?Ars/usc/1a/17032006/1100/1
अशोधित
प्रति/
प्रकाशनार्थ
नहीं
राजस्थान
विधान सभा की
कार्यवाही का
वृत्तान्त
अंक 5 बारहवीं
विधान सभा के
पांचवें सत्र
का अठारहवां
दिवस संख्या 11
शुक्रवार;
17 मार्च, 2006
राजस्थान
विधान सभा की
बैठक 1100 बजे
विधान
सभा भवन,जयपुर
में प्रारम्भ
हुई।
(श्रीमती
सुमित्रा
सिंह, अध्यक्ष,
पदासीन)
तारांकित
प्रश्नोत्तर
श्री
अध्यक्ष: श्री
प्रहलाद
गुंजल।
हिन्दू
एवं जैन धर्म
के विरुद्ध
आपत्तिजनक
टिप्पणियों
के सम्बन्ध
में दर्ज
प्रकरण
167. श्री
प्रहलाद
गुंजल
(रामगंजमण्डी):
क्या
गृह मंत्री यह
बताने की कृपा
करेंगे:-
(1) क्या
पुस्तक
हकीकत के लेखक
सी.के.मैथ्यू
द्वारा अपनी
पुस्तक में
हिन्दू व जैन
धर्म के देवी
देवताओं पर
अपमान एवं आपत्तिजनक
टिप्पणी की
है ?
(2) क्या
यह भी सही है
कि इस सन्दर्भ
में पुलिस
थाने में
मुकदमा भी
दर्ज हुआ है ?
यदि हां, तो
सरकार द्वारा
उक्त प्रकरण
में अब तक क्या
कार्यवाही की
गई? विवरण सदन
की मेज पर
रखें।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): (1) जी
हां। इस पुस्तक
‘हकीकत’ के लेखक
सी.के.मैथ्यू
न होकर एम.जी.
मैथ्यू है।
(2) जी हां। इस
पुस्तक की
सामग्री समाज
विशेष की
भावनाओं को
आहत एवं ठेस
पहुंचाने
वाली माना
जाने पर दण्ड
प्रक्रिया
संहिता की
धारा 95 के अन्तर्गत
राज्य सरकार
की अधिसूचना
दिनांक 13.2.06
द्वारा पुस्तक
की प्रत्येक
प्रति, री
प्रिंट,
अनुवाद,
उद्धरणों से
युक्त समस्त
दस्तावेजों
को समपहृत
घोषित किया
गया है । इस
अनुक्रम में
पुलिस थाना
भीमगंज मण्डी
जिला कोटा शहर
में अपराध
संख्या 56
दिनांक 14.2.2006
पंजीबद्ध
किया जाकर अन्वेषणाधीन
है, जिसमें
चार अभियुक्तों
को गिरफ्तार
किया गया है ।
यह जवाब बनाया
था आज एक और
उनका लड़का भी
कल दिल्ली
में गिरफ्तार
हो गया है । इस
तरह से पाँच
लोग इसमें
गिरफ्तार हो
गये हैं ।
इसके अतिरिक्त
थाना उद्योग
नगर, जिला
कोटा शहर में
अपराध संख्या
47 दिनांक 14.2.2006
पंजीबद्ध
किया जाकर अन्वेषणाधीन
है एवं
इस प्रकरण में
तीन अभियुक्तों
को गिरफ्तार
किया गया है।
सब मिलाकर अभी
तक पाँच
अभियुक्त
इसमें
गिरफ्तार हुए हैं।
श्री
प्रहलाद
गुंजल
(रामगंजमण्डी): माननीय
अध्यक्ष
महोदय, इस
संदर्भ में
तीन अलग अलग
एफ.आई.आर दर्ज
हुई हैं । एक
एफ आई आर संख्या
5806, एक 472 और एक एफ आई
आर संख्या 61/06,
अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से माननीय
मंत्रि महोदय
से यह जानना
चाहता हूं कि
इस पुस्तक को
लेकर जितना
पूरे राजस्थान
में हिन्दू
समाज की भावना
उद्वेलित है
और जो अंश इस
पुस्तक में
लिखे हैं
जिनको मैं
पढ़कर आपके
सामने रखना
चाहता हूं,
ज्ञानी लोगों
के लिए
हिंदुत्व एक
मूर्खता
मात्र है, घोर
अज्ञानता है,
ज्ञानी जानता
है कि गाय, सांप,
बंदर, पशु,
प्राणी, पीपल,
पेड़, तुलसी,
पौधा, सूरज,
चन्द्रमा,
गंगा, नर्मदा
नदियां हैं और
इससे आगे माननीय
अध्यक्ष
महोदय, यह
लिखते हैं
भारत माता एक
कल्पना है और
सभी बेजान
पुतले धूर्त
लोगों की कल्पना
के पात्र होकर
कठपुतलियां
हैं। माननीय
अध्यक्ष
महोदय, यह बात
मैं इसलिए कह
रहा हूं ...
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली): जब
यह किताब बेन
कर दी उनके
एब्सट्रेक्ट्स
को कैसे पढ़ा
जा सकता है ,
टोटली जब बेन
कर दी है यह
किताब आपने ।
श्री
प्रहलाद
गुंजल
(रामगंजमण्डी): यह मैम्बर
का प्रिविलेज
है असेम्बली
में ।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
उस किताब
को कैसे पढ़ा
जा सकता है ?
श्री
प्रहलाद
गुंजल
(रामगंजमण्डी): यह
मेरा
प्रिविलेज है
..(व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली): उस
किताब को पढ़ा
नहीं जा सकता
है ..(व्यवधान)
आपने जिस
किताब को बैन
कर दिया ..(व्यवधान)
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द): किताब
में क्या लिखा
है वह सदन को
मालूम तो पड़े
न सदन में कि
किताब में क्या
लिखा हुआ है
...(व्यवधान)
उसमें तकलीफ
हो रही है क्या?
श्री
अध्यक्ष: माननीय
सदस्यगण, आप
जवाब नहीं देंगे,
जवाब देंगे
मन्त्री जी,
उनको पूछने का
अधिकार है, आप
जवाब नहीं
देंगे । मन्त्री
जी ।
श्री
प्रहलाद
गुंजल
(रामगंजमण्डी): माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं
सवाल कर रहा
हूं , माननीय
मंत्रि महोदय
मेरा सवाल
पूरा होने
दें।
श्री
हेमराज मीणा
(किशनगंज): माननीय
मंत्रि महोदय
जवाब दे रहे
हैं उसके बीच
में माननीय सदस्य
क्या बोल रहे
हैं ?
