vps/usc/11.00/1a/3.4.2007

 

अशोधित प्रति/प्रकाशनार्थ नहीं

 

राजस्‍थान विधान सभा की कार्यवाही का वृत्‍तान्‍त

 

 

अंक 7   बारहवीं विधान सभा के सातवें सत्र का चौतीसवां दिवस   संख्‍या 21

 

 

मंगलवार, 3 अप्रैल, 2007

 

राजस्‍थान विधान सभा की बैठक 11:00 बजे

विधान सभा भवन जयपुर में प्रारम्हुई।

 

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, ध्‍यक्ष, पदासीन)

 

तारांकित प्रश्‍नोत्‍तर

प्रश्‍न संख्‍या 272

श्री अध्‍यक्ष: श्री नन्‍दलाल मीणा।

(अनुपस्थि‍त: कृपया आगे देखें।)

श्री दाताराम गुर्जर

 

शिक्षा मित्र योजनान्‍तर्गत अस्‍थाई नियुक्तियां

273. श्री दाताराम  गुर्जर (खेतड़ी) एवं श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): क्‍या शिक्षा मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) क्‍या यह सही है कि राज्‍य में शिक्षकों की कमी को देखते हुए शिक्षा मित्र योजनान्‍तर्गत अनुभवी लोगों को अस्‍थाई नियुक्तियां दी गई हैं? यदि हां, तो गत एक वर्ष में कितने लोगों को नियुक्तियां दी गईं? जिलेवार संख्‍या विवरण सदन की मेज पर रखें।

(2) सरकार द्वारा उक्‍त शिक्षा मित्र योजना पर गत एक वर्ष में कितनी राशि व्‍यय की गई?

(3) क्‍या यह भी सही है कि परीक्षा की निकटता के बावजूद सरकार द्वारा शिक्षा मित्रों को हटाया जा रहा है? यदि हां, तो क्‍यों?

राज्‍य मंत्री, शिक्षा (श्री वासुदेव देवनानी): (1) शिक्षा विभाग में शिक्षा मित्र योजना के नाम से योजना संचालित न होकर विद्यार्थी मित्र योजना इसी शैक्षणिक सत्र से प्रारम्‍भ की गई। इस वर्ष विद्यार्थी मित्र योजना के तहत लगाये गये अध्‍यापकों का जिलेवार संख्‍यात्‍मक विवरण का परिशिष्‍ट संलग्‍न है।

(2) माध्‍यमिक शिक्षा में उक्‍त योजना के अन्‍तर्गत लगभग 6.25 करोड़ रुपये एवं प्रारम्भिक शिक्षा के अन्‍तर्गत लगभग 11.00 करोड़ रुपये व्‍यय किया गया।

(3) माध्‍यमिक शिक्षा में विद्यार्थी मित्र योजना दिनांक 28.02.2007 तक के लिए तथा प्रारम्भिक शिक्षा में 31.03.2007 तक के लिए रिक्‍त पदों के परिणामस्‍वरूप छात्रों के अध्‍यापन में व्‍यवधान नहीं हो, को मद्देनजर रखते हुए उक्‍त योजना लागू की गई थी। चूंकि, 10वीं बोर्ड की परीक्षा 30 मार्च, 2007 एवं 8वीं बोर्ड की परीक्षा 16 मार्च, 2007 को समाप्‍त हो चुकी है तथा 12वीं बोर्ड की परीक्षा 02 अप्रैल, 2007 को समाप्त होगी अत: विद्यार्थी मित्र योजना के तहत दिनांक 31.03.2007 पश्‍चात् विद्यार्थी मित्र लगाने की आवश्‍यकता नहीं थी।

श्री दाताराम  गुर्जर (खेतड़ी): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या यह सही है कि विद्यार्थी मित्र योजना के बावजूद विभिन्‍न स्‍तर के विद्यालयों में शिक्षकों की कमी बनी रही? यदि हां, तो क्‍यों? और दूसरा, मेरा क्‍वेश्‍चन है कि क्‍या ऐसी भी शिकायतें मिली थीं कि विद्यार्थी मित्र योजना के इच्‍छुक लोगों के आवेदन के बावजूद भी उन्‍हें नियुक्तियां नहीं दी गयीं? यदि हां, तो क्‍यों?

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह सही है कि व्‍याख्‍याता, वरिष्‍ठ अध्‍यापक, अध्‍यापक माध्‍यमिक शिक्षा में 4661 पद व्‍याख्‍याता के रिक्‍त थे, 6930 पद वरिष्‍ठ अध्‍यापक के रिक्‍त थे और 2118 रिक्‍त पद अध्‍यापकों के थे। इसके लिए हमने 2104 व्‍याख्‍याता, 2897 वरिष्‍ठ अध्‍यापक और 911 अध्‍यापकों के पद लगायें लेकिन यही तक हम सीमित नहीं रहें। हमने शैक्षिक व्‍यवस्‍था के तहत माध्‍यमिक से माध्‍यमिक और प्रारम्भिक से माध्‍यमिक  भी हमने अध्‍यापकों को लगाया जिसमें 1707 व्‍याख्‍याता, 2595 वरिष्‍ठ अध्‍यापक और 352 अध्‍यापक लगाकर इस प्रकार से 509, ... (व्‍यवधान)  12 तो विद्यार्थी मित्र और 4654 हमने शैक्षिक व्‍यवस्‍था के तहत अध्‍यापक लगायें। इस तरह सारी शैक्षिक व्‍यवस्‍था पहली बार काफी हद तक हम लोग ठीक कर पायें।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न है। यह बीच में कैसे पूछने लग जाते हैं? अभी मैं पूछ रहा हूं और उससे पहले ही यह ... (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्रीजी से यह जानना चाहता हूं कि आपका सत्र शुरू होता है जुलाई महीने में और 86 हजार पद खाली पड़े हुए थे और 6 महीने आपने निकाल दिये और एक भी विद्यार्थी मित्र आपने नहीं लगाया पूरे छह महीने में। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य, सुमेरपुर से आने वाले माननीय सदस्‍य का भी प्रश्‍न है यह। पहले उन्‍हें पूछ लेने दें, फिर आप पूछिएगा।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): जी, ठीक है।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह जानना चाहता हूं कि जो परीक्षाएं मार्च में प्रारम्‍भ हुईं तो फरवरी में ही यह विद्यार्थी मित्र योजना बंद क्‍यों कर दी गयी और इसके लिए जो दोषी हैं उनके खिलाफ आप क्‍या कार्यवाही करेंगे?

दूसरा यह है कि अगले सत्र प्रारम्‍भ होने से पूर्व सरकार व्‍याख्‍याता, सैकण्ड ग्रेड और थर्ड ग्रेड की नियुक्तियों के संबंध में क्‍या विचार रखती है?

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पूछ लूं मैं भी आपकी आज्ञा हो तो?

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): एक बार इनका उत्‍तर दे दूं, आप बाद में ... (व्‍यवधान)

  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 8वीं की परीक्षा बोर्ड की 6 मार्च को शुरू हुई, 10वीं की 15 मार्च को शुरू हुई और 12वीं की 8 मार्च को शुरू हुई। साधारणतया परीक्षाएं शुरू होने के सात दिन पहले, दस दिन पहले प्रिपेशन लीव हो जाती है अत: माध्‍यमिक शिक्षा में 28 फरवरी के बाद अध्‍यापकों की कोई आवश्‍यकता नहीं रहती। जहां तक आगामी वर्ष के लिए है, आगामी वर्ष में सरकार माध्‍यमिक शिक्षा, प्रारम्भिक शिक्षा में अध्‍यापकों की व्‍यवस्‍था उचित करने के लिए प्रयत्‍नशील है। प्रारम्भिक में हमने 31433 पद, आर.पी.एस.सी. भरने जा रही है और सैकिण्‍ड ग्रेड और फर्स्‍ट ग्रेड के लिए हमने 2500 पद आर.पी.एस.सी. को भेजे हैं और 3062 पद डी.पी.सी. से भरने वाले हैं। इसी तरह फर्स्‍ट ग्रेड के भी 1407 पद हमने भेजे थे। 990 पद भर दिये हैं। हिन्‍दी के 309 पद हम बहुत जल्‍दी ही भरने जा रहे हैं। इसके अलावा 3670 पद डी.पी.सी. से भरे जाएंगे। इसके साथ ही इस बार बजट में 12500 नये पदों को भरने की घोषणा की गयी है जिसमें जो नये स्‍कूल क्रमोन्‍नत होंगे, हमने अभी से उसकी व्‍यवस्‍था की है। उसमें 3600 पद व्‍याख्‍याता के हैं, 600 प्रधानाचार्य के हैं, 900 प्रधानाध्‍यापक के हैं और 3000 पद सैकण्ड ग्रेड के हैं। इस तरह हम बहुत बड़ी संख्‍या में अध्‍यापकों की नियुक्ति कर पाएंगे।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: हां, आपको भी देंगे।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्रीजी से यह जानना चाहता हूं कि पिछले बजट सत्र में जब भीनमाल से आने वाले माननीय सदस्‍य के एक सवाल पर चर्चा हुई थी तब शिक्षा मंत्रीजी ने यह आश्‍वस्‍त किया था कि जो कमियां और खामियां जो शिक्षकों की कमी, गैस्‍ट फैकल्‍टी का वह अरेंजमैंट नहीं कर पाये हैं। अगले सत्र में जुलाई महीने से ही हम यह व्‍यवस्‍था कर देंगे लेकिन पूरे छह महीने निकल गये। एक भी विद्यालय के अन्‍दर आपने विद्यार्थी मित्र नहीं लगायें जबकि 86 हजार पद खाली पड़े हुए थे तो शिक्षा मंत्रीजी, आपकी घोषणा के बाद भी आपके विभाग के अधिकारियों ने उसकी पालना नहीं की, उनके खिलाफ आप क्‍या कार्यवाही करेंगे?

