bhs/usc/11.00/1a/2.4.2007(1)

 

अशोधित प्रति प्रकाशनार्थ नहीं

 

राजस्‍थान विधान सभा की कार्यवाही का वृत्‍तान्‍त

 

अंक 7      बारहवीं विधान सभा के सातवें सत्र का तैंतीसवां दिवस   संख्‍या 20

 

 

सोमवार, 2 अप्रैल, 2007

 

राजस्‍थान विधान सभा की बैठक 11:00 बजे

विधान सभा भवन जयपुर, में प्रारम्भ हुई।

 

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

 

श्री अध्‍यक्ष: श्री अर्जुन लाल मीणा।

जनजाति उपयोजना क्षेत्र के आवासीय विद्यालयों/छात्रावासों में रिक्‍त पद

252. श्री अर्जुन लाल मीणा (सलूम्‍बर): क्‍या जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(।) जनजाति उप योजना क्षेत्र के अन्‍तर्गत कितने आश्रम छात्रावास तथा कितने आवासीय विद्यालय संचालित है? उक्‍त छात्रावासों में वार्डनों एवं सह वार्डनों तथा अध्‍यापकों के कितने पद स्‍वीकृत हैं तथा कितने पद रिक्‍त हैं? विवरण सदन की मेज पर रखें।

(2) क्‍या सरकार आश्रम छात्रावासों एवं आवासीय विद्यालयों में स्‍वयं का कैडर बनाने का विचार रखती है? यदि हां, तो कब तक व नहीं, तो क्‍यों?

महिला एवं बाल विकास मंत्री (श्री कनकमल कटारा): (1) जनजाति उप योजना क्षेत्र में 230 आश्रम छात्रावास एवं 9 आवासीय विद्यालय संचालित हैं।

उक्‍त छात्रावासों में वार्डनों, सह वार्डनों तथा अध्‍यापकों के स्‍वीकृत एवं रिक्‍त पदों का विवरण परिशिष्‍ट – ‘पर संलग्‍न है।

(2) इस संबंध में राजस्‍थान अनुसूचित जनजाति परामर्शदात्री समिति द्वारा की गई सिफारिश का परीक्षण किया जा रहा है।

श्री अर्जुन लाल मीणा (सलूम्‍बर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री महोदय से यह जानना चाहता हूं कि 230 आश्रम छात्रावास और 9 आवासीय विद्यालय जो टीएसपी क्षेत्र में संचालित हैं वहां पर छात्रावासों में और आवासीय विद्यालयों में एडमिशन के लिए 70 प्रतिशत और 90 प्रतिशत से जो बच्‍चे पास होते हैं उन बच्‍चों का वहां एडमिशन होता है।  मैं माननीय मंत्री महोदय से जानना चाहता हूं कि कुल 296 पद हैं अधीक्षक ग्रेड –II और कोच के III ग्रेड के इनमें से 62 पद रिक्‍त हैं । मैं जानना चाहता हूं कि इन 62 पदों को कब तक भरा जाएगा और दूसरा मैं यह जानना चाहता हूं कि वार्डन और अध्‍यापक के स्‍वीकृत 144 पदों में से कुल 90 पद खाली हैं तो मैं यह पूछना चाहता हूं कि इन रिक्‍त पदों को कब तक भरा जाएगा और मैं यह भी जानना चाहता हूं कि इन अध्‍यापकों के और कोच के नहीं होने की वजह से इन आवासीय विद्यालयों में जीरो प्रतिशत से दस प्रतिशत रिजल्‍ट रहा है तो ये कब तक भरने का प्रयास करेंगे? दूसरा प्रश्‍न यह है है कि इन्‍होंने जो जवाब दिया है अनुसूचित जनजाति परामर्शदात्री कमेटी ने जो सिफारिश की है उसका मैं परीक्षण करवा रहा हूं । ये पिछले तीन सालों से सिफारिश करते आ रहे हैं ये कब तक परीक्षण पूरा करेंगे और कब तक परीक्षण करके और इस सिफारिश को लागू करेंगे जिसमें अभी तक जो शिक्षा विभाग से अध्‍यापक और काच को ये प्रतिनियुक्ति पर लेते हैं जहां से साल भर तक अध्‍यापक आवासीय विद्यालय और छात्रावासों में नहीं आते हैं तो क्‍या मंत्री जी अपने विभाग का खुद का स्‍वयं का कैडर निर्माण करने की मंशा रखते हैं और रखते हैं तो ये कब तक पूरा करेंगे?

