vkj/usc/ 1100/1a
अशोधित
प्रति/
प्रकाशनार्थ
नहीं
राजस्थान
विधान सभा की
कार्यवाही का
वृत्तान्त
|
अंक 5
बारहवीं
विधान सभा के
पांचवें
सत्र का दसवां
दिवस संख्या 7 |
गुरुवार,
09 मार्च, 2006
राजस्थान
विधान सभा की
बैठक 1100 बजे
विधान
सभा भवन,जयपुर
में प्रारम्भ
हुई।
(श्रीमती
सुमित्रा
सिंह, अध्यक्ष,
पदासीन)
तारांकित
प्रश्नोत्तर
श्री अध्यक्ष: श्री निर्भय
लाल।
राज्य
के विश्वविद्यालयों
में आरक्षित
वर्ग का
बैकलाग
103.
श्री
निर्भयलाल(रूपवास):
क्या उच्च
शिक्षा
मंत्री यह
बताने की कृपा
करेंगे:-
(1)
राजस्थान विश्वविद्यालय
जयपुर,
जोधपुर,
अजमेर,
बीकानेर तथा
कृषि विश्वविद्यालय
बीकानेर,
उदयपुर एवं
कोटा विश्वविद्यालय
में प्रोफेसर,
एसोसिएट
प्रोफेसर, रीडर
आदि के कुल
कितने-कितने
पद स्वीकृत
हैं एवं
कितने-कितने
कार्यरत हैं? वर्गवार
सूची सदन की
मेज पर रखें।
(2)
क्या यह सही
है कि उक्त
विश्वविद्यालयों
में आरक्षण
नियमों की
पूर्ण अवहेलना
की गई है? यदि
हां, तो क्या
सरकार इनमें
अनुसूचित
जाति/जनजाति
के क्रमश: 16:12
प्रतिशत के
हिसाब से
नियुक्ति
करने का विचार
रखती है?
(3)
क्या सरकार
राजस्थान
विश्वविद्यालय
जयपुर में
अनुसूचित
जाति/जनजाति
का बैकलाग
पूरा करने का
विचार रखती
है? यदि हां, तो
कब तक?
राज्य
मंत्री, उच्च
शिक्षा (श्री
वासुदेव
देवनानी): (1)
विश्वविद्यालयों
से प्राप्त
सूचनानुसार राज्य
के सामान्य
शिक्षा के
विश्वविद्यालयों
एवं कृषि विश्वविद्यालयों
में प्रोफेसर,
एसोसिएट
प्रोफेसर एवं
असिस्टेंट
प्रोफेसर के
स्वीकृत एवं
कार्यरत पदों
की विश्वविद्यालयवार
एवं वर्गवार
सूची परिशिष्ट-1
पर उपलब्ध
है।
(2) जी नहीं।
(3) जी हां। जब
भी विश्वविद्यालय
में पद भरने
की प्रक्रिया
प्रारम्भ
होगी तो आरक्षण
नियमों की
पालना करते
हुए
नियमानुसार बैकलाग
पूरा किया
जायेगा।
श्री
निर्भय लाल:
माननीय अध्यक्षजी,
मंत्रीजी ने
बताया है,
मैंने यह पूछा
है कि ‘’क्या यह
सही है कि उक्त
विश्वविद्यालयों
में आरक्षण
नियमों की
पूर्ण अवहेलना
की गई है’’ उन्होंने
लिखा है कि जी
नहीं। फिर
मैंने यह पूछा
है ‘’यदि हां तो
क्या सरकार
इनमें
अनुसूचित
जाति/जनजाति
के क्रमश: 16:12
प्रतिशत के
हिसाब से
नियमानुसार
नियुक्ति
देने का विचार
रखती है?’’ तो इन्होंने
लिखा है कि
कोई विचार
नहीं है तो क्या
आप आरक्षण
देने का कोई
विचार नहीं
रखते हैं। फिर
लिखा है आपने
और नीचे, जी
हां,
नियमानुसार।
अब तक आपने न
तो कोई नियम
पूरे बनाये तो
आप यह कहो कि
हम एस.सी. एस.टी.
के लिए कोई
ऐसा आरक्षण
नहीं देंगे।
आप बता दें।
श्री
अध्यक्ष: आप
प्रश्न
पूछें। नहीं,
आप कह रहे हैं
कि दें।
श्री
निर्भय लाल:
पूछ रहा हूं
साहब। वह कह
रहे हैं जी
नहीं। पूछ तो
रहा हूं साहब।
जवाब दें ना।
श्री
वासुदेव
देवनानी: विश्वविद्यालयों
में किसी भी
प्रकार की
आरक्षण के
नियमों कल
अवहेलना नहीं
की गई है। 1991 के
बाद में किसी
प्रकार की कोई
नियुक्ति हुई
नहीं है तो
इसलिए
अवहेलना का
कोई प्रश्न
ही नहीं उठता।
श्री
अध्यक्ष:
श्री बाबूलाल
नागर।
श्री
बाबूलाल
नागर(दूदू):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आपके
माध्यम से
मैं मंत्रीजी
से पूछना चाह
रहा हूं कि 1989 के
बाद राजस्थान
विश्वविद्यालय
में चयन
प्रक्रिया के
द्वारा कोई भी
शिक्षकों की
नियुक्ति
नहीं की गई।
एडहाक बेसिस
पर कुल कितने
पदों पर
नियुक्ति की
गई और उसमें
एस.सी. एस.टी. के
जितने भी
एडहाक बेसिस
पर शिक्षकों
को लगाया गया
है, उसमें
एस.सी. एस.टी. के
कितने लोगों
को एडहाक
बेसिस पर
लगाया गया है और
जो भी एस.सी.
एस.टी. का
बैकलाग बचता
है, क्या
सरकार का रोस्टर
प्रणाली द्वारा
विश्वविद्यालयों
को एस.सी. एस.टी.
और ओ.बी.सी.
तीनों को
दिशानिर्देश
दे दिये? तो क्या
सरकार ने जो
विश्वविद्यालयों
को
दिशानिर्देश
दिये हैं,
विभाग उस
दिशानिर्देशों
के अनुसार इस
बैकलाग की कब
तक पूर्ति कर
देगा?
श्री
वासुदेव
देवनानी:
राजस्थान
विश्वविद्यालय
में 1982 से लेकर 1995
तक 156 एडहाक पद
भरे गये और 1996 से
2000 के बीच में 127
पद एडहाक भरे
गये। टोटल 283
एडहाक पद भरे
गये, चूंकि
उसमें किसी
प्रकार की चयन
प्रक्रिया
नहीं थी इसलिए
उसमें बैकलाग
में विश्वविद्यालय
से प्राप्त
सूचना के
अनुसार कुल इस
समय 157 पद रिक्त
हैं। जैसे ही
यह प्रक्रिया
प्रारम्भ
होगी, निश्चित
रूप से बैकलाग
का पूरा ध्यान
रखा जायेगा।
श्री
अध्यक्ष: मूल
प्रश्नकर्त्ता।
आपका जवाब दे
दिया ना इन्होंने।
मूल प्रश्नकर्त्ता।
श्री
बाबूलाल नागर:
अध्यक्ष
महोदय, मैंने
मंत्री महोदय
से निवेदन
किया था। नहीं
अध्यक्ष
महोदय, आपने
नहीं दिया
जवाब। मैंने
यह पूछा है कि
अनुसूचित
जाति/जनजाति
के 287 एडहाक पद आपने
भरे हैं,
एडहाक पदों पर
जो शिक्षकों
को लगाया है,
उसमें एस.सी.
के कितने हैं
और एस.टी. के
कितने हैं,
मैं यह जानना
चाहता हूं
मंत्री महोदय
से।
श्री
सुरेश
मीणा(करौली):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, इसमें
लीपापोती क्यों
की जा रही है? सही
बात बतायें कि
भरे कि नहीं
भरे? यह हमारे
साथ बेईमानी
की जा रही है।
एस.सी. एस.टी. के
लोगों के साथ
बेईमानी कर
रहे हैं।(व्यवधान)
श्री
बाबूलाल नागर:
नहीं, कितने
हैं यह तो आ जाये।
अध्यक्ष
महोदय, यह आ
जाये कि कितने
लोगों को,
एस.सी. एस.टी. को
एडहाक पर
लगाया है 287 में
से?
श्री
अध्यक्ष:
मंत्रीजी। आप
उनका जवाब तो
आने दें।
श्री
सुरेश मीणा:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, कृषि
विश्वविद्यालय
में आज तक
बैकलाग पूरा
नहीं हुआ, आज
तक पद नहीं
भरे यह।
श्री
वासुदेव
देवनानी: कृषि
विश्वविद्यालय
में आज भी चार
विश्वविद्यालय
ऐसे हैं जहां
किसी प्रकार
का कोई प्रोफेसर
और असिस्टेंट
प्रोफेसर का
बैकलाग नहीं
है। एम.डी.एस. यूनिवसिर्टी
में कोई
बैकलाग नहीं
है। एम.एल.एस.ई.
यूनिवर्सिटी
में कोई
बैकलाग नहीं
है। इसलिए पद
वहां पर बराबर
भरे गये।
राजस्थान
विश्वविद्यालय
के लिए मैंने
कहा कि जब भी
चयन प्रक्रिया
होगी, हम पूरा
ध्यान
रखेंगे।
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
जवाब सुनें आप
उनका।
श्री
बाबूलाल नागर:
अध्यक्ष महोदय,
आपकी अनुमति से,
मैंने मंत्री
महोदय से यह पूछा
है कि 287 पद....
श्री
सुरेश मीणा:
ये जवाब ही
अलग दे रहे
हैं। (व्यवधान)
मंत्रीजी को
ध्यान नहीं
है। वे कह रहे
हैं कि बैकलाग
खाली नहीं है।
(व्यवधान)
श्री
बाबूलाल नागर:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, सिर्फ
एक सवाल है।
(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्यगण।
माननीय सदस्यगण,
स्थान ग्रहण
कर लें। आप
पहले जवाब सुन
लीजिये।
श्री
बाबूलाल नागर:
एक मिनट साहब।
श्री
अध्यक्ष: ऐसे
एक मिनट कैसे
होगा, पहले
जवाब सुनिये
ना।
श्री
वासुदेव
देवनानी: जवाब
मैंने दे
दिया। मैंने इनको
बताया है कि
राजस्थान
यूनिवर्सिटी
में 157 पद बैकलाग
के हैं जो चयन
प्रक्रिया से
जब भी भरा
जायेगा, उस
समय इनका पूरा
ध्यान
रखेंगे। (व्यवधान)
श्री
बाबूलाल नागर:
अध्यक्ष
महोदय, मैंने
यह पूछा है कि 287
में से एस.सी. के
कितने हैं
तदर्थ बेस पर
और एस.टी. के
कितने हैं? मंत्रीजी
से यह पूछा है,
मंत्री महोदय
इसका तो जवाब
दे नहीं रहे
हैं अध्यक्ष
महोदय, मेरा
आपसे आग्रह है
कि आप इसमें यह
बता दें कि
इसमें एस.सी.
के कितने हैं
और एस.सी. के
कितने हैं, यह
बता दीजिये।
(व्यवधान)
श्री
वासुदेव
देवनानी:
राजस्थान
विश्वविद्यालय
में 283 के एडहाक
हैं, यह आपके
शासन में एक
भी पद नहीं
भरा है। (व्यवधान)
पिछले पाँच
वर्षों में एक
भी पद नहीं भरा
है राजस्थान
यूनिवर्सिटी
में। (व्यवधान)
श्री
हेमराज
मीणा(किशनगंज):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, इतना
बता दें कि 287 पद
एडहाक पर लिये
गये हैं, इन 287
प्राध्यापक
लेने में क्या
एस.सी. एस.टी. के
लेने का
प्रावधान
नहीं था क्या?
(व्यवधान) आप
यह बता दें कि 287
में से एस.सी.
एस.टी. के कितने
लोग भरे गये? 287
में से कितने
लोगों को भरा
गया? (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्यगण,
एक साथ खड़े
होकर.... माननीय
सदस्यगण, स्थान
ग्रहण कर लें।
माननीय सदस्यगण,
एक साथ खड़े
होकर, एक साथ
बोलकर आप क्या
पूछना चाह रहे
हैं? एक एक
करके तो खड़ा
होइये। फिर
खड़े हो गये
आप लोग। आसन
पांवों पर है।
आसन पांवों पर
है। (व्यवधान)
मंत्री महोदय,
यदि आपके पास
इसकी सूचना हो
कि एस.सी. के
कितने हैं,
एस.टी. के
कितने हैं तो
आप बता दीजिये,
नहीं हो तो कह
दीजिये।
श्री
वासुदेव
देवनानी: मूल
प्रश्न में
यह जानकारी
नहीं मांगी गई
थी कि 283 में कितने
हैं?
श्री
बाबूलाल नागर:
जयपुर विश्वविद्यालय
इसमें लिखा
हुआ है। वह भी
नियुक्ति के
सम्बन्ध
में प्रश्न
है। (व्यवधान)
श्री
जीतमल
खांट(बागीडोरा):
आपने एस.सी.
एस.टी. के 287 पद
भरे हैं...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आप
ऐसे कैसे बोल
रहे हैं गैर
जिम्मेदारान?
