Bhs/usc/1100/1a

                                                        अशोधित प्रति/प्रकाशनार्थ नहीं

 

राजस्‍थान विधान सभा की कार्यवाही का वृत्‍तान्‍त

 

अंक 5 बारहवीं राजस्‍थान विधान सभा के पांचवें सत्र का ग्‍यारहवां दिवस संख्‍या 8

 

 

शुक्रवार,10 मार्च, 2006

राजस्‍थान विधान सभा की बैठक 11.00 बजे

विधान सभा भवन, जयपुर में प्रारम्‍भ हुई।

 

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

 

तारांकित प्रश्‍नोत्‍तर

 

श्री अध्‍यक्ष: श्री शंकरसिंह राजपुरोहित।

 

गौवध/तस्‍करी की रोकथाम हेतु कार्य-योजना

 

124.श्री शकरसिंह राजपुरोहित (आहोर): क्‍या गृह मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

क्‍या यह सही है कि राज्‍य में गौवध एवं गौ तस्‍करी पर रोक होने के बावजूद भी गौवंश राज्‍य के सीमावर्ती क्षेत्र गुजरात सीमा से महाराष्‍ट्र आदि राज्‍यों की तरफ कटने के लिए जाते हैं?

                                       राज्‍य में गौवध एवं गौ तस्‍करी से संबंधित विगत पाँच वर्षों में कितने मामले पुलिस थानों में दर्ज हुये? इनमें लिप्‍त व्‍यक्तियों व वाहनों के संबंध में  सरकार द्वारा क्‍या कार्यवाही की गई तथा कितने पशु कब-कब पकड़े गये?  जिलेवार सूची सदन की मेज पर रखें।

                                       क्‍या सरकार गौवंश की तस्‍करी के उपयोग में लाये जाने वाले वाहनों पर आबकारी नियम 69/4 के तहत वाहन को जब्‍त कर उसकी 50 प्रतिशत राशि जमानत पर रखने एवं वाहन चालक तथा उसके वाहन मालिक को भी दण्डित करने का नियम बनाने का विचार रखती है? यदि हां, तो कब तक व नहीं, तो क्‍यों?

गृह मंत्री (श्री गुलाबचंद कटारिया): (1) यह सही है कि गुजरात सीमा से लगने वाले जिलों सिरोही, जालोर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा एवं उदयपुर से गौवंश राज्‍य की गुजरात की सीमा से महाराष्‍ट्र आदि राज्‍यों की तरफ अवैध निर्यात कर ले जाने की घटना की शिकायतें आती हैं।

    (2) राज्‍य में विगत पाँच वर्षों में गौवध के कुल 351 अभियोग एवं गौवंशीय पशुओं के अवैध निर्यात के 992 अभियोग दर्ज हुए हैं। इन अभियोगों में लिप्‍त 3333 व्‍यक्तियों के खिलाफ न्‍यायालय में चालान प्रस्‍तुत किये गये तथा 604 वाहनों को भी वजह सबूत में जब्‍त किया जाकर अदालत के निर्णय अनुसार कार्यवाही की गई। गौवंशीय पशुओं के अवैध निर्यात के संबंध में पकड़े गये 24871 पशुओं की सूचना जिला वार एवं वर्ष वार परिशिष्‍ट अ' पर संलग्‍न है।

    (3) राजस्‍थान गौवंशीय पशु (वध का प्रतिषेध और अस्‍थाई प्रवर्जन या निर्यात का विनियमन) अधिनियम, 1995 के अन्‍तर्गत कारित अपराध के लिये उपयोग में आने वाले वाहन को आबकारी नियम के तहत जब्‍त करना विधि सम्‍मत नहीं होगा।  आबकारी अधिनियम की व्‍यवस्‍था के अनुरूप राजस्‍थान गौवंशीय पशु (वध का प्रतिषेध  और अस्‍थाई प्रवर्जन या निर्यात का विनियमन) अधिनियम, 1995 में अपराध के लिये उपयोग में लाये जाने वाले वाहनों को जब्‍त करने बाबत प्रावधान नहीं है।  अधिनियम में संशोधन का अभी काई प्रस्‍ताव राज्‍य सरकार के समक्ष  नहीं है।

  श्री शकर सिंह राजपुरो‍हित: मान्‍यवर, अध्‍यक्ष महोदय, प्रश्‍न बड़ा मार्मिक एक राष्‍ट्रीय अस्मिता से जुड़ा हुआ प्रश्‍न है और मैं यह मानूंगा कि यह सदन पूरा राजस्‍थान के उस गौवंश को बचाना चाहता है जो गौवंश अवैध रूप से तस्‍करी के माध्‍यम से कटने के लिए जाता है।  गाय हमारा माता है और उसे बचाना हमारा एक धर्म बन जाता है इसलिए मैं प्रश्‍न के माध्‍यम से आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से यह निवेदन करूंगा कि एक तो बॉर्डर पर जो ये बॉर्डर के थाने हैं उस पर सीमा पर एक अलग से ऐसी पुलिस फोर्स बनाने की इच्‍छा रखते हैं जो पुलिस फोर्स इस प्रकार की तस्‍करी को रोक सकती है और दूसरा यह जो जब्‍त वाहन हैं माननीय अध्‍यक्ष महोदया, 2003 में मंडार पुलिस थाना जो सिरोही विधान सभा क्षेत्र में आता है और उस थाने में 2003 में एक ट्रक को 10 दिन में तीन बार पकड़ा गया मतलब पाँच-दस हजार रुपये देकर वो ट्रक छूट जाता है यह एक गौवंश के साथ अन्‍याय हुआ है ।  दस दिन में तीन बार छूट गया तो यह घटनाएं कितने ये तो रिकार्ड में आयी हुई है बिना रिकार्ड में आयी हुई घटनाएं कितनी हैं।  मतलब यह हमारे ऊपर कितना बड़ा महापाप लगा है कि हमारे होते हुए इतना गौवंश कटने के लिए जाता है तो यह एक इस प्रकार का नियम बनाया जाए जो कि  वाहनों को जब्‍त करके और उनकी कीमत वसूली जाए।  जो एक्‍साइज में जो नियम लगता है कि मादक पदार्थों की तस्‍करी में 69 बी में ऐसा नियम है कि वाहनों को जब्‍त करके उसकी आधी कीमत वसूली जाती है ऐसा एक नियम बनाने की क्‍या सरकार इच्‍छा रखती है? पशुपालन मंत्री और गृह मंत्री महोदय आप दोनों से निवेदन है क्‍या ऐसा नियम बना सकते हैं जिससे गौवंश को रोकने में राजस्‍थान की एक अस्मिता को कायम रखने में हम मजबूत बन सकते हैं!

श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, मैं भी एक निवेदन करना चाहूंगा मंत्री महोदय से मैंने पूर्व में भी किया था कि जो गौवंश को प्रोटेक्‍शन के लिए एक्‍ट बना हुआ है...।

श्री अध्‍यक्ष: पहले मूल प्रश्‍नकर्ता का जवाब दे रहे हैं।

श्री गुलाबचंद कटारिया: मैं एक बार बता दूं उसके बाद।  माननीय सदस्‍य की जो इस बारे में ज्‍यादा चिन्‍ता है वो यह है कि ले जाने वाले वाहनों को रोकने में आपका कानून किस तरह से काम करता है तीन-तीन बार भी वो ही व्हिकल से अगर जाता है तो उसके बाद भी नहीं तो जो कानून हमने 1995 में बनाया उस कानून की धाराओं में हमने पूरी सख्‍ती के साथ इस कानून को बनाया। पालना में इसमें कहीं ढिलाई हो सकती है कानून में कोई ढिलाई नहीं है। मैं आपको बताता हूं इस कानून की धारा 3 में गौवंशीय पशु के वध का प्रतिषेध इसमें दिया हुआ है, यदि प्रवत्‍त किसी भी विधि से या किसी भी प्रथा या रूढ़ी के अन्‍तर्गत किसी बात के प्रतिकूल होने पर भी कोई भी व्‍यक्ति किसी भी गौवंशीय पशु का वध नहीं करेगा या नहीं करवायेगा उसे वध के लिए प्रस्‍तावित नहीं करेगा या नहीं करवायेग।  गौमांस के उत्‍पादों को कब्‍जा, विक्रय और परिवहन पर धारा 4 में स्‍पष्‍ट है।  धारा-5 में वध के प्रयोजन के लिए गौवंशीय पशु को निर्यात प्रतिषेध और अन्‍य प्रयोजन भी इसमें हैं इसके बाद धारा-6 में जो परिवहन का दुष्‍प्रेरक हो उसके लिए बनाया है जब कभी इस अधिनियम के अधीन किसी भी अपराध के किये जाने के उद्देश्‍य को अग्रेषित करने केग परिवहन के किसी भी साधन से गौवंशीय पशुओं का परिवहन किया जाए तो परिवाहक उक्‍त का दुष्‍प्रेरण का दोषी होगा और उसी दण्‍ड से दण्डित होगा जो उक्‍त अपराध को करने के लिए व्‍यक्ति मतलब ले जाने वाले को भी वो ही सज़ा होगी जो इसको ट्रांसपोर्ट कराता है दोनों को सज़ा में किसी प्रकार का अंतर नहीं है। इसकी धारा 8 में जो शक्तियां दी हुई हैं इसमें धारा 3 के उपबंधों का उल्‍लंघन करने या उल्‍लंघन करने का प्रयत्‍न करना या उल्‍लंघन का दुष्‍प्रेरण करता है तो दोष वृद्धि पर ऐसी अवधि के कठोर कारावास में जो एक वर्ष से कम का नहीं होगा किन्‍तु दस वर्ष तक का हो सकेगा।  मतलब एक साल कम से कम और दस साल तक की सज़ा है ।  जो स्‍वयं खरीद कर ले जाता है और जो ट्रांसपोर्ट करता है दोनों का कानून एक ही है कानून की पालना में जिस सख्‍ती का रास्‍ता निकलना चाहिए उसमें कमी हो सकती है इसी तरह से आपने देखा होगा कि इसमें धारा 11 जो है इसमें सबूत का भी उसी को अपने सबूत जुटाने हैं 11 में है।  सबूत का भार जहां किसी भी व्‍यक्ति को इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन में किसी अपराध के लिए अभियुक्‍त किया जाए वहां वह साबित करने का भार भी उसी पर होगा।  मैं सोचता हूं कि यह भार भी उसी पर है।  कानून में तो प्रावधान मैं सोचता हूं कि एक्‍साइज एक्‍ट से ज्‍यादा हैं एक्‍साइज एक्‍ट में एक्‍स्‍ट्रा यह है कि उससे पेनल्‍टी वसूल करने का अधिकार कमिश्‍नर को होता है वो उस गाड़ी को किस तरह से कितना फाइन लेकर छोडेगा।  यह जो अधिकार है वह न्‍यायालय को है किसी हमारे विभाग के अधिकारी को नहीं है दोनों का अन्‍तर है उससे भी कठोर है उसमें एक साल से लेकर दस साल तक की सज़ा है तो मैं सोचता हूं कि प्रावधानों में तो पूरी इसकी व्‍यवस्‍था की है लेकिन इसकी पालना या पालना कराने में या हमारी तरफ से जो प्रावधान करने में अगर इसमें कोई कमी खामी है तो हम इसको एक बार फिर देखकर के उसी ढंग से यह लागू हो इसका प्रयास करेंगे।

श्री अध्‍यक्ष: श्री जुबेर खान।

श्री जुबेर खान: अध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहूंगा कि मैंने पहले भी यह बात कही थी कि कानून में कोई कमी नहीं है जो 1995 में बनाया है लेकिन एक कमी जो महसूस हो रही है वास्‍तविकता में जो डिस्ट्रिक्‍ट बोर्डर पर लगते हैं हरियाणा के उत्‍तर प्रदेश के गुजरात के बॉर्डर पर अगर कोई गौधन ले जाना चाहता है तो आपने तहसीलदार एस.डी.ओ. को, हमने पहले भी आपसे निवेदन किया था कि इसमें कम से कम कलेक्‍टर या एस.पी. लेवल के अधिकारी को लगाइये कि उनके परमिट बगैर बॉर्डर डिस्ट्रिक्‍ट्स में कोई गौधन को नहीं ले जा पाएगा क्‍योंकि होता क्‍या है कि अध्‍यक्ष महोदय, सर्टीफिकेट ले लिया सिरोही जिले का मान लीजिये उदाहरण के तौर पर या भरतपुर जिले का आप रोक नहीं सकते और उससे इसकी तस्‍करी हो रही है अगर वास्‍तव में आप गौधन को बचाना चाहते हैं तस्‍करी से और वध्‍ं से तो आपको यह कानून में व्‍यवस्‍था करनी पड़ेगी कि राजस्‍थान राज्‍य के जितने भी बॉर्डर डिस्ट्रिक्‍ट्स हैं उनमें गौधन को ले जाने के लिए कम से कम जिलाधीश या एस.पी. के स्‍तर के नीचे के अधिकारी का परमिट लागू नहीं होना चाहिए।  इसके बारे में आपने पहले भी सदन में कहा था कि हम इसके ऊपर कोई न कोई कानूनी कार्यवाही करने जा रहे हैं तो आप सदन को बतायें कि इस संबंध में आप क्‍या कार्यवाही करने जा रहे हैं?

श्री अध्‍यक्ष: श्री जीतमल खांट।

श्री गुलाबचंद कटारिया: अध्‍यक्ष महोदय, यह बात सच है कि ...।

श्री अध्‍यक्ष: आ जाने दीजिये सबके प्रश्‍न पहले, साथ ही जवाब दे दीजिये।

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श्री जीतमल खांट (बागीदौरा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मैं मंत्री महोदय से जानना चाहूंगा कि राज्‍य में लगने वाले पशु मेलों से जो आदिवासी काश्‍तकार बैल खरीदकर ले जाते हैं उनके विरुद्ध कुछ संगठन के कार्यकर्ताओं के द्वारा जबरन मारपीट  क्‍यों की जाती है । क्‍या इस प्रकार के प्रकरण आपकी जानकारी में है । नंबर 2 क्‍या राज्‍य सरकार इस प्रकार की कार्यवाही को रोकने के लिये ऐसे अधिकारियों की नियुक्ति का विचार रखती है जो पशु खरीदने का परमिट मेला स्‍तर पर कोई अधिकारी लगाने का विचार रखते हैं । माननीय मंत्री जी ने भी स्‍वीकार किया है कि बांसवाडा, डूंगरपुर , उदयपुर यह जिले  गुजरात की सीमा से लगते हुए हैं और आज परिशिष्‍ट अ' में बताया है कि सबसे ज्‍यादा तस्‍करी के प्रकरण आदिवासियों के खिलाफ दर्ज कराये जाते हैं और हमारा  सारा आदिवासी वहां पर किसान है और खेती करने के लिहाज से पशु मेलों से बैल खरीद कर ले जाते हैं । हम भी नहीं चाहते गौवध हो हम खुद चाहते हैं कि गायों के साथ जो इस तरह की अनहोनी घटना होती है वह नहीं होनी चाहिये । लेकिन जिस तरीके से बांसवाडा  और डूंगरपुर के आदिवासियों के साथ घटना होती है सबसे ज्‍यादा पुलिस विभाग में आदिवासियों के खिलाफ मुकदमें दर्ज हैं । मैं निवेदन करना चाहता हूं जिस तरीके से खान साहब ने बताया कि बांसवाडा और डूंगरपुर जो गुजरात की सीमा से लगते हैं वहां पर उच्‍च अधिकारी तैनात किया जाये और कम से कम पशु मेलों में खरीदने के लिये परमिट अधिकारी नियुक्‍त किया जाये यह मैं सदन के माध्‍यम से मांग करता हूं ।

श्री जोगाराम पटेल : अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से एक प्रश्‍न पूछना चाहूंगा, इसके साथ ही उत्‍तर हो जायेगा ।

श्री अध्‍यक्ष: मूल प्रश्‍नकर्ता का अधिकार है ।

श्री जोगाराम पटेल : आप जो जवाब देंगे उससे संबंधित है साथ ही जवाब हो जायेगा । इतना है कि लाने ले जाने वाले को तो सज़ा दी जा रही है परन्‍तु जो व्‍हीकल यूज हो रहा है उसके खिलाफ क्‍या पैनेल्‍टी है ।

श्री शंकरसिंह राजपुरोहित : अध्‍यक्ष महोदय, अभी मंत्री महोदय ने जवाब दिया कि व्‍हीकल जब्‍त करने का हमें अधिकार नहीं है । मैं यह बताना चाहता हूं जो ट्रक गौवंश की तस्‍करी के लिये काम में आते हैं ..

श्री अध्‍यक्ष: बताना नहीं आप पूछना चाहो ।

श्री शंकरसिंह राजपुरोहित : मैं पूछ रहा हूं गौवंश की तस्‍करी में जो वाहन यूज में आते हैं वह कम से कम 80 हजार रुपये लेता है एक बार्डर से दूसरी बार्डर छोडने का । वह यह देखता है कि 5-10 हजार रुपये देकर मैं छूट जाऊंगा और 3-4 ट्रिप कर के मैं मेरी ट्रक फ्री कर लूंगा । मैं पशु पालन मंत्री जी और गृह मंत्री जी से निवेदन करूंगा कि किसी भी प्रकार से गौ वंश की तस्‍करी के प्रयोग में लाये जाने वाले वाहन को जब्‍त करने का नियम बनाने का विचार रखते हैं क्‍या ?

श्री सुभाषचन्‍द्र शर्मा : अध्‍यक्ष महोदय मेरा एक निवेदन है कि गौवंश को जिस प्रकार से पशु पालकों ने आवारा छोड दिया है और जिस प्रकार से वह आवारा गौवंश इधर उधर गांवों में घूमते हैं तो कटने के लिये ले जाने वाले जितने भी लोग हैं वह गांवों में से उन गायों को इकट्ठी करके अपने ट्रकों में लोड करके उनको ले जाते हैं जिनकी कोई गिनती नहीं, कोई निगरानी नहीं है । मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से यह जानना चाहूंगा कि इस प्रकार के गौवंश को कटने से रोकने के लिये सरकार क्‍या विचार रखती है । दूसरा, गौशालाओं को बढावा देकर इन गायों को गौशालाओं तक ले जाकर सरकार उनके संरक्षण की क्‍या नीति रखती है।

श्री अध्‍यक्ष: मंत्री जी ।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया : अध्‍यक्ष महोदय , अभी जो हमारे कानून में है मेलों में तो मेला अधिकारी का परमिट ही लागू होता है । मेला अधिकारी का परमिट है तो उससे जा सकते हैं। सामान्‍यत: जो ले जाते हैं वह एडीएम के स्‍तर के अधिकारी उसको ले जाने की स्‍वीकृति देता है तो उससे वह होता है । आपका आग्रह यह है कि जो हमारे बार्डर एरिया के लोग हैं और जहां इस प्रकार की घटनाएं दुर्घटनाएं होती रहती हैं वहां परमिट देने वाला अधिकारी कलेक्‍टर या एस पी लेवल का किया जाये । मैंने जैसा आपको कहा कि इस बारे में क्‍योंकि यह विशेष तो है पशु पालन विभाग का, हमने उनसे बात की है कि अगर इसके परमिट में और कोई सुधार संभव है जिसके कारण से जो अपने राज्‍य से बाहर जा रहा है उसके ऊपर कोई सख्‍ती की जा सकती है तो पशु पालन विभाग और हम दोनो मिलकर, हमने अपनी तरफ से उन्‍हें भेजा है लेकिन अभी उनकी तरफ से इस बारे  में कोई विशेष नहीं आया है, हम फिर प्रयास करेंगे कृषि मंत्री जी से । दूसरा यह है कि जो परमिट से जानवर ले कर जाते हैं उनको सामान्‍यत: नहीं रोकते हैं । बागीडोरा से आने वाले माननीय सदस्‍य ने कहा यह बात जरूर है निश्चित रूप से उस क्षेत्र में भी जो बांसवाडा, डूंगरपुर में है केवल 2005 में ही 12 मुकदमे दर्ज हुए हैं । 27 अभियुक्‍त उसमें नामजद हुए हैं । उसमें से 8 का चालान भी किया है । इसी तरह से डूंगरपुर है । यह केवल एक साल का है, पाँच साल का चार्ट भी इसमें दिया है । इस प्रकार की घटनाएं होती हैं लेकिन सामान्‍यत: जो परमिट लेकर जाता है उसे नहीं रोकते हैं । यह विशेषकर जो पकडी जाती है ट्रकों की ट्रकों में जो गौवंश इधर से उधर जाता है उसको लोग जरूर रास्‍ते में पकड़ते हैं, उतारते हैं और अगर उनके पास वैलिड परमिट होता है तो वहां का जो अधिकारी होता है उसको देखने के बाद उसे वापस छोडता भी है । जिनके पास सही परमिट नहीं होता है...

श्री जीतमल खांट : गृह मंत्री जी नहीं छोड़ते हैं विशेषतौर से बांसवाडा और डूंगरपुर के काश्‍तकार इससे बहुत दुःखी हैं । मैं आसन से चाहूंगा कि आप कोई न कोई ऐसी नीति स्‍पष्‍ट करें या जिला कलेक्‍टर या एसडीएम को वहां तैनात करें कि वह कम से कम पशु मेलों से बैलों को लाने के लिये परमिट जारी करें ।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया : विशेषकर जो हमारा अलवर और भरतपुर क्षेत्र है जहां इस प्रकार की दुखद घटनाएं कई बार होती है, मैंने पिछली बार विधान सभा में घोषणा की थी कि पाँच पाँच चौकियां दोनो ही मेवात क्षेत्र में भरतपुर और अलवर में लगायेंगे । पाँच से ज्‍यादा हमने अभी व्‍यवस्‍था कर रखी है । भरतपुर में हमने पाँच की जगह 15 चौकियां स्‍थापित की है ताकि इन रास्‍तों से की जाने वाली गौ तस्‍करी को हम किसी तरह से रोक सके और अलवर में भी हमने 5 से बढाकर 7 चौकियों की स्‍थापना की है । हमने हमारी तरफ से इस बात की कोशिश की है । जहां तक गाडी जब्‍त करने का सवाल है मैं सोचता हूं कि यह हमारे पास एक्‍साइज की तरफ से अपने एक्‍ट में नहीं है कि इस गाडी पर कोई जुर्माना लगाया जा सके । मैं सोचता हूं कि इस बारे में हम पशुपालन विभाग से मिलकर बात करेंगे कि हव जब्‍ती के बारे में अगर कानून में कोई संशोधन करना चाहे तो करें । मैं सोचता हूं कि सज़ा का प्रावधान इतना है कि अगर ले जाने वाला जो गाडी का मालिक है और ड्राइवर है उस पर भी वही सज़ा है जो उस तस्‍करी के लिये गायों को इकट्ठा करके ले जाता है । लेकिन यह बात सच है कि इस कानून की पालना ले जाने वाले ट्रक मालिक के या ड्राइवर के खिलाफ इतनी सख्‍त कार्यवाही अभी तक न्‍यायालय से नहीं हो पायी है । हम कोशिश करेंगे कि उन लोगों को जो ट्रक के मालिक है या ड्राइवर हैं उसको भी वही सज़ा दी जाये जो तस्‍करी के लिये गायों को इकट्ठा कर ले जाता है । जहां तक आपका सवाल है यह जो आवारा पशु हैं उनको जब कभी इस प्रकार से ले जाते हैं तो यह बिना परमिट के होते हैं । जहां जहां लोगों का इसके खिलाफ कोई विरोध होता है उतारते हैं वहां तो यह पकडी जाती है लेकिन कई बार हो सकता है जाने अनजाने और इतना बराबर नहीं होने से कुछ जाती होगी, इसके लिये फिर प्रयास करेंगे इस प्रकार से जो गाये जा रही हैं उनको भी कम से कम बार्डर डिस्ट्रिक्‍ट पर हम विशेष रूप से कुछ चौकियों का इंतजाम करेंगे । जैसे मेवात में तो हमने किया है लेकिन गुजरात और महाराष्‍ट्र के बार्डर पर अभी हमारे पास फोर्स नहीं है । हम फिर विचार करेंगे विभाग की तरफ से और अगर वहां पर भी कुछ व्‍यवस्‍था की जा सकती है तो निश्चित रूप से करेंगे ।

श्री बंशीलाल खटीक: अध्‍यक्ष महोदय , एक पूरक प्रश्‍न है ..

श्री अध्‍यक्ष: नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन, श्री रामचन्‍द्र सराधना । 18 मिनट हो गये हैं एक प्रश्‍न को । (व्‍यवधान) मैंने नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन पुकार लिया है । (व्‍यवधान) अंकित नहीं हो ।

श्री बंशीलाल खटीक :***   

श्री जीतमल खांट: ***

श्री बंशीलाल खटीक : ***

श्री फतेह सिंह : ***

श्री बंशीलाल खटीक: ***

ans\usc\10.3.2006\1c\1120\1

श्री फतेह सिंह: ***

श्री अध्‍यक्ष: राजसमंद से आने वाले माननीय सदस्‍य, स्‍थान ग्रहण करें। (व्‍यवधान)  यह बोलने का समय नहीं है, प्रश्‍न पूछने का समय है। बिल्‍कुल नहीं।

श्री बंशीलाल खटीक:***

श्री फतेह सिंह: ***

श्री अध्‍यक्ष: बिल्‍कुल नहीं, यह भाषण देने का नहीं है, यह प्रश्‍नकाल है। स्‍थान ग्रहण करें। माननीय सदस्‍य स्‍थान ग्रहण करें। एक प्रश्‍न पर आप लोगों ने 20 मिनिट ले लिया है, बाकी प्रश्‍न भी महत्‍वपूर्ण होते हैं। गृह मंत्री जी ने उन सब बातों के पूरे जवाब दे दिये। (व्‍यवधान) अब क्‍या चाहते हैं? नहीं, अब मैंने नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन पुकार लिया है।

श्री रामचन्‍द्र सराधना(जमुआरामगढ़): प्रश्‍न संख्‍या 125

श्री  जीतमल खांट: ***

श्री फतेह सिंह: ***

श्री अध्‍यक्ष: मैंने दूसरा प्रश्‍न पुकार लिया है1 मैंने नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन पुकार लिया। मैंने दूसरा प्रश्‍न पुकार लिया नेता जी।

श्री फतेह सिंह: ***

श्री अध्‍यक्ष:  जद यू के नेता, मैंने  दूसरा प्रश्‍न पुकार लिया है।

श्री फतेह सिंह: ***

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो, मेरी अनुमति के जो बोलते हैं अंकित नहीं हो।

श्री जीतमल खांट: ***

श्री फतेह सिंह: ***

श्री अध्‍यक्ष: आपके नेता भी खडे़ हैं और आप भी खडे़ हैं, क्‍या बात है? 

श्री जीतमल खांट: ***

श्री अध्‍यक्ष: नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन।

 

 

जयपुर शहर की गैस एजेंसियों में व्‍याप्‍त अनियमितताएं

 

125. श्री रामचन्‍द्र सराधना(जमुआरामगढ़): क्‍या खाद्य एवम नागरिक आपूर्ति  मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

 (1) क्‍या यह सही है कि सरकार को जयपुर शहर में विभिन्‍न एल.पी.जी. गैस एजेंसियों के विरूद्ध रसोई गैस की कालाबाजारी, अनियमित आपूर्ति रसोई गैस के दुरूपयोग की अनेक शिकायतें प्राप्‍त हुई है ? यदि हां, तो 01जनवरी,2005 से अब तक जयपुर शहर में कुल कितनी शिकायतें उपभोक्‍ताओं से प्राप्‍त हुई औरउनमें से कितनी शिकायतों का निराकरण किया गया? विवरण सदन की मेज पर रखें।

(2) क्‍या यह सही है कि रसद विभाग पेट्रोलियम कम्‍पनियों ने मिलकर रसोई गैस के दुरूपयोग को रोकने के लिए अभियान चलाया था ? यदि हां, तो कब इस अभियान में दुरूपयोग के कितने प्रकरण सामने आये और उनके आधार पर किन-किन गैस एजेंसियों के विरूद्ध कार्यवाही की गई? विवरण सदन की मेज पर रखें।

(3) उक्‍त अवधि में सरकार द्वारा किस-किस गैस एजेंसी में अनियमितता/ रसोई गैस के दुरूपयोग में लिप्‍त होना पाया गया और उनके विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की गई ? विवरण सदन की मेज पर रखें।

(4) सरकार उपभोक्‍ता को समय पर नियमानुसार रसोई गैस की समुचित सप्‍लाई के लिए क्‍या कोई कदम उठाने  का विचार रखती है? विवरण सदन की मेज पर रखें।

खाद्य एवम नागरिक आपूर्ति मंत्रि (डा. किरोडीलाल मीणा): (1)    हां यह सही है कि जयपुर शहर में विभिन्‍न एल.पी.जी. गैस एजेंसियों के खिलाफ रसोई गैस की कालाबाजारी,अनियमित आपूर्ति रसोई गैस दुरूपयोग की अनेक शिकायतें आई है।(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप लोग इतने जोर से बोलते हैं कि सदन डिस्‍टर्ब होता  है।

डा. किरोडीलाल मीणा: माह जनवरी,05 से अब तक प्राप्‍त शिकायतों/ आकस्मिक निरीक्षणों के आधार पर गैस एजेंसियों के विरूद्ध कुल 22 प्रकरण बनाये गये।(जयपुर शहर में बनाये गये प्रकरणों की सूची संलग्‍न परिशिष्‍ट-1 पर है) इसके अतिरिक्‍त उक्‍त अवधि में जिला रसद अधिकारी कार्यालय में 28 लिखित शिकायतें प्राप्‍त हुई जिनमें से 9 का निराकरण कर दिया गया एवम  19 विचाराधीन है। (सूची परिशिष्‍ट-2 पर संलग्‍न है) 

    (2)यह सही है कि रसद विभाग पैट्रोलियम कम्‍पनियों ने मिलकर माह अक्‍टूबर,05 में दिनांक 17.10.2005 से 20.10.05 तक चार दिवसीय अभियान रसोई गैस के दुरूपयोग को रोकने हेतु चलाया था। इस अभियान के तहत तेल कम्‍पनियों के अधिकारियों द्वारा 232 प्रकरणों में दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही कर 360 घरेलू गैस  के अनाधिकृत उपयोग करने वाले उपभोक्‍ताओं के विरूद्ध था इसलिए अभियान के दौरान गैस एजेंसियों के विरूद्ध किसी भी प्रकार की जांच अपेक्षित नहीं थी।

(3) 1 जनवरी,05 से अब तक जयपुर शहर में विभिन्‍न गैस कम्‍पनियों के विरूद्ध कुल 22 प्रकरण बनाये गये, जिनकी सूची परिशिष्‍ट-1 पर संलग्‍न है।

    (4) राज्‍य सरकार द्वारा उपभोक्‍ता को समय पर नियमानुसार गैस की समुचित सप्‍लाई सनिश्चित करने के लिए समय समय पार  तेल कम्‍पनियों एवम जिला कलक्‍टर/ जिला रसद अधिकारी को निर्देश जारी किये गये हैं जिसमें आरपीपीएल आर्डर, 1990 के खण्‍ड 19 के तहत जिला कलक्‍टर द्वारा गैस एजेंसियों को रिकार्ड उपलब्‍ध कराना,दैनिक सूचना भिजवाना, एलपीजी अनुज्ञापत्रधारी निर्धारित समयानुसार अपना व्‍यापार परिसर तथा गौदाम खुला रखकर उपभोक्‍ता के लिए कुकिंग गैस की बुकिंग एवम आपूर्ति संबंधी कार्यवाही संपादित करेंगे शामिल है। एलपीजी वितरण उपभोक्‍ताओं को गैस रिफलिंग के समय अन्‍य कोई वस्‍तु क्रय किये जाने हेतु बाध्‍य नहीं करेगा आदि के संबंध में निर्धारित आदेश में गैस एजेंसियों के लिए निर्देश है। (विभाग द्वारा जारी निर्देश पत्र प्रति संलग्‍न है)

      इसके अतिरिक्‍त तेल कम्‍पनियों को एवम जिला कलक्‍टर को गैस आपूर्ति की समुचित आपूर्ति की व्‍यवस्‍था बनाये रखने हेतु निर्देश किया हआ है। माह जनवरी 06 में सड़क सुंरक्षा सप्‍ताह के  तहत भी घरेलू एलपीजी गैस सिलेण्‍डरों का चौपाहिया वाहनों में उपयोग को रोकने के संबंध में परिवहन विभाग, तेल कम्‍पनियों एवम समस्‍त जिला प्रशासन को निर्देश जारी किये गये हैं।

      राज्‍य सरकार सिर्फ रसोई गैस आपूर्ति करने हेतु प्रयासशील है अपित रसोई गैस का अनाधिकृत उपयोग रोककर उपभोक्‍ताओं को आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु कटिबद्ध है।

श्री रामचन्‍द्र सराधना: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एलपीजी गैस का, जहां पर अनियमिताओं का और अनुपलब्‍धता का मामला आता है, महिलाएं इसकी ज्‍यादा शिकार होती है। उनको ज्‍यादा परेशानी होती है। मैं मंत्री जी के जवाब के अनुसार, आपने बताया है कि 22 प्रकरण विभाग ने बनाये हैं  और उनमें नाममात्र का दंड देकर, किसी के 250 रूपये, किसी के 300रूपये किसी के 500रूपये  जब्‍त करके उनको छोड़ दिया है। मंत्री महोदय ने स्‍वंय ने भण्‍डारण का एक निरीक्षण किया था मैसर्स उर्मिला गैस एजेंसी का और उसमें भण्‍डारण क्षमता से अधिक मात्रा का भण्‍डारण मिला, आपने हजार रूपये प्रतिभूति राशि जब्‍त करके छोड़ दिया, यह भण्‍डारण की गई  अधिक मात्रा गैस की कहां से आई थी क्‍या यह बता सकते हैं गैस एजेंसी ने फर्जी वितरण बताकर गैस को बचा लिया क्‍या उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज  नहीं कराना था, आपने उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज क्‍यों नहीं कराई?

      दूसरा, क्रम संख्‍या 17 पर आपने बताया है कि शर्मा गैस मानसरोवर ने अघोषित स्‍थान पर 70 गैस सिलेण्‍डर ले जाकर छिपा दिये, आपने उनको पकड लिया  और पकड़ने के बाद एक हजार रूपये आपने  जब्‍त कर लिया, क्‍या यह चोरी में शामिल नहीं होता, आपने उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज क्‍यों नहीं कराई ?

      प्रश्‍न के भाग संख्‍या दो में आपने बताया कि 232 प्रकरण पकड़े और 360 घरेलू गैस के सिलेण्‍डर हमने जब्‍त कर लिये। आपने जब्‍त 360 घरेलू कनेक्‍शन, घरेलू गैस सिलेण्‍डर कर लिये लेकिन क्‍या यह भी बताएंगे कि यह गैस सिलेण्‍डर किस कम्‍पनी के थे  और कौनसी गैस एजेंसी से आये थे, उनका मालिक कौन था, किसके पास कम पडे़ यह, किसके पास से आये थे, उनका नाम बताये? 

            क्रम संख्‍या पाँच पर और आठ पर एक सी शिकायत दर्ज हुई है। क्रम संख्‍या 5 पर भी वो  ही शिकायत है और ऐसी शिकायत क्रम संख्‍या 8 पर है। क्रम संख्‍या 5 वाले पर आपने सारहीन कहकर छोड दिया और क्रम संख्‍या 8 वाले पर आपने मुकदमा दर्ज करने की बात कर दी, यह विसंगतियां आपने क्‍यों पैदा करी, क्‍या इन विसंगतियों को ठीक करने की कोशिश करेंगे, क्‍या मंत्री महोदय इस मामले में अपने विचार रखते हैं ?

            एक दूसरा सबसे बड़ा दुर्भाग्‍य  एलपीजी गैस को ओटो गैस में काम में लेने का, क्‍या मंत्री महोदय यह भी थोड़ा सा बताएंगे कि एलपीजी और आटो गैस में क्‍या गुणात्‍मक अंतर है ?

