skp/akt/ 1100/1a
अशोधित
प्रति/
प्रकाशनार्थ
नहीं
राजस्थान
विधान सभा की
कार्यवाही का
वृत्तान्त
|
अंक 5
बारहवीं
विधान सभा के
पांचवें
सत्र का तृतीय
दिवस संख्या 3 |
गुरुवार,
02
मार्च, 2006
राजस्थान
विधान सभा की
बैठक 1100 बजे
विधान सभा
भवन,जयपुर में
प्रारम्भ
हुई।
(श्रीमती
सुमित्रा
सिंह, अध्यक्ष,
पदासीन)
तारांकित
प्रश्नोत्तर
श्री
रामनारायण
चौधरी (नेता,
प्रतिपक्ष):
आपकी अनुकम्पा
बनी रहनी
चाहिए।
श्री अध्यक्ष:
आपकी
पार्टी की
अनुकम्पा
बनी रहनी
चाहिए ताकि
काम ठीक हो
सके। श्री
जीतराम।
मोबाइल सर्जिकल
यूनिट हेतु
निर्धारित
लक्ष्य
20. श्री जीतराम
(मालपुरा): क्या
चिकित्सा
एवं स्वास्थ्य
मंत्री यह
बताने की कृपा
करेंगे:-
क्या
यह सही है कि राज्य
में मोबाइल
सर्जिकल
यूनिट का
संचालन किया
जा रहा है ? यदि
हां, तो इस
यूनिट द्वारा
गत दो वर्षों
में कहां-कहां
कैम्प लगाये
गये एवं इसकी
क्या उपलब्धियां
रहीं तथा इनका
वार्षिक
लक्ष्य क्या
है ?
चिकित्सा
एवं स्वास्थ्य
मंत्री (डा.
दिगम्बर
सिंह): 1. जी हां।
राज्य में
तीन इकाइयां
क्रमश: जयपुर,
जोधपुर, उदयपुर
में संचालित
हैं।
2.
कैम्पों की
सूची संलग्न
है।3. वार्षिक
लक्ष्य
प्रत्येक
इकाई को 22 से 24
शिविर आयोजित
करने का है।4.
उपलब्धियों
की सूची संलग्न
है।
श्री
जीतराम:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
माननीय
मंत्री महोदय
से पूछना
चाहता हूं कि
क्या
दूर-दराज के
क्षेत्रों
में
विशेषज्ञों
की सुविधा,
आपरेशन की जटिलताओं
को दूर करने
के लिए कैम्प
के रूप में
प्रदान की
जाती है ?
दूसरा, टोंक
जिले के
मालपुरा
निर्वाचन
क्षेत्र में
दो वर्षों में
कोई कैम्प
नहीं लगाये क्या
? क्या सरकार
निकट भविष्य
में कोई कैम्प
लगाना चाहती
है ?
डा. दिगम्बर
सिंह: माननीय
सदस्य को मैं
यह जानकारी
देना चाहता
हूं कि हमारी
मोबाइल
सर्जिकल
यूनिट के कैम्प
तो राजस्थान
के दूर-दराज
के इलाकों में
लगते रहते
हैं। टोंक में
अगर दो वर्ष
में कोई कैम्प
नहीं लगा तो
बहुत ही
नजदीकी समय
में आपके यहां
एक कैम्प
आयोजित करवा
दिया जाएगा।
श्री अध्यक्ष:
डाक्टर चन्द्रशेखर।
डा. चन्द्रशेखर
बैद (तारानगर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मोबाइल
सर्जिकल
यूनिट जिन
उद्देश्यों
के लिए बनाई
गई थी और जो
इसके एम्स और
आब्जेक्टिव
रखे गये थे वो
ये रखे गये थे
कि दूर-दराज
के इलाकों
में, माननीय
मुख्य
मंत्री जी
कहती हैं कि
हमारा बहुत
बड़ा प्रदेश
है, सबसे बड़ा
भू-भाग है ता
दूर दराज के
इलाके के अन्दर
यह सुविधाएं
उपलब्ध
कराने के लिए
मोबाइल
सर्जिकल
यूनिट का गठन
किया गया था।
पापुलेशन बढ़
गई दो साल के
अन्दर,
बीमारियां
बढ़ गईं,
लोगों की
डिमांड बढ़ गईं
पर आपके
मोबाइल
सर्जिकल का
बजट जितना
पहले था उतना
ही अब है। न
आपके व्हीकल्स
चैंज हुए, एम्बुलेंस
ऐसी है कि न तो
उसके अन्दर
उपकरण हैं और
एक जगह से
दूसरी जगह
मरीज को ले
जाने में तीन
बार रुकती है
तो क्या आप
इसके बजट पर
पुनर्विचार
करके इस बजट
को बढ़ायेंगे
? और दूर-दराज
के इलाकों में
इस तरह के ज्यादा
कैम्प लगाने
की आपकी कोई
योजना है ? दूसरा,
इसकी प्लानिंग
इतनी
डिफेक्टिव है
कि आपने जो
सूची दी है उस
सूची के अन्दर
जो
मोतियाबिन्द
के आपरेशन
हैं, हजारों
की संख्या
में आपने
मोतियाबिंद
के आपरेशन
किये और सरकार
का पैसा खर्च
किया। आपको
मोतियाबिंद
के आपरेशन मोबाइल
सर्जिकल कैम्प
से करने की
जरूरत क्या
है जब नेशनल
ब्लाइंडनैस
कंट्रोल
प्रोग्राम है
जिसमें केन्द्र
सरकार
शत-प्रतिशत
पैसा आपको
देती है तो आप
इसमें से पैसा
उठाकर के क्यों
करना चाहते
हैं और यदि
मोबाइल
सर्जिकल कैम्प
से उसका
आपरेशन करते
हैं तो वह धन
आप केन्द्र
सरकार से क्यों
नहीं मांगते ? दूसरा,
बजट निरन्तर
गिरता जा रहा
है,
कर्मचारियों
की संख्या
निरन्तर
गिरती जा रही
है, कैम्प की
संख्या
गिरती जा रही
है और आपरेशन
की लिस्ट
देखें तो ऐसे
छोटे-छोटे
आपरेशन हैं
जिनको वहां
करने की जरूरत
ही नहीं है।
कोई बड़े
आपरेशन गरीब
के झौपड़े में
जाकर करें तब
तो फायदा हो
और इतनी एड आ
रही है, वर्ल्ड
बैंक की एड आ
रही है, एशियन
डवलपमेंट
बैंक की एड आ
रही है....
श्री अध्यक्ष:
प्रश्न
पूछें, भाषण
नहीं।
डा. चन्द्रशेखर
बैद: उस एड से
पिछले दो साल
में एक भी पैसा
मोबाइल
सर्जिकल कैम्प
में नहीं
बढ़ाया गया।
डा. दिगम्बर
सिंह: माननीय
अध्यक्ष
महोदय, माननीय
सदस्य का यह
कहना कि
मोबाइल
सर्जिकल
यूनिट जिस उद्देश्य
क साथ शुरू की
गई थी, यह बात
सही है कि
इसका उद्देश्य
दूर-दराज के
गांवों में
जहां पर
चिकित्सा
सुविधाएं
उपलब्ध नहीं
होती हैं वहां
पर इंटिरियर
में जाकर के
कैम्प
आर्गेनाइज
करना और वहां
उस क्षेत्र की
जनता का लाभ
देने का ही है
और उसी
उद्देश्य से
राजस्थान के
कोने-कोने में
ये सर्जिकल
यूनिट कैम्प्स
आर्गेनाइज कर
रही हैं। मैं
माननीय सदस्य
को जानकारी
देना चाहूंगा
कि हमारी
सरकार ने तो
इनके अलावा
संजीवनी कैम्प्स
के माध्यम से
ग्रामीण जनता
को पूरी
सर्जिकल
प्राब्लम्स
की राहत दी
है। इनके
अलावा 150 से ज्यादा
हमने संजीवनी
कैम्प्स भी
लगाये हैं
जिसमें हमने
ग्रामीण जनता
को सीधा-सीधा
इसका लाभ दिया
है। इसमें बजट
प्रावधान को
निश्चित रूप
से इस बार जो
हमारी
सर्जिकल यूनिट्स
हैं इनको इम्प्रूव
करने का सरकार
का मानस है और
निश्चित रूप
से मोबाइल
सर्जिकल
यूनिट के
जहां-जहां भी
कैम्प
आर्गेनाइज
होते हैं, आप
कहते हो कि
बहुत छोटे-छोटे
आपरेशन किये
गये, अगर आप
लिस्ट
देखेंगे तो
मेरे खयाल से
बहुत मैजर
आपरेशन इस
मोबाइल
सर्जिकल यूनिट
द्वारा किये
जा रहे हैं, वो
छोटे आपरेशन
नहीं हैं जो
गरीब जनता के
लिए बहुत
हितकारी रहते हैं।
डा. चन्द्रशेखर
बैद: एक पिछली
बार यह घोषणा
की गई थी बजट
के अन्दर की
टेली-मेडिसन
योजना से भी
इसको जोड़ा
जाएगा।
प्रतिवेदन
में भी यह
लिखा है कि
टेली मेडिसन
से जोड़ा
जाएगा। इसरो
ने पूरी
सुविधा
प्रदान करने
की अनुमति
प्रदान कर दी
है। तो सबसे
इम्पोर्टेंट
काम जब रूरल
हैल्थ
प्रोजेक्ट
अभी चल रहा है
तो क्यों
नहीं इस
मोबाइल
सर्जिकल कैम्प
को
टेलिमेडिसन से
जोड़ा जाता
जिससे दूर-दराज
के गरीब आदमी
को
टेलिमेडिसन
से बड़े-बड़े
विशेषज्ञ जो
बड़े-बड़े
इंस्टीट्यूशन
में बैठे हैं
उनका लाभ
प्राप्त हो
सके।
डा. दिगम्बर
सिंह: माननीय
अध्यक्ष
महोदय,
टेलिमेडिसन
परियोजना में
भी हमारी
मोबाइल
यूनिट्स हम तैयार
कर रहे हैं
मोबाइल वैन्स
जो इससे
सुसज्जित
होंगी, वो भी
उसमें हैं।
टेलिमेडिसन
परियोजना का
भी शुभारम्भ
किया गया है,
पूरे जिले इक्यूप्ड
होने हैं, इस
महीने में
सारे जिलों
में इसकी कनेक्टिविटी
हो जाएगी तो
मोबाइल
सर्जिकल यूनिट
को भी हम उससे
कनेक्टेड
रखेंगे, इसको
अलग नहीं
छोड़ेंगे, मैं
आपको यह आश्वासन
देना चाहता
हूं।
श्री अध्यक्ष:
एक्सपर्ट ने
पूछ लिये सब
प्रश्न, अब
आप क्या
पूछेंगे ?
श्री
संयम लोढ़ा
(सिरोही): मैं
साधारण पूछ
लेता हूं।
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से माननीय
मंत्री जी से
निवेदन करना
चाहता हूं कि
आपन अभी जिक्र
किया कि संजीवनी
और दूसरी अनेक
योजनाओं से आप
दूर-दराज में
चिकित्सा
सुविधा उपलब्ध
कराने का काम
करते हैं। आप 19
तारीख को
सिरोही जिले
के सरूपगंज के
आदिवासी
क्षेत्र मे
गये थे और
वहां लोग आपसे
मिले। एक
आदिवासी के
बच्चे का दिल
बाहर निकला
हुआ था और वह
सरूपगंज के अस्पताल
में भर्ती था
और लोगों ने
कहा कि आप
उसका इलाज
करवाइये और
आपने कहा कि
हम कुछ नहीं
कर सकते। आप 19
तारीख की रात
को वहां से
रवाना हो गये
और 20 को वह बच्चा
मर गया। क्या
इलाज उपलब्ध
कराते हो आप ?
डा. दिगम्बर
सिंह: माननीय
अध्यक्ष
महोदय, यह
सरासर गलत इल्जाम
है।
श्री
संयम लोढ़ा:
पाकिस्तान
के बच्चे को
बंगलौर में
लाकर के उसके
दिल का आपरेशन
कराया था और
आपके सामने
लाकर लोगों ने
खड़ा कर दिया
और आप उसका
इलाज नहीं करा
पाये।
डा. दिगम्बर
सिंह: माननीय
अध्यक्ष
महोदय, मै
मिनिस्टर
होने के अलावा
एक डाक्टर भी
हूं और मैं
किसी भी
पेशेंट के लिए
यह बात कह
नहीं सकता कि
मरीज को मैं
देखने नहीं जा
रहा... (व्यवधान)
.... यह बिल्कुल
बेकार बात है।
श्री
संयम लोढ़ा:
आप बताइये कि 19
तारीख को आप
सरूपगंज के
दासा इलाके
में हास्पिटल
का उद्घाटन
करने गये थे
या नहीं गये
थे ?
डा. दिगम्बर
सिंह: मैं गया
था।
श्री
संयम लोढ़ा:
आपने दो
समारोह में
उद्घाटन किया
पर उस गरीब के
बच्चे के लिए
आपके मन में
कोई पीड़ा
नहीं हुई और आपके
जाने के बाद 20
तारीख को उसी
हास्पिटल में
उसने दम तोड़
दिया.... (व्यवधान)
डा. दिगम्बर
सिंह: .....यह बिल्कुल
गलत आरोप है... (व्यवधान)
इसमें कोई सच्चाई
नहीं है।
श्री
संयम लोढ़ा: ....उस
गरीब आदमी के
बच्चे को दम
तोड़ना पड़ा
और आपकी सरकार
ने कुछ नहीं
किया उसके लिए
.... (व्यवधान)
आपकी सरकार ने
कुछ नहीं किया
उस बच्चे के
लिए... (व्यवधान)
श्री
समाराम
गरासिया (पिण्डवाड़ा):
वहां का स्थानीय
विधायक मैं
हूं, ऐसा कभी
नहीं हुआ। (व्यवधान)
आप क्या
जानें... (व्यवधान)
बिना तथ्यों
के आधार पर
ऐसे आरोप.... (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
एक मिनट आप
मंत्रीजी का
जवाब तो
सुनें। सिरोही
से आने वाले
माननीय सदस्य,
आप जवाब तो
सुनिये उनका।(व्यवधान)
श्री
संयम लोढ़ा:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, इससे
बड़ी
संवेदनहीनता
क्या... (व्यवधान)
श्री
समाराम
गरासिया: मंत्री
महोदय ने यह
कभी नहीं
कहा।(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
सिरोही से आने
वाले माननीय
सदस्य। (व्यवधान)
श्री
संयम लोढ़ा:
गरीब के बच्चे
की जान बचाने
के लिए कहा
जाए और वह कह
दें कि मैं कुछ
नहीं कर सकता।
(व्यवधान)
श्री
समाराम
गरासिया: आपने
आज दिन तक
गरीब को कभी पूछा
भी है ? हमारी
सरकार ने पूरे
अस्पताल की
व्यवस्था
सही प्रकार से
अच्छी चल रही
है और डाक्टरों
की जाकरूकता
में कहीं कमी
नहीं है।
डा. दिगम्बर
सिंह: मैं 19
तारीख को
सिरोही जिले
के इलाके में
गया था यह बात
सही है। वहां
पर एक सब सैण्टर
की एक बहुत
अच्छी
बिल्डिंग बनी
तो उसका
उद्घाटन
मैंने किया था।
यह बात सही
है। पिछली बार
एक पी एच सी नई
खोली थी उसका
उद्घाटन
मैंने किया था
यह बात सही है
और वहां की
ग्रामीण जनता
ने जिस कदर स्वागत
सत्कार किया
उससे जलकर,
भुनकर यह बात
यहां पर की जा
रही है। (व्यवधान)
श्री
संयम लोढ़ा:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मेरा
तो वह क्षेत्र
भी नहीं पड़ता
है और आपके स्वागत
से हम ईर्ष्या
करने वाले
नहीं हैं,
आपके फर्ज की याद
दिला रहे हैं।
एक तरु पाकिस्तान
के बच्चे को
लाकर के
बंगलौर में
ऑपरेशन
करवाया था, आप
बहुत अच्छे
होते, आप कहते
कि इस बच्चे
को मेरे साथ
गाड़ी में
भेजिये, मैं
मुख्य
मंत्री जी से
कहकर इसका
जयपुर में
इलाज कराऊंगा।
इससे बड़ी
लानत नहीं है
और राजस्थान
पत्रिका ने
आपके
उद्गारों को
लिखा है, छापा
है उसके अन्दर।
इससे ज्यादा
शर्म की बात
नहीं हो सकती।
(व्यवधान)
श्री
जोगाराम पटेल
(लूनी): यह बिल्कुल
बेबुनियाद
आरोप हैं,
राजनैतिक
आरोप हैं। (व्यवधान)
श्री
संयम लोढ़ा: 20
तारीख को नहीं
मरा है
मंत्रीजी, यह
आप बता दें,
सदन में कह
दें आप, या तो
मैं इस्तीफा
दे दूंगा,
नहीं तो आप दे
देना। (व्यवधान)
श्री
जोगाराम पटेल:
इस्तीफा तो
आपको झूठ
बोलने के लिए
देना ही
पड़ेगा। झूठ
बोलने के लिए
इस्तीफा तो
आपको देना ही
पड़ेगा। (व्यवधान)
Vkj/akt/1110/1b
डा.
दिगम्बर
सिंह: मेरे से
कोई भी व्यक्ति
नहीं मिला और
वहां मैं...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष: स्थान
ग्रहण करें।
मंत्रीजी बोल
रहे हैं।
श्री
समाराम
गरासिया: अस्पताल
में ऐसी कोई
घटना नहीं हुई
और प्रशासन की
कोई भी
लापरवाही से
आज दिन तक कोई
भी बच्चा
नहीं मरा
हमारे अस्पताल
में। अंधविश्वासों
को लेकर चलते
हैं लोग, इस
तरीके से यह
मौतें हुई
हैं। अखबारों
में जो
लीपापोती हुई
है, वह बिलकुल
सरासर गलत है।
यह माननीय
विधायकजी, जो
पूर्व की
सरकार में
बैठे हुए थे
तो इस तरह की
जानकारी और
दु:ख को व्यक्
नहीं किया और
ये भावी
सोमशर्मा की
तरह एम.पी. के
चुनाव की बाजी
लेते हैं। (व्यवधान)
श्री
संयम लोढ़ा:
यह किशनाराम
भैराराम
गरासिया का बच्चा,
रूपना सरकारी
खेड़ा का बच्चा
स्वरूपगंज
के अस्पताल
में भर्ती था,
उसका दिल बाहर
निकला हुआ था।
19 तारीख को
मंत्रीजी
वहां थे और 20
तारीख को वह
बच्चा मरा
है, अस्पताल
के अन्दर मरा
है। (व्यवधान)
श्री
समाराम
गरासिया:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, यह
बिलकुल सरासर
गलत है और
बिलकुल गलत
है, ऐसी कहीं
भी अस्पताल
में मौत नहीं
हुई और यह 19
तारीख की है
या 20 तारीख की
है, ऐसा नहीं
है। जिस तरह
से माननीय विधायक
कह रहे हैं, यह
सरासर गलत है
और ये कह रहे
हैं, मैं
चैलेंज देता
हूं तो आप इस्तीफा
लिखकर दो या
मैं लिखकर
देता हूं कि
इस तरह की मौत
हुई है अस्पताल
के अन्दर, क्या
बात करते हो
आप? हां, मैं
बैठा हूं।
श्री
ओम बिरला:
वहां के हमारे
माननीय
विधायक कह रहे
हैं, या तो आप
इस्तीफा दो
और नहीं तो ये
दें...(व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्यगण,
माननीय सदस्यगण,
लूणी से आने
वाले माननीय
सदस्य।
श्री
संयम लोढ़ा:
अभी लिखकर
देता हूं, चलो
आप भी दो। (व्यवधान)
श्री
समाराम
गरासिया:
...आपके
क्षेत्र की
जनता रो रही
है, मर रही है।
आपने कभी उनको
देखा है, उनका
दु:ख है क्या
आपको? (व्यवधान)
आप जब पूर्व
की सरकार में
बैठे हुए थे तो
जनता रो रही
थी, अखबारों
के अन्दर
लीपापोती कर
रहे थे तब...(व्यवधान)
श्री
रामप्रताप
कासनिया: अध्यक्ष
महोदय, अगर इस
तरह से इस्तीफा
देने लग गये
तो सरकार पर
अनावश्यक
रूप से चुनाव
का खर्चा बढ़
जायेगा।
श्री
संयम लोढ़ा: लो,
मैं लिखकर
देता हूं इस्तीफा।
(व्यवधान)
श्री
समाराम
गरासिया: लोग
रोज मर रहे
हैं शिवगंज में,
कभी उनके बारे
में दु:ख दर्द
को नहीं देखा
और यहां कह
रहे हैं कि हम
पूरे क्षेत्र
में घूम लिये
और पूरे जिले
को कवर कर
लिया है। (व्यवधान)
श्री
संयम लोढ़ा:
अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपसे निवेदन
करना चाहता
हूं कि आप
सरकार को इस
बात का
निर्देश दें
कि वह संवेदनशीलता
दिखायें, मैं
आपसे भी
निवेदन करना चाहता
हूं।
श्री
जोगाराम पटेल:
...या तो आप इस्तीफा
दो। आपने सदन
में कहा है, वह
आप पहले इस्तीफा
दो, पहले इस्तीफा
दो, बाद में
बात करो। (व्यवधान)
श्री
ओम बिरला: इस्तीफा
दो, बोलो, अभी
तैयार हो
जायेगी। आप
इस्तीफा दो,
इस्तीफा
लिखकर दो। (व्यवधान)
खाली कागज
नहीं, खाली
कागज नहीं,
इस्तीफा
लिखकर दो।
श्री
अध्यक्ष:
माननीय सदस्यगण,
माननीय सदस्यगण,
माननीय सदस्यगण।
(व्यवधान)
माननीय सदस्यगण।
(व्यवधान)
श्री
समाराम
गरासिया: कागज
पर इस्तीफा
नहीं माना
जाता है अध्यक्ष
महोदय, अगर
माननीय सदस्य
इस्तीफा
देना चाहते
हैं...(व्यवधान)
श्री
रामप्रताप
कासनिया: अध्यक्ष
महोदय, हमारा
दल इससे सहमत
नहीं है इस्तीफे
से।
श्री
अध्यक्ष: कृपया
स्थान ग्रहण
करें, आप
बिराजिये।
मैं आपको मौका
दूंगी, आप
बैठो तो सही।
(व्यवधान)
श्री
ओम बिरला:
फैसला करो।
प्रश्नकाल
में आरोप
लगाना छोड़ो।
श्री
अध्यक्ष: एक
सैकण्ड, मुझे
कहने दीजिये
ना। सत्ता
पक्ष के
माननीय सदस्यों
से मुझे यह कहना
है कि आपके
मंत्रीजी
सक्षम हैं
जवाब देने में
और यह कोई
कायदा नहीं है
कि जब कोई
एलीगेशन
लगाये और उसके
बाद आप बीच
में खड़े होकर
सवाल जवाब
करने लग
जायें, यह
तरीका बिलकुल
गलत है लेकिन
सिरोही से आने
वाले माननीय
सदस्य से मैं
एक निवेदन
करना चाहती
हूं कि दिल जब
बाहर था तो वह
पैदा ही दिल
बाहर लेकर हुआ
होगा और ऐसे
छोटे बच्चे
को बचाना बहुत
मुश्किल होता
है, वह डाक्टर अपनी
डाक्टरी कर
भी लेता तो भी
बहुत मुश्किल
था इसलिए आप इस
बात का आक्षेप
नहीं लगायें
कि वह खतम हो
गया लेकिन
मंत्रीजी ने
नहीं देखा या
नहीं बात सुनी
तो वह अलग बात
है। बाकी यह
आक्षेप लगाना
क्योंकि जो
एबनोर्मल इस
तरीके से पैदा
हुआ उसको तो
बचाना बहुत
मुश्किल काम
था। लेकिन आप
लोग बीच में
उत्तेजित
होकर बीच में
बोलें, टोकने
लग जाते हैं तो
यह उचित नहीं
है।
डा.
दिगम्बर
सिंह: अध्यक्ष
महोदय, मुझे
लगता है कि माननीय
सदस्य की आदत
में आ गया है
गलत आरोप
लगाना, मिथ्या
बातें करना और
मैं खुद कहता
हूं कि मंत्री
के अलावा एक
डाक्टर का दिल
भी मेरे अन्दर
है। मेरे ऐसे
कोई पेशेंट को
छोड़कर जाने
का कोई प्रश्न
ही नहीं होता
था। मैं वहां
गया था सिरोही
में, मेरे खुद
बहुत जल्दी
के अन्य
कार्यक्रम थे
परन्तु यह
बात सही है कि
वहां के
आदिवासी
इलाके के लोगों
ने जितना स्वागत-सत्कार
किया,
ऐतिहासिक
कार्यक्रम था
क्योंकि
हमने, इस
सरकार ने वहां
के
इंटीरियर्स में
जाकर नये अस्पताल
खोले जिसकी
बहुत ज्यादा
खुशी उन लोगों
के अन्दर थी
और मेरे से
कोई भी
प्रतिनिधि
मण्डल, कोई
भी व्यक्ति
इस बात को
लेकर नहीं
मिला कि इस
तरह का कोई
बच्चा एडमिट
है। मैं जानता
हूं कि यह
कंजेनिटल एनोमली
है, कोई इसका
इलाज हो नहीं
सकता था। अगर
मुझे यह सूचना
मिलती तो हो
सकता है मैं
वहां से उसको
जयपुर शिफ्ट
कराने की या
कोई व्यवस्था
करता परन्तु
मेरे पास ऐसा
कोई व्यक्ति
नहीं आया। यह
बिलकुल
निराधार बात
आप करते हैं।
श्री
संयम लोढ़ा: अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपसे निवेदन
करना चाहता
हूं, आप एक जांच
समिति गठित कर
दीजिये। आप एक
जांच समिति गठित
कर दीजिये। वह
जांच समिति
बीजेपी या दूसरे
लोगों की गठित
कर दीजिये।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
इन्होंने जो
आरोप लगाया है,
सदन में जो
घोषणा की है
वह...(व्यवधान)
श्री
संयम लोढ़ा:
वह अपने आप
जांच करके बता
देंगे कि
मंत्रीजी ने
कहा कि नहीं
कहा और आप
कहें तो मैं
अभी फैक्स
मंगवाता हूं
राजस्थान
पत्रिका में
क्या छपा है,
अभी मंगवाता
हूं, एक घंटे
के अन्दर
मंगवाता हूं
मैं।
श्री
अध्यक्ष: यह
बिलकुल गलत
बात है, यह तो
गलत तरीका है आपका।
डा.
दिगम्बर
सिंह: माननीय
अध्यक्ष
महोदय, आप
वहां के
विधायक हैं।
अगर आप पहले
से जानते थे
तो आपको पहले
बात करनी
चाहिए थी।(व्यवधान)
और मैं नहीं
करता तो यह
मेरी जिम्मेदारी
थी। आप केवल
अखबारों के
आधार पर बात
कर रहे हैं।
श्री
संयम लोढ़ा:
मैं सिरोही का
विधायक हूं,
पिंडवाड़ा का
नहीं हूं मैं
और यह
पिंडवाड़ा
एरिये की बात
है।
श्री
समाराम
गरासिया: हां
हां, मैं वहां
का विधायक हूं,
मुझे जानकारी
है, कमेटी
गठित की है और
मैं सहमत हूं।
क्या बात
करते हो? आप
अपने क्षेत्र
का ध्यान
रखें।
श्री
अध्यक्ष: आप
बीच में नहीं
बोले।
डा.
दिगम्बर
सिंह: आपने
वहां का जन
प्रतिनिधि
होने के नाते
कुछ भी काम
नहीं किया है,
आपने वहां
किया क्या? उस
गरीब मरीज के
लिए बता
दीजिये ना कि
आपने क्या
किया?
श्री
संयम लोढ़ा:
Jkj/akt/1120/1c
श्री
सी.पी.जोशी: अध्यक्ष
महोदय, माननीय
मंत्रीजी
वहां गये, स्वागत
हुआ, मंत्रीजी
अच्छा काम कर
रहे हैं, उसका
कोई प्रश्न
नहीं है। माननीय
सदस्य के मन
में जो पीड़ा
है....
श्री
महावीर
प्रसाद जैन: काहे की
पीड़ा है, कोई
पीड़ा नहीं
है।
श्री
अध्यक्ष: बीच में
मत बोलो।
श्री
सी.पी.जोशी: उस
पी.एच.सी. का
उदघाटन करने गये
अध्यक्ष
महोदय, तो उस
पी.एच.सी. के
डाक्टर का
कर्तव्य
होता कि अच्छा
था कि मंत्री
के नोटिस में
यह लाते कि इस
तरह का पेशेंट
भरती है।
डा.किरोड़ी
लाल मीणा: यह वहां
के विधायक के
नोटिस में
लाये क्या....
डा.सी.पी.जोशी: विधायक
वहां के नहीं
हैं...(व्यवधान)
श्री
संयम लोढ़ा: मेरा
एरिया नहीं
पड़ता है, मेरा
क्षेत्र नहीं
पड़ता है।
श्री
वासुदेव
देवनानी: मानवता
के नाते नोटिस
में लाते....
श्री
संयम लोढ़ा: मुझे तो
जब बच्चा मरा
तब मालूम पडा
और
मंत्रीजी....(व्यवधान)
श्री
सी.पी.जोशी: यह
वहां के
विधायक नहीं
हैं, आप कहां
बोल रहे हैं। आप वहां
के विधायक
नहीं हैं। क्या
मतलब है...
श्री
महावीर
प्रसाद जैन: नहीं है
तो क्या हो गया।
श्री
सी.पी.जोशी: अध्यक्ष
महोदय, यह क्या
मतलब है। यह कोई
तरीका थोड़े
ही है।
अध्यक्ष
महोदय, आज
मंत्रीजी
वहां पर गये....
डा.दिगम्बर
सिंह:
अध्यक्ष
महोदय, यह
वहां के
विधायक नहीं
हैं।
यह वहां के
विधायक हैं
जिनको पूरी
स्थिति मालूम
है। (व्यवधान)
श्री
संयम लोढ़ा: यह तो
खुद ही आपके
साथ फीते काटते
घूम रहे थे।
(व्यवधान)
श्री
समाराम:
मैं वहां का
विधायक हूं,
आपको वहां की
चिंता करने की
जरूरत नहीं
है, शिवगंज में
क्या हो रहा
है, इनको ध्यान
ही नहीं है।
श्री
अध्यक्ष: माननीय
सदस्यगण। लूणी से
आने वाले
माननीय सदस्य,
आप हर बाद उत्तेजित
हो जाते हैं
और बेवजह खड़े
हो जाते हैं और
कुछ-कुछ कहने
लग जाते हैं,
उचित नहीं है। उचित
नहीं है यह। मैं
आपसे निवेदन
करना चाहूंगी
कि एक साथ
इतने लोग खड़े
होकर के,
माननीय सदस्य
बोलने लग जाते
हैं, न
रिपोर्टर्स
को सुनाई देता
है, कौन क्या
कह रहा है, न
मुझे सुनाई
देता है, इस
तरह से सदन
कैसे चलेगा। एक जो
माननीय सदस्य
खड़े हों,
उनकी बात को
शांतिपूर्वक
सुनकर पूरा
मौका आपके
पास, जवाब दें
आप, क्या
दिक्कत है
इसमें, मेरी
समझ में नहीं
आता।
नेक्स्ट
क्वेश्चन। आपको जो
कुछ लिखकर
देना है, दे
दीजिये और उस
पर माननीय
मंत्रवीजी,
आपको जवाब उस
पर दे देंगे,
दे चुके हैं,
और दे देंगे। नेक्स्ट
क्वेश्चन,
श्री हेमराज
मीणा।
विधान
सभा क्षेत्र
किशनगंज(बारां)
की प्रस्तावित
पेयजल
योजनाएं
21.श्री
हेमराज(किशनगंज): क्या
जन स्वास्थ्य
अभियांत्रिकी
मंत्री यह
बताने की कृपा
करेंगे:-
(1)
विधान सभा
क्षेत्र
किशनगंज में
पेयजल हेतु विगत
2 वर्षों में
पेयजल हेतु
कहां-कहां पर
नवीन योजनाएं
स्वीकृत की
गयी व इस हेतु
कितनी धनराशि
आवंटित की गई?
सूची सदन की
मेज पर रखें।
(2)
क्या यह सही
है कि किशनगंज
शाहबाद में
पेयजल हेतु
नवीन योजनाएं
प्रस्तावित
हैं?
यदि हां, तो
कहां-कहां पर
व नहीं, तो क्यों?
जन स्वास्थ्य
अभियांत्रिकी
मंत्री(श्री
सांवर लाल): (1)
वांछित विवरण
संलग्न
परिशिष्ठ-अ
पर उपलब्ध
है।
(2)
जी हां।
किशनगंज-शाहबाद
क्षेत्र के पेयजल
आवश्यकता
वाले गांवों
में वर्तमान
आवश्यकता
अनुरूप सैध्दांतिक
रूप से स्वीकृत
कार्यों का
विवरण निम्न
प्रकार है-
नये हैण्डपम्प
का निर्माण-
किशनगंज-5,
शाहबाद-5 । कुएं किराये
पर लेना-
किशनगंज-16 । उपरोक्त
के अतिरिक्त
किशनगंज
तहसील के 5 व
शाहबाद तहसील
के 12 गांवों
में आवश्यकता
होने पर पेयजल
परिवहन भी
प्रस्तावित
है। भविष्य
में आवश्यकता
पड़ने पर
योजनाओं के
प्रस्ताव
बनाने पर
विचार किया
जायेगा।
श्री
हेमराज:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके मार्फत
मंत्रीजी से
निवेदन करना
चाहूंगा कि
शायद
मंत्रीजी को
विभाग ने बहुत
गुमराह किया
है।
मेरे
क्षेत्र की कम
से कम तीन
योजनाएं स्वीकृति
के लिए प्रस्तावित
है।
विभाग ने
इनको शायद सही
जानकारी नहीं
दी।
मैं आपको
निवेदन करना चाहूंगा
कि भंवरगढ़ की
98 लाख की पेयजल
योजना आपके
यहां पीएफसी
की मीटिंग के
अंदर प्रस्तावित
है। एक
वर्ष उसको हो
गया, वहां पर
पानी का बहुत
जबरदस्त
क्राइसेस है
और माननीय
मुख्य
मंत्रीजी जब
केलवाणा
पधारी थीं,
उन्होंने भी
उस योजना के
लिए कहा था
लेकिन अभी तक आपके
यहां वह प्रस्ताव
ही नहीं आये। सबसे
बड़ी खेदजनक
बात यह है कि
आपका कैसा
गैरजिम्मेदाराना
जवाब है कि
प्रस्ताव भी
आपके यहां
विचाराधीन
नहीं है। दूसरा
मैं निवेदन
करूंगा आपको,
इसी तरह किशनगंज
के रानी बड़ौद
की एक स्वीकृतशुदा
स्कीम जिसके
अभी भी एक
वर्ष होने के
बाद भी टेंडर
नहीं हुए,
बार-बार टेंडर
उसके कैंसिल
हो रहे हैं और
उसके लिए भी
आप कह रहे हैं
कि उसके लिए
भी स्वीकृति
के लिए प्रस्तावित
नहीं है आपके
यहां योजना। पराणा
की योजना दो
वर्ष पहले से
मंजूर है
लेकिन उसका
कार्य अभी तक
प्रारम्भ
नहीं हुआ। मैं
आपको निवेदन
करना चाहूंगा
कि तीनों
योजनाएं जो
आपके यहां
प्रस्तावित
हैं, क्या आप
इनको स्वीकृत
करने का विचार
रखते हैं या
नहीं, और हां,
तो कब तक?
