ssy/akt  14.03.2007  1a  11:00

अशोधित प्रति प्रकाशनार्थ नहीं

 

राजस्‍थान विधान सभा की कार्यवाही का वृतान्‍त

 

अंक 7   बारहवीं विधान सभा के सातवें सत्र का चौदहवां दिवस   संख्‍या  10

 

 

बुधवार, 14 मार्च, 2007

 

राजस्‍थान विधान सभा की बैठक 11:00 बजे

विधान सभा भवन जयपुर, में प्रारम्‍भ हुई।

 

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

 

 

श्री जुबेर खान (रामगढ़):  अध्‍यक्ष महोदय, जब तक किसानों को उचित मुआवजा नहीं मिलेगा तब तक विधान सभा नहीं चलेगी ...(व्‍यवधान)

एक माननीय सदस्‍य: अध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान में किसान बरबाद हो गया है ...(व्‍यवधान)

अनेक माननीय सदस्‍य: किसानों को मुआवजा दें ...(व्‍यवधान)

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन में नारेबाजी)

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री):  सरकार बहुत चिंतित है ...(व्‍यवधान)

स्‍वागत

नार्वे प्रतिनिधिमण्‍डल का सदन में स्‍वागत

 

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण, on behalf of this House, I welcome a delegation from Norway, headed by Mr. Jagland.

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन में नारेबाजी)

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): वह तो आपके हाथ में नहीं है बदलने का तो, हल्‍ला करना आपके ...(व्‍यवधान)

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन में नारेबाजी)

श्री अध्‍यक्ष: Again I say, on behalf of this House, I welcome a delegation from Norway, headed by Mr. Jagland. …. (व्‍यवधान)…. राजशाही तो मत चलने देना, नार्वे के डेलीगेशन का आप लोगों की तरफ से मैंने स्‍वागत किया है उसका तो समर्थन करो ...(व्‍यवधान) उसका तो समर्थन कर दें, नार्वे के डेलीगेशन के सम्‍मान में भी नहीं सुनना चाहते एक शब्‍द ...(व्‍यवधान) सरकार का तो कुछ भी करो ...(व्‍यवधान) नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य ...(व्‍यवधान) 

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन में नारेबाजी)

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): जनता के बीच में जायेंगे तब पता चलेगा ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: वाह, वाहे बहुत बढि़या काम कर रहे हैं, बहुत बढि़या डेमोंस्‍ट्रेशन दे रहे हो आप।

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन में नारेबाजी)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, जिन्‍होंने अपने पचास साल के राजकाल में किसानों को एक फूटी कौड़ी नहीं दी। वह आज किसान की वकालत कर रहे हैं। राजस्‍थान के इतिहास में पहली बार इस सरकार ने ओलावृष्टि से फसल को नुकसान होते ही पाँच दिन के अंदर नुकसान का पैसा देने के लिए कल मंत्रि जी ने घोषणा की। यह तो केवल अपनी बात को ऊपर रखना चाहते हैं। सरकार घोषणा करने के लिए तैयार है। उनको राहत देने के लिए तैयार है। यह उनको राहत नहीं देना चाहते, अपनी बात कैसे ऊपर रहे, इस बात की वकालत कर रहे हैं और वह लोग कर रहे हैं जिन्‍होंने पचास साल में किसानों को फूटी पाई का लाभ नहीं दिया, फूटी पाई का। अपने पूरे इतिहास को टटोल लें ...(व्‍यवधान) अपने पूरे राज का रिकार्ड उठाकर के देख लें। आपने किसानों का एक पाई का लगान कभी माफ किया। किसान का एक पाई का लगान यह माफ नहीं करें, किसान का दस हजार का कर्जा भैरोंसिंह जी के राज में माफ करे तो भारतीय जनता पार्टी माफ करेगी। किसान को हुई हर नुकसान की भरपाई करेगी तो यह पार्टी करे और वकालत करने के लिए, केवल हल्‍ला करके यह उनके हिमायती बनने की कोशिश करें। जिन्‍होंने एक पैसे का फायदा नहीं दिया वह आज हिमायती बनना चाहते हैं। सरकार घोषणा करने के लिए पहले से जैसा आपने कहा था, वह अपना बयान देकर आज और किसान को राहत देने के लिए तैयार होकर के आये हैं लेकिन आप सुनना नहीं चाहते हैं। केवल अपनी बात को कहना चाहते हैं ...(व्‍यवधान)

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन में नारेबाजी)

