विजय/अरुण/02032007/1100/1a
अशोधित
प्रति/प्रकाशनार्थ
नहीं
राजस्थान
विधान सभा की कार्यवाही
का वृत्तान्त
अंक
: 2 बारहवीं
विधान सभा के सातवें
सत्र का दूसरा
दिवस संख्या
: 2
शुक्रवार, 02 मार्च,
2007
राजस्थान
विधान सभा की बैठक
1100 बजे
विधान
सभा भवन, जयपुर
में प्रारम्भ
हुई।
( श्रीमती
सुमित्रा सिंह,
अध्यक्ष, पदासीन
)
श्री प्रद्युम्न
सिंह (राजाखेड़ा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, माननीय
अध्यक्ष महोदय,
हम यह कहना चाहते
हैं।
श्री अध्यक्ष:
प्रश्न संख्या
(1), प्रश्न संख्या
(1)।
अनेक माननीय
सदस्य: नो नो।
अनेक माननीय
सदस्य: पहले फैसला,
पहले फैसला। पहले
फैसला।
श्री हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
पहले फैसला। पहले
फैसला। (व्यवधान)
श्री महावीर
प्रसाद जैन (मुख्य
सचेतक): यह पूर्व
मंत्रीजी जो है,
यह इन्होंने तय
कर रखा है कि आज
फजीती करायेंगे,
पाँच तारीख को
फजीती करायेंगे,
आठ तारीख को लाइन
पर आयेंगे। (व्यवधान)
होगा वही, माननीय
अध्यक्ष महोदय,
होगा वही आपने
जैसा कहा है कि
इस शर्मनाक घटना
के लिए खेद तो व्यक्त
करना ही पड़ेगा,
आज करो चाहे पाँच
तारीख को करो।
आप खेद प्रकट करो
और उसके बाद जो
बात करनी है, वह
करें।
श्री प्रद्युम्न
सिंह (राजाखेड़ा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, हम यह चाहते
हैं कि यह प्रश्नकाल...(व्यवधान)
श्री महावीर
प्रसाद जैन (मुख्य
सचेतक): ये यह चाहते
हैं कि....
श्री अध्यक्ष:
माननीय सदस्यगण,
माननीय सदस्यगण।
श्री महावीर
प्रसाद जैन (मुख्य
सचेतक): मुझे पता
है इनका षड़यंत्र।
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मुझे पता
है, इनका षड़यंत्र
है। (व्यवधान)
होली खेलो, जाओ।
आपको कोई मतलब
नहीं है जनता के
दर्द से।
श्री प्रद्युम्न
सिंह (राजाखेड़ा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, माननीय
अध्यक्ष महोदय।
श्री अध्यक्ष:
माननीय सदस्यगण,
आपमें से एक ही
बोलें तो उचित
रहेगा, सब क्यों
खड़े हैं?
श्री प्रद्युम्न
सिंह (राजाखेड़ा):
हम एक ही बोल रहे
हैं। वह आपके बीच
में यह स्प्रिंग
उछलती है, इनका
हमारे पास क्या
इलाज है?
श्री अध्यक्ष:
अब वह बैठ गये हैं।
श्री राजेन्द्र
राठौड़ (सार्वजनिक
निर्माण मंत्री):
अध्यक्ष महोदय,
प्रश्नकाल के
बाद। अध्यक्ष
महोदय, प्रश्नकाल
के बाद आप इनको
मौका दें। राजस्थान
की जनता से जुड़े
हुए सवाल तो प्रश्नकाल
में है, सरकार जवाब
देना चाहती है,
उसके बाद बात सुनिये।
आपने प्रश्न पुकार
लिया...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
माननीय मंत्रीजी।
श्री राजेन्द्र
राठौड़ (सार्वजनिक
निर्माण मंत्री):
आपने प्रश्न पुकार
लिया है, अध्यक्ष
महोदय, आपने प्रश्न
पुकार लिया है,
हम उत्तर देने
को तैयार हैं।
(व्यवधान)
श्री प्रद्युम्न
सिंह (राजाखेड़ा):
पार्लियामेंट
में भी जनता देख
रही है।
डा. सी. पी.
जोशी (नाथद्वारा):
राठौड़ साहब, आप
तो अपने मंत्रीजी
के प्रश्नों के
उत्तर दे दो।
(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
माननीय सदस्यगण,
अब आप लोग बैठें
तो मैं कुछ कहूं
ना। जब आप एक बार
स्थान ग्रहण करेंगे
प्लीज, एक बार
आप स्थान ग्रहण
करेंगे?
डा. सी. पी.
जोशी (नाथद्वारा):
आप तो अपने मंत्रीजी
के प्रश्नों के
जवाब दे दो, हमारे
सवालों के जवाब
देने की जरूरत
नहीं है।
श्री अध्यक्ष:
एक बार आप स्थान
ग्रहण करेंगे?
(व्यवधान) मैं
यह निवेदन करना
चाहूंगी कि मुझे
ऐसा प्रतीत होता
है कि शायद राजाखेड़ा
से आने वाले माननीय
सदस्य खेद प्रकट
करने केलिए ही
खड़े हुए हों।
(व्यवधान) आप बात
सुन लीजिये।
अनेक माननीय
सदस्य: नो नो।
श्री प्रद्युम्न
सिंह (राजाखेड़ा):
अब आप हमारी बात
सुनेंगे नहीं और
पहले ही आप कह देंगे।
अध्यक्ष महोदय,
आप सुन तो लीजिये।
श्री अध्यक्ष:
आप सुनिये तो सही,
आप सुनिये तो सही।
Let
him speak. आप
सुनिये तो सही।
सुनिये तो सही।
आप सुनिये तो सही।
कई बार....
श्री राजेन्द्र
राठौड़ (सार्वजनिक
निर्माण मंत्री):
आपने प्रश्न पुकार
लिया अध्यक्ष
महोदय। फिर काहे
की अनुमति है अध्यक्ष
महोदय? (व्यवधान) आपने प्रश्न
पुकार लिया अध्यक्ष
महोदय, प्रश्नकाल
के बाद....
श्री महावीर
प्रसाद जैन (मुख्य
सचेतक): एक-एक सवालों
पर लाखों रुपये
लगते हैं। ये प्रश्नों
के प्रति गम्भीर
नहीं हैं। यह केवल
हाँ-हुल्लड़ करना
चाहते हैं। (व्यवधान)
डा. ओ. पी.
महेन्द्रा (उप
मुख्य सचेतक):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, वह प्रश्न
भी इनका है और ये
अपने साथी के प्रति
भी गम्भीर नहीं
है। यह प्रश्न
भी इनके साथी का
है। (व्यवधान)
श्री महावीर
प्रसाद जैन (मुख्य
सचेतक): इन्हें
प्रश्न से मतलब
नहीं है।
डा. सी. पी.
जोशी (नाथद्वारा):
अध्यक्ष महोदय
भी प्रश्नकाल
नहीं चाहती, इसलिए
अलाउ किया है।
आप चिंता क्यों
कर रहे हो? अध्यक्ष
महोदय भी प्रश्नकाल
नहीं चाहती हैं
इसीलिए तो अलाउ
किया है। आप क्यों
बोल रहे हो?
श्री कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण विकास
एवं पंचायती राज
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, ये प्रश्न
नहीं पूछें तो
भी मैं उनको जवाब
दे देता हूं। (व्यवधान)
श्री हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आज मुख्य सचेतकजी
का डबल रोल नहीं
चलने वाला, मुख्य
सचेतकजी का डबल
रोल नहीं चलेगा।
सिंगल रोल होगा।
जो पढ़ा है, वही
यहां अन्दर कहो।
सिंगल रोल रखो,
डबल रोल मत रखो।
(व्यवधान)
श्री कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण विकास
एवं पंचायती राज
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, मैंने पूरी
तैयारी की है सारे
जवाब की, इसलिए
मैं जवाब देना
चाहता हूं, इसलिए
अलाउ किया जाये।
(व्यवधान)
श्री बाबूलाल
नागर (दूदू): राजस्थान
में पंचायती राज
में कितना भ्रष्टाचार
हो गया है, इसमें
आपका योगदान कितना
रहा है, बताओ, जवाब
दो, जवाब दो।
श्री कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण विकास
एवं पंचायती राज
मंत्री): वह तो आपको
जनता बता देगी।
श्री प्रद्युम्न
सिंह (राजाखेड़ा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय....
श्री अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
मैंने सारे नियमों
को छोड़कर, हालांकि
मैंने प्रश्न
पूछ लिया था, प्रश्न
नम्बर एक पुकार
लिया था।
श्री राजेन्द्र
राठौड़ (सार्वजनिक
निर्माण मंत्री):
आपने पुकार लिया
अध्यक्ष महोदय।
श्री अध्यक्ष:
आप सुनिये तो सही।
आप मुझे भी कुछ
कहने दिया करें।
कुछ कह तो लेने
दिया करें मुझें
आप। कृपया आप बिराजें
पहले।
श्री राजेन्द्र
राठौड़ (सार्वजनिक
निर्माण मंत्री):
नहीं, आप फरमायें।
श्री अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
मैंने सारे नियमों
को छोड़ते हुए
क्योंकि प्रश्न
नम्बर एक मैंने
पुकार लिया था।
फिर भी मैंने सोचा
कि शायद राजाखेड़ा
से आने वाले माननीय
सदस्य खेद प्रकट
करके आगे की कार्यवाही
संचालित करेंगे...
श्री राजेन्द्र
राठौड़ (सार्वजनिक
निर्माण मंत्री):
अपने कृत्य के
बारे में।
श्री अध्यक्ष:
अब आप बोलने भी
देंगे कि नहीं
मुझे?
डा. सी. पी.
जोशी (नाथद्वारा):
अगर ऐसी कोई बात
होती तो लीडर आफ
अपोजिशन बोलेंगे।
आप हर चीज को उचित
मानती हैं क्या?
आप इस चीज को उचित
मानती हैं क्या?
श्री अध्यक्ष:
Chair
is on its legs.
डा. सी. पी.
जोशी (नाथद्वारा):
We
are also on legs.
बाहर निकालने में
क्या तकलीफ है?
हमें प्रोटेस्ट
तो करना ही पड़ेगा।
कल भी प्रोटेस्ट
था हमारा, आज भी
प्रोटेस्ट है
हमारा। (व्यवधान)
निकलवाइये, बाहर
निकलवाइये। निकलवाइये
बाहर, बाहर निकलवाइये।
(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
नाथद्वारा से आने
वाले माननीय सदस्य....
डा. सी. पी.
जोशी (नाथद्वारा):
बाहर निकलवाइये,
बाहर निकलवाइये।
(व्यवधान) बाहर
निकलवाइये।
डा. ओ. पी.
महेन्द्रा (उप
मुख्य सचेतक):
: आप सदन की गरिमा
का ध्यान नहीं
रखते हैं। आप आसन
की गरिमा का ध्यान
नहीं रखते हैं।
डा. सी. पी.