श्री
बाबूलाल नागर:
उच्च शिक्षा
मंत्री
तिवाड़ीजी
जवाब देना
चाहें... (व्यवधान)
श्री
अमराराम(धोद):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
मंत्रीजी यह
बता दें कि
विश्वविद्यालय
में एस.सी.
एस.टी. के
प्रोफेसर के
पदों को नहीं
भरने के लिए
क्या यह
प्रेक्टिस
रही है कि
एडहाक बेसिस
पर उनको
नियुक्ति दी
जाये और फिर
उनको
रेगुलराइज कर दिया
जाये?
श्री
वासुदेव
देवनानी: अध्यक्ष
महोदय, एडहाक
में चयन
प्रक्रिया से
नहीं भरे जाते
हैं इसलिए
वेकेंसी के
आधार पर एडहाक
कार्य हेतु
लिये जाते हैं
इसलिए इसमें
एस.सी. एस.टी. का
विशेष चयन
नहीं होता है।
बैकलाग होता
ही नहीं है
एडहाक में और
अभी सरकार ने
तय किया है कि
विश्वविद्यालय
में खाली
पद...(व्यवधान)
श्री
जीतमल खांट:
क्या आपके
पास एस.सी.
एस.टी. का कोई
आवेदन नहीं
है? (व्यवधान)
श्री
वासुदेव
देवनानी: ...हम
भरने जा रहे
हैं, इसमें हम
पूरा ध्यान
रखेंगे। (व्यवधान)
सरकार ने सारे
पदों को...
श्री
बाबूलाल नागर:
अध्यक्ष
महोदय, मेरा
बहुत महत्तवपूर्ण
प्रश्न है।
(व्यवधान)
एक
माननीय सदस्य:
माननीय
मंत्रीजी, आप
एस.सी. एस.टी. के
पदों को जनरल
से भर लेते
हैं। (व्यवधान)
श्री
बाबूलाल नागर:
...एस.सी. एस.टी. के
साथ अत्याचार
कर रहे हैं।
सरकार ने जो
निर्देश दिये
हैं, इस सरकार
के निर्देश की
क्यों नहीं
पालना हो रही
है? (व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: यह
सारे आप ही के
समय का है। (व्यवधान)
श्री
बाबूलाल नागर:
सवा दो साल तो
आपको हो गये
हैं।
श्री
सुरेश मीणा:
माननीय
मंत्रीजी
जवाब दे रहे
हैं। (व्यवधान)
मंत्रीजी, आप
जवाब दीजिये।
श्री
बाबूलाल नागर:
25 प्रतिशत हम
भर रहे हैं।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी(उच्च
शिक्षा
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, ... एक
मिनट आप
बैठें।
श्री
निर्भय लाल:
लेकिन माननीय
अध्यक्षजी,
माननीय अध्यक्षजी।
श्री
अध्यक्ष:
माननीय
शिक्षा
मंत्रीजी
खड़े हुए हैं।
माननीय सदस्य,
स्थान ग्रहण
कर लें।
शाहबाद से आने
वाले माननीय सदस्य,
शाहबाद से आने
वाले माननीय
सदस्य, आप स्थान
ग्रहण कर लें।
श्री
हेमराज मीणा:
...और लगाये तो
कितने लगाये? यह
चयन
प्रक्रिया आप
कब तक पूरी कर
लेंगे, कब शुरू
करेंगे? आप
एडहाक पर
लगाकर सारे पद
भर लेंगे तो
एस.सी. एस.टी. का
आरक्षण खतम
होता चला
जायेगा,
बैकलाग बढ़ता
चला जायेगा।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, यह कोई
विवाद का विषय
नहीं है, यह सही
बात है कि
राजस्थान
विश्वविद्यालय
में 1989 के बाद
कोई नियुक्ति
नहीं हुई
इसलिए जब से
हमने ओ.बी.सी.
का और एस.सी.
एस.टी. का हमने
1984-85 में
यूनिवर्सिटी
में रिजर्वेशन
का प्रावधान
किया और 1989 के
बाद से हमने
ओ.बी.सी. का 21 प्रतिशत
का किया लेकिन
अभी तक राजस्थान
में सब जगह
मिलाकर 302 पद
सभी विश्वविद्यालयों
में बैकलाग के
हैं, जो हमको
भरने हैं......
Jkj/usc/1110/1b/09032006
जो
हमको भरने
हैं।
राजस्थान
सरकार ने तय
किया इस बार
कि 25 प्रतिशत
पद, जो खाली पद
हैं, उनमें
भरने का तय
किया है और हम
विश्वविद्यालयों
से प्राप्त
सूचना के
अनुसार और कई
उच्च न्यायालय,
सब न्यायालयों
के फैसले हो
चुके हैं उसके
हिसाब से एससीएसटी
का बेकलाग हम
निश्चित रूप
से भरेंगे। एक बात,
और भरने के
बाद ही
प्रक्रिया
आगे प्रारम्भ
होगी।
दूसरी बात
मैं यह कहना
चाहता हूं कि
यह जो एडहाक
हैं, सही बात
है, एडहाक किस
जमाने में हुए
मैं उसकी
चर्चा नहीं
करता, लेकिन उसमें
एससीएसटी के
लोग नहीं हैं,
बात सही है, सही
बात को स्वीकार
करने में कोई
दिक्कत नहीं
है, इसलिए जब भी
चयन
प्रक्रियापूरी
होगी, एडहाक
को भी शामिल
करके इसमें भी
जो कोटा
एससीएसटी का
कम हुआ है
उसको भरकर इस
प्रक्रिया को
हम पूरा
करेंगे।
श्री
निर्भय लाल: यह कब तक
भरा जायेगा,
सर। यह
तो बतायें कि
कब तक भरा
जायेगा। मंत्री
महोदय यह
बतायें कि यह
कब तक भरे
जायेंगे।
श्री
बाबूलाल
नागर:
मंत्री
महोदय, आपके
आने के बाद(व्यवधान)
अध्यक्ष
महोदय, निवेदन
करना चाह रहा
हूं...(व्यवधान)
श्री
निर्भय लाल: एससी
एसटी के
अधिकारियों की
भरसक अवहेलना
हो रही है।
आपने कहा है,
जी नहीं। आपने
भरने के लिए
ही मना कर
दिया...
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी: बता रहा
हूं न।
श्री
निर्भय लाल: इसमें
दर्शाया है कि
जी नहीं,
बेकलाग 16:12 का
जो...(व्यवधान)
श्री
बाबूलाल
नागर:
अध्यक्ष
महोदय, आपके
आने के बाद
कृषि विश्वविद्यालय...(व्यवधान)
निर्भयजी, एक
मिनट।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी: मेरे
आने के बाद, (व्यवधान)
आप मत खड़े
हों बीच में,
मेरे आने के
बाद...
श्री
बाबूलाल नागर:
मंत्रीजी, एक
मिनट।
आपके आने के
बाद कृषि विश्वविद्यालय,
उदयपुर में एक
प्रशिक्षण
आयोजक का एक
पद एससी के
लिए आरक्षित
करके
विज्ञापन किया
गया, उसमें
साक्षात्कार
हो गया, वह
विज्ञापन हो
गया, इंटरव्यू
दे दिया, इसके
बाद एससी का
जो आरक्षित पद
था उसको बदल
कर अन्य विषय
का कर दिया
गया क्योंकि
वह आरक्षित
एससी का था, यह
अध्यक्ष
महोदय, 19.3.2005 का
विज्ञापन
संख्या 2/2005 जो
शिड्यूल कास्ट
के लिए
आरक्षित था,
उस पद को बदल
दिया, क्योंकि
वह आरक्षित ही
एससी के लिए
था.....
श्री
अध्यक्ष: यह अलग
से प्रश्न
है।
श्री
सुरेश मीणा: घोर अन्याय
है मंत्रीजी,
घोर अन्याय।
श्री
अध्यक्ष: यह वैसे
प्रश्न अलग
से हैं।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी: यह
सूचना मेरे
पास नहीं है।
श्री
बाबूलाल
नागर:
अध्यक्ष
महोदय, इसमें
है कृषि विश्वविद्यालय। कृषि
विश्वविद्यालय
पूछा है अध्यक्ष
महोदय, इसमें।
श्री
अध्यक्ष: यह अलग
से प्रश्न
है।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी: यह
सूचना मेरे
पास नहीं है,
यह अलग से
प्रश्न है,
सूचना नहीं है
लेकिन, सुनो न,
मैं व्यवस्था
कर रहा हूं न।
श्री
बाबूलाल नागर:
इसमें है अध्यक्ष
महोदय।(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: अलग
से इसलिए हो
गया कि आपने
इसमें केवल अनुसूचित
जाति और
जनजाति के
बेकलाग की बात
करी है।(व्यवधान)
आपने केवल
बेकलाग की बात
करी है..(व्यवधान)
श्री
बाबूलाल
नागर:
अनुसूचित
जाति के लिए आरक्षित
था इसलिए आपने
उसको बदल दिया
उसके विषय को
ही और एक
बाकायदा
साक्षात्कार
हुआ, बाकायदा
उसका
विज्ञापन
निकाला और चूंकि
एससी को देना
पड़ रहा है,
एससी को आप
देना नहीं
चाहते, इसलिए
उसको बदल
दिया।(व्यवधान)
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी: हां,
एक मिनट।
निर्भयजी, बिराजो
तो सही।
मैं कह रहा
हूं कि जो भी
पद खाली हैं
या जो पद
विज्ञापित
करने के बाद
बदला गया है
तो वह गलत है
और हम विश्वविद्यालय
से इस बात का
जवाब तलब
करेंगे और मैं
आश्वस्त
करता हूं कि
इस वित्तीय
वर्ष में हम 25
प्रतिशत पद
हमने भरने की
परमिशन दी है
और जो भी पद
भरे जायेंगे
वह बेकलाग
पूरा करने के
बाद ही भरे
जायेंगे, यह
मैं आपको कहना
चाहता हूं।
श्री
निर्भय लाल: आपने यह
लिखा है 16, 12 का,
मैंनें पूछा
है कि 16:12
का
रिजर्वेशन
देंगे या नहीं
देंगे, आपने
लिखा है, जी
नहीं, आपने स्पष्ट
मना किया है..
श्री
अध्यक्ष: श्री
रामकिशोर
मीणा।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी: 16
प्रतिशत, 12
प्रतिशत
रिजर्वेशन
देंगे।
श्री
निर्भय लाल: आपने स्पष्ट
मना किया है
इसमें, जी
नहीं। जी
नहीं, जवाब में
है आपके।(व्यवधान)
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी: अब उसको
संशोधित कर
लीजिये, जी
हां।
श्री
निर्भय लाल: जी हां,
तो कहो न आप।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी: जी
हां। 16
प्रतिशत, 12 प्रतिशत,
21 प्रतिशत,
तीनों
भरेंगे। जी नहीं
किसने दिया
है।
श्री
निर्भय लाल:
कब तक भरेंगे? यह भी
पूछना चाहता
हूं आपसे मैं,
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
मंत्रीजी से
कि आप कब तक इन
पदों को
भरेंगे।
श्री
खुशवीर सिंह: आप तो यह
बतायें, संस्कृत
विश्वविद्यालय
में जो अभी
आपने 32 पद भरे
हैं उसमें से
अनुसूचित
जाति, जनजाति
के कितने हैं। एक भी
नहीं लिया
संस्कृत
विश्वविद्यालय
में 32 पदों में
से।
श्री
निर्भय लाल: कब तक
भरेंगे?
यह जुबानी बात
कह रहे हैं। पचपन
साल हो गये
देश को आजाद
हुए, अब तक
आपने पद भरे
ही नहीं और
फिर आपने...(व्यवधान)
श्री
वासुदेव
देवनानी:
इसमें लिखा है
यदि अवहेलना नहीं
की हो,
अवहेलना की ही
नहीं अपन ने।
(व्यवधान)
श्री
निर्भय लाल: 1996 में स्थाई
लिये थे...(व्यवधान)
श्री
बाबूलाल
नागर:
अध्यक्ष
महोदय, आपके
आने के बाद
संस्कृत
विश्वविद्यालय
में आपने कुल
कितने पद भरे
और उसमें से
अनुसूचित
जाति और
जनजाति के
कितने पद भरे,
यह बता
दीजिये।
श्री
खुशवीर सिंह: हाल ही
में 32 आपने भरे,
उसमें से एक
भी अनुसूचित
जाति, जनजाति
का नहीं है।
श्री
बाबूलाल
नागर:
आप यह बता
दें एससी और
एसटी के कितने
लोगों को भर
लिया।(व्यवधान)
श्री
शंकर सिंह
राजपुरोहित:
यह प्रश्नकाल
का समय खत्म
कर रहे हैं।
जो भी प्रश्नकर्ता
है वह पूरक
प्रश्न करे
और प्रश्नकाल
यह खत्म कर
रहे हैं।
श्री
बाबूलाल नागर:
मंत्री महोदय,
आप बतायें।
श्री
सी.डी.देवल: कोई
प्रश्नकाल
खत्म नहीं
है....(व्यवधान)
श्री
शंकर सिंह
राजपुरोहित: यह व्यवस्था
सब आप लोगों
ने बिगाड़ी
है, आप आइये ना,
व्यवस्था
करिये ना।(व्यवधान)
यह कांग्रेस
सरकार के किये
गये पाप, उन
पापों को धोने
में समय
लगेगा।(व्यवधान
श्री
सी.डी.देवल: जिन
लोगों के
भरोसे आप बात
कर रहे हो,
उनकी निष्ठा
दूसरी है...
