ans\usc\1100\1a
अशोधित प्रति प्रकाशनार्थ नहीं
राजस्थान
विधान सभा की कार्यवाही
का वृत्तान्त
अंक: 5 बारहवीं
विधान सभा के पंचम
सत्र का पंचम दिवस
संख्या: 5
शनिवार;
4 मार्च, 2006
राजस्थान
विधान सभा की बैठक 1100 बजे
विधान सभा
भवन] जयपुर
में प्रारम्भ
हुई ।
(श्रीमती सुमित्रा
सिंह, अध्यक्ष, पदासीन)
स्थगन प्रस्तावों पर अध्यक्षीय व्यवस्था
श्री अध्यक्ष: माननीय सदस्यगण, मुझे आपको सूचित करना है कि निम्नांकित स्थगन प्रस्तावों की सूचना प्राप्त हुई है:-
(1) श्री रणवीर सिंह गुढा एवम दो अन्य सदस्यों की और से जोधपुर के एडवोकेट श्री सुरेश शर्मा हत्याकाण्ड में शामिल प्राभावशील लोगोंके खिलाफ कार्यवाही नहीं करने से उत्पन्न स्थिति के सम्बन्ध में।
(2) श्री जुबेर खान सदस्य की और से जयपुर स्थित ऐतिहासिक धार्मिक स्थल गलताजी के चल रहे विवाद के सम्बन्ध में।
(3) श्री बाबूलाल नागर सदस्य की और से दूदू में सरसो समर्थन मूल्य केन्द्र खोलने के सम्बन्ध में।
यद्यपि उपरोक्त प्रस्ताव ऐसे नहीं हैं कि सदन की पूर्व निर्धारित कार्यवाही को रोककर इन पर विचार किया जाए, अंत: अनुमति देने में असमर्थ हूं। फिर भी माननीय सदस्य को अपनी बात कहने के लिए दो मिनिट का समय दूंगी, दो मिनिट में अपनी बात कहने की अनुमति होगी।
नियम 295 के अन्तर्गत प्राप्त सूचनाएं
मुझे
प्रक्रिया के
नियम 295 के अन्तर्गत
विशेष उल्लेख
के प्रस्ताव
प्राप्त हुए
हैं:-
(।) श्री हरिमोहन शर्मा, सदस्य की और से विधान सभा क्षेत्र हिण्डोली में औसत से कम वर्षा होने के कारण उत्पन्न स्थिति के सम्बन्ध में।
(2) श्री हरिशचन्द्र कुमावत, सदस्य की ओर से नगरपालिका मेड़ता के अधिशाषी अधिकारी एवम अध्यक्ष द्वारा पद का दुरूपयोग करने के सम्बन्ध में।
(3) श्री ज्ञानचन्द पारख, सदस्य की और से पाली के कपड़े की रँगाई-छपाई के उद्योग से किसानों की भूमि प्रदूषित होने के सम्बन्ध में।
(4) श्री प्रभुलाल वर्मा, सदस्य की और से विधान सभा क्षेत्र पिपल्दा का इन्द्रगढ़ से ढीपरी राज्य मार्ग क्षतिग्रस्त होने के सम्बन्ध में।
(5) श्री महिपाल सिंह यादव, सदस्य की और से कस्बा बानसूर से गुजर रहे स्टेट हाईवे 52 के दोनों और की जमीन पर अतिक्रमण होने के सम्बन्ध में।
(6) श्री बंशीलाल खटीक, सदस्य की और से राजसमन्द के आर. के. चिकित्सालय को 200 बैड का करने के सम्बन्ध में।
(7) श्री अर्जुन सिंह, सदस्य की और से विधान क्षेत्र दानपुर में पुलिसा का निर्माण करने के सम्बन्ध में।
(8) श्री बनवारी लाल शर्मा, सदस्य की और से धौलपुर शहर में ड्रेनेज स्कीम की क्रियान्विति के सम्बन्ध में।
(9) श्री रणधीर सिंह भीण्डर, सदस्य की और से विधान सभा क्षेत्र बल्लभनगर में यातायात के साधनों की समुसिचत व्ययवस्था नहीं होने के सम्बन्ध में।
(10) श्री संयम लोढ़ा, सदस्य की और से शिवगंज नगरपालिका द्वारा सीमा क्षेत्र(पैराफैरी) में भूमि रूपान्तरण की राशि बंडगांव व केसरपुरा ग्राम पंचायतों को उपलब्ध करवाने के सम्बन्ध में।
(11) श्री खुशवीर सिंह, सदस्य की और से विधान सभा क्षेत्र खारची में राहत कार्य आरम्भ करने के सम्बन्ध में।
(12) श्री मांगीलाल गरासिया, सदस्य की और से विधान सभा क्षेत्र गोगुन्दा की कतिपय सड़कों को पक्का करने के सम्बन्ध में।
माननीय सदस्यों से निवेदन करना चाहूंगी कि इन्हें पढ़ा हुआ मान लिया जाए क्योंकि अब हमारे पास वाद-विवाद के लिए केवल साढ़े पाँच घण्टे का समय है।
श्री सुरेश मीणा(करौली): माननीय अध्यक्ष महोदय, इससे पहले कोई ऐसा मामला है जो सदन में रखना चाहता हूं, मेरे क्षेत्र में.....
श्री अध्यक्ष: बीच में नहीं, तो आपका पढ़ा हुआ मान लेंगे ना।
श्री सुरेश मीणा: मेरे क्षेत्र में इस पानी को जनता पी रही है, इस पानी को, माननीय अध्यक्ष महोदय, इस चीज के बारे में...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: पढ़ा हुआ मान रहे हैं इसका मतलब कार्यवाही होगी ना। गुढ़ा से आने वाले माननीय सदस्य आप क्यों खडे़ हो गए, मैं बैठी थोडे़ ही हूं।
श्री सुरेश मीणा: इस पानी को जनता पीती है और हम बिसलरी का पानी पीते हैं, इसको हमारी जनता पीती है, इसको देखा जाए, इस पानी को,, यह अख़बार में छपा मामला है, सारा मामला है। इस तरह की पाँच स्कीम चल रही है राज्य सरकार की लेकिन आज तक स्कीम पूरी नहीं हुई और यह पानी पीया जा रहा है माननीय मंत्री जी।
श्री अध्यक्ष: आपका तो कोई प्रस्ताव है नहीं केवल पानी को लेकर खडे़ हो गए आप। देखिये, मौका आयेगा बजट भाषण पर बोलियेगा, पानी दिखा दीजियेगा।
श्री सुरेश मीणा: बजट भाषण, पानी पीने का मामला है अध्यक्ष महोदय।
श्री अध्यक्ष: तो पानी दिखा दीजियेगा ना, मैं कब ना कर रही हूं, मैं आपको बोलने का..(व्यवधान)
श्री सुरेश मीणा: इस पानी से लोग मर रहे हैं साहब।
श्री अध्यक्ष: बोलने का मौका दूंगी।
श्री सुरेश मीणा: माननीय अध्यक्ष महोदय, वहां पर जो अधिकारी लगे हुये हैं, दस-दस साल से वह वही टिके हुये हैं, मनमानी कर रहे हैं, उनको हटाया जाए वरना यहां धरने पर बैठूंगा, तब तक बैठूंगा जब तक मांग पूरी नहीं होगी। मैं धरने पर बैठता हूं।
(माननीय सदस्य सुरेश मीणा द्वारा सदन कूप में आकर भाषणबाजी)
श्री अध्यक्ष: आपको बोलने का मौका देंगे तब आप..(व्यवधान)
श्री राजेन्द्र राठौड़: आश्वासन किसका चाहिये, स्थानान्तरण का चाहिये या पानी की समस्या का,अधिकारियों के तबादले का आश्वासन चाहिये या पानी की समस्या के समाधान का, पानी की समस्या का चाहिये, ट्रान्सफर का ?
श्री अमराराम धोद(धोद): लोगों को इतना गंदा पानी पिला रहे हो।
श्री अध्यक्ष: माननीय सदस्य, आप पहले....
श्री अमराराम धोद: ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिये। (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: आप पहले वहां जाइये, आप अपने स्थान पर जाइये, वहां से बात करिये, आप अपने स्थान पर जाइये, वैल में आकर बोलने का आपको कोई अधिकार नहीं है।(व्यवधान)
श्री रामनारायण मीणा(नैनवा): करौली से आने वाले ..
श्री अध्यक्ष: एक सैकण्ड, मुझे कहने दीजिये, आपने यदि पहले माननीय मंत्री जी का ध्यान पानी के सम्बन्ध में आकर्षित किया है और उन्होंने सुना नहीं है,कार्यवाही नहीं हु ई है तब तो आपका यहां सब कहना उचित है और यदि आपने नहीं तो पहले ही आकर आप बोतल लेकर खडे़ हो गए और दिखाने लग गए, मैं समझती हूं यह परम्परा ठीक नहीं है, अब आप मंत्री जी बोलिये।
श्री रामनारायण मीणा: मंत्री जी, मैं एक लाइन में अर्ज करूं यह सवाल करौली का नहीं है, माननीय अध्यक्ष महोदय, यह मेरे करवर में बूंदी जिले में चार दिन से धरने प्रदर्शन चल रहे हैं,पीने के पानी की...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: यह आप क्या बता रहे हो बूंदी की ? आप उपनेता हो,क्या कर रहे हो,क्या कह रहे हो इस समय ?
श्री सांवरलाल जाट(सिंचाई मंत्री): आप उपनेता है माननीय सदस्य, आपको इस तरह से बीच में नहीं बोलना चाहिये। पानी के ऊपर पूरे दिन बहस होगी, जो भी समस्या है आप उसमें उठाइये। माननीय सदस्य अख़बार की कतरन और बोतल भरकर लाए हैं माननीय अध्यक्ष महोदय..(व्यवधान)
श्री सुरेश मीणा: हकीकत बात है। कमेटी बनाकर भेज दीजिये इसमें गलती हो तो, हकीकत बात बता रहा हूं,हकीकत बात बता रहा हूं, इसमें कोई डर..(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: आप सुनो तो सही। आप मंत्री जी को सुने तो सही।
श्री सांवरलाल जाट: हकीकत है क्या है थोड़ा बहुत सुनो तो सही। बात आ गई आपकी। आपने अपनी बोतल रख दी इससे ज्यादा और क्या कहना है आपको ? अध्यक्ष महोदय,पीने के पानी की व्यवस्था करवाना और शुद्ध पानी उपलब्ध कराना राजस्थान सरकार की जिम्मेदारी है और जिस प्रकार की भौगोलिक स्थिति राजस्थान की है सारे सदस्य और जनता भी वाकिफ है। राजस्थान में 10 प्रतिशत हिस्सा पूरे हिन्दुस्तान का है और 1.16 सरफेस वाटर है, जो भी बरसात के ऊपर निर्भर करता है, अंडरग्राउण्ड वाटर का लगातार डिप्लेसन हो रहा है। धरती के अंदर जो पानी है वह खारा है या फलोराइड का है,वही है,बाकी सब जगह हालात बडे़ गम्भीर है फिर भी सरकार की तरफ से अब हमने जल अभियान भी शुरू किया है जिसमें जो उपलब्ध जल है उसका ओप्टीमम यूटिलाइजेशन करें, इस प्रकार की चेतना पैदा करे और इसके साथ ही बरसात का पानी अगर गिरता है तो उसको रोकने के लिए सरकार व्यवस्था करे जिससे भूजल ऊपर आये।
श्री अध्यक्ष: आप तो इनके प्रश्न का जवाब दे दीजिये।
श्री सांवरलाल जाट: थोड़ा बैकग्राउण्ड तो बता दूं मान्यवर।
श्री अध्यक्ष: बैकग्राउण्ड की आवश्यकता नहीं है।
श्री सांवरलाल जाट: माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय सदस्य की बात से सहमति और असहमति व्यक्त नहीं कर सकता। माननीय सदस्य ने इस विधान सभा में, इस बोतल के अलावा मुझे कभी नहीं कहा कि मेरे एरिया में इतना गंदा पानी पी रहे हैं आप व्यवस्था कीजिए, अब विधान सभा चल रही है और बोतल दिखाने के लिये लाये हो तो इसमें मुझे कुछ नहीं कहना। बाकी माननीय सदस्य की जिम्मेदारी बनती है...(व्यवधान)
श्री सुरेश मीणा: मैं आपको दिखाने के लिए(व्यवधान) हकीकत बात है यह।
श्री सांवरलाल जाट: आप बैठिये, आप सुनो पूरी,आपकी जिम्मेदारी यह भी बनती है कि अगर आपकी जनता को शुद्ध पानी नहीं मिलता है तो हमारे को पत्र लिखते, हमारे पास आकर बताते कि ऐसी हालत है, बाकी मैं आपको यह विश्वास दिला सकता हूं अगर इस पानी में दोष होगा और ऐसा पानी जनता पी रही होगी तो हम अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करेंगे।
श्री सुरेश मीणा: मंत्री महोदय, मैं निवेदन कर रहा हूं एक कमेटी गठित करके आज ही वहां पर जाया जाये और इस चीज को देखा जाए।(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: बोल दिया ना उन्होंने।
श्री सांवरलाल जाट: कभी आपने कहा नहीं कि हमारी जनता ऐसा पानी पी रही है,आपने आज विधान सभा में कहा,तो हमें जानकारी लेने दीजिये उसके बाद
अगी वास्तव में आपकी बात ठीक होगी तो हम कार्यवाही करेंगे।
श्री सुरेश मीणा: मंत्री महोदय, मैं आपसे निवेदन कर रहा हूं।
श्री ओम बिरला(कोटा): मंत्री जी ने जवाबदे दिया कि जांच करेंगे, ऐसा पानी जनता पी रही है तो कार्यवाही करेंगे।
श्री सुरेश मीणा: जवाब कुछ नहीं है।
श्री सांवरलाल जाट: आपके इसी विधान सभा सत्र में यह रिपोर्ट लाकर आपको बता देंगे अगर गड़बड़ी होगी तो एक्शन करके बता देंगे।
श्री सुरेश मीणा: माननीय मंत्री महोदय, मैं निवेदन कर रहा हूं जो अधिकारी...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: श्री रणवीर सिंह गुढा।
श्री सुरेश मीणा: जो अधिकारी वहां पर दस साल से बैठे हुए हैं, पाइप लाइन का जो पाइप आता है उसको बेच दिया जाता है आज तक पाइप नहीं बिछवाई गई जबकि वहां पर बोरिंग है, वहां पर जीएलआर बने हुए हैं लेकिन पाइप लाइन नहीं बिछाई।(व्यवधान)
श्री सांवरलाल जाट: अधिकारी तो 60 साल की नौकरी करते हैं जो तो कह देंगे राजस्थान से बाहर भेज दो।
श्री सुरेश मीणा: पाँच-पाँच साल से, दस साल से अधिकारी वहां पर बैठे हुए हैं।
श्री
अध्यक्ष: करौली
से आने वाले
माननीय सदस्य,
आपने सब बता
दिया उसके बाद
भी आप उत्तेजित
हो रहे हैं।
Ddm/usc/1110/1b
श्री
सुरेश मीणा: नहीं अध्यक्ष
महोदय, हमको
चुनकर भेजा है
और हम इस पानी को
पिलाते हैं
जनता को, हम
सरकार से यह
कह सकते हैं
इस बात को ।
श्री
अध्यक्ष: तो उन्होंने
आपको यह आश्वासन
दिया है (व्यवधान)
आपको यह आश्वासन
दिया है (व्यवधान)
राजसमन्द से
आने वाले
माननीय सदस्य
।
श्री
बंशीलाल खटीक: यह
प्रमाणित है
क्या, यह
प्रमाणित
करके यहां लाए
हैं क्या कि
यह वहां का ही
पानी है (व्यवधान)
यह सरकार को बदनाम
करने की साजिश
है। यह सरकार
को बदनाम करने
की साजिश है ।
यह प्रमाणित
है क्याकि
वहां का पानी
है । यह झूठा
करके लेकर आये
हैं । (व्यवधान)
इतने दिन क्या
आपकी आँख फूट
गयी (व्यवधान)
इतने दिन आपकी
आंखें फूट गयी
थी क्या, ऐसा
पानी पिला रहे
थे । यह
प्रमाणित है
क्या वहां का
पानी है । (व्यवधान)यह
जांच करवा लें
यह वहां का
प्रमाणित
पानी है क्या,
यह सरकार को
बदनाम करने की
साजिश है । यह
वहां का पानी
नहीं है । (व्यवधान)
डा.दिगम्बरसिंह: माननीय
अध्यक्ष
महोदय, यह उस
इलाके का पानी
है ही नहीं । यह
कौनसा तरीका
हुआ ।
श्री
अध्यक्ष: राजसमन्द
से आने वाले
माननीय सदस्य,
आप स्थान
ग्रहण करें,
स्थान ग्रहण
करें ।
(श्री
सुरेश मीणा, सदस्य
द्वारा सदन
कूप में धरना)
श्री
जीतमल खांट: पूरे राजस्थान
का ठेका ले
रखा है क्या ?
श्री
अध्यक्ष: आप स्थान
ग्रहण करें ।
माननीय सदस्य,
स्थान ग्रहण
करें । आप
कृपया स्थान
ग्रहण करें,
माननीय सदस्य
स्थान ग्रहण
करें ।
श्री
रामनारायण
चौधरी: स्थान
ग्रहण करेंगे
तो वहां इनकी
पिटाई हो
जाएगी । फिर
पिटेगें वहां
पर ।
श्री
मुरारीलाल
मीणा: मैं आपको
बताना
चाहूंगा..(व्यवधान)..करौली
जिला ऐसा जिला
है जहां से
चम्बल नदी
गुजरती है ।
श्री
अध्यक्ष: मैंने
आपका नाम तो
नहीं पुकारा,
मैंने बोलने
के लिये आपका नाम
नहीं पुकारा
है । माननीय
सदस्य, मैंने
नाम नहीं
पुकारा है ।
(व्यवधान)
करौली से आने
वाले माननीय
सदस्य, आपको
जब यह आश्वासन
दे दिया कि
यदि यह पानी,
आप सही होंगे
तो निश्चित
तौर से उन
अधिकारियों
के खिलाफ
कार्यवाही की
जाएगी । अब आप
और क्या
चाहते हैं ।
अब आप क्या
चाहते हैं ।
श्री
रणवीरसिंह
गुढ़ा ।
(श्री
मुरारीलाल
मीणा, सदस्य भी
धरने पर बैठे)
(दोनों
माननीय सदस्यों
द्वारा धरना
समाप्त)
श्री
सुरेश मीणा: देखों
मंत्रीजी, ऐसे
+++ को बीच में
क्यों बोलने
देते हैं । +++ को
बीच में नहीं
बोलने दिया
कीजिए ।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: यह कौनसी
भाषा का
प्रयोग कर रहे
हैं आप ।
श्री
अध्यक्ष: राजसमन्द
से आने वाले
माननीय सदस्य,
राजसमन्द से
आने वाले
माननीय सदस्य,
आप मुझे मजबूर
न करें, नाम
लेकर पुकारने
के लिये ।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: इस भाषा का
उपयोग मत
कीजिए आप । इस
भाषा का उपयोग
मत कीजिए ।
श्री
बंशीलाल खटीक: सरकार को
बदनाम करने पर
तुले हुए हैं
। आपका काम ही
सरकार को
बदनाम करने का
है । आपका काम
क्या है,
सरकार को
बदनाम करने पर
तुले हुए हो
आप लोग ।
श्री
अध्यक्ष: राजसमन्द
से आने वाले
माननीय सदस्य,
मैं आपको
चेतावनी दे
रही हूं,
राजसमन्द से
आने वाले
माननीय सदस्य
मैं आपको
चेतावनी दे
रही हूं ।
मंत्रीजी जवाब
देते हैं, आप
बीच में क्यों
खड़े होते हैं
। आपकी जिम्मेदारी
नहीं है जवाब
देने की । (व्यवधान)
अब आप खामखा
में उत्तेजित
हो रहे हैं, अब
आप भी शांत
होइये । अब आप
भी शांत होइये
।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: अध्यक्ष
महोदय, मेरी
एक प्रार्थना
है, माननीय सदस्य
ने उत्तेजना
में राजसमन्द
से आने वाले
माननीय सदस्य
के लिये +++ और
दूसरे शब्दों
का उपयोग
किया, इन्हें
कार्यवाही से
निकलवा
दीजिये ।
श्री
अध्यक्ष: क्या कहा ?
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: +++ और दूसरे
शब्दों का,
इन +++ का बीच में
बोलना बंद
कराओ ।
असंसदीय शब्द
जो भी हैं
इनको
कार्यवाही से
निकलवायें ।
श्री
अध्यक्ष: +++ ?
श्री
सुरेश मीणा: मंत्रीजी,
यह हमारा पानी
का मामला है,
इसमें बीच में
बोलने की जरुरत
क्या थी,
मेरे कहने का
मतलब यह था बस
। (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: करौली से
आने वाले
माननीय सदस्य,
करौली से आने
वाले माननीय
सदस्य, आपको
भी ऐसी भाषा
का उपयोग नहीं
करना चाहिए ।
मैं +++ शब्द को
एक्सपंज कर
रही हूं ।
श्री
रामनारायण
मीणा: यह असंसदीय
नहीं है ।
श्री
सुरेश मीणा: माननीय अध्यक्ष
महोदय, रोजाना
पता नहीं क्या
..(व्यवधान)
सबको डिस्टर्ब
करते हैं ये ।
डा.
सी.पी.जोशी: अध्यक्ष
महोदय, +++ असंसदीय
नहीं है । +++ शब्द
अनपार्लियामेंट्री
नहीं है। यह
असंसदीय शब्द
नहीं है । +++
शब्द
अनपार्लियामेंट्री
नहीं है ।
श्री
ओ.पी.महेन्द्रा: +++ शब्द यहां
पर अनपार्लियामेंट्री
है । (व्यवधान)
+++ शब्द यहां
पर
अनपार्लियामेंट्री
है । असंसदीय
है यहां इस
सम्बन्ध
में । (व्यवधान)
+++ शब्द कभी
भी संसदीय
नहीं हो सकता
है ।
डा.सी.पी.
जोशी: अध्यक्ष
महोदय, +++ शब्द कोई
अनपार्लियामेंट्री
नहीं है । (व्यवधान)
+++ शब्द
अनपार्लियामेंट्री
नहीं है । +++
शबद कोई
अनपार्लियामेंट्री
नहीं है ।
आपको सदस्य
को रोकना
चाहिए था, वह
काम तो कर
नहीं रहे हैं आप
।
श्री
जोगाराम पटेल: जिस
परिप्रेक्ष्य
में कहा गया
है, उस
परिप्रेक्ष्य
में असंसदीय
है ।
+++
शब्द हो सकता
है संसदीय हो
पर उसका सेंस
असंसदीय हो
रहा है ।
श्री
सांवरलाल : माननीय
सदस्य के
लिये +++ बोलना उचित
मानते हो
क्या ?
श्री
बंशीलाल खटीक: +++ शब्द एक
अभिशाप है, +++ शब्द
एक अभिशाप है, +++ शब्द
कभी भी संसदीय
नहीं हो सकता
है ।
श्री
अध्यक्ष:
नाथद्वारा से
आने वाले
माननीय सदस्य,
मैं आपको
सूचित करना
चाहूंगी, मैं
आपका ध्यान
दिलाना
चाहूंगी कि
यदि कोई शब्द
अनपार्लियामेंट्री
नहीं भी हो तो
भी यह आसन उसे
एक्सपंज कर
सकता है ।
डा.सी.पी.
जोशी: मानते हैं,
आपकी बात से
सहमत हैं, पर
अनपार्लियामेंट्री
के नाम पर आप
नहीं कर सकते
हैं । आपको यह
अधिकार है
पूरी की पूरी
प्रोसीडिंग
को बाहर निकाल
दें ना आप । यह
आपको अधिकार
है परन्तु अनपार्लियामेंट्री
के नाम पर
नहीं निकाल
सकते हैं । यह
आपको अधिकार
है, आप पूरी प्रोसीडिंग
को बाहर निकाल
दें, आपको
अधिकार है ।
लेकिन अनपार्लियामेंट्री
के नाम पर
नहीं निकाल
सकते हैं आप ।
श्री
जोगाराम पटेल: माननीय अध्यक्ष
महोदय, जिस
परिप्रेक्ष्य
में इस शब्द
का प्रयोग
किया गया
था...(व्यवधान)
श्री
सांवरलाल: अध्यक्ष
महोदय, जिस
रूप में आप इस
शब्द को पढ़
रहे हो
नाथद्वारा से
आने वाले
माननीय सदस्य,
यदि हर सदस्य
के लिये +++ शब्द
का इस्तेमाल
होगा तो मत
कहना आप ।
श्री
जोगाराम पटेल: जिस भावना
से कहा गया है
इसलिये वह
असंसदीय शब्द
बन जाता है (व्यवधान)
सभी माननीय
सदस्य स्वतंत्र
हैं ।
श्री
सुरेश मीणा: मंत्रीजी,
हमें इतना सा
आश्वासन दे
दें 10 साल से जो
भ्रष्टाचारी
अधिकारी वहां
लगे हुए हैं
उनको तुरन्त
प्रभाव से
हटाया जाए ।
(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन: ये तो
ट्रांसफर का
तय करके आये
हैं ।
श्री
जोगाराम पटेल: ट्रांसफर
करवाने की
साजिश है और
कुछ नहीं है ।
श्री
सांवरलाल: आप विराजो
तो सही, मुझे
यह समझ में
नहीं आ रहा है
कि मैंने इतना
आश्वासन दे
दिया उसके
बावजूद आप
अभी के अभी
सस्पेंड
करवाना चाह
रहे हो क्या,
मैं कह रहा
हूं कि जांच
हो जायेगी इसी
सत्र के अन्दर
आपको सारी
स्थिति से
अवगत करा
देंगे । इतना
स्पष्ट
कहने के
बावजूद भी अगर
आप संतुष्ट
नहीं हों तो
क्या इलाज है
।
श्री
अध्यक्ष: कृपया
शांत रहें ।
आप बोलिये ।
श्री
रणवीरसिंह
गुढ़ा: माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपको धन्यवाद
देना चाहूंगा
कि आपने एक
संगीन विषय पर
मुझे बोलने का
मौका दिया ।
श्री
अध्यक्ष: बात कह दो
अपनी, धन्यवाद
तो कर दो, बात
कह दें ।
श्री
रणवीरसिंह
गुढ़ा: माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से माननीय गृह
मंत्रीजी से
यह पूछना
चाहता हूं कि
क्या जोधपुर
के एडवोकेट
सुरेश शर्मा
हत्याकाण्ड
के अन्दर
एफ.आई.आर. के
अन्दर दर्ज
व्यक्तियों
से पूछताछ की
गयी, छानबीन
की गयी । माननीय
अध्यक्ष
महोदय, जो एडवोकेट
सुरेश शर्मा
जोधपुर के
एडवोकेट,
जिनकी हत्या
हुई थी उनकी
जमीन थी 102 बीघा,
उस जमीन के
उुपर शुरू से
लेकर आज तक
मालिकाना हक
कब्जा और नाम
एडवोकेट
सुरेश शर्मा
का था और उसके विश्वास
पात्र रिश्तेदार
पृथ्वीराज
पुत्र सूरजमल
जो कि हरियाणा
में रहता है
वह सुरेश
शर्मा के
पिताजी के काम
करते थे, उनके
नाम कुछ जमीन
थी । मैं आपके
माध्यम से
पूछना चाहता
हूं, उसमें
हमारे मंत्री
महोदय, नाम
नहीं लेना
चाहूंगा, उन्होंने
50 बीघा जमीन
अपने नाम
नामान्तरण
करवाकर.....
श्री
अध्यक्ष: मंत्रीजी
का नाम लेने
के लिये 273 में
नोटिस देना
पड़ेगा ।
श्री
रणवीरसिंह
गुढ़ा: मैं नाम
नहीं ले रहा
हूं । हमारे
मंत्रीजी हैं,
उन्होंने
पने नाम से,
अपनी दो
बेटियों के
नाम से हिमानी
और चाँदनी
पूनिया के नाम
से 50 बीघा जमीन अपने
नाम करवाई ।
श्री
अध्यक्ष: अब आपने
पूनिया कहकर
बात तो स्पष्ट
कर ही दी । अब
देखिये,
पूनिया कहकर
बात आपने स्पष्ट
कर दी । 273 का
नोटिस दिया
हुआ नहीं है ।
बात गलत है
आपकी एक तरह
से । आप 273 का
नोटिस देकर
उठाते(व्यवधान)
श्री
रणवीरसिंह
गुढ़ा: माननीय अध्यक्ष
महोदय, 2004 में (व्यवधान)
अपराध जगत से
जुड़ा हुआ
मामला है, हत्या
का मामला है
और 2 साल पहले 2004
में एडवोकेट
सुरेश शर्मा
ने अपनी निजी
डायरी में
लिखा है कि उनको
उनकी जान को
खतरा है, उनके
पास में, यह
निजी डायरी की
फोटो कापी
मेरे पास में
है । उनके पास
में फोन आया
कि यू.पी. के
शूटरों को
बुलाकर उनकी
हत्या करवाई
जा सकती है,
अगर वह जमीन
के रास्ते
में से,
मंत्री के बीच
में से नहीं
हटेगें तो। 23 तारीख
को सुरेश
शर्मा बुलाया
। 23 तारीख को
सुरेश श्ंर्मा
की गुमशुदगी
की रिपोर्ट
उनके पुत्र ने
दर्ज करवाई
नवनीत शर्मा
ने । माननीय
अध्यक्ष
महोदय, नवनीत
शर्मा ने
साफ-साफ लिखा
है कि मेरे
पापा को जो
बुलाया गया है
मुझे पूरी शंका
है कि मेरे
पापा की हत्या
कर दी गयी है
या उनके साथ
में को ई
अनहोनी घटना
घट सकती है और
रिपोर्ट में साफ-साफ
विजय पूनिया
का नाम लिखा
गया है, अध्यक्ष
महोदय, जो एक
मंत्री के
पुत्र हैं,
शाम को उनकी
हत्या हो गयी
। (व्यवधान)
शाम को उनकी
हत्या हो गयी
और 24 तारीख को,
अध्यक्ष
महोदय...(व्यवधान)...माननीय
अध्यक्ष
महोदय, संगीन
मामला है,
इतना संगीन
मामला है ।
एक
माननीय सदस्य:
ये गम्भीर
आरोप लगा रहे
हैं ।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: यह क्या
बात हुई, कोई
नियम नहीं है
। कोई भी आरोप
लगा दे, यह क्या
बात हुई अध्यक्ष
महोदय । (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: माननीय
सदस्य, स्थान
ग्रहण करें,
माननीय सदस्य,
स्थान ग्रहण
करें । अंकित
नहीं हो । (व्यवधान)
श्री
रणवीरसिंह
गुढ़ा: ***
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: ***
श्रीमती
उषा पूनिया: ***
श्री
ओम बिड़ला: ***
श्री
अध्यक्ष: अब आपका स्थान
ग्रहण करें ।
(व्यवधान) अब
अरन गृह
मंत्रीजी को
दे दें जो कुछ
देना है ।
आपको जो कुछ
देना है, गृह
मंत्रीजी को
दे दें आप । अब
आपका समय खत्म
हुआ, अब आपका
समय समाप्त
हुआ । (व्यवधान)
Vps/usc/1120/4-3-06/1c.
श्री
रणवीर सिंह
गुढ़ा : ***
श्रीमती
उषा पूनिया: यह बातें
आप बाहर
करिये, आप पर
मानहानि का
दावा मैं
करूंगी।
श्री
अध्यक्ष:
अंकित नहीं
हो, अंकित
नहीं हो।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: ***
श्री
रणवीर सिंह
गुढ़ा: ***
श्री
अध्यक्ष: अब आप
गृह मंत्री की
बात सुनें।
आपका तो अंकित
नहीं हो रहा
है। आपका
अंकित नहीं हो
रहा है। आप
गृह मंत्रीजी
को सुनिये।
आपका समय
समाप्त हुआ।
मैंने केवल दो
मिनट का समय
दिया था आपको।
आप ऊटपटाँग
बात बोल रहे
हैं।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया(गृह
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय यह सही
है कि 22 तारीख
की रात को
सुरेश शर्मा
की हत्या
हुई। 23 तारीख
को सवेरे एफ.आई.आर.
लिखायी गयी और
27 तारीख को
हमने तीन
मुल्जिम जो इस
घटना में, क्योंकि
उनके घर के
पास खून के
छींटे देखे और
उसके आधार पर
पहुंचे कि
उसमें एक
हेमलता सोनी
जो उसमें
मुल्जिम थी,
उसको हमने
पकड़ लिया।
उसके बाद उसके
पति और एक और
नरपतसिंह को
और भंवरसिंह
को, उनको तीन
को तो हमने 27
तारीख को ही
गिरफ्तार कर
लिया जो अभी
भी जे.सी. में
है और उनसे
पूछताछ से यह
चार लोगों के
नाम और निकल
कर आये जो
हेमलता के
पीहर पक्ष के
भाई और उनके
लड़के हैं।
जिसमें धनेश,
बादल, जावेद
और सतीश है।
यह चार लोग
आये। उनको भी
जिस होटल में
यह रुके इसके
पहले भी एक
अटेम्प किया
था और यह लोग
उस होटल में
रुके उसका
रिकार्ड पहले
का भी मिला और
उस समय यह काम
नहीं कर पाये।
उसके बाद
दूसरी तारीख
को जब यह घटना
हुई तो उनको
आइडेंटिफाई
किया और उस
होटल में यह
चार लोग भी
रुके। यह सात
लोग उसमें
मुल्जिम हैं।
एफ.आई.आर. में
किसी का नाम
नहीं था । यह
तो ढूँढ़ते-ढूँढ़ते
इस घटना से ... (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: पहले
बैठिये आप।
सुनिये आप कि
क्या कह रहे
हैं यह। रोज
बोल देते हो
मर्जी आये सो ...
(व्यवधान)
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया:
तफ्तीश
जैसे-जैसे आगे
बढ़ी उसके
आधार पर इसमें
नाम निकलकर
आये हैं। आप
जो आरोप लगा
रहे हैं, अभी
तक कि मेरी
जांच से इस
प्रकार की कोई
बात नहीं
निकली है। मैं
आपको यह यकीन
दिलाता हूं कि
इसमें किसी को
भी संदेह नहीं
रहना चाहिए कि
हमने किसी भी
प्रकार, अगर
और मुल्जिम हो
उसको छोड़ने
की मंशा हो,
कोई सवाल ही
नहीं पैदा
होता और इसलिए
इसके बादि भी
जब वहां के
लोगों ने कहा
कि हमें
तफ्तीश में
संदेह है तो
मैंने सी.आई.डी. को कल
ही फाईल
ट्रांसफर की
है । कहीं पर
भी आपको संदेह
करने का कोई
कारण नहीं
होगा अगर
मुल्जिम होगा
तो ही मैं
मुल्जिम
बनाऊंगा।
जबरदस्ती
कोई प्रेशर से
किसी को
मुल्जिम
बनाना चाहे तो
यह मेरा धर्म
नहीं कहता है
कि मैं उसको
कोई जबरदस्ती
मुल्जिम
बनाऊं।
मैं
सदन को आश्वस्त कर रहा
हूं कि सही
जांच करके
कहीं पर भी कोई
संदेह का कोई
कारण नहीं
होगा। अगर
किसी प्रकार
की घटना में
से निकल कर
आये। अभी जैसे
चार लोगों को
हमें जो फरार
हैं, उनको
पकड़ने के बाद
और कोई नयी
बात उसमें से
निकलेगी तो
उसके बाद ही
आगे बढ़ा जा
सकता है ।
इतना मैं कहना
चाहता हूं। ... (व्यवधान)
श्री
रणवीर सिंह
गुढ़ा:***
श्रीमती
उषा पूनिया: माननीय
अध्यक्ष
महोदय, माननीय
अध्यक्ष
महोदय ...
(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
प्रश्न
पूछने की
इजाजत नहीं
है।
नहीं-नहीं,
नो-नो
बिलकुल
इजाजत नहीं
है। कतई नहीं
है । नो-नो ।
अंकित नहीं
हो, कुछ नहीं।
आप स्थान
ग्रहण करें।
श्री
रणवीर सिंह
गुढ़ा: ***
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: ***
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
स्थान ग्रहण
कर लें।
माननीय सदस्य,
स्थान ग्रहण
कर लें।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन: ***
श्री
सांवरलाल: ***
श्री
अध्यक्ष: आपके
पास कोई कागज
है तो दे
दीजिए ...
(व्यवधान)
आपके पास कोई
कागज है तो
गृह मंत्री को
दे दीजिए। आप
गृह मंत्री को
कागज दे दीजिए
।... (व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:***
श्री
रणवीर सिंह
गुढ़ा: ***
श्री
अध्यक्ष: मुझे आप
मजबूर नहीं
करें। गुढ़ा
से आने वाले माननीय
सदस्य, आप
मुझे मजबूर कर
रहे हैं। आप
मुझे मजबूर कर
रहे हैं। मैं
निवेदन कर रही
हूं कि आप
मुझे मजबूर
नहीं करें।
मैं आपसे कह
रही हूं कि
अंकित नहीं हो
रहा है। मैं आपसे कह
रही हूं कि आप
सदन छोड़कर
चले जाएं। ... (व्यवधान)
श्री
रणवीर सिंह
गुढ़ा: ***
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
माननीय सदस्य।
... (व्यवधान)
श्रीमती
उषा पूनिया: I am on an
explanation.
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
आप स्थान
ग्रहण करें,
नहीं तो सदन
छोड़कर चले
जाएं। मुझे आप
मजबूर कर रहे
हैं। आप मुझे
मजबूर कर रहे
हैं।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:***
श्री
रणवीर सिंह
गुढ़ा:***
श्री
अध्यक्ष: आप
मुझे मजबूर कर
रहे हैं।
सार्जेण्ट
एट आर्म्स ।
अंकित कुछ
नहीं हो रहा
है। अंकित
नहीं हो रहा
है। आप
ढींगामस्ती
नहीं करें। ... (व्यवधान)
सार्जेण्ट
एट आर्म्स,
इनको बाहर
करो। नहीं
करो-करो। ऐसे
नहीं मानेंगे
यह ।... (व्यवधान)
(श्री
रणवीर सिंह
गुढ़ा,
माननीय सदस्य
को मार्शल
द्वारा सदन से
बाहर ले जाया
गया।)
श्री
बहादुर सिंह
गोदारा(नोहर): माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मेरे
से गलत दस्तखत
करवाये गये
हैं। ... (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आपके
लिए तो मैंने
कब कहा ? दो ही
तो सदस्यों
का नाम लिया
है मैंने।
आपका तो लिया
नहीं मैंने। ... (व्यवधान)
श्रीमती
उषा पूनिया: माननीय
अध्यक्ष
महोदय, यह जो
आरोप लगा रहे
हैं, यह
निराधार है।
इनमें कोई
लेना-देना
नहीं है। उसकी
कार्यवाही हो
रही है और जो
सारा केस है
वह सामने आ जाएगा।
दोषी पाये
जाएंगे तब मैं
देखती हूं ।
मैं तो
चाहूंगी, फिर
मैं देखती हूं
कि इन पर क्या
लिया जाएगा? यह
झूठा है
बिलकुल केस।
इसका कोई आधार
ही नहीं है।
इसके बारे में
हमारे को न
कोई जानकारी
है, न इसका कोई
आधार है। यह
बिलकुल झूठा
साबित होगा जब
मैं देखूंगी
कि अपने
माननीय सदस्य
को क्या सज़ा
दी जाती है?
श्री
अध्यक्ष: ठीक है।
श्री जुबेर
खान।
श्री
जुबेर खान(रामगढ़):
सम्माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से बड़ी
शालीनता से
निवेदन करना
चाहूंगा कि
जयपुर में
स्थित ...