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, शिक्षा विभाग सबसे बड़ा विभाग है। उसमें थर्ड ग्रेड के 2 लाख 17 हजार 955 अध्‍यापक हैं और सैकिण्‍ड ग्रेड के 23465 पद हैं। चूंकि साधारणतया स्‍कूल क्रमोन्‍नत होते हैं, कुछ रिटायर होते हैं तो यह हमेशा 15 से 20 परसेंट अध्‍यापकों की उसमें कमी हमेशा रहती है और इसमें प्रारम्‍भ से ही रही है इसलिए हमने तो उसको भरने का प्रयत्‍न किया और 86 हजार नहीं है, आपका आकड़ा गलत है। मेरा पहले आप जवाब सुनिये। ... (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आप तो यह बताइये कि आपने किस म‍हीने से ... (व्‍यवधान)

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): पहले जवाब सुनिये आप।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मैंने यह पूछा ही नहीं है। यह आंकड़े सब मेरे पास है। कितने खाली हैं, कितने भरे हुए हैं, यह सब मेरे पास है। आप तो यह बताइये कि विद्यार्थी मित्र आपने किस महीने से लगायें, यह बताइये आप तो ... (व्‍यवधान)

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): विद्यार्थी मित्र हमने 1 जनवरी से लगाये हैं।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): फिर क्‍यों पूरे छह महीने आपने, क्‍यों निकालें आपने? जब शिक्षा मंत्रीजी ने घोषणा कर दी? क्‍या राजस्‍थान के बच्‍चों के भविष्‍य के साथ खिलवाड़ करने के लिए आपको राज दिया हुआ है? 86 हजार पद, शिक्षकों के पद खाली पड़े हुए हैं। पूरे छह महीने आपने निकाल दिये हैं। एक भी पद नहीं... (व्‍यवधान)

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): हमने तो राजस्‍थान के छात्रों के भविष्‍य की चिंता की है। आपने तो एक भी पद नहीं भरकर राजस्‍थान के छात्रों के साथ अन्‍याय किया है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): दो महीने के लिए आपने मात्र 18 करोड़ रुपये खर्च करके लीपापोती करने की कोशिश की है। राजस्‍थान के बच्‍चों का भविष्‍य बरबाद करने का काम आपने किया है। ... (व्‍यवधान)

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): हमने तो भविष्‍य बनाया है। बरबाद तो पाँच सालों में आपने किया है। हमने तो उस बरबादी को घटाने के लिए काम किया है। ... (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही):... (व्‍यवधान) आपने विधान सभा में आश्‍वासन देने के बाद भी ... (व्‍यवधान)  छह महीने के बाद आपने की। छह महीने तक एक भी शिक्षक आपने नहीं लगाया। एक भी टीचर नहीं लगाया।

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): मैं आपको आंकड़े बता सकता हूं। ... (व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): एक भी मत लगाओ, भविष्‍य बन जाएगा क्‍या? ... (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): शिक्षा मंत्रीजी, आपकी घोषणा है। आप खड़े होकर बोलिये कि छह महीने तक शिक्षक, विद्यार्थी मित्र भर्ती क्‍यों नहीं किये? यह जवाब तो मंत्रीजी आप खुद दीजिए। ... (व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): आपकी जिम्‍मेदारी थी। ... (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): बोलिये, आप खुद बोलिये। आप बताइये। आपको विद्यार्थी मित्र ... (व्‍यवधान) आपका स्‍टेट मिनिस्‍टर असेम्‍बली में जवाब देने के लिए ही है? बाकी के लिए नहीं है? ... (व्‍यवधान) आप जवाब दीजिए। आप खाली जवाब दिलाना चाहते हो मंत्रीजी से यहां। ओन नहीं करना चाहते हैं। आप स्‍वयं की घोषणा है, आप स्‍वयं की घोषणा है। छह महीने तक नहीं लगे, इसके लिए जिम्‍मेदार कौन है? यह बताइये आप तो कि ... (व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): आपने अपने पाँच साल में क्‍या किया वह तो देखो। यह पांच साल में क्‍या किया वह तो देखो ... (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): यह यूनेस्‍को पुरस्‍कार के मिल जाने से काम नहीं चलेगा। ... (व्‍यवधान)

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): हमने भर्ती की प्रक्रिया शुरू की। किसी भी प्रक्रिया में समय लगता है। उस प्रक्रिया में ही विद्यार्थी मित्र यह हमारी ... (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): शिक्षा मंत्रीजी, यह यूनेस्‍को पुरस्‍कार के गीत गाने से काम नहीं चलेगा। आप राजस्‍थान की जनता को जवाब दो कि आपने घोषणा करने के बाद भी छह महीने तक आपने विद्यार्थी मित्र क्‍यों नहीं लगायें आपने? ... (व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): हमारी सरकार ने विद्यार्थी मित्र लगाये हैं।

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): हमने घोषणा की इसलिए घोषणा की पालना करने के लिए ... (व्‍यवधान) हमने यह पद भरने शुरू किये। ... (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आपने तो बरबाद करने का, राजस्‍थान के गांव-गांव और ढाणी-ढाणी में रहने वाले उस बच्‍चे के भविष्‍य को बरबाद करने का काम आपने किया है। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: राजसमन्‍द से आने वाले माननीय सदस्‍य। राजसमन्‍द से आने वाले माननीय सदस्‍य। राजसमन्‍द से आने वाले माननीय सदस्‍य, आप बीच में नहीं खड़े होंगे। आप बीच में खड़े नहीं होंगे। ... (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): कटारिया साहब को मैं याद दिलाना चाहूंगा कि कटारिया साहब, आप सिरोही आये थे उस कोर्ट का उद्घाटन करने, कितने बच्‍चे आपके सामने आकर तख्‍ती लेकर बैठ गये थे? हमें मास्‍टर साहब चाहिए। नहीं बैठे थे क्‍या? सैकड़ों की तादाद में जिला कलेक्‍ट्रेट में प्रदर्शन हुए शिक्षकों की कमी की वजह से और आपने उसका कोई नोटिस नहीं लिया। ... (व्‍यवधान)

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, छात्रों की निश्चित रूप से, शिक्षा विभाग में अध्‍यापकों की बड़ी संख्‍या में, उनको हमने भरने का प्रयत्‍न किया। किसी भी घोषणा होने का, उसमें प्रक्रिया लगती है। हमने प्रकियाधीन,... (व्‍यवधान)  भरे हैं। कुछ आर.पी.एस.सी. को भेजें। आर.पी.एस.सी. का अपना एक समय होता है। उसके अलावा विद्यार्थी मित्र योजना भी पहली बार हमने लागू की है। इसके पहले किसी भी सरकार ने लागू की हो तो बताइये? हमने इतने सारे स्‍कूल खोलकर अध्‍यापकों की नियुक्ति की है। केवल सदन में यह कह देना कि ... (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): सरकार ने विद्यार्थी मित्र की घोषणा की थी, घनश्‍यामजी, आप तो ... (व्‍यवधान)

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): वास्‍तविकता तो यह है ... (व्‍यवधान) हमने तो प्रयत्‍न करके छात्रों के हितों की रक्षा की है। आप लोग तो केवल, ऐसा भाषण तो दिया जा सकता है पर ... (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): हमने भी लगाये थे। क्‍या बात कर रहे हैं? गैस्‍ट फैकल्‍टी हमने लगायी है। यहां पर बातें कर रहे हैं।  गैस्‍ट फैकल्‍टी हमारी सरकार ने लगायी है। ... (व्‍यवधान) नाम बदलकर नहीं होता है। ... (व्‍यवधान) गैस्‍ट फैकल्‍टी हमने लगायी है। ... (व्‍यवधान) मालूम तो है नहीं और यहां पर भाषण दे रहे हैं आप। ... (व्‍यवधान)

 

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श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): क्‍या भाषण दे रहा हूं। .(व्‍यवधान)..

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): हमारी सरकार ने लगायी है गैस्‍ट फैकल्‍टी और यहां खड़े होकर बोल रहे हैं आप। गैस्‍ट फैकल्‍टी का कंसेप्ट कांग्रेस के शासन में लागू हुआ और आप बातें करते हैं, मालूम ही नहीं है।  .(व्‍यवधान)..

श्री वासुदेव देवनानी (राज्‍य मंत्री, शिक्षा): गैस्‍ट फैकल्‍टी लगाने की प्रक्रिया हाई कोर्ट ने बंद कर दी।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आप बातें कर रहे हैं खामख्‍वाह । माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस सरकार ने पिछले छह महीने से आर.पी.एस.सी. के मैम्‍बर नियुक्‍त नहीं किये और वहां पर रिक्‍वीजिशन भेज देते हैं। जब आपके पास आर.पी.एस.सी. के मैम्‍बर नहीं हैं तो रिक्‍वीजिशन कैसे पूरा होगा ? सदन को बार बार आप गुमराह कर रहे हें। आप जो रिक्‍वीजिशन आर.पी.एस.सी. में भेज रहे हैं, आपकी आर.पी.एस.सी. का कोटा पूरा नहीं होने से वह रिक्‍वीजिशन पूरा नहीं हो रहा है, उसके लिये सरकार जिम्‍मेदार नहीं है ? छह महीने से आर.पी.एस.सी. के मैम्‍बर की पोस्‍टें खाली पड़ी हुई हैं और सदन को गुमराह कर रहे हैं आप, हमने रिक्‍वीजिशन भेज दिया। जब आपके आर.पी.एस.सी. में मैम्‍बर नहीं हैं तो उस रिक्‍वीजिशन को कौन पूरा करेगा ? यह सरकार जिम्‍मेदार है जो आर.पी.एस.सी. के मैम्‍बर को नौ‍मीनेट नहीं कर रही है और रिक्‍वीजिशन भेजकर सदन को गुमराह कर रहे हैं । इसका जवाब दें कि सरकार छह महीने में मैम्‍बर के पद को खाली क्‍यों रख   रखा है ?

एक माननीय सदस्‍य : आप अपने समय की देखो। ..(व्‍यवधान)..

