jkj/akt/07032007/1100/1a

               अशोधित प्रति/प्रकाशनार्थ नहीं

 

             राजस्‍थान विधान सभा की कार्यवाही का वृत्‍तान्‍त

 

 अंक 7   बारहवीं विधान सभा के सातवें सत्र का सातवां दिवस     संख्‍या : 5

 

                            

बुधवार, 07 मार्च, 2007

 

राजस्‍थान विधान सभा की बैठक 11.00 बजे

विधान सभा भवन, जयपुर में प्रारम्‍भ हुई।

 

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

 

श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्‍यक्ष् महोदय, मैं आपका ध्‍यान आकर्षण नियम 306 की तरफ करना चाहूंगा कि....

श्री अध्‍यक्ष: श्री अशोक कुमार नवलखा।

श्री जुबेर खान: पंजाब के मुख्‍य मंत्री ने, पंजाब की सरकार ने जो रवैया अख्तियार कर रखा है यहां राजस्‍थान के पानी बंद करने का.....

श्री अध्‍यक्ष: यह जीरो आवर में उठाइयेगा।

श्री जुबेर खान: राजस्‍थान सरकार एक शब्‍द उसके लिए नहीं बोली है।

श्री अध्‍यक्ष: यह कोई तरीका नहीं है उठाने का, आप नियमों में आइये। आप नियमों में आइये, यह क्‍वेश्‍चन आवर है।

श्री जुबेर खान: जबकि हरियाणा के मुख्‍य मंत्री ने इस बात की निंदा की है।  हम यह प्रस्‍ताव लाते हैं 306 के अंतर्गत, यह सदन की कार्यवाही रोकिये, यह राजस्‍थान की सरकार अपने कर्त्‍तव्‍य का निर्वहन नहीं कर पाई है।

श्री अध्‍यक्ष: आप क्‍वेश्‍चन आवर के बाद रखना। अंकित नहीं हो।  अंकित नहीं हो।

श्री जुबेर खान: 000   

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो रहा है।  अंकित नहीं हो रहा है।

श्री जुबेर खान: 000  (व्‍यवधान)

श्री अमरा राम(धोद): 000

श्री अध्‍यक्ष: सदन शाम के सात, साढ़े सात बजे तक चलेगा, आपको फिर मौका था उठाने का लेकिन आपने....(व्‍यवधान)

श्री अमरा राम(धोद): 000

डा.सी.पी.जोशी: 000

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो।

श्री अमरा राम(धोद):  000

डा.सी.पी.जोशी: 000

श्री अमरा राम(धोद): 000 (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आर्डर, आर्डर।  माननीय सदस्‍य, आप जिस 306 नियम का हवाला दे रहे हैं, कल भी मैंने यह कहा था कि पहले सारे पार्टियां बैठें, और बैठ कर इस इश्‍यू पर बात करके और उसके बाद संकल्‍प लायें, फिर तैयार हैं लेकिन यह तरीका नहीं है। (व्‍यवधान) बिलकुल गलत बात है आपकी।

डा.सी.पी.जोशी: 000

श्री अध्‍यक्ष: तो आपने...

श्री जुबेर खान: 000

श्री अध्‍यक्ष: आप 306 नियम का हवाला दे रहे हैंतो 306 का नियम सब के साथ...(व्‍यवधान)

डा.सी.पी.जोशी: 000

श्री अध्‍यक्ष: पढ़ लिया मैंने।

डा.सी.पी.जोशी: 000

श्री अमरा राम(धोद): 000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: 000

श्री महावीर प्रसाद जैन: 000

डा.सी.पी.जोशी: 000

श्री महावीर प्रसाद जैन: 000 (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: सरकार का उत्‍तर आयेगा उस पर। (व्‍यवधान) सरकार का उत्‍तर आयेगा, सरकार बोलेगी।

डा.सी.पी.जोशी: 000

श्री महावीर प्रसाद जैन: 000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: 000

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो रहा। (व्‍यवधान)

डा.सी.पी.जोशी: 000

श्री महावीर प्रसाद जैन: 000

श्री अध्‍यक्ष: यहां किसी का भी अंकित नहीं हो रहा है, किसी का भी अंकित नहीं हो रहा है।

श्री महावीर प्रसाद जैन: 000

डा.सी.पी.जोशी: 000

श्री जुबेर खान:  000

श्री महावीर प्रसाद जैन: 000

श्री अमरा राम(धोद): 000

डा.सी.पी.जोशी: 000 (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: रामगढ़ से आने वाले माननीय सदस्‍य, अख़बार छोडि़ये।  रामगढ़ से आने वाले माननीय सदस्‍य, अख़बार छोडि़ये। इनका अख़बार ले आओ। (व्‍यवधान)

डा.बुलाकीदास कल्‍ला: 000

श्री अध्‍यक्ष: मैंने किसी को भी अलाउ नहीं किया है, जो कोई बोले हैं किसी को भी अलाउ नहीं किया है, मैं कह रही हूं आपको कोई मुद्दा उठाना है तो क्‍वेश्‍चन आवर के बाद आप उसे उठायें, लेकिन इस समय बोलने का मैं किसी को भी मौका, अवसर नहीं दूंगी। (व्‍यवधान) नहीं, आप उसके बाद उठाना। I will give you opportunity. लेकिन उसके बाद।  क्‍वेश्‍चन आवर के बाद। (व्‍यवधान) No-No. क्‍वेश्‍चन आवर।  क्‍वेश्‍चन आवर। अशोक कुमार नवलखा। अशोक कुमार नवलखा।

श्री अमरा राम(धोद): 000

श्री सी.डी.देवल: 000 (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: कुछ नहीं। अंकित नहीं। अंकित नहीं।

श्री जुबेर खान: 000

श्री सी.डी.देवल: 000 (व्‍यवधान)

                        तारांकित प्रश्‍नोत्‍तर

परिवहन चैक पोस्‍ट निम्‍बाहेड़ा का सुदृढ़ीकरण एवं उन्‍नयन

58.श्री अशोक कुमार नवलखा(निम्‍बाहेड़ा): क्‍या यातायात मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) परिवहन चैक पोस्‍ट, निम्‍बाहेड़ा की वर्ष 2003-04 से 2006-07 की प्राप्तियां एवं आय कितनी है ? वर्षवार विवरण सदन की मेज पर रखें।

(2) परिवहन चैक पोस्‍ट, निम्‍बाहेड़ा पर वर्ष 2006-07 में कितने वाहनों की किस्‍मवार(मेक) आवक-जावक हुई? माहवार सूची सदन की मेज पर रखें।

(3) क्‍या यह सही है कि परिवहन चैक पोस्‍ट निम्‍बाहेड़ा पर वर्ष 2006-07 में ओवरलोड व अन्‍य विसंगतियों के चालान बनाए गये तथा राशि वसूलकी गई? यदि हां, तो कितनी? माहवार सूची सदन की मेज पर रखें।

(4) क्‍या सरकार की इस चैक पोस्‍ट को राजस्‍व आय की दृष्टि से और अधिक सुदृढ़ बनाने की योजना है? यदि हां, तो किस प्रकार व नहीं, तो क्‍यों?

यातायात मंत्री(श्री युनूस खान): (1) कर संग्रह केन्‍द्र निम्‍बाहेड़ा जिला चित्‍तौड़गढ़ की वर्ष 2003-04 से 2006-07 तक की प्राप्तियां एवं आय का वर्षवार विवरण निम्‍नानुसार है:-               

 वर्ष     प्राप्तियां व आय (रू.लाखों में)            

2003-04      1584.77

2004-05      1337.23

2005-06      1471.72

2006-07      998.38(माह जनवरी 07 तक)

(2) राज्‍य सरकार द्वारा अधिसूचना दिनांक 29 अप्रैल, 1995 द्वारा चैक पोस्‍ट स्‍थापित कर बेरियर लगाने सम्‍बन्‍धी समस्‍त निर्देशों को वापस लिया जाकर दिनांक 01-05.1995 से परिवहन चैक पोस्‍ट समाप्‍त कर दी गयी तथा इन्‍हें कर संग्रह केन्‍द्र के रूप में परिवर्तित कर दिया गया।  दिनांक 01.05.1995 से इन कर संग्रह    केन्‍द्रों ....

डा.बुलाकीदास कल्‍ला:  000

श्री युनूस खान: से गुजरने वाले किसी भी प्रकार के वाहनों के आने-जाने की प्रविष्टि दर्ज किये जाने का कोई अभिलेख संधारित नहीं किया जाता है।

          (प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों द्वारा नारेबाजी)

श्री अध्‍यक्ष: इनका जवाब देओ आप। (व्‍यवधान)

श्री युनूस खान: (3) इस कर संग्रह केन्‍द्र पर वर्ष 2006-07 में ओवरलोड व अन्‍य विसंगतियों के बनाए गए चालानों तथा वसूली की गई राशि का विवरण संलग्‍न परिशिष्‍ट क पर उपलब्‍ध है।

(4) सरकार द्वारा राजस्‍व लक्ष्‍यों की पूर्ति तथा आय में वृध्दि हेतु अन्‍य कर संग्रह केन्‍द्रों के अनुरूप ही निम्‍बाहेड़ा कर संग्रह केन्‍द्र पर भी आवश्‍यक प्रवर्तन स्‍टाफ लगाया जाकर आवश्‍यक सुविधायें उपलब्‍ध करायी जाती हैं।(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: हरिमोहन शर्मा। हरिमोहन शर्मा।

श्री हरिमोहन शर्मा: प्रश्‍न संख्‍या 2 ।

श्री अध्‍यक्ष: प्रश्‍न संख्‍या 2 ।

श्री युनूस खान: वह सप्‍लीमेंट्री पूछ रहे हैं अध्‍यक्ष महोदय। सप्‍लीमेंट्री पूछा है उन्‍होंने।

श्री अशोक कुमार नवलखा: अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से जानना चाहता हूं कि वर्ष 2003-04 में कर संग्रह केन्‍द्र निम्‍बाहेड़ा की प्राप्तियां एवं आय 1584.77 लाख रूपये थी, लगातार आय एवं प्राप्तियां हर वर्ष कम हो रही है इसका क्‍या कारण है तथा इसके लिए किसकी जिम्‍मेदारी बनती है।  खण्‍ड दो, माननीय मंत्री महोदयजी से जानना चाहता हूं कि विभाग ने वर्ष 2006-07 के लिए क्‍या लक्ष्‍य निर्धारित किये हैं, क्‍या जनवरी 2007 की अब तक की प्राप्तियां 998.38 लाख के विरूध्‍द दो माह में लक्ष्‍य किस तरह अर्जित हो सकेंगे।  खण्‍ड तीन, कर संग्रह केन्‍द्र पर प्रत्‍येक वाहन के प्रकार के हिसाब से ही चालान एवं कर संग्रह वसूला जाता है, फिर विभाग के पास सूची क्‍यों नहीं उपलब्‍ध है।  नम्‍बर चार, ओवरलोड चालान व विसंगतियों के चालान में अप्रैल, 2006 से अक्‍टूबर, 2006 तक प्रति माह एक करोड़ रूपये से कम की वसूली हुई है, इसका क्‍या कारण रहा है। खण्‍ड पाँच, सरकार द्वारा राजस्‍व लक्ष्‍यों की पूर्ति हेतु प्रवर्तक स्‍टाफ एवं सुविधायें तो उपलब्‍ध करायी जाती है लेकिन राजस्‍व वसूली की पूर्ति नहीं होने के लिए कौन जिम्‍मेदार है.....

 

Lpm/akt/1110/1b/70302207

 

तथा विभाग इस बारे में क्‍या कदम उठा रहा है। मैं माननीय मंत्री महोदय से यह निवेदन करूंगा कि कृपया लगातार जो विभागीय आय कम पड़ रही है इसके बारे में अपना स्‍पष्‍टीकरण प्रस्‍तुत करें। धन्‍यवाद।

श्री युनूस खान (यातायात मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय निम्‍बाहेड़ा से आने वाले मानीय सदस्‍य ने जो आय गिरने की बात कहीं अधिसूचना 1995 में जारी की गई उस अधिसूचना के तहत हमारे जो मतलब है टी.सी.सीज. थी हमने अब टैक्‍स कलेक्‍शन सेन्‍टर बना दिये हैं। पहले चैक पोस्‍ट हुआ करती थी अब जो है उनको माननीय उच्‍चतम न्‍यायालय के आदेश के अनुसार ओवर-लोड पर बंदीश लगने की वजह से आय में गिरावट आई है। चूंकि पहले वहां पर चैक पोस्‍ट होती थी और चैक पोस्‍ट के माध्‍यम से प्रत्‍येक वाहन की जांच की जाती थी इस कारण से आय ज्‍यादा होती थी। अब खाली टैक्‍स कलेक्‍शन सेन्‍टर बना दिया गया है माननीय अध्‍यक्ष महोदय इसलिए स्‍वेच्‍छया से जो मतलब ऑनर है वह टैक्‍स जमा कराता है  उसी से और कोई व्‍यक्ति अगर वहां टैक्‍स जमा नहीं कराता है आगे आ जाता है तो उस पर पाँच गुणा पेनेल्‍टी लगाई जाती है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय जहां तक वहां मतलब कर संग्रह केन्‍द्र पर अधिक भीड़ होने का सवाल है माननीय अध्‍यक्ष महोदय वहां पर मैं स्‍वयं मौके पर गया था माननीय विधायकजी के साथ, हमने सार्वजनिक निर्माण विभाग को, माननीय सार्वजनिक निर्माण विभाग को हमने पत्र लिखा है और चूंकि यह नेशनल हाइवे में आती है इसलिए नेशनल हाइवे को भी पत्र लिखा है। जिला कलेक्‍टर और हमारे आर.टी.ओ. ने भी पत्र लिखा है। हमारे परिवहन कार्यालय से भी पत्र गया है जब हमारे को नेशनल हाइवे से परमिशन मिल जाएगी तो वहां पर लेबोई बनाकर के जो असुविधा हो रही है उसका निराकरण करेंगे।

श्री अध्‍यक्ष: श्री हरिमोहन शर्मा। श्री हीरालाल।

जिला टोंक में कुपोषित बच्‍चों हेतु वितरित पोषाहार सामग्री

60. श्री हीरालाल (निवाई) क्‍या महिला एवं बाल विकास मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

1. विभागीय गणना के अनुसार 31 दिसम्‍बर,2006 तक टोंक जिले में छ: वर्ष तक की आयु के कितने बच्‍चे कुपोषित हैं? इन कुपोषित बच्‍चों में कितने बच्‍चे गंभीर रूप से कुपोषित की श्रेणी में हैं? ब्‍लॉकवार विवरण सदन की मेज पर रखें।

2. उक्‍त कुपोषित व गंभीर कुपोषित बच्‍चों में कुपोषण का स्‍तर कम करने के लिए क्‍या प्रयास किये जा रहे हैं? विवरण सदन की मेज पर रखे।

3. वर्ष 2006 में टोंक जिले में क्‍या-क्‍या व कितनी-कितनी पोषाहार सामग्री वितरित की गई? ब्‍लॉकवार विवरण सदन की मेज पर रखें।

महिला एवं बाल विकास मंत्री (श्री कनकमल कटारा):- (1) विभागीय सूचना के अनुसार टोंक जिले में संचालित आंगनबाड़ी केन्‍द्रों पर 31 दिसम्‍बर,2006 को 6 वर्ष तक के आयु के 57 हजार 646 बच्‍चे कुपोषित एवं 599 गंभीर रूप से कुपोषित बच्‍चों की श्रेणी में थे। ब्‍लॉकवार विवरण निम्‍न प्रकार है:-

 

क्र.सं.

परियोजना का नाम 

6 वर्ष तक के आयु के कुपोषित बच्‍चों की संख्‍या    

गंभीर रूप से कुपोषित की श्रेणी के बच्‍चों की संख्‍या

1

अलीगढ़

7,728

201

2

देवली

9,092

05

3

मालपुरा

9,045

97

4

निवाई

8,267

73

5

टोडारायसिंह

6,139

05

6

टोंक शहर

4,337

168

7

टोंक ग्रामीण

13,038

50

 

योग

57,646

599

 

(2) टोंक जिले में बच्‍चों में कुपोषण की रोकथाम हेतु आंगनबाड़ी केन्‍द्रों के माध्‍यम से पूरक पोषाहार का वितरण किया जा रहा है। केन्‍द्रों पर पंजीकृत अतिकुपोषित बच्‍चों को दुगुनी मात्रा में पोषाहार दिया जा रहा है। इसके अतिरिक्‍त प्रत्‍येक माह में एक निश्चित दिवस को मातृ शिशु स्‍वास्‍थ्‍य एवं पोषण दिवस का आयोजन कर बच्‍चों की वृद्धि निगरानी तालिका का संधारण, उनके स्‍वास्‍थ्‍य की जांच, टीकारण, परिजनों को बच्‍चे की पोषण की जरूरतों को पूरा करने के लिए सलाह तथा जटिल स्थिति होने पर चिकित्‍सीय जांच का परामर्श दिया जाता है। कुपोषण की रोकथाम हेतु राज्‍य स्‍तरीय कार्य योजना के अंतर्गत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहयोगिनियों को विशेष प्रशिक्षण देकर अति-कुपोषित बच्‍चों की उचित देखभाल हेतु क्षमता वर्धन किया जा रहा है। अति-कुपोषित बच्‍चों की चिकित्‍सा एवं पुनर्वास हेतु टोंक जिले में जिला चिकित्‍सालय पर कुपोषण निदान केन्‍द्र भी स्‍थापित किया गया है। इस केन्‍द्र द्वारा वर्ष 2006 में 134 कुपोषित बच्‍चों को स्‍वस्‍थ किया गया।

(3) वर्ष 206 में टोंक जिले में 3 वर्ष से कम आयु वर्ग के बच्‍चों को बेबी मिक्‍स तथा 3-6 वर्ष के बच्‍चों को गरम पूरक आहार में मीठा दलिया/खिचड़ी एवं मुरमुरों का वितरण किया गया है। कुल 14 हजार 102 क्विंटल पोषाहार सामग्री का वितरण बच्‍चों को किया गया, जिसका ब्‍लॉकवार विवरण निम्‍न प्रकार है:-

(क्विं.में)

 

क्र.सं.   

परियोजना का नाम 

बेबीमिक्‍स

गरम पूरक पोषाहार

मुरमुरे

महिला स्‍वयं सहायता समूह द्वारा निर्मित बेबीमिक्‍स

1

अलीगढ़

693

730

577

0

2

देवली

833

748

698

0

3

मालपुरा

974

837

818

0

4

निवाई

623

638

573

0

5

टोडारायसिंह

576

661

467

0

6

टोंक शहर

316

302

244

0

7

टोंक ग्रामीण

630

1249

788

127

 

योग

4,645

5,165

4,165

127

 

 

(भारी व्‍यवधान)

 

श्री अध्‍यक्ष: सदन की कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्‍थगित की जाती है।

 

(तदनन्‍तर सदन की बैठक 11.18 बजे 12.00 बजे तक के लिए स्‍थगित हुई।)

 

भीम/अरुण/6.3.07/12.00/1g

 

(12:00 बजे)

(पुन: समवेत होने पर)

(श्री रामनारायण विश्‍नोई, उपाध्‍यक्ष, पदासीन)

 

श्री उपाध्‍यक्ष: सदन की कार्यवाही 12.30 बजे तक के लिए स्‍थगित की जाती है।

 

(तदनन्‍तर सदन की बैठक 12.00 बजे 12.30 बजे तक के लिए स्‍थगित हुई।)

 

कैलाश/चौहान  7.3.07  12.30  (1) 1k

 

(समय: 12.30 बजे)

(पुन: समवेत होने पर)

(श्री रामनारायण विश्‍नोई, उपाध्‍यक्ष, पदासीन)

 

श्री उपाध्‍यक्ष: सदन की कार्यवाही 12.45 बजे तक के लिये स्‍थगित की जाती है।

 (तदनन्‍तर सदन की बैठक 12.30 बजे 12.45 बजे तक के लिये स्‍थगित हुई।)

 

ans/usc   12:40  1l  07.03.2007 

 

 

(12:45 बजे)

(पुन: समवेत होने पर)

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

 

विभिन्‍न विषयों पर विचार

पंजाब एवं राजस्‍थान के मध्‍य जल-बंटवारा

 

श्री अध्‍यक्ष: सुबह प्रतिपक्ष की और से एक प्रश्‍न उठाया गया था कि राजस्‍थान सरकार ने, पंजाब के मुख्‍य मंत्री के जो कुछ वक्‍तव्‍य  उन्‍होंने दिये हैं पानी के बारे में, उस बारे में अपना किसी प्रकार का, मुख्‍यमंत्री जी की और से कोई प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त नहीं की। इसलिए अब मुख्‍यमंत्री जी सदन में है, मैं चाहूंगी कि इस बारे में वह अपनी और से कुछ  प्रतिक्रिया दे।(व्‍यवधान) वह कह रही है, फिर आप क्‍या करेंगे। आप चाहे इस विषय में तो बाद में इसको, आप चाहते हैं तो 306 में उठाकर फिर आप चर्चा करना। अब तो मुख्‍यमंत्री जी अपनी प्रतिक्रिया दे रही है।

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,आज प्रश्‍नकाल नहीं चला और सदन की कार्यवाही के अंदर काफी बाधा पहुची है। मैं मानती हूं कि इस हाउस के अंदर हम अपनी समस्‍याओं को एक दूसरे के सामने रखते हैं और उसका समाधान भी दलगत राजनीति से ऊपर उठकर करने की कोशिश करते हैं। यह भी सही है कि 12 जुलाई,2004 के अंदर पंजाब टर्मिनेशनल ऑफ अग्रीमेंट बिल पारित किया गया था पंजाब के अंदर। मैं इसके अंदर खाली एक बात पढ़ना चाहूंगी कि इसके अंदर, पूरा एक्‍ट जिसके ऊपर एक प्रेसीडेंसियल रेफरेंस किया गया है सुप्रीम कोर्ट के अंदर और जिसके अंदर हम लोग बार-बार राजस्‍थान की और से कह  रहे हैं कि अगर स्‍पेशल बैंच भी अगर जरूरत पड़े तो लगा दिया जाए ताकि इसको जल्‍दी से जल्‍दी इसकी हियरिंग हो सके। उस टर्मिनेशल आफ अग्रीमेंट बिल के अंदर क्‍लाज 3 को अगर पढ़ा जाए, जो मैं पढ़ना चाहूंगी आपके सामने   ”Notwithstanding anything contained in any other law for the time being in force, any judgment, decree, and decision of any court, tribunal or authority, the agreement shall be deemed to have been…..” That means all agreements; Ravi Beas etc. जो भी हुए हैं “…shall all be deemed to have been terminated with effect from the respective dates they were executed or made as the case may be.”  Clause  goes further. कहता हैं ki  “Notwithstanding anything contained in any other law for the time being in force, any judgment, decree, order and decision of any court, tribunal, authority, any obligation of the Government of Punjab arising from the agreement shall be deemed to have been fully discharged with effect from the respective dates they were executed or made as the case may be.” And this is a very serious allegation. जो इस अग्रीमेंट के अंदर हुआ था और इसके अगेन्‍स्‍ट हम लोगों ने यहां सर्वसम्‍मत्ति से संकल्‍प लिया था और संकल्‍प लेने के बाद हम लोगों ने प्रधानमंत्री जी से भी बात की, हम लोग उनसे भी मिले और हम लोगों ने अपनी तरफ से जितना भी हो सकता है कोर्ट के अंदर प्रयास करने की कोशिश की है। जैसा मैंने आपको अभी बताया चिट्ठी लिखकर स्‍पेशल बैंच की भी कोशिश की है कि हमारा  यह काम जल्‍दी से जल्‍दी हो जाए । यह चिंता स्‍वाभाविक है । राजस्‍थान के हितों के ऊपर अगर कोई कुठाराघात करता है तो यह आपकी भी चिंता वाजिब है और हमारी भी चिंता है। मैं समझती हूं कि इसके ऊपर हम लोगों को जो कदम उठाने की जरूरत पड़ी है वह हमने उठाया है। तुरंत ही जैसे ही हमारे ध्‍यान में यह बात आई हम लोगों ने, मैंने तो मुख्‍यमंत्री पंजाब से कल ही बात की और उनसे पूछा कि  आपका स्‍टेटमेंट आया है उसके बारे में आप क्‍या कहना चाहेंगे, तो उन्‍होंने मुझे आश्‍वस्‍त किया कि किसी भी तरीके से राजस्‍थान के हितों के ऊपर, जो अग्रीमेंटस हुए हैं कोई कुठाराघात हम लोग नहीं होने देंगे, यह उनहोंने कहा। उसके बावजूद भी क्‍योंकि   डिले हो रहा है  सुप्रीम कोर्ट के अंदर और हमारी बात अभी तक सुनी नहीं जा रही है, हम लोगों ने अपनी एपलीकेशन बनाकर पेश करने की, बहुत ही जल्‍दी हम करने वाले हैं क्‍योंकि हम समझते हैं कि हमारी  भी  एपलीकेशन उसके अंदर लगनी चाहिये, तो हमारी तरफ से कोई कमी, कमजोरी नहीं होने वाली है।

 

दुर्गा/चौहान 070307 1250 1m

 

हम आपको यह आश्‍वस्‍त कर सकते हैं कि राजस्‍थान सरकार पूरी तरह से हमारी प्राब्‍लम और संकट से वाकिफ है और राजस्‍थान के हितों के ऊपर किसी तरह का भी कुठाराघात नहीं होने देंगे। यह मैं आप सबको विश्‍वास दिलाना चाहता हूं। (व्‍यवधान)

मैं तो इतना ही कहना चाहूंगी अध्‍यक्ष महोदय, जिन लोगों ने हमारे हितों के ऊपर कुठाराघात किया है पानी के ऊपर, जिन लोगों ने एग्रीमेंट किये हैं और जिन लोगों ने उस एग्रीमेंट की वजह से राजस्‍थान के हितों को अलग से रखकर रखा है, उनको इसके ऊपर जवाब देना चाहिए कि 8एम ए एफ पानी हमको मिल रहा है, 0.6 एम ए एफ कहां चला गया, उसके बारे में ये भी तो जवाब दें, ऐसे लोग बतायें।

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, पंजाब के मुख्‍य मंत्री प्रकाशसिंहजी बादल ने जो स्‍टेटमेंट दिया और उस पर जो चिन्‍ता मुख्‍य मंत्रीजी ने यहां पर प्रकट की, हम उनसे सहमत हैं। मेरा प्रश्‍न केवल यह है कि यह जो हाउस है सबसे पहले उसकी प्रतिक्रिया यहां होनी चाहिए। एक बात और मैं आपसे कहना चाहूंगा कि यदि उनका जो स्‍टेटमेंट अखबारों में छपा है, क्‍या स्‍टेटमेंट दिया है पता नहीं, जो अखबारों में छपा है उसमें राइपेरियन थ्‍योरी आफ डिस्ट्रिब्‍यूशन आफ वाटर का रेफरेंस दिया है, जिसको कि पानी के बंटवारे के वक्‍त में कई कमीशंस बने, गुलाटी कमीशन बना, कई कमीशन बने, इण्‍डस वाटर ट्रीटी एग्रीमेंट हुआ, 1960 का। और उसमें साफ बताया गया, हिन्‍दुस्‍तान और पाकिस्‍तान के बंटवारे के बारे में, जो तीन नदियां हमारे हिस्‍से में आयी थीं, रावी, व्‍यास और सतलज, उन तीनों नदियों के पानी को एक समय-सीमा के अन्‍दर हमको अपने देश में उपयोग करने के लिये इंतजाम करना चाहिए। वह इंतजाम करने के लिये अगर राइपेरियन थ्‍योरी की बात हम करते हैं तो मैं समझता हूं कि वह उपयोग नहीं हो सकता है। इसलिये कमीशंस ने और जब भी एग्रीमेंट्स हुए, उसमें यह माना कि राजस्‍थान भी इण्‍डस बेसिन का एक पार्ट है  और यहां पर, चूंकि जमीन पर लेवल परमिट करते हैं इसलिये इस पानी को राजस्‍थान को डाइवर्ट करके और राजस्‍थान की सूखी धरती पर पानी पहुंचाया जाना चाहिए। और उसका परिणाम यह है कि यहां इन्दिरा गांधी कैनाल और दूसरे बाँध बने ओर पानी हमारे यहां आया। इसलिये राइपेरियन थ्‍योरी की जो बात उन्‍होंने कही है, टेलीफोन पर आपने, मोटे तौर पर उन्‍होने कह दिया कि आपके हितों पर मैं कुठाराघात नहीं होने दूंगा, यह तो कई बार कहा जा सकता है, यह जबानी कहा है, स्‍टेटमेंट के तौर पर उसको ...।

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): एक मिनट, मैं इतना ही कहना चाहूंगी, जबानी ही नहीं सुना है हमने। हमने उसके साथ-साथ एप्‍लीकेशन भी लगाने की तैयारी कर दी है। हम जबानी नहीं कर रहे हैं इसको। और मैं खाली आपको इसमें यह बताना चाहती हूं, आदरणीय माथुर साहब कि इसमें अगर आप अपने मेनिफेस्‍टो को देख लें, एक मिनट के लिये, अपने पंजाब वाले मेनिफेस्‍टो के पेज 10 के ऊपर अगर आप इतना ही देख लें तो उसमें आपने यह लिखा है कि – “On January 13, 2003, Punjab Government has filed a complaint u/s 3 of the Inter-State Water Disputes Act…” और इसके अन्‍दर you have said that you want to get away from the relief of constructing the canals and everything else that goes with it. And our government has passed the historic Punjab Termination  Act, 2004. यह तो लिखा हुआ है इनका घोषणा पत्र। इस घोषणा पत्र के तहत हम सब लोग कोर्ट में गये, कोर्ट में हम ही नहीं गये, प्रेसीडेंशियल रेफरेंस हुआ कोर्ट के अन्‍दर और मैं यह खाली करना चाहती हूं कि अपन उस मामले में आयें ना कि राजस्‍थान के हितों के ऊपर हम कुठाराघात नहीं होने देंगे। यह हमने पहले भी किया है, आज भी हम लोग कायम हैं।

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): मैं यह नहीं कह रहा हूं कि आप राजस्‍थान के हितों पर कुठाराघात होने देंगी। मैं यह नहीं कह रहा हूं। इसमें हम सब एक हैं और एक सम्‍पूर्ण सकंल्‍प पारित भी किया हुआ है। एक एक्‍ट भी हमने उस प्रकार का बनाया हुआ है। वह एक बहुत महत्‍वपूर्ण बात है जिसको कोई डिनाइ नहीं करता है। मैं तो अख़बार में जो उन्‍होंने राइपेरियन थ्‍योरी आफ डिस्‍ट्रीब्‍यूशन आफ वाटर की जो बात कही है, उस पर एक सीधी प्रतिक्रिया ढंग से आपको देनी चाहिए थी, एक बात तो यह मैं कहना चाहता हूं।

दूसरी बात, आपके वक्‍तव्‍य में भी, आपने अन्तिम जो वाक्‍य कहे और शायद महावीर प्रसादजी ने भी बहुत उत्‍पीड़न ढंग से उसको कहा। मैं कहना चाहता हूं कि 1981 में जो एग्रीमेंट किया, तीन गवर्नमेंट्स ने, उस समय एक मिलियन एकड़ फुट पानी हमको मिलता था और वह 25 साल की जो फ्लो सीरिज थी उसके बेसिस पर हमने कहा कि अब 40 साल की फ्लो सीरिज पर आप पानी का बंटवारा कीजिये। तो 40 साल की फ्लो सीरिज पर जब हिसाब लगाया गया तो राजस्‍थान के हिस्‍से में 8.6 एम ए एफ आया लेकिन उस वक्‍त हमारे पास उस पानी को लेने की क्षमता नहीं थी तो इसलिये कां‍शस डिसीजन था।(व्‍यवधान) 

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): घुटने टेक दिये आपने।

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): सांवरलालजी, आप कुछ भी कह सकते हैं, सांवरलालजी आप मुझे देशद्रोही भी कह सकते हैं। सब कुछ कह सकते हैं।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): मैंने नहीं कहा।

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): नहीं, कहा है। महावीर प्रसादजी ने कहा है।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): मैंने देशद्रोही नहीं कहा। मैंने कहा राजस्‍थान के हितों को यदि किसी ने गिरवी रखा है तो वह शिवचरणजी माथुर ने रखा है। वह 81 के अन्‍दर जो समझौता किया..।

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): मैंने कोई गिरवी नहीं रखा, बिलकुल गलत बात है।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): वह 81 के अन्‍दर जो समझौता किया, घुटने टेक दिये उस समय। राजस्‍थान विधान सभा में मांग करते रहे, आपने उसमें जवाब तक नहीं दिया। उसमें सदस्‍य था। मैंने देखा, आपने बोलने तक नहीं दिया। आपने कोई जवाब नहीं दिया। उस समय आपके मुंह से यह नहीं निकला कि हम राजस्‍थान के हितों की रक्षा करेंगे।

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): मैं उस बात को, क्‍या जवाब नहीं दिया, क्‍या जवाब नहीं दिया, क्‍या जवाब नहीं दिया।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): आपने उस समय यह नहीं कहा कि 0.6 एम ए एफ पानी को हम किसी प्रकार से ....।

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): आप एग्रीमेंट पढ़ लीजिये 81 का।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): मैं प्रोसीडिंग्‍स लाकर पढ़ाता हूं आपको।

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): महावीर प्रसादजी, अगर आप तथ्‍यों को जानना चाहते हैं, 81 का एग्रीमेंट पढ़ लीजिये, एक-एक उसमें..।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री):  माथुर साहब, माफ करना, क्‍यों पत्‍ते खोल रहे हो। उस समय आपकी कुर्सी के पाये हिल रहे थे इसलिये राजस्‍थान का 0.6 एम ए एफ पानी आप छोड़कर आ गये।  आज राजस्‍थान की जनता  गांव-गांव में आपको कोस रही है।

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): कोई हमारी कुर्सी नहीं हिल रही थी।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): गांव-गांव में कोस रहे हैं, 1981 में जो कुछ आपने किया है।

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): दरबारासिंहजी हमारी पार्टी के मुख्‍यमंत्री पंजाब में थे।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप कुर्सी के पायों की बात मत करो। आप पानी की बात करो।

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): इस तरह  की बात कहना मैं समझता हूं कि तथ्‍यों को मुकरना है और खास तौर से आप यदि जिम्‍मेदार व्‍यक्ति, बगैर चीजों को देखे हुए, बेक-ग्राउण्‍ड को समझे हुए, एक जो आपने बात कह दी, मुझे महावीर प्रसादजी कही बात पर, उनकी तो आदत है और मैं समझता हूं, लेकिन आप यदि ऐसी बात कहेंगी।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): मैं सदन में था। सदन में बहस हुई थी, सदन में यह बात तय हो गयी थी फिर 0.6 एम ए एफ पानी की आपने बिल चढ़ाई। इस बात को राजस्‍थान की जनता कभी भी नहीं भूल सकती है, न आपको माफ कर सकती है।

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): इसका तो एक ही उपाय है।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): यह जो अलोकेशन आपने किया, यह आप पढि़ये।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): सुन तो लो। (व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): जिसमें आपने (व्‍यवधान) जिसमें भजनलालजी के, शिवरचरणजी माथुर के और दरबारासिंहजी के हस्‍ताक्षर हैं।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): आप बीच-बीच में ऐसे करेंगे क्‍या। (व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, बीच-बीच में डिस्‍टर्ब करेंगे क्‍या, आप सुन लो बात।

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): आप चीफ व्हिप हैं अपनी पार्टी के। तरीका यह होता है कि एक वयक्ति बोल रहा है और अगर वह यील्‍ड नहीं करता है तो आप उसको डिस्‍टर्ब नहीं कर सकते। हमने तो इसको फालो किया है, लेकिन आगे फालो नहीं होता है तो दुर्भाग्‍यपूर्ण स्थिति है। मैं जो बोल रहा हूं, मेरे बैठने के बाद आप कुछ भी कहिये, बात समझ में आती है। मैं आपको, यह इतना महत्‍वपूर्ण विषय है, अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे सिफारिश करना चाहूंगा कि आप इस पर फुल लेंग्‍थ डिबेट रखियेगा। सन 81 के एग्रीमेंट को भी इसमें आप कीजिये। मेरा निवेदन है आपसे, 81 के एग्रीमेंट पर भी आप डिस्‍कशन कीजिये।

श्री अध्‍यक्ष: हां, डिबेट आप जब चाहें कर लें, वह तो सदन चाहेगा, कभी भी कर ले, डिबेट में क्‍या दिक्‍कत है। (व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): हमें दिक्‍कत नहीं है। हमारे सम्‍बन्‍ध खराब नहीं हों। (व्‍यवधान) राजस्‍थान के हितों पर सब एक हैं। वैसे तो डाकूमेंट हैं। अध्‍यक्ष महोदय, डाकूमेंट हैं, यह डाकूमेंटरी प्रूफ है।

श्री अध्‍यक्ष: तो उस वक्‍त इस में। यदि यह बहस करने को तैयार हैं तो आप जवाब देना। (व्‍यवधान)

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बहस हो चुकी है। राजस्‍थान के सदन में बहस हो गयी और यह तय हो गया था 0.6 एम ए एफ पानी को शिवचरणजी माथुर और तत्‍कालीन सरकार ने छोड़ा। और राजस्‍थान की विधान सभा में हमको बाहर निकाल दिया। बहस नहीं करने दी, यह किया उस समय उन्‍होंने।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): वह एक्‍स्‍ट्रा लिया था। (व्‍यवधान) एक्‍स्‍ट्रा लिया था पानी। (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, भैरोंसिंहजी के नेतृत्‍व में गाड़ी में बैठकर गये थे दिल्‍ली आप। आप क्‍या करके आ गये थे। आपने भी तो यह कहा था, हम सुप्रीम कोर्ट में जाएंगे। मुख्‍य मंत्रीजी तो हाउस में नहीं थीं। हम तो हाउस में थे, आपने प्रोटेस्‍ट किया था। आप गये थे दिल्‍ली में भैरोंसिंहजी के नेतृत्‍व में, आपने कहा, सुप्रीम कोर्ट में जाएंगे। क्‍यों रुके सुप्रीम कोर्ट में जाने से। किसने रोका। (व्‍यवधान) खाली बातें करते हो।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): हम गये और हमने सबको ज्ञापन दिया। (व्‍यवधान) सुप्रीम कोर्ट में सरकार जाती। सुप्रीम कोर्ट में सरकार जाती, सरकार को जाना चाहिए था।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आप सु्प्रीम कोर्ट में जाते। यदि सरकार ने गलत फैसला किया था तो सुप्रीम कोर्ट में जाते। आप उस समय सुप्रीम कोर्ट में नहीं गये। बातें करना चाहते हो आप। (व्‍यवधान)

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): आज सारा राजस्‍थान जानता है कि सारे जितने मामले हैं.. (व्‍यवधान) और कांग्रेस पार्टी जिम्‍मेदार है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आप बिलकुल फैल गये। आपने जनता के साथ धोखा किया। आपने सुप्रीम कोर्ट में जाने के लिये कहा और सुप्रीम कोर्ट में नहीं गये। हम भी सदस्‍य थे, हम भी सदन में थे उस समय। आप लेकर गये थे वहां पहले। (व्‍यवधान) क्‍या कर लिया था आपने।  आपने अपना धर्म निभाया था क्‍या। आपने जनता को कहा था कि हम सुप्रीम कोर्ट में जाएंगे। आपने कहा सुप्रीम कोर्ट में जाएंगे। (व्‍यवधान)

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): हम विपक्ष में थे और हमने विपक्ष की भूमिका निभाई थी। जहां तक राजस्‍थान की जनता का सवाल है, आपको कठघरे में खड़ा करने का काम हमने किया। (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आपकी याददाश्‍त कमजोर है। आपने कहा सुप्रीम कोर्ट में जाएंगे और सुप्रीम कोर्ट में नहीं गये। आपने जनता के साथ धोखा किया और खड़े होकर भाषण दे रहे हैं। (व्‍यवधान) आप बातें कर रहे हो यहां खाम खां। (व्‍यवधान) सुप्रीम कोर्ट में जाने की बात करके गये थे। और सुप्रीम कोर्ट में गये नहीं, भाषण दे रहे हो। (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): इराडी कमीशन में ज्ञापन दिया। (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आपने कहा था, हम सुप्रीम कोर्ट में जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट में नहीं गये। क्‍यों नहीं गये सुप्रीम कोर्ट में। आप जाते सुप्रीम कोर्ट में, क्‍यों नहीं गये सुप्रीम कोर्ट में। (व्‍यवधान)

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): श्रीमती इन्दिरा गांधी के सामने इन्‍होंने घुटने टेके। घुटने टेके राजस्‍थान सरकार ने। (व्‍यवधान)

श्री भागीरथ चौधरी (किशनगढ़): राजस्‍थान के हितों के साथ जिस प्रकार कुठाराघात कांग्रेस पार्टी ने किया.. (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): राजस्‍थान के हितों के साथ जो कुठाराघात किया, वह काला अध्‍याय है जिसको सालों तक राजस्‍थान पढ़ेगा।

 

Vps- usc-07032007-1300-1n

 

वह काला अध्‍याय है जिसको वर्षों तक राजस्‍थान पढ़ेगा। ... (व्‍यवधान)

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (सरकारी उप मुख्‍य सचेतक): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह कहना भी गलत होगा कि हमारे पास केपेसिटी नहीं थी। यह कहना गलत होगा कि हमारे पास केपेसिटी नहीं थी। हमारे पास केपेसिटी थी। 8.6 एम.ए.एफ पानी हम ले सकते थे। केपेसिटी थी हमारे पास। आप देख लीजिए। ... (व्‍यवधान)

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 13 फरवरी को पालिसी एण्‍ड प्रोग्राम प्रक्रिया जारी किया है। शिरोमणि अकाली दल ने और बी.जे.पी. की सरकार ने ... (व्‍यवधान)

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): कल्‍ला साहब, एक मिनट। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आपका प्रश्‍न था ... (व्‍यवधान) 

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): सांवरलालजी, मैं बोल लूं, उसके बाद‍जवाब दे देना। ... (व्‍यवधान)

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): आप बोल लेना। मैं तो आधा मिनट ले रहा हूं। मेरे बाद बोल लेना आप। मेरे बाद बोल लेना आप। प्‍लीज, मैं आधा मिनट ले रहा हूं।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): मेरे बाद बोल लेना आप, प्‍लीज।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप क्‍या चाहते हो? मुख्‍य मंत्रीजी ने दे दिया रिएक्‍शन, अब आप क्‍या चाहते हो? मुख्‍य मंत्रीजी ने अपना रिएक्‍शन दे दिया। अब आप क्‍या चाहते हो?

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): मैं तो आधा मिनट ले रहा हूं। आप भाषण देंगे। मैं भाषण नहीं दूंगा। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: नहीं पहले कल्‍ला साहब खड़े हैं लेकिन मैं कल्‍ला साहब से कहना चाहूंगी कि आपकी डिमांड थी कि मुख्‍य मंत्रीजी ने कोई रिएक्‍शन नहीं दिया। मुख्‍य मंत्रीजी अपना रिएक्‍शन दे दिया और कह दिया कि राजस्‍थान के हितों का पूरा संरक्षण करेंगे और राजस्‍थान के हितों पर कुठाराघात नहीं होने देंगे और क्‍या बताएंगे आप?

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): हां, उसी पर सप्‍लीमैंट्री कर रहा हूं। उसी पर सप्‍लीमैंट्री कर रहा हूं।

श्री अध्‍यक्ष: हां, अब आप और क्‍या बताएंगे?

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): मैं बता रहा हूं। आप विराजिये, एक मिनट।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं मैं तो बैठ जाऊंगी। दो मिनट में ही आप अपनी बात कह दीजिए। दो मिनट में। ... (व्‍यवधान)

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): मैं संक्षेप में बताऊंगा। हां, दो मिनट में।    

  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से सरकार का ध्‍यान पालिसी प्रोग्राम जो 13 फरवरी को पंजाब में जारी हुआ था, उसकी कुछ लाइनें पढ़कर सुनाता हूं। रिवर वाटर इश्‍यू, इसमें यह लिखा हुआ है – “On the river water issue …”

श्री अध्‍यक्ष: प्‍लीज, अगेन आप, दुबारा से, कब हुआ यह?

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): यह पालिसी प्रोग्राम 13 फरवरी, 2007 को जारी किया था।

श्री अध्‍यक्ष: 2000, सन् कौनसा?

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 2007 है।

श्री अध्‍यक्ष: 2007, 13 फरवरी, 2007 ... (व्‍यवधान)

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): यह चुनाव से पहले जारी हुआ था, इसमें लिखा था – “On the river water issue, the Shiromani Akali Dal has always demanded the implementation of the nationally and internationally accepted riparian principle.” और उसके बाद आगे के पेज में यह लिखा हुआ है – “This clause strikes at the very root of the riparian principle completely contradicting the Punjab’s stand i.e. Haryana and Rajasthan are non riparian States.  They have no right to have share in Punjab’s river waters. The SAD-BJP government will take political, legal and constitutional steps to redress the grievous wrong done to the people of the State.” इसी में माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इन्‍होंने साफ ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: सुप्रीम कोर्ट राइपेरियन को थोड़े ही मान रहा है यह स्‍टेट वाले कह रहे हैं न ... (व्‍यवधान)

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): स्‍टेट वाले कह रहे हैं। इन्‍होंने कहा है कि हमारी गवर्नमैंट आएगी तो हम धारा 5 को, मुख्‍य मंत्रीजी ने ... (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): मुख्‍य मंत्रीजी भाषण देने गयी हैं यहां। प्रचार करने गयी हैं इनके लिए ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: यह राइपेरियन थ्‍योरी है क्‍या?

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): मुख्‍य मंत्रीजी ने अभी टर्मिनेशन आफ एग्रीमैंट बिल, ... (व्‍यवधान) 12 जुलाई, 2004 का जिक्र किया है। उसमें यह धारा 3 और 4 का जिक्र किया है लेकिन 5 में यह कहा गया है कि राजस्‍थान को जो पानी मिल रहा है वह मिलता रहेगा। उन्‍होंने तो केवल पाइंट 6 मिलियन एकड फिट पर कुदृष्टि डाली थी। उसमें हम सब लोगों ने साथ दिया और हमने इनसे कहा कि कोई बिल भी लेकर आये लेकिन राजस्‍थान की विधान सभा ने एक मत होकर यह कहा था कि आपको हम प्रशासनिक, विधिक, कोई भी कार्यवाही आप करें, आपको अधिकृत करते हैं लेकिन अफसोस है कि आप शिरोमणि अकाली दल और बी.जे.पी. की वहां पर पॉलिसी प्रोग्राम बनता है और वे कहते हैं कि हम राजस्‍थान में इस धारा 5 में भी टर्मिनेट कर देंगे। खतम कर देंगे। राजस्‍थान को एक बूंद पानी नहीं देंगे।  उसके प्रचार के लिए आप जाती हैं और 3 दिन से हिन्‍दुस्‍तान टाइम्‍स, इंडियन एक्‍सप्रेस, सभी अखबारों में यह छप रहा है कि बादल साहब कह रहे हैं कि मैं धारा 5 को हटाऊंगा और प्रिवियस गवर्नमैंट, जो केन्‍द्र की कांग्रेस रही है और पंजाब की कांग्रेस की गवर्नमैंट ने राजस्‍थान को पानी दिया है, उस पानी के हक को हम नहीं मानते हैं। ... (व्‍यवधान)

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ... (व्‍यवधान)

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): हम इसको नॉन राइपेरियन स्‍टेट मानते हुए पंजाब जो है वह राजस्‍थान को और हरियाणा को पानी नहीं देगा और उसके बाद आप चुप बैठी रहे? मैं जानना चाहता हूं कि आप इस पॉलिसी प्रोग्राम को बड़ा ... (व्‍यवधान)

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ... (व्‍यवधान)

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): मेरे दो प्रश्‍न हैं। दो प्रशनों का जवाब दे दें। एक मिनट। विराजिये, पूरा तो कर लूं। Let me complete first.

