vkj/akt/ 1100/1a
अशोधित
प्रति/
प्रकाशनार्थ
नहीं
राजस्थान
विधान सभा की
कार्यवाही का
वृत्तान्त
|
अंक 5
बारहवीं
विधान सभा के
पांचवें
सत्र का
बारहवां
दिवस
संख्या 9 |
शनिवार,
11
मार्च, 2006
राजस्थान
विधान सभा की
बैठक 1100 बजे
विधान
सभा भवन,जयपुर
में प्रारम्भ
हुई।
(श्रीमती
सुमित्रा
सिंह, अध्यक्ष,
पदासीन)
श्री
अध्यक्ष:
कृपया शांत
रहें।
स्थगन
प्रस्तावों
पर अध्यक्षीय
व्यवस्था
मुझे
माननीय सदस्यों
को सूचित करना
है कि निम्नांकित
स्थगन प्रस्तावों
की सूचना
प्राप्त हुई
है:-
(1) श्री
खुशवीर सिंह
एवं नौ अन्य
सदस्यों की
ओर से पाली के
वस्त्र
उद्योग से फैल
रहे जल
प्रदूषण के
सम्बन्ध
में।
स्थगन
प्रस्ताव के
रूप में
अनुमति देने
में असमर्थ
हूं, फिर भी
माननीय सदस्य
श्री खुशवीर
सिंह को दो
मिनट में अपनी
बात रखने की
अनुमति होगी।
(2) श्री
हेमाराम
चौधरी, सदस्य
की ओर से जिला
बाड़मेर में
अकाल राहत
प्रबन्ध
नहीं करने व
पशु शिविर
नहीं खोलने के
सम्बन्ध
में।
राज्य
में अकाल राहत
प्रबन्धन के
सम्बन्ध
में मंत्री
द्वारा कल जो
वक्तव्य
दिया गया था,
उसमें अकाल पर
विस्तृत
चर्चा हुई है
और प्रतिपक्ष
के सुझाव पर
एक समिति का
गठन भी कर
दिया गया है,
अत: पुन: चर्चा
का कोई अर्थ
नहीं रह गया।
(3) श्री
मांगीलाल
गरासिया एवं 11
अन्य सदस्यों
की ओर से
उदयपुर की
पंचायत समिति
कोटड़ा के
विद्यालयों
का मिड-डे-मील
पोषाहार बेचे
जाने के सम्बन्ध
में।
यह
मोबाइल किसका
बज रहा है?
श्री
अमराराम(धोद):
गुर्जर साहब
का बज रहा है
मोबाइल। (व्यवधान)
माननीय
मंत्रीजी का
यह हाल है तो
माननीय सदस्यों
का क्या
होगा?
श्री
अध्यक्ष:
माननीय
मंत्रीजी, जब
आसन की ओर से
आपको कई बार
दोहराया जा
चुका है, या तो
आप लेकर नहीं
आयें या फिर
आप इसे बन्द
करके लायें
(व्यवधान) जब
यह बात कही जा
चुकी है कई
बार, उसके बाद
भी आप इसे
खुला रखते
हैं, उचित
नहीं है। (व्यवधान)
और मैं जब्त
कर लूंगी आइन्दा।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: जब्त
करो साहब, अभी
करो साहब। अभी
जब्त करो
साहब।
श्री
अध्यक्ष:
पी.ए.डी.
मिनिस्टर कह
रहे हैं कि
अभी जब्त
करो, यहां
लाकर रख
दो।(व्यवधान)
रख दो यहां
लाकर, हां, ये
रख देंगे। (व्यवधान)
आसन अभी तो
पांवों पर है,
आसन जब बैठ
जाएगा तब आप
यहां लाकर रख
दीजिये।
श्री
जीतमल
खांट(बागीडोरा):
सबकी जेब चैक
की जाये।
श्री
अध्यक्ष: जेब
की तलाशी की
आवश्यकता
नहीं है, बन्द
करके रखें,
उसकी अनुमति
है लेकिन यदि
किसी की घंटी
बोलेगी तो
उसका जब्त
किया जायेगा।
(व्यवधान)
उपरोक्त
प्रस्ताव का
विषय ऐसा नहीं
है कि सदन की
पूर्व निर्धारित
कार्यवाही को
रोककर इस पर
विचार किया जाये,
अत: अनुमति
देने में तो
असमर्थ हूं और
वैसे भी
माननीय सदस्य
को बजट पर
सामान्य
वाद-विवाद के
अवसर पर अपनी
बात रखने का
अवसर मिलेगा।
इससे
पहले कि मैं
प्रक्रिया के
नियम 295 के अन्तर्गत
प्राप्त
सूचनाओं को
पढ़कर सुनाऊं,
पर्ची हमेशा
ऐसे विषय पर
दी जाती है
जिसका रीसेंट
आकरेंस हो मतलब
फौरन ही, कुछ
ही समय पहले
जो घटना घटी
हो और इतनी
महत्वपूर्ण
घटना हो कि
उसके ऊपर अपनी
बात सदन में रखनी
आवश्यक हो
लेकिन मैं यह
देख रही हूं
कि पर्ची चाहे
जिसकी आप लोग
उठाकर देते
हैं, मैं
समझती हूं कि
उस पर इस तरह
से चर्चा करके
सदन का समय है,
वह एक तरह से
बरबाद तो मैं
नहीं कहूंगी,
हां, व्यर्थ
में गंवा रहे
हैं जबकि बहुत
महत्वपूर्ण
बातों पर
चर्चा की जा
सकती है।
नियम 295 के
अन्तर्गत
प्राप्त विशेष
उल्लेख की सूचनाएं
(1)श्री
संयम लोढ़ा,
सदस्य की ओर
से जिला
सिरोही के
बरलूट थाना
पुलिस द्वारा
जावाल के एक
व्यापारी को अफीम
के मामले में
झूठा फंसाने
के सम्बन्ध
में।
यहां
किसी व्यक्तिगत,
किसी की भी
पैरवी करने के
लिए इस सदन में माननीय
सदस्य का कुछ
भी कहना, मैं
उचित नहीं
समझती हूं। (व्यवधान)
(2) श्री
भरत सिंह,
सदस्य की ओर
से कोटा सम्भाग
में जैविक खाद
की मांग नहीं
होने के
उपरान्त भी
ग्राम सहकारी
समितियों को
वितरित करने के
सम्बन्ध
में।
(3) श्री
शिवजीराम
मीणा, सदस्य
की ओर से
देवली से माण्डल
सड़क का
निर्माण
शीघ्र करवाने
के सम्बन्ध
में।
(4) श्री
वीरेन्द्र
बेनीवाल, सदस्य
की ओर से
सिंचित
क्षेत्र के
काश्तकारों
को आवंटित
भूमि की किस्म
परिवर्तन के
नाम पर अन्तर
राशि लिये
जाने के सम्बन्ध
में।
(5) श्री
नवरतन
राजोरिया,
सदस्य की ओर
से विधान सभा
क्षेत्र
फुलेरा के
कालख बाँध की
पाल पर
भीखावास की
सिवाय चक भूमि
का नियम
विरुद्ध किये
गये आवंटन के
सम्बन्ध में।
(6) श्री
बद्रीलाल जाट,
सदस्य की ओर
से दी मेवाड़
शुगर मिल्स
लिमिटेड
भूपालगढ़ को
बन्द कर दिये
जाने से उत्पन्न
स्थिति के सम्बन्ध
में।
(7) श्री
हरिसिंह रावत,
सदस्य की ओर
से भीम में
राजकीय
महाविद्यालय
एवं राजकीय
तकनीकी
शिक्षण केन्द्र
खोलने के सम्बन्ध
में।
(8) श्री
मोहन मेघवाल,
सदस्य की ओर
से जोधपुर के
प्रताप नगर
क्षेत्र के बालिका
विद्यालय में
विज्ञान एवं
वाणिज्य
संकाय खोलने
के सम्बन्ध में।
(9) श्री
पुष्पेन्द्र
सिंह, सदस्य
की ओर से
अनुसूचित
जाति/जनजाति
के गरीब पशुपालकों,
भेड़पालकों
के बीमित
पशुओं का बीमा
कम्पनियों
द्वारा दावा
राशि का
भुगतान नहीं
करने के सम्बन्ध
में।
(10) श्री
बाबूसिंह
राठौड़, सदस्य
की ओर से
विधान सभा
क्षेत्र
शेरगढ़ में
कृषि उपज मण्डी
यार्ड की स्वीकृति
एवं भूमि
आवंटन के सम्बन्ध
में।
(11) श्री
नन्दलाल
पूनिया, सदस्य
की ओर से तहसील
राजगढ़ के
ग्राम डिंगली
के बालिका
विद्यालय में
बालकों को भी
प्रवेश देने
के सम्बन्ध में।
(12) श्री
बीरूसिंह
राठौड़, सदस्य
की ओर से
जयपुर विकास
प्राधिकरण से
मान्यता
प्राप्त एक
आवासीय
कालोनी का
सैकड़ों वर्ष
पुराना आम
रास्ता 61 सब
एरिया के
सैनिक अधिकारियों
द्वारा जबरन
बन्द कर देने
के सम्बन्ध
में।
माननीय
सदस्यों को
उनके द्वारा
दी गई सूचना
को पढ़ने की अनुमति
होगी।
श्री
जुबेर
खान(रामगढ़):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, हम 30-35
माननीय सदस्यों
ने एक स्थगन
प्रस्ताव
लगाया था एक
हफ़्ता पहले
और आपने चार
दिन पहले यह
व्यवस्था
दी थी कि
सरकार को भेजा
गया है और
जवाब आने के
बाद व्यवस्था
दी जायेगी।
मेरा आपके
माध्यम से
सरकार से
निवेदन है कि..
श्री
अध्यक्ष:
कौनसा प्रस्ताव?
कौनसा प्रस्ताव?
श्री
जुबेर खान:
राजस्थान
सरकार के एक
केबिनेट स्तर
के मंत्री
द्वारा 26 जनवरी,
2006 गणतंत्र
दिवस के पावन
पर्व पर जिस
तरह का भाषण
उन्होंने
कोटा के उम्मेदसिंह
स्टेडियम
में दिया, वह
चिंता का विषय
है तो उस पर आप
सरकार से
कहिये कि वह
अपना जवाब
तुरन्त भेजे
और आप उसको
लिस्ट
करिये।
श्री
अध्यक्ष: आप
स्थान ग्रहण
करें। यह अभी
अभी प्राप्त
हुआ है और इसे
मैं देख रही
हूं और देखने
के बाद उस पर
कोई व्यवस्था
दूंगी। श्री
खुशवीर सिंह।
श्री
संयम लोढ़ा:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, एक ऐसा
महत्वपूर्ण
मामला मुझे
साढ़े नौ बजे
के बाद प्राप्त
हुआ है जिसमें
पुलिस
निदेशालय
दूरसंचार ने फिजिकल
के लिए
लड़के-लड़कियों
को बुला लिया
जो लिखित
परीक्षा में
पास हुए थे और
वे अपनी 12वीं
के एग्जाम को
छोड़कर
फिजिकल देने
के लिए आये और
उसके बावजूद
उनका फिजिकल
लिया नहीं और
उनको बाहर निकाल
दिया....
श्री
अध्यक्ष:
काहे के इन्टरव्यू
पर बुलाया?
श्री
संयम लोढ़ा:
यह भर्ती जो
निकाली थी
पुलिस
महानिदेशक ने,
मैं उस सम्बन्ध
में आपकी
आज्ञा से
निवेदन करना
चाहता हूं।
श्री
अध्यक्ष:
पुलिस भर्ती?
अच्छा।
श्री
संयम लोढ़ा: माननीय
अध्यक्ष
महोदय, पुलिस
महानिदेशक
कार्यालय
राजस्थान
जयपुर ने 14 जून,
2005 को इस सम्बन्ध
में विज्ञप्ति
जारी की थी
भर्ती के लिए
और इस पर बहुत
स्पष्ट
लिखा था कि जो
इस विज्ञापन
के बिन्दु (12)
में जो योग्यता
लिखी हुई है,
पुलिस
दूरसंचार के
लिए हायर सैकण्डरी
विज्ञान मय
भौतिकी शास्त्र
एवं गणित...
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: अध्यक्ष
महोदय, पर्ची
भी नहीं है
इनकी, इनका स्थगन
भी नहीं है।
आप काहे पर
अनुमति दे रहे
हैं? इनकी कोई
पर्ची नहीं
है, कोई स्थगन
नहीं है।
श्री
संयम लोढ़ा:
जिन
बेरोजगारों
को आपने...
श्री
अध्यक्ष: ऐसा
है कि ये
मुझसे चैम्बर
में मिले थे।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: अच्छा,
आपने अनुमति
दे दी है, फिर
ठीक है।
श्री
अध्यक्ष:
मैंने अनुमति
इसलिए दी है
कि जो लड़कियां
अपनी एग्जामिनेशन
छोड़कर इन्टरव्यू
के लिए आईं और
उन्हें इस आधार
पर मना किया
गया कि हमें
साइंस वाली
नहीं चाहिए,
साइंस
बायोलोजी
वालों का हम
इन्टरव्यू
नहीं लेंगे,
जबकि पहले उन्हें
साक्षात्कार
के लिए बुला
लिया गया। यह
इतना महत्वपूर्ण
मामला था
इसलिए मैंने
उन्हें इसकी
अनुमति दी है।
श्री
अमराराम(धोद):
आप क्या उसके
खिलाफ हो?
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: नहीं,
आपने अनुमति
दी है तो ठीक
है।
लिखित
परीक्षा पास
अभ्यर्थियों
के शारीरिक
परीक्षण से
पुलिस
(दूरसंचार)
निदेशालय का
इन्कार
श्री
संयम लोढ़ा:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपसे निवेदन
करना चाहता
हूं कि जो
कार्यालय
महानिदेशक
पुलिस राजस्थान
ने 14 जून, 2005 को इस
सम्बन्ध
में विज्ञापन
भर्ती के लिए
जारी किया गया
था, इसमे बहुत
स्पष्ट
12वें बिन्दु
में योग्यता
पुलिस
दूरसंचार के
द्वारा मांगी
गई थी, उसमें
हायर सैकण्डरी
विज्ञान मय
भौतिकी शास्त्र
एवं गणित अथवा
समकक्ष और
उसके बाद
माननीय अध्यक्ष
महोदय, पुलिस
निदेशालय ने 16
अक्टूबर, 2005 को
इस सम्बन्ध
में परीक्षा
आयोजित की ओर
जो लोग इस
परीक्षा में
पास हो गये,
उनको 14 फरवरी, 2006
को पत्र भेजा
कि आप शारीरिक
दक्षता
परीक्षा के
लिए 9 मार्च, 2006
को जयपुर
आयें.....
bhs/usc/11.3.06/1110/1b
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, इम्तहान
चल रहे हैं
बोर्ड के इसके
बावजूद नौकरी
की आस में
बड़ी संख्या
में बच्चे और
बच्चियां उस
शारीरिक
दक्षता
परीक्षा के
लिए जयपुर आये
और 9 मार्च को
जो शारीरिक
दक्षता की
परीक्षा जयपुर
में सरकार ने
रखी हुई थी
उसमें उनको
अपियर होने
देने
के लिए मना
कर दिया और वा
बच्चियां उधर
एग्जाम से भी
चूकीं।
यहां उनकी
नौकरी की आस
में जहां पर
आयी थी वो भी
नहीं हुआ और
यह मेरे पास
पुलिस
महानिदेशक का
विज्ञापन
मौजूद है
जिसमें
समकक्ष को
अलाऊ किया गया
था।
मैं आपके
माध्यम से
सरकार का ध्यान
आकृष्ट करना
चाहता हूं कि
इस संबंध में
जिन बच्चों
को शारीरिक
दक्षता
परीक्षा से
वंचित किया
गया है और
विज्ञापन
देने के बाद
इस आधार पर
वंचित किया
गया कि वो ...।
श्री
अध्यक्ष: और
परीक्षा से भी
वंचित कर दिया
गया है।
श्री
संयम लोढ़ा:
इसलिए
मैं आपके
माध्यम से माननीय
मंत्री जी से
निवेदन करना
चाहता हूं कि
ऐसी जिन
बच्चियों को
वंचित किया
गया है उनके
लिए सीट
आरक्षित रखने
की घोषणा करें
जिससे उनकी
वापस शारीरिक
दक्षता
परीक्षा ली जा
सके और उन
बच्चियों की
जो योग्यता
है उसके आधार
पर उनका फैसला
किया जा सके। मेरे
पास में
माननीय अध्यक्ष
महोदय, यह
सुमन सांखला
पुत्री श्री
नाथूलाल
सांखला जिसको
यह शारीरिक
दक्षता
परीक्षा के
लिए बुलाया
गया था और उसके
बावजूद उसको
एपियर नहीं
होने दिया गया
इसमें तमाम
विवरण उसका
मौजूद है और
इसतरह वह
अकेली बच्ची
नहीं है
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
इसमें कम से
कम डेढ़ दो
दर्जन बच्चे
बच्चियां ऐसी
हैं जिनको जो
पात्रता रखी
गयी थी जिनको
शारीरिक
दक्षता
परीक्षा के
लिए बुलाया
गया लेकिन
उसके बाद उनको
बाहर निकाल
दिया गया और इतना
ही नहीं जब वो
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
डी.जी. साहब से
मिलने के लिए
वो तमाम बच्चे
बच्चियां जा
रही थी तो
उनके दुःख पर
उनके जले हुए
पर नमक
छिड़कने के
लिए
गुमानसिंह
थानेदार ने
उनकी जीप का
चालान कर दिया
इसलिए माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से निवेदन
करना चाहता
हूं कि माननीय
गृह मंत्री जी
विराजमान हैं,
हमारे
नौजवानों के
भविष्य का
मामला है कि
वो एक तरफ तो
इम्तहान से
भी चूके और
दूसरी तरफ
यहां नौकरी का
भी फेर पड़
गया इस संबंध
में सरकार की
ओर से स्थिति
स्पष्ट
करें।
श्री
गुलाबचंद
कटारिया (गृह
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, यह
विषय एकदम
मेरे सामने
आया है तो
पूरी डिटेल
मेरे पास नहीं
है पर जो आपने
तथ्य सामने
रखे हैं उनको
ध्यान में
रखते हुए मैं
तमाम अपने
अधिकारियों के
साथ बैठ कर के,
यह कहां क्या
भूल हुई है क्या
गलती हुई है
जो कुछ भी हुआ
है उसमें जहां
कहीं भी अगर
गलती हुई है
तो उसको
सुधारने में
हमको कोई किसी
प्रकार का कोई
मन में संदेह
होने का कारण
नहीं है। आपने
विषय रखा है
मैं विषय को
देखूंगा क्योंकि
तुरन्त
उठाया तो मेरे
पास उसके बारे
में डिटेल
जानकारी इस समय
नहीं है । मैं
निश्चित रूप
से उसकी जानकारी
भी करूंगा और
अगर आप आसन से
कहेंगे तो सदन
में मैं
जानकारी के
बारे में...।
श्री
अध्यक्ष: 4 बजे आप
इस बारे में
वक्तव्य
दें क्योंकि
वो ऐसा न हो कि
वो बच्चियां
परीक्षा से भी
वंचित रह जाएं
परीक्षा भी न
दे पाये।
शिक्षा
मंत्री जी,
कहीं ऐसा न हो
कि परीक्षा भी
न दे पाये और
ये भी कोई
परीक्षा न लें
दोनों तरफ से
ही चली गईं।
श्री
गुलाबचंद
कटारिया: मैं
सोचता हूं कि
इस विषय की
जानकारी करके
इस सदन को
आपने 4 बजे के
लिए का है मैं 4
बजे दे दूंगा।
श्री
अध्यक्ष: ठीक
है।
स्थगन
प्रस्ताव
आदि पर चर्चा
असमय
वर्षा से फसल
को हुआ नुकसान
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता
प्रतिपक्ष):
अध्यक्ष
महोदय, मेरे
पास अभी सुबह
जिला कांगेस
कमेटी झालावाड़
से टेलीफोन
आया कि
हाड़ोती
क्षेत्र में
की इतनी भयंकर
वर्षा हुई
पूरे हाड़ोती
क्षेत्र में
फसल का भयंकर
नुकसान हुआ है
। सारी
फसल लेट गयी है
और राज्य
सरकार की तरफ
से अभी तक कोई
हलचल नहीं है
। मैं
आपकी मार्फत
अनुरोध
करूंगा सरकार
से कि वहां वास्तविक
स्थिति क्या
हुई कृषि
मंत्री जी इस
संबंध में
जानकारी जब आप
ठीक समझें आज
या कल दिलवा
दें।
श्री
अध्यक्ष:
कृषि मंत्री
से चाहेंगे या
अकाल राहत
मंत्री से
चाहेंगे।
श्री
रामनारायण
चौधरी: उधर
मेरे ख्याल
से बीमा भी
होता है तो
कृषि मंत्री
से दिलवा दें
चाहें राहत
मंत्री जी से
दिलावा दें आपकी
इच्छा हो
वैसे ही दिलवा
दें।
श्री
अध्यक्ष:
राहत मंत्री
देंगे इस बारे
में।
श्री
अमराराम (धोद): अध्यक्ष
महोदय, कोटा
में ही नहीं
सीकर में भी
भयंकर
ओलावृष्टि
हुई है जिससे
शत प्रतिशत
बहुत
भयंकर...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष:
आपके नेता बोल
लिये बाकी क्या
रह गया यह
बताइये।
श्री
महादेव सिंह
(खंडेला): नेता
महोदय ने
हाड़ौती की
बात कही है
मैं तो
श्रीमाधोपुर
तहसील के
रींगस कस्बे
और
श्रीमाधोपुर
के पास अति
ओलावृष्टि से
जो नुकसान हुआ
है उसके बारे
में....।
श्री
अध्यक्ष:
हाड़ौती वाले
तो पहुंच सकते
हैं नेता के
पास और खंडेला
वाले नहीं
पहुंच सकते
अपनी बात कहने
के लिए ।
श्री
महादेव सिंह : खंडेला
वाले तो खुद
ही बैठे हैं
तो आपको डाइरेक्ट
कह देंगे नेता
महोदय को क्यों
कहेंगे। जब मैं
आलरेडी यहां
बैठा हूं तो
मैं डाइरेक्ट
आसन से
कहूंगा, सरकार
से कहूंगा।
...(व्यवधान)...
श्री
सुभाषचन्द्र
शर्मा
(कोटपूतली):
अध्यक्ष
महोदय, मेरे
कोटपूतली
विधान सभा
क्षेत्र में
भी कल
ओलावृष्टि
हुई है भयंकर तरीके
से कोटपूतली,
नीम का थाना
में भी भयंकर ओलावृष्टि
हुई है और
काफी फसल तबाह
हो गयी है। मैं
आपके माध्यम
से निवेदन
करना चाहता
हूं सरकार से
कि इसकी
तुरन्त
जानकारी करें
और जानकारी
करके किसानों
को क्या
रिलीफ दिलवा
रहे हैं,
कोटपूतली और
नीम का थाना
क्षेत्र में
भयंकर
ओलावृष्टि
हुई है।
श्री
नरेन्द्र
कुमार नागर
(खानपुर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, पूरे
हाड़ौती
क्षेत्र में
लगभग डेढ़ इंच
बरसात हुई है
और फसल तबाह
हो गयी है।
श्री
प्रहलाद
गुंजल
(रामगंजमंडी):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
हाड़ौती
संभाग में
पिछले दो
दिनों से
बारिश हो रही
है सैकड़ों
गांवों में
ओले गिरे और
मेरे विधान
सभा क्षेत्र
में बी गांवों
की शत प्रतिशत
फसल नष्ट हो
गयी है और
बारां जिले के
छबड़ा,
छीपाबड़ौद
में पिछले दो
दिन से बारिश
हो रही है और
कोटा जिले के
अधिकांशत:
गांवों में
ओलों के साथ
साथ अंधड़ और
बारिश ने इतनी
भारी तबाही
मचायी है, मैं
आपके माध्यम
से सरकार से
उम्मीद
करूंगा कि इस
विषय पर सरकार
को बयान देना चाहिए
और माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से राजस्थान
सरकार से यह
भी मांग करता
हूं कि पिछले
दिनों जब कोटा
हाड़ौती में
ओले गिरने से
फसल बरबाद हुई
और चार सौ
रुपये बीघा का
मुआवजा लेकर
जब अधिकारी
गये तो
हाड़ौती के
किसानों ने
मुआवजा लेने
से मना कर
दिया कि लाखों
रुपये की फसल
के बरबादी के
बाद ऊँट के
मुँह में जीरा
जैसी कहावत
प्रचलित करके
उस किसान का
भला नहीं कर
सकते।
मैं राजस्थान
सरकार से यह
मांग करता हूं
कि जो सारे
राजस्थान
में जिस
प्रकार से
प्राकृतिक
प्रकोप के कारण
आपदा आयी है
इसमें विशेष
पैकेज का
प्रावधान
करके वो किसान
जिसके खेत पर
फसल पकने की
कगार पर खड़ी
थी और वो मेड़
पर बैठ कर ...।
श्री
अध्यक्ष: आप
दो अन्य सदस्य
क्यों खड़े
हैं आप किस
बात के लिए
खड़े हैं मेरी
समझ में नहीं
आ रहा है।
श्री
प्रहलाद
गुंजल:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, कल
तक मेड़ पर
खड़ा होकर चार
दिन बाद वो उस
फसल को काट कर
अपनी बेटी के
ब्याह की,
अपने बेटे के
ब्याह की
योजना बना रहा
था आज वो मेड़
पर बैठ करके
रो रहा है आज
हमको उस विषय में
सोचना
पड़ेगा।
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
आप स्थान
ग्रहण करें। अभी क्या
स्टेटमेंट
देंगे आकाश पर
बादल हैं अभी
तो और हो सकती
है।
श्री
प्रहलाद
गुंजल: माननीय
अध्यक्ष
महोदय, आज
उसके बारे में
सोचना पड़ेगा
मैं उम्मीद
करता हूं कि
सरकार इस बारे
में वक्तव्य
दे और वक्तव्य
केवल इतना सा
नहीं दे कि हम
उसका सर्वे
करायेंगे,
उसकी
गिरदावरी
करायेंगे ....।
श्री
अध्यक्ष: अभी
खतरा टला नहीं
है खतरा मौजूद
है।
श्री
प्रहलाद
गुंजल: वाजिब
मुआवजा देंगे,
प्रावधान के
बगैर हर किसान
के उस घाव को
भर नहीं सकते
। आज वो
किसान
बैठा-बैठा रो
रहा है।
श्री
अध्यक्ष:
अंकित नहीं
हो।
श्री
बद्रीलाल जाट
(कपासन): ***
श्री
दाताराम
गुर्जर
(खेतड़ी): ***
श्री
नरेन्द्रकुमार
नागर: ***
श्री
अध्यक्ष:
मुझे समझ में
नहीं आ रहा है
कि बात हो गयी
एक बार कह दी
अब आप क्या
कहना चाहते
हैं बाड़मेर
से आने वाले
माननीय सदस्य?
अब आप अपने स्थान
पर बैठे रहें।
...(व्यवधान)...
श्री
कन्हैयालाल
पाटीदार
(पिड़ावा): ***
श्री
तगाराम चौधरी:
***
श्री
अध्यक्ष:
श्री
खुशवीरसिंह
जोजावर।
बाड़मेर से आने
वाले माननीय
सदस्य, मैं
आपसे कह रही
हूं स्थान
ग्रहण कर
लें।
श्री
खुशवीरसिंह जोजावर।
नाथद्वारा
से आने वाले
माननीय सदस्य,
कृपया शांत
रहें। आप जोर
से क्यों बोल
रहे हैं बोलें
तो धीरे
बोलिये न।
डॉ.
सी.पी.जोशी: क्या
करें जोर से
बोलें तो
सुनते हो आप।
श्री
खुशवीरसिंह
जोजावर
(खारची):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, धन्यवाद
आपने समय
दिया।
मैं आपसे
निवेदन करना
चाहूंगा कि एक
तरफ सरकार
अपने बजट में
कई बातें
पर्यावरण के
बारे में कह
रही हैं लेकिन
हकीकत यह है
कि आज पाली
जिले में जो
जिला मुख्यालय
है पाली और
वहां पर लगभग
एक हजार छपाई
की
फैक्ट्रियां
लगी हुई हैं
और उनमें जहां
से हमारे
मंत्री महोदय
भी पाली से ही
हैं।
मैं अनुरोध
करना चाहूंगा
आपके माध्यम
से सरकार को
कि उन
फैक्ट्रियों
का जो प्रदूषित
जल जो निकल
रहा है माननीय
अध्यक्ष
महोदय, वो
पूरा का पूरा
एसिड उस नदी
में प्रवाहित
हो रहा है और
लगभग 45 से 50
किलोमीटर तक
जो सूखी नदी
है हमारे यहां
डेजर्ट है
पिछले दस
वर्षों से
बारिश नहीं हो
रही है और
पहाड़ सूखा
पडा है सभी
नाले सूखे
पड़े हैं
लेकिन वो नदी
जिसमें एसिड आ
रहा है वो
पेरेनियल
रीवर हो गयी
है वो
बारहमासी नदी
हो गयी है और
पचास
किलोमीटर तक
बारहमासी नदी
बह रही है न
जाने वो जल
कहां से आ रहा
है । ये
फैक्ट्रियों
वाले कहां से
पानी लेकर आ
रहे हैं। एक तरफ
तो हाहाकार
मचा हुआ है...
kas\akt\1120\11-3-06\1c
पीने
को पानी नहीं
है और हकीकत
है सभी ट्युब
वैल सूख चुके
हैं, हैंड पम्प
सूख चुके हैं,
फ्लोराइउ की
मात्रा इतनी
बढ गई है
लेकिन उन
फैक्ट्रियों
में पानी न
जाने कौनसी
नहर से
कहां से
प्राप्त हो
रहा है और वह
पानी यूं कि
यूं नदी में
दूषित जल पूरा
का पूरा एसिड
नदी में
प्रवाहित हो रहा
है । अध्यक्ष
महोदय, सबसे
दुर्भाग्य
की बात यह है
कि उसके आगे
एक नेहडा बाँध
करोडों रुपये
लगाकर सरकार
बनाया है और
उस नेहडा बाँध
में मैं जाकर
आया हूं । उस
बाँध के ऊपर
जो पानी भरा
हुआ है उस
बाँध के ऊपर
से अगर कोई
पक्षी उडकर
चला जाता है
तो वह उस जहर
की वजह से
अंदर गिर जाता
है । जिस
प्रकार
बरमूडा केनाल
में कोई भी
जहाज ऊपर से
नहीं निकल
सकता है उसी
प्रकार हमारे
पाली जिले का
इतना दूषित
बाँध बना दिया
जिसके ऊपर से
कोई पक्षी
उडकर निकल
जाये तो अंदर
गिर कर मर
जाता है । अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपका ध्यान
इस और आकर्षित
करना चाहूंगा
उसके लिये ट्रीटमेंट
प्लांट बने
हुए हैं ।
करोडों रुपये
लगाकर सरकार
ने ट्रीटमेंट
प्लांट
बनाये लेकिन
ट्रीटमेंट प्लांट
नाम मात्र के
हैं । आज वह
बंद पडे हैं ।
उस ट्रीटमेंट
प्लांट का एक
भी कार्य
सुचारू रूप से
नहीं चल रहा
है । अध्यक्ष
महोदय, यह
मैं नहीं कह
रहा हूं यह
राजस्थान
प्रदूषण
नियन्त्रण
मंडल ने भी
माना है कि
पाली
ट्रीटमेंट प्लांट
राष्ट्रीय
मानकों के
अनुरूप काम
नहीं कर रहा
है । बिना
शुद्धीकरण
प्रभावी
तेजाबी पानी
नदी में बह
रहा है ।
श्री
अध्यक्ष: अब
आप बात समाप्त
करें ।
श्री
खुशवीर सिंह
जोजावर: एक
सैकण्ड में
कर रहा
हूं । 70
किलोमीटर नदी
के दोनो तरफ
दो-दो, तीन-तीन
किलोमीटर नदी
के दांये
बांये आज कुओं
में प्रदूषित
जल हरे और लाल
रंग का पानी
निकल रहा है
और तेजाबी
पानी बाहर आ
रहा है । लोगों
को मजबूर होकर
वह पानी पीना
पड रहा है और
उससे
बीमारियां
फैल रही हैं ।
आज आप अगर उस
जल में हाथ
डालकर बाहर
निकल दें आपके
एक घंटे में
स्कीन डिजीज
हो जायेगी ।
अध्यक्ष
महोदय,
इसलिए मैं
आपके माध्यम
से सरकार का
और माननीय
मंत्री महोदय
का ध्यान
आकर्षित करना
चाहूंगा कि आप
उस दूषित जल को
तुरन्त
रुकवाइये और
जो ट्रीटमेंट
प्लांट लगे
हुए हैं जो
सरकार दावा कर
रही है कि ट्रीटमेंट
प्लांट चल
रहे हैं और वह
ट्रीटमेंट प्लांट
सुचारू रूप से
चल रहे हैं तो
नदी में पानी
प्रवाहित क्यों
किया जा रहा
है । आप उनको
रीयूज क्यों
नहीं करते हैं
।
फैक्ट्रियों
में दोबारा आप
उसी जल को
उपयोग करें तो
जो पानी की
कमी है उसमें
भी फर्क पडेगा
और यह प्रदूषण
भी कम होगा,
धन्यवाद ।
श्री
रणवीरसिंह
गुढा:अध्यक्ष
महोदय, मैं
बिगड़ती
कानून व्यवस्था
के संदर्भ में
आपसे दो मिनट
का समय
चाहूंगा ।
श्री
अध्यक्ष:
श्री भरत सिंह
295 पढंगे ।
श्री
रणवीरसिंह
गुढा: अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से निवेदन
करना चाहूंगा
..
श्री
अध्यक्ष: अभी
नहीं, 295 पढेंगे
।
श्री
रणवीरसिंह
गुढा: अध्यक्ष
महोदय, दो
मिनट का समय
ले रहा हूं ।
श्री
अध्यक्ष: अभी
नहीं प्लीज
आप मेहरबानी
करके स्थान
ग्रहण कर लें
। 295 चल रहा है ।
श्री
रणवीर सिंह
गुढा: अध्यक्ष
महोदय,
सुरजगढ में
बारात के साथ
मारपीट हुई है
।
श्री
अध्यक्ष:
श्री भरत सिंह
जी ।
नियम 295 के
तहत विशेष उल्लेख
जैविक
खाद का
अवांछित
वितरण
श्री
भरत सिंह (दीगोद):
अध्यक्ष
महोदय, मैं
कार्य संचालन
संबंधी नियम 295
के तहत आपका ध्यान कोटा
संभाग में
सहकारी विभाग
के माध्यम से
निजी जैविक
खाद विक्रेताओं
को लाभ प्रदान
करने हेतु
मांग नहीं होने
के उपरान्त
भी 5204765 राशि का
जैविक खाद
ग्राम सेवा
सहकारी समितियों
को वितरण करने
हेतु बाध्य
करनेकी और
आकर्षित करना
चाहूंगा ।
अध्यक्ष
महोदय, कोटा
संभाग में
सहकारी विभाग
की उच्च स्तर
पर की गई
धांधली व कमीशन
प्राप्त
करने की नीयत
से सहकारी
समितियों के
माध्यम से
किसानों को बी
कम्पोनेन्ट
के तहत अन्य
रासायनिक खाद
के साथ जैविक
खाद लेने के
लिये बाध्य
किया गया है ।
कृषि के बाजार
में अनेक निजी
कम्पनियां
विभिन्न नाम
व ब्राण्ड से
बाजार में
उतरी है ।
सहकारी विभाग
में उच्चतम
स्तर पर
कमीशन प्राप्त
करने की नीयत
से किसी
प्रभावशाली
व्यक्ति ने
राजफैड के
महाप्रबन्धक
(कृषि आदान) के
माध्यम से
जून 2006 में पत्र
लिख
क्षेत्रीय कार्यालय
राजफैड कोटा व
क्रय विक्रय
समितियों का
उपयोग करके
कोटा संभाग
में 5204785 रुपये
का जैविक खाद
का वितरण वर्ष
2005-06 में किया है
। जहां इस खाद
का भुगतान
राजफैड
द्वारा निजी
कम्पनियों
को कर दिया
गया है वहीं
बिना किसानों
की मांग के
मंगाया गया यह
खाद आज भी
कोटा संभाग की
कई ग्राम सेवा
सहकारी
समितियों व
क्रय विक्रय
समितियों के
गोदामों में
पडा हुआ है ।
जिन ग्राम
सेवा सहकारी
समितियों ने
खाद किसानों
को बेचा गया
है वहां भी
किसानों की इच्छा
के विपरीत बी
कम्पोनेंट
के साथ इस खाद
को लेने पर
बाध्य किया
है । इस
प्रकार
सहकारी विभाग
में उच्च
पदासीन लोगों
ने अपने लाभ
हेतु प्रदेश
के किसानों को
व सहकारी समितियों
की आर्थिक
स्थिति को भी
प्रभावित किया
है । कोटा
संभाग में
क्रय विक्रय
समिति सांगोद,
अन्ता,इटावा,
सुल्तानपुर,
बांरा,
रामगंजगण्डी,
छबडा,
केशोरायपाटन
व कोटा के
माध्यम से 5204765
रुपये का खाद
वितरण किया
गया है । इस प्रकरण
की शिकायत
संभागीय
आयुक्त कोटा
को काडा की
बैठक में भी
की गई थी व
संभागीय आयुक्त
ने उपरोक्त
विषय पर
सहकारिता
विभाग जयपुर
को जांच हेतु लिखा
गया है
। जांच क्योंकि
सहकारी विभाग
से ही संबंधित
है व उसी के
उच्च अधिकारियों
को जांच करने
हेतु लिखा गया
है तो जांच के
क्या परिणाम
निकलेंगे यह
विचारणीय है ।
प्रश्न
जैविक खाद के
उपयोगिता या
गुणवत्ता का
नहीं है प्रश्न
यह है कि क्या
सहकारी विभाग
किसी निजी व्यवसाय
को बढोत्तरी
प्रदान करने
हेतु इस
प्रकार से
किसानों को
बाध्य कर
सकती है ।
श्री
अध्यक्ष:
आपने शायद
इसको वापस पढा
नहीं क्योंकि
आपके फीगर्स
में फर्क है ।
आपने देने के
बाद इसको पढा
नहीं है । ठीक
है विराजिए ।
पढिये आप इसे जरा
एक जगह 85 है और
एक जगह 65 है ।
श्री
शिवजीराम मीणा
।
देवली
से माण्डल
सड़क निर्माण
श्री
शिवजीराम
मीणा(जहाजपुर):
श्री अध्यक्ष:
मैं विधान सभा
के प्रक्रिया
तथा कार्य
संचालन
संबंधी नियम 295
के तहत विशेष
उल्लेख करना
चाहूंगा ।
अध्यक्ष
महोदय, मैं
राजस्थान
विधान सभा के
प्रक्रिया
तथा कार्य
संचालन
संबंधी नियम 295
के अंतर्गत
विशेष उल्लेख
द्वारा ऐसा
विषय सदन में
उठाना चाहता
हूं जो अत्यन्त
लोक महत्व का
है । भीलवाडा
जिले की मुख्य
सड़क
देवली(टोंक)
से माण्डल तक
वाया जहाजपुर,
शाहपुरा,
बनेडा होते
हुए राष्ट्रीय
राजमार्ग
संख्या-79 को
मिलाती है ।
इस सड़क के
देवली से
जहाजपुर का
भाग एमडीआर-7,
जहाजपुर से
शाहपुरा का
भाग राज्य
राजमार्ग-39
एवं शाहपुरा
से मांडल तक
का भाग राज्य
राजमार्ग-12 के
नाम से जाना
जाता है । इस
मार्ग पर जयपुर,
टोंक एवं कोटा
से अहमदाबाद,
मुम्बई तथा
सवाई माधोपुर
से बडौदा के
लिए गैस टेंकर
तथा चित्तौडगढ,
जहाजपुर,
मांडलगढ,
बिजौलिया एवं
सावर से
खनिजों का
परिवहन किया
जाता है ।
जिससे बहुतायत
में भारी
वाहनों का
आवागमन रहता
है ।
इस
सड़क पर
वर्तमान समय
में लगभग सात
हजार छोटे बडे
वाहन गुजरते
हैं जिसके
अनुसार
वर्तमान सड़क
को 7 मीटर की
चौडाई बढाकर
उसकी मोटाई भी
बढाई जाना
आवश्यक है ।
यहां
पर मैं यह भी
निवेदन करना
चाहूंगा कि
राज्य सरकार
के ओदश
क्रमांक एफ.2
(68)पीडब्ल्यू/एएस/2000/डी-251
दिनांक 22.9.2005 के
द्वारा इस
सड़क के निर्माण
एवं विकास
हेतु राजस्थान
राज्य सड़क
विकास
एवं निर्माण
निगम लिमिटेड
को स्थानान्तरित
की गई थी ।
परन्तु निगम
द्वारा इस
सड़क की
वायबिलिटी
एवं फिसिबिलिटी
नहीं होने के
आधार पर
निर्माण एवं
विकास कार्य
प्रारम्भ
नहीं किया गया
है । जबकि
सड़क के विकास
के पश्चात ही
वाहनों का
आवागमन बढेगा
और मार्ग की
वायबिलिटी और
फिसिबिलिटी
हो सकेगी ।
अंत:
मेरा सरकार से
आग्रह है कि
राजस्थान
राज्य सड़क
विकास एवं
निर्माण निगम
लिमिटेड जयपुर
के माध्यम से
देवली से मांडल
सड़क का
निर्माण
शीघ्र कराने
की व्यवस्था
करावें ।
श्री
अध्यक्ष:
श्री वीरेन्द्र
बेनीवाल ।
सिंचित
क्षेत्र के
काश्तकारों
से किस्म
परिवर्तन के
नाम से अन्तर-राशि
की वसूली
श्री
वीरेन्द्र
बेनीवाल(लूणकरणसर):
अध्यक्ष
महोदय, मैं
प्रक्रिया के
नियम 295 के तहत
सिंचित
क्षेत्र के
काश्तकारों
को आवंटित
भूमि की किस्म
परिवर्तन के
नाम पर अन्तर
राशि लिए जाने
के संबंध में
विशेष उल्लेख
करना चाहूंगा
।
अध्यक्ष
महोदय,
बीकानेर जिले
में कंवरसेन
लिफ्ट एवं अन्य
नहरी क्षेत्र
के काश्तकारों
को उपनिवेशन
विभाग द्वारा
भूमि का सर्वे
कर कमांड या
अनकमांड भूमि
का आवंटन किया
गया था ।
आवंटन के बाद
से काश्तकारों
द्वारा
आवंटित भूमि
के सिंचित
रकबे को अलावा
उबड-खाबड व
असिंचित भूमि
को अपने अनेक
वर्षों के
कठोर परिश्रम
एवं अपार धन
व्यय करके
समतल कर
अनकमांड से
कमांड योग्य
बनाया गया ।
जब उक्त काश्तकारों
द्वारा अपनी
आवंटित भूमि
के खातेदारी
अधिकार पत्र
लेने हेतु
राजस्व
विभाग के
कार्यालय में
सम्पर्क
किया जाता है
तो ऐसे में
विभाग द्वारा
अनकमांड से
कमांड हुई
भूमि की किस्म
परिवर्तन के
नाम पर प्रति
बीघा अंतर
राशि की मांग
की जाती है ।
इसी
क्रम में मेरा
आपसे निवेदन
है कि जिस
अनकमांड रकबे
को काश्तकार
द्वारा अपनी
मेहनत से तथा
स्वयं का धन
व्यय करके
सिंचाई योग्य
बनाया गया है,
ऐसे रकबे की
किस्म
परिवर्तन
(सिंचित से
असिंचित) के
नाम पर अंतर
राशि की मांग
करना न सिर्फ
अव्यवहारिक
है बल्कि गरीब
काश्तकारों
पर अन्याय है
।
अंत:
इस हेतु मेरा
आपसे निवेदन
है कि काश्तकारों
को आवंटन के
समय जिस मूल्य
पर भूमि
आवंटित की गई
थी उसी आधार
पर उन्हें
खातेदारी
अधिकार
प्रदान किए
जाएं ।
ans\akt\1130\11.3.2006\1d\1
श्री
अध्यक्ष:
श्री नवरतन
राजौरिया ।
फुलेरा के
कालख बाँध की
पाल पर
भीखावास की
सिवाय चक
भूमि का नियम
विरुद्ध
आवंटन
श्री
नवरतन
राजौरिया(फुलेरा):
अध्यक्ष
महोदय, मैं
राजस्थान
विधान सभा के
प्रक्रिया के
नियम 295 के तहत विधान
सभा क्षेत्र
फुलेरा के
कालख बाँध की
पाल पर
भीखावास की
सिवायचक भूमि
का नियम
विरूद्ध किये
गये आवंटन की
और माननीय राजस्व
मंत्री जी का
ध्यान
आकर्षित करना
चाहता हूं।
कालख
बाँध सिंचाई
विभाग के अधीन
है, निर्माण
सन् 1883 में हुआ
था, इस बाँध की
भराव क्षमता 730
एम.सी.एफ.टी. है।
इस बाँध से
लगभग 19510 एकड़
भूमि में
सिंचाई की जाती
है। बाँध की
पाल ग्राम
भीखावास के
खसरा नं. 141 से 146 व 153
के अंतर्गत
आती है।
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य
1883 में निर्माण
हुआ इसका ?
