Gpc/akt/20032007/1100/1a

अशोधित प्रति प्रकाशनार्थ नहीं

 

राजस्‍थान विधान सभा की कार्यवाही का वृतान्‍त

 

अंक 7   बारहवीं विधान सभा के सातवें सत्र का बीसवां दिवस    संख्‍या 13

 

मंगलवार, 20 मार्च, 2007

 

राजस्‍थान विधान सभा की बैठक 11:00 बजे

विधान सभा भवन जयपुर, में प्रारम्‍भ हुई।

 

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

 

तारांकित प्रश्‍नोत्‍तर

श्री अध्‍यक्ष: वैसे कौल और शकधर में लिखा हुआ है कि मुंह से कुछ नहीं बोलते हैं, केवल हाथ ही जोड़ते हैं। मुंह से कुछ नहीं बोलते हैं। श्री प्रमोद जैन ‘’भाया’’

 

भारतीय तकनीकी संस्‍थान (आई.आई.टी.) की स्‍थापना हेतु स्‍थल चयन

 

131. श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): क्‍या तकनीकी शिक्षा मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) राज्‍य में किन-किन स्‍थानों को इण्डियन इंस्‍टीट्यूट ऑफ टेक्‍नोलॉजी खोलने हेतु चिह्नित किया गया है? विवरण सदन की मेज पर रखें।

(2) केन्‍द्र सरकार द्वारा राज्‍य में इण्डियन इंस्‍टीट्यूट ऑफ टेक्‍नोलॉजी खोलने की स्‍वीकृति संबंधी प्रस्‍ताव पत्र किस तारीख को प्राप्‍त हुआ एवं इसमें क्‍या-क्‍या सुविधाएं मांगी गईं? विवरण सदन की मेज पर रखें।

(3) सरकार द्वारा अंतिम रूप से इंडियन इंस्‍टीट्यूट ऑफ टेक्‍नोलॉजी खोलने हेतु स्‍थान का निर्धारण नहीं करने के क्‍या कारण रहे?

तकनीकी शिक्षा मंत्री (श्री घनश्‍याम तिवाड़ी): (1) आई.आई.टी. स्‍थापित करने के स्‍थान का चयन केन्‍द्र सरकार तथा राज्‍य सरकार के अधिकारियों द्वारा संयुक्‍त रूप से किया जायेगा। इस संबंध में अभी तक निर्णय नहीं लिया गया है।

(2) केन्‍द्र सरकार से आई.आई.टी. खोले जाने के संबंध में स्‍वीकृति संबंधी प्रस्‍ताव पत्र दिनांक 16 दिसम्‍बर, 2006 के द्वारा प्राप्‍त हुआ है। केन्‍द्र सरकार से प्राप्‍त पत्र के अनुसार आई.आई.टी. की स्‍थापना के लिए 500-600 एकड़ भूमि नि:शुल्‍क उपलब्‍ध करवानी होगी तथा यह स्‍थान सड़क, रेल व वायु यातायात से भली-भांति जुड़ा हुआ होना चाहिए एवं इस स्‍थान पर आवश्‍यक भौतिक एवं सामाजिक आधारभूत सुविधाएं उपलब्‍ध होनी चाहिए।

(3) अंतिम निर्णय केन्‍द्र सरकार एवं राज्‍य सरकार द्वारा संयुक्‍त रूप से ही लिया जायेगा, जो प्रक्रियाधीन है।

श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री महोदय से जानना चाहता हूं कि केन्‍द्र सरकार द्वारा निर्धारित मापदण्‍डों वाले संभावित स्‍थानों के चयन के प्रस्‍ताव राज्‍य सरकार से मांगे गये, परन्‍तु तीन माह बाद भी आई.आई.टी. के संबंधित स्‍थानों के प्रस्‍ताव भिजवाने में असक्षम रहने के क्‍या कारण रहे, सदन को स्‍पष्‍ट करें।

नम्‍बर दो, प्रश्‍न के बिन्‍दु संख्‍या एक के जवाब में बताया गया है कि स्‍थान का चयन केन्‍द्र सरकार तथा राज्‍य सरकार के अधिकारियों द्वारा संयुक्‍त रूप से किया जाएगा जबकि वास्‍तविकता यह है कि राज्‍य सरकार द्वारा पहले स्‍थान प्रस्‍तावित किया जाएगा उसके बाद में संयुक्‍त रूप से टीम उस पर निर्णय लेगी। माननीय मत्री महोदय ने सदन में गलत उत्‍तर देकर सदन को क्‍यों गुमराह किया, कृपया यह स्‍पष्‍ट करें।

नम्‍बर तीन, प्रस्‍तावित आई.आई.टी. हेतु प्रस्‍तावित स्‍थानों के चयन के प्रस्‍ताव नहीं भेजने पर क्‍या केन्‍द्र सरकार, राज्‍य सरकार के प्रस्‍तावों का इंतजार करने के लिए बाध्‍य है एवं आई.आई.टी. क्‍या राजस्‍थान राज्‍य के लिए ही रिजर्व किया हुआ है, स्थिति स्‍पष्‍ट करें।

श्री अध्‍यक्ष: आप प्रश्‍न पूछें। भाषण नहीं, प्रश्‍न पूछें।

श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): प्रश्‍न ही पूछा है।

श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  क्‍या यह सही है उदयपुर में आई.आई.टी. ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: मूल प्रश्‍नकर्ता का उत्‍तर तो आने दीजिए।

श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): वह इसी के साथ है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  यह ज्‍वलंत है। क्‍या यह सही है कि उदयपुर में आई.आई.टी. के लिए प्रतिनिधिमण्‍डल आपसे, मुख्‍यमंत्रीजी से मिला? वहां पर इंटरनेशनल एयरपोर्ट है, वहां पर भूमि 500 हैक्‍टेयर से ज्‍यादा उपलब्‍ध है। उसके कागजात आपको और मुख्‍यमंत्रीजी को दिये गये हैं और वहां दो नेशनल हाईवे क्रोस होते हैं। इसलिए मेरा आपसे अनुरोध है कि इस बारे में आपका क्‍या विचार चल रहा है? उदयपुर से ज्‍यादा प्राथमिकता और किसी की नहीं हो सकती।

श्री हरीसिंह रावत (भीम): उदयपुर में सारी सुविधा है, नेशनल एयरपोर्ट है, नेशनल हाईवे है। ..(व्‍यवधान)..

श्री जोगाराम पटेल (लूणी):  जोधपुर में सारी सुविधा है। जोधपुर में सारी सुविधा उपलब्‍ध है। जोधपुर से उपयुक्‍त स्‍थान और कोई नहीं हो सकता।

श्री अध्‍यक्ष: आप मूल प्रश्‍नकर्ता का जवाब आने दीजिए।

श्री बद्रीलाल जाट (कपासन): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  ..(व्‍यवधान)..

एक माननीय सदस्‍य: आई.आई.टी. के लिए अन्‍तरराष्‍ट्रीय हवाई अड्डा होना आवश्‍यक नहीं है। रुड़की में, खड़गपुर में अन्‍तरराष्‍ट्रीय हवाई अड्डा नहीं है।

श्री अध्‍यक्ष: कृपया स्‍थान ग्रहण करें। ..(व्‍यवधान).. माननीय सदस्‍य। ..(व्‍यवधान)..

श्री भवानी सिंह राजावत (संसदीय सचिव): कोटा में ब्राडगेज है, कोटा में नेशनल हाईवे है, कोटा में 40 हजार बच्‍चे पूरे देश के पढ़ रहे हैं ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आसन पांवों पर। आसन पांवों पर। मैं देख रही हूं आसन पांवों पर है तब कौन-कौन खड़ा है, मैं बराबर देख रही हूं। ..(व्‍यवधान).. जब आसन पांवों पर होता है, चाहे मंत्रीगण हो, चाहे संसदीय सचिव हो, चाहे माननीय सदस्‍य हो, मैं इस बात का ध्‍यान रखूंगी कि जब आसन पांवों पर होता है तब कौन-कौन खड़े होते हैं। इसलिए मैं सबसे कहना चाह रही हूं, पुन: कहना चाह रही हूं कि इस बात का खयाल रखें जब आसन पांवों पर है तो खड़े होने का प्रयत्‍न न करे। ..(व्‍यवधान).. अब आप एक बार विराजें। ..(व्‍यवधान).. अभी कुछ नहीं, नो, नो। मूल प्रश्‍नकर्ता ने और मावली से आने वाले माननीय सदस्‍य ने जो पूछा उसका जवाब दें, उसके बाद में दूसरे को अलाऊ करूंगी।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  मैं माननीय सदस्‍यों ने निवेदन करना चाहूंगा पहली बात तो यह है कि भारत सरकार ने कहा है कि ग्‍यारहवीं पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत तीन नये भारतीय प्रौद्योगिकी संस्‍थान खोले जाएंगे उसमें एक राजस्‍थान, एक आंध्रप्रदेश और एक बिहार होगा।

नम्‍बर दो, उन्‍होंने यह भी कहा कि ये तीनों खोले जाएंगे इनके लिए तीन प्रकार की सुविधा उनको चाहिए। एक उन्‍होंने कहा कि 500 से लेकर 600 एकड़ तक उनको नि:शुल्‍क भूमि उपलब्‍ध करानी पड़ेगा, दूसरा वह स्‍थान होगा वह इस प्रकार का होना चाहिए जो रेल यातायात से, सड़क यातायात से और वायु यातायात से सुलभ हो।

तीसरा उन्‍होंने कहा कि यहां पर जो आई.आई.टी. लगेगी उसमें जो फैकल्‍टीज् आएगी उसमें सारे देश और दुनिया भर के लोग आएंगे इसलिए उसको इस स्‍थान पर होना चाहिए कि हम ऐसे लोगों को आकर्षित भी कर सकें और उन्‍होंने इसके लिए हमको कहा कि आप एक नोडल अधिकारी नियुक्‍त कर दीजिए उसके बाद में भारत सरकार एक नोडल अधिकारी नियुक्‍त करेगी और वह दोनों नियुक्‍त होने के पश्‍चात वे दोनों मिलकर इसमें कार्यवाही करेंगे। 16 दिसम्‍बर को हमको यह पत्र मिला, 23 तारीख को ए.के. पाण्‍डे जो अतिरिक्‍त मुख्‍य सचिव है उनको राजस्‍थान सरकार ने इसका अधिकारी नियुक्‍त कर दिया और भारत सरकार को इसका पत्र लिख दिया। भारत सरकार की तरफ से अभी तक कोई अधिकारी नियुक्‍त नहीं हुआ है। ज्‍यों ही भारत सरकार द्वारा अधिकारी नियुक्‍त होगा राजस्‍थान सरकार और भारत सरकार के अधिकारी मिलकर स्‍थान के बारे में चयन कर लेंगे। अभी तक बिहार के लिए भी नियुक्‍त नहीं किया है। भारत सरकार ने केवल आंध्रप्रदेश के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्‍त किया है। स्‍थान का चयन वहां भी नहीं हुआ है इसलिए न तो राज्‍य सरकार ने इसमें विलम्‍ब किया है, राज्‍य को तो एक खुशी की बात है कि 2000 से लेकर 3000 करोड़ रुपये का इसमें इन्‍वेस्‍टमेंट होगा, राज्‍य का इससे विकास होगा, राजस्‍थान का नाम इसमें आएगा, इसलिए राज्‍य सरकार किसी भी प्रकार से किसी भी प्रकार की ढिलाई आई.आई.टी. के मामले में नहीं करना चाहती। जहां तक स्‍थान के चयन का सवाल है मुझे बहुत जगहों से ज्ञापन मिला है मालपुरा से आने वाले माननीय सदस्‍य ने भी ज्ञापन दिया, माननीय मुख्‍यमंत्रीजी को भी दिया, अन्‍य बहुत से स्‍थानों से ज्ञापन भी आए हैं, समितियां भी बनी है, मैं तो आपको एक ही विश्‍वास दिला सकता हूं यह विवाद का विषय है ही नहीं। राजस्‍थान में जो सबसे बढि़या स्‍थान होगा जिसको भारत सरकार और राज्‍य सरकार के अधिकारी मिलकर और विशेषज्ञ मिलकर तय करेंगे उस स्‍थान पर आई.आई.टी. बनेगी। अभी तक किसी स्‍थान का चयन नहीं हुआ है, सरकार की इसमें कोई ढिलाई नहीं है। हम निरंतर जागरुक और सक्रिय रहकर इस काम को प्रारंभ करेंगे।

दूसरी बात यह कहना चाहूंगा कि आई.आई.टी. बनेगी उसको बनाने से उस स्‍थान का भी विकास होगा, लेकिन उस स्‍थान के लड़कों या पढ़ने वालों को कोई प्रायरटी मिलेगी ऐसा नहीं है, वह तो ऑल इण्डिया की परीक्षा है और इसमें लोग भर्ती होते हैं, होंगे, लेकिन हमारे यहां विनियोजन होगा, राजस्‍थान का नाम होगा, टेक्‍नीकल एजुकेशन में आगे बढ़ेंगे यह सारी स्थिति है जो अध्‍यक्ष महोदय, मैंने आपको स्‍पष्‍ट कर दी है। ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: अब क्‍या बाकी रह गया? सारी बात तो कह दी। ..(व्‍यवधान)..

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  उसी में आप आई.आई.टी. खोलिए। इससे बढि़या कोई स्‍थान नहीं हो सकता। ..(व्‍यवधान)..

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  जोधपुर की तरफ से जो ..(व्‍यवधान).. वहां प्रयोगशाला उपलब्‍ध कराई ..(व्‍यवधान).. इसलिए जोधपुर से उपयुक्‍त स्‍थान कोई नहीं हो सकता। ..(व्‍यवधान)..

श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): उदयपुर में ..(व्‍यवधान)..

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): हमारा निवेदन है कि जोधपुर से उपयुक्‍त स्‍थान नहीं हो सकता।

श्री सुरेश मीणा (करौली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  दौसा में खोल दो, अलवर में खोल दो, भरतपुर में खोल दो, कहीं भी खोल दो। ..(व्‍यवधान)..

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): वहां जमीन उपलब्‍ध है, एडिशनल जमीन उपलब्‍ध कराने को तैयार हैं ..(व्‍यवधान)..

श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): हमारे पास इतनी लेण्‍ड है ..(व्‍यवधान).. नेशनल हाईवे है। ..(व्‍यवधान)..

 

मोहन/अरूण/अशोधित प्रति प्रकाशनार्थ नहीं/20032007/1110/1b

 

 

श्री सुरेश मीणा (करौली): ...(व्‍यवधान)... इस प्रकार का कोई भी इंस्‍टीट्यूट नहीं है। ...(व्‍यवधान)... आईआईटी जो इंस्‍टीट्यूट है उसको पूर्वी राजस्‍थान में खोला जाए, किसी भी एरिया में खोल दें, चाहे कोटा में खोल दो। ...(व्‍यवधान)...

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): यह इंस्‍टीट्यूट कहीं पर भी नहीं होनी चाहिए, जोधपुर में होनी चाहिए। ...(व्‍यवधान)...

एक माननीय सदस्‍य: सबसे अच्‍छी व्‍यवस्‍था कोटा में है। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: मूल प्रश्‍नकर्ता का अधिकार है दो सप्‍लीमेंटरी पूछने का, और मैं आप लोगों से ...(व्‍यवधान)... प्‍लीज, सिट डाउन। आप लोग, कई माननीय सदस्‍यों को मैं देख रही हूं, नाम नहीं लूंगा, लेकिन मैं अंत में नाम लूंगी कि आप लोग खड़े हो जाते हैं, एक साथ चार चार, पांच पांच लोग, जो तरीके से कोई बात पूछना चाहता है उसको आप पू्छने नहीं देते हैं। मूल प्रश्‍नकर्ता का प्रश्‍न था उनको दो सप्‍लीमेंटरी का अधिकार है, वह एक बार फिर अपना एक सप्‍लीमेंटरी और भाषण नहीं देंगे, सप्‍लीमेंटरी पूछिए।

श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मै आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री महोदय से जानना चाहता हूं कि केन्‍द्रीय मानव संसाधन राज्‍य मंत्री ने कोटा प्रवास के दौरान यह स्‍टेटमेंट दिया है कि राज्‍य सरकार ने मात्र धन्‍यवाद का पत्र भिजवाया है, इसके अलावा, कोई पत्र सरकार को अभी तक नहीं भेजा है और अन्‍य दो राज्‍यों द्वारा स्‍थान का चयन करके स्‍थान के नाम हमको भिजवा दिये हैं तो क्‍या माननीय मंत्री महोदय सही कह रहे हैं या माननीय केन्‍द्रीय मंत्री महोदय सही कह रहे हैं। यह स्थिति सदन को स्‍पष्‍ट करें।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैं स्‍पष्‍ट कर देता हूं, मैं पत्र ही पढ़ देता हूं जो मानव संसाधन मंत्री जी से मिला है, वह पांच लाईन का है।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं आप तो अपना पढि़ए, जो आपने लिखा है।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): हमने बताया न, अध्‍यक्ष महोदय, हमने तो दिसम्‍बर, 2006 में, 16 दिसम्‍बर को पत्र हुआ और ए के पाण्‍डे साहब को नियुक्‍त करके भेज दिया, भारत सरकार ने अभी नोडल अधिकारी नियुक्‍त नहीं किया।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): पत्र कब भेजा ?

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): पत्र मेरे पास नहीं है, मैं कह रहा हूं, आप सुनिए न, धन्‍यवाद तो देना ही था।

श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): गुमराह कर रहे हैं सदन को।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): मैं सदन को कभी मेरी जिन्‍दगी में गुमराह नहीं कर सकता।

श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): आप उस पत्र को सदन के पटल पर रखें।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): हां, मैं रख रहा हूं, रख रहा हूं न, आप बैठ जाएं, सुनिए आप। मैं सदन को रिलिजियसली लेता हूं, सदन मेरे लिए है। मैं सदन को कोई गलत बात, गुमराह नहीं करना चाहता। मैं, अध्‍यक्ष महोदय, माननीय अर्जुन सिंह जी ने जो पत्र लिखा उसमें लिखा है ; "The Ministry now proposes to establish 3 new Indian Institutes of Technology during the 11th Five Year Plan period. I am glad to inform you that one of them would be set up in your State." दूसरा उन्‍होंने लिखा है - "I am directing you to kindly allot free of cost approximately 500-600 acres of land for this purpose." और अन्‍त में उन्‍होंने लिखा है वह बहुत महत्‍वपूर्ण है - "I suggest that you may nominate a senior officer of your State to interact with the officers of my Ministry so that we may be able to jointly identify a suitable location for the proposed IIT in your State." यह पत्र उन्‍होंने भेजा और इस पत्र के बाद में 16 तारीख को पत्र आया दिसम्‍बर में और दिसम्‍बर में ही हमने ए के पाण्‍डे साहब को नियुक्‍त कर दिया। पुन: एक पत्र लिख देंगे, हमने नियुक्‍त कर दिया, आप नियुक्‍त करें और भारत सरकार ज्‍यों ही अधिकारी नियुक्‍त करेगी, जितने भी हमारे पास प्रस्‍ताव आये हैं, किसी से भेदभाव नहीं होगा, किसी स्‍थान की प्रायोरिटी नहीं और किसी स्‍थान की प्रायोरिटी कम होने का सवाल नहीं, सारा काम करके हम यह करेंगे। और सब राज्‍यों के साथ साथ हम इसको कराने की कोशिश करेंगे। कौन सा ऐसा राज्‍य होगा जो गलतफहमी में आईआईटी नियुक्‍त नहीं करवाएगा।

श्री अध्‍यक्ष: बात सही है।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): हम कोशिश करके लाए हैं, बार बार बात की है और उन्‍होंने दिया है, इतना अवसर आया है इसलिए मैं सदन के सभी माननीय सदस्‍यों को आश्‍वस्‍त करना चाहता हूं कि निश्चित रूप से हम हमारी प्रक्रिया जारी रखेंगे, जो भी उपयुक्‍त स्‍थान वह टीम मिलकर तय करेगी उसी स्‍थान पर आईआईटी लगेगी। धन्‍यवाद।

श्री अध्‍यक्ष: पूछ लीजिए प्रश्‍न।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या यह सही है कि कोटा में गत चार और पांच सालों में आईआईटी की कोचिंग क्‍लासेज चलाई जा रही हैं और पूरे देश में कोटा के जो कोचिंग क्‍लासेज हैं उनमें से ही सर्वाधिक स्‍टूडेंट चयन होकर के गये हैं। नम्‍बर दो, क्‍या यह सही है कि एक कोटा का प्रतिनिधि मण्‍डल माननीय मंत्री जी से मिलकर जो जो इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर गवर्नमेंट आफ इण्डिया ने जो तय किये हैं, जो मापदण्‍ड तय किये हैं उन मापदण्‍डों के हिसाब से हर पाइंट पर अपना जवाब, अपना जो टारगेट था वह देकर के, उनको आया है और उन पर अब तक क्‍या विचार हुआ है ?

श्री अध्‍यक्ष: बहुत अच्‍छा है। ...(व्‍यवधान)... सारी बातें आ गई हैं।

श्री सुरेन्‍द्र गोयल (जैतारण): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा निवेदन इतना ही है मंत्री जी से कि मंत्री जी ने अभी कहा कि सेंट्रल से जो गाइड लाइन आई हैं उसमें अधिकारी तय करेंगे कि कहां खोलना है, कहां नहीं खोलना है। मेरा निवेदन यह है कि क्‍या अधिकारी तय करेंगे या पोलिटिकली तय होगा ?

श्री अध्‍यक्ष: अधिकारी जो नोडल अधिकारी हैं, तय करेंगे।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): हिण्‍डौली से आने वाले माननीय सदस्‍य ने भी कहा है, यह बात सही है कि कोटा में कोचिंग बहुत बढि़या है, आपकी भी कोचिंग बहुत ठीक ढंग से हुई हुई है, कोचिंग चल रही है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): कोचिंग में तो आपने पूरे राजस्‍थान को मात दे रखी है सब को। ...(व्‍यवधान)...

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): तो कोचिंग भी ठीक है और मैं यह कहा रहा हूं कि सारे ज्ञापन माननीय मुख्‍य मंत्री जी को मिले हैं, मुझे भी मिले हैं, विभिन्‍न स्‍थानों के भी मिले हैं, मैं उनका विवरण नहीं करना चाहता हूं और सब ने अपना अपना क्‍लेम किया है, वह भी देखे हैं तो सारे क्‍लेम के साथ लेकिन मैंने कहा, तीन बात उन्‍होंने सिर्फ मांगीं हैं। नम्‍बर एक, पांच सौ, छह सौ एकड़ जमीन होनी चाहिए, रेल, वायुयान और सड़क इनसे जुड़े हुए होने चाहिए और शैक्षणिक व सामाजिक स्‍तर से उसका वह होना चाहिए, तीनों चीजें उन्‍होंने मांगी हैं। ...(व्‍यवधान)...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): जुड़ा हुआ नहीं है।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): क्‍या ?

श्री अध्‍यक्ष: माननीय मंत्री जी के हिसाब से तो झुंझुनूं का नम्‍बर आना चाहिए। झुंझुनू वायुयान से भी जुड़ा हुआ है।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): बड़ा सवाल यह है कि कौन तय करेगा।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय मंत्री जी, महिला शिक्षा में सबसे आगे, एजुकेशन इंस्‍टीट्यूट सबसे ज्‍यादा, केवल टेक्निकल एजुकेशन की कमी है और वायुयान से भी जुड़ा हुआ है, एयरस्‍कीम है वहां पर झुंझुनूं में। वायु से, रेल से, सड़क से सबसे जुड़ा हुआ है, तब तो उसका नम्‍बर आना चाहिए। ...(व्‍यवधान)...

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (सरकारी उप मुख्‍य सचेतक): अध्‍यक्ष महोदय, इसमें तो गंगानगर का भी दावा है कि गंगानगर में एक कृषि विश्‍वविद्यालय खोलना था लेकिन नहीं खुला तो मेरा आपके माध्‍यम से सरकार से आग्रह है कि श्रीगंगानगर को भी आईआईटी के लिए कंसीडर किया जाए क्‍योंकि गंगानगर भी इसके लिए उपयुक्‍त है। ...(व्‍यवधान)...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने अपनी बात कह कर सरकार तो आपकी बात से ज्‍यादा प्रभावित हो जाएगी और हम वैसे ही मारे जाएंगे। आपको तो निष्‍पक्ष रहना चाहिए और किसी एक जगह के लिए आपको नहीं कहना चाहिए। आपको तो अध्‍यक्ष के नाते पूरे राजस्‍थान के प्रति....

श्री अध्‍यक्ष: आसन बिलकुल निष्‍पक्ष है, आसन बिलकुल निष्‍पक्ष है क्‍योंकि उन्‍होंने तीन शर्तें बताई थी, शर्तों के मुताबिक मैंने कहा, बाकी निष्‍पक्ष है आसन तो। ...(व्‍यवधान)...

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): जयपुर सारी शर्तें पूरी करता है, जयपुर तीनों शर्तें पूरी करता है, माननीय अध्‍यक्ष महोदय। ...(व्‍यवधान)...

श्री जुबेर खान (रामगढ़): आसन से एक बार जो व्‍यवस्‍था हो जाती है उसको चुनौती नहीं दी जा सकती इसलिए आसन ने जो फरमाया है।

श्री कालीचरण सर्राफ  (जौहरी बाजार): यह तीनों शार्तें तो जयपुर ही करता है पूरी। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन, हरिमोहन जी शर्मा ।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): गंगानगर और हनुमानगढ़ सबसे पिछड़े हुए हैं शिक्षा के मामले में तो न्‍याय ही करना है तो जहां शिक्षित है वहां शिक्षित करने की आवश्‍यकता नहीं है, जहां शिक्षित कम हैं, वहां यह करो, सारा सदन का विवाद कम हो जाएगा।

श्री अध्‍यक्ष: नेता प्रतिपक्ष खड़े हैं, प्‍लीज।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके मार्फत जानना चाहता हूं शिक्षा मंत्री जी से कि सीकर शेखावाटी आज नहीं तो फिर कभी नहीं, इस संबंध में आपने सोचा है कि नहीं ?

श्री अध्‍यक्ष: आपके मंत्री रहते हुए यह काम होना ही चाहिए।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): सीकर शेखावाटी यदि नहीं है है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): छोडि़ए, सीकर, चूरू, झुंझुनूं यह बात करो।

श्री अध्‍यक्ष: सीकर और चूरू के बीच में ही तो झुंझुनूं है। सीकर, चूरू के बीच में है झुंझुनूं।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, आपके मंत्री जी को प्रभावित कर रहे हैं और सबसे पहले बांगड़ कालेज इंजिनियरिंग की जो शाखा राजस्‍थान के अन्‍दर जोधपुर में खुली है, मैं इसलिए यदि जो आपने आसन से यह कहा तो मैं भी मेरी भावना इनको कर देता हूं। ...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, फैसला करके आओ। ये केबिनेट में कलेक्टिव फैसला करके सदन में आवें, जनता को बताएं, आप यह एक्‍सप्रेस क्‍यों कर रहे हैं। मैं समझता हूं, इससे बड़ा दुर्भाग्‍य और कुछ नहीं हो सकता, ये मिनिस्‍टर कलेक्टिव डिसीजन नहीं ले सकते और हाउस में आकर बोल रहे हैं, इससे बड़ा दुर्भाग्‍य क्‍या हो सकता है। अध्‍यक्ष महोदय, पार्लियामेंटरी प्रेक्टिसेज का कम से कम इतना तो ध्‍यान रखना पड़ेगा कि लेजिस्‍लेचर के प्रति कौन सा मंत्री रेस्‍पोंसिबिल है, इनके खुद के ब्‍यूज अलग अलग हैं। ऐसी कौन सी सरकार चल रही है जिस सरकार की कोई जिम्‍मेदारी भी नहीं है कुछ भी। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष : नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन श्री हरिमोहन शर्मा। सुरेन्‍द्र/अरुण/20.3.2007/11.20/1c/1

 

राष्‍ट्रीय बागवानी मिशन के तहत चयनित जिले

 

132. श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): क्‍या कृषि मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) क्‍या यह सही है कि वर्ष 2005-06, 2006-07 और इसके आगे के वर्षों के लिये राष्‍ट्रीय बागवानी मिशन के अन्‍तर्गत कोई योजना केन्‍द्र सरकार ने प्रस्‍तावित की है, जिसके अन्‍तर्गत किसानों को अनुदान उपलब्‍ध कराया जाता है? यदि हां, तो इस योजना का विवरण तथा केन्‍द्र द्वारा दिये गये दिशा-निर्देश एवं उपलब्‍ध कराये अनुदान का विवरण सदन की मेज पर रखें।

(2) उक्‍त योजनान्‍तर्गत वर्ष 2005-06 एवं 2006-07 के लिये कितना-कितना बजट प्रावधान किया गया? यह योजना किस-किस जिले में आरम्‍भ की गई और किस-किस जिले को कितना-कितना बजट आवंटित किया गया तथा जिले के चयन का मानदण्‍ड क्‍या था?

(3) फसलों व पौधों के लिये कीटनाशक दवाइयों की उपलब्‍धता एवं विक्रय करने हेतु किन-किन कम्‍पनियों को अधिकृत किया गया है तथा इनमें से किन-किन कम्‍पनियों को राज्‍य सरकार द्वारा दिये जाने वाला अनुदान प्राप्‍त करने के लिये अधिकृत किया गया और क्‍या इनका वर्गीकरण किया गया है? यदि हां, तो कौन-कौनसी कम्‍पनी किस वर्ग के अन्‍तर्गत आती है?

(4) क्‍या उक्‍त प्रकार की दवाइयां खरीदने हेतु यह भी निर्देशित किया गया था कि केवल ग्रेड कम्‍पनी से ही ये दवाइयां खरीदी जायें? क्‍या उन निर्देशों के अन्‍तर्गत सहकारी समितियों ने ग्रेड वाली कम्‍पनियों से ही माल खरीदा है? यदि हां, तो किन-किन से व नहीं, तो क्‍यों?

(5) ग्रेड कम्‍पनी से खरीदे गये माल की अधिकतम खुदरा मूल्‍य में दर्शाये गये मूल्‍य के मुकाबले में बी ग्रेड व अन्‍य ग्रेडों से खरीदे गये माल की अधिकतम खुदरा मूल्‍य कितनी अधिक अथवा कम थी? और यदि बी व अन्‍य ग्रेडों की अधिकतम खुदरा मूल्‍य ग्रेड के मुकाबले अधिक थी तो क्‍यों?

(6) सरकार द्वारा वर्ष 2005-06 व 2006-07 में किन-किन सहकारी समितियों को कितने-कितने अनुदान का भुगतान तय दिशा-निर्देशों के अनुसार किया गया? विवरण सदन की मेज पर रखें।

(7) किन-किन कम्‍पनियों ने सहकारी समितियों को किस-किस ग्रेड का माल बेचा व कितना-कितना भुगतान सहकारी समितियों द्वारा किया गया?

राज्‍य मंत्री, कृषि (श्री सुरेन्‍द्रपाल सिंह टीटी) : (1) जी हां। केन्‍द्र सरकार द्वारा वर्ष 2005-06, 2006-07 और इसके आगे के वर्षों के लिए राष्‍ट्रीय बागवानी मिशन योजना राज्‍य में लागू की है। भारत सरकार द्वारा प्रेषित गाइडलाइन एवं योजना का विवरण परिशिष्‍ट-1 पर संलग्‍न है।

(2) राष्‍ट्रीय बागवानी मिशन के अन्‍तर्गत वर्ष 2005-06 के लिए राशि 41.02 करोड़ एवं वर्ष 2006-07 के लिए राशि 76.27 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। यह योजना वर्तमान में राज्‍य के 17 जिलों (जयपुर, अलवर, अजमेर, नागौर, कोटा, झालावाड़, बारां, चित्‍तौड़, जोधपुर, जालौर, पाली, बाड़मेर, श्रीगंगानगर, करौली, सवाई माधोपुर, टोंक एवं बांसवाड़ा) में लागू की गई है। वर्ष 2005-06 एवं 2006-07 में जिलेवार बजट आवंटन परिशिष्‍ट-2 पर संलग्‍न है।

विभाग ने राज्‍य के सभी 32 जिलों के चयन हेतु भारत सरकार को प्रस्‍ताव भिजवाये थे। भारत सरकार के द्वारा राष्‍ट्रीय बागवानी मिशन अन्‍तर्गत जिले का चयन जिले में उद्यानिकी की वर्तमान स्थिति एवं भविष्‍य की संभावनाओं के मद्देनजर कलस्‍टर एप्रोच के आधार पर किया गया है।

(3) फसलों व पौधों में अनुदान पर कीटनाशक दवाइयों की उपलब्‍धता एवं विक्रय हेतु पंजीकृत की गई कम्‍पनियों की सूची परिशिष्‍ट-3 पर संलग्‍न है। कृषि विभाग द्वारा विगत वर्षों में विभिन्‍न निर्माताओं द्वारा विक्रय किये गये कीटनाशकों की गुणवत्‍ता रिपोर्ट अमानक नमूनों के प्रतिशत के आधार पर , बी, सी डी ग्रेड में वर्गीकरण किया गया है जिनकी सूची परिशिष्‍ट-4 पर संलग्‍न है। यह वर्गीकरण भविष्‍य में गुणवत्‍ता के लिए नमूने लेने के लिए किया गया है जिसका सम्‍बन्‍ध अनुदान पर कीटनाशी रसायन उपलब्‍ध करवाने से नहीं था।

(4) उद्यान विभाग द्वारा प्राथमिकता के आधार पर ए ग्रेड की कीटनाशी सहकारी समितियों के माध्‍यम से कृषकों द्वारा स्‍वयं क्रय करने के निर्देश दिये गये थे। यदि कोई रसायन श्रेणी के निर्माता द्वारा उत्‍पादित नहीं किया जा रहा है तो क्रमश- बी, सी या डी श्रेणी के निर्माताओं द्वारा उत्‍पादित कीटनाशी ली जा सकेगी। सहकारी समितियों द्वारा वर्गीकरण की प्राथमिकता के अनुसार कीटनाशी कृषकों को उपलब्‍ध कराये गये हैं।

(5) कीटनाशी रसायनों की दरों पर नियंत्रण लागू नहीं हैं। निर्माताओं द्वारा प्रतिस्‍पर्धा दर पर कीटनाशी विक्रय किये जाते हैं।

(6) विभाग द्वारा विभागीय योजनाओं में दिशा-निर्देशों के अनुसार वर्ष 2005-06 एवं वर्ष 2006-07 में क्रमश: 3.70 करोड़ रुपये व 1.60 करोड़ रुपये के अनुदान का भुगतान सहकारी समितियों को किया गया है।

(7) सहकारी समितियों द्वारा विभिन्‍न निर्माताओं द्वारा आपूर्ति किये गये कीटनाशी रसायनों के लिए कुल राशि 5.30 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। कृषि विभाग द्वारा राज्‍य में ए बी सी एवं डी ग्रेडवार 180 कीटनाशी निर्माता कम्‍पनियों को वर्गीकृत किया गया है। परिशिष्‍ट-4 पर समितिवार, कम्‍पनीवार व ग्रेडवार उपलब्‍ध कराई गई कीटनाशी की सूची पूरे राज्‍य से संकलित करने में समय लगेगा जिसकी सूचना प्राप्‍त होने के उपरांत पृथक रूप से अलग कराई जानी संभव होगी।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, जवाब तो जो आपको दिया गया है उससे भिन्‍न बताया है इन्‍होंने।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): वह तो पढ़कर के सुना दिया न साहब। मैं तो मेरे प्रश्‍न पूछ रहा हूं। आपको जो 2005-06 में 41 करोड़ और 2006-07 में 76 करोड़ रुपया केन्‍द्र सरकार से मिला उसमें से आपने कुल कितना खर्चा किया? नम्‍बर दो, जब आपने यह डायरेक्‍शन यहां से दे रखे थे, आपने वर्गीकरण किया हुआ है कम्‍पनीज का ए बी सी एण्‍ड डी और डायरेक्‍शन उसमें यह है कि आप ए ग्रेड की कम्‍पनी से ही यह माल खरीदेंगे तो फिर आपने उसके विपरीत ए ग्रेड का उत्‍पादन होने के बावजूद भी सी और डी कम्‍पनी का माल जिसका ग्रेड आपने फिक्‍स किया था उनसे क्‍यों खरीदा?

श्री अध्‍यक्ष: मंत्री जी, आप एक बात बता दीजिये कि यह 76.27 करोड़ है यह राजस्‍थान के लिए है या फिर भारत के लिए है?

श्री सुरेन्‍द्रपाल सिंह टीटी (राज्‍य मंत्री, कृषि): राजस्‍थान के लिए है। पिछले वर्ष 70 प्रतिशत...

श्री अध्‍यक्ष: राजस्‍थान का तो उन्‍होंने पूछा ही नहीं। वह तो राष्‍ट्रीय मिशन में आया है...

श्री सुरेन्‍द्रपाल सिंह टीटी (राज्‍य मंत्री, कृषि): राजस्‍थान के जिन जिलों में राष्‍ट्रीय बागवानी मिशन काम करता है उन जिलों के लिए अनुदान आया है। उसके अन्‍दर 70 प्रतिशत पिछली बार खर्च हुआ और इस बार लगभग 90 प्रतिशत होने की संभावना है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): सम्‍भावना नहीं, सम्‍भावना तो सारा ही कर दोगे।

श्री अध्‍यक्ष: मंत्री जी, आप यह बतायें कि यह 76.27 करोड़ रुपया है यह राजस्‍थान के लिए ही है?

श्री सुरेन्‍द्रपाल सिंह टीटी (राज्‍य मंत्री, कृषि): राजस्‍थान के 17 जिलों के लिए है।

श्री प्रभुलाल सैनी (कृषि मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जिस राशि का जिक्र किया गया है वह राजस्‍थान के 17 जिलों के लिए है। 17 जिलों के लिए यह राशि आवंटित की गई है। 17 जिलों में 2005-06 में 13 जिले सम्मिलित किये गये थे और इस वर्ष 4 जिले और जिनमें बांसवाड़ा, सवाई माधोपुर, करौली और टोंक हैं उनको सम्मिलित किया गया है।

श्री अध्‍यक्ष: 17 जिलों के लिए है। मैं क्लियर होना चाहता हूं कि यह 17 जिलों के लिए आवंटित है.... (व्‍यवधान)

श्री सुरेन्‍द्रपाल सिंह टीटी (राज्‍य मंत्री, कृषि): 2004-05 में 15.26 करोड़ रुपये और 2006-07 में 24.55 करोड़ रुपये की राशि खर्च की गई है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): कुल कितना खर्च किया आपने बजट प्रावधान में से? एक तो यह बता दें आप।

श्री सुरेन्‍द्रपाल सिंह टीटी (राज्‍य मंत्री, कृषि): 2004-05 में 25.26 करोड़ और 2006-07 में 24.25 करोड़....

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): तो इतने करोड़ रुपये का आप उपयोग क्‍यों नहीं कर पाये? आपका जो बजट प्रावधान था, 2006-07 अब खत्‍म हो रहा है तो आपको जब इतना करोड़ रुपया गवर्नमेंट ऑफ इण्डिया ने दिया और दो साल में भी आप उसको उपयोग क्‍यों नहीं कर पाये? नम्‍बर दो, जो आपने ग्रेड की है कम्‍पनी की ए बी सी और डी, आप यह बता दें कि जो माल का प्रोडक्‍शन कम्‍पनी कर रही है उसकी कोस्‍ट के मुकाबले में बी सी एण्‍ड डी कम्‍पनी की जो कोस्टिंग है वह कितनी अधिक है? तीसरा, यह है कि आपने इनका जवाब दिया है वह यह दिया है कि हमने प्राइस फिक्‍स नहीं कर रखी है तो बी सी और डी कम्‍पनी, उनकी प्राइस क्‍लाइमेक्‍स पर है और जो ए क्‍लास कम्‍पनी जो प्रोडक्‍शन कर रही है उनके कम्‍पेरेटिवली उनकी लो है तो यह माल उस बी सी और डी ग्रेड कम्‍पनी से इसलिए खरीदा जा रहा है कि वह सारा का सारा गोल-गप्‍पा उस अनुदान में वो कर देते हैं। उसमें प्राइस अधिक है, उनको अधिक प्राइस देनी पड़ती है।

श्री अध्‍यक्ष: श्री सी. पी. जोशी।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या यह सही है कि भारत सरकार ने हॉर्टिकल्‍चर के सम्‍बन्‍ध में तीन साल पहले राजस्‍थान सरकार को सूचित किया और सूचित करने के बाद क्‍या राजस्‍थान सरकार ने उस हॉर्टिकल्‍चर कमीशन का लाभ उठाने के लिए कोई तैयारी की और जो तैयारी की तो 700 करोड़ रुपये में से केवल मात्र अभी तक 40 करोड़ रुपये ही क्‍यों खर्च हुए?

श्री सुरेन्‍द्रपाल सिंह टीटी (राज्‍य मंत्री, कृषि): माननीय अध्‍यक्ष जी, यह योजना जिन जिलों में लागू हुई हैं उन कई जिलों में बागवानी की तरफ किसान आकष्र्ज्ञित नहीं थे। हमने प्रचार-प्रसार करके 10 हजार हैक्‍टर में नये बाग़ इस बार लगाये हैं। पूरे राजस्‍थान में 50 सासल में 35 हजार हैक्‍टर में केवल बाग़ थे और हमने केवल एक साल के अन्‍दर 10-10 हजार हैक्‍टर बाग़ की परिधि की है। धीरे-धीरे लोग इसकी ओर आकर्षित हो रहे हैं। पिछले साल जो कम हुआ उसका कारणा था लोगों की अट्रेक्‍शन कम थी और अब लोगों को इस योजना का लाभ और इसके बारे में बता रहे हैं, लोग आ रहे हैं। इस बार 90 प्रतिशत तक खर्च होगा और अगली बार मुझे उम्‍मीद है कि हण्‍डरेड प्रतिशत और उससे आगे हम बढ़ जायेंगे।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 700 करोड़ में से 70 करोड़ रुपये खर्च नहीं हुए हैं और केवल मात्र सब्सिडी के नाम पर, सब्सिडी का इंसेंटिव देकर उन किसानों की एक गैंग बन गई है जो गैंग लाभ उठा रही है। सरकार कोई काम नहीं कर रही है, बता दो सरकार काम कर रही है तो। केवल वो आदमी जो सब्सिडी लेने वाले हैं वो सब्सिडी का लाभ उठाने के लिए कर रहे हैं, सरकार की कोई तैयारी नहीं है।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): अध्‍यक्ष महोदय, यह बिल्‍कुल सही है कि जो लोग इस मामले में बहुत ही एक्‍सपर्ट, चतुर, चालाक और शिक्षित हैं वो लोग ही इस सब्सिडी का फायदा ले रहे हैं। अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री महोदय से यह भी जानना चाहूंगा कि यह सब्सिडी प्राप्‍त करने में काश्‍तकार को कितनी कठिनाई आती है। मैं पूरी डिटेल सदन में नहीं बताना चाहूंगा पर इस बात से आप वाकिफ हैं कि काश्‍तकार सब्सिडी लेने में कितना परेशान हो रहा है और क्‍या-क्‍या इस मामले में परेशानी होती है। इसके सम्‍बन्‍ध में मैंने आपको व्‍यक्तिगत भी जानकारी दी थी। यह बात सही है कि काश्‍तकार जागरूक बहुत है, सब्सिडी लेना चाहते हैं, बाग़ भी लगाना चाहते हैं पर कुछ कठिनाइयां हैं वो मैं अध्‍यक्ष महोदय....

श्री अध्‍यक्ष: आप प्रश्‍न पूछिये, भाषण नहीं दें। प्रश्‍न पूछें।

 


vkj/akt/20032007/1130/1d

 

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): अध्‍यक्ष महोदय, भाषण नहीं है, कठिनाइयां नहीं हैं। यह सब्सिडी काश्‍तकार जो लेना चाहते हैं, उसको आसानी से नहीं मिलती हैं। जयपुर तक आने की उसकी हैसियत नहीं है, यह मैं निवेदन करना चाहता हूं अध्‍यक्ष महोदय।

श्री अध्‍यक्ष: श्री भरतसिंह।

श्री भरत सिंह (दीगोद): माननीय अध्‍यक्षजी, केन्‍द्र सरकार कृषि का विस्‍तार करने के लिए होर्टीकल्‍चर को एम्‍फेसिस कर रही है और उन्‍होंने दो साल में 117 करोड़ रुपये राजस्‍थान सरकार को इस मद में दिये हैं होर्टीकल्‍चर के लिए। मैं कृषि मंत्रीजी से जानना चाहूंगा कि क्‍या सरकार इस होर्टीकल्‍चर को सही रूप से लागू करने के लिए इसमें गम्‍भीर है और अगर है तो जिन 17 जिलों में यह योजना लागू हो रही हैं, उनमें कितने कर्मचारी एक्‍सटेंशन में होर्टीकल्‍चर में ट्रेंड है और क्‍या सरकार और इन लोगों को भर्ती कर रही हैं और दूसरी चीज, होर्टीकल्‍चर का एग्‍जाम्‍पल ले रहे हैं और यह मिसाल देने के लिए कि जो सरकारी फार्म कृषि विभाग के पास हैं, क्‍या उन्‍होंने दो साल के अन्‍दर उन कृषि फार्म्‍स पर एग्‍जाम्‍पलरी होर्टीकल्‍चर फार्म स्‍थापित करने का प्रयास किया है, करेगी सरकार? यह मैं इनसे जानना चाहता हूं।

श्री सुरेन्‍द्रपाल सिंह टीटी (राज्‍य मंत्री, कृषि): सम्‍माननीय अध्‍यक्षजी, जहां तक सब्सिडी आने का प्रश्‍न है, केवल बागवानी पर नहीं, बहुत से ग्रीन हाउस पर, पैक हाउस पर और हाईटेक नर्सरी पर, इन सबमें यह सब्सिडी सरकार द्वारा भेजी गई है लेकिन हमारा किसान अभी तक इतना एडवांस नहीं है। हर वर्ष हम 50-50 हजार पुस्‍तकें विभाग की तरफ से छपवाते हैं और किसान को हर पंचायत तक हम उनको भिजवाते हैं, उनको जानकारी दी है कि आप होर्टीकल्‍चर मिशन में क्‍या-क्‍या फायदा ले सकते हैं और उसी का नतीजा है कि पिछले 50 साल में जो 35,000 हैक्‍टेयर में बाग़ थे, हमने दो साल में 15,000 हैक्‍टेयर से ज्‍यादा बगीचे इस योजना के कारण बनाये हैं और धीरे-धीरे.....

श्री भरत सिंह (दीगोद): आदमी कितने हैं? किताबें नहीं, आदमी कितने हैं उसमें क्रियान्वित करने के लिए और किताबें तो आप लाखों बांट दो, कर्मचारी हैं क्‍या आपके पास? (व्‍यवधान)

श्री सुरेन्‍द्रपाल सिंह टीटी (राज्‍य मंत्री, कृषि): नहीं नहीं, मैं कोई बात कर रहा हूं।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 117 करोड़ में से 47 करोड़ का केवल मात्र भुगतान हुआ है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 117 करोड़ रुपये में से केवल मात्र 47 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं और उसके साथ ही बी सी एण्‍ड डी कम्‍पनियां हैं, उनकी आप रेट देखो, वह तो खरीदा गया है और जो ''ए'' क्‍लास है, उनके कम्‍पेरिजन में रेट कम है, उसको जान-बूझकर नहीं खरीदा गया है। इस प्रकार यह उन कम्‍पनियों ने मिलकर सारे अनुदान का दुरुपयोग किया गया है और कम्‍पनियों के माध्‍यम से जो सहकारी समितियों में जो काम करने वाले हैं और इसके अलावा जो एग्रीकल्‍चरल विभाग में जो वेरीफिकेशन करने वाले अधिकारी हैं, इन सबकी मिलीभगत से इन अनुदान का दुरुपयोग किया गया है और अनुचित अनुदान उठाया गया है।

श्री सुरेन्‍द्रपाल सिंह टीटी (राज्‍य मंत्री, कृषि): सम्‍माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारे विभाग से जो निर्देश जारी हुए थे कि किसानों को उच्‍च क्‍वालिटी का कीटनाशक उपलब्‍ध करवाने में प्राथमिकता दी जाये और उस पत्र में यह भी लिखा गया था कि अगर किसान उच्‍च क्‍वालिटी का नहीं लेना चाहता है या वह कम्‍पनियां पैदा नहीं कर सकती या करती हैं तो आप बाजार से खरीद सकते हैं और उस पर अनुदान हम देंगे। किसानों को बाजार से भी खरीदने का हमने उस पत्र में लिखा है लेकिन चूंकि किसानों से फीडबैक आ रहा था कि बी और सी कम्‍पनियां हैं, इनका माल ज्‍यादा सोसायटियां खरीदती हैं और ''ए'' ग्रेड का कम मिलता है तो हमने पत्र जारी करके ''ए'' ग्रेड उपलब्‍ध करवाने के लिए लिखा है तो उसमें कोई किसानों का बुरा नहीं है, इसमें तो किसान की भलाई हुई है, उसमें ''ए'' ग्रेड का माल उसको मिला है। बी और सी डी कम्‍पनियों का अगर कोई किसान लेना चाहता है तो उसको भी सब्सिडी मिलेगी।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): नहीं नहीं नहीं नहीं, उसमें यह नहीं है अध्‍यक्ष महोदय, आप स्‍वयं जानते हैं, उसमें यह नहीं है। वह सी और डी कम्‍पनियां...