श्री
अशोक (खंडार): यह
अनुसूचित
जाति, जनजाति के
लोगों के
प्रति इनकी
भावना है...(व्यवधान)
श्री
खुशवीर सिंह: आप
अनुसूचित
जाति, जनजाति
के विरोध की
बात क्यों
करते हो।(व्यवधान)
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी: मैं एक
बार कह चुका
सदन को, राज्य
सरकार इस पर
चिंतित है,
राज्य सरकार
सजग है, हमने
चाहे
आरपीएससी से
पद भरे हैं,
चाहे यह पद
आगे भरेंगे,
जो भी पद
भरेंगे, जो विसंगतियां
रह गई हैं
उनको दूर
करेंगे और एससी
एसटी...
श्री
बाबूलाल
नागर:
आपने खुद ने
ही भरा है।
श्री
सी.डी.देवल:
ओबीसी भी तो
बोलो साथ में।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी: मैंने
भरा है तो मैं
भी ठीक कर
दूंगा।
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
बीच में नहीं
बोलें आप।
माननीय सदस्य,
बीच में नहीं
बोलें आप।
श्री
सी.डी.देवल:
ओबीसी का तो
कहें।
यह बार-बार
कह रहे हैं।
श्री
अध्यक्ष: आप
स्थान ग्रहण
कर लें।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी: मैं
नहीं भरता
हूं, भरने की
एक प्रक्रिया
होती है विश्वविद्यालय
में, उस विश्वविद्यालय
की प्रक्रिया
में यदि कोई
भी गलती रही
है तो उसको
ठीक करेंगे और
अनुसूचित
जाति और
जनजाति और
ओबीसी का सारा
संविधान के
अन्तर्गत जो
कोटा है उसको
निश्चित रूप
से पूरा करेंगे।
श्री
अध्यक्ष:
श्री
रामकिशोर
मीणा। (व्यवधान)
मैंने नेक्स्ट
क्वेश्चन
पुकार लिया
है।
श्री
रामकिशोर
मीणा: प्रश्न
संख्या 104 । (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: मैंने
नेक्स्ट क्वेश्चन
पुकार लिया,
मंत्रीजी ने
आश्वस्त कर
दिया और मैंने
नेक्स्ट क्वेश्चन
पुकार लिया।
श्री
सी.डी.देवल: इनको
कुछ कहते नहीं
हो, इन्होंने
गलत जवाब दिया
है कि आरक्षण
करेंगे, नहीं।
श्री
अध्यक्ष: क्या
गलत जवाब
दिया?
श्री
सी.डी.देवल: इन्होंने
यह दिया कि 16 और 12
आरक्षण
करेंगे कि
नहीं।
श्री
अध्यक्ष: कोई गलत
जवाब नहीं
दिया।
श्री
सी.डी.देवल: आप
देखें इसको 16:12,
इनका जवाब है-नहीं।
श्री
अध्यक्ष:
मंत्रीजी ने
स्थिति स्पष्ट
कर दी और
मैंने दूसरा
प्रश्न
पुकार लिया।
श्री
सी.डी.देवल: यह
खेद प्रकट तो
करें।
श्री
अध्यक्ष: मैंने
दूसरा प्रश्न
पुकार लिया।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी: जी
हां।
कर दिया भाई।
श्री
सी.डी.देवल:
विधान सभा में
खेद प्रकट तो
करें यह
मंत्रीजी,
राज्य
मंत्रीजी अगर
तैयार नहीं
हैं तो इन्होंने
गलत जवाब क्यों
दिया।(व्यवधान)
श्री
बाबूलाल नागर:
आपने जवाब तो
अभी दिया
है..(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
स्थान ग्रहण
कर लें कृपया।
विधान
सभा क्षेत्र
सिकराय के
ग्रामीण
क्षेत्रों हेतु
पेयजल
योजनाएं
104.श्री
रामकिशोर
मीणा(सिकराय): क्या
जन स्वास्थ्य
अभियांत्रिकी
मंत्री यह
बताने की कृपा
करेंगे:-
(1)
विधान सभा
क्षेत्र
सिकराय में
पेयजल की कौन-कौन
सी योजनाएं कब
से संचालित
हैं?
(2)
क्या सरकार
विधान सभा
क्षेत्र
सिकराय के
ग्राम गडोरा,
नाहरखोहरा,
चांदेरा, रेटा
तथा करौडी, ठीकरिया
की योजनाएं
आगामी गर्मियों
से पूर्व स्वीकृत
कर पेयजल सुलभ
कराने का
विचार रखती
है? यदि नहीं,
तो क्यों?
राज्य
मंत्री,जन स्वास्थ्य
अभियांत्रिकी(श्री
चुन्नीलाल
धाकड़): (1) विधान
सभा क्षेत्र
सिकराय में विभाग
द्वारा
संचालित एवं
संधारित की जा
रही विभिन्न
प्रकार की
पेयजल योजनाओं
का वांछित
विवरण संलग्न
परिशिष्ठ-अ
पर उपलब्ध
है।
(2)
प्रश्न में
वर्णित सभी 6
गांव हैण्डपम्प
योजना से
लाभान्वित
हैं।
इन गांवों हेतु
11 नये हैण्डपम्प
स्वीकृत
किये गये हैं,
जिन्हें माह
अप्रैल,2006 तक
निर्मित कर
चालू करना प्रस्तावित
है।
इसके
अतिरिक्त
ग्राम गडोरा
तथा नाहरखोहरा
में ग्रीष्म
2006 में आवश्यकतानुसार
पेयजल परिवहन
करना प्रस्तावित
है।
विवरण संलग्न
परिशिष्ठ-ब
पर उपलब्ध
है।
श्री
रामकिशोर
मीणा:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, माननीय
मंत्रीजी ने
जिन गांवों में
योजनाएं
प्रस्तावित
हैं उनमें
केवल अभी तक
हैण्डपम्प
से व्यवस्था
की है लेकिन
इनकी योजनाएं
दो साल से
विभाग के पास
विचाराधीन
हैं, एडीशनल
चीफ इंजीनियर
तक लेवल पर यह
पड़ी हुई हैं
और गत वर्ष
एडीशनल चीफ
इंजीनियर खुद
इन गांवों में
जाकर के योजना
करके आये और
उसके बावजूद
अभी तक इन
गांवों की
योजनाएं
मंजूर नहीं
कीं, उसके
पीछे क्या
कारण रहे। दूसरा
प्रश्न यह है
कि प्रश्न के
उत्तर के एक
भाग में दौसा
पंचायत समिति
के गांव हैं,करीब
छह गांव हैं
जिनमें पाईप
की योजना है और
स्कीम सरकार
की है लेकिन
उसमें लम्बे
समय से बिजली
के कनेक्शन
के लिए, कनेक्शन
नहीं होने की
वजह से वह अभी
तक कार्यरूप
में परिणित
नहीं हो पाई,
लास्ट छोर तक
के गांव हैं,
उनको अभी तक
पानी नहीं मिल
पा रहा है,
उनको कब तक
पूराि कर दिया
जायेगा, उनको
कब तक पानी
मुहैया कराने
की योजना है।
श्री
चुन्नीलाल
धाकड़:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, सिकराय
से आने वाले
माननीय सदस्य
ने पूछा है कि
उनकी योजना
एडीशनल चीफ
इंजीनियर के
यहां लम्बित
रह जाती है, कर
जाती है, यह
हमारी
जानकारी में
लाया गया है, इसकी
जानकारी करके
शीघ्र जहां भी
पड़ी हैं उनको
निकलवाने की
और
क्रियान्वित
की कोशिश की
जायेगी। साथ ही आपने
गाडोरा के
गांवों की कोई
प्रस्तावित
योजना के बारे
में बताया है,
अभी तक हमारे
पास योजना कोई
पहुंची नहीं
है और अगर कोई
आवश्यकता
हुई योजना की
तो इसके लिए
प्रस्तावित
सर्वे करवाकर
आगे इसके लिए
प्रयत्न
किये जायेंगे,
पानी पिलाने
के लिए कोई
कमी नहीं रह
पायेगी।
श्री
रामकिशोर
मीणा:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, खुद
एडीशनल चीफ
इंजीनियर
मेरे साथ गये
हैं गत वर्ष
और उन्होंने
सारे
अधिकारियों
को साथ में ले
जाकर योजना
बनाई है। मंत्री
महोदय कह रहे
हैं कि अभी तक
हमारे पास कोई
योजना ही नहीं
है। तो
ऐसी योजनाएं
को जो खुद जाकर
के गये हैं और
वहां पर
इंतजार किया
जाता है कि
कहीं कोई आये,
कोई हमको कहे
तो उसके हिसाब
से, अपने आप
रूटीन वे में
जो एडीशनल चीफ
इंजीनियर हैं
वह खुद अपने
पास में, खुद
ने बनाई है..(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: सदन में
बैठे-बैठे
बोलना नियमों के
विपरीत है।
श्री
रामकिशोर
मीणा:
तो उन
योजनाओं को
आपकी इन स्कीम्स
में जहां पर
बहुत ज्यादा
फ्लोराइडयुक्त
पानी है, रेटा
गांव में
कुबड़ा होने
की एक बहुत
जबरदस्त
प्रक्रिया है,
वहां पर
फ्लोराइड
बहुत ज्यादा
मात्रा में
है, उसकी
योजनाएं तीन
साल पहले बनी
पड़ी है लेकिन
उसके बारे में
जो जवाब है
उसमें कुछ
नहीं बताया
गया है, तो अध्यक्ष
महोदय, निवेदन
करना चाहूंगा
कि इनको जल्द
से जल्द स्वीकृत
कराकर इसी साल
से और जिन
योजनाओं में
बिजली के
कनेक्शन के
लिए दो-दो साल
से योजनाएं बन
गईं, सारा काम
कम्पलीट है, केवल
कनेक्शन
होने के अभाव
में गांव में
पानी नहीं
पहुंच रहा है....
Bhs/usc/9.3.06/1120/1c
श्री
सांवर लाल (जन
स्वास्थ्य
अभियांत्रिकी
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, माननीय
मंत्री महोदय
ने वैसे तो
सारी बातें स्पष्ट
कर दी हैं। माननीय
सदस्य का एक
सवाल तो यह है
कि हैण्डपंप
से पानी पी
रहे हैं और
योजनाएं
बनाकर एडिश्नल
चीफ इंजीनियर
के पास लंबित
हैं तो मैं
आपके माध्यम
से अर्ज करना
चाहता हूं कि
हैण्डपंप भी
पी.एच.ई.डी. की
एक पानी उपलब्ध
कराने की
योजना है जहां
तक फ्लोराइड
का सवाल है आप
कह रहे हैं कि
फ्लोराइड की
वजह,
पी.एंड टी. स्कीम
के ट्युववैल
खुदेगा सोर्स
खुदने के बाद
पता चलेगा कि
उसमें
फ्लोराइड है
कि नहीं है। बाकी
फ्लोरोसिस
योजना हमने
लागू कर रखी
है एट सोर्स
और इंडिविजअल
के यहां पर ट्रीटमेंट
हेतु इन्स्ट्रूमेंट
हम लगाते
हैं।
उस लिमिट में
अगर होगा तो
वो लगेगा औश्र
बाकी है और भी
हमको नीचे
जाने की आवश्यकता
होगी तो
जाएंगे। बाकी यह
जो प्रोसीजर
है जे.इएन.
योजना बनाता
है, वो ए.इएन. के
दफ्तर में आती
है फिर एक्स.इएन.
भेजता है एस.ई.
के पास और
एडिश्नल चीफ
इंजीनियर के
पास तो यह
प्रक्रिया
में कुछ समय
लग गया होगा
बाकी आपके
यहां जो चार
पाँच आपने
योजनाएं बताई
हैं इसमें दो
योजनाएं, हमने
जवाब दिया कि
इस गर्मी में
ट्रांसपोर्टेशन
से हमको पानी
सप्लाई करना
पड़ेगा तो मैं
आपको भरोसा
दिलाता हूं...।
श्री
रामकिशोर
मीणा: वो तो
लगातार चार
साल से पिला रहे
हैं इन गांवों
में टैंकर से
पानी।
श्री
सांवर लाल:
हां, वो ही तो
मैं बता रहा
हूं मैं और क्या
कह रहा हूं। तो
हमारी सरकारी
की प्राथमिकता
यह है कि जहां
पर परिवहन से
पानी उपलब्ध
करवाया जाता
है वहां पर
अगर कोई सोर्स
फिजीबल है तो
वहां पर योजना
बनाकर
प्राथमिकता
से स्वीकृत
करें तो आपके
यहां दो
योजनाएं हम स्वीकृत
कर देंगे फिर
तकदीर की बात
है पानी कैसा
निकलता है क्योंकि
जिस प्रकार
आजकल अण्डरग्राउंड
वाटर के संबंध
में हम सब
चिन्ता कर
रहे हैं जल
अभियान की
शुरूआत कर रहे
हैं तो
योजनाएं
सैंक्शन कर
देंगे सोर्स
अगर फिजीबल
होगा पानी अच्छा
निकल जाएगा तो
बाकी काम काज
आपका करवा
देंगे।
दूसरा जो
जानकारी आप
लाये हैं 6
योजनाएं हैं
और बिजली
कनेक्शन की
वजह से वो
योजनाएं
लंबित हैं, आप
हमारी जानकारी
में लाये हैं
तो मैं
निश्चित रूप
से आपको भरोसा
दिलाता हूं कि
अगर इसमें
कहीं पर भी
सोर्स डवलप
होने के बाद
लापरवाही की
और कनेक्शन
के लिए एप्लाई
नहीं किया तो
उसके खिलाफ
मैं
कार्यवाही करूंगा।
श्री
रामकिशोर
मीणा: अध्यक्ष
महोदय, केवल
एक प्रश्न
जिन हैण्डपंपों
को 1990 से पहले स्वीकृत
किया था और
चालू हैं
लेकिन वो जलस्तर
नीचे चले जाने
की वजह से जो
हैण्डपंप
नाकारा हो गये
हैं उनको
बदलने के बारे
में मंत्री
महोदय कोई ऐसी
स्कीम है क्या?