श्री
सांवर लाल: माननीय
सदस्य, विभाग
ने जो जवाब
दिया, बिलकुल
ठीक दिया। आपने जो
पूछा वह तो
पढ़ लो आप खण्ड
दो।
श्री
हेमराज: पढ़
लिया मैंने।
श्री
सांवर लाल: आपने
कहा कि क्या
यह सही है कि
किशनगंज-शाहबाद
में पेयजल
हेतुं नई
योजनाएं
प्रस्तावित
हैं।
किशनगंज
विधान सभा
क्षेत्र नहीं
लिखा आपने। दो कस्बों
में नाम लिखे
हैं तब मैं क्या
जवाब देता, आप
बताइये। अब जहां
तक आपके
भंवरगढ़ की
योजना है,
भंवरगढ़ की
योजना 87 लाख की
हमारे पास
विचाराधीन है
और होली पर आप
जाओगे तब आपको
स्वीकृति का
आदेश दे
देंगे, जो दो
योजनाएं आपने बताई
है, उनमें जो
भी विलम्ब
होगा, मैं
जानकारी करके
तत्काल
कार्यवाही
करा दूंगा।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़:
हो गया, और क्या
चाहिए, धन्यवाद
दे दो। (व्यवधान)
श्री
अध्यक्ष:
नेक्स्ट क्वेश्चन,
रामकिशोर
मीणा।
डा.श्रीगोपाल
बाहेती: अध्यक्ष
महोदय, मेरा
प्रश्न
है...(व्यवधान)
श्री
सांवर लाल:
अजमेर का आप
अलग से पूछो
ना, थोड़ी-बहुत
तकलीफ तो करो,
अब आप दूसरे
प्रश्न
पूछते हैं और
आप उसमें बीच
में शरीक होना
चाहते हैं।
विधान
सभा क्षेत्र
सिकराय में
महिला
महाविद्यालय
की स्थापना
श्री
रामकिशोर
मीणा(सिकराय): क्या
उच्च शिक्षा
मंत्री यह
बताने की कृपा
करेंगे:-
(1) राज्य
में कितने
उपखण्ड ऐसे
हैं जहां
महाविद्यालय
नहीं है? क्या
सरकार जिन
उपखंडों में
महाविद्यालय
नहीं है वहां
महाविद्यालय
खोलने का
विचार रखती
है? यदि
हां, तो कब तक व
नहीं, तो क्यों?
(2)
क्या सरकार
बालिका
शिक्षा को
बढ़ावा देने
के लिए विधान
सभा क्षेत्र
सिकराय में
महिला महाविद्यालय
खोलने का
विचार रखती
है? यदि हां, तो
कब तक व नहीं,
तो क्यों?
राज्य
मंत्री,उच्च
शिक्षा(श्री
वासुदेव
देवनानी):
राज्य में 15
उपखण्ड ऐसे
हैं जहां
महाविद्यालय
नहीं है। वर्तमान
में जारी सत्र
2006-07 की
महाविद्यालय
खोलने की नीति
के तहत इन
उपखण्डों
में निजी
महाविद्यालय
प्रारम्भ
करने पर राज्य
सरकार द्वारा
छूट प्रदान की
गई है।
आवेदन पत्र
प्राप्त
होने पार उन
पर सहानुभूतिपूर्वक
विचार किया
जायेगा।
(2)
जी नहीं। राज्य
सरकार के
सीमित वित्तीय
संसाधनों को
देखते हुए
राजकीय
क्षेत्र में
नवीन
महाविद्यालय
खोला जाना
फिलहाल प्रस्तावित
नहीं है। यदि
महाविद्यालय
विकास समिति
के माध्यम से
स्ववित्तपोषित
योजना में
सिकराय में महाविद्यालय
प्रारम्भ
करने के प्रस्ताव
प्राप्त
होते हैं, तो
राज्य सरकार
उस पर
सहानुभूतिपूर्वक
विचार करेगी।
श्री
रामकिशोर
मीणा:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके मार्फत
नम्बर एक
प्रश्न
पूछना
चाहूंगा कि यह
निजी
महाविद्यालय
खोलने के लिए
सरकार की जो
नीति है उसमें
क्या छूट
प्रदान की गई
है।
दूसरा है,
महाविद्यालय
खोलने के तिलए
क्या
निर्धारित
मापदण्ड
हैं।
तीसरा, क्या
सरकार ने यह
सर्वे करवाया
है कि सीनियर
सैकण्डरी स्कूल
तक के अध्ययन
के पश्चात्
कितनी
छात्राएं आगे
कालेज की
शिक्षा लेने
से वंचित रह
जाती हैं, इस
प्रकार का क्या
कोई सरकार ने
सर्वे करवाया
है।
श्री
वासुदेव
देवनानी: माननीय
अध्यक्ष
महोदय, राज्य
में पिछले
वर्ष कुल 52
उपखण्ड ऐसे
थे जहां
महाविद्यालय
नहीं थे। राज्य
सरकार की नीति
के अनुसार
प्रत्येक
उपखण्ड पर
उच्च शिक्षा
की व्यवस्था
हो, इसलिए
हसमने इस
क्षेत्र में
महाविद्यालय
खोलने के लिए
सनिजी
महाविद्यालय
खोलने को छूट
दी जिसमें
पहली छूट थी
कि एफडीआर में
75 प्रतिशत की हमने
छूट दी है और
आवेदन शुल्क
में 50 प्रतिशत
छूट दी।
साथ ही तीसरी
छूट यह है कि
इन क्षेत्रों
में आवेदन
करने वाली संस्थाओं
को तीन वर्ष
के किराये के
भवन में
महाविद्यालय
संचालन करने
की भी अनुमति
दिये जाने का
प्रावधान
है।
इसके तहत गत
वर्ष 38 उपखण्डों
में
महाविद्यालय
खोले गये
हैं। इस
बार 15 उपखण्ड
शेष थे, अभी
नये आवेदन
हमको कुल 120
प्राप्त हुए
हैं जिन 120 में
से 13 आवेदन
पिछड़े
क्षेत्र के
हैं जिनमें 6
उपखण्ड कवर
हो रहे हैं, 9
उपखण्डों
में से अभी
कोई आवेदन
प्राप्त
नहीं हुए हैं,
सरकार का
प्रयास है कि
ऐसे पिछड़े
क्षेत्र के भी
हमको आवेदन
प्राप्त हो
और प्रत्येक
उपखण्ड पर
उच्च शिक्षा
उपलब्ध हो,
यह हम प्रयास
कर रहे हैं।
श्री
रामकिशोर
मीणा:
अध्यक्ष
महोदय, इस
क्षेत्र के ज्यादातर,
जो माडा
क्षेत्र है या
आदिवासी
इलाके हैं
वहां पर
प्राइवेट स्कूल
या स्ववित्तपोषित
विद्यालय
चलने की
स्थिति में
नहीं है क्योंकि
न तो कोई इतना
पैसा लगाने की
स्थिति में है
और ज्यादातर
उनकी शिक्षा
छूट देने की
वजह से, उनकी
फीस नहीं ली
जाती, इसके
कारण से वह
आगे
महाविद्यालय
लेवल पर वह
फीस देने की
स्थिति में
नहीं होते और
इसके कारण से
इन क्षेत्रों
में, पिछड़े
क्षेत्र में
स्ववित्तपोषित
विद्यालय
चलने की
स्थिति में
नहीं होते, क्या
सरकार
सहानुभूतिपूर्वक
विचार करके इस
क्षेत्र में
विशेष तौरि
से राजकीय
महाविद्यालय
खोलने का कोई
इरादा रखती है
और विशेष तौर
से महिला
महाविद्यालय क्योंकि
मैंने जो एक
सर्वे करवाया
माननीय अध्यक्ष
महोदय, दौसा
जिले में
सीनियर सैकण्डरी
करने के बादि
में छात्राएं
90 प्रतिशत कालेज
में जाना चाहती
हैं, उनके
अभिभावक
पढ़ाना चाहते
हैं लेकिन वह
पड़ौस में
महाविद्यालय
नहीं होने से
आगे की शिक्षा
से वंचित रह
जाती हैं, वह
आगे अध्ययन
नहीं कर पातीं
और वहां पर इस
प्रकार की संस्थाएं
भी नहीं हैं
जो नोमिनल
उसके चार्जेज
लेकर के
महाविद्यालय
चला सकें, क्या
सरकार
का इस प्रकार
का विचार है।
श्री
वासुदेव
देवनानी: सरकार
ने महिला महाविद्यालयों
के लिए जो
प्रयत्न
किये, गत दो
वर्षों में 75
गर्ल्स
कालेजेज खुले
हैं, साथ ही
इनका जो
सिकराय है उसके
निकट दो महिला
महाविद्यालय
है। एक
सिकराय से 42
किलोमीटर दूर
राजकीय महिला
महाविद्यालय,
दौसा है जहां 784
छात्राएं अध्ययनरत
हैं।
इसी तरह
सिकराय से 23
किलोमीटर दूर
स्ववित्तपोषित
महिला
महाविद्यालय,
बांदीकुई में
है जहां 189
छात्राएं इस
समय अध्ययनरत
हैं।
इसके अलावा
दौसा जिले में
इस समय कुल 24
महाविद्यालय
है जिनमें
लड़कियां भी
पढ़ती हैं,
लड़के भी
पढ़ते हैं,
जिनमें 4
गवर्नमेंट के
हैं, 20 यह हैं। जहां तक
पिछड़े क्षेत्र
की बात है,
मुझे कहते हुए
प्रसन्नता
है कि सरकार
की नीति के
अनुकूल जिन 38
उपखण्डों
में, उसमें
सिकराय भी है,
जहां पर
महाविद्यालय
खुल गये हैं
और बाकी भी,
मसूदा, परबतसर,
ऐसे स्थानों
पर खुल चुके
हैं और इस
वष्र भी
बाड़मेर के
गुढ़ामालानी
जैसे स्थान
के लिए भी छह
आवेदन हमको
प्राप्त हुए
हैं, इसलिए
निजी
महाविद्यालय
आ रहे हैं, मैं
समझता हूं कि
इस नीति के
अन्तर्गत हम
प्रत्येक
उपखण्ड पर
उपलब्ध करा
देंगे।
Bhs\akt\1130\1d\2.3.06
श्री
हरिमोहन
शर्मा: माननीय
अध्यक्ष
महोदय, केवल 9
स्थान ऐसे
बचे हैं जिन
पर कोई आवेदन
नहीं है तो मेहरबानी
करके राज्य
सरकार क्या
इस बात पर
विचार करेगी 9
ही स्थानों
पर अगर
विद्यालय सब
डिवीजनल हैड
क्वार्टर पर
खोलना है तो
अपने
संसाधनों को
उपलब्ध करा
करके
महाविद्यालय
खोल दें।
चौ.विनोद
कुमार
(हनुमानगढ़):
माननीय अध्यक्ष
महोदय मैं
मंत्री जी से
पूछना चाहता
हूं कि यह तो
सब डिवीजन की
बात है कुछ
जिले ऐसे हैं जो
बाद में बने
हैं वहां जिला
हैडक्वार्टर
पर
महाविद्यालय
नहीं है इस
तरह से एक हनुमानगढ़
है जहां यह
कृषि प्रधान
इलाका है और
यहां
एग्रीकल्चर
कॉलेज खोलने
का राज्य
सरकार के
विचाराधीन है
क्या और मैं
यह समझता हूं
कि माननीय
मुख्यमंत्री
जी विराजमान
है कम से कम
जिला हैडक्वार्टर
पर तो कॉलेज
की जरूर व्यवस्था
होनी चाहिए
जिससे बच्चों
को पढ़ने में
सुविधा हो और
हायर एजुकेशन
प्राप्त
करने के बाद
या हायर
सेकेण्डरी
करने के बाद
बहुत दूरदराज
जाना पड़ता है
तो कम से कम
जिला हैडक्वार्टर
पर जरूर
खुलवाने की व्यवस्था
करेंगे।
धनयवाद।
श्री कन्हैयालाल
मीणा (बस्सी):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से मंत्री महोदय
से निवेदन
करना चाहूंगा
कि जब कस्बे
के लोग भवन
बनाकरके जमीन
दे करके आपको
कॉलेज की पूरी
बिल्डिंग
नियमानुसार
जितना होता है
बनाकर देते
हैं तो उसके
पश्चात् क्या
महिला
महाविद्यालय
खोलने का
विचार रखते हैं?
श्री
वासुदेव
देवनानी:
सरकारी की
नीति के
अनुसार ऐसे 5
जिला मुख्यालय
हैं जहां पर
राजकीय गर्ल्स
कॉलेजेज नहीं
हैं चूंरू,
धौलपुर,
राजसमन्द,
हनुमानगढ़ और
सीकर इन
महाविद्यालयों
के लिए सरकार
ने एक नीति
लागू की है कि
राज्य सरकार
एक टोकन लीज
पर भूमि उपलब्ध
करायेगी, भवन
निर्माण
कराके देगी और
वहां कोई स्वयंसेवी
संस्था यदि
उसे चलाना
चाहेगी तो
सरकार उसमें
सहायक बनेगी
ऐसे पांचों
जिलों के
प्रस्तावाव
सरकार के पास
आ गये हैं और
विचाराधीन है
प्रक्रियाधीन
है ।
मैं समझता
हूं कि इस
वर्ष यदि इन्होंने
शुरू किया तो
पांचों जिलों
में ये कॉलेजेज
स्थापित हो
जायेंगे।
श्री कन्हैया
लाल मीणा: माननीय
मंत्री महोदय,
मैंने निवेदन
किया था कि
आपको जब हम
भवन बना कर के
दे रहे हैं
भूमि दे रहे
हैं आपके
नियमानुसार
उसके बावजूद
आपको खोलने
में क्या
परेशानी है?
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी(शिक्षा
मंत्री): अब तो
माननीय अध्यक्ष
महोदय, उलटा
काम यह
कर हरे हैं कि
हम भवन बनाकर
दे रहे हैं, हम
भूमि दे रहे
हैं आप चलाओ। एक मैं
सूचना देना चाहूंगा
कि यह जो नीति
बदली उससे कल
माननीय जोशी
जी ने कहा था,
उसमें इतना
परिवर्तन हुआ
है कि राजस्थान
में कुल 23 लाख 27
हजार
Bhs\akt\1130\1d\2.3.06
284
कॉलेज स्टूडेंट्स
हैं उनमें
शिड्यूल्ड
कास्ट के
परसेंटेज के
हिसाब से 48
हजार होने
चाहिए और आज
के दिन मुझे
यह कहते हुए
खुशी है कि 47,726
शिड्यूल्ड
कास्ट के
विद्यार्थी
भर्ती हो गये
हैं और 36,710
शिड्यूल्ड
ट्राइव के हैं
और पहली बार
राजस्थान
में यह कॉलेज
की शिक्षा
नीति बदलने से
सब उपखंडों पर
खोलने से
शिड्यूल्ड
कास्ट और
शिड्यूल्ड
ट्राइव के बच्चे
अम के बराबर आ
गये हैं और
राजस्थान
पहला राज्य
है माननीय अध्यक्ष
महोदय कि हमने
कॉलेज के
लक्ष्य
प्राप्त कर
लिये हैं ।
डॉ.सी.पी.जोशी:
मंत्री महोदय,
आपको धन्यवाद। इन
कॉलेजों को
खोलने से
एस.सी./एस.टी. का
एक भी बच्चा
साइंस और
कामर्स नहीं
ले पा रहा है। आप यह
बताइये आपने
जो नीति बनायी
है जिस नीति के
अन्तर्गत आप
प्राइवेट
कॉलेज खोल रहे
हैं उसमें कामर्स
और साइंस
फैकल्टी
नहीं है तो यह
एस.सी./एस.टी. के
बच्चों के
साथ न्याय है
या अन्याय
है? सरकार को
आगे करना
चाहिए।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी: ये
कामर्स की और
साइंस की फैकल्टी
भी शामिल है
आर्ट्स की भी
शामिल है।
डॉ.सी.पी.जोशी:
र्मै फिर आपको
निवेदन करना
चाहता हूं
माननीय
मंत्री जी, आप
पिछली बार भी
कह गये बट में
कि राजसमंद
में गर्ल्स
कॉलेज खोलेंगे
आप चैक कर
लें।
आप बहुत अति
उत्साह में
जवाब देते
हैं।
रिकार्ड में
है पिछली बार
भी राजसमंद
में आपका,
आपको बताया मैंने
आपके बजट भाषण
में लिखा हुआ
है कि राजसमंद
में कॉलेज
खोलेंगे और आज
दिन तक
राजसमंद में
गर्ल्स
कॉलेज नहीं है
।
सरकारी
कॉलेज कह दिया
आपने।
आज ये आंकड़े
हैं आर्ट्स के
हैं साइंस और
कामर्स के
विद्यार्थी
एस.सी/एस.टी. के
नहीं बढ़े हैं
जब 12वीं में
लड़के नहीं है
तो फर्स्ट
ईयर में कहां
से आ रहे हैं?
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी: ये
आंकड़े केवल
आर्ट्स के
नहीं हैं इन
आंकड़ों में
आर्ट्स साइंस,
कामर्स सब के
हैं और आपको
इस बात की
तकलीफ नहीं
होनी चाहिए कि
शिड्यूल्ड
कास्ट और
शिड्यूल्ड
ट्राइव के
लड़के भी आपके
बराबर पढ़ने
के लिए आ गये
हैं।
डॉ.सी.पी.जोशी:
मुझे तकलीफ
नहीं हो रही
है तकलीफ आपको
हो रही है
आपको तकलीफ हो
रही है ...(व्यवधान)
साइंस और
कामर्स नहीं
पढ़ाना चाहते
हैं तकलीफ तो
आपको हो रही
है।
श्री
वासुदेव
देवनानी:
राजसमन्द
जिला मुख्यालय
पर गर्ल्स
कॉलेज स्वीकृत
हो गया है।
Bhs\akt\1130\1d\2.3.06
डॉ.सी.पी.जोशी:
आप बता दीजिये
साइंस और
आर्ट्स के फीगर। आप खड़े
होकर बताइये
। आपके
सेकेट्री
बैठे हैं बताइये
साइंस और
आर्ट्स के
फर्स्ट ईयर
में कितने
लड़के हैं
एस.सी./एस.टी. के?
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी: मैं बता
रहा हूं। सभी
सरकारी
कॉलेजों में
आर्ट्स और
साइंस जो है
उनमें सब में
एस.सी./एस.टी. के
लड़कों का
आरक्षण है और
उसी अनुपात
में उनकी
भर्ती भी हुई
है।
डॉ.सी.पी.जोशी:
संख्या
बताइये संख्या
भाषण नहीं।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी: हां बता
रहा हूं जोशी
जी मैं।
डॉ.सी.पी.जोशी:
आपके राज में
आने के बाद
आपने जो नीति
बनायी है उससे
राजस्थान
में एक भी
साइंस और
कामर्स की
फैकल्टी
नहीं खुली है
और इसमें
एस.सी./एस.टी. के
लड़के भर्ती
नहीं हुए
हैं।
खाली भाषण दे
रहे हैं कि
हमने नीति
नीति बना दी
है। आप
फिगर बताइये
मंत्री जी,
फीगर बताइये।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी: आपने
पाँच कॉलेज
खोले थे पाँच
वर्ष में और
एक में भी
आपने साइंस
नहीं खोली।
डॉ.सी.पी.जोशी:
आपके राज में
आने के बाद
फर्स्ट ईयर
में साइंस और
कामर्स के
कितने लड़के
हैं बताइये
आप?
श्री
संयम लोढ़ा:
मंत्री जी,
पाँच साल में
पाँच नहीं
हमारी सरकार
ने पहले साल
में 13 कॉलेज
खोले थे फर्स्ट
ईयर में।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी: पाँच
वर्ष में
सिर्फ पाँच
कॉलेज खोले थे
और दो वर्ष
में हमने 344 कॉलेज
खोले हैं। (व्यवधान)
डॉ.सी.पी.जोशी:
आपने पाँच सौ
खोले होंगे
साइंस और आर्ट्स
के फीगर
बताइये । भाषण
दे रहे हैं।
साइंस और
कामर्स का एक
भी कॉलेज आपने
नहीं खोला है
एस.सी./एस.टी. का
लड़का आर्ट्स
पढ़े,
इनकंपीटेंट
आदमी से पढ़े,
साइंस, कामर्स
नहीं पढ़ सके।
यह आपके ऊपर
आरोप है । आप खड़े
होकर बताइये।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी: यह आरोप
है कि पाँच
वर्ष में आपने
पाँच कॉलेज
खोले उनमें एक
भी साइंस का
नहीं खोला
हमने जो कॉलेज
खोले हैं
उनमें सबमें
साइंस के स्टूडेंट्स
हैं।
डॉ.सी.पी.जोशी:
एक भी कॉलेज
नहीं खोला है
आपने एक भी साइंस
की फैकल्टी
नहीं खोली है।
माननीय
मंत्री जी, एक
भी साइंस और
कामर्स की
फैकल्टी
नहीं खोली
है।
लड़के ही
नहीं है हजार
लड़के साइंस
और कामर्स में
। भाषण
दिये जा रहे
हैं हम ने यह
कर दिया वो कर
दिया। (व्यवधान)
फीगर बताइये
आप फीगर। 44 एम.एल.ए.
एस.सी./एस.टी. के
बैठे हुए हैं
फीगर बताइये
आप।
Bhs\akt\1130\1d\2.3.06
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी: हां बता
रहा हूं।
डॉ.सी.पी.जोशी:
खाली मुख्यमंत्री
जी बैठी हुई
हैं अपनी
परफार्मेंस
बता रहे हैं । आप फीगर
बताइये आपके
सेकेट्री
बैठे हुए हैं
फीगर बताइये
आप।
बताइये
एस.सी./एस.टी. के
लड़के कितने
साइंस और
कामर्स में
भर्ती हुए हैं
बताइये।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी: हां
फिगर हैं।
एस.सी./एस.टी. के
सारे लड़के
आपने पढ़ाना
बंद कर दिये
थे हमने चालू
कर दिया।
डॉ.सी.पी.जोशी:
हमने तो ताला
लगा दिया था
गिनती बनायी
थी आप बताइये।
हमने तो ताला
लगाया है हमने
तो गिनती बनाई
है इसलिए बैठे
हैं यहां पर। आपकी
नीति से एक भी
लड़का साइंस
और कामर्स में
एस.सी. और एस.टी.
का भर्ती नहीं
हुआ है । (व्यवधान)
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी: आपने
पाँच कॉलेज
खोले हैं पाँच
में एक भी
साइंस और
कामर्स नहीं
खोली है और
आपने कॉलेज खोलना
बंद कर दिया
था।
डॉ.सी.पी.जोशी:
आप एस.सी./एस.टी.
के साथि अन्याय
कर रहे हो राज
कर रहे हो अन्याय
कर रहे हो 44
आदमी बैठे हुए
हैं एक भी
आदमी के साथ
न्याय नहीं
कर रहे हो। बताइये
फीगर बताइये
भाषण देने से
काम नहीं
चलेगा फीगर
बताइये आप।
श्री
वासुदेव
देवनानी: माननीय
विधायक महोदय,
हमारी सरकार ने
...।
श्री
सांवर लाल :
माननीय जोशी
जी, लड़के
विषय अपने हिसाब
से अपनी इच्छा
के हिसाब से
सलेक्ट करते
हैं और मेरी
बात सुनिये
आप।
डॉ.सी.पी.जोशी: डॉ. साहब
एग्रीड। आपके
प्राइवेट
कॉलेज में
फैकल्टी
नहीं है कहां
से आएंगे लड़के? आप
बताइये जितने
कॉलेज खोले हैं
प्राइवेट में
उनमें एक में
भी साइंस
फैकल्टी
नहीं है खोली
हो तो बताइये
आप?
श्री
सांवर लाल : जब
मैं कामर्स
कॉलेज में गया
तो उस समय 60%
का नंबर नहीं
आता था आज
वहां 45%
वाले भी
एडमिशन नहीं
लेते हैं
ट्रेंड
देखिये आप।
लड़के अपनी
इच्छा के
हिसाब से
फैकल्टी का
चयन करते हैं
..(व्यवधान)
डॉ.सी.पी.जोशी:
डॉ.साहब एक भी
प्राइवेट
कॉलेज में फैकल्टी
खोली हो तो
बताइये आप।
श्री
सांवर लाल:
जितनी भी
सिविल
सर्विसेज हैं
उनमें आर्ट्स
वाले भी पीछे
नहीं रहते
हैं।
डॉ.सी.पी.जोशी:
मान्यवर, आप तो
एक भी फैकल्टी
खोली हो वो
बताइये
प्राइवेट
कॉलेज में साइंस
और कामर्स की?
Bhs\akt\1130\1d\2.3.06
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी: अध्यक्ष
महोदय, अभी
तीन खोले हैं
थानागाजी,
खैरवाड़ा और
झुंझुनूं
तीनों सरकारी
कॉलेजों में साइंस
फैकल्टी है।
आपने पाँच
खोले पांचों
में एक में भी
नहीं खोला है।
डॉ.सी.पी.जोशी: मान्यवर,
प्राइवेट की
पूछ रहा हूं
मैं।
हल्ला करने
से नहीं होता
है प्राइवेट
के सवासौ कॉलेज
खोले हैं
उनमें एक में
भी
साइंस,कामर्स
नहीं है। तीन का
नाम ले रहे
हैं आपने सवासौ
प्राइवेट
कॉलेज खोले
हैं एक में भी
साइंस और
कामर्स नहीं
है ।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी: तीनों
में है
झुंझुनूं, खैरवाड़ा,
थानागाजी
तीनों में
साइंस की
फैकल्टी है ।
डॉ.सी.पी.जोशी:
श्रीमान् 125
प्राइवेट
कॉलेज का बोलिये
आप भाषण दे
रहे हैं ।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी: सरकारी
में भी हमने
खोली है आपने
तो नहीं खोली।
डॉ.सी.पी.जोशी:
आप बताइये
लड़के इन तीन
कॉलेजों में भी।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी: बता
रहा हूं आप
विराजिये। ‘जब
तारीफ हो रही
थी गजरे के
फूलों की तो
खामोश बैठे
रहे,...।
डॉ.सी.पी.जोशी:
ये सब सुनाइये
पार्टी
मीटिंग में यहां
तो फीगर
दीजिये।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी: हां
दे रहा हूं। ...
और जब जख्में
जिगर हमने
दिखाया तो
बुरा मान गई।‘
डॉ.सी.पी.जोशी
: नहीं हम तो
नहीं मान रहे
हैं वो जख्मे
जिगर तो आप
मुख्यमंत्री
को बताइये
हमें मत
बताइये।
श्री
संयम लोढ़ा:
ये जख्म बगल
वालों को
दिखाओ बगल
वालों को।
डॉ.सी.पी.जोशी:
आप बताइये
लड़के बोलिये
न ।लड़के
बताइये ।
श्री
संयम लोढ़ा:
ये जख्म उधर
दिखाओ।
डॉ.सी.पी.जोशी:
साइंस फैकल्टी
में लड़के
बताओ।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी: जितने
लड़के थे सब
भर्ती हो गये।
डॉ.सी.पी.जोशी:
सब भर्ती हो
गये आर.एस.एस.
का कार्यालय
थोड़े ही है। एक भी
साइंस और
कामर्स का
लड़का मेरा
आरोप है
माननीय अध्यक्ष
महोदय, इस
सरकार पर आरोप
है कि सरकार
ने प्राइवेट
कॉलेज के नाम
पर एस.सी./एस.टी.
के साथ अन्याय
किया है साइंस
और कामर्स
फैकल्टी
नहीं खोली है
लड़के आगे
नहीं पढ़ सके।
(व्यवधान)
श्री
वासुदेव
देवनानी:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, इसमें
आर.एस.एस. कहां
से आ गया? हर
मुद्दे पर
आर.एस.एस. और
कोई मुद्दा ही
नहीं है आपके
पास और कोई
मुद्दा हो तो
बताइये। (व्यवधान)
श्री
बंसीलाल खटीक:
बारबार
आर.एस.एस. पर
आरोप लगाया जा
रहा है आपके
पास आर.एस.एस.
के सिवाय और
कोई मुद्दा है
कि नहीं?
kas\akt\1140\1e\2-3-2006\1
श्री
बंशीलाल
खटीक:.....जारी...
आर.एस.एस.
की वजह से आप
जीवित हो वरना
आज तक चल गये
होते आप लोग।
डा.सी.पी.जोशी: हम आरती
उतार रहे थे
आपकी ।
श्री अध्यक्ष:
राजसमन्द से
आने वाले
माननीय सदस्य
दो दिन तो आप
चुप रहे और आज
फिर लग गये ।
डा.सी.पी.जोशी:
अध्यक्ष
महोदय, माननीय
मुख्य
मंत्री जी
बैठी हुई हैं
मैं माफी मांग
लूंगा
वह बताये दो
साल में इस
सरकार ने
प्राइवेट
कालेज खोले 125,
वह उपखंड हैं
जहां एसटी,
एससी, के लोग
ज्यादा रहते
हैं एक में भी
इन्होंने
साइंस की
फैकेल्टी
नहीं खोली है
। आप भाषण
देना चाह रहे
हैं हम बता
रहे हैं । दो
साल में आपने
गरीब
आदमी के साथ
अन्याय किया
है और खाली
भाषण दिये जा
रहे हैं।
श्री अध्यक्ष
: राजसमन्द
से आने वाले
माननीय सदस्य
आप कृपया स्थान
ग्रहण कर लें
।
श्री
घनश्याम
तिवाडी : अध्यक्ष
महोदय, यह
आरोप सरासर
गलत है ।सरकार
ने तीन कालेज
खोले तीनों
में साइंस की
फैकेल्टी
खोली और तीनों
में उनकी संख्या
को हमने पूरा
किया ।
डा.सी.पी.जोशी:
लडके बताइए आप
लडके, भाषण दे
रहे हैं ।
श्री
घनश्याम
तिवाडी । भाषण
की बात नहीं
है, लडके बता
रहा हूं आप
सुनिये, सुनने
का माद्दा रखिये
।
डा.सी.पी.जोशी:
बहुत ज्यादा
माद्दा है । 750
लैक्चरर
भर्ती कर
देंगे बजट में
लिखा है, एक भी
भर्ती नहीं
किया । भाषण
दिये जा रहे
हो बराबर । 2004-05 में
750 लैक्चरर
भर्ती कर
देंगे एक आदमी
को भर्ती नहीं
किया और भाषण
दिये जा रहे
हैं।
श्री
घनश्याम
तिवाडी : अध्यक्ष
महोदय, दूसरी
बडी तकलीफ यह
है कि अभी कल ही
इन्होंने
आंकडा दिया था
उसमें
कांग्रेस पार्टी
के समय में
एससी,एसटी की
संख्या कम थी
और चूंकि
राजस्थान
में इतने
कालेज खोलने
से एससी,एसटी
की 17 परसेंट और 12
परसेंट संख्या
बराबर भर्ती
हो गई है
इसलिए इनको
तकलीफ हो रही
है ।
डा.सी.पी.जोशी:साइंस
और कामर्स कें
लडके बताइए भाषण
दिये जा रहे
हैं । अपनी
गलती तो मान
नहीं रहे हैं
और भाषण दिये
जा रहे हैं ।
यह आप अपने लोगों
को खुख कर रहे
हो । (व्यवधान)
आप फीगर
बताइये भाषण
दिये जा रहे
हैं फीगर आपके
पास है नहीं ।
खाली कहे जा
रहे हैं हमने
यह कर दिया, वह
कर दिया ।
श्री
सांवरलाल : आप
किस सब्जेक्ट
के प्रोफेसर
हैं जोशी जी ।
डा.सी.पी.जोशी
: जिस सब्जेक्ट
में आप हैं
उसमें नहीं
हूं ।
श्री
सांवरलाल : आप
यहां पर
आर्ट्स को
डिमोरलाइज करना
चाहते हो । जो
बच्चा जो
पढना चाहेगा
वही पढेगा आप
जबरदस्ती
भर्ती कराना
चाहते हो ।
डा.सी.पी.जोशी
: जी, हां साहब ।
जिस सरकार का
धर्म है...(व्यवधान)
श्री
सांवरलाल :
सारी
सुविधाएं
राजस्थान
में है (व्यवधान)
राजस्थान
में हर प्रकार
की शिक्षा की
सुविधा है...(व्यवधान)
जबरदस्ती
अपनी मर्जी से
भर्ती कराओगे
क्या ।
डा.सी.पी.जोशी
: यह राज का
धर्म बनता है
कि एससी,एसटी
के साथ हम न्याय
करें ।
श्री
सांवरलाल :
लडका जो पढना
चाहता है वही
पढेगा ।
डा.सी.पी.जोशी
: कहां से
पढेगा आपके घर
आकर पढेगा क्या वहां
साइंस फैकेल्’टी
ही नहीं है ।
श्री
ओ.पी.महेन्द्रा
: अध्यक्ष
महोदय मैं
नाथद्वारा से
आने वाले
माननीय सदस्य
से यह जानना
चाहता हूं कि
आप भी शिक्षा
मंत्री रहे
हैं आपने किस
प्रकार
प्राइवेट
कालेज खोले थे
। प्राइवेट
कालेज मे जो
प्राइवेट
संस्थाएं
हैं ..(व्यवधान)
उसी सब्जेक्ट
का वहां
महाविद्यालय
खोला जाता है
। (व्यवधान)
आप भी शिक्षा
मंत्री रहे
हैं आप बताये आपने
प्राइवेट
कालेज किस
प्रकार से
खोले थे । प्राइवेट
कालेज किस
प्रकार से
खोले थे ।
डा.सी.पी.जोशी
: यहां बैठने
के लिये खोले
थे ।
श्री
ओ.पी.महेन्द्रा
: निजी
महाविद्यालय
जिस प्रकार से
आवेदन करते
हैं उसको
परमिशन दी
जाती है, आप भी
शिक्षा
मंत्री रहे
हैं आपने किस
प्रकार खोले
थे आप बताइये
।
श्री
रामप्रताप
कासनिया : अध्यक्ष
महोदय, प्रश्नकाल
कितना महत्वपूर्ण
है आये दिन
शोर शराबे में
प्रश्नकाल
समाप्त कर
दिया जाता है
इससे हमारा दल
तो बिलकुल ही सहमत
नहीं है ।
श्री
अमराराम(धोद) :
अध्यक्ष
महोदय, राजस्थान
में 32 जिलो में
मात्र 4 जिला
हैडक्वाटर
ऐसे हैं जहां
आज तक भी
गर्ल्स
गवर्नमेंट
कालेज नहीं है
। मेरा आपके
माध्यम से
मंत्री महोदय
से इतना ही
निवेदन है और
उनका तो गृह
जिला भी जहां
बडी शिक्षा के
प्रसार की बात
कर रहे हैं और
राजस्थान
में मात्र 4
जिला हैडक्वाटर
ऐसे हैं क्या
मंत्री महोदय
उन 4 जिला
हैडक्वाटर
पर जिससे कम
से कम राजस्थान
में एकरूपता
आये क्या
सरकारी कालेज
खोलने का
इरादा रखते
हैं । कम से कम
सीकर जिसमें
आप पढकर आये
हैं और उसमें
गर्ल्स
गवर्नमेंट
कालेज नहीं है
तो 4 जिला
हैडक्वाटर
पर सरकारी
गर्ल्स
कालेज खोलकर
राजस्थान
में जहां
महिला मुख्य
मंत्री, महिला
राज्यपाल,
महिला विधान
सभा अध्यक्ष
हैं और कम से
कम महिलाओं के
लिये इतनी
मेहरबानी तो
आप कीजिए कि 4
जिला हैडक्वार्टर
पर सरकारी
कालेज की इस
बजट में मुख्य
मंत्री जी से
घोषणा कराने
का प्रयास
करें ।
श्री
गुलाबचन्द
कटारिया(गृह
मंत्री) : अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से सदन के सभी
माननीय सदस्यों
के यह ध्यान
में लाना
चाहता हूं
अबकी बार हमने
जितने भी
विद्यालयों
को रियायती
दरों पर जमीन
उपलब्ध कराई
गई है उनके
साथ यह शर्त
लगाई है कि
जितना भी एससी,एसटी
का आरक्षण है
उतने बच्चे
भर्ती होने
चाहिये और आधी
फीस पर भर्ती
होने चाहिये ।
यह निर्णय
लिया हमने और
निर्णय लेकर
उन सबको
अलाटमेंट की
शर्त के साथ
बांधा है कि
भविष्य में
आपके
विद्यालय में
जो आरक्षण
कोटा है एससी,
एसटी का उतने
बच्चे भर्ती
होंगे, जो
आपकी कोमन फीस
होगी महीने की
मान लो 400 है तो
इन बच्चों से
आपको 200 रुपये
ही लेनी पडेगी
तभी आपको जमीन
उपलब्ध होगी
।
श्री
मुरारीलाल
मीणा : लोकसभा
में बीजेपी ने
बहिष्कार कर
दिया शिक्षण
संस्थाओं
में आरक्षण का
।
श्री
वासुदेव
देवनानी : अध्यक्ष
महोदय, हमने
एससी,एसटी, के
जो क्षेत्र हैं
उनके लिये एफ
डी आर ..(व्यवधान)
इसके अंतर्गत
आते हैं 32 एस सी,
24 एस टी..(व्यवधान)
जो विधान सभा
क्षेत्र के
हैं उनको छूट दी
है आपने तो
कभी दी नहीं
हमने छूट दी
है तो आपको
तकलीफ हो रही
है ।
श्री
मुरारीलाल
मीणा : मंत्री
महोदय इतने ही
हमदर्द हो रहे
हो तो
कर्मचारियों
का कोटा पूरा
कर दो । (व्यवधान)
आप इतना ही
श्रेय लेना
चाहते हो
तो...(व्यवधान)
श्री
श्रवण कुमार :
माननीय
शिक्षा
मंत्री जी आप
जो प्राइवेट
कालेज खुलवा
रहे हो सरकारी
जमीन देकर उससे
कोई सरकार को
फायदा होने
वाला नहीं है
। जहां जंगलों
में पशु चरते
थे लोग उसको
काम में ले
रहे थे आप लोग
उस पर कब्जा
करवा कर कालेज
खुलवा रहे हो,
मैं समझता हूं
यह नीति के
खिलाफ है और
इस तरह का जो
काम कर रहे हैं
उससे कोई
फायदा होने
वाला नहीं है
।
श्री राजेन्द्र
राठौड (संसदीय
कार्य मंत्री)
: अध्यक्ष
महोदय इस सवाल
पर बहुत चर्चा
हो चुकी है आप
नेक्स्ट क्वेश्चन
पुकारो ।
श्री अध्यक्ष
: मैंने तो
दूसरे का नाम
पुकार लिया
श्री भरत सिंह
लेकिन कुछ
माननीय सदस्य
मानते ही नहीं
है बोलते चले
जाते हैं ।
मैं पूर्व में
भी कह चुकी
हूं कि जो कोई
माननीय सदस्य
बिना आसन की
अनुमति के
बोलेगा उसी
अंकित नहीं
किया जायेगा
फिर भी माननीय
सदस्य ध्यान
नहीं दे रहे
हैं । माननीय
भरत सिंह जी ।
निम्न
आय वर्ग के व्यक्तियों
को कुक्कुट
शालाओं की स्थापना
हेतु
प्रशिक्षण
23.श्री भरत सिंह(दिगोद):
क्या पशु
पालन मंत्री
यह बताने की
कृपा करेंगे :-
राज्य
में गत 5
वर्षों में
कुल कितने
निम्न आय
वर्ग के
परिवारों को
कुक्कुट
शाला लगाने
हेतु सरकार
द्वारा
प्रशिक्षण
दिया गया है
जिलेवार
नामों की सूची
सदन की मेज पर
रखे ।
क्या
यह सही है कि
प्रदेश की
जनसंख्या 5.5
करोड के
मुकाबले राज्य
में अण्डों
का उत्पादन 16
से 18 लाख
प्रतिदिन के
बीच है एवं
अन्य
प्रदेशों से
अण्डे
मंगवाकर मांग
की पूर्ति की
जा रही है यदि
हां, तो
प्रदेश में
अण्डों की
प्रतिदिन कुल
खपत क्या है
तथा क्या
सरकार इस मांग
को प्रदेश की
कुक्कुट
शालाओं से ही
पूरी करने
हेतु कार्य
योजना बनाने
का विचार रखती
है । यदि हां,
तो क्या व कब
तक तथा नहीं
तो क्यों ।
श्री
प्रभुलाल
सैनी(पशु पालन
मंत्री):(1) राज्य
में गत 5
वर्षों में
कुल 1354 व्यक्तियों
को कुक्कुट
पालन का
प्रशिक्षण
दिया गया । जिलेवार
नामों की सूची
सदन की मेज पर
रख दी गइ है ।
(2) प्रदेश
में 2004-05 में 6932 लाख
अंडों का उत्पादन
हुआ जो औसतन
प्रतिदिन 18.99
लाख है ।
प्रदेश में
अंडों की मांग
उत्पादन के
मुकाबले कम
होने के कारण
अन्य
प्रदेशों से
अंडों की
आपूर्ति नहीं
की जा रही है ।
श्री भरत
सिंह : अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से पशु पालन
मंत्री जी के
साथ मुख्य
मंत्री जी का
भी ध्यान
दिलाना
चाहूंगा कि
प्रदेश में
बढती बेरोजगारी
की समस्या के
समाधान के
लिये कुक्कुट
व्यवसाय में
जो संभावना है
उसकी तुलना
में पिछले 5
साल में 1354 व्यक्तियों
को ट्रेनिंग
दी । इसका
मतलब कि औसतन 300
व्यक्तियों
से कम
ट्रेनिंग
प्रतिवर्ष
लोगों को दी
गई । मैं
मंत्री जी से
एक चीज तो यह
जानना चाहूंगा
कि जो
ट्रेंडशुदा
व्यक्ति हैं
इनमें से
कितने लोगों
ने इस व्यवसाय
को अपनाया और
सरकार ने उनकी
क्या मदद की
। दूसरा मेरा
प्रश्न है कि
जो देश में
अभी बर्ड फ्लू
आया उससे प्रदेश
में क्या कोई
घटना रिपोर्ट
हुई है और
इसके दुष्प्रभाव
से जो पोलट्री
व्यवसाय
प्रभावित हुआ
है उनमें उन
लोगों को जिन्होंने
ट्रेनिंग ली
है और जो लोग
इस व्यवसाय
में लगे हैं
उनके संरक्षण
के लिये विभाग
ने क्या पहल
की और तीसरा
मेरा प्रश्न
यह है कि
हमारी जो साढे
पांच करोड से
अधिक जनसंख्या
है उस दृष्टि
से जो अंडो की
और बायलर का
उत्पादन
हमारे राजस्थान
में है वह अत्यन्त
कम है और
दूसरे
प्रदेशों के
पोलट्री
फार्मर्स
बायलर की सप्लाई
करते हैं । अंडों
के बारे में
आपने उल्लेख
किया कि अंडे
बाहर से
मंगाये नहीं
जा रहे हैं
मगर जब आवश्यकता
पडती है
मंगाये जाते
हैं पर मैं उस
पर नहीं जाना
चाहता । मैं
तो आपसे इतना
ही निवेदन करता
हूं कि हमारे
जो आदिवासी
क्षेत्र हैं
उसमें रोजगार
की संभावना
बहुत कम है ।
आदिवासी
क्षेत्र में
पोल्ट्री की
स्थापना
करके और मिड
डे मिल के रूप
में जो आदिवासी
क्षेत्र हैं...