श्री अध्‍यक्ष: बताइये मंत्री जी।

डा. किरोड़ीलाल मीणा: एक तो 22 केस में इन्‍होंने 2 केस का बताया उर्मिल गैस और शर्मा गैस एजेंसी, अध्‍यक्ष महोदय, इसकी प्रक्रिया है जांच की, यह प्रक्रिया विचाराधीन है, जांच चल रही है और जांच में अगर यह गैस एजेंसी दोषी पाईगई तो इनके खिलाफ एफआईआर बनती है तो एफआईआर दर्ज कराई जाएगी 1

            दूसरा 232 में से से जो कैसेज बनाये उनसे 360डोमेस्टिक गैस सिलेण्‍डर जब्‍त किये यह  तीनों कम्‍पनियां  आईओसी के, बीपीसीएल के भी है, एचपीसीएल के भी है। एक आपने पूछा  कि 5 नम्‍बर में  जांच करने पर शिकायत सारहीन पाई गई है, जांच की गई तो शिव गैस एजेंसी की थी, बुक करने के 17 दिवस में आपूर्ति नहीं करने का मामला था यह ..से  इसकी जांच कराई गई। जांच के परिणाम यह आये  कि इसमें कोई तथ्‍य नहीं था। एक आपने 8 बताया है, बी.के.जैन ने शिकायत की थी, मोहन सर्विस सेंटर की, बुकिंग के बाद भी आपूर्ति नहीं करना बताया गया है, एस.एस. सिसोदिया द्वारा जांच की गई। विधि शाखा में अभी प्रकरण दर्ज है, वहां से राय आने के बाद इसकी कार्यवाही की जाएगी।

श्री रामचन्‍द्र सराधना: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी का जवाब भ्रामक प्रतीत होता है। आपने कहा हमारे विचाराधीन है, निर्णय नहीं हुआ। आपने तो निर्णय भी कर दिया उसके एक हजार रूपये जब्‍त भी कर लिये, आप कह रहे हैं हमारा निर्णय बाकी है, प्रक्रिया के अधीन है।

डा. किरोड़ीलाल मीणा:  ऐसा है प्रतिभूति राशि जब्‍त की जाती है, आपने कहा एफआईआर दर्ज करने का इरादा रखते हैं क्‍या, आपने एफआईआर के बारे में पूछा है, एफआईआर के बारे में डिटेल जांच होने के बाद  ही कार्यवाही की जाएगी।

श्री रामचन्‍द्र सराधना: आपने निर्णित कर दिया, फैसला निर्णित लिख दिया।

डा. किरोड़ीलाल मीणा: आपने प्रतिभूति का लिखा है यह प्रतिभूति राशि इनीशियल स्‍टेज पर......

श्री रामचन्‍द्र सराधना: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री महोदय समझ नहीं पा रहे या मैं नहीं समझ पा रहा, आपने लिख दिया उसका निर्णित फैसला हो चुका, हजार रूपये जब्‍त करके उसको बरी कर दिया और आप कह रहे है अभी बाकी है फैसला।

श्री अध्‍यक्ष: कह रहे हैं बाकी है।

श्री रामचन्‍द्र सराधना: बाकी गलत कह रहे हैं, लिख दिया निर्णित है।

श्री हेमाराम चौधरी: दोषी पाये जाने पर ही दर्ज हुई है...( व्‍यवधान) यदि  दोषी हैं तो एफ.आई.आर. दर्ज क्‍यों नहीं होती है?

 

Ddm/usc/100306/1130/1d

 

श्री रामचन्‍द्र सराधना: जिस आदमी ने 70 गैस सिलेण्‍डर अपने गोदाम से ले जाकर दूसरी जगह छिपा दिये और वहां पर 70 गैस सिलेण्‍डर मिले तो क्‍या वह चोरी में नहीं थे। उसमें क्‍या बाकी रह गया, उसमें एफ.आई.आर. दर्ज क्‍यों नहीं हुई? (व्‍यवधान)

डा.किरोड़ीलाल मीणा: बिना बुकिंग के गैस सप्‍लायी की गयी, यह शिकायत है।

श्री रामचन्‍द्र सराधना: आपने जवाब नहीं दिया मंत्री महोदय कि वह आपको जो 360 गैस सिलेण्‍डर मिले वह कौनसी गैस एजेंसी के थे और उनके खिलाफ क्‍या कार्यवाही की?

डा.किराड़ीलाल मीणा: वह मैंने आपको बता दिये कि वह तीनों कम्‍पनियों के हैं, बी.पी.सी.एल., एच.पी.सी.एल., आई.ओ.सी., तीनों कम्‍पनियों के हैं।

श्री रामचन्‍द्र सराधना: एजेण्‍ट कौन हैं, एजेंसी कौन सी है? कौनसी एजेंसी के हैं?

डा.किरोड़ीलाल मीणा: एजेंसी की डिटेल नहीं है, एजेंसी की डिटेल मंगवाऊंगा।

श्री रामचन्‍द्र सराधना: एजेंसी की डिटेल चाहिए उमसें, वह तो सिलेण्‍डर देखते ही मालूम पड़ जाता है कि कौनसी कम्‍पनी का सिलेण्‍डर है, सिलेण्‍डर की जांच नहीं करनी है। (व्‍यवधान) जांच यह करनी है (व्‍यवधान)

श्री हेमाराम चौधरी: बिना दोषी पाये आपने राशि जब्‍त कैसे की? जब दोषी भी मान लिया है तो फिर एफ.आई.आर. दर्ज कराने में आपको क्‍या दिक्‍कत है। यह तो आप उसको बहुत हल्‍के ढंग से ले रहे हो। उसको बचाना चाहते हो, छोटी सी सज़ा देकर के।

डा.किरोड़ीलाल मीणा: आप जरा विराज जाओ। आपने जो पूछा कि 360 सिलेण्‍डर थे, वह तीनों कम्‍पनियों के हैं, वह आई.ओ.सी, बी.पी.सी.एल.,एच.पी.सी.एल. (व्‍यवधान) आप उनकी डिटेल ब्रेक-अप चाहते हैं, कौन कौन सी, किस-किस कम्‍पनी के कितने सिलेण्‍डर हैं और किस-किस एजेंसी के हैं, वह मैं आपको डिटेल दे दूंगा।

श्री प्रद्युम्‍नसिंह: डिटेल दे देंगे, अध्‍यक्ष महोदय, एक बड़ा सिम्‍पल सा सवाल है, जैसा गुढ़ामलानी से आने वाले माननीय सदस्‍य ने पूछा, प्राइमा-फेसी, आपने एजेंसी वालों को दोषी माना, हजार रुपये उसकी प्रतिभूति राशि जब्‍त कर ली। फिर आपको क्‍या चाहिए । इसका मतलब प्राइमा-फेसी तो आपने माना कि वह दोषी है, आपने फिर यह भेदभाव क्‍यों बरता कि आपने उसकी एफ.आई.आर. दर्ज क्‍यों नहीं करायी। यह दोहरा मापदण्‍ड जो सरकार का है, यह मुनासिब नहीं है। इसके ऊपर मंत्री महोदय को क्‍या कहना है, यह अवगत कराने की कृपा करें।

डा.किरोड़ीलाल मीणा: इसमें दो तरह के मामले हैं माननीय सदस्‍य, जो गम्‍भीर प्रवृत्ति का मामला है उसमें आम तौर पर एफ.आई.आर. दर्ज कराने का प्रावधान है और इसमें गम्‍भीर प्रवृत्ति का अपराध नहीं है, इसलिये इसमें एफ.आई.आर. दर्ज नहीं हुई। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: One at a time. (व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍नसिंह: क्‍या अपराध है, आप यह बता दो । (व्‍यवधान) नहीं, नहीं, अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह पूछना चाहता हूं, गम्‍भीर अपराध। आप यह बतायें कि इसने क्‍या अपराध किया था जिसके कारण कि आपने इसकी एक हजार की सिक्‍योरिटी मनी जब्‍त की । किस किस्‍म का अपराध था, यह बता दें और औरों के खिलाफ क्‍या अपराध था, उसको बताने की कृपा करें। (व्‍यवधान)

डा. किरोड़ीलाल मीणा: मैं बता रहा हूं। (व्‍यवधान)

श्री हेमाराम चौधरी: एफ.आई.आर. दर्ज करवाने के लिये भी इतना ही कापुी है, प्राइमा-फेसी हो, बाकी तो बाद में इन्‍वेस्‍टीगेशन से अपने आप क्‍लीयर हो जाता।

डा. किरोड़ीलाल मीणा: सुन लें, आप सुनें तो सही। (व्‍यवधान)

श्री सी.डी.देवल: मंत्रीजी, क्‍या एक्‍ट में दो तरह के अपराध हैं क्‍या, गमभीर अपराध और छोटा अपराध। ऐसा है क्‍या प्रावधान एक्‍ट में।(व्‍यवधान)

श्री हेमाराम चौधरी: गम्‍भीर और दूसरा कुछ नहीं, आप गम्‍भीर नहीं हैं, सरकार गम्‍भीर नहीं है इसलिये इसको आप गम्‍भीरता से नहीं ले रहे हैं।

डा. किरोड़ीलाल मीणा: आपकी सीट पर स्प्रिंग लग रही है क्‍या, मैं जवाब दे रहा हूं आपको फिर भी बार-बार उठ रहे हैं।

श्री रामचन्‍द्र सराधना: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाह रहा था सीधी सी बात है, 70 गैस सिलेण्‍डर चोरी करके ले गया तो अपने गोदाम में से छिपाकर रख दिया, दूसरी जगह बेचने के लिये। उसके खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज नहीं हो रही है और फिर गम्‍भीर नहीं है । मंत्रीजी से यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि इसमें गम्‍भीरता और कहां बच गयी। अपने गोदाम में से, जो आइडंटीफाइड गोदाम है वहां जो सिलेण्‍डर एकत्रित करता है, वह लोगों को कह दिया कि मेरे गोदाम में माल ही नहीं है और 70 सिलेण्‍डर दूसरी जगह छिपा दिये। आप उनके खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज क्‍यों नहीं कराना चाहते हैं।

डा.किरोड़ीलाल मीणा: आन सुनो ना, आप जवाब तो सुनो, अध्‍यक्ष महोदय, इसमें एक प्रकरण है, क्रम संख्‍या एक पर, माननीय सदस्‍य ढंग से देख लें, आप भी देखें, जो पूछ रहे हैं।

श्री रामचन्‍द्र सराधना: आपने बताया है, हम पूछें क्‍या, कहां पर दिया है, लिखा हुआ है।

डा.किरोड़ीलाल मीणा: देख लें, सन्‍नी गैस सर्विस, मालवीय नगर, जयपुर। (व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍नसिंह: इनके उत्‍तर से हमारा सप्‍लीमेंट्री पैदा हुआ है, हमारे पास कहां रिप्‍लायी है कि आप भी देखो, आप भी देखो, कौन देखेगा। हमारे पास रिप्‍लायी है जो हम रिप्‍लायी देखेंगे। (व्‍यवधान)

डा.किरोड़ीलाल मीणा: तो आप बिना बात बीच में, तो आप देख ही नहीं रहे हैं। (व्‍यवधान)

श्री हेमाराम चौधरी: एफ.आई.आर. दर्ज कराने के लिये सफिसिएण्‍ट कॉज है, जब सफिसिएण्‍ट कॉज आपके पास है तो एफ.आई.आर. दर्ज क्‍यों नहीं करवाते हैं आप।

डा.किरोड़ीलाल मीणा: आप देख नहीं रहे हो तो बिना बात काहे कुछ रहे हो, बीच में। आप देख नहीं रहे हैं तो काहे को कूद रहे हैं। (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा: हेमारामजी, यह जवाब नहीं है। (व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍नसिंह: अध्‍यक्ष महोदय, यह व्‍यवस्‍था आपनी चाहिए आसन से कि आपने देखा ही नहीं तो आप क्‍या पूछ रहे हैं, यह कोई जवाब है। (व्‍यवधान)

डा.किरोड़ीलाल मीणा: मैं जवाब दे रहा हूं, बैठें, आपका जवाब दे रहा हूं। आप बैठ जाएं।

श्री रामनारायण चौधरी: अध्‍यक्ष महोदय, मंत्रीजी आंखें निकाल रहे हैं। आप मंत्रीजी अध्‍यक्षजी को संतुष्‍अ कर देंगे, हम मान जाएंगे। इनको कर दें।

श्री अध्‍यक्ष: नेता प्रतिपक्ष हैं और दोनों खड़े हो गये। (व्‍यवधान)

डा.किरोड़ीलाल मीणा: हां, मैं निवेदन कर रहा हूं, तो आप विराजें, मैं कर रहा हूं।

श्री रामनारायण चौधरी: हां, इनको करें।

डा.किरोड़ीलाल मीणा: हां, आप विराजें। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रकरण संख्‍या 13/2005, सन्‍नी गैस सर्विस, मालवीय नगर, जयपुर में एक एफ.आई.आर. दर्ज हुई जिसमें निर्धारित मात्रा से गैस का कम पाया जाना पाया गया। अब यह गम्‍भीर प्रवृत्ति का अपराध हुआ। जिसको माननीय सदस्‍य उठा रहे हैं, 5 नम्‍बर को उसमें बिना बुकिंग के गैस सप्‍लायी की गयी।

श्री अध्‍यक्ष:  अन्‍तर है, अन्‍तर तो है।

डा.किरोड़ीलाल मीणा: एक जिसमें मात्रा कम पायी गयी और एक जिसमें बुकिंग नहीं की गयी। (व्‍यवधान)

श्री रामचन्‍द्र सराधना: मंत्रीजी सवाल को नहीं समझ पा रहे हैं। सीधी-सीधी सी बात है, भण्‍डारण क्षमता से ज्‍यादा माल आया तो भी चोरी में ही आता है और भण्‍डारण क्षमता से जो कम माल पाया गया तो भी चोरी में ही आता है। इसमें क्‍या स्‍पष्‍टीकरण देना चाह रहे हैं, आप। आप सीधी सी बात करें, एफ.आई.आर. दर्ज क्‍यों नहीं करवाना चाहते हैं?

श्री सी.डी.देवल: अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या कानून के अन्‍दर दो तरह के अपराध हैं क्‍या, गम्‍भीर अपराध और छोटी प्रवृत्ति का अपराध। (व्‍यवधान)

श्री हेमाराम चौधरी: आप गम्‍भीर अपराध किसे मानते हो और साधारण अपराध किसे मानते हो, उसको आप परिभाषित कर दीजिए। (व्‍यवधान) अपराध तो एक ही है, गम्‍भीर अपराध और सीधा अपराध, कोई 2 तरह के अपराध होते हैं क्‍या?

श्री सी.डी.देवल: मानो तो चोरी है ।(व्‍यवधान)

श्री रामचन्‍द्र सराधना: आपने सन्‍नी गैस एजेंसी का नाम लिया, मैंने नहीं लिया। (व्‍यवधान) मैं उर्मिल गैस एजेंसी की बात कर रहा हूं। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: नेक्‍स्‍ट क्‍वश्‍चन। (व्‍यवधान) आप सुनना तो चाह रहे नहीं हैं। (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: मंत्रीजी जवाब देना चाहते हैं, एक-एक विषय का जवाब देना चाहते हैं, ये सुनना ही नहीं चाहते हैं। (व्‍यवधान) यह कोई तरीका थोड़े ही है।

श्री रामनारायण मीणा: आप बात तो सुनिये नरा, एक ही बोल रहे हैं। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप सुनना चाहते नहीं हैं जवाब, एक साथ खड़े हो जाते हैं।

श्री हेमाराम चौधरी: यह राठौड़ साहब धमकाकर और डराकर सबको बैठाना चाहते हैं। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: नैक्‍स्‍ट क्‍वश्‍चन। श्री तगाराम चौधरी। (व्‍यवधान)

श्री तगाराम चौधरी: प्रश्‍न संख्‍या 126 ।

श्री रामनारायण मीणा: जो आपके खिलाफ चुनाव लड़ी, मंत्रीजी उनका तो आप चालान कर रहे हो और जो ब्‍लेक-मार्केटर्स  हैं, आपकी पार्टी के सदस्‍य हैं उनके खिलाफ चालान नहीं किया। आपके खिलाफ चुनाव लड़ी हैं, सवाई माधोपुर से, यह मंत्रीजी व्‍यक्तिगत प्रतिशोध से निर्णय कर रहे हैं। (व्‍यवधान) हमारा तो आपसे अनुरोध है।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय तगाराम चौधरी, नैक्‍स्‍ट क्‍वश्‍चन। (व्‍यवधान) आप एक साथ खड़े होते हैं, आप जवाब सुनना चाहते नहीं हैं। मैंने नैक्‍स्‍ट क्‍वश्‍चन पुकार लिया। (व्‍यवधान)

पंचायती राज संस्‍थाओं का परिसीमन/पुनर्गठन

 

126. श्री तगाराम चौधरी(बाड़मेर): क्‍या पंचायत राज मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

      क्‍या यह सही है कि राजस्‍थान में ग्राम पंचायतों/पंचायत समितियों का परिसीमन एवं पुनर्गठन हुए काफी समय हो चुका है? यदि हां तो, क्‍या सरकार पंचायत राज संस्‍थाओं का परिसीमन एवं पुनर्गठन करवाने का विचार रखती है? यदि हां, तो कब व नहीं, तो क्‍यों? (व्‍यवधान)

ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री (श्री कालूलाल गुर्जर): जी हां। राजस्‍थान पंचायती राज अधिनियम, 1004 की धारा 115 के अन्‍तर्गत पुनर्गठन प्रक्रियाधीन है। इस कार्य को शीघ्र सम्‍पन्‍न करने के प्रयास किये जा रहे हैं। (व्‍यवधान)

 श्री रामचन्‍द्र सराधना: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कल भी मेरे साथ ऐसा ही किया आपने। (व्‍यवधान) कल भी आपने इसी तरीके से प्रश्‍न को टाल दिया, आज भी मेरे प्रश्‍न का जवाब नहीं दिया। (व्‍यवधान) यह प्रश्‍न पूछने के लिये प्रश्‍न नहीं पूछते हैं। सरकार की नीतियों और क्रियान्विति को प्रदेश की जनता को पहुंचाने के लिये, सरकार की नीति क्‍या और उसकी क्रियान्विति क्‍या है, प्रश्‍न के माध्‍यम से इसलिये उठाया जाता है यहां और उस बात का जवाब नहीं आ पाता है, अध्‍यक्षजी, मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं।(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: देखिये, आप एक साथ खड़े होकर..(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: एक-एक सवाल का जवाब देने के लिये मंत्रीजी तैयार हैं, फिर भी 5-5 आदमी एक साथ खड़े हो जाते हैं। एक-एक चीज का जवाब देने के लिये सरकार तैयार है। फिर भी ये खड़े हो जाते हैं। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप एक साथ खड़े होकर करते हैं तो सम्‍भव नहीं है मंत्रीजी के लिये जवाब देना। (व्‍यवधान)

श्री रामचन्‍द्र सराधना: आपसे कमजोर नहीं पड़ते हैं किरोड़ीलालजी, काहे को आप बोलते हैं। (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: आप पूछो ना, यह क्‍यातरीका है 5-5 आदमी एक साथ खड़े हो गये।

श्री रामचन्‍द्र सराधना:  आपके कहने से नहीं खड़ा हुआ, मैंने अध्‍यक्षजी से पूछा है। आपको क्‍या तकलीफ हो रही है।

श्री अध्‍यक्ष: स्‍थान ग्रहण करें। श्री तगाराम चौधरी ।

श्री तगाराम चौधरी: मैं आपके उत्‍तर का स्‍वागत करता हूं परन्‍तु मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से यह जानना चाहता हूं, राजस्‍थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 115 के तहत....(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: माफ करना, 2 क्‍वश्‍चंस में 37 मिनट हो गये।

श्री सी.डी.देवल: अध्‍यक्ष महोदय, यह जवाब ही नहीं दे रहे हैं। आपने कल भी कहा । कल भी अगला प्रश्‍न पुकार लिया और आज भी इनका जवाब आने से पहले अगला क्‍वश्‍चन पुकार लिया। (व्‍यवधान)

श्री रामचन्‍द्र सराधना: आप जवाब तो दिलवायें। नहीं तो कोई मायने नहीं हैं, 20 मिनट निकाल दिये। (व्‍यवधान)

श्री सी.डी.देवल: और ये कुछ बता ही नहीं पा रहे हैं। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: अब आप स्‍थान ग्रहण करें। माननीय उप नेता, आप भी स्‍थान ग्रहण करें।

श्री रामचन्‍द्र सराधना: माननीय अध्‍यक्षजी, आपसे निवेदन करते हैं यह 20-25 मिनट कोई काम के नहीं हैं, जब प्रश्‍न का जवाब नहीं आता है। (व्‍यवधान) तो क्‍या मायना है, प्रश्‍न करने का।

श्री रामनारायण मीणा: आप जवाब से संतुष्‍ट नहीं हैं तो दूसरे नियमों में आ जाइये। (व्‍यवधान) क्‍या दिक्‍कत है। (व्‍यवधान)

श्री तगाराम चौधरी: क्‍या प्रशासन को कोई इस तरह के निर्देश दिये गये हैं कि प्रक्रिया चालू की जाए।(व्‍यवधान)

श्री रामचन्‍द्र सराधना: यह क्‍या कारण है, कल भी मेरा जवाब नहीं आया, आज भी नहीं आ रहा है और उसमें आप मुझे मदद नहीं कर पा रही हैं। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: दो क्‍वश्‍चंस के अन्‍दर 39 मिनट हो गये हैं। मेरी जिम्‍मेदारी है 12 क्‍वश्‍चन यहां पर आयें। (व्‍यवधान)

श्री रामचन्‍द्र सराधना: यह मेरा दोष है क्‍या, यह प्रश्‍नकर्ता का दोष नहीं है। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: मैंने नैक्‍स्‍ट क्‍वश्‍चन पुकार लिया। यह मेरी जिम्‍मेदारी है कि यहां सारे क्‍वश्‍चंस आने चाहिए।

श्री रामचन्‍द्र सराधना: प्रश्‍नों के माध्‍यम से हम राजस्‍थान की जनता को बताना चाहते हैं कि सरकार जनता के लिये क्‍या कर रही है। (व्‍यवधान)

श्री तगाराम चौधरी: आप मेरे वाले क्‍वश्‍चन पर बोल रहे हैं या पुराना ही गा रहे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: लाखों रुपये खर्च होते हैं, क्‍वश्‍चन का जवाब आने में और मेरी जिम्‍मेदारी है कि सब क्‍वश्‍चंस का जवाब आये। (व्‍यवधान)

श्री कालूलाल गुर्जर: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने अभी पूछा कि डि‍लिमिटेशन की कार्यवाही के लिये जिला प्रशासन को निर्देश दिये या नहीं दिये, यह कार्यवाही शुरू करने के लिये। अध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं कि हमारे यहां पर पंचायत एक्‍ट की धारा 115 में डिलिमिटेशन का प्रावधान है और उसमें यह लिखा हुआ है कि जब-जब नई जनगणना के आंकड़े  प्राप्‍त होते हैं तब पंचायत संस्‍थाओं का पुनर्गठन किया जाएगा।  

                                         

Vps/usc/10-03-06/1140/1e

 

        इसके पहले 1991 में इस तरह की डी-लिमिटेशन की कार्यवाही की गयी थी परन्‍तु नया एक्‍ट आने के बाद 1996-97 में नये जनगणना के आकड़े आ गये थे, उस समय में भी पुनर्गठन करना था परन्‍तु नहीं किया गया और जब 2004 में पुन: 2001 की जनगणना के आकड़े आये तब सरकार ने पुनर्गठन की प्रक्रिया पर विचार किया लेकिन उसके पहले दिनांक 23.01.04 को डी-लिमिटेशन कमीशन, नई दिल्‍ली द्वारा परिसीमन कार्य शुरू, उनके द्वारा परिसीमन का कार्य शुरू कर दिया गया था इसलिए उन्‍होंने एक लैटर लिखकर हमको निर्देश दिया  कि 15 फरवरी, 2004 की सीमाओं की स्थिति को यथावत रखा जाए, इसमें किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया जाए। उसके बाद हमने कमीशन को लैटर लिखा कि हमको चुनाव करवाने हैं इसलिए डी-लिमिटेशन की परमिशन दी जाए तो दिनांक 18.5.2005 को नई दिल्‍ली डी-लिमिटेशन कमीशन ने हमको सूचित किया कि अब आप डी-लिमिटेशन का कार्य कर सकते हैं लेकिन माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उन्‍हीं दिनों में 15.7.2005 से 22.8.2005 तक बाड़मेर के अलावा 31 जिलों में नगरपालिका के चुनाव थे और आचार-संहिता लग गयी इसलिए हम यह कार्य प्रारम्‍भ नहीं कर पाये। उसके बाद 22.11.05 से 18.12.05 तक भरतपुर शहर को छोड़कर उस जिले में चुनाव थे, फिर 6.1.06 से 2.2.06 तक राजसमन्‍द, टोडारायसिंह और मालपुरा नगरपालिका के चुनाव थे और 6.2 से चार दिन तक झुन्‍झुनूं नगरपालिका के चुनाव थे ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप तो यह बता दीजिए कि इरादा क्‍या है परिसीमन का ? सीधी सी बात है ।

श्री कालूलाल गुर्जर: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा तो निवेदन यह है कि इसके जो डी-लिमिटेशन की कार्यवाही अब हमने शुरू की है। हमने चूंकि इस पर धारा 12, 13 एवं 14 उसमें यह प्रावधान स्‍टेट पर छोड़ा हुआ है कि किस तरह से पंचायतें और पंचायत समिति और जिला परिषद् की सीमा में क्‍या तय होगी, कितनी जनसंख्‍या रखी जाएगी तो इसके ऊपर सरकार तय करेगी और तय करने का हमने मिमो बनाया है और उसके बाद यह मंत्रिमण्‍डल में हम भेजेंगे और एप्रूव हो जाने के बाद इसकी फिर विधिवत प्रक्रिया शुरू होगी। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसमें धारा 115 में यह प्रावधान है कि अगर डी-लिमिटेशन भी हो जाएगा तो जब तक वापस अगला चुनाव होगा तभी वह डी-लिमिटेशन के अनुसार पंचायतें बनेगी इसलिए अगले चुनाव के पहले-पहले हमको डी-लिमिटेशन करना है और मैं सदन को आश्‍वस्‍त करता हूं कि अगले चुनाव पंचायतों के, उससे पहले-पहले डी-लिमिटेशन की कार्यवाही कर दी जाएगी।  

श्री अध्‍यक्ष: अगला चुनाव कौनसा ? विधान सभा का ? ...(व्‍यवधान)

श्री कालूलाल गुर्जर: विधान सभा का नहीं, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पंचायतों के ।

श्री अध्‍यक्ष: पंचायतों का।

श्री हेमाराम चौधरी: पंचायतों के चुनावों से पहले तो आप चले जाएंगे। ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या ऊटपटाँग बात करते हो आप ? ...(व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से यह पूछना चाहता हूं कि मंत्रीजी, आपने जो यह कहा है कि आप अगले ग्राम पंचायत के चुनाव के पहले कराएंगे तो आप तो स्‍पेसिफिक यह बताइये कि क्‍या सरकार ने अभी तक कोई मापदण्‍ड बनाये हैं क्‍या कि किस मापदण्‍ड के आधार पर, भौगोलिक एरिया या जनसंख्‍या के आधार पर क्‍या मापदण्‍ड के आधार पर आप ग्राम पंचायतों का, पंचायत समितियों का पुनर्गठन करेंगे और सरकार की मंशा कब तक है कि इसको कब तक आप पूर्ण करने का इरादा रखते हैं ? इसकी प्रक्रिया क्‍या रखेंगे? चुपचाप प्रस्‍ताव मंगाकर करेंगे या पब्लिश करेंगे पब्लिक के लिए, जन-प्रतिनिधियों के लिए, आपका क्राइटेरिया क्‍या होने जा रहा है, यह स्‍पेसिफिक बता दीजिए।

श्री अध्‍यक्ष: सारी बात बता दी। यहां पर भाषण देने की आवश्‍यकता नहीं है। सब बता दिया इन्‍होंने। सुन लीजिए जवाब आप। ...(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन: सारी बात तो बता दी। ...(व्‍यवधान)

श्री कालूलाल गुर्जर: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सारी प्रक्रिया बता दी और मैंने यह निवेदन भी कर दिया, अभी सदन के सामने यह कहा है कि मापदण्‍ड तय करने के लिए विभाग ने अभी मिमो बनाया है लेकिन जब तक मंत्रिमण्‍डल से वह तय नहीं होगा, एप्रूव नहीं होगा, तब तक उसको मैं यहां सदन में नहीं बता सकता। ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है, ठीक है। बिलकुल ठीक है। श्री कैलाश त्रिवेदी।

श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): मेरा इसी से संबंधित प्रश्‍न है, माननीय अध्‍यक्ष महोदय। ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: सारी बात उन्‍होंने कह दी है। जब तक तय नहीं होगा तब तक मैं सदन में नहीं बता सकता, खतम हो गयी बात। अब आगे ...(व्‍यवधान)

श्री प्रमोद जैन 'भाया' (बारां): नहीं इसी से संबंधित है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री महोदय से यह जानना चाहता हूं कि पंचायती राज संस्‍थाओं के बिना परिसीमन और पुनर्गठन के हाल ही में बारां नगरपालिका क्षेत्र के आस-पास की ग्राम पंचायतों के 12 गांवों को नगरपालिका क्षेत्र में मिलाने हेतु क्‍या आपके विभाग ने एन.ओ.सी. जारी की है ? ...(व्‍यवधान)

एक माननीय सदस्‍य: एन.ओ.सी. की आवश्‍यकता नहीं होती। ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: अलग से प्रश्‍न है। नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन, श्री कैलाश त्रिवेदी।

 

विधान सभा क्षेत्र सहाड़ा के अपूर्ण कार्य

127. श्री कैलाश त्रिवेदी(सहाड़ा): क्या वन मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

     विधान सभा क्षेत्र सहाड़ा(भीलवाड़ा) में दिनांक 01 जनवरी, 2003 से कितने कार्य स्‍वीकृत किये गये तथा इन कार्यों हेतु कितनी-कितनी राशि स्‍वीकृत की गयी? कितने कार्य पूर्ण हो गये व कितने अपूर्ण हैं? क्‍या सरकार अधूरे कार्यों को पूरा करने का विचार रखती है? यदि हां, तो कब तक व नहीं, तो क्‍यों?

वन मंत्री (श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे): विधान सभा क्षेत्र सहाड़ा में 01.01.2003 से वन विभाग द्वारा 29.099 लाख रुपये के 14 कार्य स्‍वीकृत किये गये। इनमें से 11 कार्य पूर्ण हैं तथा 3 कार्य प्रगति पर है। तीनों कार्य मार्च, 2006 तक पूर्ण कर लिये जाएंगे। 

श्री कैलाश त्रिवेदी: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री महोदय, यह बताने की कृपा करें कि आपने जो यह 11 कार्य स्‍वीकृत कराये, पूर्ण बताये हैं, यह 11 कार्य अकाल राहत में स्‍वीकृत हुए थे, यह मौके पर अपूर्ण हैं। क्‍या इन सभी कार्यों को आप पूर्ण करने की मंशा रखते हैं,  विभागीय मद से या अकाल से या किससे ? इसके अलावा आप और कौन-कौन सी योजनाओं में,  फोरेस्‍ट में काम करने की स्‍वीकृति देने का विचार रखते हैं, यह बताइये।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने अकाल राहत कार्य के 2003 के 13 कार्य हैं, जो इनकम्‍प्‍लीट हैं, उनको 30 जून, 2003 में बारिश आ जाने के कारण अकाल राहत कार्य बंद कर दिये गये थे। जब अकाल की स्थिति अगर उस क्षेत्र में होगी तो इन कार्यों पर ध्‍यान देकर कार्य पूर्ण करेंगे। ...(व्‍यवधान)

श्री कैलाश त्रिवेदी: अकाल की स्थिति है। माननीय मंत्री महोदय, अकाल में है इस वक्‍त भी। ...(व्‍यवधान)

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे: होगा तो इसको ले लेंगे। ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: श्री संयम लोढ़ा ।

 

 

 

 

 

जिला सिरोही में वितरित पेंशन

128. श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): क्‍या समाज कल्‍याण मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

    (1) सिरोही जिले में कितनी विधवाओं, वृद्धों  एवं विकलांगों को पेंशन उपलब्‍ध कराई जाती है ?

    (2) सिरोही जिले के उक्‍त पेंशन लाभार्थियों को वर्ष 2005 में प्रत्‍येक माह की पेंशन किस-किस तिथि को उपलब्‍ध कराई गई है? प्रत्‍येक माह का विवरण मय तिथि तहसीलवार सदन की मेज पर रखें।

समाज कल्‍याण मंत्री (श्री मदन दिलावर): (1) सिरोही जिले में 4026 विधवाओं, 3515 वृद्धों एवं 1748 विकलांगों को जनवरी, 2006 तक पेंशन उपलब्‍ध कराई गई है।

    (2) सिरोही जिले में उक्‍त पेंशन लाभार्थियों को वर्ष 2005 में पेंशन भुगतान संबंधित डाकघर द्वारा मनीआर्डर के माध्‍यम से किया गया है। इसका तिथि अनुसार व तहसीलवार विवरण संलग्‍न परिशिष्‍ट-1 सदन की मेज पर रख दिया गया है।

श्री संयम लोढ़ा: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं कि सिरोही जिले की जो पाँच तहसीलें हैं इसमें सिरोही तहसील में विकलांगों की मई महीने की पेंशन का आपने भुगतान किया है जुलाई महीने में। विधवाओं की अप्रैल महीने की पेंशन का आपने भुगतान किया जून महीने में और रेवदर तहसील के अन्‍दर विधवाओं की मई महीने की पेंशन का आपने भुगतान किया जुलाई महीने में, जुलाई की पेंशन का भुगतान किया आपने सितम्‍बर महीने में। शिवगंज तहसील में आपने वृद्धों की पेंशन का,  जनवरी की पेंशन का भुगतान किया मई महीने में और विधवाओं और विकलांगों और वृद्धों की मई महीने की पेंशन का भुगतान किया आपने सितम्‍बर महीने में। आबूरोड तहसील में वृद्धों की जून की पेंशन का आपने भुगतान किया सितम्‍बर महीने में और पिण्‍डवाड़ा तहसील में विधवाओं और विकलांगों की फरवरी की पेंशन का भुगतान किया जून महीने में और विधवाओं की जून की पेंशन का भुगतान किया सितम्‍बर महीने में। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से सरकार से निवेदन करना चाहता हूं कि ...(व्‍यवधान)

 श्री अध्‍यक्ष: आप इतना ही पूछें कि इतना डिले करने का कारण क्‍या था, यह क्‍वेश्‍चन पूछिये आप। ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा: प्रभारी मंत्री हर महीने दौरा करते हैं। प्रभारी सचिव हर महीने दौरा करते हैं। मुख्‍य मंत्री कलेक्‍टरों की कान्‍फ्रेंस करती है पर यह समाज का जो सबसे वंचित वर्ग है, उसको हर महीने पेंशन का भुगतान मिले, इस बात की सरकार व्‍यवस्‍था सुनिश्चित नहीं करना चाहती है। ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: भाषण नहीं, अब आप पूछिये।

श्री संयम लोढ़ा: भाषण नहीं दे रहा हूं, माननीय अध्‍यक्ष महोदय।

श्री अध्‍यक्ष: आप तो डिले करने का कारण बतायें, माननीय मंत्रीजी अब आप उत्‍तर दें। माननीय मंत्रीजी।

श्री संयम लोढ़ा: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से यह निवेदन करना चाहता हूं कि एक तो यह जो डिले हुआ है यह तो हर महीने जो डिले हुआ है, उसके लिए कौन जिम्‍मेदार है ? सरकार क्‍या कार्यवाही कर रही है कि हर महीने इस वर्ग के लोगों को पेंशन का भुगतान हो ? ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: देरी का कारण स्‍पष्‍ट करें। यह बता दें आप। ...(व्‍यवधान)

श्री मदन दिलावर: मैं बता रहा हूं साहब, बता रहा हूं। ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा: हर महीने हो, इसके संबंध में सरकार क्‍या व्‍यवस्‍था करना चाहती है?

