vkj/akt/ 1100/1a
अशोधित
प्रति/
प्रकाशनार्थ
नहीं
राजस्थान
विधान सभा की
कार्यवाही का
वृत्तान्त
|
अंक 5
बारहवीं
विधान सभा के
पांचवें
सत्र का चौथा
दिवस संख्या 4 |
शुक्रवार,
03 मार्च, 2006
राजस्थान
विधान सभा की
बैठक 1100 बजे
विधान
सभा भवन,जयपुर
में प्रारम्भ
हुई।
(श्रीमती
सुमित्रा
सिंह, अध्यक्ष,
पदासीन)
तारांकित
प्रश्नोत्तर
श्री
अध्यक्ष: श्री शंकर
सिंह
राजपुरोहित।
जिला
जालौर में
जारी शस्त्र
अनुज्ञा पत्र
39. श्री शंकर
सिंह
राजपुरोहित (आहोर):
क्या गृह
मंत्री यह
बताने की कृपा
करेंगे:- (1)
जिला जालौर
में विगत पाँच
वर्षों में
शस्त्र
लाइसेंस
प्राप्त
करने के लिए
कितने आवेदन
प्राप्त हुए,
इनमें से
कितने
लाइसेंस जारी
किये गये व
कितने शेष हैं ? तहसीलवार
सूची सदन की
मेज पर रखें।
(2)
उक्त वर्षों
में जिले में
कितने व्यक्तियों
को टोपीदार, 12
बोर व रिवाल्वर
के लाइसेंस
जारी किये
गये? तहसीलवार
सूची सदन की
मेज पर रखें।
(3)
क्या यह सही
है कि जिले
में आपराधिक,
गुण्डा
प्रवृत्ति के
लोगों व जिनके
विरुद्ध न्यायालय
में मुकदमे
दर्ज हैं,
उनको भी शस्त्र
लाइसेंस जारी
किये हुए हैं? यदि
हां तो
किन-किनको ?
(4)
क्या सरकार
इस प्रकार के
जारी शस्त्र
लाइसेंस को
निरस्त करने
का विचार रखती
है? यदि हां तो
कब तक ?
गृह
मंत्री(श्री
गुलाबचन्द
कटारिया): (1)
जिला जालौर
में विगत पाँच
वर्षों में
शस्त्र
लाइसेंस
प्राप्त
करने के लिए 1749
आवेदन पत्र
प्राप्त
हुए। इनमें से
1229 व्यक्तियों
को लाइसेंस
जारी किये
गये, 456 आवेदन पत्र
खारिज किये
गये तथा 64
आवेदन-पत्र
शेष हैं। तहसीलवार
सूची परिशिष्ट-‘क’ पर
संलग्न है।
(2)
विगत पाँच
वर्षों में
जिले में
टोपीदार बन्दूक
के 1111, 12 बोर गन के 82
व रिवाल्वर
के 36 लाइसेंस
जारी किये
गये। सूची
परिशिष्ट-‘क’ पर
संलग्न है।
(3)
अब तक सूची
परिशिष्ट ‘क’ में
से 29 व्यक्तियों
के विरुद्ध
आपराधिक
प्रवृत्ति के मुकदमे
दर्ज होना
पाया गया है।
सूची परिशिष्ट
‘ख’ पर
संलग्न है।
(4)
अनुज्ञापन
अधिकारी
द्वारा
लाइसेंस
निरस्त करने
की कार्यवाही की
जा रही है जिस
पर उनके
द्वारा विधिक
प्रक्रिया के
अनुसार निर्णय
लिया जायेगा।
श्री
अध्यक्ष:
मोबाइल किसका
बज रहा है?
श्री
राजेन्द्र
राठौड़:
सी.पी.जोशी का
बज रहा है।
डा.
सी.पी.जोशी:
मेरा आप ले
जाओ।
श्री
शंकरसिंह
राजपुरोहित:
माननीय अध्यक्ष
महोदया, आपके
माध्यम से
मेरा एक छोटा
सा प्रश्न
है। टोपीदार
बन्दूक के
लाइसेंस देने
का अधिकारी
तहसीलदार होता
है, कुछ
तहसीलों में
किसी एक
तहसीलदार
द्वारा एक साथ
बहुत भारी
संख्या में
लाइसेंस दिये
गये हैं, जरा
इसकी जांच करवाई
जाये और जालौर
जिले में बिना
लाइसेंस हथियार
कितने हैं,
उनमें से
कितने पकड़े
गये और उन पर
क्या
कार्यवाही
हुई?
श्री
गुलाबचन्द
कटारिया: वैसे
हमने आपको
अपनी तरफ से
परिशिष्ट-क
लगाया है
उसमें हमने
बिलकुल प्रत्येक
चीज को स्पष्ट
किया है।
कितने आवेदन
हमको प्राप्त
हुए, कितने
उसमें से
दिये। पाँच
वर्षों में
जारी किये गये
12 बोर की
तहसीलवाइज
सूची आपको दे
रखी है। जालौर
में 25, आहोर में
20, सायला में 2,
बागोडा में
नहीं, भीनमाल
में 17,
रानीवाड़ा
में 12, सांचौर
में 6, कुल 82 हैं।
इसी तरह से
रिवाल्वर की
भी हमने सूची
दे रखी है,
जिसमें 36 है
टोटल। टोपीदार
बन्दूक की भी
हमने सूची दे
रखी है, इसमें 1111
बता रखे हैं। मैं
सोचता हूं,
मैंने कोशिश
की है कि
प्रत्येक
चीज का जवाब
आपको इन सारी
चीजों को
देखने के बाद
मिल जाये परन्तु
अवैध हथियार
कितने हैं? यह
एकदम तो मैं
एट रेंडम नहीं
कह सकता हूं
कि समय समय पर
हमारी पुलिस
अवैध हथियारों
को पकड़ने का
काम करती है,
उसके केसेज भी
बनाते हैं और
अगर कहीं कोई
ध्यान में
आता है तो हम
उस दृष्टि से
कार्यवाही करते
हैं पर एग्जेक्ट
उनकी संख्या
गिनकर बताना
तो मुश्किल
है, अगर मैं यह
बताऊं इसका
मतलब है कि
फिर मुझे
जानकारी है और
फिर भी मैं
कार्यवाही
नहीं कर रहा
हूं, ऐसा मेरे
पर आरोप लगेगा।
श्री
संयम
लोढ़ा(सिरोही):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से माननीय
मंत्रीजी से
यह निवेदन
करना चाहता हू
कि जो 1111
टोपीदार
लाइसेंस का
आपने उत्तर
में जिक्र
किया है, क्या
यह सही है कि
एक तहसीलदार
तीन तहसीलों
में वहां
कार्यरत रहा
है और 1111
लाइसेंस में
से 500 से अधिक
टोपीदार
लाइसेंस एक ही
तहसीलदार ने
दिये हैं और
उसमें उन लोगों
को भी दिये
हैं जिनके
खिलाफ गम्भीर
किस्म के
आपराधिक
मुकदमे दर्ज
हैं, नम्बर
एक? नम्बर दो,
जिन लोगों को
आपने यह पिस्टल,
रिवाल्वर और
ये सारे
लाइसेंस जारी
किये हैं,
उनमें ऐसे कितने
लोग हैं जिन्होंने
लाइसेंस जारी
होने के बाद
अस्त्र नहीं
खरीदे और आपने
उनके लाइसेंस
निरस्त किये
हैं?
श्री
गुलाबचन्द
कटारिया: वैसे
हमने इस प्रश्न
का पूरा जवाब
मंगाने पर
बिलकुल
ढूंढकर निकाला
कि ऐसे कितने लोग
हैं जिन पर
किसी प्रकार
के मुकदमे हैं
फिर भी
लाइसेंसी आज
की तारीख में
है। 29 लोगों के
ऐसे प्रकरण
हैं, उन 29 में से
केवल चार
प्रकरण ऐसे हैं
जो लाइसेंस
जारी के पहले
भी उन पर
मुकदमे थे,
उसके बाद भी
लाइसेंस उनको
जारी हुए पर
वह बहुत
सामान्य
किस्म के
मुकदमे थे। एक
मुकदमा जरूर
हमारी छानबीन
में से आया है।
यह जो रामकिशन
पुत्र श्री
मोतीजी, इनको
लाइसेंस जारी
किया हमने 6.3.87 को
और इन पर एक
गुजरात में
एन.डी.पी.एस.