श्री अध्यक्ष:
अब आप प्रश्न
पूछे भाषण
नहीं दें ।
Ans\akt\1150\1f
2.3.2006\ 1
श्री भरत
सिंह: मैं
भूमिका
बाधूंगा तभी
तो।
श्री अध्यक्ष:
नहीं,प्रश्न
में भूमिका नहीं
बांधी जाती
है,प्रश्न तो
सीधा पूछा
जाता है।
श्री भरत
सिंह: मैं यह
कह रहा हूं, आप
जो आदिवासी
लोगों को
घूघरी खिलाते
हैं अगर उनको
इस व्यवस्था
से जोड़
दे,उनके अंडे
की
खपत,आदिवासी
में मिड डे
मिल के अंदर
अंडे की उनकी
देने की व्यवस्था
करेंगे क्या?
श्री
बंशीलाल खटीक:
हम विरोध करते
हैं।
श्री भरत
सिंह: अध्यक्ष
जी, यह इनको
करना है अगर
यह सुनने में भी
बर्दाश्त
नहीं कर
सकते,बेरोजगारी
से जुड़ा
प्रश्न है।
मुझे खुशी है
कि मुख्यमंत्री
जी यहां पर
है। मैं इस
प्रश्न को
इसलिये उठा
रहा हूं कि
आन्ध्रप्रदेश(व्यवधान)
अंडे से ही है
क्योंकि जब
आप बजट पेश
करेंगी तो
रोजगार,आज
प्रदेश में
बेरोजगारी की
बहुत बड़ी
समस्या है,उस
प्रोबलम को
एडजेस्ट
करना है। (व्यवधान)
श्री
जुबेर खान:
अंडे नहीं यह
डण्डे मंगवा
सकते हैं डण्डे।
मोहम्मद
माहिर आजाद:
जो मीट खाते
हैं, नंदलाल
बंशीवाल जो
खड़े हैं यह
रोज मुर्गा
खाते हैं।( व्यवधान)
श्री
नंदलाल
बंशीवाल(दौसा):
आप खडे़ होते
हैं बार-बार,
मैं खड़ा हो
गया तो कोई
अपराध कर दिया
क्या?
श्री अध्यक्ष:
राजसमंद से
आने वाले
माननीय सदस्य।
श्री
बंशीलाल खटीक:
मैं इस चीज का
विरोध करता
हूं। अंडे
देने का विरोध
करता हूं। (व्यवधान)
श्री
नंदलाल
बंशीवाल: आपसे
पूछकर आये हैं
क्या ?
श्री
बंशीलाल खटीक:
मिड डे मिल
में अंडे नहीं
दिये जाये,सभी
शाकाहारियों
को मांसाहारी
बनाने की
कवायद चल रही
है। (व्यवधान)
श्री
नंदलाल
बंशीवाल:नगर
जाना,आपको
देखूंगा ही देखूंगा
दौसा में,नगर
जाना दौसा में
देखूंगा
श्री
बंशीलाल खटीक:
सब
शाकाहारियों
को मांसाहारी बनाने
की कवायद आपकी
नहीं चलेगी,
हम विरोध करते
हैं इस बारे
में, मिड डे
मिल में अंडे
नहीं देने
की,विरोध करते
हैं।(व्यवधान)
श्री भरत
सिंह: मैं तो
शाकाहारी
अंडे की बात
कर रहा हूं।
श्री
नंदलाल
बंशीवाल:आप तो
अवैध शिकार के
करके खाते हो
और अंडे और
मुर्गियों की
बात करते
हो।(व्यवधान)
मोहम्मद
माहिर आजाद:
मदन राठौड़ जी
तो मुर्गियों
के दाने की
फैक्ट्री
चलाते हैं।
यह तो
शाकाहारी है
यह मुर्गे से
थोडे़ हो रहे
है....(व्यवधान)
श्री
बंशीलाल
खटीक:अंडा
शाकाहारी
नहीं है,
उसमें से तो
जीव पैदा होता
है अंडे में
से।
श्री मदन
राठौड(सुमेरपुर):
यह आजाद साहब
ने गलत आरोप
लगाया है,
मेरी कोई
मुर्गियों के
अंडे की फैक्ट्री
नहीं है। (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
माननीय सदस्य
एक दूसरे से
सवाल जवाब
नहीं।
श्री मदन
राठौड़: अध्यक्ष
महोदय, मेरे
कोई
मुर्गियों के
अंडे की फैक्ट्री
नहीं है। यह
असत्य बोलते
हैं आजाद साहब
।(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
माननीय नगर से
आने वाले
,आपसे में
सवाल जवाब
नहीं
करें,मंत्री
जी का जवाब
आने दे आप प्रश्न के
हिसाब से पूछिये,
आप तो भाषण
देने लग गये।
श्री भरत
सिंह: भूमिका
तो बांधनी ही
पडे़गी नहीं तो
समझ में नहीं
आयेगा।(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
प्रश्न के
लिये कोई
भूमिका नहीं
बांधी जाती।
श्री भरत
सिंह: माननीय
अध्यक्ष जी,
एक शाकाहारी
मंत्री को इस
प्रकार का प्रश्न
समझने में भी
देर लगेगी।(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
श्री केसर देव
बाबर।
श्री
अशोक
बैरवा(खण्डार):
मंत्री महोदय
जवाब.....(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: माननीय
सदस्य,कुछ
नहीं।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़(सार्वजनिक
निर्माण
मंत्री): अंडे और
मुर्गियों का
ज्ञान संयम
लोढ़ा जी को
ज्यादा है।
श्री अध्यक्ष:
केसर देव
बाबर।
श्री
केसर देव
बाबर(लक्ष्मणगढ़,सीकर):
प्रश्न संख्या
24. (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
स्थान ग्रहण
करें।
श्री
संयम लोढ़ा: न
तो मूल प्रश्नकर्ता
का जवाब आया न
इसमें एक भी
पूरक प्रश्न
हुआ।
श्री अध्यक्ष:
स्थान ग्रहण
करें,आप भी
विरोजे, आप
इनको स्थान
ग्रहण करने
दें।
श्री
केसर देव
बाबर: प्रश्न
संख्या 24.
श्री अध्यक्ष:
मैंने नेक्स्ट
क्वेश्चन
पुकार लिया
है(व्यवधान)
अंकित नहीं
हो।
श्री
अशोक बैरवा: ***
श्रीमती
ममता शर्मा: ***
श्री अध्यक्ष:
क्या प्रश्न
का जवाब आयेगा
वह तो भूमिका
बाँध रहे हैं
।
श्रीमती
ममता शर्मा: ***
श्री अध्यक्ष:
भूमिका बा रहे
हैं,नो नौ।
श्रीमती
ममता शर्मा:***
श्री अध्यक्ष:
I have called the next question.
श्री
नंदलाल
बंशीवाल: *** (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
दौसा से आने
वाले माननीय
सदस्य,दौसा
से आने वाले
माननीय
बंशीलाल स्थान
ग्रहण करें।
श्री
भरतसिंह: ***
श्री अध्यक्ष:
आप मांसाहारी
बनाने की बात
कर रहे हैं सबको।(व्यवधान)
श्री
भरतसिंह : ***
श्रीमती
ममता शर्मा: ***
मोहम्मद
माहिर आजाद: ***
श्री
रामनारायण
चौधरी: अध्यक्ष
महोदय,भरत
सिंह जी ने जो
प्रश्न किया
यह हमारा,आज
का स्टार स्पीकर
है,इन्होंने
जो प्रश्न
पूछा है एक
सप्लीमेंट्री
का तो उत्तर
दिलवाइये। एक
का भी उत्तर
नहीं दिया,एक
का तो
दिलवाइये,यह
तो उचित होगा।
श्री
अध्यक्ष:
उसको जवाब के
लायक नहीं
समझा इसलिये
नहीं दिया।
श्री
रामनारायण
चौधरी: हम एक सप्लीमेंट्री
का उत्तर
सरकार से मांग
रहे हैं वह भी
आप नहीं दिलवाते
हो।
श्री अध्यक्ष:
नेता
प्रतिपक्ष
मैंने दूसरा
प्रश्न
पुकार लिया
है,आप
दूसरे नियम
से आइये,मैंने
पुकार लिया है
दूसरा
प्रश्न।
विधान
सभा क्षेत्र
लक्ष्मणगढ़(सीकर)
के भूमिहीन
अनुसूचित
जाति- जनजाति
परिवारों को
भू-आवंटन।
24.श्री
केसर देव
बाबर(लक्ष्मणगढ़,सीकर):
क्या राजस्व
मंत्री यह
बताने की कृपा
करेंगे:-
(1)
विधान सभा
क्षेत्र
लक्ष्मण्गढ़
(सीकर) में
अनुसूचित
जाति एवम
जनजाति के कितने
भूमिहीन
परिवार है? ग्रामवार
सूची सदन की
मेज पर रखें।
(2)
क्या यह सही
है कि विधान
सभा क्षेत्र
लक्ष्मणगढ़
में काफी
मात्रा में
सिवाय चक ,गैर
मुमकिन एवम
चारागाह भूमि
है ? यदि हां, तो
किस किस ग्राम
में एवम कितनी
कितनी तथा क्या
उक्त भूमि को
सरकार भूमिहीन
परिवारों को आवंटित
करने का
विचार
रखती है ? यदि
हां, तो कब तक व
नहीं तो क्यों
?
राजस्व
मंत्री (श्री
रामनारायण
डूडी): 1.विधान
सभा क्षेत्र
लक्ष्मणगढ़(सीकर)
में अनुसूचित
जाति के 168 तथा
अनुसूचित
जनजाति के 02
(कुल 170) भूमिहीन
परिवार हैं
जिनकी
ग्रामवार
सूची अ पर संलग्न
है।
2.
जी
हां,सिवायचक,गैरमुमकिन
एवम चारागाह
भूमि उपलब्ध
है । ग्रामवार
सूची ब संलग्न
है।
जी
नहीं ,क्योंकि
उक्त भूमि
प्रतिबंधित
श्रेणी की
होने,माननीय
उच्च न्यायालय
के द्वारा
प्रतिबंधिंत
भूमि होने तथा
कृषि योग्य न
होने से आंवटन
किया जाना संभव
नहीं है।
श्रीमती
ममता शर्मा:***
श्री
अशोक बैरवा: ***
मोहम्मद
माहिर आजाद: ***
डा.सी.पी.जोशी:
***
श्रीमती
ममता शर्मा: ***
श्री
जुबेर खान: ***
श्री
नंदलाल
बंशीवाल: ***
श्री
भरतसिंह: ***
श्रीमती
ममता शर्मा: ***
श्री
रामनारायण
चौधरी: अध्यक्ष
महोदय, टाइम
बरबाद हो रहा
है,हम
आपको कोपरेट
कर रहे हैं
इधर से। आप एक
सप्लीमेंट्री
का उत्तर
दिलवा दें आसन
की तरफ से। यह
हमारे साथ ज्यादती
है,हम कापरेट
कर रहे
हैं,संचालन
में आपका
सहयोग कर रहे
हैं और
सत्ता पक्ष
को आप यह नहीं
कह सकती कि
इसका जवाब दे दीजिये।
यह कोई बात
थोडे़ ही हुई।
आपने फरमा
दिया कि मैंने
दूसरा काल कर
लिया है(व्यवधान)
हंगामें में
प्रश्न
रूकवा दिया।
श्री
नंदलाल
बंशीवाल: ***
श्री
रामनारायण
चौधरी: फायदा
क्या होगा
अध्यक्ष
महोदय,यह
कायदा रहा
है,परम्परा
भी रही है
प्रश्न
पुकार लिया है
उसके बाद भी
उसके महत्व
को
देखते
हुये,कौन उठा
रहा है उसके
महत्व
को
देखते हुये
प्रतिपक्ष यह
मांग कर रहा
है उसके महत्व
को देखते
हुये,आप इस
तरह से इगनोर
कर रही है जैसे
कोई
सिर में से
जूं निकालकर
बाहर फैकता
है,ऐसा व्यवहार
तो मत करिये।
दृष्टान्त
है कि दूसरा
प्रश्न
पुकार लिया
उसके बाद भी
टाइम दिया
है,आप दिला
दीजिये, आपसे
कोई कन्फ्रेटेशन
नहीं
चाहते हैं न
हम सरकार से
चाहते हैं। एक
सप्लीमेंट्री
का सवाल है,एक
ऐसा व्यक्ति
जो क्लियर
बोलता है आज
उनका नाम
बोलने वालो
में हैं,यह तो
कोई बात नहीं
हुई साहब। नाम
पुकार लिया क्या
हुआ?
श्री
अध्यक्ष: नेता
प्रतिपक्ष वह
घूघरी में अंडे
खिला रहे थे
और सरकार घूघरी
में अंडे
खिलाना
नहीं चाहती
है(व्यवधान)
भूमिका बना
रहे थे,क्या
करती मैं,वह
तो भूमिका बना
रहे थे।
श्री
बंशीलाल खटीक:
***
श्री
कनकमल कटारा: ***
श्री
बंशीलाल खटीक:
***
मोहम्मद
माहिर आजाद: ***
Ddm/usc/
2.3.6/1200/2a
मोहम्मद
माहिर आजाद: ***
श्री
राकेश मेघवाल:
***
श्री
बंशीलाल खटीक:
***
श्री
जोगेश्वर
गर्ग: ***
श्री
रामनारायण
चौधरी: अध्यक्ष
महोदय, आपने
हमारी छोटी सी
बात को ठुकरा दिया।
श्री अध्यक्ष:
माननीय सदस्यगण,
मुझे सदन को
सूचित करना है
कि श्री नारायण
सिंह, सदस्य,
विधान सभा ने
.....(व्यवधान) ....
श्री
रामनारायण
चौधरी: और
हमें आपसे सख्त
नाराजगी है,
हम आज इस आपकी
व्यवस्था
में भाग नहीं
लेंगे और
हमारा विरोज
आपको दर्ज
करवा रहे हैं
।
श्री अध्यक्ष:
शारीरिक अस्वस्थता
के कारण
दिनांक 28
फरवरी, 2006 से
सत्रांत तक सदन
की बैठकों से
अनुपस्थित
रहने की
अनुमति चाही
है ।
(कांग्रेस
पार्टी के
माननीय सदस्यों
द्वारा सदन से
बर्हिगमन)
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
इस मुद्दे पर
आपका वाक आउट
उचित नहीं है
। (व्यवधान)
आप बहुत
पुराने सदस्य
हैं, आप इन बच्चों
के कहने में आ
रहे हैं । (व्यवधान)
अब तो आप
भ्रमित हो रहे
हैं ।
(व्यवस्था-सूचक-घण्टी)
श्री अध्यक्ष:
मुझे सदन को
सूचित करना है
कि श्री नारायण
सिंह सदस्य,
विधान सभा ने
शारीरिक अस्वस्थता
के कारण दिनांक
28 फरवरी, 2006 से
सत्रांत तक
सदन
की बैठकों से
अनुपस्थित
रहने की
अनुमति चाही है
।
क्या
सदन की अनुमति
है कि उन्हें
सदन की बैठकों
से अनुपस्थित
रहने की अनुमति
प्रदान की
जाय?
(स्वीकृत)
अनुमति
प्रदान की गयी
।
स्थगन प्रस्तावों
पर अध्यक्षीय
व्यवस्था
मुझे
माननीय सदस्यों
को सूचित करना
है कि निम्नांकित
स्थगन प्रस्तावों
की सूचना
प्राप्त हुई
है:-
श्री
संयम लोढा एवं
23 अन्य सदस्यों
की और से
नाबालिग
लड़कियों से
बलात्कार के
मामले में
सहायता राशि
में कथित भेदभाव
के सम्बन्ध
में ।
श्री
जुबेर खान,
सदस्य की ओर
से जिला अलवर
की असाध्य
विधवा
महिलाओं को
अपनी बेटियों
की शादी हेतु
आर्थिक
सहायता
प्रदान करने
के सम्बन्ध
में ।
उपरोक्त
दोनों ही
प्रस्तावों
में हाल ही
में घटित किसी
विशिष्ट
घटना का उल्लेख
नहीं है, अत: स्थगन
प्रस्ताव के
रूप में
अनुमति देने
में असमर्थ
हूं । माननीय
सदस्य सदन
में अन्य
माध्यम से इन
विषयों को उठा
सकते हैं ।
प्रक्रिया
के नियम 295 के
अन्तर्गत
प्राप्त
सूचनाएं
श्री
राव राजेन्द्र
सिंह, सदस्य
की ओर से
विधान सभा
क्षेत्र
बैराठ के
ग्राम
रामपुरा में
वन क्षेत्र
में नीलामी में
बरती गई गम्भीर
अनियमितता के
सम्बन्ध
में ।
श्री
भरतसिंह, सदस्य
की और से
छबड़ा थर्मल
प्लान्ट
हेतु
अधिग्रहित
भूमि का उचित
मुआवजा देने के
सम्बन्ध
में ।
श्री
अमराराम धोद,
सदस्य की और
से विनोदिनी
स्नातकोत्तर
महाविद्यालय
खेतड़ी की
विशेष आडिट के
सम्बन्ध
में ।
श्री
बीरूसिंह
राठौड़, सदस्य
की ओर से
वैशाली नगर
एरियामें
अवागमन की पर्याप्त
एवं माकूल व्यवस्था
कराने के सम्बन्ध
में ।
श्री
रामकिशोर
मीणा, सदस्य
की और से
सिकराय विधान
सभा क्षेत्र
में 25 एम.वी.ए. के
दो
ट्रांसफार्मर
उपलब्ध
करवाने के सम्बन्ध
में ।
श्री
रिछपाल सिंह
मिर्धा, सदस्य
की और से
विधान सभा
क्षेत्र
डेगाना की
राजकीय
पाठशालाओं
में रिक्त
पदों के सम्बन्ध
में ।
श्रीमती
सूर्यकान्ता
व्यास, सदस्य
की और से राज्य
में एच.आई.वी.
की समुचित जांच
प्रणाली
विकसित करने
एवं एड्स के
मरीजों को
नि:शुल्क
चिकित्सा
उपलब्ध
करवाये जाने
के सम्बन्ध
में ।
श्री
हरिसिंह रावत,
सदस्य की और
से जिला पूनल
के वाहनों की
स्थिति अत्यन्त
खराब होने के
सम्बन्ध
में ।
श्री
श्रवण कुमार,
सदस्य की और
से विधान सभा क्षेत्र
पिलानी के
गांव हमीनपुर
में अतिक्रमणियों
के खिलाफ
कार्यवाही
करने के समबन्ध
में ।
श्री
नाथूराम
अहारी, सदस्य
की और से जिला
डूंगरपुर में
अकाल राहत
कार्य शुरू
करने के सम्बन्ध्
में ।
श्री
रामलाल शर्मा,
सदस्य की और
से कृषि
विद्युत
कनेक्शनों
को सामान्य
श्रेणी में
परिवर्तित
करने के सम्बन्ध
में ।
श्री
हीरालाल, सदस्य
की और से
निवाई उप खण्ड
मुख्यालय पर
ट्रोमा
हास्पिटल
खोले जाने के
सम्बन्ध
में ।
माननीय
सदस्यों को
उनके द्वारा
दी गयी सूचना
को पढ़ने की अनुमति
होगी ।
श्री
राव राजेन्द्र
सिंह।
श्री राव राजेन्द्र
सिंह: माननीय अध्यक्ष
महोदय, राजस्थान
विधान सभा की प्रक्रिया
एवं कार्य संचालन
सम्बन्धी नियमों
के नियम 295 के अन्तर्गत
निवेदन है कि वर्ष
2002 में बैराठ विधान
सभा क्षेत्र के
ग्राम रामपुरा
के वन क्षेत्र
में सूखे पे़ों
के नाम पर ग्राम
पंचायत द्वाराहरे
पेड़ों की अवैध
नीलामी में गम्भीर
अनियमितताएं
बरती गयी थीं ।
इस प्रकरण में
मेरे द्वारा विधान
सभा में विभिन्न
माध्यमों यथा-
तारांकित प्रश्न,
विधान सभा की प्रक्रिया
एवं कार्य संचालन
सम्बन्ध्ंी
नियमों के नियम
131 के अन्तर्गत
ध्यानाकर्षण
प्रस्ताव के माध्यम
से सदन का ध्यान
दिलाये जाने के
बावजूद भी आज तक
दोषियों से न तो
राजस्व हानि की
वसूली की गयी है
और न ही अभी तक किसी
को सज़ा दी गयी
है ।
इस सम्बन्ध
में यह भी निवेदन
है कि इस
प्रकरण में अतिरिक्त
जिला कलक्टर,
चतुर्थ, जयपुर
उप वन संरक्षक
(मध्य) एवं
कार्यकारी अधिकारी,
जिला परिषद, जयपुर
एवं अन्य अधिकारियों
द्वारा जांच करने
के उपरांत पंचायत
विभाग एवं वन विभाग,
दोनों ही विभागों
की जांच रिपोर्ट
में इन
अनियमितताओं का
सत्यापन हो गया
है लेकिन इस सत्यापन
के उपरांत भी आज
तक न तो इन दोषी
पाये गये व्यक्तियों
से राजस्व हानिक
को ही वसूला गया
है और न ही इन्हें
दण्डित किया गया
है ।
इतना
ही नहीं, जिस नर्सरी
को नष्ट कर दिया
गया था, न तो उसके
स्थान पर दुबारा
पेड़ लगाने की
कोई कार्यवाही
आज तक की गयी है
और न ही जिस पर्यावरण
की चर्चा हम सदन
में करते हैं उस
पर्यावरण संतुलन
के नियमों को ही
ध्यान में रखा
गया ।
अत: मेरा,
अध्यक्ष महोदय,
आपके माध्यम से
विनम्र निवेदन
है कि इस प्रकरण
में लिप्त दोषी
व्यक्तियों से
राजस्व की हानि
वसूल की जाकर उनके
खिलाफ कठोर से
कठोर कार्यवाही
की जाए ।
श्री अध्यक्ष:
श्री अमराराम,
धोद ।
श्री
अमराराम (धोद): माननीय
अध्यक्ष महोदय,
राजस्थान विधान
सभा की प्रक्रिया
एवं कार्य संचालन
नियमों के नियम
295 के अन्तर्गत
माननीय तत्कालीन
मुख्य मंत्रि,
माननीय लोकायुक्त
एवं राज्य मानवाधिकार
आयोग के निर्देशानुसार
निदेशालय कॉलेज
शिक्षा द्वारा
विनोदिनी स्नातकोत्तर
महाविद्यालय, खेतड़ी
में 27-28 जनवरी, 2003
को भेजी गयी जांच
समिति के प्रतिवेदन
(रिपोर्ट), निदेशालय,
स्थानीय निधि
अंकेक्षक, राजस्थान,
जयपुर द्वारा की
गयी विशिष्ट अंकेक्षण
जांच व महालेखा
परीक्षक एवं नियंत्रक,
भारत सरकार कार्यालय
प्रधान महालेखाकर
(लेखा परीक्षा)
प्रथम राजस्थान,
जयपुर द्वारा की
गयी आडिट के सम्बन्ध
में विशेष उल्लेख
।
श्री
अध्यक्ष:
आपका तो विषय
ही बहुत बड़ा
हो गया ।
श्री
अमराराम (धोद):
अध्यक्ष
महोदय,
विनोदिनी स्नातकोत्तर
महाविद्यालय,
खेतड़ी के
प्रबन्धन
द्वारा किये
गये सरकारी
अनुदान
(सरकारी धन) का
दुरुपयोग, घोर
अनियमितताओं,
भ्रष्टाचार,
अभिभावकों,
विद्यार्थियों
व शैक्षणिक
एवं
अशैक्षणिक
कर्मचारियों
का शारीरिक,
मानसिक व
आर्थिक शोषण
के खिलाफ
माननीय मुख्य
मंत्री,
माननीय
लोकायुक्त
एवं राज्य मानवाधिकार
के निर्देश पर
कॉलेज शिक्षा
निदेशालय ने
संयुक्त
निदेशक, सहायक
लेखाधिकारी
एवं
प्राचार्य राजकीय स्नातकोत्तर
महाविद्यालय,
दौसा के
नेतृत्व में
एक तीन सदस्यीय
जांच समिति
गठित कर
दिनांक 27 व 28
जनवरी, 2003 को जांच
करायी गयी थी
।
उक्त
समिति द्वारा
वित्तीय
अनुदान में
भारी
अनियमिततायें
एवं सरकारी धन
के दुरुपयोग व
गलत तथा फर्जी
नामों से अनुदान
उठाये जाने का
मामला प्रकाश
में लायाग या
है । इस जांच
समिति की
अनुषंशा पर तत्कालीन
मुख्य
मंत्रि महोदय
के
आदेशानुसार
निदेशक, स्थानीय
निधि
अंकेक्षण विभाग
द्वारा
विशिष्ट
अंकेक्षण
जांच की गई,
इसमें भी भारी
अनियमितताएं
उजागर हुई ।
इसके साथ ही
महालेखा
परीक्षक एवं
नियंत्रक,
भारत सरकार
कार्यालय
प्रधान महालेखाकार
(लेखा
परीक्षा)
प्रथम, राजस्थान,
जयपुर द्वारा
भी विनोदिनी
महाविद्यालय के
खातों की आडिट
में आर्थिक व
प्रशासनिक
अनियमितताएं,
सरकारी धन का
दुरुपयोग एवं
गबन पाया गया
। इन सभी जांच
रिपोर्टों को
सदन की पटल पर
रखा जावे, साथ
ही सरकार द्वारा
क्या
कार्यवाही की
गयी ? राजस्थान
गैर सरकारी
शिक्षण संस्था
अधिनियम, 1989 के
तहत क्या
प्रबन्धन के
स्थान पर
प्रशासक नियुक्त
करने के
प्रावधान हैं
? यदि हां तो इन
जांचों के
आधार पर
प्रबन्धन को
बर्खास्त कर,
क्यों नहीं
प्रशासक
नियुक्त
किया जावे ।
सही तो यह
होगा कि जब
विनोदिनी स्नातकोत्तर
महाविद्यालय,
खेतड़ी को
सरकार द्वारा
90 प्रतिशत
अनुदान दिया
जा रहा है तथाविद्यार्थियों
से प्रति वर्ष
लाखों रुपये
फीस वसूली की जा
रही है तो क्यों
न सरकार इसे
जनहित को ध्यान
में रखते हुए
इसे अधिग्रहण
कर खेतड़ी में
ही स्थित
(संचालित)
राजकीय
महाविद्यालय,
खेतड़ी में ही
विलय कर दिया
जावे, जिससे
राजकीय महाविद्यालय,
खेतड़ी के भवन
की समस्या भी
खत्म हो
जायेगी और
प्रबन्ध्ं
द्वारा
करोड़ों
रुपये का जो
अनुदान हड़प
लिया गया है
उससे भी भविष्य
में निजात मिल
सकेगी ।
अध्यक्ष
महोदय, ज्ञात
हो कि पिछले
मुख्य
मंत्री
द्वारा कॉलेज
शिक्षा
निदेशालय, जयपुर
की जांच
रिपोर्ट के
आधार पर
खेतड़ी विकास
समिति खेतड़ी
के वर्ष 1995-96 से 2002-03
तक के सभी
खातों की
विशिष्ट
अंकेक्षण
जांच के आदेश
दिये गये थे,
लेकिन खेतड़ी
विकास समिति
के प्रबन्धन
(श्री बी.एल.
मेहरड़ा के
पारिवारिक
सदस्य)
द्वारा
संचालित (1)
विनोदिनी
महाविद्यालय
(2) एम.के.एम.
महिला
विद्यालय,
खेतड़ी.......
vps/
usc/1210/2b
(श्री
अमराराम(धोद)...
जारी...)
(3)
संजीवनी
कॉलेज आफ
फार्मास्यूटिकल
साइंसेज,
राजोता
(खेतड़ी) संस्थाओं
में किये गये
फर्जीवाड़े
को विशिष्ट
अंकेक्षण से
बचाने के लिए
षड्यंत्रपूर्वक
एक और
फर्जीवाड़ा
करके 3 अप्रैल, 2003
को खेतड़ी विकास
समिति, खेतड़ी
से एम.के.एम.
महिला
विद्यालय,
खेतड़ी व
संजीवनी
कॉलेज आफ फार्मास्यूटिकल
साइसेंज,
राजोता
(खेतड़ी) को
खेतड़ी विकास
समिति से हट
दिया गया और
इस समिति में
मात्र
विनोदिनी
महाविद्यालय
ही छोड़ा गया
तथा एम.के.एम.
महिला
महाविद्यालय,
खेतड़ी व
संजीवनी कॉलेज
आफ फार्मास्यूटिकल
साइसेंज,
राजोता
(खेतड़ी) को
विवेकानन्द
शोध संस्थान
समिति में स्थानान्तरित
कर दिया ।
श्री
अध्यक्ष:
शिक्षा
मंत्री से
संबंधित
मामला है, आप उन्हें
डिस्टर्ब
नहीं करें।
श्री
अमराराम(धोद):
इस समिति का
प्रबन्धन भी
अधिकांशत: वही
है जो खेतड़ी
विकास समिति,
खेतड़ी का है।
यह ही कुछ लोग
एक अन्य एम.के.एम.एच.आर.डी.
सोसायटी के
अन्तर्गत एम.के.एम.
