जयगोविन्द/अरुण/06032007/1100/1a
अशोधित
प्रति/प्रकाशनार्थ
नहीं
राजस्थान
विधान सभा की
कार्यवाही का
वृत्तान्त
अंक
: 7
बारहवीं
विधान सभा के
सातवें सत्र
का छठा दिवस संख्या
: 4
मंगलवार, 06
मार्च, 2007
राजस्थान
विधान सभा की
बैठक 11.00 बजे
विधान
सभा भवन,
जयपुर में
प्रारम्भ
हुई।
(
श्रीमती
सुमित्रा
सिंह, अध्यक्ष,
पदासीन )
श्री अध्यक्ष: श्री नन्दलाल पूनिया।
श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्यक्ष महोदय, जिस सरकार के कैबिनेट मंत्री पर विधान सभा के बिलकुल सामने हमला हो गया..।
श्री अध्यक्ष: आप क्वेश्चन ऑवर के बाद यह बात उठाइए। गलत बात है। क्वेश्चन ऑवर होने दीजिए। ...(व्यवधान)... क्वेश्चन ऑवर होने दीजिए।
श्री जुबेर खान (रामगढ़): मंत्रिमण्डल के सदस्य के ऊपर जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता हमला कर रहे हैं...। ...(व्यवधान)...
श्री अध्यक्ष: अंकित न हो।
श्री हीरालाल (निवाई): 000
श्री धर्मपाल चौधरी (मुण्डावर): 000
श्री जुबेर खान (रामगढ़): 000
श्री अशोक बैरवा (खण्डार): 000
श्री गुलाब चन्द कटारिया (गृह मंत्री): 000
श्री अध्यक्ष: माननीय मंत्रीजी, प्रश्नकाल होने दीजिए। ...(व्यवधान)...
श्री अशोक बैरवा (खण्डार): 000
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): 000
श्री अध्यक्ष: अंकित न हो।
श्री अशोक बैरवा (खण्डार): 000
श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000
श्री अध्यक्ष: मैं आपसे कहना चाहूंगी कि यह सदन नियमों से चलता है, खण्डार से आने वाले माननीय सदस्य।
श्री अशोक बैरवा (खण्डार): 000
श्री अध्यक्ष: अंकित न हो।
श्री अशोक बैरवा (खण्डार): 000
श्री अध्यक्ष: आपकी तबीयत खराब है। आप आसन ग्रहण कर लें। आपकी तबीयत खराब है, स्थान ग्रहण करिए।
श्री अशोक बैरवा (खण्डार): 000
श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): 000
श्री अध्यक्ष: माननीय सदस्यगण। आप प्रश्न काल होने दीजिए। प्रश्नकाल के बाद इन बातों को उठाया जाता है। ...(व्यवधान)...
श्री अशोक बैरवा (खण्डार): 000
श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000
श्री रामलाल शर्मा (चौमूं): 000
श्री अध्यक्ष: श्री नन्दलाल पूनिया।
श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्द): 000
श्री धर्मपाल चौधरी (मुण्डावर): 000
श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्द): 000
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): 000
श्री अशोक बैरवा (खण्डार): 000
श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्द): 000
श्री अध्यक्ष: आप लगातार चौथे दिन प्रश्नों की बलि क्यों चढ़ाए जा रहे हैं। आप स्थान ग्रहण करिए। ...(व्यवधान)... खण्डार से आने वाले माननीय सदस्य, आप मुझे मजबूर न करें। आप चार दिन से प्रश्नों की बलि चढ़ाए जा रहे हैं। लोगों के इतने महत्वपूर्ण प्रश्न है। ...(व्यवधान)... मैंने कहा सिट डाउन। सदन के नियम हैं, आपको कोई भी महत्वपूर्ण बात, चर्चा करनी है तो आप प्रश्नकाल के बाद करिएगा। आप महत्व कम कर रहे हैं इस बात का इस समय उठा कर। जीरो ऑवर में उठाइए यह बात। उसके बाद उठा सकते हैं यह बात। प्रश्नकाल शुरू होते ही, चार दिन हो गए, मैं देख रही हूं ...(व्यवधान)... अब प्लीज बैठिए। श्री नन्दलाल पूनिया।
श्री नन्दलाल पूनिया (सादुलपुर): प्रश्न संख्या 38.
श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000
श्री
बाबूलाल नागर
(दूदू): 000
श्री जुबेर खान (रामगढ़): 000
श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000
श्री धर्मपाल चौधरी (मुण्डावर): 000
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): 000
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): 000
श्री धर्मपाल चौधरी (मुण्डावर): 000
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): 000
श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000
Gpc/akt/06032007/1110/1b
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): 000
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा): 000
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): 000
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा): 000
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): 000
श्री
अध्यक्ष:
प्रश्नकाल
है। आप तो
बैठिए। आप
विराजिए। ..(व्यवधान)..
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा): 000
श्री
अमराराम (धोद): 000
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
000
श्री
धर्मपाल
चौधरी (मुण्डावर):
000
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द): 000
श्री
हीरालाल
(निवाई): 000
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा): 000
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा): 000
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): 000
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): 000
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): 000
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
000
डा.
बुलाकीदास
कल्ला
(बीकानेर): 000
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द): 000
श्री
नरपत सिंह
राजवी (उद्योग
मंत्री): 000
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): 000
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा): 000
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
000
श्री
अमराराम (धोद): 000
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा): 000
मोहन/अरूण/अशोधित
प्रति
प्रकाशनार्थ
नहीं/06032007/1120/1c
श्री
महावीर
प्रसाद जैन: 000
श्री
प्रद्युम्न
सिंह: 000
श्री अध्यक्ष:
माननीय सदस्यगण,
राजाखेड़ा से
आने वाले
माननीय सदस्य, माननीय
सदस्यगण, सदन
के कुछ नियम
हैं, मैंने
आपसे कहा था
प्रारंभ में
कि क्वेश्चन
ऑवर हो जाने
दीजिए। न किसी
की पर्ची आई
इस मामले में,
यदि आप गंभीर
थे इस मामले
में, आपको यह
प्रश्न
उठाना था तो
पर्ची के माध्यम
से, स्थगन
प्रस्ताव के
माध्यम से
...(व्यवधान)...
बीच में नहीं
बोलेंगे, कोई
नहीं बीच में
बोलेगा। स्थगन
प्रस्ताव के
माध्यम से,
पर्ची के माध्यम
से आप इस
प्रश्न को
उठा सकते थे
और मैं मंजूर
करती उसे
लेकिन तब तो
किसी को भी यह
याद नहीं आया,
अख़बार सब ने पढ़ा,
किसी को याद
नहीं आया,
यहां आकर सब
शेर बन रहे
हैं और सब
अपनी अपनी
जिसे कहना
चाहिए लंग पावर
का पूरा इस्तेमाल
कर रहे हैं।
अब प्रश्न
काल होने
दीजिए उसके
बाद में इस
बारे में आपके
गृह मंत्री जी
अपना वक्तव्य
दे देंगे, बता
देंगे लेकिन
अब प्रश्न
काल चार दिन
हो गये हैं, अब
प्रश्न काल
होने दीजिए,
अब बीच में न
बोलें, प्रश्न
संख्या एक,
श्री नन्द
लाल पूनिया।
कन्या
उच्च
प्राथमिक
विद्यालय
नेसल एवं
डिगली (चूरू)
का क्रमोन्नयन
38. श्री नन्दलाल
पूनिय
(सादुलपुर):क्या
शिक्षा
मंत्री यह
बताने की कृपा
करेंगे :-
(1) राज्य
में कन्या
माध्यमिक
विद्यालय
क्रमोन्नति/स्वीकृति
के क्या
मापदण्ड हैं?
(2) क्या यह
सही है कि कन्या
उच्च
प्राथमिक
विद्यालय
नेसल एवं
डिगली तहसील राजगढ़
उक्त मापदण्ड
में आते हैं ?
यदि हां, तो
उक्त गांवों
के कन्या उच्च
प्राथमिक
विद्यालयों
को कब तक
क्रमोन्नत
कर दिया
जावेगा ?
राज्य
मंत्री, शिक्षा
(श्री वासुदेव
देवनानी): (1)
विद्यालय
क्रमोन्नति
हेतु
निर्धारित
मापदण्ड की
प्रति का
परिशिष्ठ 'क'
संलग्न है।
(2) राज्य
सरकार के
उपलब्ध वित्तीय
प्रावधानों
के तहत
निर्धारित
मानदण्ड की
प्रति करने
वाले
विद्यालयों
के प्रस्तावों
पर गुणावगुण
के आधार पर
समग्र विचार
करने के पश्चात्
विद्यालय
क्रमोन्नति
की स्वीकृति
प्रदान करती
है। नेसल एवं
डिगली के प्रस्ताव
प्राप्त
होने पर अन्य
प्रस्तावों
के साथ
गुणावगुण के
आधार पर समग्र
विचार किया
जाकर उपलब्ध
वित्तीय
प्रावधानों
के तहत ही
निर्णय लिया
जाना संभव हो
सकेगा।
श्री अध्यक्ष:
माननीय
शिक्षा
मंत्री जी,
यदि मैं भूलती
नहीं हूं तो
यहां पर
शिक्षा
मंत्री जी ने
घोषणा की थी,
घनश्याम जी
तिवाड़ी ने कि
कन्याओं के
जितने भी स्कूल
हैं किसी भी
स्तर के हों
उन स्कूलों
की क्रमोन्नति
की जाएगी। यह
घोषणा सदन में
की थी और अब आप गुणावगुण
पर आ गये।
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा):
अध्यक्ष
महोदय,
मेरा निवेदन
सुन लें। इन्होंने
डिगली और नेसल
के बारे में
कहा है। डिगली
की जनसंख्या
केवल 1847 है,
मानदण्ड के
अनुसार ढाई
हजार चाहिए।
श्री अध्यक्ष:
उस समय जनसंख्या
की बात नहीं
थी, क्यों की
फिर इन्होंने
घोषणा?
श्री वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा):
नेसल के अन्दर
हमने सीनियर
सैकण्डरी स्कूल
क्रमोन्नत
कर रखा है।
श्री नन्दलाल
पूनिया
(सादुलपुर):
नहीं, नेसल
में मापदण्ड
से ज्यादा है
आपकी
पापुलेशन।
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा):
नेसल में
मापदण्ड के
आधार पर केवल
सैकण्डरी स्कूल
चाहिए था,
हमने उसकी जगह
सीनियर सैकण्डरी
स्कूल जिसे
चार हजार
चाहिए केवल 2582
होने पर भी
हमने यह
सीनियर सैकण्डरी
स्कूल बना
दिया है, सारी
छात्राएं
वहां पढ़ रही हैं,
किसी भी
छात्रा को इस
कारण से पढ़ाई
में व्यवधान
नहीं है,
सरकार जो है
वह बालिका
शिक्षा के लिए
प्रतिबद्ध
है। उसके लिए
हमने जितने
कदम उठाये
हैं, इस आधार
पर
विद्यालयों
में नामांकन
पिछले तीन वर्षों
के अन्दर 18
प्रतिशत से
बढ़कर 32.7
प्रतिशत हो
गया है और 6 लाख
से अधिक
नामांकन हुआ
है। ...(व्यवधान)...
श्री सी. डी.
देवल (रायपुर):
अध्यक्ष
महोदय ने जो
कहा है उसका
यह कोई जवाब
नहीं है। अध्यक्ष
महोदय ने जो
प्रश्न किया
है उसका यह
जवाब नहीं है।
...(व्यवधान)...
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा):
निशुल्क
साइकिलें
पहले उपलब्ध
कराई हैं। ...(व्यवधान)...
श्री अध्यक्ष:
मूल प्रश्नकर्ता
पूछना चाहें
तो पूछें,
आपको क्या
आवश्यकता है,
जब बात हो गई,
आसन ने कह
दिया, आप क्यों
खड़े हैं,
बिराजिए, स्थान
ग्रहण करिये,
बीच में न
बोलें। मुझे
सपोर्ट की
आवश्यकता
नहीं है आपकी,
आसन को आपकी
कोई आवश्यकता
नहीं है।
मैंने याद दिलाया
है।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
हमको आसन की
गरिमा को मेंटेन
रखना है।
श्री अध्यक्ष:
सुनिए, मैंने
याद दिलाया है
उन्हें
लेकिन आप कहें
हम आसन को
सपोर्ट कर रहे
हैं।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
आसन की गरिमा
का प्रश्न
है, यह आसन का
आब्जर्वेशन
है।
श्री संयम
लोढ़ा
(सिरोही): अध्यक्ष
महोदय,
आपने कहा उसका
जवाब कहां
दिया है।
श्री अध्यक्ष:
अब आपको गरिमा
की याद आई और
उस दिन तो शोकाभिव्यक्ति
पर गरिमा की
नहीं याद आई
थी। ...(व्यवधान)...
श्री
वासुदेव
देवनानी (राज्य
मंत्री, शिक्षा):
अध्यक्ष महोदय, हमने 1262
पीएस को यूपीस
में क्रमोन्नत
कर दिया है।
...(व्यवधान)... यह
1262 गर्ल्स
पीएस से यूपीस
किये हैं।
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
माननीय
मंत्री जी ने
जो हाउस में
कमिटमेंट
दिया है उसके
बारे में बोलिए,
बाकी के बारे
में क्या
बोलते हैं ?
श्री घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): हां,
हां, बोल देंगे
हाउस में।
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
मैंने पहले
कहा था, आपने
मेरी भावना
ठीक से शायद,
मैं समझता
हूं, मैंने
पहले कहा था
कि जितनी भी
लड़कियों के
स्कूल हैं,
उनको हम
लगातार
क्रमोन्नत
करना चाहते
हैं और इसलिए
पहली बार हमने
जितनी
लड़कियों के
प्राथमिक
विद्यालय
राजस्थान
में थे इस बार
एक आदेश से
सारे के सारे
प्राथमिक
विद्यालयों
को उच्च
प्राथमिक
विद्यालयों
में बदल दिया
है। इसमें
कांग्रेस के
विधायकों की
भी कांस्टीट्यूएंसी
है और बी.जे.पी.
के विधायकों
की भी हैं।
इसी प्रकार से
अब जो बजट
आएगा।
श्री
हेमाराम
चौधरी
(गुढ़ामालानी):
आपको मैं नाम
से बता दूंगा,
क्या बात
करते हो आप ?
