श्याम/जयगोविन्द/09032007/1200-1240/1g
अशोधित
प्रति/प्रकाशनार्थ
नहीं
राजस्थान
विधान सभा की कार्यवाही
का वृत्तान्त
अंक
7 बारहवीं
विधान सभा के सातवें
सत्र का दसवां
दिवस संख्या
7
-
मंगलवार, 09 मार्च,
2007
राजस्थान
विधान सभा की बैठक
12.00 बजे
विधान
सभा भवन, जयपुर
में प्रारम्भ
हुई।
( श्रीमती
सुमित्रा सिंह,
अध्यक्ष, पदासीन
)
श्री अध्यक्ष: मुख्यमंत्री को मेरी बधाई।
एक माननीय सदस्य: एडवांस में ...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: अच्छा बजट पेश करें इसलिए बधाई दी है, क्या बात हुई इसमें ...(व्यवधान)
डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आपकी आशा पूरी हो ...(व्यवधान)
श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अध्यक्ष महोदय, क्या कॉम्बिनेशन है, सरकार के भी 12 बज रहे हैं और बजट भी 12 बजे हैं।
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): बजट सुनने के बाद आपके 12 बजेंगे, अभी सुन लेना थोड़ी देर में, सुनना जरा। दिल थामकर के बैठो ...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: कृपया शांत रहें। थोड़ी देर में आपके 12 बजेंगे न। माननीय मुख्यमंत्री ...(व्यवधान)
श्री जुबेर खान (रामगढ़): महिलाओं के तो 12 बज ही गये और किसी के बजें या नहीं बजें ...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: अब कृपया शांत रहें, शुरू करने दें उन्हें।
आय-व्ययक
अनुमान वर्ष 2007-08
का उपस्थापन
श्रीमती वसुन्धरा राजे (मुख्य मंत्री): अध्यक्ष महोदय, आपकी अनुमति से मैं वर्ष 2006-07 के संशोधित अनुमान तथा वर्ष 2007-08 के बजट अनुमान प्रस्तुत कर रही हँ।
2- अध्यक्ष महोदया, सर्व प्रथम मैं आपको, सदन के समस्त माननीय सदस्यों को, और सदन के माध्यम से प्रदेश के हर नागरिक को, होली की हार्दिक शुभकामनाएं देना चाहूँगी। यह त्यौंहार गिले-शिकवे पालने का नहीं, भूलने-भुलाने का है, forgive and forget का है, आपसी प्यार और सम्मान का है। इसलिए
'जी करता है कि आज निभा दूं सारे वादे होली में,
तू चाहे तो आज बता दूं अपने इरादे होली में,
एक दूजे पर रंग लगा दें आओ मिलकर होली में,
गिले-शिकवे दूर भगा दें आओ मिलकर होली में।'
3- राज्य के पश्चिमी क्षेत्रों में इस वर्ष अभूतपूर्व बाढ़ आई। 20 से 24 अगस्त, 2006 के मध्य बाड़मेर में इन तीन दिनों में हुई बारिश, वार्षिक औसत का 144 प्रतिशत थी। इस प्राकृतिक आपदा में 18 लाख रुपये की हानि अनुमानित है। राज्य के अन्य भागों में भी कहीं बाढ़ का प्रकोप रहा एवं कई क्षेत्रों में सूखे की मार रही। फरवरी माह में ओलावृष्ठि हुई। मैं सदन की ओर से बाड़मेर में हुई अतिवृष्टि एवं राज्य के दूसरे भागों में आई अन्य आपदाओं में जान-माल की हानि उठाने वाले सभी परिवारों के प्रति अपनी सहानुभूति प्रकट करती हूँ।
4- वर्ष 2006-07 अनेक मायनों में राजस्थान के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुआ है। हमने वित्तीय प्रबंध, कुशलता से करते हुए उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं, जिनसे मैं सदन को अवगत कराना चाहती हूँ:
-वर्ष 1991-92 के बाद पहली बार राज्य चालू वर्ष के संशोधित अनुमानों के अनुसार Revenue Surplus में आया है। स्मरण रहे कि जब हमने सरकार की बागडोर संभाली थी, तब राज्य सरकार का राजस्व घाटा, राजस्व आय का 30 प्रतिशत था।
-यह revenue surplus सेवानिवृत्ति पुन: प्रारंभ होने से पेंशन का भार लगभग 700 करोड़ रुपये से बढ़ने, एवं महँगाई वेतन पर 11 प्रतिशत महँगाई भत्ते सहित महँगाई भत्ते की सभी किश्तें जारी करने से हुई 600 करोड़ रुपये से अधिक की वृद्धि के बावजूद achieve किया गया।
-इसी प्रकार, राजकोषीय घाटा इस वर्ष के अंत में राज्य के GSDP के 358 प्रतिशत के बराबर अपेक्षित है, जो कि वर्ष 2002-03 में 7.09 प्रतिशत था।
-इस कुशल प्रबंधन के कारण हमें न केवल वर्ष 2005-06 के दौरान देय हुए 309 करोड़ रुपये के debt waiver का लाभ मिला, बल्कि वर्ष 2006-07 के लिए भी राज्य debt waiver हेतु पात्र हो गया है।
-राज्य ने फरवरी 2004 के पश्चात् आज तक एक दिन भी ओवरड्राफ्ट नहीं लिया, व न कभी राज्य को ways and means advance का सहारा लेना पड़ा। राज्य में पूरे वर्ष पर्याप्त liquidity बनाई रखी गई, जिससे प्रशासनिक विभागों को योजना एवं गैर-योजनागत व्यय करने में पूर्ण operational एवं financial स्वतंत्रता रही। निर्माण विभागों की credit limit भी अब माहवारी के स्थान पर तिमाही जारी करने की व्यवस्था की गई है।
-इस प्रदेश में 3 वर्ष पूर्व का वह समय भी याद है जब कर्मचारियों को अपनी बेटी की शादी करने के लिए अपने ही GPF खाते से राशि निकालने हेतु वित्त विभाग के चक्कर लगाने पड़ते थे, और works विभागों का अधिक समय वित्त विभाग से credit limit लेने में निकलता था।
-न केवल ऋण वृद्धि को नियंत्रित किया गया है, बल्कि अब ऋण consumption के लिए नहीं लिया जाकर, asset creation में लगाया जा रहा है। उदाहरण के लिए, वर्ष 2006-07 में लिया गया 100 प्रतिशत ऋण, पूंजीगत व्यय में खर्च होगा। वर्ष 2002-03 में यह प्रतिशत केवल 34 था।
-राज्य की इस वर्ष की अनुमोदित योजना, 8 हजार 501 करोड़ रुपये की है। वर्ष 2006-07 की योजना का आकार, दसवीं पंचवर्षीय योजना के प्रथम 20 माह में, पूर्व सरकार द्वारा किये गये कुल विनियोजन 6 हजार 700 करोड़ रुपये से सवा गुना है।
-हमने न केवल लंबे समय से चल रही अपूर्ण योजनाओं को पूरा किया, बल्कि ग्राम संपर्क अभियान के दौरान सामाजिक अंकेक्षण के माध्यम से हमारी सरकार के सत्ता में आने के बाद के सभी कार्यों का सत्यापन करवाया। मुझे हर्ष है कि इस सरकार के कार्यकाल के दौरान सृजित की गईं 4 लाख 10 हजार 399 परिसंपत्तियों में से 99.5 प्रतिशत परिसंपत्तियां अस्तित्व में पाई गईं।
5- मुझे अफसोस है कि हमारे भरपूर प्रयासों के बावजूद केन्द्र सरकार ने ग्यारहवें वित्त आयोग द्वारा चालू की गई Fiscal Reforms Facility के तहत राज्य को प्रोत्साहन राशि के रूप में मिलने वाली 438 करोड़ 25 लाख रुपये की राशि जारी नहीं की। इसी प्रकार बाड़मेर जैसी भीषण आपदा के लिए भी केवल 100 करोड़ रुपये की सहायता देना ही केन्द्र सरकार ने मुनासिब समझा। राज्य के हित में, मैं यह उम्मीद करती हूँ कि पूरा सदन एक होकर केन्द्र सरकार से FRF की बकाया राशि, एवं बाड़मेर में राहत कार्यों के लिए पर्याप्त राशि release करने हेतु बाध्य करने में, मेरा सहयोग करेगा।
6- मैंने गत् वर्ष outcome budget बनाने के राज्य के निर्णय से सदन को अवगत कराया था। वर्ष 2005-06 व 2006-07 के लिए, भारत सरकार की तर्ज पर, राज्य का outcome budget तैयार कर लिया गया है। इस अनुभव से हमें राज्य की योजनाओं के निर्माण, क्रियान्वयन एवं monitoring में मदद मिली है। परंतु भारत सरकार का format वास्तव में output ज्यादा दर्शाता है। अत: वास्तव में पानी की बनी हुई टंकी से पानी मिल रहा है अथवा नहीं, स्कूल में वास्तव में पढ़ाई हो रही है अथवा नहीं, जैसे outcomes को कैसे मापा जाये, अब अगले कदम के रूप में यह देखना आवश्यक है।
7- पिछले वर्ष हमने 6 विभागों में Gender Budgeting and Auditing का काम हाथ में लिया था। कृषि विभाग का अध्ययन करने पर पाया गया कि विभिन्न विभागीय योजनाओं में महिला लाभांवितों की संख्या 10 प्रतिशत से भी कम है। इस स्थिति में सुधार लाने के लिए वर्ष 2006-07 से, कृषि विभाग की अनुदान वाली विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत महिलाओं को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया। राज्य सरकार के इस निर्णय से वर्ष 2006-07 में 4 लाख से अधिक महिलाएं लाभान्वित हुई हैं।
8- वर्ष 2006-07 में 8 नये विभागों-ग्रामीण विकास, जनजाति क्षेत्रीय विकास, उद्योग, सहकारिता, उद्यान, पशुपालन, वन एवं स्वायत्त शासन विभाग के Gender Budgeting का काम हाथ में लिया गया। अब इनके भी परिणाम आने लगे हैं। ग्रामीण विकास विभाग में गत दो वर्षों (2004-05 एवं 2005-06) में व्यक्तिगत लाभकारी योजनाओं में महिलाओं की भागीदारी 50 प्रतिशत से भी अधिक रही है। इंदिरा आवास योजना में तो वर्ष 2005-06 में 99 प्रतिशत आवास महिलाओं को आवंटित किये गये। राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम के अंतर्गत महिला लाभार्थियों का प्रतिशत 58 से अधिक रहा है।
9- आगामी वर्ष 2007-08 की वार्षिक योजना का योजना आयोग द्वारा अनुमोदित आकार 11 हजार 638 करोड़ 86 लाख रुपये है। यह चालू वर्ष से 37 प्रतिशत अधिक है। मैं सदन को यह अवगत कराना चाहती हूँ कि यह वृद्धि 708 करोड़ 87 लाख रुपये की योजनाएं गैर-आयोजना मद में स्थानांतरित करने के पश्चात् है। वस्तुत: like to like basis पर देखें, तो वृद्धि 45 प्रतिशत तक बैठेगी।