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ... (व्‍यवधान)

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक मिनट। क्‍या आपने ... (व्‍यवधान) मेरे को पूरा कर लेने दो। ... (व्‍यवधान)

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ऐसे नहीं चलेगा।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): क्‍या आप राजस्‍थान के हितों के खिलाफ पंजाब में शिरोमणि अकाली दल और आपकी बी.जे.पी. की सरकार ने वहां पर संकल्‍प लिया था कि ... (व्‍यवधान)

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): आप मर्जी आये जो कहते रहे, यह चलेगा नहीं। ऐसे नहीं चलेगा। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो। अंकित नहीं हो।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000 

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): आपको जो कहना है, खड़े होकर ऐसे नहीं कह सकते। नहीं, बिलकुल नहीं कह सकते। जितना कुछ ज्‍यादा ... (व्‍यवधान) जो कांग्रेस पार्टी ने किया है वह तो ... (व्‍यवधान) ऐसे नहीं कह सकते। कहां से आप कह रहे हैं यह? खाली लंग्‍स से बात मनवाना चाहते हैं। ... (व्‍यवधान)

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

श्री अध्‍यक्ष: अब आप विराजिये, सदन की नेता खड़ी हैं। अब आप विराज जाएं, सदन की नेता खड़ी है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): लीडर आफ हाउस खड़ी हैं। ... (व्‍यवधान)

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हाउस अगर यह सोचे, माननीय सदस्‍य अगर यह सोचें कि सिर्फ लंग्‍स पावर से हम राजस्‍थान में अपनी बात मनवा लेंगे तो यह तो काम नहीं होगा। मैं तो यह क्लियरली कहना चाहती हूं कि जो लाइन ली गयी है वह राजस्‍थान की जनता से कोई छिपी तो नहीं है। कोई नयी बात नहीं आयी है इनके सामने। आपने जो रस्‍ता लिया है वह सबके सामने है, कहां आपने पाइंट 6 एम.ए.एफ छोड़ा? कहां आपने कैसे एग्रीमैंट्स किये, वह सब हिस्‍ट्री है और वह सबके सामने है तो कौन गया चुनाव में, कौन नहीं गया चुनाव में, उससे आप कोई अप-टर्न करने वाले नहीं हो क्‍योंकि हम लोग जो बातें करते हैं वह एक्‍चुअली करके दिखाते हैं। हमने अगर पानी लाया तो जिस तरीके से पानी इन तीन सालों में पूरे क्षेत्र के अन्‍दर लगा है वह पिछले सालों में नहीं लगा है। मैं छाती ठोककर कह सकती हूं और वह जब आपने टर्मिनेशन आफ एग्रीमैंट और क्‍या-क्‍या किया वह सब करने के बावजूद हम लोगों ने लाकर यह दिया है और मैं यह कह सकती हूं आपको कि जो स्‍टेप्‍स लेने की जरूरत है वह स्‍टेप्‍स हमने लिये हैं। वह स्‍टेप्‍स हम लेंगे और यहां राजनीति करने से राजस्‍थान की जनता को आप बरगला नहीं सकेंगे। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष:  अंकित नहीं हो।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): 000

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको उस एग्रीमैंट की कुछ लाइने पढ़कर सुनाना चाहता हूं  “Until such time as Rajasthan is in a position to utilise its full share Punjab shall be free to utilise the waters supplied to Rajasthan’s requirements ..” (interruptions) ..

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): 000  

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): यह अपन ने जो समझौता किया है, उसकी लाइनें हैं ... (व्‍यवधान)

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर):  000   

श्री अध्‍यक्ष: गृह मंत्रीजी खड़े हैं। गृह मंत्रीजी।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बहुत अफसोस है कि पाइंट 6 एम.ए.एफ ... (व्‍यवधान) 1981 के समझौते को हमने यहां हाउस में घंटों डिस्‍कस किया था और आपने उस समय जो पाइंट 6 एम.ए.एफ छोड़कर आये, उसी दिन से यह सब राजस्‍थान का अहित प्रारम्‍भ हुआ है। यह सच है। ... (व्‍यवधान)

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): यह बिलकुल गलत है, बिलकुल गलत है। 

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): अपने इस हाउस में घंटों तक इस विषय पर डिस्‍कशन हुआ है। घंटों तक हमने, आपके इस विषय को कि आपने इंदिरा गांधी के प्रेसर के आगे झुक कर आज आप स्‍वीकार करके आये और हमारा हित छोड़ा है आपने और आज आप बड़े हिमायती बन गये। गलती आपने की  और उस गलती का दण्‍ड हमारे माथे लगा रहे हो। आपने जिस प्रकार से गलती की है, राजस्‍थान 1981 के समझौते के कारण से ... (व्‍यवधान) राजस्‍थान धधक रहा है और राजस्‍थान के खेत जल रहे हैं। ... (व्‍यवधान) अगर उसी दिन आप इंदिरा के सामने अपने घुटने नहीं टेकते तो राजस्‍थान को इस स्थिति से बचाया जा सकता था। ... (व्‍यवधान) केवल राजनीतिक दबाव के कारण से आपने पाइंट 6 एम.ए.एफ पानी ... (व्‍यवधान) हमने हाउस में भैरोंसिंहजी के नेतृत्‍व में घंटों तक इस विषय पर चर्चा की थी कि आपने राजस्‍थान की बलि दे दी। उसके बारे में तो आपने उस समय कोई स्‍टेप नहीं उठाये और आज जब आप बड़े ... (व्‍यवधान) हमदर्द बनते हो, राजस्‍थान के। अपने हाथों से राजस्‍थान की बलि चढ़ाकर आये हैं ... (व्‍यवधान) आज आप क्‍या कह रहे हैं ... (व्‍यवधान) लेकिन यह भी बात सच है कि इस पाप के ... (व्‍यवधान) आपने प्रेसर में आकर यह समझौता किया। राजस्‍थान आज तक भुगत रहा है। घंटों तक आपसे इस विषय पर चर्चा की थी। भैरोंसिंहजी ने यहां बैठकर जैसे ही समझौता करके आप लोटे थे, तब भैरोंसिंहजी ने कहा कि केवल इंदिरा को खुश करने के लिए, राजगद्दी बचाये रखने के लिए पाइंट 6 एम.ए.एफ. पानी राजस्‍थान को ... (व्‍यवधान) माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वह सारी प्रोसीडिंग्‍स निकाली जाए। उस दिन की प्रोसीडिंग्‍स में सब लिखा है। सब माननीय सदस्‍यों को वितरित की जाए वह। हर मैम्‍बर इस बारे में सोचेगा कि वास्‍तव में चर्चा क्‍या हुई थी ताकि बेनकाब हो सके।  क्‍या आप ... (व्‍यवधान) मैं आपसे प्रार्थना करता हूं कि उस दिन की चर्चा ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): उस दिन की चर्चा जो 1981 में समझौते के बाद जो चर्चा हाउस में हुई थी उसकी प्रोसीडिंग्‍स निकाल कर सभी माननीय सदस्‍यों को दी जाए।

 

शिव/चौहान/13.10/1o/7.3.2007(1)

                   

 

कि 81 के समझौते पर इस सदन में क्‍या चर्चा हुई थी और उसका कौन दोषी था, उसका सही पता लगेगा आपको। ..(व्‍यवधान)...

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): मैं मांग करता हूं 81 के बाद में इस पर जितनी बहस हुई है ..(व्‍यवधान)... एक मिनट, मेरे पर सीधी बात कही गयी है। ..(व्‍यवधान)... मेरे पर आक्षेप लगाया गया है ..(व्‍यवधान)... मुझे अधिकार है..(व्‍यवधान)...

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): माथुर साहब, आप एक मिनट बिराजें। ..(व्‍यवधान)... आप दोनों की बातों का ही जवाब ..(व्‍यवधान)...

श्री विष्‍णु मोदी (मसूदा): To keep the record straight कि कांग्रेस ने इस पानी को लेकर इस राजस्‍थान के हितों पर कुठाराघात किया है और वसुन्‍धरा राजे की सरकार ने, भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने पिछले तीन साल में अथक प्रयास करके ..(व्‍यवधान)...

श्री जुबेर खान (रामगढ़): यहां के संकल्‍प का मजाक उड़ाया है। इस सदन में जो संकल्‍प पारित कर दिया, मुख्‍य मंत्रीजी को अधिकृत कर दिया उसके बाद पंजाब जाकर उनके लिये वोट मांगना, इस सदन का अपमान है। ..(व्‍यवधान)...

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, यह सारा मामला..(व्‍यवधान)...

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): मेरी बात कहने का मुझे अधिकार है। ..(व्‍यवधान)... मेरी बात कहने का मुझे अधिकार है। ..(व्‍यवधान)...

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): आपको अधिकार है, पर सरकार का जवाब सुनने की सहन शक्ति भी आपके पास होनी चाहिये। ..(व्‍यवधान)...

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): थोड़ा वरिष्‍ठता का तो ध्‍यान रखो। ..(व्‍यवधान)...

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): केवल अधिकार ही नहीं, अपनी जिम्‍मेदारी और दायित्‍व भी बनता है। ..(व्‍यवधान)...

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): थोड़ा ध्‍यान रखो, कामनसेंस एप्‍लाई करो। यह तरीका नहीं है। ..(व्‍यवधान)... आप थोड़ा वरिष्‍ठता का ध्‍यान रखो। ..(व्‍यवधान)... सीनियर मैम्‍बर खड़े हैं। ऐज की दृष्टि से, सभी दृष्टि से सीनियर हैं ।..(व्‍यवधान)...

एक माननीय सदस्‍य : वह तो बोल रहे हैं, आप क्‍यों खड़े हैं ? ..(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: आप पहले मा‍थुर साहब को कह लेने दीजिये ।..(व्‍यवधान)... पूर्व मुख्‍य मंत्री बोल रहे हैं। ..(व्‍यवधान)... पूर्व मुख्‍य मंत्री बोल रहे हैं, सुन लो इनको। ..(व्‍यवधान)...

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): 26 साल उस समझौते को हो गये और उसमें बहुत बहस हुई है। मैं कटारिया जी से चाहूंगा उस सारी बहस को यहां पर देख लें। इस पर फुल-डे डिबेट रख लीजिये। ..(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: आप बोलने दें उन्‍हें। आपको भी मौका मिलेगा इनके बाद। ..(व्‍यवधान)...

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): एक बात, सीरियस चार्ज कटारिया जी ने लगाया और खास तौर से मुख्‍य मंत्रीजी ने लगाया है। मैं कहना चाहूंगा आपने कहा 81 के बाद कई बार बहस हुई । उन सब बहस के आधार पर एक लम्‍बी चर्चा यहां पर रख लीजियेगा। 26 साल उस एग्रीमेंट को हो गये It has stood the test of time. और उसके बाद 81 के बाद दो बार दस साल तो हमारी गवर्नमेंट उसके बाद आई है उसके बाद फिर गवर्नमेंट आई है। लेकिन जिस प्रकार का चार्ज यहां पर लगाया गया, खास तौर से मुख्‍य मंत्रीजी ने कहा है। मैं चाहूंगा कि आप पूरे दिन की बहस इस पर रखियेयगा ताकि सब बात साफ हो सके। यहां पर यह बात कहना कहां तक उचित है। 8.06 की बात कही गयी है । ..(व्‍यवधान)... मैं तो कम से कम इसको बहुत हर्ट फील करता हूं। आपसे निवेदन करूंगा इस पाइंट पर हमें यहां नहीं बैठना चाहिये। ..(व्‍यवधान)...

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): अध्‍यक्ष महोदय, आपकी परमिशन हो तो मैं बोल लूं। ..(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: हां, आप भी बोल लीजिये। ..(व्‍यवधान)...

श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, जिस तरह से संकल्‍प की धज्जियां राजस्‍थान के मुख्‍य मंत्री ने पंजाब जाकर भारतीय जनता पार्टी और अकाली दल ..(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो। ..(व्‍यवधान)...

(घोर व्‍यवधान व प्रतिपक्ष द्वारा नारेबाजी)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 000

श्री लक्ष्‍मी नारायण दवे : 000

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

श्री मदन दिलावर : 000

श्री अमराराम(धोद): 000

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ : 000

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी : 000

डॉ0 बुलाकीदास कल्‍ला : 000

श्री गुलाबचन्‍द कटारिया : 000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ : 000

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 000

श्री मदन दिलावर : 000

श्री ओ.पी.महेन्‍द्रा : 000

श्री कनकमल कटारा : 000

श्री अमराराम :  000

श्री मदन राठौड़ : 000

श्री श्रवण कुमार : 000

श्री अध्‍यक्ष : माननीय सदस्‍यगण, ..(व्‍यवधान)... प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यगण, आप हाउस को चलाना चाहते हैं कि नहीं ? ..(व्‍यवधान)...

( प्रतिपक्ष के सदस्‍यों द्वारा नारेबाजी )

श्री गुलाबचन्‍द कटारिया : 000

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 000

श्री अध्‍यक्ष : माननीय सदस्‍यगण, ..(व्‍यवधान)... सत्‍ता पक्ष के माननीय सदस्‍यगण , ..(व्‍यवधान)... माननीय गृह मंत्रीजी, आप ज्‍यादा उत्‍तेजित नहीं हों। ..(व्‍यवधान)... माननीय गृह मंत्रीजी, ज्‍यादा उत्‍तेजित नहीं होवें। ..(व्‍यवधान)... क्‍या प्रतिपक्ष का इरादा सदन को चलाने का नहीं हैं ? ..(व्‍यवधान)... क्‍या प्रतिपक्ष का इरादा सदन को चलाने का नहीं है ? ..(व्‍यवधान)...

डॉ; बुलाकीदास कल्‍ला :  000

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 000

श्री अमराराम : 000

श्री अध्‍यक्ष: नेता प्रतिपक्ष, मैं आपसे पूछ रही हूं क्‍या आपका इरादा सदन को आगे चलने देने का नहीं है ? प्‍लीज, सिट डाउन । ..(व्‍यवधान)...

श्री अमराराम : 000

श्री अध्‍यक्ष : आपका इरादा सदन को चलाने का है ? ..(व्‍यवधान)... क्या आपका इरादा है कि सदन चले ? ..(व्‍यवधान)...

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 000

श्री अध्‍यक्ष: आपके नेता खड़े हैं और आप सब लोग खड़े हैं। प्‍लीज सिट डाउन।..(व्‍यवधान)... नेता प्रतिपक्ष, ..(व्‍यवधान)... नेता नहीं मानते क्‍या इनको ? डरा दिया सी.पी.जोशी ने और नेता बैठ गये।

सदन की कार्यवाही 2.00 बजे तक के लिये स्‍थगित की जाती है।

(तत्‍पश्‍चात् सदन की बैठक 13.18 बजे 14.00 बजे तक के लिये स्‍थगित हुई।)

 

msr/usc/2c/1400/07032007

 

(पुन: समवेत होने पर)

(14.00 बजे)

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

 

विभिन्‍न विषयों पर विचार

पंजाब एवं राजस्‍थान के मध्‍य जल-बंटवारा

 

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): जिंदाबाद, जिंदाबाद, आइये। ...(व्‍यवधान)... 

श्री अध्‍यक्ष: मैं चाहती हूं।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपकी अध्‍यक्षता में जो संकल्‍प पारित कर के मुख्‍यमंत्री, राजस्‍थान को अधिकृत किया था कि राजस्‍थान की जनता के पानी के लिए आपको वैधानिक और एग्जिक्‍युटिव, सारी पावर दी जाती है और उस मुख्‍यमंत्री की मौजूदगी में पंजाब के मुख्‍यमंत्री शपथ समारोह में कहते हैं राजस्‍थान को पानी नहीं देंगे और मुख्‍यमंत्री वहां चुप बैठी रहें, यह सदन के संकल्‍प का विरोध है, अपमान है ...(व्‍यवधान)...

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों से निवेदन करना चाहता हूं ...(व्‍यवधान)...

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप लोग किसी मुद्दे को रखते हो तो उसका जवाब सुनने का माद्दा भी रखिये अपने आप में। ...(व्‍यवधान)...

श्री जुबेर खान (रामगढ़): संकल्‍प जो सदन ने पारित किया उसका अपमान मुख्‍यमंत्री ने किया है। ...(व्‍यवधान)...

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुख्‍यमंत्रीजी ने सारी स्थिति स्‍पष्‍ट कर दी। ...(व्‍यवधान)...

श्री जुबेर खान (रामगढ़): मुख्‍यमंत्रीजी की मौजूदगी में राजस्‍थान को पानी नहीं देने की बात ...(व्‍यवधान)... और मुख्‍यमंत्री वहां कुछ नहीं बोलें।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान को पानी नहीं देने की बात, यह फोटो छप रही है सोनिया गांधी की। ...(व्‍यवधान)...

श्री जुबेर खान (रामगढ़): यह इस सदन के संकल्‍प का अपमान है। ...(व्‍यवधान)...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): सोनिया गांधी की फोटो देखो। यह प्रधानमंत्री की फोटो, यह प्रधानमंत्री क्‍या कह रहे हैं आपके?

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): यह सोनिया और मनमोहन सिंहजी की फोटो, इसको सुन लीजिए और इसमें से पढ़ कर मैं सुनाता हूं ...(व्‍यवधान)... इसको पढि़ये, इसको, थोड़ी-बहुत नैतिकता रखिये, राजस्‍थान की जनता को जवाब देना पड़ेगा, केवल बातें करने से कुछ नहीं होगा, जो हकीकत है उसको सुनिये आप। ...(व्‍यवधान)...

श्री जुबेर खान (रामगढ़): यह संकल्‍प का अपमान है, संकल्‍प के विरुद्ध में इस सरकार की मुख्‍यमंत्री ने काम किया है।  ...(व्‍यवधान)...

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): जिस पार्टी का चुनाव प्रचार करने प्रधानमंत्री और कांग्रेस की राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष, सोनिया गांधी गयी हैं उसका आप छुटभैया मेरी बात सुनिये, आप इसको पढ़ें, आप देख लीजिए ...(व्‍यवधान)...

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): इसको पढ़ के देखो, यह कहते हैं “Haryana and Rajasthan are not Riperian States. They are…..” (Interruptions)

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): ……Punjab Agreement Act, 2004 on July 1, (Interruptions)

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री):   000

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

( कांग्रेस के माननीय सदस्‍यों द्वारा नारेबाजी )

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): 000

श्री कालूलाल गुर्जर  (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री): 000

( व्‍यवस्‍था सूचक घण्‍टी )

श्री हीरालाल (निवाई):  000

श्री धर्मेन्‍द्र कुमार मोची (टिब्बी): 000

श्री राकेश मेघवाल (परबतसर): 000

श्री लालचन्‍द कटारिया (आमेर): 000

( कांग्रेस के माननीय सदस्‍यों द्वारा लगातार नारेबाजी )

( भारतीय जनता पार्टी के माननीय सदस्‍यों द्वारा नारेबाजी )

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण। माननीय सदस्‍यगण। आपसे जनता को बहुत अपेक्षाएं हैं, आपको जनता ने अपनी आवाज उठाने के लिए और जन समस्‍याओं के निराकरण के लिए भेजा था।

( माननीय सदस्‍यों द्वारा लगातार नारेबाजी )

आप जब से सत्र शुरू हुआ है तब से इसी प्रकार हाय-हाय लगा रहे हैं। जनता देख रही है और सुन रही है। आप राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण पर सरकार को कटघरे में नहीं खड़ा करना चाहते? क्‍या आपके पास बोलने के लिए कुछ नहीं है कि आप इस तरीके से नारे लगा रहे हैं?

आपको चाहिए सकारात्‍मक बहस करें। आप सकारात्‍मक बहस करें ताकि समस्‍याओं का निराकरण हो सके।

यदि आप सदन नहीं चलाना चाहते हैं तो सदन की कार्यवाही तीन बजे तक के लिए स्‍थगित की जाती है।

(तदनन्‍तर सदन की बैठक 14.06 बजे, 15.00 बजे तक के लिए स्‍थगित हुई)

 

Ars/usc/1500/2j/07032007/1

 

(1500 बजे)

(पुन: समवेत् होने पर)

(श्री रामनारायण विश्‍नोई, उपाध्‍यक्ष, पदासीन)

 

श्री उपाध्‍यक्ष:  विपक्ष की मंशा नहीं दिखती है चलाने की । सदन की कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्‍थगित की जाती है।

(तदनन्‍तर सदन की बैठक 15.00 बजे 15.30 बजे तक के लिए स्‍थगित हुई।)


vns/usc/15.30/2m/7.3.2007

 

 

(15.30 बजे)

(पुन: समवेत् होने पर)

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

 

निलम्‍बन निरस्‍तीकरण

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा के निलम्‍बन की समाप्ति

 

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): प्रक्रिया के नियम 292(2) के अन्‍तर्गत प्रस्‍ताव।

माननीय महोदय, दिनांक 1 मार्च, 2007 को सदन द्वारा प्रस्‍ताव पारित किया गया जिसमें श्री रणवीर सिंह (गुढ़ा), सदस्‍य, राजस्‍थान विधान सभा को आसन के निर्देशों की लगातार अवहेलना करने, महामहिम राज्‍यपाल के संवैधानिक पद की मर्यादाओं एवं इस सदन की स्‍वस्‍थ परम्‍पराओं का उल्‍लंघन करते हुए लगातार हो-हल्‍ला, नारेबाजी एवं अमर्यादित आचरण करने के कारण वर्तमान सत्र की शेष अवधि के लिये निलम्बित किया गया था।

राजस्‍थान विधान सभा की उच्‍च और गौरवशाली संसदीय परम्‍पराएं रही हैं। लेकिन महामहिम राज्‍यपाल के बजट अभिभाषण के समय सदन में जो कुछ हुआ उससे महामहिम राज्‍यपाल, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सदन के नेता सहित सम्‍पूर्ण सदन के सदस्‍य काफी आहत हुए हैं। पक्ष और विपक्ष के मध्‍य सौहार्द्रपूर्ण वातावरण बना रहे, यह सदन जन आकांक्षाओं के अनुरूप कार्य करे और इस सदन की गौरवशाली परम्‍पराएं अक्षुण्‍ण बनी रहें इस हेतु मैं प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत करता हूं कि माननीय सदस्‍य श्री रणवीर सिंह गुढ़ा द्वारा खेद व्‍यक्‍त करने पर उनका निलम्‍बन प्रक्रिया के नियम 292(2) के परन्‍तुक के अन्‍तर्गत अब तक के निलम्‍बन को पर्याप्‍त मानते हुए सदन द्वारा यह संकल्‍प किये जाने के बाद तत्‍काल प्रभाव से समाप्‍त किया जाय।

श्री अध्‍यक्ष: गुढ़ा को बुलाया जाय इस सदन में। गुढ़ा सदन में आएं।

श्री अमराराम (धोद): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुख्‍य सचेतक महोदय जो प्रस्‍ताव लेकर आये हैं और वह प्रस्‍ताव जो 5 तारीख को लेकर आये थे उससे एक शब्‍द मैं समझता हूं भिन्‍न रूप से आपने रखा है। उसमें खेद का नहीं था, अफसोस का था तो अफसोस होना चाहिये।

श्री अध्‍यक्ष: खेद और अफसोस में कोई अंतर है क्‍या ? खेद और अफसोस में कोई अंतर है ? खेद का मतलब भी वही है। अफसोस का मतलब भी वही है।

श्री अमराराम (धोद): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जब चारों के लिये यह बात आयी थी तो अफसोस उसमें ही रखा था।

श्री अध्‍यक्ष: खेद और अफसोस दानों एक ही बात हैं। खेद में, अफसोस में कोई अंतर नहीं है। माननीय गुढ़ा।

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राज्‍यपाल के अभिभाषण के दौरान जो भी घटनाक्रम हुआ उसके लिये सदन के नेता ने, प्रतिपक्ष के नेता ने और हमारे अमराराम जी (धोद), सुरेश जी मीणा, मुरारी जी ने जो अपने विचार प्रकट किये थे मैं उससे सहमत हूं।

श्री अध्‍यक्ष: यह क्‍या हुआ ? यह क्‍या बात हुई ? आपको अपने कृत्‍य पर काई अफसोस नहीं है ?

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): पूरे सदन को ही अफसोस है। मुझे भी अफसोस है।

श्री अध्‍यक्ष: प्रश्‍न यह है कि सरकारी मुख्‍य सचेतक महोदय ने जो प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत किया है, उसे स्‍वीकार किया जाय ?

(स्‍वीकृत)

प्रस्‍ताव स्‍वीकार किया गया।

अब मैं आज के जीरो आवर के स्‍थगन प्रस्‍ताव, प्रक्रिया के नियम 295 के अन्‍तर्गत चर्चा और परची के माध्‍यम से उठाये जाने वाले जो विषय थे उनको कल के लिये, चूंकि राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण पर प्रतिपक्ष भी अपनी बात रखना चाहेगा, सत्‍ता पक्ष के लोग भी कुछ बोलना चाहेंगे और ज्‍यादा से ज्‍यादा 5.30 बजे का कह रही हैं मुख्‍यमंत्री जी लेकिन 6.00 बजे से अधिक देर से नहीं। उन्‍हें आगे भी तैयारी करनी है बजट की तो 6.00 बजे का केवल हमारे पास समय है आज का इसलिये मैं आज के जीरो आवर को कल के लिये छोड़ रही हूं कि उनको मौका मिलेगा अपनी बात कहने का। जीरो आवर का, जीरो आवर का केवल। जीरो आवर था। जिसमें यह तीनों बातें स्‍थगन प्रस्‍ताव, प्रक्रिया के नियम 295 और परची, यह कल के लिये ले ली जायेंगी। अब मैं राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण पर...

श्री शिवचरण माथुर (माण्‍डलगढ़): जो इश्‍यु आज सदन के सामने है मैं समझता हूं कि अभी जो बातचीत हुई उस हिसाब से मुख्‍यमंत्री जी अपना कुछ वक्‍तव्‍य दे दें तो उसके बाद कोई बात हो।

श्री अध्‍यक्ष: मुख्‍यमंत्री जी।

विभिन्‍न विषयों पर विचार

पंजाब एवं राजस्‍थान के मध्‍य जल-बंटवारा

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, कुछ दिन पहले हम लोगों ने मिलकर एक संकल्‍प पास किया था हाउस के अन्‍दर जिसमें राजस्‍थान के पानी के ऊपर आधारित संकल्‍प था। मैं आज भी सब लोगों को कहना चाहती हूं क्‍योंकि काफी व्‍यवधान भी हो चुका लेकिन मैं सबको यह आश्‍वस्‍त करना चाहूंगी कि राजस्‍थान के हितों के लिये जितना पक्ष चिंतित है उतना मैं मानती हूं कि विपक्ष भी चिंतित है और इसलिये जो भी हम लोगों ने उस संकल्‍प के अन्‍दर बात रखी थी वह तो हम बात फिर दोहराते हुए आप लोगों को यह कहना चाहते हैं चाहे कोई भी सरकार आए, चाहे वह कोई भी बात रखे, हम सब कृत संकल्‍प हैं राजस्‍थान के हितों के ऊपर किसी भी तरीके से कुठाराघात नहीं होने देंगे।

श्री अध्‍यक्ष: याचिकाओं का उपस्‍थापन। श्रीमती प्रतिभा सिंह।

याचिकाओं का उपस्‍थापन

श्रीमती प्रतिभा सिंह (नवलगढ़): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  मैं निम्‍नलिखित याचिकाओं का उपस्‍थापन करती हूं:-

विधान सभा क्षेत्र नवलगढ़ से कोलसिया तक सड़क की मरम्‍मत करवाने बाबत,

विधान सभा क्षेत्र नवलगढ़ के ग्राम नवलड़ी में धावड़ा की ढाणी ग्राम जाजडिया की ढाणी एवं ग्राम गढ़वालों की ढाणी में नया ट्यूबवैल एवं पानी की टंकी का निर्माण करवाने बाबत, एवं

विधान सभा क्षेत्र नवलगढ़ में मुकन्‍दगढ़ से जेजूसर वाया सोरकरा नयी डामर सड़क स्‍वीकृत कराने बाबत।

श्री अध्‍यक्ष: आपको कुछ बोलना था ? आप कहेंगे इस बारे में ? 

ठीक है, आपने रख दी। उपस्‍थापित कर दी आपने।

श्रीमती प्रतिभा सिंह (नवलगढ़): ठीक है। थैंक यू।

श्री अध्‍यक्ष: आप बोल दें।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): क्‍या कहूं ? फरमाओ आप। 

श्री अध्‍यक्ष: मुख्‍यमंत्री जी ने राजस्‍थान के हितों के प्रोटक्‍शन के लिये जो कुछ संकल्‍प के जरिये आपसे अपेक्षा की है उनका साथ देने के लिये यह फरमा दें आप तो।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, यह रहस्‍योदघाटन हो गया हरेक चीज प्रतिपक्ष के नेता आपसे पूछकर ही करते हैं। आपसे पूछा है क्‍या कहूं। अब आप बता दें उनको क्‍या कहें।

विभिन्‍न विषयों पर विचार

पंजाब एवं राजस्‍थान के मध्‍य जल-बंटवारा

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): बता दिया ना। माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  आज जो सदन में समस्‍या उत्‍पन्‍न हुई और हाउस के अन्‍दर काम नहीं हुआ। एक तरह से सारा काम ठप्‍प हो गया, यह तो एक दुःख का विषय है। इस पर विचार-विमर्श करके और यह तरीका निकाला है कि जो उत्‍तेजना भड़की है आज वह कौनसे अख़बार में क्‍या आया है मैंने तो नहीं पढ़ा लेकिन हमारी पार्टी के लोग कह रहे हैं कि उसके अन्‍दर ... (व्‍यवधान) 

श्री अध्‍यक्ष: हंसे नहीं। प्‍लीज चुप रहें। बैठे नहीं बोले। माननीय प्रतिपक्ष के नेता को सुनें।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मैंने तो उसको नहीं पढ़ा लेकिन बता रहे हैं कि बादल साहब ने कुछ स्‍टेटमेंट ऐसा दिया है कि एक बूंद पानी मैं राजस्‍थान को नहीं दूंगा। तो मैं तो कहता हूं कि वह बादल साहब आकाश सिंह भी बन जाएं तब भी राजस्‍थान का हिस्‍सा यह उनकी ताकत नहीं कि वह काट लें। नहीं काट सकेंगे। एग्रीमेंट किया हुआ है। इतने स्‍वतन्‍त्र नहीं है स्‍टेटस इंडिया में कि वह मर्जी आवे जैसा कर लेंगे। क्‍या फिर गृह युद्ध होगा राजस्‍थान और पंजाब के बीच में पानी पर और केन्‍द्र ऐसा होने देगा ? कोई कल्‍पना की ही बात नहीं है यह। क्‍यों ऐसी खबर उछाली है मीडिया ने ? क्‍यों उछाली है ? यह बात मेरी समझ में नहीं आती और वास्‍तव में उन्‍होंने बादल साहब ने ऐसा कह दिया तो बड़े अफसोस की बात है कि पंजाब के लोगों ने उनको मुख्‍यमंत्री बना दिया।

 

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श्री अध्‍यक्ष: अब आप बीच में नहीं। बीच में नहीं बोलें।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): इस तरह की बचकानी बात करने वाले लोग मुख्‍य मंत्री हैं और लिखा है कि चार बार, अबकी पांच बार बन गये तो यह तो भगवान का फख्र है। माननीय मुख्‍य मंत्री जी ने, हमने जो संकल्‍प पास किया था इस विधान सभा के अन्‍दर, उस संकल्‍प को आपने दोहराया है और उस संकल्‍प को आपने इन शब्‍दों में कह कर कि आप पूरी रक्षा करेंगे, हमें विश्‍वास है कि आप इसके अन्‍दर कोई कमी नहीं आने देंगी।

श्री अध्‍यक्ष: यदि आपका सहयोग हो।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): और मुझे भी विश्‍वास है कि आप कोई कमी नहीं आने देंगी। तो हम इस मामले में, पानी के मामले में पूरा सदन एक है। हमसे जितना सहयोग होगा, हम पूरा सहयोग करेंगे। आप मजबूती के साथ जैसा आपने कहा है, इसी मजबूती के साथ आपको रहना होगा। आप कृपा करके बादल से टेलीफोन पर बात करें और उनको कहें कि राजस्‍थान के अन्‍दर विप्‍लव हो रहा है, यह आप क्‍या बोल गये। इन्‍हीं शब्‍दों को आप उनको कहिये कि राजस्‍थान में विप्‍लव हो रहा है।

श्री अध्‍यक्ष: विप्‍लव मतलब विद्रोह।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आंदोलन से भी ज्‍यादा हो रहा है, विप्‍लव हो रहा है किसानों में। इससे सारी समस्‍या हो जाएगी। पीने के पानी की समस्‍या हो जाएगी। खेती की ही बात नहीं, पीने के पानी की भी समस्‍या हो जाएगी। तो आपने यह क्‍या कह दिया, इसका थोड़ा स्‍पष्‍टीकरण जारी करो आप, आपको यह बात फरमानी चाहिए, कहनी चाहिए। अध्‍यक्ष महोदय, इन्‍हीं शब्‍दों के साथ मैं आपका धन्‍यवाद करता हूं कि आपने मुझे बोलने के लिए दो मिनट दिये।

श्री अध्‍यक्ष: श्री रामनारायण मीणा याचिका का उपस्‍थापन करेंगे।

याचिकाओं का उपस्‍थापन

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं दुगारी बाँध (जिला बूंदी) की चेन संख्‍या 84 से ग्राम लक्ष्‍मीपुरा के माल की ओर 3 कि.मी. छोटी माइनर (धोरे) का निर्माण कराये जाने बाबत् पांच व्‍यक्तियों द्वारा हस्‍ताक्षरित याचिका का उपस्‍थापन करता हूं।

धन्‍यवाद प्रस्‍ताव पर वाद-विवाद

श्री अध्‍यक्ष: राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण पर वाद-विवाद। डाक्‍टर चन्‍द्रशेखर बैद।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण पर जो प्रस्‍ताव रखा गया उसके विरोध में मैं कुछ कहने खड़ा हुआ हूं।

सर्वप्रथम मैं राज्‍यपाल के अभिभाषण के पैरा नम्‍बर दो पर जो राज्‍यपाल साहब से यह कहलवाया गया कि कुशल वित्‍तीय प्रबन्‍धन, शुरू से लेकर के पिछले तीन साल से अलग-अलग सभाओं में, नेशनल हो चाहे इंटरनेशनल हो, माननीय मुख्‍य मंत्री जी एक शब्‍द को अपने साथ चिपकाकर रखना चाहती हैं, कुशल वित्‍तीय प्रबन्‍धन। मैं इसी बारे में आपको यह कहना चाहूंगा कि यह कुशल वित्‍तीय प्रबन्‍धन कहने का क्‍या अभिप्राय है और कुशल वित्‍तीय प्रबन्‍धन कह कर के राजस्‍थान की जनता को आज क्‍या मिला है? कुशल वित्‍तीय प्रबन्‍धन के बारे में पिछले तीन साल के अन्‍दर जैसा कि पैरा नम्‍बर दो में कहा गया कि 22853 करोड़ रुपये पिछले तीन साल में 10वीं पंचवर्षीय योजना के अन्‍दर खर्च किये जाने की संभावना है। साथ ही में पैरा नम्‍बर तीन के अन्‍दर यह कहा गया कि 68422 करोड़ रुपये की नई 11वीं पंचवर्षीय योजना की शुरूआत की जाएगी जो कि राजस्‍थान के इतिहास में सबसे बड़ी योजना होगी। इसी के साथ ही यह भी उसमें मेंशन किया गया कि 2007-08 जो कि 11वीं पंचवर्षीय योजना का प्रथम वर्ष होगा, उसके अन्‍दर 11,638 करोड़ रुपये खर्च किये जाएंगे। मैं यह जानना चाहता हूं सरकार से और माननीय वित्‍त मंत्री, मुख्‍य मंत्री जी से कि इसका सोर्स ऑफ फाइनेंस क्‍या होगा? क्‍या आप ऋण लेकर के इतनी बड़ी कार्य योजना बनाने जा रहे हैं? इससे राजस्‍थान की जनता के ऊपर ऋण का बोझ बढ़ेगा, कर का भार बढ़ेगा। जैसा कि अभी तक वर्तमान सरकार यह दावा भी करती आई है और सत्‍य भी है कि आपकी जो रेवेन्‍यू जनरेशन ग्रोथ है उसके अन्‍दर 22 से 25 प्रतिशत की लगातार बढ़ोतरी हुई है। क्‍या राजस्‍थान की जनता को यह जानने का अधिकार नहीं है कि इस इतनी बड़ी योजना के अन्‍दर जो योजना 68,422 करोड़ की राजस्‍थान सरकार ने बनाई, उस कार्य योजना के अन्‍दर इस बढ़े हुए रेवेन्‍यू ग्रोथ का कितना हिस्‍सा उसमें शामिल किया जाएगा या सारा का सारा बोझ, लोन लेकर के यह कार्य योजना बनाई गई है? अब आप यह देखें, अपने संसाधनों से इसके अन्‍दर कितना कंट्रीब्‍यूशन होगा यह राजस्‍थान की जनता और यह पवित्र सदन जानना चाहता है। साथ में इतनी बड़ी कार्य योजना, 32 जिले और एक बार बीच में कोई अन-कांस्‍टीट्यूशनल अथोरिटी ने यह भी कहा कि हर जिले की अलग कार्य योजना बनेगी, हर जिले के बारे में अलग से निर्णय होगा तो एक तो उनको इसको कहने का कोई अधिकार नहीं था और दूसरा, जब इतनी बड़ी योजना बन रही है तो पूरे सदन के अन्‍दर 200 विधायक हैं, 200 विधान सभा क्षेत्र हैं, क्‍या यह इन विधायकों से जानने का प्रयास किया गया कि आपके क्षेत्र की क्‍या समस्‍याएं हैं, आपके क्षेत्र की समस्‍याओं में प्राथमिकता क्‍या? कौनसी योजना का पहले और कौनसी योजना को बाद में इसमें शरीक किया जाए? सदन को कान्‍फीडेंस में नहीं लिया गया और जैसा कि पिछले कुछ दिनों में विगत हुआ कि मंत्रिमण्‍डल के सदस्‍यों को भी पूर्णतया विश्‍वास में नहीं लेकर के इतनी बड़ी कार्य योजना राज्‍य सरकार बनाने जा रही है जो कि डेमोक्रेटिक नहीं है। डेमोक्रेटिक तरीके से सासरे सदन को राजनीति से ऊपर उठकर के विश्‍वास में लेकर के इतनी बड़ी योजना बनाई जाए तो सफलतापूर्वक आगे आने वाले समय में राजस्‍थान की गरीब जनता की सही रूप से, सुचारू रूप से सेवा की जा सकती है। हम यह क्‍या मानें कि माननीय मुख्‍य मंत्री जी 2-3 अन-कांस्‍टीट्यूशनल अथोरिटी को साथ में लेकर के और फिर इतनी बड़ी योजना राजस्‍थान की जनता के लिए अगले आने वाले पांच साल के लिए बनायेंगी जो कि उचित नहीं है। 1 दिसम्‍बर, 1998-99 को जब पहली बार कांग्रेस का राज आया राजस्‍थान के अन्‍दर तो राजस्‍थान के ऊपर कर्ज था 26 हजार करोड़ रुपये और जब पांच साल बाद कांग्रेस का राज था तो कर्ज था 48 हजार करोड़ रुपये। मैं एक दिसम्‍बर की बात कर रहा हूं, मार्च की बात नहीं कर रहा हूं। 31 मार्च 2007 को राजस्‍थान के ऊपर कर्ज का बोझ हो गया 72 हजार करोड़ रुपये। इतना बड़ा कर्ज, अब आप यह देखें कि पिछले कांग्रेस के शासनकाल में जब पहले 40 महीनों के अन्‍दर कर्ज का बोझ बढ़ा 15 हजार करोड़ और इसी को यदि आप भारतीय जनता पार्टी के शुरू के 40 महीनों से कम्‍पेरीजन करें तो कर्ज बढ़ा है 24 हजार करोड़। तो इतना कर्ज लेकर के इतनी बड़ी कार्य योजना बनाने का क्‍या अभिप्राय है यह समझ में नहीं आता। 60 प्रतिशत ज्‍यादा कर्ज का बोझ बढ़ा है शुरू के 40 महीने में बनिस्बत कांग्रेस के शुरू के 40 महीने के। जबकि वास्‍तविकता यह है कि सारे जो एफ आर बी एम के अन्‍दर कानून-कायदे लागू किये गये, रेवेन्‍यू जनरेशन ग्रोथ 22 से 25 प्रतिशत बढ़ी है। इसी रफ्तार से यदि राजस्‍थान की जनता के ऊपर कर्ज बढ़ता रहा तो जब वर्तमान सरकार 2008 में रुखसत होगी तो कर्ज का बोझ हो जाएगा 90 हजार करोड़ रुपये। क्‍योंकि आप इसमें कम से कम 30 हजार करोड़ रुपये और मान लो जो कार्य योजना 11वीं पंचवर्षीय योजना के पहले और दूसरे वर्ष के अन्‍दर होगी। मैं आपके माध्‍यम से यह निवेदन करना चाहता हूं कि केन्‍द्र सरकार ने, अब कुशल वित्‍तीय प्रबन्‍धन क्‍या होता है? कुशल वित्‍तीय प्रबन्‍धन वो होता है जिसमें राजस्‍थान की आम जनता को राहत पहुंचाई जाए और आम जनता को प्रगति का रास्‍ता दिखाया जाए। केन्‍द्र सरकार ने पैट्रोल और डीजल पर पांच बार अटेंम्‍प्‍ट किया पिछले तीन साल के अन्‍दर कि उनकी कीमतों में गिरावट आये। क्‍या राजस्‍थान सरकार ने उसमें सहयोग किया? आज हम देखें कि हरियाणा, पंजाब और दिल्‍ली के अन्‍दर जो पैट्रोल और डीजल के दाम हैं वह राजस्‍थान के बनिस्‍बत सिग्निफिकेंटली कम हैं।...

 

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तीन से पाँच रुपये प्रति लीटर कम है। केन्‍द्र सरकार ने दो बार इसके अंदर गिरावट की, एक्‍साइज में दो बार गिरावट की, दो बार कस्‍टम ड्यूटी कम की। एक बार उन्‍होंने तेल कंपनियों पर दबाव डालकर तेल की कीमतें कम करने पर मजबूर किया, लेकिन राज्‍य सरकार ने इन सब चीजों को नजरअंदाज किया। आज भी पूरे देश के अंदर सबसे महंगा तेल अगर कहीं मिलता है तो राजस्‍थान के अंदर मिलता है और जो सेल्‍स टैक्‍स की इनकम है, ये कहते हैं रेवेन्‍यू जनरेशन आपने इन्‍क्रीज कर लिया, सेल्‍स टैक्‍स की जो इन्‍कम है  More than 45 % is because of tax which is being charged by the Government. इतनी बड़ी इन्‍कम खाली इसके ऊपर टैक्‍स लगाने की वजह से हुई है। नतीजा क्‍या निकला आज जितने भी बोर्डर के अपने डिस्ट्रिक्‍ट्स हैं, जैसे चूरू डिस्ट्रिक्‍ट है, माननीय मंत्रीजी बैठे हैं आपको इस बात की जानकारी होगी कि कितना डीजल और पेट्रोल आसपास के हरियाणा और पंजाब से गैर कानूनी तरीके से राजस्‍थान में लाया जाता है और बेचा जाता है और राज्‍य को कितना बड़ा रेवेन्‍यू का लोस इस वजह से हो रहा है यह आप अंदाज नहीं लगा सकते।

एक तरफ तो हम यह कहते हैं वित्‍तीय प्रबंधन बहुत अच्‍दा है, गरीब आदमी को हमने राहत पहुंचायी। क्‍या राहत पहुंचायी गरीब आदमी को? आप यह कहते हैं कि हमारा खजाना हमेशा भरा हुआ है। जब आपका खजाना भरा हुआ है तो राजस्‍थान के रूरल एरिया में बीपीएल की संख्‍या में 3 लाख 61 हजार परिवार आपने काट दिये। यह कहकर काट दिये कि केन्‍द्र सरकार का निर्देश था। ..(व्‍यवधान)..

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): सर्वे किसके वक्‍त में हुआ था?

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): बीच में डिस्‍टर्ब न करें, माननीय मुख्‍यमंत्रीजी जवाब दे देंगी।

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): गलत फैक्‍ट्स के आधार पर तो मत करो। ..(व्‍यवधान)..

