jyg/akt/1a/1100/06102006

अशोधित प्रति/ प्रकाशनार्थ नहीं

 

राजस्‍थान विधान सभा की कार्यवाही का वृत्‍तान्‍त

 

 

अंक  6    बारहवीं विधान सभा के छठे सत्र का चौथा दिवस   संख्‍या  4

 

 

शुक्रवार,

06 अक्‍टूबर, 2006

 

राजस्‍थान विधान सभा की बैठक 11.00 बजे

विधान सभा भवन, जयपुर में प्रारम्‍भ हुई।

 

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

 

तारांकित प्रश्‍नोत्‍तर

 

श्री अध्‍यक्ष: श्री हरिमोहन शर्मा।

 

वर्ष 2006-07 में बाढ़ पीडि़तों की सहायतार्थ व्‍यय राशि

 

42. श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली), श्री प्रमोद जैन भाया (बारां) एवं            डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): क्‍या आपदा प्रबन्‍धन एवं सहायता मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) वर्ष 2006-07 में राज्‍य के विभिन्‍न जिलों के किन-किन गांवों में अतिवृष्टि होने से बाढ़ की स्थिति उत्‍पन्‍न हुई और उससे किस-किस जिले में कितना-कितना नुकसान हुआ? विवरण सदन की मेज पर रखें।

(2) उक्‍त अवधि के दौरान राज्‍य में किस-किस जिले के किस-किस गांव में कितने-कितने व्‍यक्तियों की बाढ़ एवं बिजली गिरने से मृत्‍यु हुई और कितने पशुओं की बाढ़ में डूबने से मृत्‍यु हुई? संख्‍या विवरण सदन की मेज पर रखें।

(3) सरकार द्वारा बाढ़ में मृतक व्‍यक्तियों एवं पशुओं के लिए कितनी-कितनी सहायता राशि उपलब्‍ध कराई गई एवं इसके क्‍या मानदण्‍ड रहे?

(4) अकाल राहत कोष तथा सी आर एफ में वर्ष 2005-06 व 2006-07 में कुल कितनी राशि किस-किस जिले में व्‍यय की गई? जीवन रक्षक उपकरण एवं अन्‍य आवश्‍यक उपकरणों को खरीदने के लिए कितनी राशि स्‍वीकृत की गई और कितनी राशि के सामान खरीदे गए?

(5) सरकार द्वारा केन्‍द्र सरकार से सहायतार्थ कितनी राशि के लिए मांग की गई तथा कितनी राशि राज्‍य सरकार ने इस कार्य हेतु उपलब्‍ध कराई? बाढ़ सहायता में उदासीनता एवं लापरवाही करने के आरोप में किस-किस जिले में किस-किस अधिकारी व कर्मचारी को दोषी पाया गया? उनके विरुद्ध सरकार द्वारा क्‍या कार्यवाही की गई?

(6) क्‍या यह सही है कि डिजास्‍टर मैनेजमेण्‍ट एक्‍ट, 2005 के अन्‍तर्गत केन्‍द्र सरकार द्वारा राज्‍य सरकार को दिशा-निर्देश जारी किए गए थे? यदि हां, तो कब और उन निर्देशों के अनुसार राज्‍य सरकार ने क्‍या-क्‍या कदम उठाए? निर्देशों की प्रति सदन की मेज पर रखें। क्‍या डिजास्‍टर मैनेजमेण्‍ट एक्‍ट, 2005 की धारा 25 (1) के अनुसार डिस्ट्रिक्‍ट डिजास्‍टर मैनेजमेण्‍ट ऑथोरिटी राजस्‍थान में बनाई गई है? यदि हां, तो कहां-कहां?

(7) सी आर एफ, बाढ़ एवं अकाल राहत कोष की कितने-कितने प्रतिशत राशि किस-किस कार्य में खर्च की जाएगी? क्‍या राज्‍य सरकार द्वारा इसके लिए कोई दिशा-निर्देश जारी किए गए? यदि हां, तो क्‍या?

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री, (डा. किरोड़ी लाल): (1) वर्ष 2006-07 में राज्‍य के विभिन्‍न जिलों में अतिवृष्टि होने से बाढ़ की स्थिति जिन-जिन गांवों में उत्‍पन्‍न हुई उनका विवरण परिशिष्‍ट-1 पर संलग्‍न है। जिलेवार नुकसान का विवरण परिशिष्‍ट-2 पर संलग्‍न है।

(2) उक्‍त अवधि के दौरान जिलेवार एवं ग्रामवार बाढ़ एवं बिजली गिरने से मृत व्‍यक्तियों की संख्‍या एवं बाढ़ से डूबकर मरने वाले पशुओं की जिलेवार संख्‍या का विवरण परिशिष्‍ट-3 पर संलग्‍न है।

(3) राज्‍य सरकार द्वारा बाढ़ से मृतक प्रति व्‍यक्ति 50,000 रुपए मृतक के आश्रितों को सहायता दी जाती है। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के एक परिवार के दो या दो से अधिक पशुओं के मृत होने पर लघु, सीमान्‍त कृषकों, खेतीहर श्रमिकों के व्‍यक्तियों के मृतक पशु की कीमत का 50 प्रतिशत अनुदान या अधिकतम 10,000 रुपए व अन्‍य परिवारों के पशुओं की कीमत का 30 प्रतिशत अनुदान या अधिकतम 7500 रुपए दिए जाते हैं। यदि एक ही पशु की मृत्‍यु हुई है तो सहायता अनुसूचित जाति एवं जनजाति के परिवार को अधिकतम 5000 रुपए की अनुदान राशि तथा अन्‍य परिवारों को 3750 रुपए है। दिशा निर्देशों की प्रति परिशिष्‍ट-4 पर संलग्‍न है।

(4) वर्ष 2005-06 एवं 2006-07 में राशि की उपलब्‍धता निम्‍न प्रकार रही है:-

1.4.2005 को अन्तिम शेष:                      359.45 करोड़ रुपए       

                    (under protest)

2005-06 की बचत                            51.53 करोड रुपए

2006-07 में सी आर एफ में कुल प्राप्तियां          436.42 करोड़ रुपए

2006-07 में एन सी सी एफ में कुल प्राप्तियां       100.00 करोड़ रुपए

कुल राशि                                     974.40 करोड़ रुपए

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आपदा प्रबन्‍ध एवं सहायता मद में वित्‍तीय वर्ष 2005-06 एवं 2006-07 (व्‍यय माह अगस्‍त, 2006 तक) में किए गए व्‍यय का मदवार व जिलेवार व्‍यय का विवरण क्रमश: परिशिष्‍ट- 5 व 6 पर उपलब्‍ध है।

जीवन रक्षक उपकरण एवं अन्‍य आवश्‍यक उपकरण एवं प्रशिक्षण हेतु उपकरण क्रय हुतु निम्‍न प्रकार राशि स्‍वीकृत की गई है:-

                    वर्ष 2005-06 में

महानिदेशक, पुलिस                                   25.00 लाख रुपए

 

                   

वर्ष 2006-07 में

विभाग का नाम 

स्‍वीकृति दिनांक

स्‍वीकृत राशि लाखों में

महानिदेशक, पुलिस     

10.5.06 

149.32 

महानिदेशक, पुलिस

16.6.06 

 58.70

उप महासमादेष्‍ठा गृह रक्षा

10.5.06 

 20.07

उप महासमादेष्‍ठा गृह रक्षा

7.7.06

  6.00

निदेशक स्‍थानीय निकाय (नगर निगम, जयपुर

14.6.06 

 93.00 

जल संसाधन विभाग

22.9.06

141.20  

कुल योग

 

468.29

वित्‍तीय वर्ष 2005-06 की स्‍वीकृत राशि के विरुद्ध महानिदेशक, पुलिस द्वारा राशि रुपए 14.47 लाख व्‍यय किए गए हैं। वर्ष 2006-07 में स्‍वीकृत राशि के विरुद्ध व्‍यय किए जाने की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।

(5) राज्‍य सरकार द्वारा केन्‍द्र सरकार से सहायतार्थ विशेष पैकेज के जरिये 3200 करोड़ रुपए की मांग की गई एवं 3284.22 करोड़ रुपए का ज्ञापन भी प्रस्‍तुत किया गया।

राज्‍य सरकार द्वारा बाढ़ राहत व सहायता हेतु वर्ष 2006-07 में 550.29 करोड़ रुपए की राशि उपलब्‍ध कराई गई है। बाढ़ सहायता में उदासीनता एवं लापरवाही करने वाले अधिकारी/कर्मचारियों के विरुद्ध की गई कार्यवाही का विवरण परिशिष्‍ट-7 पर संलग्‍न है।

(6) केन्‍द्र सरकार ने डिजास्‍टर मैनेजमेण्‍ट एक्‍ट 2005 की प्रति के साथ एक पत्र प्रेषित किया जो कि राज्‍य सरकार को दिनांक 10.4.06 को प्राप्‍त हुआ है। इस पत्र के अनुसरण में प्रकरण का विधिक परीक्षण करवाया जा रहा है। वैसे भारत सरकार ने इस एक्‍ट की प्रथम अधिसूचना 25 जुलाई, 2006 को जारी की है, जिसकी प्रति राज्‍य सरकार को दिनांक 10.8.06 को प्राप्‍त हुई थी।

(7) सी आर एफ की राशि को व्‍यय करने के लिए केन्‍द्र सरकार द्वारा नोर्म्‍स जारी किए हुए हैं, उन्‍हीं के अनुरूप खर्च किया जाता है। राज्‍य सरकार द्वारा पृथक से कोई प्रतिशत निर्धारित नहीं किया जाता है। बाढ़, अकाल या अन्‍य प्राकृतिक आपदा के नोर्म्‍स अनुसार ही आपदा की गम्‍भीरता एवं प्रकृति को देखते हुए आवश्‍यकतानुसार व्‍यय किया जाता है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा माननीय मंत्रीजी से प्रश्‍न है कि जीवन रक्षक उपकरण और इससे सम्‍बन्धित सामान खरीदने के लिए आपने कुल 468.22 करोड़ रुपए का अलोटमेण्‍ट किया, 2005-06 में भी किया और 2006-07 में भी किया और इस बाढ़ की परिस्थिति को देखते हुए आपने इसमें से केवल मात्र 13 और 14 लाख रुपए खर्च किए।

श्री समर्थ लाल (राजगढ़): इतना विस्‍तृत सवाल है, इतना विस्‍तृत उत्‍तर है इसमें, सवाल पूछने का सवाल ही पैदा नहीं होता। ...(व्‍यवधान)...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): यहां कोई अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का मामला थोड़े ही है जो हर बात में आप ऐसे समर्थन करते रहो। वहां तो करना आपका वाजिब है। ...(व्‍यवधान)... आपने 4 करोड़ 68 लाख रुपए का अलोटमेण्‍ट जीवन रक्षक उपकरण खरीदने के लिए किया और जीवन रक्षक उपकरण खरीदने के लिए खर्च किया  14 लाख रुपए और स्‍थान-स्‍थान पर इस बाढ़ के समय में सार्वजनिक रूप से सरकार की इस बात के लिए आलोचना हुई है कि जीवन रक्षक उपकरण खरीदने में सरकार ने ढि़लाई की है। उसके पास पैसा था और उसने बाढ़ के हिसाब से जो भी जीवन रक्षक उपकरण थे वह आपने नहीं खरीदे, इसका क्‍या कारण है और इसमें विलम्‍ब क्‍यों हुआ।

दूसरा, डिजास्‍टर मैनेजमेण्‍ट एक्‍ट के तहत केन्‍द्र सरकार के डाइरेक्‍शन 10.4.6 को आना आप मानते हैं। डिजास्‍टर मैनेजमेण्‍ट एक्‍ट के तहत विस्‍तृत गाइड लाइन है कि आपको डिस्ट्रिक्‍ट लेवल पर क्‍या करना है, प्रदेश लेवल पर क्‍या करना है कैसे प्राधिकरण बनाना है और आप इसका जवाब आज यह दे रहे हैं कि अभी उस डाइरेक्‍शन का विधिक परीक्षण करवाया जा रहा है।

श्री अध्‍यक्ष: भाषण नहीं, प्रश्‍न पूछें आप, भाषण देने लग गए आप तो।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): हां, यही पूछ रहा हूं, उसका जवाब यह दे रहे हैं कि लॉ डिपार्टमेण्‍ट से उसको दिखवा रहे हैं, इतने महीने हो गए और आप लॉ डिपार्टमेण्‍ट से आज कि आपने पूरी जानकारी नहीं ली, इसका क्‍या कारण है।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, प्रश्‍न के फोर्म में पूछिए आप। ...(व्‍यवधान)...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): तीसरा इसमें जो मेरा महत्‍वपूर्ण सवाल है।

श्री अध्‍यक्ष: घोटाला नहीं, आप तो प्रश्‍न के रूप में पूछे।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): हां, हां, तीसरा प्रश्‍न ही तो पूछ रहा हूं, प्रश्‍न तो पूछ लें न, जो सूची आपने बाढ़ और बिजली गिरने से मरने वालों की दी है, उसकी आप व्‍यक्तिश: पुष्टि करते हैं या जो सूची आपको अधिकारियों ने दी है उसमें अगर कोइ जानबूझकर कोई नाम नहीं लिखा गया तो उसके जिम्‍मेदार आप हैं या आपके अधिकारी हैं, यह बता दें, इसके बाद में दूसरी बात करूंगा।

श्री अध्‍यक्ष: यह क्‍या हुआ? आप प्रश्‍न ऐसे करने बैठेंगे तो इतने सारे प्रश्‍नों का उत्‍तर मंत्रीजी देंगे?