(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: दो
मिनट में।
श्री
जुबेर खान: हां।
गलता पीठ
जयपुर में ही
नहीं बल्कि
सम्पूर्ण
भारत के लोगों
के लिए प्रमुख
तीर्थ स्थल
है। इस गलता
पीठ की स्थापना
सन् 1960 में श्री
कृष्णदास
पयोहारीजी
महाराज
द्वारा की गयी
थी जो इसके सबसे
पहले महंत
बनें और इसको
तत्कालीन
महाराजा सवाई
मानसिंहजी
ने और उसके
बाद राज्य
सरकार ने मान्यता
दी।
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मेरा
आपसे निवेदन है
कि 15 फरवरी, 2006 को
महंत आदरणीय
रामोदाराचार्यजी
ब्रह्मलीन हो
गये और उनके अन्तिम
संस्कार के
बाद जो
कार्यक्रम
होते हैं,
नवें दिन,
सुबह साढ़े
पाँच बजे के
लगभग प्रात:,
जब नवें दिन
के कार्यक्रम
उनके परिवार
द्वारा वहां
निवास स्थान
पर कर रहे थे,
तो कुछ
साधु-संत के
वेश में जो लोग
गये, उनके साथ
में कुछ ऐसे
कार्यकर्ता
गये जिन्होंने
पुलिस के
संरक्षण में
जहां वहां पर
अन्तिम कार्यक्रम
की रश्में
पूरी की जा
रही थीं, सुबह
साढ़े पाँच
बजे ही जाकर
जिस तरह से
हमला किया और
पुलिस के संरक्षण
में किया, यह
अत्यन्त
दु:ख की बात
है।
एक
निवेदन मैं और
करना चाहूंगा
कि चूंकि 2004 में
माननीय उच्च
न्यायालय ने
उसमें स्थगन
आदेश दिये हुए
हैं कि जब तक
न्यायालय
कोई फैसला
नहीं कर देगा,
गलता पीठ में यथास्थिति
रहेगी। जो
महंत साहब थे
वह रहेंगे और
उनके
क्रियाकर्म
के बाद उनके
ज्येष्ठ
पुत्र महंत
अवधेश
कुमारजी को
उनकी जगह गद्दी
नसीन होना था।
उसके पहले ही
जिस तरह से
वहां पर कुछ
लोगों द्वारा
आतंक फैलाया गया
और मेरा
आदरणीय अध्यक्ष
महोदय, आपके
माध्यम से
आरोप है कि
भारतीय जनता
पार्टी सत्ता
के लोगों
द्वारा जुड़े
हुए, जिस तरह
गलता महाराज
की पीठ को
हथियाने की
कोशिश की जा
रही है,
असंवैधानिक
तरीके से, गैर-कानूनी
तरीके से, गैर-धार्मिक
तरीके से, यह
सरासर अन्याय
है । मैं आपके
माध्यम से यह
चाहता हूं कि
सरकार इसको स्पष्ट
करे कि सरकार
इसके ऊपर, आज
वातावरण क्या
है, माननीय
अध्यक्ष
महोदय, वहां
पर पुलिस की
छावनी बनी हुई
है। ... (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आप क्या
चाहते हैं ? आप
चाहते क्या
हैं? ... (व्यवधान)
श्री
जुबेर खान:
श्रद्धालु जो
नहीं जा पा
रहे हैं ...
(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: यह सब
तो आपने कह
दिया ।
श्री
जुबेर खान: मैं
आपके माध्यम
से चाहता हूं
कि सरकार इसके
ऊपर, सरकार इस
गलता पीठ को
बचाना चाहती
है या अपने
बलबूते पर कब्जा
करना चाहती है
? मैं आपके
माध्यम से
निवेदन करना
चाहता हूं । ...
(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
मैंने केवल
आपको ... (व्यवधान)
श्री
भवानी सिंह
राजावत: आपसी
विवाद को इस
पवित्र सदन
में नहीं
उठाया जाना
चाहिए। यह
पवित्र सदन
है। ... (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: श्री
बाबूलाल नागर। केवल दो
मिनट में ही
अपनी बात
कहेंगे, मैं
तीसरी मिनट नहीं
दूंगी आपको ।... (व्यवधान)
श्री
मोहनलाल गुप्ता: जो भी
विवाद है
सरकार ने उसके
बारे में
पूर्णतया न्यायिक
दृष्टिकोण
अपनाकर ही काम
किया है। माननीय
सदस्य, यहां
तथ्यों को
गलत रूप से
प्रस्तुत कर
रहे हैं। अभी
वर्तमान में जो
पीठ है वह
उसको पब्लिक
ट्रस्ट नहीं
कर रही है, वह
फैमिली ट्रस्ट
बना रखा है,
उसको आप इजाजत
देंगे कि गलता
को फैमिली
ट्रस्ट बना
दिया जाए ?
फैमिली ट्रस्ट
कर रखा है ...
(व्यवधान)
Spp/usc/1130/1d
डॉ.बुलाकीदास कल्ला: मैंने परमिशन ली है, दो मिनट में अपनी बात कह दूंगा।
श्री अध्यक्ष: आपने पर्ची थोड़े ही दी है।
डॉ.बुलाकीदास
कल्ला: बहुत
पब्लिक
इंटरेस्ट का
इश्यू है।
श्री
अध्यक्ष: आप जब भाषण
दें तो उसमें
इसका भी जिक्र
कर दीजियेगा।
डॉ.बुलाकीदास कल्ला: ठीक है।
श्री अध्यक्ष: बाबूलाल नागर।
श्री बाबूलाल नागर(दूदू): अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से सहकारिता मंत्रीजी का मैं ध्यान आकर्षित करना चाह रहा हूं । दूदू विधान सभा क्षेत्र में हमेशा वर्षा का अभाव रहता है। वहां की मुख्य फसल सरसों हैं और क्रय-विक्रय सहकारी समिति...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: अब आप भूमिका बाँध रहे हो, इस पर आ जाओ आप। आप भूमिका मत बांधो। हां, बस आ जाओ अपनी बात पर।
श्री बाबूलाल नागर: अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन यह है कि सरसों समर्थन मूल्य खरीद केन्द्र सरकार वहां पर खोलती है जहां पर सरसों की पैदावार हो और कृषि उपज मण्डी यार्ड हो, वहां गोदाम हो।
श्री अध्यक्ष: आप सीधी अपनी बात कहो कि दूदू में भी खोल दिया जाये, बस खत्म बात। यह कह दें आप बस। हां, यही कह दें।
श्री बाबूलाल नागर: अध्यक्ष महोदय, एक निवेदन करना चाह रहा हूं आप सही फरमा रही हैं कि दूदू में खोल दिया जाये। एक चीज आपके ध्यान में लाना चाहता हूं। अध्यक्ष महोदय, अभी 2005-06 में सांभर हमारे पास में सरसों खरीद केन्द्र है उसमें 60 हजार....(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: सीधी सी बात है कि आपने लिखकर दिया दूदू में सरसों समर्थन मूल्य खरीद केन्द्र खोलना, इतनी-सी बात है।
श्री बाबूलाल नागर: अध्यक्ष महोदय, मैं तो नहीं बोलूंगा, चलो मेरा काम हो जाना चाहिये।
श्री अध्यक्ष: बस ठीक है, हो जायेगा।
श्री बाबूलाल नागर: बिलकुल मेरा काम हो जाना चाहिये। मंत्रीजी बोल तो दो।
श्री अध्यक्ष: मंत्रीजी ने सुन लिया, ध्यान रखेंगे। मंत्रीजी ध्यान रखियेगा। मंत्रीजी ध्यान रखिये। अब बिराजिये। अब पर्ची पर बोलेंगे श्री कालीचरण जी। कालीचरण जी, केवल चार मिनट का समय है । आप तो बोल चुके हैं लेकिन और माननीय सदस्यों को वाद-विवाद में अपना हिस्सा लेना है इसलिये आप चार मिनट में अपनी बात कह दें।
श्री रामनारायण मीणा(नैनवां): अध्यक्ष महोदय, एक मिनट में एक बात कहना चाहूंगा, माननीय मंत्रीजी सरसों की खरीद नहीं हो रही है। किसान परेशान है। मैं आसन से आग्रह करूंगा कि इस बारे में सरकार नोटिस ले और सरसों एक क्विंटल भी नहीं खरीदी जा रही है । मोइश्चर के नाम पर किसानों को वापस भेजा जा रहा है। किसान इतने परेशान है कि बिचौलियों को सरसों बेचनी पड़ रही है। सरकार इस बारे में ध्यान दे और किसानों का हित साधन करे।
श्री अध्यक्ष: न पर्ची है, न बात, आप खड़े हो गये यूं ही। बोलिये कालीचरणजी।
श्री कालीचरण सर्राफ(जौहरी बाजार): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं पर्ची के माध्यम से राजस्थान में जो अकाल की स्थिति है और उसमें केन्द्रीय सरकार सहायता करने में जो कोताही बरती जा रही है, राजनीतिक भेदभाव के आधार पर पर्याप्त सहायता नहीं कर रही है उसके बारे में आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं। माननीय अध्यक्ष महोदय राजस्थान की भौगोलिक स्थिति इस प्रकार की है कि यहां हर वर्ष कहीं न कहीं अकाल की स्थिति रहती है। कभी पूरे राजस्थान प्रदेश में अकाल की स्थिति रहती है, कभी कई जिलों में अकाल की स्थिति रहती है। इस वर्ष भी गिरदावरी की रिपोर्ट के आधार पर 22 जिलों में 15,778 गांवों को अभावग्रस्त घोषित किया है। राजस्थान सरकार ने 1 जनवरी, 2006 से अकाल राहत के काम अभावग्रस्त क्षेत्रों में प्रारम्भ कर दिये हैं। चारा डिपो भी लगभग 265 स्थानों पर खोल दिये हैं। 50 हजार रूपये की राशि चारा डिपो को ब्याज मुक्त ऋण के रूप में प्रदान भी कर दी गयी है। भारत सरकार को 26 दिसम्बर को ज्ञापन भी प्रस्तुत कर दिया गया । 1464.25 करोड़ रूपये का 15.86 लाख मीट्रिक टन गेहूं की मांग भी उसमें शामिल की गयी है। भारत सरकार का अध्ययन दल आ गया । उसने विस्तृत रिपोर्ट भी दे दी परन्तु मुझे कहते हुए अफसोस है कि अकाल की इतनी भीषण विकरालता को देखते हुए अभी तक भारत सरकार ने केवल 146;5 करोड़ रूपये की राशि आंवटित की है। माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं ध्यान दिलाना चाहूंगा कि जब यहां कांग्रस की सरकार थी और केन्द्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी, बिना किसी राजनैतिक भेदभाव के केन्द्र की भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने जब यहां भीषण अकाल की स्थिति थी तो खुले हाथों से यहां पर सहायता दी थी। मैं बताना चाहूंगा कि बीजेपी सरकार ने 946.82 करोड़ रूपये राष्ट्रीय आपदा आकस्मिक निधि और 32.5 लाख मीट्रिक टन गेहूं की मदद उस समय की थी। माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं कहना चाहूंगा इस सदन के माध्यम से केन्द्रीय सरकार को कि राजस्थान की भौगोलिक स्थिति को देखे और यहां जिस प्रकार की अकाल की स्थिति बनती जा रही है और अभी जब यह स्थिति है तो आने वाले दिनों में- अप्रैल, मई और जून में और ज्यादा यहां स्थिति बिगड़ने वाली है तो केन्द्रीय सरकार इसमें उदारता के साथ बिना किसी भेदभाव के अकाल राहत के कामों के बारे में राशि आवंटित करे और गेहूं भी आवंटित करे। मैं आपके माध्यम से यही कहना चाहता हूं।
श्री हरिमोहन शर्मा(हिण्डौली): पहले राजस्थान सरकार तो न्याय करे। कई तहसीलें और कई जिले, जहां अकाल की स्थिति है, राजस्थान सरकार जान-बूझकर, पक्षपात कर वहां अकाल घोषित नहीं करती और यह केन्द्र की बात करते हैं। पहले अपना अन्याय तो सुधारो जो आपने हमारे साथ किया है।
श्री कालीचरण सर्राफ: कोई जगह ऐसी नहीं है जहां अकाल राहत कार्य प्रारम्भ नहीं किया हो। परन्तु केन्द्रीय सरकार राजनैतिक भेदभाव के आधार पर गेहूं और राशि आवंटित नहीं कर रही है।
श्री श्रवण कुमार: झुन्झुनूं जिला अकाल से पीडि़त है। माननीय अध्यक्ष महोदय झुन्झुनूं जिले में जाकर आईं, इनसे पूछो। माननीय अध्यक्ष महोदय दौरा करके आई हैं,लोग पानी के लिये तरस रहे हैं, भूख से तड़प रहे हैं और कह रहे हैं कि कोई पीडि़त नहीं है। ....
श्री अध्यक्ष: अंकित नहीं हो।
श्री श्रवण कुमार:***
श्री अध्यक्ष: जो मेरी बिना अनुमति के बोलते हों, उनका बिल्कुल अंकित नहीं किया जाये।
श्री श्रवण कुमार: ***
श्री अध्यक्ष: आप क्या कहना चाहते हैं ?
श्री प्रद्युम्न सिंह: (राजाखेड़ा): आप अवसर दें, दो शब्द कह दूं।
श्री अध्यक्ष: हां, आप दो शब्द कह दें।
श्री प्रद्युम्न सिंह: राज्य सरकार के पास 540 करोड़ रूपया अकाल के पेटे बचा हुआ है एन.सी.सी.एफ. के तहत, पहले उस पैसे को तो खर्च कर लें और उसके उपरान्त ट्वेल्थ फाइनेंस कमीशन की रिपोर्ट के बाद एक अप्रैल से राज्य सरकार 313 करोड़ रूपया नैक्स्ट फाइनेंशन ईयर में मिलेगा, उसके अंदर 25 प्रतिशत राज्य सरकार का बजट का हिस्सा होगा।
श्री अध्यक्ष: आप बजट पर बोल लेना। राज्यपाल महोदय के अभिभाषण पर नहीं बोला क्या ?
श्री प्रद्युम्न सिंह: मुझे कह लेने दीजिये क्योंकि अनर्गल बात सदन के अंदर आई है। रिकार्ड सही हो जाये, 373 करोड़ रूपये वह और 540 करोड़ रूपये वह इनको मिलाकर 920 के करीब होता है उस पैसे को राज्य सरकार खर्च नहीं कर रही है और यहां पर अनर्गल आरोप केन्द्रीय सरकार के ऊपर लगाये जा रहे हैं। यह मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं।
श्री अध्यक्ष: मोहम्मद माहिर आजाद।
डॉ; किरोड़ी लाल(खाद्य मंत्री): अकाल के बारे में प्रद्युम्न सिंह जी ने जो बात कही उसके बारे में सदन में स्थिति स्पष्ट करना चाहूंगा। राजाखेड़ा से आने वाले माननीय सदस्य ने जो कहा है इतनी राशि राज्य सरकार के पास नहीं है। हमको दिसम्बर में 146 करोड़ रूपये जो सीआरएफ का देना था वह पैसा आपकी केन्द्र सरकार ने नहीं दिया है । आप चाहो तो मैं सदन के पटल पर रख दूं। हमने मांग रख दी है।
श्री प्रद्युम्न सिंह: आपके पास 540 करोड़ बचा है या नहीं पुराने अकेले के पेटे और सालों का, वह आप बता दीजिये।
डॉ. किरोड़ी लाल: हमारे पास 540 करोड़ रूपया नहीं बचा।
श्री प्रद्युम्न सिंह: यह आप गलत कह रहे हैं। आपके पास 540 करोड़ बचा है। आप बार बार केन्द्र सरकार से कह रहे हैं कि उस 540 करोड़ रूपये को जो बचा हुआ है उसको प्लेन्ड एक्सपेंडिचर में काउंट किया जाये।
श्री राजेन्द्र राठौड़: यह काम आपने नहीं किया था क्या?
डॉ.सी.पी.जोशी: हमने किया था ...
श्री अध्यक्ष: अंकित नहीं हो।
डॉ. सी.पी.जोशी: ***
msr/usc/1140/1e
श्री
अध्यक्ष: अब
अंकित हो।
डॉ.
किरोड़ी लाल मीणा
(खाद्य एवं
नागरिक
आपूर्ति
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय,
राजाखेड़ा से
आने वाले
माननीय सदस्य
कह रहे थे 860
करोड़, 500...
डॉ.
सी.पी.जोशी: ***
श्री
अध्यक्ष: आप
बिना आसन की
अनुमति के
बोलने लग जाते
हैं, सी.पी.जोशी
साहब।
डॉ.
सी.पी.जोशी: ***
श्री
महीपाल सिंह
यादव
(बानसूर): ***
श्री
महावीर
प्रसाद जैन: ***
डॉ.
सी.पी.जोशी: ***
श्री
अध्यक्ष: आप इस
तरह का आरोप
लगाते हैं आसन
के ऊपर, मैंने जब
राजाखेड़ा से
आने वाले
माननीय सदस्य
खड़े हुए,
मैंने उनको
अनुमति दी
बोलने के लिए।
...(व्यवधान)... आप
रोज ही
आक्षेप...(व्यवधान)...
(श्री
अध्यक्ष ने
इशारे से
अंकित नहीं
करने के
निर्देश दिये)
डॉ.
सी.पी.जोशी: ***
श्री
महावीर प्रसाद जैन: ***
डॉ.
बुलाकीदास
कल्ला: ***
...(भारी व्यवधन)...
श्री
अशोक बैरवा
'खण्डार': ***
श्री
रामनारायण
मीणा (नैनवा): ***
श्री
अशोक बैरवा
'खण्डार': ***
डॉ.
किरोड़ी लाल मीणा:
माननीय सदस्य,
आप विराजो।
श्री
श्रवण कुमार: ***
श्री
अशोक बैरवा
'खण्डार': ***
श्री
रामनारायण
मीणा: ***
श्री
श्रवण कुमार : ***
श्री
ओम बिरला: ***
श्री
हरिमहोन
शर्मा: ***
श्री
कन्हैयालाल
मीणा (बस्सी):
***
श्री
श्रवण कुमार: ***
श्री
अध्यक्ष: जो भी
माननीय सदस्य
मेरी बिना
अनुमति के
बोलते हैं वह
अंकित तो हो
नहीं रहा है
इसलिए, माननीय
सदस्य, स्थान
ग्रहण कर लें
तो उचित
रहेगा। मोहम्मद
माहिर आजाद।
श्री
श्रवण कुमार: ***
श्री
रामचन्द्र
जारोड़ा (मेड़ता):
***
श्री
अध्यक्ष: मोहम्मद
माहिर आजाद, बोलना
प्रारम्भ
करें, यह तो
यों ही बोलते
रहेंगे।
बोलना प्रारम्भ
करें। ...(व्यवधान)...
श्री
बाबूलाल नागर: ***
श्री
कन्हैयालाल
मीणा: ***
श्री
रामचन्द्र
जारोड़ा: ***
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
आपस में
तर्क-वितर्क
नहीं करें,
आपस में सवाल-जवाब
नहीं करें।
मैं जिसका नाम
पुकारूंगी
केवल उसी का
अंकित होगा
इसलिए आप
खामखा में
खड़े होकर के
अपनी शक्ति को
यों ही व्यर्थ
गंवा रहे हैं।
श्री
रामचन्द्र
जारोड़ा: ***
श्री
अध्यक्ष :
मैंने नाम
नहीं पुकारा
आपका, आपका
कोई विषय भी
नहीं है।
श्री
रामचन्द्र
जारोड़ा: ***
श्री
अध्यक्ष: मोहम्मद
माहिर आजाद।
मोहम्मद
माहिर आजाद(नगर):
अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से निवेदन कर
रहा हूं...
डॉ.किरोड़ी
लाल मीणा: मैं
मेरा उत्तर
तो पूरा कर
लूं।
श्री
अध्यक्ष: आप क्या
कहना चाहते
हैं? बात तो हो
गयी।
मोहम्मद
माहिर आजाद: अब क्या
करें, साहब, जब
मंत्री ही
नहीं आपके
आदेश की पालना
करते हैं...(व्यवधान)...
डॉ.किरोड़ी
लाल मीणा: मेरे
पर चार्जेज
लगा दिये ...(व्यवधन)...
मोहम्मद
माहिर आजाद: अध्यक्ष
महोदय, मंत्री
ही आपके आदेश
की पालना नहीं
करें, मैं
बोलने के लिए
खड़ा हो गया
पिफर यह खड़े
हो जाते हैं।
अब इनका अंकित
कराओगे आप ...(भारी
व्यवधन)...
अब
अंकित तो मेरा
होगा, माननीय
खाद्य
मंत्रीजी।
श्री
महीपाल सिंह
यादव: ***
श्री
अध्यक्ष: आप स्थान
ग्रहण करें।
यदि
कोई विधान सभा
में इस तरह का
प्रश्न
उठाया गया है
जिसकी तरफ से
सरकार को जवाब
देना आवश्यक
हो तो मंत्री
उठ कर के अपनी
सूचना दे सकते
हैं। ...(भारी व्यवधन)...
मोहम्मद
माहिर आजाद: जब
सहकारिता
मंत्रीजी
खड़े हुए थे
श्री बाबूलाल
नागर का जवाब
देने के लिए
तब आपने उनको
बैठा दिया। जब
बाबूलालजी
नागर का जवाब
देना चाहते थे
माननीय मदन
दिलावरजी...(व्यवधान)...
मदन दिलावरजी
खड़े हुए थे
बाबूलालजी
नागर का जवाब
देने तब उनको
बैठा दिया था
और इनको खड़ा
कर दिया। ...(व्यवधान)...
श्री
अमराराम (धोद): ***
श्री
महीपाल सिंह
यादव: ***
श्री
बाबूलाल नागर: ***
श्री
अशोक बैरवा
'खण्डार': ***
डॉ.किरोड़ी
लाल मीणा: अब
हमारी बात सुन
लो। मेरी बात
सुन लो।
श्री
बाबूलाल नागर: ***
श्री
अध्यक्ष: अंकित
नहीं हो।
श्री
बाबूलाल नागर: ***
श्री
अशोक बैरवा
'खण्डार': ***
श्री
महीपाल सिंह
यादव: ***
श्री
अध्यक्ष: आप स्थान
ग्रहण्कर
लें तो उचित
रहेगा। स्थान
ग्रहण करें।
आप स्थान
ग्रहण कर लें।
श्री
हेमाराम
चौधरी
(गुढ़ामालानी):
***
श्री
अध्यक्ष: यह
अकाल पर चर्चा
नहीं हो रही थ
यह चर्चा भारत
सरकार से जो
अनाज मिलना
चाहिए उसकी
चर्चा हो रही
है। ..(व्यवधान)...
इस पर जवाब दे
रहे हैं।
डॉ.किरोड़ी
लाल मीणा: अध्यक्ष
महोदय।
श्री
हेमाराम
चौधरी: ***
श्री
अध्यक्ष: वह
आपको मौका
मिलेगा धन्यवाद
प्रस्सताव
पर जब आप
बोलें, तब यह
सब बातें
कहियेगा आप।
आपको मौका जब
मिले धन्यवाद
प्रस्ताव पर
उस समय बात
कहियेगा आप यह
सब।
श्री
हेमाराम
चौधरी:***
Ars/usc/1150/1f/04032006/1
डा .किरोड़ीलाल मीणा: गुढ़ामालानी से आने वाले माननीय सदस्य 2059 के अकाल में......
श्री अध्यक्ष: मंत्री जी, आपको कुछ कहना है तो कहिए वरना मैंने नाम लिया है
श्री श्रवण कुमार: ***
श्री खुशवीर सिंह: ***
श्री श्रवण कुमार:***
श्री अध्यक्ष: स्थान ग्रहण करें डूंगरगढ़ से आने वाले माननीय सदस्य, पिलानी से आने वाले माननीय सदस्य, कोई इस समय पाइंट आफ आर्डर नहीं होता है। यह जीरो आवर है इस समय कोई पाइंट आफ आर्डर नहीं होता ...(व्यवधान) आप स्थान ग्रहण करें..(व्यवधान) आप प्लीज स्थान ग्रहण करें।
श्री हेमाराम चौधरी: ***
श्री महीपाल सिंह यादव:***
डा. किरोड़ीलाल: मैं जवाब तो दूंगा ही ।
श्री महीपाल सिंह यादव: ***
श्री अध्यक्ष: आप हर समय इर्रेलेवेण्ट बात करते हैं ।
श्री श्रवण कुमार: ***
श्री महीपाल सिंह यादव: ***
श्री अध्यक्ष: आपको जवाब देना हो तो दीजिए वरना मैं दूसरा नाम पुकार रही हूं।
श्री महीपाल सिंह यादव: ***
श्री हेमाराम चौधरी: ***
श्री अध्यक्ष: बानसूर से आने वाले माननीय सदस्य, स्थान ग्रहण करें । गुढ़ामालानी से आने वाले माननीय सदस्य स्थान ग्रहण करें (व्यवधान) आपको बहुत नम्र शब्दों में कह रही हूं स्थान ग्रहण कर लीजिए। बानसूर से आने वाले माननीय सदस्य कुछ अंकित नहीं हो रहा है आप ख्वाम ख्वाह में खड़े हैं ।
श्री महीपाल सिंह यादव:***
श्री नंदलाल बंशीवाल:***
डा.किरोड़ीलाल: आप विराज जाओ थोड़ी देर। अध्यक्ष महोदय, मैं शार्ट में दो मिनट में निपटाऊंगा। हमने भारत सरकार को.....
श्री खुशवीर सिंह: ***
श्री अध्यक्ष:खारची से आने वाले माननीय सदस्य...(व्यवधान) गुढ़ामालानी से आने वाले माननीय सदस्य...
श्री खुशवीर सिंह:***
श्री हेमाराम चौधरी:***
श्री अध्यक्ष: मेरे बात समझ में नहीं आ रही है गुढ़ामालानी से आने वाले माननीय सदस्य को क्या हो गया ।
श्री हेमाराम चौधरी:***
श्री श्रवण कुमार:***
श्री राजेन्द्र राठौड़:***
श्री श्रवण कुमार:***
श्री बाबूलाल नागर:***
श्री हेमाराम चौधरी:***
श्री राजेन्द्र राठौड़:***
श्री श्रवण कुमार:***
श्री रामचन्द्र जारोड़ा:***
श्री अध्यक्ष: मैं नेता प्रतिपक्ष से निवेदन करना चाहूंगी कि वह अपनी पार्टी के इन सदस्यों को थोड़ा नियंत्रण में रखें। मैं देख रही हूं जब यह कहा जा रहा है कि अंकित नहीं हो रहा है उसके बावजूद भी दो-दो, तीन-तीन खड़े होकर ऐसे बोलने लग जाते हैं यह कहने के बावजूद कि अंकित नहीं हो रहा है, आप क्या चाहते हो, सदन को चलाना चाहते हो कि नहीं चलाना चाहते*** हो?
श्री श्रवण कुमार:***
श्री अध्यक्ष: मैंने कहा आप बैठ जाइये, स्थान ग्रहण करें...(व्यवधान) स्थान ग्रहण कर लें। आपका भी इरादा मुझे आज बाहर जाने का दिखता है ।
श्री हेमाराम चौधरी:***
श्री अध्यक्ष: गुढामालानी से आने वाले माननीय सदस्य....
डा.किरोड़ीलाल: एक भी पशु नहीं मरा। एक भी पशु मर जाए तो मैं इस्तीफा दे दूं। एक भी पशु नहीं मरा। कोई पलायन नहीं हो रहा, +++ बोल रहे हैं एक पैसा नहीं दिया केन्द्र ने ।
डा.बुलाकीदास कल्ला:***
डा.किरोड़ीलाल: +++ बोल रहे हो एक पशु नहीं मरा ..(व्यवधान)
डा.बुलाकीदास कल्ला: ***
श्री मदन राठौड़:***
श्री वीरेन्द्र बेनीवाल:***
श्री अशोक:***
डा.किरोड़ीलाल: आप जवाब दो मेरे इस सवाल का, हमने स्टेट प्लान में पचास करोड़ का प्रावधान रखा, कांग्रेस ने आज तक ऐसा प्रावधान नहीं रखा...(व्यवधान)
डा.बुलाकीदास कल्ला: ***
श्री हेमाराम चौधरी:***
डा.किरोड़ीलाल: 16.86 लाख मीट्रिक टन गेहूं मांगा है जो दो लाख मीट्रिक टन गेहूं मिलाहै जो ऊँट के मुंह में जीरा डाला है आपने ।
डा.बुलाकीदास कल्ला: ***
डा.किरोड़ीलाल: साढ़े चार लाख मजदूर चयनित कर रखे हैं। मैं काम खोलना बताऊं..
डा.बुलाकीदास कल्ला:***
डा.किरोड़ीलाल: साढ़े चार लाख मजदूर दे रखे हैं ।
डा.बुलाकीदास कल्ला:***
श्री मदन राठौड़:***
श्री अशोक:***
श्री श्रवण कुमार:***
श्री बाबूलाल नागर:***
श्रीमती राजकुमारी शर्मा:***
डा.एन.एस.गुर्जर:***
डा.किरोड़ीलाल : हम तो पीडि़त हैं नहीं,हम तो किसान के बेटे हैं नहीं, हम तो पशु पालते नहीं हम तो किसान के बेटे हैं नहीं,आपने ही किसान का ठेका ले रखा है। मैं गाय पालता नहीं, मेरे भैंस है नहीं, मेरे बकरी है नहीं, तुम्हारे ही बकरी है,तुम्हारे ही पशु हैं मैं पशु रखता नहीं हूं, मैं पशु भी नहीं रखता, मैं चारा भी नहीं डालता, बकवास कर रहे हो।
श्री श्रवण कुमार:***
श्री बाबूलाल नागर:***
श्री नंदलाल बंशीवाल:***
श्री अशोक:***
डा.किरोड़ीलाल :माननीय अध्यक्ष महोदय, कांग्रेस का एक भी सदस्य अगर एक भी पशु मरा, मरने का यहां लिखकर दे दे तो मैं मन्त्री पद से इस्तीफा दे दूंगा, लिखकर दे दे कांग्रेस पशु मरा हो ।
डा.बुलाकीदास कल्ला:***
श्री ओम बिड़ला:***
श्री हेमाराम चौधरी:***
श्री बाबूलाल नागर:***
श्री भवानी सिंह राजावत :***
श्री अमराराम:***
डा.किरोड़ीलाल: अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से प्रतिपक्ष के नेता से पूछना चाहूंगा कि पहली बार भारतीय जनता पार्टी से.....
श्री रिछपाल सिंह मिर्धा:*** ***
श्री अध्यक्ष: आप बीच में ही खड़े हो गये ।
श्री रिछपाल सिंह मिर्धा:***
डा.किरोड़ीलाल :मैं जवाब
दे रहा हूं
मिर्धा जी,कोई
सुन ही नहीं
रहा। मैं जवाब
दे रहा हूं
कोई जवाब सुनना नहीं चाहता।
Vns/usc/2a/1200/4.3.064 March 2006
श्री
अमराराम(धोद): ***
श्री
रामचन्द्र
जारोड़ा: ***
श्री मदन
राठौड़: ***
श्री नन्दलाल
बंशीवाल: ***
श्री
बाबूलाल नागर: ***
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: ***
श्री
अमराराम(धोद): ***
डा.किरोड़ी
लाल मीणा: अभी दे देता
हूं। (व्यवधान
श्री अध्यक्ष: आप स्थान
ग्रहण करें।
मैंने कहा स्थान
ग्रहण करें।
पर्ची
के माध्यम से
उठाये गये
प्रश्न के
ऊपर यदि आप
लोग इस प्रकार
से प्रश्न दर
प्रश्न
उठाते चले
जायेंगे तो
आगे फिर कैसे
होगा। अब
मैंने आपसे
निवेदन किया
ना यह तो पर्ची
के माध्यम से
उठाया गया था,
मंत्रीजी
जवाब दे रहे
हैं।मंत्रीजी
का जवाब सुन
लो, आप संतुष्ट
नहीं हो आपको
मिलेगा मौका
वाद विवादमें
भाग लेने का।
उस समय आप
अपनी बात कह
सकते हैं कि
यह मंत्रीजी
ने गलत कहा
है। आप कह
सकते हैं। अब
आप फिर..(व्यवधान) The Chair is on the legs.
श्री
हेमाराम
चौधरी: ***
डा.किरोड़ी
लाल मीणा(खाद्य एवं
नागरिक
आपूर्ति
मंत्रि): अध्यक्ष
महोदय, एक बात
उभरकर सामने
आयी है हमने यह
राजनैतिक
भेदभाव किया।
मेरे खुद के
इलाके में अगर
भेदभाव किया
होता तो मुख्यमंत्री
जी के इलाके
के गांव को भी
हम अभावग्रस्त
घोषित करें और
फेमिन कोड में
यह बना रखा
है...(व्यवधान)
श्री
मंगला राम
गोदारा: ***
श्री
अध्यक्ष: बीच में
नहीं बोलें। डूंगरगढ़
से आने वाले
माननीय सदस्य,
बीच में नहीं
बोलें..(व्यवधान)
श्री
नन्दलाल
बंशीवाल: ***
श्रीमती
राजकुमारी: ***
श्री
अध्यक्ष: सत्ता
पक्ष के
माननीय सदस्य
भी बीच में
नहीं बोलें।
जवाब देने दें।
डा.किरोड़ी
लाल मीणा: मैंन अगर,
राजनीतिक भेदभाव
की बात कर रहे
हैं, राजनीतिक
भेदभाव अगर
किया होता...
श्री
रामनारायण
चौधरी(नेता,
प्रतिपक्ष):
हुआ है ना।
डा.किरोड़ी
लाल मीणा: नहीं हुआ।
हमारे आम तौर
पर गिरदावरी
होती है। अध्यक्ष
महोदय, जो 50
प्रतिशत से
ऊपर का जो
खराबा होता है
उसी को फेमिन
कोड में लेते
हैं और उसी का ज्ञापन
हम भारत सरकार
को देते हैं
जिसके आधार पर
कि हमको मदद
मिलती है। अब 50
परसेंट का
खराबा जहां भी
है...
श्री
महावीर
प्रसाद जैन: ***
श्री
अध्यक्ष: बैठे बैठे
माननीय मुख्य
सचेतक, आप भी न
बोलें।
डा.किरोड़ी
लाल मीणा: उसको अभावग्रस्त
घोषित कर दिया
गया औा वह 15778
गांव 22 जिलों
के नोटिफाई हो
गये। भारत
सरकार की टीम
आ गयी। केन्द्रीय
नेतृत्व
टोली उसको
देखकर चली गयी
और हमने टोली
को ज्ञापन दे
दिया। ज्ञापन
में हमने लेबर
के लिये क्वांटिटी
मांगी है
गेहूं की 16.56 लाख
मीट्रिक टन और
749.34 लाख कैश।
मेटेरियल कम्पोनेंट
के लिये 377.7 लाख
कैश मांगा है।
फोडर ट्रांसपोर्टेशन
सब्सिड़ी
केलिये 37.50
करोड़ मांगा है।
कैटल कैम्प
सब्सिड़ी के
लिये 61.65 मांगा
है...
श्री
अध्यक्ष: पिलानी से
आने वाले माननीय
सदस्य, यहक्या
कर रहे हैं ? आपको
सदन के नियमों
की जानकारी
नहीं है? हाथ
ऐसे कैसे कर
रहे है ? कंघा
लेकर बाल बना
रहे हैं आप, यह
क्या तरीका
है यहां पर।
कमाल करते हो
आप भी। हद हो
गयी किसी चीज
की, आपको यह भी
ध्यान नहीं
है।
डा.किरोड़ी
लाल मीणा: गौशाला
सब्सिड़ी के
लिये 61.65 कैटल
फीड सब्सिड़ी
के लिये 6.75,
मिनरल मिक्सचर्स
के लिये 50,ड्रिंकिंग
वाटर के लिये
भी हमने 120
करोड़ मांगा।
इस ढंग से 1544.73
करोड़ रुपये
मांगा और बीज
की कोस्ट
होती है 775, टोटल
2320 करोड़ रुपये
का हमने भारत
सरकार को
ज्ञापन दिया
है।
श्री
संयम लोढ़ा:***
श्री
जोगाराम पटेल: ***
श्री
शंकरसिंह
राजपुरोहित: ***
श्री
जोगेश्वर
गर्ग: ***
श्री
जालम सिंह
रावलोत: ***
श्री
रामनारायण
चौधरी(नेता,
प्रतिपक्ष):
अध्यक्ष
महोदय, मैं दो
मिनट में आपके
विचारार्थ एक
बात प्रस्तुत
कर रहा
हूं। आपका जन्म
हुआ किसारी
में, आप शादी
होकर गयी
पातोसरी में...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: मेरीसमझ
में नहीं आ
रहा है आपको
हो क्या गया
है ? आपको हो क्या
गया है ?(व्यवधान)888888
श्री
रामनारायण
चौधरी: लेना देना
है, पूरी बात
तो सुनो। कोई
बात हुई क्या
? दया करो मेरे
ऊपर। मैं आपसे
हाथ जोड़ता
हूं दया करो ।
श्री अध्यक्ष: What has happened to
you? प्रतिपक्ष
के नेता What has happened to you I could not understand.
श्री
रामनारायण
चौधरी: मैं कोई गलत
बात नहीं
करूंगा..
श्रीअध्यक्ष:
क्यों आप इन्हें
चढ़ाकर फालतू
की बात करवा
रहे हैं ? आप
इन्हें
चढ़ाकर फालते
की बात यहां
करवा रहे हैं
अपने
प्रतिपक्ष के
नेता से। यह
क्या बात हुई
? मैं कहां जन्मीं,कहां
शादी होकर गयी
? क्या है यह ?
यह बयान करने
की क्या आवश्यकता
है यहां ?क्या
आवश्यकता
पड़ गयी
माननीय
प्रतिपक्ष के
नेता ?
श्री
रामनारायण
चौधरी: भैंरोसिंह
जी शेखावत
खाचरियावास
के हैं हमारे
महामहिम उप
राष्ट्रपति
महोदय।
महाराजा
जयसिंह ने ही
इस जयपुर को
बसाया था।(व्यवधान)
श्री
अमराराम(धोद): ***
श्री
लक्ष्मीनारायण
दवे: ***
श्री
रामनारायण
चौधरी: इसमें
अपराध क्या
हो गया ?मुझे
बताओ, आप किस
बात का विरोध
कर रहे हो ? मैं
अगर गलत बोलता
हूं तो आप
मेरा गला पकड़
लेना। आप बात
तो सुनो मेरी।
श्री
अध्यक्ष: आप लोग
चढ़ा रहे हो
इनको ख्वामखाह
में । मैं
आपके हाथ
जोड़ती हूं आप
मेरा बखान न
करें। मेरा
बखान न करें।
आप बैठ जाएं।
श्री
रामनारायण
चौधरी: मैं नहीं
बोलूंगा गलत
कुछ भी। मैं
गलत कुछ नहीं
बोलूंगा, मेरी
सारी
कार्यवाही
निकाल देना,
मैं कह दूंगा
सब निकाल दो।
श्री
अध्यक्ष: मैं आपसे
कह रही हूं, आप
बैठ जाएं। मैं
आपसे निवेदन
कर रही हूं
कृपापूर्वक
आप बिराज
जाएं, मेरा
बखान, मैं
कहां जन्मी,
कहां शादी
हुई, यह न करें
तो अच्छा है।
मैं जो कुछ
हूं यही...
श्री
रामनारायण
चौधरी: इस राजस्थान
का और
झुंझुनूं
जिले का इसमें
फायदा होगा।
श्री
अध्यक्ष: क्या कर
रहे हो ? आप भी
क्यों बावली बात
करवा रहे हो ? क्या
मतलब है ? I would not allow you.