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): 31 अगस्‍त को राज्‍य सरकार ने यह निर्णय लिया कि नयी बीपीएल की सूची 15 सितम्‍बर को जारी कर दी जाएगी। यह एक फैक्‍ट है और नोटिफिकेशन निकाल दिया और नयी बीपीएल सूची में ग्रामीण राजस्‍थान के 3 लाख 61 हजार परिवार कम कर दिये गये। यह कहकर कम कर दिये गये कि केन्‍द्र सरकार और प्‍लानिंग कमीशन के निर्देशानुसार ..(व्‍यवधान).. आप मेरी पूरी बात सुनें। केन्‍द्र सरकार और प्‍लानिंग कमीशन के निर्देशानुसार। हमारी मजबूरी है कि हम इतने लाख परिवार राजस्‍थान में कम करें। अब जब आपकी मजबूरी है तो क्‍या आप अपने संसाधनों से बीपीएल परिवारों की संख्‍या जहां कि लगातार आठ साल से पश्चिमी राजस्‍थान में अकाल पड़ रहा है, कई डिस्ट्रिक्‍ट्स में बाढ़ की स्थिति है। ऐसी स्थिति को देखते हुए बीपीएल परिवारों की संख्‍या अपने संसाधनों से बढ़ानी चाहिए थी क्‍योंकि आप हमेशा यह कहते हैं कि हमारा कुशल वित्‍तीय प्रबंधन है, जैसा कि पड़ोसी राज्‍यों में किया गया है। आज आंध्रप्रदेश के अंदर प्‍लानिंग कमीशन और केन्‍द्र सरकार ने कहा कि आपको हम 41 लाख परिवारों की सहायता उपलब्‍ध कराएंगे। आंध्रप्रदेश ने कहा कि नहीं, हमारे यहां बीपीएल की संख्‍या हम एक करोड़ 21 लाख मानेंगे, बाकी लोगों को, बाकी परिवारों को हम अपने संसाधनों से यह सुविधा मुहैया कराएंगे। इसी प्रकार आपका बीजेपी का जहां राज है आज की तारीख में गुजरात में और मध्‍य प्रदेश में केन्‍द्र सरकार द्वारा निर्धारित की गई बीपीएल की संख्‍या से कहीं अधिक बीपीएल की सूची घोषित कर रखी है। वो कहते हैं कि हम अपने संसाधनों से इन गरीब परिवारों को लाभान्वित करेंगे। इतनी बड़ी कार्ययोजना और यह लेबल कि हमारा कुशल वित्‍तीय प्रबंधन है और जो गरीब आदमी है उसको आप राहत नहीं पहुंचा पाओ और जहां लगातार अकाल और बाढ़ की स्थिति बनी हुई है वहां पर इन बीपीएल परिवारों को सुविधा नहीं मिले तो यह कैसा कुशल वित्‍तीय प्रबंधन है। बीपीएल की जो दुर्दशा वर्तमान राज में हुई है उतनी राजस्‍थान के इतिहास में कभी नहीं हुई।

अब आप देखें राजस्‍थान ऐसा अकेला राज्‍य है जहां दो-दो बीपीएल की सूची इन्‍होंने जारी कर रखी है, डीपीआईपी (District Poverty Initiation Programme) इसके लिए बीपीएल की सूची कौनसी है, नयी बीपीएल की सूची जो 15 सितम्‍बर को जारी हुई थी। इंदिरा आवास आवंटन के लिए बीपीएल की सूची जो 15 सितम्‍बर को जारी हुई थी। राशन आप देंगे पुरानी बीपीएल सूची से। ऐसा पहला राज्‍य है जहां अलग-अलग कामों के लिए अलग-अलग बीपीएल की सूची को मान्‍यता प्रदान की जा रही है जो कि सर्वथा गलत है क्‍योंकि आज डीलर जब गांवों में जाता है और वह कहता है गेहूं किसको दूं तो नया राशन कार्ड, सबसे हास्‍यास्‍पद बात यह है कि नये राशन कार्ड 15 सितम्‍बर से आज की तारीख तक अक्‍टूबर, नवम्‍बर, दिसम्‍बर, जनवरी, फरवरी पाँच महीने हो गये राशन कार्ड अभी तक जारी नहीं हुए। जब गांवों में डीलर जाता है गेहूं किसको वितरित करें, गेहूं वितरित करने के लिए पुराने वाले से कहता है कि नयी सूची जारी हो गई, आपका नाम इसके अंदर तो नहीं है। नया वाला जब कहता है मेरा नाम सूची में आ गया, मुझे राशन दो तो वह कहता है आपका राशन कार्ड कहां है। राशन कार्ड उसको उपलब्‍ध नहीं है। तो 17 लाख लोग जिनको राशन कार्ड आज की तारीख में उपलब्‍ध नहीं है वे बीपीएल की सुविधा पाने से वंचित रह रहे हैं तो इसको कैसे कह सकते हैं कुशल वित्‍तीय प्रबंधन है।

मैं आपके माध्‍यम से यह निवेदन करना चाहूंगा केन्‍द्र सरकार ने एक बहुत अच्‍छा निर्णय लेकर जो अंत्‍योदय अन्‍न योजना का तृतीय विस्‍तार है उसके अंदर यह निर्णय लिया कि जो बीपीएल की सूची में नहीं है, लेकिन वास्‍तव में गरीब हैं उस गरीब को भी अंत्‍योदय अन्‍न योजना में शामिल करके दो रुपये किलो का गेहूं उपलब्‍ध कराया जाएगा। इसके अंतर्गत जब राज्‍य सरकार ने सारे जिला प्रशासकों को यह निर्देश जारी कर दिये कि अंत्‍योदय अन्‍न योजना तृतीय विस्‍तार में जिन लोगों को शामिल किया जाएगा उसमें यह आवश्‍यक नहीं है कि वे बीपीएल की सूची में हो। बीपीएल की सूची के अलावा भी लोगों को उसमें शामिल किया जा सकता है, लेकिन जो नयी सूची जारी हुई, एक तरफ तो हम कहते हैं यह अंत्‍योदय अन्‍न योजना का आदमी है जो पूअरेस्‍ट आफ दी पूअर है और उसको बीपीएल की अन्‍य सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है। यह भी बहुत बड़ी विसंगति है जिसे तुरंत दूर किया जाना चाहिए।

आप कह रहे थे बीपीएल का सही है, चूरू जिले के अंदर 13 हजार बीपीएल परिवारों को काट दिया गया और यह तो आपकी जानकारी में है लगातार आठ साल से अकाल पड़ रहा है। क्‍या ऐसी स्थिति में बीपीएल परिवारों की संख्‍या कम करना उचित है। साथ में मैं आपके माध्‍यम से यह निवेदन करना चाहूंगा कि इन नवनियुक्‍त या नयी सूची में जिनको क्रमबद्ध किया गया है 17 लाख परिवारों को आज मेडिकल की सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है क्‍योंकि मेडिकल रिलीफ कार्ड ही आपने नहीं बनाया। जो शहर के क्षेत्र हैं वहां पर मेडिकल रिलीफ कार्ड बन गये, लेकिन गांव के अंदर अभी भी मेडिकल रिलीफ कार्ड नहीं बना है क्‍योंकि वह हमेशा यह कहते हैं कि हमारी सूची में लगातार परिवर्तन हो रहा है, इनका मेडिकल रिलीफ कार्ड इसीलिए नहीं बना। सूची में परिवर्तन होना लाजिमी है क्‍योंकि सुप्रीम कोर्ट ने यह आर्डर दिया है कि जब तक आपको नयी बीपीएल की सूची जारी नहीं हो जाती, 2008 में जारी होनी है तब तक बीपीएल की सूची में नाम जोड़ा भी जा सकता है और नाम निकाला भी जा सकता है। तो ऐसा कुशल वित्‍तीय प्रबंधन किस काम का जिसके अंदर पूअरेस्‍ट आफ दी पूअर दुःख पा रहे हैं और बीपीएल परिवार जो राजस्‍थान में 25 लाख हैं वे दुःख पा रहे हैं ऐसे कुशल वित्‍तीय प्रबंधन की राजस्‍थान को जरूरत नहीं है कि खाली आप आंकड़े दिखाकर बड़ी कार्ययोजना बना दी कि इतने हजार करोड़ रुपये की हमने योजना बनायी। क्‍या करेगा वह इस योजना का?

आपने एक निर्देश निकाला सारे राजस्‍थान के अंदर जो बीपीएल के गरीब बच्‍चे स्‍कूल में पढ़ते हैं उनके लिए आपने कहा कि इन बच्‍चों को हम स्‍कोलरशिप देंगे। आज तक इन बच्‍चों को स्‍कोलरशिप उपलब्‍ध नहीं करायी गयी है। साथ ही उपलब्‍ध नहीं कराने के अलावा सारे सरकारी स्‍कूलों के अंदर एक तरफ पूरे देश के अंदर सर्व शिक्षा अभियान चल रहा है, लेकिन इन बच्‍चों से सरकारी स्‍कूलों में आज भी फीस ली जाती है जो कि गलत है। आप अगर वास्‍तव में शिक्षा को बढ़ावा देना चाहते हैं तो गरीब परिवार का बच्‍चा, लघु कृषक का बच्‍चा, सीमान्‍त कृषक का बच्‍चा, एक ऐसे परिवार का बच्‍चा जिसके पास कुछ भी नहीं है सरकारी स्‍कूल के अंदर तो उसकी फीस माफ होनी चाहिए या नहीं होनी चाहिए?

माननीय मुख्‍यमंत्रीजी ने बहुत अच्‍छा आदेश निकाला आज से दो साल पहले कि राज्‍य में जितने भी विधवा व विकलांग हैं उनको प्रति माह दस किलो गेहूं हम फ्री में देंगे।

मोहन/अरूण/अशोधित प्रति प्रकाशनार्थ नहीं/07032007/1600/2p

 

इस कार्य योजना की शुरूआत दो महीने के अन्‍दर मालूम पड़ गई, गेहूं वितरित किया ही नहीं गया। यदि आपका कुशल वित्‍तीय प्रबंधन है तो उनको गेहूं तो वितरित करते फिर आपने अपनी ही कार्य योजना के अन्‍दर परिवर्तन करके यह कह दिया कि भाई, जो लोग जिनको हम गेहूं देने वाले थे उनको गेहूं की जगह 50 रुपये प्रति महीने हम देंगे।

श्री अध्‍यक्ष: तारानगर से आने वाले माननीय सदस्‍य, आपकी पार्टी के केवल 32 मिनट हैं।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): बस, 5 ही मिनट में बोल लूंगा।

श्री अध्‍यक्ष: और अभी आपके पूर्व मुख्‍य मंत्री पहाडि़या जी भी बोलना चाहते हैं, आपको 20 मिनट हो गये हैं बोलते।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): साहब, 5 मिनट में समाप्‍त कर रहा हूं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): हम प्रतिपक्ष के नेता को सुनना चाहते हैं। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: आपको तो तीसरी चाहिए। उन्‍होंने नाम ही दो भेजे हैं, आपको तीसरी चाहिए।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): प्रतिपक्ष के नेता को नहीं सुनेंगे तो किसको सुनेंगे, अध्‍यक्ष महोदय। मुख्‍य मंत्री जी को सुनना चाहते हैं और हम भी सुनना चाहते हैं। ...(व्‍यवधान)... मैं आपके माध्‍यम से प्रार्थना कर रहा हूं उनसे।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आपको तो आपके दल के लोग ही नहीं सुनना चाहते हैं।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): हमें बीच वालों को भी सुन लो न अध्‍यक्ष महोदय । हमारी तरफ भी थोड़ा ध्‍यान दें।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): आपने यह निर्णय लिया कि इन विधवाओं को और विकलांगों को जो कि एक गरीब तबका है, जो मजबूर है, जो लाचार है उनको 50 रुपये प्रति महीने उपलब्‍ध कराएंगे और आपको यह जानकर आश्‍चर्य होगा, मेरे एक प्रश्‍न के जवाब में आया है कि पिछले दो साल के अन्‍दर 7 करोड़ रुपये कम वितरित किये आपने। यह आपकी प्रशासनिक कुशलता है ? जो सबसे गरीब तबका है जो सबसे लाचार है जिसके पास कुछ भी नहीं है जिसके पास उतनी हिम्‍मत भी नहीं है कि वह अपनी आवास उठाकर सरकार तक पहुंचा सके, उसको पांच करोड़ रुपया कम वितरित किये आपने। किसानों की माननीय मुख्‍य मंत्री जी ने पहले अपने राज्‍य पाल के अभिभाषण में माननीय राज्‍यपाल से यह कहलवाया था कि हम कृषि बीमा योजना की शुरूआत कर रहे हैं और उस कृषि बीमा योजना की आपका क्‍या दुर्दशा की है ? 2005-06 के अन्‍दर जिन किसानों ने जिनमें 6 लाख 70 हजार किसान थे, पूरे राज्‍य भर के अन्‍दर 32 जिलों के अन्‍दर जिसने अपनी खेती के लिए बीमा करवाया, कहीं बारिश नहीं आई या किसी कारण से अकाल पड़ गया तो उसके लिए हम कृषि बीमा कराएंगे, उन्‍होंने प्रिमियम जमा करवा दिया, 20 करोड़ रुपये का प्रिमियम जमा करा दिया, आपने उस गरीब किसान की जेब में से पैसे तो निकाल लिये लेकिन खराबा डिक्‍लेयर होने के बावजूद जब कि आपने 2005-06 के अन्‍दर जो उन्‍होंने बीमा करवाया था जिसकी मुआवजा राशि मई, 2006 में आपको उपलब्‍ध करायी जानी थी, आज तक एक साल हो गया बीमा राशि नहीं उपलब्‍ध कराई । क्‍यों नहीं उपलब्‍ध कराई ? पहला कारण कि आपने जो क्रॉप कटिंग एक्‍सपेंरीमेंट्स किये पूरे राज्‍य भर के अन्‍दर जिलों से उसकी रिपोर्ट को इकजाई करके एग्रीकल्‍चर इंश्‍योरेंस कम्‍पनी को समय पर नहीं भेजी और समय पर नहीं भेजने का कारण यह रहा कि बाद में आपने एग्रीकल्‍चर इंश्‍योरेंस कम्‍पनी और सेंट्रल गवर्नमेंट से आपको माफी मांगनी पड़ी कि किसी कारणवश आप यह रिपोर्ट समय पर नहीं भेज पाये।

                              (   बजे)

                    ( श्री रामनारायण विश्‍नोई, उपाध्‍यक्ष, पदासीन )

उन्‍होंने इसको मंजूर कर लिया और जो मेमोरेंडम आपने साइन किया था एग्रीकल्‍चर इंश्‍योरेंस कम्‍पनी और केन्‍द्र सरकार के साथ में जो क्रॉप कटिंग एक्‍सपेंरीमेंट्स होंगे उसको आप सिंगल सिरिज में करेंगे, आपने जानबूझकर उसको मल्‍टीपल सिरिज में किया। उससे विवाद पैदा हुआ और विवाद पैदा होने के उपरांत भी इस 4 लाख सीमांत और लघु कृषकों को टोटल 6 लाख 70 हजार किसानों को आज भी मुआवजा राशि उपलब्‍ध नहीं कराई गई है। यह भी नमूना आपका कुशल वित्‍तीय प्रबंधन का जो है गरीब किसान, मजदूर, विकलांग, विधवा जो आपके कुशल वित्‍तीय प्रबंधन को महसूस कर रहे हैं उसका यह जीता जागता नमूना है। आपने एक मिशन शुरू किया था, मिशन बसेरा और इस मिशन बसेरा के अन्‍तर्गत राजस्‍थान के शहरों के दलित लोग जो कच्‍ची बस्तियों में रहते हैं, आपने यह कहा कि 10 रुपये रोज का लेंगे और इनको मकान बनाकर देंगे, फ्लेट बनाकर देंगे। क्‍या हुआ मिशन बसेरा का ? आज तीन साल हो गये हैं आपने मिशन बसेरा ...(व्‍यवधान)...

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): 10 रुपये रोज की किश्‍त में उनको आवंटित किया है, 930 मकान आवंटित हो चुके हैं, माननीय उच्‍च न्‍यायालय का स्‍थगन आ जाने की वजह से बाकी जो मकान थे उनको हम अलाट नहीं कर पाये, जब भी स्‍थगन हट जाएगा तो निश्चित रूप से हम आवंटन कर देंगे।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): यह जो लेन एक्‍सक्‍यूज आपने दिया है कि उच्‍च न्‍यायालय का आपका आब्‍जेक्‍शन आ गया था, राजस्‍थान के पता नहीं कितने शहरों में आपको मिशन बसेरा लागू करना था। एक गरीब, दलित और मजदूर के लिए वह आपने आज तक लागू नहीं किया, हवाला आप यह देते हो कि साहब, एक कहीं लैंण्‍ड एक्‍वायर करनी था उसमें थोड़ा डिस्‍प्‍यूट हो गया, उसने स्‍ट्रक्‍चर लगा दिया उसके बावजूद मिशन बसेरा के अन्‍तर्गत गरीब लोगों को आप आवास उपलब्‍ध करा सकते थे लेकिन आपने खाली उस चीज का बहाना करके क्‍योंकि जमीनें तो आपको दूसरे काम में लेनी हैं, जमीनों को तो आप दूसरी जगह काम में ले रहे हो, उससे तो पता नहीं क्‍या क्‍या किया जा रहा है, मैं कोई आरोप नहीं लगाना चाहता, जनता सब जानती है क्‍या हो रहा है। तो वह मिशन बसेरा कहां बनेगा ? वह गरीब किसान जाकर आवाज उठाएगा ? यह सिर्फ घोषणा करनी थी, इसकी क्रियान्विति कभी नहीं होनी थी, यह शुरू में ही महसूस हो गया था। इसके अन्‍तर्गत आपको एक जयपुर के अन्‍दर 2 हजार आवास आवंटित करने थे, जयपुर में तो कोई डिस्‍प्‍यूट ही नहीं चल रहा था उसके बावजूद आपने यह आवास आवंटित नहीं किये। मैं आपसे छोटा सा निवेदन करना चाहूंगा कि राज्‍यपाल के अभिभाषण में यह चीजें कहलवाई जाती हैं जो पिछले एक साल में घटित घटनाएं हुई और जो आपकी आगे आने वाले सालों की कार्य योजना है। आपको मालूम है गंगानगर, हनुमानगढ़ के अन्‍दर गोलियां चलीं, किसानों ने पानी की मांग की, उसके बारे में आज भी चर्चा हुई, यह चीज सरकार ने आज तक स्‍पष्‍ट नहीं की है कि इंदिरा गांधी नहर परियोजना के अन्‍तर्गत और पंजाब से विभिन्‍न योजनाओं के अन्‍तर्गत मिलने वाले पानी का फेज वन में, फेज टू में और पेयजल योजनाओं में किस प्रकार से आवंटन किया जाएगा, यह आज तक क्लियर नहीं किया, आज तक यह असमंसजता की स्थिति बनी हुई है। मैंने पूछा था एक प्रश्‍न और मुझे आश्‍चर्य है कि इस प्रश्‍न का इतना ऊलजलूल जवाब आया है, आपने यह स्‍वीकार किया है कि 57 लाख 12 हजार 73 क्‍यूसेक्‍स पानी यह आपको मिला टोटल और उसके अन्‍दर आपने आवंटन कर दिया 62 लाख, यह 5 लाख एक्‍स्‍ट्रा कहां से आ गया ? पानी जब एक जगह से दूसरी जगह जाता है तो उसके नेचुरल लोसेज भी होते हैं उसमें से चोरी भी होता है, सीपेज भी होता है, उसके बावजूद आपने 5 लाख क्‍यूसेक्‍स पानी अतिरिक्‍त आवंटन कर दिया जो कि उपलब्‍ध ही नहीं था। मेरे कहने का अभिप्राय यह है कि पानी के बंटवारे में पारदर्शिता और ईमानदारी नहीं बरती जा रही है और राज्‍य सरकार जानबूझकर फेज वन और फेज टू के किसानों को आमने सामने खड़ा करके राजनीति लाभ उठाना चाहती है। एक ऐसा एरिया जहां का सीमावर्ती क्षेत्र जिसका सामरिक महत्‍व है, जहां के लोग सेना के लोगों से कंधे से कंधा मिलाकर पाकिस्‍तान से लड़ाई में अपना हिस्‍सा लेते हैं, उनके सामने आपने सेना को खड़ा कर दिया उनके आन्‍दोलन को दबाने के लिए ? सरकार को यह चाहिए कि राज्‍यपाल के अभिभाषण में सबसे पहले यह लिखा जाना चाहिए था कि हमारी अगले साल की कार्य योजना पानी की योजनाओं में बंटवारे की यह रहेगा जिससे कि फेज वन और टू दोनों के किसान संतुष्‍ट हों, ज्‍यादा से ज्‍यादा भूमि सिंचित हो। फेज टू के लोग भी आज तरस रहे हैं। फेज टू में आपने जितने भी एक्‍स-आर्मीमैन हैं, जितने भी जो लोग देश के लिए शहीद हुए उनको भूमि आवंटित कर रखी है। उनके साथ अन्‍याय और उनके साथ कुठाराघात नहीं हो रहा है ? इस तरह सरकार को अपनी इस कार्य योजना को स्‍पष्‍ट रूप से रखा जाना चाहिए था। 

सर्व शिक्षा अभियान के अन्‍तर्गत छोटा सा निवेदन यह करना चाहूंगा कि जो टारगेट केन्‍द्र सरकार ने आपको दिये, क्‍या आपने उन टारगेट्स को पूरा किया ? नहीं किया। क्‍योंकि आप यह देखिए, सितम्‍बर, 2006 तक आपको कितने अध्‍यापकों की भर्ती करनी थी, आपको भर्ती करनी थी 86 हजार से ज्‍यादा अध्‍यापकों की। आपने भर्ती कितनी की ? 31896 अध्‍यापकों की। आपका यह कहना सही है कि 75 परसेंट पैसा केन्‍द्र सरकार देती है और 25 परसेंट राज्‍य सरकार देती है लेकिन अध्‍यापकों की भर्ती कम कैसे की आपने ? और दूसरा, इसके बाद में भी आपने क्‍या किया ? जिन प्राइमरी स्‍कूल के अन्‍दर और अपर-प्राइमरी स्‍कूल्‍स के अन्‍दर अध्‍यापकों को भर्ती किया, जिन अध्‍यापकों को भर्ती किया, उनमें से काफी अध्‍यापकों को आपने शिफ्ट करके माध्‍यमिक और उच्‍च माध्‍यमिक विद्यालय में शैक्षणिक व्‍यवस्‍था के अन्‍तर्गत लगा दिया, क्‍यों लगा दिया आपने ? तनख्‍वाह तो आप उठा रहे हो एसएसए के अन्‍तर्गत और उपयोग ले रहे हो उनका माध्‍यमिक और उच्‍च माध्‍यमिक के अन्‍दर। जब यह आवाज उठाई गई तो मैं यह कहना चाहता हूं कि आपने क्‍या किया, आपने 72 स्‍कूल्‍स के अन्‍दर यह एक्‍सपेंरीमेंट किया कि जो उचच माध्‍यमिक विद्यालय हैं जो छठवीं क्‍लास से शुरू होकर 12वीं क्‍लास तक होता है।

 

जयगोविन्‍द/अरुण/7.3.7/16.10/2q

 

उनको सेशन के दौरान तोड़ दिया और उनको यह निर्देश दिया कि कल से यह बच्‍चे जो छठी, सातवीं और आठवीं कक्षा में पढ़ रहे हैं, उच्‍च माध्‍यमिक विद्यालय में उनको निकटवर्ती उच्‍च प्राथमिक विद्यालय में भेज दिया जाए। यह कहां तक उचित है? आपने मिड सेशन के अंदर ऐसा किया। यदि आपको यह एक्‍सपेरिमेंट करना था तो इन 72 स्‍कूलों के बच्‍चों का भविष्‍य आपने अंधकार में डाल दिया और इनमें से कुछ स्‍कूल तो ऐसे भी हैं माननीय चिकित्‍सा मंत्री महोदय, जिनको आपने यह कह दिया कि गर्ल्‍स स्‍कूल में जाएंगे। इसका एक लाइव एक्‍जाम्‍पल तीन जिलों के अंदर हुआ है जिसमें एक जिला चूरू भी है। क्‍या आपने यह सोचने का प्रयास किया कि सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत जितने कमरे आपको बनवाने थे स्‍कूलों में आपने उतने कमरे बनवाए या नहीं बनवाए, स्‍कूल की बिल्डिंग आपको बनवानी थी साढ़े आठ हजार, आपने बनवाई साढ़े सात हजार, नए स्‍कूल आपको बनाने थे 37 हजार, आपने बनाए 28 हजार, एडीशनल क्‍लास रूम आपको बनाने थे 40982, उसके बावजूद आपने स्‍कूलों में कमरे बनवाए सिर्फ 12212।, इस प्रकार आपने सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत यू पी ए सरकार द्वारा चलाए गए शिक्षा के प्रति अभियान को नेस्‍तनाबूद कर दिया।

लास्‍ट में एक और चीज बताऊंगा। माननीय मुख्‍य मंत्रीजी ने यह कहा था कि हम जोर्डेनियन प्रिंसीपल ऑफ एजूकेशन को राजस्‍थान राज्‍य में लागू करेंगे। एक नॉलेज कॉरीडोर बनाएंगे जो जयपुर और दिल्‍ली के रास्‍ते पर होगा और इस रास्‍ते में जितने भी माध्‍यमिक और उच्‍च माध्‍यमिक विद्यालय आएंगे उनके अंदर हम कम्‍प्‍यूटर लिटरेसी के प्रोग्राम को बढ़ावा देंगे। माननीय मुख्‍य मंत्री द्वारा प्रस्‍तुत प्रतिवेदन की एक प्रति मेरे पास है। यह इन्‍होंने जोर्डन में भी कहा और डावोस के अंदर भी कहा कि शिक्षा के प्रति हम समर्पित हैं और आपने कम्‍प्‍यूटर लिटरेसी के लिए उसमें क्‍या कर रखा है कि सौ बच्‍चों के ऊपर एक कम्‍प्‍यूटर, एक सप्‍ताह में एक क्‍लास आता है, एक क्‍लास के अंदर एक अध्‍यापक सौ बच्‍चों को क्‍या कम्‍प्‍यूटर सिखाएगा? एक घण्‍टे अंदर सौ बच्‍चे कम्‍प्‍यूटर के दर्शन ही कर सकते हैं, कम्‍प्‍यूटर सीख नहीं सकते और यही कारण है कि आज कम्‍प्‍यूटर लिटरेसी में पिछड़ने के कारण हमारा जो एजूकेशन सिस्‍टम है वह पूरे देश के अंदर पिछड़ रहा है। जितने भी कॉल सेंटर लगे हुए हैं राजस्‍थान के अंदर उनमें राजस्‍थान के बच्‍चों की संख्‍या नगण्‍य है क्‍योंकि हम उनको कम्‍प्‍यूटर लिटरेसी नहीं दे रहे।

यही एक चीज निवेदन करनी थी जो यह साबित करती है कि राजस्‍थान की छह करोड़ पचास लाख जनता जो आपके द्वारा किए गए दावों को झूठा साबित करने के लिए बेताब हो रही है कि हमारा कुशल वित्‍तीय प्रबन्‍धन है, हमारी बहुत बड़ी कार्य योजना है, हम जनता को यह सपना दिखाएंगे, जमीनी सत्‍य कुछ और है।

मैं इस प्रस्‍ताव का घोर विरोध करता हूं और यह आशा करता हूं कि अगली बार राज्‍यपाल महोदय का अभिभाषण वास्‍तव में राजस्‍थान को जिसे हम प्रगति के पथ पर हम चलाना चाहते हैं, नए तरह की चीजें, नए तरह की सोच, नए तरह के विचार, राजनीति से ऊपर उठकर प्रस्‍तुत किया जाएगा, आपने मुझे टाइम दिया, आपका बहुत-बहुत धन्‍यवाद, जयहिन्‍द।

श्री उपाध्‍यक्ष: धन्‍यवाद। श्री प्रहलाद गुंजल।

श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्‍डी): उपाध्‍यक्ष महोदय, एक मार्च को राजस्‍थान के महामहिम राज्‍यपाल महोदय ने सदन में अभिभाषण पढ़ा। उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं महामहिम के अभिभाषण पर वाद विवाद में उसका समर्थन करने के लिए खड़ा हुआ हूं। हमारी व्‍यवस्‍था में महामहिम का पद संवैधानिक प्रमुख का पद है, गरिमा का पद है। अभी तारानगर से आने वाले माननीय सदस्‍य महामहिम के अभिभाषण के पेरों का उल्‍लेख करते हुए सरकार के कुशल वित्‍तीय प्रबन्‍धन पर गम्‍भीर टिप्‍पणियां कर रहे थे।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, शायद तारानगर से आने वाले माननीय सदस्‍य गत बार इस सदन के सदस्‍य नहीं थे और इसलिए उनके मन में अपनी बात रखते समय इस बात की कल्‍पना नहीं थी कि विगत सरकार के पाँच सालों में म‍हामहिम के अभिभाषण में क्‍या-क्‍या उनसे नहीं कहलवाने का प्रयास किया गया। मैं 1999 का महामहिम का अभिभाषण आपके सामने पढ़ कर बताऊंगा कि गरिमामय पद का किस प्रकार इन्‍होंने राजनीतिक अपनी महत्‍वाकांक्षा की पूर्ति के लिए इस्‍तेमाल किया। 1999 में राजस्‍थान के महामहिम ने 8 जनवरी को सदन में अभिभाषण करने आए तब उनसे कहलवाया गया कि पिछली सरकार के आठ वर्ष के कुशासन में राज्‍य में कानून और व्‍यवस्‍था एकदम चौपट हो गई, इन दौरान हत्‍याएं, महिलाओं के साथ बलात्‍कार, उत्‍पीड़न, अपहरण, चोरी, डकैती, पुलिस हिरासत में मौतें, लूट की घटनाएं आम बात हो गई। दलित समाज, कमजोर तबकों पर अत्‍याचार की घटनाओं में निरन्‍तर वृद्धि होती रही है और पूर्व सरकार द्वारा दोषियों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की, जिससे इन वर्गों के लोगों के आत्‍म सम्‍मान को भारी ठेस पहुंची। पूर्व शासित सरकार के शासनकाल में विभिन्‍न साम्‍प्रदायिक दंगों एवं गोली काण्‍ड की घटनाओं ने समूचे अल्‍पसंख्‍यक समुदाय में असुरक्षा की भावना व्‍याप्‍त हो गई।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं गम्‍भीर सवाल करना चाहता हूं कि आपमें से कोई आंकड़े बता सकता है कि राजस्‍थान में जब-जब आपका राज रहा तब साम्‍प्रदायिक घटनाएं ज्‍यादा हुई या जब भैरोंसिंह शेखावत का राज रहा तब साम्‍प्रदायिक घटनाएं ज्‍यादा हुई? अपने अंदर झांककर देखने की आवश्‍यकता है। हमने महामहिम के गरिमामय पद जैसों को भी नहीं छोड़ा और अपनी राजनीतिक भावनाओं की अभिव्‍यक्ति करवाने की कसर उस मौके को भी आपने जो हमारे लिए उपाध्‍यक्ष महोदय, सदन में एक गरिमा का अवसर उपस्थित कर सकता था, महामहिम का अभिभाषण एक परम्‍परा है। विधान सभा के गठन के बाद और उसके बाद हर वर्ष के प्रारम्‍भ में वह अवसर हम सब के लिए गरिमा का अवसर होता है। उपाध्‍यक्ष महोदय, मुझे ऐसा लगता है कि हम हमारी बात कहते समय यह चिंता तो करते हैं कि इस सदन की गौरवशाली परम्‍परा रही है, इस सदन का गौरवशाली इतिहास रहा है लेकिन ईमानदारी से विश्‍लेषण करें कि महामहिम का अभिभाषण जो गरिमा का अवसर है क्‍या इस सदन में बैठे हुए सब लोग मिलकर उस अवसर की गरिमा को बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं? इस सवाल से हम राजस्‍थान की जनता से बच नहीं सकते, महामहिम का अभिभाषण गरिमा का अवसर होता है और उस अवसर की गरिमा बनाए रखना इस सदन की सामूहिक जिम्‍मेदारी बनती है और उपाध्‍यक्ष महोदय, हालांकि मैं प्रथम बार चुनकर आया हूं लेकिन उस अभिभाषण के अवसर पर लगातार चौथी बार मैं भी उस गरिमामय अवसर का साक्षी बना। ऐसा नहीं है कि कोई यह अनायास था, अपवाद था, योजना थी, पहले भी ऐसा हुआ है।

 

vkj/akt/07032007/1620/3a

 

पहले भी ऐसा हुआ। महामहिम के अभिभाषण में टोकाटोकी का सवाल बनाने की चेष्‍टाएं पहले भी हुईं। पहले भी गरिमा भंग करने की कोशिश हुई। इसलिए माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आज इस पवित्र सदन में यह कहने में कतई अतिशयोक्ति नहीं समझता कि यह कोरा अपवाद नहीं है, यह इनका राजनैतिक आचरण बन गया और इसके गम्‍भीर उदाहरण हमारे सामने हैं। 13 दिसम्‍बर, 2001 के दिन सारे देश की व्‍यवस्‍था को चुनौती देने का क्षण अवसर उपस्थित हुआ है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को चुनौती देकर, उसको चुनौती देने का दुस्‍साहस करके लोकतंत्र को अस्थिर करने की साजिश की गई, एक नाकाम साजिश की गई और उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं इस पवित्र सदन में नमन करना चाहता हूं भारत माता के उन जाबांज सपूतों को जिन्‍होंने अपने प्राणों का उत्‍सर्ग कर, बलिदान देकर लोकतंत्र की रक्षा की। लेकिन क्‍या हुआ उपाध्‍यक्ष महोदय, संसद के हमलावर पकड़े गये, देश के सर्वोच्‍च न्‍यायालय का फैसला आ गया, फांसी का फरमान हो गया। सारे देश ने फैसले का स्‍वागत किया, सम्‍मान किया, इस देश की भावना से जुड़ा था, इसलिए प्रतिक्रिया स्‍वाभाविक है लेकिन माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, क्‍या हुआ इस सर्वोच्‍च अदालत के फैसले पर आज? देश में यू.पी.ए. की सरकार आई, कांग्रेस उसका नेतृत्‍व कर रही है और उसी पार्टी के एक प्रदेश की सरकार के मुखिया ने, जम्‍मू-कश्‍मीर के मुख्‍य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने सार्वजनिक रूप से स्‍वयं का और पार्टी का दृष्टिकोण इस देश की जनता के सामने रख दिया।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): उपाध्‍यक्ष महोदय, पार्टी का दृष्टिकोण नहीं था, उनका व्‍यक्तिगत दृष्टिकोण हो सकता है। पार्टी ने स्‍पष्‍ट कर दिया था कि यह पार्टी का दृष्टिकोण नहीं है। (व्‍यवधान) आपके पतंगे लग रहे हैं, आपके पतंगे लग रहे हैं। हम अपनी सच्‍चाई सदन के सामने ला रहे हैं।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य, बीच में टोकाटोकी नहीं करें।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): कांग्रेस पार्टी ने उसी समय कह दिया था, पार्टी का इससे कोई लेना देना नहीं है। यह उनका व्‍यक्तिगत हो सकता है। (व्‍यवधान)

श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्‍डी): पार्टी में और व्‍यक्तिगत में फर्क है क्‍या? मैं आ रहा हूं, मैं आ रहा हूं, बैठ जाइये।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): तुम्‍हें क्‍या हो रहा है, बीच में बोलने का तुम्‍हें क्‍या अधिकार है? (व्‍यवधान) जहां अफजल की बात आती है तो तुम्‍हें ऐसा क्‍यों महसूस होता है...(व्‍यवधान)

श्री बद्रीलाल जाट (कपासन): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, ये देशद्रोहियों को बचाने वालों के बीच में खड़े हो रहे हैं।

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): ये कांग्रेस पार्टी का इतिहास रहा है, आतंकवादियों का साथ दे रहे हैं।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): अफजल को बचाने का क्‍यों फैसला कर रहे हैं ऐसा? तुम्‍हें क्‍या लगता है, अफजल तुम्‍हारा कोई लगता है क्‍या? (व्‍यवधान) अफजल तुम्‍हारा रिश्‍तेदार है क्‍या?

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): ये कांग्रेस के जो नेता साथ दे रहे हैं आतंकवादियों का और वह देशद्रोही है और उसको फांसी हो। (व्‍यवधान) लांछन मत लगाइये।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): धिक्‍कार है तुम लोगों पर। 

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य। बीच में नहीं बोलें।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): अफजल कोई रिश्‍तेदार है तुम्‍हारा?

श्री भागीरथ चौधरी (किशनगढ़): उपाध्‍यक्ष महोदय, हमको सुनना पड़ेगा।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): उपाध्‍यक्ष महोदय, कांग्रेस पार्टी का दृष्टिकोण नहीं था, उनका व्‍यक्तिगत हो सकता है।

श्री बद्रीलाल जाट (कपासन): उपाध्‍यक्ष महोदय, इनको बीच में बोलने का कोई अधिकार नहीं है।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): यह कांग्रेस पार्टी का दृष्टिकोण नहीं था। (व्‍यवधान) कांग्रेस पार्टी का दृष्टिकोण न कभी रहा है, न कभी रहेगा। कांग्रेस पार्टी ने इस देश की एकता और अखण्‍डता के लिए कुर्बानी दी है, इन्दिराजी और राजीवजी की कुर्बानियां दी हैं। (व्‍यवधान)

श्री बद्रीलाल जाट (कपासन): आतंकवादियों को आपकी यू.पी.ए. सरकार बचा रही है।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य, बीच में नहीं। (व्‍यवधान) माननीय सदस्‍य।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): अफजल कोई रिश्‍तेदार लगता है क्‍या तुम्‍हारा? (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): आपका रिश्‍तेदार होगा, हमारा तो दुश्‍मन है। जो देश के साथ गद्दारी करेगा, वह मेरा तो सबसे बड़ा दुश्‍मन है। इसलिए मैं कह रहा हूं कि कांग्रेस पार्टी निष्‍पक्ष रही है कि इसने देश की एकता और अखण्‍डता के लिए, आतंकवाद के खिलाफ कांग्रेस पार्टी ने कुर्बानी दी है, तुम्‍हारी पार्टी ने कोई कुर्बानी नहीं दी है। (व्‍यवधान)

श्री बद्रीलाल जाट (कपासन): यह कहो कि इस अफजल को फांसी दी जाये। (व्‍यवधान) इस देश की माटी के साथ जो गद्दारी करता है, उनके विरुद्ध बोलने में इनको क्‍या प्रोब्‍लम है? (व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जब-जब भी अफजल की बात आती है, माननीय सदस्‍य खड़े हो जाते हैं। 

श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्‍डी): हीरालाल जी बिराजिये। मैं जवाब दे दूंगा।

श्री उपाध्‍यक्ष: वे आपकी भावना के साथ हैं माननीय सदस्‍य।

श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्‍डी): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, ...

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप उ‍त्‍तेजित नहीं हों। इनकी भावना भी आपकी भावना के साथ है। 

श्री बद्रीलाल जाट (कपासन): नहीं है।

श्री उपाध्‍यक्ष: है। उन्‍होंने क्‍या कहा है।

श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्‍डी): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैंने अखबारों में पढ़ा है कि गुलाम नबी आजाद ने कहा कि अफजल को फांसी होने से देश साम्‍प्रदायिक आग में जल जाएगा। (व्‍यवधान) अगर आपकी भावना आहत हुई है तो मैं पूछना चाहता हूं...(व्‍यवधान)

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): क्‍या मतलब है इसका? आप क्‍या कहना चाहते हैं? क्‍या कहना चाहते हैं? (व्‍यवधान)

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): इधर से एक खड़े होते हैं तो उधर से 10 खड़े हो जाते हैं। तुम्‍हारे स्प्रिंग लगी हुई है क्‍या? (व्‍यवधान)

श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्‍डी): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, कांग्रेस पार्टी के मुख्‍य सचेतक मेरी बात से आहत हुए हैं। अच्‍छा होता माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, गुलाम नबी आजाद के स्‍टेटमेंट से कांग्रेस का राष्‍ट्रीय नेतृत्‍व आहत होता। कड़ाके से अपनी पार्टी का वर्जन राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष और प्रधान मंत्री देश की जनता के सामने स्‍पष्‍ट करते। मैं राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष और प्रधान मंत्री से एक बात पूछ रहा हूं...(व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, कांग्रेस के ए.आई.सी.सी. के प्रवक्‍ता ने इस बात का खण्‍डन किया है और उसी टाइम वक्‍तव्‍य दिया था। जो बात माननीय सदस्‍य आज कर रहे हैं, कांग्रेस पार्टी के अधिकृत प्रवक्‍ता यह बात उसी समय कह चुके हैं। आप यह गलत तथ्‍य सदन में नहीं लाओ।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): तो ऐसे देशद्रोहियों को मुख्‍य मंत्री क्‍यों रखा है? (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): अभी आपने तो मामला खतम कर दिया और राजस्‍थान का गला काट रहे हो। (व्‍यवधान) और बादल के साथ जाकर किसानों का गला काट रहे हो।

श्री भागीरथ चौधरी (किशनगढ़): इनकी हकीकत है। चोर से कहो, चोरी कर और साहूकार से कहो, साहूकार रह। यह उनकी खुद की संस्‍कृति है। यह तो आतंकवाद बढ़ाते हैं।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): आतंकवादियों को कौन लेकर गया? आतंकवादियों को हवाई जहाज में ले जाकर छोड़ते हो और यहां इस सदन में बात करते हो उस पार्टी के लिए जिसका इतिहास ही कुर्बानियों से भरा हुआ है और आतंकवाद के खिलाफ हमारी पार्टी दृढ़ है।

श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्‍डी): ये देश को अस्थिर करने के लिए है।

श्री भागीरथ चौधरी (किशनगढ़): उस अफजल को फांसी क्‍यों नहीं दे रहे हो? उस अफजल को फांसी क्‍यों नहीं दे रहे हो? अफजल को फांसी से क्‍यों रोक रखा है? अफजल को फांसी से कौन रूकवा रहा है? (व्‍यवधान)

श्री हीरालाल (निवाई): हिन्‍दुस्‍तान-पाकिस्‍तान बनवा दिया आप लोगों ने। (व्‍यवधान) देश के टुकड़े करवाये कांग्रेस पार्टी ने, टुकड़े कराये इस देश के।

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): कांग्रेस की बहुत बड़ी कुर्बानी है। बांग्‍लादेश को तीन बीघा जमीन बेच दी। यह है कुर्बानी तुम्‍हारी? देश को बर्बाद करके कुर्बानी करते हो। (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): आतंकवादियों को जेल से कंधार कौन लेकर गया? आतंकवादियों को जेल से कंधार कौन ले गया? आतंकवादियों को अपने हवाई जहाज में बैठाकर कौनसी सरकार का मंत्री लेकर गया? एन.डी.ए. सरकार का मंत्री लेकर गया। उसी दिन हमारा तो सिर शर्म से जार-जार हो गया। इस देश का वित्‍त मंत्री आतंकवादियों को जेल से छुड़ाकर कंधार लेकर जाये, इससे बड़ी डूबने की बात, डूब मरने की और क्‍या बात होगी? आप उस दिन डूब मरते।

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): आतंकवादियों को कौन बचा रहा है? अफजल को क्‍यों बचा रहे हो? तीन बीघा जमीन किसने बेची? (व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): अफजल के समर्थन में खुले आ रहे हो तुम लोग। जम्‍मू-कश्‍मीर का मुख्‍य मंत्री अफजल के समर्थन में अपना वक्‍तव्‍य दे...(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह कोई बहस का मुद्दा नहीं है। दो‍षी को सज़ा मिलनी चाहिए चाहे कोई कांग्रेस पार्टी का हो, भारतीय जनता पार्टी का हो, इसमें समय बर्बाद नहीं करना चाहिए। जुल्‍मी को तो सज़ा मिलनी चाहिए। (व्‍यवधान)

श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्‍डी): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं विनम्र प्रार्थना करना चाहूंगा कि तीन दिन से...

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जिस व्‍यक्ति का नाम ले रहे हैं बार-बार, वह एक जिम्‍मेदार पद पर है, एक स्‍टेट का चीफ मिनिस्‍टर है और यहां हम उसको क्रिटिसाइज करें। किन परिस्थितियों में उन्‍होंने कहा, क्‍यों कहा, क्‍या कहा? (व्‍यवधान) कहा या नहीं कहा। अख़बारों के अन्‍दर छपी हुई बात के आधार पर माननीय गुंजल साहब उसका जिक्र कर रहे हैं और आप बार-बार जिक्र नहीं करें क्‍योंकि आपको अगर आपत्ति है तो उनको नोटिस दे दो। (व्‍यवधान) दूसरी स्‍टेट का आदमी है, चीफ मिनिस्‍टर है, आप उसको क्‍यों गालियां निकाल रहे हो? यह तो कोई बात नहीं हुई। आप अच्‍छा बोल रहे थे, बोलते-बोलते कहां उलाहना देने में उलझ गये। गुलाम नबी आजाद अकेले ही कांग्रेस पार्टी के चीफ मिनिस्‍टर नहीं हैं। कोएलिशन गवर्नमेंट है वहां।

श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्‍डी): अब मैं अपनी बात कहूं साहब।

श्री उपाध्‍यक्ष: प्रतिपक्ष के नेता की भावना का आदर करें। माननीय सदस्‍य।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): कोएलिशन गवर्नमेंट है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): जैसे आपकी पंजाब में कोएलिशन सरकार है, वैसे ही है। जैसे आपकी कोएलिशन सरकार है।

श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्‍डी): मैंने तीन दिन से इसी....

श्री जुबेर खान (रामगढ़): जैसे पंजाब में आपकी कोएलिशन सरकार है।

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): आपको क्‍यों नहीं हटाया आपकी मुख्‍य मंत्रीजी ने? आप अपनी मुख्‍य मंत्रीजी के बारे में क्‍या-क्‍या कहते हो, आपको क्‍यों नहीं हटाया? क्‍यों नहीं हटाया? मजबूरी में आपको भी ढो रही है, वैसे ही हमको भी ढोना पड़ता है।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): अखबारों को आधार मत बनाओ, वरना अखबारों में मंत्री एक-दूसरे के लिए क्‍या-क्‍या कहते हैं?

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य।

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): आपको ढो ही रहे हैं।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): हम तो मुख्‍य मंत्रीजी के सलाहकार हैं। हम तो मुख्‍य मंत्रीजी के सलाहकार हैं। आप ढोओ। जिनको ढोना है, आप ढोओ।

श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्‍डी): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं विनम्र प्रार्थना करना चाहता हूं कि पिछले तीन दिन से बहस चल रही है और तीन दिन की बहस में मैंने किसी माननीय सदस्‍य के बीच में व्‍यवधान पैदा नहीं किया और मैं उम्‍मीद करूंगा, मुझ पर कृपा करेंगे। कोई बात अगर कड़वी लगती है तो जब कभी बोलें तो अपनी बात कहें।...