10- मुझे यह कहते हुए हर्ष है कि हम राज्य की ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना, जो 2007-12 में लागू होगी, का आकार दसवीं पंचवर्षीय योजना के मूलत: अनुमोदित आकार 31 हजार 832 करोड़ रुपये के मुकाबले 68 हजार 422 करोड़ रुपये तक ले जा सकेंगे, जो दसवीं पंचवर्षीय योजना के आकार का 215 प्रतिशत होगा। मुझे विश्वास है कि जब हम इस योजना के आकार को अंतिम रूप देंगे, तब यह राशि कुछ और बढ़ेगी, घटेगी नहीं।
11 मैं NDA द्वारा भारत को वर्ष 2020 तक विकसित राष्ट्र की पंक्ति में लाने के vision से पूरी तरह सहमत हूँ। वर्ष 2004-05 हेतु अपना पहला बजट प्रस्तुत करते समय, मैंने राज्य के विकास एवं लोगों की सर्वांगीण उन्नति के लिए अपना vision statement प्रस्तुत किया था। हमारी ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना भी इस सोच को आगे ले जाते हुए निम्न चार मुख्य स्तंभों पर आधारित होगी:
-समाज के गरीब, vulnerable एवं disadvantaged वर्गों को सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराना,
-राज्य के सामाजिक infrastructure की सशक्त नींव रखना एवं आर्थिक एवं सामाजिक विकास कार्यक्रमों का विस्तार करना
-राज्य के भौतिक infrastructure को पूर्ण करना एवं विकसित स्तर का बनाना, एवं
-राज्य के शासकीय एवं विकासीय ढांचे को पुनर्गठित कर उत्तरदायी प्रशासन उपलब्ध कराना।
महिलाएं एवं बच्चे:
12- कल महिला दिवस था, जो हमें यह सोचने पर विवश करता है कि राजस्थान में महिलाओं एवं बच्चों की सामाजिक, आर्थिक व शैक्षणिक स्थिति आज भी शोचनीय स्तर तक पिछड़ी हुई है। अत: इस बजट को मैं महिला सशक्तिकरण एवं रोजगार को समर्पित...
श्रीमती ममता
शर्मा (बूंदी): महिलाओं
की बात कह रहे हैं,
कल कितने डंडे
बरसे हैं ...(व्यवधान)
श्रीमती वसुन्धरा राजे (मुख्य मंत्री): What is this ?
श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): जो महिलाएं मुआवजा मांगने आयी थी, उन पर डंडे बरसाये गये, यह महिला दिवस पर कारनामा था, मुख्यमंत्री जी से मैं कहूंगी कि आप इस पर ध्यान दें।
श्रीमती वसुन्धरा राजे (मुख्य मंत्री): ....को समर्पित करते हुए पाँच सूत्रीय मुख्यमंत्री महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम की घोषणा करती हूं।
श्री अध्यक्ष: स्थान ग्रहण करें ...(व्यवधान)
श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अत्याचार हो रहे हैं महिलाओं पर ...(व्यवधान) अध्यक्ष महोदय, माफी मांगनी चाहिए ...(व्यवधान) अंर्तराष्ट्रीय महिला दिवस पर जिस बर्बरता से महिलाओं के पीटा गया है उसके लिए माफी मांगनी चाहिए।
श्रीमती वसुन्धरा राजे (मुख्य मंत्री): एक 5 सूत्रीय मुख्यमंत्री महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम की घोषणा करती हूं। मैं सदन से अनुरोध करूंगी कि पूरा सदन एक मत से निम्न पाँच लक्ष्यों की ओर बढ़ने, और इन्हें 2011 तक substantiallyप्राप्त करने का संकल्प लें। आई विश आप लोग सुने क्योंकि यह महिलाओं का काम है, यह सब बातें तो आप लोग बाहर भी कर सकते हैं।
-बालिकाओं का शत-प्रतिशत enrollment,
-बालिकाओं में शिशु विवाह की पूर्ण समाप्ति,
-हर महिला को institutional delivery की सुविधा ,
-crude birth rate का 21 प्रति हजार तक लाना,
-महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करना जिससे आने वाले तीन वर्षों मे प्रत्येक जिले में कम से कम 1 हजार महिलाओं को रोजगार उपलब्ध करवाया जा सके।
13- महिलाएं ''पुत्र जनै, जननी जनै, और मंगल गायें चार'' - दुर्भाग्यवश, यह मान्यता रही है हमारे समाज में। पर समाज की आधी शक्ति को यूं सीमित करने से, मेरी समझ में, हमारा विकास अवरुद्ध हुआ। स्त्री को सशक्त करना ही होगा, इस potential को तो exploit करना ही होगा। क्योंकि
'बिजली जब चमकती है आकाश बदल देती है,
आंधी जब उठती है दिन-रात बदल देती है,
धरती जब दरकती है सीमांत बदल देती है,
नारी जब गरजती है इतिहास बदल देती है।'
14- इस कार्यक्रम को कारगर करने के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा,पंचायतीराज, राजस्व, ग्रामीण विकास, रोजगार, गृह, परिवहन, कृषि और महिला और बाल विकास विभागों के विभिन्न कार्यक्रमों को समन्वित किया जाएगा, तथा राजस्थान Mission on Livelihood की मदद से क्रियान्वित किया जायेगा। विभिन्न विभागीय कार्यक्रमों को dovetail करने के पश्चात् भी उपरोक्त लक्ष्यों को अर्जित करने में कोई gap रहता है अथवा अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता रहती है, तो इसके लिए पृथक से 30 करोड़ रुपये का corpus बनाया जायेगा।
15- महिलाओं के सशक्तिकरण हेतु आर्थिक संपदाएं उनके नाम पर होना अत्यावश्यक है। वर्ष 2002-03 में महिलाओं के नाम मात्र 12 हजार कृषि भूमि के बेचान के दस्तावेज पंजीकृत हुए थे। कृषि भूमि पर स्टांप डयूटी की दर घटाकर 5 प्रतिशत की थी। इस कदम के उत्साहजनक परिणाम आए हैं। अब हर वर्ष एक लाख से अधिक पंजीयन महिलाओं के नाम होने लगे हैं। वर्ष 2004-05 से अब तक 3 लाख 67 हजार दस्तावेज पंजीकृत हुए हैं। अकेले वर्ष 2006-07 में ही, फरवरी माह तक 1 लाख 19 हजार दस्तावेज पंजीकृत हुए हैं।
16- राज्य में RAC की 12 व मेवाड़ भील corps की एक, कुल 13 सशस्त्र बटालियन कार्य कर रही हैं। इन बटालियनों में महिला सशस्त्र सिपाहियों की संख्या बहुत कम हैं। मैं घोषणा करती हूँ कि महिला सशस्त्र सिपाहियों की एक exclusive, India Reserve Battalion वर्ष 2007-08 में बने, जिसका नाम Hadi Rani Armed Corps हो।
17- पुलिस फोर्स को महिलाओं के प्रति संवेदनशील बनाने एवं महिलाओं से संबंधित अपराधों के प्रभावी अन्वेषण हेतु पुलिस फोर्स में महिलाओं की संख्या बढ़ाना आवश्यक है। अभी राज्य में Constable से Sub-Inspector स्तर पर महिलाओं का अनुपात 0.49 से 3.93 प्रतिशत ही है। इन पदों पर नवीन नियुक्तियों में अभी 30 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं के लिए है, जिसका fulfillment सुनिश्चित करने हेतु नियमों में संशोधन इस प्रकार किया जायेगा कि महिलाओं के लिए आरक्षित पदों पर पुरूषों की नियुक्ति नहीं हो पाये।
18- राजस्थान पंचायती राज नियम के अंतर्गत वर्ष 1996 तक निर्मित मकानों के पट्टे, कब्जों के आधार पर जारी करने का प्रावधान है। गाँवों में ऐसे अनेक परिवार हैं जिनके पास रहने के लिए कोई भू-खण्ड नहीं है लेकिन उन्होंने वर्ष 1996 के बाद आबादी भूमि पर झोंपड़ी अथवा टापरी का निर्माण कर लिया है। ऐसे परिवार जिनके पास न कोई भू-खण्ड है और न ही कोई अन्य मकान है, उनके वर्ष 2003 तक के कब्जे नि:शुल्क नियमित कर दिये जायेंगे। महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए मैं घोषणा करती हूँ कि नियमन करने पर पट्टे अब केवल महिलाओं के नाम से ही जारी किये जायेंगे।
19- बच्चों के स्वास्थ्य हेतु आवश्यक मेडीकल चैक-अप, पोषाहार एवं प्री-स्कूल की सुविधाएं समन्वित बाल विकास परियोजना के माध्यम से प्रदान की जाती हैं। वर्ष 2007-08 में 4 नई समन्वित बाल विकास परियोजनायें शुरू की जायेंगी एवं 1 हजार 500 नये आंगनबाड़ी केन्द्र खोले जायेंगे। मैंने गत् वर्ष, 2 वर्षों में 3 हजार आंगनबाड़ियों के लिए पक्के भवन बनाने की घोषणा की थी। इस वर्ष 2 हजार भवन बनाये जा रहे हैं। शेष रहे 1 हजार में, 2 हजार की अतिरिक्त संख्या जोड़ते हुए, मैं आंगनबाड़ियों के कुल 3 हजार पक्के भवन वर्ष 2007-08 में बनाने के लिए आवश्यक राशि उपलब्ध कराने की घोषणा करती हूँ।
20- E-मित्र कार्यक्रम का विस्तार करते हुए राज्य में अगले वर्ष 6,608 Common Service Centres स्थापित किए जाएंगे। मैं घोषणा करती हूँ कि यह सभी आवंटन महिलाओं को ही किये जायेंगे। इसी प्रकार मैं यह भी घोषणा करती हूँ कि राज्य में स्थापित विभिन्न डेयरी संगठनों द्वारा आइंदा dairy booth और parlour का आवंटन केवल महिलाओं के नाम ही किया जायेगा। साथ में, dairy parlour स्थापित करने पर deep freezer इत्यादि के लिए 5 हजार रुपये प्रति parlour की सामान्य सहायता को दुगुना कर 10 हजार रुपये किया जायेगा।
21- हम बालिकाओं में लक्ष्मी का स्वरूप देखते हैं, परंतु दुर्भाग्यवश हमारे प्रदेश में sex ratio अभी भी adverse है। मैं पुत्र रहित दंपत्तियों को एक या दो बेटियों के बाद terminal methods अपनाने पर प्रत्येक बालिका को 10 हजार रुपये प्रोत्साहन के रूप में देने के लिए, मुख्यमंत्री बालिका संबल, योजना की घोषणा करती हूँ। इस योजना के तहत राज्य सरकार द्वारा 10 हजार रुपये का निवेश, पोस्ट आफिस अथवा बैंक में किया जायेगा, जिसका लाभ बालिका को 18 वर्ष की आयु पर देय होगा। सामान्यतया, परिपक्वता अवधि पर बालिका को लगभग 40 हजार रुपये प्राप्त हो सकेंगे।