श्री
जोगेश्वर
गर्ग: ***
श्री
रामनारायण
चौधरी: मैं आपका
बखान नहीं कर
रहा हूं। मैं
आपका बखान
नहीं करूंगा,
मैं वादा करता
हूं मैं आपका बखान
नहीं करूंगा।
मेरे जिले के
हित के लिये मैंने
आपका श्रीमती
सुमित्रा
सिंह जी का
जिक्र किया
है, अध्यक्ष
जी का नहीं
किया है। श्रीमती
सुमित्रा
सिंह जी का
जन्म स्थान
एक जगह है,
ससुराल दूसरी
जगह है। मान्यवर,
आप हमें यह कह
दीजिये आपके
दोनों गांवों के
अन्दर फसल
अच्छी है क्या
?
श्री
अध्यक्ष: क्या है ?
श्री
रामनारायण
चौधरी: फसल पिछले
रबी और खरीफ
की अच्छी है
और गिरदावरी
ठीक हुई है
आपके क्षेत्र की
तो मैं सब बात
विदड्रा करता
हू।
डा.सी.पी.जोशी: ***
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: ***
डा.किरोड़ी
लाल मीणा: 16.86 लाख
मीट्रिक टन जो
हमने गेहूं
मांगा उसमें मात्र
हमको 2 लाख
मीट्रिक टन गेहूं
मिला है। एक
और जानकारी
मैं सदन को
देना चाहता
हूं कि
राजाखेडा से
आने वाले
माननीय सदस्य
और नाथद्वारा
से आने वाले
माननीय सदस्य
ने हमसे हिसाब
पूछा था।
ssy/akt/1210/2b
पहली
बार राजस्थान
सरकार ने स्टेट
प्लान के
अंदर उस पेटे 50
करोड़ का फंड
रखा था ।
डॉ.सी.पी.जोशी: ***
श्री
महावीर
प्रसाद:***
श्री
अध्यक्ष: खड़े हो
गये(व्यवधान)
डॉ.सी.पी.जोशी: ***
श्री
रामनारायण
चौधरी(नेता,प्रतिपक्ष):
भारत सरकार
द्वारा भेजा
हुआ फंड
करोड़ों
रूपया पडा हुआ
है । इस साल का
आपके पास और आ
रहा है इसके बावजूद
भी माननीय
मंत्री महोदय
आपने किसी भी
गांव में,
किसी भी जिले
में कोई काम
चालू नहीं किये
हैं फेमिन के
अंदर । यह
आपने महा अन्याय
किया है देश
के साथ में ।
आपने राजस्थान
को धोखा दिया
है । यह सरकार
इस लायक ही
नहीं है कि इस
जगह पर यह रहे
। हम इसकी
भर्त्सना
करते हैं और
इसके विरोध
में कि आपने
कोई काम चालू
नहीं किये
हैं, सारा रूपया
लेकर बैठे हैं
और उसका दूसरे
कामों में दुरूपयोग
कर रहे हैं और
फालतू में कह
रहे हैं कि
भारत सरकार
हमें पैसे
नहीं दे रही
है । ऐसा आडम्बर
आप क्यों
रचते हैं । हम
इसके खिलाफ
बर्हिगमन
करते हैं ।
(कांग्रेस
के माननीय
सदस्यों
द्वारा सदन से
बर्हिगमन)
डॉ.किरोडी
लाल: सुन तो
लें...(व्यवधान)
श्री
सांवरलाल: ***
डॉ.बुलाकीदास
कल्ला: ***
श्री
महावीर
प्रसाद: ***
श्री
अध्यक्ष : बैठ जायें
अब माननीय
मंत्री जी...(व्यवधान)
डॉ.किरोड़ी
लाल: 32.5 लाख
मीट्रिक टन
तत्कालीन
सरकार को दिया
था जिससे
बेशुमार काम
खुले थे और अब
यह कह रहे हैं
कि अकाल के
काम नहीं चालू...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष : माननीय
मंत्री जी,
माननीय
मंत्री जी ।
डॉ.किरोड़ी
लाल: जनवरी, 2006 में
जो सीलिंग हैं
25 हजार उसमें 2 लाख
23 हजार काम कर
रहे हैं ।
फरवरी में 3
लाख 50 हजार की सीलिंग
हैं जिसमें 2
लाख 18 हजार हैं
।
श्री
अध्यक्ष: माननीय
मंत्री जी,
पर्ची के माध्यम
से जो प्रश्न
जौहरी बाजार
से आने वाले
माननीय सदस्य
ने उठाया था
उसके बारे में
आपको कोई जवाब
देना नहीं है
तो आप किसे
जवाब दे रहे
हैं । क्या
मतलब है ...(व्यवधान)
डॉ.किरोडी
लाल: उसी का तो दे
रहा हूं ।
भारत सरकार
कोई मदद नहीं
कर रही है ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: कह दिया ना
उन्होंने,
देखिये,
माननीय सदस्य
ने वह बात कह
दी (व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड: इन्होंने
कह दिया कि
मार्च में चार
लाख लोगों को रोजगार
दे रहे हैं ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: यह अकाल
राहत की बात
कर रहे हैं और
अकाल ग्रस्त
होने की बात
कर रहे हैं ।
जब यह सुनना
ही नहीं चाह
रहे हैं तो आप
क्या बोल रहे
हैं, क्या
मतलब है (व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: अध्यक्ष
महोदय, एक वह
समय था इस
राजस्थान
में अकाल पडा
था और 246 करोड़
रूपये अटल
बिहारी वाजपेयी
ने दिये थे ...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: पर्ची के
माध्यम से
माननीय सदस्य
ने पूरा दिया
है ...(व्यवधान)
श्री
रामप्रताप
कासनियां: अध्यक्ष
महोदय, सदन को
चलाना है तो
एक चीज की व्यवस्था
कर दें कि जो
माननीय सदस्य
हो-हल्ला करे
उसका प्रेस
में, मीडिया
में जिक्र
नहीं हो तो
हाउस में बहुत
शांति रहेगी,
यही मेरा निवेदन
है ।
श्री
अध्यक्ष: मोहम्मद
माहिर आजाद ।
मोहम्मद
माहिर आजाद(नगर): अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से माननीय
शिक्षा मंत्री
जी और शिक्षा
राज्य मंत्री
का ध्यान राजस्थान
में (व्यवधान)
यह क्या हो
रहा है, यह
मेरा सोच है,
मेरी पार्टी
पूछेगी कि आप
पूछेंगे ? Who are you to ask me?
श्री
अध्यक्ष: आप इनसे
बात नहीं करे
मुझसे बात
करें ।
मोहम्मद
माहिर आजाद: अध्यक्ष
महोदय, यह
मुझसे पूछ रहे
हैं कि आप
बाहर क्यों
नहीं गये। यह
इनका काम है
क्या ?
श्री
अध्यक्ष: वह कुछ भी
कहें लेकिन आप
इधर संबोधित
करें । उन्हें
कहने दीजिये
अगर कुछ कहते
हैं वो । आप
दरगुजर करें
उन्हें ।
मोहम्मद
माहिर आजाद: हां, बकने
दूंगा, अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से माननीय
शिक्षा
मंत्री जी और
शिक्षा राज्य
मंत्री का ध्यान
राजस्थान
में बेरोजगार
प्रशिक्षित
शारीरिक शिक्षकों
की नियुक्ति
के संबंध में
दिलाना चाहता हूं
। इन बेरोजगार
शारीरिक
शिक्षकों की
नियुक्ति की
जाये । माननीय
शिक्षा राज्य
मंत्री
वासुदेव
देवनानी जी ने
अजमेर में,
पढ़ रहा हूं
मांग पत्र है,
अध्यक्ष
महोदय, यह क्या
है, कुछ लोगों
के तो बीमारी
हो गयी है क्या
। मैं आपसे
निवेदन कर
रहा
हूं ।
श्री
अध्यक्ष: आपको
पढ़ने की आवश्यकता
होनी ही नहीं
चाहिए...(व्यवधान)
मोहम्मद
माहिर आजाद: मैं पढ़
रहा हूं कि
कौनसी तारीख
का है यह भी
नहीं पढ़ूंगा,
मुझे पढ़ना
सिंखा रहे हैं
। आपसे तीन डिग्री
ज्यादा पढ़ा
हुआ हूं (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आपको
पढ़ने की कहां
आवश्यकता है
(व्यवधान)
मोहम्मद
माहिर आजाद: मैं अनपढ़
आदमी हूं
इसलिए पढ़ रहा
हूं । महावीर
जी, मैं अनपढ़
आदमी हूं
इसलिए पढ़ रहा
हूं ।
श्री
महावीर
प्रसाद: आप क्या
हो...(व्यवधान)
मोहम्मद
माहिर आजाद: आपके जैसे
बिना नापे एक
मीटर कपड़े को
चारों तरफ से
नापकर और
दलितों और
आदिवासियों
के पैसे नहीं
लिये हैं
मैंने ।
श्री
महावीर
प्रसाद: ऐसा है, मैं
कोई जमीन नहीं
नापता हूं जो
सरकारी जमीन
हो और उस पर
कब्जा कर लूं
। मैं ऐसा
नहीं करता हूं
।
मोहम्मद
माहिर आजाद: ठीक है,
हिम्मत
चाहिए हिम्मत
।
श्री
महावीर
प्रसाद: हिम्मत चाहिए,
वह हिम्मत
आपमे हैं,
आपको मुबारक
हो ।
श्री
अध्यक्ष: क्या कह
रहे हों । क्या
कह रहे हो आप ।
क्या बोल रहे
हो आप ।
मोहम्मद
माहिर आजाद: कह रहे हैं
कब्जा कर रखा
है । मेरे ऊपर
कब्जा करने
का आरोप लगा
रहे हैं ।
श्री
अध्यक्ष: सरकारी
जमीन कब्जा
करने में हिम्मत
चाहिए, क्या
बोल रहे हो आप
।
मोहम्मद
माहिर आजाद: इन्होंने
करी होगी ...(व्यवधान)
अध्यक्ष
महोदय,
बेरोजगार
शारीरिक
शिक्षकों की
नियुक्ति की
जाये । माननीय
शिक्षा राज्य
मंत्री
वासुदेव
देवनानी ने
अजमेर में यह
घोषणा की थी
कि स्थानीय
निकाय के
चुनाव संपन्न
होने के बाद
हम शारीरिक
शिक्षकों की
भर्ती की
प्रक्रिया
प्रारंभ करवा
देंगे । अध्यक्ष
महोदय, आज
राजस्थान
में लगभग 8563
शारीरिक शिक्षकों
की वेकेन्सी
है। राजस्थान
में आठ कॉलेज हैं,
जोधपुर, बारां,
उदयपुर, केकडी,
जामडौली, सूरोठ,
बीकानेर और
अजमेर और इसके
अलावा चारों
विश्वविद्यालयों
में भी
शारीरिक
शिक्षकों की
ट्रेनिंग की
जाती है । सन् 2000
में जब पिछली
कांग्रेस की
सरकार थी माननीय
बी.डी. कल्ला
जी शिक्षा
मंत्री थे तब
लगभग 1100
शारीरिक शिक्षकों
की भर्ती हुई
थी । उसके बाद 5-6
वर्ष निकल गये
आज तक शारीरिक
शिक्षकों की
कोई भर्ती
नहीं की गयी
है । लगभग 50
हजार शारीरिक
शिक्षक राजस्थान
में बेरोजगार
है । उन्होंने
दो महीने तक
स्टेच्यु
सर्किल पर
धरना भी दिया
और आमरन अनशन
भी किया । जब आमरण
अनशन किया तो
माननीय शिक्षा
मंत्री जी
घनश्याम जी
तिवाडी और
शिक्षा राज्य
मंत्री जी ने
आश्वासन
देकर धरना
समाप्त
करवाया कि हम
बहुत जल्दी
शारीरिक
शिक्षकों की
भर्ती कर
देंगे ।
अध्यक्ष
महोदय, यह बात
सही है कि भारत
और राजस्थान
जैसे राज्य
में जहां पर
श्रम का बहुत
जोर था । श्रम
किया जता था ।
आज एक तरह तो
बाबा रामदेव
जी के प्रयासों
से हम योग और
शारीरिक
शिक्षा की बात
कर रहे हैं और
दूसरी तरफ आज इतनी
बड़ी संख्या
में शारीरिक
शिक्षकों के
पद रिक्त
पड़े हैं ।
हमने कम्प्लसरी
कर दिया कि
आठवीं तक की
हर स्कूल में
एक शारीरिक
शिक्षक होगा ।
स्वयं खेल
मंत्री जी ने
भी घोषणा की
है कि राजस्थान
में खेलों को बढावा
देने के लिए
ग्राम स्तर
पर शारीरिक
शिक्षकों की
नियुक्ति
होनी चाहिए इसलिए
अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से यहां पर
दोनों शिक्षा
मंत्री और
शिक्षा राज्य
मंत्री जी
बैठे हैं मैं
यह निवेदन
करना चाहता
हूं कि आप स्वयं
माननीय घनश्याम
जी यह कहते
हैं कि कर्म
वाणी और आचरण
में समरूपता
होनी चाहिए ।
जब आपने घोषणा
की थी और आपने
विश्वास
दिलाया था कि
बहुत जल्दी
शारीरिक
शिक्षकों की
भर्ती की
प्रक्रिया
चालू की
जायेगी । आपने
कल कहा कि 7200
शिक्षकों की
आप नियुक्ति
करने जा रहे
हैं । उसके
साथ ही मेरा
निवेदन है कि
आप शारीरिक
शिक्षकों की
भी नियुक्ति
करें और ग्रामीण
क्षेत्र के विद्यार्थियों
को भी उनकी
प्रतिभा
निखरने का और
शारीरिक शिक्षक
जो 50 हजार के
करीब
बेरोजगार हैं
उनमें से कई
ओवर एज होने
जा रहे हैं
उनकी भी
नियुक्ति की
प्रक्रिया
प्रारंभ करें
। आपने कहा था,
कहा था कि नहीं
। कहां था अजमेर
में ।
श्री
अध्यक्ष: धन्यवाद
।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी(शिक्षा
मंत्री):
सरकार इस समस्या
से अवगत है ।
श्री
अध्यक्ष: श्री
मांगीलाल गरासिया ।
श्री
मांगीलाल
गरासिया(गोगुन्दा):
अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से वन मंत्री
एवं गृह
मंत्री जी का
ध्यानाकर्षित
करना चाहूंगा
कि पंचायत बेकरिया
में गांव
पीलका में उदा
पिता नंगा गरासिया
का मामला है
और गांव पीलका
में उदा के
नाम पाँच बीघा
कृषि भूमि है ।
jyg/akt/436/1220/2c
माननीय अध्यक्ष महोदय, जिस
भूमि के माध्यम से उदा पुत्र नंगा गरासिया अपने 9 सदस्यीय परिवार का भरण पोषण कर
रहा था, उस पर जब उसने अपनी फसल बोई और फसल बोने के साथ में राजस्व मिसल संख्या
110/1962 से उक्त भूमि का नियमन प्रार्थी के नाम करने का आदेश भी प्रदान हुआ, 1962
में। माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से यह निवेदन करना चाहूंगा कि
इस भूमि पर जब फसल हुई
और फसल होते ही 17.02.2006 को उस भूमि पर वन विभाग के
अधिकारी मौके पर पहुंचे और फोरेस्टर जय सिंह, गार्ड मन्नाराम करके उन्होंने इस
पर जो फसल थी उस फसल को उखाड़ले की बात की। उखाड़ने के लिए जब उस परिवार लोगों ने
मना किया तो वह फोरेस्टर माना नहीं और जबरन उनको लताड़ देने का काम किया, गाली
गलौच देने का काम किया। माननीय अध्यक्ष, महोदय वहां पर सरसो भी थी, उसमें आग लगा
दी और आग लगाने से उसका पूरा मकान जल गया और वहां पर जो अनाज और बाकी सामान था वह पूरा
जलकर राख हो गया,
उसमें कुछ रुपए भी थे वे भी जल गए। माननीय अध्यक्ष महोदय, मामला
गम्भीर है। माननीय अध्यक्ष महोदय, उदा अपने
नौ सदस्यीय परिवार को लेकर असहाय हो गया और इस स्थिति में अब तकलीफे सह रहा है और
दर-दर की ठोकरें खा रहा है। जब थाने में गया तो थानाधिकारी ने उसकी नहीं सुनी। इस तरह के गम्भीर मसले में उन्हें करीबन 1
लाख रुपए तक का नुकसान हो गया और वह परिवार बेघर की तरह घूम रहा है।
माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं
आपके माध्यम से माननीय वन मंत्रीजी से अनुरोध करूंगा क्योंकि आपका हृदय उदारवादी
है इसलिए आप इसको देखकर पूरी तहकीकात करवाने का काम करें। वास्तव में एक तरह का
अकमर्ण्यता का काम हुआ है और उसके साथ ज्यादती
हुई है। मैं माननीय गृह मंत्रीजी से भी अनुरोध करूंगा क्योंकि वे भी उदयपुर ज़िले
के हैं और उदयपुर ज़िले का मामला होने के नाते गरीब असहाय आदिवासी भाई को मुआवजे
के रूप में एक तरह से पूरी सहायता मिले।
अध्यक्ष महोदय, मेरा आपके
माध्यम से वन मंत्रीजी से अनुरोध है कि आप इसकी पूरी तहकीकात कराएं। वन अधिकारियों
ने एक तरह से उस असहाय व्यक्ति के साथ ज्यादती की है...।
श्री अध्यक्ष: वन भूमि पर अतिक्रमण तो नहीं कर रखा था, वन भूमि पर काश्त
तो नहीं कर रहा था?
श्री
मांगीलाल गरासिया: वन भूमि पर नहीं था, वन भूमि पर काश्त नहीं कर
रहा था इसलिए मैं अनुरोध कर रहा हूं कि इस भूमि पर जिस तरह से फसल उगा कर पूरे
परिवार का भरण पोषण कर रहा था उसके साथ बहुत ज्यादती और अन्याय हुआ है, इस अन्याय
से उसे राहत दिलाने की माननीय वन मंत्रीजी से अनुरोध करूंगा।
श्री अध्यक्ष: श्री बहादुर सिंह गोदारा। वन मंत्रीजी क्या कह रहे हैं?
श्री लक्ष्मीनारायण दवे (वन और पर्यावरण मंत्री): माननीय अध्यक्ष
महोदय, माननीय सदस्य ने जो सूचना दी है, अगस्त माह में इस उदा ने दूसरी बार इस
जमीन पर अतिक्रमण
किया। वहां की वन सुरक्षा समिति और वन विभाग के कर्मचारियों ने 17-18 फरवरी को इनका अतिक्रमण हटाया, जब
अतिक्रमण हटाया तो उदा ने खुद की अपनी जो घास की झोपड़ी बनी हुई थी, उसको आग लगा
दी और यह दिखाने की कोशिश की कि यह आग वन विभाग के कर्मचारियों द्वारा लगाई गई है और
वन सुरक्षा समिति के सदस्यों के साथ मारपीट की। बेकरिया थाने के अंदर वन विभाग के
कर्मचारियों ने सी आर नम्बर 20/06, इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। माननीय सदस्य
अगर यह बताते कि 1962 के अन्दर इनके रेगूलराइजेशन का कोई मामला है तो मैं इस
मामले की जांच करवा दूंगा, बाकी अतिक्रमण जिस हिसाब से लगातार वन भूमि पर हो रहे
हैं, इन अतिक्रमणों को रोकने के लिए सख्त से सख्त कार्यवाही की जाएगी।
श्री मांगीलाल गरासिया: अध्यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहूंगा कि यह
सरनोट की जमीन का मामला था, वह इस भूमि पर गैर खातेदार के
रूप में काश्त कर रहा
था। मैं मानता हूं कि यह जमीन विभाग की नहीं थी और जिस तरह से उसके साथ अन्याय
हुआ उसको देखने का काम करें।
श्री अध्यक्ष: स्थान ग्रहण करें। पर्ची पर उन्होंने जवाब दे दिया है।
श्री बहादुर सिंह गोदारा।
श्री नन्दलाल मीणा (प्रतापगढ़): अध्यक्ष महोदय, एक मिनट केवल। अध्यक्ष
महोदय, उदयपुर सम्भाग में वन विभाग द्वारा यह आम बात हो गई है। मैं आपके माध्यम
से मंत्री महोदय से जानना चाहता हूं कि किसी अतिक्रमी ने जंगलात की जमीन पर कब्जा
किया है तो उसका झोपड़ा जलाना, उसकी चल और अचल सम्पत्ति को नष्ट करना आपके फोरस्ट
कानून में आता है? प्रतापगढ़ से लेकर कोटड़ा तक इस तरह से आदिवासियों के झोपड़े
जलाने में जंगलात विभाग के कर्मचारी माहिर हो गए हैं इसलिए मंत्री महोदय, आप इसकी
व्यवस्था करें कि कम से कम अगर अतिक्रमी है 1980 के पहले के, मैं यह कहना चाहता
हूं कि 1980 के पहले के जो अतिक्रमी थी उन अतिक्रमियों के विरुद्ध जो छानबीन कमेटी
बनी थी उसमें वन विभाग की मनमानी हुई है, वह लोग आज बच गए हैं जिनके 1980 के पहले
भी कब्जे थे। इस बारे में आप एक कमेटी जिसमें जनप्रतिनिधि भी हों, पुन: मूल्यांकन
कराएं ताकि आदिवासियों के सामने जो अहम सवाल है जंगलात की जमीन पर कब्जे का उसको
किस तरह से सुलझाया जा सकता है उसके बारे में व्यवथा करें । गरीबों के झोपड़े
जलाने वाली बात, उनको प्रताडि़त करने वाली बात हो रही है यह हमारे लिए निन्दनीय
है।
श्री लक्ष्मीनारायण दवे: माननीय अध्यक्ष महोदय, 1980 के पहले के राजस्थान
में 5466 ऐसे प्रकरण हैं उनको राज्य सरकार ने नियमित करने के लिए भारत सरकार को
भेजा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण यह मामले पेण्डिग पड़े हैं और जहां तक यह
प्रकरण है, इस प्रकरण में अतिक्रमी ने लगातार दूसरी बार एन्क्रोचमेण्ट किया है
और इस एन्क्रोचमेण्ट को रोकने के लिए जब उस अतिक्रमी के खिलाफ बेगरिया थाने में
मुकदमा दर्ज किया तो रिएक्शन के तौर पर उसने अपना झोपड़ा जलाया। अगर वन विभाग के
किसी अधिकारी और कर्मचारी ने यह कृत्य किया है, इसमें अगर कोई सत्यता है तो इसकी
जांच करवा दूंगा। अगर वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी किसी के साथ इस तरह का कोई कृत्य करते हैं तो आप मुझे इसकी
जानकारी दें और जांच करने पर अगर वास्तव में वह दोषी पाया जाएगा तो निश्चित रूप
से उसे पनिश किया जाएगा। बाकी कोई नया एन्क्रोचमेण्ट वन विभाग के अन्दर राजस्थान में होगा तो उसे बर्दाश्त नहीं किया
जाएगा।
श्री अध्यक्ष: ठीक है। श्री बहादुर सिंह गोदारा।
श्री बहादुर सिंह गोदारा: अध्यक्ष महोदय, मैं आपका ध्यान मेरे विधान
सभा क्षेत्र में अकाल की भयंकर समस्या की और दिलाना चाहता हूं। मेरा नोहर विधान
सभा क्षेत्र ज्यादातर बारानी है। बहुत ही थोड़े क्षेत्र में सिंचाई की व्यवस्था
है लेकिन उसमें भी पूरा पानी नहीं मिलता। बुवाई के बाद लोगों को रेगूलर पानी नहीं
मिला इसलिए भी फसल अच्छी नहीं हुई।
डा. एन एस गुर्जर (टोडारायसिंह): ऑन ए पाइण्ट ऑफ ऑर्डर।
डॉ. बुलाकीदास कल्ला (बीकानेर): जीरो आवर में पाइण्ट ऑफ ऑर्डर नहीं
होता।
डॉ. एन एस गुर्जर: हां, हां, कल्लाजी, आप बैठिए। मैं बता रहा हूं। सुनो
एक मिनट।
डॉ. बुलाकीदास कल्ला: पाइण्ट ऑफ ऑर्डर जीरो ऑवर में नहीं होता।
डॉ. एन एस गुर्जर: हां, पाइण्ट ऑफ ऑर्डर, जीरो ऑवर में, आप सुनिए तो
सही, क्यों नहीं हो सकता? पचासों बार उठा है।
डॉ बुलाकीदास कल्ला: इस पर व्यवस्था दी हुई है अध्यक्ष महोदय की।
डॉ. एन एस गुर्जर: मैं बताऊं आपको, पाइण्ट ऑफ ऑर्डर जीरो ऑवर में कितनी
बार उठा है।
डॉ. बुलाकीदास कल्ला: इस पर अध्यक्ष महोदय की व्यवस्था दी हुई है।
डॉ. एन एस गुर्जर: मैं बताऊ, पाइण्ट ऑफ ऑर्डर जीरो ऑवर में कितनी बार
उठा हुआ है।
श्री अध्यक्ष: जीरो ऑवर में पाइण्ट ऑफ ऑर्डर नहीं होता। दो मिनट का समय
है, उसके बाद उठा लीजिए।
डॉ. एन एस गुर्जर: इसी से सम्बन्धित है, एक मिनट आप विराजिए।
श्री अध्यक्ष: नो, आई विल नोट अलाउ।
डॉ. बुलाकीदास कल्ला: फिर हम भी उठाएंगे।
डॉ. एन एस गुर्जर: आप बोल लीजिए, इसके बाद बोल लूंगा।
श्री बहादुर सिंह गोदारा: माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे क्षेत्र में
रेगूलर पानी नहीं मिलने की वजह से सिंचित फसलें भी बरबाद हो गई और पानी के अभाव
में लोगों ने अरण्ड और सरसों की फसल बोई थी वह सर्दी की वजह से बिलकुल बरबाद हो
गई। सिंचित एरिये में भी भयंकर अकाल है, बारानी क्षेत्र में न साढि़या बीजी गई और
न सावणिया बीजी गई और यह हालत मेरे क्षेत्र की लगातार सात साल से होती आ रही है।
Gpc/akt/1230/2d
लेकिन
अभी तक वहां
किसी किस्म
की कोई भी
अकाल सहायता
नहीं खोली गई है।
श्री
अध्यक्ष: यहां अकाल
राहत
मंत्रीजी भी
नहीं हैं।
श्री
बहादुर सिंह
गोदारा: अध्यक्ष
महोदय, मेरा
आपके माध्यम
से सरकार से
निवेदन है कि
इस तरह के
क्षेत्र में
जहां पूरी की
पूरी फसल
बर्बाद हो गई
हो या बुवाई
नहीं हुई हो
ऐसे क्षेत्र
के अंदर शीघ्र
अकाल सहायता कार्य
खोले जाएं और
लोगों को राहत
दी जाए। अकाल
सहायता कार्य
खोलने के लिए
मेरा एक
निवेदन है कि
उस क्षेत्र के
अंदर खेतों के
अंदर जो कुण्ड
या डिग्गियां
बनवायी जाएं,
जहां नहरों का
सर्वे नहीं
हुआ है, वहां नहरों
का सर्वे
कराकर खाले,
नाले बनाये
जाएं और लोगों
को राहत दी
जाए। (समय
समाप्ति सूचक
घण्टी) एक
मिनट में मैं
मेरी बात पूरी
करता हूं। मेरे
क्षेत्र के
किसान 6.2.06 से
लगातार भूख
हड़ताल पर
बैठे हुए हैं,
आंदोलन कर रखा
है। कल नोहर
बंद था और
उसके बाद
किसानों ने
आमरण अनशन का
आह्वान किया
है। आज तक
किसी भी सरकारी
कर्मचारी ने
जाकर किसानों
की बातें नहीं
सुनी, किसानों
को राहत देने
की कोशिश नहीं
की। इसलिए
मेरा सरकार से
अनुरोध है कि
उन धरने पर
बैठे हुए काश्तकारों
की बात नहीं
सुनी गयी तो
वे आमरण अनशन
पर बैठेंगे।
उसकी सारी
जिम्मेदारी
सरकार की
होगी। अंत:
मेरा निवेदन
है...
श्री
अध्यक्ष: हो गई आपकी
बात।
श्री
बहादुर सिंह
गोदारा: उस क्षेत्र
के अंदर
शीघ्रातिशीघ्र
सहायता कार्य
खोले जाएं।
श्री
अध्यक्ष: माननीय
सदस्यगण,
मुझे आपको यह
सूचित करना है
कि अब जो साढ़े
पाँच घण्टे
की बहस होगी...
श्री
महावीर
प्रसाद जैन: एक मिनट मैं
बोल सकता हूं,
आपकी इजाजत हो
तो?
श्री
अध्यक्ष: क्या
बोलेंगे आप?
श्री
महावीर
प्रसाद जैन: आप जो समय का
आवंटन कर रहे
हैं उसके बारे
में आपका आदेश
शिरोधार्य है,
किसी को एतराज
का सवाल ही
नहीं है। मैं
कल यह निवेदन
करना चाह रहा
था कि भारतीय
जनता पार्टी
के माननीय
सदस्यों को
बहुत कम समय
मिला है..
श्री
अध्यक्ष: मैं वही
बता दूंगी,
जितना आपकी
पार्टी का समय
है वह सब
दूंगी आपको।
मुझे आपको यह
सूचित करना है
कि अब हमारे
पास केवल
साढ़े पाँच
घण्टे है
जिसमें
वाद-विवाद को
समाप्त करना
है, फिर मुख्यमंत्रीजी
का जवाब होगा।
वैसे तो पाँच
बजे की सीमा
तय की गई थी
बी.ए.सी. में,
लेकिन मैंने
इसे आधा घण्टा
बढ़ाकर साढ़े
पाँच कर दिया।
तो साढ़े पाँच
घण्टे बचे
हैं, अब छह बजे
तक कर दिया, छह
बजे उनका रिप्लाई
आएगा। अब जो
समय है उसमें
भारतीय जनता
पार्टी का समय
है 3 घण्टे 19
मिनट।
इण्डियन
नेशनल
कांग्रेस का
समय है एक घण्टा
31 मिनट।
इण्डियन
नेशनल लोकदल
का समय है 7 मिनट।
जनता दल
(यूनाइटेड) का
है 3 मिनट।
बहुजन समाज पार्टी
का है 3 मिनट। भारतीय
कम्युनिस्ट
पार्टी
मार्क्सवादी
का है 2 मिनट।
लोक जनशक्ति
पार्टी का है 2 मिनट।
राजस्थान
सामाजिक न्याय
मंच का है 2
मिनट और
निर्दलीय का
है 21 मिनट। अब
इस हिसाब से
आप अपनी-अपनी
बात कह सकते
हैं।
श्री
फतेह सिंह: अध्यक्ष
महोदय, जनता
दल तो कभी
बोला ही नहीं
है। 15 मिनट आपने
दिये थे उसके
बाद में आपने 3
मिनट बताए। हमारा
सदस्य तो कोई
बोला ही नहीं।
आपके सदस्य
ज्यादा संख्या
में हैं यह
बात तो सही
है।
श्री
अध्यक्ष: माननीय
सदस्य, आप
मेरी बात
सुनें। इसलिए
कि कल पूरे
समय यदि चर्चा
होती तो जो
समय आपको
मिलना चाहिए
था 15 मिनट
मिलते, लेकिन
चूंकि अब सदन
का समय
वाद-विवाद के
लिए साढ़े
पाँच घण्टे
ही रह गया तो
साढ़े पाँच
घण्टे के
हिसाब से संख्या
से हिसाब से
नम्बर आता है
और संख्या के
हिसाब से यही
समय आया है। अब
मैं इस पर क्या
कर सकती हूं?
डा.
सी.पी. जोशी: आप टाइम
बढ़ा दो।
श्री
अमराराम (धोद): अध्यक्ष
महोदय, सवाल
यह है कि दो
दिन तक पहले
बहस हुई है
जिसमें सत्ता
पक्ष भारतीय
जनता पार्टी
और प्रमुख
प्रतिपक्ष
कांग्रेस के
सदस्य बोले
हैं। जो छोटे
दल हैं उसमें
एकाध साथी ने
भाग लिया है।
तो निश्चित
रूप से जिन्होंने
भाग लिया है
दो दिन तक कल
नहीं हुई किसी
भी कारण से
डेढ घण्टे ही
चर्चा हुई है,
लेकिन उससे
पहले दो दिन
तक पूरे टाइम
सात बजे तक के
लिए चर्चा हुई
है। इसलिए
हमारा निवेदन
है कि आपका
आदेश तो
शिरोधार्य
है..
श्री
अध्यक्ष: आप समय
मांग लें
बहुजन समाज
पार्टी, लोक
जनशक्ति से
मांग लें तो
आपका समय हो
सकता है।
श्री
अमराराम (धोद): अध्यक्ष
महोदय, जिन्होंने
व्यवधान
किया है उनको
सज़ा मिलनी
चाहिए। जिन्होंने
व्यवधान
नहीं किया,
जिन्होंने
समय नष्ट
नहीं किया
उनका समय क्यों
काटा जाए? समय
तो उनका काटा
जाना चाहिए। कम्युनिस्ट
पार्टी
(मार्क्सवादी),
जनता दल ने,
इण्डियन
नेशनल लोकदल
ने तो समय
बर्बाद नहीं
किया है। जिन्होंने
समय बर्बाद
किया है उनका
समय काटा जाए।
जो तीन दिन
में नहीं बोले
उनका समय तो
वही रहना
चाहिए। हमारा आपसे
निवेदन है
जिन्होंने
कल बहस नहीं
की उसके कारण
उनका समय काटा
जाना चाहिए।
जिसने अपराध
किया उसको
सज़ा मिलनी
चाहिए। मैं
समझता हूं
इससे बेहतर
होगा (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: श्रीमती
उषा पूनिया।
श्री
संयम लोढ़ा: माननीय अध्यक्ष
महोदय, ये
पार्लियामेंट्री
मिनिस्टर
पान खा रहे
हैं हाउस के
अंदर।
श्री
अध्यक्ष: अब कोई
नहीं। मैंने
नाम पुकार
लिया उषा
पूनिया।
श्री
संयम लोढ़ा: हाउस के
अंदर
पार्लियामेंट्री
मिनिस्टर
पान खा रहे
हैं या सुपारी
खा रहे हैं।
हाउस के अंदर
यह सुपारी खा
रहे हैं। आप
हाउस के अंदर
सुपारी खा रहे
हो यह गलत बात
हे।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: बिना कारण
से आरोप लगा
दिये।
श्री
संयम लोढ़ा: यह आप जैसे
वरिष्ठ सदस्यों
से अपेक्षा
नहीं है। आप
पार्लियामेंट्री
अफेयर्स
मिनिस्टर
हैं और आप ऐसा
करें। अभी
मुंह चला रहे
थे हाउस के
अंदर।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: अध्यक्ष
महोदय, यहां
तो बिना कोई
कारण से आरोप
लगा दिया।
श्री
हरिमोहन
शर्मा: माननीय
पार्लियामेंट्री
मिनिस्टर
साहब क्या
खाते और क्या
पीते हैं आप
ही क्यों
देखते हो
इनको।
श्री
अध्यक्ष: इतने
गंभीर विषय पर
बात हो रही थी
और आप कहां पान
और गुटके पर आ
गये फालतू
में।
श्री
संयम लोढ़ा: अध्यक्ष
महोदय, जब
आपने एक
प्रयास किया
था (..व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आप मुझसे
कोई बहस नहीं
कर सकते, स्थान
ग्रहण करें।
मैंने उन्हें
देखा और देखकर
मुझे बड़ा
अनुचित लगा कि
कंघा लेकर बाल
बना रहे हैं।
तो मैंने उसके
बारे में उनको
टोका और यदि
कोई चुपचाप
दूर से किसी
को बिना
दिखाये यों
करके कोई चीज
खा लेता है तो
उस पर कोई
आपत्ति नहीं
होती। सवाल यह
है कि
प्रदर्शन
करके खाये यह
होता है। उषा
पूनिया।
डा.
सी.पी. जोशी: इनको चैक
करवाओ। ये
निगल गये। (व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: ये डाक्टर
बैठे हैं,
इनसे चैक करा
दूं।
श्री
अध्यक्ष: अब आप स्थान
ग्रहण कर लें।
श्री
संयम लोढ़ा: माननीय अध्यक्ष
महोदय, अगर डा.
दिगम्बर
सिंह जी से
जांच नहीं हो
सकती हो तो
हमारे पास बैद
और डाक्टर
दोनों एक ही
आदमी है।
श्री
अध्यक्ष: श्रीमती
उषा पूनिया। सदन की मेज
पर रखे जाने
वाले
पत्रादि।
श्रीमती
उषा पूनिया (पर्यटन
राज्य
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपकी अनुमति
से कम्पनी
अधिनियम, 1956 की
धारा 619 (ए) के
अंतर्गत
राजस्थान
टूरिज्म
डवलपमेंट
कार्पोरेशन
लिमिटेड का
24वां वार्षिक
प्रतिवेदन
वर्ष 2002-2003 सदन की
मेज पर रखती
हूं।
श्री
अध्यक्ष: डा.
बुलाकीदास
कल्ला।
श्री
रामनारायण
चौधरी: आपने हमारा
टाइम बताया एक
घण्टा।
श्री
अध्यक्ष: अब वे
समिति के
प्रतिवेदनों
का उपस्थापन
कर रहे हैं वह
तो कर लेने
दें उन्हें
आप। आपका समय
मैंने बताया
एक घण्टा 31
मिनट।
डा.
सी.पी. जोशी: अध्यक्ष
महोदय, पाइंट
ऑफ आर्डर।
माननीय
मंत्री महोदय
ने जो
प्रतिवेदन
रखा है वह 2002 का
रखा है। अब चल
रहा है 2006-07। अध्यक्ष
महोदय, यह व्यवस्था
है एक साल का
ही डिले हो,
लेकिन अपने
पार्लियामेंट्री
सिस्टम में
अगर
कारपोरेशन की
रिपोर्ट को 4-4, 5-5 साल
के प्रतिवेदन
को आप रखेंगे
तो हम असेम्बली
में क्या
डिबेट करेंगे?
सरकार बदल गई,
नई सरकार आ गई,
पिछली सरकार
के प्रतिवेदन
को हम रख रहे
हैं, कम से कम
आप विभाग को
यह डाइरेक्शन
दें (..व्यवधान..)
हमने तो रखा
ही नहीं 25 साल
तक, यह कोई
आर्गुमेंट है
क्या? उससे
क्या तकलीफ
है? आप इम्प्रूव
करना चाहते हो
या हमने क्या
किया वह बातें
करना चाहते
हो? आप खड़े
होकर बोलें
यहां पर।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन: हम भी इम्प्रूव
कर रहे हैं।
डा.
सी.पी. जोशी: क्या इम्प्रूव
कर रहे हैं? Please don’t protect the wrong thing. आप अध्यक्ष
हैं या आप अध्यक्ष
हैं? मैं अध्यक्ष
महोदय से अनुमति
मांग रहा हूं.
अध्यक्ष
महोदय, आप
निर्देश दें।
श्री
अध्यक्ष: आपका
सुझाव ठीक है,
सरकार इस बारे
में सचेत रहे
कि भविष्य के
अंदर गत वर्ष
का..
श्रीमती
उषा पूनिया: आगे से इसका
ध्यान
रखेंगे।
श्री
अध्यक्ष: यह 2005-06 चल रहा
है। विगत वर्ष
2004-2005 तक का रख
दिया करें, यह
ध्यान रखें।
डा.