यह केवल नारेबाजी से, जिन्‍होंने एक पैसे का लाभ किसान को नहीं दिया, ना किसान को बिजली दे सकें, मिनिमम चार्ज लगायें तो आप लोग लगायें। लगान को माफ करेगी तो भारतीय जनता पार्टी, किसान के बेटे को मुफ्त किताब दे तो भारतीय जनता पार्टी, दस हजार का कर्जा माफ करेगी तो भारतीय जनता पार्टी, नुकसान की भरपाई करेगी तो भारतीय जनता पार्टी और वकालत करने के लिए खड़े हैं। पचास साल में अपनी सरकार के खिलाफ खड़े होते ना और यह बताते, उस समय के समय तो अपनी जुबान पर एक तरह से चपड़ी लग गयी थी और आज वकालत करने के लिए खड़े हो गये, बात करते हैं।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, पाँच साल, सन 1952 से आज तक ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): किसानों को आज तक आपने ...(व्‍यवधान)

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन में नारेबाजी)

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): जितनी सहायता इस सरकार ने की है उसका कोई मुकाबला ही नहीं है ...(व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, मंत्रि जी अब घोषणा करने वाले हैं ...(व्‍यवधान) इनको किसानों से कोई मतलब ही नहीं है, किसानों के लिए सरकार ने जो किया है उसको सुनने के लिए तैयार नहीं हैं ...(व्‍यवधान) आज तक एक रूपया तो नहीं दिया ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, पूरे राजस्‍थान की समग्र रिपोर्ट ...(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, यह किसानों के अपने आपको हिमायती समझते हैं ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): यह उसके अतिरिक्‍त घोषणा करना चाहते हैं। काश्‍तकारों को इन ए डेज रिलीफ कैसे दीजिये उसकी घोषणा करना चाहते हैं। यह नहीं चाहते हैं कि काश्‍तकारों को वह पैसा मिले। यह जान-बूझकर के काश्‍तकारों को जो सहायता देने का हमारी सरकार का मंतव्‍य है, हमारी सरकार का विचार है, उनको यह सुनना नहीं चाहते हैं। यह केवल हल्‍ला करना चाहते हैं..(व्‍यवधान) काश्‍तकारों की किसी तरह की बात को, सहायता करने की बात को यह सुनना नहीं चाहते हैं। अध्‍यक्ष महोदय, जिस पार्टी की सरकार इस राजस्‍थान विधान सभा में रही हैं उन्‍होंने कभी भी घोषणा नहीं की है। वह राहत कार्यों की घोषणा और वह पैकेज हमारे मंत्रि जी देना चाहते हैं और मुख्‍यमंत्री जी देना चाहती हैं। 12 तारीख की शाम को ओले पड़े और कल सारे दिन हमारी मुख्‍यमंत्री जी ने पूरे क्षेत्र का भ्रमण किया और उन्‍होंने अपनी ...(व्‍यवधान)

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन में नारेबाजी)

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): दिल्‍ली का पता नहीं है  क्‍या कि दिल्‍ली में क्‍या हो रहा है पार्लियामेंट में ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: सदन की कार्यवाही 12.00 बजे तक के लिए स्‍थगित की जाती है।

(तदनन्‍तर सदन की बैठक 1120 बजे, 12.00 बजे तक के लिए स्‍थगित हुई।)

 

जयगोविन्‍द/अरुण/14.3.7/1g

 

(12.00 बजे)

(पुन: समवेत् होने पर)

(श्री रामनारायण विश्‍नोई, उपाध्‍यक्ष, पदासीन)

 

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा नारेबाजी)

 

श्री उपाध्‍यक्ष: सदन की कार्यवाही आधा घण्‍टे के लिए स्‍थगित की जाती है।

 

(तदनन्‍तर सदन की बैठक 12.00 बजे आधे घण्‍टे के लिए स्‍थगित हुई।)

 

Gpc/akt/14032007/1230/1k

 

(12.30 बजे)

(पुन: समवेत होने पर)

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

 

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन कूप में नारेबाजी)

 

श्री अध्‍यक्ष: प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों से मेरा निवेदन है कि उनकी मांग के अनुसार सदन की नेता सदन में आ गई है और वो इस संबंध में कुछ कहना चाह रही है। यदि आप अपने-अपने स्‍थान पर चले जाएंगे तो मैं उनसे आग्रह करूंगी कि वे कुछ कहें और यदि आप अपने स्‍थान पर नहीं जाते हैं उस हालत में तो मुख्‍यमंत्रीजी को बोलने की आवश्‍यकता नहीं है। सदन की नेता माननीय मुख्‍यमंत्रीजी, यदि ये अपने स्‍थान पर नहीं जाते हैं तो आपको बोलने की कोई आवश्‍यकता नहीं है। ..(व्‍यवधान)..

