vkj/akt/1a/1100/04102006
अशोधित
प्रति/
प्रकाशनार्थ
नहीं
राजस्थान
विधान सभा की
कार्यवाही का
वृत्तान्त
अंक 6
बारहवीं
विधान सभा के
छठे सत्र का
दूसरा दिवस संख्या 2
बुद्धवार, 04अक्टूबर, 2006
राजस्थान
विधान सभा की
बैठक 11.00 बजे
विधान
सभा भवन,
जयपुर में
प्रारम्भ
हुई।
(श्रीमती
सुमित्रा
सिंह, अध्यक्ष,
पदासीन)
तारांकित
प्रश्नोत्तर
तहसील
क्षेत्र
राजगढ़(अलवर)
के माडा चयनित
ग्रामों हेतु
मूलभूत
सुविधाएं
1. श्री कान्तीप्रसाद मीणा (थानागाजी): क्या जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे :-
(1) विधान सभा क्षेत्र थानागाजी में तहसील राजगढ़ सहित कौन-कौनसे ग्राम माडा योजना में चयनित हैं? सूची सदन की मेज पर रखें।
(2) क्या उक्त ग्रामों में सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं? यदि हां, तो किस-किस गांव में क्या-क्या सुविधा सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जा रही है? अब सरकार इन माडा गांवों में और क्या-क्या सुविधाएं उपलब्ध कराने का विचार रखती है?
श्री अध्यक्ष: श्री कान्तीप्रसाद मीणा का प्रश्न स्थगित हो गया है क्योंकि पूरी सूचना नहीं आई है।
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): छठे सत्र में पहला ही प्रश्न स्थगित होना शर्म की बात है सरकार के लिए...(व्यवधान) पहले सत्र में पहला प्रश्न स्थगित होना...
श्री अध्यक्ष: ऐसा है, जब बहुत अधिक सूचना हो यानी माडा गांवों में और क्या-क्या सुविधाएं उपलब्ध कराने का विचार रखते हैं तो सारे ही विभागों से सम्बन्धित हो गया, इतनी विस्तृत सूचना प्राप्त करने में समय भी लगता है और 14 दिनों में यह सूचना प्राप्त नहीं हो सकती थी इसलिए यह स्थगित किया गया है।...(व्यवधान) दूसरा प्रश्न भी स्थगित किया गया है। (व्यवधान) और आप बैठे-बैठे बोलेंगे फिर, ठीक है।
अबीमित
सरकारी
वाहनों
द्वारा
दुर्घटनाओं के
कारण व्यय
राशि
2. श्री जोगाराम पटेल (लूणी): क्या यातायात मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-
(1) क्या यह सही है कि सरकारी वाहन बिना बीमा कराये उपयोग में लिये जा सकते हैं?
(2) क्या सरकारी वाहनों को बीमा नहीं करवाने की छूट मोटरयान अधिनियम में प्रदान की हुई है? यदि हां, तो कब से?
(3) राज्य सरकार को गत तीन वर्षों में विभिन्न दुर्घटनाओं के मुआवजे के रूप में कितनी राशि वहन करनी पड़ी?
श्री अध्यक्ष: दूसरा प्रश्न श्री जोगाराम पटेल का भी स्थगित किया गया है...(व्यवधान) सुनिये माननीय प्रतिपक्ष के नेता महोदय। तीन वर्षों में विभिन्न दुर्घटनाओं में मुआवजे के रूप में कितनी राशि वहन करनी पड़ी है, इस प्रश्न का जवाब 13-14 दिन में नहीं आ सकता था, इसलिए इसे भी स्थगित किया जा रहा है। मैं समझती हूं शायद आप सरकार की मजबूरी समझ गये होंगे।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अध्यक्ष महोदय, तो नियमों में प्रावधान है कि आप अस्वीकार कर सकती हैं। आपने एक्सेप्ट क्यों किया? जब आपने स्वीकार कर लिया तो सरकार के लिए लाजिमी है कि वह जवाब दे।
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): आप माननीय अध्यक्ष महोदय के आदेशों को चैलेंज कर रहे हैं।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): हम अध्यक्षीय व्यवस्था पर ही ध्यान दिलाना चाहते हैं। अध्यक्षीय व्यवस्था पर ही हम अध्यक्षजी का ध्यान दिलाना चाहते हैं, ऐसा नियमों में प्रावधान है...
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): वह स्वीकार किया है, वह भी आपने ही किया है और यह स्थगित किया है, वह भी अध्यक्षजी ने ही किया है।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष) कोई बात तो सुनो मेरी आप, कोई बात तो सुने मेरी, कोई ऐसा प्रश्न है जो....
श्री अध्यक्ष: प्रतिपक्ष के नेता की बात तो सुन लो।
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): आप व्यवस्था नहीं दें।
श्री अध्यक्ष: अब आप बीच में नहीं बोलें। बोलने दें प्रतिपक्ष के नेता को।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): ...लेंथी हो, इतने समय में जवाब कलेक्ट नहीं कर सकती सरकार तो उसको प्रोटेक्शन देने के लिए आप हैं लेकिन जब आप स्वीकार कर लेती हैं तो हमारे राइट्स को प्रोटेक्शन देने के लिए आप हैं। अब यहां भी आप सरकार को प्रोटेक्ट करती हैं, वहां भी करती हैं, चारों तरफ सरकार को प्रोटेक्ट कर रही हैं, यह कोई बात थोड़े ही हुई...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: मैं तो आपको प्रोटेक्ट करती हूं, सरकार को नहीं करती हूं।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): नहीं नहीं आप, पहले दिन से ही...
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): यह पूरा झुंझुनूं जिला जानता है आप किसको प्रोटेक्ट करती हैं? (व्यवधान) पूरा झुंझुनूं जिला जानता है, आप किसको प्रोटेक्ट करती हैं?
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): नहीं नहीं, माननीय पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्टर साहब, सिर्फ चार दिन तो विधान सभा चलेगी और अध्यक्ष महोदय एक के बाद एक प्रश्न को स्थगित करती जा रही हैं, यह तो कोई बात नहीं हुई मान्यवर, यह तो पहला अवसर है, किसी भी पक्ष की किसी भी सरकार ने....
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): माननीय अध्यक्ष महोदय, मुझे आपत्ति है, प्रतिपक्ष के नेता महोदय, इसको यह ऐसे-ऐसे करते हैं, इसके टूटने का खतरा है। एक तो अध्यक्ष महोदय, प्रतिपक्ष के नेता महोदय के यहां एक डंडा जरूर लगवायें जिससे कम से कम यह माइक बच जाये, मेरा आपसे करबद्ध निवेदन है कि यह व्यवस्था आप कर दें।
श्री प्रद्युम्न सिंह (राजाखेड़ा): माननीय अध्यक्ष महोदय, मुझे इस बारे में और निवेदन करना है आपसे। (व्यवधान)
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): अध्यक्ष महोदय, मेरा दूसरा निवेदन यह है कि अध्यक्ष महोदय के ऊपर किसी प्रकार से, इस प्रकार के रिमार्क्स कि आप सत्ता पक्ष का पक्ष ले रही हैं, इधर भी लेती हैं, उधर भी लेती हैं, यह बहुत आब्जेक्शनेबल है, यह आसन के प्रति जिस प्रकार का रिमार्क्स है, यह असम्मानजनक टिप्पणी है माननीय अध्यक्ष महोदय के ऊपर।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मैंने प्रतिपक्ष और पक्ष की बात नहीं की।
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): इस पर आपको नोटिस लेना चाहिए।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अध्यक्ष महोदय, आप मेरे शब्दों पर तो ध्यान दीजिये। मैंने नहीं कहा कि आप पक्षपात करती हैं। मैंने कहा, आप प्रोटेक्शन करती हैं। यहां भी करती हैं, बाहर भी करती हैं, हमें चारों तरफ से आप पीटती हैं, ऐसा कैसे होगा? सदन में तो आपको हमारा प्रोटेक्शन करना चाहिए।
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): ये तो बराबर आपको प्रोटेक्शन करती हैं। (व्यवधान)
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): हमारा राइट है, आप हमें प्रोटेक्शन कीजिये। यदि हम इनसे प्रोटेक्शन नहीं मांगेंगे तो क्या महावीर प्रसाद जी से मांगेंगे क्या? (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: प्रश्न का जवाब आने दें, प्रश्न का जवाब आने दें अब आप। सरकारी मुख्य सचेतक महोदय, इस हाउस के अन्दर लीडर आफ द हाउस को भी पूरी बात जो चाहे कहने का हक है, इसी तरीके से प्रतिपक्ष के नेता को भी जो चाहे कहने का हक है। (व्यवधान)
श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): यह तो कोई बात हुई।
श्री प्रद्युम्न सिंह (राजाखेड़ा): माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है आपसे कि सरकार उत्तर नहीं देना चाहती है। सिर्फ दो जगह से इनको सूचना एकत्र करनी थी। यह सही है कि सरकारी वाहनों को छूट दी हुई है। जब भी ऐसा प्रश्न आता है तो फाइनेंस डिपार्टमेंट कन्करेंस देता है।
श्री अध्यक्ष: यह प्रश्न तो स्थगित हो गया है, इस स्थगित प्रश्न के बारे में क्या सुनें, स्थगित प्रश्न के बारे में क्या सुनें?
श्री प्रद्युम्न सिंह (राजाखेड़ा): देखिये, मेरी बात सुन लें आप। नहीं नहीं, आप मेरी बात सुन लें। आपने कहा है कि इतने सारे महकमों से सूचना लेनी है, उसके ऊपर मैं निवेदन कर रहा हूं। यह सरकार की इनएफिशियंसी दर्शाती है यह बात क्योंकि जब आपको एडिशनली चाहिए तो आपको फाइनेंस डिपार्टमेंट की कन्करेंस चाहिए और जो भी एडिशनली वहां से दी जाती है, सारा हिसाब एक जगह पर वहां मौजूद होता है, नम्बर एक और बाकी रोडवेज की बसों में दुर्घटनाएं होती हैं, आपको सिर्फ दो जगहों से सूचना लेनी थी कि मुआवजे की राशि जो दी गई है कि यह विभिन्न विभागों से लेनी है? यह बिलकुल गलत बात है। सरकार में यह सम्बन्धित विभागों से.....
श्री अध्यक्ष: तीन वर्षों की विभिन्न विभागों की सूचना है, तीन वर्षों की विभिन्न विभागों से सूचना 15 दिन के अन्दर सम्भव नहीं थी।
श्री प्रद्युम्न सिंह (राजाखेड़ा): हां हां, है, मैं आपसे निवेदन कर रहा हूं कि यह दो दिन की सूचना है, आप चार घंटे के अन्दर सारी सूचना ले सकते हैं। वहां फाइनेंस डिपार्टमेंट के अन्दर सारी चीजें मौजूद रहती हैं, यह सम्बन्धित विभाग की लापरवाही है। इन्होंने इससे बचने के लिए यह सारा काम किया है।
श्री अध्यक्ष: प्रश्न स्थगित किसी की भी सरकार हो, हमेशा होते रहे हैं और जब समय पर जवाब नहीं आता है तो स्थगित करना पड़ता है। श्री रिछपाल सिंह मिर्धा।
विधान
सभा क्षेत्र
डेगाना की
अपूर्ण/विचाराधीन
पेयजल
योजनाएं
3. श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): क्या ग्रामीण विकास मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-
(1) जिला ग्रामीण विकास प्रकोष्ठ नागौर द्वारा वर्ष 2004-05 एवं 2006-07 के दौरान विधायक स्थानीय क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम के तहत विधान सभा क्षेत्र डेगाना में पेयजल से सम्बन्धित विभिन्न योजनाओं के लिए कौनसे कार्यों की कुल कितनी राशि की स्वीकृतियां जारी की गईं? विवरण ग्रामवार/योजनावार सदन की मेज पर रखें।
(2) उक्त जारी की गई स्वीकृतियों के विभिन्न कार्यों में से कितने कार्य पूर्ण हो चुके हैं, कितने अपूर्ण हैं व कितने अभी तक शुरू ही नहीं किये गये? विवरण सदन की मेज पर रखें।
(3) क्या उक्त अपूर्ण कार्यों को सरकार भविष्य में पूरे करने का विचार रखती है? यदि हां, तो कब तक व नहीं तो क्यों? विवरण सदन की मेज पर रखें।
श्री कालूलाल गुर्जर (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री): (1) जिला परिषद (ग्रामीण विकास प्रकोष्ठ) नागौर द्वारा वर्ष 2004-05 एवं वर्ष 2006-07 के दौरान विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास योजनान्तर्गत विधान सभा क्षेत्र डेगाना में पेयजल से सम्बन्धित वर्ष 2004-05 में 13 परियोजनाएं राशि रुपये 9.26 लाख एवं वर्ष 2006-07 में आठ परियोजनाएं राशि रुपये 9.83 लाख, इस प्रकार कुल 21 परियोजनाओं की कुल राशि 19.09 लाख रुपये की स्वीकृतियां जारी की गई। इन कार्यों का विवरण ग्रामवार, योजनावार संलग्न परिशिष्ट-क पर अवलोकनीय है।
(2) उक्त 21 कार्यों में से वर्ष 2004-05 के समस्त 13 कार्य पूर्ण करवा लिये गये हैं। वर्ष 2006-07 के आठ कार्यों में से एक कार्य प्रगतिरत है व सात कार्य जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग द्वारा बिना टेण्डर प्रीमियम के कार्य नहीं कराने के कारण इन कार्यों की तकनीकी स्वीकृति जारी नहीं की गई है, जिसके कारण से ये कार्य प्रारम्भ नहीं किये गये। विवरण परिशिष्ट-क के कालम संख्या-11 पर अंकितानुसार है1
(3) जी हां। अपूर्ण एक कार्य ग्राम पंचायत गुणसली द्वारा शीघ्र पूर्ण करवा लिया जायेगा तथा शेष सात कार्य जिनकी कार्यकारी एजेंसी जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग को नियुक्त किया गया था, इन सभी कार्यों हेतु बिना टेण्डर प्रीमियम के जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग द्वारा कार्य करवाने से इन्कार कर दिया गया है। इन सभी कार्यों की कार्यकारी एजेंसी परिवर्तन पर विचार कर कार्य शीघ्र पूर्ण करवा लिये जायेंगे।
श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री महोदय से यह जानना चाहता हूं कि एक जनवरी, 2006 को विधायक कोष से जो स्वीकृति दी, इसमें अभी तक कार्य शुरू नहीं हुआ और इस बारे में सरकार आज तक फैसला नहीं कर पाई कि कौनसी कार्य एजेंसी इस कार्य को करेगी? नम्बर दो, विधायक कोष कार्यों के लिए.....
