vkj/akt/15032007/1100/1a

अशोधित प्रति प्रकाशनार्थ नहीं

 

राजस्‍थान विधान सभा की कार्यवाही का वृतान्‍त

 

अंक 7   बारहवीं विधान सभा के सातवें सत्र का पन्‍द्रहवां दिवस     संख्‍या  11

 

गुरुवार, 15 मार्च, 2007

 

राजस्‍थान विधान सभा की बैठक 11:00 बजे

विधान सभा भवन जयपुर, में प्रारम्‍भ हुई।

 

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

 

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, देखिये अध्‍यक्ष महोदय, इस विधान सभा की गरिमा को तार-तार होते देखिये। यह विधान सभा की गरिमा को तार-तार होते देखिये अध्‍यक्ष महोदय। (व्‍यवधान)

(श्री मंगलाराम गोदारा, सदस्‍य, विधान सभा ने सदन में धरना दिया)

एक माननीय सदस्‍य: यह क्‍या हो रहा है अध्‍यक्ष महोदय? यह विधान सभा है या म्‍युनिसिपल है? (व्‍यवधान) यह विधान सभा है या प्रदर्शन है?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, यह विधान सभा की गरिमा है? विधान सभा नियमों से चलती है। (व्‍यवधान)

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (सरकारी उप मुख्‍य सचेतक):यह ट्रेड यूनियन का दफ्तर नहीं है। जिस तरह से ट्रेड यूनियन के दफ्तर में जो चाहे मर्जी आये, वह करते हैं। यह ट्रेड यूनियन का दफ्तर नहीं है, यह पवित्र सदन है। इस सदन में सदन की मर्यादाओं का पालन किया जाना चाहिए। (व्‍यवधान)  

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन में नारेबाजी)

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इन्‍होंने इस सदन को, इस पवित्र सदन को ट्रेड यूनियन का दफ्तर बना दिया।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, आज आप जितने आहत होंगे, जितना आपका मन पीड़ा से भरा होगा, कभी नहीं भरा होगा। आपके चेहरे के हाव-भाव से लगता है, विधान सभा की गरिमा को तार-तार करने का काम कर रहे हैं ये। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। माननीय सदस्‍यगण, माननीय सदस्‍यगण, यह आप जो कुछ लाये हैं, यह मैं ही नहीं देख रही हूं, सारे प्रदेश के अन्‍दर इसका आंकलन किया जा रहा है कि कितना नुकसान हुआ है? और माननीय सदस्‍य, डूंगरगढ़ से आने वाले माननीय सदस्‍य, आप कृपया अपने स्‍थान पर जायें। माननीय सदस्‍य, डूंगरगढ़ से आने वाले माननीय सदस्‍य, आप कृपया अपने स्‍थान पर चले जायें। आप कृपया अपने स्‍थान पर जायें। माननीय सदस्‍यगण, माननीय सदस्‍यगण। (व्‍यवधान) आप जो हाथ में लिये फिर रहे हैं, इन्‍हें कृपया बाहर रख आयें। इन्‍हें कृपया बाहर रखिये। आसन आपसे पुन: आग्रह कर रहा है कि आप कृपया इन्‍हें यहां नहीं रखें। (व्‍यवधान) ये सदन की मेज पर रख दें। आप जो कुछ लाये हैं, सदन की मेज पर रख दीजिये। यहां कोई चीज प्रदर्शित करते हैं तो सदन की मेज पर रखते हैं। मैं आप सबसे कहती हूं कि सदन की मेज पर रखें। सदन की मेज पर रख दें आप। (व्‍यवधान) नवलगढ़ से आने वाली माननीय सदस्‍या, आप सदन की मेज पर रख दें। सदन की मेज पर रख दें। (व्‍यवधान)       

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन में नारेबाजी)

आप नारे लगा रहे हैं, बजाय नारे लगाने के, आपको जो कुछ कहना है, उचित रहे, आप वह कहें। सरकार को सुझाव दें। अपनी बात कहें। किसानों की बात करें तो ज्‍यादा अच्‍छा होगा। सरकार का जवाब भी सुनिये, सरकार का वक्‍तव्‍य भी सुनें, अपने सुझाव भी दें।

मैं आपसे पुन: आग्रह करती हूं कि आप केवल नारों से नहीं, बल्कि बतायें कि क्‍या करना है?

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन में नारेबाजी)

सदन में नियमों की अवहेलना भी नहीं चलेगी, नहीं चलेगी। अधिक समय तक सदन में आसन की अवहेलना भी नहीं चलेगी, नहीं चलेगी।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): इस सदन में इस प्रकार की अवहेलना नहीं चलेगी, नहीं चलेगी।

एक माननीय सदस्‍य: सदन में नियमों की अवहेलना नहीं चलेगी, नहीं चलेगी।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): सदन में नियमों की अवहेलना नहीं चलेगी, नहीं चलेगी। (व्‍यवधान)

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): पश्चिमी बंगाल में नंदीग्राम में आपने 13 किसानों को मारा है। आप तो किसानों के हित की कोई बात नहीं करते हो। (व्‍यवधान)

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन में नारेबाजी)

श्री अध्‍यक्ष: सरकार, वह निकम्‍मी आपके लिए है लेकिन विपक्ष भी निकम्‍मा अपने आपको साबित कर रहा है। (व्‍यवधान) आप बात क्‍यों नहीं कहते। आप यहां पर वार्ता कीजिये। केवल नारे लगाने से कैसे काम चलेगा? आप चर्चा कीजिये। चर्चा कीजिये, नारे लगाने से थोड़े ही काम चलता है।

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन में नारेबाजी)

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): *** किसानों के हत्‍यारों, आप तो किसानों के हत्‍यारे हो। कोई बात करने का अधिकार.... (व्‍यवधान)

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन में नारेबाजी)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण, मैं डूंगरगढ़ से आने वाले माननीय सदस्‍य को यह बताना चाह रही हूं कि पार्लियामेंट्री प्रेक्टिस एण्‍ड प्रोसीजर है, उसे पढ़कर सुना रही हूं, जी.सी.मल्‍होत्रा ने वह किताब लिखी है - "A member is not to resort to hunger strike, dharna, demonstration, or perform any religious function in the precincts of the Parliament House and the Parliament House Estate." …

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, पेज नम्‍बर कितने पर है? पेज नम्‍बर कितने पर है?

श्री अध्‍यक्ष: It means 'Assembly'. असेम्‍बली में आप न धरना दे सकते हैं, न आप और किसी तरह का डिमोंस्‍ट्रेशन कर सकते हैं। इसलिए मैं आपसे पुन: अनुरोध करूंगी कि अपने स्‍थान पर चले जायें। (व्‍यवधान)

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन में नारेबाजी)

सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्‍थगित की जाती है।

 

(सदन की बैठक 1106 बजे, 1400 बजे तक के लिए स्‍थगित हुई।)

 

 

 

Jkj/akt/15.3.2007/2c/14.00

 

पुन: समवेत् होने पर

(14.00 बजे)

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

 

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा लगातार नारेबाजी)

 

नियम 295 के अन्‍तर्गत विशेष उल्‍लेख की सूचनाएं

 

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण, आज जिन माननीय सदस्‍यों ने 295 के अपन  प्रस्‍ताव दिये हैं विशेष उल्‍लेख के, उन्‍हें पढ़ा हुआ मान लिया जायेगा। 

परची के माध्‍यम से जो प्रश्‍न उठाये गये हैं, मैं नाम पुकार रही हूं मोहम्‍मद माहिर आजाद का, श्री टीकमचन्‍द कांत का, श्री जोगाराम पटेल, श्री सांगसिंह भाटी। (व्‍यवधान)

 

 

पर्ची के माध्‍यम से उठाये गये मुद्दे

जैसलमेर जिले में बाहर की कम्‍पनियों द्वारा भूमि खरीद

 

श्री सांगसिंह भाटी(जैसलमेर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका एक सीमांत जिले की तरफ ध्‍यान दिलाना चाहूंगा कि मेरे जैसलमेर जिले में दो-तीन सालों से लगातार बाहर की कम्‍पनियों द्वारा जमीनें खरीदी जा रही हैं, उसका कोई न अता और न पता है और ऐसी जमीनें खरीदना एक सीमांत जिले में राष्‍ट्र को खतरा है, कोई गलत गतिविधि का आदमी बोर्डर पर आकर बैठना, मैं सरकार से निवेदन करता हूं आपके माध्‍यम से कि वे सब बाहर के लोग करोड़पति, गरीब परिवार दिन प्रतिदिन भूमिहीन होते जा रहे हैं, कृपया उनके रोक लगाई जाय और यह राष्‍ट्र के हित में होगा कि बाहर की कम्‍पनियों द्वारा जो जमीनें खरीदी जा रही हैं और गरीब परिवार सारे के सारे भूमिहीन होते जा रहे हैं, इसलिए आपके माध्‍यम से मैं सदन से निवेदन करना चाहता हूं, माननीय रेवेन्‍यू मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहता हूं कि जैसलमेर जिला एक सीमांत जिला है वहां जो भी जमीन खरीदें, राजस्‍थान का वाशिंदा होना चाहिए, राजस्‍थान का मूल निवासी होना चाहिए, नहीं तो बाहर के लोगों को जमीन अलाटमेंट नहीं होनी चाहिए।  आपने मुझे समय दिया..(व्‍यवधान) यह बहुत ही गम्‍भीर मामला है, राष्‍ट्र की सुरक्षा के हित में खतरा है, इसलिए आपसे निवेदन करता हूं कि तुरंत प्रभाव से इस पर रोक लगाई जाये।  सीमांत जिले की सुरक्षा की जाये।  आपने जो समय दिया उसके लिए बहुत-बहुत  धन्‍यवाद। (व्‍यवधान) माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मैं यहां प्रतिपक्ष के सदस्‍य जो विराजे हैं, आपसे निवेदन करना चाहूंगा कि आप अगर किसानों के हितैषी हो तो सदन में चर्चा करनी चाहिए, अपने-अपने क्षेत्र में जाकर रिपोर्ट लेनी चाहिए और यह हुल्‍लड़ करना, हाय-हाय कहना, काश्‍तकारों के हितैषी आप नहीं हो।  अगर काश्‍तकारों के हितैषी होते, बिजली के बिल की माफ की बात कर रहे हो, आपके राज में काश्‍तकारों के कनेक्‍शन पर, काश्‍तकारों के कृषि कनेक्‍शन लाखों की तादाद में पेण्डिंग पड़े थे।  लाखों की तादाद में पेण्डिंग पड़े थे वह कनेक्‍शन।  हमारा राज्‍य आने के बाद काश्‍तकारों को, कम से कम तीस-पैंतीस हजार काश्‍तकारों को कनेक्‍शन दिये गये हैं और वह काश्‍तकार के खेत तक बिजली हमारी सरकार ने पहुंचाई।  यह घडि़याली आंसू मत बहाओ और अपने क्षेत्रों में जाकर पता करो कि काश्‍तकारों का कितना नुकसान हुआ है। घडि़याली आंसू बहाने से कोई आपको हासिल नहीं होना है। (व्‍यवधान)

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा लगातार नारेबाजी)

श्री अध्‍यक्ष: मैं प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों से निवेदन करना चाहूंगी कि मुख्‍य मंत्रीजी बोलेंगी, कुछ घोषणाएं करेंगी इसलिए आप अपने-अपने स्‍थान पर चले जायें ताकि मैं सामान्‍य वाद-विवाद पर आगे वाद-विवाद को प्रारम्‍भ कर सकूं।  आप इसी प्रकार से शोर करते रहेंगे तो मुख्‍य मंत्रीजी जो घोषणाएं करना चाहती हैं वो घोषणा कैसे कर पायेंगी। आप अपने-अपने स्‍थान पर चले जायें माननीय सदस्‍य।  माननीय सदस्‍य, आप अब आसन को मजबूर ही कर रहे हैं।  मैं आपसे पुन: आग्रह करती हूं कि आप अपनी नारेबाजी बंद करके अपने-अपने स्‍थान पर चले जायें। माननीय सदस्‍यगण। माननीय सदस्‍यगण।

