Ddm/usc/1a/1100/05102006
अशोधित
प्रति/
प्रकाशनार्थ
नहीं
राजस्थान
विधान सभा की
कार्यवाही का
वृत्तान्त
अंक 6
बारहवीं
विधान सभा के
छठे सत्र का
तीसरा दिवस संख्या 3
गुरूवार,
05
अक्टूबर, 2006
राजस्थान
विधान सभा की
बैठक 11.00 बजे
विधान
सभा भवन,
जयपुर में
प्रारम्भ
हुई।
(श्रीमती
सुमित्रा
सिंह, अध्यक्ष,
पदासीन)
तारांकित
प्रश्नोत्तर
श्री अध्यक्ष:
श्री बाबूलाल
नागर।
विधान
सभा क्षेत्र
दूदू के
विद्यालयों
में अध्यापकों
के रिक्त पद
19.श्री
बाबूलाल नागर
(दूदू): क्या
शिक्षा
मंत्री यह
बताने की कृपा
करेंगे:-
(1) सर्व
शिक्षा
अभियान में
भारत सरकार
द्वारा तृतीय श्रेणी
अध्यापकों
के पदों की
भर्ती हेतु
वर्ष 2004-05, 2005-06 व 2006-07
में कुल कितने
पद स्वीकृत
किये गये तथा
राज्य सरकार
द्वारा
वर्षवार सर्व
शिक्षा
अभियान में
कितने पदों की
भर्ती की गयी?
(2)वर्तमान
में कुल कितने
पद रिक्त
हैं, इनमें से
रोस्टर के
अनुसार
अनुसूचित
जाति, जनजाति
वर्गों के बैक
लॉग रहित कुल
कितने पद रिक्त
हैं? रिक्त
पदों को सरकार
कब तक भरने का
विचार रखती
है?
(3)विधान सभा
क्षेत्र दूदू
में तृतीय
श्रेणी अध्यापकों
के कुल कितने
पद स्वीकृत
हैं तथा इनमें
से वर्तमान
में कितने पद रिक्त
हैं, रिक्त
पदों को कब तक
भर दिया
जायेगा?
(4)पंचायत
समिति दूदू
में कितने ऐसे
विद्यालय हैं
जहां एक ही
अध्यापक
कार्य कर रहा
है? एकल अध्यापक
वाले
विद्यालयों
में क्या
सरकार
प्राथमिकता
से रिक्त अध्यापकों
के पदों को
भरने का विचार
रखती है?
यदि हां, तो
कब तक व नहीं,
तो क्यों?
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री)(श्री
घनश्याम
तिवाड़ी,शिक्षा
मंत्री के स्थान
पर): अध्यक्ष
महोदय, आपकी
अनुमति से, (1)
सर्व शिक्षा
अभियान के अन्तर्गत
भारत सरकार
द्वारा तृतीय श्रेणी
अध्यापकों
की भर्ती हेतु
कोई पद स्वीकृत
नहीं किये गये
हैं, बल्कि
सर्व शिक्षा अभियान
के अन्तर्गत
राज्य सरकार
द्वारा तृतीय
श्रेणी अध्यापकों
के वर्ष 2004-05, 2005-06
एवं 2006-07 में स्वीकृत
पदों की संख्या
क्रमश: 15138, 7200 एवं 25303
हैं, जबकि वर्षवार
क्रमश: 4554, 10990 एवं 821
तृतीय श्रेणी
अध्यापकों
की भर्ती की
गई है। शेष
पदों की भर्ती
प्रक्रियाधीन
है।
(2) वर्तमान
में तृतीय
श्रेणी अध्यापकों
के 26741 पद रिक्त
हैं, इनमें
रोस्टर के
अनुसार सिर्फ
टी.एस.पी.
क्षेत्र के
अनुसूचित
जाति एवं
अनुसूचित जनजाति
वर्गों के बैक
लॉग के 890 पद
सम्मिलित
हैं। इसके
अतिरिक्त
नवीन सत्र 2006-07
हेतु राज्य
सरकार द्वारा
तृतीय श्रेणी
अध्यापकों
के 25303 पद स्वीकृत
किये गये हैं,
जिनके
जिलावार
आबंटन का कार्य
भी चालू है।
तृतीय श्रेणी
अध्यापकों
की भर्ती
राजस्थान
लोक सेवा आयोग
के माध्यम से
किये जाने की
कार्यवाही
प्रक्रियाधीन
है।
(3) विधान सभा
क्षेत्र दूदू
में तृतीय
श्रेणी अध्यापकों
के कुल 1055 स्वीकृत
पदों में से 262
पद रिक्त
हैं। राजस्थान
लोक सेवा आयोग
से चयनित
आशार्थी
उपलब्ध होने
पर रिक्त पद
भरे जा
सकेंगे।
(4)पंचायत
समिति दूदू
में 58
प्राथमिक
विद्यालय ऐसे
हैं जहां
प्रत्येक
विद्यालय में
एक ही अध्यापक
कार्यरत है।
राजस्थान
लोक सेवा आयोग
से चयनित
आशार्थी
उपलब्ध होने
पर रिक्त
पदों को भरा
जा सकेगा।
श्री
बाबूलाल नागर
(दूदू):
अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से मंत्री
महोदय से
पूछना चाह रहा
हूं, इन 3
वर्षों में स्वीकृत
पद 47641 आपने
बताये हैं और
भर्ती किये
आपने 16365 तो 3
वर्षों में स्वीकृत
होने के
बावजूद भी
सरकार ने अभी
तक 16300 पदों की
भर्ती की है,
क्या कारण
रहे? दूसरा
मैं यह निवेदन
करना चाह रहा
हूं, यह जो
आपने भर्ती
किये हैं 16365,
इसमें भारत
सरकार के बजट
से तो इसमें
कितनी राशि
खर्च की है,
आपने और राजस्थान
सरकार के बजट
से आपने कितनी
राशि खर्च की है?
दूसरा, अध्यक्ष
महोदय, यह
मैंने रोस्टर
के सम्बन्ध
में निवेदन
किया है, 05.07.85 तक
वेकेंसी
आधारित अनुसूचित
जाति, जनजाति
के रोस्टर का
मॉडल बना हुआ
था, 20.11.97 को जब
प्रदेश में
भारतीय जनता
पार्टी की
सरकार थी तब
पद आधारित
रोस्टर मॉडल
का कार्मिक
विभाग से एक
परिपत्र जारी हुआ।
अध्यक्ष
महोदय,
अनुसूचित
जाति को
संविधान
प्रदत्त व्यवस्था
है 16 प्रतिशत,
अनुसूचित
जनजाति को 12
प्रतिशत है।
अब 20.11.97 को आपका
रोस्टर मॉडल
जारी हुआ है,
उसमें 100 में 16 और
25 पर 4 पद..।
श्री अध्यक्ष:
आप सारी
इंफार्मेशंस
तो दे रहे हैं
उन्हें।
उनसे क्या
इंफार्मेशन
लेंगे। (व्यवधान)
प्रश्नकाल
सूचना लेने के
लिये होता है।
श्री
बाबूलाल नागर
(दूदू): अध्यक्ष
महोदय, मैं
सटीक पूछ रहा
हूं। 20.11.97 को जो
परिपत्र जारी
हुआ है, रोस्टर
के सम्बन्ध
में उस
परिपत्र में
जो एक आपने
निर्धारित किया
है, उसमें 25 पर
हिसाब से 4 पद
होने चाहिए
लेकिन इसमें 3
पद आते हैं।
इसी तरह एस.टी.
में 50 पर 6 आने चाहिए।
(व्यवधान)
प्रश्न पूछ
रहा हूं मैं।
श्री अध्यक्ष:
आप प्रश्न
पूछिये। (व्यवधान)
नो, भाषण अलाऊ
नहीं है। भाषण
अलाऊ नहीं है।
प्रश्न के
फोरम में
पूछिये।
श्री
बाबूलाल नागर
(दूदू): इसमें 50
पर 5 आते हैं।
(व्यवधान) 20.11.97
को जो आपने
जारी किया
इसको वापस ठीक
करने का मन
रखते हैं क्या?
क्योंकि जो 16
और 12 का आपने
दिया है वह 16 और 12
की पूर्ति नहीं
हो रही है। 16
प्रतिशत की
पूर्ति नहीं
हो रही है और 12
प्रतिशत की
पूर्ति नहीं
हो रही है। और
अध्यक्ष
महोदय, मेरे
क्षेत्र में 58
विद्यालय ऐसे हैं,
जहां एक अध्यापक
काम कर रहा
है।
श्री अध्यक्ष:
आप उन्हें
इन्फार्मेशन
दे रहे हैं, यह
प्रश्न होता
है इन्फार्मेशन
लेने के लिये।
आप के पास जो
जानकारी नहीं
है, वह
जानकारी
प्राप्त
करें। (व्यवधान)
श्री
बाबूलाल नागर
(दूदू): अध्यक्ष
महोदय, मैं
इतना सा
निवेदन करना
चाह रहा हूं
कि इन 58
विद्यालयों
में एक अध्यापक
है, ऐसे 58
विद्यालय, अभी
टूर्नामेंट
हुए, सब के सब
विद्यालय बंद
हो गये। यह 58
विद्यालय, जहां
एक-एक अध्यापक
पूरे राजस्थान
में जहां भी
हैं, यह कब तक
भर दिये
जाएंगे। यह
मेरा निवेदन
है। एक
अन्तिम...। (व्यवधान)
अध्यक्ष
महोदय, एक
अन्तिम, जो
आपने नये
विद्यालय
खोले हैं, इनमें
राजस्थान
में कुल कितने
पद सृजित
किये। अभी मई
से सेवानिवृत्त
हुए हैं,
उसमें कुल
कितने
सेवानिवृत्त
हो गये और जब
एक दिसम्बर 2003
से पूरे राजस्थान
में कितने अध्यापक
रिक्त थे, यह
बता दें। इतना
सा निवेदन करना
चाह रहा हूं।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, आपने
कहा कि कुल 56777 पद
रिक्त हैं।
मैंने स्वयं
ने भी इसको स्वीकार
किया है और
उसमें से 33
हजार...।
श्री अध्यक्ष:
56 हजार नहीं, 26
हजार हैं।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): नहीं,
टोटल मिलाकर,
सब मिलाकर अब
तक, जो वेकेंसीज
बनती हैं, वह 56777
बनती हैं।
इसमें से 35
हजार की भर्ती
पहले कर चुके
हैं और बाकी 25303
की भर्ती अभी
प्रोसेस में
चल रही है,
आर.पी.एस.सी. को
गयी हुई है।
वहां से उसकी
पूर्ति होने
के बाद इन
पदों की भर्ती
होगी। जहां तक
आपका सवाल है
कि सरकार ने
सारा जो है सर्व
शिक्षा
अभियान के
पैसे से ही
अध्यापक
लगाये जा रहे
हैं। ऐसा नहीं
है। गैर योजना
मद में भी 2004-05
में 7933, 05-06 में 8427
लगाये हैं और 06-07
में 267, इस तरह से
16627 पद नॉन प्लान
में लगाये
हैं। प्लान
में लगाये हैं
2004-05 में 905, 05-06 में 1899
और 06-07 में सौ। इस
तरह से प्लान
में 2904 लगाये
हैं। केवल यह
कि सर्व
शिक्षा अभियान
के पैसे में
से, जो हमने 35
हजार की भर्ती
की है, उसमें 16365
लगाये हैं। तो
नॉन प्लान
में भी लगाये
हैं, प्लान
में भी लगाये
हैं और सर्व
शिक्षा
अभियान में भी
लगाये हैं। यह
पिछले साल की
जो भर्ती हुई,
जिसमें 3 हजार
विडो और वह था, और
बाकी
आर.पी.एस.सी. से
था, वह जो 35 हजार
के लिये था और
इस साल जो
हमने 25303 कीर स्वीकृति
के लिये
आर.पी.एस.सी. को
भेजा हुआ है,
आर.पी.एस.सी.