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आवासीय विद्यालय और आश्रम छात्रावासों में पदों की रिक्तियां हैं और उसके लिए हमने पूरा प्रयास किया है।  गत दो वर्षों में भी हमने प्रयास करके इस बात की पूरी कोशिश की है। परंतु अभी आपने बताया कि ये कब तक भरे जाएंगे, ये पद नहीं होने की वजह से जो आवासीय विद्यालय में छात्रों के साथ और उनके परीक्षा परिणाम को देखते हुए हमें बड़ा दुःख भी है और आपको भी सबको महसूस हो रहा होगा। इस बात को ध्‍यान में रखते हुए परामर्शदात्री समिति की बैठक में भी यह बारबार प्रश्‍न आया कि स्‍वयं का कैडर बनाया जाए और हमने जो प्रयास किये हैं दो वर्ष में इनका भी उल्‍लेख करना चाहूंगा कि कुल हमारे पद 207 हैं और इन 207 पदों में से हमने 78 पद अभी भरे और रिक्‍त हैं 129 और उसके अन्‍तर्गत हमने कोशिश की थी 2004-05 में कि अध्‍यापक हमको उपलब्‍ध हो जाए और दुर्गम स्‍थानों पर आवासीय विद्यालय बने हुए हैं और इसलिए दो सौ रुपये अधिक राशि इनको दी जाए। यह भी हमने प्रयोग किया लेकिन इसमें भी अध्‍यापक आये नहीं और रुचि दिखायी नहीं । दूसरा मैं निवेदन करना चाहता हूं कि हमने यह भी कोशिश की कि सेवानिवृत्‍त कर्मचारियों की आयुसीमा और बढ़ाकरके इनके भी आवेदन लिये जाएं और इस दृष्टि से 63 वर्ष तक की आयु के भी हमने आवेदन मांगे थे और उसमें चार अध्‍यापक आये और उसमें भी हमने पूरी कोशिश की ।  दूसरा वॉक इन इंटरव्‍यु के द्वारा यानी इच्छित जो अध्‍यापक व्‍यक्ति आये उसके लिए भी हमने कोशिश की और उसके अन्‍तर्गत हमने बयालीस पद भरे हैं और इन बयालीस पदों के भरने के बाद में हमने और भी सोचा है कि एनजीओ यानी गैर सरकारी संस्‍था के द्वारा भी इन पदों को भरा जाए ताकि इन बच्‍चों की सुविधा ठीक ढंग से हो सके। इसमें भी हमने पूरे प्रयास किये लेकिन इसमें भी हमें परिणाम ठीक नहीं लगे। इसके बाद हमने कोशिश की है कि आने वाले समय अपना अलग से कैडर की बात आपने की है और मैं भी चाहता हूं शुरू से उसमें भी प्रयत्‍नरत हैं लेकिन स्‍वयं के कैडर में यह छोटा सा विभाग है और छोटे से विभाग में पदोन्‍नति के इनके चांसेज कहां बनेंगे जो कर्मचा‍री नियुक्‍त किये जाएंगे उनकी क्‍या परिस्थिति होगी इसके बारे में हमने मुख्‍य सचिव जी और हमारे प्रिंसीपल सेकेट्री, टीएडी और वित्‍त विभाग के सेकेट्री और डीओपी सेकेट्री इनके साथ 29 मार्च को मी‍टिंग करके इसके बारे में चर्चा भी की है और उसमें बहुत चिंतित हैं और आज फिलहाल मुख्‍यमंत्री महोदया से भी चर्चा हुई कैबिनेट मीटिंग में इस विषय को रखा और मैं आश्‍वस्‍त करना चाहूंगा कि जब तक हमारा यह कैडर नहीं होता है तब तक की अभी जुलाई से व्‍यवस्‍था ठीक ढंग से हो इसके लिए हम विद्यार्थी शिक्षा मित्र योजना के तहत इन अध्‍यापकों को जुलाई तक हम पूरा भर करके पूरी व्‍यवस्‍था कर देंगे और साथ ही साथ जो कैडर अलग से जिसके लिए हमने चर्चा की है वह भी निश्चित रूप से आने वाले समय में मुख्‍यमंत्री महोदया से चर्चा हुई है अभी चीफ सैक्रेटरी से भी हमारी चर्चा हुई है इसके बारे में स्‍थायी निदान हो इसके लिए हमारा पूरा प्रयास है और हम कर देंगे । ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: जवाब तो आ गया फिर भी मैं मौका दे रही हूं मूल प्रश्‍नकर्ता को एक और सप्‍लीमेंट्री पूछने के लिए। 

श्री अर्जुन लाल मीणा (सलूम्‍बर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि मंत्री जी ने बताया कि स्‍वयं का कैडर बनाने के लिए आगे प्रमोशन के कोई चांस नहीं है मैं माननीय मंत्री महोदय से यह जानना चाहता हूं कि जैसा कि आपके विभाग में टीएडी में उप शिक्षा निदेशक का पद आपके वहां कार्यरत है तो क्‍यों नहीं आप अपने स्‍वयं का कैडर बना करके और खुद के टीचर भर्ती करके उनको लिया जाए तो निश्चित रूप से आपके विभाग में काफी पद शिक्षा विभाग के भी चल रहे हैं तो आप उसका स्‍वयं का कैडर बनाने का प्रयास करें और उसका स्‍वयं का कैडर बन जाएगा तो जो नब्‍बे पद खाली हैं और भी दूसरे पद खाली हैं वो पद खाली नहीं रहेंगे। दूसरा टीएसी की बैठक में जो भी प्रस्‍ताव पारित करके सिफारिश की गई है वो आप कब तक लागू करेंगे? यह मैं जानना चाहता हूं।

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): उसके बारे में निवेदन किया ही है स्‍थायी रूप से हम समाधान कर रहे हैं और आज आश्‍वस्‍त किया गया हमें भी कि निश्चित रूप से इस बारे में स्‍थायी समाधान स्‍वयं का कैडर किस तरह से क्‍या होगा क्‍योंकि इसका बहुत परीक्षण करके ही करना पड़ेगा स्‍थायी समाधान। मैं भी बार-बार चिन्‍तन यही कर रहा हूं। आवासीय विद्यालय का स्‍थायी रूप से समाधान नहीं होता तब तक माननीय सदस्‍य आवासीय विद्यालय और आश्रम छात्रावासों की जो मांग कर रहे हैं इन बच्‍चों के साथ में जो आज परिस्थिति हो रही है उसको ध्‍यान में रखते हुए उसी बात को ध्‍यान में रखते हुए हम आगे मांग करें ताकि जब तक ये स्‍थायी समाधान हो जाए उसके बाद में जितनी परिस्थिति होगी उसके अनुसार करेंगे और जैसा कि परामर्शदात्री के बिन्‍दुओं के बारे में चर्चा की है एजेंडा और जिसकी क्रियान्विति के रूप में समय-समय पर हर तीन महीने में मीटिंग लेते रहते हैं उसके बारे में निर्णय लेकर के आपको निश्चित रूप से अवगत करा रहे हैं और करा दिया जाएगा और आने वाले समय में जो भी बिन्‍दु लेते हैं उसके क्रियान्विति निश्चित रूप से हो यह भी मैं आश्‍वस्‍त करता हूं। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: दे दिया जवाब सब।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अध्‍यक्ष महोदय, यह चौथा बजट सरकार ने पेश कर दिया है।  अध्‍यक्ष महोदय, आबू रोड के आवासीय विद्यालय में ...।

श्री अध्‍यक्ष: आबू रोड कहां आ गया यहां?