सदन की कार्यवाही 3.00 बजे तक के लिए स्‍थगित की जाती है।

 

(तदनन्‍तर सदन की बैठक 14.07 बजे, 15.00 बजे तक के लिए स्‍थगित हुई।)

 

 

Lpm/akt/1500/2j/15032007

 

(पुन: समवेत् होने पर)

(15.00 बजे)

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

 

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा लगातार नारेबाजी)

 

श्री अध्‍यक्ष: माननीय  प्रतिपक्ष के सदस्‍यगण आपसे मेरा पुन: निवेदन है कि माननीय मुख्‍यमंत्री सदन की नेता आज कुछ घोषणाएं करेंगी, आप कृपया अपने-अपने स्‍थान पर जाकर के शांतिपूर्वक बैठे। आपको जो कुछ कहना है उसको आप कहिए, अपने सुझाव दीजिए, सरकार की कमियां बताइएं लेकिन आपके इस तरीके से मुरदाबाद और जिन्‍दाबाद करने से थोड़े ही काम चलेगा। सदन का समय चलाये, सदन को चलने दीजिए, सदन चले राजस्‍थान की जनता चाहती है कि सदन चले, आपके बहुमूल्‍य सुझाव उसमें आये, आपसे मेरा पुन: निवेदन है कि आप मुझे मजबूर ना करें, आसन को सहयोग करें, आसन का सहयोग करें। माननीय प्रतिपक्ष के सदस्‍यगण आप आसन का सहयोग करें, आसन आपसे सहयोग मांग रहा है, आसन आपसे सहयोग मांगता है, आप आसन का सहयोग करें, आप बहुत जिम्‍मेदार माननीय सदस्‍य हैं, जनता को बहुत उम्‍मीदें हैं आपसे, आप अपना स्‍थान ग्रहण करें। आपने शायद यह फैसला कर लिया है कि आपको केवल नारे लगाने हैं, आपको न सुझाव देने हैं, न आपको कुछ और कहना है, न आपको अपने रचनात्‍मक सुझाव देने हैं, न आपको सरकार को कंडेम करना है, आपको केवल नारे लगाने हैं। मैं अब सदन की कार्यवाही प्रारंभ कर रही हूं। श्री सांवरलाल।

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा लगातार नारेबाजी)


समिति का प्रतिवेदन

राजस्‍थान भू-जल विकास और प्रबंध का विनियमन और नियंत्रण विधेयक, 2006

पर गठित प्रवर समिति के प्रतिवेदन के उपस्‍थापन हेतु नियत समय में वृद्धि

 

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूं कि राजस्‍थान भू-जल विकास और प्रबन्‍ध का विनियमन और नियंत्रण विधेयक,2006 पर प्रवर समिति के प्रतिवेदन के उपस्‍थापन हेतु नियत समय को आगामी सत्र के प्रथम सप्‍ताह तक बढ़ा दिया जाए।

श्री अध्‍यक्ष: प्रश्‍न यह है कि प्रवर समिति के प्रतिवेदन के उपस्‍थापन हेतु नियत समय को आगामी सत्र के प्रथम सप्‍ताह तक बढ़ा दिया जाए?

(स्‍वीकृत)

नियत समय में वृद्धि का प्रस्‍ताव स्‍वीकार किया गया।

आय-व्‍ययक-2007-08 सामान्‍य वाद-विवाद के लिए मैं नाम पुकार रही हूं। डॉ. एन.एस.गुर्जर।

आय-व्‍ययक पर सामान्‍य वाद-विवाद

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): अध्‍यक्ष महोदय, इस पर ये तो बोल चुके हैं और हमारी बात सुनना नहीं चाहते हैं...

श्री अध्‍यक्ष: इनका तो एक-सूत्री कार्यक्रम है, आपको बोलना है तो बोलिए, इनका तो एक-सूत्री कार्यक्रम है।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): अध्‍यक्ष महोदय, इसमें सुने और बात बैठे तो हम इनको बतायें, इनका उत्‍तर दें, जो इन्‍होंने सवाल उठाया है लेकिन अब ये किसानों के लिए यहां घडि़याली आंसू बहा रहे हैं और हाँ-हुल्‍लड़ कर रहे हैं, इसमें कैसे संभव हो कि हम बोल सके? कैसे संभव हो हम बोले? अध्‍यक्ष महोदय, हाउस आर्डर में हो तो हम कुछ बोलने की कोशिश करें (व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, हाउस आर्डर में हो तो मैं कुछ बोलूं।

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा लगातार नारेबाजी)

श्री अध्‍यक्ष: श्री ज्ञानचन्‍द पारख, श्री मदन राठौड़।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अध्‍यक्ष महोदय, 9 मार्च को जब यहां पर सत्र आहूत हुआ और 9 मार्च को श्रद्धेय मुख्‍यमंत्रीजी ने वित्‍तमंत्री के नाते जब बजट प्रस्‍तुत किया तो उस समय एक कांग्रेस पार्टी के अति-उत्‍साही माननीय सदस्‍य ने एक कटाक्ष किया था लेकिन जब हमारे माननीय मुख्‍यमंत्रीजी ने बजट पढ़ना शुरू किया तो इनके चेहरे की हवाइयां बदलने लगी, इनके चेहरे की रंगत बदलने लगी और वास्‍तव में जो कटाक्ष किया था जब मुख्‍यमंत्रीजी ने बजट पढ़ना शुरू किया तो धीरे-धीरे इनकी 12 बजने लगी और 12 बज गई और इनके पास कहने को कुछ नहीं है। अध्‍यक्ष महोदय, जब बजट पर इनकी प्रतिक्रियाएं आना शुरू हुई तो मुझे तो आश्‍चर्य हुआ कि नाथद्वारा के माननीय सदस्‍य जब बोलना शुरू हुए तो उनको इस पूरे बजट में कुछ भी नहीं मिला और केवल मैं-मैं करते रहे और मैं पर ही वो व्‍यंग्‍य करने की कोशिश की और तभी मैंने उसी समय टोका था कि जब इनके मंत्री, जब इनका कांग्रेस का शासन था और इनके मंत्री ने जब बजट पढ़ना शुरू किया तो मैंने इनके सामने और वो बजट की इनकी 2002-03 की प्रतियां प्रस्‍तुत की जिनमें 64 बार इन्‍होंने मैं शब्‍द का प्रयोग किया। वो मैंने इनके सामने बताया। अध्‍यक्ष महोदय, इनको हमारे बजट में मैं के सिवाय हम कहीं नहीं दिखाई दिया जबकि हमारे मुख्‍यमंत्रीजी ने 18 बार हम और हमारी सरकार का प्रयोग किया। ये इनके ध्‍यान में नहीं आया। इनको कुछ भी ऐसा नहीं मिला जिसमें ये कोई कमी निकाल सके। अध्‍यक्ष महोदय, इनके पास कहने को कुछ नहीं है, ये केवल हंगामा करना चाहते हैं, इनको मालूम है कि मुख्‍यमंत्रीजी ने ऐसा बजट प्रस्‍तुत किया जिसकी सर्वत्र प्रशंसा हो रही है और यहां राजस्‍थान की जनता मस्‍ती से झूम रही हैं और किसान खुश हैं, वो मजदूर खुश हैं और उन मजदूरों की और जो गैर संगठित ऐसे कर्मगार थे जो रिक्‍शा वाले, जो ठेले वाले, जिन की आज तक किसी ने चिंता नहीं की, उनकी चिंता मुख्‍यमंत्रीजी ने की है। इनके पास में कहने को कुछ नहीं है, ये इलाक़े में जा नहीं सकते, इलाक़े में जाए तो इनके कपड़े फाड़ देंवे। आज अध्‍यक्ष महोदय मैं आपके सामने दावे से कहना चाहता हूं कि आज ये हाय-हुल्‍लड़ कर रहे हैं, ये मुरदाबाद कर रहे हैं, इनकी जनता शर्मसार हो रही है जिन्‍होंने इनको जीता के भेजा, वह आज शर्म से और अपना मुंह नीचा करके कर रही है कि उन्‍होंने कैसे ऐसे लोगों को भेज दिया जो हमारी चिंता को सदन के अंदर नहीं रख रहे हैं, जो हमारी चिंता नहीं कर रहे हैं, जो केवल अपनी प्रतिष्‍ठा की चिंता कर रहे हैं, जो केवल यश के लिए मर रहे हैं, जनता के लिए चिंतित नहीं है, मैं आपके सामने कहना चाहूंगा अध्‍यक्ष महोदय, इस बजट की सर्वत्र प्रशंसा हुई है, महिलाओं ने अभी आपको मालूम होगा कि जब इन्‍होंने यहां पर हिण्‍डौली के सदस्‍य ने सदन में चर्चा की तो खुद ने स्‍वीकार किया कि उनकी खुद की पत्‍नी ने कहा कि इतना बढि़या बजट आपकी मुख्‍यमंत्री ने पेश किया है, यह रिकार्ड में है अध्‍यक्ष महोदय, ये रिकार्ड में आया हुआ है कि इनकी पत्‍नी ने प्रशंसा की, इनके घरों में इनकी पत्नियां इनको बोलने नहीं देती हैं, इनके पास में कहने को कुछ नहीं है, ये इतने निरुत्साहित हो चुके हैं, इतने हताश हो चुके हैं कि हताशा में इनके समझ में नहीं आ रहा है कि हम कैसे इस बजट की आलोचना करें। कहने को कुछ भी नहीं है इस बजट में, ये कुछ भी नहीं बता सकते, अध्‍यक्ष महोदय, केन्‍द्र ने कई बार भेदभाव किया, मैं तो आपको एक बात बना चाहूंगा अध्‍यक्ष महोदय, ये आलोचना करना चाहते है, आपने नवज्‍योति पढ़ा होगा, जब मुख्‍यमंत्रीजी ने बजट पेश किया तो नवज्‍योति के मुख पृष्‍ठ पर एक डेयरी का चित्र था, साक्षात् लक्ष्‍मी का चित्र नवज्‍योति ने मुख पृष्ठि पर प्रकाशित किया और उसमें मुख्‍यमंत्री लूटा रही है ये ले जाओ कामगारों के लिए, ये किसानों के लिए, ये मजदूरों के लिए, ये कर्मचारियों के लिए, इन्‍हें सब के लिए लुटाया। ये स्थिति है और मुख्‍यमंत्रीजी ने (व्‍यवधान) मुख्‍यमंत्रीजी ने जिस प्रकार से एक मां अपने परिवार की चिंता करती है उस प्रकार से मुख्‍यमंत्रीजी ने पूरे राजस्‍थान की चिंता की है। अध्‍यक्ष महोदय, मां अपने समुख छोटे से बजट के माध्‍यम से, छोटे से बजट से परिवार के सभी सदस्‍यों की चिंता करती है, वह बैंक हमारा भी भरवा देती है, बेटी की शादी की चिंता भी करती है......