श्री
नवरतन
राजौरिया: जी
साहब। 1883 में,
बहुत पुराना बाँध
है।
श्री
अध्यक्ष: 1883 की
बात कहां से
आई?
श्री
नवरतन
राजौरिया:
अंग्रेजों के
समय में
निर्माण हुआ
और काफी पुराना
बाँध है।
जयपुर जिले का
सबसे बड़ा
बाँध था।
श्री
अध्यक्ष: जंच
नहीं रही बात,
समझ में नहीं
आई बात मेरे
तो।
श्री
नवरतन
राजौरिया:
खसरा नं. 143
सिंचाई विभाग
के नाम दर्ज
है जिस पर विभाग
की चौकी बनी
हुई है, खसरा नं.
142 बाँध की
ऊपरी पाल है।
खसरा
नं. 141,144,145,146,153 जो कि
सिवाय चक भूमि
थी का आवंटन
किसी निजी व्यक्ति
के नाम दर्ज
कर दिया गया
है जबकि उक्त
खसरे बाँध की
पाल के
अंतर्गत आतह
हैं। खसरा नं.
144,145 पर
निजी व्यक्ति
द्वारा
पेड़ों की
कटाई कर पाल
को जोत दिया
गया, जिससे
पाल की ऊँचाई
कम हो गई है।
इसके फलस्वरूप
पूर्ण भराव
क्षमता के
पानी आ जाने
पर बाँध को
खतरा उत्पन्न
होने की
स्थिति पैदा
हो गई है।
अत:
आपके माध्यम
से मेरा
माननीय राजस्व
मंत्री जी से
निवेदन है कि
भीखावास
ग्राम के खसरा
नं. 141,144,145,146,153 जो कि
कालख बाँध की
पाल के हिस्से
हैं इन पर
खेती अथवा
किसी भी अन्य
प्रकार का
कार्य करने से
बाँध की
सुरक्षा को
खतरा पैदा हो
सकता है। अंत:
इन सभी खसरा
नं. का आवंटन
जो अन्य व्यक्ति
को कर दिया
गया है को
राज्य हित
में रद्द करें।
साथ ही इस तथ्य
की भी जांच
कराएं कि बिना
सिंचाई विभाग
की अनुमति के
आवंटन में
राजस्व
विभाग के
कौन-कौन
अधिकारी लिप्त
हैं। उनके
खिलाफ भी जांच
कराकर सख्त
कार्यवाही
कराने की कृपा
करें, धन्यवाद।
श्री
अध्यक्ष:
श्री
बद्रीलाल
जाट।
मेवाड़ शुगर
मिल्स लि.
भूपालगढ़ को
बन्द किये
जाने से उत्पन्न
स्थिति
श्री
बद्रीलाल
जाट(कपासन):
माननीय अध्यक्ष
महोदय नियम 295
के तहत सदन का
ध्यानाकर्षण
करने के संबध
में निवेदन है
कि विधान सभा
क्षेत्र
कपासन में
प्रमुख समस्या
दी. मेवाड
शुगर मिल्स
लि. भुवालसागर
को बन्द कर
दिये जाने से
उत्पन्न
हुई। क्षेत्र
की कीर्ति को
बढ़ाने वाली
ये धरती गन्ने
की खेती
व अपने सत्व
बल से समृद्ध
थी। लेकिन पूर्व
के कुछ वर्षों
में
अलपवृष्टि के
कारण गन्ने में कमी
आने लगी थी
ऐसी स्थिति
में मिल मालिक
अरूण कुमार
ढाढनिया ने
उसी समय से ही
गन्ने की
पिराई करना तो
बन्द करा ही
दिया था, साथ
ही गन्ने की
बुवाई को भी
प्रोत्साहन
देना बंद कर
दिया, जिससे
क्षेत्र के
किसानों के
हितों के साथ
भारी अन्याय
हुआ है।
साथ ही
मजदुरों एवम
मिल के कर्मचारियों
के साथ भी
भारी
कुठाराघात
हुआ है। उन्हें
माह जून 2001 से
बाद का वेतन
आज तक नहीं
दिया गया है।
जिससे गरीब
मजदूरों एवम
कर्मचारियों
के
परिवारजनों के भूखो
मरने की नौबत आ
गई है। उक्त
मिल मालिक
कर्मचारियों
को 56 महीनों का
वेतन नहीं
देना चाहता है
तथा वेतन नहीं
देकर उनको स्वेच्छा
से त्यागपत्र
प्रस्तुत
करने हेतु
बाध्य कर रहा
है। अंत:
मजदूरों एवम
कर्मचारियों
की पुकार के
रूप में सदन
का ध्यान
आकर्षित करना
चाहता हूं कि
कर्मचारियों का
अब तक 56 माह का
वेतन दिलाये
जाने की कृपा
करें। साथ ही
मिल की सम्पत्ति
को सरकार के
कब्जे में
लिये जाने के
आदेश प्रदान
करावें ताकि गन्ने
की बुवाई समय
पर पुन: चालू
करवा कर
सहकारिता
आधार पर किल
को चालू करने
की सम्भावना
को जीवन्त
किया जा सके।
अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से विनम्र शब्दों
में निवेदन
करना
चाहूंगा सरकार को,
आदरणीय
उद्योग मंत्रि
जी हमारे चित्तोड़
से ही है हमें
गर्व है कि
उनके माध्यम
से यह समस्या
अतिशीघ्र
सुलझने का
प्रयास
करेंगी। मेवाड़
शुगर मिल का
जो कारखाना है
उसमें
मोलासिस लगभग....
श्री
अध्यक्ष:
आपने 295 पढ़
दिया, अब आप और
क्या कह रहे
हैं ?
श्री
बद्रीलाल जाट:
नहीं, उसका हल
बता रहा हूं।
श्री
अध्यक्ष: हल
का नहीं होता
है, 295 में केवल
पढ़ना होता
है।
श्री
बद्रीलाल जाट:
अध्यक्ष
महोदय, लगभग
दो से तीन
करोड़ के बीच
में मोलासिस
मूल्य वेल्यू
का वहां पडा
हुआ है। अंत: 56
महीने हो गए
हैं और उनकी
मूलभूत आवश्यकताएं
जल, बिजली,
पानी मिल
मालिक ने बंद
कर रखी है।
श्री
अध्यक्ष: ठीक
है। उद्योग मंत्रि
जी आप ध्यान
दे लेना थोड़ा
। श्री
हरिसिंह रावत।
भीम में
राजकीय
महाविद्यालय
व तकनीकी
शिक्षण केन्द्र
श्री
हरिसिंह
रावत(भीम):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, राजस्थान
विधान सभा के
प्रकिया एवं
कार्य संचालन
नियम 295 के माध्यम
से निवेदन है
कि मेरा विधान
सभा क्षेत्र आज
भौगोलिक,
सामाजिक एवम
आर्थिक
दृष्टि से पिछड़ा
क्षेत्र हैं,
एवम पूर्व में
देश आजाद हुआ तब
से केवल
कांग्रस ने ही
राज्य किया
था, जिसकी वजह
से शैक्षणिक,
आर्थिक एवम सामाजिक
दृष्टि से
विकास
कार्यों की
तरफ कभी ध्यान
नहीं दिया
गया।
महोदय,
मेरा विधान
सभा क्षेत्र
जहां रावत
बाहुल समाज
रहता है जो कि
भौगोलिक,
आर्थिक
दृष्टि से एक
अन्य पिछड़ा
वर्ग में आता
है एवम यह
क्षेत्र जहां
पर कृषि भूमि
केवल नाम
मात्र 1 या 2
बीघा जमीन भी
एक परिवार के हिस्से
नहीं आती है।
मगरा क्षेत्र
होने
से क्षेत्र
की आर्थिक
स्थिति भी
बहुत कमजोर
है। वहां की
जनता अपने
परिवार के भरण
पोषण के लिए
केवल मजदूरी
या सरकारी या
गैर सरकारी नौकरियों पर
निर्भर है
जिसके लिए
वहां की जनता
या तो दिल्ली
या गुजरात में
मजदूरी कर
अपना जीवन
यापन करती है।
महोदय,
आज हमारी
सरकार शिक्षा
के प्रति काफी
जागरूक होते
हुए निजी संस्थाओं
को आमंत्रित
कर रही है,
जिसके तहत कई
निजी संस्थाएं
आगे आई है, एवम
कई जगहों पर निजी
विश्वविद्यालय
खोले जा रहे
हैं।
महोदय,
लेकिन
मेरा
क्षेत्र रावत
बाहुत ओ.बी.सी.
वर्ग में आता
है जो आर्थिक,
सामाजिक एवम
शैक्षणिक
दृष्टि से अत्यन्त
ही पिछड़ा है,
जहां की जनता
निजी क्षेत्र
में कालेज या
तकनीकी
शिक्षण संस्था
के बारे में
सोचना आसमान
से तारे तोडने
वाली
बात
चरितार्थ होगी
अंत: ना नौ मन
तेल होगा न
राधा नाचेगी,
अर्थात यह
योजना मात्र
कल्पना
मात्र रह
जाएगी।
महोदय,
मेरा विधान
सभा क्षेत्र
जिला मुख्यालय
से 110 किलोमीटर
दूर अंतिम छोर
पर स्थित है एवम
70-80 किलोमीटर की
परिधि में कोई
महाविद्यालय, तकनीकी
संस्थान
नहीं है जिसके
कारण मेरा
क्षेत्र शैक्षणिक,
आर्थिक व
सामाजिक
दृष्टि से
पिछड़ा हुआ है
लेकिन आज
हमारी सरकार
से आस बनी है
कि इस बजट में
भीम में राजकीय
महाविद्यालय
एवम तकनीकी
संस्थान
खोलकर वसुन्धरा
विकास
महाकुंभ में
सम्मिलित कर
भीम
विधानसभा
क्षेत्र की
जनता को तोहफा
स्वरूप राज्य
सरकार
द्वारा
राजकीय
महाविद्यालय
एवम राजकीय
तकनीकी
शैक्षणिक
संस्थान
खोलकर
अनुग्रहित
करावें, धन्यवाद।
श्री
अध्यक्ष: श्री
मोहन मेघवाल।
जोधपुर के
प्रताप नगर
क्षेत्र के
बालिका
विद्यालय में
विज्ञान एवं
वाणिज्य
संकाय
श्री
मोहन
मेघवाल(सूरसागर):
अध्यक्ष
महोदय, नियम 295
के द्वारा मैं
आपके मार्फत राजस्थान
की की यशस्वी
मुख्यमंत्री
का धन्यवाद
ज्ञापित करना
चाहता हूं कि
इन्होंने
अपने दो वर्ष
के अल्पकाल
में राजस्थान
प्रदेश में
ऐसे कार्य किए
हैं जो आजादी
के बाद कभी
नहीं हुए।
निश्चित ही
माननीया मुख्यमंत्री
महोदया की यह
सोच सर्वथा
सराहनीय है कि
जिस प्रदेश
में शिक्षा
विशेषत: महिला
शिक्षा एवम
रोजगार नहीं
होगा उस
प्रदेश के
समग्र विकास
की कल्पना ही
नहीं की जा
सकती है। इसी
सोच को केन्द्र
में रखते हुए
इन्होंने
राज्य में
हजारों
बेरोजगारों
को रोजगार
प्रदान किया
है एवम राज्य
के दूरस्थ
गांव व
ढाणियों, शहरी
क्षेत्रों
एवम अनुसूचित
जाति व अनुसूचित
जनजाति के
क्षेत्रों
में निवास
करने वाले
लाखों
परिवारों को
अच्छी
शिक्षा देने
के लिहाज से
कई महत्वपूर्ण
व ऐतिहासिक
निर्णय लिये
है। इनके कुशल
वित्तीय
प्रबंधन, जल
संचयन अभियान,
समग्र
ग्रामीण विकास
के लिए सड़कों
का जाल तथा स्वस्थ
हरित विकसित
राजस्थान का
सपना संजोते
हुए जो शिक्षा
संबल महा-अभियान
चालाया वह
सराहनीय है।
इन्हीं
दूरगामी
निर्णयों का
परिणाम आज
हमारे सामने
आया है कि
पिछली सरकार
जो कार्य अपने
पूरे 5 वर्ष के
कार्यकाल में
नहीं कर सकी
वही कार्य इनके
नेतृत्व में
दो वर्षों में
ही पुरे हो गए
हैं एवम सरकार
अपनी कल्याणकारी
व विकासोन्मुखी
कार्यक्रमों
को आगे बढ़ाती
ही जा रही है।
Ddm/akt/110306/1140/1e
माननीया
मुख्य
मंत्रीजी की
प्रमुख
प्राथमिकताओं
में राज्य
में शिक्षा का
विकास है एवं
सबको शिक्षा
के उद्धेश्य
से की गई पहल
के तहत ही
विगत दो
वर्षों में लगभग
एक करोड़ 15 लाख
के
विद्यार्थियों
को 126 करोड़
रुपये कीमत की
पाठ्य पुस्तकें
वितरित की
गयीं। लगभग
साढे अड़तीस
हजार शिक्षकों
की
नियुक्तियां
पारदर्शिता
को प्राथमिकता
देते हुए की
है। जो वास्तव
में काबिले
तारीफ है।
माननीया मुख्य
मंत्री
महोदया ने
राज्य
कर्मचारियों
के आश्रितों,
बाहरी सहायता
से संचालित
परियोजनाओं,
माध्यमिक
शिक्षा,
प्रारम्भिक
शिक्षा, कॉलेज
शिक्षा, महिला
शिक्षा,
विशेषत:
अनुसूचित
जाति एवं अनुसूचित
जनजाति की
बालिकाओं की
शिक्षा, माध्यमिक
व उच्च माध्यमिक
में अध्ययन
करने वाली ग्रामीण
छात्राओं के लिए
आने जाने हेतु
नि:शुल्क बस
पास की सुविधा,
घुघरी के
अतिरिक्त
अन्य स्वाद
भी
विद्यालयों
में प्रारम्भ
किए, इसके
अतिरिक्त
राज्य के
विद्यालयों
में आधारभूत
सुविधाओं का
विकास, नव
विद्यालयों
का सृजन व
क्रमोनयन आदि
कई एसे कार्य
किए हैं जिनकी
आज राज्य ही
नहीं अपितु
राष्ट्रीय
स्तर पर
सराहना हो रही
है। इस हेतु
अध्यक्ष्ं
महोदया, मैं
आपके मार्फत
माननीय
शिक्षा मंत्रि
महोदय को भी
धन्यवाद
ज्ञापित करना
चाहता हूं
जिन्होंने
माननीया मुख्य
मंत्री
महोदया की
नीतियों का
पालन करवाने में
उनका कन्धे
से कन्धा
किलाकर सहयोग किया।
मैं
माननीया मुख्य
मंत्री
महोदया एवं
शिक्षा
मंत्रीजी से
यह निवेदन करना
चाहता हूं कि
जोधपुर शहर का
जो निरन्तर
विस्तार हो
रहा है उसमें
अधिकतर मेरा
विधान सभा क्षेत्र
ही प्रभावित
हो रहा है।
इसके अतिरिक्त
मेरे विधान
सभा क्षेत्र
के शहरी भाग
में बहुत बड़ी
संख्या में
अनुसूचित
जाति एवं
अनुसूचित
जनजाति के
परिवारों का
निवास है एवं
आपके ही
प्रयासों से
प्रतापनगर
क्षेत्र में
कार्यरत
बालिका
विद्यालय को
अभी हाल ही में
क्रमोन्नत
किया गया है।
जिसमें अध्ययन
करने वाली
बालिकाओं में
लगभग 80-85
प्रतिशत छात्राएं
अनुसूचित
जाति/जनजाति
की हैं। इस विद्यालय
के अतिरिक्त
हाउसिंग
बोर्ड
क्षेत्र में
चल रहे राजकीय
उच्च माध्यमिक
विद्यालय,
सिंवाची गेट
में भी मध्यम
वर्ग के
छात्र-छात्राएं
अध्ययन कर
रही हैं। इन
विद्यालयों
में आज भी
वाणिज्य व
विज्ञान विषय
नहीं होने से
या तो इन गरीब
व मध्यम
वर्गीय
परिवार के छात्र/छात्राओं
को अन्यत्र
दूरस्थ
विद्यालयों
में जाना
पड़ता है अथवा
इन्हीं
विद्यालयों
में मजबूरन
कला वर्ग में
प्रवेश लेना
पड़ रहा है।
यदि इन
विद्यालयों
में वाणिज्य
व विज्ञान
विषयों की
सुविधाएं स्वीकृत
कर दी जाती
हैं तो यहां
गरीब, मध्यमवर्गी
व अनुसूचित जाति
व जनजाति के
छात्र व
छात्राओं को
काफी फायदा
होगा । मैं
उम्मीद करता
हूं कि
माननीया मुख्य
मंत्री
महोदया व
शिक्षा
मंत्री महोदय
इस सम्बन्ध
में उचित
निर्णय आगामी
शिक्षा सत्र
से पूर्व लेकर
यह सुविधा नव
शिक्षा सत्र
में प्रारम्भ
कर देंगे। धन्यवाद।
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
295 के लिए केवल
ढाई सौ शब्द
ही लिखे जाते
हैं। आपने
बहुत बड़ा लिख
दिया था, खैर
आज पढ़ लिया लेकिन
भविष्य में
ध्यान
रखियेगा। यह
केवल ढाई सौ
शब्दों में
ही लिखा जाना
चाहिए। (व्यवधान)
बात जो आपको
यहां बतानी
है, वह तो 250 शब्दों
में भी बतायी
जा सकती है। Brevity is the soul of wit,
यह है। (व्यवधान)
हर आदमी ब्रीफ
नहीं हो सकता
है। मैंने कहा
ना, brevity
is the soul of wit.
श्री
रामनारायण
चौधरी: आपका
आदेश पालनीय
है लेकिन मान्यवर,
आपके दफ्तर
में इसकी
एडिटिंग हो
जानी चाहिए,
काट देना चाहिए
बड़ा हो तो।
श्री
अध्यक्ष:
नहीं, ऐसा
नहीं किया जा
सकता है, बिल्कुल
नहीं काटा
जाता,
प्रतिपक्ष के
माननीय नेता
जैसा आप देते
हैं, यथावत
रखा जाता है
और वैसे ही
पढ़ा जाता है
यह आपको
गलतफहमी नहीं
होनी चाहिए।
श्री
रामनारायण
चौधरी: उनको
रिटर्न कर दो
जिनके 250 से ज्यादा
शब्द हों,
उनको रिटर्न
कर दो। और फिर
बाद में वे पढ़
जाएं तो यहां
आसन से
टोकाटोकी मत
करें।
श्री
अध्यक्ष: फिर
आपके जैसे
माननीय सदस्य
कहने लग
जाएंगे कि
हमारा लिखा
हुआ काट दिया।
वह स्वयं ही
करें अपना
ब्रीफ। श्री
पुष्पेन्द्रसिंह
राणावत।
जो
लम्बा लिखें,
उनको कहा करें
कि थोड़ा
शोर्ट करें, कहा
करें उन्हें।
श्री
हेमाराम
चौधरी: यह 295
समस्या
समाधान के
लिये है या
प्रशंसा करने
के लिये। (व्यवधान)
दोनों के
लिये।
श्री
अध्यक्ष: यह
दोनों के लिये
है, यह सदन में
अपनी अभिव्यक्ति
के लिये है,
जैसा आप चाहें। प्रतिपक्ष
किसी चीज का
समर्थन करता
है तो आप उसका
विरोध करते
हैं, यह तो
मर्जी की बात
है।
श्री
पुष्पेन्द्रसिंह
राणावत, नहीं
हैं ? ठीक है।
(अनुपस्थित)
श्री
बाबूसिंह
राठौड़।
शेरगढ़ में
कृषि उपज मण्डी
यार्ड की
स्वीकृति
श्री
बाबूसिंह
राठौड़(शेरगढ़):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
प्रक्रिया के
नियम 295 के तहत
लेख है कि
मेरे विधान
सभा क्षेत्र
के किसानों
द्वारा
ट्यूबवैल अत्यधिक
मात्रा में
खुदवाये गये
हैं, अंत: खरीफ
फसल के बाद
रबी की फसल का
उत्पादन अच्छी
मात्रा में
किसानों
द्वारा किया
जा रहा है,
वैसे तो सभी
प्रकार की
जिन्सों का
उत्पादन
होता है
जिसमें मुख्यत:
बाजरा, मोठ, ग्वार,
अरण्डी,
गेहूं, सरसों,
रायड़ा, जीरा
मिर्च एवं
मूंगफली का
उत्पादन
होता है।
किसानों
द्वारा उत्पादित
फसलों को
बेचने हेतु स्थानीय
मण्डी नहीं
होने के कारण
उनका उचित
मूल्य
किसानों को स्थानीय
व्यापारियों
से नहीं मिलता
है। इस कारण
किसानों को
अपनी फसल
बेचने हेतु
अन्यंत्र
कृषि मण्डी
अर्थात
जोधपुर,
औसियां, फलौदी
जाना पड़ता है।
इस प्रकार फसल
परिवहन पर व्यय
होने के कारण
किसानों की
फसलों की लागत
बढ़ जाती है
एवं उन्हें
आर्थिक हानि
उठानी पड़ती
है।
उपरोक्त
परिस्थितियों
के कारण
शेरगढ़ विधान
सभा क्षेत्र
में एक मण्डी
सब यार्ड की
आवश्यकता
महसूस की जा
रही है। इसकी
मांग भी
किसानों
द्वारा
बारबार की जा
रही है। इस
विधान सभा
क्षेत्र में
बालेसर एवं
देचु हैं जो
कि शेरगढ़
कृषि उत्पादन
के केन्द्र
हैं। अत:
जोधपुर-जैसलमेर
के मुख्य
मार्ग पर
बालेसर अथवा
देचु के
आस-पास कृषि मण्डी
यार्ड बनाने
की अनुमति
जारी करवाने
का श्रम करें।
धन्यवाद।
श्री
अध्यक्ष:
श्री नन्दलाल
पूनिया।
राजगढ़ के
ग्राम डिंगली
के बालिका
विद्यालय में
बालकों को भी
प्रवेश
श्री
नन्दलाल पूनिया(सादुलपुर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, राजस्थान
विधान सभा के
कार्य संचालन
के नियम 295 के तहत
निवेदन है कि
ग्राम डिंगली
में बालिका
उच्च
प्राथमिक
शाला है जहां
पर आठवीं तक
की लड़कियां
शिक्षा ग्रहण
करती हैं।
आठवीं तक की
शाला में
छात्रों को
प्रवेश नहीं
दिया जाता ।
इस गांव में
एक प्राथमिक
शाला है
जिसमें लड़के
एवं लड़कियां
पढ़ते हैं।
पांचवीं परीक्षा
पास करने के
बाद कक्षा 6 से 8
तक पढ़ने के
लिये लड़कों
को 5-6 किलोमीटर
दूर जाने पर
काफी समस्या
होती है। जबकि
गांव में ही
मिडिल स्कूल
है। (व्यवधान)
अंत:
मेरा आपके माध्यम
से शिक्षा
मंत्रीजी से
निवेदन है कि
या तो ग्राम
डिंगली में
राजगढ़ (चूरू)
में एक मिडिल स्कूल
लड़कों के
लिये खोला
जावे या आठवीं
तक के लड़कों
को कन्या
मिडिल स्कूल
में ही प्रवेश
देने की इजाजत
दी जावे। ग्राम
डिंगली काफी
बड़ा गांव है
जिसमें 400-450 घरों
की आबादी है। अंत:
आबादी को
देखते हुए एक
मिडिल स्कूल
लड़कों के लिए
खोला जाना
चाहिए या कन्या
शाला में
प्रवेश की
इजाजत दी
जावे। धन्यवाद।
श्री
अध्यक्ष:
श्री
बीरूसिंह
राठौड़।
जयपुर की
आवासीय बस्ती
का आम रास्ता
सैन्य
अधिकारियों
द्वारा
अवरुद्ध
प्रो.बीरूसिंह
राठौड़(बनीपार्क):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, राजस्थान
विधान सभा की
प्रक्रिया
एवं संचालन के
नियमों के
नियम 295 के तहत
विशेष उल्लेख
प्रस्ताव
प्रस्तुत कर
निवेदन है कि
मेरे विधान
सभा क्षेत्र बनीपार्क
की जयपुर
विकास
प्राधिकरण से
मान्यता
प्राप्त
पूर्णत: विकसित
कालोनीज
क्रमश: कैलाश
नगर,
प्रेमनगर, कुमावत
कॉलोनी व
भारतेन्दु
नगर के हजारों
परिवार लगभग 50-60
हजार आम नागरिकों
के सैंकड़ों
वर्षों से
कायम एकमात्र
आम रास्ता जो
आजादी से
पूर्व के
राजपूताना
जयपुर स्टेट
के नक्शों
में भी
सर्वेयर जनरल
आफ इण्डिया
द्वारा 1930-31 में
प्राकशित हुआ
तथा इस आम
रास्ते बाबत
अन्य पुख्ता
राजस्व
रिकार्ड, रेल्वे
रिकार्ड भी
मौजूद हैं। 1930
से आज तक इस
मार्ग पर आम
जनता का
आवागमन रहा है
1 आजादी के बाद
इस आम रास्ते
के इर्द गिर्द
भारतीय सेना
को भूमि उपलब्ध
हुई तब से
सैनिकगण भी आम
जनता के साथ इस आम
रास्ते का
उपयोग कर रहे
हैं। सेना ने
इस क्षेत्र से
गुजरने वाले
रास्तों पर
कब्जा करके
मात्र एक रास्ता
जो एक तरफ
जयपुर स्टेशन
से खातीपुरा
जाने वाली रोड
को मिलाता है
व दूसरी तरु
यह रास्ता
झोटवाड़ा से
चांदपोल जाने
वाली सड़क को
मिलाता है,
इससदियों
पुराने रास्ते
को जहां पक्की
डामर सड़क है,
सेना ने अपने
स्तर पर ही ‘बेऊर
मार्ग’ नाम देकर
पक्के गेट
निर्माण कर
दिये तथा सड़क
के दोनों किनारों,
छोर पर
संगीनधारी
सैनिक बैठाकर
जबरन आम जनता,
इस क्षेत्र
में बसने वाले
भूतपूर्व सैनिकों,
मृत सैनिक आश्रितों
के आवागमन में
बाधा उत्पन्न
करने की सीमा
लांघ कर कई
बार सैनिक
अपने वाहनों
में सशस्त्र
सवार होकर
कालोनीवासियों,
महिला, बच्चों,
बुजुर्गों
भूतपूर्व
सैनिकों के
साथ दुर्व्यवहार
मारपीट
गाली-गलौच
करते रहते हैं
जिसकी सूचना
जरिये
एफ.आई.आर.
पुलिस एवं
जिला कलक्टर
प्रशासन को भी
प्राप्त है।
इनके द्वारा
मौका मुआयना
भी किया गया
है।
Vps/ akt/ 11-03-06/ 1150/ 1f
भूतपूर्व
सैनिकों,
सैनिक
विधवाओं
बाहुल्य
वाली इन
कालोनीज
वासियों के आम
रास्ते को
रोका जाना
इनके मौलिक
अधिकारों का
हनन है।
माननीय न्यायालय
ने भी इस
प्रकार रास्ता
अवरुद्ध किये
जाने को गैर
कानूनी माना
है। दूसरी ओर
देश, राष्ट्र
आम नागरिकों
के रक्षक माने
जाने सेनिक,
सेना
अधिकारियों
द्वारा हथियारों
की नोक पर
मार्ग
अवरुद्ध करना,
कॉलोनीज में जाकर
बेरहमी से
मारपीट, जान
लेवा हमला
करना किसी
बड़ी
दुर्घटना की
प्रबल सम्भालना
को दर्शाता
है। अत: विशेष
उल्लेख
प्रस्ताव के
जरिए पुन:
निवेदन है कि
सेना को रास्ता
अवरुद्ध नहीं
किये जाने,
शांतिपूर्ण
माहौल कायम
रखने के लिए
पाबंद करवाया
जाए। धन्यवाद।
श्री
अध्यक्ष:
प्रतापसिंहजी,
महत्वपूर्ण
मामला है, आप
इस मामले में
कुछ कहना
चाहेंगे ?
श्री
रणवीर सिंह
गुढ़ा: माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से दो मिनट का
समय लेना
चाहता हूं। आज
बहुत गम्भीर
विषय है। ... (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
पहले मैं, आसन
कोई व्यवस्था
दे रहा है।
गम्भीर ठीक
है। स्थान
ग्रहण कर
लीजिए, माननीय
सदस्य।
बीरूसिंहजी
ने अभी पढ़कर
सुनाया कि
रास्ते को
ताला लगाकर
बंद कर दिया।
आम रास्ता है
सदियों का
रास्ता है,
उसको बंद कर
दिया तो उसके
बारे में आप
कुछ कह दें तो
ठीक रहेगा क्योंकि
इससे तो बहुत
लोग प्रभावित
हो रहे हैं। ...
(व्यवधान)
श्री
प्रतापसिंह
सिंघवी: यह
मेरी जानकारी
में अभी-अभी
प्रश्न आया
है। इसमें क्या
हो सकता है,
मैं दिखवा
लूंगा । ... (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: जी ?
श्री
प्रतापसिंह
सिंघवी: इसमें
क्या हो सकता
हैं, मैं
दिखवा लूंगा,
यह जानकारी में
मेरे अभी-अभी
आया है। किस
प्रकार की क्या
व्यवस्था
हो सकती है,
उसको दिखवा
लूंगा।
श्री
अध्यक्ष: ठीक
है। पर्ची पर
श्री जोगाराम
पटेल बोलेंगे।
पर्ची पर श्री
जोगाराम पटेल
बोलेंगे। ... (व्यवधान)
श्री
रणवीर सिंह
गुढा: माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपसे कितनी
देर पहले से
निवेदन कर रहा
हूं । पर्ची
दे चुका हूं
पहले से आपने .(व्यवधान)
बाद में बुला
लेंगे ?
श्री
अध्यक्ष:
आपकी कोई
पर्ची नहीं
है। चार
पर्चियां जो
आयी हैं, मैं
पहले पर्ची पर
बुलवाऊंगी, प्लीज
स्थान ग्रहण
कर लीजिए। ... (व्यवधान)
श्री
रणवीरसिंह
गुढ़ा: अध्यक्ष
महोदय, मेरा
गम्भीर विषय
है। मैंने
आपसे पहले भी
दिया और अभी
भी पर्ची दी
है। ... (व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष
महोदय, ऐसा
नहीं हो सकता।
... (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
कैसे नहीं हो
सकता? यहां पर
यही होगा जो आसन
चाहेगा। ... (व्यवधान)
श्री
रणवीर सिंह
गुढ़ा: माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपसे निवेदन
करना चाहता
हूं।
श्री
अध्यक्ष: ऐसा
कैसे नहीं हो
सकता? क्या
बात करते हो
आप? ... (व्यवधान)
श्री
रणवीर सिंह
गुढ़ा: अध्यक्ष
महोदय, परबतसर
से बारात गयी
सूरतगढ़ के गांव
में, अध्यक्ष
महोदय, दुल्हन
के साथ
छेड़खानी
हुई। पूरी
बारात को थाने
में बैठाया।
पूरे थाने को
सस्पैण्ड
करो। ... (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: यह
कोई बात होती
है ? ऐसा नहीं
हो सकता, यह कोई
बात हुई आपकी? आप
मुझे ... (व्यवधान)
रहे हो,
मुझे मालूम है
। ... (व्यवधान)
पर्ची के
माध्यम से
उठाये गये
मुद्दे
जोधपुर सम्भाग
में
क्षतिग्रस्त
व मिसिंग लिंक
सड़कों का
निर्माण
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): माननीय
अध्यक्ष
महोदय,
सर्वप्रथम
राजस्थान
सरकार ने, ... (व्यवधान)
मैं
सर्वप्रथम
भारत के पूर्व
प्रधान मंत्री
माननीय श्री
अटल बिहारी
वाजपेयी साहब को
बहुत-बहुत धन्यवाद
देना
चाहूंगा। ... (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: कल
आप बोले थे,
माननीय सदस्य,
सारी बातें
सड़कों की कह
दी थी। पर्ची
पर मैंने आपसे
निवेदन किया
कि पर्ची पर
वही मामले आने
चाहिए जो वास्तव
में रिसेंट
आकरेंस हो। ...
(व्यवधान)
श्री
जोगाराम पटेल:
मैं विषय पर आ
रहा हूं,
सड़कों की
कहूंगा बस।
वहीं उठाऊंगा
जो मुझे उठाना
है। एक, आधा
सैकण्ड की
भूमिका के बाद
विषय पर आ
जाऊंगा। ... (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
खैर, अब आप
बोलिये, जब
आपको मौका
दिया है तो
बोलिये लेकिन
कल काफी लम्बे
समय तक आप
अपनी बात कह
चुके थे। ... (व्यवधान)
श्री
जोगाराम पटेल:
नहीं, कल तो
मेरा समय काट
दिया गया था 15
मिनट का ... (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
खैर, अच्छा
कहिये-कहिये।
श्री
जोगाराम पटेल:
और उनकी एक
अनूठी भारत के
विकास की इस
योजना में
सड़कों का जो
जाल बिछाया गया,
उस योजना का
लाभ उठाते हुए
राजस्थान
सरकार ने अपनी
योग्यता के
अनुसार उसका
प्रदर्शन
किया और भारत
में प्रधान मत्री
ग्राम सड़क
योजना के तहत
प्रथम स्थान
प्राप्त
किया, इसके
लिए मैं राजस्थान
सरकार को बहुत
धन्यवाद
दूंगा।
दूसरा
धन्यवाद और
दूंगा कि
राजस्थान
राज्य में
जोधपुर सम्भाग
ने इस योजना
का अनूठा लाभ
उठाते हुए
जोधपुर सम्भाग
ने ... (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: एक
तरफ तो आप धन्यवाद
दे रहे हैं और
दूसरी तरफ कह
रहे हैं कि हालत
बहुत खराब है,
भारी रोष है।
जनता में भारी
रोष है। ... (व्यवधान)
श्री
जोगाराम पटेल:
मैं आ रहा
हूं। उस पर भी
आ रहा हूं। जो
धन्यवाद है
वह धन्यवाद
है और जो खराब
है वह खराब
है। ... (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: यह
तीन-चार मिनट
का समय है
आपके पास। सीधा
आ जाइये।
श्री
जोगाराम पटेल:
मैं तीन-चार
मिनट में पूरी
कर दूंगा,
मेरा एक मिनट
तो यूं ही चला
गया।
जोधपुर
सम्भाग में
जो प्रथम स्थान
प्राप्त
किया और उसके
लिए प्रधान
मंत्री सड़क
योजना के तहत
जो सड़कें
बनीं उसके लिए
धन्यवाद।
तीसरा धन्यवाद
और कि राजस्थान
सरकार ने कुल 18
स्टेट हाई-वे
डिक्लेयर
किये जिसमें
से तीन ... (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आप
तो सीधा रोष
पर आइये। आपने
लिखा है कि रोष,
तो रोष पर आ
जाइये आप। ... (व्यवधान)
श्री
जोगाराम पटेल:
मैं आ रहा
हूं। मैं रोष
पर आ रहा हूं।
नेक्स्ट
रोष पर आ रहा
हूं। सीधा रोष
पर नहीं आऊं ...
(व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: काम
इतने ज्यादा
हुए हैं कि
माननीय सदस्य
को बोलना ही
पड़ता है कुछ
न कुछ तो। ... (व्यवधान)
श्री
जोगाराम पटेल:
हां, असली बात
तो यही है।
तीन स्टेट
हाई-वे मेरे
विधान सभा
क्षेत्र में
डिक्लेयर
किये । ... (व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी:
पार्लियामैंट्री
अफेयर मिनिस्टर
साहब, पर्ची
के ऊपर कोई
धन्यवाद या
प्रशंसा गाये
जाते हैं क्या
? पर्ची पर तो
कोई घटना होती
है, बात होती
है। आप गाथा
गा रहे हो । ... (व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: वह कर
रहे हैं, क्या
करें?
श्री
जोगाराम पटेल:
मैं घटना ही
बता रहा हूं।
श्री
रामनारायण
चौधरी: आप
गाथा गा रहे
हो। ... (व्यवधान)
श्री
जोगाराम पटेल:
डिक्लेयर
किया परन्तु
उसके बाद जो
मेरी ... (व्यवधान)
श्री
हेमाराम
चौधरी: बोलना
पडा, प्रशंसा
तो सुनना मनुष्य
की आदत है। ... (व्यवधान)
श्री
जोगाराम पटेल:
परन्तु मेरी
गम्भीर समस्या
है, उस समस्या
की ओर ध्यान
दिलाना
चाहूंगा। वह
समस्या है
डब्ल्यू.बी.एम.
से बी.टी. रोड
वाला। बहुत पुरानी
मेरी ... (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
तीन-चार मिनट
तो आप धन्यवाद
में खो दोगे।
श्री
जोगाराम पटेल:
नहीं-नहीं,
मैं नहीं
खोऊंगा। मैं
तो पाइंट पर
आऊंगा।
श्री
अध्यक्ष: और
रोष बताएंगे
नहीं।
श्री
जोगाराम पटेल:
डब्ल्यू.बी.एम.
से बी.टी. की
प्रथम चरण की
जो योजना थी,
उस योजना के
तहत मुझे कोई
राशि आबंटित
नहीं हुई। डब्ल्यू.बी.एम.
से बी.टी. का जो
सैकिण्ड स्टेज
थी, उस सैकिण्ड
स्टेज में भी
जोधपुर जिले
को बहुत ही कम
धन आबंटित हुआ
है। मात्र 47
लाख, जबकि अन्य
जिलों को 3
करोड़, 35 करोड़
के आस-पास धन
आबंटित हुआ
है। इसलिए
सबसे पहला
मेरा निवेदन
यह रहेगा कि
डब्ल्यू.बी.एम.
से बी.टी. की जो
मेरी चार-पाँच
अति महत्वपूर्ण
सड़कें हैं जो
पिछले करीब 15-20
वर्षों से ऐसी
पड़ी हैं,
जहां किसी भी
हालत में चला
नहीं जा सकता है
और डब्ल्यू.बी.एम.
की वजह से
बड़े-बड़े खड्डे
और बड़े-बड़े
पत्थर हो गये
हैं, वहां पर
सड़क पर
यातायात के
साधन तो क्या
पैदल आदमी भी
नहीं चल सकता
है इसलिए पहला
मेरा निवेदन
यह रहेगा कि
उस डब्ल्यू.बी.एम.
से बी.टी.
सड़कों का जो
कार्य है वह
यथाशीघ्र स्पेशल
स्वीकृति के
तहत कराया
जाए। दूसरा,
डूंठारा से उतेसर
की जो सड़क है
वह सड़क
इतिहास से
लगाकर आज दिन
तक ऐसे ही
पड़ी है।
पूर्व की
सरकार के माननीय
विधायक और
पूर्व के
माननीय
मंत्री की उपेक्षा
के कारण उसको
जानबूझकर ऐसे
ही रखा गया है
और वह सड़क
हमारे चार
जिलों को
मिलाने वाली
है, पाली,
जालौर,
बाड़मेर और
जोधपुर और इन
चार जिलों को
मिलाने वाली
अति महत्वपूर्ण
सड़क
राजनैतिक
उपेक्षा की
वजह से ऐसी पड़ी
है।
मैं
दूसरा निवेदन
यह करूंगा
माननीय
सार्वजनिक निर्माण
मंत्रीजी से
कि उस सड़क को
भी मेरी विशेष
अनुमति के तहत
स्वीकृत
करायें और
लास्ट में
मिसिंग लिंक
और रिन्युवल
का कार्य भी
अधूरे पड़े
हैं, जिनकी
वजह से काम इतने
होने के
बावजूद भी एक
किलोमीटर, आधे
किलोमीटर, दो
किलोमीटर की
जो सड़कें रह
गयी हैं, मिसिंग
लिंक या रिन्युवल
की वजह से
उससे जनता में
रोष है इसलिए
मैं निवेदन
करूंगा कि जो
इतने
ऐतिहासिक काम
हुए हैं, साथ
के साथ मिसिंग
लिंक या रिन्युवल
के काम भी हो
जाए तो एक
इतिहास के रूप
में अमर
रहेगा। साथ ही
साथ मैं ... (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
ऐतिहासिक काम
हुए तो फिर
रोष किस बात
का है?
श्री
जोगाराम पटेल:
मैं आदरणीय
कृषि
मंत्रीजी से निवेदन
करूंगा कि ... (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
ऐतिहासिक काम
हुए हैं तो
फिर रोष किस
बात का है ?
श्री
जोगाराम पटेल:
रोष इस बात का
है कि इतने
काम होने के
बावजूद भी
थोड़ा सा रह
गया। एक
किलोमीटर
चलने में बहुत
तकलीफ आती है।
एक किलोमीटर
रह गया, आधा
किलोमीटर रह
गया, मिसिंग
लिंक रह गयी, रिन्युवल
रह गयी, उसका
रोष है। साथ
ही साथ मैं
कृषि
मंत्रीजी से
भी निवेदन
करूंगा कि
उनकी सड़कें
भी रिन्युवल
के अभाव में,
उपेक्षा के
कारण ऐसी ही
पड़ी हैं और
उनके संबंध
में भी मैंने
बारबार निवेदन
किया है और
मुझे पूर्ण
विश्वास है
कि मेरी रिन्युवल
की सड़कें और
चार सड़कें
जिनका
नवीनीकरण
करना है और जो
चार नई सड़कें
बनानी हैं,
उसके संबंध
में यथाशीघ्र
निर्णय
लेंगे।
श्री
अध्यक्ष: हो
गया, धन्यवाद।
श्री
जोगाराम पटेल:
मैं इतना
निवेदन करते
हुए पुन: दोनों
का धन्यवाद,
जय हिन्द, जय
भारत।
श्री
अध्यक्ष:
श्री कालीचरण
सर्राफ ।
केन्द्रीय
सरकार द्वारा
आवंटित
केरोसीन में
कमी
श्री
कालीचरण
सर्राफ( जौहरी
बाजार):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
सदन के माध्यम
से केन्द्रीय
सरकार द्वारा
जो केरोसीन का
आबंटन किया
जाता है उसमें
निरन्तर कमी
की जा रही है,
पिछले तीन-चार
सालों में उसके
बारे में ध्यान
आकर्षित करना
चाहता हूं।
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, हर
प्रदेश में
सार्वजनिक
वितरण प्रणाली
के अन्तर्गत
उचित मूल्य
की दुकानों के
माध्यम से केरोसीन
वितरित किया
जाता है।
हमारे प्रदेश
में डबल गैस
सलेण्डर
होल्डर्स को
छोड़कर सिंगल
गैस सलेण्डर
होल्डर्स को
दो लीटर और
शेष उपभोक्ताओं
को पाँच लीटर
केरोसीन दिये
जाने की व्यवस्था
पहले थी। प्रदेश
में कुल 1,29,41,125
राशन कार्ड
होल्डर्स
हैं। इसमें से
21,38,414 डबल गैस
सलेण्डर
होल्डर्स
हैं। इस
प्रकार 1,08,02,711 इस
प्रकार के
राशन कार्ड
होल्डर्स
हैं, जिनको कि
केरोसीन दिया
जाता है।
इसमें से 11,84,591
सिंगल गैस
सलेण्डर
होल्डर्स
हैं और 96,18,120 अन्य
उपभोक्ता
है। इस हिसाब
से लगभग 50,459.78
के.एल. प्रति
माह हमें
केरोसीन की
आवश्यकता
होती है परन्तु
मुझे यह कहते
हुए दुःख है
कि 2002-03 में जहां 44674
के.एल.