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): इसी में है 9 में आबू रोड भी है। ये 9 के अन्‍दर सब प्‍लान में आबू रोड भी है पूछो मंत्री जी को।  क्‍या बात कर रहे हैं।

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): मना नहीं कर रहे हैं,   है न । ये सबके लिए व्‍यवस्‍था है आप जो चिंता कर रहे हैं उससे भी आगे बढ़ करके ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): हमारे जिले का नहीं पूछेंगे क्‍या?

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): और निश्चित रूप से उसका स्‍थायी समाधान करने का प्रयास कर रहे हैं और माननीय मुख्‍यमंत्री ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): यह आप तो प्रयोग कर रहे हैं लगातार और चिन्‍ता प्रकट कर रहे हैं और दुःख प्रकट कर रहे हैं ये चौथा बजट आ गया आपका। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ...।

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): मैं निवेदन करना चाहता हूं कि आप तो चिन्‍ता कर रहे हैं, मैं इसका स्‍थायी करने का निवेदन कर रहा हूं और यह मैं करके रहूंगा। यह मैं विश्‍वास दिला रहा हूं।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से ...।

श्री अध्‍यक्ष: जो सूचना थी सब दे दी आपने अब और क्‍या चाहते हैं आप?

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाह रहा हूं कि आबू रोड का आवासीय विद्यालय जिसमें तीन सौ बच्‍चे हैं ..

 

कैलाश/    2.4.07  11.10  (1) 1b

 

न तो वहां पर वार्डन है, न वहां हैड मास्‍टर हैं और भीषण रूप से बच्‍चों का परीक्षा परिणाम प्रभावित हो रहा है ।

श्री अध्‍यक्ष: उन्‍होंने यह बात तो मान ली ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): हैड मास्‍टर भी नहीं है, वार्डन भी नहीं है ।

श्री अध्‍यक्ष: मान ली ना उन्‍होंने यह बात ।

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): ... (व्‍यवधान) जो प्रयास किये हैं वह भी है और आने वाले समय में जुलाई में इसकी स्‍थाई रूप से व्‍यवस्‍था करेंगे । (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): वहां हैड मास्‍टर और वार्डन दोनों ही नहीं है । अध्‍यक्ष महोदय, आप अंदाजा लगाइए कि उन छोटे छोटे बच्‍चों के साथ, यह सरकार उनके भविष्‍य के साथ किस रूप में खिलवाड कर रही है ।

श्री अध्‍यक्ष: कृपया स्‍थान ग्रहण करें । माननीय मंत्री जी चाहे आप वार्डन भेजे चाहे हैड मास्‍टर भेजे, एक तो भेजे आप ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): एक तो भेजिए आप । यह कोई बात हुई क्‍या ।

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): मैंने कहा है कि निश्चित रूप से जुलाई से यह पूरी व्‍यवस्‍था हो जायेगी ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आप कब तक व्‍यवस्‍था कर दोगे एक की यह बताओ आप (व्‍यवधान) ।

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी यह बताएं कि यह पद कब से रिक्‍त हैं । (व्‍यवधान)

प्रश्‍न संख्‍या 253

श्री अध्‍यक्ष: (व्‍यवधान) श्री जोगाराम पटेल । (अनुपस्थित)

(अनुपस्थित : कृपया आगे देखें)

श्री कान्‍ती प्रसाद मीणा (अनुपस्थित) श्री देवीशकर भूतडा (अनुपस्थित)  (व्‍यवधान)

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी यह बताएं कि यह पद कब से रिक्‍त चल रहे हैं । (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: .... श्री कान्‍ती प्रसाद, श्री नंदलाल मीणा । (व्‍यवधान) माननीय मंत्री जी मैंने नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन पुकार लिया है । माननीय सदस्‍यगण स्‍थान ग्रहण करें । मैंने नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन पुकार लिया है ।

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): अध्‍यक्ष महोदय, यह संपूर्ण उदयपुर डिवीजन के टीएसपी एरिया के लिये बहुत महत्‍वपूर्ण सवाल है और यह पद लंबे समय से रिक्‍त चले आ रहे हैं । माननीय मंत्री जी आप इसको जितना जल्‍दी हो त्‍वरित गति से इन पदों को भरे वरना पूरे ट्राइबल सब प्‍लान के छोटे छोटे, हमारे होनहार बच्‍चे, इस देश के भविष्‍य के साथ बहुत बड़ा खिलवाड हो रहा है ।

श्री अध्‍यक्ष: मान तो लिया उन्‍होंने भर रहे हैं, कह तो दिया आपको । अंकित नहीं हो । श्री नंदलाल मीणा ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): वह तो भर दिया है, अध्‍यापक ही बाकी हैं ।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री अध्‍यक्ष: वार्डन का तो भर दिया है ।

श्री कनकमल कटारा (महिला एवं बाल विकास मंत्री): मेरे पास जानकारी है वह भरा है । जो बाकी है उसका जुलाई से स्‍थाई समाधान करेंगे, पूरी व्‍यवस्‍था कर देंगे ।

श्री अध्‍यक्ष: मैंने नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन पुकार लिया है और उन्‍होंने कह दिया है । श्री नंदलाल मीणा । कांती प्रसाद बोले क्‍यों नहीं । कान्‍ती प्रसाद का नाम पुकारा वह बोले क्‍यों नहीं । कहां है कान्‍ती प्रसाद ? कौन, कान्‍ती प्रसाद मीणा ।