एक्ट में एक
मुकदमा 111/86 दर्ज
था। पहले
मुकदमा दर्ज होते
हुए भी 1987 में
इनका लाइसेंस
बना। यह केस
आपके इस प्रश्न
के माध्यम से
हमारे ध्यान
में आया, हम
निश्चित रूप
से देख रहे
हैं कि किसने
यह गलती की? समय
पर सूचना
हमारे पास
थाने में आनी
चाहिए, वह नहीं
आई, गुजरात
में हो चाहे
कहीं का हो।
दूसरा, दुर्जन
सिंह का है। इनका
प्रकरण 2000 में
दर्ज हुआ थ पर
एक सामान्य
किस्म का था
341-323 का, मैं
सोचता हूं
शायद पर एकदम
एग्जेक्ट
नहीं कह सकता
हूं पर एक
सामान्य
किस्म का था,
हो सकता है जब
हमने जारी
किया था 2003 में, मुकदमा
था 2000 का तो यह
सूचना भी मेरे
पास नहीं आ पाई
थी कि उस समय
तक मुकदमा खतम
हो चूका था या
उसके समय में
पेंडिंग था पर
मुकदमा उसमें
दर्ज था। इसी
तरह से एक और
है, रडमा उर्फ
रिडमलराम का,
इनका भी इसी
तरह का एक 341-323/34 का
मुकदमा था। यह
1995 में दर्ज था
और 1998 में इनका
लाइसेंस जारी
हुआ है। बाकी
तो 1991 का एक केस
है। कहीं पर 1995
में दर्ज था
और फिर भी 1998 में
लाइसेंस बना
है। इसके बाद
एक मुकदमा जरूर
लगता है कि
रमेशा कुमार
पुत्र लालजी
जो 200 में दर्ज
है, वह आबकारी
अधिनियम के
तहत था, वह
वास्तव में
मुकदमा जिस
तरह का था,
दर्ज होने के
बाद अगर यह 2002
में जो इनका
लाइसेंस जारी
हुआ, मैं इसकी
जांच करूंगा
कि अगर यह
जानकारी में
होते हुए भी
जिस किसी ने
लाइसेंस देने
वाले अधिकारी
ने इसको नजर
अंदाज किया तो
वह व्यक्ति
कौन था, किसके
कारण से हुआ
है, इसमें जो भी
आवश्यक
कार्यवाही
होगी, वह मैं
निश्चित रूप
से करूंगा।
श्री
संयम लोढ़ा: गृह
मंत्रीजी,
आपने मेरे
दोनों प्रश्नों
के उत्तर
नहीं दिये।
मैंने पहला यह
पूछा है कि
आपने जो 1111
टोपीदार
लाइसेंस जारी
किये हैं, एक
ही तहसीलदार
जालौर जिले
में तीन जगहों
पर तहसीलदार रहा
है और 500 से ज्यादा
लाइसेंस उसने
जारी किये हैं
और दूसरा, जिन
लोगों को आपने
लाइसेंस जारी
किये, उनमें
ऐसे कितने हैं
जिन्होंने
शस्त्र नहीं
खरीदे और नहीं
खरीदने के
कारण आपने लाइसेंस
निरस्त
किये। दो
बातें मैंने
आपसे पूछी है।
श्री
गुलाबचन्द
कटारिया: यह
जो आपने
टोपीदार
लाइसेंस के
बारे में पूछा
है...
श्री
अध्यक्ष:
श्री जीतमल
खांट। जरा
इनको भी पूछ
लेने दीजिये।
श्री
जीतमल
खांट(बागीडोरा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, माननीय
गृह मंत्रीजी
बताने का श्रम
करेंगे कि
बांसवाड़ा,
डूंगरपुर
विशेष शांतिप्रिय
इलाका है और
वहां पर
मौत-मरण और
ऐसे त्यौहारों
पर टोपीदार
बन्दूकों का
उपयोग लिया
जाता है। मैं
आपसे जानना चाहूंगा
कि जिन लोगों
ने टोपीदार
लाइसेंस हेतु
आवेदन कर रखा
है और जिनके
ऊपर किसी
प्रकार का
दोषारोपण
नहीं है, इनके
लाइसेंस
रोकने का क्या
कारण है? और
विशेष रूप से
बांसवाड़ा
डूंगरपुर के
लिए मैं निवेदन
कर रहा हूं कि वहां
पर हमारा विशेष
शांतिप्रिय
इलाका है, कम
से कम मौत-मरण
और सामाजिक
फंक्शनों
में हम लोग
टोपीदार बन्दूक
का उपयोग करते
हैं, मैं आपके
माध्यम से
निवेदन
करूंगा कि
इसमें आप कोई...
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
यह तो अलग से
प्रश्न है।
आप जवाब देना
चाहें तो दें।
श्री
गुलाबचन्द
कटारिया: अध्यक्ष
महोदय, मैं यह
तो नहीं बता
सकता कि उस
समय कौन
तहसीलदार तीन
तहसीलों में
था क्योंकि
मेरे पास इनकी
जानकारी तो
नहीं है। (व्यवधान)
मैं कोशिश कर
रहा हूं, मेरी
बात को आप सुन
लें। जो
टोपीदार बन्दूक
के लाइसेंस
बने हैं, वह
मैंने आपको
बताया है।
जालौर में 60
बने, आहोर में 217
बने, सायला
में 196 बने,
बागोडा में 150
बने, भीनमाल
में 410 बने।
निश्चित रूप
से यह जो जिन
तहसीलों में
अधिक बने हैं,
पर टोपीदार
बन्दूक के
लाइसेंस हैं,
जिसमें
सामान्यत:
अगर उसके
खिलाफ कोई केस
है तो नहीं
बनता है, बाकी
सामान्यत:
किसान को यह
देते हैं और
मैंने जो आपको
बताया है और
जो मैंने
रिजेक्ट किये
हैं, वह भी
लिस्ट मेरे
पास पूरी है। यह
जो मैंने जारी
किये हैं,
उसकी पूरी
एक-एक व्यक्ति
की सूची इसके
साथ है। जिनके
खिलाफ मुकदमा
है और विभाग
ने जिनको
मुकदमों को ध्यान
में नहीं रखा,
उसकी मैंने
आपको डिटेल दी
है और अब वहां
तहसीलदार कौन
तीन तहसीलों
में था, यह
मेरे पास इस
समय एकदम तुरन्त
उपलब्ध नहीं
है कि कौन व्यक्ति
तीन तहसीलों
में था.......
Jkj/akt/1110/1b/03032006
कि
कौन व्यक्ति
तीन तहसीलों
में था और
उसके द्वारा
जारी हुए, अगर
इसमें भी कहीं
आपको लगता है
कि इंटेसनली
किसी आदमी ने
किया है तो
मैं फिर से
इसको दिखवा
दूंगा, अगर
कोई इंटेसनली
उसने कुछ किया
है तो जो भी
कानून के तहत
मुझे अधिकार
प्राप्त है
उसके अनुसार
उसके खिलाफ
कार्यवाही हो
जायेगी।
श्री
संयम लोढ़ा: आपने
कितने
लाइसेंस निरस्त
किये जिन्होंने
अस्त्र नहीं
खरीदे...
श्री अध्यक्ष: माननीय
सदस्य, आप हर
बाद इस तरह से
मत खड़े हुआ
करें...
श्री
संयम लोढ़ा: उसका
आपने उत्तर
नहीं दिया
है।
लाइसेंस
जारी होने के
बाद कितने
लोगों ने शस्त्र
नहीं खरीदे और
इस वजह से
आपने उनके
लाइसेंस
निरस्त किये
हैं या नहीं
किये।
श्री
गुलाब चन्द
कटारिया: मैं यह
अभी बताने की
स्थिति में
नहीं हूं कि
जिनको मिल गये
और उनमें से
कौन से निरस्त
हुए, यह सूची
मेरे पास इस
समय नहीं है,
लेकिन जो एप्लीकेशंस
इन दिनों में
जो लगी थीं
उनकी सूची जरूर
है कि इतने
हमने निरस्त
किये, वह
तहसीलवाइज भी
सूची है,
नामवाइज भी है।
जहां
तक बांसवाड़ा
के माननीय
सदस्य ने कहा
टोपीदार
बंदूकों के
बारे में,
हमने अभी 16.8 को
ही फिर
डाइरेक्शन
जारी किये
हैं, उस
डाइरेक्शन
में कहा कि
अधिक से अधिक 60
दिन के
अंदर-अंदर एस.पी.