केरोसीन आबंटित
किया जाता था,
केन्द्र में
यू.पी.ए. की
सरकार आने के
बाद उसमें निरन्तर
कमी राजनैतिक
भेदभाव करते
हुए की जा रही
है। 2003-04 में, जहां 2002-03
में 44676 के.एल.
केरोसीन हमें मिलता
था....
Spp/usc/11.3.2006/1200/1g
वह 2003-04 में 43,492
कर दिया गया
और 2004-05 में 42,459 कर
दिया गया और 2005-06
में यह 42,417
के.एल.किया
गया। निरन्तर
इस प्रकार की
कमी यह
दर्शाती है कि
केन्द्रीय
सरकार
राजनैतिक
आधार पर और
हमारे राज्य
के साथ भेदभाव
करना चाहती
है। माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपको बताना
चाहता हूं कि
हमारे मुख्य
मंत्रीजी ने,
खाद्य
मंत्रीजी ने
और खाद्य सचिव
जी ने केन्द्रीय
सरकार को
बार-बार पत्र
लिखा है और
उनको यह बताया
है कि हमारे
राजस्थान की
भौगोलिक
स्थिति अन्य
प्रान्तों
से भिन्न है
। यहां 19 जिले
तो इस प्रकार
के हैं जहां
वन क्षेत्र 10
प्रतिशत से कम
है और रेगिस्तानी
इलाकों में
बाड़मेर,
बीकानेर,
चूरू, जैसलमेर,
जोधपुर, नागौर
इनमें तो 5
प्रतिशत वन
क्षेत्र भी
नहीं हैं।
यहां पर पूरे
राजस्थान
में हजारों की
तादाद में
ग्रामीण
छात्र शहरों
में पढ़ने के
लिये आते हैं,
उनको भी केरोसीन
की आवश्यकता
रहती है तो
जहां जिस प्रकार
राशन कार्डों
की संख्या
बढ़ रही है,
होना तो यह
चाहिये कि
केन्द्रीय
सरकार बिना
किसी
राजनैतिक
भेदभाव के केरोसीन
का कोटा ज्यादा
करे, परन्तु
दुर्भाग्य
है और मुझे
खेद है यह
कहते हुए कि
केन्द्रीय
सरकार कोटे
में निरन्तर
कमी करती जा
रही है। मैं
चाहूंगा कि जो
हमारे
कांग्रेस के
मित्र बैठे
हैं यहां पर
गरीबों के
बारे में
बड़ी-बड़ी
बातें करते
हैं, उनकी
केन्द्रीय
सरकार है,
उनको कम से कम
यह कहना
चािहये कि
केन्द्रीय
सरकार
राजनैतिक
भेदभाव के
आधार पर गरीबों
के साथ अन्याय
नहीं करे और
जो केरोसीन का
कोटा निरन्तर
कम किया जा
रहा है उसको
ज्यादा किया
जाये और मैं
खाद्य
मंत्रीजी से
भी अनुरोध
करूंगा कि
राज्य सरकार इस
बारे में किस
प्रकार के
प्रयास कर रही
हैं और केन्द्रीय
सरकार किस
प्रकार से यह
आवंटन निरन्तर
कम करती जा
रही है, इसके
बारे में आप
क्या कर रहे
हैं, इसके
बारे में भी
जानकारी दें
तो यह उचित
रहेगा ।
श्री अध्यक्ष:
धन्यवाद ।
मोहम्मद
माहिर आजाद।
श्री
कालीचरण सराफ:
खाद्य
मंत्रीजी से
जवाब दिलाओ
साहब। यह
लाखों लोगों
का सवाल है।
आठ हजार के.एल.
केरोसीन
प्रति माह कम
दिया जा रहा
है। उसके बारे
में राज्य
सरकार को बताना
चाहिये कि इस
बारे में क्या
व्यवस्था
की जा रही है।
मोहम्मद
माहिर आजाद:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आपके
माध्यम से इस
सदन का ध्यान
आकर्षित करना
चाहता हूं ...(व्यवधान)
..
श्री
मोहनलाल गुप्ता(किशनपोल):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
केरोसीन के
मामले में
जवाब देना
चाहते हैं
माननीय
मंत्री महोदय
को आदेश दें।
...(व्यवधान)...
मोहम्मद
माहिर आजाद:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आपने
मेरा नाम
पुकारा है। ...(व्यवधान)...
श्री
मोहनलाल गुप्ता:
केरोसीन का जो
मामला माननीय
सदस्य ने
उठाया है,
माननीय
मंत्रीजी
जवाब देना चाहते
हैं।
...(व्यवधान)...
श्री अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
पर्ची पर केवल
वही बोलता है
जो पर्ची देता
है। मंत्रीजी
कुछ बताना
चाहते हैं ...(व्यवधान)...
श्री
मोहनलाल गुप्ता:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, यह
बहुत महत्वपूर्ण
सवाल है। उनको
केरोसीन नहीं
मिल पा रहा
है। माननीय
अध्यक्ष
महोदय,
केरोसीन नहीं
मिल पा रहा है,
जयपुर के
लोगों को बहुत
बड़ी समस्या है।
...(व्यवधान) .. आप
कृपया जवाब
दिलवाइये।..(व्यवधान)
..
श्री संयम
लोढ़ा: पहले
तो आप दोनों
यह तय कर लो कि
जयपुर से
मंत्रि कौन
बनेगा? दोनों
बैठकर तय कर लो।
...(व्यवधान) ..
श्री
मोहनलाल गुप्ता:
अध्यक्ष
महोदय, आपसे
निवेदन है ;; ...(व्यवधान)
..
श्री अध्यक्ष:
मैं मंत्रीजी
को बाध्य
नहीं कर सकती।
...(व्यवधान) ..
श्री
कालीचरण सराफ:
कम से कम
मंत्रीजी को
यह तो कहिये
कि क्या व्यवस्था
की है...(व्यवधान)
..
मोहम्मद
माहिर आजाद:
यहाँ
फिक्सिंग मत
करो। ...(व्यवधान)
..
श्री
मोहनलाल गुप्ता:
मंत्रीजी
स्थिति स्पष्ट
करेंगे कि वह
केरोसीन की क्या
व्यवस्था
कर रहे हैं? ...(व्यवधान)
..
श्री अध्यक्ष:
यह आसन किसी
भी मंत्रि को
बाध्य नहीं
कर सकता। वह
चाहे तो दें,
वह चाहे तो
नहीं बोलें।
...(व्यवधान) ..
श्री
मोहनलाल गुप्ता:
अगर मंत्रि
महोदय जवाब
देना चाहते
हैं तो देदें।
...(व्यवधान) .
श्री अध्यक्ष:
प्लीज स्थान
ग्रहण करें।
बहनजी, स्थान
ग्रहण करें।
बहनजी, आप स्थान
ग्रहण कर लें।
...(व्यवधान) ..
एक माननीय
सदस्य: यह
फिक्सिंग है।
...(व्यवधान) ..
डॉ.किरोड़ीलाल
:(खाद्य एवं
नागरिक
आपूर्ति मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, माननीय
सदस्य ने जो
ध्यान
आकर्षित किया
है, उसमें अभी
राजस्थान को
केरोसीन कम
दिया जा रहा
है। आंकड़े
आपने सुने हैं
माननीय सदस्य
ने जो रखे हैं,
उस हिसाब से 7742
के.एल.
केरोसीन कम
मिल रहा है पर
मंथ और ...(व्यवधान)
..
श्री अध्यक्ष:
...(व्यवधान) ..
काम नहीं
चलेगा। ...(व्यवधान)
..
श्री संयम
लोढ़ा: यह
आपके रिकार्ड
से जाहिर है
कि फरवरी के
पहले हफ्ते
में अकाल में
जितने मजदूर आपने
लगाये, दूसरे
में उससे कम
लगाये राजस्थान
में, तीसरे
में उससे भी
कम लगाये गये।
केन्द्रीय
सरकार का जवाब
आप दे रहे हो,
खुद का तो जवाब
देदो। ...(व्यवधान)
..
श्री
मोहनलाल गुप्ता:
विषय क्या हो
रहा है, चल क्या
रहा है, यह
केन्द्रीय
सरकार की बात
है।...(व्यवधान)
..
श्री संयम
लोढ़ा: यह
रिकार्ड पर है
...(व्यवधान) ..
केन्द्रीय
सरकार की बात
कर रहे हो,
पहले खुद की
व्यवस्था
तो देख लो ।...(व्यवधान)
..
श्री मोहन
लाल गुप्ता:
यह खड़े हो
गये, कोई विषय
ही नहीं है
अभी। ...(व्यवधान)
..
श्री
कालीचरण सराफ:
केन्द्रीय
सरकार
राजनीतिक
भेदभाव के
आधार पर राजस्थान
के साथ सौतेला
व्यवहार कर
रही है, इसको
राजस्थान की
जनता कभी माफ
नहीं करेगी।
...(व्यवधान) ..
श्री अध्यक्ष:
माननीय सदस्यगण,
स्थान ग्रहण
कर लें।
...(व्यवधान) ..
एक माननीय
सदस्य:
केरोसीन की
बात करो । ...(व्यवधान)
..
श्री अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
स्थान ग्रहण
कर लें।
माननीय
मंत्रीजी, आप
केवल इतना बात
दें कि आपने
इस कोटा को
बढ़ाने के लिये
कब-कब, क्या
प्रयत्न
किये हैं, क्या
चिट्ठी लिखी,
बस इतना बता
दें और कुछ
नहीं। ...(व्यवधान)
..
श्री
रामनारायण
चौधरी(नेता,
प्रतिपक्ष): वह
इनसे तकसीम
नहीं हो रहा
है, सारा ब्लैक
में बिक रहा
है। ...(व्यवधान)
..
श्री अध्यक्ष:
कहां बिक रहा
है?
श्री
अमराराम
चौधरी(धोद): जितना
तेल है उसमें
से आधा ब्लैक
में बिक रहा
है। ट्रेक्टर
में काम आ रहा
है, बसों में
काम आ रहा है,
आप चैक करा
लें। ...(व्यवधान)
..
श्री
रामनारायण
चौधरी: गांवों
में बंट रहा
है। ...(व्यवधान)
..
श्री
महावीर
प्रसाद
जैन(सरकारी
मुख्य
सचेतक): आप
बहुत जिम्मेदार
हैं
प्रतिपक्ष के
नेता। ...(व्यवधान)
..
श्री
रामनारायण
चौधरी: हां,
मैं जिम्मेदारी
से बोल रहा
हूं। ...(व्यवधान)
..
श्री अध्यक्ष:
पर्ची के माध्यम
से उन्होंने
यह प्रश्न
उठाया है कि
लगातार
केरोसीन का
कोटा भारत सरकार
कम करती जा
रही है तो मैं
केवल इतना
जानना चाहती
हूं कि भारत
सरकार जो कोटा
कम करती जा रही
है, आपने उसे
बढ़ाने के
बारे में क्या
क्या कब-कब
चिट्ठी लिखी,
क्या प्रयत्न
किये, यह बता
दीजिये, खत्म
बात। अब आप कह
रहे हो आधे से
ज्यादा बिक
रहा है, वह एक
अलग प्रश्न
है। वह अलग
प्रश्न आप
उठाओ। आप
उठाइये उसे।
श्री संयम
लोढ़ा: जो
घोटाले
माननीय खाद्य
आपूर्ति मंत्रीजी
ने खुद पकड़े
थे उदयपुर
जाकर वह तो
बताओ आप। ...(व्यवधान)
..
(व्यवस्था
सूचक घण्टी)
जो घोटाले
माननीय
मंत्रीजी ने खुद
पकड़े, उसका
क्या हुआ?
श्री
कालीचरण सराफ:
केन्द्रीय
सरकार का कोई
भी मामला होता
है और यह खड़े
हो जाते हैं
बिना किसी बात
के खड़े हो
जाते हैं।
श्री अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
आसन की गरिमा का
ध्यान रखना
आपका कर्तव्य
है । जब मैंने
पूछा है कोई
बात और आसन ने
व्यवस्था
दी है आप बीच
में क्यों
खड़े हो जाते
हैं ? मंत्रीजी,
आप अपने
प्रयत्न बता
दीजिये, खत्म
बात।...(व्यवधान)
.. बता देंगे, आप क्यों
बीच में बोल
रहे हैं?
डॉ.सी.पी.जोशी:
जवाब दे रहे
हैं तो इनके
पास रिकार्ड
है या तो आठ
बजे देते, छह
बजे देते, जब
यह तैयार ...(व्यवधान)
.. अब आप मैच
फिक्सिंग की
जैसे करना
चाहते हैं क्या
हाउस को?
श्री संयम
लोढ़ा: उनका
हिसाब लेकर कि
कितना केरोसीन
कहां-कहां जा
रहा है और हम
पूछते हैं ...
...(व्यवधान) ..
श्री
मोहनलाल गुप्ता:
अगर गरीबों के
हित में यह
जवाब भी लेकर
आये हैं तो
अच्छी बात
हैं। ...(व्यवधान)
..
श्री
कालीचरण सराफ:
हमारी सरकार
की
प्राथमिकता
है कि आपकी
कारगुजारियों
को यहां पर
लाकर बतायें
सदन में ... ...(व्यवधान)
..
डॉ.सी.पी.जोशी:
कोई ध्यानाकर्षण
प्रस्ताव
होता तो समझ
में आता,
मंत्रीजी
जानकारी लेकर आते,
ध्यानाकर्षण
प्रस्ताव है
। यह तो पर्ची
का मामला था
कैसे मालूम आपको। ...(व्यवधान)
..
श्री संयम
लोढ़ा:
फिक्सिंग के
जरिये यहां स्टेटमेंट
हो रहा है। ...(व्यवधान)
..
श्री
मोहनलाल गुप्ता:
माननीय
मंत्री महोदय
अगर जानकारी
लेकर आये हैं
तो वह सजग हैं,
जनता के प्रति
जागरूक हैं ।
...(व्यवधान) ..
श्री
कालीचरण सराफ:
दो घंटे वाली
पर्ची निकाली
ही इसलिए जाती
हे कि राज्य
सरकार उसका
जवाब दे। ...(व्यवधान)
..
डॉ.सी.पी.जोशी:
कोई जवाब नहीं
होता।
...(व्यवधान) ..
माननीय मंत्रीजी
ने कहा हम पता
लगायेंगे।
...(व्यवधान) ..
श्री
कालीचरण सराफ:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, पर्ची इसलिए
निकाली जाती है
कि दो घण्टे
में सरकार
उसका जवाब
लेकर आये। क्या
बात कर रहे
हैं आप?...(व्यवधान)
.. शिरोधार्य
है यह नियम।
...(व्यवधान) ..
डॉ.श्रीगोपाल
बाहेती: अध्यक्ष
महोदय,
मंत्रीजी यह
भी बता दें कि
इन्होंने
अजमेर का कोटा
कम क्यों
किया? अजमेर
का कोटा कम
करके
भीलवाड़ा को दिया
और अजमेर में
जो ब्लैक हो
रहा है राशन
का, उसकी क्या
व्यवस्था
कर रहे हैं?
श्री
कालीचरण सराफ:
अजमेर की यहां
कहां से बात आ
गयी? ...(व्यवधान)..
श्री
मोहनलाल गुप्ता:
माननीय
मंत्री महोदय
बतायें, बहुत
सजग मंत्री
हैं।...(व्यवधान)
..
श्री
जोगाराम पटेल:
केन्द्र
सरकार की जो
सारी नीतियां
हैं, भेदभाव
की नीतियां
हैं, राजस्थान
सरकार के साथ
वह भेदभाव
किया जा रहा
है, उसके अगर
तथ्य सामने आ
रहे हैं तो
मेरे
प्रतिपक्ष के
भाइयों को
एतराज हो रहा
है। कल यह कह
रहे थे, यह
सुनने को
तैयार नहीं।
मंत्रीजी
जवाब दे रहे
हैं। ...(व्यवधान)
..
डॉ.सी.पी.जोशी:
भारत सरकार के
खिलाफ प्रस्ताव
लाइये आप ...(व्यवधान)..
एक माननीय
सदस्य: आप
लोग हर बात
यूं ही करते
हैं ...(व्यवधान)
..
डॉ.सी.पी.जोशी:
यह कोई पार्टी
मीटिंग नहीं
हैं, ...(व्यवधान)
.. यह कोई
बीजेपी की
पार्टी
मीटिंग नहीं है
...(व्यवधान) ..
एक माननीय
सदस्य: पैसा
केन्द्रीय
सरकार खा गयी।
...(व्यवधान) ..
श्री
जोगाराम पटेल:
जनता का सबसे
अंतिम व्यक्ति
का जो अधिकार
है, वह अधिकार
यह केन्द्रीय
सरकार ...(व्यवधान)
..
श्री
रामप्रताप
कासनिया: अध्यक्ष
महोदय, इनके
वाद-विवाद में
हम भी फंसे जा रहे
हैं। हमारा
समय नष्ट हो
रहा है। ...(व्यवधान)
..
श्री
राकेश
मेघवाल(नागौर):
कोटा नागौर
जिले का भी कम
किया है, इसका
कारण क्या
है? माननीय
मंत्रीजी ने
कहा है कि
इसमें भारत
सरकार ने कोटा
कम किया है
इसलिये इसमें
नागौर जिले का
कोटा भी कम
किया है।
नागौर जिले के
सभी विधायकों
ने लिखकर दिया
है माननीय
मंत्रीजी को ।
...(व्यवधान) ..
श्री अध्यक्ष:
नेता प्रतिपक्ष
खड़े हैं । ...(व्यवधान)
..
msr/usc/1210/11032006/1h
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता
प्रतिपक्ष):
मोहन लालजी,
आप तो ख्याति
प्राप्त
सी.ए. हैं,
ईमानदार आदमी
हैं...(व्यवधान)
आपके एरिया
में केरोसीन
तेल बिक रहा
है, ठीक बिक
रहा है कि
नहीं, यह आप
सर्टिफाइड कर
दीजिए। आपके
एरिया में जो
आ रहा है वह
बिक रहा है क्या?
...(व्यवधान)
श्री
कालीचरण
सर्राफ: केन्द्र
सरकार
केरोसीन नहीं
दे रही है...(व्यवधान)
उसके बारे में
स्पष्ट
करिये, माननीय
विपक्षी दल के
नेता।
श्री
रामनारायण
चौधरी: वह
डिस्ट्रिब्यूट
हो रहा है क्या
वहां? आप खड़े
होकर कर कह
दीजिए, मान
लेंगे, पूरे
राजस्थान का
मान लेंगे।
डॉ.किरोड़ी
लाल: इसलिए आप
सारा कोटा
काकट लोगे?
श्री
रामनारायण
चौधरी: आप
सर्टिफाइड कर
दो कि आपके
क्षेत्र में
केरोसीन तेल
मिल रहा है क्या?
श्री
मोहनलाल गुप्ता:
मेरे क्षेत्र
में तेल
बिलकुल...(भारी
व्यवधान) ...
डॉ.किरोड़ी
लाल: आप झूठ
बोल रहे हैं।
आपने एक भी शिकायत
मेरे को नहीं
दी। ...(व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी:
जानकारी नहीं
है आपके पास कहां
क्या हो रहा
है। केरोसीन
सारा बिक रहा
है ब्लैक
में। ब्लैक
में जा रहा
है...(व्यवधान)
श्री संयम
लोढ़ा: अपने
तो गेहूं बिका
है...(व्यवधान)
आज ए.पी.एल. के
गेहूं के लिए
लोग मारे-मारे
फिर रहे हैं।
श्री
कालीचरण
सर्राफ:
मनमानी
नीतियों के
कारण...(व्यवधान)...राजस्थान
की आम जनता का,
गरीब जनता
का...(व्यवधान)...गरीबों
के साथ भेदभाव
कर रही है।
श्री
रामप्रताप
कासनिया: अध्यक्ष
महोदय, यह
कालाबाजारी
तो वर्षों से
होती आ रही
है...(व्यवधान)
श्री
कालीचरण
सर्राफ:
मनमानी नहीं
चलेगी और जब
सरकार बताना
चाहती है तो
आप सुनना नहीं
चाहते...(व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी:
केरोसीन तेल
सरेआम ब्लैक
में बिक रहा है।
यह मेरा आरोप
है। ...(भारी व्यवधान)...
श्री
कालीचरण
सर्राफ: यह
मेरा आरोप है
और केन्द्रीय
सरकार
राजनीतिक
आधार पर राजस्थान
को कम केरोसीन
का आबंटन कर
के राजस्थान
की गरीब जनता
के साथ भेदभाव
कर रही है...(व्यवधान)...
श्री
रामप्रताप
कासनिया: अध्यक्ष
महोदय, यह कोई
नयी व्यवस्था
नहीं है, बहुत
पुराने समय से
ही
कालाबाजारी
होती आ रही
है।
श्री
रामनारायण
चौधरी: एक्शन
लेना चाहिए
आपको। ...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
स्थान ग्रहण
करें।
बात
तय हो गयी है
जब नेता
प्रतिपक्ष
खड़े हों और वह
बोलें तो कम
से कम माननीय
सदस्यों को
इतना धीरज
रखना चाहिए कि
उस समय तो
खड़े नहीं
हों, उस समय तो
बीच में नहीं
बोलें। यह तो
ध्यान रखा
करें आप।...(व्यवधान)
डॉ.किरोड़ी
लाल: पर नेता
प्रतिपक्ष यह
तो ध्यान
रखें वह जवाब
क्या दे रहे
हैं और वह जा
कहां पर रहे
हैं। आरोप लगा
रहे हैं जिनका
कोई आधार नहीं
है।
श्री अध्यक्ष:
वह कुछ भी कह
सकते हैं। ...(व्यवधान)
डॉ.किरोड़ी
लाल: कुछ भी
कैसे कह सकते
हैं...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
वो कह सकते
हैं, उनका
अधिकार है...(व्यवधान)
श्री नन्दलाल
बंशीवाल(दोसा):
अध्यक्ष
महोदय, मिथ्या
आरोप लगा रहे
हैं।
सी.पी.जोशीजी
बोल रहे हैं।
सी.पी.जोशीजी,
आप इस तरफ
विधान सभा में
थे मैंने पर्ची
के माध्यम से
एक प्रश्न
उठाया था।
श्री
रामनारायण
चौधरी: अध्यक्ष
महोदय, मैं
आरोप नहीं लगा
रहा हूं, मैं
आपसे यह जानना
चाह रहा हूं
और मैं मोहन
लालजी पर छोड़ता
हूं, यह इनकी
पार्टी के
प्रबुद्य,
विजिलेंट
एम.एल.ए.हैं, यह
सर्टिफाइड कर
दें कि राजस्थान
के अन्दर
केरोसीन तेल
ठीक तरह से
डिस्ट्रिब्यूट
है तो मैं मान
जाऊंगा।
श्री अध्यक्ष:
कालीचरणजी
नहीं हैं क्या
प्रबुद्य,
जिम्मेदार
नहीं हैं क्या?
श्री
रामनारायण
चौधरी:
कालीचरणजी, यह
तो हल्ला
ब्रिगेड का
आदमी है।
श्री
कालीचरण
सर्राफ: क्या
है, साहब।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: अध्यक्ष
महोदय, मेरे
को एतराज है,
यह गलत बात
है। यह शब्द
कार्यवाही से
निकाला जाए।
श्री
कालीचरण
सर्राफ: यह क्या
है?
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: जोहरी
बाजार से आने
वाले माननीय
सदस्य को हल्ला
ब्रिगेड का
आदमी कहा
है...(व्यवधान)
श्री
कालीचरण
सर्राफ: आप
इधर-उधर की
बातें कह कर
केन्द्रीय
सरकार द्वारा
जो भेदभाव
किया जा रहा
है राजस्थान
की जनता के
साथ उसको छिपा
नहीं सकते। यह
बात सही है,
आंकड़ों के
आधार पर मैंने
यह बात कही
है। केरोसीन
का कोटा निरन्तर
केन्द्र
सरकार
राजनीतिक
भेदभाव के साथ
कम कर रही है
और गरीबों के
साथ विश्वासघात
कर रही है। ...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
माननीय सत्ता
पक्ष के मुख्य
सचेतक महोदय,
क्या आपने
कोई हल्ला
ब्रिगेड यहां
बना रखी है?
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: कतई
नहीं, अध्यक्ष
महोदय। नहीं,
अध्यक्ष
महोदय, यह शब्द
कार्यवाही से
निकलवाओ।
डॉ.किरोड़ी
लाल: उधर जरूर
है।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन: न
तो हल्ला
ब्रिगेड, यहां
तो सब माननीय
सदस्य हैं और
माननीय सदस्यों
को उतना ही
अधिकार है
जितना
प्रतिपक्ष के नेता
महोदय को
अधिकार
है...(भारी व्यवधान)...
एक माननीय
सदस्य: अध्यक्ष
महोदय, जो
केरोसीन मिल
रहा है उसका
समान वितरण तो
हो रहा है...(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
मैं माननीय
प्रतिपक्ष के नेता
महोदय को,
जिनका अनुभव
है...(व्यवधान)
डॉ.सी.पी.जोशी:
काहे को
हटाया?
श्री
मोहनलाल गुप्ता:
यह बात
केरोसीन की चल
रही थी...(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
उनसे यह
अपेक्षा नहीं
करते कि एक
माननीय सदस्य
को हल्ला
ब्रिगेड कहा
जाए...(व्यवधान)
जिन माननीय
सदस्यों को
नियमों की
जानकारी नहीं
है वह कहते
हैं तो बात
समझ में आ
सकती है पर...(व्यवधान)
आपके, विपक्ष
के नेता बनने
पर तालियां बजायी
हैं। हम आपसे
यह अपेक्षा
करते थे कि आप कुछ
मर्यादाओं का
पालन करेंगे।
आप एक माननीय सदस्य
को, मैं समझता
हूं कि यह
बहुत गलत काम
किया है। और
इसके लिए आपको
खेद प्रकट
करना चाहिए।
...(व्यवधान)
श्री
जोगाराम पटेल:
अध्यक्ष
महोदय, आज
राजस्थान
पत्रिका में
एक खबर है कि
प्रतिपक्ष के
भाइयों की एक
हल्ला बोल
ब्रिगेड है।
यह तो पत्रिका
में खबर है कि
हल्ला बोल
ब्रिगेड है और
प्रतिपक्ष के
नेता नरम रवैया
रखते हैं तो
हल्ला बोल
ब्रिगेड आगे
बढ़ने का प्रयास
करती है।
राजस्थान
पत्रिका में
यह खबर है
इसलिए इनसे
पूछो...(व्यवधान)
श्री
हेमाराम
चौधरी: सुबह
से यहां भी
हल्ला बोल
ब्रिगेड हो
गयी।
श्री अध्यक्ष:
आर्डर, आर्डर।
श्री
हेमाराम
चौधरी: आज
पत्रिका में
पढ़ा, उसमें आया
है कि हल्ला
ब्रिगेड
वालों को राज्य
सभा काक टिकिट
दिया गया है
तो हल्ला
ब्रिगेड तो
आपके पार्टी
में है जब ही
यह पेपर में
आया है...(व्यवधान)
एक माननीय
सदस्य: आपके
लिए आया है,
कांग्रेस
पार्टी के लिए
आया हल्ला
बोल ब्रिगेड।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: अध्यक्ष
महोदय,
प्रतिपक्ष के
नेता ने जो
कहा है उसको
एक्सपंज
कराओ। एक
माननीय सदस्य
को जो चौथी
बार राजस्थान
विधान सभा में
आये हैं...(व्यवधान)
श्री
हेमाराम
चौधरी: राजस्थान
पत्रिका में
लिखा है हल्ला
ब्रिगेड का।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
पत्रिका में
यह आया है कि कांग्रेस
कहीं न कहीं
आन्तरिक
उसमें ग्रसित
है। पत्रिका
में यह भी आया
है कि प्रतिपक्ष
के नेता का
सभी माननीय
कांग्रेस के
विधायकों ने
अपमान किया।
यह भी आया है
उसमें...(व्यवधान)
एक माननीय
सदस्य:
बिलकुल आया
है।
श्री संयम
लोढ़ा:
पत्रिका में
तो यह भी आया
था कि मंत्रियों
ने कहा कि फोन
की टेपिंग हो
रही है ...(व्यवधान)...
ई टी.वी. पर इन्टरव्यू
में कहा था कि
मेरे फोन की
टेपिंग हो रही
है।
श्री
जोगाराम पटेल:
राजस्थान
पत्रिका में
यह भी आया
था...(व्यवधान)...
प्रतिपक्ष के
नेता आपको हाथ
जोड़ रहे थे
और फिर भी आप
नहीं मान रहे
थे। पत्रिका
में तो यह भी
आया है आज।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: अध्यक्ष
महोदय, सदन को
आर्डर में
लाओ। यह कोई
बात हुई क्या,
सभी लोग बहस
में हिस्सा
लेना चाहते
हैं, अपनी बात
को कहना चाहते
हैं। माननीय
सदस्य ने एक
बहुत गम्भीर
मुद्दा उठाया
है और हल्ला
ब्रिगेड कह
दिया उनको। यह
एक तरह से
उनकाक अपमान
किया है, अध्यक्ष
महोदय। ...(व्यवधान)
श्री
मोहनलाल गुप्ता:
माननीय
मंत्री महोदय,
जवाब दें।
श्री
रामनारायण
चौधरी: नहीं,
मेरे को कहने
का अधिकार
नहीं है और
आपको है? मेरे
को कहने का
अधिकार नहीं
है और
पार्लियामेंट्री
अफेयर्स
मिनिस्टर को
अधिकार है कि
वह बीच में
खड़े हो जाएं
और बोल जाएं?
यह अधिकार है?
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: नहीं,
मैं कहां
बोलता हूं?
मैं कहां
बोलता हूं,
मैं तो बिलकुल
ही नहीं
बोलता। आपके
उधर बैठे
माननीय सदस्यों
का जयादा आदर
मैं ही करता
हूं।
श्री
रामनारायण
चौधरी: व्याख्यान
दे रहे हो अध्यक्ष
महोदय को आप।
डॉ.किरोड़ी
लाल: यह पानी
को पू कहने
वाला आदमी, बोलने
की हिम्मत
कैसे पड़ गयी?
श्री
रामनारायण
चौधरी: अध्यक्ष
महोदय, को व्याख्यान
दे रहे हो।
यह आप पूरी
आस्तीन का
कमीज पहनते
हो, अब आपने
आस्तीन चढ़ा
रखी है न यह
ऊपर।
श्री राजेन्द्र
राठौड़: क्या
इसको ऐसे कर
लूं? आप कहो
जैसे कर लूं।
श्री
रामनारायण
चौधरी: हां, और
कालीचरणजी ने
क्या कर रखा
है?
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: यह कर
लिया। साहब,
मैं तो वैसे
ही आपका
आज्ञाकारी
हूं।
श्री अध्यक्ष:
यहां कौन क्या
कहनता है,
इसकी चर्चा की
जायेगी।
श्री
रामनारायण
चौधरी: यह हल्ला
ब्रिगेड का
साईन है...(व्यवधान)
आस्तीन को
ऊपर
चढ़ायेगा...(व्यवधान)
जो पूरी
चढ़ायेगा वह
ब्रिगेडीयर
है।
श्री
कालीचरण
सर्राफ: क्या,
साहब, यह कोई
बात हुई। आपको
पूछ कर
पहलेंगे हम
कपड़े?
श्री
रामनारायण
चौधरी: आप
अपने अतीत को
देखो, आप क्या
हो डॉ.किरोड़ी
लालजी।
श्री
कालीचरण
सर्राफ: मैं
क्या हूं, यह
जयपुर की जनता
जानती है।
श्री
रामनारायण
चौधरी:
डॉ.किरोड़ी
लालजी, जब
सी.एम. भैरोंसिंहजी
थे और
सवाईमाधोपुर
की सीमेंट फैक्ट्री
के मामले में
आप क्या-क्या
करते थे। याद
है कि नहीं
आपको?
श्री
कालीचरण
सर्राफ: अब यह
भैरोंसिंहजी
कहां से आ गये?
...(व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी: याद है
कि नहीं, आज तो
खुद मालिक हो
और क्या रहा
उस सीमेंट
फैक्ट्री का?
डॉ.किरोड़ी
लाल: सीमेंट
फैक्ट्री का
आन्दोलन
किया था और
आपने लाठी
मारने में कोई
कसर नहीं
छोड़ी चोटी से
एड़ी तक। यह
किया था आप
लोगों ने अत्याचार
किये थे,
लाठियां
माररी थीं,
जेलों में भेजा
था।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
हम तो आप पर
फूल बरसाते हैं
आपने लाठियां
बरसायीं। क्या
आन्दोलन
करना मनाही है
क्या
सवाईमाधोपुर
फैक्ट्री के
लिए? ...(व्यवधान)
श्री
रामप्रताप
कासनिया: अध्यक्ष
महोदय, इस
वाद-विवाद में
समय नष्ट हो
रहा है, हमारे
जैसे लोगों
बोलने से
वंचित रह जाते
हैं...(व्यवधान)
अध्यक्ष
महोदय, कोई न
कोई व्यवस्था
करो, इस तरह से
शोर-शराबे में
दिनभर सदन का
समय जाया होता
है।
डॉ.किरोड़ी
लाल: दो मिनट
में जवाब दे
दूं, अध्यक्ष
महोदय।
श्री अध्यक्ष:
हां।
डॉ.किरोड़ी
लाल: जोहरी
बाजार से आने
वाले माननीय
सदस्य ने
पूछा, इसको
लम्बा नहीं
देना है, अध्यक्ष
महोदय, जितना
कहा है आपने
वह ही जवाब
दूंगा दो शब्दों
में।
श्री अध्यक्ष:
आप तो केवल
आसन ने जो
पूछा उतना ही
जवाब दें, बस।
डॉ.किरोड़ी
लाल: हां, आपकी
व्यवस्था
के अनुसार।
माननीय
मुख्यमंत्रीजी
ने 07.01.04 एवं 31.01.04
पत्र लिखा है
और मैंने पत्र
लिखा है 17.12.04 को।
पत्र लिखा भी
नहीं, मैं मणिशंकरजी
से व्यक्तिगत
रूप से मिला
था और यह मांग
की थी कि हम को
इतना केरोसीन
दे दिया जाए
लेकिन भारत सरकार
ने केरोसीन
बढ़ाने के
बजाय उल्टा
घटा दिया। यह
खेद जनक बात
है।
श्री अध्यक्ष:
ठीक है।
श्री
हरिमोहन
शर्मा: 2005 में
आपने कुछ नहीं
किया।
डॉ.सी.पी.जोशी:
2004 से लगाकर 2006 तक
इस सरकार ने
केरोसीन की
कटौती के लिए
एक भी लैटर
नहीं लिखा। आप
स्वयं ने कहा
है मुख्यमंत्रीजी
ने 2004 में लैटर
लिखा, आज 2006 चल
रहा है, दो साल
तक राजस्थान
सरकार ने एक
भी पत्र भारत
सरकार को नहीं
लिखा...(व्यवधान)
नहीं लिखा। 2004
का है।
डॉ.किरोड़ी
लाल: भारत
सरकार बराबर
काट रही ही केरोसीन
को।...(व्यवधान)
डॉ.सी.पी.जोशी:
अध्यक्ष
महोदय, 2004 का
है...(व्यवधान)
एक साल से
राजस्थान
सरकार ने एक
भी पत्र नहीं
लिखा...(व्यवधान)
सिंगल लैटर
नहीं लिखा
आपने और बातें
कर रहे हैं
केरोसीन कम
किया।
श्री
कालीचरण
सर्राफ:
कांग्रेस
पार्टी ने क्या
किया, जरा यह
भी बताइये।
डॉ.सी.पी.जोशी:
अध्यक्ष
महोदय, दो साल
में राजस्थान
सरकार के मुख्यमंत्री
महोदय ने और
खाद्य
मंत्रीजी ने
भारत सरकार को
एक पत्र नहीं
लिखा और कह
रहे हैं कि हम
भारत सरकार को
लिख रहे हैं। 2004
का पत्र है यह, 2006
आ गया आज, एक भी
पत्र दो साल
में नहीं लिखा
खाली वाहवाही
लेने के लिए
बात करना चाहते
हैं।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़:
प्रिंसिपल
सेक्रेटरी,
फूड एण्ड सप्लाई
ने लिखा है।
रखोन एक कॉपी।
डॉ.सी.पी.जोशी:
बताइये,
रखिये।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: 05 में
लिखा...(व्यवधान)
...
डॉ.किरोड़ी
लाल: मेरे
मंत्री बनने
के बाद में।
श्री
हरिमोहन
शर्मा: 2004 में, 2004
का है। ...(व्यवधान)...
डॉ.सी.पी.जोशी:
आपने यहां तीन
लैटर बोले
हैं,दो लैटर
मुख्यमंत्रीजी
के एक आपका,
रखिये। ...(व्यवधान)...
डॉ.किरोड़ी
लाल: यह डॉक्टर
किरोड़ी लाल।
डा.सी.पी.जोशी:
रखिये, रखिये।
रख दीजिए।
श्री
हरिमोहन
शर्मा: 2004 का है, 2005
का नहीं है।
आप रखो, 2005 का है
तो रखो आप।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: रख
दीजिए यहां
पर।
(डॉ.किरोड़ी
लाल, खाद्य
मंत्री ने
पत्र सदन के पटल
पर रखा)
श्री
हरिमोहन
शर्मा: 2004 का है,
2005-06 में आप कहां
सोते रहे? 2004 का
है, देखो आप।
मैं कह रहा
हूं 2004 का है।
डॉ.सी.पी.जोशी:
आप लैटर
देखिये, अध्यक्ष
महोदय। कोई
पत्र नहीं
लिखा है 2006 में,
बातें कर रहे
हैं।
श्री
हरिमोहन
शर्मा: मैं कह
रहा हं न नहीं
लिखा...(व्यवधान)...
श्री
मोहनलाल गुप्ता:
अध्यक्ष
महोदय,
कांग्रेस के सदस्य
यह आब्जैक्शन
उठा रहे हैं
कि 2005में पत्र
क्यों नहीं
लिखा, 2006 में
पत्र क्यों
नहीं लिखा अगर
एक संवेदनशील
सरकार हो तो निश्चित
रूप से इस
पत्र के आधार
पर भी
कार्यवाही
करेगी। ...(व्यवधान)...कांग्रेस
की संवेदनशील
सरकार नहीं है।
श्री
राकेश मेघवाल:
अध्यक्ष
महोदय, जब माननीय
मयंत्री महोदय
ने यह कह दिया कि
मैं व्यक्तिश:
मणिशंकर अय्यरजी
से मिले हैं तो
यह रिकार्ड पर
है, वह कह रहे हैं
कि मैं मिला हूं।
Ars/usc/1j/1220/11032006/1
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
आसन पांवों पर
है जो पत्र
खाद्य और
आपूर्ति
मंत्री जी ने
लिखा है उसकी
कापी तो मेरे
पास है और जो
मुख्यमंत्री
जी ने पत्र
लिखे हैं वह
कापी उनके आफिस
में है।
डा.सी.पी.जोशी:
वह रखें यहां
पर।
श्री
अध्यक्ष: वह
अभी कहां से ...
डा.सी.पी.जोशी:
अध्यक्ष
महोदय, 2004 के बाद
एक पत्र नहीं
लिखा, मुख्यमंत्री
ने एक पत्र
नहीं लिखा
है...(व्यवधान)
2004 के बाद एक भी
पत्र नहीं
लिखा है। आप
रखिये यहां
पर, आप यहां पर
हाउस में
रखवाइये लैटर को,
2004 के बाद एक
पत्र नहीं
लिखा है ...
श्री
अमराराम(धोद):
यह कौनसी
तारीख का है?
...(व्यवधान)
डा.सी.पी.जोशी:
आप बताइये यह
कोई तरीका
थोड़े ही है ।
श्री
हरिमोहन
शर्मा: यह किस
तारीख का है
आप बताओ..(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: स्थान
ग्रहण करें,
स्थान ग्रहण
करें। मुख्यमंत्री
के दफ्तर में
होगी उसकी
कापी इनके पास
नहीं है।
डा.सी.पी.जोशी:
अभी कोट किया
है, मन्त्री
जी ने कोट
किया है। अध्यक्ष
महोदय, मंत्री
जी ने कोट
किया है...(व्यवधान)
मंत्री जी ने
लैटर कोट किया
है, मंत्री जी
ने दो लैटर
कोट किए हैं।
मुख्यमंत्री
के 2004 के दो लैटर
कोट किए हैं ।
रखवाइये आप,
दो लैटर
रखवाइये ..(व्यवधान)
आप
प्रोसीडिंग
उठाकर देख
लें, दो लैटर कोट
किए हैं मंत्री
महोदय ने दो
लैटर मुख्यमंत्री
के कोट किए
हैं 2004 के, 2004 के
बाद एक भी
लैटर नहीं
लिखा मुख्यमंत्री
ने ...(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
अध्यक्ष
महोदय, उनका
यह कहना ही
पर्याप्त है
कि...(व्यवधान)
डा.सी.पी.जोशी:
आप
प्रोसीडिंग
उठाकर देखिए,
माननीय
मंत्री महोदय
ने मुख्य
मंत्री जी के
दो पत्र कोट
किए हैं और
दोनों पत्र 2004
के...(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
मंत्री के वक्तव्य
देने में और
मंत्रीका
यहां पर कहना
ही पर्याप्त
है...(व्यवधान)
डा.सी.पी.जोशी:
बातें कर रहे
हैं ख्वाम ख्वाह..(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
अध्यक्ष
महोदय, यह कोई
बहस का विषय
नहीं है। मंत्री
का कहना ही
पर्याप्त
है।
श्री
हरिमोहन
शर्मा: 2004 का है 2005
में कोई पत्र
नहीं लिखा, 2004 का
है..(व्यवधान)
डा.सी.पी.जोशी.:
आप क्या बात
कर रहे हैं ? ..(व्यवधान)
श्री
अशोक(खंडार):
अध्यक्ष
महोदय, पूरे
प्रदेश में
कैरोसिन की
कालाबाजारी
हो रही है।
श्री
हरिमोहन
शर्मा: यह 2004 का
है ..(व्यवधान)
2005 में जो कह रहे
हैं, 2006 में जो कह
रहे हैं ....(व्यवधान)
श्री
अशोक(खंडार):
पूरे प्रदेश
में बहुत
जोरों से कैरोसिन
की
कालाबाजारी हो
रही है..(व्यवधान)
यह जो वाद
विवाद चल रहा
है उस गरीब
गांव के किसान
को कैरोसिन
नहीं मिल रहा
है, 150 रुपए में
पाँच लीटर तेल
मिल रहा है।
श्री
हरिमोहन
शर्मा: यह 2004 का
है। ..(व्यवधान)
श्री
अमराराम(धोद):
राजस्थान के
गरीब कैरोसिन
नहीं ले पा
रहे हैं..(व्यवधान)
श्री
अशोक(खंडार):
पूरे प्रदेश
में कैरोसिन
की कालाबाजारी
बहुत जोरों से
हो रही है।
सरकार कैरोसिन
की
कालाबाजारी
में लिप्त है
माननीय अध्यक्ष
महोदय....