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, ये किसानों के नाम पर घडि़याली आंसू बहा रहे हैं। राजस्‍थान की सरकार, राजस्‍थान के मुख्‍यमंत्री किसानों के प्रति संवेदनशील है। मुख्‍यमंत्री कल स्‍वयं दो जिलों के अंदर जाकर आयी हैं और जब ये सत्‍ता में थे पाँच साल के अंदर एक करोड़ से कम की राशि अतिवृष्टि से प्रभावित किसानों को दी और ..(व्‍यवधान).. इस सरकार ने 36 करोड़ रुपये अतिवृष्टि से प्रभावित किसानों को दिया। आज किसान इस प्राकृतिक विपदा को झेल रहा है उस किसान को राजस्‍थान की सरकार ने मृत्‍यु होने पर 50 हजार रुपये देने की घोषणा कल माननीय मंत्रीजी ने की है। घायल को 25 हजार रुपये देने की घोषणा माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने की है। अगर इनके पास कोई बात कहने को हो तो इनको नियमों में आना चाहिए, आकर अपनी बात कहे और कहने के लिए इनके पास कुछ नहीं है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  ये सदन का समय जाया करते हैं। सदन की नेता कुछ कहना चाहती है ये सुनना नहीं चाहते। ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  बड़े अफसोस की बात है कि आपकी मांग के अनुसार मुख्‍यमंत्री इस सदन में आ गई, मुख्‍यमंत्री कुछ घोषणाएं करना चाहती है और आप सुन ही नहीं रहे।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): उनके बीच में जाकर माननीय मुख्‍यमंत्री महोदय पधारी हैं। इनके राज में कभी किसानों को कुछ नहीं दिया। आज माननीय मुख्‍यमंत्री महोदया कुछ कहना चाह रही है, हठधर्मिता के कारण ये सुनना नहीं चाह रहे। किसानों का आज तक इन्‍होंने सन् 1952 से कुछ नहीं किया। माननीय मुख्‍यमत्री महोदया कुछ कहना चाह रही है और ये सदन का माहौल खराब करना चाहते हैं। ये गांवों में नहीं जाते। ..(व्‍यवधान).. किसानों को एक हजार रुपये प्रति हैक्‍टेयर ..(व्‍यवधान).. किसानों के बिल माफ करना, अकाल राहत के कार्य घोषित करना, यह सब सरकार कर चुकी है। ये अपनी तरफ से क्‍या चाहते हैं, आज इन्‍होंने सदन के अंदर कुछ नहीं कहा। भारत सरकार से सी.आर.एफ. में बदलाव के लिए ये कोई कार्यवाही नहीं कर रहे हैं। यह दुर्भाग्‍य है राजस्‍थान के किसानों का कि ऐसे सदस्‍यों को प्रतिपक्ष में चुनकर भेजा। किसानों की कोई बात नहीं करना चाहते, केवल रोला करना चाहते हैं। क्‍या चाहते हैं इसके बारे में आज तक एक शब्‍द नहीं कहा। यह राजस्‍थान के किसानों का दुर्भाग्‍य है।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, दो दिन हो गये। ..(व्‍यवधान).. दो दिन में सिवाय हल्‍ले के कुछ नहीं किया। ..(व्‍यवधान)..

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, ये राजस्‍थान में रहने वालों के नाम पर घडि़याली आंसू बहा रहे हैं ..(व्‍यवधान)..

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, जो किसान विधायक हैं वे अपनी बात कहना चाहते हैं। गैर किसान लोगों ने यहां माहौल खराब कर रखा है। किसानों को क्‍या चाहिए, क्‍या नहीं चाहिए, सब पीछे खड़े हैं। इनको बात करने का मौका ये नहीं दे रहे हैं ..(व्‍यवधान)..

श्री कालूलाल गुर्जर  (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री): सरकार यहां घोषणा करने वाली है, लेकिन प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍य उस घोषणा को नहीं सुन सकते क्‍योंकि सरकार काफी अच्‍छी रिलीफ काश्‍तकारों को देना चाहती है जिनका नुकसान हुआ है, लेकिन प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों के पेट में बल पड़ रहा है। यह सरकार यदि काश्‍तकारों को अच्‍छा दे देगी तो इनकी राजनैतिक रोटियां नहीं सिकेंगी। इसलिए जान-बूझकर सदन को गुमराह कर रहे हैं, हो-हल्‍ला कर रहे हैं, सदन को नहीं चलने दे रहे हैं। बहुत ही गंभीर मामला है। यदि आप इस मामले में गंभीर होते तो आराम से चर्चा कराते, आपके सुझाव देते। माननीय मुख्‍यमंत्रीजी द्वारा जो वक्‍तव्‍य दिया जा रहा है इसको शांति से सुनते, लेकिन अध्‍यक्ष महोदय, विपक्ष ने अराजकता फैलाने का ठेका ले रखा है और जान-बूझकर अनर्गल नारेबाजी कर रहे हैं और व्‍यवधान डाल रहे हैं काश्‍तकारों का जो भला नहीं कर सकते वे लोग इस तरह की बात को लेकर बिना बात के ..(व्‍यवधान)..

