Ssy/usc/1a/1100/03102006
अशोधित प्रति/ प्रकाशनार्थ नहीं
राजस्थान विधान सभा की कार्यवाही का वृत्तान्त
अंक
6 बारहवीं विधान सभा के षष्टम सत्र का प्रथम दिवस संख्या 1
मंगलवार,
03 अक्टूबर, 2006
राजस्थान विधान सभा की बैठक 11.00 बजे
विधान सभा भवन, जयपुर में प्रारम्भ हुई।
(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्यक्ष, पदासीन)
राष्ट्रीय गीत
वन्दे मातरम् । वन्दे मातरम् ।
सुजलाम् सुफलाम् मलयज शीतलाम्।
शस्य श्यामलाम् मातरम्। वन्दे मातरम् ।
शुभ्र ज्योत्स्ना पुलकित यामिनी।
फुल्ल कुसुमित द्रुमदल शोभिनी।
सुहासिनी सुमधुर भाषिणी ।
सुखदाम् वरदाम् मातरम्।
वन्दे मातरम् । वन्दे मातरम् ।
संदेश
राज्यपाल का कृतज्ञता ज्ञापन
श्री अध्यक्ष: मैं माननीय सदस्यों को सूचित करती हूं कि राज्यपाल महोदय द्वारा दिये गये अभिभाषण पर दिनांक 4 मार्च, 2006 सदन द्वारा पारित धन्यवाद प्रस्ताव के उत्तर में निम्न संदेश राज्यपाल महोदया से प्राप्त हुआ है,
प्रिय अध्यक्ष महोदया, आपका अर्द्व शासकीय पत्रांक एफ 10(1) सदन/विस- 2004-06/8212 दिनांक 4 मार्च, 2006 प्राप्त हुआ। माननीय सदस्यों द्वारा प्रकट कृतज्ञता के लिए मैं उनकी आभारी हूं। आपसे निवेदन है कि आप कृपया मेरे कृतज्ञता ज्ञापन को माननीय सदस्यों को पहुंचाने का कष्ट करें।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता
, प्रतिपक्ष): अध्यक्ष महोदय, आपके आदेश को वैसे तो कोई चुनौती नहीं दी जा सकती है लेकिन जिस दिन शोकाभिव्यक्ति जैसा दिन हो।श्री अध्यक्ष: माननीय प्रतिपक्ष के नेता महोदय मुझे शोकाभिव्यक्ति पढ़ने तो दे दें पहले आप।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता
, प्रतिपक्ष): मेरी सुन तो लें मान्यवर।श्री अध्यक्ष: पहले क्या सुन लें, जब शोकाभिव्यक्ति के लिए खड़ी हो रही हूं तो क्या सुन लूं मैं।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता
, प्रतिपक्ष): शोकाभिव्यक्ति तो आप करेंगी ही लेकिन शोकाभिव्यक्ति का औचित्य नहीं रह जाता है जब आप सरकारी बिजनिश बीच में ले लेते हैं।श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): शोकाभिव्यक्ति जैसा विषय तो पहले हो जाने दीजिये। उसके बाद बोल देना, आप सदन में नयी परंपरा काहे की डाल रहे हो। आप तो बड़े जिम्मेवार आदमी हो।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता
, प्रतिपक्ष): मुझे आपत्ति नहीं है। आपकी कुशाग्र बुद्वि का मैं जिक्र कर रहा हूं।श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): हमारी कुशाग्र बुद्वि का सर्टिफिकेट आपसे नहीं लेना है हमें।
श्री अध्यक्ष: इनकी कुशाग्र बुद्वि का जिक्र करने की आपको आवश्यकता इसलिए नहीं है कि मैं शोकाभिव्यक्ति के लिए खड़ी हो रही हूं।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता
, प्रतिपक्ष): शोकाभिव्यक्ति के पहले आप घनश्याम जी तिवाड़ी, शिक्षा मंत्री का आप अध्यादेश...(व्यवधान) वह सदन की मेज पर ...(व्यवधान)श्री अध्यक्ष: मैं उनका नाम पुकारूं तब उनका ...(व्यवधान) बिना नाम पुकारे आप कैसे खड़े हो गये। मैं नाम पुकारती तब आपका खड़ा होना वाजिब था। मैं उनका नाम पुकारूं तब आपका खड़े होने का अधिकार है, अन्यथा नहीं।
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आप यह बाद में पढ़ लेना।
श्री अध्यक्ष: माननीय प्रतिपक्ष के नेता यदि मैं उनका नाम पुकारती तो आपका खड़े होने का अधिकार था, जब तक मैं नाम नहीं पुकारूं तब आप यूं ही क्यों खड़े हो गये।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता
, प्रतिपक्ष): वह ठीक बात है, आपकी बात ठीक है ...(व्यवधान)श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्यक्ष महोदय, बिना आसन की अनुमति के प्रतिपक्ष के नेता बोलें तो मैं समझता हूं कि यह उचित परंपरा नहीं होगी।
श्री बाबूलाल नागर (दूदू): विपक्ष के नेता बोल सकते हैं ...(व्यवधान)
मोहम्मद माहिर आजाद (नगर): प्रतिपक्ष के नेता कभी भी बोल सकते हैं ...(व्यवधान)
श्री बाबूलाल नागर (दूदू): आप कौन होते हैं खड़े होने वाले ...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: सदन के माननीय सदस्य गण, शोकाभिव्यक्ति को मजाक न बनावें ...(व्यवधान)
श्री रामनारायण चौधरी (नेता
, प्रतिपक्ष): आप किस अधिकार से बोल रहे हो ...(व्यवधान) हमारा तो अधिकार है प्रतिपक्ष में ...(व्यवधान) लेकिन आपका तो कोई अधिकार ही नहीं है।श्री अध्यक्ष: इस गंभीर विषय को आप इस तरह से ना टालें। बहुत गंभीर विषय है, शोकाभिव्यक्ति के लिए खड़ी हुई हैं। आप खामेखां इस बात की चर्चा कर रहे हैं, मुझे शोकाभिव्यक्ति तो करने दीजिये आप। आपको जो कुछ कहना है वह शोकाभिव्यक्ति करने के बाद कह देना।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता
, प्रतिपक्ष): उससे पहले बात तो सुन लीजिये ...(व्यवधान)श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): पहले शोकाभिव्यक्ति होगी ...(व्यवधान)
श्री रामनारायण चौधरी (नेता
, प्रतिपक्ष): शोकाभिव्यक्ति तो करेंगे ...(व्यवधान)श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): उससे पहले तो कोई बात ही नहीं है ...(व्यवधान) कोई मामला ही नहीं है ...(व्यवधान)
श्री रामनारायण चौधरी (नेता
, प्रतिपक्ष): वही करें, हम कह रहे हैं वही करें।श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): आप बिराजें तब होगी।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता
, प्रतिपक्ष): आप शोकाभिव्यक्ति के महत्व को कम मत करें।श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): मेरा निवेदन है, हाथ जोड़कर के यही कह रहा हूं ...(व्यवधान)