श्री
अमराराम (धोद):
आपकी सरकार
सक्षम सरकार
है राजस्थान
की जनता के
हिस्से का
कैरोसिन नहीं
ले पाए।
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य
स्थान ग्रहण
करें। ..(व्यवधान)
आप कोई सदस्यों
से अलग हैं क्या,
खास हैं क्या
जो आप स्थान
ग्रहण नहीं
करते हैं, खास
हैं ?
डा.सी.पी.जोशी:
जो पत्र कोट
किए हैं वह
रखें, मंत्री
जी ने दो पत्र
कोट किए हैं
मुख्यमंत्री
जी के उनको ले
करवाइये।
प्रोसीडिंग्स
के अन्दर हैं
मुख्यमंत्री
जी के दो पत्र
कोट किए हैं 2004
के बाद मुख्यमंत्री
का एक भी पत्र
नहीं है, ले
करवाइये आप..(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: मैं
आपको पढ़कर
आखिरी पैरा
सुना रही हूं।
डा.सी.पी.जोशी:
किसका? आप
पत्र की डेट
बताइये ।
श्री
अध्यक्ष: आप
सुनिए तो सही
।
डा.सी.पी.जोशी:
क्यों
सुनेंगे
हम..(व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड: यह
कैसे चलेगा,
आप आसन के साथ
इस तरह का व्यवहार
कर रहे हैं...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
अंकित नहीं हो
। आप
सुनना नहीं चाहते
हैं तो .....
डा.सी.पी.जोशी:***
श्री
अमराराम:***
श्री
राजेन्द्र
राठौड़***
श्री
कालीचरण
सराफ:***
श्री
जुबेर खान:***
डा.सी.पी.जोशी:***
श्री
राजेन्द्र
राठौड़:***
श्री
लक्ष्मीनारयण
दवे:***
श्री
नंदलाल
बंशीवाल:***
श्री
प्रमोद जैन:***
श्री
वासुदेव
देवनानी:***
श्री
अशोक(खंडार):***
डा.दिगम्बर
सिंह:***
श्री
अमराराम(धोद):***
श्री
भवानी सिंह
राजावत:***
डा.सी.पी.जोशी:***
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
माननीय सदस्य,
कृपया स्थान
ग्रहण करें,
कृपया स्थान
ग्रहण करें।
डा.सी.पी.जोशी:***
श्री
अध्यक्ष:
पहले आप
सुनिए, स्थान
ग्रहण करें।
नाथद्वारा से
आने वाले
माननीय सदस्य
यह आपका जो
रवैया है बिल्कुल
गलत है, आसन की
बात को सुनना
नहीं चाहते।
डा.सी.पी.जोशी:***
श्री
हेमाराम
चौधरी: ***
श्री
जुबेर खान:***
श्री
बंशीलाल
खटीक:***
श्री
नंदलाल
बंशीवाल:***
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
नाथद्वारा से
आने वाले
माननीय सदस्य
सी.पी.जोशी ने
जिस प्रकार
लगातार आसन की
उपेक्षा करते
हुए....
श्री
अशोक:***
श्री
अध्यक्ष: स्थान
ग्रहण करें।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
अध्यक्ष को,
आसन को बार
बार धमका कर
लगातार आसन के
आदेशों की
अवहेलना करते
हुए यह केवल
आज की बात
नहीं है, अध्यक्ष
महोदय, जब से
यह सदन
प्रारम्भ
हुआ है तब से
आज तक पिछली
बार भी जो इन्होंने
पहले किया
उसके लिए माफी
मांगी थी और
मैं यह चाहता
हूं कि यहां
पर सदन की
कार्यवाही ठीक
प्रकार से चले
और वह जो
चैलेंज करते
हैं कि बाहर
निकालने की
बात है अभी
आंध्र प्रदेश
में पूरे
विपक्ष को
बाहर निकाला
गया। ऐसी कोई
बात नहीं है
लेकिन आप हमको
मजबूर नहीं
करें ...(व्यवधान)
..कि
नाथद्वारा से
आने वाले
माननीय सदस्य
को सदन से
बाहर निकाला
जाए।
श्री
अमराराम(धोद):***
श्री
जुबेर खान:***
श्री
कैलाश
त्रिवेदी:***
श्री
अशोक(खंडार):***
श्री
बद्रीलाल
जाट:***
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
कल ही लोकसभा
के आपके जो स्पीकर
हैं सोमनाथ जी
चटर्जी उन्होंने
बड़ा खेद व्यक्त
किया है उन्होंने
यह कहा है कि
मेरी पार्टी
के जो लोग हैं यदि
वह ऐसा करते
हैं तो सबसे
ज्यादा
निकम्में
हैं । यह सोमनाथ
चटर्जी ने कहा
है कल हीकहा
है और उन्होंने
कहा है कि
मुझे मजबूर
होना
पड़ेगा..(व्यवधान)
श्री
अमराराम(धोद):***
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
जैसे आंध्र
प्रदेश में मध्यप्रदेश
में सदन से
बाहर निकाला
गया है वैसे ही
लोकसभा में
करना पड़ेगा,
अब इसके अलावा
कोई चारा नहीं
रहा।
Vns/usc/1230/1k/11.3.06
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
लोक सभा में
यह करना पड़ेगा।
अब इसके अलावा
कोई चारा नहीं
रहा है। अब लोक
सभा स्पीकर
की वह आपने
मिटा दी है,
उनका उल्लेख
करना चाहता
हूं। सोमनाथ चटर्जी
ने कहा है कि
बिना अध्यक्ष
की अनुमति के
कोई खड़ा नहीं
हो सकता और यह
कोल एण्ड
शकधर में
मेंशन है।
बिना अध्यक्ष
की अनुमति के
इस सदन में
कोई खड़ा होकर
बोल नहीं
सकता। माननीय
अध्यक्ष महोदय,
लेकिन लगातार
आपकी उदारता
का नाजायज
फायदा उठाकर,
सरकार तत्काल
जवाब देती है,
आज तक ऐसा कभी
नहीं हुआ। इस
सरकार ने छोटे
छोटे मामले
में भी वक्तव्य
दिया है लेकिन
कांग्रेस का
यह रवैया और न
केवल आपके
प्रति है,
प्रतिपक्ष के
नेता जब समझाने
गये, कल भी गये,
आज भी गये हैं
तो इनका भी
अपमान किया
गया है। इनको
तो प्रतिपक्ष
का नेता रहना है,
मजबूरी हो
सकती है
प्रतिपक्ष के
नेता महोदय
की। हालांकि
इन्होंने
कहा था कि
प्रतिपक्ष के
नेता के रूप
में चाहे
रहूं, या नहीं
रहूं लेकिन
मैं इस सदन की
परम्परा और
नियम का पालन
करने दूंगा
लेकिन आज मुझे
यह अहसास झलक
रहा है मैं
इनको....(व्यवधान)
श्री
अमराराम (धोद):***
श्री कैलाश
त्रिवेदी: ***
श्री
अमराराम (धोद): ***
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
काहे की कुश्ती
है। राजस्थान
के इतिहास में
पहली बार है
कि यह सरकार
तुरन्त जवाब
देती है...(व्यवधान)
श्री
बंशीलाल खटीक:
***
श्री
कैलाश
त्रिवेदी: ***
डा.
सी.पी.जोशी: ***
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
यह तो पहले
निकाले गये
हैं।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह: ***
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
कांग्रेस के
माननीय सदस्य
ने कभी उठायी
वहां..(व्यवधान)
श्री
जुबेर खान: ***
श्री
अध्यक्ष: स्थान
ग्रहण करें।
कृपया स्थान
ग्रहण कर लें।
मुझे बड़ा
अफसोस है कि
आसन जब कुछ
कहना चाहे,
खड़े होकर
सुनाना चाहे
और वरिष्ठ
सदस्य भी उस
पर आपत्ति
करके खड़े हो
जाएं, अपनी
बात बोलने लग
जाएं तो फिर
आसन क्या
करे, मेरे यह
बात समझ में
नहीं आती। आसन
की प्रतिष्ठा,
सदन की गरिमा
रखने का सबका
चाहे पक्ष हो,
चाहे
प्रतिपक्ष हो,
सबकी जिम्मेदारी
है..(वयवधान)
श्री
बंशीलाल खटीक:***
श्री
अध्यक्ष: बीच
में नहीं
बोलें। मैं
केवल एक पैरा
पढ़कर सुनाना
चाह रही थी
जिसमें तीन
पत्रों का हवाला
था कि तीन बार भारत
सरकार को इस
हेतु निवेदन
किया गया।
तारीख बता रही
थी इस चिट्ठी
के अन्दर जो
डा.
किरोड़ीलाल
ने लिखी है
अपनी, खाद्य
मंत्रीजी ने 17,
मणिशंकर जी
अय्यर....(व्यवधान)
डा.
सी.पी.जोशी: ***
श्री
कालीचरण सराफ:
***
श्री
बंशीलाल खटीक:
***
श्री
अध्यक्ष: मैं
बर्दाश्त
नहीं करूंगी।
मिस्टर
सी.पी. जोशी,
मैं बर्दाश्त
नहीं करूंगी।
बहुत देरहो
गयी है। बहुत
देर हो गयी
है। यह कोई तरीका
नहीं है कि
बात कहने
से..(व्यवधान)
आप आसन की बात
न सुनें..(व्यवधान)
श्री
ओ.पी.महेन्द्रा:
***
डा.
सी.पी.जोशी: ***
श्री
मोहन लाल गुप्ता:
***
श्री
अध्यक्ष:
आपकी बात
मैंने सुन ली
है। स्थान
ग्रहण कर लें
आप। आप स्थान
ग्रहण करें।
मैं आपको
पार्लियामेंटरी
प्रेक्टिस
एण्ड
प्रोसीजर आफ
पार्लियामेंट
है, उसको और
किसी को नहीं
खास तौर से
नाथद्वारा से
आने वाले माननीय
सदस्य को याद
दिला रही हूं।
“Maintenance
of order in the House is a fundamental duty of the Speaker. He derives his
disciplinary powers from the rules and his decisions in the matters of
disciplines are not to be challenged except of a substantive motion.”
पहली
बात तो यह सुन
लीजिये।
दूसरी बात मैं
आपको यह निवेदन
करना चाहती
हूं कि जो लोग
बार-बार खड़े
होकर, जो
माननीय सदस्य
आसन की
उपेक्षा करते
हैं, आसन के
आदेश को नहीं
मानते हैं
उनको मैं याद
दिलाना
चाहूंगी जबकि मैं
पहले भी पढ़कर
सुना चुकी
हूं। मैं फिर
याद दिलाना
चाहूंगी कि लिनियेंसी
का आप लोग कई
बार अनुचित
फायदा उठाते
हैं। मैं एक
महिला होने के
नाते समझती
हूं और एक अध्यक्ष
होने के नाते
भी समझती हूं
कि प्रतिपक्ष
का अपनी बात कहने
का अवसर मिलना
चाहिये लेकिन
इसका मतलब यह
नहीं है।
इसलिये मेरी
इस उदारता का
आप लोग जो अनुचित
फायदा उठा रहे
हैं मैं क्षमा
चाहूंगी आपसे
भविष्य में
मैं ऐसा नहीं
होने दूंगी।
यदि आपका यही रवैया
रहा तो भविष्य
में ऐसा नहीं
होगा।
मैं आपको
पढ़कर सभी
माननीय सदस्यों
को सुनाना
चाहती हूं।
पहले हमारे जो
स्पीकर थे,
सबसे पहले
मावलंकर साहब
जो कांस्टीट्एंट
असेम्बली के
अध्यक्ष थे,
उन्होंने यह
लिखा है कि एक
बार …
“I have already noted before that none of his decisions in the House
can be challenged even though he may be wrong. But apart from this he exercises
a very effective powers of control because of the rules that only that Member
can put questions or can speak who is called upon by the Speaker to do so. The
result is that Speaker have refused to call upon Members to put questions or to speak…..”
जो
और लोग बात
करते हैं ना
मैं उनको खास
तौर से कह रही
हूं।
“….unless
the Members behave properly and make amend in case they have done something
which has offended the dignity of the Chair of the House. I know of one case
when late Shri Bithalbhai Patel refused to call upon one particular Member for
any question or speech for a period of about one month, the result was as
desired. The Member had to capitulate and apologize and then things went on
normally with him. He should know that no Hon’ble Member has a right to protest
against the ruling of the Speaker. A Member’s first and only duty is to submit
to it and if he is dissatisfied he has other remedies under the rules. He can
move a motion for the removal of the Speaker or some such things but that is a different
matter.”
मतलब
साफ है कि
किसी को भी यह
अधिकार नहीं
है कि चेयर ने,
इस आसन ने जो
व्यवस्था
दे दी उसे कोई
भी चेलेंज करे
और यदि इस तरह
से
डिसओबिडिएंस
कोई सदस्य
लगातार करता
है तो अध्यक्ष
को इस बात का
अधिकार है कि
अध्यक्ष उसे
कभी बोलने भी
नहीं दे, उसकी
तरु देखे भी
नहीं, जब तक वह
माफी नहीं
मांगे, क्षमा
नहीं मांगे।
यह भी इसमें
साफ लिखा हुआ
है।
डा.
सी.पी.जोशी:***
श्री
गोविन्दराम
चौहान: ***
श्री
कालीचरण सराफ:
***
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
आपके बिना
आदेश के कैसे
बोल रहे हैं।
श्री
अध्यक्ष: माननीय
सदस्यों को
मैं सुना रही
थी..(व्यवधान)
बात यहीं समाप्त
हुई..(व्यवधान)
आपसे मैं यह
अपेक्षा नहीं
करती हूं। आपसे
मैं यह
अपेक्षा नहीं
करती हूं कि
आप इस बात को न
समझें। मैं जब
बताना चाह रही
थी तो आपने सुना
नहीं और आप
खड़े होकर
भाषण देने लग
जाते हैं। आपके
साथ भी वही
करना पड़ेगा
जो विट्ठल भाई
पटेल ने किया
था...
डा.
सी.पी.जोशी:***
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता,
प्रतिपक्ष):
आपकी व्यवस्था
शिरोधार्य है
लेकिन यह भी
व्यवस्था
है, यह भी
प्रेक्टिस है
कि the
Speaker is the most humble servant of the House.
यह भी व्यवस्था
है और यह भी व्यवस्था
है कि the Speaker is the voice of the House.
यह भी व्यवस्था
है। अब आप
हमारी बात
नहीं सुनें, ...
श्री
अध्यक्ष:
कौनसी बात
नहीं सुनी ?
श्री
रामनारायण
चौधरी: गुढ़ा
से आने वाले
माननीय सदस्य
को कितनी बार आपने
फटकार
दिया..(व्यवधान)
डा.
सी.पी.जोशी: ***
श्री
रामनारायण
चौधरी: हमारे
सरकारी मुख्य
सचेतक, यह क्या
स्पेशल
प्रिविलेज्ड
हैं क्या ? जो
मर्जी आये उस
पर खड़े हो
जाते हैं। यह
तो कोई बात
नहीं होती।
श्री
अध्यक्ष:
प्रिविलेज्ड
तो यहां पर केवल
दो ही पर्सन
हैं, या तो
लीडर आफ दी
हाउस, या
प्रतिपक्ष के
नेता, और कोई
प्रिविलेज्ड
है ही नहीं।
दो ही को
प्रिविलेज्ड
है।
ssy/usc/1240/1l
श्री
रामनारायण
चौधरी: व्यवस्था
है कि इस हाउस
में...(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद: यदि
मैं अध्यक्ष
जी की आज्ञा
की अवहेलना
करता हूं तो
अध्यक्ष जी
कह दें, मैं
अपनी
ईमानदारी से
कहता हूं कि
दुबारा लौटकर
के नहीं
आऊंगा(व्यवधान)
मैं विधान सभा
में लौटकर
नहीं आऊंगा अभी
चला जाता हूं
।
श्री
अमराराम(धोद):
ईमानदारी क्या
होती है(व्यवधान)
एक
माननीय सदस्य:
बाहर निकल जाओ
।
श्री
महावीर
प्रसाद: यदि
स्पीकर साहब
यह फील करें
कि मैं इनकी
बिना इजाजत के खड़ा
हुआ हों और
मैंने इसका
दुरूपयोग किया
है तो मैं
आपको सत्य
कहता हूं कि
अभी विधान सभा
से जाने के
लिए तैयार हूं
।
श्री
रामनारायण
चौधरी: वह बात
नहीं है ।
इतना आगे जाने
की जरूरत नहीं
है । हाउस की
यह व्यवस्था
है । माननीय
स्पीकर की यह
व्यवस्था
है कि हमेशा privilege, at any moment, is of the
Speaker. Then the Leader of the House
and then the Leader of the Opposition.
If the Speaker is on his/her legs, everybody will sit down, including
the Leader of the House, the Leader of the Opposition and all other
members. And when the Leader of the
House stands up, the whole House … (interruptions) …
श्री
अध्यक्ष: बीच
में नहीं
बोलें ।
श्री
रामनारायण
चौधरी: यह डिग्निटी
ऑफ दी हाउस है
। इसको मेनटेन
करने की जिम्मेदारी
आपकी है । हम आपको
फॉलो करेंगे ।
लेकिन आप ही
डिग्निटी
मेनटेन नहीं
करें तो हम भी
वही करने लग
जायेंगे । आप
हमारी इज्जत
ही नहीं करते
हैं ।
श्री
अध्यक्ष:
सबकी है जिम्मेदारी
।
श्री
महावीर
प्रसाद:
माननीय
प्रतिपक्ष के
नेता महोदय जब
खड़े होते
हैं, हमारा
कोई भी माननीय
सदस्य खड़ाा
होता है, जब
आसन खड़ा होता
है या
प्रतिपक्ष के नेता
होने के नाते
आप खड़े होते
हैं तो मैं सबको
टोकता हूं
बल्कि डांटता
भी हूं, रोकता
हूं, टोकता
हूं और जरूरत
हो तो डांटता
भी हूं । मैं
इस बारे में
बहुत कड़ा हूं
। आप स्वयं
देख रहे होंगे
कि मैंने अभी
हमारे कई
वरिष्ठ सदस्यों
को कहा कि बैठ
जायें और आपने
सुना भी होगा (व्यवधान)
श्री
हेमाराम
चौधरी: अध्यक्ष
महोदय, माननीय
सदस्य को
टोकना, डांटना
यह कौनसी भाषा
है(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद: ऐसा
नहीं हो सकता
है कि केवल हम
आपसे ही
अपेक्षा करें
और हम जो
बोलते हैं
उसकी पालना हम
नहीं करें ।
ऐसा कभी संभव
नहीं है कि हमारे
रहते हुए आसन
का अपमान कोई करेगा
उसको हम
बर्दाश्त
नहीं करेंगे।
चाहे इधर से
हो और चाहे
उधर से हो ।
श्री
रामनारायण
चौधरी: वह हम
भी नहीं
करेंगे हम न
तो करेंगे और ना
बर्दाश्त करेंगे
।
श्री
महावीर
प्रसाद: मैं
आपका विश्वास
दिलाता हूं और
यदि हम इसमें
असफल रहे तो इस
पद पर नहीं
रहूंगा । मैं
यह भी आपसे
कहना चाहूंगा
।
डॉ.श्रीगोपाल
बाहेती: अध्यक्ष
महोदय, किसी
भी मेम्बर का
यह लक्ष्य
नहीं है कि
आसन का अपमान
करें । व्यवस्था
इस बात की है
कि पक्ष
गंभीरता रखे, शालीनता
रखे और एक
सामान्य बात
थी कि माननीय
खाद्य मंत्री
महोदय ने जो कोट
किया है मुख्यमंत्री
जी के पत्र का
वह सदन में रख
दें और उसकी
डेट बता दें ।
लंबी बात नहीं
है और इसमें
किसी का
उद्देश्य यह
नहीं है कि
आपका अपमान
करें ।
श्री
नरपत सिंह राजवी:
अध्यक्ष
महोदय, आज
प्रतिपक्ष के
नेता और आसन
की तरफ से
अंग्रेजी
भाषा में
वाद-विवाद
काफी हुआ ।
काफी लोगों को
शायद समझ में
नहीं आया ।
हां, सुंदर
काका समझ गये
होंगे ।
श्री
अध्यक्ष:
छोड़ें,
छोड़ें, जो
पत्र खाद्य
मंत्री जी ने
लिखा
पेट्रोलियम
मंत्री मणिशंकर
जी अय्यर को
उसकी लॉस्ट
पैराग्राफ
रिप्रोड्युस
कर रही हूं ।
उपरोक्त
संबंध में
निवेदन है कि
केरोसीन के
आबंटन वृद्वि
हेतु राज्य
सरकार द्वारा
विभागीय पत्र
क्रमांक एफ 30(1)
खावि/केरोसीन-3
दिनांक 17.12.(3)
उसके बाद...(व्यवधान)
नहीं, उस वक्त
गवर्नमेंट आ गयी
थी वसुन्धरा
राजे जी की ।
श्री
संयम लोढ़ा:
अध्यक्ष
महोदय, 17.12.2003 को
अटल बिहारी
वाजपेयी
प्रधानमंत्री
थे और उनकी
सरकार के वक्त
में यह...(व्यवधान)
(माननीय
अध्यक्ष
महोदय द्वारा
इशारे से
अंकित नहीं
होने के
निर्देश)
डॉ.सी.पी.जोशी:
***
श्री
अमराराम(धोद): ***
श्री
अध्यक्ष:
चुनाव नवम्बर
में हुए हैं ।
श्री
अमराराम(धोद): ***
श्री
जुबेर खान: ***
श्री
संयम लोढ़ा: ***
श्री
अध्यक्ष: 2004
में है, अब आप सुनिये
तो सही ।
डॉ.सी.पी.जोशी:
***
श्री
अध्यक्ष: क्या
सुनें बात ।
पहले मुझे
सुनिये आप । 17.12;2004
की चिट्ठी है
और उसमें 17.12.2003 का
प्रेषित पत्र
लिखा है ।
उसके बाद
दूसरी चिट्ठी
लिखी है । 7.1.2004 को
ठीक है, फिर 31.1.2004
को और है, मैं
आशा करता हूं
कि आप उपरोक्त
परिस्थितियों
को मद्दे नजर
रखते हुए राज्य
को पाँच हजार
के.एल.
केरोसीन के
अतिरिक्त आवंटन
में वृद्वि
करके राज्य
के उपभोक्ताओं
को अनुदान के
रूप में राहत
प्रदान करें ।
यह चिट्ठी
लिखी है ।
डॉ.सी.पी.जोशी:
***
श्री
अध्यक्ष:
विपक्षी
गवर्नमेंट...(व्यवधान)
पहले की लिखी
हुई चिट्ठी थी
। उसका भी
हवाला दे दिया
उसमें क्या
दिक्कत है और
खुद ने भी लिख
दी इसमें क्या
दिक्कत है ।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह: ***
श्री
अमराराम(धोद): ***
श्री
प्रद्युम्न
सिंह: ***
श्री
संयम लोढ़ा: ***
श्री
अध्यक्ष:
मंत्री जी कुछ
कह रहे हैं ।
श्री
जुबेर खान: ***
डॉ.सी.पी.जोशी:
***
श्री
अध्यक्ष:
आपको क्या
पता लिखी होगी,
दो साल में भी
लिखी होगी ।
डॉ.सी.पी.जोशी:
***
श्री
अमराराम: ***
डॉ.किरोडीलाल(खाद्य
मंत्री):
बिराजें तो
सही आप(व्यवधान)
(श्री
अध्यक्ष
द्वारा हाथ के
इशारे से
अंकित नहीं
होने के
निर्देश)
श्री
अध्यक्ष:
मंत्री जी
खड़ें हैं, स्थान
ग्रहण
कर लें ।
श्री
जुबेर खान: ***
श्री
अध्यक्ष: आप
उन्हें सुन
लें, एक मिनट
सुन लें ।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह: ***
श्री
अध्यक्ष: वह
खड़े हैं, अब
आप बिराजें ।
डॉ.किरोड़ीलाल:
मैंने खुद ने
मणिशंकर जी को
जाकर के पत्र
दिया था ।
दिल्ली में
मणिशंकर जी
मंत्री थे,
मैं स्टेट में
मंत्री था फूड
एंड सप्लाई
का और उसके
बाद पत्र लिखा
है हमारे
प्रिंसिपल
सेक्रेटरी ने
दिसम्बर 28,2005 को
उसकसे भी मैं
टेबल पर रखता
हूं ।
डॉ.सी.पी.जोशी:
***
श्री
जुबेर खान: ***
श्री
मोहनलाल गुप्ता:
***
श्री
जुबेर खान: ***
jyg/akt/1250/1m/11032006
श्री अमराराम
(धोद): ***
श्री रामप्रताप
कासनिया (पीलीबंगा): ***
श्री मदन राठौड़
(सुमेरपुर): ***
श्री अमराराम
(धोद): ***
श्री अशोक बैरवा
'खण्डार' (खण्डार):***
श्री मदन राठौड़
(सुमेरपुर):***
श्री रामप्रताप
कासनिया (पीलीबंगा):***
श्री राजेन्द्र
राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री):***
श्री हीरालाल
(निवाई):***
श्री संयम लोढ़ा
(सिरोही): ***
(प्रतिपक्ष के
माननीय सदस्यों द्वारा
नारेबाजी)
...(व्यवधान)...
श्री अध्यक्ष: माननीय मंत्रीजी कुछ कहना
चाह रहे हैं, आप लोग उन्हें सुनना नहीं चाहते हैं, नहीं सुनना चाहते हैं तो
बाहर चले जाएं आप। या तो आप मंत्रीजी को सुनिए, नहीं सुनना चाहते हैं तो कृपा करके
बाहर चले जाइए।
...(व्यवधान)...
श्री अमराराम (धोद): ***
श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढा): ***
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक
निर्माण मंत्री): ***
श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***
(माननीय सदस्य, श्री रणवीर सिंह गुढा द्वारा सदन के वैल में
चूडि़यां फेंकी गई
और काला कपड़ा लहराया गया।)
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक
निर्माण मंत्री): ***
श्री अमराराम (धोद): ***
श्री रणवीर सिंह गुढ़ा: ***
डा. दिगम्बर सिंह (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य
मंत्री): ***
श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): ***
(प्रतिपक्ष के
माननीय सदस्यों
द्वारा नारेबाजी जारी)
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक):
माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य श्री रणवीर सिंह गुढा ने काला कपड़ा और
चूडि़यां फेंकी है, इस सदन का अपमान हुआ है, आसन का और वह जिस प्रकार आसन पर झपटे
हैं, मैं प्रस्ताव करता हूं कि उनको आज के लिए सदन से बाहर निकाला जाए, आज पूरे
दिन के लिए।
श्री अध्यक्ष: क्या सदन की अनुमति है कि
श्री रणवीर सिंह गुढा को आज दिन भर के लिए सदन से निलम्बित कर दिया जाए?
(स्वीकृत)
मार्शल
!
रणवीर सिंह गुढ़ा को आज दिन भर के लिए सदन से निलम्बित किया जाता
है।
...(व्यवधान)...
श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***
श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): ***
डा. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): ***
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक
निर्माण मंत्री): ***
श्री अध्यक्ष: मैंने गुढा को, मैंने
रणवीर सिंह गुढा को आज इनके प्रस्ताव पर सारे दिन के लिए इस सदन से निलम्बित किया
है । ...(व्यवधान)... क्या समझ लिया सदन को? ...(व्यवधान)... जाइए, पधारिए।
...(व्यवधान)...
(माननीय सदस्य श्री रणवीर सिंह गुढा को
मार्शल
द्वारा सदन से बाहर निकाला गया)
...(व्यवधान)...
(प्रतिपक्ष के
माननीय सदस्यों द्वारा सदन का बर्हिगमन)
...(व्यवधान)...
11.3.06/gpc/akt/1300/1n
श्री
अध्यक्ष: मुझे
बड़ा अफसोस है
कि सन् 52 से लेकर
आज दिन तक इस विधान
सभा के अंदर किसी
भी माननीय सदस्य
ने इस प्रकार काला
झण्डा या काला
कोट किसी को दिखाया
नहीं है, काला कपड़ा
किसी को
दिखाया नहीं है।
श्री
राजेन्द्र राठौड़:
चूडि़यां फैंकी
है।
श्री
अध्यक्ष: इस प्रकार
से चूडि़यां फैंकी
हो। ...(व्यवधान)...
आसन पांवों पर।
आसन जब पांवों
पर होता है तो
न शोर मचाया जाना
चाहिए, न अपने स्थान
से उठना चाहिए,
न बहिर्गमन करना
चाहिए, न बाहर जाना
चाहिए। आप लोगों
को पता नहीं क्या
हो जाता है? क्या
आपको इतनी जल्दबाजी
होती है? मुझे बड़ा
अफसोस है कि 54 साल
के राजस्थान विधान
सभा के इतिहास
में पहली बार इस
प्रकार की दुखद
घटना हुई है उसका
मुझे बड़ा खेद
है। आखिर हम सदन
की गरिमा को कहां
ले जाकर छोड़ेंगे?
इस गरिमा को रहने
भी देंगे या नहीं
रहने देंगे। आज
पूरे हिन्दुस्तान
में राजस्थान
विधान सभा के बारे
में लोग चर्चा
करते हैं, बात करते
हैं कि राजस्थान
विधान सभा फिर
भी बहुत ठीक गरिमा
से और फिर भी बहुत
अच्छी है
कंपेरेटिवली और
स्टेट्स के। हम
आखिर यह सब काम
करके इस विधान
सभा को कहां
पहुंचाना चाहते
हैं, इस विधान सभा
को कहां ले जाना
चाहते हैं मुझे
बड़ा अफसोस है
इस बात का।
मुझे
इस बात का भी बड़ा
अफसोस है कि प्रतिपक्ष
कैसा भी हो, कितना
भी विचार वैभिन्य
हो, लेकिन कम से
कम इस तरह का कभी
व्यवहार नहीं
करता कि अध्यक्ष
को सुने नहीं, मंत्री
का वक्तव्य सुने
नहीं, मंत्री को
बात पूरी कहने
दे नहीं, मुझे इस
बात का अफसोस है
कि प्रतिपक्ष जिस
तरह का गैर जिम्मेदाराना
व्यवहार कर
रहा है कैसे चैक
किया जाए, मुझे
तो खुद यह बात समझ
में नहीं आ रही
है।
एक माननीय
सदस्य: बाहर निकाल
दो।
श्री
अध्यक्ष: खैर,
बाहर निकालना भी
कोई इसका वो नहीं
है, लेकिन
एकाध को तो निकालना
पड़ेगा तभी जाकर
ठीक काम होगा।
मंत्रीजी, आप कुछ
कहना चाहते हैं
तो कह दें ताकि
रिकार्ड में ठीक
आ जाए।
डा. किरोड़ीलाल:
इसमें एक
स्थिति मैं स्पष्ट
करना चाहता हूं।
एक पत्र तो मैंने
दे दिया जो मेरे
प्रिंसिपल
सेक्रेट्री ने
दिसम्बर, 2005 में
लिखा था। यह पत्र
जो मैंने दिसम्बर,
2004 में लिखा है यह
अध्यक्ष महोदय,
मैं फूड सिविल
सप्लाई मिनिस्टर
स्टेट का था और
वहां मणिशंकर जी
भारत सरकार में
मंत्री थे और यूपीए
की सरकार थी। वह
चार्ज यह लगा रहे
हैं मणिशंकर अय्यर
मंत्री नहीं थे
और यूपीए की सरकार
नहीं थी। यूपीए
की सरकार के
समय में लिखा हुआ
पत्र है और मेरे
हाथ के द्वारा
मणिशंकर जी अय्यर
को दिया हुआ
पत्र है। उसके
बाद भी किसी प्रकार
का कोटा भारत सरकार
ने नहीं बढ़ाया
और निरन्तर
कोटा हमको कम किया
जा रहा है बार-बार
कहने के बावजूद
भी। ये कह रहे हैं
चुनाव मई में हुए
थे। लोकसभा के
चुनाव मई, 2004 में हुए
थे जैसा आप सबको
ध्यान है।
अध्यक्षजी,
आपका मैं ध्यान
दिला दूं मई, 2004 में
लोकसभा के चुनाव
हुए थे और दिसम्बर
में जब मैंने दिया
था जब मैं मंत्री
बन गया था, दिसम्बर,
2004 में यूपीए की सरकार
में मणिशंकर जी
अय्यर केन्द्रीय
मंत्री थे। मैंने
मंत्री बनते
ही यह पत्र उनके
हाथ में थमाया
था।
श्री
अध्यक्ष: मई में
बने हैं वे मंत्री।
डा. किरोड़ीलाल:
हां। केन्द्र
में वे मंत्री
थे, स्टेट में
मैं था, मंत्री
की हैसियत से मैंने
उनको पत्र दिया
था और जितने भी
पत्र माननीय मुख्यमंत्रीजी
ने केन्द्र सरकार
को लिखे थे मैंने
उनका हवाला डाला
था, मेरे पास उपलब्ध
नहीं है, चाहे राम
नाइक जी मंत्री
थे, हम इसको पोलिटिकल
रूप नहीं देना
चाहते। तत्समय
भी मुख्यमंत्रीजी
ने पत्र लिखे थे
उन पत्रों को आप
जब उचित समझोगे
तब मैं सदन के पटल
पर रख दूंगा। प्रतिपक्ष
के सदस्य
इसको राजनैतिक
रूप देना चाहते
हैं। हमारे यहां
वास्तव में केरोसिन
की किल्लत है,
ढ़ाई या तीन लीटर
से ज्यादा केरोसिन
दे नहीं पा रहे
हैं। हम चाहते
हैं राजस्थान
की जनता को कम से
कम पर राशनकार्ड
पाँच लीटर केरोसिन
तो मिले, लेकिन
पाँच लीटर
केरोसिन हमें नहीं
मिल रहा है और पाँच
लीटर हम केरोसिन
देना चाहते हैं
तो हमें 50774 के.एल.
की जरूरत है उतना
केरोसिन हमें नहीं
मिल रहा है। इसको
राजनैतिक रूप
नहीं दिया जाए।
मैं प्रतिपक्ष
के सदस्यों को
कहना चाहता हूं
जो बाहर हैं, यहां
नहीं हैं, पर कहीं
न कहीं टीवी पर
मेरा बयान सुन
रहे होंगे वे मेरे
इस्तीफे की
मांग कर रहे हैं।
इस पर अगर जाना
चाहते हैं कि इन्होंने
यूपीए की सरकार
के रहते हुए कोई
पत्र नहीं लिखा,
यूपीए की सरकार
के रहते हुए मैंने
पत्र लिखा है।
मैंने पत्र ही
नहीं लिखा इसलिए
इस्तीफे की मांग
कर रहे हैं। जो
इस्तीफे की मांग
करें वे खुद ही
इस्तीफा देकर
इस सदन से चले जाएं।
श्री
अध्यक्ष: मोहम्मद
माहिर आजाद।
(अनुपस्थित)
श्री
तगाराम चौधरी।
श्री
तगाराम चौधरी
(बाड़मेर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं आपकी
अनुमति से पर्ची
के माध्यम से
बाड़मेर जिला मुख्यालय
पर जो मुख्य चिकित्सालय
है उनकी पूर्व
के उपेक्षापूर्ण
कृत्य से जो कई
दिनों से उनमें
पद रिक्त पड़े
थे मैं माननीय
चिकित्सा मंत्री
महोदय, मुख्यमंत्री
महोदय को बधाई
दूं कि कई पद भरे
भी गये, परन्तु
इतने पद रिक्त
थे जिसका कोई हिसाब
नहीं था। वहां
गरीबों का इलाज
करने वाला डाक्टर
नहीं मिलता था।
ऐसी स्थिति वर्षों
से रही। मुझे बड़ा
अफसोस हुआ जब मैं
चुनकर आया तो मैं
चिकित्सालय में
गया और उनकी
हालत देखी वह बड़ी
दयनीय थी। अब हालत
सुधरी है, परन्तु
मैं आपके माध्यम
से यह निवेदन जरूर
करना चाहूंगा कि
जो भी पद अभी रिक्त
हैं उन पदों को
तत्काल भरा जाए।
पदों की सूची मैं
पढ़ दूं। वरिष्ठ
विशेषज्ञ के स्वीकृत
पद 5 और रिक्त पद
एक स्त्री
रोग। कनिष्ठ विशेषज्ञ
स्वीकृत पद 10 रिक्त
पद 4 । ये भरे गये,
ये भी इसी तरह
खाली थे उनमें
से भरे गये इसलिए
कम रिक्त है, परन्तु
ये पद भी भरने के
लिए मैं आपके माध्यम
से मंत्री महोदय
से निवेदन करना
चाहूंगा।
वरिष्ठ
चिकित्सक चिकित्साधिकारी
स्वीकृत पद हैं
4, रिक्त पद हैं
3 । चिकित्सा अधिकारी
स्वीकृत पद हैं
18, परन्तु उनमें
11 पद रिक्त हैं।
मुख्य बात तो
यह है कि प्रयत्न
किया गया डाक्टरों
के आदेश भी करवाये
गये, लेकिन वे
जॉइन नहीं कर रहे
हैं। आप यह तो मानते
हैं बाड़मेर जिला
सीमावर्ती जिला
है, बाड़मेर जिले
में सुविधाओं का
अभाव है इसलिए
कोई डाक्टर जाने
में भी असमर्थ
है और जाता नहीं
है। मैं पुन: आपके
माध्यम से चिकित्सा
मंत्री महोदय से
करबद्ध
प्रार्थना करूंगा
कि किसी न किसी
तरह से इन पदों
को भरकर वहां की
जनता की सुध लें,
जैसे आपने ली है।
आपने एएनएम के
पद बहुत भारी मात्रा
में हमको दिये।
आपने चिकित्सालय
भी क्रमोन्न्त
किये, सब कुछ किया,
चिकित्सालय में
आपने भरपूर बजट
दिया, सारी व्यवस्थाएं
हुई हैं, लेकिन
जो कमी रह गई है
उनको आप किसी तरह
से आगे पूर्ण कराएं,
मेरा पर्ची के
माध्यम से इतना
ही निवेदन है।
आपने समय दिया,
आपका बहुत-बहुत
आभारी हूं।
डा. दिगम्बर
सिंह: अध्यक्ष
महोदय, बाड़मेर
जिला मुख्यालय
और बाड़मेर जिले
में यह बात सही
है माननीय सदस्य
की जो पीड़ा है
वैकेन्सीज है।
बाड़मेर डिस्ट्रिक्ट
होस्पिटल में सीनियर
स्पेशलिस्ट
के 5 पद हैं, पांचों
भरे हुए हैं, उसमें
तो वैकेंसी नहीं
है, जूनियर स्पेशलिस्ट
की वैकेंसीज हैं
और मेडिकल आफिसर्स
की वैकेंसीज हैं।
अभी राजस्थान
पब्लिक सर्विस
कमीशन से 369 डाक्टर्स
का रिक्रूटमेंट
किया है, अभी उनका
रिजल्ट आया है,
उनके पुलिस वेरीफिकेशन
के बाद मैं माननीय
सदस्य को आश्वासन
देना चाहता हूं
कि प्रायरटी से
बाड़मेर के जो
रिक्त पद हैं
उनको भरने का पूरा-पूरा
प्रयास करेंगे।
श्री
अध्यक्ष: बहुत
अच्छा। श्री एन.एस.
गुर्जर। बजट पर
सामान्य वाद-विवाद।
mlb/akt/1o/1310/11.3.2006
सदन
की मेज पर रखे
गये पत्र
प्रतिवेदन
राजस्थान
राज्य सड़क
परिवहन निगम
का 41वां
वार्षिक
प्रतिवेदन
श्री अध्यक्ष: सॉरी, एक सैकण्ड, सदन की मेज पर रखे जाने वाले पत्रादि।
श्री युनूस खान।
श्री युनूस खान (प्रभारी मंत्रि): अध्यक्ष महोदय, मैं
आपकी अनुमति से सड़क परिवहन निगम अधिनियम, 1950 की धारा 35(2) के अन्तर्गत राजस्थान
राज्य सड़क परिवहन निगम का 41वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2004-05 सदन की मेज पर
रखता हूं।
याचिकाओं
का उपस्थापन
श्री अध्यक्ष: याचिकाओं का उपस्थापन।
श्री तगाराम चौधरी।
श्री तगाराम चौधरी (बाड़मेर): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं
आपकी अनुमति से निम्नांकित दो याचिकाओं का उपस्थापन करता हूं :-
1. राजकीय वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत विद्यालय बायतु जिला बाड़मेर को संस्कृत
महाविद्यालय में क्रमोन्नत करने बाबत् सात व्यक्तियों द्वारा हस्ताक्षरित एवं
2. विधान सभा क्षेत्र बाड़मेर के तहसील एवं पंचायत समिति मुख्यालय बायतु जिला
बाड़मेर में उपखण्ड अधिकारी कार्यालय खुलवाने बाबत सात व्यक्तियों द्वारा हस्ताक्षरित
दोनों याचिकाएं उपस्थापित करता हूं।
श्री अध्यक्ष: श्री वीरेन्द्र बेनीवाल
– अनुपस्थित।
श्री बंशीलाल खटीक।
श्री बंशीलील खटीक (राजसमंद): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं
आपकी अनुमति से राजकीय आर.के.
चिकित्सालय जिला राजसमंद को 100 शैय्याओं (बैड) से 200
शैय्याओं (बैड) से 200 शैय्याओं (बैड) में क्रमोन्नत करने बाबत पाँच व्यक्तियों
द्वारा हस्ताक्षरित याचिका का उपस्थापन करता हूं।
आय-व्ययक
पर सामान्य
वाद-विवाद
श्री अध्यक्ष:
श्री एन.एस. गुर्जर।
डा. एन.एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): माननीय अध्यक्ष महोदय,
आपने मुझे बोलने का समय दिया इसके लिए आपके प्रति आभार व्यक्त करता हूं। अध्यक्ष
महोदय, इस बजट में ...
श्री मोहनलाल गुप्ता: आज विपक्ष नहीं है।
डा. एन.एस. गुर्जर: कोई बात नहीं है।
श्री अध्यक्ष: न होगा तो विपक्ष। ...(व्यवधान)...