में प्रोसेस
में है, वह
अपना काकम
पूरा करके जब
भर्ती करके
हमको देंगे तो
यह जो आपकी
वेकेंसी 56777 है,
इसको पूरा
करेंगे। एक
आपने जो दिया
कि रोस्टर के
पद हैं,
शिक्षा विभाग
में, मैं
समझता हूं शायद
पहला विभाग
होगा, जिसमें
आज की तारीख
में कोई
बैकलॉग नहीं
है किसी भी
प्रकार का।
केवल एक
बैकलॉग है वह
एस.सी., एस.टी., जो
हमारा
शिड्यूल्ड
एरिया है,
उसके आठ सौ
कुछ पद हैं,
जिन पदों पर चयनित
व्यक्ति
वहां उपलब्ध
नहीं होने के
कारण से वह पद
रिक्त हो
गये। उनको
हमने इस
वेकेंसी में
इस बार फाइनेंस
से स्वीकृति
लेकर
आर.पी.एस.सी. के
को भेज रहे
हैं ताकि उनकी
भर्ती पूरी हो
जाए। तो
शिक्षा विभाग
में 100 प्रतिशत,
जितना भी
बैकलॉग है, वह
सारा का सारा
पूरा हो गया
और यह बचा हुआ
आठ सौ कुछ हैं,
यह भी पूरा हो
जायेगा। (व्यवधान)
श्री
बाबूलाल नागर
(दूदू): माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैंने
निवेदन किया
कि 20.11.97 को जो आपने
रोस्टर का
मॉडल दिया है,
कार्मिक
विभाग ने जारी
किया है, उस के
तहत संविधान
प्रदत्त 16
प्रतिशत और 12
प्रतिशत की, न
तो सीधी भर्ती
में, न पदोन्नति
में पूर्ति हो
रही है। 25 पर उस
रोस्टर के
बिंदू के
अनुसार 3 आदमी
आते हैं जबकि 16
प्रतिशत पर 4
आदमी आते हैं।
श्री अध्यक्ष:
प्रश्न
पूछें, भाषण
नहीं।
श्री
बाबूलाल नागर
(दूदू): और इसी
तरह एस.टी. में 50
में से 6 आदमी
आने चाहिए,
एस.टी. में 50 में
से 5 आदमी आ रहे
हैं।
श्री अध्यक्ष:
आप भाषण क्यों
देना चाहते
हैं। प्रश्न
पूछिये। वह कह
रहे हैं कर
दिया पूरा,
बैकलॉग है ही
नहीं।
श्री
बाबूलाल नागर
(दूदू): मैंने
यह निवेदन
किया ...(व्यवधान)
नहीं, कहां कर
दिया। जब आपका
यह परिपत्र
है, रोस्टर
का मॉडल है,
गलत है, जब 16-12 का
है, आप उल्लंघन
कर रहे हैं, जब 16
और 12 की पूर्ति
ही नहीं कर रहे
हैं।
विष्णु/यू.एस./05.10.06/ 11.10/ 1b
जब आपकी वरीयता सूची ही गलत है, वरीयता सूची ही ठीक नहीं हो सकती तो फिर आपकी रोस्टर की पूर्ति कैसे होगी? तो मेरा निवेदन यह है कि पहले आप जो आपका यह 20.11.97 का कार्मिक विभाग ने रोस्टर का मॉडल जारी किया है उसको दुरुस्त करने का मन रखते हैं ? और जो 16, 12 के अनुसार संविधान प्रदत्त व्यवस्था है उसकी सरकार पूर्ति करना चाहती है? नहीं करना चाहती है तो आटोमैटिक ही रोस्टर का मामला ही खतम हो गया, जब हमारा 16 का नहीं बनता और न 12 का बनता। ... (व्यवधान)
श्री गुलाब चन्द कटारिया (गृह मंत्री): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं सोचता हूं कि शिक्षा विभाग में भर्ती कोई 25 पर, 8 पर नहीं है जिसके कारण से 16 परसेंट को डिवाइड करने में कोई परेशानी नहीं है। वहां हजारों पदों के ऊपर भर्ती हो रही है और इसके कारण से उसके जो 16, 12 का जो उनका हिस्सा बनता है वह सेंट-परसेंट इसकी पालना की और यहां तक कि इस भर्ती में जो पुराना बेकलॉग था उसको भी पहले पूरा करते हुए आज की तारीख में शिक्षा विभाग यह कहने की स्थिति में है कि उसका किसी भी प्रकार का बेकलॉग बाकी नहीं है। केवल टी.एस.पी. एरिया का क्योंकि हमारे पास अभ्यार्थी उपलब्ध नहीं थे तो वह पोस्ट हमारी जरूर खाली गयी है, उनको फिर हमने इस साल मिलाकर फाइनेंस से स्वीकृति के लिए भेजा है। वह मिलने के बाद आर.पी.एस.सी. को जाकर यह पद भी, अगर वहां टी.एस.पी. एरिये में ट्राइब के लोग हमें मिल जाएंगे तो उनको लेने के बाद हम यह कह सकेंगे कि हण्ड्रेड परसेंट कोई बेकलॉग और किसी भी प्रकार का 12, 16 परसेंट का जो हिस्सा है, उसमें कोई कमी नहीं रहेगी। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: डाक्टर चन्द्रशेखर बैद।
श्री बाबूलाल नागर (दूदू): माननीय अध्यक्ष महोदय, कई ऐसे पद हैं जो संख्या में कम स्वीकृत हैं। जो 100 से कम संख्या में स्वीकृत हैं। व्याख्याताओं के और सब्जैक्ट विषय के, विषयवाइज जो संख्या में कम है। मेरा प्रश्न इतना सा है। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: आप भाषण देते हैं। प्रश्न तो पूछ नहीं रहे हैं। आप प्रश्न तो पूछ नहीं रहे हैं और भाषण देने लग जाते हैं। 11 मिनट हो गये। प्रश्न पूछते नहीं है। केवल यह दिखा रहे हो आप तो। ... (व्यवधान)
श्री बाबूलाल नागर (दूदू): माननीय अध्यक्ष महोदय, यह इतना महत्वपूर्ण प्रश्न है। पूरे अनुसूचित जाति, जनजाति के लोगों के साथ जब आपकी पिछली सरकार, भारतीय जनता पार्टी की सरकार, जो पहले सरकार आयी थी, यह काला परिपत्र आपने जारी कर दिया और आरक्षण को इस परिपत्र के माध्यम से आपने 16, 12 को ही खतम कर दिया। मेरी जो मूल मंशा है कि इस परिपत्र को आप दुरुस्त करने का मन रखते हैं क्या? मेरा प्रश्न है कि इसको दुरुस्त करने का मन रखते हैं तो बता दें। 16, 12 की ही पूर्ति नहीं हो रही है माननीय अध्यक्ष महोदय, ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: डाक्टर चन्द्रशेखर बैद। विराजये, विराजिये।
श्री बाबूलाल नागर (दूदू): आपके रोस्टर की परम्परा ही गलत बनेगी। माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं तो आपके हुक्म की पालना कर दूंगा लेकिन यह कोई साधारण बात नहीं है। माननीय अध्यक्ष महोदय, आज तक 16, 12 जो संविधान प्रदत्त व्यवस्था है, उसको भी इस सरकार ने जब यह पिछली बार सरकार में थे और इसने काला परिपत्र निकाल दिया और 16, 12 खतम कर दिया। ... (व्यवधान)
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): तो फिर आप बीच में पाँच साल आप पधारे थे न, शिक्षा मंत्रीजी को कहते, क्यों नहीं आपने विद्-ड्रा किया उसको? पाँच साल आप सरकार में रहे, अब कह रहे हो।
श्री बाबूलाल नागर (दूदू): इसको ठीक करो। अब मैं जो सरकार है उसको कह रहा हूं। जो सरकार ने, आपकी ने गलती की है इसको ठीक करो आप। आपने 16, 12 की व्यवस्था ही खतम कर दी।
श्री अध्यक्ष: आपको भी मौका था।
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): सी.पी.जोशी का किया हुआ काम हम ठीक नहीं करेंगे। ... (व्यवधान)
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): नहीं-नहीं, वह आपकी गलती है। आपको ही ठीक करना पड़ेगा। आपकी गलती को आप स्वयं ठीक कर करो इसलिए नहीं किया। ... (व्यवधान)
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप विधायकों को धमका रहे हैं और उनको रोब दिखाते हैं। यह बात नहीं चलेगी। आपका यह दायित्व नहीं है। आपका दायित्व यह है कि आप हमें भी कॉ-आपरेट करें। आपका दायित्व यह है कि पूरा उत्तर दिलवाये। आज सबसे बड़ी समस्या अध्यापकों की कमी की स्कूलों में चल रही है और उसमें यह इम्पोर्टेण्ट क्वेश्चन है और जो सर्कुलर सरकार का विरोधाभासी है उस पर स्पष्टीकरण माननीय अध्यक्ष महोदय, दिलवाइये। अब आपकी खुद की ... (व्यवधान)
श्री अशोक बैरवा (खण्डार): जारी भारतीय जनता पार्टी सरकार ने 1997 में किया, भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने किया। ... (व्यवधान)
श्री रमेश खींची (कठूमर): आप इसको ऐसे ले रहे हैं, एस.सी., एस.टी. के मसले को ले जाते हो, आप जवाब दे दें कि यह जो रोस्टर बना है गलत, उसको आप ठीक करेंगे या नहीं करेंगे? बात इसकी है। ... (व्यवधान)
श्री अशोक बैरवा (खण्डार): आप सही करवा दो इसको। ... (व्यवधान)
श्री गुलाब चन्द कटारिया (गृह मंत्री): माननीय अध्यक्ष महोदय, स्वाभाविक है, सदन के सब लोगों को इस बारे में स्वाभाविक पीड़ा है कि जितने अध्यापकों की आवश्यकता है आज भी है, उतनी पूर्ति नहीं हो पायी, उसके कारण से आपका प्रश्न पूछना स्वाभाविक है लेकिन आपको यह भी विचार करना चाहिए कि पिछले पाँच साल में आपने केवल 443 अध्यापकों की भर्ती की। एक सैकण्ड, एक मिनट सुन लीजिए। ... (व्यवधान)
श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): यह तो केन्द्र सरकार से पैसे आ गये इसलिए आपने किया है, आपने अपने ... (व्यवधान)
श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): माननीय अध्यक्ष महोदय, सवाल भर्ती का नहीं है। आपने खुद ने कहा है ... (व्यवधान)
श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): यह जो कुछ भी किया है यह सर्व शिक्षा अभियान का पैसा आया है इसलिए किया है। ... (व्यवधान)
श्री बाबूलाल नागर (दूदू): हम किसी से भीख नहीं मांग रहे हैं। यह संविधान में व्यवस्था है 16, 12 की। ... (व्यवधान)
श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): यह शिक्षा का पैसा केन्द्र सरकार से मिला इसलिए आपने यह किया। यह आपका काम नहीं है।
श्री प्रद्युम्न सिंह (राजाखेड़ा): माननीय अध्यक्ष महोदय, एक यह माननीय गृह मंत्रीजी ने जो ... (व्यवधान)
श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): यह आपका काम नहीं है।
श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): इनका ध्यान नहीं रखा गया है। क्या मंत्रीजी इनका ध्यान रखकर दुबारा से रोस्टर को वर्क-आउट करवाएंगे क्या? इतना सा है। आपने जितनी भर्ती की शिक्षा विभाग में इसमें 16 परसेंट और 12 परसेंट लेना था एस.सी. और एस.टी. का, उसके आधार पर यदि रोस्टर के आधार पर पूरे अगर कर्मचारी नहीं आये, अध्यापक नहीं आये तो क्या दुबारा से आप उस परिपत्र को दिखवाएंगे क्या ताकि उसके आधार पर पुन: भर्ती की जाए। क्या उसको पूरा करेंगे, इतना सा मेरा सवाल है। ... (व्यवधान)
श्री प्रद्युम्न सिंह (राजाखेड़ा): माननीय अध्यक्ष महोदय।
श्री अध्यक्ष: हां।
श्री प्रद्युम्न सिंह (राजाखेड़ा): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं बहुत आदर करता हूं गृह मंत्रीजी का जो शिक्षा मंत्रीजी के बिहाफ पर जवाब दे रहे हैं। मुझे इस बात का सख्त एतराज है कि आप गलत बयानी कर रहे हैं, नम्बर-1, सरकार के आते ही, पिछली सरकार के आते ही पहले वर्ष भी पाँच हजार अध्यापक लगाये गये थे, काइंडली करेक्ट द रिकार्ड, आप पता लगाइये। अब आपसे मैं दूसरी बात कहता हूं। 2001-2002, 2002-2003 में ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: आप प्रश्न के रूप में पूछिये। प्रश्न के रूप में पूछिये। आप यूं पूछिये कि क्या पाँच हजार नहीं लगाये गये थे? आप प्रश्न के रूप में पूछिये। ... (व्यवधान)
श्री प्रद्युम्न सिंह (राजाखेड़ा): मैं बता रहा हूं आपको। पिछले तीन सालों के अन्दर, उस कार्यकाल के अन्दर आप फाइल देख लीजिए। कितने सेंक्शन पद थे। पी.ए.सी. को लिखा गया लेकिन स्टे आर्डर आ गया और यहां शिक्षा मंत्रीजी ने स्वयं स्वीकार किया है कि स्टे के कारण वह भर्ती नहीं हो सकी। फिर उसके बाद पैराटीचर्स को, 35 हजार पैराटीचर्स लगाये थे। आप यह कहते हैं कि आपने, जब अपनी वाहवाही लेते हैं तो जितने आपने लगाये हैं, मानदेय के ऊपर लगाये हैं, उन सबको तो आप गिनाते हैं कि हमने इतने लोगों को नौकरी दे दी, एक लाख लोगों को नौकरी देने की बात थी और जब यहां पर यह आता है तो आप कहते हैं कि 427 लगाये हैं, यह बहुत ही अनुचित उत्तर है इसलिए मैं इसका विरोध करता हूं। इस उत्तर का यहां बैठकर, यह राजनीतिक से प्रेरित होकर उत्तर दिया जा रहा है। ... (व्यवधान)
श्री गुलाब चन्द कटारिया (गृह मंत्री): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपको विरोध का मौका ही नहीं दूंगा कि आप विरोध कर सकें। मैं मौका ही नहीं दूंगा आपको। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: प्रश्नकाल में विरोध करते हैं क्या? क्वेश्चन आवर में कोई विरोध करते हैं क्या? जो कुछ भी पूछते हैं उसके बाद उत्तर आ जाता है।
श्री गुलाब चन्द कटारिया (गृह मंत्री): मैं जो कुछ भी कह रहा हूं वह प्राथमिक शिक्षा के बारे में कह रहा हूं और प्राथमिक शिक्षा की भर्ती में मैं आपको एक-एक साल की सुनाने को तैयार हूं। आकड़ों के सहित सुनाने को तैयार हूं। 1998-99 में 2689 हुआ, यह हमारा कार्यकाल था और लास्ट में तीन-चार महीने आपके बचे थे। मार्च, अप्रैल ... (व्यवधान) एक मिनट विषय को सुन लो। उसके बाद 1999-200 में ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: राजाखेड़ा से आने वाले माननीय सदस्य।
श्री बाबूलाल नागर (दूदू): नहीं आप 20.11.97 को जो रोस्टर का मॉडल जारी किया है, कार्मिक विभाग ने उसके बारे में जानना चाह रहे हैं आपसे ... (व्यवधान)
श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): वह भर्ती आपने की है उसमें 12 और 16 परसेंट का वायलेट किया है। ... (व्यवधान)
श्री बाबूलाल नागर (दूदू): 16, 12 की जो संविधान प्रदत्त व्यवस्था है इसको आप दुरुस्त करना चाहते हैं क्या? जो आपकी सरकार ने गलती की है। ... (व्यवधान)
श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): 16 परसेंट और 12 परसेंट का वायलेट किया है उसकी बात है। जो 16, 12 परसेंट में वायलेट किया है उसको पूरा करिये आप। ... (व्यवधान)
श्री बाबूलाल नागर (दूदू): अनुसूचित जाति, जनजाति के लोगों के साथ कुठाराघत किया है, यह अन्याय किया है आपकी पूर्ववर्ती सरकार ने, आप इसको ठीक करना चाहते हैं क्या? इतनी सा निवेदन है कि 16 और 12 परसेंट जो संविधान प्रदत्त व्यवस्था है, आप इसको ठीक करना चाहते हैं क्या? यह बात तो छोड़ दीजिए आप, कितने पद आपने भर्ती किये या नहीं करें, यह पूछना कौन चाह रहा है आपसे। ... (व्यवधान)
श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): आपको बहुत-बहुत बधाई की आपने तृतीय श्रेणी अध्यापकों की भर्ती बहुत की है। पिछली सरकारों ने बिलकुल नहीं की लेकिन 12 परसेंट और 16 परसेंट का जो नियम वायलेट हुआ है आरक्षण का, रोस्टर के आधार पर भर्ती नहीं हुई है, उनको आप कब पूरा करेंगे? आप उस परिपत्र को दुबारा दिखवाइये। यह हमारा निवेदन है आपसे। ... (व्यवधान)
श्री गुलाब चन्द कटारिया (गृह मंत्री): मैं क्योंकि आपने जो बात पूछी कि कोई रोस्टर के आधार पर कोई खाली है, एकदम मेरे पास इसकी परफेक्ट सूचना नहीं है, मैं आपको अधूरी सूचना देना उचित नहीं समझता। मैं कोई आपसे पक्ष और विपक्ष में भी नहीं हूं। पाँच हजार अध्यापकों की भर्ती हुई होगी, सैकण्डरी, हायर सैकण्डरी में भी हुई है। बाकी हुई है जो मेरे पास अभी है वह एलिमेण्टरी एजुकेशन में जो भर्ती हुई है उसकी मैं बात कर रहा हूं। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: पूछा भी एलिमेण्टरी का ही है । ... (व्यवधान)
श्री बाबूलाल नागर (दूदू): अध्यक्ष महोदय, रोस्टर की बात मैंने पूछी है और मेरा निवेदन है खाली 20.11.1997 का जो परिपत्र निकाला है कार्मिक विभाग ने, इसमें संविधान प्रदत्त व्यवस्था को ही आपकी पूर्ववर्ती सरकार, जब आपकी सरकार थी, उसने खतम कर दिया है। 16, 12 का ही हमारा अधिकार ही खतम कर दिया है।
श्री गुलाब चन्द कटारिया (गृह मंत्री): दूदू से आने वाले माननीय सदस्य ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: सरकार तो आपकी भी आ गयी थी। ... (व्यवधान)
श्री बाबूलाल नागर (दूदू): आपका रोस्टर ही सही नहीं बन सकता तो आप रोस्टर को लागू क्या करेंगे? आपकी वरीयता ही सही नहीं बन सकती। ... (व्यवधान)
श्री गुलाब चन्द कटारिया (गृह मंत्री): दूदू से आने वाले माननीय सदस्य, आपकी पीड़ा मुझे समझ में आती है क्योंकि पाँच साल आपका ध्यान गया ही नहीं उस ओर और अब आपका आठ साल के बाद गया है तो हम जरूर विचार करेंगे इस पर। क्या इसमें कमी है पर मैं यह ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: : जब वे मंत्री बनने के चक्कर में थे।
श्री बाबूलाल नागर (दूदू): माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारा ध्यान नहीं गया। मंत्री महोदय, अब आपका ध्यान आकर्षित करना चाह रहा हूं। आप इस 20.11.97 के परिपत्र को दुरुस्त करने का मन रखते हैं क्या? संविधान प्रदत्त व्यवस्था 16, 12 की है। इसकी आप पूर्ति करना चाहते हैं क्या?