श्री रामनारायण चौधरी (नेता
, प्रतिपक्ष): परंपरा कायम करें ...(व्यवधान)श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): शोकाभिव्यक्ति के महत्व को आप कम ना करें यही हाथ जोड़कर के विनती कर रहा हूं आपसे।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता
, प्रतिपक्ष): हाथ जोड़ने से काम नहीं चलेगा, परंपराओं को निभायें ...(व्यवधान)श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): अध्यक्ष महोदय को सब अधिकार है ...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: कार्य सूची बनाने का, मिटाने का अधिकार अध्यक्ष का है।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता
, प्रतिपक्ष): हां, है।श्री अध्यक्ष: मैं शोकाभिव्यक्ति के लिए खड़ी हो रही हूं ...(व्यवधान)
श्री रामनारायण चौधरी (नेता
, प्रतिपक्ष): इसलिए ही तो कह रहा हूं आपको।श्री अध्यक्ष: इसलिए आप स्थान ग्रहण कर लें मैं शोकाभिव्यक्ति के लिए खड़ी हो गयी हूं माननीय प्रतिपक्ष के नेता महोदय।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता
, प्रतिपक्ष): मैंने पहले वाक्य में यही कहा कि आपके अधिकार को चुनौती ...(व्यवधान)श्री अध्यक्ष: माननीय प्रतिपक्ष के नेता मैं शोकाभिव्यक्ति के लिए खड़ी हो गयी हूं। आप कृपया स्थान ग्रहण कर लें, अच्छा होगा ...(व्यवधान)
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): आपकी बात समझ गये प्रतिपक्ष के नेता महोदय।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता
, प्रतिपक्ष): अध्यक्ष महोदय, आपको सचिव महोदय के गत सत्र में पारित विधेयकों का भी सदन में पेश करने की अनुमति आपको नहीं देनी चाहिए थी पहले, नम्बर एक, क्योंकि आज शोकाभिव्यक्ति है। कोई कार्यवाही नहीं होगी सिवाय शोक व्यक्त करने के और इसी तरह से आपका घनश्याम जी तिवाड़ी का एक अध्यादेश का प्रस्ताव आपने एजेंडे पर ले लिया।श्री अध्यक्ष: प्रतिपक्ष के नेता महोदय आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। आप मुझे शोकाभिव्यक्ति करने ही नहीं दे रहे हैं। उससे पहले आपने कैसे मान लिया इस बात को, आप कैसे खड़े हो गये जब मैं खड़ी हो रही हूं तो ...(व्यवधान)
श्री रामनारायण चौधरी (नेता
, प्रतिपक्ष): आप पढ़ो ना यहां पर आपने नम्बर दो पर क्यों रखा है ...(व्यवधान)श्री अध्यक्ष: बिजनिश को डिलीट करने का, बिजनिश रखने का अध्यक्ष का अधिकार है और उसी नाते मैंने उसको डिलीट किया है ...(व्यवधान) आसन का अधिकार है।
श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): एक बार कार्य सूची जारी कर दी है प्रशासन ने ...(व्यवधान)
श्री रामनारायण चौधरी (नेता
, प्रतिपक्ष): आपके और मुख्यमंत्री जी, सदन की नेता के अधिकार को कोई चुनौती नहीं दे रहे हैं। लेकिन प्रतिपक्ष का भी कुछ अधिकार है, उसको आप चुनौती मत दें।श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): हम चुनौती नहीं दे रहे हैं ...(व्यवधान) हम भी आपके अधिकार को चुनौती नहीं दे रहे हैं। प्रतिपक्ष के नेता आप अपनी बात कह सकते हैं पर शोकाभिव्यक्ति जैसे विषय पर, इस दौर से हम सबको गुजरना है, आपको, हम सबको इस दौर से गुजरना है इसलिए अध्यक्ष महोदय मेरी प्रार्थना है कि इसके महत्व को कृपया कम नहीं करें और शोकाभिव्यक्ति पहले करवायें। अध्यक्ष्ं महोदय, यह नयी परंपरा इस राजस्थान विधान सभा में प्रारंभ नहीं करें।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता
, प्रतिपक्ष): आप कृपया करके ज्ञान मत समझायें, मैं अध्यक्ष जी से ही ज्ञान लेना चाहता हूं।श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): समझ गये ना।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता
, प्रतिपक्ष): मैं अध्यक्ष जी के अलावा किसी के ज्ञान को स्वीकार नहीं करूंगा।श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आपका अधिकार है। शोकाभिव्यक्ति के बाद आप खड़े हो जायें हम सब सुनेंगे ...(व्यवधान) इसके महत्व को कम नहीं करें आप।
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): अध्यक्ष महोदय, एक डंडा रखने की बात थी वहां, एक डंडा लगाने की ...(व्यवधान)
श्री रामनारायण चौधरी (नेता
, प्रतिपक्ष): अध्यक्ष जी का ज्ञान हम सबके लिए सर्वोपरि है ...(व्यवधान) आप बीच में खामेखां ही उछल रहे हो ...(व्यवधान)श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): वह व्यवस्था नहीं हुई ...(व्यवधान) यह टूटे नहीं और प्रतिपक्ष के नेता महोदय गिरें नहीं इसके लिए एक डंडा लगाने की व्यवस्था करने की बात है ...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: प्लीज, प्लीज, आपके ज्ञान से हम सब अनुग्रहित हो गये हैं। अब मेरी बात सुनिये आप।
शोकाभिव्यक्ति एवं श्रद्धांजलि
माननीय सदस्यगण, शोकाभिव्यक्ति के इस अवसर पर मैं गत दिनों दिवंगत हुए इस विधान सभा के पूर्व अध्यक्ष श्री पूनमचन्द विश्नोई, श्री सूरजभान, पूर्व राज्यपाल, उत्तर प्रदेश व हिमाचल प्रदेश, श्री भानुप्रताप सिंह, पूर्व राज्यपाल, कनार्टक, श्री पी.के.दवे, पूर्व उप राज्यपाल, दिल्ली, श्रीमती नन्दिनी सत्पथी, पूर्व मुख्यमंत्री, उड़ीसा, श्री सत्येन्द्र नारायण सिन्हा, पूर्व मुख्यमंत्री, बिहार, श्री प्रमोद महाजन, पूर्व केन्द्रीय मंत्री, वर्तमान विधान सभा के सदस्य श्री नाथूराम अहारी तथा पूर्व सदस्य श्री श्रीराम गोटेवाला, श्री खेमराज कटारा, श्री जयनारायण सालोदिया, श्री आर.पी.शर्मा, श्री मोहन लाल चित्तौडि़या, श्री नानकराम जगतराय, श्री रामप्रसाद, श्री नरेन्द्रपाल सिंह, श्री किशन सिंह भाटी, श्री प्रभूलाल सेन्टर, श्री केसरी सिंह, श्री चतुर्भुज उपाध्याय, भारत रत्न से सम्मानित शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्ला खां तथा राजस्थान के पश्चिमी क्षेत्र में अतिवृष्टि से मारे गये व्यक्तियों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए यह शोक प्रस्ताव प्रस्तुत करती हूं।
