Bhs/usc/12.3.07/11.00/1a
अशोधित
प्रति/प्रकाशनार्थ
नहीं
राजस्थान
विधान सभा की
कार्यवाही का
वृत्तान्त
अंक
: 7
बारहवीं
विधान सभा के
सातवें सत्र
का बारहवां
दिवस
संख्या : 8
सोमवार, 12
मार्च, 2007
राजस्थान
विधान सभा की
बैठक 11.00 बजे
विधान
सभा भवन,
जयपुर में
प्रारम्भ
हुई।
(
श्रीमती
सुमित्रा
सिंह, अध्यक्ष,
पदासीन )
तारांकित
प्रश्नोत्तर
श्री अध्यक्ष:
आज सख्ंया
इतनी क्षीण
कैसे है?
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय,
मैंने बजट रखा
तब भी कहा था
कि सन्निपात
में हैं सब
लोग अभी होश
आने वाला नहीं
है इनको।
थोड़ा समय
लगेगा, अध्यक्ष
महोदय।
श्री अध्यक्ष:
तमिलनाडु
विधान सभा की
एक कमेटी आने
वाली है और वो
अभी यहां पर
बैठेगी और
इतनी संख्या
कम है तो क्या
सोचेंगे अपने
बारे में?
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण मंत्री):
हमारे बारे
में नहीं अध्यक्ष
महोदय,
उनके बारे में
सोचेंगे।
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री):
अध्यक्ष
महोदय, बजट
इतना अच्छा
था कि उससे
आहत हो गये और
उठकर आने में
असमर्थ हो रहे
हैं।
श्री
अमराराम (धोद):
...(व्यवधान)... इधर
वाले काहें से
आहत हैं? वो
बता दो।
श्री
जीवाराम
चौधरी
(सांचौर): उनको
यह समझ में
नहीं आ रहा है
कि क्या जवाब
दें कैसे जाएं
अन्दर।
श्री अध्यक्ष:
श्री केसरदेव
बाबर।
प्रधानमंत्री
सड़क योजनान्तर्गत
ठेकेदारों का
लम्बित
भुगतान
113. श्री
केसरदेव बाबर
(लक्ष्मणगढ़):
क्या
सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री यह
बताने की कृपा
करेंगे:-
(1) राज्य
में प्रधान
मंत्री ग्राम
सड़क योजना के
तहत गत तीन
वर्षों में
कुल कितनी
सड़कें बनाई
गई एवं उन पर
कितनी राशि व्यय
की गयी?
(2) कितनी लम्बाई
की सड़कों का
कार्य
वर्तमान में
प्रगति पर है
एवं यह कब तक
पूर्ण हो
जाएगा?
(3) क्या यह
सही है कि
राज्य में
प्रधान
मंत्री ग्राम
सड़क योजनान्तर्गत
ठेकेदारों का
भुगतान बकाया
है? यदि हां, तो
कितनी राशि का
एवं क्यों?
विवरण सदन की
मेज़ पर रखें।
(4) क्या
सरकार
ठेकेदारों का
बकाया भुगतान
शीघ्र करने का
विचार रखती
है? यदि हां, तो
कब तक व नहीं,
तो क्यों?
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय,
आपकी आज्ञा से
(1) राज्य में
प्रधान
मंत्री ग्राम
सड़क योजना के
तहत दिसम्बर,
2003 से फरवरी, 2007 तक
कुल 4490 सड़कें
बनाई गई एवं
उन पर कुल
राशि रुपये 2380.07
करोड़ व्यय
किये गये।
(2)
प्रधानमंत्री
ग्राम सड़क
योजना में 10767.76
कि.मी. लम्बाई
की सड़कों का
कार्य प्रगति
पर है एवं इन्हें
मार्च, 2008 तक
पूर्ण किया
जाना प्रस्तावित
है।
(3) जी, नहीं।
(4) इस योजना
में वर्तमान
में
ठेकेदारों का
कोई भुगतान
बकाया नहीं
है।
श्री अध्यक्ष:
वो प्रस्तावित
ही है या कर भी
देंगे पूर्ण?
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): निश्चित
तौर पर अध्यक्ष
महोदय।
श्री अध्यक्ष:
तो आपने तो
कहा है कि
प्रस्तावित
है।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक निर्माण
मंत्री): नहीं,
पूर्ण होना
प्रस्तावित
है।
श्री
केसरदेव बाबर
(लक्ष्मणगढ़):
अध्यक्ष
महोदय,
मंत्री महोदय
ने बताया कि
ठेकेदारों का
कोई भुगतान
बकाया नहीं है
इसके लिए तो
इनका धन्यवाद।
मैं इस तथ्य
से जुड़े तीन
चार सवाल
पूछना
चाहूंगा।
मंत्री महोदय
से बताने की
कृपा करेंगे
कि
प्रधानमंत्री
ग्राम सड़क
योजना में
केन्द्र से
अब तक कितना
अंश मिला और
कितना बकाया है
? क्या यह सही
है कि ढाई सौ
की आबादी वाले
गांव, ढाणियों
को सड़क से
जोड़ा जाएगा? यदि
हां, तो कब तक ? मंत्री
महोदय कृपया
जवाब दें।
श्री अध्यक्ष:
आपने अपने
क्षेत्र का तो
अलग से पूछा
नहीं है आपने तो
कुल पूछा है।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय,
प्रधानमंत्री
ग्राम सड़क
योजना में अब
तक केन्द्र
से 2847 करोड़
रुपये मिले
हैं। अध्यक्ष
महोदय,
राजस्थान
पहला प्रदेश
है जिसने
प्रधानमंत्री
ग्राम सड़क
योजना का
प्रथम चरण से
लेकर चतुर्थ
चरण तक पूरा
कर लिया है और
पांचवें और
छठे चरण का
कार्य चल रहा
है। अध्यक्ष
महोदय,
मार्च, 2008 तक हम
राजस्थान के
वो सारे गांव
जिनकी आबादी
पाँच सौ तक है
उनको जोड़
देंगे। ढाई सौ
तक की आबादी
जिसके बारे
में माननीय
सदस्य ने
जानना चाहा
ट्राइबल और
डेजर्ट के अन्दर
प्रधानमंत्री
ग्राम सड़क
योजना के अन्तर्गत
ढाई सौ तक की
आबादी को
जोड़ने के लिए
हमने 1764 गांवों
के प्रस्ताव
बनाकर केन्द्र
सरकार को भेजे
हैं और हमें
उम्मीद है कि
जल्दी ही
हमें इसकी जब
स्वीकृति
मिलेगी तो हम
इनको भी जोड़
देंगे।
श्री
केसरदेव बाबर
(लक्ष्मणगढ़):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से मंत्री
महोदय से
जानना
चाहूंगा कि
मेरे विधान
सभा क्षेत्र
में ...।
श्री अध्यक्ष:
आपने अपने का
पूछा कहां है? आपने
तो जनरल पूछा
है पूरे राजस्थान
का।
श्री
केसरदेव बाबर
(लक्ष्मणगढ़):
अध्यक्ष
महोदय, यह
प्रधानमंत्री
ग्राम सड़क
योजना से
जुड़ा मुद्दा
है इसलिए मैं
पूछ रहा हूं
प्रधानमंत्री
ग्राम सड़क
योजना के अन्तर्गत
ग्राम
मनासिया
विधान सभा
क्षेत्र लक्ष्मणगढ़
के सड़क के
टेण्डर हो
गये थे लेकिन
इसका कार्य
अभी रुका हआ
है यदि कार्य
रुका हुआ है
तो सार्वजनिक
निर्माण
विभाग इसमें
क्या प्रयास
कर रहा है? कब
शुरू कर
देंगे? दूसरा
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से यह जाना
चाहूंगा कि
पीएमजीएसवाई
में जो भारत
सरकार अथवा
राजस्थान
सरकार की जो
गाइड लाइंस
हैं इनमें ऐसे
कई गांव और
ढाणियां
जिनकी आबादी
आठ सौ या हजार
है लेकिन ये
राजस्व गांव
नहीं हैं। ऐसे
गांव बहुत हैं
जिनकी मूल
गांवों से
दूरी लगभग दो
या तीन
किलोमीटर तक की
है लेकिन अभी
ये गांव प्रधानमंत्री
ग्राम सड़क
योजना से नहीं
जुड़ सके हैं।
श्री अध्यक्ष:
यह अलग से
प्रश्न है ।
श्री
केसरदेव बाबर
(लक्ष्मणगढ़):
मैं उदाहरण के
तौर पर माननीय
अध्यक्ष
महोदय,
निवेदन करूं
कि एक ग्राम
देवरा जो कि
सौ वर्ष पुराना
गांव है और
नागौर और सीकर
जिले...।
श्री अध्यक्ष:
आप भाषण दे
रहे हो कि आप
प्रश्न पूछ
रहे हो?
श्री
केसरदेव बाबर
(लक्ष्मणगढ़):
प्रश्न पूछ
रहा हूं अध्यक्ष
महोदय।
श्री अध्यक्ष:
मूल में नहीं
लिखा हुआ है।
आप प्रश्न
पूछें।
श्री
केसरदेव बाबर
(लक्ष्मणगढ़):
नागौर जिले और
सीकर जिले के
बॉर्डर पर एक
गांव हैं उस
गांव का नाम
देवरा है और
वहां पर
देवनारायण
भगवान का मंदिर
भी है और उस
गांव की आबादी
लगभग आठ सौ है,
सौ वर्ष
पुराना गांव
है लेकिन...।
श्री अध्यक्ष:
आप प्रश्न
पूछ लीजिये
भाषण का समय
नहीं है यह।
श्री
केसरदेव बाबर
(लक्ष्मणगढ़):
अध्यक्ष
महोदय, यह
भाषण नहीं है
यह प्रश्न
है।
श्री अध्यक्ष:
तो भाषण नहीं
है तो क्या
है? आप प्रश्न
पूछिये।
श्री
केसरदेव बाबर
(लक्ष्मणगढ़):
क्या इस गांव
को ग्राम
देवरा को सड़क
से जोड़ने का
सरकार विचार
रखती है या
ऐसे गांव
जिनकी आबादी
पाँच सौ से
अधिक है लेकिन
वो गांव तीन
या चार
किलोमीटर दूर
हैं इन गांवों
को जोड़ने का
क्या प्रयास
करेंगे?
श्री अध्यक्ष:
मि.बाबर, आप
प्रश्न
पूछिये।
श्री
केसरदेव बाबर
(लक्ष्मणगढ़):
...(व्यवधान)...
माननीय अध्यक्ष
महोदय, पहले
मैंने जो पूछा
है उसका जवाब
आ जाए।
श्री
सुभाषचंद्र
शर्मा
(कोटपूतली):
अध्यक्ष
महोदय, एक
प्रश्न इसी
से जुड़ा हुआ
है ...।
श्री अध्यक्ष:
नहीं, आप
पूछेंगे।
श्री
सुभाषचंद्र
शर्मा
(कोटपूतली):
निवेदन यह है
कि ढाई सौ और
उससे ज्यादा की आबादी
की ढाणियों को...।
श्री अध्यक्ष:
श्री जयराम
जाटव
पूछेंगे।
श्री
सुभाषचंद्र
शर्मा
(कोटपूतली):.... क्या
राजस्व गांव
बनाकर सड़क से
जोड़ने का विचार
रखती है
सरकार? जब तक
वो राजस्व
गांव नहीं
बनेंगे, सरकार
नहीं जोड़ेगी
तो माननीय
मंत्री महोदय
से यह पूछना
चाहता हूं कि
क्या ढाई सौ
से ऊपर की
आबादी की
ढाणियों को
राजस्व गांव
बनाकर उनको
सड़कों से
जोड़ने का
विचार रखते
है?
श्री अध्यक्ष:
श्री जयराम
जाटव।
श्री
जयराम जाटव
(खैरथल):
माननीय अध्यक्ष
जी, आपके माध्यम
से यह निवेदन
करना चाहता
हूं कि माननीय
मंत्री जी से
कि कुछ गांव
जो
क्राइटेरिया
में
प्रधानमंत्री
ग्राम सड़क
योजना में आते
हैं वो जुड़
गये, कुछ
रोड़ों को इस
तरह से जोड़
दिया गया है
कि चाहे वो
ग्राम पंचायत से
किसी से आधा
किलोमीटर या
कहीं कुछ
थोड़ा चौथाई
सीसी रोड बना
दी और
सार्वजनिक
निर्माण
विभाग ने उनको
प्रधानमंत्री
ग्राम सड़क
योजना से जुड़ा
दिखा रखा है ऐसे
कुछ गांव हैं
जिनकी लंबाई
एक-एक
किलोमीटर बच गयी
और वो गांव
सड़क से वंचित
हैं, तीसरा...।
श्री अध्यक्ष:
मि. जाटव, अलग
से प्रश्न है
यह।
श्री
जयराम जाटव
(खैरथल): कुछ
ढाणियां ऐसी
हैं माननीय
अध्यक्षजी,
जो गांव से
अधिक बड़ी
ढाणी है क्या
उनको भी
जोड़ने का
विचार रखते
हैं? ...(व्यवधान)...
श्री
अमराराम (धोद):
अध्यक्ष
महोदय,
आपके माध्यम
से मैं मंत्री
महोदय से
जानना
चाहूंगा कि
प्रधानमंत्री
ग्राम सड़क
योजना में
संवेदक को...।
श्री अध्यक्ष:
श्री टीकमचंद
कांत। ...(व्यवधान)...
मैंने नाम
टीकमचंद जी
कांत का पुकार
लिया।
श्री
टीकमचंद कांत
(सिवाना): अध्यक्ष
महोदय,
रेवेन्यु
विलेज की बात
नहीं है वहां
संख्या और हेबीटेट
लिखा हुआ है
या वो जगह
जहां पाँच सौ
की आबादी है
वो राजस्व
ग्राम में
लिखी हुई है
उस पर इसलिए
मेरे कहने का
तात्पर्य यह
है कि जो भी पाँच
सौ की आबादी
वाली जगह है
उस आबादी को
जोड़ने वाली
बात है।
माननीय
मंत्री जी
इसको क्लियर
करें नहीं तो
हमारे यहां
राजस्व गांव
की तो लिस्ट
है इनके पास
लेकिन आबादी
नहीं है।
पीएचईडी ने
ऐसा किया था
कि
आईडेंटीफाइड
ढाणीज उनकी
जनसंख्या थी
वगैरह थी यदि
पीडब्ल्यूडी
भी
आईडेंटीफाइड
आबादी कर दे
ये जो पाँच सौ
की है ढाई सौ
की है तो वो
सारा क्षेत्र
जुड़ सकता है
जो इस संख्या
में आ सकते
हैं।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय,
प्रधानमंत्री
ग्राम सड़क
योजना ये भारत
सरकार की जो
गाइड लाइंस
हैं जो
दिशा-निर्देश
उन्होंने
जारी किये
उसके अनुसार
चलती है । अध्यक्ष
महोदय, यह
सही है कि
उसके अन्दर
हेबीटेशन की
बात नहीं है
परन्तु उसके
के, मैं पढ़कर
सुनाना चाहता
हूं जो गाइड
लाइन हमें
मिली है उसका
पैरा 3.4 “…..the above reference, the population size of the
habitations, the population has recorded in the census 2001…..”
2001 के अन्दर
अध्यक्ष
महोदय,
जनसंख्या के
जो आंकड़े
प्रकाशित हुए
हैं जो
पुस्तिका
प्रकाशित हुई
है उसमें जिन
गांवों को,
जिन रेवेन्यु
विलेजेज को,
जिन ढाणियों
को जिनको
सम्मिलित किया
गया है उसी के
आधार पर ये
योजना बनी है।
अध्यक्ष
महोदय,
लक्ष्मणगढ़
से आने वाले
माननीय सदस्य
ने एक गांव के
बारे में पूछा
है ये जो
मानेशिया
गांव की सड़क
थी प्रधानमंत्री
ग्राम सड़क
योजना में स्वीकृत
हुई परन्तु
वहां पास में
मोदी
इंस्टिटयूट
है उन्होंने
कोई न्यायालय
से स्थगन
लिया है इसकी
तारीख 19 मार्च
है अध्यक्ष
महोदय, हम
कोशिश करेंगे
कि ये जो स्थगन
आया है इसमें
उसका प्रतिवाद
करके जल्दी
से जल्दी स्थगन
खारिज हो और
उसके बाद इस
सड़का के
निर्माण
कार्य को हम
पूरा
करेंगे। ...(व्यवधान)...
श्री अध्यक्ष:
नैक्स्ट क्वेश्चन।
...(व्यवधान)... अब
सारी बात आ
गयी।
श्री अमराराम
(धोद)।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
नहीं-नहीं, एक
दो महत्वपूर्ण
बातें हैं
साहब।
डॉ.सी.एस.
बैद (तारानगर): अध्यक्ष
महोदय, ...(व्यवधान)...
इससे जुड़ी
हुई बात है।
...(व्यवधान)...
श्री अध्यक्ष:
मैंने श्री
अमराराम (धोद)
का नाम पुकार
लिया। मैंने
नाम पुकारा है
श्री
अमराराम।
कैलाश/चौहान 12.3.07
11.10 1b
श्री
अमराराम (धोद):
उपाध्यक्ष
महोदय,
मैं आपके माध्यम
से मंत्री
महोदय से
जानना
चाहूंगा कि
प्रधान
मंत्री ग्राम
सड़क योजना के
संवेदकों को यह
पाबंदी है कि
वह पाँच साल
में अगर वह
सड़क टूटेगी
तो उसको वापस
मेनटेन करने
की जिम्मेदारी
उनकी होगी ।
आपने पत्र भी
लिखे हैं
लेकिन मैंने
डेढ साल पहले
मंगरानी की जो
सड़क इस योजना
में बनी थी
उसके टूटने के
बाद आज तक वह
नहीं बनी है
ऐसे अधिकारी और
ऐसे संवेदकों
के खिलाफ आप
क्या
कार्यवाही कर
रहे हो । बाकी
राजस्थान
में भी जो
सडकें इस
योजना में बनी
है जिनको पाँच
साल तक मेनटेन
करने की जिम्मेदारी
है उन अधिकारी
और संवेदकों
के खिलाफ आप
क्या
कार्यवाही कर
रहे हैं ।
श्री
अध्यक्ष:
आपकी बात आ गई,
बताइए ।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय,
प्रधान
मंत्री ग्राम
सड़क योजना जो
राजस्थान
में बनी है वह
खास मानक की
बनी है इसके
लिये वर्ल्ड
बैंक ने कई कई
बार अपनी टीम
भेज कर इसको
इंसपेक्ट
करवाया है ।
भारत सरकार के
जो सड़कों के
बारे में गुण
नियंत्रक हैं
उनका एक मिशन
भी आया जिसने
चार जिलों में
लगभग सात दिन
तक अलग अलग आकस्मिक
दौरे किये और उन
सबने यह कहा कि
पूरे देश में
प्रधान
मंत्री ग्राम
सड़क योजना के
अंतर्गत
राजस्थान
में निर्मित
सडकें जो 15 लाख
रुपये प्रति किलो
मीटर के हिसाब
से बन रही हैं
वह सर्वश्रेष्ठ
हैं और इसके
साथ साथ उन्होंने
यह भी कहा कि
कार्य ठीक चल
रहा है ।
श्री
अध्यक्ष:
सर्वश्रेष्ठ
वाली बात तो
मान ली आपकी,
आप तो मेंटीनेंस
की बात बता दो,
मेनटीनेंस की
जिम्मेदारी
उनकी है या
नहीं और है तो
कितने दिनों तक
?
श्री
अमराराम (धोद):
और जो टूट गई
उनका क्या
होगा ।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): मैं मेंटीनेंस
की बात बता
रहा हूं ।
श्री
सुभाष चन्द्र
शर्मा
(कोटपूतली):
अध्यक्ष
महोदय, जो
सडकें उधड गई
हैं, जो सडकें
टाइम पीरियड
के पहले खत्म
हो गई हैं
उनके लिये
सरकार क्या
कर रही है ।
श्री
अध्यक्ष: आप
प्रश्न का
जवाब आने
दीजिए ।
श्री
अमराराम (धोद):
अभी मेरे
विधान सभा
क्षेत्र में
जगतपुरा में
सड़क बनी है
और आप मानक की
बात कर रह हैं,
बनने के 10 दिन
बाद में वह
पूरी की पूरी
वापस उधड गई ।
श्री
अध्यक्ष: आप
प्रश्न का
जवाब आने
दीजिए ।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय,
मैंने स्वयं
ने सभी माननीय
विधायकों को
पत्र लिखें
हैं और पत्र
लिख कर उनको
यह भी अवगत
कराया है कि
प्रधान
मंत्री ग्राम
सड़क योजना
में जो संवेदक
हैं पाँच साल
तक सड़क को
मेनटेन करने
की जिम्मेदारी
उनकी है ।
मैंने राजस्थान
के सारे
प्रधानों को
भी पत्र लिखें
हैं । अध्यक्ष
महोदय,
धोद से आने
वाले माननीय
सदस्य जिस
सड़क का जिक्र
कर रहे हैं
अगर यह मुझे
पत्र लिखते तो
मैं क्वालिटी
कंट्रोल की
पूरी टीम
भेजकर उसको
इंसपेक्ट
करवाता और मैं
आपके माध्यम
से निवेदन
करना चाहता
हूं और सदन के
सभी माननीय
सदस्य को
निवेदन करना
चाहता हूं कि
प्रधान
मंत्री ग्राम
सड़क योजना या
दूसरी योजना
जो बाकी है
उनमें तीन साल
की गारंटी है
और प्रधान
मंत्री ग्राम
सड़क योजना
में पाँच साल
की है । अगर
कहीं कोई सड़क
बने और सड़क
उसी पीरियड
में टूट जाये
तो निश्चित
तौर पर न केवल उसको
ठीक करवाया
जायेगा और
उसकी रिपोर्ट
अगर आप करोगे
संबंधित जे.ईएन,
ए.ईएन जिसने
रिपोर्ट नहीं
की उसके खिलाफ
भी कार्यवाही
की जायेगी ।
हमारे सब की
मंशा है कि
राजस्थान का
सड़क तंत्र
ठीक हो और
सड़क अच्छी
बने ।
श्री
अध्यक्ष:
नेक्स्ट क्वेश्चन,
श्री हेमराज
मीणा ।
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर):
माननीय
मंत्री जी 2001 के
बाद जो राजस्व
ग्राम बने हैं
उनकी आबादी
अगर 500 से ज्यादा
है तो आप उनको
लेंगे या नहीं
लेंगे । 2001 के
बाद जो राजस्व
ग्राम बने हैं
उनके बारे में
आप क्या
विचार करते
हैं क्योंकि
2001 की जनसंख्या
में उनका नाम
नहीं है ।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
साथ ही प्रधान
मंत्री ग्राम
सड़क योजना
में जो स्वीकृति
हुई है उनमें
फोरेस्ट
विभाग ने कई
जगह रोक लगा
रखी है ।
श्री
अध्यक्ष:
मैंने नेक्स्ट
क्वेश्चन
पुकार लिया है
।
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर):
गांवों से
जुडा हुआ महत्वपूर्ण
प्रश्न है ।
आधे घंटे से
हम हाथ खड़ा
कर रहे हैं आप
बोलने की
इजाजत नहीं
देती । 2001 के बाद
जो रेवेन्यु
विलेज बने हैं
उन गांवों का
क्या होगा क्योंकि
वह 500 की आबादी
में नहीं आते
हैं और 2000 की जनसंख्या
की लिस्ट में
भी उनका नाम
नहीं है ।
श्री
अध्यक्ष:
अंकित नहीं हो
।
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): 000
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
000
श्री
अध्यक्ष:
नेक्स्ट क्वेश्चन
श्री हेमराज
मीणा । अंकित
नहीं हो ।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
000
श्री
अध्यक्ष:
श्री हेमराज
मीणा ।
विधान
सभा क्षेत्र
किशनगंज में
सहरिया विकास
परियोजनान्तर्गत
स्वयं
सहायता
समूहों
द्वारा ट्यूब
वैलों पर व्यय
114.
श्री हेमराज
मीणा
(किशनगंज): क्या
जनजाति
क्षेत्रीय
विकास मंत्री
यह बताने की कृपा
करेंगे:-
(1)
विधान सभा
क्षेत्र
किशनगंज में
सहरिया विकास
परियोजना के
अंतर्गत स्वयं
सहायता समूह
द्वारा विगत 3
वर्षों में
कहां कहां
पेयजल हेतु
ट्यूब वैल स्थापित
किये गये और
किन किन
ग्रामों को
पानी सुलभ हुआ
? सूची सदन की
मेज पर रखें।
(2) स्थापित
ट्यूब वैलों
में से कितने
ट्यूब वैल वर्तमान
में चालू हैं
व कितने खराब
हैं ? इन पर
कितनी कितनी
राशि व्यय की
गई व इनका
भौतिक सत्यापन
किसके द्वारा
किया गया ? विवरण
सदन की मेज पर
रखें ।
(3) क्या
यह भी सही है
कि इन ट्यूब
वैलों से
पूर्ण पानी आज
तक सुलभ नहीं
हो पा रहा है ? यदि
हां, तो क्यों
?
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): (1)
विधान सभा
क्षेत्र किशनगंज
में सहरिया
विकास परियोजना
के अंतर्गत
विगत तीन
वर्षों में
संलग्न
परिशिष्ठ ‘अ' पर
अंकित 31
ग्रामों में
सहरिया विकास
समितियों के
माध्यम से
पेयजल हेतु
ट्यूब वैल स्थापित
किये गये है।
(2) स्थापित
किये गये 31
ट्यूब वैल
वर्तमान में
चालू हैं । इन
ट्यूब वेलों
की स्थापना
पर व्यय की
गई राशि का
विवरण
परिशिष्ठ ‘ब’ पर
संलग्न है ।
इनका
भौतिक सत्यापन
संयुक्त
भौतिक सत्यापन
समिति द्वारा
किया गया है
जिसमें सहायक अभियंता
जन स्वास्थ्य
अभीयान्त्रिकी
विभाग
शाहाबाद,
संबंधित अध्यक्ष
सहारिया
ग्राम विकास
समिति एवं
सहरिया प्रतिनिधि
श्री मोरपाल
सहरिया शामिल
है।
(3) जी
हां । संयुक्त
भौतिक सत्यापन
कमेटी की
रिपोर्ट के
अनुसार उक्त
31 ट्यूब वैल
चालू हैं
जिनसे पूर्ण
पानी सुलभ हो
रहा है ।
श्री
हेमराज मीणा
(किशनगंज): अध्यक्ष
महोदय,
मैं आपके माध्यम
से मंत्री
महोदय से
निवेदन करना
चाहता हूं कि
पिछले तीन साल
में कुल कितने
ट्यूब वैल स्वीकृत
हुए और जो यह
ट्यूब वैल लगे
हैं इनमें कौनसे
मार्का की
मोटर, कौनसा
जनरेटर, कौनसे
मार्का के
पाइप डले यह
भी मैं आपसे
जानना
चाहूंगा ।अध्यक्ष
महोदय, 35
ट्यूब वैल
मेरी जानकारी
में है, इस
सरकार के द्वारा
35 ट्यूब वैल
मंजूर हुए थे
लेकिन 31 ट्यूब
वैल लगे हैं
और चार ट्यूब
वैलों का
भुगतान ऊपर के
ऊपर उठ गया मेरे
पास उसकी फोटो
ग्राफी भी है
। केवल मात्र बोरिंग
हुई ह, ढक्कन
लगे हुए हैं
उसकी मेरे पास
फोटो ग्राफी
भी है ।
मंत्री महोदय
बता रहे हैं 31
ट्यूब वैलों से
पेयजल मिल रहा
है । अध्यक्ष
महोदय,
मैं यह निवेदन
करना चाहूंगा
सारे ट्यूब
वैल खराब पडे
हुए हैं और एक
भी ट्यूब वैल
से पेयजल सुलभ
नहीं है । मैं
यह कहना
चाहूंगा कि
जिन ट्यूब
वैलों का
फर्जी भुगतान
हुआ है उसके
लिये कौन कौन
अधिकारी दोषी
है, कौनसे
समिति के लोग
दोषी है, कौन ठेकेदार
दोषी है उनके
खिलाफ कब
कार्यवाही
करेंगे 1 अध्यक्ष
महोदय,
भुगतान उठाने
की मेरे पास
सूची भी है ।
श्री
अध्यक्ष: आप
प्रश्न
पूछिए भाषण
नहीं ।
श्री
हेमराज मीणा
(किशनगंज): मैं
आपको नाम
बताना चाहूंगा
निवाडी,
माधोपुरा,
बालदा और
खिरीया । मैं
इन चारों की फोटो
टेबल पर फाइल
करना चाहूंगा
। चारों में
केवल ट्यूब
वैल के डंडे
डंडे खडे हैं
और वहां पर
सहरिया
परियोजना से
पूरा भुगतान
हो गया
लेकिन वहां
पर ट्यूब वैल
चालू नहीं है ,
न मोटर लगी है
न जनरेटर लगा
है और न पेयजल
सुलभ हो रहा
है । अध्यक्ष
महोदय,
मैं यह
चाहूंगा कि
जिन लोंगों ने
इसमें पैसा
खाया है जिन्होंने
पैसा उठाया
है, जो
अधिकारी
इसमें दोषी है
अध्यक्ष
महोदय,
सहरिया
परियोजना का
अध्यक्ष
जिला कलेक्टर
है और एडीएम
परियोजना के
प्रोजेक्ट
आफिसर है उनके
खिलाफ कठोर
कार्यवाही हो,
उनको निलम्बन
किया जाना
चाहिये ।
श्री
अध्यक्ष:
भाषण नहीं
प्रश्न
पूछिए ।
श्री
हेमराज मीणा
(किशनगंज): दो
साल हो गये इन
पैसों को उठे
लेकिन
कार्यवाही नहीं
हुई है । मैं
चाहूंगा कि इन
चार ट्यूब वैलों
का जो भुगतान
उठा है ...
श्री
अध्यक्ष:
आपने प्रश्न
तो पूछा कुछ
और है और आप इस
समय बोल कुछ
और रहे हैं । 31
ट्यूब वैल
खोदे वह कह
रहे हैं 31 में पानी
आ रहा है, आप कह
रहे हैं पानी
नहीं आ रहा है
।
श्री
हेमराज मीणा
(किशनगंज): अध्यक्ष
महोदय,
मैं फोटो पेश
करना चाहूंगा
।
श्री
अध्यक्ष: अगर
वह गलत जवाब
दे रहे हैं तो
आप नियम में
आइए कौन मना
करता है आपको
।
श्री
हेमराज मीणा
(किशनगंज): अध्यक्ष
महोदय,
मंत्री महोदय
को
अधिकारियों
ने गलत
जानकारी दी है
। मैं तो फोटो
पेश करना
चाहता हूं ।
इनमें न कोई
मोटर लगी हुई
है न कोई
ट्यूब वैल लगे
हैं ।
श्री
अध्यक्ष: गलत
सूचना दे रहे
हैं तो आप
नियमों में आइए
।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय,
माननीय सदस्य
का जो प्रश्न
है उसमें कुछ
तथ्य है ।
केन्द्र
सरकार से हमको
38 हैंड पम्प
लगाने के लिये
57 लाख रुपये
प्रति हैंड
पम्प डेढ लाख
के हिसाब से
स्वीकृत हुए
।
श्री
अध्यक्ष:
नहीं, हैंड
पम्प का तो
सवाल ही नहीं
है ।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): जी
हां, ट्यूब
वैल का पैसा
स्वीकृत हुआ
। उसमें से
तीन ट्यूब वैल
यह जो भू सर्वेक्षण
विभाग है उसने
फिजीबल नहीं
माना । उसके
बाद 35 ट्यूब
वैल रहे उसमें
से 31 तो बिलकुल
तैयार हो कर
उनका सत्यापन
सर्टिफ़िकेट
है वह सारा
वहां की जो
कमेटी है जो
मेम्बर बने
हैं इसमें और
जो ए.ईएन
इसमें हैं
उसके द्वारा
मिला है । यह
जो 4 ट्यूब वैल
है इनकी पहली
किश्त जारी
हुई थी 13.5.06 को एक
लाख रुपया और
यह उप निदेशक,
उदयपुर के
आदेश से इन 4
ट्यूब वैल का
पैसा स्वीकृत
हुआ । दूसरी
किश्त भी
इनकी फिर जारी
हुई और वह
सातवें महीने
में 25.7.05 को हुई ।
लेकिन चूंकि
इसका सत्यापन
का
सर्टिफिकेट न
तो वहां की
लोकल एजेंसी ने
दिया न इसको प्राप्त
हुआ । जो 6 लाख
रुपये उनको
देना था उसमें
5 लाख 50 हजार का
पेमेंट
निश्चित रूप
से इन ट्यूब
वैल के अगेंस्ट
हुआ । पहली
किश्त और
दूसरी किश्त
दोनों मिलाकर
पेमेंट हो गया
। फाइनल
पेमेंट इसका
नहीं हो पाया
क्योंकि
इसका सत्यापन
होना था और
जिस कमेटी के
द्वारा होकर
आना था वह
प्राप्त
नहीं हुआ उसके
कारण से हुआ
और इसलिए यह
विषय कि
निश्चित रूप
से पहली किश्त
तो सामान्यत:
जब भी सेंक्शन
करते हैं तो
जारी कर देते
हैं लेकिन
दूसरी किश्त
जारी करने के
पहले ए.ईएन से
रिपोर्ट जरूर
लेनी चाहिये
थी और उस
रिपोर्ट के
आधार पर दूसरी
किश्त जानी
चाहिये थी ।
श्री
अध्यक्ष: आप
जवाब तो कुछ
और ही दे रहे
हैं ।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री):
निश्चित रूप
से जिसने भी
बिना ए.ईएन की
रिपोर्ट के यह
दूसरी किश्त
जारी की है
उसके लिये जो
भी व्यक्ति
दोषी है....
ans /usc 1c 11:20
12.03.2007
उसके
लिए जो भी
आवश्यक
कार्यवाही
होगी वह हम
निश्चित रूप
से करेंगे। यह
बात सच है कि
चार टयूबवैल,
जिनका नाम
आपने लिया, आज
भी कमीशन नहीं
हुआ है।
उनसे पानी
प्राप्त
नहीं हो रहा
है, यह बात सच
है लेकिन यह
जांच का विषय
रहेगा कि
दूसरी किश्त
जारी करने का
अधिकार किसको
था और बिना
सूचना प्राप्त
हुए क्यों
जारी की, इतनी
सी इसमें कमी
है। यह जो चार
टयूबवैल है,अभी
तक भी कमीशन
नहीं हुआ है। (
व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: ठीक
है।
श्री
कैलाश
त्रिवेदी
(सहाड़ा): क्या
सुपरवीजन
किया...( व्यवधान)
श्री
हेमराज मीणा
(किशनगंज):अध्यक्ष
महोदय, मेरा
सवाल यह है कि जो 31
टयूबवैल लगे
हुए हैं,
जिनसे मंत्री
महोदय बता रहे
हैं पानी नहीं
मिल रहा लेकिन
इसमें कौनसी
मार्का की मोटर,आइएसआई
मार्का नहीं
है।
श्री
अध्यक्ष: यह
आपने नहीं
पूछा कि कौनसे
मार्का की मोटर
है। आपने पूछा
पानी मिल रहा
है कि नहीं मिल
रहा।
श्री
हेमराज मीणा
(किशनगंज):अध्यक्ष
महोदय, यह
पूरा टयूबवैल
, मैं यह पूछ
रहा हूं कि जो
बोरिंग हुआ है
पेयजल सुलभ
कराने के लिए...(
व्यवधान)
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर):
भ्रष्टाचार
की बात भी
पूछने दीजिए।
यह तो पूछने
दीजिए कम से
कम। (व्यवधान)
श्री
हेमराज मीणा
(किशनगंज):
पेयजल सुलभ
कराने के लिए
मोटर भी डाली
होगी,उसमें
जनरेटर भी
लगाया, कौनसे
मार्का का है,
आईएसआई
मार्का का है
कि नहीं है ? (व्यवधान)
अध्यक्ष
महोदय, सारा
फर्जीवाड़ा
हुआ है। 31
टयूबवैल,
मंत्री जी को
जो सूचना
अधिकारियों
ने दी है वह
बिल्कुल गलत
दी है। सारे 31
टयूबवैल, मैं
एक-एक टयूबवैल
का फोटो
खिंचवाकर
लाया हूं। (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आप
तो प्रश्न
पूछिये..(व्यवधान)
श्री
हेमराज मीणा
(किशनगंज):
सारे टयूबवैल
बिल्कुल बंद
हो चुके हैं,
किसी से भी
पेयजल सुलभ नहीं
हो रहा। सभी
में लोकल मेड
की मोटर, लोकल
मेड का
जनरेटर, लोकल
मेड की टंकी
रखी हुई है।
एक को भी
पेयजल सुलभ
नहीं है। ठेकेदारों
ने,
अधिकारियों
ने मिलकर,
पूरा पैसा
भुगतान हो
गया, मैं
चाहूंगा चार
टयूबवैल का
पैसा भुगतान
हो गया, कमिशन
में(व्यवधान)
उनके खिलाफ
मंत्री जी क्या
कार्यवाही
करेंगे
कौन-कौन
अधिकारी
इसमें दोषी
हैं।
अध्यक्ष
महोदय, सहरिया
परियोजना का
अध्यक्ष
कलक्टर होता
है , कोई
छोटा-मोटा
अधिकारी नहीं
है। सहरिया
परियोजना का
अध्यक्ष
कलक्टर है,
प्रोजेक्ट
आफिसर एडीएम
है। ( व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: बीच
में नहीं।
श्री
हेमराज मीणा
(किशनगंज):
दोनों आफिसर
आईएएस, आरएएस
आफिसर होने के
बाद घोटाला हो
गया। साढ़े पाँच
लाख रूपये का
भुगतान हो
गया, टयूबवैल कमीशन
नहीं हुए। (व्यवधान)
आप क्या
कार्यवाही
करेंगे इस
संबंध में?
श्री
अध्यक्ष: आप
प्रश्न
पूछिये।
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): अध्यक्ष
महोदय, एक
प्रश्न मेरा
भी है ।
श्री
अध्यक्ष:
पहले जवाब आने
दीजिए उनका।
मूल प्रश्नकर्ता
का जवाब आने
दीजिए।
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): ठीक
है साहब।
श्री
कैलाश
त्रिवेदी
(सहाड़ा): अध्यक्ष
महोदय, जितनी
मोटर, जनरेटर
लगे हु ए हैं आइएसआइ
है कि नहीं ? ( व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: पूछ
लिया उन्होंने,
आपको पूछने की आवश्यकता
नहीं है। पूछ
चुके वह।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री):अध्यक्ष
महोदय, इस
योजना के तहत
सहरिया पर, स्वंय
सहायता समूह
उसी पंचायत का
गठित होता है, उसका
एक अध्यक्ष
होता है, एक
कोषाध्यक्ष
होता है
एक मंत्री
होता है और दो
मैम्बर उसी
गांव के होते
हैं। कलक्टर
की अध्यक्षता
में जिला स्तर
पर कमेटी बनी
हुई है यह सीधा
पैसा स्वंय
सहायता समूह
को चैक के
द्वारा
पेमेंट करते
हैं और सारा
पेमेंट चैक के
द्वारा हुआ
है।
इसकी
जांच के लिए
भी, जैसा
मैंने कहा कि
सैकण्ड किश्त
प्राप्त
होने के लिए
पहली किश्त
तो पहले ही
दिन, जिस दिन इसका
आदेश करते
हैं, एक लाख के
चैक उस समिति
के खाते में
जमा हो जाता
है। सैकण्ड
किश्त देने
के पहले एक
राइडर है इसका
कि उसकी रिपोर्ट
एईएन के
द्वारा
प्राप्त हो उसके
बाद सैकण्ड
किश्त जारी
हो
चाहे वह 40 की
हो,50 की हो या 60
की। जितनी भी
उसकी कीमत
होती है वह
सैकण्ड किश्त
उसके बाद जारी
होती है।
31 में
से प्रत्येक,जो
गांव की स्वंय
सहायता समूह काहै
उनका प्रत्येक
का
सर्टिफिकेट
इसमें है,
इसमें किसी भी
गवर्नमेंट
एजेंसी ने काम
नहीं किया।
वहां का जो स्वंय
सहायता समूह
बना हुआ है
पाँच लोगों का
, उसी गांव के
प्रमुख लोगों
को मिलाकर
बनाया है, उन्होंने
ही काम करवाया
है, उनके
द्वारा ही
राजकीय
अधिकारी एईएन
है वह
अपने साथ
कमेटी की
रिपोर्ट देने
के बाद, उसके
सत्यापित
होने के बाद,
यहां जो ऊपर
की एजेंसी है
उसका काम केवल
पैसे का
भुगतान करने
का काम है। पीएचइडी
के द्वारा जो
अधिकारी है वह
उसको वेरीफाई
करते है, इतना ही
काम है। मैं
सोचता हूं कि इसमें न
तो कलक्टर का
बेड इन्टेशन
है न इसमें स्वंय
सहायता समूह,
यह केन्द्र
की योजना है
और योजना के
पीछे भी भावना
यह है कि
उस पंचायत
में लगने वाला
टयूबवैल उसी
पंचायत के
पाँच लोगों की
कमेटी के
द्वारा ही,
सारा का सारा
लगाना भी, जितना
लगाया उसकी
रिपोर्ट देना
और कमीशन होना
यह सारा काम
स्वंय
सहायता समूह
की, जो उस
पंचायत की है,
पाँच लोगों की
है वह
बनी हुई है
उसी के आधार
पर चैक के
द्वारा पैसा
सरकार की तरफ
से उनको गया,उनके
द्वारा उसको
पेमेंट किया ।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
इंस्टालेशन
का
वेरीफिकेशन
..(व्यवधान)
इंस्टालेशन
का
वेरीफिकेशन
जिस अधिकारी
ने किया , चाहे
कलक्टर ने
किया, दूसरे
ने किया, वह
दोषी नहीं है
क्या, वहां
सही हुआ कि
नहीं हुआ ? ( व्यवधान)
श्री
हेमराज मीणा
(किशनगंज):
कलक्टर और
एडीएम ने अपने
आपको बचाने के
लिए एईएन
को, उसमे
वेरिफिकेशन
(व्यवधान)
में लगा दिया।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
आप कह रहे हैं
पाँच आदमी से
(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:Your mike is not
working. माइक
देख लिया करो
पहले आप।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
अध्यक्ष
महोदय, मेरा
आपसे अनुरोध
है कि इस
मामले पर अध्यक्षीय
व्यवस्था
दीजिए।
माननीय सदस्य,
एजीटेटेड है।
सरकार के वक्तव्य
को वह गलत बता
रहे हैं। वह
दूसरे तथ्य
दे रहे हैं।
होम मिनिस्टर
साहब दूसरे
बोल रहे हैं। स्पष्टीकरण
होना चाहिये
सरकार की तरफ
से। आप कह रहे
हैं कि पाँच
आदमियों के
द्वारा हुआ
है, वह कहते हैं
कि किसी के
द्वारा भी
हुआ(व्यवधान)
रूपया खर्च
नहीं हो पाया,
बेईमानी हुई है1
सरकार के उत्तर
को चेलेंज का
रहे हैं। किसी
में पानी नहीं
मिल रहा।
श्री
अमराराम (धोद):
पानी नहीं मिल
रहा।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
आप यह प्रमाण
पत्र क्यों
दे रहे हैं
बार-'बार....( व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: गलत
जवाब दिया तो
दूसरे नियम
में आइये ना,
कौन ना करता
है।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
नियम क्या...( व्यवधान)
श्री
अमराराम (धोद):
यह नियम नहीं
है ?
श्री
अध्यक्ष:
चर्चा कराओ
ना। ( व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
नियम, आप बैठे
है ना।
श्री
सुभाष चन्द्र
शर्मा
(कोटपूतली):
माननीय अध्यक्ष
जी, क्या
संबंधित कलक्टर
और एडीएम को
हटाकर सरकार
कार्यवाही
करने का विचार
रखती है ? जांच
करवाये, उनके
रहते हुए जांच
होगी, कैसे
जांच होगी...(व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
लाखों रूपये
आदिवासियों
के उद्वार के
लिए...(व्यवधान)
श्री
सुभाष चन्द्र
शर्मा
(कोटपूतली):
उनके रहते हुए
कैसे जांच
होगी, यह कैसे
संभव हो सकता
है।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
राजस्थान
सरकार दुरुपयोग
कर रही है।
केन्द्र
सरकार के
द्वारा दिये
गये पैसो का
सही ढंग से
काम सहरिया
में नहीं हुआ।
करोड़ों
रूपये का
सरकार
दुरूपयोग कर
रही है। जो
अधिकारी जिम्मेदार
है उनको बचाने
की कोशिश कर
रही हे।(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
आपके नेता बोल
रहे हैं, आपके
लिए फिर आवश्यक
है बोलना ?
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर):
विधान सभा के
सदस्यों की
कमेटी बनाकर
इनको निर्देश
दे। इसकी जांच
कराये, आखिर
सहरिया विकास
के लिए वर्षों
से...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: अंकित
नहीं हो।
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): 000
श्री
बाबूलाल नागर
(दूदू): 000
श्री
अध्यक्ष:
कृपया अपना स्थान
ग्रहण कर ले,
वह पूछ चुके
हैं।
श्री
बाबूलाल नागर
(दूदू): 000
श्री
अध्यक्ष:
कृपया स्थान
ग्रहण करें।
अंकित नहीं
हो।
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): 000
श्री
बाबूलाल नागर
(दूदू): 000
श्री
अध्यक्ष:
आपके नेता बोल
चुके हैं।
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): 000
श्री
बाबूलाल नागर
(दूदू): 000
श्री
कैलाश
त्रिवेदी
(सहाड़ा): 000
श्री
अध्यक्ष:आपके
लिए बोलना
आवश्यक है ?
(व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
इस पर व्यवस्था
दी जाये। कन्सर्न
मंत्री है...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आप
खड़े हुए,
आपने पूछ
लिया, मंत्री
जी खड़े होते
उससे
पहले तो आपके
सदस्य खड़े
हो-होकर अपनी
विद्वता का
प्रदर्शन
करने लगे, क्या
किया जाए।
आपकी बात का
जवाब तो आने
ही नहीं दिया
वह तो अपने
आपको आपसे ज्यादा
बुद्विमान
समझते हैं
इसीलिए आपके
बाद खड़े होते
हैं और आपके
ही प्रश्न को
दोहराते
हैं।
श्री
हेमराज मीणा
(किशनगंज): 000
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
कन्सर्न
मंत्री आज
नहीं है और
एवज में होम
मिनिस्टर
जवाब दे रहे
हैं, जिनको
जानकारी का
अभाव है इसलिए
इस पर आप व्यवस्था
दीजिए। (व्यवधान)
श्री
अमराराम (धोद):000
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
एवजी है1
श्री
अध्यक्ष: दे
रहे हैं ना
जवाब।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
एवजी है।
श्री
अध्यक्ष: आप
बैठे तो सही,
देंगे जवाब।
आप बिराजे तब
देंगे जवाब।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
इन्होंने तो
विभाग की कुछ
समय के लिए
चूड़ी पहन रखी
है। इन्होंने
तो विभाग की
कुछ समय के
लिए..(व्यवधान)
चूडी पहन रखी
है कुछ समय के
लिए। (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: हो
उनको छूट है
इसलिए आप नहीं
कह सकते।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, यह जो
कहा जा रहा है
कि करोड़ों रूपये
का गड़बड हो
गया, कुल
सैंक्शन,38
टयूबवैल के
लिए केन्द्र
सरकार से 52 लाख
रूपये कुल
प्राप्त
हुए..(व्यवधान) इसमें
कोई भी चीज
नहीं छिपाई,
जहां कमी रही
वह मैंने आपके
सामने बता दी।
31 हैण्डपम्प
व्यवस्थित
रूप से लगे।
तीन लोगों की
जो कमेटी है ,
टयूबवैल
वेरीफाई किये
और वेरीफाई
करने के बाद
उनका पूरा
पेमेंट हुआ।
केवल चार
टयूबवैल ऐसे
थे जिनका पहली
किश्त तो
सामान्यतया
जिस दिन सैंक्शन
करते हैं उसके
साथ ही, वहां
जो ग्राम की,
पंचायत की, स्वंय
सहायता समूह
होता है उसके
अकाउण्ट में
ट्रान्सफर
हो जाता है।
उसके बाद
सैकण्ड किश्त
देने के पहले
जरूर यह राइडर
लगा रखा है कि
वह सत्यापित
होकर आए उसके
बाद लगे,
यहां यह भूल
हुई है। चार
अभी तक कमीशन
नहीं हुए हैं,
वह अधूरे पड़े
है वह निश्चित
रूप से सैकण्ड
किश्त उनको
नहीं जानी थी
जब तक इसका
वेरीफिकेशन
नहीं होता। यह
कमी रही है।
मैंने पहले ही
कह दिया इस
कमी के लिए जो
भी उत्तरदायी
होगा उसके
खिलाफ
कार्यवाही
होगी।
श्री
अध्यक्ष:
मंत्री जी...(व्यवधान)
श्री
देवीसिंह
भाटी (कोलायत):
नहीं अध्यक्ष
महोदय, सहरिया
परियोजना..
(व्यवधान)
पानी नहीं आ
रहा...(व्यवधान)
दुर्गा/चौहान
120307 1130 1d
श्री
हेमराज मीणा
(किशनगंज): अध्यक्ष
महोदय्,
सहरिया
परियोजना का
अभी पानी नहीं
आ रहा है।
उसमें ए.डी.एम.
और कलक्टर,
दोनों शामिल
हैं तो आप जांच
किससे
करवायेंगे।
क्या कलक्टर
को हटाकर जांच
करवाएंगे। (व्यवधान)
क्या कलक्टर
और ए.डी.एम. को
हटाकर जांच
करवाएंगे क्या।
(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
स्थान ग्रहण
करें। कृपया
स्थान ग्रहण
करें। (व्यवधान)
श्री
देवीसिंह
भाटी (कोलायत): 31
में से एक में
भी पानी नहीं
आ रहा है। (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
स्थान ग्रहण
करें। माननीय
मंत्रीजी, जब
वे चुनौती दे
रहे हैं कि
हैण्डपम्प,
टयूबवैल, जो
हैं यह
टयूबवैल काम
नहीं कर रहे हैं,
पूरा पानी
नहीं दे रहे
हैं तो पूरे
मामले की जांच
कराने में क्या
दिक्कत है।
आप करवाइये।
श्री सी. डी.
देवल (रायपुर):
विधान सभा
सदस्यों से।
(व्यवधान) उस
कलक्टर और
एस.पी. से जांच
नहीं होनी
चाहिए, अध्यक्ष
महोदय। वह
अधिकारी क्या
जांच करेंगे
जिन्होंने
पैसा दिया है।
(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
स्थान ग्रहण
करें।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): ऐसा
है, जोर से बोल
लेने से कोई
गलत चीज को
सही नहीं कर
सकते हैं। मैं
बिलकुल खुला
हूं और आप
यहां जोर से
बोलकर के अगर
यह....। (व्यवधान)
श्री
अमराराम (धोद):
मंत्रीजी, गलत
काम। (व्यवधान)
माननीय सदस्य,
यह कह रहे हैं 31
में भी पानी
नहीं मिल रहा
है। (व्यवधान)
श्री सी. डी.
देवल (रायपुर):
हमने यह नहीं
कहा कि आप भ्रष्टाचार
कर रहे हो।
हमने यह कभी
नहीं कहा कि
आप भ्रष्टाचार
कर रहे हो। (व्यवधान)
लेकिन सहरिया
क्षेत्र में
जो भ्रष्टाचार
हो रहा है
उसके बारे में
सरकार का ध्यान
कर रहे हैं।
हमने कभी नहीं
कहा कि आप
भ्रष्ट हैं।
लेकिन वहां के
जो अधिकारी
भ्रष्टाचार
कर रहे हैं
उसको रोकने की
जवाबदारी भी राजस्थान
सरकार की है।
श्री अध्यक्ष:
कृपया स्थान
ग्रहण करें।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): अब यह
ट्यूबवेल
कहां, अब यह ट्यूबवेल
की जगह भी
मालूम है कहां
है। (व्यवधान)
यह ट्यूबवेल
कौनसे जिले
में हैं। (व्यवधान)
श्री सी. डी.
देवल (रायपुर):
यह तो एक
झांकी है,
इसके अलावा
सहरिया
क्षेत्र में
जितना भ्रष्टाचार
हुआ है उसकी
विधान सभा की
...। (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
स्थान ग्रहण
करें। आप इनके
बैठने के बाद
दीजिये जवाब।
सुनते तो हैं
नहीं। (व्यवधान)
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): मैं
कह रहा हूं।
आपका सम्मान
करते हुए, जो 31
लगे हुए हैं
वह भी अगर ठीक
ढंग से काम
नहीं कर रहे
हैं तो
निश्चित रूप
से अधिकारियों
को भेजकर उसकी
जांच करवा
लूंगा कि वह
वास्तव में
चल रहे हैं कि
नहीं चल रहे
हैं। (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
ठीक है। श्री
भरतसिंह।
श्री
हेमराज मीणा
(किशनगंज): अध्यक्ष
महोदय, मेरा
कहना यह था।
(व्यवधान)
नहीं, अध्यक्ष
महोदय, मेरे
सवाल का जवाब
पूरा नहीं
आया। नहीं,
अध्यक्ष महोदय,
मेरे सवाल का
जवाब पूरा
नहीं आया। (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
नहीं, बात हो
गयी, अब नहीं,
अब नहीं। श्री
भरतसिंह।
श्री
हेमराज मीणा
(किशनगंज):
सारे मैं फोटो
लेकर आया हूं।
मेरे सवाल का
जवाब नहीं आया
है। (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
जब जांच करने
की बात कह दी।
श्री
हेमराज मीणा
(किशनगंज): उसमें
कलक्टर और
ए.डी.एम. दोनों
शामिल हैं।
कुछ तो बतायें
मंत्रीजी,
जांच किससे
करवाएंगे।
ए.डी.एम. और कलक्टर,
दोनों शामिल
हैं तो जांच
किससे
करवाएंगे। या
तो विधान सभा
की कमेटी से
जांच करायें।
(व्यवधान) या
कलक्टर से
ऊपर की कमेटी
बनायें। या
गवर्नमेंट से
अधिकारी
भेजकर जांच
करायें। (व्यवधान)
मैं कह रहा
हूं यह पूरा
भुगतान उठ
गया, सबका। एक
भी ट्यूबवेल
चालू नहीं है।
अध्यक्ष
महोदय, सबके
फोटो पेश कर
रहा हूं।
मंत्रीजी यह
तो बतायें कि
कलक्टर और
ए.डी.एम. दोनों
शामिल हैं
उसमें तो जांच
किससे
कराएंगे। या
विधान सभा की
कमेटी
बनाएंगे। या
कोई
गवर्नमेंट,
राज्य सरकार
किससे जांच
कराएगी। इतना
तो मेरे को बतायें।
(व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
लगातार आपकी
सरकार के
गुणगान करते
रहे हैं, उनकी
वाजिब बात तो
मान लो आप।
इनकी वाजिब बात
तो मानो।
श्री अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
जब आप कलक्टर
और एस.डी.एम.
दोनों पर आरोप
लगा रहे हैं
तो यह मानकर
चलिये कि इनसे
हायर आफिसर से
जांच कराई जाएगी।
यह मानकर
चलिये, आप।
श्री
सुभाष चन्द्र
शर्मा
(कोटपूतली):
कहें
मंत्रीजी इस
बात को।
श्री अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
आप इनको यहां
दो।
(माननीय
सदस्य श्री
हेमराज मीणा
(किशनगंज)
द्वारा फोटो
माननीय अध्यक्ष
महोदय को दिये
गये।)
माननीय
सदस्य, आप यह
मानकर चलिये
कि यदि आपका
आरोप कलक्टर
और एस.डी.एम. पर
है। (व्यवधान)
आसन पांवों पर
है और आप भाग
रहे हैं, यहां
सदन में। कमाल
करते हैं।
श्री
हेमराज मीणा
(किशनगंज): अध्यक्ष
महोदय, आप यह
बतायें कलक्टर
और ए.डी.एम.,
दोनों शामिल
हैं उसमें।
श्री अध्यक्ष:
नो, मैंने कहा,
स्थान ग्रहण
करें। जब कह
दिया
मंत्रीजी ने
तो यह मानकर
चलिये जब कलक्टर
और एस.डी.एम.
दोनों को आप
इसमें इन्वाल्व
मान रहे हैं
तो आप यह
मानकर चलिये
कि इनसे हायर
आफिसर से ही
जांच कराई
जाएगी।
श्री
हेमराज मीणा
(किशनगंज):
घोषणा करें
मंत्रीजी।
मंत्रीजी
अनाउंस करें।
श्री अध्यक्ष:
मतलब यही है
और क्या है।
श्री
सुभाष चन्द्र
शर्मा
(कोटपूतली):
इनके रहते
कैसे जांच होगी।
श्री हेमराज
मीणा
(किशनगंज):
अनांउस तो
करें
मंत्रीजी, किससे
जांच
कराएंगे।
श्री अध्यक्ष:
आसन ने कह
दिया तो इसके
बाद कोई आवश्यकता
रह गयी, आवश्यकता
रह गयी? श्री
भरत सिंह।
नगर
निगम क्षेत्र
कोटा की
गौशालाओं में
व्याप्त
अनियमिततायें
115. श्री भरत
सिंह (दीगोद):
क्या स्वायत्त
शासन राज्य
मंत्री यह
बताने की कृपा
करेंगे:-
(1) नगर निगम कोटा
में कुल कितने
स्थाई व अस्थाई
कर्मचारी हैं तथा
उनके वेतन व भत्तों
पर प्रतिवर्ष कुल
कितनी राशि व्यय
की जा रही है?
(2) क्या यह
सही है कि नगर
निगम द्वारा
संचालित
गौशालाओं में
बड़ी संख्या
में पशुओं की
मृत्यु हुई
है? यदि हां, तो
इस वर्ष कोटा
की विभिन्न
गौशालाओं में
कितनी गायों
की मृत्यु
हुई है?
(3) क्या यह
सही है कि
कोटा की
गौशालाओं में
अव्यवस्था
के कारण ताला
तोड़कर गायें
चुराने की
घटना भी घटित
हो चुकी है?
यदि हां, तो
कब-कब तथा इस
संबंध में
सरकार द्वारा
क्या
कार्यवाही की
गई?
(4) सरकार
द्वारा कोटा
में गौशालाओं
के संचालन पर
प्रतिवर्ष
कुल कितनी
राशि व्यय की
जाती है?