को अपने नीचे
की सारी
रिपोर्ट कम्पलीट
करके, थाने की
करके और कलेक्टर
तक पहुंचानी
होगी।
कलेक्टर को
30 दिन का समय
दिया है, उस 30
दिन में उसका
निस्तारण
करना है। यदि वह
किसी कारण से
उसको ठीक नहीं
समझता है तो
इसका निस्तारण
करके इसको
रिजेक्ट
करना है, पर 90
दिन उसकी
मेक्जिमम
सीमा हमने दी है
और हमने यह, क्योंकि
एक प्राक्कलन
समिति की जब
मीटिंग हुई
थी, उस मीटिंग
में जब यह
सवाल खड़े हुए
थे तो हमारे
सारे
अधिकारियों
ने जानने के
बाद, सितम्बर
में उनकी
मीटिंग हुई, 16.8
के दिन हमने
अपने सारे नये
आदेश जारी
किये और एक
बार फिर समय
की ठीक तरह से
पालना हो,
इसका प्रयास
किया है। अभी तक कोई
सौ प्रतिशत
उसका पालन हो
रहा है, ऐसा
दावा मैं नहीं
कर रहा हूं,
लेकिन इस बात
की कोशिश कर रहे
हैं कि जो समय
सीमा उनको
निर्धारित है
उसमें ही अगर
रिजेक्ट
करना है तो
रिजेक्ट कर
दें और अगर
उनको देना है
तो दे दें।
श्री अध्यक्ष: नेक्स्ट
क्वेश्चन।
(व्यवधान)
श्री
प्रद्युम्न
सिंह:
अध्यक्ष
महोदय, एक
सवाल।
एक सवाल।
श्री अध्यक्ष:
मोहम्मद
माहिर आजाद।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह: अध्यक्ष
महोदय, एक
सवाल।
ओनली वन क्वेश्चन।(व्यवधान)
श्री
राकेश
मेघवाल:
आल राजस्थान
का आल इंडिया
करने में भी
छह-छह महीने
लगते हैं
माननीय अध्यक्ष
महोदय।
एक लाइसेंस
आल राजस्थान
है और आल
इंडिया करने
के लिए भी
छह-छह महीने
लग जाते हैं
जबकि जिला
कलेक्टर,
नागौर ने
अभिशंषा कर
दी, आज तक वह
लाइसेंस आल
राजस्थान से
आल इंडिया
नहीं हुए।(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
बारह मिनट हो
गये, अब आप किसलिए
खड़े हैं। आप
किसलिए खड़े
हो गये।(व्यवधान)
बारह मिनट हो
गये हैं,
मैंने नेक्स्ट
क्वेश्चन
पुकार लिया
है।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह:
एक सवाल। एक
सवाल।
श्री अध्यक्ष:
यह क्या मतलब
हुआ, कितने
प्रश्न
पूछेंगे।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह:
नहीं-नहीं,
वह तो आपकी
मर्जी है। अगर आप
चाहें तो एक
सवाल पूछ सकता
हूं, वरना
नहीं
पूछूंगा।
श्री
सी.डी.देवल: जब यह
खड़े हुए तब
से पहली बार
से मैं हाथ
खड़ा किये
हूं, आप सामने
देखती नहीं
हैं, और प्रश्न
नहीं पूछने
देती हैं, फिर
इस प्रश्न
काल का मतलब
ही क्या रहा,
आप इसको, प्रश्न
काल को खत्म
ही कर दो। (व्यवधान)
श्री
प्रद्युम्न
सिंह:
जो आपका
विरोध पक्ष के
प्रति नरम रूख
तो है नहीं,
आजकल तो बहुत
कड़ा रूख है
आपका विरोध
पक्ष के
प्रति, अगर आप
चाहें तो एक
सवाल पूछ लें,
एक सवाल पूछना
चाहता हूं।
एक
माननीय सदस्य:
अध्यक्ष
महोदय, बहुत
महत्वपूर्ण
है, एक सप्लीमेंट्री
पूछ लें।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह:If
you allow, only then I will ask. Otherwise I will not ask. (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
औरों को
बैठाइये पहले,
औरों को
बैठाइये तब
आपको इजाजत
दूं मैं। आपके
पीछे जो खड़े
हैं उनको
बैठाओ आप।
श्री
सी.डी.देवल: साहब,
मैं तो जब यह
खड़े हुए उसके
बाद से पूछ
रहा हूं, हाथ
खड़ा कर रहा
हूं, आप ध्यान
ही नहीं देते
हैं, बोलने ही
नहीं देते हैं
और फिर प्रश्न
काल का मतलब
क्या है,
इसको समाप्त
करो प्रश्न
काल को आप। प्रश्न
काल का मतलब
तो यह है कि इनसे,
मंत्रीजी से
कोई सूचना
मांगे।
श्री अध्यक्ष:
क्या कहना
चाहते हैं आप?
श्री
सी.डी.देवल: मैं उस
समय से हाथ
खड़ा कर रहा
हूं, आप...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
क्या कहना
चाहते हैं आप?
श्री
रामनारायण
चौधरी: आसन का
रूख बहुत कठोर
होता जा रहा
है...
श्री अध्यक्ष: आप
प्रतिपक्ष के
नेता, इस माईक
को पकड़ कर मत
खड़े हुआ करो
आप, इससे खराब
हो जायेगा।
श्री
रामनारायण
चौधरी:
आसन का रूख
बहुत कठोर
होता जा रहा
है, इसमें
प्रतिपक्ष को
आपत्ति है। अगर आप
सदन को सुचारू
रूप से चलाना चाहती
हैं तो आपको
हमारा सहयोग
देना होगा।
श्री
सी.पी.जोशी: यह ठीक
नहीं है। आप
सीएलपी लीडर
पर कमेंट कर
रही हैं अध्यक्ष
महोदय।
यह पहले भी
बात हो चुकी
है, आप सीएलपी
पर कमेंट कर
लेती हैं, यह
क्या मतलब
हुआ अध्यक्ष
महोदय।
श्री
रामनारायण
चौधरी: और यह
इतनी कठोरता
आपकी बर्दाश्त
नहीं की
जायेगी।(व्यवधान)
श्री
सी.पी.जोशी: आप खुद
अध्यक्ष
महोदय, सीएलपी
लीडर की गरिमा
को नहीं रखना
चाहती हैं, आप
खुद कमेंट कर
रही हैं।
श्री
रामनारायण
चौधरी:
आप बहुत कठोर
हैं....
श्री
सी.पी.जोशी: हर बार
यह इश्यू बन
जाता है...
श्री
सी.डी.देवल: आखिर यह
आपसे सीनियर
हैं, यह भी इस
कुर्सी पर रहे
हैं।
श्री
सी.पी.जोशी: एक मिनट,
आप बिराजो न
साहब।
अध्यक्ष
महोदय, हम
सीरियस कन्सर्न
करते हैं,
आपसे फिर
निवेदन करना
चाहते हैं कि
सीएलपी लीडर
को आप कमेंट
नहीं करें। जब भी
सीएलपी लीडर
खड़े होते
हैं, आप कमेंट
कर देती हैं। आप खुद
की, आसन की
जिम्मेदारी
है, जो हमने
फैसला किया था
कि लीडर ऑफ द हाउस
और लीडर ऑफ द
अपोजीशन खड़े
हों, उसके सामने
कोई नहीं
बोलें और आसन
ही बोलने लग
जायेगा तो
बाकी क्या बच
जायेगा।(व्यवधान)
एक माननीय
सदस्य: आप हर
बार ही ख़ड़े
होते हैं
बार-बार।
श्री
सी.पी.जोशी: What
message do we want to give? आज कम
से कम सेल्फ
डिसेप्लिन
चेयर का नहीं
रहेगा, very
unfortunate, you see, in the history of two and a half years, सवा
दो साल में
अध्यक्ष ने
सीएलपी लीडर
के संबंध में
जितने कमेंट्स
किये हैं,
पचास साल के
इतिहास में
कभी नहीं हुए
होंगे, कभी
नहीं आज दिन
तक।
श्री अध्यक्ष:
ना-ना।
श्री
सी.पी.जोशी: You should discourage it. You should patronise we people. Instead of patronising we people, you always
come out with sarcastic remarks. This is
not desirable. At least, we expect from you, being a senior parliamentarian, आपको
हमको
प्रोटेक्ट
करना चाहिए,
हमारे लीडर को
ही आप कह
देंगी तो हम
क्या
बोलेंगे।(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन: अध्यक्ष
महोदय, यह तो
हद हो गई।
श्री अध्यक्ष:
नाथद्वारा
से आने वाले
माननीय सदस्य,
नियमों में यह
प्रावधान है
कि कम से कम एक
दिन में बारह प्रश्नों
का जवाब आये।
श्री
सी.पी.जोशी: यह ढाई
साल से
प्रावधान है,
पचास साल से
प्रावधान है...
श्री अध्यक्ष:
सुनिये,
सुनिये।
श्री
सी.पी.जोशी: जब आप
पिक एण्ड चूज
करें तब नहीं
हो सकता। You see the
history, आपके टेन्योर
में आधे-आधे
घंटे तक क्वेश्चन
हुए हैं,
स्ट्रिक्ट
एक ही दिन
होंगी क्या
आप।
आपको खुद को
सीएलपी लीडर
को करना
चाहिए, सीनियर
आदमी हैं, आप
कमेंट करती
हैं सीनियर
आदमी को।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आपकी
उदारता का
गलत, नाजायज
फायदा उठा रहे
हैं।
श्री
सी.पी.जोशी: सीनियर
लीडर को भी आप
नहीं जानना
चाहते, नये को
नहीं जानना
चाहते हैं,this is not the way to conduct the House
आप
सीएलपी को
नहीं बोलने
देना चाहो तो
क्या मतलब
है।You always
come out with sarcastic remarks. (व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी:
आप क्या
कहना चाहते
हैं(व्यवधान)
वह बोल रहे
हैं हमारे
आदमी।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
प्रतिपक्ष
के नेता
महोदय, जब आप
खड़े थे...