22- शिक्षण स्थानों से दूरी बालिकाओं की शिक्षा में रुकावट नहीं बननी चाहिये। वर्तमान में जनजाति छात्राओं के लिए लागू नि:शुल्क साईकिल योजना को संशोधित रूप में, ग्रामीण क्षेत्रों की सभी छात्राओं पर भी लागू करने की मैं घोषणा करती हूँ। नवीं कक्षा उत्तीर्ण कर दसवीं कक्षा में प्रवेश लेने वाली ऐसी प्रत्येक छात्रा को, जिसका घर सबसे नजदीक सैकंडरी विद्यालय से 2 किलोमीटर से अधिक दूरी पर है, को एक नई साईकिल केवल 300 रुपये में देने की मैं घोषणा करती हूँ। शेष राशि राज्य सरकार वहन करेगी। इस योजना के लिए आवश्यकतानुसार धनराशि उपलब्ध कराई जायेगी।
23- ग्रामीण क्षेत्रों में सैकंडरी विद्यालय कई गाँवों से 5 किलोमीटर से अधिक दूरी पर हैं। ऐसी स्थिति में छात्राओं के लिए साईकिल से विद्यालय जाना व्यावहारिक नहीं होगा। ऐसे गाँवों से विद्यालय जाने हेतु 5 या अधिक छात्राओं को सामूहिक निजी परिवहन की सुविधा प्रदान करने के लिए मैं एक transport voucher scheme की घोषणा करती हूँ। इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक पात्र छात्रा को 5 रुपये प्रति स्कूल दिवस की दर से एक transport voucher दिया जायेगा। छात्राओं हेतु स्कूल जाने की इन दोनों योजनाओं के लिए खर्चे का प्रारंभिक आकलन 10 करोड़ रुपये वार्षिक है।
24- महिलाओं की निजता बनाये रखने एवं स्नान को सुविधाजनक बनाने के लिए नदियों एवं अन्य तालाबों के साथ घाट बनाने के लिए मैं, निर्मल घाट योजना शुरू कर रही हूँ। इस योजना के अंतर्गत वर्ष 2007-08 में 100 निर्मल घाट बनाने के लिए 2 करोड़ 50 लाख रुपये का प्रावधान किया जायेगा, जिसे आवश्यकतानुसार और बढ़ाया जायेगा।
युवा
अ. रोजगार:
25- सदन के माननीय सदस्यों को ज्ञात है कि हमारा देश एक ''युवा देश'' है, जहां youth का proportion अधिकतर अन्य देशों से अधिक है। इसलिए, रोजगार हमारे देश के लिए एक अहम मुद्दा बन गया है। देश की अर्थव्यवस्था के अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था से जुड़ने एवं नई तकनीकों के विकास से युवा वर्ग की employability बढ़ाने के लिए उन्हें सही प्रकार की skills की आवश्यकता महसूस की जा रही है। साथ ही नियोक्ता एवं युवाओं के मध्य संवाद स्थापित कर placement facilitate करना भी आवश्यक है। हमने राज्य में इन उद्देश्यों को पूरा करने के लिए राजस्थान Livelihood Mission स्थापित किया है। मिशन 2006-07 में 10 हजार युवक-युवतियों को skill training व placement उपलब्ध करा पाया है।
26- मिशन की सफलता को देखते हुए मैं इस कार्य को एक quantum jump देना चाहती हूँ। राज्य में पारंपरिक occupations यथा चर्मकार, रिक्शा-चालक, दस्तकार आदि का अध्ययन कर occupation specific strategies तैयार की जायेंगी। रोजगार निदेशालय का पुनर्गठन किया जायेगा। संपूर्ण ग्रामीण स्वरोजगार कार्यक्रम एवं प्रधानमंत्री रोजगार योजना का leverage कर, livelihood mission के माध्यम से, वर्ष 2007-08 में, 1 लाख युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 20 करोड़ रुपये का कार्यक्रम हाथ में लिया जाएगा।
27- आधुनिक आवश्यकताओं को देखते हुए animation जैसी skills सिखाने हेतु एक school of animation निजी सहभागिता से खोला जायेगा। GE द्वारा Computer Education on Wheels हेतु उपलब्ध कराये गये 5 वाहनों का अच्छा अनुभव रहा है। अत: आगामी वर्ष में निजी सहभागिता से प्रत्येक जिले में Computer Education on Wheels हेतु एक-एक वाहन उपलब्ध कराने की नई योजना लागू की जायेगी। इसके तहत राज्य सरकार बस और उपकरण हेतु 75 प्रतिशत तक का अनुदान देगी, बशर्ते कि निजी भागीदार एक निश्चित कार्यक्रम के अनुसार इन वाहनों से गाँवों तक कंप्यूटर शिक्षा उपलब्ध कराए। इस कार्यक्रम हेतु मैं 10 करोड़ रुपए की राशि आगामी वर्ष उपलब्ध करवाऊंगी।
28- राज्य में हजारों बुनकरों की आजीविका खादी वस्त्रों पर निर्भर है। बुनकरों की skills upgrade करके, उन्हें नये डिजाइन और अंतरराष्ट्रीय trends की जानकारी देकर, खादी उत्पादों को elite खरीददारों की पसंद बनाने की दृष्टि से हमने राज्य में एक नई पहल की है, जिसको मैंने fashion for development का नाम दिया है।अगर हमें अपने कामगारों की जिदंगी को बेहतर बनाना है और उन्हें आर्थिक रूप से सुदृढ़ करना है, तो हमें खादी एवं हैंडलूम के उत्पादन एवं विपणन को re-invent करना होगा और नई डिजाइन विकास, प्रशिक्षण व उन्नत तकनीकों को अपनाना होगा। इन initiatives हेतु आगामी वर्ष 4 करोड़ 50 लाख रुपये उपलब्ध करवाये जायेंगे।
29- राज्य का हस्तशिल्प पूरी दुनिया में मशहूर है। हस्तशिल्प कलाएं जैसे शाहपुरा एवं भीलवाड़ा की पेंटिंग, कोटा-बूंदी स्कूल व जोधपुर स्कूल की पेंटिंग व बीकानेर की प्रसिद्ध ऊँट की खाल पर सुनहरी पेंटिंग, विभिन्न कारणों से लुप्त होने के कगार पर है। इन्हें पुनर्जीवित करने हेतु गुरू शिष्य परंपरा के आधार पर प्रशिक्षण प्रारंभ किया जाना प्रस्तावित है। इन विधाओं एवं कलाओं के master craftsmen को ससम्मान एवं यथोचित मानदेय सहित अपनी कला सिखाने के लिए नियोजित किया जायेगा। साथ ही योग्य प्रशिक्षुओं का चयन कर उन्हें stipend सहित master craftsmen से प्रशिक्षण प्राप्त करने की व्यवस्था की जायेगी। इस कार्यक्रम की अनुमानित लागत 52 लाख 50 हजार रुपए होगी।
30- सेवानिवृत्ति बाद आय सुरक्षा की आवश्यकता केवल सरकारी अधिकारियों और organised labour को ही नहीं होती। गैर-संगठित कामगारों जैसे रिक्शा चालक, थड़ी वाले, चर्मकार आदि को भी पेंशन मिलनी चाहिए। अत: मैं घोषणा करती हूँ कि वर्ष 2007-08 से एक अनूठी पहल कर, मेरी सरकार इन कामगारों के लिए विश्वकर्मा contributory pension scheme लागू करेगी। इस योजना में राज्य सरकार एक हजार रुपये प्रति वर्ष की सीमा तक कामगार के योगदान के बराबर अपनी तरफ से योगदान करेगी। मेरी जानकारी में असंगठित गैर-सरकारी कामगारों के लिए contributory pension scheme लागू करने वाला राजस्थान देश का अग्रणी राज्य होगा। जो संगठित वोट बैंक नहीं है, उनकी भी सुनने वाला कोई होना चाहिए। कमजोर के लिए मेरा मन, तो यूं समझिये, बहुत ही कमजोर है। अत: मैं चाहती हूं कि
‘बनके साया आपकी हर शिकन मैं हरती चलूं
आपके उपवन में बनके वृक्ष मैं खुशियां फलूं
स्याह होना यदि कोई हो तो मिटाने के लिए
आपके आँगन में बनके दीप बाती मैं जलूं।‘
31- यह pension scheme 1 सिंतबर 2007 से प्रारंभ की जायेगी। इस कार्यक्रम पर प्रति वर्ष 50 करोड़ रुपये का व्यय अनुमानित है।
32- बेरोजगार युवक की लाचारी दिल को छू लेने वाली होती है। जब तक ऐसे युवा अपनी skill upgrade कर रोजगार प्राप्त करें,या अपना स्वयं का कार्य कर, जीवन-यापन करने में सक्षम हों, मैं समझती हूँ कि राज्य द्वारा इनकी मदद करना आवश्यक है। बेरोजगारी भत्ता योजना को सभी वर्गों पर लागू करते हुए, मैं अब सभी ऐसे स्नातक बेरोजगार, जिनके माता-पिता की आय 1 लाख रुपये वार्षिक से अधिक नहीं हो, को जुलाई 2007 से चार सौ रुपये, और महिला स्नातक बेरोजगारों को 500 रुपये, मासिक भत्ता देने की घोषणा करती हूँ। विकलांग बेरोजगार स्नातकों के लिए मासिक भत्ते की राशि 600 रुपये प्रतिमाह होगी। इसके अलावा, बेरोजगार इंजीनियर्स को 10 लाख रुपये तक के कार्य बिना टेंडर के देने की योजना माह जुलाई तक घोषित की जायेगी।
33- ग्रामीण क्षेत्रों से उद्योग एवं सेवाओं के क्षेत्र में रोजगार हेतु ग्रामीण युवक-युवतियों एवं परिवारों को शहरों में रहने की काफी समस्या आती है। इसके समाधान हेतु राज्य सरकार rental housing को बढ़ावा देने के लिए BOT के आधार पर एक योजना बनाकर शीघ्र जारी करेगी। ये flats ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले BPL, Artisan अथवा किसान क्रेडिट कार्डधारी परिवारों के सदस्यों को किराये पर मिल सकेंगे।
34- सामाजिक समरसता एवं प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत को दृष्टिगत रखते हुए, और अनुसूचित जाति-जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्गों के आरक्षण में किसी भी प्रकार का परिवर्तन नहीं करते हुए, आर्थिक रूप से समाज के शेष पिछड़े वर्गों का चिन्हीकरण और उनकी आवश्यकताओं का आकलन करने हेतु सरकार ''आर्थिक पिछड़ा आयोग'' गठित करने की घोषणा करती है।
श्री घनश्याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): भंवरलालजी, अब तो आप ताली बजाओ। ...(व्यवधान)...