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं
आवासीय): (1) नगर
निगम कोटा में
कुल 2560 कर्मचारी
कार्यरत हैं,
जिसमें 2540 स्थाई
एवं 20 अस्थाई
कर्मचारी
हैं। इनके
वेतन-भत्तों
पर वर्ष 2005-06 में 29.64
करोड़ रुपये
की राशि व्यय
हुई है।
(2) नगर निगम,
कोटा द्वारा
दो गौशालाएं
क्रमश: किशोरपुरा
व बंधा
धर्मपुरा
संचालित की
जाती हैं। चालू
वर्ष 2007 में 28
फरवरी तक बंधा
धर्मपुरा
गौशाला में 212
एवं किशोरपुरा
में 40 पशु, कुल 252
पशुओं की मृत्यु
हुई है।
(3) यह सही है
कि कुछ
असामाजिक तत्वों
द्वारा निगम
कर्मचारियों
के ड्यूटी पर
होते हुये भी
दिनांक 19.09.06 को
किशोरपुरा
कायंन हाऊस से
338 व गौश्ंाला
से 52 एवं
दिनांक 06.12.06 को
किशोरपुरा
गौशाला के
पिछले गेट का
ताला तोड़कर 35
जानवरी बाहर
निकाले गये
थे। इस सम्बन्ध
में प्रथम
सूचना
रिपोर्ट
पुलिस थाना
किशोरपुरा
में क्रमश: 230,
दिनांक 21.09.06 व 267,
दिनांक 09.12.06
द्वारा दर्ज
करवाई गई है।
नगर निगम
द्वारा उक्त
घटनाओं के
घटित होने के
कारण 2-2
सुरक्षा
गार्डों की
ड्यूटी तीन
पारियों में
और लगाई जा कर
सुरक्षा व्यवस्था
सुदृढ़ की गई
है।
(4) नगर निगम
कोटा द्वारा
संचालित
गौशालाओं पर
वर्ष 2005-06 में 51.74
लाख रुपये व्यय
किये गये हैं।
चालू वर्ष 2006-07
में 28 फरवरी तक
31.34 लाख रुपये व्यय
हुए हैं।
श्री भरत
सिंह (दीगोद):
माननीय अध्यक्षजी,
जो उत्तर
प्रदान किया
गया है, मैंने
उनसे पूछा था
कि इस वर्ष
कितनी गायें
कोटा की
गौशालाओं में
मरी हैं। वित्तीय
वर्ष अभी चालू
है, पूर साल का
मैंने इनसे फिगर
मांगा था। इन्होंने
2007 का फिगर दिया
है दो महीनों
का और उसका आप
औसत देखेंगे तो
प्रतिदिन
गौशाला में एक
दिन में 4
गायें मर रही
हैं। आज 13
तारीख है, आज
के 13 दिन अगर और
जोड़ लें तो 50
गायें और मर
गयीं जब तक यह
उत्तर आया
उसके अन्दर।
मैंने इस गम्भीर
विषय पर सदन
का ध्यान
दिलाया है और
मैं माननीय
मंत्रीजी से
पूछना
चाहूंगा कि क्या
यह सही है कि
कोटा में
गौशालाओं की
बिगड़ी स्थिति
के ऊपर 6 महीने
पहले आपका ध्यान
दिलाया गया
था। कोटा की
गौशालाओं में
2 गौशालाओं
में जहां आप 50
लाख रुपये साल
का खर्च कर रहे
हैं, उस नगर
निगम में जहां
30 करोड़ रुपये
साल का खर्च
हो रहा है व्यवस्था
के ऊपर, उसमें
एक हजार से
अधिक गायें,
एक साल के अन्दर
मर चुकी हैं।
आपने जो
खण्ड दो में
उत्तर दिया
है उसके बारे
में भी मैं
आपसे जानना चाहूंगा
कि जिनको आप
असामाजिक तत्वों
का नाम देकर
पुकार रहे हैं
क्या ये
असामाजिक तत्व,
उस सम्बन्धित
बंधा
धर्मपुरा
क्षेत्र की
पंचायत समिति
के सदस्य और
सरपंच को तो
नहीं संबोधित
कर रहे हैं
आप। क्योंकि
यह पंचायत
समिति सदस्य
और वहां के
सरपंच जो
हमारे एक
माननीय सदस्य
के भाई हैं
उन्होंने इस
अव्यवस्था
को लेकर
गौशाला का
ताला तोड़ा
है, जिसका आप असामाजिक
तत्व, आप यह
बताइये कि आप
कोटा सम्भाग
होने के
बावजूद, आपने
इन गौशालाओं
का अवलोकन
किया। क्या
आपने हालात को
जाकर समझा और
क्या उसके
अन्दर
स्थिति में
सुधार के लिये
आपने प्रयास
किये। 6 महीने
पहले आपको इस
सम्बन्ध
में सूचित
किया गया था।
और अगर सूचित
किया गया था
तो क्या कारण
रहे कि उस
टाइम 3 गायों
का औसत था
मरने का और अब 2
महीने के बाद 4
गायें एक
महीने में मर
रही हैं। क्या
कारण है कि यह
सरकार जो
गौ-माता के
संरक्षण का
नाम ले रही है,
अपनी
गौशालाओं में
ही गायों को
बचाने में
असमर्थ रही
है। आप इसका
जवाब दीजिये।
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं
आवासीय):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, जिस
प्रकार से
माननीय सदस्य
ने कहा कि
किसी माननीय
सदस्य के भाई
हैं और वह
पंचायत समिति
के सदस्य
हैं, यह तो मैं
नहीं कह सकता
हूं। पर जिस
प्रकार से
उनकी वहां गौशालाओं
की चोरी हुई,
हमने तुरन्त
वहां पर
एफ.आई.आर. दर्ज
करा दी। अब
कौन चोर था, कौन
चौर नहीं है,
इसका तो मैं
खुलासा नहीं
कर सकता हूं, न
मैं बता सकता
हूं। यह पुलिस
का काम है।
पुलिस ही इसकी
इंक्वायरी
कर रही है और
पुलिस ने इंक्वायरी
करने के बाद
इसमें अदम-पता
एफ.आर. लगा दी
है जो कि न्यायालय
से भी मंजूर
हो चुकी है।
दूसरा,
आपने जिस
प्रकार का
निवेदन किया
कि यह इतने पशुओं
के मरने का क्या
कारण रहा,
इसमें अध्यक्ष
महोदय, मैं
निवेदन करना
चाहूंगा कि
पशुओं के मरने
का कारण
विशेषकर
पोलीथिन की
थेलियां रहीं
और वृद्ध पशु,
जो बीमार और
आवारा पशु जो
सड़कों पर
मरते हैं उनको
हम देखरेख के
लिये
गौशालाओं में
ले जाते हैं।
वह पशु जो
बीमार हैं और
वृद्ध अवस्था
के पशु थे, वह
मरे हैं। इस
प्रकार की
हमने व्यवस्था
की है, वहां पर
ग्रीन फोडर की
भी व्यवस्था
की है। उनको
बांटें की भी
व्यवस्था
करते हैं,
चारे-पानी की
भी व्यवस्था
करते हैं।
सरकार की तरफ
से गौशालाओं
को संरक्षण
देने में किसी
प्रकार की कोई
कोताही नहीं
बरती जा रही
है। कोटा
नगर-निगम
द्वारा भी गौशालाएं
ढंग से
संचालित की जा
रही हैं। परन्तु
जो वृद्ध पशु
हैं, हर आदमी
की एक उम्र होती
है, वैसे ही
जानवर की उम्र
होती है। उम्र
आने पर सब
समाप्त होते
ही हैं।
विशेषकर
पोलीथिन एक
कारण रहा है,
माननीय अध्यक्ष
महोदय।
श्री भरत
सिंह (दीगोद):
माननीय अध्यक्षजी,
मैं माननीय
मंत्रीजी से
यह जानना चाहूंगा
कि एक हजार
गायें मरी
हैं, क्या
गायों का पोस्टमार्टम
करवाया है।
Vps-usc-12032007-1140-1e-1
और कराया है तो कितनी गायें पोलीथिन से मरी हैं और अगर पोलीथिन से मेरी है तो पोलीथिन के संबंध में जो आपने कानून बनाये, कितने लोगों के खिलाफ कार्यवाही करी आपने कोटा में, आप यह बताइये। ... (व्यवधान)
श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): हां, बताता हूं। माननीय अध्यक्ष महोदय, कोटा में जो गायों का, जिस प्रकार से कोटा का जिक्र किया है और भी हमारी नगरपालिकाओं द्वारा या नगर निगमों द्वारा संचालित गोशालाएं हैं इनका टाइम-टाइम पर इस प्रकार की जब गायों की मौतें होती हैं तो उनका पोस्टमार्टम कराया गया है।
श्री भरत सिंह (दीगोद): एक हजार में से कितनी मरी? पोस्टमार्टम में क्या रिपोर्ट आयी है? कितनी थैलियों से मरी हैं, यह बताइये, मंत्रीजी। गोलमाल जवाब नहीं। कितनी गायें मरी हैं? आपने कैसे कह दिया है कि जो मरी हैं उनका पोस्टमार्टन करवाया है? क्या आपने करवाया है तो रिपोर्ट दीजिए कि एक हजार में से इतनी तो ... (व्यवधान)
श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): अब मैंने कारण बता दिया कि पोस्टमार्टम में ... (व्यवधान) माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं इसलिए कह रहा हूं कि वहां पर हमने चिकित्सा की व्यवस्था करवायी हुई है। वहां पर डाक्टर लगाये हुए हैं। समय-समय पर जो गायें मरती हैं उनका पोस्टमार्टम भी करवाया जाता है। माननीय अध्यक्ष महोदय, ... (व्यवधान)
श्री अमराराम (धोद): मंत्रीजी, यह बताइये कि एक हजार में से ... (व्यवधान)
श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): डाक्टर लगाने के बाद भी एक हजार गायें मर गयीं। डाक्टर लगाने के बाद भी एक हजार गायें मर गयीं तो ऐसे डाक्टरों के खिलाफ आपने क्या कार्यवाही की? क्यों नहीं उन डाक्टरों ने उनको ठीक प्रकार से ट्रीट किया? ... (व्यवधान)
श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): जो पोलीथिन खाने से मरी हैं उनको किसी प्रकार से ... (व्यवधान)
श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): पोलीथिन खाने से है तो वह रिपोर्ट दीजिए। रिपोर्ट दीजिए पोस्टमार्टम की। रिपोर्ट दीजिए और आपने ... (व्यवधान)
श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): किसी को नहीं छिपाया है। ... (व्यवधान)
श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): आपके अगर कोटा में पोलीथिन खाने से मरी तो और जगह आपने क्या व्यवस्था की, यह बताइये। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: अब आप बैठिये तो वह जवाब दे रहे हैं।
श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहूंगा कि पशु चिकित्सा हेतु एक डाक्टर, डाक्टर सत्येन्द्र कुमार राजोरिया, सेवानिवृत्त पशु चिकित्सक व एक कम्पाउंडर श्री मोहनलाल गौतम को नगर निगम, कोटा द्वारा गोशालाओं हेतु लगाया हुआ है जो सप्ताह में दो बार विजीट करके पशुओं की चिकित्सा की व्यवस्था करता है और आवश्यकता पड़ने पर... (व्यवधान)
श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): इसके बावजूद भी गायें मर रही हैं। ... (व्यवधान)
श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): और आवश्यकता पड़ने पर दो विजीट अतिरिक्त कराये जाते हैं। उनके द्वारा प्रायोजित औषधियां यथा समय पर्याप्त मात्रा में पशुओं को दी जाने की पूर्ण व्यवस्था की हुई है। ... (व्यवधान)
श्री भरत सिंह (दीगोद): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं एक मिनट ... (व्यवधान) माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपसे मंत्रीजी से यह अनुरोध कर रहा हूं कि सिर्फ मुझे मेरे प्रश्न का उत्तर दे दीजिए कि एक हजार गायों का पोस्टमार्टम करवाया क्या? और कितनी गायें पोलीथिन थैली खाने से मरी हैं। क्या रिपोर्ट है? कितनी गायें मरी हैं और यह एक बहुत गम्भीर शहरों की समस्या है कि अगर पोलीथिन से गायें इतनी संख्या में मर रही है तो उसके संबंध में क्या कार्यवाही करी है इन्होंने? पोलीथिन से कितनी मरी है? यह बता रहे हैं कि पोलीथिन खाने से मर रही है, हम भी यह स्वीकार करते हैं कि मरी होगी। कितनी गायें मरी हैं इसमें, यह उसका उत्तर बतायें और ... (व्यवधान) कराते नहीं तो यह ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: नहीं, आपने यह जो 300 बताया है यह जो ... (व्यवधान)
श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): माननीय अध्यक्ष महोदय, जो गायें पकड़ी जाती हैं, अवारा, ज्यादातर अवारा गायें पकड़ी जाती हैं।
श्री अध्यक्ष: 338 निकाल दी, यह उत्तर में है इनका। ... (व्यवधान)
श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): इनका सेम्प्ल पोस्टमार्टम करवाते हैं, उनमें ज्यादातर यह रिपोर्ट आयी है कि पोलीथिन की थैलियां खाने से मरी हैं।
श्री भरत सिंह (दीगोद): आपने कितने सेम्प्ल पोस्टमार्टम करवाये हैं?
श्री सुरेश मीणा (करौली): उनके खाने की व्यवस्था करो। भूख से मरती है। गायें भूख से मर रही है। चारे की व्यवस्था करें वे भूख से मर रही हैं। ... (व्यवधान)
श्री भरत सिंह (दीगोद): कितनी भूख से मरी हैं?
श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): माननीय अध्यक्ष महोदय, गाय से जुड़ा हुआ मुद्दा है। सम्माननीय अध्यक्ष महोदय, एक सवाल मैं पूछना चाहता हूं कि गाय किस कारण से मरी? आज से तीन साल पहले पूर्व सरकार ने गायों की कोई व्यवस्था नहीं की। गली-गली में गायें घूमती रहीं, इस कारण से गायों ने पोलीथिन खायी। भारतीय जनता पार्टी की सरकार आने के बाद गायों को एक जगह इकट्ठी की, गायों की सेवा की, मेन कारण है कि आपके कार्यकाल में गायें घूमती रहीं, इस कारण से मरी हैं यह गायें। ... (व्यवधान)
श्री सी. डी. देवल (रायपुर): तीन साल तक गायें तो गोशालाओं में रही है। यह कार्यवाही आपने की है। यह क्या है? कोटा के माननीय दिलावर साहब को इनकी पूरी नॉलेज है कि इन्होंने क्वेश्चन लगाया था, वह बतायें कि क्या हुआ? बताइये आप। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: माननीय सदस्य, इन्होंने मान लिया कि पिछली जो गायें मरी हैं उनका पोस्टमार्टम नहीं करवाया।
श्री भरत सिंह (दीगोद): माननीय अध्यक्ष महोदय, क्यों नहीं करवाया?
श्री अध्यक्ष: लेकिन फ्यूचर के अन्दर वे कह रहे हैं कि आइन्दा यदि कोई गाय मरेगी तो उसका पोस्टमार्टम करवाएंगे लेकिन यह सही बात हैं कि लोगबाग जैसे पालक के पत्ते कर लिये और उसके पीछे जो डंठल छोड़ करके प्लास्टिक की थैली में डालकर बाहर डाल दिये और प्लास्टिक की थैली समेत उसे वह खा जाती है क्योंकि वह निगल तो पाती नहीं है और उसको ही चबा लेती है तो वह प्लास्टिक की थैलियां खाने से यह ... (व्यवधान)
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): वह गायें तो गोशाला में बंद थीं । गोशालाएं इन्तजाम करती थी। गोशाला के अन्दर थी। गोशाला के अन्दर पोलीथिन की थैलियां कहां से चली गयीं। कौन लाया गोशाला में पोलीथिन की थैलियां? पोलीथिन की थैलियां गोशाला में कौन लेकर आया है? वह तो गोशाला के अन्दर थी? ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: माननीय सदस्य।
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): गोशाला के अन्दर प्लास्टिक की थैली लेकर कौन आया है?
श्री सी. डी. देवल (रायपुर): यह पोलीथिन की थैलियां कहां से आयी वहां पर ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: स्थान ग्रहण करें। ... (व्यवधान)
श्री मदन दिलावर (समाज कल्याण मंत्री) : अवारा गायों को उठाकर, सम्भालकर सरकार वहां पर लायी थी गोशाला में। यह तो आपके कारनामे हैं ... (व्यवधान)
श्री सी. डी. देवल (रायपुर): इन्होंने डाली है तो ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: गोशाला में जाने से पहले भी प्लास्टिक खा सकती है और प्लास्टिक की कोई एक थैली खाने से नहीं मरती है। जब थैलियां काफी हो जाती है जब जाकर गाय मरती है। ... (व्यवधान)
एक माननीय सदस्य: क्या यह सही है कि अनेक गायें गुड़ खाने से भी मरी हैं? गुड़ की अधिकता से मरी है। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: मैं कोई जस्टिफिकेशन नहीं दे रही हूं। हां, यह जस्टिफिकेशन नहीं दे रही हूं कि एक हजार गायें मर गयीं थैली खाने से लेकिन थैली, एक थैली खाने से नहीं मरती है। कई थैलियां खाएगी जब जाकर मरेगी। ... (व्यवधान)
श्री भरत सिंह (दीगोद): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपसे एक प्रश्न करना चाहता हूं ... (व्यवधान)
श्री अमराराम (धोद): चारे की व्यवस्था करनी चाहिए। भूख से मर रही है। ... (व्यवधान)
श्री भरत सिंह (दीगोद): भूख से भी मरी है। ... (व्यवधान)
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): यह गाय के नाम पर वोट मांगने वाले महानुभावों, आप लोगों को कुछ तो रहम आनी चाहिए। आपकी सरकार है। सरकार ने गायों को बांधकर वहां मार दिया भूखा। सरकार से अनुदान लेते हो और वहां व्यापारियों से भी आप सब सहायता लेते हो और गायों को इस तरह से भूखा मारते हो ... (व्यवधान)
श्री अमराराम (धोद): चारा चर गये। ... (व्यवधान)
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): करेक्ट।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप माफी मांगिये इस सदन से। ... (व्यवधान)
श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): माननीय अध्यक्ष महोदय, यह माननीय प्रतिपक्ष के नेता को मैं निवेदन करना चाहूंगा कि आपके समय जब सरकार थी तब ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: आप छोडि़ये न बात। आप अपनी बात करिये न। ... (व्यवधान)
श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): जानवरों के लिए पूरा अनुदान तक नहीं दिया गया और लोगों ने ... (व्यवधान)
श्री भरत सिंह (दीगोद): कितनी मरी हैं? ... (व्यवधान)
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): आप तो रिकार्ड कायम करो भ्रष्टाचार में भी ... (व्यवधान)
श्री बाबूलाल नागर (दूदू): गायें तीन-तीन साल से गोशाला में है वह ... (व्यवधान)
श्री अमराराम (धोद): अब तो सरकार आपकी है। ... (व्यवधान)
श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): हमको जो इन्तजाम करना पड़ रहा है वह करेंगे। ... (व्यवधान)
श्री अमराराम (धोद): अब तो आपकी सरकार में मर रही है। यह सपना मत लेओ। उनकी नहीं, आपकी सरकार है और तीन साल से आप हो। ... (व्यवधान)
श्री बाबूलाल नागर (दूदू): तीन-तीन साल से गोशालाओं में है। माननीय अध्यक्ष महोदय, और ऐसी-ऐसी गायें मरी हैं। भूख की वजह से मरी है। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: दूद से आने वाले माननीय सदस्य। अब आप जब चाहे खड़े हो जाते हैं। आप सब लोग खड़े हो जाता है। दूद से आने वाले माननीय सदस्य।
श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): गायों के संरक्षण के लिए यह सरकार प्रतिबद्ध है और सारी व्यवस्था हम कर रहे हैं1 ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: दूदू से आने वाले माननीय सदस्य। ... (व्यवधान)
श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): मंत्रीजी, आप तो यह बताइये कि भूख से कितनी मरीं और पोलीथिन से कितनी मरीं? ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: मूल प्रश्नकर्ता। मूल प्रश्नकर्ता।
श्री भरत सिंह (दीगोद): माननीय अध्यक्ष महोदय, इस तथ्य को हमने मान लिया कि पोलीथिन से मरी है। मैं मंत्रीजी से एक प्रश्न कर रहा हूं कि जहां 30 करोड़ रुपया हम सफाई की व्यवस्था पर खर्च कर रहे हैं इन्होंने पोलीथिन की एक जो निर्धारित आपकी थिकनैस है, उससे कम की जो पोलीथिन की थैलियां हैं, उसमें कितने लोगों के खिलाफ कार्यवाही की इस बेकग्राउंड में कि इससे गायें मर रही हैं? इन्होंने एक आदमी के खिलाफ कार्यवाही नहीं की और पोलीथिन की बात कर रहे हैं जब नियम बनाया है इन्होंने पोलीथिन का इसमें बिल पास किया है कि इस थिकनैस से कम साइल की उसकी पोलीथिन यूज करेंगे तो, एक हजार गायें मरने के बाद भी, यह मंत्रीजी, जो सेंसेटिव नहीं है इस इश्यू के प्रति कि हम उन लोगों के खिलाफ चालान करें जो थैलियां फेंक रहे हैं और जिससे गायें मर रही है, यह एक प्रश्न है मेरा और इसका जवाब दें, मंत्रीजी। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: हां, यह एक हजार आपने किस आधार पर कहा? आप यह बताइये पहले। ... (व्यवधान)
श्री भरत सिंह (दीगोद): यह विधान सभा के उत्तर में, यह छह महीने पहले इन्होंने उत्तर दिया था उसमें 700 मर चुकी हैं। 250 यह है। 13 दिन और निकल गये, चार का औसत जोड़ लें आप। एक हजार से अधिक हो गया।
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): पूरा हिसाब है।
श्री भरत सिंह (दीगोद): पूरा हिसाब है।
श्री सी. डी. देवल (रायपुर): आप पूरा राजस्थान का बता दें। गोशालाओं में गायें मर रही हैं। एक ही इस गोशाला का नहीं है, यह जोधपुर का पूछ लीजिए, यह सांगसिंहजी बैठे हैं। पोकरण का पूछ लीजिए। इनको पूरे का बताइये। ... (व्यवधान)
श्री भरत सिंह (दीगोद): माननीय अध्यक्ष महोदय, यह पहला प्रश्न है। छह महीने पहले भी ... (व्यवधान) मर चुकी थी। 250 अब मर गयी। 50 और मर गयी। यह एक हजार से ऊपर हो गयी। चार के हिसाब से औसत लगा लीजिए आप। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: विराजिये।
श्री रामचन्द्र सराधना (जमवारामगढ़): गो हत्या का पाप लग रहा है। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: नेता प्रतिपक्ष।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप भी मान चुकी हैं कि इतनी गायें पोलीथिन खाने से लगातार, एक हजार नहीं मरती हैं1 आप भी गो-पालक हो। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: आपने कह दिया है न कि माफी माँगों सदन से। आपने सुझाव दे दिया न इनको कि माफी माँगों सदन से। ... (व्यवधान)
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): माननीय अध्यक्ष महोदय, आप भी गो-पालक हो। माननीय अध्यक्ष महोदय, आप भी गो-पालक हैं। आपके भी गायें हैं। ... (व्यवधान) आपने व्यवस्था दे दी कि इतनी एक साथ नहीं मर सकती। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: इसीलिए मैं जानती हूं गाय के बारे में। ... (व्यवधान)
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): उसके बाद भी मंत्री महोदय कोई उत्तर नहीं दे रहे हैं। ... (व्यवधान)
श्री भरत सिंह (दीगोद): आप चाहे तो मैं इसको ... (व्यवधान)
श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): मैं उत्तर बराबर दे रहा हूं। उत्तर में कहीं कोई कमी नहीं है। माननीय नेता प्रतिपक्ष, माननीय अध्यक्ष महोदय, जिस प्रकार अभी मूल प्रश्नकर्ता ने पूछा कि आपने पोलीथिन की थैलियों का कचरा व्यवस्था हटाने के लिए क्या कार्यवाही अब तक नगर निगम ने की है तो मैं माननीय सदस्य को निवेदन करना चाहूंगा कि कोटा नगर निगम क्षेत्र में पोलीथिन और सफाई के बारे में निर्देश का उल्लंघन करने वाले 101 मामलों को हमने दर्ज करवाया है। ... (व्यवधान)
श्री भरत सिंह (दीगोद): चालान कितने पेश करें?
श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): करेंगे पेश। दर्ज करवाये हैं तो पेश भी करेंगे। ... (व्यवधान)
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): पुन: आप इसकी जांच करवाइये कि एक हजार गायें कैसे मरीं। गोशाला में एक हजार गायें, गोशाला में कैसे मरीं इसका क्या कारण रहा, इसकी जांच करवाइये। ... (व्यवधान)
श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): मैंने आपको निवेदन किया है कि मरने का कारण एक तो पोलीथिन की थैलियां खाना और एक वृद्धावस्था होना और बीमार होना है। हम उन गायों को पकड़ते हैं जो अवारा पशु होते हैं, जो सड़कों पर घूमते हैं उन जानवरों को पकड़ कर हम गोशालाओं में या ... (व्यवधान) में डालते हैं1
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप अनुमान से बता रहे हैं। ... (व्यवधान)
एक माननीय सदस्य: तीन साल तक इलाज हमने करवाया लेकिन सरकार बचा नहीं पायी। ... (व्यवधान)
श्री अमराराम (धोद): माननीय अध्यक्ष महोदय, वे भूख से मरी हैं। उनके लिए चारे की व्यवस्था करवाओ।
श्री भरत सिंह (दीगोद): उस टाइम इतनी ज्यादा ... (व्यवधान)
श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्द): माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री महोदय, क्या वे गायें मरी हैं उनका मेडिकल करवाया है आपने? ... (व्यवधान)
श्री भरत सिंह (दीगोद): माननीय मंत्रीजी, आप गायों के बारे में कहते हो ... (व्यवधान)
श्री अमराराम (धोद): गाय का चारा तो ... (व्यवधान) गायें भूख से मर गयीं। ... (व्यवधान)
श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्द): मेडिकल करवाया आपने कि वह गायें कैसे मरीं? वह बीमार होकर मरी या वृद्धावस्था से मरी, आपने यह करवाया क्या? ... (व्यवधान) यह प्रमाण दें आप। ... (व्यवधान)
श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): सेम्प्ल पोस्टमार्टम करवाया है। पोलीथिन का खाना पाया गया है।
श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): माननीय मंत्री महोदय, जयपुर में ही नगर निगम की गोशाला में चालीस गायें परसों मर गयीं, उसकी आपने कोई, कोई रिपोर्ट है आपके पास में? ... (व्यवधान)
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप जांच करवाइये। माननीय अध्यक्ष महोदय, कोटा गोशाला की जांच होनी चाहिए। लगातार एक हजार गायें मरने का क्या कारण रहा है? ... (व्यवधान)
spp/usc/11.50/1f/12.3.2007 (1)
होम
मिनिस्टर
साहब, आप
गौ-भक्त हो ।
गऊ के नाम पर
आप लोगों ने
वोट मांगे
हैं। आपका
कर्म और धर्म
दोनों बनता है
कि आप इसकी जांच
कराइये।
श्री प्रताप
सिंह सिंघवी
(राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं
आवासीय):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, यह बात
सही है कि
हमारा कर्म और
धर्म दोनों
बनता है कि
गायों की
रक्षा की जाये
और सरकार
गायों की
रक्षा में कभी
पीछे नहीं हटेगी,
धन्यवाद।
श्री
खुशवीर सिंह
जोजावर
(खारची): अध्यक्ष
महोदय, भूख से
कितनी मरी
हैं, यह
बताइये। ..(व्यवधान)..
पोस्टमार्टम
रिपोर्ट में
भूख से कितनी
गायें मरीं ?
श्री
हेमराज मीणा
(किशनगंज): चारे
का भुगतान
हुआ, नगर निगम
में कितने
चारे का भुगतान
हुआ ? यह गायों
का चारा कौन
खा गया, यह तो
बता दें आप।
भूख से कितनी
मरी, पॉलिथिन
से कितनी मरी ? यह
बता दें आप और
बीमारी से
कितनी मरीं ?
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं
आवासीय): किशनगंज
से आने वाले
माननीय सदस्य
ने कहा कि यह
चारा घोटाला
हो रहा है और
चारा कौन खा
गया ? अगर आपके
पास स्पेसिफिक
जानकारी हो तो
आप बता दें।
आप स्वयं
इसकी जांच कर
लेना और कोई
दोषी पाया गया
तो उसके खिलाफ
कार्यवाही
करूंगा। ..(व्यवधान)..
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही):
नहीं-नहीं, यह
कहना गलत है कि
चारा खा गये।
यह सरकार चारा
नहीं खाती, यह 90
बी में खाती
है। ..(व्यवधान)..
डा. ओ. पी.
महेन्द्रा (सरकारी
उप मुख्य
सचेतक):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, रिप्लाई
तो आ गयी है।
..(व्यवधान)..
माननीय अध्यक्ष
महोदय, इस
प्रश्न की
रिप्लाई आ
गयी है, अगला
प्रश्न आप
पुकारें। ..(व्यवधान)..
रिप्लाई आ
गयी है, नैक्स्ट
पुकारें। ..(व्यवधान)..
श्री वीरेन्द्र
बेनीवाल
(लूणकरणसर): मंत्री
महोदय, आप यह
बताने का कष्ट
करें क्या
पॉलिथिन खाने
के अलावा किन्हीं
और कारणों से
गौशालाओं में
गायों की मृत्यु
हुई है पिछले
समय में। ..(व्यवधान)..
श्री
अध्यक्ष:
पोस्टमार्टम
ही नहीं कराया
तो क्या
बतायेंगे ।
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं
आवासीय): बताया
है न। मैंने
बताया है और
भी कारण रहे
हैं पॉलिथिन
के अलावा
बीमारी भी
कारण रहा है,
उनकी उम्र भी
कारण रही है।
..(व्यवधान)..
श्री
वीरेन्द्र
बेनीवाल
(लूणकरणसर): क्या
यह सही है कि
जिला बीकानेर
में गुड़ अधिक
मात्रा में
खिलाये जाने
से गायों की
मौत हुई है।
..(व्यवधान)..
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं
आवासीय):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, यह मूल
प्रश्न से
अलग प्रश्न
है। ..(व्यवधान)..
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
बात कोटा की
चल रही है,
बीकानेर की
नहीं चल रही
है। ..(व्यवधान)..
श्री
वीरेन्द्र
बेनीवाल
(लूणकरणसर):
बताइये,
बताइये मंत्री
महोदय, कारण
बताइये।
कमजोरी है या गुड़
खाने से मरी
है। ..(व्यवधान)..
श्री
अध्यक्ष:
श्री अर्जुन
लाल जीनगर
(अनुपस्थित) प्रश्न
संख्या 116
(अनुपस्थित
: कृपया आगे
देखें)
नैक्स्ट
क्वेश्चन ।
श्री संयम
लोढ़ा ।
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर):
गायें मर रही
हैं और गौ ..(व्यवधान)..
जांच का आश्वासन
तो कम से कम
दें, इतनी
गायें मर रही
हैं।
श्री
अध्यक्ष:
श्री संयम
लोढ़ा ।
तहसील
जैसलमेर में
भू - आंवटन प्रकरण
117. श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): क्या
राजस्व
मंत्री यह
बताने की कृपा
करेंगे :-
(1) तहसील
जैसलमेर में
वर्ष 2006 में
सरकार द्वारा
कितनी भूमि का
आंवटन
किस
किस के नाम
किया गया एवं
इसके लिये क्या
प्रक्रिया
अपनाई गई ? प्रत्येक
आवंटित भूमि
के लिये किस किस
के कितने
आवेदन थे ? प्रत्येक
आवंटन की आवेदकों
की सूची सहित
एवं आवंटन
आदेशों की
प्रति सहित
विवरण सदन की
मेज पर रखें।
(2) किस
किस आवंटन को
लेकर सरकार को
शिकायतें प्राप्त
हुईं एवं उनकी
किनके द्वारा
जाचं करवाई गई
?
राजस्व
मंत्री (श्री
रामनारायण
डूडी) : (1) तहसील
जैसलमेर में
वर्ष 2006 में 6391.08
बीघा भूमि का आवंटन
तत्समय
प्रचलित
नियमों के अन्तर्गत
किया गया है।
प्रत्येक
आवंटन के लिये
प्राप्त
आवेदनों की
नामवार सूची
परिशिष्ट 'क'
एवं आवंटन
आदेशों की
प्रतियां
परिशिष्ट 'ख'
संलग्न है।
(2) राज्य
सरकार के स्तर
पर कोई शिकायत
प्राप्त
नहीं हुई है।
जिला कलक्टर
जैसलमेर को
श्रीमती ऋतु
राठी, प्रो0
गोल्डन
ड्यून्स
कैम्प
रिसोर्ट
द्वारा उनका
आवंटन हेतु
आवेदन राज्य
सरकार को न
भेजे जाने का
एक शिकायती
प्रार्थना
पत्र प्रस्तुत
किया गया है
जिसकी जांच
जिला कलक्टर
जैसलमेर के स्तर
से अतिरिक्त
जिला कलक्टर,
जैसलमेर
द्वारा करवाई
जा रही है।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से माननीय
मंत्रीजी से
निवेदन करना
चाहता हूं कि
जैसलमेर के सम
क्षेत्र में
अस्थाई टैण्ट
लगाकर पर्यटन
का कारोबार
चलता है। मैं
सिर्फ, आपने
जो उत्तर
दिया है,
उसमें तीन
इकाइयों का जो
लैण्ड
अलॉटमेंट
आपने किया है 22, 23
और 24- अभिषेक
रिसोर्ट,
भादरिया
रिसोर्ट एवं
मनोहर
रिसोर्ट, मैं
आपके माध्यम
से सिर्फ यह
जानना चाहता
हूं कि क्या
यह सही है कि
जिला कलक्टर
जैसलमेर ने इन
तीनों रिसोर्टों
को अस्थाई
आवंटन के लिये
राज्य सरकार
को प्रस्ताव
भेजा था, फिर
वह कौनसे कारण
हैं कि अस्थाई
आवंटन के
प्रस्ताव
भेजे जाने के
बाद भी राज्य
सरकार ने इन
तीनों
रिसोर्टों को
स्थाई आवंटन
कर दिया।
दूसरा, मैं
आपके माध्यम
से यह जानना
चाहता हूं कि
क्या जिला
कलक्टर
जैसलमेर ने
राज्य सरकार
को यह भी लिखा
है कि इस
क्षेत्र में
स्थाई आवंटन
करने के लिये
कोई स्पष्ट
नीति बनाये
जाने की आवश्यकता
है और माननीय
अध्यक्ष
महोदय, किसी
तरह की स्पष्ट
नीति बनाये
जाने के बिना
कौनसे कारण
हैं जिससे
सरकार ने स्थाई
आवंटन करने का
फैसला किया और
दूसरा प्रश्न
के क्रम- दो
में जो आपने
जवाब दिया है
जिसमें आपने
गोल्डन
ड्यून्स
कैम्प
रिसोर्ट की
कम्पलेंट का
जिक्र किया
है, क्या यह
सही है कि
गोल्डन
ड्यून्स
कैम्प
रिसोर्ट
द्वारा जो एप्लीकेशन
लगायी गयी थी,
उसको नहीं
भेजकर इसके स्थान
पर भारतीय
जनता पार्टी
के एक विधायक
के बेटे के
प्रस्ताव
भेजकर, जो कि
अस्थाई भेजा
गया था और
लैण्ड अलॉट
कर दिया गया।
श्री
अध्यक्ष: आप
प्रश्न
पूछिये।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): प्रश्न
है। प्रश्न
ही है यह। ..(व्यवधान)..
श्री
अध्यक्ष:
प्रश्न नहीं
है, भाषण है।
..(व्यवधान)..
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): भाषण
कैसे हैं ।
तीनों स्पेसिफिक
क्वेश्चंस
पूछे हैं। क्या
यह सही है कि
अस्थाई
आवंटन के
प्रस्ताव
भेजे गये थे
उसके बाद स्थाई
अलाटमेंट कर
दिया। क्या
इस संबंध में
जिला कलक्टर
जैसलमेर ने स्पष्ट
नीति के लिये
राज्य सरकार
को लिखा था ।
कौनसे कारण
हैं कि बिना नीति
बनाये आपने
आवंटन कर दिया
और क्या यह
सही है कि इन
तीनों आवंटन
में एक आवंटन
भारतीय जनता
पार्टी के एक
विधायक के
बेटे को किया
गया था नियमों
के
विपरीत ?
श्री
रामनारायण
डूडी (राजस्व
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैंने
जो माननीय
सदस्य को
प्रत्युत्तर
दिया था और
जिन तीन
महानुभावों
को हमने अलाटमेंट
किया है, वह 1959 के
आधार पर किया
है और अध्यक्ष
महोदय, नियम 1959
यह कहता है,
कलक्टर के
पास अस्थाई
तौर पर कैम्प
के लिये उन्होंने
भेजे थे मगर अस्थाई
आवंटन के कोई
रूल्स नहीं
बने थे और मैं
यह निवेदन
करना चाहूंगा जो
कलक्टर ने
हमारे पास 13
आवेदन भेजे थे
और उनमें तीन
व्यक्तियों
ने, जो आवेदक
थे और जब
नियमों में अस्थाई
का प्रावधान
नहीं था तो
उन्होंने यह
कहा, हमें तो
स्थाई तौर पर
एप्लीकेशन
दी और अध्यक्ष
महोदय, उन्होंने
अपना
प्रोजेक्ट
चेंज करवाया
और चेंज
करवाने पर कि
स्थाई
भू-आवंटन किया
जाये हमें और
नियमों में स्पष्ट
प्रावधान है
कि इनको हमने
स्थाई किया
है, जो भी
फोरमैलिटी
वगैरह कम्पलीट
की थी । जहां
तक माननीय
सदस्य ने जो अभी
कहा है कि
माननीय
विधायक जी के
लड़के को कर
दी होगी। अब
विधायक जी के
लड़के को की
है या हमारे
सामने जो पत्रावली
आई है और जो
तीन
पत्रावलियां
थीं, उसमें
कौन विधायक का
बेटा है और
कौन विधायक का
जंवाई है और
कौन मंत्रीजी
का बेटा है, यह
तो मैंने देखा
नहीं है और
मैंने केवल
नियमों के अन्तर्गत
जो भी आ रहा था,
उससे एक इंच
भी इधर - उधर न होते
हुए हमने इनको
आवंटन किया है
और इनकी शंका
जो है अध्यक्ष
महोदय, यह जिस
व्यक्ति के
लिये, आवेदक
के लिये बता
रहे हैं
श्रीमती ऋतु
के लिये, उनका
राज्य स्तर
पर आवेदन आया
ही नहीं तो उन
पर विचार करने
का सवाल ही
पैदा नहीं
होता और वह भी
उन नियमों में
आती कि हमें
परमानेंट
चाहिये, टैम्परेरी
कैम्पिन नहीं
चाहिये तो आप
हमें यह बता देते
तो हम उनका भी
कर देते और
हमारे पास
उनका भी आवेदन
पत्र होता,
मगर यह आया
नहीं और मैं
यह निवेदन
करना चाहता
हूं ... ..(व्यवधान)..
श्री
अध्यक्ष:
आपने बाकी जो
किये हैं वह
सारे किये हैं
सीमा चौकियों
को, विंग फोरम
के लिये तो आप
प्राइवेट को
क्यों करते ? आपको
करना ही नहीं
चाहिये था।
आता तो भी
नहीं करना चाहिये
था। ..(व्यवधान)..
यह क्या बात
हुई, क्यों
करते आप ?
श्री
रामनारायण
डूडी (राजस्व
मंत्री):
उसमें अध्यक्ष
महोदय, मैं
निवेदन करना
चाहता हूं न
तो हमारे दाल
में काला है
और न दाल काली
है।..(व्यवधान)..
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): दाला
में काला
नहीं, आपके पूरी
दाल ही काली
है। पूरी दाल
काली है।
राजस्थान
में
तहसीलदारों
के तबादलों
में आपने जो
किया है, पूरा
राजस्थान
जानता है आपको
मंत्रीजी।
..(व्यवधान).. आप
क्या काली
दाल की बात कर
रहे हो, पूरा
राजस्थान
जानता है । ..(व्यवधान)..
श्री
रामनारायण
डूडी (राजस्व
मंत्री): मुझे
तो पूरा राजस्थान
जानता है अध्यक्ष
महोदय, मगर
आपको भी सब
जानते हैं।
..(व्यवधान)..
यहां हल्ला
करने से कुछ
भी बात नहीं
है । ..(व्यवधान)..
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): आप से
तो पटवारी
सीधे काम करवा
कर ले जाते
हैं।..(व्यवधान)..
डॉ0
भँवर लाल
राजपुरोहित :
अध्यक्ष
महोदय, विधायक
के लड़के की
एक अलग इकाई है।
उसको लैण्ड
अलॉट होना कोई
प्राब्लम है
क्या ? ..(व्यवधान)..
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): माननीय
अध्यक्ष
महोदय, आरोप
लगाया गया है
बिना नोटिस
दिये। ..(व्यवधान)..
यह हटाया जाये
। या नोटिस
देकर आरोप लगाया
जाये। ..(व्यवधान)..
श्री
रामनारायण
डूडी (राजस्व
मंत्री):
आवेदक ने स्थाई
के लिये एप्लीकेशन
पेश की और
नियमों के
अंदर दिया है।
..(व्यवधान)..
श्री
अध्यक्ष: आप
बोलने दीजिये
न मंत्रीजी
को। ..(व्यवधान)..
श्री
रामनारायण
डूडी (राजस्व
मंत्री):
रूपान्तरण
के अदंर दिया
है। एक भी गलत
नहीं किया ।
..(व्यवधान).. और
हमने दिया है
विंग फोरम को
दिया है। ..(व्यवधान)..
टेलीफोन एक्सचेंज
को दिया है।
msr/usc/1200/1g/12032007
स्कूल
को दिया है,
कॉलेजों को
दिया है, जो भी
किसने मांगा
है उनको हमने
इसमें नियमों
के आधार पर ...(व्यवधान)...
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, यह
कोई पहली दफा
थोड़ी हो रहा
है। ...(व्यवधान)...
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): माननीय
अध्यक्ष
महोदय,
मेरा आपसे
निवेदन है ...(व्यवधान)...
यह कोई साधारण
आबंटन नहीं
है, अन्तरराष्ट्रीय
स्तर पर ...(व्यवधान)...
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण मंत्री):
इनके राज में
...(व्यवधान)...
इन्होंने जो
दी जमीन, उनको
पढ़ कर सुनाओ
न। ...(व्यवधान)...
1959 के रूल का
फायदा जितना
कांग्रेस के राज
में आप लोगों
ने किया उतना किसी ने
नहीं किया।
दुरुपयोग
किया ...(व्यवधान)...
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री):
कांग्रेस राज
में हुआ आज तक
किसी ने नहीं
किया ...(व्यवधान)...
इसका
दुरुपयोग
किया है आप
लोगों ने श्...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष:
प्रश्न काल
समाप्त हुआ।
...(व्यवधान)...
प्रश्न काल
समाप्त हुआ।
प्लीज सिट
डाउन। प्लीज
सिट डाउन। ...(व्यवधान)...
प्रश्न काल समाप्त
हुआ। ...(व्यवधान)...
स्थान
ग्रहण करें।
स्थान ग्रहण
करें प्लीज Please resume your seats. स्थान
ग्रहण करें। प्लीज,
आप स्थान
ग्रहण कर लें।
स्थान ग्रहण
करें, माननीय
सदस्य। ...(व्यवधान)...
श्री
तगाराम चौधरी
(बाड़मेर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
मेरे परा
आरोप
लगाया गया
है, मैं दो सवाल
पूछना चाहता
हूं, सिर्फ दो
सवाल।
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
आसन पांवों
पर।
माननीय
सदस्य, On behalf of the house I welcome the Library Committee of Tamil Nadu
head by Mr. EAP Shivaji. मैं आप सब
लोगों की ओर
से तमिलनाडु
की जो
लाइब्रेरी
कमेटी आयी है,
पूरे सदन की
ओर से उनका स्वागत
करती हूं। ...(व्यवधान)...
स्थगन
प्रस्तावों
पर अध्यक्षीय
व्यवस्था
मुझे
माननीय सदस्यों
को सूचित करना
है कि निम्नांकित
स्थगन प्रस्तावों
की सूचना
प्राप्त हुई
है:-
(1)
श्री जुबेर खान,
सदस्य की ओर
से नगरीय
पेराफेरी में
आने वाले
ग्रामों की
सरकारी भूमि
को स्थानीय
नगर विकास न्यासों
के नाम
रेकार्ड में
दर्ज करने से
जनता में व्याप्त
रोष के सम्बन्ध
में।
(2)
श्री
रामनारायण
मीणा एवं दो
अन्य सदस्यों
की ओर से
तहसील नोहर के
ग्राम बोगियों
की ढाणी में
दिनांक 05.03.2007 को
हुई बस
दुर्घटना में
सात बच्चों
की मृत्यु
एवं 27 व्यक्तियों
के घायल होने
के सम्बन्ध
मैं।
(3) श्री
हेमाराम
चौधरी, सदस्य
की ओर से नगर
पालिका
बाड़मेर की
कच्ची बस्ती
को बेदखल किये
जाने की
कार्यवाही से
कई वर्षों से
आबाद
परिवारों के
बेदखल होने के
सम्बन्ध
में।
(4)
श्री बाबूलाल
नागर, सदस्य
की ओर से
तहसील
मोजमाबाद,
फुलेरा, फागी,
बस्सी व
जमवारामगढ़
में अकाल राहत
कार्य खोलने व
पीने के पानी
की व्यवस्था
के सम्बन्ध
में।
उपरोक्त
प्रस्ताव
ऐसे ेनहीं हैं
कि सदन की
पूर्व
निर्धारित
कार्यवाही को
रोक कर इन पर
विचार किया
जाए। सदन में
बजट पर आम
चर्चा हो रही
है, अनुदान की
मांगों पर भी
चर्चा का अवसर
मिलेगा। माननीय
सदस्यों को
अपने विचार
रखने का पूरा
अवसर उपलब्ध
है। अत: मैं
अनुमति देने
में असमर्थ
हूं।
(5)
श्री हरिमोहन
शर्मा एवं 11
अन्य सदस्यों
की ओर से
विधान सभा
क्षेत्र
छबड़ा के ग्राम
लक्ष्मीपुरा
में दिनांक 04.03.2007
को शराब
ठेकेदार के व्यक्तियों
द्वारा सरेआम
गोलियां
चलाने के सम्बन्ध
में।
(6)
श्री संयम
लोढ़ा, सदस्य
की ओर से
पीपाड़ शहर
(जोधपुर) में
राष्ट्रपति
पदक से सम्मानित
कार्यालय
सहायक को आत्म
हत्या करने
पर विवश करने
के सम्बन्ध
में।
उपरोक्त
प्रस्ताव भी
ऐसे नहीं हैं
कि सदन की
पूर्व
निर्धारित
कार्यवाही को
रोक कर इन पर
विचार किया
जाए अत: इन पर
अनुमति देने
में तो असमर्थ
हूं। फिर भी
माननीय सदस्य
श्री हरिमोहन
शर्मा और श्री
संयम लोढ़ा, संयम
लोढ़ा का तो
यदि वो
बोलेंगे तो
आगे की जो इन्वेस्टीगेशन
है वो भी
प्रभावित
होगी फिर भी
चूंकि आपने इस
तरह से लिखा
है कि वो आत्म
हत्या करने
विवश, तो मैं
आपको दो मिनमट
का कसमय दूंगी
अपनी बात को
कहने के लिए।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): दो
मिनट का मतलब दो
ही मिनट।
श्री
अध्यक्ष: दो
ही मिनट। दो
मिनट काक मतलब
दो ही मिनट।
नियम
295 के अन्तर्गत
प्राप्त विशेष
उल्लेख की सूचनाएं
(1)
श्री
प्रभुलाल
वर्मा, सदस्य
की ओर से
विधान सभा
क्षेत्र
पीपल्दा के
कस्बा
खातोली में
नायब तहसील
कार्यालय
खोलने के सम्बन्ध
में।
(2)
श्री जोगाराम
पटेल, सदस्य
की ओर से
माननीय उच्च
न्यायालय की
मुख्य पीठ का
नवीन भवन
बनाने के सम्बन्ध
में।
(3)
श्री भंवरलाल
राजपुरोहित,
सदस्य की ओर
से मकराना
परबतसर उपखण्ड
क्षेत्र में
महाविद्यालय
खोलने के सम्बन्ध
में।
(4)
श्री
बीरूसिंह
राठौड़, सदस्य
की ओर से
विधान सभा
क्षेत्र
बनीपार्क की
चार आवासीय
कॉलोनी में
जनसहभागिता
योजना में पाईप
लाइन का कार्य
प्रारम्भ
करने के सम्बन्ध
में।
(5)
श्री रामलाल
शर्मा, सदस्य
की ओर से
कालाडेरा
स्थित कोका
कोला प्लाण्ट
द्वारा अत्यधिक
जल दोहन करने
से उत्पन्न
स्थिति के सम्बन्ध
में।
(6)
श्री जीवाराम
चौधरी, सदस्य
की ओर से
विधान सभा
क्षेत्र
सांचोर की
बाढ़ एवं
अतिवृष्टि से
टूटी सड़कों
की मरम्मत
करवाने के सम्बन्ध
में।
(7)
श्री राकेश
मेघवाल, सदस्य
की ओर से राज्य
के आयुर्वेद
विभाग के साथ
किये जा रहे
सौतेले श्व्यवहार
के सम्बन्ध
में।
(8)
श्रीमती
लक्ष्मी
बारूपाल, सदस्य
की ओर से
विधान सभा
क्षेत्र
देसूरी में
नहरों की मरम्मत
एवं
वितरिकाओं का
पक्काक
निर्माण करने
के सम्बन्ध
में।
(9)
श्री
मुरारीलाल
मीणा, सदस्य
की ओर से
राजमार्ग
संख्या 11 में
बालाहेड़ा से
बालाहेड़ी
सड़क पर पड़ने
वाली बाणगंगा
नदी पर
समर्सिबल
ब्रिज या वेन्टेड
काजवे बनाने
के सम्बन्ध
में।
(10)
श्री सुभाष
चन्द शर्मा,
सदस्य की ओर
से विधान सभा
क्षेत्र
कोटपूतली के 1000
से अधिक आबादी
वाले गांवों
को पेयजल
योजना से
जोड़ने के सम्बन्ध
में।
(11)
श्री
मांगीलाल
गरासिया, सदस्य
की ओर से
विधान सभ
क्षेत्र
गोगुन्दा की
कतिपय महत्वपूर्ण
सड़कों को पक्का
करने के सम्बन्ध
में।
(12)
श्री हरिसिंह
रावत, सदस्य
की ओर से
विधान सभा
क्षेत्र भीम
की ग्राम पंचायत
जैतगढ़,
दुदालिया,
दातड़ा व
कतिपय अन्य
को आसीन्द
पंचायत समिति
में शामिल
करने के सम्बन्ध
में।
माननीय
सदस्यों को
उनके द्वारा
दी गयी सूचना
को पढ़ने की अनुमति
होगी।
श्री
हरिमोहन
शर्मा।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
माननीय अध्यक्ष
महोदय।
श्री
हेमाराम
चौधरी
(गुढ़ामालानी):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, स्थगन
प्रस्ताव पर
दो मिनट का
बोलने का हमें
ही मौका दे देते,
दो मिनट में
क्या फर्क
पड़ता।
श्री
अध्यक्ष: ऐसा
है, दो मिनट
में आप मानते
तो हैं नहीं और
आपको पूरा
मौकाक मिलेगा,
डिमाण्ड पर
बोलने का भी
मिलेगा, जनरल
डिस्कशन पर
बोलने का भी मलयेगा
उस समय आप
अपने विचार
रखियेगा। ...(व्यवधान)...
श्रीमती
ममता शर्मा
(बूंदी):
माननीय अध्यक्ष
महोदय।
श्री
बाबूलाल नागर
(दूदू): माननीय
अध्यक्ष
महोदय, भयंकर
अकाल पडा हुआ
है।
श्री
अध्यक्ष:
आपको क्या हो
गया। ...(व्यवधान)...
श्रीमती
ममता शर्मा
(बूंदी):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
मैं आपसे कुछ
निवेदन करना
चाह रही हूं।
श्री
अध्यक्ष:
आपका न स्थगन
प्रस्ताव है
न 295 है। ...(व्यवधान)...
श्री
बाबूलाल नागर
(दूदू): पलायन
कर रहे हैं
लोग, पानी की
कोई व्यवस्था
नहीं है। ...(व्यवधान)...
श्रीमती
ममता शर्मा
(बूंदी): मैंने
सात तारीख को
एक बलात्कार केस
भरतपुर जिले
के लिए स्थगन
प्रस्ताव
लगाया था।
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
सात तारीख को
लगाया था। ...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष:
दूदू से आने
वाले माननीय
सदस्य, नौ,
नौ। हरिमोहन
शर्मा Please
begin your speech. बोलना
शुरू करें।
श्री
रामनारायण
मीणा (नैनवां):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
आपकी इजाजत
होगी जब
बोलेंगे ...(व्यवधान)...
श्री
बाबूलाल नागर
(दूदू): दूदू
हमेशा अकाल से
ग्रसित रहा
है। ...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष: आप
आसन की व्यवस्था
नहीं मानेंगे?
...(व्यवधान)...
श्री
बाबूलाल नागर
(दूदू):
प्रभारी
मंत्रीजी
दूदू विजिट
में आये थे,
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
सारे लोगों ने
प्रभारी
मंत्रीजी को
कहा कि हमारे
साथ बहुत बड़ा
अन्याय हो
गया है।
श्री
अध्यक्ष: आप
स्थान ग्रहण
करें। अंकित
नहीं हो।
श्री
बाबूलाल नागर
(दूदू): 000
श्री
अध्यक्ष:
नहीं, आप
सुनें। ...(व्यवधान)...
श्री
हेमाराम
चौधरी
(गुढ़ामालानी):
000
श्री
बाबूलाल नागर
(दूदू): 000
श्रीमती
ममता शर्मा
(बूंदी): 000
श्री
अध्यक्ष: ...(व्यवधान)... माननीय
सदस्य, आपका
न तो कोई स्थगन
प्रस्ताव है
न आपका कोई ...
श्री
बाबूलाल नागर
(दूदू): 000
श्री
अध्यक्ष: क्या
मतलब? अध्यक्ष
महोदय, अध्यक्ष
महोदय क्या?
श्री
बाबूलाल नागर
(दूदू): 000
श्री
अध्यक्ष: स्थान
ग्रहण करें।
स्थान ग्रहण
करिये।
श्री
बाबूलाल नागर
(दूदू): 000
श्री
अध्यक्ष:
दूदू से आने
वाले माननीय
सदस्य, बूंदी
से आने वाली
माननीय सदस्य,
स्थान ग्रहण
करें। स्थान
ग्रहण करें,
दूदू से आने
वाले माननीय
सदस्य।
अंकित नहीं हो
रहा है।
श्री
बाबूलाल नागर
(दूदू): 000
श्री
अध्यक्ष:
हां, बिलकुल
जाइये, शोक से
पधारिये आप। पधारिये,
पधारिये।
(माननीय
सदस्य, श्री
बाबूलाल नागर
ने सदन से
बहिर्गमन
किया)
श्रीमती
ममता शर्मा
(बूंदी): 000
श्री
अध्यक्ष: आप
वैश्म में
आकर मिलें।
सात तारीख की
बात आप वैश्म
में आ कर बात
करें, अभी
नहीं।
श्री
हेमाराम
चौधरी
(गुढ़ामालानी):
000
श्रीमती
ममता शर्मा
(बूंदी): 000
श्री
अध्यक्ष:
आपका कोई
प्रस्ताव
नहीं है। आपको
कोई स्थगन
प्रस्ताव
नहीं है।
श्रीमती
ममता शर्मा
(बूंदी): 000
श्री
अध्यक्ष: सात
तारीख की बात
सात तारीख को
चली जाती है।
आप जानती हैं
इस बात को, आप
पहली बार नहीं
आयी हैं जीत
कर। आपको भी
मालूम है सात
तारीख के बाद
श्री
रामनारायण
मीणा (नैनवां): 000
श्री
हेमाराम
चौधरी
(गुढ़ामालानी):
000
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
स्थान ग्रहण
करें। स्थान
ग्रहण करें,
माननीय श्री
हेमारामजी।
श्री
रामनारायण
मीणा (नैनवां): 000
श्री
अध्यक्ष: आप
एक बार स्थान
ग्रहण कर लें।
नहीं, आप स्थान
ग्रहण करें।
अभी
क्वेश्चन
आवर में
किशनगंज से
आने वाले
माननीय सदस्य
ने बड़े
जोर-शोर से यह
बिलकुल चल
नहीं रहा है ट्यूबवैल,
यह नहीं चल
रहा, तीन जो
उन्होंने
फोटो दिये हैं
यह कहीं भी
नहीं हैं, 31 की उस
लिस्ट के अन्दर
नहीं हैं
जिनको दे कर
के और एक
सनसनी सारे
सदन में इन्होंने
फैला दी। ...(व्यवधान)...
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): माननीय
अध्यक्ष
महोदय,
प्रताडि़त
करो इनको। ...(व्यवधान)...
श्री
हेमराज मीणा
(किशनगंज): माननीय
अध्यक्ष
महोदय, इन
चारों का पैसा
उठ गया पाँच
लाख रुपया,
मंत्रीजी ने
हां भी भरी
है। माननीय
अध्यक्ष
महोदय,
मंत्रीजी ने
हां भी भरी है, पाँच
लाख रुपया
उठाया है
इसका, माननीय
अध्यक्ष
महोदय।
श्री
अध्यक्ष: न
तो छिछरोनी है
शाहबाद
मैं..(व्यवधान)
31 की लिस्ट
में नहीं है।
श्री
हेमराज मीणा
(किशनगंज):
इसका पैसा उठ
गया, माननीय
अध्यक्ष
महोदय।
श्री
अध्यक्ष: न 31
की लिस्ट में
निवाड़ी,
शाहबाद है।
...(व्यवधान)...
श्री
हेमराज मीणा
(किशनगंज):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
जितने भी
ट्यूबवैल
सेंक्शन हुए
हैं ...
श्री
अध्यक्ष: न 31
की लिस्ट में
खियावदा,
किशनगंज है। ...(व्यवधान)...
Ars/usc/1h/1210/12032007/1
यह
तीन फोटो देकर
के जो 31 में है
नहीं, जिनका
नाम नहीं है
एक सनसनी फैला
दी कि जैसे
जाने क्या हो
गया ...(व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): प्रताडि़त
करो इनको।
श्री
हेमराज मीणा
(किशनगंज):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपसे निवेदन
करना चाहता
हूं ...