बहुत
प्राइमरी
बालिकाएं अभी
तक क्रमोन्नत
नहीं की गई
हैं।
श्री घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): नहीं
हो गये हैं न
आदेश। ...(व्यवधान)...
श्री हेमाराम
चौधरी
(गुढ़ामालानी):
सभी बालिका
विद्यालय
क्रमोन्नत
नहीं हुए हैं।
श्री घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): आप
नहीं सुनना चाहते
हैं, आप मत
सुनें। ...(व्यवधान)...
अध्यक्ष
महोदय,
सारे राजस्थान
में प्राथमिक
बालिका
विद्यालय
जितने भी हैं
उनको उच्च
प्राथमिक
विद्यालयों
में क्रमोन्नति
के आदेश जारी
हो चुके हैं।
श्री
हेमाराम
चौधरी
(गुढ़ामालानी):
यह बिलकुल
नहीं हुए हैं,
मैं आपको नाम
से बता दूं।
...(व्यवधान)...
मेरे विधान
सभा क्षेत्र
में कम से कम 8-9 प्राथमिक
विद्यालय हैं
क्रमोन्नत
नहीं हुए हैं1
श्री अध्यक्ष:
ये प्राथमिक
शालाओं के आये
थे प्रस्ताव
इनके पास उनको
तो किया है।
जिनके नहीं
प्रस्ताव आ
पाये वह नहीं
हुए।
श्री घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): नहीं,
ऐसा नहीं है।
...(व्यवधान)...
जोशी जी,
सुनिए राजस्थान
में जितने
प्राथमिक
विद्यालय
लड़कियों के
थे।
श्री अध्यक्ष:
यह तो ठीक है।
श्री घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): 1500
बालिका
विद्यालयों
उनमें से 1200 के
तो आदेश जारी
हो चुके हैं, 300 जो
बचे हैं उनकी
संख्या कम थी
उनके भी आदेश
कर दिये हैं।
इस साल का जो
सत्र चालू
होगा उस सत्र
से वह भी उच्च
प्राथमिक विद्यालय
हो जाएंगे।
...(व्यवधान)...
सुन लीजिए
अग्रवाल साहब,
पहले। नम्बर
एक।
श्री अध्यक्ष:
पूरी सुन लें।
श्री घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): नम्बर
दूसरी, तीन
प्रकार के
आदेश किये
हैं, अध्यक्ष
महोदय, नम्बर
एक जितनी
राजीव गांधी
पाठशालाएं थी
सारे राजस्थान
भर में उन
पाठशालाओं को
उच्च
प्राथमिक
पाठशालाओं
में
परिवर्तित कर
दिया गया है,
नम्बर एक।
जितनी संस्कृत,
इनको
प्राथमिक
किया राजीव
गांधी पाठशालाओं
को, राजीव
गांधी
पाठशालाओं को
सब को प्राथमिक
पाठशालाओं
में क्रमोन्नत
कर दिया गया
है सारे राजस्थान
भर में । इसी
प्रकार से,
जितनी बालिका
विद्यालय
प्राथमिक थे
उन सारे
बालिका
विद्यालयों
को उच्च
प्राथमिक में
परिवर्तित कर
दिया गया है।
नम्बर तीन,
संस्कृत की
जितनी
पाठशालाएं थी
प्राथमिक की
उन सब को भी
उच्च
प्राथमिक में
परिवर्तित कर
दिया गया है
जिनमें अगर
रूक गई हैं
कोई किसी कारण
से लड़कियों
की संख्या कम
अधिक होने से,
उन स्कूलों
को भी नया जो
शिक्षा सत्र
प्रारंभ होगा,
उच्च
प्राथमिक में
परिवर्तित कर
दिया जाएगा,
सब विधान सभा
क्षेत्रों
में, एक।
तीसरी बात मैं
कहना चाहूंगा
कि माध्यमिक
शिक्षा के
बारे में जो
प्रश्न था,
वैसे जो नेसल
है, नेसल में
वहां तो
सीनियर सैकण्डरी
स्कूल है और 256
बालिका वहां
पर पढ़ रही
हैं इसलिए पूनिया
साहब, यह संभव
नहीं है कि हर
पंचायत पर लड़के
और लड़कियों
की दो अलग अलग
सैकण्डरी और
सीनियर सैकण्डरी
रखें। फिर भी
लड़कियों के
लिए कोई व्यवस्था
और करनी होगी।
...(व्यवधान)... 256 ....
श्री अध्यक्ष:
यह तो कन्या
उच्च
प्राथमिक को
माध्यमिक
में क्रमोन्नत
करने का प्रश्न
है।
श्री घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): नहीं,
नहीं, मैं भी
यही कह रहा
था। कन्या
उच्च
प्राथमिक को
माध्यमिक
चाहाते हैं
लेकिन वहां पर
आलरेडी
सीनियर सैकण्डरी
है जिसमें
लड़के
लड़कियां
दोनों पढ़ रहे
हैं और 256
लड़कियां
उसमें आलरेडी
पढ़ रही हैं तो
सरकार के
संसाधनों को
देखते हुए यह
संभव नहीं है,
सब जगह जहां
सीनियर और
सैकण्डरी स्कूल
हैं, सब जगह
लड़के और
लड़कियों के
लिए अलग अलग
किया जाय,
संभव नहीं है
लेकिन मैं
आपको यह विश्वास
दिला सकता हूं
कि इस बार हम
कोशिश
करेंगे। भारत
सरकार से
प्रयत्न
किया और मैं
आपको सूचना
देना चाहूंगा,
अध्यक्ष
महोदय,
मुझे खुशी है
कि जिस कमेटी
का मुझे
चेयरमैन बनाया
था मानव
संसाधन
मंत्रालय ने,
उस कमेटी की
सिफारिशें
भारत सरकार ने
स्वीकार कर
ली है और
सैकण्डरी
शिक्षा में भी
इस बार ऊपर से
हमको मदद मिलेगी
तो पूरी कोशिश
करेंगे जो सदन
में मैंने बात
कही थी आपके
निर्देश पर
उसकी पालना
करने कर पूरा
प्रयत्न
करेंगे।
श्री नन्दलाल
पूनिया
(सादुलपुर):
कोशिश नहीं,
साहब, यह तो आप
घोषणा ही करो।
...(व्यवधान)...
श्री
रामप्रताप
कासनिया
(पीलीबंगा):
अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से मंत्री
महोदय का ध्यान
इस ओर आकर्षित
करवाना चाहता
हूं कि शिक्षाकर्मी
जो विद्यालय
हैं।
श्री अध्यक्ष:
यह डिगली,
नेसल का प्रश्न
था। ...(व्यवधान)...
नो, नो, डिगली
और नेसल का
सवाल था उसका
जवाब उन्होंने
दे दिया है।
श्री
दुर्गाप्रसाद
अग्रवाल
(गंगापुर):
नहीं, जवाब पूरा
नहीं आया है
अध्यक्ष
महोदय।
श्री अध्यक्ष:
श्री कैलाश
त्रिवेदी।
...(व्यवधान)...
श्री
दुर्गाप्रसाद
अग्रवाल
(गंगापुर):
मेरा छोटा सा
प्रश्न है।
श्री अध्यक्ष:
मूल प्रश्नकर्ता।
Skp/akt/06032007/1130/1d/1
श्री नन्दलाल
पूनिया
(सादुलपुर):
मेरा सवाल
अधूरा रह गया
है। जैसे
डिगली का
मामला है,
डिगली में कन्या
उच्च
प्राथमिक
विद्यालय और
वहां पर
प्राइमरी स्कूल
बच्चों का
है। छठी कक्षा
में प्रवेश के
लिए बच्चे
दूसरे गांवों,
सुलखनियां,
नौरंगपुरा,
थिरपाली बड़ी
में जाते हैं
तो क्यों
नहीं उनको छठी
कक्षा में उस
कन्या स्कूल
में एडमिशन दे
दिया जाए। यह
आप नहीं कह सकते
तो कम से कम
आठवीं की स्कूल
खोल दीजिये
बच्चों के
लिए। कुछ तो
करो साहब, मैं
तीन साल से
आपसे इस सम्बन्ध
में निवेदन कर
रहा हूं।
श्री घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): आप
चाहते हैं कि लड़कियों
की स्कूल को
कॉमन कर दें?
श्री नन्दलाल
पूनिया
(सादुलपुर): जी
सर।
श्री घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री): हां,
कर देंगे। कोई
दिक्कत नहीं
है। उसमें क्या
समस्या है,
कर देंगे।
श्री अध्यक्ष:
प्रश्न संख्या
39 श्री कैलाश
त्रिवेदी।
श्री कैलाश
त्रिवेदी।
मैंने नैक्स्ट
क्वेश्चन
पुकार लिया
है।
चौधरी
विनोद कुमार
(हनुमानगढ़):
जो विद्यालय
क्रमोन्नत
हुए हैं उनमें
क्या अध्यापकों
के पद सृजित
किये गये हैं?
मेरे ख्याल
में नहीं किया
गया है। (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
मैंने नैक्स्ट
क्वेश्चन
पुकार लिया
है। श्री
कैलाश
त्रिवेदी।
श्री
दुर्गाप्रसाद
अग्रवाल
(गंगापुर):
शिक्षा मंत्री
महोदय, मेरा
आपसे यह
निवेदन है कि
वजीरपुर में
कन्या माध्यमिक
विद्यालय है और
पिछले 9 वर्ष
से वह क्रमोन्नत
नहीं हुआ है।
(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
मिस्टर
त्रिवेदी। (व्यवधान)
मैंने नैक्स्ट
क्वेश्चन
पुकार लिया
है।
श्री
दुर्गाप्रसाद
अग्रवाल
(गंगापुर):
वहां पर साढ़े
तीन सौ
लड़कियां
पढ़ती हैं।
आपने यह कहा
है, आपने अपने
उत्तर में
परिशिष्ट ‘क’ में यह
लिखा है कि
सामान्य
क्षेत्र में
तीन हजार
लड़कियां
होनी चाहिए और
ग्रामीण
क्षेत्र में
ढाई हजार
लड़कियां होनी
चाहिए। (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
मैंने नैक्स्ट
क्वेश्चन
पुकार लिया
है। (व्यवधान)
श्री घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री):
लड़कियां
नहीं, जनसंख्या।
(व्यवधान)
श्री
दुर्गाप्रसाद
अग्रवाल
(गंगापुर):
जनसंख्या है
तो मैं इसलिए
आपसे यह पूछना
चाहता हूं कि
जहां..... (व्यवधान)
कन्या माध्यमिक
विद्यालय हैं
और.... (व्यवधान)
श्री
दुर्गाप्रसाद
अग्रवाल
(गंगापुर):
उसमें साढ़े
तीन सौ लड़कियां
पढ़ती हैं।
आपने मेरे
बार-बार निवेदन
करने के
उपरांत भी
उसको क्रमोन्नत
क्यों नहीं
किया? (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
सहायता
मंत्री प्लीज।
स्थान ग्रहण
करें। (व्यवधान)
श्री
दुर्गाप्रसाद
अग्रवाल
(गंगापुर):
वजीरपुर का मेरा
निवेदन है
आपसे। आप मुझे
आश्वासन दे
दीजियेगा।
मैं कई बार कह
चुका हूं। अध्यक्ष
महोदय, मेरा
जब डेलिगेशन
इनके पास में
गया तो इन्होंने
यह कहा कि
कांग्रेसी
जमाने में
क्रमोन्नत
करवा
लीजियेगा। (व्यवधान)
तो यह कोई
जवाब हुआ।
श्री अध्यक्ष:
स्थान ग्रहण
कर लीजिये। स्थान
ग्रहण करें।
गंगापुर से
आने वाले
माननीय सदस्य,
स्थान ग्रहण
कर लीजिये।
(व्यवधान)
श्री
दुर्गाप्रसाद
अग्रवाल
(गंगापुर): अध्यक्ष
महोदय, हमारी
भी तो बात
कहने
दीजियेगा। हम
यहां पर जो
आये हैं, अपने
क्षेत्र की
समस्याओं को
रखने के लिए
आये हैं। (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
प्लीज। (व्यवधान)
पूरे क्षेत्र
की समस्या का
प्रश्न नहीं
है। यह केवल
डिगली और नेसल
का प्रश्न है
और समस्या का
प्रश्न बाद
में
उठाइयेगा।
श्री
दुर्गाप्रसाद
अग्रवाल
(गंगापुर): कन्या
विद्यालय को
क्रमोन्नत
करने की बात
है। (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
क्षेत्र की
समस्या बाद
में। (व्यवधान)
श्री संयम
लोढ़ा
(सिरोही): अध्यक्ष
महोदय, यह जो
जवाब दिया है
मंत्री जी ने
कि गुणावगुण
के आधार पर
किया जाता है
तो गुण तो यह
है कि बी जे पी
के एम एल ए हों
और अवगुण यह
कि कांग्रेस
का एम एल ए हो
और उस आधार पर
पूरे राजस्थान
में कर रहे
हो। पूरे
राजस्थान
में भेदभाव कर
रहे हो आप। (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
आपकी परिभाषा
है, धन्यवाद।
(व्यवधान)
आपकी परिभाषा
के लिए धन्यवाद
आपको। (व्यवधान)
श्री
दुर्गाप्रसाद
अग्रवाल
(गंगापुर):
आपने यह बात
कही है
डेलिगेशन से।
(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
सहायता
मंत्री। बीच
में नहीं
बोलें। (व्यवधान)
विधान
सभा क्षेत्र
सहाड़ा के
अतिवृष्टि से
क्षतिग्रस्त
नहर/सड़कें
39. श्री
कैलाश
त्रिवेदी
(सहाड़ा): क्या
सहायता
मंत्री यह
बताने की कृपा
करेंगे:-
(1) क्या यह
सही है कि
विधान सभा
क्षेत्र
सहाड़ा में
वर्ष 2006 में हुई
अतिवृष्टि से
नहरें, तालाब,
सड़कें, पुलिया
आदि
क्षतिग्रस्त
हुई हैं तथा
सरकार द्वारा
उनका सर्वे
कराया जा चुका
है? यदि हां, तो
सर्वे
रिपोर्ट की
प्रति सहित
विवरण सदन की
मेज पर रखें।
(2) क्या
सरकार इनकी
मरम्मत
कराने का
विचार रखती
है? यदि हां, तो
कब तक व नहीं,
तो क्यों?