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): मैं तो अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से यह जानना चाहता था, चूंकि मामला स्‍पष्‍ट है, पहली बात तो यह है कि क्‍या सरकार ''ए'' ग्रेड का माल नहीं खरीदने वाले जो अधिकारी हैं या जो भी संबंधित लोग हैं और सोसायटी में जिस प्रकार से घोटाला हुआ है, उन सबके बारे में जांच करायेगी, नम्‍बर एक।

श्री अध्‍यक्ष: यह तो अलग से प्रश्‍न है।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): दूसरा, एक प्रश्‍न और हैं माननीय अध्‍यक्ष महोदय। माननीय मंत्रीजी, आप सुनें, इर्रिटेट मत होइये। दूसरा एक और प्रश्‍न है। मेरा प्रश्‍न यह है कि सरकार यह कहती है कि भारत सरकार से जो पैसा आया है, उसके मुताबिक हमने बागवानी का काम बढ़ाया है। मुझे याद है माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बूंदी में ईसरी गार्डन की जमीन तक आपने दूसरों को दे दी, लाखों रुपये आपने खर्च कर दिये। आपने तो सरकारी फार्म, जैसा दीगोद से आने वाले माननीय सदस्‍य ने कहा, सरकारी फार्म कम करते जा रहे हैं। आपके कर्मचारी नहीं हैं। जहां घोटाला हो रहा है, उसकी जांच आप करने की स्थिति में नहीं हैं। आप स्‍पष्‍ट बता दो, आप स्‍पष्‍ट बता दो...(व्‍यवधान) आप सुनिये तो सही, मंत्रीजी, आप सीनियर आदमी हो, आप सुनिये तो सही। आप तो यह करिये, आप इसके बारे में सरकार क्‍या करेगी, किस प्रकार से गड़बड़-घोटाले करने वाले लोग हैं, उनके खिलाफ क्‍या एक्‍शन लेंगी? सरकारी फार्म्‍स जिन्‍होंने ट्रांसफर किये हैं और बागवानी रकबा कम किया है और कर्मचारी कम हैं तो उनको कैसे बढ़ायेगी? इन सबके बारे में बतायें, इस सदन में बता दो क्‍योंकि यह बहुत अहम मसला है। भारत सरकार जितना पैसा दे रही है, उस पैसे का सदुपयोग नहीं हो रहा है, उस पैसे से घोटाले हो रहे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय मंत्रीजी, आप वहां जो दुरुपयोग करने वाली बात है, वह बता दें।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): साथ ही यह भी बतायें, ''ए'' ग्रेड की कौन-कौनसी दवाइयां उपलब्‍ध नहीं थीं और ''बी'' और ''ए'' का रेट का कम्‍पेरिजन भी आप बतायें। आप कैसे कहते हैं कि ''ए'' ग्रेड कम्‍पनी वाले के पास दवाइयां नहीं थीं, अपनी मर्जी से ही आप कह रहे हो कि ''ए'' ग्रेड वाले के पास दवाइयां नहीं थी। आपने क्‍या वेरीफाई करवाया है कि कौन-कौनसी दवाइयां ''ए'' क्‍लास के पास थी या नहीं थी उस समय? उस समय तो दवाइयों की आवश्‍यकता थी।

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): अध्‍यक्ष महोदय, मेरा भी इसी से सम्‍बन्धित प्रश्‍न है मंत्री महोदय।

श्री सुरेन्‍द्रपाल सिंह टीटी (राज्‍य मंत्री, कृषि): सम्‍माननीय अध्‍यक्षजी, 140 कम्‍पनियां हमारे यहां विभाग में रजिस्‍टर्ड हैं और इसमें जो हमारे अमानक नमूने हैं, उनके आधार पर 44 कम्‍पनियों को ''ए'' ग्रेड का दर्जा मिला हुआ है। हमने किसी एक कम्‍पनी के लिए नहीं कहा। हमने किसानों को ''ए'' ग्रेड की दवाइयां उपलब्‍ध कराने के निर्देश दिये और उसके साथ यह भी कहा कि अगर किसान बाजार से खरीदना चाहे तो सी बी और डी ग्रेड की भी खरीद सकता है। कोई जरूरी नहीं है कि वह ''ए'' ग्रेड की ही खरीदे लेकिन ''ए'' ग्रेड की दवाइयां गुणवत्‍ता में अच्‍छी हैं और उसके अन्‍दर जब हम पौध लगाते हैं तथा उसमें अच्‍छी गुणवत्‍ता की दवाइयां मिलेंगी तो पौधा सरवाइव जल्‍दी करता है और जहां तक सब्सिडी का सवाल है, आपके राज में 25 प्रतिशत सब्सिडी थी और एक हैक्‍टेयर पर थी और हमने उसको चार हैक्‍टेयर में किया और 50 प्रतिशत किया। आपके राज में 1500 रुपये प्रति हैक्‍टेयर था, हमने...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): यह तो दिल्‍ली से पैसा आया है, आपने क्‍या दे दिया? सारा पैसा दिल्‍ली से आया है और अनुदान में और घोटाला कर दिया आपने और बी सी और डी ग्रेड की जितनी हाई रेट की दवाइयां थीं, उनसे खरीद ली गईं।

श्री सुरेन्‍द्रपाल सिंह टीटी (राज्‍य मंत्री, कृषि): ...हमने 22000 रुपये प्रति हैक्‍टेयर किया, 11 गुना कर दिया, 11 गुना कर दिया। आपके राज में एक पैसा नहीं‍मिलता था, हमने 7000 प्रति हैक्‍टेयर किसानों को दिया। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप प्रश्‍न का जवाब तो सुनिये।(व्‍यवधान) आप जवाब तो सुनिये पहले।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, करोड़ों रुपयों का मामला है। बी सी और डी की रेट की क्‍यों खरीदी जब ''ए'' ग्रेड कम्‍पनी के पास दवाई थी। (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): मंत्रीजी, आप उपलब्धि मत बताओ। आपके आदेश की पालना नहीं हुई।

श्री सुरेन्‍द्रपाल सिंह टीटी (राज्‍य मंत्री, कृषि): माननीय अध्‍यक्षजी, 17000 हैक्‍टेयर में नये बागवान लगाना, दो साल में 17000 हैक्‍टेयर में एक कीर्तिमान बना है।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): आपके आदेश की पालना नहीं हुई। आप इर्रिटेट मत हो, मैंने पहले भी अर्ज किया है। आपके आदेश की पालना नहीं हुई और ''ए'' ग्रेड की दवाइयां नहीं खरीदी गई हैं। आप क्‍या कर रहे हो, यह बताओ। लम्‍बी बात मत करो।

श्री सुरेन्‍द्रपाल सिंह टीटी (राज्‍य मंत्री, कृषि): आप एक मिनट सुन लें पहले। सम्‍माननीय अध्‍यक्षजी, मूल्‍य निर्धारण हम नहीं करते हैं, न हम कोई सीधी दवाई खरीदते हैं। किसान खरीदता है और अपना शेयर जमा कराता है और उसके बाद हम उनको अनुदान देते हैं।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): नहीं, किसान नहीं खरीदता है। मेनिपुलेशन है, मेनिपुलेशन है। वह दवाई विक्रेता ही किसानों के नाम से बिल बनाता है, वह खुद ही बनाकर खुद ही सारे अनुदान का पैसा ले लेता है।

श्री अध्‍यक्ष: यह बहुत गलत बात है। आप मंत्रीजी का जवाब सुनते नहीं हो। खुद ही बोलते जाते हो। आप मंत्रीजी को सुनिये पहले।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली):...और किसी भी किसान की फर्जी लिस्‍ट वहां पर दे देता है। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: बहुत गलत बात है। हिण्‍डौली से आने वाले माननीय सदस्‍य, मंत्री का जवाब भी सुनना चाहिए। सुनने के बाद यदि आपको कोई शक हो, शुबहा हो तो फिर पूछ लीजिये आप।

श्री भरत सिंह (दीगोद): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जवाब ही नहीं मिला है।

श्री सुरेन्‍द्रपाल सिंह टीटी (राज्‍य मंत्री, कृषि): सम्‍माननीय अध्‍यक्षजी, प्रावधान यह है कि जितना प्रतिशत सब्सिडी होती है, मान लो, 90 प्रतिशत सब्सिडी है, किसान स्‍वयं अपनी इच्‍छा से उस कम्‍पनी का माल लेना चाहता है, उसके लिए 10 प्रतिशत पैसा जमा कराता है और 90 प्रतिशत हम बाद में भुगतान करते हैं जब किसान ले जाता है। हम किसी भी कम्‍पनी को यह नहीं कहते कि यह दवाई आप वहां रखो। ''ए'' ग्रेड की 15 कम्‍पनी हैं। किसी भी कम्‍पनी की वहां वह दवाई ले सकता है।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय मंत्रीजी, आप मेरी एक बात का जवाब दीजिये। जो आपकी दवाइयां स्‍फूरियस है या सब-स्‍टैण्‍डर्ड है और आपको कम्‍प्‍लेंट की। आज दिन तक किसी भी कम्‍पनी को ब्‍लैकलिस्‍ट किया आपने?

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): जांच नहीं हुई।

श्री सुरेन्‍द्रपाल सिंह टीटी (राज्‍य मंत्री, कृषि): चार-चार कम्‍पनियों के लाइसेंस रद्द हुए हैं। जो भी हम नमूने लेते हैं, उसमें दोषी पाये जाने पर कम्‍पनियों के लाइसेंस रद्द कर देते हैं।

श्री अध्‍यक्ष: आप मेरी एक बात तो जवाब दे दीजिये, कितनों को ब्‍लैकलिस्‍टेड किया आपने, यह बतायें।

श्री सुरेन्‍द्रपाल सिंह टीटी (राज्‍य मंत्री, कृषि): चार कम्‍पनियों को किया।

श्री अध्‍यक्ष: चार कम्‍पनियों को किया? इसमें चार कम्‍पनियां ही नहीं हैं, इसमें 200 कम्‍पनियां हैं। (व्‍यवधान) More than two hundred.

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, आपने होर्टीकल्‍चर के सम्‍बन्‍ध में एक भी कम्‍पनी को ब्‍लैकलिस्‍ट नहीं किया, कोई भी कम्‍पनी को ब्‍लैकलिस्‍टेड नहीं किया है आज दिन तक, आप यह बतायें। होर्टीकल्‍चर के सम्‍बन्‍ध में एक भी कम्‍पनी को ब्‍लैकलिस्‍टेड नहीं किया।

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): यह वह कम्‍पनियां हैं, जिनके दो-दो के नाम से है। एक को तो रिजेक्‍ट कर दिया, दूसरी से काम चला रहे हैं। आप तो मंत्रीजी, यह बतायें कि यह डिग्‍गी जिनकी बनवा दी, उनको भी अनुदान-वनुदान देकर, आपने पैसा तो ले लिया, कनेक्‍शन दे रहे हैं क्‍या बिजली के?

श्री अध्‍यक्ष: अब आसन ने पूछ लिया, अब आपका बाकी है क्‍या? मेरे प्रश्‍न का जवाब नहीं आया। जब आसन ने पूछ लिया, वह जवाब देंगे।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): पहले आपका आ जाये।

श्री सुरेन्‍द्रपाल सिंह टीटी (राज्‍य मंत्री, कृषि): सम्‍माननीय अध्‍यक्षजी, हमारे विभाग में रजिस्‍ट्रेशन करने का तरीका है। तीन साल के जो अमानक नमूने 100 प्रतिशत, 80 प्रतिशत तक उसमें दर्ज हैं, उसमें जितनी भी दवाइयां, जो हमारे मापदण्‍ड हैं, उसमें आती हैं, उसको ही हम रजिस्‍टर करते हैं, दूसरों को हम रजिस्‍टर नहीं करते हैं। 140 कम्‍पनियां रजिस्‍टर्ड की हैं हमने। जो सब-स्‍टैण्‍डर्ड पाई जाती हैं, उसको हम रजिस्‍ट्रेशन ही नहीं करते हैं। वह तो रजिस्‍टर्ड तब होती है, जब तीन साल तक सारे नमूने सही पाये जाते हैं। (व्‍यवधान)

श्री बद्रीलाल जाट (कपासन): आदरणीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से जानना चाहता हूं कि...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, आधे घंटे की चर्चा करवा लें यहां पर। अध्‍यक्ष महोदय, इस प्रश्‍न पर आधा घंटे की चर्चा करवा लें। अध्‍यक्ष महोदय, अच्‍छा यह रहेगा कि इस प्रश्‍न पर आधा घंटे की चर्चा की जाये। भारत सरकार से इतना बड़ा पैसा आ रहा है, सरकार की तैयारी नहीं है और लोगों को क्‍वालिटी की दवाइयां नहीं मिल रही हैं, सब-स्‍टैण्‍डर्ड की दवाइयां मिल रही हैं। यह तो केवल सब्सिडी के आधार पर यह होर्टीकल्‍चर हो रहा है, इसका कोई आधार नहीं है।

श्री बद्रीलाल जाट (कपासन): मैं आपके माध्‍यम से यह मंत्रीजी से विनती करना चाहता हूं...(व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं एक निवेदन करूं, यह जो इन्‍होंने कहा कि किसान खरीदता है....

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य एक साथ पूछना शुरू कर देते हैं। आप एक-एक पूछिये। माननीय सदस्‍य, एक-एक पूछें।

 

Jkj/akt/11.40/1e/20.3.2007

 

श्री बद्रीलाल जाट: अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से यह निवेदन करना चाहूंगा कि क्‍या इस प्‍लान में चित्‍तौड़ जिला सम्मिलित है और सम्मिलित है तो क्‍या सब्‍सीडी में कोई कटौती हुई है। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: मंत्री महोदय, जब प्रश्‍न पूछते हैं माननीय सदस्‍य, तो आपको बैठ जाना चाहिए। (व्‍यवधान)

श्री भरत सिंह: माननीय अध्‍यक्षजी, मैंने इनसे एक बुनियादी प्रश्‍न किया था कि 17 जिलों में आपका प्रोग्राम चल रहा है, कितने आपके पास ट्रेंड, प्रशिक्षक वहां पर ग्रामसेवक हैं हार्टीकल्‍चर में, उसका उत्‍तर दीजिये।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, है ही नहीं कोई, है ही नहीं, मैं कह रही हूं न कि नहीं है, मुझे मालूम है, नहीं है।

श्री भरत सिंह: माननीय अध्‍यक्षजी, इतना बड़ा प्रोग्राम है और इसमें राजस्‍थान का भविष्‍य जुड़ा हुआ है, हमारे नौ हजार से ऊपर ग्राम पंचायते हैं, चालीस गांव वालों पर एक एक्‍सटेंशन का आदमी और हार्टीकल्‍चर का प्रोग्राम तो भारत, यह राजस्‍थान सरकार इस दिशा में क्‍या पहल कर रही है कि यह कार्यक्रम सफल हो और हम इसको गांवों तक पहुंचा सकें। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: अब आप एक-एक का जवाब तो आने दीजिये। नो-नो, बहुत महत्‍वपूर्ण प्रश्‍न पूछा है। महत्‍वपूर्ण प्रश्‍न है। माननीय मंत्रीजी, क्‍या ट्रेंड आपके पास ग्रामसेवक हैं जो हार्टीकल्‍चर के बारे में जानते हों और जो उनको जानकारी दे सकते हों, काश्‍तकारों को। (व्‍यवधान) आप स्‍थान ग्रहण करें।

श्री सुरेन्‍द्र पाल सिंह टी.टी.: पर्टीकुलरली हार्टीकल्‍चर, बी.एससी. जो लड़के हैं, बी.एससी.(एग्रीकल्‍चर)...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: तो भी उनके जवाब तो देने दीजिये। (व्‍यवधान)

श्री बद्रीलाल जाट: इन सतरह जिलों के प्‍लान में क्‍या चित्‍तौड़ जिला सम्मिलित और क्‍या राजस्‍थान सरकार ने सब्‍सीडी कम करने के कोई आदेश जारी किये हैं।  जिन काश्‍तकारों ने बागवानी के जो प्‍लान थे उन्‍होंने आंवला के प्रोजेक्‍ट लगाये, उन्‍होंने लगाये थे सर, जुलाई से पूर्व और उन्‍होंने बिल भी सबमिट कर दिये और उसके बाद जुलाई-अगस्‍त में तो उनकी सब्‍सीडी 22.50 हजार प्रति हैक्‍टेयर थी और 29 जनवरी को एक आदेश निकला कि उनकी सब्‍सीडी 12.5 हजार प्रति हैक्‍टेयर कर दी।  उन काश्‍तकारों का भविष्‍य अंधकार में, वास्‍तव में सर, चिंता का विषय है कि जिन्‍होंने इतनी मेहनत की और इतना इंसेंटिव प्रोग्राम है उसमें उन्‍होंने सहभागिता निभा कर सारी व्‍यवस्‍थाएं कीं और उसके बाद उनके साथ ऐसा कुठाराघात हुआ है। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप प्रश्‍नों का जवाब तो आने नहीं देते, बीच में खड़े हो जाते हैं।

श्री सुरेन्‍द्रपाल सिंह टीटी: माननीय अध्‍यक्षजी, माननीय विधायकजी ने जो क्‍वेश्‍चन किया है, हार्टीकल्‍चर डिपार्टमेंट के अलग से 187 कृषि पर्यवेक्षक हैं और उनमें से...

श्री अध्‍यक्ष: कितने? 

श्री सुरेन्‍द्रपाल सिंह टीटी: 187।  और हार्टीकल्‍चर के अंदर तो अलग हैं, उनके ए.डी. भी अलग हैं, उनके हार्टीकल्‍चर कृषि पर्यवेक्षक...

श्री प्रमोद जैन भाया: कितनी ग्राम पंचायते हैं, यह भी स्‍पष्‍ट करें।

श्री अध्‍यक्ष: यह गलत बात है, आपको उनको जवाब देने दीजिये।

श्री सुरेन्‍द्रपाल सिंह टीटी: 187 कृषि पर्यवेक्षक हैं और समय-समय पर उनको प्रशिक्षण भी दिया जाता है और जो भी कार्यक्रम आता है इसको लागू कराने में यह 187 कृषि पर्यवेक्षक काम करते हैं।  यह हार्टीकल्‍चर के हैं और बी.एससी.(एग्रीकल्‍चर) भी इसमें, जो इनकी क्‍वालिफिकेशन है शुरू की, बी.एससी.(एग्रीकल्‍चर) के यह लड़के होते हैं।

श्री अध्‍यक्ष: यह 187 इन सतरह जिलों में नियुक्‍त हैं या कहीं और भी हैं ?

श्री सुरेन्‍द्रपाल सिंह टीटी: हार्टीकल्‍चर के अंदर हैं, 187 ।

श्री अध्‍यक्ष: इन सतरह जिलों में ही?

श्री सुरेन्‍द्रपाल सिंह टीटी: हां, जी। (व्‍यवधान)

श्री भरत सिंह: पूरे राजस्‍थान के बता रहे हैं मैडम।  यह पूरे राजस्‍थान के बता रहे हैं। (व्‍यवधान)

श्री सुरेन्‍द्रपाल सिंह टीटी: अब बाड़मेर, जैसलमेर में हार्टीकल्‍चर का काम नहीं है, वहां कैसे होंगे। जहां-जहां जिस जिले में काम है वहीं होंगे। बाड़मेर, जैसलमेर, चूरू वहां कोई होगा तो एकाध होगा। नहीं है। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, मैंने तो यों ही पूछा। (व्‍यवधान) अब जवाब देने दीजिये।

श्री हरिमोहन शर्मा: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा बहुत साफ आरोप है कि जो सी और डी कम्‍पनी की, ए और बी कम्‍पनी की मेडिसिन की जो रेट बहुत हायर है, किसानों के दस प्रतिशत भीवह खुद ही अपने पास से उसमें एडजस्‍ट करते हैं और किसानों की फर्जी लिस्‍ट बनाकर दवाइयां अपने पास रखकर मार्केटिंग सोसाइटीज में उस बिलों को पेश कर देते हैं और यह सारी अनुदान की राशि वह खुद ही खा जाते हैं, इसकी जांच कराइये आप, वह खुद ही खा जाते हैं। (व्‍यवधान)

श्री सांवर लाल: कोई है क्‍या उदाहरण आपके पास एक-दो? 

श्री हरिमोहन शर्मा: हां, हां। हां, हां। (व्‍यवधान)

श्री सांवर लाल: ऐसे अनर्गल आरोप नहीं लगाते हैं सदन में। 

श्री हरिमोहन शर्मा: हां, हां। रेट उठा कर देख लो...(व्‍यवधान)

श्री सांवर लाल: सदन पटल पर रख दें, जांच करवा देगी सरकार। क्‍या बकवास बातें करते हो। केवल सामान्‍य बात करने से कोई नहीं होता है, अगर आपके पास तथ्‍य हैं तो मामला रख दें। (व्‍यवधान) जबरदस्‍ती आरोप लगाकर के..(व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा: यह सिंचाई नहीं है। यह सिंचाई नहीं है, यह कृषि है।

श्री सांवर लाल: यहां कोई भाषण नहीं देते, अगर आपके पास तथ्‍य है तो रखिये।(व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा: या तो आप यह कहो कि कृषि मंत्री जवाब नहीं दे सकते।(व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया: उदाहरण विचाराधीन हैं, चल रहे हैं, गंगानगर, हनुमानगढ़ का मामला है, पहले से ही चल रहा है जांच में।(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: स्‍थान ग्रहण करें, स्‍थान ग्रहण करें। माननीय मंत्रीजी, क्‍या आपके पास बागवानी करने वाले काश्‍तकारों का कोई रजिस्‍ट्रेशन या कोई जानकारी है कि कौन-कौन किस जिले में कितने आपके ऐसे व्‍यक्ति हैं जो हार्टीकल्‍चर करके बागवानी कर रहे हैं और क्‍या नियमित रूप से कोई आपका अधिकारी है जो वहां जाकर उनको सलाह देता हो।

श्री सुरेन्‍द्रपाल सिंह टीटी: हर जिले के अंदर अलग से हार्टीकल्‍चर का अधिकारी है और बीस जिलों के अंदर 187 पर्यवेक्षक हैं। जैसा आप पूछ रहे हैं, बीस जिलों में हार्टीकल्‍चर का काम है, वहां 187 कृषि पर्यवेक्षक केवल हार्टीकल्‍चर का काम करते हैं और वह जो भी किसान बागवानी करना चाहता है उनसे वह सम्‍पर्क करके रजिस्‍ट्रेशन करके उन्‍हें पौधारोपण कराना और तीन साल तक उनको देखना...

श्री अध्‍यक्ष: आपके पास रजिस्‍ट्रेशन है क्‍या उनका? रजिस्‍ट्रेशन है आपके पास?

श्री सुरेन्‍द्रपाल सिंह टीटी: उसका रजिस्‍ट्रेशन जब अनुदान लेगा तब रजिस्‍ट्रेशन...

श्री अध्‍यक्ष: जानकारी। मेरा मतलब जानकारी से है। क्‍या आपके पास इस तरह की कोई सूची है कि इस जिले में इतने लोग बागवानी करते हैं। ऐसी कोई सूची है? कोई सूची नहीं है आपके पास । (व्‍यवधान) आपके पास कोई सूची नहीं है, मैं कह रही हूं। (व्‍यवधान)

श्री जोगेश्‍वर गर्ग: अध्‍यक्ष महोदय, जो आपने जानकारी मांगी थी, मैं भी, अध्‍यक्ष महोदय, यही जानना चाहता था, मैं भी यही जानना चाह रहा था...

श्री रामप्रताप कासनिया: अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से यह जानना चाहता हूं कि जो पौधे, जो दवा सब्‍सीडी पर मिलती है उससे उसी रेट में जैसे आपने सब्‍सीडी दे दी, कोई चीज दस रूपये की मिल रही है और उसमें सब्‍सीडी शामिल है, क्‍या यह सही है कि वही चीज बाजार में कम रेट पर उपलब्‍ध होती है, इसके प्रमाण गंगानगर, हनुमानगढ़ जिले में तो मैं एक नहीं, सैंकड़ों प्रमाण पेश कर दूं।

श्री जोगेश्‍वर गर्ग: अध्‍यक्ष महोदय, जो आपने प्रश्‍न किया, मैं जालौर एवं पाली के संदर्भ में...

श्री अध्‍यक्ष: नहीं। माननीय मंत्रीजी।

श्री जोगेश्‍वर गर्ग: वही जानकारी करना चाहता हूं, क्‍या सरकार को यह जानकारी है कि घूम-फिरकर के वही दस-बीस काश्‍तकार बार-बार वही फायदा ले लेते हैं और ये प्रभावशाली लोग हैं, उनकी सूची आप देखें और जांच करेंगे क्‍या उसकी?

श्री अध्‍यक्ष: सूची है ही नहीं इनके पास। (व्‍यवधान)

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल: मेरा एक प्रश्‍न है अध्‍यक्ष महोदय। यह इतना बड़ा मिशन चल रहा है...

श्री अध्‍यक्ष: माननीय मंत्री। (व्‍यवधान) नो, नो, माननीय मंत्री खड़े हुए हैं भाई।

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल: मेरा इसी के संबंध में प्रश्‍न है अध्‍यक्ष महोदय, मैं बहुत देर से प्रयास कर रहा हूं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री की बात तो सुन लें अध्‍यक्ष महोदय। एक सवाल पर, अध्‍यक्ष महोदय, चालीस मिनट हो गये। चालीस मिनट हो गये।

श्री अध्‍यक्ष: आप इनकी बात सुनिये। नो, नो। अब आपको पूछना है, उसके बाद पूछियेगा। माननीय मंत्री।

श्री प्रभुलाल सैनी(कृषि मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हिण्‍डौली से आने वाले माननीय सदस्‍य ने यहां यह आरोप लगाया सदन में कि कीटनाशकों के वितरण और उनके अनुदान में घोटाला हुआ है, यह निरर्थक है।  मैं आपको जानकारी देना चाहूंगा, राज्‍य का कृषि विभाग एक भी पैसे की दवा नहीं खरीदता है। नम्‍बर दो, मैं यह भी सदन में जानकारी देना चाहूंगा कि जिन कम्‍पनीज के बारे में जिक्र हुआ है, ए क्‍लास, बी क्‍लास, सी क्‍लास और डी क्‍लास, इन कम्‍पनियों का श्रेणीकरण उनके द्वारा जितने सेम्‍पल्‍स हम लोगों ने लिये हैं, उदाहरण के लिए ए कम्‍पनी के हमने सौ सेम्‍पल लिये हैं, यदि पाँच प्रतिशत से कम उनकी अमानकता पाई जाती है ऐसी कम्‍पनी को ए श्रेणी का दर्जा दिया गया है। इसमें ऐसा नहीं है कि बहुत बड़ी कम्‍पनी जिसने बहुत अधिक दवा बनाई हो और उसको, ऐसा नहीं है माननीय अध्‍यक्ष महोदय।  उन कम्‍पनियों का दर्जा उनके मानकीकरण के आधार पर हम लोगों ने दिया है। हमारा इस प्रकार का सर्कुलर जारी करने का जो उद्देश्‍य था माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उसके पीछे एक ही मंशा थी कि ऐसी कम्‍पनियां जिनकी मानकता सही मिलती है, सबसे पहले काश्‍तकारों को हम लोगों ने सलाह देने का प्रयास किया कि ए क्‍लास से लें, फिर उसके बाद बी से लें, इस प्रकार का दिया। एक और जानकारी देना चाहूंगा, जितनी भी सब्‍सीडी, जो अनुदान दिया गया है वह केवीएस और सहकारी समिति के माध्‍यम से भुगतान किया जाता है, उनको भुगतान किया जाता है, किसानों के अनुदान की जो हिस्‍सा राशि है, किसान अपने आप स्‍वयं जमाता है, विभाग के पास न तो कोई उसके बारे में हम लोग किसी को सजेस्‍ट करते हैं कि फलां कम्‍पनी से ही आप खरीदें। यह उसका विकल्‍प है, यह उसकी इच्‍छा है कि वह किस कम्‍पनी से खरीदे। दूसरी बात, मैं आपको जानकारी देना चाहूंगा कि राशि खर्च कम क्‍यों हुई। इसके बारे में, अध्‍यक्ष महोदय, जानकारी दूं आपको कि हमें 05 और 06 में 41 करोड़ मिले जो लगभग जनवरी के महीने में प्राप्‍त हुए थे जो दो-तीन महीने ही रह गये थे, इस वजह से उस योजना का प्रचार-प्रसार करना और हम लोगों ने इतना प्रयास किया अध्‍यक्ष महोदय कि हम लोगों ने कृषि योजना आपके द्वार कार्यक्रम चलाकर सारे प्रतिनिधि जिसमें माननीय विधायक भी सम्मिलित हैं, चाहे मंत्री हो, चाहे सांसद हो, चाहे जिला प्रमुख हो, सब लोगों को हमने सर्कुलर भेजकर निवेदन किया था कि इस प्रकार की योजनाओं के आवेदन पत्र उन ग्राम सभाओं के माध्‍यम से तैयार करके उन किसानों को लाभान्वित कराया जायेगा और इसी की पहल पर हम लोगों ने किया।  जहां तक दूसरा प्रश्‍न, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आया है कि हार्टीकल्‍चर में ग्रामसेवकों की कमी है, निश्चित रूप से, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सरकार के सीमित साधन हैं और मैं तो कहना चाहता हूं, अध्‍यक्ष महोदय, कि हार्टीकल्‍चर के बारे में यदि चिंता की है तो मात्र हम लोगों ने गत वर्ष से इसको शुरू किया है, उससे पहले बहुत कम इसका बजट होता था, ढाई गुना बजट भी राजस्‍थान सरकार ने, हम लोगों ने उसको बढ़ाया है और हमारा यह प्रयास है। खर्चा कम क्‍यों हुआ, उसके और भी कारण हैं, उसमें पोस्‍ट हार्वेस्टिंग मेनेजमेंट का भी खर्चा है, उसमें प्रोसेसिंग व्‍यव्‍स्‍था जैसे आपके मोबाइल यूनिट्स भी लगाना है, आपके ग्रीन हाउस लगाना है, आपके पोलिनेट हाउसेज लगाना है, आपके अनेक प्रकार की प्रोसेसिंग इकाइयां लगाना है, उनके बारे में हम लोगों ने जन चेतना प्रारम्‍भ की है और हम यह चाहते हैं कि राजस्‍थान का किसान आगे बढ़कर उन योजनाओं को ले और इसी वजह से.....

 

Lpm/akt/1150/1f/2032007

 

 

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसमें खर्चा कम हुआ है और हमारा प्रयास है जैसा आपने कहा कि सरकारी फार्मों के बारे में माननीय दीगोद से आने वाले माननीय सदस्‍य ने जानना चाहा, मैं जानकारी देना चाहूंगा माननीय अध्‍यक्ष महोदय आपके माध्‍यम से हम लोगों ने एग्रीकल्‍चर को बढ़ावा देने के लिए राजस्‍थान में 19 हमारे जो फार्म हाऊस हैं उन पर हम लोग ग्रीन हाउस की स्‍थापना के लिए स्‍वीकृतियां हम लोगों ने जारी कर दी हैं और मार्च तक निश्चित रूप से हमारे ग्रीन हाउस विकसित होकर के उसका लाभ राजस्‍थान के आम किसान को प्रदर्शन के रूप में हम लोगों ने उपलब्‍ध कराई है। इसके बाद और हमारा आगे प्रयास रहेगा। यदि जो भी काश्‍तकार माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं ग्रीन हाउस के बारे में जानकारी देना चाहूंगा कि लघु और सीमान्‍त कृषक जो ग्रीन हाउस की स्‍थापना करना चाहते हैं जैसे माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप इजराइल में भी देखकर आई हैं उन काश्‍तकारों को राज्‍य सरकार ने अपनी और से पहले जो 50 प्रतिशत सब्सिडी मिलती थी उसको बढ़ाकर हम लोगों ने 75 प्रतिशत करके हम लोग उन काश्‍तकारों को सब्सिडी का यह भुगतान भी हम लोग कर रहे हैं। अध्‍यक्ष महोदय, इसलिए ये सारी बातें जो भी माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो सदन के बीच में आई है मैं इतनी ही जानकारी देना चाहूंगा कि कृषि विभाग बिलकुल हर बिन्‍दु पर तैयार है और हम उसकी पूरी परिस्थितियों पर नजर रखे हुए हैं। आरोप लगाना, प्रत्‍यारोप लगाना यह कोई भी व्‍यक्ति कोई भी बात कह सकता है लेकिन मैं (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ए, बी और सी इनकी दवाइयों की कीमत में कितना अंतर है? जब आपने ग्रेड फिक्‍स की तो ए ग्रेड की दवाइयों की मुकाबले में सी एण्‍ड डी की कितनी ज्‍यादा उसकी रेट है और आपने ज्‍यादा उसको रेट कंट्रोल करने के लिए आपने हाथ खड़े कर दिये, हाथ खड़े कर दिये कि हम रेट कंट्रोल नहीं करेंगे, जचे जितने में ही बेचो, डी की चाहे वह पाँच रूपए की चीज 50 रूपए में बेचो तो एग्रीकल्‍चर डिपार्टमेंट सामने नहीं आयेगा, यह कौनसा अन्‍याय है? इन्‍होंने कहा प्राइस कंट्रोल नहीं करेंगे, डी और सी कितना ही प्राइस ले छूट है, हमारी तरफ से, तो डी, सी और बी की जो प्राइस कंट्रोल है, प्राइस कंट्रोल नहीं होने से उन्‍होंने उसकी ज्‍यादा कीमत एक स्‍टैण्‍डर्ड कंपनी के मुकाबले में ज्‍यादा करके उस किसान का दस पैसा, दस रूपया, दस प्रतिशत खुद ने उसमें जमा कराके और बिलों का वेरिफिकेशन कराके दवाइयां अपने पास रखकर उसका फिजिकल वेरिफिकेशन नहीं कर और उन्‍होंने उनसे अनुदान उन कंपनियों ने उठा लिया (व्‍यवधान)

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): अध्‍यक्ष महोदय, मेरा एक प्रश्‍न है मंत्री जी से (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, बता दें मंत्री जी आप, आपने बी और सी कैटेगिरी की दवाइयां अलाऊ क्‍यों की, जब आपका (व्‍यवधान) कंट्रोल है नहीं, पैसा राजस्‍थान सरकार का और भारत सरकार है तब आपने सर्कूलर लगाकर यह व्‍यवस्‍था क्‍यों की कि किसान उस क्रय विक्रय समिति से मिलकर के बी और सी केटेगिरी की दवाइयां भी ज्‍यादा प्राईस में ले सके। यह आपने अलाऊ क्‍यों किया? यही आपके ऊपर आरोप है कि आपके इस सर्कुलर के कारण उस किसान के साथ अन्‍याय हुआ और घटिया किस्‍म की दवाइयां ज्‍यादा पैसे में ली, यह प्रश्‍न है इसका जवाब दीजिए आप। जब प्रश्‍न यह है कि आपके सर्कुलर के कारण घटिया दवाई ज्‍यादा पैसे से लेने के लिए किसान फंसा यह जिम्‍मेदारी आपकी है, इसका जवाब दीजिए आप (व्‍यवधान)  

श्री अध्‍यक्ष: अब जवाब सुने मंत्री जी का, नो जवाब सुनिए (व्‍यवधान) जवाब सुनिये माननीय सदस्‍य।

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): बिजली के कनेक्‍शन भी दिला रहे हो क्‍या मंत्री महोदय से इतना सा मेरा एक प्रश्‍न और है।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य जवाब सुनिये पहले, नो (व्‍यवधान)

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): अध्‍यक्ष महोदय, पिछले आधे घंटे से प्रयास कर रहा हूं मेरा इतना सा प्रश्‍न है कि मंत्री महोदय  जिन किसानों को अनुदान दे रहे हैं, अनुदान के साथ-साथ उनको पहले प्राथमिकता से कृषि कनेक्‍शन भी उपलब्‍ध करवा रहे हैं या वह अपने स्‍तर पर ही ले रहे हैं?

श्री अध्‍यक्ष: आपको इनका जवाब देने की आवश्‍यकता नहीं है, ये बिना इजाजत के बोले हैं।

श्री प्रभुलाल सैनी (कृषि मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य ने सीधे-सीधे यह आरोप लगाने का प्रयास किया है कि ए क्‍लास, बी क्‍लास और सी क्‍लास की कपंनी से किस प्रकार से यह कीटनाशक खरीद किये, यह मैं जानकारी देना चाहूंगा अध्‍यक्ष महोदय, ए क्‍लास की एक कंपनी नहीं है बाकी 40 कंपनियां रजिस्‍टर्ड है और इन 40 कम्‍पनियों के रजिस्‍ट्रेशन के बाद (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आपको एक भी (व्‍यवधान) दवाई हो तो इनके प्राईस देखो आप (व्‍यवधान) ए, बी और सी में कितना अंतर है? (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी कह रहे हैं 40 हैं ए क्‍लास की तो फिर सी और डी को अलाऊ क्‍यों की आपने? आप कंडीशन करते कि  ए क्‍लास की ही लेंगे, सी और डी की अलाऊ क्‍यों की आपने? आपका इंटेशन साफ होता है कि 40 कंपनियां है तो आपने सी और डी अलाऊ क्‍यों की आपने?

श्री प्रभुलाल सैनी (कृषि मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय सदस्‍यों को अपडेट करना चाहूंगा कि जो 40 कंपनियां ए ग्रेड की है वो सारी दवा नहीं बनाती है लगभग 150 से अधिक कीटनाशक दवाइयां बनती है और ए क्‍लास जो कंपनी है यह जरूरी नहीं है कि सारी की सारी ए क्‍लास की कंपनी ही बनाती हो (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आप वेरिफाई कैसे करोंगे? ये वेरिफाई कैसे करोंगे कि यह दवाई (व्‍यवधान) आप कैसे वेरिफाई कर रहे हो आपके आदमी तो (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आप भी लिखते (व्‍यवधान) सी और डी से ली है (व्‍यवधान)

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): मंत्री महोदय, यह आप किस आधार पर कह रहे हैं कि आपने कोई वेरिफिकेशन करवाया है इसके बारे में (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आप यह वेरीफाई कर देते (व्‍यवधान) यह समझ में आता है आपने क्रय विक्रय की यह व्‍यवस्‍था कर ली है (व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): अध्‍यक्ष महोदय, यह व्‍यवस्‍था दो साल से चालू है (व्‍यवधान)

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): मंत्री महोदय, इसका वेरीफिकेशन आपने कब करवाया यह बताने की कृपा करें (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ए ग्रेड कंपनी की दवाइयां नहीं है यह किससे वेरीफाई करवाया आपने (व्‍यवधान)

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): मंत्री महोदय, मैं बताना चाहूंगा कि ए ग्रेड की दवाइयों में सभी प्रकार की दवाइयां बनती हैं, दवाइयों की बिना जानकारी के यह बात कहीं है (व्‍यवधान) 

श्री अध्‍यक्ष: श्री सी.डी. देवल, नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): अध्‍यक्ष महोदय, यह जो सेंपल की बात आई है (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: नैक्‍स्‍ट श्री सी.डी.देवल।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): अध्‍यक्ष महोदय, यह जो सेंपल की बात आई है (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, कुछ नहीं, अंकित नहीं हो।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): 000

श्री बद्रीलाल जाट (कपासन): 000

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): 000

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन पुकार लिया है, मैंने नैक्‍स्‍ट प्रश्‍न पुकार लिया है, नो, स्‍थान ग्रहण करें ।

 

जिला पाली की स्‍वायत्‍तशासी संस्‍थाओं को बाढ़ राहत कार्यों हेतु आवंटित राशि

 

133. श्री सी.डी.देवल (रायपुर) क्‍या सहायता मंत्री यह बताने कृपा करेंगे:-

(1) क्‍या यह सही है कि गत वर्ष राज्‍य सरकार ने पाली जिले की नगरपालिकाओं/नगरपरिषद को बाढ़ पीडि़तों की मदद के लिए एवं बाढ़ग्रस्‍त क्षेत्र में निर्माण के लिए धनराशि उपलब्‍ध करायी थी? यदि हां, तो प्रत्‍येक नगरपालिका/नगर परिषद को उपलब्‍ध कराई गयी राशि का विवरण सदन की मेज पर रखे।

(2) क्‍या यह सही है कि पाली जिले की नगरपालिका सादड़ी एवं बाली नगरपालिका द्वारा बाढ़ से हुई हानि के तहत जो धनराशि प्राप्‍त की गयी थी, उसका समानता के आधार पर वितरण नहीं किया गया?

(3) क्‍या यह सही है कि इसकी शिकायतें जिला कलक्‍टर, पाली एवं सरकार को की गई? यदि हां, तो क्‍या उक्‍त शिकायतों पर कार्यवाही की गयी? यदि हां, तो क्‍या, नहीं तो क्‍यों? शिकायती पत्रों की प्रति सदन की मेज पर रखे।

आपदा एवं राहत मंत्री (श्री किरोड़ लाल):- (1) जी हां नगरपालिकाओं/नगरपरिषद को उपलब्‍ध कराई गई राशि निम्‍न प्रकार है:-

नगरपालिका/नगरपरिषद का नाम    

आवंटित राशि (लाखों में)

1. नगरपरिषद, पाली   

25.00  

2. नगरपालिका, सादड़ी 

60.00  

3. नगरपालिका, जैतारण

20.00  

4. नगरपालिका, सोजत

50.00  

5. नगरपालिका, तख्‍तगढ़     

45.00  

6. नगरपालिका, बाली  

45.00  

7. नगरपालिका, सुमेरपुर     

20.00  

8. नगरपालिका, रानीखुर्द

20.00  

9. नगरपालिका, फालना

45.00  

योग:-

330 लाख रूपये

 

(2) जी नहीं, यह सही नहीं है।

(3) जी हां, निम्‍न दो शिकायतें प्राप्‍त हुई थी:-

1. राजस्‍थान समाचार पत्र दिनांक 30.12.06 एवं 31.12.06 में प्रकाशित शीर्षक नगरपालिका सादड़ी के बाढ़ एवं अतिवृष्टि से क्षतिग्रस्‍त सड़कों के कार्यों में अधिशाषी अधिकारी, न.पा. सादड़ी द्वारा भेदभाव/पक्षपात बाबत प्राप्‍त शिकायत की जांच उपखण्‍ड अधिकारी, देसूरी से कराई गई। जांच रिपोर्ट के अनुसार समाचार पत्र में प्रकाशित शिकायत तथ्‍यहीन पाई गई।

2. माननीय विधायक महोदय सी.डी. देवल के पत्रांक दिनांक 30.11.06 के द्वारा नगर पालिका, बाली के संबंध में प्राप्‍त शिकायत बाबत आप ही की शिकायत थी, आपकी शिकायत प्राप्‍त हुई जिसकी जांच कराई गई , जांच रिपोर्ट में जांच अधिकारी द्वारा बताया गया कि नगरपालिका बाली के सभी पार्षदों को जिसमें कांग्रेस के भी शामिल है, नगरपालिका बाली द्वारा करवाए जा रहे कार्यों से किसी प्रकार की शिकायत नहीं है। 

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  मैं आपके माध्‍यम से यह जानना चाहता हूं कि जिन नगरपालिकाओं को इन्‍होंने धनराशि अतिवृष्टि या बाढ़ बचाव के लिए दी है उसका क्‍या आधार रहा है? अकाल राहत कार्य खोलते हैं तो आप रिपोर्ट मंगाते हैं, बाढ़ की आप रिपोर्ट मंगाते हैं, यह पैसा देने का आपका क्‍या आधार रहा? एक, नम्‍बर दो सादड़ी और बाली में प्रत्‍येक वार्ड को कितने पैसे दिये? उसकी सूचना दें दे।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जिला कलक्‍टर से हमारे पास में यहां पर कुछ क्षति के प्रस्‍ताव आते हैं और प्रस्‍ताव के आधार पर जितने संसाधन हमारे पास होते हैं इतनी ही राशि नगरपालिकावाइज हम उपलब्‍ध करा देते है और देसूरी और बाली दोनों की वार्डवाइज लंबी पूरी सूची मेरे पास है आप चाहे तो पढ़कर बता दूंगा वरना मैं आपको अलग से दे दूंगा।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय मंत्री जी यहां अख़बार की कटिंग जिला कांग्रेस कमेटी का...

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): नगरपालिका में प्रत्‍येक वार्ड को इस राशि में कितनी आवंटित हुई उसका जवाब दें दे आप(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष:  पत्र यहाँ इसके साथ लगाने की क्‍या आवश्‍यकता थी?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): यह पारदर्शिता है अध्‍यक्ष महोदय

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): नम्‍बर-2 कलक्‍टर ने आपको इन नगरपालिकाओं के नुकसान की क्‍या सूची भेजी है? वह आप बता दे अध्‍यक्ष महोदय, जिला कलक्‍टर पाली ने इनको इन नगरपालिकाओं में नुकसान की क्‍या सूची भेजी है वह बता दे क्‍योंकि यह सहायता उन ही लोगों को दी जाती है जिनका नुकसान हुआ है और इसलिए सब कांग्रेस के जो वार्ड थे बाली के अंदर उनको छोड़ दिया, सादड़ी के अंदर कांग्रेस के वार्डों को छोड़ दिया और लिमिटेड वार्डों को डबल-डबल पैसे दे दिए, कहीं 6 लाख दे दिए, कहीं 8 लाख दे दिए, इस भेदभाव का क्‍या कारण है?

Bhs/akt/20.3.07/12.00/1g

और ये रिपोर्ट जो आप बता रहे हैं एसडीओ पाली और एसडीओ देसूरी की उसकी प्रति सदन के पटल पर रखे दें।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से यह जानना चाहूंगा कि क्‍या यह सही है कि सुमेरपुर व तख्‍तगढी बाढ़ और अतिवृष्टि से सर्वाधिक प्रभावित रहे हैं ...(व्‍यवधान)... एक मेरा प्रश्‍न भी साथ में उत्‍तर दे दें प्‍लीज।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): अभी बता देते हैं।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): क्‍या यह सही है कि सुमेरपुर व तख्‍तगढ़ ...।

श्री अध्‍यक्ष: प्रश्‍नकाल तो समाप्‍त हुआ।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे अनुमति लेकर पूछ रहा हूं।

श्री अध्‍यक्ष: प्रश्‍नकाल समाप्‍त हुआ। माननीय सदस्‍यगण, शोकाभिव्‍यक्ति के ...।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): अध्‍यक्ष महोदय, तीन सालों में पहली बार, सवा तीन साल में आपने मौका दिया है ...(व्‍यवधान)... ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): शोकाभिव्‍यक्ति।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): आप मेरी बात सुनिये। मैं अध्‍यक्ष महोदय को कह रहा हूं आपको नहीं कह रहा हूं। अध्‍यक्ष महोदय, सवा तीन साल में एक प्रश्‍न लगा और उसका जवाब भी माननीय मंत्री जी ने नहीं दिया कम से कम आप इनसे जवाब तो दिलवा दें।

श्री अध्‍यक्ष: मुझे मेरे सामने जो घड़ी लगी हुई है उसके हिसाब से चलना पड़ता है।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): अध्‍यक्ष महोदय, घड़ी तो रोज ही लगी रहती है।

श्री अध्‍यक्ष: आसन की मजबूरी है।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): जब तक पाँच साल आप अध्‍यक्ष रहेंगी ये दोनों घडि़यां यों ही लगी रहेंगी। प्रश्‍न यह है कि ये जवाब तो दें। मेरे प्रश्‍न का जवाब ही नहीं आया।

श्री अध्‍यक्ष: समय के मुताबिक चलना पड़ता है।

श्री अमराराम (धोद): अध्‍यक्ष महोदय, व्‍यवस्‍था यह है कि मंत्री उत्‍तर देते हैं तो मंत्री का उत्‍तर पूरा होने तक का समय प्रश्‍नकाल का भी रहा है तो मंत्री जी उत्‍तर दे रहे हैं तो पूरा उत्‍तर दे दें।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): ...(व्‍यवधान)... इससे बड़ा डिस्क्रिमीनेशन हो नहीं सकता कि रानी नगरपालिका को इन्‍होंने बीस लाख दिये और पाली नगरपरिषद है जिसको इन्‍होंने कुल मिलाकर के ...।

श्री अध्‍यक्ष: ऐसा है आप संतुष्‍ट नहीं हो, आप देसूरी से आने वाले माननीय सदस्‍य, यदि आप संतुष्‍ट नहीं हो, आप रायपुर से आते हैं सॉरी।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): बिलकुल संतुष्‍ट नहीं हूं।

श्री अध्‍यक्ष: हां रायपुर से आने वाले माननीय सदस्‍य यदि आप प्रश्‍न के उत्‍तर से संतुष्‍ट नहीं हैं तो दूसरे नियमों में आकर के और इस बारे में आप चर्चा कर सकते हैं क्‍योंकि मैं शोकाभिव्‍यक्ति पढ़ने के लिए खड़ी हो गयी हूं।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): ठीक है साहब। मैं तो धन्‍यवाद देता हूं आपको कि तीन साल में पहली बार आपने प्रश्‍न में मेरा नाम तो पुकारा।

शोकाभिव्‍यक्ति

 

श्री अध्‍यक्ष: धन्‍यवाद आपका।

माननीय सदस्‍यगण, शोकाभिव्‍यक्ति के इस अवसर पर मैं गत दिनों दिवंगत हुए इस विधान सभा के पूर्व सदस्‍य श्री जयकृष्‍ण शर्मा के प्रति संवेदना व्‍यक्‍त करते हुए यह शोक प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत करती हूं।

राजस्‍थान के पूर्व राज्‍य मंत्री श्री जयकृष्‍ण शर्मा का जन्‍म दिनांक 1 अप्रैल, 1925 को अलवर जिले के नारायणपुर कस्‍बे में हुआ। आपने इण्‍टरमीडियेट तक की शिक्षा प्राप्‍त की।

श्री जयकृष्‍ण शर्मा तीसरी, चौथी, छठी तथा सातवीं राजस्‍थान विधान सभा के लिए कांग्रेस के विधायक निर्वाचित हुए। आपने तीसरी एवं चौथी राजस्‍थान विधान सभा में अलवर जिले के थानागाजी तथा छठी एवं सातवीं राजस्‍थान विधान सभा में रामगढ़ निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्‍व किया। श्री शर्मा सितम्‍बर, 1967 से जून, 1968 तक राजस्‍थान सरकार में ऊर्जा, जन सम्‍पर्क तथा सहायता एवं पुनर्वास विभाग के राज्‍य मंत्री रहे, राज्‍य मंत्री तो नहीं थे ये उप मंत्री थे।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): राज्‍यमंत्री थे।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, उप मंत्री थे। I remember very well. उप मंत्री थे।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): I also remember very well Madam.