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): शिक्षा मंत्रीजी, एक सवाल, क्‍या आने वाली जुलाई से आप शिक्षा मित्र योजना के अन्‍तर्गत भर्ती करेंगे, जो खाली जगह हुई है, यह भी साथ में बता दें आप।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): मैं सबको जवाब देता हूं, विराजो । अध्‍यक्ष महोदय, यह विवाद की बात नहीं है कि अध्‍यापकों की कमी है। निश्चित रूप से इसमें कोई विवाद का विषय नहीं है और हमने उसको पूरा करने का प्रयत्‍न किया है। यह भी सही है कि मैंने विधान सभा में यह कहा था कि जुलाई से हम इस बात की व्‍यवस्‍था करेंगे। लेकिन तीन कारणों से इसमें अवरोध आया। पहला कारण था कि गैस्‍ट फैकल्‍टी पर राजस्‍थान उच्‍च न्‍यायालय ने स्‍थगन दे दिया कि गैस्‍ट फैकल्‍टी में आप टीचर्स को नहीं लगा सकते, इसके कारण से विलम्‍ब हुआ।  उसके बाद में हमने उनको जो छूट मिली कि केवल आप रिटायर्ड आदमियों को लगा सकते हो तो पहले हमने रिटायर्ड के लिये निकाला तो रिटायर्ड में हमारे पास पर्याप्‍त आदमी नहीं थे। उसके बाद में हमने बी.एड., बी.एस.टी.सी. को इसमें लगाने के लिये निकाला, लेकिन चूंकि राजस्‍थान लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं के कारण से जितने भी बी.एड., बी.एस.टी.सी. के लोग थे, वह सारे परीक्षा की तैयारी में लग गये और हमको वह टीचर्स भी उपलब्‍ध नहीं हुए । उसके बाद में हमने उसमें छूट करके जो भी उपलब्‍ध हुए एम.ए; बी.ए. पास लड़के चाहे बी.एड., बी.एस.टी.सी. नहीं हों, उनको भी लगाया जाये और इसके कारण से हमने कुल मिलाकर 27 हजार विद्यार्थी मित्र के रूप में दोनों जगह लगाये, लेकिन इस पीरियड में हमने कुछ शैक्षणिक व्‍यवस्‍थाएं कीं । कुछ अध्‍यापकों को हमने दो दो जगह ड्यूटी पर लगाया कि आप यहां भी पढ़ायेंगे, वहां भी पढ़ायेंगे। इसको मानने में मुझे कोई आपत्ति नहीं है कि निश्चित रूप से इसमें कुछ विलम्‍ब हुआ है और विलम्‍ब कुछ न्‍यायिक प्रक्रियाओं के कारण से , कुछ अनुपलब्‍धता के कारण से । यह भी सही बात है कि आर.पी.एस.सी. को इसको भर्ती करने में समय लगा है, उसके कारण से हुआ है। लेकिन अब मैं आश्‍वस्‍त करता हूं आप लोगों को, कि एक प्रतिशत अध्‍यापकों के पद भी खाली हों तो राजस्‍थान में शिक्षा में 20-30 प्रतिशत पद हमेशा खाली बने रहेंगे, उनको एक निश्चित प्रक्रिया द्वारा भरने का पूरा प्रयत्‍न करेंगे। जहां तक मैं समझता हूं कि विद्यार्थी मित्र की आप अगली जुलाई से बात कर रहे हैं, अभी 31 हजार वह और 2500 सैकण्‍ड ग्रेड के अध्‍यापकों की डायरेक्‍ट भर्ती का विज्ञापन अगले कुछ दिनों में आर.पी.एस.सी. से निकल जायेगा। हम कोशिश यह करेंगे कि जुलाई का सत्र प्रारम्‍भ होने से पहले पहले हम इन सब लोगों को नियुक्ति देते हैं और इसी प्रकार से 12,500 पद हमने इस बार घोषित किये हैं, उनको भी हम एक सिस्‍टम बदलकर प्रावधान कर रहे हैं कि यह भर्ती में समय लगता है और सैकण्‍डरी और सीनियर सैकण्‍डरी में अध्‍यापकों की आवश्‍यकता है तो हम एक समय का प्रमोशन की स्‍कीम में छूट देकर जो हमारे वर्तमान अध्‍यापक कार्यरत हैं, उनको हम एक बार सबको प्रमोट करके 12,500 पद वहां भरना है, फिर इन सारी वेकेन्‍सीज को हम थर्ड ग्रेड में इकट्ठी करके अगली साल फिर तीसरी आर.पी.एस.सी. में वेकेन्‍सी निकाल कर, उसको जुलाई में ही निकाल कर हम इसको पूरा करना चाहते हैं और हमारी जो स्‍कीम इस समय भारत सरकार के पास है और मैं धन्‍यवाद भी देना चाहूंगा कि जो हमारे 75 और 25 का रेशो अटका हुआ था, पहले 50-50 का था, वह 75 और 25 हो। यू.पी.ए. की संचालन समिति,‍ जिसकी सोनिया जी अध्‍यक्ष हैं, उन्‍होंने भी यह सिफारिश की है कि यह 50-50 नहीं होना चाहिये, यह 75-25 होना चाहिये और 10-11 तारीख को शिक्षा मंत्रियों की दिल्‍ली में मीटिंग है, उसमें भी हम सब शिक्षा मंत्री इस बात की मांग कर रहे हैं कि सर्व शिक्षा अभियान के तहत जो सर्व शिक्षा अभियान सीनियर सैकण्‍डरी तक बढ़ गया है, उसमें जो 50-50 का रेशो है, उसके बजाय 75-25 का रेशो होना चाहिये और मैं समझता हूं कि यह मांग स्‍वीकार हो जायेगी और कोशिश पूरी करेंगे कि राजस्‍थान में अध्‍यापकों की जो कमी है, अगले सत्र में अध्‍यापकों की कमी नहीं रहे। इसका बेहतर प्रबन्‍धन करने की कोशिश करेंगे। हां, मैं यह मानता हूं कि 2-3 महीने के लिये विविध कारणों से इसमें विलम्‍ब हुआ। ..(व्‍यवधान)...

श्री रमेश खींची (कठूमर): एक स्‍कूल में सात-सात अध्‍यापक लगे हुए हैं। मेरा पूरक प्रश्‍न है कि शहरों के अंदर छात्र कम हैं और टीचर ज्‍यादा हैं।

श्री अध्‍यक्ष: नेता प्रतिपक्ष खड़े हैं न। ..(व्‍यवधान)...

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): शिक्षा मंत्रीजी का उत्‍तर बहुत विस्‍तृत है और उसके बाद में कुछ बचता नहीं है, लेकिन भरना आपके हाथ की बात नहीं है। आप तो आर.पी.एस.सी. को लिख रहे हैं। राज्‍य मंत्री ने कहा हम आर.पी.एस.सी. को भेज रहे हैं। आप भी कह रहे हो हम आर.पी.एस.सी. को भेज रहे हैं तो आर.पी.एस.सी. तो किसी के हाथ में नहीं है, उसमें कब होंगे ? इसका कोई सोल्‍युशन निकालें आप।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): यह बता रहा हूं माननीय नेता।

श्री अध्‍यक्ष: पहले बात कम्प्लीट करने दीजिये मंत्रीजी इनको।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): सर्व शिक्षा अभियान का आप कह रहे हो बदलने वाला है 75 और 25 होने वाला है। 75-25 होने वाला है भारत सरकार से बात चल रही है। भारत सरकार को दूसरे मामलों में तो आप गाली निकालते हो और आप यहां उनसे याचना कर रहे हो। आपके संबंध बहुत मधुर हैं, आपके खुद के। ..(व्‍यवधान).. चेयरमैन हैं जब ही तो।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): वह तो मूंछों वालों की कृपा से है।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): मैं माननीय नेता, एक सैकण्‍ड बोल दूंगा। आपका भी बोल दूंगा। ..(व्‍यवधान)...

श्री रमेश खींची : एक स्‍कूल में सात टीचर हैं और पास की ही स्‍कूल में आठवीं के तीन टीचर हैं। यह समानीकरण की व्‍यवस्‍था तो सही करवा दें।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): बता रहा हूं।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): सैकण्‍डरी एजुकेशन के चेयरमैन हैं, यह जो फीगर आपने दिये 6 हजार टीचर्स की शार्टेज हैं। सैकण्‍ड ग्रेड और लैक्चरर की जो फीगर मंत्रीजी ने दिया है If I am correct आप अगली बार 1500 स्‍कूल खोल रहे हैं। आपने कहा हम और ज्‍यादा खोल देंगे 3000 खोल देंगे। भारत सरकार से पैसा मिल रहा है आपको। जब आपको यह तथ्‍य मालूम हैं कि अगली बार सैकण्‍डरी खोलने के लिये हमें इतने सैकण्‍ड ग्रेड और लैक्चरर के पद चाहेंगे तो आप इस व्‍यवस्‍था को करने के लिये क्‍या सदन को आश्‍वस्‍त कर सकते हैं ? आर.पी.एस.सी. नोट  सोल्‍युशन । आर.पी.एस.सी. में आपने मैम्‍बर बनाये नहीं। आर.पी.एस.सी का जो रिक्‍वीजिशन है उसको भेजकर इंटरव्‍यू कराना आपके हाथ में नहीं है। आप हमें यह आश्‍वस्‍त करें कि अगली जुलाई में जो स्‍कूल खोल रहे हैं और जिन सैकण्‍डरी स्‍कूल में पद खाली हैं, उनकी व्‍यवस्‍था क्‍या आप जुलाई में कर देंगे, बात खत्‍म हुई। अन्‍त में, आपने हमारे पर तो आरोप लगाया था कि आठवीं पास पढ़ा रहे हैं। आपने बिना एस.टी.सी. और बी.एड. किये लोगों को लगाया है।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): हां, लगाया है। लगाया है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): उसमें कोई आरोप नहीं है। इस सरकार ने आठवीं पास वाले लगाये और राजीव गांधी पाठशाला में तीन हजार आठवीं पास लगाये तो हल्‍ला कर दिया आपने। आज आपकी सरकार बिना बी.एड. और बिना एस.टी.सी. के टीचर लगा रही है उसमें कोई कम्‍प्रोमाइज नहीं हो रहा है। इससे बड़ी विचित्र स्थिति और क्‍या बन सकती है ? ...(व्‍यवधान)..

