी (उद्योग
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय,
परिशिष्ट 'ख'
अगर देख लें
तो उद्यमिता
एवं प्रबन्ध
विकास संस्थान
की 11590 वर्गमीटर
जमीन है और
उसकी कीमत 82.28
लाख रुपये है...
श्री
रामचन्द्र
सराधना
(जमवारामगढ़):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपका ध्यान
चाहूंगा कि
मंत्री महोदय
को जवाब देने
वालों ने बड़ा
चक्कर डाल
दिया। यह केवल
मात्र इन्होंने
एक संस्थान
का तो बता
दिया कि इनके
पास में 11590
वर्गमीटर है।
बाकी आपने
दूसरा नहीं बताया,
सात एकड़ जमीन
है माननीय
मंत्री महोदय
और सात एकड़
जमीन की आज कम
से कम होती है
तो चार अरब
रुपये कीमत
होती है। 5-10
हजार रुपये की
बीच में
झालाना में
जमीन बिक रही
है, उसकी सम्पत्ति
चार अरब रुपये
से ऊपर जा रही
है, आप तो केवल
मात्र 11000
वर्गमीटर
वाली बता रहे
हैं। मैं यह
नहीं पूछना
चाह रहा, यह तो
मैंने पढ़
लिया। आपको जो
नहीं बताया
अधिकारियों ने,
वह पूछना चाह
रहा हूं, आपने
चल सम्पत्तियों
का विवरण नहीं
बताया, एक तो
पहले ही बता
दिया और दूसरा
यह बता दें कि
इतनी इम्पोर्टेन्ट
थी मंत्री
महोदय, ये
संस्थान
इसलिए बनाये
गये थे कि
टैक्नीकल
ज्ञान मिलेगा
ग्रामीण
क्षेत्र के
लोगों को,
इनको
ट्रेनिंग
देने के लिए
बनाया गया था....
Jkj/usc/1200/1g/21032006
उन
उद्देश्यों
में यह सफल
नहीं रहा क्या। नहीं
रहा तो कब से
नहीं रहा और
आपने इसको सफल
करने के लिए
क्या-क्या उपाय
किये, एक बात। दूसरा
प्रश्न और
सुन लो मेरा
साथ-साथ में,
कि अम्बूजा
सीमेंट
प्राइवेट कम्पनी
को देने का
आपका विचार
कैसे बना, क्या
इसमें
प्रतिस्पर्धात्मक
प्रक्रिया
अपनाना चाहते
हैं? यदि नहीं,
तो क्यों?
श्री नरपत
सिंह राजवी
(उद्योग
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, अम्बूजा
सीमेंट को ही
देने का क्यों
किया, मैंने
प्रश्न में
उत्तर दिया
है कि उनका
प्रस्ताव
आया है, कोई
निर्णय नहीं
हुआ है।
अब सिर्फ एक
चीफ
सैक्रेटरी
लेवल पर इसका
डिस्कशन हुआ
है, अभी कोई
निर्णय नहीं
हुआ है।
मैं स्वयं
इस समय,
शुरू-शुरू में
जब अख़बार के
माध्यम से
पढ़ा था तो
मुझे भी अचम्भा
हुआ था लेकिन
अगर रियलिटिज
में आप जाकर
देखें...