श्री कान्‍तीप्रसाद मीणा  (थानागाजी): जी हां ।

श्री अध्‍यक्ष: आप बोले क्‍यों नहीं उस समय ।

श्री कान्‍तीप्रसाद मीणा  (थानागाजी): बोल दिया था  254

श्री अध्‍यक्ष: सोरी, सोरी, ठीक है । कान्‍ती प्रसाद मीणा । चिकित्‍सा मंत्री जी, अब आप बीच में नहीं बोले । आप स्‍थान ग्रहण करें कान्‍ती प्रसाद मीणा ।

प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र नारायणपुर(थानागाजी) का क्रमोन्‍नयन

254. श्री कान्‍तीप्रसाद मीणा  (थानागाजी): क्‍या चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) क्‍या सरकार ने प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र को सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र में क्रमोन्‍नत करने हेतु कोई मानदंड निर्धारित किये हुए हैं ? यदि हां, तो मानदंडों की प्रति सदन की मेज पर रखें ।

(2) क्‍या सरकार प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों पर मानदंडानुसार पदस्‍थापित कार्मिकों को विभिन्‍न योजनाओं यथा मातृत्‍व जननी सुरक्षा, टीकाकरण, नसबंदी आदि के सफल संचालन हेतु पर्याप्‍त मानती है ? यदि हां, तो किस प्रकार एवं कितनी जनसंख्‍या पर ? मानदंडों की प्रति सदन की मेज पर रखें ।

(3) क्‍या सरकार ग्राम नारायणपुर (थानागाजी) जिसकी 40000 जनसंख्‍या है के प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र को सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र में क्रमोन्‍नत करने का विचार रखती है ? यदि हां, तो कब तक व नहीं तो क्‍यों ?

चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री (डा. दिगम्‍बर सिंह): (1) जी हां, मापदंडों की प्रति परिशिष्‍ठ अ' पर उपलब्‍ध है ।

(2) जी हां, प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों पर पदस्‍थापित चिकित्‍सा अधिकारी, महिला स्‍वास्‍थ्‍य दर्शिका, नर्स श्रेणी द्वितीय एवं महिला स्‍वास्‍थ्‍य कार्यकर्ता इन योजनाओं के क्रियान्‍वयन एवं सफल संचालन के लिए पर्याप्‍त है । सामान्‍य क्षेत्र में 30,000 एवं मरू/जनजाति क्षेत्र में 20,000 की ग्रामीण आबादी के लिए ये पद समुचित है । मानदंडों की प्रति परिशिष्‍ठ अ  पर उपलब्‍ध है ।

(3) निर्धारित ग्रामीण जनसंख्‍या आधारित मापदंड के अनुसार पंचायत समिति थानागाजी में एक सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र की कमी है । आगामी वित्‍तीय वर्षों में प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों को सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों में क्रमोन्‍नत किये जाने हेतु समुचित वित्‍तीय प्रावधान उपलब्‍ध होने पर पंचायत समिति थानागाजी के एक प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र को सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र में क्रमोन्‍नत किये जाने पर विचार किया जाना संभव हो सकेगा ।

श्री कान्‍तीप्रसाद मीणा  (थानागाजी): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी निवेदन करना चाहता हूं कि आप उस पूरे क्षेत्र से वाकिफ हैं । आप वहां मौके पर भी गये थे पर आपने घोषणा नहीं की थी । इसलिए मेरा आपसे निवेदन है कि जब यह कस्‍बा सभी मानदंडों को पूरा कर रहा है तो इस पीएचसी को सीएचसी में अभी क्रमोन्‍नत कर इस सदन में विश्‍वास दिलाएं ।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि मैंने अपने जवाब में कहा है ...

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): मंत्री जी माननीय सदस्‍य का यह पहला ही सवाल लगा है चौथे बजट तक और यह सभी मापदंड भी पूरे कर रहा है ।

श्री अध्‍यक्ष: आपको पैरवी करने की आवश्‍यकता नहीं है वह खुद ही कर लेंगे ।

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): मेरे पडौसी भी हैं मैं पडौसी का धर्म भी   निभा रहा हूं ।

श्री अध्‍यक्ष: प्‍लीज, यह आपने कोई प्रश्‍न नहीं पूछा, यह कोई तरीका नहीं है आपका। यह कोई बात हुई, इस तरह पैरवी करने लग जायें ।

डा. सुरेश चौधरी (भादरा): उसके लिये माफी लेकिन यह पहली बार ही लगा है ।

श्री अध्‍यक्ष: हां बोलिए मंत्री जी ।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, जैसा मैंने अपने जवाब में कहा पापुलेशन के हिसाब से एक सीएचसी की वहां आवश्‍यकता है और मैं खुद भी नारायणपुर जाकर आया था काफी बड़ा कस्‍बा है, आबादी भी काफी है और भौगोलिक परिस्थिति को देखते हुए मुझे लगता है कि वहां एक सीएचसी की आवश्‍यकता है इसलिए मैं सदन में माननीय सदस्‍य को यह आश्‍वासन देना चाहता हूं कि निश्चित रूप से आपकी भावनाओं को ध्‍यान में रखा जायेगा ।

श्री कान्‍तीप्रसाद मीणा  (थानागाजी): मंत्री जी मैं आपको बहुत बहुत धन्‍यवाद देता हूं ।

श्री अध्‍यक्ष: जवाब तो आपका बहुत पौंचा है कि विचार किया जाना संभव   होगा । आपका जवाब तो बड़ा पौंचा था लेकिन खैर, अब आपने घोषणा कर दी ठीक है ।

प्रश्‍न संख्‍या 255

श्री देवी शंकर भूतडा (अनुपस्थित)

(अनुपस्थित: कृपया आगे देखें)