श्री अध्यक्ष:
प्रतिपक्ष
के नेता, माईक
को यों न करें
आप।(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
आपके माननीय सदस्य
खड़े हो गये,
आपके सदस्य
तो आपको बोलने
नहीं देते।
श्री
रामनारायण
चौधरी:
उनको बोलने
का अधिकार है,
आप विघ्न
नहीं डालें,
रोकने का काम
आसन का है।(व्यवधान)
श्री सी.पी.जोशी: आप
विराजिये। आप
विराजिये
महावीरजी। आप खड़े
हैं, आप खुद
खड़े हुए हैं। आप भी
खड़े हो, आप क्या
बैठाओगे। आप
क्या कह रहे
हो।(व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन: आप क्यों
खड़े हैं।
श्री
सी.पी.जोशी: आप काहे
के हेड हैं, आप
चीफ व्हीप
हैं।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन: आप क्यों
खड़े हैं।
श्री
सी.पी.जोशी: मैं तो
एम.एल.ए. हूं, आप
चीफ व्हीप
हैं, आप ध्यान
रखिये। I am an
MLA, you are Chief Whip. आप
रूलिंग
पार्टी के चीफ
व्हीप हैं,
मैं तो एम.एल.ए.
हूं।
श्री
सी.डी.देवल: महावीर
प्रसादजी, आप
जो कर रहे हैं,
ठीक नहीं कर
रहे हैं। आपकी
नेता बोलेगी
तो हम भी सब
खड़े हो
जायेंगे।(व्यवधान)
श्री सी.पी.जोशी:
Please enforce the rules. आपको
नियम तोड़
करके ही चलना
चाहिए, आप
पार्टी के चीफ
व्हीप हैं,
रूलिंग
पार्टी के।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन: मैं
इसलिए खड़ा हूं
कि जो तय हुआ
है...(व्यवधान)
श्री
सी.पी.जोशी: अध्यक्ष
महोदय, यह
रूलिंग
पार्टी के चीफ
व्हीप हैं, I am simply
an MLA. यह क्या एग्जाम्पल देना चाहते हैं, (व्यवधान)
श्री
सी.डी.देवल: कल
प्रतिपक्ष के
नेता खड़े थे,
आधे-आधे घंटे
क्यों चलता
रहा अध्यक्ष
महोदय..(व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी: माननीय
अध्यक्ष
महोदय, माननीय
सदस्य को
बोलने के लिए...
श्री
सी.डी.देवल: कल
आधा घंटे कैसे
चला।(व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी:
रोकने का काम
आपका नहीं है,
रोकने का काम
आसन का है।
श्री
सी.डी.देवल:
आपको इनको
बैठाते नहीं
हैं, महावीर
प्रसादजी सब
जगह खड़े हो
जाते
हैं,सीएलपी लीडर
के सामने...
श्री
महावीर प्रसाद
जैन:
आपको नेता
नहीं मानते
वह।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आपकी
अनुमति से,
आपके भाव से
ऐसा लगा कि
आपने
कृपापूर्वक
मुझको अलाउ कर
दिया है, ऐसा
आभास लगा, अभी
भी अगर आप
मुझे...
श्री नन्दलाल
बंशीवाल: यह परम्परा
नहीं है हाउस
की, नेक्स्ट
क्वेश्चन
काल हो गया और
आपको अलाउ कर
दें।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह:
अभी भी आप
नहीं चाहती
हैं, मैं नहीं
पूछूंगा। अगर आप
नहीं चाहती
हैं तो मैं
नहीं
पूछूंगा। आप कहें
कि हां पूछिये,
तब तो पूछूंगा
वरना मैं कतई
नहीं पूछूंगा।
श्री नन्दलाल
बंशीवाल: एक नई परम्परा
डाल रहे हैं
अध्यक्षजी,
आप।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह:
और यह मानकर,
यह तो आज ही आ
गया सदन के
अंदर...
श्री नन्दलाल
बंशीवाल: नेक्स्ट
क्वेश्चन
काल हो गया और
इनको अलाउ
करें हम।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह:
कि आसन का
रूख विपक्ष के
प्रति बहुत
कठोर होता जा
रहा है..(व्यवधान)
श्री नन्दलाल
बंशीवाल: ना अध्यक्ष
महोदय।
इनको अलाउ
नहीं करेंगे आप।
अध्यक्ष
महोदय, नई
परम्परा डाल
रहे हैं आप,
नेक्स्ट क्वेश्चन
काल हो गया और
आपने इनको
परमिशन दे दी।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह: इसलिए
मेरा आपसे
निवेदन है,
मैं आपको कटु
शब्द इस्तेमाल
कर नहीं सकता,
मैं आपसे यह
कहना चाहता हूं...
श्री अध्यक्ष: प्रश्न
सत्ता पक्ष
का था, मैंने
जानबूझ कर
प्रतिपक्ष को बोलने
का, सप्लीमेंट्री
पूछने का मौका
दिया, यद्यपि
इधर से भी
खड़े थे,
माननीय सदस्य
इधर से भी
खड़े थे और इस
तरह से आप आक्षेप
यदि लगाते हैं
कोई सदन के
ऊपर, तो आप जैसे
सदस्य से मैं
यह उम्मीद
नहीं करती
हूं।(व्यवधान)
श्री
प्रद्युम्न
सिंह:
मेरा आक्षेप
सिर्फ इतना ही
है कि मैं ऐसा
महसूस कर रहा
हूं, हमारे
सदस्य
राजसमंद से
आने वाले
माननीय सदस्य
ने जो बात कही,
मैं उसको
दूसरे शब्दों
में कह रहा
हूं....
श्री
रघुवीर सिंह
मीणा:
नीतिगत बात
है...
श्री अध्यक्ष: अब आप
खड़े क्यों
हैं, एक को बोल
लेने दीजिये।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह:
कि आपका रूख
जो है विपक्ष
के प्रति बहुत
कठोर होता जा
रहा है दो दिन
में और पूर्व
में था तो
उसके बारे में
तो मुझे कुछ
कहना नहीं है।
श्री
अध्यक्ष: आपके
प्रति तो मेरा
रूख कठोर नहीं
है।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह:
वह तो आपकी
कृपा है। मैंने
विपक्ष के
प्रति कहा
है।
मैं अब
आपसे यह
पूछना चाहता
हूं आपके
मार्फत....
श्री
नन्दलाल
बंशीवाल: आपके
प्रतिपक्ष के
नेता खड़े
हैं।(व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी:
सदन में आसन
एक व्यक्ति
से दूसरे व्यक्ति
में भेदभाव कर
रहा है।
यह भी आसन के
लिए शोभनीय
नहीं है।
दूसरी बात
आपने कही कि
सत्ता पक्ष
का प्रश्न
है...
श्री
अध्यक्ष:
प्रतिपक्ष
के नेता, आप
आसन पर आक्षेप
लगा रहे हैं,
यह शोभनीय
नहीं है, I am very sorry.
श्री
रामनारायण
चौधरी: मैं
आक्षेप नहीं
कर रहा हूं,
आक्षेप नहीं
है।
एक
माननीय सदस्य:
बहुत गम्भीर
बात है।
श्री
रामनारायण
चौधरी:
यह आक्षेप
नहीं है, आप
खुद...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:I am very sorry.
मुझे बड़ा
अफसोस है इस
बात का।(व्यवधान)
विपक्ष के
नेता यह बात
कह रहे हैं।
श्री
रामनारायण
चौधरी:
आप कह रहे
हैं कि मैंने
ऐसा होते ऐसा
किया है, क्यों
कहा आसन ने। आसन खुद
ही कह रहा है।
श्री
अध्यक्ष: क्या?
श्री
रामनारायण
चौधरी: क्या
कहा, आप दिखवा
लीजिये। आसन खुद
ही कह रहा
है।(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: यह क्या
गलत कह दिया
मैंने, क्या
गलत कहा।
श्री
रामनारायण
चौधरी:
कि आप पर
मैंने अहसान
किया है।
श्री
अध्यक्ष: जब उनको
मौका दिया तो
मैंने कहा आपके
प्रति तो कठोर
नहीं हूं। आप
क्यों कह रहे
हैं ऐसा।
श्री
रामनारायण चौधरी: कहां
मौका दिया?
श्री
अध्यक्ष: यह क्या
गलत कह दिया। लेकिन
आपने जो कुछ
कहा है...