डा. एन.एस. गुर्जर: इस बजट में माननीय मुख्य मंत्री जी ने सामाजिक सेवाओं पर
विशेष जोर दिया है वहीं इकानामिक्स सर्विसेज पर विशेष ध्यान देकर राजस्थान को
विकसित प्रदेशों की श्रेणी में लाने का प्रयत्न किया गया है। अध्यक्ष महोदय, जब वह
परिवर्तन यात्रा पर थी तो उन्होंने गरीब का चेहरा देखा लोग बेसहारा देखे,
महिलाओं, विधवाओं, वृद्धों, असहाय लोगों की विवशता देखी, किसानों की सिसकियाँ देखी
इसलिए उन्होंने यह बजट बनाते समय बच्चों के वात्सल्य को, युवाओं की बेरोजगारी
से जूझने का दर्द का उन्होंने ध्यान रखा, हर वर्ग का ध्यान रख्पाते हुए उन्होंने
हर वर्ग को कुछ न कुछ देने का प्रयास किया है। इसमें ्रइस बात की स्पष्ट झलक
मिलती है इस बजट में इसलिए जहां शिक्षा, स्वास्थ्य, जल प्रबंधन, बेरोजगारी,
आधारभूत ढांचे को मजबूत बनाने का प्रयत्न, बाहरी निवेश अधिक हो, इसका वातावरण
बनाने का प्रयास, यह सब इस बजट में किया है। अभी, अध्यक्ष महोदय, कल जब
माननीय प्रतिपक्ष के नेता इस बजट पर बोल रहे थे। तो उन्होंने कई मुद्दे उठाये थे।
लेकिन उनका जवाब देने से पहले, जब शासन हमने सँभाला था, अध्यक्ष महोदय, तो
टेंथ फाइनैंस कमीशन ने कुछ स्टेट्स को केटेगराइज किया था और केटेगराइज करते समय
उन्होंने कहा कि जो जो स्टेट्स रेवेन्यु एक्सपेंडीचर को राजस्व खर्च का
इंटरेस्ट पेमेंट 17 परसेंट से ज्यादा करते हैं वह हाई फिस्कल डेफिसिट के अन्तर्गत
आते हैं तो हमारा राजस्थान हाई फिस्कल स्टेट्स में उस समय फंसा हुआ था। मैं
आपका ध्यान दिलाना चाहूंगा ज्यों कि 1998-99 में जिस समय हमने सरकार छोड़ी interest payment of revenue
expenditure was only 19.24 per cent. यह केवल उससे थोड़ा श्री 17 प्रतिशत से 19 प्रतिशत ज्यादा था लेकिन उसके बाद लगातार यह
बढ़ता गया, 1998-99 के बाद यह लगातार 21, 22, 23, 24, 25 यह लगातार बढ़ता गया। यह
सरकार प्रयत्न कर रही है कि उसको कम करें, ताकि हाई फिस्कल डेफिसिट स्टेट्स से हमारा
प्रदेश बाहर आए और इसके लिए कुछ प्रयत्न भी किये हैं। अध्यक्ष महोदय,
रेवेन्यु
रिसीट्स को बढ़ाया, प्रयत्न करते समय 2004-05 और 2005-06 में जो इंक्रीज हुए हैं
केवल परसेंटेज ही मैं बताऊंगा क्योंकि समय की पाबंदी है, 16.78 परसेट रेवेन्यु
एक्सपेंडीचर बढ़ा, 2005-06, 2006-07 में 15.6 परसेंट बढ़ा और यदि 2002-03 जब ये
सत्ता में थे।, उस वर्ष की 2006-07 से तुलना करें तो करीब 83.39 परसेंट, करीब 83
परसेंट रेवेन्यु रिसीट्स एक्सपेंडीचर बढ़ा है। इसलिए एकदम ज्यादा रेवेन्यु
असेट्स बढ़ना यह साफ झलकता है कि प्रदेश आर्थिक वित्तीय प्रबंधन की तरफ, विकास की
तरफ मजबूती से बढ़ रहा है क्योंकि यह सामाजिक सेवाओं में सब कुछ व्यवस्था की,
राजस्थान में विकास की व्यवस्था की, पैसा कहां से आएगा ? इसलिए वित्तीय
प्रबंधन पर जोर दिया गया और उसका परिणाम यह रहा, वित्तीय प्रबंधन कैसा होता उसके
लिए रेवेन्यु रिसीट्स को बढ़ाकर जो मैंने आपको आंकड़े दिये, उसी तरह रेवेन्यु
एक्सपेंडीचर को विकास के लिए बढ़ाया गया, रेवेन्यु एक्सपेंडीचर प्लेन का तो
बढ़ा लेकिन दूसरी चीजों का रेवेन्यु एक्सपेंडीचर घटाया गया, 2002-03, 2004-2005
में रेवेन्यु एक्सपेंडीचर 16.98 परसेंट था, राजस्व व्यय वहीं 2004-05, 2005-06
में यह 8.56 परसेंट बढ़ा। यह कम क्यों हुआ क्योंकि इसका ज्यादातर हिस्सा प्लेन में बढ़ाकर नॉन प्लेन एक्सपेंडीचर
थोड़ा कम हुआ। इसी तरह 2005-06, 2006-07 में 11.21 परसेंट बढ़ा, यह क्यों बढ़ा ? यह
थोड़ा सा
फिर 2004-05, 2005-06 से बढ़ा
लेकिन इसका हिस्सा भी प्लेन एक्सपेंडीचर में बढ़ा उसमें कम बढ़ा इसलिए यह वित्तीय
प्रबंधन के लिए यह कोशिश की गई कि क्या क्या इंडीगेटर्स हैं अच्छे वित्तीय
प्रबंधन के, यह उन्होंने कोशिश की। इसी तरह से रेवेन्यु डेफिसिट, इस रेवेन्यु
डेफिसिट को कम किया, रेवेन्यु डेफिसिट के लिए 11वें वित्त आयोग ने कहा था कि जो स्टेट्स 8-9 तक इसको कम कर देंगे, विशेष उनको प्रिविलेज दिया जाएगा उनको विशेष
सहायता दी जाएगी और मुझे खुशी है कि माननीय मुख्य मंत्री जी ने रेवेन्यु डेफिसिट
को जो 2008-09 तक जीरो पर आना था, 2007-08 में ही जीरो पर लाने की घोषणा की है और
मुझे इस बात की भी खुशी है कि इस वर्ष के बजट में केवल यह डेफिसिट घटकर 0.18 रह
गया, इसका तात्पर्य यह है कि जो मुख्यमंत्री जी ने कहा है कि यह अगले वर्ष तक
जीरो पर आ जाएगा। मैं उदाहरण देना चाहूंगा कि 1989-90 में बी.जे.पी. की सरकार थी, 30
करोड़ रुपया था रेवेन्यु डेफिसिट 1990-91 में प्रेसीडेंट रूल था लेकिन
बी.जे.पी. का कार्यकाल भी उसमें शामिल था तब यह प्लस 167.9 करोड़ आ गया लेकिन अध्यक्ष
महोदय, कांग्रेस का राज जब 2002-03 में था तो मैं आपको कहना चाहता हूं रेवेन्यु
डेफिसिट बढ़कर के, आपको ताज्जुब होगा, 3933.9 करोड़ हो गया।
skp/akt/11.3.06/1320/1p
यानि
राजस्थान
विकास की
दृष्टि से
एकदम पीछे चला
गया । ये इनके
पैरामीटर्स
हैं। यह मैं
नहीं कह रहा हूं।
12वें वित्त
आयोग की जो
सिफारिशें
हैं, 12वें वित्त
आयोग के
अनुसार जो
फाइनेंशियल
मैनेजमेंट अच्छा
होता है उसके
क्या
पैरामीटर्स
होने चाहिए।
उन्होंने जो
कहा, मैं उनके
आंकड़े बता
रहा हूं। उसके
बाद लगातार
रेवेन्यु
डेफिसिट
बढ़ता गया
लेकिन सबसे ज्यादा
2002-03 में बढ़ा
जैसे मैंने
दिया। यह
मैंने अभी
कहा, 2006-07 में
घटकर, अगर बीच
के फीगर्स आप
देखना चाहें
तो हमने 03-04, 04-05 में
37 प्रतिशत
घटाया, 04-05, 05-06 में 60
प्रतिशत कम
किया, 06-07 में 97
प्रतिशत कम
किया। 97
प्रतिशत कम किया
उसका परिणाम
यह रहा कि यह
घटकर आज 0.18
प्रतिशत रह
गया। समय
बचाने के लिए
मैं आंकड़े
करोड़ों में
नहीं बताना
चाहता,
पर्सेंटेज में
दे रहा हूं कि
किस तरह से
रेवेन्यु
डेफिसिट को इस
सरकार ने कम
करके वित्तीय
प्रबन्धन को
मजबूत किया।
अध्यक्ष
महोदय, इसी
तरह से केपिटल
एक्सपेंडिचर
में भी हमने
लगातार
बढ़ोतरी की।
मैं आंकड़ों
में ज्यादा
नहीं जाना
चाहूंगा
लेकिन केपिटल
एक्सपेंडिचर
02-03, 04-05 में हमारी
सरकार आ गई थी
उस समय मैक्सिमम
72.04 बढ़ा जबकि
इनके समय इतना
कभी नहीं बढ़ा।
इसी तरह से 04-05, 05-06
में 34 प्रतिशत
के आस-पास
बढ़ा तो बढ़ता
गया। अब केपिटल
एक्सपेंडिचर
के बढ़ने से
फिस्कल
डेफिसिट भी
बढ़ता है क्योंकि
ऋण लिया जाता
है इसलिए
केपिटल एक्सपेंडिचर
को बढ़ाते हुए
फिस्कल
डेफिसिट
कंट्रोल
किया।
कंट्रोल ही
नहीं किया,
उसको कम किया
क्योंकि यह
एक जनरल धारणा
है, एक जनरल
नियम है कि जब-जब
केपिटल एक्सपेंडिचर
बढ़ेगा फिस्कल
डेफिसिट अपने
आप बढ़ेगा।
(श्री
रामनारायण
विश्नोई,
उपाध्यक्ष,
पदासीन)
इसलिए
फिस्कल
डेफिसिट को
उल्टा किया।
केपिटल एक्सपेंडिचर
को हमने
बढ़ाया और
फिस्कल
डेफिसिट को कम
किया और कम
करके उस
स्थिति पर ले
आये जो 12वें
वित्त आयोग
ने सिफारिशें
की थीं और उस
12वें वित्त
आयोग की
सिफारिशों के
आधार पर मैं
निवेदन करना
चाहूंगा कि अब
कितना कम
लाये। केपिटल
एक्सपेंडिचर
के कुछ मैंने
अभी उदाहरण
दिये थे लेकिन
अगर मैं
करोड़ों की
बात करूं तो
इसमें भी यह
फिस्कल
डेफिसिट में
लगातार सुधार
हो रहा है। 1990-91
में 544.8 करोड़ था,
1997-98 में 2552 करोड़
हो गया, 1998-99 में
जब ये सरकार
में आये, इन्होंने
5150.9 करोड़ कर
दिया, जस्ट
डबल कर दिया
और जब
इन्होंने 2003-04
में छोड़ा, ये
7367.1 करोड़ फिस्कल
डेफिसिट
छोड़कर गये
थे। तो मैं
इसलिए कहना चाहता
हूं कि इन्होंने
फाइनेंशियल
मैनेजमेंट
यानि स्टेट
को हाई फिस्कल
स्ट्रेस में
डाल दिया,
वित्तीय
प्रबन्धन को
तहस-नहस कर
दिया इसलिए
इनको बार-बार
कहना पड़ा कि
हमारा खजाना
खाली है,
खजाना खाली है।
लेकिन इस
सरकार ने एक
दिन भी यह
नहीं कहा कि हमारा
खजाना खाली है
क्योंकि
बेहतर वित्तीय
प्रबन्धन
किया और इसमें
जो सुधार किया
उसके आंकड़े मैंने
बताये। फिस्कल
डेफिसिट, यह
मैं बता रहा
हूं, 2003-04, मैंने
रेवेन्यु
डेफिसिट
बताया, यह
फिस्कल
डेफिसिट
बताया मैंने
कि केपिटल एक्सपेंडिचर
बढ़ाने के
साथ-साथ हमने
फिस्कल
डेफिसिट को कम
किया। यह
कितना कम किया
इसके आंकड़े
मैंने आपको
बताये। इसके
अनुसार अगर
देखें तो 2003-04 और
2004-05 में माइनस 17 प्रतिशत
यानि हमने 17
प्रतिशत फिस्कल
डेफिसिट को कम
किया। 2004-05 की
बी.ई. और ए.ई. में
10 प्रतिशत
हमने रिड्यूस
किया और अगर
आप 2005-06 और 2006-07, इस साल
का बजट देखें
तो इसमें फिस्कल
डेफिसिट में 26
प्रतिशत हमने
रिड्यूस किया है।
रेवेन्यु
डेफिसिट को कम
किया, फिस्कल
डेफिसिट को कम
किया। ये
इंडिकेटर्स
हैं बेहतर
वित्तीय
प्रबन्धन
के। इसलिए
हमारी सरकार
ने हर तरह से
इसको कम किया
है और कम करने
का नतीजा क्या
हुआ ? उपाध्यक्ष
महोदय, नतीजा
यह हुआ कि 12वें
वित्त आयोग
ने कुछ
रिकमंडेशंस
कीं। इन्होंने
कहा कि कर्जा
बहुत ले लिया।
अब कर्जे का
भी मैं निवेदन
करना चाहूंगा,
अभी जी. डी. पी.
का राजकोषीय
घाटा, यह फिस्कल
डेफिसिट,
राजकोषीय
घाटा, 2004-05 में यह
साढ़े छह प्रतिशत
था, एफ आर बी एम
एक्ट आया और
इस फिस्कल
डेफिसिट और जी
डी पी के रेश्यो
को 12वें वित्त
आयोग ने यह
कहा कि इसको
लाकर के आप
तीन प्रतिशत
कीजिये और तीन
प्रतिशत नहीं
कर सकते तो
इसको 4-5 के
बराबर लाइये।
ये दो बातें
उन्होंने
कही और इन
दोनों बातों
में ही हम
फिस्कल
डेफिसिट को
नीचे लाये। आज
2004-05 में जो 6.5
प्रतिशत था, 2005-06
के अन्दर जो
आर. ई. आई है
उसमें यह घटकर
के पांच
प्रतिशत रह
गया यानि हम
तीन प्रतिशत
की तरफ बढ़
रहे हैं। हमने
इसको डेढ़
प्रतिशत कम
किया है और
यदि उस तरह से
देखा जाए फिस्कल
डेफिसिट को तो
जहां यह 2004-05 में
2142.60 करोड़ था,
हमने 2005-06 की बी. ई.
में घटाकर 1523 करोड़
किया और 2005-06 की
जो आर. ई. आई
उसमें 865.37 करोड़
ही कर दिया और
इस बार तो 2006-07
में केवल,
फिस्कल
डेफिसिट, यह 43
करोड़
राजकोषीय
घाटा, पूंजीगत
व्यय। उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
इतना निवेदन
करना चाहता
हूं कि इसका
परिणाम क्या
हुआ कि हमारी
ग्रोथ रेट
बढ़ी। ग्रोथ
रेट कितनी
बढ़ी इसका
परिणाम यह हुआ
कि 2001 में जहां
इनकी ग्रोथ
रेट 0.54 प्रतिशत
थी जी डी पी की
और 2002-03 में यह
माइनस में चली
गई, माइनस 2.97
प्रतिशत।
उसके बाद हम
आये। 2003-04 में हमने
22.25 प्रतिशत
ग्रोथ रेट
बढ़ाई और 2005-06
में यह 10.36 प्रतिशत
के आस-पास
बढ़ी। उसके
बाद अब भी हम
इस ग्रोथ रेट
को इतनी ही
कंटीन्यू
करना चाहते
हैं। अगली बार
का भी हमारा
टार्गेट है कि
यह 10 प्रतिशत
से अधिक ही
रहे। आज केन्द्र
सरकार की
ग्रोथ रेट 8.1
प्रतिशत है।
केन्द्र
सरकार ने इस
बार घोषणा की
है कि वह
ग्रोथ रेट को
बढ़ाकर के 10
प्रतिशत पर ले
जाएगी आर्थिक स्थिति
मजबूत करने के
लिए। लेकिन
हमने पहले ही,
यानि हम लोग
आगे चले गये।
अब ये आगे चले
गये तो रेट आफ
इंफ्लेशन
केन्द्र
सरकार में 5.6
प्रतिशत रही।
अब यह ग्रोथ
रेट बढ़ी तो
हमारी प्रति
व्यक्ति आय
भी बढ़ गई।
प्रति व्यक्ति
आय बढ़ी तो
उसका परिणाम
यह हुआ कि
हमारे यहां
नेशनल एवरेज
के काफी नजदीक
हम लोग पहुंचे।
मैं इतना ही
निवेदन करना
चाहता हूं कि
प्रति व्यक्ति
आय अगर हम
देखें, हमारी
प्रति व्यक्ति
आय 2005-06 में 17695
रुपये हो गई।
2000-01 में केवल 12514
रुपये प्रति
व्यक्ति आय
थी जो बढ़कर
के, एकदम जम्प
करके इनके
शासनकाल तक 2001-02
में 13621, 2002-03 में 12651 और
हमारा शासन
आते ही 15 हजार
पर पहुंची,
फिर 16 हजार से
ज्यादा पर
पहुंची और अब 17695
पर पहुंच गई।
तो ग्रोथ रेट
के साथ-साथ
प्रति व्यक्ति
आय बढ़ती गई।
ये
इंडिकेटर्स
हैं एक मजबूत
आर्थिक
स्थिति किसी
भी प्रदेश की
होने के। उसका
असर आम जनता
के ऊपर भी
हुआ। आम जनता
के ऊपर यह असर
हुआ कि हमारे
यहां जन्म दर
और मृत्यु दर
थी, भारत का
मृत्यु दर का
रेश्यो 8.0
प्रति हजार है
और राजस्थान
का 7.6 प्रति
हजार है यानि
मृत्यु दर कम
हो गई। यह अगर
देखें, 2001 में जब
ये थे तो यह 8.5
प्रति हजार थी
जो यह मृत्यु
दर घटकर आ गई
जबकि जनसंख्या
हमारी लगातार
बढ़ रही है।
तो ये
पैरामीटर्स
हैं मजबूत
इकोनॉमी के और
इस मजबूत
इकोनॉमी के
पैरामीटर्स
को हमने पूरी
तरह से ठीक
किया है। .....
Vkj/akt/1330/1q
इसी तरह से
उपाध्यक्ष
महोदय,
डी.एस.पी. का
राजकोषीय
घाटा इनके समय
में था, 2001-2002 में 6.53
प्रतिशत था और
2002-2003 में 7.15 प्रतिशत
था डी.एस.पी. का
राजकोषीय
घाटा, यह घटकर
हमने इसको 7.15
प्रतिशत से
घटाकर 2004-2005 में 5.6
प्रतिशत पर ले
आये और 2005-2006 में,
बी.ई. में 5.09
प्रतिशत पर ले
आये इसलिए जो
मैंने अभी
बताया कि यह
पाँच प्रतिशत
के आसपास आ गया
है तो यह सब revenue deficit as percentage of
revenue receipts, 1999-2000 में 37.18
प्रतिशत था,
इसको कम करके
हम 2004-2005 में 12
प्रतिशत पर
लाये और 2005-2006 में
यह सात
प्रतिशत के
आसपास सम्भावित
है तो आपको
मेरे कहने का
तात्पर्य यह
है कि यही
परिणाम थे
जिसके कारण
केन्द्र
सरकार से हमको
एक दिन
ओवरड्राफ्ट
में फरवरी 2004 के
बाद राज्य
सरकार नहीं
रही, लगातार
हम रिजर्व
बैंक में सरप्लस
में रहे और
राज्य के कर
राजस्व में भी
वृद्धि की।
यही नहीं, हमने
मैनेजमेंट को
ठीक किया,
टैक्स
रेवेन्यु को
भी हम बढ़ाते
गये और यदि हम
देखें तो 2001-2002 में
केवल सात
प्रतिशत टैक्स
रेवेन्यु थी,
यह 2002-2003 में
बढ़कर 10.26
प्रतिशत हुई
लेकिन 2003-2004 में
ज्योंही हम
आये, इसको
एकदम 16.09
प्रतिशत पर ले
गये और 2004-2005 के
अन्दर यह 15.91
प्रतिशत था,
करीब 16
प्रतिशत के आसपास
पहुंच गया और
2005-2006 के अन्दर
यह करीब 17
प्रतिशत के
आसपास पहुंच
गया। उपाध्यक्ष
महोदय, यह
टैक्स
रेवेन्यु हमने
बढ़ाई, टैक्स
रेवेन्यु
किससे बढ़ाई,
यह सरलीकरण
करके बढ़ाई।
लाफर्स कर्व
थ्योरी है
टैक्स की कि
टैक्स का
जितना
सरलीकरण
करेंगे, टैक्स
को जितना कम
किया जायेगा,
लाफर्स कर्व
प्रिंसिपल
टैक्स लगाने का,
इसलिए इसको
फोलो करके
मुख्य
मंत्रीजी ने
इन टैक्सेज
का सरलीकरण
किया, टैक्सेज
में राहत दी।
उसका परिणाम
यह हुआ कि हम
ज्यादा
कलेक्शन कर
पाये।
आज सी.ए.जी.
की रिपोर्ट
मैंने पढ़ी
है, उसमें
देखा है,
उसमें एक
लेकुना बताया
है, कुछ लैप्सेज
बताये गये हैं।
उन्होंने
कहा कि लगभग 3000
करोड़ रुपये
टैक्सेज में
लैप्स हुए
हैं। यह आया
है। मैं सरकार
का ध्यान इस
ओर भी दिलाना
चाहूंगा कि जो
इस तरह के लैप्सेज
हैं, इन लैप्सेज
को देखना
चाहिए और इस
तरह के लैप्सेज
नहीं हो।
हालांकि
हमारी टैक्स
रेवेन्यु
बढ़ रही है,
लेकिन यह और
बढ़ सकती है
अगर इस तरह के
लैप्सेज को
हम रोकेंगे तो
यह प्रशासन के
स्तर पर
कहां-कहां
लैप्सेज हैं,
यह सरकार की
जिम्मेदारी
है कि उनको
रोके और जो
लोग
अधिकारीगण लैप्सेज
में शामिल
हैं, उनके
खिलाफ भी आप
कड़ी से कड़ी
कार्यवाही
करें ताकि
राजस्थान की
रेवेन्यु
बढ़े। यह
छोटे-छोटे
लैप्सेज से
हमारी
इकोनोमी खराब
हो रही है
इसलिए हमको
इसकी सावधानी,
इसकी चिंता
अवश्य करनी
पड़ेगी इसलिए
हमको यह चिंता
जरूर करनी चाहिए
कि टैक्सेज में
लैप्सेज
नहीं हों।
उपाध्यक्ष
महोदय, इसका
परिणाम क्या
हुआ कि 12वें
वित्त आयोग
ने एक रिपोर्ट
दी और उस
रिपोर्ट में
दो-तीन बातें
उन्होंने कही
कि यदि आप
रेवेन्यु
डेफिसिट को
जीरो पर ले आओगे,
कम करोगे तो
हम कितनी
सहायता
देंगे। अगर
आपके फिस्कल
डेफिसिट को कम
करोगे तो
कितनी सहायता
देंगे। यह सब
उन्होंने
बताया लेकिन
उनके अनुकूल
जिस पात्रता के
लिए हम खरे
उतरे हैं, उस
पात्रता के
अनुकूल उन्होंने
हमको कुछ नहीं
दिया। इसका
जिक्र मैं बाद
में करूंगा
लेकिन उसके
पहले मैं आपसे
निवेदन करना
चाहूंगा कि एक
तरह से हमने
राजस्थान की
इकोनोमी को
मजबूत किया
है। मैं एक और
निवेदन करना
चाहूंगा कि
12वें वित्त
आयोग ने कहा
है कि कर्ज को
जी.डी.पी. के
अनुपात, जो
वर्ष 2004-2005 में
लगभग 60
प्रतिशत हो
गया, उसको
अधिकतम 28 प्रतिशत
पर लाना होगा।
हमारी सरकार
इस तरफ प्रयत्न
कर रही है और
हमारा यह नीचे
आया है। इसी
तरह से
राजकोषीय
घाटा जी.डी.पी. का
अनुपात 6.5
प्रतिशत है,
तीन प्रतिशत
पर लाना होगा
या 4-5 प्रतिशत
के स्तर पर
लाना होगा।
मैंने अभी
बताया कि 4-5
प्रतिशत के स्तर
पर तो हम
लायें, उससे
भी कम ले आयें
और कम लाने के
अलावा हम पाँच
प्रतिशत पर भी
इसको ले आये इसलिए
यह हम पात्र
हो गये और इसी
तरह से उन्होंने
डेट-स्वेप की
बात कही, यह
11वें वित्त
आयोग ने भी
कही, 12वें वित्त
आयोग ने भी
कही कि हम
डेट-स्वेप 31.3.1999
में ब्याज दर
वाले कर्ज पर
डेट-स्वेप
लागू होगा। उस
पर 13 प्रतिशत
या उससे अधिक
अगर इंट्रेस्ट
होगा तो सात
प्रतिशत के
ऊपर लायेंगे
और लघु बचत का
डेट-स्वेप
करके 90.5
प्रतिशत पर
लायेंगे तो
इससे हमको
करीब छह
प्रतिशत की
छूट ऊपर वाले
में मिलेगी और
4.5 प्रतिशत की
छूट नीचे वाले
में मिलेगी।
यह मिलाकर
राज्य को
इसमें बहुत
बड़ा लाभ
होगा। हमारी
सरकार ने यह
काम और किया
है, अभी यह ब्याज
की बात करें,
अब यह कहेंगे
कि कर्जा बहुत
ज्यादा ले
लिया। उपाध्यक्ष
महोदय, हमने
कर्जा 23000-24000 करोड़
के आसपास
छोड़ा था
लेकिन हमने
परिसम्पत्तियां
बहुत बनाईं और
परिसम्पत्तियां
बनाने में
हमने...ज्यादा
परिसम्पत्तियां
बनाई और
परिसम्पत्तियां
बनने के कारण...
मैं परिसम्पत्तियां
बता रहा हूं
कि
कितनी-कितनी
बनी है? यहां
परिसम्पत्तियां
बनी और इन
परिसम्पत्तियों
के अन्दर
हमने
इंट्रेस्ट
कम लिया।
पिछली बार जो
इंट्रेस्ट
लेना चाहिए था
2004-2005 में हमें
करीब 1849 करोड़
रुपये लेने
चाहिए थे, जो
हमको लेने
चाहिए थे, अगर
आर्थिक
विशेषज्ञ
देखेंगे तो
कर्ज कितना
लेना चाहिए,
इकोनोमी में
उसका एक हिसाब
है, एक
फार्मूला है,
उस फार्मूले
के हिसाब से
हमने पिछले
साल 2004-2005 में 1849.07
करोड़ का
कर्जा कम लिया
तो यह कह रहे
हैं कि कर्ज
बहुत ले लिया।
उपाध्यक्ष
महोदय, कर्ज
को हमने लेकर
कर्ज को
आलतू-फालतू
चीजों में
खर्च नहीं
किया। हमने
कर्ज लिया,
पहली बार कम
लिया, लेकिन
कर्जा जितना
भी लिया है,
इसकी तुलना
में हमने उसकी
असेट्स बहुत
ज्यादा बनाई
है। जो 26
प्रतिशत
असेट्स बनाई,
इस बार 37
प्रतिशत पर ले
गये। वर्ष 2005-2006
में हमने 65
प्रतिशत
असेट्स बनाई है
और इनकी
असेट्स बहुत
कम रही और
उसका कारण यह
रहा है कि
असेट्स जब ली
गई तो यह जो
वार्षिक
योजना का आकार
था, वह हमारा
बढ़ता गया।
मैं उसमें
नहीं जाना
चाहूंगा, कई
माननीय सदस्यों
ने उसकी चर्चा
कर दी पर हमने
किस तरह से 2003-2004 में
ही, चार
महीनों में ही
4200 करोड़ से 5500
करोड़ रुपये
से दिखाया, यह
ले गये और 6000
करोड़ पर जाकर
उसको कम्प्लीट
किया। उसके
बाद 8000 से ज्यादा
8500 के आसपास ले
गये लेकिन
उसका असर क्या
हुआ? उसका असर
यह हुआ कि
नवीं
पंचवर्षीय
योजना जब यह
थे, 27650 करोड़
रुपये की थी
और इसको लाकर
के इन्होंने
जो लक्ष्य
हासिल किया वह
70.77 प्रतिशत का
लक्ष्य
हासिल किया
यानी 19566.82 करोड़
रुपये पर लाकर
इन्होंने
टिका दिया और
हमने जब यह
10वीं
पंचवर्षीय
योजना आई जो
वर्ष 2007 तक है,
हमारे
शासनकाल में आते
ही 31831.75 करोड़ की
थी, इसका असर क्या
हुआ, मैं जो
बता रहा हूं
वित्तीय
प्रबन्धन का
और यह जो
कर्जा बता रहे
हैं, वह
इंट्रेस्ट
बता रहे हैं
या जो भी
चीजें बता रहे
हैं, हमारा जो
वित्तीय
प्रबन्धन था,
इसके कारण
हमारी
पंचवर्षीय
योजना थी, यह
जब खतम होगी 2007
में उपाध्यक्ष
महोदय, 31000 करोड़
रुपये से बढ़कर
यह पहली बार
जितनी योजना
बनी है, उससे
ज्यादा 33742.42
करोड़ रुपये
की यह सम्भावित
है, जो 106
प्रतिशत के
आसपास यह
बढ़ेगी। यह इस
सरकार के अच्छे
वित्तीय
प्रबन्धन का
सवाल है इसलिए
अच्छे वित्तीय
प्रबन्धन के
लिए इस सरकार
ने यह कदम उठाये
हैं और इसमें
सफल रहे हैं।
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं एक
निवेदन और
करना चाहूंगा,
यह सब उन
परिस्थितियों
के होते हुए
भी यहां पर
कभी केपिटल
फोर्मेशन हमारा
ज्यादा हुआ
है और केपिटल
फोर्मेशन ज्यादा
होने से मैं
आंकड़े अगर
आपको दूंगा,
जैसा मैंने
बताया,
करीब-करीब 65
प्रतिशत के
आसपास हमारा
केपिटल फोर्मेशन
हुआ है। उपाध्यक्ष
महोदय, यह
सरकार इस वित्तीय
प्रबन्धन के
अलावा भी आगे
जो सरकार के
टैक्सेज
हमको मिल रहे
हैं.....
Bhs/akt/1340/2a/11.3.06/1
केन्द्र
से जितने टैक्सेज
मिले, हमारे
टैक्सेज
बहुत ज्यादा
हैं और इसलिए
हमने ये जितना
भी लोन लिया कर्जा
लिया उन
बोरोइंग्स
का हमने
सदुपयोग किया
और उसको
कैपिटल फोर्मेशन
में लगाया
इसलिए ये जो
बार’-बार कर्जे
की बात करते
हैं कि इतना
कर्जा ले लिया
इतना ले लिया,
वो चले गये
मैं उनको
बताता कि
कितना कितना
क्या कर्जा
लिया और क्या
नहीं लिया
लेकिन वो चले
गये हैं। लेकिन
एक बात और कही
उन्होंने कल
रामगढ़ से आने
वाले माननीय
सदस्य बोल
रहे थे कि ये
योजनाएं
बनायी, ये
वित्तीय
प्रबंधन का
असर क्या हुआ
है कि हमने हर
सैक्टर में
चाहे सोशल
सेक्टर हो
चाहे
इकॉनॉमिक
सैक्टर है और
सोशल सैक्टर
में बहुत ज्यादा
ध्यान दिया
पन्नाधाय
योजना, पण्डित
दीनदयाल
उपाध्याय
योजना, गुरु
गोलवलकर
योजना हमने कई
योजनाएं चलायीं
और इन योजनाओं
को चलाने से
उनको परेशानी हो
गयी और उन्होंने
कह दिया कि इन
योजनाओं के
ऊपर थोड़ा सा पैसा
खर्च किया
बहुत कम
प्राविजन रखा
कहीं डेढ़
करोड़, कहीं
दो करोड़,
कहीं तीन
करोड़, कहीं एक
करोड़ तो मैं
उनको यह कहना
चाहता हूं कि
जब शुरूआत
होती है तो छोटे
सी चीज से
होती है हमारी
सरकार ने सोचा
तो सही
कि इन वर्गों
का भी ध्यान
रखा जाए
विधवा, असहाय
महिलाएं,
बीपीएल में
रहने वाले
लोग, आदिवासी,
बच्चियां इन
सबका ध्यान
तो मैं कहना
चाहता हूं
उनको कि ये कह
रहे थे कि आप
योजनाएं
चलाकर झूंठी
वाहवाही लेने
की कोशिश कर
रहे हो तो मैं
चार
पंक्तियों के
माध्यम से
उनको कहना
चाहता हूं कि ‘हवाओं
का रुख बदलने
तो लगा है,
मौसम का
मिज़ाज बदलने तो
लगा है, व्यर्थ
में ही शक
करने वालों
जरा गौर से तो
देखो विकास का
आखिर अब चलने
तो लगा है’
इसलिए उपाध्यक्ष
महोदय, ...।
श्री घनश्याम
तिवाड़ी: आपकी
है कि दूसरे
की है?
डॉ.एन.एस.
गुर्जर: यह
मेरी है मैं
खुद की बोलता
हूं दूसरे की
नहीं बोलता
खुद ही लिखता
हूं इसलिए उपाध्यक्ष
महोदय...।
श्री घनश्याम
तिवाड़ी: यह
कहीं सुनी है।
डॉ. एन.एस.
गुर्जर: कहीं
नहीं सुनी
आपने मुझे
बताएं किसी की
लिखी हुई होगी
तो मैं जो
कहेंगे वो ही
कर दूंगा आपसे
क्षमा मांग
लूंगा कान
पकड़ करके । इसलिए
उपाध्यक्ष
महोदय, इनको
दिख रहा है कि
ये जो गरीब
तबके को पहली
बार राहत दी
गई है और उनको
राहत पहुंचायी
जा रही है
उसकी शुरूआत
हो चुकी है
उसकी शुरूआत
हमने की है और
उसका अगर आप
देखेंगे मैं
ज्यादा
आंकड़ेबाजी
में नहीं जा
रहा हूं। जैसा
मैंने कहा कि
इन गरीब वर्ग
के उत्थान के
साथ साथ हम
एसेट्स
क्रियेट कर
रहे हैं । ऐसेट्स
टोटल डेब्ट
का इन्होंने
01-02 में तीस
प्रतिशत
ऐसेट्स
क्रियेट की थी
और 04-05 में
आते-आते हमने 57
प्रतिशत और 05-06
में 65 प्रतिशत
से अबोव चली
गये जो
01-02 और 04-05 में यह
करीब साढ़े
चार गुना ज्यादा
था इसलिए मैं
निवेदन करना
चाहता हूं। इसी तरह
इंट्रेस्ट
रेट पेमेंट की
बात कर रहे थे
कि इंट्रेस्ट
ज्यादा पे कर
रहे हो 01-02 में
हमने 32
प्रतिशत
इंट्रेस्ट
पे किया गया
था 05-06 में हमने
केवल 26
प्रतिशत
इंट्रेस्ट
पे किया लोन
पर इसलिए मैं
कहना चाहता
हूं कि किसी
भी तरह से यह
सरकार कहीं
नहीं टिकती
वित्तीय
प्रबंधन में
नहीं टिकती और
चीजों में नहीं
टिकती इसलिए
अगर हम ब्याज
भुगतान की जो
राजस्व
प्राप्तियां
हैं राजस्व
प्राप्तियों
का ब्याज
भुगतान देखें
उसमें भी हम
कम पर आ गये और
ये करीब 31-32 यहां
पर थे हम 25
प्रतिशत के आस
पास आ गये 05-06 में
इसलिए उपाध्यक्ष
महोदय, किसी
भी तरह से
हमारी सरकार
किसी भी तरह
का आप आंकड़े
देख लें हम
आगे हैं।
इंट्रेस्ट
पेमेंट और
रेवेन्यु
एक्सपंडीचर
का मैंने आपको
बता दिया है
इसलिए वित्तीय
प्रबंधन में
हम कहीं भी
इनसे कम नहीं
हैं।
उपाध्यक्ष
महोदय, कल यह
बात बोल रहे
थे कि सोशल
सैक्टर में
और इकॉनॉमिक
सैक्टर में
राशि घटा दी
गयी।
सोशल सैक्टर
में हमने इन्क्रीज
किया और कितना
इन्क्रीज
किया, इसी तरह से
इकॉनॉमिक
सैक्टर में
भी हमने इन्क्रीज
किया है अगर
हम देखें कि
रेवेन्यु
एक्सपंडीचर
इन सोशल एंड
इकॉनॉमिक
सर्विसेज एंड कैपिटल
एक्सपंडीचर
बढ़ने से राज्य
की आर्थिक
स्थिति अच्छी
स्थिति में
पहुंच गयी और
इसके लिए जो
इंडीकेटर है
वो जीडीपी की
ग्रोथ रेट है
जो मैंने अभी
आपको बतायी
सबसे कम ग्रोथ
रेट कांग्रेस
के पीरियड में
हुई और सबसे
अधिक हमारे पीरियड
में हुई। इसी
प्रकार मैं
आपका ध्यान
ये जो बार बार
चर्चा करते
हैं कि वित्तीय
प्रबंधन ठीक
नहीं है कर्जा
बहुत ज्यादा
ले लिया यह
काम किया वो
किया उनकी तरफ
आपका ध्यान
दिलाना
चाहूंगा कि
किस तरह से
हमने स्थिति
सुधारी है। उपाध्यक्ष
महोदय, ग्रोस
रेवेन्यु
एक्सपंडीचर
इन सोशल
सर्विसेज एंड
इकॉनॉमिक सर्विसेज
यह मैं आंकड़े
देना चाहूंगा
सोशल सर्विसेज
के अन्दर 05-06
में सोशल
सर्विसेज में
13.3 प्रतिशत और
इनका कभी भी
जो मैक्जीमम
था 99-2000 में वो
केवल 11
प्रतिशत था
उसके बाद इनका
कभी 2.8 प्रतिशत
रहा कभी 4.5
प्रतिशत रहा
और हमारा सोशल
सर्विसेज में
मैक्जीमम 05-06
में 13.3 प्रतिशत
पर पहुंच गया
इसलिए सबसे ज्यादा
ये सोशल
सर्विसेज में
कह रहे थे कि
कम कर दिया, कम
कर दिया कहां
कम कर दिया? इनसे
ज्यादा रहा
इसी तरह
इकॉनॉमिक
सर्विसेज में
इनके 99-2000 में 8.6 प्रतिशत,
2001 में तो
आते-आते एक
प्रतिशत, 01-02 में
3.7 प्रतिशत और
हमारा आते-आते
जब हम 03-04 में आये
उस में हम 17
प्रतिशत पर
आये। 04-05 में आते-आते
हम 26 प्रतिशत
पर पहुंच गये इकॉनॉमिक
सर्विसेज में
और उसके बाद
में 05-06 और 06-07 में 11
प्रतिशत से
ऊपर हैं इसलिए
उपाध्यक्ष
महोदय, सोशल
सर्विसेज में
मने राशि बढ़ाई
इकॉनॉमिक
सर्विसेज जो
विकास का
इंडीकेटर है
उसमें राशि
बढ़ाई इसलिए
आम आदमी को
राहत देने के
साथ साथ हमने
प्रदेश को
विकास की तरफ
तेजी से ले
जाने के
प्रयास भी
हमने इसमें
किये हैं
इसलिए ये कहते
हैं कि सोशल
सर्विसेज में
कम हो गया
सोशल
सर्विसेज में
कम हो गया
सोशल सर्विसेज
में किसी भी
तरह हमारा कोई
कम नहीं हुआ
है।
मैं एक
निवेदन और
करना चाहूंगा
उपाध्यक्ष
महोदय, कि
इसके आधार पर
इन्होंने तो,
अभी वैट लग
गया वैट के
लिए ये कई बार
कह रहे थे जो
हमारी बीजेपी
की डिमाण्ड
थी हमारी
गवर्नमेंट की
वो बीजेपी की
डिमाण्ड मान
ली गयी उसका
परिणाम क्या
हुआ कि एक एम्पावर्ड
कमेटी बनी
जिसमें कई
सारी स्टेट्स
के फाइनेंस
मिनिस्टर थे
वेस्ट बंगाल
के फाइनेंस मिनिस्टर
थे उनकी अध्यक्षता
में। 132
कंट्रीज में
वैट लागू है
और ये केवल
हमारे देश में
भी करीब 28 स्टेट्स
ने इसको एसेप्ट
कर लिया केवल
यू.पी. और
तमिलनाडु में
नहीं किया।
तमिलनाडु ने
कहा कि हमारे
इलेक्शन आने
वाले हैं अगली
गवर्नमेंट
देखेगी और यू.पी.
में मुलायमसिंहजी
ने मना कर
दिया।
शुरू-शुरू में
तो वैट लगने
से स्थिति
थोड़ी सी
कमजोर होती है
दो तीन
महीने।
पंजाब में एक
दो प्रतिशत जैसे
आया उनको मिला
लेकिन
धीरे-धीरे
ग्रोथ रेट बढ़ती
है और आज दिल्ली
में 36 या 37
प्रतिशत तक
ग्रोथ रेट बढ़
गई वैट लगने
के बाद।
यह संभव है
कि वैट लगने
के बाद हमारे
भी इस साल
थोड़ा झटका
लगे कुछ
महीनों के लिए
लेकिन आगे के
लिए यह वैट क्योंकि
सबने लगा रखा
है 132 कंट्रीज
ने इसको लगा रखा
है और हमारी
जो बीजेपी की
मांग थी कि
सीएसटी में
चार प्रतिशत
से दो प्रतिशत
इसको किया जाए
ये बीजेपी की
मांग थी इसको
दो प्रतिशत जो
घटेगा करके और
जो नुकसान
होगा उसकी
भरपाई केन्द्र
सरकार करे
इसका
कंपेंसेशन
दें इस बात को
हाई एम्पावर्ड
कमेटी ने
प्रिंसीपली
स्वीकार कर
लिया और स्वीकार
करने के बाद
उसमें
कंडीशंस में
है कि एम्पावर्ड
कमेटी और केन्द्र
सरकार मिल
करके तय करेगी
इसलिए शायद कल
मीटिंग थी हो सकता
है इसका
डिसीजन हो गया
मुझे मालूम
नहीं है लेकिन
यह भी एक
स्थिति है।
kas\akt\1350\11-3-06\2b
जो हमारे
लिये एक अच्छी
स्थिति होगी ।
उपाध्यक्ष
महोदय, एजुकेशन
के लिये कह
रहे थे कि
केन्द्र का
पैसा है ।
एजुकेशन में
आज हमने जितनी
भर्तियां की
हैं, पिछली
बार कितनी भर्ती
की वह सबको
पता है 51 हजार
से ज्यादा ।
इस बार भी यह
घोषणा की गई
है 50 हजार से ज्यादा
भर्तियां इस
बार भी होंगी
। दूसरे
रोजगार के
अवसर पैदा
किये जायेंगे
। पिछली बार
हमने दो लाख
लोगों को
विभिन्न
योजनाओं में
चाहे रूरल
डवलपमेंट की
योजना हो,
चाहे स्माल
स्केल इंडस्ट्रीज
हो, चाहे बडी
इंडस्ट्रीज
हो उनमें
रोजगार के
अवसर उपलब्ध
कराये । इस
बार भी
नौकरियों के
साथ जो गरीब लोग
हैं उनको
विभिन्न
योजनाओं के
तहत डेढ से दो
लाख लोगों को
रोजगार
प्रदान करने
की घोषणा की
गई है । हम
युवाओं के
लिये रोजगार
की व्यवस्था
कर रहे हैं और
इसके लिये
हमने टैक्स
रेवेन्यु
बढाया, वित्तीय
प्रबन्धन
ठीक किया ।
वैट के कारण
लाभ होगा ।
कंडिशन यह भी
है कि वैट से
किसी स्टेट
को नुकसान हो
रहा है तो
उसके लिये
केन्द्र
सरकार जिम्मेदार
होगी । इसलिए
उपाध्यक्ष
महोदय, हमारी
इकोनोमी
दिनोदिन बहुत
मजबूती की और
जा रही है । यह
एजुकेशन के
लिये कह रहे
थे आज राजस्थान
में लिट्रेसी
रेट बढकर,
शिक्षा
मंत्री जी बैठे
थे चले गये
मैं धन्यवाद
देना चाहता
हूं आज 65
परसेंट से ऊपर
हमारी लिट्रेसी
रेट हो गइ ।
पुरूष लिट्रेसी
रेट तो जो
नेशनल एवरेज
है 75 परसेंट
उससे भी बढक कर
करीब 76 परसेंट
के आस पास
पहुंच गई ।
इसलिए आज राजस्थान
शिक्षित हो
रहा है, राजस्थान
विकसित हो रहा
है लेकिन फिर
भी यह समझते
ही नहीं। कभी
कभी तो तारीफ
कर दिया करो
अच्छा काम हो
रहा है तो ।
जहां गलत हो
रहा है वहां
क्रिटिसाइज
भी करो । सर्व
शिक्षा अभियान
में इन्होंने
कहा कि
केन्द्र
सरकार दे रही
है डीपीईपी
में केन्द्र
सरकार दे रही
है 1 मैं इनसे
पूछना चाहता
हूं केन्द्र
सरकार किससे
ले रही है ।
सर्व शिक्षा
अभियान में Central Government is funded by
World Bank, DFIB of U.K. and the European Commission.