श्री गुलाब चन्द कटारिया (गृह मंत्री): मैं आपके इस पत्र को ठीक प्रकार से देखने के बाद, क्या इसमें कमी है, क्या इस कमी को दुरुस्त करने की, किस तरह से कोई रास्ता है, उसके बाद ही कोई जवाब दे सकूंगा। एकदम एट-रेण्डम मैं आपको कोई आश्वासन दे दूं वह ठीक नहीं रहेगा। मैं निश्चित रूप से आपकी समस्या और हमारी सबकी समस्या है, मैं सोचता हूं कि इस बात की पूरी हमने कोशिश की है और आपको यह सुनकर भी प्रसन्नता होगी कि इस बार सर्व शिक्षा अभियान में जो खर्चा हुआ, राजस्थान हिन्दुस्तान में नम्बर- एक पर रहा है, उसको इस बात का प्राइस मिला है। आपको प्रसन्नता होगी, यह ठीक है कि हमारी गति और तेज बढ़े, जिसके कारण से जो अध्यापकों की आवश्यकता महसूस हो रही है, उसकी पूर्ति हो, निश्चित रूप से आपकी है और इसीलिए यह जो 25 हजार पद जो हमने और लिये हैं, उसके बाद विधवाओं को भी देकर जो हमने अभी आपको कहा था, टोटल संख्या इस 56-57 हजार जो पोस्ट है, उसको भरने की कोशिश में है।
शिव/चौहान/11.20/1c/5.10.2006
और मैं
सोचता हूं कि
प्राथमिक
शिक्षा की
दृष्टि से
हमारे पास बजट
भी उपलब्ध
है। हमारे पास
सब प्रकार की
तैयारी है और
आने वाले कुछ
समय में
आर.पी.एस.सी. से
सलेक्शन के
बाद अध्यापक
मिलेंगे।
जहां तक आपके
दूदू का सवाल
है, दूदू में
आपके
प्राथमिक
विद्यालय 200
हैं और उच्च
प्राथमिक
विद्यालय 106
हैं। इनमें
सैकिण्ड
ग्रेड की स्वीकृत
पोस्ट 106 हैं
उसमें से 60
पोस्ट खाली
हैं । 106 स्वीकृत
में से सैकिण्ड
ग्रेड की 60
पोस्टें
खाली हैं और 1055
थर्ड ग्रेड की
पोस्टें हैं
उसके अंगेस्ट
में 262 पद रिक्त
हैं जो लगभग
रिक्त 25
प्रतिशत के
आस-पास जाती
है, बहुत अधिक
रिक्त है।
इसमें कोई दो
राय नहीं है
और मैंने स्वयं
ने स्वीकार
किया है कि
आपके 58
प्राथमिक
विद्यालय ऐसे
हैं जहां केवल
सिंगल टीचर
लगा हुआ है।
यह सच है, इसको स्वीकार
करने में कोई
दिक्कत नहीं
है। हम कोशिश
कर रहे हैं कि
जो हमारे नोर्म्स
हैं कम से कम
प्राथमिक
विद्यालय में
दो अध्यापक
हों। पहली बार
यूपीएस बनने
पर एक हैड मास्टर
देते हैं,
उसके साथ दो
अध्यापक
देते हैं, फिर
दूसरे साल दो
अध्यापक
देते हैं,
उसकी पूर्ति
जितनी अभी
होनी चाहिये
वह नहीं हुई
है। इस सबके
मिलने के बाद
हम इस स्थिति
में होंगे कि 80
प्रतिशत हम इस
पूर्ति को कर
पायेंगे।
श्री
अध्यक्ष :
नैक्स्ट क्वेश्चन,
श्री खुशबीर
सिंह जोजावर।
डॉ0
सी.पी.जोशी: यह
पैसा राजस्थान
सरकार ने लिया
है यह 16 हजार
अध्यापकों
की सेलेरी में
पैसा दिया है।
आप यह बताइये
कि भारत सरकार
से आपको कितने
पैसे मिले ? (व्यवधान)
... अध्यक्ष
महोदय, राजस्थान
सरकार को 40
हजार पदों का
पैसा सर्वशिक्षा
अभियान से
मिला है । यह
केवल मात्र फाइनेंस
की व्यवस्था
कर रहे हैं।
(व्यवधान) ..... यह
पैसा केवल
मात्र
सर्वशिक्षा
अभियान का जो
आपने चार्ज
किया, वह
अमाउंट है और
आपको पैसा
मिला 40 हजार का,
उस फीगर को
बताइये आप मंत्रीजी।
डोंट कन्फ्यूज
इट। आपको 40 हजार
पदों का पैसा
मिला है। नोन
प्लान का
ट्रांसफर
करके 16 हजार
पदों का पैसा
बता रहे हैं,
जो 40 हजार पदों
का पैसा वसूल
किया भारत सरकार
से, उसको
बताइये आप।
श्री
गुलाबचन्द
कटारिया: अध्यक्ष
महोदय, इन्होंने
जो प्रश्न
पूछा, उसका भी
मैं आपको जवाब
दूंगा। (व्यवधान)
...
श्री
अध्यक्ष:
माननीय
मंत्रीजी,
मैंने नैक्स्ट
प्रश्न
पुकार लिया। 22
मिनट हो गये
हैं। मैं एक
प्रश्न को
पूरा समय नहीं
दे सकती।
डॉ0
सी.पी.जोशी:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, 16 हजार
पदों का पैसा
नहीं मिला है।
भारत सरकार से
40 हजार पदों का
पैसा मिला है,
यह केवल मात्र
बजट की व्यवस्था
करके बता रहे
हैं। इस सदन
को गुमराह
करने की कोशिश
की जा रही है।
(व्यवधान) ...
भारत सरकार से
40 हजार पदों का
पैसा मिला है।
25 प्रतिशत
पैसा जो राजस्थान
सरकार को
मिलाना है उस
पैसा का एडजस्टमेंट
करके यह फीगर
बता रहे हैं।
आप यह बताइये
कि क्या भारत
सरकार से 40
हजार पदों का
पैसा मिला है
कि नहीं मिला?
यह बताइये आप
। केवल मात्र
फाइनेंस की
बता बता रहे
हैं आप।
श्री
अध्यक्ष:
मैंने नैक्स्ट
क्वेश्चन
पुकार लिया,
अब यह कुछ
नहीं
बतायेंगे।
डॉ0
सी.पी.जोशी:
माननीय
मंत्रीजी, आप
गंभीरता से
बताइये कि
भारत सरकार से
राजस्थान
सरकार को 40
हजार पदों का
सर्वशिक्षा
अभियान का
पैसा मिला कि
नहीं मिला ?
उसके अंगेस्ट
में 25 प्रतिशत
पैसा आपको
मिलाना था,
आपने केवल
मात्र 16 हजार
पद जो बजट के
एडजस्टमेंट
है, उस फीगर को
बता रहे हैं
आप। कह रहा हूं
बताइये आप।
(व्यवधान) ....
श्री
अध्यक्ष:
मैंने नैक्स्ट
क्वेश्चन
पुकार लिया।
(व्यवधान)
श्री
बृजकिशोर
शर्मा (जयपुर
ग्रामीण) :
उसके बावजूद
हमारा क्वेश्चन
नहीं आया।
आपने कल भी क्वेश्चन
पुकारा था,
लेकिन हमारे
क्वेश्चन
का जवाब नहीं
आया। (व्यवधान)....
श्री
अध्यक्ष: जो
प्रश्न
माननीय सदस्य
ने पूछा था
उसका जवाब
मंत्रीजी ने
दे दिया। दे
दिया उसका
जवाब । (व्यवधान)
...
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता,
प्रतिपक्ष):
जवाब इन्होंने
पूरा नहीं
दिया, आपने
बीच में कट कर
दिया। (व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष:
मैंने नैक्स्ट
क्वेश्चन
पुकार लिया।
उन्होंने
जवाब दे
दिया।(व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी: नहीं
दिया पूरा।
(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
मैंने पूरा
प्रश्न पढ़ा
है, आप कृपया
प्रश्न
पढ़ें। (व्यवधान)
मैंने नैक्स्ट
क्वेश्चन
पुकार लिया।
(व्यवधान)
श्री
बाबूलाल नागर:
सारा पैसा
भारत सरकार दे
रही है, स्कूलों
की संख्या
भारत सरकार दे
रही है, अध्यापकों
की सेलेरी
भारत सरकार दे
रही है, यह केवल
खाली डींग
हांकते हैं।
(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष:
आपने जो प्रश्न
पूछा था उसका
माननीय
मंत्रीजी ने
जवाब दे दिया।
अब जो
सी.पी.जोशी साहब
ने प्रश्न
उठाया है वह
प्रश्न में
कहीं था ही
नहीं। नई बात
उठाई है, भाषण
देने लगे।
प्रश्न काल
में इस तरीके
से नहीं
चलेगा। मैंने
नैक्स्ट क्वेश्चन
पुकार लिया
माननीय
मंत्रीजी। (व्यवधान)...
श्री
बृजकिशोर
शर्मा: माननीय
अध्यक्ष
महोदय, कल भी
आपने क्वेश्चन
पुकार लिया था
और उसके
बावजूद
मंत्रीजी ने जवाब
नहीं दिया।
(व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता,
प्रतिपक्ष) :
अध्यापकों
की व्यवस्था
का मुद्दा है
और उसके अंदर
शिक्षा
मंत्रीजी ने
अधूरा जवाब
दिया है।(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
पूरा जवाब
दिया है उन्होंने।
आपको मालूम ही
नहीं है। (व्यवधान)
श्री
बाबूलाल नागर:
अध्यक्ष
महोदय, भारत
सरकार के पैसे
का दुरूपयोग कर
रहे हैं। राजस्थान
के अंदर भारत
सरकार का पैसा
बर्बाद कर रहे
हैं । खाली
डींग हांक रही
है यह सरकार।
कुछ नहीं करती
है यह। (व्यवधान)
...