श्री
अध्यक्ष: आप
क्या बोल रहे
हैं ? जब आसन ने
कह दिया तो आप
क्या बोल रहे
हैं?
श्री
प्रहलाद
गुंजल
(रामगंजमण्डी): माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मेरा
सवाल पूरा
होने दें।
श्री
गुलाब चन्द कटारिया
(गृह मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, जैसे
ही हमें यह
सूचना मिली कि
इस प्रकार की
कोई पुस्तक
है जिसमें
लोगों की
भावनाओं को
आघात पहुंचा,
हमने कांस्टेबल
भेजकर वहां से
पुस्तक
खरीदी और उसका
बिल भी उसके
साथ लेकर आए
उसके बाद हमने
पूरी
पुस्तिका का अध्ययन
किया। उसमें
जो कंटेंट थे
जिनके आधार पर
हमने इसको प्रतिबंधित
किया उसमें से
कुछ कंटेंट
हमने इसी कारण
से किया कि
इसके कंटेंट
इतने लोगों को
उद्वेलित
करने वाले थे
कि अगर कोई भी
पढ़ेगा तो
सामान्य व्यक्ति
में एक आक्रोश
आना स्वाभाविक
है उसमें से
कुछ बिंदु
हमने जिसको लेकर
यहां इसके ऊपर
प्रतिबंध
लगाया है
उसमें था,
परन्तु हिन्दूवादियों
का कहना कि
लुटेरों के त्यौंहारों
हाथों में इस
राष्ट्र को
पीडि़त कर रखा
है और यह भी इस
महामारी की
भूमि को मुक्त
करना चाहता
हैं ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: बीच
में नहीं
बोलें ...(व्यवधान)
माननीय सदस्य,
बीच में नहीं
बोलेंगे..(व्यवधान)
आप बीच में
नहीं बोलेंगे
।
श्री
बद्रीलाल जाट
(कपासन): माननीय
मंत्रि महोदय
जवाब दे रहे
हैं उसके
बावजूद यह
प्रतिपक्ष के
सदस्य अपनी
गरिमा नहीं
जानते...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: राजसमंद
से आने वाले
सदस्य, आपको
क्या हो गया
है ?
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द): यह
हमारी गरिमा
की बात है ...
श्री
अध्यक्ष: आसन
है ।
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द):
अस्मिता का
सवाल है। इन
लोगों को क्या
हक है, हमारे
हिंदुओं के
ऊपर इतना...
श्री
अध्यक्ष: आपको
क्या हो गया
है ?....(व्यवधान)
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द): ...कुठाराघात
किया गया है ।
इन लोगों को
क्या हो गया
है, हमारी
अस्मिता का
सवाल है ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आसन
आपसे आग्रह
करता है आप स्थान
ग्रहण करें ।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली): तुम
नकली हिन्दुओं
से ज्यादा
कट्टर हिन्दू
हो ..(व्यवधान)
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द): हिन्दू
समाज के धूर्त
लोगों तुम्हारे
कारण ही हिन्दू
समाज पिछड़ा
हुआ है ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: सत्ता
पक्ष के
माननीय सदस्य,
आपके मंत्री
जी सक्षम हैं
सब बातों का
जवाब देंगे, आपको
बीच में खड़े
होने की आवश्यकता
नहीं है ..(व्यवधान)
माननीय सदस्य,
राजसमंद से
आने वाले
माननीय सदस्य
अस्मिता की बात
बार बार करते
हैं अस्मिता
के लिए सब
हिफाजत करने
वाले हैं । आप
इस तरह से बीच
बीच में नहीं
खड़े हुआ
करें, आपको क्या
उत्तेजना हो
जाती है? इनको
भी प्रश्न
पूछने का हक
है ...
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द): हिन्दू
समाज के खिलाफ
क्या
बोलेंगे ...
श्री
अध्यक्ष: आपके
मंत्री जी
सक्षम हैं वह
जवाब देंगे इन
बातों का । आप
बीच में क्यों
खड़े होते हैं
? सत्ता पक्ष
के कोई माननीय
सदस्य खड़े
नहीं होंगे ।
माननीय
मंत्री जी
जवाब दे रहे
हैं ।
श्री
बद्रीलाल जाट
(कपासन): आदरणीय,
जो इन्होंने
कहा..(व्यवधान)
एक्सपंज
किया जाए।
श्री
अध्यक्ष: आपको
क्या हो गया,
कपासन से आते
हैं ना आप ? क्या
हुआ आपको क्या
तकलीफ हो गयी ?
श्री
बद्रीलाल जाट
(कपासन): इन्होंने
नकली हिन्दू
कहा साहब ।
श्री
अध्यक्ष: फिर
वही बात ।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, हमने 13.2
को जिस पुस्तक
का अध्ययन
किया उसे
प्रतिबंधित
करने के आदेश
के साथ हमने
उसके कुछ
कंटेंट लगाकर
के कि ये ये
चीजें इसमें
थीं जिसके
कारण से हमने 13.2
को इसको
प्रतिबंधित
किया उसमें
भावना... राम एक
दुर्बलता का
उदाहरण है
यहां तक कि वह
अपनी पत्नी
के प्रति भी
अच्छा नहीं
रहा उसका जीवन
पूर्णत:
निराशा और
हताशा इंसान
के समान रहा
इसकी वजह से ...
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): मंत्री
महोदय, ऐसी
बातें क्यों
लाते हो आप
कार्यवाही
करो सख्त से
सख्त, इस तरह
की बातें
रिकार्ड पर
लाना अच्छा
समझते हो क्या
?..(व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): लायेंगे
रिकार्ड पर
..(व्यवधान)
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): उनको
सख्त से सख्त
सज़ा मिलनी
चाहिए...(व्यवधान)
इसलिए आप
रिकार्ड पर मत
लाइये । मेरे
कहने का
निवेदन इतना
ही है कि
भगवान राम के
बारे में इस
तरह की बातें
रिकार्ड पर मत
लाइये....(व्यवधान) जो भी
हुआ है गलत
हुआ है उनके
खिलाफ सख्त
कार्यवाही
होनी चाहिए।
चाहे आपकी
मर्जी आए उनको
जेल में
ठूंसों, फांसी
पर चढ़ाओ
लेकिन ...