श्री अध्यक्ष: आप लिखकर देंगे, कौनसी कार्यकारी एजेंसी होगी? जब आपका पैसा है तो आप लिखकर दें।
श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): हम तो कह रहे हैं कि यह हमने थोड़े ही तय किया था कि कार्यकारी एजेंसी कौनसी होगी, वह तो सरकार तय करेगी। नहीं नहीं, हमने तो लिखकर दिया है जलदाय विभाग को, पीएचईडी को ये सब कार्य दिये थे...
श्री अध्यक्ष: तो जलदाय विभाग ने ना कर दिया कि हम नहीं है। आप दूसरी कार्यकारी एजेंसी से करवा लो। आप दूसरी नियुक्त कर दो।
श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): यह तो सरकार की जिम्मेदारी है ना, काम फिर कौन करेगा? दूसरे के लिए सरकार लिखे। हमारी गाइडलाइन में है तब करेंगे, कैसे करें, गाइडलाइन में नहीं है तो।
श्री अध्यक्ष: आप दूसरी नियुक्त कर दो। पंचायत है, पंचायत समिति है। उनको कर दो आप।
श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): पंचायत से नहीं करा सकते इनको पानी वाले कार्यों को। आप पूछो मंत्रीजी से, पंचायत से नहीं करा सकते। पूछ लो आप मंत्रीजी से, यह करवा सकते हैं क्या आप पंचायत से?
श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्यक्ष महोदय, आप बता दो। आप अलाउ करवा दीजिये, पीएचईडी वाले कार्यों को आप पंचायत या पंचायत समिति से करवा दीजिये। पीएचईडी के काम है, यह पीएचईडी से करा लो या दूसरे विभाग से करा लो, यह आप अलाउ करवा दीजिये। (व्यवधान) यह पीएचईडी नहीं कर सकती तो और कोई कार्यकारी एजेंसी करा नहीं सकती है अध्यक्ष महोदय।
श्री अमराराम (धोद): यह सरकारी विभाग है, पेयजल का काम है, यह पेयजल विभाग से ही करवा सकते हैं। स्पष्ट आदेश है कि उनसे कोई काम नहीं करा सकते। (व्यवधान)
श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): एक-एक साल से काम अधूरे पड़े हैं।
श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्यक्ष महोदय, ये काम अधूरे पड़े हैं, आप अलाउ करवा दीजिये। (व्यवधान)
श्री अमराराम (धोद): ये तो मनमर्जी कर रहे हैं। (व्यवधान)
Jk/akt/11.10/1b/4.10.2006
श्री जुबेर खान: डेढ़-डेढ़, दो-दो साल गुजरते हैं, काम नहीं होते हैं अध्यक्ष महोदय। खास तौर से पीएचईडी और यह विद्युत विभाग, दो विभाग ऐसे हैं....(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: आप एक साथ इतने जने क्यों बोल रहे हैं, मूल प्रश्नकर्ता को बोलने दीजिये, आप क्यों खड़े हो गये बीच में।
श्री रिछपाल मिर्धा: मेरा मूल प्रश्न है अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से बड़े विनम्र शब्दों में कह रहा हूं कि कार्य एजेंसी जलदाय विभाग के द्वारा यह कार्य कराने पड़ते हैं, दूसरी कार्य एजेंसी हम नियुक्त नहीं कर सकते। आप पूछ लीजिये यह। पूरे सदन में अभी आ जायेगा मामला सामने।
श्री अध्यक्ष: हम रोज कराते हैं, यह कैसे मान लूं।
श्री रिछपाल मिर्धा: हमारे कहे फिर क्यों नहीं करते हैं, इस बात का जवाब दे दो आप, हमारे क्यों नहीं किये जाते।
श्री मुरारी लाल मीणा (बांदीकुई): अध्यक्ष महोदय, इसकी समय सीमा तो फिक्स है क्या। तकनीकी स्वीकृति, प्रशासनिक स्वीकृति की क्या समय सीमा फिक्स है क्या।
श्री अध्यक्ष: हां, देखिये...
श्री मुरारी लाल मीणा: एक-एक साल तक न तो प्रशासनिक स्वीकृति निकलती, न तकनीकी स्वीकृति निकलती है इसमें।
श्री अध्यक्ष: बड़ी एस.आर. के अलावा बाकी सारे काम पंचायत समिति भी करती है, पंचायत भी करती है।
श्री रिछपाल मिर्धा: पेयजल का कह रहा हूं मैं अध्यक्ष महोदय, मेरा सवाल पेयजल से संबंधित ही है।
श्री अध्यक्ष: हां, पेयजल की ही मैं कह रही हूं। (व्यवधान)
श्री रिछपाल मिर्धा: माननीय अध्यक्ष महोदय, क्या राजस्थान पूरे में ही यह व्यवस्था है।
श्री मुरारी लाल मीणा: माननीय अध्यक्ष महोदय, एम.एल.ए. लेड के कामों की क्या टाइम, एक-एक साल तक प्रशासनिक स्वीकृति, तकनीकी स्वीकृति नहीं मिलती है, इसकी समय सीमा फिक्स होनी चाहिए। (व्यवधान)
श्री कैलाश त्रिवेदी (सहाड़ा): माननीय अध्यक्ष महोदय, मंत्री का जवाब ही पूरा असत्य है। मंत्री का जवाब ही गलत है। (व्यवधान)
एक माननीय सदस्य: पूरे राजस्थान के जो विधान सभा क्षेत्र है उनमें पूरी व्यवस्था है क्या यह।
श्री कैलाश त्रिवेदी: माननीय अध्यक्ष महोदय, आप सुन लें मेरी बात को। मंत्रीजी ने जो जवाब दिया है कि विभाग ने बिना टेंडर प्रीमियम उक्त कार्य को करने के लिए विभाग ने मना किया है और भाग (क) के अंदर आपने यह लिखा है कि तकनीकी स्वीकृति प्राप्त नहीं होने से एफ.एस. जारी नहीं की गई माननीय सदस्य की। तकनीकी स्वीकृति के अंदर कभी भी आपको टेंडर प्रीमियम की जरूरत नहीं है, बीएसआर से आपका टेक्नीकल एस्टीमेट बनता है और विभाग ने यह एस्टीमेट नहीं बनाया है, जबकि टेक्नीकल एस्टीमेट ओनली फोर बीएसआर से बनता है, किसी भी बिल्डिंग का हो, किसी भी काम का हो। माननीय विधायक की अनुशंषा के बाद साल भर तक घुमाया गया जबकि ग्रामीण विकास विभाग को 35 दिन में इसकी टी.एस. और एफ.एस. जारी करनी थी लेकिन ग्रामीण विकास विभाग की लापरवाही से एक साल तक माननीय विधायक की घोषणा के अनुरूप गांव में लोगों को पानी नहीं मिला, यह है। यह ग्रामीण विकास की योजनाओं की क्रियान्विति नियम के अनुरूप, ग्रामीण विकास बीएसआर के अनुरूप अगर इसका जो तखमीना बनता, एफ.एस. जारी होती और यह जो विभाग, जिसने यह मना किया है, आप इसी भाग (क) में देखें....
श्री अध्यक्ष: तो आप मूल प्रश्नकर्ता को पूछने दीजिये।
श्री कैलाश त्रिवेदी: भाग (क) में देखें कि यह पीएचईडी द्वारा इन कामों का...
श्री राजेन्द्र राठौड़(संसदीय कार्य मंत्री): यह भाषण दे रहे हैं साहब, यह भाषण दे रहे हैं, कोई प्वाइंटेड सवाल लायें।
श्री अध्यक्ष: आप केवल प्रश्न पूछ सकते हैं, भाषण का समय नहीं है।
श्री कैलाश त्रिवेदी: हां, तो आप सुनिये। इसी विभाग ने...
श्री अध्यक्ष: आप मूल प्रश्नकर्ता के बाद...
श्री कैलाश त्रिवेदी: माननीय अध्यक्ष महोदय, सुन लें, आप दो मिनट सुनें।
श्री अध्यक्ष: नो। मिस्टर त्रिवेदी, आप बिराजिये।
श्री कैलाश त्रिवेदी: हां, मैं क्वेश्चन ही पूछ रहा हूं।
श्री राजेन्द्र राठौड़: बिना आपकी अनुमति के बोल रहे हैं।
श्री कैलाश त्रिवेदी: माननीय अध्यक्ष महोदय, मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करें...
श्री अध्यक्ष: आपने इतनी देर तक भाषण दे दिया, अब आप कह रहे हैं मैं प्रश्न पूछ रहा हूं...
श्री कैलाश त्रिवेदी: अब आप सुन लें, वो तो भाषण की बात चल रही थी इसलिए मैं भी भाषण...
श्री अध्यक्ष: मूल प्रश्नकर्ता का प्रश्न आने दीजिये पहले।
श्री कैलाश त्रिवेदी: मैंने आपको मूल चीज समझाई है, विभाग की लापरवाही।
श्री अध्यक्ष: स्थान ग्रहण कर लें। मूल प्रश्नकर्ता का जवाब...
श्री राजेन्द्र राठौड़: बिना आपकी अनुमति के बोल रहे हैं।
श्री कैलाश त्रिवेदी: आप तो इसमें मैं जो पूछ रहा हूं उसका जवाब दिला दें। माननीय मंत्री महोदय यह बता दें...
श्री अध्यक्ष: जवाब देने की आवश्यकता नहीं है।
श्री कालूलाल गुर्जर: माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं जवाब दे देता हूं।
श्री कैलाश त्रिवेदी: नहीं, माननीय मंत्री महोदय, एक मिनट। (व्यवधान)
श्री कालूलाल गुर्जर: नहीं, पहले मूल प्रश्नकर्ता का।
श्री अध्यक्ष: आप पहले मूल प्रश्नकर्ता का जवाब देंगे, इनका जवाब देने की आवश्यकता नहीं है।
श्री कैलाश त्रिवेदी: आपने इसी विभाग के, पीएचईडी ने पांचवें...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: किसी भी सदस्य को इस प्रकार से खड़े होकर के प्रश्न काल में भाषण देने का अधिकार नहीं है।
श्री कैलाश त्रिवेदी: यह इसी विभाग ने बिना टेंडर के पांचवें साल के अंदर माननीय सदस्य के कार्य कैसे पूरे किये और 06 में टेंडर करने की क्या जरूरत पड़ी..(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: आपकी पार्टी के मेम्बर हैं, बैठाइये।
श्री कैलाश त्रिवेदी: आप तो यह बता दें कि माननीय सदस्य के पांचवें साल में जो भाग (क) में...
श्री अध्यक्ष: अंकित नहीं हो। अंकित नहीं हो।
श्री
कैलाश
त्रिवेदी: ***
श्री
रिछपाल
मिर्धा:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, माननीय
मंत्रीजी यह
बता दें कि
एमएलए लैड के
पेयजल से
संबंधित
कार्य कौन सी
एजेंसी कर
सकती है, इसका
जवाब दे दें।
नम्बर दो,
विधायक कोष के
कार्यों के
लिए निर्देशिका
में बीएसआर
रेट 1998 से लागू
है जबकि
प्रचलित दरें
अधिक हैं, इस
संबंध में
सरकार ने आज
तक फैसला नहीं
किया जबकि
तखमीना विभाग
बनाता है और
विभाग यह लिख
देता है कि
तखमीने के
अनुसार हम इस
कार्य को पूरा
नहीं कर
सकते।
तखमीना
विभाग बना देता
है उस आधार पर
हम स्वीकृति
देते हैं, फिर
भी यह एक साल
से सारे कार्य
अधूरे हैं,
इसके लिए कौन
जिम्मेदार
है और जिन
अधिकारियों ने
इसमें
लापरवाही की,
सरकार उनके
खिलाफ क्या
कार्यवाही
करने जा रही
है।
श्री
कालूलाल
गुर्जर:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, माननीय
सदस्य ने जो
कहा कि एक साल
हो गया और
बहुत लम्बा
समय हो गया,
मैं यह सारा
विस्तृत बता
देता हूं। अध्यक्ष
महोदय, इन्होंने
सन् 2004 और 05 के
जितने 13 कार्य
स्वीकृत
करवाये वह सब
कार्य पूरे हो
गये और 06-07 के जो
कार्य हैं आठ,
उसमें से एक
कार्य की
एजेंसी पंचायत
है जो कुआ
गहरा करवाने
का काम कर रही
है, बाकी पाईप
लाईन और कुछ
टंकी बनाने का
जो कार्य है
जीएलआर का, वह
पीएचईडी को
दिया गया और
अध्यक्ष
महोदय, मैं यह
स्पष्ट
करना चाहता
हूं कि इनका
जो पहला काम
पाइप लाइन
पीवीसी 10 एम.एम.