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वैसे तो मैंने पूरी जानकारी दे दी है। भारत सरकार का पत्र नोर्थ ब्‍लॉक, न्‍यू डेल्‍ही, डेटेड 7 अगस्‍त, 2006 का हमें प्राप्‍त हुआ, डिप्‍टी सेक्रेटरी टू दी गवर्नमेण्‍ट ऑफ इण्डिया, आर के सिंह का, यह है 28 जुलाई, 2006 का, यह 10.8.2006 को हमको प्राप्‍त हआ, इसका हम विधिक परीक्षण करवा रहे हैं। हमारे स्‍टेट में और जिलों में कौन-कौनसे डिजास्‍टर मैनेजमेण्‍ट को हम लागू कर सकते हैं उसका विधिक राय आने के बाद हम इसको जल्‍दी लागू कर देंगे। 8.10.2006 को हमें पत्र मिला है और हम इस पर विधिक राय ले रहे हैं, और कोई ज्‍यादा लेट नहीं हो रहा है।

 

Gpc/akt/06102006/1110/1b

 

10.8.2006 को जो प्राप्‍त हुआ है उसकी हम कानूनी राय ले रहे हैं। दूसरा आपने ..(व्‍यवधान)..

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): इसी संदर्भ में पूछना चाहता हूं बाद में कंफ्यूजन नहीं होगा। डिजास्‍टर मैनेजमेंट बिल राज्‍य सभा से 28 नवम्‍बर, 2005 को पास हुआ है। लोक सभा में यह पास हुआ है 12 दिसम्‍बर, 2005 को। 12 दिसम्‍बर, 2005 का आपदा प्राधिकरण का निर्माण करने का पार्लियामेंट एक्‍ट पास कर देती है। राज्‍य सरकार के पास में, पूरी दुनिया के पास में यह बिल आ जाता है, सूचना आ जाती है उसके आठ महीने व्‍यतीत होने के बाद भी न तो राज्‍य ने प्राधिकरण बनाने की दिशा में कोई काम किया और न आपदा प्रबंधन के लिए जो दिशा निर्देश उन्‍होंने जारी किये थे उसकी तरफ कोई काम किया क्‍योंकि इसमें महत्‍वपूर्ण यह नहीं है। इसमें महत्‍वपूर्ण यह है कि यदि आपदा प्राधिकरण का गठन कर दिया जाता और जिलो के अंदर इसका गठन कर दिया जाता है तो केन्‍द्र सरकार गठन के हिसाब से उसके अंदर समुचित राशि भी उपलब्‍ध कराती है तो अपने अगर जल्‍दी गठन कर देते या उस दिशा में कदम उठा लेते तो शायद केन्‍द्र सरकार से सही समय पर समुचित सहायता मिल जाती।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): माननीय सदस्‍य, एक्‍ट का जो टाइम आप बता रहे हैं जब एक्‍ट पारित हो गया, लेकिन भारत सरकार ने इसका नोटिफिकेशन 28 जुलाई, 2006 को किया, यह शायद आपके पास नहीं है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आप स्‍वयं सहमत हैं कि जुलाई में नोटिफिकेशन हो गया था, जुलाई के बाद बाढ़ आई है। तो सरकार को जुलाई के बाद एक्‍शन लेने में क्‍या तकलीफ थी?

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): यह बात तो सही है लेकिन आप तो अनुभवी मंत्री रहे हो कितने प्रोसिजर से निकलता है और कानूनी राय भी इसमें लेना जरूरी है क्‍योंकि नेशनल डिजास्‍टर मैनेजमेंट ..(व्‍यवधान)..

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आपकी बात से बिलकुल सहमत हूं सरकार के पास आने के बाद भी हमारा अनुभव यह कहता है कि हमें अरजेंसी नहीं थी इसलिए हमने कोई कार्यवाही नहीं की।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  हर स्‍टेट में आपदा का अलग-अलग नेचर होता है। अब तक यहां अकाल पड़ता है तो कई जगह अकाल नहीं पड़ता। कब जगह भारी वृष्टि होती है तो कई जगह भारी वृष्टि नहीं होती। कई जगह भूकम्‍प आता है तो कई जगह नहीं आता। तो सबकी स्‍टडी करने की हमारी जिम्‍मेदारी थी, कौन-कौनसी इस एक्‍ट की धाराएं हमारे स्‍टेट में लागू करेंगे। इसलिए सब समय लगा है और अब इसकी कानूनी राय जैसे ही आ जाएगी हम इसे लागू करेंगे।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या माननीय मत्री महोदय यह बताएंगे कि चार करोड़ से ज्‍यादा जीवन रक्षा के उपकरण नहीं खरीदने से कितने लोगों की मृत्‍यु हुई? इसके लिए कौन जिम्‍मेदार है?

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): माननीय सदस्‍य, जितनी भी डेथ हुई हैं आपको पता है, इसमें आप देख लें क्‍वश्‍चन के जवाब में कवास या मलवा में ज्‍यादा डेथ हुई है 109 । 109 डेथ वे हुई हैं जो रात को सो रहे थे और पानी घुस गया। हम सारे उपकरण भी खरीदकर बाड़मेर में रख देते या जयपुर में रख देते तो हम इनकी जान नहीं बचा सकते थे, पर फिर भी हमने 4 करोड़ 68 लाख रुपये का अब दिया और 25 लाख पहले दे दिया, 4 करोड़ 68 लाख की खरीदने की प्रक्रिया चल रही है, आगे कोई ऐसी बात होगी तो हम प्रयास करेंगे कि दुर्घटना से जनता को बचाया जा सके।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मंत्री महोदय, राजसमंद में 9 अगस्‍त को बागेरिका नाका पर एक बस में 56 सवार आदमियों की प्रोब्‍लम हो गई थी। डेढ़ बजे प्रशासन को सूचना मिल गई थी शाम को 6 बजे तक कोई व्‍यवस्‍था नहीं हुई, पानी रिसीड हुआ इसलिए आदमी बचे। यह घटना उसके बाद हुई है पाली वाली। यदि 9 अगस्‍त को जीवन रक्षा उपकरण आपके पास उपलब्‍ध होते तो क्‍या खारी की घटना होती? क्‍या आदमियों को नहीं बचाया जा सकता था?

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, ऐसा कौनसा उपकरण खारी की नदी में काम में नहीं लिया गया उनके प्राण बचाने के लिए क्रेन वहां पर थी, ट्रेक्‍टर वहां पर था, बड़ा ट्रोला वहां पर था, आर्मी के लोग वहां पर पहुंच गये थे। हेलीकोप्‍टर से वहां पर ट्राई की गई, गोताखोर वहां पर थे, आर्मी का एक आदमी बहकर चला गया एक बड़ी मुश्किल से बचा।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): वह वहां पर हेलीकोप्‍टर होता तो जान बच जाती उनकी। ..(व्‍यवधान)..

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): सरकार यह मानती है कि राजस्‍थान में चार करोड़ रुपये के जीवन रक्षक उपकरण क्रय करने की आवश्‍यकता नहीं है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): क्‍यों मानती है?

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): सब व्‍यवस्‍था आपके पास है, फिर भी आप बचा नहीं पाये। आपको जरूरत ही नहीं है। राजस्‍थान सरकार का यह मानस है कि चार करोड़ रुपये के उपकरण खरीदने की आवश्‍यकता नहीं है। उपकरण सब उपलब्‍ध है उसके बाद भी आदमी बह गये।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  सरकार यह भी बताए कि वहां जो हत्‍याएं हुईं उसके जिम्‍मेदारी यह लेती है या नहीं लेती है क्‍योंकि इनकी लापरवाही से और कोताही हुई है।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): हमको उपकरण खरीदने की आवश्‍यकता है इसलिए आवश्‍यकतानुसार 4 करोड़ 68 लाख की सेंक्‍शन निकाली है और आवश्‍यकता इसलिए पड़ी है कि अबकी बार जो स्थिति भयावह बाढ़ की बाड़मेर जैसी जगह बन गई, क्‍योंकि पहले कभी हम सोचते नहीं थे ऐसी बाढ़ आ जाएगी इसलिए हम ऐसे उपकरण खरीदने के लिए हमने सेंक्‍शन निकाली है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय मंत्रीजी, आपके तो लेटेस्‍ट हेलीकोप्‍टर आया है। उस हेलीकोप्‍टर में एक इंस्‍ट्रूमेंट लगाकर लिफ्ट नहीं कर सकते थे उसको प्रोक्‍योर करेंगे आप? आपने इतना बड़ा लेटेस्‍ट हेलीकोप्‍टर खरीदा है उसको इमरजेंसी में रेसक्‍यू करने के लिए एक इक्विपमेंट लगाने के बाद आप रेसक्‍यू कर सकते हैं। क्‍या राजस्‍थान सरकार ने सप्‍लीमेंट करने के लिए प्रोक्‍योरमेंट किया है? जब 25 करोड़ रुपये आप खर्च कर चुके तो ..(व्‍यवधान)..

श्री नवरतन राजोरिया (फुलेरा): वे कार को निकालना चाहते थे। क्‍या कार निकालेंगे?

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): माननीय मंत्रीजी यह कह रहे हैं कि इसकी जरूरत नहीं है। 1997 की 26 अगस्‍त को बांडी नदी के अंदर 18 आदमी बह गये उस समय भी आपकी सरकार थी तब भी आपको यह विचार नहीं आया कि हमको इन उपकरणों की जरूरत है और उसके बाद 10 महीने बाद आपकी सरकार चली गई और अब इस बाढ़ में जो लोग मरे हैं उनके पाप से भी आपकी सरकार चली जाएगी।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): रेस्‍क्‍यू के लिए हर हेलीकोप्‍टर या हर पायलट क्‍या ट्रेंड होगा?

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आपके पास जो लेटेस्‍ट इक्विपमेंट है, लेटेस्‍ट जो हेलीकोप्‍टर है उसमें एक इंस्‍ट्रूमेंट होता तो खारी नदी में जाकर वह लिफ्ट कर सकता था। वह इंस्‍ट्रूमेंट परचेज नहीं कर रखा आपने। आप बताओ कर सकते हैं या नहीं कर सकते? ..(व्‍यवधान)..

श्री नवरतन राजोरिया (फुलेरा): वे कोर को छोड़ना नहीं चाहते थे खुद ही।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): वह आप ले आना ट्रेक्‍टर।

श्री नवरतन राजोरिया (फुलेरा): कार को लिफ्ट लाएगी क्‍या?

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): हेलीकोप्‍टर की बात हो रही है ट्रेक्‍टर की बात कर रहे हैं। राजस्‍थान सरकार ने 25 करोड़ रुपया खर्च करके हेलीकोप्‍टर खरीदा है उसमें एक इंस्‍ट्रूमेंट और लगाने की आवश्‍यकता है, वह क्‍यों नहीं प्रोक्‍योर किया जा रहा है जिएऐ उसका उपयोग हो सके। इसका जवाब दीजिए आप। वह हेलीकोप्‍टर मल्‍टीपरपज काम में आ सकता है, ऐसे समय में रेस्‍क्‍यू के लिए काम आ सकता है, वह व्‍यवस्‍था हम क्‍यों नहीं कर रहे हैं।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष जी, माननीय दिगम्‍बर जी ने जो बात कही है हर पायलट उसका एक्‍सपर्ट नहीं हो सकता, मैं भी डाक्‍टर हूं, दिगम्‍बर जी भी डाक्‍टर हैं और डा. चन्‍द्रशेखर भी डाक्‍टर हैं। ये गायनोकोलोजिस्‍ट हैं, मैं गायनिक आपरेशन नहीं कर सकता। वे मेडिसन के एक्‍सपर्ट हैं मैं मेडिसन का एक्‍सपर्ट नहीं हो सकता। इसलिए हो सकता है वो पायलट एक्‍सपर्ट है या नहीं। एक्‍सपर्ट नहीं था इसलिए वह इंस्‍ट्रूमेंट उसमें नहीं था।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): यह तो वर्षों से हेलीकोप्‍टर है, आपको इसकी ट्रेनिंग देनी चाहिए थी।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): आठ किलोमीटर दूर एयरफोर्स का एयरपोर्ट था। क्‍या एक भी वहां पर पायलट नहीं था?

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): एमबीबीएस तो तीनों डाक्‍टर हैं। डा. किरोड़ीलाल जी, डा. दिगम्‍बर सिंह, डा. चन्‍द्रशेखर बैद तीनों एमबीबीएस तो हैं। इसमें तो कोई तकलीफ तो नहीं है। बेसिक क्‍वालिफिकेशन एमबीबीएस की तो आप तीनों में है।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): मैं एक्‍सपर्ट नहीं हूं।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): डा. साहब, यह उदाहरण जमा नहीं। आप यह कहें कि एक ड्राइवर है वह कार चला सकता है जीप नहीं चला सकता, क्‍वालिश चला सकता है बोलेरो नहीं चला सकता। यह काहे का उदाहरण दिया आपने?