सी.पी. जोशी: यह हर विभाग
का है। I
am not saying about this department only. हर
विभाग के लिए
विधान सभा से
डाइरेक्शन
जाना चाहिए कि
कम से कम इसको एडिहर
करें, एक साल
का गैप तो समझ
में आता है।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: आपकी
आज्ञा
शिरौधार्य है,
सब जगह इस चीज
को लिखकर भी
दे देंगे और
भविष्य के
अंदर कोशिश
करेंगे कि
इसमें विलम्ब
न हो।
श्री
नरपत सिंह
राजवी: अध्यक्ष
महोदय, एक
निवेदन आपके
माध्यम से
करना चाहता
हूं कि जो आज
एलिगेशन लगा
रहे हैं कि यह
लेट हुआ है यह
एलिगेशन
लगाने की जरूरत
नहीं है। आप
खुद ही कर
लेते तो मेरे
खयाल से जरूरत
नहीं पड़ती।
डा.
सी.पी. जोशी: हम करते तो
इधर नहीं
बैठते, उधर
बैठते फिर।
श्री
नरपत सिंह
राजवी: आप निवेदन
तो सुन लें।
डा.
सी.पी. जोशी: माननीय
राजवी साहब,
आप बार-बार यह
कहकर शेल्टर
नहीं ले सकते
कि हमने नहीं
किया। जो नियम
हैं, कानून है
उसके हिसाब से
आना पड़ेगा।
श्री
अध्यक्ष: उद्योग
मंत्रीजी,
सवाल यह है कि
जिसने गलती की,
लेकिन सिस्टम
को करेक्ट
करने वाली बात
है तो सही है,
वह सिस्टम
डवलप हो ऐसा
प्रयत्न
अपने को करना
चाहिए, इसमें
कोई दिक्कत
की बात नहीं
है। सिस्टम
डवलप होगा।
श्री
नरपत सिंह
राजवी: आपका आदेश
शिरोधार्य
है। मैं तो
इतना ही निवेदन
करना चाह रहा
था कि हमारे
इस पीरियड में
हो तो
डेफिनेटली
ठीक कर देंगे।
mlb/akt/2e/1240/4.3.2006
श्री रामनारायण चौधरी: दो साल में आप सरका में हो, सारी जिम्मेदारी आपकी है।श्री अध्यक्ष: आपको क्या सारी गलतियां वही करनी हैं जो इन्होंने की थी वो ही सारी गलतियां करनी हैं क्या आपको ? (व्यवधान) बस तो फिर ।
श्रीजुबेर खान: अध्यक्ष महोदय, मैं आपको निवेदन करना चाहूंगा आपने गत सत्र में भी डाइरेक्शन इसी संबंध में सरकार को दिये थे और सरकार आपके डाइरेक्शन को इतनी लाइटली ले रही है, यह बहुत गलत बात है, इनको दुबारा से सख्त निर्देश दीजिए कि आइंदा दुबारा से आपको रिपीट नहीं करना पड़े। हमको याद है आपने गत सत्र में भी इनको निर्देशित किया था।
श्री रामनारायण चौधरी: तो, अध्यक्ष महोदय, मैं निवेदन कर रहा था कि बी.डी. कल्ला साहब जो बोलेंगे हमारी तरफ से पी.सी.सी. प्रेसीडेंट तो हमारे पास टाइम बचा है आपके पास एक घंटा और 31 मिनट, एक घंटा आप इनको दे दीजिए, 31 मिनट में हमारे दो तीन और बोलना चाहते हैं, दस दस पन्द्रह पन्द्रह मिनट उनको दे दीजिए, ऐसा बंटवारा कर दीजिए।
श्री अध्यक्ष: ठीक है, हमको क्या एतराज है ?
श्री राजेन्द्र राठौड़: पर प्रतिपक्ष के नेता, आपके विचार भी हम जानना चाहेंगे।
श्री महावीर प्रसाद जैन: पर अध्यक्ष महोदय, हमारा आग्रह यह भी है कि प्रतिपक्ष के नेता भी बोलें।
श्री राजेन्द्र राठौड़: यह राजस्थान के इतिहास में पहली बार होगा कि प्रतिपक्ष के नेता नहीं बोलें। हम आपके भी विचार जानना चाहेंगे।
श्री महावीर प्रसाद जैन: प्रतिपक्ष के नेता भी बोलें, हमारा आग्रह है।
श्री राजेन्द्र राठौड़: आपके विचारों से लाभान्वित होना चाहते हैं, सरकार आपके विचारों से दिशा निर्देशित होना चाहती है, आप विचार व्यक्त करें, यह सी.पी. जोशी साहब चाहते हैं कि आप बोलें नहीं, हम चाहते हैं कि आप बोलें।
श्री सी.पी. जोशी: नहीं, नहीं, हमारे लीडर बोलेंगे, अभी अध्यक्ष जी और इनका जो अपना है वह चाय पर बैठकर बात हो जाए फिर प्रतिपक्ष के नेता भी अपनी बात कहेंगे, जरूर बात कहेंगे, ऐसी बात थोड़े ही है।
श्री रामनारायण चौधरी: स्पीकर महोदया, थोड़ी नाराज चल रही हैं (व्यवधान) हां, मैं कोशिश करूंगा (व्यवधान)
श्री राजेन्द्र राठौड़: फिर यह कह रहे हैं, बोलना खुद नहीं चाहते, सरकार के खिलाफ बोलने के लिए कोई इनके पास मैटेरियल ही नहीं है।
श्री जुबेर खान: माननीय मंत्री महोदय, सुन तो लीजिए, आप सुनिए।
श्री सी.पी. जोशी: 50 साल का मैटेरियल है इनके पास।
श्री राजेन्द्र राठौड़: बुलाइए न आप, पर आप नहीं चाहते, आप नहीं चाहते कि .. (व्यवधान) इनके विचार आएं।
श्री
सी.पी. जोशी: राजेन्द्र
जी, जब आप पानी
पी रहे हैं तब
का मैटेरियल
है, चिन्ता
क्यों कर रहे
हैं ? हर
मैटेरियल
इकट्ठा है
इनके पास चिन्ता
क्यों कर रहे
हैं। अभी तो
खाली यह है कि
माननीय अध्यक्ष
महोदया कल हुआ
उसमें
सौहाद्रपूर्ण
वातावरण हो
जाए उसके बाद
बोलेंगे।
श्री रामनारायण चौधरी: ठीक है, मैं इनकी बात से सहमत हूं।
श्री अध्यक्ष: लेकिन यह सदन सुनना चाहता हूं, नये प्रतिपक्ष के नेता को यह सदन सुनना चाहता है।
श्री सी.पी. जोशी: आपकी भावना को शिरोधार्य रखते हुए हमारे विपक्ष के नेता बोलेंगे। जब आपका मन, आपका हमारे प्रति, नेता के प्रति वह एक सौहाद्रपूर्ण वातावरण में बात हो जाए उस माननीय नेता बोलेंगे।
श्री सुरेन्द्र सिंह राठौड: अध्यक्ष महोदय, तो अति प्रसन्न हैं।
श्री महावीर प्रसाद जैन: अध्यक्ष महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूं ‑.
श्री अध्यक्ष: किसीभी प्रकार की कोई घटना हो जाती है तो मैं उसका मेरे दिल पर कोई असर नहीं रखती ।
श्री सी.पी. जोशी: अध्यक्ष महोदय, आपके बहुत आभारी हैं, आपने सह्दयता बताकर यह कंहा उसके अनुरूप हम आचरण करेंगे।
श्री सुरेन्द्र सिंह राठौड़: पी.डब्ल्यू.डी. मंत्री जब आप पानी को बू कहते थे वे आए थे, यह दूसरी बात है कि वह ब्रेक डांस करते हुए आए हैं और आप भँगड़ा डालते हुए चौथी बार पहुंच गये।
श्री रामनारायण चौधरी: देखिए, हर चीज का एक असर होता है, चोट शरीर पर लगती है, ह्दय पर लगती है, मेरे सिर पर यह चोट लगी हुई है उसका निशान बना हुआ है, यह मिनट नहीं सकता। अध्यक्ष महोदय की भावनाओं को कहीं ठेस लगी है उनको मैं नार्मलाइज करना चाहता हूं उसके बाद और मैं नैक्स्ट टाइम जब बजट सेशन आएगा, अभी उसमें मेरे जैसी है, भाव व्यक्त करने कीकोशिश करूंगा।
श्री राजेन्द्र राठौड़: हम तो अब सुनना चाहते हैं।
श्री रामनारायण चौधरी: अध्यक्ष महोदय, मुझे इस बात का दु:ख है कि कल सदन के नेता को मुख्य मंत्री जी को खेद व्यक्त करना पडा उनकी भावनाओं को और उनकी दिल को ठेस पहुंची, आपको भी पहुंची, मैंने कोई ऐसी बात नहीं कही थी, वह चेप्टर वहीं क्लाज हो गया और मैं आज नहीं बोलूंगा, अगर आप अनुमति देंगी तो बजट पर बोलूंगा।
श्री अध्यक्ष: ठीक है। Have you begun your speech ? (व्यवधान) अच्छा, अच्छा, अभी तो वह रख रहे हैं, यस, यस, आप रख रहे हैं।
डा. बुलाकी दास कल्ला: ये व्यवधान मंत्री बैठें तब न।
श्री महावीर प्रसाद जैन: अध्यक्ष महोदय, आपके कक्ष में माननीय प्रतिपक्ष के नेता महोदय को चाय पर, मिठाई पर आमंत्रित करता हूं, इसके तत्काल बाद।
श्री रामनारायण चौधरी: आप ?
श्री महावीर प्रसाद जैन: हां, मैं, सच में।
श्री रामनारायण चौधरी: आप तो पानी में आग मत लगाओ और सब ठीक है। किसी को पता नहीं चलता आप पानी में आग लगा देते हो।
श्री अध्यक्ष: पानी में आग लगती ही नहीं है।
डा. बुलाकी दास कल्ला: अध्यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से कार्य सूची में किये गये उल्लेख के अनुसार जन लेखा समिति, 2005-06 के निम्न 33 प्रतिवेदन उपस्थापित करता हूं :-
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1. |
जनलेखा समिति, 2002-2003 के 161वें प्रतिवेदन (11वीं विधान सभा) में समाविष्ट सिफारिशों की परिपालना हेतु शासन द्वारा की गई कार्यवाही पर(क्रियान्विति विषयक्) समिति का 101वां प्रतिवेदन । |
|
2. |
जनलेखा समिति, 2003-2004 के 201वें प्रतिवेदन (11वीं विधान सभा) में समाविष्ट सिफारिशों की परिपालना हेतु शासन द्वारा की गई कार्यवाही पर (क्रियान्विति विषयक्) समिति का 102वां प्रतिवेदन । |
|
3. |
भारत के नियंत्रक-महालेखा परीक्षक के प्रतिवेदन (सिविल) वर्ष 1999-2000 अनुच्छेद संख्या-6.4 उच्च शिक्षा तथा वर्ष 1999-2000 अनुच्छेद संख्या-3.8 शिक्षा विभाग से संबंधित मामलों पर समिति का 103वां प्रतिवेदन । |
|
4. |
जनलेखा समिति, 2000-2001 के 67वें प्रतिवेदन (11वीं विधान सभा) में समाविष्ट सिफारिशों की परिपालना हेतु शासन द्वारा की गई कार्यवाही पर (क्रियान्विति विषयक्) समिति का 104वां प्रतिवेदन । |
|
5. |
भारत के नियंत्रक-महालेखा परीक्षक के प्रतिवेदन (सिविल) वर्ष 1999-2000 का अनुच्छेद संख्या 4.1 (आर.) वन विभाग से संबंधित मामलों पर समिति का 105वां प्रतिवेदन । |
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6. |
जनलेखा समिति, 2002-2003 के 151वें प्रतिवेदन (11वीं विधान सभा) में समाविष्ट सिफारिशों की परिपालना हेतु शासन द्वारा की गई कार्यवाही पर (क्रियान्विति विषयक्) समिति का 106वां प्रतिवेदन । |
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7. |
जनलेखा समिति, 2002-2003 के 152वें प्रतिवेदन (11वीं विधान सभा) में समाविष्ट सिफारिशों की परिपालना हेतु शासन द्वारा की गई कार्यवाही पर (क्रियान्विति विषयक्) समिति का 107वां प्रतिवेदन । |
|
8. |
भारत के नियंत्रक-महालेखा परीक्षक के प्रतिवेदन (सिविल) में समाविष्ट वित्त विभाग से संबंधित अंकेक्षण प्रतिवेदन वर्ष 2000-2001 का अनुच्छेद संख्या 6.2 से संबंधित मामलों पर समिति का 108वां प्रतिवेदन । |
|
9. |
जनलेखा समिति, 2001-2002 के 110वें प्रतिवेदन (11वीं विधान सभा) में समाविष्ट सिफारिशों की परिपालना हेतु शासन द्वारा की गई कार्यवाही पर (क्रियान्विति विषयक्) समिति का 109वां प्रतिवेदन । |
|
10. |
जनलेखा समिति, 2000-2001 के 78वें प्रतिवेदन (11वीं विधान सभा) में समाविष्ट सिफारिशों की परिपालना हेतु शासन द्वारा की गई कार्यवाही पर (क्रियान्विति विषयक्) समिति का 110वां प्रतिवेदन । |
|
11. |
जनलेखा समिति, 2004-2005 के 52वें प्रतिवेदन (12वीं विधान सभा) में समाविष्ट सिफारिशों की परिपालना हेतु शासन द्वारा की गई कार्यवाही पर (क्रियान्विति विषयक्) समिति का 111वां प्रतिवेदन । |
|
12. |
जनलेखा समिति, 2002-2003 के 181वें प्रतिवेदन (11वीं विधान सभा) में समाविष्ट सिफारिशों की परिपालना हेतु शासन द्वारा की गई कार्यवाही पर (क्रियान्विति विषयक्) समिति का 112वां प्रतिवेदन । |
|
13. |
जनलेखा समिति, 2003-2004 के 213वें प्रतिवेदन (11वीं विधान सभा) में समाविष्ट सिफारिशों की परिपालना हेतु शासन द्वारा की गई कार्यवाही पर (क्रियान्विति विषयक्) समिति का 113वां प्रतिवेदन । |
|
14. |
जनलेखा समिति, 2003-2004 के 215वें प्रतिवेदन (11वीं विधान सभा) में समाविष्ट सिफारिशों की परिपालना हेतु शासन द्वारा की गई कार्यवाही पर (क्रियान्विति विषयक्) समिति का 114वां प्रतिवेदन । |
|
15. |
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के अंकेक्षण प्रतिवेदन (सिविल) वर्ष 2000-2001 के पैरा संख्या 3.10 में समाविष्ट राजस्व, शिक्षा, सार्वजनिक निर्माण, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य व अन्य विभागों से संबंधित राजकीय धन/सम्पत्ति के दुर्विनियोजन, गबन एवं चोरी इत्यादि प्रकरणों पर समिति का 115वां प्रतिवेदन । |
|
16. |
वर्ष 2000-2001 तथा 2001-2002 के लिये भारत के नियंत्रक-महालेखा परीक्षक के प्रतिवेदन (राजस्व प्राप्तियां) में समाविष्ट भूमि एवं भवन कर विभाग से संबंधित मामलों पर समिति का 116वां प्रतिवेदन । |
|
17. |
विनियोग लेखे वर्ष 2000-2001 के बताये गये दत्तमत अनुदानों तथा प्रभृत्त विनियोगों में अतिरेक के मामलों पर समिति का 117वां प्रतिवेदन । |
|
18. |
जनलेखा समिति, 2000-2001 (11वीं विधान सभा) के 74वें, जनलेखा समिति( 2002-2003 (11वीं विधान सभा) के 132वें एवं 175वें प्रतिवेदनों में समाविष्ट क्रमश: वित्त, राज्य आबकारी एवं वाणिज्यिक कर विभागों से संबंधित सिफारिशों पर शासन द्वारा की गई कार्यवाही पर (क्रियान्विति विषयक्) समिति का 118वां प्रतिवेदन । |
|
19. |
वर्ष 2000-2001 के लिये भारत के नियंत्रक-महालेखा परीक्षक के प्रतिवेदन (राजस्व प्राप्तियां) में समाविष्ट परिवहन विभाग से संबंधित मामलों पर समिति का 119वां प्रतिवेदन । |
|
20. |
जनलेखा समिति, 2000-2001 के 71वें प्रतिवेदन (11वीं विधान सभा) में समाविष्ट सिफारिशों की परिपालना हेतु शासन द्वारा की गई कार्यवाही पर (क्रियान्विति विषयक्) समिति का 120वां प्रतिवेदन । |
|
21. |
जनलेखा समिति, 2002-2003 के 139वें प्रतिवेदन (11वीं विधान सभा) में समाविष्ट सिफारिशों की परिपालना हेतु शासन द्वारा की गई कार्यवाही पर (क्रियान्विति विषयक्) समिति का 121वां प्रतिवेदन । |
|
22. |
जनलेखा समिति, 2004-2005 के 53वें प्रतिवेदन (12वीं विधान सभा) में समाविष्ट सिफारिशों की परिपालना हेतु शासन द्वारा की गई कार्यवाही पर (क्रियान्विति विषयक्) समिति का 122वां प्रतिवेदन । |
|
23. |
जनलेखा समिति, 2002-2003 के 149वें प्रतिवेदन (11वीं विधान सभा) में समाविष्ट सिफारिशों की परिपालना हेतु शासन द्वारा की गई कार्यवाही पर (क्रियान्विति विषयक्) समिति का 123वां प्रतिवेदन । |
|
24. |
जनलेखा समिति, 2002-2003 के 172वें प्रतिवेदन (11वीं विधान सभा) में समाविष्ट सिफारिशों की परिपालना हेतु शासन द्वारा की गई कार्यवाही पर (क्रियान्विति विषयक्) समिति का 124वां प्रतिवेदन । |
|
25. |
जनलेखा समिति, 2003-2004 के 204वें प्रतिवेदन (11वीं विधान सभा) में समाविष्ट सिफारिशों की परिपालना हेतु शासन द्वारा की गई कार्यवाही पर (क्रियान्विति विषयक्) समिति का 125वां प्रतिवेदन । |
|
26. |
जनलेखा समिति, 2002-2003 के 136वें प्रतिवेदन (11वीं विधान सभा) में समाविष्ट सिफारिशों की परिपालना हेतु शासन द्वारा की गई कार्यवाही पर (क्रियान्विति विषयक्) समिति का 126वां प्रतिवेदन । |
|
27. |
जनलेखा समिति, 2004-2005 के 28वें प्रतिवेदन (12वीं विधान सभा) में समाविष्ट सिफारिशों की परिपालना हेतु शासन द्वारा की गई कार्यवाही पर (क्रियान्विति विषयक्) समिति का 127वां प्रतिवेदन । |
|
28. |
जनलेखा समिति, 2001-2002 के 124वें प्रतिवेदन (11वीं विधान सभा) में समाविष्ट सिफारिशों की परिपालना हेतु शासन द्वारा की गई कार्यवाही पर (क्रियान्विति विषयक्) समिति का 128वां प्रतिवेदन । |
|
29. |
भारत के नियंत्रक-महालेखा परीक्षक के प्रतिवेदन (सिविल) वर्ष 2001-2002 में समाविष्ट ग्रामीण विकास विभाग से संबंधित अनुच्छेद संख्या 6.5 अंकेक्षण प्रतिवेदन वर्ष 2002-2003 का अनुच्छेद संख्या 4.5.1 तथा पंचायती राज विभाग से संबंधित वर्ष 2002-2003 का अनुच्छेद संख्या 1.8.2, 4.6.2 तथा 5.1.3 से संबंधित मामलों पर समिति का 129वां प्रतिवेदन । |
|
30. |
भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक के प्रतिवेदन (सिविल) वर्ष 2000-2001 का अनुच्छेद संख्या 4.17, 4.19 एवं 4.21, अंकेक्षण प्रतिवेदन वर्ष 2002-2003 का अनुच्छेद संख्या 2.6, 4.4.4, 4.4.5, 4.4.6, 4.4.7 तथा 4.6.3 सार्वजनिक निर्माण विभाग से संबंधित मामलों पर समिति का 130वां प्रतिवेदन । |
|
31. |
जनलेखा समिति, 2002-2003 के 144वें प्रतिवेदन (11वीं विधान सभा) में समाविष्ट सिफारिशों की परिपालना हेतु शासन द्वारा की गई कार्यवाही पर (क्रियान्विति विषयक्) समिति का 131वां प्रतिवेदन । |
|
32. |
वर्ष 2001-2002 के लिये भारत के नियंत्रक-महालेखा परीक्षक के प्रतिवेदन (राजस्व प्राप्तियां) में समाविष्ट परिवहन विभाग से संबंधित मामलों पर समिति का 132वां प्रतिवेदन । |
|
33. |
वर्ष 2002-2003 के लिये भारत के नियंत्रक-महालेखा परीक्षक के प्रतिवेदन (राजस्व प्राप्तियां) में समाविष्ट परिवहन विभाग से संबंधित मामलों पर समिति का 133वां प्रतिवेदन । |
श्री अध्यक्ष: अच्छी बात है। राज्यपाल महोदय के अभिभाषण पर अग्रिम वाद विवाद।
सर्वप्रथम श्री जोगाराम पटेल। हां, अब आप पाइंट आफ आर्डर पर फरमा दें।
डा. एन. एस. गुर्जर: हां, मैं आपसे परमिशन ले रहा हूं, with your permission. यह जब गवर्नर एड्रेस होता है या बजट होता है तो जो चीजें उसमें बोली जा सकती हैं, हमारे नियमों में प्रावधान है, अध्यक्ष महोदय, आप अच्छी तरह जानते हैं, बहुत सीनियर सदस्य रहे हैं, जो एक बार विषय जो सदन में अभी उस पर दुबारा चर्चा नहीं कराई जा सकती। यह नियमों में प्रावधान है। (व्यवधान) नहीं, नियमों में तो यही प्रावधान है, अब एक्स्ट्रा कहीं हो तो आप मुझे बता दें, मैं सीख लूं।
श्री सी.पी. जोशी: नहीं, यह प्रावधान है कि desirable is not essential. दूसरा क्योंकि जनरल नैचर के मैटर्स पर माननीय राज्यपाल महोदय के अभिभाषण पर यहां सदन में उठाये जा सकते हैं और स्पेसिफिक नैचर के मैटर्स हैं उनको हम दूसरे 295, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव या पर्ची के माध्यम से ही सदन में उठा सकते हैं, जो उसमें नहीं बोल सकते।
श्री अध्यक्ष: क्या पाइंट आफ आर्डर है आपका, पाइंट आफ आर्डर क्या है वह तो बताएं ?
डा. एन. एस. गुर्जर: सुनलिए तो सही, मेरा पाइंट आफ आर्डर यह है, मैं यह देख रहा हूं 2-3 दिन से कि जब राज्यपाल महोदय का अभिभाषण हो रहा है तब भी ऐसे मामले सदन में आ रहे हैं जिनको अभिभाषण के ऊपर हम बोल सकते हैं लेकिन उन्हीं मामलों को यहां उठाकर आइदर किसी भी रूप में और आधे घंटे तक एक एक घंटे तक उस इश्यु पर हंगामा होता रहता है हाउस के अन्दर और सदन का कितना पैसा वैस्ट होता है, इस पर अगर उसके बजाय अभिभाषण पर चर्चा हम लोग करें उसका जवाब आए तो एक स्वस्थ परम्परा होगी और नियमों की पालना होगी, धीरे धीरे हम नियमों में कट करते जा रहे हैं, नियमों के बाहर चीजें हैं उसमें एंटर होते जा रहे हैं। मेरा आपसे पाइंट आफ आर्डर यही है कि इस चीज को आप बंद करिए, ताकि सदन का समय बचे और अनावश्यक जो हो-हुल्लड़ होता है सदन के अन्दर जिससे सदन की इमेज बाहर खराब होती है, बंद हो। मैं आपसे यही अनुरोध करना चाहता हूं ।
डा. बुलाकी दास कल्ला: यह माननीय सदस्य ने जो व्यवस्था का प्रश्न उठाया अभी कोई ऐसी व्यवस्था चल भी नहीं रही थी, उन्होंन इर्रेलेवेंट व्यवस्था का प्रश्न उठाया है।
श्री सी.पी. जोशी: वेरी गुड, आज तो कल्ला साहब सिक्सर है, आप सिक्सर मारा है आपने।
डा. एन. एस. गुर्जर: अभिभाषण पर क्या क्या हो रहा है ? (व्यवधान)
डा. बुलाकी दास कल्ला: ऐसी कोई व्यवस्था चल ही नहीं रही थी। (व्यवधान)
डा. एन. एस. गुर्जर: क्याइर्रेलेवेंट है ?
डा. बुलाकी दास कल्ला: इस वक्त इस तरह का मामला जिसका उन्होंने जिक्र किया है व्यवस्था का प्रश्न उठाते तब तो कोई बात बनती लेकिन इन्होंने अभी जैसे समितियों के प्रतिवेदन रखे गये हैं, यहां पर कहीं कोई व्यवस्था भी वैसी नहीं हुई है जिससे यह व्यवस्था का प्रश्न उठाते।
डा. एन. एस. गुर्जर: ऐसी व्यवस्था तो पर्ची के टाइम पर मैं उठाने लगातो आपने रोका, आपने ही टोका मुझे।
डा. बुलाकी दास कल्ला: पर्ची के वक्त व्यवस्था का प्रश्न कभी नहीं उठ सकता। अध्यक्ष महोदय, इस बारे में आप निर्णय ले चुके हैं।
डा. एन. एस. गुर्जर: यह व्यवस्था का प्रश्न कब उठता है, यह बता दीजिए, पचासों बार आपने भी उठाया है।
डा. बुलाकी दास कल्ला: तो हमारा यही कहना है कि बोलते वक्त पालनीय नियमों का ध्यान रखना चाहिए।
डा. एन. एस. गुर्जर: पचासों बार कल्ला साहब पक्ष और विपक्ष को....
श्री अध्यक्ष: बिजनैस शुरू हो गया था सदन की मेज पर रखे जाने वाले रख रहे थे उसके बाद उठाया है उन्होंने । (व्यवधान)
डा. बुलाकी दास कल्ला: उसके बारे में अलग से रख सकते हैं।
मोहम्मद माहिर आजाद: बहादुरसिंह जी गोदारा जब बोलने खड़े हुए थे तब उठाया था इन्होंने, इतना तो पता है कि जब हाउस में कोई बिजनैस हो तब उठा सकते हैं। बहादुर सिंह गोदारा बोल रहे थे।
डा. एन. एस. गुर्जर: आपको मालूम है जीरो आवर में कितनी बार मैं रिकार्ड दिखाऊं आपको ? जीरो आवर में कितनी बार उठाया गया पाइंट आफ आर्डर, मैं रिकार्ड दिखाऊं ? क्या बात करते हो ?
श्री
जोगाराम पटेल (लूनी):
माननीय अध्यक्ष
महोदया,
माननीय राज्यपाल
महोदया
द्वारा इस सदन
में इस
गरिमामय आदरणीय
सदन में जो
अभिभाषण
प्रस्तुत
किया जिसके
संबंध में
माननीय सदस्य
ने धन्यवाद
प्रस्ताव
रखा उसके
समर्थन में
मैं तथ्यों
पर नम्रता
पूर्वक इस सदन
में अपनी बात
रखना चाहता
हूं। आदरणीय
अध्यक्ष
महोदया, राजस्थान
की पाँच करोड़
जनता केउ
सामने मुजो यह
एक दस्तावेज
के रूप में
पूर्व में हुई
सरकार की कार्यवाहियों,
सरकार के कृत्यों,
सरकार के
कार्यों आने
वाले भविष्य
के लिए सरकार
की योजनाओं,
सरकार के
कार्य का एक
दस्तावेज
है।
skp/akt/4.3.06/1250/2f/1
और
इस दस्तावेज
के रूप में
मौजूदा सरकार
ने जो कार्य
किये, आने
वाले भविष्य
में जो किये
जाएंगे उनका
एक प्रकार का
लेखा-जोखा है।
माननीय
अध्यक्ष
महोदय, पिछले
दो दिन की
चर्चा में
सार्वजनिक
हित के अनेक
मुद्दे डिस्कश
हुए, माननीय
सदस्यों ने अपनी-अपनी
बात कही। सड़क
से सम्बन्धित
हो, शिक्षा से
सम्बन्धित
हो या और कोई
विषय हो, मैं
उन विषयों में
नहीं जाऊंगा
जिनका काफी
डिस्कशन
यहां हो चुका
परन्तु वो
विषय जो जन
मानस के लिए
अति महत्वपूर्ण
हैं, वो विषय
जो हर पशुधन,
हर मनुष्य और
धरती पर जीवित
हर व्यक्ति
के लिए बहुत
जरूरी है उसके
सम्बन्ध
में और कुछ
ऐसे विषय
कानून से सम्बन्धित
माननीय सदस्यों
ने उठाये,
उनसे सम्बन्धित
निवेदन करने
का प्रयास
करूंगा।
माननीय
अध्यक्ष
महोदय,
भौगोलिक
दृष्टि से 3
लाख 42 हजार वर्ग
किलोमीटर में
फैला हुआ यह
राजस्थान,
देश का करीब 10.40
प्रतिशत वाला
यह राजस्थान,
आबादी के
हिसाब से 5.75
प्रतिशत वाला
यह प्रदेश, 18.70
प्रतिशत
पशुधन वाला यह
प्रदेश, सतही
जल के हिसाब
से मात्र 1.16
प्रतिशत सतही
जल रखता है।
राज्य में 94
प्रतिशत जो पेयजल
योजनाएं हैं
वो सतही जल से
चल रही हैं।
मैं इस सम्बन्ध
में आपके
मार्फत्
निवेदन करना
चाहूंगा कि भू-जल
से सम्बन्धित
जो योजनाएं
हैं वो 10
प्रतिशत हैं
और 10 प्रतिशत
पेयजल के काम
आती हैं और 90
प्रतिशत पानी खेती
के काम में
आता है।
वर्तमान में
पश्चिमी राजस्थान
ही नहीं,
जोधपुर जिला
ही नहीं, मेरा
विधान सभा
क्षेत्र लूनी
ही नहीं, पूरा
भारत और मैं
यहां तक कहूं
तो विश्व
पेयजल समस्या
से जूझ रहा
है। कई भविष्य
वक्ताओं ने,
कई विद्वानों
ने यह घोषणा
भी की है कि आने
वाला गृह
युद्ध होगा तो
वह पानी के
लिए होगा। मैं
इस सम्बन्ध में
आपके समक्ष
निवेदन करना
चाहूंगा, यह
विषय कोई किसी
राजनैतिक
विचारधारा
वाले दल का
नहीं, यह विषय
किसी व्यक्ति
विशेष का
नहीं, यह विषय
सार्वजनिक
हित का है और
सभी को इस पर
बहुत गंभीरता
से विचार करने
की आवश्यकता
भी है। हमारी
सरकार ने
जितना हो सके,
उतना प्रयास
किया और वो सब
आपके सामने
है।
पूर्ववर्ती
सरकार ने भी
प्रयास किये
होंगे, वह भी
आपके सामने
हैं। आने वाले
भविष्य की
सरकारें भी इस
सम्बन्ध
में
कार्यवाही
करेंगी परन्तु
इस विषय पर जल,
जिसको
अंग्रेजी में
ड्रिंकिंग
वाटर कहते
हैं, उसका
पूरा का पूरा
किस तरह से उपयोग
किया जाए, जो
जल बहकर चला
जाता है जिसका
उपयोग नहीं
है, जो जल
फालतू चला
जाता है जिसको
रोक नहीं पा
रहे हैं, जो
नदियों का इधर
से उधर पानी
बह जाता है
उसको रोक नहीं
पा रहे हैं, इस
विषय पर
गंभीरतापूर्वक
माननीय सदस्यों
को और इस
गरिमामय सदन
को विचार करना
चाहिए और एक
ऐसा अभियान
चलाना चाहिए
जैसा अभी राजस्थान
सरकार ने,
आदरणीय मुख्य
मंत्री जी ने
जल अभियान
चलाया, जल
चेतना जाग्रत
की उससे सम्बन्धित
निवेदन
करूंगा। दलगत
भावना से ऊपर
उठकर इस विषय
पर इस सदन में
एक ऐसा
कार्यक्रम आयोजित
किया जाए
जिससे कि आने
वाला भविष्य
सुरक्षित हो
सके। माननीय
अध्यक्ष
महोदय, पहले 44
बार अकाल पड़ा
और उस अकाल में
अतिरिक्त
भू-जल के दोहन
की वजह से
प्रदेश के 237 ब्लॉक
ऐसे हैं जो
क्रिटिकल स्टेज
में हैं, 46 तो विशेष
क्रिटिकल स्टेज
में हैं और
मात्र 30
सुरक्षित रह
गये हैं। अब
प्रश्न यह उठता
है कि सरकारों
की इस सम्बन्ध
में मन्शा क्या
है। आदरणीय
अध्यक्ष
महोदय, वर्ष 1999
से 2004 तक के जो
बजट आये वो
शहरी क्षेत्र
में 132 करोड़ के
औसतन आये और
पूर्ववर्ती
सरकारों ने मात्र
132 करोड़ औसतन
बजट दिया। इसी
तरह से
ग्रामीण क्षेत्र
में 165 करोड़ का
बजट दिया।
मौजूदा सरकार
आने के बाद
माननीय मुख्य
मंत्री जी की
इस विषय में
गहनता की वजह
से, इस महत्वपूर्ण
विषय की
जानकारी की
वजह से आते ही
2004-05 के बजट में
इसका बजट
बढ़ाकर शहरी
क्षेत्र में 196.88
करोड़ किया
गया और
ग्रामीण
क्षेत्र में 259
करोड़ किया गया
तथा 2005-06 में 211
करोड़ शहरी
क्षेत्र में
और 341 करोड़
ग्रामीण
क्षेत्र में
किया गया। जो 165
करोड़ ग्रामीण
क्षेत्र में
थे उसका 341
करोड़ किया
गया। यह पहली
सरकार की
उपलब्धि थी और
उपलब्धि के
मार्फत्
पेयजल उपलब्ध
कराने की व्यवस्था
की गई। इतना
ही नहीं,
ग्रामीण क्षेत्रों
में अकाल के
दौरान, ग्रीष्म
अवधि के दौरान
करीब एक लाख
गांव-ढाणियों
को विभिन्न
टैंकरों के
मार्फत्,
विभिन्न
पेयजल
योजनाओं के
मार्फत्
पेयजल उपलब्ध
कराया गया।
राज्य में
अनेक योजनाएं
पेयजल उपलब्ध
करवाने के सम्बन्ध
में प्रारम्भ
की गई जिसमें
मुख्य रूप
से....
श्री
अध्यक्ष: यह आवाज
कहां से आ रही
है ? बन्द
करवाइये
इसको।
श्री
जोगाराम पटेल: 11 हजार करोड़
की
बीसलपुर-जयपुर
की पेयजल योजना,
जिसके सम्बन्ध
में यहां
बताया गया।
अम्ब्रेला
परियोजना,
बीसलपुर-देवली-उनियारा
परियोजना, चम्बल-धौलपुर
परियोजना,
नागौर लिफ्ट
परियोजना, जवाईं
बांध से पाइप
लाइन लाने की
परियोजना, नर्बदा
नहर परियोजना,
ये सारी
परियोजनाएं
मौजूदा सरकार
ने प्रारम्भ
की और एक
मैसेज दिया।
इतना
ऐतिहासिक
कार्य किया
जिसके लिए
मौजूदा सरकार
को बधाई
दूंगा। इसके
अलावा 4758 करोड़
की नई पेयजल
योजनाएं
प्रारम्भ की
गईं। ये सारी
योजनाएं बनाकर
सरकार ने आम
जनता को,
पशुधन को
पेयजल उपलब्ध
करवाने हेतु
अति महत्वपूर्ण
ऐतिहासिक कदम
उठाया जिसके
लिए मौजूदा
सरकार धन्यवाद
की पात्र है।
अध्यक्ष
महोदय, इसके
अलावा राज्य
के सीमित जल
संसाधनों के
समुचित उपयोग
हेतु प्रोफेसर
वी. एस. व्यास
की अध्यक्षता
में एक कमेटी
गठित की गई और
वह कमेटी यह
कार्यवाही कर
रही है कि सतही
जल का अधिक से
अधिक उपयोग
किस तरह हो
सके, जो पानी
बहकर के जा
रहा है उसका
उपयोग कैसे हो
सके, जो अण्डर
ग्राउंड वाटर
है उसका कैसे
उपयोग हो सके।
29 जिलों में 23297 गांवों
में फ्लोराइड
मात्रा में
अधिक है
जिसमें 34.68
करोड़ की लागत
से एकीकृत फ्लोरोसिस
उन्मूलन
परियोजना स्वीकार
की गई और जो यह
पानी पीने के
लिए उपयोगी नहीं
है उसको
उपयोगी बनाने
का प्रयास किया
जा रहा है।
इतना ही नहीं,
करीब 6 हजार
करोड़ की 12 अम्ब्रेला
परियोजनाएं,
जिनका मैंने
ऊपर जिक्र किया,
उनकी
क्रियान्विति
की जा रही है।
जल अभियान मुख्य
रूप से चलाया
जा रहा है, सम्पूर्ण
पानी शुद्ध हो
उसकी
परियोजना
चलाई जा रही
है और ऐसी
करीब 7 हजार
करोड़ की 22
योजनाएं
अलग-अलग स्तर
पर स्वीकृत
की गई हैं और
यह सभी कार्य
शुद्ध पेयजल उपलब्ध
करवाने हेतु
किये जा रहे
हैं। मैं इसके
लिए विशेष रूप
से माननीय
मुख्य
मंत्री जी को,
जलदाय मंत्री
जी को
बहुत-बहुत धन्यवाद
दूंगा। मेरे
विधान सभा
क्षेत्र में
हिन्दुस्तान
आजाद होने के
बाद एक भी ऐसी
जल प्रदाय
योजना प्रारम्भ
नहीं की जिसे
सतही जल
प्रदाय योजना
कह सकें। परन्तु
मौजूदा सरकार
ने, माननीय
मुख्य
मंत्री जी,
वसुन्धरा
राजे जी ने,
जलदाय मंत्री
जी ने 57 करोड़
की योजना
प्रारम्भ की
और उसका काम
चल रहा है। दो
योजनाएं
विचाराधीन
हैं जिनसे
लूणी क्षेत्र
में शुद्ध
पेयजल मिल
सकेगा। जिसके
लिए मैं अलग
से विशेष धन्यवाद
देना
चाहूंगा।
इसके
अलावा दो विषय
माननीय सदस्यों
ने कल उठाये
थे कि यह लैण्ड
बैंक बन रहा
है इस लैण्ड
बैंक में
पंचायतों की
जमीन ली जा
रही है और यह
कांस्टीट्यूशनल
अवहेलना है और
उन्होंने
इसका जिक्र
आर्टिकल 243 (जी)
के सम्बन्ध
में किया। मैं
निवेदन करना
चाहूंगा कि
आर्टिकल 243 (जी)
इस सम्बन्ध
में है नहीं
और आर्टिकल 243
(जी) पावर
अथोरिटी एण्ड
रेस्पोन्सिबिलिटी
ऑफ पंचायत है
उसमें किसी
लैण्ड का
डिस्पोजल उस
लैण्ड का
मैनेजमेंट,
इनसे कहीं सम्बन्धित
नहीं है।....