 

Bhs/akt/15.3.07/15.10/2k

 

बच्‍चे के लिए ड्रेस की भी चिन्‍ता करती है और पति के लिए स्‍कूटर भी यानी जिस प्रकार से एक गृहिणी पूरे घर को संभालती है ऐसा मातृवत दायित्‍व हमारी श्रद्धेय मुख्‍यमंत्री जी ने निभाया। अध्‍यक्ष महोदय, केन्‍द्र ने भेदभाव किया हमारे साथ केन्‍द्र ने हमारे हक का पैसा नहीं दिया । बाढ़ में जो पर्याप्‍त राशि हमको मिलनी चाहिए थी केन्‍द्र ने नहीं दी। बिजली, जो बिजली हमारे हक की बिजली हमको मिलनी चाहिए थी वो बिजली केन्‍द्र ने नहीं दी। हमें पर्याप्‍त राशि भी नहीं दी । यहां तक कि सरसों की खरीद का भुगतान भी बहुत विलंब से किया उसके लिए भी मुख्‍यमंत्री जी को संघर्ष करना पडा अध्‍यक्ष महोदय, लेकिन इसके बावजूद जनता खुश है मुख्‍यमंत्री जी पर जनता खुश है मुख्‍यमंत्री जी ने सत्‍ता संभाली उसके बाद में कई चुनाव आये। अध्‍यक्ष महोदय, सबसे पहले लोकसभा का चुना आया 25 में से 21 सीटें भारतीय जनता पार्टी ने जीतीं श्रद्धेय मुख्‍यमंत्री जी के नेतृत्‍व में जनता ने फिर विश्‍वास दिलाया। अध्‍यक्ष महोदय, उसके बाद दूसरा चुनाव आया नगरपालिकाओं का और नगरपालिकाओं में ये चारों खाने चित्‍त हो गये। कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया और भारतीय जनता पार्टी नगरपालिकाओं में अधिक जीत कर के आये। अध्‍यक्ष महोदय, उसके बाद चुनाव हुए पंचायत समितियों के, जिला परिषदों के उसमें भी मुख्‍यमंत्री जी के नेतृत्‍व में सभी चुनाव भारतीय जनता पार्टी ने जीते। यही नहीं अध्‍यक्ष महोदय, जो बीस-पच्‍चीस वर्षों से इन्‍होंने चुनाव नहीं कराये ये चुनाव से डरते, रहे भागते रहे वो चुनाव मुख्‍यमंत्री जी ने कराये। अध्‍यक्ष महोदय, मैं बताना चाहूंगा कि कृषि उपज मंडी के चुनाव जिसमें भारतीय जनता पार्टी के लोग जीतकर आये यही नहीं डेयरी के चुनाव, डेयरी के चुनावों में भी बीजेपी जीत कर आयी और यही नहीं कोपरेटिव के चुनाव, कोपरेटिव के चुनावों में भी बीजेपी जीत कर आयी।  ये किस मुंह से जाये ।

अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको एक और जानकारी देना चाहूंगा आपको सब जानकारी है कि हमारी मुख्‍यमंत्री जी के हाथ में यश की रेखा है और उनको एक और बधाई देनी चाहिए कि उनकी छोटी बहन अभी ग्‍वालियर से यशोधरा राजे सिंधिया चुनाव जीत कर आयी है लोकसभा का चुनाव जीत कर आयी है।  अध्‍यक्ष महोदय, यह कोई कम बात नहीं है। अब कोई इनके देवी रूप में चित्र छाप दे तो इनको मौत आती है विपक्ष को मौत आने लग जाती है।  अध्‍यक्ष महोदय, मैं एक दृष्‍टांत आपको देना चाहूंगा कि जब हिंदुस्‍तान पाकिस्‍तान का युद्ध हो रहा था और उस समय हिन्‍दुस्‍तान की प्रधानमंत्री श्रीमती इ‍ंदिरा गांधी थीं और श्रद्धेय वाजपेयी जी ने पाकिस्‍तान को धमकाते हुए कहा था कि पाकिस्‍तान यह नहीं समझे कि हिन्‍दुस्‍तान का नेतृत्‍व किसी महिला के हाथ में है। हमारे यहां महिला को हमने शक्ति के रूप में माना है उसको देवी के रूप में माना है और जिस समय वो रणचंडी का खप्‍पर ले कर के मैदान में आ पड़ती है तो शत्रुओं को नेस्‍तनाबूद कर देती है और इस बात को ले कर के अटलजी ने तो कहा था पाकिस्‍तान को धमकाने के लिए और ये उसको भुनाते रहे अध्‍यक्ष महोदय, और वर्षों तक गीत गाते रहे। मैं एक बात आपसे कहना चाहूंगा अध्‍यक्ष महोदय, आपका लंबा राजनीतिक जीवन है यहां कई महानुभाव हैं जिन्‍होंने राजनीतिक लंबा जीवन जीया है ऐसे कौन मुख्‍यमंत्री थे जिन्‍होंने इंदिरा जी के सुपुत्र को ऊँट से उतारने के लिए अपना कंधा दे दिया था? *** शर्म करो यह शर्म की बात है आपके कांग्रेस के मुख्‍यमंत्री ने इंदिरा गांधी के लड़के संजय गांधी को ऊँट से उतारने के लिए अपना कंधा दे दिया। हिन्‍दुस्‍तान की जनता तो उसी दिन शर्मसार हो गयी थी, राजस्‍थान की जनता कि राजस्‍थान का एक ऐसा मुख्‍यमंत्री जिनको शर्म आनी चाहिए अपना कंधा दिया था उस राजपुत्र जिसको राजपुत्र माना गया था उसको उतारने के लिए अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे एक बात यह भी कहना चाहूंगा कि मुख्‍यमंत्री जी ने जब सत्‍ता संभाली तब राजस्‍व घाटा तीस प्रतिशत था राजस्‍व घाटा एक तिहाई था लेकिन आज राजस्‍व घाटा सरप्‍लस है ये बहुत खुशी की बात है।  कुशल वित्‍तीय प्रबंधन के कारण यह हमारा कुशल वित्‍तीय प्रबंधन है। आपको मालूम है कि कांग्रेस ने सेवानिवृत्ति की आयु दो वर्ष घटा ली थी, 58 वर्ष कर ली थी लेकिन अब एक साथ भार पडा है तीन गुना भार पडा और सात सौ करोड़ का बोझ हमारी इस राजस्‍थान सरकार पर आया लेकिन इनका कुशल वित्‍तीय प्रबंधन है कि उसकी भी परवाह नहीं की अध्‍यक्ष महोदय, यही नहीं सरकारी कर्मचारियों को बोनस दिया, महंगाई भत्‍ते पर 11 प्रतिशत और उससे अभी लगभग 600 करोड़ का बोझ राजस्‍थान की सरकार पर आया लेकिन उसकी भी परवाह नहीं की उनको भी खुश किया। यही नहीं आपको मालूम होगा कि 20 पाइंट प्रोग्राम, 20 पाइंट प्रोग्राम में जब से भारतीय जनता पार्टी की सरकार राजस्‍थान में बनी है तीनों बार फर्स्‍ट रहा है हिन्‍दुस्‍तान में प्रथम राजस्‍थान की सरकार रही है। यह बहुत खुशी की बात है।

अध्‍यक्ष महोदय, कभी भी ओवरड्राफ्ट नहीं लिया जबकि ये आठ सौ दिन अपने ओवरड्राफ्ट के सहारे ये जिन्‍दा रहे ये इनके तो शर्मसार है। ये सोच भी नहीं सकते कल्‍पना भी नहीं कर सकते कि इस प्रकार की स्थिति यहां पर हो सकती है अध्‍यक्ष महोदय, आपको मैं एक जानकारी दूं कि राजस्‍थान की सरकार ने जो अभाव अभियोग और उनकी समस्‍या सुनने का जो कार्यक्रम चालू किया है उसकी सर्वत्र प्रशंसा हुई है। कलेक्‍ट्रेट में भी जनसुनवाई हो रही है। ये सुनवाई मुख्‍यमंत्री जी खुद भी करती हैं और जिला स्‍तर पर भी, तहसील स्‍तर पर भी, एसडीओ स्‍तर पर भी जनसुनवाई हो रही है इसलिए सामान्‍य जनता की सुनवाई करके उनका निराकरण करवाना, उनको नियम और कानून और उनको लाभ इसमें जल्‍दी से जल्‍दी मिल सके इसके बारे में ये चिन्‍ता कर रही हैं।  

अध्‍यक्ष महोदय, महिलाओं की चिन्‍ता किसने की? ये लोग तो बड़े चिंतित हैं। ये ढोल पीटते हैं कि हम चिन्‍ता कर रहे हैं लेकिन महिलाओं के लिए जैसे स्‍टेंप ड्यूटी में पाँच प्रतिशत की जो राहत दी उसका यह लाभ मिला कि लगभग पौने चार लाख महिलाओं को संपत्ति का अधिकार मिला। अध्‍यक्ष महोदय, ये जो कर्जा लेते थे 28 प्रतिशत और हमने कर्जा लेने की रेट घटाई अभी 17 प्रतिशत हम कर्जा ले रहे हैं जबकि इन्‍होंने सरकार छोड़ी तो हिन्‍दुस्‍तान पर 52 हजार करोड़ का कर्जा छोड़ा। ये कितनी शर्म की बात है लेकिन इन्‍होंने स्‍थायी परिसंपत्तियों का निर्माण नहीं किया। अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको बताना चाहूंगा कि अभी जो हमने केंप चलाये उन केंपों के माध्‍यम से पूरा आकलन हुआ 99.5 प्रतिशत स्‍थायी परिसंपत्तियां मौजूद पायी गयीं। यह कोई कम बात नहीं है। अध्‍यक्ष महोदय, यह आपको मैं जानकारी दूं कि 11वीं पंचवर्षीय योजना जो 68,422 करोड़ रुपये की बनी और दसवीं पंचवर्षीय योजना जो केवल 31,832 करोड़ रुपये की थी यानी दुगुनी से भी अधिक यह हमारी मुख्‍यमंत्री जी ने किया है।

अध्‍यक्ष महोदय, यह मैं आपको बताऊं कि मैं कोई क्‍वा‍त्रोची की बात यहां करना नहीं चाहूंगा। क्‍वात्रोची की बात करूंगा तो इनकी हालत खराब हो जाएगी। जिस क्‍वात्रोची को बचाने के लिए जो मामा कहलाता था, इन कांग्रेसियों का मामा क्‍वा‍त्रोची, ये मामा के नाम से जो सोनिया जी के घर में जिसकी पहचान थी, उस क्‍वात्रोची को बचाने का षड्यंत्र  इन्‍होंने किया है । यह अपराध इन्‍होंने किया है। ये इनके लिए शर्म की स्थिति है। ये किस मुंह से बोलें जनता इनकी सुनती नहीं, जनता इनकी परवाह करती नहीं, इनकी जनता के सामने जाने की स्थिति नहीं है।