सहायता
मंत्री (डा.
किरोड़ी लाल): (1)
जी हां, यह सही
है कि विधान
सभा क्षेत्र
सहाड़ा में
वर्ष 2006 में हुई
अतिवृष्टि से
नहरें, तालाब,
सड़कें,
पुलिया आदि
क्षतिग्रस्त
हुई हैं। जी
हां, सर्वे
कराया जा चुका
है। सर्वे की
रिपोर्ट
संलग्न है।
(परिशिष्ट-1)
(2) जी हां,
प्राकृतिक
आपदाओं से हुए
नुकसान की तत्काल
मरम्मत
कराने के लिए
सी. आर. एफ.
नार्म्स के
अनुसार
सहायता दी
जाती है। इस
दृष्टि से अतिवृष्टि
से नुकसान की
तत्काल
सहायता हेतु
जिला कलेक्टर
भीलवाड़ा को 43
लाख रुपये की
राशि आवंटित
की गई थी
जिसमें से
जिला कलेक्टर
द्वारा 42 लाख
रुपये का व्यय
किया जा चुका
है। इन सम्पत्तियों
का
पुनर्निर्माण
सम्बन्धित
विभाग के स्तर
पर उनके पास
उपलब्ध राशि
अनुसार ही
किया जाता है।
श्री
कैलाश
त्रिवेदी
(सहाड़ा):
माननीय
मंत्री महोदय,
यह 43 लाख रुपये
की राशि
भीलवाड़ा
जिला कलेक्टर
को कब प्रदान
की गई? नम्बर
एक। आपने जो
सर्वे
रिपोर्ट दी है
इसमें इर्रिगेशन
के टैंक्स
टूटे हैं,
इर्रिगेशन के
एनीकट्स टूटे
हैं उसकी
सर्वे
रिपोर्ट भी इस
जवाब के साथ
नहीं है, सिर्फ
दोनों पंचायत
समितियों की
है और पी डब्ल्यू
डी की है। तो
मैं आपसे यह
पूछना चाहता
हूं कि एक तो
भीलवाड़ा
जिला कलेक्टर
को आपने यह 43
लाख रुपये की
राशि कब दी और
मेरे विधान
सभा क्षेत्र
की दोनों
पंचायत
समितियों में
कलेक्टर
द्वारा
कितनी-कितनी
राशि इस 43 लाख
रुपये में से
ट्रांसफर की
गई? सहाड़ा
पंचायत समिति
में 35 तालाब और
रायपुर
पंचायत समिति
में 58 तालाब
टूटे, इनमें
से कितने आज
तक रिपेयर
किये? 43 लाख
रुपये में से
कितना धन इन
पंचायत
समितियों को
दिया गया और
कितने अभी तक
टूटे पड़े
हैं? यह
रिपोर्ट
बतायें आप।
डा.
किरोड़ी लाल (सहायता
मंत्री):
माननीय सदस्य,
यह 22.9.2006 के बाद
राशि दिलाई
गई। इसमें 23
एनीकट और 69
तालाब, 9 नहरें
और 20 सड़कें
हैं। सी आर एफ
की जो गाइड
लाइन है उसमें
अतिवृष्टि से
हुए नुकसान के
लिए मरम्मत
का पैसा नहीं
दिया जाता है।
जहां बाढ़ आई
हो, बाढ़ग्रस्त
जिलों में यह
राशि दी जाती
है और 12 जिलों
में बाढ़ आई
थीं वहीं पर
सी आर एफ की
गाइड लाइंस के
हिसाब से राशि
उपलब्ध कराई
गई थी।
श्री
कैलाश
त्रिवेदी
(सहाड़ा): तो
भीलवाड़ा को
आपने 43 लाख
रुपये बाढ़
नहीं आई तो क्यों
दिया? विधान
सभा क्षेत्र
सहाड़ा के अन्दर
सबसे ज्यादा
अतिवृष्टि और
सबसे ज्यादा
पानी गिरा है
और जिले की
सबसे ज्यादा
बारिश वहां
हुई है और उस
बारिश की वजह
से ऊपर से
तालाब टूटता
आया तो ठेठ तक
तालाब टूटते
गये। आज की
तारीख में
सारे टैंक
टूटे हुए हैं।
80 तालाब जिस
इलाके में
टूटे हुए हों
और आप कह रहे
हो कि
अतिवृष्टि
नहीं हुई,
इससे बड़ा
मजाक मेरे
इलाके के साथ
में आप क्या
करोगे।
श्री अध्यक्ष:
आप प्रश्न
पूछें, आप
प्रश्न
पूछें।
श्री
कैलाश
त्रिवेदी
(सहाड़ा): आप यह
तो बतायें कि 43
लाख रुपये में
से हमारे यहां
कितनी राशि
गई?
डा.
किरोड़ी लाल (सहायता
मंत्री): मैं
मान रहा हूं,
मैं मान रहा
हूं
अतिवृष्टि
हुई है लेकिन
बाढ़ नहीं आई।
श्री
कैलाश
त्रिवेदी
(सहाड़ा):
अतिवृष्टि का
पैसा दिया वह
हमारे को
कितना दिया
यही पूछ रहा
हूं।
डा.
किरोड़ी लाल (सहायता
मंत्री): बाढ़
का एक लैटर
भारत सरकार ने
हमको दिया था
28.6.2005 को। सी आर एफ
की गाइड लाइंस
के पैरा नम्बर
तीन में आपदा
जो परिभाषित
की है उसमें
तूफान है,
सूखा है, भूकम्प
है, अग्निकांड
है, बाढ़ है,
ओलावृष्टि है
और भू-स्खलन
है। ये चीजें
कैटेगराइज की
हैं। इसमें अतिवृष्टि
नहीं है।
अतिवृष्टि
होती तो
सहाड़ा में भी
हम पैसा दे
देते जो 12
जिलों को दिये
हैं।
डा. सी. पी.
जोशी (नाथद्वारा):
सी आर एफ की
गाइड लाइंस से
भीलवाड़ा को 43
लाख रुपये
कैसे मिले?
मतलब आप सी आर
एफ की गाइड
लाइंस की बात
कर रहे हैं, सी
आर एफ की गाइड
लाइंस के अन्तर्गत
पैसा
अतिवृष्टि
में नहीं
मिलता है तो भीलवाड़ा
में सी आर एफ
के अन्तर्गत
यह 43 लाख रुपये
कैसे ट्रांसफर
किये? (व्यवधान)
डा.
किरोड़ी लाल (सहायता
मंत्री): वह
हमने इस बात
का दिया कि
राजस्थान
में 12 जिलों के
अलावा जिन
जिलों में
मकान टूट गये
हैं, कच्चे
मकान ढह गये
या पक्के
मकान नष्ट हो
गये या बिजली
के कारण कोई
मर गया और कोई
इस ढंग की
आपदा आ गई उस
दृष्टि से यह 43
लाख रुपये का
अकाउंट है।
बाकी और तालाब...
(व्यवधान)
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
मतलब आप सी आर
एफ की गाइड
लाइंस से पैसे
नहीं दे सकते
थे और सी आर एफ
की गाइड लाइंस
का वॉयलेशन
करके 43 लाख
रुपये भीलवाड़ा
को दिये तो
आपने दिये,
कोई बात नहीं,
आप यह बता दें
कि क्या 43 लाख
रुपये का
उपयोग जैसा आप
कह रहे हैं,
केवल मात्र
मकान गिरे उन्हीं
पर खर्च हुए,
सड़क और
रिपेयर के अन्दर
खर्च नहीं
हुए?
डा.
किरोड़ी लाल (सहायता
मंत्री): नहीं
हुए।
डा. सी. पी.
जोशी
(नाथद्वारा):
ठीक है।
डा.
किरोड़ी लाल
(सहायता
मंत्री): आप यह
देख लेना। एक
बात और आपको
क्लियर कर देना
चाहता हूं कि
अब जैसे
ओलावृष्टि
हुई है, जहां 50
प्रतिशत से
ऊपर का खराबा
हुआ है वहाँ
हम उनको मानते
हैं लेकिन
जहां बिजली
गिर गई, कहीं
भी गिर गई हो
और उसके कारण
से कोई मर गया
उसको भी हम
अनुग्रह
सहायता देते
हैं। (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
आपके नेता
खड़े हैं।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
सी आर एफ की
गाइड लाइंस
में तो नहीं
आता था तो अतिवृष्टि
के कारण एक्सेसिव
रेन की वजह से
जो नुकसान
हुआ, सरकार
प्रोपर्टी
डैमेज हुई
उसकी
लुक-आफ्टर
करने में राजस्थान
सरकार है या
नहीं है? आपका
भी बजट है या
नहीं है? आपका
भी खजाना है,
आपका भरा हुआ
है फिर क्या
करोगे?
डा.
किरोड़ी लाल
(सहायता
मंत्री): वह
पहले बनाकर नहीं
गये। हम तो
आपको ही फॉलो
कर रहे हैं।
जो दिशा-निर्देश
इस सी आर एफ की
गाइड लाइंस
में हैं उसके
बाहर हम नहीं
जा सकते। अबर
आप इसमें
रिलैक्स करा
सकें तो बड़ी
कृपा होगी।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
आपके फण्ड से
क्यों नहीं
जा सकते।
डा.
किरोड़ी लाल
(सहायता
मंत्री): हमने
भारत सरकार को
भेज रखा है।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
यह तो राजस्थान
सरकार का काम
है, भारत
सरकार इसमें
कहां आती है?
(व्यवधान)
आपके बाँध
टूटे हैं,
तालाब टूटे
हैं...
श्री
जीतराम
(मालपुरा):
हमारे भी
बिजली गिरी
है, आदमी मर
गये हमारे तो।
(व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
सरकारी
प्रोपर्टी
डैमेज हुई है
तो आप अपने खजाने
से उनकी
पूर्ति कराओ,
उनकी मरम्मत
कराओ। हर
मामले में
भारत सरकार की
रट क्यों
लगाते हो?
श्री अध्यक्ष:
सी आर एफ तो
भारत सरकार का
ही है।
श्री सी. डी.
देवल (रायपुर):
यह राजस्थान
सरकार क्या
कर रही है
हमारे नेता
महोदय का यह
कहना है। आप
अपने
संसाधनों से कराइये
जहां
अतिवृष्टि
हुई है। (व्यवधान)
डा.
किरोड़ी लाल
(सहायता
मंत्री): आप
बैठो तो सही। (व्यवधान)
कर रहे हैं।
मैं बता रहा
हूं। माननीय अध्यक्ष
महोदय, वैसे
तो सारी गाइड
लाइंस भारत
सरकार की तरफ
से जारी की
जाती हैं। मैं
बोल रहा हूं।
तदनुकूल
सहायता दी
जाती है लेकिन
पिछली बार
ओलावृष्टि
हुई थी तो
आपको ध्यान
होगा कि राजस्थान
सरकार ने अपने
फण्ड से
बिजली माफी की
थी। जहां-जहां
होता है, जितनी
हम मदद करने
की कोशिश करते
हैं, हमारी मद
से भी हम करते
हैं ऐसी बात
नहीं है लेकिन
प्रतिपक्ष के
नेता से मैं
निवेदन करना
चाहूंगा कि
भारत सरकार को
हम तीन पत्र
लिख चुके, मुख्य
मंत्री जी भी
मिलकर के आ
गईं, मैं भी
मिलकर के आया
हूं, थोड़ा सी
आर एफ की गाइड
लाइंस को रिलैक्ट
करा दें। (व्यवधान)
मैं इसको
पॉलिटिकलाइज
नहीं करना
चाहता। थोड़ा
भारत सरकार पर
दबाव डालें तो
यह रिलैक्ट
हो सकता है।
(व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
आप सी आर एफ
गाइड लाइंस को
रिलैक्ट
कराना चाहते
हैं, भारत
सरकार से सी
आर एफ गाइड
लाइंस को
अमेंड कराना
चाहते हैं फिर
आपकी सरकार का
खजाना है उसका
क्या होगा?
उसमें हिस्सा
नहीं है?
डा.
किरोड़ी लाल
(सहायता
मंत्री): मैं
बता तो रहा
हूं उसका।
आपको मैं बता
रहा हूं।....
विजय/अरुण/06032007/1140/1e
मैं
बताता हूं, 50
करोड़ रुपये
तो हमने अकाल
में दिये हैं
और 32 करोड़
रुपये के हमने
बिजली के बिल
माफ किये हैं,
यह सब बता
दूं। (व्यवधान)
श्री
रामचन्द्र
सराधना (जमवारामगढ़):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, प्रश्न
यह था जिसका
जवाब नहीं
आया। सहाड़ा
को 43 लाख रुपये
में से कितना
पैसा मिला और
किसलिए मिला? यह
बताओ ना आप।
(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आप
तो सुनिये।
श्री
कालीचरण
सर्राफ
(जौहरी
बाजार):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, राज्य
सरकार ने केन्द्रीय
सरकार से
कितने पैसों
की मांग की है
और केन्द्रीय
सरकार ने
उसमें से
कितना पैसा
आपको दिया है,
यह बोलिये।
माननीय अध्यक्ष
महोदय, कितने
पैसों की आपने
मांग की है और
कितना पैसा
दिया है केन्द्रीय
सरकार ने? (व्यवधान)
श्री
रामचन्द्र
सराधना (जमवारामगढ़):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, सहाड़ा
का मामला था।
अध्यक्ष
महोदय, 43 लाख
रुपये
भीलवाड़ा को
मिले और 43 लाख
रुपयों में से
सहाड़ा को
कितना पैसा
मिला? (व्यवधान)
डा.
किरोड़ी लाल (खाद्य
एवं नागरिक
आपूर्ति
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
इनके सवाल का
जवाब दे रहा
हूं। मैं इनके
सवाल का जवाब
दे रहा हूं।
श्री
कैलाश
त्रिवेदी
(सहाड़ा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
मंत्री महोदय
से यह पूछना
चाहता हूं।
मंत्री महोदय,
एक मिनट।
मंत्री महोदय,
एक मिनट आप
मेरी बात सुन
लें, फिर जवाब
दें। माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मंत्री
महोदय से मैं
यह पूछना
चाहता हूं कि 79
तालाब, 19 एनीकट्स
जो टूटे पड़े
हैं, वे
सी.आर.एफ. के
नोर्म्स में
नहीं आते हैं।
क्या राज्य
सरकार उनको
ठीक करने की
कोई व्यवस्था
करना चाहती है
तीन महीनों के
अन्दर या ये
टूटे ही
रहेंगे, नम्बर
एक?