श्री
सांवर लाल: माननीय
अध्यक्ष
महोदय, माननीय
सदस्य बिना
बदले ही आपके
एरिया में
इतने हैण्डपंप
दे दिये जिनकी
संख्या आप
देखेंगे, पूरी
सूची देखिये
और कहीं जरूरत
होगी तो और दे
देंगे उसमें
कोई दिक्कत
वाली बात नहीं
है।
श्री
अध्यक्ष:
नहीं, माननीय
मंत्री जी, आप
इतना बता दें कि
दो हजार से
अधिक की आबादी
के गांव में
क्या हैण्डपंप
से ही पानी की
व्यवस्था
को आप उपयुक्त
समझते हैं?
श्री
सांवर लाल: माननीय अध्यक्ष
महोदय, हम तो
चाहते हैं कि
बिलकुल शुद्ध और
मीठा पानी
लोगों को मिले
और दो हजार से
अधिक के गांव
पन्द्रह सौ
से अधिक के
गांवों में हम
पी.एंड टी. योजना
लाते हैं और
यह भी एक
प्रोसीजर
माननीय अध्यक्ष
महोदय, पूरे
राजस्थान
में एक साथ तो
सारी हैण्डपंप
योजनाएं पी.एंड
टी. में
परिवर्तित
करना मेरे ख्याल
से संभव नहीं
है धीरे-धीरे
हम इस और बढ़
रहे हैं । कई
योजनाएं हमने
दो साल में
परिवर्तित की
हैं और भी
हमारे पास
प्रस्ताव आएंगे
उन पर विचार
करके करेंगे।
श्री
अध्यक्ष: हैण्डपंप
में तो पानी
है फिर कुए
में क्यों
नहीं है पानी? श्री
रघुवीरसिंह
मीणा। नैक्स्ट।
श्री
महादेव सिंह
(खण्डेला): माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मेरा
एक छोटा सा
प्रश्न है...।
श्री
अध्यक्ष: प्रश्नकर्ता
संतुष्ट है
प्रश्न
सिकराय के
बारे में था। आप स्थान
ग्रहण कर
लें।
श्री
रघुवीरसिंह मीणा।
श्री
नंदलाल
बंशीवाल
(दौसा): आपने एक
भी सप्लीमेंट्री
पूछने की
इजाजत नहीं दी
अध्यक्ष
महोदय।
श्री
भंवरलाल
शर्मा
(सरदारशहर): आप
संतुष्ट हैं
क्या? प्रश्नकर्ता
तो संतुष्ट
है, आप संतुष्ट
हैं क्या इस
जवाब से?
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): जब आपने
पूछ लिया संतुष्ट
होने के बाद
तो इनको भी
पूछ लेने दें।
श्री
नंदलाल
बंशीवाल:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
निवेदन कर रहा
था कि सप्लीमेंट्री
तो पूछ लेने
दीजिये ।
श्री
अध्यक्ष:
सिकराय का
प्रश्न है
दौसा का थोड़े
ही है। कोई
दौसा का प्रश्न
थोड़े ही है।
श्री
नंदलाल बंशीवाल:
सिकराय में
पंचायत समिति
दौसा का जिक्र
आया है।
पंचायत समिति
दौसा का आया
है माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से पूछना
चाहता हूं कि
सिकराय से आने
वाले माननीय
विधायक ने...।
श्री
अध्यक्ष:
मैंने नैक्स्ट
पुकार लिया
प्रश्न। मैंने
अगला प्रश्न पुकार
लिया ।
श्री
नंदलाल
बंशीवाल: कोई बात
नहीं अध्यक्ष
महोदय।
श्री
महादेव सिंह:
माननीय अध्यक्ष
महोदय ...।
श्री
अध्यक्ष: मैंने
अगला प्रश्न
पुकार लिया।
श्री
महादेव सिह: उन को
कैसे अलाऊ
किया आपने?
श्री
अध्यक्ष: मैंने उन
को भी अलाऊ
नहीं किया। कहां
किया मैंने
अलाऊ?
श्री
महादेव सिंह:
आपने अलाऊ
किया है और आप
संतुष्ट
होने के बाद
आपने खुद ने
भी सवाल..।
श्री
अध्यक्ष:
नो-नो, श्री
रघुवीरसिंह
मीणा।
श्री
महादेव सिंह:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मेरा
निवेदन है कि
ढाई इंच के
हैण्डपंप थे उन
को सवा इंच
में बदलने की
मंशा रखते हैं
क्या?
श्री
अध्यक्ष:
आपको अनुमति
नहीं है अब आप
स्थान ग्रहण
करें। कृपया
स्थान ग्रहण
करें।
श्री
नंदलाल
बंशीवाल: अध्यक्षजी
ने मुझे ही
बैठा दिया
आपको क्या
मुझे ही बैठा
दिया।
उदयपुर
संभाग में
ठेकेदारों को आवंटित
कार्यों का उप
ठेका
105. श्री
रघुवीरसिंह
मीणा (सराड़ा):
क्या
सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री यह
बताने की कृपा
करेंगे:-
क्या
यह सही है कि
प्रथम श्रेणी
के ठेकेदार
कार्य अपने
नाम आबंटन के
बाद अन्य
छोटे
ठेकेदारों को
दे देते हैं? यदि हां,
तो उदयपुर
संभाग में
कौन-कौन से
ऐसे ठेकेदार
हैं, जिन्होंने
कार्य अन्य
लोगों को दे
रखे हैं?
नाम सहित
सूची सदन की
मेज पर रखें।
सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री (श्री
राजेन्द्र
राठौड़):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, जी
नहीं, ऐसा कोई
प्रकरण विभाग
में नहीं है।
श्री
रघुवीरसिंह
मीणा: वाह
मंत्री जी,
वाह जोरदार
जवाब दिया है।
पूरे प्रश्न
का जवाब पाँच
सेकिंड में। माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मेरा आपके
माध्यम से
मंत्री जी से
सवाल है और इस
बात को पूरा
सदन जानता है
कि बड़े
ठेकेदारों को
ठेका देने के
बाद वो छोटे
ठेकेदारों को सबलेट
करता है यह सब
जानते हैं
परन्तु
मंत्री जी
आपसे यह उम्मीद
तो नहीं थी
इतना छोटा
जवाब देंगे।
फिर भी मैं
पूछना
चाहूंगा कि
आपने यह पैकेज
बनाकर बड़े
ठेकेदार ए क्लास, डबल ए क्लास
ठेकेदारों को
ठेका देने की
जो नीति बनाई
है इसके पीछे
आपकी मंशा क्या
थी और क्या
आपकी मंशा
पूरी हुई? दूसरा
क्या यह सही
है कि
पी.एम.जी.एस.वाई.
में कोई भी
रोड 1 से 5 किलोमीटर
के बीच में ही
होती है और
उसकी कोस्ट 50
से 1 करोड़ के
बीच में ही
आती है? बी क्लास,
सी क्लास, डी
क्लास
ठेकेदार होते
हैं वो अगर यह
नीति हो तो वो ठेका
ले सकते हैं? आपने
पूरे गांव का
मिलाकर जो
पैकेज बना
बदया वो
करोड़ों का
बनता है बड़े
ठेकेदार उसमें
हिस्सा ले
सकते हैं छोटे
ठेकेदार
उसमें हिस्सा
नहीं ले सकते
चूंकि यह
मामला
शिक्षित बेरोजगारों
से भी जुड़ा
हुआ है, डिप्लोमा
डिग्री करने
के बाद लोग
रजिस्ट्रेशन
कराते हैं
अपना काम करते
हैं।
श्री
अध्यक्ष: आप
प्रश्न
पूछें न भाषण
क्यों दे रहे
हैं?
श्री
रघुवीरसिंह
मीणा: अध्यक्ष
महोदय, पूछने
तो दें।
तो क्या
सरकार कि इस
बारे में क्या
मंशा है ? -1
दूसरा क्या
बड़े ठेकेदार
30 प्रतिशत 40
प्रतिशत रेट
काट कर छोटे
ठेकेदारों को
टेण्डर देते
हैं? यह जवाब
दें।
टेण्डर
नहीं सब्लेट
करते हैं।
श्री
अध्यक्ष:
जवाब आने
दीजिये।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: यह
सही है जब से
सरकार ने यह
फैसला
किया जो भी
सड़कों का
निर्माण
राजस्थान
में हो वो
सारी सड़कें
पेवर मशीन और
प्लांट से
बनायी जाए
चूंकि इस पेवर
मशीन और प्लांट
लगाने की
क्षमता के लिए
एक डेढ़ करोड़
उसको खर्च
करना पड़ता है
इसलिए इसमें
जो छोटे
ठेकेदार हैं
वो कम इसमें
भाग लेते हैं
परन्तु यह
नहीं कि छोटे
ठेकेदारों को
इसमें काम
नहीं मिलता । भवन
निर्माण का
काम एक वर्ष
में लगभग दो
सौ करोड़
रुपये का होता
है उसमें छोटे
ठेकेदारों सी
और डी श्रेणी
के भाग लते
हैं और सड़कों
की मरम्मत का
काम ये भी
लगभग 60-70 करोड़
का होता है इस
तरह कुल
मिलाकर पी.डब्ल्यू.डी.
में लगभग
साढ़े चार
पाँच सौं
करोड़ का ऐसा
काम निकलता है
जिसमें सी और
डी श्रेणी के
ठेकेदार भी
भाग ले सकते
हैं। आपने यह
कहा कि
प्रधानमंत्री
सड़क योजना का
बड़ा पैकेज
बनाया, माननीय
अध्यक्ष
महोदय, प्रधानमंत्री
सड़क योजना के
लिए पूरे हिन्दुस्तान
में एक नीति
बनी हुई है एक
डाक्युमेंट
है उस डाक्युमेंट
के आधार पर हम
निविदाएं
आमंत्रित
करते हैं
उसमें स्पष्ट
लिखा हुआ है
कि इसमें बड़ा
पैकेज बनाकर
और कोशिश यह
की जाए कि काम
की गुणवत्ता
बनी रहे इसके
अलावा माननीय
अध्यक्ष
महोदय, जो भी
काम अब दे रहे
हैं वो सारा
काम डिफेक्ट
लायबिलिटी भी
है यानी पाँच
वर्ष तक उसी
ठेकेदार को उस
सड़क को उसी
तरह से रखना
पड़ेगा जिस
तरह से वो
निर्माण करते
हैं तो छोटे
ठेकेदार अगर
छोटे-छोटे
टुकड़ों में
काम लेंगे तो डिफेक्ट
लायबिलिटी
में काफी दिक्कत
आती है ।
मैं फिर भी
आश्वस्त
करना चाहता
हूं कि कोई
ऐसी बात हो कि
ऐसी बात हो,
सबलेटिंग का
प्राविजन
हमारे जो जनरल
एग्रीमेंट
राजस्थान
पब्लिक वर्क्स
अकाउंट-1000 है
उसमें है परन्तु
इसके लिए
परमीशन लेनी
पड़ती है चाहे
नेशनल हाइवे
का काम हो
चाहे दूसरा
काम हो चीफ
इंजीनियर से
परमीशन लेकर
पी.एम.जी.एस.वाई.
में भी 25 प्रतिशत
पूरा काम काम
चीफ इंजीनियर
से परमीशन लेकर
सबलेट किया जा
सकता है। यह
प्राविजन है
और उस डाक्युमेंट
में जिसके
आधार पर हम
निविदांए
करते हैं
उसमें लिखा
हुआ है ।
तो सरकार की
यह मंशा नहीं
है कि बड़े ठेकेदार
पहले काम ले
लें उसको फिर
छोटे ठेकेदार कर
दें।
आपने जिस
संभाग के लिए
पूछा है मैंने
उस संभाग में
सारे एक्स.इएन्स
से एक
सर्टीफिकेट
मंगवाया है कि
आपकी जानकारी
के अनुसार कौन-कौन
सी निविदाएं
आमंत्रित की
गईं और किस-किस
ठेकेदार ने
सबलेट किया? मेरे
पास जो सूचना
आयी है उसमें
एक भी ठेकेदार
ने उसको काम
आबंटित हुआ है
उसको सबलेट
नहीं किया है।
श्री
रघुवीरसिंह
मीणा: माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं
सिर्फ एक
उदाहरण दूंगा
मंत्री जी आप
जांच करा
लें।
एन.जी. कंस्ट्रक्शन
कंपनी ने पूरी
कोटड़ा तहसील
का ठेका लिया
पेवर रोड का । क्या
यह सही है कि
उसने लाभ कंस्ट्रक्शन
को सबलेट किया
और लाभ कंस्ट्रक्शन
ने तीसरे
ठेकेदार से
गाडि़यां
वगैरह हायर की
डम्पर वगैरह
कृष्णा
ट्रांसपोर्ट
कंपनी, उदयपुर
से गाडि़यां
हायर की और
डम्पर हायर
किये और उसने
उनको पैसा
नहीं दिया और चैक
दिया और चैक
बाउंस हुआ और
क्या आपकी
जानकारी में
है कि उनके
खिलाफ मुकदमा
दर्ज है
उदयपुर में ?