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): मंत्रीजी, आप तो बता दें कि अब क्‍या विचार है आपका?

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 18 आदमी बांडी नदी में बह गये, उस समय भी कोई नहीं पहुंचा। जोधपुर से मात्र 50 किलोमीटर दूर है। ..(व्‍यवधान).. उस समय आपको ट्रेनिंग देनी चाहिए या नहीं। यह राजस्‍थान सरकार का हेलीकोप्‍टर है, आप लोगों के लिए बैठने के लिए नहीं है, लोगों की जान बचाने के काम आता है। तो आपकी सरकार की वाहवाही होती और इसी पाइंट पर कहते हो ड्राइवर जानता नहीं है। ..(व्‍यवधान)..

श्री भवानी सिंह राजावत (संसदीय सचिव): मैं हिण्‍डौली से आने वाली माननीय सदस्‍य को बताना चाहता हूं कि हमने तो हेलीकोप्‍टर का उपयोग बाढ़ पीडि़तों की मदद के लिए किया, लेकिन पंजाब के माननीय मुख्‍यमंत्री घर से सचिवालय भी हेलीकोप्‍टर से आते हैं। ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: मंत्रीजी खड़े हैं, आप क्‍या बोल रहे हो? ..(व्‍यवधान)..

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): आपने हेलीकोप्‍टर का उपयोग अपने निजी स्‍वार्थों के लिए किया। 19 तारीख को क्‍या उपयोग था हेलीकोप्‍टर का, यह बताएं आप ताकि लोगों को पता चले 6 आदमी मर गये। आपका परिवार का एक आदमी डूबकर मरे तो आपको आंसू आ जाएंगे। ..(व्‍यवधान).. इससे पहले बांडी नदी में 18 आदमी मर चुके हैं 1997 में। इनको ट्रेनिंग देनी चाहिए थी और जोधपुर से 50 किलोमीटर दूर मरे थे और यह 105 किलोमीटर दूर है।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): आप सुन तो लो। ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: माननीय प्रतिपक्ष के सदस्‍यों को न तो जानकारी चाहिए, न आपको बाढ़ पीडि़तों के बारे में जानकारी चाहिए, न उन किसानों के बारे में जानकारी चाहिए। ये सब खड़े हो गये आप। ..(व्‍यवधान)..

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  राजस्‍थान सरकार के मंत्रियों को क्‍या हो गया? कभी यहां बात चलती है तो संसदीय कार्य मंत्री कश्‍मीर चले जाते हैं, अब संसदीय सचिव पंजाब चले गये। ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या तरीका है यह?

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): बात चल रही है राजस्‍थान और इनको कश्‍मीर और पंजाब घूमता नजर आ रहा है। आप राजस्‍थान की बात करो। कहां घूम रहे हैं? कभी गुजरात भी तो घूमा करो।

श्री भवानी सिंह राजावत (संसदीय सचिव): आपके समय कोटा में 30 आदमी बह गये थे। मुख्‍यमंत्रीजी 17 दिन बाद में कोटा पहुंचे थे, मृतकों के घर भी नहीं गये थे और फूटी कौड़ी की व्‍यवस्‍था भी नहीं की थी। आपका इतिहास उठाकर देखें, बहुत काला इतिहास है।

 

मोहन/अरूण/6102006/1120/1c

 

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): वह मर गये, अच्‍छा होता वह हेलीकोप्‍टर आपकी खारी नदी पर आ जाता तो हम समझते कि आपमें संवेदनशीलता है। अगर सेना का नहीं आया, इन मंत्री जी ने कोशिश की, सेना का नहीं आया लेकिन आपका हेलीकोप्‍टर तो आपके पास था, वह हेलीकोप्‍टर आना चाहिए था। वह हेलीकोप्‍टर वहां पर नहीं आया और आपके वहां पड़ा रहा और आप संवेदनशीलता की बात करते हैं? ...(व्‍यवधान)...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): एक मिनट आप सुन लो फिर दे देना। ...(व्‍यवधान)...

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): यह माननीय सदस्‍य फालना की घटना से ज्‍यादा उत्‍तेजित हैं, मैं उन्‍हें थोड़ी जानकारी दे दूं अगर ये तसल्‍ली से सुनें तो। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: वह जानकारी तो लेना नहीं चाहते।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): हम सब जानते हैं, इन्‍होंने मंत्री जी ने कोशिश की और हेलीकोप्‍टर नहीं आया लेकिन आपके हेलीकोप्‍टर का क्‍या हुआ, हम तो यह जानना चाहते हैं आपसे। ...(व्‍यवधान)... 19 तारीख को आपके हेलीकोप्‍टर का क्‍या हुआ ?

श्री अध्‍यक्ष: वह केवल शोर मचाएंगे। ...(व्‍यवधान)...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कि आपने जो पर्ची ..

श्री अध्‍यक्ष: आप पहले तो अपने प्रतिपक्ष के लोगों को यह समझाएं कि जो मूल प्रश्‍नकर्ता हैं...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): मेरी हैसियत क्‍या है, साहब ?

श्री अध्‍यक्ष: आप समझाइए न, एक साथ क्‍यों खड़े होते हैं ?

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): वह तो नेता साहब समझाएंगे, मैं कैसे समझा सकता हूं ? या आप समझाओगे। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: इसका मतलब मैं यह समझती हूं कि ...(व्‍यवधान)... न भविष्‍य के लिए कैसे उपाय किए जाएं, न उसके बारे में आपको किसी तरह की चिंता है, आपको केवल शोर मचाने से मतलब है। एक साथ क्‍यों खड़े होते हैं आप ? एक एक खड़े होइए, पूछिए एक एक बात फिर देंगे जवाब ये।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): With due respect, शोर मचाने का इतना गंभीरतम प्रश्‍न है, राजस्‍थान का ही है। ...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): हमारा काम शोर मचाने का ही है, हमारा काम राज करने का नहीं है, हमारा काम शोर मचाने का ही है। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: आप पूछिए, जवाब दिलवाऊंगी सरकार से लेकिन आप एक साथ खड़े होकर शोर मचाने लगते हैं।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): यही काम है हमारा। ...(व्‍यवधान)...

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): हमारा यह दुर्भाग्‍य है अध्‍यक्ष महोदय, कि हम सही प्रश्‍न पूछते हैं तो आप शोर समझती हैं, हम सही बात पूछ रहे हैं, पाली जिले के रहने वाले हैं और उसको आप शोर समझ रही हैं, यह हमारा दुर्भाग्‍य है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा जो सवाल है कि अभी हेलीकोप्‍टर की जो चर्चा हुई, बूंदी जिले में भी हेलीकोप्‍टर गया था, माननीय राज्‍य मंत्री जी भी होंगे और माननीय संसदीय सचिव भी होंगे या ना होंगे उस जिले का नाम बूंदी जिले में जहां पर आप बाढ़ पीडि़तों की सहायता करने के लिए हेलीकोप्‍टर से गये, आपने जो परिशिष्‍ट संख्‍या 2 सूची में दिया है उसमें जो वर्ष 2006-07 के विभिन्‍न जिलों में अतिवृष्टि, बाढ़ से नुकसान हुआ, उसमें बूंदी जिले का नाम क्‍यों गायब है। आप गये थे वहां आपने बांटी थी, वहां की स्थिति खराब थी, फिर आपने परिशिष्‍ट जारी किया तो इसमें बूंदी जिले का यह माननीय राज्‍य मंत्री जी पंचायती राज के बैठे हैं इसमें बूंदी को विशेष रूप से क्‍यों एक्‍सक्‍लूड किया आपने ? इसी प्रकार से आपने मृतकों की जो सूची दी है, ...(व्‍यवधान)... आप लाइटली मत लिया करो हमेशा ही दिलावर साहब, थोड़ा। आपने उस सूची में जानबूझकर उसको क्‍यों निकाला ? नम्‍बर दो, जो बूंदी के सत्‍तूर में बाढ़ से एक आदमी मरा, आपने उसका कहीं बाढ़ से मरने वालों में नाम नहीं लिखा। इसी प्रकार 28 जुलाई को बांकली

श्री अध्‍यक्ष: आप प्रश्‍न पूछें, भाषण नहीं दें।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): नहीं भाषण नहीं दे रहा हूं, साहब, यह जो सूची है।

श्री अध्‍यक्ष: तो आप यों पूछिए क्‍या बूंदी से मरा आपने उसको भी किसी प्रकार की सहायता दी ?

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): नाम ही नहीं है न इसमें। इसमें नाम तो हो।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): पूरे दिन इस विषय पर डिबेट हो चुकी है सदन के अन्‍दर। बाढ़ के संबंध में पूरे दिन यहां पर चर्चा हुई है इसलिए अब इस सवाल का महत्‍व नहीं रहा।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अगर दुबारा चर्चा चाहते हैं, यह प्रश्‍न के अन्‍दर भाषण दे रहे हैं, प्रश्‍न में तो उत्‍तर हमारा भी तैयार है, यह 24 पेज का उत्‍तर हम भी दे सकते हैं ...(व्‍यवधान)...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): मरने वालों की जो सूचीा अध्‍यक्ष महोदय, इसमें जो दी है उसमें नाम आना चाहिए न मृतकों का ? अब उसमें नाम ही नहीं है जहां से वह मरा है, बाढ़ में बहा है, उसका नाम नही है। 28 जुलाई को बांकली में 6 आदमी मरे, उनका नाम नहीं है। इनका नाम सूची में नहीं है, इसके लिए कौन जिम्‍मेदार है, अलग अलग जगह जो बाबा गांव में एक मरा, उसका नाम नहीं है।

श्री अध्‍यक्ष: मैं कह रही हूं प्रश्‍न पूछिए। ...(व्‍यवधान)...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): मेरा यह पूछना है कि नाम नहीं है।

श्री अध्‍यक्ष: मोर देन हंडरेड पेजेज हैं ये।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): इन्‍होंने सूची दी है न साहब। ...(व्‍यवधान)...

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): अध्‍यक्ष महोदय, यह नाम नहीं है, हम तो पूछ रहे हैं इसीलिए। ...(व्‍यवधान)...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): इस सूची में नाम नहीं है मरने वालों का और यह जो गलत सूची आपने दी है उसके लिए जिम्‍मेदार कौन है ? उसके लिए किस अधिकारी की जिम्‍मेदारी है और उसके खिलाफ क्‍या कार्यवाही करोगे या आप स्‍वयं अपनी जिम्‍मेदारी लेते हो तो आप इसकी क्‍या कार्यवाही करोगे, आपने जवाब दिया है।

श्री अध्‍यक्ष: आप बिराज जाओ।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो कोटा बैराज का पानी खोला तो सवाई माधोपुर के खंडार व धौलपुर तक पानी भर गया था तो हमने उन गांवों को सावचेत किया कि गांवों में जो लोग हैं वे सुरक्षित स्‍थानों पर पहुंच जाएं, हमने भी पूछा है, वैसे बूंदी में जो मेज नदी है उसका पानी ज्‍यादा आया, चार पांच गांव घिर गये। वहां मैं खुद जाकर कलक्‍टर को लेकर खुद उन गांवों में पैकेट गिरा कर आया और मैंने बाद में मुख्‍य मंत्री जी को बुलाया, मुख्‍य मंत्री जी उतर कर गांव में सब से मिल कर आई और जो ये मरने की बात बता रहे हैं, वह जो आदमी है वह तालाब में डूबकर मरा है, बाढ़ के कारण नहीं मरा।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): वह जो मरा है वह नदी में बाढ़ आने से मरा है, आपके डिस्ट्रिक्‍ट कलक्‍टर से पूछ लेना परन्‍तु इसकी यह जो सूची आपने दी है जहां चीफ मिनिस्‍टर साहब गई हैं और आप गये हैं तो फिर वहां नुकसान हुआ उसका इसमें क्‍यों नहीं इंद्राज किया आपने ? क्‍या बाबूलाल जी वहां गये थे ? इन्‍हीं के यहां सबसे ज्‍यादा नुकसान हुआ है, इस सूची में क्‍यों नहीं दिया ? ...(व्‍यवधान)...

श्री बाबूलाल (राज्‍य मंत्री, ग्रामीण विकास एवं पंचायत): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह खंडन कर रहा हूं कि गांधी सागर में जो पानी आया उसका जो ओवर-फ्लो हुआ वह केशोरायपाटन क्षेत्र में पूरा का पूरा आया। मैं यह निश्चित रूप से कन्‍फम कर रहा हूं सरकार के इस प्‍लेटफार्म पर कि किसी भी प्रकार की जनहानि किसी भी तरह की नहीं हुई है, कोई भी जनहानि केशोरायपाटन विधान सभा क्षेत्र में जो गांधी साहगर का पानी ओवर-फ्लो हुआ उसमें किसी भी प्रकार की जन क्षति नहीं हुई है। ...(व्‍यवधान)...