Vkj/akt/1300/3a
किसी भी ग्रामीण क्षेत्र में अगर कोई नजूल लैण्ड है, वह राज्य सरकार की है, उसका मैनेजमेंट राज्य सरकार के खाते में है और पंचायत के पास धारा 50 का एकमात्र अधिकार है और उस अधिकार के तहत फंक्शन एण्ड पावर आफ द पंचायत, पंचायती राज अधिनियम 1994 के तहत है और उसमें किसी भी जमीन की व्यवस्था से सम्बन्धित जो पंचायत के खाते में नहीं है, पंचायत के खाते में एकमात्र आबादी भूमि होती है और जो बकाया भूमि होती है, वह एज ए ट्रस्टी पंचायत उसका फैसला करती है और जो शिड्यूल दिया गया है उस शिड्यूल में भी जो नजूल लैण्ड है उसका पंचायत से कोई सम्बन्ध नहीं है, ऐसी स्थिति में यह जो एतराज किया गया था, यह जो बात बताई गई थी, वह पूर्ण रूप से गलत है। जे.डी.ए. एक्ट की धारा 54 के तहत जो शिड्यूल एक और दो में जितने भी रेवेन्यु विलेज आये हुए हैं करीब 374, वह सारे के सारे रेवेन्यु विलेज की जमीन जे.डी.ए. के कंट्रोल, पावर और अथोरिटी में है और जे.डी.ए. उसके सम्बन्ध में लैण्ड बैंक बनाता है तो कानून की कोई अवहेलना नहीं हो रही है।
दूसरी
बात यह उठाई
गई थी कि
पंचायत की
भूमि को बिना
पंचायत के
पूछे, बिना
पंचायत की
सहमति लिये
लोकतंत्र के
विरुद्ध उस
जमीन को लैण्ड
बैंक बनाया
गया है। मेरी
प्रार्थना है,
मेरा निवेदन
है, मेरा
अनुरोध है कि
यह जो बात कही
गई है, वह
पूर्ण रूप से
गलत है क्योंकि
लैण्ड बैंक
की भूमि राज्य
सरकार के खाते
की होती है धारा
82 लैण्ड
रेवेन्यु
एक्ट के तहत,
उसको
सैट-अपार्ट
करने का
कानूनन
अधिकार मात्र
राज्य सरकार
को है और इसके
तहत अगर राज्य
सरकार किसी
भूमि को व्यवस्थित
या सुरक्षित
करती है तो यह
कहना कि आर्टिकल
243(जी) की
अवहेलना हो
रही है, यह
पूर्ण रूप से
गलत है। इसके
अलावा मैं
सरकार की महत्वपूर्ण
उपलब्धियों
की ओर ध्यान
दिलाना
चाहूंगा,
जिसमें महिला
सशक्तीकरण
के बहुत विशेष
प्रयास
मौजूदा सरकार
के द्वारा
किये गये हैं
जिसके लिए मैं
सरकार को बधाई
दूंगा। महिला
स्वास्थ्य
एण्ड समूह
आन्दोलन के
तहत विशेष
प्रयास कर महिलाओं
का आर्थिक
सशक्तीकरण
वृहद स्तर पर
सहायता स्वयं
समूह
कार्यक्रम
शुरू किये
गये। एक लाख
से अधिक
समूहों का गठन
किया गया। 38138
महिलाओं को विभिन्न
वित्तीय
संसाधनों से 72
करोड़ के ऋण
उपलब्ध
करवाये गये
ताकि उनको
रोजगार मिल
सके। महिलाओं
को किस तरह से
अधिक से अधिक
रोजगार मिल
सके, उसकी
पूरी की पूरी
व्यवस्था
की गई है। चार
करोड़ की राशि
का
रिवाल्विंग
फण्ड स्थापित
किया गया ताकि
उनको रोजार
दिलाने में सहायता
मिल सके। महिला
समिति समूहों
को सरकारी
बैंकों से 25
करोड़ रुपये
उपलब्ध
करवाये गये
ताकि जो भी
महिला है वह
स्वयं अपने
पैरों पर खड़ी
होकर अपना
रोजगार कर सके।
5000 आंगनबाड़ी
केन्द्रों
में गरम
पौष्टिक भोजन,
500 आदिवासी
महिलाओं व
समूहों को 10000
रुपये प्रत्येक
को आर्थिक
सहायता उपलब्ध
करवाई गई ताकि
महिलाएं स्वयं
सशक्त बनकर
अपना जीवन
यापन अपने स्तर
पर कर सके। इतना ही
नहीं, आजादी
के पहले और आजादी
के बाद यह
सुनते आये थे
कि भूमि में
महिला का कोई
अधिकार नहीं
है। हालांकि
हिन्दू उत्तराधिकार
अधिनियम में
महिला चार
प्रकार की होती
है, बेटी के
रूप में, पत्नी
के रूप में,
मां के रूप
में और बहिन
के रूप में
परन्तु
राजस्थान
में ऐसी कोई
व्यवस्था
नहीं थी जिसके
तहत यह अधिकार
मिल सके। यह मौजूदा
सरकार ने
महिलाओं को
अधिक सशक्त
करने, महिलाओं
को अधिकार
देने, महिलाओं
को संरक्षण
देने के लिए
जो स्टाम्प
ड्यूटी के सम्बन्ध
में पाँच
प्रतिशत कम जो
किया गया,
जिसका जिक्र
तक आपके सामने
बार-बार हुआ
है परन्तु
उसके अलावा जो
विशेष एक बात
की गई, वह यह है
कि जब कभी भी
लैण्ड
अलाटमेंट
होगा तो उसमें
पति और पत्नी
का नाम साथ
लिखा जायेगा।
यह एक विशेष
बात थी और
मौजूदा सरकार
ने पहली बार
राजस्थान
में यह व्यवस्था
की है। इतना
ही नहीं, जो
कामकाजी
महिलाएं हैं,
जिनके लिए 500
आंगनबाड़ी
केन्द्र,
शिशु पालन गृह
की व्यवस्था
की गई और
उसमें से 434
आंगनबाड़ी
केन्द्र और
शिशु पालन गृह
प्रारम्भ हो
गये हैं और 13
कामकाजी
महिलाओं के
होस्टल स्थापित
किये गये हैं।
10 अल्प आवास
गृह यानी
शोर्ट पीरियड
होस्टल की व्यवस्था
के रूप में
किया गया है। इतना ही
नहीं माननीय
अध्यक्ष
महोदय, 315 जो
विधवाएं हैं,
जो परित्यक्ताएं
हैं, उनको
रोजगार उपलब्ध
करवाने हेतु 63
लघु उद्योगों
के माध्यम से
उनको व्यवस्था
उपलब्ध
करवाई गई है। 3606
ट्रेनिंग
कैम्प खोले
गये हैं जहां
कि जो महिला
है, इसमें से
लघु उद्योग का,
काश्तकारी
का, दस्तकारी
का प्रशिक्षण
ले सके। 655 खादी
ग्रामोद्योग
के तहत
लाभान्वित
किया गया है। 22500
आदिवासी
महिलाओं को भी
आधुनिक खेती
कैसे की जा
सकती है, खेती
के नये-नये
तरीके क्या
हैं, उसके सम्बन्ध
में
प्रशिक्षण
दिया गया है
और यह व्यवस्था
पहली बार
राजस्थान
में की गई है
जिसके लिए मैं
मौजूदा राजस्थान
सरकार को
बहुत-बहुत
बधाई देता
हूं। 1040 दुग्ध
सहकारी
समितियां
बनाई गईं
जिसके तहत 2228
महिला
समितियां
बनाई गई हैं
और विशेष रूप
से महिलाओं को
सशक्त करने
का प्रयास
किया जा रहा
है। इतना ही
नहीं, श्रेष्ठ
पुरस्कार,
शिक्षा मित्र
इत्यादि के
नाम से अनेक
योजनाएं
चलाकर सरकार
यह पूरा
प्रयास कर रही
है कि महिलाएं
सशक्त हों
परन्तु
पूर्ववर्ती
सरकार ने ऐसी
एक भी योजना
नहीं चलाकर
महिलाओं को
रोजगार देने,
महिलाओं को अपना
रोजगार स्वयं
पैदा करने,
अपने पैरों पर
खड़ा होने के
सम्बन्ध
में एक भी ऐसी
योजना नहीं
चलाई जबकि
मौजूदा सरकार
ने अपने दो
साल के
कार्यकाल में
इतनी महत्वपूर्ण
योजनाएं चलाई
हैं। यह सब
मौजूदा सरकार
के महिलाओं के
प्रति, कमजोर
वर्गों के प्रति
जो परिदृश्य है,
जो इच्छा
शक्ति है,
उसको दर्शाता
है।
माननीय अध्यक्ष
महोदय, इसके
अलावा मैं
आपके समक्ष जो
महत्वपूर्ण
विषय है जिसकी
बार-बार यहां
चर्चा हो रही
है कानून और
व्यवस्था,
उसके सम्बन्ध
में भी आपका
ध्यान
दिलाना
चाहूंगा और यह
निवेदन करना
चाहूंगा
हमारे प्रतिपक्ष
के साथियों से
कि बार-बार यह
विषय उठाया है
कि राजस्थान
में कानून व्यवस्था
नाम की कोई
चीज नहीं है
परन्तु जब
आंकड़े
देखेंगे,वास्तविकता
देखेंगे तो इस
नतीजे पर
पहुंचेंगे कि राजस्थान
में जो कानून
व्यवस्था
है वह भारत के
अन्य राज्यों
से बहुत बेहतर
है। जैसाकि
मैंने अभी
निवेदन किया, 342
वर्ग किलोमीटर
में फैला हुआ
है राजस्थान,
कहीं पहाड़ तो
कहीं रेगिस्तान
और कहीं और
तरह की स्थिति
है। 1040
किलोमीटर लम्बी
अन्तरराष्ट्रीय
सीमा है, इस
हिसाब से अगर
दृष्टि डाली जाये
तो सन् 1971 में जो
आफेंस थे और
वर्तमान में
जो आफेंस है,
अगर उनका कम्पेरिजन
किया जाये,
अगर उनका
तुलनात्मक
विवरण देखा
जाये तो
मौजूदा सरकार
और पूर्ववर्ती
सरकार के
कार्यकाल के
दौरान अगर
अपराधों की
संख्या के
आधार पर देखा
जाये तो यह
पाया जायेगा
कि दिनोंदिन
अपराधों में
कमी हुई है,
कानून-व्यवस्था
में सुधार हुआ
है और राजस्थान
में अमन-चैन
है। 1971 की
जनसंख्या के
अनुसार दो
करोड़ 50 लाख
जनसंख्या थी
राजस्थान
में और उस समय 36343
अपराध घटित
हुए थे और
उसमें पुलिस
बल की संख्या
थी, नफरी थी वह
38800 थी। मौजूदा 2004
में जब करीब
साढ़े पाँच
करोड़ की
आबादी हुई है
तो अपराध 154859 हुए
हैं, करीब
पाँच गुना
बढ़े हैं जबकि
पुलिस की नफरी
है वह मात्र
दो गुना बढ़ी
है, पुलिस की
नफरी नहीं
बढ़ी।
पूर्ववर्ती सरकार
का कोई प्रयास
नहीं रहा, कभी
कोई भर्ती नहीं
की, किसी को
रोजगार नहीं
दिया और इसकी
वजह से पुलिस
बल में
दिनोंदिन कमी
होती गई। 1974 में
710 व्यक्तियों
पर एक
पुलिसकर्मी
था और 2004-2005 में 950
व्यक्तियों
पर एक
पुलिसकर्मी
है और यह जो
रेशो घटता
गया, इसका भी
एक कारण बना,
साथ ही साथ जो
अन्तरराष्ट्रीय
सीमा है, जो
प्रदेशों की
सीमा है,
आवागमन के
साधन, कम्युनिकेशन
के साधन, इनकी
वजह से जो
अपराध हुए
परन्तु
उसके बावजूद
भी राजस्थान
में अपराध घटे
और अपराध
भविष्य में
नहीं हो,
अपराध कम से
कम हो, आम जनता
शान्ति से
रहे, इसके लिए
विशेष प्रयास
किया गया जबकि
पूर्ववर्ती
सरकार में ऐसा
कोई प्रयास
नहीं किया।
पुलिस बल का
पुनर्गठन
किया गया,
समितियों का
गठन किया गया
और जिसकी
रिपोर्ट अभी
शीघ्र आने
वाली है और
समितियों की
रिपोर्ट आने
के बाद पुलिस
का पुनर्गठन
होने वाला है, उसके
सम्बन्ध
में प्रयास
किया जा रहा
है। 2004-2005 में
शान्ति
सुरक्षा, आन्तरिक
सुरक्षा,
अपराध
नियंत्रण की
स्थिति संतोषजनक
रही। मात्र
सराडा, मांडल
के अलावा कहीं
भी छोटी-मोटी
घटना भी नहीं
हुई और ये
घटनाएं भी
सर्वदलीय
प्रयासों से
तुरन्त
नियंत्रण में
कर ली गईं।
पूर्ववर्ती
सरकार के
कार्यकाल के
दौरान जो साम्प्रदायिक
दंगे हुए अनेक
स्थानों पर,
ऐसा एक भी कोई
दंगा नहीं
हुआ। आतंककारी
घटना भी घटित
नहीं हुई। कोई
ब्रोडकास्टिंग
बहुत अधिक कम
हुए और विशेष
रूप से जो 110
बांग्लादेशी
नागरिक हैं,
उनको
आइडेंटिफाई
किया गया,
बाहर निकाला
गया.......
Jkj/akt/1310/3b/04032006
इसी तरह अनेक जो तस्कर लोग थे उनको आइडेंटिफाई किया गया और बाहर निकाला गया। यह सारे प्रयास शांति-व्यवस्था के लिए किये गये। कम्प्यूटर, साइबर कैफे, तीन जिलों में विज्ञान प्रयोगशाला, यह सभी कार्य इसीलिए किये गये कि शांति-व्यवस्था में सहायता मिले। बजट का प्रावधान जो 2004-05 में 878 करोड़ था वह 2005-06 में 918 करोड़ बढ़ाया गया जबकि पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल के दौरान अत्यन्त ही कम था। ऐसी स्थिति में, माननीय अध्यक्ष महोदय, यह सरकार के प्रयास हैं जिससे शांति-व्यवस्था कायम हुई है जबकि पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की गई। पुलिस के आधुनिकीकरण के लिए अनेक कार्यक्रम बनाये गये। प्रारम्भ में जो पुलिस की नफरी कम है उसके सम्बन्ध में प्रयास किये गये। 2004-05 के प्रारम्भ में 2333.12 लाख के आस-पास जो थी, उनको बढ़ाकर मोटर साइकिलें दी गईं, 344 मोटर साइकिल्स, 238 लाइट मोटर्स, 8 वीडियो मोटर व्हीकल्स, 13 हैवी मोटर व्हीकल्स, 224 बोटल कापियर्स, 242 हार्डली मैटल डिटेक्टर, 50 दरवाजे, 350 वायरलैस सेट, यह आधुनिक व्यवस्था हेतु पुलिस को उपलब्ध कराये गये जिनकी वजह से , जिनकी सहायता से, जिनके आधार पर पुलिस अपराध को नियंत्रण कर सके। यह सारे कार्य मौजूदा सरकार में किये गये जबकि पूर्ववर्ती सरकार ने ऐसे कोई प्रयास नहीं किये। पुलिस और आम जनता में सामंजस्य बैठाने हेतु जन समुदाय का सामंजस्य कार्यक्रम रखवाया गया, पुलिस कल्याण कार्यक्रम भी किये गये और यह सारे काम इसी वजह से किये गये कि जनता में यह मैसेज जाये कि पुलिस पूरी व्यवस्था कर रही है, पुलिस सतर्क है और आम जनता सुरक्षित है। मैं आपके सामने आंकड़ों के आधार पर यह भी बताना चाहूंगा कि 2003 में 1 लाख 45 हजार अपराध घटित हुए, 2005 में 1 लाख 40 हजार 917 अपराध घटित हुए, अपराध निरन्तर घटते जा रहे हैं, हर वर्ष अपराधों का जो आंकड़ा है, वह घटता जा रहा है। इतना ही नहीं, दर्ज अपराधों का निस्तारण भी मौजूदा सरकार के कार्यकाल के दौरान बहुत अधिक हुआ। वर्ष 2005 में 82.21 प्रतिशत चालान हुए और मात्र 2.46 प्रतिशत अपराध पेण्डिंग हैं जबकि पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल के दौरान 50 प्रतिशत, 45 प्रतिशत, 55 प्रतिशत अपराधों में चालान नहीं होंते थे, पेण्डिंग रहते थे। इसी हिसाब से मौजूदा जो रिक्त पद हैं उनकी भर्ती की भी कार्यवाही चल रही है, छह हजार कांस्टेबल्स की भर्ती, 1418 ए.एस.आई. के पद स्वीकृति, दो महिला थाने- गंगानगर और जयपुर, 24 नये बिजली की चोरी की रोकथाम हेतु थाने, 90 थानों में 180 महिला डेस्कों की स्वीकृति, 10 नई पुलिस चौकियां जो गौवंश को रोकने हेतु मेवात क्षेत्र में, अलवर में पाँच, भरतपुर में पाँच, स्थापित की गई, छह सम्भागीय मुख्यालयों पर पुलिस परामर्श सहायता केन्द्र स्वीकृत किये गये जिसके लिए 48 पद स्वीकृत किये गये, सात नई पुलिस चौकियां जिसके लिए 48 पद स्वीकृत किये गये, सात पुलिस रेंजों में 42 पद स्वीकृत, उनकी भर्ती की कार्यवाही चल रही है, 117 पुलिस प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित किये गये। यह सब इसीलिए किया गया है कि पुलिस शांति-व्यवस्था स्थापित कर सके, आम जनता को शांति मिल सके। (व्यवधान) यह इसमें बहुत कुछ लिखा हुआ है पर पढ़ने वाला ही पढ़ सकता है और आपकी नजर में वह आ नहीं सकता, आपके चश्मा दूसरा लगा हुआ है।
श्री अध्यक्ष: आप बैठे हुए की बात का जवाब नहीं दें, आप तो अपना भाषण रखें जारी।
श्री जोगाराम पटेल: माननीय अध्यक्ष महोदय, यह सारे आंकड़े शो कर रहे हैं कि मौजूदा सरकार कानून-व्यवस्था बनाने में पूर्ण रूप से सक्षम रही है और गहनता से, गम्भीरता से हर स्थिति को कंट्रोल करने का प्रयास किया है और इतना प्रयास किया है जबकि पूर्ववर्ती सरकार ने कोई प्रयास नहीं किया। इसके अलावा विशेष रूप से नर्बदा नहर परियोजना जो पश्चिमी राजस्थान के लिए एक जीवन रेखा के रूप में साबितहोगी, चाहे बाड़मेर हो, चाहे जालौर हो, चाहे वह पीने के पानी की व्यवस्था हो, चाहे खेती की व्यवस्था हो, 1450 करोड़ की लागत की यह योजना जिसके संबंध में माननीय मुख्य मंत्रीजी ने विशेष प्रयास कर इस योजना को स्वीकृत करवाया और जो पुरानी बकाया राशि थी राजस्थान सरकार के हिस्से की, वह गुजरात सरकार को जमा करवाई। कल ही गुजरात विधान सभा के एक प्रश्न के उत्तर में माननीय मुख्य मंत्रीजी ने राजस्थान सरकार के कमिटमेंट की तरह, जून, 2006 तक इसका पानी गुजरात के बोर्डर को क्रास कर राजस्थान में आयेगा, ऐसा एक प्रश्न के लिखित उत्तर में जवाब दिया। राजस्थान सरकार भी इसके लिए कमिटेड है, इससे 2.46 लाख हेक्टेयर में खेती होगी, जो जालौर और बाड़मेर के गांव हैं, 1107 गांवों और 2 कस्बों में पेयजल की सुविधा है, आम जनता को पीने का मीठा पानी मिलेगा। बेहतर वित्तीय प्रबंधन कर गुजरात की पाँच वर्ष से लम्बित राजस्थान की हिस्सा राशि 375 करोड़ का भुगतान किया गया जबकि पूर्ववर्ती सरकार ने ऐसा कोई कार्यक्रम नहीं बनाया, ऐसा भुगतान नहीं किया और पानी मिल सके जनता को, ऐसा कोई प्रयास नहीं किया। माननीय अध्यक्ष महोदय, इसके अलावा जो महत्वपूर्ण कार्य मौजूदा सरकार में हुए, शिक्षा से संबंधित, जिसकी जानकारी आपको माननीय सदस्यों ने दी, सड़क से संबंधित जो कार्य हुए जिसकी जानकारी माननीय सदस्यों ने आपको दी। हिंदुस्तान के इतिहास में पहली बार शिक्षा में इतने अधिक कार्य हुए, चाहे स्कूलें क्रमोन्नत करने का काम हो, चाहे राजीव गांधी स्कूलों को क्रमोन्नत करने का काम हो, चाहे नई प्राइमरी स्कूल खोलने का काम हो, चाहे पांचवीं से आठवीं क्रमोन्नत करने का काम हो, चाहे आठवीं से दसवीं क्रमोन्नत करने का काम हो या दसवीं से ग्यारहवीं क्रमोन्नत करने का हो, हिंदुस्तान के इतिहास में, राजस्थान के इतिहास में पहली बार इतनी स्कूलें क्रमोन्नत की गईं। यह सरकार की मंशा स्पष्ट करता है। शिक्षा का स्तर सुधरेगा तो राज्य का विकास होगा। शिक्षा हर नागरिक के लिए अत्यंत जरूरी है और जो शिक्षकों की भर्ती, शिक्षकों का प्रमोशन और जितनी सुविधाएं विद्यालय को देनी चाहिए, जितना ऐतिहासिक काम मौजूदा सरकार ने किया है उतना कभी पूर्ववर्ती सरकार ने प्रयास भी नहीं किया। मैं इसके लिए आदरणीय मुख्य मंत्रीजी और शिक्षा मंत्रीजी को धन्यवाद और बधाई देता हूं। मेरे विधान सभा क्षेत्र में मैंने आंकड़ों सहित मेरे एक साल के कार्यकाल के उपरांत बताया था...
श्री अध्यक्ष: शिक्षा मंत्रीजी, आपको बधाई दे रहे हैं, आप तो बातें कर रहे हैं।
श्री जोगाराम पटेल: उन्होंने जो 57 साल में नहीं किया, वह मौजूदा सरकार ने एक साल में कर दिया। स्कूलों का क्रमोन्नत करना हो......
श्री अध्यक्ष: आपको बधाई दे रहे हैं, आप बातें कर रहे हैं। वह आपको बधाई दे रहे हैं।
श्री जोगाराम पटेल: मैं विशेष रूप से इस बात के लिए भी बधाई दूंगा कि इस साल एक सीनियर हायर सैकण्डरी गर्ल्स, दो सैकण्डरी स्कूल गर्ल्स, दो स्कूलें बायज की क्रमोन्नत कीं सैकण्डरी और हायर सैकण्डरी। इसके अलावा 22 राजीव गांधी पाठशालाओं को प्राइमरी में क्रमोन्नत और 9 प्राइमरी नई और पाँच मिडिल स्कूलें, यह इतनी कभी भी राजस्थान के इतिहास में, लूणी विधान सभा क्षेत्र में नहीं खुलीं जितनी इस शैक्षणिक सत्र में खोली गई हैं जिसके लिए मैं विशेष धन्यवाद आदरणीय मुख्य मंत्रीजी और शिक्षा मंत्रीजी को दूंगा।
इतना
ही नहीं, सड़क
के क्षेत्र
में प्रधान
मंत्री रोजगार
योजना के तहत
व अन्य योजनाओं
के तहत मेरे
विधान सभा
क्षेत्र में
करीब एक अरब
रूपये की सड़क
योजनाओं का
काम हुआ है जबकि
हिंदुस्तान
के इतिहास
में, राजस्थान
के इतिहास में
कभी भी ऐसा
नहीं हुआ। पूर्ववर्ती
सरकार के
माननीय
विधायक या
माननीय
मंत्री रहे
होंगे परंतु
किन्होंने
भी इतने प्रयास
नहीं किये। कोई
पेयजल योजना
नहीं लाये,
कोई सड़क के
संबंधित
योजना नहीं
लाये, कोई स्कूल
क्रमोन्नत
नहीं किया। उनके
कार्यकाल में,
हिंदुस्तान
आजाद होने के
बाद मात्र 11
हायर सैकण्डरी
स्कूलें हैं
और एक साल में
एक हायर सैकण्डरी
स्कूल, उनके
इतिहास में कुल
25 सैकण्डरी
स्कूल हैं
जबकि इस साल
चार सैकण्डरी
स्कूल, उनके
इतिहास में 140
प्राइमरी स्कूल
हैं और हमने 32
स्कूलें एक
साथ दे दीं, तो
यह सारा शो
करता है कि मौजूदा
सरकार काम
करना चाहती
है, काम किया
है और भविष्य
में भी काम
करना चाहती
है।
सड़क के मामले
में 250 की
जनसंख्या
वाले, 500 की
जनसंख्या
वाले सारे
गांव सड़क से
जुड़ गये हैं
और दो-चार
योजनाएं अभी
भी चल रही हैं
और 250 की जनसंख्या
वाले जो गांव
हैं उनका
सर्वे का काम
चल रहा है। जोधपुर
जिला मरूस्थलीय
क्षेत्र के
अंदर आता है
और उस योजना
के तहत 250 की जनसंख्या
के जितने भी
रेवेन्यू
विलेज हैं
उनको जोड़ने
का काम चल रहा
है और साथ ही
साथ एक हमारी
सरकार और हमने
जो प्रयास किया,
जो रेवेन्यू
विलेज डिक्लेयर
नहीं हैं 2001 की
जनगणना के
अनुसार विलेज
की श्रेणी में
नहीं आते हैं
परंतु उसमें
एक हेबिटेशन
वर्ड है, जो रेवेन्यू
विलेज नहीं है
परंतु
हेबिटेशंस
हैं, 250 की जनसंख्या
से ऊपर हैं,
उनको
हेबिटेशंस का
प्रमाणित
करवा कर जुड़वाने
का प्रयास
किया जा रहा
है जिसके लिए
मैं आदरणीय
राजेन्द्र
सिंहजी,
सार्वजनिक
निर्माण
मंत्रीजी का विशेष
रूप से आभारी
हूं कि उन्होंने
इसमें हमारा
पूरा सहयोग
किया है। इतना ही
नहीं, मिसिंग
लेन, डब्लू.बी.एम.
से बीटी और जो
विशेष
योजनाओं के
तहत सड़के
हैं.......
Bhs/akt/4.3.06/3c/1320
उसके
लिए भी विशेष
प्रयास किया
कई ऐसी सड़कें
थीं जो 20-20, 30-30
सालों से ऐसे
ही पड़ी थी उन
सड़कों को जोड़ा
है और आम जनता
में यह अमन स्थापित
हुआ है कि यह
सरकार विकास
के काम कर रही है
विकास के काम
करने की इसकी
मंशा है और
इसी मंशा,
कर्मणा और
वाचना के साथ
यह सरकार काम
कर रही है
इसलिए हमारे
राजस्थान की
जनता पश्चिमी
राजस्थान
में लूणी
विधान सभा
क्षेत्र की
जनता
इस सरकार के
काम काज से
अति प्रसन्न
है।
इसके लिए
मौजूदा सरकार
बधाई की पात्र
है।
इतना ही नहीं
आदरणीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके समक्ष
कुछ विशेष उल्लेख
के तहत यह भी
निवेदन करना
चाहूंगा कि
सड़क, पानी के
अलावा बिजली
के मामले में
भी पूर्ववर्ती
सरकार ने कोई
कार्यवाही नहीं
की।
पिछले 57
साल के
कार्यकाल के
दौरान 12 करोड़
रुपये की
रेवेन्यु
बिजली के
मामले में
बकाया रखी। करीब 26
हजार के कंज्यूमर
होने के
बावजूद भी 161
रेवेन्यु
विलेज होने के
बावजूद भी एक
ही सब डिवीजन
रखा 150
किलोमीटर की
दूरी, 26 हजार
कंज्यूमर, 161
रेवेन्यु
विलेज और इन
सबके बावजूद
भी कभी भी उस
और कोई ध्यान
नहीं दिया
गया।
लंबे-लंबे
तारों की लहरे
झूलती हुई अगर
एक जगह कंप्लेंड
मिले तो तीन
दिन बाद दूसरी
जगह पहुंचेंगे। परन्तु
मौजूदा सरकार
ने इस एक
डिवीजन को दो
डिवीजन बनाने
के संबंध में
प्रयास शुरू
किये जिसके
लिए मैं
आदरणीय बिजली
मंत्री जी का
बहुत-बहुत
तहेदिल से
आभार व्यक्त
करता हूं। मैं
विशेष रूप से
राजस्थान की
ओजस्वी मुख्यमंत्री
वसुन्धरा जी
का अभिनन्दन
करना चाहूंगा,
निवेदन करना
चाहूंगा, धन्यवाद
देना चाहूंगा
कि उन्होंने
जैसा कहा वैसा
करके बताया । वहां
इलेक्शन के
बाद तुरन्त
ही उन्होंने
जो सबसे महत्वपूर्ण
योजना थी
पेयजल योजना
उस पेयजल
योजना का
शिलान्यास
किया और 57
करोड़ रुपये
स्वीकृत
किये।
और 57 करोड़
रुपये स्वीकृत
ही नहीं किये
जो तीन साल का
टारगेट था उस
योजना को पूरा
करने का उसको
घटा करके दो
साल किया और
यह कहा कि
योजना दो साल
के अन्दर अन्दर
पूरी होनी
चाहिए । यह
मंशा, वाचा और
कर्मणा है
सरकार की। जबकि
पूर्ववर्ती
सरकार के
पूर्ववर्ती
मंत्री चाहे
जलदाय मंत्री
रहे हों परन्तु
उन्होंने
एसी कोई योजना
नहीं बनायी
इसलिए में विशेष
रूप से बधाई
देना चाहूंगा
मेरे
विधानसभा
क्षेत्र में
जो पेयजल योजना
स्वीकृत की
स्वीकृत ही
नहीं की फंड
अलॉट किया,
सैंक्शन
किया, काम
शुरू किया और
काम चल रहा है। इतना ही
नहीं जो 74
विलेज मेरे
बकाया रह गये
थे उनके लिए
करीब 35 करोड़
रुपये की
योजना बनवाकर
सरकार के
समक्ष
विचाराधीन है
और यथाशीघ्र
वो भी स्वीकृत
हो जाएगी ऐसी
मुझे पूरी आशा
है और इसलिए
पूरा लूणी
विधान सभा
क्षेत्र जो
पश्चिमी राजस्थान
का एक भाग है
वो पूरा का
पूरा पेयजल
समस्या से
हमेशा हमेशा
के लिए
सुरक्षित रह
जाएगा ऐसा
प्रयास कभी भी
नहीं किया गया
जबकि मौजूदा सरकार
ने किया।
अध्यक्ष
महोदय, राजस्थान
और पश्चिमी
राजस्थान को
ध्यान में
रखते हुए
पश्चिमी
राजस्थान
में चाहे वो
बाड़मेर हो
चाहे जालौर हो
चाहे इधर का
बैल्ट हो
सबसे अधिक
जीरा पैदा
होता है । हमारी
लंबे समय से
यह मांग थी कि
हमारा सारा
जीरा बिकने के
लिए ऊंझा मंडी
जाता था परन्तु
जोधपुर में
मंडी की घोषणा
करके एक अति
महत्वपूर्ण
कदम उठाया गया
और इस कदम से
जो फायदा ऊंझा
मंडी को मिलने
वाला था वो
फायदा अब
राजस्थान
में पश्चिमी
राजस्थान
में और जोधपुर
में काश्तकारों
को और व्यापारियों
को मिलेगा
जबकि ऐसा
पूर्व में कभी
भी नहीं किया
गया इतना ही
नहीं जो एम्स
का मामला लंबे
समय से
राजनीतिक
कारणों से अटका
रही थी
पूर्ववर्ती
सरकार और मेरे
प्रतिपक्ष के
साथी। इसके
लिए सरकार ने
विशेष प्रयास
किया मुख्यमंत्री
जी ने विशेष
प्रयास किया
और एम्स का
अति महत्वपूर्ण
जो प्रोजेक्ट
है उसके जितने
भी विवाद उत्पन्न
किये गये वो
राजनीतिक
भेदभाव से
केन्द्र की
सरकार ने जो
भी रोड़े
लगाये उन
रोड़ों को खतम
करके इसकी
बाधाएं दूर की
गई और एम्स
का प्रोजेक्ट
जोधपुर में
प्रारम्भ
हुआ।
यह सारा
कार्य राजनीतिक
भेदभाव की वजह
से राजनीति
द्वेषता की
वजह से मेरे
प्रतिपक्ष के
साथी केन्द्र
में बैठे उनके
साथी
जानबूझकर
इसलिए कर रहे
थे कि
प्रोजेक्ट
यहां स्टार्ट
नहीं होना
चाहिए परन्तु
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आदरणीय
मुख्यमंत्री
जी ने अति
विशेष प्रयास
कर इसको प्रारम्भ
किया और
प्रारंभ कर
सारी बाधाएं
दूर की इसके
लिए मैं धन्यवाद
दूंगा।
इसके
अलावा एक विषय
हमारे
प्रतिपक्ष के
साथियों ने
उठाया था
शिक्षा संकुल
का नाम राजीव
गांधी से डॉ.
राधाकृष्णन
किया जा रहा
है इस संबंध
में मैं इतना
निवेदन अवश्य
करना चाहूंगा
कि राधाकृष्णन
वो हस्ती हैं
वो शिक्षाविद्
हैं जिनका नाम
इतिहास में
नहीं हर व्यक्ति
को फक्र के
साथ लेने में
आनन्द आता है
और उनके नाम
का अगर कोई
संकुल स्थापित
हो उसके संबंध
में भी
राजनीतिक
भेदभाव की वजह
से आरोप लगाया
जाए मेरा यह
निवेदन है कि
यह गलत है। इतना ही
नहीं कई सदस्यों
ने यह भी आरोप
लगाया कि कृषि
कार्यों पर ध्यान
नहीं दिया गया
जबकि मौजूदा
सरकार ने सबसे
अधिक कृषि
कार्यों पर ध्यान
दिया है।
पेयजल
योजनाओं पर ध्यान
दिया है,
ऊर्जा
क्षेत्र में
ध्यान दिया
है, शिक्षा के
क्षेत्र में
ध्यान दिया
है इतना ही
नहीं जो भी समाज
के कमजोर वर्ग
हैं उनकी उन्नति
कैसे हो सकती
है चाहे
आदिवासी
क्षेत्र हो
चाहे और कोई
क्षेत्र हो
उनके संबंध
में पूरे
प्रयास किये
गये उनको सशक्त
बनाने का पूरा
प्रयास किया
गया और ये सब
इसीलिए किया
गया कि राजस्थान
का सर्वांगीण
विकास हो
इसलिए मैं
मौजूदा सरकार
को तहेदिल से
बहुत-बहुत धन्यवाद
दूंगा और आपको
भी धनयवाद
दूंगा कि आपने
बोलने का समय
दिया। धन्यवाद।
जय हिन्द।
श्री
अध्यक्ष: श्री
ज्ञानचंद
पारख।
(डॉ.एन.एस.
गुर्जर,
सभापति
पदासीन)
श्री
ज्ञानचंद
पारख: माननीय
सभापति महोदय,
महामहिम राज्यपाल
द्वारा इस
पवित्र सदन
में जो
अभिभाषण दिया
गया और उसके
ऊपर माननीय
डॉ.एन.एस.
गुर्जर ने जो
धन्यवाद
प्रस्ताव पर
अपने समर्थन
का वक्तव्य
दिया, मैं भी
उसका समर्थन
करता हूं और
महामहिम राज्यपाल
का अभिभाषण
हमारी सरकार
की सवा दो साल
की उपलब्धियों
का ब्यौरा
था, हमारी
सरकार ने
राजस्थान के
चहुंमुखी
विकास के लिए
जो कार्य किये
उसका लेखा
जोखा इस
अभिभाषण में
दर्ज था। हमारी
सरकार के
कार्यकाल में
समाज के हर
वर्ग के उत्थान
और कल्याण के
लिए जो भी काम
किये गये उसका
ब्यौरा भी
बताया गया। कौन-कौन
सी
उपलब्धियां
जो हम हासिल
करने जा रहे
हैं उसके लिए
सरकार क्या
प्रयास कर रही
है क्या कदम
उठा रही है
उसकी जानकारी
भी सदन को दी। ये दो
साल हमारी
सरकार के
ऐतिहासिक वर्ष
रहे।
हमने जो काम
किया मैं दावे
के साथ कह
सकता है कि हम
और हमारा
प्रदेश राजस्थान
सुनहरे कल की
ओर बढ़ रहा है और
आने वाले कुछ
सालों में हम
देश के विकसित
प्रदेशों में
से पहले नंबर
पर होंगे।
माननीय
सभापति महोदय,
हमें जो
जनादेश मिला,
हमने विश्वास
से यह जनादेश
प्राप्त
किया और
जनादेश के बाद
में हमारी
नीति और नीयत
दोनों ठीक
होने के कारण
हमें लगातार
सफलता मिलती
रही।
हमारी जो
माननीय मुख्यमंत्री
जी हैं चुनाव
के पहले
परिवर्तन
यात्रा के
दौरान....
kas\usc\1330\3d
राजस्थान
के गांव गांव
में घूमी ।
किस गांव में
क्या समस्या
है, उस समस्या
का समाधान क्या
है, उस गांव
में विकास की
संभावनाएं
कैसे बन सकती
है, समाज के
कौनसे वर्ग की
आर्थिक
स्थिति कैसी
है, शैक्षणिक
स्थिति कैसी
है, उसकी
सामाजिक
स्थिति कैसी
है इन सारी
बातों की
जानकारी उन्होंने
उस समय प्राप्त
की और
उस समय से ही उन्होंने
जनता को विश्वास
दिला दिया था
कि यदि हमें
जनादेश दिया,
हमें अवसर
दिया तो हम
आपके विश्वास
पर खरा
उतरेंगे ।
हमने जनादेश
कोई असत्य
बोलकर या
झांसे से नहीं
लिया । सवा
सात साल पहले
आपको भी
जनादेश मिला
था । आपने
कैसे लिया आपको
पता है । साढे
आठ साल तक आप
सत्ता से
बाहर थे
और आपको सत्ता
में आने की
कुलबुलाहट थी
। समाज का
कौनसा तबका
किस कारण से
सरकार से
नाराज है आपने
वह चीजे ढूंढी
, वह बातें
ढूंढी और आपने
सत्ता हासिल
करने के लिये
प्रदेश की
जनता के साथ धोखा
किया, नये नये
तरीके के आपने
हथकंडे अपनाये
। उस समय
कर्मचारियों
से वादा किया,
आपको पता था
कर्मचारी
सरकार से नाराज
हैं और आपने
वादा किया,
आपने विश्वास
दिलाया कि
आपकी जितनी भी
सुविधाएं हैं,
आपकी जितनी भी
मांगे हैं
हमारी सरकार
मानेगी । उनको
अपनी ओर
खींचने का गलत
तरीके से प्रयास
किया । बेरोज़गारों
को आपने झांसा
दिया । प्रदेश
में बहुत बडी
मात्रा में
बेरोजगारी
फैली हुई है ।
आपने उसकी नब्ज
को देखा कि यह
रोजगार चाहते
हैं आपने उनके
साथ भी दगा
किया । आपने
चुनाव में यह
भरोसा दिलाया,
विश्वास
दिलाया कि
आपकी सरकार
अगर आई, अगर
आपको जनादेश
मिला तो आप
रोजगार के
अवसर दोगे ।
लेकिन चुनाव
के बाद क्या
हुआ, आपने एक
भी नौकरी अपने
पांच साल के
कार्यकाल में
किसी
बेरोजगार को
नहीं दी और
इतना ही नहीं
आपने तो
रोजगार के
अवसर भी सदा
सदा के लिये
खत्म करने का
काम किया । 50
हजार से ज्यादा
पद आपने खत्म
कर दिये ।
चाहे कोई वर्ग
हो, किसानों
को भी झांसा
दिया आपने कि
पर्याप्त
मात्रा में
बिजली देंगे ।
आपके हित भी
हित हैं उनकी
सुरक्षा
करेंगे । लेकिन
आपके राज में
किसानों की
स्थिति
बहुत ज्यादा
दयनीय हो गई ।
लेकिन हमने
ऐसा प्रयास
नहीं किया ।
हमने
जो कहा एक एक
कर उस पर खरा उतरने
का पूरा
प्रयास इन सवा
दो साल के
शासनकाल में
लगातार कर रहे
हैं और आगे भी
करते रहेंगे
और इसके
परिणाम आप खुद
देखेंगे ।
कल
नगर से आने
वाले माननीय
सदस्य गेहूं
को लेकर बहुत
ज्यादा
चिंतित थे कि
राजस्थान
में गेहूं की
हालत बहुत ज्यादा
खराब है । गेहूँ
बहुत ज्यादा
महंगा हो गया
। बीपीएल
वालों को राशन
का गेहूं मिल
नहीं रहा और
यह भी चर्चा
कर रहे थे कि
उनके
कांग्रेस काल
में अकाल के
दौरान इतना गेहूँ
दिया गया कि
उनके घरों में
जब अच्छी
वर्षा हुई तब
भी इतना गेहूं
अनीं आया ।
मैं उनको
बताना
चाहूंगा आपको
शायद याद नहीं
होगा कांग्रेस
काल में पहली
बार राजस्थान
में भूख से
बहुत बडी संख्या
में मौते हुई
थीं । राजस्थान
की धरती को यह
बहुत बडा कलंक
आपकी सरकार के
काल में लगा ।
एक नहीं पांच
सौ के करीब
भूख से मौते
हुईं । हाईकोर्ट
ने भी इस बात
को माना था कि
इसमें आपकी
सरकार जिम्मेदार
है और
हाईकोर्ट ने
इस बात को
लेकर आपको लताड
भी लगाई थी ।
श्री
श्रवण कुमार : भूख से एक भी
नहीं हुई होगी
।
श्री
सभापति: वह बोल रहे
हैं आप बाद
में जवाब दे
देना । प्लीज
नो इन्ट्रप्शन
।
श्री
ज्ञानचंद
पारख: माननीय
माहिर आजाद
साहब जब यह
निर्दलीय सदस्य
थे तब यह
मुद्दा उन्होंने
खुद ने उठाया
था । सभापति
महोदय, हाईकोर्ट
ने इस बात को
माना था और
इनकी सरकार को
लताड लगाई थी
।
मोहम्मद
माहिर आजाद : हाई कोर्ट
ने या सुप्रीम कोर्ट
ने? यह तो जरा
करेक्ट करें
आप ।
श्री
ज्ञानचंद
पारख:
सुप्रिमकोर्ट
ने लताड लगाई
थी आपको ।
मोहम्मद
माहिर आजाद: सभापति
महोदय, गत
वर्ष बारां
में जो हुई
सहरिया
आदिवासी
क्षेत्र में
वह बता रहे हो
या पहले की
बता रहे हो ।
श्री
सभापति : माननीय
सदस्य, प्लीज
।
श्री
ज्ञानचंद
पारख: मैं
कांग्रेस काल
की बात कर रहा
हूं ।
मोहम्मद
माहिर आजाद: 500 कहां कहां
हुई जरा उसकी
डिटेल भी आप
दे देंगे तो
मैं आपका
अहसानमंद रहूंगा
।
श्री
सभापति : माननीय
सदस्य आप
विराजिए, आप
एक मिनट
विराजिये ।
देखिये यह वाद
विवाद हो रहा
है जब इधर से
बोले तो इधर
से टोकना शुरू
कर देते हैं,
इधर से बोले
तो इधर से टोकना
शुरू कर देते
हैं । चूंकि
वाद विवाद है दोनो
तरफ के माननीय
सदस्य बोल
रहे हैं आप
पाइंट नोट कर
लीजिए जब उसका
जवाब देना है
तो खडे होकर
जब बोलते हैं
तो उसका जवाब
दे दीजिए ।
बीच बीच में
बहस करने से
वह भी डिस्टर्ब
होते हैं आप
भी डिस्टर्ब
होते हैं ।
इसलिए जब
माननीय सदस्य
बोले आप पाइंट
नोट कीजिए,
कोई बहुत
आपत्तिजनक
बात बोले तब
अलग बात है,
लेकिन हर बात
पर ही एक एक
इश्यू पर बहस
करना शुरू कर
दें that is not desirable. Please carry on.