श्री
अध्यक्ष: अब
कुछ नहीं, मन्त्री
जी ने देखे ही
नहीं फोटो,
मंत्री जी ने
कौनसे फोटो
देखे, गलत बात
है। अंकित
नहीं होगा।
श्री
हेमराज मीणा
(किशनगंज): 000
श्री
अध्यक्ष:
आपका दिया हुआ
रिकार्ड यह भी
है ...(व्यवधान)
श्री
हेमराज मीणा
(किशनगंज): 000
श्री
अध्यक्ष: और
अब आप बात कर
रहे हैं ...(व्यवधान) यह फोटो
31 में शामिल
नहीं हैं और आप
बात कर रहे
हैं, सिट डाउन
...(व्यवधान)
श्री
हेमराज मीणा
(किशनगंज): 000
श्री
अध्यक्ष: अब
आप बैठ जाएं।
बहुत सुन लिया,
बहुत कर लिया
...(व्यवधान) आप
गलत इन्फार्मेशन
देते हो ...(व्यवधान) 31 में
शामिल ही नहीं
है यह।
श्री
हेमराज मीणा
(किशनगंज): 000
श्री
रामनारायण
मीणा (नैनवां): 000
श्री
अध्यक्ष: यह 31
में शामिल ही
नहीं है जो
फोटो आपने दी है।
श्री
हेमराज मीणा
(किशनगंज): 000
श्री
अध्यक्ष: यह
तीन तो नहीं
है जो आपने दी
है ...(व्यवधान)
हां तो नियमों
में आइये।
श्री
रामनारायण
मीणा (नैनवां): 000
श्री
रामचन्द्र
सराधना
(जमवारामगढ़): 000
श्री
हेमराज मीणा
(किशनगंज): 000
श्री
अध्यक्ष:
अंकित नहीं हो
रहा है। आपने
जो फोटो दी है
और यह कहा कि
यह मेरे पास
वह ट्यूबवैल हैं
जिनमें पानी
नहीं है, यह 31
में शामिल
नहीं है, मुझे
यही कहना है
कि यह 31 में
शामिल नहीं है।
फोटो देकर सदन
में आपने एक
सनसनी फैला
दी।
श्री
हेमराज मीणा
(किशनगंज): 000
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
स्थान ग्रहण
कर लें, अंकित
नहीं हो रहा
है, अंकित
नहीं हो रहा
है।
श्री
रामनारायण
मीणा (नैनवां): 000
श्री
अध्यक्ष: आप
भी विराज
जाएं, हरिमोहन
शर्मा का नाम पुकार
लिया, बैठ
जाएं आप प्लीज।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
वर्तमान
समय में शराब
माफियाओं....
श्री
अध्यक्ष: 12
बजकर 12 मिनट,
योअर टाइम स्टार्ट
...(व्यवधान)
दुःखी हो रहे
हैं इसीलिए कह
रही हूं 12.12 हो
रहे हैं, यू स्टार्ट।
विधान
सभा क्षेत्र छबड़ा में शराब
माफियाओं
द्वारा आतंक
फैलाने विषयक
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
राजस्थान
में शराब
माफियाओं का
रेड पार्टी का
गिरोह
राजनीतिक
संरक्षण की
आड़ में और
राजनेताओं से
संरक्षण
प्राप्त
होने के कारण
इस प्रकार का
जघन्य अपराध
कर रहा है
जिसकी घटना का
विवरण मैं 4.3.07 को
ग्राम छबड़ा
जहां से
माननीय स्वायत्त
शासन मंत्री
जी का निवास
स्थान है
वहां से यह
जीतकर आते
हैं। वहां पर
शराब
माफियाओं के
एक गिरोह ने
एक लड़का जो
मोटर साइकिल
पर जा रहा था,
उस लड़के को
जीप से टक्कर
मारकर नीचे
गिराकर उसके
बाद फिर उसके
साथ मारपीट
की। यही नहीं
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
इसके
पश्चात एक
रेड पार्टी
पूरी दो जीपें
लेकर होली के
अवसर पर ग्राम
लक्ष्मीपुरा
में पहुंची और
लक्ष्मीपुरा
में पहुंचकर
उन्होंने
वहां पर खुली
फायरिंग की,
आदमियों के साथ
मारपीट की,
आदमियों के
साथ बहुत बुरा
व्यवहार
किया और इस
प्रकार आतंक
का वातावरण
पूरे गांव
छबड़ा में और
वहां पर उन्होंने
बना दिया।
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
उसमें
चूंकि
राजनीतिक
दृष्टिकोण से
वहां के पूर्व
चेयरमैन और
वर्तमान
चेयरमैन के पति,
वहां के
पार्षद, वहां
के पार्षदों
के पति इस
प्रकार का एक
राजनीतिक
गिरोह है
जिसका संरक्षण
स्वायत्त
शासन मंत्री
जी से उनको
प्राप्त है।
आज तक भी उन
लोगों को वहां
पर छबड़ा बंद
हुआ और इतिहास
में भारतीय
जनता पार्टी
का छबड़ा गढ़
होने के बाद
यह इतने वर्षो
के बाद इस जघन्य
अपराध के
खिलाफ छबड़ा
बंद हुआ, पूरा
का पूरा बाजार
बंद हुआ।
श्री
अध्यक्ष:
वहां गोली कब
चलाई ?
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
बाजार
इसलिए बंद हुआ
कि इन्होंने
मुलजिमान को
नहीं पकड़ा,
मुलजिमान को गिरफ्तार
नहीं किया और
उन मुलजिमान
को राजनीतिक
संरक्षण देकर
के अपने घरों
तक ले आए और
दूसरी जगहों
पर छिपा दिया।
यह राजनीतिक
संरक्षण के
कारण जिस
प्रकार की स्थिति
छबड़ा में और
वहां के लक्ष्मीपुरा
गांव में हुई
वहां के
निवासी
आंदोलित हैं
और अभी तक
माननीय गृह
मंत्री जी यह
स्थगन प्रस्ताव
लगने के बाद,
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
यहां से
स्थगन प्रस्ताव
जाने के बाद
उन्होंने
पुलिस ने कुछ
कार्यवाही
करके एक दो
आदमियों को
इधर उधर से
गिरफ्तार
किया और जिनको
राजनीतिक
संरक्षण
प्राप्त है,
जिनको इधर उधर
छिपाया गया
है, जिनको
जयपुर बुला
लिया गया और
जिनको इधर उधर
छिपाकर के उनको
परिश्रय दिया
जा रहा है,
मेरा आपसे
विनम्र
अनुरोध है कि
तत्काल
प्रभाव से जो
राजनीतिक
संरक्षण दे
रहे हैं उनके
खिलाफ भी और
जो इसमें
मुलजिम हैं
उनको तत्काल
गिरफ्तार
किया जाए और
उनके खिलाफ
समुचित कार्यवाही
की जाए।
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं
आवासीय):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
यह
सीधा सीधा
मेरा नाम ले
रहे हैं स्वायत्त
शासन मंत्री, इसलिए
मैं कहना
चाहूंगा यह जो
बात कर रहे
हैं कुछ इस
प्रकार का
झगड़ा जरूर
हुआ है लक्ष्मीपुरा
में सांसी
जाति के लोग
रहते हैं।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
यह अपना स्पष्टीकरण
दे सकते हैं,
झगड़े की बात
गृह मंत्री जी
बतायेंगे।
आपने उनको
छिपा रखा है।
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं
आवासीय): आपने
मेरा नाम लिया
है ।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आपने उनको
संरक्षण दे
रखा है वह
वर्तमान
नगरपालिका
चेयरमैन का
पति है ...(व्यवधान)
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं आवासीय):
छबड़ा बंद
नहीं हुआ है
...(व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
पूर्व
चेयरमैन है
नगरपालिका का
सदस्य है,
नगरपालिका की
भारतीय जनता
पार्टी की महिला
सदस्य का पति
है और आपने
उनको छिपा रखा
है, आप उनको राजनीतिक
संरक्षण दे
रहे हो, सारा
वातावरण वहां
का दूषित कर
रहे हो और आप
उनको
गिरफ्तार
नहीं होने दे
रहे हो।
श्री
अध्यक्ष: स्थान
ग्रहण कर लें।
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं
आवासीय):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
जब
मैंने इनकी
बात को शांति
से सुना है तो
यह भी मेरी
बात को शांति
से सुनें।
श्री
अध्यक्ष: आप
दे दीजिए अपना
स्पष्टीकरण।
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं
आवासीय):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
मैं
निवेदन करना
चाहूंगा कि ना
तो किसी
प्रकार का
मैंने किसी भी
आज तक के
इतिहास में ना
तो मेरे खिलाफ
कोई मुकदमा दर्ज
है ना ...(व्यवधान)
न आज तक मेरे
खिलाफ कोई एफ
आई आर दर्ज है ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: बीच
में नहीं
बोलें।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
मैंने इनके
खिलाफ थोड़े
ही मुकदमा
दर्ज करवाया
है, मैं थोड़े
ही कह रहा हूं
आपके खिलाफ
मुकदमा दर्ज
है।
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं
आवासीय): आप
मेरी बात सुन
लीजिए।
श्री
अध्यक्ष:
आपकी बात सुनी
है तो आप उनकी
बात तो सुन लीजिए।
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं
आवासीय): ना
मेरी इस
प्रकार की आदत
है मैंने कभी
भी इस तरह के
बदमाश लोगों
को जो हिस्ट्रीशीटर
हैं, या जो
लड़ाकू किस्म
के आदमी हैं
इनको मैंने
कभी संरक्षण
दिया हो या
मेरे परिवार
ने कभी
संरक्षण दिया
हो।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
गिरफ्तार क्यों
नहीं किया?
श्री
अध्यक्ष: बीच
में नहीं
बोलें।
श्री
प्रताप सिंह सिंघवी
(राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं
आवासीय): जहां
तक इनका सवाल
है, यह मैं
मानता हूं कि
इसमें झगड़ा
हुआ है झगड़ा
सांसी जाति के
लोगों के साथ
और एक हमारा
पार्षद है भगवती
उसके साथ
झगड़ा हुआ है,
झगड़े की बात
सही है। आप कह
रहे हैं कि
कोई
गिरफ्तारी
नहीं हुई है,
सेम डे छह
गिरफ्तारियां
हुई हैं
जिसमें हमारा
पार्षद भी
शामिल है। अगर
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
हरिमोहन
जी तो क्या
और भी कोई
उतरकर आ जाते
अगर मैं चाहता
तो एक भी
गिरफ्तारी
नहीं होती।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
और इसलिए
चेयरमैन के
पति को आपने
बचा रखा है,
वहां के
पार्षद को
आपने बचा रखा
है, आप गिरफ्तारी
नहीं होने
देना चाहते और
आप अपने मिशन
में कामयाब
हैं आपने खुद
ने कह दिया।
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं
आवासीय): आप
अपने गिरेबान
में झांककर
देखो।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, इन्होंने
खुद ने स्वीकार
कर लिया कि
मैं चाहता तो
मैं वहां राज
करता था, सब
कुछ कर सकता
था इन्होंने
ही नगरपालिका
के वर्तमान
चेयरमैन के पति
को और जो
पूर्व
चेयरमैन हैं
इन्होंने
गिरफ्तार
नहीं होने
दिया और सदस्य
को गिरफ्तार
नहीं होने दिया
जो इनकी
पार्टी से
संबंधित हैं।
यह वहां के मंत्री
हैं और इस
प्रकार के कारनामें यहां
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं
आवासीय):
हरिमोहन जी,
आप अपने गिरेबान
में झांकरकर
देखो।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
जहां 307 के जघन्य
अपराध के
मुकदमें हैं,
जहां खुले आम
गोलियां चलाई
जा रही हों उन
माफियाओं का
यह समर्थन
करते हैं ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
हिण्डौली से
आने वाले
माननीय सदस्य
ने बात कह दी
...(व्यवधान)
अपना प्रश्न
उठा दिया।
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं
आवासीय):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
माननीय
सदस्य अपने
गिरेबान में
झांक कर देखें
बूंदी का मुकदमा
है 157/6 उसमें
आपके पुत्र ने
क्या क्या
किया है, यह
पूरी बात मैं
बताना नहीं
चाहता वरना
जितनी गरमी से
बोलते हो सारी
गर्मी हवा निकल
जाएगी सारी।
श्री
अध्यक्ष: जब
वह आपकी बात
बता सकते हैं
तो आप इनकी
बात क्यों
नहीं बता सकते
?
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आप क्यों
नहीं बताते,
मैं यही कहता
हूं आप क्यों
नहीं बताते,
यह घोड़ा और
यह मैदान।
श्री
अध्यक्ष:
चलिए, चलिए
आगे चलिए ।
श्री संयम
लोढ़ा ।
श्री
हरिमोहन शर्मा
(हिण्डौली):
नहीं बताते,
क्योयं नहीं
बताते आप बताओ
ना।
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं
आवासीय): इनके
पुत्र के
खिलाफ 420, 467,468,471,120 में
मुकदमा दर्ज
है इसलिए यह
अनर्गल आरोप
लगा रहे हैं
...(व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
जी हां वह
मुकदमा दर्ज
है।
श्री
कैलाश
त्रिवेदी
(सहाड़ा): गृह
मंत्री जी,
आपके ऊपर
माननीय
मंत्री जी ने
सवालिया
निशान लगा दिया
है।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
जी हां, वह
मुकदमा दर्ज
है जो
राजनीतिक द्वेष
के कारण चलाया
गया है और
कोर्ट ने,
अदालत ने तत्काल ...(व्यवधान)
बेन लगने के
बाद भी अदालत
ने कहा कोई मुकदमा
नहीं बनता और
उसमें सब जो
आदमी थे उनको
एंटीसिपेटरी
बेल विदिन 24
आवर्स कर
दिया। यह आपका
राजनीतिक
षडयन्त्र है
और मैं इससे
दबने वाला
नहीं हूं अगर
मैं बताऊंगा
तो ए सी बी में
नंगा कर दूंगा
...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
माननीय सदस्य,
हिण्डौली से
आने वाले
माननीय सदस्य
....
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आपकी
स्थितियां क्या
हैं उसमें
नंगा कर
दूंगा, आपने
भ्रष्टाचार
कर रखा है
उसमें नंगा कर
दूंगा आप अपने
गिरेबान में
झांककर देखें
मंत्री जी
आपका चेहरा क्या
है और पूरे
राजस्थान की
जनता आपको क्या
देख रही है ...(व्यवधान)
करोड़ों रुपए
का घपला करने
वाले मंत्री
अगर इस प्रकार
की बात करते
हैं तो शर्म
की बात है ।
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं
आवासीय): आप
गलत बात कर
रहे हो ...(व्यवधान)
मैंने भ्रष्टाचार
किया है तो
सामने लाओ ...(व्यवधान)
इनके पुत्र के
ऊपर मामला है,
इनकी सम्पत्ति
का है ।
डा. ओ.
पी. महेन्द्रा
(केसरीसिंहपुर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
बिना
तथ्यों के
आधार पर किसी
प्रकार का कोई
आरोप नहीं
लगाया जा सकता
माननीय
मंत्री जी पर
आरोप लगाया है
कोई तथ्य है
तो पेश करें,
बिना तथ्यों
के आधार पर
कोई आरोप नहीं
लगाया जा
सकता।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
सारा राजस्थान
जानता है 90 बी
में और जे डी ए
में क्या हो
रहा है, खुला
भ्रष्टाचार
का नक्शा है
पूरा राजस्थान
जानता है।
श्री
अध्यक्ष:
सारा राजस्थान
जानता है आप
बहुत जोर से
बोलते हो।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
पूरे राजस्थान
की जनता जानती
है।
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं
आवासीय): 90 बी
में हो रहा है
तो कुछ बताओ
तो सही कि ये हो
रहा है ...(व्यवधान)
एक
माननीय सदस्य
: यह आरोप सदन
की कार्यवाही
से निकाला
जाए।
श्री
अध्यक्ष: आप
स्थान ग्रहण
कर लें,
माननीय सदस्य
मंत्री जी
खड़े हैं ।
लूणी से आने
वाले माननीय
सदस्य, स्थान
ग्रहण करें।
vns/usc/12.00/1j/12.3.2007
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): एक मिनट
का निवेदन है
मेरा ... (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: एक
मिनट की बात
नहीं है। आपका
जरूरी, आवश्यक
नहीं है कि आप
बोलें। नो-नो।
बैठ जाएं। अब
आप स्थान
ग्रहण करें।
प्लीज स्थान
ग्रहण करें।
आप भी बैठें।
नहीं-नहीं,
बैठें आप।
मंत्री खड़े
हैं ... (व्यवधान)
मंत्री खड़े
हैं।
मंत्रीजी कुछ
कहना चाह रहे
हैं। लूणी से
आने वाले
माननीय सदस्य,
आवश्यक नहीं
है कि हर बात
पर आप बोलें। It is not necessary आप
चाहे जब खड़े
हो जाते हैं।
माननीय
मंत्रीजी।
श्री
रामचन्द्र
सराधना
(जमवारामगढ़):
मंत्रीजी को
बोलने दो। ... (व्यवधान)
श्री
उपाध्यक्ष:
झूठे लगा। इस
सदन में झूठे
भी लगते हैं
और सच्चे भी
लगते हैं।
झूठे लगते हैं
तो आपको मौका
है पर्सनल एक्सप्लेनेशन
का। आप अपना
पर्सनल एक्सप्लेनेशन
दे दें। क्या
बात है ?
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
मैं
सोचता हूं कि
जिस घटना को
लेकर हिण्डौली
से आने वाले
माननीय सदस्य
बहुत उत्तेजित
हो रहे थे सच
यह है कि
जिनको मोटर साइकिल
के पीछे टक्कर
लगायी सांसी
समाज के थे।
उन्होंने दो
मुकदमे दर्ज
कराये 25/7, 27/7,
दोनों में वही
मुलजिम थे और
उसमें उसी दिन
श्री
ओमप्रकाश,
श्री सोमनाथ,
श्री
ओमप्रकाश भील,
श्री लड्डू
लाल, श्री
बबलू चालत और
भगवती प्रसाद
को सेम डे
गिरफ्तार कर
लिया। अब यह
दोनों केस में
मुलजिम हैं 25/7
में भी और 27/7 में
भी। इन्होंने
भी अपनी तरु
से एक मुकदमा
दर्ज कराया है
26/7 जिसमें तफतीश
जारी है। मैं
सोचता हूं
जिन्होंने
भी अपराध किया
है उनको उसी
दिन पकड़ा गया
है। यह केवल
राजनैतिक
आधार बनाकर के
आरोप-प्रत्यारोप
करना, मैं
सोचता हूं
उचित नहीं है
और मैं बहुत
दावे के साथ
और बड़ी
ईमानदारी से
कह रहा हूं कि
इस घटना के
बारे में
मंत्रीजी ने
मुझे कभी
टेलीफोन भी
नहीं किया कि
ऐसी कोई घटना
हुई है। कभी टेलीफोन
पर चर्चा ही
नहीं हुई ... (व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आपको टेलीफोन
करने की कोई
जरूरत नहीं है
वह खुद ही
सक्षम हैं कि
मैं सबको
चाहता तो सबको
ही बचा लेता।
आपके टेलीफोन
की आवश्यकता
नहीं है ... (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आप
बीच में न
बोलें ... (व्यवधान)
माननीय सदस्य,
बीच में न
बोलें ... (व्यवधान)
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं
आवासीय): सदन
में कहा है ... (व्यवधान)
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): कोई
मतलब नहीं है।
किसी भी आदमी
ने मुझे नहीं
कहा। किसी भी
व्यक्ति ने
नहीं किया।
वहां के किसी
कार्यकर्ता
ने टेलीफोन
नहीं किया ... (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आप
चाहे जब खड़े
होते हैं और
इधर भी देख रहे
हैं आप ... (व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आप तो इन सब
मुलजिमान को
कब तक
गिरफ्तार कर
लोगे यह बताओ ...
(व्यवधान)
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): यह
झूठे आरोप
लगाने का कोई मायने
नहीं है ... (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
हिण्डौली से
आने वाले
माननीय सदस्य,
बीच-बीच में
खड़े होते हैं
आप ... (व्यवधान)
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं
आवासीय): झूठा
आरोप लगाने से
क्या मतलब है
? सुनी सुनायी
बात कर रहे हो
आप। आप जाकर
आए हो क्या
वहां ? छबड़ा
बंद हुआ है,
छबड़ा कोई आप
खुद साल भर रह
कर बंद करा के
देख लो ... (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
माननीय
मंत्रीजी, ... (व्यवधान)
आप भी खड़े हो
गये ... (व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
यह छबड़ा बंद
के सारे अखबार
भरे पड़े हैं।
छबड़ा बंद के
सारे अख़बार
भरे पड़े हैं।
अखबार बताऊं।
सारे अखबार
भरे पड़े हैं
छबड़ा बंद के ...
(व्यवधान)
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं
आवासीय): इन
अखबारों से क्या
होता है। यह अखबारों
के आधार पर ही
बोल रहे हो क्या
? ... (व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
ऐसे मुलजिमान
को संरक्षण
देने से इस प्रकार
से काम चलने
वाला नहीं है ...
(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
हिण्डौली से
आने वाले
माननीय सदस्य,
आपको दो मिनट
का समय दिया
था और दो मिनट
के बजाय आधा
घण्टा ले
लिया आपने ... (व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
नहीं लेंगे
साहब।
श्री
अध्यक्ष: क्या
बात है ? यह गलत
बात है। श्री
संयम लोढ़ा।
श्री
रामनारायण
मीणा (नैनवां):
मैं तो अपनी
बात एक ही
मिनट में
निवेदन करना
चाहता हूं आप
इजाजत दे दें।
हिण्डौली से
आने वालों ने
तो ... (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
आपको पुलिस की
डिमाण्ड के
ऊपर पूरा समय
मिलेगा सबसे
पहले बोलिये।
अटक नहीं
आयेगी ... (व्यवधान)
श्री
रामनारायण
मीणा (नैनवां):
वह मेरी
पार्टी ने कह
दिया कि पुलिस
की डिमाण्ड
में नहीं
बोलेंगे।
पार्टी ने कह
दिया कि पुलिस
की डिमाण्ड
पर नहीं
बोलेंगे। मैं
तो आपसे
अनुरोध कर रहा
हूं ... (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
पुलिस की
डिमाण्ड
आयेगी और
पुलिस की डिमाण्ड
एक जनरल डिस्कशन
भी है। उसमें
भी चाहो तो आप
कह सकते हो।
पुलिस की
डिमाण्ड पर
कहना अपनी बात
... (व्यवधान)
श्री
रामनारायण
मीणा (नैनवां):
आप स्वयं
मौका दोगे तो
ठीक है मेरी
पार्टी वालों
ने तो टाइम ही
बांट दिया
अलग-अलग सदस्यों
को। उसमें हम
लोगों को कहा
है ... (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: ऐसे
कोई ठेका है
क्या आप ... (व्यवधान)
आप जनरल डिस्कशन
पर तो बहस
करना नहीं
चाहते हो और
इस जीरो आवर
को ले जाना
चाहते हो चार
बजे तक
बढ़वाना चाहते
हो कि आप
बोलते रहो और
जनरल डिस्कशन
जो जरूरी है
उस पर आप
बोलना नहीं
चाहते हो ... (व्यवधान)
श्री
रामनारायण
मीणा (नैनवां):
एक मिनट की
इजाजत चाहता
हूं ... (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: क्या
बात हुई यह ?
नहीं अब गलत
बात है। संयम
लोढ़ा।
श्री
रामनारायण
मीणा (नैनवां):
इनके बाद मुझे
मौका दे दें ...
(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
आप
पार्टी के उप
नेता भी हैं
और पार्टी की
शिकायत यहां
कर रहे हैं।
यह संसदीय
पार्टी की
शिकायत यहां
सदन में अध्यक्ष
महोदय के
मार्फत कर रहे
हैं इससे ज्यादा
शर्म की बात
नहीं हो सकती ...
(व्यवधान)
श्री
रामनारायण मीणा
(नैनवां): आप ही
से ज्यादा ...
(व्यवधान)
होती है। आप
क्या कर रहे
हो ? मैं तो सही
कह रहा हूं
यहां सदन की जानकारी
... (व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): आपने
कहा कि मेरी
पार्टी मेरी
सुन नहीं रही
है। आपको उप
नेता ही नहीं
रहना चाहिये ... (व्यवधान)
श्री
रामनारायण
मीणा (नैनवां):
नहीं, सुन
नहीं रही है।
आप झूठ बोल
रहे हो। असत्य
कथन कर रहे हो ...
(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): अभी
आपने कहा है
समय बांट दिया
है, मेरे लिये
समय नहीं है।
अभी कहा आपने ...
(व्यवधान)
श्री
रामनारायण
मीणा (नैनवां):
मेरी पार्टी
ने सबको समय
बांट दिया है।
आप सिफारिश कर
दो ना। मैं तो भ्रष्टाचार
पर बोलना
चाहता हूं। आप
क्या कर रहे
हो यह कहना
चाहता हूं ... (व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): आप
भ्रष्टाचार
पर बोलो, कोई
भी बोलो। फिर
यह अटैची
निकाल-निकालकर
वापस क्यों
रख रहे हैं ? ब्लेकमेल
करना चाहते
हैं क्या ? ... (व्यवधान)
श्री
रामनारायण
मीणा (नैनवां):
आप पर्सनल एक्सप्लेनेशन
करने की
स्थिति में
नहीं हैं ... (व्यवधान)
आप कृपा है तो
करो ... (व्यवधान)
(समय: )
(श्री
रामनारायण
विश्नोई,
उपाध्यक्ष,
पदासीन)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
रात साक्षात्कार
में तो बहुत
दब कर बोल रहे
थे आप और यहां
बहुत कड़क बोल
रहे थे। रात
आपको जो
इंटरव्यू था
ई टी वी में
वहां तो बहुत
दबे हुए थे।
बहुत दब-दब कर
बोल रहे थे।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): क्या
दब-दब कर बोल
रहा था ? किस
बात से दब रहा
था ? किस बात से
दब रहा था ? ... (व्यवधान)
अब यह हरिमोहन
जी उस अटैची
को कभी बाहर निकाल
रहे हैं, कभी
नीचे रखते
हैं। ब्लेकमेल
कर रहे हैं क्या
? मेरी समझ में
नहीं आ रहा
है।
श्री
उपाध्यक्ष:
छोड़ों उस बात
को आप। श्री
संयम लोढ़ा। ...
(व्यवधान)
माननीय सदस्य
... (व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): आपको
किसी ने रोका
हुआ है ...
श्री
रामनारायण
मीणा (नैनवां):
आप तो पहलवान
नजर आते हो,
डरते क्यों
हो ... (व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): यह
विधान सभा तो
प्रिविलेज है
इनको ... (व्यवधान)
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): आप
सदन में आ गये
सबको पता चल
गया ... (व्यवधान)
श्री
रामनारायण
मीणा (नैनवां):
आप तो पहलवान
नजर आते हो
डरते क्यों
हो ... (व्यवधान)
पीपाड़
नगरपालिका के कार्यालय
सहायक द्वारा आत्महत्या
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय,
आपकी आज्ञा से
मैं निवेदन
करना चाहता
हूं कि 10 मार्च
को जोधपुर
जिले का
पीपाड़ शहर,
कस्बा बंद
रहा। तमाम
दुकानें वहां
की बंद रहीं
और इस सरकार
के खिलाफ वहां
के नागरिकों
ने अपनी
नाराजगी
जाहिर की।
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय,
मुरलीधर
पुरोहित जो
पीपाड़ नगर
पालिका के एक कर्तव्य
निष्ठ
कार्यालय
सहायक थे,
इनको तत्कालीन
भैरोंसिंह जी
शेखावत की
सरकार ने 15 अगस्त,
1996 को उनकी
बेहतरीन
सेवाओं के
लिये सम्मानित
किया था। इतना
ही नहीं मुरलीधर
जी पुरोहित को
2001 में भारत के
राष्ट्रपति
के रजत पदक से
भी सम्मानित
किया गया।
पिछले महीने
की आखिरी
तारीख को अपनी
सालों साल की
कर्तव्य
परायण सेवाओं
के बाद,
कर्तव्य
निष्ठ
सेवाओं के वह
सेवा निवृत्त
हो गये। सेवा
निवृत्त
होने के बाद
पीपाड़ शहर की
भारतीय जनता
पार्टी के पालिका
अध्यक्ष के
बेटे उन पर
लगातार दबाव
बनाये हुए थे।
उनका उत्पीड़न
कर रहे थे।
नगर पालिका की
आलमारियों से कई
पत्रावलियां
भारतीय जनता
पार्टी के उन
नेताओं ने
गायब कर दी और
उस सबको लेकर
मुरलीधर जी
पुरोहित का
लगातार उत्पीड़न
कर रहे थे। उस
उत्पीड़न से
परेशान होकर,
व्यथित होकर
राष्ट्रपति
पदक से सम्मानित
उस कार्यालय
सहायक
मुरलीधर
पुरोहित ने
अपने गले में
फांसी का फंदा
लगाकर आत्महत्या
कर ली। उन्होंने
मरने से पहले
एक डैथ नोट
छोड़ा जिसमें
भारतीय जनता
पार्टी के इन
नेताओं का
जिक्र किया
गया है। आज
वहां की जनता
आक्रोशित है
लगातार वहां के
पुलिस
प्रशासन से।
मुरलीधर जी
पुरोहित के परिवार
वालों ने,
पीपाड़ शहर के
नागरिकों ने,
राजनैतिक
संगठनों ने
बराबर इस बात
की फरियाद की
कि मुरलीधर जी
पुरोहित की
मृत्यु के
लिये जिम्मेदार
लोगों को
गिरफ्तार
किया जाए। माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, 306 के
अन्दर
मुकदमा दर्ज
किया गया है 7
तारीख को और
उसके बाद
लगातार वहां
के लोगों का
संघर्ष चल रहा
है। प्रदर्शन
चल रहे हैं।
पीपाड़ शहर
बंद किया गया
है और अब वहां
संघर्ष समिति
का गठन भी
किया गया है
जो उस मसले को
लेकर आन्दोलन
तेज करेगी और
जो वहां पर
पुलिस
प्रशासन राज
सत्ता के
दवाब में
घुटने टेक कर
बैठा हुआ है
अन्याय के
खिलाफ वहां के
लोग संघर्षरत
हैं लेकिन अपराधियों
को गिरफ्तार
करने के बजाय
जोधपुर जिले
का पुलिस
प्रशासन जयपुर
में बैठे हुए
नेताओं के
इशारे पर,
सरकार के इशारे
पर अपराधियों
को गिरफ्तार
नहीं कर रहा
है। माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय,
अत्यन्त
खेद का विषय
है कि वहां से
निर्वाचित
होकर आने वाले
इस सरकार के
राजस्व
मंत्री
रामनारायण जी
डूडी का
अपराधियों को संरक्षण
प्राप्त है ...
(व्यवधान)
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य
... (व्यवधान)
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): और
इनकी वजह से
वहां के पुलिस
प्रशासन की
हिम्मत नहीं
पड़ रही है कि
भारतीय जनता
पार्टी के उस
पालिका अध्यक्ष
के बेटे को ... (व्यवधान)
श्री
सांगसिंह
भाटी
(जैसलमेर):
आपके पास क्या
सबूत है आरोप
लगाने का।
कारण क्या है
? आपके पास कोई
सबूत है जो
आरोप लगा रहे
हो ... (व्यवधान)
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
आप बीच में
नहीं ... (व्यवधान)
आप बैठे-बैठे ...
(व्यवधान)
श्री
सांगसिंह
भाटी
(जैसलमेर): और
गलत आरोप
लगाना ... (व्यवधान)
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर):
यहां आरोप
नियम के आधार
पर लगायें ... (व्यवधान)
श्री
सांगसिंह
भाटी
(जैसलमेर): क्या
सबूत है आरोप
लगा रहे हो आप ?
आपने सिरोही
में कितने
गुण्डे पाल
रखे हैं ... (व्यवधान)
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर): यह
आरोप लगा रहे
हैं, नियम के
आधार पर
लगाइये ... (व्यवधान)
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही):
नाकारा के
नाकारा साबित
हो रहे हैं ... (व्यवधान)
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर): इस
तरीके से बैठे
हुए कैसे भी
बोल दिया कि
रामनारायण जी
डूडी की वजह से
मुलजिमों को
गिरफ्तार
नहीं किया गया
... (व्यवधान)
श्री
बाबूलाल नागर
(दूदू): माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय,
सुसाइड नोट
में स्पष्ट
लिखा हुआ है
एक अधिकारी को
... (व्यवधान)
ssy/akt 12.03.2007 12.30 1k
श्री
भंवरलाल
शर्मा
(सरदारशहर):
उपाध्यक्ष
महोदय, एक
अधिकारी ने
दु:खी होकर के
आत्महत्या
की है ...(व्यवधान)
गृह मंत्री जी
निष्पक्ष
जांच करायें।
श्री
सांगसिंह
भाटी
(जैसलमेर): महत्वपूर्ण
कुर्सी पर
बैठे हुए,
विधायक के
रहते आपने जो
सिरोही में
गुंडे और
बेइमान बैठा
रखें हैं, उसकी
कोई खबर है
आपके पास में
...(व्यवधान)
श्री
भंवरलाल
शर्मा
(सरदारशहर):
आत्महत्या
की है, कोई व्यक्ति
ऐसे आत्महत्या
नहीं करता है
...(व्यवधान)
श्री
सांगसिंह
भाटी
(जैसलमेर):
कितने गुंडे
आपने पाल रखे
हैं यह बतायें
आप तो ...(व्यवधान)
श्री
बाबूलाल नागर
(दूदू): उपाध्यक्ष
महोदय, यह
बहुत बड़ी
नाइंसाफी है
...(व्यवधान)
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
आप बिराजें।
श्री
सांगसिंह
भाटी
(जैसलमेर):
उपाध्यक्ष
महोदय, माननीय
सिरोही से आने
वाले सदस्य
से यह पूछना
चाहता हूं कि
सिरोही में
आपने कितने
गुंडे, बेइमान
पाल रखे हैं
जिनकी कोई सीमा
ही नहीं है ...(व्यवधान)
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
बिराजें।
श्री
भंवरलाल
शर्मा
(सरदारशहर): यह
सिरोही का
प्रश्न नहीं
है, यह
मुरलीधर
पुरोहित का
मामला है ...(व्यवधान)
श्री
सांगसिंह
भाटी
(जैसलमेर): यह
गुंडों का
दादा बैठा है
बीच में ...(व्यवधान)
श्री
भंवरलाल
शर्मा
(सरदारशहर): आप
बता दीजिये,
अगर आप दोषी
नहीं हैं तो
छोडि़ये ...(व्यवधान)
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): मैंने
अगर गुंडे पाल
रखे हैं तो
आपके गृह
मंत्री जी ने
क्या
चूडि़यां
पहनी हुई हैं
क्या ...(व्यवधान)
करें उन पर
कार्यवाही
अगर मैंने
गुंडे पाल रखे
हैं तो ...(व्यवधान)
श्री
सांगसिंह
भाटी
(जैसलमेर): समय
आने दें, वह भी
आपका इलाज हो
जायेगा ...(व्यवधान)
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): गृह
मंत्री जी को
किसने रोका है
...(व्यवधान) दम
आपमें है तो
कुछ ...(व्यवधान)
श्री
सांगसिंह
भाटी
(जैसलमेर): वह
भी इलाज हो
जायेगा सामने
आने दो, कोई
देर नहीं है
...(व्यवधान)
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही):
बोलें, कहां
इलाज करना
चाहते हैं ...(व्यवधान)
अभी तो आपका
इलाज करूंगा
यहां बैठकर के
...(व्यवधान)
श्री
सांगसिंह
भाटी
(जैसलमेर):
अपनी
गिरेहबान में झांकें
फिर दूसरों पर
आरोप लगायें
...(व्यवधान)
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
अपना स्थान
ग्रहण करें
...(व्यवधान)
श्री
सांगसिंह
भाटी
(जैसलमेर):
आपके पास कोई
सबूत है तो
आरोप लगायें
...(व्यवधान)
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर):
सिरोही से आने
वाले माननीय
सदस्य आरोप
लगा रहे हैं
नाम से, इनको
नियमों में आकर
के लगाना
चाहिए। ऐसे ही
अनर्गल जब
चाहे तब किसी
पर नाम लेकर
के आरोप
लगायें यह
तरीका ठीक
नहीं है। यह
व्यवस्था
के विपरीत है
...(व्यवधान)
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
बिराजें ...(व्यवधान)
आप स्थान
ग्रहण कीजिये
...(व्यवधान)
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर): इस
प्रकार का
आरोप यदि इनको
लगाना है तो
नियमों में
आकर के लगायें
...(व्यवधान)
डा.
भंवरलाल
राजपुरोहित
(मकराना):
उपाध्यक्ष
महोदय, माननीय
सदस्य ने यह
कहा है ...(व्यवधान)
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): आप
बचा रहे हैं,
अपराधियों को
बचा रहे हैं
...(व्यवधान)
डा.
भंवरलाल
राजपुरोहित
(मकराना): इनकी
आंखें फूटी
हुई हैं यह
शब्द उन्होंने
...(व्यवधान)
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): आज आप
सत्ता के
घमंड में चूर
हैं ...(व्यवधान)
बैठे हुए हैं,
लेकिन वह जनता
इंतजार कर रही
है आपका ...(व्यवधान)
आज नहीं तो कल
यह घमंड
चूर-चूर कर
देगी। आज आप
सत्ता के नशे
में हैं ...(व्यवधान)
श्री
रामनारायण
डूडी (राजस्व
मंत्री): हां,
मैं जानता हूं
आप सब लोगों
को ...(व्यवधान)
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही):
लोगों की
भावनाओं की
कद्र नहीं कर
रहे हैं, सुन
नहीं रहे हैं
...(व्यवधान)
डा.
भंवरलाल
राजपुरोहित
(मकराना): सदन
का इस तरह से
उपयोग नहीं
किया जा सकता
है ...(व्यवधान)
श्री
उपाध्यक्ष:
स्थान ग्रहण
कीजिये।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): इन्हांने
यह कहा है कि
आंखें फूटी
हुई हैं ...(व्यवधान)
इस तरह से
आरोप लगाये जा
रहे हैं ...(व्यवधान)
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही):
उपाध्यक्ष
महोदय, यह
केवल अकेली
घटना नहीं है
...(व्यवधान)
डा.
भंवरलाल
राजपुरोहित
(मकराना): इनको
माफी मांगनी
चाहिए ...(व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): उपाध्यक्ष
महोदय, मेरा
पाइंट ऑफ
आर्डर है ...(व्यवधान)
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर):
उपाध्यक्ष
महोदय, यह
चाहें जिस पर
आरोप लगा दें,
यह ठीक नहीं
है, यह इनका
अभ्यास बना
हुआ है ...(व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): I am on a point of order.
श्री
उपाध्यक्ष:
स्थान ग्रहण
करें ...(व्यवधान)
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर): जब
चाहें किसी के
खिलाफ आरोप
लगा दें, किसी
विधायक के
खिलाफ आरोप
लगा दें, कभी
मंत्री के खिलाफ
आरोप लगा दें।
यह ठीक नहीं
है ...(व्यवधान)
यह नियमों में
आने चाहिंए,
यह नियमों की
पालना नहीं कर
रहे हैं ...(व्यवधान)
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): या तो
सूचना दें,
नहीं तो माफी
मांगे ...(व्यवधान)
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर):
नियमों की
पालना करना
सीखिये, ऐसे
अनर्गल आरोप
कैसे लगा रहे
हैं ...(व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): उपाध्यक्ष
महोदय, मेरा
व्यवस्था
का प्रश्न है
...(व्यवधान)
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): नहीं तो
माफी मांगे ...(व्यवधान)
श्री
सांगसिंह
भाटी
(जैसलमेर):
उपाध्यक्ष
महोदय, सिरोही
से आने वाले
माननीय सदस्य
की जो पीड़ा
है वह यह है कि
जैसलमेर के
अंदर आज के
तीन साल पहले
रिसोर्ट
बनाने के लिए
वहां पधारे
थे, वह
रिसोर्ट की
जमीन
अलॉटमेंट
नहीं हुई, वह
पीड़ा है
मंत्री महोदय के
खिलाफ ...(व्यवधान)
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
बिराजें ...(व्यवधान)
श्री
सांगसिंह
भाटी
(जैसलमेर):
बाकी कोई
पीड़ा नहीं है
इसलिए आरोप
लगा रहे हैं
मंत्री महोदय
के ऊपर ...(व्यवधान)
श्री
उपाध्यक्ष:
अपना स्थान
ग्रहण करें
...(व्यवधान)
श्री
सांगसिंह
भाटी
(जैसलमेर):
उपाध्यक्ष
महोदय, यह
कहना कि गृह
मंत्री की
आंखें फूटी
हुई है, यह लब्ज
कहना, सदन में
माफी मांगे,
सदन से यह व्यक्ति
...(व्यवधान)
श्री
उपाध्यक्ष:
मंत्री महोदय
जवाब दे रहे
हैं, आप सुनें ...(व्यवधान)
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही):
मैंने आंखें
फूटी हुई नहीं
कहा है, आंखें
तो सलामत रहें
उनकी ...(व्यवधान)
श्री
सांगसिंह
भाटी
(जैसलमेर):
आपने यह कहा
है कि आंखें
फूटी हुई हैं
गृह मंत्री
की, आपने यह
कहा है ...(व्यवधान)
सदन से माफी
मांगनी चाहिए
...(व्यवधान)
सदन में ऐसे
शब्द कहना
हमारे गृह
मंत्री जी के
लिए, सरे आम
कहना है इन्होंने
...(व्यवधान)
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही):
उपाध्यक्ष
महोदय, यह
पीपाड़ की
घटना एक नहीं
हुई है, भारतीय
जनता पार्टी
के
कार्यकर्ता
जिस तरह से
बेलगाम होकर
के राजस्थान
में नौकरशाही
का उत्पीड़न
कर रहे हैं, यह
आबू रोड की
घटना आप
लीजिये ...(व्यवधान)
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
आप बिराजें
...(व्यवधान)
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): जो
अपराध भारतीय
जनता पार्टी
के
कार्यकर्ता
कर रहे हैं
उनको कैसे संरक्षण
दिया जाये।
उनको कैसे
बचाया जाये और
पूरी सरकार इस
बात में लगी
हुई है। यह एक
मामला नहीं
है।
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
आप बिराजें।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): अपनी स्वार्थ
पूर्ति नहीं
होने के कारण,
पीपाड़ में सात
बार चुनाव
हारने से इनके
कार्यकर्ताओं
का ...(व्यवधान)
इससे कुंठित
होकर के
मंत्री के ऊपर
झूंठा आरोप
लगा रहे हैं।
मंत्री जी पर
प्रभाव डालने
के लिए ...(व्यवधान)
कोई प्रभाव
में आने वाले
नहीं हैं। इनके
गुंडों से
पीपाड़ इनके
कब्जे में
आने वाला नहीं
है।
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
बिराजें।
माननीय सदस्य,
आप स्थान
ग्रहण
कीजिये।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही):
उपाध्यक्ष
महोदय, यह
पीपाड़ की
घटना एक नहीं
है। भारतीय
जनता पार्टी
के
कार्यकर्ताओं
द्वारा जो
अधिकारियों
का उत्पीड़न
किया जा रहा
है, आबू रोड
में जूनियर स्पेशलिस्ट
डॉ. अग्रवाल
जो आरएसएस का
कार्यकर्ता
था उसको आत्महत्या
करनी पड़ी।
श्री
उपाध्यक्ष:
अंकित नहीं
होगा, माननीय
सदस्य ...(व्यवधान)
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
अंकित नहीं
होगा ...(व्यवधान)
अंकित नहीं हो
रहा है।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): 000
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
कृपया स्थान
ग्रहण
कीजिये।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): 000
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
पहले बात
सुनिये आप।
माननीय
सिरोही से आने
वाले माननीय
सदस्य ...(व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): 000
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): 000
श्री
रामनारायण
डूडी (राजस्व
मंत्री): यह
मेरा
निर्वाचन
क्षेत्र है,
इस प्रकार से
कैसे नाम ले
रहे हैं ...(व्यवधान)
आप थोड़ी बहुत
तो शर्म करो।
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
बिराजें।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): 000
श्री
सांगसिंह
भाटी
(जैसलमेर): 000
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
आपकी कोई बात
अंकित नहीं हो
रही है ...(व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
अंकित नहीं
होने दिया
मैंने ...(व्यवधान)
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): 000
श्री
नरपत सिंह
राजवी (उद्योग
मंत्री):
श्रीमती
ममता शर्मा
(बूंदी): 000
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
सदन का समय ...(व्यवधान)
श्री
सांगसिंह
भाटी
(जैसलमेर): 000
श्री
बाबूलाल नागर
(दूदू): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
आप स्थान
ग्रहण करिये
माननीय सदस्य।
आप किसी
परमिशन से बोल
रहे हैं ...(व्यवधान)
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): 000
श्री
सांगसिंह
भाटी
(जैसलमेर): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
बीच में नहीं
बोलें माननीय
सदस्य।
श्री
नरपत सिंह
राजवी (उद्योग
मंत्री): 000
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): 000
जयगोविन्द/अरुण/12.3.7/12.40/1l
श्री
नरपत सिंह
राजवी (उद्योग
मंत्री): 000
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): 000
श्री
रामनारायण
डूडी (राजस्व
मंत्री): 000
श्री
भंवरलाल
शर्मा
(सरदारशहर): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
बिना परमिशन
के जो बोल रहे
हैं उनकी बात
अंकित न हो।
सिरोही से आने
वाले माननीय
सदस्य, आपको
दो मिनट स्थगन
प्रस्ताव के
माध्यम से
समय दिया गया
था और आपने
पीपाड़ के
मुद्दे के साथ
में कोई आबू
का है, कोई
कहीं का है, इस
तरह से फालतू
का समय बरबाद
किया है। ...(व्यवधान)...
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
अंकित नहीं
होगा।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): 000
श्री
सांगसिंह
भाटी
(जैसलमेर): 000
श्री
बद्रीलाल जाट
(कपासन): 000
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): 000
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): 000
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): 000
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): 000
श्री
रामनारायण
डूडी (राजस्व
मंत्री):
उपाध्यक्ष
महोदय, पहले
मुझे मौका
दिया जाए क्योंकि
इन्होंने
पर्ची के माध्यम
से पीपाड़ की
घटना के सम्बन्ध
में मेरे ऊपर
आरोप लगाए
हैं, मेरा नाम
लिया है।
उपाध्यक्ष
महोदय, यह सही
है कि पीपाड़
सिटी मेरे कांस्टीट्यूएंसी
में है और इस
संदर्भ में आप
मुझे इस बात
के लिए नामजद
करना चाहते
हैं।
उपाध्यक्ष
महोदय, इनके
टीस दूसरी है,
मेरे लिए कह
रहे हैं कि
संरक्षण दे
रहे हैं। मैं
कहता हूं कि
राजस्थान की
कोई भी एजेंसी
उस मामले के
अंदर निष्पक्ष
जांच करे और
दूध का दूध और
पानी का पानी
करे। मैं यही
चाहता हूं
लेकिन जिस
प्रकार से यह
कह रहे हैं
पीपाड़ के अंदर
राजनीतिक
दबाव होने के
कारण वहां
पुलिस प्रशासन
दबा हुआ है और
मेरा इसमें
नाम ले रहे
हैं। संयम
लोढ़ाजी, मैं
कतई यह नहीं
चाहता हूं
लेकिन अगर यह
आप लोग जिस
प्रकार की
राजनीति
खेलना चाहते
हैं, आप जिस
प्रकार की बात
कहना चाहते
हैंवह नहीं
होगा।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): 000...(व्यवधान)...
श्री
उपाध्यक्ष:
स्पष्टीकरण
दे दिया आपने।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): 000
श्री
सांगसिंह
भाटी (जैसलमेर):
000
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): 000
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य
आप बैठो। ...(व्यवधान)...
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): 000
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): 000
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय
मंत्रीजी ने
स्पष्ट कर
दिया।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): 000
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय
मंत्रीजी,
विराजो।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
गृह मंत्रीजी
स्पष्ट कर
देंगे। ...(व्यवधान)...
श्री
बाबूलाल नागर
(दूदू): 000
श्री
रामचन्द्र
सराधना
(जमवारामगढ़): 000
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): 000
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
बिलकुल स्पष्ट
शब्दों में
कह दिया न। ...(व्यवधान)...
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री):
उपाध्यक्ष
महोदय,
निश्चित रूप
से मुरलीधर की
आत्महत्या
हुई। इसमें
कोई दो राय
नहीं। 28 तारीख
को उसका
रिटायरमेंट
हुआ था, दो को,
यह घटना सात
तारीख की है,
रस्सी पर लटक
कर उनकी डेथ
हुई। हमने
तुरन्त
पुलिस ने उनकी
एफ एस एल जांच
के लिए विसरा
भी दिया और
पोस्टमार्टम
रिपोर्ट आई
उसमें एक तो
यह था कि
हैंगिंग के
कारण से मरे
हैं तथा दाग देकर
वापस लौटे तो
उसके लड़के को
एक सुसाइड नोट
भी मिला वह
सुसाइड नोट भी
पुलिस ने अपने
कब्जे में
लिया। यह 7
तारीख की बात
है, 8 तारीख को
मुझे इसमें
वहां के महेन्द्र
कच्छावा कोई
मण्डल अध्यक्ष
है उन्होंने
मुझे
टेलिफोनिक
कहा कि चूंकि
यह केस सारी
जनता की भावना
उद्वेलित कर
रहा है इसमें
कहीं किसी
लेवल पर कोई
गड़बड़ न हो
इसके लिए आप इसकी
कोई पुख्ता
व्यवस्था
करो। मैं
सोचता हूं कि
रेड्डी, आई जी,
जोधपुर अपनी
ईमानदारी की
दृष्टि से
राजस्थान
में नम्बर वन
पर आते हैं।
मैंने तुरन्त
9 तारीख के दिन
ही यह जांच आई
जी, रेड्डी को
व्यक्तिगत
रूप से दे दी
कि आप इसकी
सही जांच करें
और इसकी हैण्डराइटिंग
के लिए जो एफ
एस एल को भेजा
है तुरन्त
इसकी रिपोर्ट
मंगवाकर
इसमें जो भी
मुलजिम हो,
दोषी हो, जो भी
हो, यह जरूर है
कि उसने
सुसाइड नोट
में दो लोगों
का नाम लिखा
है, इसमें कोई
दो राय नहीं
पर सुसाइड नोट
उनका है यह तो
कम से कम
वेरीफिकेशन
हो जाए, बिना
वेरीफिकेशन
हुए अगर हम
किसी के साथ
करेंगे तो यह
न्याय नहीं
होगा।
मैं
आपको और सदन
को विश्वास
दिलाता हूं कि
जोर से बोलने
से समस्या का
समाधान नहीं
होगा जो भी
दोषी होगा वह
निश्चित रूप
से दण्ड
पाएगा उसके
लिए मैंने
पहले से ही
पुख्ता व्यवस्था
की है। मैंने
किसी के भरोसे
या आपके यहां उठाने
के बाद व्यवस्था
नहीं की है।
मैंने घटना के
दूसरे दिन ही
केवल
टेलिफोनिक
सूचना मिलने
के बाद 10 तारीख
को बंद हुआ,
मैंने यह सारा
काम 9 तारीख को
कर लिया। मैं
आपको और सदन
को विश्वास
दिलाता हूं कि
अगर इसमें
किसी का भी
दोष निकला, वह
सज़ा पाएगा,
इसमें हल्ला
करने, चिल्लाने
की इतनी आवश्यकता
क्या है?
आरोप-प्रत्यारोप
लगाकर आप यह
दबाकर मुझसे
कोई जांच करवाना
चाहेंगे तो
मरे ही नहीं
करूंगा इस बात
का सोच लेना,
जो करूंगा वह
सही करूंगा और
सही करने के
लिए मेरा धर्म
है उसके
अनुसार मैं
निश्चित रूप
से करूंगा, आप
निश्चिंत
रहें। न कोई
राजनीतिक
दबाव है, न
किसी का कुछ
है। वास्तव
में उसने
हैंगिंग की है
और सवेरे उससे
दो लोग उसके
घर मिलने गए
हैं, जैसा
उसके लड़के ने
एफ आई आर में
लिखा है, उन सब
चीजों को देख
रहे हैं और
इसके लिए इतने
सीनियर
अधिकारी को
दिया इसीलिए
है कि इसमें
किसी प्रकार
की कोई गड़बड़
न हो।
Gpc/alt/12032007/1250/1m
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): होम मिनिस्टर साहब, आप सात्विक, महान मंत्री होने के बाद भी धमकी देते हो, बहुत तगड़ी धमकी दी है।
श्री गुलाब चन्द कटारिया (गृह मंत्री): धमकी नहीं दी।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आपने कहा इस तरह से शोरगुल करके जांच करवा लोगे क्या? तो आप शोरगुल किये बगैर जांच नहीं करते हो। ..(व्यवधान)..
श्री उपाध्यक्ष: धमकी देने की इनकी आदत नहीं है।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): भलमनसाहत तो इस राज के अंदर कोई है ही नहीं। ..(व्यवधान)..
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): 000
श्री उपाध्यक्ष: धमकी देने की इनकी आदत नहीं है।
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): 000
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): इन्होंने क्या कहा उसको नहीं सुना आपने। इन्होंने कहा इस तरह शोरगुल करके, दबाकर मुझसे जांच नहीं करवा सकते। ऐसा कहने का कोई अधिकार नहीं था।
श्री श्रवणकुमार (पिलानी): 000
श्री भंवरलाल शर्मा (सरदारशहर): 000
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): 000
श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): 000
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): महावीर प्रसाद जी, मर्यादा का तकाजा है कि आप बैठ जाएं।
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): 000
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मर्यादा का तकाजा है कि आप बैठ जाएं। आप मर्यादा का पालन नहीं कर रहे हैं गवर्नमेंट चीफ व्हिप होकर। ..(व्यवधान)..
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): 000
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): क्या कर रहे हैं, आप बोलने ही नहीं दे रहे हैं।
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): 000
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मेरी जिम्मेदारी निभा रहा हूं। मेरी जिम्मेदारी का आपको ज्ञान कराने की जरूरत नहीं है।
श्री उपाध्यक्ष: माननीय सदस्य ..(व्यवधान)..
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): उपाध्यक्ष महोदय, पार्लियामेंट्री अफेयर मिनिस्टर साहब ने पाइंट आफ आर्डर उठाया कि माननीय संयम लोढा ने मंत्री महोदय पर आरोप लगाया है। मंत्री महोदय पर इन्होंने कोई आरोप नहीं लगाया और यह कोई पाइंट आफ आर्डर नहीं बनता। पूनम चंद जी विश्नोई जब अध्यक्ष थे, व्यवस्था दी हुई है कि अगर मंत्री महोदय सामने बैठे हैं तो उनके ऊपर आरोप लगाया जा सकता है और वे तुरंत उसका उत्तर दे सकते हैं। यह व्यवस्था है। आपके चीफ व्हिप साहब को पूछ हो ..(व्यवधान)..
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आप 273 पढ़ लें। अध्यक्षीय व्यवस्था इसके बारे में है, यह नियम और प्रक्रिया की किताब है।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): यह सब पुराने हो गये। इसके बाद में व्यवस्थाएं हो गईं। ..(व्यवधान)..
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): राजस्थान विधान सभा प्रक्रिया और कार्य संचालन संबंधी नियम, इलेवन्थ एडिशन है। यह पुराना कहां हो गया? ..(व्यवधान)..
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): इसके बाद में जो व्यवस्थाएं होती हैं स्पीकर की तरफ से वे भी इतनी ही प्रभावी होती हैं जितना आपका नियम है और उन्होंने व्यवस्था दी थी कि अगर कोई माननीय सदस्य बोलते वक्त पासिंग रेफरेंस में किसी मंत्री के बारे में कुछ एलिगेशन लगाता है तो उसको लगाने का अधिकार है, आप रेफरेंस बुक मंगा लीजिए। ..(व्यवधान)..
श्री उपाध्यक्ष: माननीय नेता प्रतिपक्ष, आपका कहना उचित है, ऐसा कोई चलते के अंदर आक्षेप लगाया जाता है तो मंत्री मौजूद है तो उस आक्षेप का जवाब भी दे सकता है ..(व्यवधान)..
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): पीपाड़ के मामले पर होम मिनिस्टर साहब का वक्तव्य दिला दीजिए। ..(व्यवधान)..
श्री उपाध्यक्ष: मंत्री महोदय ने जवाब दे दिया और भी कुछ कहना चाहें तो मैं उनसे कहूंगा इस बारे में कहें ..(व्यवधान)..
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): पीपाड़ वाले मामले में स्टेटमेंट दिलवा दीजिए।
श्री उपाध्यक्ष: दे दिया स्टेटमेंट ..(व्यवधान)..
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): पीपाड़ वाली दुर्घटना हुई है यह हमारे पूर्व मुख्यमंत्री भैरोंसिंह जी के जमाने में उन्होंने राष्ट्रपति पद दिलवाया था और उसको प्रमाण-पत्र दिया था। उस आदमी को आप लोगों ने मरवा दिया।
श्री उपाध्यक्ष: क्या बात कर रहे हो ..(व्यवधान).. काहे के लिए मरवा दिया? ऐसी क्या बात थी? ..(व्यवधान)..
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): प्रेरित किया है, बाध्य किया है उनको। यह पढ़ लो आप।
श्री उपाध्यक्ष: माननीय नेता प्रतिपक्ष, ऐसी कौनसी ..(व्यवधान)..
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): इनके राज ने मरवा दिया।
श्री उपाध्यक्ष: ऐसा कौनसा राजनैतिक नेता था, क्या बात थी, काहे के लिए मरवा दिया? ..(व्यवधान).. क्या इंट्रेस्ट था मराने में ..(व्यवधान).. मर जाते हैं, पता नहीं किस प्रकार की बात है? ..(व्यवधान)..
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आत्महत्या करवाते हैं ..(व्यवधान).. सुसाइड नोट लिखकर गया है उसकी कहते हैं मैं जांच करवा लूंगा। सुसाइड नोट की कभी जांच हुई है क्या? ..(व्यवधान)..
श्री उपाध्यक्ष: हो रही है। जांच हो रही है।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मरते वक्त भी आदमी किसी पर कर सकता है क्या?
श्री उपाध्यक्ष: जांच हो रही है।
श्री गुलाब चन्द कटारिया (गृह मंत्री): सुसाइड नोट की एफएसएल में जांच होती है कि उसी का लिखा हुआ है या बाद में दाह संस्कार के बाद किसी ने लिखकर उसके तकिये के नीचे रखकर वह बरामद करवाया। क्योंकि वह उसी समय नहीं मिला, दाह संस्कार करके लौटकर आने के बाद तकिये के नीचे सुसाइड नोट मिला इस कारण से उस सुसाइड नोट का वेरिफिकेशन एफएसएल की टीम ही कर सकती है।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): वह सुसाइड नोट उसी का है, आप देख लें, उसी का है। ..(व्यवधान)..
श्री उपाध्यक्ष: उसी की जांच हो रही है।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): बहाने मत बनाओ, जो दोषी है उन पर केस बनाओ और चालान करो। दोषियों का चालान करो, उनको सज़ा दिलाने की व्यवस्था करो।
श्री गुलाब चन्द कटारिया (गृह मंत्री): बाकी व्यवस्था करने के लिए ही आईजी स्तर के अधिकारी, रेड्डी जैसे ईमानदार व्यक्ति को सारी तफ्तीश इसीलिए दी है किसी प्रकार का कोई दबाव इसमें काम नहीं आए। जिसका दोष है उसको लिया जाए। ..(व्यवधान)..