श्री अध्‍यक्ष: आपको गलत ध्‍यान है।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): राज्‍य मंत्री थे। कृपया इसको चैकअप करवा लें। आप के साथ ही राज्‍य मंत्री थे 1967 में।

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है, कोई बात नहीं है ठीक है। ... ऊर्जा, जन सम्‍पर्क तथा सहायता एवं पुनर्वास विभाग के राज्‍य मंत्री रहे तत्‍पश्‍चात् आपके पास जुलाई, 1971 तक आयुर्वेद तथा सहायता एवं पुनर्वास विभाग का स्‍वतंत्र प्रभार भी रहा।  श्री शर्मा जुलाई, 1981 से फरवरी, 1985 तक राज्‍य सरकार में जन स्‍वास्‍थ्‍य अभियांत्रिकी, राजस्‍व, यातायात एवं परिवहन तथा खान विभाग सहित अनेक विभागों के राज्‍य मंत्री रहे। विधान सभा के कार्यकाल के दौरान आप नियम समिति के सदस्‍य भी रहे। श्री शर्मा यातायात, आवासन, रोजगार एवं प्राविधिक शिक्षा तथा जन स्‍वास्‍थ्‍य अभियांत्रिकी विभाग की संसदीय परामर्शदात्री समिति के सभापति भी रहे।

श्री शर्मा अपने सार्वजनिक जीवन में वर्ष 1059 से 1963 त‍क पंचायत समिति, रामगढ़ (अलवर) के प्रधान, वर्ष 1963 से 1965 तक अलवर के जिला प्रमुख तथा जिला जन अभाव अभियोग एवं सतर्कता समिति के सदस्‍य रहे। समाज सेवा में विशेष रुचि रखने वाले श्री शर्मा हरिजन उत्‍थान के लिए सदैव प्रयत्‍नशील रहे। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्‍य रहे श्री शर्मा वर्ष 1961 से 1964 तक जिला कांग्रेस कमेटी, अलवर के सदस्‍य भी रहे।

श्री जयकृष्‍ण शर्मा का दिनांक 16 मार्च, 2007 को निधन हो गया।

मैं, दिवंगत श्री शर्मा को अपनी ओर से तथा इस सदन के सभी माननीय सदस्‍यों की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित करती हूं तथा ईश्‍वर से प्रार्थना करती हूं कि दिवंगत की आत्‍मा को शांति प्रदान करे तथा उनके शोकसंतप्‍त परिजनों को उनका‍बिछोह सहन करने की शक्ति प्रदान करे।

माननीय सदस्‍यगण, कपया दो मिनट मौन खड़े रह कर दिवंगत आत्‍मा की शांति के लिए प्रार्थना करें।

डा. भंवरलाल  राजपुरोहित (मकराना):  अध्‍यक्ष महोदय, सद्दाम हुसैन को श्रद्धांजलि देनी चाहिए।

एक माननीय सदस्‍य: सज़ा मिली थी उसको।

डा. भंवरलाल  राजपुरोहित (मकराना): कहां सज़ा मिली थी, उसको जबरदस्‍ती फांसी दे दी।

श्री अध्‍यक्ष: बीच में न बोलें।

(तदनंतर सदन ने दो मिनट मौन खड़े रहकर दिवंगत की आत्‍मा को श्रद्धांजलि अर्पित की।)

सदन की बैठक 15 मिनट के लिए स्‍थगित की जाती है। 12.20 बजे बैठक होगी।

(तदनंतर सदन की कार्यवाही 12.05 बजे 12.20 बजे तक के लिए स्‍थगित हुई।)

 


कैलाश/     20.3.07  12.20  (1)  1j

 

 

(12.20 बजे)

(पुन: समवेत होने पर)

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

 

श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, पहली बार यह ठीक नहीं रहा है कि श्रद्धांजलि के समय सदन की नेता मौजूद नहीं है । अपने यहां परम्‍परा रही है, अपने यहां पर पहली बार ऐसा हुआ है कि जब आपके द्वारा शोक प्रस्‍ताव पढा गया, श्रद्धांजलि दी गई तो सदन की नेता मौजूद नहीं थी, रहना चाहिये था आज तक परम्‍परा यह रही है ।

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है आइंदा ध्‍यान रखेंगी वह किसी प्रोग्राम में गई हुई थी ।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): अध्‍यक्ष महोदय, जैसा मकराना से आने वाले माननीय सदस्‍य ने निवेदन किया मैंने भी पहले दिन आपसे निवेदन किया कि सद्दाम हुसैन को मध्‍य प्रदेश और आंध्र प्रदेश की विधान सभा में श्रद्धांजलि दी गई है तो राजस्‍थान विधान सभा में देने में क्‍या हर्ज है । उसने इतने साल तक भारत से दोस्‍ती निभाई, भारत का समर्थन किया, साथ दिया और जो भी कुछ कृत्‍य उसने किया वह एज ए राष्‍ट्रपति रहते हुए देश के हित में किया । उसकी मैरिट डिमैरिट पर न जाकर हमको मेरा आपसे पुन: अनुरोध है कि सद्दाम हुसैन को भी सदन की तरफ से श्रद्धांजलि  दी जानी चाहिये ।

श्री अध्‍यक्ष: इस बारे में विचार करेंगे सरकार से भी और बीएसी की मीटिंग में ।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): आप कहें तो मैं मध्‍य प्रदेश और आंध्र प्रदेश विधान सभाओं में दी गई श्रद्धांजलि की अधिकृत सूचना आपको लाकर दे सकता हूं ।

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है सुन ली, आपने सूचना दे दी विचार करेंगे ।

स्‍थगन प्रस्‍तावों पर अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍था

 

मुझे माननीय सदस्‍यों को सूचित करना है कि निम्‍न स्‍थगन प्रस्‍ताव की सूचना प्राप्‍त हुई है:-

  1. सुभाष चन्‍द्र शर्मा, सदस्‍य की ओर से कोटपूतली को जिला बनाने के संबंध में।

उपरोक्‍त प्रस्‍ताव ऐसा नहीं है न रीसेंट ओकरेंस है कि सदन की पूर्व निर्धारित कार्यवाही को रोक कर इस पर विचार किया जाय, अंत: अनुमति देने में असमर्थ हूं।

  1. श्री बुलाकीदास कल्‍ला, सदस्‍य की ओर से संविदा चिकित्‍साकर्मियों की चल रही भूख हडताल के संबंध में ।

उपरोक्‍त प्रस्‍ताव भी ऐसा नहीं है कि सदन की पूर्व निर्धारित कार्यवाही को रोक कर इस पर विचार किया जाय, अंत: अनुमति देने में तो असमर्थ हूं फिर भी  चूंकि लोग भूख हडताल पर बैठे हुए हैं, आज से आमरण अनशन पर है इसलिए अपनी माननीय सदस्‍य डा. बुलाकीदास कल्‍ला को अपनी बात तीन चार मिनट में कहने की अनुमति होगी ।

नियम 295 के अंतर्गत प्राप्‍त विशेष उल्‍लेख की सूचनाएं

 

1. श्री प्रभुलाल वर्मा, सदस्‍य की ओर से तहसील पीपल्‍दा के इटावा कस्‍बे में अतिरिक्‍त मुख्‍य मजिस्‍ट्रेट के न्‍यायालय की स्‍थापना करने के संबंध में ।

2. श्री जीवाराम चौधरी, सदस्‍य की ओर से विधान सभा क्षेत्र सांचोर में अनुसूचित जाति एवं जनजाति बालिका छात्रावास खोलने के संबंध में

3. श्री मोहन मेघवाल, सदस्‍य की ओर से विधान सभा क्षेत्र सूरसागर में सैटेलाइट चिकित्‍सालय खोलने के संबंध में ।

4. श्री धर्मेन्‍द्र कुमार मोची, सदस्‍य की ओर से विधान सभा क्षेत्र टिबी के रावतसर शहर की सेम की समस्‍या कासमाधान करने के संबंध में ।

5. श्री जयराम जाटव, सदस्‍य की ओर से जिला परिषद अलवर में 10 से अधिक प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत अध्‍यापकों को अपने मूल विभाग में भेजने के संबंध में ।

6. श्री बद्रीलाल जाट, सदस्‍य की ओर से विधान सभा क्षेत्र कपासन में महाविद्यालय खोलने के संबंध में ।

7. प्रो. बीरूसिंह राठौड, सदस्‍य की ओर से दुर्गापुरा(जयपुर) क्षेत्र में स्‍थापित श्री सीको प्रा. लि. को तुरंत प्रभाव से बंद कर अन्‍यत्र स्‍थापित किये जाने के संबंध में । यह सीको क्‍या बला है ।

8. श्रीमती राजकुमारी शर्मा, सदस्‍य की ओर से सीकर शहर में राधाकिशनपुरा स्थि‍त मोडी कोठी में एकत्र गंदे पानी की निकासी हेतु उचित व्‍यवस्‍था करने के संबंध में ।

9. श्री शिवजीराम मीणा, सदस्‍य की ओर से जहाजपुर मुख्‍यालय पर राजकीय महाविद्यालय खोलने के संबंध में ।

10. डा. श्रीगोपाल बाहेती, सदस्‍य की ओर से विधान सभा क्षेत्र पुष्‍कर में बीसलपुर का पानी पहुंचाने के संबंध में ।

11. श्री अशोक कुमार नवलखा, सदस्‍य की ओर से जिला चित्‍तौडगढ को नया जिला प्रतापगढ से जोडने के लिये मुख्‍य जिला सड़क बनाने के संबंध में ।

12. श्री जोगाराम पटेल, सदस्‍य की ओर से विधान सभा क्षेत्र लूणी में कृषि उपज मंडी समिति द्वारा निर्मित की गई सडकों की मरम्‍मत करने के संबंध में।

माननीय सदस्‍यों को उनके द्वारा दी गई सूचना को पढने की अनुमति होगी ।

माननीय बुलाकीदास कल्‍ला ।

श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली): अध्‍यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है कि मैं पहले नियमों में आया था और नियमों में अगर दो मिनट की आप परमिशन दे देती तो आपकी कृपा हो जाती । नियमों में मैं लगातार इतने दिनों से पर्ची लगा रहा हूं । यह मसला आया नहीं, मैंने मुख्‍य मंत्री महोदया के बीच में भी इंट्रप्‍ट करने की कोशिश नहीं की । अध्‍यक्ष महोदय, मैं नियमों में आया हूं ।

श्री अध्‍यक्ष: आप पर्ची पर दे देना । स्‍थगन प्रस्‍ताव का नियम आपको मालूम है ? नियम 50 में ऐसे बोलने की अनुमति नहीं दी जाती है । आप या तो पर्ची पर आ जाइए या आप 295 में आ जाइए ।

श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली): अध्‍यक्ष महोदय, पर्ची भी लगातार लगा रहा हूं ।

श्री अध्‍यक्ष: 295 में ले आइए, कल रख देंगे । 295 में ज्‍यादा अच्‍छा है, बेहतर है ।

श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली): पर्ची भी लगातार लगा रहा हूं पर्ची में नंबर नहीं आ रहा है ।

श्री अध्‍यक्ष: 295 में और अच्‍छी तरह से एलोबिरेट कर दीजिए आप । डा. बुलाकीदास कल्‍ला ।

स्‍थगन प्रस्‍ताव आदि पर चर्चा

चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य विभाग और आयुर्वेद विभाग के संविदा कर्मचारियों द्वारा आमरण अनशन

डा.बुलाकीदास कल्‍ला(बीकानेर): अध्‍यक्ष महोदय, राज्‍य के चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य विभाग और आयुर्वेद विभाग के संविदा कर्मचारी पिछले पाँच दिनों से आमरण अनशन पर हैं ।

श्री अध्‍यक्ष: आमरण अनशन तो आज शुरू किया है ।

डा.बुलाकीदास कल्‍ला(बीकानेर): पाँच दिनों से है दिगम्‍बर सिंह जी को पता है । पाँच दिनों से लगातार आमरण अनशन पर हैं ।

श्री अमराराम (धोद): पाँच दिनों से लगातार आमरण अनशन पर हैं ।

श्री अध्‍यक्ष: आप बीच में क्‍यों बोल रहे हैं वह बोल रहे हैं ना ।

डा.बुलाकीदास कल्‍ला(बीकानेर): पाँच दिनों से आमरण अनशन पर हैं। उनमें से 19 मेल नर्स और फीमेल नर्स को तबीयत खराब होने के कारण हास्पिटल में भर्ती किया गया है । इतने लोग एक साथ अपनी मांगों को लेकर जो 7 वर्ष से संविदा कर्मचारियों के रूप में लैब टेक्निशीयल, रेडियोग्राफर, आयुर्वेद नर्सेज के रूप में काम कर रहे हैं 7 वर्ष तक सरकार के संविदा कर्मचारी के रूप में काम कर रहे हैं इसके लिये माननीय चिकित्‍सा एवं स्वास्थ्य मंत्री जी ने एक कमेटी भी बनाई है । उस कमेटी की क्‍या रिपोर्ट आई, सरकार इनको क्‍या नियमित कर्मचारी के रूप में रखेगी या नहीं रखेगी । अध्‍यक्ष महोदय,  इनको मैटेनिटी लीव तक नहीं मिलती है न और कोई परिलाभ मिलते हैं और इन संविदा कर्मचारियों का लगातार मांग पत्र सरकार के पास विचाराधीन है लेकिन सरकार इस पर कोई ध्‍यान नहीं दे रही है । मैं दो बार उनके बीच में जाकर आया हूं । शहीद स्‍मारक पर गवर्नमेंट हास्‍टल के पास वह बैठे हुए हैं। आज के बाद उनको भूख हड़ताल की भी अनुमति नहीं है तो कम से कम लोकतंत्र में मैं आपके माध्‍यम से सरकार का ध्‍यान आकर्षित करूंगा कि जो आमरण अनशन पर बैठा हुआ है उनको लोकतांत्रिक परम्‍पराओं का निर्वहन करने दें और उनसे बातचीत कर के इसका स्‍थाई समाधान निकाला जाये । एक तरफ तो चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य विभाग की जो मांग आई उसमें माननीय चिकित्‍सा मंत्री जी ने घोषणा की कि हम इतने हजार पदों को भरने वाले हैं, 13 हजार से ज्‍यादा पदों को और दूसरी तरफ जो 7 वर्ष से काम कर रहे हैं, आपकी सेवाएं कर रहे हैं, गांवों में रहकर चिकित्‍सा विभाग की ...

श्री अध्‍यक्ष: बाकायदा स्‍क्रीनिंग कर के ।

डा.बुलाकीदास कल्‍ला(बीकानेर): उनकी जो नौकरी लगी है वह भी स्‍क्रीनिंग कर के लगाई गई है । वह सारे के सारे ट्रेनिंग किये हुए लोग है । लैब टेक्निशीयन, मेल फीमेल नर्स, रेडियोग्राफर सब ट्रेनिंग किये हुए लोग हैं और उनमें से कई लोग ओवर एज हो गये हैं, कई ऐसे लोग हैं जो दूसरी नौकरी नहीं कर पाते उनके लिये सरकार को एक दिशा निर्देश और नीति तैयार करनी चाहिये ताकि इन लोगों को नियमित किया जा सके और उनसे बैठकर बातचीत करनी चाहिये । आपने स्‍वयं ने इस सदन में कहा था कि सुखाडिया जी के वक्‍त में यदि कोई व्‍यक्ति गांव में भी भूख हडताल करता था तो कलेक्‍टर और एसडीएम उनको संभालते थे लेकिन मैं आज पाँच दिनों से देखा है कि उनको कोई संभाल नहीं रहा है, न उनका कोई स्‍वास्‍थ्‍य का परीक्षण हो रहा है । उनके कीटोन्‍स वगैरह आ रहे हैं । वहां कोई जनप्रतिनिधि फोन करता है कि यह बीमार हो रहे हैं कोई मर जायेगा तब जाकर पुलिस आकर उनको हास्पिटल लाकर भर्ती कर लेती है । कम से कम भूख हडताल के जो नियम कानून कायदे हैं उनका भी सरकार को पालन कराना चाहिये । मैं आपके माध्‍यम से चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री जी से कहना चाहूंगा कि उनसे बातचीत कर के, उनको नियमित कर के उनकी समस्‍या का समाधान करें ताकि इनकी सेवाओं का लाभ लिया जा सके ।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय मंत्री जी फरमाएं कुछ ।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, सबसे पहले तो मैं माननीय कल्‍ला साहब को धन्‍यवाद देना चाहूंगा । धन्‍यवाद इसलिए...

श्री अध्‍यक्ष: क्‍योंकि ध्‍यान दिलाया है एक ऐसी चीज की तरफ, वाई नोट ।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): केवल इसलिए नहीं कि ध्‍यान दिलाया है ...

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): वह पाँच दिन से भूख हडताल पर हैं और इनको ध्‍यान ही नहीं आया इसलिए इनको धन्‍यवाद दे रहे हैं ।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): मैं धन्‍यवाद तो इसलिए देना चाह रहा हूं कि इन तीन साल में आप की मानसिकता में जो परिवर्तन आया है उसके लिये धन्‍यवाद देना चाह रहा हूं । सन् 2000 में कर्मचारियों की एक बहुत जबरदस्‍त हडताल हुई थी उसको आपकी सरकार ने बहुत बुरी तरह से क्रश किया था, उनके हितों पर बहुत जबरदस्‍त कुठाराघात किया था उस टाइम में ।

श्री अध्‍यक्ष: कुठाराघात किया था इसीलिए तो यहां बैठे हैं । आप तो अपनी बात बताओ । यह कुठाराघात नहीं करते तो यहां नहीं बैठते ।

 

ans/usc  12.30  1k  20.03.2007

 

अध्‍यक्ष महोदय, उस समय चिकित्‍सा जैसे विभाग में कांट्रेक्‍ट पर भर्ती करने की कार्यवाही तात्‍कालीन सरकार ने शुरू की थी।

अध्‍यक्ष महोदय, अब मैं निवेदन करना चाहूंगा द्वितीय श्रेणी नर्स 1669 आज की तारीख में काम कर रहे हैं,ए.एन.एम. 2153 काम कर रहे हैं,लैब टैक्‍नीशियन  575 काम कर रहे हैं, सहायक रेडियोग्राफर 36 काम कर रहे हैं, इस तरह से 4433 ऐसे कर्मचारी हैं जो संविदा पर काम कर  रहे हैं।

अध्‍यक्ष महोदय, मैं चिकित्‍सा मंत्री और चिकित्‍सक होने के साथ-साथ आपको निवेदन करना चाहूंगा कि चिकित्‍सा विभाग  में संविदा पर रखना,आप अगर किसी लैब टेक्‍नीशियन को जिसकी रिपोर्ट के ऊपर पूरा फिजिशियन का ट्रिटमेंट डिपेंट करता है उसको भी किसी एजेंसी के थ्रू  प्‍लेसमेंट करें तो उसकी रिलायबिलिटी मैं नहीं समझता कि ज्‍यादा रहती है। हमने लगातार प्रयास किया।हमारी सरकार ने, अध्‍यक्ष महोदय दो दिन पहले जब मैंरे डिपार्टमेंट की डिमांड थी उस समय मैंने आपके सामने, सदन में भी निवेदन किया था, हम ग्रामीण स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं का गठन कर रहे हैं।  ग्रामीण स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं के गठन के पीछे मुख्‍य उदे्श्‍य है कि सात-सात साल से, आठ-आठ साल से जो लोग संविदा पर काम कर रहे हैं,इनको नियमित करने का, इनकी सेवाए नियमित रूरल एरिया में मिलती रहे। उसके पीछे एक बहुत बड़ा कारण यह था, दूसरा बड़ा कारण यह था कि ग्रामीण क्षेत्र में, जो लोग काम करने के लिए तैयार नहीं होते हैं, जिस दिन से मैंने सदन में यह व्‍याख्‍यान दिया है मेरे पास लगातार लोग आने लग गये हैं कि साहब, शहर से हमारा गांव में ट्रान्‍सफर करा दीजिए। शहर से गांव में ट्रान्‍सफर की एक पालिसी बना दीजिए।

अध्‍यक्ष महोदय, निश्चित रूप से सरकार इसमें संवेदनशील है। हमारे सेक्रेटरी के लेवल पर वार्ता हुई। डायरेक्‍टर लेवल पर भी वार्ता हुई फिर हमारे सचिव स्‍तर पर भी इनके नेताओं से वार्ता हुई, उसके बाद मैंने खुद ने अपने चैम्‍बर में इनके प्रतिनिधि मण्‍डल से बात की और वह पूरा संतुष्‍ट होने के बाद गए कि हमारी जो गलतफहमी थी वह दूर हो गई और सरकार तो हमें खुद ही इतना देना चाह रही है। उसके बाद पता नहीं, मेरे ख्‍याल से या तो आप पहुंच गए इसलिए नहीं उठे नहीं तो कल ही उठ जाने चाहिये थे वह।

माननीय कल्‍ला साहब, मैं तो सदन को आश्‍वासन देना चाहता हूं कि हम उन कर्मचारियों के लिए पूरी तरह संवेदनशील है और उनके हित में निश्चित रूप से हम काम कर रहे हैं। उसमें जो भी आवश्‍यक, नियम परिवर्तन होना था वह काम भी हम कर रहे हैं। इनके एज रिलेक्‍शेशन का भी हमने उसमें रखा है। महिला कर्मचारी है, ए.एन.एम हो चाहे रेडियोग्राफर हो, चाहे कोई भी हो उनको कम से कम मेटरनिटी लीव का लाभ तो बहुत आवश्‍यक है ,मिलना चाहिये। सरकार पूरी तरह से सावचेत है, इनकी पूरी देखभाल करेंगे । मैं निश्चित आपको वादा करना चाहता हूं कि उनको फालतू में बैठने की आवश्‍यकता भी नहीं है क्‍योंकि जो कुछ वह चाह रहे हैं हम तो पहले ही कर रहे हैं, तो किसलिए बैठे...

श्री अध्‍यक्ष: आप तो उनका अनशन तुड़वा दीजिए, बात यह करो। और देखी जाएगी(व्‍यवधान) अनशन तुड़वाओ, यह करो।

श्री अमराराम (धोद): आप तो नियमित करने की घोषणा कर दो।(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: अनशन तुड़वाओ।

श्री अमराराम (धोद): मैरिट से आये है वह। आपके मैरिट से आये हैं, ट्रेंड है। मैरिट से लेते आये हैं। अध्‍यक्ष महोदय, आज तक मैरिट से लेते आये हैं (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: बीच-बीच में अपना नाम करने के लिए आप दोनों क्‍यों खड़े हो गए। क्‍या मतलब है? वह बोल रहे हैं, बोलने दो। (व्‍यवधान)

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): मैंने क्‍या कहा, अगर इतने पूरे प्रोसीजर उसमें....

श्री अमराराम (धोद): आप कह रहे हो उठ जाएंगे, आप नियमित करने की घोषणा कर दीजिए। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: एक मिनिट उनकी बात सुन लीजिए।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): मेरी बात सुनिये एक मिनिट(व्‍यवधान) उस समय जब इनका सलेक्‍शन हुआ था, उस समय रिजर्वेशन का भी पूरा ध्‍यान रखकर बाकायदा मेरिट से सलेक्‍शन हुआ यह बात सही है, उस समय क्‍यों आपने इनको कांट्रेक्‍ट पर रखा।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): समय नहीं था(व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, हड़ताल थी1 पैरामेडीकल स्‍टाफ की जरूरत थी1 जितनी फोरमल्‍टी कर सकते थे (व्‍यवधान) मेरीट से लिया था।

श्री अमराराम (धोद): कांट्रेक्‍ट पर रखकर नियमित करने का नहीं किया, उसकी सज़ा भुगत ली। अब आप सज़ा भुगतना चाहते हो क्‍या ? (व्‍यवधान) बात समझ में आती है। वह ट्रेंड नहीं है, क्‍वालिफाइड नहीं है, यह ट्रेंड है, क्‍वालिफाइड है, मेरीट से आपने लिया है, अगर आपका रिजर्वेशन का कोटा पूरा नहीं है तो वह भी पूरा कर लीजिए लेकिन इन्‍होंने आठ साल से, आप उनकी दे रहे हो, सवा तीन साल तो आपको हो गए, आपने कमेटी बनाई थी। अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री महोदय ने कमेटी बनाई थी कि वार्ता करके एक महीने में वह कमेटी निर्णय दे देगी। उस कमेटी को एक साल से ज्‍यादा हो गया। अब पौने दो-दो साल बचे हैं उसमें भी यह कमेटी चलती रहेगी ?

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): धोद से आने वाले माननीय सदस्‍य ऐसे कह रहे हैं जैसे एक दिन में सारा काम हो जाएगा।

श्री अमराराम (धोद): सवा तीन साल हो गए। सरकार को सवा तीन साल हो गए।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): आप मेरी बात सुनिये।(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: अब आप...

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): कमेटी का निर्णय अलग बात है। निर्णय को लागू करना इतना आसान काम नहीं है परन्‍तु मैं यहां सदन में आश्‍वासन देना चाह रहा हूं कि इनके लिए हम पूरी तरह से..., अध्‍यक्ष महोदय, मैं तो पहले ही डिमांड में खुद बोल चुका हूं और ग्रामीण स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं में...(व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): आपने डिमांड में जवाब में एक शब्‍द भी इस कांट्रेक्‍ट के लिए नहीं बोला।

श्री अध्‍यक्ष: धोद से आने वाले माननीय सदस्‍य। धोद से आने वाले माननीय सदस्‍य, आप एक-एक सैकण्‍ड में खड़े हो जाते हो। जब वह बोल रहे हैं(व्‍यवधान) यह कोई तरीका नहीं है आपका। गलत बात है।

श्री अमराराम (धोद): यह कह रहे हैं डिमांड, आप बता दीजिए डिमांड में कांट्रेक्‍ट                             के स्‍वास्‍थ्‍य कर्मियों के बारे में एक शब्‍द भी कहा हो तो।(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: चाहे जब खड़े हो जाए....(व्‍यवधान)

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): ग्रामीण्‍स स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं का गठन करेंगे, तीन साल से कार्यरत संविदा कर्मियों को निश्चित रूप से फायदा, यह तो आपने सुना नहीं। मेरी बात सुनिये आप तो केवल उनको (व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, यहां बात केवल इतनी है कि उनको आज जाकर अमराराम जी यह कह दे कि सरकार नहीं मान रही थी, हमने मनवाया है।केवल इनकी मानसिकता इतनी है। हम तो पहले से...(व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): अमराराम नहीं, आप ही कहो , अमराराम का क्‍या।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): यह तो वही बात हो गई जो आपने ओलावृष्टि पर शुरूआत की थी। मैं तो आपको कहना चाह रहा था..

श्री अध्‍यक्ष: माननीय मंत्री जी, आप नाम-वाम मत लो। आप किसी का नाम-वाम मत लो।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, हम विभाग की तरफ से पहले ही निर्णय कर चुके हैं और ग्रामीण स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं का, केवल एलोपैथिक में नहीं, यह और बताना चाहता हूं आयुर्वेद में भी हम ग्रामीण चिकित्‍सा सेवाओं का अलग से गठन कर रहे हैं, उसमें भी संविदा पर काम करने वाले लोग जो तीन साल से ग्रामीण क्षेत्र में काम कर रहे हैं उनको भी नियमित करने की निश्चित कार्यवाही कर रहे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: और सब बात तो ठीक है आपकी, आप कर रहे हैं लेकिन सवाल यह है कि वह आमरण अनशन पर बैठे हैं, सवाल उनका आमरण अनशन तुड़वाने का है, वह प्रयत्‍न कीजिए।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): वहां स्थिति ऐसी है कि उनका कोई नेता नहीं है। मेरे पास पाँच लोग आये थे वह बिल्‍कुल खुशी-खुशी तैयार होकर गए थे और वहां जाने के बाद पता लगा कि उनकी बात उन्‍होंने नहीं मानी।(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: वह अमराराम जी ने बहका दिया होगा।

श्री अमराराम (धोद):अध्‍यक्ष महोदय, मैं तो कल हरियाणा था। मैं तो कल हिसार में था। मैं यहां कहां था, था ही नहीं, हिसार में था।

श्री अध्‍यक्ष: आप कहीं भी बैठे हो, कुछ भी कर सकते हो। (व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): अध्‍यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है सरकार और उनसे मंत्री वार्ता करें और एश्‍योर करें कि हम इनको परमानेंट कर देंगे। (व्‍यवधान) सरकार को करना चाहिये। मंत्री महोदय वही आदि टाल रहे हैं कि अमराराम जी ने भड़का दिया।

श्री अध्‍यक्ष: आप उनकी बात पूरी सुने। आप उनकी बात तो सुने पहले।(व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): अमराराम जी क्‍यों तुड़वा दे। सरकार लेकर बैठे हैं, आप तुड़वाइये, आप उनको एश्‍योर कीजिए।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): हम वार्ता करेंगे, कल भी वार्ता की थी, आज भी वार्ता करेंगे और अगर आपकी नहीं चली तो उसको तुड़वा ही देंगे। आप मेहरबानी करके...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: डॉ. बी.डी. कल्‍ला।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको सूचित करना चाहता हूं, आपका ध्‍यान आकर्षित करना चाहता हूं कि संविदा के आधार पर  पहले अध्‍यापक भी लगाये गए थे इनको राज्‍य सरकार ने समय पर नियमित किया, शिक्षा कर्मियों को नियमित किया, जिस समय आप स्‍वंय जानते हैं कि अकाल पडा हुआ था, भंयकर हड़ताल थी उस समय सारे नियम कानून-कायदे ध्‍यान में रखते हुए संविदा के अलावा और कोई स्थिति नहीं थी कि इनको रखा जा सकता था और यह सरकार का इंटेशन था कि समय पर इनको पक्‍का किया जाएगा। अब मैं समझता हूं कि आपने तीन साल का जो आश्‍वासन दिया है इसको आप विधिवत रूप से, उनसे बात कर ले। हम खुद उनके साथ आ जाएंगे। बैठकर उनकी भूख हड़ताल तुड़वाए। उनको यह आश्‍वासन दे कि तीन साल से जो संविदा कर्मी है उनको आप नियमित कर देंगे, हम उनके साथ बैठकर आपसे बात करेंगे। (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहता हूं, एक ही तो मंत्री है, संविदा पर आपने मेडीकल डिपार्टमेंट में भी नर्स ,रेडियोग्राफर  और लैब टेक्‍नीशियन रखे हैं और आयुर्वेद विभाग में भी रखे हैं। यह फर्क क्‍यों हो रहा है कि आयुर्वेद विभाग में तो संविदा कर्मी का स्‍थानान्‍तरण कर रहे हैं एक जिले से दूसरे जिले में और पैरामेडीकल स्‍टाफ है उसके स्‍थानान्‍तरण पर आपने रोक लगा रखी है, चाहे किसी का बाप मर जाए, चाहे किसी के डिलिवरी हो, चाहे कुछ भी हो, यह तो कम से कम एक करना चाहिये। परमानेंट दो साल में करे या तीन साल में करें..(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप तो स्‍थानान्‍तरण की बात कर रहे हो(व्‍यवधान) सवाल आमरण अनशन तुड़वाने का है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): यह जो स्‍थानान्‍तरण की नीति है इसको तो कम से कम, आयुर्वेद और इसमें संविदा कर्मियों पर सब पर एक रूप से लागू  करिये।

श्री अध्‍यक्ष: सवाल आमरण अनशन तुड़वाने का है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): क्‍या अध्‍यक्ष महोदय ?

श्री अध्‍यक्ष: आप तो स्‍थानान्‍तरण पर चले गए। सवाल आमरण अनशन तुड़वाने का है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): मैं उसी की बात...

श्री अध्‍यक्ष: स्‍थानान्‍तरण पर चले गए।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): वो भी मांग है एक उसमें। सुबह हमसे भी मिले, यह भी उनकी एक मांग है वो ही मैं निवेदन कर रहा हूं। आप बताइये कि फर्क है कि नहीं ? आयुर्वेद वाले जो संविदा कर्मी है उनको तो स्‍थानान्‍तरण की छूट दे रखी है और पैरामेडीकल स्‍टाफ है  इसके ऊपर प्रतिबंध लगा रखा है, यह भी उनकी एक मांग है, तो इसके ऊपर तो कम से कम एकरूपता होनी चाहिये, फर्क नहीं होना चाहिये। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: नेता प्रतिपक्ष खड़े हैं भाई। नेता प्रतिपक्ष।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सत्‍ता पक्ष ने, ऐसा प्रतीत होता है कि जिद पकड़ ली है और जिद इसलिए कर ली कि प्रतिपक्ष ने इसको उठा दिया।  

दुर्गा/चौहान 200307 1240 1l

 

आप अध्‍यक्ष महोदय, इसमें बीच-बचाव करें और इनको समझायें कि जब इतनी खाली जगहें पड़ी हैं।

श्री अध्‍यक्ष: आपकी उपस्थिति में समझांऊगी।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): नहीं, मेरी उपस्थिति की जरुरत नहीं है। आप सबको रिप्रजेण्‍ट करते हैं। आप इनको समझायें कि ऐसी उलटी मत पकड़ो। जब आप भर्ती कर रहे हो, ओपन भर्ती हो रही है, इनको एडजस्‍ट कर दो।

अध्‍यक्ष महोदय, यह तो सब आपको पता है कि यह सब मैरिट पर लाये गये हैं। आपको भी पता है। झुंझुनूं जिले के सबसे ज्‍यादा संविदा पर कर्मचारी हैं और सब जगह हैं। हार्ड-डेज के अन्‍दर संविदा पर जिन लोगों ने काम किया, अनुभव प्राप्‍त किया, जनता की सेवा की, उनको तो आप फेंक रहे हो और नई भर्ती कर रहे हो। उनका कोई कंसीडरेशन नहीं कर रहे हो। यह तो अन्‍याय है, अध्‍यक्ष महोदय।

श्री अध्‍यक्ष: कर रहे हैं ना कंसीडरेशन उनका, कर रहे हैं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): नहीं कर रहे हैं, कोई कंसीडरेशन नहीं कर रहे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: करेंगे, करेंगे।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): उनको भी एप्‍लाई करना पड़ेगा। उनकी मैरिट दुबारा बनेगी उसमें, अध्‍यक्ष महोदय। अब नये लड़के आये हैं बाहर से, उनके बहुत हाई नम्‍बर हैं। उन नम्‍बरों पर तो वे पिट जाएंगे। इनका 4-4 वर्ष का, 5-5 वर्ष का अनुभव है, वह पिट जायेगा। आप कृपा करके इनको...।

श्री अध्‍यक्ष: वह अनुभव नहीं पिटेगा। इस बात को ध्‍यान में रखेंगे।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): नहीं, नहीं। मान्‍यवर, आप आब्‍जर्वेशन दें और इनको समझायें कि इनके साथ ज्‍यादती मत करो। ताकि गरीब आदमी है, लड़के-लड़कियां सब हैं और 80 प्रतिशत शेखावाटी के हैं, सीकर-झुंझुनूं के।

श्री अध्‍यक्ष: तो अपन यहां पैरवी कोई सीकर-झुंझुनूं की करने थोड़ी आये हैं। सारे राजस्‍थान की करने आये हैं ना।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): नहीं, नहीं, वह राजस्‍थान की हो रही है। बात राजस्‍थान की हो रही है लेकिन सीकर-झुंझूंनूं गौरवान्वित महसूस कर रहा है कि अब आप इस कुर्सी पर विराजमान हैं। इसलिये उनकी ज्‍यादा उम्‍मीद है। आप इसको समझाएं तो ये मान जाएंगे। दिगम्‍बससिंहजी को पहले बजट-भाषण के समय बोलना चाहिए था। बजट-भाषण आपने पेश करवाया, उस वक्‍त बोलना चाहिए था।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): उसमें बोला, साहब। मैं यही निवेदन कर रहा था।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): नहीं, नहीं, आप बोले नहीं उसमें कुछ भी।

श्री अध्‍यक्ष: आप चले गये थे, आप चले गये थे उससमय। ये बोले हैं।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): आप विराजें तो मैं एक बात कह दूं।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, नहीं। वे अपनी मर्जी से विराजेंगे। तब तक बैठे रहें आप। हां, वे अपनी मर्जी से विराजेंगे।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अब कृपा करके आप अध्‍यक्ष महोदय की बात मान लो, चलो।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): आपकी कृपा हो जाए..। (व्‍यवधान)

श्री धर्मपाल चौधरी (मुण्‍डावर): नहीं, अध्‍यक्षजी की तो मान लेंगे। अध्‍यक्ष महोदय, देखिये 5 साल में, अध्‍यक्षजी भी पिछली बार यहीं पर थीं, इसी विधान सभा में।

श्री अध्‍यक्ष: नेता प्रतिपक्ष खड़े हैं। नहीं, नहीं, माननीय सदस्‍य, नेता, प्रतिपक्ष खड़े हैं। (व्‍यवधान)

श्री धर्मपाल चौधरी (मुण्‍डावर): और 5 साल में पैरा-टीचर, पैरा-डाक्‍टर, पैरा-इंजीनियर। पैरा से आगे नहीं बढ़े थे। आज तो बड़ी चिन्‍ता करने लग रहे हैं। 5 साल में की थी क्‍या चिन्‍ता।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): हम तो रिक्‍वेस्‍ट करने वाले हैं। (व्‍यवधान)  अध्‍यक्ष महोदय, हजारों छात्र हैं, हजारों।

श्री अध्‍यक्ष: मुण्‍डावर से आने वाले माननीय सदस्‍य, नेता प्रतिपक्ष और सदन के नेता जब खड़े होते हैं तो दूसरे माननीय सदस्‍य को खड़ा नहीं होना चाहिए। नेता प्रतिपक्ष खड़े हैं।

श्री धर्मपाल चौधरी (मुण्‍डावर): पता है, साहब।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): माननीय सदस्‍य ने बहुत बेची हुई है और बेचकर के बहुतों को पागल बनाया हुआ है। अब कृपा करके छोड़ा है तो आप अब तो कुछ ख्‍याल रखो। सदन का और प्रतिपक्ष का नेता बोलता है...।

श्री धर्मपाल चौधरी (मुण्‍डावर): ऐसा है कि किस ने क्‍या-क्‍या कर रखा है, आप बहुत सीनियर हैं।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, स्‍थान ग्रहण करें। (व्‍यवधान) स्‍थान ग्रहण करें।

श्री धर्मपाल चौधरी (मुण्‍डावर): नहीं, तो यह कैसे बोल रहे हैं उल्‍टे। यह इनके बोलने का तरीका है?

श्री अध्‍यक्ष: मैंने कहा, स्‍थान ग्रहण करें।

श्री धर्मपाल चौधरी (मुण्‍डावर): ये कैसे बोल रहे हैं। ये कैसे बोलते हैं।

श्री अध्‍यक्ष: जब तक नेता प्रतिपक्ष खड़े हैं, स्‍थान ग्रहण करें।

श्री धर्मपाल चौधरी (मुण्‍डावर): अध्‍यक्ष महोदय, मुझे इनके बाद में खड़ा करें।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): आप बोल लेना इनके बाद में।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप खड़े हो गये।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): वे बैठे ही नहीं।

श्री अध्‍यक्ष: मेरा काम है बैठाने का, आपका नहीं। इनको बैठाने का मेरा काम है, आपका नहीं है।

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): क्‍या गलत कहा है, वह तो ..।

श्री अध्‍यक्ष: मेरी समझ में नहीं आता, नेता प्रतिपक्ष खड़े हैं ओर आप कभी कोई खड़ा होता है, कभी कोई खड़ा होता है। क्‍या तमाशा बना रखा है आप लोगों ने।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): इनको यह शिकायत हो गयी कि हमने इसको क्‍यों उठा लिया। इस वक्‍त हम उन लोगों की ग्रीविंसेज को ज्‍यादा रिप्रजेण्‍ट करते हैं। आप राज के अन्‍दर मदहोश हो रहे हो। हम उनकी ज्‍यादा सुन रहे हैं। अगर हमने उस वक्‍त सही सलामत काम किया होता तो इनको जरुरत नहीं थी संविदा में आने की। उस वक्‍त इनको डाइरेक्‍ट अपोइंटमेंट देना चाहिए था लेकिन नहीं दिया।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): हम अब दे रहे हैं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप दो तो सही। कहो कि हम देंगे।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): हम दे रहे हैं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): फिर तुड़वा दो, तो उनका अनशन तुड़वा दीजिये आप जाकर के।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): आप मेरी बात तो सुनें।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप अध्‍यक्ष महोदय को साथ ले जाइये। उनको शरबत पिला दीजिये, ज्‍यूस पिला दीजिये। ज्‍यूस पिलाकर उनका अनशन तुड़वा दीजिये।

श्री अध्‍यक्ष: आमरण-अनशन तुड़वा दो।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): वाह-वाही आप ले लो। वाह-वाही आपकी होगी ओर इसमें सबका श्रेय है। यह कर दो, आप कर दो घोषणा।

श्री अध्‍यक्ष: आमरण-अनशन तो तुड़वा दो, उनकी बात तो ठीक है।

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्रीजी के स्‍टेटमेंट से यह मंशा ..।

श्री अध्‍यक्ष: मुण्‍डावर से आने वाले माननीय सदस्‍य। नहीं, नहीं, मुण्‍डावर से आने वाले माननीय सदस्‍य का नाम पुकारा है मैंने।

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): अध्‍यक्ष महोदय, एक बात कह रहा हूं।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, आप स्‍थान ग्रहण करें।

श्री धर्मपाल चौधरी (मुण्‍डावर): माननीय अध्‍यक्ष् महोदय, प्रतिपक्ष के नेता बहुत हमारे आदरणीय हैं। हमारे रिश्‍तेदार भी हैं। लेकिन मुझे लगता है कि कुछ हिल गये।

श्री अध्‍यक्ष: रिश्‍तेदार हो गये तो क्‍या गड़बड़ हो गयी।

श्री धर्मपाल चौधरी (मुण्‍डावर): आज पर्सनली कोई बात कहना, अगर कोई की बात करें, आज 5 साल तक आप भी मंत्री थे उस समय में, पैरा-टीचर, पैरा-डाक्‍टर, पैरा-इंजीनियर, तब तक तो आप कहीं नहीं दिखे, 5 साल तक आप कुर्सी पर बैठ गये। और कल्‍ला साहब भी उसमें मंत्री थे।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): हमने पैरा-इंजीनियर नहीं लगाये। हमने केवल पैरा-टीचर लगाये थे। आपकी सरकार की घोषणा है कि आप..। (व्‍यवधान)

श्री धर्मपाल चौधरी (मुण्‍डावर): आप यह कहते हो सरकार नहीं कर रही है।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): आपकी सरकार की घोषणा है कि आप चपरासी... (व्‍यवधान) सारे के सारे पैरा लगायेंगे। आपकी सरकार की घोषणा है। आपकी सरकार की घोषणा है।

श्री धर्मपाल चौधरी (मुण्‍डावर): हमारी सरकार की घोषणा है तो हम पूरा करेंगे। (व्‍यवधान) हमारी सरकार की घोषणा है तो हम पूरा करेंगे, आप क्‍यों चिन्‍ता कर रहे हो। नहीं करेंगे तो हमारे साथ होगा, जो कुछ होगा। आपको चिन्‍ता करने की कहां आवश्‍यकता है। आप चिन्‍ता ही करते तो उस समय करते।

लेकिन प्रतिपक्ष के नेताजी, हम आपके बारे में कुछ कहना नहीं चाहते हैं। कोई भी बोले, उसमें उल्‍टी टिप्‍पणी करना, आप जैसे सीनियर आदमी के लिये ठीक नहीं है। आप प्रतिपक्ष के नेता भी हैं। और आप ऊपर वाली, अध्‍यक्षजी की कुर्सी पर भी बैठे हैं और मंत्री भी रहे हैं। और आपको सम्‍मान से बोलते हुए अगर कोई कहता है तो उसके बारे में कुछ कटाक्ष करते हैं तो आपके बारे में भी कोई कह सकता है। आइंदा, आप थोड़ा सा आपकी सीनियरिटी का ध्‍यान रखकर बोला करें।

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री महोदय के स्‍टेटमेंट से यह मंशा तो बिलकुल जाहिर हो गयी है कि सरकार इन संविदा के सारे चिकित्‍साकर्मियों को लगाना चाहती है, नियम बनाये जा रहे हैं। लेकिन प्रश्‍न यह है कि जो हड़ताल पर बैठे हुए हैं, भूख हड़ताल पर बैठे हैं उनको विश्‍वास देकर के उठाने का कार्य कौन करे। बात यह है।

श्री अध्‍यक्ष: यही बात तो मैंने कही है। वही बात तो कह रही हूं कि इनकी हड़ताल तुड़वा दें।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रतिपक्ष के नेता महोदय का बहुत सम्‍मान करता हूं। आपके एक भी आदेश को कभी आज तक टाला नहीं है मैंने।

श्री अध्‍यक्ष: अच्‍छा, मिलीभगत भी है आपकी।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मेरी समझ में एक चीज नहीं आ रही है कि मैंने उस दिन बड़े साफ शब्‍दों में कहा था कि हम ग्रामीण स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं का गठन करेंगे और आयुष में भी ग्रामीण सेवाओं का गठन करेंगे।  इसके पीछे हमारा मकसद यह है कि संविदा पर जो कर्मचारी ग्रामीण क्षेत्र में काम कर रहे हैं, 3 साल जिनको हो गये ...। सुन तो लीजिये।

श्री अध्‍यक्ष: मंत्रीजी, वह तो आपकी सब बातें ठीक हैं। आप कह चुके, घोषणा कर चुके। लेकिन सवाल, उनका प्रश्‍न जो है, उनका स्‍थगन प्रस्‍ताव, वह केवल आमरण-अनशन को तुड़वाने का है। उसके बारे में बोलें आप, बाकी बातों की जरुरत ही नहीं है। आप कह चुके हैं।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैंने कल भी बुलाया था। मैं आज भी बुलवाउंगा और पूरा प्रयास करुंगा कि वे अपना अनशन तोड़ें। (व्‍यवधान) और बिलकुल निश्चित रूप से करेंगे।

श्री अध्‍यक्ष: हां, यह, बस ठीक है। बस हो गयी बात। चलिये, श्री प्रभुलाल वर्मा। 295।

नियम 295 के अंतर्गत विशेष उल्‍लेख

इटावा कस्‍बे में अतिरिक्‍त मुख्‍य मजिस्‍ट्रेट के न्‍यायालय की स्‍थापना

श्री प्रभुलाल वर्मा (पीपल्‍दा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रक्रिया एवं कार्य संचालन सम्‍बन्‍धी नियम 295 के तहत निवेदन है कि मेरे विधान सभा क्षेत्र पीपल्‍दा का कस्‍बा इटावा जिला मुख्‍यालय से 86 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। तथा इस कस्‍बे के आसपास का क्षेत्र जिला मुख्‍यालय से करीबन 125 किलोमीटर की दूरी पर पड़ता है। वर्तमान में इटावा कस्‍बे में सिविल न्‍यायाधीश (क.ख.) एवं न्‍यायिक मजिस्‍ट्रेट, प्रथम वर्ग कार्यरत है जिसके क्षेत्राधिकार में तीन पुलिस थाने आते हैं। हर वर्ष तीनों थानों में 700 नये मुकदमें दर्ज होते हैं जिनमें 50 प्रतिशत मुकदमें जिला एवं सत्र न्‍यायाधीश कोटा को स्‍थानान्‍तरित किये जाते हैं। तथा इस क्षेत्र में लगभग सैंकड़ों मुकदमें वर्तमान में जिला एवं सत्र न्‍यायाधीश,

कोटा एवं मुख्‍य न्‍यायाधीश मजिस्‍ट्रेट, कोटा के यहां विचाराधीन हैं जिससे कितने ही मुकदमें धारा 228 दण्‍ड प्रक्रिया संहिता के तहत जिला एवं न्‍यायाधीश महोदय द्वारा मुख्‍य न्‍यायिक मजिस्‍ट्रेट को भेजे जाते हैं। इसके अलावा मुख्‍य न्‍यायिक मजिस्‍ट्रेट इटावा की अदालत में इटावा क्षेत्र में खाद्य एवं अपमिश्रण से सम्‍बन्धित मुकदमें कोटा अदालत में विचाराधीन हैं। इन परिस्थितियों को ध्‍यान में रखते हुए अपर मुख्‍य न्‍यायिक मजिस्‍ट्रेट की स्‍थापना कस्‍बा इटावा, तहसील पीपल्‍दा, जिला कोटा में हो जाने से क्षेत्र की आम जनता को सस्‍ता एवं सुलभ न्‍याय मिलने का रास्‍ता प्रशस्‍त हो जाएगा। सुबह की अदालत की पेशी में तो पक्षकारों का कोटा पहुंचना ही दुर्भर हो जाता है।

अत: श्रीमान से पुरजोर निवेदन करता हूं कि उपरोक्‍त परिस्थितियों को मध्‍य-नजर रखते हुए इटावा कस्‍बे में अपर मुख्‍य न्‍यायाधीश मजिस्‍ट्रेट का न्‍यायालय खुलवाने की उचित कार्यवाही करने की कृपा करें। अध्‍यक्ष महोदय, मैं एक जानकारी देना चाहता हूं।

 

Vps-usc-20032007-1250-1m-1

 

श्री अध्‍यक्ष: धन्‍यवाद। श्री जीवाराम चौधरी।

श्री प्रभुलाल वर्मा (पीपल्‍दा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से जानकारी देना चाहता हूं कि ए.सी.एम. कोर्ट में, ... (व्‍यवधान) ए.सी.एम. कोर्ट की जानकारी है, इसी की है। कोर्ट खोलने का है। ए.सी.एम. कोर्ट खोलने के संबंध में खेतसिंहजी राठौड़ ने, जब वे विधि मंत्री थे तो ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: 295 में जो बात लिखते हैं वही पढ़ी जाती है। नो-नो, प्‍लीज। आपने अपना पढ़ दिया है। नो,प्‍लीज। अंकित नहीं हो। अंकित नहीं हो।

श्री प्रभुलाल वर्मा (पीपल्‍दा):  000

श्री अध्‍यक्ष: श्री जीवाराम चौधरी। आप क्‍या कर रहे हैं यह

श्री जीवाराम चौधरी। (अनुपस्थित)

श्री मोहन मेघवाल।

विधान सभा क्षेत्र सूरसागर में सैटेलाइट चिकित्‍सालय खोलने विषयक

 

श्री मोहन मेघवाल (सूरसागर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके मार्फत माननीय मुख्‍य मंत्री महोदय एवं चिकित्‍सा मंत्रीजी का धन्‍यवाद ज्ञापित करना चाहता हूं कि इन्‍होंने गत तीन वर्षों में राज्‍य के विभिन्‍न क्षेत्रों में चिकित्‍सा सुविधाओं के विस्‍तार हेतु अब तक 801 नये उप स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र, 64 प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र, 51 सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र खोलते हुए लगभग 2500 शय्याओं का विस्‍तार अस्‍पतालों में किया है तथा इन सुविधाओं के विस्‍तार हेतु निरन्‍तर प्रयासरत भी है। विकास की इस कड़ी में मैं माननीय चिकित्‍सा मंत्रीजी को आपके मार्फत निवेदन करना चाहता हूं कि मेरा विधान सभा क्षेत्र भौगोलिक दृष्टि से काफी लम्‍बा चौड़ा है। इसमें जोधपुर शहर के 22 वार्ड एवं जोधपुर तहसील का लगभग सम्‍पूर्ण ग्रामीण एरिया पड़ता है जो लगभग 35 से 40 किलोमीटर के रेडियस में फैला हुआ है। इस क्षेत्र में जोधपुर का सम्‍पूर्ण खनिज व औद्योगिक क्षेत्र, लगभग 80 प्रतिशत कच्‍ची बस्तियों के अतिरिक्‍त शहर का मुख्‍य आबादी क्षेत्र, नव आबाद बस्तियां स्थित हैं। इस लम्‍बे-चौड़े क्षेत्रफल व जनसंख्‍या वाले विधान सभा क्षेत्र में एक भी सेटेलाइट चिकित्‍सालय नहीं है। इस क्षेत्र के समस्‍त निवासियों को अपनी छोटी व बड़ी बीमारियों के उपचार हेतु जोधपुर जिला मुख्‍यालय पर स्थित राजकीय महात्‍मा गांधी चिकित्‍सालय, राजकीय मथुरादास माथुर चिकित्‍सालय एवं उम्‍मेद महिला चिकित्‍सालय पर आना पड़ता है जिससे इन अस्‍पतालों पर लगातार रोगियों का दबाव बढ़ता जा रहा है। वर्तमान में सूरसागर विधान सभा क्षेत्र के गाम नारवा व बवनाड, सूरसागर, फीदूसर चौपड़, प्रतापनगर, चांदपोल, चौपासनी हाउसिंग बोर्ड, रेजीडेंसी तथा बासनी क्षेत्र में राजकीय डिस्‍पेंसरियां संचालित हो रही हैं। यदि इन डिस्‍पेंसरियों में से ग्राम नारवा, बनाड तथा शहरी क्षेत्र की प्रतापनगर चौपासनी हाउसिंग बोर्ड एवं बासनी में संचालित हो रही डिस्‍पेंसरियों को सेटेलाइट अस्‍पताल के रूप में क्रमोन्‍नत कर दिया जाता है तो पूरे सूरसागर क्षेत्र की लगभग 12 से 15 लाख की आबादी को सीधा लाभ मिलेगा। ग्राम नारवा व बनाड में प्रस्‍तावित सेटेलाइट चिकित्‍सालय से लगभग 70 प्रतिशत ग्रामीण जनता, प्रतापनगर के अस्‍पताल से एक लाख की शहरी गरीब व अनुसूचित जाति व जनजाति की आबादी, चौपासनी हाउसिंग बोर्ड अस्‍पताल से 2.00 लाख की मध्‍यम व गरीब तबके की आबादी को एवं बासनी अस्‍पताल से औद्योगिक क्षेत्र में कार्यरत हजारों मजदूरों व यहां निवास कर रहे हजारों परिवारों को सीधी चिकित्‍सा सुविधा का फायदा मिलेगा।