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): आपके
ध्यान में ला
रहा हूं कि...
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़):
लेकिन भगवान
राम के लिए
जिस तरह के
गलत शब्द उन्होंने
कहे हैं आप
कृपा करके सदन
में उन गलत शब्दों
को मत दोहराओ।
आदरणीय
मर्यादा पुरुष
के लिए इतनी
घटिया बात जो
उन्होंने
लिखी है, आप
सदन में मत
कहिये, मेरा
आपसे यह
निवेदन है, आप
उनका कुछ भी
करिये। क्योंकि
एक गलती उन्होंने
की कि हमारे
देवी-देवताओं
के खिलाफ कुछ आपत्तिजनक
बात कही...
श्री
अध्यक्ष: माननीय
सदस्य, आप
प्रश्न पूछ
रहे हैं?
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): दूसरी
गलती आप कर
रहे हैं,
रिकार्ड पर
लाकर। यहां हमारे
देवी-देवताओं
के खिलाफ जो
बात उन्होंने
गलत कही है उसको
आप रिकार्ड पर
ला रहे हैं।
क्या अच्छा
समझते हो
इसको? (व्यवधान)
इसकी निंदा की
जाए, उनके
खिलाफ
कार्यवाही
करिये, आप क्या
कार्यवाही कर
रहे हैं यह
सदन को
बताइये।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
मंदिर
तो बना नहीं
पाये, सारा
पैसा गड़बड़
कर गये,
करोड़ों
रुपया इकट्ठा
कर लिया और
बात कर रहे हो
इधर उधर
की।(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: राम
मंदिर का क्या
ताल्लुक है
इस प्रश्न
से।(व्यवधान)
मैं कहना
चाहूंगी, हिण्डौली
से आने वाले
माननीय सदस्य,
क्या ताल्लुक
है राम मंदिर
का इस प्रश्न
से?
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
राम
का नाम आया है
इसमें।
श्री
अध्यक्ष: गलत
बात है। तो क्या
मतलब हुआ?
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
राम
के साथ तो राम
मंदिर याद
आयेगा, राम
मंदिर का इन्होंने
झांसा दिया
था।
श्री
अध्यक्ष: कृपया
स्थान ग्रहण
करें। आप इतने
वरिष्ठ सदस्य
हो और आसन
पाँव पर होता
है फिर आप
जवाब देने खड़े
हो जाते हो।
इतना भी
इंतजार नहीं
करते हो कि
आसन पैरों पर
न हो और ऊपर से
हंसते और हैं,
गलती करके
हंसते और हैं।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, माननीय
सदस्य ने जो
प्रश्न पूछा
कि क्या यह
सही है कि इस
संदर्भ में
पुलिस थाने
में मुकदमा
दर्ज हुआ, यदि
हां, तो सरकार
द्वारा उक्त
प्रकरण में अब
तक क्या
कार्यवाही की
गई? मैं उसी
कार्यवाही का
विवरण इसमें
दे रहा हूं कि
हमने इसको जब
प्रतिबंधित
किया तो उसके
कुछ उद्धरण
हमने निकाले
उसमें उन्होंने
लिखा है कि
जिसकी वजह से
उसे सरयू नदी
में डुबो कर...
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा): उससे
फायदा क्या
है? आप खुद
रिकार्ड पर
लाकर
कार्यवाही
करें। सरकार
सक्षम है,
कार्यवाही
करे, फांसी
दे।
Vns/usc/1110/1b/17..3.2006
लेकिन
रिकार्ड में
लाकर आप क्या
कार्यवाही करेंगे?
कल अखबारों
में वापस
आयेगा, मतलब
आप क्या
चाहते हो ? जो
आदमी ने बात
की वह रिकार्ड
में लाना
चाहते हो आप,
यह क्या
तरीका हुआ (व्यवधान)
इस प्रकार की
बात अख़बार
में लाना आप
उचित समझते हो
क्या ?
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): आपको
यह नहीं पूछा
क्या लिखा है
? अध्यक्ष
महोदय, प्रश्न
में यह नहीं
लिखा है, यह
कहां लिखा हुआ
है ?(व्यवधान)
इन्होंने
कहा है
कार्यवाही
करिये। आप
कार्यवाही
बताइये।
कार्यवाही
कीजिये आप..(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): जब तक
कोई बात
रिकार्ड में
नहीं आयेगी..(व्यवधान)
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा): आप
पूरी किताब को
रिकार्ड में
लाइये, एक अंक
को नहीं लाइये।
पूरी किताब को
लाइये ज्यादा
बढि़या है।
पूरी किताब को
लाइये (व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अगर आवश्यकता
पडी तो पूरी
किताब में
रिकार्ड में
लायेंगे। एफ.आई.आर.
का कंटेंट पढ़
रहे हैं(व्यवधान)
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
आपकी मंशा यही
है पूरी रिकार्ड
में लाइये,
सबको मालूम
है(व्यवधान)
यह कौनसा तरीका
है(व्यवधान)
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा):
अध्यक्ष
महोदय,
रिकार्ड में
हिन्दूवादी
बिंदुओं का
पर्दाफाश है
(व्यवधान)
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री):
आपने तो पूछा
नहीं है एफ.आई.आर.
में क्या
लिखा हुआ है,
माननीय गृह
मंत्रि महोदय
बतायेंगे(व्यवधान)
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
आज समाज के
अंदर द्वेषता
फैलाने का काम
करना चाहते
हैं लेकिन(व्यवधान)
कार्यवाही का
रेफरेंस दे
दीजिये, किस धारा
में आपने काम
किया आप धारा
का रेफरेंस
दीजिये। धारा
में कार्यवाही
करिये। Why you are interested to quote this? आपको
यदि कोट करना
है तो पूरी
किताब करिये(व्यवधान)
We don’t want to plead it. आप
धारा को कोट
करिये(व्यवधान)
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री):
मुकदमा क्यों
दर्ज हुआ,
मुकदमा दर्ज
करने के कारण
क्या थे(व्यवधान)...