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): इतना बड़ा ईमानदार कौनसा अधिकारी है जिसका आप जिक्र कर रहे हो?
श्री उपाध्यक्ष: उच्च अधिकारी है आईजी, जोधपुर। विश्वास है उन पर ..(व्यवधान).. माननीय सदस्य बीच में नहीं।
श्री रामनारायण डूडी (राजस्व मंत्री): उपाध्यक्ष महोदय, अभी स्थगन प्रस्ताव के जरिये सिरोही से आने वाले माननीय सदस्य ने पीपाड़ सिटी में घटना घटी, मुरलीधर व्यास ..(व्यवधान).. पुरोहितान व्यास, अलग-अलग है, लेकिन वह मुरलीधर है, हमारे नगरपालिका का कर्मचारी या अधिकारी है। पीपाड़ सिटी व बिलाड़ा नगर पालिका बिलाड़ा निर्वाचन क्षेत्र की दो नगरपालिकाएं हैं और दोनों में बीजेपी का बोर्ड है और मैंने ..(व्यवधान)..
श्री उपाध्यक्ष: पहले ही स्पष्टीकरण दे दिया।
श्री भंवरलाल शर्मा (सरदारशहर): 000
श्री रामनारायण डूडी (राजस्व मंत्री): इन्होंने कहा राजनैतिक दबाव के कारण ..(व्यवधान).. संरक्षण दे रहे थे।
श्री उपाध्यक्ष: वह सरासर गलत है। ..(व्यवधान)..
श्री रामनारायण डूडी (राजस्व मंत्री):पीपाड़ सिटी के अंदर बंद हुआ 10 तारीख को, अब सफल हुआ या असफल हुआ उस संदर्भ में नहीं जाना चाहता, मेरा खामख्वाह ..(व्यवधान).. तकलीफ कहीं दूसरी जगह है सिरोही से आने वाले माननीय सदस्य को और मेरे को बार-बार आज नहीं जबसे इनका एक टार्गेट है रामनारायण डूडी, मैं तो 1979 इलेक्ट्रोल पावटा से संयम लोढ़ा जी, मैं आपको जान रहा हूं, उस वक्त से जान रहा हूं जिस वक्त से कटिंग कर रहे थे इन अखबारों की। ..(व्यवधान).. समझे ना आप। अखबारों की कटिंग अपने नेताओं को खुश करने के लिए कर रहे थे, उस वक्त से मैं इनको अच्छी तरह से जान रहा हूं। मैं यह नहीं कह रहा हूं ..(व्यवधान).. बैठिए-बैठिए आप। आप बैठिए।
श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000
श्री रामनारायण डूडी (राजस्व मंत्री): उपाध्यक्ष महोदय, मैंने पहले ही निवेदन किया था इन्होंने जब कहा तो मैंने कहा प्रकरण की निष्पक्ष जांच की जाए और हमारा कहीं भी इस मामले के अंदर ..(व्यवधान)..
श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): 000
श्री रामनारायण डूडी (राजस्व मंत्री): राजनैतिक रूप से बंद करते हैं और कहते हैं क्या होता है, क्या नहीं होता है, ये राजनैतिक रोटियां सेंकना चाहते हैं। उसकी राजनैतिक रोटियां सिकी नहीं और हमारे गृह मंत्रीजी ने उस जांच को दूसरे दिन आईजी, जोधपुर को कर दी इसलिए ये सिटपिटा रहे हैं। ..(व्यवधान)..
श्री उपाध्यक्ष: धन्यवाद, हो गया।
श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): 000
श्री रामनारायण डूडी (राजस्व मंत्री):इनको तकलीफ जैसलमेर से है ..(व्यवधान)..
श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000
श्री उपाध्यक्ष: यह कोई नहीं। कोई स्पष्टीकरण नहीं, कोई एक्सप्लेनेशन नहीं ..(व्यवधान)..
श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): यह मिनिस्टर के ऊपर आरोप है। आपके ऊपर आरोप है उसका आप खण्डन कर लीजिए।
श्री रामनारायण डूडी (राजस्व मंत्री): मैं खण्डन कर रहा हूं बिलाड़ा कांस्टीट्युएंसी में पीपाड़ सिटी में जो घटना हुई है हमारा कहीं भी उसके अंदर मुलजिम जो बनने वाले हैं, बनेंगे, आफ्टर इंक्वायरी या पहले, उनको हमारा कोई भी संरक्षण नहीं है, यह मैं कहना चाहता हूं।
श्री उपाध्यक्ष: धन्यवाद।
श्री रामनारायण डूडी (राजस्व मंत्री): इनको तकलीफ है जैसलमेर में ऋतु को रिसोर्ट अलोटमेंट नहीं हुआ, ये सुबह से फिराकर यह कहना चाहते थे ..(व्यवधान)..
श्री उपाध्यक्ष: नेता प्रतिपक्ष ..(व्यवधान)..
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप बात सुनिए। यह बात नहीं है ..(व्यवधान)..
मोहन/अरूण/अशोधित
प्रति
प्रकाशनार्थ
नहीं/12032007/1300/1n
श्री
उपाध्यक्ष:
सिरोही से आने
वाले माननीय
सदस्य, बीच
में नहीं।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
उपाध्यक्ष
महोदय, यह
एक सच्चाई है
कि आज के दिन
पीपाड़ शहर की
गली गली में
इस बात का शोर
है कि राम
नारायण जी
डूडी इसमें
दोषी हैं, गली
गली में शोर
है।
श्री
सांगसिंह
भाटी
(जैसलमेर): 000
श्री
रामनारायण
डूडी (राजस्व
मंत्री):
उपाध्यक्ष
महोदय, यह
सदन का दुरुपयोग
है। गली गली
के अन्दर क्या
है, क्या
नहीं है ?
श्री मदन
राठौड़ (सुमेरपुर):
000
श्री
रामनारायण
डूडी (राजस्व
मंत्री): इस
प्रकार से,
मैं वहां से एम.एल.ए.
हूं, गली गली
में क्या है,
क्या नहीं है
और इस केस के
अन्दर जैसा
कि .....
श्री संयम
लोढ़ा
(सिरोही): 000
श्री
रामनारायण
डूडी (राजस्व
मंत्री): मेरा
कोई अपराध बोध
नहीं है।
श्री संयम
लोढ़ा
(सिरोही): 000
श्री
रामनारायण
डूडी (राजस्व
मंत्री): आप
कैसे कह सकते
हैं ? आपकी
कांस्टीट्यूएंसी
के अन्दर कोई
होता नहीं है
क्या ? क्या
मतलब है ? इस
प्रकार से कोई
कांस्टीट्यूएंसी
से संबंध जोड़
दो।
श्री संयम
लोढ़ा
(सिरोही): 000
श्री
रामनारायण
डूडी (राजस्व
मंत्री): सभी
कांग्रेस
पार्टी के
पूरे शामिल
होकर पीपाड़ आ
जाना, मैं जा
सकता हूं या
नहीं जा सकता
हूं। समझे कि
नहीं समझे और
किसको चेलेंज
कर रहे हो ? मैं,
उपाध्यक्ष
महोदय, यह
कहना
चाहूंगा।
श्री संयम
लोढ़ा
(सिरोही): 000
श्री
सांगसिंह
भाटी
(जैसलमेर): 000
श्री संयम
लोढ़ा
(सिरोही): 000
श्री
रामनारायण
डूडी (राजस्व
मंत्री): उप
पीपाड़ के अन्दर
घट हुई, हिन्दू
मुसलिम बात
हुई और अशांति
हो, अपनी
राजनीति
रोटियां
सकेंगे, वह
मामला होने
नहीं दिया और इन्क्वायरी
चेंज करके, वह
भी रिजल्ट और
मैं तो कहता
हूं, जो दोषी
होगा वह
भुगतेगा।
श्री संयम
लोढ़ा
(सिरोही): 000
श्री
भंवरलाल
शर्मा
(सरदारशहर): 000
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
मंत्री मण्डल
के सदस्य की
जांच आईजी
नहीं कर सकता।
आप मंत्री मण्डल
के माननीय
सदस्य हैं,
रेवेन्यु
मिनिस्टर
हैं, उनकी
जांच आईजी
नहीं कर सकता।
श्री
रिछपाल सिंह
मिर्धा
(डेगाना): 000
श्री संयम
लोढ़ा
(सिरोही): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
मंत्री के
खिलाफ आरोप था
ही नहीं ।
श्री
सांगसिंह
भाटी
(जैसलमेर): 000
श्री
रामप्रताप
कासनिया
(पीलीबंगा): 000
श्री
श्रवणकुमार
(पिलानी): 000
श्री
रिछपाल सिंह
मिर्धा
(डेगाना): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
मैंने दूसरा
विषय ले लिया
है।
प्रक्रिया के
नियम 295 पर
चर्चा। श्री
प्रभुलाल
वर्मा। अंकित
नहीं हो रहा
है।
श्री संयम
लोढ़ा
(सिरोही): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
रिकार्ड पर
कोई चीज नहीं आएगी,
आप नहीं पूछ
सकते सवाल।
माननीय सदस्य,
आप काहे के
लिए कर रहे
हैं ?
श्री
रिछपाल सिंह
मिर्धा
(डेगाना): 000
श्री
श्रवणकुमार
(पिलानी): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
इस पर चर्चा
हो जाएगी।
श्री
रिछपाल सिंह
मिर्धा
(डेगाना): 000
श्री
श्रवणकुमार
(पिलानी):
श्री उपाध्यक्ष:
नियमों के
अनुसार
कार्यवाही हो
रही है।
श्री
रिछपाल सिंह
मिर्धा
(डेगाना): 000 ...(व्यवधान)...
श्री
उपाध्यक्ष:
गिरदावरियां
बराबर हो रही
हैं और इसका जवाब
आपको समय पर
दे दिया
जाएगा। नियम 295
पर चर्चा ।
श्री
प्रभुलाल
वर्मा।
माननीय
सदस्य, स्थान
ग्रहण कीजिए,
मैंने दूसरा
आइटम ले लिया
है।
श्री
प्रभुलाल
वर्मा।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
000
श्री
रिछपाल सिंह
मिर्धा
(डेगाना): 000
श्री
श्रवणकुमार
(पिलानी): 000
श्री
रामप्रताप
कासनिया
(पीलीबंगा): 000
श्री
रिछपाल सिंह
मिर्धा
(डेगाना): 000
श्री
रामप्रताप
कासनिया
(पीलीबंगा): 000
श्री
श्रवणकुमार
(पिलानी): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
अध्यक्ष
महोदय ने व्यवस्था
दे दी है।
श्री
श्रवणकुमार
(पिलानी): 000
श्री
उपाध्यक्ष:
इस पर चर्चा
होगी। अकाल
राहत के अन्दर,
इससे संबंधित
जिला कलक्टर
वगैर सब जगह
कर रहे हैं।
नियम 295
के तहत विशेष
उल्लेख
पीपल्दा
के खातोली में
नायब तहसील
कार्यालय की
स्थापना
श्री
प्रभुलाल
वर्मा (पीपल्दा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
मेरे विधान
सभा क्षेत्र
में तहसील
हैडक्वार्टर
पीपल्दा है
जो तहसील
पीपल्दा के
ग्राम बागली,
रामपुरिया
धाबाई,
जटवाड़ी,
जटवाड़ा,
बालूपा,
छापोल, देलोद,
गोठड़ा,
उदयभनपुरा,
नयांगांव,
ढीबरी चम्बल,
ठीकरदा,
गुड़ला
आदिकरीब 20
ग्राम तहसील
पीपल्दा से
करीब 30
किलोमीटर की
दूरी पर हैं।
इन ग्रामवासियों
को तहसील
कार्य से 30 से 50
किलोमीटर दूरी
पर आना जाना
पड़ता है। उक्त
20 ग्रामों में
से 15 ग्राम ऐसे
हैं, जहां
कमाई का कोई
जरिया नहीं
है, सिंचाई के
साधन भी उपलब्ध
नहीं हैं, अत्यन्त
गरीब लोग इन
ग्रामों में
निवास करते
हैं तथा
आवागमन के
साधन भी समय
पर उपलब्ध
नहीं होते। इन
गरीबों के पास
बस के किराये
के पैसे भी
नहीं होते
हैं। इधर उधर
करके प्रात: 7.00
बजे चलकर
तहसील हैड क्वार्टर
पीपल्दा
पहुंचने में
करीब 5 घंटे लग
जाते हैं। और
जब तहसील
पहुंचते हैं
तो पता चलता
है आज तहसीलदार
साहब कोटा या
मीटिंग से अन्य
काम से गये
हुए हैं तो
दूरदराज गांव
से आये निराश
होकर देर
रात्रि को घर
पहुंच पाते
हैं। यदि
तहसीलदार
साहब का
सांयकाल तक इंतजार
करे तो इन्हें
पीपल्दा में
रहना पड़ता है
क्यों शाम
होने के बाद
उन ग्रामों
में वापस आने का
कोई साधन नहीं
है।
ऐसी
स्थिति में
गरीब किसान
भूखे प्यासे
रात्रि
विश्राम
पीपल्दा में
करते हैं और
अनावश्यक
खर्चा हो जाता
है। मेरे
विधान सभा
क्षेत्र में
यह 18वां क्षेत्र
कहलाता है। यह
क्षेत्र
भा.ज.पा. का गढ़
माना जाता है।
इस क्षेत्र की
जनता ने
पंचायत राज
चुनावों में
पंच से लेकर
जिला प्रमुख
तक भा.ज.पा. के
चुने हैं।
इनके विकास की
अभी तक किसी
भी सरकार ने
नहीं सोची है।
उक्त
ग्रामों को
भा.ज.पा. की
सरकार से उम्मीद
है और अशा
करते हैं कि
इनके विकास की
गंगा भा.ज.पा.
सरकार ही
बहायेगी।
इनकी भी मांग
है कि पीपल्दा
से 25 किलोमीटर
दूर खातोली है
जहां तक आने
के साधन भी
उपलब्ध हो
जाते हैं।
नायबल तहसील
खोलने की कृपा
करावें जिससे
कि उक्त
ग्रामीणों को
राहत मिलेगी
एवं अनावश्यक
खर्चे
बचेंगे।
अत: महोदया
से मेरा
निवेदन है कि
उक्त
परेशानी को ध्यान
में रखते हुए
मेरे विधान
सभा क्षेत्र
के कस्बा
खातोली में
नायब तहसील
कार्यालय
खोलने की कृपा
करावें। आदर
सहित।
श्री
उपाध्यक्ष:
श्री जोगाराम पटेल।
सुरेन्द्र/अरुण/12032007/1310/1o/1
राजस्थान
उच्च न्यायालय,
जोधपुर के नये
परिसर हेतु
आवण्टित
झालामण्ड
स्थित भूमि पर
कार्य का
शीघ्र समापन
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, जोधपुर
शहर राजस्थान
की न्यायिक
राजधानी है।
राजस्थान की
स्थापना के
साथ ही जयपुर
को राजधानी और
जोधपुर को न्यायिक
राजधानी
प्राप्त हुई
थी। राजस्थान
के माननीय
राजस्थान
उच्च न्यायालय
की मुख्य पीठ
जोधपर में है।
मुख्य पीठ के
भवन का
निर्माण सन् 1937
में तत्कालीन
राज मारवाड़
द्वारा
करवाया गया था
पदोपरांत दिनों
दिन जनसंख्या
वृद्धि, व्यावसायीकरण
के कारण
मुकदमों में
अत्यधिक
वृद्धि हुई है
और उसी अनुसार
न्यायिक
अधिकारियों व
माननीय राजस्थान
उच्च न्यायालय
के न्यायाधिपतियों
की संख्या
में भी वृद्धि
हुई है परन्तु
माननीय राजस्थान
उच्च न्यायालय
के न्यायाधिपतियों
की संख्या के
अनुसार बैठने
हेतु न्यायालय
परिसर उपलब्ध
नहीं है। इस
हेतु झालामण्ड
के पास स्थित
सरकारी भूमि
का आवंटन करने
के सम्बन्ध
में राजस्थान
की यशस्वी
मुख्य
मंत्री
श्रीमती
वसुन्धरा
राजे द्वारा
प्रयास किये
उसके लिए उनको
बहुत-बहुत,
कोटि-कोटि धन्यवाद।
परन्तु उक्त
कार्य अभी
पूर्ण रूप से
सम्पन्न
नहीं हुआ है।
माननीय राजस्थान
उच्च न्यायालय
के भवन के
विस्तार,
मुकदमों की
संख्या,
पक्षकारान की
रोजाना न्यायालय
में आने की
संख्या,
आधुनिक उपयोग
किये जाने
वाले वाहनों
की संख्या,
पक्षकारों की
सुविधा को ध्यान
में रखते हुए
यह आवश्यक है
कि माननीय
राजस्थान
उच्च न्यायालय
की मुख्य पीठ
के लिए जो
वर्ष 1937 में भवन
बना था वह
अपर्याप्त
है और इस हेतु
सरकारी जमीन
जो झालामण्ड
के पास उपलब्ध
है, उपलब्ध
करवाई जानी
आवश्यक है।
हमारी
सरकार से मांग
है कि इस हेतु
जो प्रयास
किया उसके लिए
कोटि-कोटि धन्यवाद,
परन्तु इस
कार्य को
यथाशीघ्र
पूर्ण किया
जावे।
श्री
उपाध्यक्ष: आ
गई आपकी बात।
डा. भंवरलाल राजपुरोहित।
मकराना
में
महाविद्यालय
की स्थापना
डा.
भंवरलाल
राजपुरोहित
(मकराना):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, नागौर
जिले में
नागौर,
मेड़ता,
कुचामन,
डीडवाना, लाडनूं
सभी उपखण्ड
क्षेत्रों
में
महाविद्यालय
कई वर्षों से
खोले जा चुके
हैं जबकि
मकराना,
परबतसर उपखण्ड
क्षेत्र में
चार लाख से
ऊपर जनता,
गरीब किसान
मजदूर निवास
करते हैं। ये
ही इस अभागे
क्षेत्र में
उच्च शिक्षा
सुलभता से
प्राप्त
करने में
उपेक्षित एवं
वंचित रहते जा
रहे हैं। मान्यवर,
यह क्षेत्र
राजस्थान
सरकार को
सर्वाधिक
राजस्व आय
जिले में सबसे
ज्यादा देता
आ रहा है। इस
क्षेत्र में
यदि महाविद्यालय
खोला जाए तो
मकराना की
गरीब अल्पसंख्यकों
की बच्चियों
एवं मजदूरों की
कन्याओं को
सर्वाधिक
फायदा होगा।
अत: सभी
पहलुओं पर
राज्य सरकार
गौर कर इसी
बजट सत्र में
महाविद्यालय अथवा
कन्या
महाविद्यालय
खोलने के आदेश
प्रदान करे तो
इस क्षेत्र की
जनता सदैव
आभारी रहेगी
एवं इस सरकार
ने तीन वर्षों
में भरपूर
शालाएं खोली
हैं उसको
फीडबैक भी
भरपूर मिल
सकेगा।
श्री
उपाध्यक्ष:
प्रो.
बीरूसिंह
राठौड़।
बनीपार्क
विधान सभा
क्षेत्रान्तर्गत
सहभागिता से
दो
जलप्रदाय
योजनाओं की स्वीकृति
प्रो.
बीरूसिंह
राठौड़
(बनीपार्क):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, विधान
सभा की
प्रक्रिया
एवं कार्य
संचालन के
नियमों के नियम
295 के अन्तर्गत
विशेष उल्लेख
प्रस्ताव
प्रस्तुत
है:-
महोदय,
आपका ध्यान
वित्त समिति
की 537वीं बैठक
दिनांक 10.4.06 में
(उत्पादन एवं
वितरण खण्ड
दक्षिण) के
कार्यक्षेत्र
की दो जल
प्रदाय योजनाएं,
सहभागिता
योजनाओं की
प्रशासनिक
एवं वित्तीय
स्वीकृति की
ओर आकर्षित
है। दीपक
कॉलोनी
अनुमानित लागत
8.44 लाख व
श्रीपुरम्
कॉलोनी
अनुमानित
लागत 7.80 लाख है।
वित्त समिति
की बैठक
द्वारा स्वीकृत
उपरोक्त
योजनाओं में
योजना की लागत
की 40 प्रतिशत
राशि कार्य
प्रारम्भ
करने से पूर्व
भू-खण्डधारियों
द्वारा जमा
करने का निर्णय
लिया गया है।
इस सम्बन्ध
में मेरा
निवेदन है कि
इन योजनाओं पर
कार्य प्रारम्भ
होने के बाद
अनेक भू-खण्डधारियों
द्वारा राशि
जमा करवा दी
जाती है किन्तु
पाइप लाइन
डालने से
पूर्व राशि
संकलित करने
में कठिनाई
आती है। ऐसी
स्थिति में
पूर्ण राशि
जमा नहीं होने
पर उक्त
योजना
क्रियान्वित
नहीं हो पाती
है जबकि सहभागिता
योजनाओं में
सभी भू-खण्डधारियों
से पेयजल
कनेक्शन
लेने पर योजना
की कुल लागत 10
प्रतिशत राशि
जमा करके
योजना पर
कार्य आरम्भ
किया जाता रहा
है। इस सम्बन्ध
में पूर्व में
इसी तरह के
आदेश मुख्य
अभियंता, मुख्यालय
के पत्र
क्रमांक 2197
दिनांक 17.6.03 के
द्वारा दिशा-निर्देश
जारी किये हुए
थे किन्तु
बैठक में लिये
गये निर्णय से
उक्त योजना
क्रियान्वित
नहीं हो पा
रही है। इससे आम
नागरिकों में
आक्रोश व्याप्त
है।
इसके
अतिरिक्त
दिनांक 1.7.06 की
बैठक में एजेण्ड
आइटम नं. 2 में
भी राइडर
लगाया गया है
कि आवासीय
कॉलोनी जयपुर
विकास
प्राधिकरण से
अनुमोदित
होनी चाहिए जब
ही पाइप लाइन
डाले जाने
बाबत जन
सहभागिता
योजना लागू
होगी इससे
विधान सभा क्षेत्र
बनीपार्क की
स्वीकृत शेष
4 आवासीय
कॉलोनी में
जन-सहभागिता
योजना में
पाइप लाइन का
कार्य
प्रारम्भ
नहीं हो सका
है।
अत: मेरी
सदन से जनहित
में मांग है
कि कृपया उक्त
आदेशों में
पूर्व की
भांति
योजनाओं को
क्रियान्वित
किये जाने
बाबत्
शिथिलता
प्रदान करने
का कष्ट
करें।
श्री
उपाध्यक्ष:
श्री रामलाल
शर्मा।
कालाडेरा
स्थित
कोका-कोला प्लाण्ट
द्वारा जल
दोहन
श्री
रामलाल शर्मा
(चौमूं):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, राजस्थान
विधान सभा की
प्रक्रिया के
नियम 295 के अन्तर्गत
विशेष उल्लेख
का प्रस्ताव ‘’कालाडेरा
स्थित
कोका-कोला’’ प्लांट
द्वारा
जलदोहन के
संदर्भ में।
महोदय,
निवेदन है कि
एक ओर राजस्थान
में पीने के
पानी के लिए
सैकड़ों
कि.मी. दूर से
पाइप लाइनों
द्वारा योजना
बनाकर जनता को
पानी उपलब्ध
कराया जा रहा
है लेकिन
राजस्थान
में कुछ
क्षेत्र ऐसा
है जहां पर
भूमि में जल
उपलब्ध है।
महोदय,
चौमूं तहसील
में भी भूगर्भ
में पर्याप्त
पानी के स्रोत
हैं लेकिन 1998
में कालाडेरा
गांव में
कोला-कोला का प्लांट
लगने के बाद
कालाडेरा,
सांडसर,
अनोपपुरा,
घिनोई,
जयसिंहपुरा,
कल्याणपुरा,
भोलपुरा आदि
गांवों का जल
स्तर
दिन-प्रतिदिन
तीव्र गति से
गिर रहा है।
महोदय, जल
ही जीवन है, इस
ध्येय को ध्यान
में रखते हुए
उपरोक्त
गांवों के
किसानों को
खेती, पीने व
पशुओं के लिए
पानी
सुरक्षित रह
सके इसके लिए
आवश्यक है कि
इस फैक्ट्री
के द्वारा
किये जा रहे
जल दोहन की
अविलम्ब
जांच करवाकर
इस प्लांट पर
प्रतिबंध
लगाने का श्रम
करें।
श्री
उपाध्यक्ष:
श्री जीवाराम
चौधरी।
सांचोर
में बाढ़ से
टूटी सड़कों
की मरम्मत
श्री
जीवराम चौधरी
(सांचौर):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, राजस्थान
विधान सभा के
प्रक्रिया
एवं कार्य
संचालन सम्बन्धी
नियम 295 के तहत
विधान सभा
क्षेत्र
सांचौर में
बाढ़ एवं
अतिवृष्टि
में टूटी
सड़कों की मरम्मत
करने के सम्बन्ध
में।
महोदय,
निवेदन है कि
सांचौर से
रानीवाड़ा की
मुख्य सड़क
सांचौर चार
रास्ते से
रानीवाड़ा की
ओर जाने वाली 27
किलोमीटर सड़क
बारिश में
जगह-जगह से
इतनी टूट गई
है कि उस पर
आवागमन
मुश्किल हो
गया है।
सांचौर जिला
मुख्यालय
जालौर जाने
वाली यह सड़क
मुख्य सड़क है।
मेरा माननीय
सड़क मंत्री
जी से नम्र
निवेदन है कि
उपरोक्त
सड़क की तुरंत
मरम्मत कराई
जाए ताकि वहां
की जनता को
आवागमन की सुविधा
बहाल हो सके।
ठीक उसी
प्रकार जो
सड़कें पी.एम.जी.एस.वाई.
स्कीम में
बनी हैं और वो
भी बारिश से
टूट गई हैं उनको
भी
नियमानुसार
व्यवस्था
करवाकर मरम्मत
करवाने का कष्ट
करें। धन्यवाद।
श्री
उपाध्यक्ष:
श्री राकेश
मेघवाल।
आयुर्वेद
को सरकारी सुविधा
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, मैं इस
सदन का ध्यान
राजस्थान
विधान सभा के
प्रक्रिया
एवं कार्य
संचालन सम्बन्धी
नियम 295 के अन्तर्गत
विशेष उल्लेख
प्रस्ताव के
माध्यम से
आकर्षित कर
निवेदन करना
चाहूंगा कि
पूरे देश की
सबसे प्राचीन
चिकित्सा
विधि जो
आयुर्वेद
चिकित्सा के
नाम से जानी
जाती है, को
वर्तमान में
राज्य सरकार
द्वारा पूर्ण
सुविधा उपलब्ध
नहीं करवाये
जाने के कारण
गर्त में जा
रही है।
सर्वप्रथम तो
राज्य सरकार
द्वारा इस
विभाग के लिए
न तो भवन बनाये
जा रहे हैं, न
ही इनके लिए
बने पुराने
भवनों की मरम्मत
हेतु कोई राशि
आवंटित की जा
रही है। राज्य
के लगभग सभी
आयुर्वेद
चिकित्सालयों
के लिए या तो
भवन उपलब्ध
है ही नहीं और
है भी तो बिल्कुल
जीर्ण-शीर्ण
अवस्था में
है जहां
चिकित्सक
एवं उनके
सहकर्मियों
के बैठने का
भी उचित स्थान
नहीं है।
आयुर्वेद
औषधालयों में
फर्नीचर बिल्कुल
टूटा-फूटा ही
मिलेगा जिन पर
बैठ कर चिकित्सक
को स्वयं को
भी कुण्ठाग्रस्त
होते देखा जा
सकता है। इन औषधालयों
में चिकित्सा
के उपकरण, स्टेशनरी
एवं दवाओं का
हमेशा अभाव
बना रहता है।....
vkj/akt/12032007/1320/1p
साथ
ही आयुर्वेद
चिकित्साकर्मियों
के निवास की
भी कोई उचित
व्यवस्था
नहीं होती है।
न ही इन
औषधालय भवनों
में विद्युत
व्यवस्था,
पेयजल कनेक्शन,
टेलीफोन
कनेक्शन,
सफाई
कर्मचारी की
व्यवस्था
होती है।
ग्रीष्म काल
में इन
आयुर्वेद
चिकित्सकों
को कागज के
पुट्टे से हवा
खाते भी देखा
जा सकता है।
मैं
इस सदन का ध्यान
इस ओर भी
आकर्षित करना
चाहूंगा कि
भारतीय चिकित्सा
केन्द्रीय
परिषद् ने
डिग्रीधारी
आयुर्वेद
चिकित्सकों
को उनके
आधुनिक
चिकित्सा
पद्धति के
पर्याप्त
अध्ययन एवं
ट्रेनिंग के
आधार पर तथा
राज्य सरकार
द्वारा घोषित
अधिसूचनाओं
सन् 1966, 1982 एवं 1986 के
द्वारा भी
ऐलोपैथी
चिकित्सा का
अधिकार
प्रदान किये
जाने के
बावजूद भी इन्हें
ऐलोपैथी
चिकित्सा का
अधिकार नहीं
होने के कारण
उन स्थानों
पर जहां
आयुर्वेदिक
चिकित्सालय
तो हैं लेकिन
ऐलोपैथिक
चिकित्सालय
नहीं होने के
कारण उस
क्षेत्र की एक
ए.एन.एम. जो
इनके मुकाबले
कुछ भी नहीं
जानती, वह भी इनके
अधिकारों को
हनन कर मरीज
को आगे तक
रैफर कर देती
है जबकि इन्हें
रैफर तक करने
का अधिकार भी
नहीं होता है।
उपरोक्त
कारणों से
आयुर्वेद
चिकित्सक
कुंठाग्रस्त
होकर कार्य कर
रहे हैं जिससे
वे अपने कार्य
को ठीक से
अंजाम देने
में असफल रह
जाते हैं।
अत:
मैं इस विशेष
उल्लेख
प्रस्ताव के
माध्यम से
राज्य सरकार
से यह निवेदन
करना चाहूंगा
कि राज्य के
आयुर्वेद विभाग
को पूर्ण
आर्थिक
सहायता एवं
आयुर्वेद चिकित्सकों
को ऐलोपैथी
चिकित्सा के
अधिकार
प्रदान
करवाने की
कृपा करायें ताकि
मानसिक कुंठा
से ग्रस्त ये
चिकित्सक
अपने आपको
कुंठा से बाहर
निकाल कर अपने
कार्य को सही
तरीके से कर
सकें एवं
राजस्थान की
एक बहुत
पुरानी
चिकित्सा
पद्धति को
लागू किया
जाये। आपने
समय दिया, उसके
लिए धन्यवाद।
श्री
उपाध्यक्ष:
श्रीमती
लक्ष्मी
बारूपाल
(अनुपस्थित)
श्री मुरारी
लाल मीणा।
बाणगंगा
नदी पर राष्ट्रीय
राज मार्ग
संख्या 11 पर
पुल का
निर्माण
श्री
मुरारी लाल
मीणा
(बांदीकुई): माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
प्रक्रिया
तथा कार्य
संचालन सम्बन्धी
नियमावली के
नियम 295 के तहत
विशेष उल्लेख
के प्रस्ताव
की सूचना देना
चाहता हूं।
मेरे
विधान सभा
क्षेत्र
बांदीकुई व
महुवा विधान सभा
क्षेत्र की
सीमा में होकर
बाणगंगा नदी
गुजरती है। इस
नदी को
बालाहेड़ा,
बालाहेड़ी होकर
राष्ट्रीय
राजमार्ग 11 तक
जाने वाली
सड़क क्रास करती
है। यह सड़क
बांदीकुई से
गोलाडा,
निहालपुरा,
बैजूपाड़ा,
बालाहेड़ा,
बालाहेड़ी
गांव होकर
जाते हुए
महुवा तहसील
मुख्यालय को
जोड़ती है।
विधान सभा
क्षेत्र
बांदीकुई के
लगता हुआ
क्षेत्र
राजगढ़ है।
यहां से
राजगढ़, रेणी,
करणपुरा होते
हुए
बालाहेड़ा
जंक्शन पर
सड़क मिलती
है। इस प्रकार
इस सड़क से तीन
विधान सभा
क्षेत्र
महुवा,
बांदीकुई व
राजगढ़ की
जनता का
आवागमन होता
है। लम्बे
समय से
बालाहेड़ा से
राष्ट्रीय
राजमार्ग 11
वाया
बालाहेड़ी
सड़क पर पड़ने
वाले बाणगंगा
ब्रिज की जनता
द्वारा मांग
की जा रही है।
वर्षा ऋतु में
यह रास्ता
पूर्णरूपेण
अवरूद्ध हो
जाता है जिसके
कारण तीनों
विधान सभा
क्षेत्रों का
आपस में आवागमन
बन्द हो जाता
है। अत: इस नदी
पर सबमर्सिबल
ब्रिज या वेन्टेड
काजवे बनाने
के अविलम्बनीय
लोक महत्व के
विषय की ओर
मैं माननीय
सार्वजनिक
निर्माण
मंत्रीजी का
ध्यान
दिलाना चाहता
हूं। धन्यवाद।
श्री
अध्यक्ष: श्री
सुभाष चन्द्र
शर्मा।
कोटपूतली
के विभिन्न
गांवों में
पेयजल योजना
श्री
सुभाष चन्द्र
शर्मा
(कोटपूतली): माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
प्रक्रिया
एवं कार्य
संचालन सम्बन्धी
नियम 295 के अन्तर्गत
विधान सभा
क्षेत्र
कोटपूतली के
विभिन्न
गांवों में
पेयजल योजना
से जोड़ने के
सम्बन्ध
में विशेष उल्लेख
करना चाहता
हूं। मेरे
विधान सभा
क्षेत्र
कोटपूतली में
1000 से अधिक आबादी
वाले 106 ग्रां
मैं जिनमें से
42 गांवों में
पेयजल योजना
चालू है। अन्य
गांवों में
अभी भी सरकार
द्वारा किसी
प्रकार की कोई
पेयजल की
योजना लागू
नहीं की गई
है। कई गांवों
में तो भू-जल
भी उपलब्ध
नहीं है तथा
कई गांवों में
भू-जल का स्तर
नीचे चले जाने
से इन गांवों
में हैण्डपम्प
भी पानी खींच
पाने में
सक्षम नहीं है
जिसके कारण इन
गांवों में
पीने के पानी
की गम्भीर
समस्या बनी
हुई है। गर्मी
के मौसम में
तो बहुत से
गांवों तथा
ढाणियों में
पेयजल की गम्भीर
स्थिति पैदा
हो जाती है।
भू-जल उपलब्ध
नहीं होने
वाले गांवों
में तो योजनाओं
को प्राथमिक
आधार पर स्वीकृत
किया जाना
चाहिए। इन
गांवों में
पेयजल उपलब्ध
करवाना सरकार
की नैतिक जिम्मेदारी
बनती है।
अंत:
प्रक्रिया
एवं कार्य
संचालन सम्बन्धी
नियम 295 के अन्तर्गत
यह निवेदन
करता हूं कि
मेरे विधान
सभा क्षेत्र
कोटपूतली के 1000
से अधिक आबादी
वाले गांवों
जिनमें सरकार
द्वारा किसी
प्रकार की
पेयजल योजना
नहीं बनाई गई
है, उन गांवों
में पेयजल की
योजना बनाई
जाये तथा जिन गांवों
में भू-जल अत्यधिक
नीचे चला गया
है, उन गांवों
को पाइप लाइन
के माध्यम से
जोड़कर पेयजल
उपलब्ध
कराया जाये।
धन्यवाद।
श्री
उपाध्यक्ष: श्री
मांगीलाल
गरासिया।
गोगुन्दा
की प्रमुख
सड़कों का
निर्माण
श्री
मांगीलाल
गरासिया(गोगुन्दा):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
विधान सभा
संचालन
प्रकिया नियम
295 के तहत महत्वपूर्ण
सड़क पक्की
कराये जाने के
सन्दर्भ में
निवेदन करना
चाहता हूं।
विधान
सभा क्षेत्र
गोगुन्दा के
अन्तर्गत
बहुत ही महत्वपूर्ण
सड़कें एक
जिले से दूसरे
जिले को मिलाने
तथा एक तहसील
से दूसरे
तहसील मुख्यालय
को जोड़ने
वाली प्रमुख
सड़कें हैं जो
बहुत ही कम
दूरी को पार
कर एक जिले से
दूसरे जिले तक
आने-जाने में
सुगमता होगी।
जो निम्न तरह
से है :-
1.
सड़क :-
विसमा, पांबा
से गोरिया
2.
सड़क :-
कड़ेच
(चित्रावास)
से कोयलवाव
3.
सड़क :-
चांपा की नाल
(मेवाड़ों का
मठ) से भीमाणा
4.
सड़क :-
तिलरवा
(सामोली) से
बोरी सिमा
5.
सड़क :-
सेनवाड़ा
(गोगुन्दा)
से माडा खेत
(झाड़ोल
फलासिया)
6.
सड़क :- बोखाड़ा,
कुर्रा से
गोरिया
7.
सड़क :-
कुकावास
(कोटड़ा) से
पोसिना
(गुजरात)
8.
सड़क :-
छणावल (गोगुन्दा)
से आत्री,
बारा
(केलवाड़ा)
9.
सड़क :-
समीजा से
लादेन घाटा,
जुडा(कोटड़ा)
10.
सड़क :-
समीजा(कोटड़ा)
से आमरी,
सेनवाड़ा
(गोगुन्दा)
11.
सड़क :-
नाथिया थल
(नाल) से
मादड़ी
(पड़ावली
कलां)
इस
तरह से मैं
महत्वपूर्ण
सड़कें हैं।
इन्हें पक्की
कराये जाने के
लिए मैं
सार्वजनिक
निर्माण मंत्रीजी
का ध्यान
आकर्षित कर
अनुरोध करता
हूं कि इन्हें
प्राथमिकता
के आधार पर
बनवाया जाये।
बोलने के लिए
समय दिया,
उसके लिए
बहुत-बहुत धन्यवाद।
श्री
उपाध्यक्ष:
श्री हरीसिंह
रावत।
भीम
विधान सभा
क्षेत्र के
कतिपय गांवों
का आसींद पंचायत
समिति में
विलय
श्री
हरीसिंह
रावत(भीम):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
राजस्थान
विधान सभा के
प्रक्रिया
एवं कार्य
संचालन सम्बन्धी
नियम 295 के तहत
मेरे विधान
सभा क्षेत्र
के जैतगढ़ ग्राम
पंचायत एवं
दुदालिया,
दातड़ा व अन्य
गांवों को
आसीन्द
पंचायत समिति
जिला
भीलवाड़ा से
जोड़ने के सम्बन्ध
में पंचायती
राज मंत्रीजी
का ध्यान
आकर्षित करना
चाहता हूं।
मेरे
विधान सभा
क्षेत्र भीम के
जैतगढ़
पंचायत, माद
पंचायत के
दातड़ा,
दुदालिया व
काकरोद के रलायता,
बटेरी गांवों
को आसीन्द
एवं माण्डल
पंचायत समिति
जिला
भीलवाड़ा में
सम्मिलित
किये जाने से
इन गांवों की
जनता में भारी
आक्रोश व्याप्त
है जिसके तहत
जिला कलक्टर
एवं मुख्य
मंत्री
महोदया एवं
पंचायती राज
मंत्रीजी को
भी ज्ञापन
दिया था। जिस
फलस्वरूप
माननीय मुख्य
मंत्रीजी का
प्रत्युत्तर
भी आया था कि
मैंने
पंचायती राज
विभाग को आप
द्वारा भेजा
गया ज्ञापन
कार्यवाही
हेतु भेज दिया
है।
माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, लेकिन
आज ही मेरे
विधान सभा
क्षेत्र से
फोन आया है कि
ग्राम पंचायत
जैतगढ़ को
आसीन्द
तहसील में
जोड़ा जा रहा
है। अगर यह
ग्राम पंचायत
उक्त तहसील
में जोड़ा गया
तो सभी
ग्रामवासी
आन्दोलन
करने को बाध्य
हो जायेंगे।
कारण कि अगर
यह पंचायत,
पंचायत समिति
आसीन्द में
सम्मिलित
होती है तो
तहसील का कोई
कार्य होगा तो
20 किलोमीटर
आसीन्द जाना
पड़ेगा।
पुलिस उप
अधीक्षक एवं
उपखण्ड
अधिकारी से
कार्य होगा तो
45 किलोमीटर
गुलाबपुरा
जाना पड़ेगा।
पुलिस स्टेशन
एवं उप तहसील
सम्बन्धित
कार्य होगा तो
10 किलोमीटर
बदनोर जाना पड़ेगा।
इसी प्रकार
काकरोद
पंचायत का
रलायता एवं
बटेरी को भी
माण्डल
तहसील से
जोड़ा जायेगा
तो उनको भी
वही परेशानी का
सामना करना
पड़ेगा जबकि
मेरे क्षेत्र
भीम में सभी
कार्य एक ही
छत के नीचे
होते हैं।
मैं
आपके माध्यम
से सरकार से
निवेदन करना
चाहता हूं कि
उक्त
परेशानियों
को मध्य नजर
रखते हुए
उपरोक्त
गांवों एवं
ग्राम
पंचायतों को
यथा स्थान ही
रखकर होने
वाली तकलीफों
से निजात
दिलायें। धन्यवाद।
श्री
उपाध्यक्ष: पर्ची
के माध्यम से
उठाये जाने
वाले विषय।
श्री दाताराम
गुर्जर।
पर्ची
के माध्यम से
उठाये गये
मुद्दे
गिरते
जल-स्तर के
चलते पेयजल की
कमी
श्री
दाताराम
गुर्जर(खेतड़ी):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, गिरते
जल स्तर से
पीने के पानी
की कमी से उत्पन्न
स्थिति के सम्बन्ध
में। वर्षा की
कमी के कारण
से निरन्तर
भूमि का जल स्तर
नीचे गिरता जा
रहा है जिसके
कारण गांवों
में पहले जहां
हैण्डपम्प
का पानी उपलब्ध
हो जाता था, आज
स्थिति यह आ
गई है कि पानी
का स्तर
करीबन 400-500 फुट
नीचे चला गया
और ट्यूबवैल
से भी पानी
उपलब्ध नहीं
हो रहा है।
सरकार ने इसके
लिए काफी बजट खर्च
किया, इसके
बावजूद भी आज
के जो संसाधन
हैं, उससे जल
स्तर के नीचे
जाने से
पूर्णतया
पीने का पानी
उपलब्ध नहीं
हो सकता है।
इसमें जल के
स्तर को
निरन्तर
बनाये रखने के
लिए पहले
पूर्ववर्ती
सरकार के तत्कालीन
प्रधान
मंत्री अटल
बिहारी जी
वाजपेयी ने
नदियों को
जोड़कर और
पूरे देश का
जल स्तर
निरन्तर
बनाये रखने का
एक प्रयोग
शुरू किया था
लेकिन
वर्तमान की
केन्द्र की
सरकार ने उस
नीति को
बिलकुल ठंडे
बस्ते में
डाल दिया और
उसका परिणाम
यह है कि आज
पूरे देश में
पानी का स्तर
निरन्तर
नीचे गिरता जा
रहा है। कहीं
पर बाढ़ की
स्थिति होती
जा रही है,
कहीं सूखे की
स्थिति है।....
Jkj/akt/13.30/1q/12.3.2007
हमारी
सरकार ने
वर्तमान बजट
में एक लाख
एनीकट जो राजस्थान
में बनाने के
लिए प्रावधान
रखा है,
निश्चित रूप
से यह प्रशंसा
के योग्य है
और सरकार का एक कदम
आगे बढ़कर सोच
इससे स्पष्ट
हुआ है।
मैं, उपाध्यक्ष
महोदय, आपके
माध्मय से यह
निवेदन करना
चाहता हूं कि
यह सारे एनीकट्स
शीघ्र बनें और
जल के स्तर
को निरन्तर
बनाये रखने के
उपयोग में यह
उपयोगी साबित
हों।
हमारी सरकार
ने पिछली बार 15
मई से 15 जून तक
जल चेतना का
कार्यक्रम
चलाया, निश्चित
रूप से पूरे
देश में यह
कार्यक्रम
बहुत अच्छा
साबित हुआ और
जनता में जल
के प्रति
जाग्रति पैदा
करने का अच्छा
कदम भी यह
माना गया है। इस कदम
के तहत इस
वर्ष भी सरकार
जल चेतना का
कार्यक्रम
पुन: चलाये और
जनता में जब
तक जाग्रति
नहीं आयेगी तब
तक जल का स्तर
कभी रूक नहीं
सकता और जल का
अधिक दोहन जो
अनावश्यक
रूप से भी
किया जाता है
उस पर कंट्रोल
किया जाना
जरूरी है। सरकार
उसके लिए वाटर
हार्वेस्टिंग
स्ट्रक्चर
डवलप करे और
इसमें अच्छा
पैसा लगाये। अब कई
गांवों में
मेरे क्षेत्र
में ही 85 राजस्व
गांव हैं
जिनमें से
क्षेत्रीय
योजना के 11 गांव
हैं और पाइप्ड
योजना में 16
गांव हैं,
टीएसएस के 38
गांव हैं, बाकी
के 20 गांव बचे
हुए हैं उनकी
आबादी करीबन 1500
से अधिक की है
और उनमें हैण्ड
पम्प स्कीम
हैं।
आज हैण्ड
पम्प से जनता
के पानी की व्यवस्था
की पूर्ति
नहीं हो सकती
इसलिए सरकार
एक नीति
बनाकर, जिस
प्रकार से
सड़क से
गांवों को जोड़ने
की हमारे
पूर्व प्रधान
मंत्री श्री
अटल बिहारी
वाजपेयीजी ने
पूरे देश में
सड़कों से जोड़ने
की नीति बनाई,
उसी प्रकार
से, उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से यह निवेदन
करना चाहूंगा
और मेरा सुझाव
रखना चाहूंगा
कि राजस्थान
में भी मुख्य
मंत्री जल
योजना नाम की
कोई स्कीम
चालू करके और
आबादी के
हिसाब से जो 1500
से अधिक की
आबादी के हैं,
एक हजार की
आबदी के हैं
और उससे नीचे
की आबादी के
जो भी गांव
हैण्ड पम्प
स्कीम में
हैं उनको
नीतिगत तय
करके सरकार
उसमें कोई इस
प्रकार की स्कीम
बनाये ताकि
सभी गांव
पेयजल से जुड़
सकें और इस
प्रकार से जो
भूमि का जल स्तर
निरंतर गिरता
जा रहा है, ऐसे
ही गिरता रहा
और पानी के
सोर्सेज स्थापित
नहीं किये गये
तो निश्चित
रूप से पीने
के पानी की
भयंकर समस्या
उत्पन्न हो
जायेगी। इसलिए
इन गांवों
में, जो 1500 से
अधिक की आबादी
के हैं, सरकार
नीतिगत कोई तय
करके उनको एक
हजार तक की
आबादी के
गांवों में पेयजल
स्कीम से
जोड़कर और अभी
इस गर्मी तक
तो नहीं हो
सकता लेकिन
सरकार इस बार
यह तय कर ले तो
अगली गर्मी से
पहले पीने के
पानी की पूरे
राजस्थान
में व्यवस्था
करवा सकती
है।
उपाध्यक्ष
महोदय, इस
संबंध में
आपने जो समय
दिया इसके लिए
धन्यवाद, जय
हिन्द।
श्री
उपाध्यक्ष:
श्री शंकर
सिंह
राजपुरोहित।
श्री
सांवर लाल(जन
स्वास्थ्य
अभियांत्रिकी
मंत्री):
उपाध्यक्ष
महोदय, माननीय
सदस्य ने
पर्ची के माध्यम
से बहुत ही
महत्वपूर्ण
प्रश्न खड़ा
किया है। राजस्थान
अपने देश का
सबसे बड़ा
प्रदेश है, दस
प्रतिशत
एरिया है और
पानी जो बरसात
का है, 1.16
प्रतिशत है। भू जल
केवल 1.7
प्रतिशत है और
वह भी खारा और
फ्लोराइड का। ऐसे में
गिरते जल स्तर
के संबंध में
जो चिंता
प्रकट की है,
पूरे सदन की
और राज्य की
जनता की चिंता
है।
बरसात होना,
नहीं होना,
कहां होना, यह
सब नेचर के
ऊपर, प्रकृति
के ऊपर निर्भर
है माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय और इस बार
हमने देखा भी
है कि जहां
हिन्दुस्तान
में
चेरापूंजी
में
रिकार्डेड
बरसात होती थी
वहां तो अकाल
की स्थिति है
और बाड़मेर जहां
बरसात को
तरसते थे वहां
पर बाढ़ आ गई। तो ऐसी
स्थिति में जो
भगवान करेगा,
वह तो उनकी
कृपा है,
प्रकृति की
कृपा है पर जो
उपलब्ध है उसका
ओप्टिमम
यूटिलाइजेशन
करें, उसके
प्रति चिंता
करें, यह
हमारी सबकी
चिंता होनी
चाहिए और मैं
यह कहना चाहता
हूं कि मुख्य
मंत्रीजी ने
तीन वर्ष में
इस वाटर सेक्टर
में और जल का
महत्व
समझाने का
जनता को जो
प्रयास किया
है, निश्चित
रूप से एक
प्रशंसा का
काम है। जल अभियान
चलाना, जल
चेतना यात्रा
और जल चेतना
यात्रा भी जब
टेम्परेचर
लगभग 48 डिग्री
पर हो, 16 मई से 15
जून तक, और लगभग
राज्य के बीस
हजार गांवों
में जाने का
कोई सरकार साहस
करे, यह पहली
बार हुआ है और
मैं यह कहता
हूं कि काफी
कुछ लोगों को
इस बात का समझ
में भी आया कि
पानी बहुत
महत्वपूर्ण
है, प्रकृति
की देन है, इस
दुनिया में पानी
और खून ऐसे
हैं जो किसी
फैक्टरी में,
इण्डस्ट्रियल
एरिया में
नहीं बनाये जा
सकते, इसलिए
इसके उपयोग के
प्रति चिंता
करनी है। तीन
साल में तीन
सौ करोड़ के
एनीकट, सवा सौ
के लगभग माइनर
इर्रिगेशन
प्रोजेक्ट,
नहरी क्षेत्र
के अंदर काफी
कुछ
डिसिल्टिंग,
मोगे ठीक
कराना करके
टेल तक पानी
पहुंचाना, यह
सारी व्यवस्थाएं
हुई हैं। तो
निश्चित रूप
से सवा लाख
वाटर स्ट्रक्चर्स
जिनको हम कह
सकते हैं
फार्म पौण्ड
राजस्थान
में बनाये। इस
संबंध में जो
दूसरे डिपार्टमेंट्स
ने किया, और भी
कुछ किया है,
माननीय सदस्य
ने जो चिंता
पीने के पानी
के लिए भी की
है तो इनको
विश्वास
दिलाना चाहता
हूं कि सरकार
की तरफ से
साढ़े छह हजार
करोड़ की तो
सरफेस वाटर से
ड्रिंकिंग
वाटर की
योजनाएं हमने
सेंक्शन की
और एक्जीक्यूशन
शुरू किया है,
यह मिलेगा,
बाकी
छोटे-छोटे
आबादी एरिया
में भी हमने
आबादी को
प्रमुख आधार
नहीं मानकर
जहां की
परिस्थितियां,
जहां आवश्यकता
है उसके हिसाब
से यह पी एण्ड
टी योजनाएं,
दूसरी
योजनाएं शुरू
की हैं तो मैं
यह भरोसा
दिलवाना
चाहता हूं कि
जल के प्रति,
गिरते हुए स्तर
के प्रति
सरकार
चिंतनशील है,
निश्चित रूप
से आप सब के
सहयोग से राज्य
में वाटर
मेनेजमेंट
में सबका इन्वाल्वमेंट
हो, आम जनता का
सहयोग उसके
अंदर हो, इस बात
का सरकार
प्रयास
करेगी। इस बार
भी जल चेतना यात्रा
हम गर्मी के
महीने में
निकालने जा
रहे हैं। माननीय
मुख्य
मंत्री जल
योजना के अन्तर्गत
जो आपने मांग
रखी है, इस
बारे में भी
विचार करेंगे,
कौन सी योजना
शुरू की जा
सकती है जिससे
गरीबों को
शुध्द पेयजल
उपलब्ध
कराया जाय, इस
बारे में भी
मैं विश्वास
दिलाता हूं कि
हम विचार
करेंगे, कोई
कार्यवाही
करेंगे। आपने
बहुत ही महत्वपूर्ण
जो बिंदु है
उसकी तरफ ध्यान
दिलाया है
इसके लिए धन्यवाद
भी मैं माननीय
सदस्य को
देना चाहता
हूं।
श्री
उपाध्यक्ष:
धन्यवाद
मंत्रीजी। श्री
शंकर सिंह
राजपुरोहित।
राज्य
में पशुधन की
घटती संख्या
श्री
शंकर सिंह
राजपुरोहित(आहोर):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, राजस्थान
एक कृषि
प्रधान
प्रदेश है और
पशु प्रधान भी। राज्य
की जाट,
गुर्जर और
आदिवासी
जनजाति का
बहुत बड़ा भाग
पशुपालन पर
आधारित उनका
जीवन है और पिछले
दस वर्षों से
जिस तरह से
पशुधन राज्य
की धरती से
लोप होता जा
रहा है, यह एक
चिंता का विषय
है।
अगर सीमांत
क्षेत्र का
विषय ले लें
तो सीमा पर
रहने वाला
हमारा बंधु,
उसका मुख्य
काम रहता है
पशुपालन और
वहां से भी
अगर पशुधन कम
हो गया तो
वहां उस सीमा
पर रहने वाला
हमारा बंधु जो
सीमा की
सुरक्षा भी
करता है वह भी
लोप हो
जायेगा, इससे
सीमा का भी
खतरा बढ़
जायेगा, सीमा
की सुरक्षा का
भी खतरा बढ़
जायेगा।
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
कुछ आंकड़ों
के माध्यम
से, जो राजस्थान
पशु चिकित्सा
परिषद के
आंकड़े हैं,
पशुधन की जो
भारी कमी हुई
है, 1997 में भेड़
लगभग दो करोड़
थी, 2003 में वह डेढ़
करोड़ पर आ
गई।
गौवंश एक
करोड़ 19 लाख था
जो 2003 में एक
करोड़ सेभी
नीचे आ गया। ऊँट 6 लाख
70 हजार जो थे, जो
रेगिस्तान
का जहाज
कहलाता है, वह
आज पाँच लाख
के करीब आ
गये।
तो यह एक
चिंता का विषय
है कि हमारे
राज्य की एक
बहुत बड़ी
ग्रामीण
आबादी जो
पशुधन के ऊपर
निर्भर रहती
है और उनका कम
हो जाना, इसके
पीछे के रीजन
हमें निकालने
पड़ेंगे। इसके
साथ ही
जैसलमेर
सीमांत
क्षेत्र के
दौरे पर सीमा
सुरक्षा बल के
महानिदेशक
ए.के.मित्रा
गये, उनका
बयान तो एकदम
चौंकाने वाला है।
उन्होंने
कहा कि बांग्लादेश
की तरफ अगर
सबसे ज्यादा
पशुधन की जो
तस्करी हो
रही है, गौवंश की
जो तस्करी हो
रही है, वह
राजस्थान से
जा रहे हैं।
यह एक पुलिस
अधिकारी का,
महानिदेशक का
जो बयान है यह
हमारे लिए
चौंकाने वाला
है।
माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, पिछली
सरकार में कुछ
पश्चिमी सीमा
से ऐसे तस्कर
जो जुड़े हुए
थे, उनकी
सरकार के
नुमाइंदों से
जुड़े हुए थे,
मैं नाम लेना
चाहूंगा गाजी
फकीर का।
Lpm/akt/1340/2a/12032007
जो
पिछली सरकार
के कांग्रेस
के छोटे-छोटे
नुमाइंदों से
जुड़े हुए थे
और उनका काम
पशु धन की तस्करी
करना,
हथियारों की
तस्करी करना,
उसके कारण आज
जो पश्चिमी
राजस्थान के
सभी जिलों में
छोटे-छोटे तस्कर
उनकी शरण में
हो गये तैयार
कि इतनी भारी
मात्रा में जो
यह तस्करी हो
रही है। यह
हमारे लिए
चिंता का विषय
है। गौ-शालाओं
के माध्यम से
सरकार ने मैं
मुख्यमंत्रीजी
वसुंधरा राजे को
बहुत-बहुत धन्यवाद
देना चाहूंगा
कि 50 साल के
इतिहास में
अगर किसी मुख्यमंत्री
ने एक गौशाला
के संरक्षण के
लिए अपने बजट
में प्रावधान
किया तो पिछली
सरकार के बजट
में एक करोड़
सत्ताईस लाख
का प्रावधान
करके
गोशालाओं के,
गो-वंश
के लिए बहुत
बड़े अभिमान
का काम किया।
इस बार भी गो
सेवा आयोग के
लिए दो करोड़
था लेकिन वह
भी कम है। तो
यह घटती हुई
गो-वंश और
बाकी पशुओं की
जो संख्या
हैं हमारे लिए
चिंता का विषय
है। मैं माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय आपके
माध्यम से
पशुपालन
मंत्रीजी का
ध्यान इस और
दिलाना
चाहूंगा कि
कहीं-न-कहीं,
किसी न किसी
प्रकार से
नियमों में
कहीं-न-कहीं
कमजोरी है
जिसके कारण से
यह पशु धन की
तस्करी होती
है। मैं आपका
ध्यान
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय
कांग्रेस
सरकार के समय
मंडावर के थाने
में गो-वंश की
तस्करी में
पकड़ा गया एक
ट्रक और दस
दिनों के अन्दर
वह ट्रक तीन
बार पकड़ा गया
मतलब पकड़ा
जाता है, पैसे
देके छोड़
दिया जाता है।
हमारे लिए यह बड़ी
शर्म की बात
है। इसलिए मैं
आपके माध्यम
से पशुपालन
मंत्री को
निवेदन करना
चाहता हूं कि
ऐसे
कहीं-न-कहीं
इस प्रकार का
नियम करें जो
पशुपालन के
पशुओं की तस्करी
में लाया जाने
वाला वाहन
जैसे मादक
पदार्थों की
तस्करी में
वाहन लाया
जाता है उसके
लिए जो कड़े कानून
बनाये जाते
हैं 69-बी का जो
आबकारी कानून
है वाहन जब्ती
का, वह कानून
भी पशुपालन
मंत्री महोदय
इस, जो पशुओं
की तस्करी
में हो रही है
इसकी रोकथाम
के लिए ऐसा
कानून लाया
जाए और उसके
बाद मैं ध्यान
दिलाना
चाहूंगा
माननीय
गृहमंत्री
महोदय का। मैं
धन्यवाद
देता हूं उनको
कि बॉर्डर पर
अच्छे मजबूत
थाने और उनके
एस एच ओ इस
प्रकार के मजबूत
किए कि पिछली सरकार
की जो बॉर्डर
पर तस्करी के
माध्यम से
पकड़ी गई
दो-दो, चार-चार
बार ट्रकें इस
बार की घटनाओं
में कमी हुई
है और मैं
आपसे निवेदन
करना चाहूंगा कि
सीमान्त जो है
हमारा, पश्चिमी
सीमा जो
सुरक्षा
प्रहरी इस देश
की सुरक्षा
करता है उस पर
भी इस प्रकार
की निगरानी
रखे और उसके
लिए जो कोई भी
पुलिस की व्यवस्था
चाहिए वह हमें
करनी चाहिए और
ऐसे जांबाज बहादुर
अफसरों को
वहां लगाया।
जिस सीमांत
मतलब यह एक
मंत्री जी ने
एक बयान में
कहा है कि सौ
से अधिक तस्करों
को मारा गया
मतलब मुठभेड़
में मारा गया
मतलब तस्कर
ये पशुओं के
तस्कर भी
होते हैं जो
आमने-सामने
मुठभेड़ करते
हैं तो हमारी
जनता, हमारे
राजस्थान का
जो ग्रामीण
बंधु, आदिवासी
बंधु जिन
पशुओं के
भरोसे जीता है,
उनके जीवन
जीने का, उनकी
रोजी और रोटी
का जो सवाल है
इसलिए मैं
आपके माध्यम
से माननीय
पशुपालन
मंत्री महोदय
एक निवेदन यह
करना चाहूंगा
कि एक तो यह
नियम में
कहीं-न-कहीं
यह कठोरता आप
बयान करेंगे
कि उनमें वाहन
के मालिक पर
भी कार्यवाही,
आप बतायें एक
भी केस ऐसा
हुआ है वाहनों
की तस्करी
में किसी वाहन
के मालिक पर
कार्यवाही की
हो तो बताये।
आज दिन तक
नहीं हुई है,
ले-देकर
वाहनों को
छोड़ दिया
जाता है।
इसलिए
कहीं-न-कहीं
तो यह कठोरता लानी
पड़ेगी और मैं
सरकार से
निवेदन करता
हूं आपके माध्यम
से कि एक ऐसा
हिन्दूस्तान
के इतिहास में
इतिहास बनाये
कि ऐसा पशुधन
पर तस्करी
में लाने वाला
वाहन उसको जब्त
करके इतना
कठोर कानून
बनाये और एक
इतिहास बनें। इसके
साथ ही मेरा
एक और निवेदन
है कि जो पशु
वास्तव में
गो-वंश की जो
तस्करी हो
रही है उसकी
नस्ल के
सुधार के लिए
गो-सेवा आयोग
को दो करोड़
दिये हैं
लेकिन वह भी
कम है और
दूसरा
पश्चिमी
राजस्थान के
अंदर जो बड़ी
गो-शालाएं की
हैं जैसे पथबेड़ा
गो-शाला अभी
बाड़मेर में
कुछ दिनों पहले
एक ट्रक पकड़ी
गई और उन ट्रक
को कौन रखें?