इण्डियन इंस्टीट्यूट
आफ मेनेजमैंट
सीतापुरा,
जयपुर संचालित
कर रहे हैं
साथ ही साथ
कागजों में
संचालित
कामकाजी
महिला
छात्रावास,
खेतड़ी एवं
अनुसूचित जाति
एवं अनुसूचित
जनजाति
प्रशिक्षण
केन्द्र
विनोदिनी
महाविद्यालय,
खेतड़ी आदि।
इन संस्थाओं
को प्रत्यक्ष
एवं अप्रत्यक्ष
रूप से
संचालित कर
रहे हैं। तथा
इन्हीं का
संरक्षण
प्राप्त है।
इन्होंने
अपनी पत्नी
के नाम से
विनोदिनी
महाविद्यालय,
खेतड़ी खोल
रखा है जो
राज्य सरकार
ने 90 प्रतिशत
अनुदान
प्राप्त है
और स्थापना
से लेकर सत्र
2002-03 तक सरकारी
भवन में ही चलता
रहा है। साथ
ही एम.के.एम.
महिला
महाविद्यालय
अपनी मां के
नाम से व संजीवनी
फार्मास्यूटिकल
साइंसेज,
राजोता,
खेतड़ी
पुत्री के नाम
से तथा एम.के.एम.
इण्डियन इंस्टीट्यूट
आफ मेनेजमैंट,
सीतापुरा,
जयपुर माता व
पिता के नाम
पर और स्वयं
के नाम पर बी.एल.एम.
मेमोरियल
रिसर्च एण्ड
हॉस्पिटल,
चाकसू (जयपुर)
संचालित कर
रहे हैं।
इसलिए इनकी
सरकार द्वारा
उच्च स्तरीय
जांच करवायी
जाए तथा साथ
ही सम्पत्तियों
का ब्योरा
मांगा जाए।
श्री
अमाराम (धोद): 90
परसेंट राजस्थान
की जनता का
मेहनता का
पैसा जा रहा
है।
श्री
अध्यक्ष: अब
तो आपने पढ़
लिया। 295 में
इतना ही प्रावधान
है। 295 में इतना
ही प्रावधान
है।
श्री
बीरूसिंह
राठौड़(बनीपार्क):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
प्रक्रिया के
नियम 295 के अन्तर्गत
विशेष उल्लेख
का प्रस्ताव।
महोदय,
राजस्थान
विधान सभा की
प्रक्रिया
एवं कार्य
संचालन
संबंधी
नियमों के
नियम 2295 के अन्तर्गत
मैं राज्य
सरकार एवं
यातायात
मंत्रीजी का
ध्यान मेरे
विधान सभा
क्षेत्र की
आवासीय कॉलोनियों
यथा- नेमीसागर
कॉलोनी, हनुमान
नगर, वीर
विहार आदि के
वाशिंदों को
परिवहन के
साधनों के
अभाव में हो
रही भारी
परेशानियों
की और आकर्षित
करते हुए
निवेदन करता
हूं कि वैशाली
नगर क्षेत्र
में वैशाली
मार्ग होते
हुए किसी भी
प्रकार का
आवागमन का
साधन उपलब्ध
नहीं होने से
आस-पास रहने
वाले नागरिकों
को रोजमर्रा
के जीवन-यापन
में दुविधा का
सामना करना
पड़ता है। स्कूल-कॉलेज
जाने वाले
छात्र
-छात्राओं को
पैदल चलकर
वैशाली
सर्किल तक आकर
बस पकड़नी
पड़ती है ।
साथ ही
वृद्धजनों
एवं
नौकरीपेशा व्यक्तियों
को भी भारी
परेशानी
भुगतनी पड़ती
है जबकि इस
मार्ग पर एक गुरूद्वारा
एवं जैन मंदिर
भी अवस्थित है
तथा वैशाली
मार्ग के बाहर
प्रसिद्ध
झारखण्ड
महादेव का भी
मंदिर है जहां
पर सैंकड़ों
की तादाद में
दर्शनार्थी
रोज
दर्शन-पूजन
करने हेतु आते
हैं। इन
दर्शनार्थियों
को भी आवागमन की
माकूल व्यवस्था
नहीं होने से
पैदल चलकर ही
जाना-आना पड़
रहा है जिससे
नागरिकों में
रोष व्याप्त
होना स्वाभाविक
ही है। इस
संबंध में
विभिन्न
क्षेत्रीय
नागरिकों एवं
संस्थाओं ने
माननीय
परिवहन
मंत्रीजी को
ज्ञापन भी
प्रेषित किये
हैं परन्तु
मुझे खेद के
साथ यह निवेदन
करना पड़ रहा
है कि इसके
बावजूद आज तक
कोई आवागमन का
साधन राज्य
सरकार की और
से मुहैया
नहीं कराया
गया है ।
श्री अध्यक्ष:
ऊर्जा
मंत्रीजी के
पास कौन
माननीय सदस्य
खड़े हैं? यह
कोई तरीका
नहीं है इस
तरह,
आपको बैठकर बात
करनी चाहिए
कोई करे तो।
श्री
बीरूसिंह
राठौड़: अतएव
मेरा राज्य
एवं माननीय परिवहन
मंत्रीजी से
अनुरोध है कि
मेरे विधान सभा
क्षेत्र में
स्थित वैशाली
नगर एरिया में
आवागमन के
साधनों की
पर्याप्त
एवं माकूल व्यवस्था
की जावे ताकि
आम जनता को
राहत मिल सके
। धन्यवाद ।
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती(पुष्कर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, पाइंट
आफ इन्फोरमेशन।
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आज तीन
दिन से
कांग्रेस के
पार्षद भूख
हड़ताल पर
हैं। वहां के
बी.जे.पी. बोर्ड ने
बिना बहुमत के
प्रस्ताव
पास कर लिये
और मीटिंग साफ
कर दी और तीन
दिन से .....
(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
जीरो ऑवर में
कोई पाइंट आफ
इन्फोरमेशन
नहीं होता है।
और हमेशा ही
यह .....
(व्यवधान) आप
विराजिये और
थोड़ी देर बाद
अपना पाइंट आफ
इन्फोरमेशन
करिएगा।
डा. श्री
गोपाल
बाहेती:तीन
दिन से वे भूख
हड़ताल पर है
और वे मर भी
सकते हैं और
मेरा निवेदन
यह है कि
सरकार उनसे
बात करें और
उसको
निपटाये।
श्री अध्यक्ष:
इण्टरप्ट
नहीं करें।
डा.
श्रीगोपाल
बाहेती: यह
बहुत गम्भीर
स्थिति है,
वहां पर महिला
कांग्रेस की
अध्यक्ष भूख
हड़ताल पर
बैठी हैं।
श्री अध्यक्ष:
अंकित नहीं
हो।
मैंने
कहा कि पाइंट
आफ आर्डर
और पाइंट आफ
इन्फोरमेशन
जीरो ऑवर में
नहीं होता । उसके
बाद में आप कोई
पाइंट आफ इन्फोरमेशन
हो तो
दीजिएगा।
आपने
कम्प्लीट
कर लिया
बीरूसिंहजी ? कर
लिया। श्री
रामकिशोर
मीणा।
श्री
रामकिशोन
मीणा(सिकराय): माननीय
अध्यक्ष
महोदय, 25 एम.वी.ए. के
दो
ट्रांसफार्मर
उपलब्ध
कराने हेतु
नियम 295 के अन्तर्गत
निवेदन है कि
सिकराय विधान
सभा क्षेत्र
में
निहालपुरा
(सिकन्दरा) 132
के.वी.ए.
ग्रिड स्टेशन
निर्माणाधीन
है। सिकराय
क्षेत्र में सर्वाधिक
33 के.वी.ए. के 12
सब स्टेशन
हैं, जिनका
कुल विद्युत
भार 45 से 50 एम.वी.ए.
बैठता है । इस
आधार पर इस 132 के.वी.ए.
ग्रिड स्टेशन
के लिए 25 एम.वी.ए. के
दो
ट्रांसफार्मर
आवश्यक है।
मुझे
ज्ञात हुआ है
कि निगम
द्वारा 12.5 एम.वी.ए. का
पुराना
ट्रांसफार्मर
लगाया जा रहा
है। यदि
पुराने 12.5 एम.वी.ए. के
ट्रांसफार्मर
को लगा दिया
गया तो वह 45 से 50
एम.वी.ए. का
लोड झेल नहीं
पायेगा तथा जल
जायेगा जिससे वर्तमान
स्थिति से भी
ज्यादा
दयनीय स्थिति
हो जायेगी।
निगम के अधिकारी
12.5 एम.वी.ए. का
ट्रांसफार्मर
लगाने पर
उतारू हैं।
यदि पुराना 12.5 एम.वी.ए. का
ट्रांसफार्मर
लगाया गया तो
क्षेत्र के काश्तकार
भड़क सकते
हैं।
अंत: इस
संबंध में
सरकार का ध्यान
आकर्षित कर
निवेदन है कि 25
एम.वी.ए. के
दो नये
ट्रांसफार्मर
लगाये जावे।
धन्यवाद।
श्री
अध्यक्ष:
श्री रिछपाल
सिंह मिर्धा।
श्री
रिछपाल सिंह
मिर्धा(डेगाना):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, विधान
सभा के कार्य
संचालन संबंधी
नियमों के
नियम 295 के अन्तर्गत
विधान सभा
क्षेत्र
डेगाना की राजकीय
पाठशालाओं
में लम्बे
समय से पड़े
रिक्त पदों
के बारे में
शिक्षा
मंत्रीजी का
ध्यान
आकर्षित कर
रहा हूं।
महोदय,
उपरोक्त
विषय में
निवेदन है कि
विधान सभा
क्षेत्र डेगाना
की विभिन्न
स्तर की
पाठशालाओं
में पिछले
चार-पाँच
वर्षों से
लगातार
प्राचार्य,
प्रधानाध्यापक
गणित विज्ञान,
अंग्रजी,
सामान्य
ज्ञान,
शारीरिक
शिक्षक एवं
अन्य अध्यापकों
के पद बड़ी
संख्या में
रिक्त चले आ
रहे हैं जिससे
छात्र-
छात्राओं के
अध्ययन में
बाधा उत्पन्न
हो रही है तथा
परीक्षा
परिणाम का
प्रतिशत निरन्तर
गिरता जा रहा
है जो एक चिन्ता
का विषय है।
जिला नागौर
में वर्तमान
में प्राचार्यों
के 28 पद,
प्रधानाध्यापकों
के 20 पद, व्याख्याताओं
के 335 पद, वरिष्ठ
अध्यापकों
के 336 पद तथा अन्य
अध्यापकों
के 202 पद रिक्त
पड़े हैं।
पिछले चार
वर्षों में
विधान सभा क्षेत्र
डेगाना में
काफी शालाएं
क्रमोन्नत
की गयी हैं
जिनमें
बुटाटी,
देहला,
मेवड़ा, बनवाड़ा,
बछवारी,
राजलौता,
जालसूर्खुद,
जालसुकला,
निम्बोला,
विश्वा,
पिपलिया,
किला,
खारोलबास,
सुरपुरा,
चकढाणी, निम्बडी,
चांदावता,
ढाढरिया कला,
निम्डी
कोठारिया,
सुखबासनी,
रावलियाबास,
रलियावता,
ढाणीपुरा, ईग्यासनी,
चोलीयास, कोड,
भादवासी आदि
हैं परन्तु
खेद का विषय
है कि इन सभी
क्रमोन्नत
विद्यालयों
में अनेकों
अध्यापकों
के पद नवसृजित
नहीं करने से
रिक्त पड़े
हैं तथा
छात्र-छात्राएं
भगवान भरोसे अध्ययन
कर रहे हैं।
इस संबंध में
अनेकों बार
लिखित में तथा
दूरभाष पर
संबंधित
अधिकारियों
से निवेदन
किया जा चुका
है परन्तु यह
समस्या अभी
जस की तस है।
अंत:
मैं आपके माध्यम
से माननीय
शिक्षा
मंत्रीजी से
पुरजोर शब्दों
में मांग करता
हूं कि रिक्त
पदों को शीघ्र
भरने की कृपा
करें। धन्यवाद।
श्री
अध्यक्ष:
श्रीमती
सूर्यकान्ता
व्यास ।
श्रीमती
सूर्यकान्ता
व्यास(जोधपुर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय,
प्रक्रिया के
नियम 295 के अन्तर्गत
राजस्थान
में एच.आई.वी. की
समुचित जांच
प्रणाली
विकसित करने
एवं एड्स के
मरीजों को
नि:शुल्क
चिकित्सा
उपलब्ध
करवाने
बाबत्।
महोदय,
मैं आपके माध्यम
से माननीय
चिकित्सा
मंत्री का ध्यान
राजस्थान
में एड्स के
मरीजों की
उचित जांच एवं
नि:शुल्क
चिकित्सा
उपलब्ध
कराने की और
आकृष्ट करना
चाहती हूं। एच.आई.वी. /
एड्स की समस्या
अब गम्भीर
रूप ले रही
है। देश में
संक्रमण की
संख्या 45 लाख
के करीब है
तथा एड्स के
मरीज 1 लाख से
अधिक है।
राजस्थान
में यह संख्या
60000 के करीब
बतायी जा रही
है तथा एड्स
के मरीज करीब 1366
और इससे भी
अधिक हो सकते
हैं।
SPP/USC/1220/2C
श्रीमती
सूर्यकान्ता
व्यास: जारी...
राजस्थान
में जोखिम की
श्रेणी के
लोगों में
संक्रमण का
प्रतिशत 5 से
अधिक हो रहा
है । इस कारण
राजस्थान
में संक्रमण
क्षेत्र में
द्वितीय स्थान
दिया गया
है,जबकि यह
पहले नहीं था।
इसका मुख्य
कारण यहां से
गांवों में 20
प्रतिशत से
अधिक लोग
नौकरी/रोजगार
के लिये बड़े
शहरों (बम्बई,
सूरत, कलकत्ता,
अहमदाबाद इत्यादि)
में जा रहे
हैं। वहां पर
वे अकेले रहते
हैं तथा एच.आई.वी.
संक्रमण की
चपेट में आ
रहे हैं। यही
लोग यह
संक्रमण अपनी
औरतों को दे
रहे हैं और उनके
होने वाले बच्चे
भी संक्रमित
हो रहे हैं ।
इस कारण राजस्थान
में यह स्थिति
वर्तमान में
किये गये आंकलन
से अधिक हो
सकती है।
भारत
सरकार ने
मार्च में
घोषित बजट में
500 करोड़ का प्रावधान
केवल 6 राज्यों
में एड्स के
मरीजों के
चिकित्सा और
प्रचार-प्रसार
के लिये रखा
है, यह उचित नहीं
है। राजस्थान
के एड्स का क्या
अन्य मरीजों
से भिन्न है
और ऐसा नहीं
है तो फिर यह
खुल्लम-खुल्ला
मानव
अधिकारों का
हनन क्यों और
राज्य से ऐसी
मानवीय समस्या
के लिये
भेदभाव क्यों?
मैं सदन के
माध्यम से इस
समस्या का ध्यान
राज्य सरकार
की इस भेदभाव
वाली नीति का
विरोध करें और
राजस्थान के
सभी एड्स
मरीजों के
नि:शुल्क
इलाज मुहैया
कराने की
तुरन्त व्यवस्था
करें।
साथ
ही मैं राज्य
सरकार का ध्यान
राजस्थान
में एच.आई.वी.
की समुचित
जांच प्रणाली
विकसित करने
की ओर ध्यान
आकर्षित करना
चाहती हूं।
राजस्थान
एड्स कंट्रोल
सोसायटी
द्वारा
मेडिकल कॉलेज
और डिस्ट्रिक
अस्पताल के
स्तर पर तो
एच.आई.वी.
संक्रमण की
जांच की
सुविधा तथा
उसके साथ
परामर्श केन्द्रों
की स्थापना
स्वयंसेवी
संस्थाओं के
माध्यम से की
गई है।
उपरोक्त
संस्थानों
में जांच NACO (नेशनल
एड्स कन्ट्रोल
ओरगलेट) के
नियमों के
अनुसार तीन
अलग अलग विधि
से जांच कर
संक्रमण
प्रमाणित
किया जाता है
और जांच पूर्व
एवं पश्चात्
परामर्शदाता
द्वारा इस
संबंध में
परामर्श दिया
जाता है जो NACO के
द्वारा बनायी
गयी पॉलिसी के
अन्तर्गत
है। परन्तु
इस पॉलिसी का
खुल्ल्म-खुल्ला
उल्लंघन
प्राइवेट अस्पतालों
एवं निजी
जांच
प्रयोगशालाओं
में बगैर
परामर्श और केवल
एक विधि के
द्वारा जांच
कर परिणाम
सीधा मरीज या
उनके परिजनों को
थमा दिया जाता
है। यह बिल्कुल
नियमों के
विरूद्ध है और
इसके परिणाम
गंभीर हो सकते
हैं जैसे –
संक्रमित
व्यक्ति इसे
अपने स्तर पर
गोपनीय रख
लेता है जिससे
दूसरों में
संक्रमण
फैलने का खतरा
होता है तथा
अगर संक्रमित व्यक्ति
को यह लगे कि
अब तो
मेरी मौत निश्चित
है तो वह आत्महत्या
कर सकता है या
मानसिक तौर पर
विचलित हो सकता
है। जांच के
पूर्व किसी
प्रकार का स्वीकृति
पत्र भी नहीं
लिया जाता है।
यह भी कानून के
विरूद्ध है।
प्राइवेट
अस्पतालों
या
लेबोरेट्री
वाले इसकी
सूचना राजस्थान
स्टेट एड्स
कंट्रोल
सोसायटी को भी
नहीं देते जिससे
संक्रमण के
आंकड़ों का
पता लग सके।
सभी अनुज्ञा
पत्र प्राप्त
रक्त कोषों
में अगर रक्त
H I V/ Hepatits B,C or V D R L तथा
मलेरिया की
जांच अगर + ve
आती है तो
भी उस व्यक्ति
का रक्त
नालियों में बहा
दिया जाता है
परन्तु
संक्रमित व्यक्ति
को सूचित नहीं
किया जाता और
इन स्थानों
पर किसी
प्रकार का
परामर्श केन्द्र
भी नहीं है।
अंत: रक्त
कोषों में
परामर्श केन्द्र
की स्थापना
की जाये तथा
संक्रमित व्यक्ति
की फिर
विधिवत् जॉच
हेतु सम्बन्ध
स्थापित
किया जाय। यह
उक्त
संक्रमण को
रोकने में एक
कारगर कदम
होगा ।
अंत:
सदन के माध्यम
से माननीय
चिकित्सा
मंत्री महोदय
से मेरा
निवेदन है कि
तुरन्त इस
विषय की
गंभीरता को
समझते हुए
कार्यवाही करें
अन्यथा एड्स
नियन्त्रण
में प्रतिकूल
गंभीर परिणाम
होंगे।
श्री
अध्यक्ष:
श्री हरिसिंह
रावत।
श्रीमती
सूर्यकान्ता
व्यास:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, कुछ
कहें तो सही ।
इतना बड़ा
गंभीर मामला
है, इन्होंने
कुछ भी नहीं
कहा।
श्री
अध्यक्ष: 295 का
जवाब आपको
भेजा जाता है,
आपको जवाब भेज
दिया जायेगा।
श्री
हरिसिंह
रावत।
श्रीमती
सूर्यकान्ता
व्यास:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, 295 पढ़
देते हैं परन्तु
उसका जवाब आता
ही नहीं है।
श्री
हरिसिंह रावत
(भीम): माननीय
अध्यक्ष
महोदय,
प्रक्रिया के
नियम 295 के अन्तर्गत
राज.पूल विभाग
से यह जानना
चाहता हूं कि
राज.पूल विभाग
द्वारा सभी 31
जिला पूलों
में कितनी जीपें
एवं कारें
कार्यरत हैं
एवं उनकी क्या
स्थिति है ?
महोदय, आज का
युग एक आधुनिक
है एवं हम इक्कीसवीं
सदी की बात
करते हैं एवं
जिला पूलों में
गाडि़यों की
स्थिति देखें
तो बाबा आदम
के युग का
जमाना याद आता
है, जहां एक स्थान
से दूसरे स्थान
जाने के लिये
महीनों गुजर
जाते थे। वैसे
ही आज हमारे
जिला पूलों की
गाडि़यों की
स्थिति है ।
मैं आपके माध्यम
से सरकार से
निवेदन करना
चाहता हूं कि
सभी जिलों की
जिला पूलों की
गाडि़यों की
स्थिति सही
नहीं है, वहां
नई गाडि़यां
स्वीकृत
कराई जाये।
मेरे जिला
राजसमन्द
में जब हमारा
नया जिला बना
था तो उदयपुर
जिले में
जितनी भी पुरानी
गाडि़यां थीं
वो सभी
गाडि़यां
राजसमन्द
जिले को भिजवा
दी गयी थी। उन
पुरानी
गाडि़यों की
वजह से कोई भी
अधिकारी समय
से नहीं पहुंच
सकते हैं एवं
रखरखाव में
इतना मंहगा
पड़ता है कि
एक साल का
हिसाब जोड़ा
जाये तो नई गाड़ी
खरीदी जा सकती
है। पुरानी
गाडि़या सभी पेट्रोल
गाडि़या हैं
जिनका ऐवरेज 8
से 9 कि.मी.प्रति
लीटर का खर्चा
आता है जोकि
सरकार के लिये
पुरानी
गाडि़या रखना
एक सफेद हाथी
को पालने जैसा
प्रतीत होता
है।
महोदय
मेरा एक दूसरा
सुझाव है कि
अभी तक हिन्दुस्तान
मोटर्स की ऐम्बेसडर
कार खरीदी
जाती है तो
रखरखाव काफी
मंहगा पड़ता
है। आज हमारे
देश में एक से
एक नई तकनीक
की गाडि़या आ
चुकी हैं,
अत:हमें उस ओर
भी ध्यान
देना चाहिये।
हिन्दुस्तान
मोटर्स की
गाडि़यों में
हमेशा
पेट्रोल की
बदबू आ रही
हैं।
महोदय,
आपके माध्यम
से मैं राजस्थान
विधान सभा के
प्रक्रिया
एवं कार्य
संचालन
नियमों के
नियम 295 के तहत
यह निवेदन
करना चाहता
हूं कि मेरे
जिला राजसमन्द
की पुरानी
गाडि़यों को
अविलम्ब
राज.जिला पूल
में जमा कराकर
नई गाडि़यां
वितरण कराने
की व्यवस्था
करावें।
श्री
अध्यक्ष:
श्री श्रवण कुमार
।
श्री
श्रवण
कुमार(पिलानी):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मेरे
विधान सभा
क्षेत्र
ग्राम हमीरपुर
में आज के दो
महीने पहले ....
श्री
अध्यक्ष:
पढ़ें-पढ़ें,
नो-नो, आप
पढि़ये । 295
पढ़ने का है।
श्री
श्रवण कुमार:
पढ़ रहे हैं।
मुझे याद है।
मैं जबानी कह
दूंगा। इसमें आपको
क्या एतराज
है?
श्री
अध्यक्ष:
पढि़ये।
श्री
श्रवण कुमार:
पढ़ रहा हूं।
श्री
अध्यक्ष: 295
पढ़ने का है।
श्री
श्रवण कुमार: 295
पढ़ रहा हूं।
आपको मेरे
पढ़ने पर
एतराज, खड़े
होने पर एतराज
वाट
कैन आई डू ?
श्री
अध्यक्ष: इस
आसन पर किसी
प्रकार का कोई
आरोप नहीं लगा
सकते ।
श्री
श्रवण कुमार: मैं कह
रहा हूं मेरे
विधान सभा
क्षेत्र में ....
श्री
अध्यक्ष:
आपका जो लिखा
हुआ है वह
मेरे सामने
रखा है।
श्री
श्रवण कुमार:
अतिक्रमणों
के प्रति
उदासीनता को
गति देने व
अवरूद्ध रास्तों
को खुलवाने की
प्रक्रिया 295
के तहत उठाने
बाबत्।
श्री
अध्यक्ष:
उदासीनता को
गति देने।
आपने लिख रखा
है अतिक्रमणों
के प्रति
उदासीनता को
गति देने।
श्री
श्रवण कुमार:
तो गति दे रहा
हूं ना, उसी को
तो पढ़ रहा
हूं। आगे
पढ़ूगा ना,
यही तो कह रहा
हूं। श्रीमान्
जी से निवेदन
है कि मेरी
विधान सभा क्षेत्र
हमीनपुर गांव
में किसानों
ने 40-40 बीघा
जोहड़ में अतिक्रमण
कर रखा है।....
श्री
अध्यक्ष:
जमीन में
जुताई कर रखी
है, यह लिखा है
आपने ।
श्री
श्रवण कुमार: वह एक ही
बात है जोहड़
मान लिया
उनको।
श्री
अध्यक्ष:
जोहड़ और
अतिक्रमण एक
है क्या?
श्री
श्रवण कुमार:
आप यह बताओ यह
प्रश्न इतना
जटिल क्यों
होता जा रहा
है, इसका मैं
उत्तर दे
नहीं सकता पर
मुझे पीड़ा
है, खेद है कि
इसमें कुछ न
कुछ दाल में
काला है।
श्री
अध्यक्ष: आप
पढि़ये ना, क्या
कर रहे हैं ?
श्री
श्रवण कुमार:
जिला कलेक्टर
महोदय से गांव
के लोग मिले,
शिकायत की और
कलेक्टर
महोदय ने
एस.डी.एम. साहब
को आदेश दिया।
एस.डी.एम. ने
नायब
तहसीलदार को
आदेश दिया।
तहसीलदार सूरजगढ़
ने उस पर तत्काल
कार्यवाही की
और उन
अतिक्रमियों
के खिलाफ ....
श्री
अध्यक्ष: यह
बिल्कुल
नहीं लिखा ।
आपने जो लिखा
है वह पढि़ये
। गलत बात मत
करिये आप। यह
गलत बात है
आपकी।
श्री
श्रवण कुमार:
मैं वही पढ़
रहा हूं।
श्री
महावीर
प्रसाद
जैन(मुख्य
सचेतक): आप आसन
की बार-बार
अवहेलना कर
रहे हैं।
श्री
श्रवण कुमार:
यह नहीं लिखा
है क्या इसके
अंदर ?
श्री
अध्यक्ष: आप
पढ़ते क्यों
नहीं हो , आप
तमाशा क्यों
बना रहे हो ? क्या
तरीका है ? जो
आपने लिखा है
वहीं पढि़ये
आप । 295 का मतलब
है पढ़ना।
आपने जो लिखा
है उसे पढि़ये
आप ।
श्री
श्रवण कुमार:
मुख्य सचेतक
महोदय, मैं न
तो अवहेलना कर
रहा हू, न ...
श्री
अध्यक्ष: आप
इधर सम्बोधन
करिये।
श्री
श्रवण कुमार:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, इसमें
इतना गंभीर क्यों
हो रहे हो ?
मामला आपको
मालूम है।
आपको इस बात
का मालूम है
कि अतिक्रमण
हुआ है और
मामला बड़ा
संजीदा है ।
आपको सारी बात
का मालूम है।
श्रीमान्
जी से निवेदन
है कि मेरी
विधान सभा
क्षेत्र हमीनपुर
गांव में
किसानों ने 40-40
बीघा जमीन में
जुताई कर रखी
है। गांव के
लोगों ने श्रीमान्
जिला कलेक्टर
से शिकायत की
और जिला कलेक्टर
ने एस.डी.एम. को
आदेश दिया ।
उपखण्ड
कार्यालय से
शिकायत नायब
तहसीलदार
सूरजगढ़ को
लिखा और उन्होंने
वस्तुस्थिति
व मौके की
जांच कर फैसला
अतिक्रमण को
हटाने का किया
और प्रशासन को
पुलिस की मांग
की गई और बाद
में केवल
वाद-विवाद ही
होकर उस फाइल
को ठण्डे बस्ते
में रख दी गई।
मुझे खेद है
कि इस प्रकार
के अन्याय को
अनदेखा करना
समाज में
अतिक्रमणियों
को बढ़ावा
देना, यह गरीब
जनता के साथ
खिलवाड़ है।
वो बड़े लोग
गरीब के पशु
भी नहीं जाने
देते। इसलिए
सरकार से मेरा
अनुरोध है कि
इस प्रकार के
फैसलों की
पालना करवाई
जावे और
अतिक्रमणियों
के खिलाफ
कार्यवाही
तत्काल की
जावे। ....
msr/usc/1230/2d
श्री
अध्यक्ष:
श्री नाथूराम
अहारी। आर्डर
प्लीज।
श्री
श्रवण कुमार:
अध्यक्ष
महोदय, आपको मालूम
है उसके बाद
जिला कलेक्टर
ने आदेश दिया
और फैसला होने
के उपरान्त
मैं बताना
चाहता हूं उन
लोगों को शह
दी गयी।
श्री अध्यक्ष:आई
विल नोट अलाउ
यू। नेता
प्रतिपक्ष,
इनको रोकें
आप।
श्री
श्रवण कुमार:
और उसके बाद
में न तो उस
अतिक्रमण को
हटाया गया...
श्री अध्यक्ष:
अंकित नहीं
हो।
श्री
श्रवण कुमार: ***
श्री अध्यक्ष:
अंकित नहीं हो
रहा है।
श्री
श्रवण कुमार: ***
एक
माननीय सदस्य:
***
श्री अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
आप समय नष्ट
कर रहे हैं
सदन का, आपका
अंकित नहीं हो
रहा है।
श्री
श्रवण कुमार: ***
श्री
बंशीलाल खटीक
(राजसमन्द): ***
श्री अध्यक्ष:
आप दोनों ही
एक से हो।
श्री
श्रवण कुमार: ***
श्री
बंशीलाल खटीक:
***
श्री
महीपाल सिंह
यादव (बानसूर): ***
श्री
महावीर
प्रसाद जैन
(सरकारी मुख्य
सचेतक): अध्यक्ष
महोदय, जिस
प्रकार से
असंसदीय भाषा
का इस्तेमाल
किया जा रहा
है, यह +++
कहते हैं कभी,
कभी +++ कहते हैं।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़:
माननीय सदस्य
को +++ बता रहे
हैं, चुन कर
आये हैं, जनता
ने चुन कर भेजा
है, उनको +++ बता
रहे हैं ...(व्यवधान)...
इनको +++
नजर आते
हैं माननीय
सदस्य? ..(भारी
व्यवधान)...
श्री
धर्मपाल चौधरी:
एक माननीय
सदस्य को +++ बता रहे हैं
यह, इनको
थोड़ी बहुत
शर्म आनी चाहिए
और यह माफी
मांगें।
डॉ.एन.एस.गुर्जर:
+++ एक्सपंज
करवाएं।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: अध्यक्ष
महोदय, इस
रिकार्ड को
दुरुस्त करो,
अध्यक्ष
महोदय,
कार्यवाही से
निकालो।
माननीय सदस्य
को +++ कहा है ...(व्यवधान)...
श्री
अमराराम (धोद):
यह कहा है...(व्यवधान)...
+++ है,उनको
कंट्रोल करो।
श्री
धर्मपाल
चौधरी: इनको
माफी मांगनी
पड़ेगी।
डॉ.एन.एस.गुर्जर:
अध्यक्ष
महोदय, मेरा
व्यवस्था
का प्रश्न
है।
श्री
अमराराम (धोद):
जीरो ऑवर में
व्यवस्था का प्रश्न
नहीं होता।
एक
माननीय सदस्य:
माननीय सदस्य
को इस प्रकार
से +++ बता रहे है
इसके लिए माफी
मांगनी
चाहिए।
श्री
श्रवण कुमार: ***
...(व्यवधान)...
श्री अध्यक्ष:
माननीय सदस्यगण।
माननीय मुख्य
सचेतक महोदय।
पिलानी
से आने वाले
माननीय सदस्य,
थोड़ी अपनी
भाषा पर
कंट्रोल करें,
+++ कहने का
आपको कोई
अधिकार नहीं
है। यद्यपि
यहां अंकित
नहीं हो रहा
था लेकिन इसका
मतलब यह नहीं
है कि आप यहां
पर चाहे जो
बात बोलें।
...(व्यवधान)...
एक
माननीय सदस्य:
इन्होंने
नहीं कहा +++।
श्री अध्यक्ष:
अच्छा,
बानसूर से आने
वाले माननीय
सदस्य ने।
श्री
श्रवण कुमार: ***
श्री अध्यक्ष:
माननीय सदस्य,
आपने +++ और बानसूर
से आने वाले
माननीय सदस्य
ने कहा +++यह
गलत बात है
आपकी। यद्यपि
अंकित नहीं हो
रहा था फिर भी
ऐसी भाषा का
प्रयोग करना न
सदन की गरिमा
है...(व्यवधान)...
श्री महावीर
प्रसाद जैन:
तो भी निन्दा
करनी चाहिए
इनकी, माफी
मांगनी
चाहिए।
श्री नन्दलाल
बंशीवाल: माफी
मांगें, साहब,
माफी मांगनी
पड़ेगी। ...(व्यवधन)...
डॉ.एन.एस.गुर्जर:
विधान सभा में
बैठे हो। ग्राम
पंचायत में
बैठे हो कहां
बैठे हो? अध्यक्ष
महोदय, ग्राम
पंचायत की
मीटिंग्स
में ऐसे शब्द
नहीं बोलते
हैं। विधान
सभा में बैठे
हो, ग्राम
पंचायत में
बैठे हो?
श्री
श्रवण कुमार: ***
श्री
बंशीलाल खटीक:
मेरे हृदय को
जोरदार आघात
लगा है, यह लोग
माफी मांगें।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
...(व्यवधान)...
गुर्जर में
ज्ञान नहीं,
बानसूर से आने
वाले माननीय
सदस्य ने और
अभी इन्होंने
कहा, +++। यह
असंसदीय भाषा
का प्रयोग है,
यह निन्दनीय
है, इनको माफी
मांगनी चाहिए
और आप इनको बाध्य
करें, माफी
नहीं मांगें
तो बाहर
निकालें इनको।
श्री
बंशीलाल खटीक:
इनको सदन से
बाहर निकलना
चाहिए। जो सदन
की गरिमा में
नहीं रहते,
सदन की
गरिमाओं की
रक्षा नहीं
करते उनको
बाहर निकालना
चाहिए ...(व्यवधान)...
इनको, ऐसे को
बाहर भेजना
चाहिए।
श्री
श्रवण कुमार: ***
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
ऐसे कैसे
चलेगा यह?
एक
माननीय सदस्य:
यह तो कल किसी
और को भी +++ कह
देंगे, इनसे
माफी मंगवाओ।
श्री
बंशीलाल खटीक:
सदन की गरिमा
को ठेस
पहुंचाने वालों
को सदन से
बाहर निकालना
चाहिए या माफी
मांगनी
चाहिए। इनसे
माफी मंगवायी
जाए।
श्री
श्रवण कुमार: ***
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
यह आपसे कोई
कम पड़ते हैं क्या
बंशीलालजी? आप
जैसे निपटना
चाहते हो वैसे
निपट लो।
श्री
श्रवण कुमार: ***
श्रीमती
सूर्यकान्ता
व्यास: अध्यक्ष
महोदय, यह +++ किस को कह
रहे हैं?
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
मर्जी आये जो
बोलते हैं, आप
आसन के आदेश
की पालना नहीं
करते।
श्री
रामनारायण
डूडी (राजस्व
मंत्री): आपकी
हर बात का
जवाब देने में
मंत्रिमण्डल
सक्षम हैं मगर
असंसदीय भाषा
का प्रयोग आप
इस सदन के अन्दर
नहीं कर सकते।
आप किसी को +++ या किसी को +++ आप बहुत
बड़े सदस्य
हैं इस हाउस
के, हाउस की
गरिमा रही है,
यह हाउस परम्परा
के आधार पर
चलता है।
श्री
श्रवण कुमार: ***
श्री
बंशीलाल खटीक:
इस सदन में
बैठने का ऐसे
सदस्यों को
कोई अधिकार
नहीं है जो
सदन की गरिमा
को ठेस
पहुंचाते
हैं। ...(व्यवधान)...