श्री नंदलाल मीणा ।

विधान सभा क्षेत्र प्रतापगढ में पुन: विद्युत संबंध हेतु लंबित प्रकरण

256. श्री नन्‍दलाल मीणा (प्रतापगढ़): क्‍या ऊर्जा मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) जून, 2004 से अब तक विधान सभा क्षेत्र प्रतापगढ में कितने विद्युत कनेक्‍शन काटे गये ? पंचायतवार विवरण सदन की मेज पर रखें ।

(2) वर्तमान में कांटे हुए कनेक्‍शनों को पुन: जुडवाने के लिए कितने आवेदन प्राप्‍त हुए ? इनमें से कितने कनेक्‍शनों को पुन: जोड दिया गया तथा कितने कनेक्‍शन जोडे जाना शेष है ? पंचायतवार विवरण सदन की मेज पर रखें ।

श्री गजेन्‍द्र सिंह (राज्‍य मंत्री, ऊर्जा): (1) विधान सभा क्षेत्र प्रतापगढ में माह जून, 2004 से फरवरी, 2007 तक कुल 3894 विद्युत कनेक्‍शन काटे गये । पंचायतवार विवरण परिशिष्‍ट अ पर उपलब्‍ध है ।

(2) विधान सभा क्षेत्र प्रातापगढ में उक्‍त कटे हुए विद्युत कनेक्‍शनों में से उन्‍हें पुन: जुडवाने हेतु 2312 आवेदन प्राप्‍त हुए हैं । इन सभी आवेदकों के कनेक्‍शन पुन: जोड दिये गये हैं । पंचायतवार विवरण उपरोक्‍त परिशिष्‍ट अ  में दर्शाया गया है ।

श्री नन्‍दलाल मीणा (प्रतापगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से जानना चाहता हूं कि प्रतापगढ उप खंड में 53 ग्राम पंचायतों में 3894 वर्ष 2004 से 2007 तक विभाग द्वारा कुओं के कनेक्‍शन काटे गये हैं और 2312 कनेक्‍शन फरवरी, 2007 तक वापस इन्‍होंने जोडे हैं । अध्‍यक्ष महोदय, पिछले चार साल से लगातार अकाल पड रहा था और कुओं में पानी नहीं होने की वजह से काश्‍तकारों ने स्‍वेच्‍छा से अपने कनेक्‍शन कटवाये थे । राज्‍य सरकार ने बाद में निर्णय लिया था कि जो काश्‍तकार दुबारा कनेक्‍शन कराना चाहते हैं वह आवेदन कर सकते हैं । यह संपूर्ण आदिवासी क्षेत्र है और जो ग्राम की सूची मंत्री महोदय ने संलग्‍न की है उनमें से अधिकांश काश्‍तकार आदिवासी कृषक हैं । उनकी जानकारी में नहीं है कि पुन: कनेक्‍शन कराने की कितनी राशि ली जायेगी या निशुल्‍क कनेक्‍शन किये जायेंगे । मैं मंत्री महोदय जानना चाहता हूं कि क्‍या जो कटे हुए कनेक्‍शन बाकी हैं विभाग द्वारा इन काश्‍तकारों को पुन: कनेक्‍शन कराने के लिये आवेदन मांगेगे या उनके आवेदन पर ही आप कनेक्‍शन करेंगे । अगर मान लो आवेदन करते हैं तो इन कनेक्‍शनों को कब तक री कनेक्‍ट करने के आदेश जारी करेंगे ।

श्री गजेन्‍द्र सिंह (राज्‍य मंत्री, ऊर्जा): अध्‍यक्ष महोदय, जितने भी कनेक्‍शन कटे थे नोन पेमेंट आफ बिल्‍स की वजह से उनमें से जितने लोगों ने एप्‍लीकेशंस दे दी है उनके कनेक्‍शन कर दिये हैं । यदि कोई और भी एप्‍लीकेंट्स आयेंगे तो उनके कनेक्‍शन भी तुरंत कर दिये जायेंगे ।

श्री नन्‍दलाल मीणा (प्रतापगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, मेरा एक और सवाल है यहां पर जितने भी कनेक्‍शन हुए हैं वह फ्लैट रेट पर हुए हैं और फ्लैट रेट की राशि इतनी है कि वह काश्‍तकार उसका भुगतान नहीं कर सकता क्‍योंकि हमारे वहां पत्‍थरीला एरिया होने की वजह से पानी बहुत कम है, घंटा आधे घंटा तीन हार्स पावर की मोटर चलती है इसलिए वह पैसा ज्‍यादा है । वर्तमान में इन सब के मोटर लग जाती है तो काश्‍तकारों को भी रिलीफ मिलेगी ।

श्री अध्‍यक्ष: तीन हार्स पावर की तो कम ही है ।

श्री नन्‍दलाल मीणा (प्रतापगढ़): तीन की है, कुओं में पानी नहीं है और इन्‍होंने फ्लैट रेट पर कनेक्‍शन किये हैं तो जो फ्लैट रेट के कनेक्‍शन किये गये थे और पानी की कमी की वजह से वह भुगतान नहीं कर पाये, पैसा ज्‍यादा आया तो क्‍या राज्‍य सरकार इन गरीब आदिवासियों पर पुनर्विचार कर के जो फ्लैट रेट से पैसा चार्ज किया जिसकी वजह से उन्‍होंने पेमेट नहीं किया है उन पैसों को माफ करने की व्‍यवस्‍था करेंगे ।

श्री गजेन्‍द्र सिंह (राज्‍य मंत्री, ऊर्जा): अध्‍यक्ष महोदय, जो भी फ्लैट रेट के कंज्‍युमर हैं उनके पास आप्‍शन है वह मीटर कैटेगिरी में जा सकते हैं .........