पूनमचन्द विश्नोई
श्री, पूर्व अध्यक्ष, राजस्थान विधान सभा के निधन परराजस्थान विधान सभा के पूर्व अध्यक्ष श्री पूनम चन्द जी विश्नोई का जन्म 20 फरवरी, 1924 को जोधपुर जिले के फींच ग्राम में हुआ। आपने बी.ए., एल.एल.बी. की उपाधियां प्राप्त कीं।
श्री पूनम चन्द विश्नोई दूसरी, चौथी, पांचवीं, सातवीं, नौवीं तथा दसवीं राजस्थान विधान सभा के लिए कांग्रेस के विधायक निर्वाचित हुए। आपने दूसरी व चौथी विधान सभा में लूणी, पांचवीं विधान सभा में भीनमाल तथा सातवीं, नौवीं और दसवीं विधान सभा में फलौदी निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। आप 9 मई, 1967 से 9 जुलाई, 1971 तक राजस्थान विधान सभा के उपाध्यक्ष, तत्पश्चात् 7 जुलाई, 1980 से 20 मार्च, 1985 तक अध्यक्ष पद पर आसीन रहे। पीठासीन अधिकारी के रूप में निष्पक्षतापूर्ण कर्तव्य निर्वहन से सदन की गरिमा में अभिवृद्वि की। आपने निर्भीक, स्पष्ट और नीति-सम्मत निर्णय तत्परता से देकर अध्यक्ष के रूप में अपना विशिष्ट स्थान बनाया। आपने हमेशा शालीनता, सौम्यता और सदाशयता का परिचय देकर संसदीय परंपराओं को समृद्व बनाने में भी योगदान दिया।
जयगोविन्द/यूएस/03102006/11.10/1
b/श्री विश्नोई वर्ष 1957 से 1962 तक राजस्थान सरकार में उप मंत्री तथा जुलाई, 1971 से 16 मार्च, 1972 तक जेल, भाषा, विधि एवं न्याय तथा शिक्षा विभाग के मंत्री रहे।
श्री विश्नोई अपने सार्वजनिक जीवन में मारवाड़ किसान सभा के मंत्री, सेन्ट्रल को-आपरेटिव बैंक, जोधपुर, राजस्थान सहकारी संघ, राजस्थान को-आपरेटिव डेयरी फेडरेशन तथा राजस्थान मरु विकास आयोग के अध्यक्ष रहे। प्रारम्भ से ही कांग्रेस से सम्बद्ध रहे श्री विश्नोई राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य, महासचिव तथा उपाध्यक्ष भी रहे।
राजस्थानी भाषा, साहित्य और संस्कृति अकादमी के अध्यक्ष पद पर रहते हुए आपने राजस्थानी भाषा के उन्नयन के लिए निरन्तर प्रयास किया। श्री विश्नोई के राजस्थान राज्य क्रीड़ा परिषद् के अध्यक्ष पद के कार्यकाल के दौरान ही राज्य में खेलों का वास्तविक विकास शुरू हुआ तथा आपके सद्प्रयत्नों से ही जयपुर में एस.एम.एस. स्टेडियम का निर्माण सम्भव हुआ। वन्य जीवन एवं पर्यावरण संरक्षण तथा कृषि विकास में विशेष रुचि रखने वाले श्री विश्नोई ने अनेक देशों की यात्राएं कीं।
श्री पूनम चन्द विश्नोई का दिनांक 25 मई, 2006 को निधन हो गया।
सूरजभान श्री, पूर्व राज्यपाल, उत्तर प्रदेश व हिमाचल प्रदेश के निधन पर
उत्तर प्रदेश एवं हिमाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल तथा लोक सभा के पूर्व उपाध्यक्ष श्री सूरजभान का जन्म 1 अक्टूबर, 1928 को हरियाणा के यमुनानगर जिले के महलां बाली ग्राम में हुआ। आपने एम.ए. तथा एलएल.बी. की उपाधियां प्राप्त कीं।
श्री सूरजभान चौथी, छठी, सातवीं तथा ग्यारहवीं लोक सभा के सांसद निर्वाचित हुए। ग्यारहवीं लोक सभा के कार्यकाल के दौरान आप 12 जुलाई, 1996 से 2 दिसम्बर, 1997 तक लोक सभा के उपाध्यक्ष पद पर आसीन रहे। इससे पूर्व आप केन्द्रीय सरकार में कृषि मंत्री रहे। श्री सूरजभान वर्ष 1987 में हरियाणा विधान सभा के सदस्य निर्वाचित हुए तथा 1989 तक राज्य सरकार में राजस्व मंत्री रहे। वर्ष 1989 से 1990 तक आप हरियाणा विधान सभा में प्रतिपक्ष के नेता रहे। आप अप्रैल, 1998 से नवम्बर, 2000 तक उत्तर प्रदेश तथा नवम्बर, 2002 से मई, 2003 तक हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल के पद पर आसीन रहे। आपको फरवरी 23, 2004 को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग का अध्यक्ष बनाया गया।
लोक सभा के कार्यकाल के दौरान आप अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जन जाति कल्याण सम्बन्धी समिति के सदस्य तथा सभापति रहे। आप लोक लेखा समिति के सदस्य तथा याचिका समिति के सभापति भी रहे। दलित एवं पिछड़े वर्गों के लोगों के उत्थान के लिए सदैव प्रयत्नशील रहे श्री सूरजभान अनुसूचित जाति एवं जन जाति की सूचियों के पुनरीक्षण हेतु गठित संयुक्त संसदीय समिति के सभापति भी रहे। आप पिछड़े वर्ग के उत्थान से जुड़ी अनेक संस्थाओं से सम्बद्ध रहे तथा भारतीय जनता पार्टी के विभिन्न पदों पर रहे।
सामाजिक कार्यों में रुचि रखने वाले श्री सूरजभान ने कई आन्दोलनों का नेतृत्व किया तथा आपातकाल के दौरान जेल यात्रा भी की। आपने अंग्रेजी पाक्षिक
‘अपराइट’ का सम्पादन भी किया।श्री सूरजभान का दिनांक 6 अगस्त, 2006 को निधन हो गया।
भानुप्रताप सिंह श्री, पूर्व राज्यपाल, कर्नाटक के निधन पर
कर्नाटक के पूर्व राज्यपाल श्री भानु प्रताप सिंह का जन्म 10 अगस्त, 1917 को उत्तर प्रदेश के बुलन्दशहर में हुआ। आपने लखनऊ विश्वविद्यालय से एम.एससी. की उपाधि प्राप्त की।
श्री भानु प्रताप सिंह तीसरी और पांचवी उत्तर प्रदेश विधान सभा के सदस्य रहे। आप अप्रैल, 1976 में उत्तर प्रदेश से राज्य सभा के सांसद निर्वाचित हुए तथा वर्ष 1977 में आपको केन्द्रीय सरकार में कृषि तथा सिंचाई राज्य मंत्री बनाया गया। श्री भानु प्रताप सिंह 8 मई, 1990 से 6 जनवरी, 1991 तक कर्नाटक के राज्यपाल के पद पर आसीन रहे।