अध्‍यक्ष महोदय, ये रिक्‍शा वाले, ठेले वाले बहुत खुश हैं। ये मुख्‍यमंत्री से बहुत खुश हैं क्‍योंकि उनके बारे में किसी ने कभी भी चिन्‍ता नहीं की । आज कोई कर्मचारी रिटायर होता है तो उसको पेंशन मिलती है लेकिन ये बेचारे उम्र पार कर लेते हैं जिन्‍दगी भर वो ठेला चलाते हैं, रिक्‍शा चलाते हैं लेकिन अंत में जब वो रिटायर हो जाते हैं उम्र पार हो जाती है जब उसकी टांगों में जोर नहीं रहता जब रिक्‍शा चला नहीं सकता तब उसकी कोई सुध लेने वाला नहीं है लेकिन अध्‍यक्ष महोदय, इनकी चिंता भी हमारी मुख्‍यमंत्री जी ने की है और उनसे सहयोग लेकरके और जितना वो सहयोग देते हैं एक हजार रुप्‍ये तक का और वो राशि जमा करने के बाद में और उनकी उम्र 58 वर्ष हो जाएगी तो उनको भी इसका पेंशन के रूप में वापस मिलेगा ताकि वो भी अपनी वृद्धावस्‍था में सम्‍मान की जिन्‍दगी जी सकें। अध्‍यक्ष महोदय, विकलांग के लिए या युवाओं को आज आप एक बात सोचिये अध्‍यक्ष महोदय, युवाओं को रोजगार नहीं मिलता है तो उनको भत्‍ता दिया। यानी बेरोजगारी भत्‍ता देने की बात चार सौ रुपये युवाओं को बेरोजगार भत्‍ता और पाँच सौ रुपये युवतियों को और छ: सौ रुपये विकलांगों को इस प्रकार की जो घोषणा की है ये मुख्‍यमंत्री जी की घोषणा वास्‍तव में उन युवाओं के दिल को छूने वाली है वो युवा आज खुश हैं । युवा खुश, महिला खुश, मजदूर खुश, व्‍यापारी खुश सभी लोग खुश हैं तो इनको सिर छुपाने के लिए जगह नहीं है। इनकी हालत खराब है। अध्‍यक्ष महोदय, यही नहीं मैं आपके माध्‍यम एक निवेदन और करना चाहूंगा श्रद्धेय मुख्‍यमंत्री जी को कि मुख्‍यमंत्री जी, आपने बहुत बढि़या बजट पेश किया है लेकिन कृपा करके सभी वृद्धों को जिनकी उम्र 65 वर्ष पार हो गयी जिनको आप बसों में राहत देते हैं जिनको आप और जगहों पर राहत देते हैं यदि उन सबको भी आप राहत दे सकें उनको वृद्धावस्‍था पेंशन 65 वर्ष की उम्र पार करने पर चाहे कोई भी जाति का हो, कोई भी वर्ग का हो जिसकी उम्र 65 वर्ष पार हो गयी उसको दें । आप इस प्रकार का और पेंशन का इनके लिए आप करेंगी तो वो भी निश्चित रूप से आपको अपने सिर पर और वास्‍तव वो सही रूप में आपकी तस्‍वीर बना कर के पूंजेंगे क्‍योंकि बुजुर्ग हो गया वो तो उसके कोई लड़का भी होगा लेकिन लड़का नौजवान हो गया वो अपनी पत्‍नी को लेकर उसके साथ रहने लग जाता है लेकिन उस वृद्ध की चिन्‍ता वो नहीं करता तो उसकी चिन्‍ता आप करें, यह मैं आपसे निवेदन करना चाहूंगा।

 

कैलाश/अरुण   15.3 07  15.20  (1) 2l

 

अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह भी चाहूंगा कि सभी प्रकार की विधवा जो पेंशन लेना चाहे उसको भी आप पेंशन देने की घोषणा कर सके तो निश्चित रूप से यह एक सराहनीय कदम होगा ।

अध्‍यक्ष महोदय, एक बात और निवेदन करूंगा कि समजा के कई ऐसे लोग हैं जो मांग कर रहे हैं यह बैक लाग की मांग लगातार करते आ रहे हैं और आपने यह घोषणा की है कि बैक लाग मैं बिलकुल शून्‍य कर दूंगी यह निश्चित रूप से प्रशंसा की बात है, यह कोई कम बात नहीं है । अध्‍यक्ष महोदय, बैक लाग आपने पूरा भरने की बात कही है इससे एससी के लोग खुश हैं, एसटी के लोग खुश हैं और अनुसूचित जाति जन जाति के सभी वर्गों के लोग खुश हैं यह कोई कम बात नहीं है । यह आपने बहुत बढिया बात की है । समाज के कई लोग जो मांग करते रहे हैं कि आर्थिक आधार पर जो पिछडे लोग हैं उनको भी राहत दी जानी चाहिये लेकिन मैं आपकी प्रशंसा करना चाहूंगा कि आपने आर्थिक पिछडा आयोग के गठन करने की जो घोषणा की है वह प्रशंसनीय कदम है यह बहुत बढिया काम आपने किया है । इसके लिये मैं आपको बहुत बहुत साधुवाद दूंगा । अध्‍यक्ष महोदय, हम जब कभी भी अख़बार देखते हैं कि ओलम्पिक के गेम आ रहे हैं और उसमें जब हम इतने बडे भारत का नाम ढूंढने की कोशिश करते हैं तो ऊपर से नाम मिलता नहीं है नीचे से कहीं नाम मिलता है लेकिन इसका कारण है कि इन्‍होंने कभी भी चिंता नहीं की । खेल प्रतिभाओं को प्रोत्‍साहित करने की इन्‍होंने कभी भी परवाह नहीं की । वह परवाह आपने की है मैं इसके लिये आपको बहुत बहुत धन्‍यवाद देना चाहूंगा । हमारे मुख्‍य मंत्री जी को धन्‍यवाद देना चाहूंगा जिन्‍होंने किसी भी प्रकार के मैडल जीत कर आने पर, हिन्‍दुस्‍तान का नाम रोशन जिसने किया है उसके लिये इन्‍होंने प्रोत्‍साहन राशि की घोषणा की । ओलम्पिक में जो स्‍वर्ण पदक जीतता है उसके लिये हमारे मुख्‍य मंत्री जी ने 15 लाख रुपये देने की घोषणा की है । जो रजत पदक जीत कर आता है उसको 10 लाख रुपये की घोषणा की है कांस्‍य पदक जीत कर आता है उसको 5 लाख रुपये देने की घोषणा की है । यही नहीं जो एशियन गेम में स्‍वर्ण पदक जीते उसे 5 लाख, रजत पदक जीते उसे 3 लाख और कांस्‍य पदक वाले को डेढ लाख देने की घोषणा की है । कोमन वैल्‍थ के चुनाव में, नेशनल खेलों में जो हिन्‍दुस्‍तान का नाम रोशन कर के आता है उसको प्रोत्‍साहन देने के लिये आपने इस प्रकार की घोषणा की है इसकी प्रशंसा भी की जानी चाहिये । अध्‍यक्ष महोदय, यही नहीं हमने सब क्षेत्रों में कीर्तिमान स्‍थापित किये हैं । अध्‍यक्ष महोदय, मातृ मृत्‍यु दर जो पहले 670 प्रति लाख थी आपने घटाकर 445 की और 148 का लक्ष्‍य रखा है यह प्रशंसा की बात है । अध्‍यक्ष महोदय, संस्‍थागत प्रसव  पहले 17.3 था उसको बढाकर 32.2 किया है यह भी प्रशंसा की बात है । यह है हमारा काम । शिशु टीका करण पहले 21.5 था जो अभी 26.5 आपने किया है । इसमें भी आपने कीर्तिमान स्‍थापित किया है । अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे यह भी निवेदन करना चाहूंगा हमारे यहां पर पहले अस्‍पतालों की चिंता किसी ने नहीं की । लेकिन मुख्‍य मंत्री जी ने निर्देंश दिये और चिकित्‍सा मंत्री जी ने हमारे सभी डाक्‍टर्स के पद भर दिये, मेरे इलाके के सभी डाक्‍टर्स के पद भर दिये । मैं यह भी कहना चाहूंगा कि मेरे सुमेरपुर में 4 डाक्‍टर्स के क्‍वाटर्स और 4 पैरा मैडिकल स्‍टाफ के क्‍वाटर्स और 2 चतुर्थ श्रेणी के क्‍वाटर्स के लिये राशि इन्‍होंने स्‍वीकृत की, यह भी प्रंशसा की बात है । अध्‍यक्ष महोदय, मैं जलदाय की बात करना चाहूंगा । पानी के बारे में इन्‍होंने किसी ने पहले चिंता नहीं की । यह घडियाली आंसू बहा रहे हैं । किसान के हितैषी बनने की कोशिश कर रहे हैं । जब इनकी सरकार थी तो नर्मदा का पानी गुजरात के मुख्‍य मंत्री देने के लिये तैयार थे इन्‍होंने कोई राशि जमा नहीं कराई, केवल 67 करोड़ कराई । लेकिन हमारे मुख्‍य मंत्री जी ने पद संभालते ही सबसे पहले 335 करोड़ रुपये दिये और उसके बाद आज तक जितनी भी राशि होती है पूरी की पूरी राशि इन्‍होंने जमा करा दी यह प्रंशसा की बात है । हमारे संवेदनशील मुख्‍य मंत्री जी ने सभी वर्गों की चिंता की है और राशि जमा कराई। आप किस मुंह से बात करते हो आपके पास बोलने के लिये कुछ नहीं है । अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको यह बताना चाहूंगा कि प्राकृतिक प्रकोप हुआ, प्रकृति ने जब ओले बरसा दिये उसकी आपने क्‍या चिंता की । मुख्‍य मंत्री जी ने विधायक दल की मीटिंग में सबको कहा कि इलाके की चिंता करो, इलाके में जाइए और वहां जाकर सर्वे करवाओ, तुरन्‍त अधिकारियों को भेज दिया, सारे कलेक्‍टर्स को निर्देश दिया, मंत्रियों को इलाके में भेजा और कहा जाकर पूरा सर्वे करवा कर रिपोर्ट लाकर दो हम किसान की मदद करना चाहते हैं, यह मुख्‍य मंत्री जी ने घोषणा की । अध्‍यक्ष महोदय, उसके तुरन्‍त बाद वह यहां बैठे नहीं, मुख्‍य मंत्री जी तुरन्‍त खुद निकल गये और इलाके का सर्वे करने के लिये निकल गये और अपने जो साथी मंत्री हैं उनको भी भेजा, विधायकों को भी भेजा लेकिन यह क्‍या करने लगे, यह तो पहले दिन से ही हंगामा कर रहे हैं । करे क्‍या इनको तो कहीं जगह मिलती नहीं, विरोध का कोई आधार मिलता नहीं । बजट ऐसा उसमें ढूंढने से भी कुछ मिलता नहीं तो यह तो हँगामा कर रहे हैं । अध्‍यक्ष महोदय, यह किसान के हितैषी नहीं है, यह किसान की चिंता नहीं करते हैं । यह विपक्ष बिलकुल गैर जिम्‍मेदार है, गैर जवाबदार है और वास्‍तव में विपक्ष  अपना दायित्‍व नहीं निभा पा रहा है । इनके पास कुछ नहीं है किंकर्तव्‍यविमूढ हो गया, दिमाग शून्‍य हो गया कि अब क्‍या बोले, क्‍या करें, इनके दिमाग की उपज समाप्‍त हो गई । अध्‍यक्ष महोदय, केवल हंगामा कर रहे हैं । केवल हंगामा करने से काम नहीं चलता । आपने कोशिश की, मुख्‍य मंत्री 4-5 बार यहां पर आ गये, पहले दिन आये, कल भी आये अपनी घोषणा करना चाहते थे । अध्‍यक्ष महोदय, जन हितों के लिये राहत का पैकेज लेकर आये । मुख्‍य मंत्री जी कोई पैकेज की घोषणा करना चाहती थी यह हंगामा कर रहे हैं । पैकेज के बारे में सुनने की इनकी स्थिति नहीं है । अकाल राहत मंत्री जी बोले तो भी यह सुनने को तैयार नहीं है । अध्‍यक्ष महोदय, इनको चाहिये था कि जब मुख्‍य मंत्री जी पैकेज की घोषणा करे और इनको लगता है कि कोई सुझाव देने चाहिये तो सारगर्भित सुझाव दे । लेकिन दे क्‍या इनके पास कुछ भी नहीं है । इनको मालूम है कि जब इनकी मुख्‍य मंत्री जी खडी हो गईं तो वह तो वाह वाही लूट लेंगी, इनके पास तो खजाना खाली नहीं है । मुख्‍य मंत्री जी का खजाना तो भरा हुआ है और वह जनता के हितों की चिंता कर रही है, आज भी कर रही है । अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको निवेदन करूं कि निश्चित रूप से मुख्‍य मंत्री जी किसानों के हितों की चिंता करेगी ।