श्री
रामनारायण
डूडी: नहीं, यह
नहीं चलने
दिया जायेगा।
श्री
बंशीलाल खटीक:
ऐसे सदस्यों
को इस सदन में
बैठने काक कोई
अधिकार नहीं है,
सैंवधानिक
अधिकार इनका
समाप्त हो
गया है। सदन
की गरिमाओं
में यहां
बैठते हैं।
श्री
श्रवण कुमार: ***
श्री
रामनारायण
डूडी: मंत्री
का जवाब
मंत्री देगा आपको।
श्री अध्यक्ष:
पिलानी से आने
वाले माननीय
सदस्य, न तो
नियमों की
पालना करते
हैं न आप अपनी
भाषा पर संयम
और संयत रखते
हैं।
श्री
श्रवण कुमार: ***
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: बाहर
निकालो, आसन
पैरों पर।
श्री अध्यक्ष:
क्या नहीं
रखते, पहली
बात तो यह है,
सुनिये-सुनिये
आप। आप बैठें,
स्थान ग्रहण
कर लें, अहारी
साहब, प्लीज।
सुनिये-सुनिये।
राजसमन्द
से आने वाले
माननीय सदस्य
को आपने +++ कह
कर उत्तेजित
किया।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़ अध्यक्ष
महोदय, इससे
भी आगे +++
कहा।
श्री अध्यक्ष:
सुनिये, आप
नहीं बोलें
बीच में।
एक
माननीय सदस्य:
वह आपकी इजाजत
से थोड़ी खड़े
हुए थे।
श्री अध्यक्ष:
सत्ता पक्ष
मेहरबानी कर
के थोड़ा संयम
रखे।
मैं
निवेदन कर रही
थी कि पहले
पिलानी से आने
वाले माननीय
सदस्य ने उन्हें
+++ कहा, उससे
उत्तेजित
हुए। बानसूर
से आने वाले
माननीय सदस्य
ने अग्नि के
अन्दर घी का
काम किया और +++ कह दिया, तो
उनका उत्तेजित
होना स्वाभाविक
था।
श्री
श्रवण कुमार: ***
श्री नन्दलाल
बंशीवाल: यह
वो वो क्या
होता है?
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
क्या होता
है, माननीय
सदस्य, वो वो?
वो वो करते हो,
यहां माननीय
सदस्य होते
हैं सब। आपने
ठेका ले रखा
है?
श्री
श्रवण कुमार: ***
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
आप कोई कमजोर
समझते हो क्या
उनको? खड़े होते
हैं, खड़े
होते हैं।
श्रीमती
सूर्यकान्ता
व्यास: अध्यक्ष
महोदय, पहले
तो इन्होंने
आपकी बात का
ही उल्लंघन
किया, 295 नढ़ना
चाहिए था
इनको, यह 295 नहीं
पढ़ कर और कुछ
पढ़ना शुरू कर
दिया। शुरूआत
से ही इन्होंने
तो उल्लंघन
करना शुरू कर
दिया था।
श्री नन्दलाल
बंशीवाल: आप
क्या बोल रहे
हो, वो वो क्या
होता है? ऐसे
बोला जाता है
क्या?
श्री अध्यक्ष:
दौसा से आने
वाले माननीय
सदस्य।
आर्डर, आर्डर।
...(व्यवधान)...
श्री नन्दलाल
बंशीवाल: ऐसे
क्या बोलते
हो वो वो? नहीं,
अध्यक्ष
महोदय,बिल्कुल
नहीं, इन्होंने ऐसे
कैसे बोला,वो?
श्री अध्यक्ष:
दौसा से आने
वाले माननीय
सदस्य।
श्री नन्दलाल
बंशीवाल: +++ यह बोलें, +++ यह बोलें, वो
यह बोलें, क्या
मतलब है यह?
इनकी
दादागिरी
चलेगी क्या?
नहीं चलेगी
आपकी
दादागिरी।
श्री
अशोक बैरवा
'खण्डार': आसन
को ऐसे कैसे
बोल सकते हो
आप?
श्री नन्दलाल
बंशीवाल: बैठ
जाओ। हम किसी
भी सदस्य का
अपमान
बर्दाश्त
नहीं करेंगे।
श्री
हेमाराम
चौधरी: अध्यक्ष
महोदय, यह स्थिति
क्यों आई? हर
सदस्य के बीच
में व्यवधान
डालते हैं।
श्री अध्यक्ष:
दोनों माननीय
सदस्य स्थान
ग्रहण कीजिए।
श्री नन्दलाल
बंशीवाल: तमीज
से बोलें पहले
आप।
Ars/usc/2e/1240/02032006/1
श्री अध्यक्ष:
दौसा से आने
वाले माननीय
सदस्य आप स्थान
ग्रहण करिए(व्यवधान) राजसमन्द
से आने वाले
माननीय सदस्य
आप बार बार
यही दोहरा रहे
थे कि आप
नियमों के विपरीत
बोल रहे हैं । 295
में केवल पढ़ा
जाता है आप
बिना पढ़े
बोलरहेथे तो
वह यही टोक
रहे थे कि आप
अपना पढि़ये।
उस पर आप बहुत
उद्वेलित
होकर के कोई
ऐसे शब्द इस्तेमाल
कर दें तो
उचित नहीं है।
श्री
महावीर
प्रसाद जैन: +++ कह दिया।
श्री
श्रवण कुमार:
आप बोल सकते
हो ना।
श्री
हेमाराम
चौधरी: व्यवस्था
आप दे सकते हो
वह नहीं दे
सकते (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष:
व्यवस्था
यहां सब दे
देते हैं। आसन
की व्यवस्था
को तो कई
बार..(व्यवधान)
कर देते हैं
आप। माननीय
सदस्य खुद ही
व्यवस्था
देने लग जाते
हैं ।
श्री
हेमाराम
चौधरी: ये कर
लेते हैं इनको
आप कह सकते हैं।
श्री अध्यक्ष:
ठीक है। अब इस
बात को खतम
करिए। श्री
नाथूराम
अहारी । अंकित
ही नहीं किया
गया था। आइन्दा
के लिए ध्यान
रखिए। बानसूर
से आने वाले
माननीय सदस्य,
कभी आप गुर्जर
कभी माली और
कभी इनको
कहतेहैं।
आइन्दा से
उचित बात नहीं
होगी। कभी तो
आप बाली को कहते
हैं पहलवान
नहीं होता,
कभी कहते हैं
कि गुर्जर
विद्वान नहीं
होता और कभी
कहते हैं तुम्हारे
+++ हैं, उचित
बात नहीं है
आपकी यह।
श्री
श्रवण कुमार :
व्यवस्था
के विपरीत
नहीं, आप बोल
सकते हैं हमें
कुछ भी हम आसन
की इज्जत
करते हैं वह
हमें नहीं टोक
सकते,आप जो भी
कहेंगे मानने
के लिए तैयार
हैं । यह क्या
तरीका है, आसन
बोले ना।
श्री अध्यक्ष:आसन
की व्यवस्था
के खिलाफ कोई
कुछ नहीं बोल
सकता है।
श्री
श्रवण कुमार:
आसन बोल सकता
है, आसन जो भी
कहता है मान्य
है।
श्री
रामप्रताप
कासनिया: अध्यक्ष
महोदय, यह सदन
में क्या हो
रहा है?
श्री
महावीर
प्रसाद जैन:
आसन के पास जो
है सारा सदन ही
है जब आसन की
नहीं मानें तो
सदन को
कंट्रोल
करना..(व्यवधान)
श्री
रामप्रताप
कासनिया: बीच
के आदमीका
प्रश्न नहीं
है। अध्यक्ष
महोदय, इस तरह
से सदन में
अगर समय
बर्बाद होगा
तो राजस्थान
की जनता के
खून पसीने की
गाढ़ीकमाई
यहां खर्च हो
रहीहै और इस
तरह से समय
बर्बाद हो रहा
हैइससे मेरा
दल तो कतई
सहमत नहीं है।
श्री अध्यक्ष:
श्री नाथूराम
अहारी।
श्री
नाथूराम
अहारी(डूंगरपुर):अध्यक्ष
महोदय,
प्रक्रिया के
नियम 295 के अन्तर्गत
निवेदन है कि
डूंगरपुर जिले
में बरसात कम
ज्यादा होने
से फसल बिल्कुल
नष्ट हो गई
है, अर्थात
अन्य वर्षो
के बनिस्पत
इस वर्ष् बिल्कुल
अनाज नहीं पका
है। जनता भूख
व घास के अभाव में
परेशन हो
रहीहै, अकाल
राहत के कार्य
शुरू नहींहुए
हैं। लोग
पलायन करने
लगे हैं। जनता
में भय पैदा
हो गया है। स्वरोजगार
योजना चालू
होने जा रही
हैलेकिन पर्याप्त
नहींहै। अंत:
डूंगरपुर में
अकाल राहत
कार्य अति
शीघ्र खोलने
की कार्यवाही
करने की आवश्यकता
है। साथ ही
घास की भी
काफी आवश्यकता
है। घास की भी कोई
व्यवस्था
नहीं हुई है।
अंत: अति
शीघ्र घास की
भी व्यवस्थ
करने की कृपा
करावें। धन्यवाद
1
श्री अध्यक्ष:
श्री रामलाल
शर्मा 1
श्री
रामलाल
शर्मा(चौमूं):अध्यक्ष
महोदय, राजस्थान
विधान सभा के
नियम 295 के अन्तर्गत
विशेष उल्लेख
में नर्सरी
एवं विशेष
योजना के अन्तर्गत
कृषि कनेक्शनों
का सामान्य
श्रेणी में
परिवर्तित
करने के
संदर्भ में
निवेदन है कि
राज्य सरकार
केआदेश
पारितकर
विद्युत
विभाग को निर्देश
दिए गए कि जिन
किसानों ने
नर्सरी, विशेष
तथा फार्म
हाउस श्रेणी
में कृषि
कनेक्शन ले
रखा है तथा
जिनकी अवधि दो
वर्ष पूरी हो
चुकी है एवं
जिनको चौबीस
घंटे विद्युत
सप्लाई की
जाती है उन्हें
सामन्य
श्रेणी में
परिवर्तित कर
दिया जावे।
लेकिन ग्रामीण
क्षेत्र में
जिन किसानों
को चौबीस घंटे
विद्युत
आपूर्ति नहीं
की जाती उन्हें
तो सामान्य
श्रेणी में
परिवर्तित
किया जा रहा
है।लेकिन जिस
किसानों ने
नगरपालिका
क्षेत्र में
कृषि कनेक्शन
ले रखा है तथा
जिन्हें
ग्रामीण फीडर
से विद्युत
आपूर्ति की जा
रही है उसके
बावजूद
भीउनके कृषि
कनेक्शनों
को सामान्य
श्रेणी में
परिवर्तित
नहीं किया जा
रहा है। अंत:
आपके माध्यम
से सरकार से
निवेदन है कि
ऐसे कृषि
कनेक्शनों
को जिनको
चौबीस घंटे
विद्युत
आपूर्ति नहीं
की जाती तथा
जिन्होंने
दो वर्ष पूरे
कर लिए उनको
तत्काल
सामान्य
श्रेणी में
परिवर्तित
कराने का श्रम
करें।
श्री अध्यक्ष:
श्री
हीरालाल।
श्री
हीरालाल(निवाई):
प्रक्रिया के
नियम 295 के तहत
निवेदन है कि
विधान सभा
क्षेत्र
निवाई के अन्तर्गत
बनास से
ट्रकों द्वारा
बजरीका
परिवहन किया
जाता है। बजरी
चालकों
द्वारा
अधिकतर
ट्रकों
द्वारा बजरी
का ठेका नहीं
जाता है।
जिससे छोटे
वाहनों पर
गिरने से उनके
शीशे खराब हो
जाते हैं साथ
ही बजरी उड़कर
दुपहिया
वाहनों के
चालकों के
आंखों में गिरने
से वाहने
दुर्घटनाएं
होती हैं। यहां
तक मेरे विधान
सभा क्षेत्र
में आए दिन
दुर्घटनाएं
जारी हैं।
जनवरी एवं
फरवरी में 16
दिवसों में 16
मौतें हो चुकी
हैं। इसका
मुख्य कारण
है कि ट्रक
चालक अकुशल या
बिना लाइसैंस
के चलाते हैं
जिनकी चैकिंग
की व्यवस्था
ना तो पुलिस
विभाग और ना
ही परिवहन
विभाग द्वारा माकूल
व्यवस्था
की जाती है।
अक्सर वाहन
दुर्घटनाएंबनास
पुलिया से
सांगानेर तक
असावधानी एवं
अधिक बार चक्कर
ले जाने
केकारण हो रही
हैं । मेरा
अनुरोध है कि
बजरी के ट्रक
चालकों के
लाइसेंसों की
चैकिंग चुंगी
नाके या टोल
टैक्स पर ही
परिवहन विभाग
एवं पुलिस
विभाग द्वारा
टीम गठित कर
की जावे ताकि
अमूल्य मानव
जीवन को बचाया
जा सके। साथ
ही टीम में चिकित्सक
को भी रखा
जावे ताकि
वाहन चालक नशे
में हो तो
मेडिकल कराकर
तुरन्त
कार्यवाहीकी
जावे। मेरा
अनुरोध है कि
बजरी के ट्रक
सड़क पर
बेतरतीब खड़े
कर छोटे
वाहनों का
रास्ता रोक
देते हैं इससे
भी
दुर्धटनाएं
होने की
संभावना बनी
रहती है।
मेरा
अनुरोध है कि
निवाई छिलाय
बाई पास पर
बेतरतीब ट्रक
दोनों तरु
खड़े रहते है
इससे भी
दुर्घटनाएं
घटित हो रही
हैं। सोतेता
डिग्गी रोड
पर रात्रि को
रास्ता
अवरूद्ध की
खड़े हो जाते
हैं इससे भी
दुर्घटना
घटित हो रही
है। अंत: मानव
जीवन को
दुर्घटनाओं
से बचाने
केलिए पुलिस
विभाग, परिवहन
विभाग एवं
चिकित्सा
अधिकारी को
शामिल कर
चैकिंग की व्यवस्था
हेतु दल गठित
कर मुस्तैदी
से
कार्यवाहीकी
जावे। वाहन
चालकों का लाइसैंस
कागज एवं चालक
नशे में तो
नहीं है बजरीटोल
टैकस पर
हीचैकिंग की
जावे तथा
सड़कों पर
बेतरतीब खड1े
वाहनों की
विरूद्ध
कार्यवाही की
जावे। तथा
निवाई उप खंड
मुख्यालय पर
ट्रोमा
हास्पिटल
खोला जावे
ताकि दुर्घटना
घटित होने पर
मानव जाने
बचाई जा
सकेें। चूंकि
दुर्घटनाएं
विधान सभा
क्षेत्र के
बनास नदी एवं
सांगानेर की
बीच ही हो
रहीहै। अंत:
निवाई में
ट्रोमा हास्पिटल
खोला जाना न्यायोचित
है।
श्री अध्यक्ष
: श्री भरत
सिंह ।
श्री भरत
सिंह
(दिगोद):अध्यक्ष
महोदय, नियम 295
के तहत छबड़ा
थर्मल प्लांट
हेतु
अधिग्रहित
भूमि का उचित
मुआवजा प्रभावित
परिवार के एक
सदस्य को
थर्मल में
नौकरी एवं पडत
पडी भूमि का
आबंटन
प्रभावित
किसानों को
करने बाबत
निवेदन है कि
छबडा जिला
बारां में
थर्मल प्लांट
के निर्माण
हेतु किसानों
की भूमि अधिग्रहित
की गई है।
डी.एल.सी
द्वारा जो
भूमि की दर मुआवजा
हेतु
निर्धारित की
गई है वह बहुत
कमहै। सिंचित
क्षेत्र में
यह राशि 35000
प्रति बीघा है
तथा असिंचित
क्षेत्र में
यह राशि 22000
प्रति बीघा तय
की गई है। यह राशि
अत्यन्त कम
है। वर्तमान
में वहां की
भूमि का बाजार
दर एक लाख
रुपए प्रति
बीघा है। जिन
किसानों की भूमि
अधिग्रहित की
जा रही है
उनके सामने
अँधेरा छा गया
है व जीवन
यापन करने
हेतु उन्हें
कृषि के
अतिरिक्त
कोई विकल्प
दिखाई नहीं
देता है। 504
किसानों की
कुल 1600 बीघा जमीन
अधिग्रहित
होगी व 600 बीघा
चरागाह भूमि
अधिग्रहित
होगी, इस
प्रकार कुल 2200
बीघा भूमि
अधिग्रहित
होगी। थर्मल
प्लांट की
कुल लागत 1750
करोड़ रुपए
है। इस पृष्ठभूमि
में किसानों
को यदि एक लाख
रुपए प्रति बीघा
के हिसाब से
भुगतान किया
जाता है तो
पूरे भुगतान
की कुल राशि 16
करोड़ होगी जो
पूरी लागत के
सामने नाम
मात्र है। इस
राशि से 100 गुना
अधिक राशि तो
बतौर कमीशन ही
इस कार्य को
संचालन करने
वाले डकार
जायेंगे। 504
किसान परिवार
को एक लाख
रुपए की दर से
भुगतान किया
जावे ताकि
प्रभावित
किसान परिवार
को अपनी भूमि
से बेदखल होने
की पीड़ा कम
महसूस हो।
यहां
यह भी उल्लेख
करना चाहता
हूं कि जहां
छबडा में
प्रति बीघा 22000
से 35000 रुपए
प्रति बीघा
भूमि के
मुआवजे का भुगतान
किया जाना
प्रस्तावित
है वहीं कोटा
जिले के ग्राम
ब्रजेशपुरा
में भारत
पैट्रोलियम
का टमिर्नल
पाइंट बनाने
हेतु 13 हैक्टेयर
कृषि भूमि हाल
ही में
अधिग्रहित की
गई है। इस
भूमि का
भुगतान तीन
लाख रुपए
प्रति बीघा के
हिसाब से किया
जा रहा है।
कोटा में
डी0एल0सी0 की दर तीन
लाख रुपए
प्रति बीघा
नहीं है मगर
सरकार के हस्तक्षेप
से किसानों को
तीन लाख रुपए
प्रति बीघा का
भुगतान किया
जा रहा है।
लाडपुरा में
यदि किसान को
तीन लाख रुपए
प्रति बीघा के
हिसाब से
भुगतान किया
जा सकता है तो
छबड़ा के
किसानों को क्योंकर
22000 से 35000 राशि प्रति
बीघा के हिसाब
से भुगतान
किया जा रहा
है। छबडा के 504
किसान
परिवारों को
एक लाख रुपये
प्रति बीघा के
हिसाब से
भुगतान क्यों
नहीं किया जा
सकता है।
प्रदेश में एक
ही संभाग के
दो जिलों में
मुआवजे का
मापदण्ड
इतना भिन्न
क्यों है ।
छबडा के
किसानों को
भूमि अवाप्ति
का उचित
मुआवजा
प्रदान किया
जाना सरकार का
दायित्व है।
श्री
प्रताप सिंह
सिंघवी:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, छबडा
में जिन
किसानों की
अभी माननीय
सदस्य ने बात
की,छबडा में
उन किसानों का
एक एक पेड1 का,सारा
छप्पर का जो
भी होता है
सबका मुआवजा
दिया जा रहा है
और किसान खुद
एस.डी.ओ. आफिस
में आकर चैक
ले जा रहे हैं
और मात्र
राजनीति.......
Vns/usc/2F/1250/02032006
Vns/usc/2f/1250/2.3.06
श्री प्रताप सिंह सिंघवी जारी...
मात्र राजनैतिक रूप से यह सवाल उठाया गया
है। मैं समझता हूं कि इस प्रकार की राजनीति इस पवित्र सदन में नहीं होनी चाहिये।
श्री हरिमोहन शर्मा: आपका कौनसा विभाग है ?
आप क्या जवाब दे रहे हो ?
श्री प्रताप सिंह सिंघवी: मेरा क्षेत्र
है, ध्यान कैसे नहीं है ?
श्री हरिमोहन शर्मा: विभाग नहीं है। ऐसे
नहीं दे सकते आप। विभाग हो तो आप, यह कोई बात हुई ? आपका नहीं है।
श्री महावीर प्रसाद जैन(सरकारी मुख्य
सचेतक): जोइंट रेसपांसिबिलिटी है।
श्री अध्यक्ष: जोइंट रेसपांसिबिलिटी है।
श्री अशोक बैरवा: बहुत अच्छा बोल
रहे हैं अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्रीजी कल तो हकला रहे थे, आज अच्छा बोल रहे
हैं।
श्री प्रताप सिंह
सिंघवी: बैठ जाओ
आप।
श्री महावीर प्रसाद जैन: आपको पता होना
चाहिये मंत्री कभी भी बोल सकते हैं।
श्री अध्यक्ष: श्री नवनीत लाल नीनामा,
पर्ची पर बोलेंगे।
श्री हरिमोहन शर्मा: निर्विवाद मंत्री हैं
क्या ?
श्री महावीर प्रसाद जैन: हां, निर्विवाद।
श्री हेमाराम चौधरी: बस ठीक ठाक चल रहा
हैं यहां तो कुछ कहने की कोई जरूरत ही नहीं है, यह क्या बात हुई ? सब कुछ ठीक ठाक
चल रहा है तो फिर हम यहां यूं ही आए, कुछ कहने की जरूरत ही नहीं है क्या बात कर
रहे हो आप ? पैसा नहीं मिल रहा है जब ही तो बात कर रहे हैं अगर पैसा मिल जाये तो आपको बोलने की जरूरत ही नहीं है तो आप तो यूं ही, आपको लगा कि मैं ले लूं वाहवाही।
श्री संयम लोढ़ा: माननीय अध्यक्ष महोदय,
नाबालिग लड़कियों से बलात्कार के मामले में...
श्री अध्यक्ष* अब उसको ऐसा है आप तो चले
गये थे बहिर्गमन करके और उसके बारे में मेरी व्यवस्था यह है...
श्री संयम लोढ़ा: आपने प्रस्ताव रिजेक्ट
किया है पर इतना संवेदनशील मामला है...
श्री अध्यक्ष: तो आप सुनना नहीं चाहते
हैं, अध्यक्ष की व्यवस्था को नहीं सुनना चाहते हैं। महत्वपूर्ण मामला है इसीलिये मैंने सदन में निवेदन किया है कि उस पर आप अन्य नियम में आएं ताकि इसकी विस्तृत चर्चा की जा सके, पर चूंकि
आपने पर्टिकूलर इंस्टांस नहीं दिया था; यदि आप कोई पर्टिकूलर इंस्टांस मुझे देते या रिसेंट आकरेंस का होता तो मैं उसे मंजूर भी कर लेती। सुनिये
अब आप इतनी जल्दी भी न किया करें। मुझे
पूरा तो बोलने दीजिये इसलिये मैंने कहा आप
अन्य नियम में आएं, 127 में आएं, 131 में आएं ताकि उस बारे में आप पूरी चर्चा कर
सकें।
श्री संयम लोढ़ा: माननीय अध्यक्ष महोदय,
मैंने पूरे मसले से आपको अवगत कराया था। आपकी आज्ञा लेने के बाद मैंने नियम 50 के
अंतर्गत यह स्थगन प्रस्ताव दिया है इसलिये कृपा करके...
श्री अध्यक्ष: 50 is not accepted. नियम 50 कब एक्सेप्ट होता है, मुझे आप यह तो बतायें जरा। पूरे राजस्थान
विधान सभा के इतिहास में केवल चार बार 50 एक्सेप्ट हुआ है।
श्री संयम लोढ़ा: आप बोलने की तो आज्ञा
दें। आप मुझे सदन को अवगत कराने का अवसर दें।
श्री अध्यक्ष: तो बोलने के लिये आप थे
कहां ? You were not here.
आप थे कहां यहां।
श्री गुलाब चन्द कटारिया(गृह मंत्री): अध्यक्ष महोदय, मैं केवल निवेदन करना चाह रहा हूं बाकी तो आसन जैसी व्यवस्था
देगा मैं उसे स्वीकार करूंगा। यही प्रश्न पिछले सत्र में माननीय सदस्य ने पूछा
जिसका मैंने पूरा डिटेल दिया। अभी अंत: सत्र में भी यह प्रश्न पूछा उसका भी मैंने
पूरा जवाब दिया। मतलब इसमें कोई चीज नहीं,
किसको दिया...
श्री अध्यक्ष: एक ही बात को दुबारा उठा
ही नहीं सकते कायदे से आप।
श्री गुलाब चन्द कटारिया: किसको दिया,
कितना पैसा दिया, किस फंड से दिया, उसके बाद भी अगर आप किसी विषय पर चर्चा कर रहे
हैं...
श्री संयम लोढ़ा: हम तो माननीय अध्यक्ष
महोदय, बलात्कार से 4 बच्चियां मर गयीं उनको तो आपने फूटी कौड़ी दी नहीं तो उसका जवाब पूछने का हमको हक नहीं है।
श्री अध्यक्ष: तो आपने प्रश्न में पूछ
लिया था।
श्री महावीर प्रसाद जैन: यह उसमें जिक्र
होना चाहिये और एक प्रश्न वह आ चुका है विधान
सभा में उस प्रश्न को बार बार यहां नहीं लाया जा सकता है, नियमों में व्यवस्था
है यह।
श्री संयम लोढ़ा: मामला डिसकस नहीं हुआ है
यहां विधान सभा के अन्दर।
श्री अशोक बैरवा: घटनाएं तो बार बार घट
रही हैं, पूरे प्रदेश में रोजाना घट रही हैं।
श्री अध्यक्ष: आप क्यों खड़े हैं अब ? आप क्यों खड़े हैं।
श्री अशोक बैरवा: आप कह रहे हो कि जवाब
नहीं देना चाहिये।(व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: क्यों नहीं दिया, वह खड़े
हैं ना।
श्री अशोक बैरवा: घटनाएं रोज घट रही हैं
मैं उसकी बात कर रहा हूं।
श्री गुलाब चन्द कटारिया: आपका यह प्रश्न
514 पिछली बार सत्र में था, मैंने इसका आपके एक एक बिंदु का जवाब दिया ना, जो आपके
पास है। मैंने कोई चीज इसमें छिपायी क्या ? अगर इसमें कोई चीज मैंने गलत तथ्य
दिये हों अगर उसके बारे में आपको कुछ कहना है तो आप नियम से आओ, मुझे कोई ऐतराज
नहीं है। अगर मेरे से फैक्ट देने में कोई गलती रह गयी, कमी रह गयी तो मैं समझ
सकता हूं।
श्री अध्यक्ष: हां, नियम में आइये।
श्री संयम लोढ़ा: आपका जवाब देना माननीय
गृह मंत्रीजी, पर्याप्त नहीं है। सरकार की व्यवस्था किस तरह की है उस पर चर्चा
करने का हमारा अधिकार है। 442 बलात्कार हुए..
श्री अध्यक्ष: तो नियम में आओ, कौन मना
कर रहा है।
श्री संयम लोढ़ा: यह कोई तरीका नहीं है
राजशाही का कि आप मर्जी आये जिसको पाँच लाख रुपये दे दो और बाकी पीडि़त बच्चियों
को जिनकी मौत तक हो चुकी है उनको आप फूटी कौड़ी नहीं दो, यह पूछने का अधिकार हमारा
नहीं है ? और जब विधान सभा के अध्यक्ष पद पर..
श्री महावीर प्रसाद जैन: यह वेग आरोप लगा
रहे हैं। वेग आरोप लगाने का कोई अधिकार नहीं है।
श्री संयम लोढ़ा: मेरे पास रिकार्ड है
पूरा एक एक चीज का..
श्री महावीर प्रसाद जैन: बाकायदा एक सूचना
के आधार पर आपको बात करने का अधिकार है लेकिन वेग आरोप लगाने का कोई अधिकार नहीं
है, ऐसी कोई नियमों में व्यवस्था नहीं है।
श्री संयम लोढ़ा: अध्यक्ष महोदय, दो
महीने के शासन में 441 नाबालिग लड़कियों के बलात्कार हुये...
श्री महावीर प्रसाद जैन: सुबह से शाम तक एक ही बात करते हैं, ऐसा कोई केस लाकर बतायें तो समझ में आता है।
श्री संयम लोढ़ा: बहुत गंभीर मामला है..
श्री अध्यक्ष: मैंने आपसे कहा रिसेंट
आकरेंस का कोई भी उदाहरण यदि आप देते तो मैं उस पर आपको चर्चा करने का मौका
देती...
श्री महावीर
प्रसाद जैन: यह कोई गंभीर
नहीं है।
श्री अध्यक्ष: लेकिन आप तो बहिर्गमन करके
चले गये थे। आप थे ही नहीं मौजूद, मैं किसको बोलने का मौका देती ?
श्री संयम लोढ़ा: माननीय अध्यक्ष महोदय,
प्रतिपक्ष के नेता का अगर फैसला है तो प्रतिप्रक्ष का सदस्य होने के नाते उनके
आदेश की पालना करना मेरा कर्तव्य है और मैं आपसे प्रोटक्शन चाहता हूं यह कोई
साधारण सवाल नहीं है, पूरे राजस्थान के अन्दर नाबालिग बच्चियों से बलात्कार का
मामला है और उसको सहायता देने में भेदभाव किया गया है और वह भी तब जब राज्यपाल के पद पर एक महिला आसीन है,
मुख्यमंत्री पद पर महिला आसीन है। आप किसी एक लड़की को तो पाँच लाख
रुपये दे दो और दूसरी को पाँच हजार रुपये भी नहीं दो, यह कौनसा तरीका है सरकार का ?
श्री महावीर प्रसाद जैन: यह आपने परमीशन
दे दी क्या वेग आरोप लगाने की ?
श्री अध्यक्ष: मैंने परमीशन नहीं दी है, यह अननेसेसरी...
श्री संयम लोढ़ा: मैं वेग आरोप नहीं लगा
रहा हूं। इस सरकार का रिकार्ड है मेरे पास में। मैं कोई वेग आरोप नहीं लगा रहा हूं।
श्री महावीर प्रसाद जैन: अध्यक्ष महोदय, न कोई नाम है, न कोई गांव है, न कोई इसमें भेदभाव हुआ है, न कोई बात है और मैं
समझता हूं यह पवित्र सदन का दुरुपयोग है।
श्री अशोक बैरवा: आपको इस समय कुछ नहीं
दिख रहा है। पूरे एक साल में सैकड़ों बलात्कार हुए हैं, आप मदांध हो रहे हैं।
श्री अध्यक्ष: सिरोही से आने वाले माननीय
सदस्य, मैं आपको मौका देती मैंने जैसा कि कहा अगर कोई रिसेंट आकरेंस का मुझे..(व्यवधान)
बैठिये, पहले स्थान ग्रहण कर लें। यदि
रिसेंट आकरेंस का मुझे कोई आप इस तरह का उदाहरण देते कि उसको तो इतना पैसा दिया, इसको इतना कम दिया तो मैं आपको मौका देती लेकिन आप तो थे ही नहीं यहां पर, मौका
किसको देती मैं और अब मैं मौका दूंगी नहीं। अब मैं सदन का समय आपको नहीं लेने
दूंगी।
श्री संयम लोढ़ा: मैं आपसे प्रार्थना करता
हूं कि आप पूरी उदारता के साथ...(व्यवधान) बाहर निकाल दो, मुझे ऐतराज नहीं है।
मैं नाबालिग बच्चियों की, आपकी भी बच्ची हो सकती है, यह क्या बात हुई ?व्यवधान) हां मेरी होगी, चलिये वह सारी बच्चियां मेरी हैं। मेरी बच्ची हैं इसलिये बोल रहा
हूं मैं।
श्री महावीर प्रसाद जैन: आपको तो वह जे.डी.ए. में जो महिला है ना वह याद करती
है आपको तो, बात करते हो।
श्री संयम लोढ़ा: क्या बातें कर रहे हो आप ? एक तो सरकार को आगे बढ़कर बोलना चाहिये कि हमसे गलती हुई है, यह सारी
बच्चियों को सहायता देनी है, आपको सदन में आकर घोषणा करनी चाहिये। वह तो आप करना
नहीं चाहते और मुझे बाहर निकालना चाहते हो। मुझे बाहर निकालने से आपके पाप धुल
नहीं जायेंगे।
श्रीमती ममता शर्मा: माननीय अध्यक्ष
महोदय, मामला बहुत संवेदनशील है, महिलाओं का है इसमें आपको व्यवस्था देनी चाहिये
और यह बात बहुत सही है भेदभाव किया गया है। किसी महिला को पाँच लाख, किसी को दो
लाख, किसी को पाँच हजार, इस पर आपको व्यवस्था देनी चाहिये। मैं आपसे निवेदन कर
रही हूं इनको बोलने की इजाजत देनी चाहिये। इस पर चर्चा होनी चाहिये, चर्चा के लिये
रखा जाना चाहिये इस विषय को।
श्री संयम लोढ़ा: मैं हाथ जोड़कर आपसे
प्रार्थना करता हूं कि यह मामला बहुत गंभीर है और आपको आगे बढ़कर सरकार को निर्देश
देने चाहिये।
श्री नन्दलाल बंशीवाल: क्या व्यवस्था देनी चाहिये और कौनसे नियम में
बोल रहे हैं आप ? ममता जी किस नियम में बोल रही हैं आप ?क्या व्यवस्था देनी
चाहिये अध्यक्ष जी को ? अध्यक्ष जी व्यवस्था दे चुकी हैं। अध्यक्ष जी ने व्यवस्था
दे दी है।
श्रीमती
ममता शर्मा:
आप नहीं
करेंगी तो कौन
करेगा ?
श्री अध्यक्ष:
जब आपकी और से
ममता शर्मा
खड़ी हो गयी
हैं आप स्थान
ग्रहण कर
लें।
श्रीमती
ममता शर्मा:
क्या कह रहे
हैं आप ? आप
माननीय अध्यक्ष
की तरु
मुखातिब होकर
बात करिये।
मेरे से नहीं
कर सकते आप।
मैं बिलकुल
ठीक कह रही
हूं।
श्री नन्दलाल
बंशीवाल: आप
क्या व्यवस्था
चाहती हैं ?
किस नियम में
बोल रही हैं
आप।
श्रीमती
ममता शर्मा:
अध्यक्ष
महोदय, से
निवेदन कर रही
हूं, हम आपके
मोहताज नहीं
हैं, हम आपके
ऊपर नहीं हैं,
हमारा अधिकार
है।
श्री नन्द
लाल बंशीवाल:
आप किस नियम
में आये हो ?
श्रीमती
ममता शर्मा:
बिलकुल हम व्यवस्था
मांगेंगे।
हमारा अधिकार
है मांगने का
व्यवस्था,
जिसे हम मांग
रहे हैं और
महिलाओं का
सवाल है। जब
सरकार के
सामने
महिलाओं का
सवाल आता है,
आपने क्राइम
रेट देखी है,
कितनी बढ़ी हुई
है ?
श्री नन्दलाल
बंशीवाल: आपका
अधिकार है,
नियम में तो
आओ। उधर बात
करो।
श्री अध्यक्ष:
मैं आपकी बात
तो जब सुनू ना
जब यह सब लोग बैठें।
माननीय सदस्य
बैठें।
श्रीमती
ममता शर्मा:
जो अनुशासन
में रहता है
उनको मौका
नहीं मिलता,
जो अनुशासन
में नहीं रहता
अपने आप बोलता
है, आप मौका
देती हैं
उनको।
श्री नन्दलाल
बंशीवाल:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, किस
नियम में आयी
हैं यह ?
श्री अध्यक्ष:
आप क्यों
खड़े हैं ?क्यों
खड़े हैं आप ?
श्री नन्दलाल
बंशीवाल: सदन
का समय खराब कर
रहे हैं।
श्रीमती
ममता शर्मा:
आप बताइये आप
किस नियम में
खड़े हैं।
माननीय सदस्य
किस नियम में
खड़े हैं, मैं
भी पूछ सकती
हूं।
श्री
संयम लोढ़ा:
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आप
सबसे वरिष्ठ
सदस्य हैं,
आपका सबसे लम्बा
अनुभव है और
आप इस पीड़ा
को भली भांति
समझती है और
अनुभव करती
हैं। यह सवाल,
अगर पाँच मिनट
का आप वक्त
दे देंगी और
सरकार से जवाब
दिलवा देंगी
कितनी
बच्चियों का
भला होगा और
आगे के लिये
इस शासन व्यवस्था
को एक निर्देश
मिलेगा कि इस
मामले में
सरकार को काम
करना चाहिये।
मैं आपसे
प्रार्थना करता
हूं।
श्री अध्यक्ष:
इतना महत्वपूर्ण
मसला है
इसीलिये
मैंने कहा है
किसी अन्य
नियम में आइये
ताकि उस पर
विस्तृत
चर्चा की जा
सके। इसीलिये
मैं आपसे
निवेदन कर रही
हूं, अब आप बैठ
जाएं। अन्य
नियम में आ
जाएं, क्या
दिक्कत है ?