कृषि में विशेष रुचि रखने वाले श्री भानु प्रताप सिंह भारतीय किसान फैडरेशन के प्रेसीडेन्ट, जी.बी. पंत विश्वविद्यालय के कृषि एवं प्रौद्योगिकी प्रबन्धन बोर्ड के सदस्य तथा नेशनल कार्डिनेशन कमेटी ऑफ फार्म ऑर्गेनाइजेशन के कन्विनर रहे। स्वतंत्र पार्टी से राजनीतिक जीवन प्रारम्भ करने वाले श्री सिंह पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य तथा उत्तर प्रदेश विधान सभा में नेता रहे। आप वर्ष 1976 में भारतीय लोक दल के महासचिव बनाए गए। आपने जनता पार्टी के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। श्री सिंह अपने सार्वजनिक जीवन में अनेक शिक्षण संस्थाओं तथा सामाजिक संगठनों से सम्बद्ध रहे। आपने आपातकाल के दौरान जेल यात्रा भी की।
‘फार्मर्स वॉयस’ तथा ‘गांवों की पुकार’ के सम्पादक रहे श्री सिंह की कृषि उन्नति तथा गहन खेती नामक पुस्तकें भी प्रकाशित हुई। कृषि से सम्बन्धित अनेक पत्रिकाओं में भी आपके अनेक लेख प्रकाशित हुए हैं।
श्री भानु प्रताप सिंह का दिनांक 20 अगस्त, 2006 को निधन हो गया।
पी के दवे श्री, पूर्व उप राज्यपाल, दिल्ली के निधन पर
दिल्ली के पूर्व उप राज्यपाल श्री प्रसन्नाभाई करुणाशंकर दवे का जन्म 1 जनवरी, 1923 को हुआ। आपने साइन्स कॉलेज, नागपुर से बी.एससी. की उपाधि प्राप्त की।
आजादी से पूर्व भारतीय सेना में कार्यरत रहे श्री दवे वर्ष 1947 में मध्य प्रदेश कैडर से भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयनित हुए। भारतीय प्रशासनिक सेवा के कार्यकाल के दौरान आप अदिलबाद, नान्देड, करीमनगर तथा रायचूर जिलों के जिलाधीश, मध्य प्रदेश तथा भारत सरकार के मंत्रालयों में उप सचिव एवं संयुक्त सचिव के पदों पर रहे। आप वर्ष 1967 से 1971 तक जम्मू एवं कश्मीर राज्य के मुख्य सचिव तथा वर्ष 1976 से 1977 तक तमिलनाडु के राज्यपाल के सलाहकार भी रहे। अगस्त, 1981 में सेवानिवृत्ति से पूर्व आप ब्रुसेल्स में भारतीय राजनयिक रहे। श्री दवे मई, 1992 से जनवरी, 1997 तक दिल्ली में उप राज्यपाल के पद पर आसीन रहे।
वाणिज्य क्षेत्र में रुचि रखने वाले श्री दवे अनेक औद्योगिक संस्थाओं से सम्बद्ध रहे। आपको वर्ष 2005 में तेल एवं गैस उद्योग के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए लाइफटाइम अचीवमेण्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
श्री प्रसन्नाभाई करुणाशंकर दवे का दिनांक 18 सितम्बर, 2006 को निधन हो गया।
नन्दिनी सत्पथी श्रीमती, पूर्व मुख्य मंत्री, उड़ीसा के निधन पर
उड़ीसा की पूर्व मुख्य मंत्री श्रीमती नन्दिनी सत्पथी का जन्म दिनांक 9 जून, 1931 को कटक में हुआ। आपने एम.ए. की उपाधि प्राप्त की।
श्रीमती नन्दिनी सत्पथी अप्रैल, 1962 तथा अप्रैल, 1968 में उत्तर प्रदेश से राज्य सभा की सांसद निर्वाचित हुई। आप वर्ष 1966 में केन्द्रीय सरकार में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की उप मंत्री तथा वर्ष 1971 में सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री बनाई गई। श्रीमती सत्पथी वर्ष 1971 से 1995 तक सात बार उड़ीसा विधान सभा की सदस्य निर्वाचित हुई। आप वर्ष 1972 से 1973 तथा 1974 से 1976 तक उड़ीसा के मुख्य मंत्री पद पर आसीन रही। आप वर्ष 1989 व 1995 में उड़ीसा राज्य के आयोजना बोर्ड की सभापति भी रही।
श्रीमती सत्पथी अपने सार्वजनिक जीवन में अनेक सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों से जुड़ी रही। चिल्ड्रन फिल्म सोसायटी की चेयरपर्सन रही श्रीमती सत्पथी ने वर्ष 1966 तथा 1968 में मास्को तथा वर्ष 1972 में ताशकन्द गये भारतीय चल चित्र प्रतिनिधिमण्डल का नेतृत्व किया। आपने पेरिस में आयोजित यूनेस्को की 15वीं सामान्य बैठक में भाग लिया। आप अन्तर्राष्ट्रीय बाल एवं युवा फिल्म केन्द्र की निदेशक मण्डल की सदस्य भी रही।
अध्ययन में रुचि रखने वाली श्रीमती सत्पथी की अनेक पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। आपने कई पुस्तकों का अनुवाद भी किया। आपके द्वारा उडि़या भाषा में रचित अनेक कहानियां तथा आलेख भी प्रकाशित हुए हैं।
श्रीमती नन्दिनी सत्पथी का दिनांक 4 अगस्त, 2006 को निधन हो गया।
सत्येन्द्र नारायण सिन्हा श्री, पूर्व मुख्य मंत्री, बिहार के निधन पर
बिहार के पूर्व मुख्य मंत्री श्री सत्येन्द्र नारायण सिन्हा का जन्म 1 फरवरी, 1919 को औरंगाबाद के पोइआवान ग्राम में हुआ। आपने एम.ए., एलएल.बी. की उपाधियां प्राप्त कीं।
श्री सत्येन्द्र नारायण सिन्हा वर्ष 1950 में अस्थायी संसद के सदस्य रहे। आप पहली, दूसरी, पांचवीं, छठी, सातवीं और आठवीं लोक सभा के सदस्य भी रहे। लोक सभा के कार्यकाल के दौरान आप प्राक्कलन समिति तथा सार्वजनिक उपक्रमों सम्बन्धी समिति के सदस्य रहे। श्री सिन्हा प्राक्कलन समिति के सभापति भी रहे। कई बार बिहार विधान सभा के सदस्य निर्वाचित हुए श्री सिन्हा 11 मार्च से 6 दिसम्बर, 1989 तक बिहार के मुख्य मंत्री पद पर आसीन रहे। श्री सिन्हा वर्ष 1961 से 1967 तक बिहार सरकार में कृषि मंत्री भी रहे। श्री सिन्हा ने हेलसिंकी, केनबरा तथा लिस्बन में आयोजित अन्तर संसदीय संघ के सम्मेलनों में भाग लिया।
अनेक शैक्षणिक संस्थाओं से सम्बद्ध रहे श्री सिन्हा बिहार विश्वविद्यालय तथा पटना विश्वविद्यालय की सीनेट और सिंडीकेट के सदस्य रहे। श्री सिन्हा कांग्रेस की प्रदेश कार्यकारिणी और चुनाव समिति तथा अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य रहे। आप बिहार प्रदेश कांग्रेस (ओ) कमेटी ताकि जनता पार्टी की बिहार प्रदेश इकाई के अध्यक्ष, जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति तथा जनता पार्टी, संसदीय बोर्ड के सदस्य भी रहे।
श्री सत्येन्द्र नारायण सिन्हा का दिनांक 4 सितम्बर, 2006 को निधन हो गया।
प्रमोद महाजन श्री, पूर्व केन्द्रीय मंत्री के निधन पर