श्री
सी.डी.देवल: यह
अनुसूचित
जाति-जनजाति
के लोग ...(व्यवधान)
श्री
बाबूलाल नागर:
यह रोस्टर की
बात करते हैं,
रोस्टर को तो
आपने खत्म कर
दिया ।
संविधान का
उल्लंघन कर
दिया है।
संविधान को
मानने को
तैयार नहीं हो
आप।
श्री
अध्यक्ष:
अंकित नहीं
हो।
श्री
सी.डी.देवल : ***
श्री
बृजकिशोर
शर्मा: ***
श्रीमती
लक्ष्मी
बारूपाल: ***
श्री
संयम लोढ़ा : ***
श्री
बाबूलाल नागर
: ***
श्री
रमेश खींची: ***
श्री
अशोक बैरवा: ***
श्री
सी.डी.देवल: ***
श्री
राजेन्द्र
राठौड़ : ***
डॉ0
सी.पी.जोशी: ***
श्री
बंशीलाल खटीक:
***
श्री
जयराम जाटव : ***
श्री
प्रद्युम्न
सिंह : ***
डॉ0
सी.पी.जोशी: ***
श्री
मदन दिलावर : ***
श्री
राजेन्द्र
राठौड़ : ***
श्री
बाबूलाल नागर
: ***
श्री
बंशीलाल खटीक
: ***
श्री
बद्रीलाल जाट
: ***
श्री
मदन राठौड़ : ***
(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्यगण,
सत्ता पक्ष
के माननीय
सदस्यगण,
माननीय
उद्योग
मंत्रीजी,
राजसमन्द से
आने वाले
माननीय सदस्य,
प्रश्न
पूछते हैं
माननीय सदस्य,
उनका जवाब
देते हैं
मंत्रीजी।
राजसमन्द से
आने वाले
माननीय सदस्य
आप क्यों
खड़े हो जाते
हैं खामाख्वाह
? मैं माननीय
सदस्यों से
एक निवेदन
करना चाहूंगी
कि प्रश्नों
में सभी प्रश्नों
का महत्व है
और सारे ही
विधायक महत्वपूर्ण
हैं। एक प्रश्न
के ऊपर आखिर
कितना समय
दिया जाये ? 28
मिनट हो गये
एक प्रश्न
में। जवाब
पूरा है, जो
कुछ पूछा है।
यदि आपने इस
प्रश्न को
पढ़ा है तो
माननीय
मंत्रीजी ने
उसका पूरा
जवाब दिया है।
गलत बात है और
आपने प्रश्न
पढ़ा भी है।
प्रश्न जो
पढ़ेगा, उसका
पूरा जवाब
दिया है। अब
आप बात करने
लगे जाते हो
...(व्यवधान)
डॉ.सी.पी.जोशी:
***
श्री
प्रद्युम्न
सिंह : ***
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता,
प्रतिपक्ष) :
आप पूछ लो इनको।
राजेन्द्र
सिंह जी ने एक
प्रश्न खड़ा
किया था उसके
ऊपर मुझे जवाब
देने में 57 मिनट
लगे थे । अध्यक्ष
महोदय ने मुझे
अनुमति दी थी
पूरा पढ़ने के
लिये। (व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़ : आप तो
धीमी गति के
समाचार हो।
(व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी : इन्होंने
त्राहिमाम्
कर लिया कि
मैं मेरे सवाल
को वापस लेता
हूं, मैं
संतुष्ट
हूं। ऐसा इन्होंने
कहा था, पूछ
लीजिये। (व्यवधान)
श्री
प्रद्युम्न
सिंह : माननीय
अध्यक्ष
महोदय, बड़ा
महत्वपूर्ण
प्रश्न है
प्राथमिक
शिक्षा का।
श्री
अध्यक्ष: सब
प्रश्न महत्वपूर्ण
होते हैं। (व्यवधान)
श्री
प्रद्युम्न
सिंह: आप मेरा
निवेदन सुन
लें। स्कूल
खाली पड़े
हैं, भारत
सरकार पैसा दे
रही है सर्वशिक्षा
अभियान के तहत
और उसके बाद
में यहां
गलतबयानी हो
रही है। 40 हजार
अध्यापकों
का पैसा मिला
है, कमरों के
निर्माण का पैसा
मिला है, हण्डरेड
पर्सेन्ट
पैसा इनको
मिला है। इनके
पास 25 प्रतिशत
पैसा भी नहीं
हुआ है । इन्होंने
नोन प्लान
...(व्यवधान)
सदन को गुमराह
कर रही है यह
सरकार।
श्री
अध्यक्ष:
भाषण नहीं, यह
प्रश्न काल
है। भाषण देने
का समय नहीं
है। प्रश्न
काल है यह ।
डॉ.सी.पी.जोशी:
अध्यक्ष
महोदय, 800 करोड़
रूपये भारत
सरकार से मिले
हैं।
श्री
अध्यक्ष :
श्री खुशबीर
सिंह जोजावर,
नैक्स्ट क्वेश्चन।
डॉ.सी.पी.जोशी:
800 करोड़ रूपया
मिला है
सर्वशिक्षा अभियान
के तहत। 40 हजार
पोस्टों का
पैसा लिया है
इन्होंने,
गलत सूचना दे
रही हैं। आपने
कमरे बनाये,
उसका पैसा
मिला है। पदों
का पैसा मिला
है।
महेन्द्र/चौहान/1d/1130/05102006
40 हजार
पद का पैसा
मिला है आपको, 25
परसेंट पैसा
आपको मिलाना
था, उस पैसे को
एडजेस्ट कर
के बता रहे
हैं आप।
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): तो क्या
भारत सरकार
इसलिए बनी हुई
है कि राजस्थान
को पैसा नहीं
देगी? ...(व्यवधान)...
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
अध्यक्ष
महोदय, शिक्षा
मंत्रीजी,
घनश्यामजी
तिवाड़ी खुद
शर्मसार हैं,
वो इसका उत्तर
दे नहीं सकते,
शर्मसार हैं
और गृह
मंत्रीजी
पूरा जवाब
नहीं दे रहे।
अध्यक्ष महोदय,
आप हमारे को
प्रोटेक्शन
नहीं कर रहे,
आप सरकार का
बचाव सबसे ज्यादा
कर रहे हैं।
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, 27 हजार करोड़
में से तो एक
रुपया नहीं
दिलाया, सर्व
शिक्षा अभियान
में अगर पैसा
दे दिया तो
कोई अहसान कर दिया
क्या भारत
सरकार ने? ...(व्यवधान)...
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
सारा राजस्थान
सुन रहा है
आपको, आपका
इलाका भी सुन
रहा है कि स्कूलों
के अन्दर क्या
हालत हो रही
है और आप इनका
प्रोटेक्शन
कर रही हैं।
आप इनका जवाब
क्यों नहीं
दिलवातीं?
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): आप तो
अपने
कार्यकाल में
पाँच साल में
एक अध्यापक
नहीं लगाया
है, वो तो अच्छा
काम हुआ और
हमने 35 हजार ...(व्यवधान)...
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
यह असत्य है।
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
एक पैसा नहीं
दिया भारत
सरकार ने, एक
फूटी कौड़ी
नहीं दी भारत
सरकार ने। ...(व्यवधान)...
भारत सरकार ने
एक पैसा नहीं
दिया, किस मुंह
से बोल रहे
हो। ...(व्यवधान)...
एक पैसा नहीं
दिया भारत
सरकार ने। एक
फूटी कौड़ी,
एक पैसा नहीं
दिया। ...(व्यवधान)...
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): 35 हजार
पैराटीचर्स
लगाये ...(व्यवधान)...
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा): 35
हजार
पैराटीचर्स
लगाये थे, यह
असत्य
आंकड़े हैं।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): आप
चाहें तो
दिनभर की बहस
रख सकते हैं।
...(व्यवधान)... आप
जो सर्व
शिक्षा काक कह
रहे हो न, आपकी सारी
की सारी जन्मपत्री
मैंने ले रखी
है। ...(व्यवधान)...
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
आपकी जन्मपत्री
फर्जी जन्मपत्री
है यह।
श्री
अमराराम (धोद):
मंत्री महोदय,
क्या जन्मपत्री
यह ही रखोगे
क्या? ...(व्यवधान)...
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): असली
जन्मपत्री
घनश्यामजी
तिवाड़ी के
पास है, आपके
पास फर्जी जन्मपत्री
है। ...(व्यवधान)...
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया (गृह
मंत्री): क्या
आपने सर्व
शिक्षा में
किया। 40 हजार सैंक्शन
कर है, कर रहे
हैं, उसमें क्या
बात है, सारा
चार्ट है, आप
चाहो जहां ले
लें। ...(व्यवधान)...
श्री अध्यक्ष:
आर्डर, आर्डर।
श्री
अमराराम (धोद):
स्कूल खुलें
तीन महीने से
ज्यादा हो
गये।
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
प्रतिपक्ष के
नेता महोदय
खड़े हैं।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
अध्यक्ष
महोदय, आपकी
उम्र, आपकी
उम्र
कटारियाजी की
उम्र पाँच साल
में तीन साल
बीत गयी है।
श्री
अध्यक्ष:
माननीय
मंत्रीजी,
माननीय सदस्य,
प्रतिपक्ष के
नेता खड़े
हैं।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
आपकी उम्र
स्टिक है और
कटारियाजी की
उम्र तीन साल
बीत गयी है, दो
साल बाकी और
हैं, अब रोना
रो रहे हैं
पाँच साल पहले
का, यह कोई बात
हुई क्या? आज
आपको तीन साल
हो रहे हैं
राज करते हुए,
आपने क्या
किया था, क्या
किया था क्या
नहीं किया,
कोई बात नहीं
...(व्यवधान)...
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): अध्यक्ष
महोदय, सत्य
बहुत कड़वा
होता है। ...(व्यवधान)...
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
यह भारत सरकार
के पैसे थे, गुलछर्रे
उड़ा रहे हो
भारत सरकार के
पैसे पर, उसको
भी स्वीकार
करना नहीं
चाहते हो। ...(व्यवधान)...
एक
माननीय सदस्य:
प्रतिपक्ष के
नेता खड़े हैं
औप आप बोल रहे
हैं,
प्रद्युम्न
सिंहजी।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): यह
हिन्दुस्तान
की सरकार है,
पाकिस्तान
की सरकार है
क्या? हिन्दुस्तान
की सरकार है।
...(व्यवधान)...
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
उस पर भी काम
नहीं करना चाहते
हैं और उस फंड
का दुरुपयोग
कर के नोन प्लान
के अन्दर बता
रहे हैं उसको।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
मंत्री महोदय,
आप शिक्षा
विभाग के बारे
में पूरी
जानकारी नहीं
दे रहे हैं, हम
आपके जवाब से संतुष्ट
नहीं हैं।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): इसका
अलग वो है,
राजस्थान का
हिस्सा है।
...(व्यवधान)...
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
अध्यक्ष
महोदय ...(व्यवधान)...
आप जवाब इनसे
दिलवाना नहीं
चाहती हैं, मंत्री
महोदय, ऐसी
स्थिति में हम
आज की इस कार्यवाही
का इस पाइण्ट
के ऊपर हम
बहिर्गमन कर
रहे हैं और
विरोध प्रदर्शन
करवा रहे हैं
कि आप मनमानी
कार्यवाही करें,
स्कूल खाली
पड़े हैं। ...(व्यवधान)...
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): अध्यक्ष
महोदय, मुझे
बहुत अफसोस है
कि प्रतिपक्ष के
नेता इतनी बार
चुन कर आये
हैं और उसके
बाद प्रश्न
का है, यहां
भाषणदेने के
लिए नहीं है,
यहां केवल
प्रश्न
पूछने के लिए
है और अपनी
असफलता की बात
करते हैं।
दर्द शुरू हो
जाता है। ...(व्यवधान)...
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
हां, सब स्कूल
खाली पड़े
हैं।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
दर्द तो आपका
शुरू हो रहा है।
भारत सरकार के
पैसे का उसका
उपयोग नहीं कर
पा रहे हैं। ...(व्यवधान)...
एक
माननीय सदस्य:
भारत सरकार का
पैसा है, कोई
दान में नहीं
दिया। ...(व्यवधान)...
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
उस पैसे का भी
उपयोग नहीं कर
पा रहे हैं।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): भारत
सरकार के पैसे
किसी के हैं
क्या? ...(व्यवधान)...
यह राजस्थान
का हिस्सा
है, कोई
मेहरबानी
नहीं है किसी
की, राजस्थान
की जनता का
पैसा है, उसका
शेयर है वह,
किसी की
मेहरबानी
नहीं है और
आपने क्यों
नहीं किया? आप
अयोग्य थे?
पैसा उस समय
भी था लेकिन
वो भारत सरकार
का पैसा काम
में नहीं
लिया। दिमाग नहीं
था आप में।
दिमाग नहीं
था, दिमाग। ...(व्यवधान)...
श्री
रामनारायण
मीणा (नैनवां):
हमने आपका उत्तर
सुन लिया,
आपका उत्तर
संतोषजनक
नहीं है,
निहायत
असंतोषजनक है,
हम इसका विरोध
करते हैं,
पूरा जवाब दिलाया
जाए अन्यथा
हम बहिर्गमन
करते हैं।
श्री
महावीर प्रसाद
जैन (मुख्य
सचेतक): खजाना
खाली है,
दिवालियाओं,
खजाना खाली है
इसके अलावा
रोने के अलावा
कुछ किया सिवाय
रोने के? ...(व्यवधान)...
कह दो तमा ते
खाओ, तमा ते।
...(व्यवधान)... यह
कहा होगा तमा
ते खाओ।
श्री
कैलाश
त्रिवेदी
(सहाड़ा): भारत
सरकार के पैसे
की पुरसगारी
भी सही नहीं
की, आपने भारत
सरकार के भोजन
को बिगाड़
दिया। ...(व्यवधान)...
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
यह पैसा भारत
सरकार का है,
यह पैसा
सोनिया गांधीजी
का है, सोनिया
गांधी का,
सोनिया गांधी
का भेजा हुआ
पैसा है, आपका
इसमें कुछ
नहीं है। ...(व्यवधान)...
श्री
नरपत सिंह
राजवी (उद्योग
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, आपके
माध्यम से
मैं तो
प्रतिपक्ष के
नेता से एक ही
रिक्वेस्ट
करना चाहता
हूं। ...(व्यवधान)...
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
आपका अंगूठा
...(व्यवधान)... वो
टेक कर के
पैसे ला रहे
हो। ...(व्यवधान)...
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द):
भर पेट कर
खाते हो और
बाहर चिल्लाते
हो ...(व्यवधान)...
16 हजार बता रहे
हो।
एक
माननीय सदस्य:
थोड़ी देर में
वाक आउट कर
जायेंगये,
इनको बहाना
चाहिए रैली
में जाने के
लिऐ। ...(व्यवधान)...
श्री
नरपत सिंह राजवी
(उद्योग
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, मैं तो
आपके माध्यम
से एक ही
प्रतिपक्ष के
नेता महोदय को
कहना चाहता
हूं कि
राजाखेड़ा से
आने वाले
माननीय सदस्य
ने तो कभी ...(व्यवधान)...
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द):
अध्यक्ष
महोदय,
कांग्रेस की
रैली है और यह
अभी बहाना बना
कर वाक आउट कर
के रैली में
चले जायेंगे
...(व्यवधान)... यह
अभी बहाना
बनायेंगे, वाक
आउट कर के रैली
में चले
जायेंगे। ...(व्यवधान)...
श्री
नरपत सिंह
राजवी (उद्योग
मंत्री): बजट
में पैसा नहीं
दिया। जाओ,
जाओ।
श्री
अध्यक्ष:
पधारो, पधारो,
आपकी रैली है।
रैली है,
पधारो।
(
कांग्रेस के
माननीय सदस्यों
द्वारा सदन से
बहिर्गमन )
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): +++ जाओ।
...(व्यवधान)... जो
पैसा काम में
नहीं ले सके
वो कांग्रेस
निकम्मी है,
जो पैसा काम
में नहीं ले
सके वो
दिवालिया,
सरकार को
दिवालिया
बताते हैं वो
खुद दिवालिया
हैं।
श्री
अध्यक्ष:
जाओ, जाने दो।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): अध्यक्ष
महोदय, मुझे
बहुत अफसोस है
कि प्रश्न
काल ...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष:
बैठो, बैठो।
माननीय
मंत्रीजी,
माननीय सदस्य।
...(व्यवधान)...