अध्‍यक्ष महोदय, आपको तो सब मालूम है लेकिन मैं एक निवेदन करना चाहूंगा मुख्‍य मंत्री जी ने प्रयास किये, पहले भी मुख्‍य मंत्री रहे हैं कांग्रेस के मुख्‍य मंत्री तो केवल नारे लगाते थे कि आओ राजस्‍थान में उद्योग लगाओ । उस कंगाल के पास जाकर कौन उद्योग लगायेगा जिसके पास देने को कुछ नहीं है । लेकिन कोई नहीं आया । लेकिन मैं आपको जानकारी देना चाहूंगा कि मुख्‍य मंत्री जी पर उद्योगपति भी विश्‍वास करता है, सेज के माध्‍यम से और भी कई माध्‍यमों से मुख्‍य मंत्री जी ने विदेशी निवेश और हमारे जो अप्रवासी राजस्‍थानी हैं उनको निवेश भी प्राप्‍त करने की कोशिश की और वह लोग आये, उन्‍होंने विश्‍वास किया और यहां आकर अपना उद्योग स्‍थापित करने लगे हैं । राजस्‍थान में पूंजी निवेश बढा है । सीएम की औद्योगिक विकास में रूचि है । यही नहीं उद्योग मंत्री द्वारा जो आमंत्रण किया गया उसको भी जनता ने स्‍वीकार किया है। उद्योग मंत्री पर भी जनता ने विश्‍वास किया है और यह यहां आने लगे । मल्‍टीनेशनल्‍स आये, बिल्‍डर्स आये, फिल्‍मकार आये, बडे निवेशक आये, हीरो होंडा वाले आये, महिन्‍द्रा वाले आये, ओमेक्‍स वाले आये, वाटिका वाले आये, रिलायंस वाले आये, एयरटैल वाले आये, पिरामिड वाले आये अध्‍यक्ष महोदय, मैं कितने नाम गिनाऊ सभी यहां आये और यहां पर निवेश करना चाहते हैं । अब उनको विश्‍वास हो गया है कि राजस्‍थान की जनता हमारे साथ है और मुख्‍य मंत्री जी के नेतृत्‍व में पूरा राजस्‍थान एकजुट है और यह हमारे हितों की रक्षा कर सकेगा तब जाकर वह यहां निवेश करने के लिये आये हैं । अध्‍यक्ष महोदय, यह कोई कम बात नहीं है अब यह किस मुंह से बोले इनके पास कहने को कुछ नहीं है । अध्‍यक्ष महोदय, मैं उद्योग मंत्री जी से एक और निवेदन करूंगा कि जिस प्रकार से स्‍पेशल इकोनोमिक जोन में आपने सब प्रकार की सुविधाएं देने की जो घोषणा की है मैं आपसे निवेदन करूंगा कि और भी जो औद्योगिक क्षेत्र है उसमें भी आप इसी प्रकार की सुविधाएं दें इससे और भी उद्योग स्‍थापित होंगे । उद्योग फलेगा हमारा आर्थिक आधार मजबूत होने वाला है इस प्रकार की स्थिति हमारी बनेगी। अध्‍यक्ष महोदय, किसानों की चिंता करने की बात विपक्ष कह रहा है, इन्‍होंने कभी भी किसान की चिंता नहीं की । यह मुख्‍य मंत्री जी ने चिंता की है जिन्‍होंने क्रय विक्रय सहकारी संघ को एक प्रकार का फंडिंग दिया है । कृषि मंत्री जी ने इस प्रकार का पैसा दिया है कि वह उर्वरक लाकर यहां इकट्ठा कर सके ताकि जरूरत पडने पर किसान को इधर उधर भागना नहीं पडे । अध्‍यक्ष महोदय, मुझे जानकारी है कि इस बार बरसात अच्‍छी हुई है । किसानों को चाहिये था खाद, किसानों को चाहिये था यूरिया लेकिन केन्‍द्र ने यहां भी ऐसा कि हमें रेलवे वैगन देने के लिये तैयार नहीं हुए। उन्‍होंने कह दिया हम गेहूं इम्‍पोर्ट कर रहे हैं यह कहकर रेलवे वैगन हमको नहीं दिये । लेकिन मैं यह कहना चाहूंगा कि हमने उसकी भी व्‍यवस्‍था की चाहे ट्रकों के माध्‍यम से लाना पडा लेकिन हमने खाद, यूरिया हमारे किसानों को समय पर दिया इसके लिये भी मैं इन सबका धन्‍यवाद देना चाहूंगा । अध्‍यक्ष महोदय, इन्‍होंने वहां फंडिंग किया है, क्रय विक्रय सहकारी संघ को रुपया दे दिया कि आप ओफ सीजन में पहले से लाकर यूरिया का भंडार कर दो, खाद का भंडार कर दो ताकि किसान को जरूरत पडने पर उनको इधर उधर नहीं देखना पडे और वहां से आप खाद उपलब्‍ध करवा दो ।

अध्‍यक्ष महोदय, मैं एक और निवेदन करना चाहूंगा कि किसान की जब उपज आती है, जब चारो ओर से एक साथ उपज आ जाती है, रायडा आता है तो एक साथ रायडा आ जाता है, गेहूं आता है तो एक साथ आ जाता है  तो किसान को मजबूरी में अपनी फसल मार्केट में बेचनी पडती है और जब वह मार्केट में बेचने जाता है .....

 

ans/usc  15.30  2m  15/03/2007

 

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन में नारेबाजी)

चूंकि मार्केट में आवक ज्‍यादा है इसलिए भाव घट जाते हैं इसलिए मैं निवेदन करना चाहता हूं कि कृषि मंत्री जी  जरा इसकी चिंता कीजिए कि आप उसको भंडार दे दीजिए, भंडार में वह अपना अन्‍न रख देवे और उसको 50 प्रतिशत बिना ब्‍याज पर आप रूपया दे दो।

अध्‍यक्ष महोदय, मैं एक और बात आप से कहना चाहता हूं  यह लोग किसान से 20-21 प्रतिशत ब्‍याज लेते थे, कांग्रेस के लोग किसानों से 20-21 प्रतिशत ब्‍याज लेते थे। इन्‍होंने केवल 7 प्रतिशत पर कापरेटिव बैंक से कर्जा देनर शुरू कर दिया और यह भी कम नहीं है कि बैकडेट से, पिछली तारीख से इन्‍होंने 7 प्रतिशत पर कर्जा देने की घोषणा की। यह किसान का हित है, किसान की चिंता है, यह किसान के प्रति दर्द है। केवल हाय-हो करने से दर्द साबित नहीं होता है। राजस्‍थान की जनता आपको देख रही है। राजस्‍थान की जनता आपको थू-थू कर रही है। आप पर थूक उछाल रही है। आप राजस्‍थान की जनता की चिंता नहीं कर रहे। किसान की चिंता तो मुख्‍यमंत्री औरे इस मंत्रिमण्‍डल के सभी सदस्‍यों के मन में है। इन्‍होंने किसान प्रतिनिधियों को इजरायल भेजा, यह कहा कि इजराइल आगे बढ रहा है, इजराइल कम पानी में कैसे खेती कर पा रहा है, इजराइल किस प्रकार अच्‍छी उपज कम पानी में ले सकता है, इन्‍होंने अपने प्रतिनिधियों को चुनकर इजराइल भेजा ताकि वहां से प्रशिक्षण लेकर आये और यहां के किसानों को समझाये। यह कोई आपके दिमाग की उपज तो है नहीं। इन विपक्षियों के दिमाग में नहीं है, इन विरोधियों के दिमाग में नहीं है। इन्‍होंने कभी भी चिंता नहीं की। यह कितने वर्ष तक राज  करते रहे, कितने वर्ष तक राजस्‍थान का खून चूसते रहे। अरे, यह क्‍या बात करेंगे। इनके तो मुख्‍यमंत्री जी की स्थिति यह थी, मुझे मालूम है। यह प्रमोद जैन भाया, आप वहां पर क्‍या देख रहे हो, आपके यहां तो जब, आपके  वहां पर पहले श्‍याम नागर एक एमएलए था, मुख्‍यमंत्री जी अशोक गहलोत के सामने उसकी थू-थम पेजार हुई, यह आप भूल जाते हो क्‍या,शर्म आनी चाहिये आपको, किस मुंह से हमारी आलोचना करने की कोशिश कर रहे हो।  

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन में नारेबाजी)

अध्‍यक्ष महोदय, महिलाओं को भी ताकत दी। हाडी रानी एक ऐसा फोर्स यह गठित करने की बात, आर ए सी में महिलाओं को भर्ती करने की बात। पहले 0.49 प्रतिशत महिला सिपाही, अब मुख्‍यमंत्री जी ने घोषणा की है 30 प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण, यह कोई कम बात है ? आपने किया क्‍या है, कुछ भी नहीं किया। वह महिलाएं तो वास्‍तव में आपको जूते मारने वाली है, यह आप समझ लीजिए। आप भले ही हाँ-हाँ करें। हैण्‍डस आधे रह जाएंगे। आपके पास में कहने को कुछ नहीं है।

श्री अध्‍यक्ष: कृपया समाप्‍त करें। माननीय सदस्‍य, आधा घंटा हो गया, कृपया समाप्‍त करें।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर):अध्‍यक्ष महोदय, एक निवेदन करूंगा, कर प्रस्‍ताव, अध्‍यक्ष महोदय, एक और जानकारी आपको दूं यह किसानों के हितैषी बन रहे हैं, बंगाल में क्‍या हुआ,13 लोगों को मार दिया। 13 लोगों को, अब यह शर्म खाए। इनके पास में क्‍या है कहने को, अरे,   13 लोगों के हत्‍यारों आप बंगाल में देखो नंदगांव में क्‍या स्थिति बनी है। वहां पर निर्दोष किसानों को, जो जमीन पर कब्‍जा करने के लिए गये उनको आपने भून दिया, बहुत घायल है, यह आपके लिए शर्म की बात है। आप क्‍या बोलेंगे, आपके पास बोलने के लिए कुछ नहीं है।

अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मुख्‍यमंत्री जी से एक निवेदन करूंगा, आपने सबको छूट दी है, कर प्रस्‍ताव में भी बहुत रियायत आपने दी है। एक वो खटिया ,  पाइप से खाट बनाता है और उसमें निवार बांधता है, वह खाट बनती है, मैं आपसे उन कामगारों की तरफ से निवेदन करूंगा  कि उस खाट को यदि आप 4 प्रतिशत पर कर सके क्‍योंकि वह पाइप 4 प्रतिशत पर है और निवार फ्री है निवार पर वैट नहीं है और निवार बांधकर खटिया तैयार करता है जिसकी कीमत 400-500 रूपये है, चाहे कीमत के आधार पर ही सही 500 रूपये की कीमत से कम कीमत की खाट हो उसको यदि आप 4 प्रतिशत कर सके तो  मैं बहुत उपकार मानूंगा। वह मजदूर भी आप पर बहुत मेहरबान हो जाएगा, बहुत खुश हो जाएगा।  मैं आपके माध्‍यम से कहना चाहूंगा आप कृपया उस पर मेहरबानी करनी की कृपा करें।

अध्‍यक्ष महोदय, आपने बहुत चिंता की है, आपने यह भी चिंता की है कि यदि कोई बेरोजगार इंजिनियर है, बेरोजगार इंजिनियर है ता उसको  दस लाख तक का ठेका बिना टैण्‍डर के देने की घोषणा की, यह कम बात नहीं है।  शिक्षा के मामले में, अध्‍यक्ष महोदय, मेरे पास बहुत कुछ है बोलने के लिए, मैं दो घंटे बोल सकता हूं लेकिन अब आपने समय की घंटी बजा दी। मैं आपसे एक निवेदन करूं...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: बात हो गई, कनक्‍लूड करें। अब आप कनक्‍लूड करें।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अध्‍यक्ष महोदय, शिक्षा के बारे में बताना चाहूंगा। हमारे शिक्षा मंत्री ने रिकार्ड कायम किया है। इतनी स्‍कूलें खोल दी, इतने मास्‍टर लगा दिये। अभी और 1500 स्‍कूल खोलने वाले हैं। यह आपने अपनी जिंदगी में नहीं खोली। आपने अपने जीवन में भी कभी कल्‍पना नहीं की। इतनी स्‍कूलें खोल दी। इतनी सैकण्‍डरी, सिनियर सैकण्‍डरी, कितने कमरें बना दिये, कितनी स्‍कूले बना दी  आपने बहुत कुछ काम कर लिया।