नम्बर
दो, 43 लाख में से
इतनी भारी
वर्षा से
सहाड़ा विधान
सभा क्षेत्र
में सबसे ज्यादा
मकान गिरे,
उनको आपने
कितनी राशि
आवंटित की और
अन्य जगहों
पर कितनी की,
यह तो बताइये।
या यह बता दो,
आपने कितना
पैसा दिया? (व्यवधान)
डा.
किरोड़ी लाल (खाद्य
एवं नागरिक
आपूर्ति
मंत्री): तो
फिर तो यह
पूरा ही बता
देता हूं।
माननीय अध्यक्ष
महोदय, तीन
तरह के प्रश्न
आये हैं।
जौहरी बाजार
से आने वाले
माननीय सदस्य
ने कहा कि
आपने ज्ञापन
कितने का
दिया।
श्री
कैलाश
त्रिवेदी
(सहाड़ा): आप
बात सहाड़ा की
करो।
डा.
किरोड़ी लाल (खाद्य
एवं नागरिक
आपूर्ति
मंत्री): मैं
सभी का जवाब
दे रहा हूं।
हमने 3200 करोड़
रुपये का
ज्ञापन दिया
था, जिसमें
मात्र 100 करोड़
रुपये हमको
मिला। (व्यवधान)
श्री
कालीचरण
सर्राफ
(जौहरी
बाजार): अब
देखो केन्द्रीय
सरकार को। (व्यवधान)
केन्द्रीय
सरकार से हमने
3200 करोड़ रुपये
मांगे और हमको
100 करोड़ रुपये
मिला। (व्यवधान
)
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
आपकी सरकार ने
कितना दिया था
जब अटल बिहारी
जी वाजपेयी की
सरकार थी? हमारी
सरकार ने
ज्ञापन दिया
था, आपकी
भाजपा की सरकार
ने कितना दिया
था? (व्यवधान)
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): जो
ज्ञापन देते
हैं आप मांगते
हो? (व्यवधान)
एक
माननीय सदस्य:
हमने पूर्व
में भी ज्ञापन
दिया था,
कितनी राशि का
ज्ञापन दिया
और कितना
मिला। (व्यवधान)
श्री
कालीचरण
सर्राफ
(जौहरी
बाजार): हमने
केन्द्रीय
सरकार से 3200
करोड़ रुपये
मांगे और भारत
सरकार वहां
राजनैतिक
भेदभाव करती है।
(व्यवधान)
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा): भारत
सरकार की भी
नीति है।
हमारी सरकार
ने जब ज्ञापन
दिया था, अटल
बिहारी जी
वाजपेयी ने क्या
दिया था? (व्यवधान)
क्या बात कर
रहे हो आप।
आधी जानकारी
दे रहे हो। आपको
मालूम ही नहीं
है। भारत
सरकार इसी तरह
से ज्ञापन लेती
है और उसी तरह
से पैसा देती
है। नई बात
कौनसी कह रहे
हो? आपके अटल
बिहारी जी
प्रधान
मंत्री थे, तब
आपकी सरकार ने
क्या किया
था? आप फालतू
की बात कर रहे
हो। (व्यवधान)
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री):
अटलजी ने 33 लाख
टन गेहूं दिया
था, इतना
गेहूं दिया
था, आप उन
गेहूं का पूरा
उपयोग ही नहीं
कर पाये थे,
इतना गेहूं
दिया था। (व्यवधान)
33 लाख टन गेहूं
दिया था।
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
हिन्दुस्तान
में आपके वित्त
मंत्री थे,
जसवंत सिंह
थे, भारत
सरकार में वित्त
मंत्री थे,
उन्होंने क्या
किया था? (व्यवधान)
जसवंत सिंह जी
वित्त
मंत्री थे, उस
समय आपने क्या
किया था? (व्यवधान)
क्या बात कर
रहे हो। पहले
भी राजस्थान
के वित्त
मंत्री रहे
हैं, उन्होंने
क्या दे
दिया? (व्यवधान)
भारत सरकार के
जो नियम हैं।
जसवंत सिंह जी
तो राजस्थान
के थे, वे वित्त
मंत्री थे, तब
भी नहीं कर
सके। अब आप क्या
बात कर रहे हो? यह
कोई नई बात
नहीं है।
फालतू बात
करते हो? (व्यवधान)
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, भारत
सरकार ने पैसे
लेने की जब भी बात
आती है...(व्यवधान)
श्री
कालीचरण
सर्राफ
(जौहरी
बाजार): राजस्थान
के साथ
राजनैतिक
भेदभाव के
कारण कुछ नहीं
दिया गया है।
(व्यवधान)
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
आपकी सरकार ने
क्या कर
दिया। आप क्या
नई बात कर रहे
हो? (व्यवधान)
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): जब भी
भारत सरकार से
कुछ लेने की बात
आती है तो
आपको क्यों
तकलीफ होती
है? क्या
आपकी है अकेले
की भारत
सरकार?
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
आप तो पहले भी
मंत्री थे।
पहले भी
मंत्री थे।
(व्यवधान)
आपको तो
जानकारी
होगी। इस
राजस्थान की
सरकार को
राजीव गांधीजी
ने 800 करोड़
रुपये दिये।
याद है आपको,
कितने रुपये
दिये हैं?
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, पहले
सी.आर.एफ. के
नोर्म्स थे।
पहले सी.आर.एफ.
के नोर्म्स
थे। (व्यवधान)
जब भी आपकी
सरकार राजस्थान
में बनी है, इस
तरह की बात
हुई है। (व्यवधान)
श्री
अमराराम (धोद):
प्रश्न संख्या
40
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
बात कर रहे हो
खामख्वाह।
सुबह-शाम माला
जपो सोनियाजी
की। (व्यवधान)
खाली भाषण
देने के लिए
खड़े हो जाते
हो।
श्री
मदन दिलावर
(समाज कल्याण
मंत्री): मैं
बताऊं, क्या
हुआ। (व्यवधान)
श्री
रामचन्द्र
सराधना
(जमवारामगढ़):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, सहाड़ा
को कितना पैसा
दिया? इनके
प्रश्न का
जवाब नहीं
आया।
श्री
अमराराम (धोद):
अध्यक्ष
महोदय, प्रश्न
संख्या 40
श्री
रामचन्द्र
सराधना
(जमवारामगढ़):
यह पहले ही आ
गया क्या?
श्री
कैलाश
त्रिवेदी
(सहाड़ा): अध्यक्ष
महोदय, मेरे
प्रश्न का
जवाब ही नहीं
दिया है।
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): आपका
जवाब आ जायेगा।
भारत सरकार से
पैसा आने पर
फटाफट आ
जायेगा।
श्री
कैलाश
त्रिवेदी
(सहाड़ा): एक
धेला भी नहीं
दिया उन्होंने।
श्री
अध्यक्ष: यही
जवाब है उनके
पास।
श्री
अमराराम (धोद):
प्रश्न संख्या
40 (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: उन्होंने
जवाब दे दिया
है। मैंने
नैक्स्ट
प्रश्न
पुकार लिया।
मैंने नैक्स्ट
प्रश्न
पुकार लिया।
श्री
कैलाश
त्रिवेदी
(सहाड़ा):
अतिवृष्टि
में कौनसा
गुणावगुण है,
यह भी बता दो।
एक धेला नहीं
दिया और
इर्रिगेशन की
तो सर्वे रिपोर्ट
भी नहीं दी,
इससे ज्यादा
निकम्मापन
और क्या
होगा?
श्री
अध्यक्ष:
मैंने नैक्स्ट
प्रश्न
पुकार लिया।
मैंने नैक्स्ट
प्रश्न
पुकार लिया।
क्षेत्रीय
जल प्रदाय
योजना
पडि़हारा(चूरू)
से पेयजल आपूर्ति
40. श्री
अमराराम (धोद):
क्या जन स्वास्थ्य
अभियांत्रिकी
मंत्री यह
बताने की कृपा
करेंगे:-
(1)
सरकार द्वारा
ग्राम
पडि़हारा
जिला चूरू की क्षेत्रीय
जल प्रदाय
योजना कब स्वीकृत
की गई एवं इस
पर कितनी राशि
व्यय की गई
तथा इसे कब
पूर्ण किया
गया?
(2) इस
योजना से
कितने ग्राम
लाभान्वित
होने थे तथा
कितने
ग्रामों को
कितने पेयजल
की आपूर्ति की
जा रही है? इस
योजना को
डिजाइन करने
वाले
अधिकारियों
के विरुद्ध
सरकार द्वारा
क्या
कार्यवाही की
गई?
(3)
सरकार द्वारा
इन ग्रामों को
शुद्ध पेयजल
उपलब्ध
करवाने हेतु
अब क्या
योजना बनाई गई
तथा इन्हें
कब तक पर्याप्त
पेयजल उपलब्ध
करवा दिया
जायेगा?
श्री
सांवर लाल (जन
स्वास्थ्य
अभियांत्रिकी
मंत्री): (1)
क्षेत्रीय जल
योजना
आलसर-पडि़हारा,
जिला चूरू की
स्वीकृति
माह दिसम्बर,
1995 में रुपये 216.10
लाख की जारी
की गई। इस
योजना पर कुल 236.54
लाख का व्यय
किया गया तथा
यह योजना माह
जून, 1998 में
पूर्ण की गई।
(2) उक्त
योजना में कुल
पाँच ग्राम
लाभान्वित
होने थे।
वर्तमान में
उक्त योजना
से चार ग्राम
पडि़हारा,
पडि़हारी, जेगनिया
बीकान एवं
धातरी को
लाभान्वित
किया जा रहा
है। विवरण
परिशिष्ट-'अ'
पर संलग्न
है।
(3) दीमक
की समस्या व
इसके कारण लीकेज
समस्या तथा
इन्टरमीडिएट
पम्पिंग स्टेशन
पर काम
विद्युत
प्राप्ति को
दृष्टिगत रखते
हुए निदान
हेतु दो
संवर्द्धन जल
योजनाएं क्रमश:
संवर्द्धन
योजना
आलसर-पडि़हारा
(आलसर, जेगनिया
बीकान, धातरी,
पडि़हारा व
पडि़हारी
ग्रामों हेतु)
रुपये 149.63 लाख
अनुमानित लागत
व योजना
लोहा-खोतड़ी-बुधवाली
(लोहा, खोतड़ी, बुधवाली,
भोजासर एवं
सांवतिया
ग्रामों हेतु)
रुपये 53.88 लाख
अनुमानित
लागत पर वर्ष 2021
की पेयजल मांग
रखते हुए माह
दिसम्बर, 2005
में स्वीकृत
की गई।
इन स्वीकृत
योजनाओं को
मार्च, 2008 तक
पूर्ण कर इन
ग्रामों को लाभान्वित
किया जाना
लक्षित है।
श्री
अमराराम (धोद):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से मंत्री
महोदय से
जानना
चाहूंगा कि इस
योजना पर 1995 तक 216.10
लाख रुपये स्वीकृत
किये गये और
उससे करीब 20
लाख रुपये से
ज्यादा का
खर्च किया
गया। मंत्री
महोदय, एक तो
यह बताने की
कृपा करें कि
यह जो
चार-पाँच गांवों
को इस
क्षेत्रीय
जलदाय योजना
से पानी मिलना
था, यह 20 लाख
रुपये योजना
पर ज्यादा
खर्चा करने के
बाद भी वहां
की जनसंख्या
और पशुधन की
संख्या को
देखते हुए क्या
पर्याप्त
मात्रा में
पानी मिला? और
अगर नहीं
मिला, अब आप कह
रहे हैं कि यह
उस समय भी वही
क्षेत्र था, जिस
समय आप दीमक
की बात कर रहे
हो, बिजली की
कमी की बात कर
रहे हो, मैं
समझता हूं कि 1995
के बाद आज जो
पडि़हारा की
जनसंख्या 10
से 12,000 के करीब
है, उसको आज तक
शुद्ध पेयजल
नहीं मिला और
जो स्थानीय
जल स्रोत है, उसमें
फ्लोराइड की
अत्यधिक
मात्रा के
कारण आज वहां
पर 30 साल की
उम्र के लोगों
के जोड़ों का
दर्द हो रहा
है, इतना अत्यधिक
फ्लोराइड है।
मैं
आपके माध्यम
से जानना
चाहूंगा कि
ऐसी योजना का
फायदा जनता को
ढाई करोड़
रुपये खर्च
होने के बाद
में भी नहीं
मिला, इसके लिए
कोई न कोई
अधिकारी जिम्मेदार
निश्चित रूप
से होगा और यह
आपने इनको
पानी पिलाने
के लिए 2005 में
योजना स्वीकृत
की और योजना
पूरी होगी 2008
में, यानी तीन
साल बाद में
भी जहां इतने
लोगों को, चार
गांव के लोगों
को
फ्लोराइडयुक्त
पानी पीना पड़
रहा है जिससे
पूरा उनका जन
स्वास्थ्य
खराब हो रहा
है तो क्यों
नहीं आप 2008 के
बजाय, इसी आने
वाले छह
महीनों के अन्दर,
तीन साल के
बजाय, तो मैं
समझता हूं कि
आगे आने वाले
छह महीनों में
इस योजना को
पूर्ण करके, जितने
मापदण्ड
आपके विभाग के
हैं, उनके
अनुसार उन
चारों गांवों
को पानी मिल
जायेगा और क्या
इनमें बिजली
पंपिंग स्टेशन
पर बराबर
मिलती रहे,
इसके लिए प्लानिंग
करने वालों ने
उसकी योजना क्यों
नहीं बनाई? क्या
उसके लिए कोई
दोषी है? इसका
आप जवाब दें।
(व्यवधान)
श्री
सांवर लाल (जन
स्वास्थ्य
अभियांत्रिकी
मंत्री): माननीय
अध्यक्ष
महोदय, माननीय
सदस्य की
चिंता से मैं
बिल्कुल सहमत
हूं और जिस प्रकार
से राजस्थान
में बरसात कम
होने, अण्डरग्राउण्ड
वाटर का दोहन
ज्यादा होने
से जितना भी
भूगर्भ का जल
है, वह लगभग
खारा और
फ्लोराइड का
बचा हुआ है और
चूरू जिले में
इसीलिए आपणी
योजना और
दूसरी
योजनाओं से
नहर का पानी
लाकर कई
गांवों को लाभान्वित
किया गया। अब
यह पाँच
गांवों की बात
आपने की है,
इनमें पाँच
गांवों में
कुछ समय पानी
देने के बाद
में आखिरी
गांव में पानी
नहीं गया। यह
मैं आपको
बताना चाहता
हूं क्योंकि
वास्तव में
आप जैसा कह
रहे हैं कि
पानी की क्वालिटी
पीने लायक
नहीं है, इसको
मिक्स करके
इस पानी का
उपयोग करते
हैं और आखिरी
जो गांव है, उस
गांव में 2000 के
बाद पानी नहीं
गया। मेरी
जानकारी में
जब आया, उसके
बाद मैंने
कोशिश की, उस
समय बीच में
गया, फिर बन्द
हो जाता है।
लोकल सोर्स
वहां पर
ओपनवैल और कुछ
कुए हैं,
जिनके माध्यम
से वे अपना
काम चला रहे
हैं। निश्चित
रूप से लोगों
को शुद्ध पानी
मिले, इसमें
हम प्रतिबद्ध
हैं और माननीय
सदस्य को मैं
आपके माध्यम
से माननीय अध्यक्ष
महोदय, बताना
चाहता हूं कि
काफी योजनाएं सरफेस
वाटर की हमने
इन तीन सालों
में इसीलिए
प्रारम्भ की
है कि अण्डरग्राउण्ड
वाटर शुद्ध
नहीं मिलता
है। जहां पर
मिलता है,
वहां पर उस सोर्स
को हम काम में
ले रहे हैं।
इसीलिए मैं
आश्वस्त
करना चाहता
हूं कि कुछ
समय इसमें
जरूर लगेगा क्योंकि
जब मैंने
विभाग सम्भाला,
चाहे 10 लाख की
योजना हो, 20 लाख
की योजना हो,
उसका कम्प्लीशन
पीरियड वही 18
महीने और 24
महीने होता था,
अब उसको नौ
माह कर दिया
है। जो छोटी
योजना है, उनका
पीरियड घटाकर
नौ महीने कर
दिया है। अब
यह योजना
पहले, आते-आते
ही स्वीकृत
हुई थी इसलिए
इनका समय कुछ
ज्यादा हमने
एक्जीक्युशन
का रखा है पर मैं
आपको आश्वस्त
करना चाहता
हूं कि इसका
मिनिमम समय
कितना हो सकता
है, उसके आधार
पर कम से कम
समय में इन
गांवों को यह
रतनगढ़ से
सोर्स लाकर
हमने किया है....