आशा करता हूं कि हमारी यशस्‍वी मुख्‍य मंत्री महोदय की मंशानुरूप आम जनता को सुलभ चिकित्‍सा सुविधा उपलब्‍ध कराने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए चिकित्‍सा मंत्रीजी आगामी वित्‍तीय वर्ष की शुरूआत उक्‍त सेटेलाइट चिकित्‍सालय खोलकर ही करेंगे।

धन्‍यवाद।

श्री अध्‍यक्ष: श्री धर्मेन्‍द्र कुमार मोची।


विधान सभा क्षेत्र टिबी के रावतसर शहर की सेम की समस्‍या

श्री धर्मेन्‍द्र कुमार मोची (टिब्बी): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नियम 295 के अन्‍तर्गत रावतसर क्षेत्र एवं रावतसर शहर में सेम (वाटर लोकिंग) जल पलावन से निजात दिलवाने हेतु।

मान्‍यवर, मेरे निर्वाचन क्षेत्र टिबी के अन्‍तर्गत कस्‍बा रावतसर शहर/ रावतसर क्षेत्र में सेमग्रस्‍त क्षेत्र होने के कारण केन्‍द्र सरकार के ग्रामीण विकास विभाग द्वारा मार्च 2000 में 406.66 लाख रुपयों की लागत से पायलट परियोजना स्‍वीकृत हुई। जिसमें केन्‍द्र सरकार का अंश 304.78 लाख रुपये व राज्‍य सरकार/ लाभान्वितों का हिस्‍सा राशि 155.92 लाख रुपये थी। दिनांक 31.3.2003 तक परियोजना पेटे 305.46 लाख रुपये खर्च कर 14500 बीघा रकबा सेम मुक्‍त हुआ जिसमें 205.39 लाख केन्‍द्र सरकार, 73 लाख लाभान्वितों एवं 27.07 लाख रुपये राज्‍य सरकार का अंश है। जिसमें राज्‍य सरकार द्वारा समय पर अंश नहीं देने के कारण केन्‍द्र सरकार द्वारा समयावधि को आगे नहीं बढ़ाया गया जिससे उक्‍त परियोजना पूर्ण नहीं हो सकी।

(    बजे)

(डा. एन. एस. गुर्जर, सभापति, पदासीन)

 

केन्‍द्र सरकार द्वारा राशि 27.59 लाख, शेष फण्‍ड व तृतीय किश्‍त 71.76 लाख, कुल 99.35 लाख का उपयोग नहीं हो सका जिससे परियोजना पूर्ण नहीं हो सकी।

इस संबंध में मेरे द्वारा दिनांक 2.3.2006 को विधान सभा में प्रश्‍न किया गया तो माननीय सिंचाई मंत्री महोदय द्वारा आश्‍वासन दिया कि अपूर्ण कार्य शीघ्र ही पूर्ण करवाया जाएगा एवं राज्‍य सरकार का हिस्‍सा राशि दी जाएगी एवं परियोजना की समयावधि भी बढ़ाई जाएगी। समयावधि बढ़ायी जाने या डी.आर.डी. अनुमानगढ़ में 27.59 लाख रुपये इस परियोजना के तहत बकाया पड़े हैं। उक्‍त 27.59 लाख रुपये एवं राज्‍य सरकार अपनी भागीदारी हिस्‍सा राशि जो डी.आर.डी. हनुमानगढ़ में पड़ी राशि राज्‍य सरकार का शेष मिल जाये तो सेम नाले का रख-रखाब, डी-सिलटिंग व बकाया कार्य पूर्ण हो सकता है जिससे किसानों को राहत मिलेगी। मेरे द्वारा माननीय मंत्री महोदय से कई बार लिखित/ मौखिक में भी निवेदन किया गया था कि उक्‍त अपूर्ण परियोजना को पूर्ण करवाने हेतु राज्‍य सरकार को बकाया अंश राशि दिलवाने का कष्‍ट करे ताकि परियोजना को पूर्ण करवाया जा सके एवं सेमग्रस्‍त क्षेत्र से निजात मिल सके एवं कृषकों की समस्‍या का समाधान हो सके।

धन्‍यवाद।

श्री सभापति: श्री जयराम जाटव (अनुपस्थित)

श्री बद्रीलाल जाट (अनुपस्थित)

प्रो. बीरूसिंह राठौड़ ।

दुर्गापुरा (जयपुर) में स्‍थापित श्री सीको प्रा. लि. को अन्‍यत्र स्‍थापित किये जाने विषयक

प्रो. बीरूसिंह राठौड़ (बनीपार्क): माननीय सभापति महोदय, दुर्गापुरा क्षेत्र में दिसम्‍बर, 2004 में स्‍थापित श्री सीको प्रा.लि. को तुरन्‍त प्रभाव से बंद कर अन्‍यत्र स्‍थान पर स्‍थनांतरित किये जाने बाबत् राजस्‍थान विधान सभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन के नियम 295 के तहत ध्‍यानकर्षण प्रस्‍ताव।

महोदय, राजस्‍थान विधान सभा के प्रक्रिया एवं कार्य संचालन के नियमों के नियम 295 के तहत विशेष उल्‍लेख प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत कर माननीय का ध्‍यान आकर्षित कर निवेदन है कि विधान सभा क्षेत्र बनीपार्क के वार्ड संख्‍या 14 में स्थित दुर्गापुरा क्षेत्र घनी आबादी का क्षेत्र है। जिसमें जयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा विभिन्‍न आवासीय कॉलोनी को नियमित किया गया है जिसमें लगभग 75 हजार से अधिक आबादी विकसित है। इसके अतिरिक्‍त राजकीय शिक्षण, निजी शिक्षण संस्‍थाएं एवं विभिन्‍न राजकीय विभाग संचालित है।

उक्‍त क्षेत्र के मध्‍य में पहले से स्‍थापित पीपा फैक्‍ट्री को बंद करके वर्ष 2004 में खल में से तेल निकालने की नई औद्योगिक इकाई श्री सीको प्राइवेट लिमिटेड, दुर्गापुरा की स्‍थापना राजस्‍थान सरकार के विभिन्‍न विभागों द्वारा विभिन्‍न नियमों के तहत स्‍थानीय क्षेत्रीय नागरिकों के विरोध करने के बावजूद की गई है। इससे उक्‍त क्षेत्र में ध्‍वनि, वायु, जल प्रदूषण अत्‍यधिक होने से उक्‍त क्षेत्र के नागरिकों का जीना दूभर हो रहा है। इससे निकलने वाली हानिकारक गैसों से अनेक बीमारियां फैल रही हैं। इसकी भयंकर बदबू से उक्‍त स्‍थान पर एक मिनट खड़ा होना भी मुश्किल हो रहा है। दिन भर भारी संख्‍या में ट्रक, टोला आते जाते रहते हैं, सारा यातायात प्रभावित रहता है।

दिनांक 6.3.2007 को रात्रि लगभग 8 बजे अचानक फैक्‍ट्री में भयंकर विस्‍फोट हुआ और आग लगने से आम नागरिकों को खतरा बन गया है। आग की लपटें 100 फीट दूरी तक तथा 40-50 फीट ऊंची लपटें थीं। यदि जिला प्रशासन ने चुस्ती नहीं दिखाई होती तो आज उक्‍त क्षेत्र का विनाश हो गया होता। मौके पर जिला प्रशासन के अधिकारियों ने मामले की गम्‍भीरता को देखते हुए तुरन्‍त कार्यवाही की है। उक्‍त फैक्‍ट्री में इससे पूर्व कई हादसे हो चुके हैं। स्‍थानीय नागरिकों का तो यहां तक कहना है कि सीवरेज लाइन फैक्‍ट्री का सारी कैमिकल व अन्‍य पदार्थ की निकासी बनी हुई है। अत्‍यन्‍त दु:ख का विषय है कि विभिन्‍न विभागों के अधिकारियों द्वारा सब कुछ जानते हुए भी आंखें बंद कर रखी हैं। 

अत: मेरा सदन से अनुरोध है कि जन हित में उक्‍त फैक्‍ट्री को बंद कर अन्‍य स्‍थान पर स्‍थानां‍तरित की जाए ताकि आम नागरिकों के जीवन की सुरखा की जा सके तथा किन परिस्थितियों में उक्‍त फैक्‍ट्री को अनुज्ञा पत्र जारी किया गया इसकी जांच करवा कर दोषी अधिकारियों को दंडित किया जाए। धन्‍यवाद।

श्री सभापति: श्रीमती राजकुमारी शर्मा।

राधाकिशनपुरा, सीकर शहर में स्थि‍त मोडी कोठी में एकत्र गंदे पानी की निकासी

श्रीमती राजकुमारी शर्मा (सीकर): माननीय सभापति महोदय, प्रक्रिया के नियम 295 के अन्‍तर्गत विशेष उल्‍लेख प्रस्‍ताव, सीकर शहर में राधाकिशनपुरा स्थित मोडी कोठी में गंदे पानी की निकासी बाबत्।

महोदय, मैं राजस्‍थान विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 295 के तहत विशेष उल्‍लेख के जरिए सीकर शहर में राधाकिशनपुरा स्थित मोडी कोठी में एकत्र गंदे पानी की निकासी हेतु निवेदन करना चाहूंगी।

 

spp/usc/13.00/1n/20.3.2007

 

सीकर शहर में स्थित मोडी कोठी में कई दिनों से पड़ोसी कालोनियों का गन्‍दा पानी एकत्र हो रहा है। आवागमन पूर्ण रुप से अवरूद्ध हो गया है। गन्‍दे पानी से अनेक बीमारियां उत्‍पन्‍न हो गयी हैं। लोगों को अस्‍पताल के चक्‍कर लगाने पड़ रहे हैं, खासकर बच्‍चों की परीक्षा का सीजन चल रहा है। स्‍थानीय निवासियों में इस बात को लेकर भी जबरदस्‍त आक्रोश है कि इस समस्‍या के निवारण हेतु पूर्व में जिला प्रशासन एवं नगर परिषद् को कई बार अवगत कराने के बावजूद भी आज तक कोई ठोस कार्यवाही अमल में नहीं लाई गई है।

मैं यहां पर यह विशेष रूप से उल्‍लेख करना चाहूंगी कि इस प्रकरण को पूर्व में आई.डी.एस.एम.टी. की मीटिंग में भी लिया गया था परन्‍तु आज तक कोई वांछित कार्यवाही नहीं की गई है। इस समस्‍या का हल अति आवश्‍यक है क्‍योंकि यह परेशानी यहां के निवासियों के लिये ही नहीं अपितु हर आने जाने वाले नागरिकों के लिये भी है। इस क्षेत्र के लोगों द्वारा निरन्‍तर इस समस्‍या के निवारण की मांग उठाई जा रही है।

अत: मैं पुरजोर शब्‍दों में माननीय सभापति महोदय, माननीय मुख्‍य मंत्री महोदया एवं स्‍वायत्‍त शासन मंत्री से सीकर शहर में राधाकिशनपुरा स्थित मोडी कोठी में एकत्र गन्‍दे पानी की निकासी हेतु उचित व्‍यवस्‍था हेतु निवेदन करती हूं। धन्‍यवाद।

श्री सभापति: श्री शिवजीराम मीणा

(अनुपस्थित)

डॉ0 श्रीगोपाल बाहेती

(अनुपस्थित)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): सभापति महोदय, आप माननीय सदस्‍यों को पुकार लेते हैं और वह यहां अनुपस्थित होता है या उपस्थित होकर आपकी आवाज पर खड़ा नहीं होता है या नहीं बोलना हो तो माफी मांगे आपसे कि मैं नहीं बोलूंगा। आप नाम पुकार लेते हैं और वह यहां मिलते नहीं हैं तो यह आसन का सीधा अपमान है। आसन का अपमान है यह। (व्‍यवधान).....

श्री सभापति: आप बिलकुल ठीक कह रहे हैं। (व्‍यवधान)....

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपका अपमान है। तो ऐसे लोगों को ताड़ना दे दो आप कि नाम देकर चले क्‍यों जाते हैं ?

श्री सभापति: अभी है ही नहीं तो ताड़ना किसको दें ?

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): जनरल ताड़ना दे दो आप। (व्‍यवधान) आप जनरल ताड़ना दे दो ताकि यह व्‍यवस्‍था बन जाये। ..(व्‍यवधान)...

श्री कालूलाल गुर्जर : माननीय प्रतिपक्ष के नेता जिन माननीय सदस्‍यों ने दिया, उनके लिये प्रतिपक्ष के नेता को ताड़ना दे दो।

श्री सभापति: अपनी अपनी पार्टी के, प्रतिपक्ष के माननीय नेता, आप तो अच्‍छी तरह से जानते हैं कि चीफ व्हिप इसलिए बने होते हैं कि वे अपने सदस्‍यों को नियंत्रित करें। जो माननीय सदस्‍य चाहे सवाल पूछें, चाहे नोटिस दें, यह उनकी ड्यूटी है कि वह उस समय सदन में मौजूद रहें और उन पर वह बोलें। यह आसन की अकेले की जिम्‍मेदारी नहीं है। यह मुख्‍य पार्टियों के विभिन्‍न जो चीफ व्हिप बने हुए हैं यह उनकी ड्यूटी है, पार्टियों की ड्यूटी है इसलिए आप अपनी पार्टी के अंदर, विधायक दल में यह चर्चा करके यह व्‍यवस्‍था आप करें कि आप नोटिस देते हैं और बोलते नहीं हैं। प्रश्‍न पूछते हैं और फिर गायब हो जाते हैं। चाहे पक्ष हो या प्रतिपक्ष, दोनों ही तरफ से यह चिन्‍ता का विषय है। यह लोक सभा में भी कई बार उठा है कि सवाल पूछ लेते हैं और फिर सदन में मौजूद नहीं रहते, गायब हो जाते हैं या नोटिस देते हैं और फिर उस समय गायब हो जाते हैं। यह बहुत सीरियस बात है, गंभीर बात है और इसको पूरे सदन को गंभीरता से लेना चाहिये।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): यह आसन का अपमान है।

श्री सभापति: नहीं, आसन का नहीं, सदन का अपमान है कि आप नोटिस देते हो, समय कितना खराब होता है । इसमें सवाल पूछते हैं, नोटिस देते हैं। वह सरकार में जाते हैं, वहां से जवाब देते हैं । जवाब में कितना पैसा बरबाद होता है और फिर माननीय सदस्‍य उस पर बोलते नहीं हैं, गायब हो जाते हैं। यह बहुत गंभीर विषय है और सभी पार्टियों को अपने अपने विधायक दलों में इस पर विचार करना चाहिये और मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं कि मैं माननीय अध्‍यक्ष महोदय को भी निवेदन करूंगा कि चेयर की तरफ से इस पर स्ट्रिक्‍ट कोई व्‍यू लें कि जो माननीय सदस्‍य यहां अनुपस्थित रहते हैं, दुबारा जब वह नोटिस दे तो उनको बोलने की परमिशन नहीं मिलनी चाहिये। इस तरह का मैं उनको रिक्‍वेस्‍ट करूंगा, क्‍योंकि यह केवल आसन का अपमान नहीं, यह सदन का अपमान है, पूरे प्रदेश की जनता का अपमान है और उसके पैसे के साथ खिलवाड़ है ऐसा करक, इसलिए बहुत गंभीर है। आपने इसको उठाया इसके लिये आपको धन्‍यवाद।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): सभापति महोदय, मैं आपके ध्‍यान में लाना चाहूंगा कि अभी माननीय पंचायत राज मंत्री ने सदस्‍यों की अनुपस्थिति के बारे में विपक्ष के नेता को ताड़ना देने की जो बात कही है तो आप मुख्‍य मंत्री महोदया को थोड़ा निर्देशित करें कि वे अपने मंत्रिमण्‍डल के सदस्‍यों का भी एक दिन का प्रशिक्षण शिविर लगायें और प्रतिपक्ष के नेता के बारे में किस तरह बोलना है, उसकी उनको नसीहत प्रदान करें। ...(व्‍यवधान)...

श्री सभापति : इस पर डिबेट नहीं है, आप बैठ जाइये। डिबेट नहीं हो रही है। इस पर बैठ जाइये। मैंने व्‍यवस्‍था देदी।

श्रीमती राजकुमारी शर्मा (सीकर): हम डिबेट नहीं कर रहे हैं। प्रतिपक्ष के माननीय नेता खड़े थे, तब तो हमारी अध्‍यक्ष जी बोल रहे थीं कि हमारे सदन की नेता खड़ी थी, प्रतिपक्ष लॉबी में खड़ा था।

श्री सभापति: आप बिराज जाइये। हर चीज पर कोई डिबेट होना जरूरी है क्‍या ? उन्‍होंने एक मुद्दा उठाया, उस पर मैंने व्‍यवस्‍था देदी, बात खत्‍म हो गयी।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): बात खत्‍म नहीं हुई। सभापति महोदय, आप आसन पर बिराजमान हैं और नेता प्रतिपक्ष के बारे में मंत्री महोदय इस तरह टिप्‍पणी करे, यह साधारण बात है क्या ?

श्री सभापति: श्री अशोक कुमार नवलखा । आप बिराज जाओ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): नहीं, बिराज तो जाऊंगा मैं पर आप आसन पर बिराजमान हैं और नेता प्रतिपक्ष के बारे में माननीय मंत्री महोदय इस तरह की टिप्‍पणी करे और आप इस पर कोई व्‍यवस्‍था नहीं दें।

श्री सभापति: यहां सदन में आपस में टिप्‍पणियां करते हैं। (व्‍यवधान)....

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): यह कोई एक सदस्‍य के बारे में टिप्‍पणी की बात नहीं है। हमारे बारे में कह देते तो मान जाते । नेता प्रतिपक्ष के बारे में इस तरह की टिप्‍पणी करे कि उन्‍हें ताड़ना दें। आपको इस बारे में व्‍यवस्‍था देनी चाहिये।

श्री सभापति: आप बिराज जायें। यह सभी सदस्‍यों का दायित्‍व है कि एक दूसरे का सम्‍मान करे, एक दूसरे के बारे में कोई ऐसी टिप्‍पणी नहीं करे जिससे किसी को ठेस पहुंचे, यह सभी का दायित्‍व है।

श्री रामलाल : संयमजी, आप खुद तो कहना मानते हो क्‍या इनका ।

श्री धर्मपाल चौधरी : माननीय सभापति महोदय, संयम जी ठीक बात कह रहे हैं..श्री सभापति: इसमें बहस की कोई बात नहीं है।

श्री धर्मपाल चौधरी : बहस नहीं है। बहस की बात नहीं है। हम तो यह कहते हैं कि सभापति जी, कि प्रतिपक्ष के नेता का आदर करना चाहिये, यह बात बिलकुल सही है, लेकिन प्रतिपक्ष के नेताजी से भी हाथ जोड़कर कहते हैं कि सबका सम्‍मान करना चाहिये। आज जो कोई खड़ा होता है उसके मन में आये वहीं टिप्‍प्‍णी कर देते हैं तो आप प्रतिपक्ष के नेता खुद भी सम्‍हलकर रहो और इनको भी सम्‍हाल कर रखो।

श्री सी.डी.देवल : ..(व्‍यवधान)... बोल रही थीं तब भी यह खड़े हो गये। प्रतिपक्ष के नेता बोल रहे थे तब भी खड़े हो गये और आज आसन पैरों पर था तब भी यह खड़े हो गये। ...(व्‍यवधान)....

श्री सभापति: माननीय अशोक कुमार नवलखा।

चित्‍तौड़गढ़ को प्रतापगढ़ से जोड़ने हेतु मुख्‍य जिला सड़क का निर्माण

श्री अशोक कुमार नवलखा : सभापति महोदय, मैं राजस्‍थान विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमों के तहत निवेदन करना चाहता हूं कि पालछा से करजू तलाया सड़क को जिला सड़क (एम.डी.आर.) घोषित करने हेतु निम्‍नलिखित प्रस्‍ताव सूचना देता हूं ।

उपरोक्‍त विषयान्‍तर्गत निवेदन है कि जिला चित्‍तौड़गढ़ एवं नये घोषित जिला प्रतापगढ़ को मुख्‍य जिला सड़क (एम.डी.आर.) के माध्‍यम से सड़क मार्ग से जोड़ा जाना अत्‍यन्‍त आवश्‍यक प्रतीत होने से इसकी स्‍वीकृति हेतु निम्‍न सड़क मार्ग का प्रस्‍ताव श्रीमान् की सेवा में प्रस्‍तुत है :-

प्रस्‍तावित एम.डी.आर.का नाम ''पालछा से करजू तलाया मार्ग''

प्रस्‍तावित एम.डी.आर.की लम्‍बाई - अनुमानित लम्‍बाई 114 कि.मी.

प्रस्‍तावित एम.डी.आर. में कच्‍ची सड़क 22 कि.मी.(वी.आर.)

प्रस्‍तावित एम.डी.आर.से पक्‍की डामर सड़क 92 कि.मी. प्रस्‍तावित एम.डी.आर. में सम्मिलित सड़कें :-

1. भीलवाड़ा बस्‍सी विजयपुर कनेरा निम्‍बाहेड़ा एम.डी.आर. संख्‍या 20 पर स्थित गांव पालछा से उदपुरा 7 कि.मी. (तहसील चित्‍तौड़गढ़) पक्‍की डामर सड़क

2. उदपुरा से मेवासा 3 कि.मी. (तहसील निम्‍बाहेड़ा) कच्‍ची सड़क

3. मेवासा से मांगरोल चौराहा 15 कि.मी. (तहसील निम्‍बाहेड़ा) पक्‍की सड़क

4. मांगरोल चौराहा से भावलिया 02 कि.मी. (तहसील निम्‍बाहेड़ा) नेशनल हाइवे 79 पक्‍की सड़क

5. भावलिया से बिनोता भगवानपुरा 33 कि.मी. (तहसील निम्‍बाहेड़ा) वी.आर.पक्‍की सड़क

6. भगवानपुरा से साटोला 20 कि.मी. (तहसील छोटी सादड़ी) वी.आर.पक्‍की सड़क

7. साटोला से भैरवी 07 कि.मी. (तहसील छोटी सादड़ी) कच्‍ची सड़क

8. भैरवी से पीलीखेड़ा 03 कि.मी.(तहसील छोटी सादड़ी) पक्‍की सड़क

9. पीलीखेड़ा से फालाकोट 06 कि.मी. (तहसील छोटी सादड़ी) कच्‍ची सड़क

10.कालाकोट से कालाकोट 1.00 कि.मी. (तहसील छोटी सादड़ी) पक्‍की सड़क

11. कालाकोट से सरी पीपड़ी 6.00 (तहसील प्रतापगढ़) कच्‍ची सड़क

12. सरी पीपली से नेशनल हाइवे नं0 113 (निम्‍बाहेड़ा प्रतापगढ़- बांसवाड़ा-दाहोद रोड) पर स्थि‍त गांव तलाया।

उक्‍त एम.डी.आर. भीलवाड़ा बस्‍सी विजयपुर कनेरा निम्‍बाहेड़ा (एम.डी.आर.) सड़क के मध्‍य पालछा गांव से प्रारम्‍भ होकर निम्‍बाहेड़ा प्रतापगढ़ बांसवाड़ा दाहोद राष्‍ट्रीय राजमार्ग सं0 113 के मध्‍य गांव तलाया से जाकर अनुमानित लम्‍बाई 114 कि.मी. की होगी। इस सड़क के निर्माण एवं स्‍वीकृति से भीलवाड़ा चित्‍तौड़गढ़ व प्रतापगढ़ जिले से सीधा सम्‍पर्क सड़क जुड़ जायेगा। विशेषकर इस मार्ग से छोटी सादड़ी, बड़ी सादड़ी व प्रतापगढ़ तहसील के जनजाति बाहुल्‍य क्षेत्रों को सड़क परिवहन की सुविधा मिल सकेगी।

उल्‍लेखनीय है कि राज्‍य सरकार द्वारा प्रतापगढ़ को नया जिला घोषित किया गया है तथा इस जिले में चित्‍तौड़गढ़ जिले की तहसील छोटी सादड़ी व बड़ी सादड़ी को भी नये जिले के सीमांकन में सम्मिलित किया गया है। यदि यह एम.डी.आर. स्‍वीकृत होती है तो दोनों तहसील की जनता को जिला मुख्‍यालय जाने में काफी सुविधा एवं राहत मिल सकेगी।

अत: मेरा राज्‍य सरकार व माननीय सार्वजनिक निर्माण मंत्री महोदय से निवेदन है कि उक्‍त नई एम.डी.आर. को व्‍यापक जनहित में स्‍वीकृत करने तथा इसका निर्माण केन्‍द्रीय सड़क निधि (सी.आर.एफ.) के अन्‍तर्गत करवाने हेतु आवश्‍यक कार्यवाही शीघ्र कराने का कष्‍ट करावें।

श्री सभापति: श्री जोगाराम पटेल।

 

Msr/usc/1310/1o/20032007

 

लूणी में कृषि उपज मण्‍डी समिति द्वारा निर्मित सड़कों की मरम्‍मत

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): राजस्‍थान विधान सभा के प्रक्रिया एवं कार्य संचालन के नियम 295 के तहत जनहित के अत्‍यन्‍त महत्‍वपूर्ण विषय, सड़क सुविधा के सम्‍बन्‍ध में निवेदन करना चाहता हूं।

सभापति महोदय, निवेदन है कि विधान सभा क्षेत्र लूणी में सार्वजनिक निर्माण विभाग व कृषि उपज मण्‍डी समिति द्वारा समय-समय पर अनेक सड़कों का निर्माण करवाया गया। सार्वजनिक निर्माण विभाग ने तो अपने द्वारा निर्मित सड़कों का नवीनीकरण समय-समय पर करवा दिया है व उसके द्वारा करवाये गये कार्य की गुणवत्‍ता उच्‍च कोटि की है। सार्वजनिक निर्माण विभाग ने नई सड़कों का भी निर्माण करवाया है। सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा सड़कों के मामले में किये गये बढि़या कार्य के लिए मुख्‍यमंत्रीजी व सार्वजनिक निर्माण मंत्रीजी का बहुत-बहुत हार्दिक धन्‍यवाद।

कृषि उपज मण्‍डी समिति द्वारा मेरे विधान सभा क्षेत्र लूणी में 1996-97 में भाण्‍डू-फींच सड़क, 1989-90 में भाण्‍डू चौराहा-बडलिया सड़क, धवा-चाली सड़क व बाड़मेर रोड- वायरड़ा सड़क का निर्माण करवाया गया था। इन सड़कों का निर्माण के पश्‍चात एक बार भी रिन्‍युअल (मरम्‍मत) नहीं करवाया गया। लगभग 15-20 वर्षों से रिन्‍युअल नहीं होने से इन सड़कों की स्थिति बहुत ही खराब है। जगह-जगह भारी गड्ढे हो गये तथा सड़कें पूरी तरह से टूट-फूट गई हैं। आये दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं जिससे जनता में सरकार की प्रतिकूल छवि का संदेश जा रहा है तथा आजमन में भारी रोष है।

सभापति महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र लूणी में पिछले लगभग दस वर्षों में दो-तीन किलोमीटर सड़कों का दिखावटी व औपचारिकता के अलावा कोई भी जनहित की अति महत्‍वपूर्ण सड़कों का निर्माण नहीं करवाया गया तथा ना ही रिनेवल कार्य करवाया गया है। इस सम्‍बन्‍ध में अनेक बार प्रस्‍ताव भी भेजे गये हैं।

सभापति महोदय, भाण्‍डू-फींच, भाण्‍डू-बड़लिया, धवा-चाली व बाड़मेर रोड-कटारड़ा सड़कों का नवीनीकरण अगर शीघ्र नहीं किया गया तो हो रही जान-माल की हानि में अत्‍यधिक वृद्धि होगी तथा जनता में भारी आक्रोश बढ़ेगा जिससे शांति व्‍यवस्‍था को खतरा उत्‍पन्‍न हो जायेगा। इन सड़कों की स्थिति अत्‍यन्‍त ही खराब होने से यातायात व अन्‍य वाहनों को प्रति दिन भारी नुकसान पहुंच रहा है। ये सभी सड़कें अत्‍यधिक महत्‍वपूर्ण सड़कें हैं। इस सम्‍बन्‍ध में अनेक बार निवेदन करने के बाद भी आज तक कोई न्‍यायोचित कार्यवाही नहीं हुई है। इस सम्‍बन्‍ध में तुरन्‍त कार्यवाही करने की पुरजोर मांग की जाती है।

सभापति महोदय, आपने समय दिया इसके लिए धन्‍यवाद।

पर्ची के माध्‍यम से उठाये गये मुद्दे

संविधानेतर व्‍यक्तियों को जिलों का प्रभार

श्री सभापति: आज चार पर्चियां आयी हैं उनमें पहली पर्ची है श्री संयम लोढ़ा।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय सभापति महोदय, आपने मुझे अपनी पर्ची के जिस विषय पर बोलने की अनुमति दी है उस पर शुरू करते हुए मेरे जेहन में अमरीका के तत्‍कालीन राष्‍ट्रपति अब्राहम लिंकन की पंक्तियां आती हैं कि प्रजातंत्र प्रजा का, प्रजा के लिए, प्रजा के द्वारा स्‍थापित शासन व्‍यवस्‍था, शासनतंत्र है। राजस्‍थान में भी, सभापति महोदय, 2003 में जब विधान सभा के चुनाव हुए और राजस्‍थान में पहली बार भारतीय जनता पार्टी की अध्‍यक्ष के रूप में वसुंधरा राजे ने राजस्‍थान की जनता से जनादेश मांगा और प्रजातंत्र के इतिहास में पहली बार राजस्‍थान में भारतीय जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत प्राप्‍त हुआ। माननीय सभापति महोदय, मंत्रिमण्‍डल के गठन के बाद पहली बार मुख्‍यमंत्री के रूप में उन्‍होंने आठ मंत्री लिये और उसके बाद कुछ महीने के बाद मंत्रिमण्‍डल का विस्‍तार करते हुए संख्‍या को 27 तक पहुंचाया।

माननीय सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से सरकार का ध्‍यान जिस विषय की ओर आकर्षित करना चाहता हूं वह यह है कि राजस्‍थान की मौजूदा सरकार के रूप में लोगों को, जिन्‍होंने ना तो मंत्री पद की शपथ ली है, न ही जिन्‍होंने राजस्‍थान के सदस्‍य के रूप में शपथ ली है, पिछले कुछ महीने से ऐसे व्‍यक्तियों को जिलों में प्रभारी मंत्री बना कर के भेज रही है और पूरी तरह से एक असंवैधानिक कृत्‍य राजस्‍थान की सरकार करने में लगी हुई है।

सभापति महोदय, मुझे व्‍यक्तिगत रूप से किसी  भी व्‍यक्ति से कोई तकलीफ नहीं है लेकिन हम सब का यह सामूहिक उत्‍तरदायित्‍व है कि संविधन के जो प्रावधान हैं उन प्रावधानों का अक्षरश: पालन होना चाहिए, जो संसदीय परम्‍पराएं हैं उन परम्‍पराओं का पालन होना चाहिए और जो जनादेश राजस्‍थान की जनता ने दिया है उस जनादेश के माध्‍यम से, उस जनादेश के अनुसार काम होना चाहिए।

सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं कि आज ऐसे व्‍यक्ति जिलों में प्रभारी मंत्री बन कर जा रहे हैं जिनको ना तो राजस्‍थान की जनता ने चुना है, जिनकी न राजस्‍थान की विधान सभा में शपथ हुई है, न महामहिम ने जिनको मंत्री पद की शपथ दिलायी है। सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं कि मंत्रिपरिषद के सम्‍बन्‍ध में भारत के संविधान के अनुच्‍छेद 163, 164 और 167 के अन्‍दर प्रावधान किया गया है और जो गवर्नमेंट का रूल ऑफ बिजनस है, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं कि भारत सरकार अनेच्‍छेद 77 (3) के अन्‍तर्गत जो रूल ऑफ बिजनस का निर्माण किया गया है और राजस्‍थान सरकार ने अनुच्‍छेद 166 के अन्‍तर्गत रूल ऑफ बिजनस का निर्माण किया है। सभापति महोदय, न तो संविधान के किसी अनुच्‍छेद में ना रूल ऑफ बिजनस है उसमें किसी तरह का यह प्रावधान है कि इन लोगों को, इस रूप में शपथ जिन्‍होंने नहीं ली हुई है उनको प्रभारी बना कर, प्रभारी मंत्री बना कर भेजा जा सकता है।

माननीय सभापति महोदय, इस व्‍यवस्‍था से एक तरह से प्रजातंत्र के अपहरण की व्‍यवस्‍था को आगे बढ़ाया गया है। जनता का कोई प्रतिनिधित्‍व नहीं हो, *** किसी बोर्ड का चेयरमैन बन गया, उसको मंत्री का दर्जा दे दिया और जब तक ...(व्‍यवधान)... सभापति महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं ...

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): लीगल आब्‍जैक्‍शन आपका हो सकता है पर *** शब्‍द गलत है। ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): जो प्रजा‍तांत्रिक व्‍यवस्‍था से ...(व्‍यवधान)...

श्री नरेन्‍द्र नागर (खानपुर): आपके, पिछली सरकार में गहलोतजी ने क्‍या किसी को मंत्री पद की शपथ नहीं दिलायी थी। ...(व्‍यवधान)...

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): सभापति महोदय, कोई भी ऐसे *** नहीं बोलें।

श्री नरेन्‍द्र नागर (खानपुर): केबीनेट मंत्री का और राज्‍य मंत्री का दर्जा नहीं दिया क्‍या ...(व्‍यवधान)... चेयरमैन नहीं बनाया क्‍या बोर्ड का। यह पहली परम्‍परा है क्‍या। यह पहली सरकार है जो बोर्ड के चेयरमैन बना रही है। ...(व्‍यवधान)...

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): लीगल आब्‍जैक्‍शन इनका हो सकता है ...(व्‍यवधान)...

श्री भागीरथ चौधरी (किशनगढ़): *** कोई नहीं होता है,सब माननीय सदस्‍य हैं।

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): सभापति महोदय, *** शब्‍द को हटा दें, इस *** शब्‍द पर ऐतराज है हम को। 

श्री सभापति। यह  *** शब्‍द डिलीट किया जाय।

श्री सभापति: प्‍लीज, आप बोलने के समय थोड़ा शब्‍दों का ध्‍यान रखिये। ...(व्‍यवधान)... आप बैठ जाएं, मैंने व्‍यवस्‍था दे दी, क्‍या परेशानी है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): सभापति महोदय, आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहूंगा कि यह जनता के द्वारा चुनी हुई सरकार है, एक रेस्‍पोंसिबल गवर्नमेंट है और इसमें पब्लिक रेस्‍पोंसिबिलिटी का ध्‍यान रखना चाहिए। जो व्‍यक्ति जनता के माध्‍यम से चुन कर नहीं आया उसको आप जिले में प्रभारी मंत्री बना कर के कैसे भेज सकते हैं।

सभापति महोदय, आपकी जानकारी में है  और मैं लाना चाहूंगा कि मुख्‍यमंत्री बनने के लिए भी या मंत्री बनने के लिए निश्चित रूप से यह आवश्‍यक नहीं है कि जिस वक्‍त उसे बनाया जाए वो सदन का सदस्‍य हो लेकिन 6 महीने के भीतर, सभापति महोदय, यदि कोई व्‍यक्ति मुख्‍यमंत्री भी हो और मंत्री के रूप में भी शपथ लेता है तो 6 महीने के अन्‍दर उसको निर्वाचित हो कर के सदन की सदस्‍यता लेनी पड़ती है लेकिन पिछले कुछ महिनों से ऐसे लोगों को जिलों के अन्‍दर प्रभारी मंत्री बना कर के भेजा जा रहा है जो ना तो इस संविधान के अनुच्‍छेद के प्रावधानों की पालना कर रहे हैं और न ही संसदीय प्रावधानों की पालना कर रहे हैं।

सभापति महोदय, में आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं कि जनता ने जो वोट दिये और उसके माध्‍यम से यह बहुमत प्राप्‍त हुआ, उसके माध्‍यम से ही यह सरकार बनी और 163, 164 और 167 के प्रावधानों के सन्‍दर्भ में यह मंत्रिपरिषद् बना और यह लोग जो जा रहे हैं इनकी जनता की क्‍या भागीदारी है, इसमें जनता का क्‍या योगदान है इसके अन्‍दर।

सभापति महोदय, मैं आपकी जानकारी में लाना चाहता हूं कि यह खाली एक एग्‍जाम्पिल नहीं है, जब से यह सरकारी आयी है लगातार संवैधानिक प्रावधानों का उल्‍लंघन कर रही है और संवैधानिक प्रावधानों को बिलकुल ताक पर रख कर के यह काम कर रही है। 6-6 महीने तक मंत्रिमण्‍डल की बैठक नहीं होती और ज्‍वाइंट रेस्‍पोंसिबिलिटी का जो है ...

श्री सभापति: विषय पर बोलिये प्‍लीज।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): सभापति महोदय, कहां जा रहे हैं, विषय वस्‍तु पर बोलें ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): विषय पर ही बोल रहा हूं। ...(व्‍यवधान)... मेरा विषय इस सरकार के असंवैधानिक कृत्‍य के सम्‍बन्‍ध में है, सभापति महोदय।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): नहीं, सभापति महोदय, विषय वस्‍तु इन्‍होंने रख दी, ध्‍यान आकर्षित कर दिया, हम जवाब दे देंगे पर ऐसे डिबेट चलेगी क्‍या पर्ची पर। डिबेंट चली है कभी पर्ची पर, पर्ची पर डिबेट थोड़ी चली है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं।

श्री सभापति: डिबेट नहीं, आप ध्‍यान आकर्षित करिये, जो करना है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मैं वो ही तो बोल रहा हूं। मेरी पर्ची आप पढ़ लें, मैंने असंवैधानिक कृत्‍य शब्‍द का उल्‍लेख किया है और उसी पर मैं बोल रहा हूं।

अब शिक्षा मंत्रीजी इतिहास लिखवाना चाहते हैं, मंत्रिपरिषद की बैठक में उसका अनुमोदन करवाया नहीं, उसके लिए पैसों की व्‍यवस्‍था करें नहीं और जसवंत सिंहजी को बुला कर के उस कार्यक्रम का शुभारम्‍भ करा दें, यह असंवैधानिक कृत्‍य नहीं तो क्‍या है, सभापति महोदय।

श्री सभापति: यह रिलेटेड नहीं है आपने जो बोला है ...(व्‍यवधान)... यह रिलेटेड नहीं है।

 

Ars/usc/1320/1p/20032007/1

 

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि जो लोग मंत्रिपरिषद, मुख्‍यमंत्री भी मंत्रिपरिषद की एक सदस्‍य होती है। माननीय सभापति महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं कि मंत्रिपरिषद के सदस्‍य ही मुख्‍यमंत्री के खिलाफ जाकर के दिल्‍ली में भ्रष्‍टाचार के आरोप लगाएं, शिकायतें करें कि राजस्‍थान के अन्‍दर भ्रष्‍टाचार हो रहा है ...(व्‍यवधान)

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा ( उप मुख्‍य सचेतक ): माननीय सभापति महोदय, पर्ची पर क्‍या डिबेट? ...(व्‍यवधान) जो विषय था इन्‍होंने रख दिया, इस तरह से पर्ची पर डिबेट करवाने का कोई हक नहीं है ...(व्‍यवधान)

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य विराजें, माननीय सदस्‍य विराजें ...(व्‍यवधान)

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): ऐसी बात हाउस में कैसे बोल रहे हैं ...(व्‍यवधान) माननीय सभापति महोदय, यह अपनी इच्‍छा के हिसाब से मर्जी आए जो बोलते रहते हैं ...(व्‍यवधान)

श्री सभापति: I am on my legs.

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): विषय से बाहर जाकर नहीं बोलें।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): बैठो, बैठो पहले बैठो।

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, आप पहले स्‍थान ग्रहण करें। आपने जो पर्ची दी है थोड़ा मैं उसको पढ़कर आपको सुनाना चाहता हूं। राज्‍य सरकार द्वारा बगैर मंत्री पद की शपथ लिए व्‍यक्तियों को जिलों में प्रभारी मंत्री लगाने के असंवैधानिक कृत्‍य के संबंध में । केवल यहां तक आपका लिमिटेड सब्‍जैक्‍ट है, इसमें यह कहां से आ गया, कैबीनेट की मीटिंग कहां से आ गयी, इसमें दिल्‍ली कहां से आ गयी, इसमें कौन मंत्री क्‍या बोल रहे हैं, क्‍या कर रहे हैं यह कहां से आ गया। केवल आपका लिमिटेड एक मैटर है जो डिस्ट्रिक्‍ट्स में ...(व्‍यवधान) लगाया गया है तो उस सम्‍बन्‍ध में आपने रख दिया विषय ...(व्‍यवधान) एक मिनट, पहले आप बैठिए, पहले मुझे पूरी बात कहने दीजिए।

देखिए यह पर्ची का उल्‍लेख कहीं नियमों में नहीं है। यह पर्ची सिस्‍टम शुरू कर दिया एक परम्‍परा से बीच में और इसका एक लिमिटेड दायरा है कि जिस सब्‍जैक्‍ट पर कोई अरजैंट पब्लिक इम्‍पोर्टेंस का है तो उस पर आप, नियमों में जाने में तो समय लगता है तो एक पर्ची दी और उस पर एक लिमिटेड टाइम तक बोल दिया, आपने ध्‍यान आकर्षित कर दिया सरकार का, एक मिनट सुनिये, पूरी व्‍यवस्‍था सुन लीजिए। इसमें न तो डिबेट होती है न किसी मंत्री को इसका जवाब देने के लिए सरकार को बाध्‍य किया जा सकता है । यह स्‍पष्‍ट रूप से सबको पता है इसलिए न इस पर डिबेट हो सकती है। एक से ज्‍यादा सदस्‍य चाहे किधर से बोलें, इधर से बोलें वह भी इसमें अलाउड नहीं है। अगर आपको डिबेट करानी है तो नियमों में प्रावधान है डिबेट का, उनके अन्‍तर्गत आप आइये, गवर्नमैंट उसका जवाब देगी इसलिए आपकी जो पर्ची है उसमें ध्‍यान आकर्षित करने का है ।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय सभापति महोदय, स्‍पीकर के चैम्‍बर में बात हुई है We met Speaker and we have requested, she was kind enough that she will allow it. आप स्‍पीकर से बात करें We met early in the morning the Parliamentary Minister was there.  

श्री सभापति: मैं एक मिनट,

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): I am very sorry. आप अपनी मैजोरिटी से हाउस को नहीं चला पायेंगे We requested early in the morning. आप बुलाइये स्‍पीकर साहब को फैसला करा लीजिए This is not the way.

श्री सभापति: एक मिनट, एक मिनट मेरी पूरी बात सुन लीजिए।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आप इस तरह से सडनली कह सकते हैं किसी चीज को।

श्री सभापति: आप मेरी बात सुनिये।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): You have to give reply. You cann’t suddenly. You have to give reply. यह कोई घर का राज नहीं है कि मन हो उसको भेजो, यह कोई घर का राज नहीं है You have to go by the rules and regulations.

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): जवाब देंगे, जवाब देंगे।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): जवाब दीजिए ना आप ...(व्‍यवधान) क्‍या तकलीफ है ...(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय सभापति महोदय, यह नई परम्‍परा कैसे बना दी पर्ची पर ...(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): कोई परम्‍परा नहीं है, रोज भाषण दे रहे हैं आप, रोज मंत्री बोल रहे हैं ...(व्‍यवधान) कोई नई परम्‍परा नहीं है, पर्ची का कोई मतलब नहीं है ...(व्‍यवधान) मतलब ही इम्‍पोर्टेंट मैटर है। सरकार ने प्रभारी मंत्री भेजे हैं जांच करने के लिए कि कितना नुकसान हुआ है।

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): आप बीच में कैसे बोल सकते हैं ...(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): प्रभारी मंत्री को मुख्‍यमंत्री जी ने भेजा है कि सरकार के प्रभारी मंत्री जायेंगे और इसकी जांच करेंगे कि किसानों को कितना नुकसान हुआ है ...(व्‍यवधान) It is not an important matter.

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय सभापति महोदय, आप डिबेट की नई परम्‍परा प्रारम्‍भ कर रहे हैं क्‍या ...(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आपकी परम्‍परा नई होगी, मुख्‍यमंत्री ने आश्‍वासन दिया है कि 20 तारीख को ...(व्‍यवधान)

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): आपकी नहीं चलेगी ...(व्‍यवधान)

श्री सभापति: एक मिनट, मेरी बात सुनिये।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय सभापति महोदय, इस सदन में मुख्‍यमंत्री ने कहा है कि हमारे मुख्‍यमंत्री, प्रभारी मंत्री जिले में गये हैं, किसान का कितना नुकसान हुआ है उसका जवाब देंगे ...(व्‍यवधान) वह नुकसान देखने अगर गलत आदमी जाएगा, उसका प्रोटेस्‍ट कर रहे हैं हम ...(व्‍यवधान) सदन को यह कहा गया है कि मंत्री और हमारे सेक्रेटरी कितना नुकसान हुआ है किसान का, देखने के लिए जायेंगे ...(व्‍यवधान) 

श्री सभापति: माननीय नाथद्वारा से आने वाले सदस्‍य, .....

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): यह इम्‍पोर्टेंट मैटर नहीं है, यह अपनी मन में आए जो करना चाहते हैं ...(व्‍यवधान) 

श्री सभापति: माननीय नाथद्वारा से आने वाले सदस्‍य, मैं बोल रहा हूं।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय सभापति महोदय, आप बुलाइये स्‍पीकर को, आप स्‍पीकर को बुला लीजिए।

श्री सभापति: आप विराज जाइये।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): सभापति महोदय, आप बुलाइये स्‍पीकर को You cann’t settle by the majority.

श्री सभापति: अंकित नहीं होगा, अंकित नहीं हो, अंकित नहीं हो।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): 000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री सभापति: इसमें अंकित नहीं हो रहा है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री विष्‍णु मोदी (मसूदा): 000

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य I am on my legs.

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

श्री सभापति: अंकित नहीं हो रहा है, अंकित नहीं हो रहा है, बैठिए आप।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री सभापति: मैं बोल रहा हूं ना तो आप बैठिए।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): 000

श्री सभापति: यह अंकित नहीं हो रहा है, बैठिए आप।

श्री विष्‍णु मोदी (मसूदा): 000

श्री सभापति: प्‍लीज नोडिबेट।

श्री विष्‍णु मोदी (मसूदा): 000

श्री सभापति: एक मिनट प्‍लीज आप विराजिए, आसन पांवों पर है, आसन पांवों पर है प्‍लीज आप विराजिए, ...(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री सभापति: आप बैठिए, मेरी बात सुनिये।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री सभापति: आप मेरी बात सुनेंगे, एक मिनट बैठिए।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री सभापति: मैं खड़ा हूं, सदन की परम्‍परा है ....

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

श्री सभापति: माननीय मंत्री जी, एक मिनट पहले मुझे सुनिये, प्‍लीज प्‍लीज। देखिये मुझे अंकित नहीं होने का निर्देश इसलिए देना पडा, एकसाथ कई माननीय सदस्‍य खड़े हो जाते हैं विदाउट परमिशन आफ दी चेयर बोलते हैं, कोई बात कहनी है तो पहले चेयर से परमिशन लीजिए। देखिये मैं आपको एक निवेदन करना चाहता हूं

श्री विष्‍णु मोदी (मसूदा): 000

श्री सभापति: एक मिनट, एक मिनट, पहले सुन लीजिए ना ...(व्‍यवधान) मैं उनको भी रोक रहा हूं। मैंने पहले भी ऐसी व्‍यवस्‍था दी है कि पर्ची पर कोई डिबेट नहीं होती, पर्ची पर कोई डिबेट नहीं हो सकती नम्‍बर एक। नम्‍बर दो, यह विषय संविधान से संबंधित है क्‍योंकि आपने लिखा है इसमें यह असंवैधानिक कृत्‍य है । आपने स्‍वयं ने लिखा है संविधान से संबंधित विषय है । केवल पर्ची के माध्‍यम से क्‍योंकि गम्‍भीर विषय है आप जो उठा रहे हैं मामला, अगर आप इसकी गम्‍भीरता को समझते और इतने लोग बोलने एक साथ खड़े हो गये, इसका मतलब आप इसको गम्‍भीर मानते हैं तब ही इतने लोग बोलने खड़े हुए तो ऐसे विषय को पर्ची के माध्‍यम से हाउस में नहीं लाया जाना चाहिए।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री सभापति: आप पहले मेरी बात सुनिये।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री सभापति: आप मेरी पूरी बात नहीं सुन रहे हैं। पर्ची पर ...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

श्री सभापति: आप पहले मेरी बात सुनिये, पर्ची पर केवल रिसेंट आकरेंस के विषय ही ...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

श्री विष्‍णु मोदी (मसूदा): 000

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मैं दो मिनट में समाप्‍त कर रहा हूं मेरा वक्‍तव्‍य..