श्रीमती वसुन्धरा राजे: ब. शिक्षा:
35- भारत सरकार ने आगामी वर्ष से उच्च प्राथमिक स्तर तक मिड-डे मील योजना को extend करने की घोषणा की है। लेकिन इसे शैक्षणिक रूप से पिछड़े blocks तक ही सीमित किया गया है। पर, हम ऐसे पक्षपात से सहमत नहीं हैं। अत: मैं घोषणा करती हूँ कि राज्य की जो पंचायत समितियां शेष बचेंगी उनमें आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को mid-day meal, राज्य सरकार अपने स्वयं के खर्चे पर उपलब्ध करायेगी। इस हेतु 40 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि उपलब्ध करवाई जायेगी।
36- सर्व शिक्षा
अभियान को माध्यमिक
दर्जे तक ले जाने
की घोषणा केन्द्रीय
वित्तमंत्री जी
ने अपने बजट भाषण
में अभी हाल ही
की है। प्राथमिक
शिक्षा के माफिक, राजस्थान
इस सहायता को लेने
में भी अग्रणी
राज्य रहे, इस हेतु
राज्यांश के रूप
में मैं 150 करोड़ रुपये
वर्ष 2007-08 के लिए उपलब्ध
कराऊंगी। आगामी
वर्ष में 1 हजार 500 उच्च
प्राथमिक विद्यालयों
को माध्यमिक विद्यालयों
में,
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): मुख्य मंत्रीजी, जरा एक बार यह आंकड़ा दुबारा बोलना। मुख्य मंत्रीजी यह आंकड़ा दुबारा बोलना।
श्रीमती वसुन्धरा राजे: आगामी वर्ष में 1 हजार 500 उच्च प्राथमिक विद्यालयों को माध्यमिक विद्यालयों में और600 माध्यमिक विद्यालयों को उच्च माध्यमिक विद्यालयों में क्रमोन्नत किया जाएगा।
श्री जुबेर खान (रामगढ़): समानता से करेंगे या पक्षपात से करेंगे-
श्रीमती वसुन्धरा राजे (मुख्य मंत्री): अब आपको मैं बताऊंगी पूरा। ...(व्यवधान)...
श्री अध्यक्ष: आप क्यों खड़े हो गए-
श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): हमें विश्वास है इसमें पक्षपात नहीं होगा। ...(व्यवधान)...
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): सभी दिल थाम के बैठे हैं क्या-
श्रीमती वसुन्धरा राजे: पिछले वर्षों का क्रम जारी रखते हुए राज्य सरकार 12 हजार 300 शिक्षकों को नियुक्ति देगी।
37- माननीय सांसदों एवं विधायकों द्वारा अपने क्षेत्रों में प्राथमिक शिक्षा हेतु नवीन विद्यालय खोलने एवं विद्यालयों को क्रमोन्नत करने की मांगों से मैं अवगत हूं। दुर्भाग्यवश, इस क्षेत्र में केन्द्र और राज्य सरकार के बीच ग्यारहवीं पंच वर्षीय योजना के दौरान हिस्सेदारी क्या रहेगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। केन्द्रीय मानव संसाधन विभाग से यह संकेत निरंतर मिलते रहे हैं कि हिस्सेदारी 75:25 ही रहेगी, जबकि वित्तमंत्री जी ने अपने बजट भाषण में इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी। हम केन्द्र सरकार से संपर्क में हैं और स्थिति स्पष्ट होने पर ही राजकीय प्राथमिक विद्यालयों को खोलने अथवा क्रमोन्नत करने पर view लिया जा सकेगा। फिलहाल, जिस नीति के अंतर्गत निजी सहभागीदारी से ITI खुली हैं, उसी नीति से प्राथमिक शिक्षा में नये स्कूल खोलने के लिए मैंने राज्यांश के रूप में 5 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है।
38- मदरसा बोर्ड प्रदेश के 2 हजार से अधिक मदरसों में करीब 1 लाख 75 हजार बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने का कार्य कर रहा है। अल्पसंख्यकों के शैक्षिक उत्थान के लिए 1 हजार मदरसों में शिक्षा सहयोगी उपलब्ध कराने हेतु राज्य सरकार मदरसा बोर्ड को 1 करोड़ 15 लाख रुपये व 200 मदरसों में कंप्यूटर एवं आवश्यक साज-समान हेतु 50 हजार रुपये प्रति मदरसे के हिसाब से 1 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध करायेगी।
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): सलाम वालेकुम। ...(व्यवधान)...
श्री अध्यक्ष: यह क्या कर रहे हैं आप ?