यदि हां, तो
आपने यह कह
दिया कि
उदयपुर संभाग
में कहीं
सबलेट नहीं
किया, क्या
एन.जी. कंस्ट्रक्शन
कंपनी ने
कोटड़ा में यह
काम सबलेट
किया, हां या
नहीं?
kas\usc\1130\1d
श्री राजेन्द्र
राठोड: अध्यक्ष
महोदय, जो
हमारा स्टेण्डर्ड
बिडिंग डाक्युमेंट
है उसके क्लाज
7(2) में यह साफ
लिखा है कि
मैटेरियल सप्लाई
का अगर कोई
काम करता है
तो वह सबलेट
की परिभाषा
में नहीं आता
। कोई लेबर सप्लाई
करता है वह
सबलेट की
परिभाषा में
नहीं आता ।
आपने जिस कंस्ट्रक्शन
कम्पनी का
हवाला देकर
सवाल खड़ा
किया है मेरे
पास जो
जानकारी है उस
जानकारी के
अनुसार किसी
तरह का सबलेट
उन्होंने
नहीं किया है,
सबकांट्रेक्ट
का काम नहीं
किया है ।
उसके बाद भी
आप कह रहे हैं
कि इस तरह के
मामले को लेकर
वाद विवाद
इतने बढे कि
न्यायालय
में चले गये
तो मैं पूरी
जानकारी लेकर जो
सूचना मेरे
पास आई है
उदयपुर पूरे
संभाग में कोई
भी सबलेटिंग
और सब
कांट्रेक्ट
का काम नहीं
हुआ है उसके
पश्चात भी
हुआ है तो मैं
निश्चित तौर
पर पूरी जानकारी
लेकर कार्यवाही
भी करूंगा ।
अध्यक्ष
महोदय, यह आपस
में तो काम
करते ही रहते
हैं परन्तु
किसी का
पेमेंट रुक
गया, किसने
लेबर सप्लाई
की, किसने
मैटेरियल सप्लाई
किया, किस ने
डम्पर सप्लाई
किया इसलिए
मैं समझता हूं
पूरी चीज की
जानकारी लेकर
यहां पर कोई
बात करें ।
श्री
अध्यक्ष:
श्री
सी.पी.जोशी,
मैंने सी.पी.
जोशी का नाम पुकार
लिया है उसके
बाद आप पूछना
।
डा.सी.पी.जोशी:माननीय
मंत्रि जी ने
जो बात कही है वह
कानून की बात
कही है । जो
प्रेक्टिस है,
जो पेवर रोड
की जो कैपेसिटी
है उस
कैपेसिटी के
अनुसार
कांट्रेक्टर
व्यवस्था
कर ले तो
सबलेटिंग
नहीं होगी ।
उसकी पेवर की
जितनी
कैपेसिटी
नहीं है उससे
ज्यादा वह
काम ले लेता
है और फिर सबलेट
करता है । यह
जो
सबल्रेटिंग
की प्रेक्टिस
है इसको रोकने
के लिये आप क्या
कार्यवाही कर
रहे हैं ।
श्री
राजेन्द्र
राठौड: अध्यक्ष
महोदय, खुली
निविदाएं
आमंत्रित की
जाती हैं ।
खुली
निविदाओं में
डबल ए, ए और बी
श्रेणी के
ठेकेदार भाग
लेते हैं । वह
अपना काम अपने
आप लेते हैं
उसके बाद अगर
वह सबलेट करना
चाहे तो भी
परमिशन लेकर
कर सकते हैं
हमारे नियमों
में प्रावधान
है । उसके पश्चात
भी अगर इस तरह
की कोई बात
होती है तो
उसको कैसे
रोका जा सकता
है ।
डा.सी.पी.जोशी:
पेवर कंडीशन
डाल दी इसलिए
इश्यू यह
नहीं है ।
छोटे
कांट्रेक्टर
के पास पेवर
मशीन नहीं है
इसलिए वह काम
नहीं ले रहा
है । आपने
प्रि कंडीशन
डाल दी कि
जिसके पास
पेवर होगी वही
कांट्रेक्ट
ले सकेगा
इसलिए आपने क्लब
बना रखा है
इसलिए इस
प्रेक्टिस को
रोकने के लिये
क्योंकि वह
आदमी इस कंडीशन
में ठेके ले
लेता है और
फिर सबलेट
करता है उन लोगों
को जिनके पास
पेवर नहीं है
। यह जो आपकी प्रेक्टिस
सी और डी लेवल
के जो
कांट्रेक्टर
है वह बिड में
पार्टिसिपेंट
तो नहीं कर
सकता लेकिन वह
आदमी पेवर
मशीन के नाम
से कांट्रेक्ट
ले लेता है और
काम उन्हीं
से करवाता है
। यह जो
प्रेक्टिस चल
रही है उस
प्रेक्टिस को
रोकने के लिये
जिससे आपकी गुणवत्ता
भी बनी रहे और
प्रेक्टिस भी
रुके इसके
लिये क्या
कार्यवाही कर
रहे हैं ।
श्री
अध्यक्ष: इस
प्रेक्टिस
में कोई
नुकसान होता
है क्या ।
डा.सी.पी.जोशी:
अध्यक्ष
महोदय , इससे
नुकसान यह हो
रहा है (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: एक
समय में एक ही
बोले ।
डा.सी.पी.जोशी:
अध्यक्ष
महोदय, इसमें
नुकसान यह हो
रहा है जो
पहला
कांट्रेंक्टर
अपने हिसाब से
बिड करता है
सबलेट करने
वाले से कमीशन
ले लेता है, वह
तीसरे आदमी से
कमीशन करता है
। मान लो एक
लाख रुपये की
रोड है तो 30
हजार तो कट ही
हो जाते हैं
एक, दो और तीन
सबलेट करने में
तो एक्चुअल
जो काम एक लाख
रुपये का होना
चाहिये वह काम
70 हजार रुपये
का ही हो रहा
है । इसलिए
इसको रोकने के
लिये, मैं यह
नहीं कमह रहा
आपने क्वालिटी
मेनटेन की है,
अच्छा काम हो
रहा है यह मैं
मना नहीं कर
रहा लेकिन सी
और डी के
कैटेगिरी के
आदमी इस
प्रेक्टिस में
इन्वाल्व
होकर आपकी क्वालिटी
से कम्प्रोमाइज
कर रहे हैं और
आप की यह
प्रेक्टिस
जारी है इसलिए
इसको रोकने के
लिये सरकार को
कोई न कोई ऐसी व्यवस्था
करनी चाहिये
जिससे आपकी क्वालिटी
भी मेनटेन
रहे, सी और डी
कैटेगिरी के लोगों
को भी काम मिल
सके और यह जो
सबलेट करके कांट्रेक्ट
में डाइरेक्ट
पैसा ले रहे
हैं, अध्यक्ष
महोदय, यह मैं
इसलिए कहना
चाहता हूं
कार्टेल
बनाकर एक आदमी
पूरी रोड का
ठेका ले लेता
है । मान लो 50
करोड का ठेका
ले लिया और 50
करोड में 5-5 आदमी
को ठेका दे
देता है वह
आदमी उनसे घर
बैठे पैसा
लेता है । इस
प्रेक्टिस को
रोकने के लिये
आप निश्चित
तौर पर कुछ
कार्यवाही
करें यह आपसे
निवेदन करना
चाहता हूं ।
श्री
अध्यक्ष:
श्री
नाथूसिंह जी ।
डा.एन.एस.गुर्जर:
अध्यक्ष
महोदय, माननीय
मंत्रि जी से
यह जानना चाहूंगा
क्योंकि यह
इनके शासन में
भी और हमारे
शासन में भी
यह प्रेक्टिस
जारी है तो यह
कोई एक सरकार
का सवाल नहीं
है । क्या यह
सही है कि आप
जिस प्रोविजन
का हवाला दे रहे
हैं कि सबलेट
कर सकता है वह केवल
कांट्रेक्टर
ही कांट्रेक्टर
को तो सबलेट
कर सकता है
लेकिन जो
रजिस्टर्ड
कांट्रेक्टर
नहीं है उनको
वह सबलेट नहीं
कर सकता । जिस
नियम का आपने
हवाला दिया है
वह केवल एक काट्रेक्टर
दूसरे
कांट्रेक्टर
को सबलेट कर
सकता है और वह
इसलिए कर सकता
है इन्होंने
प्रोविजन
इसलिए रखा है
कि टुकडों में
जल्दी बन
जाये या कहीं
छोटा काम है,
बड़ा काम है
उसके पास इतने
साधन नहीं है
इसलिए इन्होंने
यह व्यवस्था
की थी ।
मंत्रि जी मैं
आपसे यह जानना
चाहूंगा यह एक
संभाग का सवाल
नहीं है पूरे
राजस्थान
में ही इस बात
की जांच कराइए
कि क्या इन
बडे
ठेकेदारों ने
ए, बी और डबल ए
क्लास यह
इसलिए किया है
कि सड़क की क्वालिटी
मेनटेन रहे ।
अभी आपने ही
सवाल किया था
इससे नुकसान
क्या है ।
अध्यक्ष
महोदय, घटिया
सामग्री का
इस्तेमाल
होता है । वह
सड़क दो महीने
बाद ही टूट जाती
है उसके बाद
पेचवर्क चलते
रहते हैं ।
श्री
अध्यक्ष: आप
प्रश्न पूछ
रहे हैं या
जवाब दे रहे
हैं ।
डा.एन.एस.गुर्जर:
नहीं मैं जवाब
नहीं दे रहा,
आपने स्वयं
पूछा है कि
इससे क्या
नुकसान होगा ।
पाँच साल तक
केवल उसके
पेचवर्क होते
रहते हैं, 6-6 महीने
तक गड्ढे पडे
रहते हैं और
उसके बाद डिपार्टमेंट
जोर डालता है
तो फिर
पेचवर्क कर देते
हैं । मैं
आपसे यह जानना
चाहूंगा कि क्या
आप राजस्थान
में जांच
करायेंगे कि
कितने
ठेकेदारों ने
जो ठेकेदार
नहीं हैं उसको
सबलेट किया है
। नंबर दो,
आपके जो
अधिकारी इस
करोबार में
शामिल हैं.....
श्री
अध्यक्ष: आप
जवाब दे रहे
हैं या पूछ
रहे
डा.एन.एस.गुर्जर:
मैं पूछ ही
रहा हूं क्या
आपके अधिकारी
जो इस कारोबार
में शामिल हैं
जिन्होंने
खुद के
ठेकेदार
पाटनरशिप में
खडे कर रखें
हैं और वह लोग
आपको गलत
सूचना देंगे
क्या किसी
तीसरी ऐजेंसी
से जांच करा
कर जो कमीशन
खाकर गलत
रिपोर्ट देते
हैं आप यह
जांच करा कर उनके
विरुद्ध
कार्यवाही
करेंगे । यह
इनके समय में
भी प्रेक्टिस
थी, आज भी है ।
जितनी भी इंजीनियरिंग
सेवाएं हैं
उनमें कमीशन
चलता है यह इनको
भी मालूम है
और हमको भी
मालूम है इसको
रोकने के लिये
क्या व्यवस्था
करेंगे ।
श्री
कैलाश
त्रिवेदी :
...यही तो
प्रक्रिया है
कि एक ठेकेदार
से इकट्ठा
कमीशन ले लो
और मजे करो
बाकी तो 10 जगह
से कमीशन लेते
हैं 10 जगह
बदनाम होंगे ।
श्री
अध्यक्ष:
माननीय
मंत्रि जी ।
श्री
राजेन्द्र
राठौड: अध्यक्ष
महोदय, आपने
स्वयं ने
देखा होगा कि
इन वर्षों में
सड़क की क्वालिटी
पहले से बेहतर
इसलिए है कि
पेवर प्लांट
से सड़क का
निर्माण होता
है । इसके
अलावा यह बात
उठी कि वहां
खड्डे हो जाते
हैं सड़क टूट
जाती है जब
पाँच साल जो
ठेकेदार
बनाता है उसके
जिम्में
रहती है सड़क
और उसके बाद
डिफेक्ट
लायबिलिटी
में हम हर
वर्ष हमारा
एक्स ईएन को
उसको प्रमाण
पत्र देना
पडता है कि अमुक
सड़क जिस तरह
की बनी थी वह
उसी तरह की
सड़क है ।
वरना हम उसके
खिलाफ
कार्यवाही
करते हैं । इसलिए
यह कहना गलत
है कि वहां खड्डे
छोड देते हैं
। तीसरा अध्यक्ष
महोदय, जिसको
कांट्रेक्ट
कहते हैं
इसमें
लेबर,मैटेरियल
और ट्रांसपोर्टेशन
यह तीनो इस
परिभाषा में
ही नहीं आते । इसके
अलावा आपने एक
बात सही कही
कि छोटे ठेकेदार
इस प्रतिस्पर्द्धा
से बाहर चले
जाते हैं । हम
कोशिश करेंगे
कि सी और डी
श्रेणी के
ठेकेदार यह ज्वाइंट
वेंचर करके
अगर 4-5 ठेकेदार
मिलकर भी कोई ठेका
लेना चाहेंगे,
उनकी
कैपेसिटी में
क्योंकि 15 लाख तो
डी श्रेणी की
है और 50 लाख तक
का काम सी
श्रेणी का
ठेकेदार ले
सकता है । अब सी
श्रेणी के 3-4
ठेकेदार
मिलकर उस
कैपेसिटी में
ज्वाइंट
वेंचर करके
आयेंगे तो मैं
आपके माध्यम
से आश्वासन
देना चाहूंगा
कि हम उन
लोगों को
प्रोत्साहित
करेंगे ।
हमारी खुद की
मंशा है कि इस
पूरे निर्माण
के माध्यम से
लोगों को काम
मिले और
गुणवत्ता का
काम हो ।
श्री
सुरेश मीणा :
अध्यक्ष
महोदय, मैं
मंत्रि महोदय
से पूछना
चाहूंगा कि एक
महीने में जो
रोड बनी है आज
वह रोड खुदकर
दूर पडी है
उसमें कौनसा मैटेरियल
लगा हुआ
हैउसके बारे
में हमको
बताये ।
श्री
अध्यक्ष : यह
तो आप अलग से
प्रश्न पूछ
रहे हैं ।
डा.एन.एस.गुर्जर:
अध्यक्ष
महोदय, मेरे
सवाल का जवाब
नहीं आया कि
एक कांट्रेक्टर
कांट्रेक्टर
को ठेका दे
सकता है,
सबलेट कर सकता
है ..