श्री नवनीत
लाल नीनामा,
पर्ची पर बोलेंगे।
श्री
नवनीत लाल
नीनामा(घाटोल):
माननीय अध्यक्ष
महोदया,
निवेदन इस
प्रकार है कि
अभी राजस्थान
सरकार ने
किसानों का
विशेष ध्यान
रखते हुए
सिंचाई की और
नहरों के
आखिरी छोर तक
पानी
पहुंचाने की
व्यवस्था
की है। मैं
मेरे तहसील
घाटोल
क्षेत्र में माही
डेम की दायीं
मुख्य नहर जो
निकाली गयी है
और उसी से
माही डेम से ही
भूंगड़ा नाम
की एक केनाल
निकाली गयी
है, दोनों
नहरें निकल
चुकी हैं।
ssy/usc/1300/3a
आपके
विभागीय
अधिकारियों
द्वारा सर्वे
की गयी । वह
सर्वे इस
प्रकार से की
गयी जो समतल
भूमि थी वह भी
छूट गयी और इन
दोनों में
जहां पानी
जाना चाहिए
था वहां आज
दिन तक पानी
बराबर पहुंच
नहीं रहा है
और वह भूमि
कमांड एरिये
में हैं । 15
ग्राम
पंचायतें ऐसी
हैं,पंचायत
मंडल भी हैं
जिसमें 76 गांव
आते हैं और
इसकी 227319 बीघा
जमीन है । इसी
तरह से कमांड
एरिया होने के
बावजूद पानी
नहीं जा रहा
है और जहां
अभी राज्य से
भूमि
अलाटमेंट हो
रही है उसका
प्रीमियम वसूल
किया जा रहा
है । वहां का
किसान पानी
लेने को तैयार
है । पानी
पीने योग्य
जमीन भी है
लेकिन नहरें
वहां पहुंची
नहीं हैं ।
इसलिए मेरा
आग्रह है
इसमें कि
दुबारा सर्वे
कराया जाये ।
यह ग्राम पंचायतें
देवदा, भगौरों
का खेड़ा, कण्ठाव,
खेरवा,
सवनिया,
खमेरा, रूपजी
का खेड़ा, बस्सी
हाड़ा,
देवलिया,
देलवाड़ा,
लोकिया
,गनौड़ा, मोटा
गांव, जगपुरा,
भुआसा, बोरदा
और रूणिया इस तरह
से 15 पटवार
मंडल हैं । वह
जमीन पानी
पिलाने योग्य
है, कमांड भी
है लेकिन
नहरों के अभाव
में वहां का
किसान पास में
पानी होने के बावजूद
पानी नहीं
पिला पा रहा
है । इसलिए
मेरा आग्रह है
कि दुबारा से
कमांड भूमि को
पानी दिलाया
जाये । अगर वह
पानी नहीं
देने योग्य
है, अगर पानी
जाने योग्य
है तो उसका
सर्वे कराकर
पानी सप्लाई
कराया जाये और
जो पानी नहीं
पहुंच रहा है
तो उस भूमि को
कमांड से बाहर
किया जाये
ताकि वहां का
किसान नाजायज
दंड-पेनल्टी
से बच जाये ।
वहां पर सर्वे
कराने के लिए
मैंने पूर्व
में भी मांग
की है लेकिन
अभी तक सर्वे
नहीं हुई है ।
अत: मेरा
मंत्रि महोदय
से निवेदन है
कि दुबारा
मौके पर सर्वे
कराया जाये ।
विभागीय
अधिकारियों
को जहां-जहां
सर्वे योग्य
भूमि है उस
भूमि को जांच
कर इंजीनियर,
ओवरसियर को आदेश
दिया जाये
ताकि वहां का
किसान जो
नाजायज रूप से
अकाल का
मुकाबला कर
रहा है उससे
वह लड़ाई लड़
सके और अनाज
पैदा कर सके ।
अध्यक्ष
महोदय, मेरा
आपसे आग्रह है
कि माननीय
मंत्रि महोदय
को आप ओदश दें
और घोषणा
करायें कि
वहां पर इस
तरह की जो अव्यवस्था
है उसको पूरी
तरह से व्यवस्था
करायी जाये ।
श्री
अध्यक्ष :
ठीक है, धन्यवाद
। श्री रघुवीर
मीणा।
श्री
सांवरलाल
जाट(सिंचाई
मंत्रि): अध्यक्ष
महोदय, माननीय
सदस्य की जो
चिंता है उससे
मैं सहमत हूं
। पहले मेरी
एक बार जयपुर
में बैठक हुई
थी उसमें भी
माननीय सदस्य
ने इस संबंध
में काफी
चर्चा की और
मैंने बाद में
मेरे विभागीय
अधिकारियों
को निर्देश दिये
कि जो बीच का
एरिया जहां पर
पानी नहीं
पहुंच रहा है
वहां पानी
पहुंचाने की
व्यवस्था
करें । माननीय
सदस्य को मैं
कहना चाहता
हूं कि भूखड़ा
की आर.डी. 28 किलोमीटर
से एक उच्चस्तरीय
नहर बनाकर
नरवाली
वितरिका और
भूखड़ा के मध्य
अवस्थित
घाटोल तहसील
के खैरवा,
खमेरा, गोलियावाड़ा,
झरकणिया,
नेगरडा, भगोरा
का पाड़ा, रूपजी
का खेड़ा आदि
गांवों में
लगभग चार हजार
हेक्टेयर
भूमि को
इर्रिगेट
करने के लिए
टेंडर फलोट कर
दिये गये हैं
और जल्दी ही
इस संबंध में
कार्यवाही हो
जायेगी और भी
जो आपने बातें
उठायी हैं अगर
कोई कमांड
एरिया है और
पानी नहीं
पहुंचा है आज
तक और पहुंचने
की संभावना भी
नहीं होगी तो
उसके संबंध
में डी-कमांड
करने की
कार्यवाही
अतशीघ्र
प्रारंभ करवा
देंगे जिससे
किसानों को
किसी प्रकार
की कठिनाई
महसूस नहीं हो
। इसके लिए जो
डूब क्षेत्र.
वहां से भी एक
उच्चस्तरीय
नहर का सर्वे
कराया जा रहा
है जिससे पीपलखूंट
क्षेत्र की
लगभग 4 हजार
हेक्टेयर
भूमि से
सिंचाई
सुविधा उपलब्ध
हो तो इस तरह
से भी विभाग
में काम करना
प्रारंभ कर
दिया ।
श्री
जीतमल खांट:
दानपुर
क्षेत्र भी आ
रहा है ।
श्री
सांवरलाल जाट:
आपका भी आयेगा
।
श्री
अध्यक्ष:
श्री केशर देव
बाबर।
श्री
रघुवीर मीणा:
मैं हूं ना
अध्यक्ष
महोदय, मंत्रि
जी बीच में
खड़े हो गये
थे ।
श्री
अध्यक्ष:
मंत्रि जी बीच
में खड़ें हो
गये तो आप बैठ
गये । आप पूरा
करते अपना ।
आप क्यों
बैठे ।
श्री
रघुवीर मीणा:
पर्ची पर ही
तो बोल रहा
हूं ना । पर्ची
पर ही तो है
मेरा । आप
खड़े हो गये
थे इसलिए ।
श्री
अध्यक्ष: आप
बैठ क्यों
गये ।
श्री
रघुवीर मीणा:
वह बोल रहे थे
। अब सदन की
परंपरा नहीं
निभायेंगे ।
श्री
अध्यक्ष: यह
क्या बात हुई
। आपको अपनी
बात पूरी कहनी
चाहिये थी ...(व्यवधान)
श्री
रघुवीर मीणा:
वह बीच में
खड़े हो गये
थे ना, शुरू ही
नहीं किया
उससे पहले ही
खड़े हो गये...(व्यवधान)
अध्यक्ष
महोदय, मैं
बहुत ही
संवेदनशील
विषय की तरफ
आपके माध्यम
से सरकार का
ध्यानाकर्षित
करना चाहूंगा
जिसमें मैं
उम्मीद करता
हूं कि इसमें
सरकार पूरी
सहानुभूतिपूर्वक
विचार कर कोई
न कोई हल
निकालेगी ।
अध्यक्ष
महोदय, जनजाति
विकास विभाग
का 1975 में गठन
हुआ और राजस्थान
में इसको चार
भागों में
बांटकर
जनजातियों का
विकास होता है
। मैं सभी
क्षेत्रों पर
प्रकाश नहीं
डालकर विषय पर
ही आ जाता हूं
। अनुसूचित
जनजाति का
अनुसूचित
क्षेत्र जहां
राजस्थान का
दक्षिणी
इलाका आता है
जिसमें
बांसवाड़ा
पूरा जिला,
डूंगरपुर
पूरा जिला,
उदयपुर, चित्तौड़
और सिरोही के
कुछ लघु खंड
के 23 पंचायत
समितियों को
मिलाकर
अनुसूचित
क्षेत्र बना
है । वहां जो
अनुसूचित
क्षेत्र
घोषित किया
गया है । भारत
के संविधान की
अधिसूचना
संख्या एफ
19(2)/80/एल-1 दिनांक 12.2.1981
द्वारा
डूंगरपुर व
बांसवाड़ा के
संपूर्ण जिला,
उदयपुर, चित्तौड़,
सिरोही जिलों
के जनजाति
खंडों को
अनुसूचित
क्षेत्र
घोषित किया है
। यह घोषणा
भारत के
संविधान के
अनुच्छेद 244(ए)
के अधीन
पांचवी
अनुसूची के
पैदा 6 के उप पैरा
एक के अंतर्गत
की गयी है ।
मेरा निवेदन इसके
बारे में यह
है कि यह
अनुसूचित
क्षेत्र
संविधान की
धारा 244(ए) के तहत
घोषित है और
अनुसूचित
क्षेत्र की जो
सुविधाएं हैं
वह भी संविधान
के सम्मत हैं
। इसके पीछे
मंशा यह है कि
अनुसूचित क्षेत्र
में रहने वाले
जनजाति लोग जो
वहां की जनसंख्या
के 68.52 प्रतिशत
हैं । जनजाति
बाहुल्य क्षेत्र
45 लाख 44 हजार
लोगों में से 30
लाख 93 हजार लोग
जनजाति के हैं
। वहां का
शैक्षणिक,
सामाजिक और आर्थिक
स्थिति से
पूरा सदन
वाकिफ है । सब
जानते हैं ।
सब सरकारें भी
जानती हैं ।
अध्यक्ष
महोदय, मेरा
निवेदन यह है
कि राजंस्थान
में 54 आर.ए.एस.
आफिसर
हैं उसमें से
उस क्षेत्र से
मात्र एक
आर.ए.एस. है और
एक निर्मला जी
थी व अजमेर की
हो गयी हैं
इसलिए वह इधर
में आ गयी हैं
। एक आर.ए.एस.
ऑफिसर हैं
राजस्थान का
एस.टी. में 74
आर.ए.एस. में से
। आजादी के
बाद 50 साल में
आज तक 20 डाक्टर
बने होंगे और
जिस विषय पर
मैं आपका ध्यानाकर्षित
करना चाह रहा
हूं 2002-03 में
मेडिकल और आर.पी.एम.टी.,
आर.पी.वी.टी.
में स्पेशल
रिजर्वेशन इस
संविधान के
प्रावधानों के
अनुरूप लागू
हुआ उसके बाद
तीन साल में
लगातार करीब 75
छात्र मेडिकल
कॉलेज में
डाक्टरों की
ट्रेनिंग ले
रहे हैं । मैं
आपसे सहानुभूतिपूर्वक
निवेदन इसलिए
कर रहा हूं कि
अभी राज्य
सरकार ने
सुप्रीम
कोर्ट के
फैसले को आधार
वह फैसला
सुप्रीम
कोर्ट ने
एस.सी. की
अनुसूचित जाति
के 57 जातियों
को चार
केटेगरी में
बांट रखा है, ए,
बी, सी, डी और
इनमें अलग-अलग
केटेगरी का
अलग-अलग
प्रतिशत है
रिजर्वेशन का,
एक
प्रतिशत,सात
प्रतिशत,छ:
प्रतिशत,एक
प्रतिशत ।
वहां रैली कम्युनिटी
है । उसकी 2.67
प्रतिशत
पापुलेशन है
और रिजर्वेशन
एक प्रतिशत है
। डी केटेगरी
में आदि आंध्रा
कम्युनिटी
एस.सी. उसमें 8.96
प्रतिशत कास्ट
है और
रिजर्वेश्शन
एक प्रतिशत है
। इस असंतुलन
के कारण वह
लोग सुप्रीम
कोर्ट में गये
। सुप्रीम
कोर्ट ने
संविधान के
अनुच्छेद 341
को आधार बनाकर
के एक फैसला
दिया जो
एस.सी.कम्युनिटी
के संबंध में
था ।
jyg/udc/02032006/1310/3b
आन्ध्रप्रदेश
के सम्बन्ध
में था। एस टी
आर्टिकल 342 में
कवर होती है, 342
में न इसके
बारे में
जिक्र था न एस
टी के बारे
में जिक्र था,
शिड्यूल्ड
एरिया के बारे
में जिक्र था।
मेरा आपसे
निवेदन है कि
इस एरिया के
बारे में
विशेष
प्रावधान हैं
जिसके तहत
केन्द्र
सरकार से
सहायता मिलती
है। धारा 275(1) के
तहत अलग से
फाइनेन्शल
एड मिलती है
और सेण्ट्रल
स्पोन्सर्ड
स्कीम्स से
विकास के काम
होते हैं, स्टेट
गवर्नमेण्ट
की तरफ से भी
होते हैं।
महाराष्ट्र
पैटर्न की तरफ
से होते हैं,
यह सारे प्रावधान
हैं जिसके तहत
मन्शा यह है
कि वहां के
लोगों को
आर्थिक,
सामाजिक, शैक्षणिक
दृष्टि से ऊपर
उठाया जाए और
आज अगर राज्य
सरकार ने इस
फैसले का इण्टरप्रिटेशन
गलत करके एस
टी पर लागू कर
दिया तो आगे
आने वाली
पीढि़यां
बरबाद हो
जाएंगी। अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपसे निवेदन
कर रहा था कि
यह बहुत सेन्सेटिव
विषय है। (समय
समाप्ति सूचक
घण्टी)
श्री अध्यक्ष:
सेन्सेटिव
है तो क्या
हुआ, पर्ची पर
आप 7 मिनट बोल
लिए।
श्री
रघुवीर सिंह
मीणा : मैं
अपना विषय तो
रखूंगा।
अध्यक्ष
महोदय, 20 फरवरी
से अभी बच्चों
के एडमिशन के लिए,
परीक्षा के
लिए फार्म
निकल गए हैं।
अभी मई में
परीक्षा होनी
है और जुलाई
में काउन्सलिंग
होनी है। उस
क्षेत्र के
आदिवासी बच्चे
इतने सक्षम भी
नहीं हैं, न
वहां के लोगों
के पास इतना
पैसा है जो
सुप्रीम
कोर्ट जाकर
अपील करके
फैसला अपने हक
में करा सकें।
हमारे पास तो
एक ही हथियार
है कि सरकार
स्वयं पहल
करके सुप्रीम
कोर्ट में जाए
और जो आदेश
आपने 31.12.2005 को
महर्षि
दयानन्द
सरस्वती
विश्वविद्यालय,
अजमेर को दिया
है उस आदेश को
विड्रा करके
अभी जो बच्चे्
पी एम टी और पी
वी टी में
प्रवेश
करेंगे उनको
सहायता दे
पाएंगे
इसलिए मेरा
आपसे निवेदन
है कि इस पर
पुन: विचार
करके अपने इस
आदेश को स्वीकार
करें, विड्रा
करें।
अध्यक्ष
महोदय, इसके
परिणाम बहुत
गम्भीर यूं
होने वाले हैं
कि 1995, 1996, 1998 और 1999 में
राज्यपाल
महोदय की
अलग-अलग
अधिसूचनाओं द्वारा
कैटेगिरी 1 से 6, 7,
और 9, चतुर्थ
श्रेणी कर्मचारी
से लेकर थर्ड
ग्रेड की
जितनी भी
सर्विसेज आती
हैं उस पर आज
उस क्षेत्र के
लोगों के लिए
रिजर्वेशन है
और यह
प्रभावित
होगा इसलिए
मेरा निवेदन
है कि यह जो
ट्राइबल सब प्लान
एरिये के लिए
पी एम टी, पी jyg/udc/02032006/1310/3b
वी टी में
12 में से 45
प्रतिशत का जो
रिजर्वेशन है
उसको स्थायी
रखा जाए, इसके
लिए सरकार से
उम्मीद
करूंगा और
निश्चित तौर
पर आप कोई आश्वासन
देंगे। इसमें
किसी भी तरह
से, मैं यह नहीं
कहना चाहूंगा
कि यह पार्टी
विशेष का
मामला है, सत्ता
पक्ष के लोग
भी हमारी बात
से सहमत होंगे
और मैं
चाहूंगा कि इस
बारे में सभी
अपनी सहमति व्यक्त
करें। (व्यवधान)
श्री
अर्जुनलाल
मीणा (सलूम्बर):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, बहुत
ही महत्वपूर्ण
प्रश्न है,
इस पर सरकार
अमल करके अपना
वक्तव्य
जारी करे और
हमारी मदद
करे। यह कोई
आरोप प्रत्यारोप
का मामला नहीं
है। यह उदयपुर
संभाग के ट्राइबल
का मामला है।
श्री
जीतमल खांट
(बागीडोरा):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, यह कोई
आरोप प्रत्यारोप
का मामला नहीं
है, यह भारतीय
जनता पार्टी
का कांग्रेस
का मामला नहीं
है।
श्री अध्यक्ष:
जिस माननीय
सदस्य ने
पर्ची दी है,
वही बोले, यह
क्या बात
हुई? स्थान
ग्रहण करें।
श्री
अर्जुनलाल
मीणा: मैं धन्यवाद
देना चाहूंगा
कि
हमारा जितना
भी बैकलॉग है,
खाली पड़े पद
थे उसको
माननीय
शिक्षा
मंत्रीजी ने
भरा है और यह
बहुत बड़ा गम्भीर
विषय है। मैं
निवेदन करना
चाहता हूं कि
इस पर आप
विचार करें।
श्री अध्यक्ष:
पर्ची जिन
माननीय सदस्य
ने दी है केवल
उसी को बोलने
का अधिकार है
। यदि बहुत
महत्वपूर्ण
मामला है तो
आप अन्य नियमों
में आ जाइए,
इसमें क्या
दिक्कत है?
(व्यवधान)
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी
(शिक्षा
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, राज्यपाल
महोदय के
अभिभाषण पर भी
माननीय सदस्यों
ने अपनी पीड़ा
व्यक्त की
थी। अभी भी
पीड़ा व्यक्त
की है, सदन के
बहुत से
माननीय सदस्य
मुझसे मिले
हैं, मैं अपनी
स्थिति बहुत
स्पष्ट कर
देता हूं कि
राज्य सरकार
ने पूर्व में
भी यह जो 12
प्रतिशत का
आरक्षण है पी
एम टी में एस
टी का उसमें 45
प्रतिशत आरक्षण
जो जनजाति
क्षेत्र
विकास एरिया
है उसके लिए
रखा था, वह
लगातार चल रहा
था। सर्वोच्च
न्यायालय ने
पिछली बार एक
फैसला दिया,
मैं उस फैसले
की समीक्षा
में नहीं जा
रहा हूं क्योंकि
उस फैसले में
दोनों सेक्शन
लिखे हैं, 341 भी
है, 342 भी है और
उन्होंने यह
भी लिखा है कि
मटाण्डिस
मुटाण्डी जो
341 पर फैसला
होगा वह 342 पर
लागू होगा और 342
पर जो फैसला
होगा वह 341 पर
लागू होगा। यह
5 जजों की बैन्च
का फैसला है।
इसके बाद
पिछली बार जब
हम काउन्सिलिंग
कर रहे थे तो
सुश्री
राजकुमारी
मीणा
ने पत्र दिया
और कन्टेम्प्ट
का नोटिस राज्य
सरकार को दिया
लेकिन चूंकि
पिछली बार भी
हमने इसको
सर्वोच्च न्यायालय
में अप्लीकेशन
देकर कि यह
इलाका अलग से
है और हमने
उसका
रिजर्वेशन कायम
रखा, इस पर भी
नोटिस मिल गया
है। इस किताब
का तो आपने
पढ़ा, वह तो एक
कानूनी बाध्यता
है लेकिन
सरकार
सर्वोच्च न्यायालय
में गई है और
हम कोशिश यह
कर रहे हैं 2006-07 में
भी जुलाई में
जो
काउन्सिलिंग
हो उसके पहले-पहले
सर्वोच्च न्यायालय
से हम इस बात
की छूट ले लें
और छूट लेकर आपके
अधिकार को
आरक्षित
करें। सरकार
ने इसमें
निश्चित रूप
से माना है
इसलिए इस पर
कोई भी विवाद
की बात कहने
की आवश्यकता
नहीं है।
श्री अध्यक्ष:श्री
केशरदेव
बाबर।
श्री
केशरदेव बाबर
(लक्ष्मणगढ़):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, आपने
मुझे बोलने के
लिए इजाजत दी उसके
लिए धन्यवाद।
मैं आपके माध्यम
से पशु पालन
मंत्रीजी का
ध्यान
दिलाना
चाहूंगा कि
मेरे विधान
सभा क्षेत्र
लक्ष्मणगढ़
के ग्राम
चारणानाऊ,
बाटडानाऊ,
राजास, एवं
आसपास के
गांवों में
भेड़ और
बकरियों में अजीब
बीमारी फैल गई
है और यह
बीमारी करीब 20-25
दिन से चल रही
है। इससे करीब
150-200 जानवर मर
चुके हैं और अभी
भी उन जानवरों
का मरना जारी
है। मैंने वहां
के प्रशासन से
इस बारे में
बात की और
वहां डाक्टरों
की टीम भी गई
लेकिन अभी तक
जो उपाय होने
चाहिए थे, वह
उपाय नहीं हुए
हैं और वहां
जो पशु पालक
हैं वह भयभीत
हैं और अभी भी
उनके जानवर
मरना जारी है।
मेरा सरकार से
अनुरोध है कि
वहां अच्छे
डाक्टरों की
एक टीम जाए
भिजवाई जाए और
जो पशु मर रहे
हैं उनका इलाज
किया जाए और
जिनकी भेड
बकरियां मर
चुकी हैं उन
गरीब
परिवारों को
मुआवजा
दिलाया जाए,
यही मेरी
सरकार से आशा
है। धन्यवाद
श्री अध्यक्ष:
मोहम्मद
माहिर आजाद।
मोहम्मद
माहिर आजाद
(नगर): अध्यक्ष
महोदय, मैं
आपके माध्यम
से माननीय
शिक्षा
मंत्रीजी का और सदन
का ध्यान
पैरा टीचर्स
की समस्याओं
के सम्बन्ध
में दिलाना
चाहता हूं। यह
सदन साक्षी है
इस बात का कि
पिछले बजट
सत्र में
माननीय
शिक्षा
मंत्रीजी ने
यहां खड़े
होकर यह घोषणा
की थी कि चाहे
पैरा टीचर हो,
चाहे डी पी ई
पी के हो, चाहे
मदरसा पैरा
टीचर्स हो,
चाहे लोक
जुम्बिश के
शिक्षाकर्मी
हो चाहे उर्दू
शिक्षाकर्मी
हो, हम बहुत
जल्द इसकी समीक्षा
करके इनका स्थायीकरण,
इनकी वेतन
वृद्धि और
समान
सुविधाएं देने
का इरादा रखते
हैं और बहुत
जल्दी ही
इसका फैसला कर
लिया जाएगा।
लेकिन
माननीय अध्यक्ष
महोदय, एक साल
गुजर गया और
एक साल गुजरने
के बाद भी आप
द्वारा की गई
घोषणा पर अमल
नहीं हुआ।
इससे बड़ी शर्म
की बात कुछ हो
नहीं सकती। आज
पूरे राजस्थान
के अन्दर जो
भी पैरा टीचर
थे 30-35 हजार उनमें
से करीब 10 हजार
तो आर पी एस सी
के माध्यम से
स्थायी हो गए
लेकिन बाकी जो
बच गए चाहे वह
आप हो या हम हो,
हम चुनाव
लड़ते हैं, एक
बार असफलता भी
मिलती है,
सबको मिली तो दूसरी
बार मौका फिर
देते हैं यह
नहीं कि घर बैठ
जाए, जो बाकी
बचे उनको भी
आपको अवसर
देना चाहिए
किसी कारणवश
वह रह गए हों,
आज पूरे राजस्थान
में पैरा
टीचर्स ने
आंदोलन किया 19
स्थानों पर
और उदयपुर
जहां से
माननीय गृह
मंत्रीजी आते
हैं, वहां पर
गोली भी चलाई
गई, आज स्थिति
यह है कि उन
पैरा टीचर्स
के मन में यह भावना
आ गई कि अब हम
स्थाई हो
नहीं सकते तो
जिस रुचि से
वह कार्य कर रहे
थे शिक्षा के
प्रचार
प्रसार में
सहयोग दे रहे
थे, आज उनमें
भी एक
उदासीनता आई
है और इसलिए मेरा
आपसे निवदन है
कि एक बार और
अवसर आप इनको दें
और जो बॉड
भरने का नया
फार्मूला आप
ले आए
कि सारे पैरा
टीचर्स
नोन जूडिशल
स्टाम्प पर
एक अनुबन्ध
पत्र भर कर दे
दें और इससे
उनके मन में
यह हो रहा है
कि बस यह बॉण्ड
हमने भरा,
उसके बाद इस
अवधि के बाद
हमारी छुट्टी
हो जाएगी। इन
सारी शंकाओं
के ऊपर अपना
समाधान कराने
के लिए पैरा
टीचर्स का
प्रतिनिधिमण्डल
माननीय
शिक्षा
मंत्रीजी के
घर पर गया,
सारे
मंत्रियों के
पास, विधायकों
के पास ,
जनप्रतिनिधियों
के पास गया।
Gpc/udc/1320/3c/2-3-06
लेकिन
क्या यह सही है कि उसके बाद वो प्रतिनिधि मण्डल माननीय बी.डी. कल्ला जी के पास,
रामलाल जी के पास और हमारे पास भी आया और उसने जो पीड़ा व्यक्त की, मैं उम्मीद
नहीं कर सकता था कि जिसको वजीरे तालीम कहा जाए या शिक्षा मंत्री कहा जाए वो इस तरह
की भाषा का उपयोग भी कर सकता है क्या? उन पैराटीचर्स को, प्रतिनिधि मण्डल को
माननीय शिक्षा मंत्रीजी ने कहा कि तुम चले जाओ, मैं तुम्हारी कोई बात नहीं सुनना
चाहता, तुम तो कांग्रेस की नाजायज औलाद हो। क्या इस तरीके की भाषा के प्रयोग की
अपेक्षा शिक्षा मंत्रीजी से की जा सकती है? शिक्षा मंत्रीजी, अगर यह बात आपने कही
है तो आपको निश्चित रूप से सार्वजनिक रूप से पैराटीचर्स से माफी मांगनी चाहिए और
नहीं कही है तो सदन के माध्यम से आज इस बात का खुलासा किया जाना चाहिए कि यह गलत
बात है इस तरह की भाषा का प्रयोग नहीं किया।
अध्यक्ष
महोदय, मैं आपके माध्यम से निहायत अदब के साथ कहना चाहता हूं माननीय शिक्षा
मंत्रीजी खुद
विद्वान आदमी हैं, मैं इनसे निवेदन करना चाहता हूं कि चाहे कांग्रेस
के शासन में लगे, आज आप भी लगा रहे हैं, चाहे आप साथिनें लगा रहे हैं, चाहे और
दूसरे विभाग में लगा रहे हैं, हुकम कभी नहीं बदलता है, हाकिम बदल जाता है। इसलिए
चाहे कांग्रेस के शासन में इनको लगाया गया हो, आज इनकी जो समस्याएं और पीड़ा है
उनका समाधान करना आपका काम है। इसलिए निश्चित रूप से जो लोग वंचित रह गये हैं उनको
आप पुन: अवसर दें ताकि वो अगर उसमें अपनी प्रतिभा दिखा सकते हैं और उनका चयन हो
सकता है तो चयन हो तो उनके मन में भी यह रहे कि हम भी स्थायी हो सकते हैं और वे
रुचि के साथ काम करें और इस तरह की भाषा का मुझे तो आशा और विश्वास नहीं है,
लेकिन फिर भी आपने उपयोग किया है तो सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए और (व्यवधान)
श्री मदन राठौड़: ऐसी भाषा का प्रयोग नहीं
किया हो तो आप माफी मांग लें।
मोहम्मद माहिर आजाद: मैं क्यों मांगूं,
पैराटीचर्स ने जो ज्ञापन दिया है उसमें लिखित में यह बात हमको कही है, हम उनसे बात
करेंगे, गलत बात क्यों कह रहे हो, मैं किस बात की माफी मांगू? माननीय अध्यक्ष
महोदय, शिक्षा मंत्रीजी से मैं आपके माध्यम से कह रहा हूं आपके पेट में मरोड़ी क्यों
उठी? यहां पर आयुर्वेद का अस्पताल भी है, एलोपैथिक का भी है, चले जाइए, मुझसे क्यों
समाधान करना चाहते हो?
श्री मदन राठौड़: आप तो यूनानी दवा काम
में लें वहां ठीक रहेगा, आयुर्वेद की बात आप मत करो।
मोहम्मद माहिर आजाद: इसमें आप मेरे
सलाहकार हो क्या, अवैतनिक या वैतनिक यह तो बता दो आप।
श्री मदन राठौड़: आपने मुझे सलाह दी है कि
मैं आयुर्वेद की लूं। आपने मुझे सलाह दी है तो मैंने भी आपको सलाह दे दी। जिस
प्रकार से आप मुझे दे रहे हैं मैं भी उसी रूप में आपको दे रहा हूं। (व्यवधान)
मोहम्मद माहिर आजाद: माननीय अध्यक्ष
महोदय, यह क्या तरीका है हम अपनी बात आपके माध्यम से शिक्षा मंत्रीजी और सदन से कह रहे हैं, ये बीच-बीच में इस तरह की बात करते हैं उससे क्या मतलब हुआ? विषयान्तर
हो जाते हैं। इसलिए माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्यम से शिक्षामंत्रीजी
से यही निवेदन है कि समय रहते अभी भी इन सारे लोक जुम्बिश, शिक्षाकर्मी, उर्दू
शिक्षाकर्मी, मदरसा पैराटीचर्स और राजीव गांधी पाठशालाओं के जो पैराटीचर्स हैं
इनमें किसी का 200 रुपया साल बढता है, किसी का 100 रुपया बढ़ता है, किसी को कितना
मिल रहा है, इनकी समान सेवा शर्तें हैं, वेतनवृद्धि है इन सबको कीजिए और इनके स्थायीकरण
के लिए कृपया जो वंचित रह गये उनको एक अवसर और दीजिए और अगर आपने इस तरीके की भाषा
का प्रयोग किया है तो उसका खुलासा सदन के माध्यम से करेंगे, इतना ही मुझे आपसे
निवेदन करना है।
डा. बुलाकीदास कल्ला: अध्यक्ष महोदय, यदि शिक्षा मंत्रीजी ने वास्तव में ये शब्द कहे हैं तो आपको ये शब्द वापस लेने
चाहिए, नहीं तो इसका स्पष्टीकरण करना चाहिए।
श्री घनश्याम तिवाड़ी: अध्यक्ष महोदय, मैं
बोलता नहीं, लेकिन मैं बोल देता हूं, मुझे इतने वर्ष हो गये, 1980 से तो मैं आपके
साथ इस सदन में हूं और मेरी ऐसी संस्कृति नहीं है, मैं किसी को जायज औलाद ही नहीं
बताता तो नाजायज कैसे बता सकता हूं?
मोहम्मद माहिर आजाद: वैसे आपने अपने आपको
माननीय भैरोंसिंह जी का राजनैतिक पुत्र कहा था एक बार, यह मत कहिए आप।
श्री घनश्याम तिवाड़ी: वह तो हूं मैं
उनका।
मोहम्मद माहिर आजाद: यह तो आपने कहा था,
इसलिए क्या बताते हो?
श्री घनश्याम तिवाड़ी: पुत्रवत हूं, आज भी मैं कब मना करता हूं। अध्यक्ष महोदय, जिस समस्या की ओर मेरा ध्यान आकर्षित
किया है, उसी दिन मैंने बी.डी. कल्ला साहब से भी
बात की थी, आपने कहा कि रामलाल
जी को संरक्षक बनाया है, हम बात करेंगे, लेकिन मेरे पास उसके बाद आ गये थे, आप केवल
डीपीईपी और पैराटीचर्स की बात कर रहे हैं उनकी समस्या का समाधान हो गया है।
दूसरा,
जितने नाम लिए हैं उनका हो गया है। अभी राजीव गांधी पैराटीचर्स हैं उनका भी सम्मेलन
मण्डफिया, सांवलिया जी में हुआ था, मैं वहां गया था उनसे भी मेरी सारी बातचीत हो
चुकी है और ए.के. पाण्डे जी की हमने कमेटी बनायी हुई है उस कमेटी की इसी महीने
में रिपोर्ट आ जाएगी। वैसे हमने जिन समस्याओं का समाधान कर दिया है उनमें लोक
जुम्बिश के 948 आदमियों का समाधान हो गया है, अब इनकी कोई समस्या नहीं है।
शिक्षाकर्मी 8532 हैं उनमें 5 हजार वरिष्ठ शिक्षाकर्मी में समायोजित हो गये हैं
उनको 8500 रुपये महीने का वेतन मिलने लग गया है। बाकी भी जिन-जिनको 8 वर्ष पूरे
होंगे वो समायोजित हो जाएंगे, उनके लिए अलग से शिक्षाकर्मी बोर्ड गठित कर दिया है जो समाप्त हो गया था, उनकी समस्या का भी समाधान कर दिया है।
इसी प्रकार से संस्कृत विभाग में 250 थे उनका
भी कर दिया है। मदरसा राजीव गांधी में 1231 थे उनका भी समाधान कर दिया है। शारीरिक
पैराटीचर्स 630 थे उनका भी समाधान कर दिया है। अब कुल मिलाकर 21877 पैराटीचर्स बचे
हैं, करीब 12 हजार पैराटीचर्स का राजस्थान पब्लिक सर्विस कमीशन के माध्यम से
डाइरेक्ट सलेक्शन हो गया है, उनका नियमितीकरण हो गया है। अब जो 21800 बचे हैं
उनको भी इस बार जो 7200 लोगों की नयी वैकेंसी कल निकली है, अब इन पैराटीचर्स को एक
बार पुन: परीक्षा में बैठने की अनुमति दे देंगे ताकि इनका भी नियमितीकरण के अंदर
नाम आ जाए और इनका जो वेतन बढ़ाने की बात है वह वेतन बढ़ाने की मांग में मानदेय
इनको दिया जाता है उसके लिए ए.के. पाण्डे साहब की अध्यक्षता में कमेटी बनी हुई
है उस कमेटी की रिपोर्ट इसी महीने में आ जाएगी और मैं समझता हूं इनकी समस्याओं का हम समाधान जहां तक कर सकते हैं उतना सरकार करने की कोशिश करेंगी। किसी भी प्रकार
से सरकार के मन में नहीं है, किस सरकार में लगे, सरकार कौन होती है,
सरकार एक
कंटीन्युअस प्रोसेस है, उसमें लगे हैं, किसी को भी जो काम कर रहे हैं न तो किसी
को बाहर निकालने का विचार है, न किसी को परेशान करने का विचार है। इन सब लोगों को
समायोजित करके नियम, कानून, कायदे के अंतर्गत चलेंगे और मैं समझता हूं कि इस महीने
में इस प्रकार का कोई समाधान निकलेगा जिसके बाद में शिक्षा विभाग में पैराटीचर्स
की या किसी भी प्रकार के टीचर्स की समस्या का बहुत बड़ा झमेला था वह हमेशा के लिए
समाप्त हो जाएगा। सरकार यह भी चाहती है कि इनको अच्छा वेतन मिले ताकि ये अच्छे
ढंग से बच्चों को पढ़ा सके।
इसलिए इस प्रकार की कोई समस्या नहीं रहेगी, यह मेरा
आपके माध्यम से कहना है और ऐसी बात कहने की तो आप सपने में मत सोचना, आपके मुंह
से तो मझे आशा भी नहीं थी कि आप मेरे लिए ऐसी बात बोल दोगे। खैर, मेरी भी थोड़ी
इमेज कम हुई है यह बोलने से आपके बारे में। बहुत-बहुत धन्यवाद।
श्री रामलाल (बनेड़ा): माननीय मंत्रीजी, इतनी अच्छी बात कही आपने (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: मुझे सदन को सूचित करना है
(व्यवधान) स्थान ग्रहण करें।
श्री रामलाल (बनेड़ा): अच्छी बात कही है, पूरी जानकारी दे दी, बाण्ड वाली बता दो।
श्री घनश्याम तिवाड़ी: बाण्ड का कुछ
नहीं है, बाण्ड का सुप्रीम कोर्ट का फैसला हो गया था कि आप किसी प्रकार से बैकडॉर
एंट्री नहीं कर सकते, इसलिए वित्त विभाग की कुछ धारणाएं थीं कि इस प्रकार से ले
लेंगे तो उनकी नियमित नियुक्ति नहीं मानी जाएगी। इसलिए उनके इंट्रेस्ट में ही
हमने यह काम किया है और अब वह हाईकोर्ट में है, जैसा भी फैसला होगा, कर देंगे, किसी भी प्रकार से सरकार की कोई भी जिद नहीं है। (व्यवधान)
श्री अध्यक्ष: अब नहीं। अब आप विराजें।
श्री बंशीलाल खटीक: इसको कार्यवाही से
निकालें। अब ये पढ़ रहे थे इधर से आवाज आयी
आसन सो गया।
श्री अध्यक्ष: अंकित ही नहीं हो रहा था, क्या निकालें।
सभापति
तालिका
माननीय सदस्यगण, मुझे सदन को सूचित करना है कि प्रक्रिया तथा
कार्यसंचालन संबंधी नियमों के नियम 9(1) के अंतर्गत मैं श्री रामनारायण मीणा, सदस्य
को सभापति तालिका के लिए मनोनीत करती हूं । (व्यवधान) अब नाम तो आये नहीं किसी
के। बोलने वालों के नाम नहीं आये। (व्यवधान)
डा. श्रीगोपाल बाहेती: माननीय अध्यक्ष
महोदय, पाइंट ऑफ इंफार्मेशन।
श्री घनश्याम तिवाड़ी: सदन के पटल पर
रखने के बाद में बात कर लें।
श्री अध्यक्ष: इंफार्मेशन आप दे रहे हैं, खड़े
वे हैं।
डा. श्रीगोपाल बाहेती: मैं दे रहा हूं। अध्यक्ष
महोदय, पाइंट ऑफ इंफार्मेशन। ब्यावर में नगर परिषद में बी.जे.पी. के बोर्ड ने
बिना बहुमत के अपनी पूरी कार्यवाही कर ली उसके विरोध में कांग्रेस के 21 पार्षद
वहां धरने पर बैठे हुए हैं और चार दिन से भूख हड़ताल पर हैं। सरकार व प्रशासन
बिलकुल मौन बैठा हुआ है, जिनमें से दो-तीन आदमियों की स्थिति गंभीर है। तो मेरा
आपके माध्यम सरकार से निवेदन है कि सरकार इस मामले में जो भूख हड़ताल पर बैठे हैं
उनसे बात करें और जो कार्यवाही अवैध हुई है म्युनिसिपैलिटी की उसे निरस्त करके
लोकतंत्र की रक्षा करें, यह मुझे आपके माध्यम से निवेदन करना है।
mlb/akt/3d/13.30/2.3.2006
यह
मुझे आपके
माध्यम से
सरकार को
बताना था।
श्री अध्यक्ष:
यू.डी.एच.