 

Jkj/akt/16.30/3b/7.3.2007

 

गुलाब नबी आजाद के स्‍टेटमेंट के बाद ऐसा लगा कि यूपीए गवर्नमेंट अफजल की फांसी को बचाने के प्रयासों में आकर खड़ी हो गई है और माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरे कानों तक आवाज आई है, यह कभी भाषण का विषय नहीं, लेकिन मैं यह कहना चाहता हूं कि हम उस बात से बच नहीं सकते, जिस रोज सारे राष्‍ट्र की आत्‍मा रो रही थी कि केन्‍द्र के आचरण के सामने मरणोपरांत वीरता के जो पदक मिले, शहीदों के परिवारजनों ने जाकर राष्‍ट्रपति को समर्पित कर दिये, लौटा दिये, उस रोज सारे राष्‍ट्र की आत्‍मा रो रही थी।  सारा देश सवाल पूछ रहा है।  आंकड़ों पर चर्चा करने के लिए नहीं, खाली इतनी सी जिम्‍मेदारी के लिए नहीं, इस राष्‍ट्र और समाज के मान-सम्‍मान, रक्षा, वैभव, बहबूदी, उसके स्‍वाभिमान की रक्षा का दायित्‍व सौंप कर इस पवित्र सदन में हमको भेजते हैं, क्‍या आज हम सारे लोग मिल कर जनता के उस सवाल का जवाब देने की स्थिति में खड़े हैं? यह गम्‍भीर सवाल सारे देश में विचरण कर रहा है, यूपीए नजरंदाज कर रहा है, लेकिन यह कल्‍पना यूपीए को और दिल्‍ली की सरकार को करके चलनी चाहिए कि अभी हिन्‍दुस्‍तान की जनता ने उसके मन की पीड़ा का इजहार केवल उदाहरण के रूप में पंजाब और उत्‍तराखण्‍ड में दिया है, अब वह दिन दूर नहीं जब उसका फैसला, आपका अफजल की फांसी पर फैसला आये, न आये, लेकिन हिन्‍दुस्‍तान की जनता का फैसला आपके सामने आकर उपस्थित होगा, इससे आप बच नहीं सकते।  आज हमको ईमानदारी से विचार करना पड़ेगा कि हम किस दोराहे पर आकर खड़े हो गये।  वोटों की राजनीति के पीछे हमने राष्‍ट्र और उसकी अस्मिता को ताक पर ले जाकर खड़ा कर दिया।

उपाध्‍यक्ष महोदय, हम जिस प्रकार का आचरण सदन में करते हैं, जिस प्रकार की चर्चा सदन में करते हैं, हमारा व्‍यवहार, हमारा वक्‍तव्‍य प्रोपर्टी बनता है, हाउस की प्रोपर्टी बनता है, राजस्‍थान की जनता की प्रोपर्टी बनता है और आने वाली पीढ़ी के सामने एक आदर्श प्रस्‍तुत करता है। क्‍या इस प्रकार के कृत्‍य, इस प्रकार का आचरण, देश के द्रोहियों के साथ सहानुभूति, युवा पीढ़ी के सामने हम किस प्रकार का आदर्श उपस्थित कर पायेंगे, इस गम्‍भीर सवाल से बच नहीं सकते हैं।  अगर हम ईमानदारी से यह विचार करेंगे तो मैं सवाल पूछना चाहता हूं प्रतिपक्ष से आपके माध्‍यम से, जिस महात्‍मा गांधी के नाम से पचास-पचपन साल की यात्रा, राजनैतिक यात्रा को सफल बनाते चले आ रहे हैं, ऐसा आचरण करके आप क्‍या महात्‍मा गांधी के सपनों के भारत का निर्माण कर रहे हो, ऐसा आचरण करके आप सुभाष, पटेल, भगत सिंह, चन्‍द्रशेखर, अशफाक उल्‍लाह, राजगुरू, सुखदेव, अब्‍दुल हमीद के सपनों के भारत का निर्माण कर रहे हो? कभी-कभी आपके आचरण को देख कर उनकी आत्‍मा के आंसू टपकते होंगे।  एकांत में कभी राजघाट पर कोई जायेगा तो इसके दर्शन हो जायेंगे आपको।  उपाध्‍यक्ष महोदय, दो दिन से निश्चित रूप से बहस चल रही है, बहस से ज्‍यादा दूसरी बहस, कुछ सार्थक बहस भी हुई है, आंकड़े भी आये हैं, बहुत गम्‍भीर आंकड़े, आंकड़ों से हम व्‍यवस्‍था सुधार सकते हैं, प्रगति की राह बना सकते हैं, समाज जीवन और राष्‍ट्र जीवन का निर्माण नहीं कर सकते और इसलिए उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आज कहना चाहता हूं कि अगर हम ईमानदारी से देश के सामने आदर्श उपस्थित करना चाहते हैं, समाज और राष्‍ट्र जीवन का निर्माण करना चाहते हैं तो आज हमको इस सदन के अंदर हमारे फैसले पर राष्‍ट्रीयता की गम्‍भीर छाप छोड़नी पड़ेगी।  तीसरा दिन है, किस प्रकार चर्चा के रोज-रोज प्रसंग बदलते हैं, कल्‍पना हमारे मन में है, कोई आदमी सही बात करे तो अभिभाषण का विषय नहीं है, प्रसंग पर प्रसंग, अप्रसंग चर्चा चले जाय, सदन का समय जाया होता जाय, तो समय की बरबादी नहीं।  राजस्‍थान की जनता के करोड़ों रूपये की बरबादी हो रही, हम लोग हमारे राजनीतिक एजेण्‍डे से बाहर नहीं निकल रहे।  नेताओं के नाम पर, पार्टियों के नाम पर छींटाकशी में विधान सभा युध्‍द का मैदान बनाकर रख दी।  समझना पड़ेगा उपाध्‍यक्ष महोदय, यह साबरमती के संत कादेश है, यह शहीदों का, महापुरूषों का देश है, हम रहेंगे, न रहेंगे, यह नेता रहेंगे, न रहेंगे, राजनीतिक दल रहेंगे, न रहेंगे, यह भारत राष्‍ट्र रहेगा।  यह कल्‍पना करके, इस राष्‍ट्र की परम्‍पराएं रहेंगी और जो परम्‍पराएं आज हम डालेंगे, वह परम्‍पराएं भावी पीढ़ी को रास्‍ता दिखायेगी, उसका मार्गदर्शन करेगी।  यह गम्‍भीर सवाल आज हमको विचार करना चाहिए और जब विचार करेंगे तो हमारी भूमिका क्‍या बन रही है इस हाउस में, इस पर हमको गंभीरता से विचार करना पड़ेगा।  माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आज चर्चा करते समय अभिभाषण पर हमें इस बात का विचार करना पड़ेगा कि आजादी के बाद साठ साल की इस लोकतंत्र की यात्रा में हमने हमारे पड़ाव को किस मुकाम पर पहुंचाया है और जब हम ईमानदारी से विचार करेंगे तो यह बात सच है कि हमने विकास का लम्‍बा रास्‍ता तय किया है, लेकिन उस रास्‍ते में गतिरोध और गतियां बदलने का सिलसिला बीच-बीच में चलता रहा और इन पिछले तीन सालों में उस विकास की गति बदली है, उसकी धारा बढ़ी है, उसका प्रवाह तेज हुआ है और इसका उल्‍लेख महामहिम के भाषण के पैरा नम्‍बर 183 में स्‍पष्‍ट रूप से कहा गया है।

श्री रामनारायण मीणा: मन से मानते हो? मन से?

श्री प्रहलाद गुंजल: बिलकुल मन से बात कर रहा हूं, आप कैसे कह सकते हो कि मैं बेमन से बात कर रहा हूं।

श्री हरिमोहन शर्मा: वह इसलिए कहते हैं कि जो निर्भीकता, जो ईमानदारी आपमें बात कहने की है, वह जसवंत सिंहजी कंधार गये थे उस पर भी कुछ बोल दो।

श्री प्रहलाद गुंजल: उस पर जरूरत पड़ेगी तब बोलेंगे।

श्री रामनारायण मीणा: और कुछ सरकार के बारे में भी बता दो जो चर्चाएं होती हैं।(व्‍यवधान)

श्री प्रहलाद गुंजल: 183 में उल्‍लेख है।  पैरा नम्‍बर 183 में उल्‍लेख किया है। आज का राजस्‍थान अपने सीमित संसाधनों के बावजूद विकास में आ रही बाधाओं को दूर करते हुए बीमारू प्रदेश की छाप से मुक्‍त हो चुका है।  सरकार के प्रयासों से राष्‍ट्रीय और अन्‍तर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर राजस्‍थान की विशिष्‍ट पहचान बनी है।  प्रदेश में निवेश के लिए बड़े औद्योगिक घराने आगे आने लगे हैं।  मैं इस अवसर पर अभिभाषण के लिए आभार व्‍यक्‍त करते हुए महामहिम का मुख्‍य मंत्रीजी को धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि उनके कुशल नेतृत्‍व में राज्‍य के विकास का रथ आगे बढ़ा है और न केवल आगे बढ़ा है, आज राजस्‍थान हिन्‍दुस्‍तान के विकसित प्रांतों की अग्रिम पंक्ति की प्रतिस्‍पर्धा में आकर खड़ा हुआ है कि हम विकसित प्रांतों में देश का नेतृत्‍व करें।  यह कल्‍पना आज राज्‍य के मन में पली है और इसके पीछे है मुख्‍य मंत्रीजी का कुशल नेतृत्‍व, कुशल वित्‍तीय प्रबंधन।  इसका अधिक उल्‍लेख नहीं करना चाहता, ईमानदारी से जब बजट पर चर्चा होगी, बात करेंगे, आप इसको पढ़ेंगे तो इसमें आपको दर्शन होंगे। योजनाओं के आकार को लेकर, वित्‍तीय प्रबंधन को लेकर, केवल आरोप के लिए आरोप लगाने की परम्‍परा से तो....

 

Lpm/akt/1640/3c/7032007

 

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): (....व्‍यवधान) यह आकार कंहा से आ गया?

श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्‍डी): ...और इसलिए मैं विश्‍वास के साथ कह सकता हूं माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय किसी भी प्रान्‍त में विकास के लिए पानी, बिजली, सड़क, शिक्षा, शिक्षा, चिकित्‍सा, सिंचाई जैसी आधारभूत चीजों की आवश्‍यकता है और पिछले तीन वर्षों में इन मौलिक विषयों में से ऐसा विषय नहीं बचा जिसमें सुधार लाने के गंभीर प्रयास नहीं किये गये और महाहिम का अभिभाषण को अगर ईमानदारी से पढ़ेंगे तो अपने आपने सरकार की भावना की अभिव्‍यक्ति का वो दस्‍तावेज हैं जो राजस्‍थान को इन आधारभूत आवश्‍यकताओं की पूर्ति के नजदीक ले जाकर खड़ा कर रहा है। अब वह दिन दूर नहीं जब राजस्‍थान बिजली की दृष्टि से सम्‍पन्‍न प्रान्‍त होगा, अब वह दिन दूर नहीं जब राजस्‍थान का फ्लोराइड पानी पीने वाला व्‍यक्ति स्‍वाभिमान के साथ कह सकेगा  सरकार ने हमारी समस्‍या का गंभीरता से निदान किया है। वह दिन दूर नहीं माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय जब राजस्‍थान का गांव, गरीब और ढ़ाणी कहेगा प्रारंभिक शिक्षा के सार्वजनिकरण के नारे, राष्‍ट्रीय शिक्षा नीतियां न जाने कितनी बार बनी, कब से नारे लग रहे हैं लेकिन यह पहला अवसर राजस्‍थान के सामने उपस्थित हुआ जब राजस्‍थान की सरकार ने इनेसेटिव लेकर प्रारंभिक शिक्षा के सार्वजनिकरण के अभियान के एक आंदोलन के रूप में चला, कितने हजारों स्‍कूल खुले। मैं आंकड़ा नहीं रखना चाहता लेकिन में यह विश्‍वास के साथ कह सकता हूं माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय इस अवसर पर शिक्षा मंत्रीजी का आभार व्‍यक्‍त करना चाहता हूं कि किस ईमानदारी के साथ उन्‍होंने राजस्‍थान से कहा बिना भवन के कोई विद्यालय नहीं होगा, बिना अध्‍यापक के कोई विद्यालय, स्‍कूल नहीं होगा। राजस्‍थान के बच्‍चों की पढ़ाई के लिए शिक्षक का प्रबंध करेंगे, भवन का प्रबंध करेंगे और इतना ही नहीं माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय चाहे वो मुख्‍यमंत्री शिक्षा संबल अभियान चला हो, हमने राजस्‍थान के गरीब को इस बात के लिए मोटिफिएट करने की कोशिश की, उसके घर निमंत्रण देने का प्रयास किया। क्‍या वह राजस्‍थान की सरकार शिक्षा का दीपक आपके अंधेरे घर में जलाने का प्रयास करती और मैं साधुवाद देना चाहता हूं इस अवसर पर सरकार को, मुख्‍यमंत्रीजी को माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय मैं जिस जगह रहता हूं मेरे घर के सामने सवेरे-सवेरे अलाउदल पार्क के पास एक हजार आदमी आकर खड़ा होता है, पाँच बजे आकर खड़ा हो जाता है। उसके मन में कल्‍पना रहती है सूरज की भोर निकलेगी, कोई कार आकर रूकेगी, ठेकेदार आकर कहेगा 60 रूपए की मजदूरी का बेलदार चाहिए। जब बेलदारी मिलेगी तो शाम को बच्‍चो के लिए भोजन बनेगा। आज उस गरीब का बच्‍चा अगर पढ़ना चाहता है तो अपने घर से स्‍कूल के दरवाजे भूखा आ सकता है लेकिन विद्यालय से भूखा घर नहीं जा सकता। यह राजस्‍थान के इतिहास में कीर्तिमान स्‍थापित किया है..

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय गुंजल साहब कनक्‍लूड कीजिए। (....व्‍यवधान)

श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्‍डी): पाँच मिनट और लूंगा माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय.. 

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, कीर्तिमान तो अब कायम होने शुरू हुए हैं और आपने बीच में टोक दिया..

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): यही तो हैं जो उद्योग मंत्रीजी की सही भावनाओं को अभिव्‍यक्‍त करते हैं।

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री):  नजदीक है यह मुझे ध्‍यान है।

श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्‍डी): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, प्रधानमंत्री सड़क योजना, मैं वर्णन नहीं करना चाहता। सारे देश का नेतृत्‍व कर रहा है राजस्‍थान जिस गति से राजस्‍थान में प्रधानमंत्री सड़क योजना पर काम हुआ कल्‍पना से बाहर की बात है और यह कल्‍पना किसने दी इस देश को माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय 1977 राजस्‍थान की बात करें तो 90 से 98, 2004 से 07 और हिन्‍दुस्‍तान में छह साल का अटलजी का कार्यकाल कांग्रेसी या कांग्रेस की विचारों की सरकारें बनती रही इसको छोड़कर, क्‍या किया लेकिन पहली बार जब देश में प्रधानमंत्री सड़क योजना चालू हुई अटलबिहारी वाजपेयी इस देश के प्रधानमंत्री बने तो यह केवल भावना की अभिव्‍यक्ति नहीं थी माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय एक गंभीर सवाल हिन्‍दुस्‍तान के वातावरण में कोंद रहा था कि पचास साल, पचपन साल के इतिहास में अब की बार सड़क, अब की बार बिजली, अब की बार पानी वादों के आधार पर हिन्‍दुस्‍तान की जनता का विश्‍वास ढोल रहा था और इसलिए अटलबिहारी वाजपेयी ने गंभीरता से विचार किया। वादों के आधार पर जनता के विश्‍वास की डोर को बांधकर ज्‍यादा समय नहीं रखा जा सकता। राजनीति और राजनेता से दोनों से उसकी आस्‍था कमजोर पड़ रही है। लोकतंत्र के लिए घातक संकेत है और इसलिए पहली बार हिन्‍दुस्‍तान के इतिहास में शेरशाह सूरी के बाद दिल्‍ली की सल्‍तनत पर अटलबिहारी वाजपेयी जो पहले प्रधानमंत्री बने जिन्‍होंने प्रधानमंत्री सड़क योजना लागू की और कल्‍पना दी देश को जब आपका विश्‍वास वादों की डोर से नहीं हकीकत के साथ खड़ा होगा। 31 दिसम्‍बर,2007 का दिन आयेगा हिन्‍दुस्‍तान के नक्‍शे पर 2007 को 500 की आबादी का कोई गांव नहीं बचेगा जिसमें सड़क नहीं पहुंचेगी। तय किया था, 250 तक मामला आगे चला गया, 31 दिसम्‍बर,2012 एक डेड लाईन तय की थी कि हिन्‍दुस्‍तान के नक्‍शे पर कोई गांव नहीं बचेगा जिसकें सड़क नहीं पहुंचेगी। यह कल्‍पना जनता के विश्‍वास लोकतंत्र के प्रति बना रहे हैं। दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र जो केवल जनता की भावना और आस्‍था के आधार पर टीका हुआ है उसके चूल्‍हे संकट में न आये इसलिए अटलजी ने देश को एक विचार दिया और तय किया हम इस राष्‍ट्र को विकसित राष्‍ट्र बनाने के लिए स्‍वर्ण चतुर्भुज सड़क योजना बनाएंगे। ईस्‍ट-वेस्‍ट-साउथ-नॉर्थ कॉरिडोर बनाएंगे। हम इस देश के संसाधनों का उपयोग करेंगे, इस देश के जीवन को संवारने के लिए और महत्‍वाकांक्षी लम्‍बी-चौड़ी परियोजना इस देश के सामने उपस्थित की लेकिन माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय जब से केन्‍द्र में यूपीए की सरकार आई है खाली जनता के डर से योजनाओं का क्रियान्‍वयन चल रहा है जिन पर क्रियान्वि‍ति प्रारंभ नहीं हुई थी ठण्‍डे बस्‍ते में चली गई। अभी आप प्रसन्‍न हो सकते हैं लेकिन जब आम चुनाव आयेगा उसका हिसाब-किताब हिन्‍दुस्‍तान की जनता आपसे लेगी। मैं माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय आप एक गंभीर सवाल करना चाहता हूं और इस गंभीर सवाल के बाद अपनी बात को विराम दूंगा। आंकड़ों की बात नहीं करना चाहता। मैं बात करना चाहता हूं हम सब लोगों को मिलकर आज इस गंभीर सवाल पर विचार करना पड़ेगा। आने वाली पीढ़ी के भविष्‍य के बारे में, पिछले कुछ दिनों के आप आंकड़े उठाकर देखें नौजवान पीढ़ी में आत्‍महत्‍या की प्रवृत्ति बढ़ी है। क्‍या इस सदन में हमारे लिए गंभीर विचार नहीं? देश का भविष्‍य आत्‍महत्‍या की और नौजवान पीढ़ी आत्‍महत्‍या की और बढ़ रही है, क्‍या इस सवाल पर हमको चिंतन करने की आवश्‍यकता नहीं? इसके गंभीर कारणों में हमको झांकना पड़ेगा माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय सामान्‍य ग्रेज्‍युएट व्‍यक्ति जब अपने आपको रोजगार-परक नहीं कर पाता तो उसके जीवन में निराशा आती है, हताशा आती है और इसलिए वो निराश और हताश जीवन में आत्‍महत्‍या के रास्‍ते पर चला जाता है। आने वाली पीढ़ी के भविष्‍य को संवारने के लिए हमें चिंतन करना पड़ेगा।

श्री उपाध्‍यक्ष: धन्‍यवाद, गुंजल साहब आप समाप्‍त कीजिए काफी समय हो गया है, एक मिनिट में।

श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्‍डी):  कनक्‍लूड, कर रहा हूं। आने वाली पीढ़ी को हम किस प्रकार की एजुकेशन दें, रोजगारपरक शिक्षा, उसकी हताशा दूर हो, बेरोजगारी दूर हो और मैं उम्‍मीद करता हूं कि राजस्‍थान के शिक्षामंत्रीजी से जो आपने एजुकेशन इंसेटिव प्रोग्राम लागू किया है क्‍प्‍यूटरीकरण की जो शिक्षा आपने आरंभ की है उस विषय के साथ इस गंभीरता पर आप...

 

भीम/अरुण/7.3.07/16.50/3d

 

विचार करते हुए आगे बढ़ेंगे और अगर आज हमने इस विषय पर गंभीरता से विचार नहीं किया माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, तो मैं आज आपसे निवेदन करना चाहूंगा कि ये जो सैलाब बेरोजगारी का हमारे सामने आ रहा है हम इस सदन में बैठकर एक दूसरे का विरोध करके प्रसन्‍न हो लें, किसी प्रकार का तर्क-वितर्क करके अपनी बात कह लें लेकिन जिस रोज यह बेरोजगारों का सैलाब उमड़ कर आएगा, इस सारी व्‍यवस्‍था को ध्‍वस्‍त कर देगा। इस गंभीर चुनौती पर हमको आज सावधान होकर काम करना पड़ेगा और इसके लिए आज आवश्‍यकता है एक तरफ सरकारी दफ्तरों में चले जाएं काम नहीं हो रहा है मैन पॉवर की कमी है दूसरी तरफ देश की सबसे जटिल समस्‍या बेरोजगारी खड़ी है। आबादी बढ़ रही है हम यह चिंता तो करते हैं लेकिन कभी हमने इस विषय पर गंभीरता से विचार नहीं किया, क्‍या बढ़ी हुई आबादी हमारी दुनिया की सबसे बेहतरीन संसाधन नहीं बन सकती। भारी आबादी अब हम संसाधनों के रूप में तैयार करें और संसाधनों के रूप में तैयार करके दुनिया का नेतृत्‍व करने के लिए आगे बढ़ें। अगर हमने इस पर ईमानदारी से विचार किया, आज हम अगर दुनिया को आईआईटियंश एक्‍सपोर्ट कर रहे हैं इंजीनियर, डॉक्‍टर एक्‍सपोर्ट कर रहे हैं हमारे पास मिस्‍त्री हो सकते हैं लेकिन कुशल मेकेनिक नहीं हो सकते। हमें ईमानदारी से यह विचार करके इस दिशा में प्रयास करने पड़ेंगे और इन प्रयासों से हमें लघु उद्योगों को ग्रामोद्योगों की श्रेणी में ले जाकर खड़ा करना पड़ेगा और जब हम इस प्रकार के टैक्निशियन तैयार करेंगे, हम इस प्रकार के प्रशिक्षित इंजीनियर तैयार करेंगे तो मैं आज आपके सामने एक उदाहरण देना चाहता हूं माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, दुनिया के कई देशों के सर्वेक्षण आ रहे हैं यूरोपियन कंट्रीज में बर्थ दर घटी है औसत से ज्‍यादा की उम्र बढ़ी है, उम्र की औसत दर घटी है और आने वाले बीस साल दस साल के अन्‍दर-अन्‍दर यूरोपियन कंट्रीज सारी दुनिया भारत की तरफ निगाह उठा कर देख रही है। मुसलिम कंट्रीज को यूरोपियन कंट्रीज में रोजगार के लिए कोई स्‍थान नहीं है और उस स्‍थान की पूर्ति केवल हिन्‍दुस्‍तान कर सकता है और हिन्‍दुस्‍तान ...।

(समय समाप्ति सूचक घंटी)

श्री उपाध्‍यक्ष: धन्‍यवाद गुंजल साहब। श्रीमती अनिता भदेल।

श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्‍डी): मैं कंक्‍लूड कर देता हूं बस आखिरी है।

श्री उपाध्‍यक्ष: हां कंक्‍लूड कीजिये आप।

श्री प्रहलाद गुंजल (रामगंजमण्‍डी): हिन्‍दुस्‍तान कर सकता है और इस प्रतिस्‍पर्धा में मैं चाहता हूं कि हिन्‍दुस्‍तान का नेतृत्‍व करने के लिए राजस्‍थान आगे आए और यह सिलसिला प्रारंभ हुआ राजस्‍थान में पंचायत समितियों में गांव-गांव तक आईटीआई खोल कर, पोलिटेक्निक खोलकर, कंप्‍यूटर की शिक्षा के पाठ्यक्रम चलाकर। यह सिलसिला आगे बढ़ेगा और राजस्‍थान निश्चित रूप से आगे बढ़ेगा। इस अवसर पर मुख्‍यमंत्री जी, सारी सरकार को धन्‍यवाद देते हुए महामहिम के अभिभाषण का समर्थन करते हुए अपनी बात को विराम देता हूं।  बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): आप अब तो समझ गये होंगे तारानगर से आने वाले माननीय सदस्‍य कि ...(व्‍यवधान)... मामला क्‍या था। ...(व्‍यवधान)... अब बर्फ की तरह ठंडे हो गये आप।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्रीमती अनिता भदेल।

 

सदन की कार्यवाही

विधान सभा की बैठक के निर्धारित समय में वद्धि

डॉ.ओ.पी.महेन्‍द्रा (सरकारी उप मुख्‍य सचेतक): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूं कि महामहिम राज्‍यपाल के अभिभाषण एवं माननीय मुख्‍यमंत्री जी के उत्‍तर तक इस सदन का समय बढ़ाया जाय।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): हम तो ठंडे ही हैं ये तो वातावरण ही आप लोगों ने गरम बना रखा है।

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): ...(व्‍यवधान)... कम फैलाओगे तो बाकी भी सुख पाओगे।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): अब आप इतने ठंडे हो गये कि कोई इंजेक्‍शन काम नहीं करता।

श्री उपाध्‍यक्ष: क्‍या सदन की अनुमति है?

(स्‍वीकृत)

महामहिम के अभिभाषण पर मुख्‍यमंत्री जी के जवाब देने तक सदन का समय बढ़ाया जाता है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आप इंजेक्‍शन लगाते हैं उसके लिए आप बहुत बधाई के पात्र हैं। आप अपनी हिम्‍मत बनाये रखो।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्रीमती अनिता भदेल।

श्रीमती अनिता भदेल (अजमेर पूर्व): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय महामहिम राज्‍यपाल महोदय द्वारा दिये गये अभिभाषण के ऊपर अपनी विचार व्‍यक्‍त करना चाहती हूं।  तीन दिन से इस भाषण पर बहुत बहस सुनी है आंकड़ों के माध्‍यम से राजस्‍थान का विकास किस गति से, किस तेजी से, किस दिशा में घूम रहा है यह बहुत अच्‍छे से हम तार्किक रूप से इस बात को रख सकते हैं। पर जैसा कि हिण्‍डोली से आने वाले माननीय सदस्‍य और तारानगर से आने वाले माननीय सदस्‍य का कहना है कि ये तो आंकड़े हैं पंचवर्षीय योजनाओं में वृद्धि हर वर्ष बढ़ती है लेकिन मैं एक बिन्‍दु के माध्‍यम से आपका ध्‍यान आकर्षित करना चाहूंगी कि निश्चित रूप से कई कारणों से पंचवर्षीय योजनाओं में वृद्धि होती है पर उनकी प्रतिशतता क्‍या है यदि हम इस बात को बारीकी से देखेंगे तो निश्चित रूप से जो ग्‍यारहवीं पंचवर्षीय योजना का आकार बढ़ा है वो बहुत बड़े प्रतिशत के साथ बढ़ा है और ये राजस्‍थान के इतिहास में शायद पहली बार हुआ है कि इतना बड़ा प्रतिशत हमारे सामने आया है और आकार सिर्फ बढ़ा ही नहीं है बल्कि उसको खर्च करने के लिए नियमानुसार योजना बनाकर योजनागत तरीके से उसको किस प्रकार से प्रतिवर्ष खर्च करेंगे, कहां-कहां खर्च करेंगे किसी स्थिति में कौन से कार्य आएंगे, कब वो स्थितियां बनेंगी ये सब पूर्व निर्धारित है, पूर्व तय है और जब हम ये पूर्व निर्धारित कर देते हैं तो निश्चित रूप से जितनी बड़ी योजना होती है उतना ही बड़ा व्‍यय होता है इस बात को आप तय मानिये कि निश्चित रूप से ये इतनी बड़ी जो योजना बनी है वो निश्चित रूप से पूरी व्‍यय होगी और जैसा कि कहा गया कि कुशल वित्‍तीय प्रबंधन आप सिर्फ आंकड़ों के माध्‍यम से बताना चाहेंगे पर मैं जैसा समझती हूं कि जिस प्रकार से केन्‍द्रीय मंत्रियों ने भी सराहना की है विभिन्‍न योजनाओं के माध्‍यम से कि हमारा कुशल वित्‍तीय प्रबंधन है इसी आधार पर केन्‍द्र सरकार ने हमारी प्रशंसा की है और ये वित्‍तीय प्रबंधन ही है जिसके कारण से बहुत अच्‍छे तरीके  से राजस्‍थान के विकास की गति को हम आगे बढ़ा पाए हैं।  मैं यह बताना चाहूंगी कि व्‍यक्ति का जैसा दृष्टिकोण होता है उसके विचार भी वैसे ही होते हैं जिस प्रकार से व्‍यक्ति देखता है उसके मन में उसी प्रकार से विचार उत्‍पन्‍न होते हैं । हमने देखा है कि हम जो ऋण लेंगे उस ऋण का उपयोग हमारी परिसम्‍पत्तियों के निर्माण के लिए लगायेंगे, ताकि एक स्‍वस्‍थ राजस्‍थान का निर्माण हो, सुन्‍दर राजस्‍थान का निर्माण हो और वो परिसंपत्तियां हमारी जनता के उपयोग के काम आए। हमारे मतदाता, हमारे नागरिक उन परिसंपत्तियों का उपयोग करके उनके जीवन को संवार सके, उनके जीवन का निर्माण हो सके।  मैं यहां हमारी माननीय मुख्‍यमंत्री जी विराजमान हैं और सदन के सभी माननीय सदस्‍यों का ध्‍यान इस ओर आकर्षित करना चाहूंगी कि कहते हैं महिला की शक्ति यदि महिला की अपनी इच्‍छाशक्ति उसके पास हो तो वो वो कर दिखाती है जो असंभव होता है।  आपने महिला सशक्तिकरण के लिए जो कदम उठाया है उसी का परिणाम यह है कि आज तीन लाख से ज्‍यादा महिलाएं उससे भी ज्‍यादा संख्‍या में महिलाओं को अपनी संपत्ति का स्‍वामित्‍व का अधिकार प्राप्‍त हुआ है और वो स्‍वामित्‍व का अधिकार प्राप्‍त करके अपने आपको बहुत स्‍वाभिमानी महसूस करती है उसमें एक आत्‍मविश्‍वास बढ़ता है कि एक परिवार का केन्‍द्र बिन्‍दु मैं हूं और परिवार पूरा मेरी तरफ देख रहा है। जब उसका आत्‍मविश्‍वास बढ़ता है तो निश्चित रूप से उसका परिवार समृद्ध होता है और यदि उसका परिवार समृद्ध होता है तो यह सभी माननीय सदस्‍यों को अच्‍छे से मालूम होगा कि एक परिवार से समाज बनता है और समाज से राष्‍ट्र बनता है तो हम राष्‍ट्र निर्माण में लगे हुए हैं और माननीय मुख्‍यमंत्री जी इस प्रकार एक राष्‍ट्र का निर्माण किस प्रकार से कर रही हैं मैं आपको यह बताना चाहती हूं। मैं यह बताना चाहती हूं कि शिक्षा के क्षेत्र में सरकार ने बहुत सारे काम किये हैं। इतने सारे विद्यालय खोले हैं कि उनकी कोई गिनती नहीं है। प्राथमिक विद्यालय हो चाहे माध्‍यमिक विद्यालय हो विद्यालयों के लिए भवन का निर्माण, अध्‍यापकों की व्‍यवस्‍था और प्राथमिक शिक्षा के सार्वजनीकरण के लिए मिड-डे मील की व्‍यवस्‍था। सभी ने कहा कि पहले घूघरी बच्‍चों को खिलायी जाती थी लेकिन माननीय मुख्‍यमंत्री जी के ही प्रयास रहे कि अब बालकों को तरह-तरह का भोजन विद्यालयों में दिया जा रहा है और ये प्रभाव डालता है बालकों के नामांकन पर बालकों के ठहराव पर। यदि बालक विद्यालय में आता है और विद्यालय में ठहरता है तो निश्चित रूप से जिस लक्ष्‍य को हमें प्राप्‍त करना चाहिए वो लक्ष्‍य हमें निश्चित रूप से प्राप्‍त होगा। प्राथमिक शिक्षा के सार्वजनीकरण का लक्ष्‍य हमें प्राप्‍त होगा पर मैं इस अवसर पर हमारी मुख्‍यमंत्री जी का ध्‍यान इस ओर आकर्षित करना चाहूंगी कि हमने संख्‍यात्‍मक दृष्टि से बहुत सारे विद्यालय खोले हैं बहुत सारे कार्य किये हैं पर अब हमें विद्यालयों की गुणवत्‍ता की ओर ध्‍यान देने की आवश्‍यकता है।

 

कैलाश/अरुण   7.3.07  17.00  (1) 3e

 

मैं समझती हूं कि आगामी सत्र में आप जो बजट प्रस्‍तुत करेंगी उस बजट में बहुत छोटी छोटी चीजें है यदि हम उनकी व्‍यवस्‍थाएं कर दें जिन अध्‍यापकों ने अपने रिजल्‍ट जीरो परसेंट दिये हैं उनको शहरी खेत्र में हम पदस्‍थापित ना करें, ग्रामीण क्षेत्र में जो अध्‍यापक लगे हुए है उनके रिजल्ट यदि अच्‍छे हैं तो उनको प्रोत्‍साहन राशि के रूप में कुछ दिया जाये । टीचर्स को दिये जाने वाला जो टीएलएम है उसके उपयोग की सुनिश्चित व्‍यवस्‍था करें और कई बार मैंने अखबारों में पढा है अध्‍यापक मिड डे मील के प्रभारी होने के नाते आपस में लडते हैं तो इससे एक नया विचार सामने आता है कि उन के लडने का कारण क्‍या है । यह लडने का कारण जो बन रहा है उसको हम समाप्‍त करें और जिस प्रकार से आपके मन में यह विचार है कि हम केन्‍द्रीकृत रसाई घर बनाकर सब जगह भोजन वितरित करें ताकि अध्‍यापक अपने अध्‍यापन के कार्य में लगे रहे और इस प्रकार जो शिक्षा विभाग भ्रष्‍टाचार से बचा हुआ था वह वहां न पनपने पाये । यदि इस प्रकार की व्‍यवस्‍था हम करेंगे तो हम निश्चित रूप से शिक्षा को गुणात्‍मक दृष्टि से भी बढावा देंगे और शिक्षा के माध्‍यम से राजस्‍थान का हम निर्माण कर पायेंगे ।

उपाध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान विभिन्‍न भौगोलिक परिस्थितियों वाला प्रदेश है और यहां पर आपदाएं होती रहती हैं । कभी अतिवृष्टि के कारण से, कभी बाढ के कारण से । लेकिन जैसा कि रबी की फसल के दौरान ओलावृष्टि हुई और उस ओलावृष्टि के तुरन्‍त बाद माननीय मुख्‍य मंत्री जी ने सभी मंत्रियों को आदेश देकर, अधिसूचना जारी कर के यह कहा कि जहां भी फसलों का खराबा हुआ है वहां किसानों को राहत पैकेज के माध्‍यम से आप राहत दें, यह कदम इतनी तीव्र गति से उठाया गया कदम है जिसके लिये इस अवसर पर मैं आपकी बहुत बहुत सराहना करती हूं । (व्‍यवधान) कई बार किसान बहुत लंबा इंतजार करते हैं कि किसी राहत पैकेज की घोषणा होगी तब हमें राहत मिलेगी । लेकिन यह जो कदम उठाया उससे किसान बहुत प्रसन्‍नचित है कि उसको तुरन्‍त समय पर अपनी सहायता उपलब्‍ध हो पायेगी ।

जैसा कि पंच वर्षीय योजनाओं के बारे में कहा गया अब की बार जो पंच वर्षीय योजना बनी है उसको हमने गांव से देखा है कि जो हमारी आधारभूत संरचना है ग्राम, उस गांव के विकास के आधार पर हम राजस्‍थान का विकास कर पायेंगे तो आगामी पाँच वर्षों में हमारे गांव का विकास क्‍या होना चाहिये । प्रत्‍येक ग्राम पंचायत की आवश्‍यकताएं क्‍या है और वहां के जो चुने हुए जनप्रतिनिधि हैं वह अपने गांव में क्‍या विकास चाहते हैं उसके वहां से अनुमोदित करा कर ग्राम सभाओं से अनुमोदन करा कर वह प्रस्‍ताव यहां प्राप्‍त हुए और उनके अनुसार पंच वर्षीय योजना बनी । यह एक बहुत बड़ा सराहनीय कदम है जिसके लिये माननीय मुख्‍य मंत्री जी की मैं बहुत बहुत प्रशंसा करना चाहूंगी ।

श्री उपाध्‍यक्ष: धन्‍यवाद बहन जी ।

श्रीमती अनिता भदेल (अजमेर पूर्व): दो मिनट और बोलने दीजिए । मैं एक बहुत आवश्‍यक चीज की ओर आपका ध्‍यान आकर्षित करना चाहूंगी कि जल के बिना जीवन संभव नहीं है और शायद वह दिन दूर नहीं जब जल के लिये विश्‍व युद्ध लडा जाये । सिंचाई परियोजनाओं पर हमने बहुत सारे करोड़ रुपये खर्च किये हैं और यह अभिभाषण जब मैंने पढा तो मुझे ज्ञात हुआ कि नर्मदा परियोजना पर अनिवार्य रूप से फव्‍वारा पद्धति को लागू करने की बात कही गई है । तो हम क्‍यों ना इसी की भांति जितनी भी हमारी परियोजनाएं हैं, सिंचाई की परियोजनाएं हैं उन पर भी यही बात लागू करें ताकि जल के अपव्‍यय को हम रोक सकें और जो ग्रामवासी फ्लोराइड युक्‍त पानी पीने के लिये मजबूर हो रहे हैं उनको हम शुद्ध पेयजल उपलब्‍ध करा सके। सिर्फ यही कह कर मैं अपनी बात को समाप्‍त करूंगी । उपाध्‍यक्ष महोदय, आपने मुझे समय दिया उसके लिये आपको बहुत बहुत धन्‍यवाद ।

श्री उपाध्‍यक्ष: धन्‍यवाद । श्री जगन्‍नाथ पहाडिया जी ।

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (बैर): उपाध्‍यक्ष जी, मैं काफी दिनों के बाद इस सदन में कुछ अपने विचार जाहिर करने खड़ा हुआ हूं और वह भी माननीय राज्‍यपाल के अभिभाषण पर जो हमारे लिये एक पवित्र मौका होता है । मैं समझ रहा था कि हम अपने आप को राजस्‍थान तक सीमित रखें क्‍योंकि राज्‍यपाल का भाषण राजस्‍थान के राज्‍यपाल का है और उनके अभिभाषण में सरकार ने जिन बातों का जिक्र किया है वह राजस्‍थान से ही ताल्‍लुक रखती है । मुझे खुशी हुई कि मेरे से पूर्व वक्‍ताओं ने राजस्‍थान की सीमाओं को लांघ दिया और सारे देश को अपना परिवेश बना लिया । यह बहुत खुशी की बात है कि वह राजस्‍थान के साथ साथ देश का ध्‍यान रखते हैं और मैं इसीलिए भारत की सीमाओं को नहीं लांघूगा ।

श्री उपाध्‍यक्ष: दिल्‍ली की तरफ तो ध्‍यान देना पडेगा ।

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (बैर): उपाध्‍यक्ष जी, वैसे राजस्‍थान हिन्‍दुस्‍तान का बहुत महत्‍वपूर्ण अंग है और हिन्‍दुस्‍तान भी दुनिया का एक अंग है । अगर इसी रूप में माननीय सदस्‍य देखते हैं तो मेरा जी चाहता है मैं भी आपको काबुल कंधार आपको ले चलूं । उपाध्‍यक्ष महोदय, मुझे मेरी मर्यादाओं का ध्‍यान है क्‍योंकि मैं केवल सदस्‍य नहीं मुझे इस बात का सौभाग्‍य मिला है कि मैं राज्‍यपाल भी रहा हूं और इसलिए अपनी मर्यादाओं का पूरा ध्‍यान रख कर चलूंगा, हमेशा रखता रहा हूं । कभी मजबूरी हो जाती है वह बात अलग है । इसलिए मैं इतना ही कहना चाहूंगा कि जब हम राजस्‍थान की चर्चा कर रहे हैं अच्‍छा यह हो कि हम अपने आप को राजस्‍थान तक सीमित रखें और चूंकि राजस्‍थान हिन्‍दुस्‍तान का एक बहुत महत्‍वपूर्ण अंग है इसलिए अपने आप को वहां तक ही विस्‍तारित करें तो आश्‍चर्य की बात नहीं है । लेकिन जिस परिप्रेक्ष्‍य में राज्‍यपाल के अभिभाषण को राजनीतिक रूप दिया गया मेरे ख्‍याल से बहुत उचित नहीं है । कहलाने के लिये विकास की बहुत योजनाओं की चर्चा की गई है लेकिन मुझे ताज्‍जुब हुआ इस भाषण को पढकर के और विपक्षी दलों के भाषणों को सुनकर कि उन्‍होंने अपने आप को सरकार की आर खास तौर से माननीय मुख्‍य मंत्री जी की प्रशंसा तक सीमित रखा । मैंने गौर से इसको पढा है , एक बार नहीं मैंने कई बार इसको पढा है । कभी सदन में बैठकर और कभी सदन से बाहर बैठकर के सभी माननीय सदस्‍यों के भाषण सुने हैं । मुझे कोई पाइंट नजर नहीं आया जब कि राजस्‍थान की सरकार को माननीय सदस्‍यों ने कोई सुझाव दिया हो । तारीफ करना बुरा नहीं है, अच्‍छे काम की तारीफ होनी चाहिये लेकिन कोई अच्‍छा काम हो तो । माननीय सदस्‍य केवल अपने आप को संतुष्‍ट कर रहे हैं यह कह कर कि भारत सरकार के मंत्रियों ने राजस्‍थान की सरकार की, खास तौर से मुख्‍य मंत्री जी की बडी प्रशंसा की है । माननीय सदस्‍य यह भूल गये कि जब भी कोई बाहर से अतिथि आता है आम तौर पर मेजबान की तारीफ ही करता है और इस बात की कोशिश करता है कि जिन के यहां हम जा रहे हैं उनका मन ठीक रहे, उनकी तारीफ करे, उनकी प्रशंसा करें चाहे हमारा मन मस्तिष्‍क कुछ भी कहता हो । कहीं ऐसा तो नहीं है कि जिन माननीय मंत्रियों ने यहां आकर औपचारिकता वश कुछ कह दिया वह ऐसा ही हो । मैं समझता हूं ऐसा नहीं होगा खास तौर से माननीय मुख्‍य मंत्री जी को निवेदन करना चाहूंगा कि अपने आप को उसके अनुरूप ढालने की कोशिश करें ।

 

ans/akt  17:10  3f  07.03.2007

 

क्‍योंकि ऐसे तो माननीय सदस्‍यों ने कई ऐसी बातें कह दी जिसकी चर्चा करना मैं उचित नहीं समझता। बहुत अभिमान के साथ कहा गया कि वह दिन दूर नहीं जब राजस्‍थान कई मामलों में, खास तौर से बिजली के मामले में आत्‍मनिर्भर होगा1 हम सब इस बात को चाहते हैं और भगवान से प्रार्थना करते हैं कि वह दिन जल्‍दी से जल्‍दी आ जाए लेकिन अफसोस इस बात के लिए है जब राजस्‍थन आत्‍मनिर्भर होगा बिजली के मामले में तो जो आज सत्‍तापक्ष में बैठे हुए हैं वह वहां पर नहीं होंगे, यह हमको ही करना होगा।

इसी तरह से सड़क परियोजना की चर्चा करके पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी  की तारीफ की गई, उसमें कोई बुराई की बात नहीं है। मुझे मालूम नहीं कितने माननीय सदस्‍य प्रधानमंत्री वाजपेयी के साथ रहे, मुझे भी इस बात का सौभाग्‍य मिला लेकिन अफसोस इस बात का है कि विपक्ष अटक गया केवल 500 तक की आबादी वाले गांवों तक, जबकि  कांग्रेस की योजना है कि गांव- गांव सड़क से जुड़ना चाहिये और इस दिशा में काम किया जा रहा है। 500 से बहुत नीचे चले गये। हम तो चले गांव-गांव, गांव-गांव तक चले गये, राजस्‍थान तक चले गये।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री):राजस्‍थान में किस-किस....(व्‍यवधान)

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (बैर): केवल एक योजना है सड़कों की,अनेक योजनाएं हैं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): जरा मेरा मार्गदर्शन कर दीजिए पहाडिया जी, आपके पास मुख्‍यमंत्री का भी अनुभव है, कौन-कौनसी योजना है, हम लागू कर दे उसको भी। (व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): क्‍या आपको पता नहीं है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में पहाड़ी इलाके में, डेजर्ट इलाके में 250 के गांव लिये जाने की बात तय हो चुकी है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): यह तो है, यह तो मालूम है पर यह तो कह रहे हैं ना उससे नीचे चले गये।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा):250 तो आ गये है, जब 250 आ गये हैं तो उससे नीचे भी जाएंगे। Why are you trying to mislead? आप काहे के लिए मिसलीड कर रहे हैं? (व्‍यवधान)

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): राठौड साहब, आप 250 की आबादी के गांवों की बात कर रहे हैं, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना है उसमें रेवेन्‍यू विलेज नहीं है, उसमें हेबीटेशन है।

(समय:   बजे )

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

 

हेबीटेशन के हिसाब से बाड़मेर जिले में चार राजस्‍व गांव नहीं है,केवल ढाणियां है उनको भी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से जोड़ा गया। बाड़मेर जिले की चार सड़कों के मैं आपको नाम बता दूं।

श्री अध्‍यक्ष: आपके ही माननीय सदस्‍य बोल रहे हैं। आप बीच में खड़े होकर  के क्‍यों ....  (व्‍यवधान)

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): अगर हेबीटेशन को आधार मानकर, आप प्रस्‍ताव बनाकर भारत सरकार को भेजे तो इससे भी तीन गुणा सड़के बन सकती है, आपको पैसा मिल सकता है लेकिन आपने हेबीटेशन का ध्‍यान ही नहीं दिया, आप तो एक रेवेन्‍यू विलेज पकड़कर बैठ गये।

श्री अध्‍यक्ष: आप अपने माननीय सदस्‍य का समय ले रहे हैं।

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): अब आपको कौन समझाए, यह किसी के ताकत की बात नहीं है। ( व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या करें ?