इनसे
मिलकर 2-4 और 6-7 तक 4700
करोड रुपये का
इन्होंने
सर्व शिक्षा
अभियान में
पैसा लिया है
। इतना ही
नहीं बाहर से
भी वह पैसा ले
रहे हैं । स्टेट
को दे रहे हैं
और स्टेट को
भी एक
फार्मुले के
तहत पैसा दे
रहे हैं ।
लेकिन स्टेट
का भी उसमें
शेयर तय कर
दिया इन्होंने
। 25 परसेंट स्टेट
को देना पडेगा
। इसके तहत
राजस्थान को
3-4 में 80 करोड
रुपये देना
पडा, 4-5 में डेढ
सौ करोड हमने
दिये, 5-6 में 200
करोड रुपये
दिये और 6-7 में साढे
तीन सौ करोड
रुपये हम देने
जा रहे हैं।
उपाध्यक्ष
महोदय, किस आधार
पर यह कह रहे
हैं कि केवल
यह केन्द्र
का पैसा है और
केन्द्र के
पैसे से राजस्थान
सरकार वाह वाही
लूट रही है, यह
सरासर गलत है।
इसी तरह
डीपीइपी यह 9
स्टेट की
करीब 129
डिस्ट्रिक्ट
में लागू है ।
इसमें 80.15
परसेंट का
रेश्यो है ।
यह भी केन्द्र
सरकार फंडेड
बाई वर्ल्ड
बैंक,
डीएफआईडी ऑफ
यूके और
युनिसेफ यह
संस्थाएं
हैं जो इसको
फंडिग कर रही
है । केन्द्र
सरकार यह पैसा
कहां से ला
रही है । केन्द्र
सरकार का इस
पर कोई हक हो
कांस्टीट्युशनली
जितना केन्द्र
सरकार का हक
बाहर से लोन
लेने पर है उतना
ही स्टेट का
हक है और यह एक
स्टेट को
नहीं दे रहे
हैं कई स्टेट
को यह पैसा जा
रहा है ।
उपाध्यक्ष
महोदय, इसमें साफ
लिखा है,
कितना कितना
पैसा लिया मेरे
पास आंकडे
हैं, वर्ल्ड
बैंक ने कितना
दिया, युनिसेफ
ने कितना
दिया,डीपीआईपी
में कितना
किया और किस
किस से फंडेड
है । यह सब इन्होंने
लिखा है मैं
थोडा सा आपको
निवेदन करना चाहूंगा- “The SSA
is partly funded by external funding agencies like World Bank, DFID of U.K. and
the European Commission up to Rs. ……” यह करोडो
में ले रहे
हैं, यह मेरे
पास डाक्युमेंट
है । समय समय
पर उनकी टीम
आकर उनको चैक
करती है कि कौनसी
स्टेट ठीक
काम कर रही है
और कौनसी स्टेट
ठीक काम नहीं
कर रही है। जो
स्टेट काम
नहीं करती है
वह केन्द्र
सरकार को कहते
हैं कि इस स्टेट
को माइनस करो
। हमारी स्टेट
को उन्होंने
कंटीन्यू
आगे के लिये
बढाया कि
राजस्थान
में यह अभियान
आगे भी बढाया
जाये, दो साल
के लिये उन्होंने
और एक्सटेंड
किया । उपाध्यक्ष
महोदय, एजुकेशन
में हम पीछे
नहीं है, हैल्थ
में हम पीछे
नहीं है । कल
यह एक बात और
कह रहे थे
एग्रीकल्चर
में कम
प्रोविजन
किया ।
एग्रीकल्चर
में किस तरह
से कम
प्रोविजन किया।
एग्रीकल्चर
में 98-99 और 99-2000 की
मैंने तुलना
की तो 98-99 में
जितना पैसा था
99-2000 में इन्होंने
16.16 करोड रुपये
कम किये, इनकी
सरकार ने। 1-2 और
2-3 में 6 करोड
रुपये कम किये
। 2-3 और 3-4 में जब
हम दिसम्बर,03
में आ गये
उसके बाद हमने
एग्रीकल्चर
में 22 करोड
रुपये प्लस
किये और उसके
बाद 4-5 में 3-4 की
तुलना में
हमने 3 करोड
बढाये और अगर
हम 4-5 और 5-6 की
तुलना करें तो
हमने 216 करोड की
बढोत्तरी की
। अब यह
कहेंगे 6-7 में
घट गया । 6-7 में 280
करोड का
प्रोविजन है ।
उपाध्यक्ष
महोदय, यह घटा
नहीं है, आज
माहिर जी अभी
चले गये वह कल
बोल रहे थे वह होते
तो मैं उनको
बताता पिछले
साल 21 जिलों
में ओलावृष्टि
हुई और
ओलावृष्टि के
कारण राज्य
को पैसा देना
पडा और उस
पैसे में 30
करोड का प्रावधान
हमने 5-6 में
किया, एक अलग
हैड बनाया ।
आरई में 132
करोंड रुपया
हमको देना पडा
और 6-7 में 1800 करोड
का प्रोविजन
किया । इस तरह
से 180 करोड
रुपया अलग से
फसल
क्षतिपूर्ति
का हैड बनाकर
उसमें डाल
दिया । इसलिए
यह इनको कम नजर
आ रहा है इन
आंकडों में ।
कृषि में पैसा
बढा है यह
पैसा कम नहीं
हुआ है । अगर
यह होते तो मैं
इनसे पूछता ।
इसी तरह से 4-5
में और 6-7 में 117
करोड हमने
बढाये हैं ।
इस तरह से
हमने
एग्रीकल्चर
में पैसा
बढाया है । आज
इर्रिगेशन
में अगर इनका
देखें 1-2 और 2-3 अगर
इसकी तुलना
करें तो 1-2 से 2-3
में इन्होंने
13.67 करोड रुपये
कम किये हैं
इर्रिगेशन में
। 2-3 और 5-6 का हम
आंकडा देखें
कि 2-3 में इन्होनं
कितना
प्रोविजन
किया था और 5-6
में हमने कितना
किया । उपाध्यक्ष
महोदय, हमने एकदम
छलांग लगाकर 229.67
करोड रुपये
बढाये हैं ।
इस तरह से अगर 5-6
की आरई और 6-7 की
बीई को हम
देखें तो हमने
करीब 44.26 करोड
हमने बढाये
हैं । उपाध्यक्ष
महोदय, इस के साथ
साथ मैं सरकार
से अनुरोध
करना चाहूंगा
और इतना ही
नहीं नर्मदा
का पानी लाने
के लिये 74
किलोमीटर नहर
बन रही है । वह
अगर बनकर पूरी
तैयार हो
जायेगी तो
राजस्थान
में पानी आ
जायेगा । इसके
लिये 647 करोड के
आस पास हमने
गुजरात
गवर्नमेंट को
पूरा पैसा दे
दिया है उसके
बाद गुजरात
गवर्नमेंट
मना नहीं कर
रही है वह कह
रहे हैं कि आप
इसका सिस्टम
तैयार करो और
हम पानी देने
के लिये तैयार
हैं । राजस्थान
के लिये एक
बाँध बढा है ।
पिछले साल
जहां 2 लाख
हैक्टेयर से
ज्यादा
एरिया सिंचित
क्षेत्र का
बढा है इस साल
भी हम एक लाख
से ज्यादा
सिंचित
क्षेत्र
बढाना चाहते
हैं । 3-4 लाख का
सिंचित
क्षेंत्र
बढेगा तो
राजस्थान
में कृषि उत्पादन
ज्यादा होगा
जो हमारी
जीडीपी को और
ऊँचाई पर ले जायेगा
जो एक विकास
का इंडिकेटर
है । उपाध्यक्ष
महोदय, इसमें एक
सुझाव भी देना
चाहूंगा आज 1.6
परसेंट हमारे
यहां सतही
वाटर है और
इसका 60 परसेंट
वाटर वेस्ट
जाता है ।
सरकार को इसकी
व्यवस्था
करनी चाहिये
कि हमारे पास
जल की और कोई
व्यवस्था
नहीं है
हालांकि
सरकार ने जल
संसाधन मंत्रालय
बना दिया है
और यह भी कहा
है कि हम जल
प्रबन्धन की
व्यवस्था
कर रहे हैं ।
सरकार प्रयत्नशील
है लेकिन मैं
फिर भी कहना
चाहूंगा कि
इसमें तेजी
लाये । हमारा
अकाल का जो
सर्कल है हर चौथी
पांचवीं साल
में राजस्थान
में अकाल आता
है । इसलिए इस
सर्कल को
तोडने के लिये
हमें विशेष
प्रयत्न
करने पडेंगे ।
जल प्रबन्धन
की व्यवस्था
हो ताकि यह सतही
जल हमारे काम
आ सके ।
उपाध्यक्ष
महोदय, कल उन्होंने
एक आरोप लगया
कि इंटर स्टेट
डिस्प्युट
में सरकार
सुस्त है । 151
एनीकट गांधी
सागर पर मध्य
प्रदेश ने बना
लिये और मैं
उनको पूछना
चाहता हूं क्या
एक साल में 151
एनीकट बन गये
। यह इनके
शासनकाल में
भी बने हैं ।
ans\akt\1400\2c\11.3.2006\1
ज्यादातर
इनके शासन काल
में बने एनीकट
और यह सरकार,
मध्यप्रदेश
के साथ कुछ
नहीं कर पाई
इनकी सरकार।
हमारी सरकार
ने उस पर पहल
की, मध्यप्रदेश
के साथ बैठे
और हमने मध्यप्रदेश
को कहा कि यदि
यदि आप एनीकट
बनाओंगे तो
चम्बल का
पानी हम भी
रोक लेंगे और
उसके आधार पर
टेबल पर आया
और आज वह
समझौते की
स्थिति में आ
गया।
उपाध्यक्ष
महोदय, माननीय
भैरोसिंह जी
शेखावत मुख्यमंत्री
थे, यमुना के
पानी का
समझौता
हरियाणा के
साथ किया,
हरियाणा
तैयार हो गया
यमुना का पानी
देने के लिए।
उसके बाद यह सरकार
आ गई, आज यमुना
का पानी कहां
है? हम
वापिस प्रयत्न
कर रहे हैं।
यमुना का पानी
इन्होंने
हमारा भेज
दिया .6 एमए
पानी, पंजाब
के साथा जो
समझौता किया
आज तक हमको
नहीं मिल रहा।
वहां पर हमारी
सरकार ने,
जबकि हैरीकेज
का सिस्टम था
उसको सुदृढ़
किया जिसके
कारण हमको
ज्यादा पानी
मिलने लग गया।
हेरीके बैराज
की, गेटों की
मरम्मत करके
तो हमारी
सरकार तो हर
तरह से पानी
आये, चारों
तरफ से इंटर
स्टेट डिस्प्यूट
में राजस्थान
का पक्ष
मजबूती से रखा
जाए और राजस्थान
को लाभ हो इस
बात के लिए
हमारी सरकार
लगातार
प्रयत्न कर
रही है।
अब
इन्होंने
पानी के मामले
में कहा कि
पानी जलापूर्ति
का मामला है
आपका बजट घट
रहा है, आप ऐसा
कर रहे हैं।
मैं आंकड़ों
के आधार पर
कहना चाहता
हूं कि इसमें
भी हम आगे
हैं। 98-99
और 99-2000 का कम्पेरीजन,
मैं कहना
चाहता हूं 98-99 में.....
(समय
समाप्ति सूचक
घंटी)
थोड़ी
देर में
करूंगा, पाँच
मिनिट लूंगा।
श्री
उपाध्यक्ष:
कन्क्ल्यूड
कीजिए, काफी
सदस्य हैं।
डा.
एन.एस.गुर्जर:
हां, मैं कन्क्ल्यूड
कर रहा हूं,
मैं आपको
इररिलेवेंट
बोलू तो आप
मुझे बता देना
क्योंकि इन्होंने
बोला है इसलिए
मेरा जवाब
देना आवश्यक
है। 98-99 और 99-2000 में
इन्होंने 149.15
करोड़ रूपये
पानी में कम
किये और 2003-4 के अंदर
इन्होंने 17.77
करोड़ रूपये
की कमी की है।
जब 2003-4 में हम आ
गए तो 3-4 और 4-5 का
हमारा बजट आप
देखें तो 1004-5 में
हमने आते ही 1489.69
करोड़ रूपये
ज्यादा पानी
के ऊपर
प्रावधान
हमने किया,
खर्च किये। इस
तरीके से 2004-5 और 2005-6
के आंकड़े
देखे तो
हमने 527.4 करोड़ रूपये
ज्यादा किये
पानी के अंदर।
2005-6 और 2006-7 की तुलना
करें तो हमने 737.95
यानि 738 करोड़
रूपये ज्यादा
इस पर व्यवस्था
की है,
प्रोवीजन
किया है इसलिए
यह किस आधार
पर कह रहे हैं ? आंकड़े
देखते नहीं
है, पढ़ते
नहीं है और
यहां आकर कह देते
हैं कि, इस पर
आलोचना, केवल
आलोचना कर रहे
हैं, इस पर कम
किया इस पर कम
किया। उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
निवेदन करना
चाहता हूं कि
हर हैड में, हर
स्थिति में
सारी चीजों की हमने
व्यवस्था
की है।
इसी
प्रकार से
हमने
एग्रीकल्चर
हो या पीएचईडी
या दूसरी
चीजें हो या
शिक्षा हो या
स्वास्थ्य सेवाएं,
सब में हमने
बढ़ोतरी की
है।
मैं सरकार को
कुछ सुझाव भी
देना चाहूंगा
और सुझाव यह
देना चाहूंगा ।
अब यह बिजली
टैरिफ की बात
कर रहे हैं।
बिजली की टैरिफ
बढ़ा दी यह
बिजली की
टैरिफ किन
शर्तों पर बढ़ाई
यह नोर्म्स
सब सैंट्रल
गवर्नमेंट, यह
फोर पावर सैक्टर,
यह सैंट्रल
गवर्नमेंट ने
नोर्म्स बना
रखे हैं,हर स्टेट
के यह नोर्म्स।
जब बिजली पर
बहा आयेगी उस
समय डिटेल में
बताऊंगा
लेकिन नोर्म्स
और नोर्म्स
के आधार पर हर
स्टेट को
बिजली की
टैरिफ बढ़ानी
पडे़गी। अगर
बिजली की
स्थिति
सुधारनी है तो
हमें, बिजली
की टैरिफ
राजस्थान
सरकार नहीं
बढ़ा रही है
यह केन्द्र
सरकार के
नोर्म्स है।
उसके आधार पर
राजस्थान को
बिजली का
टैरिफ बढ़ाना
पड़ता है1 यह
जो वाह-वाही
लेना चाहते हैं,
मैं इसके
साथ-साथ राजस्थान
का विकास करना
है तो इन्हें
और हमको मिलकर
साथ चलना
होगा। यह
दोनों की जिम्मेदारी
है हम राजस्थान
का विकास करें
और राजस्थान का
विकास करने के
लिए उपाध्यक्ष
महोदय
हमको कुछ
विशोष प्रयत्न
करने होंगे।
ऐसी
सम्भावनायें
तलाशनी पडे़गी
कौन -कोन से
एरिया है जहां
से रेवेन्यू ज्यादा
क्रियेट कर
सकते हैं,
कहां लेप्स
है जिनको दूर
कर सकते हैं।
रेवेन्यू ज्यादा
जनरेट करके,
स्वंय के
ससाधन ज्यादा
क्रियेट करके
हमारी
वार्षिक
योजना का आकार
बढ़ा सकते
हैं1
पंचवर्षीय
योजना का आकार
बढ़ा सकते
हैं। राजस्थान
को विकास की
दृष्टि से
विकसित
प्रदेशों की
श्रेणी में
जल्दी से जल्दी
ला सकते हैं,
इसके लिए
विशेष प्रयत्न
करने पड़ेगे। इसके
लिए पर्यटन
बहुत बड़ा
क्षेत्र है।
पर्यटन को यदि
हम जोड़ दे तो
हमारे राजस्थान
में पर्यटन की
बहुत सम्भावनायें
हैं इसलिए
हमको इस पर
विशेष ध्यान
देना चाहिये।
इसी
तरह से खनिज,
यहां खनिज और
वन मंत्री जी
बैठे हुए हैं।
खनिज की, एक
हजार खानें
बंद पड़ी है।
सुप्रीम
कोर्ट का आदेश
आया उसके बाद
केन्द्र
सरकार ने राज्यों
को पावर दे
दिया कि आप
चाहे तो
फोरेस्ट
लैंण्ड को,
उस पर परिवर्तित
कर सकते हैं।
मंत्री जी
यहां बैठे हैं
इनको कहना
चाहूंगा कि
आपने आते ही
सदन में घोषणा
की थी कि हम
बहुत जल्दी
फोरेस्ट
लैण्ड में और
दूसरी लैण्ड
में
डिमारकेशन
कराने वाले
हैं। मंत्री
जी सवा दो साल
हो गए आज तक
डिमारकेशन
पूरा नहीं हुआ।
मुझे पता नहीं
आप कब तक इस
डिमारकेशन को
पूरा
कराएंगे। जब
तक डिमारकेशन,
अकेले अलवर
डिस्ट्रिक
में 400 खानें बंद
है। राजस्थान
में एक हजार
खानें बंद है
और फोरेस्ट
एरिया में....
श्री
लक्ष्मी
नारायण देव(वन
एवम पर्यावरण
मंत्री): 9000
डा.एन.एस.गुर्जर:
मैं करेक्ट
कर लेता हूं।
लिखने में कहीं
गलती हो गई।
सब्जेक्ट
टू करेक्शन,
उपाध्यक्ष
महोदय
टाइपिंग मिस्टेक
है। 9000 खानें
राजस्थान
में बंद हैं।
मैं आपसे
निवेदन करना
चाहता हूं कि
डिमारकेशन का
काम पूरा कर
देंगे तो यह खानें
चालू हो
जाएगी
और सरकार का
राजस्व
बढे़गा।
डिमारकेशन नहीं
करने का कारण
क्या हो रहा
है, माइनिंग
लीज दे रखी है
एक स्थान पर
और माइनिंग
एरिया,फोरेस्ट
एरिया में मैं
आपको केवल
मेरा जिला जहां
से मैं चुनकर
आता हूं टोंक,
उसमें आज की
डेट में जाकर
देख ले फोरेस्ट
एरिया में
माइनिंग हो
रही है या
इल्लिगल माइनिंग
हो रही है कि
नहीं दूसरी जो
लैण्ड हैं
वहाँ भी। आप
देखे कि अगर
हमने इल्लिगल
माइंस को
रोका, फोरेस्ट एरिया
में माइनिंग
हो रही है
उसको रोका और
डिमारकेशन
कराकर लीज
देना शुरू कर
दिया तो
करोड़ों
रूपये का
राजस्व आपका
बढ़ जाएगा।
उपाध्यक्ष
महोदय, इसके
साथ ही जैसा मैंने
कहा कि इंटर
स्टेट डिस्प्यूट
को भी, हमारी
सरकार
हांलाकि
प्रयत्नशील
है लेकिन इसको
और
प्रायोरिटी
में हमको लाना
चाहिये ताकि
इंटरस्टेट
डिस्प्यूट में जो
पानी का हिस्सा
हमारा है
अलग-अलग
प्रदेशों के
साथ वह हमको मिल
सके।
इसी
तरह से
रिफाइनरी,
खुशी की बात
है कि
रिफाइनरी आप
लगा रहे हैं1
बहुत प्रयत्न
किया राज्य
सरकार ने, वह
बधाई की पात्र
है लेकिन इसके
साथ-साथ आप
अगर रायल्टी
इस पर लगाये
रिफाइनरी के
तहत, रायल्टी
लगाने से
आपको....
श्री
लक्ष्मी
नारायण दवे:
नहीं वो है। इनकी भी
अंडर कन्सीड्रेशन
है, प्रोजेक्ट
बना रहे हैं।
डा.
एन.एस.गुर्जर:
नहीं नहीं वो
रायल्टी तो
है लेकिन अपना
हिस्सा
कितना है
उसमें?
श्री
लक्ष्मी
नारायण दवे: 20
प्रतिशत
रायल्टी।
डा.एन.एस.गुर्जर:
20 प्रतिशत, धन्यवाद।
इसके लिए भी
बधाई देता हूं
क्योंकि
डिस्प्यूट
चल रहा था
आपने सैटल कर
लिया। हमारे
ऊपर सरकार को
एक सावधानी और
रखनी पड़ेगी, 58
से 60, दो साल
हमने
कर्मचारियों
की आयु बढ़ाई,
अब वह समय आ
गया दो साल
होते ही रिटायरमेंट
होगा और
रिटायरमेंट
होने के कारण
सरकार के ऊपर
करीब 1600 करोड़
रूपये का भार
आएगा। सरकार
को अभी से
उसकी व्यवस्था
करनी चाहिये
कि 1600 करोड़
रूपये का घाटा
हम कहां से
पूरा करेंगे।
श्री
वीरेन्द्र
मीणा(वित्त
एवम करारोपण
राज्य
मंत्री): बजट
में प्रावधान
कर दिया है।
डा.एन.एस.
गुर्जर: किया
है किया है
लेकिन पॉच सौ
समथिंग का ही
किया है।
श्री
वीरेन्द्र
मीणा: 750 करोड़
रूपये का पूरा
प्रावधान।
डा.
एन.एस. गुर्जर: 750
करोड़ रूपये
का किया है
लेकिन भार
आएगा 1600 करोड़
के आस-पास, मोर
देन सिसटिन
हंडरेड
करोड़। अच्छी
बात है किया
है, मैं सरकार
को सचेत कर
रहा हूं।
इसी
तरह से
हमारे यहां
राजस्थान की
जो परिस्थिति
है, हमारी
इकनोमिकी
कृषि आधारित
है, पशुपालन
आधारित है।
चौधरी
चरणसिंह जी
कहा करते थे
कि गांवों का
विकास, जब तक
कृषि, पशुपालन
और लघु
उद्योगों को
बढ़ावा नहीं
देंगे तब तक
गांवों का
विकास नहीं हो
सकता इसलिए
गांवों की
इकनोमिकी को मजबूत
करना है,
हमारे गांवों
की इकनोमिकी
जब तक मजबूत
नहीं होगी 70
प्रतिशत लोग
हैं, महात्मा
गांधी ने भी
कहा, पंडित
दीनदयाल
उपाध्याय ने
भी कहा,
डा.लोहिया ने
भी कहा, चरण
सिंह जी ने भी
कहा और सरदार
पटेल ने भी
कहा कि गांवों
की इकनोमिकी
मजबूत नहीं
होगी तब तक
किसी भी राष्ट्र
या इसकी
इकनोमिकी
मजबूत नहीं हो
सकती राज्य
की।
मैं निवेदन
करना चाहता
हूं कि यह काम
भी हमको करना
चाहिये इसके
लघु उद्योग
कहां कहो
आधारित,
पशुपालन
आधारित, कृषि
आधारित लघु
उद्योग, इनमें
हम डवलपमेंट
करें तो राज्य
की इकनोमिकी
में एक भू
आयेगा यह हमें
कहना चाहिये।
ऊर्जा
सुधार
कार्यक्रम,
इसमें हम छीजत
को कम करें,
लिग्नाइट का
अधिक से अधिक
उपयोग करेंगे
तो उसकी लागत
कम आएगी।
गुजरात सरकार
से हमें सबक
लेना चाहिये।
इसी
तरह बाहरी
निवेश को
बढ़ावा देने के लिए
हमको पूरी
ताकत लगानी
चाहिये। बाहर
से ज्यादा से
ज्यादा पैसा
आकर राजस्थान
में इन्वेस्टमेंट
हो। आज चाइना
मजबूत क्यों
है, बाहरी
निवेश सबसे ज्यादा वर्ल्ड
में अगर
है तो वह
चाइना में है।
चाइना ने
प्रयत्न
करके निवेश
बढ़ाया जिसके
कारण चाइना की
इकनोमिकी
मजबूत हो गई।
भारत सरकार भी
प्रयत्न
करें ग्लोबलाइजेशन
के बाद, भारत
के अंदर ज्यादा
से ज्यादा
निवेश हो,
हमारी सरकार
को भी प्रयत्न
करना चाहिये,
राजस्थान को
और राजस्थान
इसमें प्रयत्नशील
है। मैं बधाई
देना चाहता
हूं सरकार को
लेकिन और
प्रयत्न
बढ़ाने की
आवश्यकता
है।
Ddm/usc/110306/1410/2d
इसी
तरह से जनसंख्या
नियंत्रण, आज
उपाध्यक्ष
महोदय, जनसंख्या
नियंत्रण,
हमारी जनसंख्या
जो पूरे भारत
की जनसंख्या
है, उसकी
तुलना में
हमारी जनसंख्या
बहुत बढ़ी हुई
है और यह
जनसंख्या जब
तक नहीं
रुकेगी इसको
रोकेंगे नहीं,
तब तक हमारी,
चाहे हम कितने
ही प्रयत्न
करें, इकोनोमी
को बढ़ाएं, वह
कम पड़ते
जाएंगे। जो
भारत का
प्रतिशत है, 1951
के अन्दर
दशकीय वृद्धि,
जनसंख्या
लाखों में
प्रतिशत, भारत
13.31 प्रतिशत और
राजस्थान 15.20
प्रतिशत पर
था, आज 1991 आते-आते
कुल भारत की
तो 13 से 23 पर
पहुंची और हम 15
से 28 पर पहुंचे
हैं और 2001 आते-आते
तो हम उस पर
कांस्टेंट
रहे, भारत की
तो नीचे आ
गयी। भारत में
तो 23.86 से 21.34
प्रतिशत पर आ
गयी और हम 28
प्रतिशत पर,
जहां थे हम
वहीं के वहीं पर
पड़े हैं।
इसलिये इस
जनंसख्या
वृद्धि को जब
तक हम नहीं
रोकेंगे तो...
श्री
रामप्रताप
कासनिया: एक
साथ 5-5 बच्चे
पैदा होने लगे
तो जनसंख्या
बढ़नी ही है।
डा.एन.एस.गुर्जर:
हमारे यहां
कुछ डाक्टर
हैं, यह आप उन
डाक्टरों से
राय लीजिए,
इसका क्या
इलाज हो सकता
है, कई लोगों
की उर्वरा
शक्ति...
डा.सुरेश
चौधरी: एक साथ 5
पैदा हो गये,
उनको नहीं रोका
जा सकता है। 5
बार हो तो
उसके लिये तो
कोई कानून बन सकता
है।
डा.एन.एस.गुर्जर:
वह ठीक है
लेकिन यह exceptions are not rules. यह
एक्सेप्शंस
ही हैं । कई
लोगों की
उर्वरा शक्ति
ज्यादा होती
है तो यह एक्सेप्शंस ही हैं,
और यह एक्सेप्शंस
हमेशा नहीं
होते हैं। यह
वण्डर हैं,
दुनिया में कई
तरह के वण्डर
होते रहते हैं
तो यह भी एक
वण्डर है।
(व्यवधान)
डा.सुरेश
चौधरी: यह
अपवाद है,
उर्वरा शक्ति
से सम्बन्धित
नहीं है। यह
जेनेटिक
इफेक्ट है।
डा.एन.एस.गुर्जर:
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
निवेदन करना
चाहूंगा इनसे,
मैं इनका
सहयोग मांगना
चाहूंगा, कल
आपने एक बात कही
थी, माननीय
जुबेरजी बोल
रहे थे कि इस
सरकार की
गाड़ी के आगे
के टायर हवाई
जहाज के हैं
और पीछे के टायर
बैल गाड़ी के
हैं। मैं उनको
ध्यान
दिलाना चाहता
हूं कि कोई भी
देश या प्रदेश
जब तक अपनी
जड़ों से
जुड़ा हुआ
नहीं रहता है,
जड़ों से
जुड़कर विकास
नहीं करेगा वह
लम्बे समय तक
अपने अस्तित्व
में नहीं रह
सकता है। आज
भारत क्यों
खड़ा है, विश्व
में वापस
आर्थिक शक्ति
के रूप में,
सैन्य शक्ति
के रूप में,
राजनीतिक
शक्ति के रूप
में क्यों
खड़ा हो गया,
हमारे ऊपर
हमले हुए
लेकिन हम जड़ों
से जुड़े रहे
इसलिये उनसे
एक निवेदन करना
चाहता हूं, वे
कहते हैं कि
पिछले पहिये
बैलगाड़ी के
हैं और यह कहा
कि आर.एस.एस. को
खुश करने के
लिये किया तो
मैं उनसे कहना
चाहता हूं इसी
पर, कि मुझे
सूखा, मुझे
मतलब हमारी
सरकार और
संगठनों के लिये
जो इन्होंने
कहा है, उसके
लिये मैं कहना
चाहता हूं कि
हमें सूखा
वृक्ष समझकर
हमारी टहनियां
काटने वालों,
जरा समझ लो हम
जड़ों से जुड़े
हैं वक्त आने
दो फिर हरे हो
जाएंगे, हम
जड़ों से
जुड़े हैं,
वक्त आने दो,
फिर हरे हो
जाएंगे।
इसलिये यह कह
रहे हैं कि
बैलगाड़ी, हम
जड़ों से
जुड़कर रहना
चाहते हैं,
लेकिन आधुनिक
राजस्थान भी
बनाना चाहते
हैं, मार्डन
राजस्थान,
विकसित राजस्थान,
इसलिये इनका
सहयोग क्यों
चाहिए (व्यवधान)
श्री
उपाध्यक्ष:
अब इसके
बाद..(व्यवधान)
अब इसके बाद
तो अच्छा
नहीं लगेगा।
डा.एन.एस.गुर्जर:
बस दो मिनट, दो
मिनट। (व्यवधान)
मैं दो मिनट
के अन्दर
समाप्त कर
रहा हूं, बस दो
मिनट में ही
समाप्त कर
रहा हूं। मैं
दो मिनट में
ही समाप्त कर
रहा हूं।
श्री
सुभाषचन्द्र
शर्मा: हरा है
अपने पास में
तो, आप तो
हरे-भरे हो,
सूखे वाले तो
वे थे, उनको
देना चाहिए था
यह शैर तो, आप
तो हरे-भरे
हो।
डा.एन.एस.गुर्जर:
नहीं, नहीं,
उन्होंने
बैलगाड़ी की
बात कही, उस पर
कहा है मैंने।
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं दो
मिनट में
समाप्त कर
रहा हूं। यह
एक हमारी
मेहन्दी है
सोजत के अन्दर,
मैं चाहूंगा
कि वैट से
उसको बाहर कर
दिया जाए।
उपाध्यक्ष
महोदय,
करोड़ों
रुपये का एक्सपोर्ट
हो रहा है। (व्यवधान)
वहां की
इकोनोमी, अगर
सुहागिन...(व्यवधान)
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
चाहूंगा कि
सरकार इस पर
विचार करे जब
आये तो एक
मेहन्दी को
वैट से अगर
बाहर निकाले
तो अच्छा
रहेगा। लेकिन
विपक्ष के
माननीय सदस्य,
कहीं सुन रहे
होंगे, उनसे
निवेदन करना
चाहूंगा, आज
अभी केन्द्र
सरकार को लेकर
के बहुत बवाल
मचा। आज हमारे
24 करोड़ रुपये
सरिस्का
टाइगर
प्रोजेक्ट
का प्लान
बनाकर भेज रखा
है उनको भी
चिन्ता है कि
जो जंगली
जानवर हैं
उनका बचाव हो,
ये अभ्यारण्य
सुरक्षित
रहें, सरिस्का
टाइगर
प्राजेक्ट
का 24 करोड़
रुपये का प्लान
बनाकर भेज रखा
है, केन्द्र
सरकार के पास
पेंडिंग है,
वह स्वीकृत
नहीं कर रहे
हैं। 109 करोड़
रुपये केवलादेवी
के लिये,
केवलादेवी
में चम्बल से
पानी लाने के
लिये प्रस्ताव
बनाकर भेज रखा
है, एक साल हो
गया वह भी स्वीकृत
नहीं कर रहे
हैं। 190 करोड़,
रुरल डवलपमेंट
मिनिस्टर
बैठे हैं, 190
करोड़ रुपये
रुरल
डवलपमेंट के
रोक रखे हैं।
वह भी हमको
नहीं दे रहे
हैं। 11वें
वित्त आयोग
के 307.55 करोड़
रुपये भी नहीं
दे रहे हैं। 26 करोड़
रुपये, जो
यू.सी. ग्राण्ट
हुई थी, 31 मार्च
में उसके
बकाया हैं, वे
भी नहीं दे
रहे हैं । 332
करोड़ रुपये
12वें वित्त
आयोग के, कण्डीशन
है उसके आधार
पर हैं, वे भी
नहीं दे रहे
हैं। इस तरह
से कुल मिलाकर
के आज मुख्य
मंत्रीजी का
बयान आया है,
उसके आधार पर 155.86
करोड़ रुपये
सी.आर.एफ. का
बाकी है, वे
नहीं दे रहे
हैं। इस तरह
से सर्विस
टैक्स का उल्टा
नहीं दे रहे
हैं, आज मुख्य
मंत्रीजी का
बयान आया कि 866
करोड़ रुपये
इन चीजों के
बकाया हैं ।
इसके अलावा
बी.पी.एल. और
ए.पी.एल. का
पूरा गेहूं नहीं
दे रहे हैं।
अन्नपूर्णा
योजना के
गेहूं को कम
कर दिया गया
और सरसों की
खरीद के लिये 900
करोड़ रुपये
का ज्ञापन
दिया हुआ है,
वह भी हमको
नहीं दिया है।
इस तरह 33 करोड़
रुपये
इर्रिगेशन
में नर्मदा,
माही की
नार्मल
ग्राण्ट है
उसके रोक रखे
हैं, 29.813 करोड़
रुपये गंगनगर
के
मार्डनाइजेशन
के लिये और
आई.जी.एन.पी. के
सैकिण्ड फेज
के लिये 63
करोड़ रुपये
नहीं दे रखे
हैं। मैं
चाहूंगा कि ये
सब लोग, इसके
उपरान्त
सर्विस टैक्स
को जोड़कर 10-12
प्रतिशत कर
दिया, यह 81
आइटम्स में
था 15 आइटम और
जोड़ दिये, 96
आइटम पर कर
दिया तो यह जो
इस तरह से
हमारे राजस्थान
के ऊपर भार
लाद दिया। जो
सरकार मांग
रही है वह दे
नहीं रहे हैं
और उसके बाद
यह कह रहे हैं कि
राजस्थान
सरकार केन्द्र
के पैसे से चल
रही है, सरासर
गलत तथ्य
प्रस्तुत कर
रहे हैं। मैंने
आपको आंकड़े
दिये कि कितने
करोड़ रुपये
राजस्थान के
रोक रखे हैं।
इसने एक अपील
करता हूं, जहां
कहीं भी हों,
सुनें, राजस्थान
के हित के
लिये, यह नहीं
सोचें, कभी
सत्ता में वे
आएंगे, कभी हम
आएंगे, यह नहीं
सोचें कि वे
प्रतिपक्ष
में हैं, हम
पक्ष में हैं।
हम दोनों
मिलकर दो
पहिये साथ-साथ
चलेंगे तो
राजस्थान का
विकास होगा
इसलिये मैं राजस्थान
सरकार से चाहूंगा
कि जो सुझाव
दिये उन पर
चर्चा करे,
केन्द्र से
जो हमारा
बकाया है उस
पर दबाव डालकर
सहयोग लेकर
के, उसको
प्राप्त करे
और अन्त में
विपक्ष से
अपील करना
चाहूंगा कि आओ,
साथ-साथ जैसे
मुख्य
मंत्रीजी ने
कहा है,
साथ-साथ हम
मिलकर के अगर चलेंगे
तो राजस्थान
का विकास
होगा, इस पर
केवल दो
पंक्तियां रखकर
समाप्त करना
चाहता हूं।
(व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: स्वरचित
होनी चाहिए ।
डा.एन.एस.
गुर्जर: स्वरचित
ही हैं सारी
की सारी।
शक्ति
और भक्ति का
अद्भुत स्थान
है, आओ मिलकर
विकसित कर
दें, प्यारा
राजस्थान है,
आओ मिलकर विकसित
कर दें, प्यारा
राजस्थान
है। उपाध्यक्ष
महोदय, आपने
मु्झे मौका
दिया, इसके
लिये धन्यवाद।
श्री
उपाध्यक्ष:
धन्यवाद, धन्यवाद,
बहुत-बहुत धन्यवाद।
श्री
प्रद्युम्नसिंह।
(अनुपस्थित)
श्री
रामप्रताप
कासनिया।
श्री
रामप्रताप
कासनिया:
उपाध्यक्ष
महोदय, माननीय
मुख्य
मंत्रीजी ने
विधान सभा में
जो बजट पेश
किया है, उस
में हर वर्ग,
हर क्षेत्र का
ध्यान रखा
गया है,
महिलाओं पर तो
इस बजट के अन्दर
विशेष ध्यान
रखा गया है।
एक तरह से यह
बजट महिलाओं
को समर्पित है
यह कह दिया
जाए तो कोई
बुरी बात नहीं
होगी। उपाध्यक्ष
महोदय,
महिलाओं के
बारे में जो
रजिस्ट्री
के अन्दर दस्तावेज
पंजीकरण
कराने के
मामले में छूट
दी है, उसके
अन्दर
महिलाएं अपने
आप में बहुत
ही शक्तिशाली
बन गयी हैं,
इसका उदाहरण
इस बजट में
है।
Vps/usc/1420/11-3-06/2e
माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय सन 2004 में
तीन महीने के
अन्दर दस्तावेजों
की संख्या जो
आठ हजार थी वह
अगले तीन माह
में बढ़कर 34 हजार
हो गयी। 2004-05 तक
बढ़कर 67 हजार
हो गयी और
अप्रैल 2005 से
दिसम्बर तक एक लाख के
लगभग पहुंच
गयी।
माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, पहले
महिलाओं के
नाम पर कोई
भूमि नहीं
खरीदता था। जब
से यह कर में
छूट हुई है तब से
ज्यादातर
पंजीयन
महिलाओं के
नाम से ही हो
रहा है। इसी
तरह से बी.पी.एल.
परिवार के अन्दर
पन्नाधाय
जीवन अमृत
योजना के तहत
बीमा का लाभ
देकर और राज्य
सरकार ने बीमा
राशि जमा
कराने का जो
निर्णय लिया
है और
दुर्घटना
होने पर मृत्यु
होने पर बीमित
परिवार को
पचास हजार
रुपये, प्राकृतिक
मृत्यु होने
पर बीस हजार
रुपये और गम्भीर
क्षति होने पर
पचास हजार रुपये,
यह भी बहुत
बड़ी उपलब्धि
है। बी.पी.एल.
परिवार के
11वीं और 12वीं
कक्षा तक के
बच्चों को
बीमा कम्पनी
में 100 रुपये
प्रति माह,
यानि प्रति
वर्ष 1200 रुपये
प्रति
विद्यार्थी
को देने का जो
निर्णय किया है,
यह भी बहुत
सराहनीय कदम
है।
वृद्धावस्था
पेंशन, यह एक
बहुत बड़ी बात
राजस्थान
सरकार ने
वृद्धों का जो
सम्मान किया
है, इससे
वृद्धों का
मान और सम्मान
बढ़ेगा। 200
रुपये से
बढ़ाकर 400
रुपये जो पेंशन
की है इसमें
वृद्धों का मान-सम्मान
बढ़ेगा।
वृद्धों की
सेवा लोग
करेंगे, नहीं
तो वृद्धों की
हालत बहुत ही
खराब थी तो
इसके लिए
राजस्थान
सरकार को मैं धन्यवाद
देना चाहूंगा
कि वृद्धों का
जो मान-सम्मान
किया है, यह
बहुत ही बड़ी
उपलब्धि है
वृद्धों के
लिए।
माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, स्वयं
सहायता समूह
के अन्दर भी
लाखों की संख्या
में महिलाओं
ने समूह
एकत्रित किये
हैं और मैं यह
मानकर चलता
हूं कि राजस्थान
में 25-30 प्रतिशत
महिलाएं इन
समूहों से
आगामी वर्षों
में जुड़
जाएंगी, ऐसा
मेरा मानना
है।
माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय,
आंगनबाड़ी
केन्द्रों
के अन्दर आज
तक फूटी कौड़ी
का भी कोई
प्रोविजन
नहीं था। न तो
राज्य सरकार
की तरफ से था
और न केन्द्र की तरफ
से था।
वर्तमान
सरकार ने पहली
बार यह
प्रोविजन
किया है कि
गांवों में
आंगनबाड़ी
केन्द्र के
भवनों का निर्माण
करने का जो
निर्णय लिया
है, यह बहुत ही
सराहनीय कदम
है। समाज कल्याण
विभाग में भी,
पूर्व सरकार
ने पाँच वर्ष
के कार्यकाल
में योजना मद
में लिये गये
कुल प्रावाधन
की तुलना में
वर्तमान
सरकार ने तीन
वर्षों में ही
यह 20 परसेंट की
वृद्धि करते
हुए 262 करोड़
रुपये का जो
प्रावधान
किया है, यह
अपने आप में
बहुत बड़ी
उपलब्धि है।
माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, मिड डे
मील के लिए
गर्म भोजन
विद्यालयों
में उपलब्ध
कराना, साधन
सम्पन्न के
लिए तो
कोई बहुत बड़ी
बात नहीं है परन्तु
गरीब के बच्चे
को मुफ्त में
पुस्तक मिल
जाए और खाने
के लिए रोटी
मिल जाए तो वह
शिक्षित हो
सकता है, नहीं
तो गरीब का
बच्चा पुस्तक
के अभाव में,
खाने के अभाव
में विद्यालय
में पढ़ने ही
नहीं जाता,
पाँच-छह वर्ष
का होते ही,
माता-पिता
उसको कहते हैं
कि तू तेरा
खुद ही कमा कर
खा, तो यह
सरकार ने एक
बहुत ही बड़ा
पुण्य का
कार्य किया
है, इसके लिए
मैं सरकार को
धन्यवाद
देना
चाहूंगा।
माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, समाज
कल्याण
द्वारा 697
छात्रावासों
में निवास
करने वाले
विद्याथियों
को मैस भत्ता
675 रुपये से
बढ़ाकर 725
रुपये किया
गया है, यह भी एक
गरीब
विद्यार्थी
के लिए बहुत
अच्छा कार्य
है। माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, यह
सरकार जब से
सत्ता में
आयी है, चाहे
पहले हो, चाहे
बाद में आयी हो
तब से लेकर
समाज कल्याण
विभाग की तरफ
और जो गरीबों
के बच्चे हैं
उनकी तरफ
जितनी प्रोत्साहित
राशि, चाहे
मैस के रूप
में हो, चाहे
पुस्तक के
रूप में हो,
चाहे किस न
किसी रूप में
हो, गरीब को
ऊपर बढ़ाने का
काम इस सरकार
ने किया है। इसमें
कोई संदेह
नहीं है। द्वितीय
विश्व युद्ध
के सैनिकों की
विधवाओं को इस
सरकार ने
सोचकर कि
विधवाओं की जो
पेंशन है
उसमें बढ़ोतरी
की जाए, यह भी
बहुत बड़ा कदम
है। नारे तो
हम हमेशा जवान
और किसान के
लगाते रहते
हैं परन्तु
इसकी तरफ किसी
ने ध्यान
नहीं दिया।
वर्तमान
सरकार ने इस
पर ध्यान
देकर और
द्वितीय विश्व
युद्ध की
विधवाओं को और
द्वितीय विश्व
युद्ध के
सैनिकों को 300
रुपये से
बढ़ाकर 800 रुपये
जो पेंशन की
है, यह बहुत ही
बड़ी उपलब्धि
का कार्य है।
माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, परमवीर
चक्र, अशोक
चक्र, महावीर
चक्र, कीर्ति
चक्र, वीर
चक्र प्राप्त
करने वाले
सैनिकों को
वर्तमान में
जो तय राशि है
उससे पाँच-छह
गुणा बढ़ोतरी
करके इनका मान-सम्मान
किया गया है।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
दस गुणा ।
श्री
रामप्रताप
कासनिया: दस
गुणा भी कह दी
जाए तो कोई
खास बात नहीं
है। एग्जैक्ट
आकड़े किताब
वाले ही दूंगा
तो तब आप कहेंगे
कि रिपीट करते
हैं। यह रौळा
है । सही बात
यह है। यहां
तो पोथी
पढ़-पढ़कर
छोड़ दी।
छोड़ा ही
नहीं, आकड़े
नहीं है यह। ...