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): जनहानि की बात नहीं है।

श्री बाबूलाल (राज्‍य मंत्री, ग्रामीण विकास एवं पंचायत): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी बात तो सुनिए।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): यह जनहानि की बात नहीं है, नुकसान हुआ बाढ़ के कारण से उसकी बात है।

श्री बाबूलाल (राज्‍य मंत्री, ग्रामीण विकास एवं पंचायत): मैं दूसरी बात भी कर रहा हूं। मैं उस टाइम बाढ़मेर क्षेत्र के दौरे पर था, मेरी माननीय मुख्‍य मंत्री महोदय से बात हुई, उस टाइम माननीय मुख्‍य मंत्री महोदय मेरे विधान सभा क्षेत्र में गई।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): आप बाड़मेर में थे, मैं खण्‍डार में था, मेरी तो सुनें।

श्री बाबूलाल (राज्‍य मंत्री, ग्रामीण विकास एवं पंचायत): और जो 3-4 गांव घिर गये थे उसमें कांकरा गांव में इन्‍होंने हेलीकोप्‍टर से भोजन के पैकेट गिराए और सब लोगों की पूरी व्‍यवस्‍था की गई है। यह मैं निश्चित रूप से आपके माध्‍यम से कहना चाहता हूं।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): नुकसान हुआ है अपने बाढ़ से और चम्‍बल के पानी से उसका नाम नहीं है, कितना नुकसान हुआ है, यह मैं कह रहा हूं। कोई नुकसान नहीं हुआ क्‍या बाबूलाल जी ? अगर आप यह कह दो ...(व्‍यवधान)... तो मुझे कुछ नहीं कहना । आप कह दो कि कोई नुकसान नहीं हुआ बूंदी क्षेत्र में ...(व्‍यवधान)... आप कह दो कोई नुकसान नहीं हुआ, मरे हैं ...(व्‍यवधान)...

श्री बाबूलाल (राज्‍य मंत्री, ग्रामीण विकास एवं पंचायत): जो नुकसान हुआ, जो खेती-बाड़ी का नुकसान हुआ उसके लिए निश्चित रूप से बूंदी प्रशासन से सर्वे कराने के लिए कहा गया है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): तो फिर नाम क्‍यों नहीं है ? अगर नुकसान हुआ है बाढ़ से तो नाम क्‍यों नहीं है ?

श्री बाबूलाल (राज्‍य मंत्री, ग्रामीण विकास एवं पंचायत): उसकी सर्वे रिपोर्ट जिला प्रशासन की तरफ से निश्चित रूप से भेजी गई है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): मैं यही तो कह रहा हूं नाम क्‍यों नहीं है ? बाढ़ का नुकसान हुआ है तो नाम क्‍यों नहीं है ?

श्री बाबूलाल (राज्‍य मंत्री, ग्रामीण विकास एवं पंचायत): बूंदी प्रशासन की तरफ से निश्चित रूप से जो बाढ़ का नुकसान हुआ है तो उसकी रिपोर्ट यहां आई है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): तो गलती किसकी है ? आप कहो अब उनसे गलती किसकी है ? ...(व्‍यवधान)...

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से यह निवेदन करना चाहता हूं ...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): बूंदी जिले का नुकसान हुआ है।

श्री बाबूलाल (राज्‍य मंत्री, ग्रामीण विकास एवं पंचायत): जनहानि की बात कही है उन्‍होंने, जनहानि की उन्‍होंने बात कही है, किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है। मैं इस चीज को कन्‍फर्म कर रहा हूं ।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): जनहानि की बात ही नहीं है, नुकसान की बात है।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): नुकसान का मुआवजा दे दिया क्‍या आपने .? ...(व्‍यवधान)...

श्री बाबूलाल (राज्‍य मंत्री, ग्रामीण विकास एवं पंचायत): आज जो ओवर-फ्लो हुआ है उससे किसी भी मकान का कोई नुकसान नहीं हुआ ...(व्‍यवधान)...

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इनका कोई मुआवजा नहीं दिया ...(व्‍यवधान)...

श्री बाबूलाल (राज्‍य मंत्री, ग्रामीण विकास एवं पंचायत): जो अकाल राहत के अन्‍दर सामग्री दी जानी चाहिए थी वह सामग्री पहुंच गई है। ...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मंत्री जी, आपके जिले में नुकसान हुआ है कि नहीं हुआ ? ...(व्‍यवधान)... आपने सरकारी उत्‍तर में यह दिया है, बूंदी जिले का नाम नहीं , इसके लिए जिम्‍मेदार कौन है ? आपने जो उत्‍तर दिया है उसके अन्‍दर बूंदी जिले का नाम नहीं है, इसके लिए जिम्‍मेदार कौन है ? ...(व्‍यवधान)...

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): माननीय सदस्‍य, उसमें तो सवाईमाधोपुर का भी नाम नहीं है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): नहीं है तो गलत है। जहां बाढ़ से नुकसान हुआ है तो फिर नाम क्‍यों नहीं है ?

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): सुन तो लो ...(व्‍यवधान)...

श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): आपकी कांस्‍टीट्यूएंसी है उसका नाम नहीं है। ...(व्‍यवधान)...

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, खण्‍डार में भी बाढ़ आई थी। मंत्री महोदय, आप तो एक ही सवाल का जवाब दे दो, आपने हेलीकोप्‍टर से जो भोजन के पैकेट गिराए, वहां लड़ाई करवा दी और लोगों को पूरे पैकेट ही नहीं बांटे।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): आप तो पहुंच ही नहीं वहां।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): वहीं था मैं।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): मैं तो तीन बार जाकर आया।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): लाठी मारकर ए.डी.एम. को भगाया वहां से ...(व्‍यवधान)... गांव वालों ने भगाया।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): आप तो एक बिसकिट भी नहीं ले गये।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): आप तो हेलीकोप्‍टर से ऊपर चले गये और नीचे लड़ाई करवा दी आपने। ...(व्‍यवधान)...

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): आप तो कुछ भी नहीं ले गये।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): और मुख्‍य मंत्री जी एक हैंडपम्‍प पास करके आई थी वह भी नहीं लगाया आज तक।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): आप तो एक बिसकिट भी नहीं ले गये।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): एक हैंडपम्‍प पास किया था मुख्‍य मंत्री महोदय ने वह भी नहीं लगा।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): और मैं पूरा एक हेलीकोप्‍टर भरकर कोटा से ले गया था।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): पैकेट पर लड़ाईयां करवा दी आपने। ...(व्‍यवधान)... लोगों ने आपके अधिकारियों को मारा।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): लड़ाईयां करवाना तो आसान है, काम करना बड़ा टेड़ा काम है।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): आपके अधिकारियों को मारा, आपके कर्मचारी जान छुड़ाकर भागे वहां से।

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): मैं भरकर दुबारा ले गया था।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): आप तो छोड़कर नीचे लडाईयां करवा दी आपने और कोई राहत नहीं मिली वहां पर, कोई मुआवजा नहीं मिला। एक हैंडपम्‍प पास किया था मुख्‍य मंत्री ने वह भी नहीं लगा। ...(व्‍यवधान)... वह हैंडपम्‍प भी नहीं लगा हमारे।

 

Skp/aky/06102006/1130/1d/1

 

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): आपने जो मरने वालों की सूची दी है उसमें शाहपुरा के विधायक के दो आदमी सुमेरपुर की नदी में डूबकर 20.8.06 को मर गये उनका सूची में नाम नहीं है। नावी के अन्‍दर एक ब्राह्मण मरा उसका सूची में नाम नहीं है। एक आदमी सुमेरपुर का मरा उसका सूची में नाम नहीं है, एक आदमी दूजाणा का मरा उसका सूची में नाम नहीं है तो आखिर इसके लिए कौन जिम्‍मेदार है? (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप प्रश्‍न पूछिये। भाषण नहीं दें, प्रश्‍न पूछिये। (व्‍यवधान) प्रश्‍न के रूप में पूछिये। (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): मरने वालों का बता रहा हूं। इन आदमियों का नाम नहीं है सूची के अन्‍दर। (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): यह सूची गलत है, गैर जिम्‍मेदाराना ढंग से तैयार की गई है। इसको कोई देखने वाला नहीं है। (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): सूची में नाम नहीं हैं इनके। (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आगे का सवाल इससे भी जरूरी है। (व्‍यवधान) ये सुनना चाहते नहीं हैं। (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): विधान सभा के अन्‍दर जो माननीय मंत्री जी जवाब दे रहे हैं और उस जवाब में मरने वालों की सूची में नाम नहीं है। हम यही तो पूछ रहे हैं कि नाम नहीं हैं तो इसके लिए कौन जिम्‍मेदार है?

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): ....... यहां पर सूची में नाम देते। (व्‍यवधान) नाम नहीं देते हैं।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): अधिकारी हैं या मंत्री जी हैं? (व्‍यवधान) और यह हमारा दुर्भाग्‍य है कि ये हमारे जिले के प्रभारी मंत्री और हैं और इनको यही मालूम नहीं है कि हमारे प्रभार वाले जिले में कौन मर गये। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, मैंने आपसे निवेदन किया, स्‍थान ग्रहण कर लें। स्‍थान ग्रहण करें। आप प्रश्‍न के रूप में पूछिये। आप प्रश्‍न के रूप में पूछते नहीं और भाषण देने खड़े हो जाते हैं। समस्‍या तो यही है। (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम यही पूछ रहे हैं कि इन लोगों के नाम मृतकों की सूची में क्‍यों नहीं हैं? इन लोगों के नाम मृतकों की सूची में क्‍यों नहीं हैं? (व्‍यवधान)

श्री नन्‍दलाल मीणा (प्रतापगढ़): देवल साहब, आप कैसे बच गये? इस नदी में आप क्‍यों नहीं आये? आप आ जाते तो यह सब..... (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): जब कि यह हमारा दुर्भाग्‍य है कि ये हमारे प्रभारी मंत्री हैं। इनके आने के बाद अकाल है, इनके आने के बाद लोग मरे हैं। (व्‍यवधान)

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): .....बेकार की बात करते हो आप। आपको 100 हैण्‍डपम्‍प मंत्री जी ने दिये हैं। (व्‍यवधान) 100 हैण्‍डपम्‍प मंत्री जी ने दिये हैं फिर भी.... (व्‍यवधान)

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): एक हैण्‍डपम्‍प मुख्‍य मंत्री वाला नहीं लगा। (व्‍यवधान) वो हैण्‍डपम्‍प आज तक नहीं लगा। (व्‍यवधान) आपकी बात नहीं है मंत्री महोदय, सिंचाई मंत्री जी की बात है। (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): जो आदमी मर गये, हैण्‍डपम्‍पों को छोड़ो। (व्‍यवधान)

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): मैं एक निवेदन करना चाहता हूं अध्‍यक्ष महोदय कि एक हैण्‍डपम्‍प नहीं लगा यह यहां असेम्‍बली में कहने की बात है? (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): .....लेकिन आदमी मर गये उनके नाम नहीं हैं उसके लिए कौन जिम्‍मेदार है? मंत्री जिम्‍मेदार हैं या अधिकारी जिम्‍मेदार हैं? (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: श्री रघुवीर सिंह मीणा।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): नहीं लगा बिल्‍कुल गलत बात है। मेरे को बिल्‍कुल कम दिये हैं। (व्‍यवधान) किरोड़ी लाल जी के ज्‍यादा लगे। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय गृह मंत्री जी। माननीय गृह मंत्री जी, आपका प्रश्‍न पुकार लिया है। (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): अध्‍यक्ष महोदय, जवाब तो आया ही नहीं और हर बार यही प्रक्रिया अपनाई जा रही है। हर प्रश्‍न का जवाब आये नहीं और फिर दूसरा प्रश्‍न पुकार लेती हैं। हम इनसे पूछते हैं कि जो आदमी मर गये हैं उनके नाम सूची में नहीं हैं उसके लिए कौन जिम्‍मेदार है? (व्‍यवधान)

डा. किरोड़ी लाल  (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): ये तसल्‍ली से सुने तो मैं जवाब देने को तैयार हूं। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: यदि आप जवाब से असंतुष्‍ट हैं तो और नियम हैं उन नियमों में आइये। (व्‍यवधान)

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): अध्‍यक्ष महोदय, नियम क्‍या हैं, इन्‍होंने जवाब दिया है वह जवाब बिल्‍कुल गलत दिया है इसलिए आप इनके खिलाफ क्‍या कार्यवाही कर रहे हैं? (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: गलत दिया उसके लिए भी नियम हैं उन नियम में आइये। (व्‍यवधान)

 

 

जनजाति उप योजना क्षेत्र के आदिवासियों के विरुद्ध

आबकारी अधिनियम के तहत दर्ज मुकदमे

43. श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): क्‍या गृह मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) क्‍या यह सही है कि सरकार द्वारा जनजाति उपयोजना क्षेत्र के आदिवासियों के विरुद्ध आबकारी अधिनियम के तहत दर्ज मुकदमे वापस लेने की घोषणा की गई थी?

(2) क्‍या यह भी सही है कि आदिवासियों पर 20 (बीस) बोतल तक के दर्ज मुकदमे वापस लेने की घोषणा की गई थी? यदि हां, तो आदिवासियों के विरुद्ध दर्ज ऐसे कितने मुकदमे वापस ले लिये गये? सूची सदन की मेज पर रखें।

गृह मंत्री(श्री गुलाबचन्‍द कटारिया): (1) सरकार द्वार जनजाति उप योजना क्षेत्र के आदिवासियों के विरुद्ध दर्ज आबकारी अधिनियम के तहत 2 वर्ष की सज़ा तक के दर्ज प्रकरण तथा 20 बोतल तक के दर्ज मुकदमे वापस लेने की घोषणा की गई थी।

(2) जी हां। (सूची संलग्‍न है)

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से मैं स्‍पेसिफिक सवाल पूछूंगा। मंत्री जी, मैंने तो सवाल पूछा था सब-प्‍लान इलाके का, आपने पूरे राजस्‍थान का जवाब दिया उसके लिए धन्‍यवाद। 1490 प्रकरण आपने वापस लिये बताये और राजसमन्‍द और बारां भी जोड़ दिये जो मैंने पूछा नहीं था। यह काटने के बाद 1414 मुकदमें आपने वापस लिये। मेरा पहला सवाल तो यह है कि ये मुकदमे कितनी अवधि के हैं, कब से कब तक के हैं?