साइज,
नाथावड़ा,
मेड़ा सकला, इसकी
अनुशंषा इन्होंने
की थी तारीख 20.4.2006
को, 300 फीट पाईप
लाईन डालने की
मोहल्ला
अंतरोली में,
इसकी अनुशंषा
आपने की थी 15.5 को,
तुलछाराम साहू
की जीएलआर,
इसके लिए भी
आपने 15.5 को की थी
और जीएलआर 10
किलोलीटर
रामसुखजी
बुडालिया की
ढाणी, यह भी
आपने 15.5 को की थी
अनुशंषा और एक
17-5 को की थी और एक
15.5 को की थी और एक
15.6 को आपने
अनुशंषा की
थी। मेरा
निवेदन करना
यह है कि मई और
जून के अंदर
आपने अनुशंषा
की, अनुशंषा
करने के बाद
तत्काल ही यह
हमने 22.5 को ही
सारी
प्रशासनिक स्वीकृतियां
विभाग की और
से हमारे
सी.ई.ओ. साहब ने
निकाल दी।
उसके बाद जब
पीएचईडी को यह
स्वीकृतियां
वहां यह
प्रशासनिक गई
और टेक्नीकल
स्वीकृति के
लिए उनसे मांग
की गई तब उन्होंने
समय पर नहीं
निकाली तो
हमने वापिस
तारीख 7.7.2006 और 17.7.2006
को और फिर
आठवें महीने
में 28.8 को, फिर
उसके बाद 20.9 को लैटर
लिखा तो एक्स.ईएन.
को बार-बार,
चूंकि एक्स.ईएन.
बदल गया था,
पहले वाले
सारे कार्य भी
इनके पीएचईडी
के थे,
पीएचईडी ने कर
दिये, बीच में
एक्स.ईएन.
बदल गया तो
नया एक्स.ईएन.
जो आया उसने
कहा कि मैं तो
बिना टेंडर प्रीमियम
के इसकी स्वीकृति
जारी नहीं
करूंगा, न तो
टेक्नीकल स्वीकृति
जारी करूंगा
और न यह काम
करवाऊंगा, यह बार-बार,
दो बार हमने
लैटर लिखा कि
पहले आप कई सालों
से तो काम कर
रहे हैं, अब आप
नई इसमें यह
कानूनी क्यों
अड़चन डालते
हैं तो उन्होंने
अंत में तारीख
26...(व्यवधान) आप
सुन लें पहले।
श्री
कैलाश
त्रिवेदी: आप
अब प्रीमियम
एबव ब्लाक की
कैसे बात करते
हैं...(व्यवधान)
श्री
कालूलाल
गुर्जर: आप
सुन लो। आप
समझा करें,
पहले सुन लें।
तारीख 20.9 को अध्यक्ष
महोदय, तारीख 20.9
को अंत में
उन्होंने
लैटर लिख दिया
कि हम तो
इसमें
करवायेंगे ही
नहीं। तो हमने
फिर यह तय
किया कि हम
इसकी कार्यकारी
एजेंसी
माननीय
विधायक से पूछ
करके बदल
देंगे, आप
अनुशंसा कर
दें कि पंचायत
से करवा दो। जहां तक
आपने दूसरा यह
पूछा कि...
श्री
अध्यक्ष:
नहीं, आप मेरी
एक बात का
जवाब दे दें।
श्री
कालूलाल
गुर्जर: हां।
श्री
अध्यक्ष:
हमारे जिले के
अंदर जीएलआर
का निर्माण पंचायत
भी करती है,
पंचायत समिति
भी करती है और विधायक
की मंशा के
अनुसार
पीएचईडी भी
करता है। तो
क्या नागौर
के अंदर सरपंच
को, पंचायत को
या पंचायत
समिति को
जीएलआर के निर्माण
का प्रावधान
नहीं है?
एंटाइटल नहीं
हैं वह बनाने
के? आप यह बता
दीजिये
सिर्फ।
श्री
कालूलाल
गुर्जर: अध्यक्ष
महोदय,
प्रावधान स्पष्ट
है, हमारी मैं
गाइड लाईन की
यह है हमारे
यहां पर, धारा 3(14)
और 3(14)(2) और 3(14)(3) में
इसका स्पष्ट
प्रावधान है।
इसमें यह लिखा
हुआ है कि
विधायक
महोदय...
श्री
अध्यक्ष:
मैंने जो
प्रश्न पूछा
उसका जवाब दें
आप। (व्यवधान)
मैंने पूछा
उसका जवाब।
(व्यवधान) प्लीज,
आप बैठें, आसन
पांवों पर है।
मैं जो पूछ रही
हूं उसका जवाब
दें आप।
श्री
कालूलाल
गुर्जर: हां,
वह है। अध्यक्ष
महोदय,
पंचायतों को
ही गांव के
अंदर काम कराने
का प्रावधान
है। अगर
विधायक महोदय
चाहें तो
पंचायतों को
हम दे देंगे,
हमें कोई आपत्ति
नहीं है और...
श्री
अध्यक्ष:
हमारे यहां तो
हैं, हमारे
जिले में तो
है।
श्री
कालूलाल गुर्जर:
जिन एक्स.ईएन.
महोदय ने मना
किया, उनके
खिलाफ भी हम
संबंधित
विभाग को
लिखेंगे ताकि
एक्शन लेंगे
कि उन्होंने
मना क्यों
किया।
श्री
जुबेर खान:
अध्यक्ष
महोदय, यह स्पष्ट
हो गया आज कि
पेयजल योजना
के विधायक कोष
के कार्य
पंचायत और
पंचायत समिति
करा सकती है,
यह हम अर्थ
निकालें।
एक
माननीय सदस्य:
हां, करा सकते
हैं।
श्री
जुबेर खान: क्योंकि
नहीं कराते
हैं, नहीं
कराने देते
हैं। (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
सुनिये।
श्री
कालूलाल
गुर्जर:
बिलकुल करवा
सकते हैं, पूरा
प्रावधान है।
श्री
अध्यक्ष:
माननीय
मंत्रीजी, मेरी
बात सुनिये।
मैंने तो अपने
अनेक काम,
जीएलआर
पंचायत के
मार्फत,
पंचायत समिति
के मार्फत और
पाईप डालने तक
का काम पंचायत
समिति और
पंचायत के
मार्फत
करवाया है।
मोहम्मद
माहिर
आजाद(नगर):
लेकिन हमारे
यहां नहीं है, हमारे
यहां इजाजत
नहीं है।(व्यवधान)
श्री
जुबेर खान:
पेयजल
योजनाओं के
काम कहीं नहीं
होने देते
ग्राम
पंचायतों और
पंचायत
समितियों से,
हम कह रहे
हैं। (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: अब
आप एक साथ
इतने बोलते
हैं, मुझे समझ
में नहीं आता
है।
श्री
जुबेर खान: आप
निर्देश दें
सरकार को कि सभी
जिलों में
लागू करे।
श्री
अध्यक्ष: प्लीज,
आप बिराजिये।
इस बात को स्पष्ट
करने दें उन्हें।
श्री
रामचन्द्र
जारोड़ा(मेड़ता):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, जब
सार्वजनिक
निर्माण
विभाग भी इसका
काम करवा सकता
है तो पीएचईडी
क्यों नहीं
करवा सकता।
श्री
सांवर लाल(जन
स्वास्थ्य
अभियांत्रिकी
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, यह जो
समस्या है,
यह आज की नहीं
है। एमएलए
साहब, एम.पी.
साहब पेयजल
योजनाओं के
लिए पैसे देते
रहे हैं और जब
सरकार आपकी थी
तब भी यह समस्या
आती थी कि
एमएलए के पैसे
को पीएचईडी
काम में नहीं
लेता था क्योंकि
एमएलए अपने
हिसाब से जनता
की, जहां पर
उनके नोर्म्स
में नहीं आता
था, उन
योजनाओं के
लिए भी पैसे देते
थे।....
पर
जब से यह
सरकार बदली है
मैंने माननीय
अध्यक्ष
महोदय, सदन
में यह आश्वस्त
किया है कि
पेयजल
योजनाओं के
लिए, पानी की
समस्या के
लिए अगर किसी
माननीय सदस्य
को आवश्यकता
है तो एमएलए
फंड से पैसा
देने की आवश्यकता
नहीं है पहली
बात तो मैंने
यह अर्ज किया हुआ
है तो यह अगर
हमको देवें तो
हम उसको पूरा
करायेंगे।
नंबर-2 - टेण्डर
प्रीमियम की
जो बात आयी
अगर माननीय
अध्यक्ष
महोदय,
किसी एमएलए
साहब ने एक
लाख रुपये का
पैसा सैंक्शन
किया और टेण्डर
किया और टेण्डर
में अगर डेढ़
लाख आ जाएंगे
तो फिर वो
पैसा तो देना
पड़ेगा इसलिए
जो भी विलम्ब
हुआ है ...(व्यवधान)...
बैठ तो जाओ न
आप क्यों ज्यादा
ऊपर नीचे हो
रहे हैं?
श्री
कैलाश
त्रिवेदी
(सहाड़ा): ...(व्यवधान)...
आप ढंग से
बोलें मंत्री
महोदय।
श्री
अध्यक्ष:
सहाड़ा से आने
वाले माननीय
सदस्य बात
सुनिये आप
पहले।
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय,
सही बात सुनने
में भी आपको
तकलीफ है तो
इसका इलाज
मेरे पास में
नहीं है।
श्री
अध्यक्ष:
मेड़ता से आने
वाले माननीय
सदस्य स्थान
ग्रहण करें।
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): अभी
मैं माननीय
सदस्य के
एरिये में गया
था ।
श्री
अध्यक्ष: आप
मंत्री जी को
सुनें उसके
बाद यदि आपको
कोई गलतफहमी
हो या प्रश्न
पूछना हो, तो
पूछिये। उनकी
बात तो सुनिये
आप पहले।
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई मंत्री):
अध्यक्ष
महोदय,
मैं अभी
डेगाना भी गया
था ...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष: आप
उन्हें सुन
लें पहले।
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): तब भी
एक समस्या
हमारे सामने
आयी थी जैसे
एमएलए साहब
ने, एमपी साहब
ने अपने एरिये
में कहीं टंकी
की डिमाण्ड
की, टंकी बनवा
दी। अब वहां
पर सोर्स नहीं
है पाइपलाइन
नहीं है तो
ऐसे राजस्थान
में कई केसेज
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
हैं तो वो
सैंक्शन हो
गये, काम हो
गया पर पूरा
काम नहीं होने
से सिस्टम
डवलप नहीं
होने से अभी
भी उसका उपयोग
नहीं हो रहा
है तो मैंने
डेगाना मैं भी
यह घोषणा की
और हमारे
अधिकारियों
को निर्देश
दिया कि जो भी
माननीय एमपी,
एमएलए ने
बनाया है और
वो सिस्टम
काम में नहीं
आ रहा है
उसमें क्या-क्या
और चाहिए वो
सारी रिक्वायरमेंट
हमारे पास
भेजिये उसको
भी हम काम करवायेंगे
पीएचईडी के
माध्यम से
जनता को उसका
लाभ मिलेगा और
भी कहीं राजस्थान
में अगर कोई
स्थिति ऐसी है
...(व्यवधान)... ।
श्री
अमराराम (धोद):
ये काम कब तक
हो जाएंगे आप
बता दें। आपके
विभाग के एक्सईएन
यह मना कर दें
पैसे देने के
बाद वो काम नहीं
करेंगे जबकि
सरकार ने साफ
निर्देश दे
रखे हैं कि
कोई भी सरकारी
विभाग एमएलए
और एमपी लेड
में प्रो रेटा
चार्जेज नहीं
लेगा और फिर
वो प्रो रेटा
चार्जेज के
लिए मना करते हैं
उसके खिलाफ आप
कार्यवाही
करेंगे? और
इनके काम जो
सैंक्शन
किया वो कितने
दिन में आप
पूरा कर देंगे
विभाग से? यह
बता दें।
श्री
खुशवीर सिंह
जोजावर
(खारची):
मंत्री महोदय,
एक प्रश्न है
मेरा।
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): अब
प्रश्न क्या
जवाब ही दे
रहा हूं क्योंकि
जनरल मैंने
सारी बात कह
दी।
श्री
अध्यक्ष: सारी
बात तो कह दी
और अब क्या
बाकी रह गया?
श्री
खुशवीर सिंह
जोजावर
(खारची): अध्यक्ष
महोदय, हम
यह जानना
चाहते हैं कि
माननीय
मंत्री महोदय,
जो आपने बात
कही है कि अगर
विधायक कोष
द्वारा
कंपलीट कार्य
करवाकर दे
दिया जाए तो
उसकी बिजली का
भुगतान आप करवाने
की व्यवस्था
करेंगे क्या?