Jkj/akt/11.50/1f/6.3.2007
इन
गांवों को
लाभान्वित
करें ऐसी मैं
व्यवस्था
करने की कोशिश
करूंगा। बाकी
बिजली के लिए
डेडिकेटेड
फीडर की आवश्यकता
होगी तो
डेडिकेटेड
लाईन हम डलवा
देंगे जिससे
कि व्यवधान
नहीं हो और
ड्रिंकिंग
वाटर पर
जहां-जहां
हमारी
जानकारी में
आता है, राजस्थान
में
डेडिकेटेड
फीडर के लिए
हम पैसा देते
हैं जिससे
निर्बाध रूप
से पेयजल व्यवस्थाएं
चलती रहें। अब यहां
पर 216 और 236 लाख का
सवाल है, अब
टेण्डर होते
हैं, आपकी
जानकारी में
है, टेण्डर
में ऊंची रेट
पर जाते हैं
तो कास्ट
अपने आप बढ़
जाती है और हम
कोशिश करते
हैं कि ज्यादा
कहीं पुलिंग
वगैरह या ज्यादा
रेट नहीं हो,
इस प्रकार का
अंकुश लगाने के
लिए सरकार
करती है
प्रयास। अब पैसा लगाने
के बाद भी
शुध्द पानी
धरती में से
नहीं निकला और
नहीं निकलने,
कई जगह निकलने
की गुंजाइश भी
नहीं है, पर
चूंकि पानी
सबसे पहली
आवश्यकता है,
लोगों को पानी
चाहिए, चाहे
कहीं से भी मिले,
कैसा भी मिले,
मैं यहां की,
बुधवाली गांव
की बताना
चाहता हूं कि
जो पानी हम
यहां से भेजना
चाह रहे हैं
वैसा पानी
उनके गांव में
है, कई बार वह
यही कहते हैं
कि आप तो इसको
आप छोडि़ये,
अब इसको ठीक
मत करिये। हमारे
तो जो दूसरी
योजना सेंक्शन
करी है दो-चार
महीने में वह
पानी पहुंचा
दीजिये, पानी
पीने लायक
होगा, बाकी
ऐसा पानी जो
वहां से आ रहा
है वह हमारे
पास भी है। तो मैं
इस आखिरी गांव
के लिए तो
आपको आश्वस्त
करता हूं कि
तीन-चार महीने
के अंदर-अंदर
मैं पानी
पहुंचाने की
कोशिश करूंगा
और दूसरे जो गांव
हैं उसमें
योजना का समय
कितना कम किया
जा सकता है
एक्जीक्यूशन
में, वह करने
का प्रयास
करूंगा।
डा. चन्द्रशेखर
बैद(तारानगर):
अध्यक्ष
महोदय, इसी से
जुड़ा हुआ एक
सवाल है, चूरू का
है यह, बहुत
महत्वपूर्ण
है, इसी से
जुड़ा हुआ है।
श्री
अमरा राम(धोद):
अध्यक्ष
महोदय, एक तो
मैं जानना
चाहूंगा कि
मंत्री महोदय
ने स्वीकार
किया है कि 2000 से
2007, सात साल तक
पानी वहां नहीं
गया और मंत्री
महोदय यह
बतायें कि
जहां आपने यह
योजना बनाई है
वहां तो यह
फ्लोराइडयुक्त
पानी नहीं है,
फ्लोराइडयुक्त
पानी है उन
पाँच गांवों
में जहां लोग
फ्लोराइडयुक्त
पानी पी रहे
हैं, क्या
जहां से आपने
यह योजना बनाई
है वहां अगर
फ्लोराइडयुक्त
है तो फिर
सरफेस वाटर का
ही बनाते, यह
योजना आपने
बनाई ही क्यों। अगर
उसका पानी ठीक
है, वहां इन
पाँच गांवों
में
फ्लोराइडयुक्त
पानी है जो
करीब-करीब पी
रहे हैं, मैं
यह कह रहा हूं
कि पैसे ज्यादा
क्यों लगे,
मैं यह कह रहा
हूं कि पैसे
लगने के बाद
भी 95 के बाद आज
तक पडि़हारा
जो बारह हजार
की पोपुलेशन
है उनको कभी
भी पूर्ण पानी
नहीं मिला,
इसके लिए जिम्मेदार
कौन है।
मतलब जितना
आपने पैसा सेंक्शन
किया उससे ज्यादा
खर्च होने के
बाद इस योजना
से पडि़हारा गांव
में पानी नहीं
पहुंचा, इसके
लिए जिम्मेदार
कौन है और सात
साल तक पानी
नहीं मिला है और
वह पानी पी
रहे हैं,
मजबूरी में पी
रहे हैं, वहां
जो लोकल
सोर्सेज हैं
कुआ या
बावड़ी,वह तो मजबूरी
है, वहां पर यह
तो है नहीं कि
बिलकुल मर जायेंगे
और वहां जितना
स्वास्थ्य
खराब हो रहा
है, आप खुद स्वीकार
कर रहे हैं कि
हमने, 2005 में
आपके आने के
बाद यह सेंक्शन
हुई।
पाँच साल से
पानी नहीं जा
रहा...
श्री
अध्यक्ष: अब
आप भाषण तो
दें नहीं और
प्रश्न पूछ
लीजिये, हां।
श्री
सांवर लाल: अब,
अध्यक्ष
महोदय, आपके
एक-एक बिंदु
का जवाब दे
दिया मैंने,
और दे दूंगा।
श्री
अमरा राम(धोद):
अध्यक्ष
महोदय, इनकी
क्षमता यह है,
इनकी सिकराना तालाब
योजना जहां 22
ट्यूब वैल
खुदे हुए हैं
उनमें से
मात्र तीन चल
रहे हैं।
श्री
अध्यक्ष: आप
अपना प्रश्न
पूछिये,
क्षमता की बात
न करें।
श्री
अमरा राम(धोद):
अध्यक्ष
महोदय, मेरा आपके
माध्यम से है
कि यह आपके
सिकराना
क्षेत्रीय
जलप्रदाय
योजना जिसमें
22 ट्यूब वैल
खोदे हैं और
मात्र तीन चल
रहे हैं, यह
इनकी
कार्यक्षमता
है, इनके
विभाग की, कि 22
ट्यूब वैल
खोदकर के पैसा
खर्च कर दिया
और उनमें से
मात्र तीन चल
रहे हैं और उनमें
भी इस तरह की
घटिया किस्म
की मोटरें,
इन्होंने
खुद ने स्वीकार
किया है कि लगाई
है जिससे आउट
कम सबसे कम दे
रहे हैं, जो
पानी होते हुए
नहीं दे रहे...
श्री
अध्यक्ष: तो
आप भाषण क्यों
दे रहे हैं,
प्रश्न पूछ
लिया और वह
बता दिया
आपने। डाक्टर
चन्द्रशेखर
बैद। आप भी
पूछ लीजिये,
आप भी पूछ
लीजिये।(व्यवधान)
डा. चन्द्रशेखर
बैद: अध्यक्ष
महोदय, आपके
माध्यम से यह
पूछना चाह रहा
हूं मंत्रीजी
से...(व्यवधान)
श्री
राजकुमार
रिणवा(रतनगढ़):
पडि़हारा की
योजना जल्दी
शुरू
करवायें।
डा. चन्द्रशेखर
बैद: मेरे
प्रश्न का भी
साथ में जवाब
दे देना आप।
(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
मंत्रीजी,
उनको भी पूछने
दें।
श्री
सांवर लाल: अब
आपके तो बहुत
लम्बी
हुकूमत रही
चूरू तो आप क्यों
खड़े हो रहे
हैं।(व्यवधान)
डा.चन्द्रशेखर
बैद: कि जो
पाँच गांवों
का नाम आपने लिया
उसमें
पडि़हारा
गांव तो है
नहीं, वह तो गैरआबाद
गांव है और
बुधवाली में
आज तक पानी पहुंचा
ही नहीं और
जहां से पानी
सप्लाई करना
चाहते हैं वह
फ्लोराइडयुक्त
है।
मैं यह पूछना
चाहता हूं क्या
आप आपणी योजना
का फेज-टू
शुरू करके इन
गांवों को,
रतनगढ़ तहसील
को और
सुजानगढ़
तहसील को लाभान्वित
करना चाहते हैं
क्या।
श्री
अध्यक्ष: ठीक
है। उनको भी
पूछ लेने दो।
श्री
सांवर लाल:
अध्यक्ष
महोदय, मैंने
निवेदन किया
कि जो लाभान्वित
करने का सवाल
है...
श्री
अध्यक्ष:
उनका इलाका
है, उनको भी
पूछ लेने दो।
श्री
सांवर लाल:
केवल यह सरकार
ही चाह रही है,
नहीं तो इनके
तो बहुत लम्बा
कार्यकाल रहा,
अब काहे को
इतनी बातें कर
रहे हैं आप
लोग। आपको मैं
निवेदन करना
चाहता हूं, आप
विराजिये, अभी
भी मैं आपको
कह रहा हूं कि
हमने सारी
शर्तें पूरी
करके भारत
सरकार के ग्रामीण
मंत्रालय को
भेज दिया,
हमने
मंत्रीजी से बार-बार
रिक्वेस्ट
किया है आपणी
योजना फेज-टू
सेंक्शन
करने के लिए,
अब फिर कह
दोगे भारत
सरकार। अब आप
करो न वहां
कार्यवाही
कुछ, यहां
बैठते हो कुर्सी
पर, कुछ होता
नहीं, वहां
जाते हो कुछ
करते नहीं हो
और बातें करते
हो केवल।
डा.चन्द्रशेखर
बैद: आपणी
योजना फेज-टू
के लिए राजस्थान
सरकार के
सामने जो
शर्तें रखीं
वह शर्तें
आपने मानी नहीं
तो वह फेज-टू
मंजूर कैसे
करेंगे।
श्री
राजकुमार
रिणवा: अध्यक्ष
महोदय, इस
योजना को जल्दी
शुरू
करवायें।(व्यवधान)
श्री
सांवर लाल: एक
मिनट, वह पूरा
करने दें।
श्री
अमरा राम(धोद):
ऐसा ही पानी
पिलाओगे, सात
साल से पानी
नहीं जाये और 22-22
ट्यूब वैल में
से मात्र तीन
चले हों और वह
भी...
श्री
सांवर लाल: एक
मिनट, उनका
कम्पलीट
होने दें।
श्री
राजकुमार
रिणवा: वहां
पानी की बहुत
समस्या है,
इस योजना को
जल्दी शुरू
करवायें आप।
यह निवेदन है
आपसे अध्यक्ष
महोदय...(व्यवधान)
डा.सुरेश
चौधरी(भादरा):
तारानगर में
अगर आज पानी की
समस्या है तो
उसके लिए जिम्मेदार
कहीं न कहीं
आप भी हैं। आज अगर
तारानगर में
पीने के पानी
की समस्या है
और राजस्थान
के वित्त
मंत्री रहते
हुए, बहुत
काबिल वित्त
मंत्री मैं
कहूंगा, रहते
हुए और आज अगर
तारानगर, चूरू
और राजगढ़ में
पानी की समस्या
है तो you are equally responsible for that.(व्यवधान)
डा.चन्द्रशेखर
बैद: यह तो
रतनगढ़ की बात
है, रतनगढ़ की
बात है,
तारानगर की
बात ही नहीं
है भाई साहब। यह
तो रतनगढ़ की
बात हो रही है,
तारानगर की
बात ही नहीं
है।(व्यवधान)
नहीं है।
श्री
अध्यक्ष:
उनका इलाका
है।
डा.चन्द्रशेखर
बैद: चूरू के
हैं, वह बैठे
राजेन्द्र
सिंह राठौड़,
पूछो उनसे।
चूरू के
मंत्रीजी
बैठे हैं,
उनसे पूछो आप,
तारानगर में
पानी की कमी...(व्यवधान)
डा.सुरेश
चौधरी: चूरू
पूरे जिले में
है और चूरू पूरे
जिले की व्यवस्था
सुधारने का
जिम्मा काफी
लम्बे समय तक
आपके पास रहा
है...