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): मैं बताता हूं। एक मिनट रुको गोविन्‍द जी। आप दुबारा पूछ लेना। मैं यह कह रहा था एक तो माननीय नेता प्रतिपक्ष ने पूछा कि आर.पी.एस.सी. में मैम्‍बर नहीं है, आप कैसे करेंगे ? आर.पी.एस.सी. ने 31 हजार लोगों का रिजल्‍ट निकाल दिया और 30 मार्च तक की उनको डेट दी है, 30 मार्च तक वह करेंगे, उसके बाद हमने काउंसलिंग का टाइम तय कर दिया है। एक डिप्‍टी सेक्रेट्री सरकार का जायेगा, एक डिप्‍टी सैक्रेटरी आर.पी.एस.सी. का बैठेगा और लगातार काउंसलिंग चलेगी और पूरा प्रयत्‍न करेंगे कि जुलाई के महीने के पहले तक यह पद भर जायें। दूसरे माननीय सदस्‍य ने प्रश्‍न पूछा कि आप नये स्‍कूल खोल रहे हो और जुलाई तक , मैंने इसका जवाब दिया कि राजस्‍थान लोक सेवा आयोग से इन पदों की पूर्ति 12 महीने तक नहीं हो सकती, इसलिए प्रमोशन की नई स्‍कीम लगाकर जो वर्तमान में एग्जिस्‍ट हमारे सारे टीचर्स हैं, उनको एक साथ सीनियरिटी के आधार पर सब्‍जैक्‍टवाइज देकर हम इन 12,500 पदों को भी इसी से भरना चाहते हैं ताकि स्‍कूल खुलने के साथ अध्‍यापकों की समस्‍या का समाधान हो जाये।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): यह संभव नहीं है।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मैं इसलिए कह रहा हूं कि आप डिस्क्रिपेंसी पैदा कर देंगे । जो टीचर थर्ड ग्रेड के हैं जनरल, सब्‍जैक्‍टवाइज नहीं, उसमें आपको केवल मात्र अंग्रेजी गणित उसमें आपका सब्‍जैक्‍टवाइज है, बाकी थर्ड ग्रेड में रिक्रूटमेंट नहीं है तो वह टीचर बिना साइंस और गणित है, वह तो तीन साल में लेक्‍चरर बन जायेगा और जो टीचर सिविक्‍स और हिंदी का है वह 25 साल तक लेक्‍चरर नहीं बनेगा, यह डिस्क्रिपेंसी आप पैदा कर देंगे। मैं समझता हूं कि कोई आदमी लिटिगेशन में जायेगा, संभव नहीं होगा। इसलिए आप सदन में वही बातें कहें जो नियम और कानून की पालना करते हुए संभव हो सके। मैं आपको फिर निवेदन करना चाहता हूं तीनों साल, आपने एक साल नहीं मंत्री बनने के बाद इस सदन को आश्‍वस्‍त किया है कि जुलाई में टीचर लगा दूंगा और तीनों साल बिना टीचर लगाये हुए आपने स्‍कूल चलाये, छह छह महीने तक अब भगवान के लिये आपका आखिरी साल है, मेहरबानी करके यह एश्‍योर कर लीजिये कि हम अगली जुलाई में कम से कम टीचर दो साल तो भगवान पर हैं, इसलिये आखिरी साल तो हवा में निकलता है। आपका आखिरी साल है उसमें पूरे टीचर लगावें और जो आपको शिक्षा के क्षेत्र में आप जो वाहवाही ले रहे हैं, उसको एजुकेशन के अचीवमेंट में वाहवाही लें । स्‍कूल खोलकर मास्‍टर लगाकर तो आपने वन मोद फेदर आपने गेदर कर लिया, लेकिन मैं आशा करता हूं कि आपके होते हुए कम से कम जुलाई में यह जो आप बातें कह रहे हैं, यह प्रेक्टिल पोसिबिल नहीं है। कटारिया जी आपके पास बैठे हुए हैं। वह शिक्षा मंत्री रहे हैं। यह इस बात को जानते हैं कि यह संभव नहीं है। न आर.पी.एस.सी. में आप मैम्‍बर लगा रहे हो और आर.पी.एस.सी. की जो व्‍यवस्‍था है, उसमें अगले नवम्‍बर तक आप लेक्‍चरर और सैकण्‍ड ग्रेड टीचर की भर्ती नहीं कर पाओगे । इसलिए मेहरबानी करके आप जो कुछ भी कहो, उसको जुलाई तक कर देना, यह आपसे निवेदन करना चाहता हूं।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): मैं पुन: एक बार आश्‍वस्‍त करना चाहता हूं, पिछले साल भी मैंने कहा था और 15 हजार से अधिक अध्‍यापकों का प्रमोशन हमने किया है। इस बार यह बात सही है कि आर.पी.एस.सी. में दो मैम्‍बर हैं, लेकिन हमने जो परीक्षा की पद्धति निकाली है, उसमें इंटरव्‍यू नहीं है।

 

Msr/usc/1120/1c/03042007

 

इसमें सिर्फ आब्‍जेक्टिव टाइप प्रश्‍न के आधार पर मैरिट पर सलैक्‍शन होता है इसलिए उसका कोई असर नहीं पड़ेगा और 2500 जो सेकण्‍ड ग्रेड अध्‍यापक हैं उनकी भी डाइरेक्‍ट भर्ती हो जायेगी।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से आपको पूर्ण आश्‍वस्‍त करना चाहता हूं कि हम पूरा प्रयत्‍न करेंगे कि जुलाई में अधिकांश अध्‍यापकों की जिनकी 31 हजार यह 33 वो जो विडो कोटे के अन्‍तर्गत भर्ती हो रहे हैं वो और 2500 जो सेकण्‍ड ग्रेड में आर.पी.एस.सी. में आ रहे हैं वो और बाकी जिनका प्रमोशन होना है वो, वो कर के हम निश्चित रूप से जुलाई में अधिक से अधिक अध्‍यापकों को लगा कर इसका पूरा प्रयत्‍न करेंगे।

एक दूसरा प्रश्‍न जो माननीय सदस्‍य, आपने पूछा, यह बात सही है, हमने एक सूची बना ली है और सूची बना कर 1500 टीचर्स शहरों में सरप्‍लस हैं, जो अपने पद से ज्‍यादा हैं उन 1500 टीचर्स को भी इस साल हमने यह घोषणा की थी कि जिनके रिजल्‍ट सेकण्‍डरी और सीनियर सेकण्‍डरी में बोर्ड के एवरेज से कम होंगे, बोर्ड के एवरेज से जिन सरकारी स्‍कूलों के रिजल्‍ट कम होंगे उनका स्‍थानान्‍तरण उन खाली स्‍थानों पर किया जायेगा जो दुरस्‍त हैं। तीन साल तक हमने कोई स्‍थानान्‍तरण इस प्रकार का नहीं किया लेकिन पहली बार जो रिजल्‍ट खराब हैं, जिनका रिजल्‍ट खराब है उनके स्‍थानान्‍तरण किये जायेंगे इसलिए यह जो समस्‍या है समानीकरण वाला, उसका भी समाधान हो जायेगा।

श्री गोविन्‍द राम मेघवाल (नोखा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से शिक्षा मंत्रीजी से आग्रह है ...(व्‍यवधान)...

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): शिक्षा मंत्रीजी, रिजल्‍ट की तो आप बात ही मत करो।

श्री गोविन्‍द राम मेघवाल (नोखा): एक मिनट, माहिर आजादजी।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): मैरिट आती है, मैरिट में सरकारी स्‍कूल का नाम पडा मुश्किल से देखने को मिलता है। देख लो आप उठा कर के दो साल की। ...(व्‍यवधान)...

श्री गोविन्‍द राम मेघवाल (नोखा): ऐसा है कि जो शहरों में बैठे हैं वर्षों से, यह सबसे बड़ी प्राब्‍लम है कि शहर में छात्र संख्‍या है 40 और शिक्षक संख्‍या है ...(व्‍यवधान)...

श्री अमराराम (धोद): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्रीजी कह रहे हैं एक जुलाई से, राजस्‍थान में अभी 16 अप्रैल से नया सत्र शुरू हो जाता है।

श्री गोविन्‍द राम मेघवाल (नोखा): हमारा आपसे आग्रह है कि जब तक शहरों के टीचर्स को, आप इसको रिजल्‍ट से नहीं जोड़ कर के और जो शहरों में टीचर्स बहुत लम्‍बे समय से बैठे हैं उन लोगों को आप गांवों में लगाने का काम करें।

श्री अमराराम (धोद): सत्र आपका 16 अप्रैल से शुरू हो जाता है और आप पूर्ति करने की बात कर रहे हैं एक जुलाई से। ...(व्‍यवधान)...

श्री गोविन्‍द राम मेघवाल (नोखा): हमारे यहां एक और गड़बड़ है कि शहर में जो टीचर लगते हैं उनको मकान का भत्‍ता ज्‍यादा दे रहे हैं और जो गांव में, दूर दराज जो टीचर काम कर रहा है उसको हम लोग सुविधा कम दे रहे हैं इसलिए प्रत्‍येक टीचर लगने के बाद में वो शहर जाने के लिए आतुर होता है।

श्री अमराराम (धोद): शिक्षा मित्र योजना में लगे ...(व्‍यवधान)... 16 अप्रैल से नया शिक्षा सत्र डेढ़ महीने तक चलेगा ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, प्रश्‍न काल है। भाषण देने के लिए नहीं, प्रश्‍न काल है, प्रश्‍न पूछिये कुछ पूछना हो तो। नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन।

श्री गोविन्‍द राम मेघवाल (नोखा): मैं प्रश्‍न ही पूछ रहा हूं।

श्री अध्‍यक्ष: आप भाषण दे रहे हैं।

श्री गोविन्‍द राम मेघवाल (नोखा): नहीं, मेरा आग्रह है कि जो शहर में टीचर बैठे हैं लम्‍बे समय से उनको आप गांव में लगाने का कष्‍ट करें। जो शहर में बैठे हैं ...(व्‍यवधान)...

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): आपकी सुन लो, आपकी बता देता हूं। आपने यह कहा है कि शिक्षा सत्र तो आपने प्रारम्‍भ कर दिया है, अभी अप्रैल में शुरू हो जायेगा और आप टीचर्स लगायेंगे जुलाई में। यह बात ठीक है, शिक्षा सत्र हमारा उन कक्षाओं के लिए वो 17 अप्रैल से शुरू हो जायेगा लेकिन टीचर्स की व्‍यवस्‍था हम जुलाई में ही कर पायेंगे इसलिए जो कर पा रहे हैं वो इस सदन में मैंने आपको बताया।

श्री अमराराम (धोद): नहीं, आपने जो लगाया उनको हटा क्‍यों रहे हैं? माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जब 16 अप्रैल से नया सत्र शुरू हो जायेगा और उनको आप मार्च में हटा रहे हैं तो जब नया सत्र शुरू हो जायेगा तो हटा क्‍यों रहे हैं?

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): वो हमारे पास इतने पर्याप्‍त टीचर्स हैं कि शुरू में वो काम चला लेंगे।

श्री अध्‍यक्ष: नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन। श्री पुष्‍पेन्‍द्र सिंह।

विधान सभा क्षेत्र बाली के क्षतिग्रस्‍त जल स्रोतों की मरम्‍मत/नवीनीकरण

274. श्री पुष्‍पेन्‍द्र सिंह (बाली):  क्‍या सिंचाई मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे :-

(1) विधान सभा क्षेत्र बाली में वर्ष 2006 की बाढ़ के दौरान कौन-कौनसा बाँध, तालाब, एनीकट, नहरें व आवक फीडर्स क्षतिग्रस्‍त हुए? विवरण सदन की मेज पर रखें।

(2) क्‍या इन क्षतिग्रस्‍त बाँध, नहरों, आवक फीडर्स, तालाब व एनीकट की मरम्‍मत/नवीनीकरण हेतु सरकार को प्रस्‍ताव प्राप्‍त हुए हैं? यदि हां, तो कितनी-कितनी लागत के प्रस्‍ताव कब प्राप्‍त हुए? प्रत्‍येक बाँध, नहरें, तालाब, एनीकट, आवक फीडर्स काक विवरण सदन की मेज पर रखें।

(3) क्‍या यह भी सही है कि सरकार को प्राप्‍त उक्‍त नवीनीकरण/मरम्‍मत प्रस्‍तावों के अनुरूप स्‍वीकृतियां जारी नहीं होने से इनकी मरम्‍मत/नवीनीकरण कार्य प्रारम्‍भ नहीं किये गये हैं या अपूर्ण है? यदि हां, तो क्‍यों?