अध्‍यक्ष महोदय, बुजुर्गों की किसने चिंता की है, ओल्‍ड एज होम्‍स के लिए इन्‍होंने प्रशिक्षण केन्‍द्र बनाना शुरू किया..(व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): बैटरी बैठ गई है...(व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अध्‍यक्ष महोदय, केन्‍द्र ने क्‍या किया, केन्‍द्र ने बहुत धोखा देने की कोशिश की। कांग्रेस सरकार ने धोखा देने की बहुत कोशिश की हे। (व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय, उन्‍होंने एपीएल का गेंहू काटा। केन्‍द्र सरकार ने एपीएल का गेंहू काटा, बीपीएल की संख्‍या कम की लेकिन मुख्‍यमंत्री जी ने घोषण की कि चाहे राजस्‍थान के फण्‍ड से लेकिन बीपीएल को पहले की तरह राहत मिलती रहेगी,यह है बीपीएल की चिंता। गरीबी की जीवन रेखा से नीचे जीवन जीने वालों की चिंता, महान व्‍यक्तित्‍व ने की है। आप इसकी तो पूजा करो। क्‍या आरोप लगाते हो हम पर, आपको भी पूजा करनी चाहिये। साक्षात लक्ष्‍मी मानकर पूजा करो। यह मंत्रिमण्‍डल के सभी सदस्‍य सेवा को समर्पित है। यह मालिक बनने की कोशिश नहीं कर रहे, यह जनसेवक बनकर सेवा में लगे हुए हैं, यह काम यह कर रहे हैं, यह आपके ध्‍यान में आने की बात है।  आपने राजा बनने की कोशिश की, तो आपको पुनर्मूषको भव और धरती दिखा दी। अब आप इतने भी नहीं आओंगे मानकर चलो। मैं यहां पर घोषणा करके जा रहा हूं आप गिनती के आये हो, अगली बार सिमट करके पाँच भी नहीं आ पाओंगे यह मानकर चलिये1

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, समाप्‍त कीजिए।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): यह स्थिति आपकी होने वाली है

श्री अध्‍यक्ष: बोलने वाले और भी बहुत है। माननीय मुख्‍यमंत्री जी पाँच बजे बोलना चाहती है। अब आप कृपया समाप्‍त करें।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): आपने मुझे अवसर दिया इसके लिए मैं आपके माध्‍यम से मुख्‍यमंत्री जी, मंत्रिमण्‍डल के सभी सदस्‍य और सत्‍तापक्ष के सभी विधायकों  का बहुत-बहुत आभार, अभिनंदन करना चाहूंगा।

श्री अध्‍यक्ष: आप समाप्‍त कीजिए।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर):  इन्‍होंने बहुत-बहुत सहयोग दिया। बहुत ताकत दी। मुख्‍यमंत्री जी को फ्री हैण्‍ड  दिया, मुख्‍यमंत्रीजी को पूरी ताकत दी कि आप करिये और जनता की सेवा करो, जनता का आर्शीवाद लूटो।

श्री अध्‍यक्ष: कृपया समाप्‍त कीजिए।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): और जनहित आप नाम रोशन करो। सौभाग्‍य से मुख्‍यमंत्री जी का जन्‍मदिन भी इसी दरमियान आया। मैं आपके माध्‍यम से...(व्‍यवधान) 

श्री अध्‍यक्ष: कृपया समाप्‍त कीजिए।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): मैं आपके माध्‍यम से मुख्‍यमंत्री जी को बधाई देना चाहूंगा कि आपने हिन्‍दुस्‍तान में तो नाम रोशन किया है, दुनिया में  भी आप नाम रोशन करो। बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

श्री अध्‍यक्ष: श्री रामप्रताप कासनिया।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): अध्‍यक्ष महोदय, जब से माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने इस विधान सभा के अंदर तीसरा बजट पेश किया है इस बजट के बारे में मैं जितनी प्रशंसा करूं,बहुत ही कम है। यह चौथा बजट है। अध्‍यक्ष महोदय, इस बजट में, मैं रिपिटेशन नहीं करूंगा, मेरा आग्रह है कि इस बजट में किसी भी मद में चाहे कृषि हो, चाहे सिंचाई हो, चाहे पीडब्‍ल्‍यूडी हो, चाहे पीएचइडी हो, चाहे समाज कल्‍याण हो, यानि कोई भी विभाग ऐसा नहीं जिसमें छूट नहीं दी हो। हर वर्ग इसमें प्रोत्‍साहित हुआ है। हर वर्ग को काम मिला है। बेरोजगार को काम मिला है। शिक्षा को बढ़ावा मिला है।

अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह निवेदन करना चाहूंगा कि देवता ने परिचय देने में कोई कमी नहीं रखी है, अब कमी है तो पुजारियों की है। पुजारियों का काम प्रचार करना है और पुजारी अगर प्रचार...(व्‍यवधन)

श्री अध्‍यक्ष: यह क्‍या है पोगापंथी? (व्‍यवधान) 

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा):पुजारी अगर प्रचार करेंगे तो मंदिर बना रहेगा और अगर पुजारी प्रचार नहीं करेंगे तो देवता को पूजने वाले बहुत लोग बैठे है, मैं यह कहना चाहता हूं।

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन में नारेबाजी

 

दुर्गा/त्रिपाठी 150307 1540 2n

 

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा निरन्‍तर नारेबाजी)

अध्‍यक्ष महोदय, मोटे रूप में इस बजट के अन्‍दर किसी भी तरह की कोई त्रुटि नहीं है। अगर आज के दिन जरुरत है तो मुख्‍य मंत्रीजी काश्‍तकारों को कुछ देने की सोच रही थीं उसकी भनक विपक्ष को लग गयी। उस भनक के कारण से यह सारा विपक्ष जिस तरह का, अगर काश्‍तकारों का हितैषी है विपक्ष तो इसके अन्‍दर जो त्रुटियां हैं, वह सुझाव देना चाहिए। अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहूंगा कि प्राकृतिक प्रकोप से जो फसल नष्‍ट होती है, उसमें काश्‍तकार की कई जिन्‍सें ऐसी हैं जो इसमें सम्मिलित नहीं हैं, जैसे जीरा, धनिया। मैं एक-एक फसल का नाम नहीं लूंगा। अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्‍यम से सरकार से यही निवेदन है कि काश्‍ताकर जो भी चीज पैदा करता है, खेत में उन सबको इसमें सम्मिलित करना चाहिए और मुआवजा मिलना चाहिए। अध्‍यक्ष महोदय, इसमें एक कमी और है। जब मुआवजे की पर्सण्‍टेज तय करती है सरकार, वह केन्‍द्र की जो गाइड-लाइन है, उसको सरकार छोड़ दे तो बढि़या है। उसमें कुछ नहीं है। मोटे रूप में गांव को इकाई मानकर जो खराबे की प्रतिशत निकाली जाती है, उससे जिन काश्‍तकारों के खेत में नुकसान हो जाता है, वह वंचित रह जाते हैं मुआवजे से।  अध्‍यक्ष महोदय, खेत को इकाई मानकर करश्‍तकार को मुआवजा देना चाहिए। दूसरा, अध्‍यक्ष महोदय, सिंचित एरिये में आपको पता है...।

श्री अध्‍यक्ष: माइक पर तो रहम करो। नैनवां से आने वाले माननीय सदस्‍य, माइक पर तो रहम करो।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): अध्‍यक्ष महोदय, सिंचित एरिये में, वैसे मैं कोई, अध्‍यक्ष महोदय, सिंचित एरिये के अन्‍दर चक को इकाई मानकर के जो खराबे की गिरदावरी करवाई जाती है वह भी सही नहीं है। एक चक में 40 मुरब्‍बे जमीन है और 10 मुरब्‍बे में फसल पूर्णतया नष्‍ट हो गयी, वह फसल जो है खराबा प्रतिशत दर्ज करने में पूरे चक का रकबा काउण्‍ट करके जो खराबा प्रतिशत निकाला जाता है वह बहुत ही कम हो जाता है जबकि नुकसान पूरा हो गया काश्‍तकार का। अध्‍यक्ष महोदय, आपने देखा है जब ओलावृष्टि होती है तो आदमी पास-पास में खड़े हों, एक के ऊपर ओले गिरते हैं, दूसरा उससे वंचित रहता है। इसी तरह से काश्‍तकार के खेत की हालत है। तो मेरा आपके माध्‍यम से सरकार से यह आग्रह है कि इस के अन्‍दर जो त्रुटि है इसका सुधार किया जाए।

अध्‍यक्ष महोदय, मैं एक बात सदन के मार्फत सभी माननीय सदस्‍यों से निवेदन करना चाहूंगा कि अगर आज राजस्‍थान में चिन्‍ता करने की आवश्‍यकता है तो दिन-प्रतिदिन जो जनसंख्‍या बढ़ रही है ओर इससे जनसंख्‍या का जब तक, चाहे हिन्‍दुस्‍तान सरकार हो, चाहे कोई भी सरकार हो, कितना भी विकास कर लो, किसी न किसी सरकार को आगे आकर के यह ऐतिहासिक फैसला करना पड़ेगा, अगर इस देश को खुशहाल करना है तो 1977 से मत घबराओ। कोई न कोई सरकार आगे आकर के, और मैं तो यह भी निवेदन करना चाहूंगा अध्‍यक्ष महोदय कि शोर-शराबा, नारेबाजी करने के बजाय हमको एक संकल्‍प पारित करना चाहिए इस विधान सभा में और केन्‍द्र को भेजना चाहिए कि पूरे देश के अन्‍दर एक बच्‍चे का नियम लागू करो। अगर इस देश को खुशहाल करना चाहते हो तो यह कार्य भी करना पड़ेगा। अध्‍यक्ष महोदय, मैं एक बात और आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहूंगा कि काश्तकारों के नाम से पिछले 55 वर्षों से लगातार घडि़याली आसूं बहाये जा रहे हैं और एक फूटी कौड़ी काश्‍तकार को उपलब्‍ध नहीं करवाने वालों से मैं आग्रह करना चाहू्गा कि आपने कभी भी काश्‍तकारों की मदद नहीं की और अब वह समय आ गया है, मैं यह दावे के साथ कह सकता हूं कि चाहे हिन्‍दुस्‍तान सरकार हो, चाहे कोई राज्‍य की सरकार हो, कातश्‍कारों को अब अतिवृष्टि के मुआवजे से अगर वंचित करेंगे तो पूरे देश के अन्‍दर हाहाकार मच जाएगा। अध्‍यक्ष महोदय, मैं मुख्‍य मंत्रीजी को तो धन्‍यवाद देना चाहूंगा कि इन्‍होंने सरकार में आने के बाद, यह सही है, मैं कोई चापलूसी नहीं कर रहा हूं। जो सच्‍चाई है, वही बखान कर रहा हूं। मैं यह भी चैलेंज करना चाहूंगा कि आप अगर सरकार में रहना चाहते हो, संख्‍या बढ़ाना चाहते हो तो आप केन्‍द्र से 5 हजार रुपये प्रति बीघा काश्‍तकार को दिलाओ। मैं तो आपकी वाह-वाही करने के लिये तैयार हूं। आप एक तरफा बात कर रहे हो। आज हमारे राज्‍य की जो माली हालत है वह आपसे छिपी हुई नहीं है। फिर भी मैं ऐसा मानकर चलता हूं कि आज तक राजस्‍थान सरकार में किसी ने सहायता नहीं दी और मुख्‍य मंत्रीजी हर हालत में सहायता देंगी। ऐसा मेरा मानना है। ऐसी मेरी सोच है। इसकी भनक आपको लग गयी। इसमें कोई सन्‍देह नहीं है।