 

ans/usc  11.20  1c  1.4.2007

 

उसके पास ऑप्शन है।  

श्री नन्‍दलाल मीणा (प्रतापगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, मैं मेरी बात बताऊं।

श्री अध्‍यक्ष: यह आप गलत कह रहे हैं।

श्री नन्‍दलाल मीणा (प्रतापगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, मेरे घर पर 6 महीने  पहले दोनों कुओं के मीटर आकर रख दिये और परसों ही  उसका कनेक्‍शन हुआ है, अब तक 6 महीने का जो पेमेंट हे फ्लेट रेट से, मुझे करना पडा। सवाल यह है कि मीटर तो आ गए परनतु क्‍या काश्‍तकार के कुए पर मीटर लगे है कि नहीं लगे हैं ? आपने घरों पर ले जाकर रख दिये। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: अमराराम जी भी साथ ही पूछ लेते हैं।

श्री अमराराम (धोद): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से जानना चाहूंगा कि कि जो कटे हुए कनेक्‍शन को दस साल में रिकनेक्‍शन करने का आदेश है लेकिन उसमें शर्त लगा रखी है कि उसी जगह होगा क्‍योंकि पानी खतम होने पर कनेक्‍शन कटा था, दूसरी जगह उसी खेत में या उसी खातेदारी में कहीं भी कनेक्‍शन लेता है तो वह पहले जहां  कटा था वहां कनेक्‍शन कराएंगा और फिर वहां ले जाएगा इससे जो दुविधा है, क्‍या मंत्री महोदय इस शर्त को  कि रिकनेक्‍शन  जो कटे हुए कनेक्‍शन को रिकनेक्‍शन कराने का दस साल की छूट दी हे उसमें उसी स्‍थान पर कनेक्‍शन लेने की जो पाबंदी है क्‍या इसको हटाकर किसान के हित में जहां भी वह खातेदारी में जहां भी वापिस रिकनेक्‍शन लेता है वहां देने की परमीशन देंगे, यह मंत्री जी बताए ? 

श्री अध्‍यक्ष: हां जी मंत्री जी, मंत्री महोदय जवाब दीजिए।  

श्री गजेन्‍द्र सिंह (राज्‍य मंत्री, ऊर्जा): अध्‍यक्ष महोदय, जो रिकनेक्‍शन का मामला है, शिफ्टिग के नाम पर बहुत मिसयूज हुआ, हमारे बहुत पेण्डिग कनेक्‍शन है, हमें लोगों को बहुत देने हैं, तो जितने भी पेण्डिग, जा हमने दस साल की अवधि बढ़ाई है उसे हमने रिकनेक्‍शन के लिए दस की बजाए पन्‍द्रह साल कर दिया है।

श्री अमराराम (धोद): आप उसी जगह पर क्‍यों पाबंदी, इसमें कम्‍पनी का भी नुकसान है।

श्री अध्‍यक्ष: सवाल यह है कि उसी जगह (व्‍यवधान) देकर फिर शिफ्ट करते हैं।

श्री अमराराम (धोद): किसान का भी नुकसान है1 वह अपना कनेक्‍शन कहीं भी ले अपने खातेदारी में, आपको क्‍या एतराज है ?(व्‍यवधान) डबल नुकसान होगा। पहले वहां कनेक्‍शन होगा , वहां पोल खड़े करेंगे जहां पानी नहीं है और वहां फिर शिफ्ट करेंगे इससे तो उलटा कम्‍पनी को नुकसान है, किसान को नुकसान है, उसमें उसको छूट दीजिए।(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: हां बस ठीक है, देंगे जवाब, दे रहे हैं  जवाब ।

श्री गजेन्‍द्र सिंह (राज्‍य मंत्री, ऊर्जा): अध्‍यक्ष महोदय, जहां भी कनेक्‍शन कटा है वहीं पर रिकनेक्‍शन होगा, पंचायत समिति का एक हमने जो प्रावधान किया था उससे बाहर नहीं जा सकते।

श्री अध्‍यक्ष: वहां तो पानी खतम हो गया, उसके पास में अपना खोद लिया, उसमें आपको क्‍या आपत्ति है, उसी खसरा नम्‍बर में दूसरा है तो आपको क्‍या आपत्ति है ?

श्री गजेन्‍द्र सिंह (राज्‍य मंत्री, ऊर्जा): उसी खेत में है तो कोई समस्‍या नहीं है, सेम खेत है, उसमें काई प्रोबलम नहीं है।

श्री अध्‍यक्ष: उसी खसरा नम्‍बर में है। उसी खसरा नम्बर में दूसरा उसने खोद लिया, पहले में पानी खतम हो गया तो क्‍या आपत्ति है ?

श्री अमराराम (धोद): अध्‍यक्ष महोदय, आदेश अभी...

श्री अध्‍यक्ष: आप बीच में नहीं बोले, बात का जवाब आने दीजिए।

श्री गजेन्‍द्र सिंह (राज्‍य मंत्री, ऊर्जा): अध्‍यक्ष महोदय, अगर सेम खसरा नम्‍बर में, उसमें कोई समस्‍या नहीं है।

श्री अमराराम (धोद): खेत में खसरा नम्‍बर....

श्री अध्‍यक्ष: फिर कैसे कह रहे है यह ?