सिंचाई
मंत्रीजी, जवाब
दीजिए।
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, नये
सिरे से चालू
करूं वापस?
श्री
अध्यक्ष:
सुना नहीं
हमने तो। आप
बीच में नहीं
बोलें। बारां
से आने वाले
माननीय सदस्य,
आप बीच में
बैठे-बैठे
नहीं बोलें।
थोड़ी
बहुत देर तो
रहे होते
बाहर।
ढारिया
बांध (पाली) के
निर्माण में
व्याप्त
अनियमितताओं
की जांच
20. श्री खुशबीर
सिंह जोजावर (खारची) एवं
श्रीमती
लक्ष्मी
बारूपाल
(देसूरी) : क्या
सिंचाई
मंत्री यह
बताने की कृपा
करेंगे :-
(1) सरकार
द्वारा पाली
जिले में
देसूरी
पंचायत समिति
के धारिया
बांध का निर्माण
कार्य कब स्वीकृत
किया गया ? इसके
निर्माण में
कितना समय लगा
एवं यह कब
बनकर तैयार
हुआ ? बांध
बनने के पश्चात्
कितनी बार इस
पर पानी की
चादर चली ? विवरण
सदन की मेज पर
रखें।
(2) बांध
का निर्माण
कार्य सरकार
द्वारा करवाया
गया अथवा
ठेकेदार
द्वारा
करवाया गया ? निर्माण
कार्य के लिये
क्या क्या
शर्तें तय
हुईं ? शर्तों
की प्रति सदन
की मेज पर
रखें।
(3)
क्या यह सही
है कि निर्माण
कार्य चालू
करने से पूर्व
बांध की
मिट्टी का
परीक्षण
करवाया गया था
? यदि हां, तो
किस एजेन्सी
द्वारा तथा
जांच रिपोर्ट
क्या रही ? प्रति
सदन की मेज पर
रखें।
(4) क्या
यह सही है कि
मानसून से
पूर्व बांधों
के रखरखाव
दुरूस्ती के
लिये जांच
रिपोर्ट
मंगवाकर
कार्यवाही की
जाती है ? यदि
हां, तो उक्त
बांध की जांच
कब की गयी तथा
क्या कमियां
पाई गईं ? इसे
दुरूस्त
करने के लिये
सरकार द्वारा
क्या कार्यवाही
की गई ? विवरण
सदन की मेज पर
रखें ।
(5) क्या
यह सही है कि
बांध वर्ष 2006
में टूट गया ? यदि
हां, तो कितनी
जगह से व
टूटने के क्या
कारण रहे ? इसके
लिये ठेकेदार
के साथ साथ
विभाग के कौन
कौन अधिकारी/कर्मचारी
दोषी हैं ? इनके
विरूद्ध
सरकार क्या
कार्यवाही करने
का विचार रखती
है ? यदि नहीं,
तो क्यों ?
(6) बांध
के टूट जाने
से किस किस
गांव में
कितना कितना
नुकसान हुआ ? पीडि़तों
को सरकार
द्वारा क्या
सहायता उपलब्ध
करवाई गई या
करवाने जा रही
है ? विवरण सदन
की मेज पर
रखें ।
सिंचाई
मंत्री (श्री
सांवर लाल) : (1) पाली
जिले के
देसूरी विधान
सभा क्षेत्र
में स्थित
धारिया बांध
के निर्माण की
स्वीकृति
दिनांक 11.9.96 को
राज्य सरकार
द्वारा जारी
की गई। बांध
के निर्माण कार्य
में पांच वर्ष
का समय लगा।
बांध वर्ष 2002 में
बनकर तैयार
हुआ। बांध
बनने के बाद
पहली बार 19 अगस्त,
2006 को बांध
पूर्ण भराव
क्षमता तक भरा
तथा अधिक पानी
आने के कारण
चादर चली (ओवर
फ्लो हुआ) तथा
उसी दिन शाम
को 6.30 बजे टूट गया।
(2) बांध
का निर्माण् विभाग
द्वारा
विधिवत् रूप
से निविदाएं
आमंत्रित कर
ठेकेदारों के
माध्यम से
करवाया गया।
जिन शर्तों पर
कार्य कराया गया
उसकी एक प्रति
परिशिष्ट अ
पर संलग्न
है।
(3) जी
हां। बांध
निर्माण से
पूर्व मिट्टी
का परीक्षण
गुण नियन्त्रण
इकाई पाली एवं
जोधपुर तथा
सिविल अभियांत्रिकी
संकाय जेएनवी
यूनिवर्सिटी
जोधपुर से
करवाया गया था
। जांच में
मिट्टी को
बांध निर्माण
के लिये
उपयुक्त पाया
गया। जांच
रिपोर्ट की
प्रतियां
परिशिष्ट ब
पर संलग्न
है। (4)
यह सही है कि
बांधों की
वर्षा पूर्व
रखरखाव
दुरूस्ती के
लिये संबंधित
अधिकारियों
द्वारा प्रतिवर्ष
निरीक्षण
किया जाता है
और निरीक्षण
के दौरान अगर
कोई कमी पायी
जाती है तो
इसका निराकरण किया
जाता है। उक्त
बांध का
निरीक्षण
सहायक अभियन्ता
जल संसाधन
उपखण्ड पाली
द्वारा
संबंधित
कनिष्ठ
अभियन्ता के
साथ दिनांक 4.6.2006
को मानसून
पूर्व रखरखाव
व दुरूस्ती
हेतु किया
गया, जिसमें
कोई कमी नहीं
पायी गयी।
इसके बाद
अधिशाषी
अभियन्ता जन
संसाधन खण्ड
पाली द्वारा
भी बांध स्थल
का निरीक्षण
14.6.2006 को किया गया,
जिसमें बांध
की स्थिति
संतोषजनक पाई
गई।
(5) जी
हां। बांध 38 स्थानों
पर
क्षतिग्रस्त
हुआ । बांध के
क्षतिग्रस्त
होने के
कारणों की
जांच हेतु
मुख्य
अभियन्ता जल
संसाधन के
आदेश क्रमांक
1775 दिनांक 24.8.2006 द्वारा
श्री जयपाल
सिंह मुख्य
अभियन्ता की
अध्यक्षता
में एक कमेटी
का गठन किया
जा चुका है। जांच
रिपोर्ट 31.10.2006 तक
प्राप्त
होना
अपेक्षित है।
जांच रिपोर्ट
में दोषी पाये
जाने वालों के
विरूद्ध
नियमानुसार
आवश्यक
कार्यवाही की
जायेगी।
(6) बांध
के टूट जाने से
देसूरी तहसील
के ग्राम
डूठारिया,
ईटन्तरा
मेडतियान,
ओडवाडिया एवं
पाली तहसील के
सेदरिया,
हिरणखुरी,
पादरली
तुर्कान आदि
ग्रामों में
क्षति हुई।
देसूरी तहसील
में 367 मकान क्षतिग्रस्त
हुए। इसी
प्रकार पाली
तहसील के 6
मकान क्षतिग्रस्त
हुए।
क्षतिग्रस्त
मकानों के
धारकों को 10,57,200
रुपये सहायता
राशि का वितरण
किया जा चुका
है।
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): अध्यक्ष
महोदय, अब तो
इस सरकार की
नाकों में चने
चबा देंगे, आप
देखना आज आगे।
यह सरकार जिस
तरह से चल रही
है, जिस तरह से
अन्याय कर
रही है ...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष: और
अपोजिशन भी
जिस तरह से व्यवहार
कर रहा है ...(व्यवधान)...
श्री
हीरालाल
(निवाई): पाँच
मिनट तो बाहर
रहो। क्या कर
लोगे, बड़ी
धमकियां देते
हो।
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
अध्यक्ष
महोदय, आप
कृपा रखें
बाकी सब ठीक
है। ...(व्यवधान)...
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): अध्यक्ष
महोदय, सरकार
ने 600 तो उर्दू
अध्यापक ही
लगाये थे, 400
थर्ड ग्रेड
के, 200 सेकण्ड
ग्रेड के
इसलिए गृह
मंत्रीजी ने
जो जवाब दिया
कि केवल इतने
अध्यापक
लगाये थे,
बिलकुल गलत
जवाब दिया है।
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): अध्यक्ष
महोदय, 25 हजार
राजीव गांधी
पाठशाला के
टीचर ...(व्यवधान)...
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): पिछली
सरकार ने तो 600
तो उर्दू अध्यापक
ही लगाये थे।
...(व्यवधान)...
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
अध्यक्ष
महोदय, 25 हजार
राजीव गांधी
पाठशाला के टीचर,
जिसका आप पक्ष
ले रहे थे, वो
सड़क पर घूम
रहे हैं आज।
...(व्यवधान)... 25
हजार टीचर
सड़क पर घूम
रहे हैं, आपके
कारण घूम रहे
हैं सड़क के
ऊपर। आश्वासन
दिया था उनका।
वोट लेने के
लिए घुमाया था
उनको। 25 हजार
सड़क पर घूम
रहे हैं। 25
हजार राजीव गांधी
पाठशाला
काअध्यापक
तो सड़क पर
घुमा रहे हैं
...(व्यवधान)...
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): अध्यक्ष
महोदय, पूर्व
शिक्षा
मंत्रीजी,
पूर्व मुख्य मंत्रीजी
इतने अयोग्य
और नालायक थे
कि जिसके कारण
भर्ती नहीं हो
सकी, पैसों का
उपयोग नहीं हो
सका। यह पूर्व
शिक्षा
मंत्री इतने
अयोग्य थे।
श्री सी.
डी. देवल
(रायपुर): यह
शिड्यूल्ड
कास्ट और
ट्राइब आपको
उखाड़ कर फैंक
देगी। इसी का राज
कर रहे हो, आप
जो राज कर रहे
हो शिड्यूल्ड
कास्ट,
ट्राइब पर कर
रहे हो। ...(व्यवधान)...
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा):
चीफ व्हिप है,
उससे अयोग्य
कम नहीं हैं।
मेरा कोई
काम्पिटिशन
नहीं है, आपका
जितना अयोग्य,
जितने अयोग्य
आप हैं उतना
अयोग्य मैं
भी हूं। जितना
चीफ व्हिप
अयोग्य है
उतना आज से
मैं भी अयोग्य
हूं। यह मानने
को तैयार हूं।
इस सरकार का
चीफ व्हिप
जितना अयोग्य
है उतना अयोग्य
मैं भी हूं,
मैं मानने के
लिए तैयार हूं।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): केवल
कम्प्युटर
खरीदने में
इन्ट्रेस्ट
लिया, इसमें
कैसे गड़बड़
हो सकती है
इसमें इन्ट्रेस्ट
लिया। ...(व्यवधान)...
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): खुद
तो सदन में आ
गये और घनश्यामजी
का सब्टिट्यूट
बैठा दिया। कम
से कम
थोड़ी-बहुत तो
आप शर्म करते,
उनको भी साथ लाते।
...(व्यवधान)...
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): अध्यक्ष
महोदय, भारत
सरकार ने 40
हजार
शिक्षकों के पद
का वेतन दिया
है ---
श्री
अध्यक्ष: क्या
बोल रहे हो आप
बीच में? नौ,
नहीं, माननीय
सदस्य।
श्री
संयम लोढ़ा (सिरोही):
और इसके
बावजूद
सिरोही जिले
में 113 स्कूल
हैं, टीचर
नहीं है, आज एक
भी टीचर नहीं
है 113 प्राइमरी
स्कूल में।
श्री
अध्यक्ष: नौ,
नौ, आप स्थान
ग्रहण कर लें,
मैंने दूसरा
प्रश्न
पुकार लिया।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): यह
हालात राजस्थान
के बना रखे हैं।
श्री
अध्यक्ष:
मैंने दूसरा
प्रश्न
पुकार लिया
है। ...(व्यवधान)...
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): अध्यक्ष
महोदय, 113
प्राइमरी स्कूल
में एक भी
टीचर नहीं है।
...(व्यवधान)...
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदयश्,
बीमारी दूसरी
है, पंडाल
खाली हैं
इनका, यहां आज
प्रदर्शन करने
के लिए बुलाया
था वो तो आये
ही नहीं। ...(व्यवधान)...
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): अध्यक्ष
महोदय, प्रश्न
को स्थगित
करा दीजिए ...(व्यवधान)...
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, राजस्थान
की जनता नहीं
आ रही है,
पंडाल खाली है
इसलिए यहां पर
...(व्यवधान)...
श्रीमती
लक्ष्मी
बारूपाल
(देसूरी): बाँध
का निर्माण
करवाने का
विचार रखते
हैं?
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
सरकारी मुख्य
सचेतक ...(व्यवधान)...
श्री
श्रवणकुमार
(पिलानी): अध्यक्ष
महोदय, तीन
वर्ष पूर्व आप
पैराटीचर्स
के बारे में
वकालत करते
थे, अब क्या
होगा?
पैराटीचर तो
आज भी भूखे मर
रहे हैं।
श्री
अमराराम (धोद):
यह सचेतक
महोदय बहिष्कार
कर के जा रहे
हैं क्या?
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, जिस
विषय के ऊपर
सदन का बायकाट
करते हैं उस
पर वापस आकर
बोलने का
अधिकार नहीं
है आपको।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): पंडाल
खाली हैं, हम
क्या करें?
प्रतिपक्ष के
नेता महोदय,
आपके पंडाल
खाली हैं
वहां, वहां
लोग आये नहीं,
अध्यक्ष
महोदय ...(व्यवधान)...
वहां
लोग आये नहीं,
अध्यक्ष
महोदय। ...(व्यवधान)...
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): 2008 तक
बोलने का
अधिकार है, 2008 तक।
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर):
नियमों का
पालन कर रहे
हैं। ...(व्यवधान)...
आपके यह मुख्य
सचेतक हर बार
खड़े हो जाते
हैं उसके बाद
क्या सुनना
है।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): बिलकुल
खाली पडा है
वहां कोई 300-400
आदमी हैं, क्या
मुंह लेकर
जाएं ये वहां।
300-400 आदमी आये
हैं, संकट यह
है। ...(व्यवधान)...
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): लाखों
लोग आये हैं,
लाखों लोग, राजेन्द्रजी।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): प्रदर्शन
करने वाले लोग
आये नहीं
इसलिए वहां
जाएं कैसे अब।
...(व्यवधान)...