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (बैर): अध्‍यक्ष जी, मैं निवेदन कर रहा था कि कुछ योजनाओं के जरिये से 500 से नीचे के आबादी वाले गांवों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। मैंने नहीं कहा कि सब पहुच गये लेकिन कोशिश की जा रही है। हमारी योजना है...(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): इस योजना का नाम पहाडि़या जी के नाम से (व्‍यवधान) पहाडिया़ सड़क योजना।

श्री अध्‍यक्ष: आप मजाक नहीं बनाये अब।

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): मुख्‍यमंत्री सड़क योजना  भी है, नाम मैं बता दूं आपको, उससे जोड़ दो।

श्री अध्‍यक्ष: गुढामालानी से आने वाले  माननीय सदस्‍य, बीच में नहीं टोके।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): यह बात-बात में इंटरवीन कर रहे हैं, इनको रोकिये। पार्लियामेंट अफेयर्स मिनिस्‍टर साहब बात-बात में इंटरफेयर कर रहे हैं। एक्‍स चीफ मिनिस्‍टर  बोल रहे हैं, सदन के वरिष्‍ठ सदस्‍य है।(व्‍यवधान) आप रोकिये उनको।

श्री अध्‍यक्ष: अब नहीं बोलने दूंगी, मैं थी नहीं यहां पर।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): हम तो खड़े होकर करेक्‍ट कर रहे हैं साहब।(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: नगरीय विकास मंत्री जी, आप बिराज जाए।

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (बैर): अध्‍यक्ष जी, प्रस्‍ताव के प्रस्‍तावक ने कहा कि ग्‍याहरवीं पंचवर्षीय योजना के जरिये  से हमारा पर्दापाश हो गया । हमारा तो कुछ न कुछ हुआ ही, अच्‍छाई हुई बुराई हुई। हमारी मुश्किल है कि उनका पर्दापाश हम करें तो कैसे करें, आखिर उनका योजना में विश्‍वास नहीं है। अध्‍यक्ष जी, क्‍या आपको याद नहीं है  कि जब जनता पार्टी राज में आई तो  प्‍लान होलीडे हो गया था। प्‍लानिंग हुआ ही नहीं था। रोलिंग प्‍लान आ गया था। इसलिए इस बात का मौका   हमको मि लेगा, जो शायद नहीं मिले, कि वह योजना बनाये और उसका पर्दापाश हम करें, अभी तक तो ऐसा कोई मौका नहीं आया।

बहुत जोर से कह दिया कि राजस्‍थान अब बीमारू राज्‍य नहीं है। हमारी योजनाओ की तुलना, आज की ग्‍यारहवीं योजना की तुलना आठवीं से की गई है। मैं आपको  उदाहरण के तौर पर एक पैराग्राफ पढ़कर सुनाता हूं, पैरा चार है, योजना आयोग द्वारा राज्‍य की वार्षिक योजना 2007-8 के लिए 11638.86 करोड़ रूपये की स्‍वीकृति की गई है जो कि राज्‍य की आठवीं पंचवर्षीय योजना के कुल आकार का,आठवी, नवीं नहीं, दसवीं नहीं, आठवीं योजना के कुल आकार का 11500 करोड़ रूपये से अधिक है।

अध्‍यक्ष जी, जहां तक मैं समझता हूं तुलना हमेशा पिछली योजना से या पिछले कार्यों से की जाती है। मैं आशा करके चलता हूं कि अब  जब भी तुलनात्‍मक अध्‍ययन करें, माननीय वित्‍त मंत्री जी,मुख्‍यमंत्री जी इस बात का ध्‍यान रखे कि तुलना का भी कोई आधार होता है। 

यह कहना कि अब बीमारू राज्‍य नहीं है, इस भाषण को देखने के बाद यह स्‍पष्‍ट  हो जाता है कि  बीमार करने का तो आपका इरादा ही नहीं है,बीमार करने का तो आपका इरादा ही नहीं है क्‍योंकि किसी भी राज्‍य को चलाने के लिए सरकार की प्राथमिकता लॉ एंड आर्डर की होती है। इस अभिभाषण के जब हमने पढ़ा तो  जैसे लॉ एंड आर्डर के नाम का कोई महत्‍व ही नहीं है। बहुत पीछे जाकर थोड़ा सा हवाला दिया गया है। हांलाकि उसमें कुछ माना गया है कि कुल मामलों में राजस्‍थान के अंदर अपराध बढ़े हैं। हमारी ऐसी मान्‍यता है कि चोरी हो, डकैती हो, बलात्‍कार हो, महिला का उत्‍पीड़न हो, एस सी,एसटी पर अत्‍याचार हो  सबके अपराध बढ़े हैं और राजस्‍थान बीमारू राज्‍य नहीं है। पीने का पानी नहीं है,बीमारू राज्‍य नहीं है, विघार्थियों के लिए बिजली नहीं है लेकिन राजस्‍थान बीमारू राज्‍य नहीं है, प्रेस वाले पिट रहे हैं  लेकिन राजस्‍थान बीमारू राज्‍य नहीं है, हमारी ऐसी आशा है कि इन सब बातों का भी ध्‍यान रखा जाएगा।

यह कहना कि यह कुशल प्रबंधन का ही कारण है जिससे कि राजस्‍थान काफी विकास की और आगे बढ़ रहा है, मैं पूछना चाहता हूं अध्‍यक्ष जी कि ऐसा राज्‍य है क्‍या जिसकी योजना पिछली योजना से ज्‍यादा रकम की नहीं हो, क्‍या राजस्‍थान की ऐसी कोई योजना है जबकि पिछली योजना से दूसरी योजना अधिक रकम की नहीं बनी हो, क्‍या ऐसी कोई योजना है जिस योजना में विकास के काम पिछली योजना से ज्‍यादा नहीं सोचे गये हो ? यदि ऐसा है तो हक का प्रबंधन कैसा है, प्रबंधन का एक ही उदाहरण देकर इस टोपिक को समाप्‍त करूंगा कि  डिजास्‍टर  मेनेजमेंट कैसा है उसको तो आप देखे । बाढ़ आये, अकाल आये, तुरंत प्रबंध  नहीं होता। बाढ़ का पानी आज कई गांवों में भरा पडा है, उनके स्‍थाई निकास की आज तक कोई व्‍यवस्‍था नहीं है, उन गांवों के नाम नहीं बताऊंगा, आप सब जानते हैं।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री: अध्‍यक्ष महोदय, या तो आपको पूरे फेक्‍ट्स यहां रखने चाहिये  अपनी बात के साथ में । आप बाढ़ की बात बार-बार लाते हैं1 बाढ़ में आपके  दो-दो केन्‍द्रीय मंत्री आये जो जमीन पर उतरे नहीं, हेलीकाप्‍टर से सर्वे करके वापस चले गये। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय मंत्री जी, बीच-बीच में नहीं बोले।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): राजस्‍थान को क्‍या मदद की केन्‍द्र सरकार ने, यह सब आपके सामने हैं1 राजस्‍थान सरकार ने कितना किया  यह भी  आपको  जानकारी में होना चाहिये। कितना अभी....( व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: बीच में नहीं बोले।

 

दुर्गा/त्रिपाठी 070307 1720 3g

 

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, चूंकि मैं उसी जिले से आता हूं जहां से माननीय पहाडि़याजी आते हैं। (व्‍यवधान)

श्री जोगेश्‍वर गर्ग (जालौर): ये तथ्‍य नहीं दे रहे हैं, ये तो कविता कर रहे हैं।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैं उसी जिले का हूं जहां से माननीय पहाडि़याजी आते हैं। भरतपुर के लोगों ने बहुत खुशी जाहिर की थी जब आप मुख्‍य मंत्री बने थे। परन्‍तु राजस्‍थान में या भरतपुर जिले में एक काम आपके कार्यकाल का बता दो कि आप मुख्‍य मंत्री रहे, आपने एक काम राजस्‍थान के अन्‍दर कोई बढिया कर दिया हो।  आज सलाह देना बहुत आसान है। सलाह देने में पैसा खर्च नहीं होता है, पहाडियाजी। कुछ करके बताते, आपको भी भगवान ने मौका दिया था और यह हमारे जिले का सबसे बड़ा दुर्भाग्‍य रहा कि आप मुख्‍य मंत्री बनने के बाद भी, आज इन तीन सालों के अन्‍दर भरतपुर में काम होना शुरू हुआ है, आज भरतपुर की जनता भी मानती है कि राजस्‍थान में सरकार में हमारी कोई हिस्‍सेदारी है। और आप मुख्‍य मंत्री होते हुए भी भरतपुर जिले को बिलकुल शून्‍य करके गये थे। (व्‍यवधान)

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (बैर): मुझे बहुत खुशी हुई कि माननीय सदस्‍य ने मेरा ध्‍यान भरतपुर पर दिला दिया, सीमित कर दिया (व्‍यवधान) लेकिन मैंने कहा, मैं राजस्‍थान पर बोल रहा हूं।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी (राज्‍य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवासीय): माननीय पहाडिया साहब महादेवी वर्मा की कविता पढ़ रहे हैं। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: अब आप उन्‍हें कविता पढने दीजिये। आपको क्‍या है। माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य। (व्‍यवधान)

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (बैर): एक जिले का व्‍यक्ति नहीं हूं उनकी तरह से। और अपने आपको सीमित नहीं करुंगा।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): इनको रोकिये।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): नहीं हम तो रुके हुए हैं। हम तो एक बात से सहमत हैं।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय मंत्रीजी।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): दिगम्‍बरसिंहजी, कितने वक्‍त थे पहाडियाजी। आप यह बेकार की बात कर रहे हो यहां बैठे हुए, कितने वक्‍त रहे थे।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): एक साल रहे। एक साल तो रहे।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): एक साल, क्‍या बात कर रहे हो। (व्‍यवधान) एक साल रहे, तो आपको 3 साल हो गये। आपने क्‍या तीन के तेरह कर दिये वहां पर। आपने क्‍या तीन के तेरह कर दिये वहां पर। (व्‍यवधान)

श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल (देसूरी): उनको मुख्‍य मंत्री नहीं देख सकते थे, आपने हटा दिया। (व्‍यवधान)

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): एक साल के अन्‍दर यदि पहाडि़याजी की समझ में महादेवी ...(व्‍यवधान)

श्रीमती लक्ष्‍मी बारूपाल (देसूरी): कांग्रेस वैसे तो दलितों की हितैषी बनती है, मगर उनको साल भर ही रखा, आपने हटा दिया। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: सत्‍तापक्ष के माननीय सदस्‍यगण, बीच में नहीं बोलें। निवाई से आने वाले माननीय सदस्‍य।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): हमने हटाया कि नहीं हटाया, अब आप बना दो किसी को, हम कहां रोक रहे हैं, आपको।

श्री जोगेश्‍वर गर्ग (जालौर): लोग एक दिन में चमड़े के सिक्‍का चला लेते थे, ये सवा साल रहे थे।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): इनको कम समय आपके कारण मिला, यह पहाडियाजी के मन से पूछो।

श्री अध्‍यक्ष: पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्‍टर साहब, आप तो बीच में नहीं बोलें।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): इनको अगर कम समय मिला, इसके दोषी आप हो, व्‍यक्तिगत तौर पर। यह पहाडियाजीके मन से पूछो।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): हो-हो, क्‍या कहने।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आपने जो षड्यंत्र रचा था। पहाडियाजी के घाव अभी तक हरे हैं। षड्यंत्र आपने इनके खिलाफ रचा था।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): हो-हो क्‍या कहने आपके। (व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): बहुत धोखा किया आपने।

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): यह ध्‍यान रखने की बात है।

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (बैर): माननीय अध्‍यक्षजी, मुझे बहुत खुशी है कि राज्‍यपाल के अभिभाषण के बजाय मैं चर्चा का विषय बना। माननीय अध्‍यक्षजी, मैं आपके जरिये धन्‍यवाद देना चाहता हूं उन सदस्‍यों को जिन्‍होंने राज्‍यपाल के अभिभाषण के बजाय मुझे चर्चा का विषय बनाया और खास तौर से माननीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रीजी को जिन्‍होंने इस बात की कोशिश की कि मैं राजस्‍थान के लेवल से उतरकर केवल एक जिले तक आ जाऊं। अब तक जो काम हुए हैं, आखिर किसने किये, भरतपुर में या राजस्‍थान में। उन सबकी चर्चा करने की आवश्‍यकता नहीं है, बहुत समय लग जायेगा। आप सब उस बात को जानते हैं। यहां पर इस बात की चर्चा की गयी कि अब राजस्‍थान में ओवर ड्राफ्ट नहीं है। और इस बात की भी चर्चा की गयी कि रिजर्व बैंक में मार्गोपाय अग्रिम नहीं लेना पडा यह सब हालात बदलते हैं और इसी का कारण है कि न कवेल राजस्‍थान बल्कि हिन्‍दुस्‍तान का कोई राज्‍य शायद, हो सकता है, मुझे जानकारी में नहीं हो, शायद हो। जिस पर ओवर ड्राफ्ट हो। (व्‍यवधान) फिर भी मैं चैलेंज नहीं कर रहा हूं। मैं इतना ही कह रहा हूं कि शायद ही कोई राज्‍य ऐसा होगा जिस पर ओवर ड्राफ्ट हो या जिसने रिजर्व बैंक से अग्रिम राशि ली हो। और यही कारण है कि आपका घाटा अन्‍य राज्‍यों की तरह से लगातार कम होता चला जा रहा है। राजस्‍थान में कोई खास बात नहीं है। अन्‍य राज्‍य भी इसी तुलना में हैं। मैं इसलिये इन सब बातों को, जो आपने कही, छोड़ देता हूं।

आपके द्वारा लिखाये गये भाषण में महिलाओं के सशक्तिकरण की चर्चा हुई और बहुत जोरदार तरीके से हुई। हम तो सब महिलाओं के सशक्तिकरण के पक्ष में हैं और आज से नहीं, आजादी के पहले से ही कांग्रेस इस बात की हामी रही है कि माताओं और बहनों को बराबरी का दर्जा मिले। उसी का नतीजा है कि केन्‍द्र सरकार ने इस तरह की व्‍यवस्‍था की, जिससे कि यह कानून बना। मैं केवल एक ही बात कहना चाहता हूं कि महिलाओं को आगे बढ़ाना है, सम्‍पत्ति का अधिकार देना है। तो उनको कृषि तक क्‍यों सीमित रखा गया। और सम्‍पत्तियां नहीं हैं क्‍या जिनकी रजिस्‍ट्री होती है। हमारी ऐसी आशा है, मेरा सुझाव भी है कि जिस तरह से कृषि भूमि पर किया है, उसी प्रकार से यह क्रय दस्‍तावेज पंजीयन कराने के मामले में उनकी व्‍यवस्‍था अन्‍य सम्‍पत्तियों के मामले में भी की जायेगी।

अध्‍यक्षजी, कई क्षेत्रों में अकाल पड़ जाता है, बाढ़ आ जाती है, खराबा हो जाता है और राज्‍य सरकार छूट देती है। आपने भी किया है। लेकिन जहां तक हमारी जानकारी में है, काफी पक्षपात, भेदभाव बरता गया है, इस सर्वे में। जो हमने सुना है, नीचे के कर्मचारियों को यह हिदायत दी गयी कि ज्‍यादा खराबा नहीं लिखें। मैं आशा करता हूं कि कम से कम मानवता के नाते इस तरह की हिदायतें यहां से नहीं जानी चाहिए, अगर ऐसा हुआ है तो। और अन्‍य बातों के साथ-साथ यह भी कहा गया कि इसको भी डवटेल कर दिया गया, अकाल राहत के कामों के साथ। माननीय अध्‍यक्षजी, मैं इतना ही कहना चाहता हूं कि इसमें बहुत सारी चर्चा एक साथ कर दी गयी। जिसमें पेयजल की व्‍यवस्‍था भी, अभावग्रस्‍त जिलों में व्‍यवस्‍था, अपंग और वृद्धजनों की व्‍यवस्‍था भी, यह सब बातें तो अच्‍छी हैं लेकिन एक बात और कही गयी कि केन्‍द्र की सरकार को आपने  बाढ़ के सम्‍बन्‍ध में 3284.22 करोड़ की मांग का ज्ञापन दिया और केन्‍द्र सरकार पर आरोप लगाया कि अब तक केवल सौ करोड़ रुपये ही केन्‍द्र सरकार से मिले। मुझे जानकारी नहीं है, कितने मिले, यह तो आप जाने। लेकिन इतना पूछना चाहता हूं, क्‍या बाढ़ केन्‍द्र का सब्‍जेक्‍ट है। क्‍या हर बात के लिये आप केन्‍द्र पर निर्भर करेंगे। जब आपके पास पैसे की कमी नहीं है, जब पूरी व्‍यवस्‍था है तो क्‍यों इंतजार किया केन्‍द्र की सरकार का। आपको चाहिए कि अपने काम अपने स्‍तर पर आपको कर देना चाहिए। 

श्री जोगेश्‍वर गर्ग (जालौर): सी.आर.एफ. किसका विषय है, आप बता दें।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): राज्‍य का योगदान रहता है, जोगेश्‍वरजी, सी.आर.एफ. में। यह आपकी जानकारी में है, आपको बता रहा हूं कि राज्‍य का योगदान भी रहता है।

एक माननीय सदस्‍य: 25 प्रतिशत। (व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): और कोई बार नहीं है, कोई बेन नहीं है। अगर राज्‍य सरकार अपने संसाधनों से केलेमिटी के अन्‍दर खर्च करना चाहती है तो कहीं कोई बेन नहीं है।

श्री जोगेश्‍वर गर्ग (जालौर): राज्‍य सरकार ने तो कर दिया, जितना करना चाहिए था। केन्‍द्र सरकार ने क्‍या किया, वह भी तो बताइये।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): आज की सम्‍माननीय मुख्‍य मंत्रीजी, हमारा राज था तब कहती थीं कि कांग्रेस के लोग कटोरा लेकर के भारत सरकार के आगे घुमते हैं। मैंने पहले ही भाषण में यह कहा था कि आप तसला लेकर घुमोगे और वही स्थिति बन रही है।

श्री जोगेश्‍वर गर्ग (जालौर): घूमते थे तो उनको मिलता भी था।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): हर बात के अन्‍दर केन्‍द्र सरकार। केन्‍द्र सरकार को ज्ञापन दे दिया है, केन्‍द्र सरकार को लिख दिया है। कोई महकमा नहीं बचा है कि जहां पर केन्‍द्र सरकार से आप रोज भीख नहीं मांगते फिरते हो।

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, भीख की जरुरत नहीं है।

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): केन्‍द्र राजस्‍थान से अलग है क्‍या, या बाहर है राजस्‍थान केन्‍द्र से। बाहर है क्‍या, क्‍या बात कर रहे हैं।

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): स्‍टेट आफ फेडरल स्‍ट्रक्‍चर हमने इनहेरिट किया है। यह कोई मेहरबानी नहीं कर रहे हैं आप।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): मैं तो माननीय राजवी साहब उन बातों को दोहरा रहा हूं जो माननीय मुख्‍य मंत्रीजी कांग्रेस के राज में कहती थीं कि राज्‍य सरकार केन्‍द्र सरकार के आगे कटोरा लेकर घूमती है। आज हर चीज में ज्ञापन।

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): बिलकुल, आपको आपकी ड्यू मिल रही थी। आज नहीं मिल रही है, आज हमारी ड्यू भी नहीं मिल रही है। (व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): जंगलात हो, गेम-सेंक्‍चवरीज हों, सड़कें हो, केन्‍द्र सरकार को ज्ञापन दे दिया है हमने। (व्‍यवधान) तब तो हमारा कटोरा था, आपका क्‍या तसला है, जिसे लेकर घूम रहे हो वहां।

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): वह हमारा राइट है। राइट काम में ले रहे हैं, भीख नहीं मांग रहे हैं। (व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): अध्‍यक्ष महोदय, विवाद में समय की बर्बादी हो रही है।

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (बैर): माननीय अध्‍यक्षजी, इसी सन्‍दर्भ में ओलावृष्टि का जिक्र किया गया है और कहा गया कि ओलावृष्टि से प्रभावित 5 जिलों के 102 गांवों को दिनांक 20.02.07 को अभावग्रस्‍त घोषित किया गया तथा राहत पैकेज घोषित कर प्रभावित किसानों को सहायता राशि उपलब्‍ध कराई जा रही है। अध्‍यक्षजी, जहां तक हमारी जानकारी है, उसके बाद भी ओले पड़े हैं।

 

Vps-usc-07032007-1730-3h-1

 

हमारी ऐसी आशा है कि राज्‍य सरकार उन स्‍थानों का भी सर्वे कराएगी और आपके सर्वे से जो गांव छूट गये हैं, जिनमें ओला बाद में पड़े हैं उनको भी राहत कार्य से लाभ पहुंचेगा।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसमें यह भी कहा गया है कि ग्रामीण विकास विभाग द्वारा सर्वांगीण क्षेत्र के सर्वांगीण विकास हेतु वर्तमान वित्‍तीय वर्ष में जनवरी, 2007 तक 1468.59 करोड़ रुपये की राशि प्राप्‍त करके 1257.34 करोड़ रुपये व्‍यय किये गये है जो प्राप्‍त राशि का 85.62 परसेंट है। यह तो बहुत खुशी की बात है कि आप कुछ कर रहे हैं लेकिन अच्‍छा होता कि आप केन्‍द्र सरकार को थोड़ा धन्‍यवाद दे देते क्‍योंकि आपने ही लिखा है कि इतने करोड़ रुपये की राशि प्राप्‍त करके, यह राशि कहां से प्राप्‍त हुई? जाहिर है कि केन्‍द्र सरकार से आयी। हमारी ऐसी आशा है कि अगली बार जब आप बजट पेश करें या अभिभाषण लिखें राज्‍यपाल महोदय का तो उसका भी एक खुलासा होना चाहिए। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, केन्‍द्रीय ... (व्‍यवधान)

एक माननीय सदस्‍य: बहुत हो गया।

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (बैर): अभी तो शुरू ही नहीं किया, कहां से हो गया? इसके अन्‍दर पैरा 18 में राजस्‍थान रोजगार गारंटी कार्यक्रम राज्‍य के 6 जिलों में यथा- डूंगरपुर, बांसवाड़ा, उदयपुर, सिरोही, झालावाड़ एवं करौली में प्रारम्‍भ किया गया। जहां तक हमारी जानकारी है, यह केन्‍द्र सरकार की योजना है। राज्‍य सरकार ने ... (व्‍यवधान)

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): हमारी भी यही जानकारी है।

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (बैर): इसका नाम बदलने की कोशिश की है लेकिन इसके आगे जो लिखा है उसको पढ़ने से स्‍पष्‍ट हो जाता है कि केन्‍द्र की योजना है, राज्‍य की नहीं है। मैं आगे पढ़कर सुनाता हूं, एक लाइन। इस योजना में देश के चयनित 200 जिलों में प्रदान किये गये औसत रोजगार के आधार पर राजस्‍थान का प्रथम स्‍थान है। ... (व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): इसमें कोई दो राय नहीं है, यह तो अच्‍छा किया है। पैसा किसने दिया?

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): राजस्‍थान का प्रथम है, यह तो मानते हैं?

श्री अध्‍यक्ष: आप बीच में क्‍यों बोल रहे हैं? ... (व्‍यवधान)

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (बैर): इसके बारे में तो हमने कुछ नहीं कहा। ऐसा तो हमने कुछ नहीं कहा। हम केवल इतना बता रहे हैं कि केन्‍द्र की योजना को आप अपनी योजना बनाकर प्रचारित कर रहे हैं। हमारी ऐसी आशा है कि जो मूल रूप में है उसको वही रहने देंगे और ... (व्‍यवधान)

एक माननीय सदस्‍य: धीमी गति के समाचार है।

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (बैर): और जिस ढंग से जो काम होना चाहिए, उसको उसी तरह से करते रहेंगे। हालांकि, अभी इसका अवलोकन करना, इसका मूल्‍यांकन करना अभी बाकी है। काम की शुरूआत है अभी तो ... (व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): जो आपके केन्‍द्र के मंत्री हैं न उन्‍होंने प्रधान मंत्री की आलोचना की है कि वह जो ग्रामीण रोजगार योजना है उसमें जितने जिले चयनित होने चाहिए उन्‍होंने किये नहीं, यह ए.सी. में बैठे रहते हैं।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): नहीं, आपने केन्‍द्रीय मंत्री से ही प्रेरणा ली होगी, आपके मंत्रिमण्‍डल के सदस्‍यों ने?

एक माननीय सदस्‍य: हां-हां, उनसे ही ली है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): जब फिर ठीक है।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): उस मंत्री से आपके 6 मंत्री जाकर मिल लिये होंगे इसलिए वह भी ऐसी ही बात करने लग गये होंगे। ... (व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): अच्‍छा, यह है क्‍या? उन्‍होंने आपकी मतलब शर्मनाक तरीके से आपका वह ... (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): कल कटारिया साहब ने कहा उस पर तो ध्‍यान दो। कल कटारिया साहब ने कहा उस पर तो ध्‍यान दो, महावीरजी। ... (व्‍यवधान)

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (बैर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं थोड़ा सा जिक्र इंदिरा आवास योजना के बारे में करना चाहूंगा। योजना बहुत अच्‍छी है और कोशिश की जानी चाहिए कि गरीब से गरीबतम जो व्‍यक्ति मकान नहीं बना सकता, उसका चयन हो लेकिन जिस तरह से चयन किया जाता है और उसमें जिस तरह की धांधलीबाजी होती है वह शायद आपके नोटिस में आयी होगी। ऐसे लोग जो कम्‍पेटेटिवली धनी-मानी हैं, मैं कम्‍पेटेटिवली शब्‍द का इस्‍तेमाल इसलिए कर रहा हूं कि मैं तुलना गरीबों की गरीब से ही कर रहा हूं। उनको वह मकान दे दिये जाते हैं और जो इसके पात्र है वाकई में उनको छोड़ दिया जाता है। हमारी ऐसी आशा है कि इस बात का ध्‍यान रखकर ही आगे की कार्यवाही की जाएगी।

मिड डे मील वगैरह की चर्चा मेरे साथियों ने कर दी। मैं एक ही बात कहना चाहूंगा, इसमें विधायक कोष की चर्चा भी की है। मुझे कुछ कहना नहीं है उसके बारे में। मैंने पढ़ लिया अख़बार में। एक मंत्रीजी ने कोई कमेटी बनायी है उस पर चर्चा करेगी पर एक ही बात कहना चाहता हूं कि जब आपके पास पैसे की कमी नहीं है, राजस्‍थान बीमारू राज्‍य नहीं है तो हर बात के लिए हर मंत्री विधायक कोष से पैसा क्‍यों मांगता है विभिन्‍न कामों के लिए? कई मंत्रियों ने चिट्ठियां हमको लिखी हैं कि आप कम्‍प्‍यूटर का पैसा दे दो, आप इस बात का पैसा दे दो। आप इस बात का पैसा दे दो। जब पैसे की कमी नहीं है तो इन विधायकों को तो बख्शों  इनको तो अपने हिसाब से अपने-अपने क्षेत्रों का विकास करने दो। हमारी ऐसी आशा है कि इस बात का भी ध्‍यान रखा जाएगा।

मैं एक बात और कहना चाहूंगा कि वित्‍त आयोग एवं राज्‍य वित्‍त आयोग के तहत 2006-07 में, क्रमश: रुपये 123 करोड़ एवं रुपये 90 करोड़ पंचायती राज संस्‍थाओं को हस्‍तांतरित किये गये। यह अच्‍छी बात है क्‍योंकि पंचायती राज संस्‍थाएं अपने आप में कोई साधान नहीं जुटा पाती। हमारी ऐसी है कि उनको और ज्‍यादा पैसा दिया जाएगा लेकिन इनका सुपरवीजन बहुत जरूरी है। जिस तरह से गड़बडि़यां हो रही हैं, उसका जिक्र करना बहुत जरूरी नहीं है। आपके नोटिस में आ गया होगा। हमारी ऐसी आशा है कि इन पर सुपरवीजन रखा जाए वरना तो काफी गड़बड़ी हो रही है और ज्‍यादा होने का अंदेशा है।

एक बात जरूर इस संबंध में कहना चाहूंगा, मेरा सुझाव है कि पंचायती राज संस्‍थाओं को भी और स्‍वायत्‍तशासी संस्‍थाओं को भी कोई न कोई अपने निजी साधन जुटाने के लिए भी कहा जाना चाहिए। सारी बातें राज्‍य सरकार पर, केन्‍द्र सरकार पर निर्धारित करते रहे, अभी शुरुआती मामला है इसलिए करते रहे लेकिन ऐसी कोई व्‍यवस्‍था की जानी चाहिए जिससे कि इनका भी उसमें कोई न कोई योगदान हो। हमारी ऐसी आशा है और हमारा सुझाव है कि यह पंचायती राज संस्‍थाएं अपने निजी साधन, निजी आय के साधन जुटाये। ऐसा भी कोई सोच होना चाहिए। इसी के साथ-साथ मैं बहुत लम्‍बा नहीं जाकर जल संसाधन के बारे में एक बात कहना चाहूंगा। व्‍यवस्‍था हो रही है, वह अच्‍छी है और यह भी खुलासा कर दूं कि मेरे अपने विचार है। एनिकट बनाओ, वहां का पानी वहीं रोको, यह तो बहुत अच्‍छी बात है अगर सम्‍भव हो तो हो ही रहा है लेकिन इस बात का भी ध्‍यान रखना पड़ेगा डाक्‍टर दिगम्‍बर सिंह को खास तौर से जब भरतपुर की बात उन्‍होंने की ... (व्‍यवधान) चले ही गये। भरतपुर में पानी केवल बाहर से आता है। भरतपुर का पानी खारा पानी है। The deeper you go, the more saline water you get. पीने का पानी ऊपर की सतह से ही आता है। चाहे गम्‍भीर से आता हो, चाहे बाणगंगा नदी से आता हो, चाहे रूपारेल से आता हो, तो सब पानी नहीं आने की वजह से भरतपुर तो अब उजड़ होता चला जा रहा है। सबसे ज्यादा समस्‍या स्‍वास्‍थ्‍य की ही हो रही है। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रीजी इस बात का ध्‍यान रख लें, वे भी भरतपुर शहर और कुम्‍हेर के आस-पास, जहां से वे आते हैं। जो फ्लोराइड की समस्‍या कभी थी नहीं भरतपुर में, वह आज पैदा हो रही है। पीने का पानी नहीं है। लोग जाने लगे हैं पीने के पानी की वजह से। मैं सिंचाई की बात नहीं कर रहा हूं। घना की बात ही नहीं कर रहा हूं। मैं तो पीने के पानी की बात कर रहा हूं इंसान की। जानवर की बात ही नहीं कर रहा हूं। मैं आशा करके चलता हूं, माननीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रीजी, मुख्‍य मंत्रीजी और वित्‍त मंत्रीजी से बात करके कम से कम पीने के पानी की व्‍यवस्‍था का तो ध्‍यान रखेंगे।

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): पांचना बाँध के बारे में बताएंगे? पांचना बाँध के बारे में, वह तो आप लोगों का ही सेंक्‍शन किया हुआ है पांचना बाँध, इसी कारण से हो रहा है। ... (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): डेढ़ साल बाद बात देंगे।

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (बैर): मेरे ख्‍याल से इससे ज्‍यादा कहने की आवश्‍यकता नहीं है। इसके साथ-साथ मैं यह भी कहना चाहूंगा कि आपने कुछ योजनाओं का जिक्र किया  जिसकी वजह से सिंचाई योजनाएं आपने मंजूर कर ली हैं और उन पर काम होगा। मैं आपकी कोई आलोचना नहीं कर रहा हूं। मैं आपको सुझाव दे रहा हूं कि सिंचाई का होना तो बहुत आवश्‍यक है वरना किसान करेगा क्‍या लेकिन किसानों को भी पीने को पानी पहले चाहिए। मैं शहरों की वकालत नहीं कर रहा। मैं गांव की बात कर रहा हूं जहां पर पानी नीचे चला जा रहा है, सतह नीचे चली जा रही है, पीने के पानी की। हैण्‍डपम्‍प लगते हैं, एक दिन लगते हैं, दूसरे दिन खराब। ट्यूबवैल खुदते हैं, एक बार खुदते हैं, महीने, दो महीने में पानी नीचे चला जाता है। उसका कारण एक ही है, व्‍यापक रूप से हमारी लापरवाही। ... (व्‍यवधान) मुख्‍य मंत्रीजी मैं भ्रष्‍टाचार शब्‍द का इस्‍तेमाल जानबूझकर नहीं कर रहा हूं। असलियत तो यही है ठेकेदार को ठेका दिया जाता है हैण्‍डपम्‍प लगाने के लिए, ट्यूबवैल लगाने के लिए, पानी मात्र एक दिन आता है। एक दिन की बात मैं कर रहा हूं। ऐसे उदाहरण मैं आपको, चाहे वह एग्‍जाम्‍प्‍ली हो सकते हैं, पेश कर सकता हूं। 

 

spp/usc/17.40/3j/7.3.2007(1)

 

मैं आशा करके चलता हूं कि इस बात की व्‍यवस्‍था की जाये कि इन पर पूरा सुपरविजन होना चाहिये वरना पूरा पैसा खर्च हो रहा है लेकिन वांछित फल नहीं मिल रहे हैं। हमारी ऐसी आशा हे कि स्‍वास्‍थ्‍य की और भी ध्‍यान दिया जायेगा और मैंने आपको निवेदन किया सिंचाई की योजनाएं जरूर बनायें, लेकिन उन योजनाओं मंे प्राथमिकता पीने के पानी की हो। मैं आगे की बात कह रहा हूं दुनिया में जो आया है उसको जाना है, हम भी जायेंगे। लेकिन इस बात का ध्‍यान रखना चाहिये कि हमारी पीढि़यां कहीं हमको कोसे नहीं कि जिस समय सही वक्‍त था हमने ध्‍यान नहीं दिया। हमारी ऐसी आशा है कि इस बात का ध्‍यान रखा जायेगा।

अध्‍यक्षजी, अब मैं कहूं किसको, लेकिन किसी को देखने की आवश्‍यकता नहीं है मुख्‍य मंत्रीजी जब बिराजमान हैं, क्‍योंकि चम्‍बल धौलपुर से होकर आती है।

श्री अध्‍यक्ष: आप उधर ना देखें।

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (वैर): धौलपुर के माननीय सदस्‍य भी बिराजमान हैं।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): अध्‍यक्ष महोदय, यह बहुत भयभीत हैं, ऐसा लगता है। मैं आश्‍वस्‍त कर रहा हूं कि आपको प्रीविलेज से प्रोटेक्‍टेड हैं, आपको उधर देखने की जरूरत नहीं है। कोई चम्‍बल से डरने की जरूरत नहीं है। ..(व्‍यवधान)...

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (वैर): देखने लायक इधर है, उधर देखने लायक तो कुछ है नहीं। ..(व्‍यवधान)...

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): आप भयभीत क्‍यों हो रहे हो। आपके रहते यह ओ.पी.महेन्‍द्रा बोल रहे हैं, आप भयभीत लग रहे हैं। ..(व्‍यवधान)...

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): आपने शांति पहाडि़या जी की शक्‍ल नहीं देखी क्‍या ? ..(व्‍यवधान)... आपने शांति जी पहाडि़या की शक्‍ल नहीं देखी क्‍या ?

श्री अध्‍यक्ष: नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य की तरफ देख रहे हैं कहीं और कोई बात तो नहीं कह दिया ।..(व्‍यवधान)...

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (वैर): अगर आपको बहुत शौक हैं कि हम आपको देखें तो अपने आपको देखने लायक बनाइये। ..(व्‍यवधान)...

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): क्‍या देखते ही मूड खराब हो गया ? ..(व्‍यवधान)...

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (वैर): नहीं, अपने आपको देखने लायक तो बनाइये। ..(व्‍यवधान)...आपको देखने लायक बनाने के लिये रंग-रूप ही बदलने की आवश्‍यकता नहीं है, अपनी टोटल पर्सनैलिटी को ठीक कीजिये तो हम केवल आपकी तरफ ही देखेंगे।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): और क्‍या बदलना पड़ेगा, वह भी बता दो ..(व्‍यवधान)... और क्‍या बदलना पड़ेगा, वह भी बता दो। ..(व्‍यवधान)...

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (वैर): मैने टोटल पर्सनैलिटी की बात कही है। ..(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: मैं उन्‍हें बीच में नहीं टोक सकती उन्‍हें। वह पूर्व मुख्‍य मंत्री हैं, मैं नहीं कह सकती उन्‍हें। (व्‍यवधान) ...    

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (वैर): माननीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रीजी आ गये। आपके आने के पहले मैंने कहा था आप अपने क्षेत्र का हाल देख लें। मैं तो कुछ नहीं कर पाया, मुझे जितना समय मिला था सवा साल का और उससे कई गुना आपको समय मिल चुका है। मैं पूरे राजस्‍थान के विकास की बात आपसे नहीं कह रहा हूं, जहां से आप आते हैं मेहरबानी करके पीने के पानी की व्‍यवस्‍था पहले वहां कर लें। आपको ध्‍यान होगा कि बाण गंगा नदी में लगभग 100 ट्यूबवैल लगाकर कुम्‍हेर, भरतपुर, डीग, पहाड़ी, कामां को पानी ले जाने की बात आई थी। उस समय हमने इस बात का विरोध किया था और सरकार ने कहा था हां, इसकी आवश्‍यकता नहीं है। उस समय इसको बंद कर दिया गया कि चम्‍बल लिफ्ट सिंचाई योजना के साथ साथ पीने का पानी भी आ रहा है। क्‍या हो रहा है, आपको ज्‍यादा जानकारी होगी । मैं माननीय मुख्‍य मंत्रीजी से निवेदन कर रहा हूं कि हमने सुना है कि चम्‍बल का पानी तो पर्याप्‍त है नहीं, जो है उसको भी झालावाड़ ले जाने की व्‍यवस्‍था की जा रही है। सुनी-सुनाई बातें हैं। अगर यह सही बात है .. (व्‍यवधान) ...

श्री अध्‍यक्ष: सुनी-सुनाई बातों पर आप चर्चा नहीं करें। (व्‍यवधान) ...

श्री विजय बंसल : माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं इनकी जानकारी में लाना चाहता हूं कि चम्‍बल परियोजना कोर्ट में डेढ़ साल से अटकी है और मैंने अभी इस पर पी.आई.एल. लगाई है। कोर्ट स्‍टे की वजह से उस पर काम नहीं हो पा रहा है।(व्‍यवधान) ...

श्री अध्‍यक्ष: आप सुनी-सुनाई बातों पर विश्‍वास नहीं करें और अपना भाषण प्रारम्‍भ करें।

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): आप पूरे भरतपुर को चम्‍बल का पानी पिलाकर क्‍या कराना चाहते हो, यह समझ में नहीं आया। (व्‍यवधान) ...

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, आप अभी पानी की बात पर काफी देर से चर्चा कर रहे थे। मैडम, मैं एक निवेदन करना चाह रहा हूं कि आप इतने लम्‍बे समय से शासन करते आ रहे हैं। भरतपुर में जिधर से भी पानी आता था, कोई नदी मुझे ऐसी बता दीजिये जिसमें एक बूंद पानी आता हो। इस सबकी जिम्‍मेदारी आपकी है, सिर्फ आपकी है। दूसरों को आप जिम्‍मेदार नहीं ठहरा सकते। (व्‍यवधान) ...

श्री अध्‍यक्ष: इनकी नहीं है, वह सरकार की जिम्‍मेदारी है। इनकी नहीं है, अब सरकार की जिम्‍मेदारी है।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): इनकी सरकार थी।

श्री अध्‍यक्ष: तो उस वक्‍त इनकी जिम्‍मेदारी थी, उस वक्‍त किया नहीं। अब जिम्‍मेदारी आपकी है, आप करो। आप करो अब। (व्‍यवधान) ...

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (वैर): अध्‍यक्ष जी, जब मैं मुख्‍य मंत्री था तब तो पानी की कोई कमी थी नहीं। (व्‍यवधान) ...

श्री अध्‍यक्ष: अब कहां चला गया ? (व्‍यवधान) ...

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (वैर): तब तो बाढ़ आती थी। अब कैसे कैसे लोग, अध्‍यक्षजी, उस समय तो बात दूसरी होती थी। अगर अनपार्लियामेंट्री नहीं हो  तो एक शेर कह देता हूं -

'' कैसे कैसे लोग वैसे-वैसे हो गये, और वैसे - वैसे लोग कैसे कैसे हो गये।''

अगर उस समय की इनकी बातों को मैं याद दिलाऊं तो मुझे रिकार्ड लाना पड़ेगा। मेरी ऐसी आशा है उन बातों का आप ध्‍यान रखकर चलेंगे, इसलिए मैंने आपको निवेदन किया है। चम्‍बल के पानी का क्‍या हुआ, यमुना के पानी का क्‍या हुआ ? मैं आशा करके चलता हूं कि योजनाएं लम्बित पड़ी हैं। पड़ोसी राज्‍यों से बात करके, केन्‍द्र सरकार से बात करके उन विवादों का निपटारा किया जाना चाहिये और यथासंभव जितना जल्‍दी हो सके, राजस्‍थान को पानी आना चाहिये। अध्‍यक्षजी, मैंने राजस्‍थान को पानी की बात कही है, भरतपुर को पानी की बात नहीं कही, भरतपुर राजस्‍थान में ही है। उनके हिसाब से नहीं, अगर आप इस सदन के बाहर जायें और भरतपुर चले जायें तो वहां भरतपुर को राजस्‍थान में नहीं होने की बात की जा रही है। कई कारण हैं, मैं उनका भागीदार नहीं हूं। मैं चाहता हूं कि राजस्‍थान की एकता बनी रहे, जिस तरह की है उससे भी ज्‍यादा सुदृढ़ हो। हमारी ऐसी आशा है कि अन्‍य बातों को उठाते समय इस बात का भी ध्‍यान रखा जायेगा कि कहीं हम राजस्‍थान की अखण्‍डता पर तो आंच नहीं उठा रहे हैं।

अध्‍यक्षजी, राजस्‍थान में एस.एम.एस.मेडिकल कालेज जयपुर एक बहुत महत्‍वपूर्ण स्‍वास्‍थ्‍य सुधार का केन्‍द्र है। लेकिन उसको अब तक एम्‍स का दर्जा नहीं मिला। सुना है कि दो मंत्रियों के बीच में बात अटकी है क्‍योंकि हमारी ऐसी आशा है कि इस बात भी इशारा मात्र काफी है। आप तो देख रहे हैं लेकिन आपके पीछे वाले नहीं देख रहे हैं। (व्‍यवधान) ...

श्री अध्‍यक्ष: बीच में नहीं टोकें। (व्‍यवधान) ...

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (वैर): अभी यह कहने की आवश्‍यकता नहीं है, क्‍योंकि स्‍वास्‍थ्‍य विभाग पर चर्चा होगी तब करेंगे। गांवों में डॉक्‍टर नहीं है, दवाई नहीं है । दवाई है तो नर्स नहीं है। बिल्डिंग का बुरा हाल है और प्राइवेट प्रेक्टिशनर्स को काफी फायदा पहुंचाया जा रहा है, यह हमारी ऐसी सोच है। हमारी ऐसी आशा है कि इस बात की भी व्‍यवस्‍था की जायेगी।

डा. भंवरलाल  राजपुरोहित (मकराना): सारे अस्‍पतालों में दवाई पहुंचायी जा रही है, दवाई की बात गलत कह रहे हो। (व्‍यवधान) ...

श्री अध्‍यक्ष: आप बीच में नहीं टोकें। (व्‍यवधान) ...

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): आप रिकार्ड बताओ।

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (वैर): अब यह रिकार्ड तो आप ही बताओ। मैं तो बिना रिकार्ड के ही बोल रहा हूं। रिकार्ड तो अभी आपको दे रखा है, थोड़े दिन बाद हमारे पास आयेगा, तब बता देंगे। माननीय अध्‍यक्षजी, एक बहुत गंभीर विषय जो मेरे हिसाब से है वह शिक्षा का है। शिक्षा के क्षेत्र में काफी उन्‍नति हुई है सारे देश में। हम चाहते हैं कि गांव-गांव के अंदर पूरी शिक्षा की व्‍यवस्‍था हो। बालिका शिक्षा की व्‍यवस्‍था खास तौर से हो। उनमें भवन की कमी है तो भवन का निर्माण हो। बाउण्‍ड्री नहीं है तो बाउण्‍ड्री का निर्माण हो। लेकिन पढ़ाने के लिये कम से कम शिक्षक तो हों। अभी तो ऐसी व्‍यवस्‍था नहीं है। मैं मानता हूं बहुत गंभीर मसला है। इसमें टाइम लगता है, ट्रेनिंग देनी पड़ती है, बहुत सारी व्‍यवस्‍थाएं हैं। ज्‍यादा समय नहीं, सवा साल रहा तो देख लिया तमाशा। इसलिए मैं आपको इतना ही कह रहा हूं इस बात का ध्‍यान रखकर चलें, जो व्‍यवस्‍था करें सही करें। स्‍कूल खोलने मात्र से काम नहीं चलेगा। स्‍कूल के मायने बच्‍चे पढ़ने वाले होने चाहिये, पढ़ाने वाले शिक्षक होने चाहिये, पढ़ने की किताबें होनी चाहिये, बैठने को भवन हो, उसके साथ साथ पीने का पानी भी होना चाहिये और पीने के पानी के साथ आज के जमाने के अंदर शौचालय भी होना चाहिये। यह सम्‍पूर्ण व्‍यवस्‍थाएं अगर हो जायें तो मैं समझता हूं ज्‍यादा ठीक होगा। लेकिन एक बात भी कहना चाहता हूं बहुत सारा विवरण दिया इतने कालेज टैक्निकल, इतने एजूकेशनल वगैरह, क्षेत्रों की चर्चा की है। मैं उसका विरोधी नहीं हूं, अगर टैक्निकल एजूकेशन की बात है, ज्‍यादा से ज्‍यादा बढ़ाइये, लेकिन मेरे अपने विचार हैं, मैंने कह दिया। पार्टी के विचार मेरे से बंधे हों, जरूरी नहीं हैं। हर लड़की को, हर लड़के को एम.ए.पास कराना जरूरी नहीं है मेरे हिसाब से । प्राइमरी एजुकेशन, मिडल एजुकेशन तक शिक्षा अनिवार्य होनी चाहिये, लेकिन उसके बाद अगर कोई बच्‍चा और रोजगारोन्‍मुख शिक्षा की और जाना चाहता है तो सभी स्‍कूलों में इस बात की व्‍यवस्‍था हो जानी चाहिये। कुछ चंद स्‍कूलों का जिक्र इसमें किया जिसमें शिक्षा को रोजगारोन्‍मुख बनाया गया है। हमारी ऐसी आशा है कि सरकार इस बात का ध्‍यान रखेगी। सब जगह विद्यालय हों, सब जगह महाविद्यालय हों। हो सकता है तो बहुत अच्‍छी बात है, लेकिन उसका क्‍या नतीजा निकलेगा आगे चलकर? कहीं ऐसा न हो जाये, प्राइमरी स्‍कूल वाला भी एम.ए.जैसा ही हो जाये। बहुत सारे बच्‍चे आज स्‍कूल के बजाय कालेज पास करके चले गये, लेकिन एप्‍लीकेशन तक नहीं लिख सकते। डिग्री तो मिल गयी है, अगर सबको डिग्री देनी है तो बहुत अच्‍छी बात है। मैंने तो जो अपना विचार था, रख दिया। उसको तो सीमित करें, जो योग्‍य व्‍यक्ति है वह आगे जायें। टैक्निकल वाला टैक्निकल में जाये, मेडिकल वाले मेडिकल में जाये, सभी को उच्‍च शिक्षा देना अगर आवश्‍यक है तो आपकी मर्जी की बात है। लेकिन मेरे अपने विचार मैंने आपके सामने रख दिये।

 

msr/usc/3k/1750/07032007

 

श्री अध्‍यक्ष: वैर से आने वाले माननीय सदस्‍य, कांगेस पार्टी का समय बीत चुका था फिर भी आपको समय दिया गया। आपने पाँच बजे अपना प्रारम्‍भ किया था, अब केवल दस मिनट बचे हैं, में चाहती हूं कि आपके जनता दल (यू) के जीतमल खांट को भी पाँच मिनट का समय दे दूं ताकि वो भी बोल सकें।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राज्‍यपाल रहे हुए सदस्‍य तो एक ही हैं हाउस में।

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या?

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): राज्‍यपाल का भाषण है और राज्‍यपाल रहे हुए सदस्‍य एक ही हैं, पूरा समय दीजिए इनको, इनके अनुभव का लाभ कहां मिलेगा आपको।

श्री अध्‍यक्ष: इसीलिए 50 मिनट का समय दिया कि पूर्व राज्‍यपाल अकेले यही हैं।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारे समय का क्‍या हुआ?

श्री अध्‍यक्ष: कांग्रेस पार्टी का समय खतम हो गया था। ...(व्‍यवधान)...

श्री जुबेर खान (रामगढ़): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने आसन से यह व्‍यवस्‍था दी थी कि मुख्‍यमंत्रीजी की रिप्‍लाई और अपोजिशन की तरफ से लास्‍ट वक्‍ता जो बोलेंगे उनका समय उस समय में से अलग होगा।

श्री अध्‍यक्ष: यह किसने दी व्‍यवस्‍था? यह व्‍यवस्‍था नहीं दी मैंने।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): यह आपकी स्‍वयं की व्‍यवस्‍था थी कि मुख्‍यमंत्रीजी की रिप्‍लाई और अपोजिशन लीडर जो बोलेंगे इस समय से अलग से होगा। आप की खुद की व्‍यवस्‍था है इसी सदन में।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारे समय का भी ध्‍यान रखा जाए।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): हमारी तरफ से अंतिम वक्‍ता हैं यह।

श्री अध्‍यक्ष: मुख्‍यमंत्रीजी 6 बजे अपना भाषण प्रारम्‍भ करेंगी, मेरी व्‍यवस्‍था यह  थी। जो दल बिना बोले रह गये हैं उन दलों को भी पाँच-पाँच मिनट का समय देना आवश्‍यक है इसलिए मैं कह रही हूं कि पाँच-पाँच मिनट उन्‍हें भी ...(व्‍यवधान)...

श्री मुरारी लाल मीणा (बांदीकुई): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आठ मिनट तो हमारे ईमानदारी से हैं।

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (वैर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं कोशिश करूंगा।

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या?

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (वैर):  मैं आपके आदेश का पालन कर सकूं। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: कहां बोल दिया? जनता दल (यू) के कोई नहीं बोले।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो दल नहीं हैं, निर्दलीय हैं उनका भी ध्‍यान रखा जाए।

श्री अध्‍यक्ष: आपके बसपा के कोई नहीं बोले।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): पहाडि़याजी के बाद मुख्‍यमंत्रीजी ही बोलेंगी, यह अण्‍डर स्‍टेंडिंग हुई है सत्‍तापक्ष के साथ।

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): और कोई बोल नहीं सकता, आज तक हुआ भी नहीं। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, वो भी बोलना चाहते हैं, क्‍या बात हुई यह, पाँच-पाँच मिनट का समय, यह क्‍या बात हुई आपकी? ...(व्‍यवधान)...

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): यह आज तक हुआ है क्‍या कभी? ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या हुआ है? क्‍या नहीं हुआ?