राज्य सभा सांसद तथा पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री प्रमोद महाजन का जन्म 30 अक्टूबर, 1949 को आंध्र प्रदेश के महबूबनगर में हुआ। आपने बी.एससी., एम.ए. तथा पत्रकारिता में स्नातक की उपाधियां प्राप्त कीं।
श्री प्रमोद महाजन वर्ष 1986, 1992, 1998 तथा 2004 में महाराष्ट्र से राज्य सभा के सांसद निर्वाचित हुए। आप ग्यारहवीं लोक सभा में उत्तरी-पूर्वी मुम्बई निर्वाचन क्षेत्र से सांसद निर्वाचित हुए। श्री महाजन वर्ष 1996 में केन्द्रीय सरकार में रक्षा मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, संसदीय मामलात, सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के मंत्री रहे। आप वर्ष 1998 में प्रधान मंत्री के राजनीतिक सलाहकार भी रहे। लोक सभा के कार्यकाल के दौरान आप वर्ष 1996-97 में परिवहन और पर्यटन सम्बन्धी स्थायी समिति के सभापति भी रहे।
Gpc/usc/03102006/1120/1c
सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता रहे श्री महाजन ने वर्ष 1971 में स्कूल अध्यापक के रूप में अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की। भारतीय जनता पार्टी से सम्बद्ध रहे श्री महाजन वर्ष 1978 में महाराट्र राज्य इकाई के महासचिव, वर्ष 1983 में अखिल भारतीय सचिव तथा लम्बे समय तक पार्टी के अखिल भारतीय महासचिव रहे।
कुशल राजनेता और प्रखर वक्ता रहे श्री महाजन ने क्षमतावान संयोजक के रूप में राजनीति में अपना विशेष स्थान बनाया। आपने अपने नवीन विचारों से राष्ट्रीय जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। श्री महाजन दलगत राजनीति से ऊपर उठकर लोगों की मदद के लिए सदैव तत्पर रहते थे।
भारतीय संसद के दोनों सदनों में उनकी बहुमुखी प्रतिभा सदैव दृष्टिगत होती थी। संसद के वाद-विवाद में उनके अमूल्य योगदान को सदैव स्मरण किया जाएगा। कार्य के प्रति समर्पित रहे श्री महाजन कठोर मेहनत से सार्वजनिक जीवन के उच्च शिखर पर पहुंचे।
श्री महाजन के निधन से देश ने एक प्रेरक राजनेता तथा प्रभावी प्रशासक खो दिया है।
श्री प्रमोद महाजन का दिनांक 3 मई, 2006 को निधन हो गया।
नाथूराम अहारी श्री, विधायक के निधन पर
विधायक श्री नाथूराम अहारी का जन्म मार्च, 1938 में डूंगरपुर जिले के रघुनाथपुरा ग्राम में हुआ। आपने मैट्रिक तक शिक्षा प्राप्त की।
श्री नाथूराम अहारी सातवीं से बारहवीं राजस्थान विधान सभा तक लगातार छह बार डूंगरपुर सुरक्षित निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक निर्वाचित हुए। विधान सभा के लम्बे कार्यकाल में आप अनुसूचित जाति कल्याण समिति, गृह समिति, प्राक्कलन
‘ख’ समिति तथा अनुसूचित जनजाति कल्याण समिति के सदस्य रहे। आप अनुसूचित जनजाति कल्याण समिति के सभापति भी रहे। विधान सभा में आप क्षेत्र की समस्याओं के निराकरण के लिए सदैव प्रयत्नशील रहते थे।समाज कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले श्री अहारी कारागार सलाहकार समिति, बांसवाड़ा के सदस्य, राजस्थान सेवा संघ, डूंगरपुर में अध्यापक, हिसाब रक्षक तथा ग्राम सहायक, जिला ग्रामदान संघ व जिला नशाबंदी मण्डल के संयोजक तथा अम्बर शिक्षक रहे। आपने वर्ष 1958 में गोविन्दगढ़ से अम्बर शिक्षक, वर्ष 1960 में कारा केन्द्र, बम्बई से ग्राम सहायक तथा राजघाट, वाराणसी और खादी ग्रामोद्योग विद्यालय नासिक से क्षेत्र संगठन का प्रशिक्षण प्राप्त किया।
श्री नाथूराम अहारी का दिनांक 6 अगस्त, 2006 को निधन हो गया।
श्रीराम गोटेवाला श्री, पूर्व राज्य मंत्री के निधन पर
पूर्व विधायक एवं राज्य मंत्री श्री श्रीराम गोटेवाला का जन्म 16 मार्च, 1929 को सीकर जिले के खण्डेला ग्राम में हुआ। आपने आठवीं कक्षा तक शिक्षा प्राप्त की।
श्री श्रीराम गोटेवाला पांचवीं तथा सातवीं राजस्थान विधान सभा में जयपुर के किशनपोल निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक रहे। सातवीं विधान सभा के कार्यकाल के दौरान आप जुलाई, 1981 से फरवरी, 1985 तक राज्य सरकार में नगर आयोजना, स्वायत्त शासन, खादी एवं ग्रामोद्योग, पशुपालन, आबकारी, करारोपण एवं सहकारिता विभागों के राज्य मंत्री रहे। विधान सभा में आप पुस्तकालय समिति तथा विशेषाधिकार समिति के सभापति तथा प्राक्कलन समिति के सदस्य रहे। आप स्वायत्त शासन, नगर आयोजना, जन सम्पर्क विभाग की परामर्शदात्री के सभापति भी रहे। श्री गोटेवाला राजस्थान आवासन मण्डल के अध्यक्ष भी रहे।
श्री गोटेवाला अपने सार्वजनिक जीवन में नगर परिषद, जयपुर के सदस्य तथा उसकी सेनीटेशन समिति के सभापति, राजस्थान व्यापार उद्योग मण्डल के संस्थापक सदस्य, विश्वशांति परिषद की राजस्थान शाखा के कोषाध्यक्ष, टेलीफोन सलाहकार समिति, खादी ग्रामोद्योग बोर्ड तथा जयपुर जिमखाना क्लब के सदस्य रहे। प्रारंभ से ही कांग्रेस से सम्बद्ध रहे श्री गोटेवाला राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष थे। आप तहसील कांग्रेस (बी) तथा जयपुर शहर जिला कांग्रेस के प्रधान मंत्री, जयपुर जिला कांग्रेस की कार्यकारिणी समिति के सदस्य तथा जयपुर शहर कांग्रेस कमेटी (आई) के अध्यक्ष रहे।
सामाजिक कार्यों में रुचि रखने वाले श्री गोटेवाला खण्डेलवाल युवक मण्डल के मंत्री तथा हिन्दू अनाथाश्रम के कोषाध्यक्ष भी रहे। आपने भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय योगदान किया। श्री गोटेवाला
‘राजस्थान व्यापार उद्योग’ पत्रिका, मासिक पत्रिका ‘वरुण प्रवाह’ और ‘साप्ताहिक कांग्रेस’ पत्रिका के प्रधान सम्पादक भी रहे।श्री श्रीराम गोटेवाला का लम्बी बीमारी के बाद दिनांक 25 जून, 2006 को निधन हो गया।
खेमराज कटारा श्री, पूर्व विधायक के निधन पर
पूर्व विधायक श्री खेमराज कटारा का जन्म 9 जुलाई, 1952 को हुआ। आपने राजस्थान कृषि महाविद्यालय, उदयपुर से बी.एससी. की उपाधि प्राप्त की।