श्री
सांवर लाल
(सिंचाई
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, कई
नीतिगत सवाल
उठाये हैं धोद
से आने वाले माननीय
सदस्य ने कहा
जो हमारी
जानकारी में
आया है, जो न्यूनतम
समय टेण्डर
में लगता है
वो करके हम
काम को एग्जीक्यूट
करवा देंगे।
हमने नौ महीने
आजकल जो छोटी
योजनाएं जो भी
होती है
अधिकतम समय तय
किया है पहले
दो-दो साल था
इस समय को भी
हमने तय किया
है जो भी योजनाएं
एग्जीक्यूट
हों उसका लाभ
जल्दी से जल्दी
लोगों को
मिले तो इसको
हम जल्दी
प्राथमिकता
से करवा देंगे
बाकी आपने जो
सवाल उठाया है
उसमें आवश्यकता
होगी तो हम
निश्चित रूप
से उसके ऊपर
विचार कर
लेंगे आपको
मना थोड़े कर
रहे हैं।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, एक
सवाल इस सदन
के अन्दर यह
सवाल पूर्व
में भी उठा था
कि विधायक कोष
के पैसे का
काम समय में
विभिन्न
एजेंसियां
नहीं करती हैं
लोकसभा के अन्दर
भी इसके बारे
में एक कमेटी
बनी है एमपीज
की राज्य सभा
के अन्दर भी
एक कमेटी
बनायी है।
मैंने पूर्व
में भी यह
मांग की थी और
उस वक्त
माननीय मुख्यमंत्री
जी ने एक आश्वासन
दिया था कि हम
इसके बारे में
विचार करेंगे
और आभास ऐसा
था कि शायद
सदन की एक
कमेटी बना दी
जाएगी। इस
प्रकार के
प्रकरण अगर
वहां मॉनिटर
हो जाएंगे
जहां की काफी
देर हो रही है,
और दूसरी समस्या
क्या खड़ी
होती है कि
इसमें कई पेच
हैं पीएचईडी वाले
काम नहीं करते
हैं जो उनका
एस्टीमेट
आता है वह इन्फ्लेटेड
आता है। अब
उसके कई कारण
हैं उस विगत में
मैं नहीं जाना
चाहूंगा
लेकिन क्या
सरकार की मंशा
है कि सदन की
एक कमेटी बना
दी जाए, जो इस
प्रकार की अन्य
समितियां हैं
लोक सभा और
राज्य सभा की
भांति जिससे
इस प्रकार के
मामले वहां पर
एमएलएज ले जा
सके और उनका
निराकरण
शीघ्र हो जाए,
इसके बारे में
सरकार में क्या,
और आपसे भी
मैंने निवेदन
किया था
माननीय अध्यक्ष
महोदया, आपसे
भी कई दफा
मिला इस बारे
में दो दफा आपसे
भी निवेदन
किया था तो
मेरा आप किसी,
आप कोई नयी
कमेटी न बना
करके किसी एग्जस्टिंग
कमेटी जिसके
पास काम कम हो
उस समिति को
यह कार्य
सौंपा जा सकता
है जिससे
एमएलएज को राहत
मिले सके।
आपसे निश्चित
कह रहा हूं कि
उस वक्त भी
पक्ष और
विपक्ष दोनों
के विधायक
खड़े हुए थे ।
श्री
अध्यक्ष: अब
आप भाषण देने
लग गये। आप
प्रश्न
पूछने की बजाय
भाषण देने लगे
गये।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह
(राजाखेड़ा):
एक मेरा
निवेदन सुन
लें। मैं भाषण
कहां दे रहा
हूं मुझे भाषण
देने की आदत
ही नहीं है
मैं तो बोलता
ही नहीं हूं
आपके डर की
वजह से बोलता
ही नहीं हूं
मैं तो।
मैं
आपसे निवेदन
कर रहा हूं कि
इस बारे में
मैं आसन से
निवेदन करना
चाहूंगा कि
मुख्यमंत्री
जी के आश्वासन
के उपरांत भी
आज काफी समय
बीत गया है क्या
सरकार इसके
ऊपर अपनी
सहमति देगी
सदन की कमेटी
गठित करने के
बारे में जो
एग्जिस्टिंग
समिति है उनके
अन्दर
जिसमें इस
प्रकार के
प्रकरण, क्योंकि
कई मामलों में
मुझे मालूम है
कि तत्कालीन
जिला कलेक्टर
ने एक एमपी का
काम नहीं किया
था तो राज्य
सभा सचिवालय
ने उनको दिल्ली
तलब कर लिया
था इस प्रकार
से जब एक दफा
सदन के सामने
आ जाएंगे तो
काम में निश्चित
रूप से इस
विकास के काम
के अन्दर गति
आएगी यह मेरा
आपसे अनुरोध
है इसके बारे
में सरकार की
क्या नीति है
अवगत कराने की
कृपा करें।
श्री
रामप्रताप
कासनिया
(पीलीबंगा):
अध्यक्ष
महोदय, एक
सवाल है।
श्री
अध्यक्ष:
माननीय
मंत्री जी, यह
बात तो सही है
एमएलए लेड का
जो काम है
उसकी समयावधि
तो होनी चाहिए
कि इतने समय
में वो पूरा
हो जाएगा कुछ
तो समय होना
चाहिए कम से
कम साल दो साल
तीन साल।
तीन-तीन साल
चलते रहते हैं
और काम नहीं
होता है आप कम
से कम फिक्स
करें कि इतनी
अवधि में यह
काम पूरा हो
जाना चाहिए।
चाहे छ: महीने
करें चाहे आठ
महीने करें
चाहे साल कर
दें लेकिन
उसमें वो काम
पूरा होना
चाहिए यह तो
आप तय कर सकते
हैं।
श्री
रामप्रताप
कासनिया
(पीलीबंगा):
अध्यक्ष
महोदय, एक
सवाल।
श्री
अध्यक्ष:
मंत्री जी को
सुनिये अब
आप।
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं
पंचायती राज मंत्री):
अध्यक्ष
महोदय,
विभाग के
द्वारा एमएलए
लेड के लिए जो
स्वीकृति
जारी की जाती
है ...।
श्री
अध्यक्ष: अब
आप विराजें और
मंत्रीजी को
सुनिये।
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं
पंचायती राज
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय,
विभाग द्वारा
जो एमएलए लेड
की स्वीकृति
जारी की जाती
है उसके अन्दर
बिलकुल
बाकायदा समय
निर्धारित
करके ही हम आदेश
जारी करते हैं
लेकिन उसके
बाद यदि कोई
अधिकारी देरी
से काम करता
है तो उसको हम
नोटिस देते
हैं उसके
खिलाफ
कार्यवाही
करते हैं लेकिन
चूंकि ...(व्यवधान)...
एक मिनट ।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): एक के
खिलाफ भी की
क्या आज तक?
एक के खिलाफ
कार्यवाही की
क्या आज तक?
...(व्यवधान)... एक
के खिलाफ भी
कार्यवाही की
क्या आपने ?
...(व्यवधान)...
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं
पंचायती राज
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय,
अन्य विभाग
के जो अधिकारी
समय पर काम
नहीं करते हैं
उसके लिए
माननीय प्रद्युम्न
सिंह जी ने
पहले भी विधान
सभा में यह
बात रखी थी और
माननीय मुख्य
मंत्री जी ने
आश्वासन
दिया, यह आश्वासन
अभी सितम्बर
महीने में
हमारे पास आ
गया है और इस
पर कार्यवाही
हो रही है ।
मैं सदन को
आश्वस्त
करता हूं कि
मुख्य
मंत्री जी और
आप मिलकर के
जो भी कमेटी
विधान सभा की
इसके लिए
बनायेंगे
उसको हम जल्दी
से जल्दी ...(व्यवधान)...
श्री
रामप्रताप
कासनिया
(पीलीबंगा):
अध्यक्ष
महोदय, एक
छोटा सा सवाल।
अभिशंषा को ..।
अध्यक्ष
महोदय, एक
छोटा सा सवाल।
...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष: डॉ.
समरजीत सिंह।
सारी बात आ
गयी। डॉ.समरजीत
सिंह। मैंने
अगला प्रश्न
पुकार लिया।
मैंने अगला
प्रश्न
पुकार लिया।
नो।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): अध्यक्ष
महोदय,
सुन लीजिये आप
भले ही
रिकार्ड न
करवायें। यह सारी
प्रोब्लम
आपके डिप्टी
सेकेट्री
ने...।
श्री
अध्यक्ष: एक
घंटा पच्चीस
मिनट हो गये
हैं । नहीं अब
कुछ नहीं ।
अंकित नहीं
हो।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही):
***
श्री
रामप्रताप
कासनिया
(पीलीबंगा): ***
श्री
अध्यक्ष:
डॉ.समरजीत
सिंह। नैक्स्ट
क्वेश्चन।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ***
श्री
अध्यक्ष:
मैंने अगला
प्रश्न
पुकार लिया।
मैंने अगला
प्रश्न
पुकार लिया
है।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ***
श्री
अध्यक्ष: नो।
ऊर्जा
मंत्री।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ***
श्री
अध्यक्ष:
मैंने अगला
प्रश्न
पुकार लिया।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ***
श्री
अध्यक्ष: I am not going to hear anything.
अगला प्रश्न
पुकार लिया।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ***
श्री
अध्यक्ष: अब
कोई माननीय
अध्यक्ष
नहीं। मैंने
अगला प्रश्न
पुकार लिया।
नो। स्थान
ग्रहण कर लें।
सिरोही से आने
वाले माननीय सदस्य
बहुत
विनम्रता से
कह रही हूं।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ***
श्री
अध्यक्ष: क्या
चुनौती दे रहे
हैं आप?
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ***
श्री
अध्यक्ष: मैं
कह रही हूं आप
स्थान ग्रहण
कर लें।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ***
श्री
अध्यक्ष: अब
नहीं
सुनूंगी।
नहीं
सुनूंगी। अब
आसन आपकी कोई
बात नहीं
सुनेगा। ...(व्यवधान)...
अंकित नहीं
हो।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ***
श्री
अध्यक्ष:
इसलिए नहीं
सुनना चाहती
कि आप अध्यक्ष
को नहीं सुनना
चाहते। आप अध्यक्ष
की बात को
नहीं मानते
इसलिए नहीं
सुनना चाहती।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ***
श्री
अध्यक्ष: ...(व्यवधान)...
आवश्यकता
नहीं है।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ***
श्री
अध्यक्ष:
इसलिए नहीं
सुनना चाहते
कि आप अध्यक्ष
की व्यवस्था
को नहीं मानते
हैं आप अध्यक्ष
की व्यवस्था
को मानते हुए
कोई बात
कहेंगे तो
निश्चित तौर
पर सुनूंगी जब
मैंने नैक्स्ट
क्वेश्चन
पुकार लिया तो
फिर आपको बैठ
जाना चाहिए।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ***
कैलाश/
4.10.06 11.30 (1) 1d
श्री
रामनारायण
चौधरी(नेता, प्रतिपक्ष):
अध्यक्ष
महोदय, दो
मिनट दे दो ,
साहब थोडा
बड़ा दिल रखो
।
श्री
अध्यक्ष: फिर
वही बात अब क्या
दे दो मैंने
नेक्स्ट क्वेश्चन
पुकार लिया है
। श्री राजेन्द्र
राठौड
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): ***
श्री
अध्यक्ष:
मैंने नेक्स्ट
क्वेश्चन
पुकार लिया
उसके बाद आप
कहते हैं कि
दो मिनट दे दो
।
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर): ***
श्री
अध्यक्ष: (व्यवधान)
आप प्रतिपक्ष
के नेता हैं ।
(व्यवधान) अब
कोई अध्यक्ष
महोदय नहीं,
स्थान ग्रहण
कीजिए । मैं
कहती हूं स्थान
ग्रहण कीजिए ।
मंत्री जी ने
जवाब दे दिया ।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ***
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर): ***
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): ***
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ***
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): ****
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): ***
श्री
कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण
विकास एवं पंचायती
राज मंत्री) :
(व्यवधान)
बल्कि
प्रावधान तो
यह है कि टेण्डर
भी किया जा
सकता है बस
प्रिमीयम
अलाऊ नहीं है
।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ****
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर): ***
श्री
अध्यक्ष: आसन
पांवों पर है,
आसन पांवों पर
है कृपया स्थान
ग्रहण करें,
कृपया स्थान
ग्रहण करें ।
जब नेक्स्ट
क्वेश्चन
पुकार लिया
गया तो इस
प्रकार से खडे
होना सही नहीं
है । सब के
प्रश्न बहुत
महत्वपूर्ण
होते हैं । सब
माननीय सदस्य
चाहते हैं कि
उनके प्रश्नों
का जवाब भी
आये । एक
प्रश्न पर 32
मिनट हो गये
कितना और समय
दिया जाये एक
प्रश्न पर और
आप अध्यक्षीय
व्यवस्था
को मानने को
तैयार नहीं
हैं सदन चलेगा
कैसे ।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ****
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): ***
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर): ***
श्री
अध्यक्ष: आप
खाम ख्वाह
सदन का समय
बरबाद कर रहे
हैं । मैंने
नेक्स्ट क्वेश्चन
पुकार लिया है
1 नेक्स्ट
क्वेश्चन
का जवाब आने
दीजिए । आप स्थान
ग्रहण कर लें
।
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): ***
श्री
अध्यक्ष:
प्रतिपक्ष के
नेता महोदय
मैं आपसे निवेदन
कर रही हूं
आपके माननीय
सदस्य थोडी
व्यवस्था
को बनाये रखें
तो उचित रहेगा
।
श्री
रामनारायण
चौधरी(नेता, प्रतिपक्ष):
मैंने तो आपसे
अनुरोध किया था
कि दो मिनट
उन्हें दे दो
।
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर): ***
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): अध्यक्ष
महोदय, यह
झगडा आन्तरिक
है जो यहां पर
हो रहा है ।
प्रतिपक्ष के
नेता ने कल भी
सभी माननीय
सदस्यों को
कहा था कि
मुख्य
मंत्री जी
बहुत होशियार
है सावधान रहो
।
श्री
अध्यक्ष: इन्होंने
कहा क्लेवर
है ।
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर): ****
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ***
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): आपकी
बात कोई सुनता
नहीं है और
कैसे इनका
विदाई समारोह
हो, प्रतिपक्ष
के नेता के विदाई
समारोह में लगे
हुए हैं यह।
यह झगड़ा है
और यह झगड़ा
सदन में
निपटाना चाहते
हैं । इनको
काम से कोई
मतलब नहीं है
।
श्री
मदन राठौड़
(सुमेरपुर): ****
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): ****
श्री
अध्यक्ष:
सिरोही से आने
वाले माननीय
सदस्य आपको
मैं फिर कह
रही हूं कृपया
स्थान ग्रहण
कर लें मैने
नेक्स्ट क्वेश्चन
पुकार लिया है
अब नेक्स्ट
का ही जवाब
आयेगा उसके
पहले कोई
चर्चा नहीं होगी
।
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही):
***
श्री
अमराराम (धोद):
अध्यक्ष
महोदय,
मंत्री जी
जवाब तो दें,
मंत्री जी तो
आराम से विराजे
हुए हैं ।
जोधपुर
संभाग के ग्रामीण
क्षेत्रों
में विद्युत
आपूर्ति
4. डा.