श्रीमती वसुन्धरा राजे: 39- वर्ष 2005-06 में मैंने सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ को पूंजीगत कार्यों हेतु 2 करोड़ 50 लाख रुपये की राशि उपलब्ध करवाई थी। इससे छात्रावास का निर्माण, सभागृह का पुनरुद्धार, खेल मैदान का सुधार आदि कार्य या तो पूर्ण कर लिये गये हैं या प्रगति पर हैं। राजस्थान के जरूरतमंद छात्रा इस स्कूल में सुविधापूर्वक पढ़ सकें, इस हेतु मैं यहाँ दी जाने वाली बाकी छात्रावृत्तियों में निम्न बढ़ोतरी करने की घोषणा करती हूँ:
पूर्ण छात्रवृत्ति - 9 हजार 100 रुपये से 15 हजार
तीन-चौथाई छात्रवृत्ति - 7 हजार 263 से 12 हजार
आधी छात्रवृत्ति - 5 हजार 425 से 9 हजार
चौथाई छात्रवृत्ति - 2 हजार 775 से 6 हजार
40- राज्य सरकार ने अनुदानित शिक्षण संस्थाओं की समस्याओं पर गौर किया है। अनुदानित शिक्षण संस्थाओं में गैर-अनुदानित शिक्षण कार्य भी होता है। इन संस्थाओं को फीस के माध्यम से अपनी आय बढ़ाने का विकल्प, शिक्षकों को देय वेतन-भत्ते देने की छूट और सहायता को norm आधारित करना आदि जटिल मुद्दों पर गहन विचार आवश्यक है। मेरी सरकार राजस्थान अनुदानित शिक्षण संस्था अधिनियम 1989 में आवश्यक परिवर्तन करने के लिए विधेयक शीघ्र ही सदन में प्रस्तुत करेगी।
41- संस्कृत शिक्षा के विस्तार के लिए मेरी सरकार ने 16 जिलों में भी वेद-विद्यालय खोले हैं। मैं अब शेष 16 जिलों में भी वेद विद्यालय वर्ष 2007-08 में ही खोलने की घोषणा करती हूँ। संस्कृत विश्वविद्यालय की आय का एक निश्चित स्रोत विकसित करने के लिए मैं वर्ष 2007-08 में संस्कृत विश्वविद्यालय को 2 करोड़ 50 लाख रुपए की corpus grant देने की घोषणा करती हूं।
42- वर्ष 2005-06 के बजट भाषण में मैंने महिला महाविद्यालयों से वंचित 5 जिला मुख्यालयों पर नये महाविद्यालय खोलने हेतु निजी संस्थाओं को, भूमि एवं भवन के सरकारी सहयोग से, आमंत्रित किया था। इसके उत्साहजनक परिणाम आये। मैं समझती हूँ कि यह नीति महिला महाविद्यालयों के लिए सार्थक हो सकती है तो अन्य महाविद्यालयों के लिए भी उचित होनी चाहिए। अत:, ऐसी हर तहसील में जहाँ कोई महाविद्यालय नहीं है, मैं इस नीति के तहत भवन एवं भूमि उपलब्ध कराने की घोषणा करती हूँ। नि:शुल्क भूमि की नीति इंजीनियरिंग कालेज रहित जिलों के लिए भी लागू की जायेगी। लेकिन यह स्वीकार करते हुए कि कुछ क्षेत्रों की विशेष आवश्यकताएं हो सकती हैं, मैं सार्वजनिक क्षेत्र में भीम, जिला राजसमंद व उनियारा जिला टोंक में महाविद्यालय, झुंझुनू के राजकीय महाविद्यालय को PG Science तक क्रमोन्नत, भरतपुर में एक इंजीनियरिंग कालेज, लालसोट, जिला दौसा में एक कृषि महाविद्यालय और भिण्डर जिला उदयपुर में एक पशुपालन महाविद्यालय खोलने की भी घोषणा करती हूँ। बागवानी एवं वन महाविद्यालय Jain Irrigation Systems जैसे संस्थानों के साथ सहभागिता से नई कृषि पद्धति, जल संग्रहण्, एवं उपयोग, फल एवं सब्जी प्रसंस्करण tissue culture आदि विषयों पर नवीनतम और अंतरराष्ट्रीय स्तर के पाठयक्रम चालू करेगा। मेरी सरकार जन-सहभागिता के आधार पर विज्ञान संकाय और महिला छात्रावास खोलने के लिए सभी राजकीय महाविद्यालयों को सहायता प्रदान करेगी।
43- कोटा शिक्षा के एक बहुत बड़े प्रशिक्षण केन्द्र के रूप में उभर कर आया है। कोटा में हजारों की तादाद में छात्र पूरे देश से आकर यहां रहते हैं। इनके शैक्षिक मनोरंजन एवं अन्य गतिविधियों के लिए कोटा में एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का Students' Cultural Centre खोला जायेगा। यहां पर International Film Club, नाटकों एवं अन्य cultural programme आदि का आयोजन किया जा सकेगा।
Gpc/usc/09032007/1240-1300/1l-1m
स. खेलकूद:
44- युवाओं के सर्वांगीण विकास एवं upliftment में खेल-कूद की महत्ता को हमने हमेशा under-estimate किया है। राज्य में किशोरों एवं युवाओं के सर्वांगीण विकास एवं उनकी ऊर्जा एवं उत्साह के सर्जनात्मक उपयोग के लिए, एक किशोर एवं युवा नीति बनाई जायेगी। इसका मुख्य अंग हर पंचायत में एक खेल मैदान स्थापित करना, एवं इन खेलों के लिए आवश्यक खेल का सामान उपलब्ध कराना होगा। अगले 2 वर्षों में 5 हजार से अधिक आबादीवाले सभी गाँवों में खेल मैदान हेतु 25 हजार रुपये उपलब्ध करवाये जायेंगे और, सभी सांसदों एवं विधायकों से प्रार्थना की जायेगी कि वे अपने कोष से प्रत्येक ऐसे गाँव को 5 हजार रुपये प्रति गाँव की खेल सामग्री दिलवायें। प्रथम वर्ष में 7 हजार से अधिक जनसंख्या वाले 338 गाँव इस योजना में cover किये जायेंगे।
45- राज्य सरकार तहसील स्तर तक खेल स्टेडियम्स का विकास करने के लिए एक स्टेडियम विकास कार्यक्रम चलायेगी। इस कार्यक्रम के अंतर्गत संभाग स्तरीय, जिला स्तरीय एवं तहसील स्तरीय स्टेडियमों का निर्माण standardised type designs के अनुसार एक चरणबद्ध कार्यक्रम के तहत अगले तीन वर्षों में किया जायेगा। विधायकों व सांसदों द्वारा MLA-LAD या MP-LAD योजना, corporates एवं खेलों में रुचि रखने वाली संस्थाओं द्वारा वित्तीय सहयोग के आधार पर प्राथमिकता तय की जायेगी। इस योजना हेतु वर्ष 2007-08 के लिए 5 करोड़ रुपये उपलब्ध कराये जायेंगे, एवं आवश्यकता पड़ने पर और अधिक राशि उपलब्ध कराई जायेगी।
46- इसके साथ, मैं यह घोषणा भी करती हूँ कि एक नये कार्यक्रम के तहत, प्रथम चरण में TSP क्षेत्र की हर पंचायत समिति में एक ''ग्रामीण युवा केन्द्र'' खोला जायेगा। ये युवा केन्द्र स्टेडियम पॉलिसी के अंतर्गत स्थापित होने वाले खेल मैदानों का उपयोग कर सकेंगे। इन केन्द्रों के माध्यम से जनजाति के गाँव-गाँव में विभिन्न खेलों जैसे तीरंदाजी, वालीबाल, फुटबाल, हॉकी में talent search की जायेगी और युवा केन्द्रों के खेल मैदानों में इन talents को foster किया जायेगा। इन ग्रामीण युवा केन्द्रों पर युवाओं को एकत्रित कर social awareness के कार्यक्रम भी चलाये जा सकेंगे।
47- गांवों में खेल केन्द्र और युवा केन्द्रों के संचालन हेतु राज्य स्तर के बारहवीं कक्षा पास 349 छात्रों को स्थान-विशेष अनुबंध तहत संयोजक नियुक्त किया जायेगा। नि:संदेह, इन नियुक्तियों में पहली प्राथमिकता महिलाओं को दी जायेगी।
48- खेलकूद में महिलाओं को भी पीछे नहीं रहना चाहिये। मेरा विश्वास है कि अगर इनको अवसर मिले तो वास्तव में वे इस क्षेत्र में भी अब सबको पीछे छोड़ देंगी। जयपुर में हॉकी, बास्केटबाल, साईक्लिंग, शूटिंग, तीरंदाजी एवं घुड़सवारी की बहुत अच्छे स्तर की facilities हमनें दो-एक वर्ष में तैयार की है। इनके उपयोग में महिलाओं को प्राथमिकता तो दी ही जायेगी, मैं यह भी घोषणा करती हूँ कि:
-जयपुर में एक महिला बास्केटबाल अकादमी का गठन किया जायेगा जिससे कि पूरे प्रदेश से प्रतिभाशाली बालिकाओं को जयपुर में अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण मिल सके।
-ग्राम भारती सीनियर सैकंडरी स्कूल कोठयारी सीकर को National Institute of Sports से affiliate करवा, इसे एक sports school के रूप में विकसित किया जायेगा।
राज्य सरकार ढांचा विकास के लिए और प्रति खिलाड़ी के हिसाब से आवर्तक व्यय राशि उपलब्ध करायेगी।
49- राज्य के जो खिलाड़ी राष्ट्रीय अथवा अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में जीत हासिल कर राज्य को गौरवान्वित करते हैं उन्हें वर्तमान नियमों में अधिकतम 50 हजार रुपये का पुरस्कार दिया जा सकता है। प्रदेश के खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने की दृष्टि से individual events हेतु, मैं निम्न नई सीमाएं तय करती हूँ:
|
Games |
स्वर्ण पदक |
रजत पदक |
कांस्य पदक |
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Olympic |
15 लाख रु |
10 लाख रु |
5 लाख रु |
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Asian |
5 लाख रु |
3 लाख रु |
1लाख 50 हजाररु |
|
Commonwealth |
5 लाख रु |
3 लाख रु |
1लाख 50हजार रु |
|
National |
1लाख 50 हजाररु |
75 हजार
रु |
25 हजार
रु |
इस हेतु नियमों में माह जून 2007 तक आवश्यक संशोधन कर दिया जायेगा।
स्वास्थ्य:
50- पिछले वर्ष मैंने ''कृण्वंतो: विश्वमारोग्यम्'', (अर्थात् समस्त विश्व को हम निरोग करें) के उद्घोष के साथ प्रदेश को स्वास्थ्य के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों की श्रेणी में लाने का संकल्प व्यक्त किया था। मुझे सदन को यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि इस क्षेत्र में सार्थक परिणाम अब सामने आने लगे हैं:
-मातृ मृत्यु दर 1998 के 670 प्रति लाख से घटकर 2006 में 445