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): प्रतिपक्ष के लीडर बोलने के बाद में लीडर बोलता है। आज तक हुआ है क्‍या।

श्री अध्‍यक्ष: विपक्ष के नेता तो बैठे हैं रामनारायणजी चौधरी।

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): यह कोई बात थोड़ी है, लीडर, वो लीडर की तरफ से बोल रहे हैं न।

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या बात हुई यह भी?

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): यह आज तक हुआ ही नहीं कभी। ...(व्‍यवधान)... अपोजिशन के लीडर बोलें, लीडर बोलता है। नये-नये दल बोलेंगे तो ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: आपने 50 मिनट ले लिया। ...(व्‍यवधान)...

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): प्रेम सिंह नत्‍था सिंह सेम थिंक नहीं होगा, भाई। यह ऐसे थोड़ी होता है।

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): नेता नहीं हैं क्‍या? लीडर बोल रहे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: हां, और आपको तो बोलने का कोई अधिकार नहीं है, सीट पर नहीं हैं आप।

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): आप नयी परम्‍परा डाल रहे हो, यह तो गलत है। वो अपोजिशन लीडर बोलने के बाद में लीडर बोलता है। ...(व्‍यवधान)... वी.आई.पी. लीडर बोलता है उसके बाद में कोई छोटा नहीं बोलता है।

श्री अध्‍यक्ष: प्रतिपक्ष के नेता की बात समझ में आती है लेकिन बाकी और कोई है उसके बाद दूसरे दल के लोग बोल सकते हैं।

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): यह प्रतिपक्ष का लीडर, फोटो कॉपी बोल रही है, क्‍या बात करते हो। यह कॉपी बोल रही है।

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): फोटो कॉपी ओरीजिनल नहीं होती है डुप्लिकेट होती है, डुप्लिकेट थोड़ी है। डुप्लिकेट है क्‍या? ...(व्‍यवधान)...

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): अब आप इनकी बात मान लो। ...(व्‍यवधान)...

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): Photo copy is not an original. ...(व्‍यवधान)... डुप्लिकेट बना दिया।

श्री अध्‍यक्ष: Photostat is attested by the Speaker.

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): साहब, यह तो आब्‍जैक्‍शनेबल है, डुप्लिकेट कैसे हो गये यह? ...(व्‍यवधान)...

एक माननीय सदस्‍य: नेगेटिव बोल रहे हैं।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): वो पावर डेलिगेट करदिये उन्‍होंने ...(व्‍यवधान)...

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): यह सदन का भाग्‍य है।

श्री अध्‍यक्ष: आज बोलना चाहते हैं, क्‍या बात कर रहे हैं आप।

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): यह इनको तो फोटो कॉपी बना दिया लेकिन जो ओरीजिनल है उसकी कॉपी कैसे हो गयी? यह तो डुप्लिकेट हो गयी।

श्री अध्‍यक्ष: नेता प्रतिपक्ष खड़े हैं, कोई दोनों ही खड़े रहेंगे क्‍या नेता?

एक माननीय सदस्‍य: नेता प्रतिपक्ष खड़े हैं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): स्‍पीकर साहब का निर्णय है वो तो सर्वमान्‍य है, आपकी व्‍यवस्‍था सर्वमान्‍य है लेकिन आज के मामले में सदन के नेता ने दरियाफ्त किया था कि प्रतिपक्ष का कोई आदमी लास्‍ट में बोलेगा, मैं उसके बाद बोलूंगी।

श्री अध्‍यक्ष: यह कब कहा उन्‍होंने? किस के सामने कहा, कब कहा? मेरे सामने तो यह बात नहीं आयी। कब कहा?

श्री अमराराम (धोद): स्‍पीकर के सामने तय होती है तो होती है, आपने कर लिया होगा ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: कब कहा? आपने कहा था? सदन की नेता, आपने कहा था ऐसा?

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): यह अण्‍डर स्‍टेंडिंग है कि नेता ...

एक माननीय सदस्‍य: आप प्रतिपक्ष के नेता की बात करो।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): नेता प्रतिपक्ष इनमें कोई अन्‍तर नहीं है।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रतिपक्ष के नेता महोदय की भलमनसाहत का नाजायज फायदा उठा रहे हैं, हर आदमी खड़ा होता है और कहता है कि मैं उनकी हैसियत से बोल रहा हूं। इससे गरिमा गिरती है प्रतिपक्ष के नेता महोदय की पद की।

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): नहीं, आज तक हुआ है क्‍या? ...(व्‍यवधान)...

श्री जुबेर खान (रामगढ़): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह चक्‍कर क्‍या है, झुन्‍झुनूं से आने वाले माननीय सदस्‍य एक जगह टिकते क्‍यों नहीं एक सीट पर? अबल-बदल क्‍यों होते रहते हैं?

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (वैर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो समय व्‍यवधान में चला गया वह कृपा कर के मेरा समय नहीं गिना जाए।

श्री अध्‍यक्ष: धीमी गति से मध्‍यम गति पर तो आ जाइये।

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (वैर): यह बात आपकी मानने वाली है।

श्री अध्‍यक्ष: तेज नहीं, मध्‍यम पर तो आएं।

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (वैर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपका प्रस्‍ताव स्‍वीकार है।

इसमें एक चर्चा किसान आयोग की की गयी है। मेरा सुझाव है कि खेती से सम्‍बन्धित पर खेत बोने वाला किसान नहीं है, उसमें काम करने वाला मजदूर, उसमें ट्रेक्‍टर चलाने वाला ड्राइवर, उसमें अगर है तो बढ़ई वरना ट्रेक्‍टर को ठीक करने वाला मजदूर, ट्रांसपोर्ट करने वाला जो कि मण्‍डी तक ले जाता है, वो साथी, अनेक लोग हैं जो खेती से सम्‍बन्धित होते हैं, व्‍यापारी भी उसमें शामिल है क्‍योंकि व्‍यापार भी करता है इसलिए इसका नाम अगर किसान आयोग के बजाय कृषि आयोग कर दिया जाए, जैसा कि केन्‍द्र में है तो मैं आशा करके चलता हूं कि इसके ऊपर भी विचार किया जायेगा और अगर ऐसी मंशा है सरकार की कि किसान आयोग अलग हो, दूसरों के लिए अलग हो तो मुझे कोई एतराज नहीं है वरना मेरा सुझाव है कि इस पर विचार किया जाए क्‍योंकि केन्‍द्र सरकार के अन्‍दर ऐसी व्‍यवस्‍था है।

मैं एक बात का धन्‍यवाद सरकार को दे ही देता हूं कि नसबंदी आपरेशन कराने के मामले में राशि दोगुना कर दी गयी, मेरा सुझाव है कि यह पर्याप्‍त नहीं है इसको दोगुना नहीं, चार गुना नहीं दस गुना करो अगर आपका कोई वैचारिक मतभेद नहीं आता हो तो।

एक माननीय सदस्‍य: आपको तो कोई फायदा होगा नहीं।

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (वैर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपको ध्‍यान है।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): आप स्‍वीकार करो तो हम ...(व्‍यवधान)... करने के लिए तैयार हैं।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप बीच में नहीं बोलें।

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (वैर): अब जब यह कार्यक्रम चल रहा था उस समय कांग्रेस ने कोई कानून नहीं बनाया था। हो सकता है उसमें कुछ अतिश्‍योक्ति हुई हो लेकिन कानून कांग्रेस ने नहीं बनाया था। कांग्रेस के सत्‍ता से हटने के बाद राजस्‍थान के अन्‍दर पहली बार, प्रथम बार राजस्‍थान में यह कानून बनाया गया कि दो से ज्‍यादा जिसकी सन्‍तान होगी...

श्री अध्‍यक्ष: बुरा है क्‍या कानून यह, आप कन्‍डेम कर रहे हो इसको?

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): बुरा नहीं है तो एम.एल.ए., एम.पी. के लिए पहले होना चाहिए फिर दूसरों के लिए। खुद के लिए तो बनाते नहीं हैं, दूसरों के लिए बनाते हैं। ...(व्‍यवधान)...

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): हम कन्‍डेम नहीं कर रहे। उन बातों को याद दिला रहे हैं जो तत्‍कालीन प्रतिपक्ष के नेताओं ने भाषण में कही थी, 1977 के भाषण में नसबंदी की जो खिल्‍ली उड़ायी थी, आज देश की दुर्दशा नहीं होती अगर उस समय नसबंदी का इतना जबरदस्‍त विरोध नहीं होता। तो उस तरफ, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपका ध्‍यान इंगित कर रहे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: वह तो बात और कह रहे हैं। आप और बात कह रहे हैं वह और बात कह रहे हैं। ...(व्‍यवधान)...

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नसबंदी का जिस प्रकार का वातावरण बना दिया वह दस साल तक इस प्रकार का रहा, इन्‍होंने नसबंदी नहीं उस समय बूढ़ों को और जवानों को काट दिया, इस बात का विरोध था।

श्री अध्‍यक्ष: विराजो, विरोजो। आप विराजो।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): जो भय का वातावरण बनाया आपने इमरजेंसी में।

श्री अध्‍यक्ष: आप स्‍थान ग्रहण करें कृपया।

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (वैर): अब, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा समय ले रहे हैं उसका मैं क्‍या करूंगा। मैं इसलिए आपसे निवेदन करना चाहता हूं, अब मैं आपको धन्‍यवाद ही तो दे रहा हूं। ...(व्‍यवधान)...

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): वह आदमी अभी भी इनको ढूंढ़ रहे हैं, कहां है कांग्रेस।

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (वैर): धन्‍यवाद लेने में भी कठिनाई आ रही है।

श्री अध्‍यक्ष: राजसमन्‍द से आने वाले माननीय सदस्‍य, हर बात पर बोलना आवश्‍यक नहीं है।

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (वैर): मैं तो धन्‍यवाद ही दे रहा हूं और एक बार नहीं अनेक बार धन्‍यवाद देता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: आप कृपया अब कन्‍क्‍लूड करें, मेहरबानी होगी कन्‍क्‍लूड करें अब आप।

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (वैर): मैं तो कन्‍क्‍लूड कर दूंगा, आपने कहा उस समय को गिन कर के और जो मेरा समय चला गया उसमें गिनती कर के भी देख लीजिए।

एक बात बिजली के बारे में कहना चाहता हूं। जो व्‍यवस्‍था की जा रही है वह हम सबके सामने है लेकिन आने वाला समय बहुत कठिन आने वाला है। एंटीसिपेटरी प्‍लानिंग जब तक आप नहीं करेंगे, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मैं सरकार को निवेदन करना चाहता हूं कि आगे आने वाले समय में सरकार कोई भी आये, पार्टी कोई भी आये लेकिन बहुत कठिनाई हो जायेगी क्‍योंकि बिजली की मांग बराबर बढ़ती चली जा रही है और जो अब तक की प्‍लानिंग है, मेरे हिसा‍ब से पर्याप्‍त नहीं है। और इसके साथ-साथ बिजली में जो छीजत होती है और इसके साथ-साथ जो चोरी होती है, जिसमें हम सब शामिल हैं, हमारी ऐसी आशा है ...(व्‍यवधान)...

एक माननीय सदस्‍य: नहीं, हम तो नहीं हैं शामिल।

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (वैर): मैं तो शामिल अपने आप को इसलिए मानता हूं कि जब मैं देख रहा हूं चोरी हो रही है फिर भी मैं चुप रहता हूं या चोरी करने वालों को बचाता हूं तो आप अपने कलेजे पर हाथ रख कर के देखें कि आप उससे कितने बचे हुए हैं। हमारी यह आशा है कि इस बात की ओर राजस्‍थान सरकार ध्‍यान देगी।

इसके अलावा कानून व्‍यवस्‍था की बात मैं छोड़ देता हूं क्‍योंकि उसमें तो बहुत समय लगने वाला है, वो कहां से शुरू करूंगा कहां से समाप्‍त करूंगा।

श्री अध्‍यक्ष: आपके पन्‍ने पलटने से तो लग रहा है कि आधा ही भाषण दे पाये हैं अभी आप, एक घंटा हो गया।

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (वैर): अगर मौका मिला तो गृह मंत्रालय की मांगों पर चर्चा होगी तो इसकी चर्चा उस समय कर दी जायेगी।

 

Ars/usc/1800/3l/07032007/1

 

मैं एक ही बात कहकर अब समाप्‍त करना चाहूंगा कि जिले के अन्‍दर और हर पुलिस स्‍टेशन पर कुछ कमेटियां बनाई गई हैं। माननीय मुख्‍य मंत्री जी और गृह मंत्री जी इस बात की जांच कर लें कि कहीं ऐसा तो नहीं हो गया है कि उन कमेटियों के अन्‍दर भी खुद अपराधी बैठ गए हैं राजनीति की वजह से। मैं आशा करके चलता हूं कि उस बात का ध्‍यान रखा जाएगा।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप और क्‍या दे रहे हो ?

श्री जुबेर खान (रामगढ़): मैंने यह दिया है कि स्‍पीड बढ़ाई जाए। आपने कहा था ना कि धीमी गति से मध्‍यम गति कर दें वही देकर आया हूं ...(व्‍यवधान)

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (बैर): अध्‍यक्ष जी, अब मैं थोड़ी सी चर्चा एस सी एस टी के मामलों में करना चाहूंगा। स्‍पेशल कम्‍पोनेंट प्‍लान का रिव्‍यू बहुत दिन से नहीं हुआ बतलाया। अस्‍वस्‍थता निवारण के मामले में जो काम हो रहे हैं, मैं तो धीमी गति से चल रहा हूं, सरकार उससे भी ज्‍यादा धीमी गति से चल रही है। नौकरियों में बैकलाग बढ़ा पडा है । बहुत से बच्‍चे हमारे बेकार घूम रहे हैं। मैं जानता हूं अध्‍यक्ष जी, कि केवल एस सी एस टी के नहीं सभी के बच्‍चे घूम रहे हैं, व्‍यवस्‍था ऐसी हो रही है लेकिन ऐसी कोशिश की जानी चाहिए कि कम से कम कास्‍ट ट्राइब को आपने जो व्‍यवस्‍था की है उसमें कोई स्‍पेशल प्रोग्राम बन जाए जिससे कि उन बच्‍चों को रोजगार मिल जाए और अत्‍याचार बंद हो।

एक बात मैं अपने आपको मर्यादा में रखते हुए एक सुझाव देना चाहूंगा आपके माध्‍यम से चाहे केन्‍द्र तक पहुंचे कि प्राइवेट सैक्‍टर में एस सी, एस टी, ओ बी सी और महिलाओं को आरक्षण नहीं दिया जाएगा तब तक रोजगार की पूरी व्‍यवस्‍था हो जाएगी लेकिन उनका मान सम्‍मान नहीं बढ़ेगा। हम अपने आपको थोड़ा ऐसा महसूस करने लगे हैं कि जैसे हम कोई दया के पात्र हों। अब वह समय आ गया है जब हम नहीं रहना चाहते दया के पात्र। हम चाहते हैं वह समय आना चाहिए जब सब समान हो जाएं, सबको समान अवसर मिल जाएं और हम सबके सामने आपको खुद कह सकें कि हमको आरक्षण नहीं चाहिए लेकिन अभी ऐसी व्‍यवस्‍था नहीं है। जब तक ऐसी व्‍यवस्‍था नहीं हो जाती हम आशा करके चलते हैं कि इस पर विचार किया जाएगा और प्राइवेट सैक्‍टर में आरक्षण की व्‍यवस्‍था होगी।

मैं इस सम्‍बन्‍ध में एक बात कहना चाहूंगा, मैंने एक पैरेग्राफ में पढ़ा...

श्री अध्‍यक्ष: अब आप कन्‍क्‍लूड प्‍लीज कर दो, छह बजे का टाइम था 6.2 कर दिए ।

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (बैर): अभी आपने कहा था उस समय को और जो व्‍यवधान हो गया उस समय की गिनती कर लीजिएगा, मैं खुद बैठ जाऊंगा।

श्री अध्‍यक्ष: एक घंटा और दो मिनट हो गया आपको बोलते बोलते।

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (बैर): मेरी तरफ से तो दस घंटे तक आप नहीं बोलने देंगी तो मैं क्‍या करूंगा। बीच बीच में आपके मंत्री खड़े हो जाएं, आपके दूसरे मैम्‍बर खड़े हो जाएं ...(व्‍यवधान) अध्‍यक्ष जी, मुख्‍यमंत्री जी ने ...

श्री श्रवणकुमार (पिलानी): .. विपक्ष में बोल रहे हैं और क्‍या चाहते हो आप।

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (बैर): अनुसूचित जनजाति के सदस्‍यों के विरूद्ध लम्बित बीस बोतलों तक शराब की तथा दो वर्ष तक की सज़ा के प्रकरणों को वापस लेने की घोषणा की थी तदानुसार भारतीय दण्‍ड संहिता के अन्‍तर्गत 6276 तथा आबकारी अधिनियम के 2988 प्रकरण वापस लिए गए। मुझे कोई एतराज नहीं है अध्‍यक्ष जी, इतना जरूर कहना चाहूंगा आबकारी नीति में आपको परिवर्तन करना पड़ेगा। अब समय आ गया है जबकि सारे समाज और देश के साथ साथ राजस्‍थान को सोचना पड़ेगा कि इस दारू को हम कब तक जारी रखें। रखिएगा अगर दवा के तौर पर रखना है, अगर कोई डाक्‍टर प्रेस्‍क्राइब करता है तो अब वह बात अलग है डाक्‍टर दिगम्‍बर जैसे मेरे जैसे को भी प्रेस्‍क्राइब कर देंगे। मैं आशा करके चलता हूं कि इस बात का ध्‍यान रखा जाएगा और उसमें मेरा एक सुझाव है कि सन् 1980-81 में एस सी एस टी के कुछ लोगों को बसों का आरक्षण करके कुछ रुट दिए गए थे, आर एफ सी के जरिए से उन को लोन दिया गया था, आज तक वह लोन में दबे हुए हैं। जिन पर कर्जा एक दो लाख का था वह बीस बीस लाख हो गया, कई लोग उनमें से मर गये। हमारी आशा है कि जिस तरह से आपने यह कैसेज विथड्रा किए हैं, उन केसेज को भी जो बसों के लिए पैसा दिया गया था, बहुत थोड़े से हैं मुख्‍यमंत्री जी, काफी लोग मर गए हैं, वह लोग हमारी ऐसी आशा है कि उनकी दशा दिशा पर ध्‍यान दिया जाएगा और इस कर्जे को भी जिस तरह से यह आपने माफ किया है उसी तरह से यह आप माफ करने की कृपा करेंगे।

इसके साथ साथ मैं आपको एक निवेदन और करना चाहूंगा। औद्योगिक विकास की बहुत चर्चा की लेकिन यह मामला बहुत लम्‍बा चौड़ा है इसलिए मैं अपने साथियों को छोड़ देता हूं। मैं एक ही बात कहना चाहूंगा, आपने स्‍पीड बढ़वा दी उसी में पूरा हो जाएगा, राजस्‍थान का कोई कोना ऐसा बाकी नहीं है जो पर्यटक स्‍थलों से भरपूर नहीं हो। कहीं छोटे कहीं बड़े कहीं बहुत पुराने कहीं नये बहुत सारे पर्यटक स्‍थल हैं। जो मुद्दा बताया गया है उसमें छांट पूरी तरह से नहीं की गई है। अब छोटी छोटी जगह पर भी देशी विदेशी पर्यटक जाने लगा है । मैं आशा करके चलता हूं कि जो छूट गए हैं उन की दुबारा जांच होनी चाहिए और जिस तरह से बड़े बड़े पर्यटक स्‍थलों को संरक्षण मिल रहा है, सहायता मिल रही है उसी तरह से इन छोटों को भी पूरा संरक्षण और पूरी सहायता दी जानी चाहिए जिससे छोटी छोटी जगह पर जो रह गये हैं उनको भी उनका फायदा मिल सके।

मैं अब कुछ सुझाव आपकी सेवा में पेश करना चाहूंगा। रिफाइनरी राजस्‍थान के अन्‍दर लगे, इस बात की चर्चा बहुत हो रही है, विस्‍तृत चर्चा बजट के समय शायद हमारे साथी करेंगे। मैं इतना ही कहना चाहूंगा अगर कोई शर्ते हैं उन शर्तो पर बहुत जिद करने की आवश्‍यकता नहीं है। राजस्‍थान को पूरा फायदा मिले इस बात की कोशिश तो होनी चाहिए लेकिन उस जिद की वजह से राजस्‍थान में रिफाइनरी न लगे, मैं आशा करके चलता हूं माननीय मुख्‍यमंत्री जी खास तौर से पूरी सरकार इस बात पर विचार करेगी, सारे राजस्‍थान की जनता सरकार की ओर देख रही है। हमारी ऐसी आशा है कि इस पर आप विचार करेंगे और ऐसी कोशिश करेंगे कि जितना जल्‍दी हो सके राजस्‍थान के अन्‍दर रिफाइनरी जल्‍दी से जल्‍दी आ जाए।

कुछ सुझाव हैं जिनको मैं बहुत जल्‍दी जल्‍दी आपके सामने रख देता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: आपने काफी दे दिए सुझाव। इतने मान लेंगी वही बहुत है।

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (बैर): अध्‍यक्ष जी, मैं कभी कभी तो बोलता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: इतने मान लेंगी वह तो ही बहुत है।

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (बैर): यह मेरा काम नहीं है मेरा काम सुझाव देने का है, मानना नहीं मानना उनका काम है।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): दो लाइन छायावाद पर और बता दें तो हमारा और जरा ज्ञानवर्द्धन हो जाए।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): बहुत उदार हैं पहाडि़या जी के सारे सुझावों को मानेंगीं।

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (बैर): अध्‍यक्ष जी, मेरा सबसे पहला सुझाव तो यह है कि समाज के अन्‍दर कुछ ऐसे व्‍यक्ति हैं जो असहाय हैं, जो दूसरे के बिना सहारे के यात्रा नहीं कर सकते, चल नहीं सकते। केवल मैं तो दूसरी बार बोल रहा हूं, प्रथम बार यह सुझाव दिया था कि जो अंधे हैं, जो नेत्रहीन हैं, बिना सहायता के चल नहीं सकते उनको राजस्‍थान की रोड़वेज के अन्‍दर एक व्‍यक्ति और साथ रहने की व्‍यवस्‍था की जाए। मैं समझता हूं राजस्‍थान में इस तरह की व्‍यवस्‍था कर दी गई है। अब मैं एक सुझाव दे रहा हूं कि ऐसे व्‍यक्ति और हैं कुछ जो दूसरों की बिना सहायता के चल नहीं सकते, बहरे भी हैं गूंगें भी हैं, इस तरह के जो व्‍यक्ति हैं वह तो मेडिकल सर्टिफिकेट के आधार पर किया जाएगा। ऐसे व्‍यक्ति जो कि बिना दूसरे की सहायता के चल नहीं सकते उनको भी एक एक पास देने की व्‍यवस्‍था हो जाए तो अच्‍छा रहेगा।

दूसरा सुझाव, शायद आप लोग हंसेंगे, मैं खुद भी पशोपेश में हूं कि उसको कहूं कि न कहूं। आज भी जब हम गांवों के अन्‍दर जाते हैं तो जहां पर हैण्‍डपम्‍प लगे हैं वहां भी और जहां नहीं लगे हैं वहां भी हमारे कुछ बाल्‍मीकी भाई हैं जो आकर के हमसे भीख मांगने को खड़े हो जाते हैं झोली ओट करके कि महाराज और तो कुछ नहीं चाहिए पीने का पानी तो दे जाओ। जहां हैण्‍डपम्‍प लगे थे उन पर भी दूसरों ने कब्‍जा कर लिया। इसलिए आपसे आशा करके चलता हूं कि कुछ रिजर्वेशन बाल्‍मीकी भाइयों को उनको पानी नहीं भरने दिया जाता है या जिनके हैण्‍डपम्‍प पर दूसरों ने कब्‍जा कर लिया है उनके लिए एक स्‍पेशल व्‍यवस्‍था होनी चाहिए जिससे हैण्‍डपम्‍प उनके घरों के सामने लग सकें और इसी तरह की एक और जाति है, भई मुझे माफ करना मुझे जानकारी नहीं है, मैं अपने क्षेत्र के हिसाब से बोल रहा हूं हमारे यहां तेली जाति के लोग होते हैं जो कि मुसलमान भाई होते हैं उन्‍होंने आकर के बहुत करूण शब्‍दों में मुझे कहा कि हम सुबह अपने घरों से निकल नहीं सकते, मैंने कहा भई ऐसी क्‍या बात है कि साहब लोग आज भी हमको सुबह सुबह देखना अपशकुन मानते हैं, हमको पानी लेने तो जाना ही पड़ता है इसलिए आपसे विनती करना चाहता हूं जहां भी ऐसे भाइयों के मौहल्‍ले हैं, मैंने अपनी बात की कोई हिन्‍दु भाई हो तो बुरा न माने तो उनको भी तेली भाइयों के सामने भी यह व्‍यवस्‍था हो जाए तो आपकी बड़ी कृपा होगी।

एक बात मुझे कहनी है कि सरसों की कटाई शुरु हो गई है, बाजार में आना शुरू हो गया है, अभी मण्डियों में आना शुरू हो गया है। सरकार पूरी तरह से सरसों को खरीद नहीं पा रही है जितने केन्‍द्र होने चाहिए उतने केन्‍द्र नहीं हैं । मैं आशा करके चलता हूं और प्रार्थना भी करता हं कि किसान के भले के लिए सरसों के जितने ज्‍यादा केन्‍द्र आप खरीद के खोल सकें तो अच्‍छा होगा। इसके साथ साथ एक छोटी सी बात और मैं कह रहा हूं कि जब भी किसान जाता है ........

 

vns/usc/18.10/3m/7.3.2007   

 

तो कई-कई दिन तक मंडी में पड़ा रहता है। कहां अपनी गाड़ी को रखें ? सबके पास ट्रैक्टर अभी भी नहीं है। ट्रैक्टर को कहां खड़ा करें ? चोरी होने की गुंजाइश है। वारदात बहुत हो रही है। कोई किसान भवन बनना चाहिये जिससे उनकी सुरक्षा भी हो और वह ठीक तरह से रात गुजार सकें क्‍योंकि कई बार मंडी वाले बदमाशी करते हैं कि माल तो खरीद लिया लेकिन पैसा दूसरे दिन देंगे। ऐसी स्थिति में किसान बहुत परेशानी में पड़ जाता है तो किसान भवन की व्‍यवस्‍था भी होनी चाहिये और सरसों के खरीद केन्‍द्र ज्यादा से ज्‍यादा बढ़ाये जाने चाहिये।

एक छोटी सी बात आपको और कहना चाहूंगा। खास तौर से बसों के अड्डों,  रेल के स्‍टेशनों और सार्वजनिक स्‍थानों पर काफी बहन-भाईयों को भिक्षा माँगते देखा जा सकता है। मैं मानता हूं कि कोई अपने मन से इस काम को नहीं चाहता है। सब चाहते हैं कि भीख नहीं मांगे लेकिन मांग रहे हैं। हमारी ऐसी आशा है कि जो केन्‍द्र रोजगार के हैं उनमें रख करके के इस भिक्षावृत्ति को बंद करने की कोशिश की जाए। केवल कानून से काम नहीं चलेगा। उनको रोजगार देना पड़ेगा। हमारी ऐसी आशा है कि इस काम को भी किया जायेगा।

पेन्‍शन के मामले में बहुत जोर से कहा गया कि हमने पेन्‍शन बढ़ा दी। मैं यह सवाल पूछना चाहता हूं पेन्‍शन जारी किसने की ? पेन्‍शन शुरू करने का काम तो कांग्रेस ने किया। आपने बढ़ा दिया, आपको बहुत-बहुत धन्‍यवाद लेकिन एक ही बात कहना चाहता हूं कई भाई वृद्ध हैं जिनके बच्‍चे हैं, नौकरी में है, कमा भी रहे हैं, जिनके नाम पर जमीन भी हैं, ट्रैक्टर भी है लेकिन घर में रोटी नहीं है। बच्चे उनको मारते हैं। हमारी ऐसी आशा है कोई अमेंडमेंट ऐसा हो जाए जिसके जरिये से वृद्ध की सम्‍पत्ति जो है सरकार उनको ले ले लेकिन उनको पेन्‍शन देने की व्‍यवस्‍था हो जाए इस पर एक विचार करना है। हम सबको विचार करना है। मैं केवल आपके सामने विचार मात्र रख रहा हूं। हमारी ऐसी आशा है कि इस पर विचार करेंगे।

इसी प्रकार से हमारी जो बहने विधवा हैं। घरों में रह नहीं सकती। पति का देहान्‍त हो गया। बच्‍चे छोटे हैं। क्‍या करें ? उनकी पेन्‍शन को भी थोड़ा सा और बढ़ाना पड़ेगा। इसी प्रकार कुछ अपंग हैं जिनकी मैंने चर्चा की है उनकी भी सहायता के लिये पेन्‍शन बढ़ायें और जो चल नहीं सकते हैं उनको साथ ले जाने के लिये एक व्‍यक्ति के पास की व्‍यवस्‍था और की जाए। तो मैंने कुछ बातों की चर्चा की लेकिन कुछ मामले और आ गये।

अभी कुछ दिन पहले मैं अपने क्षेत्र में गया। कुछ हमारे यहां ऐसे स्‍थल हैं जो धार्मिक भावनाओं से परिपूर्ण हैं। गिरिराज महाराज की जय हम बोलते हैं। तब ही ह‍म काम शुरू करते हैं। गोवर्धन बाबा की परिक्रमा करते हैं। काले पहाड़ की परिक्रमा करते हैं। अभी दो-तीन साल से उनका पत्‍थर निकालकर माइनिंग शुरू हो गयी। मैं राजनीति नहीं कर रहा हूं इस मामले के अन्‍दर। मैं ईमानदारी के साथ कहना चाहता हूं, कोई व्‍यवधान करने का मेरा इरादा नहीं है लेकिन यह धार्मिक भावनाएं हैं। उनको ठेस पहुंचेगी तो नुकसान सरकार को ही होगा। सरकार हमारी आयेगी तो हम व्‍यवस्‍था कर ही देंगे। हमारी ऐसी आशा है मुख्‍यमंत्री जी इस बात पर विचार करें कि जो इस तरह की धार्मिक भावनाओं के केन्‍द्र हैं, और भी हो सकते हैं। मैंने कुछ पहाड़ों की चर्चा की। धार्मिक भावनाओं को ध्‍यान में रखते हुए जो माइनिंग और वह भी इल्‍लीगल शुरू हो गयी है उसको बंद कराया जाए। अगर नहीं कराया तो मैं समझता हूं कि कुछ दिन के अन्‍दर हो सकता है आन्‍दोलन का रूप भी धारण कर लिया जाए। हालांकि हम नहीं चाहते। सड़क कहां से बनेगी, मकान कहां से बनेंगे ? आखिर पहाड़ से पत्‍थर आयेगा। इस बात को हम अच्‍छी तरह से जानते हैं लेकिन जो धार्मिक भावनाओं के केन्‍द्र हैं और चूंकि बाप धार्मिक भावनाओं के बहुत हामी हैं हम आशा करके चलते हैं कि पहले आप कहते थे, अब हम कह रहे हैं इन धार्मिक भावनाओं को ठेस मत पहुंचाइये। आपने कई धार्मिक भावनाओं का नाम लेकर बहुत ठेस पहुंचायी है। भगवान राम को कई तरह से आपने प्रचारित किया है। भगवान राम तो नाराज हो ही गये। कहीं गोवर्धन बाबा नाराज हो गये तो और पर कहर बीतेगा कि नहीं बीतेगा डाक्‍टर साहब मेरा और आपका क्‍या होगा ? जरा सोचना पड़ेगा। मैं आशा करके चलता हूं...

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  यह पर्वत की परिक्रमा मेरे ख्‍याल से पहाडि़या जी, कई दिनों से परिक्रमा पर आप गये नहीं है। कई दिनों से परिक्रमा देने आप गये नहीं है। गोवर्धन के पहाड़ पर कोई छेड़छाड़ नहीं है। वहां कोई माइनिंग का काम नहीं होता है। यह जो आपने सुनी है बात वह चौरासी कोस की उसमें भी सरकार का पूरा फैंसला है। उसमें जो भी धार्मिक भावनाओं से जुड़ा हुआ क्षेत्र है उस परिक्रमा मार्ग में आज तक कोई माइनिंग का काम नहीं होता। पाँच-पाँच सौ मीटर का पूरा एरिया खाली करके रखा हुआ है और वहां पर कोई माइनिंग का काम इल्‍लीगल, न लीगल जो अपना धार्मिक क्षेत्र है उसकी बात कर रहा हूं। अदरवाइज आप जिस बात को कहना चाह रहे हैं भरतपुर के अन्‍दर अगर कोई रोजगार का साधन है, कितने परिवार आज भरतपुर के अन्‍दर पल रहे हैं ? केवल माइनिंग की वजह से। वहां कोई मजदूरी करता है...

श्री अध्‍यक्ष: यह आप बहुत गलत परम्‍परा डाल रहे हैं। इस तरीके से जवाब दे रहे हैं बीच में आप। बहुत गलत परम्‍परा है। यह कोई अच्‍छी परम्‍परा नहीं है।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): किसी का ट्रैक्टर चलता है, किसी का कुछ चलता है तो आप अगर बेरोजगारी भरतपुर के अन्‍दर फैलाना चाहते हैं तो आप इस बात को बढ़ावा दे सकते हैं परन्‍तु मैं पूरा विश्‍वास करता हूं भरतपुर के बहुत सीनियर लीडर्स में से आप हैं। भरतपुर के युवाओं का, बेरोजगारों का भी आपको ध्‍यान रखना चाहिये। इस तरह की बात यहां नहीं करनी चाहिये।

श्री अध्‍यक्ष: आपकी जिम्‍मेदारी है क्‍या जवाब देने की ? बैर से आने वाले माननीय सदस्‍य, सब पूरा का पूरा सदन आपके भाषण की बहुत प्रशंसा कर रहा है। आप बहुत बढि़या बोले हैं। अब आप एक मिनट में कनक्‍लूड कर दें बस।

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (बैर): चलिये जैसी आपकी आज्ञा है।

श्री अध्‍यक्ष: आपने कोई पाइंट छोड़ा ही नहीं। सब बता दिया आपने। बहुत प्रभावित हैं हम सब।

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या (बैर): जैसी आपकी आज्ञा।

मैं बहुत समय नहीं लेता हुआ इस आशा के साथ अपनी बात समाप्‍त कर रहा हूं कि हमारे जो सुझाव दिये हैं, हमने केवल आलोचना नहीं की, सुझाव भी दिये हैं उन पर सरकार विचार करेगी और इस बात की कोशिश करेगी कि राजस्‍थान के हित में जो पाइंटस हमने कहे हैं  उन पर विचार करके, उन पर फैंसला करके कोई कार्यवाही करेगी इन्‍हीं शब्‍दों के साथ आपको धन्‍यवाद।

श्री अध्‍यक्ष: धन्‍यवाद। बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

मैं आप सब लोगों से क्षमा चाहूंगी। बजट में बोलने का आपको मौका दूंगी क्‍योंकि ... (व्‍यवधान) 

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): एक-एक मिनट का हमको समय दे दिया जाए मेरी विनती है।

श्री अध्‍यक्ष: मैं आपको दो-दो मिनट का समय देती हूं। दो-दो मिनट का देती हूं। बोलिये।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  बात समय की नहीं है, हमारे 40 मिनट बाकी हैं। विवाद के अन्‍दर पूरा दिन बरबाद कर देते हैं सदन में।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप क्‍या बरबाद कर रहे हैं ? दो-दो मिनट में कह दें। अपनी बात कहिये। दो-दो मिनट में बोलिये।

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): हम दोनों में से पहले कौन बोले ?

श्री अध्‍यक्ष: श्री जीतमल खांट।

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  महामहिम राज्‍यपाल महोदय ने राज्‍य सरकार की तीन वर्ष की उपलब्धि गाथा समेटे बाण प्रश्‍नों के इस अभिभाषण में एक दर्पण की तरह पूरे राजस्‍थान को विकास के पथ पर कैसे इस प्रदेश को आगे बढ़ाया, नयी सोच, नयी विचारधारा, नयी तकनीकी की इस त्रिवेणी संगम के साथ में राजस्‍थान प्रदेश को सर्वांगीण विकास के समग्र विकास में आगे बढ़ाने के लिये एक नया आयाम प्रस्‍तुत किया है। मैं ज्‍यादा नहीं कहूंगा। यहां पर प्रतिपक्ष और सत्‍ता पक्ष के माननीय सदस्‍यों अभिभाषण से संबंधित महत्‍वपूर्ण सुझाव इस सदन में रखे हैं। मैं चूंकि यहां मुख्‍यमंत्री महोदया बिराजमान हैं, अपने सत्‍ता संभालने के बाद में राजस्‍थान में एक बहुत बड़ा संकल्‍प आपने लिया था कि इस राजस्‍थान प्रदेश को दरिद्रता, कुपोषण, भूख और बेकारी से हर हालत में मुक्ति दिलायी जायेगी। महिलाओं में सम्‍बल और स्‍वाभिमान से जीने की ललक पैदा की जायेगी। शासन व्‍यवस्‍था में एक नयी सोच पैदा करना हमारा एक संकल्‍प है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  मैं मुख्‍यमंत्री जी को धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि आपकी सोच, इस अभिभाषण‍में कुशल वित्‍तीय प्रबंधन का आपने बार-बार जिक्र किया है। निश्चित रूप से पिछले पाँच साल का समय अगर हम गिनती करें अशोक जी के समय का पाँच साल के कार्यकाल में पूरे राजस्‍थान भर में एक चपरासी तक की नियुक्ति नहीं हुई लेकिन राजस्‍थान की ओजस्‍वी मुख्‍यमंत्री के नेतृत्‍व में हमारे ट्राइबल सब प्‍लान के उस एरिये से इन तीन सालों में कम से कम पन्‍द्रह हजार लड़के-लड़कियां वहां पर अध्‍यापक-अध्‍यापिका बनी हैं। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से विशेष तौर से मुख्‍यमंत्री महोदया से आग्रह करना चाहूंगा कि बी पी एल सेंसस के बारे में बार-बार यहां पर जिक्र किया जा रहा है और मैं आपसे आग्रह करना चाहूंगा कि डूंगरपुर में बाई इलेक्‍शन आपको ध्‍यान में है। अच्‍छी तरह से आपने उस इलाके को देखा। बांसवाड़ा, डूंगरपुर सब प्‍लान का इलाका जिनके पास में एक-एक, डेढ़-डेढ़, दो-दो बीघा जमीन है और ऐसे लोगों का नाम बी पी एल की सूची से वंचित हो गया है और जब आप बाई इलेक्‍शन में गये तो कांग्रेस पार्टी के लोगों ने जोर शोर के साथ में प्रचार किया भारतीय जनता पार्टी का राज नहीं आता तो बी पी एल के अन्‍दर गरीबों का नाम नहीं छूटता। यह वंचित नहीं रहता। यह बहुत जोर के साथ में प्रचार किया है।

 

जय गोविन्‍द/यूएस/7.3.7/18.20/3n

 

मैं आपसे आग्रह करना चाहूंगा कि हम सब जानते हैं कि भारत सरकार की कमी और खामी और योजना आयोग ने आकार घटाने के लिए आपके ऊपर एक दबाब बनाया और आपकी एक मजबूरी थी जिसके कारण से बी पी एल के अंदर 13 प्रश्‍न पूछे हैं और 13 अंक देकर के हम सब लोगों के साथ, गरीब जनता के साथ कुठाराघात करने का काम भारत सरकार ने किया है। मैं आपसे आग्रह करना चाहूंगा कि सिर्फ एक दिन आप मंत्रिमण्‍डल के साथ भारत सरकार के यहां पर दिल्‍ली में जाकर एक दिन का धरना देकर राजस्‍थान की जनता को बताने का प्रयास करें कि वास्‍तव में बी पी एल के लिए जिम्‍मेदार कौन है। यहां पर बार बार विपक्ष की तरफ से यह अंगुली आपकी तरफ उठाई जा रही है और मैं आपसे आग्रह करना चाहूंगा कि बी पी एल परिवार में आज मैं कह सकता हूं कि बांसवाड़ा जिले के अंदर 50 हजार परिवार ऐसे हैं जिनको सुबह शाम की रोटी का ठिकाना नहीं है जिनके सिर ढकने के लिए कोई छत नहीं है और आज हालत यह है कि जो बी पी एल सर्वे हुआ है उसके अंदर बांसवाड़ा, डूंगरपुर और सिरोही आबू के इलाके की हालत ऐसी है कि उनकी आंखों में आंखें डालकर देखते हैं तो असली गरीबी का चित्रण नजर आता है। आज हमारे इस इलाके के अंदर, विपक्षी साथियों को भी मैं कहना चाहता हूं कि भारत सरकार ने रोजगार गारण्‍टी कार्यक्रम शुरू किया है 6 जिलों के अंदर। हालत क्‍या है? 73 रुपए प्रतिदिन देने का है लेकिन दिया कितना जाता है? 25 रुपए, 30 रुपए। यहां पर मैनेजमेण्‍ट के नाम पर गरीबों के साथ में बहुत बड़ा धोखा किया जाता है1   अध्‍यक्ष महोदय, आप उस जमाने के अंदर 1960 के आसपास वहां भीखा भाई के साथ ड्राइविंग करके हमारे वांगड़ क्षेत्र में खुद गई थी और उस जमाने की हालत और आज की हालत में गरीब की झोपड़ी के अंदर, आज मक्‍के का भाव 220 रुपए प्रति 20 किलोग्राम का है। आज हालत यह बनती है कि गरीब की झोपड़ी में जाकर देखें तो मुट्ठी भर अनाज नहीं मिलता है और आज जहां पर हम कहते हैं कि बी पी एल सैंक्‍शन के बारे में तो अन्‍त्‍योदय अन्‍न योजना के माध्‍यम से बी पी एल परिवारों को 35 किलो गेहूं मिलता था, उस 35 किलो को 20 किलो करने का काम किसने किया? राजस्‍थान सरकार ने किया या भारत सरकार ने किया? आज गेहूं का भाव 12 सौ से 15 सौ रुपए क्विंटल जा रहा है। आज गरीब को राष्‍ट्रीय रोजगार गारण्‍टी योजना के माध्‍यम से मात्र 25 रुपए मिलता है दिन का, 10 दिन का उसको कितना मिलेगा, 250 रुपए मिलेगा। किस प्रकार से अपने परिवार को जिन्‍दा रखने का काम करेगा? इसलिए मैं आग्रह करना चाहता हूं आपके माध्‍यम से माननीय अध्‍यक्ष महोदय कि यह हमारे वहां की परिस्थितियां हैं। बी पी एल सैंक्‍शन के बारे में जो आज भ्रांति बनी हुई है उसके बारे में माननीय मुख्‍य मंत्रीजी खुलासा करेंगी।

अंत में मैं आपसे एक छोटा सा आग्रह करना चाहूंगा कि बिजली और पानी के लिए पूरा प्रदेश चिंतित है। इस बार हमारे बांसवाड़ा जिले में 90 से 100 इन्‍च बारिश हुई है। 90 से 100 इन्‍च बारिश होना राजस्‍थान के अन्‍दर एक रिकार्ड है। इतनी भयंकर बारिश होने के बावजूद भी वहां पर जन और धन की कोई हानि नहीं हुई। कवास के अंदर 12 इन्‍च बारिश हुई और वहां पर कितनी जन और धन की हानि हुई। मैं माननीय मुख्‍य मंत्री महोदय से आग्रह करना चाहूंगा कि हमारे माही बजाज सागर परियोजना बाँध की भराव क्षमता 77 टी एम सी है और इस बार जो भारी बारिश हुई उसमें हमारा कम से कम 250 इन्‍च बारिश का पानी बहकर समुद्र में चला गया। मैं माननीय सांवरमल जी जाट साहब से आग्रह करना चाहूंगा...।

श्री अध्‍यक्ष: आपका समय समाप्‍त हुआ, बस हो गया आपका।

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): माही बजाज सागर परियोजना जो लिलवाणी पावर सेक्‍टर नम्‍बर दो जो 45 मेगावाट क्षमता की है, 1990 से बंद पड़ी है। मैं आपसे आग्रह करना चाहता हूं कि वहां पर एक अपर लेवल कैनाल का निर्माण कर उस यूनिट को चालू किया जाए तो कम से कम 45 मेगावाट बिजली, 50 करोड़ रुपए की बिजली साल भर के अंदर पैदा हो सकती है।  तो इस तरह की वहां सम्‍भावना है। पानी और बिजली का वहां पर पर्याप्‍त भण्‍डार है। इसके बावजूद भी इस परियोजना को हाथ से बाहर क्‍यों कर रखा है? मैं आपसे आग्रह करना चाहूंगा कि आप इस बजट के अंदर इस कार्यक्रम को हाथ में ले और बांसवाड़ा और डूंगरपुर के अंदर भीखाभाई केनाल को आगे बढ़ाने के लिए आपने यहां पर वित्‍तीय स्‍वीकृति प्रदान की है। मैं आपसे आग्रह करना चाहूंगा कि कम से कम इस परियोजना को भी हाथ में लेकर 43 हजार हैक्‍टेयर जमीन पर सिंचाई के लिए पानी पहुंचाने का काम करें ताकि गरीबी का कलंक जो है वह हमेशा हमेशा के लिए धो सकें और गरीबों को दो जून की रोटी की व्‍यवस्‍था हो सके। आपने मुझे समय दिया उसके लिए धन्‍यवाद। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: श्री विजय बंसल। दो मिनट में कह दें अपनी बात।

श्री विजय बंसल (भरतपुर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने समय तो दो मिनट दिया है, जिसको दो मिनट दिए उसका मैं आठ मिनट गिन रहा हूं, तो कम से कम पाँच मिनट तो दें।

राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण में भाग लेते हुए मैं इसका तहेदिल से समर्थन करता हूं। राज्‍यपाल महोदय का अभिभाषण राज्‍य सरकार के विगत वर्षों में किए गए विकास कार्यों का एक आईना होता है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आईना का नाम मत लो, सारी सरकार हिल जाएगी। ना, ना आईना का नाम मत बोलो, आईना से गड़बड़ होता है।

श्री अध्‍यक्ष: ...(व्‍यवधान)... हां, आईना ही होता है, बिलकुल आईना ही होता है।

श्री विजय बंसल (भरतपुर): अध्‍यक्ष महोदय, इस सदन की नेता ने 2003 में जो पाँच वर्ष के विकास कार्यों के वायदे राज्‍य की जनता से किए थे, मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि तीन वर्ष में वह वायदे पूर्ण कर दिए गए हैं। आगामी दो वर्ष तो विकास बोनस के रूप में दिए जाएंगे जनता को। अगर इसका कम्‍पेरीजन चार्ट बनाया जाए क्‍योंकि आपने मुझे समय कम दिया है तो मैं आंकड़ों के हिसाब से बता सकता हूं कि पिछले पाँच वर्ष के कांग्रेस के शासन काल में जो काम हुए उनसे तीन गुने काम इन तीन वर्षों के राज में हो चुके हैं। 

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पिछली बी जे पी सरकार ने वायदे के अनुसार चुंगी हटाई और इस सरकार ने अपने वायदे के अनुसार गृह कर हटा कर आम जनता को राहत प्रदान की है।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अभी माननीय पहाडि़याजी बोल रहे थे कि हरिजन बस्तियों में हैण्‍डपम्‍प की व्‍यवस्‍था की जाए। शायद आप या तो अपने क्षेत्र का दौरा नहीं करते या अपना उदार दिल नहीं रखते, मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि पहले एक-एक हैण्‍डपम्‍प के लिए विधायक निधि से पैसा कटता था। आज अकेले मेरे विधान सभा क्षेत्र में 400 हैण्‍ड पम्‍प तीन साल के अंदर लग चुके हैं और एक भी हरिजन परिवार, एक भी हरिजन मौहल्‍ला नहीं रहा है जहां हैण्‍डपम्‍प की व्‍यवस्‍था नहीं कर दी गई हो। आपके यहां नहीं हुई तो आप स्‍वयं अपने कोटे से व्‍यवस्‍था कर दें।