श्री
नरपत सिंह
राजवी (उद्योग
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, मैं
प्रतिपक्ष के
नेता का ध्यान
इस ओर आकर्षित
करना चाहता
हूं कि कम से
कम न्याय की
बात तो मत
करो। ...(व्यवधान)...
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): आप तो
यहां पर बैठे
हो ...(व्यवधान)...
सबसे ज्यादा
चूरू से आये
हैं। ...(व्यवधान)...
श्री
भवानी सिंह
राजावत
(संसदीय सचिव):
सराहना कर रहे
हैं और आप
आलोचना कर रहे
हो। ...(व्यवधान)...
राजस्थान के
शिक्षा जगत
में जो
क्रांतिकारी
सूत्रपात हुआ
है इसकी
सराहना
कीजिए।
Ars/usc/1140/05102006/1e/1
श्री
अध्यक्ष:
आपने अपना
प्रोटेस्ट
दर्ज करा दिया
अब नैक्स्ट
क्वश्चन
चलने दीजिए
...(व्यवधान)
जवाब आने
दीजिए, बहुत
महत्वपूर्ण
है ।
श्री
श्रवणकुमार
(पिलानी): आप जब
यहां बैठते थे
यह कहते थे ....
श्री
अध्यक्ष: अब
आपका क्या हो
गया ?
श्री
श्रवणकुमार
(पिलानी): पैरा
टीचर की वकालत
करते थे अब क्या
हो गया । पैरा
टीचर के साथ
अन्याय हो
रहा है अब क्या
हो गया पैरा
टीचर का? अब भी
पच्चीस हजार
पैरा टीचर
बाहर बैठे हैं
और आप यहां
बैठकर कहते थे
पैरा टीचर के
साथ अन्याय
हो रहा है । आप
भूल गये उन
बातों को ...(व्यवधान)
एक
माननीय सदस्य:
अध्यक्ष
महोदय, पच्चीस
हजार पैरा
टीचर के साथ
भारी अन्याय
कर रही है
सरकार ।
डा.
सी. पी. जोशी
(नाथद्वारा):
सबसे ज्यादा
हाउस के
रिकार्ड में
पैरा टीचर पर
आप बोलते थे।
रिकार्ड
निकाल कर देख
लो ...(व्यवधान)
आज आपका मन
कैसे बदल गया ? आप
हाउस के अन्दर
सबसे ज्यादा
पैरा टीचर्स
के लिए आप
बोलते थे, अब
क्या हो गया
आपको ...(व्यवधान)
याद नहीं है
क्या आपको ।
आपकी सबसे ज्यादा
सहानुभूति पैरा
टीचर्स के
प्रति ...(व्यवधान)
और आज एक शब्द
भी नहीं बोल
रहे आप ...(व्यवधान)
श्री
श्रवणकुमार
(पिलानी): आज वो
ही अन्याय हो
रहा है पैरा
टीचर्स के साथ
...
श्री
अध्यक्ष:
अंकित नहीं
हो।
श्री
श्रवणकुमार
(पिलानी): ***
श्री
अध्यक्ष:
अंकित तो हो
नहीं रहा क्यों
खड़े हो आप ?
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ***
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर): ***
श्री
अध्यक्ष:
प्रश्नकाल
केवल प्रश्न
पूछने के लिए
होता है भाषण
देने के लिए
नहीं एक बार
जब प्रतिपक्ष
वाक आउट कर
जाता है ...(व्यवधान)
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ***
डा. सी.
पी. जोशी
(नाथद्वारा): ***
श्री
अध्यक्ष: बात
खतम हो जाती
है और आगे
नैक्स्ट
कार्यवाही आ
जाती है, नैक्स्ट
बिजनस आ जाता
है ।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): *** श्री
अध्यक्ष: अब
आप स्थान
ग्रहण करें ।
श्री
बृजकिशोर
शर्मा (जयपुर
ग्रामीण): ***
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ***
श्री
अध्यक्ष: आप
मुझे मजबूर
नहीं करें ।
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): ***
श्री
अध्यक्ष:
सिरोही से आने
वाले माननीय
सदस्य, मैं
आपका नाम
लूंगी। अब यदि
आप नहीं
बैठेंगे तो
मैं आपको नाम
से पुकारूंगी
।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ***
श्री
बृजकिशोर
शर्मा (जयपुर
ग्रामीण): ***
श्री
अध्यक्ष:
आपको भी नाम
से पुकार सकती
हूं। यदि आप नहीं
बैठेंगे तो आई
विल कॉल योअर
नेम ...(व्यवधान)
नहीं अब आप
कुछ नहीं।
नैक्स्ट क्वश्चन।
श्री
खुशवीर सिंह
जोजावर
(खारची): मेरा
मूल प्रश्न
है । मैं
पुछूंगा पहले,
मूल प्रश्नकर्ता
हूं मैं । हम
बाहर नहीं गए
थे ...(व्यवधान)
हम यहीं बैठे
थे आपकी नजरें
बाहर गई थीं।
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
उनकी तरफ हाथ
नहीं करें आप।
आप इधर संबोधन
करें और
मंत्री जी से
जो पूछना है
वह पूछें।
श्रीमती
लक्ष्मी
बारूपाल
(देसूरी):धारिया
बांध मेरी
कांस्टीट्यूएंसी
का है मुझे
पूछने दें
पहले।
श्री
अध्यक्ष: आप
तो बहिर्गमन
कर गये।
बहिर्गमन
करने के बाद
दुबारा चांस
थोड़े ही
मिलता है।
श्री
खुशवीर सिंह
जोजावर
(खारची): नहीं,
बहिर्गमन नहीं
किया, मैं
यहीं बैठा था।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): इस सवाल
पर थोड़े ही
गये थे।
श्रीमती
लक्ष्मी
बारूपाल
(देसूरी): मेरी
विधान सभा का
बाँध टूटा है
मैं सरकार से
कुछ निवेदन
करना चाहती हूं।
मुझे पूछने
दें पहले ।
श्री
खुशवीर सिंह
जोजावर
(खारची): अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से मंत्री जी
से यह जानना
चाहता हूं ।
श्री
अध्यक्ष:
पहले लक्ष्मी
बारूपाल के
प्रश्न का
जवाब देंगे
उसके बाद आपका
जवाब देंगे क्योंकि
वह पहले खड़ी
हो गई थीं आप
बाद में हुए।
श्री
खुशवीर सिंह
जोजावर
(खारची): अध्यक्ष
महोदय, मैं
कभी से खड़ा
हूं।
श्री
अध्यक्ष:
नहीं, नहीं आप
स्थान ग्रहण
करें।
श्री
खुशवीर सिंह
जोजावर
(खारची): मैं तो
आधे घंटे से
खड़ा हूं यहां
पर। मैं तो
बैठा ही नहीं
आया तब से ।
श्री
अध्यक्ष: आसन
ग्रहण करें।
वह भी प्रश्नकर्ता
हैं।
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): क्यों
नहीं देंगे ? यह
क्या हो गया
यह बिल्कुल
गलत है। हमेशा
आपने यह व्यवस्था
दी है कि मूल
प्रश्नकर्ता
पहले बोलेगा
तो पहले मूल
प्रश्नकर्ता
को बुलाया जाए
उसके बाद देने
दीजिए आप जवाब।
श्रीमती
लक्ष्मी
बारूपाल
(देसूरी): मेरी
विधान सभा का
है।
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): आपकी
विधान सभा का
तो सत्यानाश
हो गया।
श्री
खुशवीर सिंह
जोजावर
(खारची): यह
विधान सभा का
मामला नहीं
है। यह पूरे
प्रदेश का
मामला है । पूरे
राजस्थान
प्रदेश से
संबंधित है
विधान सभा से
संबंधित नहीं
है ...(व्यवधान)
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): ढाई
साल बाद आपका
क्या होना है
यह तो सोचो।
श्रीमती
लक्ष्मी
बारूपाल
(देसूरी): मैं
हूं मूल प्रश्नकर्ता।
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): आपकी
पंचायत समिति
चली गई ...(व्यवधान)
आपको सड़क पर
लाकर छोड़
दिया ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
रायपुर से आने
वाले माननीय
सदस्य ..
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): ढ़ाई
साल बाद यह
बाँध आपको ले
डूबेगा यह ध्यान
रखना।
श्रीमती
लक्ष्मी
बारूपाल
(देसूरी): आप
इतना उग्र मत
बोलिए ।
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): आप जो
कल बोल रही
थीं धक्का
देकर, ...(व्यवधान)
राजस्थान
में अभी धक्का
देने वाला सी
डी देवल को
कोई पैदा ही
नहीं हुआ है।
श्री
अध्यक्ष:
कृपया स्थान
ग्रहण कर लें।
कृपया स्थान
ग्रहण करें
रायपुर सेआने
वाले माननीय
सदस्य।
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): धक्के
तो आपको
पब्लिक ने दिए
हैं जो आपकी
देसूरी पंचायत
समिति चली गई,
तीस साल तक
आपकी रानी पंचायत
समिति थी ...(व्यवधान)
श्रीमती
लक्ष्मी बारूपाल
(देसूरी): आप
अपने गिरेबान
में झांक कर देखिए,
आप कहां बैठते
थे, आज इस
विधान सभा में
किसकी वजह से
आए हैं यह आप
सोचिए ...(व्यवधान)
पैरों में
बैठते थे आप ।
श्रीमती
राजकुमारी
शर्मा (सीकर):
माननीय सदस्य
ऐसी बातें
करते हैं आप
पुराने सदस्य
कहलाते हैं और
हमारी महिला
को बोलने नहीं
देते। अध्यक्ष
जी, आप इनको
बाहर
निकलवाइये।
...(व्यवधान)
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): इसको
बर्दाश्त
नहीं किया जा
सकता।
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
मैं आपको नाम
से पुकारूंगी
...(व्यवधान)
श्रीमती
लक्ष्मी
बारूपाल
(देसूरी): आप
मेरे चाचा के
पैरों में
बैठते थे आज
विधान सभा में
उसी के कारण
से हैं मुझे
बता रहे हैं ।
श्री
अध्यक्ष: मैं
आपको फिर कह
रहीहूं आई काल
यू नेम
मैं आपको नाम
से
पुकारूंगी।
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): इन्होंने
कहा, आप इनको
तो नहीं कह
रहीं इन्होंने
कहा धक्के दे
दिये ।
श्री
अध्यक्ष: स्थान
ग्रहण कर लें
।
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): इनकी
हैसियत है धक्के
देने की? इनको
धक्के तो
मैंने पंचायत
समिति, म्युनिसिपैलिटी
सबमें दिला
दिए। ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
कृपया स्थान
ग्रहण कर लें।
नेता
प्रतिपक्ष, क्या
आपके माननीय
सदस्य आपका
बिल्कुल भी
कहना नहीं
मानते ?
श्रीमती
लक्ष्मी
बारूपाल
(देसूरी): इनको
वहां पर घुसने
नहीं दिया
इसलिए ये गुस्सा
सारा मेरे ऊपर
निकाल रहे हैं
।
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): आपकी
कहां हैसियत
है धक्के
देने की? ...(व्यवधान)
आप पैदा ही नहीं
हुई जब मैं
धक्के दे रहा
था ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आप
अपने माननीय
सदस्यों को
...(व्यवधान)
नहीं करवाते,
हठधर्मिता पर
उतर जाते हैं
आप ...(व्यवधान)
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर):
निकाल दिया,
इस बार विधान
सभा से निकाल
दूंगा ...(व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
कोई जरूरी बात
है ।
श्री
अध्यक्ष: क्या
जरूरी बात है ?
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): वापस
विधान सभा में
आ जाए तो मेरा
नाम सी डी
देवल नहीं ...(व्यवधान)
श्रीमती
लक्ष्मी
बारूपाल
(देसूरी): आप भी
नहीं आओगे, आप
किसके बल पर
आए हो ...(व्यवधान)
मेरे चाचा के
चरणों में
बैठते थे आप ।
...(व्यवधान)
उनके जूते साफ
करते थे आप ।
मैं तो जीतूंगी
डंके की चोट
पर जनता
जिताएगी मेरे
को तो आप अपना
ध्यान रखो
...(व्यवधान)
श्रीमती
राजकुमारी
शर्मा (सीकर):
आपको जन्म
देने वाली औरत
ही है, आप
किसके बलबूते
पर आए हो ?
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): ...(व्यवधान)
आपके पिता
मेरे चरणों
में बैठते थे।
श्रीमती
लक्ष्मी
बारूपाल
(देसूरी): यह क्या
जानें औरत का
सम्मान करना
।
श्री
अध्यक्ष: आप
कुश्ती वहां
लड़ना ना
इलाके में,
यहां क्या
कुश्ती लड़
रहे हो ...(व्यवधान)
श्रीमती
लक्ष्मी
बारूपाल
(देसूरी): मेरे
को लगता है यह
मेरे सामने
खड़े होंगे
...(व्यवधान)
शिड्यूल्ड
कास्ट होना
पड़ेगा ...(व्यवधान)
तब किसी के
गोद आना
पड़ेगा ...(व्यवधान)
श्री
नरपत सिंह
राजवी (उद्योग
मंत्री):
महिलाओं से कुश्ती
हम नहीं लड़ने
देंगे।
श्री
अध्यक्ष:
भूतपूर्व आई ए
एस आफीसर हो
आप ...(व्यवधान)
श्रीमती
लक्ष्मी
बारूपाल
(देसूरी):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से सरकार से
पूछना चाहती
हूं, मैं
सरकार के जवाब
से पूर्णतया
संतुष्ट हूं
और भविष्य
में क्या यह
बाँध
पुनर्निमाण
की इच्छा
रखते हैं और
पुनर्निमाण
पक्का
करवाने की इच्छा
रखते हैं ? इतना
बड़ा बाँध जब
था तो वहां पर
एक चौकीदार की
भी व्यवस्था
की जानी चाहिए
। मेरे प्रश्न
पूछने का यही
था और मुझे
उत्तर से
संतुष्टि है ।
उन्होंने
जांच आयोग
बैठा दिया है
उसका रिजल्ट
आएगा, मुझे
संतुष्टि
रहेगी। सिर्फ
मैं यही
चाहतीहूं कि
भविष्य में
जब यह बाँध पुनर्निमाण
हो तो पक्का
पुनर्निमाण
हो । सरकार से
मैं इसका जवाब
चाहतीहूं ।
इतना बड़ा
बाँध है तो
इसके ऊपर एक
चौकीदार होना
चाहिए, यह मैं
चाहतीहूं ।
धन्यवाद।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
अध्यक्ष
महोदय, सरकार
के जवाब से
संतुष्ट हो
जाते हैं उसके
बाद कोई सप्लीमैंट्री
नहीं पूछते
हैं । जब
सरकार के जवाब
से संतुष्ट
हो जाता है
कोई सदस्य
उसके बाद सप्लीमैंट्री
नहीं पूछता है
...(व्यवधान)
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर):
धारिया बाँध
बनने से कितने
किसानों की
भूमि सिंचित
होती है ...(व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
इनको गाइड करो
।
एक
माननीय सदस्य:
आपसे तो आपके
सदस्य
संतुष्ट
नहीं हैं ।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
दवाब में आकर
के तो संतुष्ट
हैं बोल देते
हैं और अन्दर
हीअन्दर ...(व्यवधान)
यह कैसे
संतुष्ट हैं?