श्री सभापति: यस, यस कन्‍क्‍लूड करिये।

 

vns/usc/13.30/1q/20.3.2007/1/

 

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): जो आपने मुझे आज्ञा दी है मैं उसी तक सीमित रहकर अब निवेदन करना चाह रहा हूं। यह रूल आफ बिजनस बने हुए हैं। यह भारत का संविधान बना हुआ है। माननीय सभापति महोदय,  कौनसी चीज संविधान के अनुरूप है कि नहीं है, रूल आफ बिजनस के नियमों के अनुरूप है कि नहीं है सरकार को यह निर्देश देने का दायित्‍व किसका है। मैं आपके माध्‍यम से यह पूछना चाहता हूं सरकार से कि अगर राजस्‍थान सरकार के मुख्‍य सचिव ने जब यह आपने संविधान विरोधी आदेश निकाले हैं कि ऐसे व्‍यक्तियों को प्रभारी मंत्री बनाकर‍जिलों में भेजा है जिन्‍होंने मंत्री पद की शपथ ली हुई नहीं है, क्‍या फाइल पर राजस्‍थान सरकार के मुख्‍य सचिव जिनका यह दायित्‍व बनता है कि वह सरकार का मार्ग दर्शन करेंगे कि इस सम्‍बन्‍ध में संवैधानिक प्रावधान क्‍या हैं, रूल आफ बिजनस में क्‍या है ? उन्‍होंने अपने कर्तव्‍य का निर्वहन किया कि नहीं किया ? माननीय सभापति महोदय,  यदि राजस्‍थान सरकार के मुख्‍य सचिव ने अपने कर्तव्‍य का निर्वहन नहीं किया है तो मैं राजस्‍थान की जनता की और से आपके माध्‍यम से यह मांग करता हूं कि राजस्‍थान सरकार को मुख्‍य सचिव के खिलाफ कार्यवाही करनी चाहिये। माननीय सभापति महोदय,  मैं आपके माध्‍यम से यह भी निवेदन करना चाहता हूं अगर फाइल पर मुख्‍य सचिव ने इन प्रावधानों का हवाला देकर सरकार का मार्ग दर्शन करने की कोशिश की है कि यह संवैधानिक प्रावधान के अनुरूप नहीं है तो यह जिम्‍मेदारी राजस्‍थान की मुख्‍यमंत्री की बनती है। माननीय सभापति महोदय,  यह संवैधानिक प्रावधानों की अवहेलना, उल्‍लंघन और राजस्‍थान की जनता ने जो जनादेश दिया है उसका घोर एवं खुला अपमान है। राजस्‍थान की मुख्‍यमंत्री ने किया है जिसके लिये उनको राजस्‍थान की जनता की और से क्षमा याचना करनी चाहिये। धन्‍यवाद।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय सभापति महोदय,  मैं बात कुछ कहना चाहता हूं ... (व्‍यवधान) 

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): माननीय सभापति महोदय,  एक सवाल सिर्फ। माननीय राठौड़ साहब, एक मिनट।

श्री सभापति: मंत्रीजी।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आपने मेरा नाम पुकार लिया।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): एक मिनट में ही, उसका जवाब भी दे देंगे। 

मैं आपसे यह पूछना चाहता हूं श्री मानिक चन्‍द जी सुराना स्‍टेट फाइनेंस कमीशन के चेयरमैन हैं। स्‍टेट फाइनेंस का अपाइंटमेंट कांस्‍टीट्यूशन के अमेंडमेंट के बाद होने लगा कि पंचायती राज संस्‍था को, लोकल बॉडीज को कैसे पैसा बंटेगा ? उनका यह दायित्‍व है। यह कांस्‍टीट्यूशन था। आपने उस काम के लिये जो कि जो निर्णय लेते वक्‍त प्रभावित कर सकता है। उनके निर्णय को आप जिले में भेज रहे हैं। कर क्‍या रहे हैं आप? आप कर क्‍या रहे हैं, बैठे हुए यहां पर? आपके मंत्री नहीं हैं क्‍या? आपके 27 मंत्री हैं। आप एक मंत्री को दो जिले दे सकते हैं। जो कारपोरेशंस हैं, मैं व्‍यक्तिगत किसी के खिलाफ नहीं हूं, हमारे साथ रहे हैं। भाभड़ाजी हैं I am not personally against anyone. I am not casting any remarks against anyone.  मैं तो सोच का दिवालियापन कह रहा हूं। इस सरकार की सोच का दिवालियापन निकल गया। सोचते ही नहीं हैं आप। आपने करा क्‍या है? जो लोग केबिनेट मिनिस्‍टर्स का स्‍टेटस, एक केबिनेट मिनिस्‍टर की सुविधाएं, वे सुविधाएं पाने के हकदार हैं, किसी चीज के हकदार नहीं है। इस प्रकार से जिलों में जब मंत्री जाते हैं उनके क्‍या लोकल स्‍टेंड लिये, क्‍या जिले के अधिकारियों को आदेश दे सकते हैं? वहां पर प्रभारी मंत्री जाते हैं उनको यह अधिकार है कि वहां के हालात को देखते हुए वह निर्देश देंगे। यह जो आपका कृत्‍य है सरकार का, मेरे हिसाब से गैर-संवैधानिक कृत्‍य है। इसके ऊपर सरकार तुरन्‍त कार्यवाही करके सदन से और फिर संघ में यहां कहा गया कि मंत्री जा रहे हैं और मंत्री में यह लोग भी शरीक कर लिये। चल ही यह रहा है, यह तो बड़ा इम्‍पोर्टेंट मुद्दा है, मैंने आपसे कहा है, मुझे बड़ी तकलीफ हो रही है कि मैं मेरे मित्र, हमारे संग सदन में रहे हैं, मानिक चन्‍दजी सुराना, उनका मुझे नाम लेना पड़ रहा है, भाभड़ा साहब हमारे अध्‍यक्ष रहे हैं। मैं उन सबका सम्‍मान करता हूं लेकिन आपने करा क्‍या? पार्लियामैंट्री अफेयर मिनिस्‍टर साहब, आपके यहां पर ऐसे महारथी बैठे हुए हैं, गृह मंत्रीजी बैठे हुए हैं, यह पार्लियामैंट्री अफेयर के मिनिस्‍टर बैठे हुए हैं, जो वर्षों में सरकार में रहे हैं, एम.एल.ए. रहे हैं तो इन सबकी बुद्धि के ऊपर, क्‍या कोई सोचने वाला नहीं है? इनको आपने भेज दिया है। इसको आप तुरन्‍त अमेंड कीजिए भविष्‍य के लिए और जो हुआ है इसके लिए सदन से माफी मांगिये, यह मैं आपसे मांग करना चाहता हूं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय सभापति महोदय,  आपने तो डिबेट ही प्रारम्‍भ करा दी।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): राजेनद्रजी, आप बाद में। एक मिनट। आप बोल लेना। ... (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय सभापति महोदय,  आपने डिबेट प्रारम्‍भ करा दी तो समय निश्चित कर लें। ... (व्‍यवधान)

श्री सभापति: नहीं, डिबेट नहीं, आपने उन्‍हें हिन्‍ट दिया है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आप बोल लीजिए, राजेन्‍द्रजी, बोल लीजिए।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): तो फिर हमें अपनी बात कहने दीजिए। मैंने तो अलाऊ नहीं किया है, मैं अलाऊ करने वाला कौन होता हूं? मैं कौन होता हूं कहने वाला? सरकार की बात है। किसको कहूं? यह क्‍या, फिर तो सब ही बोलेंगे।

श्री सभापति: आपने ही अलाऊ किया है। आपने हिन्‍ट किया है। आपने हिन्‍ट किया है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अगर इनकी तरफ से आपने इस डिबेट को अलाऊ कर दिया तो फिर इधर से बोलेंगे। यह क्‍या है?

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): हां, सबको बुलवाओ। माननीय सभापति महोदय,  सबको बुलवाइये।

श्री सभापति: माननीय मंत्रीजी, मैंने आपका अलाऊ किया। आपने हिन्‍ट किया इसलिए वे बोल रहे हैं, बोलिये।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय सभापति महोदय,  सबको बुलवाइये। एक मिनट मैं मेरी बात ... (व्‍यवधान) मंत्रीजी बोल लेंगे बाद में। हमारी सुन लें पहले, एक मिनट में बात सुन लो मंत्रीजी। आप एक मिनट विराजिये। ... (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अगर आप नई परम्‍परा कायम कर रहे हैं  पर्ची के ऊपर डिबेट प्रारम्‍भ हो। ... (व्‍यवधान)

श्री सभापति: आप बोलिये न। आप बोलिये। ... (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): माननीय सभापति महोदय,  यह आपको भी धमका रहे हैं। ... (व्‍यवधान)

श्री सभापति: इसके आप आप पूछ लीजिए। वह बोले दें। पहले उनका जवाब सुन लें।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मंत्रीजी, आप बाद में बोलना। मंत्री का जवाब तो फाइनल जाता है। दो मिनट लगेंगे। मंत्री, सरकार का वक्‍तव्‍य आ जाएगा, फिर क्‍या है? दो मिनट बाद आप बात कह लेना। आप जो बात कहेंगे वह होगा। ... (व्‍यवधान)

श्री विष्‍णु मोदी (मसूदा): दस मिनट बैठ जाओ न, क्‍या दिक्‍कत है?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): तो वह बाद में पूछ लेना। मैं दो मिनट में अपनी बात ... (व्‍यवधान)

श्री सभापति: मंत्रीजी, कुछ कहना चाहते हैं, मंत्रीजी को सुन लीजिए।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): सरकार इनकी भी कुछ बात सुन ले, उसके बाद सरकार वक्‍तव्‍य दे देगी, फिर बीच में क्‍या देना है यह? ... (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मैं माननीय सभापति महोदय,  खाली एक एड कर रहा हूं। जो बात राजाखेड़ा से आने वाले माननीय सदस्‍य ने कही, उसमें दो बाद एड करना चाहता हूं, आप जवाब दे दीजिए। माननीय सभापति महोदय,  पार्लियामैंट अफेयर मिनिस्‍टर का ध्‍यान मैं पार्लियामैंट्री प्रेक्टिस एण्‍ड प्रोसीजर पर भी आकर्षित करना चाहता हूं जिसमें यह स्‍पष्‍ट लिखा हुआ है, काउंसिल आफ मिनिस्‍टर का मतलब क्‍या होता है? काउंसिल आफ मिनिस्‍टर का मतलब माननीय सभापति महोदय,”The Council of Ministers consists of all the categories of Ministers of the Government of India, whether they are Members of Cabinet or Ministers of State or Deputy Ministers.” पार्लियामैंट अफेयर जो सेक्रेटरी है are not included in the Council of ministers. यह मैं नहीं कोट कर रहा हूं । यह भी कोट कर रहा हूं पार्लियामैंट सेक्रेटरी का काम केवल मात्र क्‍वश्‍चन का जवाब देना है क्‍योंकि पार्लियामैंट सेक्रेटरी केवल शपथ लेता है चीफ मिनिस्‍टर के चैम्‍बर में। मिनिस्‍टर शपथ लेता है गवर्नर के द्वारा । शिड्यूल में जो प्रेस्‍क्राइब है वह शपथ गवर्नर के यहां लेता है इसलिए न केवल वह सदस्‍य जो मंत्री नहीं है इवर पार्लियामैंट सेक्रेटरीज को भी मंत्री, इन्‍चार्ज भेजना यह कानून की दृष्टि से ठीक नहीं है इसलिए मैं माननीय सभापति महोदय,  माननीय मंत्री महोदय से हम्‍बल रिक्‍वेस्‍ट करना चाहता हूं आपकी मैजोरिटी है, मैजोरिटी में आप जो आए करें लेकिन मावलंकर जी का कोट करके मैं अपनी बात समाप्‍त करता हूं। “For real democracy, one has to look not bearing in the provision of the Constitution or the Rules and the Regulations made for the conduct of business in the legislation but one has to foster a real democratic spirit in those who form the legislation. If this fundamental is born in mind it will be clear that those questions would be decided by the majority. Parliamentary Government will not be possible if it is reduced to bear counting of heads or hands. If we are to go merely by majority we shall be foisting the seats of fosters, violence and revolve if  on the other hand we would foist spirit of tolerance, a spirit of freedom of discussion and a spirit of understanding, we shall be foisting the spirit of democracy.”

इसलिए मैं मावलंकर जी की इस भावना के आधार पर सरकार से निवेदन करना चाहता हूं आप इतने स्ट्रिक्‍ट नहीं हो जो डेमोक्रेसी, पार्लियामैंटरी डमोक्रेसी की स्पिरिट है उस स्पिरिट के अन्‍तर्गत इस सरकार को यह ध्‍यान रखने की आवश्‍यकता है कि पार्लियामैंट सेक्रेटरी भी आपके किसी भी जिले के इन्‍चार्ज नहीं हो सकते । वह कौन्सिल आफ मिनिस्‍टर के मैम्‍बर नहीं हैं। आप उनमें झण्‍डा लगाकर भेजे, आप उनके एस्‍कोर्ट लगाकर भेजें, उनसे निर्णय करावें यह भी संविधान का खुला उल्‍लंघन है। आफ्टर आल कौंसिल आफ मिनिस्‍टर लेजिस्‍लेटर का उत्‍तरदायित्‍व है और लेजिस्‍लेटर का जनता के प्रति उत्‍तरदायित्‍व है।

इसलिए इस सरकार के मंत्री जी मैं आपसे सानुरोध प्रार्थना करना चाहता हूं आज आपको अच्‍छा लग रहा होगा, आज हम राजशाही कहते हैं उसका बुरा लग रहा होगा लेकिन पार्लियामैंट्री डेमोक्रेसी को कमजोर करने का काम यदि घनश्‍याम जी तिवाड़ी और गुलाबचन्‍द जी कटारिया इतने सीनियर आदमी करेंगे तो लोकतंत्र भी आपको माफ नहीं करेगा कि आप साइलैंट रहकर इसके साथ पार्टी बनें। यदि गलती हुई है तो उसको रेक्टिफाई किया जाना चाहिए और जनता में यहां से मैसेज जाना चाहिए कि यह सरकार पार्लियामैंट्री डेमोक्रेसी के जो कांस्‍टीट्यूशन के प्रोवीजन हैं उनको फालो करती है। यदि नहीं करती तो मैं समझता हूं कि मैजोरिटी के आधार पर आप कुछ भी कर लें राजस्‍थान की जनता के साथ यह सबसे बड़ा अन्‍याय है। यह सरकार संविधान की पालना नहीं कर रही है, यह सरकार गैर संवैधानिक काम कर रही है और इस पवित्र सदन में आपने कहा है यह तीन दिन की छुट्टी की है हमने, तीन दिन की छुट्टी में सेक्रेटरी जायेंगे, मंत्री जायेंगे, मंत्री जाकर कितना नुकसान हुआ है वह आप कह रहे हैं जनता के बीच में, असेम्‍बलि में कहेंगे और किसानों को भरोसा दिलायेंगे। आप मुझे बताएं कि जो पार्लियामैंट्री सेक्रेटरी कांस्‍टीट्यूशन के आधार पर डिस्ट्रिक्‍ट में नहीं जा सकते थे, जो मिनिस्‍टर की फेसेलिटी वाले आदमी नहीं जा सकते थे वह आदमी क्‍या हैं जो सूचना लेकर इस सदन को इत्‍तला करेंगे, मैं समझता हूं कि सदन के सामने सबसे बड़ा कन्‍सोलिडेटेड फण्‍ड का दुरूपयोग करने का आपने गलत आदमी से काम करवाए हैं । माननीय मंत्री जी, पार्लियामैंट्री अफेयर्स मिनिस्‍टर आपकी कांशियस प्रिक करे कि नहीं करे मेरी कांशियस प्रिक करती है कि सदन के अन्‍दर यदि यह काम होता है तो इससे गैर संवैधानिक कोई काम हो नहीं सकता है इसलिए इस सरकार को संविधान की दृष्टि से काम करने के लिए या तो सभापति महोदय आप कहिये या फिर हमें गैर संवैधानिक काम करने के लिए छूट दीजिए । काहे को हम सरकार को क्रिटिसाइज करें, काहे को हम असेम्‍बलि में आएं, काहे को कन्‍सोलिडेटेड फण्‍ड से खर्च करें, मैं समझता हूं सभापति महोदय, आप स्‍वयं इसको उठाकर देख लें 164 में क्‍या लिखा है, गवर्नर की पावर क्‍या है।

माननीय सभापति महोदय,  आखिरी में मैं एक ही बात कहना चाहता हूं जिस पर माननीय मंत्री महोदय इस पर ध्‍यान रखें  “The Council of Ministers shall be collectively responsible to the Legislative Assembly of the State.

 

 

 

 

 

श्‍याम/चौहान    20.03.2007   13.40  2a 

 

यह आपका 164(2) का प्रोविजन है “Before a Minister enters upon his office, the Governor shall administer to hi9m the oaths of office and of secrecy according to the forms set out for the purpose in the Third Schedule." थर्ड शिड्युल लिखा हुआ है, उसी के अंतर्गत जिसकी शपथ है वह कौंसिल ऑफ मिनिस्‍टर का मैम्‍बर हो सकता है, ना आपका पार्लियामेन्‍ट्री सेक्रेटरी, वह आपका बड़ा आदमी हो सकता है, खास आदमी हो सकता है या राज दरबार में कामदार हो सकता है लेकिन इस पार्लियामेन्‍ट्री डेमोक्रेसी के अंदर मंत्रि नहीं हो सकता है और मंत्रि नहीं हो सकता है तो इस विधान सभा के प्रति वह जिम्‍मेदार नहीं हो सकता है। यह गैर संवैधानिक काम अगर इस सदन के अंदर, आप तो बेस्‍ट पार्लियामेंटेरियन हैं, आपको तो बहुत बड़ा पुरूस्‍कार मिला है। हम सबको गर्व है कि बेस्‍ट पार्लियामेंटेरियन आदमी आज चेयर पर बैठा हुआ है। वह बेस्‍ट पार्लियामेंटेरियन आदमी भी अगर गैर संवैधानिक काम की अध्‍यक्षता कर रहा है तो मैं समझता हूं कि इससे बड़ा दुर्भाग्‍य हमारा नहीं हो सकता है। इसलिए मेहरबानी करके इस सरकार को आप डायरेक्‍शन दीजिये।

श्री सभापति: माननीय मंत्रि जी।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): सभापति महोदय, सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य ने ...(व्‍यवधान)

श्री विष्‍णु मोदी (मसूदा): सभापति महोदय, मैं आपका बार-बार ध्‍यानाकर्षित करना चाहता हूं लेकिन आपकी नजर ही नहीं आ रहा है ...(व्‍यवधान)

श्री सभापति: मंत्रि जी खड़े हैं।

श्री विष्‍णु मोदी (मसूदा): मंत्री जी तो खड़े हो जायेंगे लेकिन मैं भी तो एक मिनट ...(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): एक मिनट मंत्रि जी, एक मिनट, सभापति महोदय, पर्ची के माध्‍यम से सिराही से आने वाले माननीय सदस्‍य ने एक विषय उठाया और उस विषय के माध्‍यम से नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य और राजाखेड़ा से आने वाले माननीय सदस्‍य ने संविधान की व्‍याख्‍या कर दी और यहां तक कहा गया कि यह सरकार संवैधानिक दायित्‍व को पूरा करने में बिलकुल असमर्थ रही है और हम पार्लियामेन्‍ट्री डेमोक्रेसी को कमजोर करने का काम कर रहे हैं।

सभापति महोदय, यह सही है मैं उस और जाना नहीं चाहता, संविधान के अनुच्‍छेद 164(2) में सामूहिक उत्‍तरदायित्‍व की बात भी की गयी है। 164 के अंदर मंत्रिपरिषद का गठन कैसे होगा। राज्‍यपाल किसे शपथ दिलायेगा, यह सारी व्‍यवस्‍था है। मैं उन व्‍यवस्‍थाओं की तरफ नहीं जाना चाहता। यहां यह कह दिया कि प्रभारी मंत्रि के रूप में हमने कुछ असंवैधानिक लोगों को भेज दिया।

सभापति महोदय, यह प्रेक्टिश राजस्‍थान में नहीं, भारत सरकार का मैं निवेदन करना चाहता हूं। आज भारत सरकार के अंदर ट्रेक टू डिप्‍लोमेसी विद अफगानिस्‍तान, इतना बड़ा मामला है, एस.के.लांबा, जो रिटायर्ड सेक्रेटरी हैं भारत सरकार के, वह देख रहे हैं। श्‍याम शरण यह रिटायर्ड फोरेन सेक्रेटरी हैं, न्‍युक्लियर डील पर यह सारा काम कर रहे हैं, अधिकृत हैं भारत सरकार के मंत्रिमंडल से अधिकृत हैं और पदमनैभया यह रिटायर्ड सेक्रेटरी हैं, यह नागा समस्‍या की सारी चीजों को देख रहे हैं। मैं निवेदन करना चाहता हूं कि यह जो हमने इंतजाम किये हैं यह सं‍वैधानिक व्‍यवस्‍था नहीं है, यह पूर्णतया प्रशासनिक व्‍यवस्‍था थी ...(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आप पार्लियामेंट में जवाब दे रहे हैं क्‍या। आप शरण का या इसका उदाहरण दे रहे हैं। आप बातें कर रहे हैं जिसका कोई संबंध नहीं है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): वह भी कह देंगे ...(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आप एस.एन.गुप्‍ता से काम कराये वैट का वह इश्‍यु नहीं है ...(व्‍यवधान) इश्‍यु यह है कि असेम्‍बलि में जो जवाबदारी है वह किसका संबंध है। आप किसी से काम करायें ना।

श्री सभापति: माननीय नाथद्वारा से आने वाले सदस्‍य, आप पहले सुन लें ...(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): सभापति महोदय, कोई संवैधानिक व्‍यवस्‍था हमने नहीं की, पूर्णतया: प्रशासनिक व्‍यवस्‍था की। इस प्रशासनिक व्‍यवस्‍था के अंतर्गत हमने कोई प्रभारी मंत्रि नहीं लगाया। उस जिले की समस्‍याओं के बारे में सरकार के पास महत्‍वपूर्ण जो योजनाएं हैं, उन योजनाओं की और और अभी जो ओलावृष्टि की बात हुई, उन सारे तथ्‍यों के लिए उन लोगों को भेज दें, उन सारी चीजों का आंकलन करके सरकार के पास लेकर के आयें। मैं नहीं समझता, यह कोई नयी परंपरा नहीं है ...(व्‍यवधान) सभापति महोदय, यह प्रशासनिक व्‍यवस्‍था की बात है। यह वैधानिक व्‍यवस्‍था की बात नहीं है इसलिए इसके माध्‍यम से यह कहना कि पूरी संवैधानिक व्‍यवस्‍था को जीर्ण-शीर्ण ...(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): गुमराह किया है। यह माननीय अकाल राहत मंत्रि जी को स्‍टेटमेंट है। मुख्‍यमंत्री जी का स्‍टेटमेंट है कि हम प्रभारी मंत्री को और सेक्रेटरी को भेजेंगे ...(व्‍यवधान) बातें कर रहे हैं आप ...(व्‍यवधान) इससे बड़ा असत्‍य भाषण हो नहीं सकता कि इस सदन में आपने घोषणा की है कि तीन दिन की छुट्टियों में प्रभारी मंत्रि और सेक्रेटरी जायेंगे। यह प्रभारी मंत्री हैं आपके ...(व्‍यवधान) सदन को गुमराह कर रहे हैं आप ...(व्‍यवधान)

श्री सभापति: माननीय सदस्‍य, आप मंत्री जी को अपना उत्‍तर पूरा करने दीजिये ...(व्‍यवधान) एक मिनट ...(व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): बातें कर रहे हैं खामे खां ...(व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आप तो यह बतायें कि बूंदी जिले के प्रभारी मंत्री कौन हैं ...(व्‍यवधान)

श्री सभापति: माननीय हिण्‍डौली से आने वाले माननीय सदस्‍य, बिराजें ...(व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आपने कहा कि हमने प्रभारी मंत्री नहीं लगा रखे, बूंदी जिले के प्रभारी मंत्री कौन हैं। चलों यह बता दें ...(व्‍यवधान) बूंदी जिले के प्रभारी मंत्री संसदीय सचिव श्री ओम बिरला हैं ...(व्‍यवधान)

श्री सभापति: आप पूरा उत्‍तर सुन लीजिये, प्‍लीज ...(व्‍यवधान) 

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): और यह यहां कह रहे हैं हमने कोई प्रभारी मंत्रि नहीं लगा रखें हैं ...(व्‍यवधान)

श्री सभापति: आप पूरा सुनिये प्‍लीज ...(व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): सभापति महोदय, विषय को शायद हम, एज ए मंत्री प्रभारी लगाया को लेकर के यहां संवैधानिक विषय खड़ा कर रहे हैं जबकि यह प्रभारी मंत्री के रूप में नहीं लगाये गये। प्रभारी के रूप में लगाया गया है ...(व्‍यवधान) मेरी बात को आप सुन लें। यह जरूर है कि बोलते समय यह कहा कि हमने प्रभारी मंत्रियों को भेजा है, यह शब्‍द यहां जरूर उच्‍चारण हुआ लेकिन इसमें कुछ ऐसे लोगों को भी जो मंत्री ना होते हुए भी एज ए प्रभारी मंत्री नहीं, एज ए प्रभारी इस सारे का आंकलन करके और सरकार को तुरंत दें। इसके लिए कुछ लोगों को लगा दिया। मैं सोचता हूं कि यह सरकार का अधिकार है कि अगर उसमें भी किसी सदस्‍य को, एक सेकण्‍ड ...(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): राहत मंत्री जी ने कहा है कि मंत्रियों को भेजा है, मुख्‍यमंत्री जी ने स्‍वयं ने कहा है ...(व्‍यवधान)

श्री सभापति: आप उनको सुनिये, पूरा सुनिये, प्‍लीज ...(व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): या तो यह कह दें कि मुख्‍यमंत्री जी ने कहा ...(व्‍यवधान) और या यह गलत बोल रहे हैं ...(व्‍यवधान) दोनों में से एक सही बोल रहा है ...(व्‍यवधान)

श्री सभापति: आप बैठिये, माननीय सदस्‍य ...(व्‍यवधान) यह गलत बात है, एक सेंटेंश बोलते ही फिर खड़े हो जाते हैं उस एक सेंटेंश का स्‍पष्‍टीकरण लेने के लिए। आप पहले पूरा उत्‍तर सुनिये, उसके बाद अगर आपके कोई डाउट हैं तो वह पूछने का अधिकार होता है। चाहे जो खड़ा हो जाता है बीच में और इसमें डिबेट भी नहीं होती है, लेकिन फिर भी वह जवाब दे रहे हैं तो पूरी बात उनकी सुनिये, यस।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): सभापति महोदय, आप और मैं इतने वर्षों से यहां हैं। कई बार हम किसी विधायक को भी किसी जानकारी के लिए प्रभारी बनाकर के किसी जिले में लगाते हैं और वह सूचना लेकर के आते हैं। मैंने भी जैसे, मेरे साथ में जो विधायक जुड़े हुए हैं गृह विभाग में, मैंने अपने इन सारे साथियों को भी जिला कमेटियां, जो मैंने बनाई हैं, जहां रिव्‍यु करके, वहां के जन-प्रतिनिधि होंगे, उसमें भी मैंने अपनी तरफ से उनको उस रिव्‍यु मीटिंग में रहने के लिए, यद्यपि वह रहने वाले जयपुर के होंगे और मैंने उनको बांसवाड़ा जिला दिया हेगा जबकि वहां की डिस्ट्रिक्‍ट की कमेटी में जिसमें सारे जन-प्रतिनिधि हैं, प्रधान हैं, वहां की नगर पालिका के सदस्‍य हैं वह होंगे और मेरे पुलिस के अधिकारी महिने में एक बार अपनी रिव्‍यु मीटिंग करेंगे। उसमे मैंने अपनी कमेटी से जो मेरे साथ जुड़ी हुई है आठ-नौ एम.एल.ए. की, तो जहां प्रभारी लगाया तो नियमों की अवहेलना नहीं हुई, जहां एज ए प्रभारी मंत्री लगाया तो आपकी बात में दम है। इन दोनों में अंतर करिये। मैं सोचता हूं ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): सिरोही का प्रभारी मंत्री कौन है बताइये आप ...(व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): प्रभारी मंत्री हैं, बूंदी जिले के प्रभारी मंत्री हैं ...(व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): मेरी बात एक बार पूरी सुन लें ...(व्‍यवधान) जैसे हम सेक्रेटरी को भी ...(व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय गृह मंत्रि जी, आप तो यह बता दें कि भरतपुर और धौलपुर जिले का प्रभारी मंत्री कौन है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आप तो सिरोही का बता दें ...(व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): भरतपुर और धौलपुर जिले का और बूंदी और सिरोही का प्रभारी मंत्री कौन है ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आप गुमराह कर रहे हैं सदन को ...(व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): आपके हर जिले में सरकार के कार्यक्रमों और नीतियों के क्रियान्‍वयन के लिए मानीटरिंग के लिए प्रभारी मंत्री लगा रखे हैं कि नहीं लगा रखे हैं ...(व्‍यवधान) कृपया मुझे तो इतना बता दें कि भरतपुर और धौलपुर का प्रभारी मंत्री कौन है।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): आप फिर से बात का घुमा रहे हैं ...(व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): आप तो भरतपुर का बता दें, भरतपुर का कौन है ...(व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): प्रभारी मंत्री सुनें ...(व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): प्रभारी मंत्री कौन हैं यह बता दें आप ...(व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): भरतपुर का प्रभारी मंत्री कौन है यह बता दें आप ...(व्‍यवधान) हम आपकी बात मान लेंगे ...(व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): प्रभारी मंत्री और प्रभारी दोनों में अंतर है ...(व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): कटारिया साहब, आपके बारे में यह कहा जाता है कि आप कोई गलती होती है तो उसको तहे दिल से स्‍वीकार कर लेते हैं ...(व्‍यवधान) राजेन्‍द्र जी तो नहीं करेंगे। लेकिन आपसे तो उम्‍मीद करते हैं कि जो भूल आपसे हो गयी, संवैधानिक चूक हो गयी उसको आप स्‍वीकार करेंगे और सदन से माफी मांगिये ...(व्‍यवधान)

श्री सभापति: सुनिये, पूरा सुनिये ...(व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): सभापति महोदय, दोनों में अंतर करना होगा, अगर यह कहकर कि यह प्रभारी मंत्री के रूप में लगाये हैं और मंत्री नहीं हैं तो हमने संविधान की अवहेलना की है ...(व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): की है।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): एक सेकण्‍ड, एक सेकण्‍ड, लेकिन अगर प्रभारी के रूप में लगाया है तो संविधान की अवहेलना नहीं हुई है। जाने वाले अगर गलती से अपने आपको यह कहें कि मैं इस जिले का प्रभारी मंत्री हूं तो उसके कहने से इस आदेश की भावना नहीं है, कि कहीं यदि लगाया गया और मैं अपने आपको प्रभारी मंत्री हूं, तो नहीं होगा। सरकार ने एज ए प्रभारी मंत्री के रूप में अगर दिया है तब तो अवहलेना हुई और प्रभारी का चार्ज दिया है तो प्रभारी का चार्ज तो दिया जा सकता है। आपमें से भी किसी को किसी जिले का प्रभारी सरकार अगर चाहे किसी को तो लगा सकती है। इसमें कहीं अड़चन नहीं है। मैं सोचता हूं कि दोनों विषयों को मिलाये मत। प्रभारी मंत्री और प्रभारी अगर दोनों का अंतर स्‍पष्‍ट हो जाये तो मैं समझता हूं कि शायद उन्‍हें उलझन नहीं रहेगी।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आप तो यह बता दें कि सिरोही जिले का प्रभारी मंत्री कौन है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आप तो बूंदी जिले का ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): सभापति महोदय, मंत्री जी, गुमराह कर रहे हैं ...(व्‍यवधान) यह सदन का गुमराह कर रहे हैं ...(व्‍यवधान)

श्री सभापति: आप मुझे सुनिये। एक मिनट सु‍निये ...(व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): कलेक्‍टर के साथ प्रभारी मंत्रि की हैसियत से ओम बिरला ने अनेक स्‍थानों पर ...(व्‍यवधान) इनोग्रेशन स्‍टोन हैं जिसमें प्रभारी मंत्री लिखा हुआ है।

श्री सभापति: एक मिनट, मुझे सुन लें ...(व्‍यवधान) बैठिये, आप मेरी बात सुनिये ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आप पहले मेरी बात सुनिये ...(व्‍यवधान) पूरे राजस्‍थान के प्रभारी मंत्रियों की यह सूची है ...(व्‍यवधान)

श्री सभापति: बिराजें, माननीय सदस्‍य ...(व्‍यवधान) आप बिराजिये।

 

जयगोविन्‍द/यूएस/20.3.7/13.50/2b

 

                (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): लिस्‍ट पड़ी है मेरे पास। ...(व्‍यवधान)...

श्री सभापति: हां, तो एक मिनट विराजिए पहले।

माननीय सदस्‍यगण, मैं आपका ध्‍यान राजस्‍थान विधान सभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन सम्‍बन्‍धी नियमों में पेज दो पर दी गई डेफिनिशन क्‍लॉज की तरफ दिलाना चाहता हूं।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): This is  for Assembly.

श्री सभापति: यस, पेज टू। ...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): यह असेम्‍बली के लिए ही है। This not for Assembly. इस पर पहले डिस्‍कस हो चुका है।

श्री सभापति: डे‍फिनिशन। ...(व्‍यवधान)...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आप तो सरकार के प्रभारी मंत्रियों की सूची सदन पटल पर रख दो, इन्‍होंने जो लिस्‍ट निकाली है, उस लिस्‍ट  की कॉपी सदन पटल पर रखवा लो उसमें प्रभारी शब्‍द की जगह प्रभारी मंत्री लिखा हुआ है। ...(व्‍यवधान)...

श्री सभापति: मैं जानकारी वाली बात कह रहा हूं, आप विराज जाइए। ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): सदन को गुमराह किया है गृह मंत्रीजी ने। ...(व्‍यवधान)... गृह मंत्रीजी ने सदन को गुमराह किया है और सदन के माध्‍यम से राजस्‍थान की जनता को गुमराह किया है। सूची राजस्‍थान सरकार ने खुद ने जारी की है। ...(व्‍यवधान)...

श्री सभापति: सिट डाउन प्‍लीज। पहले चेयर को सुनिए। अंकित नहीं होगा। ...(व्‍यवधान)...

अंकित नहीं होगा।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री सभापति: I am on legs. Take your seats please.

श्री विष्‍णु मोदी (मसूदा): 000

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): 000

श्री सभापति: तगारामजी, आप बैठिए। आप एक मिनट बैठिए। ...(व्‍यवधान)...  I am on my legs.

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री सभापति: I am on my legs.

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री सभापति: आप विराजिए, यह अंकित नहीं हो रहा है। Don’t record it.  

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000 

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री सभापति: मैं आपसे प्रार्थना कर रहा हूं। I want to say something.

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): 000

श्री सभापति: They don’t want to listen the Chair.

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

श्री सभापति: Take your seats please. Why don’t you want to listen?

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): 000 ...(व्‍यवधान)...

श्री सभापति: Please take your seats please. Mr. Sanyam Lodha I am calling you. I am again asking you to take your seats please. I will call your name. This is very unfortunate that they don’t want to hear the Chair. Take your seats please. I am on my legs. This is very unfortunate that some of the Members they don’t want to listen even the Chair. Please maintain.  मैं आप सभी माननीय सदस्‍यों का ध्‍यान डेफिनिशन क्‍लॉज की ओर दिलाना चाहता हूं। ...(व्‍यवधान)... आप फिर खड़े हो गए? पहले मुझे कम्‍पलीट करने दीजिए। मैं प्रक्रिया और नियमों में दिए गए डेफिनिशन क्‍लॉज की ओर आपका ध्‍यान दिलाना चाहता हूं। इसमें मिनिस्‍टर की डेफिनिशन दी है। Minister means a member of the Council of Minister, a Minister of State, a Deputy Minister or a Parliamentary Secretary. यह आपका नियम है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): 000 

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): 000

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): 000

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

श्री सभापति: आप बोलें। ...(व्‍यवधान)... 

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ...(व्‍यवधान)... मुझे पुकारा है।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 000

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): 000

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 000

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): 000

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ...(व्‍यवधान)... आपने पर्ची के माध्‍यम से सरकार का ध्‍यान आकर्षित किया है और सरकार ने उत्‍तर दे दिया। ...(व्‍यवधान)...

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

श्री अमराराम (धोद): 000

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

श्री अध्‍यक्ष: आप कृपया एक-एक माननीय सदस्‍य बोलें तो कोई बात आगे बढ़ेगी। ऐसे सब खड़े होकर यदि आप बोलेंगे तो....।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पर्ची पर माननीय सदस्‍य ने सरकार का ध्‍यान आकर्षित कर दिया और सरकार ने उत्‍तर दे दिया। यह क्‍या बात हुई?

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने मुझे अनुमति दी है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने मुझे अलाउ किया है। एक घण्‍टे से बहस कर रहे हैं, एक घण्‍टे से।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): 000

श्री अध्‍यक्ष: पर्ची के माध्‍यम से यह मुद्दा उठाया गया। ...(व्‍यवधान)... आप क्‍यों बोल रहे हैं? आपने पर्ची थोड़े दी है, पर्ची तो उन्‍होंने दी है।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): मैं अभी दो मिनट में कम्‍पलीट कर दूंगा, बहुत संक्षेप में बता रहा हूं।

Gpc/usc/20032007/1400/2c

 

श्री अध्‍यक्ष: आप एक मिनट में समाप्‍त कर दें।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  आपकी अनुपस्थिति में सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य ने यह प्रश्‍न पर्ची के माध्‍यम से उठाया था कि जिन लोगों ने संविधान की शपथ नहीं ली और यहां पर सदन में यह घोषणा की गई थी कि तीन दिन की छुट्टियां हैं उसमें प्रभारी मंत्री अपने-अपने जिलों में जाएंगे और जाकर यहां पर रिपोर्ट देंगे ओलावृष्टि कहां-कहां हुई, कहां कितना नुकसान हुआ उसके बारे में सदन को अवगत कराएंगे और उसके बाद राज्‍य सरकार तदनुरूप घोषणा करेगी कि किसानों की क्‍या सहायता की जाए। इसमें हमारा आपके माध्‍यम से सरकार का ध्‍यान आकृष्‍ट करना है कि जो लोग गये वो ऐसे लोग थे जिन्‍होंने मंत्री पद की शपथ नहीं ली हुई थी और वे प्रभारी मंत्री के रूप में गये। यहां पर आप आसन पर विराजमान नहीं थे, सभापति महोदय ने डेफिनेशन का क्‍लाज पढ़कर बताया कि पार्लियामेंट्री सेक्रेट्री मंत्री की परिभाषा में आते हैं वे केवल प्रश्‍न का जवाब देने के लिए सीमित हैं। इसके अलावा प्रभारी मंत्री के रूप में आज तक हमको याद है हमारी भी सरकारें रही हैं कभी भी कोई पार्लियामेंट्री सेक्रेट्री किसी जिले का प्रभारी मंत्री नहीं रहा। न कभी कोई चेयरमैन जैसे आपके वित्‍त आयोग के अध्‍यक्ष अथवा कोई अभाव अभियोग के अध्‍यक्ष, ये लोग कभी प्रभारी मंत्री के रूप में नहीं गये। हां, पोलिटिकल पार्टियों ने अपनी तरफ से उनको प्रभारी बनाकर भेजा है, लेकिन सरकार ने कभी भी नहीं भेजा। किसी भी अध्‍यक्ष को, किसी भी गैर मंत्री को मंत्री के रूप में किसी भी जिले में नहीं भेजा। लेकिन यहां पर संविधान का खुल्‍लमखुल्‍ला उल्‍लंघन हुआ है कि जो चेयरमैन थे माननीय मानिकचंद सुराना, जो राज्‍य वित्‍त आयोग के अध्‍यक्ष हैं उनको, एस.एन. गुप्‍ताजी को, पार्लियामेंट्री सेक्रेट्री को ..(व्‍यवधान)..

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): क्‍या इनका नाम है जो ये बोल रहे हैं?

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): आप विराजें।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): ये किस आधार पर बोल रहे हैं? यह कोई वाद-विवाद का मामला है।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): माननीय मंत्रीजी, यह हाउस की प्रोपर्टी है। यह संवैधानिक मामला है, हाउस की प्रोपर्टी हो गया। ..(व्‍यवधान)..

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): हाउस की प्रोपर्टी नहीं, आप क्‍या पर्ची पर बोल रहे हैं? अगर हाउस की प्रोपर्टी है तो आप पुट अप करें। आप क्‍या पर्ची पर बोल रहे हैं? ..(व्‍यवधान)..

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): माननीय मत्री महोदय को यह पता नहीं है यह हाउस की प्रोपर्टी है। माननीय सदस्‍य ने प्रश्‍न उठाया कि यहां एडवोकेट जनरल को बुलाया जाए। ..(व्‍यवधान)..

श्री जुबेर खान (रामगढ़): माननीय मत्री महोदय, सदन से उनको अनुमति दी गई है। ..(व्‍यवधान)..

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): क्‍या किसी अध्‍यक्ष को प्रभारी के रूप में भेजा जा सकता है इसलिए मैं आपके माध्‍यम से सरकार से यह जानना चाहता हूं ..(व्‍यवधान)..

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): यह गलत परम्‍परा हुई है।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): एक तो प्रभारी मंत्रियों की सूची सदन की मेज पर रखी जाए। ..(व्‍यवधान).. यदि किसी अध्‍यक्ष या पार्लियामेंट्री सेक्रेट्री को प्रभारी मंत्री के रूप में भेजा है तो सरकार यहां पर माफी मांगे, खेद प्रकट करें और ऐसे लोगों के खिलाफ कार्यवाही की जाए जिन्‍होंने प्रभारी मंत्री के रूप में बिना मंत्री पद की शपथ लिये लोगों को भेजा है। ऐसे लोगों के खिलाफ कार्यवाही की जाए।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, एक मिनट, मैंने पहले भी यह कहा था ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: आप सुन लीजिए। आपने अपनी बात उठा दी, इनको भी सुन लीजिए। ..(व्‍यवधान)..

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): यह क्‍या अध्‍यक्ष महोदय, आपने मेरा नाम पुकार लिया। ..(व्‍यवधान)..

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अध्‍यक्ष महोदय, मेरा जो प्रश्‍न है वह मैं आपके नोटिस में लाना चाहता हूं ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: मेरे ध्‍यान में है ..(व्‍यवधान)..

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मैंने निवेदन किया है ..(व्‍यवधान)..

श्री अर्जुन सिंह देवड़ा (रानीवाड़ा): अध्‍यक्ष महोदय, सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य ने मेरे बारे में जिक्र किया ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, आपका तो ठीक है।

श्री अर्जुन सिंह देवड़ा (रानीवाड़ा): अध्‍यक्ष महोदय, हमें प्रभारी मंत्री के नाते भेजा है और हमने अध्‍यक्ष महोदय, आपको रिपोर्ट भी प्रभारी के नाते दी है, प्रभारी मंत्री के नाते नहीं दी। ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: आपकी बात बिलकुल सही है। आपने तो प्रभारी जिला सिरोही लिखा है।

श्री अर्जुन सिंह देवड़ा (रानीवाड़ा): यह रिपोर्ट देखकर आपको स्‍वयं को मालूम पड़ जाएगा। ..(व्‍यवधान)..

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): सरकार ने आपको प्रभारी मंत्री के रूप में रामनारायण डूडी को हटाकर आपको प्रभारी मंत्री लगाया है।  ..(व्‍यवधान)..

श्री अर्जुन सिंह देवड़ा (रानीवाड़ा): मैं ओलावृष्टि में प्रभारी के नाते गया था।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आप छह महीने से प्रभारी हैं ..(व्‍यवधान).. आप छह महीने से प्रभारी बने हुए हैं।

श्री अर्जुन सिंह देवड़ा (रानीवाड़ा): आप जोर से दबाकर मुझे ..(व्‍यवधान).. मैं प्रभारी गया हूं, मंत्री के रूप में नहीं गया और जो मैंने रिपोर्ट दी है जो अध्‍यक्ष महोदय को दी है एज ए प्रभारी दी है, प्रभारी मंत्री के नाते रिपोर्ट नहीं दी है। ..(व्‍यवधान)..

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आप छह महीने से प्रभारी हैं या नहीं हैं?

श्री अर्जुन सिंह देवड़ा (रानीवाड़ा): छह महीने से नहीं हूं मैं प्रभारी।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): पिछले साल आपने मीटिंग ली है या नहीं ली है? आप क्‍या गुमराह कर रहे हैं सदन को।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, आपने सदन को यह सूचित किया था कि तीन दिन की छुट्टी की जा रही है और तीन दिन की छुट्टी में सरकार की तरफ से मंत्री और सेक्रेट्री वहां पर जाएंगे और तीन दिन बाद जितना किसान का नुकसान है ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य भी पधारेंगे, यह भी कहा था।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): हां, बिलकुल ठीक था, यह भी कहा था माननीय सदस्‍य भी जाएंगे, लेकिन आप स्‍वयं चेयर ने सदन को आश्‍वस्‍त किया था कि किसान का नुकसान का जायजा लेने के लिए मंत्री जाएंगे, सेक्रेट्री जाएंगे और वे आकर सूचना देंगे, यह प्रभारी और न प्रभारी ..(व्‍यवधान).. वहां मंत्री को जाना था, सदन को यह आश्‍वस्‍त करके गये थे। सरकार यह बता दे, दो बातें हैं नम्‍बर एक, क्‍या ओलावृष्टि के लिए आपने मंत्री को भेजा? नम्‍बर दो, क्‍या यह सही है कि पिछले दो साल से पार्लियामेंट्री सेक्रेट्री अलग-अलग जिले के प्रभारी मंत्री के रूप में काम कर रहे हैं? यह सही है या नहीं है, दो चीजों को स्‍पष्‍ट कर दें। क्‍या मुख्‍यमंत्रीजी और अध्‍यक्ष सदन को यह आश्‍वस्‍त करें कि किसान का नुकसान का जायजा लेने के लिए मंत्री जाएंगे, सेक्रेट्री जाएंगे और उसके बाद मंत्री, सेक्रेट्री न जाएं तो इससे बड़ा सदन का अपमान क्‍या होगा? ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: आप विराजें।

श्री तगाराम चौधरी (बाड़मेर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  मैं निवेदन करूं, मंत्री ही जाएंगे, यह शब्‍द है क्‍या? मंत्री ही जाएंगे? ..(व्‍यवधान)..

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): यही है।

श्री तगाराम चौधरी (बाड़मेर): मंत्री ही जाएंगे, ऐसा कोई है कहीं? कार्यवाही में आया क्‍या?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका ध्‍यान भारत के संविधान, अनुच्‍छेद 166 के अंतर्गत दिलाना चाहता हूं जिसमें रूल्‍स ऑफ बिजनेस का जिक्र किया है। इस रूल्‍स ऑफ बिजनेस में जिक्र है ..(व्‍यवधान)..

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): वापस बोलिए।

श्री अध्‍यक्ष: आप सुनिए तो सही।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): सरकार चाहे तो किसी भी समस्‍या के समाधान के लिए, जानकारी के लिए समुचित सूचनाओं के लिए किसी भी योग्‍य व्‍यक्ति को किसी भी कार्य के लिए अधिकृत कर सकती है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): नहीं कर सकती।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैंने अभी आपसे पहले बोलते हुए कहा था जिस भारत सरकार को पर्दे के पीछे से श्रीमती सोनिया गांधी चला रही है ..(व्‍यवधान).. सेक्रेट्री हैं गवर्नमेंट ऑफ इण्डिया के और ट्रेक टू डिप्‍लोमेसी विद अफगानिस्‍तान का पूरा काम देख रहे हैं। उसी के साथ-साथ रिटायर्ड ..(व्‍यवधान)..

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 166 में क्‍या प्रावधान है यह तो करें।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): रिटायर्ड होम सेक्रेट्री नगा समस्‍या का सारा काम देख रहे हैं ..(व्‍यवधान).. और ये प्रभारी मंत्री के रूप में नहीं ..(व्‍यवधान)..

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): पार्लियामेंट्री मिनिस्‍टर, उन्‍होंने यह लिखा हुआ नहीं है ..(व्‍यवधान).. वहां कौंसिल आफ मिनिस्‍टर ..(व्‍यवधान)..

एक माननीय सदस्‍य सदन को गुमराह कर रहे हैं और अकाल पीडि़तों ..(व्‍यवधान)..

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): गवर्नर को कौंसिल ऑफ मिनिस्‍टर एडमिनिस्‍ट्रेटिव मामले में नहीं करेगी, यह डिसीजन है ..(व्‍यवधान)..

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  इन्‍होंने पार्लियामेंट्री सेक्रेट्री की बात की है। इन्‍हीं की सरकार के समय का 30 जनवरी, 1968 का आदेश निकला है कि पार्लियामेंट्री सेक्रेट्री की क्‍या ड्यूटी है क्‍या नहीं है। आप कहें तो मैं इसको टेबल कर देता हूं। इनको धन्‍यवाद देना चाहिए कि आपका आदेश था ..(व्‍यवधान).. हर जिले के ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: आप उनकी बात सुन लीजिए।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ये सदन को गुमराह कर रहे हैं। अध्‍यक्ष महोदय, भाषण दे रहे हैं ये हमारी बातों का जवाब देने की बजाय ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष:  आप बात सुनें। ..(व्‍यवधान)..

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): हमने जो प्रश्‍न उठाया ..(व्‍यवधान)..

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): हर जिले में, हर तहसील में, संभवत: हर गांव के अंदर राजस्‍थान सरकार का भेजा हुआ नुमाइंदा गया है, आकलन किया है, इनको धन्‍यवाद देना चाहिए। इनको कुछ पता नहीं है और इन्‍होंने संवैधानिक उत्‍तरदायित्‍व के नाम पर सदन का बिना मतलब एक घण्‍टा खराब कर दिया है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अध्‍यक्ष महोदय, गृह मंत्रीजी ने दो बातें कही हैं कि अगर हमने प्रभारी मंत्री बनाकर भेजा है तो हमने असंवैधानिक काम किया है। मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि आप इस सरकार के द्वारा प्रभारी मंत्रियों के संबंध में पिछले एक साल में जितने आदेश जारी किये गये हैं उनको आप टेबल करवा दीजिए। छह महीने से हमारे यहां अर्जुन सिंह जी प्रभारी मंत्री हैं, पहले रामनारायण जी डूडी थे इनको हटाकर गंगानगर लगाया गया। पूरे सदन को गुमराह कर रहे हैं आप। ..(व्‍यवधान)..

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, आपको याद होगा जब आप उधर विराजते थे सूरतगढ़ से आने वाली माननीय सदस्‍या, विजय लक्ष्‍मी जी गंगानगर के अंदर जाकर मीटिंग लेती थीं ..(व्‍यवधान)..

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): नहीं थी, बिनकुल नहीं थी। बिलकुल गलत।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): और चूरू जिले में, जिस जिले में मैं हूं ..(व्‍यवधान)..

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): बिलकुल गलत कह रहे हो। ..(व्‍यवधान).. आप कापी लेकर आइए।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): आप गलत सूचना दे रहे हैं ..(व्‍यवधान)..

श्री जुबेर खान (रामगढ़): कापी सदन की मेज पर रखिए।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): रखिए कापी। यहां ममता जी मेम्‍बर थीं। ..(व्‍यवधान).. ममता शर्मा खुद पार्लियामेंट्री सेक्रेट्री थीं, किसी जिले की नहीं थी। खाली जोर से बोलने से क्‍या होगा ..(व्‍यवधान)..