तो पथबेड़ा
गो-शाला भेज
दिया। अब
सरकार अनुदान
अभी तक चालू
नहीं किया
वहां पर,
बाड़मेर-जैसलमेर
में कर दिया है,
जैसलमेर-बाड़मेर
में तस्करी
जो पकड़े गये
पशु गो-शाला
में रख दिए
हैं लेकिन
अनुदान चालू
नहीं किया है।
मैं आपके माध्यम
से आपसे
निवेदन करना
चाहूंगा कि उस
गो-शाला के
लिए
कहीं-न-कहीं
अनुदान की व्यवस्था
की जाए और
चारे के डिपो
की व्यवस्था
की जाए क्योंकि
अकाल राहत में
यह जिला नहीं
होने के कारण,
लेकिन गो-शाला
के लिए जैसा
गत पर किया था,
वैसा इस बार
भी एक स्पेशल
पैकेज देकर और
अनुदान की व्यवस्था
की जाए। यही
मेरा निवेदन
है।
श्री
उपाध्यक्ष:
धन्यवाद।
श्री राव
राजेन्द्र
सिंह।
श्री
प्रभुलाल
सैनी (कृषि
मंत्री):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, आहोर
से आने वाले
माननीय सदस्य
की चिंता, यह
सच है कि 1997 में
जब पशुओं की
गणना हुई
उसमें गो-वंश
एक करोड़ इक्कीस
लाख था और जब 2003
में जब गणना
हुई तो एक
करोड़ आठ लाख
गो-वंश रहे।
जहां तक तस्करी
का प्रश्न है
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय मैं
आपके माध्यम
से सदन को
जानकारी देना
चाहूंगा कि
राजस्थान
में गो-वंश (वध)
प्रतिषेध एवं
अस्थाई
प्रवर्जन या
निर्यातक
विनियमन
अधिनियम 1995 बना
हुआ है और इस
अधिनियम में
कई कड़े
प्रावधान किए
गए हैं।
जिसमें गो-वंश
को राजस्थान
के बाहर तस्करी
ले जाने पर रोक
के प्रावधान
किये हैं और
उसमें धारा-8
में माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय
प्रावधान
किये गये हैं
कि यदि इस प्रकार
की तस्करी की
जाती है या
उसमें वाहन
पकड़े जाते
हैं तो
निश्चित रूप
से मोटर व्हीकल
एक्ट 1988 के
प्रावधानों
के अंतर्गत
वाहन को जब्त
भी किया जाता
है लेकिन
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय जैसा
माननीय सदस्य
जानते हैं कि
आबकारी
अधिनियम की
भांति इस अधिनियम
को और कठोर
किया जाए इसके
बारे में एक माननीय
मुख्यमंत्रीजी
के निर्देशन
पर एक
मंत्री-मण्डलीय
उप-समिति बनी
है। जिसमें
राजस्थान के
बछड़ा, बछड़ी
जो निर्यात या
अस्थाई
प्रवर्जन किए
जाते हैं उनकी
रोकथान के बारे
में विचार
किया जा रहा
है। मैं आपको
यह जानकारी
देना चाहूंगा
कि माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय कि
निश्चित रूप
से इस अधिनियम
की धारा-6 यह
प्रावधान
करती है कि
यदि बिना
परमिट के किसी
भी गो-वंश को
स्टेट के
बाहर ले जाया
जाएगा, उसको
एक वर्ष से
लेकर सात वर्ष
तक की सज़ा
देने के
प्रावधान
उसमें किए हुए
हैं। जहां तक
वाहन के बारे
में भी माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय धारा-6
में प्रावधान
दिया हुआ है यदि
उसका मालिक या
उसका कोई भी
ड्राईवर जो कि
उसका वाहक जो
ले जाने वाला
है यदि इसमें
वह भी पकड़ा
जाता है,
उसमें लिप्त
पाया जाता है
तो उस पर भी
उतनी ही सज़ा
के प्रावधान
दिये गये हैं
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय जो
धारा-3 के
प्रावधानों
के अंतर्गत उस
अपराधी को
दिया जाएगा जो
यहां राजस्थान
से बाहर उसको
लेके जाएगा
दूसरा, प्रश्न
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय आपने
जानना चाहा कि
राजस्थान
में पशुओं की
नस्ल के
संवर्द्धन के
बारे में भी
सरकार को कुछ
करना चाहिए।
इसके बारे में
मैं जानकारी
देना चाहूंगा
कि माननीय
मुख्यमंत्रीजी
ने अभी बजट
में घोषणा की
है कि राजस्थान
में प्रमुख जो
हमारी
प्रजाति हैं
राठी, थारपारकर,
गिर और काकरे।
इन गो-वंश को
बचाने के लिए
हम लोग एक विशेष
अभियान भी चला
रहे हैं और
राजस्थान
में पशु नस्ल
के बारे में
हमने एक नीति
भी लागू की है,
निश्चित रूप
से राजस्थान
का गो-वंश
संरक्षित
होगा, पल्लवित
होगा और जहां
तक गो-शालाओ
के अनुदान का
प्रश्न है
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय अभी 793
गो-शालाओं का
रजिस्ट्रेशन
राजस्थान
में है और
लगभग 2 लाख 86 लाख
हजार और पशु उनमें
अभी संधारित
किए जा रहे
हैं। जहां
अभावग्रस्त
क्षेत्र हैं
वहां पर उनको
अनुदान देने
की व्यवस्था
भी दी जा रही
हैं और जहां
अधिक अनुदान
देने का प्रश्न
है माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय इस पर
सरकार विचार
कर रही है।
जहां भी जैसी
स्थिति होगी
सीमित
संसाधनों को
देखते हुए हम
उस पर
कार्यवाही
करेंगे।
श्री
उपाध्यक्ष:
धन्यवाद।
श्री राव
राजेन्द्र
सिंह। आपकी
दुविधा दूसरी
है (व्यवधान)
श्री
रिछपाल सिंह
मिर्धा
(डेगाना): माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं एक
छोटा सा
निवेदन कर रहा
हूं कि
पशुपालन
मंत्रीजी
कृषि और
पशुपालन में
बहुत ही
जानकारी रखते
हैं और पर्ची
के माध्यम से
उठाये गये
मुद्दों का
जवाब दे रहे
हैं तो मेरा
भी एक निवेदन
है कि हमारे
जिले में मैं लगातार
15 वर्षों से इस
सदन में मांग
कर रहा हूं (व्यवधान)
श्री
उपाध्यक्ष:
आपकी मांग
दूसरी है।
श्री
रिछपाल सिंह
मिर्धा
(डेगाना): आप तो
काश्तकार है
साहब, दो मिनट
आप यह सुन
लेंगे मेरी
बात तो सदन पर
कोई बोझ नहीं
आ जाएगा। तीन
साल तक के
बछड़े को बाहर
ले जाने के
लिए रोक है और
वह कृषि के
लिए ले जाते
हैं, उसको
काटने के लिए
नहीं ले जाते
हैं। हमारे
नागौर के
एशिया के
प्रसिद्ध मेलें
बर्बाद हो रहे
हैं। नागौरी
नस्ल का बैल
समाप्त होने
जा रहा है।
मेरा आपसे
निवेदन है कि
इस पर भी आप
विचार करके
इसमें संशोधन
करें तो हमारे
मेले बच सकते
हैं और हमारी नस्ल
वापिस तैयार
हो सकती है।
यह कहना चाहता
था मैं माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय। मैं
लगातार 15
वर्षों से इस
सदन में यह
मांग कर रहा
हूं।
श्री
उपाध्यक्ष:
आपकी तो शुरू
से ही यह
डिमाण्ड है
(व्यवधान)
श्री
रिछपाल सिंह
मिर्धा
(डेगाना): वो
कहना चाह रहे हैं,
मंत्रीजी कुछ
कह रहे हैं
सुन तो लो आप।
श्री
उपाध्यक्ष:
वह इस समय क्या
कहेंगे?
Bhs/akt/12.3.07/13.50/2b
श्री प्रभुलाल सैनी (कृषि मंत्री): नहीं, माननीय उपाध्यक्ष महोदय, जैसा मैंने कहा कि इस बारे में एक हमारी मंत्रिमंडलीय उपसमिति बनी हुई है हम लोग सभी वर्गों से, किसानों से और इससे जुड़े सभी लोगों के विचार हम लोग ले रहे हैं। निश्चित रूप से कोई न कोई ऐसा निर्णय जो समिति उचित समझेगी, हम लोग शीघ्र लेंगे।
श्री उपाध्यक्ष: उस कमेटी में आप सदस्य हैं कि नहीं?
श्री रिछपालसिंह मिर्धा (डेगाना): मैं सदस्य हूँ कि नहीं उससे कोई फर्क नहीं पड़ता है साहब, यह काम सरकार का है सरकार करेगी ।
श्री उपाध्यक्ष: श्री रावराजेन्द्र सिंह। भू माफिया द्वारा अनुसूचित जाति एवं जनजाति की भूमि हड़पने के संबंध में।
अनुसूचित
जाति-जनजाति
की भूमियों का
हस्तान्तरण
श्री राव राजेन्द्र सिंह (बैराठ): सम्माननीय उपाध्यक्ष महोदय, भारतवर्ष के स्वाधीनता प्राप्त करने के उपरांत इस देश के संविधान निर्माताओं ने उन समस्त जातियों को जो कि पिछले कई वर्षों से शोषण का शिकार थी, संविधान की अनुसूची में डालकर उनको संरक्षण प्रदान करने की कृतज्ञता की है उसी भावनाओं के अनुरूप राजस्थान काश्तकारी अधिनियम की धारा 42 सैक्शन 2 के प्रावधानों का संस्मरण राजस्थान राज्य में उच्चस्थापित किया गया है। इस धारा के माध्यम से उन समस्त अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों को जिनके पास में अपनी कृषि भूमि है उनके हस्तांतरण पर यानी धन के अभाव और प्रभाव दोनों को संतुलित करने के लिए इस धारा का इस्तेमाल उनके स्वामित्व के संरक्षण के लिए राजस्थान प्रदेश में प्रतिपादित किया हुआ है। पिछले तीन वर्ष से ज्यादा समय में इस कानून का सर्वत्र उल्लंघन करके इन अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों को उनकी कृषि भूमि को गैरकानूनी तरीके से खरीद फरोख्त करके कुछ ऐसे लोग बाग़ लो इन्हीं जाति के हैं इसका दुरुपयोग करके इन जमीनों का हस्तांतरण कर रहे हैं । उदाहरण के तौर पर मैं अर्ज करना चाहूंगा कि बावरिया जाति के जो लोग बाग़ हैं उनके रिकार्ड में बावरिया को बागरिया करके और उनकी जमीन का हस्तांरण करने के लिए बागरिया होने के बाद वो ओबीसी में आ जाते हैं और कोई भी आदमी उस जमीन को ले सकता है। ऐसे-ऐसे लोग बाग़ हैं जिनके जाति प्रमाण पत्र, जिनके रिश्तेदार, जिनकी धर्मपत्नी, जिनके बच्चे आज भी अनुसूचित जाति में हैं वो ही तहसीलदार, वो ही तहसील और वो ही राजस्व के कर्मचारी उनको जाति प्रमाण पत्र तो अनुसूचित जाति का दे रहे हैं उसी व्यक्ति की उसी की फोटो और वो अपनी जाति को छिपाकर बागरिया नाम से उनकी भूमि का हस्तांतरण कोई अन्यत्र लोगबाग अपने नाम पर करा रहे हैं। इसी प्रकार विराटनगर तहसील में 15 दिसंबर को राजस्थान पत्रिका के माध्यम से एक बहुत बड़ा इस तरीके का भू माफिया का जो वहां काम चल रहा था उसको उजागर किया था। इसके दो पहलू हैं एक तो कानून का उल्लंघन हो रहा है जहां गलत आदमी को लेकर पेश कर रहे हैं अहीर जाति के व्यक्ति को चमार जाति का बताकर या रैगर जाति का बताकर सामने खड़ा किया गया। व्यक्ति हरियाणा का था उसका हस्तांतरण करके सात सौ बीघा जमीन को हस्तांतरण कर दिया गया। दुसरी बात जो लेने वाला है जो उस जाति का जो व्यक्ति जिसको ले रहा है वो एक ऐसा व्यक्ति है एक ऐसा परिवार है जो बीपीएल श्रेणी का परिवार है। सात सौ बीघा जमीन का आदान प्रदान और दो सौ बीघा जमीन अभी भी उसके नाम पर है अगर वो डीएलसी रेट भी देख ली जाए तो करोड़ों में वो डीएलसी रेट आएगी। कहां से आया यह पैसा कौन इन जमीनों की खरीद कर रहा है । हो यह रहा है कि जिस अधिनियम को इसलिए लागू किया गया था कि ये जमीनें इन आदिवासी लोगों को और अनुसूचित जाति के लोगों के पास में रहे, आज न तो उनको पैसा मिल रहा है, उनके ऊपर तो ये और दंड है कि तुम्हारी अगर गलत तरीके से हमने जमीन ली है तो तुम्हारे को ये पैसा भी लौटाना पड़ेगा। न तो उनको पूरा पैसा मिल रहा है अपनी संपदा से भी उनको हाथ धोना पड़ रहा है और धीरे-धीरे ये सारी की सारी संपदा किसी कंपनी अधिनियम के तहत किन्हीं कंपनियों के अधीनस्थ हो रही हैं। एक जांच राजस्थान पत्रिका में छपने के उपरांत एसडीएम कार्यालय से कलेक्टर ने करायी और कलेक्टर ने साफ लिखा है कि कंपनी अधिनियम में यह बात साफ है कि अगर आप, कंपनी की कोई जाति नहीं होती लेकिन अगर कंपनी में एक डाइरेक्टर भी अनुसूचित जाति का है और बाकी डाइरेक्टर स्वर्ण जाति के हैं तो वो इसको हस्तांरण करा रहे हैं। कंपनी अधिनियम ये भी कहता है माननीय उपाध्यक्ष महोदय, अगर कंपनी को आपने बनाया है और कंपनी को बनाकर सिर्फ एक ट्रेडिंग करने की हैसियत से आपने बनाया है तो कंपनी अधिनियम का भी आप उल्लंघन कर रहे हैं। यह सारी कंपनियां 6 महीने पहले बनती है 6 महीने पहले बनने के बाद में इन सारी जमीनों का हस्तांतरण इन कंपनियों के नाम पर होता है और फिर इस कंपनी के डाइरेक्टर्स चेंज हो जाते हैं और दूसरे डाइरेक्टर्स इन कंपनियों में आ जाते हैं । दो चीजों का उल्लंघन हो रहा है कंपनी अधिनियम का दुरुपयोग करके एससी/एसटी की जमीन कंपनी के नाम पर ले ली जा रहा है। दूसरा कंपनियों के डाइरेक्टर्स हट जाते हैं और दूसरे डाइरेक्टर्स आते हैं। आपके स्टांप ड्यूटी का भी पूरा पूरा उल्लंघन हो रहा है दोनों तरफ से राज्य सरकार को मार पड़ रही है। यहां तो जो गरीब और शोषित वर्ग है वो अपने हाथों से उनकी संपदा जा रही है और वहां से जो रेवेन्यु आनी चाहिए उसकी हानि हो रही है। ठीक इसी प्रकार से कम से कम एक दर्जन तो ऐसे केसेज हैं जो विराटनगर तहसील में हैं सात ऐसे केसेज बावरिया जाति के जो सांभर और दूदू तहसील के हैं श्योराम बावरिया हो या कालूराम बावरिया हो या देवा बावरिया हो इन सबके नाम बावरिया की जगह बागरिया कर दिया गया है और इस बात को बताने में भी अतिशयोक्ति नहीं होगी कि कंपनी अधिनियम में आने वाले तो धनाढ्य सेठ हैं ही इनके साथ कहीं न कहीं पुलिस के उच्चाधिकारी का भी इसके साथ में तालमेल है। ये जितने हस्तांतरण हुए हैं कहीं न कहीं पुलिस का अधिकारी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप में जरूर उसके अन्दर हिस्सेदार है। ये जो बावरिया जाति का हुआ है इसमें तो धर्मपत्नी ही पुलिस अधिकारी की है। खरीदने वाली जो है वो धर्मपत्नी है पुलिस अधिकारी की। बाड़मेर जिले का वो व्यक्ति रहने वाला है और दूदू में आकर उसकी धर्मपत्नी वो चीज कर रही है। बावरिया जाति से वो ले पा रही है ये स्वयं ओबीसी के हैं । विराटनगर में भी यह हुआ अधिकारी वर्ग कहीं का आईपीएस अफसर है कहीं बाहर है जब उनके ऊपर अंकुश कसा गया तो कहा कि हमें प्रताडि़त कर रहे हैं, पूरे शोध में और एसडीएम के शोध में यह जब पता लगा कि वास्तविकता में ये सारा का सारा बेनामी ट्रांजेक्शन है । मेरा आप लोगों से यह आग्रह है कि गृह मंत्री जी इसकी जांच करा कर के इसका जो आपराधिक षडयंत्र है उस पर तो उनको सज़ा दिलायें लेकिन ये जितनी भी जमीन है ये बेनामी जमीन है इसको सरकार अपने आप अधिग्रहण करे। यह जिस तरीके से पडी़ हुई हैं ये आगे हस्तांतरण हो जाएंगी। जब आपके इंक्वायरी में यह आ गया कि ढाई सौ, तीन सौ बीघा जमीन तो खरीददार जिसके नाम से रजिस्ट्री हुई है उसने यह कह दिया कि मैंने यह जमीन नहीं खरीदी है मेरी गलत फोटो लगायी गयी है मेरे से तो सिर्फ दस्तख्त कराये गये हैं न मैंने जमीन खरीदी है न जमीन के मेरे पास कभी पैसे रहे इसलिए ये जमीन मेरी नहीं है। जब वो कह रहा है बयान आ गया मजिस्ट्रेट के सामने दे दिया, इंक्वायरी में यह साबित हो गया आई.ओ. जो इंवेस्टिगेशन ऑफिसर है उसने यह साफ कर दिया उसके बावजूद भी आई.ओ. को चेंज कर देना। आई.ओ. चेंज करके फाइल कहीं और हस्तांतरित करा देना, आप दस जगह करायें, आप बोर्ड बनायें, आप विधान सभा की समिति बनाकर इसको करें जो-जो चीजें हैं सत्य हैं, प्रमाणित हैं लेकिन यह हजारों बीघा जमीन को कम से कम राज्य सरकार अपने अधीनस्थ तो लें। वरना आगे यह किसी न किसी को बिक जाएगी और कंपनी कानून का और कंपनी का जो दुरुपयोग हो रहा है उस पर अंकुश लगायें। यह राजस्व मंत्रालय और गृह मंत्रालय दोनों की संयुक्त जिम्मेदारी होती है इस तरीके से जो क्राइम कमिट हो रहा है और लोगों का शोषण हो रहा है उस पर कम से कम हमको विराम लगाना है। यही कहते हुए मैं अपनी बात को समाप्त करता हूं। जय हिन्द।
श्री गुलाबचन्द कटारिया (गृह मंत्री): उपाध्यक्ष महोदय, बहुत ही गंभीर विषय है।
श्री प्रद्युम्न सिंह (राजाखेड़ा): एक मिनट गृह मंत्री जी, जैं ज्यादा नहीं एक बात आपसे कहना चाहता हूं कि सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग है कि शिड्यूल्ड कास्ट की जमीन किसी भी रूप में टांसफर नहीं हो सकती सेटल्ड लॉ है लेकिन सम्माननीय सदस्य ने एक बहुत महत्वपूर्ण विषय उठाया है। कलेक्टर ने मोहर लगा दी कलेक्टर ने कह दिया कि कंपनी की कोई जाति नहीं होती और वो टांसफर हो सकती है उसके बोर्ड में एक आदमी शिड्यूल्ड कास्ट का है एक गली निकाली बाद में ...I don’t want to go. क्या सरकार इरादा रखती है कि इस मसले में ऐसे मामलों में आप बोर्ड ऑफ रेवेन्यु को रेफरेंस करना चाहेंगे? अगर आप रेफरेंस करेंगे तो यह कानून हमेशा के लिए सेटल्ड हो जाएगा जो हमारे जिन्होंने निर्माण किया यह कानून बनाया उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचेगी क्योंकि इस प्रकार फिर नयी कंपनियां गठित होंगी कंपनियां गठित होकर पलिता लगाने वाली बात है। जो एग्जस्टिंग कानून है आपका उसके ऊपर पलिता लगायेंगे एक रास्ता खुल गया। कलेक्टर, जयपुर ने मोहर लगा दी कि यह हो सकता है तो कृपया मेरा आपसे निवेदन है कि इसमें कानून विभाग वालों से राय मशविरा ले करके इस पर आपको तुरंत कार्यवाही करनी पड़ेगी अन्यथा इस आड़ के अंदर जो शुरूआत है, शुरूआत एक बहुत महत्वपूर्ण मुद्दे की तरफ उन्होंने ध्यान आकर्षित किया है ये तो शुरूआत है अन्यथा शिड्यूल्ड कास्ट की जमीनों को हड़पने का एक तरीका निकल आएगा, इससे रक्षा करने के लिए सरकार को कारगर कदम उठाने पड़ेंगे। एक चीज आपको और बताना चाहता हूं ...।
कैलाश/अरुण 12.3.07
14.00 (1) 2c
मेरे
धौलपुर जिले
में सपेरे
होते हैं,
कालबेलियां
बगल के गांव
में दर्ज हैं
एससी में आप
चाहो तो लिख
लें । आप
मंगवा लें, आप
के यहां कागज
पडे हुए हैं,
फैसला नहीं हो
रहा है आप के
यहां । कलेक्टर
के यहां कागज
पडे हुए हैं
वह बार बार
मांग कर रहे
हैं वह नाथ
दर्ज कर लिये
गये और नाथ की
जमीन
ट्रांसफर हो
रही है ।
दूसरे गांव
में एससी में
दर्ज है,
कालबेलिये
दर्ज हैं,
सपेरे दर्ज हैं
और यहां नाथ
दर्ज कर दिये
हैं । नाथ
दर्ज होने के
बाद उनकी जमीन
ट्रांसफर हो
रही है । कम से
कम वहां आप
करेक्शन आफ
रिकार्ड तो
करवा दीजिए ।
कई जगह
बावरिया बगरिया
बन गये। यह जो
खेल हो रहे
हैं इसको ठीक
करवाइए । कहीं
न कहीं इसको
रेफरेंस
करवाइए राजस्व
मंत्री जी अन्यथा
यह प्रक्रिया
शुरू हो गई तो
एक बहुत बड़ा खतरनाक
सिगनल इस
राजस्थान के
एससी और एसटी
के लोगों के
लिये होगा, यह सारी
जमीनें चली
जायेंगी मैं
यही आपसे
निवेदन करना
चाहता हूं ।
श्री
राव राजेन्द्र
सिंह (बैराठ): गृह
मंत्री महोदय
मैं इसमें एक
और निवेदन
करना चाहूंगा इसमें
ऐसे भी प्रकरण
सामने आये हुए
हैं जहां आदमी
खुद मौजूद
नहीं है ...
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय राव
साहब, आपको
शायद मालूम
नहीं होगा बीच
में तो यह एक
विचार पैदा
हुआ था कि
सैक्शन 22 में
जो बैन लगा
हुआ है उसको
हटा दिया जाये
और एससी के व्यक्ति
को नोन एससी
को बेचने के
लिये उसको स्वतन्त्रता
दे दी जाये और
उसमें फिर जब
विचार आया कि
नहीं इससे
सारी जमीनें
बिक जायेंगी क्योंकि
जो कम कीमतें
मिल रही हैं,
आपका मेन उद्देश्य
तो यही है कि
एससी के आदमी
की जमीन बहुत
सस्ती रेट पर
कम्पनीज ले
रही हैं, बैन
की वजह से ले
रही हैं, यह भी एक
विचार चला था
इसमें एससी के
लोग एग्री
नहीं हुए और
वह बात भी सही
थी , वास्तव
में यह गंभीर
विषय है ।
श्री
राव राजेन्द्र
सिंह (बैराठ):
इसमें मैं एक
और निवेदन
करना चाहूंगा
जब तहसीलदार
को यह मालूम
है, तहसीलदार
बार बार यह
कहता है कि
तहसीलदार
जहां जहां सब
रजिस्ट्रार
के दौहरे
दायित्व का
निर्वहन कर
रहा है, आईजी
स्टेम्प की
तरह यह बिलकुल
सीधा मामला है
कि कोई भी चीज
रजिस्ट्रेशन
के लिये आप
उसको मना नहीं
करेंगे । यह बात
सही साबित
होती जयपुर के
लिये जहां सब
रजिस्ट्रार
का आफिस अलग
है और
तहसीलदार का
अलग । लेकिन
जहां
तहसीलदार सब
रजिस्ट्रार
के दायित्व
का निर्वहन कर
रहा है,
तहसीलदार के
दायित्व का
भी निर्वहन कर
रहा है जब
उसको मालूम है
कि जो बेचने
वाला है वह
गलत आदमी है,
जो उसके सामने
पेश किया हुआ
है वह गलत
आदमी है । जब
तहसीलदार को
मालूम है कि बावरिया
जाति का यह व्यक्ति
या बागरिया
जाति का यह व्यक्ति
बावरिया है
उसके बावजूद
अगर वह यह
कहता है, सिर्फ
यह एक्सप्लेनेशन
देता है कि
मेरे ऊपर कोई
प्रतिबंध नहीं
है. He is first a
Tehsildar and then a sub-Registrar. As a Tehsildar, he is also a Magistrate. और
उसका पहला
दायित्व यह
बनता है कि
ऐसी किसी चीज
को वह रोके ।
जिन जिन
तहसीलदारों
ने यह बात कही
है जो सब
रजिस्ट्रार
की हैसियत से
भी है और
तहसीलदार की
हैसियत से भी
है उनकी जांच
होनी चाहिये
और जहां मरे
हुए आदमी की
जगह किसी
दूसरे आदमी को
लाकर खड़ा कर दिया
और जब यह पता
चला तो कुछ
केसेज में
रजिस्ट्री
केंसिल कर दी. A crime once committed cannot be set aside
like that. A crime once committed is always a crime. That person or that member
should be penalized. एक तो यह हो
रहा है और खास
कर ऐसे लोग
परिसम्पत्तियां
खरीद रहे हैं
जो चाहे स्वर्ण
जाति के ही क्यों
न हो जिनका खुद
का बैक
ग्राउंड भी
सही नहीं है।
जो आपके थानों
में हिस्ट्रीशीटर
है वह आते हैं
रजिस्ट्री
करवाते हैं और
चले जाते हैं
। उनके पास पैसा
कहां से आ रहा
है और यहां तक
कि तीन तीन
साल तक स्टेंडिंग
वारंट उनके
नाम के आगे
खडे हैं उसके
बावजूद रजिस्ट्रार
के यहां आते
हैं, रजिस्ट्री
करवाते हैं थानों
में जाते हैं
। इसका आप मंगा
लें और राजस्व
मंत्री जी आप
तो यह बात
मंगा लें कि
कितनी लैंड
अलाट हुई थी
एससी एसटी को
और जयपुर जिले
में कितनी
एससी एसटी की
लैंड है जो
किसी न किसी प्रकार
से स्थानान्तरण
हो गई अपने आप
में ब्यौरा आ
जायेगा और साथ
में प्रत्येक
थाने में इस
बात की जांच
जरूर करवाये
कि ऐसे कितने
लोग हैं जिनके
खिलाफ वारंट
थे । तीन तीन
साल तक वारंट
खडे रहते हैं
उसके बाद
मजबूरन जो
पीडित पक्ष
हैं वह उनसे
घबरा कर उनसे
समझौता करते
हैं । समझौते
अदालतों में
पेश होते हैं
और उनके खिलाफ
कार्यवाही
नहीं होती ।
अगर हम तीन
तीन साल तक
पीडित पक्ष को
मजबूर करेंगे
तो डर के मारे
वह तो उनसे
समझौता करेगा
ही करेगा । इन
सारी चीजों की
जांच करा लें
सैक्शन वाइज
और मुकदमें
वाइज । आधा
दर्जन
मुकदमें तो
सिर्फ एक ही
थाने विराट
नगर में है ।
तीन मुकदमें
शाहपुरा थाने
में दर्ज है
और अनेक ऐसी शिकायतें
या तो किसी न
किसी डीआईजी
विजीलेंस के
यहां हैं या
एसीडी में पडी
हुई है । मैं
चाहूंगा कि इस
पर जरूर कठोर
कार्यवाही हो
।
श्री
श्रवणकुमार
(पिलानी):
उपाध्यक्ष
महोदय, जो
राव साहब कह
रहे हैं वह
बात सही है
लेकिन मैं
कहना चाहता
हूं कि
तहसीलदार को
मालूम होता है
कि गलत हो रहा
है उसके
बावजूद अपने
पेट के लिये,
रिश्वत लेने
के लिये वह
सारा आँख मींच
कर काम करता है
। यह तो भला हो
गुलाब चंद जी
कटारिया साहब
का हमारे भी
इसी तरह एक
गरीब के पास
से 10 लाख रुपये
लूट लिये
लेकिन यह भले
आदमी थे उन्होंने
उसकी सही जांच
करवा दी वरना
जमीन भी ले ली
और 10 लाख रुपये
भी उससे ले
लिये । उसके
बाद भी इन्होंने
सीआईडी सीबी
में इसकी जांच
करवाई । वरना
तो उस पर एफआर
लगती उन्होंने
तो कह दिया कि
हमारे पास तो 10
लाख रुपये आ गये
हम तो 2 लाख
रुपये दे
देंगे । हालत
इस तरह की कर
दी इसमें जब
तक सख्त
कानूनी
कार्यवाही
नहीं होगी और
आपके एसडीएम
हो चाहे
तहसीलदार हो
सारे के सारे 50
हजार से कम
लिये बिना तो
कुछ नहीं करते
। इस पर अंकुश
लगाना पडेगा
चाहे यह सदन
कहे या यह सदन
कहे जिस तरह
पानी के ऊपर चर्चा
हुई थी उसी
तरह भ्रष्टाचार
पर भी चर्चा
होनी चाहिये ।
सारे के सारे
एसडीएम हो
चाहे
तहसीलदार हो
सब भ्रष्टाचार
में लिप्त है
और गरीबों की
जमीनों कों
हरियाणा और
पंजाब के लोग
आकर खरीदते
हैं । जो राव
साहब कह रहे हैं
वह हालत सही
है जो लोग इस
बात को समझ ही
नहीं रहे हैं
कि किस की
जमीन है, क्या
है। इसलिए
सबसे ज्यादा
जरूरी है इस
भ्रष्टाचार
पर अंकुश
लगाया जाये और
जो भ्रष्ट
अधिकारी पाये
जाये उसकी तत्काल
जांच करवा कर
उसको दंडित
किया जाये ।
श्री
उपाध्यक्ष: आ
गई आपकी बात ।
श्री
जीतराम
(मालपुरा):
उपाध्यक्ष
महोदय,
एससी की जमीन
जैसे पंजाब और
हरियाणा में
बिकती है उसी
हिसाब से कर
दी जाये ताकि
उसको भी फायदा
होगा । पडौस
वाली जमीन तो 5 लाख
रुपये में बिक
रही है और
एससी वाली लाख
रुपये में ही
बिक रही है ।
इसलिए पंजाब
हरियाणा की
तरह कर दिया
जाये ।
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर):
उपाध्यक्ष
महोदय,
एससी एसटी पर
जो बैन लगा
हुआ है हमारे
अलवर जिले में
40 लाख रुपये
बीघा जमीन हो
रही है और इन
बेचारे एससी एसटी
की जिनकी दो
चार बीघा जमीन
है वह उस पर न कुआं
बना सकते हैं
। माननीय गृह
मंत्री जी इस
पर भी आप कोई
विचार करें
संशोधन लाकर
ताकि गरीबों
को भी फायदा
हो । वह बेचार
वहां कुआ बना
नहीं सकते,
बेच नहीं सकते
। जो महंगी
बेचते हैं तो
रजिस्ट्री
नहीं हो सकती
। आज 30-40 लाख
रुपये बीघा
जमीन हो रही
है तो एससी
एसटी पर क्यों
पाबंदी है ।
हरियाणा
पंजाब में यह
हटाया हुआ है,
वह उसमें
साधान भी नहीं
कर सकते ।
श्री
उपाध्यक्ष:
आप एससी एसटी
के सदस्यों
को पूछो वह
एतराज करते हैं
वह समझते हैं
कि हमारी सारी
जमीन चली
जायेगी ।
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर):
यह सब चाहते
हैं ।
श्री
लालचन्द
मेघवाल
(रायसिंहनगर):
उपाध्यक्ष
महोदय, यह
कांग्रेस
सरकार की नीति
है कि एससी
एसटी के लोगों
के पास जमीन
नहीं रहे यह
चाहते हैं कि यह
सर्कुलर तोडे
राजस्व
विभाग ताकि
एससी एसटी के
लोगों के पास
जमीनें बचे
नहीं, यह इनकी
सोच है ।
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर):
मैं
प्रेक्टिकल बात
बता रहा हूं
आप अपने
क्षेत्र में
पूछो उनसे ।
एसटी एससी
वाले साधन कर
नहीं सकते । 40
लाख रुपये
मिलता है आप
लेने नहीं
देते उसको,
वोट की
राजनीति है ।
आप
प्रेक्टिकल
बात करो । हरियाणा
और पंजाब की
तरह संशोधन
लाइए ।
डा. ओ.
पी. महेन्द्रा
(केसरीसिंहपुर):
उपाध्यक्ष
महोदय, यह
माननीय सदस्य
बेचारे
बेचारे क्या
कर रहे हैं ।
यह एससी, एसटी
वाले कोई
बेचारे नहीं
है । यह
बेचारे
बेचारे क्या
कर रखा है ।
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर):
माननीय राव
साहब ने कहा
इसीलिए
फोरजरीज हो
रही है । वह भी
तो 40 लाख रुपये
ले नहीं सकते,
वह उस चार
बीघा में साधन ही
नहीं कर सकते
। बताइए आप
किसान क्या
करेगा । एक
हरिजन को चार
बीघा जमीन
अलाट हुई ...
श्री
लालचन्द मेघवाल
(रायसिंहनगर):
उपाध्यक्ष
महोदय, यह
हरिजन शब्द
को कार्यवाही
से निकाला
जाये ।
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर):
मेरा सुझाव है
इस पर विचार
किया जाये, यह
कोई असंसदीय
नहीं है । मेरा
एक सुझाव है ।
श्री
लालचन्द
मेघवाल
(रायसिंहनगर):
उपाध्यक्ष
महोदय,
इन्होंने
जिस शब्द को
यूज किया है
उसको
कार्यवाही से
निकाला जाये ।
श्री
उपाध्यक्ष:
अभी यह इतना
डिटेल में
डिसकस करने का
मुद्दा नहीं
है इस स्टेज
पर ।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री):
उपाध्यक्ष
महोदय,
माननीय सदस्य
ने बहुत ही
गंभीर विषय
उठाया है जिस
पर सारे सदन
के सदस्य स्वयं
चिंतित है और
मैं स्वयं भी
चिंतित हूं ।
विराट नगर और
शाहपुरा का केस
तो क्योंकि
अख़बार में
आने के बाद हमने
यह सारी
प्रक्रिया कर
मुकदमें दर्ज
कर के उसके जो
मुलजिम थे उन
सारे
मुलजिमों को
हमने गिरफ्तार
किया है लेकिन
यह जो बावरिया
और बागरियां
वाला जो दूदू
का प्रकरण कह
रहे हैं जिसमें
मेरे किसी
पुलिस
अधिकारी की
पत्नी के नाम
से लिया है
अभी विषय
हमारे पास
किसी भी
मुकदमें के
रूप में नहीं
आया है । आज
इन्होंने
जानकारी दी है
मैं उसकी
जानकारी कर के
अगर मेरे किसी
अधिकारी ने भी
बावरिया और
बागरिया का
भेद कर के
किसी की जमीन
हडपने का
प्रयास किया
है तो निश्चित
रूप से जो भी
नियम में मुझे
अधिकार
प्राप्त है
उसके अनुसार
उसकी
कार्यवाही
होगी ।
श्री
उपाध्यक्ष:
श्रीमती राज
कुमारी शर्मा
। कुशलपुर में
हुए गोली कांड
में मृतक की
विधवा को
नौकरी या राहत
प्रदान करने ...
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
आपके विभाग से
भी संबंधित है
श्रीमान, आप
भी कुछ फरमाये
।
श्री
रामनारायण
डूडी (राजस्व
मंत्री):
उपाध्यक्ष
महोदय, यदि
कहीं भी कानून
का उल्लंघन
हो रहा है 42 बी
में किसी एससी
एसटी की जमीन जनरल
ले नहीं सकता
और एससी की
जमीन एससी ले
सकता है और
बागरिया और
बावरिया और इस
प्रकार से
किया है तो यह
जांच का विषय
है । मंत्री
महोदय ने आपको
बता ही दिया
है और कोई
खरीद फरोख्त
हुई है तो वह
बंद करवा दे
यदि राजस्थान
की जनता चाहती
है कि न तो
एससी की जमीन
कोई एससी वाला
ले और न एसटी
की जमीन एसटी
वाला ले यह नियमों
में तो कोई
प्रावधान है
नहीं कि उसको
रोका जाये ।
यदि अनलीगल
ट्रांजिक्शन
होता है तो वह
जांच का विषय
है ।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
यह लीगल
अनलीगल का
सवाल नहीं है
। आपके कलेक्टर
ने यह कह दिया...
ans/usc 14:10 2d 12.03.2007
जैसा
कि विराटनगर
से आने वाले
सम्मानीय
सदस्य ने कहा
है कि
आपके जयपुर
कलक्टर ने यह
दे दिया कि
कम्पनी
कानून के तहत
कम्पनी को
ट्रांसफर की
जा सकती है।
मेरा मैन मुद्दा
यह है, आपने
मेरी बात की
तरफ गौर नहीं
किया।
श्री
उपाध्यक्ष: इसमें
अभी भ्रम
है(व्यवधान)
कानून स्पष्ट
नहीं है।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
आपको इसके
बारे में स्पष्ट
करना पड़ेगा
नहीं तो
कम्पनी
बना-बनाकर
एससी की जमीन
खा जाएगी ।आज
दिन तक आप
देखिये, आपके
कलक्टर ने
मोहन लगा दी,
कलक्टर की
मोहर लगने के
बाद किस
तहसीलदार और
सब रजिस्ट्रार
की हिम्मत है
कि वह उस
रजिस्ट्री
को रोकेगा।
आपने इस तरफ
गौर नहीं
किया। आपने तो
बड़े साधारण
तरीके से ले
लिया। यह सरकार
अगर नहीं
चाहती गम्भीर
समस्या पर ध्यान
देना, तो फिर
मुझे कुछ नहीं
कहना है इस
मामले के
अंदर।आप
चाहते हैं कि
एससी,एसटी की
जमीन बाईपास
निकालकर, इस
आड के अंदर
एससी,एसटी की
जमीन लोग हडप
जाए तो सरकार
की मर्जी है।
श्री
उपाध्यक्ष:
यह स्पष्ट
नहीं है।
श्री
सुभाष चन्द्र
शर्मा
(कोटपूतली):
उपाध्यक्ष
महोदय, बैराठ
से आने वाले
माननीय सदस्य
ने जो प्रश्न
उठाया है, जो
संबंधित तहसीलदार
है, जो रजिस्ट्री
कर रहा है,
रजिस्ट्रार
भी है उसको
जानकारी है कि
यह बावरिया नहीं
बागरिया है,
बागरिया नहीं
बावरिया है,
तो जब उसको
जानकारी है
उसको बावजूद
वह एससी,एसटी
कीजमीन को
ट्रान्सफर
कर रहा है
उसके खिलाफ सरकार
क्या
कार्यवाही कर
रही है,यह
माननीय रेवेन्यू
मिनिस्टर
बताए।
श्री
उपाध्यक्ष:
ऐसा कोई केस
आयेगा तो
कार्यवाही
होगी।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): यह बहस
का विषय नहीं
है।
श्री
रामनारायण
डूडी (राजस्व
मंत्री): बहस
का नहीं है।
पर्ची के माध्यम
से आया है और
इस प्रकार की
कोई
कार्यवाही है
तो दिखवा
लेंगे।
श्री
टीकम चन्द
कान्त
(सिवाना): सदन
में कुछ
सूचनाएं आ
जाए, कोई समाधान
आ जाए तो बुरी
बात नहीं है।
(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): कानून
सक्षम है,
कार्यवाही
करने के लिए।
कोई फ्लोड हुआ
तो उसके
खिलाफ
फ्लोड का
मुकदमा दर्ज
होगा, कहीं
कोई षड़यत्र
है...(व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):आप
राजस्व
मंत्री है क्या,
उनको बोलने
दीजिए। (व्यवधान)
अधिकृत घोषणा
आपकी नहीं हो
सकती। अधिकृत
घोषणा तो वो
ही कर सकते
हैं।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): आप
विषय को
डायवर्ट कर
रहे हो। (व्यवधान)
जब तक कोई स्पेसिफिक
मामला नहीं
होगा।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
कोई वेलिटिडी
नहीं है(व्यवधान)
आपकी घोषणा की
वेलिडिटी
है...(व्यवधान)श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): घोषणा
काहे की
करेंगे जब कोई
स्पेसिफिक
मामला ही नहीं
है। (व्यवधान)
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
स्पेसिफिक
मामला अभी
बताया उन्होंने,
विराटनगर से
आने वाले(व्यवधान)
स्पेसिफिक
मामला अभी
बताया, पूछ
लीजिए आप
उनसे, उनसे
पूछिये, अभी
बताया। (व्यवधान)
श्री
श्रवणकुमार
(पिलानी):
महावीर जी, आप
सदन में नहीं
थे। आप आउट आफ स्टेशन
थे।(व्यवधान)
बैराठ से आने
वाले सदस्य
ने जो कहा.वह
तथ्यात्मक
रिपोर्ट है और
आप इसमें
अर्न्गल
बातें करेंगे
तो पूरे सदन
को हानि
होगी।(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): मैं
यही था, मैं
कही नहीं गया।
(व्यवधान)
श्री
उपाध्यक्ष:
वह तो
गृहमंत्री जी
ने कह दिया
आपको।
श्री
टीकम चन्द
कान्त
(सिवाना): एक
सूचना दे रहा
हूं इस विषय
में..(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): राजस्थान
पत्रिका का
हवाला देते
हुए....(व्यवधान)
श्री
राव राजेन्द्र
सिंह (बैराठ):
नहीं, इसमें
बाकायदा
मुकदमा दर्ज
हुआ है। सैक्शन
है, आन
रिकार्ड
है,उसमें कोई
बात नहीं है।
गृहमंत्री
जी...(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक):
आन रिकार्ड
पर आये हैं(व्यवधान)
गृहमंत्री जी
ने कह दिया कि
कार्यवाही हुई
है।
श्री
श्रवणकुमार
(पिलानी): मुकदमें
दर्जै हुए
ना...(व्यवधान)
श्री
राव राजेन्द्र
सिंह (बैराठ):जो
राजस्व
मंत्री से
संबंधित बात
थी उसमें यह
था कि कम्पनी
ला का
दुरूपयोग
करते हुए यह
बात हो रही है, तहसीलदार
कम्पनी ला भी
यही कहता है।
अगर आपने किसी
जमीन को किसी
वजह से खरीदी
है और आप डवलप नहीं
कर रहे हैं, वह
कारखाना नहीं
लगा रहे एक नैचुरल
पीरियड आफ
टाइम पर, तो
उसको आप
ट्रान्सफर
कर सकते हैं
लेकिन 6 महीने
आपने खरीदी,
डायरेक्टर
निकल गया,
दूसरा
डायरेक्टर आ
गया, आपको स्टाम्प
डयूटी नहीं
मिल रही,वहां
जमीन का हस्तांतरण
हो गया, ऐसी
कम्पनियां बनती
जा रही है,
जमीन लेती जा
रही है।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): इसलिए
मैं कह रहा
हूं कि वह
षडयंत्र रचकर
कानून को....(व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
इसलिए रेवेन्यू
मिनिस्टर
साहब को कहना
चाहिये।
श्री
श्रवणकुमार
(पिलानी):
रेवेन्यू मिनिस्टर
साहब को मालूम
है, जैसलमेर
के अंदर...(व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
इसलिए उनको
कहना चाहिये,
आप मत कहो।
आपकी
वेलिडिटी
नहीं है कहने
की, उनकी है
वेलिडिटी।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): (व्यवधान)
कोई मामला
नहीं आयेगा,
कोई इस प्रकार
के कूटनैतिक...
श्री
हेमराज मीणा
(किशनगंज):
आपका कोई
मामला नहीं है।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): मेरा
क्या मामला
है, मामले
होंगे तो आपके
होंगे। (व्यवधान)
श्री
हेमराज मीणा
(किशनगंज):
हमारा तो काम
ही। हम तो
आपकी नाक में
नकेल डालना
चाहते हैं। आप
बेइमानी करते
हो उसको रोकना
चाहते हैं।
(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक):करते
होंगे और कुछ
करते होंगे,
मेरा कोई
संबंध नहीं
है(व्यवधान)
श्री
हेमराज मीणा
(किशनगंज):
हमारा तो काम
ही है आप जैसे..(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक):
कूटनैतिक दस्तावेज
तैयार करके
जिनके खिलाफ
कार्यवाही होगी..(व्यवधान)
श्री
श्रवणकुमार
(पिलानी): बिना
तथ्य बोल रहे
हैं क्या ?
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): सक्षम
है ।(व्यवधान)
श्री
उपाध्यक्ष:
श्रीमती
राजकुमारी
शर्मा। मृतक
की विधवा हेतु...(
व्यवधान)
श्री
श्रवणकुमार
(पिलानी):
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, राजस्थान
में कितना
बड़ा घोटाला
है...(व्यवधान)
श्री
उपाध्यक्ष:
माननीय सदस्य..
श्री
श्रवणकुमार
(पिलानी):
रेवेन्यू
मंत्री जी...
श्री टीकम चन्द कान्त (सिवाना): बहुत महत्वपूर्ण सूचना है वह यह है कि यह जो जमीन की खरीद फरोख्त है, सरहद पर भी जमीनें खरीदी जा रही है। जहां बीएसएफ कैम्प है वह जमीन कब किसने खरीदी उनको भी मालूम नहीं यह बहु त बड़ा षडयंत्र जालौर, बाडमेर वगैरह, इसके अंदर चल रहा है। जमीन खरीदने वाला कौन है, जमीन किसके पास से कौन खरीद रहा है,पैसा कौन दे रहा है मालूम नहीं ले किन रजिस्ट्री हो रही है, इस प्रकार के महत्वपूर्ण मामले समझकर इस पर वास्तव में जांच होनी चाहिये। (व्यवधान) एक बार तहसीलदार को भी बुलवा लिया जाए, मीटिंग बुलाइ जाए, उनको पूछा जाए यह जमीन खरीद रहे हैं.. (व्यवधान) कोई कह रहा है कम्पनी खरीद रही है, कोई कह रहा है कोई खरीद रहा है1 यहां तक की भी बात है आपके खाते में जमीन है या नहीं, मौके पर मौजूद जमीन है या नहीं, अगर खाते में कही है तो वह कागज ला दीजिए हम जमीन खरीद रहे हैं, यह स्थिति हो रही है इसलिए मैं निवेदन कर रहा हूं।
श्रीमती राजकुमारी शर्मा (सीकर): माननीय सदस्य बिराजे आप।
श्री श्रवणकुमार (पिलानी): जैसलमेर के अंदर तो यह हालत है...(व्यवधान)
कुशलपुरा
(सीकर) में होली
के दूसरे दिन
हुए गोलीकांड
विषयक
श्रीमती राजकुमारी शर्मा (सीकर): उपाध्यक्ष महोदय, होली के दूसरे दिन मेरे क्षेत्र कुशलपुरा में गोली कांड हुआ। उसमें मुन्ना महिपाल नाम का व्यक्ति मारा गया। भार्गव है जिसे अभी अभी लाइसेंस मिला है। भार्गव को लाइसेंस देने के लिए गांव वालों ने बहुत दिनों से मना कर रखा था कि इसको कोई लाइसेंस न दे क्योंकि न तो उसके कोई खेत है न कोई ऐसा व्यापार है कि आने जाने के लिए उसको लाइसेंस दिया जाए। गांव में अपना दबदबा बना रखा है। उसने होली खेलने के बहाने दस बजे मुन्ना उर्फ महिपाल को अपने घर बुलाया। दस बजे घर बुलाने के बाद उसके छोटी रिवाल्वर थी, कोई आवाज नहीं, उसके बाई साइड में, कंधे पर दाग दी। उसने कहा मेरे दर्द हो रहा है तो बोला आपके कुछ नहीं हो रहा आप सो जाइये हम अभी डाक्टर को बुलाने जा रहे है। इतने में एक बूढी दादी सामने से आ रही थी उसने कहा अरे आप लोगों ने तो इस लड़के को मार दिया, तो बोला कि मारा नहीं अभी इसको डाक्टर को दिखाने के लिए ले जा रहे हैं। वह जोर से चिल्लाई, गांव में थोड़ी भगदड़ मची, भार्गव ने सोचा कि लोग मेरे को पकड़ लेगे इसलिए वह जीप लेकर भाग गया। उसके पिताजी कुछ भी समझे उसके पहले उसने सब लोगों को इकट्ठा किया कि अपन लोग यहां से निकल चलते हैं। उसके माता पिता जब तक समझे सारा गांव इकट्ठा हो गया। एक भार्गव महिला थी, उसका आंतक तो था ही उसने जीप को पत्थर मार दिया और उसको गांव वालों ने गिरफ्तार कर लिया।
उपाध्यक्ष महोदय, जो बच्चा मरा है मुन्ना महिपाल उसकी पत्नि के न तो माता पिता है, विकलांग है, मात्र तीन साल की एक बच्ची है और मुन्ना महिपाल जो मारा गया है उसके भी माता पिता नहीं है। पहले कोई पालनहार योजना तो थी नहीं तो इसको चाचा-चाची और दादी ने इसको पाला। अब यह 26-27 साल का कमाने लायक हुआ, न इसकी कोई रंजिश थी। इसको क्यों मारा गया, क्यों घर बुलाया गया, कौनसी साजिश रची गई यह गांव वाले हमसे पूछते हैं।
मैं आपके माध्यम से हमारे गृहमंत्री जी से निवेदन करना चाहूंगी कि इसकी पूरी जांच कराई जाए। जो महिला है वह कल इतना रोई है, मैं उनके घर तीन घंटे रही। उसके माता-पिता नहीं है वह कहां जाए। पढ़ी लिखी नहीं है, एससी-एसटी की महिला है। बहुत छोटी उम्र की बच्ची है, अभी बीस साल की भी नहीं हुई है, उसके एक छोटी बच्ची है इसलिए मैं आपके माध्यम से हमारी मुख्यमंत्री साहिबा को निवेदन करना चाहूंगी कि उसको नौकरी दे। फोर्थ क्लास की दे या उसको विडो में पढ़ा लिखाकर टीचर की दे।कुछ भी करें उसका, उसकी बच्ची का।
मेरे शब्दों में यही है कि उसको नौकरी दिलवाये। परिवार दुःखी है। उनके कोई बहुत बड़ी जमीन नहीं है। पिताजी उसके अध्यापक है। उस बच्ची के माता-पिता नहीं थे ले किन यह जो चाचा थे उन्होंने उसको बताया ही नहीं कि हम आपके माता-पिता नहीं है। उसको पालपोश कर शादी की। सबको यही मालूम है कि उसके तीन बेटे और तीन बच्चियां थी । आज उनकी स्थिति ऐसी दयनीय हो रही है। गांव सहमा-सहमा है कि उसके खिलाफ कोई बात नहीं करना चाहता है, उसने सबको धमकी दे रखी है कि जो भी मेरे खिलाफ बोलेगा उसका मैं मर्डर कर दूंगा इसलिए मैं सदन के माध्यम से, आपके माध्यम से एक निवेदन करूंगी कि उस बच्ची को नौकरी तो दिलवाए ही उसकी जांच करवाकर जितने भी दोषी है, सुनते हैं एक दर्जी की दुकान पर ऐसा षडयंत्र रचा गया, इसलिए आप उसकी जांच करवाकर उसको तो....