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): ये तो किसानों से कोई वास्‍ता नहीं रखते। जिनकी एक इंच जमीन नहीं है, जिनको पता नहीं खेती-बाड़ी कैसे होती है ऐसे माननीय सदस्‍य ..(व्‍यवधान).. किसानों की आवाज उठाने का अवसर नहीं दे रहे हैं। मुख्‍यमंत्रीजी किसानों के लिए कुछ करना चाहते हैं। जिनकी एक इंच जमीन नहीं है वे क्‍या कर रहे हैं ..(व्‍यवधान)..

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): आप काश्‍तकारों के हितैषी न होकर काश्‍तकारों के बहुत बड़े दुश्‍मन हैं। आपने जो ..(व्‍यवधान)..

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍य किसान की मदद नहीं करना चाहते हैं, किसान की मदद के लिए मुख्‍यमंत्रीजी सदन में आकर अपनी बात कहना चाहते हैं, लेकिन उस किसान की मदद की जाए यह नहीं चाहते हैं। वे तो केवल इस बात का श्रेय ले जाना चाहते हैं कि जो भी मदद करा रहे हैं वह हमारे हल्‍ले के कारण से मदद हो रही है, यह गलतफहमी निकाल देनी चाहिए। आप लोगों ने 45 साल तक राज किया आज आप यह भी बताना कि आपने कोई किसान की मदद की है। केवल हल्‍ला करके किसान के हिमायती नहीं बन सकते हो। केवल यहां चिल्‍लाकर किसान की तरफदारी नहीं कर सकते। यह तो पहली बार भैरोंसिंह जी की सरकार ने किसान की मदद करने की सोची और राजस्‍थान की मुख्‍यमत्रीजी ने इस बार भी ओले गिरते ही चार दिन के अंदर चैक किसान के हाथ में पहुंचाने का काम अगर किसी ने किया है तो इस सरकार ने किया है। अब आप लोगों को इसकी पीड़ा है कि इस सरकार को श्रेय मिल रहा है और आप अछूते रह गये इसकी भड़ास निकालने के लिए आप कोशिश कर रहे हो। आप किसान की मदद नहीं करना चाहते हो। आप मुख्‍यमंत्रीजी को नहीं सुनना चाहते हो। किसान को मदद मिले यह भी आप नहीं चाहते हो। आप तो केवल श्रेय लूटना चाहते हैं कि किसान के हमदर्द तो हम ही हैं। जिन्‍होंने 45 साल में किसान की मदद नहीं की वो यह नाटकबाजी करके किसान के हमदर्द बनना चाहते हैं। सारे राजस्‍थान की छह करोड़ जनता इस सारे खेल को देख रही है। चिल्‍लाने से नहीं है, अगर आप चाहें तो मैं अकेला ही आपकी चिल्‍लाने की आवाज दबा सकता हूं। अगर हिम्‍मत हो तो अकेले ही बहस करो। आप सब बोलो, मैं अकेला भी आपकी आवाज को दबा सकता हूं, केवल हल्‍ला करके किसानों के हमदर्द नहीं बन सकते हो। 45 साल का आपका इतिहास इस बात का साक्षी है कि आपने किसान का शोषण किया, किसान के साथ न्‍याय नहीं किया और उसकी झेंप मिटाना चाहते हो। 45 साल के पापों की झेंप मिटाने के लिए आधा घण्‍टे हल्‍ला करने से किसान के हमदर्द नहीं बन सकते हो। इस सरकार ने जो मदद की उससे आपको ठेस लग रही है कि हम क्‍या शक्‍ल दिखाएंगे? इस सरकार ने तो जैसे ही घटना हुई मुख्‍यमंत्रीजी ने सारे क्षेत्रों का दौरा करके किसान की पीड़ा को सुना और यही नहीं आज सारे मंत्रियों को अलग-अलग जिलों में भेजा है। सारे के सारे मंत्री आज जिलों में जाकर वहां की जनता से प्रत्‍यक्ष बात करके सारी रिपोर्ट लेकर आएंगे, यह जो नुकसान हुआ है पटवार सर्किल के आधार पर अगर रिकार्ड इकट्ठा होकर नहीं आता है तो फिर मैं सोचता हूं कि आप कोई सुझाव देना चाहते हैं तो अपनी चर्चा में कोई सुझाव दे सकते हो।

 

मोहन/अरूण/अशोधित प्रति प्रकाशनार्थनहीं/14032007/1240/1L

 