दूसरा, इसमें पुलिस ने कितने मुकदमे दर्ज किये हैं और आबकारी विभाग ने कितने मुकदमे दर्ज कराये हैं? एक बार जवाब दे दें।

श्री अध्‍यक्ष: आपने तो आबकारी अधिनियम का ही पूछा है, पुलिस का नहीं पूछा है।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): मैं यह चाह रहा हूं कि पुलिस स्‍वयं भी मुकदमे दर्ज करती हूं उसने कितने मुकदमे दर्ज किये और आबकारी विभाग ने कितने मुकदमे दर्ज करवाये और कितनी अवधि है?

श्री अध्‍यक्ष: आपने पूछा उसमें पुलिस का नहीं है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): ये मुकदमे वापस नहीं लेने चाहिए माननीय सदस्‍य?

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): मैं पूछूंगा वो ही जवाब देंगे तो फिर मंत्री जी क्‍या जवाब देंगे? (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय सदस्‍य, ये मुकदमे वापस नहीं लेने चाहिए थे सरकार को? आप विरुद्ध में हो न? बोलो, विरुद्ध में हो तो।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): मान्‍यवर, रुको, शांति रखो, अभी पूछने दो।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): कम से कम काम्‍पीटेंट मिनिस्‍टर हो जब तो मत बोला करो। (व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, सराड़ा से आने वाले माननीय सदस्‍य की जो भावना है, यह घोषणा थी कि आदिवासी क्षेत्र के इस प्रकार के जिसमें 20 बोतल से कम का आबकारी का कोई मुकदमा बना हुआ हो और एक लघु प्रकृति के हैं जिसमें तीन महीने, छह महीने या साल भर की सज़ा है इस प्रकार के प्रकरणों के बारे में यह घोषणा थी और अप्रैल तक का जो आंकड़ा हमारे पास था, जो अप्रेल तक के मुकदमे दर्ज थे हमारे पास इन जिलों के आबकारी के, बांसवाड़ा के 636 मुकदमे इस प्रकार के थे जो इस श्रेणी के आते थे.....

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): एक मिनट, मैं इंटरप्‍ट कर रहा हूं आपको। यह नहीं, ये जो आपने बताये हैं ये कितने सालों के प्रकरण हैं?

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): ये उस तारीख तक, अप्रेल, 2006 गया इसके पहले से लेकर के अप्रेल, 2006 तक के जितने मुकदमे थे जो 20 बोतल से कम के मुकदमे दर्ज थे ऐसे बांसवाड़ा में 636 थे उनमें से 313 हटाये, बारां में 69 थे सहरिया क्षेत्र में उनमें से 39 हटाये, चित्‍तौड़ में 300 मुकदमे थे, ये सारे के सारे मुकदमे केवल आदिवासियों के हैं जो हटाये हैं। इन 300 में से 185....

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, 242 लिये हैं वापस चित्‍तौड़ में।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): डूंगरपुर में 225 में से 145, सिरोही में 320 में से 236, राजसमंद में 44 में से 37, उदयपुर में 1920 में से 478 और सारे मिलाकर के 3514 में से 1433 ये तो थे आबकारी से सम्‍बन्धित। इसी तरह से जो लघु प्रकृति के मुकदमे थे इन जिलों में इनमें बांसवाड़ा में 4119 थे उनमें से 2111 हटाये, बारां में 200 थे उनमें से 90 हटाये, चित्‍तौड़ में 1623 थे उनमें से 235 हटे, डूंगरपुर में 973 थे उनमें से 254 हटे, सिरोही में 636 थे उनमें से 388, राजसमंद में 83 में से 37, उदयपुर में 3896 में से 1012 और कुल 11530 में से 4227 मुकदमे लघु प्रकृति के थे वे हटे। तो आबकारी के और लघु प्रकृति के जो अप्रेल तक हमारे पास सूचना थी सारी जिनमें 20 बोतल से कम के मुकदमे थे या जिनमें लघु प्रकृति की सज़ा थी और उस समय तक के जो सारे मुकदमें थे उनमें से कितने हटाये यह मैंने आपके सामने रखा है।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक्‍साइज के तो समझ में आ गये पर लघु प्रकृति पर आज थोड़ा सा प्रकाश डाल दें कि लघु प्रकृति में किस प्रकार के केसेज आते हैं। अगर इसकी जानकारी दे दें तो बेहतर होगा।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): ......... 341 और इसमें केवल मोटर यान को छोड़कर के इस प्रकार के या फिर ऐसे जिसमें सामान्‍य सज़ा सी है। कुछ सैक्‍शन हैं जिन सैक्‍शंस के तहत जो मुकदमे दर्ज हैं लघु प्रकृति के, ये वैसे सामान्‍यत: अपनी जिला लेवल पर जो अपने कमेटी बनाई हुई है डी जे की अध्‍यक्षता में, वो भी इस प्रकार के लघु प्रकृति के मुकदमे सम्‍पूर्ण राजस्‍थान के अन्‍दर भी इस प्रकार के मुकदमे हटाने की प्रक्रिया है और एक कमेटी बनी हुई है चार लोगों की वो भी उसमें समय समय पर बैठती है और जो इस प्रकार के छोटे किस्‍म के जिसमें सामान्‍य हजार रुपया, 500 रुपया या 50 रुपया जुर्माना है इस प्रकार के केस वे भी अपनी उस निरन्‍तर प्रक्रिया में हटाते हैं। इस क्षेत्र के लिए, जो आदिवासी क्षेत्र है उसमें अप्रेल तक जो भी इस प्रकार के मुकदमे हमने छांटे उनमें से जितने हम हटा पाये, अभी भी कुछ मुकदमे हैं क्‍योंकि उनकी या तो पेशी जिस दि न थी उस दिन अभियुक्‍त उपस्थित नहीं था या न्‍यायालय ने उस दिन बदल दिया तो जैसे-जैसे इनकी तारीख पेशी आती जाएगी वैसे-वैसे मुकदमे विद्ड्रा होते जाएंगे।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): अध्‍यक्ष महोदय, मैं मात्र दो वर्ष 1.4.2004 से 31.3.2005 और 1.4.2005 से 31.3.2006 तक दो वर्ष तक के मुकदमों के बारे में निवेदन करना चाह रहा हूं। मैं सवाल बनाऊंगा इसका वापस इसलिए आप इंटरप्‍ट नहीं करें। कुल दर्ज हुए आपके उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, चित्‍तौड़ और सिरोही में 3179, इस सरकार का ही जवाब है यह, उसमें से मात्र एस टी के 2410 मुकदमे दर्ज हुए। 3179 में से 2410 मुकदमे दर्ज हुए मात्र दो वर्ष में। अब मेरा सवाल यह है कि इतने में से इतने मुकदमे यानि 3179 में से 2410 मुकदमे दर्ज हुए तो क्‍या कारण है कि ये अधिकांश मुकदमे ट्राइबल्‍स के नाम से दर्ज हैं? दूसरा आप 20 बोतल की बात कर रहे हैं, मैं मात्र 10 बोतल तक की बात करूं, एक से 10 बोतल तक की बात करूं तो यह सरकार का ही जवाब है मेरे पास, इसमें उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, चित्‍तौड़ का ही है, इन चार जिलों में 3022 मुकदमों में से 2006 मुकदमे दर्ज हैं, मैं 10 बोतल शराब के, 20 बोतल भी नहीं कह रहा हूं, इतने सारे ट्राइबल्‍स के नाम मुकदमे हैं इसका क्‍या कारण है? सरकार क्‍या महसूस करती है? क्‍या सरकार भविष्‍य में इसके बारे में कोई विचार रखती है कोई नीति बनाने की या कैसे दर्ज होने चाहिए?......

 

vkj/akt/1140/1e

 

एक सवाल का जवाब आपने नहीं दिया। मुकदमे पुलिस ने कितने दर्ज किये थे, आबकारी विभाग वालों ने कितने दर्ज किये, यह आपने क्लियर नहीं किया है।

दूसरा यह सवाल है, क्‍या कारण है इतने मुकदमे ट्राइबलों के नाम दर्ज हैं?

तीसरा, मैं आपसे निवेदन करना चाहूंगा कि क्‍या जनजाति उपयोजना क्षेत्र में या ट्राइबल सब प्‍लान इलाके में....

श्री अध्‍यक्ष: आप प्रश्‍न पूछिये, आप तो भाषण देने लग गये। प्रश्‍न पूछिये।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): नहीं नहीं। क्‍या लिखकर फिर आगे पूछना शुरू किया है, तो जो आबकारी नीति अभी लागू है आपकी, क्‍या यह भारत सरकार के टेम्‍परेंस प्रोग्राम का उल्‍लंघन नहीं है या ट्राइबल के विकास के लिए या उसके अन्‍य उत्‍थान के लिए या अन्‍य गतिविधियों के उत्‍थान के लिए क्‍या सरकार यह महसूस नहीं करती है कि आबकारी नीति वहां ठीक नहीं है?

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, आबकारी नीति का जो निर्धारण होता है, वह किसी एरिये को या किसी व्‍यक्ति और जाति को देख‍कर निर्धारित नहीं होता। उसकी तो अपने सब पर एक समान एक्‍साइज एक्‍ट जो लागू होता है, वह है। ट्राइबल एरिया में चूंकि उनका एक ट्रेडिशनल है और वह महुए की शराब बनाकर अपने स्‍वयं के काम में लेते हैं। इसमें से भी अधिकांश तो मैं सोचता हूं, दर्ज करते नहीं हैं सामान्‍यत: लेकिन कभी-कभी किसी व्‍यक्ति विशेष पर या कोई अभियान में कोई मुकदमे दर्ज हो जाते हैं, वह मुकदमे हैं और हम भी यह महसूस करते हैं कि उनका ट्रेडिशनल है, इस प्रकार से शादी-ब्‍याह, मरण-मौत तक, उसको ही ध्‍यान में रखकर मैं सोचता हूं कि इसको लाने के पीछे जो मंशा है, वह यह है कि उनको कोर्ट के चक्‍कर नहीं लगाना पड़े, आर्थिक दृष्टि से उनको नुकसान नहीं भुगतना पड़े। समय समय पर यह अभियान होता है इस तरह से। पूर्व में भी इस प्रकार से 10 बोतल तक के शराब के मुकदमे हटाने का निर्णय पहले भी हुआ, उस समय तक जो पेंडिंग थे, उस समय जो हट सके, हमने जो निर्णय किया, वह अप्रैल, 2006 के पहले तक के जो हमारे पास पेंडिंग मुकदमे थे, उन मुकदमों को हटाने के लिए हमने प्रयास किये। इसका मतलब यह नहीं है कि कल कोई शराब इस तरह से निकालता हुआ मिल जायेगा तो उस पर मुकदमा नहीं बनेगा, वह बनेगा। यह जो अभियान में अभी तक जो हमने लिये, वह एक कट-आफ डेट तय की है। उस समय तक जो पेंडिंग मुकदमे हैं, वह तो हटाने का क्रम इसमें भी आ रहा है और लघु प्रकृति का मतलब जिसमें अधिक से अधिक दो साल की सज़ा होती है, उस तरह के सारे मुकदमे हैं, वह उसके अन्‍तर्गत समाहित किये हैं।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): माननीय गृह मंत्रीजी, आप बिराजें। आपने एक बड़ी विचित्र स्थिति पैदा कर दी। आप एक्‍साइज के केसेज वापस लें, किसी को एतराज नहीं। आपने एक बात कही यहां पर कि 323 और 341 के केसेज भी आपने लिये हैं और आप ध्‍यान देंगे और जानकारी ले लीजिएगा कि दो आदिवासियों में झगड़ा हुआ, एक के साथ मारपीट हुई, पुलिस के अन्‍दर रिपोर्ट करने गया, उन्‍होंने 323 और 341 का केस दर्ज कर लिया। आपने, सरकार ने उस परिस्थिति में उसको तो न्‍याय मिला नहीं जो एग्रीव्‍ड पार्टी है। जो एग्रीव्‍ड पार्टी है, उसको तो न्‍याय मिला नहीं, सरकार कहां से बीच में आ गई केस विदड्रा करने के लिए। या तो सरकार कम्‍प्रोमाइज कराये, वहां तो समझ में आता है कि सरकार का कोई मैकेनिज्‍म है, आपकी जिला स्‍तरीय समिति है, वह कम्‍प्रोमाइज कराये, वहां तो समझ में आता है लेकिन दो आदिवासी में झगड़ा हुआ, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको एक उदाहरण देता हूं, किसी के साथ मारपीट हुई आदिवासी के संग और आदिवासी के खिलाफ उसने रिपोर्ट की तो कैसे उस केस को विदड्रा करोगे, यह है। (व्‍यवधान)

श्री नन्‍दलाल मीणा (प्रतापगढ़): माननीय सदस्‍य, आपने तो पहले गिरफ्तार कराये हैं।

श्री अध्‍यक्ष: …. competent to withdraw the case.