दुर्गा/चौहान
120307 1420 2e
इसलिये आप उसकी जांच करवाकर और उसको आजीवन कारावास रखिये तो गांव वाले ठीक रहेंगे और उस बच्ची को नौकरी दिलायें, धन्यवाद।
श्री गुलाब चन्द कटारिया (गृह मंत्री): उपाध्यक्ष महोदय, वास्तव में यह घटना बहुत दुखद है और सही है। 4 तारीख के दिन यह वारदात हुई और 28/7 मुकदमा उसी दिन दर्ज हो गया। और उसमें आर्म्स एक्ट का भी, एस.सी., एस.टी. एक्ट का भी है और 302 का भी है। एक मुलजिम तो नाकाबंदी के दौरान, शाम को 4 बजे, 11 बजे की घटना थी, जो मेन मुलजिम था, वह मेन मुलजिम किशोर भार्गव तो पकड़ में आ गया। और बाकी उसके जो 2 साथी और हैं, वह भी नामजद हैं, नरेश मीणा है, प्रहलाद भार्गव है, वह भागे हुए हैं। जब भी, जिस समय भी पकड़ में आएंगे, निश्चित रूप से उनके खिलाफ 302 का मुकदमा, आर्म्स एक्ट है, बाकी सारे जो कानून के तहत जो कुछ भी सज़ा उसे मिल सकती है, वह तो हम केस आफिसर स्कीम में डलवाने का प्रयास करेंगे। एस.सी.,एस.टी. का होने के कारण से इनको जो मुआवजा है, उसके लिये भी फाइल मूव कर दी है। मैं सोचता हूं, बहुत जल्दी उनको जो राहत मिलती है, कानून के तहत वह निश्चित रूप से मिलेगी।
श्रीमती राजकुमारी शर्मा (सीकर): माननीय गृह मंत्रीजी, उसने इस तरह का षड्यंत्र रचा था कि इसकी लाश तो बोरे में डाल देंगे। कुशलपुरा में बहुत सारे पहाड़ हैं और उन पहाड़ों की कटाई होती है तो उन्होंने सोचा कि आज होली का दिन है, किसी को पता तो चलेगा नहीं और हम सब लोग भाग जाएंगे। इस तरह से उनका पूरा प्लान था। जो गिरफ्तार हुए हैं, उन्होंने स्वयं ने यह बताया है कि इस तरह का हमारा षड्यंत्र था। उन्होंने पहले से ही टिकटें बुक करवा रखी थीं। इसलिये यह पुन: वारदात न हो उस परिवार के लिये आप ज्यादा से ज्यादा करें तो आपको बहुत-बहुत धन्यवाद। उस बच्ची को नौकरी दिलाने का आश्वासन दें, मेरी यह विनती आपसे है।
प्रतिवेदन
राजस्थान
स्टेट इण्डस्ट्रियल
डवलपमेंट एण्ड
इन्वेस्टमेन्ट
कॉरपोरेशन
लिमिटेड का
37वां वार्षिक
प्रतिवेदन
एवं लेखा
विवरण वर्ष 2005-2006
श्री उपाध्यक्ष: श्री नरपतसिंह राजवी, उद्योग मंत्री राजस्थान स्टेट इण्डस्ट्रियल डवलपमेंट एण्ड इन्वेस्टमेन्ट कॉरपोरेशन लिमिटेड का 37वां वार्षिक प्रतिवेदन एवं लेखा विवरण वर्ष 2005-2006 सदन की मेज पर रखेंगे ।
श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): उपाध्यक्ष महोदय, मैं कम्पनी अधिनियम, 1956 की धारा 619-ए के अन्तर्गत राजस्थान स्टेट इण्डस्ट्रियल डवलपमेंट एण्ड इन्वेस्टमेन्ट कॉरपोरेशन लिमिटेड का 37वां वार्षिक प्रतिवेदन एवं लेखा विवरण वर्ष 2005-2006 सदन की मेज पर रखता हूं।
याचिकाओं
का उपस्थापन
श्री
उपाध्यक्ष:
श्री मदन
राठौड़, सदस्य
विधान सभा
निम्नांकित
याचिकाओं का
उपस्थापन
करेंगे ।
श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): उपाध्यक्ष महोदय, मैं निम्नांकित 4 याचिकाएं उप-स्थापित करता हूं:
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I |
विधान सभा क्षेत्र सुमेरपुर की ग्राम पंचायत नौवी में पशु चिकित्सालय स्वीकृत करने बाबत्, तीन व्यक्तियों से हस्ताक्षरार्थ; |
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II |
विधान सभा क्षेत्र सुमेरपुर की ग्राम पंचायत भांवरी में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र स्वीकृत करने बाबत, तीन व्यक्तियों से हस्ताक्षरार्थ ; |
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III |
विधान सभा क्षेत्र सुमेरपुर में नवीन उप स्वास्थ्य केन्द्र स्वीकृत करने बाबत्, तीन व्यक्तियों से हस्ताक्षरार्थ ; एवं |
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IV |
विधान सभा क्षेत्र सुमेरपुर के ग्राम कोलीवाड़ा में आयुर्वेद औषधालय खोलने बाबत् तीन व्यक्तियों से हस्ताक्षरार्थ। |
समिति का
प्रतिवेदन
कार्य
सलाहकार
समिति का 17वां
प्रतिवेदन
श्री उपाध्यक्ष: श्री महावीर प्रसाद जैन, सरकारी मुख्य सचेतक, कार्य सलाहकार समिति के 17वें प्रतिवेदन का उप-स्थापन करेंगे।
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): उपाध्यक्ष महोदय, मैं कार्य सलाहकार समिति के 17वें प्रतिवेदन का उप-स्थापन करता हूं।
श्री उपाध्यक्ष: सरकारी मुख्य सचेतक यह भी प्रस्ताव करेंगे कि यह सदन कार्य सलाहकार समिति के 17वें प्रतिवेदन पर अपनी सहमति प्रकट करता है।
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): उपाध्यक्ष महोदय, मैं पूरा बोल दूं, अगर आप कहें तो।
उपाध्यक्ष महोदय, कार्य सलाहकार समिति की बैठक दिनांक 9 मार्च, 2007 को मध्यान्ह पश्चात् 2.40 बजे माननीय अध्यक्ष के वैश्म के चैम्बर में हुई । समिति ने निर्णय लिया कि दिनांक 12 मार्च, 2007 से 30 मार्च, 2007 तक सदन में लिये जाने वाले कार्य का बटवारा निम्न प्रकार किया जाय :-
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सोमवार, दिनांक 12 मार्च, 2007 मंगलवार, दिनांक 13 मार्च, 2007 बुधवार, दिनांक 14 मार्च, 2007 |
आय-व्ययक अनुमान वर्ष 2007-2008 पर सामान्य वाद-विवाद |
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गुरूवार, दिनांक 15 मार्च, 2007 |
आय-व्ययक अनुमान वर्ष 2007-2008 पर अग्रेत्तर सामान्य वाद-विवाद एवं राज्य सरकार की ओर से उत्तर |
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शुक्रवार, दिनांक 16 मार्च, 2007 |
अनुदान की मांगों पर विचार एवं मतदान |
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शनिवार, दिनांक 17 मार्च, 2007 रविवार, दिनांक 18 मार्च, 2007 |
बैठक नहीं होगी । |
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सोमवार, दिनांक 19 मार्च, 2007 |
अनुदान की मांगों पर विचार एवं मतदान |
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मंगलवार, दिनांक 20 मार्च, 2007 |
बैठक नहीं होगी । |
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बुधवार, दिनांक 21 मार्च, 2007 गुरूवार, दिनांक 22 मार्च, 2007 शुक्रवार, दिनांक 23 मार्च, 2007 |
अनुदान की मांगों पर विचार एवं मतदान |
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शनिवार, दिनांक 24 मार्च, 2007 रविवार, दिनांक 25 मार्च, 2007 |
बैठक नहीं होगी । |
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सोमवार, दिनांक 26 मार्च, 2007 |
अनुदान की मांगों पर विचार एवं मतदान |
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मंगलवार, दिनांक 27 मार्च, 2007 |
बैठक नहीं होगी । |
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बुधवार, दिनांक 28 मार्च, 2007 |
अनुदान की मांगों पर विचार एवं मतदान |
( आय-व्ययक अनुमान वर्ष 2007-2008 से संबंधित अनुदान की शेष मांगें मुखबन्द का प्रयोग किया जाकर दिनांक 28 मार्च, 2007 को मतदान हेतु प्रस्तुत की जायेगी )
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गुरूवार, दिनांक 29 मार्च, 2007 |
राजस्थान विनियोग (संख्या-2) विधेयक, 2007 पर विचार एवं पारण |
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शुक्रवार, दिनांक 30 मार्च, 2007 |
राजस्थान वित्त विधेयक, 2007 पर विचार एवं पारण |
उपाध्यक्ष महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूं कि यह सदन कार्य सलाहकार समिति के 17वें प्रतिवेदन पर अपनी सहमति प्रकट करता है।
श्री उपाध्यक्ष: प्रश्न यह है कि क्या यह सदन कार्य सलाहकार समिति के 17वें प्रतिवेदन पर अपनी सहमति प्रकट करता है?
(स्वीकृत)
सदन द्वारा प्रतिवेदन पर सहमति प्रदान की गयी।
आय-व्ययक अनुमान वर्ष 2007-08 पर सामान्य वाद-विवाद
मुझे सदन को सूचित करना है कि आय-व्ययक अनुमान वर्ष 2007-08 पर सामान्य वाद-विवाद के लिए लगभग 16 घण्टे उपलब्ध हैं। उपलब्ध समय में सरकार द्वारा उत्तर दिये जाने का समय भी सम्मिलित है। विभिन्न पार्टियों के लिए समय का बंटवारा निम्न प्रकार किया जाता है:-
12. भारतीय जनता पार्टी - 9 घण्टे 40 मिनट
13.
इण्डियन
नेशनल
कांग्रेस – 4
घण्टे 24 मिनट
14.
इण्डियन
नेशनल लोकदल – 15
मिनट
15.
जनता
दल (यूनाइटेड) – 10
मिनट
16.
बहुजन
समाज पार्टी – 10
मिनट
17.
भारत
की कम्युनिस्ट
पार्टी
(मार्क्सवादी)
– 5
मिनट
18.
लोकजन
शक्ति पार्टी – 5
मिनट
19.
राजस्थान
सामाजिक न्याय
मंच – 5 मिनट
20.
निर्दलीय
- 1 घण्टा
3 मिनट
कुल समय: 16 घण्टे।
माननीय श्री सी.पी. जोशी।
आय-व्ययक
अनुमान वर्ष
2007-2008 पर सामान्य
वाद-विवाद
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): उपाध्यक्ष महोदय, सबसे पहले, Let me confess it. मैं सन 80 में एम.एल.ए. बना। 80-98 तक I was an MLA. और एक विधायक के रूप में विधान सभा में जो बजट के कागज मिलते थे, वह मैं अपने घर पर ले जाकर रखता था। बाद में परिवर्तन हुआ, बजट को अटेची में रखने की परम्परा प्रारम्भ हुई। आज अच्छी अटेची में पूरे बजट को अच्छे ढंग से माननीय विधायक को दिया जाता है। परन्तु माननीय उपाध्यक्ष महोदय, यदि मुझे सरकार में मंत्री बनने का अवसर नहीं मिलता तो शायद बजट के सम्बन्ध में हम अपने विचार को ठीक ढंग से नहीं रख सकते। मैं धन्यवाद देना चाहता हूं, अध्यक्ष महोदया को भी और ....... संस्था को भी, जिसने हमें इस बात के लिये प्रेरित किया कि जन-प्रतिनिधियों को बजट के बारे में समझना जरुरी है।
( बजे)
(श्री सुरेन्द्र गोयल, सभापति, पदासीन)
जब तक हम बजट के बारे में ठीक ढंग से नहीं समझेंगे तब तक हम प्रभावशाली ढंग से जनता की सेवा नहीं कर सकेंगे। ऐसी मेरी मान्यता है। और इसलिये मैं अपनी बात प्रारम्भ करना चाहता हूं हमारे भारत सरकार के वित्त मंत्री, उन्होंने यह बात कही, “I must caution that the outlays do not necessarily mean outcomes. The people of the country are concerned with the outcomes. The Prime Minister has repeatedly emphasized the need to improve the quality of implementation and enhance the efficiency and accountability of the mechanism.” यह हमारे भारत सरकार के वित्त मंत्री के विचार हैं और मैं समझता हूं कि हर सरकार का कर्तव्य होता है, हम आउट-लेज से ज्यादा आउट-कम के बारे में चर्चा करें। और मुझे आज इसी बात से आपका ध्यान आकर्षित करना है, सभापति महोदय, आउट-लेज बड़े इम्प्रेसिव हैं। आउट-लेज इम्प्रेसिव आज से नहीं हैं। जब से यह सरकार सत्ता में आयी है, तब से है, सरकार ने जो बजट रखे हैं मैं उन सबके बारे में भी आपका ध्यान आकर्षित करुंगा और बताऊंगा कि किस तरह से इम्प्रेसिव आउट-ले देकर जनता को यह बताने की कोशिश की जो उनके उद्देश्य हैं उनको पूरा करेंगे। जब एक्चुअल्स आये, सभापति महोदय, सी.ए.जी. ने आउट-लेज और आउट-कम में बहुत बड़ा अन्तर है। माननीय मुख्य मंत्रीजी ने भी, सभापति महोदय, आप जानकर आश्चर्य करेंगे, अपने बजट भाषण, 8 मार्च, 2006 में पैरा 21 में कहा, बजट प्रक्रिया में समय के साथ परिवर्तन लाते हुए हमने आउट-कम बजटिंग प्रारम्भ करने का निर्णय लिया है ताकि हम केवल वित्तीय प्रावधानों का ही नहीं बल्कि योजनाओं के वास्तविक परिणामों का मूल्यांकन कर सकें। आउट-कम बजटिंग के परिणाम प्राप्त होने पर मैं उनको सदन से अवगत कराऊंगी।
( बजे)
(श्रीमती
सुमित्रासिंह,
अध्यक्ष,
पदासीन)
Vps-usc-12032007-1430-2f-1
माननीय अध्यक्ष महोदय, यह वित्त मंत्री के रूप में मुख्य मंत्रीजी का भाषण है 08 मार्च, 2006 का और माननीय अध्यक्ष महोदय, मुझे कहते हुए यह तकलीफ है, वही मुख्य मंत्री, वही वित्त मंत्री जब 9 मार्च, 2007 में भाषण दे रही हैं, माननीय अध्यक्ष महोदय, तब माननीय अध्यक्ष महोदय, वह यह कह रही हैं, आउट कम और आउट लेट में, आउट कम को आउट पुट से लिंक कर दिया है भारत सरकार ने इसलिए मैं अभी यह रखने के लिए असमर्थ हूं माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आज भी समझ नहीं पाया, माननीय अध्यक्ष महोदय, कि यह सरकार जिसका 2006 में यह कमिटमैंट था कि हम आउट कम जनता के सामने रखेंगे और आज क्या आवश्यकता बन गयी कि यह सरकार आउट कम बजट हमारे सामने नहीं रखना चाहती? माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं समझता हूं कि यही सबसे बड़ी एक दुविधा है इस सरकार के साथ में कि कथनी और करनी में इनका कितना अन्तर है।
माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं इसका रिलेवेंट पैरा मैं आपको रेफर करके बता दूंगा जिसमें माननीय मुख्य मंत्रीजी ने यह कहा है कि आउट कम बजट रखने की स्थिति उनकी नहीं है क्योंकि आउट कम को आउट पुट से मेजर नहीं किया जा सकता। एक साल बाद मुख्य मंत्री को मालूम पडा, माननीय अध्यक्ष महोदय, कि आउट कम को आउट पुट से मेजर नहीं कर सकते। इस पवित्र सदन में एक बार यह कहा गया कि मैं सदन को आउट कम बजट के बारे में सूचना करूंगी और दूसरी ही बार आज सदन में रखा उसमें लिखा है कि मैं आउट कम बजट के संबंध में अपनी बात नहीं कह सकती क्योंकि आउट पुट और आउट कम में अन्तर है।
माननीय अध्यक्ष महोदय, अंग्रेजी वर्ड तो मुझे आते नहीं हैं क्योंकि अंग्रेजी वर्ड पढ़े-लिखे लोग जो हैं, माननीय अध्यक्ष महोदय, वे ही, इस भाषण में आप देखिये, माननीय अध्यक्ष महोदय, कितना परिवर्तन हो गया? आज अंग्रेजी वर्ड लिखकर हम इस बजट भाषण में क्या-क्या बातें कहना चाहते हैं? माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं दो-तीन बातों की ओर आपका ध्यान आकर्षित करके मुख्य मुद्दे पर आऊंगा क्योंकि मैंने कहा, माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने कोट किया है चिदम्बरम साहब को और दूसरा चिदम्बरम साहब का एक और मैं कोट करना चाहता हूं। माननीय अध्यक्ष महोदय, “This Budget has to be judged in the political and economical context.” यह बजट को जज किया जाना चाहिए इकॉनोमिक एण्ड पालिटिकल कांटेक्स्ट में। यह हमारे वित्त मंत्री का विचार है, माननीय अध्यक्ष महोदय, और मैं चाहता हूं कि मेरे जो भाषण का सार है वह यही है कि इस बजट को पालिटिकल और इकॉनोमिक, इसी आधार पर जज किया जाना चाहिए।
माननीय अध्यक्ष महोदय, मुख्य मंत्रीजी का यह तीसरा बजट है और माननीय अध्यक्ष महोदय, ... (व्यवधान) चौथा बजट है। बजट भाषण के दूसरे पैराग्राफ में माननीय अध्यक्ष महोदय, लिखा है कि यह त्यौहार गिले-शिकवे पालने का नहीं भूलने-भुलाने का है। फोरगिव एण्ड फोरगेट का है। हिन्दी मुझे पता नहीं है। अंग्रेजी में जो उनके विचार हैं वहीं लिखे हैं, माननीय अध्यक्ष महोदय, क्योंकि अंग्रेजी में कभी-कभी आदमी अपनी बातें सही लिख सकता है जो हिन्दी में अभिव्यक्ति नहीं दे सकता है क्योंकि कुछ आदमियों की अभिव्यक्ति अंग्रेजी में अच्छी होती है। अच्छा है उन्होंने अपनी सब बातें जो उनकी मन की बातें हैं वह अंग्रेजी में ही लिख है उन्होंने। उन्होंने लिखा कि यह फोरगिव एण्ड फोरगेट करने का है, माननीय अध्यक्ष महोदय, आपसी प्यार और सम्मान का है।
माननीय अध्यक्ष महोदय, पहली बात तो इस बजट भाषण में इसलिए मैंने कहा कि पालिटिकल और मैं उसका इकॉनोमिक का भी कहूंगा, माननीय अध्यक्ष महोदय, और आखरी में एक बात अच्छी कही है 233 पैरा में, मेरी सरकार ने राजस्थान को एक विकसित प्रदेश बनाने का सपना देखा है। यह 233 पैरा के पहले, माननीय अध्यक्ष महोदय, किसी भी जगह पर मेरी सरकार का वर्णन नहीं है। ‘मैं’, ‘मैं’ यह करूंगी, ‘मैं’ यह दे रही हूं, ‘मैं’ फलांना करूंगी, ‘मैं’ यह करूंगी, माननीय अध्यक्ष महोदय, यह इस बात का प्रतीक है कि इस राजस्थान के लोकतंत्र में जिस चुनी हुई सरकार को गुड्स डिलीवर करने हैं, उनकी एग्जिक्यूटिव एजेंसी पालिटिकल गवर्नमैंट से मिनिस्टर होते हैं और मिनिस्टस के नीचे ब्यूरोक्रेसी है। ब्यूरोक्रेसी को काम करवाकर अपने बजट की जो सरकार के नीति निर्णय है, उसको लागू करना है। दुर्भाग्य है। दुर्भाग्य है माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं राज्यपाल के अभिभाषण को भी लेकर आया हूं। यह राज्यपाल का अभिभाषण जो रखा है, माननीय अध्यक्ष महोदय, इस राज्यपाल के अभिभाषण का इतिहास भी समझना पड़ेगा कि केबिनेट ने राज्यपाल के अभिभाषण को पास नहीं किया। एक कमेटी बनी। कमेटी बनकर रेफर करके उसको पास करवाया। इस राज्यपाल के अभिभाषण में कहीं शब्द ‘मैं’ नहीं है। मेरी सरकार, सरकार, यह सरकार तो लोकतंत्र में होता ही यह है कि सरकार ही काम करती है। मुख्य मंत्री के जो मंत्री लोग साथी हैं, वे लोग मिलकर निर्णय करते हैं और निर्णय करने के बाद एग्जिक्यूट करते हैं। यह राज्यपाल का अभिभाषण माननीय अध्यक्ष महोदय, इसमें तो सरकार है और इसमें माननीय अध्यक्ष महोदय, वित्त मंत्री है, सरकार नहीं है। ‘मैं’, ‘मैं’ का मतलब माननीय अध्यक्ष महोदय, है जितने विभाग हैं, मैं एक-एक विभाग में से खास तौर से कुछ ही विभागों की चर्चा करूंगा। वह विभाग चाहे शिक्षा विभाग हो, वह चाहे शिक्षा, हैल्थ मिनिस्टर हो, चाहे माननीय अध्यक्ष महोदय, इण्डस्ट्रियल मिनिस्टर हो, मैं अलग-अलग विभाग की आपसे चर्चा करके बताऊंगा। माननीय अध्यक्ष महोदय, यह जो पालिटिकली कलेक्टिव गवर्नमैंट है, इन लोगों ने जो पालिटिकल गवर्नेंस किये हैं, उसका एक परसेंट भी रिफलेक्शन ... (व्यवधान)
श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं कि ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: Please don’t disturb. Please don’t disturb.
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आपको मौका मिलेगा। मैं बैठता हूं। अभी सीखो।
श्री अध्यक्ष: Don’t disturb please. सुमेरपुर से आने वाले माननीय सदस्य, कृपया, स्थान ग्रहण करें। कृपया उनको पूरा मौका मिलेगा। मुख्य मंत्रीजी बता देंगी। ... (व्यवधान)
श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): मैं निवेदन करना चाहता हूं। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: आप बीच में क्यों बोल रहे हैं। कृपया, स्थान ग्रहण करें। ... (व्यवधान)
श्री प्रद्युम्न सिंह (राजाखेड़ा): आपकी सरकार जवाब देगी। यह गलत बात है, यह प्लीज, आपसे निवेदन है कि आप बैठिये। गलत बात है यह।... (व्यवधान)
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय अध्यक्ष महोदय, मुझे बहुत खुशी है कि कुछ आदमी को परफार्मेंस करना पड़ेगा, जरूरी है। जरूरी है कि जिस तरह की बातें कर रहा हूं उसको परफार्म नहीं करेंगे, वेकेंसी भी नहीं होगी और जगह भी नहीं मिलेगी इसलिए कुछ लोग जगह बनाने के लिए करें, कोई तकलीफ नहीं है।
श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): नहीं, परफोर्म नहीं ... (व्यवधान)
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अभी टाइम लगेगा आपको। अभी टाइम लगेगा। ... (व्यवधान) मदनजी, अभी टाइम लगेगा। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: कृपया, स्थान ग्रहण करें। ... (व्यवधान)
श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): कई जगह पर लिखा है, ‘हमारी सरकार’, कई जगह पर लिखा है ‘हमारी सरकार’ ... (व्यवधान)
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आप कह देना। मौका मिले जब बोल देना। कोट कर देना। मना कर रहे हैं क्या कोई? आपको मौका मिले जब बोल देना आप। करेक्ट कर देना आप। ... (व्यवधान)
श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): आप पैरा 193 देख लीजिए, 231 देख लीजिए। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: सुमेरपुर से आने वाले माननीय सदस्य।
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): बोल देना आप। आपको मौका मिलेगा, आप वकील हो। वकील लोग ऐसे करेंगे क्या? ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: गलत बात। यह ठीक नहीं है। उचित नहीं है।
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं इसलिए बड़ी गम्भीरता से कहना चाहता हूं, माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं जो कोई बात कहता हूं, मैं माननीय मुख्य मंत्रीजी का, वसुन्धराजी का बहुत सम्मान करता हूं। मुख्य मंत्री के संबंध में मेरी अपनी रिजर्वेशन है इसलिए माननीय अध्यक्ष महोदय, ‘मैं’ और मुख्य मंत्री के बीच में मैं अन्तर करना चाहता हूं। माननीय अध्यक्ष महोदय, यह सरकार, यह सरकार का, माननीय मदनजी राठौड़ साहब, पढ़ लीजिए, बहुत विद्वान आदमी हैं, यह आय व्यय, एट ए ग्लांस, बजट एट ए ग्लांस है, माननीय अध्यक्ष महोदय, यह भी सरकार का डाकुमैंट है 2007-08 का और माननीय अध्यक्ष महोदय, यह आय-व्यय 2007-08, इसमें भी यह मेंशन है और यही माननीय अध्यक्ष महोदय, भाषण है इसमें। माननीय अध्यक्ष महोदय, मुझे खुशी होगी कि इसके एक भी पैराग्राफ में, what do you mean by Budget-at-a-Glance? एट ए ग्लांस का मतलब होता है कि एक वर्ड व्यू में हमें मालूम पड़ जाती है कि बजट में क्या-क्या होगा। एट एनी स्टेज, यहां पर बता दें कोई भी, एक मैं यह खोलकर बताना चाहता हूं, यह मैं कोट करना चाहता हूं सबसे पहले शिक्षा मंत्रीजी को ही, एजुकेशन का पैरा अंग्रेजी में 6 है, माननीय अध्यक्ष महोदय, “ ….. social and community services, education – general education, elementary education, a provision of Rs. 318.27 crore has been proposed for elementary education.” यह बजट एट ए ग्लांस में है और जो माननीय अध्यक्ष महोदय, मुख्य मंत्रीजी ने यह जो भाषण दिया है, यहां पर उसमें केवल मात्र कंसोलिडेट अमाउंट दिया है, एलिमेंटरी एजुकेशन का। यह कहा है कि भारत सरकार 75 करेगी, 25 करेगी, 50-50 करेगी, यह जानकारी नहीं है इसलिए कंसोलिडेट फण्ड कर रहा हूं, यह बजट एट ए ग्लांस में माननीय अध्यक्ष महोदय, कहीं यहां पर मेंशन नहीं किया है कि हम एक साथ कंसोलिडेट करेंगे। माननीय अध्यक्ष महोदय, सरकार 1500 स्कूलें खोल रही हैं। बहुत बड़ा काम है। सैकेण्डरी स्कूल, 600 सीनियर हायर सैकेण्डरी स्कूल खुल रही हैं, बहुत बड़ा काम है। बजट एट ए ग्लांस में माननीय अध्यक्ष महोदय, एक शब्द नहीं है। राठौड़ साहब, पढ़ लीजिए। मुझे ध्यान, जानकारी होगी कि बजट एट ए ग्लांस में एक भी शब्द नहीं है कि सैकेण्डरी स्कूल कितनी खोलेंगे? सीनियर हायर सैकेण्डरी स्कूल कितनी खोलेंगे, माननीय अध्यक्ष महोदय, इसका मतलब यह है कि Budget-at-a-Glance and Budget speech, they are two different documents, which should not be. लोकतंत्र में यह बजट एट ए ग्लांस हम सब सदस्यों को एट ए ग्लांस, एट ए वैरी इम्पोर्टेंट कम समय में हम बजट के जो साइलेंट फीचर्स हैं ... (व्यवधान) आप खड़े होकर बता दो। आप बता दो पढ़कर। जो मैं बोल रहा हूं इस बजट एट ए ग्लांस में कहीं लिखा हुआ है तो ... (व्यवधान)
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): क्या? बजट एट ग्लांस में तो वही आता है।
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): क्या आता है? स्कूल खोलेंगे, यह नहीं आता?
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आज जो कह रहे हो, आज तक किसी भी बजट एट ग्लांस में किसी भी बजट को आप देख लें इसमें अगर लिखा हो कि इतने स्कूल खुलेंगे, इतने चिकित्सालय खुलेंगे, यह तो मोटा-मोटा आकड़ा दिया जाता है कि इस-इस विभाग के लिए इतना-इतना प्रावधान किया जा रहा है। ... (व्यवधान)
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय अध्यक्ष महोदय, मुझे तो पार्लियामैंट्री अफेयर मिनिस्टर की चमचागीरी पर दया आती है। चमचागीरी करें, स्टेण्डर्ड की ही करें। एलिमैण्टरी एजुकेशन का हैड पढ़ लें आप, इसमें लिखा है कि “A provision of Rs. 318. .. crore …” इसको पढ़े आप ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: आपने यह कहा जो ... (व्यवधान)
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): नहीं, माननीय अध्यक्ष महोदय, इसमें चमचागीरी की क्या बात आ गयी?
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): और यह माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्रीजी का ... (व्यवधान) आपने कलेक्टिव पास किया है आपने. You are equally responsible for endorsing this Budget speech. You cannot shirk the responsibility.
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): इसमें चमचागीरी की क्या बात आ गयी? आप क्या कहना चाहते हो? ... (व्यवधान)
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): चमचागीरी की पराकाष्ठा है। कलेक्टिव रेस्पांसिबिलिटी है। ... (व्यवधान) आपको ऑन करनी चाहिए अपनी मुर्खता को। ... (व्यवधान)
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): क्या कहना चाहते हो आप?
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): यह आपके बजट में लिखा हुआ है। इसमें भाषण है।
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): राजस्थान के इतिहास में सबसे बड़ा वार्षिक बजट बनाकर आपके मुंह पर तमाचा मारा है। राजस्थान के साथ अन्याय आप लोगों ने किया है।
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): वार्षिक से क्या होता है। आप तो जितने लम्बे हो उतनी ही वार्षिक होगी। वार्षिक से क्या फर्क पड़ता है। कोई लम्बाई होने से आदमी अक्ल वाला हो जाता है क्या? आप बहुत लम्बे हो तो अक्ल ज्यादा थोड़े ही हो सकती है क्या? ... (व्यवधान)
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): तो कोई छोटा होने से अक्ल वाला होता है क्या?
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): हां, ज्यादा होते हैं। मुख्य मंत्रीजी भी ... (व्यवधान)
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आपको खुद को, चार फुट का बनाया। अक्ल वाले हो गये क्या आप? यही भ्रम में हो क्या आप कि आप चार फुट के हो तो अक्ल वाले हो गये?
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): यही कहलवाना चाहता हूं। यही सुनना चाहता हूं। मुझे खुशी हुई कि मुख्य मंत्री को यह कहना चाहते हो कि आप छोटे हो। आप में अक्ल नहीं है, यही तो कहलवाना चाहता हूं मैं आपसे। आपने एण्ड्रोसड किया, उसके लिए धन्यवाद। बोलिये अब? मैं तो यही कहलवाना चाहता हूं धन्यवाद।
माननीय अध्यक्ष महोदय, I wish, मुझे कोई तकलीफ नहीं है, मैंने कहा कि I want ignorant. I was an MLA for 10 years, but I was ignorant. मैं शायद मंत्री नहीं बनता तो मुझे यह बजट और बजट की प्रक्रिया मालूम नहीं है, यह बजट जो यहां लाकर रखा गया है, केबिनेट मीटिंग, दो मिनट में होती है और हाउस में आते हैं, मुझसे क्या कहलवाना चाहते हो कि केबिनेट का क्या मतलब है, किस तरह से केबिनेट में बजट भाषण आता है. Why are you interested that I should speak all these things? मैं तो माननीय अध्यक्ष महोदय, यह कहना चाहता हूं कि बजट एट ए ग्लांस, मैं समझता हूं कि आप भी इतने सीनियर पार्लियामेंटेरियन रहे हैं, Budget-at-a-Glance should reflect what are the provisions in the Budget. एट ए ग्लांस मालूम पड़ना चाहिए। आप इतना बड़ा काम कर रहे हैं। 1500 स्कूलें खोल रहे हैं, आपने अध्यक्ष महोदय, सोशल वायबिलिटी गेप के लिए आप 100 करोड़ रुपये की व्यवस्था कर रहे हैं. Hundred crores of rupees! It is a very big achievement. अम्बेड़कर के पार्क के लिए आप पीठ बना रहे हैं। अम्बेड़कर का पार्क बना रहे हैं. Have you mentioned anything in this? यइ इंडिकेट करता है, माननीय अध्यक्ष महोदय, यह सरकार भारत सरकार के बजट का इन्तजार कर रही थी। इस सरकार के पास विजन नहीं है। यदि विजन होता, माननीय अध्यक्ष महोदय, यह जो डाकुमेंट एट ए ग्लांस है, इसमें कोई न कोई चीज रिफलेक्शन होनी चाहिए थी जो बजट में मुख्य मंत्रीजी ने सदन के सामने रखा। माननीय अध्यक्ष महोदय, जो सबसे पहला मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं, माननीय अध्यक्ष महोदय, कि इस बजट एट ए ग्लांस में जो इम्पोर्टेंट है, मेरी दृष्टि से भी, माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं धन्यवाद देना चाहता हूं, मैं कुछ चीजों को मना नहीं करना चाहता, आज सोशल सिक्योरिटी का इतना बड़ा इन्शिएटिव मुख्य मंत्रीजी ने रखा।
spp/usc/14.40/2g/12.3.2007(1)
अब
स्कीम को
कंसीव नहीं कर
रहे हैं 100
करोड़ रुपये
का आपने
प्रोविजन कर
दिया है सोशल
वायबिटी गैप के
नाम पर, क्योंकि
भारत सरकार के
मंत्री
प्राइवेट
पब्लिक
पार्टनरशिप
को इनीशियेट
करने के लिये 100
करोड़ का
प्रोविजन
रखा। आप उनसे
दो कदम आगे
चलना चाहते
थे। आपने
पब्लिक
प्राइवेट इन्फ्रास्ट्रक्चर
की जगह सोशल
गैप को वाइबल
करने के लिये 100
करोड़ का
प्रोविजन
रखा। माननीय
अध्यक्ष
महोदय, जब
आदमी यह रखता
है, आदमी
मैंने कहा,
अध्यक्ष
महोदय, मुख्य
मंत्री,
मंत्री और मैं,
यह भारतीय
जनता पार्टी
की सरकार है,
यह सरकार व्यक्ति
की नहीं है।
भारतीय जनता
पार्टी के आदर्श
गुरु गोलवलकर
की है। गुरु
गोलवलकर जी के
लिये 2004 में
आपने
प्रोविजन रखा
दो करोड़
रुपये का । आप
उठाकर देख
लें, 2005-06 में
कितना खर्च
किया, सात करोड़
समथिंग, अब
कितना रख रहे
हैं, 20 करोड़
रुपये। खुशी
होती अध्यक्ष
महोदय, गुरु
गोलवलकर के
नाम से
जनसहभागिता
की जो आप बात
कर रहे हैं, 100
करोड़ का
प्रोविजन आप
जन सहभागिता
में करते और
यह जो सोशल
गैप है, सोशल
गैप कौनसा ? आज
राजस्थान
में पिछले दस
साल से एक भी
सैकण्डरी स्कूल
को सीनियर
हायर सैकण्डरी
में साइंस
फैकल्टी के
साथ नहीं
जोडा। एक भी
नहीं जोड़ा।
मैं जिस सरकार
में मंत्री
था, उसको भी
मैं सम्मिलित
कर रहा हूं।
अध्यक्ष
महोदय, आज 11 लाख
बच्चे बैठ
रहे हैं ट्वल्थ
क्लास में,
उसमें साइंस
के लड़कों की
संख्या 89,000 है। I want to correct myself. आज
राजस्थान
में 11 लाख बच्चे
सीनियर हायर
सैकण्डरी
में बैठ रहे
हैं उसमें
साइंस के 89000
हैं। सैकण्डरी
स्कूल को
सीनियर हायर
सैकण्डरी स्कूल
में क्रमोन्नत
तो किया लेकिन
साइंस फैकल्टी
नहीं खोलना
चाहते हैं।
एस.सी., एस.टी. या
गरीब आदमी का
बच्चा जो
पढ़ेगा, वह
हिन्दी-अंग्रेजी
पढ़कर आगे
जाकर कम्प्यूटर
में दुनिया
को बदलना
चाहेगा। हम
इसको पार्ट
बनाना चाहते हैं
लेकिन उन
लोगों को एम्पॉवरमेंट
नहीं करना
चाहते, यह
कौनसी
फिलोसफी है ? अध्यक्ष
महोदय, यदि
आपके मन में
कल्पना होती
कि एस.सी; एस.टी.
को एम्पॉवरमेंट
करना है,
साइकिल देने
से ज्यादा
आवश्यकता इस
बात की थी कि
हम
आइडेंटिफाई
करते कि ऐसी
कौनसी पंचायत
समिति है, ऐसे
कौनसे जिले
हैं, ऐसी
कौनसी जगह है,
जहां एस.सी.,
एस.टी. के लोग
हैं जहां पर
एम्पॉवरमेंट
करने के लिये
इंटरवेंशन
करने की जरूरत
है। अध्यक्ष
महोदय, पाँच
लाख बच्चियां
नहीं हैं क्लास
एर्थ में
एस.टी. की Are we aware about this Adhekshya Mahodaya? मैं
समझता हूं कि
मन में कल्पना
होती तो सोशल
सैक्टर का 100
करोड़ रुपये
का क्या लिखा
है इसमें,
आपने पढ़ा ? हॉस्टल
बनाने के लिये
इन्फ्रास्ट्रक्चर
देंगे, कैपिटल
इन्वेस्टमेंट
में खर्च
करेंगे और
इसमें खर्च
नहीं करेंगे 100
करोड़ रुपये ।
यदि भारतीय
जनता पार्टी की
सरकार के मन
में कल्पना
होती तो 100
करोड़ गुरु
गोलवलकर की
शताब्दी में
गुरु गोलवलकर
जी के नाम पर
वह उन गरीब, एस.सी.,
एस.टी. को आगे
लाने के लिये,
उन बच्चों को
पढ़ाने के
लिये या एक
पंचायत समिति
में कम से कम
दो या तीन
सीनियर हायर
सैकण्डरी स्कूल
में साइंस और
कॉमर्स सब्जैक्ट
खोलती, 50 बच्चों
का हॉस्टल
बनाते तो
एस.सी. का,
ट्राइब का बच्चा
पढ़ सकता था।
वह आठवीं,
नवीं में आकर
पढ़ सकता था।
अध्यक्ष
महोदय, सैकण्डरी
स्कूल में व्यवस्था
करते पर हमारे
मन में
टोकनिज्म एक
गुडविल, आदमी
की एक इलाइट
इमेज होती है,
उस इमेज को
सुधारना
पड़ता है।
'मिड टर्म
करेक्शन',
अंग्रेजी में
एक वर्ड है
'मिड टर्म
करेक्शन'
माननीय अध्यक्ष
महोदय, बिजनैस
में भी करना
पड़ता है, घर
में भी करना
पड़ता है और कभी
कभी जब हम
पालिटिकल
हमारी स्लाइड
करती है, अध्यक्ष
महोदय, आप तो
बहुत वरिष्ठ
हैं। आपको
मालूम होना
चाहिये कि
सरकार आने के
बाद लोक सभा
के चुनाव जीती
है, पंचायत के
चुनाव जीती
है। इन्होंने
बहुत वाहवाही
ली पर अध्यक्ष
महोदय, मेड़ता
का चुनाव हारे
हैं। इन्हें
मालूम है
डूंगरपुर का
चुनाव हारे
हैं। पालिटिकल
बेस इस सरकार
का जब सरकार
सत्ता में
आई, वह
पॉलिटिकल बेस
इनका डिस्टर्ब
हो रहा है
इसलिए नागौर
में जवाहर लाल
नेहरू के नाम
पर व्यवस्था
करेंगे,
बाड़मेर में
पानी की व्यवस्था
करेंगे, झुन्झुनूं
में पी.जी.
कालेज
खोलेंगे। यह
पालिटिकल पॉवर
मेड़ता का
करेक्शन
नहीं होता तो
यह बाड़मेर,
झुन्झुनूं
और सीकर नजर
नहीं आते। अध्यक्ष
महोदय,
डूंगरपुर में
पूरी सरकार
लगने के बाद
हमने तो
महाराष्ट्र
पैटर्न पर
खर्च नहीं
किया, इन्होंने
तो बहुत पैसा
खर्च किया,
पैसा बढ़ाया,
अनाउंस किया,
पूरी सरकार
लगी है और काम
किया है और अध्यक्ष
महोदय, वहां
करने के बाद
पूरी सरकार,
मंत्रिमण्डल
लगने के बाद
वहां पर 10 हजार
वोट से हारे
हैं। अध्यक्ष
महोदय, यह
छोटी मोटी
घटना नहीं है।
मैं भी नहीं
मानता था कि
वहां बी.जे.पी.
हार सकती है।
..(व्यवधान)...
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री):
माननीय सदस्य,
मेड़ता के
चुनाव के बाद
तो पहले एक
बजट जा चुका।
..(व्यवधान)...
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
प्रोफेसर
साहब, मिड टर्म
करेक्शन की
बात कही है। ..(व्यवधान)...
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): मिड
टर्म की नहीं,
मेड़ता के
पहले की
जानकारी दी
है। ..(व्यवधान)...
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
आप दोनों सुन
लें, घनश्याम
जी बैठे हैं,
मदन जी बैठे
हैं, वह भी तो
बोल सकते
हैं।
..(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष:
माननीय
मंत्रीगण, शांति
से सुनें आप। ..(व्यवधान)...
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
आप सुन तो
सकते हैं । मिड
टर्म करेक्शन
आपको नहीं
करना है, मिड
टर्म करेक्शन
का रोल आपके
पास नहीं है।
मिड टर्म
करेक्शन तो
ऊपर से होगा,
आपसे नहीं
होगा। वहां
कहा गया है
इसलिए सब व्यवस्था
हो रही है।
बाकी आपको
पूछता कौन है ? मिड
टर्म करेक्शन,
मैं इसलिए
कहना चाहता
हूं, मैंने
कहा इस बजट के
पीछे
पालिटिकल समझ
नहीं पड़ेगी।
अध्यक्ष
महोदय, एस.टी.
का जो हमारा
वोट बैंक था,
उनको मनाने
में यह असफल
रहे हैं।
कटारिया जी
जैसे सम्माननीय
कमिटेड आदमी
चुनाव के
इंचार्ज हों,
पूरी सरकार
वहां लग जाये
और माननीय
राजेन्द्र
जी राठौड़ के
नेत़ृत्व
में जो कुछ भी
व्यवस्था
करनी हो, कर ली
जाये, उसके
बाद 10 हजार वोट
से हार जायें,
अध्यक्ष
महोदय, यह कोई
कम घटना नहीं,
इसको समझने की
आवश्यकता
है।
यह
दूसरा
पालिटिकल
करेक्शन करने
के लिये अम्बेडकर
की पीठ की व्यवस्था
की। अम्बेडकर
पार्क की व्यवस्था
की, पर इसमें
शब्द पढ़े
हैं, मुझे
जानकर बहुत
आश्चर्य हुआ,
यह एस.सी., एस.टी.
के भाई समझें
इस बात को, एक
पैसे का
प्रोविजन
नहीं किया गया
है। वैसे ही
तालियां
बजवाकर यह 'एट
ए ग्लांस'
में नहीं लिखा
और इसमें क्या
लिखा
'अपेक्षित
सहयोग देंगे'
सहयोग किसको देंगे
? आपके मन में
यह व्यवस्था
होती तो आप
करते कि हम
अम्बेडकर
पार्क के
लिये, अम्बेडकर
पीठ के लिये 10
करोड़ रुपये
की व्यवस्था
करते हैं। यह
बात नहीं कही।
आपने इसमें यह
कहा है कि हम
अम्बेडकर जी
के सम्मान
में पीठ
खोलेंगे और
पीठ खोलने के
बाद अपेक्षित
सहयोग देंगे।
अपेक्षित
सहयोग किसको
देंगे ? कोई
प्रपोजल आपके
पास है, किसी
ने कहा पार्क
बनायेंगे,
किसी
युनिवर्सिटी
ने कहा पीठ
खोलेंगे, क्या
प्रपोजल आपके
पास है जिसके
ऊपर यहां व्यवस्था
करेंगे । आपको
पालिटिकल
घोषणा करनी
थी। यह मैसेज
देना था कि
राजा का राज
नहीं है । इस
राज में परिवर्तन
हो रहा है और
परिवर्तन के
लिये अध्यक्ष
महोदय, मिड
टर्म करेक्शन
करने के लिये
सबसे पहले यह
काम किया गया
कि हम माननीय
अम्बेडकर
साहब की याद
में पीठ की व्यवस्था
करेंगे। मैं
चाहता हूं
माननीय अध्यक्ष
महोदय, माननीय
मंत्रीजी, क्योंकि
यह शायद
शिक्षा
मंत्रीजी को
मालूम नहीं है
उन्होंने
घोषणा कर दी।
इसलिए शिक्षा
मंत्री महोदय
की यह जिम्मेदारी
हो गयी। मैं
जानकारी देना
चाहता हूं इसमें
लिखा गया है,
इसको समझ लें।
मैं करेक्ट
नहीं हूं तो
आप मुझे करेक्ट
कर दें।
शिक्षा
मंत्रीजी, मैं
चाहता हूं कि आप
पैराग्राफ को
निकालकर
देखें, इसमें
लिखा हुआ है।
..(व्यवधान)...
श्री
प्रद्युम्न
सिंह : शिक्षा
मंत्रीजी को
अता-पता ही
नहीं है।
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
मैंने अध्यक्ष
महोदय, पहले
यह कहा .. ..(व्यवधान)...
श्री
कालूलाल
गुर्जर : यह
छोटी-मोटी
बातों पर ध्यान
नहीं देते।
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
यह छोटी-मोटी
बात है। एस.सी;
एस.टी. के लिये,
अम्बेडकर जी
के बारे में
आपके विचार
छोटे-मोटे हैं।
मैं मानता हूं
कि इससे तो
बड़ी दुर्भाग्यपूर्ण
स्थिति हो
नहीं सकती। ..(व्यवधान)...
अध्यक्ष
महोदय, मेरा
तारतम्य
बिगड़ जायेगा,
मैं वापस शुरू
करता हूं। आप
पैराग्राफ
निकाल दें,
जिस
पैराग्राफ
में यह लिखा
हुआ है कि हम
अम्बेडकर जी
के लिये जो
उनके मन में
है, मैं चाहता हूं
कि यह बातें
जनता के सामने
आनी चाहिये।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): हमने मान
लिया, हमने
पढ़ा हुआ मान
लिया।
..(व्यवधान)...
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
कोई चिन्ता
नहीं, आप बहुत
अच्छे हैं।
आपको पढ़ा हुआ
ही मानना
पड़ेगा और ऑफ्शन
ही क्या है ? आपके
पास दूसरा
ऑफ्शन है क्या
?
श्री
हीरालाल
(निवाई): अम्बेडकर
जी के प्रति
चिन्तित होते
तो आप हारने के
बाद लोक सभा
चुनाव में
कहीं नोमीनेट
करवा देते।
कभी सोचा ही
नहीं आपने अम्बेडकर
जी के लिये ।
खाली
घडि़याली
आंसू बहा रहे
हैं आप।
एक
माननीय सदस्य
: जोशी साहब, आप
तैयारी करके
नहीं आये।
एक
माननीय सदस्य
: सुनियोजित
तरीके से
हरवाया है
आपने।
..(व्यवधान)...
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
आपके समझ में
आ जायेगी तैयारी
मेरी। मैंने
गलत निकाल
लिया था, अभी
आपके समझ में
आ जायेगा।
श्रीमती
ममता शर्मा :
जमुना
बारूपाल कौन
थी, मूलचन्द
मीणा कौन थे ?
श्री
प्रद्युम्न
सिंह : जमुना
बारूपाल कौन
थी, क्या
जानकारी है
आपको ?
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): पैरा नम्बर
80 है ।
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
नहीं-नहीं,
इनको पूरा पढ़कर
सुनाना जरूरी
है, मैं समझता
हूं । ..(व्यवधान)...
आपको बहुत
बहुत धन्यवाद।
मैं चाहता हूं
आप उसकी लेंग्वेज
पढ़ लें ।
मुझे कम से कम
यह ध्यान रहे
जो मैं बात कह
रहा हूं वह
ठीक है। अध्यक्ष
महोदय, यह
लेंग्वेज है-
डॉ0 भीमराव
अम्बेडकर ने
देश को न केवल
संविधान दिया
बल्कि वंचित
वर्गों को
अपने अधिकार
मांगने का
मार्ग प्रशस्त
किया । डॉ0 अम्बेडकर
की
ज्ञानवर्धन
एवं चिन्तन
की परम्परा
को आगे बढ़ाना
आवश्यक है।
मैं जयपुर में
अम्बेडकर जी
के सामाजिक,
आर्थिक एवं
बौद्धिक चिन्तन
को बढ़ावा
देने के लिये
एक अम्बेडकर
पीठ एवं अम्बेडकर
पार्क की स्थापना
करने के लिये
राज्य सरकार
द्वारा
अपेक्षित
सहयोग देने की
घोषणा करती
हूं। सहयोग
मांगा किसने ?
..(व्यवधान)...
कोई प्रस्ताव
आपके पास
विचाराधीन है
?
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): जोशी जी,
आप प्रस्ताव
लेकर आ जाओ कि
इस पैरा को
हटाया जाये। ..(व्यवधान)...
आप विरोधी हो
न ..(व्यवधान)...
आप अम्बेडकर
जी के खिलाफ
हो ना।
..(व्यवधान)...
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
बिराजें।
बिराजें आप। ..(व्यवधान)...
हां, मैं ले
आंउगा, सब कर
लूंगा।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): यह इनकी
भावनाओं के
अनुसार है। आप
तो खिलाफ में
हो।
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
इनके वोट पर
ही आप राज कर
रहे हो। 40 आदमी
जीतकर आये हैं
और आप जैसा
नेता बना हुआ
है। दुर्भाग्य
है हमारा। अध्यक्ष
महोदय, यह
सरकार बतायें,
यह मंत्रीजी
खड़े हो जाते
हैं, सरकार के
पास कोई
प्रपोजल है क्या
? किसको
अपेक्षित
सहयोग देना
चाहते हैं क्या
आप ? यह आपने
पास किया है,
किसने
प्रपोजल दिया
? मोहन लाल
सुखाडि़या
विश्वविद्यालय
ने, जोधपुर
युनिवर्सिटी
ने, उदयपुर
युनिवर्सिटी
ने, राजस्थान
युनिवर्सिटी
ने, किसने
प्रपोजल दिया
है ? जे.डी.ए. ने दिया,
किसी
नगरपालिका ने
दिया कि हमारे
यहां पार्क
बनाया जाये।
इस पार्क में
पैसा कम पड़
रहा है, सरकार
इस पैसे को
दें। बताया
जाये हमें। मैं
समझता हूं
इससे ज्यादा
गीमिक्स, मैं
एक उदाहरण
आपको देना
चाहता हूं,आप
जानकर आश्चर्य
करेंगे इसी
सरकार ने अध्यक्ष
महोदय, एस सी,
एस.टी. के जो
अलोकेशन फण्ड्स
हैं, उसमें
पूरे पैसे
खर्च नहीं
किये हैं। अभी
मंत्रीजी फिर
खड़े हो
जायेंगे क्योंकि
इनको खड़े
होने की आदत
पड़ी हुई है।
खड़े हुए बिना
इनका काम चलता
नहीं है।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): नहीं-
नहीं। ..(व्यवधान)...
msr/usc/1450/2h/12032007
माननीय
अध्यक्ष
महोदय,
मैं इनका ध्यान
आकृष्ट करना
चाहूंगा, 2005-06 का
बजट का मैं
कोट कर रहा
हूं, हैड 33, सोशल
सिक्योरिटी
एण्ड
वैलफेयर,
अमाउण्ट
सेविंग हुई,
कितना है, पता
है आपको, बता
दें आप, 29.71 करोड़
रुपये सेविंग
किया आपने बजट
प्रोविजन में।
माननीय अध्यक्ष
महोदय, स्पेशल
स्कीम ऑफ
वैलफेयर
शिड्यूल्ड
कास्ट, 51 हैड, 13.29
सेव किया,
माननीय अध्यक्ष
महोदय।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): 13 ओनली।
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
जी, 13, प्रोविजन
कितना था जो 13
करेंगे, कोई 500
करोड़ था 13 का?
माननीय
अध्यक्ष
महोदय,
मैं और कोट
करना चाहता
हूं, रेवेन्यु
voted 30,
ट्रायबल
एरिया
डवलपमेंट,
प्रोविजन था 554.73
करोड़, खर्चा
किया 474.76 करोड़
रुपये और
सेविंग की 79.97 करोड़।
माननीय अध्यक्ष
महोदय, नैक्स्ट,
33, सोशल सिक्योरिटी
एण्ड
वैलफेयर,
इसमें
प्रोविजन था 125.62
करोड़ और खर्च
किया 67.56 करोड़
और सेविंग
किया, माननीय
अध्यक्ष
महोदय,
सॉरी, सोशल
सिक्योरिटी
में 615.20 करोड़
रुपये का
प्रोविजन था
खर्चा किया 504.11
करोड़ और
सेविंग किया 111.09
करोड़। स्पेशल
स्कीम ऑफ
वैलफेयर ऑफ
शिड्यूल्ड
कास्ट,
प्रोविजन था 139.92
करोड़ रुपये
खर्च किया 102.40
करोड़ रुपये
और सेविंग
किया 37.52 करोड़
रुपये। यह इनका
कमिटमेंट है,
अम्बेडकरजी
का पार्क बना
देंगे, अम्बेडकरजी
के यह कर
देंगे पर अपना
जो आउट-ले है
उसके अगेंस्ट
में आउट कम
किया। आउट कम
किया, माननीय
अध्यक्ष
महोदय, इन
स्कीम्स
में जहां गरीब
आदमी का भला
हो सकता है
वहां पर हमने
आउट-ले को कम
किया है। कौन
जिम्मेदार
है, माननीय
अध्यक्ष
महोदय,
मैं मंत्रीजी
को जिम्मेदार
नहीं बना
सकता।
मंत्रीजी तो
बड़े कमिटेड
आदमी हैं,
मंत्रीजी का
तो कमिटमेंट
है, मैं
मंत्रीजी को
नहीं कह सकता
कि उनको दोष
है। यह प्लान
की साइज को कट
कौन करता है?
माननीय अध्यक्ष
महोदय, प्लान
की साइज जब कट
होती है तो वित्त
मत्री इम्पोर्टेंट
होता है। कौन
हैं वित्त
मंत्रीजी,
मुख्यमंत्रीजी,
मुख्यमंत्रीजी
के नजदीक कौन
है, राठौड़
साहब हैं।
राठौड़ साहब
के फंड मकें
कट नहीं हुआ
है, किसी फंड
में कट नहीं हुआ
है। पी.डब्ल्यू.डी.
में रोड में
एक्सेज
खर्चा किया
है। प्लान,
सप्लीमेंट्री,
सप्लीमेंट्री
के बाद एक्सेज।
उठा कर देखें
पर वह
शिड्यूल्ड
कास्ट,
ट्राइय का
आदमी जिसके मन
में है,
कांस्टिट्युशन
का प्रोविजन है,
प्रोविजन है,
माननीय
मंत्रीजी भी
यह जानते हैं
कि सरकार को
यह डाइरेक्शन
है कि जितनी
पापुलेशन है
उतना पैसा
खर्च किया जाए
और मानीटरिंग
करने का काम
समाज कल्याण
मंत्रीजी को
दिया है। समाज
कल्याण
मंत्रीजी
कोशिश भी करते
हैं पर कोशिश
करने के बाद
यह यह सरकार
जिसमें 40 एस.सी.,
एस.टी. के
एम.एल.ए. जीत कर
आये हैं।
एक
माननीय सदस्य:
45.
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा): 45.
सरकार और
बी.जे.पी. में वह
40 एस.सी., एस.टी.
के एम.एल.ए. के
वैलफेयर के
लिए हम केवल-मात्र
अम्बेडकरजी
की मूर्ति
लगादें,
प्रतापगढ़
जिला बना दें,
प्रतापगढ़
जिला बन
जायेगा, अम्बेडकरजी
की मूर्ति लग
जायेगी तो
एस.टी. के लिए बहुत
बड़ा काम करदिया,
50 साल में इस
कांग्रेस ने
काम नहीं
किया।
माननीय
अध्यक्ष
महोदय,
काम करना है
तो मैंने कहा
कि 100 करोड़
रुपये जो सोशल
सेक्टर में
रखा है, एस.टी.,
एस.सी. के सम्बन्ध
में मैं खास
तौर से शिक्षा
के क्षेत्र
में, माननीय
मंत्रीजी,
आपसे कहना
चाहता हूं
ईमानदारी से,
क्या आपको यह
सूचना है कि
ऐसे कौनसे ब्लाक
हैं जिन ब्लाक
के अन्दर आज
भी एजुकेशन,
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
मैं मंत्रीजी
का ध्यान
आकर्षित करना
चाहता हूं,
पंचायत मुख्यालय
को छोड़
दीजिए, कुछ
राजस्थान
में, साउथ
राजस्थान
में डूंगरपुर,
बांसवाड़ा,
उदयपुर के जो
आदिवासी
पंचायतें हैं
उन पंचायत में
केवल-मात्र 30
प्रतिशत
पंचायत मुख्यालय
पर 20 प्रतिशत
पापुलेशन
रहती है, 60 टु 70 परसेंट
पापुलेशन
हेमलेट में
रहती है जहां
फेयरवेदर रोड
नहीं है, जहां
पर आने-जाने
के रास्ते
नहीं हैं,
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
वहां का बच्चा
स्कूल में
पढ़ने नहीं आ
रहा है, वहां
की बच्ची
पढ़ने के लिए
नहीं आ रही
है। पंचायत
मुख्यालय पर
रहने वाला
एस.सी., एस.टी. का
बच्चा-बच्ची
पढ़ने आ रहा
है, बिलकुल
सही है हेमलेट
में रहने वाला
जो हमारा
एस.टी. का बहुत
साधारण बच्चा
है वह पढ़ने
के लिए नहीं आ
रहा है और
वहां आप उठा
कर देख लें,
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आज
आप मानें या
ना मानें,
मंत्रीजी, मैं
आपको फिगर
देना चाहता
हूं, सबसे ज्यादा
राजीव गांधी
पाठशाला
हमारी सरकार
ने एस.टी. में
खोली हैं,
बाड़मेर में
खोली हैं।
बाड़मेर में,
सिंगल
बाड़मेर
डिस्ट्रिक्ट
में हमने 1500
राजीव गांधी
पाठशालाएं
खोली हैं।
डूंगरपुर,
बांसवाड़ा
में, हमने हर
हेमलेट में
राजीव गांधी
पाठशालाएं
खोली हैं
जिससे उस बच्चे
को यह मिले।
आपने उसको
प्राइमरी स्कूल
किया, सर्व
शिक्षा में
कमरे बनाये,
धन्यवाद पर
वह बच्चा
पांचवी से
आठवीं तक
पढ़ने के लिए
आये, यह काम
कौन करेगा? आप
तो दसवीं में
साईकल दिला
रहे हैं,
पांचवी से
आठवीं आने की
स्थिति भी
नहीं है। आपको
इन्टरवेन्शन
करने की जरूरत
है यहां पर कि
वो बच्चा जो
हेमलेट में और
वो बच्ची जो
पांचवी क्लास
में पढ़ रही
है, जिसको आप
राजीव गांधी
पाठशाला के
नाम से नहीं
जानना चाहते,
प्राथमिक विद्यालय
के नाम पर
जानना चाहते
हैं उस
प्राथमिक
विद्यालय में
पढ़ने वाला
बच्चा और बच्ची
आठवीं क्लास
में आवे, इस स्टेज
पर इन्टरवेन्शन
करने की जरूरत
है जिस इन्टरवेन्शन
की हमारे मन
में कल्पना
नहीं है।
साईकल देकर
वहां पर इन्टरवेन्शन
नहीं होता।
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, आप
आदर्श मिडल स्कूल
बनाएं, उस
आदर्श मिडल स्कूल
में आप
डोरमैटरी
बनाएं, बच्चों
को रखने की व्यवस्था
करें, बच्चे
वहां रह सकें
और वहां पर जो
महिलाहै, विडो
है उनको आप
बच्चों को
रखने की व्यवस्था
दें तो वहां
बच्चा
रिटेन्शन कर
सके। आप होस्टल
बनाना चाहते
हैं, जयपुर
में रहने
वाला, वह आदिवासी
बच्चा होस्टल
में आकर रह ही
नहीं सकता। वह
कैसे रहेगा,
नहीं करेगा।
मैं समझता हूं
कि पूरे
राजनीतिक
जीवन में, में
मुख्यमंत्रीजी
को 1985 से जानता
हूं, एम.एल.ए. बन
कर आयीं, मैं
भी आया, मुझे
भी सौभाग्य
था एम.एल.ए.
बनने का और
मुख्यमंत्रीजी
को तो, अच्छे
बैकग्राउण्ड
से हैं, उन्हें
तो बहुत मौका
मिला, चार दिन
डूंगरपुर,
बांसवाड़ा
में कपड़े पहन
कर यात्रा
करने से
डूंगरपुर की
जानकारी नहीं
हो सकती। आप
गये होंगे चार
बार यात्रा
करने, आप
परिवर्तन
यात्रा में
गये हैं, धन्यवाद
देने भी गये,
चुनाव में भी
गये हैं आप पर
टोटल बीस साल
के पालिटिकल
टेन्योर में
आपका एक्सपोजर
पाँच बार
होगा, चार बार
होगा। वहां की
समस्या
दूसरी है,
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
वहां जरूरत है
कि कैसे उस
बच्चे के
पैरेंट्स को
हम इकानामिक
सपोर्ट दें जिससे
बच्चे को
वहां पढ़ने के
लिए भेजे। यह
ज्यादा आवश्यकता
है इसलिए आपको
एक डिफरेंट
काइण्ड ऑफ
इन्टरवेन्शन,
यदि आप सही
मायने में
गुरु गोलवलकर
की शताब्दी
मनाने चाहते
हैं, तिवाड़ी
साहब, अगर
आपको पूछा ही
नहीं तो आप क्या
बताओगे, यह तो
आपका आईडिया
है ही नहीं, यह
तो मैं का
आईडिया है,
मैं में सरकार
तो है ही नहीं, सरकार
अलग है और मैं
अलग है इसलिए
जब आपको
आईडिया ही
नहीं है,
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
सरकार का
शिक्षा
मंत्री, जिसको
यह सब काम करना
है उसके कुछ
आईडिया हो
सकते हैं, उस
आईडिया को तो
इनको करना
नहीं, अब इन
आईडिया को
लागू करना है See the fun. क्योंकि
यह मेन्डेट
है, सरकार की
तरफ से है,
हाउस पास
करेगा। हाउस
पास करने के
बाद माननीय
शिक्षा
मंत्रीजी को,
यह जो बजट पास
किया है
जिसमें मैं
सम्मिलित है,
उस मैं को
लागू कर के
सरकार को सशक्त
बनाना है। आप
मैं को बनना
चाहते हैं
भारतीय जनता
पार्टी को
बनना चाहते
हैं, मुझे
जानकारी नहीं
है। मुझे तो
यह मालूम था
कि आप भारतीय
जनता पार्टी
को मजबूत बनना
चाहते हैं। मुझे
जानकारी नहीं
है।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): Our Chief Minister is number one amongst the equals. यह
सिद्धांत है
भारतीय
प्रजातंत्र
का, सब प्रजातंत्रों
का।
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा): But alongwith rider. का
भी तो हो। आप
खड़े होकर कह
दें कि मेरा
इनमें
पार्टिशिपेट
है, मैं बैठ
जाऊंगा। ...(व्यवधान)...