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर):
कितने
किसानों के
कुए रीचार्ज
होकर के कितने
क्षेत्रफल
में सिंचाई हो
सकती है कृपया
यह बतायेंगे ?
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
इनके डर से कह
देते हैं हम
संतुष्ट हैं
और फिर सप्लीमैंट्री
क्वश्चन
ठोके जा
रहीहैं । कोई
बात होती है
क्या, दुनिया
के इतिहास में
जहां भी पार्लियामैंट
चलती है, सदन
चलता है ....
श्री
अध्यक्ष: आप
बजाए इधर
शिक्षा देने
के उधर शिक्षा
दो ।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
इनको समझाओ
आप।
श्रीमती
राजकुमारी
शर्मा (सीकर):
आप अपने लोगों
को समझाओ ।
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर):
मैंने पूछा
अध्यक्ष
महोदय, कि
बाँध बनने से
लाभ है कि
नहीं बनने से
लाभ है ...(व्यवधान)
श्री
खुशवीर सिंह
जोजावर
(खारची):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से मंत्री
महोदय से
प्रश्न का
जवाब चाहता
हूं जो मंत्री
जी ने लिखित
में हमें दिया
है और एक इतनी
बड़ी
पुस्तिका भी दी
उसके लिए तो
धन्यवाद है ।
श्री
अध्यक्ष: अब
आपने भी धन्यवाद
दे दिया। आपके
नेता
प्रतिपक्ष ने
कह दिया कि
धन्यवाद के
बाद तो आवश्यकता
नहीं है ...(व्यवधान)
श्री
खुशवीर सिंह
जोजावर
(खारची): अध्यक्ष
महोदय, यह जो
पुस्तिका दी
है मैं इसके
लिए धन्यवाद
दे रहा हूं
लेकिन मात्र
किताब देने से
जवाब नहीं आ
सकता है ।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
आप नये सदस्यों
को व्यवस्थाएं
देकर समझा
दीजिए कि ऐसा हो
जाने के बाद
सप्लीमैंट्री
नहीं होती। एक
उदाहरण हो
जाएगा।
श्री
अध्यक्ष: आप
कुछ अपनी
पार्टी वालों
को प्रतिपक्ष को
भी तो समझाओ
कि हर बात पर
खड़े होकर शोर
नहीं मचाते
हैं । उनको
समझाओ आप ।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
अध्यक्ष
महोदय,
प्रतिपक्ष का
तो काम है
आपको असिस्ट
करने का। हम
आपको मदद करते
हैं आपकी रौनक
बढ़ाते हैं,
आप हमें कहते
हैं कि इन्हें
समझाओ। अगर हम
आपकी रौनक
नहीं
बढ़ायेंगे, आपको
कोई नहीं
पूछेगा। आपको
कभी घास नहीं
डालेंगे। यह
तो हमारी कृपा
मानो आप आपके
ऊपर कि हम
आपकी रौनक
बढ़ा रहे हैं
।
श्री
अध्यक्ष: और
किसी से तो इस
सदन की रौनक
बढ़ती है कि नहीं
बढ़ती है
लेकिन नेता
प्रतिपक्ष से
रौनक बढ़ जाती
है ।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, आसन पर
कृपा की बात
की इन्होंने
। अध्यक्ष
महोदय, मुझे
इस बात पर
एतराज है
प्रतिपक्ष के
नेता ने कहा
किआप पर इनकी
कृपा है । यह
स्पष्ट
करें कि आप पर
इनकी कृपा है
कि इन पर आपकी
कृपा है । पता
तो चले राजस्थान
की जनता को ।
vns/usc/11.50/1f/5.10.2006
श्री अध्यक्ष:
ऐसा है आप
कृपा की बात
छोडि़ये..
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): आप कहां आ
गये दोनों के
बीच में ?
श्री अध्यक्ष:
लेकिन यह अभी
भी रौनक
बढ़ाते हैं।
इस सदन के अन्दर
और कोई रौनक
बढ़ाता हो
चाहे नहीं
बढ़ाता हो
माननीय नेता
प्रतिपक्ष
अवश्य रौनक
बढ़ाते हैं।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): लेकिन आज
तो सदन की
रौनक भवानी
सिंह राजावत बढ़ा
रहे हैं देखो
कैसा कुर्ता
पहनकर आये हैं
सर्कस जैसा।
आज की रौनक तो
भवानी सिंह
राजावत बढ़ा
रहे हैं।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
इनको जलन क्यों
हो रही है ? मैं
आपका भी
प्रशंसक हूं।
मैं आपकी भी
कई मामलों में
प्रशंसा करता
हूं। हमारे
बुजुर्गों ने
यह कहा था कि
तलवार का घाव
यदि बैरी का
है तो भी उसकी
सराहना की
जानी चाहिये।
कभी-कभी अच्छी
बात कह देते
हैं हम आपकी
सराहना कर
देते हैं। जब
रात-दिन आप
उलटा करते हो
उसकी हम
सराहना कैसे
करें ? अध्यक्ष
महोदय की हर
बात की हम
सराहना करते
हैं।
श्री
राजेन्द्र राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री):
नहीं-नहीं,
मैंने तो पूछा
कृपा किसकी
किस पर है यह
पता लग जाए
थोड़ा सा।
आपकी इन पर है
कि इनकी आप पर
है, इतनी सी
बात थी बाकी
तो...
श्री अध्यक्ष:
इनकी मुझ पर
है। इनकी मुझ
पर है।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
इसमें आपको क्या
ऐतराज है ?
इसकी बराबरी,
क्या जलन है ?
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): फिर भी
आप पर है...
श्री अध्यक्ष:
नहीं, इनकी
मुझ पर है।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): और जैसी
इनकी है वैसी
आपकी है कि
नहीं ?
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
अध्यक्ष
महोदय, इसको
स्पष्ट
करने के लिये,
आप किसी भी
चीज को आप अध्यक्ष
महोदय को कह
ही नहीं सकते।
आपको कोई अधिकार
नहीं है कि
अध्यक्ष
महोदय से क्लेरीफिकेशन
मांगे।
श्री
अमराराम (धोद):
आप दोनों के
बीच में कहां
आ गये ?
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): मैं बीच
में हूं।
श्री अध्यक्ष:
यह अधिकार
केवल नेता
प्रतिपक्ष का
है।
श्री
खुशवीर सिंह
जोजावर
(खारची): अध्यक्ष
महोदय, मैं
मंत्री महोदय,
आपसे यह जानना
चाहता हूं कि
जिस स्थान पर
उक्त धारिया
बाँध का जो ओवरफ्लो
बनाया गया, क्या
एस्टीमेट
में वह
ओवरफ्लो उस
पहाड़ी के पास
था या नदी की
मुख्य धारा
पर था ? अगर वह
पहाड़ी के पास
नहीं था और मुख्य
धारा पर था तो
गलत स्थान पर
क्यों बनाया
गया ? और अगर
एस्टीमेट
में वह स्थान
लिया गया तो
क्या वह स्थान
उपयुक्त था ?
मंत्री
महोदय, दूसरा
मेरा प्रश्न
है कि आपने
तकनीकी
रिपोर्ट का जो
इसमें हवाला
दिया है कि
मिट्टी की
जांच करवायी
गयी, मैं मानता
हूं कि मिट्टी
की जांच हुई
होगी लेकिन उस
मिट्टी की
जांच में यह
लिखा कि
उपयुक्त
पाया गया। मैं
आपसे यह जानना
चाहूंगा कि एक
बाँध राजस्थान
के इतिहास में
आज दिन तक
जितने भी बाँध
टूटे हैं
अतिवृष्टि से
कोई भी बाँध
मेरे ख्याल
से 38 स्थानों
से नहीं टूटा
होगा और उसका
एक मात्र कारण
यह था कि वह
मिट्टी
उपयुक्त
नहीं थी। वह
रिपोर्ट गलत
प्रस्तुत की
गयी। जो भी
टैस्ट
रिपोर्ट आयी
लेबोरेटरी से
वह गलत
रिपोर्ट
प्रस्तुत की
गयी।
तीसरा
मेरा प्रश्न
आपसे है बाँध
के रख-रखाव के
लिये मैंने
पूछा कि क्या
मानसून से
पूर्व उनकी
जांच करवायी
जाती है ? वहां
आपका एक
अधीक्षण
अभियन्ता
बैठा है और
मैं आपसे यह
जानना
चाहूंगा मंत्री
महोदय कि आपने
इसमें लिखा है
कि हां, उसकी
जाँच करवायी
गयी। उसका
निरीक्षण
करवाया हमने
मानसून से
पूर्व। तो उस
निरीक्षण की
जो प्रति है कि
किस दिन आदेश
हुए और जो
निरीक्षण
किया उसकी
रिपोर्ट क्या
प्रस्तुत की
गयी वह आप सदन
के पटल पर
प्रस्तुत
करें।
मैं आपसे
यह जानना
चाहूंगा जो
इसमें 38 स्थान
बताये गये हैं
कि 38 स्थानों
से बाँध टूटा
है तो क्या
इसको खण्ड़ों
में बांटा गया
है। ब्लाक
एक, ब्लाक दो
ऐसे करके आपने
खण्ड़ों में
बांटा है
इसको। इसकी यह
रिपोर्ट आयी है
और इसमें आप
यह बतायेंगे
क्ले कितना
प्रतिशत होना
चाहिये जो उस
बाँध के बनाने
के लिये उपयुक्त
रहे ? यहां
अलग-अलग
प्रतिशत
अलग-अलग खण्ड़
में दिये गये
हैं। जो बाँध
यहां जिन स्थानों
से टूटा है वह
पूरी जगह से
उसमें क्ले
की मात्रा
अधिक थी,
ग्रेवल की
मात्रा अधिक थी
इसलिये वह
बाँध टूटा है
तो इसकी आप
दुबारा जांच
करवाने का
विचार रखते
हैं ? उस जांच
में और इस
मिट्टी की
जांच में अगर
अंतर आता है
तो आप उन दोषी
अधिकारियों
के विरुद्ध
जिन्होंने
उस वक्त यह
जांच रिपोर्ट
प्रस्तुत की
थी, क्या
कार्यवाही
करने जा रहे
हैं ? साथ ही इस
आप कब तक इसका
पुनर्निर्माण
करेंगे ? इससे
पूर्व आप यह
भी विचार रखते
हैं कि बाँध का
केचमेंट
एरिया जो भी
है, पिछले 12
वर्षों का जो वर्षा
का रिकार्ड है
उसको भी आप ध्यान
में रखते हुए
उक्त बाँध को
बनायेंगे या
यूं ही बना
देंगे ?
श्री अध्यक्ष:
बस अब पूछ
लिया..(व्यवधान)
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, यह सब
बता दिया ना।
श्री
खुशवीर सिंह
जोजावर
(खारची): शासन
चाहे कांग्रेस
का हो चाहे बी
जे पी का हो
बाँध टूटने से
मतलब है। आपके
शासन में भी
टूटे होंगे और
हमारे शासन
में भी टूटे
होंगे।
कांग्रेस या
बी जे पी वहां
जाकर बाँध
नहीं बनाती
है।
श्री अध्यक्ष:
अब आप स्थान
ग्रहण कर लें।
श्री
कालीचरण
सर्राफ
(जौहरी
बाजार): आपके
शासन में बना
था..(व्यवधान)
श्री
रामनारायण
मीणा (नैनवां):
आपके राज में
बना था तब ही
तो भ्रष्टाचार
हुआ है।
कांग्रेस के
राज में बनता
तो भ्रष्टाचार
ही नहीं होता
...(व्यवधान)
बनाने वाले जो
थे ठेकेदार
आपके लोग थे।
श्री मदन
राठौड़
(सुमेरपुर):
ठेकेदार के
भाई हो आप..(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
मंत्रीजी
जवाब देंगे।
आप क्यों बोल
रहे हैं बीच
में ?
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, माननीय
सदस्यों की
चिन्ता
बिलकुल स्वाभाविक
है। कोई भी
अगर वाटर
हार्वेस्टिंग
स्ट्रक्चर
बनता है और
चिन्ता का
विषय है। मैं
अभी यह कह
सकता हूं कि
जहां पर भी
हैवी रेनफाल
और बाढ़ की
स्थिति थी,
मैं सदन को
बताना चाहता
हूं कि दो साल,
ढाई साल में जो
भी स्ट्रक्चर
सबने निर्माण
किये हैं चाहे
हार्वेस्टिंग
स्ट्रक्चर
हो चाहे डेम
हो, कोई भी
फुली डेमेज
नहीं हुआ है।
साइड में से
कहीं-कहीं
पानी निकल
गया, बाकी
सबमें पानी
भरा हुआ है और 85
प्रतिशत के
लगभग
इर्रिगेशन तक
की क्षमता का
पानी आज की
तारीख में
मौजूद है। दो
डूंगरपुर में
टूटे हैं और
एक धारिया बाँध
टूटा है पाली
जिले का।
बदकिस्मती
यह है कि यह
बाँध तो पहली
बार बनने के
बाद उसी दिन
भरा और शाम को
टूट गया...
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): कब बना
यह ?
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): यह
बना 2002 में और
उसके बाद में
लगातार..(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
आप शांत रहें
ना। शांत
रहिये।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आपका यह कहना
कि इस बरसात
में आज के समय
के निर्माण का
एक भी बाँध
नहीं टूटा,
शत-प्रतिशत
असत्य है।
आपके टाइम के
निर्माण के
अनेक बाँध
टूटे हैं
श्री अध्यक्ष:
हरिमोहन
शर्मा। हिण्डोली
से आने वाले
माननीय सदस्य,
यह कोई तरीका
नहीं है आपका
कि आप बीच में
खड़े होकर और
मंत्रीजी को
डिस्टर्ब
करते हैं।
पूरा जवाब आने
दीजिये उनका।
यह कौनसा
तरीका है ?