श्री अमराराम (धोद): अध्‍यक्ष महोदय, खसरा नम्‍बर तो कुए का होता है, यह खसरा नम्‍बर में दूसरा कुआ हो ही नहीं सकता। 

श्री अध्‍यक्ष: पहला नम्‍बर तो खेत का....(व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): खेत की खातेदारी में, उसी किसान की खातेदारी में कहीं भी कुआ है, खसरा नम्‍बर तो कुए का खसरा नम्‍बर है उसमें दूसरा कुआ बन ही नहीं सकता वह उतना ही नम्‍बर होता है। यह तो किसान अपने खेत में  अपने उसी खातेदारी में कही भी कुआ लेता है आपको क्‍या एतराज है उसमें ? उसका कनेक्‍शन, उसका खेत है उसमें वह कनेक्‍शन लेता है आपने केवल यह आदेश दे रखा है कि उसी जगह, उसी खेत में उसी कुए पर उसमें कनेक्‍शन होगा, शिफ्ट कराना होगा तो दुबारा कराना होगा यह क्‍या बात हुई ।

श्री गजेन्‍द्र सिंह (राज्‍य मंत्री, ऊर्जा): इस खेत के अंदर अगर कुआ है या टयूबवैल है, उसी खेत के अंदर दूसरा बोरवैल करके कनेक्‍शन ले सकते हैं, उसके तो प्रावधान है।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, इसमें इतना सा निवेदन है कि सैटलमेंट में कुए का खसरा नम्‍बर छोटा कर दिया तो खसरा नम्‍बर जब किसान का अलग हो गया उस जगह तो दूसरा कुआ खुद नहीं सकता, तो पुराना खसरा नम्‍बर बड़ा खेत है उसमें कहीं भी आपको अलाऊ करना पड़ेगा, नम्‍बर एक।

श्री अध्‍यक्ष: वह तो कह रहे हैं ना।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): नहीं अध्‍यक्ष महोदय, सेटलमेंट में कुए का चाहे छोटा सा खसरा नम्‍बर अलग बना दे, छितम्‍भे काट दिए उसमें दूसरा कुआ कैसे खुदेगा मंत्री महोदय ? अध्‍यक्ष महोदय, दूसरा किसानों का मुद्दा यह है कि पहले बिजली वाले कहीं भी कनेक्‍शन ले लो किसानों को कनेक्‍शन दे देते थे। पुराने जमाने में गैर खातेदारी में कनेक्‍शन हो गया आज उनको अगर वह शिफ्ट कराना चाहते हैं खातेदारी में तो यह कहकर मना करदेते है कि यह तो 20 साल पहले गैर खातेदारी में हुआ था अब इसको खातेदारी में नहीं देंगे, यह राइडर हटाना चाहिये।  जब तो आप किसी भी एपलीकेशन पर देते थे, आज यह, किसी आदमी ने 15 साल पहले कुए का कनेक्‍शन लिया और वह कुआ सूख गया, अब उसको शिफ्ट कराना चाहता है अपने खातेदारी के खेत में, आप यह कहकर मना कर रहे हैं क्‍योंकि 20 साल पहले  कनेक्‍शन गैर खातेदारी का था इसलिए इसको खातेदारी में शिफ्ट नहीं करेंगे, यह राइडर हटाइये, किसान के हित में है मंत्री महोदय।

श्री गजेन्‍द्र सिंह (राज्‍य मंत्री, ऊर्जा):अध्‍यक्ष महोदय, दो साल तो ओनरशिपरहित  तो होना ही चाहिये, उसके बाहर हम नहीं जा सकते। दो साल की आपकी ओनरशिप होनी चाहिये। आपके पंचायत समिति के अंदर कोई भी आपका खसरा है, दो साल की ओनरशिप होनी चाहिये।

श्री अमराराम (धोद): ओनरशिप क्‍या है ? (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): मंत्री महोदय,  एक किसान ने 30 साल पहले एग्रीकल्‍चर कनेक्‍शन लिया   वह आपने गैरखातेदारी में दे दिया, वह कुआ सूख गया अब वह शिफ्टिंग चाहता है दूसरी जगह आप यह मना करके, शिफ्टिंग नहीं कर रहे, उसको कनेक्‍शन नहीं दे रहे क्‍योंकि आपका तो गैर खातेदारी में कनेक्‍शन है इसलिए आपको नहीं देंगे। आज तो वह खातेदारी में ले रहा है और आपने विधिवत तरीके से उसको कनेक्‍शन दिया है, यह तो अध्‍यक्ष महोदय, बहुत बड़ा अन्‍याय है किसानों के साथ।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): 20 वर्ष वाली खातेदारी करवा लो ना।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, आप सरकार को निर्देशित करिये कि इस संबंध में काई न कोई कदम उठाए।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, गैर खातेदारी खातेदारी करवाई जा सकती है कौनसा कानून आड़े आ रहा है उसमें।

श्री अमराराम (धोद): अध्‍यक्ष महोदय,जो खारा पानी है जहां मीठा पानी लाना चाहते हैं, दो साल तक वह इंतजार करें कि खारा पानी है जहां 3 किलोमीटर पर मीठा पानी है दो बिस्‍वा जमीन लेकर टयूबवैल बनाकर, यह जो दो साल की पाबंदी लगाते है कि दो साल तक वह इंतजार करें, जहां मीठा पानी से  दो-दो, तीन-तीन किलोमीटर से अपने खेत में लाकर कर रहे है इसलिए मेरा आपके माध्‍यम से मंत्री जी से निवेदन है कि यह पाबंदी हटाए कि दो साल की खातेदारी होगी, वरना किसान को नुकसान होता है क्‍योंकि पडौस में  खारा पानी हो जाता है तो नजदीक से मीठा पानी लान के लिए परेशानी है। काई भी अपना कनेक्‍शन कहीं भी ले, किसी भी जमीन में ले, इसमें सरकार को क्‍या एतराज है ? (व्‍यवधान)

श्री दाताराम  गुर्जर (खेतड़ी): अध्‍यक्ष महोदय, एक मेरा क्‍वेश्‍चन है।

श्री अध्‍यक्ष: जवाब दे रहे हैं मंत्री जी।

श्री दाताराम  गुर्जर (खेतड़ी): इससे संबंधित छोटा सा है। मंदिर माफी की जमीन में कई किसानों ने पहले कनेक्‍शन ले लिया और उसमें कुआ सूख गया दूसरा बोर उसने करवाया था उसको दुबारा परमीशन के लिए लिखा जाता है एक तो, एक उसी कुए में अगर कनेक्‍शन कट गया और दुबारा रिकनेक्‍शन लिया जाता है तो भी उसको कनेक्‍शन नहीं दिया जाता है, जब एक बार अनापत्ति ले ली तो बार बार लेने की जरूरत नहीं हे।