(4) क्‍या सरकार बाढ़ में क्षतिग्रस्‍त उक्‍त बाँध, नहर, तालाब, एनीकट, आवक फीडर्स के मरम्‍मत/नवीनीकरण हेतु प्राप्‍त प्रस्‍तावों के अनुरूप शीघ्र स्‍वीकृतियां जारी कर कार्य कराने का विचार रखती है? यदि हां, तो कब तक?

सिंचाई मंत्री (श्री सांवर लाल): (1) विधान सभा क्षेत्र बाली में वर्ष 2006 की अतिवृष्टि  के कारण जल संसाधन विभाग के आठ बाँध, नहरें एवं 26 एनीकट/सरफेस बेरीयर्स इत्‍यादि क्षतिग्रस्‍त हुए। विवरण क्रमश: प्रपत्र पर संलग्‍न है।

(2) क्षतिग्रस्‍त कार्यों को मरम्‍मत करवाने हेतु प्रस्‍ताव दिनांक 22.08.2006 एवं दिनांक 31.08.2006 को प्राप्‍त हुए जिनका विवरण क्रमश: प्रपत्र पर संलग्‍न है।

(3) वित्‍तीय संसाधनों की उपलब्‍धता एवं कार्यों की आवश्‍यकता/प्राथमिकता को ध्‍यान में रखते हुए प्रपत्र- में अंकित कार्यों के लिए स्‍वीकृतियां जारी की गई हैं। प्रपत्र- में अंकित कार्यों के लिए आवश्‍यकता एवं वित्‍तीय संसाधनों की उपलब्‍धता के आधार पर स्‍वीकृतियां जारी किया जाना सम्‍भव हो सकेगा।

(4) वित्‍तीय संसाधनों की उपलब्‍धता के आधार पर ही विचार किया जाना सम्‍भव हो सकेगा।

श्री पुष्‍पेन्‍द्र सिंह (बाली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं मंत्रीजी से यह पूछना चाहूंगा कि आपने बताया कि लगभग आठ बाँध और लगभग 26 एनीकट क्षतिग्रस्‍त हुए हैं, कुछ एनीकट तो पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्‍त हो गये, कुछ आंशिक रूप से क्षतिग्रस्‍त हो गये। उसमें लगभग ज्‍यादा एनीकट आंशिक रूप से आपके क्षतिग्रस्‍त हैं। उसमें दो लाख, तीन लाख रुपये की आवश्‍यकता है और जो बाँध हैं उसमें आपने 19 लाख रुपये दिये 34 लाख के ऊपर।

मेरा आपसे अनुरोध है कि जिस बाँध पर सरकार तीन से चार करोड़ रुपये खर्च करती है और मामूली पर चार, पाँच लाख रुपये देने पर अगर उसको अपन वापस मेन्‍टेन कर सकते हैं तो मुझे लगता है कि यह आगे जाकर के बहुत, अभी जैसे कोट बाँध का आपके कार्यकाल में ढाई करोड़ रुपये दिये ...

श्री अध्‍यक्ष: आप प्रश्‍न पूछिये न।

श्री पुष्‍पेन्‍द्र सिंह (बाली): और आज हमें उस पर आठ लाख रुपये की आवश्‍यकता है, आपने मात्र तीन लाख 90 हजार दिये, अगर यह पाइपिंग आज वापस चालू हो जाए तो यह चार, पाँच करोड़ का बाँध वापस क्षतिग्रस्‍त होने की संभावना ...

श्री अध्‍यक्ष: आप प्रश्‍न पूछिये।

श्री पुष्‍पेन्‍द्र सिंह (बाली): मैं आपसे यह अनुरोध करूंगा कि जितना आपसे एस्‍टीमेट मांगा है, कम से कम बाँध और नहरों पर विशेष ध्‍यान रखते हुए 34 लाख रुपये मांगे हैं तो उनको 34 लाख पूरा दें, उसकी मेन्‍टीनेन्‍स वापस पूरी हो जाए। नहीं तो इतना बड़ा जो जल संसाधन है वो खराब बहुत जल्‍दी, ज्‍यादा बरसात होने से वापस फूट सकते हैं।

दूसरा, मेरा आपसे एक अनुरोध है कि ...

श्री अध्‍यक्ष: अब आपको प्रश्‍न पूछना हो तो पूछिये, भाषण तो ना दें।

श्री पुष्‍पेन्‍द्र सिंह (बाली): 2001 में लाटाड़ा बाँध क्षतिग्रस्‍त हो गया, आज दिन तक उस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। क्‍या आप उसको वापस बनाना चाहते हैं क्‍योंकि वहां के जो किसान हैं वो काफी दुःखी हैं।

श्री अध्‍यक्ष: मंत्रीजी, जवाब दें।

श्री सुरेन्‍द्र गोयल (जैतारण): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा भी निवेदन है मंत्री महोदय से कि जो बाँध, जिसके ऊपर लाखों रुपये गवर्नमेंट के खर्च हो चुके हैं और अतिवृष्टि के कारण उनमें खर्चा आ गया, मेरे क्षेत्र में भी कम से कम आठ, दस एनीकट ऐसे हैं जिन पर करोड़ों रुपये खर्चा किया गवर्नमेंट ने, अब उनमें पी.टी. अमाउण्‍ट का खर्चा है और वहां से जवाब यह आता है कि यह केचमेंट में आता है। अब केचमेंट में आया, पहले बनाया क्‍यों? इसलिए मेरा निवेदन है कि इसके लिए कि उनको रिपेयर कराएं वरना सामने जितनी भी जमीन है खाली उन काश्‍तकारों को इतना भारी नुकसान हो रहा है कि जिसकी भरपाई पन नहीं कर पायेंगे। इसलिए मेरा निवेदन है कि उनको भी ठीक करेंगे या नहीं करेंगे?

श्री अध्‍यक्ष: हां, हां ठीक है।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह बिलकुल माननीय सदस्‍यों की चिंता ठीक है। अतिवृष्टि और बाढ़ से जो क्षतिग्रस्‍त 1994, 1995, 1997, 1998 में जो नुकसान हुआ उस समय सी.आर.एफ. में प्रावधान था और उस टाइम में जब मैं रिलीफ मिनिस्‍टर था तो उस टाइम 50, 60 करोड़ रुपये हमने इर्रिगेशन को दिये थे उसके बावजूद भी कई टूटफूट रह गयी। वो आज तक कई क्षतिग्रस्‍त है।

आजकल जो परम्‍पराएं नहीं पिछले वर्षों में मेन्‍टीनेन्‍स और टूटफूट के लिए बजट प्रावधान पर्याप्‍त नहीं है। नये काम के लिए तो विविध प्रकार से सोर्सेज उपलब्‍ध हो जाते हैं पर जो स्‍ट्रैक्‍चर एक बार खड़ा हो गया उसके क्षतिग्रस्‍त होने के बाद में जो इन्‍वेस्‍टमेंट किया गया उसका लाभ लोगों को नहीं मिलता है। इसलिए इसके ऊपर प्राथमिकता के आधार पर सी.आर.एफ. से जो राशि मिलती है वो तो केवल इतनी मिलती है जिससे आप तुरन्‍त ही टाइम पर उसके ऊपर काम में ले सकते हो, रिपेयर कर सकते हो। जिस लेवल तक डैमेज हुआ उसके लिए बंद कर दिया फिर भी राज्‍य सरकार की तरफ से हम कोशिश करेंगे।

जैसे अभी माननीय सदस्‍य ने बताया कोट बाँध के लिए आठ लाख की मांग की है तो चार लाख हमने दिये हैं और अगर यह जरूरत होगी कि बरसात से पहले-पहले चार लाख और खर्च करने पड़ेंगे तभी वो सुरक्षित रहेगा तो मैं माननीय सदस्‍य को आश्‍वस्‍त करना चाहता हूं कि उनको हम ठीक करा देंगे।

इसके अलावा जो एनीकट की लिस्‍ट दी है मैंने अभी कुछ एनीकट की जो हमने शर्तें चैंज कर दी थी कि दो नैनी सीजन में अगर क्षतिग्रस्‍त हो जायेगा तो चो ठेकेदार को आगे ठीक करवाना पड़ेगा। इनके चार, पाँच एनीकट तो ऐसे हैं कि जो ठेकेदार की लायबिलिटी हैं, वो ठीक करायेगा बाकी इन एनीकट के लिए विशेष नुकसान नहीं है, साइड ब्रेस ऐसा ही हुआ बाकी इनमें पानी सारा भरा रहा है।

तो मैं माननीय सदस्‍य को आश्‍वस्‍त करना चाहता हूं कि माननीय मुख्‍यमंत्रीजी ने गई बार भी रिपेयर के लिए काफी बजट प्रावधान दिया, इस बार भी दिया तो जितना हो सकेगा कोशिश कर के जो भी प्राथमिकता से आवश्‍यक काम होंगे उनको करवाने की कोशिश करेंगे।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्‍यक्ष महोदय।

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): माननीय अध्‍यक्ष महोदय।

श्री अध्‍यक्ष: श्री सुभाष चन्‍द्र बहेडि़या। नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन।

श्री पुष्‍पेन्‍द्र सिंह (बाली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, लाटाड़ा बाँध के लिए भी मंत्रीजी कहें। लाटाड़ा बाँध के लिए भी कहें, 2001 से वहां क्षतिग्रस्‍त है, वहां के किसानों को ...