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): अगर
आपके पास कोई
सूचना हो, ऐसी
कोई सूचना हो
कि इस ढाई साल
में बना और
जिस तरीके से
धारिया टूटा
वैसे कहीं
पानी निकल आया
हो तो मुझे
देना, आपको
मैं बता रहा
हूं कि तत्काल
ससपेंड
करूंगा
संबंधित
अधिकारियों
को। अब आप भी
ऐसे ही...
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
बता दो आप
अमराराम जी
टूटा है।
श्री
अमराराम (धोद):
मेरे यहां
टूटा है। इस
साल बनाया था
और इसी साल
टूट गया पूरा।
आप ससपेंड करा
दो।
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): आपके
यहां तो बरसात
ही नहीं हुई,
वैसे ही टूट
गया है।
श्री
अमराराम (धोद):
आखिरी में
इतनी बरसात
हुई और उसी से
टट गया। इसी
साल बना था।
बता दो आप।
श्री अध्यक्ष:
वह दूसरा
प्रश्न है।
श्री हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
यह वाटर
हार्वेस्टिंग
का जो काम है
ना, आपका वाटर
हार्वेस्टिंग
का अनेक टूट
रहे हैं, हर
जगह पर टूट
रहे हैं।
श्री अध्यक्ष:
अनेक का जवाब
नहीं देंगे
यह। यह इसी का
जवाब देंगे।
हरेक के जवाब
के लिये दूसरा
प्रश्न
कीजिये।
श्री
सांवर लाल (सिंचाई
मंत्री): केवल
इर्रिगेशन से
संबंधित जो
कंस्ट्रक्शन
है अभी उन्हीं
की बात कर रहा
हूं। बाकी स्ट्रक्चर्स
कई एजेंसीज के
द्वारा बनते
हैं। तो माननीय
सदस्य की
चिन्ता है,
मेरे पास जो
जानकारी आयी
है मिट्टी के
टैस्ट की
उसके सम्बन्ध
में जानकारी
दी है। अब क्योंकि
आजकल आप सब भी
जानते हैं
जैसे-जैसे समय
आगे बढ़ता जा
रहा है आदमी
की बॉडी का
टैस्ट आज से
दस साल पहले
कम होते थे आज
हर चीज का टैस्ट
होता है। आज
यह बाँध तो
बड़े-बड़े स्ट्रक्चर्स
बनते हैं..(व्यवधान)
श्री
खुशवीर सिंह
जोजावर
(खारची): नहीं,
मंत्री महोदय
क्ले का टैस्ट
नहीं हुआ। गलत
रिपोर्ट
प्रस्तुत की
गयी।
श्री अध्यक्ष:
फिर आप यह क्या
हो गया है ? यह
कौनसा तरीका
है ?
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): मैं
बता रहा हूं
ना आप क्यों
खड़े हो रहे
हो। आपकी चिन्ता,
मैं आपसे ज्यादा
चिंतित हूं।
तो मैं माननीय
अध्यक्ष
महोदय, यह
कहना चाह रहा
हूं कि जब यह
बाँध बनना
शुरू हुआ था
उस समय भी एक
टैस्ट जो
होना चाहिये
था, कर सकते थे,
हमारे यहां पर
फैसेलिटी थी
आई डी आर में
जो नहीं किया
गया जिसको
अंग्रेजी में
कहते
डिसपर्सिव
सॉयल टैस्ट।
अब अंग्रेजी
में मैंने
कोशिश की कि
क्या होता है
? घुलनशील तत्व,
घुलनशीलता की
जाच। अब यह
बाँध जिस
तरीके से टूटा
है...
श्री
खुशवीर सिंह
जोजावर
(खारची): मुख्य
बात यही है।
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): 38 जगह
से यह अंदर से
ब्रिक्स हुआ
और एक जगह से
मेन पॉल टूटी
है। अगर यह
टैस्ट हो
जाता तो मैं
आपकी बात से
बिलकुल सहमत
हूं कि जिस
तरीके से बाँध
भरने के बाद
कुछ ही घण्टों
में मिट्टी
घुल-घुल करके
वह एक तरह से
छेद जिसको
गुल्ला हम
मारवाड़ी
भाषा में कहते
हैं। जगह-जगह
बाँध से गुल्ले
लग गये और इस
वजह से वह
पूरा का पूरा
पानी उसका
निकल गया। यह
हमारे लिये
चिन्ता की
बात है। मैंने
जांच के चीफ
इंजीनियर, नर्बदा
श्री जयपाल
सिंह की अध्यक्षता
में कमेटी
गठित कर दी है
और एक महीने में
हमने रिपोर्ट
मांगी है और
मैं आपको विश्वास
दिलाता हूं कि
जो भी इस बाँध
के निर्माण में
अधिकारी लगे
हुए थे, सबकी
जानकारी मैंने
कर ली है और आज
की तारीख में
लगभग यह सब सेवा
में हैं और
इनके खिलाफ
एक्शन होगा
अगर यह दोषी
पाये जायेंगे
तो। निश्चित
रूप से मैं
सदन को आश्वस्त
करना चाहता
हूं राज्य का
पैसा लगता है
किसानों के
लिये लगता है,
किसान आशा
करता है कि
बरसात हो जाए
पानी आ जाए...
श्री अध्यक्ष:
बस ठीक है, हो
गया।
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): दो
साल, चार साल,
दस साल में तो
कभी तो फायदा
मिला। आज
जवार्इ बाँध बारह
साल बाद में
भरा। आज
धारिया में
किस्मत है
हमारी कि
मारवाड़ में
बाढ़ आ रही है
और पहली बार
बरसात हुई है...
श्री अध्यक्ष:
सबको संतुष्ट
कर दिया आपने
अपने जवाब से।
नेक्सट क्वेश्चन।
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): तो यह
मैं जांच करा कर
उनके खिलाफ
कार्यवाही
करूंगा।
दूसरी बात
यह आयी कि
इसका री-कंस्ट्रक्शन,
तो मैं सदन को
आश्वस्त
करना चाहता
हूं कि वापस
पानी रुके कैसे,
इस बार बरसात
हुई भगवान करे
फिर अगली बार
बरसात करे तो
मानसून का
पानी रोकने तक
की स्थिति तो
कर देंगे।
उसमें सारे
टैस्ट कराकर
इस प्रकार से
कंस्ट्रक्शन
करायेंगे कि
इससे फिर
डेमेजेज नहीं
हो। यह व्यवस्था
हम करेंगे।
श्री अध्यक्ष:
पूर्णरूपेण
संतुष्ट हो गये।
नेक्सट क्वेश्चन।
श्री
एमादुद्दीन।
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): बाकी
एक ओवरफ्लो वाली
जो आपने...
श्री
खुशवीर सिंह
जोजावर
(खारची): आप
निरीक्षण
रिपोर्ट
प्रस्तुत...
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, वहां
बरसात से
पहले...
श्री अध्यक्ष:
तो हम सब
संतुष्ट हो
गये, आसन भी
संतुष्ट है,
यह भी संतुष्ट
है।
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): और
इंस्पेक्शन
रिपोर्ट तो
जैसे कोई भी
अधिकारी ए
ईएन, जे ईन, एक्स
ईएन है यह
उनकी
प्रोपर्टी
है। आज आप
आपके घर में
जाते हो तो सब
एक-एक को टटोल
रिपोर्ट थोड़ी
बनाते हो वैसे
ही इर्रिगेशन
के डिपार्टमेंट
वाले ..(व्यवधान)
श्याम/चौहान 5.10.2006
12.00(1) 1g
श्री
खुशवीर सिंह
जोजावर
(खारची): यह घर
नहीं सरकार है
मंत्री महोदय
...(व्यवधान)
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): अब आप
सुनें तो सही, सरकार
कोई हर बार जा-जाकर
कोई लॉग-बुक
थोड़े ही
भरेगी ...(व्यवधान)
कि इस बाँध
में यह हो गया
...(व्यवधान)
अगर कोई
ब्रीचेज
वगैरह होती तो
निश्चित रूप
से इस पर
कार्यवाही
होती।
श्रीमती
कृष्णेन्द्र
कौर (नदबई): अध्यक्ष
महोदय, मैं
मंत्री जी को
यह सुझाव देना
चाहती हूं कि
जितने भी बाँध
अभी पंचायत
समिति में गये
हैं।
श्री अध्यक्ष:
वह अलग से
प्रश्न है,
आई एम सॉरी,
अलग से प्रश्न
है, इनसे आप
वैसे ही बात
कर लीजिये वह
वैसे ही कर
देंगे।
श्रीमती
कृष्णेन्द्र
कौर (नदबई): इन्होंने
तो पंचायत
समिति में ले
लिया ...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
इससे थोड़े ही
संबंधित है
...(व्यवधान)
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय,
कैबीनेट सब
कमेटी बनी हुई
है, मुख्यमंत्री
जी ने इस
संबंध में
कैबीनेट सब
कमेटी बनायी
है। उसकी
रिकमंडेशन के
बाद
मंत्रिमंडल
विचार करेगा।
श्री अध्यक्ष:
श्री
एमादुद्दीन
अहमद खान।
साबी
नदी(अलवर) पर
पुल निर्माण
श्री
एमादुद्दीन
अहमद खान
(तिजारा): क्या
सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री यह
बताने की कृपा
करेंगे:-
(1) क्या यह
सही है कि
अलवर जिले की
तहसील तिजारा
व उपखण्ड
कोटकासिम
मुख्यालय पर
रेवाड़ी से
किशनगढ़बास,
तिजारा वाया कोटकासिम
व रेवाड़ी से
भिवाड़ी वाया
कोटकासिम रोड
पर कोटकासिम
कस्बे पर
साबी नदी पर
पुलिया न होने
से भिवाड़ी, खुशकेड़ा,
चौपानकी
औद्योगिक
क्षेत्र को
नेशनल हाइवे
नं.8
(जयपुर-दिल्ली)
से वैकल्पिक
मार्ग नहीं
मिल पा रहा है?
(2) क्या
सरकार उक्त
पुलिया का
निर्माण कर
राज्य के
सबसे बड़े
औद्योगिक
क्षेत्र को
जयपुर-दिल्ली
नेशनल हाईवे
से वैकल्पिक
मार्ग उपलब्ध
करवाने का
विचार रखती
है? यदि हां, तो
कब तक व नहीं
तो क्यों?
श्री अध्यक्ष:
आप जवाब
दीजिये।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): 1. जी हां।
अलवर जिले की
तहसील तिजारा
व उपखण्ड
कोटकासिम
मुख्यालय पर
रेवाड़ी से
किशनगढ़वास
तिजारा वाया कोटकासिम
रोड़ पर
कोटकासिम कस्बे
में साबी नदी
पर पुलिया
नहीं होने से
इस मार्ग में
नदी का हिस्सा
कच्चा होने
के कारण वर्षा
ऋतु में
यातायात में
बाधा आती है।
लेकिन भिवाड़ी,
खुशकेड़ा,
चौपानकी
औद्योगिक
क्षेत्र को नेशनल
हाईवे नंबर-8
से जोड़ने के
लिए टपूकड़ा, बूढ़ी
बावल, नन्दरामपुरवास,
धारूहेड़ा वैकल्पिक
मार्ग उपलब्ध
है।
2. जी हां।
किशनगढ़बास
कोटकासिम
बोलनी रेवाड़ी
रोड पर
कोटकासिम कस्बे
के साबी नदी
पर
पुलिया(रपट)
का कार्य राज्य
सड़क निधि में
विचाराधीन
है।
श्री
एमादुद्दीन
अहमद खान
(तिजारा): अध्यक्ष
महोदय, माननीय
मंत्री जी ने
पार्ट एक में
जो बताया है
कि नेशनल
हाईवे से
जोड़ने के लिए
टपूकड़ा,
बूढ़ी बावल और
जो रोड आपने
बताया है यह
रूट दिल्ली
से होता है,
जयपुर कैपिटल
है और अगर
जयपुर से जाना
होता है तो
यहां से बोलनी
को पार करके
बाद में
कोटकासिम का
है, बोलनी के साथ
उसके बजाय
धारूहेड़ा
फिर भिवाड़ी,
फिर टपूकड़ा
और फिर पुष्करणा
आना पड़ता है।
श्री अध्यक्ष:
आप सीधा सा
प्रश्न
पूछें कि साबी
नदी पर पुल
बनाने का आपका
इरादा है क्या?
यही पूछ
लीजिये ना।
बात हो गयी
खत्म।
श्री
एमादुद्दीन
अहमद खान
(तिजारा): मैं
यही पूछ रहा
हूं।
श्री अध्यक्ष:
यही पूछ
लीजिये आप।
श्री
एमादुद्दीन
अहमद खान
(तिजारा): यह जो
रूट है, यह दिल्ली
वाले के बजाय
जयपुर से ...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
इसलिए कह रही
हूं कि यह पूछ
लीजिये ताकि
जवाब दे देंगे
वह।
श्री
एमादुद्दीन
अहमद खान
(तिजारा): इसको
जोड़ने के लिए
रूट बनाने का
आपका कब तक प्लान
है?
श्री अध्यक्ष:
वही तो मैं कह
रहा हूं कि आप
सीधा पूछ लीजिये।
श्री
एमादुद्दीन
अहमद खान
(तिजारा):
पार्ट दो में
जो आपने पुलिया
का बताया है
तो 2005 में जब आप
नवम्बर,2005 को
जोडि़या
पधारे थे
कोटकासिम
तहसील में तब
आपने एक
उदघाटन किया
था, वहां पर
आपने दो एलान
किये थे, एक तो
आपने दो
किलोमीटर
सी.सी.रोड साबी
नदी का पुल
बनाने का एलान
किया था।
श्री अध्यक्ष:
इन्होंने
एलान कुछ भी
किया हो, आपको
जो बात पूछनी
है वह पूछ
लीजिये।
श्री
एमादुद्दीन
अहमद खान
(तिजारा):
दूसरा आपने कोटकासिम
से
किशनगढ़बास
के हाईवे का
आपने किया था।
श्री अध्यक्ष:
समय हो गया है
इसलिए पूछ
लीजिये आप।
श्री एमादुद्दीन अहमद खान (तिजारा): उन बातों पर एक साल होने को आया है और अभी तक काम शुरू नहीं