मोहम्मद
माहिर आजाद: सभापति
महोदय, मैं तो
कल बोल चुका
अब मैं तो जवाब
देने वाला
नहीं हूं ।
श्री
सभापति : आपकी
पार्टी से
कहिये, अभी
माननीय बीडी
कल्ला साहब,
संयम जी लोढा
बोलेंगे ।
मोहम्मद
माहिर आजाद: मेरा नाम
लेकर कोई बात
कही जाये तो
उसको तो करेक्ट
करना पडेगा ।
श्री
सभापति : आपका नाम
लेकर कही गई
है तो आप पहले
परमिशन सीक
कीजिए
for personal explanation. Thereafter you can speak on that.
मोहम्मद
माहिर आजाद: आपसे
इजाजत लेकर ही
तो कह रहा हूं,
आपसे इजाजत लिये
बिना नहीं
कहूंगा ।
श्री
सभापति : थैंक्यू,
बैठ जाइये ।
श्री
ज्ञानचंद
पारख: सभापति
महोदय, जब
राजस्थान
में भुखमरी के
हालात हो गये
थे तो उस समय केन्द्र
की सरकार जो
हमारी पार्टी
की थी, माननीय
अटल बिहार
वाजपेयी
प्रधान
मंत्री थे कोई
व्यक्ति भूख
से नहीं मरे
इसलिए गेहूं
के गोदाम खोल
दिये और राजस्थान
सरकार को बहुत
बडी मात्रा
में गेहूं का
आबंटन किया और
माननीय सदस्य
कह रहे हैं कि
उनके काल में
अकाल में इतना
गेहूं घरों
में आ गया
जितना सुकाल
में भी नहीं आया
। यह गेहूं भी
हमारा दिया
गया था और अगर
हम गेहूं नहीं
देते तो शायद
हालात कुछ और
होते और मैं
यह कह दूं कि
इस गेहूं ने
तो आपकी
पार्टी की लाज
और साख बचा दी
। आपने चुनाव
मे खास मुद्दा
यही बनाया,
चुनाव में भी
मुख्य
मुद्दा यही था
। हमने अकाल
में इतना
गेहूं दिया और
आप हमको वोट
दो और कोई
मुद्दा इनके
पास चुनाव में
नहीं था । कोई
काम का मुद्दा
नहीं था ।
अकाल में
गेहूं जो घरों
में पहूंचा
हमारी सरकार
का दिया हुआ,
हमारी पार्टी
का दिया हुआ ।
अगर उस समय
अटल जी की
सरकार गेहूं
नहीं देती तो
जितनी संख्या
में आज यह आये
हैं ना आज 54 हैं
शायद 4-5 तक
सीमित रह
जाते, खाता
खुल जाता कहीं
से भी । आप तो
धन्यवाद दो
माननीय अटल
बिहारी
वाजपेयी जी की
सरकार को,
राजग की सरकार
को जिन्होंने
आपकी लाज रख
दी और आज आप
गेहूं के ऊपर
राजनीति कर
रहे हो। कल
आपने आरोप
लगाया कि
हमारी सरकार
गेहूं नहीं
उठा रही है ।
वहां आप मना
करवा रहे हो
कि उनको गेहूं
मत दो । पहले
भी आपने गेहूं
के ऊपर राजनीति
की और आज भी
वही पासा आप
वापस चलाना
चाहते हो ताकि
यह जनता झांसे
में आ जाये,
धोखे में आ जाये,
हमारी सरकार
को बदनाम कर
दें । मैं
आपको स्पष्ट
कर दूं आज तक
आप गेहूं खाते
आये हो अगर
गेहूं के ऊपर
ज्यादा
राजनीति की तो
यह गेहूं कल
आपकी पार्टी
को पूरा का
पूरा निगल
जायेगा यह
मानकर चलना आप
।
सभापति
महोदय,
नाथद्वारा से
आने वाले
माननीय सदस्य
ने भी इस
अभिभाषण पर
चर्चा के
दौरान इस बात
पर सहमति जताई
कि हमारी
सरकार के बहुत
विकास किया,
हमारी सरकार
ने बहुत काम
किया । पर यह
कहकर कि हमने
लोकतांत्रिक
परमपराओं को,
व्यवस्थाओं
को कमजोर किया
हमारे काम में
पादरर्शिता
नहीं, यह कह कर
उन्होंने
अभिभाषण का
समर्थन करने
में अपनी ओर
से असमर्थता
जताई । हमने
कभी लोकतंत्र
को कमजोर नहीं
किया ।
लोकतंत्र को
इस देश में
किसी ने कमजोर
किया है तो
उसके लिये भी
आप स्वयं
जिम्मेदार
हो । हमारी
पार्टी में
पूरी
लोकतांत्रिक
व्यवस्था
है, सारे
निर्णय
सामूहिक आधार
पर लिये जाते
हैं, सब मिलकर
करते हैं ।
ऊपर से कोई
निर्णय आ गया
और वह मानना...
ans\usc\1340\4.3.2006\3e\1
और
वह मानना,ऐसा
हमारी पार्टी
में हम आपस
में बैठकर
निर्णय करते
हैं। मैं आपसे
यह भी
कह दूं कि
किसी भी बडे़ व्यक्ति
ने भी कोई
निर्णय ले
लिया....
श्री
सभापति: समाप्त प्लीज(व्यवधान)
नम्बर भी
बहुत है, 15
मिनिट हो गए।
श्री
ज्ञानचंद
पारख: नहीं पाँच
मिनिट हुए
हैं, मुश्किल
से पाँच मिनिट।
मैं अभी बात पर तो
आया ही नहीं
हूं।
श्री
सभापति: जल्दी
बोलिये,15
मिनिट ले
चुके। मैं ध्यान
दिला रहा हूं।
श्री
ज्ञानचंद
पारख: हमारी पार्टी
का आंतरिक
लोकतंत्र
बहुत मजबूत
है। सारे
निर्णय होते
हैं वह मिल
बैठकर होते
हैं। सबको
अपनी बात कहने
और रखने का
अधिकार भी है
हमारी पार्टी
में, चाहे
किसी निर्णय पर असहमति
हो। हमारा
कार्यकर्ता
हो चाहे हमारा
मंत्री हो
बड़ी दबंगता
से पूरे साहस
से अपनी बात रखता
है। आपकी
पार्टी में
आपको ऐसा अवसर
कभी नहीं मिला
होगा। आपके
नेता ने
ऊपर से जो कह दिया....
श्री
श्रवण कुमार: आप शहरों के
आदमी हो, गांव
के मामले में क्या
मालूम।
श्री
सभापति: प्लीज आप
बैठिये, नो इन्ट्रप्शन,
नौ इन्ट्रप्शन।
(व्यवधान) आप
सदन को थोड़ा
ढंग से चलाये।
आप अपनी
बात बोलिये,
इधर देखकर
बोलिये आप उनसे
सीधे बात मत
कीजिए,
बिराजिए।
श्री
श्रवण कुमार: हमें मालूम
है गांव में
बिजली
नहीं....(व्यवधान)
श्री
सभापति: आप इधर
देखकर बोलिये,
उधर नहीं।
श्री
ज्ञानचंद
पारख: माननीय
सभापति महोदय,
यह पंक्तियां
इनको बता दूं।
श्री
सभापति: आप उनसे
उलझिये मत, आप
अपनी बात
कहिये।
श्री
ज्ञानचंद
पारख: यह सुनी
होगी इन्होंने
' जिनके अपने
घर की दीवारें
शीशे की होती
है वह दूसरो
के ऊपर पत्थर
नहीं उछाला
करते' । आप ध्यान
रख करे इस बात
का।
माननीय
सभापति महोदय,
ऐसा नहीं है
कि विकास की
जो जानकारी है
यह कोई
अभिभाषण के माध्यम
से ही माननीय
सदस्य को
मिली हो या
छपी छपाई
सामग्री हमने
दे दी और
उससे हम यह
साबित करना
चाहते हैं कि
हमने बहुत
विकास कर
दिया, प्रत्यक्ष
रूप में किसी
भी गांव में
चले जाइये,
ढाणी में चले
जाइये हमारे
विकास की
गवाही वह गांव-ढाणी
दोनों आज तत्पर
बैठे हैं।
बिल्कुल तत्पर
बैठे है। आज
आप हंस रहे हो
ना, जनता कल
आपके
ऊपर हंसेगी
देखना। 50 साल
आपने शासन किया....
श्री
सभापति: माननीय सदस्य Please don't comment upon him.
श्री
श्रवण कुमार: 'शीशे की
दीवार । फानूस
बनकर जिसकी
हिफाजत हवा
करे,वो शमा क्या
बुझे जिसे
रोशन खुदा
करे'।
श्री
सभापति: प्लीज आप
बैठिये।
श्री
ज्ञानचंद
पारख: अब आपकी शमा
कोई ज्यादा
चलने वाली
नहीं है।
श्री
सभापति: प्लीज
अब आप समाप्त
कीजिए।
श्री
ज्ञानचंद
पारख: यह अपनी शमा
की बात कर रहे
हैं।
श्री
सभापति: आप समाप्त
कीजिए।
श्री
ज्ञानचंद
पारख: यह अपने
खुदा की बात
कर रहे हैं,
मैं स्पष्ट कह
दूं आपको
मात्र एक
सहारे से आप बहुत लंबे
समय तक जीवित
नहीं रह सकते।
गांधी परिवार
के नाम का
सहारा लेकर आप
आज तक राजनीति
करते
आये हो, जब तक
काम नहीं
करोंगे तो यह
नाम भी ज्यादा
लंबे समय तक
चलने वाला
नहीं है। (व्यवधान)
श्री
सभापति: आपका समय
जाया हो रहा
है इसलिऐ आप
टाइम इधर उधर
खराब मत
करिये, आप
बोलिये।
श्री
ज्ञानचंद
पारख: आज हर
गांव में ढाणी
में विकास की
गंगा
वहां तक
पहुंच गई चाहे
कोई भी
क्षेत्र ले
लीजिए आप कोई
बनाने की आवश्यकता
नहीं है, आप
खुद महसूस
करते होंगे।
चाहे सड़क का
क्षेत्र ले लीजिए,
चाहे मेगा
हाइवे हो,
राजस्थान का
नाम पूरे हिन्दुस्तान
में वह कर
जायेगा।
चाहे
गांवों को सड़क
से जोड़ने की
योजना हो
राजस्थान
पहले नम्बर
पर है, पहले
नम्बर पर
राजस्थान को
हम ले आये।
मैं बिल्कुल
कह सकता हूं
कि जितनी
सड़के
आजादी के बाद
मेरे विधान
सभा क्षेत्र
में नहीं बनी,
मैं राजेन्द्र
राठौड़ जी को
धन्यवाद
देना चाहूंगा
कि इन सवा दो
साल में
उससे ज्यादा
सड़के बनाकर उन्होंने
गांव गांव में
सड़क पहुंचा
दी। यही नहीं
डब्ल्यू.बी.एम.
सड़कों के बारे
में तो आपको
भी पता है कि
आपने पिछली
बार भी डब्ल्यू.बी.एम.
को बीटी करने
के लिए अपनी
बात कही थी सदन
में और आपके
मंत्री जी ने
कभी इसके ऊपर
गम्भीरता से
नहीं लिया।
आपके कई
माननीय सदस्यों
ने जो
हमारी
क्षतिग्रस्त
सड़के हैं डब्ल्यू.बी.एम.
की, अपना
दुखड़ा रोया
था, अपनी
पीड़ा बताई थी
कि सड़के
क्षतिग्रस्त
हैं इनका
डामरीकरण
किया जाना
बहुत आवश्यक
है लेकिन एक
भी डब्ल्यू.बी.
एम. सड़क को उस
समय डामरीकरण
में नहीं बदला
गया और हमारी
सरकार ने आते
ही, हमारे
मंत्री जी ने
आते ही इन सवा
दो साल में
राजस्थान की
जितनी भी डब्ल्यू.बी.एम.
सड़के हैं एक
आदेश में ही
कि उन सारी सड़कों
का डामरीकरण
करने की स्वीकृति
दी जाती है, आज
वह सड़के लगभग
बनकर तैयार है
। और इतना ही
नहीं....
श्री
सभापति: प्लीज:
श्री
ज्ञानचंद
पारख: जो भी एमडीआर
सड़के हैं
जिसमें शहरी
और गांव
क्षेत्र आता
है, आबादी
क्षेत्र आता
है और वह पानी
की वजह से कीचड़
की वजह
से, नाली
नहीं होने की
वजह से(व्यवधान)
मात्र पाँच
मिनिट....
श्री
सभापति: माननीय
सदस्य, आप 20
मिनिट ले चुके
हैं।
श्री
ज्ञानचंद
पारख: मात्र 10
मिनिट लिये
हैं मैंने।
श्री
सभापति: रिकार्ड है
यहां पर मेरे
पास।
श्री
ज्ञानचंद
पारख: दस
इन्होंने ले
लिये वापस
मेरे तो, इनके काट देना
आप। (व्यवधान)
श्री
श्रवण कुमार: हमारे तो
कटे ही सवा दो
साल हो गए।
श्री
सभापति: दो-तीन
मिनिट में
समाप्त
कीजिए1
श्री
ज्ञानचंद
पारख: जितनी भी
आबदी क्षेत्र
की जो सड़के
हैं पीडब्ल्यूडी
की, उनको
सीमेंट का
बनाने की जो
स्वीकृति
जारी की यह भी
आजादी के बाद
पहली बार हुआ
है, मेरे
विधान सभा
क्षेत्र में
पीडब्ल्यूडी
की मुख्य
सड़क मंडिया
रोड़ 91 लाख की
सीमेंट
कंकरीट रोड़
की स्वीकृति
देकर पाली
वालो के ऊपर
बहुत बड़ा
अहसान किया है
उसके लिए मैं
ह्दय से
माननीय
सार्वजनिक
मंत्री जी का
आभार प्रकट
करता हूं।
चाहे
शिक्षा का
क्षेत्र ले
लें सारी जनता
जानती है,
सारा प्रदेश
जानता है इतनी
प्राथमिक
शालाएं आज तक
नहीं खुली। हर
एक किलोमीटर
के एरिया में
प्राथमिक
शाला।
कोई बच्चा
पढ़ना चाहे
उसके घर के
पास स्कूल
मौजूद। बहुत
बड़ी संख्या
में प्राइमरी
स्कुलों को
अपर प्राइमरी
में क्रमोन्नत
किया, इतनी
बड़ी संख्या
में जितना
हमने भी चुनाव
में वादा नहीं
किया उससे भी
बढ़कर।
आपके काल में
एक भी शिक्षक
की नियुक्ति
नहीं हुई,
किसी को नौकरी नहीं
दी। हमारी
सरकार ने स्कूल
भी खोले और स्कुलों
को अच्छी
तरह से
चलाने के लिए
ताकि बच्चों
को अच्छी
शिक्षा मिले,
योग्य अध्यापकों
की 54000 अध्यापकों
की भर्ती करके
पूरे हिन्दुस्तान
में एक
रिकार्ड कायम
किया। ऐसा
नहीं है कि
हमने कोरे
विद्यालय
क्रमोन्नत
कर दिये, जिस
विद्यालय में
जो-जो आवश्यकता,
चाहे पूरे
विद्यालय भवन
की आवश्यकता
तो उसकी
मंजूरी भी साथ
में, चाहे
कमरों की आवश्यकता
तो वह
मंजूरी भी साथ
में, चाहे विद्यालय
में पानी के
टांके की आवश्यकता
तो उसकी
मंजूरी भी और
चाहे शौचालय
की तो उसकी स्वीकृति,
चाहे किचन सैट
बनाना हो तो
उसकी भी स्वीकृति,
कोई कसर
शिक्षा के
क्षेत्र में
बाकी नहीं है।
पहले पढ़ना
चाहते थे
लेकिन गांवों
में स्कुल
मौजूद नहीं,
आज जो भी
पढ़ना चाहता
है वहीं पास
में विद्या का
मंदिर
इन्होंने
स्थापित
करके एक
कीर्तिमान स्थापित
किया है।
कानून
व्यवस्थ की
बात करें, आज
ऐसा ठीक कर
दिया राजस्थान
को हमने।
पुलिस पहले
सत्तापक्ष
की गुलाम थी।
सत्तापक्ष
जैसा चाहता था
पुलिस को
मजबूरन वैसी ही
जांच करनी
पड़ती थी। आज
हमारे शासन
काल में हमने
उसे ठीक करके
वह कानून की
रखवाली बने,
रक्षक बने
उसके लिऐ चाहे
हमारे
कार्यकर्ताओं
को भी नाराज
करना पडा।
हमारे
गृहमंत्री जी
ने बिल्कुल
ईमानदारी से
सच्चाई से,
पुलिस अपना
काम भी
ईमानदारी से
सच्चाई से
करें उसी नीति
से उन्होंने पुलिस
अधिकारियों
को इस आशय का संदेश
भी दिया,
हवाला भी दिया
कि कानून के
ऊपर कोई नहीं
चाहे सत्तारूढ
पार्टी का कार्यकर्ता
हो चाहे कोई
भी व्यक्ति,
कोई बहुत बड़ा
प्रभावशाली
व्यक्ति हो।
श्री
जुबेर खान: माननीय
सदस्य, आपके
घर से आपकी
जीप ही चोरी
चली गई। (व्यवधान)
सत्तापक्ष
के विधायक के
बावजूद भी
आपकी जीप चोरी
हो गई आपके
यहां से, यह कह
रहा हूं।
श्री
ज्ञानचंद
पारख: मैं यह
नहीं
कह रहा कि
उन्होंने
पूरे अपराध
खतम कर दिये,
मैं बिल्कुल
नहीं कह रहा,
अपराधों पर जिस
प्रभावी
तरीके से
अंकुश लगाया
है....
श्री
जुबेर खान: यह सही है
पक्षपात नहीं
हुआ, यह तो हम
कह रहे हैं
पक्षपात नहीं
हुआ।
श्री
ज्ञानचंद
पारख: जिस तरीके
से अंकुश
लगाया वाकई
में काबिले तारीफ
है।
श्री
संयम लोढ़ा : आपकी क्वालिस
मिली की नहीं ?
श्री
ज्ञानचंद
पारख: मेरी
नई क्वालिस आ
गई, आप चिंता
नहीं करें
मेरी गाड़ी की।
मेरे पास अपनी
गाड़ी है।
श्री
संयम लोढ़ा: चोरी गई वह
आई कि नहीं ?
श्री
ज्ञानचंद
पारख: चोरी गई वह
तो नहीं आई।
श्री
संयम लोढ़ा: इतना ही
पूछना था।
Ddm/usc/04.03.06/1350/3f
श्री
ज्ञानचन्द
पारख: और मान्यवर,
पेयजल के
मुद्दे पर,
पेयजल जैसी
गम्भीर समस्या
के मद्दे पर
भी आपकी सरकार
कभी गम्भीर
नहीं रही ।
चाहे व्यक्ति
पानी (व्यवधान)
श्री
मदन राठौड़: अब तो गाड़ी
दे दो इनको।
(व्यवधान)
श्री
ज्ञानचन्द
पारख: नहीं नहीं,
कोई आपकी
पार्टी से सम्बन्धित
रहा होगा वह
चोर ।
श्री
संयम लोढा: यह वसुन्धराजी
से पूछकर
बताएंगे कि
गाड़ी कहां
भेजी है।
एक
माननीय सदस्य:
आपको मालूम
होगा, पड़ौसी
आप हैं ना ।
श्री
ज्ञानचन्द
पारख: माननीय
सभापति महोदय,
मैं अन्तिम,
अन्तिम जो पानी
का विषय है
मेरे इलाके का
प्रमुख विषय है।
श्री
सभापति: प्लीज,
माननीय सदस्य,
25 मिनट आप ले
चुके हैं ।
श्री
ज्ञानचन्द
पारख: पानी का जो
अन्तिम विषय
है, पानी की
समस्या जैसे
गम्भीर
मुद्दों पर भी
आपकी सरकार की
सरकार कभी गम्भीर
नहीं रही, आप
याद करो ।
श्री
सभापति: अब आप 2 मिनट
में कन्क्लुड
करिये । 2 मिनट
में कन्क्लुड
करिये 25 मिनट
आप ले चुके
हैं ।
श्री
ज्ञानचन्द
पारख: बस, पानी
वाला मैटर है,
2मिनट में,
हां। पानी का
आप याद करो,
अकाल के दौरान
जिससमय
टैंकरों के
माध्यम से
गांवों में
पानी की गाड़ी
जाती थी आपकी सरकार
के कार्यकाल
में प्रति व्यक्ति
मात्र 10 लीटर
पानी की
मंजूरी थी,
मात्र 10 लीटर
पानी की और
उसमें चाहे
गांव का पशु
भी है तो वह व्यक्ति
अपना पानी
काटकर उस पशु
को पिलाये ।
और ज्योंहि यह
जानकारी
हमारी सरकार
आने के बाद
में हमने
हमारे पेयजल
मंत्रीजी को
दी तो पिछली
बार के अकाल
में प्रति व्यक्ति
10 लीटर के बजाय 30
लीटर पानी कम
से कम दिये जाने
की स्वीकृति,
बहुत बड़ी स्वीकृति
है यह और जहां
पशु संख्या
अधिक है वह इस
बात की भी
अधिकारियों
को छूट दे दी
कि जिस गांव
में पानी की
जितनी आवश्यकता
हो, पर्याप्त
मात्रा में
पानी उपलब्ध
करवाया जाए और
पानी की
बड़ी-बड़ी
योजनाओं के
बारे में,
आपको खुद को
जानकारी है और
मेरे खुद के
विधान सभा
क्षेत्र में
बताऊं हमने 17
करोड़ की पाइप
लाइन के लिये
जब पाली पूरा
प्यासा था
बहुत बड़ा
धरना-प्रदर्शन
किया था, 50 हजार
लोग इक्ट्ठा
हुए थे, पाली
पानी के लिये
तरस रहा था ।
एक बार नहीं,
कई बार
प्रदर्शन हुए,
धरना हुए, आन्दोलन
हुए, बंद हुए,
लाठी चार्ज
हुए, आपकी
सरकार ने उस
मामले को भी
गम्भीरता से
नहीं लिया, 17
करोड़ की
योजना को भी
ठुकरा दिया और
हमारी यशस्वी
मुख्य
मंत्री ने
पहली ही बार
में 354 करोड़ की
योजना पाली और
पाली के आसपास
के गांवों की
जनता को पर्याप्त
मात्रा में
पानी उपलब्ध
कराने के लिये
पिछले बजट में
मंजूर कर दिये
। कहीं हम
पीछे नहीं हैं
काम के मामले
में ।
श्री
सभापति: नो कमेण्ट्स,
बैठे-बैठे, प्लीज
।
श्री
ज्ञानचन्द
पारख: कहीं हम
पीछे नहीं हैं
और मैं पूरे
विश्वास के
साथ कह सकता
हूं, हमारी
सरकार ने जो
वादे किये,
एक-एक करके
उनको पूरा कर
रही है । हम
जनता की नजरों
में खरा उतर
रहे हैं । आज
जो मुझे बोलने
का अवसर दिया
उसके लिये मैं
माननीय
सभापतिजी का
बहुत-बहुत धन्यवाद
दूंगा, धन्यवाद
।
श्री
सभापति: श्री
रामप्रताप
कासनिया।
श्री
रघुवीरसिंह
मीणा: सभापति
महोदय, एक
सूचना है ।
सभापति महोदय,
खबर यह है कि
बांसवाड़ा
जिले के
दानपुर
क्षेत्र में
एक घण्टे तक
ओलावृष्टि
हुई है। चूंकि
अभी फसल पक
गयी है, कटने
को है, इसलिये
हम यह चाहेंगे
कि सरकार को
इस बारे में
जितनी जानकारी
है वह सदन को
भी बताने की
कृपा करे। चित्तौड़
जिले में
दलोड़
क्षेत्र में
भी ओलावृष्टि
हुई है इसलिये
कृपा करके
जितनी
जानकारी हो उतनी
सदन को बता
दें ।
श्री
सभापति: श्री
रामप्रताप
कासनिया।
श्री
रामप्रताप
कासनिया: सभापति
महोदय,
महामहिम राज्यपाल
महोदया ने इस
सदन में जो
अभिभाषण दिया
है मैं उसका
समर्थन करता
हूं। समर्थन
इसलिये करता
हूं कि उस
अभिभाषण में
राजस्थान की
आन-बान-शान और
बेहबूदी का ध्यान
रखा गया है ।
इसलिये मैं इस
अभिभाषण का
समर्थन करता
हूं । सभापति
महोदय, सबसे
पहले तो राजस्थान
सरकार का जो
वित्तीय
प्रबन्धन है
वह बहुत ही
सराहनीय है और
यह बात,
सभापति महोदय,
केन्द्र
सरकार ने भी
वित्तीय
प्रबन्धन के
माले में
राजस्थान
सरकार की पीठ
थपथपाई है और
पीठ थपथपाने
के साथ 60 करोड़
रुपये प्रोत्साहन
राशि के रूप
में राज्य
सरकार को दिये
हैं । इससे
राज्य सरकार
का वित्तीय
प्रबन्ध जो
है उसका स्वत:
ही पता लगता
है । सभापति
महोदय, राज्य
सरकार के अच्छे
वित्तीय
प्रबन्ध के
कारण पिछले 6
माह में
भारतीय
रिजर्व बैंक के
अन्दर एक दिन
भी ओवर
ड्राफ्ट नहीं
लेना पडा । यह
बहुत बड़ी
उपलब्धि है ।
पूर्ववर्ती
सरकार के आये
दिन बैंकों के
अन्दर खाता
सफा मिलता था
। और इस सरकार
के आने के बाद
में कभी भी
हमारी माननीय
मुख्य
मंत्री वसुन्धराजी
ने यह नहीं
कहा कि राजस्थान
सरकार का
खजाना खाली है
। जब भी कभी
किसी बात को
लेकर गये,
जनता की कोई
बात हुई, कोई
मांग हुई तो
यह कभी नहीं
कहा कि खजाना
खाली है ।
खजाना हमेशा
भरा रहा है और
भरा रहेगा ।
सभापति महोदय,
कुल मिलाकर के
राज्य सरकार
ने 2 वर्ष पूरे
होने के
उपलक्ष्य
में आयोजित
माननीय मुख्य
मंत्रीजी की
जन सम्पर्क
यात्राओं में
भारी जन समूह
उमड़ पडा, उससे
सरकार की
लोकप्रियता
का अपने आप ही
पता लगता है
कि जिस तरह से
माननीय मुख्य
मंत्रीजी की
जन सभाओं में
जो भीड़ जुटी,
लोग अपने आप
चलकर आये उससे
राज्य सरकार
के
क्रियाकलापों
का स्वत: ही
पता लग जाता
है । राजस्थान
उद्योगों में
भी प्रगति की
ओर बढ़ रहा है, निवेशकों
की बढ़ती संख्या
और रुचि इस
बात की प्रतीक
है कि प्रदेश
के विकास की
मंजिल पाने के
लिये निरन्तर
आगे बढ़ रहा
है यह प्रदेश
। कुल मिलाकर
के पिछले 2
वर्ष के अन्दर
हर मामले में
राज्य सरकार
ने उपलब्धि हासिल
की है ।
सभापति महोदय,
शिक्षा के
मामले में
पिछले 2
वर्षों में 1350
प्राथमिक,
माध्यमिक
एवं उच्च
माध्यमिक
विद्यालय
क्रमौन्नत
किये गये हैं
यह अपने आप
में एक
रिकार्ड है।
पीछे का आप
बजट उठाकर देख
लें कि इतने
विद्यालय एक
साथ कभी भी
क्रमौन्नत
नहीं हुए । सभापति
महोदय, ग्राम
पंचायतों पर 500
महात्मा
गांधी
सार्वजनिक
पुस्तकालय
खोले गये हैं
। यह भी कोई कम
बात नहीं है ।
ग्रामीण
क्षेत्रों
में प्राथमिक
एवं उच्च
प्राथमिक
विद्यालयों
में आधारभूत
सुविधाओं के
अन्तर्गत 4886
स्कूलों में
पेयजल सुविधा
और 5499 विद्यालयों
में शौचालय
कुल मिलाकर के
अतिरिक्त
कक्षा तथा 3331
भवन निर्माण
के कार्य किये
गये हैं। यह
ग्रामीण
क्षेत्र के
बच्चों को शिक्षा
देने के लिये
बहुत ही अच्छा
कार्यक्रम
राज्य सरकार
ने प्रस्तुत
किया है ।
इसमें कोई सन्देह
नहीं है ।
विकास की सोच और
महत्वपूर्ण निर्णय, सभापति
महोदय, वर्ष 2005-06
में कक्षा एक
से 12वीं तक के
सभी
विद्यार्थियों
को नि:शुल्क
पाठ्य पुस्तक
उपलब्ध
करवाना बहुत
बड़ी उपलब्धि
है, किसी भी
गांव की तरफ
शहरों की तरफ
से कोई मांग
नहीं की थी,
ग्रामीण
क्षेत्रों में,
शहरी
क्षेत्रों
में बच्चों को
नि:शुल्क
पुस्तकें
उपलब्ध
करवायी जाएं।
यह भारतीय
जनता पार्टी
की सोच है कि
बिना मांगे,
बिना किसी के
कहे गरीबों को
शिक्षा देने
के लिये सरकार
ने इस तरह के
महत्वपूर्ण
निर्णय लेकर
के गरीब बच्चों
को शिक्षा
देने का जो
काम किया है
यह बहुत ही
पुण्य का काम
है । इससे
राजस्थान
शिक्षित होगा,
राजस्थान का
हर बच्चा
पढ़-लिखकर
कामयाब होगा ।
सभापति महोदय,
पहली कक्षा से
अंग्रेजी की
शुरूआत करना,
यह भी बहुत
अच्छी सोच है
। यह सरकार की
सोच किसी के
कहने से नहीं,
अपनी सूझबूझ
से यह पहली
कक्षा से
अंग्रेजी
लागू की है।
सभापति महोदय,
विकलांग व
मंद-बुद्धि
बालकों हेतु
विशेष
छात्रवृत्ति
प्रारम्भ
करना और
ग्रामीण
क्षेत्रों की
बालिकाओं को माध्यमिक
एवं उच्च
माध्यमिक
विद्यालयों
में अध्ययन
करने के लिये
घर से स्कूल
और स्कूल से
घर तक
आने-जाने के
लिये नि:शुल्क
पास जो राज्य
सरकार ने दिया
है बस यात्रा
का, यह भी बहुत
सराहनीय कदम
है।
Vps/usc/1400/4-3-06/4a
सभापति महोदय, किराये के अभाव में ग्रामीण क्षेत्र की बच्चियों को कोई दो-चार-पाँच-दस किलोमीटर दूर पढ़ने के लिए उन्हें जाना पड़े तो उनके पास किराये की कमी थी, इस कारण से बच्चियां अनपढ़ रह जाती थीं परन्तु अब राज्य सरकार ने नि:शुल्क पास उपलब्ध कराकर गरीब बच्चों, बच्चियों को शिक्षा देने के लिए बहुत ही बड़ी उपलब्धि की है।
सभापति महोदय, अनुसूचित जाति और जनजाति क्षेत्र में 12255 बालिकाओं को नि:शुल्क साइकिल उपलब्ध कराना, यह भी एक शिक्षा को बढ़ाना देने वाला कार्यक्रम है। बहुत ही पुण्य का काम है कि गरीब कि बच्चियों को साइकिल मुहैया कराना, नि:शुल्क, तो उसको स्कूल जाने में, पढ़ने में वह साइकिल बहुत ही अच्छी साबित होगी।
सभापति महोदय, सभी सरकारी एवं गैर-सरकारी विद्यालयों में योग शिक्षा प्रारम्भ करना, यह भी बहुत बड़ा उपलब्धि है, बहुत अच्छा कार्यक्रम है। सभापति महोदय, इससे एक तो बच्चे का स्वास्थ्य बहुत ही सही रहेगा । डाक्टर के पास जाने की आवश्यकता नहीं रहेगी। बच्चा बड़ा हृष्ट-पुष्ट होगा। जिन-जिन स्कूलों में सब जगह राजस्थान सरकार ने यह फैसला कर लिया कि योग हर विद्यालय में जरूरी है तो इससे बच्चे स्वस्थ और निरोग होंगे, यह भी बहुत अच्छा कदम है।
सभापति महोदय, सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों का कम्प्यूटर शुल्क का 50 परसेंट अब राजस्थान सरकार वहन करेगी । यह भी शिक्षा को बढ़ावा देने वाला कार्यक्रम है।
सभापति महोदय, सभी 4117 पात्र विधवा आवेदकों को स्कूलों के अन्दर नियुक्तियां दी गयीं हैं। उसमें से 2155 को तो नियुक्तियां दी जा चुकी हैं और शेष नियुक्तियां शीघ्र ही होंगी। विधवाओं को अध्यापिका लगाने में सरकार ने बहुत अच्छा पुण्य का कार्य किया है, यह ऐसी सोच पहली बार सरकार की है। सभापति महोदय, इसके अलावा बालिकाओं को नि:शुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने का यह भी कोई कम बात नहीं है।
सभापति महोदय, 6473 राजीव गांधी पाठशालाओं को प्राथमिक पाठशाला में परिवर्तित करके सरकार ने एक रिकार्ड कायम किया है। इसके साथ-साथ 4162 नवीन प्राथमिक शालाएं भी खोली गयी हैं। 5170 प्राथमिक पाठशालाओं को उच्च प्राथमिक पाठशालाओं में क्रमोन्नत किया गया है। कुल अब 13528 विद्यालय खोले गये हैं एवं क्रमोन्नत करने के आदेश जारी किये गये हैं, जो अपने आप में एक कीर्तिमान रिकार्ड है।
सभापति महोदय, इतना ही नहीं कृषि के क्षेत्र में सरकार ने कृषि को बढ़ावा देने के लिए कृषि के बजट में छह गुणा वृद्धि करके काश्तकारों को राहत प्रदान की है। वर्ष 2004-05 में सरसों का रिकार्ड उत्पादन हुआ है । वर्ष 2004-05 में मूंगफली का रिकार्ड उत्पादन हुआ है। सभापति महोदय, 2005-06 में कपास का भी बहुत रिकार्ड उत्पादन हुआ था। कुल मिलाकर सरकार की सोच, सूझबूझ के कारण यह लक्ष्य अर्जित किये गये हैं।
सभापति महोदय, किसानों को कृषि जलवायु के अनुकूल तकनीकी उपलब्ध कराने के लिए तीन नये खण्ड कार्यालय सीकर, बीकानेर, जालौर एवं गृह परीक्षण केन्द्रों की स्थापना का निर्णय करके काश्तकारों के हित का काम किया है। दो नये बीज परीक्षण प्रयोगशाला अलवर व जोधपुर, तीन नयी उर्वरक परीक्षण जोधपुर, कोटा व दो टिश्यू कल्चर प्रयोगशाला झालावाड़ एवं गंगानगर में । सभापति महोदय, नयी मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला बारां, धौलपुर, करौली, चूरू, झुन्झुनूं, जालौर, हनुमानगढ़, जैसलमेर, बाड़मेर, राजसमन्द, दौसा, बूंदी जिलों में स्थापित की जा रही है। किसानों को इससे बहुत ही लाभ मिलेगा।
श्री सभापति: समाप्त करिये प्लीज। आपका 21 मिनट में है, जिसमें आपके एक सदस्य और बोलेंगे। ...(व्यवधान)
श्री रामप्रताप कासनिया: सभापति महोदय, पेट तो ऊँट का दुखे और ...(व्यवधान) गधा को दो । सभापति महोदय, टाइम खराब तो करे मेरे दाईं और बाईं और वाले और काट रहे हैं मेरा, यह न्यायसंगत बात नहीं है।
श्री सभापति: नहीं-नहीं, 21 मिनट है, उसमें आप और दूसरे मैम्बर भी बोलेंगे। थोड़ा जल्दी करिये आप।
श्री रामप्रताप कासनिया: सभापति महोदय, किसानों को फव्वारा सैट, बूंद-बूंद सिंचाई के लिए व पाइप -लाइन के लिए 13 करोड़ रुपये का अनुदान, सहायता व्यवस्था करके सरकार ने बहुत बड़ी राहत प्रदान की है। गत पाँच वर्षों के फव्वारा वितरण 11700 की तुलना में चालू वित्तीय वर्ष में दो हजार, 27000 फव्वारा सैट एवं 3500 हैक्टेयर में बूंद-बूंद सिंचाई सैट हेतु अनुदान का प्रावधान किया गया है। सभापति महोदय, गत वर्षों में 225 डिग्गियों का निर्माण प्रति वर्ष में हुआ है, उसके मुकाबले में चालू वित्तीय वर्ष में नौ हजार, 956 डिग्गियों के निर्माण का प्रावधान है जो किसानों को बहुत ही लाभ देगा।
बूंद-बूंद सिंचाई के लिए अनुदान बदलकर 50 परसेंट करके काश्तकारों को बहुत ही अच्छी राहत प्रदान की गयी है। सभापति महोदय, इतना ही नहीं, उद्यान के अन्दर गत वर्षों में योजनाओं के लिए उपलब्ध धनराशि 7.20 करोड़ रुपये के बजट को बढ़ाकर इस वर्ष 20 करोड़ रुपये किये हैं जो बहुत ही अच्छा कार्य है।
सभापति महोदय, 2005 में .... (व्यवधान) किसानों को नुकसान नहीं हो इसके लिए अलग-अलग शहरों के अन्दर अलग-अलग जिन्सों के हिसाब से सरकार ने जो मण्डी खोलने का निर्णय लिया है, वह काश्तकारों के हित का काम है। इसी तरह से जैविक खेती की तरफ भी ध्यान दिया गया है।
सभापति महोदय, नहरों का पिछले 20-25 वर्षों के अन्दर किसी भी सरकार ने इसकी तरफ ध्यान नहीं दिया। भारतीय जनता पार्टी की सरकार आने के बाद पहली बार सरकार ने यह सोचा कि वर्षों से नहर के अन्दर सिल्ट जमा है, जगह-जगह टूटी-फूटी हैं, उनकी मरम्मत करने के लिए, सिल्ट निकालने के लिए राज्य सरकार ने जो बजट दिया है, इससे किसानों को बहुत बड़ा लाभ मिला है। अन्तिम छोर के काश्तकारों को पिछले 15-15, 20-20 वर्षों के अन्दर पानी नहीं मिला जो अबकी बार उपलब्ध हुआ है। सभापति महोदय, इस सरकार ने हर क्षेत्र के अन्दर, चाहे पी.डब्ल्यू.डी. हो, चाहे पी.एच.ई.डी.हो, चाहे शिक्षा हो, चाहे स्वास्थ्य हो, ऐसा कोई भी विभाग नहीं है जिसमें किसी न किसी रूप में छूट नहीं दी गयी हो। ... (व्यवधान)
श्री सभापति: कन्क्लूड प्लीज।