श्री अध्‍यक्ष: वे देरी का कारण बताएंगे तो वे बता रहे हैं। देरी का कारण बताइये। आप विराजिये।

श्री मदन दिलावर: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जब से यह भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी है, तब से लगातार पेंशन का भुगतान होता जा रहा है। यह सच है कि कुछ दो-तीन महीने ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: सुनिये ।

श्री मदन दिलावर: पेंशन भुगतान में विलम्‍ब हुआ है और उसका विलम्‍ब का कारण भी बता देता हूं क्‍योंकि अब कम्‍प्‍यूटर्राइज मनीआर्डर से भुगतान होने लगा है और जो कम्‍प्‍यूटर्राइज मनीआर्डर के फार्म देता है वह डाकघर उपलब्‍ध कराता है। डाकघर कई बार समय पर हमको उपलब्‍ध नहीं करा पाता और हमारी बाध्‍यता यह है कि यदि डाकघर उपलब्‍ध नहीं कराता है तो जब तक वह एन.ओ.सी. नहीं दे दे, तब तक हम हमारे फार्म नहीं छपवा पाते हैं।  हमने कई बार पत्र लिखा है। उसके बावजूद भी उन्‍होंने हमको तीन महीने के बाद लगभग 17.8.2005 को एन.ओ.सी. उपलब्‍ध करवायी है कि अब आप छपवा सकते हैं। मैं आपको जो कोषालय से हमने जो पत्र लिखे हैं उनकी दिनांक बता देता हूं। हमने 25.5 को भी लिखा है, 18.7 को भी लिखा, 23.7 को भी लिखा और उसके पहले भी हम लिखते रहे हैं। एन.ओ.सी. आन के बाद हमने फार्म छपवाये और फार्म छपवाकर हमने वह कोषालय में भेजे, इसके कारण से यह विलम्‍ब हो गया है।

 

spp/usc/10.3.2006/1150/1f

   

मैं यह आश्‍वस्‍त करना चाहता हूं माननीय सदस्‍य को, अब इस प्रकार का विलम्‍ब नहीं होने देंगे और इसलिये हमने अधिकारियों को सख्‍त निर्देश दे दिये हैं।

श्री अध्‍यक्ष: श्री प्रहलाद गुंजल।

 

जिला कोटा में निगम सेवा विहीन मार्गों पर निजी बस सेवा

 

129. श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्‍डी): क्‍या यातायात मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) सरकार द्वारा जिला कोटा में कितने मार्गों पर चल रही निगम बसों को घाटे की स्थिति बताकर बन्‍द कर दिया गया ?

(2) सरकार उन मार्गों पर बसों के पुनर्संचालन के लिये क्‍या कार्यवाही कर रही है? यदि नहीं, तो क्‍या सरकार उन मार्गों पर निजी बसों को परमिट देने का विचार रखती है ? यदि हां, तो कब तक? विवरण सदन की मेज पर रखें।

यातायात मंत्रि (श्री युनूस खान): (1) कोटा जिले में संचालित बस सेवाओं में से 8 परिचक्रों का संचालन समय विशेष पर घाटे के कारण बन्‍द किया गया है। कोटा जिले के ऐसे तीन राष्‍ट्रीयकृत मार्ग हैं, जिन पर निगम द्वारा संचालन प्रस्‍तावित नहीं है।

(2) जिन समय विशेष की 8 बस परिचक्रों को घाटे के कारण बन्‍द किया गया है, उनके अनार्थिक रहने के कारण पुन: संचालन का फिलहाल कोई विचार नहीं है। जिन राष्‍ट्रीयकृत राजमार्गों पर निगम बसें संचालित नहीं कर रहा है, उन मार्गों को गुणावगुण एवं जन सुविधा के आधार पर राज्‍य सरकार द्वारा उचित निर्णय लिया जायेगा।

श्री प्रहलाद गुंजल: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री महोदय से जानना चाहता हूं कि आपने खण्‍ड-1 में यह कहा है कि कोटा जिले में संचालित बस सेवाओं में से 8 बस परिचक्रों का संचालन समय विशेष घाटे के कारण बंद कर दिया गया है। पहले तो आप यह बतायेंगे कि वह कौनसे आठ मार्ग हैं जिन पर बसों का संचालन बंद किया है? खण्‍ड-2 माननीय मंत्री महोदय ने यह बताया है कि जिन राष्‍ट्रीयकृत राजमार्गों पर निगम बस संचालित नहीं कर रहा है उन मार्गों पर गुणावगुण व जन सुविधा के आधार पर राज्‍य सरकार द्वारा उचित निर्णय लिया जायेगा। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्रीजी से जानना चाहता हूं कि जिन मार्गों पर आपने बसों का संचा‍लन बंद कर दिया, अब उन मार्गों पर गुणावगुण के आधार पर निर्णय लेने का क्‍या आधार रहेगा, यह स्थिति भी सदन को स्‍पष्‍ट करें। मैं यह भी जानना चाहता हूं कि जिन 8 मार्गों पर पिछले 50 सालों से बसों का संचालन हो रहा है और लगातार 40-50 सालों से, कहीं 20 साल से हम सेवाएं देते आ रहे हैं और अचानक उन मार्गों पर घाटे की स्थिति बताकर उन मार्गों पर बसों का संचालन बंद कर देना, उसके कारणों में नहीं जाना क्‍या सरकार की यह जिम्‍मेदारी नहीं बनती कि अगर घाटे में बस चल रही है तो आम नागरिकों को परिवहन की सुविधा उपलब्‍ध कराई जानी चाहिये। घाटे में बताकर हम राजस्‍थान के आम नागरिकों को, कोटा जिले के आम नागरिक को परिवहन की सुविधा से वंचित कर दें जिसको हम 30-40 साल से मुहैया करा रहे थे, यह कहां तक उचित है। यह माननीय मंत्री महोदय से जानना चाहता हूं। 

श्री युनूस खान: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने आठ मार्ग पूछे हैं कोटा जिले में आठ मार्गों में- बारां-डिबरी, बारां निमोली, कोटा-बुडादिद, कोटा-मांगरोल, कोटा-रामगंजमंडी, कोटा- बकानी, कोटा-इकलेरा, सांगोद-कोटा- बापावरदरा, यह सारी बसें कम लोड फैक्‍टर मिलने की वजह से और अधिक खर्चा होने की वजह से बंद की गयी हैं और यह अचानक बंद नहीं की गयी। अलग-अलग वर्षों में 2004-05 में अलग-अलग वर्षों में बंद की गयी हैं। जो बसें बंद हुई हैं उनमें हमारे रोडवेज का लोड फैक्‍टर, यात्रियों का भार है वह 33 प्रतिशत, 45 प्रतिशत और 47 प्रतिशत और 50 प्रतिशत है, औसत लगभग 45 प्रतिशत आया है, इसलिये की गयी है और इन पर हमारा जो खर्चा है वह भी बहुत ज्‍यादा हो रहा था। इनकी लागत लगभग 16 रूपये के आसपास हो रही थी और आय आठ रूपये के लगभग आ रही थी, इसलिए इन बसों को बंद किया गया है। आपने दूसरा मुद्दा उठाया कि जन सुविधा को देखते हुए क्‍या सरकार इस तरीके का विचार रखती है तो पिछले साल में जो हमारे संभाग मुख्‍यालय हैं उनके आसपास उप नगरीय बस सेवाएं भी शुरू की थीं  जिसका माननीय मुख्‍य मंत्रीजी ने अपना बजट पेश करते हुए जिक्र भी किया। उनमें भी कुछ और सुविधा देकर उसकी समीक्षा करके हम उप नगरीय बसों को भी शुरू करेंगे। उसके अलावा पिछले साल हमने ग्रामीण रूट्स भी नये शुरू किये हैं तो उन पर भी अभी ज्‍यादा पापुलर नहीं हुए हैं लेकिन सरकार यह विचार रखती है कि हमारे जो ग्रामीण रूट्स हैं उनमें जो प्रचलित हमारा टैक्‍स है, उसमें थोड़ा संशोधन करके ग्रामीण जनता को आवागमन की सुविधाएं अच्‍छी मिले, उसके लिये सरकार इस पर गंभीरता से विचार कर रही है और मैं आपके माध्‍यम से माननीय सदस्‍य को आश्‍वस्‍त करना चाहूंगा कि कोई भी इन मार्गों पर और स्‍टेट कैरिज के लोग परमिट लेने के लिये आयेंगे तो सरकार उस पर भी विचार करेगी। 

श्री अध्‍यक्ष: श्री रिछपाल सिंह मिर्धा। परसों बजट में कह दिया था न मुख्‍य मंत्रीजी ने 40 कि.मी. तक वाले तो कह ही दिया था, 50 तक तो कह ही दिया था।(व्‍यवधान)...

श्री प्रहलाद गुंजल: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से केवल एक प्रश्‍न करना चाहूंगा ......(व्‍यवधान) ...

श्री अध्‍यक्ष: आपको मौका मिले तब बोलियेगा । ......(व्‍यवधान) ....

श्री प्रहलाद गुंजल: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से केवल एक प्रश्‍न मंत्री महोदय से करना चाहूता हूं । 

श्री अध्‍यक्ष: अब मैंने नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन पुकार लिया गुंजल साहब।

श्री प्रहलाद गुंजल: एक प्रश्‍न पूछना चाहता हूं। केवल एक प्रश्‍न पूछना चाहता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: अब तो मैंने नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन पुकार लिया। दूसरा प्रश्‍न पुकार लिया।

श्री प्रहलाद गुंजल: सरकार गुणावगुण के आधार पर जब तक विचार को पूरा नहीं करती इन मार्गों पर निजी बसों को परमिट देने के बारे में सरकार विचार रखती है? मैंने मूल प्रश्‍न पूछा है।

श्री अध्‍यक्ष: मैंने अगला प्रश्‍न पुकार लिया न।

श्री प्रहलाद गुंजल: अध्‍यक्ष महोदय, मैंने मूल प्रश्‍न में पूछा है जिसका उत्‍तर नहीं आया। निजी बसों को परमिट देने का विचार रखती है क्‍या सरकार और विचार रखती है तो क्‍या इसके बारे में सूचना प्रसारित की गयी है और नहीं तो कब तक सूचना प्रसारित कर दी जायेगी ?

श्री प्रभुलाल वर्मा: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप कह रहे हैं कि घाटे के कारण बसें बंद की गयी हैं। ..(व्‍यवधान) ..

श्री अध्‍यक्ष: नॉट अलाउड, मैंने अगला प्रश्‍न पुकार लिया। 

श्री प्रभुलाल वर्मा: कोटा से उसको रामगंजमण्‍डी कर दिया। वह रूट एक ही है, सिर्फ रूट बदलकर उधर कर दिया। भम्‍भौरीकलां बहुत बड़ा कस्‍बा है। कम से कम 30 हजार की आबादी का कस्‍बा है आज की तारीख में और वहां आपने बसें बंद कर दी और वह भी घाटा बताकर। ....(व्‍यवधान) ...

श्री अध्‍यक्ष: मैंने अगला प्रश्‍न पुकार लिया न, क्‍या आपकी सीटों पर तकलीफ हो गयी क्‍या? नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन, श्री रिछपाल मिर्धा।

श्री रिछपालसिंह मिर्धा: इधर से कोई खड़ा नहीं हुआ। ....(व्‍यवधान) .....

श्री अध्‍यक्ष: आई एम सॉरी, अब कृपया बैठ जायें। आई एम सॉरी। श्री रिछपाल मिर्धा।

 

तहसील डेगाना (नागौर) के राशन डीलरों के विरूद्ध कार्यवाही

 

130. श्री रिछपालसिंह मिर्धा (डेगाना): क्‍या खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे :-

(1) क्‍या यह सही है कि तहसील डेगाना (नागौर) में राशन द्वारा वितरित किये जाने वाले केरोसीन की कालाबाजारी एवं वितरण में की गई अनियमितताओं की शिकायतें गत दो वर्षों में सरकार को प्राप्‍त हुई थी? यदि हां, तो किन किन ग्रामों की? विवरण ग्रामवार सदन की मेज पर रखें।

(2) क्‍या यह भी सही है कि उक्‍त प्रकरण की शिकायतें प्राप्‍त होने के बाद सरकार द्वारा जांच की गयी? यदि हां, तो किस अधिकारी द्वारा व जांच का परिणाम क्‍या रहा? विवरण सदन की मेज पर रखें।

(3) सरकार द्वारा उक्‍त प्रकरण की जांच में दोषी पाये जाने वाले राशन डीलरों के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की गयी? विवरण सदन की मेज पर रखें। 

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री (डॉ.किरोड़ीलाल): (1) तहसील डेगाना के राशन डीलर्स द्वारा केरोसीन की कालाबाजारी एवं वितरण में अनियमितताओं की शिकायतें प्राप्‍त हुईं। संबंधित गांवों की सूची परिशिष्‍ट-1 पर संलग्‍न है।

      (2)   आलोच्‍य शिकायत प्राप्‍त होने पर जांच हेतु जिला कलेक्‍टर के निर्देशन में जांच दल गठित कर जांच करवायी गयी। जांच दल में प्रवर्तन अधिकारी नागौर, मेड़ता एवं प्रवर्तन निरीक्षक नागौर (मुख्‍यालय) एवं स्‍थानीय प्रवर्तन निरीक्षक डेगाना को लगाया गया। जांच दल द्वारा क्षेत्र में डीलर्स के स्‍टॉक एवं वितरण रजिस्‍टर कब्‍जे में लेकर स्‍टॉक का सत्‍यापन किया गया, जो सही पाये जाने पर क्षेत्र के उपभोक्‍ताओं से सम्‍पर्क कर राशन कार्ड प्राप्‍त कर उपभोक्‍ताओं के समक्ष ही वितरण रजिस्‍टर से मिलान किया गया। जांच दौरान अधिकतर राशनकार्ड में दी गयी मात्रा का अंकन नहीं करना, मूल्‍य एवं स्‍टॉक सूची बोर्ड पर केरोसीन की आवक/वितरण एवं मूल्‍य का अंकन नहीं करना तथा राशन कार्डों का यूनिट रजिस्‍टर संधारण नहीं करना पाया गया है जिसके लिये संबंधित डीलर्स के विरूद्ध मामलात दर्ज किये गये। सूचना परिशिष्‍ट-1 पर संलग्‍न है।

      (3)   जांच में दोषी पाये गये सभी 12 डीलर्स के विरूद्ध राजस्‍थान खाद्यान्‍न एवं अन्‍य आवश्‍यक वस्‍तु (वितरण का विनियमन) आदेश, 1976 के अन्‍तर्गत विभागीय प्रकरण दर्ज किये गये। इनमें से 2 डीलर्स की गंभीर अनियमितताओं के मध्‍यनजर प्राधिकार पत्र निलम्बित किये गये एवं कार्यवाही लम्बित है। नोटिस देकर जवाब मांगा गया है। विस्‍तृत सूचना परिशिष्‍ट-1 पर संलग्‍न है। 

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्रीजी से यह जानना चाहता हूं कि राज्‍य सरकार ने केरोसीन आंवटन के लिये जिला रसद अधिकारी नागौर को क्‍या निर्देश दिये और नम्‍बर-दो क्‍या जिला रसद अधिकारी नागौर ने उन निर्देशों के अन्‍तर्गत एस.डी.एम. डेगाना को केरोसीन डीलर को केरोसीन आंवटित करने का अधिकार दिया? यदि हां, तो एस.डी.एम. ने किन मापदण्‍डों के आधार पर केरोसीन डीलरों को केरोसीन का वितरण किया? माननीय  


msr/usc/1200/10032006/1g

 

     अध्‍यक्ष महोदय, मेरा माननीय मंत्री जी से निवेदन है कि मैंने यह सवाल इसलिए पूछा कि गरीब की चिमनी तो केरोसीन के लिए तरसती है और यह जो केरोसीन भेदभाव करके एक रिटेलर को 500 लीटर, एक रिटेलर को 800 लीटर, एक रिटेलर को 900 लीटर और एक रिटेलर को बराबर कार्ड होते हुए और बराबर जनसंख्‍या होते हुए दो हजार लीटर केरोसीन आवंटन किया गया, इसके क्‍या मापदण्‍ड हैं? और अगर किया है तो आप उसके खिलाफ क्‍या कार्यवाही करने का विचार रखते हैं? मंत्रीजी, बस इतना ही बता दें।

डॉ.किरोड़ीलाल: अध्‍यक्ष महोदय,उप आबंटन जिला रसद अधिकारी ही करता है, एस.डी.ओ.ने आबंटन कैसे किया, यह समझसे बाहर है तो उसमें हम कार्यवाही करेंगे।

         दूसरी बात, जो आबंटन में गड़बड़ बतायी है दस-बारह डीलर्स के वहां जो उसमें पक्षपात एस.डी.ओ.ने किया है उसके खिलाफ ए.डी.एम. को हमने जांच करने के आदेश दे दिया है, जांच आते ही उनके खिलाफ कार्यवाही...(व्‍यवधान)...

श्री रिछपालसिंह मिर्धा: बस वही है, जांच हो जाए।

श्री सुरेश मीणा (करौली): माननीय मंत्रीजी, मैं इस सम्‍बन्‍ध में एक सवाल पूछना चाहता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: प्रश्‍न काल समाप्‍त हुआ।

 

स्‍थगन प्रस्‍तावों पर अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍था

 

         मुझे माननीय सदस्‍यों को सूचित करना है कि निम्‍नांकित स्‍थगन प्रस्‍तावों की सूचना प्राप्‍त हुई है:-

     (1) श्री बाबूलाल नागर एवं 36 अन्‍य सदस्‍यों की और से प्रदेश के 15778 गांवों को अभावग्रस्‍त घोषित करने के उपरान्‍त भी वहां अकाल राहत कार्य शुरू नहीं करने एवं दोबारा गिरदावरी की मांग के सम्‍बन्‍ध में।

         दोबारा, इनके अलावा करा रहे हो कि इन्‍हीं की दोबारा करा रहे हो 15778 की?

श्री अमराराम (धोद): दोबारा, जो अकाल होते हुए नहीं की गयी है मांग, यह तो हो ही गयी न।

श्री अध्‍यक्ष: यह तो लिखा नहीं न, लिखा तो यह ही है।

     (2) श्री हेमाराम चौधरी एवं एक अन्‍य सदस्‍य की और से जिला बाड़मेर में रबी की फसल ईसबगोल नष्‍ट होने के सम्‍बन्‍ध में।

         उपरोक्‍त विषयों पर कल सदन में चर्चा हुई है। बजट पर सामान्‍य वाद-विवाद के दौरान भी माननीय सदस्‍यों को चर्चा करने का पर्याप्‍त अवसर उपलब्‍ध है, इन स्‍थगन प्रस्‍तावों की अनुमति देने में असमर्थ हूं।

     (3) श्री विनोद कुमार एवं आठ अन्‍य सदस्‍यों की और से नगर पालिका हनुमानगढ़ के अध्‍यक्ष एवं उपाध्‍यक्ष के विरुद्ध अविश्‍वास प्रस्‍ताव पारित होने के उपरान्‍त भी वहां कोई वैकल्पिक व्‍यवस्‍था नहीं करने के सम्‍बन्‍ध में।

          स्‍थगन प्रस्‍ताव के रूप में तो अनुमति देने में असमर्थ हूं लेकिन मैं चाहूंगी कि माननीय मंत्री महोदय इस सम्‍बन्‍ध में स्थिति स्‍पष्‍ट कर दें।

प्रक्रिया के नियम 295 के अन्‍तर्गत प्राप्‍त सूचनाएं

 

          प्रक्रिया के नियम 295 के अन्‍तर्गत जो सूचनाएं प्राप्‍त हुई हैं:-

     (1) श्री अशोक कुमार नवलखा, सदस्‍य की ओर से अजमेर-इन्‍दौर राष्‍ट्रीय राजमार्ग संख्‍या 79 के किलोमीटर 219 स्थित चैक पोस्‍ट को एक किलोमीटर आगे स्‍थापित करने के सम्‍बन्‍ध में।

     (2) श्री जीतमल खांट,सदस्‍य की ओर से उदयपुर संभाग के समस्‍त जिलों के राजस्‍व रिकार्ड में किस्‍म जंगल शब्‍द हटवाने के सम्‍बन्‍ध में।

     (3) श्री रणधीर सिंह भिण्‍डर, सदस्‍य की ओर से तहसील धरियावद में कृषि उपज मण्‍डी का निर्माण करने के सम्‍बन्‍ध में।

     (4) श्री के.डी.बाबर, सदस्‍य की ओर से जिला सीकर की तहसील फतेहपुर एवं लक्ष्‍मणगढ़ के बीमित किसानों को उनकी मुआवजा राशि तुरन्‍त उपलब्‍ध करवाने के सम्‍बन्‍ध में।

     (5) श्री शंकर सिंह राजपुरोहित, सदस्‍य की ओर से जालौर एवं आहौर को पेयजल उपलब्‍ध करवाने एवं फ्लोराईड से मुक्‍त कराने के सम्‍बन्‍ध में।

     (6) श्री बनवारीलाल शर्मा, सदस्‍य की ओर से जिला धौलपुर के कूकपुरताल केनाल पर बने एक्‍वाडक्‍ट की मरम्‍मत हेतु बजट प्रावधान करने के सम्‍बन्‍ध में।

     (7) श्री बृजकिशोर शर्मा, सदस्‍य की ओर से विधान सभा क्षेत्र जयपुर ग्रामीण के कुछ इलाकों में मिनी बस की सेवाएं उपलब्‍ध करवाने के सम्‍बन्‍ध में।

     (8) श्री खुशवीर सिंह, सदस्‍य की ओर से विधान सभा क्षेत्र खारची की कतिपय पंचायतों को मगरा विकास क्षेत्र में शामिल करने के सम्‍बन्‍ध में।

     (9) डॉ.ओ.पी.महेन्‍द्रा, सदस्‍य की ओर से श्रीगंगानगर जिला मुख्‍यालय पर राजकीय कृषि महाविद्यालय खोलने के सम्‍बन्‍ध में।

     (10) श्री बहादुर सिंह गोदारा, सदस्‍य की ओर से नोहर के श्री बालिका उच्‍च प्राथमिक विद्यालय की अध्‍यापिकाओं के बकाया वेतन के भुगतान के सम्‍बन्‍ध में।

     (11) श्री रामकिशोर मीणा, सदस्‍य की ओर से राज्‍य में सीमेन्‍ट आधारित उद्योगों को जिन्‍दा रखने के लिए सीमेन्‍ट की उपलब्‍धता बढ़ाने के सम्‍बन्‍ध में।

     (12) श्री हीरालाल निवाई, सदस्‍य की ओर से राज्‍य में वर्ष 1995 के बाद शीघ्रलिपिक भर्ती परीक्षा आयोजित नहीं होने के सम्‍बन्‍ध में।

         माननीय सदस्‍यों को उनके द्वारा दी गयी सूचना पढ़ने की अनुमति होगी।

        

         इससे पूर्व की मैं 295 के लिए किसी का नाम पुकारूं, मैं आसन की ओर से खेद प्रकट करती हूं कि कल श्‍योपत सिंहजी, जो पूर्व विधायक भी हैं और संसद के सदस्‍य भी हैं, उनके साथ जिस प्रकार भी उन्‍हें बाहर किया गया उसके लिए मैं खेद प्रकट करती हूं।

         कारण उसका यह हुआ कि गृह विभाग से एक सूचना आयी थी और उस सूचना में उनका नाम भी था कि यह इन लोगों को यहां पर आने से रोका जाए।

         गृह विभाग ने जिन लोगों को यह सूची संलग्‍न की थी वह सूची मेरे नोटिस में नहीं लायी गयी और बिना मेरी अनुमति के वह सूची के आधार के ऊपर जो कुछ हुआ उसके लिए मैं आसन की ओर से खेद प्रकट करती हूं।

श्री अमराराम (धोद): नहीं, अध्‍यक्ष महोदय, आसन की तरफ से तो ठीक है लेकिन गृह विभाग, गृह मंत्रीजी मौजूद हैं, आप विराजें, आपने खेद प्रकट किया उसके लिए तो हम आपके आभारी हैं लेकिन गृह विभाग है, गृह मंत्रीजी यहां मौजूद हैं, जो चार दफे इस सदन के सदस्‍य रहे हैं, पार्लियामेंट के सदस्‍य रहे हैं और ऐसी कोई गतिविधि आपकी सरकार आने के बाद यह हो सकता है कि राजस्‍थान के किसान की, गरीब की, मजदूर की बात रखने और आन्‍दोलन करने में हो लेकिन ऐसी कोई गतिविधि श्‍योपत सिंहजी की रही हो और आपका विभाग अवांछनीय घोषित कर दे, मैं समझता हूं कि इतनी बड़ी तो दुर्भाग्‍यपूर्ण बात नहीं हो सकती।

         आपके ध्‍यान में नहीं लाया गया लेकिन गृह विभाग और इतने सक्षम गृह मंत्रीजी हैं और ऐसे व्‍यक्ति के बारे में एक भी अगर घटना हो, उल्‍टा उन्‍होंने तो राजस्‍थान में रावला-घड़साना में लोगों को शांत करने का काम किया, सरकार की मदद करने का काम किया है और आपके अधिकारी हनुमानगढ़ और गंगानगर से ऐसी रिपोर्ट भेजते हैं और यहां तक आती है तो यह मैं समझता हूं कि सबसे बड़ी अफसोसजनक है और गृह मंत्रीजी को ऐसे अधिकारी जिन्‍होंने यह रिपोर्ट भेजी है, जिन्‍होंने कानून और व्‍यवस्‍था बनाने में आगे बढ़ कर मदद की है, हजारों, 25 हजार लोग जो घड़साना में थे...

 

श्री अध्‍यक्ष: अब बात हो गयी।

श्री अमराराम (धोद): इसलिए ऐसे अधिकारियों के खिलाफ आपको सख्‍त कार्यवाही करनी चाहिए और दोबारा इस तरह की घटना नहीं हो...

श्री अध्‍यक्ष: दोबारा ऐसी घटना नहीं होगी, इस बात के लिए तो मैं आश्‍वस्‍त करती हूं आपको। ...(व्‍यवधान)

श्री सुभाषचन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली): और, अध्‍यक्ष महोदय, सदन के किसी भी पूर्व सदस्‍य के साथ इस प्रकार का व्‍यवहार बड़ा ही अशोभनीय है, जो नहीं होना चाहिए। सरकार को स्थिति स्‍पष्‍ट करनी चाहिए। ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: स्‍थान ग्रहण करें।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, आपने जो विषय रखा, मैं सोचता हूं श्री श्‍योपत सिंहजी मेरे साथ भी सांसद भी रहे, विधायक भी रहे और उनके स्‍वभाव और उनके आचरण से में पूर्णत: वाकिफ हूं। क्‍या घटना घटी, आपने जो मेरे ध्‍यान में लाया है, में अपने अधिकारियों के साथ बैठ कर के चर्चा कर के क्‍यों ऐसी बात हुई और उसकी जहां भी कहीं कमी रही है उस कमी को मैं और मेरे विभाग के अधिकारी निश्चित श्‍रूप से उसको देखेंगे।

एक माननीय सदस्‍य: खेद प्रकट कर दो।

श्री अध्‍यक्ष: आसन के खेद प्रकट करने के बाद कोई खेद व्‍यक्‍त करने की आवश्‍यकता नहीं है ...(व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया: हां भई, खेद प्रकट करता हूं। अगर खेद कहने से भी आपको अच्‍छा लगता है तो मुझे कोई अफसोस नहीं ...(व्‍यवधान)... खेद प्रकट करता हूं।

श्री श्रवण कुमार (पिलानी): अध्‍यक्ष महोदय, मुझे एक सूचना देनी है आपको।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप बीच में नहीं बोलें।

श्री श्रवण कुमार: एक सूचना है।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, अब कुछ नहीं सूचना, अब आप मेहरबानी कर के स्‍थान ग्रहण कर लें।

श्री श्रवण कुमार: अध्‍यक्ष महोदय, सूचना दे रहा हूं।

श्री अध्‍यक्ष: अब यह जीरो आवर में कोई सूचना नहीं होती है, मैं आपको कह रही हूं, आप समझते ही नहीं किसी चीज को।

श्री श्रवण कुमार: हमारा सूरजगढ़ का संघ आया था, एक आदमी को मार दिया, पुलिस ने सब को पीटा है, बुरी तरह से घायल कर दिया...

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, सूरजगढ़ का सवाल हो चाहे कहीं और का सवाल हो, इस समय अनुमति नहीं दे सकती।

श्री श्रवण कुमार: अंकित मत करो, बात सुनो तो सही।

श्री अध्‍यक्ष: यह कोई तरीका नहीं है आपका, माननीय सदस्‍य, आप मुझे मजबूर कर रहे हैं। 

श्री श्रवण कुमार: हमारे सूरजगढ़ के संघ को बुरी तरह पीटा पुलिस ने..

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो।

श्री श्रवण कुमार: ***

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री अध्‍यक्ष: आप अव्‍यवस्‍था फैलाते हैं, पिलानी से आने वाले माननीय सदस्‍य, आप अव्‍यवस्‍था फैलारहे हैं, यह मौका नहीं है इस तरह से खड़े होकर, चाहे जब खड़े हो जाते हैं और चाहे जो कुछ बोलने लग जाते हैं। मैंने जो व्‍यवस्‍था दी है उसके मुताबिक प्रक्रिया के नियम 295 के अन्‍तर्गत अनुमति होगी। कोई तरीका नहीं है आपका...(व्‍यवधान)...

श्री श्रवण कुमार: ***                  

श्री अध्‍यक्ष: स्थिति स्‍पष्‍ट करें, माननीय मंत्रीजी, आप कभी भी ...(व्‍यवधान)

श्री श्रवण कुमार: ***

श्री अध्‍यक्ष: स्‍वायत्‍ता शासन मंत्रीजी, मैंने जो हनुमानगढ़ की बात कही थी उसके बारे में अभी आवश्‍यक नहीं है, आप जब चाहें तो स्थिति को स्‍पष्‍ट कर देना...(व्‍यवधान) वही मैंने कहा, जब चाहें स्थिति स्‍पष्‍ट कर देना आप बस। ...(व्‍यवधान)

     श्री अशोक कुमार नवलखा।

श्री बाबूलाल नागर: राजस्‍थान में 22 जिलों में...(व्‍यवधान)...

 

 

 

Ars/usc/1h/1210/10032006/1

 

श्री अध्‍यक्ष: कल चर्चा हो चुकी है। अंकित नहीं हो।

श्री हरिमोहन शर्मा: ***

श्री हेमाराम चौधरी:***

श्री बाबूलाल नागर:***

श्री अध्‍यक्ष: कल इस पर चर्चा हो चुकी है। आपके कहने का क्‍या औचित्‍य है?

श्री बाबूलाल नागर:***

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो रहा है ..(व्‍यवधान)

श्री बाबूलाल नागर:***

श्री अध्‍यक्ष: दुदू से आने वाले माननीय सदस्‍य आसन पांवों पर है, आसन पांवों पर है, आसन पांवों पर है, दुदू से आने वाले माननीय सदस्‍य...

मोहम्‍मद माहिर आजाद:***

श्री महिपाल सिंह यादव:***

श्री अशोक(खंडार):***

श्री अमराराम(धोद):***

श्री अध्‍यक्ष: कृपया स्‍थान ग्रहण करें, कृपया स्‍थान ग्रहण करें।

श्री महिपाल सिंह यादव:***

श्री अध्‍यक्ष: आसन का सम्‍मान करना....

श्री महिपाल सिंह यादव:***

श्री अध्‍यक्ष: आप स्‍थान ग्रहण कर लें। बानसूर से आने वाले माननीय सदस्‍य, आपसे कह रहीहूं मैं स्‍थान ग्रहण करें, आप स्‍थान ग्रहण करें। 

श्री हेमाराम चौधरी:***

श्री अध्‍यक्ष: गुढ़ामलानी से आने वाले माननीय सदस्‍य, स्‍थान ग्रहण करें।

श्री हेमाराम चौधरी:***

श्री महिपाल सिंह यादव:***

श्री बाबूलाल नागर:***

श्री अध्‍यक्ष: आप पहले आसन को सुनें और स्‍थान ग्रहण करें। आसन का सम्‍मान करना पक्ष और प्रतिपक्ष दोनों की जिम्‍मेदारी है। उससे कोई पक्ष को उसमें नहीं मिल जाती है छूट कि पक्ष चाहे जैसे करे। सत्‍ता पक्ष को भी मानना चाहिए कि आसन जब पांवों पर हो तो मन्‍त्री गणों को भी इस बात का ध्‍यान रखना चाहिए । लेकिन मैं आपसे एक बात कह रहीहूं दुदू से आने वाले माननीय सदस्‍य, कल चर्चा हो चुकी है..(व्‍यवधान) यह क्‍या तरीका है? यह क्‍या तरीका है?

श्री हेमाराम चौधरी:***

श्री अध्‍यक्ष: आप पुराने सदस्‍य हो गुढ़ामालानी से आने वाले माननीय सदस्‍य, आप कई बार आ चुके हो इस सदन में, यह क्‍या तरीका है? यह क्‍या तरीका है? दूदू से आने वाले माननीय सदस्‍य, मैं कई बातों को बर्दाश्‍त नहीं करूंगी। मैं आपसे कह रही हूं, मैं आपसे निवेदन करना चाह रही हूं । आप सबको मौका मिलेगा, बजट के ऊपर चर्चा जब हो रही है तो अपनी बात कहने का पूरा मौका मिलेगा और उसमें ..(व्‍यवधान) नहीं आसन किसी के कहने से बैठेगा क्‍या....

श्री रामनारायण मीणा:***

श्री अध्‍यक्ष: आप पहले सुनिए।

श्री बाबूलाल नागर:***

श्री अध्‍यक्ष: तो क्‍या हुआ?

श्री बाबूलाल नागर:***

श्री अध्‍यक्ष: आप मेरी बात सुन लीजिए, अब आप आसन की बात सुन लीजिए। स्‍थगन प्रस्‍ताव का मतलब होता है इतनी महत्‍वपूर्ण हाल की घटना जिसके लिए सदन की पूर्व निश्चित कार्यवाही छोड़कर के उस पर चर्चा कराई जाए।

श्री हेमाराम चौधरी:***

श्री बाबूलाल नागर:***

श्री अध्‍यक्ष: गुढ़ामालानी से आने वाले सदस्‍य....

श्री बाबूलाल नागर:***

श्री अशोक (खंडार):*** 

श्री बाबूलाल नागर:***

श्री अध्‍यक्ष: आप इस सदन को क्‍या बनाना चाहते हैं? ..(व्‍यवधान) आप क्‍या बनाना चाहते हैं? आप यहां से पलायन करो वह ज्‍यादा अच्‍छा होगा। आप यहां से पलायन करो तो ज्‍यादा अच्‍छा रहेगा।

श्री अर्जुनसिंह :***

श्री रामनारायण मीणा:***

श्री बाबूलाल नागर:***

श्री अध्‍यक्ष: आप इस तरीके से आसन की उपेक्षा कर रहे हैं यह गलत बात है। मैं इसको सीरियसली लूंगी...(व्‍यवधान) मैं इसको गंभीरता से लूंगी, आसन इसको गंभीरता से लेगा, आप लगातार उपेक्षा कर रहे हैं । मैं आपको चेतावनी दे रही हूं ...(व्‍यवधान) आसन गंभीरता से लेगा। 

श्री बाबूलाल नागर:***

श्री अध्‍यक्ष: अंकित कुछ नहीं हो।

श्री रामनारायण मीणा: ***

श्री श्रवण कुमार:***

श्री महावीर प्रसाद जैन: आसन का सहयोग करेंगे सर्वदलीय बैठक में यह तय हुआ था, इस पर चर्चा भी हो चुकी है और इसके अलावा अप्रैल में अकाल पर अलग से चर्चा  होने का भी तय हुआ था। मैं अन्‍दर की बात यहां नहीं कहना चाहता लेकिन मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि बहुत सारे अवसर हैं ...

श्री रामनारायण मीणा:***

श्री महावीर प्रसाद जैन: क्‍या जानते हैं आप? आप उप नेता हैं और आसन खड़े हैं ... क्‍या जानते हैं आप?

श्री रामनारायण मीणा:***

श्री महावीर प्रसाद जैन: इसलिए मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं कि बहुत अवसर हैं ऐसे।

श्री अध्‍यक्ष: जितनी किसानों की आपको चिन्‍ता है उतनी चिन्‍ता मुझे है। आप क्‍या मुझे बता रहे हैं? आपसे ज्‍यादा चिन्‍ता है मुझे, क्‍या कह रहे हैं आप?

श्री रामनारायण मीणा:***

श्री अध्‍यक्ष: मैं खेती करती हूं आपका पता नहीं करते हो कि नहीं करते हो, मैं करती हूं मुझे मालूम है।

श्री रामनारायण मीणा:***

श्री महावीर प्रसाद जैन: नौ बार चुनकर आए हैं अध्‍यक्ष जी, आप इनको चैलेंज कर रहे हैं, नौ बार चुनकर आए हैं।

श्री रामनारायण मीणा:***

श्री अध्‍यक्ष: मैं एक पूरा दिन दूंगी अकाल और पानी के अभाव पर चर्चा करने के लिए पूरा दिन दूंगी लेकिन इस तरीके से स्‍थगन प्रस्‍ताव को मंजूर नहीं करूंगी।

श्री रामनारायण मीणा:***

श्री जुबेर खान:***

श्री श्रवण कुमार:***

श्री बाबूलाल नागर:***

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो रहा है।

श्री बाबूलाल नागर:***

 

 

श्री अध्‍यक्ष: यह आपका निवेदन अंकित नहीं हो रहा है।

 

VNS /usc /1220/1j/10.03.06

श्री अमराराम (धोद): ******

 अशोक बैरवा: ***

श्री बाबूलाल नागर: ***

श्री अध्‍यक्ष: दूदू से आने वाले माननीय सदस्‍य, माननीय मंत्रीजी, यदि आप थोड़ी स्थिति स्‍पष्‍ट कर देंगे तो मैं उसके लिये समय, आप अकाल के ऊपर जो कुछ इतने उत्‍तेजित हैं माननीय सदस्‍य, चार साढ़े चार बजे, जब आप चाहें थोड़ी स्थिति को स्‍पष्‍ट कर देंगे तो यह उचित रहेगा।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अभी कर दें ?