श्री अध्‍यक्ष: कह दिया न उन्‍होंने कि अब मैं प्राथमिकता के आधार पर कराऊंगा। कह तो दिया।

श्री पुष्‍पेन्‍द्र सिंह (बाली): इस लाटाड़ा बाँध के लिए नहीं, कोट बाँध के लिए कहा है।

श्री अध्‍यक्ष: कह तो दिया इन्‍होंने कि प्राथ‍मिकता के आधार पर कराऊंगा।

प्रश्‍न संख्‍या 275

श्री सुभाष चन्‍द्र बहेडि़या।

(अनुपस्थित कृपया आगे देखें)

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बहुत रिलेवेण्‍ट क्‍वेश्‍चन है, पूछने दीजिए।

श्री अध्‍यक्ष: श्री रामरतन बैरवा।

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बहुत रिलेवेण्‍ट क्‍वेश्‍चन है, पूछने दीजिए।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्‍यक्ष महोदय।

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): माननीय मंत्रीजी, स्‍टेट टाइम के जो बाँध हैं और जो काफी क्षतिग्रस्‍त हैं उनको आप मरम्‍मत के लिए...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: मैंने नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन पुकार लिया। अंकित नहीं हो। अंकित नहीं करना। हां, मंत्रीजी, जवाब दें।

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): 000

विधान सभा क्षेत्र शाहपुरा (भीलवाड़ा) में औद्योगिक क्षेत्र की स्‍थापना

276. श्री रामरतन बैरवा (शाहपुरा): क्‍या उद्योग मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

क्‍या सरकार विधान सभा क्षेत्र शाहपुरा में औद्योगिक विकास हेतु औद्योगिक क्षेत्र बनाने का विचार रखती है? यदि हां, तो कब तक व नहीं, तो क्‍यों?

उद्योग मंत्री (श्री नरपत सिंह राजवी): जी, नहीं। वर्तमान में शाहपुरा (भीलवाड़ा) में रीको द्वारा औद्योगिक क्षेत्र की स्‍थापना का कोई प्रस्‍ताव विचाराधीन नहीं है। इस क्षेत्र में औद्योगिक विकास की संभावना का आंकलन कर यथोचित निर्णय लिया जावेगा।

श्री रामरतन बैरवा (शाहपुरा): क्‍या तारीफ करूं बजट ए इन्‍तजाम की, राजस्‍थान का विकासकरने चली महारानी राजस्‍थान की। ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह महारानी शब्‍द पर आपत्ति है हमारी।

श्री रामरतन बैरवा (शाहपुरा): क्‍यों आपत्ति है आपको?

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह कोई महारानी नहीं है अब राजस्‍थान के अन्‍दर। प्रजातंत्र है अब यहां। ...(व्‍यवधान)...

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उनको तो आप अलाऊ करते हैं जो शेरो-शायरी कर रहे हैं सदन में और जो रिलेवेण्‍ट क्‍वेश्‍चन पूछना चाहते हैं उनको आप अलाऊ नहीं करते। ...(व्‍यवधान)...

 

Ars/usc/1d/3.4.2007/1130/1

 

श्री रामरतन बैरवा (शाहपुरा): आप नहीं करते हैं क्‍या, आपको क्‍या आपत्ति हो रही है  ...(व्‍यवधान) क्‍यों मिर्ची लग रही है आपके ?

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): प्रजातंत्र में सब महाराजा और सब महारानियां हैं, पूरा हिन्‍दुस्‍तान ही महाराजा और महारानी है ...(व्‍यवधान)

श्री रामरतन बैरवा (शाहपुरा): सोनिया गांधी को क्‍या बोला था ...(व्‍यवधान) विदेशी महिला को ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: महारानी वह स्‍वयं कहें तो ...(व्‍यवधान) कोई और कहे तो क्‍यों एतराज है।

श्री रामरतन बैरवा (शाहपुरा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, शाहपुरा की धरती भक्ति और शक्ति का प्रतिबिम्‍ब है। ...(व्‍यवधान) वहां पर प्रसिद्ध क्रांतिकारी हुए हैं। एक क्रांतिकारी का मैं स्‍टेटमैंट देना चाहता हूं ...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अब कोई महारानी नहीं हैं।

श्री रामरतन बैरवा (शाहपुरा): आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से मेरे एक दो प्रश्‍न हैं। क्‍या पूर्व में मुख्‍यमंत्री ने वहां किसी फैक्‍ट्री का उद्घाटन किया है क्‍या ? किया है तो किस तारीख को ? या पूर्व में रीको एरिया घोषित हुआ कांग्रेस शासन में? यह तीन प्रश्‍न हैं मेरे।

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, भीलवाड़ा से 45 किलोमीटर दूर ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: बैठे बैठे बात नहीं करें। प्रतिपक्ष के नेता स्‍वयं ही बात करते हैं, किसी और को क्‍या कहूंगी मैं ...(व्‍यवधान) प्रतिपक्ष के नेता धुमा मत करो, जिससे जरुरत हो बात करने की उसे ही बुला लिया करो, अच्‍छा नहीं लगता आप ऐसे पीठ किये हुए ...

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मैं तो बहुत धीरे धीरे बोल रहा था।

श्री अध्‍यक्ष: बोल तो आप धीरे ही रहे होंगे लेकिन जब आप पीठ करके बैठते हैं तो अच्‍छा नहीं लगता है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): नहीं, मैं टेढ़ा बैठा था।

श्री अध्‍यक्ष: प्रतिपक्ष का नेता आसन की तरफ पीठ करे यह अच्‍छा नहीं लगता है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): नहीं, आपकी तरफ नहीं की।

श्री अध्‍यक्ष: प्रतिपक्ष का नेता आसन की तरफ पीठ करे, उचित नहीं लगता है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): पर झुन्‍झुनूं के अन्‍दर तो पीठ ही रहेगी इनकी आपकी तरफ।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): अध्‍यक्ष महोदय, आपकी तरफ तो पीठ हो ही नहीं सकती मंत्री महोदय।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): पीठ आपको ही नहीं, पीठ किसी को ही नहीं दिखायेंगे।

श्री अध्‍यक्ष: अच्‍छी बात है।

श्री रामरतन बैरवा (शाहपुरा): मंत्री महोदय, बताइये किन किन मुख्‍यमंत्रियों ने कब कब, किन किन तारीख को किन किन फैक्ट्रियों का उद्घाटन किया ?

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, भीलवाड़ा, जहाजपुर रोड पर जहाजपुर में एक औद्योगिक क्षेत्र स्थित है जो 1982 में 30.50 एकड़ भूमि पर स्‍थापित किया गया। यह अभी तक अनसैचुरेटेड श्रेणी में है। कुल 44 नियोजित भूखण्‍डों में से 31 भूखण्‍ड आबंटित किये गये। गत चार वर्षो में 2003 से 2007 तक केवल तीन भूखण्‍ड आबंटित हुए, शेष तेरह भूखण्‍ड रिक्‍त हैं। इन इकाइयों पर अभी भी जितने भी भूखण्‍ड इसमें अस्‍सी रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से यह भूखण्‍ड आबंटित किये गये थे, अनसैचुरेटेड हैं, अभी भी भूखण्‍ड खाली हैं। इसलिए नया क्षेत्र वहां पर कोई अभी स्‍थापित करने का प्रश्‍न विचाराधीन नहीं है।

जहां तक जिस मंत्री के बारे में आप कह रहे हैं, यह प्रश्‍न का भाग नहीं है इसलिए मैं अभी उत्‍तर दे नहीं पाऊंगा।

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है, मुख्‍यमंत्री क्‍यों कह .....

श्री रामरतन बैरवा (शाहपुरा): अध्‍यक्ष महोदय, मेरे तीनों प्रश्‍नों का उत्‍तर ही नहीं है इसमें।

श्री अध्‍यक्ष: सबका जवाब दे दिया, आपने सुना ही नहीं, समझे नहीं आप।

श्री खुशवीर सिंह।


खाटू बड़ी (नागौर) के खसरा नम्‍बर 1148 में नियम विरूद्ध जारी क्‍वारी लाइसेंस

 

277. श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): क्‍या खनिज मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे :-

(1) क्‍या यह सही है कि बिना डेलीनियेशन के क्‍वारी लाइसेंस जारी करने का प्रावधान है? यदि हां, तो नियमों की प्रति सदन की मेज पर रखें।

(2) क्‍या यह सही है कि राजस्‍थान अप्रधान खनिज रियायत नियम, 1986 के लागू होने के पश्‍चात 1986 के पूर्व की डेलीनेटेड बाउन्ड्रियों की सीमा के बाहर बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के क्‍वारी लाइसेंस स्‍वीकृत किये गये हैं? यदि हां, तो कितने? संख्‍या सूची सदन की मेज पर रखें।

(3) क्‍या यह सही है कि ग्राम खाटूबड़ी जिला नागौर का खसरा नम्‍बर 1148 क्‍वारी लाइसेंस देने हेतु डेलीनियेटेड किया गया है? यदि हां, तो कब? आदेश की प्रति सदन की मेज पर रखें।

(4) क्‍या यह सही है कि उक्‍त खसरा नम्‍बर 1148 में बिना डेलीनियेशन के क्‍वारी लाइसेंस जारी किये गये हैं? यदि हां, तो किन नियमों के तहत? नियम विरूद्ध आबंटन हेतु कौन कौन दोषी हैं व उनके विरूद्ध सरकार द्वारा क्‍या कार्यवाही की जा रही है ?

(5) क्‍या उक्‍त खसरा में जारी लाइसेंस के लिए खनिज अभियन्‍ता ने अपने उच्‍चाधिकारियों से अनुमति ली है ? यदि हां, तो किस किस मामले में किन किन अधिकारियों ने किन नियमों के तहत अनुमति दी ? नियम विरूद्ध अनुमति के दोषी व्‍यक्तियों के विरूद्ध सरकार द्वारा क्‍या कार्यवाही की जा रही है ?

वन एवं पर्यावरण मंत्री (श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे):  (1) जी हां । राजस्‍थान अप्रधान खनिज रियायत नियमावली, 1977 एवं 1986 के संबंधित नियमों की प्रति परिशिष्‍ठ-1 पर संलग्‍न है।

(2) जी हां। सूची परिशिष्‍ठ-2 पर संलग्‍न है।

(3) जी नहीं।

(4) जी हां। राजस्‍थान अप्रधान खनिज रियायत नियमावली, 1986 के नियम 22(1) के परन्‍तुक के तहत जिला नागौर के खसरा नम्‍बर 1148 में बिना डेलीनियेशन के क्‍वारी लाइसेंस जारी किये गये हैं। नियमों की पालना के सन्‍दर्भ में जांच कराई जाकर दोषी व्‍यक्तियों के विरूद्ध कार्यवाही की जाएगी।

(5) राजस्‍थान अप्रधान खनिज रियायत नियमावली, 1986 के नियम 22(1) के परन्‍तुक के तहत स्‍वीकृतियां दी गई हैं और क्‍वारी लाइसेंस प्रकरण में सक्षम अधिकारी खनिज अभियंता स्‍वयं हैं। निदेशालय, उदयपुर से एक प्रकरण और अतिरिक्‍त निदेशक, खान, जोधपुर से 27 प्रकरणों में अनुमति प्राप्‍त की गई है।  सूची परिशिष्‍ठ -3 पर संलग्‍न है। नियमों की पालना के सन्‍दर्भ में जांच कराई जाकर दोषी वयक्तियों के विरूद्ध कार्यवाही की जाएगी।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): अध्‍यक्ष महोदय, नियम 22(1) के तहत राज्‍य में आज भी बिना डेलीनियेशन के खानें क्‍या मंत्री महोदय स्‍वीकृत हो रही हैं? भविष्‍य में इसे रोकने के लिए आप क्‍या कदम उठा रहे हैं ?