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा निरन्‍तर नारेबाजी)

मैं कोई चमचागीरी नहीं कर रहा हूं। मैं अभी घोषणा करता हूं कि आप केन्‍द्र सरकार से 5 हजार रुपये  बीघा बंधवाओ और मैं अभी चमचागीरी आपकी करना शुरू कर देता हूं। मुझे किसी की चमचागीरी की जरुरत नहीं है। मुझे राजस्‍थान के काश्‍तारों का जो नुकसान हुआ है उसकी जो भरपाई करने में सहयोग करेगा उसका मैं साथी हूं। आपके पास अब सरकार है नहीं, जब सरकार थी, तब तो आपको चिन्‍ता नहीं लगी कि काश्‍तकारों को मुआवजा देना चाहिए। ठीक है, पीड़ा आपके है, पीड़ा हमारे भी है। काश्‍तकारों का नुकसान हुआ है, इसमें कोई दो राय नहीं है। परन्‍तु इसको राजनीतिक रूप देना बहुत गलत बात है। अध्‍यक्ष महोदय, प्रेस में आ जायेगा, मीडिया में आ जायेगा। इसके सिवाय कुछ नहीं है। अगर प्रेस और मीडिया में यह शोर-शराबा नहीं छपे तो मैं यह बात भी दावे के साथ कह सकता हूं कि विधान सभा ओर लोकसभा में कोई शोर-शराबा नहीं होगा। जो व्‍यक्ति विधान सभा और लोकसभा के नियम का उल्‍लंघन करता है उसकी बात प्रेस और मीडिया में कहीं नहीं आये तो यह राजस्‍थान की विधान सभा तो क्‍या, हिन्‍दुस्‍तान की विधान सभाओं को भी सांप सूँघ जायेगा, कोई शोर-शराबा नहीं होगा। अध्‍यक्ष महोदय, यहां मैं यह भी कहना चाहूंगा, अब इसको आप चाहे चमचागीरी कह दो, जिस घर का मुखिया नौजवान हो और उस घर के सदस्‍य मुखिया के कहने पर चलेंगे तो उस घर में अध्‍यक्ष महोदय, कभी भी दरिद्रता नहीं आयेगी। वह घर हमेशा खुशहाल रहेगा। तो हमारी सरकार का मुखिया नौजवान है, काम करने में किसी भी तरह की कमी नहीं रहेगी। दिन-रात समय देने में कोई कंजूसी नहीं होगी। मैं फिर अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से कहना चाहूंगा, प्रतिपक्ष के साथियों से कि भगवान के लिये एक बात तो मेरे से कहने से कर दे। मैं तो बीच का आदमी हूं।

अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों से इतना निवेदन करना चाहूंगा कि डाइरेक्‍ट तो हिम्‍मत नहीं है पर सदन के माध्‍यम से एक संकल्‍प पारित तो करवाना चाहिए सर्वसम्‍मति से केन्‍द्र सरकार को भेजना चाहिए कि राज्‍य सरकार की माली हालत को देखते हुए जितना नुकसान हुआ है उसकी भरपाई करने के लिये कम से कम 2 हजार रुपये एक्‍स्‍ट्रा केन्‍द्र सरकार उपलब्‍ध करवाये। ऐसा एक संकल्‍प पारित कराओ तब तो मैं मानूंगा आप काश्‍तकारों के हितैषी हो। अन्‍यथा क्‍यों घडि़याली आंसू।

एक माननीय सदस्‍य: दो हजार करोड़?

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): दो हजार बीघे के बोले हैं मैंने। मैं इतना अनपढ़ भी नहीं हूं, आप चिन्‍ता मत करो। मोटी सी बात, 2 हजार रुपये अगर केन्‍द्र सरकार देती है तो, प्रति बीघा ही तो कहा है और क्‍या है, बाकी राजस्‍थान सरकार, चमचागीरी की, मैं अभी एक बात कह रहा हूं कि आप केन्‍द्र सरकार से 5 हजार रुपये दिलवा दो, मैं अभी सदन से इस्‍तीफा देने के लिये तैयार हूं, किसी की चमचागीरी नहीं करुंगा। आप अगर 5 हजार रुपये प्रति बीघा मुआवजा दिलवा दो केन्‍द्र से तो मैं इस्‍तीफा दे दूंगा, अभी इसी वक्‍त, एक मिनट में।

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा निरन्‍तर नारेबाजी)

 

Vps-usc-15032007-1550-20

 

( प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा भारी नारेबाजी व शोरगुल जारी)

चमचागीरी तो तब होती है न जब कोई चमचागीरी करवा कर कोई काम करे। कोई दो नम्‍बर का धंधा निकलवाये। आपके दिमाग में चमचागीरी, लोग बरबाद हो गये और आप बिलकुल ही गम्‍भीरता से बात नहीं कर रहे हो। 

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस बात को राजस्‍थान की जनता देख रही है। पीड़ा सबके मन में है। मैं यह भी नहीं कहता कि आपके मन में पीड़ा नहीं है पर आप राजनीति कर रहे हो। यह मुझे पीड़ा है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मोटे रूप में शिक्षा के मामले में सरकार ने स्‍कूल खोलने में कोई कंजूसी नहीं की। बेरोज़गारों को रोजगार देने में कोई कमी नहीं छोड़ी। सिंचाई के मामले में भी, काम एक-एक मैं बखान करने लग जाऊं तो माननीय अध्‍यक्ष महोदय, रिपीटिशन हो जाएगा। मोटे रूप में मेरा तो आपके माध्‍यम से एक निवेदन और है कि माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस देश में गांव और शहर के बीच में जो खाई पनपी है उस खाई को दूर करने का काम इस सरकार ने काफी हद तक ठीक किया है परन्‍तु माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पिछले 55 साल से कुएं में भाग पड़ी हुई है। खाली नारे देकर वोट बैंक से जीत-जीत कर सरकार बनाना, यह कोई खास बात नहीं है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, खास बात यह है कि बिना कोई कर लगाये, बिना कोई जनता पर बोझ डाले हुए इस तरह का बजट पेश करना, इसकी तारीफ नहीं करें तो क्‍या आलोचना करें और आलोचना करें तो जनता हमें जूते नहीं मारेगी? अगर कोई सही काम करने वाले को आप प्रोत्‍साहित नहीं करोगे और उसकी तारीफ नहीं करोगे तो काम करने वाला माननीय अध्‍यक्ष महोदय, भविष्‍य में नहीं करेगा। आज हम, जो सरकार ने काम किया है उसकी तारीफ खुले मन से विपक्ष को भी करनी चाहिए। इसमें कंजूसी नहीं करनी चाहिए। जनता को एक-एक बात का पता है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं फिर आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहूंगा, हर बात को रिपीट करना उचित नहीं है। एक नया सुझाव मैं आपके माध्‍यम से सरकार को देना चाहूंगा कि माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान के अन्‍दर जो डेजर्ट बढ़ता जा रहा है। टिब्‍बा को स्थिरीकरण करने के लिए हमने करोड़ों-करोड़ों रुपये खर्च कर दिया और आज हालत क्‍या है? रेगिस्‍तान बढ़ता जा रहा है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं सरकार से आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहूंगा कि राजस्‍थान के जहां भी रेगिस्‍तान के अन्‍दर धोरों की जमीन है, उस जमीन के अन्‍दर सरकार चाहे सब्सिडी दे, चाहे किसी रूप में काश्‍तकार को प्रोत्‍साहित करे, फोग जो है, राजस्‍थान के रेगिस्‍तान की जीविका है और फोग, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप तो इस बात से परिचित हो कि रेतीली जमीन में एक बार फोग पनप गया तो उससे ऊँट को चारा मिलता है, भेड़ को चारा मिलता है, बकरी को चारा मिलता है, भैंस को चारा मिलता है और इसके साथ-साथ खेजड़ी और फोग दो चीज राजस्‍थान में लगाने के लिए काश्‍तकार को आप कोई सहायता, चाहे सीडी उपलब्‍ध करवा दो, चाहे डेमोस्‍ट्रेशन के माध्‍यम से एक-एक गांव में 100 या 200 बीघा टिब्‍बों के ऊपर आप फोग और खेजड़ी डेमोस्‍ट्रेशन के तौर पर लगाकर सरकार दिखाएगी तो प्रत्‍यक्ष में प्रमाण की जरूरत नहीं है। काश्‍तकार अपने आप देखेंगे, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक राजस्‍थान से जो हरियाली नष्‍ट हो रही है। वनों की जो अवैध कटाई हो रही है, उसके ऊपर भी रोक लगेगी। रोक इस तरह से लगेगी कि फोग जो है वह जलाऊ लकड़ी भी है। पूर्व में हम फोग की लकड़ी गांवों में जलाते थे। यह बात शायद कुछ लोगों को, मेरी दाईं साइड वालों को तो पता ही नहीं है, यह फोग क्‍या चीज है तो मैं सरकार से आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहूंगा कि इसमें कोई बहुत बड़ा खर्चा आने वाला नहीं है और अन्‍त में, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं एक बात कहना चाहूंगा कि राजस्‍थान सरकार का कर के रूप में, बिक्री कर के रूप में व्‍यापारियों से जो रुपया वसूल करना है उसका एग्‍जैक्‍ट फिगर तो मेरे को पता नहीं है पर 11 मार्च की राजस्‍थान पत्रिका में मैंने पढ़ा था कि 2200 करोड़ रुपये बकाया है व्‍यापारियों की तरफ, ज्‍यादातर 90 परसेंट और माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उसके अन्‍दर व्‍यापारियों ने, कोई कर अपनी जेब से जमा नहीं करवाता व्‍यापारी, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 10 वर्ष पहले ही यह व्‍यापारियों ने कर जो है वह उपभोक्‍ताओं से वसूल कर लिया। व्‍यापारी कर कभी भी अपने घर से नहीं देता है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सरकारी मशीनरी के कारण से राज्‍य सरकार का करोड़ों रुपया जो बकाया पड़ा है, वह सख्‍ती से वसूल करके और माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मुख्‍य मंत्रीजी से निवेदन करना चाहूंगा कि इतिहास रच जाएगा अगर वह बकाया राशि आप सख्‍ताई से वसूल करके काश्‍तकारों को अगर मुआवजा देने का काम करोगे तो मैं यह बात दावे के साथ कह सकता हूं कि आप हमेशा ही बाईं साइड में रहोगे। यह मैं राजस्‍थान की जनता के भरोसे से कहना चाहता हूं। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने समय दिया, इसके लिए बहुत-बहुत धन्‍यवाद और आपको भगवान बनाये रखे, इसी तरह से शोर मचाने के लिए, यह मैं भगवान से दुआ करता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: श्री सांगसिंह भाटी।