-शिशु मृत्यु दर 1996 में 86 प्रति हजार से घटकर 2005-06 में 65
-संस्थागत प्रसव 1998-99 में 17.3 प्रतिशत से बढ़कर 2005 में 32.2
-शिशु पूर्ण टीकाकरण 1998-99 में 21.5 प्रतिशत से बढ़कर 2005 में 26.5
51- उपरोक्त से उत्साहित होकर, हमने ग्यारहवीं पंच वर्षीय योजना में वर्ष 2012 के लिए निम्न महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य रखे हैं :
-शिशु मृत्यु दर को 67 से 32 प्रति हजार
-मातृ मृत्य दर को 445 से 148 प्रति लाख
-कुल प्रजनन दर 3.2 से 2.1,
52- नि:संदेह ये लक्ष्य बहुत महत्त्वाकांक्षी हैं, लेकिन मैं मानती हूँ कि महत्त्वाकांक्षा नहीं तो आशा नहीं। हम इस शिखर पर अवश्य पहुँचेंगे। क्योंकि:
धनुष से जो छूटता बाण कब पथ पर ठहरता है,
देखते ही देखते वह लक्ष्य का भेद करता है,
लक्ष्य प्रेरित बाण हैं हम, ठहरने का काम कैसा,
लक्ष्य तक पहुंचे बिना पथ में पथिक विश्राम कैसा।
53- बीमारी कहकर नहीं आती और न ही उसके आने का कोई समय होता है। इसलिए राज्य को हर समय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था करने की तरफ अग्रसर होना पड़ेगा। राज्य सरकार द्वारा चरणबद्ध तरीके से चिन्हित 365 संस्थाओं में डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, उपकरण और आवासीय सुविधाओं की व्यवस्था कर, इन्हें 24 घंटे खोले जाने की व्यवस्था की जायेगी।
54- चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं को जन-सामान्य तक ले जाने के लिए मेरी सरकार ने 1 से 31 दिसंबर की अवधि में स्वास्थ्य चेतना यात्रा अभियान चलाया। इस अभियान के दौरान 9 हजार 205 कैम्पों का आयोजन किया गया जिसमें 53 लाख 21 हजार लोगों ने भाग लिया व 31 लाख 5 हजार व्यक्ति लाभान्वित हुए। इसमें 19 लाख 2 हजार रोगी ऐलोपैथिक उपचार एवं 12 लाख 3 हजार रोगी भारतीय उपचार विधियों से लाभान्वित हुए। इन कैम्पों में 2 लाख 85 हजार जांचे भी हुईं। हम वर्ष 2007-08 में भी यह अभियान चलायेंगे।
55- बड़े शहरों में वरिष्ठ नागरिकों की आवश्यकताओं की ओर ध्यान देना भी जरूरी है। इन शहरों में वृद्ध आश्रमों की आवश्यकता है और ये स्थापित भी होने लगे हैं। जयपुर विकास प्राधिकरण के नियमों के तहत इनके लिए भूमि आवंटन भी किया जा सकता है। साथ ही यह भी आवश्यक है कि युवाओं, विशेष कर महिलाओं को geriatric care हेतु प्रशिक्षण दिया जाये। इस हेतु आगामी वर्ष चिकित्सा शिक्षा विभाग एक अभिनव योजना ''अभिलाषा'' प्रारंभ करेगा, जिससे प्रशिक्षित व्यक्तियों को रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। साथ ही प्रशिक्षित व्यक्तियों की उपलब्धता से old age homes की स्थापना को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
56- राज्य में प्रत्येक उप-स्वास्थ्य केन्द्र पर अभी एक ANM कार्यरत है। उप-स्वास्थ्य केन्द्रों पर सभी दिन एक ANM उपलब्ध रहे एवं field visit के लिए दूसरी ANM या GNM की सेवाएं उपलब्ध हो सकें इसके लिए मैं प्रत्येक उप-स्वास्थ्य केन्द्र पर एक अतिरिक्त GNM लगाए जाने की घोषणा करती हूँ। इस कार्यकम की आवश्यकता सहित 7 हजार 502 ANMs व GNMs को नियुक्ति दी जायेगी।
57- सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर रोगियों को लाने ले जाने तथा बड़े अस्पतालों में रेफर करने पर उन्हें वहाँ transfer करने के लिए ambulance की आवश्यकता महसूस की जाती रही है। मैं राज्य के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर चरणबद्ध तरीके से ambulance सुविधा उपलब्ध कराने की घोषणा करती हूँ। इस व्यवस्था हेतु वर्ष 2007-08 में 100 ambulances उपलब्ध कराई जायेंगी।
58- राज्य के कुल 40 हजार गाँव हैं। राज्य में स्थापित स्वास्थ्य सेवाओं के बावजूद दूर-दराज के क्षेत्रों में प्रभावी चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाती। मैं राज्य के ऐसे unserved क्षेत्रों की ग्रामीण जनता को प्रत्येक माह की एक निश्चित तारीख को mobile medical unit के द्वारा चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की नई योजना ''डॉक्टर-आपके-द्वार'' की घोषणा करती हूँ। इसके लिए desert एवं tribal जिलों के लिए दो तथा अन्य जिलों के लिए एक, कुल 52 mobile medical units उपलब्ध कराई जायेंगी।
59- जयपुर से संचालित mobile surgical unit ने ग्रामीण इलाकों में चिकित्सा कैंप आयोजित कर अपनी साख बनाई है। साथ ही उदयपुर एवं जोधपुर में भी mobile surgical unit कार्यरत हैं। इन तीनों mobile units को सुदृढ किया जायेगा। इसके अतिरिक्त, मैं राज्य के सभी संभागीय मुख्यालयों पर mobile surgical units के गठन की घोषणा करते हुए, इन सभी यूनिटों को एक scheme ''चरक-आपके द्वार'' के अंतर्गत लाने की घोषणा करती हूँ। इन mobile surgical units के कैंपों का कार्यक्रम इस प्रकार बनाया जायेगा कि राज्य के प्रत्येक ब्लॉक में वर्ष में कम से कम एक बार mobile surgical unit का कैंप लग सके।
60- वंचित को अर्पित इस बजट में स्वास्थ्य सेवाओं के फैलाव को बढ़ाने की दृष्टि से, वर्ष 2007-08 में 130 उप-स्वास्थ्य केन्द्र एवं 30 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र खोलने, और 15 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में क्रमोन्नत करने की मैं घोषणा करने की मैं घोषणा करती हूं। इसके अलावा 5 जिला स्तरीय चिकित्सालयों एवं 12 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में निजी सहयोग से दानदाताओं के नाम पर, वार्ड खोलकर शय्याओं को बढ़ाने का प्रस्ताव है।
61- राज्य के मरूस्थलीय क्षेत्रों, जनजातीय क्षेत्रों एवं चंबल के डांग क्षेत्रों में paramedical staff की गंभीर समस्या को देखते हुए राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि इन क्षेत्रों के स्थानीय लोगों को paramedical staff के रूप में ज्यादा से ज्यादा प्रशिक्षित किया जायेगा। बाड़मेर, डूंगरपुर और झालावाड़ जिले में चल रहे तीन GNM Nursing Colleges के अतिरिक्त, एक-एक और जनरल नर्सिंग प्रशिक्षिण केन्द्र के निर्माण हेतु भूमि और भवन निर्माण के लिए 30 लाख रुपये की राशि निजी promoters को उपलब्ध करवाई जायेगी। इसके अतिरिक्त राज्य के पांच जिलों यथा- हनुमानगढ़,राजसमंद, दौसा, बारां एवं धौलपुर- में इसी तर्ज पर ANM प्रशिक्षण कॉलेज खोले जायेंगे।
62- Paramedical Staff, चिकित्सक के साथ, रोग की पूर्ण एवं विस्तृत जांच, सही निदान, प्रभावी नियंत्रण एवं वांछित उपचार के लिए सक्षम हो और उसे सक्षमता का प्रमाण पत्र मिल सके इस हेतु यह भी आवश्यक है कि standards set करने और certification agency का कार्य करने हेतु, Paramedical Council का गठन किया जाये, जिसकी वर्ष 2007-08 में स्थापना की मैं घोषणा करती हूँ।
63- वित्तीय वर्ष 2007-08 हेतु विश्व बैंक संपोषित RHSDP परियोजना के माध्यम से 154 करोड़ रुपये का विनियोजन किया जायेगा। 238 अस्पतालों में आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने, आवश्यक औषधियां एवं नवीन तकनीक के आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराने हेतु आगामी वर्ष में 60 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। साथ ही, 5 जिला अस्पतालों, 23 रैफरल चिकित्सालयों एवं 58 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के पुनर्निर्माण, जीर्णोद्धार एवं मरम्मत करने हेतु 60 करोड़ रुपये के निर्माण कार्यों का भी प्रावधान किया गया है।
64- राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार के साथ द्रुत गति के वाहनों की संख्या में भी तेजी से विस्तार हो रहा है। जिससे सड़क दुर्घटना से होने वाली मृत्यु एवं घायल व्यक्तियों की संख्या बढ़ रही है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, परिवहन विभाग, सार्वजनिक निर्माण विभाग एवं राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के समन्वय से BOO आधार पर अगले वर्ष fully equipped एवं ambulances से serviced दो ट्रोमा अस्पताल स्थापित करेंगे।
65- चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के साथ-साथ यह भी आवश्यक है कि राज्य में रोगियों को आवश्यक दवाइयां राजकीय अस्पतालों में ही मिले। राज्य में भी वर्ष 2007-08 से generic आधार पर आवश्यक दवाइयों का क्रय कर उपलब्ध करवाने की संभावनाओ की जांच की जाएगी। योजना लागू होने पर, राजकीय कर्मचारी, पेंशनर्स एवं बीपीएल परिवारों के लोग तमिलनाडू की तर्ज पर इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।