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 1986 के नियम 22(1) के तहत बिना डेलीनियेशन और बिना नोटिफिकेशन के क्‍वारी लाइसेंस जारी नहीं किये जा सकते परन्‍तु नियम 22(1) में एक प्रोवीजो रखा है, उस प्रोवीजो के तहत रैंट कम रॉयल्‍टी लीज ग्रांट जो हो चुकी है और क्‍वारी लाइसेंस में परिवर्तन कर दिया गया है। उनमें एम. एम. सी. आर. 1986 नियम 22(1) के प्रोवीजो के तहत जो 1986 के बाद में इस प्रकार की बिना डेलीनियेशन किये, बिना नोटिफिकेशन किये अगर इस प्रकार के क्‍वारी लाइसेंस जारी किये हैं तो निश्चित रूप से यह गम्‍भीर विषय है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं इसकी जांच कराने की आपको यहां घोषणा करता हूं और मरे डिप्‍टी सेक्रेटरी को आदेश देता हूं कि एक माह के अन्‍दर अन्‍दर इसकी जांच करें और इस जांच में जो निश्चित रूप से दोषी पायेंगे and they will be penalized.

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से यह जानना चाहता हूं कि यह क्‍वारी लाइसेंस की स्‍वीकृति हेतु जो अधिकृत अधिकारी हैं वह अभियन्‍ता और सहायक अभियन्‍ता हैं। आपके नियम 22 के तहत क्‍या यह सही है कि राजस्‍थान में बापी पट्टे सिस्‍टम आज भी लागू है और वह सोजत में, खाटू में, मकराना में,धौली खान राजसमंद और कहां कहां हैं?

दूसरा, यह कि यह जो डेलीनियेशन है यदि किसी भी जो खनिज सम्‍पदा है उसको छोटे छोटे प्‍लाट में विभक्‍त करने का यह काम जियोलॉजिस्‍ट द्वारा किया जाता है। क्‍या राजस्‍थान में जो बापी खानें हैं उनका जियोलॉजिस्‍ट द्वारा आज तक कभी डेलीनियेशन कराया गया है ? यदि कराया गया है तो कहां कहां कराया गया है ?

तीसरा, अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय खनिज मंत्री जी से यह जानना चाहता हूं कि यह जो क्‍वारी लाइसेंस जारी किये हैं, क्‍या इनको जारी करने से पहले निदेशक खान विभाग उदयपुर और अतिरिक्‍त निदेशक, जोधपुर से भी इसकी स्‍वीकृति ली गयी है क्‍या? और अगर आप जांच करायेंगे तो क्‍या निदेशक और अतिरिक्‍त निदेशक जिन्‍होंने इसके लिए स्‍वीकृति दी है, वह भी जांच के दायरे में आयेंगे? कृपया इसका जवाब दें।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नियम 22(1) एम. एम. सी. आर. 1986, प्रोवीजो पढ़ रहा हूं “Provided that no such notification shall be necessary for the areas in respect of which rent-cum-royalty leases have been granted earlier and have been converted into quarry licences in accordance with these rules.” इनके अन्‍दर जो पहले बापीदार, सरफेस राइट और जो थे, जब राजस्‍थान स्‍टेट बनी और उसके अन्‍दर आर. सी. आर. एल. के तहत जो क्‍वारी लाइसेंस के बिना नोटिफिकेशन क्‍वारी लाइसेंस के पट्टे इश्‍यु किये गये और 1986 के इस प्रोवीजो परन्‍तुक के अन्‍दर उनको रेगुलराइज करने की व्‍यवस्‍था थी और इसके बाद में माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसका डेलीनियेशन होता है और डेलीनियेशन होता है उसका अंकन होता है, प्‍लाट का नम्‍बर होता है, एस. टी. एस. सी. का रिजर्वेशन होता है। जिस हिसाब से इस 22(1) के प्रोवीजो का जो दुरूपयोग किया गया है और निश्चित रूप से एस. सी. एस. टी. के लिए यह अभी का नहीं है, यह लगातार 1986 से जिस हिसाब से बिना डेलीनियेशन क्‍वारी लाइसेंस को रेगुलराइज किया गया नागौर के अन्‍दर माननीय अध्‍यक्ष महोदय, गोचर भूमि में तत्‍कालीन कलैक्‍टर ने कइयों में एन. ओ. सी. इश्‍यु कर दी, कईयों में गोचर भूमि में एन. ओ. सी. नहीं दी गयी और जो खातेदारी भूमि थी, खातेदारी भूमि के अन्‍दर अगर कोई है तो चार हैक्टेयर के अन्‍दर भूमि का अलॉटमैंट होता है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): पंचायतों के प्रस्‍ताव पर दी है।

श्री अध्‍यक्ष: आप अलग से पूछें। 

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): पंचायतों ने प्रस्‍ताव किया है, उनके ऊपर कलैक्‍टर ने एन. ओ. सी. दी है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा सवाल यह नहीं है।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): चार हैक्टेयर गवर्नमैंट को सरेण्‍डर की गयी।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय मंत्री जी, मैंने आपसे आपने चैप्‍टर थर्ड

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): आप पूछ लेना।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): राजस्‍थान माइनर मिनरल कंस्‍ट्रक्‍शन रूल्‍स 1986 का 22 का उदाहरण दिया। आपने केवल तीन लाइनें पढ़ीं, आप इसको पूरा पढ़ें इससे अपने आप साबित हो जाएगा ग्रांट आफ क्‍वारी लाइसेंस 22 Restriction on grant of quarry licences:- (1) No quarry licence shall be granted for any mineral deposit unless it is notified in the Rajasthan Gazette or at least one daily newspaper having wide circulation in the State as well as one newspaper having wide circulations in the locality nearest to the area in question,  by the Mining Engineer/Assistant Mining Engineer after due approval of the Director. Such notification shall be made after delineating the plots of quarries…”यह डायरेक्‍टर से निर्देश लेकर के उसके बाद जारी किये हैं।

दूसरा अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मैंने निवेदन किया था ..........

 

 

 

 

vns/usc/11.40/1e/3.4.2007/1

 

कि जो बापी खानें हैं। बापी खानों का मतलब होता है जो बपौती से बाप दादाओं से चली आ रही हैं। जागीरदारों के टाइम में एरिया निश्चित नहीं होता था और उस वक्‍त के ठिकानेदार और जागीरदार जो पूरा एरिया होता था वह दे देते थे कि आप इसके अन्‍दर माइनिंग करें। आप यह बतायें कि वह जो बापी पट्टे हैं उनमें आज तक राजस्‍थान में कहीं डेलीनियेशन हुआ है क्‍या ? हुआ है तो कहां-कहां हुआ है ? वह बताइये। केवल एक ही जगह डेलीनियेशन की आप बात कर रहे हैं। तीसरा, मैंने आपसे यह सवाल किया था कि आप कह रहे हैं ... (व्‍यवधान) 

श्री हरीसिंह रावत (भीम): एक प्रश्‍न है मेरा माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  ... (व्‍यवधान) 

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): जांच करायेंगे लेकिन यह जो कलेक्‍टर ने गोचर भूमि में एन.ओ.सी. दी। पंचायतों के प्रस्‍ताव हैं। पंचायत ने प्रस्‍ताव दिये उसके बाद दी और उसमें एन.ओ.सी. दे दी उस पर किसी को आपत्ति नहीं है। अगर इसने गलत दिया आप जांच कराइये, हमको कोई आपत्ति नहीं है लेकिन डायरेक्‍टर से अप्रूवल ली है। एडिशनल डायरेक्‍टर से अप्रूवल ली है एम.ई. ने तो आप उनको भी जांच के दायरे में शामिल करिये। यह मेरा निवेदन है। केवल एक छोटा अधिकारी जिसने ... (व्‍यवधान) 

श्री अध्‍यक्ष: क्वेश्‍चन पूछिये। प्‍लीज आस्‍क द क्‍वेश्‍चन। आप पूछिये ना।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): ऊपर के निर्देश से जांच लेकर कर दी। आप उसको चाहे जांच करके उसके ऊपर तलवार लटका दें और जो निदेशक और अतिरिक्‍त निदेशक हैं जिनका एन.ओ.सी. देने और जिनकी स्‍वीकृति देने के बाद यह काम हुआ है उसको भी सुनें।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): यह डेलीनियेशन में जो-जो भी डिफैक्‍टस, जो-जो भी गलतियां हुई अधिकारियों से उसकी जानकारी आपको इस प्रश्‍न लगने के बाद हुई या इससे पहले हुई ? अगर पहले हुई तो आपने क्‍या-क्‍या कार्यवाहियां की ?