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (उप मुख्‍य सचेतक): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  इस नाम पर सदन का समय व्‍यर्थ गंवाया जा रहा है। सरकार किसी भी योग्‍य व्‍यक्ति को किसी भी कार्य के लिए कभी भी भेज सकती है। यह भारत सरकार भी भेजती है और राज्‍य सरकारें भी भेजते हैं और यह कांस्‍टीट्यूशनल प्रोविजन भी नहीं है कि किसी को प्रभारी के रूप में नहीं भेजा जा सकता। ..(व्‍यवधान)..

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): यह आपके घर का राज है क्‍या?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): जोशी जी, एक मिनट। अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से सरकार का वह आदेश, जिस आदेश के अंतर्गत सारे लोग जिलों में गये वो पढ़कर सुनाना चाहता हूं।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आप तो टेबल करो। ..(व्‍यवधान)..

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): छह महीने का लेकर आओ पार्लियामेंट्री सेक्रेट्री मिनिस्‍टर था या नहीं था।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): सुनेंगे नहीं, आप तो टेबल करो उसको।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): टेबल कर दीजिए।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ये वे पढेंगे जो इनको पढ़ना है। हमने बहुत स्‍पेसिफिक पूछा है ..(व्‍यवधान)..

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय ने मुझे पढ़ने की अनुमति दी है। ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: देखिए, आपको शांतिपूर्वक सदन ने सुना, अब आप इनको सुन तो लीजिए।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): हमने बहुत स्‍पष्‍ट पूछा है, प्रस्‍ताव मेरा है, मैं अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से यह निवेदन करना चाहता हूं ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: पर्ची के माध्‍यम से आपने एक प्रश्‍न उठाया, लेकिन चूंकि वह संवैधानिक था इसलिए इतनी चर्चा हो रही है वरना चर्चा ..(व्‍यवधान)..

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मैं अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से स्‍पेसिफिक ही पूछ रहा हूं, मैं बहुत स्‍पष्‍ट पूछ रहा हूं ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: आप उनकी सुन तो लीजिए। आप सुन लो लें उन्‍हें। प्‍लीज स्‍थान ग्रहण करें। ..(व्‍यवधान)..

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, आप 167 पढ़ लीजिए। “It shall be duty of the Chief Minister of each State – (a) to communicate to the Governor of the State all decisions of the Council of Ministers relating to the administration …”

मोहन/अरूण/अशोधित प्रति प्रकाशनार्थ नहीं/20032007/1410/2d

 

यह एडमिनिस्‍ट्रेशन के सारे मामले मुख्‍य मंत्री जी कौंसिल आफ मिनिस्‍टर्स के थ्रू गवर्ननर को करना है। यह प्रभारी भेजे हैं, यह एडमिनिस्‍ट्रेशन का काम है कि नहीं है ? यह काम केवल मात्र कांस्‍टीट्यूशन से कौंसिल आफ मिनिस्‍टर्स का आदमी कर सकता है दूसरा आदमी नहीं कर सकता है। अपनी मनमर्जी की बातें कर रहे हैं। यह कोई राजा के राज में कपड़े लाने हों, घी लाना हो, दूध लाना हो, किसी सं मंगवा लें, राज करने का जो काम है वह राज में अधिकृत आदमी है वही करेगा, बाकी काम नहीं कर सकता है इसलिए अध्‍यक्ष महोदय, 167 में भी यह प्राविजन है कि एडमिनिस्‍ट्रेशन के मामले में भी कौंसिल आफ मिनिस्‍टर की राय को ...(व्‍यवधान)...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, आपने अनुमति दी है इसलिए बोलते हैं। ...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): यह बता दें कि यह जो आदमी भेजे हैं, ये कौंसिल आफ मिनिस्‍टर्स के मेम्‍बर हैं कि नहीं हैं ? एडमिनिस्‍ट्रेशन को अलग अलग कर रहे हैं।...(व्‍यवधान)...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): एक मिनट।

श्री अध्‍यक्ष: इनकी बात को सुना लीजिए।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, आपकी अनुमति से पढ़ रहा हूं।

श्री अध्‍यक्ष: पढि़ए।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): राजस्‍थान सरकार मंत्रि मण्‍डल सचिवालय क्रमांक प/11/6 मुख्‍य मंत्री/2003, जयपुर 21­.1.2007 का इस सचिवालय का समसंख्‍यक आज्ञा दिनांक 20.7.2004 एवं 22.11.2004 में आंशिक संशोध्‍न करते हुए माननीय मुख्‍य मंत्री महोदय ने निम्‍नांकित मंत्री परिषद् के माननीय सदस्‍य एवं समकक्ष दर्जा प्राप्‍त पदाधिकारियों को उनके नाम से अंकित जिले का प्रभारी नियुक्‍त किया है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): समकक्ष किस कांस्‍टीट्यूशन में है, कैसे है अध्‍यक्ष महोदय? समकक्ष कैसे कर सकते हैं? कांस्‍टीट्शन में समकक्ष वर्ड ही नहीं है। ...(व्‍यवधान)...

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (सरकारी उप मुख्‍य सचेतक): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रभारी लगाया जा सकता है, भारत सरकार भी लगाती रही है, राज्‍य सरकारें भी प्रभारी लगाती रही हैं। कांस्‍टीट्यूशन का कहीं किसी रूप में भी दुरूपयोग नहीं हुआ है यह।...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, केवल मात्र शपथ लिया हुआ आदमी ही लग सकता है, समकक्ष नहीं लग सकता है।

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): प्रभारी तो लगाया है लेकिन मंत्री के समकक्ष बनाकर प्रभारी नहीं लगाया। ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अध्‍यक्ष महोदय, यह रूल्‍स आफ बिजनेस भी क्‍या राजस्‍थान गवर्नमेंट का है क्‍या ? ...(व्‍यवधान)... 

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): यह जो संशोधन इन्‍होंने किया है, इसमें क्‍या मंत्री मण्‍डल से सहमति ली गई है ? ...(व्‍यवधान)...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उसके अनुसार, रूल्‍स आफ बिजनेस के अनुसार, ये प्रभारियों को नियुक्‍त किया है। ...(व्‍यवधान)...

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (सरकारी उप मुख्‍य सचेतक): मुख्‍य मंत्री का अधिकार है, यह माननीय सदस्‍य, मुख्‍य मंत्री जी का अधिकार है।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): नहीं, कोई अधिकार नहीं है। 

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मुख्‍य मंत्री का अधिकार कहां से है, उनके घर से नहीं है।...(व्‍यवधान)...

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (सरकारी उप मुख्‍य सचेतक): कांस्‍टीट्यूशन में, संविधान में यह तो उल्‍लेख नहीं है, प्रभारी नहीं लगाया जा सकता है, प्रभारी लगाये हैं और प्रभारी लगाये जा सकते हैं और मुख्‍य मंत्री को कांस्‍टीट्यूशनल राइट है यह। ...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मंत्रिमण्‍डल के सदस्‍य को बनाने का अधिकार है, राजेन्‍द्र जी को बनाने का अधिकार मुख्‍य मंत्री को है, राज चलाने का अधिकार संविधान का है। ...(व्‍यवधान)...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): राज चलाने का अधिकार सोनिया जी का है क्‍या ? ...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आप मानते हो क्‍या ? ...(व्‍यवधान)... यह गैर कानूनी काम नहीं चल सकता, अध्‍यक्ष महोदय।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): हम कह रहे हैं ...(व्‍यवधान)... अध्‍यक्ष महोदय, आपकी आज्ञा से मैं टेबल करना चाहता हूं।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, कोई भी सरकार जिसने कांस्‍टीट्यूशन ग्र अन्‍दर शपथ नहीं ली हो शिड्यूल थर्ड के अन्‍दर नहीं, वह समकक्ष हो सकता है क्‍या? Can he be a member of the Council of Ministers? अध्‍यक्ष महोदय, आप भी मेम्‍बर हैं, can somebody be member of the Council of Minister without taking the oath? ...(व्‍यवधान)...

डा. भंवरलाल  राजपुरोहित (मकराना): यह विवाद तो खतम नहीं होगा, इसलिए आप व्‍यवस्‍था दे दें। ...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): किसी को भी बना देंगे क्‍या ? ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अध्‍यक्ष महोदय, यह रूल्‍स आफ बिजनेस में साफ प्राविजन है मंत्री का दर्जा प्राप्‍त व्‍यक्ति ही प्रभारी मंत्री लग सकता है, यह रूल्‍स आफ बिजनेस में प्राविजन कहां है, यह तो बताइए न। आप तो, मुख्‍य मंत्री कोई खुदा थोड़े ही है। संविधान के अनुसार काम करना पड़ेगा, वह मर्जी आए जैसे नहीं कर सकता है। यह नहीं है कि इसकी जागीर इसको दे दी उसकी जागीर उसको दे दी1

श्री अध्‍यक्ष: आप स्‍वयं ही कहते जाएंगे औरों की बात भी सुनेंगे ? ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अध्‍यक्ष महोदय, यह रूल्‍स आफ बिजनेस में कहां प्राविजन है कि मुख्‍य मंत्री मंत्री का दर्जा प्राप्‍त व्‍यक्ति को प्रभारी मंत्री लगा सकता है, कहां है प्राविजन ? मैं आपसे प्रार्थना करना चाहता हूं कि संविधान की भावना के अनुरूप शासन व्‍यवस्‍था चलाने के लिए और भविष्‍य में ऐसी गंभीर त्रुटि नहीं करे इसलिए सरकार को माफी मांगने का आप निर्देश प्रदान करें।

श्री अध्‍यक्ष: यह मंत्री जी ने बहुत साफ कहा है कि यदि यह लिखा गया प्रभारी मंत्री शब्‍द यूज किया गया है तो उसके लिए खेद प्रकट करते हैं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): कहीं नहीं है, ये टेबल कर देते हैं।

श्री अध्‍यक्ष: मेरी बात तो सुन लीजिए पहले आप। लेकिन जैसा कि पढ़कर सुनाया गया आदेश आपने उसमें मंत्री शब्‍द का इस्‍तेमाल नहीं किया गया है और प्रभारी तो किसी को भी बनाया जा सकता है। प्रभारी तो अर्जुन सिंह देवड़ा को जो बनाया गया है सिरोही का उन्‍होंने नीचे अपने दस्‍तखतों में यही कहा है, प्रभारी, जिला सिरोही। उन्‍होंने नहीं लिखा प्रभारी मंत्री । प्रभारी तो कोई भी हो सकता है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): संविधान के अन्‍दर कैसे हो सकता है ? ...(व्‍यवधान)... आप हाउस में ही किसी को बुला लीजिए। हर कोई एलएलए हो जाएगा, आप हाउस में बुला लीजिए उनको। यह क्‍या मतलब है, आप एमएलए को बुला लीजिए किसी को। इस हाउस में वही आदमी बैठ सकता है जो एमएलए है। किसी को बुला लीजिए आप। ...(व्‍यवधान)...

श्री अमराराम (धोद): माननीय देवड़ा जी ही नहीं है लेकिन इस लिस्‍ट में बहुत से लोग ऐसे हैं जो मंत्री मण्‍डल के सदस्‍य नहीं हैं। ...(व्‍यवधान)...

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): प्रभारी है न, वह तो अध्यक्ष‍या महामंत्री नहीं होते, प्रभारी तो मंत्री ही होते हैं। अध्‍यक्ष महोदय, दूसरा और नहीं हो सकता। ...(व्‍यवधान)...

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (सरकारी उप मुख्‍य सचेतक): माननीय सदस्‍य, कांस्‍टीट्यूशन के किस क्‍लाज में लिखा है कि प्रभारी जो है वह मंत्री ही होगा कांस्‍टीट्यूशन के क्‍लाज बता दे। माननीय डा. सी पी जोशी या आप बता दें, कांस्‍टीट्यूशन के कौन से क्‍लाज में लिखा है कि प्रभारी जो है मंत्री ही होगा। आप बताइए, कांस्‍टीट्यूशन को कोट कीजिए। ...(व्‍यवधान)... बताइए आप। ...(व्‍यवधान)... कि जिलों में प्रभारी केवल मंत्री ही होगा। ...(व्‍यवधान)... डा. सी पी जोशी बताएं, डा. कल्‍ला बताएं, कांस्‍टीट्यूशन के क्‍लाज बताएं आप।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): इसमें जो किया है प्रभारी मंत्री के समकक्ष करते हुए ...(व्‍यवधान)...

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (सरकारी उप मुख्‍य सचेतक): प्रभारी मंत्री ही लगाया है हमने। ...(व्‍यवधान)... कांस्‍टीट्यूशन के क्‍लाज बता दीजिए आप। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: श्री युनूस खान। ...(व्‍यवधान)...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): राजीव अरोड़ा क्‍या थे ? पिछली बार जो स्‍टेट मिनिस्‍टर का दर्जा लिए घूमते थे। ...(व्‍यवधान)...

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): प्रभारी मंत्री किसी जिले का नहीं बनाया यह गलती आपने की है और इसको आप डिफेंड कर रहे हो। यह भी बहुत गलत बात है, कोई गलती हो जाती है तो गलती स्‍वीकार करनी चाहिए। हमारे वक्‍त में कोई भी बोर्ड का चेयनमैन किसी भी जिले का प्रभारी मंत्री नहीं था। ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे निवेदन कर रहा हूं। ...(व्‍यवधान)... मैं आपसे निवेदन कर रहा हूं कि यह बहुत गलत परम्‍परा शुरू हो जाएगी। यह मुख्‍य मंत्री अपने रसोईयों को मंत्री का दर्जा देकर जिलों में भेज देंगी। आप बहुत गलत कर रहे हैं, अध्‍यक्ष महोदय। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: यह मुख्‍य मंत्री का प्रोगेटिव है। ...(व्‍यवधान)...

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): आप तर्क से बात करो, समझ में आ सकता है, हल्‍केपन से बात करने से कोई मतलब नहीं निकलता। ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): सारे तर्क रख दिये आपके सामने ...(व्‍यवधान)... और आप सुनना नहीं चाहते ...(व्‍यवधान)...

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): माननीय गृह मंत्री जी और शिक्षा मंत्री जी को भी विश्‍वास में नहीं लिया।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): एक चुनाव जीते नहीं, वार्ड मेम्‍बर रहे नहीं और वह जिलों के प्रभारी। मजाक बना रखा है आपने व्‍यवस्‍था को। ...(व्‍यवधान)... मजाक बना रखा है, मजाक, पूरे जिले में लोग हंसते हैं आपकी सरकार के ऊपर।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): पहले आप आदेश पढ़ लें फिर जोर से बोलो, मैंने पहले भी यह कहा कि अगर उसको प्रभारी मंत्री के नाते लगाया तो ठीक नहीं है, अगर उसको प्रभारी के नाते लगाया है तो किसी को भी लगाया जा सकता है।...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): गृह मंत्री जी मैंने आपसे स्‍पष्‍ट पूछा है कि रामनारायण डूडी को हटा कर ...(व्‍यवधान)...

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): आदेश निकला हुआ है और पुराने आदेश का रेफरेंस देकर इस जनवरी के महीने में यह भेजते हैं, जिले के अन्‍दर ये लोग जाएंगे।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मैं सरकार की बहुत स्‍पष्‍ट जानकारी में लाया हूं, आप सुनना नहीं चाहते तो आपकी मर्जी है।

श्री अध्‍यक्ष: आप भी नहीं सुनना चाह रहे तो आप सुनिए तो सही। ...(व्‍यवधान)... अंकित नहीं हो।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (सरकारी उप मुख्‍य सचेतक): 000

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 000

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): 000

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप स्‍थान ग्रहण करें।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री अध्‍यक्ष: बानसूर से आने वाले माननीय सदस्‍य ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही):   000

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 000

श्री अध्‍यक्ष: हां, टेबल भी करेंगे, टेबल हो गया, जब मेरे पास आ गया तो टेबल अपने आप हो गया। ...(व्‍यवधान)... माननीय सदस्‍य।

माननीय सदस्‍यगण, जैसा कि कह रहे थे पार्लियामेंटरी अफेयर्स मिनिस्‍टर, आज सप्‍लीमेंटरी डिमाण्‍ड्स भी मुख्‍य बंद का प्रयोग करके पास की जाएंगी और फाइनैंस बिल पर कुछ लोग बोलना भी चाहेंगे, सप्‍लीमेंटरी का जो फाइनैंस बिल है उस पर कुछ लोग बोलना भी चाहेंगे, पुलिस जैसे महत्‍वपूर्ण विभाग पर चर्चा होगी, मांग है आज और उस हालत के अन्‍दर इतनी देर हो गई है, इस संवैधानिक विषय पर चर्चा करते हुए।

सुरेन्‍द्र/अरुण/20.3.2007/14.20/1e/1

 

इस बारे में सरकार का आदेश बिल्‍कुल स्‍पष्‍ट है। सरकार ने 21.1.2007 को यह आदेश निकाला है और इसमें मंत्री शब्‍द का प्रयोग नहीं किया गया है। लिखा है- इस सचिवालय की समसंख्‍यक आज्ञा दिनांक 20.7.04 एवं 22.11.04 में आंशिक संशोधन करते हुए माननीय मुख्‍य मंत्री महोदया ने निम्‍नांकित मंत्री परिषद् के माननीय सदस्‍यों एवं समकक्ष दर्जा प्राप्‍त पदाधिकारियों को उनके नाम के आगे.... (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (उप मुख्‍य सचेतक): 000

श्री अध्‍यक्ष: आप सुनिये। आसन को सुनिय पहले आप। प्‍लीज। (व्‍यवधान) समकक्ष से मतलब यह है कि कोई किसी बोर्ड और निगम के अध्‍यक्ष हैं तो उनको किसी को स्‍टेट मिनिस्‍टर का दर्जा है और किसी को कैबिनेट मिनिस्‍टर का दर्जा है इसलिए वो समकक्ष ही तो माने जाएंगे। जब वो समकक्ष माने जाएंगे तो मंत्री शब्‍द तो इसमें है ही नहीं इसीलिए समकक्ष तो मानोगे। समकक्ष दर्जा प्राप्‍त पदाधिकारियों को उनके नाम के आगे अंकित जिले का प्रभारी नियुक्‍त किया गया है। मैं नहीं समझती.... (व्‍यवधान) कई कामों के लिए.... (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 000

श्री अध्‍यक्ष: 2004 में पहले अन्‍य का था बाद में अन्‍य को कर दिया इसलिए आंशिक परिवर्तन किया है इसमें क्‍या बात हुई? (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 000

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): 000

श्री अध्‍यक्ष: श्री मोहम्‍मद माहिर आजाद। आप पर्ची पर बोलें। (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 000

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): 000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (उप मुख्‍य सचेतक): 000

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): 000

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): 000

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): 000

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 000

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (उप मुख्‍य सचेतक): 000

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): 000

श्री अध्‍यक्ष: बस, पढ़ लिया न। (व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): 000

श्री अध्‍यक्ष: यह रही कापी। (व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): 000

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 000

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (उप मुख्‍य सचेतक): 000

डा. भंवरलाल  राजपुरोहित (मकराना): 000

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): 000

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही):  000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

श्री अध्‍यक्ष: नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य, कैसे खड़े हैं आप? नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य, आप नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं, पीठ करके खड़े हैं। (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री अध्‍यक्ष: ऐसा है कि वो 2004 वाला भी आसन देख लेगा और आसन देखने के बाद इस बारे में जो कुछ व्‍यवस्‍था देनी है वह दे देगा। वह देख लेगा मैंने कहा न। आसन देख लेना। अब आप आगे चलिये। (व्‍यवधान) मैंने आपको कह दिया न।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 000

श्री तगाराम चौधरी (बाड़मेर): 000

श्री अध्‍यक्ष: करा देंगे। मोहम्‍मद माहिर आजाद, आपको नहीं बोलना है क्‍या?

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): बोलना है साहब। आप खड़े थे तो मैं कैसे बोलता?

श्री अध्‍यक्ष: बोलिये।

सरकारी भूमि पर अवैध कब्‍जे

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय वन मंत्री जी का और सदन का ध्‍यान एक अति-महत्‍वपूर्ण विषय की ओर आकर्षित कराना चाहता हूं। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान में भू-माफियाओं ने पहले तो सिवाय चक जमीन पर कब्‍जे किये, जब सिवाय चक जमीन खत्‍म हो गई तो फिर चरागाह भूमि....

श्री अध्‍यक्ष: और फिर वन भूमि पर।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ... और गोचर भूमि पर कब्‍जे किये और उसके बाद अब वन भूमि के ऊपर भू-माफिया कब्‍जा जमाने का काम राजस्‍थान में अपनी ताकत के बल पर कर रहे हैं। इसके कुछ उदाहरण मैं आपके माध्‍यम से माननीय वन मंत्री जी के समक्ष रखना चाहूंगा।

vkj/akt/20032007/1430/2f

 

और इतना ही नहीं, इसकी एक वजह यह भी है कि हमारे यहां वनकर्मियों की भी कुछ कमी है, फोरेस्‍ट गार्ड की कमी है, वह भी मंत्रीजी कह सकते हैं, सही है। लेकिन प्रभावी कार्यवाही नहीं करने के कारण आज जो वन सम्‍पदा है, वन भूमि है, उस पर कब्‍जे किये जा रहे हैं और उसका नाजायज इस्‍तेमाल किया जा रहा है।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं कुछ उदाहरण आपके माध्‍यम से देना चाहता हूं। जैसे सवाई माधोपुर है। सवाई माधोपुर में रणथम्‍भौर और सवाई मानसिंह अभयारण्‍य है, चित्‍तौड़गढ़ में भैंसरोडगढ़ अभयारण्‍य है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक सूची अगर आप इजाजत देंगी तो मैं सदन पटल पर भी रख दूंगा। मैंने माननीय वन मंत्रीजी को भी दी थी कि हंगरी के ट्यूरिस्‍ट सवाई माधोपुर में आये और फोरेस्‍ट के कोर एरिया की भूमि के ऊपर वन विभाग के अधिकारियों ने टैंट लगाकर, उसमें कूलर लगाकर, सारी सुख-सुविधाएं देकर, जहां एक तरफ अगर कोई आदिवासी अपने पशुओं को ले जाता है तो उसको पकड़कर, पशु को और उस आदिवासी को पकड़कर बंद कर देते हैं। एक तरफ अगर कोई खातेदारी की जमीन पर भी खेती कर रहा है और वह फोरेस्‍ट जमीन से एडजोर्न है, जैसा मैंने भैंरूपुरा का उदाहरण दिया माननीय मंत्री महोदय को कि भैंरूपुरा के 35 काश्‍तकार खातेदारी की जमीन पर खेती कर रहे हैं और रेवेन्‍यु बोर्ड से उसका फैसला उनके पक्ष में हो गया, मुकदमा जीतकर आ गये, फोरेस्‍ट के अधिकारियों ने उसको फोरेस्‍ट की भूमि बताकर, इसलिए कि फोरेस्‍ट की भूमि बताकर इनको डरायेंगे, ये सस्‍ती, औने-पौने भाव में बेच देंगे तो वे खुद फोरेस्‍ट के अधिकारी खरीद लेते हैं। मैंने माननीय मंत्रीजी को इस सम्‍बन्‍ध में वहां के लोगों का ज्ञापन दिया। माननीय वन मंत्रीजी ने उसके ऊपर 12.8.2006 को डी.एफ.ओ. सवाई माधोपुर और उसके बाद पी.सी.सी.एफ. को निर्देश दिये कि आप परीक्षणात्‍मक, तथ्‍यात्‍मक रिपोर्ट 22 अगस्‍त को प्रस्‍तुत करें। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 22 अगस्‍त भी गई, और उसके बाद में छह-सात महीने चले गये। आज तक कोई रिपोर्ट आई हो तो मुझे उसकी कोई जानकारी नहीं है। मैं यह उदाहरण दे रहा हूं कि 250 फोरेनर्स आये और 250 टैंट कोर एरिया के अन्‍दर लगे। आप कहें तो मैं एक-एक ट्यूरिस्‍ट का नाम, उसकी कंट्री का नाम, उसके पासपोर्ट का नम्‍बर कि कितनी तारीख को पासपोर्ट इश्‍यु हुआ, कितनी एक्‍सपाइरी डेट थी। सात अप्रैल और आठ अप्रैल, 2006 को टैंट लगाकर फोरेस्‍ट की जमीन पर रहे और वहां पर एक व्यक्ति को ठेका दे दिया गया और उस व्‍यक्ति ने एक ट्यूरिस्‍ट से 500 डालर पर डे के हिसाब से लिया। जमीन फोरेस्‍ट की, रेवेन्‍यु का नुकसान सरकार को हो रहा है और कोई प्राइवेट व्‍यक्ति ठेका लेकर कोर एरिया की जमीन के अन्‍दर यात्रियों को ठहरा रहा है। मैंने इसकी पूरी सी.डी. भी माननीय मंत्रीजी को दी और अगर आप कहेंगे तो माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे पास में फोरेस्‍ट का बोर्ड लग रहा है, रणथम्‍भौर और सवाई मानसिंह अभयारण्‍य और इसके अन्‍दर यह टैंट लग रहा है और इस टैंट में सारी सुविधाएं दे रहे हैं। वहां रह रहे हैं, संगीत हो रहा है, गाना-बजाना हो रहा है, दारू पार्टी हो रही है। कैसे वहां पर जंगली जानवर रहेंगे? क्‍या वे वहां से पलायन नहीं करेंगे? एक तरफ हम चिंता करते हैं कि हमारे वाइल्‍ड लाइफ की कमी हो रही है, एक तरफ हम चिंता करते हैं कि उनकी सही सुरक्षा नहीं हो रही है और दूसरी तरफ वन विभाग के अधिकारियों से मिलीभगत करके और इतनी बड़ी तादाद में, 250-250 टैंट लगाकर, आज साल भर होने को आ गया, इसके ऊपर क्‍या कार्यवाही की? मैं समझता हूं कि कोई कार्यवाही इस सम्‍बन्‍ध में नहीं की। किसान को खेती मत करने दो, दूसरे भू-माफिया को कब्‍जे करने दो और माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह इसलिए हो रहा है कि 1986 से फोरेस्‍ट विभाग के अन्‍दर कोई फोरेस्‍ट गार्ड की भर्ती नहीं हुई। यहां तक कि जो वर्कचार्ज पर लग रहे थे, वह भी रिटायर हो गये। केवल मृतक कर्मचारियों के आश्रितों को लगाया जा रहा है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आज फोरेस्‍ट गार्ड जिनको हम असिस्‍टेंट फोरेस्‍टर का कैडर देते हैं, इसका कोई फाइनेंशल लोड भी आपके ऊपर नहीं पड़ता, थोड़ा उनका सम्‍मान बढ़ जाता है ताकि उत्‍साह से काम करे, वह भी आपसे नहीं हुआ।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक निवेदन और मैं आपके माध्‍यम से करना चाहूंगा। अभी हाल ही में पूरे हिन्‍दुस्‍तान भर के फोरेस्‍ट विभाग के खिलाडि़यों के जयपुर में मैचेज आर्गेनाइज हुए। जयपुर को मेजबानी मिली, उसके लिए तो आपको बधाई, लेकिन हुआ क्‍या? पहले शुरूआती दौर में ही हमारे वन विभाग के जो खिलाड़ी थे, वह हार गये। कारण क्‍या कि जो दूसरी स्‍टेट हैं, उन स्‍टेट से यंग ब्‍लड, अच्‍छे नौजवान खिलाड़ी वहां से आये और हमारे जो रिटायर्ड लग रहे हैं। अभी हालांकि बजट में घोषणा की गई है कि हम रिटायर्ड फौजियों को, पूर्व सैनिकों को इसके अन्‍दर भर्ती रखेंगे। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उससे काम चलने वाला नहीं है। आप फ्रेश नौजवानों की भर्ती करें, तब जाकर आप वन भूमि की सुरक्षा रख पायेंगे।

आज भैंसरोडगढ़ अभयारण्‍य के अन्‍दर बराबर मीडिया के अन्‍दर आ रहा है और सबको पता है, मैं किसी का नाम नहीं लूंगा, पर ''राजस'' के नाम से कुछ है, उसमें अपनी कोर एरिया की जमीन में से पाइप लाइन निकल रही है। वहां कंट्रोल टावर बन रहा है, उसी के अन्‍दर वहां पंपिंग सैट लगा रखा है। यह सारा काम आपकी वनारक्षित जमीन है, उसमें किसी को घुसने की इजाजत नहीं है, उसमें हो रहा है और सरकार चुप बैठी है इसलिए माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से चाहता हूं कि हमारी सिवाय चक खतम हो गई, चारागाह खतम हो गये और वनों की जमीन पर भी कब्‍जे होते रहे तो राजस्‍थान, देश का सबसे बड़ा प्रांत होने के बावजूद भी वनों पर कब्‍जे हो जायेंगे तो हमारी प्रकृति जो आज नाराज हो रही है कि बे-समय बारिश हो रही है और समय पर बारिश नहीं होकर अकाल पड़ता है। मेरा निवेदन है माननीय वन मंत्रीजी, आप इसको गम्‍भीरता से लेंगे। चाहे वह भैंरूपुरा के किसानों का मामला हो चाहे रणथम्‍भौर और सवाई मानसिंह अभयारण्‍य हो और भैंसरोडगढ़ अभयारण्‍य के ऊपर कब्‍जे का मामला हो चाहे आपके फोरेस्‍ट के अधिकारियों की मिलीभगत हो। आप जांच करायें कि वह फोरेस्‍ट के अधिकारी जिन्‍होंने किसानों को नोटिस तो दिया कि यह फोरेस्‍ट की जमीन है और फिर उन्‍होंने खरीद ली अपने बीवी और बच्‍चों के नाम से। उसके ऊपर भी आपको कार्यवाही करनी चाहिए, नहीं तो मैं आपको जो पहले ज्ञापन दिया था, उसकी एक कापी और दे दूंगा। आप ट्रांसफर कर देते हैं। आपने उस अधिकारी को दोषी माना, इसने 50 लाख की ब्राडर जो सड़क के लिए अभयारण्‍य के ऊपर भी कब्‍जा दिया, उसकी जांच कराई और दोषी पाये जाने पर उसका ट्रांसफर कर दिया लेकिन आपका सरकारी आदेश निकलने के बाद आज सवाई माधोपुर का डी.एफ.ओ. उनको रिलीव नहीं कर रहा है। सरकारी आदेश कहीं नहीं माने जा रहे हैं। इसलिए मेरा निवेदन है कि सख्‍त बनिये और सख्‍तता से ही आप इस वन भूमि को रोक पायेंगे, नहीं तो वन बर्बाद हो जायेंगे और राजस्‍थान की वन सम्‍पदा खतम हो जायेगी।

श्री अध्‍यक्ष: आप आसन का आदेश नहीं मान रहे हैं। आप आसन का आदेश नहीं मान रहे हैं। 

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नगर से आने वाले माननीय सदस्‍य ने......

श्री अध्‍यक्ष: You should take note of it. मंत्रीजी, you should take a note of it. क्‍योंकि दो बातें जो कही हैं, कर्मचारियों की कमी और वन भूमि पर अतिक्रमण। (व्‍यवधान) अब बोलने की जरूरत नहीं है। आप वन भूमि पर अतिक्रमण रोकिये और....

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): मैं वही बात कह रहा हूं। मैं सूक्ष्‍म में अपनी बात समाप्‍त करूंगा। 

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नगर से आने वाले माननीय सदस्‍य ने सवाई माधोपुर के पास में टैंट लगाकर, वहां पर फोरेनर्स के ठहरने की बात आपने की है। जब यह प्रकरण आप मेरी नोलेज में लाये, मैंने जांच के आदेश दिये हैं। प्रकरण विचाराधीन है। इसमें निश्चित रूप से हाउस को भी आश्‍वस्‍त करता हूं कि इसमें कोई भी अधिकारी और कर्मचारी, मैंने आदेश स्‍पष्‍ट दिये हैं कि उसकी जिम्‍मेदारी फिक्‍स की जाये। अगर अधिकारी और कर्मचारियों की इसमें संलिप्‍तता है तो निश्चित रूप से दोषी कर्मचारियों और अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही होगी। मामला जांच विचाराधीन है।

इसके साथ में आपने भैंसरोडगढ़ अभयारण्‍य के बारे में बात की है। मैं आपको जानकारी देना चाहता हूं कि भैंसरोडगढ़ में जलोत्‍थान सिंचाई परियोजना 1999 से आपकी सरकार के द्वारा एक पम्‍पहाउस को और पाइप लाइन को जो दी है...

श्री अध्‍यक्ष: सरकार किसी की भी हो।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): उसके अलावा, अभयारण्‍य क्षेत्र के अन्‍दर......

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): अध्‍यक्ष महोदय, मेरी तो कभी सरकार रही ही नहीं। मैं तो हमेशा विपक्ष में रहा हूं।

श्री अध्‍यक्ष: यह बदनसीबी आपकी है। माहिर साहब, यह आपकी बदनसीबी है कि आप हमेशा विपक्ष में रहते हो। (व्‍यवधान)

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सम्‍बन्धित अभयारण्‍य के अन्‍दर जो यह भूमि है, व‍ह वन खण्‍ड के अन्‍दर नहीं है, यह अभयारण्‍य में है। वहां पर किसान अपना कार्य करते हैं। इस मामले में वन खण्‍ड के बारे में और जहां पर पम्‍पहाउस व पाइपलाइन डी.आर.डी.ए. के पैसों से वहां लगाई गई थी और उनके द्वारा राज्‍य सरकार की इस जलोत्‍थान योजना पर 80 प्रतिशत राशि डी.आर.डी.ए. विभाग ने खर्च की और 20 प्रतिशत राशि सम्‍बन्धित काश्‍तकारों ने खर्च की है तो निश्चित रूप से इसका भी मैं आंकलन कर, जांच कर जो भी होगा, इसके बारे में जांच करवा दूंगा और आपको पुन: आश्‍वस्‍त करता हूं कि राजस्‍थान में वन भूमि पर तीन साल के कार्यकाल में जहां कहीं पर भी माइनिंग का मामला हो, जहां कहीं पर भी एन्‍क्रोचमेंट का मामला हो, लैण्‍ड रेवेन्‍यु एक्‍ट की धारा 91 के अन्‍तर्गत और वन अधिनियम 1953 के तहत कार्यवाही की जा रही है, एफ.आई.आर. लोज की जा रही है, तीव्र गति से कार्यवाही कर रहे हैं। मैंने अधिकारियों को भी स्‍पष्‍ट निर्देश दिये हैं। आपने सवाई माधोपुर का किया है, इसकी जांच होते ही, जांच में अधिकारी और कर्मचारी दोषी पाये गये तो निश्चित रूप से उनके विरुद्ध कार्यवाही होगी।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी बात का जवाब तो दिया नहीं। आपने भैंरूपुरा के किसानों के बारे में कुछ नहीं कहा कि उनके ट्रैक्‍टर पकड़ लेते हैं, खेती नहीं करने देते हैं। (व्‍यवधान) दूसरा, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अप्रैल का मामला है और यह मार्च भी खतम होने जा रहा है। साल भर में आपकी जांच पूरी नहीं हुई तो साल भर में तो आपकी सरकार का कार्यकाल ही खतम हो जायेगा। कब करोगे जांच, कब दोगे सज़ा?

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह नेशनल पार्क के पास की सड़क का मामला है और रेवेन्‍यु विभाग, सैटलमेंट विभाग और फोरेस्‍ट के अधिकारी संयुक्‍त रूप से मिलकर कि हमारे नेशनल पार्क के क्षेत्र में कोर एरिया में हो या उस क्षेत्र के बाहर हो, इसकी जांच होने के बाद में ही कार्यवाही की जायेगी।

Jkj/akt/14.40/2g/20.3.2007

 

श्री खुशवीर सिंह जोजावर: मंत्री महोदय, आपके नेशनल पार्क का आपको सीमा का ज्ञान ही नहीं है तो आप क्‍या एनक्रोचमेंट हटाओगे। सीमा ज्ञान ही नहीं आपको तो नेशनल पार्क का और आप क्‍या एनक्रोचमेंट हटाने की बात करेंगे। (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद: फोरेस्‍ट लैण्‍ड में है माननीय अध्‍यक्ष महोदय। भैरूंपुरा के किसानों का क्‍या कर रहे हो आप। जो किसानों की जमीन है उसको खरीद रहे हैं फोरेस्‍ट के अधिकारी डरा-डरा कर किसानों को। उसका क्‍या कह रहे हो। (व्‍यवधान) माननीय अध्‍यक्ष महोदय, भैरूंपुरा का तो जवाब देओ, किसानों की जमीन को डरा-धमका कर, ट्रेक्‍टर पकड़-पकड़ कर फोरेस्‍ट के अधिकारी खरीद रहे हैं, उसका आपने कोई जवाब नहीं दिया और यह तो पूरे प्रमाण आपको मैंने दे दिये, आपके जिले का प्रभारी मंत्री कह रहा है फोरेस्‍ट लैण्‍ड है, अधिकारी कह रहे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: श्री धर्मपाल चौधरी।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह फोरेस्‍ट गार्ड आप फ्रेश भर्ती करो, यह पूर्व सैनिकों को छोड़ो।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जिस सवाई माधोपुर में जिस रेंजर के आप ट्रांसफर की बात कर रहे हैं, वह रिलीव नहीं होने की बात कर रहे हैं, उसको आज ही रिलीव करवा दिया जायेगा।

श्री अध्‍यक्ष: आप तो प्रश्‍न, आपकी तरफ से प्रश्‍न कर रहे हैं और वह उत्‍तर दे रहे हैं। परची पर यह सिस्‍टम नहीं होता है।

अलवर जिले में एन.सी.आर. बाडी का गठन

श्री धर्मपाल चौधरी(मुण्‍डावर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से स्‍वायत्‍त शासन मंत्रीजी का ध्‍यान अलवर जिले में जो हमारा जिला एनसीआर में शामिल है, नेशनल केपिटल रीजन, जब हमारा जिला एनसीआर में शामिल हुआ था तब हमें बहुत आशाएं थीं कि हम राष्‍ट्रीय राजधानी परियोजना क्षेत्र में शामिल हो गये, हमारे जिले में बहुत बड़ा विकास होगा लेकिन जहां विकास की बात है वहां तो कुछ नहीं हुआ। हमारे जिले में जितनी परेशानियां इस नेशनल केपिटल रीजन की वजह से हो रही है, आज वहां पर अगर कोई छोटा सा भी किसी को भी भूमि परिवर्तन कराना पड़े तो हमारे यहां तीन-तीन आफिस हो गये उसके। एक उप नगर नियोजक आफिस अलवर में है, उस आफिस का कार्य जिसके अंडर करता है वह सीटीपी, राजस्‍थान के अंदर आता है और हमारा जिला जो नेशनल केपिटल रीजन में है उसका सीटीपी(एनसीआर) अलग से बना हुआ है, वह ग्रामीण क्षेत्र का काम देखता है और सीटीपी(राजस्‍थान), वह शहरी क्षेत्र का काम देखता है और उप नगर नियोजक का आफिस जो अलवर में बना हुआ है वहां पर कोई भी कागज अगर आज शहरी क्षेत्र में या ग्रामीण क्षेत्र में सरकार भी अगर कोई स्‍कूल बनाती है, सरकार के लिए अगर गांव के लिए श्‍मसान घाट के लिए भूमि की आवश्‍यकता पड़े या किसी भी सरकारी काम के लिए, हास्‍पीटल के लिए अगर जमीन का काम करना पड़े, तो कागज महीनों तक नहीं निकलता और प्राइवेट कागज तो फिर भी निकल जाता है क्‍योंकि वह आदमी उस कागज के पीछे लगा रहता है लेकिन सरकारी भूमि का अगर कोई कागज आ गया तो तीन-तीन, चार-चार साल से वह कागज यहां पर पड़े हैं। इसलिए मेरा आपके माध्‍यम से मंत्रीजी से निवेदन है कि आप तो जो यह तीन जगह हमारा काम बिखरा हुआ है, इसको जब अलवर अकेला जिला एनसीआर में है, आज एनसीआर में सिर्फ अकेला अलवर जिला है इसलिए अलवर जिले में ही इसका आफिस हो और वहीं पर एक अधिकारी हो और छोटे-मोटे जो काम हैं, अगर हजार गज की, पाँच सौ गज की, दो सौ गज की भूमि भी आज परिवर्तन कराना पड़ती है, बाकी पूरे राजस्‍थान में तो वहां का एसडीएम और तहसीलदार कर देता है, कलेक्‍टर कर देता है लेकिन हमारे यहां हर कागज एनसीआर की वजह से सीटीपी के आफिस में जाता है तो इसका एक तो निवारण करेंगे।

दूसरा, एनसीआर होने के कारण से बहुत सी सुविधायें हमको केन्‍द्र सरकार से मिल सकती है उस जिले को, लेकिन उसके लिए कोई बॉडी ही नहीं बना रखी।  अब तक एनसीआर में शामिल होने के बाद कि क्‍या-क्‍या हमको केन्‍द्र सरकार से सुविधायें मिल सकती हैं उसके लिए कोई बॉडी का निर्माण नहीं हुआ, अगर वह आज बाडी बन जाय, कितने ही, हजारों करोड़ के रूप में वहां से पैसा इस राजस्‍थान सरकार को मिल सकता है, अलवर जिले को मिल सकता है और अलवर जिले का चहुंमुखी विकास हो सकता है। क्‍योंकि हमने सोचा था कि एनसीआर में शामिल होने के बाद में यहां पर अच्‍छे-अच्‍छे हास्‍पीटल्‍स बनेंगे, अच्‍छी सड़कें बनेंगी, अच्‍छे स्‍कूल बनेंगे, सब साधन होंगे, इसलिए इसकी बॉडी बनना बहुत जरूरी है, तो मंत्रीजी इस बॉडी का भी निर्माण करेंगे और वहां पर हमारे जिले की जो उम्‍मीद है उनको पूरा करेंगे।  इसके बाद में जो एक सब से इसमें महत्‍वपूर्ण बात है कि इसमें ग्‍लो‍बल सिटी बनाने की भी हमारे यहां के अधिकारियों की कई बार दिल्‍ली में मीटिंग हो चुकी, ग्‍लोबल सिटी के लिए बहुत से हमारे गांव भी उन्‍होंने अंकित कर रखे हैं और ग्‍लोबल सिटी के रूप में अगर वहां पर कोई हमारी बॉडी होती जो उसका ध्‍यान रखती तो ग्‍लोबल सिटी के अंदर इस अलवर जिले का बहुत बड़ा विकास हो सकता था।  तो मैं आपके माध्‍यम से मंत्रीजी से यही निवेदन करता हूं कि हमारा आफिस एक जगह कर दें, हमारे वहां  पर एक बॉडी बना दें एनसीआर की जो दिल्‍ली में जाकर इस पूरे जिले के जो-जो विकास के काम हो सकें उसके लिए कार्य कर सके। आपने समय दिया उसके लिए बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

श्री अध्‍यक्ष: श्री दाताराम । (व्‍यवधान)

श्री दाताराम गुर्जर(खेतड़ी): जवाब दे रहे हैं।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी: दे दूं साहब, जवाब।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं। क्‍या जवाब देंगे आप। एनसीआर में आपका क्‍या है, वह आप क्‍या देंगे जवाब। (व्‍यवधान)

श्री धर्मपाल चौधरी: माननीय अध्‍यक्षजी, एनसीआर, नेशनल केपिटल रीजन में हमारा जिला आया हुआ है...

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है।

श्री धर्मपाल चौधरी: और हमारे को आज एक अगर मान लो सौ गज की भी परमिशन लेनी पड़ती है, आपके जिले में, पूरे राजस्‍थान में नीचे तहसीलदार करता है, उसके बाद एसडीएम को पावर है, फिर कलेक्‍टर को पावर है, फिर राजस्‍थान गवर्नमेंट आती है और अगर हमारे यहां पाँच सौ गज की भी भूमि का परिवर्तन कराना पड़ता है तो उसको छह महीने से पहले परमिशन नहीं मिलती।

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है, वह दे रहे हैं जवाब, विराजिये अब आप, वह दे रहे हैं।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी(स्‍वायत्‍त शासन मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जहां तक मैं समझ पाया हूं, माननीय सदस्‍य की जो तकलीफ है या जो दिक्‍कतें हैं उनको एनओसी से संबंधित मामलों में है कि वह तीन जगह से एनओसी लेनी पड़ती है इसलिए जो वहां के निवासी हैं अलवर जिले के, उनको परेशानी होती है। निश्चित रूप से मैं इस बात को स्‍वीकार करता हूं कि कोई भी आदमी तीन जगह से एनओसी लेगा तो उसमें परेशानी उसको आयेगी, डिले भी हो सकता है, इसमें भी कोई शक नहीं है। मैं माननीय सदस्‍य के साथ अभी बैठ जाऊंगा, किस प्रकार की इनको असुविधा है, जो भी असुविधायें हैं उनको निश्चित रूप से दूर करने का प्रयास करूंगा।

श्री अध्‍यक्ष: वेरी गुड। बहुत अच्‍छा। (व्‍यवधान) नो-नो। नो क्‍वेश्‍चन। श्री दाताराम।

श्री जुबेर खान: जो एनसीआर में, अध्‍यक्ष महोदय, एक मिनट, एनसीआर में जो कर रखा है कि दिल्‍ली से जाकर ही कोई परिवर्तन आप कराओगे, क्‍या उसको आप कार्यवाही करोगे कि दिल्‍ली तक नहीं जाये फाईल। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: नो क्‍वेश्‍चन। श्री दाताराम। 

श्री जुबेर खान: सारी फाइलें दिल्‍ली जाती हैं, यह मुण्‍डावर से आने वाले माननीय सदस्‍य को मालूम है...

श्री जयराम जाटव: वहां स्‍कूल, स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र, किसी भी तरीके का बनाने के लिए...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो। अंकित नहीं।

श्री जुबेर खान:  000

श्री जयराम जाटव:  000

श्री अध्‍यक्ष: श्री दाताराम। शुरू करिये। अंकित नहीं हो रहा है। श्री दाताराम का पुकार दिया। जो उनको बताना था बता दिया उन्‍होंने। अब स्‍थान ग्रहण कर लें।

श्री दाताराम गुर्जर(खेतड़ी): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र में सुनारी बहुत बड़ी नदी है, वहां सुनारी घाट पर और वहां खेतड़ी कापर में पानी सप्‍लाई होता है बहुत वर्षों से, तीस-पैंतीस साल से और वहां जल स्‍तर इतना नीचे चला गया है कि किसानों को खेती के लिए पानी तो बहुत बड़ी बात है, पीने के लिए भी अगर ट्यूब वैल लगाये जाते हैं तो उनमें पीने का पानी भी उतना अधिक मात्रा में उपलब्‍ध नहीं हो पाता और पिछली बार भी मैंने माननीय मंत्रीजी से यह निवेदन किया था कि सुनारी घाट पर बाँध बनाया जाय ताकि वहां का जल स्‍तर रूक सके और उस नदी में पानी, क्‍योंकि वहां आसपास में पहाड़ी क्षेत्र है और पहाड़ी से वर्षा के दौरान इतना अधिक पानी आता है, अभी भी यह वर्षा हुई इसमें भी बहुत अधिक मात्रा में पानी का बहाव आया और वह वहां रूकता नहीं है तो जल स्‍तर उसका निरंतर रूक नहीं पाता और निरंतर नीचे चला जाता है जिसके कारण से इतनी बड़ी समस्‍या हो गई है। खेतड़ी विधान सभा क्षेत्र वैसे भी, अध्‍यक्ष महोदय, आप जानती हैं, पहाड़ी क्षेत्र है और वहां बांधों की कमी है, अगर बाँध अच्‍छी मात्रा में वहां बन जाय, जैसे खरकड़ा के पास में बन जाय एक बाँध, तो वहां जल स्‍तर भी रूक सकता है और कापर की वजह से जो पानी वहां नीचे का, जो खारा पानी पड़ता है केमिकल की वजह से, उसमें भी सुधार हो सकता है।  फ्लोराइड पानी वहां खेतड़ी में कापर की वजह से हो रहा है तो उसमें दो बाँध, एक तो सुनारी घाट में और एक खरकड़ा नदी के ऊपर, बना दिये जायें तो पीने के पानी की प्रचुर मात्रा मिल सकती है और वहां का जो पानी फ्लोराइड का है उसमें भी सुधार हो सकता है।  वैसे भी हमारी केन्‍द्र सरकार ने, तत्‍कालीन प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने नदियों को जोड़ने की बात रखी थी, वह सरकार केन्‍द्र में रही नहीं और दूसरी जो सरकार आई उसने उस बात को आगे बढ़ाया नहीं। मेरा, अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से निवेदन है कि हमारी राजस्‍थान सरकार तो, जिसने अभी बजट में ऐसे करीब एक लाख एनीकट्स बनाने की बात कही है, पानी का संचय करने के लिए, जल चेतना भी उन्‍होंने काफी जाग्रति पैदा करने के लिए चलाई, इसलिए इसमें इस बार ज्‍यादा से ज्‍यादा अच्‍छे बाँध और एनीकट्स बनाये जायं ताकि क्षेत्र का पानी क्षेत्र में रूक सके और जो हमारे क्षेत्र में विशेषकर खेतड़ी   

का पानी जो बहाव से जाता है वह नजदीक हरियाणा की सीमा से लगता हुआ क्षेत्र है वहां चला जाता है इ‍सलिए हमारे खेतड़ी में पानी की बिलकुल कमी है और वैसे भी झुंझुनूं जिले में जो चम्‍बल के पानी की मांग की जा रही है उसको भी जो प्रस्‍तावित योजना बनाई गई है उसमें भी खेतड़ी को वंचित रखा गया है, इसलिए खेतड़ी में तो विशेषकर जो पहाडी क्षेत्र है इसमें इस बार के बजट में अधिक संख्‍या में बाँध बनवा कर पानी के जल स्‍तर को बनाये रखने के लिए सरकार पहल करे। अध्‍यक्ष महोदय, आपने समय दिया, इसके लिए मैं आपको धन्‍यवाद करता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: धन्‍यवाद, धन्‍यवाद।  (व्‍यवधान) क्‍या जरूरी थोड़े ही है। You should take note of it. बस, that’s all.