मुझे खुशी
होगी। मुझे
कहां तकलीफ
है। बात ही
नहीं करूंगा
मैं। Why
should I speak all these things? मैं इतनी
बातें क्यों
करूं, माननीय
अध्यक्ष
महोदय। माननीय
अध्यक्ष
महोदय,
कोई बात नहीं
है।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): माननीय
अध्यक्ष
महोदय,
राजाखेड़ा से
आने वाले
माननीय सदस्य
ने जब बजट रखा
था तो आपने
मैं का शब्द
इस्तेमाल
नहीं किया था?
लाऊं आपका बजट
स्पीच निकाल
कर के?
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
हमने गलति की
वो गलती करा
कर मुख्यमंत्रीजी
को डूबाओगे।
...(व्यवधान)...
मतलब इससे
बड़ा तो
एडवाईजर मिल
ही नहीं सकता।
...(व्यवधान)...
हमने जो काम
किये वो काम
सब करेंगे यह,
बहुत-बहुत धन्यवाद।
राठौड़ साहब,
आप जैसे
एडवाईजर के
लिए कोई जरूरत
नहीं है
हमारी।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): यह एक-दो
बार नहीं,
आपने
सैंकड़ों बार
इस्तेमाल
किया है।
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
हमें तो बहत
खुशी है, सही
एडवाईजर मिला
हुआ है सरकाकर
के पास, हमें कुछ
करने की जरूरत
ही नहीं है।
हमने यह-यह
काम किया
इसलिए हम इधर
बैठे हैं, आप
भी यह-यह काम
करो, इधर
बैठोगे। इससे
बड़ी बात क्या
होती है।
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
मैं माननीय
सदस्य को
बताना चाहता
हूं, यह मेरे
हाथ में है, जब
यह सत्ता में
थे ...
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
कुछ कहने को
है ही नहीं, यह
सामान्य
भाषा है मैं
का इस्तेमाल
करना। मैं,
मेरी सरकार का
इस्तेमाल
करना सकामान्य
भाषा है। ...(व्यवधान)...
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर):
जिसमें यह
शिक्षा मंत्री
थे और जब इनके मंत्रीजी
ने, जो इनके
मुख्यमंत्रीजी
ने पढ़ा इसमें
मैं शब्द का
प्रयोग ...(व्यवधान)...
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
मैं मुख्यमंत्रीजी
को बोलने नहीं
दूंगा। बोलने
दो हम को ...(व्यवधान)...
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर):
मैं का प्रयोग
18 जगह आया है।
यह मेरे हाथ
में है। पेज
नम्बर 65, आपका
2003-2004 का जो बजट है
य...
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
मैं मुख्यमंत्रजी
को नहीं बोलने
दूंगा, यह क्या
कदम हुआ। ध्यान
रखना, यह आपकी
ट्रेनिंग है,
मुख्यमंत्री
को नहीं बोलने
दूंगा। ...(व्यवधान)...
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर):
माननीय
प्रद्यूम्न
सिंहजी, आप
विराजमान हैं
...(व्यवधान)... स्थानों
पर मैं शब्द
का प्रयोग है,
मैं यह करता
हूं, मैं यह
करता हूं।
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
आप मेरे को
पंक्चर नहीं
कर सकते,
दिमाग से
निकाल दो। यों
खड़े होकर मेरी
बात को रोक
नहीं सकते। और
किसी को बुला
कर खड़ा कर
दो। ...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष:
सुमेरपुर से
आने वाले
माननीय सदस्य,
कृपया स्थान
ग्रहण करें।
क्या फायदा
ऐसे करने से।
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर): इन
सब पर मैं का
कप्रयोग है,
यह मैं आपको
निवेदन करना
चाहता हूं।
...(व्यवधान)...
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
मुख्यमंत्री
और वित्त
मंत्री साथ
में हैं, यह मत
भूल जाइयेगा।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): वाह, वाह।
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
बिलकुल नहीं
टोकेंगे
जोशीजी साहब
को।
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
नहीं, और
बोलें आप।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): पर इनको
कहें हमारी
तरफ नहीं
देखें। देखते
भी आँख निकाल
कर यों देखते
हैं, फिर,
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
यों और हो
जाते हैं। ...(व्यवधान)...
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
आँख से डरते
ही नहीं हैं,
मुख्यमंत्रीजी
खुद कह रही
हैं आँख से
डरते ही नहीं
हैं। डरते तो
खड़े ही नहीं
होते यह।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): जरा मुस्करा
कर बात करो,
तनाव रहित
हों।
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
नहीं, मैं तो
मुस्करा कर
करूंगा।
श्री
अध्यक्ष: आप
को चश्में से
आँख दिखाई
कहां दे रही
है? चश्मा
लगा रखा है
उन्होंने
तो।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): तिवाड़ी
से पूछो इस
बात को, इन्होंने
इस अदा से
नहीं कहा हो
तो।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
यह मुख्यमंत्रीजी
की आँख को ही
सहन कर सकते
हैं, दूसर की
को सहन नहीं
करेंगे।
श्री
अध्यक्ष:
कानों से
सुनने का काम
करेंग, आंखें
से देखने का।
...(व्यवधान)...
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
एक बात तो,
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आप
भी स्वीकार
करेंगी कि
माननीय मुख्यमंत्रीजी
ने अच्छा कन्फेक्शन
किया कि यह
खाली घोषणाएं
नहीं हैं
इसलिए, माननीय
अध्यक्ष
महोदय,
मैं 188 पढ़ना
चाहता हूं।
मैं 188 पढ़ रहा
हूं - मैंने आज
अनेक नये
काय्रक्रमों
की घोषणा की
हैं ...
श्री
अध्यक्ष: मैं
और मैंने कई
बार कह दिया,
इसे क्यों
दोहरा रहे हैं
बारबार? ...(व्यवधान)...
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
जिससे असर
पड़े, रस्सी
आवत जावत है,
पता है न
उसमें निशान
पड़ जाते हैं,
कोई असर पड़
जाए, फर्क
पड़े तो मैं
बोल रहा हूं,
कोशिश कर रहा
हूं। उस पत्थर
पर भी निशान
पड़ जाते हैं
घूमने से, इन
पर कोई असर
पड़ जाएं तो
मैं कोशिश कर
रहा हूं, नहीं
पड़े तो नहीं
पड़े। मेरा तो
धर्म बनता है
कोशिश करने
का। मैं
लोकतंत्र में
नहीं चलता,
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
मैं से
लोकतंत्र को
कमजोर करोगे
और अगर आप भी यदि
इस विचार के
हो तो मैं
समझता हूं कि
मुझे कष्ट
होगा, आप तो उस
परिवार से हैं
जिसने संघर्ष
किया है
लोकतंत्र के
लिए। मैं के
लिए संघर्ष किया
है आपने?
लोकतंत्र में
सामूहिक जिम्मेदारी
होती है। हर
मंत्री
सामूहिक
कंट्रिब्यूट
करता है उसके
बाद सरकार
चलती है।
मैं
समझता हूं अच्छा
है जो घनश्यामजी
ने कहा मुख्यमंत्रीजी
नम्बर वन
होती हैं सब
में लेकिन वो
बाकी सब को
सम्मिलित तो
करे उसमें।
Ars/usc/2j/1500/12032007/1
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं कोट
करना चाहता
हूं 188, मैंने आज
अनेक नये
कार्यक्रम की
घोषणा की है
इनकी
अनुमानित लागत
1200 करोड़ रुपए
है। माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मेरी
गणित ठीक हो
तो बारह हजार
करोड़ रुपए का
एन्युअल प्लान
है। बारह हजार
करोड़ रुपए का
एक हजार करोड़
रुपया कितना
परसेंट है, दस
परसेंट। दस
परसेंट में
बेरोजगारों
को भत्ता भी,
शिड्यूल्ड
कास्ट,
ट्राइब के बच्चों
को साइकिल भी
और सब व्यवस्था
भी दस परसेंट
में, नब्बे
परसेंट के सम्बन्ध
में नहीं, दस
परसेंट में ही
सब चीजें करके
मैं समझता हूं
आप तो हिन्दी
के बहुत
विद्वान हैं,
हथेली में
सरसों उगाने
की कहावत सुनी
थी कि हथेली
में सरसों
उगाया जा सकता
है, या हथेली
में हाथी को
खड़ा कर सकते हैं,
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैंने
तो सुना नहीं
पर देखा
प्रयास किया
गया है कि
हथेली में
सरसों खड़ी
करके बता दी
जाए कि बारह
सौ करोड़ रुपए
जो टोटल आउट
ले बारह हजार
करोड़ का दस
पर्सेण्ट है
उस दस पर्सेण्ट
में यह सब
घोषणाएं हैं।
एम्पावरमैंट
आफ वुमेन, एस
सी एस टी के
लिए यह व्यवस्था
है, विकलांग
के लिए यह व्यवस्था
है, बेरोजगारी
भत्ता मैं
समझता हूं कि
यह सब व्यवस्था
बजट एट ग्लांस
तक इनका दिमाग
अलग चल रहा था
फिर भारत सरकार
का पता लगा कि
एक लाख करोड़
रुपए, वर्ड
यूज कर रहा
हूं मैं, एक
लाख करोड़
एलीमैंट्री
एजूकेशन, हैल्थ,
भारत निर्माण
ऐसे चार पाँच
कार्यक्रम के
अन्दर एक लाख
करोड़ रुपए का
डिवोल्यूशन
हो रहा है, 34
पर्सेण्ट, 20
पर्सेण्ट, 28
पर्सेण्ट
उसमें राजस्थान
सरकार पर भी
पैसा लगा। उस
पैसे का उपयोग
करके राजस्थान
की जी डी पी
बढ़ाने का काम
करते, समझ में
आता पर उस
पैसे का उपयोग
करके गिमिक्स
करके काम करना
चाहते हैं तो
मैं समझता
हूं, मैं यह
इसलिए कहना
चाहता हूं,
मैं आपका ध्यान
...(व्यवधान) 2004, 2005,2006
का बजट भाषण
लेकर आया हूं,
मैं राठौड़
साहब कोट कर
देता हूं कि
आपने क्या यह
घोषणा नहीं की
थी कि गिराल
का बिजली का
कब आ जाएगा, 2006
में, आपने कब
घोषणा की जून 2000 में
पढ़ो इसमें ...
श्री
अध्यक्ष: आप
झूंठ की बजाए
कहिए असत्य
बोले।
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, असत्य
नहीं मैंने स्टार्ट
में आपको कहा
है आउट ले और
आउट कम I said outlays are very impressive. I am saying what
about outcomes.
श्री
अध्यक्ष: ठीक
है।
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
मैं इसलिए कह
रहा हूं क्योंकि
मुझे खतरा है
मैं बाकी इस
बात को नहीं कहता।
माननीय अध्यक्ष
महोदय, यह
जो बजट है 2007-08 का,
यह बजट मैं
चाहूंगा कि यह
जो मैं बता
रहा हूं
माननीय
मंत्री जी
निकालकर देख
लें यह बजट 12820
करोड़ का 2007-08
काउसमें आप
जानकर आश्चर्य
करेंगे सोशल
सैक्टर में
पिछले बजट में
37.92 पर्सेण्ट
आउट ले था
उसको रिड्यूस
करके 23.12
पर्सेण्ट कर
दिया है।
वैज्ञानिक
उसमें .03 था
उसको .02 कर दिया,
उद्योग और
खनिज में 2.38 था 1.28
कर दिया,
सिंचाई और बाढ़
में आउट ले
पिछली बार 10.81
पर्सेण्ट था
उसको कर दिया 7.18
पर्सेण्ट और
विशेष
क्षेत्रीय
कार्यक्रम
में .46 था उसको .31
कर दिया।
ग्रामीण
विकास का आउट
ले था 9.34 पर्सेण्ट
उसको इस नये
बजट में कर
दिया 5.42
पर्सेण्ट।
कृषि एवं
संबंधित हम तो
बहुत चर्चा
करते हैं कृषि
की, आप भी
किसानों के
बारे में
चिन्तित हैं
उसका जो आउट
ले था 2.65 उसको
रिड्यूस करके
कर दिया 1.58,
माननीय अध्यक्ष
महोदय, अब
मंत्री जी
खड़े होकर बता
दें कि मैं गलत
बोल रहा हूं ....
श्री
अध्यक्ष: तो
अब बीच में क्यों
खड़े होंगे वह
?
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
अच्छा नहीं
होंगे। आपने
बहुत अच्छा
निर्णय दिया।
माननीय अध्यक्ष
महोदय, यह मैं
इसलिए कहना
चाहता हूं कि
इसमें कैच है,
वह कैच यह है,
मैं आरोप नहीं
लगाना चाहता,
मैं कैच, कैच
यह है कि
एनर्जी पर 41.50
पर्सेण्ट का
प्रोवीजन
किया। क्यों
किया माननीय
अध्यक्ष
महोदय, अब मैं
आगे बोलूंगा
अभी नहीं
बोलूंगा,
मैंने बताया
इनको मालूम है
कि गिराल की
जो बिजली की
योजना थी वह
एक साल बाद
आया है,
धौलपुर की
इनकी 2007 में आनी
चाहिए वह अभी
तक आयी नहीं
है। यह बड़े बड़े
ख्वाब और
फोटो और
अख़बार लगाकर
बताना चाहते
हैं कि हम 2008 तक
राजस्थान को
यह कर देंगे 2010
में सरप्लस
कर देंगे। यही
शिक्षा
मंत्री जी जब
शुरू शुरू में
असेम्बलि
हमारी असेम्बल
हुई थी पहले
साल में तब
माननीय
शिक्षा मंत्री
जी जवाब दे
रहे थे बिजली
के संबंध में
विद्युत
मंत्री जी के
जवाब में, याद
कर लें
रिकार्ड में
है कि तीन साल
बाद तत्काल
फार्म भरना और
बिजली दूंगा।
यह आपका भाषण है,
मेरा भाषण
नहीं है ...(व्यवधान)
आपका भाषण है।
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): ऐसा
किया था आओ और
ले जाओ ...(व्यवधान)
श्री
घनश्याम तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): आओ और
ले जाओ।
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): जब आप
इतने पास से
कुछ नहीं ले
पा रहे तो हम
इतनी दूर से
क्या ले
पायेंगे। जब
आप पड़ौस से
ही नहीं ले पा
रहे ....
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
इसलिए कहना
चाहता था विशेष
केन्द्रीय
सहायता, कुओं
का
विद्युतीकरण
करना था, यह
अनुसूचित
जाति और
जनजाति उत्थान
का पढ़ रहा
हूं मैं पेज
अस्सी पर,
उसमें था कि
कुओं का
विद्युतीकरण
एस सी एस टी के
लिए करना था
एक हजार कुओं
का किए 377, कूप ब्लास्टिंग
करना था 700 किये
165, कुटीर ज्योति
योजना में
शिड्यूल्ड
कास्ट,
ट्राइब के
आर्थिक
समीक्षा के
हिसाब से दस हजार
लोगों को
कनेक्शन
देने थे, दिए
छह हजार
पांचसौ।
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं यह
बताना चाहता
हूं कि आपका
रेवेन्यू
जनरेशन बढ़
रहा है, धन्यवाद
पर माननीय
मंत्री जी
खड़े होकर
बताएं आपने एफ
आर बी एम ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: मत
उन्हें
आमंत्रित
करो।
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
नहीं, नहीं
मुझसे गलती हो
गयी। माननीय
अध्यक्ष
महोदय, एफ
आर बी एम एक्ट
के अन्तर्गत
दो काम करने
थे, राजस्व
घाटे को कम
करना था और
फिस्कल
डेफिसिट को कम
करना था अब
राजस्व घाटे
को कम करने के
लिए क्या
तरीका हो सकता
है, राजस्व
घाटे को कम
करने के लिए
रेवेन्यू को
बढ़ाया जाए,
रेवेन्यू
बढ़ाकर राजस्व
घाटे को कम
किया जाए और
फिस्कल
डेफिसिट को कम
करने के लिए
क्या किया
जाए, फिस्कल
डेफिसिट को कम
करने के लिए
जी डी पी
बढ़ाई जाए।
सबसे वर्स्ट
वर्स्ट
राजस्थान का
समय था 2002-03, 2002-03 की
जी डी पी
उठाकर देख लें
उस जी डी पी के
बाद आज जी डी
पी में इन्होंने
क्वांटम जम्प
किया है, जी डी
पी का कोई
रिफलक्शन
रेवेन्यू के
अन्दर नहीं
हैऔर जी डी पी
बढ़ रही है तो
फिस्कल डेफिसिट
को कम करने की
जरुरत कहां
पड़ रही है
मुझे बता दें
आप ।
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, 1998-99
में फिस्कल
डेफिसिट पाँच
हजार समथिंग
था एक्चुअल्स
बोल रहा हूं
मैं 2005-06 के पाँच
हजार समथिंग
हैं, मना कर
दें। आपने
फिस्कल
डेफिसिट को
कण्ट्रोल
करने के लिए
कुछ नहीं
किया, आपको
करना चाहिए था
रेवेन्यू
एक्सपैंडिचर
को कंट्रोल,
अब रेवेन्यू
एक्सपैंडिचर
को कंट्रोल कर
सकते नहीं
हैं, करेंगे
तो आरोप लगाने
की बात करेंगे
कि इन्होंने
इस पर खर्च
कहां किया।
अनप्रोडेक्टिव
असैट्स पर
खर्च किया। अब
अनप्रोडेक्टिव
असैट्स कौन
कौनसी हैं
इनका नाम
लूंगा तो फिर
प्राब्लम
आएगी, अनप्रोडेक्टिव
एक्सपैंडिचर
करके रेवेन्यू
एक्सपैंडिचर
को कण्ट्रोल
नहीं किया।
रेवेन्यू
एक्सपैंडिचर
को कण्ट्रोल
करते तो राजस्व
घाटा वैसे ही
ठीक हो सकता
था पर माननीय
अध्यक्ष
महोदय, फिस्कल
डेफिसिट को
कण्ट्रोल
करने के लिए
अब इस सरकार
ने सबसे ज्यादा
नुकसान
पहुंचाया है
आउट ले के
सामाजिक सुरक्षा
के अन्तर्गत,
आर्थिक
सुरक्षा के
अन्तर्गत, 2005-06
की बी ई थी
सामाजिक सेवा
की बी ई का अमाउंट
था 10921.17 इन्होंने
एक्चुअल्स
खर्च किए 9733
शार्ट फाल आफ 1
हजार 188 करोड़
सामाजिक
सुरक्षा पर,
आर्थिक सेवा
में 7256 का बी ई थी
ए ई इन्होंने
कर दिया 7125,
उसमें शार्ट
फाल है 130 करोड़
रुपए का और
सामान्य
सेवा में जरूर
इन्होंने 106
करोड़ रुपए कम
किए हैं।
अब
माननीय अध्यक्ष
महोदय, यह
बताएं फिस्कल
डेफिसिट को
कण्ट्रोल
करने के लिए सामाजिक
सुरक्षा का
पैसा यदि आप
रोक रहे हो तो
सामाजिक
सुरक्षा का
सबसे बड़ा एस
सी एस टी और
समाज कल्याण
की व्यवस्था
के ऊपर होता
है जिनके अन्तर्गत
न आप पानी की
व्यवस्था
कर सकते हो न
बिजली की व्यवस्था
कर सकते हो और
न कोई व्यवस्था
कर सकते हो।
हॉस्टल
खोलने की बात
कर सकते हो,
हॉस्टल बना
नहीं सकते हो,
आंगनबाड़ी
केन्द्र
मुझे बहुत आश्चर्य
हुआ, यह बजट तो
सामूहिक है
इसमें तो मैं
मुख्यमंत्री
जी को भी नहीं
कह सकता कि
मुख्यमंत्री
जी ने बनाया, 150
गवर्नर के
एड्रेस के पैरा
पर पढ़ रहा
हूं मैं
आंगनबाड़ी केन्द्रों
पर आधारभूत
सुविधा
विकसित करने
की दृष्टि से
राज्य में
प्रथम बार
विगत दो वर्षो
में एक साथ
पाँच हजार
आंगनबाड़ी
भवनों का
निर्माण
कराया गया है
और मुख्यमंत्री
से यह कहलवाया
गया है कि एक
हजार का ही
हुआ है। मुख्यमंत्री
जी का पढ़
लीजिए, मुख्यमंत्री
जी का भाषण है
इसमें यहां तो
यह कह रहे हैं
गवर्नर की स्पीच
में पाँच हजार
भवनों का
निर्माण कर
दिया है और
बजट के अन्दर
यह कह रहे हैं
कि हमने केवल
मात्र एक हजार
का किया है, दो
हजार और नये
जोड़कर तीन
हजार भवनों का
निर्माण 2007-08 में
करेंगे। यह इस
बात का द्योतक
है कि जब आप
फिस्कल
डेफिसिट को कम
करने का काम
करोगे तो बी ई
तो ...(व्यवधान)
मैंने पहले भी
कहा था माननीय
अध्यक्ष
महोदय, अभी तक यह
सरकार 2004-05 की
बात कर रही है,
2005-06 आ गया, 2006-07 आ गया,
2007-08 की बात कर
रही है, 2005 के एक्चुअल्स
पर माननीय अध्यक्ष
महोदय, इनका
एन्युअल प्लान
था 8152 करोड़
रुपए का ।
vns/usc/15.10/2k/12.3.2007
और अध्यक्ष
महोदय, खर्चा
हुआ है मैं
चाहता हूं कि
वह भी देख लें
कि 8000 इन्होंने
खर्च किये कि
नहीं किये ?
इसमें 8100 के
अगेनस्ट में
इन्होंने
खर्चा किया है
केवल मात्र 7000,
यह 8152 का आउट ले
था। खर्चा हुआ
है 7699.83 A
shortfall of 45…..
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): कितना
प्रतिशत हो
गया ?
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
जितने
प्रतिशत आपकी
लम्बाई है।
मेरे से ज्यादा
है उतने
प्रतिशत ज्यादा
हुआ होगा।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): 92 प्रतिशत,
आप अपने
आंकड़े उठाकर
देख लो 92
प्रतिशत है।
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
मेरे से लम्बाई
ज्यादा है
आपका प्रतिशत
ज्यादा
होगा। क्या
तकलीफ है ? पर
आपने हाउस को
यह कमिट किया
था कि 8155 करोड़ रुपये
की योजना बना
रहे हैं और
आपने खर्चा
किया है केवल
मात्र 7699 करोड़
का। यह जो
शॉर्टफाल है इसमें
455 करोड़ रुपये
का शॉर्टफाल
है। शॉर्टफाल
मैंने बताया
सामाजिक
सुरक्षा के
अन्दर
शॉर्टफाल,
आर्थिक
सुरक्षा के
अन्दर
शॉर्टफाल है।
खाली घोषणा
करके मैं
समझता हूं कि
यह सरकार जिस
ढंग से काम
करती है उसको
गंभीरता से
सोचना होगा।
माननीय
मुख्यमंत्री
जी ने स्कूल 1500,
500, 600 और उसमें जो
प्रोविजन
किया है 12,000
टीचर्स की व्यवस्था
करेंगे।
माननीय
शिक्षा
मंत्रीजी, 12,000
टीचर्स थर्ड
ग्रेड, सैकिण्ड
ग्रेड और लैक्चरर्स,
यह सरकार जब ...
(व्यवधान)
श्री घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री):
सीनियर और
सीनियर
सैकेण्डरी
स्कूल
खोलेंगे उनके
लिये 12,500 की व्यवस्था
है। थर्ड
ग्रेड की अलग
से है।
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
मुझे बहुत
खुशी हुई अध्यक्ष
महोदय, अब
कोरिलेट कर
रहे हैं उससे
जितनी पोस्ट
खाली हैं
बताऊं मैं।
आपने बहुत जल्दी
बोल दिया।
मंत्रीजी
मुझे बहुत
खुशी है। मुझे
पता है कि आप
जिस चीज में
इनवाल्व
नहीं है तो यह
बात बोलने का,
मैं बताना
चाहता हूं
कितनी वेकेन्सी
है। वेकेन्सी
कितनी है
सैकेण्डरी,
आपका स्टेटमेंट
बता रहा हूं
मैं ... (व्यवधान)
श्री घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): वेकेन्सी
की स्थिति
शिक्षा में यह
है कि तीन ... (व्यवधान)
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
मैं यह नहीं
कह रहा हूं। 12,000
आपके सैकेण्डरी
में वेकेन्सी
ही नहीं है।
आप किसकी
भर्ती कर रहे
हो ? मैं जो बात ...
(व्यवधान)
श्री घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): पहले
की भी हैं। चलें
आप बोलिये मैं
बाद में
बताऊंगा
आपको।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): पोस्ट
क्रियेट
करेंगे नयी के
लिये। पोस्ट
क्रियेट करनी
पड़ेगी।
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
अच्छा जो
खुले उसके बोल
दूं। जो आपने स्कूल
खोले 2004-05 में और
2005-06 में सैकेण्डरी
स्कूल और सीनियर
हायर सैकेण्डरी
उनके लैक्चरर्स
की भर्ती कर
दी ?
श्री घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): कर
दी। 11,000 व्याख्याताओं
की भर्ती कर
दी। 5,000 सैकिण्ड
ग्रेड के
लोगों को ढाई
हजार की
डायरेक्ट भर्ती
कर दी और ढाई
हजार का
प्रमोशन कर
दिया है। यह
काम 1350 सैकेण्डरी
और सीनियर सैकेण्डरी
स्कूल खोले
थे उनके लिये
कर दिया। 900
सैकेण्डरी
और सीनियर
सैकेण्डरी
स्कूल आपके
पाँच साल के
राज में खुले
थे उसकी एक भी
पोस्ट
क्रियेट नहीं
की थी वह सारी
की सारी बाकी
है। वह अब
भरेंगे हम
जाकर।
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
धन्यवाद।
तीन साल तक जो
आपको ध्यान
नहीं रहा। तीन
साल पहले हमने
स्कूल खोले
उसकी पोस्टें
क्रियेट नहीं
थी पहले साल
में मंत्री क्या
कर रहे थे ? दूसरे
साल में
मंत्री क्या
कर रहे थे ? तीन
साल का हैंग
ओवर कब तक
चलाओगे आप ? आप
सरकार में आ
गये ... (व्यवधान)
श्री घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): हम यह
कर रहे थे कि
आपके
कारनामों का
थोड़ा पता लगे
सबको इसलिये
तीन साल
इंतजार करा
दिया अब पूरा
कर देंगे।
श्री संयम
लोढ़ा
(सिरोही): आप
जाते-जाते
करना चाहते हो
यह।
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
अध्यक्ष
महोदय, यह तो
बात समझ में आ
गयी कि हमारे
कारनामों को
बताने के लिये
कर रहे हैं
बाकी इनको यह
जरूरत नहीं है
कि यहां टीचर
की जरूरत है। आपने
खुद ने उसमें
शिक्षा मित्र
में कहा है कि
इतने आदमियों
को शिक्षा
मित्र में
लेकर हमने
सैकेण्डरी
एजुकेशन की
पढ़ाई की है।
अध्यक्ष
महोदय, मैं
माननीय
मंत्रीजी से
बड़े विनम्र
शब्दों में
निवेदन करना चाहता
हूं कि सर्व
शिक्षा अभियान
के थर्ड ग्रेड
के टीचर जो एम
ए, बी एड थे
जिनको तनख्वाह
सर्व शिक्षा
अभियान से
चार्ज हो रही
थी उनको सैकेण्डरी
स्कूल में
पढ़ाने का काम
किया है which is against the devolution of fund by
the Government of India. सर्व
शिक्षा
अभियान में
आपको पैसा
दिया है
एलीमेंटरी स्कूल
का एक्सटेंशन
करने के लिये।
आप अपनी तरफ
से भर्ती नहीं
कर सको प्लान
के पैसे की
नोन प्लान की
पोस्ट की
भर्ती नहीं कर
सको लैक्चरर्स
की, सैकिण्ड
ग्रेड टीचर्स
की भर्ती नहीं
कर सको मैं
माननीय
मंत्रीजी,
विनम्र शब्दों
में निवेदन
करना चाहता
हूं आज भी
राजस्थान के
सैकेण्डरी
स्कूलों में
साइंस,
मैथमेटिक्स
और अंग्रेजी
के टीचर नहीं
हैं ... (व्यवधान)
श्री घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): हां
नहीं हैं।
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
और आप जो 1500 खोल
रहे हो किसके
लिये खोल रहे
हो ? आप खोलोगे
जिसमें हिन्दी
और सिविक्स
का टीचर
रहेगा। मतलब
वहां पर भी
अभी भी अंग्रेजी
और गणित का
टीचर नहीं
आयेगा। अध्यक्ष
महोदय, मैं
निवेदन करना
चाहता हूं कि
इंटरवेंशन, आप
बात कर रहे
हैं । मैं
इसलिये कहना चाहता
था आपको ... (व्यवधान)
श्री घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): मैं
बाद में बोल दूंगा।
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
आपको तो बोलना
ही है। मैं सब
बातें इसलिये
कह रहा हूं यह
इलेवेंथ प्लान
का पहला साल
है। यह बात
इसलिये कहना
चाहता हूं जब
सरकार बनी थी
तब इस सरकार
ने हमारी सरकार
पर यह आरोप
लगाया था कि
टैंथ प्लान
के दो साल हो
गये, ढाई साल
हो गये, उस ढाई
साल में इनको
जितना पैसा खर्च
करना था उतना
नहीं किया और
हमने दो, ढाई
साल में खर्च
करके जो टैंथ
प्लान का टार्गेट
था उसको पूरा
किया। आज
इलेवेंथ प्लान
का आपको करने
का मौका मिला।
सौभाग्य है।
सौभाग्य यह
है यह मिलने
के बाद अगले
पाँच साल तक
यह आउट ले और
आउट कम अगर
यही ट्रेंड
रहा तो राजस्थान
का भविष्य क्या
होगा ? रेवेन्यू
जनरेट हुआ।
भारत सरकार से
राजस्थान
सरकार को लगभग
8000 करोड़ से ज्यादा
मैं फिगर देना
चाहता हूं। 8000
करोड़ से ज्यादा
पैसा ग्राण्ट
इन एड और
डिवोल्यूशन
में फण्ड से
आया है। 8000
करोड़ का
हमारा एन्युअल
प्लान है। हमारा
टोटल एन्युअल
प्लान आज की
डेट में 8000
करोड़ का है
और 8000 करोड़
रुपये हमारा
एन्युअल प्लान,
ग्राण्ट इन
एड है। भारत
सरकार के
डिवोल्यूशन
से इनको पैसा
मिल गया और
उसके बाद फिस्कल
डेफिसिट को हम
जो करना चाहते
हैं वह छोड़ रखा
है हमने भगवान
के भरोसे कि
बरसात हो
जायेगी जी डी
पी बढ़ जायेगी
... (व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): ग्राण्ट
इन एड का जो 4174 है
... (व्यवधान)
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
मैंने पाँच
साल का, मेरी
सरकार से जाने
के बाद का
फिगर दिया है
आपको। 2002 से
दिया है।
मैंने फिगर
दिया है आपको,
मैं आपको आज
की डेट में जो
फिगर ... (व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): नहीं-नहीं,
आप कह रहे हैं
ना ... (व्यवधान) आप तो 8000
करोड़ के एन्युअल
प्लान की बात
कर रहे हो। 8000
करोड़ भारत
सरकार से ... (व्यवधान)
डिटेल आपके
पास भी होगी ...
(व्यवधान)
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
फिर रिपीट कर
रहा हूं। हमारी
2002 ... (व्यवधान) आप एफ आर
बी एम के अन्तर्गत
क्या कर रहे
हो ... (व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): एक्चुअल
बात की है ... (व्यवधान)
आथेंटिक
बोलने वाले
आदमी हो क्या
चेप रहे हो ?
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
मैं गलत बोल
रहा हूं ? मैं
रिजाइन करता
हूं। बोलो I will resign. खड़े
होकर बोल दो।
मैं रिजाइन कर
दूंगा। मैं जो
बोल रहा हूं
मैं रिजाइन कर
दूंगा। 8000 करोड़
रुपये, बोलो
फिर रिपीट कर
रहा हूं मैं Once again I repeat it.
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): ग्राण्ट
इन एड की बात
करी है ... (व्यवधान)
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
कि राजस्थान
सरकार को भारत
सरकार के
डिवोल्यूशन
और ग्राण्ट
इन एड में
मिलाकर 8000
करोड़ रुपये
मिले। मैं
रिजाइन कर
दूंगा गलत बता
बता दो आप ... (व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, यह बजट
एट ग्लांस
बड़ा आथेंटिक
कागज है। इस
बजट एट ग्लांस
में ... (व्यवधान)
डा. सी. पी.
जोशी (नाथद्वारा):
एक सैकिण्ड,
एक मिनट आप
राठौड़ साहब I will correct it.
श्री अध्यक्ष:
आपका समय नहीं
है उनको ही
बोलने दो।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, इन्होंने
ग्राण्ट इन
एड की बात कही
है ... (व्यवधान)
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
कुछ आदमी आदत
से लाचार हैं
उसका उत्तर
नहीं है मेरे
पास ... (व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): मैं टेबल
करना चाहूंगा
... (व्यवधान)
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
आप मेरे से
बोलो ... (व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री):
यह बहुत
विद्वान हैं।
पर ग्राण्ट
इन एड का
इसमें यह लिख
रखा है।
ग्राण्ट इन
एड यह है
राजस्व
प्राप्तियां,
व्यय। इसमें
लिख रखा है 2005-06
में जो एक्चुअल्स
आये हैं इसमें
2921, 2006-07 के अन्दर
आए हैं 3986 उसके
बाद 2006-07 की आर ई
में आया है 4174 और
अब बी ई में है
4300, अब कहां 8000-8000
करोड़ का एन्युअल
प्लान। हांक
रहे हैं बिना
मतलब ... (व्यवधान)
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
आप बिराजो।
मैं महोदय, मैं
बोल रहा हूं Let me say it.
श्री अध्यक्ष:
इसलिये आप ... (व्यवधान)
आस-पास है ... (व्यवधान)
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा): (Interruptions) What about the
grant-in-add? This is the share in Central taxes.
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): वह अलग
बात है।
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
तो वह क्या करेंगे।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): ग्राण्ट
इन एड किया इस
पर बात नहीं
है पर ग्राण्ट
इन एड कितना
है ... (व्यवधान)
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
आप आधा सुनते
हो क्या ?
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): इन्होंने
8000 का फिगर बढ़ा
हुआ है ... (व्यवधान)
8000 के फिगर ... (व्यवधान)
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
मैंने कहा
शेयर और दोनों
बातें कही
हैं। आधा
सुनते हो आप ?
और क्या ?
मैंने दोनों
बात कही है
शेयर और
ग्राण्ट इन
एड मिलाकर।
आधा सुनते हो
आप क्या ... (व्यवधान)
बातें कर रहे
हैं अपन ... (व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अब शेयर
की बात आ गयी ...
(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
बीच में इसके
अन्दर क्या
आ गया है।
कौनसा हिसाब
है इसमें ठीक
है।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके और वक्ता
के बीच में
डिस्टर्वेंस
नहीं कर रहा
हूं। मैं आपकी
अनुमति से वक्ता
महोदय के ध्यान
में यह लाना
चाहता हूं कि
राज्यपाल के
अभिभाषण और
बजट भाषण इन
दोनों का उत्तर
मुख्यमंत्री
जी देंगी। इन्होंने
दिया है और
देंगी।
श्री अध्यक्ष:
सही है।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
आप इनडिवीज्युअल
मंत्रियों से
किसी भी तरह
जवाब के बारे
में कृपा करके
न उलझें। आपके
हर पाइंट का
जवाब मुख्यमंत्री
जी ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
बस बिलकुल ठीक
बात है और
इनडिवीज्युअल
मंत्री भी बीच
में न बोलें
क्योंकि कोई
मतलब नहीं है
वह देंगी
जवाब।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
दें और नहीं
दे उनकी मर्जी
है। आप कैसे
कह सकते हैं
देंगी ?
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
देंगी।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
मेरे पाइंटस
के जवाब नहीं दिये
... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
क्यों ? क्या
बात हुई अभी ?
यह क्या बात
हुई ?
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
उम्मीद की
जाती है वह
देंगी।
श्री अध्यक्ष:
वह देंगी।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
हां देंगी।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह (राजाखेड़ा):
आप उम्मीद तो
कर सकते हो।
मेरे किसी
विषय, पाइंट
का जवाब नहीं
दिया।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
मैं आपके बारे
में नहीं कह
सकता लेकिन
सी.पी.जोशी के ...
(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
आपका जवाब तो
देंगी।
निश्चित तौर
से देंगी।
देना पड़ेगा आपकी
बात का जवाब
उन्हें।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
हर आब्जेक्शन
का जवाब मुख्यमंत्री
जी देंगी। ठीक
हैं देंगी ... (व्यवधान)
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
आपको भ्रम है ...
(व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
तो मेरा भ्रम
रहने दो और क्या
दिक्कत है ...
(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
नहीं-नहीं,
ठीक बात है।
प्रतिपक्ष के
नेता ने ठीक
बात कही है।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, मैं
प्रतिपक्ष के
नेता की बात
उन तक
पहुंचाऊंगा
और इनका वह
बहुत सम्मान
करती हैं ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
बिलकुल।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): एक-एक
चीज का जवाब
देंगी और हम
चाहते हैं इस
बार आप भी
बोलें और आपकी
एक-एक चीज का
सदन की नेता
जवाब दें।
आपका भाषण भी
होगा इस बार ...
(व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
माननीय
सी.पी.साहब आप
माननीय
मंत्रियों
में स्पेशली
पार्लियामेंटरी
अफेयर मिनिस्टर
से नजर मत
मिलाओ। क्यों
आप इनको
भड़काते हो।
यह रुकते नहीं
है। इनका
राठौड़ी खून
है और चीफ
मिनिस्टर के
प्रति
वफादारी इनके
बीच में उछल
पड़ती है तो
इनको उठना
पड़ता है।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): माननीय
नेता
प्रतिपक्ष,
इतनी शिक्षा
दे ही दें कि वफादारी
चीफ मिनिस्टर
या किसी अपने
नेता के प्रति
नहीं होनी
चाहिये ? आपने
कहा नहीं होनी
चाहिये ... (व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
होनी चाहिये।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): आपके साथ
यह कर रहे
हैं। जो जख्म
आपको दे रहे
हैं ना उनका
दर्द उबल रहा
है यह।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
तो इसीलिये आप
री-एक्ट कर
रहे हो।
इसीलिये आप
री-एक्ट करते
हो और आपको यह
इस ... (व्यवधान)
श्री घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री):
राठौड़ साहब
ने शिक्षा के
बारे में, मैं
एक मिनट ... (व्यवधान)
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):अध्यक्ष
महोदय, आप तो
बड़ी विदुषी
हैं यह
वफादारी और चमचागिरी
में क्या
अंतर है यह और
बता दें ... (व्यवधान)
श्री घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): अभी
आपने रामनारायण
जी बात नहीं
सुनी। राठौड़
साहब ने आपको
कहा आज शिक्षा
मुझे दे ही
दें आप। इसके
लिये तो मुख्यमंत्री
जी से रिकवेस्ट
करनी पड़ेगी।
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
हां यह ... (व्यवधान) अध्यक्ष
महोदय, मैं अब
आपका ध्यान
आकर्षित करना
चाहता हूं।
श्याम/चौहान 12.03.2007 15.20
2l
आपका
ध्यानाकर्षित
करना चाहता
हूं, 8 मार्च, 2006
के मुख्यमंत्री
जी के भाषण के
पैरे 69 में
प्राय: यह देखा
गया है कि
ग्रामीण व गैर
संस्थागत
रूप अनेक महत्वपूर्ण
विषय शेष रहे
हैं। अनेक ऐसी
उपयोगी तकनीकों
को भी विकास
हुआ है जिन्हें
समुचित पहचान
नहीं मिल पायी
है। राज्य
सरकार द्वारा
अन्वेषकों
को प्रोत्साहित
करने हेतु
इसके पूंजीगत
प्रयोग एवं प्रोत्साहन
में एक विषय,
अध्यक्ष
महोदय, यह मैं 2006
का बोल रहा
हूं।
श्री
अध्यक्ष:
हां, मैं समझ
गयी। 2006 का आप
पढ़ रहें हैं
जिसका कोई
मतलब नहीं है।
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
इसलिए श्यामा
प्रसाद
मुखर्जी
विज्ञान
दृष्टि योजना लागू
की जायेगी।
आपको कह रहा
हूं, मुझे
नहीं बोलना
चाहिए। आप
सरकार की तरफ
से बोल रही
हैं कि नहीं
बोलना चाहिए।
श्री
अध्यक्ष:
हां, हां,
बोलें, बोलें।
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
इसमें लिखा
है कि प्रोत्साहन
में, एक विशेष
श्यामा
प्रसाद
मुखर्जी
विज्ञान
दृष्टि योजना लागू
की जायेगी।
इसके अंतर्गत
अन्वेषकों
को सम्मानित
करने के लिए
विशेष पुरूस्कार
भी प्रारंभ
किये
जायेंगे। यह
घोषणा है 2006 में
और 2007 का बजट यह
भी पढ़ देता
हूं, पैरा 121,
राज्य के 8475
ग्रामीण फीडर
में 40 से 60
प्रतिशत के टी
एंड डी लोसेस
थे, हमने इन
फीडर में
लोसेस 15 से 20
प्रतिशत तक
सीमित करने के
उद्देश्य से
महत्वाकांक्षी
श्यामा
प्रसाद
मुखर्जी विजय
ज्योति फीडर
सुधार
प्रोग्राम
हाथ में लिया
है। यह फीडर
योजना शुरू हो
गयी थी संवत् 4-5
में और आपको 7-8
में यह मालूम
पडा है कि
इसका नाम श्यामा
प्रसाद
मुखर्जी विजय
ज्योति फीडर
करना है। यह
तो श्यामा
प्रसाद
मुखर्जी के
प्रति इनकी
निष्ठा की, 2006
में घोषणा
करने के बाद
एक आदमी को
पुरूस्कार
नहीं दिया।
अध्यक्ष
महोदय, आज
फीडर ज्योति
के नाम से श्यामा
प्रसाद
मुखर्जी क्या
नया देना
चाहते हैं।
अध्यक्ष
महोदय, जिन
नेताओं की
निष्ठा
पार्टी के
प्रति संदिग्ध
हो उनको अपनी
लायल्टी
बतानी पड़ती
है, डेमोस्ट्रेशन
करना पड़ता है
कि करंट लगे,
श्यामा
प्रसाद
मुखर्जी के
नाम से करंट
लगना चाहिए,
इसलिए अपने
आपको साबित
करें, इसलिए
कहा कि, नहीं,
हम इस विज्ञान
का पुरूस्कार
नहीं करेंगे
अब इसको फीडर
रिनोवेशन के
नाम से, दो साल
तक राजस्थान
सरकार फीडर
रिनोवेशन
करती रही तब
ध्यान नहीं
गया कि श्यामा
प्रसाद
मुखर्जी का
नाम रखना है।
आज दो साल के
बाद मालूम पडा
है। यह कहां
से मालूम पडा
है। क्यों
मालूम पडा है।
यह फोरगेट और
फोरगिव कहां से
शुरू हुआ। यह
फोरगेट और
फोरगिव के बाद
यह परंपरा
प्रारंभ की
गयी कि श्यामा
प्रसाद
मुखर्जी के
नाम ही से ज्योति
की व्यवस्था
करें, बहुत
अच्छा है।
माननीय
दीनदयाल जी
उपाध्याय के
नाम से हमने
शुरू किया
आदर्श गांव,
आपने कहा है
आदर्श गांव के
संबंध में,
यहां पर एक भी
आदर्श गांव,
आपने कब घोषणा
की, आपने कहा
कि दीनदयाल
उपाध्याय के नमा
पर आदर्श गांव
में एलोकेशन
ऑफ फंड
करेंगे,
पंचायती राज
में करेंगे।
दो साल पहले,
अध्यक्ष
महोदय, दो साल
हो गये, एक
गांव दीनदयाल
जी के नाम पर
आदर्श गांव
नहीं ख्ड़ा
किया है, एक भी
और कह दिया
गया कि एप्लीकेशन
आ गयी है, अब 50 की
जगह 150 कर दिया
है। संख्या बढ़ा
दी है। बाद
में मुख्यमंत्री
जी ने बजट में
घोषणा की कि
दीनदयाल जी
उपाध्याय के
नाम पर आदर्श
गांव अब 150
करेंगे। दो
साल में एक
गांव के प्रति
आपका
कमिटमेंट
नहीं है। आपका
कमिटमेंट ना
गुरु गोलवरकर
के प्रति है।
जिनका संदिग्ध
मन रहा है,
आपका
कमिटमेंट ना
दीनदयाल जी
उपाध्याय के
प्रति है, यह
मिड टर्म
करेक्शन
किसका कर रहे
हैं। यह
पालिटिकली यह
स्थिति बन गयी
है जिसमें
फोरगेट एवं
फोरगिव करना
जरूरी है।
उसमें मिड
टर्म करेक्शन
करने के लिए
डेमोस्ट्रेशन
करना पड़ता है
कि मैं, यह
सरकार नहीं, सरकार
में तो आदमी
हैं जो कमिटेड
हैं दीनदयाल
जी उपाध्याय
के लिए,
गुरूजी
गोलवरकर के
लिए और श्यामा
प्रसाद
मुखर्जी के
लिए। जो लोग
कमिटेड नहीं
हैं, अब नहीं
बोलेंगे
मंत्री जी, जो
कमिटेड नहीं
हैं उन लोगों
की निष्ठा को
सदन में पास
करवायें और यह
बतायें कि मैं
भी उतनी ही
निष्ठावान
हूं।
अध्यक्ष
महोदय, मैं यह
इसलिए कहना
चाहता हूं कि
आप जो व्यवस्थाएं
कर रहे हैं
उनमें बहुत से
पॉलिटिकल
करेक्शन
पार्ट हैं,
मिड टर्म
करेक्शन,
ढाई-तीन साल
के बाद यदि
राजनीतिक
पार्टी की
पृष्ठभूमि
में करेक्शन
नहीं किया
जाये तो
पालिटिकल
लीडरशिप वंडरेबल
हो जाती है और
वंडरेबल किया
है। वह तो
अख़बार में
पढ़ा है, मैं
तो कहना नहीं
चाहता,
कलेक्टिव
जिम्मेदारी
के प्रति
संविधान में
क्या लिखा
हुआ है। चीफ
मिनिस्टर के,
अमंग दी चीफ
मिनिस्टर,
उसकी क्या
पावर है, हज
हाउस बन गया
क्या आज की
डेट में,
इसमें हज हाउस
के संबंध में
एक भी शब्द
नहीं कहा है।
सेज दो साल
में बन गया क्या।
आज सेज के
संबंध में एक
प्रतिशत काम
नहीं किया गया
है।
अध्यक्ष
महोदय, तेल के
संबंध में,
रिफाइनरी के
संबंध में एक
शब्द नहीं
कहा गया। स्टेट
का सब्जेक्ट
है, महंगाई
बढ़ रही है,
आपने पचास
पैसे सेस लगा रखा
है डीजल,
पेट्रोल में,
इस महंगाई को
कम करने के
संबंध में कुछ
काम नहीं कर
रहे हैं।
अध्यक्ष
महोदय, हमारा
काम यह है कि
श्यामा
प्रसाद
मुखर्जी के
संबंध में
मैसेज जाना
चाहिए। हमारा
काम है कि
गुरु गोलवरकर
के संबंध में
जाना चाहिए।
हमारा काम है
दीनदयाल जी उपाध्याय
के प्रति जोना
चाहिए। लेकिन
मैं सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर
में गुरु
गोलवरकर में
जितना पैसा
खर्च किया
उससे ज्यादा
100 करोड़ का
प्रोविजन कर
रहे हैं, निष्ठा
होती तो 100
करोड़ रूपये
गुरु गोलवरकर
के नाम पर
करने चाहिंए।
वह भी जन
सहभागिता की
स्कीम है, क्या
तकलीफ थी।
उसमें यह भी
जन सहभागिता
में लेना चाहते
हैं।
अध्यक्ष
महोदय, मैं
समझता हूं कि
सरकार ने
पंचायती राज
उत्तरदायित्व
गवर्नमेंट के
लिए कंडीशन
रखी है उसमें,
एक साल गया, आज
तीन साल हो
गये, कटारिया
जी की अध्यक्षता
में मीटिंग
हुई है। आपने
सदन में कहा है
कि तीन महिने
में रिपोर्ट
दे देंगे।
आपने राज में
चुनाव भी हो
गये। एक लाख
से ज्यादा
वार्ड पंच
हैं, 237 पंचायत
समिति के
प्रधान हैं,
प्रमुख हैं।
पंचायत समिति
सदस्य हैं,
जिला परिषद के
सदस्य हैं। 73,74
अमेंडमेंट
हुआ था कि हम
सेल्फ
गवर्नेस की
स्थिति पैदा
करें। उन
लोगों के लिए
फंड, फंग्शन
और फंग्शनरी
ट्रांसफर
करेंगे। यह
आपने लिखा है।
आपने इस बजट
भाषण में यह
कहा है कि
हमने उनको
पट्टा देने का
अधिकार दे
दिया है। यह
अधिकार दिया है
तीन साल में।
भारतीय जनता
पार्टी के
प्रमुख हैं ही
नहीं, भारतीय
जनता पार्टी
के प्रधान भी
नहीं हैं।
अध्यक्ष
महोदय, मुझे
भी मौका मिला
था वैंकय्या
नायडू जी भारत
सरकार के रूरल
डवलपमेंट
मिनिस्टर थे,
अटल बिहारी जी
वाजपेयी सम्मानित
प्रधानमंत्री
थे। मैं
मंत्री था,
हमे भी वहां
दिल्ली में
जाकर के
मीटिंग अटैंड
करने का मौका
मिला जिसमें
सोनिया जी को
भी बुलाया।
पूरा देश इस
बात के लिए
कन्सेस था कि
दस साल हो गये
इसको, हमे नये
ढंग से पंचायती
राज का स्ट्रेंथन
करने के लिए
काम करना
चाहिए। तब
एन.डी.ए. की
सरकार थी। आप
तो उस सरकार
की लेगिसी के
पार्ट हैं।
पंचायती राज
को एम्पावरमेंट
करने के लिए
एक शब्द नहीं
हैं Elementary education is a part of the Panchayat Raj.