श्री
अध्यक्ष : आपका तो
दिया ही था ।
डा.एन.एस.गुर्जर:
नहीं एक
कांट्रेक्टर
दूसरे
कांट्रेक्टर
को सबलेट कर
सकता है लेकिन
जो रजिस्टर्ड
कांट्रेक्टर
ही नहीं है
उसको सबलेट
करने का
प्रावधान है
क्या और क्या
राजस्थान
में उनको ऐसे
सबलेट नहीं
किया गया, क्या
आप इसकी जांच
करायेंगे ,
इसका जवाब
कहां आया ।
श्री
राजेन्द्र
राठौड: अध्यक्ष
महोदय, कई तरह
के ऐसे काम
हैं जो बिना
रजिस्टर्ड
कांट्रेक्टर
से भी करवा
सकते हैं जैसे
लेबर सप्लाई
है, मैटेरियल
सप्लाई है,
ट्रांसपोर्टेशन
का काम है ।
अध्यक्ष
महोदय, मैं एक
आश्वासन
जरूर देना
चाहूंगा कि
अगर कोई ऐसी
सड़क जो
डिफेक्ट
लायबिलिटी
में है और
उसमें उसके
पीरियड से पहले
उस सड़क में
खड्डे पड गये
हैं तो माननीय
सदस्य मुझे
लिखकर देंगे
तो मैं यहां
से एक क्वालिटी
कंट्रोल की एक
स्पेशन टीमक
बनाकर
भेजूंगा और
उसको ठीक भी
करायेंगे और
उस ठेकेदार पर
पैनेल्टी भी
लगायेंगे ।
श्री
अध्यक्ष : नेक्स्ट
क्वेश्चन ।
श्री
जीतमल खांट :
अध्यक्ष
महोदय, एक एक
जिले के 5-5 ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
नेक्सट क्वेश्चन
श्री ओ पी
महेन्द्रा
का स्थगित
किया जाता है
क्योंकि आज
यह पुनर्वास
को स्थानान्तरित
कर दिया गया ।
विधान
सभा क्षेत्र
केसरीसिंहपुर
की कस्टोडियन
भूमि का
नियमितीकरण
106.श्री
ओ.पी.महेन्द्रा(केसरीसिंहपुर):
क्या राजस्व
मंत्रि यह
बताने की कृपा
करेंगे:-(1) राष्ट्रपति,
भारत सरकार की
भूमि से
संबंधित
प्रकरण
पुनर्वास
विभाग, जिसमें
डी पी एक्ट
समाप्त कर
नया एक्ट
लागू करने पर
विचार किया जा
रहा है, को
सरकार राज्य
में कब से लागू
किये जाने का
विचार रखती है
।
(2)
श्री गंगानगर
जिले में व
विधान सभा
क्षेत्र केसरीसिंहपुर
में उक्त
भूमि के कितने
प्रकरण ऐसे
हैं, जो गैर
खातेदार हैं ।
सूची सदन की
मेज पर रखें ।
(3)
क्या ऐसे
प्रकरणों में
राज्य सरकार
सनदें जारी
करने का विचार
रखती है ? यदि
हाँ, तो कब तक व
नहीं, तो क्यों
?
(4)
क्या ऐसे
गैरखातेदार
जिहोंने भूमि
का बेचान कर
दिया है, को
राज्य सरकार
शास्ति
(जुर्माना)
लगाकर नियमित
करने का विचार
रखती है ? यदि
हां तो समस्त
प्रकरणों से
राज्य सरकार
को मितना
राजस्व
अपेक्षित है व
नहीं, तो क्यों
?
श्री
अध्यक्ष: नेक्सट
क्वेश्चन
श्री ओ पी
महेन्द्रा
का स्थगित
किया जाता है
क्योंकि आज
यह पुनर्वास
को स्थानान्तरित
कर दिया गया ।
श्री रामचन्द्र
सराधना
राज्य
की रुग्ण्औद्योगिक
इकाइयों का
पुनरुद्धार
107. श्री
रामचन्द्र
(जमवारामगढ):
क्या उद्योग मंत्री
यह बताने की
कृपा करेंगे:-
(1)
क्या यह सही
है कि सरकार
द्वारा वर्ष 2004-05
में रुग्ण
औद्योगिक
इकाइयों के
पुनरुद्धार
के लिए कोई
योजना घोषित
की गई थी ? यदि
हां, तो योजना
का विवरण सदन
की मेज पर
रखें ।
(2)
उक्त योजना
की घोषणा के
बाद राज्य
में इस प्रकार
की कितनी रुग्ण
औद्योगिक
इकाइयां
चिह्नित की गई
और उनमें से
किमतनी
इकाइयों को कितनी
कितनी राशि की
किस प्रकार की
सहायता प्रदान
कर
पुनरुद्धार
किया गया ? विवरण
सदन की मेज पर
रखें ।(3) उक्त
योजना के लागू
होने के बाद
राज्य में
कितनी रुग्ण
औद्योगिक
इकाइयां कहां
कहां
पुनर्जीवित हुई
? विवरण सदन की
मेज पर रखें ।
श्री
नरपत सिंह
राजवी(उद्योग
मंत्रि) : (1) जी
हां । योजना
का विवरण
परिशिष्ठ 1
पर संलग्न है
।
(2)
राजस्थान
विनिवेश
योजना के
प्रावधानों
के अनुसार राज्य
में कुल 1023 रुग्ण
इकाइयां
चिह्नित की गई
हैं । इनमें
से 12 इकाइयों
को योजना के
अंतर्गत
लाभान्वित
किया गया है 4
इकाइयों को ब्याज
अनुदान एवं
विद्युत शुल्क
में छूट का
लाभ दिया गया
है तथा शेष 8
इकाइयों को
केवल विद्युत
शुल्क में
छूट का लाभ
दिया गया है ।
(3)
उक्त योजना
के अंतर्गत
लाभांवित 12
इकाइयों की सूची
परिशिष्ट 2
पर संलग्न है
।
श्री
रामचन्द्र:
अध्यक्ष
महोदय, प्रश्न
के भाग संख्या
2 में मंत्रि
जी का जवाब है 1023
रुग्ण
इकाइयों को
चिह्नित किया
गया और केवल
मात्र 12 रुग्ण
इकाइयों को
लाभान्वित
किया गया इसके
क्या कारण है
..
ans\usc\1140\9.3.2006\1e\1
श्री
रामचन्द्र
सराधना...जारी:
क्या आपने जो
रूग्ण इकायों
को पुनर्जीवित
करने के लिए
उनका उद्धार
करने के लिए
जो योजना बनाई
थी क्या वह
शर्तें
इसमें कठिनाई
का कारण बन
रही है और उन्हें
सुधारना
चाहते हैं ? दूसरा
इसमें मैंने
पूछा था कि इन
इकाइयों को
कितनी-कितनी
राशि, किस-किस
प्रकार की
सहायता दी गई,
वह इसमें जवाब
नहीं आया?
तीसरा मेरा
प्रश्न है कि
इन औद्योगिक
इकाइयों को
पुर्नउद्धार करने
के लिए आपने
जो प्रावधान
रखा था इस
वर्ष में, कुल
कितना
प्रावधान था
और उसमें
कितना खर्चा
हुआ ?
श्री
नरपतसिंह
राजवी: अध्यक्ष
महोदय, 2004-5 के
बजट भाषण में माननीय
मुख्यमंत्री
जी ने जिन-जिन
बातों का उल्लेख
किया है उसी
के आधार पर
रिप्स योजना
2003, राजस्थान
राजस्व
विनियोजन
प्रोत्साहन
योजना 2003 में
खंड 5 ए को
अमेंड करके उन
शर्तों को
वापिस वहां पर
रखा, अभी यह
वालेंटरी है।
रिजर्व बैंक
आफ इण्डिया ने
38 हजार रूग्ण
इकाइयां मानी,
अब वह एप्लाई
ही नहीं
करेंगे तो
उसका लाभ कैसे
मिलेगा औरे अभी
तक तो
लाभान्वित और
कार्य आरम्भ
करने का 31.3 तक का
टाइम दिया है।
31.3 को जो 10 लाख
रूपये या 5 लाख
रूपये
विनियोजन कर
लेगा वह लाभ
का हकदार
होगा, अब शर्त
पूरी करना तो
आवश्यक है क्योंकि
आइबीआई की
गाइड लइन के आधार
पर 50 प्रतिशत
नेट रोजन हो,
नेटवर्क का,
तो कम से कम वह
उसका पात्र
होगा। छोटी
इकाइयां बीआईएफआर
और उनमें तो
जाती नहीं है
लेकिन
बीआईएफआर की भी उसके
अंदर रखी हुई
है। विद्युत शुल्क
में इन्टरेस्ट
और पेनल्टी
वेव करना इन्सालमेंट
में देना इन
सब बातों का, पात्रता
तो
कंडीशन
प्रेसीडेंट
जो फुलफिल
करेगा तो
कंडीशन सब्सीक्यूंट
में राज्य
सरकार उसको
देगी।
श्री
अध्यक्ष: हां
फरमाइये
प्रद्युम्नसिंह
जी1
श्री
प्रद्युम्न
सिंह(राजाखेड़ा):
माननीय
मंत्री महोदय,
क्या यह
बताने की कृपा
करेंगे कि
आपने 1123 नम्बर
बताया, क्या
यह वह इकाइयां
है जिनका कि
रीको या
आरएफसी के
द्वारा
फाइनेंस किया
गया, पहला
सवाल। इसके अलावा
जिनको कि रीको
और आरएफसी के
द्वारा फाइनेंस
नहीं किया गया
ऐसी कितनी
इकाइयां हैं
राजस्थान के
अंदर बंदी
पड़ी हुई
है,उनकी सरकार
की कोई रिवाइव
करने की योजना
है तो बताने
की कृपा करें।
मैं इसलिए पूछ
रहा हूं कि
आपने पिछले आम
चुनाव
में बडे़ जोर
शोर से
होर्डिग्स
लगाये थे कि
राजस्थान की
हजारों
इकाइयां रूग्ण
इकाइयां होकर
सरकार द्वारा,
पिछली सरकार
के कार्यकाल
में बंद हो गई,
लाखों लोग
बेरोजगार हो
गए, बेरोजगारी
बढ़ी है, यह
डिस्टिकंशन
जो मैं पूछ
रहा हूं, आपने
जो कुछ कहा था उसके
सन्दर्भ में
सवाल आपसे पूछ
रहा हूं कि यह
रीको, आरएफसी
वाली है?