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): मुझे कुछ नहीं कहना नन्‍दलाल जी, मुझे अब कुछ नहीं कहना क्‍योंकि मैंने तो एक नीतिगत प्रश्‍न उठाया था। अगर आप नहीं चाहते कि मैं पूछूं, तो मैं नहीं पूछता क्‍योंकि मेरी आवाज तो उतनी तेज है नहीं जितनी आपकी आवाज तेज है।

श्री नन्‍दलाल मीणा (प्रतापगढ़): नहीं, आप सवाल को बाई-पास कर रहे हैं

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): तो मैं आपसे इतना ही पूछ रहा हूं कि यह एक विचारणीय प्रश्‍न है, या तो आपको जानकारी विभाग ने सही दी नहीं है। जिला स्‍तरीय समिति जो डिस्ट्रिक्‍ट जज की अध्‍यक्षता में है, उसको कैसे कम्‍प्रोमाइज कराये, कि केस समाप्‍त कर दिया है, अदरवाइज एग्रीव्‍ड पार्टी के साथ यह नेचुरल जस्टिस के खिलाफ है, उसको न्‍याय कहां मिला? पुलिस ने चालान किया रिपोर्ट के आधार पर, आदिवासी की रिपोर्ट के आधार पर, आदिवासी के खिलाफ केस दर्ज हुआ है, उसको आप विदड्रा कैसे करोगे, मेरा प्रश्‍न यह है।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): अध्‍यक्ष महोदय, मेरे सवाल का जवाब नहीं आया। (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, अध्‍यक्ष महोदय। उदयपुर डिवीजन में यह जो 11000 केसेज रजिस्‍टर हुए हैं पुलिस के, क्‍या आपने कभी एनेलेसिस करने की कोशिश की, यह 11000 पेटी केसेज क्‍यों उदयपुर डिवीजन में लागू हुए हैं? 11000 केसेज जो उदयपुर डिवीजन में पेटी क्राइम में रजिस्‍टर हुए हैं, यह सबसे ज्‍यादा विशियस सर्किल है पुलिस का पैसा कमाने का, आदिवासियों के साथ अन्‍याय करने का। मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं विनम्र शब्‍दों में, आप एनेलेसिस करायें, आप नेक्‍सस बना हुआ है वकील और पुलिस वालों के बीच में और गरीब आदमी और आदिवासी के साथ में अन्‍याय हो रहा है। आपको इस बारे में एनेलेसिस करना चाहिए कि यह 11000 केसेज इस बात का इंडीकेशन है, ट्राइबल इलाके के आदिवासियों के लिए जैसा माननीय मंत्रीजी कह रहे हैं कि 323 में नहीं हो सकता है लेकिन वहां जबरदस्‍ती इस तरह के केसेज करके पुलिस वाले और वकील मिलकर वहां के आदिवासियों के साथ शोषण कर रहे हैं इसलिए आपको इस मामले में गम्‍भीरता से विचार करके, एनेलेसिस करके गांव के आदिवासियों को साथ लेने के बारे में निर्णय करना चाहिए और आदिवासियों के जो 10-20 बोतल वाले मामले हैं, आप ब्‍लेंकेट फैसला करिये। जो यह सराडा वाले माननीय सदस्‍य कह रहे हैं कि पहले वहां पर केवल मात्र गंगानगर शुगर मिल से ही शराब मिलती थी। अब आपकी सरकार आने के बाद आपने दूसरों को, प्राइवेट ठेकेदारों को भी अलाऊ कर दिया। आप तो खुद ही उस इलाके के हैं। कमीशनर की व्‍यवस्‍था नहीं हुई, आज आपके वहां पर प्राइवेट ठेकेदार शराब बेच रहा है तो आदिवासियों को कैरी-आउट कराकर क्राइम करवा रहे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: यह प्रश्‍नकाल है, यह प्रश्‍नकाल है। प्रश्‍नकाल है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): प्रश्‍नकाल में ही पूछ रहा हूं अध्‍यक्ष महोदय। माननीय मंत्री महादय ने उस इलाके में इस तरह के केसेज में साइंटिफिक एनेलेसिस करने का काम किया है? (व्‍यवधान) जो क्राइम धौलपुर में होते हैं, जो क्राइम जयपुर में होते हैं, वह क्राइम ट्राइबल इलाके में नहीं होते हैं। आप तो उस इलाके के हो।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अध्‍यक्ष महोदय, वे आदिवासियों के मुकदमे वापस लेने के खिलाफ हैं। (व्यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आप मेहरबानी करके ये 11000 केसेज को एनेलेसिस करके, 11000 को बिलकुल ब्‍लेंकेट विदड्रा करने का काम करिये, यह सबसे बड़ा आदिवासियों के साथ न्‍याय होगा।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): आदिवासियों पर जो मुकदमे लगे हुए हैं, उनको वापस लेने के ये विरुद्ध हैं। आप क्‍या चाहते हैं, यह तो स्‍पष्‍ट करें। क्‍या आदिवासियों के विरुद्ध मुकदमे वापस लिये, आप उनके खिलाफ हैं? (व्‍यवधान)

श्री गौतम लाल मीणा (लसाडि़या): जो उनके मुकदमे वापस लिये, क्‍या आप उनके खिलाफ हो क्‍या? ये मुकदमे वापस लिये हैं, क्‍या आप उनके खिलाफ हो क्‍या? (व्‍यवधान) वकील पैसा खा जाते हैं उसमें।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): आप क्‍या चाहते हैं, यह कृपया स्‍पष्‍ट करें। क्‍या आप उनके पक्ष में नहीं हो? आपके हिसाब से मुकदमे वापस नहीं लिये जाने चाहिए थे? (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मुख्‍य मंत्रीजी से हम मिले, आप नहीं मिले। मुख्‍य मंत्रीजी से हम मिले, नन्‍दलाल जी नहीं मिले। आपके भरोसे नहीं हैं। मुख्‍य मंत्रीजी से आप इस मामले में नहीं मिले हैं। (व्‍यवधान)

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): अध्‍यक्ष महोदय, मैं मंत्री महोदय आपसे यह जानना चाहूंगा, शराब के जितने भी केसेज हुए हैं, उसमें पुलिस विभाग ही क्‍यों दर्ज कर रही है, आबकारी विभाग क्‍या कर रहा है? मेरे विधान सभा क्षेत्र में 90 प्रतिशत शराब के जो केसेज में मुकदमे दर्ज हुए हैं, आपका पुलिस विभाग कर रहा है, आबकारी विभाग एक प्रतिशत भी दर्ज नहीं कर रहा है और उसके पीछे कारण यह है कि पुलिस पैसों से बंधी हुई है।

श्री अध्‍यक्ष: श्री नन्‍दलाल मीणा। श्री नन्‍दलाल मीणा।

एक माननीय सदस्‍य: आपकी मंशा साफ है कि ये आदिवासी बरबाद हो जाये। (व्‍यवधान)

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): मेरे यहां इतनी चोरियां हुई हैं पिछले एक साल के अन्‍दर, एक चोरी नहीं खुली है वहां मंत्री महोदय और मात्र वह शराब के तस्‍करों के पीछे और उनके कहने से, उनके इशारों पर आपकी पुलिस चल रही है। मेरे विधान सभा क्षेत्र से एक भी चोरी का मुकदमा आज तक नहीं खुला है और सिर्फ पुलिस का काम यह रह गया है कि शराब तस्‍करों के कहने से शराब के कैसे मुकदमे बनायें और लोगों को झूठा फंसायें।

श्री अध्‍यक्ष: आप कहां भाषण देने लग गये मिस्‍टर खुशवीर सिंह। (व्‍यवधान) नन्‍दलाल जी, आप बोलिये।

श्री नन्‍दलाल मीणा (प्रतापगढ़): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सबसे पहले तो मैं मंत्री महोदय को और भारतीय जनता पार्टी की सरकार को इस बात के लिए बहुत-बहुत बधाई अर्पित करता हूं कि उन्‍होंने आदिवासी और आदिवासी क्षेत्र के लोगों के जो मुकदमे हुए हैं...(व्‍यवधान)

एक माननीय सदस्य: क्‍या बधाई दे रहे हो, गली-गली में अंग्रेजी शराब की दुकान खुलवा दी। क्‍या बधाई दे रहे हो।

श्री अध्‍यक्ष: यह बधाई देने का समय थोड़े ही है, यह प्रश्‍नकाल है। आप प्रश्‍न पूछिये।

एक माननीय सदस्‍य: अध्‍यक्ष महोदय, प्रश्‍नकाल में बधाई चल रही है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मुख्‍य मंत्रीजी के घर पर नहीं थे आप, आप मुख्‍य मंत्रीजी के घर पर क्‍यों नहीं थे? मुख्‍य मंत्रीजी के घर पर क्‍या फैसला हुआ माननीय मीणा साहब?

श्री नन्‍दलाल मीणा (प्रतापगढ़): आपकी हमेशा से नीयत रही है कि आदिवासियों के ऊपर ज्‍यादा से ज्‍यादा मुकदमे लगे।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): राजस्‍थान विधान सभा के अध्‍यक्ष की कमेटी बनने के बाद आज दिन तक भी फैसला नहीं किया। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान विधान सभा के अध्‍यक्ष की कमेटी बनाई, हम मुख्‍य मंत्रीजी से मिले, उसके बाद फैसला होने की बात कर रहे हैं। (व्‍यवधान) राजस्‍थान विधान सभा में रहने वाले लोग भी ऐसी.... (व्‍यवधान)

श्री नन्‍दलाल मीणा (प्रतापगढ़): मैं माननीय मंत्री महोदय से पूछना चाहता हूं कि....

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आदिवासियों को लडाने का काम किया है इन्‍होंने।

श्री नन्‍दलाल मीणा (प्रतापगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह पूछना चाहता हूं माननीय मंत्री महोदय, जो अप्रैल, 2006 के पहले जो 11000 मुकदमे सरकार ने विदड्रा किये हैं, उसमें महुए से बनने वाली कच्‍ची शराब के हैं।

श्री अध्‍यक्ष: धन्‍यवाद के साथ अब क्‍या प्रश्‍न पूछ रहे हो? आपने तो धन्‍यवाद दे दिया, अब क्‍या प्रश्‍न है?

श्री नन्‍दलाल मीणा (प्रतापगढ़): मैं यह जानना चाहता हूं कि 11000 में से कितने ऐसे मुकदमे हैं जो मटके में महुए सड़ाये गये और उस समय उनको पकड़ लिया और आबकारी अधिनियम के अन्‍तर्गत उन पर मुकदमे बनाये हैं। अध्‍यक्ष महोदय, जब गाय-भैंस ब्‍याती है तो उनको बांटे के तौर पर महुआ दिया जाता है उसको सड़ाकर-गलाकर। आदिवासी क्षेत्र में, आदिवासियों के ऊपर इस तरह के मुकदमे भी बने हैं जो महुए मटकों में बिखरे हुए थे तो मंत्री महोदय यह बतायें...(व्‍यवधान) यह कांग्रेस पार्टी तो शुरू से ही खिलाफ रही है। और सी.पी. जोशीजी, आपको तो कम से कम हमारा साथ देना चाहिए।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मीणा साहब, आप कहां इनके चक्‍कर में आ गये, तो मंत्री नहीं बनोगे। तीन साल हो गये, इनके चक्‍कर में आओगे तो मंत्री नहीं बनोगे। इनके चक्‍कर में मत आओ।

श्री नन्‍दलाल मीणा (प्रतापगढ़): मंत्री बनने में कुछ फायदा नहीं है। सवाल आपकी नीयत का है। कांग्रेस पार्टी की नीयत क्‍या है, यह दर्शाती है कि...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: नैक्‍स्‍ट प्रश्‍न, श्री अमराराम (धोद)। नैक्‍स्‍ट प्रश्‍न, श्री अमराराम (धोद)

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): आबकारी का काम पुलिस कर रही है। इसमें क्‍या आप आबकारी विभाग को पुलिस विभाग में मर्ज करने का विचार रखते हैं। आबकारी विभाग को ही समाप्‍त कर दें।

श्री अमराराम (धोद): प्रश्‍न संख्‍या 44.

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): अध्‍यक्ष महोदय, हमारे सवाल का जवाब नहीं आया है। हमारे सवाल का जवाब नहीं आया है। अध्‍यक्ष महोदय, हमने सवाल यह पूछा था...

 

 

 

 

 

Jkj/akt/11.50/1f/6.10.2006

 

श्री अध्‍यक्ष: आपने भाषण भी दे दिया, प्रश्‍न भी पूछ लिया, उसका जवाब भी दे दिया उन्‍होंने।

श्री रघुवीर सिंह मीणा: क्‍या भाषण दिया, प्‍वाइंटेड सवाल पूछा है, आप अन्‍याय मत करिये।  एक तरफ तो आधा घंटा एक क्‍वेश्‍चन के लिए दे देती हैं, एक तरफ दस मिनट नहीं देती है, क्‍या बात है, आदिवासियों का है। (व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, मेरा सवाल यह है, मैंने मंत्रीजी से पूछा कि आपकी वर्तमान आबकारी नीति के तहत भारत सरकार के टेम्‍परेंस प्रोग्राम का उल्‍लंघन नहीं हो रहा है क्‍या, एक।  दूसरा, आपने एक कमेटी बनाई थी सदन के माननीय सदस्‍यों की, अध्‍यक्षजी ने और हम स्‍वयं मुख्‍य मंत्रीजी से मिले, मुख्‍य मंत्रीजी ने हमारी बात सुनी, उन्‍होंने....