श्री
रामनारायण
मीणा: आप
दोनों क्यों
बात कर रहे
हैं...
डा.सुरेश
चौधरी: और
सुधार सकते थे
आप।
श्री
रामनारायण
मीणा: देखिये,
यह तो सदन को
मानना पड़ेगा,
अध्यक्षजी,
यह तो सदन को
मानना पड़ेगा
कि भूमिगत
जलस्तर
गिरता जा रहा
है।
मेरे इलाके
में साठ-साठ
फीट पानी
नहीं....
श्री
अध्यक्ष: आप
कहां, चूरू और
पडि़हारा की
बात हो रही है,
आप अपने इलाके
पर चले गये, क्या
बात कर रहे
हैं आप।
श्री
अमरा राम(धोद):
हमारा तो उत्तर
दिला दें अध्यक्ष
महोदय।
श्री
रामनारायण
मीणा: मैं
इसलिए अर्ज कर
रहा हूं माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं
इसलिए अर्ज कर
रहा हूं कि
भारत सरकार को
आप योजना
भेजते हैं...
श्री
अध्यक्ष: उप
नेता महोदय,
आपके इलाके की
बात नहीं है,
यह चूरू के
पडि़हारा की
बात है।
श्री
रामनारायण
मीणा: स्वीकृति
लेते हैं
लेकिन आप
बार-बार यह
कैसे कहते हैं
आपकी भारत
सरकार। आप
कैसे कह सकते
हैं कि आपके मुख्य
मंत्री। वह
राजस्थान की
मुख्य
मंत्री हैं,
वह केन्द्र
की भारत सरकार
है। अब आप
तालमेल नहीं
रखो, समय पर
पैसा नहीं
लाओ, इसलिए
मंत्रीजी, आप
तो सक्षम आदमी
हैं, आपके सामने
जो समस्या
है, कृपा करके
उसको ठीक कर
दीजिये, पैसा
दे दीजिये,
योजना को चालू
कर दीजिये।
श्री
अध्यक्ष:
रतनगढ़ से आने
वाले माननीय
सदस्य, आपको
पूछना है तो
आप भी पूछ
लें। रतनगढ़
से आने वाले
माननीय सदस्य,
आपको पूछना है
तो आप भी पूछ
लीजिये। बस हो
गया आपका तो।
हां। माननीय
मंत्रीजी,
उनको भी पूछ
लेने दो।
श्री
राजकुमार
रिणवा: अध्यक्ष
महोदय, आपणी
योजना को जल्दी
लागू करवाने
की कृपा करें
और जो
पडि़हारी की
अब योजना आई
है मंत्री
महोदय के पास
में उसको भी
अतिशीघ्र, तीन
साल से...
श्री
अध्यक्ष:
आपणी योजना तो
अलग है तो
इससे। वह अलग
योजना है, वह
इसमें थोड़े
ही है।
श्री
राजकुमार
रिणवा: हां, वह
अलग है। उसको
तो, उसको अध्यक्ष
महोदय, 2031 तक के
लिए टाल दिया
गया है, इतनी बड़ी
समस्या हो
जायेगी।
डा.चन्द्रशेखर
बैद: आपणी
योजना में जो
फेज-टू है इसके
लिए के.एफ.डब्लू.
ने प्रस्ताव
भेज दिया राज्य
सरकार को,
राज्य सरकार
ने उन शर्तों
को मंजूर नहीं
किया और इसलिए
उन्होंने
लोन नहीं दिया
और फेज-टू
योजना रतनगढ़
और सुजानगढ़
के लिए लागू
नहीं हो सकी।...
श्री
अध्यक्ष: आप
इनफोर्मेशन
सीक कर रहे
हैं या दे रहे हैं?
श्री
राजकुमार
रिणवा: वहां
पर पीने के
पानी की
जबरदस्त
समस्या है।
दो साल, ढाई
साल योजना को
हो गये, उसको
अतिशीघ्र
पूरा करवाया
जाय।(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
बोलिये।
मंत्रीजी,
मंत्रीजी।
माननीय मंत्रीजी
का जवाब
सुनें, माननीय
मंत्री का जवाब
सुनें, बैठें
अब आप।
श्री
सांवर लाल: राजस्थान
की जो स्थिति
है पानी के
संबंध में,
सबको पता है
माननीय अध्यक्ष
महोदय, इसीलिए
गत वर्ष हमने
जल चेतना यात्रा,
वाटर
कंजर्वेशन, सब
के ऊपर ध्यान
दे रहे हैं,
वाटर लेवल ऊपर
बढ़े, क्वालिटी
उसकी ठीक हो,
सारी चीजों के
ऊपर राजस्थान
सरकार बनने के
बाद में काफी
कुछ किया है।
(व्यवधान) अब
आप सुन तो लो,
जनता कोई तीन
साल से ही थोड़े
पी रही है।
श्री
अध्यक्ष:
बैठे-बैठे
नहीं बोलें,
बैठे-बैठे
नहीं।
श्री
सांवर लाल: अब
आप पूरी बात
को सुनना ही
नहीं चाहो,
बीच-बीच में
आब्सटेकल
माननीय अध्यक्ष
महोदय...
श्री
कैलाश त्रिवेदी:
आप क्या कर
रहे हैं, सौ
तालाब फूटे
पड़ें हैं और
वह तो एक
विधान सभा के
ठीक ही नहीं
हो रहे हैं...
श्री
सांवर लाल: *** सौ
तालाब तो
इसलिए फूटे
हैं कि डेढ़
सौ को ठीक करा
दिया हमने तीन
साल में, बाकी
पहले ध्यान
रखते आप। कुछ
पता तो है
नहीं और पहली
बार यों-यों
कर रहे हैं
आप।(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
यहां *** नहीं
बोलते हैं। आप
*** निकाल देना।
श्री
सांवर लाल:
अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से सदन को
अर्ज करना चाह
रहा हूं...
श्री
अध्यक्ष: ***
शब्द बोला है
वह निकाल
देना।
श्री
सांवर लाल:
पीने के पानी
की व्यवस्था
के लिए,
माननीय अध्यक्ष
महोदय, जहां
पर भी जो व्यवस्था
करने की जरूरत
होती है हम कर
रहे हैं बराबर। आपने जो
सवाल उठाया है
उसके संबंध में
भी हमने
कार्यवाही कर
ली है। अब आप
कह रहे हैं
पानी खारा
पानी है लेकिन
वहां पर
पुराने जमाने
से टांका
बनाकर उसका
पानी पीने के
लिए पहली
प्रेक्टिस
इस्तेमाल
करते हैं, फिर
अगर पानी में
कहीं कमी आती
दिखती है तो
जो खराब पानी
और वह पानी है
उसको मिक्स
करके काम में
लेते हैं,
बाकी जानवर के
लिए नहाने-धोने
के लिए पानी
काम में आता
है। जहां-जहां
पर...
श्री
अमरा राम(धोद): मंत्रीजी,
पाँच सौ रूपये
टेंकर के
हिसाब से पानी
ला रहे हैं
लोग।
श्री
अध्यक्ष:अब
आपका, उसको तो
आने दो आप।
आपके प्रश्न
का जवाब, वह तो
आने दो।
श्री
सांवर लाल: अब
यह सब बता रहा
हूं मैं।
श्री
अमरा राम(धोद):
पाँच सौ रूपये
प्रति टैंकर,
हर दूसरे दिन
पाँच सौ रूपये
एक परिवार को
खर्च करने पड़
रहे हैं वहां।
श्री
सांवर लाल: यह
दुर्भाग्य
है कि वास्तव
में खर्च करने
पड़ते हैं और
पीने का पानी
पहली आवश्यकता
है इसलिए आदमी
बिसलरी की
बोतल खरीद कर
भी पीता है,
आपको पता है।
यह सारी चीजें
हम जानते हैं
पर...
श्री
भंवरलाल
शर्मा(सरदारशहर):
तो बिसलरी
पिलाओ फिर सब
को। बिसलरी के
चक्कर में आप
आ गये, हां।
श्री
सांवर लाल: आप
तो गोल-मटोल
हो रहे हो,
विराज जाओ न,
आपके *** का
काम है...(व्यवधान)
श्री
भंवरलाल
शर्मा(सरदारशहर):
यह मेरे उड़े
हैं तो आप
जैसे
बिचौलियों से
माथापच्ची
करते हुए उड़े
हैं, बिसलरी
की बात कर रहे
हैं, लोगों को
भैंसों की
पेशाब का पानी
नहीं मिल रहा,
बिसलरी की बात
कर रहे हैं।
मंत्री बनते
ही नशा आ गया।
श्री
सांवर लाल:
माननीय अध्यक्ष
महोदय: अगर उस
जनता की चिंता
होती तो आपका
हुलिया कुछ
अलग से लगता,
दस-पन्द्रह
वर्ष से मैं
ही देख रहा
हूं आपको
यहां। अध्यक्ष
महोदय, मेरा
निवेदन यह है
कि वाटर सेक्टर
में...
श्री
भंवरलाल
शर्मा(सरदारशहर):
ऐसा है, आपसे
तो पार नहीं
पड़ेगा, डेढ़
साल में हम कर
लेंगे।
डा.किरोड़ी
लाल: आप तो यह
बताओ,
गोल-मटोल कैसे
हो रहे हो।
श्री
भंवरलाल
शर्मा(सरदारशहर):
आप इनके चक्कर
में मत पड़ो।
श्री
सांवर लाल:
वाटर सेक्टर
में जितनी
योजनाएं हमने
सेंक्शन की
है, जितनी
शुरू की है, यह
अपने आप में
एक रिकार्ड है
और इनके पूरे
होने में,
माननीय अध्यक्ष,
कुछ समय तो
लगेगा। आज
बाड़मेर
लिफ्ट है, पोकरण-फलसूण्ड
है, पाली वाली
है...
श्री
अमरा राम(धोद):
हम तो यह
पडि़हारा की
पूछ रहे हैं,
आप कहां
बाड़मेर जा
रहे हैं,
पडि़हारा का
तो कल्याण कर
दो आप, राजस्थान
का कल्याण क्या
करोगे, सात
साल में एक
बूंद नहीं
गया, उसका कल्याण
करों आप तो।
श्री
सांवर लाल:
पडि़हारा का
तो हो जायेगा।
अच्छा, आपको
यही जानकारी
चाहिए,
पडि़हारा में
आज की तारीख
में 2001 के आधार
पर जनसंख्या
है 10069 ।
Lpm/akt/1200/1g/6032007
पटियारा
में आज तारीख
में 2001 के आधार
पर जनसंख्या
है 10,069, वर्तमान
में है 11560 अब ये
सेंसेक्स तो
मेरे
डिपार्टमेंट
ने नहीं किये।
मेरे पास
आंकडे हैं जो
बता रहा हूं
और जो स्रोत से
पानी मिल रहा
है इनको 200 किलो
पानी के हिसाब
से प्रतिदिन
मिल रहा है
लीटर के हिसाब
से।
श्री
अमराराम (धोद):
कितना मिलना
चाहिए..
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): यह तो
बहुत है, पर्याप्त
है पानी, 200 तो
शहरों में ही
नहीं मिल पाता
इतना...
श्री
अमराराम (धोद):
वह लोकल स्रोत
से मिल रहा है
जो खारा है
अध्यक्ष
महोदय लोक
स्रोत से जो
पीने लायक
नहीं है उससे
बता रहे हैं
आप। जो आपकी
योजना है उससे
मिल रहा है
मात्र 200 और
लोकल स्रोत से
मिल रहा है 768 मतलब
तीन गुणा तो
जो लोकल स्रोत
हैं जो पीने
लायक नहीं है
उससे मिल रहा है
यह तो...
श्री
अध्यक्ष:
प्रश्नकाल
समाप्त हुआ।
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, अगर आप
मीठा निकाल
सकते हो तो
करोड़ दो
करोड़ रूपए
आपको सरकार की
तरफ से दिलवा देता
हूं मैं यह
निवेदन करना
चाहा रहा हूं...
श्री
अमराराम (धोद):
...(व्यवधान)
खारा है तो जब
यह योजना कैसे
बनाई आपने....
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): यह
योजना जो बन
रही है मीठे
पानी की है ...(व्यवधान)
श्री
अमराराम (धोद):
हां तो उसी से
देने की है
लोकल स्रोत
से ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
प्रश्नकाल
समाप्त हुआ।
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): मैं
आपको यही बता
रहा हूं कि यह
मीठे पानी की
है इसको एक्जीक्यूशन
का टाइम घटा
के टाइम से
उनको पानी
देने की कोशिश
करेंगे।
श्री
अमराराम (धोद):
धन्यवाद।
स्थगन
प्रस्तावों
पर अध्यक्षीय
व्यवस्था
श्री
अध्यक्ष:
बिराजे। मुझे
माननीय सदस्यों
को सूचित करना
है कि निम्नांकित
स्थगन प्रस्तावों
की सूचना
प्राप्त हुई
है :-
1. श्री
भरत सिंह (106) एवं
दो अन्य सदस्यों
की और से
प्रदेश में
समर्थन मूल्य
पर सरसों की
खरीद आरम्भ
नहीं होने से
उत्पन्न
स्थिति के
संबंध में।
2. श्री
खुशवीर सिंह (30)
एवं श्री
हेमाराम
चौधरी (200) की और
से राज्य में
डोडा-पोस्त
के
क्रय-विक्रय
मूल्य में
भारी विसंगति
के संबंध में।
स्थगन
प्रस्ताव के
रूप में तो
अनुमति देने
में असमर्थ
हूं फिर भी
माननीय सदस्य
श्री भरत सिंह
एवं श्री
खुशवीर सिंह
को अपने प्रस्ताव
के विषय में
तीन-तीन मिनट
बोलने की
अनुमति होगी।
शून्यकाल
श्री
हेमाराम
चौधरी
(गुढ़ामालानी):
मेरा नाम नहीं
लिया
...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: बीच
में नहीं No sit down, No
please sit down डॉ.