जोशी (नाथद्वारा):
आपके मन में आये
वह उचित होता है।
(व्यवधान) बाहर
निकलवाइये। हमारे
लिए भी प्रस्ताव
रखिये, रखिये प्रस्ताव।
(व्यवधान) रखिये
प्रस्ताव।
डा. ओ. पी.
महेन्द्रा (उप
मुख्य सचेतक):
सी.पी. जोशीजी चाहते
हैं कि बाहर निकलवाइये।(व्यवधान)
माननीय सदस्य
सदन की गरिमा का
ध्यान नहीं रखते
हैं। माननीय अध्यक्ष
महोदय, आज दिन तक
आसन को डिक्टेशन
देने का किसी को
कोई अधिकार नहीं
है। (व्यवधान)
श्री राजेन्द्र
राठौड़ (सार्वजनिक
निर्माण मंत्री):
ये आसन को सम्बोधित
करने की कोशिश
कर रहे हैं। ये
आसन को प्रताडि़त
करने की कोशिश
कर रहे हैं। आप
आसन का अपमान करने
की कोशिश कर रहे
हैं। (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
माननीय सदस्य।
डा. सी. पी.
जोशी (नाथद्वारा):
रखवाइये ना प्रस्ताव।
रखवाइये ना प्रस्ताव,
क्या तकलीफ है।
रखवाइये ना प्रस्ताव।
श्री अध्यक्ष:
एक-एक माननीय सदस्य
बोलें।
श्री सी.
डी. देवल (रायपुर):
ये बीच में बोल-बोलकर
व्यवस्था खराब
कर रहे हैं। (व्यवधान)
हमारे नेता बोलेंगे
तो ये बीच में नहीं
बोलेंगे। (व्यवधान)
डा. सी. पी.
जोशी (नाथद्वारा):
आप तो हर चीज को
प्रतीक मानती हैं।
श्री राजेन्द्र
राठौड़ (सार्वजनिक
निर्माण मंत्री):
नाथद्वारा से आने
वाले माननीय सदस्य,
राजाखेड़ा से आने
वाले माननीय सदस्य
के पास जाकर कह
रहे हैं कि आप परवाह
मत करना, इनकी धौंस
में मत आना आप, डरने
की कोई आवश्यकता
नहीं है। (व्यवधान)
डा. सी. पी.
जोशी (नाथद्वारा):
आप दिलावर साहब
से कहिये, हमको
नहीं कह सकते हैं।
(व्यवधान) आपके
धौंस से हाउस नहीं
चलेगा, आपकी धौंस
से सरकार भी नहीं
चल सकती। (व्यवधान)
आपकी धौंस से सरकार
भी नहीं चल रही
है। आपकी धौंस
से सरकार भी नहीं
चल रही है।
श्री महावीर
प्रसाद जैन (मुख्य
सचेतक): आप रामनारायणजी,
कांग्रेस के नेता
नहीं हैं। इनका
गला घोंटा जा रहा
है। (व्यवधान)
श्री सांवर
लाल (सिंचाई मंत्री):
यह विधान सभा है
। प्रश्नकाल में
प्रश्न पूछे जाते
हैं।
श्री कालूलाल
गुर्जर
(ग्रामीण विकास
एवं पंचायती राज
मंत्री): सरकार
को आप चला रहे हो
क्या? (व्यवधान)
आप सबको प्रोवोक
करना चाह रहे हो।
(व्यवधान)
डा. सी. पी.
जोशी (नाथद्वारा):
ये चार आदमी सदन
को चलाना चाहते
हैं। हम तो चारों
को देखना चाहते
हैं। एक भी बाकी
हो तो बताओ हमें।
(व्यवधान)
श्री महावीर
प्रसाद जैन (मुख्य
सचेतक): माननीय
रामनारायणजी, ये
आपको नेता नहीं
मानते। इसीलिए
तो नेता अमरा राम
जी हैं। आप नहीं
हैं। आपको कोई
नेता नहीं मानता।
(व्यवधान)
डा. सी. पी.
जोशी (नाथद्वारा):
पूरे राजस्थान
को पार्टी के चार
आदमी चलायेंगे
तो बाकी को भी निकलवा
दो। (व्यवधान)
चार आदमी बोल रहे
हैं, बाकी सब चुप
बैठे हैं, यह दिख
नहीं रहा है क्या?
(व्यवधान)
श्री सांवर
लाल (सिंचाई मंत्री):
चारों को खड़ा
करना आपको ज्यादा
भा रहा है तो बता
दो। (व्यवधान)
डा. सी. पी.
जोशी (नाथद्वारा):
ना ना, हमें तो पाँच
पसन्द हैं, पाँच
काफी हैं। पाँच
काफी हैं, ज्यादा
की जरूरत नहीं
है।
श्री सांवर
लाल (सिंचाई मंत्री):
अध्यक्ष महोदय,
प्रश्नकाल सबसे
महत्वपूर्ण है,
आपने प्रश्न पुकार
लिया।
श्री महावीर
प्रसाद जैन (मुख्य
सचेतक): ये कम्युनिस्ट
पार्टी के नेता
को अपना नेता मानते
हैं। वह तो एक ही
काफी है। रामनारायणजी
की जरूरत क्या
है। (व्यवधान)
सी.पी.एम. आपकी नेता
है1
श्री अध्यक्ष:
नेता प्रतिपक्ष
खड़े हैं, नेता
प्रतिपक्ष खड़े
हैं।
श्री हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आप तो मुख्य मंत्रीजी
के ऊपर आरोप लगाकर
भी इस कुर्सी पर
बैठे हुए हो। (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
मुख्य सचेतक महोदय,
नेता प्रतिपक्ष
खड़े हैं। सुनें
आप, सुनें आप।
श्री रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, हमारी पार्टी
की तरफ से राजाखेड़ा
से आने वाले माननीय
सदस्य खड़े हुए
थे। उनके बारे
में आपने अनुमान
पहले ही से अपने
आप अपने मन के हिसाब
से लगा लिया, वह
अनुमान ऐसा नहीं
था। वह सोच-समझकर
खड़े हुए थे। पहले
हमने देखा था, आज
की कार्यवाही देखी
थी और आपने सब व्यवस्थाएं,
रूलिंग, जो पहले
इस मामले में हुई,
वह सब हमारे पास
भेजी है, उनकी फोटोस्टेट
कराकर भेजी है।
इससे हमें यह आभास
लगा कि आप इस मामले
को शांतिपूर्वक
रिजोल्व करना
चाहती हैं।
श्री अध्यक्ष:
चाहती हूं। बिलकुल
चाहती हूं।
श्री रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
चाहती हैं ना आप,
तो यही हमारी इच्छा
थी और वही हम बोलना
चाहते थे। आप उसको
पहले ही यह ले गये
कि खेद प्रकट करना
चाहते हैं।
श्री अध्यक्ष:
इसलिए मैंने समझा।
एक सैकण्ड, क्षमा
चाहते हुए आपसे,
इसलिए मैंने समझा
कि चूंकि आप वरिष्ठ
सदस्य हैं, सात
बार जीतकर आ चुके
हैं। मैंने सोचा,
शायद वह खेद प्रकट
करने के लिए ही,
यहां पर खेद प्रकट
करने के लिए खड़े
हुए हैं।
डा. सी. पी.
जोशी (नाथद्वारा):
क्षमा मांगेंगे,
क्षमा मांगेंगे?
श्री प्रद्युम्न
सिंह (राजाखेड़ा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं बड़े
सम्मान के साथ
आपसे विनम्र निवेदन
करना चाहता हूं
कि आपका प्रिजम्पशन
गलत है। आज चूंकि...
श्री अध्यक्ष:
मतलब आप रिजोल्व
नहीं करना चाहते?
श्री प्रद्युम्न
सिंह (राजाखेड़ा):
नहीं नहीं नहीं।
श्री अध्यक्ष:
आप सदन की कार्यवाही
नहीं चलने देना
चाहते?
श्री प्रद्युम्न
सिंह (राजाखेड़ा):
नो नो नो, आप पूरी
बात सुनिये अध्यक्ष
महोदय। (व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय,
मेरा आपसे निवेदन
है, मैं बड़ी कड़वी
बात कह रहा हूं।
मैं आपका बड़ा
आदर करता हूं।
श्री अध्यक्ष:
आप बीच में नहीं
बोलें। सुन लें
आप।
श्री राजेन्द्र
राठौड़ (सार्वजनिक
निर्माण मंत्री):
ये क्या कह रहे
हैं माननीय अध्यक्ष
महोदय?
श्री अध्यक्ष:
इन्होंने अनुमान
तो गलत बता दिया।
श्री प्रद्युम्न
सिंह (राजाखेड़ा):
नहीं नहीं, मैं
आपका बहुत आदर
करता हूं। एक मिनट,
आप मेरी बात सुनिये,
आप मेरी बात सुन
लीजिये।
श्री अध्यक्ष:
मैं सुन रही हूं।
डा. ओ. पी.
महेन्द्रा (उप
मुख्य सचेतक):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, इस सदन में
प्रतिपक्ष.....(व्यवधान)...
एक तरफ तो गंगानगर
में लाल झण्डे
के नीचे बैठते
हैं और दूसरी तरफ
यहां सदन में आकर
उनका बचाव करते
हैं और गंगानगर
में और कोई स्टेटमेंट
देते हैं। (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
देखिये, जब वे बोल
रहे हैं तो मैं
आप सबसे चाहूंगी,
बीच में नहीं बोलें
आप।
Jkj/akt/11.10/1B
यह बात बहुत
गलत है कि एक व्यक्ति
के जिसके प्रांगण
कब्जे में होता
है दूसरा इंटरफियर
करता है, यह बहुत
गलत व्यवस्था
और गलत परम्परा
है। हां, बोलिये।
श्री प्रद्युम्न
सिंह(राजाखेड़ा):
अध्यक्ष महोदय,
मैं आपका बहुत
सम्मान करता हूं
लेकिन एक बात मैं
कहना चाहता हूं,
आप इसको...