श्री अध्‍यक्ष: अभी कर सकते हैं ? अभी कर रहे हैं ? आप दे रहे हैं ? आप अभी दे रहे हैं क्‍या ?

डा. किरोड़ीलाल मीणा (आपदा प्रबंधन एवं सहायता मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, चार, साढ़े चार बजे का समय तय कर दें, मैं स्‍टेटमेंट दे दूं।

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है। श्री अशोक कुमार नवलखा।

श्री हेमाराम चौधरी: ***

श्री अध्‍यक्ष: अब ज्‍यादा आप..(व्‍यवधान) अब आप गलत काम कर रहे है। वह दे रहे हैं। आप स्‍थान ग्रहण कर लें। स्‍थान ग्रहण करें। श्री अशोक कुमार नवलखा।

श्री हेमाराम चौधरी: ***

श्री बद्रीलाल जाट: ***

श्री खुशवीर सिंह खारची: ***

श्री अध्‍यक्ष/ श्री अशोक कुमार नवलखा को बुला  रही हूं और आपकी बारिश पर भी कहेंगे। रात को जो बारिश हुई है, नुकसान हुआ है उस पर भी तो कहेंगे कुछ न कुछ यह। श्री अशोक कुमार नवलखा।

नियम 295 के तहत विशेष उल्‍लेख के प्रस्‍ताव

अजमेर-इन्‍दोर राजमार्ग संख्‍या 79 के किमी. 219 पर गांव जलिया के पास चैक पोस्‍ट के एक किमी. क्षेत्र में फोर लेन सड़क  का निर्माण

श्री अशोक कुमार नवलखा (निम्‍बाहेड़ा): राजस्‍थान विधान सभा के प्रक्रिया एवं कार्य संचालन के नियम 295 के तहत विशेष उल्‍लेख का प्रस्‍ताव।

      महोदय, उपरोक्‍त विषयान्‍तर्गत निवेदन है कि मेरे विधान सभा क्षेत्र के अन्‍तर्गत अजमेर-इन्‍दोर राजमार्ग संख्‍या 79 के किमी. 219 पर गांव जलिया के पास परिवहन विभाग, वाणिज्‍य कर विभाग के चैक पोस्‍ट एवं आबकारी विभाग की चौकी

स्थित है। चैकपोस्‍ट व चौकी पर वाहनों की जांच पड़ताल के कारण इस रोड़ पर घण्‍टों तक यातायात अवरुद्ध रहता है जिस कारण आवश्‍यक एवं आपातकालीन कार्यों हेतु निकलने वाले वाहनों को काफी कठिनाईयां उठानी पड़ती हैं। यही नहीं इस मार्ग से उदयपुर, चित्‍तौड़गढ़, नीमच या निम्‍बाहेड़ा के चिकित्‍सालयों में गंभीर रोगियों को

रोगी वाहनों के माध्‍यम से ले जाने में भी काफी मुश्किलें होती हैं तथा कई बार मरीज रास्‍ते में ही दम तोड़ देते हैं।

      वर्तमान में इस राजमार्ग की चौड़ाई मात्र 7 मीटर है तथा प्रतिदिन 3 से 4 हजार वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं। ऐसी स्थिति में राजमार्ग की चौड़ाई को 4 लेन में बदलकर ले बाई का निर्माण किया जाना अत्‍यन्‍त आवश्‍यक है। यातायात अवरुद्ध होने की स्थिति में स्‍थानीय पुलिस को भी अपना आवश्‍यक काम छोड़कर यातायात खुलवाने में अधिकांश समय लगाना पड़ता है। यहां यह भी उल्‍लेखनीय है कि इस मार्ग के 3 किमी. उत्‍तर दिशा में रेलवे फाटक है जो भी अधिकांश समय बंद रहता है तथा इस चैक पोस्‍ट के 5 किमी. दूरी पर मध्‍य प्रदेश की सीमा में नया गांव चैक पोस्‍ट स्थित है जहां भी यातायात अवरुद्ध रहता है। रेलवे फाटक खुलने पर नया गांव चैक पोस्‍ट पर यातायात खुलने की स्थिति में सारा दवाब जलिया (निम्‍बाहेड़ा) चैक पोस्‍ट पर पड़ता है व यहां यातायात जाम बना रहता है। इस समस्‍या की जानकारी पूर्व में भी परिवहन विभाग एवं सार्वजनिक निर्माण के अधिकारियों को दी जा चुकी है।

      मेरा इस सदन के माध्‍यम से आग्रह है कि अतिशीघ्र कार्यवाही कर इस समस्या के स्‍थायी समाधान हेतु चैक पोस्‍ट के एक किमी. क्षेत्र में फोर लेन सड़क व ले बाई का निर्माण करवाने का कष्‍ट करें।

श्री अध्‍यक्ष: धन्‍यवाद। श्री जीतमल खांट।

 

उदयपुर संभाग के समस्‍त जिलों के राजस्‍व रिकार्ड में किस्‍म जंगल शब्‍द हटवाने बाबत

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): प्रकिया नियम 295 के तहत उदयपुर संभाग के समस्‍त जिलों के राजस्‍व रिकार्ड में किस्‍म जंगल शब्‍द हटवाने बाबत विशेष उल्‍लेख प्रस्‍ताव।

      महोदय, निवेदन है कि जनजाति उपयोजना क्षेत्र उदयपुर संभाग में सम्‍पूर्ण रूप से जनजाति बाहुल्‍य क्षेत्र है जहां के आदिवासी़/गैर आदिवासी किसान बिखरी बस्‍ती में निवास करते हैं। इस क्षेत्र के किसानों का मुख्‍य धंधा कृषि है, खेती पर ही परिवार का जीवन यापन होता है। आय का अन्‍य कोई स्रोत नहीं है। नान कमाण्‍ड क्षेत्र  आये दिन अकाल की चपेट में आता रहता है।आदिवासी किसान ने दुर्गम पहाड़ी, पठारी क्षेत्र में रहते हुए कठोर परिश्रम कर उबड़ खाबड़ जमीन को जोतने लायक बनाया है और आज स्थिति यह है कि जिस जमीन पर कुए, बावड़ी, मकान, खेत खालिहान, फसलदार पेड़ पौधे मौजूद हैं, 50-50 वर्षों के गुजरने के पश्‍चात् भी राजस्‍व रिकार्ड में किस्‍म जंगल दर्ज हो जाने से हजारों आदिवासी किसानों, गैर आदिवासी किसानों के नाम उक्‍त भूमि आबंटन नहीं हो रही है। मैं मुख्‍यमंत्री व राजस्‍व मंत्रीजी को धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि टी.एस.पी. क्षेत्र में विशेष राजस्‍व अभियान चलाया और 50 वर्षों से जो किसान इंतजार कर रहा था कि राजस्‍व रिकार्ड में दर्ज नाकाबिल काश्‍त भूमि को मौके के स्थिति के अनुसार काबिल काश्‍त किस्‍म परिवर्तन कर भूमि आबंटन कर आदिवासी किसान व गैर समाज के किसानों को लाभ दिया है। यह कार्य किसानों के जीवन में नयी खुशहाली एवं वरदान साबित हुआ है। उसी तर्ज पर किस्‍म जंगल शब्‍द हटवाने का श्रम करावें।

श्री अध्‍यक्ष: श्री रणधीर सिंह भीण्‍डर।

धरियावद तहसील (मेवाड़ संभाग) में कृषि मण्‍डी शीघ्र स्‍थापित करने हेतु

श्री रणधीर सिंह भीण्‍डर (बल्‍लभनगर): राजस्‍थान विधान सभा के प्रक्रिया एवं कार्य संचालन संबंधी नियम 295 के तहत विशेष उल्‍लेख।

      महोदय, धरियावद तहसील में कृषि उपज मंडी की स्‍थापना के लिये 1996 में निर्णय लिया गया व उसके लिये भूमि आबंटन की कार्यवाही प्रारम्भ की गयी थी। जो भूमि इसके लिये चिहिंत की गयी थी और जिसके आबंटन की कार्यवाही शुरू की गयी थी वह भूमि विवादास्पद थी व उसके विरुद्ध न्‍यायालय में प्रकरण चल रहा हैजिसको करीब दस वर्ष से अधिक हो गये हैं।

      पिछली सरकार के दौरान स्‍थानीय विधायक व जन प्रतिनिधियों ने एक अन्‍य जगह कृषि मंडी के लिये आबंटित करने का राज्‍य सरकार से अनुरोध किया था व वर्तमान समय में भी विधायक व अन्‍य जन प्रतिनिधियों ने उक्‍त लम्बित प्रकरण को देखते हुए इस नयी जगह जो कि गाड़रियावास में है, को आबंटित करने की सरकार से अपील की है परन्‍तु अब तक विभाग ने इस और कोई ध्‍यान नहीं दिया।

      महोदय, धरियावद तहसील मेवाड़ संभाग का सबसे उपजाऊ क्षेत्र है परन्‍तु विपणन की व्‍यवस्‍था नहीं होने से स्‍थानीय व्‍यापारियों को मनमाने दाम पर कृषि उपज बेचना किसानों की मजबूरी हो गयी है। मेरा सरकार से अनुरोध है कि इस आदिवासी बाहुल्‍य क्षेत्र में कृषि मण्‍डी शीघ्र स्‍थापित करने हेतु गैर विवादित भूमि पर कृषि उपज मण्‍डी निर्माण का कार्य सम्‍पादित कराया जाये जिससे क्षेत्र के किसानों को अपनी फसल का उचित मूल्‍य मिल सके।

                           

(समय:           )

            ( श्री रामनारायण विश्‍नोई, उपाध्‍यक्ष, पदासीन)

 

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री के.डी.बाबर।

 

किसानों की फसल का बीमा करने विषयक

श्री केशर देव बाबर (लक्ष्‍मणगढ़): प्रक्रिया के नियम 295 के अन्‍तर्गत विशेष उल्‍लेख प्रस्‍ताव।

      महोदय, मैं राजस्‍थान विधान सभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन सम्‍बन्‍धी नियमावली के नियम 295 के अन्‍तर्गत राज्‍य के किसानों के सम्‍बन्‍ध में एक अति महत्‍वपूर्ण समस्‍या की और राज्‍य सरकार एवं माननीय कृषि मंत्रीजी का ध्‍यान दिलाना चाहूंगा।

   पूरे राज्‍य में किसानों की फसल का बीमा करने की योजना गत वर्षों में प्रारम्‍भ की गयी और अपनी फसलों की असुरक्षा से पीडि़त किसानों ने अपनी गाढ़ी कमाई में से फसल की सुरक्षा हेतु बीमा करवाया। परन्‍तु राज्‍य सरकार की उदासीनता के चलते फतेहपुर एवं लक्ष्‍मणगढ़ तहसील के किसानों को उनकी फसल के हुए नुकसान का मुआवजा अभी तक नहीं मिल पा रहा है। इसके कारण उक्‍त दोनों तहसीलों के किसान आंदोलित हैं और पिछले एक माह से लगातार फतेहपुर उपखण्‍ड कार्यालय पर सैंकड़ों की संख्‍या में धरने पर बैठे हुए हैं परन्‍तु उनकी इस वाजिब मांग पर कोई अमल नहीं किया जा रहा है। चूरू जिले के किसानों को तो उनके नुकसान की मुआवजा राशि उपलब्‍ध करायी जा चुकी है परन्‍त फतेहपुर एवं लक्ष्‍मणगढ़ तहसीलों के काश्‍तकार आत भी मुआवजा पाने को भटक रहे हैं। कारण यह बताया जा रहा है कि सरकार द्वारा बीमा कम्‍पनी को देय अपनी हिस्‍सा राशि जमा नहीं करायी गयी है जिसके कारण मुआवजा मिलने में देरी हो रही है। एक और तो किसान प्रकृति की मार से परेशान है ही, क्‍योंकि पिछली बार बर्फबारी के कारण सर्दी से रबी की फसल का नुकसान हो गया।

 

ssy/usc/1230/1k

 

    जो थोड़ी-बहुत फसल बची थी वो तेज गर्मी से नष्‍ट होने के कगार पर पहुंच गयी। ऐसी परिस्थिति में किसान वर्ग बहुत ही दु:खी एवं पीडि़त है और सरकार से मुआवजा राशि जिसके वह हकदार हैं तुरंत उपलब्‍ध कराये जाने हेतु आंदोलित हैं और ऐसी आशका है कि यदि उनकी वाजिब मांग को पूरा नहीं किया गया तो एक बड़े प्रदर्शन एवं आंदोलन की तैयारी की जा रही है ।

        अंत:एव मैं राज्‍य सरकार एवं कृषि मंत्री जी से पुरजोर शब्‍दों में निवेदन करता हूं कि जिला सीकर के तहसील फतेहपुर एवं लक्ष्‍मणगढ़ के बीमित किसानों को उनकी मुआवजा राशि तुरंत उपलब्‍ध कराई जायें । धन्‍यवाद ।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री शंकर सिंह राजपुरोहित ।

                  (अनुपस्थित)

            श्री बनवारीलाल शर्मा ।

धौलपुर जिले के कूकपुर कैनाल पर बने नाले की मरम्‍मत

श्री बनवारी लाल शर्मा(धौलपुर): उपाध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान विधान सभा की प्रक्रिया के नियम 295 के अन्‍तर्गत निवेदन है कि धौलपुर जिले के कूकपुर कैनाल पर नाले पर बना हुआ एक्‍वा डक्‍ट लगभग पिछले सात-आठ वर्ष से 80 फुट लम्‍बाई में भारी वर्षा के कारण टूट गया था जिसके कारण काश्‍तकारों की सिंचाई नहीं हो पा रही है । इस कैनाल से करीब 300 एकड़ की सिंचाई होती थी । सिंचाई विभाग, धौलपुर द्वारा इस कैनाल की मरम्‍मत हेतु कई बार उपलब्‍ध कराने के लिए लिखा गया परंतु बजट के अभाव के कारण इसकी मरम्‍मत नहीं कराई जा सकी ।

        अंत: श्रीमान् सिंचाई मंत्री जी से निवेदन है कि काश्‍तकारों की आवश्‍यकता को ध्‍यान में रखते हुए विभाग द्वारा वांछित करीब चार लाख रूपये स्‍वीकृत करने की कृपा करें ताकि ग्राम तहरौन कोटरा पटेवरी के काश्‍तकारों को सिंचाई का लाभ मिल सके ।

 श्री उपाध्‍यक्ष: श्री बृजकिशोर शर्मा ।

हटवाड़ा से रेल्‍वे स्‍टेशन जाने वाली बसों का रुट बदलने विषयक

श्री बृजकिशोर शर्मा(जयपुर ग्रामीण): उपाध्‍यक्ष महोदय,राजस्‍थान विधान स‍भाा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन के नियम 295 के अन्‍तर्गत निवेदन है कि मेरे विधान सभा क्षेत्र जयपुर ग्रामीण में जयपुर शहर के वार्ड नं.54 में लगभग 30-35 हजार लागों की आबादी रहती है । इस वार्ड की बहुत सी कॉलोनियों में लोग बरसों से रह रहे हैं किन्‍तु अभी तक भी शहर के प्रमुख स्‍थानों पर आने-जाने के लिए कोई साधन नहीं है । इस क्षेत्र में रामगढ़ मोड़ से छीपीवाड़ा, कागदीवाड़ा, शंकर नगर होते हुए कोई भी मिनी बस रेल्‍वे स्‍टेशन को नहीं जाती है ना ही ब्रह्रापुरी से ही कोई बस जाती है इसलिए इस क्षेत्र के निवासियों को महंगे साधन से छोटी चौपड़ जाकर के स्‍टेशन के लिए साधन पकड़ना पड़ता है । ब्रह्रापुरी से भी रेल्‍वे स्‍टेशन तक कोई भी सीधी बस नहीं जाती है ।

        अंत: आपसे निवेदन है कि हटवाड़ा से रेल्‍वे स्‍टेशन जाने वाली सुबह-सायंकाल वाली कुछ मिनी बसों को बड़ी चौपड़ के बजाय माउंट रोड होते हुए कागदीवाड़ा व शकर नगर, ब्रह्रापुरी छोटी चौपड़ होते हुए रेल्‍वे स्‍टेशन तक चलवाने की व्‍यवस्‍था कराने की कृपा करें ताकि यहां के राज्‍य कर्मचारियों व अन्‍य निवासियों को दफ्तर व बाजार आदि आने-जाने के लिए सुविधा होगी व धन की भी बचत होगी ।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री खुशवीर सिंह ।

            (अनुपस्थित)

            डॉ.ओ.पी.महेन्‍द्रा ।

श्री गंगानगर में आधुनिक तकनीक से युक्‍त राजकीय कृषि

महाविद्यालय खोले जाने विषयक ।

 

डॉ.ओ.पी.महेन्‍द्रा(केसरीसिंहपुर): उपाध्‍यक्ष महोदय,राजस्‍थान विधान सभा के कार्य संचालन एंव प्रक्रिया के नियम 295 के अन्‍तर्गत निवेदन है कि श्री गंगानगर जिला राजस्‍थान का एक अग्रणी कृषि प्रधान जिला है जहां अनेक कृषि फसलों का उत्‍पादन होता है जिनमें खाद्यान्‍न एवं व्‍यावसायिक फसलें शामिल हैं । राजस्‍थान का कृषि क्षेत्र में सिरमौर जिला होने के कारण यह जिला कृषि विश्‍वविद्यालय होने का हकदार था लेकिन ऐसा नहीं हो सका । श्री गंगानगर गेहूं में हापुड के पश्‍चात् भारत की दूसरे नम्‍बर की मंडी व नरमे-कपास में भारत की पांचवें नम्‍बर की मंडी रहा है । इनके अतिरिक्‍त सरसों व गन्‍ने का उत्‍पादन राजस्‍थान में सर्वाधिक श्री गंगानगर जिले में ही होता है व किन्‍नू में एकाधिकार है । माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने किन्‍नू की मंडी श्री गंगानगर में घोषित करने के अतिरिक्‍त टिश्‍यू कल्‍चर केन्‍द्र भी श्री गंगानगर में स्‍थापित किया है ।

        चूंकि श्री गंगानगर जिला कृषि का एक प्रमुख केन्‍द्र है अंत: मैं सरकार से जिले के किसानों व कृषि क्षेत्र में उच्‍च शिक्षा प्राप्‍त करने के लिये उत्‍साहित हजारों युवाओं की और से विनम्र आग्रह करता हूं कि श्री गंगानगर में आधुनिक तकनीक से युक्‍त राजकीय कृषि महाविद्यालय खोला जाये ।

        मैं व जिले की जनता सदैव मुख्‍यमंत्री जी के आभारी रहेंगे । अनेकानेक धन्‍यवाद  सहित ।

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर: मैं भी इनकी बात का समर्थन करता हूं ।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री बहादुर सिंह गोदारा ।

श्री बालिका उच्‍च प्राथमिक विद्यालय नोहर की

अध्‍यापिकाओं को बकाया का भुगतान करवाने विषयक

श्री बहादुर सिंह गोदारा(नोहर): उपाध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान विधान सभा  के प्रक्रिया एवं कार्य संचालन संबंधी नियमों के नियम 295 के अंतर्गत निवेदन है कि श्री बालिका उच्‍च प्राथमिक विद्यालय नोहर की अध्‍यापिकाओं का शिक्षण कार्य जनवरी,2000 से जुलाई,2001 तक का बकाया वेतन व ई.पी.एफ. का पैसा व 90 प्रतिशत अनुदानित पदों पर कार्यरत अध्‍यापिकाओं को बिना नोटिस के हटाकर स्‍कूल बंद करने पर सरकारी पदों में समायोजित की और दिलाना चाहता हूं । नोहरा क्षेत्र में श्री बालिका माध्‍यमिक विद्यालय इसकी उच्‍च प्राथमिक शाखा राजस्‍थान सरकार से 90 प्रतिशत अनुदानित आज भी है । इसकी प्रबंधक समिति पर वेतन अदायगी में हेराफेरी कर अनुदान हड़पने का मुकदमा नं. 334/31/7/2000 भ्रष्‍टाचार निरोधक ब्‍युरो पुलिस में दर्ज होने से शिकायतकर्ता महिला अध्‍यापिकाओं का 19 माह का शिक्षण कार्य का वेतन के अनुदान के बिल जिला शिक्षाधिकारी प्राथमिक को प्रेषित न कर राज्‍य सरकार के गैर सरकारी शैक्षणिक संस्‍था अधिनियम 1993 के नियम 14 के 1 व 2 का उल्‍लंघन कर जुलाई, 2001 में बिना सरकार की अनुमति के विद्यालय बंद कर कन्‍याओं के शिक्षा पाने के मौलिक अधिकार को छीन लिया व अनुदानित पदों पर कार्यरत महिलाओं को सेवा से बिना सरकार व शिक्षा विभाग की अनुमति के हटा दिया ।

        गैर सरकारी शैक्षणिक संस्‍था नियम 1989 की धारा 30 व 31 के 1 व 2 व 32 के 4 के अनुसार विद्यालय प्रबंधन वेतन संदाय करने में विफल रहने के जिला शिक्षाधिकारी प्राथमिक शिक्षा हनुमानगढ़ की व्‍यक्तिगत उपरोक्‍त नियम की अनुपालना में महिला अध्‍यापिकाओं का 19 माह का बकाया वेतन व पी.एफ. का भुगतान दिलाने में सक्षम हैं । लेकिन बड़ा खेद का विषय है कि आज 6 वर्षों से जिला प्रशासन ने इनका बकाया वेतन शिक्षण कार्य का व पी.एफ. का भुगतान व भ्रष्‍ठाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाली इन महिला अध्‍यापिकाओं को सरकारी पदों पर समायोजित अब तक क्‍यों नहीं किया गया जबकि 90 प्रतिशत राज्‍य सरकार अनुदान वेतन के जरिये इस विद्यालय संस्‍था को देता था, सरकारी पदों पर समायोजित करने से राज्‍य सरकार को किसी प्रकार की आर्थिक क्षति न होकर इन अध्‍यापिकाओं को शत-प्र‍तिशत प्रोत्‍साहन मिलेगा व महिलाएं ग़ुडफिल महसूस कर सकेगी । संस्‍था नये नाम से इसी सार्वजनिक भवन में विद्यालय खोलने का षड्यंत्र रच रही है । सरकार इस भवन को अपने कब्‍जे में लेकर पुराने नाम से ही विद्यालय चालू करवाने का प्रयास करे । क्‍या सरकार इन अध्‍यापिकाओं का शिक्षण कार्य व 19 माह का बकाया वेतन, पी.एफ. का पैसा व सरकारी पदों पर समायोजन या पुन: संस्‍था को चालू करने का इरादा रखती है । हां तो कब तक ना तो क्‍यों नहीं ।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री रामकिशोर मीणा ।

राज्‍य की सीमेंट उद्योगों की समस्‍याओं का निराकरण

श्री रामकिशोर मीणा(सिकराय): उपाध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान विधान सभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन संबंधी नियमों के नियम 295 के अंतर्गत मैं राज्‍य सरकार का ध्‍यान आपके माध्‍यम से आकर्षित कर यह बताना चाहूंगा कि राज्‍य सीमेंट उत्‍पादन में देश में दूसरे स्‍थान पर होते हुए भी राज्‍य स्थित उद्योगों को सीमेंट मिलने में बहुत परेशानियां आ रही है ।

      सरकार द्वारा जबसे सीमेंट में निश्चित प्रतिशत 'राख' मिलाने के फार्मूले को स्‍वीकार करने के पश्‍चात् राज्‍य स्थित सीमेंट के कारखानों में कोटा थर्मल स्‍टेशन, कोटा तथा सूरतगढ़ थर्मल स्‍टेशन सूरतगढ़ से 'राख' उठाने की होड़ लगी हुई है । सभी सीमेंट फैक्ट्रियों ने अपने उत्‍पाद का 70 प्रतिशत से ज्‍यादा हिस्‍सा पी.पी.सी. सीमेंट बनाने में लगा दिया है । उद्योगों में काम आने वाली अच्‍छी क्‍वालिटी की ओ.पी.सी. सीमेंट की उपलब्‍धता में एक तरह से कमी कर दी गयी है । सभी सीमेंट निर्माताओं ने राज्‍य में उद्योगों के लिए उपलब्‍ध डी फार्म पर सीमेंट देना बंद कर दिया है तथा सभी सीमेंट निर्माताओं ने पूल बनाकर सीमेंट की बाजार में कमी का ऐलान कर कीमतों में भारी वृद्वि कर दी है ।

 

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जयपुर बाजार में सीमेण्‍ट का एक बैग दो माह पूर्व 125 रुपए में मिल रहा था वही सीमेण्‍ट का बैग अब 180 रुपए में भी मिलना मुश्किल है। इसी प्रकार राज्‍य स्थित सीमेण्‍ट आधारित उद्योगों को तो सीमेण्‍ट की उपलब्‍धता निम्‍न हो गई है। ज्‍यादातर सीमेण्‍ट देहली व यू पी भेजी जा रही है1 राज्‍य में सीमेण्‍ट उद्योगों का विस्‍तार करने से सरकार इतनी सब्सिडी व फैसिलिटी दे रही है वहीं सीमेण्‍ट निर्माता राज्‍य में जान बूझकर कमी बनाए हुए हैं जिससे राज्‍य स्थित सीमेण्‍ट काम में लेने वाले उद्योग बन्‍द होने के कगार पर हैं।

      अत: मैं राज्‍य सरकार का ध्‍यान सीमेण्‍ट की इस कमी की और दिलाकर यह चाहूंगा कि राज्‍य में सीमेण्‍ट आधारित उद्योगों को जिन्‍दा रखने के लिए सीमेण्‍ट की उपलब्‍धता तुरन्‍त बढ़ाई जाए एवं उपभोक्‍ताओं को कीमतों पर नियंत्रण रखकर लुटने से बचाया जाए।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री हीरालाल निवाई । (अनुपस्थित)

   श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल।

 

पर्ची के माध्‍यम से उठाए गये मुद्दे

ग्राम पंचायतों द्वारा जारी आवासीय पट्टों के पंजीकरण में आ रही बाधाएं

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, ग्राम पंचायतों द्वारा जारी आवासीय पट्टों के अवधि पार होने के कारण पंजीयन विभाग द्वारा पंजीयन न कर पाने की स्थिति पर माननीय पंचायती राज मंत्रीजी और सदन का ध्‍यान आकर्षित करना चाहता हूं। आज लिबरलाइजेशन का दौर चल रहा है, बैंकों द्वारा फाइनेन्‍स करने के प्रोसेस को इजी किया गया है, रेट ऑफ इण्‍टरेस्‍ट भी गत कुछ समय में डाउन किया गया है, इन सब परिस्थितियों के चलते हर वर्ग लोन लेकर अपना एक आवास निर्मित करने का सपना था उस सपने को साकार करने के लिए प्रयासरत था और प्रयासरत है। इसी क्रम में ग्राम पंचायतों द्वारा समय-समय पर ग्रामीणों को आवासीय पट्टे जारी किए जाते रहे हैं, उन आवासीय पट्टों को अगर आम जन उस पर लोन लेना चाहता है तो लोन इस कारण नहीं मिल पाता क्‍योंकि वह रजिस्‍टर्ड नहीं होता और रजिस्‍टर्ड न होने का कारण यह रहता है कि एक तो उनकी अज्ञानता दूसरा उन पट्टों का अवधि पार हो जाना क्‍योंकि रजिस्‍ट्रेशन डिपार्टमेण्‍ट का यह नियम है कि पट्टा जारी होने की अवधि के चार महीने के अन्‍दर अन्‍दर अगर पट्टा रजिस्‍टर्ड किया जाता है तो उसकी अलोटमेण्‍ट वैल्‍यू के एक प्रतिशत पर रजिस्‍टर्ड किया जाता है और चार माह के बाद अगले चार माह तक अलोटमेण्‍ट वैल्‍यू का एक प्रतिशत जो चार्ज है उसका दुगुना, तीन गुना, चार गुना, पाँच गुना, छह गुना, इस तरह से करते हुए आठ महीने की समय सीमा तक उनकी रजिस्‍ट्री की जाती है और आठ महीने की समय सीमा बीतने के बाद अगर कोई व्‍यक्ति अपने पट्टे को रजिस्‍टर्ड करवाना चाहता है तो रजिस्‍ट्री नहीं की जाती है। मेरा इसी क्रम में निवेदन है कि चूंकि इस तरह के प्रकरण पूरे राज्‍य के हैं, राज्‍य के सभी ग्रामीण क्षेत्रों के हैं अत: इन प्रकरणों की गहराई को समझते हुए माननीय मंत्रीजी इसमें ऐसा कुछ आदेश फरमाये कि या तो  रिवेलिडेट किया जाए उन पट्टों को, चाहे वह बी डी ओ द्वारा किए जाएं या ए सी ओ द्वारा किए जाएं और रिवेलिडेट किए जाने के साथ ही उसकी जो ऑरिजनल अलोटमेण्‍ट की डेट थी उस डेट की वेल्‍यू पर किया जाए, और उसी पर रजिस्‍टर्ड किया जाए। इससे बैंकों से फाइनेन्‍स लेने में आम जनता को सुविधा रहे और उस पट्टे को कहीं और भी वह सम्‍पत्ति के रूप में उपयोग करना चाहे तो उपयोग कर सके। बहुत-बहुत धन्‍यवाद। मैं चाहूंगा कि इस पर मंत्री महोदय कुछ जवाब दें।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह जो महत्‍वपूर्ण सवाल पर्ची के माध्‍यम से आया है, वह स्‍टेट फाइनेन्‍स मिनिस्‍टर से रिलेटेड है और यही नहीं ग्राम पंचायतों के पट्टे ही नहीं, जिला परिषद्, पंचायत समितियों, को-आपरेटिव सोसायटीज और अन्‍य स्‍वायत्‍तशासी संस्‍थाओं द्वारा जो पट्टे जारी किए जा रहे हैं वे पट्टे चार-छह महीने बाद पूरी मार्केट वैल्‍यू से उनका रजिस्‍ट्रेशन करते हैं तो खरीदते तो वह हैं दो हजार, तीन हजार रुपए में और रजिस्‍ट्रेशन के समय जो मार्केट वैल्‍यू है, उस समय पर उससे करते हैं। पूरे राजस्‍थान लेवल की यह गम्‍भीर समस्‍या है। मेहरबानी करके स्‍टेट फाइनेन्‍स मिनिस्‍टर और फाइनेन्‍स मिनिस्‍टर से मेरा अनुरोध है कि वह इस प्रकार की छूट इन पट्टों के लिए दिलाए तब जाकर कारगर लाभ मिलेगा।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री संयम लोढ़ा।

रामगढ़ (जैसलमेर) में मंदिर जोडे जाने से उत्‍पन्‍न हुए हालात

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, धर्म और आस्‍था की हमारी एक अभिनव संस्‍कृति है। बच्‍चे के जन्‍म से लेकर मृत्‍यु पर्यन्‍त उसका पूरा सफर धार्मिक संस्‍कारों और आस्‍था से जुड़ा हुआ है। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, एक और हमारे राजस्‍थान के अनेकानेक परिवारों में इस तरह की धार्मिक संस्‍कृति है कि सुबह जब तक दर्शन नहीं करते मुंह में अन्‍न का एक दाना भी नहीं डालते, इसी प्रकार शाम ढलने के बाद भी दैव दर्शन, प्रार्थना, यह सब हमारे जीवन का एक अभिन्‍न अंग बना हुआ है। लेकिन बहुत खेद के साथ कहना पड़ता है कि राजस्‍थान में आज एक ऐसी सरकार शासन कर रही है जिसका चुनाव के वक्‍त तो चेहरा और होता है जब जब देश में लोक सभा के चुनाव हो, राज्‍य में विधान सभा के चुनाव हो, धार्मिक आधार पर लोगों की भावनाएं भड़काकर वह वोट लेने का काम तो यह करना चाहते हैं, यात्राएं निकालना चाहते हैं लेकिन माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से सरकार के ध्‍यान में लाना चाहता हूं कि हमारे पाकिस्‍तान की सीमा पर रेतीले धोरों के बीच एक जीवट संघर्ष के बीच जो लोग जीते हैं, धर्म रक्षा का काम करते हैं, सीमा पर हमारे क्षेत्र की रखवाली का काम करते हैं, उसी इलाके में माताजी का एक मन्दिर बना हुआ था, मुझे बहुत दु:ख के साथ कहना पड़ता है कि वहां के जिला कलेक्‍टर के मौखिक आदेश से नायब तहसीलदार ने जाकर वह मन्दिर तोड़ दिया और जब नायब तहसीलदार ने इसके सम्‍बन्‍ध में थाने में जाकर पुलिस इमदाद के लिए सम्‍पर्क किया तो थानेदार ने इमदाद देने से मना कर दिया और कहा कि आपके पास लिखित में कोई आदेश नहीं है और इसलिए मैं आपको इमदाद उपलब्‍ध नहीं कराऊंगा। लेकिन इस सरकार की करतूतों से और नास्तिकता के अन्‍धकार में डूबे हुए जिला प्रशासन ने लोगों की भावनाओं की कोई कद्र नहीं की और 14 फरवरी को वह माताजी का मन्दिर प्रशासन ने जाकर तोड़ दिया। इससे पूरे जैसलमेर ज़िले का जनमानस आन्‍दोलित है। 20 फरवरी को रामगढ़ में एक विशाल रैली वहां के लोगों ने निकाली और वहां के जिला कलेक्‍टर का पुतला फूंका जिसके मौखिक आदेश से मन्दिर तोड़ने का शर्मनाक कृत्‍य हुआ। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, उसके बाद 28 फरवरी को रामगढ़ में फिर बन्‍द हुआ और इसलिए बन्‍द हुआ कि 14 फरवरी को मन्दिर तोड़ने की हृदय विदारक घटना होने के बाद हजारों हजार, लाखों लाख हिन्‍दू धर्मावलम्बियों की भावनाओं पर कुठाराघात करने के बाद जब राजस्‍थान की सरकार ने कोई ध्‍यान हीं दिया तो 28 फरवरी को रामगढ़ कस्‍बा बन्‍द हुआ और राजस्‍थान के गृह मंत्री का वहां हजारों लोगों द्वारा पुतना फूंका गया। उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करनाचाहता हूं कि जैसलमेर ज़िले के लोग आन्‍दोलित हैं, उनकी भावनाओं पर कुठाराघात हुआ है, उनकी आस्‍था पर हमला हुआ है। पोकरण के अन्‍दर भी इसी की प्रतिक्रिया में 24 फरवरी को जुलूस निकाला गया और महामहिम राज्‍यपाल महोदय के  नाम पर वहां की जनता ने ज्ञापन दिया। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं कि राजनीति अपनी जगह पर है लेकिन लोगों की धार्मिक आस्‍थाओं का संरक्षण करना, लोगों में नैतिक ज्‍वार का प्रसार करना, यह एक जिम्‍मेदार नागरिक के रूप में भी हमारा कर्तव्‍य है। मैं आपके माध्‍यम से राजस्‍थान सरकार से निवेदन करना चाहता हूं कि इस सदन में वह यह घोषणा करे कि वह उस धार्मिक मन्दिर का पुननिर्माण करवाएगी और जिस जिला कलेक्‍टर के आदेश से उस मन्दिर को तोड़ने का शर्मनाक कृत्‍य वहां के नायब तहसीलदार ने किया है, इस सदन में आज ही उनके खिलाफ कार्यवाही करने की घोषणा करेंगे।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): उपाध्‍यक्ष महोदय, एक तरफ सरकार मन्दिर के नाम पर राजनीति करती है दूसरी तरफ तनोटराय माताजी का मन्दिर.....।

श्री उपाध्‍यक्ष: कह दिया इन्‍होंने, कोई बाकी तो रखा नहीं।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): तनोटराय माताजी का मन्दिर मैंने देखा है। कहीं भी वह रास्‍ते में आता नहीं है। उसको तोड़ देना, उसके खिलाफ कार्यवाही नहीं करना, मैं यह जानना चाहता हूं कि गृह मंत्रीजी, उस कलेक्‍टर के खिलाफ, उस नायब तहसीलदार के खिलाफ क्‍या कार्यवाही करने जा रहे हैं? क्‍या आप एफ आई आर दर्ज करके ऐसे मामले में कार्यवाही करेंगे? नहीं करेंगे तो क्‍यों नहीं करेंगे इसका जवाब दें।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री मदन राठौड़। (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़):उपाध्‍यक्ष महोदय, आप सरकार से जवाब दिलवाइए। धार्मिक आस्‍थाओं से जुड़ा हुआ मसला है, इससे बड़ा काम कोई हो नहीं सकता। (व्‍यवधान)

Gpc/akt/1250/1m

 

श्री उपाध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो। माननीय सदस्‍य। ...(व्‍यवधान)...