बिना चर्चा के हो हो से आपको मदद नहीं मिलेगी। आज राजस्‍थान का किसान जान रहा है । यह केवल नाटक के लिए हो रहा है, उसकी मदद नहीं हो रही है । अगर उसकी मदद के लिए चाहें तो हाउस में मुख्‍य मंत्री को सुनते, फिर आपके कुछ सुझाव होते। अगर आप उसमें कुछ कमियां महसूस करते, आप उन कमियों को बताते, हम उन कमियों के आधार पर अगर और कुछ मदद की जा सकती है तो उस पर चर्चा हो सकती है लेकिन यह चाहते नहीं इसलिए मैं सोचता हूं मुख्‍य मंत्री जी, इस तरह के हालात में कोई घोषणा करने की जरूरत नहीं है। जो घोषणा कल हमारे अकाल राहत मंत्री ने की उसके बाद जब यह सुनना चाहेंगे उसी दिन आप इसको करें, तब तक उस आधार पर कोई घोषणा नहीं करें। ये अड़े हुए हैं तो सरकार को भी अड़ना चाहिए। इस आधार पर घोषणा करके हम इनको श्रेय देने वाले नहीं हैं। ये केवल श्रेय लूटना चाहते हैं कि हमने घोषणा कराई। पैसा सरकार देवे, निर्णय सरकार करे और केवल फालतू जाकर के उसका मुआवजा लेने की कोशिश करें, यह नहीं हो सकता। केवल हल्‍ला करके और श्रेय लूटना चाहते हैं, यह श्रेय किसी भी कीमत पर नहीं मिल सकता आपको। जिस तरह से जिस ओछे हथकंडे से आप आए हैं न, उस ओछे हथकंडे से नहीं, अगर आप यह लोकतंत्र मानते हो न तो चर्चा होनी चाहिए, लोकतंत्र में बराबर आप अपने सवाल को रखें लेकिन हो हो में से आपके सवाल का जवाब नहीं है और मैं कहता हूं कि आप निश्चिंत होकर जाइए हम निपटेंगे जो भी होगा वह। केवल हल्‍ला करके और श्रेय लूटना चाहते हैं, यह श्रेय किसी भी कीमत पर नहीं मिल सकता आपको।

श्री सांवर लाल: अध्‍यक्ष महोदय, इनका किसानों से कोई वास्‍ता नहीं है। प्रतिपक्ष के ऐसे लोग शोर करवा रहे हैं। .....(व्‍यवधान).... जिनका किसानों से कोई लेना देना नहीं है, एक इंच जमीन नहीं है इनकी।


समिति का प्रतिवेदन

कार्य सलाहकार समिति का 17वां संशोधित प्रतिवेदन

श्री ओ.पी. महेन्‍द्रा (सरकारी उप मुख्‍य सचेतक): अध्‍यक्ष महोदय, मैं दिनांक 13 मार्च, 2007 को माननीय अध्‍यक्ष महोदय द्वारा सदन में की गई घोषणा एवं कार्य सलाहकार समिति की बैठ में हुई सहमति के संदर्भ में कार्य सलाहकार समिति के 17वें प्रतिवेदन में निम्‍नानुसार परिवर्तन करने हेतु प्रक्रिया के नियम 218 के तहत प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत करता हूं :-

शनिवार, 17 मार्च, 2007

रविवार, 18 मार्च, 2007             अवकाश

सोमवार 19 मार्च, 2007

मंगलवार, 20 मार्च, 2007     1.अनुपूरक अनुदान की मांगें वर्ष 2006-07

                          मुखबंद का प्रयोग किया जाकर मतदान एवं

                          तत्‍संबंधी विनियोग विधेयक का पुर:स्‍थापन,

                          विचार एवं पारण।

2.आय-व्‍ययक,2007-08 की अनुदान की मांगें- न्‍याय प्रशासन, पुलिस, कारागार पर विचार एवं पारण।

 

श्री अध्‍यक्ष: प्रश्‍न यह है कि जो प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत किया गया है उसको स्‍वीकार किया जाए?

(स्‍वीकृत)

प्रस्‍ताव स्‍वीकार किया गया।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (संसदीय कार्य मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान की सरकार किसानों के प्रति संवेदनशील है। अकाल राहत मंत्री जी अपनी बात को कहना चाहते हैं। इस सदन के माध्‍यम से साढ़े चार करोड़ किसानों के लिए जो सरकार के मन में हमदर्दी है, जो सरकार उनके लिए करना चाहती है उसी घोषणा करना चाहते हैं, अध्‍यक्ष महोदय। अध्‍यक्ष महोदय, आसन से अनुमति मांग रहे हैं।