श्री अध्यक्ष:
मैं भी उतना ही
सम्मान करती हूं
आपका।
श्री प्रद्युम्न
सिंह: आप अन्यथा
न लें इसको, आप अन्यथा
ना लें।
श्री अध्यक्ष:
यह आसन भी आपका
उतना ही सम्मान
करता है।
श्री प्रद्युम्न
सिंह: अगर आप पूरी
बात सुन लिया करें
तो आधी समस्याओं
का निदान ऐसे ही
हो जाय।
श्री अध्यक्ष:
तो मैं सुन रही
हूं ना।
श्री प्रद्युम्न
सिंह: आप बीच में
ही टोक-टोक कर, हम
लोगों की समस्याएं
बढ़ती हैं उससे।
श्री अध्यक्ष:
आपको नहीं टोक
रही, मैं तो उन लोगों
को...(व्यवधान) अब
आप क्या देख रहे
हैं, (व्यवधान)
अब आप क्या....(व्यवधान)
श्री राजेन्द्र
राठौड़(संसदीय
कार्य मंत्री):
आप कहना क्या
चाहते हैं, अध्यक्ष
महोदय समस्या
बढ़ा रहे हैं, आप
अध्यक्ष महोदय
पर आरोप लगा रहे
हैं। (व्यवधान)
श्री प्रद्युम्न
सिंह: मैं आरोप
नहीं लगा रहा, निवेदन
कर रहा हूं।
श्री राजेन्द्र
राठौड़: नहीं, आप
कह रहे थे कि आपके
टोकने के कारण
समस्याएं बढ़ती
हैं, यह आसन का अपमान
है अध्यक्ष महोदय।
श्री प्रद्युम्न
सिंह: निवेदन कर
रहा हूं। निवेदन
कर रहा हूं।
श्री राजेन्द्र
राठौड़: इनका यह
कथन, अध्यक्ष
महोदय, मेरी प्रार्थना
है अध्यक्ष महोदय,
यह कथन कि आसन की
टोकाटाकी से समस्या
बढ़ती है, यह आप
पर आरोप लगा रहे
हैं, आसन पर आरोप
लगा रहे हैं।
श्री अध्यक्ष:
तो निवेदन करते
समय आप इधर मुखातिब
होइये, उधर क्या
देखते हैं।
श्री प्रद्युम्न
सिंह: मेरा आप निवेदन
सुनें।
श्री अध्यक्ष:
आप उधर क्या देख
रहे थे। नहीं, क्या
देख रहे थे आप।
श्री प्रद्युम्न
सिंह: वह बीच में
बोलने ही नहीं
देते हैं।
श्री अध्यक्ष:
तो उनको टोक रही
हूं, उनको रोक रही
हूं, कह रही हूं
कि न बोलें।
श्री प्रद्युम्न
सिंह: यह पार्लियामेंट्री...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
प्लीज। पीएडी मिनिस्टर,
प्लीज।
श्री राजेन्द्र
राठौड़: आप पर आरोप
लगाते हैं अध्यक्ष
महोदय, आप पर आरोप।
श्री संयम
लोढ़ा: अध्यक्ष
महोदय, उनको तो
पूरी आरएसएस नहीं
रोक पा रही है, पूरी
आरएसएस। पूरा आरएसएस
नहीं रोक पा रहा
है इनको तो। (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
देखिये, आपके ही
माननीय सदस्य....(व्यवधान)
वेरी सॉरी।
श्री प्रद्युम्न
सिंह: अध्यक्ष
महोदय, आपने कृपापूर्वक
1966 की प्रोसीडिंग्स
की हमको कापियां
भेजी हैं, हमने
उसको गौर से पढ़ा
है।
श्री अध्यक्ष:
हां।
श्री प्रद्युम्न
सिंह: 1966 की आपने जो
प्रोसीडिंग्स
की कापी हमको भिजवाई
जिसमें तत्कालीन
उप मंत्री श्री
रामप्रसादजी लड्ढा
ने एक सस्पेंशन
का प्रस्ताव रखा
था, आज हमने देखा
उस पर, उस पर विचार-विमर्श
भी किया...
श्री महावीर
प्रसाद जैन(सरकारी
मुख्य सचेतक):
यह प्रश्न काल
के बाद की बात है...
श्री प्रद्युम्न
सिंह: अब यह नहीं
मानेंगे, यह नहीं
सुधरेंगे। (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
यह तो सुधरेंगे
कि बिगड़े हुए
हैं लेकिन आप नहीं
सुधरेंगे, आप नहीं
सुधरेंगे। आठ टर्म
हो गये आपको यहां
पर, आप 66 में मौजूद
थे....
श्री प्रद्युम्न
सिंह: हम बिगड़े
कब थे जो सुधरेंगे।
हम बिगड़े नहीं
थे।
श्री अध्यक्ष:
आप उस समय मौजूद
थे, आप विधान सभा
के सदस्य थे उस
समय।
श्री प्रद्युम्न
सिंह: हम बिगड़े
नहीं थे जो सुधरेंगे।
हम तो सुधरे-सुधराये
हैं अध्यक्ष महोदय।
हम तो सुधरे-सुधराये
हैं, हम बिगड़े
हुए कब थे।(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
अब तक तो आप सुधरे
हुए थे लेकिन अब
आप मत बिगड़ो।
अब तक तो सुधरे
थे।
श्री कालूलाल
गुर्जर: अध्यक्ष
महोदय, यह इतने
बिगड़ गये कि अब
सुधरने की कोई
गुंजाइश ही नहीं
है। इनके तो सुधरने
की अब कोई गुंजाइश
ही नहीं है।
श्री अध्यक्ष:
अब मत बिगड़ो।
श्री प्रद्युम्न
सिंह: मेरा आप निवेदन
सुनें।
श्री अध्यक्ष:
मेरी पहले सुन
लें आप। आपके लिए
मैं कह रही हूं।
तमाम उम्र तो गुजारी
वोमिन बुतों को
पूजते, अब आखिरी
वक्त क्या खाक
मुसलमां होंगे।
(व्यवधान)
श्री प्रद्युम्न
सिंह: अध्यक्ष
महोदय, आपने कृपापूर्वक
हमको वह भिजवाई,
प्रोसीडिंग्स
भिजवाई। (व्यवधान)
श्री घनश्याम
तिवाड़ी: कुछ लोग
बुढ़ापे में भी
बिगड़ते हैं।
श्री प्रद्युम्न
सिंह: यह उनमें
से एक हैं। यह उनमें
से एक हैं। अध्यक्ष
महोदय, मैं आपसे
निवेदन कर रहा
था कि तत्कालीन,
1966 की जो आपने प्रोसीडिंग्स
भिजवाई, हमको ऐसा
आभास लगा जिसके
ऊपर आज नेता महोदय
हम लोगों को कुछ
लोगों को लेकर
बैठे जिस पर चर्चा
हुई। मेरा भी आपसे
निवेदन है कि आप
इस प्रश्न काल
को स्थगित करके
लोगों को बैठें,
इस मामले को रिजाल्व
करें क्योंकि
देखिये, यह कल इतना
हार्ड स्टेप लिया
गया है यहां पर
जिसकी आवश्यकता
नहीं थी। मैं आपको
1991 की याद दिलाना
चाहता हूं। सुखदेव
प्रसादजी का कुर्ता
फाड़ दिया था लेकिन
उसके बाद भी कांग्रेस
वाले, कांग्रेस
वाले किसी सस्पेंशन
का या सदन से उनको
निकालने का प्रस्ताव
नहीं आया था। 89 की (व्यवधान)
सॉरी, 89 की...(व्यवधान)
89-89 की...
श्री महावीर
प्रसाद जैन: राज
तो हमारा था, आप
क्या बात कर रहे
हैं।
श्री प्रद्युम्न
सिंह: 13 मार्च, 1989 की
बात है...
श्री महावीर
प्रसाद जैन: 91 में
तो राज बीजेपी
का था।
श्री कालूलाल
गुर्जर: अध्यक्ष
महोदय, 91 में तो भारतीय
जनता पार्टी का
राज था और वहां
बीजेपी वालों ने
कहां से कुर्ता...(व्यवधान)
श्री जुबेर
खान: 13 मार्च, 1979 की
बात है। 13 मार्च,
1979 की बात है।
श्री महावीर
प्रसाद जैन: 91 की
बात कर रहे हैं।
(व्यवधान)
श्री कालूलाल
गुर्जर: अध्यक्ष
महोदय, 91 में भारतीय
जनता पार्टी की
सरकार यहां पर
थी और उस समय में
भारतीय जनता पार्टी
के कार्यकर्ताओं
और नेताओं ने, सदस्यों
ने कैसे फाड़ दिया
कुर्ता सत्ता
पक्ष के लोगों
ने। (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
आप बीच में नहीं
बोलें। (व्यवधान)
आप बीच में नहीं
बोलें।
श्री प्रद्युम्न
सिंह: आप शायद कांग्रेस
पार्टी को यह संदेश
देना चाहते थे
कि अगर आपने..(व्यवधान)
यह सत्ता पक्ष
...(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
अब आप बीच में नहीं
बोलें, बैठिये
न आप। आप बीच में
नहीं बोलें, वह
बोल रहे हैं।
श्री मदन
राठौड़: वह गलत
बता रहे हैं।
श्री अध्यक्ष:
वह गलत-सलत जो बता
रहे हैं मैं जवाब
दे दूंगी उसका।
श्री प्रद्युम्न
सिंह: हमको यह आभास
लगा अध्यक्ष महोदय,
यह आभास हुआ कल,
शायद सत्ता पक्ष
यह हमें कांग्रेस
पार्टी को, जो सबसे
बड़ा दल है, प्रतिपक्ष
के अंदर बैठा हुआ
है, यह संदेश देना
चाहते थे कि आप
होश में रहो, अगर
आपने ज्यादा चूं-चपड़
की तो आपका भी यही
हाल होगा। हमको
यह बात नागवार
गुजरी है, चाहे
हमको कुछ भी कीमत
चुकानी पड़े इसके
लिए, हम चाहते हैं
कि आप इस मामले
को रिजाल्व करें,
आपका यह नौवां
टर्म है इस विधान
सभा में, आपने भी
बहुत जमाना देखा
है और आपने बहुत
उतार-चढ़ाव....
श्री अध्यक्ष:
ऐसा कल जैसा नहीं
देखा था मैंने
कभी, पचास साल के
इतिहास में कल
जैसा नहीं देखा
था मैंने। (व्यवधान)
श्री प्रद्युम्न
सिंह: क्या। कपड़े
फाड़ने वाला देखा
था आपने। कपड़े
फाड़ने वाला तो
देखा था आपने उस
वक्त। (व्यवधान)
या तो आपने...
डा. सी.पी.जोशी:
माननीय सदस्य,
आँख बंद कर रखी
थी उस समय, कहां
से देखा।
श्री प्रद्युम्न
सिंह: मेरा आपसे
निवेदन है कि प्रश्न
काल को कृपया स्थगित
करें आप, अपने चैम्बर
के अंदर आप बुलायें
लोगों को लेकर
बैठें कि यह मामला
कैसे रिजाल्व
हो, वरना, अन्यथा,
मैं बहुत ही आपसे
पेनफुली निवेदन
कर रहा हूं कि प्रतिपक्ष
को अपना दायित्व
निभाते हुए हम
प्रश्न काल को
नहीं चलने देंगे।
यह मेरा आपसे निवेदन
है, आप इसको...
श्री अध्यक्ष:
सरकार तो चलेगी,
विधान सभा की बात
कह सकते हैं आप।
विधान सभा नहीं
चलने देंगे, यह
कह सकते हैं।
श्री प्रद्युम्न
सिंह: आप सुनिये,
भैरोंसिंहजी ने
कभी, ना-ना...