श्री जुबेर खान:***

श्री खुशवीर सिंह जोजावर: ***

डा. बुलाकीदास कल्‍ला: ***

श्री सी.डी. देवल: ***

श्रीमती ममता शर्मा: ***

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (गंगानगर): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। आप अपना स्‍थान ग्रहण कीजिए। माननीय सदस्‍य। आप अपना स्‍थान ग्रहण कीजिए। ...(व्‍यवधान)...

श्री खुशवीर सिंह जोजावर: ***

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर (गंगानगर): ***

श्री खुशवीर सिंह जोजावर: ***

श्री संयम लोढ़ा: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप अपना स्‍थान ग्रहण करें। माननीय सदस्‍य, आप अच्‍छी तरह से जानते हैं ...(व्‍यवधान)... एक बात मेरी बात सुनिए आप। माननीय सदस्‍य आप अपना स्‍थान ग्रहण करें।

श्री सी.डी. देवल: ******

श्री बृजकिशोर शर्मा: ***

श्री बंशीलाल खटीक: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, स्‍थान ग्रहण कीजिए।

श्री बृजकिशोर शर्मा: ***

श्री अशोक बैरवा ‘’खण्‍डार’’: ***

मोहम्‍मद माहिर आजाद: ***

श्री बंशीलाल खटीक: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। ...(व्‍यवधान)... सदन के नियमों के अनुसार आपको अच्‍छी तरह से मालूम है कि पर्ची के माध्‍यम से विषय को उठाया जा सकता है सरकार और सरकार के प्रतिनिधि अगर उचित समझेंगे तो उसका जवाब दे देंगे, इतना शोर-शराबा मचाने वाली बात है क्‍या? ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा: ***

श्री सी.डी. देवल: ***

श्री खुशवीर सिंह जोजावर:

मोहम्‍मद माहिर आजाद: ***

श्रीमती ममता शर्मा: ***

श्री अशोक बैरवा ‘’खण्‍डार’’: ***

डा. बुलाकीदास कल्‍ला: ***

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया: उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं सदन के माननीय सदस्‍यों की भावना का पूरा सम्‍मान करते हुए सदन के सभी माननीय सदस्‍यों का, उनके विचारों का, उनकी अन्‍तर्भावना का पूरा सम्‍मान करता हूं। जिस तनोट माता का मंदिर आप कह रहे हैं यह तनोट माता का मंदिर वो तनोट माता का नहीं है जो पाक युद्ध के समय में जहां हमारे सब लोगों के संरक्षण की जगह बनी और कितने ही बम वहां गिराये गये, लेकिन एक भी बम वहां फटा नहीं, जो आज भी वहां सुरक्षित हैं। यह तनोट माता का मंदिर वो नहीं है। जो कलक्‍टर ने मुझे रिपोर्ट भेजी वह आपके सामने रख रहा हूं। उसके बाद भी अगर कहीं कोई कमी रही है, किसी की कोई गलती रही है ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा: ***

श्री अशोक बैरवा ‘’खण्‍डार’’: ******

श्री उपाध्‍यक्ष: आप सुनिए।

श्री मोहन मेघवाल: ***

श्री सी.डी. देवल: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप सुनना नहीं चाहते। माननीय सदस्‍य, आप अपना स्‍थान ग्रहण करें।

श्री संयम लोढ़ा: ***

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया: आप जोर से बोलकर मुझे मजबूर करने की कोशिश मत करो, मुझ पर कोई असर नहीं होता जोर से बोलने का। मैं जो कुछ करूंगा नियम से करूंगा और नियम के आधार पर जो चीज मुझे मिलेगी उसकी कार्यवाही तो मैं कर सकता हूं, लेकिन आप चाहेंगे ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा: ***

श्री सी.डी. देवल: ***

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया: दबाव में नहीं होगा।

श्री संयम लोढ़ा: ***

श्री सी.डी. देवल: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: ऐसी कोई बात नहीं है। माननीय सदस्‍य ...(व्‍यवधान)...

 

श्री रामनारायण चौधरी: माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने चिट के ऊपर यह मामला उठाया, सरकार उत्‍तर दे रही है, मैं आपको धन्‍यवाद करता हूं और हम आपका उत्‍तर सुनेंगे।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया: उपाध्‍यक्ष महोदय, अगर मेरी बात में कोई कमी रहती है तो आप मुझे बताएं उस कमी के बारे में हम फिर विचार करेंगे। वहां के जिला कलक्‍टर ने जो सूचना भेजी है वह आपके सामने रख रहा हूं, उसके बाद आपको कोई कमी लगती है, इसमें कोई चीज है तो उसको बताएं। यह है, ‘’रामगढ़ तनोट मार्ग पर स्थित गुमटीनुमा मंदिर को हटाये जाने के संबंध में। उपरोक्‍त प्रकरण में सम्‍पूर्ण स्थिति से मेरे द्वारा आपको दूरभाष पर अवगत कराया जा चुका है। मामले का तथ्‍यात्‍मक विवरण निम्‍न प्रकार है। जैसलमेर से रामगढ़-तनोट जाने वाली सड़क ग्रेप की है, यह मिलट्री की है और इसकी मेंटीनेंस वगैरह सारा मिलैट्री करती है। इसकी मेंटीनेंस भी ग्रेप द्वारा की जाती है। रामगढ़-तनोट सड़क मार्ग पर ग्रेप की सड़क के किनारे 6 फीट की दूरी पर चार बाई चार का गुमटीनुमा मंदिर बना हुआ है। यह सड़क मार्ग से एकदम किनारे पर सड़क बाउण्‍ड्री पर स्थित होने के कारण वाहनों के आवागमन में होने वाली परेशानियों तथा संभावित दुर्घटनाओं

mlb/akt/1n/1300/10.3.2006

     के बचाव के लिए ग्रेप द्वारा जिला प्रशासन को इसे हटाने के लिए अनुरोध किया गया। ग्रेप का जो पत्र है वह मेरे पास इसमें संलग्‍न है। ग्रेप ने एक पत्र 30 तारीख को कलक्‍टर को लिखा- “The road leading from Jaisalmer-Ramgarh-Tanot is maintained by …. (GREP) for GS purpose.  All armed/civil VIPs are traveling on this road to visit famous Tanot Mata temple and also border area.

    “In recent past, it is observed that the encroachment on all roads are increasing by civilians causing discomfort, visibility problems for road users.

    “On Jaisalmer-Ramgarh-Tanot road approximate at km 81.00 two nos. structures so called temple and water tank have been made just adjacent to existing road, which is within our existing road boundary.  Now it is requested to evacuate/demolish the said structure at the earliest please.”

   यह वहां के जो मिस्‍टर एच.मूर्ति हैं, वहां आफिसर कमाण्डिंग हैं उन्‍होंने 30 जनवरी के दिन एक पत्र लिखा और उस पत्र को ध्‍यान में रख्‍ंते हुए उन्‍होंने 14 फरवरी के दिन एक नायब तहसीलदार को भेजा। उसने इस स्‍ट्रक्‍चर को हटाया। इसमें जो कलक्‍टर की तरफ से आया उसमें कहा कि इसमें न कोई नियमित पूजा होती है, न कुछ और होता है। केवल एक स्‍ट्रक्‍चर जरूर बना हुआ था वो रोड की 6-7 फीट की दूरी पर था वह आब्‍स्‍टेकल था और जो बार्डर है जो इसको मेंटेन करती है फोर्स की, उन्‍होंने अपनी तरफ से लिखा कि यह आब्‍स्‍टेकल के रूप में आता है इसे आप हटाएं। उसके तहत उन्‍होंने इसको हटाया। उसके बाद भी अगर हमें लगता है कि यहां सेवा पूजा होती थी, यह किसी प्रकार का आब्‍स्‍टेकल में नहीं था उसके बाद भी इसे हटाया और बिना किसी वेलीड कारण से हटाया तो एक बार हम फिर दिखा देंगे, अगर किसी ने गलती की है तो उस गलती के बारे में विचार करेंगे। ऐसा तो है नहीं हम कुछ नहीं कर सकते। ...(व्‍यवधान)...

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, प्रतिपक्ष के नेता ने जो अभी कहा है। ...(व्‍यवधान)...

श्री बृजकिशोर शर्मा: ***

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री बृजकिशोर शर्मा: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: ये कुछ भी होने वाला नहीं है, पूरा डिटेल स्‍टेटमेंट आ गया। ...(व्‍यवधान)...

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया: किसी का भी हो तो आप मुझे भेज दीजिए। ...(व्‍यवधान)...

श्री बृजकिशोर शर्मा: ***

श्री रामनारायण चौधरी: इनका खुद का ही प्रश्‍न है, यह कहा है कि फिर भी आप चाहो तो इसको दिखवा लें। डिवीजनल कमीशनर के जांच करवा लीजिए।

श्री उपाध्‍यक्ष: करवा लेंगे।

श्री रामनारायण चौधरी: डिवीजनल कमीशनर की रिपोर्ट ले लीजिए कि स्थिति क्‍या है वास्‍तविक।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया: मैं आपकी बात से सहमत हूं, आपके पास जो भी इसके बारे में जानकारी हो, जिसको भी.. (व्‍यवधान)....

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री गुलाबचन्‍द कटारिया: जो जोधपुर के हैं उनको भेजकर के आपने जो बातें रखी उनको भी दे देंगे उनको जाकर के वह देखकर के रिपोर्ट दे देंगे।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री रामनारायण चौधरी: माननीय सदस्‍य ने जो कुछ कहा है वह ऑन रिकार्ड है, ये लेकर, वह भी उनके साथ भेज दीजिए।

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: जांच हो जाएगी, श्री श्री मदन राठौड़, ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री गुलाबचन्‍द कटारिया: अगर कोई आपके पास में तथ्‍य हों तो दे दें। ...(व्‍यवधान)...

श्री उपाध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो रहा है।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर: ***

श्री सी.डी. देवल (रायपुर):***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, जांच हो जाएगी।

श्री रामनारायण चौधरी: यह बात तो तय है, निश्चित है, माननीय सदस्‍य, आपका उनके पास में है, उनके क्षेत्र में है वह कहते हैं कि मन्दिर था और एक मेघवाल उसकी पूजा-अर्चना करता था कभी कभी तो यह था कि मन्दिर तो वहां था।

श्री उपाध्‍यक्ष: जांच का विषय है।

श्री रामनारायण चौधरी: अब सवाल यह उठता है कि जांच का विषय है, आप कमीशनर से रिपोर्ट ले लीजिए, 7 दिन के भीतर और जो यह प्रोसीडिंग्‍स में आया है, माननीय सदस्‍य ने कहा है वह भी भेजिए और हमारे उन्‍होंने उठाया है वह भी भेजिए, सब की प्रोसीडिंग्‍स भेजकर के उनकी रिपोर्ट ले लीजिए और उसके बाद में हम आपसे जानकारी कर लेंगे, क्‍या स्थिति है।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री मदन राठौड़ ।

श्री गुलाबचन्‍द कटारिया: मैंने प्रतिपक्ष के नेता, आप सब की भावना, मेरी भावना के साथ जुड़ी हुई है, जो भी तथ्‍य आपने रखे हैं मैं उनको करके इसीलिए मैंने कहा है संभागीय आयुक्‍त को देते हैं कि वास्‍तविक स्थिति की वह जांच करके हमारे सुपुर्द करें इससे अधिक और क्‍या चाहिए।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री गुलाबचन्‍द कटारिया: दिन का कोई टाइम नहीं है, इसमें क्‍या है दो दिन या तीन दिन ...(व्‍यवधान)...

डा. बुलाकीदास कल्‍ला: ***

श्री सी.डी. देवल (रायपुर): ***

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): ***

श्री उपाध्‍यक्ष:  इसको अतिक्रमण मानकर हटा दिया, अब उनके खिलाफ कार्यवाही होगी तो होगी। ...(व्‍यवधान)...

      (माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय ने अंकित नहीं करने का हाथ से इशारा किया)

डा. बुलाकीदास कल्‍ला: ***

श्री सी.डी. देवल (रायपुर): ***

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ***

श्री बृजकिशोर शर्मा: ***

श्री कन्‍हैया लाल मीणा: ***

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अब इसमें सब कुछ आ चुका है।

श्री सी.डी. देवल (रायपुर):***

डा. बुलाकीदास कल्‍ला: ***

श्री सी.डी. देवल (रायपुर): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप अपना स्‍थान ग्रंहण करें। ...(व्‍यवधान)...

                                               

skp/akt/10.3.06/1310/1o

 

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, कोई आवेश नहीं है।

श्री संयम लोढ़ा: ***

श्री बंशीलाल खटीक: ***

श्री महीपाल सिंह यादव : ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री सुरेन्‍द्र सिंह राठौर: ***

श्री रामनारायण चौधरी: माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, कभी-कभी मान्‍यवर ऐसे क्षण आते हैं कि आदमी उत्‍तेजना में आ जाता है। सब चल रहा था और चलते-चलते गृह मंत्री जी आप थोड़े से उत्‍तेजित हो गये। उत्तेजित होने का कारण नहीं था, बात सब तय हो गई थी, 7 दिन नहीं तो 10 दिन में आप रिपोर्ट मंगवा लें । (व्‍यवधान) मान रहे हैं, सब मान रहे हैं।

श्री महावीर प्रसाद जैन: ***

श्री अमराराम (धोद): ***

श्री महीपाल सिंह यादव: ***

श्री रामनारायण चौधरी: आप बात सुनिये। आप इस तरह से भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। बात मानेंगे तो ये ही मानेंगे, नहीं मानेंगे तो भी ये ही मानेंगे और ये नहीं मानेंगे तो इनकी बात मैं मान जाऊंगा, मेरी बात ये मान जाएंगे लेकिन आप बीच में मत पड़ो। (व्‍यवधान) गृह मंत्री जी, 7 दिन में आप रिपोर्ट मंगवा लो और हमें अप्राइज कर दो। यह मंदिर का मामला है, चारों तरफ से है, आपकी पार्टी के माननीय सदस्‍य भी कह रहे हैं कि मंदिर टूटा है। इसमें दिक्‍कत क्‍या है ? आप हमारे से क्‍यों कसरत कराते हो ? हम बाहर जाएंगे फिर वापस आयेंगे, आपको इस कसरत में मजा आता है तो हम तो वह भी कर देंगे।

श्री उपाध्‍यक्ष : माननीय नेता, प्रतिपक्ष, अतिक्रमण मानकर अतिक्रमण हटा दिया गया है, अब 7 दिन की या 10 दिन की बात की ऐसी क्‍या अर्जेन्‍सी रह गई ? कोई अतिक्रमण हटाया जा रहा हो, अर्जेन्‍सी क्‍या है ? (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: सब जांच हो जाएगी। (व्‍यवधान) सात दिन लगे, 10 दिन लगे, यह गृह मंत्री जी के विवेक पर छोड़ दीजिये आप।

श्री संयम लोढ़ा: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री मदन राठौड़।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मुझे बहुत खुशी है कि...

श्री उपाध्‍यक्ष: कर दिया, अब आप अपने विषय पर आ जाओ, वह छोड़ो आप।

श्री मदन राठौड़: इनमें मंदिर का भाव जाग्रत तो हुआ।

 

यातायात कानून की कतिपय विसं‍गतियां

उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं अभी अपने क्षेत्र से जयपुर आ रहा था तो रास्‍ते में ड्राइवर कार बहुत तेजी से चला रहा था, 100-120 की स्‍पीड से चला रहा था। ज्‍यों ही जयपुर निकट आया, शहर की सीमा में आया और ड्राइवर ने गाड़ी साइड में रोककर के बैल्‍ट लगाया और पास में बैठे हुए व्‍यक्ति से भी कहा कि आप भी बैल्‍ट लगा लें। मैंने जब उससे पूछा कि जब रास्‍ते में तेज स्‍पीड से चला रहा था तब तो बैल्‍ट नहीं लगाया और शहर में आने के बाद में बैल्‍ट लगाना तो बोला कि पुलिस वाले पकड़ लेते हैं, तंग करते हैं। तो जब नेशनल हाईवे पर तेज स्‍पीड से गाड़ी चलती है, वहां पर कोई चैकिंग करने वाला नहीं है और शहर में जहां पर स्‍पीड 20-30 से ज्‍यादा कभी नहीं होती क्‍योंकि शहर भीड़-भाड़ वाला एरिया है और वहां पर बैल्‍ट लगाना और वहां पुलिस बराबर रोककर के, कई बार तो पैनल्‍टी इम्‍पोज भी कर देती है और कई बार कुछ ले-देकर के यों ही छोड़ देती है तो एक तो यह कि यह बात ठीक नहीं है। नेशनल हाईवे पर जहां स्‍पीड तेज होती है वहां पर चैकिंग करके ड्राइवरों को पाबंद किया जाना चाहिए कि बड़े वाहनों में सभी लोगों को बैल्‍ट लगाना आवश्‍यक रहे।

      ठीक इसी प्रकार से मैं हैलमेट के लिए निवेदन करना चाहूंगा कि बड़ी सड़कों पर, नेशनल हाईवे पर लोग हैलमेट नहीं लगाते हैं, बिना हैलमेट के घूमते हैं, तेज गाड़ी चलाते हैं जिससे दुर्घटनाएं होती हैं और शहर में आवश्‍यक कर दिया। कोई व्‍यक्ति पार्टी में जाता है, शादी की पार्टी में जाता है तो अब वह हैलमेट हाथ में रखेगा या प्‍लेट हाथ में रखेगा ? कोई पत्रकार जाएगा तो वह डायरी रखेगा या हैलमेट हाथ में रखेगा ? यहां पर लूट मचाने का जो यह प्रयास चल रहा है, मेरा आपके माध्‍यम से यातायात मंत्री जी से यह आग्रह है कि शहर में यह पाबंदी हटनी चाहिए और नेशनल हाईवे पर यह पाबंदी लागू की जानी चाहिए। वहां पर चैकिंग निश्चित रूप से होनी चाहिए, यह मेरा आपके माध्‍यम से निवेदन है।

      उपाध्‍यक्ष महोदय, आज भी वही कानून चल रहे हैं जो अंग्रेजों के जमाने में कानून चलते थे। अंग्रेजों के जमाने में उनके पास में गाडि़यां थीं, हमारे हिन्‍दुस्‍तान के नागरिकों के पास में गाडि़यां नहीं थीं। वो लोग अंधाधुंध गाड़ी चलाते थे और हिन्‍दुस्‍तान के नागरिक टक्‍कर खाकर के मारे जाते थे और अंग्रेजों को लाभ पहुंचाने के लिए अंग्रेजों ने एक कानून बनाया था धारा 304-ए, जिसके माध्‍यम से किसी कार के आगे कोई व्‍यक्ति आ जाए और कार की टक्‍कर से वह व्‍यक्ति मर भी जाए तो ड्राइवर को केवल 304-ए में थाने में गिरफ्तार करके जमानत लेकर के छोड़ दिया जाता है, उसकी गिरफ्तारी करके कोर्ट में पेश करने की भी पाबंदी नहीं है। उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से यह निवेदन करना चाहूंगा कि या तो अपने कानून में परिवर्तन कर सकें तो ठीक, नहीं तो केन्‍द्र सरकार से भी यह आग्रह किया जाना चाहिए कि इस कानून में परिवर्तन किया जाए। धारा 304-ए जिसको केवल लापरवाही का आधार बनाकर के ड्राइवर को तुरंत छोड़ दिया जाता है, एक व्यक्ति‍की तो जान कार से टक्‍कर खाकर के चली गई लेकिन ड्राइवर को केवल थाने में ही केवल जमानत देकर के छोड़ दिया जाए, यह ठीक नहीं है। इससे ड्राइवर निश्चित रूप से अंधाधुंध गाडि़यां चलाते हैं क्‍योंकि वो इस बात को जानते हैं कि मेरी तो थाने में तुरन्‍त जमानत हो जाएगी। इसका दुरुपयोग भी होता है उपाध्‍यक्ष महोदय। कई बार सिरोही के माननीय सदस्‍य को जंच जाए कि यह बहुत विरोध करता है, एतराज करता है और कहीं बीच में आ जाए और कार चलाते हुए मुझे टक्‍कर भी मार दे तो इनकी तो थाने में तुरन्‍त जमानत हो जाएगी और मैं तो जीवन से जाऊंगा। कृपा करके इस कानून में थोड़ा सा परिवर्तन करवा सकें तो यह ठीक रहेगा। यही मैं आपके माध्‍यम से सरकार को निवेदन करना चाहूंगा।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री लक्ष्‍मीनारायण बैरवा।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: वह तो सब सही है, यह सुमेरपुर से आने वाले माननीय सदस्‍य ने यह कहा है कि ले-देकर के छोड़ देते हैं, वह ले-देकर का तो ध्‍यान रखना आप। (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: वह समझ गये आपकी बात।

श्री मदन राठौड़: ... हर मौक़े पर ऐसा कोई अवसर नहीं चूकते कि कभी भी मैं बोलूंगा और ये नहीं बोलें, यह कभी होता ही नहीं है। आज तो कई शेर-शायरी भी लेकर के आये हैं। मुझे पहले ही कह दिया कि कुछ बोले तो मैं शेर सुना दूंगा। अब पता नहीं ये कितने शेर लेकर के आये हैं। कोई वाहन लेकर के मत आ जाना, मुझे खतरा वाहनों से है, शेरों से नहीं है।

श्री रामनारायण चौधरी: डिबेट के स्‍तर को गिरने नहीं दें। माननीय सदस्‍य बोल रहे हैं ये-ये। यह कोई तरीका होता है ? कौन है ये ? यह आपके घर की बात नहीं है जो ये-ये कर रहे हो। इधर माननीय सदस्‍य हैं, उधर माननीय सदस्‍य है। माननीय सदस्‍य कहकर बोला जाना चाहिए।

श्री मदन राठौड़: जब माननीय नेता प्रतिपक्ष किसी की शादी की बात कर सकते हैं, किसी के जन्‍म स्‍थान और उसकी बात कर सकते हैं तो मैंने तो केवल यह कहा, ये माननीय सदस्‍य, अब ये माननीय सदस्‍य तो हैं ही।

श्री उपाध्‍यक्ष: हां, ठीक है।

श्री मदन राठौड़: ये माननीय सदस्‍य में इनको एतराज करना ही नहीं चाहिए था। ये माननीय नेता प्रतिपक्ष वैल में आ गये। 

श्री उपाध्‍यक्ष: वे आपस में सम्‍मान की बात कर रहे हैं। श्री लक्ष्‍मीनारायण बैरवा।

फागी में अकाल राहत कार्यों व श्रमिक संख्‍या में वृद्धि

श्री लक्ष्‍मीनारायण बैरवा (फागी): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं मेरे विधान सभा क्षेत्र फागी के अकाल राहत कार्यों के लिए बताना चाहूंगा कि मेरे विधान सभा क्षेत्र में दो तहसील आती हैं एक फागी और एक चाकसू। फागी में 172 गांव हैं उनमें 75 से 100 प्रतिशत तक का खराबा खाली 11 गांवों में बताया गया है, 50 से 74 प्रतिशत 132 गांवों में और 50 प्रतिशत से कम 29 गांवों में बताया गया है। इस वक्‍त जो अकाल राहत कार्य चल रहे हैं वो खाली 54 कार्य स्‍वीकृत हुए और उनमें से भी खाली 15 कार्य चालू हैं जिनमें 257 व्‍यक्ति कार्य पर लगे हुए हैं। मेरे क्षेत्र में अकाल पड़ा हुआ है....

Vkj/akt/1320/1p

     इसमें मैं माननीय मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहूंगा कि यहां पर श्रमिकों की संख्‍या बढ़ाई जाये, अकाल राहत कार्य और खोले जायें। अभी खाली पक्‍के राहत कार्य खोलने की स्‍वीकृति जारी की जा रही है। मैं चाहता हूं कि कच्‍चे कामों के भी इसमें कार्य खोले जायें जैसे कि नाड़ी और तालाब की खुदाई या मेड़बन्‍दी के कार्य है, ऐसे किये जायें। साथ ही मैं यह भी कहना चाहूंगा कि खरीफ की फसल को देखकर अकाल राहत कार्य खोले जाते हैं और माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं चाहता हूं कि अब तो रबी की फसल भी इस तरह की होने लग गई है जिसमें ज्‍यादा से ज्‍यादा खराबा होने लग गया। न तो कुओं में पानी है और न ही कोई बारिश होती है। पहले तो मावठ होती थी जिससे फायदा मिल जाता था पर अब तो ओलावृष्टि और शीतलहर आती है जिससे कि सारे किसान इसी से बहुत दु:खी हैं। मैं चाहता हूं कि खरीफ की फसल के साथ-साथ रबी की फसल को भी 7-डी के अन्‍दर कलक्‍टर्स से राज्‍य सरकार को रिपोर्ट मंगवाकर इसके आधार पर भी अकाल राहत कार्य खोले जाने चाहिए। साथ ही मैं यह भी कहना चाहूंगा कि आज गांवों से पलायन शुरू हो गया है, जहां अकाल राहत कार्य नहीं चल रहे हैं वहां की जनता गांव छोड़-छोड़कर जा रही है। आपने अभी यो अक्षय कलेवा योजना चलाई है, मैं चाहता हूं कि अक्षय कलेवा की योजना गांवों में भी चलाई जाये जिससे लोग-बाग़ अपना पेट भर सके और गांवों से पलायन नहीं कर सके, यह मेरा आपसे निवेदन है। साथ ही मैं यह कहना चाहूंगा कि अभी गत दिनों में चार तारीख को मेरे क्षेत्र फागी और चाकसू में ओलावृष्टि भी हुई है उसमें ग्राम मदनपुरा, गोकुलपुरा, खरूंज, सांवलिया और किशनपुरा में 70 से 90 प्रतिशत तक के बीच में खराबा हुआ है। इनको भी नियमों के आधार पर इन किसानों को ज्‍यादा से ज्‍यादा मुआवजा दिलाया जाये। साथ ही मैं यह कहना चाहूंगा कि जो भी व्‍यक्ति इन कार्यों में अनियमितता करता है, उनके खिलाफ भी कार्यवाही की जाये, इतना ही मैं निवेदन करना चाहता हूं कि मेरे क्षेत्र में अकाल राहत कार्य ज्‍यादा से ज्‍यादा खोले जायें जिससे लोग-बाग़ पलायन नहीं करें।

श्री हरिमोहन शर्मा: उपाध्‍यक्ष महोदय, पाइंट आफ इन्‍फोर्मेशन। 

श्री कन्‍हैया लाल मीणा: माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से यह निवेदन करना चाहूंगा कि मेरा भी क्षेत्र इसी में आता है। मैं यह निवेदन करना चाहूंगा कि चाकसू क्षेत्र है, दूदू और चाकसू में कोई फर्क नहीं है। दूदू में अकाल राहत कार्य खुले हुए हैं, फागी में खुले हुए हैं, दूदे से ज्‍यादा बदतर स्थिति चाकसू में है। मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहूंगा कि उसको भी अकालग्रस्‍त घोषित किया जाये चाकसू तहसील को। (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा: माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, पाइंट आफ इन्‍फोर्मेशन। आज बहुत गम्‍भीर स्थिति राजस्‍थान में है। अजमेर, झालावाड़, बून्‍दी और अन्‍य स्‍थानों पर बार कौंसिल आफ इण्डिया के नाम से एक समाचार प्रकाशित हुआ है और उस समाचार के माध्‍यम से बार कौंसिल आफ इण्डिया ने राजस्‍थान सरकार के बून्‍दी, झालावाड़, सीकर, सिरोही और श्रीगंगानगर और 11 प्राइवेट कालेज, अजमेर संत परमहंस कालेज, अजमेर लॉ कालेज और नगेन्‍द्र कालेज, बांसवाड़ा, इस प्रकार अनेक जो प्राइवेट कालेज हैं, 11 जो प्राइवेट कालेज हैं, इनके सम्‍बन्ध में यह समाचार प्रकाशित हुआ है और उस समाचार के माध्‍यम से आन्‍दोलन चालू हो गया है, अधिकारियों के सामने धरने और प्रदर्शन हो गये कि बार कौंसिल आफ इण्डिया ने इन लॉ कालेजों की मान्‍यता समाप्‍त कर दी है। मैं माननीय शिक्षा मंत्रीजी से अनुरोध करूंगा कि इस तरह के जो समाचार चल रहे हैं और उससे जो जन आन्‍दोलन हो रहा है....

श्री बंशीलाल खटीक: माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरी भी पर्ची है।

श्री हरिमोहन शर्मा: ...वहां मौजूदा क्‍या स्थिति है, इस बात का जवाब बताने का कष्‍ट करें।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य। श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे।

श्री बंशीलाल खटीक: माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरी भी पर्ची है। मेरी पर्ची भी है। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, खुली है मेरी पर्ची।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य।

श्री श्रवण कुमार: माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आन ए पाइंट आफ इन्‍फोर्मेशन। पाइंट आफ इन्‍फोर्मेशन है। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे विनती करता हूं कि हमारे सूरजगढ़ से एक संघ कल खाटूश्‍यामजी जा रहा था। एक ट्रक वाले ने टक्‍कर मारकर एक व्‍यक्ति को मार दिया और उसकी.....

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, इस पर बात पूरी हो चुकी है।

श्री श्रवण कुमार: आप मेरी पूरी बात तो सुन लें। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, बहुत गम्‍भीर मामला है। 25,000 आदमी जा रहे थे...

श्री उपाध्‍यक्ष: उस पर पहले ही निर्णय हो चुका है।

श्री श्रवण कुमार: माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, कहां निर्णय हो गया, क्‍या निर्णय हो गया? माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, वह आदमी मर गया, पुलिस ने उन लोगों को आकर पीटा और कई लोगों को घायल कर दिया। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, कितना गम्‍भीर मामला है। मैं कोई मंदिर जाने की बात नहीं कर रहा हूं, मैं तो केवल इतना कह रहा हूं कि मंदिर में पूजा करने वाले को, अर्चना करने वाले लोगों को पीटा है।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य। आपकी सूचना आ गई है। आसन से व्‍यवस्‍था दे दी गई है। माननीय सदस्‍य। अंकित नहीं होगा। (व्‍यवधान)

श्री श्रवण कुमार: ***

श्री बंशीलाल खटीक: ***

श्री श्रवण कुमार : ***

श्री रणवी‍र सिंह गुढ़ा: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: स्‍थान ग्रहण कीजिये। पर्ची नहीं है आपकी। (व्‍यवधान)

श्री श्रवण कुमार: ***

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य। कोई भी अंकित नहीं होगा। आपका कोई अंकित नहीं हो रहा है।

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा: ***

श्री श्रवण कुमार: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। आप किस बात पर बोल रहे हैं माननीय सदस्‍य? आप कहना क्‍या चाहते हैं माननीय सदस्‍य? ऐसे कोई अंकित नहीं हो रहा है माननीय सदस्‍य।

श्री श्रवण कुमार: ***

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: आप अपना स्‍थान ग्रहण कीजिये। बिना आसन की अनुमति के बोलने से अंकित नहीं होता है। अंकित नहीं करें आप। आप दूसरे तरीके से आइये।

श्री सी.डी.देवल: ***

श्री अमराराम(धोद): ***

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा: ***

श्री उपाध्‍यक्ष: गृह मंत्रीजी से आप मिल लीजिये। कोई बात हो तो आप गृह मंत्रीजी को लिखकर दीजिये माननीय सदस्‍य।

श्रीमती राजकुमारी शर्मा(सीकर): आप बैठिये तो सही माननीय सदस्‍यजी। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, कल राष्‍ट्रीय राजमार्ग पर 16 साल का एक लड़का जिसको ट्रक ने टक्‍कर मार दी और वहीं वह ढेर हो गया और उसके माता-पिता का यह निवेदन था कि ट्रक चालक को हमारे को सौंप दो और उन्‍होंने जब ट्रक चालक को नहीं सौंपा, थाने पर बैठाकर रखा तब उत्‍तेजित भीड़ ने वहां एक जो ट्रेफिक पुलिस थी उसको पीट दिया। उसके बाद में वहां थाने में आग लगा दी, फिर पुलिस वालों को गुस्‍सा आया तो उन्‍होंने उनको पीट दिया इसलिए आपके माध्‍यम से मैं यह निवेदन करना चाहूंगी गृह मंत्रीजी से कि वहां की पूर्णतया जांच करवाई जाये। उस बच्‍चे की मौत हुई है वहां, हमें बहुत दु:ख हुआ है लेकिन जो उनके साथ में थे, उनको भी तो दु:ख होता है। एक तो वे पैदल चलते हैं, यह राष्‍ट्रीय राजमार्ग है। मेरा आपसे निवेदन है, आप गृह मंत्रीजी यह बतायें कि या तो भक्‍तों का रास्‍ता दूसरी जगह कहीं से निकाल दें तो ज्‍यादा बढि़या रहेगा या यह जो मेला होता है, 15 दिन का मेला होता है, उसमें इस तरह की व्‍यवस्‍था कर दी जाये कि भक्‍तों का अहित न हो। 16 वर्ष का बच्‍चा मरा है, उनके घर का दीपक बुझा है, उन्‍हें तो दु:ख होगा ही होगा लेकिन जो भीड़ थी, वहां पर पुलिस की कमी थी, जो चौकी लगी थी उन्‍होंने उसको भी जला दिया। मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहती हूं कि उसकी कार्यवाही करके दोषी को सज़ा दी जाये। धन्‍यवाद। (व्‍यवधान)

श्री अमराराम(धोद): सीकर से आने वाली माननीय सदस्‍या कह रही हैं, कोई उन्‍होंने उस तरह से नहीं किया और वह इतनी असक्षम हैं कि राजमार्ग तीन घंटे तक बन्‍द रहा।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय गृह मंत्रीजी। माननीय गृह मंत्रीजी को सुनें आप।

 

Jkj/akt/1330/1q/10032006

 

श्री गुलाबचन्‍द कटारिया (गृह मंत्री):  उपाध्‍यक्ष महोदय, घटना बहुत दुखद थी लेकिन मैंने सोचा कि किसी न किसी माध्‍यम से आप आओगे तो मैं उसका पूरा जवाब देने की स्थिति में होऊं लेकिन एट रेण्‍डम आपने इस विषय को उठाया, यह घटना कल की थी, सारे अखबारों में यह बात कवर हुई, आप इसको किसी न किसी रूप में अगर रखते तो मैं उसके सारे फेक्‍ट्स एण्‍ड फीगर्स लेकर आता, लेकिन जो कुछ भी मेरी जानकारी है, घटना घटी, एक बच्‍चे की डेथ हुई, जब जैसा कहा कि उस ड्राईवर को हमें सुपुर्द कर दो उस भीड़ को, यह पुलिस का धर्म नहीं है कि उस ड्राईवर को उस भीड़ को सुपुर्द कर दे और उससे वह उत्‍तेजित होकर के उन्‍होंने पथराव किया।  मैं तो यह कह सकता हूं कि मुझे तो इस बात का है कि पुलिस बहुत कम संख्‍या में थी इसलिए पुलिस बुरी तरह से पिटी वहां पर, उसके कपड़े फाड़े हैं।  फिर भी, मैं सोचता हूं क्‍योंकि आखिर जिसका भी बच्‍चा मरता है, उसका क्रोधित होना, उसको दुःख होना स्‍वाभाविक है लेकिन आपने एकदम एट रेण्‍डम विषय खड़ा किया, जबकि कल की घटना थी, आप किसी भी माध्‍यम से अगर इस विषय को रखते तो मैं आपको पूरा जवाब देने की स्थिति में रहता।  अगर आप चाहेंगे तो कल मैं आपको, आप जवाब चाहेंगे तो मैं पूरा जवाब दूंगा पर मैंने जो कुछ भी देखा उसमें उनका उत्‍तेजित होना और उनका यह आग्रह करना कि इस ड्राईवर को हमें सुपुर्द कर दें, ड्राईवर को सुपुर्द करना पुलिस का धर्म नहीं है, उसे बचाना भी हमारा धर्म है जिसके लिए हमारी पुलिस पिटी कम संख्‍या में होने के कारण से, फिर भी हमने संयम रखते हुए उसको जितना उतनी भीड़ को कंट्रोल करने में जो कुछ भी संभव हो सका, किया, उसके बाद भी आप चाहेंगे कि अगर हमारा कहीं दोष है, गलती है तो आप चर्चा करा लें, मैं आपको हर विषय पर जो कुछ भी हुआ है, वह आपके सामने रखने को तैयार हूं। ऐसी बात नहीं है।

श्री श्रवण कुमार(पिलानी):  माननीय गृह मंत्रीजी, यह बात सही है कि उसको नहीं दिया जा सकता, लेकिन ढाई घंटे तक प्रशासन सुस्‍त रहा, आया ही नहीं वहां, ढाई घंटे तक, उसके बाद जब रास्‍ता जाम हो गया, पूरा हाहाकार मच गया, दस किलोमीटर लम्‍बी लाईन लग गयी, उसके बाद प्रशासन आया।

श्री उपाध्‍यक्ष: ठीक है।  श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे, खनिज मंत्री राजस्‍थान स्‍टेट माइन्‍स एण्‍ड मिनरल्‍स लिमिटेड का वार्षिक प्रतिवेदन सदन की मेज पर रखेंगे।

सदन की मेज पर रखे गये पत्र

राजस्‍थान स्‍टेट माइंस एंड मिनरल्‍स का 58वां वार्षिक प्रतिवेदन

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे(खनिज मंत्री):  माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से कम्‍पनी अधिनियम, 1956 की धारा 619(ए) के अन्‍तर्गत राजस्‍थान स्‍टेट माइन्‍स एण्‍ड मिनरल्‍स लिमिटेड का 58वां वार्षिक प्रतिवेदन 2004-05 सदन की मेज पर रखता हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष:  श्री वीरेन्‍द्र मीणा, वित्‍त राज्‍य मंत्री ।

नियंत्रक महालेखा परीक्षक के प्रतिवेदन (राजस्‍व प्राप्तियां व वाणिज्यिक) वर्ष 2005

तृतीय राज्‍य वित्‍त आयोग का अंतिम प्रतिवेदनराज्‍य वित्‍त आयोग के अन्‍तरिम प्रतिवेदन पर की गयी कार्यवाही के विवरण का ज्ञापन

 

श्री वीरेन्‍द्र मीणा(वित्‍त राज्‍य मंत्री):  माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से वित्‍त एवं विनियोग लेखे वर्ष 2004-05, भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक का 31 मार्च, 2005 को समाप्‍त वर्ष के लिए प्रतिवेदन(राजस्‍व प्राप्तियां), भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक का 31 मार्च,2005 को समाप्‍त वर्ष के लिए प्रतिवेदन(वाणिज्यिक) तथा तृतीय राज्‍य वित्‍त आयोग का अंतिम प्रतिवेदन एवं राज्‍य वित्‍त आयोग के अंतरिम प्रतिवेदन पर की गई कार्यवाही के विवरण का ज्ञापन सदन की मेज पर रखता हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष:  श्री रिछपाल सिंह मिर्धा, याचिका उपस्‍थापित करेंगे। (अनुपस्थित) 

   श्री मोहन लाल गुप्‍ता।  सामान्‍य वाद-विवाद।

आय व्‍ययक पर सामान्‍य वाद-विवाद

श्री मोहन लाल गुप्‍ता (किशनपोल):  माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान सरकार के बजट के समर्थन में मैं यहां खड़ा हुआ हूं और हमारे वित्‍त मंत्री और राजस्‍थान की यशस्‍वी मुख्‍य मंत्री ने जो बजट 2006-07 का रखा है, वह वास्‍तव में सराहनीय है, मैं उसका स्‍वागत करता हूं।  यह बजट महिलाओं को शक्ति प्रदान करने वाला है, नौजवानों को रोजगार देने वाला है, उद्यमियों को प्रोत्‍साहित करने वाला है, किसानों की आंखों में चमक लाने वाला है, व्‍यापारियों को विभिन्‍न छूटों के साथ वेट को लाने वाला है, अनुसूचित जाति, जनजाति के वर्गों में उत्‍साह प्रकट करने वाला है, गरीबों, रिक्‍शाचालकों और मजदूरों के लिए अक्षय कलेवा के रूप में पाँच रूपये में गर्म खाना देने वाला है, छात्र और छात्राओं को स्‍कूल में जाने के लिए प्रोत्‍साहित करने वाला है, वृध्‍दों को पेंशन में बढ़ोतरी के रूप में उनकी आंखों में उत्‍साह बढ़ाने वाला है और जवानों को रोजगार देने वाला है, नौजवानों को और साथ ही साथ.(व्‍यवधान)कृपया डिस्‍टर्ब न करें।

श्री अमरा राम(धोद):  गुप्‍ताजी, आपको तो नहीं है न देने वाला यह।

श्री हेमाराम चौधरी:  आपको क्‍या देने वाला है, यह भी तो बताओ।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता:  और जिनके पास मकान है, जो किश्‍तें चुका रहे हैं, उनके लिए(व्‍यवधान) आपकी कृपा हो जायेगी तो।  उनके लिए इन्‍टरेस्‍ट रेट कम करने वाला है, उनके ऊपर भार कम करने वाला है।

श्री हेमाराम चौधरी:  इनकी तो पूरी कृपा है।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता:  मेरे कहने का मतलब यह है कि सर्वस्‍पर्शी, सर्वव्‍यापी बजट है जिसकी हर वर्ग ने प्रशंसा की है। (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष:  माननीय सदस्‍य।

श्री अर्जुन सिंह:  माननीय सदस्‍य, एक बार फिर स्‍पष्‍टीकरण कर दें कि सर्व क्‍या, नाश करने वाला है कि सर्व क्‍या कहना चाह रहे थे, स्‍पष्‍ट कर दें।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता: सभी लोगों को विकास की दिशा देने वाला है।

श्री ज्ञानचन्‍द पारख:  आपका सर्वनाश करने वाला यह बजट है।

श्री हेमाराम चौधरी:  यह सर्वव्‍यापी क्‍या है, सब जगह मिलेगा क्‍या, यह सर्वव्‍यापी क्‍या है?