श्रीगोपाल
बाहेती, सदस्य
की और से
...(व्यवधान)
श्री
हेमाराम
चौधरी
(गुढ़ामालानी):
आपने मेरा नाम
नहीं लिया ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: ...(व्यवधान)
अध्यक्ष
कहता है सीट
डाउन तो सीड
डाउन यह होती
है बात प्लीज
आप स्थान
ग्रहण करें
...(व्यवधान)
श्री
हेमाराम
चौधरी
(गुढ़ामालानी):
नहीं सिट डाउन
का क्या अर्थ
हुआ?*** सीट
डाउन का क्या
मतलब हुआ?
मेरे भी नाम
पर आपको व्यवस्था
देनी चाहिए। *** (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: प्लीज
मुझे बोलने
दीजिए, मैं
बोल दूंगी,
मुझे बोल लेने
दीजिए
...(व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, आसन के
विरूद्ध इस
तरह की टिप्पणी
अशोभनीय है,
मुझे पीड़ा
है, यह
सर्वोच्च
आसन है, आसन के
प्रति इस तरह
की बात अध्यक्ष
महोदय यह शब्द
आसन के लिए
आदर योग्य है
यह आसन के लिए
किस तरह की
बात करते हैं ...(व्यवधान)
श्री
कालूलाल गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं
पंचायती राज मंत्री):
अध्यक्ष
महोदय, यह
धौंस शब्द
निकाला जाए ...(व्यवधान)
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर):
आप जबरदस्ती
करना चाहते
हो ...(व्यवधान)
इन्होंने क्या
अशोभनीय कहा
है, ऐसा कुछ
नहीं कहा है,
आप जबरदस्ती
आग लगाना
चाहते हो ...(व्यवधान)
कुछ नहीं कहा
है।
श्री
अध्यक्ष:
रायपुर से आने
वाले माननीय
सदस्य,
रायपुर से आने
वाले माननीय
सदस्य कृपया
स्थान ग्रहण
कर लें।
गुढ़ामालानी
से आने वाले माननीय
सदस्य आप
बहुत वरिष्ठ
हैं, मैं
मानती हूं कि
मैं धौंस डरा
नहीं रही हूं।
मैं आपको नियमों
की बात बता
रही हूं कि स्थगन
प्रस्ताव जो
है वह आते हैं
ऐसी इम्पोर्टेंट,
इतनी महत्वपूर्ण
बात होती हैं
और ऐसी जो सदन
में पूरी कार्यवाही
को छोड़ करके
और उस पर
चर्चा की जाए।
फिर भी इस
विषय पर बोलने
के लिए चूंकि
यह किसानों से
संबंधित
मामला था
मैंने फिर भी
तीन तीन मिनट
बोलने की
अनुमति दी। यह
केवल एक ही व्यक्ति
को दी जाती है
आपने साथ में
किया आप खुशवीर
सिंहजी नहीं
चाहे आप बोल
दीजिए मुझे क्या
आपत्ति है
लेकिन यह
थोड़े ही है
कि मैंने अनुमति
दी इसका मतलब
जितनो ने दिया
मैं सबको बोलने
का मौका दूं।
स्थगन प्रस्ताव
का पहले महत्व
समझिए। आप
नियम-50 का महत्व
समझिये कि
उसका महत्व
क्या है? मैं
तो फिर भी
सदाशयता का
परिचय देती हूं,
धौंस-दपट का
सवाल नहीं है
लेकिन यह कोई
आसन का करने
लग जाएगा, आसन
से बहस ही
करने लग जाएगा
तो आसन को भी
आँख दिखानी
पड़ती है Yes, you can sit
here आराम
से बैठिये कोई
दिक्कत नहीं
है, आराम से
बैठिये आप।
श्री
भरतसिंहजी।
(कांग्रेसी
सदस्य श्री
हेमाराम
चौधरी द्वारा
सदन कूप में
आकर बैठना)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय,
हेमारामजी अब
आप मत उठ जाना,
किसी हालात में
नहीं उठना ...(व्यवधान)
डा.
किरोड़ी लाल (खाद्य
एवं नागरिक
आपूर्ति
मंत्री):
संघर्ष करना
उठना नहीं ...(व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, क्या
जबरदस्ती हो
रही है सदन के
अन्दर धक्कामुक्की
हो रही है ...(व्यवधान)
डा. ओ.
पी. महेन्द्रा
(केसरीसिंहपुर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, एक नई
परम्परा
यहां पैदा की
जा रही है
प्रतिपक्ष के
द्वारा इस तरह
की नई परम्परा
पैदा की जा
रही है, आसन
सर्वोपरि है,
आसन का सम्मान
करना नहीं
जानते हैं ये ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: मैं
आपको बोलने से
पूर्व एक
सैकिण्ड आप
बिराजे। डॉ.
श्रीगोपाल
बोहती सदस्य
की और से
जयपुर में
मीडिया
कर्मियों पर
किये गये कथित
हमले के संबंध
में।
इस विषय पर
सरकार की और
से वक्तव्य
दिया जायेगा।
अत: इस पर
अनुमति देने
में असमर्थ
हूं। लेकिन
सरकार से उस
समय आपको
प्रश्न
पूछने का
निश्चित तौर
से अवसर
होगा।
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती (पुष्कर):
अध्यक्ष
महोदय, तत्काल
का मुद्दा है
मुझे इस पर
बोलने की
अनुमति दी
जाए, दो मिनट
के लिए तत्काल
का मुद्दा है,
घटना कल ही
हुई है कोई
विलम्ब का
मामला नहीं है
और मीडिया
कर्मियों पर
हमला हुआ है,
सामान्य बात
नहीं है। मुझे
बोलने की
अनुमति दी जाए
इसके ऊपर यह
मेरा आपसे
निवेदन है।
श्री
अध्यक्ष: मैं
आपको दो मिनिट
का समय दूंगी
आप अपनी बात
कह दीजिएगा। ...(व्यवधान)
श्री
जितेन्द्र
सिंह (अलवर):
अध्यक्ष
महोदय, आपसे
निवेदन है कि
ऐसी की ऐसी
घटना 22 तारीख
को अलवर में
हुई थी
...(व्यवधान)
नियम 295
के अन्तर्गत प्राप्त
विशेष उल्लेख
की सूचनाएं
श्री
अध्यक्ष: मैं
व्यवस्था
दे रही हूं ना,
प्रक्रिया के
नियम 295 के अन्तर्गत
जो सूचनाएं
प्राप्त हुई
हैं:-
1. श्री
मुरारीलाल
मीणा (122), सदस्य
की और से
विधानसभा
क्षेत्र
बांदीकुई के
कस्बा बहिया
कलां व
गुढ़ाकटला के
पास एनीकट का
निर्माण करने
के संबंध में।
2. श्री
मोहनलाल गुप्ता
(124), सदस्य की और
से जयपुर शहर
के रसोई गैस
धारकों की समस्या
के संबंध में।
3. श्री
जोगाराम पटेल
(146), सदस्य की और
से राज्य के
विभिन्न न्यायालयों
में सहायक लोक
अभियोजक,
प्रथम एवं द्वितीय
द्वारा नेक
नीति से पैरवी
नहीं करने के
संबंध में।
4. श्री
रामनारायण
मीणा (138) सदस्य
की और से
कानूनगो
सर्किल करवर
को यथावत तहसील
नैनवां में
रखने के संबंध
में।
5. डॉ.
सुरेश चौधरी (186),
सदस्य की और
से सिद्ध मुख
परियोजना के
अंतर्गत चौकों
की रीफिटिंग
का कार्य त्वरित
गति से करवाकर
बराबन्दी
लागू करने के
संबंध में।
6. श्री
जीवाराम
चौधरी (52), सदस्य
की और से जिला
जालौर एवं
बाड़मेर की
डोडा-पोस्त
की सरकारी
लाइसेंस फीस
को कम करने के
संबंध में।
7. श्रीमती
सूर्यकान्ता
व्यास (189), सदस्य
की और से
जोधपुर शहर के
सुनियोजित
विकास हेतु
प्राधिकरण का
गठन के संबंध
में।
8. श्री
बंशीलाल खटीक
(89), सदस्य की और
से मार्बल कटर
उद्योग को
रायल्टी
मुक्त करने
के संबंध में।
9. श्री
भंवरलाल
राजपुरोहित (102),
सदस्य की और
से मकराना में
सत्र न्यायालय
खोलने के
संबंध में।
10. श्री
हेमराज मीणा (199),
सदस्य की और
से विधानसभा
क्षेत्र
किशनगंज के
शाहबाद में
ओलावृष्टि से
प्रभावित व्यक्तियों
को मुआवजा
देने के संबंध
में।
11. डॉ.
श्रीगोपाल
बाहेती (167), सदस्य
की और से पुष्कर
एवं अजमेर का
जवाहरलाल
नेहरू रिन्युअल
मिशन के तहत
विकास करने के
संबंध में।
माननीय
सदस्यों को
उनके द्वारा
दी गई सूचना
को पढ़ने की अनुमति
होगी।
शून्यकाल
श्री
जितेन्द्र
सिंह (अलवर):
अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपसे निवेदन
करना चाहता
हूं कि 22 तारीख
को मीडिया
कर्मियों के
साथ कोर्ट के
कुछ
कर्मचारियों
ने उनके कैमरे
फेंक-फेंक कर
तोड़ दिये थे ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: डॉ.
श्रीगोपाल
बाहेती ने यह
प्रश्न रख
दिया और यह
प्रश्न रख
दिया अब आपको
बोलने की
अनुमति
...(व्यवधान)
स्थगन प्रस्ताव
जब दिया जाता
है जो अध्यक्षीय
व्यवस्था
के समय उसके
पास नहीं होती
है आप प्लीज
स्थान ग्रहण
कर लें।
श्री
जितेन्द्र
सिंह (अलवर):
अध्यक्ष
महोदय, मेरा
निवेदन यह है
कि सरकार को
इसके ऊपर
वक्तव्य, जवाब
दें...
श्री
अध्यक्ष:
सरकार के लिए
कह तो दिया ...(व्यवधान)
श्री
जितेन्द्र
सिंह (अलवर): यह
अलवर का मामला
है 22 तारीख का है,
अलवर का मामला
है ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
अलवर का मामला
है आपको लिखित
में देना चाहिए
ऐसे नहीं उठता
है अलवर का
मामला है,
मौके पर
उठाइये। अब
श्री
भरतसिंहजी।
श्री
भरत सिंह
(दीगोद): माननीय
अध्यक्षजी,
आप ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
उनको भी बोल
लेने दो शून्यकाल
तो है अभी आप
कह देना, वह
खड़े हो गये
हैं।
स्थगन
प्रस्ताव आिद
पर चर्चा
प्रदेश
में समर्थन
मूल्य पर
सरसों की खरीद
आरम्भ नहीं
होने से उत्पन्न
स्थिति के
संबंध में
श्री
भरत सिंह
(दीगोद):
माननीय अध्यक्ष
जी, आपका मैं
ध्यान
दिलाना
चाहूंगा कि
पिछले एक
महीने से कोटा
क्षेत्र की
मण्डियों में
नई सरसों की
उपज बाजार की
मण्डियों में
आ रही हैं।
सरकार ने जो है
1715 रूपए समर्थन
मूल्य सरसों
का निर्धारित
किया है और
पिछले एक महीने
से किसान को
मजबूरी में
समर्थन मूल्य
पर खरीद चालू
नहीं होने की
वजह से अपनी
उपज कम से कम 100-150
क्विंटल कम
भाव से
मंडियों में
बेचनी पड़ रही
हैं। आज राज्य
सरकार को आवश्यकता
है कि तत्काल
सरसों की खरीद
जो है समर्थन
मूल्य पर
आरम्भ करें।
पिछले वर्ष एक
मार्च से इसकी
खरीद आरम्भ
करी थी और आज 6
तारीख हो चुकी
हैं। हमारी
समर्थन मूल्य
पर खरीद नहीं
होने की वजह
से किसानों को
प्रतिदिन
कोटा संभाग के
अंदर ही कम से
कम 25 लाख रूपए
की आर्थिक
हानि हो रही
है और
ओलावृष्टि और
वर्षा से
किसानों की
फसल पहले ही
प्रभावित हुई है
और इस साल
सरसों की उपज
में जो
पैदावार कोटा
संभाग में बैठ
रही है वह कम
है संभव है कि
राजस्थान के
अन्य प्रदेश
में भी कम
बैठे और क्योंकि
सरसों का रकबा
इस साल ज्यादा
है तो सरकार
को आवश्यकता
है कि तत्काल
और मैं आपसे
उम्मीद करता
हूं कि इस पर
कृषि
मंत्रीजी जो
है और संबंधित
मंत्री वक्तव्य
देंगे और केन्द्र
सरकार के ऊपर
बात नहीं टाली
जाए। सरकार अपनी
खरीद आरंभ
करें और इसकी
जो व्यवस्था
पैसे के
भुगतान की है
वह केन्द्र
से बात करके
राजस्थान के
किसान को
नुकसान नहीं
होना चाहिए।
यह मेरी आपसे
प्रार्थना
है। धन्यवाद।
भीम/अरुण/6.3.07/12.10/1h
डॉ.ओ.पी.महेन्द्रा
(सरकारी
उपमुख्य
सचेतक):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, यह
तो उलटा चोर
कोतवाल को
डांटे भारत
सरकार को
सरसों की खरीद
शुरू करनी है
राजस्थान
सरकार सारी व्यवस्था
कर चुकी है।
नेफेड को करनी
है। भारत
सरकार सरसों
की खरीद शुरू नहीं
कर रही है ।
श्री
अध्यक्ष: आप
किस हैसियत से
बोल रहे हैं?