समरजीत
सिंह(भीनमाल):
क्या ऊर्जा
मंत्री यह
बताने की कृपा
करेंगे:-
(1) क्या
यह सही है कि
सरकार द्वारा
जोधपुर
डिवीजन के
ग्रामीण
क्षेत्रों
में सिंगल फेस
विद्युत आपूर्ति
24 घंटे उपलब्ध
करवाई जाने की
घोषणा की गई
थी ? यदि हां, तो
यह घोषण किसके
द्वारा की गई
और क्या इसके
लिये कोई आदेश
भी जारी किये
गये हैं ? यदि
हां, तो जारी
आदेशों की
प्रति सदन की
मेज पर रखें ।
(2) क्या
यह भी सही है
कि विद्युत
वितरण कम्पनी,
जोधपुर
द्वारा या अन्य
संस्थान
द्वारा
माननीय मुख्य
मंत्री जी की
तस्वीर छपे
पम्पलेट
विद्युत
विभाग के
सहायक
अभियंता/कनिष्ठ
अभियन्ताओं
को इस घोषणा
पर अमल करने
के लिये व
कार्यालय में
चस्पा करने
के लिये उपलब्ध
कराये गये
जिनमें 24 घंटे
सिंगल फेस
बिजली दिये
जाने का उल्लेख
था ? यदि हां, तो
किस स्तर के
अधिकारी द्वारा
इस कार्य को
अंजाम दिया
गया ? विवरण
सदन की मेज पर
रखें ।
(3) क्या
यह भी सही है
कि 24 घंटे
सिंगल फेज
बिजली दिये जाने
की घोषणा की
पालना करीब दो
माह तक अधिकारी
करते रहे ? यदि
हां, तो क्हां
कहां पर इस
घोषणा की
पालना की गई ?
क्या अब इसे
बंद कर दिया
गया ? यदि हां
तो क्यो ?
(4) क्या
यह भी सही है
कि अब जोधपुर
विद्युत
वितरण कम्पनी
द्वारा 24 घंटे
विद्युत
सिंगल फेज
उपलब्ध
कराने के कारण
अधिनस्थ
अधिकारियों
के विरुद्ध
अनुशासनात्मक
कार्यवाही की
जा रही है ? यदि
हां, तो क्या
व क्यों ?
श्री
अध्यक्ष:
ऊर्जा मंत्री
जी जवाब दें ।
राज्य
मंत्री, ऊर्जा
(श्री गजेन्द्र
सिंह) : (1) फीडर
सुधार
कार्यक्रम के
दिशा निर्देशों
के अंतर्गत 15
प्रतिशत से कम
विद्युत छीजत
वाले 11 केवी
ग्रामीण
फीडरों से
जुडे गांवों
में 24 घंटे
घरेलू
आपूर्ति करने
का प्रावधान
है । दिशा
निर्देशों की
प्रति
परिशिष्ठ-‘अ' पर
उपलब्ध है ।
(2)
जोधपुर
विद्युत
वितरण निगम
द्वारा पम्पलेट/पोस्टर
जोधपुर डिस्काम
क्षेत्रान्तर्गत
जन प्रचार एवं
प्रसार हेतु
वृत/खण्ड/उपखण्ड
स्तर के
अधिकारियों
को जल चेतना
अभियान के तहत
उपलब्ध
कराये गये थे
।
(3)
जोधपुर विद्युत
वितरण निगम
क्षेत्रान्तर्गत
ग्रामीण
क्षेत्रों
में फीडर
सुधार कार्यक्रम
के क्रियान्वयन
से जिन फीडर
पर छीजत 15
प्रतिशत से कम
हुई वहां 24
घंटे सिंगल
फेज विद्युत
उपलब्धता के
आधार पर दी गई
। परन्तु ... (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: बीच
में नहीं
बोले, जवाब सुने
।
श्री
गजेन्द्र
सिंह (राज्य
मंत्री,
ऊर्जा) : पिछले
कुछ समय से
कुछ केन्द्रीय
विद्युत उत्पादन
इकाइयों के
बन्द होने से
उपलब्धता
में कमी हो गई
जिससे इन
फीडरों पर
विद्युत
आपूर्ति कम कर
दी गई । जैसे
जैसे उत्पादन
इकाइयों में
उत्पादन
बढकर आवंटन
बढेगा इन
गांवों में
विद्युत
आपूर्ति पुन: 24
घंटे कर दी
जायेगी ।
जोधपुर
डिवीजन के जिन
ग्रामीण क्षेत्रों
में फीडर
सुधार
कार्यक्रम के
अंतर्गत
विद्युत
आपूर्ति की गई
उनकी सूची
परिशिष्ठ ‘ब’ पर
उपलब्ध है ।
(4) जी
नहीं ।
डा.समरजीत
सिंह (भीनमाल):
अध्यक्ष
महोदय, जब
से यह सरकार
सत्ता में आई
है विभिन्न
प्रकार से
घोषणाएं करती
रही है कि हम 24
घंटे विद्युत
आपूर्ति
गांवों में
करेंगे, घरेलू
कनेक्शन
देंगे । आज भी
हालात यह है
कि जैसा सभी
माननीय सदस्य
कह रहे हैं 3-4
घंटे से ज्यादा
सप्लाई नहीं
आ रही है । ऐसे
हालात में
मैंने जो मूल
प्रश्न किया
है उसमें इन्होंने
जो जवाब दिया
है, पहली बात
तो मैंने पूरे
जोधपुर डिस्काम
का सवाल पूछा
था इन्होंने
सिर्फ जालौर
जिले का जवाब
देकर मुझे संतुष्ट
करना चाहा कि
जालौर से आते
हैं इसलिए
जालौर से ही
संतुष्ट
होइए । आपने
जो अभियान
चलाया था जल
चेतना यात्रा
का उसमें
लोगों को
प्रोत्साहित
किया कि आपके
यहां सिंगल
फेजेज ट्रांसफारमर
लगेंगे और
सिंगल फेजेज
ट्रांसफारमर
लगने से छीजत
रुकेगी । यही
भावना थी
हमारी कि छीजत
रुकेगी और
उससे 24 घंटे
सप्लाई दी
जायेगी । अब
आप यह कह रहे
हैं 15 प्रतिशत
से कम छीजत वाले
11 केवी
ग्रामीण
फीडरों से
जुडे गांवों में
24 घंटे
आपूर्ति करने
का प्रावधान
है । आपने जो
जालौर जिले की
लिस्ट दी है,
मेरे अलावा भी
जालौर जिले के
4 विधायक यहां
बैठे हैं कोई
दावा कर दें
कि गांवों में
18-20 घंटे सप्लाई
मिली है ।
मेरी जानकारी
में तो यह गलत
सूचना है ।
दूसरी बात यह
है जब आपने
सिंगल फेजेज
ट्रांसफारमर
लगा दिये तब
भी आप छीजत
नहीं रोक पाये
। इसका मतलब
तो यह हुआ कि
यह सिंगल फेजेज
ट्रांसफारम
जो नार्मल
ट्रांसफारमर
से मंहगे आपने
खरीदे और उसके
बावजूद भी
आपकी छीजत नहीं
रुक रही है यह
साबित हुआ है
। इसके अलावा
जो चौथा प्रश्न
मैंने पूछा था
वह यह था कि क्या
जोधपुर
विद्युत
वितरण कम्पनी
द्वारा
24 घंटे सिंगल
फेज उपलब्ध
कराने के कारण
अधीनस्थ
अधिकारियों
के विरुद्ध
कोई
अनुशासनात्मक
कार्यवाही की
जा रही है ।
आपने सिंपल कह
दिया, नहीं ।
आपके
सैक्रेटरी डिस्काम
बी.एल.मेहरा
ने 5.8.06 को 14
इंजीनियर्स
को आपके ओसियां,
सोजत, भीनमाल,
घूमडिया,
सिवाना इत्यादि
को नोटिस जारी
किया कि आपने
जल चेतना यात्रा
के बाद इन
गांवों में 24
घंटे सिंगल
फेज सप्लाई
क्यों दी और
यहां कह रहे
हैं कि ऐसा
कोई नोटिस ही जारी
नहीं हुआ ।
अध्यक्ष
महोदय, यह
गुमराह कर रहे
हैं ।
श्री
गजेन्द्र
सिंह (राज्य
मंत्री,
ऊर्जा) :अध्यक्ष
महोदय,
सबसे पहले
माननीय सदस्य
ने जो प्रश्न
पूछा था उसमें
क्लियर लिखा
है कि जौधपुर
डिवीजन और
जोधपुर
डिवीजन में 5-6
जिले आते हैं
पूरी डिस्काम
नहीं आती है ।
इसलिए आपके
प्रश्न का जो
मैंने जवाब
दिया है वह
जोधपुर
डिवीजन का है,
या तो आपको
प्रश्न में
पूरी डिस्काम
का जिक्र करना
चाहिये था ।
आपने डिवीजन
के बारे में
कहा था तो
मैंने आपको
जवाब डिवीजन का
दिया है ।
DDM/AKT 04102006 1140 1e
डा. समरजीत
सिंह (भीनमाल):
मंत्रीजी,
जोधपुर
डिवीजन में क्या
पाली नहीं
आता, जोधपुर
नहीं आता,
बाड़मेर नहीं
आता। डिवीजन
में सिर्फ
जालौर जिला ही
आता है? (व्यवधान)
श्री
गजेन्द्र
सिंह (राज्य
मंत्री, ऊर्जा):
दूसरा अध्यक्ष
महोद, सरकार
ने 2005-06 के अन्दर
850 फीडर का
रिनोवेशन हम
कर चुके हैं।
और 2006-07 में साढे
तीन हजार के
लगभग फीडर रिनोवेट
हो जाएंगे और
जो बाकी बचे
हैं, 2007-08 मार्च तक
हम टोटल 8500 फीडर
का रिनोवेशन
कर देंगे। और
फीडर सुधार
कार्यक्रम
का...।
श्री अध्यक्ष:
फीडर का
रिनोवेशन तो
कर देंगे आप,
बिजली कितनी
देंगे, यह भी
बता दें आप।
श्री गजेन्द्र
सिंह (राज्य
मंत्री, ऊर्जा):
मैं उसी पर आ
रहा हूं। (व्यवधान)श्री
लालचन्द
कटारिया
(आमेर): आप तो यह
बताओ कि...। (व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): इतनी
देंगे कि कोई
कमी नहीं
रहेगी। (व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, बिजली
के मामले में
यह सरकार पूर्णतया
विफल रही है।
(व्यवधान) एक
मेगावाट
बिजली पैदा
नहीं की, एक
मेगावाट।
पूरी तरह विफल
रही है,
गांवों में
जाकर के देखो
आप। जगह-जगह
आन्दोलन कर
रहे हैं,
प्रदर्शन कर
रहे हैं। (व्यवधान)
जगह-जगह आवाज
उठा रहे हैं।
गांव को बिजली
नहीं मिलती,
किसान परेशान,
मजदूर परेशान,
घर वाले
परेशान। फिर
भी आप कहते,
पूरी बिजली
मिल रही है।
(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आप
एक साथ खड़े
होकर इतने
माननीय सदस्य
बोलते हैं,
मंत्रीजी, बात
तो सुन नहीं
पाते हैं। (व्यवधान)
श्री
अशोक बैरवा
(खण्डार): यह
सत्तापक्ष
के सदस्य
टेबल बजा रहे
हैं (व्यवधान)
गांव में हालत
बहुत खराब है।
सिर बचाने की
चिन्ता
करिये आप।
श्री
अध्यक्ष: आप
अपना स्थान
तो ग्रहण
करें। माननीय
सदस्य, सब एक
साथ खड़े होकर
बोलेंगे तो
मंत्रीजी सुन
नहीं पाएंगे।
श्री
अशोक बैरवा
(खण्डार):
मंत्रीजी
मिलेंगे कैसे
गांव वालों
को। (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: मूल
प्रश्नकर्ता।
श्री
अशोक बैरवा
(खण्डार): 4 घण्टे
बिजली नहीं
मिल रही है।
अध्यक्ष
महोदय, हालत
बहुत खराब है।
यह टेबल बजाने
से, वाहवाही
लूटने से काम
चलेगा नहीं।
जनता सिर पकड़
लेगी इनका।
श्री
गजेन्द्र
सिंह (राज्य
मंत्री, ऊर्जा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आपने
जो माननीय
सदस्य ने
फरमाया था...।
श्री
अध्यक्ष: मूल
प्रश्नकर्ता
के प्रश्न का
जवाब दें आप।
आप स्थान
ग्रहण करें।
श्री
गजेन्द्र
सिंह (राज्य
मंत्री, ऊर्जा):
मैं आपको
बताना
चाहूंगा कि कई
ऐसे फीडर हैं
जहां पर आपके 70
प्रतिशत से 20
प्रतिशत डाउन
आ चुका है।
डा.
समरजीत सिंह
(भीनमाल):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, जो मूल
प्रश्नकर्ता
का है, उसका
जवाब दे ही
नहीं रहे हैं
आप।
श्री
अध्यक्ष:
सुनिये,
शांतिपूर्वक
सुनिये।
डा.