श्री अध्यक्ष:
आप कह रहे हैं कि
सरकार को नहीं
चलने देंगे।
श्री प्रद्युम्न
सिंह: सरकार को
नहीं कह रहा हूं,
सरकार तो अब...(व्यवधान)
श्री हरिमोहन
शर्मा: सरकार को
तो वही नहीं चलने
देंगे।
सरकार को हम नहीं,
सरकार को तो केबिनेट
के मिनिस्टर ही
नहीं चलने देंगे।
(व्यवधान)
डा.ओ.पी.
महेन्द्रा( सरकारी
उप मुख्य सचेतक):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, इनका तात्पर्य
है विधान सभा को
नहीं चलने देंगे,
इतना गैर जिम्मेदाराना
रवैया।
श्री प्रद्युम्न
सिंह: मेरा आपसे
निवेदन है कि आप
अपना....
श्री महावीर
प्रसाद जैन: इस
बहम में मत रहो
आप।
श्री महीपाल
यादव: इनके तो जूतियों
में खीर बंट रही
है।
श्री प्रद्युम्न
सिंह: आप अपने गुड
आफिसेज को यूज
करते हुए आप इनके
ट्रेप में न फंसे। यह तो आपको
अपने ट्रेप में
लेना चाहते हैं,
इनके काले कारनामों
को यह चाहते हैं
कि दबे रहें, उठायें
नहीं इनके काले
कारनामे जो हैं
इसलिए यह चाहते
हैं कि सदन नहीं
चले।
श्री अध्यक्ष:
काले कारनामों
को उजागर करने
का पूरा आपको समय
मिलेगा, करियेगा
उजागर आप।
श्री प्रद्युम्न
सिंह: आप तो इनकी
मदद कर रही हैं,
आप तो इनकी मदद
पर आ गई हो। (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
लेकिन आप जिस चीज
पर हाउस को नहीं
चलने दे रहे हैं
वह इनके काले कारनामों
पर पर्दा डाल रहे
हैं आप।
श्री प्रद्युम्न
सिंह: इसलिए मेरा
आखिरी निवेदन है...
श्री महावीर
प्रसाद जैन: अध्यक्ष
महोदय, ब्लेकमेल
कर रहे हैं, और इनका
कोई परपज नहीं
है। यह प्रेजाइडिंग
आफिसर को ब्लेकमेल
करते हैं। (व्यवधान)
श्री गुलाब
चन्द कटारिया(गृह
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, माननीय
सदस्य की अगर
यह भावना है कि
सदन चलना चाहिए
तो हम आपकी भावना
के साथ सहमत हैं।
हम भी चाहते हैं
कि जनता के प्रतिनिधि
के नाते इस सदन
का उपयोग करके
जन समस्याओं को
यहां रखा जाय, लेकिन
आप और मेरा भी कुछ
बीस-तीस साल का
अनुभव है, कल राज्यपाल
के साथ जो घटना,
जिस ढंग का व्यवहार
हुआ, क्या आपा
उसको उचित समझते
हैं और अगर उचित
नहीं समझते हैं
तो क्षमा मांगने
में ऐसी कौन सी
बड़ी आफत है जिसके
कारण से समस्या
का हल न होकर के
सदन व्यवस्थित
रूप से अपना काम
पूरा कर सके। केवल एक जिद्द
के कारण से अगर
हम समय बरबाद कर
रहे हैं और क्वेश्चन
आवर जैसा महत्वपूर्ण
सवाल है और आप स्वयं
कह रहे हैं कि सरकार,
सरकार तो चाहती
है कि आपके द्वारा
उठाये हुए सवालों
का हम ठीक प्रकार
से जवाब देकर के
आपको संतुष्ट
करने का प्रयास
करें और राजस्थान
की जनता के पास
इस बात का मैसेज
जाये कि वास्तव
में सदन में विषय
उठे थे उसकी उचित
कार्यवाही हुई।
मैं सोचता हूं
यह केवल एक आपस
के अहंकार की लड़ाई
नजर आ रही है, जो
व्यवहार कल दिखा। आपने भी देखा
है कि कई बार हम
लोगों ने शायद
राज्यपाल के अभिभाषण
के समय एक मिनट
या दो मिनट कुछ
बोल करके व्यवधान
करने की कोशिश
की होगी लेकिन
उसके बाद सदन शांत
हुआ और उनका भाषण
हुआ या हम उनके
बाहर जाकर के अपना
विरोध दर्ज करा
लिया, लेकिन इस
प्रकार की घटना
नहीं हुई जो उनके
सामने करना, इस
प्रकार की नारेबाजी
हुई, क्या यह सदन
की शोभा है? मैं
चाहूंगा कि आप
भी...
श्री सी.डी.देवल:
कुर्ता फाड़ दिया,
इससे ज्यादा आप
क्या कर सकते
हो और कहते हो क्या
व्यवहार है। आपने कपड़े
फाड़ दिये। आप लोगों
ने उनके कपड़े
फाड़ दिये, उनका
जो वह था उसको फाड़
दिया, इससे ज्यादा
क्या व्यवहार
कर सकते हो आप।
(व्यवधान)
श्री गुलाब
चन्द कटारिया:
अगर मान लो हमने
कपड़े फाड़ दिये
तो....
श्री अध्यक्ष:
रायपुर से आने
वाले माननीय सदस्य..
श्री सी.डी.देवल:
हां साहब।
श्री अध्यक्ष:
जब राजाखेड़ा से
आने वाले माननीय
सदस्य बोल रहे
थे सब शांतिपूर्वक
उनकी बात सुन रहे
थे। (व्यवधान)
बीच में नहीं, और
अब जब गृह मंत्रीजी
बोल रहे हैं तब
आप बीच-बीच में
खड़े हो रहे हैं,
कृपया अपने स्थान
पर बैठे रहें आप।
श्री सी.डी.देवल:
अध्यक्ष महोदय,
यह बीच में खड़े,
तीन-तीन खड़े हुए
थे, महावीर प्रसादजी
खड़े हुए, माननीय
यह संसदीय मंत्री
खड़े हुए और बीच
में इनको टोका। आपने उनको
बैठने का नहीं
कहा और हमको कह
रहे हो आप बैठ जाओ,
हम तो बैठ जायेंगे,
आपकी आज्ञा को
मानते हैं लेकिन
इसका मतलब नहीं
है कि इनको आप पक्ष
करो।
श्री गुलाब
चन्द कटारिया:
अध्यक्ष महोदय,
हम सब की इच्छा
है...
श्री अध्यक्ष:
उनको भी मैंने
रोका था, उनको भी
टोका था।
श्री सी.डी.देवल:
बैठे तो नहीं साहब,
हम तो बैठ रहे हैं।
श्री अध्यक्ष:
अब फिर आप..
श्री सी.डी.देवल:
हम तो बैठ रहे हैं
साहब।
श्री गुलाब
चन्द कटारिया:
अध्यक्ष महोदय,
सब की इच्छा है
कि सदन ठीक प्रकार
से चले, प्रश्न
इतना है कि क्वेश्चन
आवर समाप्त करने
के बाद बैठा जाय
या पहले। मैं सोचता
हूं क्वेश्चन
आवर को पूरा करिये
और उसके बाद आपके
कक्ष में बुलाकर
के इस समस्या
को हल करने के लिए
बैठ करके जो भी
बात हो सकती है...
श्री अध्यक्ष:
मैंने तो कल भी
बुलाया था। मैं तो कल
भी बुलाकर चाह
रही थी कि रिजाल्व
हो जाय लेकिन यह
आये नहीं।
श्री गुलाब
चन्द कटारिया:
वह बात होकर के
कम से कम सदन व्यवस्थित
रूप से चले तो मैं
सोचता हूं ज्यादा
ठीक उपयोग होगा।
श्री अध्यक्ष:
मैं तो कल भी चाह
रही थी।
डा.सी.पी.जोशी:
अध्यक्ष महोदय,
जो भावना व्यक्त
की वह इसमें इश्यू
नहीं है। इश्यू यह
है कि आपने स्वयं
ने मीटिंग बुलाई,
सर्वदलीय मीटिंग
बुलाई।
सर्वदलीय मीटिंग
में यह बात आपके
सामने आई कि कुछ
दल के लोग प्रोटेस्ट
करेंगे। आपने स्वयं
ने, अध्यक्ष महोदय,
याद करिये, आपने
स्वयं ने कहा
कि भई आप प्रोटेस्ट
करके बाहर जा सकते
हैं।
Lpm/akt/1120/1c/02032007
आपको कहा
कि हमारी पार्टी
नैक्स्ट डे मिलेगी
और आपको कम्युनिकेट
करेगी। हमने आपकी
भावनाओं को ध्यान
में रखकर हमारी
पार्टी पूरे राज्यपाल
महोदय के भाषण
में शांतिपूर्ण
बैठी। हमारे एक
माननीय सदस्य
ने उसके बाद पॉइन्ट
ऑफ ऑर्डर उठाया।
आपको उसमें फैसला
करना था, इसके बीच
में प्रस्ताव
ले आये। हमारा
जो बोन ऑफ कटेंशन
यह है कि आपकी नीयत
साफ होती तो आप
पहले डिस्पोज
करते पॉइन्ट ऑफ
ऑर्डर को, उसके
बाद माननीय चीफ
व्हिप ऑफ दी रूलिंग
पार्टी प्रस्ताव
लाते, आप उसमें
सुन रहे थे और सुनने
के बीच में चीफ
व्हिप ने प्रस्ताव
लेकर के आ गये, यह
धर्म बनता था रूलिंग
पार्टी का, आप हमारे
लीडर को इन्फोर्म
करते कि इस तरह
के व्यवहार पर
रूलिंग पार्टी
का यह मत है आप भी
इसमें कोपरेट करिए
बिना यूनिलेटरल
कम्युनिकेट किए
आप, आपने फैसला
लेकर कांग्रेस
पार्टी के नुमाइंदों
को जो मैसेज देना
चाहते हैं उस मैसेज
के खिलाफ हम प्रोटेस्ट
करना चाहते हैं
और माननीय अध्यक्ष
महोदय आपसे भी
विनम्र शब्द में
निवेदन करना चाहते
हैं कि कल आपने
भी सदन के, आपने
मतलब चैयर ने भी
रोंग परम्पराएं
प्रारंभ करी, आपने
स्वयं ने कहा
कि जब राज्यपाल
महोदय डिसाइड कर
रहे हैं तो वह डिसाइड
करने में स्पीकर
का रोल नहीं है,
कांस्टिट्यूशन
में भी प्रोविजन
यह है कि राज्यपाल
महोदय हाऊस को
आहूत करते तो पहले
सदन में वो इन्फरेंस
करते, आपने कल स्वयं
ने यह निर्णय दिया।
फिर आपने अध्यक्षजी
को रिक्वेस्ट
करके, गवर्नर को
रिक्वेस्ट करके
भाषण को कट शोर्ट
करवाया, जो जिम्मेदारी
रूलिंग पार्टी
की बनती थी पूरी
की पूरी व्यवस्थाएं
चैयर के माध्यम
से कल यदि पार्लियामेंट्री
डिमोक्रेसी की
वाइलेट की जाये
और उसके बाद यह
एग्जाम्पल देना
चाहे, माननीय अध्यक्ष
महोदय तो टू-वे
ट्रेफिक है, यह
वन-वे ट्रेफिक
नहीं है। इसलिए
आपको बड़प्पन
बताकर क्वेश्चन
आवर को समाप्त
कर जैसा माननीय
प्रघुम्नसिंहजी
ने कहा है कि आप
लीडर ऑफ अपोजिशन
के साथ बैठकर और
पार्टी के रूलिंग
पार्टी के साथ
बैठकर निर्णय करें
कि भविष्य में
इस तरह की घटना
रिपिट नहीं हो।
राज्यपाल महोदय
के संवैधानिक पद
पर सम्मान करना
हमारी सबकी जिम्मेदारी
है, सभी चुने हुए
प्रतिनिधि की जिम्मेदारी
है लेकिन चैयर
की भी जिम्मेदारी
है कि वो व्यवस्था
इस तरह की करें
कि इस तरह की स्थिति
नहीं बने, हमारी
भावना यह है। आप
बड़प्पन में चलकर
आपने स्वयं ने
कहा है कि यदि मेरी
गलती है तो मैं
ठीक कर लूंगी, आपने
स्वयं ने आपने
कल कहा है जब आप
एक तरफ तो यह कह
रहे हैं कि मैं
ठीक कर लूंगी, दूसरी
तरफ आपने रूलिंग
को रिजर्व रखा,
तीसरी तरफ आपने
अलाऊ करके आपने
बीच में प्रस्ताव
रखवा दिया, यह परम्परायें
अच्छी संसदीय
प्रणाली के लिए
ठीक नहीं है। इसलिए
इसको ठीक करने
के लिए आपको आज
क्वेश्चन आवर
समाप्त करना चाहिए
और बैठकर बात कर
इस डेड-लॉक को खत्म
करना चाहिए।
श्री अध्यक्ष:
....व्यवधान... नहीं
मुझे बोलने दीलिए,
आप बिराजे, मैं
बोलूंगी। नाथद्वारा
से आने वाले माननीय
सदस्य आप बहुत
वरिष्ठ सदस्य
है, आप जानते हैं
इस बात को कि राईट
और रोंग जो अध्यक्षीय
व्यवस्था दी
जाती है उस पर कभी
चर्चा नहीं की
जाती है और उसको
कभी कन्डेम नहीं
किया जाता है।
यह आपको जानकारी
है और जानकारी
होते हुए आप यह
कर रहे हैं मैं
समझती हूं कि उचित
नहीं है।
डा. सी. पी.