श्री
रामनारायण
चौधरी:
मैंने क्या
कह दिया...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: आसन के
प्रति
प्रतिपक्ष के
नेता से यह
उम्मीद नहीं
की जाती है कि
आसन के प्रति
इस तरह की बात करें।(व्यवधान)
श्री
रामनारायण
चौधरी:
नहीं-नहीं,
हमने आसन के
प्रति कोई
अनादर नहीं
किया।
हम तो यह कह
रहे हैं कि आसन,
हम तो यह कह
रहे हैं कि
आसन कठोर हो
रहा है, तो यह
कहने का
अधिकार है, यह
पार्लियामेंट्री
वर्ड है, कठोर
है आसन।
हम यह नहीं
कहते पक्षपात
कर रहे हैं।(व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़:
विपक्ष के
नेता, आसन की
एक मर्यादा
है, आसन की
गरिमा है, आसन
की मर्यादा
है, आप तो हमें
कुछ सिखाने के
लिए हैं, इतने
वरिष्ठ आप
हैं, आप आसन को
ही कह रहे हैं,
आसन को सीधा
चार्ज कर रहे
हैं।(व्यवधान)
श्री
महावीर प्रसाद
जैन:
प्रतिपक्ष
की मर्यादा
नहीं है।(व्यवधान)
श्री
राजेन्द्र
राठौड़:
आसन पर सीधा
आक्षेप लगा रहे
हैं, कम से कम
आपसे उम्मीद
नहीं है ऐसी। आप कई
वर्षों तक इस
सदन में रहे
हैं। आसन
सर्वोपरि है,
आसन की गरिमा है,
आसन का सम्मान
करना हम सब का
फर्ज है,
नियमों और
प्रक्रियाओं
में प्रावधान
है।
श्री
सी.डी.देवल: आसन का
मतलब यह नहीं
है ऐसी इकतरफी
कार्यवाही
करे।(व्यवधान)
श्री
सी.पी.जोशी: हमारी
जिम्मेदारी
नहीं है, आपकी
भी जिम्मेदारी
बनती है हाउस
चलना।
श्री
सी.डी.देवल:
आसन न्याय
करे।
श्री
रामनारायण
चौधरी: सुनिये,
सुनिये साहब,
सी.पी.साहब। जो
गरिमा का पाठ
आप मुझे पढ़ा
रहे हैं वह
पाठ मैं उस
समय से जानता
हूं जब आप
पानी को बू
कहते थे, पानी
को आप बू कहते
थे।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़:
इसीलिए मुझे
अफसोस है कि
आप उस समय से
सदन में आ रहे
हैं जब पानी
को मैं बू
कहता था और
उसके बाद आसन
पर इस तरह का
हस्तक्षेप,
आसन पर इस तरह
का आरोप आपके
द्वारा, इसीलिए
मुझे अफसोस
है।(व्यवधान)
श्री
सी.पी.जोशी: यह
नेता के सामने
खड़े हैं, क्या
आरोप दे रहे
हैं, क्या
बात कर रहे
हैं, खुद ही यह
पार्लियामेंट्री
मिनिस्टर
हैं, यह
पार्लियामेंट्री
मिनिस्टर
एग्जाम्पल
दे रहे हैं,
सीएलपी लीडर
के सामने खड़े
हुए हैं, You want to
set an example? पार्टी
चला रहे हैं,
राज कर रहे
हैं आप।
आप राज कर
रहे हैं, हम जो
विरोध कर रहे
हैं, हमें तो
हल्ला करने
दो, राज करने
के बाद में
अक्ल नहीं है,
क्या बातें
कर रहे हैं
आप।(व्यवधान)इसलिए
अक्ल नहीं है
आपमें।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़:
करो-करो।
श्री
सी.पी.जोशी: अध्यक्ष
महोदय, फिर
कहना चाहूंगा
अध्यक्ष
महोदय, आपके
चेम्बर में
मीटिंग हुई,
आपने एक एग्जाम्पल
सेट किया और
यह एग्जाम्पल
आपके चेम्बर
में मीटिंग
होने के बाद
का ठीक नहीं
है और हम कहना
चाहते हैं,
हमने कल प्रश्न
लगाया गृह कर
का, आज आपने
सात बजे लगा
दिया गृह कर
का, यह
अपोजीशन के
प्रति आपका
रूख है अध्यक्ष
महोदय।
जो एक क्वेश्चन
डेफर किया,
उसको लगा दिया
आपने लास्ट
में।
आप चाहते ही
नहीं कि सदन
के अंदर प्रतिपक्ष
की कोई बात को
हम हाउस के
अंदर रखें।
Bhs\akt\1120\3.3.06\1c
इसलिए
अध्यक्ष
महोदय, आप
अपने चैम्बर
में मीटिंग
कराओ।
श्री अध्यक्ष:
चर्चा
कराएंगे न
आपकी।
डॉ.सी.पी.जोशी:
कब करायेंगे 8
बजे रात को?
श्री अध्यक्ष: हमेशा
रात को होती
है।
डॉ.सी.पी.जोशी:
7 बजे तो हाउस
खतम होगा आपका
कब चर्चा
करायेंगे?
श्री अध्यक्ष: हमेशा
बाद में होती
है। (व्यवधान)
डॉ.सी.पी.जोशी:
अध्यक्ष
महोदय, आप फिर
याद कर लें स्थगन
प्रस्ताव पर
हमने आपको कहा
था कि मौका
देते हैं तब भी
आपने कहा कि
नहीं होता
है।
आपकी या तो याददाश्त
ठीक नहीं है
या आपकी
मेमोरी में
कोई तकलीफ हो
गयी है।
श्री
सी.डी. देवल: ...(व्यवधान)...
पक्षपात की
उम्मीद नहीं
करते हैं। अध्यक्ष
महोदय, लोगबाग
आसन से उम्मीद
करते हैं।
श्री अध्यक्ष:
मोहम्मद
माहिर आजाद।
श्री
सुरेश मीणा
(करौली):
लाइसेंस का
मामला है माननीय
अध्यक्ष
महोदय, एक बात
पूछना चाहता
हूं सिर्फ।
श्री
सांवरलाल: अध्यक्ष
महोदय, 7 बजे क्या
इस सदन में तो
रात को एक-एक
बजे तक चर्चा
हुई है मुझे
यह समझ में
नहीं आ रहा है
कि आपने इतनी गम्भीरता
से लेकर पहली
बार आधा घंटे
की चर्चा दी
है और माननीय
सदस्य कह रहे
है कि 7 बजे लगा
दी। यहां तो
एक-एक बजे तक
चर्चा हुई है
विधान सभा
में। 7
बजे कोई
आपका समय
विगड़ रहा है
क्या?
डॉ.सी.पी.जोशी:
...(व्यवधान)... यह
कोई नियम है
आप उठा कर के
देख लीजिये आप
नियम को जब
चाहें तब यूज
कर लें आप।
आपको गवर्नर
की डिबेट के
पहले लगानी
चाहिए थी यह
और आपने गवर्नर
की डिबेट के
बाद में
लगाया।
आप क्या इम्पोर्टेंस
करना चाहते
हैं?
श्री
सांवरलाल: 7
बजे की तकलीफ
आपको भी महसूस
हो रही है क्या?
डॉ.सी.पी.जोशी:
आपने गवर्नर
की डिबेट के
बाद लगाया आप
उठा कर देख
लीजिये कोई भी
बात विपक्ष
उठाये उस पर
आप डिबेट नहीं
करना चाहते
हैं...(व्यवधान)
श्री
नरपतसिह
राजवी(उद्योग
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, आसन के
प्रति जितने
भी आरोप लगाये
कृपया आप उनको
देख कर
विलोपित
करें। यह नहीं
चलेगा, हम
चुपचाप बैठे
हैं। (व्यवधान)
डॉ.सी.पी.जोशी:
बंद करिये
नहीं चलेगा
तो। 6 महीने
पहले क्या कर
लिया आपने?...(व्यवधान)
... बंद करिये
हाउस को कोई
जरूरी थोड़े
ही है हाउस
चले यदि हाउस
को चलाने की
जिम्मेदारी
हमारे पर है
तो इनकी भी
जिम्मेदारी
है ...(व्यवधान)
श्री
महिपाल सिंह
यादव (बानसूर):
सिंचाई
मंत्री जी, 8 बजे
रात का समय
नजदीक आ जाता
है न इसलिए
गम्भीरता
खतम हो जाती
है।
श्री
सांवरलाल: मैं
तो यह सोच रहा
हूं कि आपका
भी 8 बजे का समय
आता है क्या?
श्री
महिपाल सिंह
यादव: 8 बजे बाद
तो सरकार का
ही नहीं पता
रहता है।
श्री
सांवरलाल: अध्यक्ष
महोदय,
नाथद्वारा से
आने वाले
माननीय सदस्य
को जो 12 सवाल का
आपने कहा है
अगर...।
श्री
रामनारायण
चौधरी: ...(व्यवधान)...
आपके सामंत रहे
हैं।
सामंती परम्परा
और नौकरशाही
की परम्परा
यहां नहीं
चलती है सदन
चलाना आपको है
अगर नहीं
चलाना चाहते
हैं तो मत
चलाओ हमें क्या
आपत्ति है।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: आपके
सहयोग से
चलायेंगे।
श्री
रामनारायण
चौधरी: चलाओ। हमें क्या
धमकी दे रहे
हैं आप? (व्यवधान)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:...(व्यवधान).. आप नहीं
चाहते तो नहीं
चलेगा।
डॉ.