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
धारा कोट
करिये, सज़ा दीजिये,
फांसी
दीजिये(व्यवधान)
एक
माननीय सदस्य:
आप इनसे जवाब
दिला दीजिये।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): किस
कारण से हमने
प्रतिबंधित
किया मान्यवर,
यह आपके ध्यान
में लाना
चाहता हूं(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: बीच
में नहीं
माननीय सदस्य(व्यवधान)
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): उन्होंने
यह नहीं पूछा
है क्या लिखा
है ? उन्होंने
यह पूछा ही
नहीं है अध्यक्ष
महोदय, क्या
लिखा है ? आप
इनसे जवाब
दिलाइये।
जवाब तो दे नहीं
रहे हैं
रिकार्ड में
ला रहे हैं।
काहे को जो
बात नहीं है
उसको रिकार्ड
में ला रहे
हैं।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): कि
जिसकी वजह से
सरयू नदी में
कूदकर आत्महत्या
करके दुखों से
निजात पायी।
उनके जीवन के
प्रत्येक
कदम में..(व्यवधान)
गुण रूप में असफल
रहा। उसकी
प्रेम कथाएं..(व्यवधान)
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
अध्यक्ष
महोदय, इस सदन
में हर
एफ.आई.आर. को
लाना पड़ेगा
आप फैसला कर
दीजिये।
कटारिया साहब,
एक मिनट(व्यवधान)
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): उसके
अनियंत्रित
(व्यवधान)
कानून की
भर्त्सना और
लड़ाई झगड़े
में(व्यवधान)
प्रेमी की एक
तस्वीर पेश
कर दी है। मैं सोचता
हूं कि ..(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
मंत्रीजी, आप
छोड़ दें
तो(व्यवधान)
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
अध्यक्ष
महोदय, हर
एफ.आई.आर. को
कोट करना
पड़ेगा। या तो
धारा कोट करके
कार्यवाही
करिये और
एफ.आई.आर. कोट
करना है तो हर केस में
एफ.आई.आर. दर्ज
करिये। फैसला
कर लीजिये आप
हम एग्री हैं।
हर केस में
एफ.आई.आर.
कंटेंट लिखना
पड़ेगा
आपको(व्यवधान)
हिन्दू आदमी
हूं इसलिये(व्यवधान)
आप कार्यवाही
करिये क्या
तकलीफ है(व्यवधान)
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (नगरीय
विकास एवं आवासीय
राज्य
मंत्री): क्यों
बैन किया है
यह तो लिखना
पड़ेगा। यह तो
करना पड़ेगा
यह रिकार्ड
में लाकर(व्यवधान)
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़):
हमारा सवाल यह
है कि इस तरह की
बात सदन में
मत कहिये। आप
कार्यवाही
करिये, आप
फांसी दीजिये,
आप जेल में
भेजिये लेकिन
आपके मुंह से
देवी देवताओं
के प्रति इस
तरह के शब्द,
आप यहां मत
कहिये अपने मुंह
से। देवी
देवताओं के
प्रति इतने
अपमानजनक शब्द
इस सदन में
नहीं कहने
चाहिये।
हमारा आब्जेक्शन
है कि देवी
देवताओं के
लिये इस तरह
के अपमानजनक
शब्द सदन में
नहीं कहे जाने
चाहिये गृह
मंत्रि द्वारा
जो कि एक
अपराधी ने
किया है तो
आपको(व्यवधान)
यह गलत परम्परा
है कि हमारे देवी
देवताओं के
प्रति अपशब्द
इस सदन में
कहे जायें। यह
बड़ा अशोभनीय
है और
दुर्भाग्य है।
कार्यवाही
कीजिये, आप
धारा बताइये,
आप जेल में
भेजिये, आप
उनको फांसी पर
चढ़ाइये
लेकिन आपको यह
अधिकार नहीं
है कि हमारे
देवी देवताओं
के प्रति गलत
अपशब्द आप
विधान सभा में
कहें। आप अपने
मुंह से नहीं
कहें(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): प्रश्नकर्ता
यह पूछ रहे
हैं कि आपने
क्श
कार्यवाही की,
उसका जवाब दे
रहे हैं..(व्यवधान)
श्री
वासुदेव
देवनानी (शिक्षा
राज्य
मंत्री):
बताने में क्या
आपत्ति है ?
सुनने में क्या
आपत्ति है यह
बताइये। आप
थामस का
समर्थन क्यों
कर रहे हैं(व्यवधान)इसमें
आपको आपत्ति
क्या है, यह
बताइये(व्यवधान)
श्री
ओम बिरला
(संसदीय सचिव):
माननीय सदस्य
सिरोही वालों
को आप पैरवी
कर रहे हैं(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: गृह
मंत्रीजी ने
एक शब्द(व्यवधान)डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
इस प्रश्न को
पूछा, उन्होंने
यह नहीं पूछा
है कि क्या
यह (व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं यह
कहना चाहता
हूं कि ‘क्या
बात है कि हस्ती
मिटती नहीं
हमारी, दुश्मन
रहा जमां दौरे
जहां हमारा’
हिन्दू धर्म
सहिष्णु रहा
है, पोलाइट
रहा है इसलिये
मेरा निवेदन यह
है कि आप
विधान सभा को
साम्प्रदायिकता
का मंच नहीं बनायें(व्यवधान)
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): मैं
केवल यह बता
रहा हूं
माननीय सदस्य
ने जिस भावना
से इस प्रश्न
को पूछा। उन्होंने
पूछा कि क्या
यह सही है कि इस
संदर्भ में
कोई कानूनी
मुकदमा दर्ज
हुआ ? यदि हां,
तो सरकार
द्वारा उक्त
प्रकरण में अब
तक क्या
कार्यवाही की
गयी ? विवरण
सदन की मेज पर
रखें। उन्होंने
इस पुस्तक को
लेकर जहां से
जो कुछ प्रकरण
चला वहां से
लेकर जो
कार्यवाही
हुई, इस सारे
का विवरण उन्होंने
पूछा है। मैं
प्रश्न का जो
उत्तर है(व्यवधान)श्री
अध्यक्ष: केवल
मंत्री महोदय
का जवाब अंकित
हो। केवल मंत्री
महोदय का
अंकित
करें।(व्यवधान)
आप सुनिये।
बीच में खड़े हो
गये, जवाब तो
सुनिये उनका।
पहले आप जवाब
सुनिये। पहले
मंत्रीजी का
जवाब
सुनिये(व्यवधान)
श्री
हीरालाल
(निवाई): ***
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): मैं आपकी
भावना की कद्र
करता हूं।
मैंने पिछली
बार भी जब इस
विषय को उठाया
था तो मैंने यह
समझकर इसको
कि(व्यवधान)
लेकिन आज जब
जिस भावना से
उन्होंने
प्रश्न पूछा
कि आपने क्या
कार्यवाही की
? अब मेरी
मजबूरी है कि
मैंने इस पुस्तक
को बेन किया,
तो क्यों
किया और बैन
करने के बाद
मैंने कौन