जोशी (नाथद्वारा):
रूलिंग कहां दी
है माननीय अध्यक्ष
महोदय, अध्यक्ष
महोदय आपका सम्मान
है, आप उठा के देख
लें, महावीर प्रसाद
जी चीफ व्हिप उस
पॉइन्ट ऑफ ऑडर्र
पर बोल रहे थे और
बोलने के बीच में
प्रस्ताव लाये
हैं रिकॉर्ड देख
लें आप, यदि इसमें
कोई करेक्शन हो
तो हम माफी मांग
लेंगे, आप चैक कर
लें, अध्यक्ष
महोदय फिर दुबारा
कह रहा हूं मैं
आप चैक कर लें महावीर
प्रसादजी चीफ व्हिप
पॉइन्ट ऑफ ऑडर
पर बोल रहे थे, आपके
फैसले के बीच में
उन्होंने प्रस्ताव
ले आये, यह ठीक परम्परा
नहीं है आप चैक
कर लें रिकॉर्ड
में, हम माफी मांग
लेंगे अन्यथा
आप गलत परम्पराओं
को पेट्रोनाइज
कर रहे हैं। अध्यक्ष
महोदय यह आपके
लिए भी शोभा नहीं
देता, आपने स्वयं
ने रूलिंग देने
के बाद में आपने
मुझे पॉइन्ट आफ
ऑर्डर अलाऊ किया
था, आपने खुद ने
रूलिंग दी थी उस
पर पॉइन्ट ऑफ
ऑर्डर अलाऊ किया
था, डिस्कस कर
रहे हैं आपने उसके
बाद आप चेंज करना
चाहते थे अध्यक्ष
महोदय (....व्यवधान)
श्री महावीर
प्रसाद जैन (मुख्य
सचेतक): (.....व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय
पॉइन्ट आफ ऑर्डर
उठाया, राज्यपाल
के भाषण में हमने
व्यवस्था पढ़कर
सुनाई कि पूर्व
अध्यक्ष की यह
व्यवस्था रही
है, उसके बाद आपने
पॉइन्ट आफ ऑर्डर
पर व्यवस्था
दी और उसको निरस्त
किया, एक पॉइन्ट
पर आपने अपना फैसला
रिजर्व रखा था
यदि कहीं मेरी
गलती हुई है तो
(........व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
आपने कहा है कि
कहीं मेरी गलती
हुई है (.....व्यवधान)
डा. सी. पी.
जोशी (नाथद्वारा):
तो माफी मांग लेंगे,
तो मांग लें आप,
हम माफी मांग लेंगे,
हम माफी मांग लेंगे
अध्यक्ष महोदय
हम माफी मांग लेंगे
आप रिकॉर्ड चैक
कर लें हम माफी
मांग लेंगे (....व्यवधान) माफी मांगने
में कोई तकलीफ
नहीं है, मंगा ले
रिकॉर्ड चैक कर
लें (.....व्यवधान)
श्री महावीर
प्रसाद जैन (मुख्य
सचेतक): (....व्यवधान)
यदि मान लो मैंने
बिना परमिशन के
और उस पॉइन्ट
आफ ऑर्डर का उत्तर
हमने नहीं दिया,
वह रूलिंग पढ़कर
के नहीं सुनाई,
उसमें माननीय राज्यपाल
के अभिभाषण पर
और जो चर्चा हुई
है 1992 का, वह फैसला
नहीं पढ़कर सुनाया
और उस पर मतलब जो
है आपने फैसला
नहीं लिया तो उसके
बाद आया यह प्रस्ताव
(.......व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
(...व्यवधान) अब आप
बैठिये, नाथद्वारा
से आने वाले माननीय
सदस्य आप बैठे-बैठे
नहीं बोले।
श्री महावीर
प्रसाद जैन (मुख्य
सचेतक): (.....व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष
महोदय उसके बाद
जब ये सारे फैसले
हो चुके, मैं काफी
बैठा, सारी प्रेस
भी देख रही थी, सब
देख रहे थे, सब ने
कहा कि पहली बार
मुझे प्रेस नहीं
भी एप्रिसेट किया
कि आप बैठे थे यानि
यह बात सही है।
मैं मानता हूं
कि जो मतलब है कि
मैं अपने आपको
नहीं रोक पाता
लेकिन कल मैंने
इतना रोका, प्रेस
भी कह रही थी (.....व्यवधान)
डा. सी. पी.
जोशी (नाथद्वारा):
(.....व्यवधान)
श्री जुबेर
खान (रामगढ़): अध्यक्ष
महोदय इसके धन्यवाद
के लिए एक प्रस्ताव
लाना चाहते है
कि आपने बहुत संयम
रखा और रोका अपने
आपको....
श्री प्रद्युम्न
सिंह (राजाखेड़ा):
(......व्यवधान) प्रस्ताव
लाएंगे कि कल आपने
आपको रोकने की
चेष्टा की, इसका
प्रस्ताव लाएंगे
सदन के अन्दर
आपका आभार प्रकट
करने के लिए (....व्यवधान)
श्री हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
आप इसलिए भी धन्यवाद
के पात्र हैं कि
आपने अख़बार वालों
से भी कहा कि मेरी
पार्टी के जो लोग
है उन पर आरोप लगाऊंगा
तो जवाब नहीं दे
सकते, यह चुप्पी
भी आपकी ठीक है
(......व्यवधान)
श्री महावीर
प्रसाद जैन (मुख्य
सचेतक): क्या कहा
मैंने, माननीय
अध्यक्ष महोदय
मैं कभी डबल स्टैण्डर्ड
नहीं रखता (.....व्यवधान)
श्री रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
अध्यक्ष महोदय,
आपकी बात सत्य
नहीं है कि कल आपने
अपने आपको बहुत
रोका, आपको कल रोकने
का कारण दूसरा
था आपसे चीफ मिनिस्टर
साहब की बात नहीं
हुई थी और आज सुबह
तक आप अत्यन्त
निराश थे और आज
नौ बजे के बाद मुख्यमंत्रीजी
की आपके टेलीफोन
पर बात हुई है और
उनकी बात होने
के बाद में आपमें
करन्ट आया है
(.....व्यवधान) कल आपमें
करंट नहीं था।
श्री राजेन्द्र
राठौड़ (सार्वजनिक
निर्माण मंत्री):
(...व्यवधान) अध्यक्ष
महोदय, मुख्यमंत्रीजी
और मुख्य सचेतकजी
के बीच में बात
हो और इनको इत्तिला
हो जाए अब इनके
सम्बन्ध कितने
मधुर है यह आपको
अंदाजा है, आप लगा
सकते हैं। प्रतिपक्ष
के नेता और हमारे
संबंध कितने (.....व्यवधान)
डा. सी. पी.
जोशी (नाथद्वारा):
मालूम है कि आपके
संबंध कितने मधुर
है (.....व्यवधान)
श्री राजेन्द्र
राठौड़ (सार्वजनिक
निर्माण मंत्री):
अध्यक्ष महोदय,
जब आज सुबह आपने
प्रोसीडिंग में
1966 की जो प्रोसीडिंग
साथ में भेजी, सब
माननीय सदस्यों
के मन में एक बात
आई कि आप उदार मन
से कल जो कृत्य
हुआ उसके लिए यह
क्षमा मांगेंगे
और आप क्षमा करेंगे,
यह जो आपने प्रोसीडिंग
भेजी 1966 की इसके पीछे
अपने आप में एक
मंतव्य दिखता
है अध्यक्ष महोदय
कल जब यह घटना घटित
हुई, प्रतिपक्ष
के नेता से मैंने
जाकर स्वयं बात
की थी .....व्यवधान
डा. सी. पी.
जोशी (नाथद्वारा):
यह कैसे बोल रहे
हैं अध्यक्ष महोदय,
आप अलाऊ कैसे कर
रहे हो इनको (.....व्यवधान)
आप कैसे अलाऊ कर
रहे हों? He was speaking. आप अलाऊ
कैसे कर रहे हो?