बुलाकीदास
कल्ला:
ऐसा है
सामान्यतया
गवर्नर साहब
के एड्रेस पर
जब डिबेट होती
है तो इस प्रकार
के मुद्दे
जीरो ऑवर में
ही उठाये जाते
हैं।
दोनों
पक्षों की
सहमति से कभी
कभी एकाध
उदाहरण के
अलावा काई भी
उदाहरण नहीं
है। इस प्रकार
की चर्चा
जिसको आपने नियत
किया है वो
प्रश्नकाल
के बाद तत्काल
लेनी चाहिए यह
हाउस की परम्परा
रही है पहले
से । आप
उठा कर देख
लें रिकार्ड
। अब
माननीय सदस्यों
की जिस तरीके
से मांग है
उसके आधार पर
आपको इसको
मंजूर करना
चाहिए और 7 बजे
की जगह जीरो
ऑवर में ही
हाउस टैक्स
के बारे में
डिबेट करानी
चाहिए क्योंकि
प्रेस भी इसके
बाद चली जाती
है फिर उसका
मतलब ही नहीं
रहता है चर्चा
का। इसलिए आप
इसको इस वक्त
में करायें और
प्रश्नों के
बारे में
मंत्री
तैयारी करके
नहीं आते हैं
कम से कम
दो-चार सप्लीमेंट्री
तो हर प्रश्न
में होनी
चाहिए।
श्री अध्यक्ष:
हो रही है न
सप्लीमेंट्री
कब नहीं हुई
सप्लीमेंट्री?
डॉ.
बुलाकीदास
कल्ला: कल भी
सप्लीमेंट्री
नहीं हुई थी।
श्री
सांवरलाल: अध्यक्ष
महोदय, प्रेस
के बारे में
आप कह रहे हैं
प्रेस तो रात
को दो-दो बजे
तक यहां रहती
है।
आपको जो
बोलना है और
छपाना है
प्रेस बैठी
रहती है इसलिए
आपको प्रेस की
चिन्ता नहीं
करनी चाहिए।
श्री
गुलाबचंद
कटारिया: अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से कहना चाहता
हूं कि सदन के
सभी माननीय सदस्य
इस प्रश्न के
उत्तर में
अगर कहीं आप
कोई कमी खामी
पायें तो सदन के
बाद भी अगर आप
मुझे कहेंगे
तो सदन जैसा
ही मान करके
उसके खिलाफ भी
कार्यवाही
करने में कोई
हिचकने का
सवाल नहीं
करूंगा। [1]...(व्यवधान)श्री
खुशवीर सिह
जोजावर(खारची):
मंत्री महोदय,
मैं यह जानना
चाहता हूं
आपसे कि
हजारों
पशुपालक राज्य
से बाहर अन्य
राज्यों में
जाते हैं..।
श्री
सी.डी. देवल: माननीय
अध्यक्ष
महोदय, जब ये
पहली बार खड़े
हुए और आप...(व्यवधान)...
तुम विधान सभा
के सदस्य नहीं
हो आप यह
फैसला कर
दें।
कोई बात नहीं
हम बाहर चले
जाएंगे लेकिन
आप बोलने ही
नहीं देते हैं
यह क्या बात
हुई? हम भी
निर्वाचित
होकर आये हैं
..(व्यवधान)
श्री
खुशवीर सिंह
जोजावर:
... और
प्रतिवर्ष उनके
साथ में लूट
होती है
लुटेरे लूट कर
चले जाते हैं
उनके मवेशियों
को और उन्होंने
लाइसेंस के
लिए एप्लाई
कर रखा है उन
कितने
पशुपालकों को
आपने लाइसेंस
जारी किये हैं
जो प्रदेश से
बाहर जा रहे हैं
और उन्होंने
एप्लाई कर
रखा है लाइसेंस
के लिए?
श्री
सी.डी.देवल: स्पीकर
का काम न्याय
करना है विधान
सभा अध्यक्ष
से अपेक्षा है
कि सबके साथ
न्याय करें।
कल जब शिक्षा
का प्रश्न आया
था तो आपने
आधा घंटा
चलाया ...(व्यवधान)
श्री
गुलाबचंद
कटारिया: जिन
लोगों ने एप्लाई
कर रखा है, मैं
आप सब लोगों
को...(व्यवधान)
श्री
खुशवीर सिंह
जोजावर:
पाली जिले
में 20 पशुपालकों
ने एप्लाई किया
है और मंत्री
महोदय उनको
लाइसेंस जारी
नहीं हुए हैं
जबकि माननीय
मुख्यमंत्री
महोदय ने पत्र
जारी करके
मेरे पास में
भी भेजा है कि
इनको लाइसेंस
जारी किये
जाएंगे।
श्री
सी.डी.देवल: ...(व्यवधान)...
इस तरह सदन
चलता है तो
सदन का चलने
का काई मतलब
ही नहीं है।
बोलना
बर्दाश्त
नहीं हो तो
अध्यक्ष
महोदय, आप
फैसला कर दो। ***
श्री अध्यक्ष: अंकित
नहीं हो।
श्री
गुलाबचंद
कटारिया: ..अध्यक्ष
महोदय, पिछले
सत्र में जिन
माननीय सदस्यों
ने इस विषय
में प्रश्न
पूछे उनको भी
सूचीबद्ध किया
है...
श्री अध्यक्ष:
हां अब अंकित
किया जाए।
श्री
गुलाबचंद
कटारिया: ... इस
विषय में
प्रश्न थे
प्रमोदजी
भाया का,
रामनारायण जी
मीणा का, वीरेन्द्र
जी मीणा का,
भरत सिंह जी
का इन सबके
प्रश्नों को
मैंने वापस
टटोला और उसके
आधार पर मैंने
16 अगस्त के
दिन पूरे
डाइरेक्शन
जारी किये हैं
कि इस तरीके
से आप इसको
निपटायेंगे
अधिक से अधिक 90
दिन से ज्यादा
नहीं लगेंगे
चाहे वो कलेक्टर
तक होगा। अगर
आपको रिजेक्ट
करना है तो
रिजेक्ट कर
दीजिये आपको
स्वीकार
करना है तो स्वीकार
करिये अगर
वापस उसको
नवीनीकरण
करना है तो
उसके लिए भी 60
दिन की
समयावधि में
पूरा करें। जिनके
फादर की डेथ
हो गयी और
लाइसेंस उनके
पास आना है
उसमें भी अगर
डिले हो रहा
है तो उस डिले
को भी समाप्त
करके जो एक
प्रप्रोर्मा
है जिसमें
उसके परिवार
के सब लोगों
को उस व्यक्ति
के नाम से वो
जो शस्त्र
ट्रांसफर
करना है वो
अगर पत्र
भरेंगे अगर वो
एलिजेबल होगा
लाइसेंस के
लिए तो
निश्चित रूप
से उसको 60 दिन
में जारी कर
दिया जाएगा
उसके बाद भी
आपको कहीं मैं
सोचता हूं कि
प्रश्न के
सभी कोर्नर से
मेरे
पास रिकार्ड
है पर समय
बचाने की दृष्टि
से मैं कहना
चाहता हूं कि
आपको कहीं भी
कोई कमी लगती
है जहां पालना
नहीं हो रही
है ये
डाइरेंक्शंस
मैंने अभी एक
तारीख को और दिये
हैं कि इसके
लिए कलेक्टर
स्वयं जिम्मेदार
होंगे या तो
उसको 90 दिन में
इसको डिस्पोज
ओफ करना है या
रिजेक्ट
करना है, जो भी
उसके पास कारण
हैं मैं सोचता
हूं कि आप सब
के प्रश्नों
के आधार पर ही
और प्राक्कलन
समिति के
सुझावों के
आधार पर ही
मैं सारे के सारे
डाइरेक्शंस
जारी कर चुका
हँ।
उसकी पालना
हो रही है। मैं
आपको विश्वास
दिला सकता हूं
कि थोड़ी बहुत
कमी खामी होगी
तो और
सुधारेंगे।
श्री
जुबेर खान
(रामगढ़): अध्यक्ष
महोदय, सवाल
मंत्री जी के
उत्तर का
नहीं है प्रश्न
यह है कि आसन
द्वारा जिस
तरह से नेता
प्रतिपक्ष के
खड़े होने
पहले ही आप कह
देते हैं कि
आप क्या
बोलेंगे, यह
अच्छी बात
नहीं है। हमने
आपसे उस दिन
सर्वदलीय बैठक
में भी निवेदन
किया था और
आपने स्वयं
ने ही डाइरेक्शंस
दिये थे कि जब
नेता सदन और
नेता प्रतिपक्ष
खड़े होकर
बोलेंगे तो
कोई माननीय
सदस्य बीच
में रोक-टोक
नहीं करेंगे
वो बोलें जो
कुछ बोलें आप
बोलने से पहले
ही कह देते
हैं कि आप क्या
बोलेंगे। यह बात
ठीक नहीं है
हमारा विरोध
इस बात को
लेकर है
माननीय अध्यक्ष
महोदय।
डॉ.सी.पी.जोशी:
अध्यक्ष
महोदय, आप
झुंझुनूं की
मीटिंग में
गये अध्यक्ष
की हैसियत से
नहीं गये थे
आप एक एम.एल.ए.