कौनसे लोगों
के खिलाफ क्या
मुकदमा दर्ज
हुआ यह
बताऊंगा।
इसमें से
कितने लोग गिरफ्तार
हुए, यह बताऊंगा..(व्यवधान)
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ***
श्री
हीरालाल
(निवाई): ***
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
***
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): आपकी
सारी किताबें
मेरे पास हैं।
मैं इसको पढ़
रहा हूं। ऐसा
नहीं है मैंने
आपकी सारी
किताब नहीं
मंगायी, मैंने
हरेक किताब
मंगाकर जब तक
उसके कंटेंट
को मैं
आईडेंटिफाई
नहीं करूंगा
जिसके तहत
इसमें मुकदमा
बनता है, उसके
पहले मैं नहीं
बता सकता पर
आपने जो विषय
डाले हैं यह
किताबें मैंने
इकट्ठी की है
और इसलिये इकट्ठी
की हैं कि मैं
इन किताबों को
देखने के बाद
इस किताब में
कौनसे ऐसे शब्द
लिखे हैं
जिसके कारण से
इसको
प्रतिबंधित,
इसका अध्ययन
करने के बाद
ही बता
पाऊंगा। तो
मैं सोच रहा
था मेरी भावना
कोई आपकी
भावना से भिन्न
नहीं है लेकिन
इसमें जिन
बातों को लेकर
इन्होंने
प्रश्न पूछा
कि अब तक क्या
आपने
कार्यवाही की,
तो जिस किताब
को मैंने
प्रतिबंधित
किया उनके उन
थोड़े विषय को
मैंने उद्धत
करने का
प्रयास किया
जिसके कारण से
मैंने किताब
पर बैन लगाया
तो मैं सोचता
हूं कि
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): ***
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): अब
आपको यह तकलीफ
हो रही है जिस
दिन इस किताब
वाले ने(व्यवधान)
भगवान कृष्ण
को अय्याश
बताया हो, उस
किताब के बारे
में क्या कहा
जाए। मैं
देखता हूं कि
यह जो भगवान
कृष्ण के
बारे में शब्द,
आपके मन को स्वयं
को भी पीड़ा
होनी चाहिए कि
किस तरह का
घृणित काम
करता है और
इतनी बड़ी
संस्था
चलाता है। (व्यवधान)
ताकि जनता को
यह पता लगे कि
सेवा की आड़
में किस तरह के
षड्यंत्र इस
देश में चल
रहे हैं। यह
प्रजातंत्र
है...(व्यवधान)
आप यह नहीं
चाहते हो कि
सेवा के नाम
पर आडम्बर
करके देश की
धार्मिक
भावनाओं को
चोट पहुंचाने
का काम कर रहे
हो...(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन (मुख्य
सचेतक): यह सदन
इसलिए नहीं
बना हुआ है कि
हिन्दू देवी
देवताओं के
प्रति जो
अपशब्द कहे,
उसको इस
पवित्र सदन के
रिकार्ड में
लाना चाहते
हैं....(व्यवधान)
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): ***
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): आप उस
थामस को
प्रोटेक्ट
करना चाहते हो
ना, मैं सोचता
हूं कि ऐसी
कोई भावना नहीं
है, लेकिन
उसने जिस
प्रकार से
लोगों की भावनाओं
को उद्वेलित
किया, मैंने
उसके कुछ उदाहरण
आपको दिये।
भगवान कृष्ण
के बारे में
लिखता है-
अनियंत्रित
यौन संबंधों,
कामुकता,
वासना तथा...
श्री
अध्यक्ष: आप
काहे को इंट्रोड्यूस
कर रहे हैं, जब
आपने बैन कर
दिया।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): लड़ाई-झगड़े
में प्रेमी की
घृणित तस्वीरें
पेश करता है।
क्या अश्लील
ऐसा कोई विषय
नहीं छोड़ा,
ऐसा कोई देवी
देवता नहीं
छोड़ा, हमारी
आस्था का बिन्दु
नहीं छोड़ा
जिस पर उन्होंने
गंदे कमेंट्स
नहीं किये
हों।
डा.
चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर): ***
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): ***
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): जैन
समाज के लिए
भी कहा है।
श्री
हीरालाल
(निवाई): ***
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): उन्होंने
वंदे मातरम के
बारे में कहा,
उन्होंने
दुर्गा के
बारे में कहा,
जिस गणेश की
हम पूजा करते
हैं उसके बारे
में इस प्रकार
के शब्द
लिखे। उन्होंने
हमारे जितने
देवी-देवता
हैं उनके ऊपर
लिखा। हमारे
यहां का जो
मानचित्र है
उसके ऊपर लिखा।
हमारे वंदे
मातरम् को
कंडेम किया।
यह सब कपोल
कल्पित कल्पनाएं
हैं। किसी भी
आस्था के
बिन्दु को
नहीं छोड़ा,
उस कारण इन सब
बातों को
मैंने उद्भृत
किया। दस-पन्द्रह
ऐसे बिन्दु
निकाले और
उसके आधार पर 13.2
को उस किताब
को
प्रतिबंधित
किया।
प्रतिबंधित
करने के बाद
हमने उनके
खिलाफ चार
मुकदमे दर्ज
किये। अभी
माननीय सदस्य
ने बताया तीन,
तीन नहीं चार
हैं। उन चार
मुकदमों में
सैमुअल थामस
जो इनका लड़का
है, उसे कल दिल्ली
में गिरफ्तार
किया। जितनी
हमें
कार्यवाही
करनी थी उस
कार्यवाही के
आधार पर किया।
जो आप विषय
उठा रहे हो कि
प्रदर्शन
करने वालों के
खिलाफ आपने
कार्यवाही
नहीं की, हमने
की है। जिन
लोगों ने भी
इस इश्यू को
लेकर धार्मिक
संस्थाओं पर
हमला किया या
किसी तरह के
पवित्र स्थान
पर किया तो
हमने 11 मुकदमे
दर्ज करके 66
लोगों को
गिरफ्तार
किया और उसमें
चार लोग तो
अभी भी पिछले
पन्द्रह दिन
से जेल में
हैं। ऐसा नहीं
कि हमने उन लोगों
के खिलाफ
कार्यवाही
नहीं की। हमने
उनके खिलाफ भी
की लेकिन जिस
प्रकार के इस
किताब में वर्णन
है...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
मुख्य सचेतक
महोदय, आप ख्वाहमख्वाह
ही उत्तेजित
कर रहे हैं।
सोनियाजी का
नाम लेकिन उत्तेजित
न करें इनको।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): आस्था
केन्द्रों
पर जिन्होंने
हमला किया
उनके खिलाफ
कार्यवाही की
है।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): उस
वर्णन के आधार
पर आप या हम
हों, निश्चित
रूप से इस
कार्यवाही को
और कठोरता से
किया जाए। और
यह क्या है,
जो इतनी बड़ी
संस्था
चलाकर जो आडम्बर
ओढा हुआ है, 85
शिक्षण संस्थाएं
चलती हैं...