श्री रामप्रताप कासनिया: राज्य सरकार ने राजस्थान को आगे बढ़ाने का जो कार्य किया है, उसके लिए सभापति महोदय, मैं माननीय मुख्य मंत्रीजी का बहुत ही धन्यवाद प्रगट करना चाहता हूं। मैं इसके साथ-साथ एक बात और कहना चाहता हूं कि अगर राजस्थान को खुशहाल देखना है, इस राज्य को विकसित करना है तो पक्ष और विपक्ष दोनों मिलकर एक बात सुन लें कि इस प्रदेश का अगर भला करना है तो जब तक प्रदेश ही नहीं, सभापति महोदय, इस पूरे देश के अन्दर एक बच्चा पैदा करने की जब तक हम पाबंदी नहीं लगाएंगे तब तक चाहे हम कितने ही विकास क्यों नहीं कर लें, यह राज्य खुशहाल होने वाला नहीं है।
सभापति महोदय, दूसरा, खेती आज घाटे का सौदा हो गयी है। जब तक काश्तकारों को लाभकारी मूल्य नहीं मिलेगा, चाहे मेरी दाईं साइड वाले चिल्लाते रहे, चाहे कुछ भी करते रहे, इस तरफ तो इन्होंने 50 वर्ष तक राज कर लिया, कभी भी किसान को लाभकारी मूल्य देने की बात नहीं सोची। अगर इस देश को, इस राज्य को खुशहाल करना है तो काश्तकारों को लाभकारी मूल्य देना होगा तभी यह प्रान्त और देश आगे बढ़ सकता है । सभापति महोदय, आपने समय दिया, बहुत-बहुत धन्यवाद।
श्री सभापति: धन्यवाद। श्री संयम लोढ़ा ।
श्री संयम लोढ़ा(सिरोही) : माननीय सभापति महोदय, इस सरकार ने महामहिम राज्यपाल महोदय से जो लम्बा, उबाऊ और नीरस किस्म का जो अभिभाषण पढ़वाया, इस सर्वोच्च सदन में सत्तारूढ़ पार्टी के सदस्यों के आचरण से ही यह साबित हो गया था। जब महामहिम राज्यपाल महोदय अपना अभिभाषण पढ़ रही थीं तो उसकी नीरसता की वजह से कई सदस्य बाहर जा रहे थे और आ रहे थे। राजस्थान की मुख्य मंत्री ने, जब पहली बार भारतीय जनता पार्टी को राजस्थान में पूर्ण बहुमत प्राप्त हुआ और राजस्थान के इस सर्वोच्च सदन के माध्यम से पहले अभिभाषण के दौरान अपना मशहूर शेर पढ़ा था कि-
आंधियों को कह दें कि अपनी औकात में रहे ।
हम परों से नहीं हौसलों से उड़ा करते हैं ।।
Spp/usc/4.3.2006/1410/4b
तो उन हौंसलों के उन दो वर्ष की यात्रा हौसलों के नीचे खिसककर माननीय सभापति महोदय हवाई जहाज तक आ गयी है। इन दो सालों में एक काम राजस्थान की माननीय मुख्य मंत्री ने किया 200 से ज्यादा हवाई यात्राएं करने का एक कीर्तिमान कायम किया और इन 700 दिनों में 250 घण्टे हवाई जहाज के अंदर बिताने का काम किया और सरकारी विमान होने के बावजूद 2005 के अंदर निजी विमानों से 30 लाख रूपये की यात्राएं करने का काम किया और आज उनके हौंसलों को लेकर, एक जो मशहूर फिल्मी गीत हुआ है, लोग उन्हें वसु मैडम हवा-हवाई के नाम से पुकारने लग गये । माननीय सभापति महोदय, राजस्थान सरकार पूरी तरह से दिशाहीन है, यह अभिभाषण खुद अपने आप जाहिर करता है। एक तरफ राजस्थान की मुख्य मंत्रीजी की दाओस यात्रा की आर्थिक दुनिया, दाओस के माध्यम से राजस्थान की प्रजा को दिखाये गये आर्थिक सपने और दूसरी तरफ राजस्थान सरकार की इस कैबीनेट की दिलावरी दुनिया। कितने फासले और अन्तरद्वंद्व दोनों के बीच है। इस अभिभाषण के माध्यम से मुख्य मंत्रीजी की खूब पीठ ठोकी है। लेकिन राजस्थान के एक प्रमुख अख़बार ने आपकी सरकार के दो वर्ष पूरे होने पर राजस्थान के अंदर जो सर्वेक्षण करवाया। उस सर्वेक्षण से आप अपनी सरकार का आत्मलोचन करने की कोशिश कीजिये। उसमें राजस्थान की जनता ने क्या मत व्यक्त किया? जब राजस्थान की जनता को यह पूछा गया कि आप क्या पहले से अधिक सुरक्षित महसूस करते हैं, 78फीसदी लोगों ने हां नहीं कहा। जब उनसे यह पूछा गया कि क्या इस दो वर्ष के शासन में भ्रष्टाचार घटा है 82 प्रतिशत लोगों ने हां नहीं कहा और जब उनसे यह पूछा गया कि क्या सरकारी दफ्तरों में जनता की सुनवाई कैसी हो रही है, अच्छी हो रही है तो 77 फीसदी लोगों ने अच्छी नहीं कहा और माननीय सभापति महोदय, यह पूछा गया कि क्या आप राज्य सरकार के काम-काज से सन्तुष्ट हैं तो 61 फीसदी लोगों ने हां नहीं कहा। इससे ज्यादा शर्म की बात माननीय सभापति महोदय, यह है कि जब राजस्थान की जनता से सर्वेक्षण में उस प्रमुख अख़बार ने यह पूछा कि क्या सरकारी अधिकारी ईमानदारी से काम कर रहे हैं तो माननीय सभपति महोदय, 90 फीसदी लोगों ने हां नहीं कहा।
श्री जोगाराम पटेल: हाउस में अख़बार की कटिंग नहीं बताई जा सकती।
श्री सभापति: बिराज जाइये।
श्री संयम लोढ़ा: राजस्थान के प्रमुख अख़बार, और आपकी पार्टी के प्रिय अख़बार ‘राजस्थान पत्रिका’ के सर्वेक्षण को कोट कर रहा हूं मैं।
श्री ओम बिरला: वह अख़बार भारतीय जनता पार्टी का अख़बार है, यह कहना चाहते हैं।
श्री संयम लोढ़ा: माननीय सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से यह भी निवेदन करना चाहता हूं कि यह आत्मालोचन का अवसर है। सत्ता के मद में, अंहकार के मद में डूबने का समय नहीं है। इस अख़बार ने सर्वेक्षण के माध्यम से अगर कुछ जानकारी राजस्थान की जनता के माध्यम से आपके सामने लाने का प्रयास किया है तो इसको सकारात्मक रूप से लेना चाहिये। राजस्थान की माननीय मुख्य मंत्री के बारे में भी सर्वेक्षण पूछा कि क्या मुख्य मंत्री की लोकप्रियता बढ़ी है तो 60 प्रतिशत लोगों ने हां नहीं कहा। इससे ज्यादा आप क्या जानना चाहते हैं? माननीय सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से निवेदन करना चाहता हूं....(व्यवधान)
श्री सभापति: नो-नो, इंटरप्शन प्लीज।
श्री संयम लोढ़ा: माननीय सभापति महोदय, लूणी से आने वाले माननीय सदस्य का 56 मिनट का भाषण मैंने यहां बैठकर पूरी शांति से सुना। जितनी गौरव गाथा गानी थी, उन्होंने बहुत आराम से गायी। मैं आपका सरंक्षण चाहते हुए यही निवेदन करना चाहता हूं कि जो बात मैं कह रहा हूं आपके हित में कह रहा हूं। तीन साल आपके पास और हैं । हम यह जो बातें निवेदन कर रहे हैं वह इसलिए कह रहे हैं कि आप अपनी सरकार की परफोर्मेन्स और बेहतर कर सकें। हमें मालूम है कि हमारे बोलने से आपका राज जाने वाला नहीं है। राजस्थान की जनता ने जो पाँच साल के लिये आपको जनादेश दिया है, आपकी हुकूमत रहेगी इसलिए मेहरबानी करके उसको उसी रूप में लें। माननीय सभापति महोदय, जब सरकार थी कांग्रेस पार्टी की, बहुत भूख को लेकर बवाल मचाया था और यह कहा था कि राजस्थान के लोग भूख से मर रहे हैं, कुपोषण से मर रहे हैं। मैं निवेदन करना चाहूंगा कि अभी विश्व स्वास्थ्य संगठन ने और एक एन.जी.ओ. हे सैंटर फार एनवायरनमेंट फूड सिक्योरिटी द्वारा मार्च से जून, 2005 के बीच में राजस्थान के 40 आदिवासी गांवों का जो सर्वेक्षण किया, उसकी रिपोर्ट क्या कहती है? 99 फीसदी आदिवासी भूख से पीडि़त हैं और 30.30 फीसदी आदिवासी अल्प भूखमरी से पीडि़त हैं। यह मैं निवेदन कर रहा हूं और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस दिशा में उपाय सुझाया है और यह आपकी सरकार के वक्त में राजस्थान के 40 आदिवासी गांवों का एक चित्र वगैरह पेश करने की कोशिश की है।
माननीय सभापति महोदय, इस सरकार का तीसरा बजट आने वाला है। तीसरा अभिभाषण पढ़वा दिया। लेकिन, माननीय सभापति महोदय, इसके बावजूद सत्ता पक्ष के सदस्यों की यात्रा वही, अशोक गहलोत सरकार जो 2003 में चली गयी, उससे शुरू होती है, उसके काम पर शुरू होती है उससे आगे की यात्रा नहीं करना चाहते हैं, लेकिन उस सरकार और इस सरकार, दोनों के चेहरों को देखने की कोशिश कीजिए। क्या था अशोक गहलोत की सरकार का चेहरा और आप भूल गये ‘मुख्यमंत्री जीवन रक्षा कोष’ समाज का वह सबसे वंचित आदमी, जिसके इलाज के लिये ...(व्यवधान)..
श्री धर्मपाल चौधरी: 156 से 56 पर उस चेहरे से ही आये आप।
श्री सभापति: धर्मपाल जी, आप बोलेंगे । माननीय सदस्य, आपका नम्बर है, जब आपका नम्बर आये तो बोलिये। आपका नाम हे अभी बोलेंगे आप।
श्री संयम लोढ़ा: मैं आपको निवेदन करना चाहता हूं कि जो 2003 में राजस्थान की जनता ने कांग्रेस पार्टी को जनादेश दिया, हमने उसको शिरोधार्य किया और अब कांग्रेस पार्टी का यह जनादेश है कि हम आपकी सरकार से काम करवाने के लिये राजस्थान की जनता से किये हुए वायदों को पूरे करवाने के लिये एक रचनात्मक विपक्ष की भूमिका हम अदा करें। हम उसी कर्तव्य का निर्वहन कर रहे हैं। मैं आपसे निवेदन करना चाहूंगा कि ‘मुख्यमंत्री जीवन रक्षा कोष’ के माध्यम से तत्कालीन अशोक गहलोत की सरकार ने समाज के सबसे अन्तिम छोर पर बैठे हुए आदमी की पीड़ा को बांटने का प्रयास किया था । आप भूल गये वृद्वावस्था पेंशन के अंदर कहां 96 करोड़ का प्रावधान था और कहां तत्कालीन अशोक गहलोत सरकार ने उसको 200 करोड़ रूपये करने का काम किया था। कोई पाप कर दिया था, लेकिन नहीं, मानवीय सरोकार से ताल्लुक रखने वाले उन तमाम प्रावधानों की आपके दिल में कोई जगह नहीं है और इस सरकार की प्राथमिकता में वह किसी भी रूप में नहीं है। मैं इसको पूरी तरह साबित करूंगा और मैं चाहता हूं कि राजस्थान की मुख्य मंत्री जब इस सदन में अपना जवाब दें तो बतायें कि क्या 2005 के अंदर शिवगंज ब्लॉक में चार महीने तक आपने विधवाओं की पेंशन नहीं बांटने का काम किया और वह इस बात का जवाब दें कि सिरोही ब्लॉक के अंदर 2004 के शुरूआत में वह गरीब बीपीएल परिवार का मुखिया, जो गुजर गया, उसके पीडि़तों को सहायता देने का काम आपने दो साल तक नहीं किया और आप इस बात का भी जवाब दें कि विधवाओं की पुत्रियों के लिये जो सहायता राशि का प्रावधान है, आज राजस्थान के अंदर कितने फार्म बिके हुए हैं ? शादियां हुए कई महीने हो गये, विधवाओं की पुत्रियों के 1000 फार्म पेंडिंग पड़े हुए हैं और अलवर जिले के अंदर नौ महीने से विधवाओं की पुत्रियों की, जिनकी शादियां हो चुकी हैं, आपने पैसे नहीं देने का काम किया है और आपके माध्यम से, सभापति महोदय, निवेदन करना चाहता हूं राजस्थान में जो सरकार आई है, यह परिवर्तन हुआ सबसे बड़ी भूमिका किसकी थी, राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी की सरकार को लाने के पीछे, भारतीय जनता पार्टी को पहली बार ऐतिहासिक बहुमत देने के पीछे अगर किसी आदमी, किसी वर्ग की भूमिका थी तो वह राजस्थान का दलित और राजस्थान का आदिवासी था, जिसने भारतीय जनता पार्टी के 44 विधायक यहां जिताकर भेजे हैं। लेकिन मैं आपके माध्यम से निवेदन करना चाहता हूं कि इस सरकार ने उन दलितों और आदिवासियों के साथ क्या किया ? 29 सितम्बर, 2000 का आदेश है कि अनुसूचित जाति और जनजाति के व्यक्ति की अगर सामान्य वर्ग के व्यक्ति द्वारा हत्या हो तो बॉडी का पोस्टमार्टम होने के बाद 50 प्रतिशत पैसा तुरन्त उसको मुहैया कराया जायेगा और दोष सिद्ध होने के बाद बाकी का पैसा दिया जायेगा। राजस्थान में जो हत्यायें हुईं,2005 के आंकड़े मैं सुना रहा हूं। एक-एक आंकड़ा मेरे पास है । मैं आपके माध्यम से शुरूआत यहां से करता हूं सीकर से – श्री रामकुमार पुत्र प्रहलाद बियाना बिहारीपुरा 26 मार्च, 2005 को उसकी हत्या हुई सीकर में, आपने आज तक उसके परिवार को फूटी कौड़ी दी ? ताराचन्द बाजीगर, गंगानगर के अंदर 16 जनवरी, 2005 को उसकी हत्या हुई, आज तक आपने उसको फूटी कौड़ी दी ? राजू जाति नायक भादूवाला रायसिंहनगर थाना 16 मार्च, 2005 को उसकी हत्या हुई, आपने आज तक उसको फूटी कौड़ी दी?
msr/usc/1420/4c
जसपाल कौर
जाति मजहबी
सिंह,
धौलावालाचक
थाना
सार्दुलशहर,
दो मार्च, 2005 को
उसकी हत्या
हुई, आपने
फूटी कौड़ी
दी? मांगीलाल
जाति मेघवाल
निवासी 59
एलएमपी थाना
घमंडवाली, 11
जून, 2005 को उसकी
हत्या हुई,
आज तक आपने
उसको प फूटी
कौड़ी दी?
श्री
अर्जुन सिंह
देवड़ा
(रानीवाड़ा):
आपने कितनी दी
थी? पहले वाली
सरकार ने
कितने दिये,
कुल बता दो कि
कांग्रेस
सरकार ने इतनी
दी।
श्री
संयम लोढ़ा: हमारे तो
करम फूटे हुए
थे, हम विपक्ष
में आ कर बैठ
गये, आप सत्ता
में बैठे हो,
आपको एक-एक
बात पर जवाब
बदेना पड़ेगा
और राजस्थान
की जनता की और
से यह सारे
पैसे हम
दिलाकर रहेंगे
आप से।
श्री
सभापति: प्लीज
सिट डाउन।
श्री
अर्जुन सिंह
देवड़ा: पहली
वाली सरकार ने
कितना दिया,
वह भी बता दो
ताकि सही चीज
आ जाए।
श्री
सभापति: नो इन्ट्रप्शन
प्लीज।
श्री
संयम लोढ़ा: एक गरीब
आदमी की हत्या
हो गयी, आपका
यह कमेंट है?
श्री
अर्जुन सिंह
देवड़ा: मैं यह
पूछ रहा हूं
कि पहले वाली
सरकार ने कितना
दिया? मैं
मेरी जानकारी
के लिए आप से
पूछ रहा हूं।
श्री
सभापति- नो इन्ट्रप्शन।
डॉ.सी.पी.जोशी: इधर आ
जाओ जब पूछ
लेना आप। ...(व्यवधान)...
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता प्रतिपक्ष):
सभापति महोदय,
मैं आपसे अनुरोध
करूंगा कि
माननीय सदस्य
बोल रहे हैं
वक्ता वे
अपने भाषण की
शैली भी ऐसे
रखें, यद्यपि
मेरी पार्टी
के हैं, उनका
समर्थन करता
हूं लेकिन
सीधा उनको आह्वान
नहीं करें कि
इसी वक्त
खड़े होकर वो
जवाब दें।
श्री
अर्जुन सिंह
देवड़ा: मैंने
जानकारी चाही
है, साहब।
श्री
रामनारायण
चौधरी: आप बाद
में दे सकते
हैं लेकिन हाथ
की हाथ देंगे,
उनको भी समझना
चाहिए कि उनका
टाइम कन्जूम
हो जायेगा
लेकिन वह तो
नहीं एंभलते
हैं, टाइम
लिमिट इनको दे
रखी है उसमें
इनकी बात पूरी
नहीं होगी तो,
साहब, हमारी
बात पूरी नहीं
हुंई। पूरी
नहीं हुई तो
दोष किसका है?
आप बोलते हैं, सामने
वाले को इन्वाइट
करते हैं वो
खड़े हो जाएं।
आप
भाषण, हमारे
सदस्य से
मेरा अनुरोध
है कि भाषण की
शैली ऐसी रखें
कि वह भाषण
सेल होता चला
जाए यह नहीं
हो कि सीधा
उसको छाती में
मारो। छाती
में मत मारो,
सेल होता जाए
और उसका बाद
में जवाब आ
जायेगा...(व्यवधान)...
श्री
सभापति महोदय: नौ
इन्ट्रप्शन
बैठे-बैठे,
बैठे-बैठे
नहीं बोलें प्लीज।
श्री
रामनारायण
चौधरी: आप
बैठे-बैठे बोल
रहे हैं।
आपसे
यह भी अनुरोध
है कि राज्यपाल
के अभिभाषण पर
नीति सम्बन्धी
प्रश्नों को
ही आप यहां
रखें,
इंडीविजुअल
केस में रखें
उसका उततर
कैसे आयेगा।
उत्तर नहीं आ
सकेगा तो फिर
आपको निराशा
होगी जब यह
डिमाण्ड आये,
तो माननीय
सदस्यों से,
मेरे पक्ष
वालों से
निवेदन है कि
उन पर डिमाण्ड
पर जवाब
आयेगा,उस पर
बोलिये आप, हम
बुलवायेंगे।
राज्यपाल का
भाषण तो
नीति-नीति पर,
क्या हुआ
पहले उसके ऊपर
आप बोलेंगे,
अब आप यह मांग
लेंगे मेरे
जवाजा के अन्दर
क्या हुआ,
जवाजा का जवाब
कैसे आयेगे।
माफ
करना लेकिन आप
भी इतने
भड़कें नहीं।
पार्लियामेंट्री
अफेयर्स
मिनिस्टर
साहब, आपसे
मेरा अनुरोध
है कि आप अपने
सदस्यों को
संयमित रखते
हुए,
मंत्रियों को
संयमित रखें
कि वह भड़कते
क्यों हैं?
आप राज कर रहे
हैं, राज करने
वालों पर तो
आक्षेप
लगेगा। राज
करने वाला
आक्षेप से, एक भी
आक्षेप से
डरते हैं आप
तो आपका जीना
कैसे होगा?
आप
सुनिये, हमारी
बात तो सुनिये
और आप शांति
से सुनिये, आप
भभकें नहीं और
हम भी कोशिश
करेंगे आपको
हम भभकायें
नहीं।
श्री
सभापति: नौ इन्ट्रप्शन
प्लीज।
श्री
रामनारायण
मीणा: यह इसलिए
तकलीफ आ रही
है कि मुझे
ऐसा लगता है कि
यह सारे के
सारे, जिनका
नाम यह ले रहे
हैं वह शिड्यूल्ड
कास्ट के लोग
हैं।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन: नेता के
बाद उप नेता
का बोलना
जरूरी है क्या?
यह नेता ही
नहीं मानते
आपको।
श्री
रामनारायण
मीणा: और
आदिवासी
लोगों को आप
पैसे नहीं दे
रहे हो...(व्यवधान)
श्री
सभापति: आप
विराजिये, वो
बोल रहे हैं,
आपकी ही
पार्टी के
सदस्य हैं।
श्री
संयम लोढ़ा: सभापति
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से निवेदन
करना चाहता
हूं कि पूरे
राजस्थान की
लिस्ट मेरे
पास हैं, मैं
पूरी लिस्ट
नहीं पढ़ कर
के सिर्फ यह
ध्यान में
लाना चाहता
हूं कि पूरे
राजस्थान
काक कोई
जिलाऐसा नहीं
है...
श्री
सभापति: समय का
ध्यान रखें
प्लीज:
श्री
संयम लोढ़ा: कोई जिला
ऐसा नहीं है
कि जहां
शिड्यूल्ड
कास्ट एण्ड
ट्राइब के
आदमी का मर्डर
हुआ हो और
वहां उसको
सहायता उपलब्ध
करायी गयी हो।
75 फीसदी मामले
ऐसे हैं
शिड्यूल्ड
कास्ट एण्ड
ट्राइब के
मर्डर के कि
जहां फूटी
कौड़ी इस सरकार
ने उन लोगों
को नहीं दी
है।
सभापति
महोदय, बड़े
गीत गाते हो
यह महिला मुख्यमंत्री
के राज में यह
शिड्यूल्ड
कास्ट की
महिलाओं से
बलात्कार जो
राजस्थान के
अन्दर हुए
हैं उनको,
जिसको चिकित्सा
जांच के तुरन्त
बाद 50 फीसदी
सहायतादेने
का प्रावधान
है, 79 महिलाएं
राजस्थान के
हर जिले में
हैं और 70 फीसदी
शिड्यूल्ड
कास्ट एण्ड
ट्राइब की महिलाएं
हैं जिनको
आपने फूटी
कौड़ी नहीं दी
है। क्या
महिला सशक्तीकरण
को लेकर अब आप भाषण
देते हो और
कौनसी महिला
के उत्थान की
बात आप कर रहे
हो और अगर मैं
गलत कह रहा हूं।
यह समाज कल्याण
मंत्री यहां
पर विराजमान
हैं, आप चाहें
तो पूरी एक-एक
लिस्ट मैं
सुना सकता हूं-
एक-एक नाम मैं
सुना सकता
हूं। पूरे राजस्थान
के हर जिले के
अन्दर जिस
शिड्यूल्ड
कास्ट एण्ड
ट्राइब
की लेडी से
बलात्कार
हुआ है उसको
फूटी कौड़ी की
सहायता नहीं
दी आपने।
सभापति
महोदय, इसी
सदन में पिछले
सत्र में यह
बात हुई थी कि
जो संवैधानिक
प्रावधान
है,राजस्थान
के आदिवासी
इलाके के अन्दर
उसमें शराब के
ठेकेदार नहीं
जायेंगे, अंग्रेजी
की शराब की
दुकानें नहीं
खुलेंगे और
इसी सदन में
राजस्थान की
माननीय मुख्यमंत्री
ने आश्वासन
दिया था कि
मैं ऐसा नहीं
होने दूंगी।
एक कमेटी
बनायी गयी थी,
उस कमेटी की
इसके बाद में
मीटिंग हुई
लेकिन पूरा
साल निकाल दिया
और राजस्थान
के आदिवासी लो
के हक के साथ,
उनकी परम्परा
के साथ
खिलवाड़ करने
का काम राजस्थान
की इस वसुन्धरा
सरकार ने किया
है। आज पूरे
आदिवासी
इलाके के अन्दर
शराब के
ठेकेदारों के
साथ मिल कर
पुलिस उनके
खिलाफ झूठे
मुकदमें दर्ज
करने का काम
कर रही है।
डूंगरपुर में
बड़े-बड़े आन्दोलन
हुए लेकिन इस
सरकार के कान
पर कोई जूं नहीं
रेंगी, सभापति
महोदय।
अब,
सभापति महोदय,
मैं आपके माध्यम
से राजस्थान
सरकार का ध्यान
अत्यन्त
महत्वपूर्ण
विषय की और
आकर्षित करना चाहूंगा।
श्री
सभापति: समाप्त
करें प्लीज।
श्री
संयम लोढ़ा: शुरू
किया है मैंने
अभी, समाप्त
की बात मत करो।
श्री
सभापति: You
have taken 17 minutes.
श्री
संयम लोढ़ा: 17 minutes taken by the ruling party Members.
सभापति
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से निवेदन
करना चाहता
हूं कि राजस्थान
के माननीय
शिक्षा
मंत्रीजी ने
एक वक्तव्य
दिया अपने घर
पर किसानों को
संबोधित करते
हुए कि सेज
नाम की कोई
योजना नहीं है
और वह राजस्थान
के तमाम
अखबारों में
छप कि सेज नाम
की कोई योजना
नहीं है और
उसके बाद,
सभापति महोदय,
माननीय मुख्यमंत्री
के नाम से
जयपुर विकास
प्राधिकरण के आयुक्त
के यहां से एक
फैक्स हुआ,
मुख्यमंत्री
का स्टेटमेंट
कि सेज की
योजना है और
उसके बाद में
मुख्यमंत्रीजी
का यह खण्डन
कि इस तरह की
कोई योजना के
विषय में जो
कार्यवाही की
गयी, बजाय जिन
लोगों ने वह
फैक्सक
बनाया, जिन
लोगों ने वह
भेजा उसके
खिलाफ कार्यवाही
करने के बजाय
मामूली से,
छोटे अधिकारियों
को हटाने का
या सस्पैंड
करने का काम
इन्होंने
किया और आज तक
यह सरकार यह
पता नहीं लगा
पायी और यह
जवाब नहीं दे
पायी कि वह
कौन लोग थे
जिन्होंने
आयुक्त के यहां
से यह फैक्स
किया है।
सभापति
महोदय, यह
नौबत क्यों
आयी, राजस्थान
की सरकार ने
अघोषित रूप से
जयपुर के
आस-पास के
पूरे कृषि
क्षेत्र की
रजिस्ट्री
पर प्रतिबंध
लगा दिया और
जब यहां के
जनप्रतिनिधियों
ने और यहां के
जिला कलेक्टर
को पूछा कि
आपने किसानों
की रजिस्ट्री
पर प्रतिबंध
क्यों लगा
रखा है, उस
कलेक्टर ने
यहां के
जनप्रतिनिधियों
को जवाब दिया
कि मुख्यमंत्री
के मौखिक
निर्देश पर
हमने यह
प्रतिबंध लगा
रखा है। लोग,
यहां के जयपुर
के किसान हाई
कोर्ट में गये
और हाई कोर्ट
के अन्दर,
सभापति महोदय,
मुझे बहुत खेद
के साथ कहना पड़ता
है कि राजस्थान
सरकार के...
श्री
धर्मपाल
चौधरी: मुख्यमंत्रीजी
पर आरोप लगा
रहे हो, क्या
आप वहां बैठे
थे?
श्री
सभापति: आपका
नम्बर आयेगा,
धर्मपालजी, तब
बोलियेगा आप।
श्री
धर्मपाल
चौधरी: नहीं,
समय आयेगा, यह
कह रहे हैं
मुख्यमंत्रीजी
का नाम लेकर।
किसने कहा,
कौनसे ने कहा?
नाम बताएं,
ऐसे ही मुख्यमंत्रीजी
पर चार्ज
लगाने लग रहे
हैं।
श्री
सभापति: आपका
नम्बर आयेगा
तब बोलिये प्लीज।
श्री
संयम लोढ़ा: जयपुर के
जिला कलेक्टर
ने कहा है यह।
श्री
धर्मपाल
चौधरी: जयपुर
के जिला कलेक्टर
से कहलवा दो।
दिलाओ
एफिडेविट
जयपुर के जिला
कलेक्टर से।
श्री
सभापति: प्लीज,
प्लीज।
श्री
रामलाल शर्मा: आपके पास
सबूत है क्या?
श्री
धर्मपाल
चौधरी: जयपुर
के जिला कलेक्टर
ने कहा,
अख़बार ने कहा
और उस दम पर
यहां बोलते
हो।
श्री
सभापति: आपका
नम्बर आये तब
बोलियेगा आप।
श्री
धर्मपाल
चौधरी: नहीं,
नम्बर आयेगा
लेकिन झूठी
बात को कैसे
सुन लेंगे यहां
पर।
श्री
सभापति: आपका
नम्बर आयेगा
तो आप खन्डन
करियेगा इसका,
बैठ जाइये।
श्री संयम लोढ़ा: खन्डन करने के लिए माननीय मुख्यमंत्रीजी बहुत सक्षम हैं। माननीय सभापति महोदय, जयपुर का किसान हाई कोर्ट में गया कि यह क्या मामला है, हमारी रजिस्ट्री रोकी जा रही है और तब नगरीय विकास मंत्री ने जयपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष के रूप में हाई कोर्ट में यह शपथ पत्र दिया कि सेज नाम की कोई योजना नहीं है। राजस्थान सरकार का एक कैबीनेट मंत्री किसानों को भाषण में कहता है कि सेज नाम की कोई योजना नहीं है, राजस्थान सरकार का दूसरा मंत्री हाई कोर्ट में जाकर एफिडेविट देता है कि सेज नाम की कोई योजना नहीं है और जयपुर विकास प्राधिकरण उससे बहुत पहले, सभापति महोदय, इस सम्बन्ध में सारे प्रस्ताव जमीन के एक्विजिशन को लेकर भेज चुका था।
Ars/usc/4d/1430/04032006/1
श्री
संयम लोढ़ा...जारी..एक
झूंठा शपथ
पत्र राजस्थान
के नगरीय
विकास मंत्री
ने उच्च न्यायालय
में दिया,3936
बीघा तो जयपुर
विकास
प्राधिकरण की
बिखरी हुई
लैण्ड थी और 15240
बीघा जो
प्राइवेट
लैण्ड थी उन
सब के सम्बन्ध
में जयपुर
विकास
प्राधिकरण ने
जयपुर के बीस
गांवों की
जमीन का यह
प्रस्ताव
भेजा । मैं
आपके माध्यम
से निवेदन
करना चाहता
हूं कि आज किस
तरह का वातावरण
इस सरकार को
लेकर जयपुर
में बन रहा है
और यह जयपुर
विकास
प्राधिकरण
क्या क्या
कारनामें कर
रहा है।
सभापति महोदय,
आप देखिए अगर
आपके मुख्यमंत्री
के अन्दर सच्चाई
है और इस
सरकार के अन्दर
सच्चाई है,
मैं कोई आरोप
नहीं लगाता तो
आप इस बात का
जवाब दीजिए कि
आपने यह 90-बी की
कार्यवाही कहां
कहां बंद की
और क्यों बंद
की और कब खोली,
इस बात का भी
जवाब दो कि पिक
एण्ड चूज, यह
90-बी की
कार्यवाही
में पिक एण्ड
चूज की
कार्यवाही क्यों
की। कितने ऐसे
मामले हैं जो
महीनों से जे.डी.ए
में पड़े हुए
हैं जिनके ऊपर
कोई एक अंट खींचने
को तैयार नहीं
है और उसके
बाद में आए
हुए कितने ऐसे
मामले हैं
जिनके मामले
में आपने त्वरित
रूप से
कार्यवाही की
और यह भी
जानकारी दो उस
प्राधिकरण
में कितनी ऐसी
सड़कें हैं
जिनकी आपने सौ
फीट चौड़ाई
घटाकर अस्सी
फीट कर दी और
बीस फीट की
रोड पर आपने
दुकानें काट
दीं, कितनी
ऐसी सड़कें
हैं जिनकी 120
फीट से चौड़ाई
घटाकर 100 फीट कर
दी और उस बीस
फीट के अन्दर
उन लोगों को
लाभान्वित
करने का काम
किया दुकानों
के माध्यम से
। आपमें अगर
सच्चाई है तो
आप इस बात की
भी जानकारी दो
कि सुविधा
क्षेत्र के
अन्दर से
कितनी जमीनें
आपने निकाली
हैं और कितने सुविधा
क्षेत्र के प्लाट
को भूखण्ड
बनाकर जयपुर
के भू-माफिया
को लाभान्वित
करने का काम
आपने किया है।
माननीय
सभापति महोदय,
मैं आपके माध्यम
से यह भी निवेदन
करना चाहता हूं
कि यह जो आप
योजना लाए हो
रोहिणी नगर की
फस्ट और
सैकिण्ड,
आपने इसके
फार्म इकट्ठे
करने का काम
किसको दिया,
कितने कमीशन
पर दिया? जयपुर
विकास
प्राधिकरण का
इतना बड़ा
आपका लवाजमा है
लेकिन आपने
पन्द्रह
रुपए प्रति
फार्म के
कमीशन पर
राजस्थान
बैंक को जो एक
प्राइवेट
बैंक है और
सात आठ रुपए
प्रति फार्म
पर एक
लोकमित्र नाम
की संस्था को
आपने दिया और
बारह लाख रुपए
कमाने का उनको
मौका दिया और
जो पचास करोड़
रुपया आपने
रोहिणी नगर
योजना के
फार्म के माध्यम
से इकट्ठा
किया वह पचास
करोड़ रुपया
दूसरे बैंकों
से प्रस्ताव
मंगाने के
बजाए उसी बैंक
में आपने जमा
कराने का काम
किया और आपका
जो आयुक्त है
जे.डी.ए का, क्या
आप इस बातका
जवाब दोगे कि कितने
ऐसे आदमी
जे.डी.ए में
उसके आने के
बाद आ गये हैं जो
उससे पहले
मार्केटिंग
बोर्ड में था
तब भी उसके
साथ थे, उसके
बाद वह डेयरी
में गया उसके
साथ थे, अब यह
जे.डी.ए में आ
गया है तब
उसके साथ है? यह
कोई संस्थागत,
जे.डी.ए को
आपने लूट का
अड्डा बना
दिया। आज इस
जे.डी.ए की
जयपुर में क्या
पहचान बन गयी
है। लोग क्या
कहते हैं
जयपुर में
जे.डी.ए और
जंगल में भेडि़ए
। यह आपके
जे.डी.ए. की एक
छवि बन चुकी
है। मैं आपके
माध्यम से
सभापति
महोदय,.....
श्री
सभापति : सम अप प्लीज।
श्री
संयम लोढ़ा: इस सरकार को
राजस्थान की
जनता को उन
बातों का जवाब
देना पड़ेगा, इस
सरकार का अगर
दामन साफ है
तो आप मुझे एक
एक बात कहने
का अवसर
दीजिए।
श्री
सभापति : You have taken 22 minutes.
श्री
संयम लोढ़ा: जिससे यह
सरकार अपनी
असली स्थिति
को राजस्थान
की जनता के
सामने रख सके।
मैं आपके माध्यम
से यह जानना
चाहता हूं कि
जिस रिंग रोड
का अलाइनमैंट
आपने तय किया
है आपने उस पर
क्यों
ट्रांसपेरेंसी
नहीं रखी और
मंत्री जी क्या
यह सही है कि रीको
से जिस
अधिकारी को
उठाकर रिंग
रोड के
प्रोजक्ट
में लाए हो उस
संजय गुप्ता
के दोस्तों
ने इसके आस
पास की सारी
जमीन को
बेनामी रूप से
खरीदा है, आप
जवाब देना इस बातका
और मैं आपसे
यह भी पूछना
चाहता हूं यह
जो भी....
श्री
राजेन्द्र
राठौड़:कहां से
लाए हैं ?
श्री
संयम लोढ़ा: रीको से,
रीको का एक्स.ई.एन
है वह और मैं
आपसे यह भी
मन्त्री जी
से पूछना
चाहता हूं कि
यह जो
विज्ञापन और
होर्डिंग का
आपने बिना
टेंडर किए काम
दिया है और
साल का, महीने
का डेढ़ करोड़
रुपया एडवरटाइजमैंट
जो प्रिंट
मीडिया का और
इस सब पर हो रहा
है, एक खास
आदमी को लाभान्वित
करने के लिए
किया है जो आप
टेंडर प्रोसेस
में नहीं गए
और आप इस बात
का जवाब देना
कि विद्याधर
नगर के पास
ग्राम बीड
पापड़ में आरक्षित
वन की भूमि 90-बी
की कार्यवाही
कर रहे हो, साठ
बीघा की 90-बी
आपने कर दी है
और 700 बीघा की
90-बी आप करने जा
रहे हो। इसके
अलावा माननीय
सभापति महोदय,
मैं यह निवेदन
करना चाहता
हूं...