समरजीत सिंह
(भीनमाल): मैं
जो प्रश्न
करता हूं,
सीधे पाइण्टेड
सवाल पूछ रहा
हूं, आप बता ही
नहीं रहे हैं
उसका जवाब।
श्री
अध्यक्ष:
मंत्रीजी
खड़े हैं,
जवाब दे रहे
हैं और आप
खड़े हो गये,
बीच में। (व्यवधान)
नो, स्थान
ग्रहण करें।
(व्यवधान) नो,
स्थान ग्रहण
करें। आप
तीनों स्थान
ग्रहण करें।
श्री
मंगलाराम
गोदारा
(श्रीडूंगरगढ़):
किसान मरने
को, आत्मदाह
कर रहे हैं
किसान।
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
स्थान
ग्रहण।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
जोधपुर के
अलावा किस-
किस डिवीजन
में छीजत पर
कार्यक्रम हो
गया। (व्यवधान)
श्री
मंगलाराम
गोदारा
(श्रीडूंगरगढ़):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
मंत्रीजी यह
बतायें कि
पूरे राजस्थान
में किसान मर
रहे हैं,
बिजली 3-4 घण्टे
मिल नहीं रही
है।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आपने 24 घण्टे
बिजली सप्लाई
की है, उनके भी
नाम बताएं।
(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आप
स्थान ग्रहण
करें।
श्री
सी. डी. देवल
(रायपुर): केवल
जालौर का ही
कर दिया है
जबकि जोधपुर
डिवीजन में
पाली है,
जैसलमेर है,
बाड़मेर है।
अकेले जालौर
को ही ये
जोधपुर
डिवीजन समझ
रहे हैं। यह
हमारा दुर्भाग्य
है। (व्यवधान)
श्री
अमराराम (धोद):
मंत्रीजी, यह
बता दें कि
फीडर
रिनोवेशन जिनका
हुआ है, उनमें
कितने दिन 24
घण्टे बिजली
की सप्लाई की
है। वह दिन
बता दें कि 10
दिन की है, या 15
दिन की है। (व्यवधान)
डा.
समरजीत सिंह
(भीनमाल): अध्यक्ष
महोदय, जो
मैंने सीधे
सवाल पूछे हैं
उसका जवाब तो
दें आप। (व्यवधान)
श्री
अमराराम (धोद):
अब आदेश था,
जिन्होंने 2
दिन दे दी
उनको तो इनके
अधिकारियों
ने नोटिस थाम
दिया कि 24 घण्टे
क्यों दी।
(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
देखिये, बिजली
की
अवेलेबिलिटी
होगी तो वहां
पर 24 घण्टे
मिलेगी। जब
बिजली की
अवेलेबिलिटी
ही नहीं है तो
कहां से मिल
जाएगी।
श्री
अमराराम (धोद):
नहीं, फिर यह
कहें कि देंगे
ही नहीं।
अवेलेबिलिटी
तो पैदा करने
पर होगी। पैदा
करेंगे नहीं।
पैदा करेंगे
नहीं, खरीदेंगे
नहीं,
अवेलेबिलिटी
होगी नहीं और 5
साल पूरे हो
जाएंगे। फीडर
रिनोवेशन के
नाम से करते
जा रहे हैं 5
हजार करोड़
रुपये को।
मकसद क्या
है, 5 हजार
करोड़ रुपया
जो खर्च किया
जा रहा है,
उसका लाभ जनता
को नहीं मिल
रहा है। केवल
अधिकारियों
को और
मंत्रीजी के
सफा चट हो
जाएं, 5 हजार
करोड़ रुपये
तो क्या मतलब
है, इससे।
जनता को फायदा
नहीं मिले, 24 घण्टे,
एक महीने भी
नहीं दें,
पौने तीन साल
में, एक महीना
भी नहीं दें
तो क्या मतलब
है इसका।
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, जहां
एफ.आर.पी. का
काम कम्पलीट
हो गया, जिन
जी.एस.एस. पर उन
पर, कहीं पर भी
आज तक सिंगल
फेज लाइट दी
हो तो
मंत्रीजी बता
दें। एक साल
हो गया,
करोड़ों
रुपया खर्च कर
चुके हैं आप एफ.आर.पी.
पर।
श्री
गजेन्द्र
सिंह (राज्य
मंत्री, ऊर्जा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, अभी
केवल 850 फीडर्स
का रिनोवेशन
हुआ है। अगले
वर्ष साढे तीन
हजार
होंगे।(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
मंत्रीजी को
पूरा सुनें
पहले, मंत्रीजी
क्या कह रहे
हैं, पहले
सुनें आप। स्थान
ग्रहण करें।
बानसूर से आने
वाले माननीय सदस्य,
आपको कह रही
हूं, मैं।
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर):
नहीं, यह तो बतायें,
किस जी.एस.एस.
पर आपने ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: नो,
कोई जवाब नहीं
देंगे। नहीं,
स्थान ग्रहण
करें, जवाब
नहीं देंगे
इनका।
श्री
गजेन्द्र
सिंह (राज्य
मंत्री, ऊर्जा):
सरकार की मंशा
है कि जहां
फीडर रिनोवेट
हो जाता है और 15
प्रतिशत छीजत
होती है वहां
पर 24 घण्टे
बिजली दी
जाएगी।(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आप
मंत्रीजी को
सुनना नहीं
चाहते हैं।
श्री
गजेन्द्र
सिंह (राज्य
मंत्री, ऊर्जा):
और जहां पर 20
प्रतिशत से कम
होती है, वहां पर
हम जो सुबह की
अर्ली
मार्निंग की
बिजली मिलाकर
12 घण्टे
देंगे। लेकिन
यह सब्जेक्ट
टू
अवेलेबिलिटीहै।
आज जो हमारा
उत्पादन है, 2600
मेगावाट तो है
हमारी सरकार का
और 2600 मेगावाट
जो हमें बिजली
मिल रही है, वह
सैण्ट्रल
यूनिट से मिल
रही है। मैं
आपको बताना
चाहूंगा आज की
तारीख, 3 अक्टूबर
को रिहंद 500
मेगावाट डाउन
हो चुकी है,
सेण्टर की।
सिंगरौली की 200
मेगावाट, आज
की तारीख में बंद
है। (व्यवधान)
ऊंचाहार की 210
मेगावाट
बिजली डाउन
है। एन.एस...... की 220
मेगावाट डाउन
है। (व्यवधान)
डा.
चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर):
आपने कितनी
बढ़ाई?
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर):
जो सवाल हम कर रहे
हैं, उसका तो
जवाब दो। आपको
जो पूछा गया,
उसका जवाब तो दो।
हमने पूछा,
नोटिस दिये या
नहीं दिये।
(व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आप तो गांव
हमारे साथ चले
चलिये। गांवों
में घूमिये और
गांव वालों से
पूछिये। आपके
ये सारे
आंकड़े फर्जी
हैं। सारी व्यवस्था
चरमरा गयी है।
बिजली के नाम
पर, फीडर
रिनोवेशन के
नाम पर
करोड़ों
रुपया खर्च
करने के बाद
ऐसी खराब स्थिति
है बिजली के
मामले में। आप
हमारे साथ
चलेंगे,
भारतीय जनता
पार्टी के
विधायक,
चलिये, मंत्रीजी,
चलिये। आप
गांवों में
घुस नहीं सकते
हैं, बिजली के
मामले में।
बिजली एक पैदा
नहीं की और
बिजली-बिजली,
काहे की सप्लाई
है आपकी बिजली
की।
श्री
नवरतन
राजोरिया
(फुलेरा): और
आपकी
कांग्रेस
सरकार है, जो
दिल्ली के
लोगों को लाइट
नहीं दे रही
है। (व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
अशोक गहलोत ने
1760 मेगावाट
बिजली पैदा की
है। (व्यवधान)
श्री
रामचन्द्र
जारोड़ा
(मेड़ता): 3 साल
में एक भी
मेगावाट आपने
जनरेट की है
क्या? (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आसन
पांवों पर,
आसन पांवों पर
है। (व्यवधान)
माननीय सदस्य,
माननीय सदस्य,
आसन पांवों पर
है। (व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आप हमारे साथ
गांवों में
चलेंगे, सरकार
की कितनी
तारीफ है, पता
लग जाएगा,
बिजली के मामले
में, आप चलो तो
सही। (व्यवधान)
श्री
रामचन्द्र
जारोड़ा
(मेड़ता): 3 साल
में कितनी
मेगावाट बिजली
उत्पादित की
गयी। (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आसन
पांवों पर है।
आसन पांवों पर
है। मंत्रीजी,
आप सब बात
बताई। जनमत को
जानते हुए एक निवेदन
कर रही हूं कि
नवम्बर के
महीने में कम
से कम...। (व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): आप तो
आदेश्ं
कीजिए। आपके
आदेश की पालना
आपके कक्ष में
कर देंगे। (व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
बैठिये, आप
बैठिये। (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
नवम्बर के
महीने में ठीक
कर देना, जनमत
को जानते
हुए...।
डा.
समरजीत सिंह
(भीनमाल): अक्टूबर,
नवम्बर
दोनों में
बुवाई है रबी
की।
श्री
अध्यक्ष: अब
आप मंत्रीजी
को बोलने दें।
मंत्रीजी बोल
रहे हैं। (व्यवधान)
मंत्रीजी बोल
रहे हैं। पहले
जवाब सुन लीजिये।
(व्यवधान)
श्री
अशोक बैरवा (खण्डार):
असत्य बोल
रहे हैं। (व्यवधान)
यह बहुत बड़ा
मुद्दा है, 2003 से
लेकर 2006 तक...। (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: खण्डार
से आने वाले
माननीय सदस्य,
नो। अंकित
नहीं हो।
अंकित नहीं
हो। (व्यवधान)
अंकित नहीं
हो।
श्री
अशोक बैरवा
(खण्डार): ***
श्री
अध्यक्ष: अब
आप बोलें। (व्यवधान)
खण्डार से
आने वाले
माननीय सदस्य,
आप व्यवधान न
करें।
श्री
गजेन्द्र
सिंह (राज्य
मंत्री, ऊर्जा):
मैं यह बताना
चाहूंगा आज जो
भी बिजली का
संकट है यह
कांग्रेस की
पिछली सरकार
की वजह से है।
(व्यवधान)
श्री
अशोक बैरवा
(खण्डार): ***
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर): ***
श्री
रामचन्द्र
जारोड़ा
(मेड़ता): ***
विष्णु/अरुण
04.10.06/ 11.50/ 1f
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर): ***
श्री अशोक
बैरवा (खण्डार):
***
डा. चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर): ***
श्री अध्यक्ष:
पता नहीं
माननीय सदस्यों
को क्या हो
गया आज? आप
मंत्रीजी का
जवाब सुनने को
तैयार नहीं
हैं। आप
मंत्रीजी का
जवाब सुनने को
तैयार नहीं
है। नहीं,
माननीय सदस्य,
आप कृपया,
पहले मुझे
सुनिये। नहीं,
आप स्थान
ग्रहण करें।
आप प्रश्न
इसलिए पूछते
हैं कि आपको
सूचनाएं
चाहिए।
श्री
अमराराम (धोद): ***
श्री अध्यक्ष:
वे जब सूचनाएं
देना चाहते
हैं किसी चीज की
तो आप सुनना
नहीं चाहते
हैं। आप
सुनिये। ... (व्यवधान)
आप सुनना ही
नहीं चाहते
हैं। आप क्यों
खड़े हो गये
एक साथ? ... (व्यवधान)
श्री
गजेन्द्र
सिंह (राज्य
मंत्री, ऊर्जा):
अध्यक्ष
महोदय, मुझे
मौका दीजिए।
मेरी बात तो
सुनिये आप।
मेरी बात तो
सुनिये आप। ...
(व्यवधान)
आपको फैक्ट्स
एण्ड फिगर
देता हूं। आपको
शर्म आएगी। ...
(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
एक साथ क्यों
खड़े हो गये?
डा. चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर): ***
श्री
गजेन्द्र
सिंह (राज्य
मंत्री, ऊर्जा):
आपको शर्म
आएगी
when you will hear my facts and figures.
श्री अध्यक्ष:
वे जानकारी दे
रहे हैं। ... (व्यवधान)
श्री अशोक
बैरवा (खण्डार):
***
श्री
गजेन्द्र
सिंह (राज्य
मंत्री, ऊर्जा):
वे जवाब सुनकर
फिर बोल ही
नहीं पाएंगे।
... (व्यवधान)
अध्यक्ष
महोदय, दिसम्बर,
2003 के अन्दर जब
हमारी सरकार
आयी थी, पूछा
जाए कि कितने
मेगावाट के ऑन
गोइंग
प्रोजेक्ट
छोड़कर गये
थे? एक गिरल का 125
मेगावाट का और
वह आपका
जनवरी, 2007 के अन्दर
... (व्यवधान)
डा. चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर): ***
श्री अध्यक्ष:
नो, बीच में
नहीं
बोलेंगे। बीच
में नहीं
बोलेंगे आप। जवाब
देने दीजिए।
श्री
गजेन्द्र
सिंह (राज्य
मंत्री, ऊर्जा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, एक
परियोजना तो
यह छोड़कर गये
थे 125 मेगावाट
की दिसम्बर, 2003
के अन्दर और
वह जो यूनिट
गिरल की 125
मेगावाट की
उसका उत्पादन,
पहली यूनिट
बिजली
निकलेगी
जनवरी, 2007 में और
उन्होंने प्लानिंग
की थी एक साल
पहले। चार साल
तो आपने लगा
दिये तो आप
हमें तीन साल
नहीं दे सकते
हैं बिजली
पैदा करने के
लिए? ... (व्यवधान)
डा. समरजीत
सिंह (भीनमाल): ***
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
***
श्री अशोक
बैरवा (खण्डार):
***
डा. चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर): ***
डा.