ssy/usc/1120/1c
इसी
प्रकार से
विदेशों से धन
लाकर जिस
तरीके से इस
देश में धर्म
परिवर्तन का
काम किया है ।
यह सारा ऑन
डाकूमेंट आ
चुका है। ऐसे
लोगों को हम कैसे
छोड़ेंगे । जो
बाहर से
विदेशी धन मंगाकर
केवल यही सारी
कार्यवाही कर
रहा है । अनाथालय
में जो बच्चे
हैं वह अनाथ
नहीं हैं,
उनके मां-बाप
जब लेने के
लिए आते हैं
तो वह उनके
मां-बाप को
सुपुर्द नहीं
करते हैं ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: वह
जवाब दे रहे
हैं ।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया: उनका
धर्म परिवर्तन
करके और उनको
मां-बाप विहीन
बताकर के अपने
धर्म में
परिवर्तन
करके उनको
कहीं न कहीं नौकरी
लगाता है । इस
प्रकार का
घृणित काम...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: वह
जवाब दे रहे
हैं ।
श्री
सी.डी.देवल: यह
तो बोल रहे
हैं, भाषण दे
रहे हैं (व्यवधान)
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया: इस
प्रकार का
घृणित काम,
मैं सोचता हूं
कि...(व्यवधान)
श्री
सी.डी.देवल: यह
भाषण दे रहे
हैं ...(व्यवधान)
श्री
संयमू लोढ़ा:
यह तो पुलिस
की डिमांड पर
रिप्लाई चल
रही है (व्यवधान)
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया: इतने
बड़े विश्वविद्यालय
और संस्था चला
रहे हैं जिसकी
85 शिक्षण संस्थाएं
हैं राजस्थान
में, जिनकी
हिन्दुस्तान
के कई राज्यों
में
एक्टिविटी चल
रही है । उस
पैसे का उपयोग
वह धर्म
परिवर्तन के
लिये कर रहा
है...(व्यवधान)
श्री
संयम लोढ़ा:
ऐसा प्रतीत
होता है कि
पुलिस की डिमांड
पर रिप्लाई
चल रही है ।
एक
माननीय सदस्य:
मैं सोचता हूं
कि आपको इस
बात की तकलीफ
है कि (व्यवधान)
श्री
प्रहलाद
गुंजल: आपसे
सुना नहीं जा
रहा है ।
श्री
बंशीलाल खटीक:
इसाइयों के
दलालों ...(व्यवधान)
श्री
संयम लोढ़ा:
बीस मिनट हो
गये हैं ...(व्यवधान)
श्री
बंशीलाल खटीक:
आपको बोलने का
अधिकार नहीं
है(व्यवधान)
श्री
संयम लोढ़ा:
दूसरे भी सवाल
हैं, एक सवाल
पर बीस मिनट
हो गये हैं ।
श्री
बंशीलाल खटीक:
यह हमारी
अस्मिता
है...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
अंकित नहीं
हो(व्यवधान)
श्री
बंशीलाल खटीक:
***
श्री
शंकरसिंह
राजपुरोहित: ***
श्री
बंशीलाल खटीक:
***
श्री
हरिमोहन
शर्मा: ***
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया: आपकी
भावना की मैं
पूरी कद्र
करूंगा ।
श्री
हरिमोहन
शर्मा : ***
श्री
संयम लोढ़ा: ***
श्री
अध्यक्ष:
अंकित नहीं
हो, अंकित
नहीं हो ।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया: आपकी
भावना की मैं
कद्र करूंगा ।
कानून भी
लायेंगे और हम
प्रयास यही कर
रहे हैं कि
इसी सत्र में
लायेंगे, इसके
लिये हम
प्रयासरत हैं
...(व्यवधान)
श्री
शांतिलाल
चपलोत: ***
श्री
हरिमोहन
शर्मा : ***
श्री
कनकमल कटारा: ***
श्री
अध्यक्ष:
बैठें तब न । श्री
टीकम चन्द
कांत...(व्यवधान)
श्री
कनकमल कटारा: ***
श्री
संयम लोढ़ा: ***
श्री
शंकरसिंह : ***
श्री
हरिमोहन
शर्मा : ***
श्री
अध्यक्ष:
अंकित नहीं हो
रहा है ...(व्यवधान)
श्री
बंशीलाल खटीक:
***
श्री
अध्यक्ष: आप
कृपया अपना स्थान
ग्रहण करें ।
श्री
प्रहलाद
गुंजल: ***
श्री
अध्यक्ष:
मैंने नाम
पुकारा है
श्री टीकम चंद
कांत का ।
श्री
बंशीलाल खटीक:
***
श्री
अध्यक्ष:
अंकित नहीं
करें, अंकित
नहीं होगा
आपका ।
राजसमंद से
आने वाले
माननीय सदस्य,
मैं आपको
चेतावनी दे
रही हूं कि आप
बहुत उटपटांग
बोलते हैं ।
चाहे जो मर्जी
आये बोल देते हैं
। कृपया शांत
रहे आप । आप
चाहे जो खड़े
होकर बोलने लग
जाते हैं ।
श्री
प्रहलाद
गुंजल : ***
श्री
टीकम चन्द
कांत: अध्यक्ष
महोदय, मैं और
जनता आश्वस्त
होना चाहेंगे
कि ऐसी पुस्तकें
जो जान-बूझकर
हिन्दु धर्म
पर किसी न
किसी प्रकार
को आक्षेप
करके छापी गयी
हैं और सिरोही
से आने वाले
माननीय सदस्य
ने कहा कि
हमने तीन पुस्तकें
दी हैं तो क्या