मन में आई जो बात … He was in
possession of the floor of the House. (.......व्यवधान)
आप हमारे लीडर
बन जाए, आप खुद अलाऊ
करके यह खुद बोल
रहे थे आप खुद को
(........व्यवधान) करते नहीं
है (......व्यवधान)
आप अलाऊ कर रहे
हैं....
श्री राजेन्द्र
राठौड़ (सार्वजनिक
निर्माण मंत्री):
अध्यक्ष महोदय,
प्रतिपक्ष के नेता
से जब मैंने स्वयं
ने बात की इस कल
की घटना की तो आपने
खुद ने कहा कि यह
खेदजनक बात है।
महामहिम राज्यपाल
महोदय के साथ जिस
तरह का आचरण हुआ
प्रतिपक्ष के नेता
ने खुद ने कहा यह
नहीं होना चाहिए
(.......व्यवधान) जब
मैंने कहा (..... व्यवधान)
श्री सी.
डी. देवल (रायपुर):
आपने इनको अलाऊ
कर दिया जब हमारे
प्रतिपक्ष के नेता
बोल रहे थे आप इनको
बिठाइए और प्रतिपक्ष
के नेता की पहले
बात सुनिये और
नहीं तो इनकी बात
हम भी नहीं सुनेंगे,
आपने कल यह व्यवस्था
दी कि कल मैं व्यवस्था
दूंगी, आसन्न
ने यह कल कहा था
कि इस मामले में
मैं कल व्यवस्था
दूंगी तो पहले
आप इसकी व्यवस्था
दिलाये।
श्री रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
अध्यक्ष महोदय,
सत्तापक्ष का
आपके द्वारा भेजी
गई प्रोसीडिंग
के बारे में जो
इन्फरेंस निकाला
जा रहा है वह गलत
है ...
श्री अध्यक्ष:
मैंने भेजी है
श्री रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
(.....व्यवधान) आप भेजने
वाले कौन होते
हो आपने जो प्रोसीडिंग
भेजी हमारे पास
है, वह आपके पास
भी गई होगी (....व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
हां गई है।
श्री रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): उसका जो इन्फरेंस
निकाल रहे हैं
वह गलत निकाल रहे
हैं और सीधे ही
आप जम्प कर रहे
हैं पार्लियामेंट्री
के (.....व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
आप बतो दो ना, यह
तो गलत निकाल रहे
हैं आप सही बात
बता दें।
श्री रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
सही बात तो मैंने
बता दी और आपने
कंसीड कर ली ...
डा. सी. पी.
जोशी (नाथद्वारा):
वैरी गुड ....
श्री रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
(........व्यवधान) आपकी
ऐसी मंशा थी तो आपने कहा
है कि हां-हां है,
मेरी ऐसी मंशा
है, बात खत्म हो
रही थी वरना हम
आगे और बोलते इतने
में तो आपके तो
जम्प कर दिए, वो
कूद गये, वो कूद
गये (....व्यवधान)
श्री राजेन्द्र
राठौड़ (सार्वजनिक
निर्माण मंत्री):
अध्यक्ष महोदय,
कूदने का क्या
अर्थ हुआ? (.....व्यवधान)
श्री रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
पार्लियामेंट्री
अफेयर्स मिनिस्टर
साहब यह विधानसभा
है और यहां राठौड़ों
का राज नहीं है,
यहां विधानसभा
में माननीय सदस्यों
का राज है .......
श्री अध्यक्ष:
आप यहां पर केवल
माननीय सदस्य
है, राठौड़ नहीं
है। केवल माननीय
सदस्य है चुरू
से आने वाले माननीय
सदस्य, यह नेता
प्रतिपक्ष है।
श्री रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
(......व्यवधान) यहां
200 माननीय सदस्यों
का राज है, यह बोलते
समय थोड़ा संयम
आपको रखना चाहिए।
आप कैसे कह सकते
हैं कि माफी मांग
लो? क्या आपका
कोई मार्शल ऑर्डर
है जो हम माफी मांगे
(.....व्यवधान) आप यह
कैसे कह सकते हो
(........व्यवधान)
श्री राजेन्द्र
राठौड़ (सार्वजनिक
निर्माण मंत्री):
(....व्यवधान) आपने
उसी सीट पर खुद
कहा था कल जो कुकृत्य
हुआ वह नहीं होना
चाहिए था, आपने
खुद ने कहा था जब
मैं आपसे बात करने
आया था (...व्यवधान)
श्री रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष):
आपने जो प्रोसीडिंग
भेजी है, विधानसभा
में पहले ऐसी घटनाएं
उसके बारे में
कार्यवाही आई है
वह हमने देखी है,
उस पर विचार किया
और विचार करने
के बाद हमने तय
किया कि प्रद्युम्नसिंहजी
बोलेंगे ....
श्री राजेन्द्र
राठौड़ (सार्वजनिक
निर्माण मंत्री):
क्या बोलेंगे?
श्री रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): जो बोल रहे
थे वो, अब आप बोल
रहे है माफी मांगे,
माफी मांगे (....व्यवधान)
ऐसे मार्शल लॉ
से माफी मांग सकते
हैं, आप कमाल करते
हैं, माफी क्यों
मांगे? होम मिनिस्टर
साहब कह रहे थे
कि माफी मांग ली
जाए, कौन मांगेगा
माफी? माफी मांगने
वाले हैं वह तो
नहीं है यहां (.....व्यवधान)
श्री हरिमोहन
शर्मा (हिण्डौली):
नहीं ये सामन्ती
प्रवृत्ति छोड़े
आप (.......व्यवधान)
श्री रामनारायण
चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): माफी मांगने
वाले जिनको आपने
चारो को आपने निलम्बन
कर रखा है वह आज
कहां है विधानसभा
में? हम मांगेंगे
माफी?
श्री अध्यक्ष:
1966 में उन 12 की तरफ
से नेता प्रतिपक्ष
श्री महारावल लक्ष्मणसिंहजी
ने खेद प्रकट किया
था, क्षमा मांगी
थी (.....व्यवधान)
भीम/अरुण/2.3.07/11.30/1d
खेद प्रकट
किया था क्षमा
मांगी थी। श्री राजेन्द्र
राठौड़ (सार्वजनिक
निर्माण मंत्री):
लिखित में प्रस्ताव
आया था।
श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्यक्ष महोदय, पूरे सदन ने खेद प्रकट किया था।
श्री अध्यक्ष: सदन ने अनुमति दी।
श्री जुबेर खान (रामगढ़): पूरे सदन ने खेद प्रकट किया था ...(व्यवधान)...
श्री कालूलाल गुर्जर (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री): अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य जिनको निष्कासित किया वो तो नहीं हैं पर उनके लिए आपने प्रोटेक्शन कर रखा है आप विधान सभा को नहीं चलने दे रहे हैं इसलिए आपको माफी मांगनी चाहिए।
श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): अध्यक्ष महोदय, प्रतिपक्ष के नेता बोल रहे हैं।
श्री जुबेर खान (रामगढ़): पूरे सदन ने खेद प्रकट किया था।
श्री कालूलाल गुर्जर (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री): अध्यक्ष महोदय, निष्काषित सदस्यों के पक्ष में आपने विधान सभा में इस तरह की स्थिति पैदा की है इसलिए आपको माफी मांगनी पड़ेगी।
श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): अध्यक्ष महोदय, प्रतिपक्ष के नेता बोल रहे हैं प्रतिपक्ष के सदस्य बीच में डिस्टर्ब कर रहे हैं बताइये आप।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता प्रतिपक्ष): कालूराम जी, ये पंचायती राज नहीं है।
श्री कालूलाल गुर्जर (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री): पंचायती राज ही है आज तो ।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता प्रतिपक्ष): आप ग्राम पंचायत की सी बात मत करो।
श्री कालूलाल गुर्जर (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री): आज तो प्रश्न ही पंचायत राज का है और मैं सारी तैयारी करके आया हूं मैं चाहता था कि पंचायत राज में आपके अच्छे सुझाव आते पर अब आप तो देना ही नहीं चाहते।
श्री सी. डी. देवल (रायपुर): आपको कोई कुछ नहीं देना।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता प्रतिपक्ष): आप ग्राम पंचायत की सी बात मत करें। आप अनुभवी हैं आज के नहीं बहुत अनुभवी विधायक हैं मिनिस्टर बने हैं पहले भी मिनिस्टर बने थे फिर विधायक भी रहे थे तो जो बात चल रही है न जो समझते हैं वो लोग सब बैठे बैठे सुन रहे हैं चुपचाप होम मिनिस्टर साहब ने कहा माफी तो वो मांगेंगे जिन्होंने कसूर किया है। खेद व्यक्त वो करेंगे जिन्होंने कसूर किया है।
श्री कालूलाल गुर्जर (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री): आप उनकी पैरवी कर रहे हैं न साहब इसलिए आपको मांगनी चाहिए।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता प्रतिपक्ष): बात तो सुनें आप आप हर बात पर उछलना जरूरी है क्या आपका? हर बात पर आपका उछलना जरूरी है?
श्री सी. डी. देवल (रायपुर): आपको घनश्याम जी कुछ नहीं देने वाले।
श्री कैलास त्रिवेदी (सहाड़ा): आपके वकीलों को सज़ा मिलती है क्या?
श्री रामनारायण चौधरी (नेता प्रतिपक्ष): हम इस बात के लिए सहमत नहीं थे हमने उनको पूर्व में में ही कह दिया था कि राज्यपाल के अभिभाषण पर विघ्न नहीं डाला जाए आपको जो कुछ कहना है बाद में कह देना हमने उनको परश्युएड करने की बहुत कोशिश की पूरी पार्टी ने की थी लेकिन वो नहीं माने अपनी जिद पर रहे । अब वो है ही नहीं यहां तो कौन खेद व्यक्त करेगा?
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): नहीं हम यह नहीं कह रहे हैं आप करें, हम यह नहीं कह रहे हैं माननीय अध्यक्ष महोदय।
श्री सी. डी. देवल (रायपुर): फिर खड़े हो गये अध्यक्ष महोदय।
श्री अध्यक्ष: नेता प्रतिपक्ष आप तो केवल इतना बता दो कि यहां आकर के ....।
श्री सी. डी. देवल (रायपुर): इन दो को तो बैठा दो।
डॉ. दिगम्बर सिंह (चिकित्सा मंत्री): जब आपकी बात उन्होंने मानी नहीं तो अब आप क्यों परेशान हो अब चलने दीजिये सदन को उनको बाहर बैठने दीजिये।
श्री अध्यक्ष: प्लीज। चिकित्सा मंत्री जी, Chair is on its legs.
श्री रामनारायण चौधरी (नेता प्रतिपक्ष): अब सदन को चलने देंगे कि नहीं देंगे वो तो हमारा काम है।
श्री अध्यक्ष: नेता प्रतिपक्ष महोदय, आप क्या इस बात को कि यहां पर आकर के अपनी बात कह दी थी और कह कर बैठ जाते या बहिर्गमन करते वहां तक तो उचित था लेकिन यहां आकर के जिस तरीके से नारे लगाये और उसके बाद शोकाभियक्ति के वक्त में आपकी पार्टी सम्मिलित होकर के और जो नारे लगाये क्या आप उसे उचित समझते हैं ? क्या आप वो उचित समझते हैं सदन की मर्यादा के अनुकूल है क्या? उन दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए और जो कुछ आपने किया वो क्या उचित था ?