दूसरा, कितनी
इकाइयां है,
अगर आपके पास
फीगर्स है
उनके कि कितनी
इकाइयां बंद
हुई है स्माल
सैक्टर के
अंदर, मिडियम
सैक्टर के
अंदर जो कि इन
फाइनेंशियल
इन्स्टीटयूशन
के द्वारा
फाइनेंस नहीं
की गई इनका नम्बर
बताने की कृपा
करें। (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
जवाब आने
दीजिये पहले,
मौका दूंगी
जवाब आ जाने
दीजिये।
श्री
नरपतसिंह
राजवी: 2004-5 में 679
रूग्ण
इकाइयों के
आवेदन प्राप्त
हुये थे। (व्यधान)
मुर्गा इतना
बड़ा था, तो
इतना होता
नहीं है नीचे
वाला हाथ तो
देने
दीजिये। उनमें
से 389 इकाइयों
का विधिवत रूप
से रूग्ण
चिह्नित
किया। इस अवधि
में रीको,
आरएफसी, केन्द्रीय
वित्तीय
संस्थाओं
द्वारा
अधिग्रहित व
नये प्रबंधन
को बेची गई
अथवा मूल
प्रबंधन को लौटाई
गई 365 ओद्योगिक
इकाइयों को जारी
मार्गदर्शिकस
के अनुसार स्वत:
रूग्ण मान
लिया, इसलिए 2004-5
में 754 रूग्ण
इकाइयां
चिह्नित की
गई।
इसी प्रकार 5-6 में
263 इकाइयों को
स्वत: रूग्ण
माना क्योंकि
आरएफसी और
रीको या
सेंट्रल
फाइनेंस इन्स्टीटयूट
द्वारा वह कब्जे
में ले ली गई
थी और 6
इकाइयां ऐसी
थी जिन्होंने
अप्लाई किया,
इस हिसाब से 1023
इसमें क्वालिफाई
करते हैं।
शर्ते वास्तव
में सख्त है।
आप इण्डस्ट्रीयल
मिनिस्टर
रहे हुये हैं
ऐसी शर्तों
में छोटे
उद्योग जो
टाइनी और स्माल
के अति लघु
लघु, उनके
लाभान्वित
होने के चांस
कम रहते हैं
और दूसरा एक
और कारण बनता
है कोई भी
फाइनेंशियल
इन्स्टीटयूट
एक बार डिफाल्टर
होने के बाद
दुबारा उसका
फाइनेंस नहीं
करेंगा इसलिए
फाइनेंशियल
इन्स्टीटयूट
से जब तक
टाइअप नहीं
बैठेगा तब तक
मू ल रूप से जिनको
लाभान्वित
करने का,लघु
और अति लघु को
लाभान्वित
करने की मंशा
है सरकार की
वह पूरी नहीं
हो पाएगी।
श्री
अध्यक्ष: उन्होंने
एक प्रश्न और
पूछा था कि
ऐसी कितनी
इकाइयां है
जिन्होंने
आरएफसी, रीको
से लोन नहीं
ले रखा और वो रूग्ण
है, उसका जवाब
भी दे दीजिए
आप।
श्री
रामचन्द्र
सराधना: अध्यक्ष
महोदय, मेरा
मूल प्रश्न
था, मैं एक
निवेदन करना
चाहता हूं।
मेरे प्रश्न
का जवाब नहीं
आया, मैं यह
कहना चाह रहा
हूं, सीधी सी
बात है।
माननीय
मंत्री जी से
मैंने
यह निवेदन किया
है कि 1023 रूग्ण
इकाइयों में से 12 आने का क्या
कारण था यह
कठिन
शर्तों को क्या
हटाना चाहते
है एक। दूसरा
मैंने पूछा था
उसमें
आपने जवाब दिया
12 इकाइयों को
हमने
लाभान्वित
किया, 12 इकाइयों
को कितना धन दिया है
और किस किस
क्षेत्र में
दिया है ? तीसरा,
इस वर्ष में
कितना बजट रखा
गया था और
उसमें कुल कितना
खर्च हुआ है ? एक
भी प्रश्न का
जवाब आपने
नहीं दिया।
श्री
मोहनलाल गुप्ता(किशनपोल): अध्यक्ष
महोदय, मेरे
को भी एक
प्रश्न
पूछने की
इजाजत दी थी
आपने। पूछ
सकता हूं? अध्यक्ष
महोदय, जयपुर
मैटल क्या
रूग्ण में
शामिल.....
श्री
रामचन्द्र
सराधना: जयपुर
मैटल तो बाद
में आयेगा
पहले
मेरा तो जवाब
आने दीजिये।
श्री
मोहनलाल गुप्ता:
जयपुर मैटल की
स्थिति बड़ी
खराब है साहब।
हजारों मजदूर
रोजाना धरणा
देते हैं। 35 से
ज्यादा
लोगों की
मौतें हो चुकी
हैं। यह बहुत
ही गम्भीर
प्रश्न है।
आपने प्रश्न
पूछा अच्छा
है, इसका स्वागत
करता हूं और
मैं चाहता हूं
कि आपके प्रश्न
के जवाब में
यदि मंत्री
महोदय यह बता
दे, सदन को आश्वस्त
कर दे कि
जयपुर मैटल को
पुनर्जीवित
करने के लिए
सरकार की क्या
योजना है
ताकि
उन मजदूरों
को सदन आश्वस्त
कर सके कि हां
सरकार कुछ कर
रही है उनके
लिए। काफी तो
आपसे
मिल ही चुके
हैं और माननीय
मुख्यमंत्री
जी से भी मिल
चुके हैं।
श्री
नरपतसिंह
राजवी: अध्यक्ष
महोदय, जहां
तक कितनी राशि
से लाभान्वित करने
का प्रश्न
पूछा, इन्टरेस्ट
सब्सिडी तो
राशि, उतना
पीरियड
निकलने के बाद
कितनी राशि
आयेगी वह अभी 31
मार्च के बाद
गणना होगी। इन
12 इकाइयों को
कितनी इन्टरेस्ट
सब्सिडी दी है
या
इलेक्ट्रिसिटी
डयूटी में 50
प्रतिशत
रिबेट जो सात
वर्ष तक
रहेगा, डिटेल
आपने
इस प्रश्न
में मांगी
होती तो सबकी
डिटेल ले
लेते। 31 मार्च
तक उसकी गणना
होगी वह आपको
निश्चित तौर
पर लिखित रूप
में बता
दूंगा। एक इन्टरेस्ट
सब्सिडी है
एक्चुअल सेज
पर पेयबल है
इसलिए वह
फीगर्स भी है
वह वर्ष के
बाद तक
मिलेगा।
श्री
रामचन्द्र
सराधना:
मंत्री
महोदय, आप गलत
जवाब पढ़ रहे
हैं। मैंने
पूछा था कितनी
राशि, किस प्रकार
की सहायता
प्रदान की गई,
मूल प्रश्न
मेरा यह है।
पूछा गया वह
आपने बताया
नहीं। 12
इकाइयों को
कितनी राशि दी
गई और किस किस
क्षेत्र में
दी गई आपने
नहीं बताया।
श्री
नरपतसिंह
राजवी: राशि
का आप.....
श्री
रामचन्द्र
सराधना:
आपने जवाब
सही नहीं
दिया,आपके
विभाग ने।
श्री
अध्यक्ष: दो में
पूछा है उन्होंने।
श्री
नरपतसिंह
राजवी: उक्त
आयोजना में
लागू होने के
बाद राज्य
में कितनी रूग्ण
इकाइयों को,
कहां कहां
पुनर्जीवित
हुई यह आपने
पूछा है और वह
परिशिष्ट
मैंने रखा है,
अगर राशि पूछी
होती तो वह भी
रखता, अगर
राशि पूछते।
श्री
अध्यक्ष: दो
में पूछा है
उन्होंने,
कितना-कितना
पैसा दिया यह
भी पूछा है
उन्होंने।
श्री
नरपतसिंह
राजवी: माननीय
सदस्य ने
जयपुर मैटल का
पूछा...
श्री
रामचन्द्र
सराधना: मैंने
नहीं पूछा
माननीय अध्यक्ष
महोदय। मेरे
प्रश्न का
जवाब सही नहीं
आ रहा है।
शायद मंत्री
जी को विभाग
वालों ने सही
जवाब नहीं
दिया। दूसरा पन्ना
पढ़ रहे है
आप।
मैंने भाग
संख्या दो
में पूछा कि
इन रूग्ण
औद्योगिक
इकाइयों को
चिह्नित किया गया
है, उनमें से
कितनी
इकाइयों को
कितनी कितनी
राशि, किस
प्रकार की दी
गई सहायता, यह
पूछा है मूल
प्रश्न में।
श्री
नरपतसिंह
राजवी: अध्यक्ष
महोदय, नकद
राशि तो दी ही
नहीं जाती।
इन्टरेस्ट
सब्सिडी का
मैंने कहा है,
इन्टरेस्ट
सब्सिडी एक्चुअल
कामर्शियल
प्रोडक्शन
के बाद दी
जायेगी। जहां
तक
इलेक्ट्रिसिटी
डयूटी है तो
एक्चुअल
पावर यूज
करेगा उसके
बाद में दी
जाएगी। 50 प्रतिशत
इलेक्ट्रिसिटी
डयूटी बिल में
से ही कटेगा
एडवांस में
थोडे़ ही मिल
जाएगा। (व्यवधान)
श्री
रामचन्द्र
सराधना:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, यह 2004-5 की
बात है वह अब
बता रहे हैं
मंत्री महोदय,
दरअसल में
आपके पास है
नहीं। केवल
मात्र राज्य
सरकार ने रूग्ण
इकाइयों को
चालू करने के
लिए वाह वाही
लूटने के लिए
आपने घोषित कर
दी नीति और जब
नीति की बात
करते हैं तो
रूग्ण
इकाइयों
वालों से बात
करते हैं तो
वह कहते है
अव्यवहारिक।
आपने नीतियां
ऐसी बनाई,
शर्तें ऐसी रखी
कि कोई भी
औद्योगिक
इकाई को लाभ
नहीं मिल सके।
आप उस पर
विचार करना
चाहते हैं क्या
? वस्तुत:
उनको वह लाभ
देना चाहते
हैं और रूग्ण
इकाइयों को
चालू करना
चाहते हैं तो
आपको उन शर्तों
को,
उसमें ढील
देनी पडे़गी,
उस पर विचार करना
पडे़गा, क्या
वह करना चाहते
हैं क्या,
यह बताइये आप।
Vps/akt/1150/9-3-06/1f
श्री नरपत
सिंह राजवी:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, यह बात
सही है कि
जितनी भी
रुग्ण
इकाइयां हैं,
उस अनुपात में
लाभान्वित वह
नहीं हो पा
रही है और न हम
कर पा रहे
हैं। अव्यवहारिकता
भी जहां-जहां
पर है, हमारी
कोशिश है कि
उनको चिह्नित
करके उनको दूर
करने का प्रयास
कर रहे हैं
लेकिन
फाइनेंशियल
इंस्टीट्यूशंस
के संबंध में
जो मैंने आपसे
निवेदन किया
कि वह एक जटिल
समस्या है,
क्योंकि एक
बार डिफाल्टर
होने के बाद,
चाहे बैंक हो,
चाहे स्टेट
फाइनेंशियल
इंस्टीट्यूशंस
हो, चाहे केन्द्रीय
वित्तीय
संस्थाएं हो,
वह उनको
फाइनेंस नहीं
करती और जब तक
फाइनेंस नहीं
करेगी,
रिवाइवल उसका,
स्टार्ट नहीं
होगा। कुछ
इकाइयां इस
प्रकार की है,
जैसे एक बाई
दो की टाइल्स
हैं, अब वह व्यवहारिक
नहीं है।
चूरू, झुन्झुनूं
में जितनी लगी
हैं, सबकी सब
सिक हुई है।
श्री
रामचन्द्र
सराधना(जमवारामगढ़):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मंत्रीजी,
मैं यह निवेदन
करना चाह रहा
था कि आपने
नीति घोषित
करने से पहले
फाइनेंशियल
इंस्टीट्यूशंस
से बात की क्या
? आपने नीति
घोषित कर दी।
विरोध नहीं कर
रहे हैं और
बीच में लटक
रहा है रुग्ण
इकाइयों वाला।
आप करना क्या
चाहते हैं? दरअसल
में केवल
ढिंढोरा पीट
कर वाहवाही
लूटना चाहते
थे कि
हमारी सरकार
उद्योगों को
चलाएगी। वह
जयपुर मैटल के
लिए सही कह
रहे हैं। आप
करना क्या
चाहते हैं? आपकी
नीति घोषित
करने से पहले
आपको उनसे ...(व्यवधान)
श्री
मोहनलाल गुप्ता(किशनपोल):
जयपुर मैटल पर
जवाब आ जाने
दीजिए। जयपुर
मैटल के लोगों
का भला हो
जाएगा, आप जरा उनसे
जवाब आ जाने
दीजिए ...(व्यवधान)
श्री
रामचन्द्र
सराधना(जमवारामगढ़):
आप उनके
पुनरुद्धार करने
के मामले,
औद्योगिक
इकाइयों को
चालू करने के
मामले में आप
लोगों को
बिजली बोर्ड
से, फाइनेंशियल
इंस्टीट्यूशंस
से, रीको से,
आर.एफ.सी. से,
सबसे बात करके
फिर आपको नीति
घोषित करनी
चाहिए थी ...(व्यवधान)
श्री
मोहनलाल गुप्ता(किशनपोल):
जयपुर मैटल को
चालू करवाओ
साहब। माननीय
मुख्य
मंत्रीजी
बैठी हुई हैं।
माननीय मुख्य
मंत्रीजी
बैठे हैं। उन्होंने
नीति घोषित की
है। जयपुर
मैटल के कर्मचारियों
के हित में,
मजदूरों के
हित में बात
बतायें। ...(व्यवधान)
उस रुग्न
इकाई को चालू
करने के संबंध
में आपकी क्या
योजना है
सरकार की वह
...(व्यवधान)
श्री
अमराराम (धोद):
सवा दो साल तो
गुजर गये हैं
।
श्री
रामचन्द्र
सराधना(जमवारामगढ़):
आपने जो नीति
घोषित की है
वह घोषित नीति
अव्यावहारिक
है । क्या आप
उस पर
पुनर्विचार
करना चाहते
हैं या नहीं?