श्री सुरेन्‍द्रसिंह राठौर(राज्‍य मंत्री,सिंचाई): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपकी अनुमति से, खेतड़ी से आने वाले माननीय सदस्‍य ने जिस बाँध के बारे में यहां चर्चा की है कि सुनारी घाट पर यह बाँध बनवाना चाहते हैं, अध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहूंगा कि वहां

Lpm/akt/1450/2h/2032007

 

एक मालियों की ढाणी बनी हुई है वह डूब क्षेत्र में आती है और काफी किसानों ने वहां कुएं बना रखे हैं, बिजली के कनेक्‍शन ले रखे हैं इसलिए बड़ा बाँध बनाना संभव नहीं है फिर भी सरकार ने (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: झुन्‍झुनू में एक ही बाँध है अजीत सागर और वह खेतड़ी में ही है यह और बता दूं आपको।

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौड़ (राज्‍य मंत्री, सिंचाई): जो स्‍थान ये बता रहे है माननीय अध्‍यक्ष महोदय उस स्‍थान पर फिर भी सरकार ने एक एनीकट बनाने का प्रस्‍ताव हमारे पास विचाराधीन है, हमने सर्वे रिपोर्ट मंगाई है, सर्वे रिपोर्ट में यदि उपयुक्‍त समझा गया तो निश्चित तौर से वहां एक एनीकट का निर्माण किया जाएग। जिससे माननीय सदस्‍य की जो मंशा है कि वहां पानी को रोककर के किसानों के कुओं को चार्ज किया जाए, इससे इनकी मंशा भी पूरी होगी और सरकार भी यह चाहती है कि इस तरह से एनीकट बनाकर के हम जितनी मदद कर सकते हैं किसानों की, वह मदद करने का प्रयास करेंगे।

श्री अध्‍यक्ष: श्री सी.डी. देवल याचिका का उपस्‍थापन करे।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, सरकार का आज वक्‍तव्‍य आने की बात थी जो ओलावृष्टि से जो फसल को नुकसान हुआ है तो आज क्‍या सरकार उस पैकेज की घोषणा की बात करने वाली है।

श्री अध्‍यक्ष: करेगी सरकार लेकिन आज का हो जाने दीजिए, उसके बाद करेगी।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, आपके निर्देशानुसार पूरी चीज जो ओलावृष्टि में जो नुकसान हुआ है उसका आकलन हो रहा है, आप 23 तारीख फिक्‍स कर दें, 23 को वक्‍तव्‍य दे देंगे, आप कहो तो।

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है, उपस्‍थापन कीजिए आप तो।

 

 

याचिकाओं का उपस्‍थापन

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): अध्‍यक्ष महोदय, मैं जिला पाली कर्मावास पट्टा ग्राम से पीपलीया मार्ग पर पुलिया नदी पर रपट निर्माण बाबत पाँच व्‍यक्तियों द्वारा हस्‍ताक्षरित जिला पाली के ग्राम बिजागुढ़ा व रायरा कल्‍ला के बीच पुलिया के निर्माण बाबत छह व्‍यक्तियों द्वारा हस्‍ताक्षरित, तहसील सोजत के चंदावल स्‍टेशन से बगडीनगर तक सड़क का डामरीकरण करने बाबत छह व्‍यक्तियों द्वारा हस्‍ताक्षरित, तहसील सोजत के चंदावल से गुढ़ाबसा तक डामर सड़क का निर्माण करने बाबत पाँच व्‍यक्तियों द्वारा हस्‍ताक्षरित, तहसील सोजत पाली के ग्राम चंदावल नगर से क्षेत्रिया तक डामर सड़क करने बाबत पाँच व्‍यक्तियों द्वारा हस्‍ताक्षरित याचिकायें उपस्‍थापित करता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: श्री खुशवीर सिंह जोजावर।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): अध्‍यक्ष महोदय, विधान सभा क्षेत्र खारची में धार्मिक महत्‍व के स्‍थलों को पक्‍की सड़क से जोड़ने बाबत पाँच व्‍यक्तियों द्वारा हस्‍ताक्षरित, विधान सभा क्षेत्र खारची के विद्यालयों को क्रमोन्‍नत करने बाबत पाँच व्‍यक्तियों द्वारा हस्‍ताक्षरित, ग्राम राणावास पंचायत समिति मारवाड़ जंक्‍शन में समाज कल्‍याण छात्रावास खोलने बाबत छह व्‍यक्तियों द्वारा हस्‍ताक्षरित, विधानसभा क्षेत्र खारजी...

श्री अध्‍यक्ष: एवं को बोलने की जरूरत नहीं है आप तो वैसे ही बोलते जाओ, लास्‍ट में बोलना।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): ग्राम पंचायत को मगरा क्षेत्र से जोड़ने बाबत हस्‍ताक्षरित याचिकाएं उपस्‍थापित करता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: थैंक यू, डा. श्रीगोपाल बाहेती अपसेंट, श्री अशोक खंडार अपसेंट, श्री भागीरथ चौधरी।

श्री भागीरथ चौधरी (किशनगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, मैं किशनगढ़ उपखण्‍ड मुख्‍यालय पर परिवहन निगम का नवीन आगार बणीठगी में खोलने बाबत चार व्‍यक्तियों द्वारा हस्‍ताक्षरित एक याचिका उपस्‍थापित करता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: श्री राकेश मेघवाल।

श्री राकेश मेघवाल (परबतसर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं पर्बतसर जिला नागौर में परिवहन निगम के बस स्‍टैण्‍ड पर मूलभूत सुविधओं के साथ-साथ हॉल का निर्माण कराए जाने बाबत पाँच व्‍यक्तियों द्वारा हस्‍ताक्षरित एक याचिका उपस्‍थापित करता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: श्री लक्ष्‍मीनारायण बैरवा।

श्री लक्ष्‍मीनारायण बैरवा (फागी): मैं तहसील चाकसू में औद्योगिक प्रशिक्षण केन्‍द्र आई टी आई खोलने बाबत पाँच व्‍यक्तियों द्वारा हस्‍ताक्षरित एक याचिका उपस्‍थापित करता हूं।

 

मुखबंद

अनुपूरक अनुदान वर्ष 2006-07 की मांगों का पारण

श्री अध्‍यक्ष: मुखबंद का प्रयोग किया जा रहा है।

मांग संख्‍या-1

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-1 राज्‍य विधान मण्‍डल के संबंध में 31 मार्च,2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किए जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रूपए 33,81,000/-(तैंतीस लाख इक्‍यासी हजार) तक की राशि और प्रदान की जाए?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

मांग संख्‍या-2

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-2 मंत्रि परिषद के संबंध में 31 मार्च,2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किए जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपए 1,15,00,000/-(एक करोड़ पन्‍द्रह लाख) तक की राशि और प्रदान की जाए?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

मांग संख्‍या-3

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-3 सचिवालय के संबंध में 31 मार्च,2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किए जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपए 99,03,97,000/-(निन्‍यानवे करोड़ तीन लाख सतानवे हजार) तक की राशि और प्रदान की जाए?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

मांग संख्‍या-4

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-4 जिला प्रशासन के संबंध में 31 मार्च,2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किए जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपए 1,21,82,000/-(एक करोड़ इक्‍कीस लाख बयासी हजार) तक की राशि और प्रदान की जाए?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

मांग संख्‍या-5

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-5 प्रशासनिक सेवाएं के संबंध में 31 मार्च,2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किए जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपए 31,10,20,000/-(इक्‍तीस करोड़ दस लाख बीस हजार) तक की राशि और प्रदान की जाए?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

मांग संख्‍या-6

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-6 न्‍याय प्रशासन  के संबंध में 31 मार्च,2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किए जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपए 13,86,62,000/-(तेरह करोड़ छियासी लाख बासठ हजार) तक की राशि और प्रदान की जाए?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

मांग संख्‍या-7

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-7 निर्वाचन  के संबंध में 31 मार्च,2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किए जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपए 1,68,26,000/-(एक करोड़ अडसठ लाख छब्‍बीस हजार) तक की राशि और प्रदान की जाए?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

मांग संख्‍या-8

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-8 राजस्‍व के संबंध में 31 मार्च,2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किए जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपए 2,000/-(दो हजार) तक की राशि और प्रदान की जाए?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

मांग संख्‍या-10

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-10 विविध सामान्‍य सेवाएं  के संबंध में 31 मार्च,2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किए जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपए 88,80,,000/-(अठासी लाख अस्‍सी हजार) तक की राशि और प्रदान की जाए?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

मांग संख्‍या-11

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-11 विविध सामाजिक सेवाएं   के संबंध में 31 मार्च,2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किए जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपए 6,10,94,000/-(छह करोड़ दस लाख चौरानवे हजार) तक की राशि और प्रदान की जाए?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

मांग संख्‍या-12

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-12 अन्‍य कर  के संबंध में 31 मार्च,2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किए जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपए 14,28,52,000/-(चौदह करोड़ अठाईस लाख बावन हजार) तक की राशि और प्रदान की जाए?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

मांग संख्‍या-14

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-14 बिक्री कर  के संबंध में 31 मार्च,2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किए जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपए 78,05,85,000/-(अठहत्‍तर करोड़ पाँच लाख पचासी हजार) तक की राशि और प्रदान की जाए?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

मांग संख्‍या-16

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-16 पुलिस  के संबंध में 31 मार्च,2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किए जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपए 40,11,68,000/-(चालीस करोड़ ग्‍यारह लाख अडसठ हजार) तक की राशि और प्रदान की जाए?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

मांग संख्‍या-18

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-18 जनसम्‍पर्क  के संबंध में 31 मार्च,2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किए जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपए 5,95,31,000/-(पाँच करोड़ पचानवे लाख इक्‍तीस हजार) तक की राशि और प्रदान की जाए?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

मांग संख्‍या-19

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-19 लोक निर्माण कार्य  के संबंध में 31 मार्च,2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किए जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रूपए 57,28,03,000/-(सतावन करोड़ अठाईस लाख तीन हजार) तक की राशि और प्रदान की जाए?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

 

Bhs/akt/20.3.07/15.00/2j

 

मांग संख्‍या 20

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-20 आवास के संबंध में 31 मार्च, 2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 3,78,30,000/-  (तीन करोड़ अठहत्‍तर लाख तीस हजार) तक की राशि और प्रदान की जाय?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

मांग संख्‍या 21

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-21 सड़कें एवं पुल के संबंध में 31 मार्च, 2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 2,41,25,91,000/-  (दो अरब इकतालीस करोड़ पच्‍चीस लाख इक्‍यानवे हजार) तक की राशि और प्रदान की जाय?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

मांग संख्‍या 22

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-22 क्षेत्र का विकास के संबंध में 31 मार्च, 2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 30,75,54,000/-  (तीस करोड़ पचहत्‍तर लाख चौवन हजार) तक की राशि और प्रदान की जाय?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

मांग संख्‍या 24

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-24 शिक्षा, कला एवं संस्‍कृति के संबंध में 31 मार्च, 2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 23,03,000/-  (तेईस लाख तीन हजार) तक की राशि और प्रदान की जाय?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

मांग संख्‍या 25

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-25 कोषागार व लेखा प्रशासन के संबंध में 31 मार्च, 2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 3,12,33,000/-  (तीन करोड़ बारह लाख तैंतीस हजार) तक की राशि और प्रदान की जाय?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

मांग संख्‍या 26

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-26 चिकित्‍सा एवं लोक स्‍वास्‍थ्‍य और सफाई के संबंध में 31 मार्च, 2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 7,48,37,000/-  (सात करोड़ अड़तालीस लाख सैंतीस हजार) तक की राशि और प्रदान की जाय?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

मांग संख्‍या 27

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-27 पेयजल योजना के संबंध में 31 मार्च, 2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 2,11,70,78,000/-  (दो अरब ग्‍यारह करोड़ सत्‍तर लाख अठहत्‍तर हजार) तक की राशि और प्रदान की जाय?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

मांग संख्‍या 28

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-28 ग्रामीण विकास के विशेष कार्यक्रम के संबंध में 31 मार्च, 2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 15,50,30,000/-  (पन्‍द्रह करोड़ पचास लाख तीस हजार) तक की राशि और प्रदान की जाय?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

मांग संख्‍या 29

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-29 नगर आयोजना एवं प्रादेशिक विकास के संबंध में 31 मार्च, 2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 1,000/-  (एक हजार) तक की राशि और प्रदान की जाय?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

मांग संख्‍या 30

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-30 जनजाति क्षेत्रीय विकास के संबंध में 31 मार्च, 2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 67,06,85,000/-  (सडसठ करोड़ छह लाख पचासी हजार) तक की राशि और प्रदान की जाय?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

मांग संख्‍या 31

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-31 पुनर्वास एवं सहायता के संबंध में 31 मार्च, 2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 94,000/-  (चौरानवे हजार) तक की राशि और प्रदान की जाय?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

मांग संख्‍या 32

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-32 नागरिक आपूर्ति के संबंध में 31 मार्च, 2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 1,14,00,000/-  (एक करोड़ चौदह लाख) तक की राशि और प्रदान की जाय?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

मांग संख्‍या 33

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-33 सामाजिक सुरक्षा और कल्‍याण के संबंध में 31 मार्च, 2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 1,06,88,56,000/-  (एक अरब छह  करोड़ अठासी लाख छप्‍पन हजार) तक की राशि और प्रदान की जाय?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

 

 

 

मांग संख्‍या 34

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-34 प्राकृतिक आपदाओं से राहत के संबंध में 31 मार्च, 2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 5,95,39,30,000/-  (पाँच अरब पचानवे करोड़ उनतालीस लाख तीस हजार) तक की राशि और प्रदान की जाय?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

मांग संख्‍या 35

 

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-35 विविध सामुदायिक एवं आर्थिक सेवाएं के संबंध में 31 मार्च, 2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 3,55,56,89,000/-  (तीन अरब पचपन करोड़ छप्‍पन लाख नवासी हजार) तक की राशि और प्रदान की जाय?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

मांग संख्‍या 36

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-36 सहकारिता के संबंध में 31 मार्च, 2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 39,53,27,000/- (उनतालीस करोड़ तिरपन लाख सत्‍ताईस हजार) तक की राशि और प्रदान की जाय?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

मांग संख्‍या 37

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-37 कृषि के संबंध में 31 मार्च, 2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 1,07,44,90,000/-  (एक अरब सात करोड़ चवालीस लाख नब्‍बे हजार) तक की राशि और प्रदान की जाय?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

मांग संख्‍या 38

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-38 लघु सिंचाई एवं भूमि संरक्षण के संबंध में 31 मार्च, 2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 11,45,34,000/-  (ग्‍यारह करोड़ पैंतालीस लाख चौंतीस हजार) तक की राशि और प्रदान की जाय?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

मांग संख्‍या 39

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-39 पशुपालन एवं चिकित्‍सा के संबंध में 31 मार्च, 2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 26,54,000/-  (छब्‍बीस लाख चौवन हजार) तक की राशि और प्रदान की जाय?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

मांग संख्‍या 40

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-40 राजकीय उपक्रम के संबंध में 31 मार्च, 2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 1,72,05,000/-  (एक करोड़ बहत्तर लाख पांच हजार) तक की राशि और प्रदान की जाय?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

मांग संख्‍या 41

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-41 सामुदायिक विकास के संबंध में 31 मार्च, 2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 9,000/-  (नौ हजार) तक की राशि और प्रदान की जाय?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

मांग संख्‍या 42

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-42 उद्योग के संबंध में 31 मार्च, 2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 5,42,07,000/-  (पाँच करोड़ बयालीस लाख सात हजार) तक की राशि और प्रदान की जाय?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

मांग संख्‍या 43

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-43 खनिज के संबंध में 31 मार्च, 2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 5,46,95,000/-  (पांच करोड़ छियालीस लाख पचानवे हजार) तक की राशि और प्रदान की जाय?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

मांग संख्‍या 44

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-44 लेखन सामग्री एवं मुद्रण  के संबंध में 31 मार्च, 2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 47,47,000/-  (सैंतालीस लाख सैंतालीस हजार) तक की राशि और प्रदान की जाय?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई।

 

कैलाश/अरुण     20.3.07  15.10  (1) 2k

 

मांग संख्‍या-45

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-45 राज्‍य कर्मचारियों को ऋण के संबंध में 31 मार्च, 2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 70,000/- (सत्‍तर हजार) तक की राशि और प्रदान की जाये ?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई ।

मांग संख्‍या-46

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-46 सिंचाई के संबंध में 31 मार्च, 2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 34,000/- (चौंतीस हजार) तक की राशि और प्रदान की जाये ?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई ।

मांग संख्‍या-47

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-47 पर्यटन के संबंध में 31 मार्च, 2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 4,06,33,000/- (चार करोड़ छह लाख तैंतीस हजार) तक की राशि और प्रदान की जाये ?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई ।

मांग संख्‍या-48

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-48 विद्युत के संबंध में 31 मार्च, 2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 10,01,18,66,000/- (दस अरब एक करोड़ अठारह लाख छियासठ हजार) तक की राशि और प्रदान की जाये ?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई ।

मांग संख्‍या-49

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-49 स्‍थानीय निकायों और पंचायती राज संस्‍थाओं को मुआवजा और समनुदेशन के संबंध में 31 मार्च, 2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 7,44,82,000/- ( सात करोड़ चवालीस लाख बयासी हजार) तक की राशि और प्रदान की जाये ?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई ।

मांग संख्‍या-50

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-50 ग्रामीण रोजगार के संबंध में 31 मार्च, 2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 22,38,51,000/- (बाईस करोड़ अडतीस लाख इक्‍यावन हजार) तक की राशि और प्रदान की जाये ?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई ।

मांग संख्‍या-51

प्रश्‍न यह है कि अनुपूरक अनुदान की मांग संख्‍या-51 अनुसूचित जाति के कल्‍याण हेतु विशिष्‍ठ संघठक योजना के संबंध में 31 मार्च, 2007 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपये 11,10,11,000/- ( ग्‍यारह करोड़ दस लाख ग्‍यारह हजार) तक की राशि और प्रदान की जाये ?

(स्‍वीकृत)

मांग स्‍वीकार की गई ।

 

 

 

 

 

 

विधायी कार्य : विधेयक का पुर:स्‍थापन

राजस्‍थान विनियोग (संख्‍या 1) विधेयक, 2007

राजस्‍थान विनियोग (संख्‍या-1) विधेयक, 2007 का पुर: स्थापन, उस पर विचार एवं पारण ।

श्री वीरेन्‍द्र मीणा (राज्‍य मंत्री, वित्‍त एवं करारोपण): अध्‍यक्ष महोदय, मैं राजस्‍थान विनियोग (संख्‍या-1) विधेयक, 2007 को पुर: स्‍थापित करने की आज्ञा के लिये प्रस्‍ताव करता हूं ।

श्री अध्‍यक्ष: प्रश्‍न यह है कि राजस्‍थान विनियोग (संख्‍या-1) विधेयक, 2007 को पुर:स्‍थापित करने की आज्ञा प्रदान की जाय ?

(स्‍वीकृत)

विधेयक को पुर:स्‍थापित करने की आज्ञा प्रदान की गई ।

श्री वीरेन्‍द्र मीणा (राज्‍य मंत्री, वित्‍त एवं करारोपण): अध्‍यक्ष महोदय, मैं राजस्‍थान विनियोग (संख्‍या-1) विधेयक, 2007 को पुर: स्‍थापित करता हूं ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मेरी प्रार्थना है कि कार्य सलाहकार समिति की बैठक में यह फैसला हुआ था कि यह सप्‍लीमेंट्री डिमांड और उसके साथ उसका फाइनेंस बिल इन दोनों का मुख बंद कर के पारण होगा । कार्य सलाहकार समिति के फैसल के अनुसरण में ही हम लोग आये हैं तो मेरी प्रार्थना है कि उसी सप्‍लीमेंट्री डिमांड का यह फाइनेंस बिल है इस फाइनेंस बिल पर क्‍या डिसकशन होगा । अध्‍यक्ष महोदय, मैं याद दिलाना चाहता हूं पिछली बार 2004-05 में और 2005-06 में इस पर कभी डिसकशन हुआ ही नहीं । इसलिए मेरी प्रार्थना यह थी ...

श्री अध्‍यक्ष: यह आसन बंधा हुआ है जो कुछ कार्य सूची में उससे इसलिए आप मुझे क्षमा करेंगे । आसन इस कार्य सूची से बंधा हुआ है । इसमें लिखा हुआ है कि कोई माननीय सदस्‍य बोलना चाहे तो उन्‍हें अनुमति दी जायेगी । इसलिए आसन मजबूर है ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, बाकी तो आसन सर्वोपरि है, आपकी आज्ञा की पालना करना ....

श्री अध्‍यक्ष: यद्यपि मैं आपकी बात से सहमत हूं कि यह फैसला बीएसी की मीटिंग में हुआ था कि अनुपूरक अनुदान की मांगो के साथ साथ मुख बंद कर के इस पर कोई चर्चा नहीं होगी लेकिन यह चूंकि लिख दिया गया इसलिए आसन मजबूर है मुझे आज्ञा देनी पडेगी । आप बोल रहे हैं ? विचारार्थ तो उन्‍होंने रखा नहीं अभी । आप थर्ड रीडिंग पर बोल लेना, पारित पर बोल लेना । विचारार्थ रखें आप ।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): ठीक है ।

 

विधेयक पर विचार

श्री वीरेन्‍द्र मीणा (राज्‍य मंत्री, वित्‍त एवं करारोपण): अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूं कि राजस्‍थान विनियोग (संख्‍या-1) विधेयक, 2007 को विचारार्थ लिया जाये।

श्री अध्‍यक्ष: प्रश्‍न यह है कि राजस्‍थान विनियोग (संख्‍या-1) विधेयक, 2007 को विचारार्थ लिया जाये ?

(स्‍वीकृत)

विधेयक को विचारार्थ लिया गया ।

अब आप पारित का प्रस्‍ताव करो ।

विधेयक का पारण

श्री वीरेन्‍द्र मीणा (राज्‍य मंत्री, वित्‍त एवं करारोपण): अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूं कि राजस्‍थान विनियोग (संख्‍या-1) विधेयक, 2007 को पारित किया जाय ।

श्री अध्‍यक्ष: आप न बोले तो क्‍या फर्क पडेगा । नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य बोलना जरूरी है क्‍या ?

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): जरूरी है । अध्‍यक्ष महोदय, मैंने आपका ध्‍यान पिछली बार भी आकर्षित किया, अभी भी आकर्षित किया । यह सीएजी की रिपोर्ट हमको बजट पेश होता है उस समय मिलती नहीं है । सप्‍लीमेंट्री की डिमांड को डिसकस कहां करें इ‍सलिए मैं चाहता हूं कि सभी माननीय सदस्‍य, यह कोई मेरा शोक नहीं है लेकिन मेरा यह शोक जरूर है कि जो सबसे इम्‍पोर्टेंट बिजनेस है बजट का उस पर हम ध्‍यान नहीं दे रहे हैं । इसलिए मैं चाहता हूं कि सभी माननीय सदस्‍य, इसमें न इस सरकार का दोष है पर परम्‍परा ऐसी रही है कि उन परम्‍पराओं की शैल्‍टर लेकर हम राजस्‍थान में हमारा जो मुख्‍य काम है बजट का उस पर हम ध्‍यान नहीं दे रहे हैं इसलिए मैं सभी माननीय सदस्‍यों का ध्‍यान आकर्षित करना चाहता हूं कि सरकार ने अभी जो अनुपूरक मांगों का प्रस्‍ताव रखा उसमें वित्‍तीय वर्ष 2006-07 के लिये विधान सभा में 24947 करोड़ 25 लाख 79 हजार रुपये की दत्‍तमत वोटेड मांगे तथा 10211 करोड़ 93 लाख 03 हजार रुपये पृभत विनियोग चार्ज एप्रोपिएशन पुर: स्‍थापित किये गये हैं । अध्‍यक्ष महोदय, अनुपूरक मांग की कुल राशि अध्‍यक्ष महोदय, यह मैं इसलिए बता रहा हूं कि आपने जो सप्‍लीमेंट्री रखा है उसमें अभी जो राशि है वह है 3215 करोड़ 86 लाख 63 हजार रुपये होती है । इसमें 6 करोड़ 88 लाख 54 हजार रुपये पृभत विनियोग चार्ज एप्रोपिएशन तथा 3208 करोड़ 98 लाख 09 हजार दत्‍तमत वोटेड श्रेणी में है । अध्‍यक्ष महोदय, यह इस सरकार की वर्ष 2006-07 की अनुपूरक मांगे हैं । अध्‍यक्ष महोदय, मैं ध्‍यान आकर्षित करना चाहता हूं सरकार का 2003-04 के एक्‍चुअल्‍स मैं आपके सामने रख रहा हूं । 2003-04 के एक्‍चुअल्‍स में जो सप्‍लीमेंट्री ग्रांट थी वह थी 8021.91 करोड़ । उसमें वोटेड मांग थी वह है 3109.39 करोड़ । अध्‍यक्ष महोदय, सबसे बड़ा जो प्रश्‍न है 31 मार्च, 04 को इस सरकार ने 2293.55 करोड़ रुपये सरेंडर किये ।

श्री अध्‍यक्ष: आप तो इस पर बोल रहे हैं 2006-07 पर ।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): मैं उसी पर बोल रहा हूं, गाडी को खींचते खींचते वही ला रहा हूं । आपको पता पडे कि सरकार का जो कुशल प्रबन्‍धन है वह कुशल प्रबन्‍धन केवल वाक्‍य से, भाषण से या यह जो आंकडे बता रहे हैं उनको समझने की आवश्‍यकता है । अध्‍यक्ष महोदय, 2003-04 में क्‍योंकि 2003-04 में सरकार आधी कांग्रेस की थी, आधी सरकार नई आ गई थी उस समय 2293.55 करोड़ रुपये सरेंडर किये 31 मार्च को और उसमें वोटेड रेवेन्‍यु सबसे इंटरेस्‍टेड बात है रेवेन्‍यु वोटेड सरेंडर किया 1609.20 करोड़ रुपये । अध्‍यक्ष महोदय, कैपिटल में सरेंडर किया 1072.20 करोड़ रुपये और लोन एंड एडवांस में इन्‍होंने सर प्‍लस रखा 116.57 करोड़ रुपये । 2564 करोड़ रुपये सरेंडर किये उसमें वह कौनसा हैड है, रेवेन्‍यु वोटेड में सोशियल सैक्‍टर में यदि हम 31 मार्च को सरेंडर करते हैं तो यह हम सब के लिये कन्‍सर्न का सवाल है । आप एक तरफ कैपिटल आडट ले की बात करते हैं । कैपिटल आउट ले में आप कहते हैं कि हम फिजिकल एसेट्स बढायेंगे । अध्‍यक्ष महोदय, पर मैं फिगर देना चाहता हूं 2713.45 करोड़ रुपये जो 31 मार्च को सरेंडर किये ......

 

ans/akt  15.20  2l  20.03.2007 

 

अध्‍यक्ष महोदय, उसमें रेवेन्‍यू वोटेड, पेंशन और रिटायरमेंट में 42.40 करोड रूपये,पुलिस में 39.53 करोड़ रूपये। माननीय मंत्री जी रोड एंड ब्रिज में, रेवेन्‍यू  वोटेड में 31.65 करोड़ रूपये। एजुकेशन आर्ट एंड कल्‍चर, रेवेन्‍यू  वोटेड में 402.73 करोड़ रूपये, मेडीकल पब्लिक हैल्‍थ सेनिटेशन में, रेवेन्‍यू वोटेड में 97.72 करोड़ रूपये, स्‍पेशल प्रोग्राम ऑफ रूरल डवलपमेंट में 48.45 करोड़ रूपये, अरबन प्‍लान एंड रीजनल डवलपमेंट में, रेवेन्‍यू वोटेड में 462.55 करोड़ रूपये, ट्राइबल एरिया डवलपमेंट में,रेवेन्‍यू  वोटेड में 29.75 करोड़ रूपये, सोशल सिक्‍योरिटी एंड वेलफेयर में, रेवेन्‍यू वोटेड में 73.71 करोड़ रूपये, कम्‍युनिटि डवलपमेंट रेवेन्‍यू वोटेड में 131.43 करोड़ रूपये, इर्रिगेशन रेवेन्‍यू वोटेड में 31.52 करोड़ रूपये। अध्‍यक्ष महोदय, 3-4 का सिनेरियो है जब 3-4 में राजस्‍थान सरकार ने रेवेन्‍यू वोटेड में सलेण्‍डर किया। 4-5 में सरकार आ गई थी, 4-5 में सरकार आने के बाद 4-5 के जो फीगर है उसमें इन्‍होंने इम्‍प्रूव किया। इम्‍प्रूव यह किया कि जो सप्‍लीमेंट्री डिमांड है वह सप्‍लीमेंट्री डिमांड इनकी केवल 1234.55  करोड़ की थी और 1234.55 करोड़ की थी जो पिछले समय में इम्‍प्रूवमेंट था पर अध्‍यक्ष महोदय, 31 मार्चको जो सरेण्‍डर अमाउण्‍ट है वह अमाउण्‍ट का वेल्‍यूम है 7292.34 करोड रूपये1 अध्‍यक्ष महोदय, उसमें I am aware about this, चार्ज अमाउण्‍ट में ज्‍यादा था क्‍योंकि लोन पेमेंट में इनका 5708 करोड़ रूपये, उसको बाहर भी निकाल दे तब भी अध्‍यक्ष महोदय वोटेड रेवेन्‍यू और केपीटल में एंड  लोन एडवान्‍सेज में 31 मार्च को जो सरेण्‍डर अमाउण्‍ट हुआ वह 1560.56 करोड़ रूपये। अध्‍यक्ष महोदय, उस समय जो सरेण्‍डर हुआ उसकी भी मैं आपको जानकारी देना चाहता हूं। सेक्रेट्रेरियट सर्विसेज में रेवेन्‍यू  वोटेड में 69.37 करोड़ रूपये हुए। रोड्स एंड ब्रिज में सरेण्‍डर हुए, रेवेन्‍यू  वोटेड में 32.84 करोड़ रूपये, एजुकेशन आर्ट एंड कल्‍चर में सरेण्‍डर हुए 165.07 करोड़ रूपये, मेडीकल हैल्‍थ सेनिटेशन में सरेण्‍डर किए 84.39 करोड़ रूपये, अरबन प्‍लान एंड रिजनेबल डवलपमेंट में सरेण्‍डर किए 25.76....

श्री अध्‍यक्ष: और मांग रहे  हैं। (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): हां जी ?

श्री अध्‍यक्ष: सरेण्‍डर वाली बात थोडे़ ही है, और मांग रहे हैं।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): यही तो मैं आपको जानकारी देना चाहता हूं कि आप हमें कह क्‍या रहे हैं और हो क्‍या रहा है। यह जो आपने दिया है इसका तो एक्‍चुअल आएगा तब पता पड़ेगा। यही चीज मैं आपका लाना चाहता हूं अध्‍यक्ष महोदय। अध्‍यक्ष महोदय, सोशल सिक्‍योरिटी एंड वेलफेयर में रेवेन्‍यू  वोटेड में सरेण्‍डर किया 52.83 करोड़ रूपये और पावर सैक्‍टर में 4-5 में सरेण्‍डर किया रेवेन्‍यू  वोटेड में 90.45 करोड़ रूपये।

अध्‍यक्ष महोदय, 4-5 में इनकी ही सरकार थी। अब 4-5 में सीएजी का है उसमें अध्‍यक्ष महोदय, आप जानकार आश्‍चर्य करेंगे कि सरकार की जो सबसे इंटरेस्टिंग बात है, पहले हम मैंन डिमांड, ग्रांट लाते हैं, ग्रांट के बाद सप्‍लीमेंट्री लाते हैं और सप्‍लीमेंट्री के बाद बी.ई. और आपकी आर.ई. होती है। बी.ई. और आर.ई.  आने के बाद मैं कोई कारण नहीं है अध्‍यक्ष महोदय, विभाग की सजगता हो,  एक्‍सपंडीचर पर कंट्रोल हो, पूरी चीज की जानकारी रखे अध्‍यक्ष महोदय तो एक्‍सेस कर देना चाहिये। जितनी हमने व्‍यवस्‍था की उस पैसे में हमको ज्‍यादा पैसा खर्च करना पडा है या जो हमने व्‍यवस्‍था की उतना हम खर्चा नहीं करें, अध्‍यक्ष महोदय आप खुद जानकर आश्‍चर्य करेंगे कि पिछले 4-5  के मैं कुछ आपको बताना चाहता हूं –“Supplementary provisions of Rs. 98.11 crore made in 10 cases during the year proved unnecessary in view of aggregate saving of Rs. 211 crore ..” 211 करोड़ रूपये की आपने सेविंग की और सप्‍लीमेंट्री में भी आप आये।

(समय:  )

(श्री रामनारायण विश्‍नोई, उपाध्‍यक्ष, पदासीन)

“In 19 cases, against additional requirement of only Rs. 433.43 crore, supplementary grants of Rs. 637.99 crore were obtained, resulting in savings in each case exceeding Rs. One crore, aggregating Rs. 204.56 crore. … In four cases, supplementary provision of Rs. 441.10 crore proved short of requirement by more than rupees one crore in each case leaving an uncovered excess expenditure of Rs. 50.51 crore. …Significant excesses were persistent in four cases involving three grants … Persistent excess requires investigation by Government.” उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं समझता हूं कि पर्सिसटेंट इनका जो एक्‍सपंडीचर हुआ है उसको देखने की आवश्‍यकता है कि पर्सिसटेंट एक्‍सपंडीचर इनके किस हैड में हुआ।  उपाध्‍यक्ष महोदय,आप जानकर आश्‍चर्य करेंगे. Persistent savings more than Rs. One crore in each case and in excess of 10 per cent of the total grant/appropriation. उपाध्‍यक्ष महोदय, अरबन प्‍लान एंड रीजनेबल डवलपमेंट रेवेन्‍यू वोटेड में 2002-3 में 100.86 करोड़ रूपये, In 2003-04 462.62 करोड़, In the year 2004-05, it is 25.18 करोड़, यह रेवेन्‍यू  वोटेड है। उपाध्‍यक्ष महोदय, मांग संख्‍या 33 सोशल सिक्‍योरिटी एंड वेलफेयर में 2002-3 में 127.23 करोड, 2003-4  में 74.65 करोड, In the year 2004-5 में 51.9 करोड। उपाध्‍यक्ष महोदय, टयूरिज्‍म में 5.03 करोड, इन दा ईयर2002-3,इन दा ईयर 3-4 इट वाज 2.57 करोड, इन दा ईयर 2004-5 इट वाज 2.67 करोड, अध्‍यक्ष महोदय,यह रेवेन्‍यू वोटेड में था। अध्‍यक्ष महोदय, केपीटल वोटेड में, इन दा ईयर 2002-3 हमारी सरकार ने 118.80 करोड रूपये, 2003-4 214.15 करोड, नेक्‍स्‍ट ईयर 50.62करोड । उपाध्‍यक्ष महोदय, ट्राइबल एरिया डवलपमेंट, महाराष्‍ट्र पेटर्न में बहुत आगे बढ़ा है। इन दा ईयर 2002-3 केपीटल इन्‍वेस्‍टमेंट में 49.47 करोड़, इन दा ईयर 2003-4 इट वाज 38.50 करोड, इन दा ईयर 2004-5 इट वाज 15.45 करोड। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, टयूरिज्‍म केपीटल में इन दा ईयर 2002-3 4.60 करोड, इन दा ईयर 2003-4 में 2.28 करोड़, इन दा ईयर 2004-5 इट वाज 2.46 करोड़। अध्‍यक्ष महोदय....

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (सरकारी उप मुख्‍य सचेतक): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): बोले ..

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (सरकारी उप मुख्‍य सचेतक): उपाध्‍यक्ष महोदय।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अच्‍छा, मेरी इच्‍छा उपाध्‍यक्ष से अध्‍यक्ष बन जाओ तकलीफ है ? आपकी भावना समझ में आ गई। आप बहुत विजिलेंस है, धन्‍यवाद। उपाध्‍यक्ष महोदय, “Injudicious re-appropriation of funds. Re-appropriation is transfer of funds within a grant from one unit of appropriation, where savings are anticipated to another unit where additional funds are needed. Cases where re-appropriations proved injudicious in view of final savings/excess in each case being more than rupees one crore are detailed as under: In nine cases, addition a funds of Rs. 706.65 crore provided through re-appropriation proved unnecessary in view of final savings of Rs. 36.63 crore .. In six cases, the withdrawal of Rs. 1,990.19 crore through reappropriation was excess against necessity as the final expenditure still exceeded the modified grant by Rs. 102.49 crore…” उपाध्‍यक्ष महोदय, ग्रांट में भी आ गए, सप्‍लीमेंट्री में भी आ गए, एक्‍सेस में भी आ गए उसके बाद भी 102 करोड़ रूपये एक्‍सेस में. “In six cases, additional funds of Rs. 149.60 crore provided through re-appropriation proved insufficient as the final expenditure exceeded the grant by Rs. 55.95 crore … In 15 cases, the savings were not properly assessed as even after the withdrawal of Rs. 347.44 crore through re-appropriation there was a final savings of Rs. 47.28 crore ..” Anticipated savings, उपाध्‍यक्ष महोदय, आप जानकर आश्‍चर्य करेंगे, “According to rules, the spending Departments are required to surrender the grants/appropriations or portion thereof to the Finance Department as and when the savings are anticipated. However, at the close of the year 2004-05, there were 11 cases in which after partial surrender, savings of Rs. One crore and above in each case aggregating Rs. 122.26 remained unsurrendered.” उपाध्‍यक्ष महोदय, 120.26 करोड़ रूपये एक्‍सेस में हैं लेकिन उपाध्‍यक्ष महोदय, इसको सरेण्‍डर नहीं की है। उपाध्‍यक्ष महोदय, 4-5 इसलिए कोट कर रहा हूं यह के यह ओब्‍जेक्‍शन, एक और बात मैं आगे पढ़ देता हूं – “Besides, in nine cases. Rs. 36.70 crore (14 per cent of savings) were surrendered in excess (more than five per cent), which includes excess surrender of savings of Rs. 5.93 crore (eight per cent under Grant No. 26 – Medical, Public Health and Sanitation), Rs. 17.36 crore (34 per cent under Grant No. 21 – Roads and Bridges-Capital Voted) and Rs. 6.80 crore (seven per cent under Grant No. 46– Irrigation-Capital voted). It indicates inadequate financial control over expenditure. फाइनेंशियल कन्‍ट्रोल  यदि उपाध्‍यक्ष महोदय होता तो यह जो सेविंग है, in nine cases of Rs. 36.70 crore, यह एक्‍सेस भी नहीं होती। उपाध्‍यक्ष महोदय, आप जानकार आश्‍चर्य करेंगे 4-5 में इनकी सरकार थी।

 

दुर्गा/त्रिपाठी 200307 1530 2m

 

पर सबसे इंटरेस्टिंग फैक्‍ट्स, सी.ए.जी. की रिपोर्ट जो 05-06 की है उसमें मैं जरुर चाहता हूं। उपाध्‍यक्ष महोदय, आप जानकर आश्‍चर्य करेंगे कि यहां पर ओरिजिनल ग्राण्‍ट थी 17539.70 रेवेन्‍यु वोटेड में और खर्च किया है 16947 करोड़। मतलब ओरिजिनल ग्राण्‍ट में कम खर्च हुआ है। फिर भी सप्‍लीमेंट्री ग्राण्‍ट में 565.04 करोड़ रुपये की मांग की है। तो टोटल अमाउण्‍ट हो गया 18104.74 करोड़ रुपये। लेकिन एक्‍चुअल अमाउण्‍ट हुआ 16947.96 करोड़ और उसके बाद उपाध्‍यक्ष महोदय, 31 मार्च को जो सरेण्‍डर किया है, रेवेन्‍यु वोटेड में, उसका अमाउण्‍ट है 1156.78 करोड़ रुपये। उपाध्‍यक्ष महोदय, कैपिटल में ओरिजिनल में जो इनकी ग्राण्‍ट थी, 5658.15 करोड़ रुपये थी, कोई जरुरत नहीं सप्‍लीमेंट्री की। और सप्‍लीमेंट्री मांगी 138.61 करोड़, टोटल अमाउण्‍ट हो गया 5796.76 करोड़। पर एक्‍चुअल एक्‍सपंडीचर हुआ है वह केवल 4883.93, एण्‍ड नेट सेविंग ..। सरेण्‍डर किया है 31 मार्च को वह अमाउण्‍ट है 912.83 करोड़ रुपये। उपाध्‍यक्ष महोदय, 31 मार्च को 05-06 में अमाउण्‍ट सरेण्‍डर किया है, वह अमाउण्‍ट है 5175.73 करोड़ रुपये, I am aware about this, उसमें जो वोटेड/चार्ज्‍ड अमाउण्‍ट है, वह 3009 का, उसको बाहर निकाल दें तो रेवेन्‍यु में जो वोटेड और कैपिटल में वोटेड है वह अमाउण्‍ट सरेण्‍डर किया है 2057 करोड़ रुपये, जो उपाध्‍यक्ष महोदय सरेण्‍डर किये उसमें सबसे इंटरेस्टिंग बात यह है, इसमें देखें, उपाध्‍यक्ष महोदय, जो अमाउण्‍ट सरेण्‍डर किया है उन्‍होंने 2000 का उस अमाउण्‍ट में आप देखेंगे, सबसे इंटरेस्टिंग जो अमाउण्‍ट है इसमें सरेण्‍डर किया है वह सरेण्‍डर किया है इन्‍होंने रेवेन्‍यु चार्ज इंटरेस्‍ट पेमेण्‍ट में 109.58 करोड़ रुपये, सेक्रेटेरियट में 97.58 करोड़ रुपये, फोरेस्‍ट में 21.94 करोड़ रुपये, सेल्‍स-टैक्‍स में 37.19 करोड़, पेन्‍शन एण्‍ड अदर रिटायरमेंट व्‍यय में 33.19 करोड़ रुपये, हाउसिंग में, रेवेन्‍यु वोटेड में 24.29 करोड़ रुपये, एजुकेशन, आर्ट, कल्‍चर में रेवेन्‍यु वोटेड में 319.95 करोड़ रुपये। मेडिकल पब्लिक हैल्‍थ सेनिटेशन में रेवेन्‍यु वोटेड में 101.6 करोड़ रुपये, ट्राइबल एरिया डवलपमेंट में रेवेन्‍यु वोटेड में 74.62 करोड़ रुपये, सोशल सिक्‍योरिटी एण्‍ड वेलफेयर में रेवेन्‍यु वोटेड में 109.11 करोड़ रुपये, रिलीफ फ्राम नेचुल केलेमिटी रेवेन्‍यु वोटेड में 46.29 करोड़ रुपये, मिस्लेनियस कम्‍युनिटी एण्‍ड इकानोमिक सर्विसेज में 57.96 करोड़ रुपये, माइनर इर्रिगेशन एण्‍ड सोइल कंजर्वेशन में रेवेन्‍यु वोटेड में 47.06 करोड़ रुपये, स्‍पेशल आर्गनाइजेशन एण्‍ड स्‍कीम्‍स फार वेलफेयर आफ शिडयूल्‍ड कास्‍ट, रेवेन्‍यु वोटेड में 36.71 करोड़ रुपये। इस तरह से 31 मार्च को 2057 करोड़ रुपये, रेवेन्‍यु वोटेड की बात कर रहा हूं, रेवेन्‍यु वोटेड का मतलब आपका सोशल सैक्‍टर में जितना इन्‍वेस्‍टमेंट है, जो आप प्रोजेक्‍ट कर रहे हैं उस प्रोजेक्‍शन में इस सरकार की एफिशियंसी होती तो मुझे आज समझायें कि जब आपको मालूम है कि एक्‍चुअल एक्‍सपंडीचर आपका 16 हजार है तो जब आपका ओरिजिनल ग्राण्‍ट में, सप्‍लीमेंट्री में गये, उससे पहले आपने बी.ई. की, आपने आर.ई. की। क्‍या आवश्‍यकता थी कि आप सप्‍लीमेंट्री डिमाण्‍ड में इसमें मांग करते, मैं समझता हूं रेवेन्‍यु वोटेड के जो मैंने हेड बताये, उनकी इफेक्टिव मोनिटरिंग नहीं होती। यदि इफेक्टिव मोनिटरिंग होती तो यह अमाउण्‍ट यह नहीं होता। और सबसे तकलीफ की बात है कि यह जो 05-06 का एक्‍चुअल है उसमें जो अमाउण्‍ट है, वह सप्‍लीमेंट्री का केवल मात्र 743.36 है। लेकिन उपाध्‍यक्ष महोदय, यह 06-07 की जो आपने पास कराई है, यह बताये सरकार कि यह 700 करोड़ की जगह अब आप 3215 करोड़ ग्राण्‍ट कैसे मान रहे हैं। जब आप रेवेन्‍यु वोटेड और यह सब सरेण्‍डर कर रहे हैं, 3 साल का पूरा है। आपकी पिछली जो सप्‍लीमेंट्री ग्राण्‍ट है, वह केवल मात्र 743.46 करोड़ की है। 04-05 की जो आपकी सप्‍लीमेंट्री ग्राण्‍ट है वह केवल मात्र आपकी जो सप्‍लीमेंट्री ग्राण्‍ट है वह केवल 1234 करोड़ रुपये की है। अब मुझे बतायें कि इस सरकार का इतना एफिशिएंट मैनेजमेंट है तो यह सप्‍लीमेंट्री ग्राण्‍ट 2006-07 में 3215 करोड़ रुपये क्‍यों हो रही है जबकि चार्ज में केवल मात्र 6 करोड़ रुपये है। तो चार्ज का तो है नहीं इसमें। यह जो आपका मेजर अमाउण्‍ट है 3208 करोड़ 98 लाख 9 हजार, यह टोटल अमाउण्‍ट है रेवेन्‍यु वोटेड और कैपिटल वोटेड का। अब रेवेन्‍यु वोटेड और कैपिटल वोटेडर की मैंने आपको फिगर दिये हैं, 02-03, 04-05, 05-06 के कि यह सरकार 31 मार्च को इतना बड़ा अमाउण्‍ट सरेण्‍डर करती है। इसका मतलब, हम पब्लिक को, केवल मात्र पब्लिक को यह बताने के लिये कि हमारी प्‍लान साइज बढ़ गयी है, प्‍लान साइज बढ़ाने के नाम पर हम एक तरफ तो असेम्‍बलि में वोटेड ले लेते हैं और लेने के बाद में 31 मार्च को हम सरेण्‍डर कर देते हैं। यह अच्‍छा होता उपाध्‍यक्ष महोदय, कि सरकार ने जैसे चार्ज्‍ड अमाउण्‍ट को कम किया, वैसे सरकार यह रेवेन्‍यु वोटेड जो अमाउण्‍ट है उस अमाउण्‍ट को कम करती। तब उसकी जो पब्लिक के प्रति, जो गरीब आदमी के प्रति, जो सबको खुश करके लोगों के प्रति हमारी जो स्‍कीम बनाई है, जो पापुलर बजट की बात कही है, जिसमें कहा कि गरीब आदमी को हम मदद करेंगे। जिसमें शिड्यूल्‍ड कास्‍ट और ट्राइब्‍स की आकांक्षाओं को बढ़ाया है। जिसमें यह कहा गया है कि हम गरीब आदमी के प्रति अपने आप में समर्पित हैं, महिलाओं के प्रति समर्पित हैं। इस बजट में उपाध्‍यक्ष महोदय 1251 करोड़ रुपये का प्रोविजन करके वाह-वाही ले रहे हैं और इधर एवरी-यीअर 31 मार्च को 2000 करोड़ रुपये आप सरेण्‍डर कर रहे हो रेवेन्‍यु वोटेड के अन्‍दर। और वह भी आप कर रहे हो केवल मात्र सोशल सेक्‍टर के अन्‍दर। इसका मतलब यह है कि जिस फाइनेंशियल मेनेजमेंट की बात कर रहे हैं उस फाइनेंशियल मेनेजमेंट में आज भी, उपाध्‍यक्ष महोदय, आप जानकर आश्‍चर्य करेंगे जो मैंने 04-05 के बताये, आज भी 05-06 के अन्‍दर वही की वही स्थिति है। वही के वही एक्‍सेज हो रहे हैं। वही ग्राण्‍ट में आप अमाउण्‍ट सेंक्‍शन कर रहे हैं और उसके बाद उपाध्‍यक्ष महोदय, वह का वही हो रहा है। तो मैं आपका ध्‍यान आकर्षित करना चाहता हूं, जिससे यह आपको ध्‍यान में रहे कि यह सरकार जो अभी कर रही है वह यह का यह 06-07 में होगा। उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको बताना चाहता हूं unnecessary/excessive/inadequate supplementary provisions, यह 04-05 में भी था, 05-06 में भी है – “Supplementary provisions of Rs. 142.86 crore made in 12 cases during the year proved unnecessary as the expenditure did not come up to the level of original  provisions in view of saving of Rs. 238.36 crore as detailed in Appendix – VIII. In 12 cases, supplementary grants of Rs. 321.42 crore were obtained against additional requirement of only Rs. 219.90 crore, resulting in savings in each case exceeding Rs. One crore, aggregating Rs. 101.52 crore. Details of these cases are given in Appendix – IX. In four cases, supplementary provision of Rs. 113.68 crore proved short of requirement by more than Rupees one crore in each case leaving an uncovered excess expenditure of Rs. 48.41 crore as per details given below: ..” उपाध्‍यक्ष महोदय, इसमें रेवेन्‍यु वोटेडर में मांग संख्‍या 21- रोड एण्‍ड ब्रिज में है, मांग संख्‍या 27- ड्रिंकिंग और वाटर स्‍कीम में है। केपिटल वोटेड में रोड एण्‍ड ब्रिज में है और 42- इण्‍डस्‍ट्रीज में है। इसके अलावा “Significant excesses were persistent in three cases involving two grants as detailed below: 21-Roads and Bridges (Revenue-Voted) –in the year 2003-04, it was Rs. 2.67 crore, in the year 2004-05, it was 18.66 crore and in the year 2005-06 it was 17.73 crore. In the capital-voted, in the year 2003-04, it was Rs. 1.85 crore, in the year 2004-05, it was 17.37 crore and in the year 2005-06 it was 7.08 crore. 27-Drinking Water Scheme (Revenue-voted) – in the year 2003-04 it was 0.41 crore, in the year 2004-05 it was Rs. 15.46 crore and in the year 2005-06 it was 18.42 crore.” कंजीक्‍यूटिव 3 साल में, उपाध्‍यक्ष महोदय, एक्‍सेज है और हम कहते हैं, हमारा मेनेजमेंट अच्‍छा है। हम बहुत इसको ध्‍यान से देख लें.

उपाध्‍यक्ष महोदय, Injudicious re-appropriation of funds. “In six cases, additional funds of Rs. 137.44 crore provided through re-appropriation proved unnecessary in view of final savings of Rs. 47.18 crore as indicated in Appendix-XI. In 14 cases, the withdrawal of Rs. 214.80 crore through re-appropriation proved excessive as the final expenditure exceeded the reduced Major Head by Rs. 38.40 crore as indicated in Appendix-XII. In seven cases, additional funds of Rs. 51.48 crore provided through re-appropriation proved insufficient as the final expenditure exceeded the augmented Head by Rs. 46.67 crore as indicated in Appendix-XIII. In 14 cases, the savings were not properly assessed as even after the withdrawal of Rs. 175.25 crore through re-appropriation there was a final saving of Rs. 40.26 crore as indicated in Appendix-XIV.”