पेयजल व्‍यवस्‍था के लिए मैं राज्‍य सरकार को धन्‍यवाद देना चाहता हूं। पी एच ई डी मिनिस्‍टर साहब ने एक ऐतिहासिक कार्य किया है। एक-एक गांव में दस-दस हैण्‍डपम्‍प लगाकर पेयजल व्‍यवस्‍था की है। जैसा कि चम्‍बल परियोजना की बात कर रहे थे। हम भी उससे बहुत दु:खी हैं लेकिन क्‍या करें कोर्ट में स्‍टे हुआ पडा है डेढ़ साल से। अभी पिछले कुछ दिनों पूर्व मैंने एक जनहित याचिका लगाकर उसको तुड़वाने का प्रयत्‍न किया है।

अब हम बात करें शिक्षा क्षेत्र की तो मैं निश्चित रूप से कह सकता हूं कि जितने स्‍कूल खोले हैं, जितने क्रमोन्‍नत किए हैं जितने टीचर्स लगाए गए हैं वह एक ऐतिहासिक रिकार्ड है, इसके लिए माननीय शिक्षा मंत्रीजी धन्‍यवाद के पात्र हैं।

चिकित्‍सा क्षेत्र की बात करें तो पूरे राजस्‍थान की मैं बात नहीं करना चाहता लेकिन मेरे भरतपुर क्षेत्र में सिटी स्‍केन मशीन हो, ट्रोमा यूनिट हो, हॉस्पिटल का जीर्णोद्धार हो, चाहे पुराने हॉस्पिटल के लिए दो करोड़ की व्‍यवस्‍था करके उसको एक नया रूप देने का प्रयत्‍न किया गया है, इसके लिए मैं माननीय चिकित्‍सा मंत्रीजी को बहुत-बहुत आभार प्रकट करता हूं।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, किसी भी क्षेत्र के विकास के लिए, किसी भी राज्‍य के विकास के लिए, सबसे बड़ी आवश्‍यकता होती है इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर डवलपमेण्‍ट की। इसके लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग ने पिछले तीन वर्ष में सड़कों का जाल राजस्‍थान में बिछाया है। मैं बताना चाहता हूं कि हमारे भरतपुर-जयपुर के मार्ग पर प्रतिदिन सैंकड़ों आदमियों की एक्‍सीडेण्‍टल डेथ होती थी, बी ओ टी आधार पर फोर लेन जो बनाई जा रही है इससे सफर भी कम होगा और मृत्‍यु दर भी घटेगी। इसके साथ-साथ मेरे अकेले भरतपुर विधान सभा क्षेत्र में साढ़े पाँच करोड़ रुपए लगाकर 61 किलोमीटर सड़कें बनाई और 12 गांवों को उससे जोड़ दिया गया है।

 

Gpc/usc/07032007/1830/3o

 

पीएमजीएसवाई में क्रियान्विती में राजस्‍थान का नम्‍बर पूरे देश में प्रथम नम्‍बर पर है। अभी इसी वर्ष आठ गांवों में चार करोड़ की लागत से वे गांव जोड़े गये हैं। क्‍योंकि समय कम है, कुछ बातें यह कहना चाहूंगा कि इस बजट में मिसिंग लिंक को जरूर रखा जाए।

भरतपुर एक ऐतिहासिक नगरी है जिसे घना पक्षी विहार के नाम से पूरे संसार भर में जाना जाता है, लेकिन वह घना पक्षी विहार पानी की कमी की वजह से आज अस्तित्‍व खोने के कगार पर है। देश-विदेश से पर्यटक आते हैं। मैं राज्‍य सरकार को धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि उन्‍होंने 108 करोड़ रुपये की योजना बनाकर सेंट्रल में दो वर्ष पूर्व भेजी है, लेकिन केन्‍द्र सरकार उस योजना को दबाकर बैठी हुई है। मैं  कहना चाहता हं खाली भरतपुर ही नहीं पूरे संसार में भरतपुर उसकी वजह से जाना जाता है उस योजना को स्‍वीकृत कराए तो हम आपके आभारी रहेंगे।

श्री अध्‍यक्ष: धन्‍यवाद।

श्री विजय बंसल (भरतपुर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  मैं बैठ रहा हूं, दो मिनट बोलने दो। माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  भरतपुर में जीवनदायिनी सुजानगंगा के नाम से जानी जाती थी जो शहर के किले के चारों तरफ है। भरतपुर आने वाला पर्यटक उसको देखने जाता है, उसके जीर्णोद्धार की तुरंत आवश्‍यकता है। मात्र कुछ करोड़ रुपये से एक सुंदर पर्यटक स्‍थल का डवलपमेंट हो सकता है। साथ ही साथ संभाग बनाने के लिए धन्‍यवाद देते हुए दो बातें कहना चाहूंगा। संभाग बनाने के बाद जितने उसके स्‍तर के कार्यालय हैं वे भरतपुर में खोले जाएं। इसके अलावा टेक्‍नीकल एजुकेशन में कम से कम इंजीनियरिंग कालेज, वेटेरनरी कालेज आदि की व्‍यवस्‍था की जाए।

श्री अध्‍यक्ष: धन्‍यवाद।

श्री विजय बंसल (भरतपुर): मैं बृज चौरासी कोस ..(व्‍यवधान).. जैसा कि डा. दिगम्‍बर सिंह जी ने कहा था कि बृज चौरासी कोस के 500 मीटर के अंदर खनन बंद कर दिया गया है, लेकिन वहां मैं निश्चित रूप से कह सकता हूं कांग्रेस सरकार द्वारा एक मिलीभगत योजना के तहत एक आंदोलन चलाया जा रहा है। उस कामां क्षेत्र में करीब एक लाख लोग अगर खनन बंद किया गया तो रोजगार से विमुख हो जाएंगे। निश्चित रूप से धार्मिक स्‍थल पर कोई खनन कार्य नहीं हो रहा है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  मैं आपको बहुत-बहुत धन्‍यवाद देते हुए राज्‍यपाल के अभिभाषण का समर्थन करता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: धन्‍यवाद। ..(व्‍यवधान).. मुख्‍यमंत्रीजी को जवाब देना है।

श्री मुरारी लाल मीणा (बांदीकुई): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  मैं बिना किसी भूमिका के राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण पर बोलना चाहता हूं। अध्‍यक्ष महोदय, हम तीन साल से देख रहे हैं इस विधान सभा के अंदर सत्‍ता पक्ष तो चाहे अच्‍छा हो या बुरा उसका काम है बड़ाई करना और विपक्ष का काम है उसकी बुराई करना। विपक्ष का काम है सरकार की बुराई करना।

श्री अध्‍यक्ष: आप तथ्‍यों पर बोलें, न बुराई करें, न बड़ाई करें, तथ्‍यों पर बोलें।

श्री मुरारी लाल मीणा (बांदीकुई): हरिमोहन जी अभी कह रहे थे कि सत्‍य बोलो, मैं कुछ सत्‍य बातों पर अपना प्रकाश डालूंगा। मैं आपसे निवेदन करना चाहूंगा राज्‍य सरकार चाहे पैसा भारत सरकार से लायी हो, चाहे लोन से लिया हो, चाहे इन्‍होंने अपनी लोकल व्‍यवस्‍था की हो, लेकिन आर्थिक मैनेजमेंट ओवरआल ठीक रहा। जो मैंने सबसे बड़ी कमी इस सरकार के अंदर महसूस की है वह है कि पिछले तीन साल में राजस्‍थान में आंदोलन हुए हैं, बहुत तेजी से आंदोलन हुए हैं और उनके पीछे जो कारण समझता हूं कि माननीय मुख्‍यमंत्री महोदय ने राजस्‍थान के अंदर जो परिवर्तन यात्रा निकाली तो अनेक क्षेत्रों में जहां-जहां पर गयी प्रत्‍येक समाज को अनेक प्रकार के तरह-तरह के आश्‍वासन दे दिये। कहीं पानी का आश्‍वासन दे दिया, कहीं किसी को आरक्षण का आश्‍वासन दे दिया, कहीं गुर्जरों को दे दिया, कहीं मीणों को दे दिया, कहीं राजपूतों को ओबीसी का आरक्षण दे दिया, कहीं ब्राह्मणों को दे दिया और कहीं कर्मचारी संगठनों को आश्‍वासन दे दिये कि हम जैसे ही मुख्‍यमंत्री बनेंगे आपकी सारी की सारी मांगें पूरी कर देंगे। जितने भी सारे संगठन थे, जितने भी क्षेत्र थे, जितने भी जिले थे, समाज थे, एक साल तक तो उन्‍होंने इंतजार किया। उस टाइम माननीय मुख्‍यमंत्रीजी ने यह नहीं सोचा कि बाद में जब ये मांगें उठेंगी और हम सत्‍ता में आ जाएंगे तो इन समाजों में टकराव पैदा होंगे और उसके कारण क्‍या हुआ एक साल बाद में कहीं कर्मचा‍री संगठनों द्वारा आंदोलन, कहीं किसानों द्वारा आंदोलन, कहीं जातियों के द्वारा आंदोलन, पूरे राजस्‍थान में आंदोलन चालू हो गये और उसका परिणाम यह हुआ कहीं किसान मर गये, कहीं एस.सी., एस.टी. वाले मर गये, कहीं कोई समाज वाले मर गये। बिना सोचे-समझे जो आश्‍वासन सरकार ने दिये थे उनका परिणाम हुआ कि तीन साल में सबसे ज्‍यादा आंदोलन हुए और किसानों की हत्‍या हुई। ..(व्‍यवधान).. आप बैठ जाइए। मैंने कहा है कि आर्थिक मामलों में सरकार से सबसे अच्‍छा काम किया है। मैंने बताया बिलकुल सही-सही कहूंगा। जो मैं महसूस कर रहा हूं वह बोल रहा हूं।

दूसरा, मेरा आपसे निवेदन है जहां तक सड़कों का मामला है राजस्‍थान ने वास्‍तव में सड़कों के मामले में उपलब्धि प्राप्‍त की है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंदर 14724 किलोमीटर सड़कों के माध्‍यम से 4620 गांवों को सड़कों से जोड़ा गया है। डब्‍ल्‍यूबीएम से बीटी के अंदर 4668 किलोमीटर सड़कें बनायी हैं और 5 मेगा हाईवे रिडकोर के तहत आप बना रहे हैं उसके लिए भी धन्‍यवाद के पात्र हैं।

एक सुझाव देना चाहूंगा कि सड़कें काफी बनी हैं। 10-12 जिलों में 250 तक की आबादी के गांव में पहाड़ी एरिया और प्‍लेन एरिया में ले लिये हैं बाकी जिलों को भी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत लेने का पूरा प्रयत्‍न करें। एक सबसे बड़ा अभाव महसूस इस समय कर रहे हैं वह यह है कि सड़क खूब बन गई, दो तहसील जुड़ गई, लेकिन 3-3, 4-4 किलोमीटर के बीच में मिसिंग लिंक बकाया है, जिस हिसाब से आपने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना बनायी है पूरे राजस्‍थान के लिए जिस हिसाब से आपने डब्‍ल्‍यूबीएम से बीटी की योजना बनायी है इस हिसाब से समानान्‍तर दृष्टि से, पक्षपात की दृष्टि से नहीं, पक्षपात की बात मैं अभी माननीय शिक्षा मंत्री महोदय की बताऊंगा, एक विधायक को करीब 40-40 किलोमीटर मिसिंग लिंक माननीय मुख्‍यमंत्री महोदय यहां बैठी हुई हैं क्‍योंकि यह बहुत बड़ी समस्‍या है। मेरे बांदीकुई से नारायणी माता आना पड़ता है बीच में चार किलोमीटर का टुकड़ा घट रहा है उस चार किलोमीटर के टुकड़े की वजह से हमें 50 किलोमीटर घूमकर आना पड़ता है। तो इस बार सरकार पूरी कोशिश करे कि पूरे राजस्‍थान में प्रत्‍येक विधायक के क्षेत्र मकें 40-40 मिसिंग लिंग इस बजट में ले लें तो बहुत बड़ी समस्‍या का समाधान हो जाएगा।

एक निवेदन और है। हमारे यहां सड़क दो डिपार्टमेंट बनाते हैं एक पीडब्‍ल्‍यूडी और एक मण्‍डी समिति। पीडब्‍ल्‍यूडी की जो सड़क होती है उनका टाइम टू टाइम मेंटिनेंस होती रहती है, लेकिन जो मण्‍डी की सड़क है उनकी मेंटिनेंस टाइम टू टाइम नहीं होती है। सरकार ऐसा कोई निर्णय करे या तो मण्‍डी की सारी सड़कों को पीडब्‍ल्‍यूडी को ट्रांसफर कर दे और यदि ट्रांसफर नहीं करे तो ऐसी पालिसी बनाये कि मण्‍डी की सड़कों को टाइम टू टाइम मेंटिनेंस होती रहे। मेरे यहां का उदाहरण देता हूं। हमारे यहां एक सड़क है दौसा से लेकर घोसराना। उसकी लम्‍बाई 75 किलोमीटर है, उसमें मात्र आठ किलोमीटर सड़क तो मण्‍डी समिति की है और बाकी पीडब्‍ल्‍यूडी की है। पीडब्‍ल्‍यूडी की सड़क तो बिलकुल वेल अपटूडेट है, लेकिन मण्‍डी की सड़क है उसमें 8 किलोमीटर के अंदर 8 घण्‍टे निकलने में लगते हैं। यहां कृषि मंत्री महोदय बैठे हुए हैं इसलिए इनके ऊपर थोड़ा ध्‍यान दें। इसके अंदर कोई पालिसी बनाए कि या तो सारी मण्‍डी की सड़कें पीडब्‍ल्‍यूडी को दे दें या फिर मेंटिनेंस का बजट अलग से रखें।

मैं आपसे निवेदन करना चाहूंगा शिक्षा मंत्री महोदय बैठे हैं, मैं धन्‍यवाद दूंगा राजस्‍थान में आपने खूब स्‍कूल खोले हैं। आपने कहा कि 63 हजार पर एक कालेज है, लेकिन आप यह तो सोचें कि क्‍या बीए लड़के को आप रोजगार दे सकते हो, ग्रेजुएट लड़के को रोजगार दे सकते हो? बिना टेक्‍नीकल एजुकेशन के आज भारत के अंदर रोजगार नहीं है। शहरों में टेक्‍नीकल एजुकेशन खूब है। आपने जो 200 कालेज खोले हैं, आपने सीनियर सैकण्‍डरी 500 खोले हैं उनमें कितने के अंदर साइंस खोली है, कितने के अंदर बायलॉजी खोली है, कितने में मैथेमेटिक्‍स खोली है। सबमें आर्ट्स खोल दी। गांव के सब लड़के बीए करो और बेरोजगार घूमो। दूसरा, जो 200 कालेज खोले वे भी ज्‍यादा शहरी क्षेत्रों में खोले हैं। मेरा निवेदन है कि आप ग्रामीण क्षेत्र में खोलें। हम यह जानते हैं ग्रामीण क्षेत्र के अंदर कालेज खोलने वाले लोग-बाग़ नहीं हैं, लेकिन आप उनको ऐसी फैसेलिटी दें चाहे आप उनको स्‍पेशल भत्‍ता दें या उनको जमीन दें या बिल्डिंग दें ताकि टेक्‍नीकल एजुकेशन गांवों में जा सके। यदि गांवों में टेक्‍नीकल एजुकेशन नहीं गई तो आने वाले समय में सब लड़के बेरोजगार हो जाएंगे।

एक सबसे बड़ी गलती की आपने करीब 15500 स्‍कूल खोल दिये, प्राइमरी, मिडिल, सैकण्‍डरी, सीनियर सैकण्‍डरी। आपने किस हिसाब से खोल दिये। जैसे मैंने आपको बताया प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के बिलकुल पैरेलल चाहे माननीय मुख्‍यमंत्री महोदय का एरिया हो चाहे कोई और एरिया हो जनसंख्‍या के आधार पर किया। आपकी कोई पालिसी नहीं है। आपने किसी विधायक के यहां 200 स्‍कूल खोल दिये और किसी के यहां 10 स्‍कूल खोल दिये। क्‍या आप आधे राजस्‍थान को शिक्षित करके पूरे राजस्‍थान को शिक्षा में बराबर कर देंगे? कहीं-कहीं तो इन्‍होंने 20-20 स्‍कूल खोल दिये, कहीं दो भी नहीं खोले। कहीं मिडिल स्‍कूल इन्‍होंने 100 खोल दिये, कहीं एक भी नहीं खोला। यह करौली का उदाहरण है। थोड़ा 19-20 हो जाता है, 18-20 हो जाता है, लेकिन इतना डिफरेंस नहीं होता कि कहीं तो 40 स्‍कूल, कहीं कुछ नहीं। मैं 20 बार आपसे मिल चुका, मैंने 20 बार आपको लिस्‍ट दी है, आप कहते हैं खोल देंगे। 19-20 कर लो, बेईमानी थोड़ी-बहुत कर लो, इतनी बेईमानी मत करो, कहीं दो और कहीं 100 ।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): घनश्‍याम जी, जैसा केन्‍द्रीय सरकार पक्षपात नहीं कर रही है आप भी पक्षपात मत करो। स्‍कूल खोलने में आप बहुत पक्षपात कर रहे हो। ..(व्‍यवधान)..

श्री मुरारी लाल मीणा (बांदीकुई): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  मेरा आपसे जल संसाधन के बारे में निवेदन है। ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: समाप्‍त करें।

 

मोहन/चौहान/अशोधित प्रति प्रकाशनार्थ नहीं/07032007/1840/3p 

 

श्री मुरारी लाल मीणा (बांदीकुई): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जल संसाधन मंत्री महोदय से मेरा एक निवेदन है। बहुत बड़ी समस्‍या है, सब की समस्‍या है। मेरा एक निवेदन है कि आपने वास्‍तव में पानी में बहुत पैसा दिया है, आपने सिंचाई में बहुत पैसा दिया है और एनीकट् में इन्‍होंने तीन सौ करोड़ रुपये दिये थे, वह धन्‍यवाद के पात्र हैं, उसमें बजट और बढ़ाया जाए और यह जो सबसे बड़े जिसके दोषी आप भी हो और आप भी हो, पूरे राजस्‍थान के अन्‍दर, बिलकुल दोनों पक्ष हैं, पूरे राजस्‍थान के अन्‍दर दुनिया भर की योजनाएं हजारों रुपये की, करोड़ों रुपये की बनी हैं, नर्मदा योजना, इंदिरा गांधी योजना, भाखड़ा योजना, माही योजना, बीसलपुर योजना, चम्‍बल योजना, यमुना योजना, मैं आपको निवेदन करना चाहूंगा आज से 15 साल पहले हमने देखा था जब हम छोटे छोटे थे, जयपुर जोन का, भरतपुर जोन का, जयपुर दौसा, भरतपुर, सवाईमाधोपुर, करौली, अलवर बिलकुल इर्रिगेटेड क्षेत्र था, बिलकुल और इधर का पूरा का पूरा एरिया, मैंने पहले सर्विस की है वहां 8-10 जिलों में मैंने देखा है, बिलकुल रेगिस्‍तान था, आज सारी की सारी योजनाएं पश्चिमी राजस्‍थान के अन्‍दर बनी है और पूर्वी राजस्‍थान के अन्‍दर 8 जिलों के अन्‍दर स्थिति यह हो गई है, खेती के लिए तो क्‍या पानी के लिए भी पैसा नहीं है इसलिए सरकार से निवेदन है कि कोई न कोई योजना इन 8-7 जिलों के लिए तो ऐसी बनाएं और दूसरा आप कह रहे थे पहाडि़या जी कह रहे थे, इन्‍होंने कहा है, मैंने सुना है, सुना नहीं, मेरे प्रश्‍न का जवाब आया है, भारत निर्माण के तहत आपने 47 करोड़ रुपये की योजना भारत सरकार को भेजी हुई है, भारत निर्माण के तहत उसमें मात्र इन 8 जिलों के लिए सौ करोड़ रुपये है तो मेरा आपसे करबद्ध निवेदना है कि ऐसा नहीं हो जाए कि आने वाले 15 साल के अन्‍दर ये 8 जिले पूरे के पूरे रेगिस्‍तान हो जाएं इसलिए कोई न कोई इसमें ऐसी एक कोई योजना बनाए। दूसरा मेरा निवेदन और है। माननीय मुख्‍य मंत्री महोदय, आप यहां बैठी हुई हैं, मैं आपको बिलकुल स्‍पष्‍ट कहता हूं कि हम हमारी ताकत का अहसास नहीं कर सकते, जब जब राजस्‍थान के अन्‍दर एस.टी. और एस.सी. के 20 विधायक किसी भी पार्टी के आए हों और क्रॉस किये हों।

श्री समर्थ लाल (राजगढ़): यह राजस्‍थान की पहली मुख्‍य मंत्री हैं जो झूठ नहीं बोलती।

श्री मुरारी लाल मीणा (बांदीकुई): मेरा निवेदना है कि राजस्‍थान में जब तक, यह गौर करने की बात है, आज तक न तो कोई महसूस करता है, न कांग्रेस ने महसूस किया, न बी.जे.पी. ने महसूस किया, आप आंकड़े उठाकर देख लो, जब जब राजस्‍थान के अन्‍दर एस.सी., एस.टी. के विधायक किसी पार्टी के 20 क्रॉस किये हैं उसी की सत्‍ता बनी है और आपकी सरकार के अन्‍दर 43-44 एमएलए हैं लेकिन आपने क्‍या किया इनके साथ ? शिक्षा मंत्री तो धन्‍यवाद के पात्र हैं। यह बात तो कहनी पड़ेगी, इन्‍होंने बैकलॉग पूरा किया, गृह मंत्री महोदय ने कुछ किया, पीडब्‍ल्‍यूडी में किया राठौड़ साहब ने लेकिन हमको चिल्‍लाते चिल्‍लाते तीन साल हो गये।

श्री अध्‍यक्ष: कृपया समाप्‍त करें।

श्री मुरारी लाल मीणा (बांदीकुई): नहीं, एक मिनट, साहब, 2-3 पाइंट हैं। हमारे न तो एस.सी., एस.टी. को अच्‍छी पोस्टिंग दी जाती है, चाहे आईएएस हों, चाहे आरएएस हों, चाहे आरपीएस हों, इनको कृपा करके ढंग की पोस्टिंग दें। हमारे जितने भी अधिकारी हैं सब के सब बर्फ के लगा रखे हैं, उससे ऐसा मेसेज गया है कि यह सरकार, 43 हमने दिये हैं लोग-बाग़, 43-44, यह तो उदाहरण है कि 20 एमएलए से बढ़ते ही आपका राज बदल जाता है तो हमने 43-44 एमएलए आपको दे रखे हैं तो अधिकारी/कर्मचारियों और हमारे रोस्‍टर का और हमारे प्रमोशन का कम से कम ध्‍यान रखें।

श्री अध्‍यक्ष: हां, बिलकुल।

श्री मुरारी लाल मीणा (बांदीकुई): मेरा एक निवेदन है और छोटा सा है। अभी मैं इसमें पढ़ रहा था कि अपना पंचायती राज जो डिपार्टमेंट है उसको मजबूत बना रहे हैं। मेरा निवेदन है कि पैसा खूब करीब 1200 करोड़ रुपये के आसपास आपने उसको दिया हुआ है लेकिन आप यह सोचो, मैं यह भी पढ़ रहा था कि हरेक पंचायत समिति में कम्‍प्‍यूटर दिये जाएंगे, कौन चलाएगा कम्‍प्‍यूटर को ? आठवीं पास सेक्रेटरी खोलना ही नहीं जानता, पंचायत समिति में कम्‍प्‍यूटर दिये जाएंगे इसलिए पंचायती राज को यदि मजबूत करना है तो आप वहां पर उचित व्‍यवस्‍था की जाए, एक्‍जीक्‍यूटिव अथोरिटी अलग और मानीटरिंग अथोरिटी अलग, हर अलग टेक्निकल स्‍टाफ लगाया जाए जब जाकर ही सारा वर्क खराब, आप पीडब्‍ल्‍यूडी की रोड देख लीजिए और पंचायत राज की रोड देख लीजिए।

श्री अध्‍यक्ष: अब कृपया समाप्‍त करें आप।

श्री मुरारी लाल मीणा (बांदीकुई): आज रोड बनता है दो दिन में खतम तो इसमें भी आप कृपा करके थोड़ा ध्‍यान रखें।

श्री अध्‍यक्ष: अब धन्‍यवाद आपको बहुत बहुत।

श्री मुरारी लाल मीणा (बांदीकुई): एक मेरा निवेदन और है।

श्री अध्‍यक्ष: अब धन्‍यवाद बहुत बहुत।

श्री मुरारी लाल मीणा (बांदीकुई): अध्‍यक्ष महोदय, एक बात और सुन लो। अभी मैं अख़बार में पढ़ रहा था कि 20 फरवरी को ओले पड़े और अकाल राहत मंत्री महोदय ने कहा अकाल राहत के कार्य चालू कर दो, कर दिये। मेरा आपसे निवेदन है कि जिस आदमी को आधी रोटी मिल गयी उसको तो पूरी चाहिए, आधी और दे दो और जहां पर आधी रोटी नहीं है, इनको बेचारों को भूखे मारो। जहां पर फसल बोई ही नहीं गयी उसके बारे में भी सोचो। मेरे विधान सभा क्षेत्र में 12 ग्राम पंचायत ऐसी हैं वहां पर एक दाना नहीं बोया गया तो वहां पर अकाल राहत के कार्य क्‍यों नहीं चालू किये गये ? यह पालिसी गलत है इसलिए इस पालिसी को चेंज किया जाए।

श्री अध्‍यक्ष: बस अब हो गया, बस कृपया।

श्री मुरारी लाल मीणा (बांदीकुई): मैंने जल्‍दी जल्‍दी में मेरी बात बताई हैं।

श्री अध्‍यक्ष: कृपया समाप्‍त करें। 

श्री मुरारी लाल मीणा (बांदीकुई): आपको बहुत बहुत धन्‍यवाद। जयहिन्‍द।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय मुख्‍य मंत्री ।

 

धन्‍यवाद प्रस्‍ताव का पारण

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आज सबसे पहले सदन में आभार व्‍यक्‍त करना चाहूंगी गवर्नर साहब के अभिभाषण के ऊपर कि उन्‍होंने खाली अपना कांस्‍टीट्यूशनल राइट पूरा नहीं किया परन्‍तु साथ साथ, जो भी हमारी भावी योजनाएं थीं उनकी जानकारी भी सब को दी है, सब को देने की उन्‍होंने बहुत बड़ी कृपा की है। मैं धन्‍यवाद सब को देना भी चाहूंगी जिन्‍होंने बहुत ही रचनात्‍मक तरीके से, इन इनवर्टेड कोमाज, रचनात्‍मक तरीके से इस डिबेट के अन्‍दर भाग लिया और बहुत अच्‍छे अच्‍छे सुझाव हम लोगों के सामने, कई लोगों ने दिये उसके लिए मैं आप सब को धन्‍यवाद देना चाहूंगी। यह चीज मैं जरूर मानती हूं कि हम लोग पक्ष और विपक्ष जरूर हैं परन्‍तु जैसा मैंने पहले कहा राजस्‍थान के बारे में हम सब सोचते हैं, राजस्‍थान का विकास हम सब के दिमाग और दिल में है और उसके लिए मेरा मानना है कि विकास की कल्‍पना हम सब के दिल के अन्‍दर है और हम लोग सब चाहते हैं कि उस विकास की तरफ हम लोग अग्रसर रहें, उसकी कोशिश जरूर हो रही है और मैं मानती हूं कि हम लोग काम करते भी हैं और आप लोग उसके अन्‍दर कुछ डिस्क्रिपेंसीज हम लोगों की है उनको निकालते भी हो तो उससे हमको लाभ भी मिलता है, मार्गदर्शन भी हमको मिलता है और मैं उसके लिए आप सब को धन्‍यवाद भी देना चाहूंगी। एक बात की खुशी मैं जाहिर करना चाहूंगी आप लोगों के सामने, यह जो प्रदेश बीमारू माना जाता था, कई लोगों ने कई किस्‍म की मजाक की है परन्‍तु अपने दिल के अन्‍दर टटोलेंगे तो उनको सब को मालूम है, प्रदेश बीमारू कहलाया जाता था, आज इस परिस्थिति में आ गया है कि बीमारू के दर्जे से बाहर निकला और उसके लिए हम यहां जो बैठे हैं, वह पूरी क्रेडिट नहीं लेंगे, मैं आपको सब को धन्‍यवाद देना चाहूंगा क्‍योंकि मैं मानती हूं कि राजस्‍थान का अगर विकास करना है तो इस विकास के अन्‍दर पक्ष, प्रतिपक्ष और राजस्‍थान के सब निवासी उन लोग, सब का जब तक हाथ नहीं होगा तब तक उस तरफ हम लोग अग्रसर नहीं हो सकते। इसलिए मैं आपसे यहां यह कहना चाहूंगी कि इस यात्रा के अन्‍दर, इस विकास की यात्रा के अन्‍दर आप भी हमारे सहभागी बनें।

आतंकवाद एक ऐसी चीज है जिसने आज पूरे विश्‍व को अपनी चपेट में ले रखा है। कितने लाखों लोग इसमें मर गये हैं, कितने लोगों के घर उजड़ गये हैं, यह रोज अगर अख़बार उठाकर आप देखें तो कुछ न कुछ बात उसमें निकल कर आती है। जब आदरणीय अटल बिहारी वाजपेयी हमारे प्रधान मंत्री थे तब उन्‍होंने हमारा जो पड़ोसी देश था उसकी तरफ जरूर दोस्‍ती का हाथ बढ़ाया परन्‍तु जब जरूरत पड़ी तो उन्‍होंने अपनी आंख भी दिखाई और उनको मुंह तोड़ जवाब भी दिया और आज जिन लोगों ने संसद के ऊपर हमला किया था, जिन आतंकवादियों ने उस संसद के ऊपर हमला किया था, आज उनके कितने हौसले बुलन्‍द हो रहे हैं क्‍योंकि हम लोग उनकी माफी के बारे में बात कर रहे हैं और उनका सोच यह है कि जिन्‍होंने अपनी जान उनके ऊपर दे दी है, अपनी जान हमारे देश के ऊपर और उस संसद के ऊपर कुर्बान कर दी है उनके परिवार और जवानों की, उनके दिल में कैसी कुठा पैदा हो रही होगी। जब वह रोज यह पढ़ते हैं कि हम लोग इस चीज को अपने ध्‍यान में लाए भी हैं।

अध्‍यक्ष महोदय, मैं समझौता एक्‍सप्रेस के साथ हुआ उसके ऊपर बहुत ही कड़ी निंदा करना चाहूंगी और जो भी निर्दोष व्‍यक्ति हैं जो मारे गये थे उसमें उनके लिए श्रद्धांजलि अर्पित करना चाहूंगी और हम सब की ओर से उसको अर्पित करना चाहूंगी।

अभिभाषण के अन्‍दर कई लोगों ने समालोचना की है, कई लोगों ने आलोचना की है, उन सब का आभार व्‍यक्‍त मैंने किया है और हिण्‍डौली से आने वाले माननीय सदस्‍य, पुष्‍कर से आने वाले माननीय सदस्‍य इन लोगों ने यह भी कहा कि हमारी सरकार में मतभेद नजर आ रहे हैं तो मैं उनको यह दो पंक्तियां अर्पित करना चाहूंगी।

' ए, फूल तुझे बुलबुल ...(व्‍यवधान)... नो।

श्री अध्‍यक्ष: बीच में न बोलें, आप शेर का आनन्‍द तो लेने दें, क्‍यों बीच में बोलते हैं?

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): आप उधर मत देखना इधर देखो आप।

' ए, फूल तुझे बु लबुल के दिल के सैकड़ों टुकडों की चिंता क्‍यों है ?

तूने स्‍वयं के पहनने के लिए फटे हुए कपड़ों को तो रफू कर लिया ?

 

Skp/akt/07032007/1850/3q/1

 

मैं इन चीजों के ऊपर सदन का ज्‍यादा समय नहीं लेना चाहूंगी। (व्‍यवधान) जमा नहीं, मैं तो मानती हूं कि जमा नहीं होगा और कई लोगों को समझ में भी नहीं आया होगा। पर मैं आपको यही कहना चाहूंगी कि कई ऐसी बातें आई हैं जो आधारहीन भी थीं, उनका भी काफी बड़ा पुलिंदा हुआ है और मैं समझती हूं कि उसके ऊपर मुझे ज्‍यादा समय नहीं निकालना है। इतना कहूंगी कि आपकी सरकार के पांच वर्ष और हमारी सरकार के अगर तीन वर्ष के कार्यकाल की कोई भी तुलना करें तो मैं समझती हूं कि उसको आगे जाने की जरूरत नहीं होगी और आपको भी इस तरीके से बार-बार कहने की जरूरत नहीं होगी। लेकिन मुझे मालूम है कि ये बातें तब उठती हैं जब अपने पास कहने को कुछ नहीं हो और इसीलिए मैं संख्‍यात्‍मक दृष्टि से नहीं बल्कि गुणात्‍मक दृष्टि से भी यह कह रही हूं। मैं आज यहां आंकड़े भी आपके सामने नहीं रखना चाहूंगी क्‍योंकि आप लोगों ने उसको अच्‍छी तरह से पढ़ा है, उसको अच्‍छी तरह से समझा है, उसको अच्‍छी तरह से देखा है इसलिए ऐसी डिबेट का स्‍तर हम सबके सामने पेश हुआ है। हम लोग गरीब जनता को राहत देने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। हम खाली बात करके नहीं परंतु वाकयी में काम करके दिखाने की कोशिश कर रहे हैं और अगर हम पैसा लाये हैं, अगर हमने काम किया है तो मैं समझती हूं कि वहां से आवाज उठेगी उस आवाज से ही हम सब को खुशी होगी। लोकतंत्र के अन्‍दर जनता फैसला करती है कि सरकार ने कैसा काम किया है, अच्‍छा काम किया है या बुरा किया है। अपने बोर्डर के इलाके पंजाब में और फिर उत्‍तराखंड के अन्‍दर जो नतीजे निकलकर के आये हैं उससे बहुत क्लियरली मालूम पड़ जाता है कि जनता क्‍या सोच रही है। (व्‍यवधान)

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): डूंगरपुर के परिणाम से भी परिलक्षित होता है कि क्‍या हुआ है। (व्‍यवधान)

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): केन्‍द्र की गलत नीति की वजह से जो महंगाई पूरे देश के अन्‍दर छा गई है वह कितनी असहनीय है वो सबके सामने निकलकर के आ गई है इन इलेक्‍शंस के अन्‍दर। यह हमने नहीं कहा है, यह सोनिया गांधी जी ने कहा है तो मैं समझती हूं कि उसके ऊपर तो आप कोई आर्ग्‍यू नहीं करोगे। पंजाब के जो पूर्व मुख्‍य मंत्री थे उन्‍होंने तो कहा ही कहा है, उन्‍होंने तो यह कहा है कि जो बढ़ी हुई महंगाई थी वो उनकी सरकार को, उनकी पार्टी को वहां ले गई। उन्‍होंने जोर-जोर से जो सुनना चाहता था उसको यह कहा है। मुझे यह समझ में नहीं आता है कि इतना विद्वान प्रधान मंत्री जिसको लोग कहते हैं इकोनोमिस्‍ट, अर्थशास्‍त्री कहते हैं, उसके कार्यकाल में अगर इस तरीके की समस्‍या सब के सामने हो तो हम लोगों को बहुत चिंता होती है और यह वाकयी में सब के लिए चिंता का विषय है। अभी-अभी उन्‍होंने हम सब को चिट्ठी लिखी है और मुझे इस पर बहुत बड़ा आश्‍चर्य हुआ कि उन्‍होंने अपनी चिंता व्‍यक्‍त की है और उन्‍होंने यह कहा है कि हम आपसे सहयोग मांगते हैं कि कीमतों को किस तरीके से स्थिर रखा जाए और जो बढ़ती प्राइसेज हैं उनके ऊपर मुझे बहुत चिंता है, हम इसके लिए क्‍या करें। इसके बारे में उन्‍होंने हमको चिट्ठी लिखी। यह कुछ दिन पहले की बात है। मैं यह कहना चाहती हूं कि हम सब लोग यह जानते हैं कि नेशनल और इंटर नेशनल प्राइसेज डिमांड और सप्‍लाई के ऊपर पूरी तरह से निर्भर हैं और यह राज्‍य सरकार के हाथ में नहीं है। यह भी हम सब लोग जानते हैं कि यह केन्‍द्र सरकार के हाथ में है इसलिए हम लोगों की तरफ देखने की जरूरत नहीं है, अपनी नीति को सुधारने की जरूरत है ताकि स्‍टेट्स भी उस चीज को फॉलो कर सकें और उसको गरीब से गरीब जनता तक पहुंचा सकें। हम जानते हैं कि अटल जी के समय मानीटरिंग सैल पहले दिन से ही हम लोगों ने तैयार करके रखा हुआ था और मानीटरिंग सैल रोज की रोज उसको मानीटर करता था कि हम लोग किसी भी तरीके से महंगाई पर काबू रखें। ये मानीटरिंग सैल के आंकड़े जो आज निकलकर के आ रहे हैं वो इतने भयावह हैं और बहुत ही चिंताजनक हैं। मैं आपको यह बताना चाहूंगी कि मई, 2004 के मुकाबले में अगर आप अभी देखें तो मूंग में 118 प्रतिशत की वृद्धि, उड़द के अन्‍दर 82 प्रतिशत की वृद्धि, आटे में 44 प्रतिशत की वृद्धि, सीमेंट और स्‍टील के अन्‍दर 39 प्रतिशत और 29 प्रतिशत, गेहूं में जून, 2005 के मुकाबले 33 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। तो यह तो बहुत ही चिंता का विषय है और मैं समझती हूं कि यह यहां से नहीं होगा, वहां से उन लोगों को अपनी जो रीति-नीति है उसको ठीक करने की कोशिश करनी होगी।

अध्‍यक्ष महोदय, महंगाई से सबसे ज्‍यादा अगर किसी को प्राब्‍लम होती है तो हमारे गरीब तबके को होती है। ए पी एल के परिवार को 6 रुपये 70 पैसे प्रति किलो के हिसाब से 35 किलो प्रति माह गेहूं हम लोग देते थे। आज बाजार का भाव कितना बढ़ गया है वह आप सब को मालूम है। एक जमाना था जब इसमें उठाव बहुत कम था, ए पी एल का गेहूं उठता नहीं था और यह इसलिए भी था कि जो भाव का अन्‍तर था वह बिल्‍कुल ही नगण्‍य ही समझो। आज दुगुना अन्‍तर हो गया है। मांग बढ़ने लगी है। ए पी एल श्रेणी के परिवार के लोग इसकी बहुत जोरदार मांग कर रहे हैं और जो 1,57,682 मैट्रिक टन की मात्रा हमको मिला करती थी उसको घटाकर अब सरकार ने 16965 मैट्रिक टन माने टैन पर्सेंट पर ला दिया है। आप समझो कि यह सब जो सुझाव आपने दिये हैं वह एक किस्‍म से ना के बराबर हो जाते हैं जब यह रीति-नीति सही तरीके से लागू नहीं होती।

इसी तरीके से केन्‍द्र सरकार द्वारा बी पी एल से निकालने की बात पर बहुत सारे माननीय सदस्‍यों ने जोर-शोर से कहा है कि इतने सारे बी पी एल परिवार जिनकी संख्‍या 20 लाख कुछ थी, आलमोस्‍ट 21 लाख थी, उसमें से 17 लाख पर ले आये और करीब 3 लाख लोगों को इस बी पी एल की परिधि से बाहर निकाल दिया। यह सब उन्‍होंने कहा और यह चिंता तो हम सब को होती है परन्‍तु चुनाव के अन्‍दर उसको इस्‍तेमाल करना और हाउस के अन्‍दर उसको बोलना, मैं समझती हूं, काफी नहीं होता है, इसको सही जगह पर बोलने की जरूरत है और जरूरत पड़े तो हम सब लोगों को जाना चाहिए और वहां धरना देने की जरूरत है तो वहां धरना भी देना चाहिए क्‍योंकि उन लोगों को मालूम होना चाहिए कि जब गरीब को यह अफेक्‍ट करता है तो हम सब को यह अफेक्‍ट करता है। यह सिर्फ हाउस में बोलने की बात नहीं है। इसलिए यह मैंने आप लोगों के सामने कही है क्‍योंकि मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि कोई तो माननीय सदस्‍य कहते हैं कि पैसे तो गवर्नमेंट ऑफ इण्डिया से आते हैं और दूसरे कहते हैं कि आपका कुशल वित्‍तीय प्रबन्‍ध कैसे रहा कि बी पी एल छूट गये, गेहूं नहीं मिले, विधवा को गेहूं का क्‍या हुआ। मैं यह कहना चाहती हूं कि बी पी एल छूटे तो यह कारण आपको सब को मालूम है, गेहूं क्‍यों नहीं दिये यह आपको वहां पूछने की जरूरत है कि जहां हमको देना जरूरी है वहां तक हम लोग नहीं पहुंचा पा रहे हैं। आपदा प्रबन्‍धन के लिए जो हमने 3200 करोड़ मांगे तो उसमें मात्र 100 करोड़ रुपये देकर के उन्‍होंने अपना पल्‍ला झाड़ दिया। विधवा को गेहूं के लिए आपने हमसे पूछा कि विधवा को गेहूं क्‍यों नहीं मिल रहा है तो कैसे मिलेगा जब गेहूं को ही रोक दिया है, गेहूं हम लोगों के पास पहुंच नहीं रहा है, यह कैसे दिया जाए। उसके बावजूद हमने विधवाओं को उस गेहूं के बदले में 50 रुपये दिये जो सरकार इल-अफोर्ड कर सकती थी फिर भी हम लोगों ने दिया। आप तो हमको यह कहो अपनी बात को बदलते हुए कि आपने इतना अच्‍छा कुशल वित्‍तीय प्रबन्‍धन किया है कि यह सब होने के बावजूद भी आपने इनको यह कमी महसूस नहीं होने दी है, जहां तक हो सकता था वहां आपने अपनी जेब से, सरकार की जेब से उनको मदद करने की कोशिश की है। यह बात आप कहो तो मैं आपको पूरा धन्‍यवाद दूं। बी पी एल परिवार को क्‍यों नहीं लिया, इतना सारा एडवाइज जो आपने हमको दिया है, अगर आप यही एडवाइज अपनी सरकार के अन्‍दर इस्‍तेमाल कर लेते तो मैं समझती हूं कि यह सब प्राब्‍लम आपको देखनी नहीं होती। कुशल वित्‍तीय प्रबन्‍धन कौन कर रहा है, कैसे कर रहा है, मैं तो समझती हूं कि जब विशेषज्ञ इस बात को कहते हैं, हम और आप तो कुछ भी कहें यहां पर, जब विशेषज्ञ कहते हैं, इकोनोमिस्‍ट कहते हैं, प्‍लानिंग कमीशन के डिप्‍टी चेयरमैन कहते हैं तो मैं समझती हूं कि वो तो समझ रहे होंगे कि कौनसे स्‍टेट ने अच्‍छा वित्‍तीय प्रबन्‍धन किया है और कौन ने नहीं किया है। यह तो पिछले दिनों में लगातार अखबारों में आ रहा है, लगातार मैगजींस में आ रहा है वह किसी से बात छिपी हुई नहीं है। मुझे तो इसके ऊपर गर्व है कि आज हमारा जो एक छोटा सा प्‍लान था वह आज प्‍लान 11वीं पंचवर्षीय योजना के अन्‍दर 68422 करोड़ रुपये बनकर रह गया है तो मैं समझती हूं कि कुशल वित्‍तीय प्रबन्‍धन तो होगा कि हम लोग उसको वित्‍त पोषित करके इस तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं तो बहुत बड़ी बात है। अगर हमारे माननीय सदस्‍य जो यह कह रहे हैं कि यह पैसा तो वहीं से आ रहा है और यह तो सतत् प्रक्रिया है, इनको करने की जरूरत तो होगी, एक प्‍लान दूसरे प्‍लान से बढ़ता ही है तो मैं उनका ध्‍यान इस पर आकर्षित करूंगी कि 8वीं पंचवर्षीय योजना 12051 करोड़ रुपये की थी, 9वीं पंचवर्षीय योजना 22103 करोड़ रुपये की थी, 10वीं पंचवर्षीय योजना 31831 करोड़ की थी और इन तीनों का अगर कुल योग कर लो तो 65986 करोड़ रुपये का यह होता है। इन सब तीन प्‍लान को आप मिला दो तो 11वीं पंचवर्षीय योजना से वह फिर भी कम होता है।....