शासकीय वक्‍तव्‍य

राज्‍य में ओलावृष्टि से प्रभावित लोगों को सहायता

डा. किरोड़ी लाल( अकाल राहत मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राज्‍य में सर्वप्रथम 9, 13 फरवरी, 2007 में ....(व्‍यवधान).... 20 जिलों में ओलावृष्टि से प्रभावित हुए, माननीय मुख्‍य मंत्री महोदय ने स्थिति की समीक्षा करते हुए मुझे निर्देश दिये कि मैं सभी जिलों के प्रभारी मंत्रियों को व सचिवगणों को ....(व्‍यवधान)... ओलावृष्टि से प्रभावित जिलों में तुरन्‍त भेजूं तथा मंत्रिगणों व सचिवगण अपनी रिपोर्ट ...(व्‍यवधान)... प्रस्‍तुत करें। मेरे द्वारा निर्धारित समय में जिलों में प्रभारी मंत्रिगणों द्वारा दौरा किया गया और उसके लिए एक विशेष पैकेज घोषित किया जिसमें ......

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री) : सुनो, आप लोगों ने कुछ नहीं किया, मंत्री जी जो किसानों के लिए कर रहे हैं, सुनो।

डा. किरोड़ी लाल (अकाल राहत मंत्री) ओलावृष्टि से प्रभावित मृतकों के परिवारों को 50,000 रूपये दिए जाएंगे, गंभीर रूप से घायलों के परिवारों को 25,000 रूपये व सामान्‍य घायलों के परिवारों को 5000 रुपये प्रति व्‍यक्ति अनुग्रह सहायता उपलब्‍ए कराई जाएगी।

पक्‍के मकानों के पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्‍त हो जाने पर 10,000रुपये, गंभीर रूप से क्षतिग्रस्‍त मकानों को 2,000 रुपये तथा आंशिक रूप से क्षतिग्रस्‍त मकानों को 800 रुपये प्रति मकान की दर से आर्थिक सहायता उपलब्‍ध कराई जाएगी।

कच्‍चे मकानों के पूर्ण रूप से क्षतिगस्‍त हो जाने पर 6,000 रुपये, गंभीर रूप से क्षतिग्रस्‍त मकानों के लिए 1200 रुपये तथा आंशिक रूपसे क्षतिगस्‍त मकानों के लिए 800 रुपये की दर से आर्थिक सहायता उपलब्‍ध कराई जाएगी।

जिन लघु एवं सीमान्‍त कृषकों की फसल क्षति हुई है उनको सिंचित क्षेत्र के लिए 2500 रुपये प्रति हैक्‍टेयर एवं असिंचित क्षेत्र के लिए 1000 रुपये प्रति हैक्‍टेयर की दर से कृषि आदान अनुदान सहायता उपलब्‍ध कराई जाएगी।

अन्‍य किसानों को भी लघु एवं सीमान्‍त कृषकों की भंति कृषि अदान अनुदान दिया जाएगा। ये कृषि आदान अनुदान 2 हेक्‍टेयर तक ही देय होगा।

ओलावृष्टि से प्रभावित 50 प्रतिशत से अधिक खराबा वाले काश्‍तकारों का सिंचाई विभाग द्वारा लिया जाने वाला आबियाना शुल्‍क माफ किया जाएगा।

जिन प्रभावित परिवारों के मकान पूर्ण रूप से नष्‍ट हो गये हैं उनको तुरन्‍त सहायता के रूप में 20 रुपये प्रति वयस्‍क एवं 10 रुपये प्रति बच्‍चे प्रतिदिन की दर से अन्‍य वैकल्पिक व्‍यवस्‍था तक नकद अनुग्रह सहायता दी जाएगी और ऐसे लोगों के लिए कपड़ों के लिए 500 रुपये एउवं बर्तनों के 500 रुपये की राशि प्रति परिवार उपलब्‍ध कराई जाएगी।

किसी कातश्‍कार द्वारा अपने स्‍वतंत्र रूप से नोशनल शेयर के आधार पर या स्‍वतंत्र रूप से धारित भूमि के कुल रकबा आदि सीमान्‍त तथा लघु कृषक के लिए धारित रकबा के अनुसार हो तो उसे लघु सीमान्‍त कृषक के अनुसार कृषि आदान अनुदान स्‍वीकृत किया जाएगा।

ओलावृष्टि से प्रभावित वे गांव जिनमें 50 प्रतिशत से अधिक फसल नुकसान हुआ है, उन क्षेत्रों को अभावग्रस्‍त घोषित कर दिया गया है तथा भू-राजस्‍व स्‍थगित कर दिया गया है। सहकारी अल्‍पकालीन ऋणों की वसूली स्‍थगित कर रिफेजिंग की जाएगी।

जिन किसानों की फसलों में 50 प्रतिशत से अधिक खराबा हुआ है उनके दो माह के बिजली के बिल माफ किये जाएंगे।