श्री मोहन लाल गुप्‍ता:  सभी लोगों को विकास की दिशा देने वाला।  कांग्रेस के हमारे काफी सदस्‍य, अब समझौता हो गया हमारे में...

श्री अमरा राम(धोद):  हो गया। पहले झगड़ा था?

श्री मोहन लाल गुप्‍ता:  इसलिए वह खुद आज मेरे को आशीर्वाद देने के लिए बैठे हैं और माननीय प्रतिपक्ष के नेता का भी आशीर्वाद चाहूंगा।

श्री अर्जुन सिंह:  इसका मतलब मंत्री पद पक्‍का।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी:  यह बात कही आपने तो समझौता टूट जायेगा।

श्री मोहन लाल गुप्‍ता:  मैं यह कहना चाहूंगा कि विपक्ष के नेता का आशीर्वाद इस बजट को है लेकिन कांग्रेस के अध्‍यक्षजी ने बजट के बारे में जो कुछ कहा है और पूर्व मुख्‍य मंत्री अशोकजी गहलोत ने जो इसके बारे में कहा है, मैं बताना चाहूंगा।  कल्‍ला साहब ने कहा है, बजट घोषणाओं का पुलिंदा है, इस बजट से गांव, गरीब, किसान और आम आदमी को कुछ नहीं मिला।  गांव को कुछ नहीं मिला, गरीब को कुछ नहीं मिला, आम आदमी को कुछ नहीं मिला।  मैंने यह सारी बातें बताई हैं।  महिलाओं को, बेरोजगारों को, युवाओं को, उद्यमियों को, व्‍यापारियों को सब कुछ मिला है।  बजट में महिलाओं के लिए कोई विशेष घोषणा ही नहीं की गई, झूठ बोल रहे हैं।  सैकण्‍डरी और हायर सैकण्‍डरी स्‍कूल खोलने का प्रावधान नहीं है, राज्‍य सरकार अपने बलबूते पर शिक्षा क्षेत्र में कुछ नया नहीं कर रही है, जो भी प्रावधान किये गये हैं वह केन्‍द्र सरकार की और से सर्वशिक्षा अभियान के तहत स्‍वीकृत राशि में से है।  यह बात कल कांग्रेस के वक्‍ताओं ने भी बोली थी, मैं उस पर विशेष डिटेल से आऊंगा लेकिन जो कल्‍लाजी ने कहा है कि बजट से बेरोजगारी बढ़ेगी और प्रति व्‍यक्ति आय घटेगी, प्रति व्‍यक्ति आय भी बढ़ी है और बेरोजगारी घट रही है, रोजगार मिल रहे हैं इस बजट से।  यह कल्‍लाजी की बात का जवाब है।(व्‍यवधान) माननीय अशोकजी गहलोत, पूर्व मुख्‍य मंत्री आज यहां सदन में नहीं हैं लेकिन उनका एक स्‍टेटमेंट है, आंकड़ों का जाल है बजट, बजट में न तो जनता के किसी वर्ग को राहत दी गई है, न ही राज्‍य के विकास की दिशा दिखती है, सही शब्‍दों में यह बजट, बजट ही नहीं है क्‍योंकि इसमें कहीं भी राज्‍य की मूलभूत समस्‍याओं का समाधान नहीं है, मुख्‍य मंत्री ने आंकड़ों के सहारे से बजट की सुनहरी तस्‍वीर दिखाने की कोशिश की है लेकिन उसमें कहीं भी यह स्‍पष्‍ट नहीं किया कि यह सुनहरी कैसे है।

श्री हेमाराम चौधरी:  प्रति व्‍यक्ति आय कितनी बढ़ी है?

श्री मोहन लाल गुप्‍ता:  मैं बताऊंगा सब।।  वित्‍तीय प्रबंधन को अच्‍छा बताने की इस सरकार की पोल उसके आंकड़ों ने ही खोल दी जिसके हिसाब से पिछले सवा दो वर्षों में राज्‍य पर बीस हजार करोड़ का कर्ज बढ़ गया।  यह माननीय अशोकजी गहलोत का एक स्‍टेटमेंट है।  अब मैं हमारी पार्टी के अध्‍यक्ष माननीय महेशचन्‍दजी शर्मा का जवाब पढ़कर सुनाना चाहता हूं जिसमें उन्‍होंने कहा है कि यह अद्भुत व लोक कल्‍याण का संवेदनशील व संजीदा बजट है, यह महिलाओं को शक्तिवान, नौजवानों को रोजगार देने वाला, उद्यमियों को अवसर मुहैया कराने वाला बजट है, इस दस्‍तावेज का संबंध सिर्फ बजटीय आंकड़ों से नहीं है बल्कि सरकारी पहल व जन सहभागिता का अद्भुत सम्मिश्रण है।  यह पालिटिकल स्‍टेटमेंट इसमें आये हैं, उसी के साथ-साथ.... (व्‍यवधान)

श्री महीपाल यादव:  यह अख़बार की खबर पढ़ रहे हैं....

श्री मोहनलाल गुप्‍ता:  आप भी पढ़ लेते।

श्री महावीर प्रसाद जैन: यह आपके अध्‍यक्षजी के ज्ञान का बखान कर रहे हैं।

                                              

Bhs/akt/1340/10.3.06/2a/1

 

श्री मोहनलाल गुप्‍ता: एक इकॉनॉमिस्‍ट ने लिखा है इस बजट के बारे में मैं कहना चाहूंगा कि जिसमें इस बजट को बहुत सराहनीय बताया है और बीमारू राज्‍य का कलंक मिटाने का संकल्‍प वाला बताया है उसमें कुछ जवाब भी दिये हैं इकॉनॉमिस्‍ट साहब ने। मैं माननीय कल्‍ला जी का ध्‍यान आकर्षित करना चाहूंगा कि जब पिछले वर्ष ...। बीकानेर से आने वाले माननीय सदस्‍य ने...।

डॉ. बुलाकीदास कल्‍ला: एक मिनट विराज जाएं आप।  आप यह कह रहे हैं कि मैंने यह कहा कि एक भी सेकेण्‍डरी स्‍कूल नहीं खोली, एक भी सीनियर सेकेण्‍डरी स्‍कूल नहीं खोली, मैंने क्‍या गलत कहा है पूछ लो शिक्षा मंत्री जी से बजट में है या नहीं।

श्री कालीचरण सर्राफ: आपने यह नहीं कहा कि 16 हजार राजीव गांधी पाठशालाओं को प्राथमिक विद्यालय में क्रमोन्‍नत कर रहे हैं। प्राथमिक शालाओं को मिडिल में किया ये तो बोलो।

डॉ. बुलाकीदास कल्‍ला: वो प्राथमिक विद्यालय ही थे।  आपने इसमें क्‍या किया? ...(व्‍यवधान...

श्री कालीचरण सर्राफ: ...(व्‍यवधान... दोनों बातें बोलिये।

डॉ. बुलाकीदास कल्‍ला: आपने कहा गांव, तो गांव का क्‍या भला किया बता दीजिये ।

श्री मोहनलाल गुप्‍ता: बता रहा हूं आप पूरी बात सुन लें मेरी।

डॉ. बुलाकीदास कल्‍ला: और प्रति व्‍यक्ति आय कैसे बढ़ेगी कितना रोजगार मिलेगा?

श्री मोहनलाल गुप्‍ता: आपका आशीर्वाद चाहता हूं आप पूरी बात सुन लें ।

श्री उपाध्‍यक्ष: बताने दीजिये।

श्री मोहनलाल गुप्‍ता: पिछले वर्ष जब मुख्‍यमंत्री श्रीमती वसुन्‍धरा राजे ने अपना बजट पेश किया था तो विपक्ष के नेता का यह आरोप था कि न तो कर राजस्‍व वसूली के बड़े लक्ष्‍यों को पाया जा सकेगा न ही 8300 करोड़ की वार्षिक योजना के अनुरूप खर्च हो पाएगा । लक्ष्‍यों को प्राप्‍त करना और उसको खर्च करना करना यह आपने कहा था नहीं होगा।  आज के अपने बजट भाषण में श्रीमती वसुंधरा राजे ने न केवल दोनों आशंकाओं को निर्मूल सिद्ध कर दिया बल्कि यह भी जता दिया कि उनके बढि़या वित्‍तीय प्रबंधन पर किसी को शक नहीं रहना चाहिए ।  पिछली बार जब 977 करोड़ रुपये का बजट पेश किया गया तो कहा गया कि सरकार ने कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु साठ वर्ष कर उनको मिलने वाले पेन्‍शन लाभों की मद में करीब सात सौ करोड़ रुपये बचा लिये हैं लेकिन ऐसा इस बार कुछ भी नहीं है पेन्‍शन लाभ कुछ भी नहीं है फिर भी साठ करोड़ रुपये का  यह बजट आया है। यह शायद पहला अवसर होगा कि कर राजस्‍व वसूली लक्ष्‍यों के अनुरूप रही है।  कर राजस्‍व पूरे-पूरे प्राप्‍त हुए हैं कुछ मामलों में ज्‍यादा ही हुए हैं राज्‍य सरकार के आग्रह पर योजना आयोग ने चालू वर्ष की योजना का आकार 8300 करोड़ रुपये रखना माना है यद्यपि अब थोड़ी कटौती हो सकती है लेकिन उसका आकार 8155 करोड़ रुपये के आस पास रहेगा यानी 2000, 2003 की आपकी 4431 करोड़ रुपये की योजना से लगभग दुगुनी।  यह तभी संभव है जब राज्‍य सरकार ने अपने राजस्‍व हितों...।

श्री हेमाराम चौधरी:  यह तो पढ़ा हुआ मान लिया जाए साहब।

श्री मोहनलाल गुप्‍ता: क्‍यों आपकी पोल खुल रही है इसलिए पढ़ा हुआ मान लिया जाए?  आप सुनिये आपने जो आलोचना की थी उसका जवाब है इकॉनॉमिस्‍ट जवाब दे रहा है मैं जवाब नहीं दे रहा हूं।

श्री हेमाराम चौधरी: इकॉनॉमिस्‍ट कहते हैं तो वो कहते हैं क्‍या?

श्री मोहनलाल गुप्‍ता: अन्‍य वित्‍तीय संस्‍थाओं से ऋण लेने की क्षमता बढ़ाई।  कुछ लोग यह कहते हैं कि कर्ज लेकर विकास करना बेमानी है लेकिन अर्थशास्‍त्री कहते हैं कि कर्ज के बिना विकास की गति नहीं बढ़ सकती है, कर्ज भी उसे ही मिलता है जिसकी चुकाने की क्षमता हो जो उसे वापस करने की क्षमता रखता हो और ये क्षमता वसुंधरा राजे ने वित्‍त मंत्री के रूप में पायी है।  मैं समझता हूं कि ये जो जवाब है आपके जवाब का... ।

श्री अर्जुन सिंह: माननीय सदस्‍य, आपने बताया है...।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप बीच में नहीं।  आप अपना स्‍थान ग्रहण कीजिये।  यह ठीक नहीं है।

श्री अर्जुन सिंह:  आपने बताया कि कर्ज वो लेता है जो चुकाने की क्षमता रखता हो तो मैं आपसे निवेदन करता हूं कि माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से कि कब तक चुका देंगे कर्ज सारे राजस्‍थान का यह भी बतायें।

श्री उपाध्‍यक्ष: आप अपना स्‍थान ग्रहण कीजिये माननीय सदस्‍य। अंकित नहीं होगा।  बीच में नहीं।

श्री महावीर प्रसाद जैन:***

श्री अर्जुन लाल: ***

श्री कालीचरण सर्राफ: ***

श्री रामनारायण चौधरी: अशोक जी गहलोत ने और बी.डी. कल्‍ला साहब की जो प्रतिक्रिया आयी है जो टिप्‍पणी आयी है बजट पर उससे आप बौखला गये  क्‍योंकि आपकी सारी बातें इनकी प्रतिक्रिया पर ही बेस्‍ड हैं, बजट पर आयें।

श्री मोहनलाल गुप्‍ता: मैंने उनका जवाब दिया है और मैं यह भी कहना चाहता हूं माननीय विपक्ष के नेता जी मैं आपको भी कहना चाहता हूं कि आपने आदर सहित माननीय मुख्‍यमंत्री जी को आशीर्वाद दे दिया इस बजट के लिए और आपने कोई आलोचना इसकी नहीं की है आपने इसका स्‍वागत भी किया है।  कहीं अख़बारों में आपकी प्रतिक्रिया नहीं आयी इसलिए मैं कहना चाहूंगा आपका आशीर्वाद इस बजट के साथ में है और सदैव बजट के साथ रहेगा क्‍योंकि आप समझदार हैं और आप जानते हैं कि राज्‍य की महिला मुख्‍यमंत्री इस राज्‍य के विकास को एक नयी दिशा देना चाहती है।  माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मुख्‍यमंत्री जी ने एक वीजन दिया इस स्‍टेट को एक नयी दिशा दी है और उसमें एक कहावत को सिद्ध किया है थिंक ग्‍लोबली एंड एक्‍ट लोकली आपके जो विचार, चिन्‍तन, मनन हैं वो निश्चित रूप से वैश्‍वीकरण की ओर होना चाहिए। विश्‍व में जो आर्थिक विकास हो रहा है उसको देखते हुए ..।

डॉ.सी.पी. जोशी: घनश्‍याम जी को ही समझ में नहीं आयी है बाकी सब को समझ तमें आ गयी।

श्री मोहनलाल गुप्‍ता: घनश्‍याम जी की भी बात भी बता रहा हूं आपको अभी बताता हूं।

श्री महावीरप्रसाद जैन: माननीय प्रतिपक्ष के नेता महोदय कह रहे थे कि मैं अपने सदस्‍यों का संरक्षण कर रहा हूं।  हमारे सदस्‍यों के संरक्षण की भी जिम्‍मेदारी आपकी है।

डॉ. बुलाकीदास कल्‍ला: आप इनको नेता बना दो ये संरक्षण कर देंगे।  आप इनको सदन का नेता बना दो ।

श्री महावीरप्रसाद जैन: आप जिस प्रकार का व्‍यवहार करते हो प्रतिपक्ष के नेता के प्रति जिस प्रकार का अपमान करते हो वो बर्दाश्‍त नहीं किया जायेगा।

डॉ. बुलाकीदास कल्‍ला: हमारा पूरा सम्‍मान है आप आग में घी मत डालिये।  पानी में आग मत लगाइये।  आज हम पूरा सम्मान करते हैं आप क्‍या करते हो..।  आप व्‍यवधान मंत्री हो। 

श्री महावीरप्रसाद जैन:  प्रतिपक्ष के नेता महोदय ने यह तय किया है कि कोई भी बीच में रोक-टोक नहीं करेंगे और कोई यदि रोक-टोक करेगा तो उसकी जिम्‍मेदारी प्रतिपक्ष के नेता ने ली है इसलिए मैंने उनसे निवेदन किया है।

डॉ. बुलाकीदास कल्‍ला: आप जितना चुप रहोगे उतना ही सदन अच्‍छा चलेगा।

श्री महावीरप्रसाद जैन: मैं तो बिलकुल चुप हूं।

श्री महीपालसिंह यादव:  आज तो आपने वास्‍तव में शांति धारण कर रखी है।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी: ये तो इनका शाति का स्‍वरूप है तो फिर क्रांति वाला क्‍या होगा?

श्री मोहनलाल गुप्‍ता: माननीय शिक्षा मंत्री जी, आपका आशीर्वाद चाहूंगा।  विश्‍व के बाजार में जिस प्रकार से आर्थिक गतिविधियां बढ़ रही हैं हमारा देश भी वैश्‍वीकरण की ओर जा रहा है और उसी के साथ साथ भारत भी एक विकासशील देश से विकसित देश की ओर आ रहा है। मैंने अभी पिछले दिनों यू.एस. राष्‍ट्रपति बुश का भाषण सुना था और उसमें यह कहा था कि भारत और चाइना इन दोनों से हमारा बहुत बड़ा कंपीटिशन है।  विश्‍व की आर्थिक शक्ति यह कह रही थी कि भारत और चाइना से हमारी बहुत बड़ा आर्थिक प्रतिस्‍पर्धा है और मैं यह भी कहना चाहूंगा कि आज के आर्थिक विशेषज्ञ इस विश्‍व की इकॉनॉमी को ब्रिक इकॉनॉमी मानते हैं ।  ब्रिक इकॉनॉमी यानी ब्राजील, रशिया, इंडिया एंड चाइन ये चार देश विश्‍व की आर्थिक नीतियों को प्रभावित करने वाले होंगे।  ब्रिक इकॉनॉमी के रूप में और ये चार देश अमेरिका और यूरोप के देशों को निश्चित रूप से पछाड़ देंगे और मैं समझता हूं कि उसी दिशा में हमारी मुख्‍यमंत्री जी जा रही हैं।  राजस्‍थान का विकास हो और राजस्‍थान अविकसित राज्‍यों के साथ साथ बीमारू राज्‍यों की श्रेणी से ऊपर उठकर और एक विकसित राज्‍य के रूप में उभरे ऐसा एक बजट उन्‍होंने प्रस्‍तुत किया है।  एक्‍ट लोकली और मैं उदाहरण देना चाहूंगा कि जिस प्रकार से सम्‍माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने निर्णय लिये हैं सेज के, आई.टी. पार्क के, स्‍टोन पार्क के, वर्ल्‍ड ट्रेड टॉवर के, गोल्‍ड सूक के, रिंग रोड के जितने सब ये निर्णय लिये हैं वो थिंक ग्‍लोबली एंड एक्‍ट लोकली के परिचायक हैं।  आज जो सेज की बात करते हैं माननीय कांग्रेस अध्‍यक्ष जी ने बीकानेर से आने वाले माननीय सदस्‍य ने सेज के बारे में अपने धन्‍यवाद प्रस्‍ताव के उत्‍तर में यह कहा था कि सेज में भ्रष्‍टाचार हुआ है ।  सेज में माननीय शिक्षा मंत्री जी ने विरोध किया है।  मैं कहना चाहूंगा कि सेज हमारी आर्थिक उन्‍नति का परिचायक है।  देश की आर्थिक उन्‍नति का परिचायक है सेज यानी स्‍पेशल इकॉनॉमिक जोन.।

                                                             

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    चाइना में बहुत सारे इकोनोमिक जोन स्‍थापित किये गये हैं और मैं चाहता हूं माननीय मुख्‍य मंत्री जी न केवल जयपुर में बल्कि उदयपुर में, जौधपुर में, अजमेर में, भरतपुर में और विभिन्‍न शहरों में यह सेज की स्‍थापना करें । सेज एक इण्डियन टेरेट्री है इंडियां में ही लेकिन वह फोरन टेरेट्री जैसे मानी जायेगी । वहां आयात निर्यात पर किसी प्रकार का कोई प्रतिबंध नहीं है और सेज के माध्‍यम से हमारे राजस्‍थान के लोगों को और भारत के लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्‍त हो सकेंगे । आज विश्‍व में व्‍यापार में बहुत बडी प्रतिस्‍पर्द्धा है । हमारा माल विभिन्‍न प्रकार के आयात प्रतिबंधों, विभिन्‍न प्रकार के आयात पर लगाये गये करों के द्वारा और विभिन्‍न प्रकार की फोरमल्‍टी के कारण हमारा निर्यात व्‍यापार बहुत प्रभावित होता है । इस सेज के कारण व्‍यापारियों को, उद्योगपतियों को आई टी के क्षेत्र वाले लोगों को अपना व्‍यापार धंधा वहां स्‍थापित करने, नौकरशाही का लचीलापन होना, विभिन्‍न सरकारी प्रक्रियाओं का एक ही स्‍थान पर पूरा होना और साथ ही साथ लाखों लोगों के रोजगार के अवसर प्रदान करने वाला सेज है । इसमें कहां किसी प्रकार की गड़बड़ है । मैं समझता हूं कि माननीय शिक्षा मंत्री जी ने भी जो इसका जवाब दिया था इन्‍होंने किसानों के बारे में बोला था और माननीय मुख्‍य मंत्री जी ने किसानों की जो जमीन अवाप्‍त हो रही है इसके लिये उन्‍होने रास्‍ता निकाला और 25 परसेंट मुआवाजे की राशि की घोषणा की । यह किसानों को वृद्धि देने वाला बजट है सेज किसनों को वृद्धि दे रहा है । रिंग रोड जायेगी, सेज आयेगा, आई टी पार्क आयेगा, नोलेज पार्क आयेगा, राजस्‍थान का विकास नहीं होगा ? निश्चित रूप से राजस्‍थान का विकास होगा । राजस्‍थान में लोग आई टी पार्क में पढने के लिये आयेंगे, नोलेज पार्क में पढने के लिये आयेंगे । शिक्षा के क्षेत्र में काफी प्रगति हो रही है । भारतवर्ष के बच्‍चे, राजस्‍थान के बच्‍चे वहां बाहर पढने के लिये जाते हैं । मैं समझता हूं कि आई टी पार्क होगा, नोलेज पार्क होगा तो निश्चित रूप से वह बच्‍चे यहां पढने के लिये आयेंगे, विदेशों के बच्‍चे भी यहां पढने के लिये आ सकते हैं । इस प्रकार का आई टी पार्क और नोलेज पार्क होगा । मैं यह कहना चाहूंगा सेज पर कांग्रेस के हमारे मित्रों ने कहा कि इसमें भ्रष्‍टाचार हुआ है । भ्रष्‍टाचार क्‍या हुआ है ? इसमें एक पैसे का भी भ्रष्‍टाचार नहीं हुआ है । यह सेज किसानों को समृद्धि लाने वाला है, मजदूरों को रोजगारदेने वाला है, व्‍यापार, उद्योगधंधों को प्रोत्‍साहन देने वाला है और हमारे देश का निर्यात बढाने वाला है । आपने कहा कि डीएलसी की रेट पर सेज के लिये जमीन एम एण्‍ड एम को दे दी । क्‍या और कोई प्रस्‍ताव सेज के लिये बीडी में आया हुआ है जिसको हम देते, जिसको मुख्‍य मंत्री जी कंसीडर करतीं । कांग्रेस के समय से ही एक रीति बनी हुई है कि जो भी व्‍यक्ति एक सर्टेन राशि से ज्‍यादा का इन्‍वेस्‍टमेंट करना चाहता है, जो भी उद्योगपति एक निश्चित राशि से ज्‍यादा का इन्‍वेस्‍टमेंट राजस्‍थान में करना चाहता है उस व्‍यक्ति को बीडी एक सुपर पावर कमेटी है उस नाते से विभिन्‍न प्रकार की सुविधाएं,रियायते बीडी देगी और उसके माध्‍यम से वह राजस्‍थान में विकास करेगा । आपने बहुत सारे विकास के लिये काम किये, मैं कहता हूं वह विकास के लिये नहीं थे लेकिन बहुत सारी सुविधाएं आपने दी हैं, एन्‍टरटेनमेंट पार्क को दी है वही बीडी ने दी है । जी ई कैपिटल को दी है ।

श्री महिपाल यादव : उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय केन्‍द्रीय मंत्री श्री शरद पवार जी ने इनको क्‍या फटकार लगाई कि आप कृषि भूमि को, ग्रीन बैल्‍ट को उजाडकर केन्‍द्रीय मंत्री ने मुख्‍य मंत्री जी की उपस्थिति में कहा है....

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप बीच में नहीं बोले । रिकार्ड नहीं होगा ।

श्री महिपाल यादव : ***

श्री उपाध्‍यक्ष: आप अपने माननीय सदस्‍य को चुप कराइए ।

श्री मोहनलाल गुप्‍ता : उपाध्‍यक्ष महोदय, यह जो सेज के बारे में मैं बता रहा था कि इससे किसानों का भला हुआ है । उस जमीन में पानी नहीं है और उस जमीन में पानी लाने के लिये विशेष प्रयत्‍न सरकार की और से हो रहे हैं किसानों को किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं हुआ है, किसानों को फायदा हुआ है और आप इस सदन के माध्‍यम से केन्‍द्रीय कृषि मंत्री जी को कह दीजिए कि इस सेज में किसानों को किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं हुआ है और उनके संघर्ष का फायदा उनको निश्चित रूप से मिला है । इसमें कोई भ्रष्‍टाचार नहीं है यदि आप करते हो, आप जी ई कैपिटल को देते हो बीडी में तो उसमें भ्रष्‍टाचार नजर नहीं आता है । आप एन्‍टरटेनमेंट पैराडाइज को बीडी में देते हो तो उसमें भ्रष्‍टाचार नजर नहीं आता है । आप मित्‍तल साहब को जमीन देते हो उसमें आपको भ्रष्‍टाचार नजर नहीं आता है । आप अन्‍य संस्‍थाओं को आबंटित करते हो उसमें आपको भ्रष्‍टाचार नजर नहीं आता है और देश के और राजस्‍थान के व्‍यापा‍रियों को, किसानों को और मजदूरों की समृद्धि लाने वाला यह सेज इसमें आपको भ्रष्‍टाचार नजर आता है । मैं यह कहना चाहता हूं कि इसमें किसी प्रकार का कोई करेप्‍शन नहीं है । यह सेज आयेगा, आई टी पार्क आयेगा, टैक्‍नोलोजी पार्क आयेगा, टैक्‍सटाइल पार्क आयेगा और राजस्‍थान का विकास होगा ।

उपाध्‍यक्ष महोदय, आपका आशीर्वाद चाहूंगा, पिछली बार जब बजट भाषण हो रहा था तब विपक्ष के लोगों ने बोला कि आपका वित्‍तीय प्रबन्‍धन ठीक नहीं है । हमने अपना वित्‍तीय प्रबन्‍धन ठीक किया है । राजस्‍व के आंकडों को प्राप्‍त किया है । बीमारू राज्‍यों की श्रेणी से ऊपर लाये हैं । लेकिन आपके समय में क्‍या था ? आपके समय में सरकारी कडकी के दिन थे और सरकारी कडकी किस प्रकार की थी कि सारी खरीददारी पर रोक थी, सारी भर्तियों पर रोक थी, एक भर्ती आपने नहीं की । किसी प्रकार की कोई सरकारी खरीद नहीं की । कर्मचारियों की सारी सुविधाएं खत्‍म कर दी, उनका बोनस इत्‍यादि खत्‍म कर दिया । राज्‍य की नगरपालिकाओं की आर्थिक स्थिति कमजोर कर दी, पंचायतों की आर्थिक स्थिति कमजोर कर दी और केन्‍द्र के पैसे के आधार पर आपने अकाल का प्रबन्‍धन कराया । यह सरकारी कडकी से निकाल कर आज प्रगतिशील राजस्‍थान और जहां जाओ वहां पैसे की कोई कमी नहीं, धन की कोई कमी नहीं, विकास के काम के लिये किसी प्रकार की कोई कमी नहीं है  इस प्रकार का एक बजट हमने पेश किया है, इस प्रकार का एक विजन हमारी मुख्‍य मंत्री जी ने प्रस्‍तुत किया है । उस पर आप यह कहते हो कि यह बजट प्रगतिशील बजट नहीं है, यह गांवों को रोजगार देने वाला बजट नहीं है, यह बजट , स्‍कूल खोलने वाला बजट नहीं है । यह किस प्रकार की आलोचना आप कर रहे हैं । अभी राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण पर बीकानेर से आने वाले माननीय सदस्‍य ने कहा था कि राजस्‍थान की ग्रोथ रेट 4 परसेंट है । वह आंकडे यह कहां से ले आये यह मुझे समझ में नहीं आता है । मैं कहना चाहता हूं कि यह गलत आंकडे प्रस्‍तुत किये हैं । मेरे पास जो आंकडे हैं और जो सरकार ने यहां पेश किये हैं..

श्री हेमाराम चौधरी: आप कहां से लाये ?

श्री मोहनलाल गुप्‍ता : मैं सरकारी आंकडे लेकर आया हूं किताब में से पढकर लेकर आया हूं । 99-2000 में 2.11 परसेंट की वृद्धि थी । 2001 में (-) 2.17 परसेंट की वृद्धि थी । 2001-02 में 9.40 परसेंट की हुई । 202-03 में (-) 6.87, 2004-05 में 0.62 की वृद्धि हुई है और 2005-06 में जो कांस्‍टेंट प्राइजेज हैं उसके आधार पर 5.44 परसेंट की जी डी पी में ग्रोथ हुई है । 4 परसेंट की ग्रोथ हुई है और अगर करंट प्राइजेज को देखा जाये तो 10.74 परसेंट की वृद्धि हुई है । उपाध्‍यक्ष महोदय,मैं कहना चाहूंगा हमारा राजस्‍थान यह बीमारू राज्‍य नहीं है । हमारा राजस्‍थान विकासशील राज्‍य है जिसमें चारो और विकास की गंगा बह रही है, सडके बन रही हैं, स्‍कूल खुल रहे हैं, गांवों में किसान बहुत प्रसन्‍न है,अकाल की मार नहीं है । अकाल यदि कहीं है तो अकाल का प्रबन्‍धन बेहतर हो रहा है । यदि बीमारू राज्‍य है तो फिर अगर 35 स्‍टेट का हम विश्‍लेषण करें, आंकलन करें कि जितने स्‍टेट हैं उसमें हमारे स्‍टेट की क्‍या पोजिशन है । यदि हमारा स्‍टेट हर क्षेत्र में कहीं दसवें स्‍थान पर, कहीं बारहवें स्‍थान पर कहीं दूसरे स्‍थान पर, कहीं तेरहवें स्‍थान में है तो वह बीमारू स्‍टेट नहीं कहा जायेगा । मैं कहना चाहूंगा कि हमारा स्‍टेट लिट्रेसी के पर्सेंट में 14वें स्‍थान पर है ।


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   हमारा स्‍टेट लिटरेसी के प्रतिशत में 14वें स्‍थान पर है, जहां 60 प्रतिशत लिटरेसी है। कंज्‍म्‍पशन आफ फर्टिलाइजर  पर हैक्‍टयेर के हिसाब से 17वें स्‍थान पर है। यह मैं 2001 की बात, आज 66 प्रतिशत हो गई। मैं पूरे आंकड़ें दे रहा हूं किताब से। उसी के साथ साथ एवरेज डेली वर्कर कंज्‍म्‍पशन 9 वें स्‍थान पर है। पर केपीटा वेल्‍यू एड इन इण्‍डस्‍ट्रीज में 11 वें स्‍थान पर है। पर केपीटा कंज्‍म्‍पशन आफ इलेक्ट्रिसिटी में 11 वें स्‍थान पर है। परसेंटेज आफ इलेक्टिफाइड विलेज टू टोटल विलेज, उसमें चौथे स्‍थान पर है 1 गांवों में विद्युतीकरण के मामले में हम चौथे स्‍थान पर है। नम्‍बर आफ मोटर व्‍हीकल्‍स में 9 वें स्‍थान पर है। प्रोजेक्‍टेड आउटलेट 8 वें स्‍थान पर है। पर केपीटा बैंक डिपोजिट के मामले में 14 वें स्‍थान पर है। पर केपीटा बैंक क्रेडिट के मामले में 2004 में 12 वें स्‍थान पर है। नये डोमेस्टिक प्रोडेक्‍ट के हिसाब से 7 वें स्‍थान पर है। पर केपीटा एनएसडीपी करंट प्राइसेस,10 वें स्‍थान पर है। पर केपीटा रेवेन्‍यू के हिसाब से 13 वें स्‍थान पर है। पर केपीटा टैक्‍स रेवेन्‍यू के हिसाब से 10 वें स्‍थान पर है । पर केपीटा रेवेन्‍यू एक्‍सपंडीचर के  हिसाब से 14 वें स्‍थान पर है, 2004-5 में, पर केपीटा रेवेन्‍यू डवलपमेंट एक्‍सपंडीचर, उसमें 12 वें स्‍थान पर है। इस प्रकार सो हमारा राज्‍य  बिमारू राज्‍य नहीं है। हमारा राज्‍य विकसित राज्‍य की और जा रहा है1 मैं समझता हूं कि डवलपमेंट की और जा रहा है।

            मैं समझता हूं कि, जिस प्रकार से कल विपक्ष के लोगों ने बोला और यह कहा कि आपको सारा पैसा केन्‍द्र सरकार से मिल रहा है, उस केन्‍द्र सरकार के पैसे के माध्‍यम से आप विकास कर रहे हैं, केन्‍द्र सरकार के माध्‍यम से आप विभिन्‍न प्रकार की योजनाएं चला रहे हैं। उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं  कहना चाहूंगा कि फाइनेंस कमीशन जो स्‍थापित हुआ है वह फाइनेंस कमीशन.....