श्री
रामचन्द्र
सराधना
(जमवारामगढ़):
माननीय अध्यक्षजी,
अभी समय बरबाद
हो जायेगा,
फिर आप समाप्त
कर देंगी,
मेरे प्रश्न
का जवाब हमेशा
नहीं आता है,
समय होने वाला
है। समय बरबाद
कर रहे हैं,
मंत्रीजी उत्तर
नहीं दे रहे
हैं मेरा। (व्यवधान)
श्री नरपत
सिंह राजवी
(उद्योग
मंत्री): अगर
ज्ञान का सारा
ठेका, अध्यक्ष
महोदय, एक
माननीय सदस्य
ने ले लिया तब
तो मैं कह
नहीं सकता
लेकिन 12 लाख 55
हजार के अगर
एक्सपेंडीचर
हैं तो उसमें
कितनेक
ट्रेनीज
निकाल सकेंगे,
स्पोंसर
नहीं मिलेगा
तो वह ट्रेनी
नहीं निकल पायेंगे। पिछले
पाँच वर्षों
से आप देख लें,
वहां कितनों
को ट्रेन्ड
करके दिया है,
हमने प्रयास
किये हैं
लेकिन फिर भी
हमेशा स्पोंसर
के आधार पर
करेंगे या
सेल्फ
फाइनेंस के
आधार पर स्टूडेंट्स
से फीस लेकर
आईआईसीडी में
कर रहे हैं, 24
लाख रूपये साल
का, उसमें
बहुत ज्यादा
विकास होने
का, उसमें transfer of management is out of question, मेरे
मंत्री रहते
हुए ट्रांसफर
ऑफ आनरशिप नहीं
हो सकता।
श्री
रामचन्द्र
सराधना
(जमवारामगढ़):
माननीय
मंत्रीजी,
आपसे यह उम्मीद
नहीं थी। मैं पूछ
रहा हूं इसमें
चल सम्पत्ति कितनी
है, इसके पास
में कितना
पैसा फिक्स्ड
डिपाजिट है,
कितना बैंक
में है और अम्बूजा
सीमेंट को आप
क्यों देना
चाहते हैं। दूसरा,
इसको सफल बनाने
के लिए आपने
क्या-क्या
प्रयत्न
किये हैं, छोटी-छोटी
बात है।
श्री नरपत
सिंह राजवी
(उद्योग
मंत्री): मैं
बता रहा हूं। कारपस
फंड डेढ़
करोड़ और दो
करोड़ का है,
वह मैं आपको
निवेदन कर
चुका हूं, अगर
आपने नहीं
सुना, फिर
निवेदन कर रहा
हूं। लेकिन
स्टूडेंट्स
से जो फीस ले
रहे हैं वह तो
उस पर्टीकुलर
कोर्स के आधार
पर आयेगी, वह
इर्रेगुलर है
और अभी जैसे
देखिये, पहले
पीजी स्टूडेंट्स
थे, सिर्फ आज
तक हम निकाल
पाये हैं, आईआईसीडी
में 20 पीजी स्टूडेंट्स
और इस वर्ष है 28
अण्डर
ग्रेजुएट एण्ड
पीजी स्टूडेंट्स
16, सेटिस्फेक्टरी
नहीं है और
सेटिसफेक्टरी
नहीं है,
इसमें अगर स्टेट
के इंटरेस्ट
में, एन्टरप्रिन्योर
के इंटरेस्ट
में इसको और
डवलप किया जा
सकता है तो without
transferring ownership in any matter, सिर्फ
मेनेजमेंट ऑफ
प्रोफेशनली,
निसेट के या
और ज्यादा
ट्रेंड
अधिकारी
उसमें वह एम्पलाई
करे और सिर्फ
मेनेज करे और
इसमें टोटल
कंट्रोल स्टेट
का रहेगा, इस
प्रकार का अगर
विचार निकलता है,
अभी तक तो कोई
निर्णय हुआ
नहीं है लेकिन
अगर होता भी
है तो मेरे ख्याल
से सदन मेरा
साथ देगा कि
उसमें और स्टेट
के इंटरेस्ट
के डवलपमेंट
के लिए अगर
करना हो तो
निश्चित तौर
पर उसका
रिजोल्यूशन नहीं
होना
चाहिए...(व्यवधान)
श्री संयम
लोढ़ा:
इसकी सीमेंट
में मजबूती दिख
रही होगी
आपको। (व्यवधान)
श्री
रामचन्द्र
सराधना
(जमवारामगढ़):
क्या इस
निर्णय करने
से पहले और
प्राइवेट कम्पनियों
को भी शामिल
करेंगे। माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं
पूछ रहा था...
श्री नरपत
सिंह राजवी
(उद्योग
मंत्री):
मजबूती तो जो
सिरोही में है
वही जयपुर में
है, चिंता
करने की आवश्यकता
नहीं है...
श्री
रामचन्द्र
सराधना
(जमवारामगढ़):
माननीय
मंत्रीजी, मैं
तो यह निवेदन
करना चाह रहा
था कि आप इस
बात पर आ
जाइये कम से
कम कि इसका
निर्णय करने
से पहले दूसरी
प्राइवेट कम्पनियों
को भी शामिल
करेंगे क्या
इस निर्णय
में, और फिर एक
बात और सुन
लीजिये...
श्री नरपत
सिंह राजवी
(उद्योग
मंत्री): अगर
आप भी
इसको लेकर
डवलप करने को
तैयार हैं, We are open for
that.
श्री
रामचन्द्र
सराधना
(जमवारामगढ़):
और यह प्राइवेट
कम्पनी को
देने के बाद
में ग्रामीण
एरिये के बेरोजगार
युवकों को जो
प्रशिक्षण ले
रहे थे उनको क्या
लाभ होने वाला
है।
श्री अध्यक्ष:
प्रश्नकाल
समाप्त हुआ।