श्री नरपत
सिंह
राजवी:बैठ
जाओ, एक बार कह
दिया। जयपुर
मैटल का, उसको
भी बता दूंगा।
...(व्यवधान) माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं आपके
माध्यम से यह
बात जो आपने
कही वह सही है
लेकिन बिजली
का और जितने
भी टैक्स
कंसेशंस दिये
हैं वह तो वह
सारे
नोटिफिकेशन
निकले हुए
मेरे पास पड़े
हैं। वह सदन
की मेज पर रख
दूंगा लेकिन
उतने मात्र से
इलेक्ट्रिसिटी
ड्यूटी मात्र
से वे
लाभान्वित
नहीं हो
पाएंगे।
बी.आई.एफ.आर. में
छोटा केस जाता
नहीं है इसलिए
उनको व्यवहारिक
बनाने के लिए
...(व्यवधान)
श्री रामचन्द्र
सराधना(जमवारामगढ़):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मुझे उम्मीद
नहीं थी इस
सरकार से कि
वह इस तरह का
जवाब देगी।
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
मंत्रीजी से
अब सीधी-सीधी
बात करना चाह
रहा था कि 12
इकाइयों को
आपने सहायता
दी, 1083 इकाइयों
को सहायता
देते तो शायद
आप पढ़ ही
नहीं पाते
उसको। 12
इकाइयों का
नहीं बता पाये
कि आप कितना
पैसा आपने
दिया।
श्री नरपत
सिंह राजवी:
वह पढूंगा या
नहीं पढ़ पाऊगा,
यह आपकी
मेहरबानी से
नहीं है। ...(व्यवधान)
श्री
रामचन्द्र
सराधना(जमवारामगढ़):
आपने इस बजट
में कितना
प्रावधान रखा
था वह नहीं बताया
है आपने और
कितना
प्रावधान रखा
था और उसमें
कितना खर्चा
हुआ वह नहीं
बताया आपने।
सीधी सी बात
है आपने वह
बताया है अभी
...(व्यवधान)
श्री नरपत
सिंह राजवी:
प्रावधान
कितना रखा ? जितना
भी प्रावधान
है, 50 परसेंट
इलेक्ट्रिसिटी
ड्यूटी है तो
जितनी ड्यूटी
ड्यू बनेगी,
वह बिल तो
उसको लेने दो।
आज 12 इकाइयों
में से जिनको
लाभन्वित हो
रही हैं, वह हो
रही हैं तो 5
परसेंट जितनी
सब्सिडी ...(व्यवधान)
उन्होंने
फाइनेंशियल
इंस्टीट्यूशंस
से लिया, वह
उसको मिलेगा ।
...(व्यवधान)
उतना मिलेगा ।
...(व्यवधान)
श्री
रामचन्द्र
सराधना(जमवारामगढ़):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, प्रतिष्ठा
का सवाल हो
गया है, यह
बताना नहीं
चाहते हैं ।...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
नेक्स्ट क्वेश्चन
। श्री
अमराराम धोद।
श्री
मोहनलाल गुप्ता(किशनपोल):
अब जयपुर मैटल
का बता दीजिए।
जयपुर मैटल का
जवाब तो आने
दीजिए। जवाब आ
जाने दीजिए।
माननीय अध्यक्ष
महोदय, जयपुर
मैटल का जवाब
आ जाने दीजिए।
...(व्यवधान)
श्री अशोक
बैरवा(खण्डार):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, जयपुर
मैटल के
कर्मचारी मर
रहे हैं।
सड़कों पर
भूखे मर रहे
हैं, उनके
जीने का कोई
आसरा नहीं है
...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
जो सूचना
मंत्रीजी के
पास थी वह उन्होंने
आपको दे दी ...(व्यवधान)
श्री
मोहनलाल गुप्ता(किशनपोल):
जयपुर मैटल का
जवाब आ जाने
दीजिए । बहुत
महत्वपूर्ण
प्रश्न है।
श्री अध्यक्ष:
अगला प्रश्न
भी महत्वपूर्ण
है। श्री
अमराराम धोद ।
...(व्यवधान)
श्री अशोक
बैरवा(खण्डार):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, इसका जवाब
आ जाने दीजिए।
एक प्रश्न का
भी जवाब नहीं
आया । एक का भी
जवाब नहीं आया
। तीन भाग है,
तीनों का जवाब
नहीं आया है।
...(व्यवधान)
जयपुर मैटल के
कर्मचारियों
के संबंध में
मैं जवाब
चाहता हूं।
सत्ता पक्ष
के माननीय
सदस्य की
पीड़ा को आप
समझना नहीं
चाहते और केवल
सरकार
वाहवाही लूट
रही है।
सैकड़ों
कर्मचारी जयपुर
मैटल के
बेघरवार हो
गये हैं। ...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
मैंने अगला प्रश्न
पुकार लिया
है। ...(व्यवधान)
श्री
मोहनलाल गुप्ता(किशनपोल):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आपने
मुझे इजाजत दी
है।...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
मैंने अगला
प्रश्न
पुकार लिया
है। ...(व्यवधान)
श्री अशोक
बैरवा(खण्डार):
अगला पूछो मत,
माननीय अध्यक्ष
महोदय, वह
कर्मचारी मर
रहे हैं। ...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
स्थान ग्रहण
कर लें। आसन
पाँवों पर
हैं। स्थान
ग्रहण कर लें।
खण्डार से
आने वाले
माननीय सदस्य,
स्थान ग्रहण
कर लें।
माननीय सदस्य,
स्थान ग्रहण
करें। ...(व्यवधान)
मैंने अगला
प्रश्न
पुकार लिया
है। The Chair
is on legs. आसन
पाँवों पर।
आसन पाँवों पर
है। स्थान
ग्रहण कर लें,
श्री अमराराम
धोद ...(व्यवधान)
श्री
मोहनलाल गुप्ता(किशनपोल):
एक मिनट,
माननीय अध्यक्ष
महोदय, जयपुर
मैटल के संबंध
में ...(व्यवधान)
श्री नरपत
सिंह राजवी:
यहां पर सरकार
लोगों को लाना
चाहती है,
निवेश बढ़ाना
चाहती है। ...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
सभी प्रश्न
महत्वपूर्ण
है। हरेक का
प्रश्न यहां
पर महत्वपूर्ण
है। ...(व्यवधान)
श्री
रामचन्द्र
सराधना(जमवारामगढ़):
मेरे प्रश्न
का एक का भी
जवाब नहीं आया
है और आपने
आगे वाला
प्रश्न
पुकार लिया
है। माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मेरे
प्रश्न का
जवाब नहीं
आया, एक पार्ट
का भी, एक
पार्ट का भी
जवाब नहीं आया
है मेरा निवेदन
है ...(व्यवधान)
श्री अशोक
बैरवा(खण्डार):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, माननीय
सदस्य का
जवाब नहीं आया
है, माननीय
सदस्य का
जवाब नहीं आया
है । ...(व्यवधान)
श्री
बाबूलाल
नागर(दूदू): एक
भी प्रश्न का
जवाब नहीं आया
है।
श्री अशोक
बैरवा(खण्डार):
मंत्रीजी या
तो इस प्रश्न
को आगे
बढ़ाये। ...(व्यवधान)
श्री
रामचन्द्र
सराधना(जमवारामगढ़):
इतना बड़ा
महत्वपूर्ण
प्रश्न है।
श्री
बाबूलाल
नागर:
माननीय सदस्य
का जवाब नहीं
आया है। ...(व्यवधान)
श्री अशोक
बैरवा(खण्डार):
जवाब तो आया
ही नहीं है।
...(व्यवधान)
आपने जयपुर
मैटल के संबंध
में भी मंत्री
महोदय ने कोई
बात कही है वह
...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
आपका प्रश्न
अलग से प्रश्न
है। आप ख्वाहमख्वाह
खड़े हो रहे
हैं। माननीय
मंत्रीजी,
आपकी बात
सुनाई नहीं दे
रही है, माननीय
मंत्रीजी।
माननीय
पशुपालन
मंत्रीजी आपकी
बात सुनाई ...(व्यवधान)
मैंने कहा स्थान
ग्रहण कर लें,
माननीय सदस्य
। ...(व्यवधान)
जितनी
सूचना
मंत्रीजी के
पास थी वह उन्होंने
दे दी। ...(व्यवधान)
श्री
रामचन्द्र
सराधना(जमवारामगढ़):
उत्तर आया
नहीं है। तीन भाग
हैं। ...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
आप यदि उत्तर
से संतुष्ट
नहीं हैं तो,
माननीय सदस्य
...(व्यवधान)
श्री
मोहनलाल गुप्ता(किशनपोल):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आपने मुझे
इजाजत दी
थी।...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
आप उत्तर से
संतुष्ट
नहीं हैं तो
आप फिर आधे
घंटे की चर्चा
में आइये यदि
आप संतुष्ट
नहीं हैं तो
...(व्यवधान)
श्री
रामचन्द्र
सराधना(जमवारामगढ़):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आप इसको
गम्भीरता से
देखें। मेरे
तीन भाग हैं,
प्रश्न के।
...(व्यवधान) एक
भाग का भी
जवाब नहीं आया
है। ...(व्यवधान)
श्री
मोहनलाल गुप्ता(किशनपोल):
आपने मुझे
इजाजत दी थी,
माननीय अध्यक्ष
महोदय, ...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
श्री अमराराम
धोद। आसन
पॉंवों पर है।
आसन पॉंवों पर
है।
श्री
हरिमोहन
शर्मा: प्रश्न
को स्थगित कर
दो। जवाब पूरा
नहीं आया तो
प्रश्न को स्थगित
कर दो। जवाब आ
जाने दो आप।
स्थगित कर दो
प्रश्न को
...(व्यवधान)
श्री
मोहनलाल गुप्ता(किशनपोल):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आपने मुझे
इजाजत दी थी।
...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष
महोदय, जयपुर
मैटल के संबंध
में।
श्री अध्यक्ष:
जयपुर मैटल तो
अलग से प्रश्न
है। ...(व्यवधान)
श्री राजेन्द्र
राठौड़: पूरा
जवाब दिया है।
...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
आप दूसरे
नियमों से
आइये। ...(व्यवधान)
श्री
मोहनलाल गुप्ता(किशनपोल):
जयपुर मैटल भी
रुग्ण इकाइ
है। माननीय
अध्यक्ष
महोदय, वे देना
चाहते हैं,
माननीय
मंत्री महोदय,
जवाब ...(व्यवधान)
श्री हरिमोहन
शर्मा: आप ही
जवाब से
संतुष्ट
नहीं हो तो स्थगित
करने में क्या
है? आप खुद ही
संतुष्ट
नहीं हो जवाब
से तो ?
श्री
अमराराम (धोद):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैंने
प्रश्न
पुकार लिया,
उत्तर
दिलवाइये।...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
अब दूसरे नियम
भी हैं। खण्डार
से आने वाले
माननीय सदस्य,
ख्वाहमख्वाह
खड़े हो जाते
हैं यूं ही ।
आसन पॉवों पर
है। आसन पावों
पर है। ...(व्यवधान)
यदि आप संतुष्ट
नहीं हैं तो
और नियम हैं,
उन नियमों में
आइये। उन पर
चर्चा करिये,
क्या दिक्कत
है ? ...(व्यवधान)
श्री
मोहनलाल गुप्ता(किशनपोल):
आपने मुझे
पूरक प्रश्न
पूछने की
इजाजत दी है
और मंत्रीजी
तैयार हैं,
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आपकी
थोड़ी कृपा हो
जाए तो उन
लोगों का भला
हो जाएगा,
मजदूरों का।
आपकी थोड़ी
कृपा चाहिए। ...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
जयपुर मैटर
बिलकुल अलग
प्रश्न है।
जयपुर मैटल
अलग से प्रश्न
है। ...(व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा: अगर
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आप संतुष्ट
हैं तो आप कह
दो कि आप
संतुष्ट है ।
हम तो मान
लेंगे। आप ही
फैसला कर दो
कि आप संतुष्ट
हैं क्या?
श्री अध्यक्ष:
आसन जवाब नहीं
दिया करता।
आसन माननीय सदस्य
का इस तरह से
जवाब नहीं
देता। आसन
केवल आपको इजाजत
देता है ।
सुनता है।
श्री
रामचन्द्र
सराधना(जमवारामगढ़):
मेरे प्रश्न
का जवाब नहीं
दिया है।
श्री अध्यक्ष:
हां, जवाब
दें।
ग्राम
रसीदपुरा
(सीकर) में पशु
चिकित्सालय
की स्थापना
108. श्री
अमराराम(धोद):
क्या
पशुपालन
मंत्री यह
बताने की कृपा
करेंगे:-
(1) जिला
सीकर में
आधुनिक नस्ल
के अधिकतम
दुधारू
पशुपालन करने
वाले ग्राम रसीदपुरा
में पशु
चिकित्सा की
व्यवस्था
नहीं होने के
क्या कारण
हैं?
(2) पशु चिकित्सालय खोलने के क्या मानदण्ड हैं तथा क्या