मंत्री जी
कृपया ध्यान
दें, बैठे हैं
न घनश्याम जी
वह बता देंगे।
श्री
गुलाबचन्द
जी कटारिया
अधिसूचना सदन
की मेज पर
रखेंगे।
श्री
गुलाबचन्द
कटारिया(प्रभारी
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, मैं आपकी
अनुमति से
कार्यसूची
में किये गये
उल्लेख के
अनुसार निम्नांकित
अधिसूचनाएं
सदन की मेज पर
रखता हूं:-
|
1. |
अधिसूचना
संख्या-एफ.9(23)गृह-5/2005 दिनांक
15.10.2005 (हिन्दी
अनुवाद सहित)
जिसके
द्वारा
कतिपय
आसूचना और
सुरक्षा
संगठनों को
विनिर्दिष्ट
किया गया है । |
|
2. |
अधिसूचना
संख्या-एफ.9(23)गृह-5/2005 दिनांक
12.10.2005 एवं 14.10.2005
जिसके द्वारा
राजस्थान
सूचना का
अधिकार नियम, 2005
विरचित किये
गये है एवं
उसका हिन्दी
अनुवाद जारी
किया गया है । |
श्री
अध्यक्ष: तीन
अधिसूचनाएं
थी आपकी तो, दो
ही रख रहे हैं
क्या ?
श्री
गुलाबचन्द
कटारिया: दो
ही हैं।श्री
अध्यक्ष:
इसमें तो तीन
लिखा है।श्री
गुलाबचन्द
कटारिया:
नहीं, दो ही
हैं।श्री अध्यक्ष:
श्री युनूस
खान।श्री
युनूस खान(प्रभारी
मंत्री):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, मैं आपकी
अनुमति से
कार्य सूची
में किये गये उल्लेख्
के अनुसार
परिवहन विभाग
की निम्नांकित
अधिसूचनाएं
सदन की मेज पर
रखता हूं।
|
1. |
अधिसूचना
संख्या-एफ.6(262)परि/कर/मु./2005 दिनांक
5.12.2005 जिसके द्वारा
अधिसूचना
संख्या-एफ.6(179)परि/कर/मु./2005 दिनांक
24.3.2005 में संशोधन
किया गया है । |
|
2. |
अधिसूचना
संख्या-एफ.6(96)परि/कर/मु./।।।/2001 दिनांक
9.11.2005 जिसके द्वारा
स्टेज
कैरिज
मार्गों पर
संचालित
वाहनों को
वर्ष 2005-06 में
देय विशेष
पथकर राशि को
घटाकर वर्ष 2004-05
में देय
विशेष पथकर
की राशि के
बराबर किया
गया है । |
|
3. |
अधिसूचना
संख्या-एफ.6(262)परि/कर/मु./2005 दिनांक
3.1.2006 जिसके द्वारा
पूर्व में
जारी
अधिसूचना
संख्या-एफ.6(262)परि/टैक्स/एच.क्यू./
2001
दिनांक 20.2.2004
अधिसूचना
संख्या-एफ.6(179)परि/कर/मु./2005 दिनांक
24.3.2005 (समय-समय पर
यथासंशोधित)
को तुरन्त
प्रभाव से
विखण्डित
किया गया है 1 |
श्री अध्यक्ष:
श्री
रामनारायण
डूडी।
श्री
रामनारायण
डूडी (श्री
वीरेन्द्र
मीणा, वित्त
राज्य
मंत्री के स्थान
पर): अध्यक्ष
महोदय, मैं आपकी
अनुमति से
कार्य सूची
में किये गये उल्लेख
के अनुसार
वित्त विभाग
की निम्नांकित
अधिसूचनाएं
सदन की मेज पर
रखता हूं।
|
1. |
अधिसूचना
संख्या-प.7/1ए/वित्त-1(1)/आय-व्यय/2005
दिनांक 24.1.2006
जिसके
द्वारा
राजस्थान
राजवित्तीय
उत्तरदायित्व
और बजट
प्रबंध नियम, 2006
विरचित किये
गये है । |
|
2. |
अधिसूचना
संख्या-प.2(11)वित्त/कर/03पार्ट-38 दिनांक
20.9.2005 जिसके
द्वारा अधिसूचना
संख्या-प.2(11)वित्त/कर/2003/110 दिनांक
14.1.2004 में संशोधन
किया गया है । |
|
3. |
अधिसूचना
संख्या-प.16(3)वित्त/कर/2004-39 दिनांक
23.9.2005 जिसके
द्वारा
आवा-कजावा
रीति से निर्मित
ईंटों के
(चिमनी विधि
के प्रयोग
करते हुए
भट्टों
द्वारा
निर्मित
ईंटों को
छोडकर विक्रय
को राजस्थान
विक्रय कर से
सशर्त छूट
प्रदान की गई
है । |
|
4. |
अधिसूचना
संख्या-प.16(3)वित्त/कर/2004-40 दिनांक
23.9.2005 जिसके
द्वारा पाली,
अलवर, जोधपुर
व भीलवाड़ा
संवर्गों
में
अधिसूचना
में उल्लेखित
सूची अनुसार
विनिर्दिष्ट
क्षेत्र/चैकपोस्टों
पर उनके सम्मुख
अंकित माल पर
संविदा के
आधार पर कर
संग्रहण
किये जाने
हेतु आयुक्त
वाणिज्यिक
कर विभाग,
राजस्थान
जयपुर को
आदेशित किया
गया है । |
|
5. |
अधिसूचना
संख्या-प.16(3)वित्त/कर/2004-41 दिनांक
23.9.2005 जिसके
द्वारा
अधिसूचना संख्या-प.16(3)वित्त/कर/2004-25 दिनांक
19.5.2004 में संशोधन
किया गया है । |
|
6. |
अधिसूचना
संख्या-प.16(3)वित्त/कर/2004-42 दिनांक
23.9.2005 जिसके
द्वारा
अधिसूचना
संख्या-प.16(3)वित्त/कर/2004-13 दिनांक
9.6.2004 में संशोधन
किया गया है । |
|
7. |
अधिसूचना
संख्या-प.16(3)वित्त/कर/2004-43 दिनांक
23.9.2005 जिसके
द्वारा
अधिसूचना
संख्या-प.16(3)वित्त/कर/2004-129 दिनांक
25.11.2004 में संशोधन
किया गया है । |
|
8. |
अधिसूचना
संख्या-प.12(20)वित्त/कर/05पार्ट-44 दिनांक
27.9.2005 जिसके
द्वारा
अधिसूचना
संख्या-प.5(40)एफडीआरटी/63-। दिनांक
2.3.1963 में संशोधन किया
गया है । |
|
9. |
अधिसूचना
संख्या-प.12(20)वित्त/कर/05पार्ट-45 दिनांक
27.9.2005 जिसके
द्वारा अधिसूचना
संख्या-प.5(17)एफडीसीटी/69-3 दिनांक
1.4.1969 में संशोधन
किया गया है । |
|
10. |
अधिसूचना
संख्या-प.12(20)वित्त/कर/05पार्ट-46 दिनांक
27.9.2005 जिसके
द्वारा अधिसूचना
संख्या-प.5(70)एफडीसीटी/70-6 दिनांक
31.5.1971 में संशोधन
किया गया है । |
|
11. |
अधिसूचना
संख्या-प.12(20)वित्त/कर/05पार्ट-47 दिनांक
27.9.2005 जिसके
द्वारा अधिसूचना
संख्या-प.2(8)वित्त/ग्रुप-4/75-27 दिनांक
4.12.1975 में संशोधन
किया गया है । |
|
12. |
अधिसूचना
संख्या-प.12(20)वित्त/कर/05पार्ट-48 दिनांक
27.9.2005 जिसके
द्वारा अधिसूचना
संख्या-प.4(67)वित्त/ग्रुप-4/76-25 दिनांक
8.9.1976 में संशोधन
किया गया है । |
|
13. |
अधिसूचना
संख्या-प.12(20)वित्त/कर/05पार्ट-49 दिनांक
27.9.2005 जिसके
द्वारा अधिसूचना
संख्या-प.4(60)वित्त/ग्रुप-4/76-36 दिनांक
14.12.1976 में संशोधन
किया गया है । |
|
14. |
अधिसूचना
संख्या-प.12(20)वित्त/कर/05पार्ट-50 दिनांक
27.9.2005 जिसके
द्वारा अधिसूचना
संख्या-प.4(21)वित्त/ग्रुप-4/78-5 दिनांक
6.3.1978 में संशोधन
किया गया है । |
|
15. |
अधिसूचना
संख्या-प.12(20)वित्त/कर/05पार्ट-51 दिनांक
27.9.2005 जिसके
द्वारा अधिसूचना
संख्या-प.4(25)वित्त/ग्रुप-4/77-36 दिनांक
27.2.1980 में संशोधन
किया गया है । |
|
16. |
अधिसूचना
संख्या-प.12(20)वित्त/कर/05पार्ट-52 दिनांक
27.9.2005 जिसके
द्वारा अधिसूचना
संख्या-प.4(5)वित्त/ग्रुप-4/85-26 दिनांक
5.7.1985 में संशोधन
किया गया है । |
|
17. |
अधिसूचना
संख्या-प.12(20)वित्त/कर/05पार्ट-53 दिनांक
27.9.2005 जिसके
द्वारा अधिसूचना
संख्या-प.4(30)वित्त/ग्रुप-4/86-6 दिनांक
6.3.1986 में संशोधन
किया गया है । |
|
18. |
अधिसूचना
संख्या-प.12(20)वित्त/कर/05पार्ट-54 दिनांक
27.9.2005 जिसके
द्वारा अधिसूचना
संख्या-प.4(10)वित्त/ग्रुप-4/86-17 दिनांक
28.4.1986 में संशोधन
किया गया है । |
|
19. |
अधिसूचना
संख्या-प.12(20)वित्त/कर/05पार्ट-55 दिनांक
27.9.2005 जिसके
द्वारा अधिसूचना
संख्या-प.4(52)वित्त/ग्रुप-4/86-37 दिनांक
16.10.1986 में संशोधन
किया गया है । |
|
20. |
अधिसूचना
संख्या-प.12(20)वित्त/कर/05पार्ट-56 दिनांक
27.9.2005 जिसके
द्वारा अधिसूचना
संख्या-प.4(8)वित्त/ग्रुप-4/87-15 दिनांक
5.3.1987 में संशोधन
किया गया है । |
|
21. |
अधिसूचना
संख्या-प.12(20)वित्त/कर/05पार्ट-57 दिनांक
27.9.2005 जिसके
द्वारा अधिसूचना
संख्या-प.4(45)वित्त/ग्रुप-4/85-31 दिनांक
5.5.1987 में संशोधन
किया गया है । |
|
22. |
अधिसूचना
संख्या-प.12(20)वित्त/कर/05पार्ट-58 दिनांक
27.9.2005 जिसके
द्वारा अधिसूचना
संख्या-प.4(2)वित्त/ग्रुप-4/87-47 दिनांक
15.7.1987 में संशोधन
किया गया है । |
|
23. |
अधिसूचना
संख्या-प.12(20)वित्त/कर/05पार्ट-59 दिनांक
27.9.2005 जिसके
द्वारा अधिसूचना
संख्या-प.4(45)वित्त/ग्रुप-4/85-61 दिनांक
31.8.1987 में संशोधन
किया गया है । |
|
24. |
अधिसूचना
संख्या-प.12(20)वित्त/कर/05पार्ट-60 दिनांक
27.9.2005 जिसके
द्वारा अधिसूचना
संख्या-प.4(72)वित्त/ग्रुप-4/81-72 दिनांक
15.10.1988 में संशोधन
किया गया है । |
|
25. |
अधिसूचना
संख्या-प.12(20)वित्त/कर/05पार्ट-61 दिनांक
27.9.2005 जिसके
द्वारा अधिसूचना
संख्या-प.4(72)वित्त/ग्रुप-4/81-8 दिनांक
2.3.1989 में संशोधन
किया गया है । |
|
26. |
अधिसूचना
संख्या-प.12(20)वित्त/कर/05पार्ट-62 दिनांक
27.9.2005 जिसके
द्वारा अधिसूचना
संख्या-प.4(47)वित्त/ग्रुप-4/84-75 दिनांक
6.1.1990 में संशोधन
किया गया है । |
|
27. |
अधिसूचना
संख्या-प.12(20)वित्त/कर/05पार्ट-63 दिनांक
27.9.2005 जिसके
द्वारा अधिसूचना
संख्या-प.4(8)वित्त/ग्रुप-4/91-116 दिनांक
6.3.1991 में संशोधन
किया गया है । |
|
28. |
अधिसूचना
संख्या-प.12(20)वित्त/कर/05पार्ट-64 दिनांक
27.9.2005 जिसके
द्वारा अधिसूचना
संख्या-प.4(46)वित्त/ग्रुप-4/92-31 दिनांक
27.8.1992 में संशोधन
किया गया है । |
|
29. |
अधिसूचना
संख्या-प.12(20)वित्त/कर/05पार्ट-65 दिनांक
27.9.2005 जिसके
द्वारा अधिसूचना
संख्या-प.4(7)वित्त/ग्रुप-4/92-81 दिनांक
4.3.1992 में संशोधन
किया गया है । |
|
30. |
अधिसूचना
संख्या-प.12(20)वित्त/कर/05पार्ट-66 दिनांक
27.9.2005 जिसके
द्वारा अधिसूचना
संख्या-प.4(8)वित्त/ग्रुप-4/94-71 दिनांक
7.3.1994 में संशोधन
किया गया है । |
|
31. |
अधिसूचना
संख्या-प.12(20)वित्त/कर/05पार्ट-67 दिनांक
27.9.2005 जिसके
द्वारा अधिसूचना
संख्या-प.4(69)वित्त/ग्रुप-4/95-48 दिनांक
15.3.1996 में संशोधन
किया गया है । |
|
32. |
अधिसूचना
संख्या-प.12(20)वित्त/कर/05पार्ट-68 दिनांक
27.9.2005 जिसके
द्वारा अधिसूचना
संख्या-प.4(1)वित्त/ग्रुप-4/97-121 दिनांक
12.3.1997 में संशोधन
किया गया है । |
|
33. |
अधिसूचना
संख्या-प.12(20)वित्त/कर/05पार्ट-69 दिनांक
27.9.2005 जिसके
द्वारा अधिसूचना
संख्या-प.4(14)वित्त/ग्रुप-4/98-135 दिनांक
9.7.1998 में संशोधन
किया गया है । |
|
34. |
अधिसूचना
संख्या-प.12(20)वित्त/कर/05पार्ट-70 दिनांक
27.9.2005 जिसके
द्वारा अधिसूचना
संख्या-प.4(1)वित्त/ग्रुप-4/2000-284 दिनांक
30.3.2000 में संशोधन
किया गया है । |
|
35. |
अधिसूचना
संख्या-प.12(20)वित्त/कर/05पार्ट-71 दिनांक
27.9.2005 जिसके
द्वारा अधिसूचना
संख्या-प.4(1)वित्त/ग्रुप-4/2000-285 दिनांक
30.3.2000 में संशोधन
किया गया है । |
|
36. |
अधिसूचना
संख्या-प.12(20)वित्त/कर/05पार्ट-72 दिनांक
27.9.2005 जिसके
द्वारा अधिसूचना
संख्या-प.4(1)वित्त/ग्रुप-4/2000-401 दिनांक
30.3.2000 में संशोधन
किया गया है । |
|
37. |
अधिसूचना
संख्या-प.12(20)वित्त/कर/05पार्ट-73 दिनांक
27.9.2005 जिसके
द्वारा अधिसूचना
संख्या-प.4(12)वित्त/ग्रुप-4/01-28 दिनांक
29.3.2005 में संशोधन
किया गया है । |
|
38. |
अधिसूचना
संख्या-प.12(20)वित्त/कर/05पार्ट-74 दिनांक
27.9.2005 जिसके
द्वारा अधिसूचना
संख्या-प.4(18)वित्त/ग्रुप-4/97-।।।-93 दिनांक
17.9.2001 में संशोधन
किया गया है । |
|
39. |
अधिसूचना
संख्या-प.12(20)वित्त/कर/05पार्ट-75 दिनांक
27.9.2005 जिसके
द्वारा अधिसूचना
संख्या-प.4(1)वित्त/ग्रुप-4/2000-105 दिनांक
12.11.2001 में संशोधन
किया गया है । |
|
40. |
अधिसूचना
संख्या-प.4(75)वित्त/कर/2004-76 दिनांक
1.10.2005 जिसके
द्वारा उन व्यवहारियों
को जो
अधिसूचना
में उल्लेखित
माल का व्यवहार
कर रहे है, को
राज्य में
बेचे गये माल
के पण्यावर्त
के संबंध में
सशर्त सेट-ऑफ
क्लेम करने
हेतु
निर्देशित
किया गया है । |
|
41. |
अधिसूचना
संख्या-प.4(75)वित्त/कर/2004-77 दिनांक
1.10.2005 जिसके
द्वारा
कतिपय वस्तुओं
के विक्रय पर
देय बिक्री
कर संलग्न
सूची में
अंकित दर के
अनुसार
प्रत्येक
रजिस्टर्ड
व्यवहारी
द्वारा
विक्रय की
सीरिज में
प्रत्येक
बिन्दु
तुरन्त
प्रभाव से कर
देय होगा । |
|
42. |
अधिसूचना
संख्या-प.2(10)वित्त/कर/2002-78 दिनांक
3.10.2005 जिसके
द्वारा
राजस्थान
स्टाम्प
नियम, 2004 में
संशोधन किया
गया है। |
|
43. |
अधिसूचना
संख्या-प.4(1)वित्त/कर/97-79 दिनांक
5.10.2005 जिसके
द्वारा
अधिसूचना
संख्या-प.4(1)वित्त/कर/97-112 दिनांक
12.3.1997 में संशोधन
किया गया है । |
|
44. |
अधिसूचना
संख्या-प.2(1)वित्त/कर/2001-80 दिनांक
17.10.2005 जिसके
द्वारा
वर्ल्ड
रिन्यूअल
स्प्रीच्यूल
ट्रस्ट
सार्दुलगंज,
बीकानेर को
नगर विकास न्यास,
बीकानेर
द्वारा निष्पादित
दस्तावेज
पर प्रभार्य
शुल्क में
दिनांक 16.7.05 से
छूट प्रदान
की गई है । |
|
45. |
अधिसूचना
संख्या-प.4(75)वित्त/कर/2004-81 दिनांक
24.10.2005 जिसके
द्वारा
कतिपय वस्तुओं
के विक्रय पर
व्यवहारी
को संदेय कर
से दिनांक 1.10.2005
से सशर्त छूट प्रदान
की गई है । |
|
46. |
अधिसूचना
संख्या-प.4(75)वित्त/कर/2004-82 दिनांक
24.10.2005 जिसके
द्वारा
राजस्थान
में निर्मित
कतिपय माल के
विक्रय पर
निर्माता को
संदेय कर में
सशर्त छूट
प्रदान की गई है
। |
|
47. |
अधिसूचना
संख्या-प.4(75)वित्त/कर/2004-83 दिनांक
24.10.2005 जिसके
द्वारा राज्य
में निर्मित
माल को भारत
से बाहर निर्यात
पर,
अंतर्राज्यीय
व्यापार के
क्रम में या
राज्य में
बेचने पर
किसी भी
पंजीकृत व्यापारी
को बेचने या
खरीदने पर कर
में छूट प्रदान
की गई है । |
|
48. |
अधिसूचना
संख्या-प.4(76)वित्त/कर/2005-84 दिनांक
26.10.2005 जिसके
द्वारा मै.
कन्फैडरेशन
ऑफ इण्डियन
इण्डस्ट्री,
जयपुर से
कतिपय वस्तुओं
के
क्रय/विक्रय
पर सशर्त छूट
प्रदान की गई
है । |
|
49. |
अधिसूचना
संख्या-प.43(9)वित्त/कर/2005-85 दिनांक
14.11.2005 जिसके
द्वारा फिल्म
'वीर सावरकर'
को एक वर्ष के
लिए मनोरंजन
कर में सशर्त
छूट प्रदान
की गई है । |
|
50. |
अधिसूचना
संख्या-प.16(3)वित्त/कर/2004-पार्ट-86 दिनांक
14.11.2005 जिसके
द्वारा आयुक्त,
वाणिज्यिक
कर विभाग को
अलवर संभाग
में संपूर्ण
राजस्व
तहसील
रूपवास चैक
पोस्ट हेतु
सैण्ड स्टोन
का खण्डा पर
संविदा के
आधार पर कर
संग्रहण
किये जाने
हेतु आदेशित
किया गया है । |
|
51. |
अधिसूचना
संख्या-प.4(89)वित्त/कर/2004-87 दिनांक
17.11.2005 जिसके
द्वारा मै.
हीरो होण्डा
मोटर्स लि.
एवं उनकी
एनसिलिएरी
इकाईयों को वाहन
निर्माण
हेतु सभी आवक
व उत्पादों
(औद्योगिक
ईंधन छोड़कर)
पर सशर्त
प्रवेश कर
में छूट
प्रदान की गई
है । |
|
52. |
अधिसूचना
संख्या-प.4(89)वित्त/कर/2004-88 दिनांक
17.11.2005 जिसके
द्वारा मै.
हीरो होण्डा
मोटर्स लि.
द्वारा
अंतर्राष्ट्रीय
व्यापार
एवं वाणिज्य
की स्थिति
में मोटर
साईकिल उनके
पार्ट्स के विक्रय
पर व्यापार
का स्थान
राज्य में
होने पर केन्द्रीय
विक्रय कर की
दर सशर्त 0.25
प्रतिशत से
संगठित की गई
है । |
|
53. |
अधिसूचना
संख्या-प.4(18)वित्त/कर/01-89 दिनांक
21.11.2005 जिसके
द्वारा
अधिसूचना
संख्या-प.4(18)वित्त/कर/01-75
दिनांक 28.7.03 में
संशोधन किया
गया है ।
|
|
54. |
अधिसूचना
संख्या-प.4(10)वित्त/कर/02-पार्ट-90 दिनांक
21.11.2005 जिसके
द्वारा
मै. गुजरात
अम्बूजा
सीमेण्ट लि.
द्वारा
निर्माण
हेतु दिनांक
1.6.2004 से प्रारम्भ
होने की
दिनांक से 5
वर्ष की अवधि
के लिए विद्युत
शुल्क में 50
प्रतिशत की
सशर्त छूट
प्रदान की गई
है । |
|
55. |
अधिसूचना
संख्या-प.12(31)वित्त/कर/2005-91 दिनांक
21.11.2005 जिसके
द्वारा टैक्सटाइल
सैक्टर में
नए प्रोजेक्ट
को अधिसूचना
में अंकित
सारणीनुसार
राजस्थान
इन्वेस्टमेंट
प्रमोशन स्कीम,03
के तहत 7 वर्ष
हेतु
विद्युत
शुल्क में
छूट प्रदान
की गई है । |
|
56. |
अधिसूचना
संख्या-प.12(31)वित्त/कर/2005-92 दिनांक
21.11.2005 जिसके
द्वारा राज्य
में टैक्सटाइल
सैक्टर का
नया
प्रोजेक्ट
प्रारम्भ
करने वाले
डीलर को उसके
निर्मित माल
के टर्न ओवर
के संबंध में
राज्य में
या अन्तर्राज्यीय
व्यापार या
वाणिज्य की
स्थिति में 7
वर्ष के लिए
विक्रय कर
में सशर्त छूट
प्रदान की गई
है । |
|
57. |
अधिसूचना
संख्या-प.12(31)वित्त/कर/2005-93 दिनांक
21.11.2005 जिसके
द्वारा राज्य
में टैक्सटाइल
सैक्टर का
नया
प्रोजेक्ट
प्रारम्भ
करने वाले
डीलर को
कैपीटल
गुड्स के
संबंध में 7
वर्ष के लिए
विक्रय कर
में सशर्त
छूट प्रदान
की गई है । |
|
58. |
अधिसूचना
संख्या-प.2(20)वित्त/कर/2005-94 दिनांक
22.11.2005 जिसके
द्वारा मै.
रीडकोर कम्पनी
द्वारा मेगा
हाईवे
प्रोजेक्ट
स्थापित
करने के
संबंध में
निष्पादित
किये जाने
वाले प्रत्येक
ऋण
इकरारनामें
पर प्रभार्य
मुद्रांक शुल्क
का, के स्थान
पर एकमुश्त
राशि रूपये 2500/-
देय होगी । |
|
59. |
अधिसूचना
संख्या-प.12(31)वित्त/कर/2005-95 दिनांक
23.11.2005 जिसके
द्वारा टैक्सटाईल
सैक्टर की
नई इकाईयों
के लिए कच्चे
माल,
अर्द्धनिर्मित
माल और
कैपीटल
गुड्स को स्थानीय
क्षेत्र में
लाने पर
प्रवेश कर
में सशर्त
छूट प्रदान
की गई है । |
|
60. |
अधिसूचना
संख्या-प.2(18)वित्त/कर/96-पार्ट-96 दिनांक
24.11.2005 जिसके
द्वारा उद्योग
विभाग
द्वारा लवण
उत्पादन
क्षेत्र
हेतु
मुद्रांक कर
की राशि निर्धारित
की गई है । |
|
61. |
अधिसूचना
संख्या-प.12(20)वित्त/कर/2005-पार्ट-97 दिनांक
2.12.2005 जिसके
द्वारा
अधिसूचना
संख्या-प.12(20)वित्त/कर/2005-174 दिनांक
24.3.2005 में संशोधन
किया गया है । |
|
62. |
अधिसूचना
संख्या-प.12(20)वित्त/कर/2005-पार्ट-98 दिनांक
2.12.2005 जिसके
द्वारा सीमेंट
के क्रय या
विक्रय की 9% से अधिक
की दर को
तुरन्त प्रभाव
से सशर्त कर
मुक्त किया
गया है । |
|
63. |
अधिसूचना
संख्या-प.12(20)वित्त/कर/2005-पार्ट
दिनांक 2.12.2005
जिसके
द्वारा
राजस्थान
इंवेस्टमेंट
प्रमोशन स्कीम,
2003 में संशोधन
किया गया है । |
|
64. |
अधिसूचना
संख्या-प.16(3)वित्त/कर/2004-99 दिनांक
2.12.2005 जिसके
द्वारा
आयुक्त,
वाणिज्यिक
कर विभाग को
उदयपुर व
जयपुर (द्वितीय)
संभाग में
कतिपय चैक
पोस्टों
हेतु कतिपय
माल के संबंध
में संविदा
के आधार पर कर
संग्रहण
करने हेतु
आदेशित किया
गया है । |
|
65. |
अधिसूचना
संख्या-प.2(26)वित्त/कर/98-100 दिनांक
3.12.2005 जिसके
द्वारा
अधिसूचना
संख्या-प.2(26)वित्त/कर/98-14 दिनांक
9.6.2004 में संशोधन
किया गया है । |
|
66. |
अधिसूचना
संख्या-प.2(26)वित्त/कर/98-101 दिनांक
3.12.2005 जिसके
द्वारा
अधिसूचना
संख्या-प.2(26)वित्त/कर/98-15 दिनांक
9.6.2004 में संशोधन
किया गया है । |
|
67. |
अधिसूचना
संख्या-प.4(75)वित्त/कर/04-102 दिनांक
13.12.2005 जिसके
द्वारा
अधिसूचना
संख्या-प.4(75)वित्त/कर/2004/76-77 दिनांक
1.10.2005 को कतिपय
शर्तों के अनुसार
तुरन्त
प्रभाव से
प्रत्याहारित
किया गया है । |
|
68. |
अधिसूचना
संख्या-प.4(75)वित्त/कर/04-103 दिनांक
13.12.2005 जिसके
द्वारा
अधिसूचना
संख्या-प.4(75)वित्त/कर/04-81
से 83दिनांक 24.10.2005
को दिनांक 11.11.2005
से तुरन्त
प्रभाव से
प्रत्याहारित
किया गया है । |
|
69. |
अधिसूचना
संख्या-प.2(23)वित्त/कर/04-104 दिनांक
14.12.2005 जिसके
द्वारा
राजस्थान
अरबन इन्फ्रास्ट्रक्चर
फाइनेंस एण्ड
डवलपमेंट
कॉरपोरेशन
लि. द्वारा
अपनी अधिकृत
अंश पूंजी 5
करोड़ से
बढ़ाकर 10
करोड़ करने
के संबंध में
निष्पादित
लेखपत्र पर
देय
मुद्रांक कर
का परिहार किया
गया है। |
|
70. |
अधिसूचना
संख्या-प.4(67)वित्त/कर/04-पार्ट-105 दिनांक
14.12.2005 जिसके
द्वारा
अधिसूचना
संख्या-प.4(67)वित्त/कर/04-43 दिनांक
12.7.2004 में संशोधन
किया गया है । |
|
71. |
अधिसूचना
संख्या-प.2(26)वित्त/कर/98-पार्ट-106 दिनांक
15.12.2005 जिसके
द्वारा अधिसूचना
संख्या-प.2(26)वित्त/कर/98-पार्ट-103 दिनांक
27.9.2004 में संशोधन
किया गया है । |
|
72. |
अधिसूचना
संख्या-प.4(4)वित्त/कर/2001-107 दिनांक
17.12.2005 जिसके
द्वारा NAFED
को सरसों की
खरीद पर क्रय
कर, राज्य
में सरसों
विक्रय पर कर
तथा सरसों व
सरसों तेल पर
अंतर्राज्यीय
व्यापार व
वाणिज्य की
स्थिति में 1% से अधिक
केन्द्रीय
कर को
अधिसूचना
में उल्लेखित
शर्तों के
अनुसार
राजस्थान
विक्रय कर
तथा केन्द्रीय
विक्रय कर
में छूट
प्रदान की गई
है । |
|
73. |
अधिसूचना
संख्या-प.4(6)वित्त/कर/2003-108 दिनांक
22.12.2005 जिसके
द्वारा
अधिसूचना
संख्या-प.4(6)वित्त/कर/03-पार्ट-29 दिनांक
28.4.2003(दिनांक 18.2.2005 की
अधिसूचना
द्वारा
संशोधित) में
संशोधन किया
गया है । |
|
74. |
अधिसूचना
संख्या-प.2(11)वित्त/कर/03-109 दिनांक
2.1.2006 जिसके
द्वारा स्टाम्प
शुल्क हेतु
विशेष राहत
योजना लागू
की गई है । |
|
75. |
अधिसूचना
संख्या-प.12(66)वित्त/कर/05-110 दिनांक
3.1.2006 जिसके
द्वारा
अधिसूचना
संख्या-प.4(38)वित्त/कर/03-124 दिनांक
18.11.2004 में संशोधन
किया गया है । |
|
76. |
अधिसूचना
संख्या-प.12(66)वित्त/कर/05/111 दिनांक
16.1.2006 जिसके
द्वारा भूमि
भवन कर
अधिकारी,
कोटा के स्थान
पर उपखण्ड
अधिकारी
कोटा को
प्रतिस्थापित
किया गया है । |
|
77. |
अधिसूचना
संख्या-प.16(3)वित्त/कर/2004-112 दिनांक
15.2.2006 जिसके
द्वारा
अधिसूचना
संख्या-प.16(3)वित्त/कर/2004-40 दिनांक
23.9.2005 में संशोधन
किया गया है । |
|
78. |
अधिसूचना
संख्या-प.16(3)वित्त/कर/2004-113 दिनांक
15.2.2006 जिसके
द्वारा
अधिसूचना संख्या-प.16(3)वित्त/कर/2004-129 दिनांक
25.11.2004 में संशोधन
किया गया है । |
|
79. |
अधिसूचना
संख्या-प.4(10)वित्त/कर/02-114 दिनांक
15.2.2006 जिसके
द्वारा मै.
गुजरात अम्बूजा
सीमेंट लि. को
उनके द्वारा
क्लींकर व
सीमेंट के
निर्माण पर
दिनांक 21.11.2005 से 5
वर्ष के लिए 50
प्रतिशत
विद्युत
शुल्क में
सशर्त छूट
प्रदान की गई
है । |
|
80. |
अधिसूचना
संख्या-प.4(10)वित्त/कर/02-115 दिनांक
15.2.2006 जिसके
द्वारा
अधिसूचना
संख्या-प.4(10)वित्त/कर/02-90 दिनांक
21.11.2005 को
विखण्डित
किया गया है |
|
81. |
अधिसूचना
संख्या-प.16(3)वित्त/कर/04-पार्ट-116 दिनांक
15.2.2006 जिसके
द्वारा आयुक्त,
वाणिज्यिक
कर विभाग को
जोधपुर
संभाग में जैसलमेर
व पोकरण समूह
में संविदा
के आधार पर कर संग्रहण
किये जाने
हेतु आदेशित
किया गया है । |
श्री अध्यक्ष:
श्री
गुलाबचन्द
कटारिया,
राजस्थान
समाज विरोधी
क्रियाकलाप
निवारण
विधेयक, 2006
श्री
गुलाबचन्द
कटारिया: अध्यक्ष
महोदय, आपकी
अनुमति से मैं
राजस्थान
समाज विरोधी
क्रियाकलाप
निवारण
विधेयक,2006 को
पुर:स्थापित
करने की आज्ञा
के लिए प्रस्ताव
करता हूं।
श्री अध्यक्ष:
प्रश्न यह है
कि राजस्थान
समाज विरोधी
क्रियाकलाप
निवारण
विधेयक, 2006 को
पुर:स्थापित
करने की आज्ञा
प्रदान की जाय
?