(व्यवधान)
माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, 5000 मिडल
स्कूल खोलने
का जो निर्णय
किया है, यह
ग्रामीण क्षेत्र
के लिए और
विशेषकर गरीब
और किसान के
लिए वरदान
साबित होगा।
देश आजाद होने
के बाद पहली
बार इतनी बड़ी
संख्या में
ग्रामीण
क्षेत्रों के
अन्दर मिडल
स्कूल
खुलेंगे, जो
एक ऐतिहासिक
निर्णय है। इसी
तरह से आगामी
वर्ष में 31
हजार अध्यापकों
की नियुक्ति
करने का जो
निर्णय लिया है,
यह भी बहुत
बड़ी बात है।
10वीं और 12वीं के
विद्यालयों
में शौचालय और
पेयजल उपलब्ध
कराने के लिए
सरकार ने 27
करोड़ रुपये
का जो प्रोविजन
रखा है, यह भी
बहुत बड़ा
सराहनीय कदम है। 1387
विद्यालयों
में कक्षा
कक्ष और शौचालय
बनाने का जो
निर्णय है, यह
भी बहुत बड़ी
उपलब्धि है।
माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, राजस्थान
सरकार ने वर्ष
2001, 02 और 03 की फसलों
का आबियाना माफ
किया था। कुछ
काश्तकारों
ने आबियाना
पहले जमा करा
दिया, जिनका बारबार
यही रोना-धोना
था और सरकार
से मांग थी कि
हमने क्या
गुनाह कर दिया
? हमने पैसे
जमा करवाया
है। हमारा भी
आबियाना माफ
होना चाहिए तो
मैं सरकार को
धन्यवाद
देना चाहूंगा
कि उन लोगों
ने जो पैसे
जमा करा दिये,
उनके आगे
आबियाना जो
आएगा, उसमें
समायोजन करने
का जो निर्णय
सरकार ने लिया
है, मैं किन
शब्दों में
तारीफ करूं,
वह शब्द मेरे
पास नहीं है।
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, यह
बहुत बड़ा कदम
है। इतना ही
नहीं ब्याज
माफ करके काश्तकारों
को,
सिंचित
एरिया के काश्तकारों
को बहुत ही
बड़ा लाभ
प्रदान किया
है, इसके लिए
भी मैं सरकार
का आभार प्रगट
करना चाहूंगा।
माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं ज्यादा
आकड़ेबाजी
में नहीं
पडूंगा, कुल
मिलाकर चाहे पानी
हो, चाहे
बिजली हो,
चाहे सड़क हो,
चाहे गुणवत्ता
की बात हो,
चाहे शिक्षा
की बात हो,
चाहे समाज कल्याण
की बात हो,
मेरा तो यही
कहना है कि इस
बजट में जो
धरातल पर हो
रहा है, उसकी
प्रशंसा कर
रहा हूं।
विपक्ष के
साथी बारबार
यह बात
दोहराते हैं
कि इस सरकार
ने ऐसे
कर दिया,
वैसे कर दिया।
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, मैं तो
तीसरी बार आया
हूं, मैं इतना
ही जानता हूं
कि जब से
भारतीय जनता
पार्टी की
सरकार राजस्थान
में जब-जब सत्ता
में आयी है,
तब-तब ही गांव,
गरीब और किसान
का भला किया
है। हर रूप
में छूट दी
है। कोई नया
टैक्स नहीं
लगाया है। कोई
कर में वृद्धि
नहीं की। किसी
न किसी रूप
में छूट ही दी
गयी है।
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, तेल पर
बिक्री कर कम
करने का जो निर्णय
लिया है, यह भी
बहुत बड़ी उपलब्धि
है। काश्तकारों
को इससे राहत
मिलेगी,
डीलरों को,
मिलों को इससे
राहत मिलेगी।
माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, पशु
चिकित्सालय,
चिकित्सालय,
पशु उप केन्द्र
और उप स्वास्थ्य
केन्द्र
खोलने का जो
निर्णय लिया
है, उसके लिए
भी मैं सरकार
का धन्यवाद
करना
चाहूंगा।
माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, अब मैं
कुछ बातें
मांग के तौर
पर, सुझाव के
तौर पर आपके
माध्यम से
सरकार से
निवेदन करना
चाहूंगा।
Spp/usc/11.3.2006/1430/2f
बजट पर तो
बहस हो चुकी,
बहुत-से लोगों
ने तर्क-वितर्क
के साथ
आंकड़ों के
साथ समझाने
में कोई कमी
नहीं रखी।
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से यह निवेदन
करना चाहूंगा
कि तहसील हैड
क्वार्टर पर
एक
वृद्धाश्रम
खोल दिया जाये
और उसमें
मुफ्त खाने की
सुविधा उपलब्ध
करवा दी जाये
तो यह भी गरीब
वृद्ध के लिये
बहुत बड़ा
कार्य होगा और
सरकार को
इसमें पीछे नहीं
हटना चाहिये।
मेरा यह
निवेदन है।
...(व्यवधान) .. अपने
भी बूढ़े
होंगे, कोई
हमेशा ही जवाब
थोड़े रहेंगे।
उपाध्यक्ष
महोदय, टीसी
से पुख्ता
गंगानगर व
हनुमानगढ़
जिले में टीसी
के जो काश्तकार
हैं, उनके ऊपर
वर्तमान में
मुरब्बाबंदी
के नाम से
पाबन्दी लगा
रखी है
अलॉटमेंट पर,
पानी वहां
पूरा पीने के
लिये ही नहीं
मिल रहा है,
परन्तु
मुरब्बाबंदी
के नाम से
अलॉटमेंट रोक
रखा है। मैं
आपके माध्यम
से रेवेन्यू
मंत्रीजी का
ध्यान
आकर्षित करना
चाहूंगा कि
रोक आप तुरन्त
हटायें । जिस
क्षेत्र के
अंदर पानी की
कोई योजना
नहीं है, पानी
पहुंच नहीं
सकता, उस
क्षेत्र को
आपने
उपनिवेशन
क्षेत्र में
सम्मिलित कर
रखा है, उसके
अंदर कानून-कायदे
नहीं हैं, जो
सिंचित एरिया
है और पानी
वहां पहुंच
नहीं सकता तो
यह मैं निवेदन
करना चाहता
हूं कि उस
एरिये को
डि-कोलोनाइजेशन
किया जाये।
इसके अलावा 1955
से पूर्व के
जो काश्तकार
हैं, आज दिन तक
उनको
खातेदारी
नहीं मिली है
और उपाध्यक्ष
महोदय, सन् 1955 के
बाद के जो
काश्तकार
हैं, एक मुरब्बा
आवंटन वाले
काश्तकार
हैं, उनको भी
खातेदारी
नहीं मिल रही
है। आपने वैसे
तो आन्दोलन
के अंदर यह
निर्णय किया,
सरकार ने कोई
कमी नहीं
छोड़ी है
निर्देश देने
में, पर मौके
पर यह आन्दोलन
के अंदर लागू
नहीं हुआ है। यह
मैं निवेदन
करना चाहता
हूं।
उपाध्यक्ष
महोदय, मेरे
विधान सभा
क्षेत्र में
सरदारगढ़ एक
पुरानी
पंचायत है
जिसमें राजसिको
का प्रकरण था,
माननीय
मंत्री महोदय
इस पर ध्यान
दें। पूर्व में
जब भारतीय
जनता पार्टी
की सरकार थी
तो एक लाख पच्चीस
हजार रूपये
प्रति मुरब्बा
आवंटन करने का
निर्णय लिया
था और तीन माह
का समय दिया
था प्रार्थना
पत्र देने का
तो उस तीन माह
के अंदर काश्तकारों
ने प्रार्थना
पत्र दिया।
इतने में दुबारा
कांग्रेस की
सरकार आई, कुछ
अप्रोच वाले जो
काश्तकार थे,
उन्होंने तो
एक लाख पच्चीस
हजार रूपये
में भूमि
आंवटन करवा ली
और बाद में
कांग्रेस की
सरकार आने के
बाद उसी मुरब्बे
की कीमत पाँच
लाख और सवा
चार लाख रूपये
कर दी। उपाध्यक्ष
महोदय, एक
श्रेणी के
काश्तकार, एक
ही गांव के, एक
ही पंचायत के
और इतना भेदभाव,
आपने कीमत तो
कम की है, किश्तें
भी कम की हैं
परन्तु जिला
कलेक्टर
महोदय इस पर
ध्यान नहीं
दे रहे हैं।
सरकार ने जो
कीमत कम की है
राजसिको का भी
सामान्य
आवंटन है,
भूमिहीन
मानते हुए
उसमें आवंटन
किया है तो जो
राशि आपने
किश्तों की
कम की है, उसके
लिये तो आपका
बहुत बहुत धन्यवाद,
पर इस प्रकरण
में वही राशि
लागू करवायें।
एक और
निवेदन करना
चाहूंगा कि
खातेदारी
देने पर भी
पाबन्दी लगा
रखी है।
आई.जी.स्टॉम्प
इस मामले में
राजसिको के
प्रकरण में
बीच में आ
गये। रेवेन्यू
बोर्ड तक तो
फैसला हो
चुका, सरकार
के स्तर पर
ही यह पेंडिंग
पडा है।
खातेदारी
देने पर भी
आपने रोक लगा
रखी है कि
इनसे कम कीमत
वसूल की गयी
है, इनसे ज्यादा
कीमत वसूल की
जाये। इस
प्रकरण से आन्दोलन
के अंदर भी यह
कार्य नहीं हो
पाया।
उपाध्यक्ष
महोदय, सिंचित
क्षेत्र में
थर्मल और घग्घर
डिप्रेशन में
जिन काश्तकारों
की भूमि आ गयी,
एक ही श्रेणी
के काश्तकार
हैं, एक को तो
टीसी से पुख्ता
हो गयी,
खातेदारी मिल
गयी। उसको तो
मुआवजा मिल गया
और दूसरा व्यक्ति,
जो वंचित रह
गया, उसने भी
प्रार्थना पत्र
दिया
खातेदारी
लेने के लिये
पर उसकी अप्रोच
नहीं थी, उसके
पास कोई व्यवस्था
नहीं थी, इस
कारण से उसको
खातेदारी
नहीं मिली। 30-40
वर्षों
पुराने काश्तकार
हैं, उनको
मुआवजा नहीं
मिला और उनको
बेदखल कर
दिया, चाहे
थर्मल की भूमि
हो, चाहे
डिप्रेशनों
में भूमि आई
हुई है। मेरा
आपके माध्यम
से माननीय
मंत्रीजी से
निवेदन है कि
उन काश्तकारों
की भी वही
पात्रता है
जिनको आपने
मुआवजा दिया
है तो ऐसे
काश्तकार, जो
वंचित रह गये
हैं, उनको खातेदारी
अधिकार देकर
और उनको
मुआवजा देने
की व्यवस्था
करें अन्यथा
दूसरी जगह
सरकारी जमीन
पड़ी है खसरों
में, डेजट
वाले एरिये
में भूमि है,
कोई सिंचित
भूमि नहीं है,
बदले में भी
भूमि दी जा
सकती है। यह मैं
आपसे आग्रह
करना चाहता
हूं।
उपाध्यक्ष
महोदय, एक
मैंने पहले भी
निवेदन किया
है हनुमानगढ़
और गंगानगर
जिले के काफी
लोग बालिग पुत्र
और टीसी के
पुख्ता वाले
या कोई और
विवाद के
मामले हैं, वह
भूमि पटवारियों
ने गजट में
जान-बूझकर
पकड़ ली और वह
गजट में साया
हो गयीजिसके
कारण आंवटन
होने में बाधा
आ रही है,
प्रतिबन्ध
है, कोई आंवटन
नहीं हो सकता।
जिला कलेक्टर
गंगानगर ने तो
बहुत ही बड़ा
पुण्य का काम
किया, उन्होंने
तो 500 फाइलें
निकलवा लीं
परन्तु
हनुमानगढ़
कलेक्टर
साहब ने सिर्फ
150-200 फाइलें ही
निकलवाई हैं ।
हजारों केस
आपके पास
विचाराधीन
हैं। क्यों न
आप इसको एक ही
कलम के साथ, जो
पात्र हैं, जिनका
वाजिब हैं,
आंवटन का हक
है तो उन
पत्रावलियों को
क्यों आप
पेंडिंग कर
रहे हो? कृपा
करके आप वह
पत्रावलियां
निकलवाकर
काश्तकारों
को राहत
प्रदान
करें।
(समय
समाप्ति
सचूक घण्टी)
उपाध्यक्ष
महोदय, थोड़ा
है, पाँच मिनट
में खत्म कर
रहा हूं।
श्री
उपाध्यक्ष: काफी
हो गया, समाप्त
करें।
श्री
रामप्रताप
कासनिया: बहुत
ही महत्वपूर्ण
सुझाव है,
सरकार की आय
होगी, काश्तकारों
का भी भला
होगा और यह
कार्य करना
पडेगा।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
यह बिना बोले
ही कर देंगे।
श्री
रामप्रताप
कासनिया: बिना
बोले तो नहीं
होगा। मैं कई
बार बोल चुका
हूं, मुझे कोई
शौक नहीं है
भाषण देने का।
श्री
उपाध्यक्ष:
इनके ध्यान
में है यह
बात।
श्री
रामप्रताप
कासनिया: माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
अकाल के बारे
में कुछ कहना
चाहूंगा। देश
आजाद होने के
बाद अकाल पर
जितना पैसा
खर्च हुआ है
अगर इस पैसे
का सही तरीके
से
युटिलाइजेशन
हो जाता तो आज
अकाल की समस्या
का पचास
प्रतिशत से ज्यादा
समाधान हो
सकता था। अब
इस डिटेल में
मैं नहीं जाना
चाहता कि किस
तरह से हो
सकता था पर यह
बात मैं दावे
के साथ कह
सकता हूं कि
अकाल राहत के
अंदर जितना
पैसा सरकार ने
खर्च किया है,
इतने पैसे से
स्थाई
समाधान हो
सकता था।
भविष्य में
सरकार इस तरफ
सोच रही है
इसके लिये तो
मैं धन्यवाद
देना
चाहूंगा।
परन्तु
इसमें और
सोचने की आवश्यकता
है, गंभीरता
से इस
कार्यक्रम को
लागू करना
चाहिये। वैसे
ही करोड़ों
रूपये कच्चे
काम के अंदर पानी
की तरह बहा
दिये जाते
हैं। आज मैं
कहना चाहूंगा
मुझे कोई
संकोच नहीं
है, चाहे मुझे
कितना ही बड़ा
नुकसान क्यों
न हो जाये, आज
आम आदमी की यह
सोच हो गयी है
कि मिट्टी का
काम होना
चाहिये। मिट्टी
का काम करना
नहीं, दिन भर
वहां बैठे रहना,
पाँच किलो
मिट्टी कच्ची
इधर से उधर
डाल दी और
पूरे दिन की
मजदूरी पक्की,
तो इस तरह के
कार्य से मैं
सहमत नहीं
हूं। उपाध्यक्ष
महोदय, मेरा
सरकार को यह
सुझाव है कि
चाहे पाँच
रूपये ही खर्च
करो, मजदूर को
मजदूरी कम
उपलब्ध
करवाओ, पर
कार्य ऐसा
होना चाहिये।
सरकार की वह
स्थाई सम्पत्ति
होनी चाहिये,
चाहे किसी रूप
का कार्य हो।
उपाध्यक्ष
महोदय,
गंगानगर और
हनुमानगढ़
जिले में
धानका जाति के
लिये मैं
निवेदन करना
चाहता हूं कि
धानका जाति
सन् 1976 में
अनुसूचित
जनजाति में
केन्द्र
सरकार ने
सम्मिलित की
थी और उसके
बाद राजस्थान
सरकार ने भी 1977
में शायद 27
जुलाई है,
तारीख मुझे
एग्जक्ट
याद नहीं, गजट
में संशोधन
करके उनको
अनुसूचित
जनजाति में
सम्मिलित कर
लिया। हनुमानगढ़
जिले में और
गंगानगर जिले
में धानका
जाति के लोगों
को अनुसूचित
जनजाति का
प्रमाण पत्र
नहीं दिया जा
रहा है। मौखिक
रोक लगा रखी
है जबकि पूर्व
मुख्यमंत्री
माननीय
भैरोंसिंह जी
शेखावत के कार्यकाल
में समाज कल्याण
विभाग के
निदेशक से एक
पत्र उन्होंने
लिखवाया था,
आदेश भिजवाया
था। उसी आदेश को
फिर दुबारा
रिपीट करते
हुए कलेक्टर
हनुमानगढ़ और
गंगानगर को
निर्देश दिया
गया। परन्तु
आज भी धानका
जाति के लोगों
को प्रमाण
पत्र अनुसूचित
जनजाति का
नहीं बन रहा
है। मैं नाम
नहीं लेना
चाहूंगा इसके
पीछे कोई
पूर्व माननीय
सदस्य हैं,
जो अगर धानका
जाति को
अनुसूचित
जनजाति में
सम्मिलित कर
लिया जाये तो
उन्हें भी
दिक्कत आती
है।
एस.सी.,एस.टी. की सीट
के कारण से इस
तरह से उन
लोगों के साथ
अन्याय हो
रहा है। उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
सरकार से आपके
माध्यम से
निवेदन करना
चाहूंगा कि
हनुमानगढ़ और
गंगानगर जिले
के कलेक्टरों
को यह सख्त
निर्देश दिया
जाये कि धानका
जाति
अनुसूचित जनजाति
में सम्मिलित
होते हुए भी उनको
प्रमाण पत्र
क्यों नहीं
दिया जा रहा
है? मौखिक
आदेश हैं, यह
मैं मेरी
जानकारी के
अनुसार कह रहा
हूं। वैसे कोई
प्रतिबन्ध
नहीं है।
उपाध्यक्ष
महोदय ...(व्यवधान)
..
श्री
उपाध्यक्ष:
कासनिया जी,
समाप्त
कीजिये।
श्री
रामप्रताप
कासनिया:
थोड़ा-सा और
है। उपाध्यक्ष
महोदय, पक्ष
और विपक्ष
चाहे
पूर्ववर्ती सरकार
हो ..
msr/usc/1440/11032006/2g
खेती के
बारे में एक
बात कहना
चाहता हूं।
किसान और गांव
के लिए बोलते
तो सभी हैं, यह
कोई बहुत बड़ी
बात नहीं है,
केन्द्र हो
चाहे राज्य
सरकार हो,
पक्ष हो चाहे
प्रतिपक्ष हो,
खेती के बारे
में सोचना
पड़ेगा, आने
वाले समय में
मजबूर होना
पड़ेगा। यह
सोचना पड़ेगा
तो, उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से पक्ष और
विपक्ष से
निवेदन करना
चाहता हूं कि
खेती के लिए
कोई पुख्ता
इंतजाम करना
चाहिए। आये
दिन
प्राकृतिक प्रकोप
से अकाल से
फसलें नष्ट
हो जाती है।
पकी हुई फसल
ओलावृष्टि से
नष्ट हो गयी
तो बीमा के
मामले में अभी
जो पंचायत को
इकाई मानने की
बात तो मान ली
है, इसके लिए
तो मैं
बहुत-बहुत धन्यवाद
देना चाहूंगा
ऊपरला न, तो यह
तो बहुत अच्छा
निर्णय है
लेकिन जब तक
खेत को इकाई
मान कर बीमा
नहीं किया
जायेगा तब तक
काश्तकार का
भला होने वाला
नहीं है।
लाभकारी मूल्य
जब तक काश्तकार
को नहीं दिया
जायेगा, उसकी
उपज का सही मूल्य
उसको नहीं
मिलेगा, जो
आदमी कमजोर
है, पैदावार
नहीं करता
उसको चाहे सरकार
सस्ते रेट
में अनाज
उपलब्ध
कराये, हमें
कोई एतराज
नहीं है परन्तु
जो काश्तकार
पैदावार करता
है उसको
लाभकारी मूल्य
दिलवाने के
लिए केन्द्र
सरकार पर पक्ष
और विपक्ष मिल
कर के दबाव डालना
चाहिए।
श्री
उपाध्यक्ष:
धन्यवाद, धन्यवाद।
आ गया, किसान
के बाद अब क्या
बात रह गयी?
श्री
रामप्रताप
कासनिया:
उपाध्यक्ष
महोदय, गाय और
भैंस और ऊँट
के लिए मैं और
निवेदन करना चाहता
हूं कि आने
वाले समय में
ऊँट बहुत ही
महत्वपूर्ण
चीज होगी।
श्री युनूस
खान: ऊँट के
लिए बोलो,
गाय-भैंस तो
छोड़ दो।
श्री
उपाध्यक्ष:
बोल रहे हैं,
बोल रहे हैं।
श्री
रामप्रताप
कासनिया: चलो,
ऊँट के लिए
हमें कोई न
कोई काश्तकार
को प्रोत्साहित
करना चाहिए।
अच्छी नस्ल
के ऊँट, भंडाण
के ऊँट मैं
बता दूं आपको
सबसे अच्छी
नस्ल के ऊँट
भंडाण हैं जो
लूणकरणसर है
बीकानेर का
एरिया, इस नस्ल
को विकसित
करने के लिए
सरकार को कोई
न कोई सहायता
काश्तकार को
उपलब्ध
करवानी चाहिए
चाहे कोई
सरकारी अपनी
योजना बना कर
के करे। ऊँट
दिन-प्रतिदिन,
उपाध्यक्ष
महोदय, आप
जानते हैं खतम
होते जा रहे
हैं और यह
राजस्थान का
ब हुत ही बड़ा
जहाज है। पहले
यह साबित हो
चुका है और
आने वाले समय
में इस ऊँट की
आवश्यकता
पड़ेगी जिस
तरह से
दिन-प्रतिदिन पैट्रोल
और डीजल महंगा
होता जा रहा
है। ऊँट और
बैल के बिना
हम खेती नहीं
कर सकते तो
मेरा सरकार से
आग्रह है,
इसकी डिटेल
में मैं नहीं
जाना चाहता
कैसे करना है,
क्या करना
है, अगर जरूरत
पड़े तो सुझाव
देने के लिए
तैयार हूं,
उपाध्यक्ष
महोदय।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
माननीय सदस्य,
कृषि
मंत्रीजी को
सुझाव दें,
आजादी के बाद
ऊंटों की
उपेक्षा हुई
है, वह अब वापस
लाइन में लायेंगे
उनको।
श्री
उपाध्यक्ष:
लाना पड़ेगा
जी।
श्री
अमराराम चौधरी
(पचपदरा):
बीकानेर में
कैमल सफारी का
है न?
श्री
रामप्रताप
कासनिया: हां।
श्री
अमराराम
चौधरी: तो वह
देखा आपने
कैम्प?
श्री
रामप्रताप
कासनिया: हां,
कैम्प तो देख
लिया।
श्री
उपाध्यक्ष:
कैमल सफारी से
काम नहीं
चलेगा जी।
श्री
रामप्रताप
कासनिया: बहुत
जरूरत है, यों
तो सब कुछ ही
है। कालेज भी
है, वेटनरी सब
कुछ है परन्तु
जितनी आवश्यकता
है उतना कुछ
नहीं है वहां,
अब मैं आलोचना
नहीं करना
चाहूंगी, जो
कुछ है वह सब
ठीक है परन्तु
मैं भी कुछ...।
उपाध्यक्ष
महोदय, आपने
मुझे समय दिया
उसके लिए
बहुत-बहुत धन्यवाद।
श्री
उपाध्यक्ष:
श्री प्रहलाद
गुंजल।
श्री
प्रहलाद
गुंजल(रामगंजमण्डी):
उपाध्यक्ष
महोदय, आठ
तारीख को
माननीय मुख्यमंत्रीजी
ने वित्त
मंत्री के रूप
में वर्ष 2006-07 के
बजट अनुमान इस
पवित्र सदन
में पेश किये।
दो दिन से
चर्चा हो रही
है और अगले
दिन समाचार
पत्रों में सभी
वर्गों की
प्रतिक्रिया
पढ़ने को
मिली, समाज के
हर वर्ग ने
बजट की
प्रशंसा की।
उपाध्यक्ष
महोदय, बजट
केवल आय-व्यय
का सामान्य
दस्तावेज
नहीं होता,
बजट हमारे
प्रदेश की
अर्थव्यवस्था
को सुदृढ़
बनाये रखने का
उपक्रम है और
साथ ही समाज
के प्रत्येक
वर्ग के हित
संरक्षण के
अनुबंध का
कार्यक्रम है
और, उपाध्यक्ष
महोदय, जब इस
दृष्टि से हम
बजट का विवेचन
करते हैं तो
इस बार का
प्रदेश का बजट
प्रदेश के उन
वर्गों के लिए
जीवन संदायनी
कार्यक्रम है।
जिनके बारे
में आज तक
किसी ने सोचा
नहीं उनकी तरफ
आज तक किसी ने
चिंताजनक
तरीके से देखा
नहीं, लगातार
तीसरे साल सरल
बजट राजस्थान
की जनता को
देने के लिए
मैं राजस्थान
की मुख्यमंत्रीजी
को धन्यवाद
देना चाहता
हूं।
उपाध्यक्ष
महोदय, दो दिन
से वाद-विवाद
चल रहा है,
दोनों तरफ से
पक्ष-विपक्ष
के तर्क इस
सदन में रखे
जा रहे हैं।
अभी हमारे
टोडारायसिंह
से आने वाले
माननीय सदस्य
ने अपने ज्ञान
का खजाना खोल
कर आंकड़ों का
इतिहास पढ़ा,
मैं उन
आंकड़ों में
नहीं जाना
चाहता लेकिन
इतना निवेदन
करना चाहता
हूं आंकड़े
कितने महत्वपूर्ण
हैं, आंकड़े
क्या हैं यह
गम्भीर बात
नहीं है गम्भीर
बात है, उपाध्यक्ष
महोदय,
आंकड़ों के पीछे
की इच्छा-शक्ति।
आंकड़े किस
प्रकार की इच्छा
शक्ति की
गवाही देते
हैं, एक महत्वपूर्ण
बात है और यह
बात हम को इस
बजट में देखने
को मिली। समाज
का वह तबका
जिसको हम
बी.पी.एल. कह कर
संबोधित करते
हैं, बजट में
इस बार उस
वर्ग के लिए
जीने का नया
विश्वास बजट
के
प्रावधानों
में किया है।
मैं उसकी ज्यादा
चर्चा नहीं
करना चाहता। बजट
में सभी
माननीय सदस्यों
ने पढ़ा,
बी.पी.एल.
परिवार के लिए
बीमा योजना का
प्रावधान
किया और
न-केवल बीमा
योजना का
प्रावधान
किया, आपदा
में, संकट में
बीमित राशि अब
बी.पी.एल.को
मिलेगी और उस
बीमे का प्रीमियम
राजस्थान की
सरकार भरेगी। उपाध्यक्ष
महोदय, इसके
साथ प्रावधान किया
कि
बी.पी.एल.परिवार
का बच्चा जो
ग्यारहवीं-बारहवीं
कक्षा में
पढ़ता है,
बीमा कम्पनी
के माध्यम से
उसकी सालाना
छात्रवृत्ति
का बंदोबस्त
किया जाए,
अपने आप में
सराहनीय कदम है
और इससे
न-केवल
बी.पी.एल.
परिवार के बच्चों
का हायर
एजुकेशन के
प्रति रुझान
बढ़ेगा उसका
शैक्षणिक उन्नयन
होगा, उसके
सामने रोजगार
के अवसर पैदा
होंगे।
बजट में इस
बार राजस्थान
की महिला मुख्यमंत्री
ने मानो सारे
बजट को
महिलाओं के
प्रति
समर्पित किया
है। यह माननीय
मुख्यमंत्रीजी
की समाज की इस
आधारभूत
ढांचे को सुदृढ़
करने की इच्छा-शक्ति
का प्रकटीकरण
है। कितनी
महिलाओं को
रोजगार
मिलेगा।
Ars/udc/2h/1450/11032006/1
कितनी
साथिनों की
भर्ती होगी,
कितनी
साथिनों की
भर्ती कर ली
गयी, महिला
विकास के अन्य
क्या क्या
कार्यक्रम
चलेंगे, मैं
समझता हूं कि
माननीय तमाम
सदस्यों ने
इस सन्दर्भ
में बजट भाषण
को पढ़ा होगा।
मैं स्वागत
करना चाहता
हूं माननीय
मुख्य
मंत्री जी का
वृद्धावस्था
पेंशन की राशि
बढ़ाई लेकिन
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
इसके लिए धन्यवाद
तो देना चाहता
हूं लेकिन
आपके माध्यम
से यह भी उम्मीद
करना चाहता
हूं राजस्थान
की सरकार से
कि जिस प्रकार
की कृपा आपने
बजट में
वृद्धावस्था
पेंशन बढ़ाकर
वृद्धों को
राजस्थान के
की है, राजस्थान
का विकलांग
जन, राजस्थान
की विधवा,
राजस्थान की
परित्यक्ता
उसी उम्मीद
और विश्वास
की किरण से
आपकी तरफ देख
रही है । इनकी
भी पेंशन
बढ़ाये जाने
के सन्दर्भ
में विचार
करने की आवश्यकता
है।
एक महत्वपूर्ण
बात माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, आज
आपके सामने
रखना चाहता
हूं । हमने आठ
दिन के अन्तराल
में दो बजट
देखे हैं, 28
फरवरी को देश
का बजट आया, 8
अगस्त को
राजस्थान का
बजट आया। जहां
पर हमारे
राजस्थान के
बजट में समाज
के ताने बाने
को सुदृढ़
करने की इच्छा
शक्ति नजर आती
है, उपाध्यक्ष
महोदय, यह
मेरे पास केन्द्र
का बजट है, आप
उठाकर देख लें
इस बजट के
पीछे की भावना
इस बजट के
पीछे के
उद्देश्य,
पूर्वोत्तर
क्षेत्र के
लिए बारह हजार
इकतालीस
करोड़ रुपए का
आबंटन ऐसा
लगता है कि यह
केन्द्र की
प्रगतिशील
गठबंधन सरकार
की राजनीतिक मजबूरी
का प्रदर्शन
करता है।
उपाध्यक्ष
महोदय, केन्द्र
के बजट ने
राजस्थान की
जनता को निराश
किया है।
राजस्थान को
उम्मीद थी कि
कठिन भौगोलिक
परिस्थिति
वाले इस मरू
प्रदेश की
भौगोलिक सम्पदा
को इसकी
प्राकृतिक
सम्पदा को विकास
के लिए केन्द्र
से कुछ
मिलेगा।
राजस्थान
उम्मीद कर
रहा था इसके
गंभीर पेयजल
के संकट पर केन्द्र
के बजट में
कुछ विशेष
प्रावधान
होंगे, कुछ
उल्लेख
होंगे लेकिन
सारे के सारे
बजट का केन्द्रीकरण
आगामी पाँच
राज्यों के
चुनावों की और
बन गया और
मुझे लगता है
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय कि न
केवल पाँच
राज्यों के
चुनावों के
केन्द्र की
प्रगतिशील
गठबंधन सरकार
ने इस बजट में लक्ष्य
रखा है, लोक
लुभावने
संकेत इस बात के
दे रहे हैं
बजट की
प्रगतिशील
गठबंधन की
सरकार का
पिटारा फूटने
वाला है । वह
बजट के माध्यम
से मध्यावधि
चुनाव की
तैयारी करना
चाहती है और
यह स्थिति
लोकतंत्र के
लिए दुर्भाग्यपूर्ण
है । इस विषय
में हम सबको
मिलकर सोचना पड़ेगा
कि हम पवित्र
सदन में चाहे
लोकसभा हो चाहे
असेम्बलि हो,
बजट पेश करते
समय हमारी
आंखों के सामने
अगले पाँच साल
के चुनाव का
नक्शा रखें और
इस राजस्थान
की, इस भारत की
भावी पीढ़ी के
भविष्य की
अनदेखी हो
जाए। आज इस
विचार से
निकलकर हमको
नव निर्माण के
रास्ते पर
आगे बढ़ने की
आवश्यकता है।
मैं समझता हूं
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, इस
दिशा में
पिछले दो
सालों में राजस्थान
की सरकार का
काम काज एक
क्रांतिकारी
परितर्वन के
संकेत दे रहा
है। देश में
आजादी के बाद
से लगातार
प्राथमिक
शिक्षा के सार्वजनिकीकरण
की बात चलती आ
रही है । हम
कल्पना करते
हैं विकसित
राष्ट्र की
चर्चा करते
हैं । जब तक
विकसित राष्ट्र
का सपना पूरा
नहीं हो सकता
जब तक सारा
समाज शिक्षित
नहीं हो सकता
और इसके लिए
प्रारम्भिक
शिक्षा का सार्वजनिकीकरण
किया जाए और
परसों तो देश
की पार्लियामैंट
में कांग्रेस
के सांसद
श्रीमान राहुल
जी गांधी ने
कहा कि वक्त
आ गया है जब
माध्यमिक
शिक्षा का
सार्वजनीनकरण
किया जाना चाहिए।
मैं आभार
व्यक्त
करना चाहता
हूं हमारे
यशस्वी
लोकप्रिय
शिक्षा
मंत्री जी का
कि उनके गंभीर
प्रयासों के
बाद आजादी के
छठे दशक में
आकर यह लगने
लगा है कि अब
राजस्थान
प्रारम्भिक
शिक्षा अब
पूर्णाहुती
की ओर जा रही
है। लेकिन मैं
आपके माध्यम
से राजस्थान
की मुख्यमंत्री
जी और शिक्षा
मंत्री जी से
यह कहना
चाहताहूं,
मैंने शिक्षा
के बजट के
प्रावधानों
को पढ़ा है,
प्रारम्भिक
शिक्षा की ओर
बड़ा ध्यान
राजस्थान की
सरकार ने
उसमें दिया है
लेकिन माध्यमिक
शिक्षा के उन्नयन
के बारे में
बजट में
प्रावधानों
में उल्लेख
नहीं है । मैं
उम्मीद
करूंगा
माननीय उपाध्यक्ष्
महोदय,
प्राथमिक
शिक्षा के
सार्वजनीनकरण
के साथ साथ अब
वक्त आ गया
है कि हम माध्यमिक
शिक्षा का
सार्वजनिकीकरण
करें । हम गरीब
की गांव की उस
बेटी को आठवीं
की शिक्षा के
बाद पंचायत के
मुख्यालय पर
माध्यमिक की
शिक्षा
प्रदान करने
की व्यवस्था
करें । इस
दिशा में हमको
आगे बढ़ना
चाहिए और मैं
विश्वास
करता हं कि जब
बजट पर राजस्थान
की माननीय
मुख्यमंत्री
अपना जवाब
देंगी तो
निश्चित रूप
से यह सदन
विश्वास
करता है, सारे
राजस्थान के
विधायक जन
प्रतिनिधि
विश्वास
करते हैं कि
माध्यमिक
शिक्षा के
प्रावधानों
के बारे में निश्चित
रूप से चर्चा
की जाएगी, कोई
न कोई उल्लेख
उसमें किया
जाएगा।
लेकिन
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, गत
दिवस सिरोही
से आने वाले
माननीय सदस्य
बजट पर भाषण
कर रहे थे और
भाषण करते समय
बड़ा जोर से
भाषण कर रहे
थे। माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, हम
जानते हैं कि
उनका प्रभावित
प्रस्तुतीकरण
है। हम उनकी
बात रखने के
प्रभावी प्रस्तुतीकरण
के लिए धन्यवाद
देते हैं
लेकिन यह उम्मीद
करते हैं कि
आंकड़ों के
भ्रम जाल में
इस सदन की
दिशा को
भ्रमित नहीं
किया जाना
चाहिए। अपने
भाषण की
चर्चा
करते हुए
सिरोही से आने
वाले माननीय
सदस्य कह रहे
थे, तुलना कर
रहे थे सकल
घरेलू उत्पाद
और प्रति व्यक्ति
आय में भारत
और राजस्थान
की तुलना कर
रहे थे और
आंकड़े दे रहे
थे । सकल घरेल
उत्पाद भारत
का 3200.6 राजस्थान
का 1102.3 प्रति व्यक्ति
आय भारत की 25,788
राजस्थान की
17,685 अच्छा होता
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, सिरोही
से आने वाले
माननीय सदस्य
इस बात का
वर्णन करते ।
सकल घरेलू उत्पाद
जहां पर 2001-2002 में
45,664 करोड़ रुपया
था 2005-06 में बढ़कर
63,354 करोड़ रुपया
हो गया । इसका
भी जिक्र करते
तो अच्छा
होता । सिरोही
से आने वाले
माननीय सदस्य
इसकी भी चर्चा
करते, प्रति
व्यक्ति आय
के बारे में
चर्चा करते...
(समय: )
(श्री
राव राजेन्द्र
सिंह, सभापति,
पदासीन)
जहां
प्रति व्यक्ति
आय 2001-02 में
माननीय
सभापति महोदय,
कांग्रेस के
शासन में ...
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
माननीय
सभापति महोदय,
बधाई हो ।
श्री प्रहलाद
गुंजल: मैं स्वागत
करता हूं,
माननीय
सभापति महोदय
का अभिनंदन
करता हूं। 2001-02
में 12,514 रुपए थी
वह बढ़कर 2005-06
में 17,695 रुपए हो
गयी। अच्छा
होता माननीय
सभापति महोदय,
कि चर्चा करते
समय माननीय
प्रतिपक्ष के
सदस्य इस बात
की चिन्ता व्यक्त
करते कि पिछले
दो साल के
राजस्थान
सरकार के वित्तीय
प्रबंधन के
बाद
Vns/usc/1500/2j/11.3.06
सी.आर.एफ;
का जो ओपनिंग बेलेंस
2004-05 में, 2005-06 में
योजना के वित्त
पोषण के लिये
समायोजित
किया जाना
चाहिये था, जो
लगातार पिछले
सालों में
होता रहा है। 94-95
में हुआ, 99-2000 में
हुआ। उस मद की 430
करोड़ रुपये
की राशि केन्द्र
से लेकर राजस्थान
के कल्याण के
लिये लगाने की
बात करते, इस
सदन को आश्वस्त
करते केन्द्र
में हमारी
सरकार है
राजस्थान के
हितों की
अनदेखी नहीं
होने देंगे।
अच्छा होता
माननीय
सभापति महोदय,
वह चर्चा करते
समय इस बात का भी
जिक्र करते।
ऋणों के
पुनर्भरण की
योजना बनी और
उस योजना के
तहत राजस्थान
को उसके हक का
जितना पैसा
मिलना चाहिये
था 307.55 करोड़
रुपये उसकी
जगह मात्र 11.87
करोड़ रुपया दिया
है।
प्रतिपक्ष के
सदस्य इस
विषय में
चिनता करते।
राजस्थान की
सरकार ने वित्तीय
प्रबंधन को
सुधारने का
प्रयास किया।
ट्वेलथ
फाइनेंस
कमीशन की गाइडेंस
के हिसाब से
अपने वित्तीय
प्रबंधन को
सुधारा। उसकी
प्रोत्साहन
राशि, उस स्कीम
की राशि राजस्थान
की जनता के
कल्याण के
लिये मिलनी
चाहिये थी,
केन्द्र की
सरकार से उस
विषय में मांग
करते तो
निश्चित रूप
से उनका कदम
स्वागत योग्य
था। उन्हें
इसकी भी चर्चा
करनी
चाहिये।
माननीय
सभापति महोदय,
हम बहुत भाषण
करते हैं। बजट
के बहुत सारे
आंकड़े पेश
करते हैं और
जब बजट पेश होता
है तो प्रत्येक
माननीय सदस्य
को इतने सारे
दस्तावेज
बजट की क्रिटिकल,
टिपिकल भाषा
में लिखकर दे
दिये जाते हैं
कि वह 85
प्रतिशत सदस्यों
के लिये पढ़कर
समझना असंभव
है लेकिन कोई
उसमें घुसकर
देखे तो इस
बात का सहज
अनुमान लगा लेते
हैं कि अगर हम
विकास की
रोशनी राजस्थान
के प्रत्येक
व्यक्ति तक
पहुंचाना
चाहते हैं, हम
विकास का फायदा
राजस्थान के
प्रत्येक व्यक्ति
को देना चाहते
हैं तो वृहद्
योजना के आकार
के बिना संभव
नहीं हो सकता।
आपकी योजना का
आकार कैसा है,
आपका एन्युअल,
वार्षिक पलान
कैसा है ? अच्छा
होता इस बारे
में विचार करते,
धन्यवाद
देते राजस्थान
की मुख्यमंत्री
को कि जहां पर
उनकी योजना का
आकार माननीय
सभापति महोदय,
2002-03 में जितना
था लगभग 2006-07 में
बढ1कर उससे
दुगुना हो गया
लेकिन इस सदन
को माननीय
सदस्य
आंकड़ों के
भ्रमजाल में
उलझाकर
गुमराह करना
चाहते हैं। यह
आंकड़े हैं,
आंकड़ों का
मायाजाल है
लेकिन मैं
इसमें नहीं
जाना चाहता
हूं। स्वयं
प्रतिपक्षी
पार्टी की
प्रगतिशील
गठबंधन की
सरकार ने
हमारे वित्तीय
प्रबंधन को
सराहा है और
इसके प्रमाण
है प्रोत्साहन
राशि भारत
सरकार ने
राजस्थान
सरकार को दी।
लेकिन यह
आंकड़े महत्वपूर्ण
नहीं है।
मैं आज
दूसरी चर्चा भी
करना चाहता
हूं। अब केवल
आंकड़ों के
आधार पर तर्क
वितर्क और
विपक्ष की
भूमिका से काम
नहीं चलने
वाला है।
वर्तमान में
हम एक ऐसी
अर्थव्यवस्था
में जी रहे
हैं जहां पर एक
और स्थानीय
सरकार है,
दूसरी तरफ ग्लोबल
गवर्नमेंट
है। वैश्विक
सरकार है और
ग्लोबल
गवर्नमेंट के
कानून कायदे
अपना विश्वव्यापी
प्रभाव छोड़
रहे हैं। जिस
वैट के बारे
में हमने
पिछली बार भी
चर्चा की और
इस बार इस सदन में
लागू किया उसी
व्यवस्था
के प्रभाव का हिस्सा
है और अब
दुनिया का कोई
भाग इस व्यवस्था
के प्रभाव से
बच नहीं सकता।
मैं यह बात
इसलिये कर रहा हूं
कि जहां एक और
हम ग्लोबलाइजेशन
की और बढ़ रहे
हैं, सारी
दुनिया का
भूगोल समान
बनता जा रहा
है, हम लगातार
ग्लोबलाइजेशन
की चिन्ता
करते रहे और
हमारी चर्चा
और चिन्ता
में उस व्यक्ति
की अनदेखी हो
जाये जिसके
वोट के आधार
पर हम चुनकर
आते हैं, इस
पवित्र सदन
में लगातार 55 बजट,
मैं समझता हूं
पेश हो चुके
हैं। 55 बजट पेश
होने के बाद
आज हमें यह
विचार करने की
आवश्यकता है
वैश्वीकरण
का युग आ गया,
ई-गर्वनेंस का
युग आ गया लेकिन
इस लोकतन्त्र
का आधार बिन्दु
गांव का
ग्रामीण
गणदेवता किस
हाल में जी
रहा है ? और
इसलिये
माननीय
सभापति महोदय,
मैं आपके माध्यम
से अनुरोध
करना चाहता
हूं कि आजादी
के छह दशक बाद गांव
के उस व्यक्ति
को लोकतन्त्र
का अहसास तो
है लेकिन यह
बहुत महत्वपूर्ण
विचार का विषय
है कि क्या
उसके साथ
लोकतांत्रिक
व्यवहार हो
रहा है ? रोजमर्रा
के कामों में
जो उसके साथ
प्रशासन का व्यवहार,
थानेदार का,
तहसीलदार का,
पटवारी का, उस व्यवहार
में कोई
परिवर्तन
नहीं किया।
लोकतन्त्र
की साठ साल की
यात्रा के
बावजूद भी एक
दुखद पहलू के
रूप में हमारे
सामने जिंदा
नहीं है ? क्या
यह विषय कभी
हमारे सामने
विचार के लिये
नहीं लाया
जाना चाहिये ? उस
गांव के व्यक्ति
के लिये कौन
मुख्यमंत्री
बना, कौन मुख्यमंत्री
नहीं बना,
किसकी सरकार
है, किसकी
सरकार नहीं
है, यह बड़ा
पहलू नहीं है।
किस राज में उसके
साथ बर्ताव
ठीक हो रहा है,
किस राज में
उसके साथ
कर्मचारी का
व्यवहार ठीक
है, किस राज
में उसके साथ
भ्रष्टाचार
कम हो रहा है,
तब उसको
लोकतन्त्र
की अनुभूति
होती है लेकिन
हम देखते हैं
राज तो बदल
जाता है, व्यवस्था
नहीं बदलती ।
व्यवस्था
में बैठे हुए
लोगों का व्यवहार
नहीं बदलता और
आज इस सदन में
इस बात पर भी
चर्चा की आवश्यकता
है। इस दिशा
में हमको
सामूहिक सोच
बनाकर आगे कदम
बढ़ाने की
आवश्यकता है
और इसके लिये
आवश्यक है
राजनैतिक और
सामाजिक
अनुशासन कायम
किया जाये।
एक उदाहरण
देना चाहता
हूं। माननीय
सभापति महोदय,
समाज के हर
वर्ग में
सामाजिक
अनुशासन की कमी
आयी है। पिछले
दिनों एक
अख़बार पढ़
रहा था राजस्थान
के डायरेक्टर
जनरल, पुलिस
ने एक आदेश
जारी किया
राजस्थान के तमाम
थानेदारों की
ए.सी.आर., तमाम
सी.आई. की
ए.सी.आर. राजस्थान
के डिप्टी
भरेंगे।
इलाके कमा
एडिशनल
एस.पी./डिप्टी
भरेगा। मैं
गलत नहीं
मानता लेकिन
बहुत देर बाद
जब
अनुशासनहीनता
की पराकाष्ठा
सामाजिक अनुशासन
के मापदंडों
के उल्लंघन
इस बारे में
विचार बना।
मैं जानना
चाहता हूं क्या
यह व्यवस्था
कार्यपालिका
और व्यवस्थापिका
के व्यवहार,
बर्ताव में
नहीं लायी
जानी चाहिये ? क्या
इस प्रकार के
प्रावधान विधायिका
और
कार्यपालिका
के परस्पर व्यवहार
के बारे में
तय नहीं किया
जाना चाहिये
लेकिन आज इसकी
कोई चिन्ता
नहीं करता।
हमको लगता है
हम बजट की
प्रशंसा कर
रहे हैं, हमको
लगता है हम
बजट का
प्रतिरोध कर
रहे हैं।
हमारी
भूमिकाएं स्पष्ट
पक्ष, विपक्ष
की बनी हुई
हैं। इससे
बाहर निकलकर
हमको समाज के
व्यक्ति की
भूमिका के
बारे में, इस समाज
के नव निर्माण
की दिशा के
बारे में
सोचना
पड़ेगा। हमें
सोचना पड़ेगा
उस वयक्ति के
हितों के बारे
में और जब तक
इस पर सार्थक
चिंतन नहीं
होगा , माननीय
सभापति महोदय,
डी.जी.पी. को
आवश्यकता
पड़ी डिसीप्लीन
की व्यवस्था
के बिना नीचे
के अधिकारी
अनुशासन से
बाहर जा रहे
हैं।
डेमोक्रेसी
की स्थिति क्या
है ? राज चाहे
कांग्रेस
पार्टी का हो,
चाहे भारतीय
जनता पार्टी
का कितने
मंत्रियों की
बात शासन
सचिवालय में
मानी जाती है।
मंत्रियों की
पर्सनलिटी,
उनके व्यवहार
को लेकर शासन
सचिवालय में
सचिव उपेक्षा
का व्यवहार
करते है, उनकी
मजाक बनाया
करते हैं। क्यों
नहीं इस दिशा
में अनुशासन
की व्यवस्था
का मापदंड तय
किया जाये ? माननीय
सभापति महोदय,
खाली विधान
सभा में तर्क
वितर्क करने
से
कार्यपालिका
के व्यवहार
में आम आदमी
के साथ..... .