श्री खेमराज कटारा आठवीं तथा ग्यारहवीं राजस्थान विधान सभा के लिए उदयपुर ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक निर्वाचित हुए। विधान सभा के कार्यकाल के दौरान आप फरवरी, 1988 से दिसम्बर, 1989 तक राजस्थान सरकार में उपमंत्री रहे। आप प्राक्कलन समिति
‘ख’, याचिका समिति तथा नियम समिति के सदस्य रहे।आदिवासी क्षेत्र एवं आदिवासियों के जीवन के संबंध में विशेष जानकारी रखने वाले श्री कटारा आदिवासियों के उत्थान के लिए सदैव प्रयत्नशील रहे।
श्री खेमराज कटारा का दिनांक 8 अगस्त, 2006 को निधन हो गया।
जयनारायण सालोदिया श्री, पूर्व विधायक के निधन पर
पूर्व विधायक श्री जयनारायण सालोदिया का जन्म फरवरी, 1926 में टोंक जिले के निवाई कस्बे में हुआ। आपने मैट्रिक तक शिक्षा प्राप्त की।
श्री जयनारायण सालोदिया तीसरी, चौथी और छठी राजस्थान विधान सभा के लिए निवाई सुरक्षित निर्वाचन क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए। आप तीसरी एवं चौथी विधान सभा में स्वतंत्र पार्टी तथा छठी विधान सभा में जनता पार्टी के विधायक रहे। विधान सभा के कार्यकाल के दौरान आप प्राक्कलन समिति के सदस्य रहे। आप विधान सभा में स्वतंत्र पार्टी के उपाध्यक्ष तथा प्रतिपक्ष के उप नेता भी रहे।
श्री सालोदिया अपने सार्वजनिक जीवन में नगरपालिका, निवाई के सदस्य तथा अध्यक्ष रहे। आप पंचायत समिति तथा जिला बोर्ड, टोंक के सदस्य भी रहे। श्री सालोदिया निवाई मण्डल कांग्रेस के अध्यक्ष, टोंक जिला कांग्रेस तथा राज्य प्रजा मण्डल के सदस्य तथा जनता पार्टी विधायक दल के कोषाध्यक्ष रहे।
समाज सेवा में रुचि रखने वाले श्री सालोदिया नुक्ता (मृत्यु भोज) प्रथा, पर्दा प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन हेतु सदैव प्रयत्नशील रहे। आप अखिल भारतीय रैगर महासभा की कार्यकारिणी के सदस्य सहित प्रान्तीय रैगर महासभा तथा अनुसूचित जाति उत्थान सभा के सदस्य भी रहे।
श्री जयनारायण सालोदिया का दिनांक 26 मई, 2006 को निधन हो गया।
आर.पी.शर्मा श्री, पूर्व विधायक के निधन पर
पूर्व विधायक श्री आर.पी. शर्मा का जन्म 11 अप्रैल, 1950 को भरतपुर की नदबई तहसील के वैलारा ग्राम में हुआ। आपने बी.कॉम., एलएल.बी. तथा चार्टर्ड अकाउंटेंट की उपाधियां प्राप्त कीं।
श्री आर.पी. शर्मा दसवीं तथा ग्यारहवीं राजस्थान विधान सभा में भरतपुर निर्वाचन क्षेत्र के भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के विधायक रहे। विधान सभा के कार्यकाल के दौरान आप पुस्तकालय समिति तथा जन लेखा समिति के सदस्य रहे।
श्री शर्मा वर्ष 1986 में ग्राम सेवा सहकारी समिति, वैलारा तथा सहकारी उपभोक्ता भण्डार, भरतपुर के अध्यक्ष रहे। सामाजिक कार्यों में विशेष रुचि रखने वाले श्री शर्मा भरतपुर जिला ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष भी रहे। आप वर्ष 1985 में भरतपुर जिला देहात युवक कांग्रेस के उपाध्यक्ष तथा वर्ष 1991 में भरतपुर शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे।
श्री आर.पी. शर्मा का दिनांक 24 सितम्बर, 2006 को निधन हो गया।
मोहनलाल चित्तौडि़या श्री, पूर्व विधायक के निधन पर
पूर्व विधायक श्री मोहन लाल चित्तौडि़या का जन्म 1 जून, 1936 को कपासन तहसील के चित्तौडि़या ग्राम में हुआ। आपने मिडिल तक शिक्षा प्राप्त की।
श्री मोहन लाल चित्तौडि़या नौवीं तथा ग्यारहवीं राजस्थान विधान सभा के लिए कपासन निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित हुए। श्री चित्तौडि़या नौवीं विधान सभा में जनता दल तथा ग्यारहवीं विधान सभा में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के विधायक रहे। विधान सभा के कार्यकाल के दौरान आप राजकीय उपक्रम समिति, गृह समिति, अधीनस्थ विधान संबंधी समिति तथा यातायात, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभागों की संसदीय परामर्शदात्री समिति के सदस्य रहे।
आप 29 वर्ष तक ग्राम पंचायत के सरपंच तथा 11 वर्ष तक पंचायत समिति के उप प्रधान रहे। समाज सेवा में रुचि रखने वाले श्री चित्तौडि़या जन समस्याओं के निराकरण के लिए सदैव प्रयत्नशील रहते थे।
श्री मोहन लाल चित्तौडि़या का दिनांक 20 सितम्बर, 2006 को निधन हो गया।
नानकराम जगतराय श्री, पूर्व विधायक के निधन पर
पूर्व विधायक श्री नानकराम जगतराय का जन्म 6 दिसम्बर, 1938 को पाकिस्तान के सिंध प्रांत के मेहरापुर में हुआ। आपने सिन्धी विषय सहित मैट्रिक तक शिक्षा प्राप्त की।
श्री नानकराम जगतराय ग्यारहवीं राजस्थान विधान सभा के लिए फरवरी, 2002 में हुए उप चुनाव में अजमेर पश्चिम निर्वाचन क्षेत्र से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य चुने गये। विधान सभा के कार्यकाल के दौरान आप प्रश्न एवं संदर्भ समिति के सदस्य रहे।
श्री जगतराय वर्ष 1970, 1990, 1995 व 2000 में अजमेर नगर परिषद के सदस्य तथा वर्ष 1971 से 1974 तक नगर सुधार न्यास, अजमेर के ट्रस्टी रहे। आप अजमेर उपभोक्ता थोक विक्रेता सहकारी भण्डार (अपना बाजार) अजमेर के निर्वाचित सदस्य तथा दरगाह बाजार व्यापारिक संघ, अजमेर के अध्यक्ष एवं संरक्षक रहे। श्री जगतराय शहर जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री सहित पार्टी के अनेक पदों पर रहे। अनेक सामाजिक संगठनों से सम्बद्ध रहे श्री जगतराय ने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया तथा वर्ष 1946 में जेल यात्रा भी की।
श्री नानकराम जगतराय का दिनांक 11 मई, 2006 को निधन हो गया।
रामप्रसाद श्री, पूर्व विधायक के निधन पर
पूर्व विधायक श्री रामप्रसाद का जन्म वर्ष 1939 में बयाना में हुआ। आपने प्राथमिक स्तर तक शिक्षा प्राप्त की।