श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): फिर तो सबको निकालना चाहिए फिर हमको क्यों नहीं निकाला?
श्री अध्यक्ष: अब आपके नेता प्रतिपक्ष खड़े हैं ...। इनको क्या किया जाए, ये नेता प्रतिपक्ष के कब्जे में नहीं हैं। आप क्यों खड़े होते हैं, जब आपके नेता खड़े हैं तो आप किसलिए खड़े होते हैं, क्यों खड़े हो आप जब आपके नेता प्रतिपक्ष खड़े हैं।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता प्रतिपक्ष): अध्यक्ष महोदय, आप में कोई चूक हम नहीं निकाल सकते ।
श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): आप एक हि समझदार हैं।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता प्रतिपक्ष): आप में हम कोई चूक नहीं निकाल सकते लेकिन आपसे भी कहीं न कहीं भूल हुई है । शोकाभिव्यक्ति पेश करते समय आपको हाउस को सूचना करनी चाहिए था हमें भी बताना चाहिए था कि मैं शोकाभिव्यक्ति रखना चाहती हें। श्री अध्यक्ष: उसमें था न लिखा हुआ, कार्यवाही में लिखा हुआ था, बिजनेस में है।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता प्रतिपक्ष): आपने हंगामे के बीच में शोकाभिवयक्ति पढ़ना शुरू कर दी।
आपको पहले हाउस को इन ऑर्डर लाना जरूरी था और उसके बाद शोकाभिव्यक्ति व्यक्त करते अगर हाउस इन ऑर्डर नहीं था तो आप स्थगित कर देते। दिवंगत आत्माओं के प्रति अपनी श्रद्धा देनी थी तो हाउस को इन ऑर्डर लाना चाहिए था। हो-हल्ला हो रहा है उसके अन्दर आप शोकाभिव्यक्ति किसको सुना रहे थे? हाउस ऑर्डर में कहां था?
श्री अध्यक्ष: मैंने कहा, मैंने बार-बार कहा शोकाभिव्यक्ति उसके बाद भी आपकी पार्टी लगातार उनके साथ मिलकर यही करती रही । मैंने बार-बार कहा।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता प्रतिपक्ष): उसमें आपकी भी भूल हुई है उसमें प्रभु आपकी भी भूल हुई है। आपको पहले सलाह करनी चाहिए थी कि शोकाभिव्यक्ति मैं पेश कर रही हूं।
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आप प्रभु हो क्या अध्यक्ष महोदय, प्रतिपक्ष के नेता कह रहे हैं प्रभु, हमें मालूम नहीं था कि अवतार के रूप में आप हो।
डा. किरोड़ी लाल (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): आप दुर्गा कहते तो समझ में आता । आपने प्रभु कह दिया, प्रभु तो आप हो।
श्री अध्यक्ष: जब नेता प्रतिपक्ष बोल रहे हैं प्लीज, नेता प्रतिपक्ष कुछ भी कहें, जब बोल रहे हों तो आप नहीं बोलेंगे। आप नहीं बोलेंगे।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता प्रतिपक्ष): आपको इसमें क्या एतराज हुआ मैंने प्रभु कहा?
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आप दुर्गा कह सकते हो, भवानी मां कह सकते हो।
श्री अध्यक्ष: फिर आप उल्लंघन कर रहे हैं।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता प्रतिपक्ष): सुनिये मेरे को। प्रभु को लार्ड बोलते हैं कि नहीं अंग्रेजी में, लार्ड बोलते हैं कि नहीं? जब वो मी लार्ड बोलते हैं तो हाईकोर्ट जज प्रभु है क्या? उसको मी लार्ड बोलते हैं। कमाल करते हैं आप एक अनाड़ी तो कुछ भी बोल सकता है लेकिन आप इतने विद्वान हैं, इतने अनुभवी हैं, पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्टर हैं आप ऐसी बातें पर एतराज करते हो। मेरी बात से सुनने वाला राज़ी सब राज़ी फिर बीच में काजी क्या करेगा?
श्री अध्यक्ष: अब आप बीच में नहीं बोलेंगे।
श्री राजेन्द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): नहीं, मुझे यह मालूम नहीं था कि इनकी बात से ये भी राज़ी और ये भी राज़ी बीच में मैं कहां आ गया।
श्री अध्यक्ष: आप बीच में नहीं बोलेंगे जब तक वो खड़े हैं आप बीच में नहीं उठेंगे। राठौड़ी नहीं चलेगी आपकी यहां पर।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता प्रतिपक्ष): आदरणीय अध्यक्ष जी, मैंने आपसे पूर्व में निवेदन किया था आज जो कार्यवाही आपने हमारे पास भेजी और उसमें पूर्व के उदाहरण आपने कटिंग करके हमारे पास भिजवाये उनको हमने पढ़ा गौरपूर्वक और हमने हमारी मीटिंग बुलवायी थी 10.00 बजे और उसमें सारा विचार हुआ और विचार होने के बाद यह तय हुआ कि हमारी ओर से अभिव्यक्ति इसके ऊपर प्रद्युम्न सिंह जी करेगे क्योंकि प्रद्युम्नसिंह जी के प्रति आप भी सोफ्ट हैं।
श्री अध्यक्ष: आप आसन पर किसी भी तरह का आक्षेप नहीं लगा सकते।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता प्रतिपक्ष): एक तो आपके हमारे शिवचरण जी माथुर बहुत भक्त थे कल वो भी बहुत गुस्सा हो रहे थे कल आपने उनकी जो गति की उससे वो व्यथित हो रहे थे।
श्री अध्यक्ष: आपने सदन के टेंस वातावरण को काफी ठीक बना दिया है, मैं बहुत आभारी हूं आपकी। बहुत आभारी हूं।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता प्रतिपक्ष): हमने तो सोचकर इनको ख्ड़ा किया था और आप इनको सुन लेते, अब भी सुन लें इनकी बात को आप और उससे अब कोई हल निकल जाएगा और सदन को भी सुनना चाहिए ...(व्यवधान)... होम मिनिस्टर की बात को भी सुना है।
श्री अध्यक्ष: नहीं आप बीच में नहीं।
श्री प्रद्युम्न सिंह (राजाखेड़ा): नहीं-नहीं, ये कह रहे हैं ...(व्यवधान)... इन्होंने कहा है।
श्री रामनारायण चौधरी (नेता प्रतिपक्ष): लेकिन मैं आपकी बात पर यही कहता हूं कि वो तो यहां हैं ही नहीं कौन माफी मांगेगा? बुला लो उनको।
श्री प्रद्युम्न सिंह (राजाखेड़ा): अध्यक्ष महोदय, भाषा देखिये अगर आप गौर करेंगी, मैंने अभी अपने साथी से बात की है।
श्री अध्यक्ष: किनसे बात की?
श्री प्रद्युम्न सिंह (राजाखेड़ा): अपने साथी सी.पी.जोशी साहब से इसके बारे में ...। अब आप सुन तो लीजिये। ये महावीरजी नहीं चाहते कि वातावरण शांत हो।
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): माननीय सदस्य कहो उनको, मैं तो यह कह रहा हूं।
श्री अध्यक्ष: वो तो एक ही बात है क्या फर्क है।
श्री प्रद्युम्न सिंह (राजाखेड़ा): He doesn’t want कि यहां पर शांति हो। अशांति में ही तो इनकी चवन्नी चलेगी। महारावल श्री लक्ष्मण सिंह जी प्रतिपक्ष के नेता एवं श्री सतीशचंद्र जी अग्रवाल, सदस्य विधान सभा निम्नलिखित प्रस्ताव प्रस्तुत करेंगे। गौर कीजिये। एक-एक शब्द। ‘यह सदन...।
डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): दुबारा रिपीट करें आप।
श्री प्रद्युम्न सिंह (राजाखेड़ा): ‘यह सदन दिनांक 26 फरवरी, 1966 को सदन में घटित घटनाओं पर खेद प्रकट करता है।’ पूरे सदन ने खेद प्रकट किया था।
श्री घनश्याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): प्रस्ताव तो उनकी तरफ ये आया था।
श्री अध्यक्ष: प्रस्ताव नेता प्रतिपक्ष की ओर से था।
श्री प्रद्युम्न सिंह (राजाखेड़ा): हां-हां, अगर आप इस पर हैं तो हम तैयार हैं ...(व्यवधान)... एक मिनट रुकिये।
श्री अध्यक्ष: नहीं खेद प्रकट किये बिना कुछ नहीं। पहले खेद प्रकट करें।
श्री प्रद्युम्न सिंह (राजाखेड़ा): देखिये अगर आपने इसमें गौर किया है तो पूरे सदन ने खेद प्रकट किया है हम इसके ऊपर कोई प्रतिष्ठा का सवाल नहीं बनाना चाहते। पूरा सदन है इसी भाषा की अगर आप, आप सहृदयता का, आसन बड़प्पन का परिचय देते हुए इस मामले को रिजोल्व आसन को करना चाहिए और मैं सत्तापक्ष से भी अपील करूंगा । यहां सत्तापक्ष के उपनेता महोदय बैठे हुए हैं, वरिष्ठ बैठे हुए हैं यहां पर माननीय तिवाड़ी जी भी मौजूद हैं हालांकि आजकल जरा इनके सितारे गर्दिश में हैं लेकिन माफ कीजियेगा तिवाड़ी जी जरा, यहां पर बैठे हुए हैं तो मेरा निवेदन यह है कि ..।
श्री घनश्याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): मैंने महाराज, आपको माफ कर दिया।
श्री प्रद्युम्न सिंह (राजाखेड़ा): धन्यवाद।
श्री अध्यक्ष: प्लीज। प्लीज।
डा. किरोड़ी लाल (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री): यह आपकी सूचना गलत है कि इनके सितारे गर्दिश में हैं।
श्री प्रद्युम्न सिंह (राजाखेड़ा): I withdraw, मैंने जो ...।
श्री अध्यक्ष: बीच में नहीं टोकें। बीच में नहीं खड़े हों। नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्य।
श्री प्रद्युम्न सिंह (राजाखेड़ा): मैं चाहता हूं माननीय अध्यक्ष महोदय, अगर आज्ञा दें तो मैं सत्तापक्ष की तरफ से नेता महोदय की अनुमति अगर मुझे दे देंगी, मैं यह प्रस्ताव पेश कर दूंगा।
श्री अध्यक्ष: मैं इससे पहले एक बात कहना चाहूंगी। उस समय, मैं यह व्यवस्था देना चाहूंगी आपको कि उस समय जो था
कैलाश/अरुण 2.3.07 11.40 (1) 1e
नेता प्रतिपक्ष और सतीश चन्द्र अग्रवाल उस कृत्य में शामिल नहीं थे और कल के कृत्य में आप सब भी शामिल हो, आपने भी नारे लगाये हैं । आप सब भी शामिल हो इसलिए पहले नेता प्रतिपक्ष खेद प्रकट करें । (व्यवधान)
श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्डौली): राज्यपाल महोदय के अभिभाषण के समय हम कहां शरीक थे उसमें ।
श्री रामनारायण चौधरी(नेता, प्रतिपक्ष): अध्यक्ष महोदय, ने हमारे ऊपर कटाक्ष किया है आप क्यों उछल रहे हो ।