की हैसियत
झुंझुनूं की
मीटिंग में गये
और जिला
परिषद् की
मीटिंग में
राजस्थान
विधान सभा का
अध्यक्ष
झुंझुंनूं की
जिला परिषद्
में वाक आउट करके
आ जाए और आपने
कहा सदन में
कि मैं एम.एल.ए.
की हैसियत से
गयी थी।
यहां भी आप
जो बात करते
हैं चेयर के
साथ आप एक
एम.एल.ए. भी हैं
यदि आप एम.एल.ए.
की हैसियत से
सी.एल.पी. लीडर
को टोकते हैं
तो फिर क्या
एग्जाम्पल
सैट करेंगे
आप। इसलिए अध्यक्ष
महोदय, यह ज्यादा
जरूरी है कि
एम.एल.ए. की
हैसियत से भी
और लीडर की
हैसियत से भी
आपको और अध्यक्ष
महोदय, आप...(व्यवधान)...
ढाई साल से...।
श्री अध्यक्ष: आप किस
संदर्भ में कह
रहे हैं यह सब?
डॉ.सी.पी.जोशी:
अध्यक्ष
महोदय, हम चार
बार आपके चैम्बर
में मिले जब सी.एल.पी.
लीडर कल्ला
साहब थे तब भी
आप इनको टोकते
रहते थे हमने
बार-बार आपसे
यह बात कही है
हमारे सी.एल.पी
लीडर हो चाहे
पार्टी का
लीडर
सी.एम. हो जब भी
बोलें आप टोके
नहीं। आप एक
तरफ तो सी.एम.
जब बोलती हैं
तो आप टोकना
नहीं चाहती और
सी.एल.पी. लीडर
जैसे ही खड़े
होते हैं तो
आप कहते हैं
कि आप क्या
बोलेंगे, आपकी
क्या बात है,
आप बुजुर्ग
आदमी हैं। यह
अध्यक्ष
महोदय,
लोकतंत्र के
लिए ठीक नहीं
है एक अध्यक्ष
इस तरह
कमेंट करे। इसका
मतलब यह है कि
अध्यक्ष अभी
इम्पार्शल
नहीं है अध्यक्ष
के मन में अभी
भी अपनी
पार्टी के
प्रति लायल्टी
है।
इम्पार्शलिटी
को रोकिये अध्यक्ष
महोदय। ...(व्यवधान)...
श्री
सांवरलाल:
झुंझुनूं की
जिला परिषद् में
एम.एल.ए. की
हैसियत से जा
सकती हैं और
माननीय सदस्य
यहां पर अध्यक्ष
की हैसियत से
ही बैठेंगी।
डॉ.सी.पी.जोशी: जब तक
सी.एल.पी. लीडर
को सम्मान
नहीं दिया
जाएगा ...(व्यवधान)...
तब तक सदन ...(व्यवधान)...
नहीं हो
सकता।
अध्यक्ष
महोदय, आप स्वयं
बताइये आप
झुंझुनूं
जिला परिषद्
में एम.एल.ए. की
हैसियत से
मीटिंग में
गयी थीं ....।
श्री
सांवरलाल:
झुंझुनूं
जिला परिषदद्
में एम.एल.ए. की
हैसियत से
जाएंगी और
राजस्थान के
सर्वसम्मत
अध्यक्ष हैं
इसलिए यहां पर
अध्यक्ष की
हैसियत से
बैठी हैं और चेयर
का अपमान करने
का आपको
अधिकार नहीं
है आप भी
मंत्री रहे
हैं आप भी
जाते थे जिला
परिषद की
बैठकों में । आप
एम.एल.ए. की
हैसियत से
जाते थे।
डॉ.सी.पी.जोशी:
मान लिया ...(व्यवधान)...ये
भारतीय जनता
पार्टी की
हैसियत से ...(व्यवधान)...
अध्यक्ष का
सम्मान करने
की जिम्मेदारी
हमारी है अध्यक्ष
के सम्मान के
साथ ...(व्यवधान)...
श्री
सांवरलाल: यह कतई
जायज नहीं है।
..(व्यवधान)...
श्री अध्यक्ष:
अंकित नहीं
हो।
डॉ.सी.पी.जोशी:
***
श्री
सी.डी.देवल: ***
श्री
राजेन्द्र राठौड़:
***
श्री
सांवरलाल: ***
kas\akt\1130\1d
श्री राजेन्द्र
राठौड: ***
डा.सी.पी.जोशी:
***
श्री
सांवरलाल: ***
डा.सी.पी.जोशी:
***
श्री
गुलाबचन्द
कटारिया : ***
श्री
रघुवीर सिंह
मीणा: ***
डा.सी.पी.जोशी:
***
श्री
राजेन्द्र
राठौड: ***
श्री
सांवरलाल : ***
श्री
वासुदेव
देवनानी: ***
डा.सी.पी.जोशी:
***
श्री
गुलाबचन्द
कटारिया : ***
श्री
रामनारायण
चौधरी: माननीय
गृह मंत्री जी
आपका सत्ता
पक्ष गरिमा का
पाठ हमें पढा
रहा है और वह
लोग पढा रहे
हैं जब हम
यहां आये उस
समय वह पानी
को पू कहते थे और
सारा सत्ता
पक्ष जो आज
विराजमान हैं
वह सब मेरे
बाद में आया
हुआ है, सब
मेरे से बाद
में जन्मे
हुए हैं ।
मेरे से पहले
जन्म लेने
वाले तो चले
गये दिल्ली
या मेरे से
पहले जन्म
लेने वाले हैं
स्पीकर साहब
। यह तो अगर
मुझे कुछ
कहें, यह मुझे
गरिमा का पाठ
पढाये,
गंगाराम जी तो
इधर के हैं ही
नहीं यह तो
हमारे यहां से
पैदा हुये थे
और उधर
बहिर्गमन कर
गये और फिर
इधर आ गये अब
वहां हैं कोई
जरूरी नहीं कि
आपके पास रहे
ही क्योंकि
आपने इनको कोई
सम्मान नहीं
दिया । इनको
सम्मान नहीं
मिलने का कारण
भी हम ही हैं
क्योंकि यह
हमारे थे
इसलिए आप
लोगों ने नहीं
बनने दिया ।
आप मुझे पाठ
पढाये मैं
मानता हैं,
उम्र में मेरे
से छोटी हैं,
मेरे से बहुत
ज्यूनियर
हैं, इनकी
शादी मैं करवा
कर लाया था फिर
भी अगर मुझे
कोई गरिमा का
पाठ पढाये तो
चूंकि यहां
है, इस पद पर
हैं मैं सम्मान
करूंगा और
मानूंगा ।
लेकिन अध्यक्ष
महोदय, आप कुछ
भी ख्याल
नहीं रखतीं,
इतना कठोर
होती जा रही
हैं यह असहनीय
होता जा रहा
है । जब कल
हमने
बहिर्गमन
किया हमें
बहुत दुख हुआ
क्योंकि स्पीकर
की रूलिंग के
खिलाफ प्रथम
बार हमें ऐसा
करना पडा जो
अक्सर नहीं
होता और फिर
आप अवसर दे रही
हैं कि हम
आपके खिलाफ जाये
। आपकी
नाराजगी है
झुंझुनूं की
मैं उसका क्या
करूं । यहां
से बाहर भी
आपने फरमाया
कल परसों कि
झुंझुनूं
वालो से मैं
बहुत दुखी हूं
। आप दुखी[2]
हैं यह बात
सही है लेकिन
मान्यवर
आपका
निर्वाचन
क्षेत्र बिगड़ा
है उसमें मेरा
कोई बस नहीं है
और आज यह
हकीकत है अध्यक्ष
महोदय....
श्री अध्यक्ष:
इन बातों की
रिलीवेंसी क्या
है यहां पर ।
श्री
रामनारायण
चौधरी :
माननीय
सभासदों सुन
लो मेरी बात
यह हकीकत है
कि आपका बिगड़
गया और यह
हकीकत है कि
आप वहां से
नहीं जीत सकेंगी
यह मैं दावा
करता हूं ।
अगर आप जीत
जाये और मैं
जीत कर आ गया
तो मैं छोड कर
चला जाऊंगा,
आप नहीं
जीतेंगी । वह
फ्रस्ट्रेशन
आप यहां मेरे
पर क्यों
निकल रही हैं
। जिला परिषद
से आपने
बहिर्गमन
किया मैं आपको
रोक रहा था ।
आपने
बहिर्गमन क्यों
किया जबकि
हमारा बहुमत
था दूसरों का,
मेरे को छोडकर
भी बहुमत था ।
मैं अगर आपके
साथ भी चला
जाता तो भी वह
पास होता । आप
कहीं की बात
यहां पर लाकर
इस्तेमाल
करती हैं यह
दुखदायी है,
परम्पराओं
के खिलाफ है,
आसन के लिये
शोभनीय नहीं है,
आसन के लिये
अशोभनीय है ।
(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
अब इधर से
बोलेंगे, श्री
घनश्याम
तिवाडी ।
श्री
प्रद्युम्न
सिंह : ***
श्री अध्यक्ष:
नहीं समाप्त
नहीं हो सकता
यह मामला ऐसे,
ऐसे समाप्त
नहीं होगा, गलत
बात है । आप
चाहे जो कुछ
बोल दें और
उसे फिर आप कहें
कि इसे समाप्त
करें, नहीं
होगा समाप्त
।
डा.सी.पी.जोशी:
***
मोहम्मद
माहिर आजाद: ***
डा.सी.पी.जोशी:
***
श्री
राजेन्द्र
राठौड: ***
श्री
बंशीलाल खटीक
: ***
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
आर्डर आर्डर ।
डा.