श्री रामप्रसाद सातवीं तथा नौवीं राजस्थान विधान सभा में कांग्रेस के विधायक रहे। आपने सातवीं विधान सभा में रूपवास तथा नौवीं विधान सभा में वैर सुरक्षित निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। विधान सभा के कार्यकाल के दौरान आप अनुसूचित जाति कल्याण समिति, खान विभाग की संसदीय परामर्शदात्री समिति तथा वन, पर्यावरण, खादी एवं ग्रामोद्योग विभागों की संसदीय परामर्शदात्री समिति के सदस्य रहे।
श्री रामप्रसाद वर्ष 1976 से 1977 तक बयाना नगरपालिका के सदस्य रहे। अनुसूचित जाति के लोगों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध रहे श्री रामप्रसाद अनुसूचित जाति व जनजाति कल्याण मण्डल के संयोजक तथा अनुसूचित जाति लोक पारिषद के अध्यक्ष रहे। आप वर्ष 1987 से 1990 तक भूमि विकास बैंक के संचालक मण्डल के सदस्य भी रहे।
प्रारंभ से ही कांग्रेस से सम्बद्ध रहे श्री रामप्रसाद बयाना युवक कांग्रेस तथा ब्लाक युवक कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे। आप प्रदेश कांग्रेस विधायक दल के सदस्य भी रहे।
श्री रामप्रसाद का दिनांक 20 जुलाई, 2006 को निधन हो गया।
नरेन्द्रपाल सिंह श्री, पूर्व विधायक के निधन पर
पूर्व विधायक श्री नरेन्द्रपाल सिंह का जन्म 20 मई, 1905 को नाथद्वारा में हुआ। आपने इंटर एवं विशारद तक की शिक्षा प्राप्त की।
श्री नरेन्द्रपाल सिंह छठी राजस्थान विधान सभा के लिए मावली निर्वाचन क्षेत्र से जनता पार्टी के विधायक निर्वाचित हुए। विधान सभा के कार्यकाल के दौरान आप जनलेखा समिति के सभापति रहे।
मोहन/चौहान/3102006/1130/1
dस्वतंत्रता आन्दोलन में सक्रिय रहे श्री नरेन्द्रपाल सिंह ने कई बार जेल यात्राएं कीं। आपको वर्ष 1972 में भारत सरकार द्वारा ताम्र-पत्र से सम्मानित किया गया। साम्प्रदायिक सद्भावना के प्रबल समर्थक रहे श्री नरेन्द्रपाल सिंह हरिजन उत्थान, नशाबंदी व दहेज प्रथा उन्मूलन के लिए सदैव प्रयासरत रहे। आप प्रादेशिक जनता पार्टी के अध्यक्ष भी रहे।
श्री नरेन्द्रपाल सिंह का दिनांक 30 मई, 2006 को निधन हो गया।
किशनसिंह भाटी श्री, पूर्व विधायक के निधन पर
पूर्व विधायक श्री किशन सिंह भाटी का जन्म 27 मार्च, 1931 को भीलवाड़ा जिले की आसीन्द तहसील के दौलतगढ़ ग्राम में हुआ। आपने मैट्रिक तक शिक्षा प्राप्त की।
श्री किशन सिंह भाटी पांचवी राजस्थान विधान सभा के आसीन्द निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय विधायक निर्वाचित हुए। आपने जनवरी, 1973 में विधान सभा की सदस्यता से त्याग-पत्र दे दिया। विधान सभा के अल्प कार्यकाल में आप अपने क्षेत्र की समस्याओं के समाधान हेतु प्रयासरत रहे।
अपने सार्वजनिक जीवन में आप ग्राम पंचायत, दौलतगढ़ के सरपंच तथा पंचायत समिति, आसीन्द के प्रधान रहे। छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहे श्री भाटी वर्ष 1945 में महाराणा मिडिल स्कूल, उदयपुर छात्र संघ के सदस्य तथा भीलवाड़ा हाई स्कूल छात्र संघ के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष रहे।
श्री किशन सिंह भाटी का दिनांक 26 जून, 2006 को निधन हो गया।
प्रभुलाल सेंटर श्री, पूर्व विधायक के निधन पर
पूर्व विधायक श्री प्रभुलाल सेन्टर का जन्म 16 अक्टूबर, 1921 को झालावाड़ जिले की खानपुर तहसील में हुआ। आपने मिडिल तक शिक्षा प्राप्त की।
श्री प्रभुलाल सेन्टर तीसरी राजस्थान विधान सभा के लिए खानपुर निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय विधायक निर्वाचित हुए। विधान सभा में आप अपने क्षेत्र के विकास तथा समस्याओं के समाधान के लिए सदैव प्रयत्नशील रहे।
श्री प्रभुलाल अपने सार्वजनिक जीवन में वर्ष 1948 से 1953 तक ग्राम पंचायत के उप सरपंच, वर्ष 1953 से 1959 तक सरपंच तथा वर्ष 1959 से 1961 तक खानपुर पंचायत समिति के प्रधान रहे। आप जिला जल बोर्ड के सचिव भी रहे। श्री प्रभुलाल झालावाड़ जिला युवक कांग्रेस एवं तहसील कांग्रेस के अध्यक्ष तथा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य सहित पार्टी के महत्वपूर्ण पदों पर रहे।
फुटबाल तथा वॉलीबाल के उत्कृष्ट खिलाड़ी रहे श्री प्रभुलाल सेन्टर के नाम से विख्यात रहे। आप सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन हेतु भी निरन्तर प्रयत्नशील रहे।
श्री प्रभुलाल सेन्टर क दिनांक 1 मई, 2006 को निधन हो गया।
केसरी सिंह श्री, पूर्व विधायक के निधन पर
पूर्व विधायक श्री केसरी सिंह का जन्म दिनांक 1 जून, 1927 को नागौर जिले के मूडियार ग्राम में हुआ। आपने बी.ए. की उपाधि प्राप्त की।
श्री केसरी सिंह तीसरी विधान सभा में पाली निर्वाचन क्षेत्र से स्वतंत्र पार्टी के विधायक निर्वाचित हुए। विधान सभा में आप अपने क्षेत्र की समस्याओं के निराकरण के लिए सदैव प्रयत्नशील रहे।
श्री केसरी सिंह अपने सार्वजनिक जीवन में केराफ ग्राम पंचायत के सरपंच, पाली पंचायत समिति के प्रधान तथा पाली जिला परिषद के उप प्रमुख रहे। आप मानव सेवा संघ के संस्थापक सदस्य भी रहे। श्री सिंह पाली साहित्य साधना समिति के अध्यक्ष भी रहे। आप लोकतंत्र के विकेन्द्रीकरण की दिशा में निरन्तर प्रयत्नशील रहे।
श्री केसरी सिंह का दिनांक 15 अगस्त, 2006 को निधन हो गया।
चतुर्भुज उपाध्याय श्री, पूर्व विधायक के निधन पर
पूर्व विधायक श्री चतुर्भुज उपाध्याय का जन्म 29 मार्च, 1914 को हुआ। आपने महाराजा मिडिल स्कूल, उदयपुर से मिडिल तक की शिक्षा प्राप्त की।
श्री चतुर्भुज उपाध्याय तीसरी राजस्थान विधान सभा में चित्तौड़गढ़ निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक रहे। विधान सभा में आप अपने क्षेत्र के विकास के मुद्दों को बड़े तर्कपूर्ण ढंग से उठाते थे।