ssy/usc/1510/2k
श्री
सभापति: आप दो
मिनट में कनक्लूड
करें ।
श्री
प्रहलाद
गुंजल: सभापति
महोदय कर रहा
हूं । यह बहुत
जरूरी बात कर
रहा हूं, मैं
कुछ आंकड़ों की
बात करता हूं
और मैं कहना
चाहता हूं कि
अगर आंकड़ों
को समझना है
तो इतना बड़ा
पुलिंदा है जिसको
पढ़ते भी नहीं
हैं । इस विषय
में भी हमको चर्चा
करनी पड़ेगी ।
इनके व्यवहार
में परिवर्तन
होना है या तो
फिर जिन
आंकड़ों की हम
चर्चा करते
हैं वह आंकड़े
भी उन्हीं के
द्वारा उपलब्ध
किये जाते हैं ।
उन्हीं के
द्वारा उपलब्ध
किये हुए
आंकड़ों पर हम
यहां सदन में
पक्ष और
विपक्ष के
आधार पर चर्चा
करते हैं । यह
बहुत गंभीर परिस्थिति
है जिस पर
विचार करने की
आवश्यकता है
। हम प्रसन्न
होते हैं कि
हम बजट के
पक्ष में तर्क
दे रहे हैं ।
हम बजट के
विपक्ष में
तर्क दे रहे
हैं । हमें व्यवस्था
की सच्चाई को
समझना पड़ेगा
। जब तक गांव
के व्यक्ति
के साथ न्याय
नहीं होगा,
लोकतंत्र के
आधार स्तंभ
के देवता के
साथ हम न्याय
नहीं कर सकते
। हम प्रश्न
पूछते हैं,
कौन देता है
प्रश्नों का
जवाब, वहां से
प्रश्न का
जवाब बनकर आता
है, मंत्री जी
पढ़कर सुना देते
हैं, हंगामा
थोड़ा-बहुत उस
पर कर लेते
हैं । व्यवस्था
का परिवर्तन
इससे
परिवर्तित
होने वाला नहीं
है । हमको इस
दिशा में बहुत
क्रांतिकारी परिवर्तन
लाने के बारे
में सोचना
होगा। बजट हम
पास करते है,
पूरे समाज में
इस प्रकार की
धारणा व्याप्त
हो गयी है कि
वह अर्थव्यवस्था
के संचालन में
ज्यादा रूचि
नहीं रखते हैं
।
कार्यपालिका
की रूचि अर्थ
के बंटवारे को
लेकर बनने लगी
है । उनका ध्येय
अर्थ को
बांटने का बन
गया है । क्या
हम शासन में
नहीं हैं । हम
चुनकर आये
हैं, जीतकर
आये हैं, इस
दिशा में कोई
प्रयास नहीं
करने चाहिए और
अगर हम इस
दिशा में
प्रयास नहीं
करेंगे,
सोचेंगे नहीं
तो मैं समझता
हूं कि
लोकतंत्र की
इस व्यवस्था
में हमारा
चुनकर आने का
काई फायदा
नहीं है । आज
चर्चा करना
चाहता हूं,
खूब चर्चा हो
रही है दो दिन
से, लेकिन अपनी
बात समाप्त
करने से पहले
बजट तो बहुत
अच्छा था,
बजट में कोई
कर नहीं है,
बजट बीपीएल को
समर्पित है,
बजट महिलाओं
को समर्पित
है, बजट में राजस्थान
की मुख्यमंत्री
ने उन सारी
बातों को
समझने की
कोशिश की है
जिसको हम कभी
समझने की
कोशिश नहीं
करते । आर्थिक
उदारीकरण के
इस युग में
अभी ट्रेड से
हटकर, कुछ लीक
से हटकर फैसले
हमको करने पड़ेगें
। तब तक हम
प्रदेश की
अर्थव्यवस्था
को सुधार नहीं
सकते और इस
दिशा में बढ़ी
राजस्थान की
मुख्यमंत्री
ने राजस्थान
में पब्लिक
प्राइवेट
पार्टिसिपेशन
के कई
कार्यक्रम
लिये हैं । जब
तक विकास के
कार्यक्रमों
में हम निजी
भागीदारी
नहीं
बनायेंगे और
मैं तो आज
चर्चा करना
चाहता हूं कि
जब भी पब्लिक
प्राइवेट
पार्टिसिपेशन
की भागीदारी की
बात राजस्थान
में आती है तो
लोग शंकित
होते हैं,
आरोप लगाते
हैं। आज की
आवश्यकता को
महसूस करते
हुए मुख्यमंत्री
जी के इस कदम
पर क्यों
नहीं राजस्थान
की विधान सभा
में पब्लिक
प्राइवेट
पार्टिसिपेशन
का कानून
बनाया जाये ।
यह आज की
जरूरत है,
इसको महसूस
करने की आवश्यकता
है और इस दिशा
में जो सरकार
ने पहल की है । इस
दिशा में जो
परिवर्तन की
शुरूआत की है
मैं उसके लिए
राजस्थान की
मुख्यमंत्री जी को
धन्यवाद
देना चाहता
हूं । सभापति
महोदय, लेकिन
एक बात और
आपसे निवेदन
करना चाहता
हूं कि इन दो-तीन
सालों में
मेरे विधान
सभा क्षेत्र
में विकास तो
बहुत हुआ है
लेकिन कल एक
दुर्घटना हुई,
मैं दुर्घटना
कहूंगा पूरे
राजस्थान
में चल रहा
प्राकृतिक
वज्रपात,
पिछले एक सप्ताह
से राजस्थान
का किसान खेत
की मेड़ पर
खड़ा होकर
अपने सपनों का
ताना-बाना साल
भर का बुन रहा
था, फसल आ
जायेगी तो मन
की योजना पूरी
होगी,
कार्यक्रम
होंगें, ना जाने
क्या सपना
देख रहा था ।
आज उसके सपने
टूट गये हैं, खड़े
होकर
ताना-बाना
बुनने के बजाय
खेत की मेड़
पर बैठा-बैठा
रो रहा है ।
हमारी जिम्मेदारी
बनती है
लोकतंत्र में,
समाज का जो
तबका है हम
केन्द्र
सरकार से
मुआवजे की ऊँट
के मुंह में
जीरे के बराबर
राशि के प्रावधान
के आधार पर
फैसला नहीं ले
सकते हैं ।
उसके जख्म पर
मरहम नहीं लगा
सकते हैं और
पूरे राजस्थान
को लेकर पिछले
दो दिनों से
इस सदन में
लगातार चर्चा
हो रही है, हल्ला
हो रहा है । सब
लोग जानते हैं
। मैं उम्मीद
करूंगा कि
राजस्थान की
मुख्यमंत्री
जी इस बजट में
विशेष पैकेज
राजस्थान के
हाड़ौती के
किसानों जो
बरबाद हो गये
हैं, उसके
बारे में
निश्चित रूप
से करेगी ।
श्री
सभापति:
माननीय सदस्य,
अगर आप इसको
कनक्लूड कर
दें तो बेहतर
रहेगा।
श्री
प्रहलाद
गुंजल: सभापति
महोदय, बिलकुल
कर रहा हँ । एक
मांग और आपके
माध्यम से
करना चाहूंगा
बीमा के
प्रावधान हैं,
अनावृष्टि पर
बीमा मिलता
है, अतिवृष्टि
पर बीमा मिलता
है ।
अतिवृष्टि
हुई है,
अंधड़-तूफान
से बरबादी हुई
है । राजस्थान
सरकार को आज
इस दिशा में
गाइड लाइन तय
करनी चाहिए कि
जहां पर तहसील
की तहसील
बरबाद हो गयी
जहां पर तहसील
के 50 प्रतिशत
से ज्यादा
गांव बरबाद हो
गये हैं ।
वहां कलेक्टर
को
दिशा-निर्देश
दें, आंकलन की
रिपोर्ट और उसके
आधार पर सूचना
जारी करें और
उस राशि को
15दिन के
अंदर-अंदर
राजस्थान के
किसान को उसके
जख्मों पर
मरहम लगाने का
काम किया जाये
और राजस्थान
काा किसान
जहां पर
वज्रपात हुआ
प्रकृति का
वज्रपात हुआ
वह रो रहा है ।
इस बारे में
भी बात आपके माध्यम
से रखना चाहता
हूं ।
सभापति
महोदय, बहुत
सारे उल्लेखनीय
काम चिकित्सा
के क्षेत्र
में, पेयजल के
क्षेत्र में
हुए हैं । लगातार
इन दो सालों में,
पिछले पाँच
साल में जितने
उल्लेखनीय
काम पेयजल, चिकित्सा
के क्षेत्र
में नहीं हुए
हम यह भी
चिंता लगातार
करते हैं,
भू-जल स्तर
गिरता चला जा
रहा है । भू-जल
स्तर गिर रहा
है लेकिन इसके
समाधान की
दिशा में हम
क्या आगे बढ़
रहे हैं । इस
दृष्टि से
महामहिम राज्यपाल
महोदय के
अभिभाषण में
जो उल्लेख
किया है पिछले
दो साल से
राजस्थान की
सरकार के कदम
सराहणीय कदम
हैं । मैं प्रशंसा
करना चाहता
हूं और मेरे
विधान सभा
क्षेत्र में खासतौर
से पेयजल के
मामले में
शत-प्रतिशत
गांवों को चम्बल
की योजनाओं से
जोड़ना और
सिंचाई के
क्षेत्र में
ताखली बाँध
जैसी बड़ी
योजनाओं की
मंजूरी के लिए
मैं सरकार का
आभार व्यक्त
करना चाहता
हूं । लेकिन
यह अनुरोध
करना चाहता
हूं कि
हाड़ौती में
बहुत आवश्यकता
है चम्बल के
बेसिन में कई
नदियां बहती
हैं मैंने अभिभाषण
के दौरान भी
कहा था । वह नदियां
बहकर व्यर्थ
चली जाती हैं
। उस पानी को
उपयोग में लाकर
हाड़ौती में
किसान का जीवन
सुधारने का
कार्यक्रम
बनाया जाना
चाहिए। माइनर
इर्रिगेशन प्रोग्राम
बनाया जाना
चाहिए। हमने
प्रस्तावित
किया है और आज
मैं इस मौके
पर मुख्यमंत्री
जी का और
सिंचाई
मंत्री जी का आभार
व्यक्त
करना चाहता
हूं कि मैंने
बजट के दौरान
कहा था कि
कोटा चम्बल
नहर जो
हाड़ौती की
जीवनदायिनी
रेखा है । उनकी
उम्र पुरानी
हो गयी है ।
नया जीवन मांग
रही हैं । कई
बार उम्र के
पड़ाव के कारण
टूटकर
अप्राकृतिक
अकाल भी हमको
झेलना पडा है।
उनकी मरम्मत
का एक
ऐतिहासिक काम
हुआ है । उनको
पक्का करने
के लिए बजट
में 30 करोड़
रूपये की राशि
का प्रावधान
किया है । मैं
आभार व्यक्त
करना चाहता
हूं। धन्यवाद
देना चाहता
हूं कोटा के
बारे में 10
करोड़ रूपये
की राशि का
प्रावधान
किया । कोटा
में विकास के
अवसर बढ़ेंगे
। वहां के
लोगों को लाभ
मिलेगा ।
सभापति
महोदय, मैं
राजस्थान के
माननीय
चिकित्सा
मंत्री जी
जिन्होंने
पिछली बार उप
स्वास्थ्य
केन्द्र से
लेकर
प्राथमिक स्वास्थ्य
केन्द्र से
लेकर
आयुर्वेद की
डिस्पेंसरी
कोटा में और
खास तौर से
मेरे विधान
सभा क्षेत्र
में देने में
कोई कमी नहीं
रखी । चिकित्सा
के क्षेत्र
में उन्होंने
क्षेत्र के
मतदाताओं का
आम आदमी का ख्याल
रखा है ।
लेकिन मैं इस
अवसर पर आपके
माध्यम से
मांग करना
चाहता हूं कि
रामगंज मंडी
के उस
हास्पिटल का,
डिमांड पर जब
बात आयेगी तो
रखूंगा, उसकी
शैयाओं की
क्षमता बढ़ाई
जानी चाहिए और
आज तो यही बात
अंतिम रूप से
कहते हुए
वर्तमान में
जो वज्रपात
किसान के साथ
हुआ है, उसमें
सरकार को
सहानुभूति का
बरताव करना
चाहिए और कल्याणकारी
बजट पेश किया
है, इस बजट की
कुछ अनुभव राहत
के रूप में
इसको तुरंत
महसूस होना
चाहिए । इसी
के साथ में इस
बजट का समर्थन
करते हुए अपनी
बात को समाप्त
करता हूं ।
बहुत-बहुति
धन्यवाद।
आपने समय
दिया, इसके
लिए बहुत-बहुत
आभार ।
श्री
सभापति: श्री
धर्मपाल
चौधरी।
श्री
धर्मपाल
चौधरी(मुण्डावर):
सभापति महोदय,
अंर्तराष्ट्रीय
महिला दिवस पर
राजस्थान की कुशल
मुख्यमंत्री
ने अपने जन्म
दिन पर, राजस्थान
की जनता के
लिए जो शानदार
बजट पेश किया
है । उसके लिए
सबसे पहले मैं
मुख्यमंत्री
जी को धन्यवाद
देना चाहता
हूं । पिछले
तीन दिन से
बजट पर बहस चल रही
है । इसमें
सत्ता पक्ष
और प्रतिपक्ष
दोनों तरफ के
माननीय सदस्यों
ने भाग लिया
है ।
jyg/1136/1520/2l
मैंने
उनके विचारों
को गम्भीरता
से सुना,
सुनने के बाद
आज जहां सत्ता पक्ष के
लोगों ने इस
बजट को सराहा
वहीं
प्रतिपक्ष के
हमारे
साथियों ने
इसकी कमियों
खामियों को
बताया लेकिन
बाहर जब हम
उनसे चर्चा
करते हैं और
मिलते हैं तो वे
बजट की सराहना
करते हैं कि
राज्य की
मुख्य
मंत्री ने
बहुत अच्छा
बजट पेश किया
लेकिन सदन में
उनकी मजबूरी
है चूंकि वे
प्रतिपक्ष के
हैं इसलिए
चाहे कितना ही
अच्छा बजट
हो, चाहे
सरकार कितना
ही अच्छा
कार्य करे,
इसकी खिलाफत
करने का
दायित्व वे
निभा रहे हैं।
राजस्थान
में जब
प्रतिपक्ष
पिछली बार सत्ता
में था और
प्रतिपक्ष
में बैठे हुए
राजाखेड़ा से
आने वाले
माननीय सदस्य
वित्त
मंत्री थे तब
उन्होंने भी
दो तीन बार
बजट पेश किए
थे उन्होंने
बजट बनाते समय
अपनी बुद्धि
पर इतना जोर नहीं
डाला, उन्होंने
अपनी बुद्धि
को फ्रेश ही
रखा जिसके
कारण उन्होंने
राजस्थान की
जनता का फायदा
नहीं किया,
अपने बजट से राजस्थान
की जनता के
लिए अगर वह
अच्छा करते,
लोगों का
फायदा करते तो
आज उनको विपक्ष
में बैठने का
मौका नहीं
मिलता, राजस्थान
की जिस जनता
ने उनको 156
सीटें देकर
सत्ता में
बैठाया वही 56
सीटें लेकर
बैठे हैं
विपक्ष में।
प्रतिपक्ष के
मुख्य
सचेतकजी, जो
रामगढ़ से आने
वाले
माननीयसदस्य
हैं, वार्षिक
योजना के बारे
में कह रहे थे
कि इसमें ज्यादातर
राशि केन्द्र
प्रवर्तित
योजनाओं की
है, अनुदानों
में हिस्से
की है। मैं
उनसे आपके
माध्यम से
पूछना चाहता
हूं कि जब
उनकी सरकार थी
तो क्या केन्द्र
सरकार ने पैसा
नहीं मिलता
था, मिलता था
लेकिन इसमें
उन्होंने
अपनी बुद्धि
का प्रयोग
नहीं किया और
राजस्थान की
जनता के प्रति
उत्तरदायी
नहीं रहे
इसलिए मैं
उनसे कहना
चाहता हूं कि
पैसा जो भी
आता है वह
केन्द्र से
आता है, पहले
भी केन्द्र
से आता था और
आज भी केन्द्र
से आता है।
सभापति महोदय,
सबसे बड़ी बात
तो कुशल वित्तीय
प्रबन्धन की
है। आज राजस्थान
में कुशल वित्तीय
प्रबन्धन के
कारण हमारी
सरकार ने बजट
का आकार 8551
करोड़ 44 लाख
रुपए करने की
घोषणा की है,
जो अब तक का
सबसे बड़ा
आकार है।
सरकार के कुशल
वित्तीय
प्रबन्धन के
कारण राजस्व
घाटा 2002-03 में 31
हजार 18 करोड़
था उसके बाद
में 2006-07 में
मुख्य
मंत्रीजी ने
बजट पेश किया
उसमें यह 43
करोड़ रह गया।
वह 5140.59 करोड़
मात्र रह
जाएगा। राज्य
पर प्रति वर्ष
कर्जे में
वृद्धि की दर
गिरती जा रही
है। 5 हजार 974 .47 करोड़
के स्थान पर
5201.44 करोड़ रह
गया है। ब्याज
का भार बढ़ा
है लेकिन कांग्रेसी
शासन ने
अंधाधुंध जो
कर्ज लिए उनका
नतीजा है।
योजना व्यय 5504
करोड़ से 8562.53
करोड़ रुपए हो
गया। कैपिटल
आउट ले 2027.53 करोड़
से 5024.3 करोड़ हो
गया । कर
आमदनी जो 6451.51
करोड़ थी, वह बढ़कर
10 हजार 932.12 करोड़
हो गई। राजस्व
आय एवं खर्च
को संतुलित
करने के
प्रयास किए गए
हैं। राजस्व
घाटा भी
धीरे-धीरे जो
2001-02 में 2697 करोड़
रुपए था वह 2006-07
में मात्र 43
करोड़ रह गया।
इस तरह
राजकोषीय
घाटा 2003-04 में 7367.13
करोड़ था वह 2006-07
में 5140.59 करोड़
रह गया और इसी
तरह से राज्य
पर कर्ज का जो
भार था वह भी 2003-04
में 7312.5 करोड़ था
वह घटकर 2006-07 में 5201
करोड़ रह गया।
इसी तरह जो
आर्थिक
समीक्षा जो
राज्य की
राजस्व व्यवस्था
का चित्रण है,
इस पर जब हम
नजर डालते हैं
तो राज्य का
सकल घरेलू उत्पाद
जो 2003 में 84 हजार405
करोड़ था वह 2005-06
में 1 लाख 22308 हो
गया है और
इसमें वृद्धि
हुई है जो
माईनस 4.17 थी 2002-03
में वह 2005-06 में 10.74
है। शुद्ध
घरेलू उत्पाद
जो 2002-03 में 73864 था
वह बढ़कर 1 लाख 9632
हो गया। इसी
तरह से प्रति
व्यक्ति आय 2002-03
में 12641 थी जो
बढ़कर 17695 हो गई।
बिजली में
इसी तरह राजस्थान
में उत्पादन
बढ़ा है। चाहे
बिजली राजस्थान
की सरकार ने
बाहर से खरीदी
हो। 3003-04 में 2640
करोड़ यूनिट
थी जो 2005-06 में
बढ़कर राजस्थान
के किसान और
आम आदमी को
देने के लिए 3165
करोड़ यूनिट
हो गई। यह बजट
राजस्थान के
विकास का,
गरीब आदमी के
आंसू पोंछने
वाला, सड़क
एवं शिक्षा के
क्षेत्र में
क्रांतिकारी
बजट है। बजट
में माननीय
मुख्य
मंत्रीजी ने
सभी वर्गों का
ध्यान रखा
है, चाहे वह गरीब
किसान हो,
मजदूर हो, आम
आदमी हो,
उद्योग हो, शिक्षा
हो, सबका ध्यान
रखा है।
महिला
दिवस पर इस
बजट में मुख्य
मंत्रीजी ने
राज्य की
महिलाओं को
कृषि भूमि
क्रय करने पर
पहले जो 11.11
प्रतिशत
मुद्रांक
शुल्क लगता
था उसको घटाकर
5 प्रतिशत
किया, इसका
नतीजायह निकला
कि राज्य में
2 लाख महिलाओं
को भूमि पर स्वामित्व
का अधिकार
मिला। शिक्षा के
क्षेत्र में
प्राथमिक और
उच्च माध्यमिक
स्तर के
विद्यालयों
में छात्रों
का एनरोलमेण्ट
बढ़ा है। स्कूलों
के मामले में
पहले बहुत बात
हो चुकी है, पहले
भी कहा जा
चुका है, इस
सरकार के बनने
के बाद जो नई
स्कूलें
खुलीं और अब
इस बजट में 16
हजार राजीव
गांधी
पाठशालाओं को
प्राथमिक
विद्यालयों
में क्रमोन्नत
करने और.........
11.3.06/gpc/usc/1530/2m
5
हजार प्राथमिक
विद्यालयों को
उच्च प्राथमिक
विद्यालय में क्रमोन्नत
करना यह भी सरकार
का अपने आपमें
रिकार्ड है। पिछली
सरकार ने मास्टरों
की एक भर्ती नहीं
की। हमारी सरकार
ने 37 हजार मास्टरों
की पहले भर्ती
की, 7200 मास्टरों
की भर्ती की प्रक्रिया
चल रही है और इस
बजट में 26 हजार तृतीय
श्रेणी के और 5 हजार
द्वितीय श्रेणी
अध्यापकों की
भर्ती की जाएगी।
इसी तरह से 31 हजार
अध्यापकों की
भर्ती सरकार इस
बार करेगी।
अनुसूचित
जाति और अनुसूचित
जनजाति के विकास
के लिए भी इस सरकार
ने अपने बजट में
कोई कोर-कसर नहीं
छोड़ी है। पूर्व
की सरकार ने जनजातीय
विभाग के लिए
कभी भी चिन्ता
नहीं की। पूरे
राजस्थान में
पाँच साल में 262 करोड़
बजट का
प्रावधान था। हमारी
सरकार ने हमारी
मुख्यमंत्रीजी
ने गरीबों के प्रति
चिन्ता करते हुए
तीन वर्षों में
364 करोड़ का प्रावधान
किया। उदयपुर संभाग
में अनुसूचित
जाति व जनजाति
के 500 विद्यार्थियों
हेतु 5 बालक और 6 बालिकाओं,
कुल 10 नवीन आश्रम
छात्रावासों का
संचालन प्रारंभ
किया और 9 आश्रमों
में कम्प्यूटर
स्थापित किये।
समाज
कल्याण हेतु पूर्व
सरकार के पाँच
वर्षों के कार्यकाल
में योजना मद से
कुल मिलाकर जो
पैसा था उसमें
तीन वर्षों में
20 परसेंट अधिक किया
जिससे 262 करोड़ का
प्रावधान इस बजट
में किया। समाज
कल्याण विभाग
द्वारा चलाये जा
रहे
छात्रावासों में
जो छात्र रहते
हैं उनके लिए जो
675 रुपये मिलते थे
उनको 725 किया।
स्वास्थ्य
के अंदर गांवों
में रहने वाले
गरीब आदमी को चिकित्सा
का अच्छा इलाज
मिले उसके लिए
इस बार बजट में
10 सामुदायिक स्वास्थ्य
केन्द्र, 22
प्राथमिक स्वास्थ्य
केन्द्र, 100 उप स्वास्थ्य
केन्द्र खोलने
की घोषणा की। 3 सामुदायिक
स्वास्थ्य
केन्द्रों, 21
प्राथमिक स्वास्थ्य
केन्द्रों, 227
उप स्वास्थ्य
केन्द्रों के
भवन निर्माण की
घोषणा की। 14 सामुदायिक
स्वास्थ्य
केन्द्रों में
शैय्याओं की क्षमता
बढ़ाने की घोषणा
की।
राज्य
में अंधता, केटरेक्ट
की बीमारी के कारण
से बहुत हमारे
भाई अंधे हो जाते
हैं। उनका ऑपरेशन
कर राजस्थान में
2008 तक 9 लाख लोगों
का ऑपरेशन
करके उनको इससे
छुटकारा दिलाने
के लिए 0.34 प्रतिशत
के स्तर तक करने
के राष्ट्रीय
लक्ष्य की प्राप्ति
होगी।
गुर्दे
की बीमारी और अन्य
बड़ी बीमारियां
हैं उनका गरीब
आदमी इलाज
नहीं करा सकता।
इसलिए 6 बड़े होस्पिटलों
में मेडिकल रिलीफ
सोसाइटी द्वारा
डे केयर सेंटर
खोलने की घोषणा
की।
पशुधन
के लिए, राजस्थान
में पशुओं की संख्या
देखते हुए राजस्थान
के अंदर 50 नये पशु
चिकित्सालय,
100 नये उप स्वास्थ्य
केन्द्र, 200 पशु
चिकित्सकों
की भर्ती की घोषणा
की।
सार्वजनिक
निर्माण विभाग
में पिछले बजट
के समय रिडकोर
के माध्यम से
करीबन 1100
किलोमीटर
सड़कों की घोषणा
की थी। आज उन सड़कों
पर जो चारों सड़कें
हैं, एक हजार करोड़
का अनुबंध होकर
उन सड़कों का काम
चल रहा है।
प्रधानमत्री
सड़कयोजना की
शुरूआत देश के
प्रधानमंत्री
अटल बिहारी वाजपेयी
जी ने की थी। कांग्रेस
की सरकार उसको
आने के बाद बंद
करना चाहती थी,
लेकिन सभी सांसदों
द्वारा उसका विरोध
करने के बाद उस
योजना को चालू
रखना पडा। आज इसी
की वजह से गांव-गांव
में पेवर रोड बन
रही है और गांवों
के अंदर सी.सी. रोड
बन रही है। यह
सब उसी बात की मेहरबानी
है1 ...(व्यवधान)...
सड़क
क्षेत्र में यातायात
को सुगम बनाने
के लिए आरओबी और
उपमार्गों के निर्माण
हेतु एक अभूतपूर्व
पहल करते हुए 17 आरओबी
और 25 उपमार्गों
का निर्माण माननीय
सार्वजनिक
निर्माण मंत्री
ने चालू किया है।
मुख्यमंत्री
सड़क योजना के
लिए 200 करोड़ रुपये
से प्रत्येक वर्ष
में गांवों में
सड़कें, धार्मिक
स्थानों पर सड़कें,
जहां-जहां भी आवश्यकता
हो उन सड़कों के
लिए लिंक रोड बनाने
के लिए सरकार ने
चिन्ता करते
हुए हर वर्ष 200 करोड़
रुपया खर्च करने
की घोषणा की है।
ग्रामीण
क्षेत्र के स्कूलों
में आज स्कूलों
की जिन गांवों
में बिल्डिंग नहीं
है उन स्कूलों
के लिए 27 करोड़ रुपये
सरकार ने 1387 विद्यालयों
में अतिरिक्त
कक्ष और शौचालय
खोलने की कोशिश
की। आसींद और टोडाभीम
में निजी सहयोग
से
महाविद्यालय खोलने
की घोषणा की और
इसमें महिला पोलीटेक्निक
महाविद्यालय और
महाविद्यालय जहां
भी जिन तहसीलों
और जिलों में नहीं
हैं उनमें अगर
कोई भी निजी
सहभागिता से कालेज
खोलना चाहता है
तो सरकार मुफ्त
में जमीन देगी
और महिला
पोलीटेक्निक कालेज
खोलने के लिए 15 करोड़
का प्रावधान किया,
उसमें 50 परसेंट
बिल्डिंग का भी
पैसा देगी। इसलिए
कि हमारी जो बहन-बेटियां
हैं वे तकनीकी
शिक्षा का
ज्ञान ले लें और
उनको नौकरी व गांवों
में जो गरीबी है
उससे उत्थान मिले।
महिलाओं के बारे
में इस बात का ध्यान
दिया है।
सरकार
की सोच है आज गांव
में रहने वाले
आदमी को पीने का
पानी भी अच्छा
मिले। इसके लिए
पूर्ववर्ती सरकार
ने कभी ध्यान
नहीं दिया। हम
भी जब
प्रतिपक्ष में
बैठते थे तो कितनी
बार इनको कहते
थे गांवों में
हैण्डपम्प में
लगाने के लिए या
और पानी की स्कीम,
लेकिन कभी मंजूर
नहीं हुई। लेकिन
हमारी सरकार
ने बनते ही इस राजस्थान
में अंदर 40 हजार
हैण्ड पम्प राजस्थान
की सरकार ने दो
साल में लगाये
हैं। 2003 से दिसम्बर
05 तक लाभान्वित
आंशिक रूप से 24443 गांव
और ढाणियों में
तथा 1962 बस्तियों
में पेयजल आपूर्ति
उपलब्ध करायी।
...(व्यवधान)... स्वजलधारा
योजना के कार्यक्रम
में लगभग 6118 लाख रुपये
की लागत से 1866 योजनाओं
की प्रशासनिक व
वित्तीय स्वीकृति
हुई। 5392.10 लाख की लागत
से 1803 योजनाओं की
तकनीकी स्वीकृति
जारी की। इसलिए
पानी की व्यवस्था
में भी जहां गांवों
में फ्लोराइड पानी
हो या वहां पीने
के पानी की दिक्कत
हो तो कोई भी विधायक
या मंत्रीजी
के पास गया तो कभी
भी मंत्रीजी ने
उसके लिए मना नहीं
किया चाहे वह सत्ता
पक्ष का हो और चाहे
विपक्ष का हो।
सिंचाई के मामले
में भी राजस्थान
की सरकार ने गिरते
हुए जल स्तर को
रोकने के लिए गांव-गांव
में एनीकट और बाँध
बनाने की योजनाएं
मंजूर की जहां
25 लाख सिंचाई योजनाओं
को पूर्ण करके
1 लाख हैक्टेयर
में सिंचाई सुविधा
उपलब्ध कराने
का लक्ष्य है।
( )
(श्रीमती
सुमित्रा सिंह,
अध्यक्ष, पदासीन)
श्री
अध्यक्ष: मैं
आपसे एक सैकण्ड
के लिए क्षमा चाहूंगी
थोड़ा स्थान ग्रहण
करें। मैं प्रतिपक्ष
से अपील करना चाहूंगी
कि उनके बिना सदन
में कुछ नीरस लग
रहा है। इसलिए
वे भी आएं और अपने
बहुमूल्य सुझावों
से सदन को लाभान्वित
करें। मैं चाहती
हूं कि प्रतिपक्ष
भी आकर सदन में
अपनी-अपनी सीटों
पर बैठें।
श्री
कालीचरण सर्राफ:
एक अशोभनीय घटना
हुई काला झण्डा
दिखाया और पूरा
विपक्ष बहिर्गमन
कर गया, इससे ज्यादा
अफसोसजनक बात क्या
हो सकती है? इसके
लिए हम भी रिक्वेस्ट
करते हैं ...(व्यवधान)...
श्री
धर्मपाल चौधरी:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं सिंचाई
के बारे में बता
रहा था कि राजस्थान
में सिंचाई के
लिए 17150 हैक्टेयर
में खालों का निर्माण
इंदिरा गांधी नहर
परियोजना में
...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष: मुख्य
सचेतक महोदय, आप
मेरी अपील के बारे
में प्रतिपक्ष
की लॉबी में चले
जाएं और कहें कि
मैंने यह अपील
की है प्रतिपक्ष
से। आप जाएं एक
बार। आप जाइए और
कहें।
श्री
महावीर प्रसाद
जैन: हम तो आसन का
आदेश मानते हैं।
श्री
धर्मपाल चौधरी:
इंदिरा गांधी नहर
परियोजना का आधुनिकीकरण
एवं पुनरुद्धार
हेतु आगामी चार
वर्षों में 300 करोड़
रुपये व्यय करके
20 हजार हैक्टेयर
में पक्के खालों
के निर्माण हेतु
28 करोड़ रुपये..
mlb/akt/2n/1540/11.3.2006
सिद्धमुख नहर में खालों के निर्माण
के लिए 22 हजार हैक्टेयर में और अमरसिंह जागराणा योजना में 10 हजार हैक्टेयर में
खालों के निर्माण हेतु 18 करोड़ और 8 करोड़ रुपये चम्बल परियोजना की नहरों का
जीर्णोद्धार और सुदृढ़ीकरण करने के लिए 7 करोड़ रुपये, दायीं मुख्य नहर सड़क हेतु 20
करोड़, मुख्य नहर
के लिए 10 करोड़, इस तरह सिंचाई के लिए भी और आज गंगानगर
जिले में जो इनका बहुत लम्बे समय से आबियाना को माफ करने की बात थी, हमारी सरकार
आने के बाद ही माफ किया।
श्री अध्यक्ष: माननीय सदस्य बोलने वाले बहुत हैं, आप 21 मिनट ले चुके हैं, 3.19 पर शुरू किया था इसलिए दो मिनट में अपनी बात समाप्त कर दें।
श्री धर्मपाल चौधरी: मैं दो मिनट में समाप्त कर दूंगा।
माननीय अध्यक्ष महोदय,
इस बजट
में चाहे सैनिकों के कल्याण के लिए हो आज जो दूसरे विश्वयुद्ध के सैनिकों की
विधवाओं को जो पेंशन तीन सौ से बढ़ाकर हमने ही छह सौ की थी, उसको आठ सौ किया,
दूसरे विश्व युद्ध के भी पेंशन प्राप्त करने पर वाले सैनिकों को भी आठ सौ रुपये
किया, चाहे खाद्य में हो, चाहे उद्योग में हो, पावर जनरेट पर उद्योगों के अन्दर
कर लगा रखा था उसको समाप्त किया। इस तरह से प्रत्येक क्षेत्र में माननीय मुख्य
मंत्री महोदय ने इस बजट से राजस्थान के आम-अवाम का ख्याल रखा है।
अब मैं कुछ बातें अपने अलवर ज़िले
के लिए भी कहना चाहता हूं। ...(व्यवधान)... आखिर हमारे अलवर जिले में मत्स्य
यूनिवर्सिटी की मांग रही, मत्स्य प्रदेश था तब ही से रही, इसकी हम बार बार यहां
पर मांग भी करते रहे, अलवर जिले को इस पिछले 2-3 साल के बजट में अलवर जिले को एक
थानागाजी महाविद्यालय और बहरोड़ में पोलीटेक्निक कालेज के अलावा कोई ऐसा बड़ा पैकेज
नहीं मिला तो हम माननीय मुख्य मंत्री जी से आग्रह करते हैं कि राजर्षि
महाविद्यालय में छात्रों की
संख्या भी बहुत ज्यादा है, इस राजर्षि महाविद्यालय
को ही क्रमोन्नत करके अगर यूनिवर्सिटी बन जाए, राजर्षि यूनिवर्सिटी तो वहां की
जनता की मांग पूरी हो जाएगी, यह हमारा माननीय मुख्य मंत्री जी से निवेदन है और
मैं अपने विधान सभा क्षेत्र में पहले भी कह चुका हूं
मुख्य मंत्री जी से भी रिक्वेस्ट
की कि कृषि महाविद्यालय खोलने की क्योंकि मण्डावर क्षेत्र किसानों का क्षेत्र है और वहां पर एक दो सौ बीघा में तिनकीरूड़ी में फार्म हाउस है, सरकार का कृषि फार्म हाउस
है, अगर उसमें कृषि महाविद्यालय खोला जाता है तो मण्डावर क्षेत्र की जनता का
फायदा होगा।
श्री अध्यक्ष: कृपया कन्क्लूड करें आप।
श्री धर्मपाल चौधरी: एक मिनट मैं आखिरी बात कह रहा हूं। हमारे वहां स्कूलों
में साइंस सब्जेक्ट नहीं है, माननीय शिक्षा मंत्री जी यहां विराजमान हैं, हमारे
चाहे सब डिवीजनल हैड क्वार्टर हो, चाहे गांव में साइंस और कामर्स का सब्जेक्ट
नहीं है तो उन उच्च माध्यमिक विद्यालयों में
विषय खोलने की कृपा करेंगे। मैं अन्त
में, मुख्य मंत्री जी को बहुत बहुत बधाई देना चाहता हूं कि उन्होंने इतना शानदार
बजट पेश किया, राजस्थान के आम अवाम के लिए इसके लिए माननीय अध्यक्ष महोदय,
आपने जो समय दिया उसके लिए भी बहुत बहुत धन्यवाद। जयहिन्द जय भारत।
श्री अध्यक्ष: श्री प्रद्युम्न सिंह।
श्री प्रद्यम्न सिंह (राजाखेड़ा): माननीय अध्यक्ष महोदय,
सर्वप्रथम मैं अपनी बात शुरू करता हूं, हमारे मुख्य मंत्री जी वित्त
विभाग भी
देख रही हैं और हर वित्त मंत्री का यह प्रयास रहता है कि राज्य की राजस्व आमदनी
बढ़ाई जावे, राज्य की आर्थिक स्थिति सुधरे और इस दिशा में उन्होंने पहल की है, काम किया है लेकिन यहां पर यह बात भी बताना चाहूंगा कि उनके प्रयत्नों के अलावा
अन्य कई ऐसे कारण रहे हैं जिससे कि राज्य की आर्थिक स्थिति के अन्दर सुधार हुआ
है, इसमें भारत सरकार का योगदान भी और 12वें फाइनैंस कमीशन का योगदान भी इसके अन्दर
कम नहीं है और भारत सरकार से डिफरेंट मिनिस्ट्रीज से जो ग्रांट मिली है राज्य
सरकार को विभिन्न विभागों के
पेटे उसका भी योगदान रहा है लेकिन इन सब के बावजूद
भी राज्य के ऊपर कर्जा बढ़ा है, राज्य के ऊपर ब्याज का भार बढ़ा है, यह अपने आप
में एक चिन्ता की बात है, मैं आपसे निवेदन करना चाहूंगा कि माननीय मुख्य मंत्री
जी ने अपने बजट भाषण में शुरू में एक साल का जिक्र किया है कि जिस साल राज्य की
राजस्व आय के अन्दर ...
डा. किरोड़ी लाल: माननीय अध्यक्ष महोदय,
माननीय सदस्य ने सदन में आसन से
पानी पीने की परमिशन ले ली है ?
श्री अध्यक्ष: ले ली है।
डा. किरोड़ी लाल: मैं जानकारी लेना चाहता था।
श्री अध्यक्ष: बीच में डिस्टर्ब न करें, बिना आसन की अनुमति के सदन में पानी
नहीं आ सकता।
श्री प्रद्युम्न सिंह: मैं ऐसा कोई कारण नहीं करूंगा कि आपको कोई अंगुलि
उठाने का मौका मिले।
श्री महावीर प्रसाद जैन: नाहीं, आप पानी पी पी कर हमारे को ..
श्री प्रद्युम्न सिंह: मैं आपको कोसूंगा नहीं,
आपकी तारीफ भी करूंगा।
श्री अध्यक्ष: वह आपको पानी पी पी कर कोसेंगे, क्या करेंगे आप।
श्री प्रद्युम्न सिंह: आपकी तारीफ नहीं करूंगा, मैं आपको कोसूंगा।
श्री जुबेर खान: पानी में नमक मिलाकर भेजा है न इसलिए।
श्री घनश्याम तिवाड़ी: महारानी साहिबा का नमक है इसमें।
श्री प्रद्युम्न सिंह: माननीय अध्यक्ष महोदय,
जहां तक राजस्व वृद्धि का प्रश्न
है क्योंकि यहां बार बार यह बात कही है।
मोहम्मद माहिर आजाद: सांभर साल्ट का है जो केन्द्रीय सरकार के