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारे शेर ए राजस्‍थान की मुख्‍य मंत्री वसुन्‍धरा राजे सिन्धिया ने जो इस बार बजट पेश किया है, चाहे वह खेत में बैठा है किसान, चाहे वह कहीं मजदूरी कर रहा है, चाहे वह ठेला चला रहा है, हर वर्ग को ध्‍यान में रखते हुए जो माननीय मुख्‍य मंत्री महोदय ने बजट पेश किया है उस बजट की पूरे राजस्‍थान में, एक-एक घर में प्रशंसा हुई है और यह प्रतिपक्ष बुरी तरह से तिल-मिला गया है। उनके पास में न तो कोई किसानों का मुद्दा है, न कोई काश्‍तकार की पीड़ा है। हकीकत यह है कि यह बजट पेश होने के बाद में यह बौखला चुके हैं। यह बजट पेश होने के बाद जबरदस्‍त बौखला चुके हैं। इनके पास कोई मुद्दा नहीं रहा है।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मुख्‍य मंत्री महोदय को धन्‍यवाद देना चाहूंगा। काश्‍तकारों की पीड़ा अगर इनको होती, किसानों की अगर पीड़ा होती तो काश्‍तकारों के खालों के कवरिंग के लिए, काश्‍तकारों के खालों की कच्‍ची शाखाओं पर इनके राज में इन खालों की कवरिंग करवाते। काश्‍ताकरों के लिए बजट में खालों की घोषणा करवाते लेकिन हमारी शेर ए मुख्‍य मंत्री ने इस बजट में जो गरीब काश्‍तकार के खालों की कवरिंग के लिए जो बजट में घोषणा की है, उसकी मैं भूरि-भूरि प्रशंसा करता हूं। पहली बार अगर किसान की, टेल पर बैठा हुआ काश्‍तकार, आखिरी किनारे पर बैठा हुआ काश्‍तकार, उसके खालों की अगर घोषणा की है और उस किसान की अगर पीड़ा किसी मुख्‍य मंत्री ने की है तो वसुन्‍धरा राजे सिन्धिया ने पीड़ा की है तो काश्‍तकारों के हित में बजट की घोषणा की है। आप करवा देते अपने शासन में।

दूसरी बात, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आज यह काश्‍तकारों के हित की बात कर रहे हैं। मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं कि काश्‍तकार के कृषि कनेक्‍शन, अगर एक काश्‍तकार का खेत कृषि कनेक्‍शन के लिए अगर एक किलोमीटर दूर है तो पर पिलर पैसे यह लूटते थे। एक-एक काश्‍तकार से लाख-लाख रुपये, दो-दो लाख रुपये वह पीड़ा इनको नहीं हुई। हमारी सरकार आयी। शेर ए मुख्‍य मंत्री वसुन्‍धरा राजे सिन्धिया ने काश्‍तकारों का खेत, अगर जो पाँच किलोमीटर है तो 50000 से 55000 रुपये नहीं लगे, वह काश्‍तकार अपनी ट्यूबवैल में ले जाकर कनेक्‍शन कर सकता है और तो और आपके शासन काल में कृषि कनेक्‍शनों के लिए हमारे काश्‍तकारों के कितने कनेक्‍शन पेंडिंग पड़े थे पूरे राजस्‍थान में? मैं धन्‍यवाद देना चाहता हूं काश्‍तकारों के माध्‍यम से, पूरे राजस्‍थान के किसानों की तरफ से शेर ए मुख्‍य मंत्री, आपके आने के बाद काश्‍तकारों के सारे के सारे कनेक्‍शन हुए। आज की तारीख में कोई मामूली कनेक्‍शन बकाया है। सारे काश्‍तकारों के खेतों में कनेक्‍शन हुए।         

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा भारी नारेबाजी व शोरगुल जारी)

spp/Akt/16.00/2p/15.3.2007

 

उन लोगों के सारे के सारे कनेक्‍शन, आज की तारीख में जो बकाया कनेक्‍शन थे, सारे किसानों के खेतों में कनेक्‍शन हुए। यह कौनसे किसानों की पीड़ा लेकर बैठे हो आप?

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से हमारे मुख्‍य मंत्रीजी को बाड़मेर और जैसलमेर जिलों को आपके प्रयासों से आपने लगातार तीन साल तक केन्‍द्र सरकार से प्रयास किया और बेरोजगार लोगों को रोजगार गारन्‍टी में पिछड़े लोगों को जोड़ा, उसके लिये जैसलमेर, बाड़मेर और सारी जनता की तरफ से मैं आपको धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि यह सारा श्रेय आपको जाता है। जो आपने प्रयास किये जैसलमेर और बाड़मेर जिलों को आपने रोजगार गारन्‍टी योजना से जोड़कर बहुत बड़ी राहत दी है।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मैं राजस्‍थान सरकार को यह भी धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि हमारे बाड़मेर जिला शिक्षा में सदियों से पिछड़ा हुआ रहा। शिक्षा में प्रगति के लिये मैं शिक्षा मंत्रीजी को धन्‍यवाद देना चाहता हूं। मैं बहुत बहुत साधुवाद देना चाहता हूं जिन्‍होंने तीन वर्षों में 125 प्राइमरी से अपर प्राइमरी स्‍कूलों को क्रमोन्‍नत करके बच्‍चों को शिक्षा से जोड़ा। तीन सालों में आपने 11 हायर सैकण्‍डरी स्‍कूलें दीं। तीन सालों में चार सैकण्‍डरी स्‍कूलें दीं और इन स्‍कूलों के साथ साथ माननीय मुख्‍य मंत्री महोदया, आपने पोकरण में महाविद्यालय खोलकर पूरी जैसलमेर जनता को राहत दी है। यह पीड़ा कर रहे हैं काश्‍तकारों की। सबसे ज्‍यादा अगर शासन रहा तो वह कांग्रेस का शासन रहा। चालीस साल तक आपने शासन किया और जनता को आपने दिया क्‍या ? पानी के लिये जनता तरस रही है, शिक्षा के लिये जनता तरस रही है और आपने 40 साल तक खाली पत्‍थर लगाकर आपने उदघाटन किये, विकास नाम की कहीं चीज नहीं की, यह काम किये हैं। आप किसकी बात कर रहे हो ? हमारे जैसलमेर जिलों में तीन सालों में विकास की गंगा बहाई माननीय वसुन्‍धरा राजे सिंधिया जी ने । मैं दावे के साथ कह सकता हूं आज की तारीख में जो आपने बजट पेश किया है हर घर के अंदर, हर गांव के अंदर और इनके खुद के घरों में औरतें कह रही हैं डूब मरो, ऐसा बजट कभी आया नहीं। आप ला भी नहीं सकते हो। इसलिए आप बौखला गये।  

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा नारेबाजी)

आप यह सोचिये कि अगर आपको काश्‍तकारों की पीड़ा होती, आपको किसानों की पीड़ा होती तो मुख्‍य मंत्री महोदया घोषणा करना चाहती है, लेकिन आप बौखला गये। इस वक्‍त आप बौखला चुके हो। ..(व्‍यवधान).. आप हो, यह सरेआम बैठे हैं कसाई तो।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से एक और निवेदन करना चाहता हूं जो यह काश्‍तकार के हित की बातें करते हैं, गरीब के हित की बात करते हैं, सबसे बड़े कसाई तो आप हो। सबसे बड़े अगर गरीब के कसाई हो तो आपसे बढ़कर कोई कसाई हो नहीं सकता। इसका उदाहरण है कि बी पी एल परिवार का गेहूं आप केन्‍द्र सरकार से ला नहीं सकते। बी पी एल परिवारों का गेहूं केन्‍द्र सरकार ने बंद कर दिया। आपसे बढ़कर कसाई कौन होगा ?

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं तीन सालों में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकाल में स्‍वास्‍थ्‍य विभाग में काफी उन्‍नति हुई। मैं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रीजी को और मुख्‍य मंत्रीजी को निवेदन करना चाहूंगा, धन्‍यवाद देना चाहूंगा कि पहली बार आजादी से लेकर आज दिन तक जैसलमेर जिले में 127 नर्सों की नियुक्ति पहली बार हुई है राजस्‍थान में हुई है तो। इसके साथ साथ हास्पिटल क्रमोन्‍नत हुए। 127 नर्सों की नियुक्ति पहली बार हुई है जैसलमेर जिले में, आप क्‍या बात कर रहे हो ? उप स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों को क्रमोन्‍नत किया, हास्पिटलों को क्रमोन्‍नत किया और कम से कम जैसलमेर जिले में 6 करोड़ रुपये का बजट हास्पिटलों के अंदर मुख्‍य मंत्री महोदया ने दिया। इससे पूरे जैसलमेर जिले की जनता आज खुश है। आपके पास रहा क्‍या है ? हो-हल्‍ला के अलावा कुछ रहा भी नहीं। अब सुनने का माद्दा रखो। 

मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री महोदया, पी.डब्‍ल्‍यू.डी.मंत्री को और राठौड़ी राजा को भी धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि आपने जैसलमेर जिले को रोडों में नम्‍बर वन रखा और हजारों गांवों को आपने रोडों से जोड़ दिया, उसके लिये मैं आपको बहुत बहुत धन्‍यवाद और साधुवाद देना चाहता हूं।   

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा नारेबाजी)

श्री हीरालाल (निवाई): पानी पी आओ, पानी पी आओ।

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): आप पानी पी आओ जाकर। अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से रेवेन्‍यु मंत्री, उपनिवेशन मंत्री को भी मेरी तरफ से और जैसलमेर जिले की तरफ से धन्‍यवाद देना चाहता हूं जिन्‍होंने पहली बार 64 हजार भूमिहीनों के फार्म भरवाकर भूमिहीनों, बेरोजगारों के फार्म भरवाकर भूमि अलॉटमेंट की जो शुरूआत की है, उसके लिये भी मैं आपकी भूरि-भूरि प्रशंसा करना चाहता हूं और बहुत बहुत धन्‍यवाद देना चाहता हूं।

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा नारेबाजी)

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे एक बात कहते हुए खेद होता है कि आज से तीन-चार दिन पहले चूरू जिले और सरदारशहर से मांग उठी कि पीने के पानी की व्‍यवस्‍था नहीं है। पानी हम पी नहीं सकते तो मुझे अफसोस है कि सरदारशहर में कितने वर्षों तक सिंचाई मंत्री सरदारशहर के रहे, सरकार में मैन पदों पर रहे, लेकिन आप जनता को पानी पिला नहीं सके। कई दफा कैबिनेट मंत्री रहे लेकिन जनता को पानी पिला नहीं सके। अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मुख्‍य मंत्री महोदया से निवेदन करूंगा कि ये तो कितने भी पदों पर रहे, चाहे कुछ भी किया, यह पानी नहीं पिला सके। लेकिन माननीय मुख्‍य मंत्री महोदया व्‍यवस्‍था कर देंगी, आप चिन्‍ता मत करना। मुझे बोलने का जो समय दिया, उसके लिये अध्‍यक्ष महोदय, बहुत बहुत धन्‍यवाद।

श्री अध्‍यक्ष: श्री हरिसिंह रावत।

श्री हरीसिंह रावत (भीम): अध्‍यक्ष महोदय, इस विधान सभा में मैं पहली बार विधायक चुनकर आया हूं और आने के बाद यह चौथा बजट भाषण है और इस बजट को पढ़कर, सुनकर यह महसूस कर रहा हूं कि मैंने भारतीय जनता पार्टी में आकर विधायक बना और आज विधायक बनने के बाद हमारी सरकार ने जो बजट पेश किया है, उससे हमारे विपक्ष के मुंह उतर गये हैं। इनके पास बात करने के लिये, जवाब देने के लिये कोई मुद्दा नहीं है। न इनके पास कोई तथ्‍य है। तथ्‍यहीन बात करके जब से हमारी विधान सभा शुरू हुई है तब से आज दिन तक इन व्‍यक्तियों ने कभी जनता की सुध नहीं ली, कभी किसानों की सुध नहीं ली। लेकिन विकास रूपी आयाम प्रस्‍तुत करने वाला जो बजट पेश हुआ है, इसको कैसे विध्‍वंस करे, कैसे हम केवल हाय-हाय के नारे लगायें, इसी तक सीमित हैं।

अध्‍यक्ष महोदय, आज मैं आपको जो कुछ ठोस निर्णय लिये हैं, वह बताना चाहता हूं कि आज हमारे देश की 100 में से 70 प्रतिशत जनसंख्‍या गांवों में रहती हैं और गांवों के विकास के लिये जो हमारे मुख्‍य मंत्री हैं, उन्‍होंने जो आयाम कायम किये हैं, यह हमारे लिये एक बहुत बड़ी उपलब्