श्री अध्‍यक्ष: बस ठीक है।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  नगर से आने वाले सदस्‍य कन्‍फ्यूज हो रहे हैं। मैंने स्‍वयं ने पहले कहा था कि आर.सी.आर.एल. और जो बापी पट्टेदार थे उनके लिये ही 22(1) के अन्‍दर प्रोविजो रखा है। इसमें स्‍पष्‍ट लिखा हुआ है “Provided that no such notification shall be necessary for the areas in respect of which rent-cum-royalty leases have been granted earlier and have been converted into quarry licences in accordance with these rules.” यह उनके लिये ही बना था। माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  आपने कहा है कि यह माइनिंग इंजीनियर को अधिकार, पर माइनिंग इंजीनियर को डेलीनियेटेड किये बिना क्‍वारी लाइसेंस ग्रांट करने का कोई अधिकार नहीं है। है तो 1986 और 1977 के इस प्रोविजन में है जो बापीदार पट्टे थे या यह जो आर.सी.आर.एल. के जो पट्टेधारी थे उनको देने का प्रावधान था। जो आप गोचर भूमि में कलेक्‍टर की बात करते हो कि एन.ओ.सी. पंचायत द्वारा दी गयी, एक जानकारी और देना चाहता हूं माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  कि जो खातेदार, जिन खातेदारों को इस हिसाब से इस कानून को बरगलाने के लिये, इसको डाइल्‍यूट करने के  लिये 22(1) को उन्‍होंने गवर्नमेंट वह भूमि सरेंडर कर दी। जब गवर्नमेंट को वह भूमि सरेंडर कर दी है गवर्नमेंट की भूमि हो गयी उसमें डेलीनियेशन आवश्‍यक है। डेलीनियेशन नहीं किया गया चाहे डायरेक्‍टर हो, चाहे एडिशनल डायरेक्‍टर हो, चाहे माइनिंग इंजीनियर और डायरेक्‍टर ... (व्‍यवधान) अब सुनिये एक मिनट। बैठिये आप। माइनिंग इंजीनियर ने मार्गदर्शन मांगा है एडिशनल डायरेक्‍टर से और डायरेक्‍टर से और डायरेक्‍टर को कोई अधिकार नहीं है। गवर्नमेंट से 65 में रिलेक्‍सेशन मांगने चाहिये और 65 में रिलेक्‍सेशन की अनुमति राज्‍य सरकार से प्राप्‍त होती है इसलिये निश्चित रूप से मैं डिप्‍टी सेक्रेटरी से और एक महीने के अन्‍दर इसकी जांच कराऊंगा और इसमें जो दोषी होंगे निश्चित है वह पैनलाइज होंगे।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): मेरी बात का जवाब नहीं आया। मेरी बात का जवाब नहीं आया ... (व्‍यवधान) 

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  मेरा सवाल तो यह था कि डेलीनियेशन जियोलॉजिस्‍ट करता है। जियॉलॉजिस्ट यह देखता है कि यहां कितना खनिज भण्‍डार है, कितनी गहराई पर है, कितना है ? डेलीनियेशन एम.ई. नहीं करता। कहीं भी असिसटेंट इंजीनियर और एग्‍जीक्‍यूटिव इंजीनियर नहीं करता, जियॉलॉजिस्ट करता है। 

दूसरा मैंने सवाल आपसे स्‍पेसिफिक यह पूछा था कि राजस्‍थान में जो बापी पट्टे हैं। पाँच जगह के नाम भी बताये उनमें कहीं एक भी जगह डेलीनियेशन हुआ है क्‍या ? अब भी विदाउट डेलीनियेशन वहां माइनिंग हो रही है और बापी पट्टों पर काम हो रहा है तो यह काम केवल आप एक ही जगह खाटू में लागू करना चाहते हैं या इन बापी पट्टों का हर जगह डेलीनियेशन करा कर पूरे राजस्‍थान में कहीं भी हो उन सबको इस चक्रव्‍यूह में लेना चाहते हैं।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): मैंने जो प्रश्‍न किया था ... (व्‍यवधान) 

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): आप उस संदेह के घेरे में आ रहे हो क्‍या ?

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): मैं नहीं हूं। जांच करा लीजिये।

श्री सांगसिंह भाटी (जैसलमेर): तो फिर ?

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): जांच करा लीजिये। यह बैठे हैं। मेरे पास कुछ नहीं है। फकीर आदमी हूं। आपके दर्द नहीं होना चाहिये। मैं तो बात कर रहा हूं कानून की। समझ में आ गयी बात। यह जो पूरे राजस्‍थान के जहां-जहां बापी पट्टे हैं उसका सवाल है। केवल एक जगह का नहीं है ... (व्‍यवधान) 

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  मैं जो समझ पाया हूं कि आपने कलेक्‍टर ने गोचर भूमि को भी किया, यह भी किया तो आप एक डिप्‍टी सेक्रेटरी लेवल के अधिकारी से कलेक्‍टर की भी जांच करवायेंगे ?

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): हां, देखो आप।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आपको यदि जांच करवानी है। आपकी मंशा है जैसा हिण्‍डौली से आने वाले माननीय सदस्‍य ने कहा तीन साल तक आप मंत्री रहे। तीन साल तक आपको यह जानकारी में आ जाना चाहिये था किस तरह से स्थिति बनी हुई है। यदि आपको जांच करवानी है तो चीफ सेक्रेटरी लेवल से जांच कराइये तब इसकी जांच होगी। आप चीफ सेक्रेटरी लेवल पर जांच क्‍यों नहीं देते ? इन्‍होंने कोट किया है कि आपका जो डेलीनियेशन प्‍लान बनता है इसको अखबार में निकालना पड़ता है। डायरेक्‍टर, माइन्‍स की अप्रूवल होनी चाहिये। डायरेक्‍टर, माइन्‍स को 65 रूल है, लेने चाहिये1 यह आप सब बता रहे हो। इसका मतलब जो अधिकार है 65 के अन्‍दर सरकार को था। 65 तो एप्‍लीकेशन नहीं हुआ और डायरेक्‍टर ने अपने लेवल पर यह पट्टे दे दिये। इतनी बड़ी गड़बड़ मानते हैं तो आप इसकी जांच चीफ सेक्रेटरी लेवल से कराइये Why for a Dy. Secretary level?बताइये हमको इस बात की। इसका क्‍या उपाय है। बताइये आप।

श्री हरीसिंह रावत (भीम): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  मैं खनिज मंत्रीजी से पूछना चाहता हूं कि 108/04/16.6.2004 को एक केस दायर हुआ था मांगलियावास पुलिस स्‍टेशन पर। इसमें सैक्‍शन 379 आई.पी.सी. के थ्रू और एम.डी.डी.आर. एक्‍ट 1957 की धारा 4.21 के अन्‍तर्गत साढ़े सात करोड़ की रिकवरी इसमें निकली है लेकिन आज तक इस केस में कोई कार्यवाही नहीं हुई। इसका कारण बतायें मुझे।

दूसरा माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  इसमें भ्रष्‍टाचार के अन्‍तर्गत काफी लोग सम्मिलित हैं तो अभी तक पुलिस केस ही हुआ है ... (व्‍यवधान) 

श्री अध्‍यक्ष: आप भाषण नहीं दें।

श्री हरीसिंह रावत (भीम): लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई, इसका कारण क्‍या रहा ?

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): मैंने जो प्रश्‍न पूछा था उसका भी यह जवाब दें। मैंने यह पूछा था कि क्‍या इस बात की जानकारी आपको यह प्रश्‍न लगाने के बाद हुई ? और अगर इसकी जानकारी आपको पहले थी तो अब तक आपने उन अधिकारियों के खिलाफ क्‍या-क्‍या कार्यवाही की ?

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  मैं अभी क्‍लीयर कर रहा हूं कि 22(1) प्रोविजों के अन्‍दर जो नगर से आने वाले सदस्‍य ने कहा है 22(1) प्रोविजों में जो आर.सी.आर.एल. और बापी पट्टेदार हैं उनके लिये डेलीनिएशन का नहीं रखा था प्रोविजन और उनको जो 77 और उसके पहले जिनको बिना क्‍वारी लाइसेंस इश्‍यू किये गये थे। बिना डेलीनिएशन और बिना बाउण्‍ड्री के उन लोगों को रेगुलराइज का प्रावधान 22(1) प्रोविजो में रखा है और 22(1) के अन्‍दर नोटिफिकेशन होता है, बाउण्‍ड्री तय होती है। नक्‍शे बनते हैं। प्‍लाटिंग होती है। उसमें माइनिंग इंजीनियर को अधिकार है परन्‍तु बिना नोटिफिकशन, बिना डेलीनिएशन, बिना गजट में दिये माइनिंग इंजीनियर ने इस प्रकार का कृत्‍य किया है। जैसे ही जानकारी मिली, आपने यह देखा होगा, हिण्‍डौली से आने वाले माननीय सदस्‍य ने जो प्रश्‍न का उत्‍तर, प्रश्‍न के उत्‍तर में मैंने इस बात को तय करवाया कि मैं इसकी जांच करूंगा। मेरे ख्‍याल से आज तक प्रश्‍न के उत्‍तर में कंसीड करने का आज तक नहीं हुआ है। यह पहली बार हुआ है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  और यह आज के कार्यकाल के नहीं है यह 1986 से लगातार हो रहा है। नागौर डिस्ट्रिक्‍ट के अन्‍दर, जायल के अन्‍दर लगातार कई लोगों को इस हिसाब से वायलेशन करते हुए, 22(1) के प्रोविजन का वायलेशन करते हुए डेलीनिएशन की कार्यवाही बिना डेलीनिएट किये गये इनमें अनुसूचित जाति के व्‍यक्तियों के अधिकारों का हनन हुआ है। इसी बात पर मैं आज कहता हूं कि निश्चित रूप से मैं इसकी जांच करवाऊंगा।

श्री अध्‍यक्ष: नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन। ... (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): मेरे प्रश्‍न का उत्‍तर नहीं हुआ। ... (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): किससे जांच करवा रहे हो आप? ... (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): यह आपका खेल ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन। मैंने नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन पुकार लिया। ... (व्‍यवधान)

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं इसकी जांच डिप्‍टी सैक्रेटरी से करवाऊंगा। अगर जांच में उच्‍च स्‍तर के जिला कलक्‍टर और अधिकारी हुए हैं तो निश्चित रूप से इसकी भी जांच करवाऊंगा। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन। नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन पुकार लिया। श्री हेमराज मीणा।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  अब जब रिकार्ड पर बात आ गयी थी कि जिला कलक्‍टर ने एन.ओ.सी. दी है तो डिप्‍टी सैक्रेटरी जांच कैसे करेगा यह समझाइये हमको ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: जांच करवा रहे हैं। ... (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): डिप्‍टी सैक्रेटरी तो आर.ए.एस. है। ... (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): यह ... (व्‍यवधान) सही लगता है। यह मंत्रीजी की मिलीभगत है। ... (व्‍यवधान) जब आप डिप्‍टी सैक्रेटरी से जांच करवा सकते हो ... (व्‍यवधान)

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): 22(1) के प्रोविजन का जो वायलेशन किया है इसकी जांच डिप्‍टी सैक्रेटरी करेगा और इसमें जिला कलक्‍टर ... (व्‍यवधान) स्‍तर के अधिकारी से जांच करवा दूंगा। ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन। श्री हेमराज मीणा। ... (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  यह खसरा नम्‍बर 1148 के अन्‍दर रियासत-काल के समय से, जागीरदारों के समय से इसमें खनिज हो रहा है। तब की एन.ओ.सी. दी हुई है। आपका जवाब है यह ... (व्‍यवधान) आज थोड़े ही दिये गये हैं। इस पर आपका जवाब 2006 में ... (व्‍यवधान) यह 1148 खसरा नम्‍बर है। जो गैर  मुमकिन ग&