एलिमेन्ट्री
एजुकेशन में
पंचायत का
प्रधान,
पंचायत समिति
में एक
ट्रांसफर
नहीं कर सकता,
जिला परिषद का
ट्रांसफर
नहीं कर सकता
है। जी.ओ. यहां
सरकार से
निकले। यह
पंचायती राज
के एक लाख
आदमियों का
चुनाव हमने क्यों
करवाया। क्या
हमारा 73 वें
अमेंडमेंट के
प्रति यह
कमिटमेंट है।
सरकार ने हमें
यह एश्योरेंस
दिया है, हाउस
में यह लिखा
है कि 73 वें अमेंडमेंट
के संबंध में
हम फंड, फंग्शन
और फंग्शनरी
के साथ
ट्रांसफर
करेंगे।
इसमें एक शब्द
पंचायती राज
को ट्रांसफर करने
के लिए नहीं
कहा गया है।
अध्यक्ष
महोदय, हम गुड
गवर्नेंस की
बात करते हैं।
गुड गवर्नेंस
की बात कैसे
करेंगे। यह
जितनी स्कीम
आप लागू
करेंगे उन स्कीम
का कौन करेगा,
आप सुपरवाइज
करेंगे या
हमारे लोग जो
चुने हुए हैं
वह सुपरवाइज
करेंगे। मैं
समझता हूं कि
इसमें पंचायती
राज के संबंध
में एक शब्द
नहीं कहा है।
अध्यक्ष
महोदय, बहुत
बड़ी जनसंख्या
एस.टी. की है, जो
नॉन ट्राइब्ल
सब प्लान में
हैं, कटारिया
जी जानते हैं
इस बात को, डूंगरपुर,
बांसवाड़ा और
उदयपुर के
अलावा भी गोगुन्दा,
नाथद्वारा,
कुम्भलगढ़,
मावली, वल्लभ
नगर ऐसी बहुत
सी जगह हैं
जहां एस.टी. की
पापुलेशन
रहती है जिसकी
जनसंख्या आज
12 लाख से भी ज्यादा
है। जिन लोगों
का नुकसान
होगा उनको
सरकार पाँच
हजार रूपये
देगी जो कि
ट्राइब्ल सब
प्लान में
आदिवासी रह
रहे हैं। जो
नॉन ट्राइब्ल
सब प्लान में
आदिवासी रह
रहे हैं, उसके
नुकसान के लिए
क्या
करेंगे। आप यह
दो तरह की व्यवस्था
कररहे हैं।
ट्राइब्ल सब
प्लान का
आदिवासी उसको
तो एक तरह की
सुविधा मिलेगी
और नॉन
ट्राइब्ल का
आदिवासी उसको
दूसरी तरह की
सुविधा मिलेगी।
क्या
कटारिया जी,
यह आवश्यकता
नहीं है कि वह
गरीब आदमी जो
वल्लभ नगर
में रहता है,
वह गरीब आदमी
जो गिरवा में रहता
है, वह गरीब
आदमी जो कुम्भलगढ़
और नाथद्वारा
में रहता है,
उस गरीब आदमी
का जो नुकसान
है उसको भी
उतना पैसा
मिलना चाहिए।
उसके बिजली की
व्यवस्था
होनी चाहिए।
क्या हम दो
तरह के
आदिवासी
मेवाड़ में
पैदा करना चाहते
हैं। मैं
समझता हूं कि
सरकार को आगे
आकर यह फैसला
करना चाहिए कि
हम एस.टी. केIrrespective of
whether they are residing in scheduled tribes areas or non scheduled tribes
areas. कहीं
भी जो आदिवासी
रह रहा है, सब
आदिवासी को
उसका लाभ
मिलेगा। जो
उसका नुकसान हुआ
है यह सरकार
को करना
चाहिए। सरकार
को यह व्यवस्था
करने की बहुत
जरूरत है।
अध्यक्ष
महोदय, मैं एक
बात और ध्यानाकर्षित
करना चाहता
हूं, हैल्थ
के संबंध में
...(व्यवधान) आप
जानकर आश्चर्य
करेंगे वर्ल्ड
बैंक का पैसा
आया हुआ है,
भारत सरकार का
रूरल हैल्थ प्रोग्राम
था और यह फीगर
देना चाहते
हैं। आप जानकर
के आश्चर्य
करेंगे कि 2006-07
में गैर योजना
में 436 करोड़ रूपये
का प्रोविजन
था, योजना में 194
करोड़ का प्रोविजन
था। केन्द्रीय
प्रवर्तित
योजना में 200
करोड़ समथिंग
प्रोविजन था
और 2006-07 दिसम्बर
तक गैर योजना
में कुल
मिलाकर 332
करोड़ रूपये
खर्च किये जो
एस्टेब्लिशमेंट
कॉस्ट है। 194
करोड़ की
योजना के
अगेंस्ट में
कुल मिलाकर 35.70
रूपये खर्च
किया है।
अध्यक्ष
महोदय, आपने
केन्द्रीय
प्रवर्तित
योजना के 200
करोड़ के
अगेंस्ट में
कुल मिलाकर 93.76
करोड़ रूपये
खर्च किये
हैं। आज हैल्थ
मिशन के सिस्टम
में पब्लिक
प्राइवेट
पार्टनरशिप
की बात की है
कि इसमें स्कूल
खोल देंगे,
अस्पताल खोल
दें, मैं
सरकार से
जानना चाहता
हूं कि सरकार
बताये कि
पिछले बजट के
बाद पब्लिक
प्राइवेट
पार्टनरशिप
में इतने अस्पताल
खुले, इतने स्कूल
खुले। क्या
नीति बनाई, आज
दिन तक नीति
नहीं बनायी।
पब्लिक
प्राइवेट
पार्टनरशिप,
इसमें एक काम
हुआ है,
मंत्री जी
बतायें। आज
दिन तक राजस्थान
में इसकी
पालिसी नहीं
आयी कि पब्लिक
प्राइवेट
पार्टनरशिप
क्या है।
पब्लिक
प्राइवेट
पार्टनरशिप
का एक उदाहरण
है रीडको is a public
private partnership
Rajasthan
Bravery is an example of unknown unwritten public private partnership कि
फिर क्वालिफाई
कर रहे हैं. Unknown-
unwritten public private partnership is R.B.C. अध्यक्ष
महोदय, मैं
फिर मुद्दे पर
आना चाहता
हूं, यह 41 करोड़
का आउट ले है,
यह भी करेक्ट
कर लें, इस बजट
में तो 45 करोड़
लिखा है, उसको
चैक कर लें, 41
करोड़ है।
इसमें गलत लिख
रखा है। 41 प्रतिशत
का जो आउट ले
है, जो रफली 5
हजार करोड़ का
आउट ले है,
परंतु यह 1977-78, यह
भी 90 बी में कोई
दम नहीं रखा
है, आज
ब्रेवरीज
कॉरपोरेशन में
कोई दम नहीं
रहा है। आज कोल
में दम रहा
है।
जयगोविन्द/अरुण/12.3.7/15.30/2m
कोल में बिना टेण्डर के कोल मंगवा लिया गया था। कोल एम एन टी से मंगवाया गया और प्राइवेट पार्टी जो सप्लाई करती है उनको बंद कर दिया गया है। आज कोल के हैण्डलिंग का काम हम करना चाहते हैं।
मैं आज नहीं बोलना चाहता। अध्यक्ष महोदय, मेरा एप्रिहेंसन है कि 5 हजार करोड़ रुपए का जो आउट ले है यह राजस्थान सरकार के जब चुनाव होंगे 2008 के तब तक बिजली पैदा नहीं होगी और इसके पहले जो व्यवस्था करनी है उस व्यवस्था को सुदृढ़ करने का काम हो रहा है, उसको भी चैक करने की जरूरत है। यदि यह पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप है तो राजस्थान के लोकतंत्र का भविष्य ठीक नहीं है।
अध्यक्ष महोदय, मैं विनम्र शब्दों में निवेदन करना चाहता हूं कि यह बजट जिस बजट को लाने के लिए इकोनॉमिक इन्होंने बात की, मैं फिर कहना चाहता हूं कि एफ आर बी एम एक्ट राजस्थान के हित में नहीं है। समय आ गया है कि एफ आर बी एम के बारे में हम सोचें। आज केरला ने लीड ली है। अध्यक्ष महोदय, केरला ने यह कहा है कि वैट के सम्बन्ध में यदि फ्लोर रेट को हम माने और लक्जरी आइटम्स पर हम टैक्स लगावें तो हमें टैक्स ज्यादा मिलेगा। केरला ने एक उदाहरण प्रस्तुत किया है। केरला ने उदाहरण प्रस्तुत करके अपने यहां पर जितने भी लक्जरी आइटम्स हैं उन लक्जरी आइटम्स पर उन्होंने टैक्स लगाया है और अपने रेवेन्यू को जनरेट किया है।
आपने भी यदि ग्यारहवीं पंच वर्षीय योजना में भगवान न करे अकाल पड़े, आपकी जी डी पी डिस्टर्ब हो जाए, उसको रोकने के लिए,रेवेन्यू जनरेट करने के सम्बन्ध में आपको कुछ व्यवस्था करनी पड़ेगी कि कैसे हम रेवेन्यू ओरिएण्टेड मेजर्स अपनाकर बजट फिस्कल डेफिसिट को कण्ट्रोल करें न कि केवल मात्र हम जी डी पी के भरोसे अपने फिस्कल डेफिसिट को कण्ट्रोल करें। अध्यक्ष महोदय, यह सबसे बड़ी आवश्यकता है, मैं समझता हूं कि इस सम्बन्ध में सरकार को सोचने की आवश्यकता है।
माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं अपनी बात समाप्त करूं उसके पहले यह जरूर कहना चाहता हूं कि आज सबसे बड़ी तकलीफ एग्रीकल्चर के लोगों की है, किसान की तकलीफ है। केरला का उदाहरण है माननीय अध्यक्ष महोदय, वहां पर एग्रीकल्चर डेट रिलीफ कमीशन बनाया है। यदि आपके मन में किसान के प्रति कुछ है तो आप मेहरबानी करके एग्रीकल्चर डेट रिलीफ कमीशन बनाएं जिससे कि नुकसान हो तो उसको कम्पनसेट करने के लिए सरकार आगे आ सके। माननीय अध्यक्ष महोदय, वहां पर फार्मर कमीशन भी बनाया गया है, वह फार्मर कमीशन वहां प्राइस फिक्स करता है। राजस्थान में आपके पानी उपलब्ध नहीं है। माननीय अध्यक्ष महोदय, यह जानने की आवश्यकता है कि कैसे हम पानी का जूडिशस उपयोग करें और पानी का जूडिशस उपयोग करने के बाद हम यह कोशिश करें कि फारर्मर को रेमुनरेटिव प्राइस मिले। जो कम पानी से खेती कर रहे हैं। माननीय अध्यक्ष महोदय, यह भी आवश्यक है कि हम इस बात की कोशिश करें कि टोप लोन है 4 प्रतिशत पर आपको मिले। यह स्थायी व्यवस्था करे। माननीय अध्यक्ष महोदय, पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम का स्ट्रेंथन करना बहुत जरूरी है नहीं तो गरीब आदमी को उसका लाभ नहीं मिलेगा।
माननीय अध्यक्ष महोदय, अंत में मैं एक बात पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं जिस पर सरकार को चिंता करने की आवश्यकता है। हमने लगभग 1 लाख से ज्यादा कुओं को एनरजाइज किया है, बिजली के कनेक्शन दिए हैं आपकी सरकार ने। माननीय अध्यक्ष महोदय, आपने 34 महीने में लगभग 2720 करोड़ रुपए खर्च किए हैं सिंचाई के सम्बन्ध में। माननीय अध्यक्ष महोदय, आपने 99 लघु सिंचाई योजनाएं पूरी की हैं, आपने क्लेम किया है। माननीय अध्यक्ष महोदय, आपने इन्दिरा गांधी नहर पर 481.93 करोड़ रुपए खर्च करके लगभग 20 हजार हैक्टेयर में सिंचाई का काम किया है। माननीय अध्यक्ष महोदय, आपने सिंचाई में प्रथम चरण और द्वितीय चरण में 42 और 61 हजार खालों का निर्माण कराकर 40 करोड़ रुपए और 49 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। माननीय अध्यक्ष महोदय, यह सब होने के बाद भी आपका एग्रीकल्चर का प्रोडक्शन स्टेगनेंट है, पर यूनिट नहीं बढ़ा है। माननीय अध्यक्ष महोदय, यह गम्भीर समस्या है कि राजस्थान में जी डी पी में सबसे ज्यादा कण्ट्रीब्यूशन एग्रीकल्चर का है और एग्रीकल्चर में इतना सब होने के बाद भी यह सरकार को सोचने की आवश्यकता है कि क्या यह समय आ गया है जिसमें ध्यान रखें कि वह डिस्ट्रेस में नहीं आवे और यह जो हमने पोटेंशल क्रिएट किया है एग्रीकल्चर और बिजली का कनेक्शन देने के लिए इसकी व्यवस्था की है। उसके बाद राजस्थान का प्रोडक्शन बढ़े, यह यदि हमने नहीं बढ़ाया और माननीय अध्यक्ष महोदय, किसी भी समय में यदि अकाल पड़ गया तो आपकी जी डी पी कम हो जाएगी और जी डी पी कम हो जाएगी तो फिस्कल डेफिसिट के सारे टारगेट आपके डिस्टर्ब हो जाएंगे। माननीय अध्यक्ष महोदय, इसलिए मैं कहना चाहता हूं कि राजस्थान सरकार फिस्कल डेफिसिट भगवान के भरोसे, जी डी पी के आधार पर कण्ट्रोल करना चाहती है उसके सम्बन्ध में दुबारा बात करने की आवश्यकता है।
माननीय अध्यक्ष महोदय, राजस्थान सरकार रेवेन्यू बढ़ा रही है, रेवेन्यू की बोएंसी तो थ्रू आउट इण्डिया है। आज रेवेन्यू की बोएंसी तो भारत सरकार में भी हो रही है, यह अलग-अलग स्टेट में भी हो रही है। आपने केवल रेवेन्यू बढ़ाया सेल टैक्स में और आपने रेवेन्यू बढ़ाया है स्टाम्प एण्ड ड्यूटी में, आपने रेवेन्यू बढ़ाया है एक्साइज में। माननीय अध्यक्ष महोदय, यह स्टाम्प एण्ड ड्यूटी का जो बढ़ाया है रेवेन्यू 5 सौ करोड़ से 1 हजार करोड़ रुपए, इससे माननीय अध्यक्ष महोदय, शहर का रहने वाला आदमी स्ट्रेस में आ जाएगा। मैं दूसरी बात कहा चाहता हूं, अभी तो हम एग्रीकल्चर में किसान के स्ट्रेस की बात कर रहे हैं, इसके बाद जयपुर में इस विधान सभा से 20 किलोमीटर राउण्ड में ईस्ट, वेस्ट, नोर्थ और साउथ में कोई गरीब आदमी मकान लेकर रहने की स्थिति में नहीं है। यह इतनी भयंकर समस्या आपने रेवेन्यू जनरेशन करने के नाम पर आर्टिफिशल 90 बी करके, आर्टिफिशल, क्योंकि 90 बी करने के पहले प्लान पास करवाना चाहिए था, उसके बाद 90 बी करते। बड़े लोगों की 90 बी कर दी आपने अब आपने उल्टा काम कर दिया पहले आप अपना प्लान लेकर आओ फिर 90 बी करेंगे, जिनका काम पडा है उनका काम तो कर दिया अब आपका कोई काम नहीं हो सकता, अब अरबन आदमी भी स्ट्रेस में आएगा, वह मकान लेने की स्थिति में नहीं रहेगा।
इसलिए माननीय अध्यक्ष महोदय, समय आ गया है कि हम इस बात को गम्भीरता से सोचें कि हमारा रेवेन्यू बढ़ रहा है, हमारी जी डी पी भगवान की दया से ठीक है तो आज आवश्यक है कि हम सारा जोर रेवेन्यू ओरिएण्टेशन में लगावे, बजाय फिस्कल डेफिसिट को कण्ट्रोल करने का काम करें। यदि हमने यह नहीं किया तो यह ऐतिहासिक अवसर जो इस सरकार को मिला है, जिस बोएंसी से अब रेवेन्यू जनरेशन बढ़ रहा है, सेल टैक्स में पैसा बढ़ रहा है, एक्साइज में बढ़ रहा है, भारत सरकार का डिवोल्यूशन का पैसा बढ़ रहा है, आपके ग्राण्ट इन एड में पैसा बढ़ रहा है, इतना सब होने के बाद माननीय अध्यक्ष महोदय, 2001-2002 से अभी तक लगभग आठ हजार करोड़ से ज्यादा रेवेन्यू का पैसा आया है आपके पास यदि इसके बाद भी राजस्थान सरकार लोंग टर्म परस्पेक्टिव लेकर राजस्थान के विकास की कल्पना नहीं कर सके तो इससे बड़ा दुर्भाग्य और कोई नहीं हो सकता।
माननीय अध्यक्ष महोदय, मुझे पूरा विश्वास है कि यह सरकार लोकतंत्र और संसदीय परम्पराओं का निर्वहन करेगी। लोकतंत्र और संसदीय परम्पराओं में मंत्रियों को वही स्थान मिलेगा जो मंत्री पॉलिटिकल मास्टर के रूप में ब्यूरोक्रेसी से काम कराए। इस बजट में जो प्रोविजन किया है, उसका उपयोग कर सके तब तो मैं समझता हूं कि बजट का जो हम कर रहे हैं वह ठीक है अन्यथा यह बजट की आउट ले इम्प्रेसिव है, 10 प्रतिशत खर्चा करके हथेली में सरसों बोने का काम किया गया है। इस बजट से राजस्थान की जी डी पी कोई बढ़ी है ऐसा मुझे नहीं लगता है। मैं समझता हूं कि सरकार को गम्भीरता से इस बात के लिए सोचने की जरूरत है कि आज भी राजस्थान सरकार की रेवेन्यू बढ़ने के बाद भी इण्टरेस्ट की लाइबिलिटी उतनी ही है। यह सरकार बताएं कि जो भी इण्टरेस्ट लाइबिलिटी 5 हजार करोड़ के आसपास है, आज भी पैसा भारत सरकार से लोन नहीं ले रही है, आज आप पैसा पी एफ से और कंसोलिडेट फण्ड से लोन लेकर व्यवस्था कर रहे हैं। माननीय अध्यक्ष महोदय, आप यह जानकर आश्चर्य करेंगे कि 74 हजार करोड़ रुपए का आज तक राजस्थान सरकार पर ऋण हो गया है और माथुर साहब की स्टडी यह है, माथुर साहब बता रहे थे कि यदि यही ट्रेण्ड रहा तो चुनाव तक 94 हजार करोड़ रुपए का राजस्थान पर टैक्स हो जाएगा और प्रति व्यक्ति टैक्स बढ जाएगा। इस सुनहरे अवसर को राजस्थान सरकार के सम्बधितों को सोचना चाहिए और लोंग टर्म में राजस्थान का विकास कैसे करें और मैं समझता हूं कि उसमें मुख्य मंत्रीजी की जो व्यक्तिगत क्षमता है, जिस क्षमता के कारण कुछ लोग नाराज हैं, कुछ लोग खुश हैं, उस व्यक्तिगत नाराजगी और खुशी का लाभ राजस्थान की जनता को मिले और राजस्थान की जनता कह सके कि उनके समय में विकास हुआ तब तो यह बजट, धन्यवाद देता हूं, अन्यथा यह समय भी निकल जाएगा और मुख्य मंत्रीजी की ‘मैं’ के कारण लोकतंत्र यदि कमजोर होता है तो राजस्थान का भला नहीं होगा। इन्हीं शब्दों के साथ आपने समय दिया, उसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।
श्री अध्यक्ष: श्री कालीचरण सर्राफ।
श्री कालीचरण सर्राफ (जौहरी बाजार): नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्य के पौने दो घण्टे लम्बे भाषण के...।
श्री अध्यक्ष: एक घण्टा दस मिनट।
श्री कालीचरण सर्राफ (जौहरी बाजार): चलिए एक घण्टा दस मिनट। उस भाषण में हम लोग यह अपेक्षा कर रहे थे कि आदरणीय जोशीजी बहुत विद्वान, वित्त विशेषज्ञ हैं, कोई इस प्रकार की नई बात बताएंगे जिससे राजस्थान को एक नई दिशा मिलेगी परन्तु उन्होंने अपने एक घण्टे दस मिनट के सारगर्भित भाषण में केवल ‘मैं’ की व्याख्या की। केवल ‘मैं’ की व्याख्या करने में 55 मिनट खराब कर दिए। मैं यह बताना चाहूंगा सदन के माध्यम से माननीय अध्यक्ष महोदय, कि आज तक जितने भी बजट पेश किए गए हैं चाहे वह कांग्रेस के समय हमारे वित्त मंत्रियों के द्वारा पेश किए गए हों चाहे भारतीय जनता पार्टी के समय हमारे वित्त मंत्रियों द्वारा पेश किए गए हों, सब में ‘मैं’ का उल्लेख हुआ है। यहां प्रद्युम्न सिंहजी, राजाखेड़ा से आने वाले माननीय सदस्य, अभी तो गए वह, उनका अभी सुमेरपुर से आने वाले माननीय सदस्य ने जिक्र किया और उनके भाषण को भी वह देखें उसमें लगभग पचास-पचपन जगह ‘मैं’ शब्द का उपयोग हुआ। मैंने ऐसा कर दिया, मैं ऐसा करूंगा, यह तो एक परम्परा है और इस पर सदन का इतना समय इन्होंने जाया किया कि मैं तो इनके प्रति सहानुभूति ही प्रकट कर सकता हूं।
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, हम आपसे
यह भी अपेक्षा
कर रहे थे कि
हमारे विपक्ष
के वरिष्ठ
सदस्य,
आदरणीय
जोशीजी, इस
बार मुख्य
मंत्रीजी ने
चौथा बजट पेश
किया है, उनके
बजट में जिक्र
आया था कुशल
वित्तीय
प्रबन्धन का,
उसके बारे में
यह जिक्र
करेंगे।
रेवेन्यू बढ़ाने
का जिक्र हुआ
उसके जिक्र के
साथ बजट में
योजना का आकार
बढ़ा है। उसके
बारे में कुछ
कहेंगे।
बेरोजगार
नौजवानों के
बारे में इन्होंने
कहा है उसके
बारे में अपने
श्रीमुख से कुछ
सुनने का मौका
मिलेगा।
महिला सशक्तीकरण
की बात कही गई
है, उसके बारे
में कुछ कहने
का मौका
मिलेगा।
प्रतापगढ़ को
जिला बनाने की
बात कही गई है
उसके बारे में
कुछ कहेंगे।
Gpc/akt/12032007/1540/2n
असंगठित
मजदूरों के
लिए पेंशन
योजना चालू की
है उसके बारे
में कुछ
कहेंगे, पर
सी.पी. जोशी
साहब ने किसी
के बारे में
कुछ नहीं कहा।
हम उनसे यह
अपेक्षा कर
रहे थे कि वे
राजनीति से
ऊपर उठकर वास्तविक
रूप से जो काम
माननीय मुख्यमंत्री
जी करना चाहती
हैं, भारतीय
जनता पार्टी
की यह सरकार
करना चाहती
है, उन्होंने
जो 16 योजनाएं 1250
करोड़ रुपये
के प्रावधान से
इस बजट में
प्रस्तुत की
है उसके बारे
में कोई जिक्र
करेंगे, पर वे
राजनीति से
ऊपर नहीं उठे
और बिना दलीय
भावना से ऊपर
उठकर उन्होंने
केवल विपक्ष
में, क्योंकि
मैं विपक्ष का
सदस्य हूं
इसलिए उन्होंने
केवल विपक्ष
का रोल अदा
किया।
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं
माननीय मुख्यमंत्रीजी
को इस बात के
लिए बधाई देना
चाहूंगा कि
राजस्थान
में इतिहास
में पहली बार
उन्होंने
इतना जानदार
और शानदार बजट
प्रदेश की जनता
के सामने
प्रस्तुत
किया है। आज
राजस्थान
में चाहे
महिलाएं हों,
चाहे
बेरोजगार नौजवान
हो, चाहे गांव
में रहने वाला
किसान हो, चाहे
फैक्ट्री
में काम करने
वाला मजदूर
हो, चाहे शहरी
क्षेत्र में
रहने वाला
छोटा या बड़ा व्यापारी
हो, चाहे
अनुसूचित
जाति का व्यक्ति
हो, चाहे
जनजाति का व्यक्ति
हो, चाहे
पिछड़ी जाति
का व्यक्ति
हो, चाहे
सैनिक हो,
चाहे विकलांग
हो आज ऐसा
कोई वर्ग नहीं
है जो इस बजट
की भूरि-भूरि प्रशंसा
नहीं कर रहा
हो। आज केवल
यदि इस बजट की
प्रशंसा नहीं
कर रहे हैं तो
वे विपक्ष के
माननीय सदस्य
नहीं कर रहे
हैं और वो
उनकी
राजनैतिक
मजबूरी है
इसलिए वे इसकी
प्रशंसा नहीं
कर रहे हैं। यह
ऐतिहासक बजट,
यह विकासोन्मुखी,
यह सुंदर बजट
जो माननीय
मुख्यमंत्रीजी
ने सदन में
प्रस्तुत किया
है इसकी जितनी
प्रशंसा की
जाए उतनी कम
है।
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, बिना
टैक्स लगाये,
बिना टैक्स
का भार बढ़ाये
हर वर्ग को
राहत तो दी गई
है, पर किसी
वर्ग का अहित
इस बजट में
नहीं किया गया
है। हमारी
सरकार के कुशल
वित्तीय
प्रबंधन का यह
परिणाम है कि
इस बार 16 साल के
लम्बे समय के
बाद पहली बार
रेवेन्यू
सरप्लस का
बजट पेश किया
गया है।
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, भारतीय
जनता पार्टी
की सरकार बनने
के बाद केवल
पाँच दिन
ओवरड्राफ्ट
लिया गया और
फरवरी, 2004 के बाद
आज तक एक दिन
भी
ओवरड्राफ्ट
नहीं लिया
गया। जब
कांग्रेस की
सरकार थी, मैं
बताना
चाहूंगा इनके
पाँच साल के
कार्यकाल में
704 दिन राज
ओवरड्राफ्ट
की स्थिति में
रहा। यदि मैं
गलत कह रहा
हूं तो आप इसे चुनौती
दे सकते हैं।
माननीय अध्यक्ष
महोदय, यह कुशल
वित्तीय
प्रबंधन का ही
कमाल है कि इस
वर्ष हमारी जो
अनुमोदित
वार्षिक योजना
है वह 8501 करोड़
रुपये की है।
यह बताने की
आवश्यकता
नहीं है कि
जब-जब राजस्थान
में भारतीय
जनता पार्टी
की सरकार बनी
योजनाओं का
आकार बढ़ा और
जब-जब
कांग्रेस का
राज राजस्थान
में आया
योजनाओं का
आकार घटा।
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं
बताना
चाहूंगा आपके
माध्यम से कि
ग्यारहवीं
पंचवर्षीय
योजना 68422 करोड़
रुपये की बनी
है। आठवीं
पंचवर्षीय
योजना 12051 करोड़
रुपये की बनी
थी। नौवीं
पंचवर्षीय
योजना 22103 करोड़
की और दसवीं
पंचवर्षीय
योजना 31831 करोड़
की। यानी कुल
मिलाकर तीनों
पंचवर्षीय
योजनाएं 65985
करोड़ की थी।
मैं बधाई देना
चाहूंगा,
साधुवाद देना
चाहूंगा राजस्थान
की मुख्यमंत्री
को भारतीय
जनता पार्टी
की सरकार को कि
उन्होंने एक
पंचवर्षीय
योजना, ग्यारहवीं
पंचवर्षीय
योजना 68522 करोड़
रुपये की बनायी
है जो इन
तीनों
योजनाओं के
योग से 3 हजार करोड़
ज्यादा है।
माननीय अध्यक्ष
महोदय, कांग्रेस
के लोग जब भी
भाषण करते
हैं, नाथद्वारा
से आने वाले
माननीय सदस्य
ने भी अभी कहा
और राजाखेड़ा
से आने वाले
माननीय सदस्य
और बी.डी. कल्ला
साहब का
अखबारों में
स्टेटमेंट
भी पढ़ा, उन्होंने
एक ही बात कही
कि भारतीय
जनता पार्टी
की सरकार ने
आने के बाद
राजस्थान को
कर्जें में
डूबो दिया।
राजस्थान
प्रदेश को
कंगाल कर
दिया। मैं
आपको बताना चाहूंगा
कि भैरोंसिंह
शेखावत राजस्थान
के मुख्यमंत्री
थे, उस समय वे
राजस्थान पर
24 हजार का
कर्जा छोड़कर
गये थे। जब
अशोक गहलोत जी
ने यह सत्ता
हमको सौंपी उस
समय राजस्थान
पर 52 हजार
करोड़ का
कर्जा ये
छोड़कर गये।
..(व्यवधान)..
यानी 120
प्रतिशत
कर्जे में
पाँच साल के दौरान
बढ़ोतरी हुई।
आज आप कहते
हैं राजस्थान
को हमने कर्जे
में डुबो
दिया। मैं
बताना चाहूंगा
कि हमने तीन
साल में आज
कर्जा 72 हजार
करोड़ रुपया
हो गया, लेकिन
तीन साल में
हमने 20 हजार
करोड़ का
कर्जा लिया, केवल
30.31 प्रतिशत
कर्जे में
बढ़ोतरी हुई
है। उसके साथ-साथ
मैं यह भी
बताना
चाहूंगा कि
आपके समय में
कर्जा आप
लोगों ने लिया
केवल वेतन और
भत्ते
चुकाने के
लिए, हमने
वेतन और भत्ते
चुकाने के लिए
कर्जा नहीं
लिया। हमने
उससे परिसम्पत्तियां
निर्मित कीं।
मैं आकड़ों के
माध्यम से
आपको बताना
चाहूंगा कि
आपके समय में
जो कर्जा लिया
गया उसमें
बढ़ोतरी हुई 24
परसेंट और
हमारे समय में
जो कर्जा लिया
गया
प्रतिवर्ष हमारे
यहां बढ़ोतरी
हुई 10 परसेंट।
परिसम्पत्तियों
के निर्माण का
जहां तक सवाल
है ..(व्यवधान)..
वर्तमान
सरकार ने स्थायी
परिसम्पत्तियों
के निर्माण पर
विशेष ध्यान
दिया।
वर्तमान
सरकार के समय
2003-04 में 42.48 प्रतिशत,
2004-05 में 51.50
प्रतिशत और 2005-06
में 83.02
प्रतिशत। इस
बार हमने
प्रावधान रखा
है 96.58 प्रतिशत।
आपके समय में
क्या स्थिति
थी? 2001-02 में 29.82
प्रतिशत की
परिसम्पत्तियां
आपने निर्मित
कीं और 2002-03 में 34.36
प्रतिशत।
हमने कर्जा
लिया तो उससे
परिसम्पत्तियों
का निर्माण
कराया और आपने
कर्जा लिया
केवल वेतन-भत्तों
में चुकारा
किया, परिसम्पत्तियों
का निर्माण
नहीं किया।
आदरणीय
अध्यक्ष
महोदय, बजट
पेश करने के
बाद
प्रद्युम्न
सिंह जी का,
राजाखेड़ा से
आने वाले
माननीय सदस्य
पूर्व में
वित्त
मंत्री भी रहे
हैं ..(व्यवधान)..
श्री अध्यक्ष:
नाम न लें।
श्री
कालीचरण
सर्राफ
(जौहरी
बाजार): मुझे
पत्रकार बता
रहे थे, कई
नेताओं को फोन
किया ..(व्यवधान)..
श्री अध्यक्ष:
राजाखेड़ा से
आने वाले
माननीय सदस्य
कहें, नाम न
लें।
श्री
कालीचरण
सर्राफ
(जौहरी
बाजार):
राजाखेड़ा से
आने वाले
माननीय सदस्य,
पूर्व वित्त
मंत्रीजी,
इनका अख़बार
में स्टेटमेंट
छपा, उन्होंने
कहा कि मुख्यमंत्रीजी
ने बड़ी
चतुराई से
केन्द्र की
योजनाओं पर
अपने नाम का
लेबल लगा दिया
है। केन्द्र
सरकार का ही
पैसा आ रहा है
उससे ही विकास
की योजनाओं की
घोषणा की गई
है। मैं
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आपके
माध्यम से
राजाखेड़ा से
आने वाले
माननीय सदस्य
को यह बताना
चाहूंगा ..(व्यवधान)..
श्री अध्यक्ष:
आ गये आपकी
बात सुनकर। अब
आप ध्यान से
सुनिए।
श्री
कालीचरण
सर्राफ
(जौहरी
बाजार): अध्यक्ष
महोदय,
हमारे देश में
फेडरल स्ट्रक्चर
है और
गवर्नमेंट आफ
इण्डिया,
यूनियन गवर्नमेंट
है और जो पैसा
वे हमें भेजते
हैं वह कोई खैरात
में नहीं
देते, वे कोई
मेहरबानी
नहीं करते,
हमारे राज्य
का जो हिस्सा
होता है उसको
वे हमें देते
हैं। ..(व्यवधान)..
आप मेरी बात
सुनिए। ..(व्यवधान)..
श्री अध्यक्ष:
क्या बोल रहे
हैं आप ..(व्यवधान)..
श्री
कालीचरण
सर्राफ
(जौहरी
बाजार): मैं
बताना
चाहूंगा कि जब
केन्द्र में
अटल बिहारी
वाजपेयी इस
देश के प्रधानमंत्री
थे।
मोहन/अरूण/अशोधित
प्रति
प्रकाशनार्थ/12032007/1550/20
और राजस्थान
में जब आपका
राज था तो
बिना
राजनीतिक
भेदभाव के
जिना पैसा
राज्य सरकार
के लिए आवश्यक
था उतना पैसा
उन्होंने
वहां से भेजा।
राजस्थान की
सरकार ने जब
भीषण अकाल से
जूझ रहा था लाखों
टन गेहूं बिना
किसी
राजनीतिक
भेदभाव के उन्होंने
वहां से भेजा
परन्तु आज क्या
स्थिति है।
बाड़मेर जिले
में बाढ़ आई,
हमारी राज्य
सरकार ने 3250
करोड़ रुपया
उनसे मांगा और
उन्होंने
केवल सौ करोड़
रुपये दिये।
सरसों की खरीद
की यह स्थिति
है कि पिछली
बार का 26 करोड़
रुपये आज भी
बकाया है, आज
भी केन्द्रीय
सरकार हमको
नहीं दे रही
है, इस साल
एडवांस देने
का तो सवाल ही
नहीं और
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
इतना ही नहीं,
यह कहते हुए
अफसोस हो रहा
है कि हमारी
सरकार की
भरपूर कोशिश
के बाद भी
केन्द्रीय
सरकार ने 11वें
वित्त आयोग
द्वारा शुरू
की गई फिस्कल
रिफार्म्स
फैसिलिटी के
तहत हमारे
प्रदेश को जो
प्रोत्साहन
राशि के रूप
में 438 करोड़ 25
लाख रुपये की
राशि मिलनी
चाहिए था वह
भी अभी तक
जारी नहीं की।
होना तो यह
चाहिए कि क्या
आप लोग वास्तव
में इस प्रदेश
का हित चाहते
हैं, केन्द्रीय
सरकार में यदि
आप लोगों की
वास्तव में
कुछ चलती है,
आपकी पार्टी
में आपके नेताओं
की भी कोई पूछ
है तो उन पर
दबाव बनाइए कि
सरसों की खरीद
के लिए हमको
पैसा दें,
बाढ़ राहत कामों
के लिए 3250 करोड़
रुपये हमने
मांगा है, सौ
करोड़ रुपया
दिया है, हमको
वह 3250 करोड़ रुपया
दे और यह जो
फिस्कल
रिफार्म्स
फैसिलिटी के
तहत जो हमें 438
करोड़ रुपये
जो मिलने वाला
है वह हमको
दे।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
आप कृपया यह
भी बता दें कि
हमने भी अकाल
राहत के पेटे
जब जब
मेमोरेंडम
दिया जितने
अमाउंट का
भारत सरकार को
क्या हमें
उतना पैसा कभी
दिया उन्होंने
?
श्री
कालीचरण
सर्राफ
(जौहरी
बाजार): आपने
जितना
मेमोरेंडम
दिया, यह भी
कभी नहीं हुआ
कि आपने मांगा
हो 3250 करोड़
रुपये तो सौ
करोड़ दिये हों।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
उसका 20 परसेंट
भी नहीं दिया
कभी, आप
निकलवा लें।
श्री
कालीचरण
सर्राफ
(जौहरी
बाजार): कैसे
नहीं दिया ? बिना
किसी
राजनीतिक
भेदभाव के
इतना भीषण
अकाल राजस्थान
में पड़ा था,
यदि बिना किसी
राजनीतिक
भेदभाव के
केन्द्रीय
सरकार आपको
गेहूं का
आवंटन नहीं
करती और राशि
नहीं देती तो
आप अकाल का
मुकाबला ही
नहीं कर सकते
थे। सब को पता
है इस बात का।
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, अब
रोजगार के
मामले में मैं
बात करना
चाहूंगा, याद
दिलाना
चाहूंगा, 1998 में
जब विधान सभा
के चुनाव हो
रहे थे तो
कांग्रेस के
मित्रों हर
जगह चुनाव के
भाषण में एक ही
बात कही कि
शेखावत सरकार
ने
बेरोजगारों
के साथ बड़ा
अन्याय किया
है, बेरोजगार
नौजवानों के
साथ विश्वासघात
किया है,
सरकारी
कर्मचारियों
की सेवानिवृत्ति
आयु 58 साल से 60
साल कर दी, यदि
हमारा राज आ
गया तो हम
उनको 60 साल से 58
साल करेंगे और
उससे जो पद
रिक्त होंगे
उन पर
नौकरियां दी
जाएंगी। उन्होंने
यह वादा किया
था प्रदेश की
जनता से परन्तु
मैं आपको
बताना चाहता
हूं कि 1998 में
इनका राज भी
आया प्रचण्ड
बहुत के साथ
आया, सरकारी
कर्मचारियों
की सेवानिवृत्ति
की आयु तो 60 साल
से 58 साल कर दी
परन्तु उससे
जो 28 हजार पद
रिक्त हुए उन
पदों को ही
इन्होंने
समाप्त कर
दिया, एक भी
बेरोजगार
नौजवान को इन्होंने
रोजगार नहीं
दिया। मैं
आपको यह बताना
चाहता हूं।
श्री घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री):
कालीचरण जी,
इनका तो नारा
यह था कि पानी
बचाओ, बिजली
बचाओ, सब को पढ़ाओ
और नौकरी किसी
की मत लगाओ।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
आप ऐसा कह रहे
हैं तिवाड़ी जी,
यह चीज तो मैं
नहीं कह रहा
हूं।
श्री अध्यक्ष:
चौथी बात तो
आप कह रहे हो
उन्होंने तो
3 बातें कही
थी।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
आप उस वक्त
के फीगर्स
निकलवा लें।
श्री अध्यक्ष:
बिजली बचाओ,
पानी बचाओ, सब
को पढ़ाओ।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
इतनी कठिन
वित्तीय
स्थिति के
बावजूद भी
हमने नौकरी दी
लोगों को।
एक माननीय
सदस्य: नहीं,
नहीं कांट्रेक्ट
बेसिस पर।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
मैं आपको कह
रहा हूं।
श्री घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): 7 हजार 5
सौ की निकली
थी, वह भी
कोर्ट स्टे
करा दी।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
जवाब दिया है,
अध्यक्ष
महोदय, आप
निकलवा कर देख
लें, आपके पास
राज है, सारे
फीगर्स हैं उस
वक्त के।
श्री
कालीचरण
सर्राफ
(जौहरी बाजार):
आपने नौकरी
नहीं दी।
श्री घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): सारे
फीगर्स आपको
दिये, शिक्षा
में केवल
7हजार 5 सौ की
वेकेंसी निकाली
और कोर्ट से
स्टे करा कर
आप चले गये।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
कोर्ट से हमने
स्टे करवाया
? क्या कह रहे
हैं ?
श्री अध्यक्ष:
कहा कि सब को
पढ़ाओ, बिजली
बचाओ, पानी
बचाओ। नारा तो
ठीक ही था।
श्री
कालीचरण
सर्राफ
(जौहरी
बाजार): और
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
इतना ही नहीं,
राजस्थान
में तीन साल
पहले जब
भारतीय जनता
पार्टी की
सरकार
वसुंधरा जी के
नेतृत्व में
बनी और पहले
बजट भाषण में
वित्त
मंत्री के रूप
में मुख्य
मंत्री जी ने
जब यह घोषणा
की कि
हर वर्ष एक
लाख लोगों को
रोजगार देंगे
तो हमारे राजाखेड़ा
से आने वाले
माननीय सदस्य
खड़े बोले कि
हम 5 साल में एक
व्यक्ति को
रोजगार नहीं
दे पाये और आप
हर साल एक लाख
लोगों को
रोजगार देंगे ?
यह गलत* है, इन्होंने
उसका मजाक
उड़ाया। मैं
आपको बताना
चाहता हूं।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
मनगढ़ंत
बातें हैं कि
हम पांच साल
में एक को भी
नहीं दे पाये।
श्री
कालीचरण
सर्राफ
(जौहरी
बाजार):
प्रोसिडिंग्स
में है।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
प्रोसिडिंग्स
अगर निकाल
दीजिए, मैं
सदन में माफी
मांग लूंगा।
श्री
कालीचरण
सर्राफ
(जौहरी
बाजार): आपने
यह कहा था।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
निकलवाओ न।
श्री
कालीचरण
सर्राफ
(जौहरी
बाजार):
निकलवा लेंगे,
अभी तो आप
मेरे को बोलने
दीजिए, आपका
समय आये तब
बोलना।
श्री घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): माफी
मांगने की तो
आपकी आदत है
तीन चार बार
तो इस बार ही
मांग ली। ...(व्यवधान)...
श्री
शांतिलाल
चपलोत (मावली):
बार बार माफी
मांग ली, माफी
मांग ली,
क्षमा वीरस्य
भूषणम।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
एक लाख की
घोषणा की तो
कालीचरण जी
बता दो, कितनों
को दी आपने।
श्री
कालीचरण
सर्राफ
(जौहरी
बाजार): हां,
मैं अभी बताता
हूं।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
बताइए लाख को
दी है क्या ?
श्री
कालीचरण
सर्राफ
(जौहरी
बाजार): एक लाख
लोगों को
प्रति वर्ष हम
नौकरी देंगे,
यह मुख्य
मंत्री जी ने
घोषणा की और
मैं आपको यह
बताना चाहता
हूं कि तीन
साल में हमने 3
लाख से ज्यादा
लोगों को
नौकरी दे दी।
अब आप कहेंगे
कि कहां कहां
दे दी, अब
सुनिए, एक लाख
से अधिक शिक्षकों
की नियुक्ति
आर.पी.एस.सी. के
माध्यम से,
एक लाख 38 हजार 241
बेरोजगारों
को विभिन्न
औद्योगिक
इकाईयों में
नियुक्ति, 46
हजार महिलाएं
आंगनवाड़ी
केन्द्रों
पर सहयोगिनी
के रूप में
नौकरी, 6 हजार
पुलिस में
कांस्टेबल
की भर्ती, 719
चिकित्सकों
की नियुक्ति
और 2528 पैरा
मेडिकल
कर्मचारियों
की नियुक्ति,
अब बताइए, हुई कि
नहीं यह 3 लाख
यह जोड़ लो, 3
लाख से ऊपर
बैठती हैं। 3
लाख से अधिक
लोगों को,
बेरोजगार
नौजवानों को
हमने नौकरी दी
और मैं बधाई
देना चाहूंगा
माननीय मुख्य
मंत्री जी को
कि उन्होंने
इस बजट में भी
यह घोषणा की
है कि 12500 शिक्षकों
की नियुक्ति
दी जाएगी, 7502
एएनएम और
जेएनएम की
नियुक्ति की
जाएगी, 5200 पुलिस
के कांस्टेबल
भर्ती किए
जाएंगे।
श्री अध्यक्ष:
7502
श्री
कालीचरण
सर्राफ
(जौहरी
बाजार): 7502
श्री अध्यक्ष:
5 नहीं 7
श्री
कालीचरण
सर्राफ
(जौहरी
बाजार): 7502 ही बोल
रहा हूं मैं।
श्री अध्यक्ष:
अच्छा।
श्री कालीचरण
सर्राफ
(जौहरी
बाजार): 8 हजार
भूतपूर्व
सैनिकों को
पुलिस में
नौकरी दी
जाएगी, 1 हजार
फर्स्ट
ग्रेड
भूतपूर्व
सैनिकों में
से नियुक्ति की
जाएगी और 1
हजार मदरसा
शिक्षक
सहयोगियों और जल
प्रहरियों के
पद पर भी
नियुक्ति की
जाएगी और यह
तो हो गये 28
हजार के लगभग
और इसके अलावा
सम्पूर्ण
ग्रामीण स्वरोजगार
कार्यक्रम
अभी प्रधान
मंत्री रोजगार
योजना के माध्यम
से इस वर्ष एक
लाख युवाओं को
और नौकरी दी
जाएगी, यह
हमारे मुख्य
मंत्री जी ने
घोषणा की है
पर इतना ही
नहीं, आदरणीय
प्रतिपक्ष के
नेता जी को
मैं विशेष रूप
से कहना चाहूंगा
कि उन्होंने
एक
क्रांतिकारी
घोषणा की है,
ऐसे ग्रेजुएट
जिनके माता
पिता की 1 लाख
से आय कम है
उनको जुलाई, 2007
से 4 सौ रुपये
प्रति माह
बेरोजगारी
भत्ता दिया
जाएगा और
महिलाओं को 5
सौ रुपये
प्रति माह
बेरोजगारी
भत्ता दिया
जाएगा और जो
विकलांग हैं
उनको 6 सौ
रुपये प्रति
माह भत्ता
दिया जाएगा।
आप लोग पांच
साल में एक भी
नौकरी नहीं दे
पाये क्योंकि
आपकी नीयत में
खोट था, आप
पूरे पांच साल
तक खजाना खाली
है, प्रदेश
कंगाल हो गया,
इसका रोना
रोते रहे, एक
भी व्यक्ति
को आपने
रोजगार नहीं
दिया परन्तु हमारे
राज में मुख्य
मंत्री जी की
दृढ़ इच्छा
शक्ति और जैसा
कहा जाता है
कि भारतीय
जनता पार्टी
जो कहती है वह
करती है, जो
करती है वह कहती
है। हमने एक
लाख लोगों को
हर साल नौकरी
देने का वादा
किया और 3 साल
में 3 लाख से ज्यादा
लोगों को
रोजगार दिया।
इस साल हम सवा
लाख लोगों को
नौकरी भी
देंगे और जो
बेरोजगार
नवयुवक हैं
उनको 4 सै
रुपये प्रति
माह, महिलाओं
को 5 सौ रुपये
प्रति माह और
विकलांगों को
6 सौ रुपये प्रति
माह देंगे।
सुरेन्द्र/अरुण/12032007/1600/2p/1
माननीय अध्यक्ष महोदय, महिलाओं का जहां तक सवाल है, यदि मैं यह कहूं कि माननीय मुख्य मंत्री जी ने इस साल का बजट महिलाओं को समर्पित किया है तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। पिछले तीन साल के शासनकाल में हमारी सरकार ने महिलाओं को केवल सशक्त बनाने की बात नहीं कही बल्कि प्रदेश में महिलाएं किस प्रकार से स्वावलम्बी बने और प्रदेश के विकास में महिलाओं की भागीदार किस प्रकार से ज्यादा से ज्यादा हो, इस बात की भी पूरी कोशिश की है।
पिछले तीन साल में सवा लाख स्वयं सहायता समूह का गठन किया गया और इन समूहों में 18 लाख महिलाएं जुड़ीं, समूह में एक लाख से अधिक महिलाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया गया। कुल 72 हजार समूहों को 130 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण दिया गया।
एग्रीकल्चर लैण्ड के क्रय दस्तावेज का पंजीयन शुल्क पांच प्रतिशत करने से 3,68,000 महिलाओं को सम्पत्ति का अधिकार प्राप्त हुआ। पिछले तीन साल में 46 हजार महिलाओं की आंगनबाड़ी केन्द्रों में सहयोगिनियों के रूप में नियुक्ति की गई। राजस्थान के इतिहास में पहली बार बी.एड. महाविद्यालयों में 3500 सीटें विधवा और परित्यक्ता महिलाओं के लिए आरक्षित की गईं। कक्षा 9 व 10 की छात्राओं को मुफ्त में कम्प्यूटर शिक्षा दी गई। द्वितीय विश्व युद्ध की सैनिक विधवाओं की पेंशन 600 रुपये से 800 रुपये प्रतिमाह की गई। 5000 आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण किया गया। कक्षा 9 से 12वीं कक्षा में अध्ययनरत बालिकाओं को घर से स्कूल तक यात्रा करने हेतु नि:शुल्क बस सेवा सुविधा उपलब्ध करवाई गई। एक लाख शिक्षकों की जो नियुक्तियां हुईं उनमें पहली बार विधवा और परित्यक्ता महिलाओं को आरक्षण देकर के हजारों महिलाओं की नियुक्ति की गई। इस साल तो जो मुख्य मंत्री जी ने बजट पेश किया है, महिलाओं के लिए रोजगार और रियायतों का पिटारा ही खोल दिया। अब आप देखिये, इस वर्ष आर ए सी की महिला सशस्त्र सिपाहियों की एक एक्सक्लुजिव बटालियन हाडीरानी आर्म्ड कोर बनाई जाएगी। पुलिस फोर्स में कांस्टेबल और सब-इंस्पैक्टर स्तर पर नई नियुक्तियों में महिलाओं के लिए आरक्षित 30 प्रतिशत पदों पर पुरुषों की नियुक्ति की जाएगी। गांव में आबादी क्षेत्र में 2003 तक के कब्जों का नि:शुल्क नियमन किया जाना और पट्टे केवल महिलाओं के नाम से ही जारी किये जायेंगे। इस वर्ष 1500 नये आंगनबाड़ी केन्द्र खोले जाएंगे।
ई-मित्र कार्यक्रम में 6608 कॉमन सर्विस सेंटर बनेंगे। सभी का आवंटन केवल महिलाओं को ही होगा। डेयरी संगठन और बूथ एवं पार्लर्स का आवंटन केवल महिलाओं को ही किया जाएगा। डेयरी पार्लर स्थापित करने पर डीप-फ्रिजर के लिए पांच हजार प्रति पार्लर की सामान्य सहायता को 10 हजार किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में घर से दो मिलोमीटर से ज्यादा दूर सैकण्डरी स्कूल में पढ़ने के लिए जाने वाली नवीं कक्षा में उत्तीर्ण बालिकाओं को 300 रुपये में साइकिल उपलब्ध करवाई जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों घर से पांच किलोमीटर से अधिक दूरी पर सैकण्डरी स्कूल जाने वाली बालिकाओं को पांच रुपये प्रति दिवस की दर से ट्रांसपोर्ट वाउचर दिया जाएगा। महिलाओं के लिए नदियों और तालाबों पर स्नान करने के लिए निर्मल घाट योजना शुरू की जाएगी। तीन साल से हर जिले में एक हजार महिलाओं को रोजगार दिया जाएगा। रोडवेज बसों में ग्रुप में यात्रा करने वाली महिलाओं को 25 प्रतिशत किराये में छूट होगी और आर टी डी सी की होटलों में अकेले या ग्रुप में ठहरने पर महिलाओं को 25 प्रतिशत किराये में छूट होगी। पुत्ररहित दम्पत्तियों के एक या दो बेटी के बाद नसबंदी करवाने पर प्रत्येक बालिका को 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। उसकी एफ.डी. कराई जाएगी और जब 18 साल की होगी तो उसको 10 हजार के 40 हजार दिये जायेंगे।
इतना ही नहीं, माननीय अध्यक्ष महोदय, पांच लाख ए पी एल परिवारों की छात्राओं को दसवीं से बारहवीं की पढ़ाई के दौरान हर वर्ष दो हजार रुपये की एफ. डी. और इस राशि को ग्रेजुएट होने के बाद वह निकाल पायेगी। विधवा और विकलांगों की जो पेंशन 250 रुपये प्रति माह थी उसको बढ़ाकर के 400 रुपये कर दिया। पेंशन नियमों की हकदार विधवा अगर शादी करती है तो उसे शादी के अवसर पर 15 हजार रुपये उपहार राशि के रूप में दिया जाएगा। निश्चित रूप से मैं यह कह सकता हूं कि अच्छा होता नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्य इस बात को एप्रिशिएट करते परन्तु उन्होंने इसको एप्रिशियेट नहीं किया। मैं आज विश्वास के साथ कह सकता हूं कि इन घोषणाओं से प्रदेश की महिलाएं न केवल सशक्त होंगी बल्कि प्रदेश की महिलाओं में आत्मविश्वास जाग्रत होगा, आत्मविश्वास पैदा होगा, वह स्वावलम्बी बनेंगी और प्रदेश के विकास में भागीदारी निश्चित रूप से वो अपनी करेगी।
माननीय अध्यक्ष महोदय, इतना ही नहीं, जिस क्षेत्र में भी हम हाथ डालें, मैं सब क्षेत्रों की तो यहां चर्चा नहीं करूंगा परन्तु मुख्य रूप से मैं बताना चाहूंगा कि शिक्षा के क्षेत्र में हर पंचायत समिति में 8वीं कक्षा तक के बच्चों को मिड-डे मील, 1500 मिडिल स्कूल सैकण्डरी में क्रमोन्नत, 600 सैकण्डरी स्कूल सीनियर सैकण्डरी में क्रमोन्नत, सभी जिलों में वेद विद्यालय, निजी संस्थाओं को हर ऐसी तहसील जहां महाविद्यालय नहीं हैं, नि:शुल्क जमीन और भवन, हर जिले में इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए निजी संस्थाओं को नि:शुल्क जमीन और भवन, सार्वजनिक क्षेत्र में भीम जिला राजसमंद और उनियारा जिला टोंक में महाविद्यालय, झुन्झुनूं में पी.जी. विज्ञान संकाय में क्रमोन्नयन, भरतपुर में इंजीनियरिंग कॉलेज, लालसोट जिला दौसा में कृषि महाविद्यालय....
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): माननीय कालीचरण साहब, यह तो सारा का सारा रिकार्ड पर आ गया माननीय मुख्य मंत्री बोलीं जो। कोई नई बात बताओ आप।
श्री कालीचरण सर्राफ (जौहरी बाजार): नई बात इसलिए है, मैं यह इसलिए बता रहा हूं कि नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्य इनकी प्रशंसा में दो शब्द भी कह देते तो हमें संतोष हो जाता। परन्तु वो तो अपने एक घंटा 10 मिनट के भाषण में 55 मिनट ‘’मैं’’ की व्याख्या करने में ही लगे रहे। केवल मैं की व्याख्या करने में उन्होंने सदन का समय बर्बाद किया। इसलिए मैं यह बता रहा हूं कि आप लोगों को पता नहीं हो तो सुन लो और जब आप अभी भाषण दो तो कम से कम राजनीति से ऊपर उठकर के जो काम वास्तव में बढि़या हुए हैं उनके बारे में थोड़े प्रशंसा के शब्द कह दो तो प्रदेश की जनता सुने।
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): यह जो आपने अभी बोला है कि महिलाओं को आर टी डी सी की होटल में अकेले आने पर उनको 25 प्रतिशत सुविधा मिलेगी।
श्री अध्यक्ष: अकेले में भी और समूह में भी, दोनों में।
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): अकेले या समूह।
श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): माननीय सदस्य अकेले नहीं ग्रुप में आने पर। ग्रुप में आने पर। पढ़ लो।
श्री कालीचरण सर्राफ (जौहरी बाजार): दोनों में, पढ़ लो।
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): हां, ग्रुप में या अकेले, आप सुनो तो सही। ग्रुप में या अकेले। अब हम जिस संस्कृति के पुजारी हैं और जिस ढंग से हमारी पत्नियां रहती हैं, मैं बूंदी गया तो जाते ही मेरी श्रीमती जी ने कहा कि कितनी अच्छी घोषणा की है, घूमने चलो। जब मैंने उसको समझाया कि मैं आपके साथ चलूंगा तो यह सुविधा नहीं मिलेगी। (व्यवधान) पति पत्नी के साथ आयेगा....
श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): आप तो भाभीजी को लेकर के जाओ, आपके साथ भी वो ही रियायत की जाएगी। (व्यवधान)
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): नहीं मिलेगी यही मैं कहना चाहता हूं। (व्यवधान)
श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): लेकर के तो जाओ, उनको घर पर तो मत बिठाओ। (व्यवधान)
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): अगर पति पत्नी के साथ आये तो पत्नी को यह अधिकार नहीं होगा कि वो छूट प्राप्त कर ले। तो मेहरबानी करके... (व्यवधान)
श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): चंगुल से निकालने के लिए ही तो यह व्यवस्था की है।
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): अब कोई पति आये तो उसको भी यह छूट मिल जाए। (व्यवधान)
एक माननीय सदस्य : उनके नाम से कमरा बुक कराना और उनके साथ में आप रहो। (व्यवधान)
श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): पतियों के जूते से महिला बाहर निकले इसलिए तो यह व्यवस्था की है और क्या बीमारी है, पतियों वाली ही तो बीमारी है। (व्यवधान)
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): इस राज में अकेली महिला नहीं घूम सकती है। अकेली महिला घूमेगी तो चैन छीन लेंगे, कान की बलियां तोड़ लेंगे इसलिए उसके साथ कम से कम पति के आने में तो छूट दो।
श्री जोगाराम पटेल (लूणी): आदरणीय हरिमोहन जी, आप ईमानदारी से बता दो, भाभीजी ने कहा या नहीं कहा कि मैं अब खुद जाऊंगी, सक्षम हूं, हमारी मुख्य मंत्री जी ने राजस्थान में यह घोषणा कर दी है। मैं जाऊंगी अकेली, आपकी जरूरत ही नहीं है, यह भाभीजी ने कहा या नहीं कहा? (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: ..... विधवा और परित्यक्ता महिलाओं के लिए.... (व्यवधान) उनके लिए है।
श्री कालीचरण सर्राफ (जौहरी बाजार): माननीय मुख्य मंत्री जी ने घोषणा इसलिए की है कि आप कभी भाभीजी को लेकर के जाते नहीं हो।
श्री जोगाराम पटेल (लूणी): हां, इसीलिए घोषणा की है। (व्यवधान)
श्री कालीचरण सर्राफ (जौहरी बाजार): अब वो अकेली जाने में सक्षम हैं आपकी जरूरत नहीं है। कंसेशन मिलेगा। (व्यवधान) अब आप कहोगे कि नहीं जाना है तो भी वो जायेंगी इसलिए यह घोषणा की है।
श्री जोगाराम पटेल (लूणी): हां वो मानेंगी नहीं।
श्री अध्यक्ष: यह सदन व्यक्तिगत पैरवी के लिए नहीं है, ये व्यक्तिगत पैरवी की बात कर रहे हैं। व्यक्तिगत लाभ की पैरवी कर रहे हैं इस बात के लिए नहीं है सदन।
श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): माननीय अध्यक्ष महोदय, यह महिलाओं की पैरवी है। (व्यवधान)
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): माननीय अध्यक्ष जी, मैंने व्यक्तिगत नहीं की है, मैंने कानूनी... (व्यवधान) अगर उनके पति के साथ अधिकार... (व्यवधान) मैं तो यह कह रहा हूं।
श्री अध्यक्ष: .... आपने इंस्टांस दिया पत्नी का कि मेरी पत्नी ने यह कहा। (व्यवधान)
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): आप तो उस समय वनस्थली में पढ़ लीं और हमारी जो पत्नियां हैं वो पांचवीं, चौथी पास हैं, वो घर से निकलने की हिम्मत ही नहीं करतीं। (व्यवधान)
श्री शांतिलाल चपलोत (मावली): माननीय अध्यक्ष जी, पहले तो इन्होंने कहा हमारी पत्नियां, ये बहुवचन में बोले हैं तो ये ग्रुप में उनको ले जा सकते हैं और एक बात और कहना चाहता हूं....
vkj/akt/12032007/1610/2q
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, 50 महिला
और 50 पुरूष
जायें तो 50
महिलाएं एक
साथ ठहरेंगी
तो वह ग्रुप
हो जायेगा,
बाद भी उसके
साथ जा सकते
हैं, अलग से
जाकर धर्मशाला
में ठहर जाना,
वे 50 महिलाएं
एक साथ ठहर
सकेंगी। उसके
ग्रुप को
फायदा होगा।
आपको क्या
तकलीफ हो रही
है?
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
महिला के रूप
में? यह कि
मैं मेरी पत्नी
के साथ जाकर
के यह छूट
प्राप्त
नहीं कर सकता,
यह तकलीफ है
मुझको।
श्री
कालीचरण
सर्राफ
(जौहरी
बाजार): आप ले
ही नहीं जाते
हो, बात तो यही
है आज।
श्री
अध्यक्ष: आप
पति-पत्नी की
बात छोडि़ये,
आगे बढि़ये।
(व्यवधान) आप
पति-पत्नी की
बात छोड़कर
आगे बढो।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): अब आप
तो पति-पत्नी
की बात मत करो,
आप तो
पोते-पोतियों
की बात करो।
शर्म करो
थोड़ी बहुत।
आप पोते-पोतियों
की बात करो।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आप तो भाभीजी
को साथ लेकर
जाते हो और
हमको यह
शिक्षा देते
हो। आप तो
हमेशा साथ
लेकर जाते हो।
(व्यवधान)
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): यह तो
जवान आदमी का
और बूढ़े आदमी
का फर्क है।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
पोते-पोतियों
को लेकर जाने
की आप शुरूआत
करो ना।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): आप
अपनी उम्र के लोगों
के साथ जाओ।
श्री
कालीचरण
सर्राफ
(जौहरी
बाजार): अब तो
पोते-पोतियों
के साथ ही
जाना पड़ेगा
हरिमोहन जी।
यह क्या हुआ,
बुढ़ापा आ गया
क्या?
श्री
अध्यक्ष:
बोलिये
बोलिये। (व्यवधान)
कन्क्लूड
करिये। प्लीज
कन्टीन्यू।
श्री
रामप्रताप
कासनिया
(पीलीबंगा):
बाबाजी खुद सांडा
मारै और लोगां
न प्रमोद
सिखावै।
श्री
कालीचरण
सर्राफ
(जौहरी
बाजार):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, खेलकूद
के क्षेत्र
में आप देखिये,
5000 से अधिक
आबादी वाले
गांवों में
खेल मैदान
हेतु 25,000 रुपये
उपलब्ध
कराये
जायेंगे।
श्री
अध्यक्ष: यह
सब तो पढ़
लिया लोगों
ने। आप तो नई
बात बोलो। यह
तो पढ़ लिया।
श्री
कालीचरण
सर्राफ
(जौहरी
बाजार): मैं ''म'' की
व्याख्या
नहीं कर रहा
हूं। मैं ''म'' की
व्याख्या
नहीं कर रहा
हूं।
श्री
अध्यक्ष: आप
तो उनका जवाब
दो उनकी बातों
का।
श्री
कालीचरण
सर्राफ
(जौहरी
बाजार): मैं
उनका क्या
जवाब दूं? उन्होंने
केवल ''म'' की व्याख्या
की 55 मिनट में,
मैं क्या
जवाब दूं, कोई
उन्होंने
सारगर्भित
बात ही नहीं
कही।
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, माननीय
मुख्य
मंत्रीजी ने 16
योजनाओं की
घोषणा की है
इस बजट में,
धनलक्ष्मी
योजना, विश्वकर्मा
अंशदायी
पेंशन योजना,
मिसिंग लिंक
कार्यक्रम,
पातंजलि
आरोग्य
योजना, चरक
आपके द्वार,
केशवबाड़ी
योजना, कामधेनु
योजना, बैकुंठ
द्वार मुक्ति
धाम योजना,
यानी इस बजट
में, यह पहला
बजट है जिसमें
हर वर्ग का ध्यान
रखा गया है और
हर वर्ग को
राहत देने की
कोशिश की गई
है। जब यहां
पर बजट प्रस्तुत
किया गया,
उसके बाद मैं
घर गया तो ''ई''
टीवी देख रहा
था।
प्रतापगढ़ को
जिला बनाया
गया है, यह घोषणा
यहां पर की गई
थी। तो ''ई'' टीवी
का संवाददाता
पूछ रहा था
प्रतापगढ़
के संवाददाता
से कि वहां
कैसा माहौल है?
तो वहां
आदिवासी झूम
रहे थे इस
घोषणा से,
ढोल-मजीरों के
साथ वहां पर
वे नृत्य कर
रहे थे।
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर):
रात को तो वे
वैसे ही झूमते
रहते हैं।
श्री
कालीचरण
सर्राफ
(जौहरी
बाजार): हां,
मैंने देखा है
''ई'' टीवी पर, यही
बताना चाहता
हूं। अब आप तो
कैसे देखते,
आप लोगों ने
तो अपने फोनों
को स्विच-आफ
कर रखा था।
कोई पत्रकार
का फोन आये तो
कहीं
प्रतिक्रिया
पूछ ले कि बजट
कैसा था तो हम
क्या
बोलेंगे? इसलिए
आप लोगों ने
तो अपने फोन
स्विच-आफ कर
रखे थे। ''ई''
टीवी पर यह
दृश्य था कि
ये आदिवासी
माननीय सदस्य
हैं, वे भी इस
बात की ताईद
करेंगे।
श्री
अमराराम (धोद):
प्रतापगढ़
में तो नाच
रहे थे लेकिन
डीडवाना,
नीमकाथाना,
बालोतरा, ब्यावर
में क्या
हुआ? वे तो ले
लो।
श्री कालीचरण सर्राफ (जौहरी बाजार): वे भी थोड़े दिन बाद में नाचेंगे, आप चिंता मत करो। सबसे पिछड़ा हुआ समाज, हमारा आदिवासी समाज है और उनके जिले को, प्रतापगढ़ को जिला बनाने की घोषणा की है। इससे निश्चित रूप से आदिवासियों में हर्ष की लहर है और इतना ही नहीं माननीय अध्यक्ष महोदय, 1997 में बी.पी.एल. की सेंशस के अनुसार राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में 20 लाख 97 हजार बी.पी.एल. परिवार थे। अब केन्द्रीय सरकार ने तो घोषणा कर दी कि हम केवल 17 लाख 36 हजार लोगों को ही बी.पी.एल. की सुविधाएं देंगे। मैं धन्यवाद देना चाहूंगा माननीय वसुन्धराजी को कि उन्होंने यह घोषणा की है कि जो 20 लाख 97 हजार परिवार म