66- राज्य के विभिन्न चिकित्सा महाविद्यालयों एवं संबद्ध अस्पतालों के योजनाबद्ध विकास कार्यक्रम के अंतर्गत आगामी वर्ष 34 करोड़ 80 लाख रुपये व्यय किये जायेंगे। आगामी वर्ष कोटा में महाराव भीमसिंह अस्पताल के पुनरुद्धार के कार्यों पर 2 करोड़ रुपये तथा मेडिकल कॉलेज से संलग्न चिकित्सालय पर 7 करोड़ रुपये व्यय किये जायेंगे। कोटा में 500 शैय्याओं के नये अस्पताल का निर्माण कार्य पूर्ण कर इसे प्रारंभ कर दिया जायेगा। इसके अतिरिक्त कोटा में राज्य सरकार के सहयोग से cath-lab की स्थापना भी की जायेगी।
67- Prevention is not only better than cure, it is also cheaper. गैर-संक्रामक बीमारियों की रोकथाम, शीघ्र निदान एवं उपचार हेतु आगामी वर्ष ‘’पातंजलि आरोग्य’’ योजना प्रारंभ की जायेगी। इस योजना के अंतर्गत मधुमेह, रक्तचाप, ह्नदय रोग तथा कैंसर आदि की रोकथाम, शीघ्र निदान तथा उपचार की दृष्टि से ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों में विशेष कार्यक्रम क्रियान्वित किये जाएंगे।
68- सवाईमानसिंह अस्पताल राज्य का prestigious अस्पताल है। जयपुर में 4 सेटेलाईट अस्पताल भी हैं, परंतु इनमें कुछ कमियों के कारण सवाईमानसिंह अस्पताल एक referral अस्पताल नहीं बन पाया है। राज्य सरकार चारों सेटेलाइट अस्पतालों को सुदृढ़ करने की ओर कार्य करेगी।
69- राज्य सरकार मानसरोवर में एक नये अस्पताल का निर्माण करा रही है। वर्ष 2007-08 में इस अस्पताल के भवन का निर्माण पूरा हो जायेगा। राज्य सरकार बॉम्बे हास्पिटल जैसे बड़े एवं established अस्पताल से समझौता कर, इसका संचालन करेगी।
70- निरोगता रखने में आयुष पद्धतियों में मेरा अटल विश्वास रहा है। मैंने वर्ष 2007-08 में 20 वर्तमान औषधालय के भवन निर्माण, एक मोबाईल यूनिट, एक रसायनशाला और एक वनौषधि एवं जड़ी-बूटी उद्यान हेतु आवश्यक राशि उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। इसके अलावा वर्ष 2007-08 में 30 आयुर्वेदिक, 30 होम्योपैथिक एवं 10 नवीन यूनानी औषधालय खोले जायेंगे। भारतीय चिकित्सा पद्धतियों की जानकारी आम जनता तक ले जाने के लिए आरोग्य मेले संयोजित करना भी प्रस्तावित है।
समाज
कल्याण:
71- नि:शक्त, निर्बल व निर्धन वर्गों को संबल देना प्रथम बजट से ही मेरी प्राथमिकता रही है। वर्ष 1997 के BPL census के अनुसार राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में कुल 20 लाख 97 हजार BPL परिवार थे। भारत सरकार ने केन्द्रीय सहायता एवं अन्य कार्यक्रमों हेतु राजस्थान के लिए 17 लाख 36 हजार की सीमा निर्धारित कर दी। इससे कई लाख परिवार इस श्रेणी को दी जा रही सुविधाओं से वंचित हो जायेंगे। अत: मैं घोषणा करती हूँ कि भारत सरकार द्वारा निर्धारित artificial सीमा के कारण इस श्रेणी से बाहर आये परिवारों को राज्य सरकार adopt करेगी और इन्हें गेहूं, बीपीएल मेडिकेयर कार्ड व मुख्यमंत्री जीवन रक्षा कोष की सुविधाओं का लाभ यथावत मिलता रहेगा।
किसी होंठों से हमको गुनगुनाहट छीनना आता नहीं,
हमें आते हुए कदमों की आहट छीनना आता नहीं,
आप इस आदत को चाहे कोई भी पहचान दें,
किसी चेहरे की हमको मुस्कराहट छीनना आता नहीं।
72- वंचित BPL परिवारों को उपरोक्त सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए बजट में 24 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध करवाई जायेगी।
73- राज्य सरकार BPL परिवारों के लिए कई लाभकारी योजनाएं चला रही है परंतु गरीबी की रेखा से marginally ऊपर आय वाले परिवारों के लिए कोई विशेष योजना नहीं है। हम राज्य में poverty line से ऊपर रहने वाले 5 लाख परिवारों को और चिह्नित कर रहे हैं। इन 5 लाख APL परिवारों की छात्राओं को अपना अध्ययन, स्नातक स्तर तक जारी रखने के लिए प्रेरित करने हेतु, कक्षा 10 से 12 में पढ़ने वाली सभी बच्चियों को प्रत्येक वर्ष अपनी उत्तीर्ण करने के प्रमाण पत्र के साथ 2 हजार रुपये की FD दी जायेगी। इस राशि को बालिका graduation करने के पश्चात् निकाल सकेगी।
74- राज्य में वृद्धावस्था पेंशन 400 रुपये प्रतिमाह है परंतु विधवाओं अथवा विकलांगों की पेंशन 250 रुपये प्रतिमाह ही है। मैं विधवा एवं विकलांग पेंशन की राशि 250 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 400 रुपये प्रतिमाह करने की घोषणा करती हूँ। इसी प्रकार पालनहार योजना का विस्तार करते हुए, मैं निराश्रित पेंशन हेतु पात्र विधवाओं के बच्चों को भी इस योजना के तहत 675 रुपये प्रतिमाह की सहायता देने की घोषणा करती हूँ।
75- मैं समझती हूँ कि महिलाओं की वैधव्य अवस्था को समाप्त करना ज्यादा उपयुक्त है। अत:, मैं घोषणा करती हूं कि यदि वर्तमान पेंशन नियमों में हकदार विधवा महिला शादी करती है तो उसे शादी के मौके पर राज्य सरकार की ओर से 15 हजार रुपये का उपहार दिया जायेगा। इसी प्रकार, पेंशनधारी विकलांग व्यक्ति यदि स्वावलंबी बनने के उद्देश्य से अपना business करना चाहे, तो उसे मासिक पेंशन के स्थान पर एकमुश्त 15 हजार रुपये की राशि प्रदान की जायेगी।
76- Corporates व NGOs के सहयोग से हमारी सरकार ने जरूरतमंद गरीबों को सस्ता लेकिन पोषक खाना उपलब्ध कराने के लिए अक्षय कलेवा योजना शुरू की है। राज्य में 58 शहरों में अक्षय कलेवा योजना में लगभग 10 हजार व्यक्तियों को 5 से 9 रुपये प्रति थाली भोजन उपलब्ध हो रहा है। इस कार्यक्रम को और बढ़ाने के लिए मैं घोषणा करती हूं कि यदि कोई भी मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर आदि शहरों के गरीबों को 5 या 6 रुपये प्रति थाली के हिसाब से भोजन देकर सहायता करना चाहे, तो राज्य सरकार उनसे सहभागिता करने को तैयार है। मैं सभी गणमान्य व्यक्तियों से भी अपील करूंगी कि वे अपने पूर्वजों की याद में सामर्थ्यनुसार केन्द्र चयनित कर एक दिन का भोजन अपने पूर्वजों के नाम से बंटवाने का पुनीत कार्य करें।
77- राज्य सरकार अनुसूचित जाति-जनजाति, सफाई कर्मियों व denotified tribes के बच्चों के अध्ययन को शैक्षणिक संस्थानों में बढ़ावा देने के लिए छात्रावासों के निर्माण की एक नई योजना शुरू करेगी। राज्य के राजकीय अथवा गैर-राजकीय महाविद्यालय, माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालय यदि अपने परिसर में इन वर्गों के छात्रों के लिए अलग या सामूहिक छात्रावास बनाना चाहे तो राज्य 25 बच्चों के छात्रावास के निर्माण हेतु या इसके अनुपात में 10 लाख रुपये का पूंजीगत अनुदान देगा। साथ ही ऐसे प्रत्येक छात्रा अथवा छात्रा के लिए 400 रुपये प्रति माह भोजन एवं अन्य सुविधाओं के लिए अनुदान उपलब्ध करवाया जायेगा। राज्य सरकार,इस शीघ्र घोषित होने वाली नीति के तहत, 50 छात्रावासों के निर्माण एवं भोजनादि हेतु 10 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध करायेगी।
78- बच्चों का आपराधिक मामलों से जुड़ना एक सामाजिक failure है। इनका, अथवा अन्य असहाय बालकों का पुनर्वास हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी है। राज्य में केवल 6 संभागीय मुख्यालयों पर juvenile homes खुले हुए हैं। मैं घोषणा करती हूँ कि वर्ष 2007-08 में शेष 26 जिलों में भी juvenile homes खोले जायेंगे। इसी प्रकार राज्य में अभी केवल अजमेर में ही संप्रेषण गृह स्थापित है। राज्य सरकार वर्ष 2007-08 में राज्य के शेष सभी 6 संभाग मुख्यालयों पर संप्रेषण गृह खोलेगी। वर्तमान में इन गृहों के बालकों के खान-पान पर लगभग 700 रुपये प्रति बालक प्रति माह व्यय किया जाता है। इस राशि को बढ़ाकर सरकार ने 850 रुपये प्रति बालक प्रतिमाह करने का निर्णय लिया है। मैं यह भी घोषणा करती हूँ कि किसी भी नवजात शिशु को उसके natural parents किसी विवशता के कारण पालना नहीं चाहे, तो भगवान की इस अद्भुत देन का पालन-पोषण राजस्थान राज्य करेगा। इस हेतु मैं, जयपुर के अलावा 6 अन्य जिलों में शिशु गृह खोलने की घोषणा करती हूँ।
79- पिछली सरकार अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लगभग 21 हजार पदों का बैक लॉग छोड़कर गई थी। मैं आज संतोष से यह बता सकती हूँ कि विभिन्न विभागों द्वारा नियुक्तियां एवं पदोन्नति कर 10 हजार से अधिक बैक लॉग कम किया गया है। मेरा लक्ष्य है कि मेरी सरकार के प्रथम 5 वर्ष पूरे होते-होते यह संख्या शून्य के करीब पहुँच जाये।
80- डॉ बी.आर. अंबेडकर ने देश को ना केवल संविधान दिया बल्कि वंचित वर्गों को अपने अधिकार मांगने का मार्ग प्रशस्त किया। डॉ अंबेडकर की ज्ञानवर्धन एवं चिंतन की परंपरा को आगे बढ़ाना आवश्यक है। मैं जयपुर में अंबेडकर जी के सामाजिक, आर्थिक एवं बौद्धिक चिंतन को बढ़ावा देने के लिए, एक अंबेडकर पीठ एवं अंबेडकर पार्क की स्थापना करने के लिए राज्य सरकार द्वारा अपेक्षित सहयोग देने की घोषणा करती हूँ।