श्री
गोविन्द राम
मेघवाल (नोखा): अध्यक्ष
महोदय,
हमारा भी
इसमें यही
आग्रह है कि
केन्द्र
सरकार तुरंत
इसमें हस्तक्षेप
करके तुरंत
खरीद शुरू
करवायें
सरसों की
किसान परेशान
है सरसों
बाजार में सस्ते
भाव में बेचनी
पड़ रही है।
श्री
शांतिलाल
चपलोत: माननीय
अध्यक्षजी,
सरसों की खरीद
बहुत गंभीर
है।
श्री
गोविन्द राम
मेघवाल (नोखा):
इसलिए हम तो
प्रतिपक्ष के साथियों
से सहयोग
चाहेंगे कि आप
लोग केन्द्र
सरकार से कह
कर और जल्दी
से जल्दी स्वीकृति
करायें और
इसमें हम तो
चाहेंगे कि ... ।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): माननीय
अध्यक्ष
महोदय, इस
सदन के माध्यम
से...।
श्री
गोविन्द राम
मेघवाल (नोखा):
...इसमें आम
सहमति बना
करके और जल्दी
से जल्दी
सरसों खरीद के
लिए केन्द्र
सरकार पर दबाव
बनाया जाए।
श्री
भरत सिंह: ...(व्यवधान)...
केन्द्र
सरकार ने कभी
मना नहीं किया
...(व्यवधान)...
श्री
शांतिलाल
चपलोत: हजारों
क्विंटल
सरसों प्रतिदिन
आ रही है...।
श्री
अध्यक्ष:
माननीय
सहकारिता
मंत्री।
श्री
शांतिलाल
चपलोत: और अभी
तक खरीददारी
चालू नहीं हुई
है मुझे लगता
है कि...।
श्री
रामनारायण
मीणा (नैनवां):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, यह
किसानों से
संबंधित
मामला है गत
वर्ष भी ...। आप
कृपा करके ...।
श्री
शांतिलाल
चपलोत: अभी तक
केन्द्र
सरकार इस बारे
में गंभीरता
से नहीं ले
रही है। केन्द्र
सरकार को इसको
गंभीरता से
लेना चाहिए और
सरकार जितनी सहायता
दे सके देनी
चाहिए। अबकी
बार गये साल
से भी डयोढ़ी
सरसों हुई है
। माननीय अध्यक्ष
महोदय, और
अभी तक केन्द्र
सरकार इस बारे
में गम्भीर
नहीं लग रही
है और खरीद के
लिए विशेष
तैयारी उनकी
लगती नहीं है।
श्री
अध्यक्ष:
सहकारिता
मंत्री जी।
श्री
रामनारायण
मीणा (नैनवां):
माननीय अध्यक्षजी,
यह मामला
जितना गम्भीर
है, मेरा जहां
तक ख्याल है
...।
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, केन्द्र
सरकार ने स्पष्ट
कहा है राज्य
सरकारों को कि
तुरन्त खरीद
शुरू करें ।
श्रीमती
ममता शर्मा:
अध्यक्ष
महोदय,
केन्द्र
सरकार ने
पिछले वर्ष भी
ढाई हजार
करोड़ की
सरसों खरीदी
थी । खरीदने
की जिम्मेदारी
तो आपकी है
पैसा देगी
केन्द्र
सरकार तो ।
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर):
यह गलत बात कर
रहे हो आप यह
राज्य सरकार
बिलकुल गम्भीर
नहीं है इस
मामले में।
श्रीमती
ममता शर्मा:
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
किसानों का
मामला है बहुत
गंभीर मामला
है सरसों की
खरीद अभी तक
शुरू नहीं हुई
है और जब बात
आती है ये
केन्द्र
सरकार पर टाल
देते हैं।
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर):
और राजस्थान
का किसान लुट
रहा है
मंडियों में
कोई व्यवस्था
नहीं है
सरकारी की तरफ
से।
श्रीमती
ममता शर्मा:
केन्द्र
सरकार केवल
पैसा देगी
खरीदने की व्यवस्था
तो आप करें।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): माननीय
अध्यक्ष
महोदय, ये
जैसी
प्रतिपक्ष की
भावना है उस
भावना को
देखते हुए ...।
श्री
अध्यक्ष:
माननीय कृषि
मंत्री जी,
माननीय सदस्यों
की उत्तेजना
को देखते हुए
यदि आप इस
बारे में कुछ
कहना चाहें।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): एक मिनट
मैं एक निवेदन
करूं। एक
मिनट।
श्री
अध्यक्ष: अब
क्या कहेंगे?
बात हो गयी।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): मुझे
परमीशन दें एक
मिनट के लए।
श्री
अध्यक्ष: जब
मंत्री जी
खड़े हो गये
फिर क्या बात
है?
श्री
रामनारायण
मीणा (नैनवां):
कमाल यह है कि
अध्यक्ष जी,
कृषि मंत्री
जी सहकारिता
मंत्री जी भी
हैं।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): एक मिनट
एक निवेदन
सिर्फ एक मिनट
माननीय अध्यक्ष
महोदय।
श्री
शांतिलाल
चपलोत: ...(व्यवधान)...
अभी तक केन्द्र
सरकार उस बारे
में कोई
गंभीरता नहीं
ले रही है।
श्री
रामनारायण
मीणा (नैनवां):
केन्द्र
सरकार को गाली
निकालने के
लिए पैदा हुए
हैं क्या
अपन? अपन तो
किसानों की
समस्याओं के
लिए ...(व्यवधान)...श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): माननीय
अध्यक्ष महोदय, यह सदन की
पूरी भावना
है।
श्री
अध्यक्ष:
माननीय
मंत्री जी,
खड़े हैं और
आप बीच में क्यों
खड़े हैं?
मंत्री जी
खड़े हो गये
हैं।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): एक मिनट
आपकी परमीशन
से एक मिनट।
श्री
अध्यक्ष: बात
तो आ गयी न?
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): आपकी परमीशन
से।
श्री
अध्यक्ष: बात
आ गयी मंत्री
जी खड़े हैं।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): एक
मिनट। आधा
मिनट कर दें।
श्री
अध्यक्ष: क्या
होगा? बात उठा
ली उन्होंने।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): ...(व्यवधान)...
आपकी पंचायती
काहे की है? आपको
काहे की
पंचायती है? ...(व्यवधान)...श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
लूणी से आने
वाले माननीय
सदस्य, भरत
सिह जी ने जो
स्थगन प्रस्ताव
जिस बात पर..।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): एक
लाइन।
श्री
अध्यक्ष: आप
क्यों लेकिन?
क्या मतलब?
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): एक लाइन
निवेदन करना
चाहता हूं।
श्री
अध्यक्ष:
नौ-नौ, प्लीज
सिट डाउन। हां
माननीय कृषि
मंत्री जी।
श्री
प्रभुलाल
सैनी (कृषि
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
दीगोद से आने
वाले माननीय
सदस्य एवं
अन्य माननीय
सदस्यों
द्वारा जो
चिन्ता
जाहिर की है
वास्तव में
यह वाजिब है
और यह किसानों
से जुड़ा एक
संवेदनशील
मुद्दा है
लेकिन मैं सदन
को जानकारी
देना चाहूंगा
कि समर्थन
मूल्य पर
सरसों की खरीद
भारत सरकार के
नेफेड के द्वारा
की जाती है और
नेफेड को
माननीय मुख्यमंत्री
जी के द्वारा,
सहकारिता
मंत्री जी के द्वारा,
राजस्थान
सरकार के मुख्य
सचिव के द्वारा
कई पत्र लिखे,
हम लोगों ने
राजस्थान
में सरसों
क्रय करने
हेतु आग्रह
किया है लेकिन
आज दिन तक भी
नेफेड के
द्वारा राजस्थान
सरकार को
सरसों क्रय की
अनुमति नहीं
मिल पायी है। मैं
आपको यह
जानकारी देना
चाहूंगा माननीय
अध्यक्ष
महोदय, यह
बिलकुल सही है
कि राजस्थान
में इस वर्ष
लगभग 28 लाख
हैक्टैयर
में सरसों की
बुवाई की गयी है
और यह भी सही
है कि 40-42 लाख
मीट्रिक टन
सरसों राजस्थान
में इस वर्ष
उत्पादित
होगी।
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
मैं सदन को
जानकारी देना
चाहूंगा कि
राजस्थान
सरकार के
द्वारा
माननीय मुख्यमंत्री
जी के द्वारा
हम लोगों ने
केन्द्र
सरकार को
नेफेड को 20 लाख
मीट्रिक टन
सरसों क्रय
करने के लिए
प्रस्ताव
भेजे हैं और जो
मित्रवत
राजस्थान
सरकार सहयोग
कर सकती है
किसानों के
हित में, हम
लोगों ने 263
केन्द्र
चिह्नित करके
भारत सरकार को
भेजे हैं लेकिन
सरसों क्रय की
नेफेड के
द्वारा
अनुमति आज दिन
तक हम लोगों
को नहीं मिली।
मैं सदन को
आश्वस्त
करना चाहूंगा
कि ज्यों ही
आप...।
श्री
रामनारायण
मीणा (नैनवां):
आप जाकर के
मिले हो क्या?
यह पत्र भेजे
रोजाना
अख़बार में
पढ़ते हैं ये
योजनाएं।
कृपा
करके आम जनता
का सभी पार्टियों
के किसान हैं
आप जाकर कब
मिल रहे हैं? कृपा
करके आप जाकर के
बात करें। आपके
मुख्यमंत्री
जी रोजाना
दिल्ली जाती
हैं आप उनको
सजेस्ट
करिये और आप
जाकर के बात
करिये बहुत
गंभीर मसला है
और आपके पास
तो खजाना है
बैंकों से लोन
ले लीजिये बाद
में पैसा मिल
जाएगा आपको।
श्रीमती
ममता शर्मा:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, यह खरीदना
तो चालू करें
पैसा तो आ
जाएगा केन्द्र
सरकार से।
आपने खरीद ही
चालू नहीं की
। आपने केन्द्र
ही नहीं खोले
अभी तक खरीद
के पैसा देने
को केन्द्र
मना नहीं कर
रही है लेकिन
आप लोग खरीद
ही चालू नहीं
कर रहे हैं।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): पिछली
बार खरीदा था
...(व्यवधान)...
जिसके आंदोलन
करके बैठ गये।
श्रीमती
ममता शर्मा:
किसान परेशान
हैं अभी तक
आपने खरीद
चालू नहीं की
और आप हर बात
नेफेड और केन्द्र
सरकार पर टाल
देते हैं।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): तो यह
बात केन्द्र
सरकार को क्यों
नहीं बताते
हो?
श्री
अध्यक्ष:
माननीय
मंत्री जी
खड़े हैं।
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
तारीख तो
बतायें कब से
शुरू करेंगे?
श्री
अध्यक्ष:
पूरी बात तो
सुनिये आप।
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): वो केन्द्र
सरकार से
पूछें।
श्री
प्रभुलाल
सैनी (कृषि
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
जैसा कि बूंदी
से आने वाली
माननीय सदस्या
ने यह कहा कि आप
लोग ...।
श्री
अध्यक्ष:
नहीं आप तो एक
बात स्पष्ट
कर दो कि जब तक
नेफेड नहीं
कहेगी हम नहीं
कर सकते, यह
बोल दो बस।
श्री
प्रभुलाल सैनी
(कृषि मंत्री):
नहीं इसके
अलावा फिर भी
मैं कहना
चाहूंगा सदन
को कि यह
किसान से
जुड़ा मुद्दा
है इसमें
राजनीति नहीं
करनी चाहिए और
हम सबको सदन
में एक प्रस्ताव
लाना चाहिए इस
बात का कि
नेफेड शीघ्र
राजस्थान
में सरसों का
क्रय प्रारम्भ
करे क्योंकि
राजस्थान सरकार
और ये सदन
चाहे वो पक्ष
हो या चाहे
विपक्ष हो हम
सब मिलकर
चाहते हैं कि
राजस्थान
में किसानों
की सरसों
समर्थन मूल्य
पर जो कृषि
मूल्य एवं
लागत आयोग
द्वारा जो
राशि
निर्धारित की गयी
है 1715 रुपये उसका
निर्णय हम सब
इस सदन के
माध्यम से
लेकर भारत
सरकार से यह
कहें कि आप
शीघ्र राजस्थान
में सरसों
क्रय केन्द्र
खोलने की
अनुमति हमें
दी जाए।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आप सारे
मंत्रियों का
सर्टिफिकेट,
कल अभिभाषण के
समय सब
मंत्रियों का
जो केन्द्र
के आये हैं
उन्होंने
आपकी जो
तारीफें की
हैं वो सब
बांच चुके, आप
अकेले जाकर
नहीं करा कर
ला सकते क्या? आपने सबको
पढ़ा।
आपने माननीय
सदस्य ने
अभिभाषण पर
पढ़ा था कि
फलां मंत्री
ने आपकी तारीफ
की सरकार की,
मुख्यमंत्रीजी
की की तो आप
जाकर करवा लो
न इसको।
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री): हरिमोहन
जी आप साथ
जाएंगे तब
होगा आप
जाइये।
श्री
अध्यक्ष: हर
मामले में
खड़े होना
उचित नहीं है।
श्री
सुरेन्द्रपाल
सिंह टीटी: अध्यक्ष
महोदय,
किसानों के
मामले में
केन्द्र
सरकार का
सहयोग मिलता
नहीं है
यूरिया लेट दी,
आपको एड देनी
थी बाड़मेर को
कम दी आपने। हर
काम में आपकी
सरकार असहयोग
करती है।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
किसानों कि
मामले में जो
अत्याचार इस
सरकार ने किये
हैं न टीटी
साहब वो तो राजस्थान
में मिसाल
रहेगी। 17
आदमियों को क़तलेआम
कर दिया।
किसानों की
बात करने
वालों ने और
आज किसानों के
हितों की बात करते
हो। खुद तो
इंकंपीटेंट
हो और बोझ
दूसरे पर
डालना चाहते
हो।
श्री
सुरेन्द्रपाल
सिंह टीटी: आप
किसानों को
गुमराह करते हो
एक भी किसान
नहीं आपके
कार्यकर्ता
करते हैं सारा।
कितने किसान
आये थे आपके
आंदोलन में दो
सौ किसान नहीं
आये।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
ये युनूस खान
जी पर भी
हमारे
कार्यकर्ताओं
ने किया होगा
हमला? थोड़ा
बहुत तो शर्म
करो।
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्यक्ष महोदय, मैं धन्यवाद देना चाहूंगा दीगोद से आने वाले माननीय सदस्य को कि इन्होंने बड़ा समसामयिक और बड़ा किसान से जुड़े मुद्दे को उठाया। कृषि मंत्री महोदय ने आपसे एक आग्रह किया है सरसों नî