मैं विश्वास
करूं कि सरकार
ऐसी समस्त
पुस्तकें और
जिनकी भी आपको
सूचना दी जा
रही है वह सारी
प्रतिबंधित
होगी । यदि इस
उद्देश्य से
वह लिखी गयी
हैं तो, नम्बर
एक ।
श्री
अध्यक्ष: वह अलग
से प्रश्न है
आपका । इस
प्रश्न से
कोई ताल्लुक
नहीं है ।
श्री
टीकम चन्द
कांत: एक मिनट
। मेरा साथ ही
प्रश्न है ।
श्री
प्रहलाद
गुंजल: अध्यक्ष
महोदय, मुझे
एक प्रश्न
पूछने दीजिये
(व्यवधान)
श्री
बंशीलाल खटीक:
डायलुट कर रहे
हैं जबरदस्ती,
जो विषय है
उसी पर बोलने दीजिये
।
श्री
टीकम चन्द
कांत: उसी पर
कह रहा हूं कि
सारी पुस्तकें
प्रतिबंधित
होनी चाहिए ना ।
श्री
प्रहलाद गुंजल:
अध्यक्ष
महोदय, मैंने
प्रश्न पूछा
ही नहीं ।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया: अध्यक्ष
महोदय, माननीय
सदस्य की जो
भावना है (व्यवधान)
श्री
प्रहलाद
गुंजल: अध्यक्ष
महोदय, मैंने
यह प्रश्न
पूछा ही
नहीं...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
देखिये, प्रश्न
का जवाब तो आ
गया है ।
श्री
प्रहलाद
गुंजल: एक भी
प्रश्न नहीं
पूछा है ।
मुझे एक सप्लीमेंट्री
तो पूछने
दीजिये ।
श्री
अध्यक्ष:
प्रहलाद गुंजल
क्या कह रहे
हैं आप । आप
चाहें तो एक
सप्लीमेंट्री
पूछ सकते हैं
। मैं फिर
नेकस्ट क्वेश्चन
पुकार रही
हूं(व्यवधान)
मैंने नाम
पुकारा है
प्रहलाद
गुंजल का,
कृपया स्थान
ग्रहण करें ।
मैंने नाम
उनका पुकारा
है ।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया: अध्यक्ष
महोदय, जैसा
माननीय सदस्यों
ने कहा, जो भी
पुस्तकें आप
हमारे ध्यान
में लायेंगे
जिससे कि किसी
की भी भावना
को ठेस
पहुंचगी चाहे
वह हिन्दु
धर्म की हों,
चाहे मुसलमान
हो और चाहे
कोई भी हो । जो
भी इस प्रकार
की पुस्तकें
लिखेगा जिससे
कि धार्मिक
भावनाओं को चोट
पहुंचेगी वह
हमारे ध्यान
में आयेगी तो
हम निश्चित
रूप से जैसे
अभी इसको
प्रतिबंधित
किया है ऐसे
ही उनको भी
प्रतिबंधित
करेंगे । इसी
प्रकार से
थामस के प्रति
जो गुस्सा था
लगातार 1985 से
लगातार एक के
बाद एक संगीन
अपराध दर्ज हो
रहे हैं ।
श्री
अध्यक्ष: वह
दे दिया जवाब,
अब क्या है ।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया: उसके
बाद भी जब
कार्यवाही
नहीं हुई तो
वह कार्यवाही
नहीं होने के
कारण से जो
गुस्सा था वह
इस हकीकत पुस्तक
के कारण से
सबके बीच में
सामने आया ।
यह प्रक्रिया
तो कई वर्षों
से चल रही थी ।
लोगों के ध्यान
में नहीं आयी
। जब ध्यान
में आयी तो
हमने इसकी
पुख्ता व्यवस्था
की है ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आप
खड़े क्यों
हैं । जब
मंत्री जी
बोलते हैं तो
आपको बैठ जाना
चाहिए।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया:
इसलिए हमने इस
बार व्यवस्था
की है कि इस
प्रकार का कोई
भी व्यक्ति न
तो बना सके, न
अनुवाद कर
सकेगा जो कि
किसी की
धार्मिक भावनाओं
को ठेस
पहुंचायेगी ।
अभी तो अगर यह
गिरफ्तार
नहीं हुआ तो
इसकी
प्रापर्टी को
अटैच करके
इसको सब
प्रकार से
चाहे यह जंगल
में भी जायेगा
तो इसको
ढूंढकर के
लायेंगे और
इसको गिरफ्तार
करके जेल के
सींखचों में
डालेंगे ताकि
भविष्य में
यह ना हो और
कोई भी व्यक्ति
किसी की
धार्मिक
भावनओं को चोट
नहीं पहुंचा
सकेगा । इसके
लिए मैं सदन
को आश्वस्त
करता हूं ।
श्री
अध्यक्ष:
नेकस्ट क्वेश्चन
डॉ. गोपाल
बाहेती ।
श्री
प्रहलाद
गुंजल: नेकस्ट
क्वेश्चन।
अध्यक्ष
महोदय, मैंने
प्रश्न पूछ
लिया (व्यवधान)
अध्यक्ष
महोदय, आपने
इजाजत दी है
मुझे (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
नहीं, एक
प्रश्न पर 27
मिनट हो गये
हैं...(व्यवधान)
अंकित नहीं हो
रहा है, अंकित
नहीं हो(व्यवधान)
श्री
शांतिलाल
चपलोत: ***
श्री
हेमराज मीणा: ***
श्री
बंशीलाल खटीक:
***
श्री
प्रहलाद
गुंजल : ***
श्री
रिछपाल सिंह
मिर्धा: ***
श्री
अध्यक्ष:
मैंने नेकस्ट
क्वेश्चन
पुकार लिया है
। I will not allow any more
question.