श्री अध्‍यक्ष: यह अलग से प्रश्‍न है। यह अलग से प्रश्‍न है।

श्री रघुवीर सिंह मीणा: अलग से प्रश्‍न नहीं है, इसी से जुड़ा हुआ है।  मुख्‍य मंत्रीजी ने हमको आश्‍वासन दिया था...

श्री अध्‍यक्ष: नो ।  नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन।

श्री रघुवीर सिंह मीणा: कि 19 तारीख को मैं सदन में घोषणा करूंगी।

श्री अमरा राम(धोद): प्रश्‍न संख्‍या 44 ।

श्री रघुवीर सिंह मीणा: अध्‍यक्षजी, एक बात, मंत्रीजी जवाब तो दे रहे थे।

श्री अध्‍यक्ष: आपने जो प्रश्‍न पूछा, आपने पूछ लिया, उसका जवाब मंत्रीजी ने दे दिया, अब आप नीति की, और-और प्रश्‍नों पर चले गये, अब आप नीति पर आ गये। (व्‍यवधान) नीति की बात तो कहीं है नहीं। आपके प्रश्‍न में नीति की बात है नहीं कोई।

श्री रघुवीर सिंह मीणा: नहीं दिया है।  यह पूछा था कि कितने मुकदमे पुलिस के द्वारा दर्ज किये हैं, कितने आबकारी द्वारा दर्ज किये हैं।  पुलिस का धंधा बन गया कि आदिवासी इलाके में अपना टारगेट तय करने के लिए पुलिस घर-घर घूमती है और मुकदमे बनाती है, मैं यह पूछ रहा हूं कितने पुलिस ने दर्ज किये हैं और कितने आबकारी विभाग ने दर्ज करवाये, एक।  दूसरा, क्‍या राज्‍य सरकार इस बारे में कोई विचार कर रही है...

श्री अध्‍यक्ष: अब आप फिर भाषण दे रहे हैं। आप भाषण दे रहे हो।

श्री रघुवीर सिंह मीणा: क्‍या यह राजनीतिक द्वेष से मुकदमे बनाये गये हैं...(व्‍यवधान)

श्री बद्रीलाल जाट: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इनसे यह पूछ लिया जाय कि आदिवासियों के यह मूल रूप से खिलाफ हैं क्‍या। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: नेक्‍स्‍ट प्रश्‍न। श्री अमरा राम धोद।

श्री अमरा राम(धोद): प्रश्‍न संख्‍या 44 ।

श्री संयम लोढ़ा(सिरोही): सिरोही में आपने नेग्‍लीजेंट ड्राइविंग से जो डेथ हुई है, वह मामला भी आपने इसमें विदड्रा किया है। (व्‍यवधान) मैं कह रहा हूं, किया है आपने।

श्री अध्‍यक्ष: मैंने नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन पुकार लिया। आप नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन का जवाब दीजिये।

श्री संयम लोढ़ा: एक मामला नेग्‍लीजेंट ड्राइविंग से डेथ का, वह भी आपने विदड्रा किया है। जो सरकार का फैसला भी नहीं था। (व्‍यवधान)

श्री रघुवीर सिंह मीणा: सरकारी चाहती है कि आदिवासी किसी तरह बरबाद हो जाय, है वहीं का वहीं रहे, उसके बच्‍चे नहीं पढ़ें, उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं हो इसलिए घर-घर में, गली-गली में शराब की दुकानें खोली हैं इस सरकार ने, यह हमारा आरोप है। (व्‍यवधान)

आपराधिक प्रकरणों में पीडि़त आरक्षित वर्ग के व्‍यक्तियों को आर्थिक सहायता

44. श्री अमरा राम(धोद): क्‍या समाज कल्‍याण मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) क्‍या यह सही है कि राज्‍य में अनुसूचित जाति/जनजाति के व्‍यक्तियों की हत्‍या, बलात्‍कार एवं संगीन मारपीट के मामलों में आर्थिक सहायता दी जाती है? यदि हां, तो पिछले दो वर्षों में कितने मामलों में आर्थिक सहायता उपलब्‍ध करवाई गई? जिलेवार संख्‍या सूची सदन की मेज पर रखें।

(2) आर्थिक सहायता हेतु कितने मामले कितने समय से लम्बित हैं? विवरण सदन की मेज पर रखें।

(3) आर्थिक सहायता उपलब्‍ध कराने हेतु जिलेवार कब-कब बैठकें आयोजित की गई तथा निस्‍तारण का प्रतिशत क्‍या रहा?

समाज कल्‍याण मंत्री(श्री मदन दिलावर): (1) जी हां।  487 मामलों में वर्ष 2004-05 में एवं 766 मामलों में वर्ष 2005-06 में आर्थिक सहायता उपलब्‍ध कराई गई है।  जिलों से प्राप्‍त जिलेवार संख्‍या सूची परिशिष्‍ट अ पर सदन की मेज पर रख दी गई है।

(2) आर्थिक सहायता हेतु जिलों में लम्बित मामलों का विवरण परिशिष्‍ट ब पर सदन की मेज पर रख दिया गया है।

(3) आर्थिक सहायता उपलब्‍ध कराने हेतु बैठक की आवश्‍यकता नहीं होती है।  आर्थिक सहायता जिला कलेक्‍टर द्वारा स्‍वीकृत की जाती है।  राज्‍य में पिछले दो वर्षों में कुल 1443 प्रकरण प्राप्‍त हुए हैं जिनमें से 1253 प्रकरणों में आर्थिक सहायता दे दी गई है जो प्राप्‍त प्रकरणों का 86.83 प्रतिशत है। (व्‍यवधान)

श्री सी.डी.देवल(रायपुर): जवाब भेज दें और पढ़ लें, हर मामले में आप अगला प्रश्‍न पुकार लेती हैं...

श्री अध्‍यक्ष: आपकी सलाह की आवश्‍यकता नहीं है आसन को, आपके कहने से नहीं चलने वाला आसन, आसन नियमों से चलेगा।

श्री सी.डी.देवल: आप हर मामले में अगला प्रश्‍न पुकार लेती हैं, हमारा जवाब ही नहीं आता है। नहीं आता है तो फिर प्रश्‍नकाल समाप्‍त कर दीजिये, यह आपका अधिकार है, आप अधिकारों के तहत खत्‍म कर दें।

श्री अध्‍यक्ष: आप अपना स्‍थान ग्रहण कर लें।

श्री सी.डी.देवल: ताकि न रहे बांस, न बजे बांसुरी।  न तो डिस्‍कशन हो और न कोई बात हो। हर मामले में आप अलगा प्रश्‍न पुकार लेते हैं।

श्री अध्‍यक्ष: पधारो आप, ठीक है। (व्‍यवधान)

श्री सी.डी.देवल: कम से कम हमारे साथ आप न्‍याय करें अध्‍यक्ष महोदय, हर मामले में आप सरकार का प्रोटेक्‍शन कर रही हैं।

श्री संयम लोढ़ा: अध्‍यक्ष महोदय, मैंने कहा है कि नेग्‍लीजेंट ड्राइविंग से डेथ का मामला भी आपने विदड्रा किया है।

श्री सी.डी.देवल: अब तक जितने तीन जवाब आये हैं, तीनों मंत्री जवाब नहीं दे सकें और उसके बाद आपने शुरू कर दिया।

श्री अध्‍यक्ष: श्री अमरा राम धोद।

श्री संयम लोढ़ा: अमरा राम धोद तो यहीं विराजमान हैं माननीय अध्‍यक्ष महोदय।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप बीच में नहीं बोलें, वह प्रश्‍न पूछ रहे हैं, यह भी बहुत महत्‍वपूर्ण प्रश्‍न है। सभी प्रश्‍न बहुत महत्‍वपूर्ण हैं...

श्री संयम लोढ़ा: नेग्‍लीजेंट ड्राइविंग से डेथ का मामला भी इन्‍होंने विदड्रा किया है, नेग्‍लीजेंट ड्राइविंग से डेथ का, जो कोई अधिकार नहीं था।

श्री अध्‍यक्ष: आप स्‍थान ग्रहण कर लें, उचित होगा।

श्री अमरा राम(धोद): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से जानना चाहूंगा कि यह जो एससी और एसटी के लोगों के साथ जो हत्‍या, बलात्‍कार और इस तरह की प्रकृति के जो अत्‍याचार होते हैं उनमें आर्थिक सहायता सरकार की तरफ से उनको, पीडि़त को यथाशीघ्र मिले, इस बात के लिए है।  मैं मंत्री महोदय से जानना चाहूंगा कि जिन जिलों के 2004 से 2006 तक दो साल तक पेण्डिंग हैं, 2004 में कोई भी उसके साथ अत्‍याचार हुआ और 2006 तक उसका, जिसमें एक-एक जिले में, दौसा में 43 प्रकरण हैं, चित्‍तौड़गढ़ में 12 हैं, हनुमानगढ़ में 10 हैं और सीकर में 2005 से 22 प्रकरण हैं जो दो साल से ज्‍यादा के प्रकरण हैं जबकि मैं समझता हूं सरकार की भावना यह होगी कि जो भी दलित के साथ अन्‍य जाति के लोगों द्वारा प्रताड़ना होती है उसको तुरंत सहायता मिले तो कोई मकसद होगा।  तीन साल बाद में, चार साल बाद में होगा तो जिन अधिकारियों ने यह लापरवाही बरती है कि आज तक निर्णय नहीं किया, क्‍या उनके खिलाफ आप कार्यवाही करने का इरादा रखते हैं और इनको आर्थिक सहायता कब तक दिला देंगे?

दूसरा, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से जानना चाहूंगा कि आपने कहा है कि इसमें मीटिंग की आवश्‍यकता नहीं है, कलेक्‍टर केवल स्‍वीकृत करता है। तो क्‍या प्रोसीजर है कि जो भी एससी और एसटी के लोगों के साथ जो उत्‍पीड़न हो जाय उसका समाज कल्‍याण विभाग में पुलिस उसका प्रकरण भेजती है या पीडि़त को पक्ष भेजना पड़ता है क्‍योंकि एससी और एसटी के जितने भी मुकदमे हैं उनकी समीक्षा के लिए कलेक्‍टर की अध्‍यक्षता में एक समिति बनी हुई है जिसकी मीटिंग हर महीने होती है और मैं समझता हूं उसी में यह आर्थिक सहायता के भी मुद्दे आते हैं और आपने दिया है कि इसके लिए मीटिंग की आवश्‍यकता नहीं होती। मैं समझता हूं कि उसी में जिसमें समीक्षा होती है उसी के अंदर आर्थिक सहायता की भी समीक्षा की जाती है।

श्री अध्‍यक्ष: प्रश्‍न पूछें आप, प्रश्‍न पूछें।

श्री अमरा राम(धोद): इसलिए मेरा आपके माध्‍यम से निवेदन है कि वह समीक्षा में यह होता है तो किस-किस जिले में, कितने-कितने अंतराज से मीटिंग हुई है और दो साल तक सहायता नहीं मिलने के क्‍या कारण हैं और जिन्‍होंने सहायता समय पर नहीं पहुंचाई, उनके खिलाफ आप क्‍या कार्यवाही करना चाहते हैं?

श्री अध्‍यक्ष: एक-दो जिलों में ही है, 2004 के तो एक-दो जिले में ही हैं, बाकी तो सब, 86 प्रतिशत..

श्री अमरा राम(धोद): एक-दो नहीं हैं। अध्‍यक्ष महोदय, दौसा में 43 प्रकरण हैं।

श्री अध्‍यक्ष: 86 प्रतिशत का तो निपटारा हो गया।

श्री अमरा राम(धोद): नहीं अध्‍यक्ष महोदय, इसके लिए तो यह है कि जितने मुकदमे दर्ज हुए हैं वह यहां सहायता तक पहुंचते ही नहीं है, वरना इतने मुकदमे नहीं हैं।  43 मुकदमे दौसा में है जो 2004 से पेण्डिंग हैं जिनको सहायता नहीं मिली है जबकि यह है कि जितनी राशि सहायता मिलनी चाहिए उसका 50 प्रतिशत मेडिकल आते ही वह सहायता, जैसे मर्डर में एक लाख रूपये है, बलात्‍कार में एक लाख रूपये है, वह 50 प्रतिशत दर्ज और मेडिकल होते ही मिल जानी चाहिए और 50 प्रतिशत चालान होते ही मिल जानी चाहिए थी, मैं समझता हूं दो साल तक अगर नहीं हुआ..