 

vkj/akt/07032007/1900/4a

 

इसी तरीके से आपने, कई माननीय सदस्‍यों ने जिला योजना के कंसेप्‍ट के बारे में बात की कि आपने यह कंसेप्‍ट रखा है, उस कंसेप्‍ट को अभी तक आपने क्रियान्वित नहीं किया है। मैं आपको यह खुशखबरी देना चाहती हूं कि हम लोगों ने पहली दफा, केरल के बाद यह सैकण्‍ड स्‍टेट है जिसने डिस्ट्रिक्‍ट प्‍लान कम्‍प्‍लीट कर दिया है और पंचायती राज के इंस्‍टीट्यूशन्‍स के साथ, पंचायती राज के जो अधिकारी लोग हैं, उनके साथ बैठकर, जो चुनाव जीतकर आये हैं, उनके साथ बैठकर ये प्‍लान्‍स तय किये हैं और वह प्‍लान्‍स सिर्फ यहां बैठकर नहीं, पर वहां बैठकर, ग्राम सभाओं के अन्‍दर बैठकर तय किये हैं और जिला प्‍लान्‍स सब तैयार हैं और मुझे बहुत खुशी है इस बात की।

पूर्ववर्ती सरकार के शासनकाल में न केवल वार्षिक योजना के आकार के अन्‍दर आप लोगों ने कटौती की थी परन्‍तु जो डवलपमेंट का खर्चा था, उसके अन्‍दर भी आप लोगों ने कमी कर दी। माना कि एक अजीब थोट प्रोसेस थी, जिसमें आपको यह लगा कि अगर हम इसको कम कर देंगे तो कम खर्चा होगा, यह ऐसी बात नहीं होती है। प्‍लान्‍स के अन्‍दर अगर डवलपमेंट खर्चा होता है या आप लोग उसका खर्चा करते हैं, अगर उसकी परिसम्‍पत्तियां बढ़ती हैं, अगर असैट्स क्रिएट होते हैं तो मैं समझती हूं कि स्‍टेट का लाभ होता है, बहुत लाभ होता है और हम लोगों ने यह कोशिश की है कि लाभ लाया स्‍टेट को कर्जे को बोझ नहीं बनाते हुए हम लोगों ने पूरी तरीके से असैट्स बनाये जिसका हम लोगों ने सर्वे करवाकर पता किया है कि 99.9 प्रतिशत असैट्स क्रिएटेड हैं। यह हम लोगों ने सर्वे करके पता किया और यह जबकि हमने अपने आपमें संयम रखा और एफ.आर.बी.एम. के अन्‍दर, इस एक्‍ट को हमने लागू करके हमने अपनी सीमाएं तय कर लीं, एक लक्ष्‍मण रेखा हमने अपने आर-पार खींची और उसके बावजूद भी हम लोगों ने इतना बड़ा प्‍लान करके, इतना पैसा जमीन के स्‍तर तक पहुंचाया। यह अपने आपमें ही एक बहुत बड़ा काम है।

52,000 करोड़ रुपये के कर्जे की आप लोगों ने बात की और हमको आप लोगों ने यह बताया कि तीन साल के अन्‍दर आपने उसको 20,000 करोड़ रुपये बढ़ाये हैं। आप शायद इस बात को भूल रहे हैं कि 24,000 करोड़ रुपये एप्रोक्सिमेटली जो कर्जा बढ़कर दुगुना हो गया था 52,000 करोड़ का, अगर आप हमारा देखें और वह खाली आपका वेतन-भत्‍तों पर था, कोई परिसम्‍पत्तियां नहीं बनी थीं। हमारा यह 20,000 करोड़, आपके उस हिसाब से बहुत कुछ कम है, परिसम्‍पत्तियां बहुत ज्‍यादा बढ़ी हुई हैं। हमने सिर्फ वेतन-भत्‍तों पर इसको खर्च नहीं किया था, यह मैं आपको बताना चाहती हूं। 1998-99 से 2003-2004 तक राज्‍य का ऋण भार 120 प्रतिशत बढ़ा। यह बहुत ज्‍यादा था और इसके ऊपर लगाम लगाने की बात थी। आज आप अगर देखें तो 30-31 प्रतिशत से ज्‍यादा बढ़ा नहीं है। इसको हम लोगों ने लगाम लगाई है। डैट इन्‍क्रीज तो होंगे ही परन्‍तु परिसम्‍‍पत्तियों में भी इन्‍क्रीज हुआ है।

इसी तरीके से बिजली की जो मुसीबतें थीं, उसके ऊपर आप लोगों ने, सब लोगों ने अपनी चिंता व्‍यक्‍त की है। यह चिंता हम लोगों को भी है। जब हम लोग आये थे तो बिजली की बहुत ही हालत खराब थी। मुश्किल से दो या तीन घंटे बिजली मिला करती थी। उसके बावजूद हम लोगों ने आठ घंटे बिजली पहले साल के अन्‍दर दी और जो पहले 1.75 लाख कनेक्‍शन आपके 10-12 सालों से पड़े हुए थे, जिसको किसी ने हाथ तक नहीं लगाया, उन 1.75 लाख कनेक्‍शन्‍स में से 1.13 लाख कनेक्‍शन हम लोगों ने करीब तीन साल के अन्‍दर पूरे किये हैं। अब इसका एक और असर हुआ है, जितने कनेक्‍शन हम लोगों ने दिये, उसका भार हमारी बिजली के ऊपर पडा और जनसंख्‍या का भार भी उसके पडा और उसकी वजह से जो हम लोगों को बिजली आठ घंटे मिलती है, वह हम लोगों को छह घंटे तक सीमित हो गई। उसके साथ-साथ जो सेन्‍ट्रल पूल से हम लोगों को बिजली मिलती थी, उसके अन्‍दर भी गिरावट आ गई है। उसमें गिरावट इसलिए आई कि सिंगरौली और रिहन्‍द पावर स्‍टेशन हैं, उनके अन्‍दर बार-बार ट्रिपिंग आई और वह पावर स्‍टेशन आउट आफ आर्डर हुए और जितनी बिजली हम लोगों को मिलनी चाहिए थी, वह बिजली हमको नहीं मिली। जहां 800 करोड़ रुपये की बिजली खरीदा करते थे, वहीं हम लोगों को करीबन 1200 करोड़ रुपये की बिजली खरीदनी पड़ी, हमने खरीदी और लोगों तक पहुंचाई। इसके साथ-साथ हमने दरें नहीं बढ़ाई, एक पैसा हमने नहीं बढ़ाया जबकि नियामक आयोग... (व्‍यवधान) माननीय सदस्‍य, आप लोगों को भी कभी न कभी थपथपा देना चाहिए क्‍योंकि जब लोग काम करते हैं, उनकी तरफ हाथ देने से कोई मतलब नहीं है। मैं मानती हूं कि आप लोगों को भी कहना चाहिए कि अच्‍छा काम किया तो चाहे कोई भी हो, डिजर्विंग हो तो उसको कह देना चाहिए कि हां, तुमने अच्‍छा काम किया है और मैं यह कहना चाहती हूं कि जहां आपने अपने पाँच साल के अन्‍दर अच्‍छी बिजली नहीं देकर भी दो दफा बिजली की दरों में बढ़ोतरी की। नियामक आयोग के कहने के बावजूद भी हम लोगों ने छोटे-छोटे किसानों को, छोट-छोटे घरेलू उपभोक्‍ताओं को राहत देकर दरें नहीं बढ़ाईं और जो उसमें प्राइस राइज हुआ, उसको सरकार ने स्‍वयं वहन किया। यह बहुत बड़ी बात थी जबकि आप लोगों ने पूरा भार गरीब जनता के ऊपर किया और उसका असर और उसका भार आप लोगों को बाद में भोगना पडा।

यह सब्सिडी 202 करोड़ रुपये की हमने दी है और मैं यह कहना चाहती हूं। इसके साथ-साथ हम लोगों ने यह तय किया कि बिजली का उत्‍पाद भी हम लोगों को करना है, पिछली सरकार के जैसे नहीं, जहां नगण्‍य था बिजली का प्रोडक्‍शन और मैं यह कहना चाहती हूं कि हम लोगों ने तय किया कि 1900 मेगावाट यह 2008 तक, जो पहले नहीं के बराबर था माननीय सदस्‍य, ना के बराबर था, हम लोग 1900 मेगावाट 2008 तक कर लेंगे। (व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): You have been given wrong information. Please check up.  

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): आप लोगों का ना के बराबर था, 800 मेगावाट कुछ था। यह आर्गुमेंट की बात है. I have checked up and I can tell you, यह 1900 मेगावाट हम नैक्‍स्‍ट ईयर में आप लोगों को देंगे जिसमें कई हमारे ताप बिजलीघर लाइन में आयेंगे जिसमें आपका धौलपुर जो 23 साल से पडा हुआ था वह भी, और आपका बरसिंगसर जो 26 साल से पडा हुआ था वह भी, उसके बाद गिरल के दो प्रोजेक्‍ट, ऐसे कई प्रोजेक्‍ट्स हैं, छबड़ा के प्रोजेक्‍ट, नये प्रोजेक्‍ट हम ला रहे हैं। एक यूनिट कोटा के अन्‍दर है, एक यूनिट सूरतगढ़ के अन्‍दर है, एक झालावाड़ के अन्‍दर हम बनाने जा रहे हैं। जहां-जहां हमारी नदियां हैं, वहां हम लोग इनको खड़ा करने की कोशिश में हैं और मैं यह मानती हूं कि 2010-2011 तक पूरी तरह से हम लोग पावर सरप्‍लस हो जायेंगे। वैसे पावर सरप्‍लस तो 2008 के अन्‍दर हम लोग हो जायेंगे। यह बहुत बड़ा काम हुआ है। हमारी आदत नहीं है कि हम लोग जो कहें, वह  नहीं करें। आपके माइन्‍ड के अन्‍दर क्‍वेश्‍चन मार्क हो सकता है परन्‍तु अभी तक आप अगर फील्‍ड में जायेंगे तो आपको मिलेगा। जो-जो काम हम लोगों ने आपको यहां कहे हैं, जो काम की हमने घोषणा की है, वह आपको फील्‍ड के अन्‍दर मिलेंगे और इसलिए मैं कहना चाहती हूं कि इसके साथ-साथ हम लोगों ने यह भी तय किया कि जो लाइन बिजली ले जाती हैं, उनका भी हम लोग उद्धार करेंगे। जो लाइन को किसी ने हाथ नहीं लगाया था इतने सालों से, उसको हमने फीडर रिनोवेशन प्रोग्राम के तहत लेकर करीबन 5,000 करोड़ रुपये लागत लगाकर 8,000 फीडर को रिपेयर और मेंटीनेंस करने का हम लोगों ने काम अपने हाथ में लिया है और मैं इनको बताना चाहूंगी कि इसमें कई तो हम लोगों ने फीडर पूरे कर दिये हैं और इसकी वजह से छीजत भी रूकी हुई है और करीबन 800 कुछ गांवों के अन्‍दर हमारी छीजत अण्‍डर 25 प्रतिशत हो गई है और हमने उनको यह भी कह दिया था कि 20 प्रतिशत के नीचे अगर आप आ जाओगे तो 12 घंटे बिजली आप लोगों को मिलेगी जो उन 800 गांवों के अन्‍दर हम लोग बिजली 12 घंटे दे रहे हैं।

इसी तरीके से कुटीर ज्‍योति योजना के अन्‍दर भी हम लोगों ने गरीब घरों के अन्‍दर रोशनी पहुंचाने की योजना हाथ में ली और अभी तक एक लाख से अधिक कनेक्‍शन हम लोगों ने जारी कर दिये हैं। पूरे पाँच साल के अन्‍दर अपने कार्यकाल में आपने 65,000 कुटीर कनेक्‍शन दिये थे, जो तीन साल के अन्‍दर हम लोगों ने एक लाख से अधिक कनेक्‍शन घरों के लिए हमने निकाल दिये हैं, वह भी अपने आपमें एक रिकार्ड है।

सड़कों के बारे में हमको गर्व है। हमारी सरकार के अन्‍दर इतना अच्‍छा काम हुआ है, मैं समझती हूं कि उसके ऊपर मुझे ज्‍यादा देने की आपको कहने की बात नहीं होती है। वह तो क्‍योंकि आप लोग खुद महसूस करते हो। आपके गांव जैसे जुड़े हैं जहां तीन साल के अन्‍दर, 14,724 किलोमीटर लम्‍बी डामर सड़क का निर्माण और 4620 गांवों को हम लोगों ने जोड़ा है। वहीं पूरे पांच साल के अन्‍दर आपने 3900 किलोमीटर और 918 गांवों को ही जोड़ा था। उसी के अन्‍दर आप लोगों को अन्‍तर दिखाई देगा अध्‍यक्ष महोदय, हमारी सरकार में और आपकी सरकार के अन्‍दर फर्क हुआ था। जहां चार किलोमीटर सड़क बनाकर एक गांव को जोड़ रहे थे, वही 12 किलोमीटर सड़क बनाकर चार गांवों को जोड़ने का कोई आसान काम नहीं था, पर इस सरकार ने किया और जो पी.एम.जी.एस.वाई. है, जिसको माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने चलाया था अपने समय में, उसको तो वर्ल्‍ड बैंक ने हमको बधाई दी है यह कहते हुए कि हमने जब अपना मूल्‍यांकन किया तो उसके अनुसार क्‍युमुलेटिव एन्‍युअल एलोकेशन ऑफ यूटिलाइजेशन ऑफ सैस इन्‍टाइटलमेंट के अन्‍दर राजस्‍थान प्रदेश पहला रहा और इसके ऊपर हम सब लोगों को बड़ा गर्व है और यह हम लोग नहीं कह रहे हैं, यह वर्ल्‍ड बैंक की रिपोर्ट का कहना है तो इसके लिए तो कंजूसी मत करो, इसके लिए तो आप लोग कह सकते हैं।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): कंजूसी हम कतई नहीं करेंगे। बड़ी साधारण बात है। 1500 के गांव थे, वह कम थे, 1000 के गांव कम थे, बाकी 500-700 के ज्‍यादा थे इसलिए नम्‍बर बढ़ गये। वह सारा पैसा प्रधान मंत्री योजना का था। देखिये आप, टेक-आफ राजस्‍थान ने पहले किया था, राजस्‍थान ने टेक-आफ बढिया किया था माननीय मुख्‍य मंत्रीजी, मैं आपकी इज्‍जत करता हूं, सम्‍मान करता हूं। सड़कों में अच्‍छा काम हुआ। टेक-आफ भी बहुत बढि़या हुआ। दौड़ में जो आगे निकल गया, उसको पकड़ कौन पायेगा? राजस्‍थान ने जल्‍दी दौड़ शुरू कर दी। असली बात यह है।

 

Jkj/akt/19.10/4b/7.3.2007

 

श्रीमती वसुंधरा राजे(मुख्‍य मंत्री): नहीं-नहीं, माननीय सदस्‍य, आप मेहरबानी करके, माननीय सदस्‍य, इसका क्रेडिट भी आपको ही, इसका क्रेडिट भी आपको ही।  कभी न कभी तो किसी और को क्रेडिट देने का बड़ा दिल रखो।  

श्री प्रद्युम्‍न सिंह: दिया न मैंने तो आपको, मैंने तो दिया है आपको।

श्रीमती वसुंधरा राजे: बड़ा दिल रखने में कोई प्रोब्‍लम नहीं होती है।  और 4500 किलोमीटर जो डब्‍लू.बी.एम. थी, जो डब्‍लू.बी.एम. की बनी हुई रोड्स थी उसको डामर करने की हमने योजना बनाई है, हरेक जिले के अंदर एक आदर्श सड़क बनाने का भी हमने काम अपने हाथ में लिया है।  यह सब काम हो रहे हैं, यह कोई ऐसा नहीं है कि हमने कागज-कागज के अंदर ही बाँध कर उसको रखा हुआ है।  सिंचाई के अंदर मैं आपको कहना चाहूंगी क्‍योंकि जब मैंने परिवर्तन यात्रा की थी तो मुझे याद है कि जगह-जगह पर रास्‍ते में मेरे को पत्‍थर मिले।  पड़े हुए पत्‍थर थे कि हमने यह शिला लगाई है, यहां हम यह करने जा रहे हैं।  हम यह खाली कहना चाहेंगे कि हम लोगों ने खाली वह पत्‍थर नहीं लगाये, हमने उसके साथ-साथ काम भी किया।  नागौर लिफ्ट सिंचाई योजना के बारे में जब पहली दफा नागौर गई तो मैंने बहुत सुना कि मालूम नहीं नागौर के अंदर बहुत बड़ी योजना आ रही थी, आ रही थी, आपने वोटों के टाइम पर, जैसा भी हो, उसको बहुत भुनाया।  परंतु इस नागौर लिफ्ट योजना को हम लोगों ने क्रियान्वित किया।  मैं खुद वहां जाने वाली हूं और सितम्‍बर, 2008 तक नागौर तक यह लाईन आ जायेगी जिसके लिए तीन हजार करोड़ हम वहां लगाने जा रहे हैं।  जयपुर-बीसलपुर, दूदू-बीसलपुर, बाड़मेर लिफ्ट, मुझे याद है बाड़मेर जब हम गये थे तो बाड़मेर लिफ्ट के बारे में, आपके पोकरण-फलसूण्‍ड के बारे में बार-बार सुनना पडा परंतु आज यह दोनों खाली पत्‍थर-पत्‍थर पर नहीं है, यह एक्‍चुअली में होने जा रही है और इसी तरीके से जो चम्‍बल-भरतपुर की बात आप कर रहे हैं उसकी तो हमको भी बहुत चिंता है पर अनफोर्चुनेटली कोर्ट में मामला फंसा हुआ है, हमारी सबकी कोशिश है कि किसी भी तरीके से हम उसको छुड़वायें ताकि वह पानी भरतपुर तक पहुंच सके।  परंतु मैं, माननीय सदस्‍य, आपको यही कहना चाहूंगी, सबको याद दिलाना चाहूंगी कि धौलपुर लिफ्ट सिंचाई योजना जिससे राजाखेड़ा से आने वाले माननीय सदस्‍य पूरी तरह से लाभान्वित होंगे, आज तक आप उसको कर नहीं सके, पूरी कोशिश आपने कर ली।  मैं तो मुझे याद है कि 1984 से यह माननीय सदस्‍य बैठे हुए हैं धौलपुर के कि 1984 से यह बात चली आ रही थी कि हम करने जा रहे हैं, करने जा रहे हैं, पर अपने को, उनकी तो बेचारों की डेथ भी हो गई जिनके सामने यह बात उठी थी और आज तक अपने का यह नहीं हुआ है परंतु मैं आपको यह कहरना चाहती हूं कि सी.डब्‍लू.सी. के अंदर इसको हम लोगों ने पास करवा दिया है, अब यह जाकर अटकी हुई है आपके एनवायर्नमेंट मिनिस्‍ट्री के अंदर।  मैं यह विश्‍वास करूंगी कि आप लोग और आप क्‍योंकि इतना वह रखते हैं, जरूर इसके अंदर हम लोगों की मदद करवाओगे और वह एनवायर्नमेंट क्लियरेंस जल्‍दी से जल्‍दी हमको दिलवा दोगे ताकि वह कितने वर्षों से पड़ी हुई जो योजना है वह जल्‍दी से जल्‍दी हम लोग क्रियान्विति में लायें।  100 तो माइनर इर्रिगेशन के काम, तीन तो मीडियम इर्रिगेशन के काम, तीन सौ करोड़ के एनीकट, यह सब काम....

श्री जगन्‍नाथ पहाडि़या: माननीय मुख्‍य मंत्रीजी, जमना के पानी की चर्चा नहीं की आपने।

श्री अध्‍यक्ष: भाषण पूरा करने तो दो।  बीच में ही बोल रहे हैं आप।

श्रीमती वसुंधरा राजे: माननीय सदस्‍य, मैंने तो यह नहीं कहा कि मेरे हाथ में जादू है कि मैं सब आपके पुराने और लम्बित जो हैं, उन सब को मैं ठीक कर दूं, एक साथ कर दूं, यह तो मेरे हाथ में नहीं है, परंतु कोशिश में हम लोगों ने कोई कमी नहीं छोड़ी है और मैं आपको यह भी बताना चाहूंगी कि यह भी योजनाएं जिनकी बात आप कर रहे हैं, हम उनके ऊपर बैठेंगे, उनसे सलाह करेंगे, आपकी सरकार दिल्‍ली के अंदर बैठी हुई है उसके साथ भी करेंगे।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: हरियाणा में सरकार किस की है, हरियाणा में सरकार आपकी है न, हरियाणा से दस्‍तखत करा दो।  करवा दो दस्‍तखत, एम.ओ.यू. पर दस्‍तखत करा दें।

श्रीमती वसुंधरा राजे: पर सरकार आपकी हरियाणा वाली में, हरियाणा वाली सरकार के ऊपर आप अपना जोर डालेंगे, पूर्ण विश्‍वास है, इसमें आप मेरी मदद करेंगे...

श्री सांवर लाल: मुख्‍य मंत्रीजी तो खुद मीटिंग में गई हैं, वहां पर राजस्‍थान का पक्ष रखा है, आपकी भारत सरकार, हरियाणा सरकार है, कुछ करवाओ न।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह: बहुत अच्‍छी बात है।

श्री महावीर प्रसाद जैन: आपका भी कोई पावर है तो उपयोग करो।

श्रीमती वसुंधरा राजे: आप यह देखेंगे कि हम लोगों ने इंदिरा गांधी नहर के ....

श्री अध्‍यक्ष: इनका प्रभाव नहीं है।

श्रीमती वसुंधरा राजे: जो नहर परियोजना है, इंदिरा गांधी नहर परियोजना, उसके ऊपर भी हम लोगों ने करीबन, आज तक ही समझो आप, कि करीबन तीन हजार करोड़ रूपये उसके ऊपर खर्च हो गये हैं और हम लोगों ने जहां तीन साल के अंदर 186 करोड़ हमने उसके ऊपर खर्च किये, वहां पाँच वर्ष के अंदर, प्रति वर्ष, हां, वहां आप लोगों ने पाँच वर्ष के अंदर करीबन, नहीं, 186 करोड़ तीन वर्षों के अंदर जो हम लोगों ने एपरोक्सिमेट खर्चा किया, उसे पाँच वर्षों के अंदर आप लोगों ने करीब 129 करोड़ रूपये खर्च किये हैं।  मैं समझती हूं कि इसके साथ-साथ हम लोगों ने वह काम किये जो बीस-बीस साल से नहीं हुए थे, चाहे मोगों को ठीक करना हो, चाहे उसकी डिसिल्टिंग का काम करना हो, चाहे आपके गेट्स की रिपेयर हो, गेट्स की रिपेयर बीस-बीस साल तक नहीं हुई थी इसकी वजह से पानी उसमें से निकल-निकल कर बह रहा था, उन सब का रिपेयर हम लोगों ने करवाया है।  उसके साथ-साथ हम लोगों ने आबियाना भी माफ किया, ब्‍याज का भी माफ किया और अभी 6(ए) का काम हम लोग करने की तैयारी में हैं ताकि जो गरीब बेचारे वहां फंस रहे थे उनको भी हम किसी भी तरीके से राहत दे सकें, यह भी हम लोग करने की कोशिश में हैं।  यह कहीं हम लोगों ने भेदभाव भी नहीं किया, कहीं यह भी नहीं सोचा कि कौन सा क्षेत्र, कैसा क्षेत्र, सब क्षेत्रों के अंदर कुछ न कुछ हमने देने की कोशिश की और जहां पानी का काम है, वहां चम्‍बल की नहरें, चाहे माही की नहरें, चाहे इंदिरा गांधी केनाल की नहरें, उन सब के ऊपर हमने पैसा देने का कार्य किया है।  सबसे पहले तीन साल के अंदर हम लोगों ने इंदिरा गांधी नहर के ऊपर बहुत सारा पैसा खर्च किया, अभी चम्‍बल नहर के ऊपर हम लोग पैसा अलग से रखे हुए हैं जो हम लोग खर्च करेंगे और इसी तरीके से माही के अंदर भी हम खर्च करने जा रहे हैं।  अभी तक मैं समझती हूं कि जिन-जिन लोगों के शहर के अंदर से और गांव के अंदर से या क्षेत्र के अंदर से यह नहर बहती हैं, उनको यह पूरी तरह से मालूम होगा कि उसका कितना फायदा कितने लोगों को मिला है, टेल तक पानी पहुंचा जो इतने सालों तक अभी तक नहीं पहुंचा हुआ था।  यह मुझे खुशी है आपको बताने में।

इसी तरीके से शिक्षा के अंदर मुझे गर्व है, अब आप लोग कुछ भीकह लो, अब वह तो कहना ही था, बहुत आसान है यह कहना कि जहां स्‍कूल था वहां टीचर नहीं था, जहां टीचर थे वहां कमरे नहीं थे, इस तरीके से कहना बहुत आसान है परंतु क्षेत्र के अंदर जाकर अंदर कोई देखे, जब कोई देखे कि कितनी ड्राप-आउट रेट पहले हुआ करती थी, उस ड्राप-आउट रेट में हम लोगों ने कितनी कमी कर दी है, कोई वो देखे कि कितने हेल्‍थ कार्ड उसके साथ-साथ बच्‍चों के मिल गये हैं, कोई वो देखे कि कितने सारे बच्‍चों के अंदर यह यात्रा गई, लोगों को साथ में लाने की कोशिश की, यह देखे कि मिड डे मील के अंदर 75 हजार स्‍कूल आते हैं उन 75 हजार स्‍कूल के अंदर करीबन एक करोड़ बच्‍चों को हम लोग मिड डे मील दिलवा रहे हैं और वह माननीय सदस्‍य, घूघरी नहीं, हम लोग उनको छह दिन अलग-अलग मेन्‍यू देकर अलग-अलग खाना पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं और उसमें हम लोगों ने बहुत सारे लोगों को मदद में जोड़ा है और मैं समझती हूं कि उनको हम लोगों ने पौष्टिक खाना दिलाने की कोशिश की है क्‍योंकि हम समझते हैं कि हमारे बच्‍चे अगर तंदुरूस्‍त हों, उनको अच्‍छा खाना मिलेगा तो कल वह अच्‍छी तरह से पढ़ कर हमारे राज्‍य को अग्रणी और विकासशील क्षेत्र में लाने का पूरा प्रयास करेंगे, इसको सोचकर हम लोगों ने इसके ऊपर बहुत ध्‍यान दिया है।  मैं आपको बताना चाहूंगी कि तीन साल के दौरान 4162 नये प्राथमिक स्‍कूल खुले हैं, 22460 राजीव गांधी पाठशालाओं को हमने क्रमोन्‍नत किया है जबकि पिछले पाँच साल के दौरान सिर्फ 550 नये प्राथमिक स्‍कूल खुले थे और इसमें लगभग 56 हजार टीचर्स को हम लोगों ने नियुक्‍त किया और अभी भी नियुक्तियां चल रही हैं।  जबकि उन पाँच साल के अंदर एक भी टीचर की नियुक्ति नहीं हुई थी। इसी तरीके से तीन वर्षों में छह नये राजकीय और 674 निजी नवीन महाविद्यालय खुले हैं जबकि पिछली सरकार के समय 12 राजकीय और 102 निजी महाविद्यालय खुले थे सिर्फ और एक भी पोलीटेक्निक कालेज नहीं खुला था और हमारी सरकार ने पाँच नये पोलीटेक्निक कालेज भी खोले और 114 नये आई.टी.आई. भी खोले हैं और जहां जरूरत पड़ेगी तो वहां और भी खोलेंगे, यह भी हम लोगों ने तय कर लिया है।  इसी तरीके से अन्‍तरराष्‍ट्रीय हमको पुरस्‍कार प्राप्‍त हुआ है, तो यह तो खाली यहां की बात नहीं है, यहां हम लोग एक-दूसरे के लिए पीठ थपथपा रहे हैं या मेज के ऊपर ताली कर रहे हैं परंतु इंटरनेशनली यह रिकग्‍नाइज किया गया है कि राजस्‍थान का अच्‍छा काम रहा है एजुकेशन इनीशिएटिव के अंदर, अभी जार्डन प्‍लान नहीं, यह जार्डन प्‍लान नहीं है, इसको कहते हैं राजस्‍थान एजुकेशन इनीशिएटिव, यह राजस्‍थान एजुकेशन इनीशिएटिव स्‍टार्टेड बिकाज जार्डन का एक हमको मिसाल मिला था वर्ल्‍ड इकोनोमिक फोरम के अंदर, वहां जार्डन वगैरह हम लोग कहीं गये नहीं, जार्डन का मिसाल जो हमको मिला, उस मिसाल को लेकर हम लोगों ने उसको और प्रभावी और बड़ा बनाकर उसके अंदर आई.टी. के लोगों को जोड़ कर इसको राज्‍य के अंदर हम लोगों ने लाया है और मैं समझती हूं कि बहुत अच्‍छा काम उसके द्वारा हो रहा है।  टीचिंग आफ टीचर्स, नये कम्‍प्‍यूटर्स स्‍कूल के अंदर, बच्‍चों को कम्‍प्‍यूटर शिक्षित करना, यह भी काम हम लोगों ने किया है और मैं समझती हूं कि इसका बहुत बड़ा श्रेय हमारी सरकार को जाता है, उसको मानना चाहिए।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह: मान रहे हैं, तिवाड़ीजी की बड़ी तारीफ कर रहे हैं।

श्रीमती वसुंधरा राजे: बहुत अच्‍छा है, आपको मान कर उसकी तारीफ करनी चाहिए, जिन-जिन लोगों ने किया है उनकी तारीफ आपको करने की जरूरत है।  इसी तरीके से हम लोगों ने खाली जयपुर के अंदर बैठ कर, जैसे हमारी पूर्व सरकार ने किया है कि जयपुर के अंदर बैठ कर ही हम लोगों ने न तो प्‍लानिंग किया, न उसके बारे में अख़बार में अपना वक्‍तव्‍य दिया, हम लोगों ने जाकर आखिरी आदमी तक जाकर हमने अपनी बात को पहुंचाने की कोशिश की और अपने काम को पहुंचाने की कोशिश की।  हमने गरीब की चौखट पर जाकर उसके दर्द को जानने की और उसके दुःख को दूर करने की हम लोगों ने कोशिश की ।  कई तो अभियान, मैंने तो एक तो शिक्षा सम्‍बल के बारे में आपको बताया, उसके साथ-साथ जल चेतना अभियान, अब यह कई ऐसे माननीय सदस्‍य हैं जो वैसे ही......

 

Lpm/akt/1920/4c/7032007

 

बिना जानकारी लिए अपनी बात रख देते हैं। इसने कहा कि जल चेतना यात्रा के अंदर खाली दाल-बाटी-चूरमा का काम हुआ। अब थोड़ा सा सीरियस होने की बात है क्‍योंकि जब अपन इस सदन के अंदर बैठते हैं तो हम लोग सब सीरियस बातें करते हैं। यह कोई मजाक की बात नहीं होती है। एक मई के अन्‍दर 50 डिग्री के अंदर पूरी सरकार गांव के अंदर गई 18 हजार गांव को छुआ और करीबन एक लाख बीस हजार हम लोगों ने वाटर्स स्‍ट्रेक्‍चर, वाटर हाउसिंग स्‍ट्रेक्‍चर को पूरा किया। यह ग्राउंड्स है यह कोई छोटी बात नहीं थी और मैं समझती हूं कि खाली बातों-बातों में हम लोगों ने नहीं किया, जा के लोगों से बात करके वहां उनको नाटक के द्वारा, वहां उनको भाषण के द्वारा, वहां उनको फिल्‍मस के द्वारा पूरी सरकार, पूरे हमारे अधिकारीगण सब के सब वहां जाके उन लोगों ने लोगों को उनके दिमाग में यह बात लाने की कोशिश की कि हम लोगों को पानी को किस तरह से बचाके किस तरीके से पोण्‍ड्स को, किस तरीके से वाटर्स रिस्‍ट्रेक्‍चरिंग को ठीक करके और किस तरीके से फायदा अपने आपको पहुंचाने की जरूरत है ये सब लोगों को हम लोगों ने पहुंचाने की कोशिश की और उसके साथ-साथ हमने स्‍वास्‍थ्‍य चेतना यात्रा भी निकाली। इसके अंदर भी एक महीने के लिए सब लोग गांव के अंदर गये और इसकी तरफ से हम लोगों ने गांव-गांव के अंदर राजस्‍व अभियान को भी चलाया ताकि उसका भी फायदा हमारे लोगों को मिले परन्‍तु हम लोग उसमें गये और गांव के अंदर जाके हम लोगों ने देखा कि यह काम हो रहा है कि नहीं हो रहा है। इसके साथ-साथ हमने महिलाओं को खाली सशक्‍त बनाने की बात नहीं करी, हम लोगों ने उनको स्‍वावलंबी बनाने का माध्‍यम दिया और देश और प्रदेश के अंदर उनको भागीदार बनाने की पूरी कोशिश हम लोगों ने की और मैं तो यह मानती हूं कि प्रदेश के अन्‍दर एक्‍चुअली मैं खाली दो जात है, राजनीति के अंदर हम लोग जातियों को वू करते हैं। हम लोग उनको चाहते हैं कि किसी भी तरीके से स्‍वावलंबी बनाये और इसके लिए स्‍व-रोजगार योजना के साथ हमने उनको जोड़ दिया है और चाहे स्‍वयं सहायता समूह के द्वारा जोड़ा या उनको काम देके जोड़ा। मैं समझती हूं कि एक लाख से अधिक महिला के समूह को हम लोगों ने इसके साथ जोड़ा है। अपने पैरों पर खड़ा किया है। यह बहुत बड़ी बात है और हमने खाली इनके लिए विधवा और परित्‍यक्‍ता महिलाओं को भी नौकरियों में किस तरीके से प्राथमिकता दी जाए इसके बारे में भी सोचके उनको मेनस्‍ट्रीम में लाने की कोशिश की है। आठ लाख से ज्‍यादा वृद्धा, वृद्ध महिलाओं, विधवाओं को हम लोगों ने 400 रूपए पेंशन  देने की कोशिश की जबकि 200 रूपए का पेंशन था और उसको जब सरकार सेन्‍ट्रल गवर्नमेंट ने हम से बात कहीं तो हम लोगों ने उसको तुरन्‍त ही 200 रूपए बढ़ाकर के इतने सारे लोगों को उसको फायदा दिया है। चिकित्‍सा और स्‍वास्‍थ्‍य के अन्‍दर भी हम लोगों ने कमी नहीं छोड़ी। 801 नये स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र खोले, बहुत सारे बैड्स में बढ़ोतरी की और शिशु मृत्‍यु दर को 75 प्रति हजार से घटाकर 67 प्रति हजार किया। मातृ मृत्‍यु दर को 677 प्रति लाख से घटाकर 445 प्रति लाख जीवित जन पर ले आये और इसी तरीके से जो जन्‍म का दर 30.4 से घटकर 29 प्रति हजार और मृत्‍यु दर को 7.6 से कम कर-कर सात तक हम लोगों ने राष्‍ट्रीय औसत से भी कम करने की इसको कोशिश की है। सहकारिता के अंदर 15 साल बाद हम लोगों ने चुनाव कराये और पाँच हजार ग्राम सेवा सहकारी समितियों के हम लोगों ने चुनाव कराये। कृषि उपज मण्‍डी समिति, प्राथमिक दुग्‍ध समिति इनके साथ करीबन 11 हजार सहकारी समिति के चुनाव हमने करायें जो इतनों दिनों से पड़े हुए थे। आप लोग अभी डेमोक्रेसी की बात करते हो, मैं समझती हूं कि जो लोग 15 वर्ष तक चुनाव नहीं करवाते, अपने समय में चुनाव नहीं करवा सकते वो डेमोक्रेसी की क्‍या बात करते हैं? वह समझ में नहीं आता। इसी तरीके से जो अल्‍पकालीन सहकारी ऋण 11.5 प्रतिशत था...

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): ....व्‍यवधान... आपने भी कोई आदेश मानते हैं।

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): अल्‍पकालीन ऋण जो हमारा 11.5 प्रतिशत था उसको घटाकर 7 प्रतिशत हमने करके 15 लाख किसानों को इसका लाभ दिया है। अब आप जिन-जिन माननीय सदस्‍यों ने लॉ एण्‍ड ऑर्डर वाली बात उठाया है और कहा कि लॉ-एण्‍ड-ऑर्डर मालूम नहीं कहा से फिगर्स आते हैं क्‍योंकि ये फिगर्स मैं समझती हूं नेशनल क्राइम ब्‍यूरौ यह तो जाना माना है, सब लोग जानते हैं इसके बारे में, अपने को फिगर्स लाने हैं तो अपन कोई आथेंटिक स्रोत पर जाए ताकि उस ऑथेंटिक स्रोत को अपन बड़ी जिम्‍मेदारी के साथ हाउस के अंदर रख सकते हैं। अब मेरे पास जो नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्‍यूरौ के प्रकाशित 2005 के जो आंकड़े हैं उसके अनुसार तो राजस्‍थान में वर्ष 2005 में निस्‍तारित अभियोगों में 96.9 प्रतिशत अभियोगों में चालान किया गया है और वो बढ़कर 2006 के अंदर 97.39 प्रतिशत हो गया है और इस दृष्टि से राजस्‍थान पूरे देश के अंदर पहले नम्‍बर पर है अब और क्‍या चाहते हैं? कोई भी पर‍फेक्‍ट स्‍टेट माननीय सदस्‍य तो नहीं हो सकता, कोई भी परफेक्‍ट होगा नहीं क्‍योंकि पोपुलेशन का इतना बड़ा भार है कि क्राइम रेट कितना हम लोग कम कर सकते हैं यही बहुत बड़ी बात होगी। आप अगर दूसरे स्‍टेट्स को देख लीजिए उसका कंपेरिजन कर लोगे तो आप देखोगे कि राजस्‍थान उनकी दृष्टि में बहुत अव्‍वल नम्‍बर पा रहा है, बहुत ऊपर है और मैं तो कहती हूं कि और किसी चीज के अंदर हम लोगों को जाने की जरूरत नहीं है। मैंने एक और टेबल यहां देखा 2001-2005 के अंदर पब्लिक ऑर्डर क्राईम, जो पब्लिक ऑर्डर का क्राइम होता है 2001 के अंदर 21.7 प्रतिशत था 21.79 प्रतिशत, आज 2005 के अंदर यह घट के 4.76 प्रतिशत होगा तो कुछ तो विभाग ने काम किया होगा, कि इण्‍डस्‍ट्री यहां आना चाह रही है, कि लोग राजस्‍थान के अंदर आना चाह रहे हैं, कि पर्यटक राजस्‍थान के अंदर इतनी सारी संख्‍या में आ रहे हैं इसके भी कुछ तो मायने होंगे। इसलिए जब अपन लोग बात करते हैं विधानसभा के अंदर तो इन सब चीजों को देखकर के, समझकर के तो मैं समझती हूं कि अपने लिए अच्‍छा ही रहेगा। अब ये तारीफ की बात करते हैं मियां वाजपेयीजी की तारीफ हो रही है, मुख्‍य मंत्रीजी की तारीफ हो रही है, अभी अपन नहीं कहते कि सोनिया गांधीजी की जब तारीफ होती है वहां तो मैं लोक सभा के अन्‍दर थी तो रोज-रोज तारीफ सुनें, जो खड़ा होता था बस वहीं तारीफ करता था, मैं समझती हूं कि आप भी तारीफ कर लो तो ऐसी बुरी बात नहीं होगी। आप भी कर सकते हो, हां काम कर रहे हो तो...

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): मुख्‍य मंत्रीजी अब आपकी तारीफ हमने कर दी यहां..

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): बहुत अच्‍छा..

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): मैं सही कह रहा हूं देखिए आपको गारंटी प्रोग्राम, रोजगार गारंटी प्रोग्राम देश के मुकाबले में भले ही भारत सरकार की स्‍कीम है लेकिन जब राजस्‍थान का इम्‍प्‍लीमेंटेशन अच्‍छा हुआ है इसमें कोई दो-राय नहीं है और आपको 330 जिले बढ़ रहे हैं अब 200 की जगह 330 हो जाएंगे। हम तो यह चाहते हैं कि आप जितने अधिक जिले प्राप्‍त कर सकें, आपको कोशिश करके...

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): उसमें हम कोशिश करेंगे यह सही बात है।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): आपको कोशिश करके अधिक से अधिक जिले प्राप्‍त करना चाहिए राजस्‍थान के लिए।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): केन्‍द्र का नेता है इसलिए ....(व्‍यवधान)

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): अब ये माननीय सदस्‍य ने मेरे को कहा कि अगर पैसे की कमी नहीं थी, यह आपने कहा, आपने यह कहा कि अगर पैसे की कमी नहीं थी क्‍योंकि हम कह रहे हैं कि हमारा खजाना खाली नहीं है और पैसे की जब जरूरत पड़ती है तो हम लोग उस पैसे को पहुंचा देते हैं तो आपने हमको यह कहा कि पैसे की कमी नहीं है तो विधायक कोष से क्‍यों पैसा लिया जा रहा है तो हमने तो डवलपमेंट के लिए ही तो पैसा आप लोगों को दिया है जो 60 लाख रूपए आपको दिए हैं वो खाली नॉन-डवलपमेंट वर्क्‍स के ऊपर नहीं, डवलपमेंट वर्क्‍स के ऊपर और हम चाहते हैं कि जब हम कोई डवलपमेंट वर्क कर रहे हैं अगर हम रोड का काम कर रहे हैं तो आपका काम अगर होगा डवटेल उसके अंदर तो मैं समझती हूं कि और अच्‍छा होगा और फिर आपको ओनरशिप डवलपमेंट करने का भी हमने सोचा है कि हम तो काम कर दें और आप उसमें ओनरशिप डवलमेंट न करो तो फिर क्‍या मतलब है? जब हम पैसे आपको दे रहे हैं और आपका चाह रहे कि आपका अंशदान उसमें हो और आप लोग भी उसका ओनरशिप डवलप करें तो मैं समझती हूं कि अच्‍छी बात होती है क्‍योंकि इसी तरीके से क्षेत्र के अंदर अपन और ज्‍यादा काम करा सकते हैं। फसल बीमा की बात आप लोगों ने करी, फसल बीमा की आपने कहीं कि करीबन 26 करोड़ रूपए गलत एंट्रीज की वजह से हम लोग इसको नहीं कर पाये हैं। हम लोगों ने बार-बार उसको समझने की कोशिश की परन्‍तु उन्‍होंने बाड़मेर जैसे गरीब इलाके तक ये पैसे नहीं पहुंचाये हैं और मैं अभी दो दिन पहले बाड़मेर गई थी वहां बहुत सारे लोग हमको मिले थे और हम लोगों ने यह तय कर लिया कि 26 करोड़ रूपए अगर वहां से नहीं आ रहा है तो हम ही उसको दे देंगे और हमने उसकी घोषणा करके सबको कह दिया कि ठीक है, है पैसे हमारे पास है हम लाएंगे.... ....(व्‍यवधान)  हम उनको पैसे देंगे, हमारे पास पैसे हैं ऐसी चीजों के लिए हम ढूंढ के लाएंगे और वो पैसे देंगे गरीब को वह पिंच फील नहीं करने देंगे। इसी तरीके से बहुत सारी और भी बातें थी। मैं समझती हूं बीपीएल परिवार और ये सब चीजों के बारे में तो आप लोग और फाईनेंस में जब डिबेट्स होगें तो उसके अंदर भी ये बातें आ जाएगी इसलिए मैं और डिटेल में इसमें जाना नहीं चाह रही हूं खाली एक हमारे माननीय सदस्‍य ने बात रखी थी कि फडिंग ऑफ प्‍लान कैसे होता है? अब इतने साल हो गये फडिंग ऑफ प्‍लान कैसा होता है अगर नहीं मालूम है तो फिर मैं क्‍या समझाऊं? फडिंग ऑफ प्‍लान होता है कि Through State’s own resources, through central assistance, through public sector companies, through likely loans and borrowings. That is how, Plan is funded  और मैं समझती हूं कि उसको इसी तरीके से प्रपोशन के अंदर हम लोग एलोकेट करते हैं The difference is only this कि 2002-03 के अन्‍दर State’s own resources were minus 3 thousand something and in 2006-07, the State’s own resources are 9,030 crores.

 

भीम/अरुण/7.3.07/19.30/4d

 

आपके समय के अन्‍दर 4,000 करोड़ का था वो 8,000 करोड़ का उस समय हो गया हमारे तुरन्‍त आते ही और हम लोग उसको बढ़ाते ही गये हैं परन्‍तु कैसे होता है, this is how it is done.

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): अन्‍य राज्‍यों के प्‍लान बढ़े हैं या नहीं बढ़े और कितने प्रतिशत बढ़े हैं? आप यह बता दो। आप जो कह रहे हैं माननीय मुख्‍यमंत्री जी, आपने प्‍लान साइज बढ़ाया है, बहुत खुशी की बात है लेकिन हर राज्‍य का पिछले साल भारत सरकार ने ...(व्‍यवधान)...

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍यमंत्री): माननीय सदस्‍य, अगर मेरे को यहां क्‍वेश्‍चन- आन्‍सर करना ही है तो फिर अपन फाइनेंस तक कहां जाएंगे? मेरा खाली यह है कि ये सब क्‍वेश्‍चन आप बजट के अन्‍दर मुझे कर लीजिये वो चांस आपको मिलेगा और विशेषज्ञ तो आप ही हैं न यहां।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): मैं ज्‍यादा विशेषज्ञ नहीं हूं, विशेषज्ञ नहीं हूं मैं क्‍लेम नहीं कर रहा हूं।

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍यमंत्री): मैं आपको मानती हूं।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): आप हैं विशेषज्ञ।

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍यमंत्री): हम सब आपको मानते हैं।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): हम तीन साल से हैं जो आप विशेषज्ञ आज आप बोल रही हैं।

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍यमंत्री): हम सब आपको मानते हैं इसलिए आपको पूरा समय मिलेगा उस समय आप इन चीजों को उठा सकते हो।  मैं आखिरी में इतना ही कहना चाहूंगी कि इस प्रदेश के प्रत्‍येक नागरिक से हमारी इतनी गुजारिश है कि वो हमारे ये विकास के बहुत बड़े कार्यक्रम के अंदर भागीदार बने और सरकारी और गैर सरकारी तंत्र को हम लोग इसके अन्‍दर जोड़ने का पूरा प्रयास कर रहे हैं। पहली दफा एनजीओज को इतनी संख्‍या के अन्‍दर, उद्यमियों को इतनी संख्‍या के अन्‍दर हम लोगों ने विकास के काम में जोड़ा है। पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप को हम लोग आगे लाये हैं इन फैक्‍ट पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप हम लोगों की इतनी अच्‍छी चली है कि उसको भी प्‍लानिंग कमीशन ने सराहा है और हम लोग अब एक जुझारू और विकासित प्रदेश बनने के रास्‍ते पर चल पड़े हैं । ये जो हमारे माथे पर कंगाली का कलंक था वो अब मैं मानती हूं कि खुशहाली का चंदन बन रहा है और मुझे यह विश्‍वास है कि जो-जो हमारे काम गवर्नमेंट ऑफ इंडिया के अन्‍दर भारत सरकार के अन्‍दर लंबित पड़े हुए हैं उसके अन्‍दर आप हमारी भी मदद करोगे, आपके भी प्रयास होंगे कि यह सब पैसे जो वहां अटके हुए हैं वो हम तक आये या कोई एनओसीज अगर वहां अटकी हुई हैं तो वो यहां तक आये, हमारी बात वहां उन तक पहुंचे और यह आपको सबको मैं विश्‍वास दिलाना चाहूंगी कि व्‍यक्तिगत तौर पर अगर आप लोगों की कोई प्रोब्‍लम्‍स है जो यहां हम लोगों ने एड्रेस नहीं की हैं कोई आप कुछ कहना चाहेंगे तो व्‍यक्तिगत स्‍तर के ऊपर आप आकर मिल सकते हो और निश्चित तौर पर आपसे चर्चा करके उसको सुलझाने की मैं कोशिश करूंगी और आखिर में सब माननीय सदस्‍यों का आभार व्‍यक्‍त करते हुए एक शेर से अपनी बात समाप्‍त करना चाहूंगी, जब से चली हूं मैं, मेरी मंजिल पर नज़र है, राहों में कभी मील के पत्‍थर को नहीं देखा।  

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): ये शेर किसको समर्पित है? यह शेर दिलावर साहब को समर्पित नहीं है।

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍यमंत्री): राज्‍यपाल को भी, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राज्‍यपाल महोदय को भी मैं हम सबकी ओर से इसको पास करने का धन्‍यवाद देना चाहूंगी।

श्री अध्‍यक्ष: प्रश्‍न यह है कि श्री विष्‍णु मोदी, सदस्‍य विधान सभा द्वारा राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण पर प्रस्‍तुत धन्‍यवाद प्रस्‍ताव स्‍वीकार किया जाय?

(स्‍वीकृत)

धन्‍यवाद प्रस्‍ताव स्‍वीकार किया गया।

सदन की बैठक गुरुवार दिनांक 8 मार्च, 2007 के प्रा‍त: 11.00 बजे तक के लिए स्‍थगित की जाती है।

(तदनन्‍तर सदन की बैठक 19.34 बजे, गुरुवार,

8 मार्च, 2007 के 11.00 बजे तक के लिए स्‍थगित हुई।)



000 अध्‍यक्षपीठ के आदेशानुसार अंकित नहीं किया गया।

000 अध्‍यक्षपीठ के आदेशानुसार अंकित नहीं किया गया।

000 अध्‍यक्षपीठ के आदेशानुसार अंकित नहीं किया गया।

000 अध्‍यक्षपीठ के आदेशानुसार अंकित नहीं किया गया।

000  अध्‍यक्षपीठ के आदेशानुसार अंकित नहीं किया गया।

000 अध्‍यक्षपीठ के आदेशानुसार अंकित नहीं किया गया।

000 अध्‍यक्षपीठ के आदेशानुसार अंकित नहीं किया गया।

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000 अध्‍यक्षपीठ के आदेशानुसार अंकित नहीं किया गया।