Anticipated savings not surrendered. उपाध्‍यक्ष महोदय, 04-05 में भी सरेण्‍डर नहीं किया और 05-06 में एंटीसिपेटेड सेविंग्‍स कितनी हैं – “According to Rajasthan Budget Manual, Departments are required to surrender the grants/appropriations or portion thereof to the Finance Department as and when the savings are anticipated.  However, at the close of the year 2005-06, there were 18 cases in which after partial surrenders, savings of Rs. one crore and above in each case aggregating Rs. 120.96 crore remained unsurrendered. Details are given in Appendix – XV.”

 

 

 

 

Vps-usc-20032007-1540-2n

 

अध्‍यक्ष महोदय, इन द ईयर 2004, आपका विभाग मोनेटरिंग कर रहा है उसके बाद भी उस पर सरेण्‍डर नहीं हो रहा है। इन द ईयर 5-6 में भी सरेण्‍डर हो रहा है and what is the guarantee that in the year 2006-07 or 07-08 आप सरेण्‍डर को कण्‍ट्रोल कर पाएंगे मैं समझता हूं माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, it indicates, how the department is functioning and what is the control of the department. “Besides, in 22 cases of 19 grants and two appropriations, Rs. 4,895.20 crore (95.5 per cent) were surrendered (exceeding Rs. 20 crore in each case) on the last working day of March 2006, out of total surrender of Rs. 5,125.80 crore, indicating inadequate financial control over expenditure.” The words are, “…indicating inadequate financial control over expenditure.” “Details are given in Apendix – XVI.”

“Injudicious surrender of funds. In three cases, the amount surrendered (at least Rs. One crore) was in excess (more than five per cent of savings), which indicated inefficient budgetary control. It was noticed that as against the total available savings of Rs. 68.92 crore, the amount surrendered was Rs. 74.66 crore, resulting in excess surrender of Rs. 5.74 crore as detailed below: ..” In Sales Tax, the amount surrendered in excess was 2.85 crore, in Public Works it was 1.20 crore and in Housing it was 1.69 crore. टोटल 5.74 करोड़ एक्‍सेस में सरेण्‍डर कर दिया। “In four cases, Rs. 11.84 crore were surrendered though there was excess expenditure as indicated below: ..” आपका एक्‍सेस भी था फिर भी सरेण्‍डर कर दिया, कितना बड़ा कण्‍ट्रोल है ? माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह है इसमें रेवेन्‍यू मद में, रोड एण्‍ड ब्रिज में 16.41 crore. Amount surrendered was 1.83 crore. Drinking water scheme, .26 crore. In the capital voted – Roads and Bridges, 2.69 core and in the industry, it was 7.06 crore. Total amount is 11.84 crore.

“Full or substantial portions (more than 50 per cent of total provision) of the supplementary provisions obtained under the following heads of account on 25 March 2006 were surrendered/re-appropriated on 31 March 2006, thus indicating inaccurate budgeting: …” … “In three cases of Grant Nos. 30, 33 and 42 entire provisions were re-appropriated/surrendered. In one case (Grant No. 29) supplementary provision of Rs. 0.01 lakh was obtained without any necessity resultantly the funds were not fully utilised and surrendered/re-appropriated to other heads on the last working day (31 March 2006) of the financial year.”

“Rajasthan Budget Manual envisages that Government expenditure should be evenly distributed throughout the year. Rush of expenditure particularly in the closing month of a financial year shall be regarded as breach of financial regularity and should be avoided. Contrary to this, in respect of 10 Heads of Account, expenditure exceeding Rs. 92 crore ranging between 79.5 and 100 per cent of the total expenditure for the year was incurred in March 2006. This includes three cases where entire expenditure was incurred during March 2006. Details are given in Appendix – XVII.”

Non-reconciliation of accounts. यह भी माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, अकाउंट तब भी री-कंसाइल नहीं है इसलिए मैं आपका ध्‍यान, सदन का ध्‍यान इस सरकार के इफेक्टिव बजट मेनेजमैंट पर ध्‍यान आकर्षित करना चाहता हूं। इस जनता को हम बजट मेनेजमैंट के नाम पर माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, हमारा फाइनेंशियल मेनेजमैंट बहुत अच्‍छा है, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, फाइनेंशियल मेनेजमैंट, मैं फिर रिपीट कर रहा हूं, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आज जो स्थिति बनी हुई है, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, फिस्‍कल डेफिसिट डिपेंड करता है जी.डी.पी. पर। इस बार राजस्‍थान में बरसात भी हुई, तूफान भी आया, ओले भी पड़े, इस बार एग्रीकल्‍चर की, खेती खराब हुई है, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आप क्‍या यह असेस करवा कर आएंगे, यह जी.डी.पी. घटेगी और राजस्‍थान का फिस्‍कल डेफिसिट ठीक नहीं होगा?

श्री तगाराम चौधरी (बाड़मेर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इतना ओवर ड्राफ्ट करने वाले यह ... (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, फिस्‍कल डेफिसिट को बंद करने के लिए, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, सरकार को अपना रेवेन्‍यू बनाना बढ़ेगा। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान सरकार टैक्‍स से रेवेन्‍यू नहीं बनाना चाहती है। राजस्‍थान सरकार एग्रीकल्‍चर से अपने इन पुट को बढ़ाना चाहती है। पिछले चार साल से राजस्‍थान का एग्रीकल्‍चर स्‍टेगनेंट है। आपने कुओं को भी एनेर्जाइज किया है? आपने इर्रिगेशन का पोटेंशियल बढ़ाया है? तब भी आपका रबी और खरीफ का जो पोटेंशियल है, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, वह आपका बढ़ा नहीं है। आपकी जो रेवेन्‍यू की बोयंसी है, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, वह रेवेन्‍यू की बोयंसी न केवल राजस्‍थान में थ्रू आउट इंडिया एवरी स्‍टेट में भारत सरकार का भी है, उसके बाद भी राजस्‍थान सरकार की सॉफ्ट ऑप्‍शन है, इनकी हिम्‍मत नहीं है कि टैक्‍स लेकर हम जनता के लिए काम करें। यह केवल मात्र ज्‍यादा पैसा लेकर सस्‍ती वाहवाही लूटने के लिए इस राजस्‍थान को आने वाले समय में ट्रेप में डालना चाहते हैं, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, क्‍योंकि आज रेवेन्‍यू बोयंसी होने के बाद भी, आपका जो अमाउंट देना है वह अमाउंट माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, 74 हजार करोड़ रुपया आपका हो गया है। आपको जो पर एनम पैसा देना है पाँच हजार करोड़ रुपये वह आपका कम नहीं हो रहा है माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, अच्‍छा होता यह सरकार उस अमाउंट को कम करती। अच्‍छा होता यह सरकार जी.डी.पी. बढ़ाने के साथ-साथ रेवेन्‍यू जनरेट करने के संबंध में भी कोई काम करती। तब मैं समझता माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह सप्‍लीमैंट्री मांग जो हम कर रहे हैं वह एक्‍चुअल फिगर आते। मुझे कहते हुए यह तकलीफ है, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह समय है राजस्‍थान सरकार को, चाहे सरकार हमारी हो, चाहे किसी की भी सरकार हो, बजट के संबंध में एफिकेसी से अपना मोनेटरिंग करना चाहिए जिससे हर पैसे का जुडिशस उपयोग हो सके और राजस्‍थान सरकार को हम विश्‍वास, जनता को हम विश्‍वास दिला सकें कि यहां जो सदन में हम बैठे हुए लोग हैं वे जुडिशस इस काम को करते हैं। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, हम बजट से पहले सी.ए.जी. की रिपोर्ट देवे नहीं। सप्‍लीमैंट्री की डिमांड को हम डिस्‍कस नहीं करें। मैं समझता हूं कि यह जो हमारा सबसे बड़ा इम्‍पोर्टेंट काम है, उस काम को हम ले करते हैं। इसलिए मेरी इच्‍छा, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह है कि हम सब साथी मिलकर इस पर ज्‍यादा से ज्‍यादा ध्‍यान दें। ब्‍यूरोक्रेसी के भरोसे नहीं रहे, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं अन्‍त में कहना चाहता हूं कि इस राजस्‍थान के फाइनेंस डिपार्टमैंट का रिकार्ड उठाकर देख लीजिए। राजस्‍थान सरकार का जो बजट आफिसर है, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, वह दाई है इसका। वह दाई बनता है। तो रिवार्ड मिलता है। जो भी बजट आफिसर रहा है वह आई.ए.एस. आफिसर बना है। क्‍यों बना है? हम पोलिटिकल लीडरशिप वाले इतने इनकॉम्‍पीटेंट हैं, हम अपनी बातों को उनके सामने रख नहीं सकते, वे हमको जो सजेश कर रहे हैं, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, उनको ही हम प्रोविजन करके बात कर रहे हैं इसलिए उसको रिवार्ड करने के लिए, चीफ सैक्रेटरी को भी रिवार्ड करना पड़ता है। हमको भी रिवार्ड करना पड़ता है इसलिए आप उठाकर देख लीजिए माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, एक चीज में कंसिस्‍टेंसी है, राज किसी का भी हो, जो बजट आफिसर बनेगा वह आई.ए.एस. आफिसर बनेगा, यह कंसिस्‍टेंसी है, चाहे पैसा वह 31 मार्च को सरेण्‍डर करें। चाहे वह सोशल सैक्‍टर में सरेण्‍डर करें, चाहे गरीब आदमी के गले का घंटा, उठाकर करें, यह हमारी पोलिटिकल लीडरशिप की कमजोरी है। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इस कमजोरी को यदि हम दूर नहीं करेंगे, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, तो हम अपनी जिम्‍मेदारी को जो जनता ने हमें दी है उसको पूरा नहीं कर सकेंगे। इसी भावना से मैं कहना चाहता हूं, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आशा करता हूं कि यह जो सप्‍लीमैंट्री सरकार ने अभी जो ली है उस सप्‍लीमैंट्री में ध्‍यान रखेंगे कि इनका जितना प्रोविजन है, सप्‍लीमैंटी में उससे एक्‍सेस नहीं हो। यह ध्‍यान रखेंगे कि जितना अमाउंट इनको सरेण्‍डर करना है वह टाइमली उसमें जमा हो जाए। यह कोशिश करेंगे कि बारबार जो जिन डिपार्टमैंट, मांगों  में आपका कंसिस्‍टेंस, आपका एक्‍सेस बढ़ता जा रहा है इनके संबंध में ध्‍यान देकर भविष्‍य में ऐसी स्थिति नहीं बनेगी और जब अगली बार हम सप्‍लीमैंट्री लेकर आये तब सदन के सामने यह कह सकें कि इस सरकार ने इन सब चीजों पर ध्‍यान रखा है और यह जो हैड हैं, इन हैड को उन्‍होंने कम किया। मैं समझता हूं कि तब हमारी यह सप्‍लीमैंट्री डिमांड और यह जो हमारा विनियोग विधेयक जो हम आज पास कर रहे हैं उसकी कोई सार्थकता है, अन्‍यथा माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपने देखा कि 700 करोड़ से यह सरकार 3200 करोड़ रुपये के लगभग में नया सप्‍लीमैंटी ग्रांट लेकर आ रही है, इसका मतलब न तो इनके पास कोई आशा है। यह डिपेंड कर रहे हैं भारत सरकार से कितना पैसा मिलेगा। एक-एक टोकन हैड क्‍या है एक-एक का, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मुझे जानकर आश्‍चर्य होता है माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आप डिटेल में जाएंगे तो एक-एक का टोकन हैड क्‍या है उस टोकन हैड के आधार पर यह आशा कर रहे हैं, हमें पैसा मिलेगा। नहीं पैसा मिलेगा तो फिर 31 मार्च को इनको सरेण्‍डर करना पड़ेगा। वह फिगर माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आयेगा वह हम सबके लिए ठीक नहीं होगा। इन्‍हीं भावनाओं के साथ मेरी इच्‍छा थी माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, कि हम इस पर सदन में चर्चा करें और चर्चा करने के बाद यदि हम इन चीजों को कण्‍ट्रोल कर सकें, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, तो विनियोग विधेयक की चर्चा करना हमारे लिए सार्थक होगा और बाकी तो हमारे तगारामजी बैठे हुए हैं। इनसे फाइनेंस का काम करवा लो। सरकार बहुत अच्‍छी चलेगी।

श्री तगाराम चौधरी (बाड़मेर): यह हमेशा की ही बात है। ... (व्‍यवधान) एक समय की बात नहीं है, हमेशा की बात है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): जिस प्रकार से सरकार चल रही है इसमें मेरी इच्‍छा यह है कि माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह मंत्री बनने के लिए बहुत ही लालायित हैं। इनको वित्‍त मंत्री बना दिया जाए तो कम से कम राजस्‍थान की जो वित्‍तीय स्थिति है, उसका कुशल प्रबंधन होगा। रिफायनरी भी लग जाएगी और राजस्‍थान के लोगों को खुशहाली आएगी। मैं समझता हूं कि राजेन्‍द्र सिंहजी राठौड़ साहब, इनकी भावना को समझेंगे और कुशल प्रबन्‍धन में इनके ज्ञान का भी लाभ लेकर इस राजस्‍थान को आगे बढ़ाने का काम करेंगे। आपने सुना उसके लिए धन्‍यवाद।

श्री तगाराम चौधरी (बाड़मेर): खुशहाली तो आएगी।

श्री उपाध्‍यक्ष: धन्‍यवाद। माननीय सदस्‍य।  मंत्री महोदय।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, ... (व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): पाइंट आफ आर्डर। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा पाइंट आफ आर्डर है। मेरा पाइंट आफ आर्डर है। आप कृपया, स्‍थान ग्रहण करें। You may reject it.

राज्‍य मंत्री, वित्‍त यहां पर बैठे हुए हैं जिन्‍होंने बिल को पायलट किया है। जवाब देने के लिए पार्लियामैंट्री अफेयर्स मिनिस्‍टर साहब खड़े हो जाते हैं। मुझे अफसोस है। आज तीन साल होने को आये। कब नये लड़के सीख़ेंगे? क्‍यों नहीं तैयार कराते हैं? आप जवाब दिलवाइये उनसे। कहां दिक्‍कत आ रही है? पढ़ा-लिखा है वह। यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर, लेक्‍चरर थे। आप हर चीज में खड़े हो जाते हैं जवाब देने के लिए। आप गये वहां गैलरी के अन्‍दर और लिखवाकर लाये और घिसा-पिटा दे देंगे। आप फाइनेंस के बारे में, वे जानते हैं वहां पर फाइलें आती हैं उनके पास। मेरा तो यह है, आखिर जोइंट रेस्‍पांसिबिलिटी है, यह मैं मानता हूं, कोई मंत्री जवाब दे सकता है, any one can reply, लेकिन एक अच्‍छी परम्‍परा यहां पर आप नहीं डाल रहे हैं। अच्‍छी परम्‍परा नहीं डाल रहे हैं। संसद के अन्‍दर भी वित्‍त राज्‍य मंत्री जवाब देते हैं। कई मामलों में जवाब देते हैं लेकिन आप यह मत करिये। आप मत करिये, भगवान के लिए, उनसे जवाब दिलवाइये जो आपको लिखकर दिया है उनको दे दीजिए।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): वह पढ़ देंगे। आप भी तो पढ़ेंगे और क्‍या करेंगे?

श्री उपाध्‍यक्ष: पहले यह थोड़ा, पहले विचार कर लिया गया था कि इस पर बहस नहीं करेंगे।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, एक मिनट आप विराज जाएं तो मैं जवाब दे दूं। ... (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): वित्‍त राज्‍य मंत्री काम्‍पीटेंट नहीं हैं क्‍या?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): एक मिनट, डाक्‍टर साहब, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह भी नई परम्‍परा आज ही कायम हुई है, हम कार्य सलाहकार समिति में जो भी निर्णय करते हैं, पूरा हाउस उसी के अनुसार रेगुलेट होता है। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपको स्‍मरण होगा कि कार्य सलाकार समिति में राजाखेड़ा से आने वाले माननीय सदस्‍य भी विराजे थे।

 

spp/akt/15.50/2o/20.3.2007(1)

 

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): उपाध्‍यक्ष महोदय, अध्‍यक्षजी ने व्‍यवस्‍था दे दी उसके बाद आप इसको क्‍या कर रहे हैं ? अध्‍यक्षजी सर्वोपरि है। अध्‍यक्षजी ने कह दिया कि मैं कार्य सूची से पाबन्‍द हूं, फिर उसी बात को आप दुबारा दोहरा रहे हैं।  उपाध्‍यक्ष महोदय, पहले इन्‍होंने मुद्दा उठाया था, उस पर अध्‍यक्षजी ने रिजेक्‍ट कर दिया और अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍था देदी, उसके बाद दुबारा फिर उसी बात को उठा रहे हैं।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): कार्य सलाहकार समिति में जो कुछ डिस्‍कस हुआ, उसको आप यहां बोल नहीं सकते संसदीय कार्य मंत्रीजी। उन बातों को आप यहां उठा नहीं सकते।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): यहां पर कार्य सलाहकार समिति की मीटिंग के बारे में सदन में कोई बात नहीं हो सकती। कार्य सलाहकार समिति का प्रतिवेदन मुख्‍य सचेतक या उप मुख्‍य सचेतक रखते हैं और सदन में आसन पर बैठा व्‍यक्ति उसको पारित कराता है। उपाध्‍यक्ष महोदय, आपको ध्‍यान नहीं है, माननीय संसदीय कार्य मंत्री महोदय ने यह आपत्ति माननीय अध्‍यक्ष जी के समक्ष रखी थी। अध्‍यक्षजी ने उसको निरस्‍त कर दिया, व्‍यवस्‍था देदी कि मैं आज की कार्य सूची से पाबन्‍द हूं। अब उसी बात को वापस दोहरा रहे हो। आप आसन द्वारा दी गयी व्‍यवस्‍था को फिर से चुनौती देना चाहते हो, क्‍या मकसद है आपका ?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आसन की व्‍यवस्‍था सर्वोपरि है, उसकी व्‍यवस्‍था को चुनौती देने की कोई मंशा नहीं है, पर राजाखेड़ा से आने वाले माननीय सदस्‍य से मैं निवेदन करना चाहूंगा । पहले सरकार यह सोच रही थी कि कार्य सूची का निर्णय है, मुखबंद करके, फाइनेंस बिल भी पारित होना है और सप्‍लीमेंट्री डिमांड भी पारित होनी है, इसलिए उपाध्‍यक्ष महोदय, मुझे कहने में कोई संकोच नहीं है, हम वैसे तैयार होकर नहीं आये, यह तो चूंकि नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य डिफेक्‍टो लीडर ऑफ अपॉजिशन है, यह चाहते हैं वैसे विधान सभा में चलाते हैं। इसलिए ऐसे जिद पकड़ ली, जिद पकड़ ली तो फिर आसन ने आज्ञा देदी। आसन ने आज्ञा दे दी तो जितनी जानकारी मैं समझता हूं, पूरी जानकारी नहीं होगी, पर जितनी जानकारी तात्‍कालिक रूप से घण्‍टे, दो घण्‍टे में मैं प्राप्‍त कर सकता था, जो मेरे विद्वान वित्‍त राज्‍य मंत्री ने मुझे दी है, उसी के अनुसार मैं कोशिश करूंगा कि मैं उनकी बात का जवाब दूं।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): आप उन विद्वान को ही जवाब देने दो ना।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह : आप मेरे पाइंट आफ आर्डर का निस्‍तारण करें और यह भी आप कृपया मिथ्‍या भाषण न करें कि उन्‍होंने मुझे दी है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): उपाध्‍यक्ष महोदय, मंत्रिमण्‍डल के कई सदस्‍य तो ऐसे हैं जिनको हमने या तो बैठे देखा है या चलते देखा है, उनके श्रीमुख से एक शब्‍द भी नहीं सुना। ऐसे-ऐसे शो-पीस भी हैं यहां।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह : उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं स्‍वयं आई विटनैस हूं। मैं यहां से देख रहा हूं। उन्‍होंने कहीं नहीं दी। यह अधिकारी दीर्घा में गये और अधिकारी दीर्घा के अंदर जो उनके पास कागज तैयार थे, वह प्राप्‍त किये। आप उनको ही दे देते। मैं तो आपसे कह रहा हूं आप सीनियर हैं। यह यंगस्‍टर्स कब सीखेंगे ? आप हर चीज में दखलदांजी मत दीजिये। .....(व्‍यवधान)....

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): वीरेन्‍द्र जी की थोड़ी तबीयत ठीक नहीं है इसलिए यह दे रहे हैं।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): उपाध्‍यक्ष महोदय, वित्‍त राज्‍य मंत्री जो जवाब देंगे, हम संतुष्‍ट रहेंगे। कोई सवाल-जवाब नहीं करेंगे। ..(व्‍यवधान)...आपको यह आश्‍वस्‍त करते हैं कि कोई सवाल जवाब नहीं करेंगे। ...(व्‍यवधान)...

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): उपाध्‍यक्ष महोदय, हाउस में पेपर ले किये थे, क्‍या यह आपने हाउस में ....(व्‍यवधान)....

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): आप तो विद्वान हो। ...(व्‍यवधान)....

श्री ओ.पी.महेन्‍द्रा (सरकारी उप मुख्‍य सचेतक) : नगर से आने वाले माननीय सदस्‍य, हमें आपका भी ख्‍याल है। आपका भी स्‍वास्‍थ्‍य खराब है, थोड़ा धीरे ..(व्‍यवधान)...

श्री प्रद्युम्‍न सिंह : आपका यह व्‍यवहार नौजवानों के प्रति, एस.टी. के मंत्री के प्रति अशोभनीय व्‍यवहार है यह आपका। ...(व्‍यवधान)...

श्री जीतराम (मालपुरा): उपाध्‍यक्ष महोदय, परम्‍परा की बात कर रहे हैं, परम्‍परा तो रही है आज तक लोक सभा में ......(व्‍यवधान) ...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): नाथूसिंह जी हैं, नाथूसिंह जी से दिला दो..(व्‍यवधान)...इस सरकार ने यह फैसला तो कर ही लिया है कि मंत्री के समकक्ष आदमी को हम कर सकते हैं तो बेस्‍ट पार्लियामेंटेरियन भी हैं, बाकी तगाराम जी से दोनों का जवाब दिला दो, जरूरत ही नहीं है, मान लिया दोनों का जवाब।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): मेरी तगाराम जी से कहां तुलना कर रहे हो, कृपा करो मेरे ऊपर तो।

श्री तगाराम चौधरी (बाड़मेर): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैंने गलत कहां कहा है ? ....(व्‍यवधान)... लेकिन कर्जा लेने वाली प्रथा क्‍या अभी अभी चली है क्या ?

श्री जीतराम : आज तक परम्‍परा रही है कि लोक सभा के चुने हुए को प्रधान मंत्री ने पहली बार .......(व्‍यवधान)....

श्री तगाराम चौधरी (बाड़मेर): प्रभारी का जहां तक सवाल है, प्रभारी हैं और ...(व्‍यवधान)...

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): उपाध्‍यक्ष महोदय, यह कागज पुर:स्‍थापित तो करें तब तो तबीयत ठीक और उसका जवाब देओ आप ..(व्‍यवधान)....

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): उपाध्‍यक्ष महोदय, नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य ने मेरे बारे में कहा यह जवाब दे सकते हैं। मैं चाहूं तो इनकी एक एक चीज का जवाब दे सकता हूं। यहां पूर्व वित्‍त मंत्री बैठे हुए हैं, यह भी इस तरह की सप्‍लीमेंट्री डिमाण्‍ड्स लेकर आये कि नहीं, पहले तो इसका जवाब दें। मेरे पास आंकड़े हैं अभी निकालकर बताऊंगा कि इन्‍होंने कितना खर्च नहीं किया है। मैं यह जवाब दे सकता हूं ..(व्‍यवधान)....

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): आपकी योग्‍यता और विद्वता को नहीं मान रही हैं, हम तो आपकी योग्‍यता को मानते हैं। आपकी नेता आपकी योग्‍यता को मान्‍यता नहीं दे रही हैं।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): उपाध्‍यक्ष महोदय, यह टोडारायसिंह से आने वाले माननीय सदस्‍य ही तो कहते हैं कि अध्‍यक्ष और आयोगों के चेयरमैन को मंत्री बनाकर भेजा है, जगह खाली है और हमको नहीं बना रहे हैं और अब खुद यह बात कह रहे हैं कि इनका जवाब दे सकते हैं। आप ही तो कहकर बुलवाते हो और आप ही एतराज करते हो, वाह भाई वाह।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, सदन में राजस्‍थान विनियोग (संख्‍या-1) विधेयक, 2007 पर विचार हो रहा है। उपाध्‍यक्ष महोदय, यह सही है कि इस विधेयक के माध्‍यम से सरकार 3,215 करोड़ 86 लाख 63 हजार रुपये की सप्‍लीमेंट्री डिमाण्‍ड लेकर आई है। उपाध्‍यक्ष महोदय, इसमें यह भी सही है कि इसमें 6 करोड़ 88 लाख 54 हजार चार्ज्‍ड है और 3,208 करोड़ 98 लाख रुपये वोटेड है। उपाध्‍यक्ष महोदय, यह कोई नई बात नहीं है । यह सदन की परम्‍परा रही है, यह राजस्‍थान ही नहीं पूरे हिन्‍दुस्‍तान के अंदर जब कभी बजट पारित होता है, सदन के सम्‍मुख वित्‍तीय लेखे प्रस्‍तुत किये जाते हैं और आय-व्‍ययक लेखों के बाद पूरे वर्ष के अदंर आकस्मिक व्‍यय भी होते हैं, जरूरत और उपयोगिता के अनुसार खर्चे भी करने पड़ते हैं।

मैं यह निवेदन करना चाहता हूं यह जो कह रहे हैं सप्‍लीमेंट्री के लिये, ऐसा कोई वर्ष नहीं जब सप्‍लीमेंट्री डिमाण्‍ड नहीं आई हो और सप्‍लीमेंट्री डिमाण्‍ड के बाद बचत नहीं रही हो। मैं नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य से निवेदन करना चाहूंगा 2001 में आपकी बी.ई.थी 2,649 करोड़ की, सप्‍लीमेंट्री आप लेकर आये 7,676 की और उसके बाद बचत थी इनकी 1,782 यानि कोई ऐसा वर्ष नहीं रहा जब सप्‍लीमेंट्री भी आई है और सप्‍लीमेंट्री के बाद भी बचत किसी न किसी रूप में हुई है। मैं यह निवेदन करना चाहूंगा यह सरकार जब से आई है और इस सरकार के वित्‍तीय प्रबन्‍धन के लिये माननीय सदस्‍य ने कई टीका-टिप्‍पणी की। मैं उन बातों पर लम्‍बा जाना नहीं चाहता। पर जिस सरकार के वित्‍तीय प्रबन्‍धन के कारण भारत सरकार, जो सरकार इनकी सरकार है, 2003-04 के अंदर 59 करोड़ रुपये नये प्रोत्‍साहन राशि के रूप में, इसलिए कि वित्‍तीय प्रबन्‍धन अच्‍छा है और 2004-05 के अंदर सात करोड़ रुपये दे ..(व्‍यवधान)...लिखा हुआ नहीं पढ़ रहा । उपाध्‍यक्ष महोदय, आज राजस्‍थान की सरकार अपने वित्‍तीय प्रबन्‍धन के कारण 438 करोड़ रुपये इनीशियेटिव के रूप में भारत सरकार से प्राप्‍त करने की हकदार हो गयी है, जो अभी भारत सरकार दे नहीं रही है। उपाध्‍यक्ष महोदय, यहां मामला राजस्‍व खाते में बचत की बात इन्‍होंने कही, आंकड़े लेकर कही। उपाध्‍यक्ष महोदय, अब इस पूरे राजस्‍व खाते के अंदर जो राजस्‍व प्राप्तियां होती हैं उसके अंदर हमारे ओन टैक्‍स रेवेन्‍यू, नोन टैक्‍स रेवेन्‍यू सरकार का खुद का, इसके अलावा इसके अंदर सेंट्रल स्‍पोंर्स्‍ड स्‍कीम का पैसा भी है। अब सेंट्रल स्‍पोंर्स्‍ड स्‍कीम का पैसा रिलीजीज मिलती है भारत सरकार से और उसके रिलीजीज के साथ साथ राजस्‍थान सरकार का राज्‍यांश होता है। अब राज्‍यांश और भारत सरकार की रिलीजीज है अगर यह विलम्‍ब से मिले तो हमारे पास उसका चारा क्‍या है ? या तो हम उन योजनाओं के अनुसार खर्च नहीं करें, इसलिए उपाध्‍यक्ष महोदय, इसका यह भी एक कारण रहता है और उपाध्‍यक्ष महोदय, कई बार कर्मचारियों के अलाउंसेज देते हैं, इन अलाउंसेज के अंदर भी कई बार बचत भी हो जाती है और कई बार आधिक्‍य भी हो जाती है। इसलिए मैं निवेदन करना चाहूंगा कि यह कहना कि सप्‍लीमेंट्री डिमाण्‍ड लेकर आये और उसके बाद सरेण्‍डर भी किया। 2003-04 की बात कर रहा हूं। बचत थी मात्र 542 करोड़ रुपये, जबकि 2002-03, यह जो बचत थी यह 2016 करोड़ रुपये और 2005-06 के अंदर यह बचत हुई 340 करोड़ रुपये, मतलब राजस्‍थान की सरकार, आपने जो सवाल उठाया, निरन्‍तर प्रयास के अंदर है कि यह जो बचत है, यह बचत कम से कम हो और हम पूरी कोशिश कर रहे हैं। अभी आपने यह कहा कि सप्‍लीमेंट्री डिमाण्‍ड और उसके बाद बी.ई., दोनों का अन्‍तर भी है । बी.ई.के अंदर जो राशि लेकर आते हैं उसके बाद सप्‍लीमेंट्री डिमाण्‍ड जब लेकर आते हैं दोनों का जो अन्‍तर है, कम से कम होना चाहिये। यह बात बहुत सही है और कोई ऐसा वर्ष नहीं रहा। दोनों का अगर प्रतिशत देखें तो मैं निवेदन करना चाहूंगा 2001 सप्‍लीमेंट्री डिमाण्‍ड से लेकर आप आये 8,437 करोड़ की और मूल बजट को जो प्रतिशत के रूप में देखें तो वह है 43.50 प्रतिशत, यह वित्‍तीय प्रबन्‍धन की बात कर रहे हैं। खुद के समय का देख नहीं रहे और आज 2006-07 के अंदर जो सप्‍लीमेंट्री डिमाण्‍ड हम लेकर आये हैं, मूल बजट का है 9.15 प्रतिशत।

Msr/usc/1600/2p/20032007

 

मतलब निरन्‍तर इस ओर, उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं कि सप्‍लीमेंट्री मैंने जो बताया कि तकनीकी कारणों के कारण लेनी आवश्‍यक होती है और बजट भी मांगवार है इसलिए यह वास्‍तविक व्‍यय विभिन्‍न में कितना हुआ इसका आंकलन, आडिट रिपोर्ट की बात यह कह रहे हैं, निश्चित रूप से आडिट रिपोर्ट के अन्‍दर जो बात आपने कही, पी.ए.सी. के परीक्षण करने की बात है, पी.ए.सी. के रिकमण्‍डेशन के बाद सरकार निश्चित तौर पर उस पर विचार करेगी। इसलिए मैं निवेदन करना चाहूंगा कि जिस तरह का वित्‍तीय प्रबन्‍धन सरकार का है उस वित्‍तीय प्रबन्‍धन में, उपाध्‍यक्ष महोदय, हम राजस्‍व घाटे की बात करें, निरन्‍तर कमी आयी है। राजस्‍व घाटे को सकल घरेलू उत्‍पात के अनुपात में देखें तो इनके अन्‍दर निरन्‍तर कमी आयी है। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, हमने अपने आपको बांधा है, एफ.आर.बी.एम. एक्‍ट के माध्‍यम से एक इस परिधि में बांधा है कि किस तरह हम वित्‍तीय अनुशासन में रहें और इस कारण जहां एक ओर हमने पूंजीगत परिव्‍यय को बढ़ाया, आपने अभी बात करी कि 74 हजार करोड़ रुपये ऋण हो जायेगा तो मैं निवेदन करना चाहूंगा कि ऋण आज की बात नहीं है, केन्‍द्र सरकार हो चाहे राज्‍य सरकार, आज कोई सरकार ऐसी नहीं है जो ऋण नहीं ले रही है। आवश्‍यकता इस बात की है कि इस ऋण का उपयोग किस तरह से हो रहा है, इस ऋण से परिसम्‍पत्तियां बन रही हैं या नहीं बन रहीं। मुझे यह कहते हुए हर्ष होता है, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, कि 2006-07, जिसकी चर्चा हम कर रहे हैं, जितना ऋण लिया उसमें 96.5 प्रतिशत की परिसम्‍पत्तियों का अर्जन करने का काम इस सरकार ने किया है जो अपने-आप में एक रिकार्ड है वरना पहले आप देखें, जो यह ऋण ले रहे थे और, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं कि अब ऋण भी लिया और ऋण के साथ-साथ हमने राजस्‍व घाटे को कम किया और फिस्‍कल डेफिसिट को कम किया।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, दसवीं पंचवर्षीय योजना जब बनी, दसवीं पंचवर्षीय योजना को जो वित्‍त पोषित किया गया उसके अन्‍दर 31831 करोड़ की योजना योजना बनी उसमें 31563 करोड़ ऋण लेकर उसको वित्‍त पोषित किया गया और यह जो ग्‍यारवहीं पंचवर्षीय योजना है, जो राजस्‍थान के विकास का मूल आधार है, जो राजस्‍थान के माथे से पिछड़ेपन के कलंक को पोंछने का एक शानदार अभियान है। इसके अन्‍दर जो योजना बनी है वो योजना बनी है 68,422 करोड़ की और उसमें ऋण लेकर पोषित किया मात्र 25,948 करोड़।

इसलिए, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहूंगा कि यह जो सप्‍लीमेंट्री डिमाण्‍ड लेकर आये हैं, यह कोई आज की बात नहीं यह लगातार सप्‍लीमेंट्री डिमाण्‍ड आती रही है और इस सप्‍लीमेंट्री डिमाण्‍ड के आधार पर यह सवाल खड़ना करना कि राज्‍य सरकार का वित्‍त प्रबन्‍धन ठीक नहीं है और राज्‍य सरकार ने एक तरफ से सप्‍लीमेंट्री डिमाण्‍ड ली और बचत भी की, यह पुराने समय के अन्‍दर भी जब-जब सप्‍लीमेंट्री डिमाण्‍ड आयी है तब बचत भी हुई है। इसलिए मेरा आपसे अनुरोध है कि इस वित्‍त विधेयक को पारित किया जाए।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से संसदीय कार्य मंत्रीजी से दो प्रश्‍न पूछना चाहता हूं। एक तो आपने वित्‍त आयोग को क्‍या आश्‍वासन दिया है कि आप फाइनेन्‍शल मैनेजमेंट ठीक करने के लिए राजस्‍व प्राप्तियां और ब्‍याज अदायगी में जो रेश्‍यो उन्‍होंने तय किया है उसको लाने में सक्षम होंगे और वह कितना प्रतिशत है? ...(व्‍यवधान)...

नहीं, यह वित्‍त मंत्री का काम कर रहे हैं इसलिए इनको पूछना जरूरी है।

दूसरा, मैं यह जानना चाहता हूं कि वर्ष 2006-07 में आपने कितनी ब्‍याज की अदायगी की और कितनी राजस्‍व प्राप्तियां कीं और उस रेश्‍यों में इन दोनों का क्‍या रेश्‍यो रहा?

श्री उपाध्‍यक्ष: प्रश्‍न यह है कि ...

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): क्‍या प्रश्‍न यह है, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, देखिये यह हाउस की प्रोपर्टी है, थर्ड स्‍टेज पर काई भी माननीय सदस्‍य प्रश्‍न कर सकता है।

श्री उपाध्‍यक्ष: कह दिया, बता दिया। अब इसके अन्‍दर ज्‍यादा चर्चा ...(व्‍यवधान)... बहस तो होनी नहीं थी।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): इन्‍होंने वित्‍त आयोग को आश्‍वासन दिया है कि हम राजस्‍व प्राप्तियों में और ब्‍याज अदायगी का प्रतिशत कम कर के फाइनेन्‍शल मैनेजमेंट ठीक करेंगे।

श्री अमराराम (धोद): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, वह उत्‍तर देने के लिए खड़े हैं।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): मैं जानना चाहता हूं कि इन्‍होंने क्‍या फाइनेन्‍शल मैनेजमेंट ठीक किया?

श्री उपाध्‍यक्ष: बता तो दिया ...(व्‍यवधान)...

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): बतायें कि इस साल जो राजस्‍व प्राप्तियां आपने प्राप्‍त की हैं और जो ब्‍याज अदायगी की है उसका रेश्‍यो क्‍या रहा है?

श्री तगाराम चौधरी (बाड़मेर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): तगारामजी, एक मिनट। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय।

श्री उपाध्‍यक्ष: नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य ने सुझाव दिया है।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): एक मिनट।

कल्‍ला साहब ने जो पूछा है, में आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि राजस्‍व प्राप्तियों का इन्‍ट्रेस्‍ट पेमेंट और राजस्‍व व्‍यय का रेवेन्‍यू ...

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): इनको बताने दो।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): मैं आपको प्रतिशत में बता देता हूं कितना-कितना है। मैं बता देता हूं।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): आपको अगर वसुंधराजी वित्‍त मंत्री का चार्ज दे दें तो आप जरूरत बताएं, हालांकि चार्ज तो इनके पास भी नहीं है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, 2006-07 की आर.ई. के अन्‍दर जो इन्‍ट्रेस्‍ट ओन रेवेन्‍यू रिसिप्‍ट है वह था 22.47 परसेंट। अब आप अपने समय का पूछना चाहें तो वो भी बता दें। नहीं, फिर आप पूछना क्‍या चाहते हैं?

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): मैं बता देता हूं कि मैं क्‍या पूछना चाहता हूं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आपने चलते-चलते कोई सवाल यों ही खड़ा कर दिया।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): चलते-चलते नहीं, मैंने बहुत रिलेवेन्‍ट प्रश्‍न किया है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ध्‍येय क्‍या है, नहीं आप क्‍या पूछना चाहते हो?

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): आपने वित्‍त आयोग को 2009-10 तक क्‍या आश्‍वासन दिया है कि आप राजस्‍व प्राप्तिओं में और ब्‍याज अदायगी का रेश्‍यो कितने परसेंट तक लेकर आयेंगे और वर्ष 2006-07 में आपने राजस्‍व प्राप्तियां और ब्‍याज अदायगी का प्रतिशत कितना कम किया?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इस तरह का कोई कमिटमेंट नहीं दिया गया।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय मंत्री महोदय, नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य का सुझाव था ...(व्‍यवधान)... और सुधार की आवश्‍यकता है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): लेकिन इस रेश्‍यो को लगातार कम करने की ओर बढ़ रहे हैं। आप कहो तो मैं आंकड़े प्रस्‍तुत कर दूं। ...(व्‍यवधान)...

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): आंकड़ा नहीं है, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, एक मिनट, इनको आंकड़े मैं बता देता हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: यह चर्चा का विषय नहीं है।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): इन्‍होंने यह आश्‍वासन दिया था वित्‍त आयोग को कि हम 2009-10 तक राजस्‍व प्राप्तियां और ब्‍याज अदायगी करते हैं, इन दोनों का रेश्‍यो 15 परसेंट तक लायेंगे और आपने मात्र .32 परसेंट यह रेश्‍यो कम किया है। .32 के हिसाब से आप दस वर्ष में भी यह रेश्‍यो 15 परसेंट तक नहीं ला सकते। इसलिए आप यह एप्रोप्रिएशन बिल लेकर आ रहे हैं, यह जनता के साथ धोखा कर रहे हैं और फाइनेन्‍शल मैनेजमेंट आपका बहुत पूवर है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इस तरह का कोई वादा, कोई कमिटमेंट राजस्‍थान की सरकार ने वित्‍त आयोग के सामने नहीं किया, यह गलत पढ़ रहे हैं। एफ.आर.बी.एम. एक्‍ट के माध्‍यम से हमने अपने आपको वित्‍तीय अनुशासन में बांधने का जो काम किया यह इसके आंकड़ों के बारे में बता रहे हैं। यह भूल जाते हैं ...(व्‍यवधान)...

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): यह बात मुख्‍यमंत्रीजी से कहलवा दो कि उन्‍होंने प्रॉमिस नहीं किया है वित्‍त आयोग के सामने।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): जो हमारी कमिटमेंट है ...(व्‍यवधान)... यह उसकी बात कर रहे हैं।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): आप संसदीय कार्य मंत्री हो इसलिए इनको पता नहीं है। तमाम राज्‍यों को यह निर्देश दिया है वित्‍त आयोग ने कि यह जो राजस्‍व प्राप्तियां और ब्‍याज अदायगी का जो रेश्‍यो है वो 15 परसेंट अबाऊ तक लाया जाए। ...(व्‍यवधान)... तब इसका फाइनेन्‍शल मैनेजमेंट अच्‍छा होगा। आपको मालूम ही नहीं है।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, एक मिनट। एक मिनट, विराजें तो सही।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, यह बहुत लम्‍बा प्रश्‍न नहीं ...(व्‍यवधान)...

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): नहीं, लम्‍बा नहीं है, यह तो फाइनेन्‍शल मैटर्स हैं।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। ...(व्‍यवधान)...

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): आप विराजें न, इसमें कोई भी डिबेट में भाग ले सकता है। आप सुनिये तो सही, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आप तो खुद समझदार हैं।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, टैन्‍थ फाइनेन्‍स कमीशन ने हर स्‍टेट को, माननीय कल्‍लाजी जानते होंगे, हर स्‍टेट को यह डाइरेक्‍शन दिया है। यह सही है कि उन्‍होंने दो डाइरेक्‍शन दिये हैं और एक तो डाइरेक्‍शन यह दिया कि 15 परसेंट तक, रेवेन्‍यू रिसीट्स का जो इन्‍ट्रेस्‍ट पेमेंट है वो 15 परसेंट तक लाएं और दूसरा यह दिया कि जो रेवेन्‍यू एक्‍सपेंडीचर है, राजस्‍व व्‍यय, उसका जो इन्‍ट्रेस्‍ट पेमेंट है उसी रेट 17 परसेंट तक लाएं क्‍योंकि 17 परसेंट से अबाऊ कोई भी स्‍टेट यदि रेवेन्‍यू एक्‍सपेंडीचर का इन्‍ट्रेस्‍ट पेमेंट ज्‍यादा कर रही है तो फिस्‍कल इन्‍ट्रेस्‍ट, हाई फिस्‍कल इन्‍ट्रेस्‍ट की उसमें गिनी जाती है।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): इनको समझाओ।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं बता रहा हूं आपको, इनको भी समझा रहा हूं, आपको भी समझा रहा हूं। आप एक मिनट तो सुनिये न।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, हर स्‍टेट, करीब-करीब ज्‍यादातर स्‍टेट, कुछ स्‍टेट्स को छोड़ दीजिए, कोई हाई फिस्‍कल स्‍ट्रेस में है कोई फिस्‍कल स्‍ट्रेस की श्रेणी में हैं। राजस्‍थान में  भी इनके समय पर हमारा जो रेवेन्‍यू एक्‍सपेंडीचर जो इन्‍ट्रेस्‍ट पेमेंट रेट थी वो 26 परसेंट से ज्‍यादा थी। ...(व्‍यवधान)... 26 परसेंट और इस तीन साल में उसको घटा कर के 23 और 24 परसेंट पर हम ले आये। 23 परसेंट के आसपास हम ले आये तो यह एक एचीवमेंट हमारा है जिसको आपको स्‍वीकार करना चाहिए।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 23.52, केवल 32 परसेंट कम हुआ है और इस कारण से हुआ है कि वहां ब्‍याज की दर कम हो गयी है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): कल्‍लाजी, आप यह भूल गये कि यह ट्वेल्‍थ फाइनेन्‍स कमीशन की रिकमन्‍डेशन है, यह सारी स्‍टेट्स को दी है। यह नहीं, आप तो कह रहे हैं कि हमने कमिटमेंट दिया है, हमने काहे का कमिटमेंट दिया है।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): बिलकुल।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ट्वेल्‍थ फाइनेन्‍स कमीशन की रिकमण्‍डेशन है जो सारे राज्‍यों को उन्‍होंने की है।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): आप एक तरफ तो यह कह रहे हो कि हमारा फाइनेन्‍शल मैनेजमेंट सही है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): बिलकुल।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): और आप .32 परसेंट के हिसाब से यदि इस रेश्‍यो को कम करोगे तो दस साल में ही नहीं कर सकोगे। ...(व्‍यवधान)...

एक माननीय सदस्‍य: 2008-09 तक हमारी सरकार रहेगी, हो जायेगा पूरा।

श्री उपाध्‍यक्ष: राज्‍य सरकार की तरफ से प्रयास जारी हैं ...(व्‍यवधान)...

प्रश्‍न यह है कि राजस्‍थान विनियोग (संख्‍या-1) विधेयक, 2007 को पारित किया जाए।

(स्‍वीकृत)

राजस्‍थान विनियोग (संख्‍या-1) विधेयक, 2009 पारित किया गया।


आय-व्‍ययक वर्ष 2007-08 पर सामान्‍य वाद-विवाद

आय-व्‍ययक अनुमान वर्ष 2007-08, द्वितीय अवस्‍था, अनुदान की मांगों पर विचार एवं मतदान।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी, विधि एवं न्‍याय मंत्री अनुदान की मांग संख्‍या-6 एवं श्री गुलाबचंद कटारिया, गृह मंत्री अनुदान की मांग संख्‍या-16 व 17 विचार एवं मतदान हेतु प्रस्‍तुत करेंगे।

Ars/usc/1610/2q/20032007/1

 

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूं कि मांग संख्‍या-6 न्‍याय प्रशासन के संबंध में 31 मार्च,2008 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपए 1,80,81,82,000 ( अक्षरे रुपए एक अरब, अस्‍सी करोड़, इक्‍यासी लाख, बयासी हजार) तक की राशि प्रदान की जाए।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूं कि मांग संख्‍या-16 पुलिस के सम्‍बन्‍ध में 31 मार्च, 2008 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपए 10,60,46,48,000 (अक्षरे रुपए दस अरब, साठ करोड़, छियालीस लाख, अड़तालीस हजार) तक की राशि प्रदान की जाए।

श्री अमराराम चौधरी (राज्‍य मंत्री, गृह): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूं कि मांग संख्‍या-17, कारागार के सम्‍बन्‍ध में 31 मार्च, 2008 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में किये जाने वाले व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को रुपए 40,22,76,000 (अक्षरे रुपए चालीस करोड़, बाईस लाख, छिहत्‍तर हजार) तक की राशि प्रदान की जाए।

श्री उपाध्‍यक्ष: डा. एन. एस. गुर्जर।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा एक व्‍यवस्‍था का प्रश्‍न है कि आज तक यह परम्‍परा रही है कि सदन जिस विभाग की मांगों पर विचार करता है उसके शासन सचिव और महानिदेशक पुलिस जैसे वह लोग अधिकारी दीर्घा में रहते हैं और सदस्‍य जो बहुमूल्‍य सुझाव देते हैं उनको नोट करते हैं। आज पुलिस, कारागार और न्‍याय प्रशासन की डिमांड पर चर्चा हो रही है और ना प्रिंसिपल सेक्रेटरी होम, न डी जी पुलिस, न डी जी जेल, न एंटीकरप्‍शन कोई भी अधिकारी यहां नहीं है। यह आज तक की परम्‍परा रही है। यह सदन परम्‍पराओं व नियमों से चलता है । मैंने आपका ध्‍यान आकर्षित करने का काम किया है। संबंधित मंत्री जो हैं उनको बुलाएं यहां पर ।

श्री उपाध्‍यक्ष: सम्‍पर्क में हैं।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ऐसे थोड़े है कि यहां पर इतने बहुमूल्‍य सुझाव देंगे और उनको कोई सुनने वाला और उनको कोई एग्‍जीक्‍यूट करने वाली एजेंसी नहीं होगी।

श्री उपाध्‍यक्ष: सम्‍पर्क में हैं वह। डा. एन. एस. गुर्जर।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मांग आपकी बहुत ही सही है और चूंकि बाकी डिस्‍कशन चल रहा था तो उसके साथ जैसे ही यह मांग रखी है वह लोग आ रहे हैं।

श्री उपाध्‍यक्ष: बिल्‍कुल सम्‍पर्क में हैं।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): उपाध्‍यक्ष महोदय, सबसे पहले तो मैं आपका आभार व्‍यक्‍त करना चाहताहूं कि आपने मुझे बोलने का अवसर प्रदान किया है ...(व्‍यवधान) वह तो मैं भी जानता हूं लेकिन एक परम्‍परा है धन्‍यवाद देने की।

श्रीमती प्रतिभा सिंह (नवलगढ़): उपाध्‍यक्ष महोदय, सबसे पहले मेरा कट मोशन था, मेरी जगह डा. एन. एस. गुर्जर को दे दिया।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): क्‍या बोल रही हैं आप?

श्रीमती प्रतिभा सिंह (नवलगढ़): सबसे पहले कट मोशन मेरा लगा हुआ था न्‍याय प्रशासन पर और मेरे अधिकारों को आप उधर ट्रांसफर कर रहे हैं।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): हमने भी कट मोशन दिया है।

श्री उपाध्‍यक्ष: नहीं, नहीं ऐसा नहीं है।

श्रीमती प्रतिभा सिंह (नवलगढ़): पहले मौका मेरेको देना चाहिए था, मेरा उसमें रिकार्डेड है।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): आपको मिलेगा, बाद में मिलेगा, हमने भी कट मोशन दिए हुए हैं।

श्रीमती प्रतिभा सिंह (नवलगढ़): मेरा रिकार्डेड पहले नम्‍बर पर है।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): नहीं, नहीं उससे नहीं बोलते हैं। वह व्‍यवस्‍था दे दी ना अध्‍यक्ष जी ने पहले ।

श्री उपाध्‍यक्ष: मौका दिया जाएगा आपको।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं पहले न्‍याय व्‍यवस्‍था पर बोलना चाहूंगा उसके बाद थोड़ा बहुत समय पुलिस पर लूंगा। उपाध्‍यक्ष महोदय, हमारे कांस्‍टीट्यूशन में एक व्‍यवस्‍था है। कांस्‍टीट्यूशन ने यह व्‍यवस्‍था की है कि सैल्‍फ संतुलन, अपने आप में स्‍वस्‍थ संतुलन, जूडिशियरी और विधायिका में एक स्‍वस्‍थ संतुलन रहे। जहां विधायिका कानून बनाने का काम करती है एक्‍जीक्‍यूटिव भी उसको लागू करने का काम करती है और जूडिशियरी उसको इंटरप्रेट करके किसी के साथ अन्‍याय हो रहा होता है उसको ठीक करने का काम करती है। आप तो स्‍वयं लॉयर हैं, लॉ के &