श्री अध्यक्ष: खेद प्रकट करो ।
श्री रामनारायण चौधरी(नेता, प्रतिपक्ष): अध्यक्ष महोदय, ने हमें उलाहना दिया है आप किस लिये उछल रहे हो, आप सुनो ।
श्री अध्यक्ष: आप क्यों उठे हो ।
श्री रामनारायण चौधरी(नेता, प्रतिपक्ष): अध्यक्ष महोदय, हम आपको साफ हृदय से सच कहते हैं कि हमने उनको मनाने की बहुत कोशिश की थी कि राज्यपाल का अनादर नहीं किया जाये । (व्यवधान)
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): अध्यक्ष महोदय, प्रतिपक्ष के नेता महोदय को बोलने नहीं देते । (व्यवधान) राजाखेडा से आने वाले माननीय सदस्य.... (व्यवधान)
श्री सी. डी. देवल (रायपुर): आप सबको निकालने का प्रस्ताव ले आओ महावीर जी। सारे प्रतिपक्ष को निकालने का प्रस्ताव दे दो । (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: सदन की कार्यवाही 12.15 तक स्थगित की जाती है ।
(तदनन्तर
सदन की कार्यवाही
11.41 बजे 12.15 तक के लिये
स्थगित हुई)
ans/usc 12:10 02/03/2007 1h
(12:15 बजे)
(पुन: समवेत
होने पर)
(श्रीमती
सुमित्रा सिंह,अध्यक्ष,
पदासीन)
श्री अध्यक्ष: मैं पुन: चाहूंगी कि किसी तरीके से यह सदन चले। मैं नेता प्रतिपक्ष से यह कहना चाहूंगी कि काँग्रेसी पार्टी ने, काँग्रेसी विधायक दल ने शोकाभिव्यक्ति के समय, जैसा भी यहां प्रदर्शन हुआ उसके लिए यदि वह यह समझते हैं कि यह उनके लिए बहुत ठीक था और अनुचित नहीं था तो वह जाने, उसके लिए तो खेद प्रकट मैं कर दूंगी, वह चार सदस्य जिन्होंने यहां पर आकर जो कुछ प्रदर्शन महामहिम राज्यपाल महोदय के सामने किया, वह क्षमा मांग ले, खेद प्रकट करें तो मैं समझती हूं कि सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चल सकेगी। मेरी इस बात पर यदि आप सहमत है तो सदन की कार्यवाही ठीक तरीके से चलाई जाए क्योंकि मैंने विपक्ष को बुलाया था, विपक्ष ने फिर भी आने से नहीं किया। अंत में मैं यही सूझाव दे रही हूं, मैं यह आप पर छोड़ती हूं कि आप उसे उचित समझते हैं तो खेद मैं प्रकट कर देती हूं1 आसन प्रकट कर देगा। जो कुछ हुआ, सदन के रहते यदि इस तरह की कार्यवाही होती कि शोकाभिव्यक्ति के समय यदि कोई भी करता तो मैं उन पर छोडती हूं, उचित समझते हैं तो ठीक है, अनुचित समझते हैं तो खेद प्रकट कर दें और नहीं तो मैं खेद प्रकट कर देती हूं। बाकी के चारों माननीय सदस्य, जिन्होंने भी इस तरीके से किया वह खेद प्रकट करें और सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलने दें। मैं अपनी तरफ से सुझाव रख रही हूं।(व्यवधान) आसन पाँव पर है और आप इतना भी सब्र नहीं कर सकते कि बैठने दें आसन को, तभी खडे हो।(व्यवधान)
श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी):यदि आप खेद प्रकट कर सकती है तो उन चार सदस्यों के लिए खेद प्रकट कर मामला समाप्त करके जन समस्याओं को सुलझाने का प्रयास.....(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: मैंने कहा आप उचित समझे तो। मैंने फिर कहा है, यदि अनुचित समझते हो तो खेद प्रकट कर देना और उचित समझते हो तो मैं खेद प्रकट कर दूंगी कि जो कुछ हुआ है ठीक नहीं हुआ। मैं एक निवेदन कर रही हूं.....(व्यवधान)
श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): यही बात उनके लिए आप....
श्री अध्यक्ष: फिर वही बात कर रहे हो....(व्यवधान)
श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): उचित समझते हैं तो खेद प्रकट कर देंगे नहीं तो आप खेद प्रकट कर देना।
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): माननीय अध्यक्ष महोदय, उनके बारे में स्वंय प्रतिपक्ष के नेता महोदय ने और प्रतिपक्ष के माननीय सदस्यों ने यह कहा है कि उनका आचरण उचित नहीं था।
श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): किसने कहा...(व्यवधान)
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): आपने नहीं कहा?
श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): ऐसा कुछ नहीं है, आप दो मिनिट बैठिये।
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): नहीं कहा ना...(व्यवधान) उनका आचरण उचित है?
श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): एक मिनिट बैठिये, मैं बताता हूं।
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): उनका आचरण उचित है आप यही कहना चाहते हैं ना।(व्यवधान)
श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): मैं अर्ज करता हूं, आप एक मिनिट बैठिये। माननीय अध्यक्ष महोदय, कल सदन जल्दी स्थगित हो गया, जो भी हमारे बीच में डिस्प्यूट हुआ, मैं उसके बाद टीवी देख रहा था, संसद की कार्यवाही मैंने देखी और संसद के नियम, कुछ विधानसभाओं के, आपने भी देखा और हमने भी देखा है1 जिस तरह का वहां व्यवहार होता है, यहां तो केवल अपनी बात कहने के लिए, यदि गवर्नर सहाब दो मिनिट कुर्सी पर बिराज जाती और अमराराम जी की भी बात सुन लेती तो मेरा जहां तक ख्याल है(व्यवधान) आप मेरी बात तो सुनिये, आपको ही अधिकार है क्या बोलने का?
श्री टीकम चन्द कान्त (सिवाना): अध्यक्ष महोदय, फिर गवर्नर बैठ जाती, गवर्नर उठ जाती यह करते नहीं, कहे(व्यवधान) यह उसका उपयोग नहीं करें....
श्री अध्यक्ष: महामहिम की और अमराराम जी की एक ही हैसियत है संविधान में? (व्यवधान)
श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): सुनिये, वही अर्ज कर रहा हूं। मेरी सुनेंगे?
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): आप तो कहते हैं गवर्नर बैठ जाती1(व्यवधान
दुर्गा/त्रिपाठी 020307 1220 1j
इनको सम्बोधन का तरीका भी याद नहीं है। ये कितने गम्भीर हैं।
श्री सी. डी. देवल (रायपुर): अध्यक्ष महोदय, अमरारामजी तो गलती नहीं कर रहे थे, आपने तो उनको आदेश देकर उनके अभिभाषण का अंतिम पैरा पढ़वा दिया। आपने उनको आदेश देकर, उनके अभिभाषण का अंतिम पैरा पढ़ा दिया। (व्यवधान) अमरारामजी तो हाथ जोड़कर निवेदन कर रहे थे। (व्यवधान)
श्री टीकम चन्द कान्त (सिवाना): यह बारबार, अध्यक्षजी की गलती है, बारबार आपकी भूल है, यह प्रकट करना कहां की बात है, कौनसा तरीका है बहस का। (व्यवधान)
श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): मैं आसन की कोई गलती न तो निकाल रहा हूं, न मेरी यह भावना है। मैं अपनी दो मिनट में व्यक्तिगत बात कहना चाहता हूं। मैं लम्बा समय नहीं लेना चाहता हूं। (व्यवधान)
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): क्या कहना चाहते हो? (व्यवधान)
श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): आप भी सीनियर होंगे, लेकिन आपसे सीनियर कुर्सी पर विराजमान हैं। और यह तो दुर्भाग्य है राजस्थान का कि इनको यहां होना चाहिए, वह वहां हैं। इनको यहां नहीं होना चाहिए था। (व्रूवधान)
श्री दाताराम गुर्जर (खेतड़ी): यह आपके सोचने की बात नहीं है। (व्यवधान)
श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): मेरी बात सुन लीजिये आप। (व्यवधान)
श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): यह दुर्भाग्य है, यह दुर्भाग्य कैसे हुआ? आप चैअर पर विराज रही हैं, दुर्भाग्य है क्या? (व्यवधान) यह दुर्भाग्य कैसे बता रहे हैं।
श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): आप बात तो सुनिये। किसान की बेटी होनी चाहिए वहां। (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: अब आप लोग स्थान ग्रहण करें। (व्यवधान)
श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): यह आपका दुर्भाग्य है कि आप उप-नेता हो। अध्यक्ष के लिये यह सम्बोधन करने का तरीका नहीं है।
श्री अध्यक्ष: सुमेरपुर से आने वाले माननीय सदस्य, आप स्थान ग्रहण करें।
श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): यह तो मेरा सौभाग्य है कि मैं कांग्रेस पार्टी का सदस्य हूं।
श्री अध्यक्ष: उप नेता महोदय, 1966 का जो उद्धरण आपने दिया है, मैं पूरी प्रोसीडिंग उसकी आपको मंगा करके और पूरी प्रोसीडिंग से अवगत कराऊंगी कि कैसे क्या हुआ था। इस कल के केस को आप उसके साथ इक्वेट नहीं करें। क्योंकि वह आपको पता नहीं है, वह अलग बात थी। सदन ने खेद इसलिये प्रकट किया था कि उनको निकाला था गवर्नर ने, महामहिम ने निकाला था। इसलिये महामहिम के निकालने पर माफी मांगने पर 6-7 दिन बाद, पूरा डिस्कशन हुआ था इन बातों पर, विचार-विमर्श के बाद सब कुछ हुआ और तब सदन ने खेद प्रकट किया था। इसलिये आप कल के इंसिडेंस को उसके साथ इक्वेट नहीं करें।
श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): नहीं, माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपसे यह अर्ज कर रहा हूं कि यदि हम ज्यादा पढ़े लिखे होते और फर्स्ट डिवीजन होते तो आज आपके चीफ सेक्रेटरी होते। हम विधायक हैं, भगवान की कृपा है, मैं आपको कानून की बात नहीं बता रहा हूं। (व्यवधान)
श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्य सचेतक): आ