बुलाकीदास
कल्ला: ***
श्री
बंशीलाल
खटीक:***
श्री
राजेन्द्र
राठौड: ***
(सदन
में नारेबाजी)
श्री
गुलाबचन्द
कटारिया: ***
श्री
अध्यक्ष: सदन
की कार्यवाही
आधे घंटे के
लिये स्थगित
की जाती है ।
(तदनंतर
सदन की बैठक 11.38
बजे आधे घंटे
के लिये स्थगित
हुई)
Ans\usc\1200\3.3.2006\2a\1
(समय:12.08 बजे)
(पुन:
समवेत होने
पर)
(श्री
रामनारायण
विश्नोई,
उपाध्यक्ष,
पदासीन)
श्री
उपाध्यक्ष:
राम-राम सा।
क्या मंशा है
आपकी, सदन की ?
श्री
राजेन्द्र
राठौड़(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): उपाध्यक्ष
महोदय, जो
दृश्य आज
राजस्थान की
विधान सभा में
हुआ है यह
दृश्य कतई
उचित नहीं है।
श्री
उपाध्यक्ष:
सदन की
कार्यवाही
आधे घंटे के
लिए और स्थगित
की जाती है।
(तदनन्तर
सदन की बैठक 12.09
पर स्थगित की
गई)
Ddm/usc/1230/2d
(समय: 12.39
बजे)
(पुन:
समवेत होने
पर)
(श्री
रामनारायण
विश्नोई,
उपाध्यक्ष
पदासीन)
श्री
उपाध्यक्ष:
सदन की
कार्यवाही एक
घण्टे के
लिये स्थगित
की जाती है ।
(तदनन्तर
सदन की बैठक 12.39
बजे 13.39 बजे तक के
लिये स्थगित
हुई)
vps/usc/3-3-2006/1330/3d
(समय 13.39
बजे)
(पुन:
समवेत् होने
पर)
(श्री
रामनारायण
विश्नोई,
उपाध्यक्ष,
पदासीन)
श्री
उपाध्यक्ष:
सदन की
कार्यवाही
तीन बजे तक के
लिए स्थगित
की जाती है।
(तदनन्तर
सदन की बैठक 13.39 बजे
15.00 बजे तक के लिए
स्थगित हुई।)
Spp/usc/1500/5a/3-3-2006
(समय:
15.00 बजे)
(पुन:
समवेत् होने
पर)
(श्री
रामनारायण
विश्नोई,
उपाध्यक्ष,
पदासीन)
श्री
उपाध्यक्ष:
सदन की बैठक
चार बजे तक के
लिए स्थगित
की जाती है।
(तदनन्तर
सदन की बैठक 15.00
बजे 16.00 बजे तक के
लिए स्थगित
हुई।)
msr/usc/1600/6a/3-3-2006
(समय:
16.00
बजे)
(पुन:
समवेत् होने
पर)
(श्री
रामनारायण
विश्नोई,
उपाध्यक्ष,
पदासीन)
श्री
उपाध्यक्ष:
सदन की बैठक पांच
बजे तक के लिए
स्थगित की
जाती है।
(तदनन्तर
सदन की बैठक 16.00
बजे 17.00 बजे तक के
लिए स्थगित
हुई।)
ars/usc/1700/7a/3-3-2006
(समय:
17.00 बजे)
(पुन:
समवेत् होने
पर)
(श्री
रामनारायण
विश्नोई,
उपाध्यक्ष,
पदासीन)
श्री
उपाध्यक्ष:
सदन की बैठक आधा
घंटे के लिए
स्थगित की
जाती है।
(तदनन्तर
सदन की बैठक 17.00
बजे 17.30 बजे तक के
लिए स्थगित
हुई।)
Vns/usc/7d/1730/3.3.2006
(समय: 17.30 बजे)
(पुन: समवेत् होने पर)
(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्यक्ष, पदासीन)
श्री प्रद्युम्न सिंह: माननीय अध्यक्ष
महोदय, आज मुख्य मंत्री जी के
कक्ष में राजनीतिक दलों की सर्वदलीय बैठक हुई थी और हम सबने, सभी राजनीतिक दलों के
प्रतिनिधियों ने सम्माननीय मुख्य मंत्री महोदय से निवेदन किया था कि आज जो कुछ
सदन में हुआ उसके अन्दर हमारी सबकी भावनाओं को सदन से अवगत करा दें और उसके बाद
सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चल सके।
श्रीमती वसुन्धरा राजे (मुख्य
मंत्री): माननीय अध्यक्ष महोदय, आज सुबह
मैं सदन में नहीं थी जब कोई घटना यहां घटी थी, मैंने सदन की प्रोसीडिंग्स लेकर उसको पढ़ा है, उसको पढ़ने के बाद मैं समझती हूं कि जो भी हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण
था। आसन की गरिमा को बचाये रखना यह हम सबका, जो भी सदन में बैठे हैं उन सबका कर्तव्य
है। मैं सब लोग जो भी यहां बैठे हैं उन सबकी ओर से आपसे क्षमा चाहूंगी कि आज सुबह
जो भी हुआ वह नहीं होना चाहिए था और मैं विश्वास करती हूं कि लोकतांत्रिक व्यवस्था
को बनाये रखने का काम हम सबका है। हम सब मिलकर सुचारु रूप से सदन को चलाएं, यह हमारा
कर्तव्य है। मैं विश्वास करती हूं, आपसे क्षमा मांगने के बाद, कि हम लोग मिलकर
इस काम को कर सकेंगे। मेरा आपसे आग्रह है, हम लोग कल से इस सदन को मिलकर सुचारु रूप
से चलाएं। कोई भी इस तरीके से घटना हो तो मिल बैठकर इसको सार्ट आउट करने में कोई
मुसीबत नहीं होती है और मैं विश्वास करती हूं इस तरह की घटना फिर से सदन में नहीं
होगी।
श्री अध्यक्ष: याचिकाओं का उपस्थापन। डा. किरोड़ीलाल मीणा...(.व्यवधान
)
अब क्या कहना चाहते हैं, माननीय सदस्य
?
श्री हेमराज मीणा: माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं कहना चाह रहा हूं कि
माननीय मुख्य मंत्री जी ने जो बात कही है लेकिन जिन्होंने यह सिलसिला चालू किया
है उनको कुछ कहना चाहिए था तो ज्यादा ठीक रहता क्योंकि ....
डा.सी.पी.जोशी: अध्यक्ष महोदय, मैं आपकी आज्ञा से निवेदन करना चाहूंगा,
जो पर्ची और 295 है, कल चार तारीख को ग्यारह बजे हाउस शुरू होगा, आज वाला बिजनस कल
शुरू करने के लिए निवेदन है ।
श्री राजेन्द्र राठौड़: अध्यक्ष महोदय, इसमें कोई एतराज की बात नहीं है पर एक
निवेदन जरूर करूंगा...
श्री अध्यक्ष: पर्ची तो दुबारा से देनी
पड़ेगी तो कल दीजिए आप पर्ची । कल प्रश्नकाल तो है नहीं।
डा.सी.पी.जोशी: कल शनिवार को बिजनस अपन ने रखा है तो क्वेश्चन आवर के
टाइम में पर्ची .....
श्री अध्यक्ष: कल प्रश्नकाल नहीं है और मैं समझती हूं कि पर्ची और यह भी नहीं हो सीधे ही अपन गवर्नर स्पीच पर आ जाएं।
डा.सी.पी.जोशी: अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन था कि आप यह 295 और पर्ची कल ले लें 11 से 12 में। आज वाला बिजनस कल 11 से 12 में हो जाएगा।
एक माननीय सदस्य: आज तक नहीं हुआ।
श्री अध्यक्ष: 295 तो पढ़े हुए मान लिए गए हैं। सदन की मेज पर रखे जाने
वाले पत्रादि। श्री प्रभुलाल सैनी।
सदन की मेज पर रखे गये
पत्र
श्री प्रभुलाल सैनी( कृषि मंत्री )(ऊर्जा राज्य मंत्री के स्थान पर): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से कम्पनी अधिनियम,1956 की धारा 619-