श्री
प्रहलाद
गुंजल: ***
श्री
हरिमोहन
शर्मा : ***
श्री
अध्यक्ष: स्थान
ग्रहण करें,
स्थान ग्रहण
करें (व्यवधान)
I am very sorry.मैंने
नेकस्ट क्वेश्चन
पुकार लिया है
(व्यवधान) आप
कृपया स्थान
ग्रहण कर लें
।
श्री
प्रहलाद
गुंजल: ***
श्री
अध्यक्ष:
अंकित नहीं
होगा, अंकित
नहीं हो...(व्यवधान)
अंकित नहीं हो रहा है।
jyg/usc/1736/1130/1d
श्री प्रहलाद गुंजल: ***
श्री अध्यक्ष: अंकित नहीं हो रहा है। आप
सदन का समय यूं ही गंवा रहे हैं।
श्री प्रहलाद गुंजल:***
श्री अध्यक्ष: सत्ता पक्ष के माननीय मुख्य सचेतक महोदय, मैं आपसे
निवेदन कर रही हूं कि आप अपने माननीय सदस्य को बैठाएं।
श्री अध्यक्ष: नेक्स्ट क्वेश्चन। डा. श्रीगोपाल बाहेती।
श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्द): ***
श्री अध्यक्ष: राजसमन्द से आने वाले माननीय सदस्य, टिप्पणी न आप बैठे
करेंगे और न खड़े होकर करेंगे। यह मैं आपको चेतावनी दे रही हूं।
क्रीड़ा परिषद से
सम्बद्ध
खेल
संघों को
आर्थिक सहायता
168. डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्कर): क्या युवा एवं खेलकूद मंत्रि यह
बताने की कृपा करेंगे:-
(1) राज्य के कितने खेल संघ
राजस्थान खेल परिषद से सम्बद्ध हैं, सूची सदन की मेज पर रखें।
(2) क्या यह सही है कि
सरकार द्वारा गत दो वर्षों में इन खेल संघों को
कोई आर्थिक
सहायता दी गई है, यदि
हां, तो कितनी-कितनी राशि संघों को दी गई व नहीं तो क्यों, विवरण सदन की मेज पर
रखें।
(3) क्या इन संघों को अपने
खेलों में राष्ट्रीय स्तर पर कोई पदक जीते, यदि हां, तो किस-किस खेल में किस-किस
संघ ने, विवरण सदन की मेज पर रखें।
युवा एवं खेलकूद मंत्री (श्री युनुस खान) : (1) राजस्थान राज्य क्रीड़ा
परिषद ने अभी तक 40 राज्य स्तरीय संघों को सम्बद्धता दी है। सूची परिशिष्ट
‘’क’’ पर संलग्न है।
(2) जी हां, गत 2 वित्तीय
वर्षों में परिषद द्वारा संघों को दी गई आर्थिक सहाययता का विवरण परिशिष्ट- ‘’ख’’ पर संलग्न है।
डा. श्रीगोपाल बाहेती: माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से
माननीय मंत्रीजी से पूछना चाहता हूं कि 40 संघ आपके यहां पर रजिस्टर्ड है उसमें
23 को आपने आर्थिक सहायता दी है और इसमें भी जिन लोगों ने स्वर्ण पदक जीते हैं
राजस्थान के लिए उन लोगों को सहायता बहुत कम दी गई है या नहीं दी गई है तो आपके
सहायता देने के मापदण्ड क्या है, जब से आपने खेल नीति बनाई है उसके बाद से सरकार
ने खेलों को बन्धक बना लिया और जो लोग राजस्थान का नाम ऊँचा कर रहे हैं और खेलों
में गति ला रहे हैं उन लोगों को सहायता देने में आप कंजूसी और कोताही बरत रहे हैं।
यह क्या राजनीतिक भेदभाव है या आपकी कोई नीति है, कृपया स्पष्ट करें।
श्री युनुस खान: आदरणीय अध्यक्ष महोदय, हमारी खेल नीति बिलकुल स्पष्ट
है। हमारे यहां पर राजस्थान राज्य क्रीड़ा परिषद से 40 खेल संघ सम्बद्धता रखते
हैं। राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय
खेलों का आयोजन करते हैं, जो वास्तविक खर्चा
होता है, उसका बिल हमारे यहां परिषद में सब्मिट करते हैं, उसकी बाकायदा जांच होती
है और उसके बाद उसका भुगतान किया जाता है और यह सतत प्रक्रिया है। वर्ष 2004-05 का भी भुगतान हमने किया है। चूंकि कई खेल संघ अपना आयोजन करते हैं, राज्य और राष्ट्रीय
स्तर के जिन खेल आयोजनों के बिल हमारे पास आते हैं, उन्हीं को भुगतान किया जाता
है।
जहां तक आपने कहा, हमारे
क्रीड़ा अधिनियम, 2005 में किसी प्रकार का आज तक कोई राजनीतिक भेदभाव नहीं किया है और चूंकि पिछले वर्ष 2005-06 के अन्दर केन्द्र सरकार की जितनी भी योजनाएं हैं, खेल विभाग ही एक ऐसा विभाग है जिसको एक रुपया भी अनुदान का केन्द्र सरकार द्वारा
नहीं दिया गया है और
हमारी बहुत सारी योजनाएं चल रही है जिनमें केन्द्र सरकार से भी पैसा आने वाला था, उसकी वजह से भी रूकी हुई है। पिछले साल खेल के क्षेत्र में
हमने विशेष रूप से खर्च किया। आपने खिलाडि़यों के लिए बात कही है मैं निवेदन करना
चाहता हूं कि हमने हमारे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाडि़यों को प्रोत्साहित करने के लिए बहुत सारे काम किए हैं जिनमें मेजर राज्यवर्द्धन सिंह जो अभी लेफ्टिनेण्ट
कर्नल हैं, उनको 11 लाख रुपए नकद....।
डा. श्रीगोपाल बाहेती: माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा विषय यह नहीं है। माननीय मंत्रीजी के जवाब से साफ है कि कालम नम्बर 41, खिलाडि़यों को यात्रा भत्ता/पुरस्कार, उसमें सारे कालम खाली है, केवल एक कालम भरा हुआ है। इसके अलावा आप यह देखिए, आपके द्वारा जवाब दिया हुआ है उसमें यह है कि एथेलेटिक्स में 9 स्वर्ण पदक, साइकलिंग में 8 पदक, गोल्फ में 4 पदक और कुश्ती में 5 पदक जीते। कुश्ती संघ अभी आपके यहां चूरू में आयोजन कराकर आया है, उसको भी आपके यहां से यह कहा गया है कि दो महीने बाद पैसा मिलेगा। आप जब खिलाडि़यों को पैसा नहीं दे सकते और इतनी बड़ी बात करते हैं, आपने खेल अधिनियमकेवल मात्र इसलिए बनाया कि आप क्रिकेट