श्री अर्जुन सिंह(दानपुर): मंत्री बनने के लालच में उपाध्‍यक्ष महोदय को भी.....(व्‍यवधान)

श्री मोहनलाल गुप्‍ता: इस फाइनेंस कमीशन ने स्‍पष्‍ट कर दिया है कि देश का जितना भी रेवेन्‍यू आयेगा, भारत सरकार के पास होगी। जो भी ग्रांट होगी, जो टैक्‍स आएंगे वह सब स्‍टेट्स में बंटेगे । स्‍टेट में ही नहीं नगरपालिकाओं में बंटेगे,नगरपरिषदों में बंटेगे, पंचायत में बंटेगे। इसी के लिए फाइनेंस कमीशन की स्‍थापना हुई है। केन्‍द्र सरकार यह कोई हम को दान में नहीं दे रही है। कोई दक्षिणा में नहीं दे रही है, यह हमारा अधिकार है। राजस्‍थान के जितने लोग टैक्‍स पे करते हैं उसमें हमारा शेयर केन्‍द्र सरकार दे रही है। विभिन्‍न प्रकार की योजनाएं दे रही है। केवल राजस्‍थान को ही नहीं दे रही है कि राजस्‍थान के


माध्‍यम से आप जा रहे हैं,   हमारा अधिकार है उस रूप से दे रही है। फाइनेंस कमीशन की स्‍थापना हुई उसमें यह  स्‍पष्‍ट  कहा गया है

    “The Commission shall make recommendation as to following matters:-

The distribution between the Union and the States of the net proceeds of taxes. Net proceeds of taxes which are to be, or may be, divided between them under this Chapter I of Part XII of the Constitution and the allocation between the States of respective shares of such proceeds; the principles which should govern in the grants-in aid of the revenues of these states out of Consolidated Fund of India.”

    क्‍स के साथ साथ कंसोलिडेंट फण्‍ड्स को भी देगी1 आप यह कह रहे हैं कि हमने राजस्‍थान का विकास केन्‍द्र सरकार के पैसे से करवाया है1 यह हमारा अधिकार है। यह कांस्‍टीटयूशनल राइट हमको दिया है, जिस कांस्‍टीटयूशनल  के तहत आप और हम चुनकर आते हैं। जिस कांस्‍टीटयूशनल के तहत पार्लियामेंट बनती है, जिस कांस्‍टीटयूशनल के तहत असेम्‍बलि बनती है, उसी कांस्‍टीटयूशनल के तहत नगरपालिका और नगरपरिषद बनती है। सभी को पैसा इस कांस्‍टीटयूशनल के द्वारा दिया जाता है। फाइनेंस कमीशन के द्वारा दिया जाता है।

श्री उपाध्‍यक्ष: कनक्‍ल्‍यूड कीजिए।

श्री मोहनलाल गुप्‍ता: माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, दो मिनिट  अपनी बात कहकर खतम करना चाहूंगा। मैं यह कहना चाहता हूं कि हमने, हमारी मुख्‍यमंत्री जी ने  जो अभी विकास किया है वह विकास राजस्‍थान के पैसे से तो किया ही है, हमने अपने रेवेन्‍यू टारगेट अचीव किये हैं। रेवेन्‍यू  टारगेट अचीव करने के साथ साथ हमने, विभिन्‍न प्रकार के जो विकास के काम करने थे  हमने अपने स्‍वंय के स्‍त्रोतों से 9724 करोड़ रूपये इकट्ठे किये, केन्‍द्र ने वह 5300 करोड़ रूपये दिये हैं। 9700 तो हमारा भी कलेक्‍शन है। आपके राज में कि तना कलेक्‍शन था उसके आंकड़ों में मैं नहीं जाना चाहता क्‍योंकि मुझे समय नहीं है लेकिन मैं यह कहना चाहूंगा कि जिस प्रकार से आज जयपुर में विकास के  काम हो रहे हैं, जेडीए जिस प्रकार से विकास के काम कर रहा है वह अदभूत और विलक्षण है और उसी प्रकार के विकास के काम यदि जयपुर शहर में हो जाए और राजस्‍थान के विभिन्‍न शहरों में हो जाए तो निश्चित रूप से राजस्‍थान की कायाकल्‍प हो जाएगी। गांवों की कायाकल्‍प हो जाएगी। किसानों की कायाकल्‍प हो जाएगी। जेडीए ने लैंड बैंक  बनाया है, 56000 बीघा भूमि उसमें चिह्नित की है, लैंड बैंक के माध्‍यम से चिह्नित की गई। जेडीए इतनी बड़ी रिंग रोड बना रहा है 1250 करोड़ रूपये की। जेडीए ने विभिन्‍न प्रकार के, आईटी पार्क, नॉलेज पार्क, सेज यह सब योजनाएं बनाई हैं। मैं समझता हूं कि सहकारी समितियों की भूमि पर, बसने वाले लोगों को, कच्‍ची बस्‍ती में रहने वाले लोगों को हम निश्चित रूप से बढ़ावा देंगे। उनकी सुख-सुविधाओं का ध्‍यान रखेंगे। सड़क, नाली, बिजली और सिवरेज की व्‍यवस्‍था भी हम करेंगे और उसी के साथ- साथ राजस्‍थान के विकास  के लिए माननीया मुख्‍यमंत्री जी ने जो बजट पेश किया है उसका मैं स्‍वागत करता हूं। अपने स्‍थान पर बैठता हूं। धन्‍यवाद, जय भारत।

श्री उपाध्‍यक्ष: धन्‍यवाद। मोहम्‍मद माहिर आजाद।

मोहम्‍मद माहिर आजाद(नगर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह सदन....

श्री राजेन्‍द्र राठौड: सही-सही बोलना।

श्री उपाध्‍यक्ष: सही बोलते हैं।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: मेरे मुंह में आप शब्‍द तो डाल नहीं सकते। चलिये सुनिये।

श्री तगाराम चौधरी(बाड़मेर): हमारे यहां से मंत्री बना सकते हैं तो हम आपको कुछ ....(व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद: क्‍या हुआ साहब? 

श्री तगाराम चौधरी: आप हमारे वालों को मंत्री बना देते हो तो  तो हम भी आपको कुछ सिखा देते हैं।

श्री रामप्रताप कासनिया: उपाध्‍यक्ष महोदय, हमारे भी निर्दलीय वालों का नम्‍बर....

मोहम्‍मद माहिर आजाद: क्‍या हो रहा है .....(व्‍यवधान) माननीय घनश्‍याम जी  आप तो कहां जा रहे हो,बिराजिये। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह सदन 2006-7 के आय-व्‍ययक अनुमानों पर बजट पर चर्चा कर रहा है। हमारी सदन की नेता बार-बार हौंसलों की, बुलंद हौंसलो की, बेपर की उडान की बात करती है। मैं भी अर्ज करना चाहता हूं कि सोते शेरों को मत जगाओ। ऐसा नहीं कि हौंसले आप में ही है, हमारे नेता प्रतिपक्ष के हौंसले आप देख ही रहे हैं। अभी कांग्रेस विधयक दल  के हौंसले आपने देखे नहीं है इसलिए मैं अर्ज करना चाहता हूं :-

 'हौंसले अगर हम दिखा देंगे-हौंसले अगर हम दिखा देंगे फूल सहराओं में खिला देंगे, जिनको माकूल आप समझते हो,उनको गैर माकूल हम बना देंगे,हम शान वाले हैं शान रखते हैं और तीरो कमान भी रखते हैं,तलक लहजे में गुफ्तगूं मत  करना वरना मुंह में जबान हम भी रखते हैं'।

   माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आज तक यह स्थिति थी कि जिस दिन राजस्‍थान का बजट पेश किया जाता था लोग आंखें फाड-फाडकर यह देखते थे, कान खडे़ करे यह सुनते थे कि आज हमको क्‍या रियायत मिलेगी। राजस्‍थान के चहुमुंखी विकास की क्‍या नई घोषण होगी और कुछ लोगों को यह भी खतरा रहता था कि हम पर कितना और टैक्‍स का बोझ लादा जाएगा।  मैं आपके माध्‍यम से पूछना चाहता हूं कि इस बजट की सेंसिटी, जब से भारतीय जनता पार्टी राज में आई, राज में रह नहीं गई। रह क्‍यों नहीं गई कि छाती पर वार तो हम झेल सकते हैं लेकिन पीठ पर हमला किया जाए उसका अंदाजा भी नहीं होता। इस बजट के माध्‍यम से आप कर लगाये या रियायते दें यह बात समझ में आती है लेकिन यह सरकार बेकडोर एंट्री करती है, जो पीठ पर वार करती है उससे कैसे  बचा जा सकता है। आपने पिछले साला भी बजट पेश किया, उसमें कर नहीं लगाया लेकिन उसके बाद भी आपने विद्युत पर कर लगाया, क्‍या यह बेकडोर एंट्री नहीं थी? अभी इस साल भी, आप तो क्‍योंकि अपनी आदत से बाज नहीं आते, इस साल भी 28 फरवरी से विधान सभा का सत्र हो रहा था और उसके ठीक एक महीने पहले 25 जनवरीको 1.6 प्रतिशत टैक्‍स बैकडोर  तरीके से आपने चाय पर, सूखे  और गीले नारियल पर, सूखे मेवे पर, असुगंधा पर लगाया।

                                               

Ddm/usc/100306/1410/2d

 

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: इसको करेक्‍ट कर लो, यह 1.6 है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: 1.6 ही बोल रहा हूं, 1.6। सवाल इतना नहीं है। मैंने 1.6 ही बोला है। आप 1.6 लगायें, चाहे 0.6 लगायें लेकिन जब विधान सभा का बजट सत्र हो रहा था तो क्‍या जल्‍दी पड़ी थी आपको यह। और आपने लगा दिया और लगाने के बाद जब श्री सत्‍यनारायणजी गुप्‍ता के माध्‍यम से आप पर चाय के व्‍यापारियों ने दबाव बनाया तो आपने चाय पर से तो टैक्‍स वापस ले लिया और बाकी चीजों पर रहने दिया।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: मैं आपको फिर करेक्‍ट कर रहा हूं, यह मण्‍डी शुल्‍क है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: मण्‍डी शुल्‍क टैक्‍स नहीं होता है क्‍या, मण्‍डी टैक्‍स ही कह रहा हूं, मैं भी इतना जानता हूं कि यह नारियल, अश्‍वगंधा, चाय और खजूर एग्रीकल्‍चर जिंस में आती है। इतनी जानकारी मुझे भी है। समझ में आयी बात आपको।

दूसरी बात, आज भी, उपाध्‍यक्ष महोदय, आप भी 20 साल का विधायी अनुभव रख्‍ंते हैं और आप और मैं साथ-साथ इस सदन में आ रहे हैं। टैक्‍स लगाने के बाद तो यह स्थिति होती थी कि लोग विभिन्‍न माध्‍यमों से जो एसोसिएशंस हैं एप्रोच करती थीं, लेकिन अब के तो उल्‍टा हुआ। उल्‍टा यह हुआ कि वित्‍त राज्‍य मंत्रीजी बैठे हैं, ये और जन अभाव अभियोग समिति के अध्‍यक्ष, ये पूरे राजस्‍थान में घूमे हैं। ये बीकानेर गये, कोटड़ी वालों से मिले, कहा कि हमको पार्टी में चन्‍दा दे दो नहीं तो आपके भी टैक्‍स लगा देंगे। ये जोधपुर गये, जोधपुर जाकर पेण्‍ट एसोसिएशन से मिले और उनसे जाकर बात की। उपाध्‍यक्ष महोदय, यह मेरे पास फैक्‍स है, मैं प्रमाण के साथ कोई भी बात कहता हूं।

श्री वीरेन्‍द्र मीणा: माननीय सदस्य, कम से कम इस पवित्र सदन के अन्‍दर गलत बात तो मत बोलें आप। (व्‍यवधान) हमने हमारे व्‍यापारियों को, सबको सुना है, एक-एक को।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: आप जवाब दे देना ना कि किस लिये गये। किसलिये सुना, क्‍या बात की आपने।

श्री वीरेन्‍द्र मीणा: इस सदन के अन्‍दर, इस पवित्र सदन में गलत बात मत बोलें आप।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: बिलकुल सही बात कह रहा हूं, और उपाध्‍यक्ष महोदय, आप कहेंगे तो यह दिनांक 2 मार्च, 2006 को एक फैक्‍स जो इनको भेजा गया है उसकी फोटो प्रति मेरे पास है, आप कहेंगे तो टेबल ...।

डा.दिगम्‍बरसिंह: खुदा के लिये महीने में एक दिन सच बोलने का रखो आप। कोई भी एक दिन तय कर दो।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: आप तो 30 दिन असत्‍य बोलते हैं, मेरे वोटर हैं। आप क्‍यों एक दिन का उपदेश दे रहे हैं। उस रोज अण्‍डे का विरोध कर रहे थे जब भरतसिंहजी बात कर रहे थे और मुर्गे खा गये एक लाख। क्‍या आप अपनी बात कर रहे हो। (व्‍यवधान)

एक माननीय सदस्‍य: ये खुदा को मानते ही नहीं हैं। (व्‍यवधान)

श्री टीकमचन्‍द कान्‍त: मामला बर्ड फ्लू का है।

मोहम्‍म्‍द माहिर आजाद: नहीं, राजस्‍थान में नहीं है, कृषि मंत्रीजी ने कह दिया है, राजस्‍थान में कोई बर्ड फ्लू नहीं है।

            उपाध्‍यक्ष महोदय, ये उनकी समस्‍याएं सुनने के लिये गये थे या उनको क्‍या रियायतें चाहिए, क्‍या उनकी दिक्‍कतें जानने गये, मुझे इसमें कोई एतराज नहीं है लेकिन यह प्रक्टिस, उपाध्‍यक्ष महोदय, क्‍या आप अच्‍छी मानते हैं, मैं इसका फैसला आप पर छोड़ता हूं, आप स्‍वयं निर्णय कर लें इस बात का। और आप कहेंगे तो यह फैक्‍स है, मैं इसको टेबल भी कर दूंगा अगर ये इन्‍कार करें तो यह गलत बात नहीं है।

श्री राकेश मेघवाल: यह फैक्‍स आपने ही भिजवाया होगा।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: अगर इतनी ताकत मेरे पास है कि श्री एस.एन.गुप्‍ताजी के यहां फैक्‍स गया, उसकी कापी मेरे पास आ गयी तो जरुर कुछ न कुछ घर वालों ने मेरा नाम माहिर सोच समझकर रखा है। आप जैसा तो नहीं है।

            माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आसन से प्रोटेक्‍शन चाहूंगा। अगर मैं गलत बात कहूं तो माननीय सत्‍तापक्ष के सदस्‍यों को अधिकार है कि जब वे अपनी बात कहें तो इसका खण्‍डन कर दें, इसकी बात कह दें।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जब ये सही बात बोलेंगे तब हमें अचम्‍भा होगा बाकी तो..। तब रिएक्‍ट करेंगे, सही बात बोलेंगे तो।

श्री उपाध्‍यक्ष: अब आप फिर बीच में इंटरप्‍ट कर रहे हैं।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: क्‍या, क्‍या हो गया?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: सही बात बोलेंगे ना तो तब हम अचम्भित होंगे, कि आप सही बात भी बोलते हैं।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: अच्‍छा,अच्‍छा। आपको तो मेरे वजूद पर भी अचम्‍भा है ना। राजेन्‍द्र राठौड़ साहब, मैं कतरा हूं लेकिन मेरा अलग वजूद तो है, हुआ करे भले समुन्‍द्र मेरी तलाश में । मैं समुन्‍द्र के पानी के जैसे खारा पानी नहीं हूं आपकी तरह। मैं एक बूंद हूं भले ही, लेकिन सीप के अन्‍दर पडा हुई।

श्री टीकमचन्‍द कान्‍त: अपने मुंह मियां मिट्ठू।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: आप खड़े होकर जरा कहो कि आप बुद्धू हो, मैं मान लूंगा कि अपने मुंह मियां मिट्ठू नहीं हो, इतनी हिम्‍मत तो दिखाओ, सिवाना से आने वाले माननीय सदस्‍य।

            माननीय उपाध्‍यक्षजी, दूसरा मैं आपसे निवेदन कर रहा हूं कि इनकी एक आदत पड़ गयी कि प्‍लान साइज को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर दिखायें और लम्‍बी-चौड़ी घोषणाएं करें कि हम यह कर देंगे, वह कर देंगे। हम फलाना कर देंगे, हम आकाश  से तारे तोड़ लाएंगे। लेकिन इसमें स्थिति क्‍या है। तीन चीजें होती हैं, एक आपके एस्‍टीमेट्स, पिुर रिवाइज एस्‍टीमेट और फिर आपके एक्‍चुअल एक्‍सपंडीचर। उपाध्‍यक्ष महोदय, यहां सत्‍तापक्ष के लोगों ने बड़े जोर-शोर से यह बात कही कि देखिये, मुख्‍य मंत्रीजी ने योजना आयोग के उपाध्‍यक्ष से मिलकर राजस्‍थान का प्‍लान साइज इतना बढ़ा दिया है और हमने इतनी घोषणाएं कर दी हैं। थोथी घोषणाएं करने से कुछ नहीं होता है। आपका क्रियान्‍वयन क्‍या है, जरा उसकी बानगी मैं आपको दिखाना चाहता हूं। आपकी यह किताब आर्थिक समीक्षा, इसका पेज 14 देखिये। आपने कृषि एवं सम्‍बद्ध सेवाओं पर 394.27 करोड़ रुपये व्‍यय करने का एस्‍टीमेट बनाया था, लक्ष्‍य रखा था और आपने वास्‍तविक व्‍यय कि‍तना किया 219.99, आपने विशिष्‍ट योजना संगठन जिसमें मेवात योजना भी आती है, जिसमें माडा योजना भी आती है, देख लें, आप पेज 14 देख लें, तालिका 2.4.1, वार्षिक योजना, मदवार व्‍यय, जरा देख लें इसको विशिष्‍ट योजना संगठन 47.62 करोड़ का लक्ष्‍य रखा था और आपने खर्च किया है 33.07 । आपने ऊर्जा, आप ऊर्जा उत्‍पादन की बड़ी बात कर रहे हैं कि हम ऊर्जा में राज्‍य को आत्‍मनिर्भर बना देंगे। मांग के अनुरूप डिमाण्‍ड कर देंगे, व्‍यवहारिक कर देंगे। ऊर्जा पर आपने रखा था 2272.68 करोड़ और आपने व्‍यय किया है 1999.08 करोड़। (व्‍यवधान) और आपने उद्योग और खनिज पर 141 के अगेंस्‍ट 108.99 किया। मैं यही तो कह रहा हूं कि आप योजना तो लम्‍बी-चौड़ी बतना देते हैं लेकिन आपने एक्‍चुअल एक्‍सपंडीचर कितना किया है, वह मैं आगे जब अपनी स्थिति आयेगी तब मैं आपको बता दूंगा। यहां बड़े जोर-शोर से एक बात कही गयी।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: यह बजट स्‍टडी में है ना पेज 50 पर।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: हां, बजट स्‍टडी भी देख लेना, उसका तो मैंने इसमें, दोनों चीजें, इसमें उतार दीं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: आप निकाल ही लें ना, पेज 50 निकाल लें आप एक्‍सपंडीचर भी मालूम पड़ जाएगा। निकाल लो आपको एक्‍सपंडीचर भी मालूम पड़ जाएगा। निकाल लो पेज 50, यूं ही ठोक रहे हैं बिना कागज के।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: यह बजट स्‍टडी से इसमें उतार दिया, दोनों आंकड़े, दो किताबें ली थीं। (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: यह प्‍लान एक्‍सपंडीचर लिखा हुआ है, बजट स्‍टडी में पेज नम्‍बर 50 पर।

श्री सी.डी. देवल: आप इनको करेक्‍ट कर लेना, खत्‍म बात ।

एक माननीय सदस्‍य: व्‍यवधान अट्रेक्‍ट कर रहे हैं। (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: क्‍यों असत्‍य बात ठोक रहे हो यहां पर।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: पिुर वही बात कह रहे हो आप, आप संसदीय कार्य मंत्री  होकर असंसदीय शब्‍द का प्रयोग कर रहे हो।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: चलो मैं नहीं बोलता, मैं तो नहीं बोलता। फिर आप चेपो यूं ही।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: हां तो मत बोलिये, यह अच्‍छा है। लेकिन आप असंसदीय शब्‍दों का प्रयोग मत करिये।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: आप माथुर साहब से करेक्‍ट करवा दें। माथुर साहब कह दें कि सही बोल रहे हो आप। (व्‍यवधान) आप माथुर साहब से कहलवा दो, आपका सारा भाषण थपथपा के सुनेंगे। (व्‍यवधान) आउट ले को बोल रहे हैं 8350 करोड़ की योजना है। उसके कम्‍पोनेंट पढ़कर सुना दिये इन्‍होंने।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: मैंने आउट ले से इसमें उतारा है, मेरे पास दोनों चीजें हैं। (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: माथुर साहब, 8350 की योजना के कम्‍पोंनेंट पढ़कर सुना दिये, आपने यह व्‍यय कर दिया। यह प्‍लान एक्‍सपंडीचर इसके अन्‍दर लिखा पडा है, बजट स्‍टडी के अन्‍दर, वह नहीं बोलकर बस।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: वह भी बताऊंगा, आप वह भी सुनिये, धैर्य तो रखिये। इतने उतावले क्‍यों हो रहे हैं आप।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: माथुर साहब के लिये कह रहा हूं मैं।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: हां तो माथुर साहब भी बता देंगे। माथुर साहब की क्‍या होड़ केरेंगे आप, आप भी बता देना।

डा.दिगम्‍बरसिंह: आप तो धड़ाधड़ दें।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे यह निवेदन कर रहा हूं कि बड़े जोर-शोर से एक बात की गयी। यहां हमारे मावली से आने वाले माननीय सदस्‍य भी कल एक बात कह रहे थे और आप भी वही कर रहे हो। क्‍या आप इस बात से सहमत हो कि आपकी कर्जे की अर्थ व्‍यवस्‍था नहीं बढ़ रही है। क्‍या हम कर्जे के कुचक्र में नहीं फंस रहे हैं, यह भी गलत है, क्‍या हम डेट-ट्रेप की तरफ नहीं जा रहे हैं। क्‍या इतना कर्जा लेना एक प्रगतिशील राज्‍य के लिये यह कोई सही स्थिति है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: आपने लिया, वह भी बता दो।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: मैं वह भी बता देता हूं। आप यह बात करो मैं अकाउण्‍ट्स का आदमी हूं। 1985 में जब कांग्रेस का राज था 1990 तक तब 6 हजार करोड़ रुपये का कर्जा था, अगर गलत हो तो आप बता दें और 1990 में जब शेखावत साहब की सरकार बनी और 1998 के अन्‍दर में आपने छोड़ा तो आप 23864 करोड़ रुपये का कर्जा छोड़कर गये, 16-17 हजार का कर्जा लिया। बताइये, अगरयह आंकड़े गलत हों तो, क्‍या बात करते हो आप। मैं अकाउण्‍ट्स का आमदी हूं, एक-एक बात आप मुझसे उससे पहले के भी पूछेंगे तो भी बता दूंगा।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: पिफर आप 2003-04 में कितना कर्जा लिया, आपने 2001-02 में कितना लिया, जोड़कर बताओ ना।

मोहम्मद माहिर आजाद: मतलब, हमारा भी हम बताएं और आपका भी हम बताएं, वाह-वाह।

एक माननीय सदस्‍य: वह तो 28 का तो आपने 56 कर दिया था।

डा.एन.एस.गुर्जर: मैं आपको करेक्‍ट कर दूं।(व्‍यवधान) बस एक मिनट सुन लें। आप जो कह रहे हो कि इतना कर्जा लिया 8 हजार करोड़ का कर्जा छोड़कर गये थे।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: 6 हजार करोड़।

डा.एन.एस.गुर्जर: एक मिनट, सुन लें, आप सुनिये ना, यह सही है 23 हजार से ज्‍यादा कर्ज हमने छोड़ा।                                     

 

Vps/usc/10-3-06/1420/2e

 

    लेकिन हमने असेट्स कितने बनाये, के‍पिटल असेट्स कितने क्रिएट किये और यह केपिटल फारमेशन कितने किये हमने और आपने 53 से 55 हजार के बीच में कर्जा छोड़ा और आपका केपिटल फारमेशन कितना था ? यह आकड़े बताओ जरा। वह भी बताओ जरा। ...(व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर):हम तो कर्ज लेकर घर पर ले गये और आपने कर्ज लिया वह ...(व्‍यवधान)

डा. एन.एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): हां, बताओ न ? बताओ आकड़े ? आकड़े बहुत कोट कर रहे थे इतनी देर से। मैं सुन रहा था आकड़े आपके। ...(व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): हां, उसी पर आ रहा हूं। यह क्‍या बात हुई ? यह काम आपका है क्‍या ? ...(व्‍यवधान)

डा. एन.एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): मैं सुन रहा था आकड़े आपके। आप कोट कर रहे थे इसलिए मैंने टोका, बताओ अब आप ?

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, नहीं मैं तो यह टोडारायसिंह से आने वाले माननीय सदस्‍य यह बता रहे हैं ...(व्‍यवधान)

श्री राकेश मेघवाल: आप घर पर तो नहीं ले गये लेकिन अशोक उद्यान जरूर बनाया था।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): वह है तो धरती पर, आकाश पर तो नहीं है? आकाश पर तो नहीं है, है तो धरती पर। उसको परिसम्‍पत्ति नहीं मानते हो ? ...(व्‍यवधान)

डा. एन.एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): नहीं, आप सारे परसेंटेज के हिसाब से लगाइये। वह परसेंटेज के हिसाब से कर्जा आपने ज्‍यादा लिया है या हमने लिया ? हमने लिया है या आपने लिया है, यह बताइये। ...(व्‍यवधान)

श्री जोगाराम पटेल: एक ओर अशोक उद्यान और ...(व्‍यवधान)

श्री सी.डी.देवल (रायपुर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह इण्‍टरप्‍शन रोका जाए। ...(व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): एक घंटे तक आपने भाषण दिया, हमने तो आपको नहीं रोका। क्‍या हम में क्षमता नहीं थी क्‍या? ...(व्‍यवधान)

श्री सी.डी.देवल (रायपुर): बोलने दीजिए आप। ...(व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): इसका मतलब आप कर्जे के कुचक्र को अच्‍छा मानते हैं कि यह स्‍टेट कर्जा ले । कर्जा लेकर घी पीये, इसको अच्‍छा मानते हैं क्‍या?

श्री जोगाराम पटेल: परिसम्‍पत्तियां बनायी हैं, घी नहीं पीया, घी तो आपने पीया है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): आपको तो पानी पिला दिया।

श्री जोगाराम पटेल: पिला दिया आपको, याद रखो कि आपका तो मामला ही बंद हो गया पूरा। ...(व्‍यवधान)

श्री सी.डी.देवल (रायपुर): यह टोकाटोकी बंद करवाओ साहब, अच्‍छा नहीं लगता टोकाटोकी होना। ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): मेरा दुर्भाग्‍य यह है कि मैं जब बोलने खड़ा होता हूं तो पता नहीं क्‍या परेशानी हो जाती है। मैं अगर कोई गलत बात कहूं तो आप विशेषाधिकार ले आना, आपको पूरी छूट है, उसको करेक्‍ट कर लेना। ...(व्‍यवधान)

श्री टीकमचन्‍द कान्‍त: हम कोई बात नहीं बोलेंगे तो आप बोर हो जाएंगे। यह बात है, इसी कारण से ठीक है यह ।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): हां, यह बात है।

श्री उपाध्‍यक्ष: यह तो आपके हित में ही बोल रहे हैं। ...(व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): यह बात सही है, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, सिवाना से आने वाले माननीय सदस्‍य ने सही कहा है।

        मुखालफत से मेरी शख्सियत सँवरती है

        मैं दुश्‍मनों का भी बड़ा ऐतराम करता हूं

        करीब आओगे तो शायद समझ लोगे     यह फासले तो गलतफहमियां ही पैदा करते हैं।

श्री उपाध्‍यक्ष: इसीलिए इनको आपकी नेचर का पता है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): हां, ठीक बात है। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन कर रहा था कि आज हम जो कर्जे के कुचक्र में फंस गये हैं, जो आज हम डेट ट्रेप की तरफ जा रहे हैं, आज हमारी स्थिति क्‍या है ? हमने 2004-05 में 12702.61 का कर्जा लिया। क्‍या यह भी गलत है ? हमने 2005-06 में 811.80 का कर्जा लिया और इस वर्ष का जो हमारा अनुमानित है वह 9582.09 है, यानि तीन साल में 30400 करोड़। आज स्थिति यह है कि हमारा जो कर राजस्‍व, जो हमें हो रहा है वह कर राजस्‍व प्राप्‍त हो रहा है 9724.44, यानि करों से जितनी आय हो रही है, उससे भी ज्‍यादा हम कर्जा ले रहे हैं। हमारा जो शेयर इन सेण्‍ट्रल टैक्‍सेज है, केन्‍द्रीय करों में जो हमारा हिस्‍सा है वह 5300.08 है, क्‍या यह भी गलत है ? इससे दुगना हम कर्जा ले रहे हैं और हमारा जो नोन टैक्‍स् रेवेन्‍यू है वह 2542.84 है, उसका चार गुणा कर्जा ले रहे हैं।  यानि हम टैक्‍स रेवेन्‍यू के बराबर , नोन टैक्‍स रेवेन्‍यू से चार गुणा और शेयर इन सेण्‍ट्रल टैक्‍सेज से दुगना और जो अनुदान हमको मिल रहा है 3178 उससे तीन गुणा कर्जा हम ले रहे हैं। यह स्थिति हमारी आज कर्जे की हो गयी और हम राजस्‍व प्राप्तियों के लगभग 50 परसेंट के बराबर हमारा कर्जा ले रहे हैं। कर्जे को  परिसम्‍पत्ति बनाने पर या विकास पर व्‍यय करें तो हमको कोई एतराज नहीं है,  टोडारायसिंह से आने वाले माननीय सदस्‍य, लेकिन आप इस कर्जे को खर्च काहे पर कर रहे हो ? इसको राजस्‍व व्‍यय में खर्च कर रहे हो। आप कर्जा चुकाने में, ब्‍याज की अदायगी में, वेतन-भत्‍तों में, गैर विकास व्‍यय में ...(व्‍यवधान)

डा. एन.एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): आपकी इजाजत हो तो । आपने मुझे कोट किया है इसलिए मैं पूछना चाहूंगा कि आप मुझे यह बताइये कि रेवेन्‍यू एक्‍सपेंडिचर में प्‍लान एक्‍सपेंडिचर शामिल है या नहीं है ? आप बताइये। आपने मुझे कोट किया है इसलिए पूछ रहा हूं कि रेवेन्‍यू एक्‍सपेंडिचर में प्‍लान शामिल होता है या नहीं होता है, इतना सा बता दीजिए आप । ...(व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): अच्‍छा ठीक है, बता देंगे। यह आप ही सीखते हो, आप ही जानते हो एक ? ...(व्‍यवधान)

        माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा निवेदन यह है कि चाहे हमने लिया हो, चाहे आपने लिया हो, हमको इस डेट ट्रेप से राज्‍य को निकालना चाहिए। हमको इस कर्जे की अर्थव्‍यवस्‍था से बचना चाहिए और यह सिलसिला लगातार चला आ रहा है और यह रुकने वाला भी नहीं है इसलिए मैं आपसे यह निवेदन करना चाहता हूं कि इस पर हमको सोचना चाहिए। जब आज हमारी कर्जे की स्थिति यह है कि हम डेट ट्रेप में फंस रहे हैं तो मैं माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से पूछना चाहता हूं कि फिर हमको इतने टोप हेवी  प्रशासन की क्‍या जरूरत है ? जब मंत्रिमण्‍डल में डाउन साइड हो सकता है कि 10 परसेंट से ज्‍यादा मंत्री नहीं होंगे तो क्‍या हम एडमिनिस्‍ट्रेशन के अन्‍दर, 15 परसेंट मान लीजिए तो हम प्रशासन के अन्‍दर यह नहीं कर सकते हैं क्‍या ?