जिन परिवारों के ओलावृष्टि के कारण मकान ध्‍वस्‍त/क्षतिग्रस्‍त हुए हैं उनको राहत कार्यों के अन्‍तर्गत भवनों की मरम्‍मत/निर्मित कराया जाएगा। इस योजना अन्‍तर्गत सामग्री मद में व्‍यय होने वाली समस्‍त राशि लाभार्थी द्वारा वहन की जाएगी व समस्‍त श्रम राशि राहत मद से नकद में देय होगी।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (संसदीय कार्य मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, अकाल राहत मंत्री जी ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के लिए इस सदन के अन्‍दर जो राहत सरकार देना चाहता है, सरकार उनकी पीड़ा में जिस तरह सम्मिलित होना चाहती है उसके बारे में अपनी बात कहिए, अध्‍यक्ष महोदय और अच्‍छा होता प्रतिपक्ष के लोग अपनी सीटों पर जाते और इसके अन्‍दर और कैसे किया जा सकता है, हमारा मार्ग प्रशस्‍त करते। यह कोई बात कहना नहीं चाहते। अगर कोई बात कहना चाहते, किसानों के प्रति हमदर्दी इनके मन में हो तो निश्चित तौर पर इनको अपनी बात कहनी चाहिए, अध्‍यक्ष महोदय। अध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान के इतिहास के अन्‍दर यह पहली सरकार है जिसने ओला पीडि़त किसानों के दर्द को समझा, अध्‍यक्ष महोदय, 36 करोड़ रुपये की सहायता दी है और अध्‍यक्ष महोदय, 5 साल तक राज करने वालों ने एक करोड़ रुपये से कम की सहायता दी है।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, यह काश्‍तकारों के घडि़याली आंसू बहाने वाले काश्‍तकारों के हमदर्द बनने वाले काश्‍तकारों को जो पैकेज दिया है।

नियम 295 के अन्‍तर्गत विशेष उल्‍लेख की सूचनाएं

श्री अध्‍यक्ष: नियम 295 के अन्‍तर्गत जिन लोगों ने सूचना दी है वह पढ़े हुए मान लिए जाएंगे। श्री शांति लाल चपलोत।

समिति का प्रतिवेदन

राजकीय उपक्रम समिति (क्रम सं0 56 से 67)

श्री शांतिलाल चपलोत: अध्‍यक्ष महोदय, मैं कार्य सूची में किये गये उल्‍लेख के अनुसार राजकीय उपक्रम समिति 2006-07 के 12 प्रतिवेदनों का उपस्‍थापन करता हूं:

राजस्‍थान वित्‍त निगम (अंकेक्षण प्रतिवेदन (वाणिज्यिक) वर्ष 1999-2000) से संबंधित समिति का 56वां प्रतिवेदन ।

राजस्‍थान वित्‍त निगम (अंकेक्षण प्रतिवेदन (वाणिज्यिक) वर्ष 2001-2002) से संबंधित समिति का 57वां प्रतिवेदन ।

राजस्‍थान राज्‍य होटल्‍स निगम लिमिटेड (अंकेक्षण प्रतिवेदन (वाणिज्यिक) वर्ष 1998-1999) से संबंधित समिति का 58वां प्रतिवेदन ।

राजस्‍थान राज्‍य हाथकर्घा विकास निगम लिमिटेड (अंकेक्षण प्रतिवेदन वर्ष 1997-1998) से संबंधित समिति का 59वां प्रतिवेदन ।

राजस्‍थान पर्यटन विकास निगम लिमिटेड (अंकेक्षण प्रतिवेदन (वाणिज्यिक) वर्ष 2000-2001) से संबंधित समिति का 60वां प्रतिवेदन ।

राजस्‍थान राज्‍य बीज निगम लिमिटेड (अंकेक्षण प्रतिवेदन (वाणिज्यिक) वर्ष 1997-1998) से संबंधित राजकीय उपक्रम समिति, 2002-2003 के 62वें प्रतिवेदन में समाविष्‍ट सिफारिशों पर शासन द्वारा की गई क्रियान्विति विषयक्  समिति का 61वां परिपालनात्‍मक प्रतिवेदन ।

राजस्‍थान वित्‍त निगम (अंकेक्षण प्रतिवेदन (वाणिज्यिक) वर्ष 1997-1998) से संबंधित राजकीय उपक्रम समिति, 2005-2006 के 28वें प्रतिवेदन में समाविष्‍ट सिफारिशों पर शासन द्वारा की गई क्रियान्विति विषयक्  समिति का  62वां परिपालनात्‍मक प्रतिवेदन ।