श्री
महावीर
प्रसाद जैन(सरकारी
मुख्य
सचेतक): मेरा
आपसे निवेदन
है कि समय की
सीमा आसन ने
तय की हुई है।
अनेक
माननीय सदस्य:
बढ़ा दो, बढ़ा
दो।
श्री
सी.पी.जोशी: आपसे
निवेदन कर रहे
हैं कि आप
प्रस्ताव
रखें कि सदन
की कार्यवाही
रात दस बजे तक
चले।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन: यह तो
सर्वदलीय
बैठक में तय
हुआ है और
प्रतिपक्ष के
नेता महोदय
इसके साक्षी
हैं और मैं
निवेदन करना
चाहताहूं कि
उन्होंने
प्रस्ताव
किया है कि एक
घंटा बी.डी.
कल्ला साहब
बोलेंगे और एक
घंटा तीस मिनट
कुल मिलाकर
टाइम है तो
हमको कोई
एतराज नहीं
है। आप बी.डी.कल्ला
साहब का समय
काट दें। समय सीमा
का ध्यान
रखें।
श्री
हरिमोहन
शर्मा: समय की सीमा
आप बढ़ा दो ..(व्यवधान)
श्री
सी.पी.जोशी: मुख्यमंत्री
जी के भाषण तक,
रात के बारह
बजे तक...(व्यवधान)
बारह बजे तक
समय बढ़ाया
जाए ...(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन: कांग्रेस
ने डबल समय
बोलने में
लिया है तो भारतीय
जनता पार्टी
के माननीय
सदस्यों को
टाइम मिलना
चाहिए। हमने
केवल इस मंशा
के आधार पर कि
सदन में
प्रतिपक्ष को
बोलने का मौका
मिलना चाहिए
अपना समय
काटकर, आप समय
देख लीजिए।
हमको बारह
घंटे का समय
आबंटन हुआ था,
अभी तक हमारे
पास छह घंटे
मौजूद हैं
लेकिन उसके
बाद हमारा समय
काटा...
श्री
हरिमोहन
शर्मा: आप तो राज
चलाओ।
श्री
श्रवण कुमार : आप तो राज कर
रहे हो, बोलने
की जरूरत कहां
है, बोलना तो
हमें
चाहिए...(व्यवधान)
श्री
संयम लोढा: यह अत्यन्त
खेद की बात है
कि सच्चाई
सुनने के लिये
सरकार के पास
टाइम नहीं है ।
श्री
सभापति: माननीय
प्रतिपक्ष के
नेता महोदय
आपकी पार्टी के
एक घंटा इक्कतीस
मिनट थे उसमें
से ...
श्री
संयम लोढ़ा: यह ध्यान
रखना, मुझे
बोलने नहीं
दिया, एक एक
बात बोलूंगा।
श्री
सभापति: आप तय कर
लें..(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन: पहले तो
अपनी सीट से
बोलें।
श्री
सभापति: प्लीज, प्लीज,
माननीय
नाथद्वारा से
आने वाले
माननीय सदस्य
आप अपनी सीट
से नहीं बोल
रहे हैं ...(व्यवधान) मैं
माननीय
प्रतिपक्ष के
नेता से
निवेदन करना चाहता
हूं कि आपकी
ही पार्टी का
समय जाया हो
रहा है।
माननीय
बी.डी.कल्ला
साहब बोलेंगे,
चार नाम दे
रखे हैं। संयम
लोढ़ा जी,
श्रीमान
हरिमोहन
शर्मा,
श्रीमान श्रवण
कुमार जी उसके
बाद बी .डी .कल्ला
जी। अब यह
इनको कितना
समय बाद में
दिया जाएगा,
इस पर सोच लें
क्योंकि
भारतीय जनता
पार्टी का अभी
तीन घंटा उन्नीस
मिनट में से
केवल दो सदस्य
बोल पाए हैं
और अभी
दूसरे दलों के
माननीय सदस्य
हैं। एक ही दल
के माननीय
सदस्य बोल
पाए हैं,
निर्दलीय
उनका भी समय
है तो आप उस
हिसाब से अपने
सदस्यों को
नियंत्रित
करिए कि वह जो
समय सीमा तय है
उसमें बोलें ।
आप कह देते
हैं कि नहीं,
हमारी पार्टी
का समय है,
बोलने दीजिए
फिर मुझे कोई
आपत्ति नहीं
है।
श्री
संयम लोढ़ा: मुझे बहुत
खेद है कि सत्तारूढ
पार्टी के
इतने लोग 55-55
मिनट तक बोले
तब आपने एक
बार टोकने का
प्रयास नहीं किया
और मैं राजस्थान
की जनता की और
से कोई सच्चाई
रख रहा हूं तो
बार बार
भारतीय जनता
पार्टी टोक
रही है कभी आप
टोक रहे हैं,
मैं सरकार की
सच्चाई बता
रहा हूं।
श्री
सभापति: टोक रहाहूं
मैं, उनको भी
टोका है, उनका
समय है...(व्यवधान)..आप
विराजो।
श्री
रामनारायण
चौधरी(नेता
प्रतिपक्ष):
आपकी व्यवस्था
सभापति महोदय
शिरोधार्य है
समय का..(व्यवधान)
श्री
सभापति : प्रतिपक्ष
के नेता बोल
रहे हैं माननीय
सदस्य बैठे
बैठे बात नहीं
करें।
श्री
रामनारायण
चौधरी: सभापति जी,
आपकी व्यवस्था
शिरोधार्य
है। यह समय का
नियमन करना
आपका काम है,
आसन का काम है,
आप व्यवस्था
जो देंगे उसका
हम पालन
करवायेंगे
लेकिन व्यवस्था
में आप ही ढील
करें आसन से
उसका क्या
करें। यह आसन
पर आक्षेप
नहीं है लेकिन
प्रतिपक्ष का
चीफ व्हिप
प्रतिपक्ष का
नेता ही कोप भाजक
हो जाए अपने
आदमियों का,
ऐसा नहीं होगा।
आसन को डरने
की जरूरत नहीं
होती है। इनको
सबको पालन
कराओ, नियमित
समय पर
बुलवाओ,
नियमित समय के
बाद रिक्वेस्ट
कर दो। अब
मेरे से क्यों
कहलवाते हो सब
बात। ऐसा
नहीं, सभापति
ऐसा कमजोर
नहीं चाहिए,
आसन ऐसा कमजोर
नहीं चाहिए।
श्री
सभापति : आपकी
पार्टी से जब
यह बात आती है
कि हमारी पार्टी
का समय है बोलने
दीजिए तब आसन
की मजबूरी हो जाती
है।
श्री
रामनारायण
चौधरी: मैं पार्टी
का विनम्र
सेवक हूं और
सेवा में मैं
कोई फर्क नहीं
पड़ने देना
चाहता उसके
बाद पालन
करवाने का काम
आसन का है।
मैं आपको
सहयोग करूंगा
।
श्री
सभापति : धन्यवाद। Please sum up your speech now.
श्री
संयम लोढ़ा: माननीय
सभापति महोदय,
मैं आपका
संरक्षण चाहता
हूं और आपको
यह लग रहा है
कि मैं कोई
अनर्गल बात कर
रहा हूं तो आप
कह दें मैं
बैठ जाता हूं।
श्री
सभापति: यह नहीं हे,
समय का सवाल
है ।
श्री
संयम लोढ़ा: क्या बात
हुई, माननीय
सभापति महोदय,
मैं आपके माध्यम
से निवेदन
करना चाहता
हूं..
श्री
सभापति: समअप ।
श्री
संयम लोढ़ा: मुख्यमंत्री
जी इस बात का
भी जवाब दें
कि जे.डी.ए ने
बिना टेंडर के
जो एक करोड़
दस लाख के जो ....
श्री
महावीर
प्रसाद जैन: सभापति
महोदय, मेरा
पाइंट आफ
आर्डर यह है
कि अपने कुछ 269-270
में यह नियम
है
Vns/usc/4e/1440/4..3.06
यह
नियम है कि
कोई भी माननीय
सदस्य ऐसा
कोई भाषण नहीं
देगा जिससे
उत्तेजना
फैले।
दूसरी
बात यह है कि
जैसा
प्रतिपक्ष के
नेता महोदय ने
कहा कि राज्यपाल
का अभिभाषण
कुछ नीतियों
और उसके ऊपर
बोलने का है,
अब हरेक में
वह जवाब दो,
जवाब दो। जवाब
होना चाहिये
तो क्वेश्चन
के माध्यम से
या और बहुत
सारे माध्यम
हैं, मैं यह
नहीं कह रहा
उनको नहीं
बोलना चाहिये
पर अपने इस
प्रक्रिया और
नियम में बहुत
सारे ऐसे माध्यम
हैं जिनके
माध्यम से, 273
है, कोई
आक्षेप आप
लगाना चाहते
हैं, आप कोई प्रस्ताव
लेकर आएं। अब
बिना प्रस्ताव
लाये यहां पर अनावश्यक
रूप से कोई भी
बात कहेंगे और
जवाब दो,
हाथों हाथ क्या
जवाब देंगे ? इसलिये
मेरा आपसे
निवेदन है कि
जवाब तो समय
पर दिया जायेगा...
श्री
संयम लोढ़ा: मत देना
जवाब हमारे क्या
फर्क पड़ता है
?
डा.सी.पी.जोशी: मत दो जवाब।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन: जवाब दिया
जायेगा। क्यों
नहीं देगें ? लेकिन
यह नहीं हो
सकता वह सदन
में बार बार
अनर्गल आरोप
लगाये जायें।
यह ठीक नहीं
है।
डा. बुलाकीदास
कल्ला: सभापति
महोदय, जो
पाइंट आफ
आर्डर उन्होंने
269 और 270 में, 270 में
तो कोई पाइंट
आफ आर्डर आ ही
नहीं सकता(1
उसमें तो यह
व्यवस्था
है कि 270 के
अंतर्गत अध्यक्ष
द्वारा
पुकारे जाने
पर सदस्य का बोलना,
तो यह नियम तो
इन्होंने
गलत कोट किया
है। 269 में
बोलते समय
पालनीय
नियमों का उल्लेख
किया गया है...
श्री
महावीर
प्रसाद जैन: तो उसको
पढ़ो तो ही
आप।
डा.
बुलाकीदास
कल्ला: उसमें
माननीय सदस्य
जो बोल रहे
हैं, बिलकुल
नियमों के
अंतर्गत बोल
रहे हैं।
गवर्नर
एड्रेस के ऊपर
खुली डिबेट होती
है और उसमें मुख्यमंत्री
जी आज जवाब
देंगी, जो
प्रश्न वह
उठा रहे हैं
उनका जवाब दे
देंगी। यह कोई
प्रश्नों के
माध्यम से
उठाने वाले
बिन्दु नहीं
हैं, इस पर
जनरल डिबेट हो
रही है इसलिये
जो यह मुद्दे
उठा रहे हैं
उनका प्रत्युत्तर
जवाब दें, तब
दे दें। कोई
नियम के
विरुद्ध नहीं
बोले हैं।
श्री
सभापति: समय का ध्यान
रखें। प्लीज,
समय, समाप्त
करें।
श्री
संयम लोढ़ा: माननीय
सभापति महोदय,
जिस 56,000 बीघा
लैंड बैंक का ढिंढोरा
पीट रहे हैं
उसका टाइटल तो
कितने बरसों
से जे.डी.ए. के
नाम पर है।
मैं यह नहीं
कहता कि यह
सारी 56,000 बीघा
भूमि पहले की
है, आपने भी
पहले कुछ
महीने में
जे.डी.ए. के नाम
की है लेकिन
उस 56,000 बीघा में
से बहुतायत
में भूमि का
टाइटल पहले से
जे.डी.ए. के नाम
पर है।
माननीय
सभापति महोदय,
आज जयपुर विकास
प्राधिकरण
में जिस तरह
के काम हो रहे
हैं , आप देखिये।
शूटिंग रेंज,
जगतपुरा,
कंसलटेंट
साढ़े तीन
प्रतिशत, कोस्ट
का साढ़े तीन
प्रतिशत। स्मृति
उद्यान-कंसलटेंट,
कोस्ट का तीन
प्रतिशत, खोले
के हनुमान जी,
भले ही वह मंदिर
के लोग चाहते
हों, नहीं
चाहते हों,
काम हो कि
नहीं पर ओब्लाइज
करना है तो
तीन प्रतिशत
कोस्ट का
उनको दी। जयपुर
विकास
प्राधिकरण
में 38 कम्प्यूटर
और 3 लैपटाप
हैं, इसके
बावजूद एक एक
के ऊपर 118 कम्प्यूटर
लेकर 60 लाख
रुपये
प्रतिवर्ष
चूना लगाने का
काम इस जयपुर
विकास
प्राधिकरण के
अन्दर हो रहा
है। मैं आपके
माध्यम से
निवेदन करना
चाहता हूं...
श्री
सभापति: समाप्त प्लीज।
आप अब बहुत
समय ले चुके
है, प्लीज
समाप्त
करिये वरना
मैं दूसरे का
नाम पुकारता
हूं।
श्री
संयम लोढ़ा: मैं अब आपकी
आज्ञा का पालन
करूंगा।
मैं
आपके माध्यम
से यह भी ध्यान
आकृष्ट करना
चाहता हूं कि
जब अकाल को
लेकर
गिरदावरी हुई,
हमारे अपने
सिरोही जिले
में चार
पंचायत
समितियों में
रिजोल्यूशन
लिया कि यह
गिरदावरी गलत
हुई है।
भारतीय जनता
पार्टी के लोग
उसमें बैठे
हुए थे। जिला
परिषद् ने जब
रिजोल्यूशन
लिया भारतीय
जनता पार्टी
के छह लोग
इसमें बैठे हुए
थे। सरकार को
हमने
रिप्रजेंटेशन
दिया और जब
जोधपुर में
माननीय अकाल
राहत
मंत्रीजी ने
बैठक ली हमने
इस बात को रखा
कि यह
गिरदावरी गलत
हुई है।
भारतीय जनता
पार्टी के
विधायकों ने
उस मीटिंग में
यह कहा
गिरदावरी के
अंदर धांधली
हुई है।
माननीय
सभापति महोदय,
सरकार ने
योजनाबद्ध
तरीके से राजस्थान
के हजारों
गांवों को
गिरदावरी में
अंडर 50 परसेंट
से कम खराबा
में रख करके
लोगों को
आर्थिक
नुकसान पहुंचाने
का काम किया
है।
श्री
सभापति: समाप्त प्लीज।
श्री
संयम लोढ़ा: और जिस चारा
डिपो और
अनुदान का
जिक्र कर रहे
हैं मैं आपसे
पूछना चाहता
हूं कि शिवगंज
की गौशाला...
श्री
सभापति: श्री
जीवाराम
चौधरी।
श्री
संयम लोढ़ा: पाँच मिनट
में वाइंड अप
कर रहा हूं
माननीय सभापति
महोदय।
आज
शिवगंज की
गौशाला के अन्दर
यह..(व्यवधान) लेकिन
इसके बावजूद
एक रुपये का
अनुदान आपने
नहीं दिया।
श्री
सभापति:No. I cann’t allow you. You
have taken more than 35 minutes. Sorry please.
श्री
संयम लोढ़ा: मैं वाइंड
अप कर रहा
हूं। मैं दो
मिनट में वाइंड
अप कर रहा हूं ।
दो मिनट लूंगा
मैं आपके। मैं
आपसे निवेदन
करना चाहता
हूं कि आज
जिस..(व्यवधान)
दो मिनट प्लीज।
दो मिनट में
वाइंडअप कर
रहा हूं मैं..
श्री
जीवाराम
चौधरी: उनसे लो
परमीशन।
श्री
संयम लोढ़ा: मेरे दो इशु
हैं, मैं दो
मिनट में
वाइंड अप कर
रहा हूं । मैं
आपको कह रहा
हूं..
श्री
सभापति: You have taken more than 35
minutes.
श्री संयम
लोढ़ा: मैं आपसे
निवेदन करना
चाहता हूं कि
जिस आज इमानुअल
मिशन की पाँच
संस्थाओं का
रजिस्ट्रेशन
रद्द किया
सरकार ने।
इमरजेंसी के
अंदर भी
आर.एस.एस. से
जुड़े हुए
लोगों का
रजिस्ट्रेशन
निरस्त किया
था लेकिन
माननीय
सभापति महोदय,
वह आज थामस
बदमाश हो सकता
है। थामस के
खिलाफ
कार्यवाही
होनी चाहिये।
उस किताब के
खिलाफ
कार्यवाही
होनी चाहिये
लेकिन अगर
सरकार किसी भी
संस्था का
रजिस्ट्रेशन
कैंसिल करती
है तो पहले
प्रशासक की व्यवस्था
करती है, वह
आपने व्यवस्था
की नहीं। उन
बच्चों का क्या
होगा ? यह आपने
व्यवस्था
की नहीं और
उससे पहले आप
जो अनाथ बच्चों
के साथ करने
जा रहे हो वह
किसी भी रूप
में सर्वथा
उचित नहीं है।
श्री
सभापति: धन्यवाद।
प्लीज, श्री
जीवाराम
चौधरी।
श्री
संयम लोढ़ा: ***
श्री
सभापति: जीवाराम
चौधरी।
Take your seat please. Nothing to record.
श्री
बंशीलाल खटीक: ***
श्री
कन्हैया लाल
मीणा: ***
श्री
महावीर
प्रसाद जैन: पाइंट आफ
आर्डर। मैंने
पहले भी यह कहा
था कि 269 के तहत
पालनीय नियम
है उसकी पालना
सिरोही से आने
वाले माननीय
सदस्य नहीं
कर रहे हैं, यह
बोलते जा रहे
हैं।
श्री
सभापति: आप सदन का ध्यान
दिलाना चाहते
हैं तो नियमों
के तहत आइये। ऐसा
नहीं है No. I would not allow it. Nothing is going on record. I would not
allow it. You please come. नो
रिकार्ड में
कुछ नहीं
जायेगा।
श्री
संयम लोढ़ा: ***
श्री
बंशीलाल खटीक: ***
श्री
सभापति: श्री
जीवाराम
चौधरी।
श्री
जुबेर खान: सभापति
महोदय, आन ए
पाइंट आफ इन्फार्मेशन।
नेता
प्रतिपक्ष के
पास एक तार
आया है बसेड़ी
से और महिला
ने किया है कि
मेरे पति
दीनदयाल
पुत्र गोरे
काछी निवासी
झील बसेड़ी को
जेरोली से
पुलिस मार्शल
जीप में पकड़
कर ले गयी और
मुझे इसका
पूरा अंदेशा
है कि उनका
एनकाउंटर करके
उनको मार दिया
जायेगा। मैं
आपके माध्यम
से गृह
मंत्रीजी से
निवेदन करना
चाहूंगा कि एक
महिला जो अपने
पति के लिये
इस तरह की
गुहार कर रही
है उनको सुरक्षा
दिलायी जाये
और इसकी
पड़ताल की
जाये कि कहीं
पुलिस उसको
एनकाउंटर में
मार नहीं दे।
मैं आपके
माध्यम से यह
पाइंट आफ
इनफोरमेशन
माननीय गृह
मंत्रीजी को
देना चाहता
हूं।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया(गृह
मंत्री): तार
इधर दे दो।
श्री
सभापति: श्री
जीवाराम
चौधरी।
श्री
जीवाराम
चौधरी(सांचोर):
आदरणीय
सभापति महोदय,
मैं महामहिम राज्यपाल
महोदय के
अभिभाषण के
समर्थन में
बोलने जा रहा
हूं। मेरे से
पूर्व सभी
माननीय सदस्यों
ने अपने अपने
विचार प्रकट
किये। मैं सभी
माननीय सदस्यों
से हाथ जोड़कर
प्रार्थना
करता हूं कि
मैं इस विधान
सभा में दो
साल के
कार्यकाल में
दूसरी बार
बोलने के लिये
खड़ा हुआ हूं
इसलिये मैं आपका
सबका समर्थन
चाहूंगा कि
मुझे बीच में
व्यवधान
पैदा नहीं
करें।
माननीय
सभापति महोदय,
मेरे विधान
सभा क्षेत्र
सांचोर में
विश्व की
सबसे बड़ी
गौशाला
श्रीगोपाल
गौवर्धन गौशाला
के नाम से है
जिसमें हम
लाखों गायों
की जनता के
सहयोग से और
हमारी
लोकप्रिय
सरकार के
सहयोग से
रक्षा करते
हैं।
ssy/usc/1450/4f
इनकी सरकार पिछले कितने साल रही उस गौ-शाला की 6 किलोमीटर सड़क इनके वहां के उस समय के विधायक, उस समय के माननीय पूर्व मुख्यमंत्री अशोक जी और पूर्व सरकार के कई मंत्री जो उस गौ-शाला में जाकर के अपनी-अपनी तरफ से सड़क को बनाने के लिए घोषणा करके आये । मुझे खेद है कि इनके पाँच साल के कार्यकाल में इतनी बड़ी गौ-शाला की 6 किलोमीटर की सड़क इनकी सरकार नहीं बना सकी । उस 6 किलोमीटर की सड़क की वजह से इतनी बड़ी गौ-शाला का प्रतिदिन चारा लाने के लिए ट्रकों का 15 हजार रूपए का किराया, सड़क ना होने के कारण से लग रहा था । मैं धन्यवाद देता हूं हमारी लोकप्रिय मुख्यमंत्री जी और हमारे सार्वजनिक निर्माण मंत्री जी को जिन्होंने हमारी सरकार बनते ही 6 महिने के अंदर वह 6 किलोमीटर सड़क बनाकर के हमारी गौ-शाला को गौरवान्वित किया और हमारी गौ-शाला को लाभ दिया ।
सभापति महोदय, ठीक इसी प्रकार से मेरे विधान सभा क्षेत्र के हजार की जनसंख्या वाले गांव जुड़ गये हैं, पाँच सौ की जनसंख्या के गांव सड़कों से वर्तमान में जुड़ चुके हैं और अभी 250 की जनसंख्या वाले गांवों के प्रस्ताव माननीय सार्वजनिक निर्माण मंत्री जी ने मंगवा लिये हैं । उसके लिये भी मैं उन्हें हृदय से धन्यवाद देता हूं । दूसरे माननीय सदस्यों ने पूरे प्रदेश के बारे में जो जिक्र किया है हमारी सरकार की लोकप्रियता की वह बातें मैं वापिस रिपीट नहीं करूंगा । मैं मेरे विधान सभा क्षेत्र सांचौर में इन दो-सवा दो साल की अल्पावधि में हमारी लोकप्रिय सरकार ने जो-जो कार्य किये, सिर्फ उन्हीं को आपके माध्यम से गिनाना चाहूंगा ।
सभापति महोदय, जैसा कि सर्वविदित है कि पूरे प्रदेश में पानी की कमी हैं यह हम,आप और माननीय प्रतिपक्ष के सदस्य और राजस्थान की जनता जानती है । हमारे इस प्रदेश की भौगोलिक स्थिति ही कुछ ऐसी है जिसकी वजह से हम उस तकलीफ को सहन करते जा रहे हैं । लेकिन हमारी इस लोकप्रिय सरकार के आने के बाद मेरे विधान सभा क्षेत्र सांचोर केगांवों में से 150 गांव ऐसे हैं, वहां का क्षेत्र ऐसा है जहां जमीन के अंदर ही पानी उपलब्ध नहीं है और अगर है तो बिलकुल साल्टी वाटर है । मैं धन्यवाद दूंगा हमारे पी.एच.ई.डी. मंत्री जी को जिन्होने दो साल में 35 नये बोर जहां पानी की उपलब्धता है वहां स्वीकृत करवा कर हमारी जनता को पानी पहुंचाने का बहुत शुभ कार्य किया है । उसके साथ-साथ पौने तीन करोड़ रूपये की केरिया और अगड़ावा और तीन करोड़ की भादरणा और अरनाय यह दो स्कीमें हमारी सरकार से स्वीकृत करने की मांग हमने की है । बेडि़या एक क्षेत्र है जो बाखासर बोर्डर पर पड़ता है । वहां से एक डायरेक्ट अप्रोच ना होने के कारण वहां की जनता को पीने के पानी की समस्या होती है, लाइट ना होने के कारण हमारे विभाग ने 31 लाख रूपये की स्कीम बनाकर के सरकार को भेजी है । मैं चाहूंगा कि वह भी तुरंत स्वीकृत हो जाये । मैं धन्यवाद दूंगा आदरणीय मुख्यमंत्री जी को और सिंचाई मंत्री जी को जिन्होंने मेरे विधान सभा क्षेत्र में एक नहर क्षेत्र है जहां लूणी नदी का पानी बारिश होने पर प्रवेश करता है । आज से चालीस साल पहले उस पानी को रोकने के लिए वहां पर डेढ़-डेढ़, दो-दो किलोमीटर के लंबे अलग-अलग जगह पर बाँध बने हुए थे और 25-30 साल पहले लूणी में खूब पानी आने के कारण वह सारे बाँध बीच-बीच में से टूट गये थे । पिछली सरकारों ने उस बाँध की तरफ कोई चिंता व्यक्त नहीं की । उन किसानों की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया । उस बाँध में पानी भरने के बाद उस क्षेत्र के खेत पानी से लबालब हो जाते हैं और पानी सूखने के बाद उस क्षेत्र में गेहूं को खूब बोया जाता है उसके बाद में उस फसल के लिए उन किसानों का कोई खर्चा नहीं होता है । ऐसी जगह पर हमारे माननीय सिंचाई मंत्री जी जिन्होंने उन 19 बांधों को इन दो साल में 4 करोड़ 55 लाख रूपये स्वीकृत करके काम समय पर पूरा करवा लिया । मैं पुन: उनको और हमारी आदरणीय मुख्यमंत्री जी को वहां के किसानों और मेरी और से धन्यवाद देता हूं । जिन्होंने नर्मदा नहर परियोजना जो कि साढ़े 74 किलोमीटर सिर्फ मेरे निर्वाचन क्षेत्र सांचोर से होकर के निकलती है । पिछली सरकार ने उनके कार्यकाल में 110 करोड़ नर्मदा नहर परियोजना के लिए नहीं दिये थे जिनकी वजह से यह कार्य डिले हुआ । अगर वह पिछली कांग्रेस सरकार समय पर उनका भुगतान गुजरात सरकार को कर देती तो आज नहीं आज से तीन साल पहले हमारी विधान सभा क्षेत्र सांचोर में नर्मदा का पानी आ चुका होता । लेकिन वह इतना महत्वपूर्ण कार्य हमारी सरकार ने महत्वपूर्ण समझा । इसके लिए मैं धन्यवाद देता हूं हमारी लोकप्रिय मुख्यमंत्री जी को और हमारे सिंचाई मंत्री जी को जिन्होंने हमारी सरकार बनने के तुरंत बाद 344 करोड़ रूपये और उसके बाद 150 करोड़ रूपये कुल मिलाकर 644 करोड़ रूपये गुजरात सरकार को भुगतान कर चुके हैं और नर्मदा का कार्य मेरे विधान सभा क्षेत्र में लगभग पूर्ण होने पर है और गुजरात का कार्य जो राजस्थान से जोड़ने का है वह तीन-चार महिनों में हो जाना चाहिए । ऐसी संभावना सरकार ने व्यक्त की है । जून-जुलाई तक नर्मदा का पानी सांचोर में आयेगा । मैं निवेदन करूंगा हमारे सिंचाई मंत्री जी और हमारी लोकप्रिय मुख्यमंत्री जी को कि जिस स्पीड से यह काम आपने हाथ में लिया, चालू रखा है इसी स्पीड से इसको कायम रखें ताकि जून-जुलाई तक हमारे जालौर जिले में, सिरोही जिले और बाड़मेर जिले के लोगों को नर्मदा से पीने के पानी की सुविधा उपलब्ध हो सके ।
( बजे)
(श्री रामनारायण विश्नोई, उपाध्यक्ष, पदासीन)
उपाध्यक्ष महोदय, मुझे याद है 1998 में मैने भारतीय जनता पार्टी की तरफ से सांचौर से चुनाव लड़ा था और उसके पाँच साल तक हम लोग विपक्ष में रहे और सामने बिराजे माननीय सदस्यों की कांग्रेस की सरकार रही । मुझे याद है एक-एक ट्रांसफार्मर लगाने के लिए, सीजन के टाइम पर किसान 15-15, 20-20 दिन तक तड़फता था और उसके बाद चार-पाँच हजार रूपये रिश्वत लेने के बाद उस किसान को ट्रांसफार्मर मिलता था । मुझे यह कहने में बडा गौरव महसूस होता है, मैं धन्यवाद देता हूं हमारे बिजली मंत्री जी को और हमारे मुख्यमंत्री जी को कि आज की वर्तमान स्थिति सांचौर की ऐसी है वहां पर स्टोर में 450 ट्रांसफार्मर अभी वर्तमान में हाजिर हैं और हमारी सरकार के कार्यकाल में (व्यवधान)
श्री श्रवण कुमार: आपको जवाब देना पड़ेगा । आपने जो अन्याय किसानों के साथ किया है उसको किसान बर्दाश्त नहीं करेगा (व्यवधान) चार-चार घंटे बिजली नहीं आती,किसान की फसल जल गयी है (व्यवधान)
श्री जीवाराम चौधरी: हमने किसानों के साथ कोई अन्याय नहीं किया (व्यवधान)
श्री श्रवण कुमार: यह अन्याय है ।
श्री जीवाराम चौधरी: हमने किसानों के लिये जो फायदा किया है(व्यवधान)
श्री श्रवण कुमार: हम तो भुगत रहे हैं न ।
श्री जीवाराम चौधरी: हमने किसानों के लिए जो फायदा किया है। हमारी सरकार ने किसानों के हितों के लिए जो कार्य किया वह मैं गिना रहा हूं और वह भी मैं मेरे विधान सभा क्षेत्र सांचौर का गिना रहा हूं । सांचौर में पहली बार विद्युत का स्टोर हमारी सरकार ने खोला और जिस सामान के लिए, एक-एक एंगल के लिए,एक-एक बोल्ट के लिए, एक-एक नट के लिये किसान जिसने नया कनेक्शन मिलता था उसके लिए महिने-महिने, डेढ़-डेढ़ महिने तड़फता था आज वहीं सांचोर में स्टॉक 450 तक नये ट्रांसफार्मर अभी वर्तमान में स्टाक में हैं ।
उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से निवेदन करूंगा कि आप चाहें तो हमारे जिला कलेक्टर जालौर से उनके स्टॉक की संख्या मंगा लें । हम भी असत्य नहीं बोलते और हमारी सरकार भी नहीं बोलती ।
श्री श्रवण कुमार: वह साढ़े चार सौ झुंझुनूं मंगाओ आपका जिला है ।
jyg/akt/436/1500/5a
दो साल के कार्यकाल में मेरे विधान सभा क्षेत्र में पाँच 33 के वी ए के नए जी एस एस हमारी सरकार ने खोले और 132 के वी ए के दो जी एस एस, सांकड़ और भादरोना, उसमें भादरोना तो कम्पलीट हो चुका है और सांकड़ दो महीने में कम्पलीट होने जा रहा है। मैं धन्यवाद देना चाहूंगा हमारे बिजली मंत्रीजी को कि दो साल में इतना बड़ा कार्य बिजली के विभाग का मेरे विधान सभा क्षेत्र सांचौर में इन्होने कराया है।
मैं
धन्यवाद देना
चाहूंगा हमारे
आदरणीय शिक्षा
मंत्रीजी का जिन्होंने
मेरे विधान सभा
क्षेत्र सांचौर
में सिर्फ दो साल
में 51 नई प्राइमरी
स्कूलें मिडल
में क्रमोन्नत
की और 64 नए प्राइमरी
स्कूल खोले। वर्तमान
में उन 64 प्राइमरी
स्कूलों में दो-दो
सौ, तीन-तीन सौ बच्चे
शिक्षा का लाभ
ले रहे हैं। 5 स्कूलें
मिडल से सैकण्डरी
में क्रमोन्नत
की और एक को सीनियर
सैकण्डरी में
क्रमोन्नत करके
मेरे विधान सभा
क्षेत्र सांचौर
की जनता को लाभांवित
किया।
मैं धन्यवाद देना चाहूंगा आदरणीय स्वायत्त शासन मंत्रीजी को जिनके सहयोग से नगर पालिका, सांचौर ने दो साल में 200 छोटी-मोटी सड़कें बनाकर एक कीर्तिमान स्थापित किया है। सांचौर नगरपालिका क्षेत्र में आज कोई भी ऐसी गली, जिसको गली कह सकते हैं, 40 फीट की है तो वहां सड़क निर्मित है और जहां रोलर नहीं जाता था वहां पर हमने सी सी रोड बनाई है।
सांचौर नगरपालिका बनने के बाद से आज दिन तक वहां फायर ब्रिगेड की गाड़ी नहीं थी और हमारे वहां पर इस प्रकार की कोई दुर्घटना हो जाती थी तो फायर ब्रिगेड की गाड़ी हमें जालौर जिला हैड क्वाटर या भीनमाल से मंगवानी पड़ती था और जब तक वह गाड़ी उस स्थान तक पहुंचती थी तब तक वहां सब कुछ जल कर राख हो जाता था। मैं धन्यवाद देना चाहूंगा हमारे स्वायत्त शासन मंत्रीजी को जिन्होंने 19 लाख रुपए की एक नई फायर ब्रिगेड की गाड़ी नगरपालिका सांचौर को दी।
मैं धन्यवाद देना चाहूंगा हमारे समाज कल्याण मंत्रीजी को जिन्होंने दो साल में समाज कल्याण के क्षेत्र में मेरे विधान सभा क्षेत्र में आवासीय विद्यालय खोला जिसमें अभी वर्तमान में हमारे एस सी और एस टी के बालक बालिकाएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं और रह रहे हैं।
मैं धन्यवाद देना चाहूंगा आदरणीय स्वास्थ्य मंत्रीजी को जिन्होंने विधान सभा क्षेत्र सांचौर में 14 नए उप स्वास्थ्य केन्द्र खोले और राजकीय अस्पताल, सांचौर को आदर्श अस्पताल का दर्जा दिया।
आदरणीय उपाध्यक्ष महोदय, हमारी सरकार बनने से पहले भी इस प्रदेश में कई बार अकाल पडा। पिछले अकाल में मेरे विधान सभा क्षेत्र सांचौर में जितने भी इससे पूर्व के अकाल थे, इनकी सरकार के समय में 13 हजार से ज्यादा श्रमिक संख्या कभी भी पूरी तहसील में नहीं रही। मैं धन्यवाद देता हूं, हमारे अकाल राहत मंत्रीजी को जिन्होंने पिछले अकाल में अकेले विधान सभा क्षेत्र सांचौर में 26 हजार की श्रमिक संख्या देकर हमारे गरीबों को रोजगार दिया।
श्री उपाध्यक्ष: पूरे मंत्रियों को एक साथ ही धन्यवाद दे दो, बाकी मत छोड़ो।
श्री जीवाराम चौधरी: मुझे गर्व है कि हमारे हर विभाग ने मेरे विधान सभा क्षेत्र में ही नहीं हमारे पूरे प्रदेश में अच्छा काम किया है। इसीलिए भी यह धन्यवाद के पात्र हैं। मैं झूठा धन्यवाद नहीं देता हूं, इन्होंने इतने काम किए हैं जिनका उद्घाटन मैं नहीं कर पाया हूं। शर्म आनी चाहिए आप लोगों को।
उपाध्यक्ष महोदय, अन्त में मैं राजस्थान की ओजस्वी, यशस्वी, और तेजस्वी मुख्य मंत्री महोदया का हृदय से धन्यवाद देता हूं कि प्रदेश में इसी प्रकार की विकास की गंगा बहाती रहे। सिरोही से आने वाले माननीय सदस्य को अभी पता नहीं, कहां से उलट-मुलट आंकड़े इकट्ठे करके प्रचार पाना चाहते हैं।
श्री उपाध्यक्ष: वह छोड़ों, उनकी चर्चा आप छोड़ो।
श्री जीवाराम चौधरी: हमारी लोकप्रिय मुख्य मंत्रीजी कुछ दिन पहले मेरे विधान सभा क्षेत्र सांचौर में एक गौशाला में पधारी थी। उनके साथ हमारे सदन की अध्यक्षा भी थी। मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि सिर्फ एक दिन के शोर्ट नोटिस पर, आज तय हुआ कि कल आदरणीय मुख्य मंत्रीजी पधार रही हैं, दूसरे दिन जब मुख्य मंत्रीजी पधारी तो उस समय सवा लाख से ज्यादा की संख्या में लोग उन्हें सुनने और देखने के लिए आए थे।
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): गाडि़यां कितनी लाए थे।
श्री जीवाराम चौधरी: एक सिंगल गाड़ी नहीं लगाई थी। गौ शाला में धार्मिक फंक्शन था, सबको खुद को यह पता था कि आदरणीय मुख्य मंत्रीजी गौ शाला पधार रही हैं। गाडि़यां लगाने का काम आप लोगों को सौंपा हुआ है।
श्री हरिमोहन शर्मा: सभी जानते हैं कि जहां पोलिटिकल फंक्शन करते हैं, सभी पार्टियां गाड़ी लगाती है। अभी उनियारा में प्रभुलालजी ने लगाई थी।
श्री जोगेश्वर गर्ग (जालौर): वह आपकी परम्परा है, हमारी नहीं।
श्री जीवाराम चौधरी: आप मुझसे वरिष्ठ सदस्य हैं। मैंने शुरूआत में ही आपसे निवेदन कर दिया था लेकिन आदत से बाज बन्दर कितना ही बूढ़ा हो जाए, गुंलाटी मारना नहीं भूलता। आदरणीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं इन्हीं को कह रहा हूं, गड़बड़ कहीं और होती है और चिल्लाते कहीं और है ऐसे कांग्रेसी मित्रों को भी मेरा राम-राम, जय हिन्द।
श्री उपाध्यक्ष: धन्यवाद। श्री जोगेश्वर गर्ग।
श्री जोगेश्वर गर्ग: धन्यवाद उपाध्यक्ष महोदय। (व्यवधान) तुलसीदासजी ने कहा है, 'दुर्जन पहले वन्दिए'।
उपाध्यक्ष महोदय, पिछले चार दिन से यह सदन एक दस्तावेज के बारे में चर्चा कर रहा है। महामहिम राज्यपाल महोदया ने कृपापूर्वक जो भाषण हम सबके सामने रखा, उसमें वर्णित बातों के बारे में यह सदन चर्चा कर रहा है। साल के 52 सप्ताह और 52 पृष्ठों का यह दस्तावेज। 52 सप्ताह के कामों को 52 पृष्ठों में समेटना और वह भी वसुन्धराजी की सरकार, भारतीय जनता पार्टी की सरकार के कामों को, बहुत मुश्किल काम था, मगर गागर में सागर भरने का प्रयास महामहिम राज्यपाल महोदया ने किया है। यह वास्तव में सराहनीय प्रयास है। इतनी सारी बातें इसमें आने के बाद भी बहुत सारी बातें ऐसी बच गई थी जो इसमें नहीं ले पाई, उन सबका वर्णन मेरे साथी माननीय सदस्यों ने अपने-अपने भाषण में किया है। इतनी सारी बातों का उल्लेख इस दस्तावेज में होने के बाद भी बहुत सारी बातें ऐसी हैं हमारे पास कहने को जो काम हुए हैं राजस्थान की धरती पर और हम गिना नहीं पा रहे। इतनी लम्बी सूची है। किसी भी विभाग में चले जाएं किसी भी विभाग को हाथ में ले लें, चाहे चिकित्सा हो, चाहे शिक्षा हो, चाहे पë