श्री अध्‍यक्ष: हां, तीन जिलों में ही ऐसा है, बाकी जिलों में तो ठीक है काम। तीन जिले हैं, दौसा, चित्‍तौड़गढ़ और हनुमानगढ़। तीन ही जिले हैं।

श्री अमरा राम(धोद): दौसा में 43 हैं, चित्‍तौड़गढ़ में 12 हैं, हनुमानगढ़ में 12 हैं और सीकर में भी 2005 से 22 प्रकरण हैं।

श्री अध्‍यक्ष: तीन हैं ऐसे, हनुमानगढ़, चित्‍तौड़गढ़ और आपका दौसा।

श्री कन्‍हैयालाल मीणा(बस्‍सी): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहूंगा मंत्री महोदय से कि डीआईजी टंडन जिसने मल्‍लीदेवी अनु‍सूचित जनजाति की महिला थी उसके साथ बलात्‍कार किया था...

श्री अध्‍यक्ष: आप प्रश्‍न पूछिये। 

श्री कन्‍हैयालाल मीणा: बलात्‍कार हुआ उसके साथ में, अब तक न कोई उसको सहायता मिली है एक नया पैसा भी और न टंडन गिरफ्तार हुआ है, तो मैं निवेदन करना चाहूंगा कि उस व्‍यक्ति को, उस महिला को अब तक सहायता नहीं दिये जाने का क्‍या कारण है और अब कब तक उसको सहायता दे दी जायेगी और नहीं देने का क्‍या कारण है।

श्री जीतमल खांट(बागीदोरा): कानून बड़े लोगों के लिए नहीं है, छोटे लोगों के लिए है कानून वरना टंडन आज दिन तक पकड़ा जाता।

श्री कन्‍हैयालाल मीणा: पकड़ा भी नहीं गया, उसकी सम्‍पत्ति को कुर्क कर देते गरीब आदमी होता तो।  आज तक उसकी सम्‍पत्ति को कुर्क नहीं किया गया।

श्री अध्‍यक्ष: जवाब दीजिये।

श्री कन्‍हैयालाल मीणा: और यह सब, यह प्रतिपक्ष के राज में ही हुआ है, यह घटना जो घटी है, शेखावत साहब ने जरूर उसको सस्‍पैण्‍ड किया है। तो यह जो जनजाति की महिला के साथ में घटना घटी है मैं मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहता हूं कि इसको सहायता दी जाय। (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान: अब तीन साल से क्‍या कर रहे हो।

श्री अमरा राम(धोद): तीन साल से हो आप और दो साल में भी नहीं पकड़ पाओगे।

श्री जुबेर खान: तीन साल से तो आप बैठे हो।

श्री रामनारायण मीणा: यह गृह मंत्रीजी तो प्‍लान कर रहे हैं...(व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान: और यह वाकया भी तत्‍कालीन मुख्‍य मंत्री भैरोंसिंहजी के समय का है, कांग्रेस के समय का नहीं है, आप यह गलत तथ्‍य मत दीजिये यहां।

एक माननीय सदस्‍य: कांग्रेस के समय का है, कांग्रेस का है...(व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान: भैरोंसिंहजी मुख्‍य मंत्री थे, तब यह मुकदमा दर्ज हुआ था। (व्‍यवधान)

श्री कन्‍हैयालाल मीणा: सस्‍पैण्‍ड किया था शेखावत साहब ने आते ही। शेखावत साहब ने आते ही सस्‍पैण्‍ड किया था, टर्मिनेट किया था उसको। (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा: उसको कब तक गिरफ्तार कर लिया जायेगा?(व्‍यवधान)

श्री कन्‍हैयालाल मीणा: घटना आपके टाइम की है, बाद में ज्‍यों ही दूसरा राज शेखावत साहब का आया उन्‍होंने उसको टर्मिनेट किया । (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: बस्‍सी से आने वाले माननीय सदस्‍य, आपका प्रश्‍न तो अलग से प्रश्‍न है। हां, मंत्रीजी जवाब दीजिये। (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा: नहीं, अलग नहीं है, यह इसलिए है कि इतने मामले पेण्डिंग हैं...(व्‍यवधान)

श्री कन्‍हैयालाल मीणा: अनुसूचित जाति की महिला है और दौसा जिले की रहने वाली है और बलात्‍कार से पीडि़त है, हां।

श्री रामनारायण मीणा: महिलाओं के साथ अन्‍याय हो.....(व्‍यवधान) 

श्री अध्‍यक्ष: आप जवाब सुनिये। (व्‍यवधान) आप माईक ऑन करिये अपना। (व्‍यवधान)

श्री मदन दिलावर: मैं बता दूंगा। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने काफी चिंता जाहिर की इस बात के ऊपर कि अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों पर जो अत्‍याचार होते हैं उनको राशि समय पर मिलनी चाहिए। परंतु इनका यह कहना था कि समय पर राशि नहीं मिल रही है। मैंने पहले ही मेरे जवाब में इनको बताया कि जो राशि देने का हमारा प्रतिशत है, 86 प्‍वाइंट समथिंग हमारा प्रतिशत है, यानि इतना प्रतिशत हम दे रहे हैं। यदि आप पुराना रिकार्ड उठाकर देखेंगी तो 2001-02...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: बीच में नहीं। आप तो, माननीय मंत्री, उन्‍होंने प्रश्‍न पूछा है कि वह जो समिति बनी हुई है कलेक्‍टर की अध्‍यक्षता में, वह किस-किस जिले में...

श्री मदन दिलावर: चार-पाँच प्रश्‍न किये हैं, एक-एक करके दे रहा हूं सब।

श्री अध्‍यक्ष: कब-कब से नहीं हुई, यह बता दें आप तो सिर्फ। (व्‍यवधान)

श्री अमरा राम(धोद): मैंने 2001 का पूछा ही नहीं, यह 2001 का बता रहे हैं।

श्री मदन दिलावर: इन्‍होंने चार-पाँच प्रश्‍न पूछे हैं...

श्री अध्‍यक्ष: आप 2001  पर मत जाओ, 2004 से 2006 तक आओ आप तो।

श्री मदन दिलावर: आपने जो हुक्‍म किया है उसका बता देता हूं। आपने यह कहा है कि कमेटी की मीटिंग हुई कि नहीं हुई, होती है तो किसकी अध्‍यक्षता में होती है, उसका निस्‍तारण कैसे होता है, इसके बारे में डिटेल बतायें...

श्री अध्‍यक्ष: आप तो तीन बातों का जवाब दे दें। यह जो तीन जिले आपके हैं, जहां 2004 के मामले पेण्डिंग हैं....

 

भीम/अरुण/ 6.10.06/12.00/1g

 

 एक तो उनसे जल्‍दी कराओ दूसरा वो मीटिंग किसकी कब-कब नहीं हुई है कब से नहीं हो रही है यह बता दो बस दो ही बात पूछी है उन्‍होंने वो बता दो आप तो बस।

श्री अमराराम (धोद): अध्‍यक्ष महोदय, उसका तो उत्‍तर ही टाल गये ये।

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): अध्‍यक्ष महोदय, इसी में एक बात और पूछना चाहता हूं मंत्री महोदय आप तो ये बता दें कि ये जो मीटिंग होती है ये आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए क्‍या मीटिंग में निर्णय लिया जाता है या निर्णय पहले से होता है?

श्री अमराराम (धोद): ...(व्‍यवधान)... समय पर मीटिंग नहीं बुलाते हैं वो उत्‍तर ही टाल गये।

श्री अध्‍यक्ष: बताने दीजिये आप बताने दीजिये न।

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): मंत्री महोदय, इसी में एक बात बताने का कष्‍ट करें।

श्री अध्‍यक्ष: लूणकरणसर से आने वाले माननीय सदस्‍य उनको जवाब देने दें आप।

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): इसी से जुड़ा प्रश्‍न था।

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो माननीय सदस्‍य यह पूछना चाह रहे हैं कि मीटिंग होती है उसका प्रोसेस क्‍या है और कैसे सहायता राशि स्‍वीकृत होती है। मैं यह बता दूं कि इसमें हमारे जो जिले में नोडल अधिकारी वहां के अतिरिक्‍त जिला कलेक्‍टर होते हैं वो सारी सूचनाएं जो एसपी उपलब्‍ध कराते हैं और उसको प्रोसेस करके जिला कलेक्‍टर के समक्ष वो प्रस्‍तुत करते हैं जिला कलेक्‍टर के समक्ष प्रस्‍तुत करने के बाद वो उसकी स्‍वीकृति जारी करते हैं और हर अपराध के बारे में नार्म्‍स बने हुए हैं अलग-अलग आप यदि हुक्म करें तो मैं डिटेल बता सकता हूं। आपने जो सारे आंकड़े बताये हैं सीकर जिले के उसमें बलात्‍कार, हत्‍या और अन्‍य अपराधों के भी हैं केवल ये बलात्‍कार और हत्‍या के ही नहीं है। बलात्‍कार के मामले में यह है कि चिकित्‍सा जांच के बाद में पचास प्रतिशत देना पड़ता है और जब पुलिस पूरी जांच कर लेती है उसके बाद पचास प्रतिशत का भुगतान करना पड़ता है पुलिस जांच में यह निष्‍कर्ष आ जाए कि वास्‍तव में इसके साथ बलात्‍कार हुआ है तो पचास प्रतिशत बाद में देना पड़ता है इसी प्रकार से हत्‍या के मामले में है हत्‍या हो जाती है तो उसको 75 प्रतिशत हम तुरंत देते हैं और हत्‍या के मामले में भी कमाने वाले का और नहीं कमाने वाले का अलग-अलग है तो कमाने वाले का दो लाख रुपये का 75 प्रतिशत तुरन्‍त देते हैं और नहीं कमाने वाले का एक लाख रुपया होता है उसका 75 प्रतिशत हम देते हैं उसके अलावा मैं आपको डिटेल बता देता हूं यदि डिटेल जानकारी चाहें तो अन्‍य अपराधों में किस-किस प्रकार की सहायता दी जाती है।

श्री अमराराम (धोद): डिटेल नहीं चाहिए आप तो नहीं मिल रही है वो बतायें न। अध्‍यक्ष महोदय, जोधाराम मीणा का अपहरण हुआ..।

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): मैं वो ही बता रहा हूं उसमें सारे अपराध है।

श्री अध्‍यक्ष: प्रश्‍नकाल समाप्‍त हो चुका है अब आप सुन लीजिये।

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ये जो आंकड़े बता रहे हैं आप उसमें हत्‍या और बलात्‍कार ही नहीं है अन्‍य अपराध भी हैं और अन्‍य अपराधों में भी देने की प्रक्रिया अलग-अलग है इसलिए चाहें या तो पर्टीकूलर अपराध बता दें। दो का तो मैंने बता दिया या फिर मैं सारी सूची पढ़ देता हूं कि किस अपराध में किस-किस प्रकार से वो सहायता देते हैं।

श्री अध्‍यक्ष: अब सारी सूची तो 12 बजकर 2 मिनट हो गये हैं।

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): मैं निवेदन करूं दूसरी बात इसकी समीक्षा के लिए ...।

श्री अमराराम (धोद): जिन्‍होंने नहीं दिया दो साल से उनके लिए बताओ न आप तो। जिन्‍होंने दो साल तक नहीं दिया उसके खिलाफ क्‍या कार्यवाही करोगे? यह बतायें। अब सहायता क्‍या है वो हमको पता है। 

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): दो साल का ही बता रहा हूं दो साल का ही बता रहा हूं क्‍योंकि उसमें सब में तुरन्‍त देने का प्रावधान नहीं है कुछ में तो चालान पेश होने के बाद है कुछ में दोष सिद्ध होने के बाद है ।

श्री अमराराम (धोद): आप बता दो सीकर के लक्ष्‍मणगढ़ में जोधाराम मीणा का अपहरण हुआ, मर्डर हुआ उसका चालान हुआ और एक पैसा आज तक आपने नहीं दिया। जो चार साल पहले हुआ, अपहरण हुआ जोधाराम मीणा...।

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): मेरे पास सारी सूची है।

श्री अमराराम (धोद): मर्डर हुआ और एक नया पैसा आज तक नहीं दिया।

श्री अध्‍यक्ष: चालान होने पर होता है भुगतान। चालान होने पर भुगतान हो जाना चाहिए था।

श्री अमराराम (धोद): नहीं हुआ मैं कह रहा हूं । जोधाराम मीणा जिसका अपहरण हुआ, मर्डर हुआ, चालान हुआ और एक नया पैसा आज तक नहीं दिया।

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमको पुलिस सूचना उपलब्‍ध कराती है ...(व्‍यवधान)...श्री अध्‍यक्ष: खैर आप नोट कर लीजिये नहीं हुआ तो पूछिये । पता कर लें।

श्री कन्‍हैया लाल मीणा (बस्‍सी): अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री महोदय वो डीआईजी टण्‍डन वाले का चालान भी हो चुका है चालान होने के बाद भी उसको सहायता नहीं दी गयी है ...(व्‍यवधान)...

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): ...(व्‍यवधान)... दो-दो साल से लेकर बैठे हो।

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): ...(व्‍यवधान)... हुआ है और ...(व्‍यवधान)... हुआ है तो हम उसको सहायता एक महीने के अन्‍दर दिला देंगे।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): एससी/एसटी के लोगों से सद्भावना रखें मंत्री महोदय ...(व्‍यवधान)...

श्री मदन दिलावर (समाज कल्‍याण मंत्री): यदि उसका मर्डर हुआ है और जांच में प्रूव हुआ है कि अट्रोसिटी क