81- निजी भागीदारी से सरकार के सीमित साधनों को leverage करने के लिए हमने नये Polytechnic और ITI खोलने, मिड-डे मील कार्यक्रम चलानेRajasthan Education Initiative, Water Initiative और प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों के प्रबंधन में भागीदारी जैसी अनेक महत्त्वपूर्ण PPP पहल की है। इस नीति को योजना आयोग ने भी सराहा है।
मोहन/090307
82- इससे प्रेरित होकर, जहाँ भारत सरकार ने आर्थिक ढांचागत परियोजनाओं हेतु Viability Gap Funding योजना शुरू की है, मैं सामाजिक ढांचागत सुविधाओं के लिए Rajasthan Social Sector Viability Gap Funding Scheme शुरू की जाने की घोषणा करती हूँ। मैं विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से इस योजना के लिए 100 करोड़ रुपये उपलब्ध कराऊंगी। यह योजना हमारे इस conviction पर आधारित है कि सामाजिक सेवाओं के विस्तार एवं delivery में समाज एवं सरकार की घनिष्ठ सहभागिता होनी चाहिए।हम इस योजना को ''पूंजीगत विनियोजन सरकार से व सेवा संचालन एवं प्रबंध समाज द्वारा'' के सिद्धांत पर बनायेंगे। इस योजना में सरकार विद्यालय, महाविद्यालय, छात्रावास, अस्पताल, स्वास्थ्य केन्द्र, आंगनबाड़ी, सामुदायिक भवन जैसी कोई भी सामाजिक आधारभूत सुविधा सृजित करने के लिए भूमि, भवन निर्माण या अन्य प्रकार के पूंजीगत व्यय हेतु viability gap के आधार पर सहायता उपलब्ध करायेगी।
अनुसूचित
जनजाति विकास:
83- जनजाति उपयोजना क्षेत्रों में वेतन शृंखला 1 से 6 तक एवं ग्राम सेवक के पद की सीधी भर्ती की रिक्तियों का 45 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति एवं 5 प्रतिशत अनुसूचित जाति के स्थानीय सदस्यों के लिए आरक्षित है। राज्य सरकार इस आरक्षण का विस्तार करने के लिए यह व्यवस्था, राज्य सेवाओं को छोड़कर, अन्य सभी पदों पर लागू करना प्रस्तावित करती है। इसी प्रकार बारां जिले की शाहबाद एवं किशनगंज तहसीलों की रिक्तियों हेतु स्थानीय सहरिया आदिम जाति के अभ्यर्थियों के लिए 25 प्रतिशत आरक्षण विभिन्न सेवाओं की वेतन शृंखला 1 से 9 तक में लागू है। अब यह आरक्षण,राज्य सेवाओं को छोड़कर, सभी पदों के लिए लागू करना प्रस्तावित है।
84- जनजाति व सहरिया आदिम परियोजना क्षेत्रा में वर्ष 2007-08 में निम्न विकास कार्यक्रम चलाये जायेंगे:
सहरिया परियोजना क्षेत्र में पाँच नवीन आश्रम छात्रावासों (कस्बाथाना, आगर, खांडा सहरोल, विलासगढ़ एवं खंडेला) का संचालन।
-जनजाति परियोजना क्षेत्र में 150 माँबाड़ी भवनों का निर्माण, जिस पर 1 करोड़ 12 लाख रुपये व संचालन, जिस पर 3 करोड़ रुपये व्यय किये जायेंगे।
-1 हजार 800 बेरोजगार जनजाति युवकों को रोजगारोन्मुख व्यवसायों में प्रशिक्षित कर स्वरोजगार हेतु आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराना, जिस पर 2 करोड़ रुपये का व्यय अनुमानित है।
85- गत् तीन वर्षों में मुख्य ग्राम से जनजातीय बस्ती तक विद्युत तंत्र स्थापित करने हेतु 4 करोड़ 31 लाख रुपये व्यय कर 150 बस्तियों को विद्युतीकृत किया गया है। वर्ष 2007-08 में 2 करोड़ 95 लाख रुपये व्यय कर अनुसूचित क्षेत्र की 118 जनजातीय बस्तियों तथा फलों का विद्युतीकरण किया जाना प्रस्तावित है। वित्तीय वर्ष 2007-08 में माडा क्षेत्रा में C.D. works तथा Road निर्माण हेतु 2 करोड़ 25 लाख रुपये का प्रावधान रखा गया है। इसी प्रकार बिखरी क्षेत्र में सड़क निर्माण हेतु 1 करोड़ 54 लाख रुपये का प्रावधान रखा गया है। अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों में कुएं खुदवाने एवं भूमि के समतलीकरण हेतु वित्तीय वर्ष 2007-08 में 50 लाख रुपये का प्रावधान रखा गया है एवं कुओं को गहरा करवाने हेतु 25 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है।
86- जनजाति उपयोजना क्षेत्र में निवास करने वाले BPL परिवारों की टापरी अथवा झोंपड़ी के आग लगने से नष्ट हो जाने पर केवल 2 हजार 500 रुपये की सहायता राशि मिलती है। इसे BPL परिवारों के लिए बढ़ाकर 10 हजार रुपये करने की मैं घोषणा करती हूँ। साथ ही, गैर BPL परिवारों को इस योजना में सम्मिलित किया जायेगा और उनकी रहवासीय झोंपड़ी के आग से नष्ट होने पर 5 हजार रुपये की सहायता दी जायेगी।
87- उदयपुर एवं अन्य क्षेत्रों की जनजाति जनसंख्या में बैणेश्वर धाम का विशिष्ठ स्थान है। इस धाम में मेरी स्वयं की भी विशेष आस्था है। अत: वित्तमंत्री होने का privilege इस्तेमाल करते हुए, इस धाम और उससे संबंधित सुविधाओं के जीर्णोद्धार एवं सुधार के लिए मैं कला एवं संस्कृति विभाग के माध्यम से 2 करोड़ रुपये उपलब्ध करवाने की घोषणा करती हूं।
ग्रामीण
विकास :
88- राज्य के 6 जिलों बांसवाड़ा, डूंगरपुर,झालावाड़, करौली, सिरोही एवं उदयपुर में रोजगार गारंटी कार्यक्रम चल रहा है। इन जिलों के 15 लाख 7 हजार परिवारों ने रोजगार के लिए job card लिया है। 10 लाख 38 हजार परिवारों को माह दिसंबर तक रोजगार उपलब्ध कराया गया, जिस पर 449 करोड़ 12 लाख रुपये का व्यय किया गया। रोजगार गारंटी कार्यक्रम के क्रियान्वयन में राजस्थान की राष्ट्रीय स्तर पर सराहना हुई है।
89- वर्ष 2007-08 में राज्य के 6 और जिलों, यथा जैसलमेर, जालौर, बाड़मेर, चित्तोडगढ़, सवाईमाधोपुर एवं टोंक, के इस योजना में शामिल किया गया है। रोजगार गारंटी कार्यक्रम में सबसे ज्यादlabour राजस्थान के जिलों में लगी। यह हमारे प्रदेश में employment की अत्यन्त आवश्यकता को दर्शाता है। मेरा विपक्ष से पुन: अनुरोध है कि राजस्थान के सभी जिले इस कार्यक्रम में लेने हेतु भारत सरकार को निवेदन करें।
90- जनसहभागिता आधारित चालू की गई गुरू गोलवलकर जनसहभागिता योजना के उत्साहवर्द्धक परिणाम रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए इस योजना के अंतर्गत आवंटित पिछले वर्ष की राशि को बारह गुना करते हुए वर्ष 2007-08 हेतु 60 करोड़ रुपये का प्रावधान किया जाना प्रस्तावित है। इस योजना का लाभ अधिक से अधिक गाँवों तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार का अंशदान कार्य की लागत का 70 प्रतिशत अथवा 3 लाख 75 हजार रुपये, जो भी कम हो, तक रहेगा। यदि चयनित कार्य District Plan में स्वीकृत कार्यों में से हैं तो राज्य सरकार का अंशदान 80 प्रतिशत या पाँच लाख रुपये जो भी कम हो, तक दिया जायेगा। आवश्यकता होने पर इस कार्यक्रम के लिए और अतिरिक्त प्रावधान किया जाएगा।
91- पिछले वर्ष गाँवों के समग्र विकास हेतु दीनदयाल उपाघ्याय आदर्श गाँव योजना प्रारंभ की गई थी व पचास गाँवों में इसे प्रायोगिक तौर पर लागू करने का लक्ष्य रखा गया। मुझे कहते हुए खुशी है कि इस योजना के अंतर्गत 128 गाँवों के प्रार्थना पत्रा प्राप्त हुए। पचास गाँवों का चयन किया जाकर उनकी विकास योजना तैयार करने का कार्य प्रगति पर है। वर्ष 2007-08 में इस योजना में 100 और गाँवों को लिया जायेगा।
92- राज्य में क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने के लिए मगरा, डांग एवं मेवात विकास बोर्ड के लिए चालू वर्ष के प्रावधान को बढ़ाकर प्रत्येक कार्यक्रम हेतु आगामी वर्ष में 5-5 करोड़ रुपये, करने की मैं घोषणा करती हूं।
93- जनजाति उपयोजना क्षेत्र में रहने वाले आदिवासी व अनुसूचित जाति के परिवार आजादी के 60 वर्ष पश्चात् भी गरीबी की मार झेल रहे हैं। यद्यपि अधिकतर परिवारों के पास भूमि उपलब्ध है लेकिन मिट्टी के बहाव, सिंचाई की कमी आदि के कारण उत्पादकता बहुत कम है। राज्य सरकार इन परिवारों की भूमि को विकसित करने हेतु ''केशव बाड़ी'' योजना हाथ में लेगी। इस योजना से इनकी भूमि पर भू-संरक्षण, जल ग्रहण विकास व सिंचाई के साथ फलदार पौधारोपण के कार्य नि:शुल्क कराये जायेंगे। इस योजना से वर्ष 2007-08 में 50 हजार परिवारों के जीविकोपार्जन के स्थाई साधन उपलब्ध होंगे।
94- रतनजोत की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए हमनें एक विशेष योजना लागू की है। मेरा मानना है कि इस योजना की सफलता रतनजोत उत्पाद के remunerative दाम मिलने पर निर्भर करेगी। मैं घोषणा करती हूँ कि प्रदेश में पैदा होने वाली रतनजोत को अगले 3 वर्षों तक राजफेड 7 रुपये प्रति किलो के न्यूनतम समर्थन मूल्य से खरीदने के लिए तैयार रहेगा। इस हेतु कृषि विभाग तथा सहकारिता विभाग शीघ्र ही एक विस्तृत योजना जारी करेंगे।
95- राज्य में बायो-फ्यूल प्लांटेशन को बढ़ावा देने में वन विभाग भी वन भूमियों पर NREGS में उपलब्ध राशि का उपयोग कर,एवं तेल कंपनियों व आरएसएमएम से खरीद की गांरटी के आधार पर, रतनजोत के 1 करोड़ पौधे रोपित किये जायेंगे।
96- मरू विकास कार्यक्रम ç