        राजस्‍थान एक आई.जी. पुलिस होता था तब भी चलता था। इसकी कानून-व्‍यवस्‍था तब भी चलती थी। डी.जी. बना दिया आई.जी. का लेकिन इतने सारे डी.जी. बना दिये। आप फिर प्रिंसिपल सैक्रेटरी, फिर स्‍पेशल सैक्रेटरी, फिर डिप्‍टी सैक्रेटरी, फिर असिस्‍टेंट सैक्रेटरी । मेडिकल के अन्‍दर भी माननीय चिकित्‍सा मंत्री बैठे हैं, अलग-अलग डाइरेक्‍टर होंगे। एड्स का अलग होगा, आई.ई.सी. का अलग होगा, मलेरिया का अलग होगा, मेडिकल का अलग होगा और पैरामेडिकल का अलग होगा। मेरा निवेदन आपसे यह है कि अगर हम इस कुचक्र से बचना चाहते हैं और वास्‍तव में इस राज्‍य के हितैषी हैं तो हमको इतना टॉप हेवी एडमिनिस्‍ट्रेशन जो है उसको भी कम करना चाहिए और इस संबंध में प्रशासनिक व्‍यय के अन्‍दर कमी करनी चाहिए।

        माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से  निवेदन करना चाहता हूं कि हमारा जो बजट प्रस्‍तुत कर दिया गया, अभी यह पूछ रहे थे, हमारी राजस्‍व प्राप्तियां 23991 है और व्‍यय 24034 है। घाटा 43 करोड़ और हम कर्जा लेंगे 9582 और खर्च करेंगे 9586, पूंजीगत खाते में बजट भाषण के पेज नम्‍बर 65 पर आपने कह दिया कि हम 103 करोड़ बचाएंगे। यह आप बचा काहे में से रहे हो ? यह आप बचा रहे हो, तनख्‍वाह और भत्‍तों में से तो बच नहीं रहा, यह बच रहा है जो विकास का काम हमको करना चाहिए था, उस विकास पर खर्च नहीं कर रहे हैं, वह 60 करोड़ 85 लाख हम सरप्‍लस दिखा रहे हैं और इसको बचत का कह रहे हैं कि साहब यह हमारा सरप्‍लस हो गया। यह सरप्‍लस आया कहां से? यह सरप्‍लस वह दिखा रहे हो जो आपने कर्जा लिया है। इसको सरप्‍लस दिखा रहे हो। यह आकड़ों की बाजीगीरी और जगलरी करके आप राजस्‍थान की जनता को बेवकूफ नहीं बना सकते हो। आप तो ठीक है ऐसा काम कर रहे हो कि कोई एक आदमी डेढ़ सौ रुपये उधर ले ले किसी से और डेढ़ सौ रुपये उधार लेकर 100 रुपये खर्च कर दे और पचास रुपये बचाकर कहे कि देखो मेरे पास 50 रुपये बच गये। देखो मेरे पास पचास रुपये बच गये। ऐसा करने से राजस्‍थान का भला होने वाला नहीं है। आपका फिजिकल डेफिसिट आप देख लें। आपकी स्थिति राजकोषीय घाटे को कम दिखाने के लिए, आज बजटीय अधिशेष, सरप्‍लस दिखा रहे हैं। सरप्‍लस आया कहां से ? यह सब आपने कर्जा लिया है इसलिए आज तो हमारी स्थिति यह हो गयी कि हमको कर्जे का ब्‍याज चुकाने के लिए भी नया कर्जा लेना पड़ रहा है और कर्जे की अर्थव्‍यवस्‍था से हमको निकलना पड़ेगा। हमारी स्थिति तो आज यह हो रही है कि एक ऐसी महिला है जिसका बच्‍चा तो दूध मांग रहा है और वह बच्‍चे को दूध पिलाने के बजाए लिपिस्टिक पर और कॉस्‍मेटिक्‍स पर खर्च कर रही है। यह प्राथमिकताएं ठीक नहीं है, इनको हमको सोचना चाहिए इसलिए मैं माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, कहना चाहता हूं कि फिर हम अपने आपको कहने के लिए, आप कहते हो कि अशोक गहलोत कह रहे थे कि खजाना खाली है, खजाना खाली है लेकिन अकाल पीडि़त जनता को कभी यह महसूस नहीं होने दिया कि राजस्‍थान का खजाना खाली है। राजस्‍थान की सरकार ने उसको घर में बैठे गेहूं पहुंचाने का काम किया। उन्‍होंने जो गरीब आदमी था, प्‍लीज आप बैठ जाइये। ...(व्‍यवधान)

श्री नन्‍दलाल बंशीवाल: उस अकाल में तो भूखे मर गये लोगबाग, लोगबाग भूखे मर गये, गरीब आदमी भूखे मर गये गहलोत सरकार में ...(व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): मुझे मजबूर मत कीजिए, आप बैठ जाइये। ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: बीच में नहीं, माननीय सदस्‍य।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, उन्‍होंने गरीब बीमार को जीवन रक्षा कोष से इलाज कराकर 23 हजार लोगों को यह महसूस नहीं होने दिया कि राजस्‍थान का खजाना खाली है। उन्‍होंने जो जरूरत के काम थे उसमें कभी पैसे की बात नहीं कही लेकिन यह तो आप करते हो कि साहब, अब उसको छुपाने के लिए कि हम डेट ट्रेप में फंस गये, हम कर्जे के कुचक्र में फंस गये । आप फ्लाईओवर बना देते हो, आप कुछ सड़कें बना देते हो। यह फ्लाईओवर बनाने के हम खिलाफ नहीं है लेकिन यह फ्लाईओवर से गरीब का भला हो रहा है क्‍या ? इस पर तो जो मोटर कार वाले हैं वे ही दौड़ेंगे उनका जो समय लगता था, वह खर्च हो रहा है। गांव की स्थिति क्‍या है? गांव पर आप क्‍या कर रहे हो?  गांवों की स्थिति यह है कि आपने इस बजट में माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह बजट गांव, गरीब और किसान का विरोधी है। यह मैं इसलिए आपको कहना चाहता हूं कि इस बजट के अन्‍दर आपने एग्रीकल्‍चर के ऊपर जो बजट था उसमें आपने कमी की। आपने इर्रिगेशन, राजस्‍थान की धरती किसी भी हालत में पंजाब और हरियाणा की धरती से कम उपजाऊ नहीं है।

 

Spp/usc/10.3.2006/1430/2f

 

राजस्‍थान का किसान किसी भी अन्‍य राज्‍य के किसान से कम मेहनतकश नहीं है,लेकिन कमी केवल यह है कि राजस्‍थान की धरती की प्‍यास नहीं बुझ पा रही है, उसकी उर्वरा शक्ति में भी कमी नहीं है, उसकी प्‍यास अगर बुझ जाये, सिंचाई के लिये पानी मिल जाये तो आज राजस्‍थान का किसान भी हरियाणा और पंजाब के किसान की तरह मालामाल हो सकता है। उसकी आर्थिक स्थिति सुधर सकती है। आपने इस बजट के अंदर दिया है, मैं आपको उदाहरण देना चाहता हूं कि इस बजट में आपने एग्रीकल्‍चर पर 06 और 7 में जो आपने पिछली बार 394.27 का अनुमान था, आपने 227.22 करोड़ रूपये खर्च करने का इरादा रखा। 150 करोड़ रूपये की कटौती तो आपने एग्रीकल्‍चर में कर दी, क्‍या यह भी गलत है? क्‍यों करी? आप, राजस्‍थान जो कृषि प्रधान राज्‍य है, राजस्‍थान की इकोनोमी एग्रीकल्‍चर बेस इकोनोमी है, चाहे वह कृषि हो, चाहे पशुपालन हो, चाहे डेयरी हो, चाहे और दूसरी चीजे हों, उस पर आपने कमी कर दी। 150 करोड़ की, खेती कहां से बढ़ेगी? ..(व्‍यवधान)...

                      (समय समाप्ति सूचक घण्‍टी)

मतलब यह डिटेक्‍ट करेंगे और आप कहोगे। इर्रिगेशन का मैं आपसे जिक्र कर रहा था। पिछली बार 992.54 करोड़ का इस बार आपने इसको 925.56 यानि आपने 67 करोड़ रूपये की कमी सिंचाई के अदंर कर दी। आप रूरल डवलपमेंट, ग्रामीण विकास की बात करते हैं, ग्रामीण विकास की स्थिति यह है कि पिछली बार 47.62 के विरूद्ध आपने इस साल 39.57 आप खर्चा चाहते हो यानि 8 करोड़ 5 लाख रूपयों की आपने ग्रामीण विकास के अंदर कमी कर दी। सामाजिक सेवाएं, इसकी बड़ी बातें कर रहे थे, वृद्धावस्‍था पेंशन देंगे, हम विकलांगों की मदद करेंगे, हम दलितों और एस.सी., एस.टी. के लोगों को यह करेंगे। आपने सामाजिक सेवाओं के अंदर 1711.66 करोड़ का आपका जो प्रावधान था, उसको आपने रिवाइज एस्‍टीमेट में 1517.56 कर दिया। इसमें भी आपने कमी कर दी तो लगभग 200 करोड़ रूपया आपने काट लिया। आप दिखाओ कुछ और करो कुछ, यह कैसे चल सकता है? इसलिए मैं आपसे यह निवेदन करना चाहता हूं कि आज आपकी स्थिति तो यह है फिर मैं कहूंगा आप केन्‍द्र प्रवर्तित योजनाओं पर चल रहे हो या आप केन्‍द्र सरकार के ऊपर चल रहे हो तो आपको बुरा लगेगा।

श्री महावीर प्रसाद जैन(सरकारी मुख्‍य सचेतक): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं यह निवेदन करना चाहता हूं कि पार्टियों का जो समय है उसके हिसाब से हमारे सदस्‍य केवल ढाई घण्‍टे बोले हैं और कांग्रेस के माननीय सदस्‍य दो घण्‍टे से ज्‍यादा बोल चुके तो हमारे माननीय सदस्‍यों को या तो तीन-चार को बुलवाइये। यदि समय सीमा में नहीं बांधेंगे तो और जो माननीय सदस्‍य बोलना चाहते हैं ..(व्‍यवधान) ...

मोहम्‍मद माहिर आजाद: चैम्‍बर में बात की जाती है, यहां की जाती है। (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: इसमें थोड़ी पाबन्‍दी रखिये। 

श्री महावीर प्रसाद जैन: मैं इसलिए कह रहा हूं ...(व्‍यवधान) ..

डॉ.बुलाकीदास कल्‍ला(बीकानेर): यह पहले तय था एक पक्ष और एक विपक्ष में बोलेगा। ..(व्‍यवधान)..

श्री महावीर प्रसाद जैन: स्‍तर तो जो परम्‍पराएं हैं, वह स्‍तर अच्‍छा है। आप परम्‍पराओं का निर्वहन करो उपाध्‍यक्ष महोदय। ..(व्‍यवधान).

श्री सुभाष शर्मा(कोटपूतली): निर्दलियों को भी मौका दिया जाये माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, बीच-बीच में।

श्री रामप्रताप कासनियां: उपाध्‍यक्ष महोदय, बीच में भी बैठे हैं हम। ..(व्‍यवधान) ..

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय माहिर आजाद जी, ऐसा है करीब आपको 25-30 मिनट हो गये। 

मोहम्‍मद माहिर आजाद: मैं एक घण्‍टा और बोलूंगा बस। 

श्री उपाध्‍यक्ष: नहीं-नहीं, एक घण्‍टा कौन बोलने देगा ?

मोहम्‍मद माहिर आजाद: वह आप मेरी पार्टी से पूछ लें। (व्‍यवधान)...

श्री सुभाष शर्मा: माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, निर्दलिय सदस्‍यों को भी बीच में बोलने का मौका दिया जाये।

श्री उपाध्‍यक्ष: दूसरे सदस्‍यों के लिये समय नहीं बचेगा फिर। 

मोहम्‍मद माहिर आजाद: माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, सत्‍ता पक्ष के दो माननीय सदस्‍य बोल लिये। क‍ल रामलाल जी शर्मा बोल लिये थे और अब आप एक बोल लिये।

श्री महावीर प्रसाद जैन: सब रिकोर्डेड है मामला। (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद: माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन कर रहा था (व्‍यवधान) 

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप दो मिनट में समाप्‍त कीजिये।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: कितने में?

श्री उपाध्‍यक्ष: दो मिनट में समाप्‍त कीजिये।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: यह तो आप लोगों को कहना चाहिये, मैं खड़े होकर कोई बात यहां पर कहूंगा क्‍या?

श्री उपाध्‍यक्ष: दूसरे सदस्‍यों को मौका नहीं मिलेगा, फिर वह शिकायत करेंगे।

डॉ.बुलाकीदास कल्‍ला: नहीं करेंगे, कोई शिकायत नहीं करेंगे। वह अच्‍छा बोल रहे हैं। 

श्री उपाध्‍यक्ष: सब बोलना चाहते हैं।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: वह खड़े हो जाते हैं कैसे बोलें साहब ? माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं यह निवेदन कर रहा था कि यह बजट गांव, गरीब और किसान का विरोधी है। आपने एग्रीकल्‍चर के अंदर कटौती कर ली, आपने इर्रिगेशन पर कटौती की, आपने सामाजिक सेवाओं में कटौती की और दूसरा प्रदेश का जो विकास होता है वह औद्योगिक और खनिज के विकास से होता है। आपकी यही स्थिति इंडस्ट्रियल प्रोडक्‍शन की रही। कल एक माननीय सदस्‍य ने एक बात कही थी मैं उसकी गहराई में नहीं जाकर संक्षिप्‍त में निवेदन करना चाहता हूं कि हमारे इंडस्ट्रियल प्रोडक्‍शन की स्थिति क्‍या है? आपकी आर्थिक समीक्षा का पेज 29-30-31 में आप देख लें। 35 आइट्म्‍स इन्‍होंने आइडेंटिफाई किये हुए हैं और 35 आइट्म्‍स में से 18 के अंदर आपका इंडस्ट्रियल प्रोडक्‍शन कम हो रहा है और आप प्रदेश का औद्योगिक विकास करना चाहते हैं। यह स्थिति आपकी हो गयी। दो वर्षों में आपके लाइन के ऊपर 87 प्रतिशत प्रोडक्‍शन आपका कम हो गया। ट्रांसफार्मर्स पर आपका 37 प्रतिशत फॉल आया है और आप एक तरफ विद्युतिकरण को बढ़ावा देने की बात कर रहे हैं और ट्रांसफार्मर्स में आपका प्रोडक्‍शन 37 प्रतिशत कम हो रहा है। आप पानी को बढ़ाने की बात कर रहे हैं और आपका जापानी मीटर, जो पानी के मीटर बनते थे, उसका प्रोडक्‍शन 33 प्रतिशत कम हुआ है यानि स्थिति कैसे भी उठाकर देख लें कि आपका खेती पर, सिंचाई पर, ग्रामीण विकास पर पैसा कम हुआ है और इसी तरीके से आप प्राइस इंडेक्‍स को उठाकर देख लें। प्राइस इंडेक्‍स की स्थिति यह है कि 2000 के अंदर मैं फिर चाहूंगा, अगर मैं गलत हूं तो आप करेक्‍ट कर दें, 2000 में आपका प्राइस इंडेक्‍स आपकी इकोनोमिक्‍स रिव्‍यू का पेज 20 उठाकर देख लें, 2000 के अंदर 441 था, था या नहीं था और उसके बाद 2003 में 496 था और आज 2005 में 536 हो गया है यानि मंहगाई बढ़ रही है और गांव और गरीब का पैसा काट रहे हैं।

      एम्‍प्‍लायमेंट की बात यहां पर कही गयी । आपकी एम्‍प्‍लायमेंट की स्थिति देखिये, मैं पब्लिक और प्राइवेट सैक्‍टर की बात कर रहा हूं । 2002-03, 2003-04, 2004-05 उठाकर देख लें तो आपकी पब्लिक और प्राइवेट सैक्‍टर के अंदर जो 12.46 थी, वह आपकी 11.91 रह गयी, यानि आबादी बढ़ रही है और आप औद्योगिकरण के अंदर पीछे जा रहे हैं। प्राइस इंडेक्‍स बढ़ रहा है और आपका रोजगार कम हो रहा है और उसके बाद भी यही कह रहे हो कि हमने बहुत बड़ा विकास कर दिया ।

( समय समाप्ति सूचक घण्‍टी )

श्री उपाध्‍यक्ष: धन्‍यवाद माहिर साहब, अब आप बंद कीजिये।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं कन्‍क्‍लूड कर रहा हूं। दस मिनट में कन्‍क्‍लूड कर रहा हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: आपने तीन माननीय सदस्‍यों का समय ले लिया है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: अच्‍छा, मैं कन्‍क्‍लूड कर रहा हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: नहीं-नहीं, अब मैं दूसरे माननीय सदस्‍य का नाम पुकार रहा हूं। (व्‍यवधान) ना-ना, बोलने कैसे दें, सब अप-सैट हो जायेगा। इनको किसी ने टोका-टोकी नहीं की।

डॉ.बुलाकीदास कल्‍ला: बहुत अच्‍छे बोल रहे हैं।

श्री उपाध्‍यक्ष: अच्‍छा तो हमेशा ही बोलते हैं।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: मैं आपसे निवेदन कर रहा हूं कि सामाजिक सुरक्षा में पिछली सरकार की बात आप देखिये कि पिछली सरकार ने मेडिकल, इंजीनियरिंग और अन्‍य तकनीकी संस्‍थानों में एस.सी. का आरक्षण 8 से बढ़ाकर 16 प्रतिशत किया। एस.टी. का आरक्षण 6 से बढ़ाकर 12 प्रतिशत किया और ओ.बी.सी. को पहली बार 21 प्रतिशत आरक्षण दिया। क्‍या यह काम पिछली सरकार ने किया या नहीं किया? एस.सी. और एस.टी. पर होने वाले अत्‍याचारों में कमी करने हेतु क्षतिपूर्ति की राशि को दस गुनी और बीस गुनी बढ़ाई। एस.सी. के आदमी की हत्‍या पर जो दस हजार रूपये मिलते थे, उसको एक लाख करने का काम पिछली सरकार ने किया। स्‍थाई रूप से शारीरिक क्षति होने पर दस हजार से 25 हजार किया। बलात्‍कार के मामले में पाँच हजार से एक लाख किया और अस्‍थाई क्षति के मामले में दो हजार से बढ़ाकर दस हजार करने का काम किया। मैं आपसे यह भी निवेदन करना चाहता हूं कि बात करते हैं कुछ नहीं किया। मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि जनसंख्‍या नीति किसने बनाई, क्‍या यह गहलोत सरकार ने नहीं बनाई? ऊर्जा नीति किसने बनाई, उद्योग नीति किसने बनाई, पेयजल व्‍यवस्‍था पर नीति किसने बनाई, पर्यटन नीति किसने बनाई, महिला विकास नीति किसने बनाई, सूचना और प्रौद्योगिकी नीति किसने बनाई, खनिज नीति किसने बनाई, पवन ऊर्जा नीति किसने बनाई ? हम तो एक ही काम करना बाकी छोड़ गये और वह केवल इतना था अगर हम एक काम और कम देते कि साम्‍प्रदायिक शक्ति भगाओ नीति और बना देते तो आज हमको यह दिन नहीं देखने पड़ते। एक नीति बनानी बाकी रह गयी, वह भी दुबारा मौका मिलेगा जब बनाने का काम करेंगे। ...(व्‍यवधान).. आपके कर्मों से ही मिलेगा। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं शिक्षा पर कुछ आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं। आज शिक्षा की बात की गयी कि शिक्षा पर यह काम ...(व्‍यवधान) ..

(समय समाप्ति सूचक घण्‍टी)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, शिक्षा की अनुदान मांगों पर फिर आपको समय देंगे। अब तो आप समाप्‍त कीजिये। श्री ज्ञानचन्‍द पारख।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: इसमें कुछ जरूरी है। नहीं-नहीं, दो चार जरूरी बातें कहकर मैं खत्‍म कर रहा हूं। (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री ज्ञानचन्‍द पारख। बहुत ज्‍यादा समय हो गया।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: ऐसे नहीं उपाध्‍यक्ष महोदय, कन्‍क्‍लूड तो करने देंगे आप। उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं दो-चार जरूरी बात कहकर खत्‍म कर रहा हूं। (व्‍यवधान)

श्री सुभाष शर्मा: माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, निर्दलिय सदस्‍यों को भी बोलने का मौका दीजिये। (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद: माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय शिक्षा मंत्रीजी से जानना चाहता हूं क्‍या आज भी राजस्‍थान में शिक्षक विहीन विद्यालय नहीं हैं?

श्री उपाध्‍यक्ष: यह बता देंगे।                    

 

msr/usc/1440/10032006/2g

 

 

मोहम्‍मद माहिर आजाद: आप बता दें, आज भी शिक्षक विहीन विद्यालय चल रहे हैं और आप शिक्षा के प्रचार-प्रसार की बात कर रहे हो। आपने शिक्षकों के रिक्‍त पद भरने की बात की, यह क्‍वेश्‍चन नम्‍बर 290, कल ही जवाब दिया है, 90 से, 15-15, 16-16 साल से उर्दू अध्‍यापकों के पद रिक्‍त चल रहे हैं।

         उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से एक निवेदन करना चाहता हूं कि यह समराना फारूख, कक्षा दस की हिन्‍दी की परीक्षा दे रही थी तीन तारीख को किशनगढ़बास गर्ल्‍स स्‍कूल के सेन्‍टर में, उसको सेन्‍टर सुपरिन्‍टेन्‍डेन्‍ट ने इसलिए निकाल दिया कि तरे चिकन पोक्‍स है, तु दूसरे बच्‍चों को भी इसको लगा देगी, उसको निकाल दिया। आप इसकी क्‍या व्‍यवस्‍था करेंगे? वहां आन्‍दोलन हो रहा है, अखबारों में आ रही है। उसको चिकन पोक्‍स है, एक तरफ आप कहते हो हमने बड़ी माता चेचक का इलाज कर दिया और जो बड़ी माता चेचक का मरीज बतायेगा उसको हजाररुपये इनाम दिया जायेगा और इस बच्‍ची को इसलिए परिक्षा में रहने से निकाल दिया तीन तारीख को कि, भई, तेरे चिकन पोक्‍स हो रही है। इसकी क्‍या व्‍यवस्‍था करेंगे अब आप, दोबारा परीक्षा में बैठेगी कि सप्‍लीमेंट्री रहेगी कि क्‍या करेगी? यह मैं आपसे तवज्‍जो चाहता हूं।

         कल मावली से आने वाले माननीय सदस्‍य कह रहे थे कि आपने विधवाओं को और परितक्‍ताओं को बहुत बड़ी संख्‍या में नौकरी दे दी, मुस्लिम तलाकशुदा बालिकाओं ने और परितक्‍ताओं ने आपका क्‍या बिगाड़ा था, आपको हाई कोर्ट का निर्देश आ गया, आप उन तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को नियुयक्ति क्‍यों नहीं दे रहे? क्‍या वह विधवा और परितक्‍ता नहीं हुई है? इसलिए मेरा निवेदन है कि, माननीय शिक्षा मंत्रीजी, बड़े दिल से आप इसके ऊपर भी विचार करने का काम कीजिए।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। श्री ज्ञानचन्‍द पारख।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: आपने मिडल स्‍कूल बना दिये, एक भी कालेज का लेक्‍चरर आपने बनाया, एक भी व्‍याख्‍याता बनाने का काम आपने किया है? ...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, नहीं, नहीं, मैंने नाम पुकार लिया दो बार।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: मैं पूर्वी राजस्‍थान की एक बात कहूंगा कि क्‍या अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली और सवाईमाधोपुर राजस्‍थान का हिस्‍सा नहीं है?

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप अपना स्‍थान ग्रहण कीजिए। माननीय माहिर साहब।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: उपाध्‍यक्ष महोदय, एक मिनट में खतम कर रहा हूं, सिर्फ एक मिनट में।

         उपाध्‍यक्ष महोद, मैं आपके माध्‍यम से यह कहना चाहता हूं कि माननीय मुख्‍यमंत्रीजी की दरियादिली से तो मैं कायल हूं और ऐसे काकेयल हूं कि वह कहते हैं न कि तुम मुझे एक पैसा दोगे मैं तुम को दस लाख दूंगा, उनको सरदार अजयपाल सिंहजी ने एक मकान रहने के लिए दिया उन्‍होंने उनको हाउसिंग बोर्ड को ही अध्‍यक्ष बना दिया कि ले, हजारों-लाखों मकान ले और तु देता रह। भरतपुर संभाग भी राजस्‍थान का हिस्‍सा है, भरतपुर संभाग में कोई यूनिवर्सिटी नहीं, कोई इन्‍जीनियरिंग कालेज नहीं, कोई मेडिकल कालेज नहीं और हैल्‍थ मिनिस्‍टर साहब बैठे हैं, घर के पूत कंवारे डोले और पाड़ोसियों के फेरे कर रहे हो, आपको पूर्वी राजस्‍थान की जनता माफ नहीं करेगी अगर भरतपुर के अन्‍दर, भरतपुर संभाग में आपने मेडिकल कालेज या इन्‍जीनियरिंग कालेज नहीं बनाया। आपने वहां यूनिवर्सिटी कायम नहीं की। आज वहां सिंचाई के साधन नहीं हैं। गम्‍भीरी नदी की क्‍या स्थिति हो गयी, रूपारेल की क्‍या स्थिति हो गयी, बाणगंगा की क्‍या स्थिति हो गयी, लोग वहां पानी को तरस रहे हैं। एक तरफ प्राकृतिक आपदा को झेल रहे हैं दूसरी तरफ प्रशासन की अनदेखी को झेल रहे हैं इसलिए, उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से यह निवेदन करना चाहता हूं कि आप पूर्वी राजस्‍थान की तरफ भी ध्‍यान देने का काम करेंगे।

         अंत में एक शेर सुना कर अपनी बात खतम करना चाहता हूं।

श्री दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा मंत्री): माहिरजी, आपने आज इतना बोर किया, अगर शेर भी बोर हुआ तो मजा नहीं आयेगा, शेर जानदार सुनादेना। शेर तो अच्‍छा हो।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: आपके राज में तो गीदड़ और लंगूरों की तादाद बढ़ रही है, पूछो लक्ष्‍मीनारायण दवे साहब से, शेर तो कांग्रेस के राज में था अब तो सरिस्‍का में ही एक नहीं रहा, कहीं भी नहीं रहे।

श्री संयम लोढ़ा: पर आप यह पूछो कि लंगूर और इनकी तादाद बढ़ाने के लिए मंत्रिमण्‍डल के किस सदस्‍य ने विशेष प्रयास किये।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: वह तो खड़े हो रहे हैं न खुद ही, लंगूर वाली हरकत नहीं देख रहे क्‍या आप, पूछने की जरूरत क्‍या है।

         उपाध्‍यक्ष महोदय, 'एक स्‍कूल अब ऐसा चलाया जाए जिसमें कुछ और नहीं प्‍यार सिखाया जाए, किसी मन्दिर में दियाऐसा जलाया जाए जिसके उजियाले में कुरान पढ़ाया जाए, रावणों की यहां वैसे भी कमी क्‍या है लोगों, अब दशहरे पर तोरावण न जलाया जाए, जो यह कहते हैं यह देश है कुछ लोगों का, ऐसे लोगों को ही अब इतिहास पढ़ाया जाए'। धन्‍यवाद। जय हिन्‍द।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री ज्ञानचन्‍द पारख।

श्री संयम लोढ़ा: उपाध्‍यक्ष महोदय, ओन ए पाइंट ऑफ इन्‍फोर्मेशन।

         उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से राज्‍य सरकार से निवेदन करना चाहता हूं कि नागोर जिले के जाट समाज के सैंकड़ों की तादाद में लोग आज स्‍टेच्‍यू सर्कल पर धरनादे रहे हैं और वो इस धरने के माध्‍यम से राज्‍य सरकार का ध्‍यान प्रदेश में बढ़ते हुए मृत्‍यु भोज की तरफ आकृष्‍ट करना चाह रहे हैं।

         उपाध्‍यक्ष महोदय, आप जानते हैं कि पूरे राजस्‍थान में कानून होने के बावजूद इतनी, हजारों की तादाद में मृत्‍यु भोज होते हैं और राजस्‍थान का सरकार का जो कुल  बजट है उससे कई ज्‍यादा धन इस मृत्‍यु भोज में बरबाद हो रहा है। और वह गरीब आदमी जो पैसे का इंतजाम नहीं कर सकता गरीबी की वजह से वह ब्‍याज पर पैसा लेने को विवश है और यह जो कानून राजस्‍थान मृत्‍यु भोज निवारण अधिनियम, 1960 बनाया गया है, इसकी पूरे राजस्‍थान में कहीं कोई पालना नहीं हो रही है। उपाध्‍यक्ष महोदय, सरपंच, ग्राम सेवक, पटवारी सभी को इसमें प्रावधान किया गया है, सब को जवाबदेह बनाया गया है और उनके द्वारा सूचना नहीं देने पर सज़ा का प्रावधान किया गया है।

         इसलिए, उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से यह सरकार से निवेदन करना चाहता हूं कि वह जाट समाज के प्रतिनिधिमण्‍डल को बुला कर के इस सम्‍बन्‍ध में ज्ञापन ले, इस सम्‍बन्‍ध में उनसे मुलाकात करे और इस सदन में आपके माध्‍यम से गृह मंत्रीजी से निवेदन करना चाहता हूं कि वह सदन को आश्‍वस्‍त करें कि पूरे प्रदेश में इस कानून की पालना सुनिश्चित की जायेगी और इस कुरूती की वजह से हजारों की तादाद में जो परिवार तबाह हो रहे हैं उनको रोकने का काम सरकार करेगी, उपाध्‍यक्ष महोदय।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, वह जाट समाज के प्रतिनिधिमण्‍डल आपसे मिले हैं क्‍या कोई? 

श्री संयम लोढ़ा: मैं उनके धरने पर स्‍टेच्‍यू सर्कल पर जाकर आया हूं, मैं और मेड़ता से आने वाले माननीय सदस्‍य जाकर आये हैं इसलिए मैं आपके माध्‍यम से सरकार से निवेदन करना चाहता हूं कि एक बहुत अच्‍छा काम करने का...(व्‍यवधान)

श्री रामचन्‍द्र जारोड़ा: जाकर आये हैं। यह निवेदन करना चाहते हैं कि 1960 का मृत्‍यु भोज निवारण अधिनियम है उस पर कार्यवाही की जाए। सैंकड़ों किसान आये हुए हैं।

श्री उपाध्‍यक्ष: वो खुद ही बहुत सक्षम हैं।

श्री संयम लोढ़ा: माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, पूरे नागोर जिले में इस साल के अन्‍दर तीन हजार मृत्‍यु भोज जाट समाज की चेतना, अथक प्रयासों की वजह से रुके हैं...(व्‍यवधान) और दूसरी सभी जातियों के लोग भी इस काम में सहयोग कर रहे हैं और, उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे चाहूंगा कि इस कुरूती से समाज को बचाने के लिए आप आसन से सरकार को निर्देश प्रदान करें कि वे इस कानून को प्रभावी करें। यह कानून मंत्री विराजमान हैं।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री ज्ञानचन्‍द पारख। ...(व्‍यवधान)... असामाजिक है समाज?

मोहम्‍मद माहिर आजाद: यह तो श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी, दीनदयाल उपाध्‍याय का नाम लेकर नशाबंदी केन्‍द्र भी खोलना चाहती है और दारू को भी बढ़ावा दे रही है। कुछ नहीं।

श्री संयम लोढ़ा: कानून मंत्री विराजमान हैं, कानून की पालना तो कराओ। 

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी: प्रतिनिधिमण्‍डल आयेगा तो मिल लेंगे, मदद करेंगे...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा: आप बुलवा लो अधिकारी के जरिये, आने नहीं दे रहे उनको तो।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी: बुला लेंगे, बुला लेंगे।

श्री संयम लोढ़ा: ठीक है,साहब, धन्‍यवाद।

श्री रामचन्‍द्र जारोड़ा: ठीक है।

श्री उपाध्‍यक्ष: दूसरी तकलीफ होगी जी। (व्‍यवधान) इतना कमजोर थोड़ी ही है।

श्री ज्ञानचन्‍द पारख (पाली): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मुख्‍यमंत्रीजी द्वारा वर्ष 2006-07 का जो बजट पेश किया गया, समाज का प्रत्‍येक वर्ग उससे खुश है, वह राहत महसूस कर रहा है और उसे इस बात का अहसास है कि उसके कल्‍याण की ढेरों योजनाएं इस बजट में हैं।

         माननीय मुख्‍यमंत्रीजी ने इस बजट में प्रदेश के सर्वांगीण विकास की जो तस्‍वीर, जो चित्र हमें दिखाया है वह आने वाले कल  में गांवों का नक्‍शा बदल कर रख देगा। गांवों में ढेरों अभाव, ढेरों समस्‍याएं हैं लेकिन हम जिस दिशा में बढ़ रहे हैं, आने वाले कल में न तो अभाव रहेंगे और न समस्‍या रहेगी।

(समय:      बजे)

    (श्री सुरेन्‍द्र गोयल, सभापति, पदासीन) 

         लगभग सारे बजट से खुश हैं, हां आपके चेहरे जरूर लटके हुए हैं। आपको यह अहसास भी हो रहा है कि अगर इसी प्रकार बजट आता रहा और ऐसे ही विकास के काम होते रहे, प्रत्‍येक वर्ग के राहत की इतना योजनाएं अगर लगातार बनती रही, उनको उसका लाभ मिलता रहा तो शायद आने वाले वक्‍त में आपका कोई नाम लेने वाला नहीं बचेगा। निश्चित रूप से यह होने वाला है। इतनी खुश है जनता। बिलकुल बजट से अहसास हो रहा है कि इस बार हमारा विद्यालय भी क्रमोन्‍नत होगा, हमारे गांव में भी पीने के पानी की जो समस्‍या वर्षों से चल रही है उसका समाधान भी होगा। सिंचाई के साधन की जो कमी महसूस हो रही है वर्षों से उस कमी के दूर होने का भान भी उसे होने लगा है। बेरोजगारी, गरीबी इसमें भी अनुभव कर रहा है कि उसको बहुत कुछ राहत मिलेगी।

         यह बजट कोई मामूली बजट नहीं है, जिस समय माननीय मुख्‍यमंत्रीजी द्वारा बजट पढ़ा गया, आपके सारे के चेहरे लटके हुए थे। बिलकुल चेहरे, गर्दन लटकी हुई थी, अपने भविष्‍य के बारे में चिंतित थे आप और आपके सामने यह भी था कि हम जब क्षेत्र में जायेंगे...।

 

Ars/usc/2h/1450/10032006/1

 

   जनता जब पूछेगबी कि आपको भी कई बार मौका दिया था हमने शासन का तो क्‍यों नहीं रोजगार दिया आपने, क्‍यों नहीं आपने गरीबी दूर की, पानी क्‍यों नहीं पिलाया, सिंचाई के साधन क्‍यों नहीं उपलब्‍ध कराए,स्‍कूल क्‍यों नहीं खोले, गांवों की जो ढ़ेरों समस्‍याएं थीं, जो आपने उनके ऊपर थोप दी, डाल दी जनता उसका जवाब आपसे पूछने वाली है। उसी जनता को लेकर आप चिन्तित थे। आपके चेहरे उदास थे और आपको यह अहसास भीहो गया कि इसका कोई जवाब आपके पास नहीं। जनता को चेहरा दिखाने लायक नहीं, अब वह हिम्‍मत आपमें नहीं। माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने इस बजट में जो भी योजनाएं दीं कहीं भी इस बात का रोना नहीं रोया किहमारे पास धन का अभाव है, कभी यह भी नहीं कहा उन्‍होंने कि हमारे साधन सीमित हैं, हमारा खजाना खाली है इसलिए हम इतने काम नहीं कर सकते, हमको इन इन योजनाओं में कटौति करनी पड़ रही है। जो भी राजस्‍थान की आवश्‍यकता, राजस्‍थान की जनता की आवश्‍यकता, उन सारी आवश्‍यकताओं को उस बजट में सम्मिलित कर माननीय मुख्‍यमंत्री जी के दिए हुए बजट से पूरे प्रदेश की जनता बहुत खुश। अखबारों में प्रतिक्रियाएं आपने भी पढ़ी होंगी। प्रतिपक्ष के सदस्‍यों के वक्‍तव्‍य छोड़ दें, उनकी प्रतिक्रियाएं छोड़ दें या उनकी पार्टी से जुड़े हुए जो लोग हैं उनकी प्रतिक्रियाएं भी छोड़ दें, आम आदमी ने, आम जन मानस ने चाहे वह किसी भी वर्ग से संबंधित है उसने इस बजट को सराहा है, इसको जन कल्‍याणकारी बजट बताया है । बहुत सारी प्रतिक्रियाएं आईं, सबने अच्‍छा बताया और सबने यह भी कहा यह बजट निश्चित रूप से राजस्‍थान में क्रांतिकारी परिवर्तन लाएगा और आने वाले कल में आप खुद महसूस करोगे कि इस बजट के माध्‍यम से राजस्‍थान की जनता को कितनी राहत मिली और विकास के कितने नये आयाम हमने इस बजट में खोले हैं ।

    माननीय सभापति महोदय, यह माननीय मुख् मंत्री जी का एक के बाद एक तीसरा शानदार बजट, जनता के लिए बहुत शानदार, हमारे लिए बहुत शानदार पर आपके लिए आपकी कांग्रेस के ताबूत पर एक के बाद एक तीसरी कील और जब चौथा बजट पेश होगा तो चौथी कील ठुकेगी और उससे भी जब अगला बजट पेश होगा तो कांग्रेस का ताबूत राजस्थान की धरती केअन्दर दफन हो जाएगा। यह मानकर चलना आप हम यहनहीं कहते कि हमने सब कुछ कर दिया पर हम यह दावा जरूर कर सकते हैं कि हमने बहुत कुछ कर दिया। हम यह भी दावा कर सकते हैं कि हम बहुत कुछ बहुत जल्दी करने वाले हैं आपको भी अहसास होगा, अपने क्षेत्र में आपने भी काम देखे होंगे। आप प्रतिपक्ष में हैं, विरोध करना आपका काम है लेकिन महसूस जरूर किया होगा, चाहे विद्यालयों का मामला हो चाहे गांवों को सड़क से जोड़ने का मामला हो, चाहे पेयजल योजनाएं हों, आपने भी हमारे पैसे से वाहवाही लूटनेका प्रयास निश्चित रूप से किया होगा और उससे भी बढ़कर इस बजट में 31 हजार अध्यापकों की नई नियुक्ति की घोषणा कर हमारी मुख्यमंत्री जी ने जो बी.एड किए हुए युवा हैं उनके चेहरे पर चमक ला दी, आंखों में रोशनी ला दी। दौ सौ डाक्टर 200 .एन.एम 700 नर्सो की नियुक्ति, इसकी भी घोषणा बजट में है इस बार भी हम पचास हजार से ज्यादा लोगों को निश्चित रूप से सरकारी रोजगार उपलब् करायेंगे, यह प्रावधान इस बजट में है। ग्यारह हजार सहयोगिनों की भी गांव की गरीब महिला भी कुछ कुछ अपने बूते कुछ पैसे अर्जित कर सके उसका भी प्रावधान किया और बी.एड किया हुआ बेरोजगार युवा जो आपके पाँच सालके शासनकाल में आपकी नीतियों के कारण निराश हो गया था, उदास हो गया था और अपने अंधकारमय भविष् की आशंका  को लेकर हताश हो गया था, जो खुशियां आपने छीन ली थीं

Vns/usc/1500/2j/10.3.06

 

     बेरोजगार युवा की, हमारी मुख्‍यमंत्री जी ने इस बजट के माध्‍यम से वह खुशियां वापस लौटाने का जोकाम किया, प्रदेश का सारा युवा वर्ग उनको दुआएं दे रहा है, आशीर्वाद दे रहा है, उनकी पीठ थपथपा रहा है। आप यहां बैठकर कुछ भी बोल दो लेकिन बाहर वह युवा खुशियां मना रहा है।

      माननीय सभापति महोदय, कल माननीय