भंवरलाल
राजपुरोहित
(मकराना): ***
श्री
कैलाश
त्रिवेदी
(सहाड़ा): ***
श्री
गजेन्द्र
सिंह (राज्य
मंत्री, ऊर्जा):
... (व्यवधान)
प्रोजेक्ट्स
का काम चल रहा
है। 5
प्रोजेक्ट्स
का काम चल रहा है।
5 प्रोजेक्ट्स
का काम चल रहा
है और 3 का और
शुरू होने
वाला है।
सेंक्शन हो
गयी है। टेंडर
भी हो चुके
हैं।
डा. समरजीत
सिंह (भीनमाल): ***
श्री
गजेन्द्र
सिंह (राज्य
मंत्री, ऊर्जा):
अध्यक्ष
महोदय, मैं यह
बताना
चाहूंगा कि
पिछले ढाई साल
में ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
वे आपको जो
जानकारी देना
चाहते हैं आप
उसको सुनना
नहीं चाहते।
उसका क्या
इलाज हो, यह
बता दीजिए? एक
साथ खड़े हो
जाते हैं आप।
वे जानकारी दे
रहे हैं आपको।
... (व्यवधान)
डा. समरजीत
सिंह (भीनमाल): ***
श्री
गजेन्द्र
सिंह (राज्य
मंत्री, ऊर्जा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, पिछले
ढाई साल के
अन्दर यह
रिकार्ड है कि
हमने 30 परसेंट
बिजली ... (व्यवधान)
ज्यादा
दिलायी। हम
खरीद कर लाये
चाहे हमने कुछ
भी किया हो 30
परसेंट ढाई
साल के अन्दर
ज्यादा
दिलायी। ... (व्यवधान)
डा. चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर): ***
श्री
श्रवणकुमार
(पिलानी): ***
श्री
गजेन्द्र
सिंह (राज्य
मंत्री, ऊर्जा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, 5
साल के अन्दर
कांग्रेस
सरकार ने 150
करोड़ की
बिजली खरीदी जबकि
हम दो साल में
ही करीबन 957
करोड़ की ... (व्यवधान)
खरीद चुके
हैं। 957 करोड़ ...
(व्यवधान) आकड़े
देखो आप। ... (व्यवधान)
आपने केवल 150
करोड़ की
बिजली खरीदी
और हमने दो
साल में ही यह
खरीदी। ... (व्यवधान)
श्री
रामनारायण
मीणा (नैनवां): ***
श्री
जोगाराम पटेल
(लूणी): ***
श्री
गजेन्द्र
सिंह (राज्य
मंत्री, ऊर्जा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आपकी
सरकार ने 5 साल
में 1070 मेगावाट
बिजली दी और
हम ढाई साल में
405 मेगावाट ... (व्यवधान)
दे चुके हैं
ऑलरेडी। ... (व्यवधान)
हम आपसे तीन
गुणा बिजली ज्यादा
प्रोड्यूस
करके बताएंगे
आपको। ... (व्यवधान)
डा. समरजीत
सिंह (भीनमाल): ***
श्री
श्रवणकुमार
(पिलानी): ***
श्री अध्यक्ष:
श्री
बृजकिशोर
शर्मा, नेक्स्ट
क्वेश्चन।
आप सुनने को
तैयार नहीं
हैं। आप लोगों
को वे जानकारी
देना चाहते
हैं पर आप
सुनने को तैयार
नहीं हैं। एक
साथ खड़े होकर
दस-दस बोल रहे
हैं। सुनने को
आप तैयार नहीं
हैं। मैंने
नेक्स्ट क्वेश्चन
पुकार लिया
है। ... (व्यवधान)
श्री संयम
लोढ़ा
(सिरोही): ***
डा. समरजीत
सिंह (भीनमाल): ***
श्री
रामनारायण
मीणा (नैनवां): ***
श्री
अमराराम (धोद): ***
श्री
श्रवणकुमार
(पिलानी): ***
श्री अध्यक्ष:
मैंने अगला
प्रश्न
पुकार लिया
है। मैंने
अगला प्रश्न
पुकार लिया है।
... (व्यवधान)
श्री संयम
लोढ़ा
(सिरोही): ***
श्री अशोक
बैरवा (खण्डार):
***
श्री अध्यक्ष:
प्रतिपक्ष के
नेता खड़े
हैं। अब तो
विराजमान हो
जाए आप।
आपके नेता
खड़े हैं। ... (व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपसे निवेदन
करना चाहता
हूं। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
हां। ... (व्यवधान)
आप मंत्रीजी
विराजिये। ...
(व्यवधान)
श्री
प्रकाश चौधरी
(बड़ी सादड़ी): ***
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपसे निवेदन
करना चाहता
हूं कि आप किसान
की बेटी हैं।
आप किसान की
बेटी हैं। खुद
किसान है।
बिजली का
मामला है। आज
सारा राजस्थान,
क्या किसान,
क्या मजदूर,
क्या
बिजनेसमैन, सब
बिजली से
त्रस्त है और
इसका संतोषजनक
जवाब मंत्री
महोदय नहीं दे
पा रहे हैं और
आप ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
आपने मंत्रीजी
को सुना ही
नहीं है इसलिए
आप यह कैसे कह
रहे हैं? आपके
दस-दस आदमी तो
खड़े हो गये।
सुन ही नहीं
रहे आप उनको।
आपने सुना ही
नहीं उनको। ...
(व्यवधान)
श्री संयम
लोढ़ा
(सिरोही):
***
डा.
भंवरलाल
राजपुरोहित
(मकराना): ***
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
अब मैं, हमारे
पास इसके
सिवाय और कोई
चारा नहीं है
मान्यवर, कि
आप संतोषजनक
जवाब नहीं दे
पा रहे हैं, न दिलवा
रही हैं, न
मंत्री महोदय
जवाब दे रहे
हैं। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
प्रतिपक्ष के
नेता महोदय,
मैंने जवाब देने
के लिए कहा
उन्हें
लेकिन आपके एक
साथ दस-दस
माननीय सदस्य
खड़े हो गये। ...
(व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
ऐसी सूरत में
हम हमारा
विरोध दर्ज
करना चाहते
हैं कि ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
काहे पर दर्ज
करवा रहे हो?
काहे पर दर्ज
करवा रहे हो? ...
(व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
यह सरकार
बिजली की व्यवस्था
सुदृढ़ रूप से
नहीं कर रही
है, करने की
नीयत नहीं है।
एक मेगावाट
बिजली उन्होंने
बनायी नहीं,
पुरानी बिजली
जो कांग्रेस के
राज में बनी
थी उसके आधार
पर यह काम चला
रहे हैं। इनके
लायक, इनके
शर्म के सिवाय
इनके पास और
काम नहीं है,
हम ... (व्यवधान)
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द): ***
श्री अध्यक्ष:
नेता
प्रतिपक्ष
बोलते हैं जब
खड़े नहीं होते
हैं। नेता
प्रतिपक्ष
खड़े होते हैं
जब बीच में
बोलने के लिए
खड़े नहीं
होते हैं।
राजसमन्द से
आने वाले
माननीय सदस्य,
जब लीडर ऑफ द
हाउस और
प्रतिपक्ष के
नेता बोलने के
लिए खड़े हो
जाते हैं तो
बीच में दूसरे
लोग खड़े नहीं
हुआ करते हैं।
... (व्यवधान)
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द): ***
श्री अध्यक्ष:
फिर वही बात,
आप स्थान
ग्रहण करें।
आप स्थान
ग्रहण कर
लीजिए। ... (व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
मुझे दु:ख है,
मान्यवर, कि
सरकार के
संतोषजनक
जवाब, उत्तर
के अभाव में
हमें बाहर
जाना पड़ रहा
है और हम जा
रहे हैं।
श्री अध्यक्ष:
नहीं, आप जवाब
सुन लीजिए
पहले और उसके
बाद बाहर
जाइयेगा। ... (व्यवधान)
नो,
पहले जवाब
सुनिये,
पहले जवाब
सुनो आप उनका।
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
आप दिलवा नहीं
रहीं और वे दे
नहीं रहे हैं।
... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
आप उनका जवाब
सुनिये,
शांतिपूर्वक
और उसके बाद
जाना बाहर आप।
... (व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
इसके खिलाफ हम
वाक-आउट करते
हैं। ... (व्यवधान)
(इण्डियन
नेशनल
कांग्रेस दल
के माननीय
सदस्यों
द्वारा सदन से
बहिर्गमन)
श्री
अमराराम (धोद):
अध्यक्ष
महोदय, आगे का
पुकारिये।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): यह
जवाब को सुनना
नहीं चाहते। ...
(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
आप बहिर्गमन
कर रहे हैं, आप
चले जाइये चुपचाप।
शांतिपूर्वक
जाइये।
बहिर्गमन कर
रहे हैं,
जाइये
शांतिपूर्वक।
नेता
प्रतिपक्ष। नहीं,
मैं सुनाऊंगी I will call him again. आप
बहिर्गमन कर
रहे हैं तो
कृपया
बहिर्गमन कर जाइये।
आपके नेता ने
बहिर्गमन का कहा
है। बहिर्गमन
कर जाइये। ... (व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): आप
सुनना नहीं
चाहते हैं।
श्री अध्यक्ष:
आपके नेता ने ...
(व्यवधान)
मुझे मजबूर
नहीं करें आप।
... (व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक):
मनमोहन सिंह
सरकार ने,
प्रधान
मंत्री
मनमोहन
सिंहजी की
सरकार ने
बिजली रोकी
हुई है और यह
सुनना नहीं
चाहते हैं। ... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
मुझे मजबूर
नहीं करें। ...
(व्यवधान)
माननीय सदस्य,
आपके नेता ने
बहिर्गमन
किया है। ... (व्यवधान)
बाहेती,
बाहेती ही है
न यह? इनका क्या
नाम है,
बाहेती ... (व्यवधान)
श्री
बृजकिशोर
शर्मा (जयपुर
ग्रामीण):
मैंने कहा
प्रश्न संख्या-5
श्री अध्यक्ष:
मिस्टर
प्रकाश
चौधरी।
श्री
बृजकिशोर
शर्मा (जयपुर
ग्रामीण):
आपने पुकारा
है मुझे, आपने
मुझे पुकारा
है। आपने मुझे
पुकारा है। ...
(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
मिस्टर
प्रकाश
चौधरी।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(मुख्य
सचेतक): यह
नेता ही नहीं
मानते हैं
उनको। ... (व्यवधान)
शिव/चौहान/12.00/1g/4.10.2006
यह जयपुर
देहात से आने
वाले माननीय
बृजकिशोर जी प्रतिपक्ष
के नेता को
नेता नहीं
मानते हैं और उनके
विरोध में
यहां यह प्रश्न
पूछ रहे हैं।
(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
माननीय
मंत्रीजी
आपकी जो
उपलब्धि हो तो
बता दें आप।
श्री
अमराराम(धोद): अध्यक्ष
महोदय, आपने
आगे वाला
प्रश्न
पुकार लिया।
श्री
अध्यक्ष: अब
वह उपलब्धि
बता रहे हैं न
। (व्यवधान)...
श्री
अमराराम(धोद):
नहीं, अब आपने
आगे वाला
प्रश्न
पुकार लिया।
अध्यक्ष
महोदय, आपने
आगे वाला
प्रश्न
पुकार लिया तो
पीछे वाले
मंत्रीजी
कैसे उत्तर
देंगे ? सदन
परम्पराओं
से, नियमों से
चलेगा। (व्यवधान)
.....
श्री
अध्यक्ष: धोद
से आने वाले
माननीय सदस्य,
आप कृपया स्थान
ग्रहण कर लें।
जब विपक्ष इस
बात को लेकर,
कि आपने बिजली
का उत्पादन
किया नहीं,
बिजली की हालत
बहुत खराब है,
उस हालत में
जब आप
बहिर्गमन कर गये
और मंत्रीजी
की बात को
सुनें नहीं तो
मंत्रीजी
अपनी बात तो
कहेंगे कि उत्पादन
की क्या कमी
है, क्या
नहीं ?
श्री अमराराम(धोद):
अध्यक्ष
महोदय, आपने
आगे का प्रश्न
पुकार
लिया।(व्यवधान)
आप खुद कह रही
हैं ....(व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा: आपने
अगला प्रश्न
पुकार लिया तो
आप व्यवस्था
नहीं बदल
सकते। आपने व्यवस्था
देदी अगले
प्रश्न की। यह
गलत परम्परा
आरम्भ हो
जायेगी। अगर एक
बार अगला
प्रश्न
पुकारने के
बाद वापस यह
कहेंगी कि ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष :
प्रश्नकाल
समाप्त हुआ।
(व्यवधान)
श्री
बृजकिशोर
शर्मा: आपने
मेरा क्वेश्चन
पुकारा है, आप
मुझे इजाजत
दीजिये। मेरे
प्रश्न का
जवाब दिलाया
जाये।
(
माननीय सदस्य,
श्री बृजकिशोर
शर्मा वैल में
धरने पर बैठे)
(माननीय
सदस्य, श्री
बृजकिशोर
शर्मा द्वारा
धरना समाप्त)
श्री
अमराराम(धोद):
अध्यक्ष
महोदय, यह
प्रतिपक्ष और
पक्ष दोनों
ही, नहीं अध्यक्ष
महोदय, मेरा
अगला प्रश्न
है जिसमें
किसानों का 125
करोड़ छह
महीने से सरसों
का, जो छह
महीने पहले
किसानों ने
सरसों बेची
थी, उसका 125
करोड़ रूपया
छह महीने से
बकाया है। उस
किसान की
कुर्की की है,
किसाना का
बकाया के नाम
पर कनेक्शन
काटा जा रहा
है और दोनों
सरकारों ने
किसानों के
पेमेन्ट को
...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: अंकित
नहीं हो।
मैंने नाम
नहीं पुकारा,
अंकित नहीं
हो। (व्यवधान)
श्री
अमराराम(धोद) : ***
श्री
अध्यक्ष: आप किस
नियम में इस
बात को उठा
रहे हैं ?
श्री
अमराराम(धोद): ***
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
जीरो ऑवर के
अंदर आप पर्ची
के माध्यम से
ला सकते हैं,
आप स्थगन
प्रस्ताव के
माध्यम से ला
सकते हैं, 295 के
माध्यम से ला
सकते हैं, 131 के
माध्यम से ला
सकते हैं,
किसी भी माध्यम
से लाइये।
श्री
अमराराम(धोद): ***
अनुपस्थिति
के लिये
अनुमति
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्यगण,
मुझे सदन को
सूचित करना है
कि श्री वासुदेव
देवनानी,
शिक्षा राज्य
मंत्री ने पैर
की हड्डी में
फैक्चर हो
जाने के कारण
दिनांक
30 अक्टूबर, 2006
से सत्रांत तक
सदन की बैठकों
से अनुपस्थित
रहने की
अनुमति चाही है,
क्या सदन की
अनुमति है ?