(स्वीकृत)विधेयक
को पुर:स्थापित
करने की आज्ञा
प्रदान की
गई।प्रभारी मंत्री
पुर:स्थापित
भी करें।
श्री
गुलाबचन्द
कटारिया(प्रभारी
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, मैं राजस्थान
समाज विरोधी
क्रियाकलाप
निवारण
विधेयक, 2006 को
पुर:स्थापित
करता हूं।
श्री अध्यक्ष:
श्री घनश्याम
तिवाड़ी,
राजस्थान
संस्कृत
विश्वविद्यालय
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी(प्रभारी
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, मैं राजस्थान
संस्कृत
विश्वविद्यालय
(नाम
परिवर्तन)
विधेयक, 2006 को
पुर:स्थापित
करने की आज्ञा
आज्ञान के लिए
प्रस्ताव
करता हूं।
श्री अध्यक्ष:
प्रश्न यह है
कि राजस्थान
संस्कृत
विश्वविद्यालय
(नाम
परिवर्तन)
विधेयक, 2006 को
पुर:स्थापित
करने की आज्ञा
प्रदान की जाय
?
(स्वीकृत)विधेयक
को पुर:स्थापित
करने की आज्ञा
प्रदान की
गई।पुर:स्थापित
भी करें।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी(प्रभारी
मंत्री): अध्यक्ष
महोदय, मैं राजस्थान
संस्कृत
विश्वविद्यालय
(नाम
परिवर्तन)
विधेयक, 2006 को
पुर:स्थापित
करता हूं। अध्यक्ष
महोदय, मैं
प्रक्रिया के
नियम 63 ए के अन्तर्गत
राजस्थान
संस्कृत
विश्वविद्यालय
(नाम
परिवर्तन) अध्यादेश,
2006 (2006 का अध्यादेश
संख्या 3) को
जारी करने के
कारणों का
विवरण भी सदन
की मेज पर
रखता हूं।
श्री अध्यक्ष:
श्री कालीचरण
सर्राफ,
सामान्य वाद
विवाद पर बोलेंगे।
श्री
कालीचरण
सर्राफ(जौहरी
बाजार):
माननीय अध्यक्ष
महोदय, महामहिम
राज्यपाल
महोदय ने अपने
अभिभाषण में
प्रदेश में चल
रही हमारी
सरकार के दो
वर्षों के
कार्यों का जब
लेखा जोखा
यहां प्रस्तुत
किया,
उपलब्धियों
की यहां चर्चा
की तो ऐसा लगा
कि हमारी
सरकार के दो
साल के कामों
में कितने
विकास के काम
इस प्रदेश में
हुए हैं।
पिछली
कांग्रेस
सरकार के 5 साल
के कामों से
ज्यादा
विकास के काम
हम लोगों ने
करवाये हैं।
आज दो साल में
हमारे द्वारा
किये गये
कार्यों की
सर्वत्र
प्रशंसा हो
रही है, चाहे
गांव में रहने
वाला किसान
हो, चाहे शहर
के व्यापार
करने वाला व्यापारी
हो, चाहे फैक्ट्री
में मजदूरी
करने वाला
मजदूर हो,
चाहे बेरोजगार
नौजवान हो,
चाहे इस
प्रदेश में
रहने वाली
महिलाएं हों,
अनुसूचित
जाति का व्यक्ति
हो, अनुसूचित
जन जाति का व्यक्ति
हो और चाहे
पिछड़ी जाति
का व्यक्ति
हो, हर व्यक्ति
हर वर्ग हमारी
सरकार के दो
सालों में किये
गये कामों की
सराहना कर रहा
है, प्रशंसा
कर रहा है।
हमारी सरकार
ने हर वर्ग की
खुशहाली का ध्यान
रखा है, हर
वर्ग को इन दो
सालों में
राहत मिली है
और उसी का
परिणाम है कि
पिछले वर्ष
में जितने
चुनाव हुए,
विधान सभा
चुनावों के
बाद, चाहे लोक
सभा का चुनाव
हो, चाहे
विधानसभा के
उप-चुनाव हों,
चाहे शहरी निकायों
का चुनाव हो
और चाहे
पंचायती राज
के चुनाव हों,
हर चुनावों
में भारतीय
जनता पार्टी
ने शानदार
सफलता हासिल
की है।
(श्री
रामनारायण
विश्नोई,
उपाध्यक्ष,पदासीन)
माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, पिछले
विधान सभा के
चुनाव में
भारतीय जनता
पार्टी ने
अपने चुनाव
घोषणा पत्र
में प्रदेश की
जनता से पाँच
साल के लिए 243
वायदे किये
थे, 243 घोषणाएं
हमने की थी,
मुझे यह कहते
हुए प्रसन्नता
है कि पाँच
साल के लिए
हमने 243
घोषणाओं को केवल
दो साल के
कार्यकाल में
उसमें से हमने
115 घोषणाओं की क्रियान्विति
पूरी कर दी है
। माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, 70 घोषणाएं
इस प्रकार की
हैं जिन पर
काम चल रहा है
और कुछ ही
दिनों में
उनकी
क्रियान्विति
हो जाएगी।
केवल 51
घोषणाएं ऐसी
हैं जो हमारी
लम्बित हैं।
दो साल का
पीरियड पाँच
साल में दो
साल यानी 40
प्रतिशत
कार्यकाल
हमारा पूरा
हुआ है और
हमने पाँच साल
के लिए जो
घोषणाएं की थी
उसमें से 70
प्रतिशत
घोषणाएं हमने
पूरी कर दी
हैं। माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, बताने की
आवश्यकता
नहीं कि राज्य
में जब से
भारतीय जनता
पार्टी की
सरकार आई है
हमारी सरकार
ने जिस प्रकार
का कुशल वित्तीय
प्रबंधन पहली
बार कोई
ओवरड्राफ्ट
नहीं लिया गया
है और रिजर्व
बैंक ने राज्य
सरकार के
खाते
में निरन्तर
सरप्लस की
स्थिति रही
है। इसी
प्रकार से
राजस्व घाटा
और राजकोषीय
घाटे में भी
सुधार हुआ है जहां
के2001-02 में राजस्व
प्राप्तियों
का 31 प्रतिशत
था और 2002-03 में 30
प्रतिशत था,
हमारी सरकार
के आने के बाद
2004-05 में घटकर 12 प्रतिशत
रह गया है। यह
कुशल वित्तीय
प्रबंधन का
परिणाम है।
माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, इतना ही
नहीं, 11वें
वित्त आयोग
द्वारा
प्रतिपादित
फिस्कल
रिफार्म्स
फैसिलिटी के
अन्तर्गत 2001-02
और 2002-03 में राज्य
सरकार के
राजस्व घाटे
में अपेक्षित
सुधार न होने
के कारण प्रोत्साहन
राशि प्राप्त
नहीं कर पाई
पर हमारी
सरकार ने
राजस्व घाटे
में अपेक्षित
सुधार करके न
केवल 2003-04 में 59.77 करोड़
रुपये और 2004-05
में 60.62 करोड़
रुपये प्राप्त
किये बल्कि
पिछले वर्षों
की बकाया राशि
146 करोड़ रुपये
भी प्राप्त
करने की हमने
पात्रता
अर्जित की है।
माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, इसी
प्रकार हमने
पिछले दो
वर्षों में
करों में राहत
दी। कई चीजों
पर हमने कर
हटाया, कई
चीजों से जहां
12 प्रतिशत
टैक्स था
उसकी जगह 8
प्रतिशत किया,
जहां 8
प्रतिशत कर था
वह 4 प्रतिशत
किया और जहां 4
प्रतिशत कर था
वहां दो
प्रतिशत किया
और दो प्रतिशत
जहां था वह हमने
बिलकुल खतम कर
दिया । उसके
बाद भी हमारे कर
राजस्व की
वसूली में
वृद्धि हुई
है। माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं आपके
माध्यम से इस
सदन को यह
बताना
चाहूंगा कि
दिसम्बर,2003 से
मार्च 2000 तक जब
कि गत वर्ष की
इसी अवधि में इससे
कम प्राप्त
हुआ, इसउ पर
हमने 26.58
प्रतिशत कर
राजस्व की
बढ़ोतरी की थी
अवधि में, इसी
प्रकार 2004-05 में हमने
4797.53 करोड़ रुपये
हमने कर राजस्व
प्राप्त
किया जो पिछले
साल की तुलना
में 20.38 प्रतिशत
अधिक था,
बताने की आवश्यकता
नहीं, माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, कि जब जब
पंचवर्षीय
योजना हमारी
सरकार के समय
में आई
वार्षिक
योजनाओं का
आकार बढ़ा,
पंचवर्षीय
योजनाओं का
आकार बढ़ा और
जब जब प्रदेश
में कांग्रेस
कीसरकार आई
वार्षिक योजनाओं
और पंचवर्षीय
योजनाओं का
आकाल घटा है।
काँग्रेस का
राज था सातवीं
पंचवर्षीय
योजना उस समय
लागू हुई,
हमारे प्रदेश
की पंचवर्षीय
योजना थी सात
हजार करोड़
रुपये की और
भारतीय जनता
पार्टी की
सरकार आई
भैरोंसिंह
शेखावत राजस्थान
के मुख्यमंत्री
बने, आठवीं
पंचवर्षीय
योजना जहां सातवीं
पंचवर्षीय
योजना सात
हजार करोड़
रुपये की थी
भारतीय जनता
पार्टी की 11500
करोड़ रुपये
की योजना बनी
आठवीं।
skp/akt/1340/3e/2-3-2006/1
और 11500
करोड़ की
योजना बनी और
खर्चा हुआ 11998
करोड़ रुपये।
इसी प्रकार से
जब शेखावत
साहब की सरकार
थी उस समय जब
नवीं
पंचवर्षीय
योजना बनी वह 27560
करोड़ रुपये
की स्वीकृत
हुई। उसके
पहले साल में
क्योंकि
राजस्थान
में भारतीय
जनता पार्टी
की सरकार थी, 3314.52
करोड़ रुपये
की वार्षिक
योजना स्वीकृत
हुई और खर्चा
हुआ
3987
करोड़ रुपये
यानी हमने 600
करोड़ रुपये
ज्यादा
खर्चा किया। परन्तु
उसके बाद
दुर्भाग्य
से प्रदेश में
कांग्रेस की
सरकार आ गई तो
पंचवर्षीय
योजना का क्या
हश्र हुआ,
वार्षिक
योजनाओं का क्या
हश्र हुआ वह
बताने की आवश्यकता
नहीं है।
वार्षिक
योजनाओं में
लगातार कटौती
होती गई और
9वीं
पंचवर्षीय
योजना जो
भारतीय जनता
पार्टी के राज
में 27560 करोड़
रुपये की बनी
थी, कांग्रेस
के राज में
उसमें कटौती
होकर वह 15448 करोड़
रुपये की रह
गई। विकास की
गति अवरुद्ध
हो गई। योजना
आयोग ने दसवीं
पंचवर्षीय
योजना 31831.75 करोड़
रुपये की
निर्धारित
की। 2002-03 में
कांग्रेस का
राज था, योजना
का आकार 5107
करोड़ रुपये
और वास्तविक
व्यय हुआ
केवल 4431 करोड़।
2003-04 में वार्षिक
योजना का आकार
था 4258 करोड़,
नवम्बर 2003 तक
केवल 2266 करोड़
रुपये खर्चा
हुआ। राजस्थान
में फिर विधान
सभा के चुनाव
हुए, कांग्रेस
की सरकार चली
गई और फिर
भारतीय जनता
पार्टी की
सरकार आ गई और
उसके आने के
बाद भारतीय
जनता पार्टी
की सरकार ने
यह विचार किया
कि योजना के
आकार में यदि
वृद्धि नहीं
की गई,
अतिरिक्त
संसाधन यदि
नहीं जुटाये
गये तो प्रदेश
में जो विकास
की गति
अवरुद्ध हो
रही है वह फिर
से विकास की
गति प्रवाहित
नहीं हो सकती।
हमने विचार
किया और दसवीं
पंचवर्षीय
योजना का भी
9वीं
पंचवर्षीय
योजना जैसा
हश्र नहीं हो
इस बारे में
हमने प्रयास
किये, अतिरिक्त
संसाधन
जुटाये और उसी
का यह परिणाम
है कि वार्षिक
योजना 2003-04 का
आकार 4258 करोड़
रुपये था वह
हमने 5504.52 करोड़
रुपये
निर्धारित
किया। इतना ही
नहीं, मैं
बधाई देना
चाहता हूं
हमारी मुख्य
मंत्री जी को
कि उनके कुशल
वित्तीय
प्रबन्धन से
5504.52 के स्थान
पर 6044.38 करोड़
रुपया हमने
खर्चा किया।
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, 2004-05 की
योजना 6922.50 करोड़
की स्वीकृत
हुई और मुझे
यह बताते हुए
प्रसन्नता
है कि 2005-06 की स्वीकृत
योजना का आकार
8350 करोड़ रुपये
का है। हमारी
सरकार आने के
बाद जहां वर्ष
2003-04 की योजना 4
हजार कुछ
करोड़ की थी
वह 8300 करोड़
यानी दो साल
में हमने
वार्षिक
योजना दुगुनी
कर दी।
माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
याद दिलाना
चाहता हूं कि 1998
में जब विधान
सभा के चुनाव
हुए थे तो
हमारे कांग्रेसी
मित्रों ने
जनता के सामने
यह वादा किया
कि राजस्थान
की भैरोंसिंह
शेखावत सरकार
ने सरकारी कर्मचारियों
की
सेवानिवृत्ति
की आयु 58 से 60 साल
कर दी और
जिसके कारण
बेरोजगार
नौजवानों को
रोजगार नहीं
मिल रहा है और
हम यदि सत्ता
में आये तो यह
सेवानिवृत्ति
आयु 60 साल से वापस
58 साल करेंगे।
उन्होंने
सत्ता में
आने के बाद
सेवानिवृत्ति
आयु तो 60 साल से 58
साल कर दी
परन्तु आपको
जानकर आश्चर्य
होगा कि एक भी
बेरोजगार नौजवान
को कांग्रेस
की सरकार जो
पांच साल रही,
उन्होंने एक
भी बेरोजगार
नौजवान को
रोजगार नहीं किया
और 60 साल से 58 साल
सेवानिवृत्ति
की आयु करने
के बाद जो पद
रिक्त हुए थे
उनको भी इन्होंने
नहीं भरा और
उन्होंने क्या
किया कि
सरकारी
नौकरियों पर
प्रतिबन्ध
लगा दिया, पद
ही समाप्त कर
दिये। माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, उसके
बाद राजस्थान
में आदरणीय
वसुन्धरा जी
के नेतृत्व
में भारतीय
जनता पार्टी
की सरकार बनी,
प्रचण्ड
बहुमत के साथ
हमारी सरकार
बनी तो पहले
बजट भाषण में
जब आदरणीय
वसुन्धरा जी
ने कहा कि हम
एक लाख लोगों
को प्रतिवर्ष
इस प्रदेश में
रोजगार देंगे
तो मुझे अच्छी
तरह से याद है
कि राजाखेड़ा
से आने वाले
माननीय सदस्य
और अन्य
कांग्रेस
मित्रों ने
कहा कि पांच
साल में हम एक
व्यक्ति को
रोजगार नहीं
दे पाये, एक
बेरोजगार नौजवान
को हम रोजगार
नहीं दे पाये
तो आपके पास ऐसा
कौनसा अल्लादीन का
चिराग है,
आपके पास ऐसी
कौनसी जादू की
छड़ी है कि आप
रोजगार दे
पायेंगे। आप ये
झूंठे वादे कर
रहे हैं, आप एक
भी व्यक्ति
को रोजगार
नहीं दे
पायेंगे।
परन्तु,
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, कहने
की आवश्यकता
नहीं है, इनकी
नीयत मे खोट
थी, इनमें
दृढ़ इच्छा
शक्ति का अभाव
था, भारतीय
जनता पार्टी
की वसुन्धरा
जी की सरकार
और वसुन्धरा
जी और भारतीय
जनता पार्टी
के लोगों की
नीयत में खोद
नहीं, दृढ़
इच्छाशक्ति
है हमारी,
हमने वह काम
कर दिखाया
जिसकी ये
कांग्रेसी
मित्र कभी कल्पना
नहीं कर सकते
थे। दो साल
में शिक्षा
विभाग में
हमने 51201 व्यक्तियों
को रोजगार
उपलब्ध
करवाया। इतना
ही नहीं,
महिला एवं बाल
विकास विभाग
में दो वर्ष
में 22912
सहयोगिनियों
की नियुक्तियां
की गईं और
उद्योग विभाग
में 83864 लोगों को
हमने रोजगार
उपलब्ध
करवाया। जब इन
सबका टोटल
लगाया जाए तो
हमने जो वादा
किया था कि एक
साल में एक
लाख लोगों को
रोजगार देंगे,
दो साल में
हमने दो लाख
लोगों को रोजगार
देकर के बता
दिया है और
मैं आपको दावे
के साथ कह
सकता हूं कि
जिस प्रकार की
घोषणा हमारी
मुख्य
मंत्री जी ने
की है, पांच
साल में हम
राजस्थान
में पांच लाख
लोगों को,
बेरोजगार
नौजवानों को रोजगार
देंगे।
श्री
जुबेर खान: यह
उद्योग वाले 93
हजार कहां हैं
? उनसे हम जाकर
के मिलना
चाहते हैं,
बता देना।
श्री
कालीचरण
सर्राफ: आपसे
मैं बाद में
बात कर लूंगा
और मैं आपको
बता दूंगा।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: राजस्थान
के हर कोने
में है, राजस्थान
के शहर में
हैं, राजस्थान
के गांव में
हैं जिनसे
आपका कोई वास्ता
नहीं है।
श्री
जुबेर खान:
आपने दिया है ?
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: बिल्कुल
हमने दिया है।
श्री
कालीचरण
सर्राफ:
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, जहां
तक शिक्षा के
क्षेत्र का
सवाल है,
पिछली कांग्रेस
की सरकार के
कार्यकाल में
शिक्षा क्षेत्र
में जिस
प्रकार की
अराजकता का
माहौल रहा,
बताने की आवश्यकता
नहीं है,
ग्रामीण
क्षेत्रों
में अंधाधुंध
तरीके से लगभग
22 हजार राजीव
गांधी
पाठशालाएं
खोल दी गईं।
8वीं, 10वीं पास
लोगों को
पढ़ाने के लिए
लगा दिया गया।
ग्रामीण
क्षेत्र के
बच्चों को
8वीं और 10वीं क्लास
पास लोगों के
रहमोकरम पर
छोड़ दिया
गया। मैं
पूछना चाहता
हूं कि
ग्रामीण जनता
के साथ इस
प्रकार का
जघन्य
खिलवाड़ करने
की आप लोगों
की हिम्मत
कैसे हुई ? शहर
का बच्चा
पब्लिक स्कूलों
में पढ़े, क्वालिफाइड
टीचर्स के
माध्यम से
पढ़े और गांव
का बच्चा
8वीं और 10वीं
पास व्यक्ति
के माध्यम से
पढ़े, आप गांव
और शहर में
जिस प्रकार का
भेद आप लोग
करना चाहत थे,
आप उसमें सफल
नहीं हुए।
राजस्थान
में विधान सभा
के चुनावों के
बाद सरकार परिवर्तित
हुई और हमने
कहा कि नहीं,
राजस्थान
में चाहे बच्चा
शहर में रहता
हो चाहे गांव
में रहता हो,
सब को बराबर
पढ़ने का
अधिकार है और
मैं आपको
आंकड़ों के
माध्यम से
बताना
चाहूंगा कि
पिछली सरकार
ने पांच साल
में केवल 550 नये
प्राथमिक स्कूल
खोले थे और
हमने दो साल
में 3343 नये
प्राथमिक स्कूल
खोले। पिछली
सरकार ने एक
भी राजीव
गांधी
पाठशाला को
प्राथमिक
विद्यालय में
क्रमोन्नत
नहीं किया,
हमने 4254
पाठशालाओं को
प्राथमिक शालाओं
में क्रमोन्नत
कर दिया है।
यह तो सही है ?
श्री
जुबेर खान:
चार हजार ये
अलग किये और
वो अलग किये
हैं ? इसका
मतलब 8 हजार
खोली हैं आपने
? वही 4 हजार है
या 8 हजार हैं ?
श्री
कालीचरण
सर्राफ:
बिराजें। ये
आंकड़े सुनकर
दिल बैठ जाएगा
इसलिए आप
चुपचाप बैठे
रहिये, इसलिए
कह रहा हूं कि
बैठे रहिये।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी: कुल 17746
हैं।
श्री
राकेश मेघवाल
(परबतसर):
जुबेर खान जी,
आप कांग्रेस
की इतनी
तरफदारी करते
हैं, जब
कांग्रेस का
राज आता है तो
आप हार जाते
हो, बी.जे.पी. का
राज आता है तो
आप जीत जाते
हो इसलिए
हमारी
प्रशंसा करो।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी:
हमारा ही राज
रहे ताकि आप
वहां रहो।
श्री
कालीचरण
सर्राफ:
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, इतना
ही नहीं, पांच
साल में
कांग्रेस की
सरकार में 2989
प्राथमिक स्कूलों
को सैकण्डरी
स्कूल में
क्रमोन्नत
किया गया।
कितने जुबेर
साहब ? 2989 स्कूलों
को केवल पांच
साल में और
हमने दो साल
में इससे डबल 4792
प्राथमिक
शालाओं को
सैकण्डरी
में क्रमोन्नत
कर दिया। इसी
प्रकार पांच साल
में आपने 767
सैकण्डरी स्कूलों
को सीनियर
सैकण्डरी स्कूलों
में क्रमोन्नत
किया, सॉरी,
मिडल, हां
वहीं हो गया न,
सॉरी मिडल.....
Vkj/akt/1350/3f
श्री
जुबेर खान:
तिवाड़ी साहब
आपके आंकड़ों
को घटाकर बता
रहे हैं,
इसमें कोई राज
है।
श्री
कालीचरण
सर्राफ: राज नहीं
है, इसकी
चिंता मत करो
आप, बिराजो।
वास्तविकता
वास्तविकता
रहेगी जुबेर
साहब। आप चाहे
इसको यूं घुमाओ
चाहे यूं
घुमाओ, जो
हमने काम किया
है वह तो किया
है, जनता को
दिख रहा है।
आपने पाँच
वर्ष में दो
विश्वविद्यालय
खोले और हमने
दो साल में छह
विश्वविद्यालय
खोले। पिछली
सरकार
मिड-डे-मील
के नाम से बच्चों
को घूघरी
खिलाती थी और
हमने, मुझे यह
कहते हुए फख्र
है कि राजस्थान
के एक करोड़
बच्चों को
दोपहर का, आप
केवल घूघरी का
वितरण करते थे,
हमने उस सिस्टम
को खतम किया
और आज मुझे
फख्र है...
श्री
राकेश मेघवाल:
... आज अंडे
मिलाकर
खिलाने की बात
कर रहे थे यह।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी: ये
अंडे नहीं
मिला रहे थे,
आज तो बर्ड
फ्लू आई हुई
थी सबके स्वभाव
में।
श्री
कालीचरण
सर्राफ: और आज
हम एक करोड़
बच्चों को
गरम खाना खिला
रहे हैं।
डा.
बुलाकीदास
कल्ला: उपाध्यक्ष
महोदय, ये तो
बता दें कि
मिड-डे-मील का
पैसा कहां से
आ रहा है?
श्री
कालीचरण
सर्राफ: आप भी
लाते, आप भी
लाते।
डा.
बुलाकीदास
कल्ला: हां
वह तो ठीक बात
है लेकिन सवाल
इस बात का है,
बात तो सही
कहो। केन्द्र
सरकार के माध्यम
से आप
गुलछर्रे
उड़ा रहे हो,
केन्द्र का
पैसा नहीं हो
तो आपने कुछ
नहीं किया है।
श्री
कालीचरण
सर्राफ: केन्द्र
सरकार के माध्यम
से तो...(व्यवधान)
डा.
बुलाकीदास
कल्ला: यही
ट्रेनिंग दी
है क्या
आपने? यही
ट्रेनिंग दी
है क्या
आपने?
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: केन्द्र
सरकार का पैसा
कोई दया पर
मिलता है क्या?
नहीं, केन्द्र
सरकार का पैसा
कोई दया पर
मिलता है क्या?
यह हमारा
संवैधानिक
अधिकार है,
जिसको हम लेते
हैं, दया पर
मिलता है क्या
पैसा?
श्रीमती
लक्ष्मी
बारूपाल: हम
गुलछर्रे
नहीं उड़ा रहे
हैं, पब्लिक
को दे रहे हैं,
जनता को दे
रहे हैं। आप
उड़ा रहे थे
गुलछर्रे।
डा.
बुलाकीदास कल्ला:
माननीय
संसदीय कार्य
मंत्रीजी,
आपकी सरकार
पैसा रोकती थी
हमारा जायज
पैसा। शिक्षा
का, ऊर्जा का,
चिकित्सा का,
सभी का पैसा
रोकती थी। हम
रोकते नहीं है।
हम फेडरल
गवर्नमेंट की
तरह काम करते
हैं, इसलिए
बराबर पैसा
देते हैं।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: अकाल
के अन्दर 973
करोड़ रुपये
इस सरकार ने
दिये हैं।
डा.
बुलाकीदास
कल्ला: इसलिए
मिड-डे-मील
में यह कर
दिया, आपने क्या
किया? आपने क्या
किया, यह आप
बतायें।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: आप
भूल गये,
राजस्थान
में अकाल पडा
था, 973 करोड़
रुपये नकद और 32
लाख मैट्रिक
टन गेहूं अटल
बिहारी
वाजपेयी जी ने
दिया और आपने
हमें एक किलो
गेहूं दिया हो
तो बताओ, एक
रुपया दिया हो
तो बताओ। काहे
की
संवेदनशीलता
की बात कर रहे
हो।
डा.
बुलाकीदास
कल्ला: आपके
पास 890 करोड़
रुपये पड़े
हुए हैं जून
तक, आप लोग
कंजूस की तरह
बैठे हो, खर्च
नहीं कर रहे हो।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी:
माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, बात यह
नहीं है। बात
यह है कि उस समय
भी पैसा था,
पैसा आज भी
है। पहली बात
तो यह है कि
भारत सरकार का
पैसा कोई दया
पर नहीं है, यह
हिन्दुस्तान
के टैक्स
पेयर्स का
पैसा है और इस
पर सब राज्यों
का हक है और यह
संवैधानिक
अधिकार है, वह
लेते हैं।
श्री
उपाध्यक्ष:
जनता का हक है,
पैसा तो आम
जनता का है।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी:
लेकिन उस समय
कमी क्या थी?
उन्होंने तो
सळू के साथ
भैंस काट दी।
इन्होंने जो
10 प्रतिशत
पैसा मिलता है
ना, वह नहीं दिया
और इसके कारण
से भारत सरकार
का पैसा नहीं
मिला, अब हमको
मिल रहा है।
आज 1000 करोड़ रुपये
मिल रहे हैं
क्योंकि
हमने 250 करोड़
राजस्थान के
बजट से
सर्वशिक्षा
अभियान में
दिया है,
इसीलिए 1000
करोड़ रुपये
मिल रहे हैं,
इसलिए वह तो बराबर
नकद देकर माल
ले रहे हैं।
(व्यवधान)
डा.
बुलाकीदास
कल्ला: नोन
प्लान की
पोस्टों को
केन्द्र
सरकार के
पैसों से भर
रहे हैं आप, यह
बात आप छोड़
दो, हम सब पोल
जानते हैं।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी:
अपनी-अपनी अक्ल
है। अपनी-अपनी
अक्ल है।
आपके समय में
आप भी भर
लेते। (व्यवधान)
श्री
ओम बिरला:
राजस्थान की
जनता का टैक्स
का पैसा है,
सोनिया
गांधीजी ने
नहीं दे दिया
पैसा, यह
हमारे टैक्स
का पैसा है।
श्री
शान्तिलाल
चपलोत: माननीय
उपाध्यक्षजी,
माननीय कल्ला
साहब स्वीकार
कर रहे हैं कि
हमारी सरकार
काम्पीटेंट
नहीं थी पैसा
लेने में,
हमारी सरकार
उतनी ज्यादा
काम्पीटेंट
है पैसा लेने में,
इसलिए दे रहे
हैं।
डा.
बुलाकीदास
कल्ला: हमारी
सरकार पूरी
काम्पीटेंट
थी लेकिन आपके
वित्त
मंत्रीजी जान
बूझकर पैसा
रिलीज नहीं
करते थे।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी: अक्ल
की कमी थी अक्ल
की, लेने में
अक्ल चाहिए।
श्री
जुबेर खान:
उपाध्यक्ष
महोदय, एक बात
तो आप मानते
हैं कि आपने 250
करोड़ रुपये
दिये, एक बात तो
मानिये, अटल
बिहारी
वाजपेयीजी
प्रधान मंत्री
थे तो बच्चे
घूघरी खाते थे
और सरदार
मनमोहन सिंह
जी हैं तो
अच्छे-अच्छे
व्यंजन खा
रहे हैं, यह
बात तो माननी
पड़ेगी।
श्री
घनश्याम
तिवाड़ी: यह
बात बिलकुल
ठीक है। जब
आपके अशोक
गहलोत मुख्य
मंत्री थे तो
बच्चे घूघरी
खाते थे और
वसुन्धराजी
हैं तो रसगुल्ले
उड़ाते हैं।
(व्यवधान)
श्री
जुबेर खान:
आपको रसगुल्ला
खिला रही है
तब भी बार-बार
विरोध कर रहे
हो, भाई ऐसे तो
मत करो,
रसगुल्ला
खाकर भी विरोध
कर रहे हो। (व्यवधान)
श्री
कालीचरण
सर्राफ: आप तो
यह आत्म-विश्लेषण
करो कि हमने
पाँच साल में
यदि काम किये
होते तो
प्रदेश की
जनता हमें
सिर-आंखों पर
बैठाती। आपके
कारनामों के
कारण आज हम
इधर हैं और आप
उधर हो। हम
आपको यह विश्वास
दिलाना चाहते
हैं कि पाँच
साल में हम
इतने विकास के
काम करेंगे,
इतने विकास के
काम करेंगे
कि...
श्री
जुबेर खान:
तिवाड़ी साहब,
इनसे कहो कि
यह मुझे नहीं
कहें, इन्हें
कहें यह बात।
श्री
कालीचरण
सर्राफ: पाँच
साल बाद पुन:
हम यहीं होंगे
और आप वहां
होंगे और
जुबेरजी, आपके
लिए बढि़या
होगा, हम यहां
होंगे तभी आप
वहां होंगे। यदि
आप लोग इधर आ
गये तो आपका
पता नहीं
लगेगा, कहां
गये आप। (व्यवधान)
श्री
जुबेर खान:
ऐसा मत करो,
नहीं तो कल्ला
साहब मेरा
टिकट ही काट
दिया करेंगे
हर बार।
श्री
कालीचरण
सर्राफ: कल्ला
साहब, इनका ध्यान
रखना। माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
पाँच साल और
दो साल की तुलना
कर रहा था।
सबको शिक्षा
हेतु 1.14 करोड़
बच्चों को 126.09
करोड़ की
मुफ्त
किताबें हमने
दो साल में
वितरित कीं।
आप बता दो
आपने की हो
तो। इसी प्रकार
से पिछली
सरकार ने पाँच
साल में 12
राजकीय और 102
निजी
महाविद्यालय
शुरू किये और
हमने दो साल
में पाँच नये
राजकीय
महाविद्यालय
और 343 निजी
महाविद्यालय
शुरू किये।
पिछली सरकार
में
महाविद्यालयों
में केवल 7447
सीटें थीं और
हमारे आने के
बाद अभी इन
सीटों की संख्या
बढ़कर 34000 हो गई
महाविद्यालयों
में। माननीय उपाध्यक्ष
महोदय, यह तो
मैंने शिक्षा
के मामले में बताया।
अब मैं सड़कों
के मामले में
भी बताना
चाहता हूं।
पिछली सरकार
ने जहां पाँच
साल के दौरान
चार किलोमीटर
बी.टी. रोड और
एक गांव को
प्रतिदिन
सड़क से जोड़ा
गया। पाँच साल
में केवल एक
गांव को प्रतिदिन
सड़क से जोड़ा
गया, हमने दो
वर्ष में 12 किलोमीटर
बी.टी. रोड का
निर्माण किया
और चार गांवों
को प्रतिदिन
के हिसाब से
हम सड़कों से
जोड़ रहे हैं
और यह बात
केवल कागजों में
नहीं है। जो
चार गांवों को
हमने सड़कों
से जोड़ने का
कीर्तिमान स्थापित
किया, उसकी
भारत सरकार ने
और वर्ल्ड
बैंक ने भी
तारीफ की है।
मैं बधाई देना
चाहूंगा
सार्वजनिक
निर्माण
मंत्रीजी को
कि हमने जिस
तरीके से
कीर्तिमान यह
स्थापित
किये सड़कों
के मामले में,
भारत सरकार चाहे
विरोधी सरकार
हो परन्तु
भारत सरकार ने
भी हमारी
तारीफ की है
और वर्ल्ड
बैंक ने भी
हमारी तारीफ
की है।
श्री
राजेन्द्र
राठौड़: और
उपाध्यक्ष
महोदय, मैं
बधाई लेना
चाहूंगा। ये
बधाई देना
चाहते हैं तो
मैं लेना
चाहूंगा।
श्री
जुबेर खान:
पी.डब्ल्यू.डी.
मंत्रीजी, ये
देना चाहते
हैं, दे नहीं
रहे हैं।
श्री
कालीचरण
सर्राफ: मैं
दे रहा हूं, दे
रहा हूं। बैठिये
आप। इसी
प्रकार से
उद्योगों के
मामले में
देखिये आप।
पिछली सरकार में
पाँच साल में 48122
लघु उद्योगों
का पंजीयन हुआ
हमारे प्रदेश
में और हमने
केवल दो साल
में 22149 लघु
उद्योगों का
पंजीयन किया।
माननीय
उपाध्यक्ष
महोदय, राजस्थान
की सरकार ने
प्रवासी
राजस्थानियों
का सम्मेलन
किया, करोड़ों
रुपया बरबाद
किया और उसके
बाद पाँच साल
में केवल 1123.88
करोड़ रुपये
का पूंजी
विनियोजन हुआ
राजस्थान
में उद्योगों
का और हमने केवल दो
साल में 548.74
करोड़ का
पूंजी का
विनियोजन
किया। चाहे
उद्योगों का
सवाल हो, चाहे
सड़कों का
सवाल हो और
चाहे शिक्षा
का सवाल हो, और
मैं यदि आपको पढ़कर
बताऊं, ऊर्जा
के मामले में
देखिये आप,
पिछली सरकार
ने पाँच वर्ष
की अवधि के
दौरान बिजली
के
ट्रांसफार्मर्स
जब खराब हो
जाते थे तो एक
महीने में
बदले जाते थे
और वही जब
हमारी सरकार
आई तो हमने
कहा कि एक
महीना नहीं, 72
घंटे में हमने
ट्रांसफार्मर्स
को बदलने का
काम किया।
पिछली सरकार
ने....
डा.
चन्द्रशेखर
बैद: 100 प्रतिशत
पावर कट चल
रहा है। एक मेगावाट
से ज्यादा
बिजली जो
कंजूम कर रहे
हैं, उनका 100
प्रतिशत पावर
कट चल रहा है।
श्री कालीचरण सर्राफ: माननीय उपाध्यक्ष महोदय, कांग्रेस के राज मí