राजस्‍थान राज्‍य हाथकर्घा विकास निगम लिमिटेड (अंकेक्षण प्रतिवेदन वर्ष 1991-1992) से संबंधित राजकीय उपक्रम समिति, 2004-2005 के 22वें प्रतिवेदन में समाविष्‍ट सिफारिशों पर शासन द्वारा की गई क्रियान्विति विषयक्  समिति का 63वां परिपालनात्‍मक प्रतिवेदन ।

राजस्‍थान राज्‍य हाथकर्घा विकास निगम लिमिटेड (अंकेक्षण प्रतिवेदन (वाणिज्यिक) वर्ष 1992-1993) से संबंधित राजकीय उपक्रम समिति, 2004-2005 के 23वें प्रतिवेदन में समाविष्‍ट सिफारिशों पर शासन द्वारा की गई क्रियान्विति विषयक्  समिति का 64वां परिपालनात्‍मक प्रतिवेदन ।

राजस्‍थान राज्‍य हाथकर्घा विकास निगम लिमिटेड (अंकेक्षण प्रतिवेदन (वाणिज्यिक) वर्ष 1994-1995) से संबंधित राजकीय उपक्रम समिति, 2004-2005 के 24वें प्रतिवेदन में समाविष्‍ट सिफारिशों पर शासन द्वारा की गई क्रियान्विति विषयक् समिति का 65वां परिपालनात्‍मक प्रतिवेदन ।

राजस्‍थान राज्‍य विद्युत मण्‍डल (अंकेक्षण प्रतिवेदन वर्ष 1992-1993) से संबंधित राजकीय उपक्रम समिति, 2004-2005 के 19वें प्रतिवेदन में समाविष्‍ट सिफारिशों पर शासन द्वारा की गई कार्यवाही विषयक् समिति का 66वां परिपालनात्‍मक प्रतिवेदन ।

राजस्‍थान पर्यटन विकास निगम लिमिटेड (अंकेक्षण प्रतिवेदन वर्ष 1995-1996) से संबंधित राजकीय उपक्रम समिति, 2004-2005 के प्रथम प्रतिवेदन में समाविष्‍ट सिफारिशों पर शासन द्वारा की गई कार्यवाही विषयक्  समिति का 67वां परिपालनात्‍मक प्रतिवेदन ।

श्री अध्‍यक्ष: श्री समर्थ लाल ।

अधीनस्‍थ विधान संबंधी समिति (सं0 3)

श्री समर्थ लाल (राजगढ़): मैं सभापति, अधीनस्‍थ विधान संबंधी समिति 2006-07 समिति द्वारा प्राधिकृत किये जाने पर समिति का तृतीय प्रतिवेदन उपस्‍थापित करता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: याचिकाओं का उपस्‍थापन।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर अनुपस्थित।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार) अनुपस्थित।

श्री बंशीलाल खटीक।

याचिकाओं का उपस्‍थापन

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमंद): अध्‍यक्ष महोदय, मैं विधान सभा क्षेत्र राजसमंद में पुनर्गठित पेयजल योजना लागू करने बाबत पाँच व्‍यक्तियों द्वारा हस्‍ताक्षरित एवं विधान सभा क्षेत्र राजसमंद में केलवा एवं कांकरोली में पुलिस थाना स्‍वीकृत करने बाबत पाँच व्‍यक्तियों द्वारा हस्‍ताक्षरित याचिकाएं उपस्‍थापित करता हूं।

 

सुरेन्‍द्र/अरुण/14.3.2007/1m/1250/1

 

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन कूप में नारेबाजी)

श्री अध्‍यक्ष: श्री सी. डी. देवल। श्री देवीशंकर भूतड़ा।

श्री देवीशंकर भूतड़ा (ब्‍यावर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं विधान सभा क्षेत्र ब्‍यावर (अजमेर) की पंचायत समिति जवाजा मुख्‍यालय पर तहसील कार्यालय खोलने बाबत् पांच व्‍यक्तियों द्वारा हस्‍ताक्षरित याचिका उपस्‍थापित करता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: श्री दाताराम गुर्जर।

श्री दाताराम  गुर्जर (खेतड़ी): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं पाटन नेशनल हाइवे से सिंघाना (40 कि.मी.) को मेगा हाइवे से जोड़ने बाबत् पांच व्‍यक्तियों द्वारा हस्‍ताक्षरित याचिका उपस्‍थापित करता हूं।

(प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन कूप में नारेबाजी)

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): जोर से बोलो। दम नहीं है, दम निकल गया।

श्री अध्‍यक्ष: सदन की बैठक गुरुवार दिनांक 15 मार्च, 2007 के प्रात: 11.00 बजे तक के लिए स्‍थगित की जाती है।

 

(तदनन्‍तर स‍दन की बैठक 12.51 बजे गुरुवार, 15 मार्च, 2007 के

11.00 बजे तक के लिए स्‍थगित हुई।)