(
स्वीकृति )
अनुपस्थित
रहने की
अनुमति
प्रदान की
गयी।
मोहम्मद
माहिर आजाद :
घनश्याम
तिवाड़ी जी का
क्या हुआ ?
श्री
हरिमोहन
शर्मा: घनश्याम
जी का भी है क्या
कोई
प्रार्थना
पत्र ?
मोहम्मद
माहिर आजाद :
घनश्याम
तिवाड़ी जी का
क्या हुआ ? वह
क्यों नहीं आ
रहे ?
श्री
अध्यक्ष :
अभी स्थगन
प्रस्तावों
पर व्यवस्था
होगी, फिर पर्ची
पर व्यवस्था
होगी, फिर 295 पर
होगी, उसके
बाद जब प्रश्न
आये तब प्रश्न
करियेगा।
मुझे व्यवस्था
तो देने
दीजिये।
स्थगन
प्रस्तावों
पर अध्यक्षीय
व्यवस्था
मुझे
माननीय सदस्यों
को सूचित करना
है कि निम्न
स्थगन प्रस्तावों
की सूचना
प्राप्त हुई
है :–
1. मोहम्मद
माहिर आजाद
एवं पांच अन्य
सदस्यों की
ओर से जयपुर
विकास
प्राधिकरण
द्वारा आवंटित
भूमि पर हज
हाउस का
निर्माण
कराने के संबंध
में।
चूंकि
उक्त प्रकरण
न्यायालय
में
विचाराधीन है,
अत: इस पर
अनुमति देने
में असमर्थ
हूं।
मोहम्मद
माहिर आजाद: यह
तो कहीं नहीं
है
विचाराधीन।
कोर्ट में कोई
मामला पेंडिंग
नहीं है। यहां
टेबिल पर रखा
जाये।
श्री
बृजकिशोर
शर्मा(जयपुर
ग्रामीण): अध्यक्ष
महोदय, यह
होने का सवाल
ही नहीं उठता।
मोहम्मद
माहिर आजाद:
अध्यक्ष
महोदय, आपको
गलत सूचना दी
है। आप टेबिल
कराइये।
श्री
अध्यक्ष: अगर
आसन कोई व्यवस्था
देता है तो
किसी को भी
खड़े होने का
अधिकार नहीं
है।
श्री
बृजकिशोर
शर्मा: माननीय
अध्यक्ष
महोदय, माननीय
मुख्य
मंत्रीजी ने
इस सदन में हज
हाउस बनाने के
बारे में जवाब
दिया है, उसका
क्रियान्वयन
कराया जाये।
न्यायालय का
प्रश्न ही
नहीं उठता।
श्री
अध्यक्ष: माननीय
सदस्यगण, आसन
की व्यवस्था
के बाद में आप
कुछ कह सकते
हैं। (व्यवधान)
...
मोहम्मद
माहिर आजाद:
सदन को गलत
गुमराह किया
है । अध्यक्ष
महोदय, आपको
गलत सूचना दी
है । यहां पर
बताया जाये कि
कौनसे न्यायालय
में है और क्या
मामला है ?
श्री
बृजकिशोर
शर्मा: माननीय
अध्यक्ष
महोदय, माननीय
मुख्य
मंत्रीजी ने
जो सदन में
घोषणा की है
हज हाउस के
संबंध में,
उसका
क्रियान्वयन
कराया जाये। न्यायालय
की आड़ में
लेकर हज हाउस
के काम को
रोकना चाहते
हैं।
श्री
अध्यक्ष:
डॉ.चन्द्रशेखर
बैद एंव 6 अन्य
सदस्यों की
ओर से ..(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन : अध्यक्ष
महोदय, एक
मिनट मैं आपको
निवेदन करना
चाहता हूं कि
नगर से आने
वाले माननीय
सदस्य, जिन्होंने
यह स्थगन
प्रस्ताव भी
दिया है, उन्होंने
संविधान के
आर्टिकल 188 के
अन्तर्गत
सशपथ लेकर यह
कहा है कि मैं
इनके उपबन्धों
का पालन
करूंगा और यह
स्थगन प्रस्ताव
और अपने वक्तव्यों
द्वारा यह इस
सदन के माननीय
सदस्य रहने
के काबिल नहीं
है। मैं आपको
निवेदन करना
चाहता हूं ....(व्यवधान)
श्री
हरिमोहन
शर्मा: आपके
कैबिनेट
मंत्री तो वक्तव्य
देने के बाद
भी काबिल हैं
शपथ का उल्लंघन
करने के बाद
और यह काबिल
नहीं हैं।
बोलो आप। (व्यवधान)
.. आप खुद क्या
बोले थे ? आप भी
काबिल नहीं
हो इस जगह पर
रहने के लिये।
(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
मैं बोल रहा
हूं। (व्यवधान)
श्री
बृजकिशोर
शर्मा: मुख्य
मंत्रीजी ने
सदन में घोषणा
की है, उनका यह
बयान है और जब
मुख्य
मंत्रीजी ने
सदन में घोषणा
की है तो उसका
क्रियान्वयन
कराया जाये
इसी हज हाउस
पर।
श्री
राम प्रताप
कासनियां : अध्यक्ष
महोदय, मैं इस
विवाद से
दु:खी होकर
हाउस से बहिर्गमन
करता हूं।
(श्री
रामप्रताप
कासनियां,
सदस्य
द्वारा सदन से
बहिर्गमन)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़ : अध्यक्ष
महोदय, आपने
व्यवस्था
दे दी है, आसन
की व्यवस्था
सर्वोपरि है।
(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
जयपुर
ग्रामीण से
आने वाले
माननीय सदस्य,
आप बैठिये।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़ : अध्यक्ष
महोदय, आपने
व्यवस्था
देदी। मैं एक
मिनट
प्रार्थना कर
रहा हूं आपकी
व्यवस्था
के बाद आसन
सर्वोपरि है ।
हम कोई भी
सवाल आसन के
प्रति नहीं
उठा सकते। अब
आप नैक्स्ट
पुकारे अध्यक्ष
महोदय। इसमें
आपने व्यवस्था
फरमा दी है कि
यह न्यायालय
में लम्बित
है, इस पर
विवाद नहीं हो
सकता। न्यायालय
में लम्बित है
यह ।
श्री
अध्यक्ष: आप
कृपया स्थान
ग्रहण करें।
नगर से आने
वाले माननीय
सदस्य, मुझे
यह निवेदन
करना है कि जब
अध्यक्षीय
व्यवस्था
हो रही हो तो
जब तक अध्यक्षीय
व्यवस्था
होती है तब तक
किसी भी
माननीय सदस्य
को खड़े नहीं
होना चाहिये।
यह सदन का
नियम भी है,
सदन की परम्परा
भी रही है,
लेकिन इस परम्परा
को सब सदस्य
तोड़ते नजर आ
रहे हैं। चाहे
प्रतिपक्ष हो,
चाहे सत्ता
पक्ष हो, कोई
भी इस व्यवस्था
का ध्यान
नहीं रखते।
इसलिये मैं
आपको याद दिला
रही हूं , स्मरण
करा रही हूं
कि नियमों का
और इस परम्परा
का आप सख्ती
के साथ पालन
करेंगे तो ही यह
सदन ठीक
प्रकार से चल
सकेगा । आप
आखिर यहां जनहित
की बात करने
ही आये हैं तो
एक साथ खड़े
होकर दस-दस
माननीय सदस्य
खड़े हो जाते
हैं तो पता
नहीं लगता कि
क्या बोल रहे
हैं, क्या
नहीं बोल रहे
। इस सदन की यह
गरिमा रही है
कि यहां एक
माननीय सदस्य
जब बोलते हैं
तो दूसरा बीच
में खड़ा नहीं
होता है। आप
एक के बाद एक न
जाने कितने
खड़े हो जाते
हो। मैं यह
निवेदन कर रही
थी कि आपको
मैंने कहा
इसको
विचाराधीन कर
दिया, मैं इस
पर अनुमति
देने में
असमर्थ हूं।
अब यदि आपको बाद
में कुछ कहना
है तो आप भी
कहियेगा और
माननीय
सरकारी मुख्य
सचेतक जी,
आपको जो कुछ
कहना है तो
आपको भी समय दूंगी,
लेकिन अभी इस
व्यवस्था
के बारे में
आप कुछ नहीं
बोलेंगे।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़ : आपने
व्यवस्था
ही देदी।
श्री
अध्यक्ष: 2. डॉ0
चन्द्रशेखर बैद
एवं 6 अन्य
सदस्यों की
ओर से राज्य
में बी.पी.एल.
परिवारों की
संख्या 21 लाख
से घटकर 17.34 लाख
कर दिये जाने
से उत्पन्न
स्थिति के
संबंध में।
3. श्री
हरिमोहन
शर्मा, सदस्य
की ओर से
ग्रामीण
क्षेत्रों
में बीपीएल
परिवारों की
संख्या में
भारी कमी कर दिये
जाने के संबंध
में।
स्थगन
प्रस्ताव पर
तो अनुमति
देने में
असमर्थ हूं क्योंकि
यह इतना महत्वपूर्ण
नहीं है कि
सदन की
कार्यवाही को
रोककर इस पर
चर्चा की
जाये, ऐसा
नहीं है, फिर
भी मैं
चाहूंगी कि मंत्री
महोदय इसके
संबंध में वक्तव्य
दें।
श्री
राजेन्द्र राठौड़
: आप समय तय कर
दें ।
श्री
अध्यक्ष: No, I am not going to hear anything. अभी
मैंने आपको व्यवस्था
बता दी।
श्री
हरिमोहन
शर्मा: बारां
में 10 हजार
आदमियों ने प्रदर्शन
किया है
बीपीएल के
मामले में, यह
सरकार कुछ
सुनना ही नहीं
चाहती। एक
विधायक आमरण
अनशन पर बैठा
हुआ है और इस
पर व्यक्तव्य
अगर दिलाना है
तो आज वक्तव्य
दिलाने की व्यवस्था
करें आप। अध्यक्ष
महोदय, वहां
पर 10 हजार
आदमियों के
साथ बैठे हैं
विधायक।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़ : अध्यक्ष
महोदय, आपने
व्यवस्था
दी है।
msr/usc/1h/1210/04102006/
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आज
गांवों-गांवों
में जिस
प्रकार के हालात
हैं बी.पी.एल.
के मामले, में
आपसे निवेदन
करता हूं कि
वह व्यवस्था
आज ही दिलाएं
आप इनकी।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): आपकी आज्ञा
अनुसार सरकार
वक्तव्य देने
के लिए तैयार
है, समय तय कर
दें। इनका समय
तय कर दें। ...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
स्थान ग्रहण
करें। आप वक्तव्य
कब दिलायेंगे?
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, आपके
वैश्म में आ
कर के हम तय कर
देंगे, जब भी
आप समय तय
करेंगे वक्तव्य
देने के लिए
सरकार तैयार
है।
श्री
अध्यक्ष: जब
आप चाहेंगे उस
दिन वक्तव्य
हो जायेगा।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़
(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): आज नहीं,
अध्यक्ष
महोदय। आज
नहीं, कल दे
देंगे ...(व्यवधान)...
श्री
बृजकिशोर
शर्मा (जयपुर
ग्रामीण): आज
दिलाया जाए।
...(व्यवधान)...
श्री
अध्यक्ष: आज
तो देखिये, एक
मिनट, एक मिनट
...(व्यवधान)...
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
बी.पी.एल. के
मामले में
बैठे हुए हैं,
जो उनके साथ
ज्यादतियां
हुईं, उस
मामले में
बैठा हुआ है,
वहां के अस्पताल
की जो हालत
बिगड़ी है उस
मामले में
बैठा हुआ है
और दस-दस हजार
आदमियों के
साथ प्रदर्शन
किया है और,
अध्यक्ष
महोदय, इन्होंने
जो आदेया
निकाले हैं
नाम जोड़ने
का, अपील करने
का उसको भी 27
तारीख को स्थगित
कर दिया गया
है। ...(व्यवधान)...
और गांव-गांव
में अपील के
नाम से इस
मामले को डिले
करना चाहते
हैं और एक
आदमी की जान
से खिलवाड़
करना चाहते
हैं ...(व्यवधान)...
मैं आपसे
निवेदन कर रहा
हूं, अध्यक्ष
महोदय।
श्री
अध्यक्ष: स्थान
ग्रहण कर लें
अब आप। ...(व्यवधान)...
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
मैं आपसे
निवेदन करना
चाहता हूं,
अध्यक्ष
महोदय, इनसे
आज ही वक्तव्य
दिलवाएं।
श्री
अध्यक्ष: अब
आप स्थान
ग्रहण कर लें।
आप स्थान
ग्रहणकरें।
...(व्यवधान)...
श्री
मदन दिलावर
(समाज कल्याण
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, पाँच
आदमी भी नहीं
हैं वहां पर
...(व्यवधान)...
वहां पाँच आदमी
भी नहीं बैठे
हुए ...(व्यवधान)...
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आप तो बोलने
की स्थिति में
ही नहीं हो।
श्री
मदन दिलावर
(समाज कल्याण
मंत्री): पाँच
आदमी भी नहीं
हैं।
श्री
हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आप तो बोलने
की स्थिति में
ही नहीं हो। दस
हजार आदमियों
के साथ
प्रदर्शन
किया है अगले
ने, आप जा कर के
तो देखो,
गांव-गांव में
जा कर के देखो,
यह ओमजी बिरला,
हमारे
प्रभारी हो कर
आये थे बूंदी
में।
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी (राज्य
मंत्री, नगरीय
विकास एवं
आवासीय): अध्यक्ष
महोदय, वहां
के जो माननीय
सदस्य हैं
इनकी कुछ व्यक्तिगत
समस्याएं
हैं जिनको
सरकार पूरा
नहीं कर
सकती,सम्पत्ति
से जुड़े हुए
मामले हैं ...(व्यवधान)...