समाज सेवा में विशेष रुचि रखने वाले श्री उपाध्याय अपने सार्वजनिक जीवन में ग्राम पंचायत, बस्सी के सरपंच, गंगरार तहसील के सरपंच तथा चित्तौड़गढ़ पंचायत समिति के प्रधान रहे। आप कांग्रेस संगठन में भी अनेक पदों पर रहे।
श्री चतुर्भुज उपाध्याय का दिनांक 31 अगस्त, 2006 को निधन हो गया।
बिस्मिल्लाह खां उस्ताद, भारत रत्न के निधन पर
प्रसिद्ध शहनाई वादक भारत रत्न से सम्मानित उस्ताद बिस्मिल्लाह खां का जन्म दिनांक 21 मार्च, 1916 को बिहार के डुमरांव ग्राम में हुआ।
अपने शहनाई वादन से सम्मोहित करने वाले उस्ताद बिस्मिल्लाह खां ने वाराणसी के विश्वनाथ मंदिर में शहनाई में वादक रहे अपने मामा अली बख्श से शहनाई की तालीम हासिल की। शहनाई को प्रसिद्ध क्लासिकल इन्स्ट्रूमेंट के रूप में मान्यता दिलाने वाले उस्ताद बिस्मिल्लाह खां को वर्ष 1956 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, वर्ष 1963 में शहनाई चक्रवती सम्मान, वर्ष 1965 में तानसेन पुरस्कार, वर्ष 1961 में पद्यश्री, वर्ष 1968 में पद्यभूषण तथा पद्यविभूषण जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों के अलावा वर्ष 2001 में भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। उस्ताद बिस्मिल्लाह खां को बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय तथा शांति निकेतन से डॉक्टरेट की मानद उपाधि से भी सम्मानित किया गया।
मानवतावादी तथा धर्म निरपेक्ष मूल्यों के समर्थक उस्ताद बिस्मिल्लाह खां संगीत में मजहब की संकीर्ण सीमाओं से ऊपर उठ गये थे। उनका शहनाई वादन आध्यात्मिक अनुभूति कराता था। प्रथम स्वतंत्रता दिवस पर शहनाई वादन करने वाले उस्ताद ने संसद भवन में आयोजित समारोह में भी अपनी सुरीली स्वर लहरियां बिखेरी। उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के निधन के संगीत के क्षेत्र में अपूरणीय क्षति हुई है।
उस्ताद बिस्मिल्लाह खां का लम्बी बीमारी के बाद दिनांक 21 अगस्त, 2006 को निधन हो गया।
मैं, अपनी और से तथा इस सदन के सभी माननीय सदस्यों की और से दिवंगत व्यक्तियों को श्रद्धांजलि अर्पित करती हूं। और ईश्वर से प्रार्थना करती हूं कि दिवंगत व्यक्तियों की आत्मा को शान्ति प्रदान करें तथा उनके शोक संतप्त परिजनों को उनका बिछोह सहन करने की शक्ति दे।
पश्चिमी राजस्थान में अतिवृष्टि से मारे गये लोगों के निधन पर
पश्चिमी राजस्थान के कई जिलों में गत दिनों आयी बाढ़ से जन-धन की भारी क्षाति हुई है। इस प्राकृतिक आपदा में बाड़मेर जिले के कवास और मलवा सहित अनेक गांवों में कई फीट पानी भर गया। इस अतिवृष्टि से हजारों लोग बेघर हो गये। मरूक्षेत्र में कहर बनकर बरसे प्राकृतिक प्रकोप से जहां बहुत से व्यक्ति मारे गये वहीं बड़ी भारी संख्या में पशुधन की भी क्षति हुई।
मैं, अपनी ओर से तथा इस सदन के सभी माननीय सदस्यों की ओर से बाढ़ से मारे गये व्यक्तियों की मृत्यु पर शोक प्रकट करते हुए पीडि़त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करती हूं
श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्यक्ष महोदय
, कामां में 48 लोग मरे हैं, सरकार को इतना तो संवेदनशील होना चाहिए, वे भी इंसान मरे हैं, राजस्थान के वासी मरे हैं, उनको भी आप श्रद्धांजलि देंगी तो अच्छा रहेगा।श्री अध्यक्ष: ऐसा है कि इस बीच में दो और पूर्व माननीय सदस्यों के बारे में भी सूचना प्राप्त हुई है इसलिए आप यदि कोई इस तरह की बात है तो बता दीजिए, कल उसमें शामिल करके उनके साथ वह भी कर ली जाएगी। ...(व्यवधान)... अब देखिए, इसे विवाद का विषय न बनाएं। माननीय सदस्य
, माननीय सदस्य।श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): नहीं, डेंगू की वजह से भी रोजाना मर रहे हैं।
श्री जुबेर खान (रामगढ़): कामां में 48 लोग जो टंकी से मरे उनके बारे में बताने की जरूरत पड़ेगी क्या यहां ?
श्री अध्यक्ष: मैंने जब एक बार कह दिया।
श्री जुबेर खान (रामगढ़): क्या सरकार को नहीं चाहिए था कि आपको अवगत कराती और रखवाती ?
श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): रोजाना मर रहे हैं, अभी भी हमारे क्षेत्र में आज ही मरा है, आप अख़बार उठाकर देख लें।
श्री अध्यक्ष: मैंने जब कह दिया।
श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): रोजाना मर रहे हैं, संवेदना व्यक्त करनी चाहिए, सरकार नहीं करे तो आपको तो संवेदना व्यक्त करनी चाहिए।
श्री अध्यक्ष: आपको जब मैंने एक बार कह दिया कि इस तरह की कोई सूचना हो तो आप आज दे दें ताकि वह जो हमारे पूर्व सदस्यों के प्रति हमें और संवेदना व्यक्त करनी है उनके साथ में उन्हें भी ले लीजिए। अब आप क्या कहना चाहते हैं ?
श्री बृजकिशोर शर्मा (जयपुर ग्रामीण): यह खारी नदी में भी मरे हैं और कामां में भी मरे हैं, उसमें बताने की क्या बात है ? खारी नदी में और कामां में मरे उनमें बताने का क्या ताल्लुक है ?
श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): सरकार इतनी असंवेदनशील हो जाएगी और ये बातें आसन तक नहीं पहुंचाएगी, यह काम हमारा है क्या ? सरकार का है, सरकार खुद क्यों नहीं करना चाहती ?
श्री अध्यक्ष: माननीय सदस्य
, कृपया दो मिनट के लिए खड़े होकर दिवंगतों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें।(सदन ने दो मिनट खड़े होकर दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की)
ओम शांति, शांति, शांति।
सदन की बैठक कल बुधवार, दिनांक 4 अक्टूबर, 2006 के प्रात: 11.00 बजे तक के लिए स्थगित की जाती है।
(तदनन्तर सदन की बैठक 11.40 बजे बुधवार, दिनांक 4 अक्टूबर, 2006 के प्रात: 11.00 बजे तक के लिए स्थगित हुई)