श्री गजेन्‍द्र सिंह (राज्‍य मंत्री, ऊर्जा): अध्‍यक्ष महोदय, जितने इम्‍पोरटेंट हमारे कन्‍ज्‍यूमर है शिफ्टिंग के उतने ही इम्‍पोर्टेंट  है जो लोग पेण्डिग कनेक्‍शन, इतने वर्षों से  जो वेट कर रहे हैं। शिफ्टिंग के नाम पर जो मिसयूज हो रहा है..We don’t want to allow that misuse. आपके जो पेण्डिग कनेक्‍शन है उसको आप रोकना चाहते हैं क्‍या? कांग्रेस के, आपकी सरकार के समय में माननीय सदस्‍य, आपके तो शिफ्टिंग अलाऊ ही नहीं थी।

श्री अमराराम (धोद): आपने तो दिया ही नहीं। 31 मार्च तक सबको देने का किया था, आपने एक नहीं दिया। लोगों को, किसानों को, किसानों को बल्‍ब दिया है। (व्‍यवधन) 31 मार्च 2007 को पेण्डिग खतम करने की आपने घोषण की थी।

श्री अध्‍यक्ष: श्री टीकमचंद कांत।

श्री अमराराम (धोद): मंत्री महोदय बैठे हैं, आज तक उसका इम्‍पलीमेंट नहीं किया। यह केवल ट्विस्‍ट कर रहे हैं1 31 मार्च,2007 को जितनी पेण्डिग थी सबको कनेक्‍शन जारी, 31 मार्च,2007 का किया था,आज तक सरकार ने नहीं किया, केवल बहाना करते हैं और किसानो को धोखा दे रहे हैं।

श्री रामचन्‍द्र जारोड़ा (मेड़ता): एक साल से कोई कनेक्‍शन नहीं दिया। (व्‍यवधान)

श्री दाताराम  गुर्जर (खेतड़ी): मेरे प्रश्‍न का जवाब मंत्री जी, मैंने भी क्‍वेश्‍चन किया था उसका जवाब तो दिया नहीं।

श्री रामचन्‍द्र जारोड़ा (मेड़ता): एक साल से कोई  कृषि कनेक्‍शन नहीं...( व्‍यवधान)

श्री दाताराम  गुर्जर (खेतड़ी): मंदिर माफी की जमीन के लिए मैंने पूछा था मंत्री जी से, मंत्री जी ने ध्‍यान ही नहीं दिया।  

श्री मुरारी लाल मीणा (बांदीकुई): (व्‍यवधान) नोटस जमा किया था। उन कनेक्‍शनंस को बेन कर दिया गया, दो साल हो गए बेन करे हुए, किसानों ने 60-60 हजार, 70-70 हजार रूपये डिमांड नोटिस जमा करा रखे हैं, उन बेन को सरकार कब तक खोलेगी मंत्री महोदय बताए?

श्री गजेन्‍द्र सिंह (राज्‍य मंत्री, ऊर्जा): अध्‍यक्ष महोदय, तीन साल से हमारी सरकार ने जितने कनेक्‍शन दिए, पाँच साल में कांग्रेस सरकार ने कनेक्‍शन नहीं दिए और हम एक लाख कनेक्‍शन से ज्‍यादा क्रोस कर चुके हैंऔर अभी भी एक अप्रैल के बाद...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आपने तो, आपकी सरकार ने इस सदन में कहा था पहले बजट सत्र के अंदर। घनश्‍याम तिवाडी जी जब जवाब दे रहे थे, जितने कनेक्‍शन है, जितनी एपलीकेशन है सारे दे देंगे और यह (व्‍यवधान) पहले आओ, पहले पाओ। (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): अब नये कनेक्‍शन कब खोलेंगे, अब तो आपने पूरा बैन लगा रखा है

श्री गजेन्‍द्र सिंह (राज्‍य मंत्री, ऊर्जा): नया वित्तिय वर्ष 1 अप्रैल को शुरू होता है, नया वित्तिय वर्ष शुरू हो गय, कनेक्‍शन खोल दिये जाएंगे। (व्‍यवधन)

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो।

श्री सुरेश मीणा (करौली): 000

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही):000

श्री अध्‍यक्ष: नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन, टीकमचंद कांत। 

श्री गजेन्‍द्र सिंह (राज्‍य मंत्री, ऊर्जा): कनेक्‍शन खुल गए है, आपको ज्ञान नहीं होगा, कनेक्‍शन खुल चुके हैं।

श्री अध्‍यक्ष: नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन, टीकमचंद कांत।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री अध्‍यक्ष: नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन, टीकमचंद कांत। 

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): प्रश्‍न संख्‍या 257

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री अध्‍यक्ष: नेक्‍स्‍ट कवेश्‍चन, टीकमचंद कांत।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): 000

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): प्रश्‍न संख्‍या 257 (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: नेक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन 257

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): प्रश्‍न संख्‍या 257

सिणधरी-जालौर राज्‍य उच्‍च मार्ग का संधारण।

  257. श्री टीकमचंद कांत(सिवाना): क्‍या सार्वजनिक निर्माण मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

  (1) क्‍या यह सही है कि राज्‍य उच्‍च मार्ग 16 के सिणधरी से जालौर तक का हिस्‍सा सीमा सड़क संगठन (ग्रीप) को मरम्‍मत हेतु सुपुर्द किया गया है ?यदि हां तो अब उस सड़क की क्‍या स्थिति है ?

  (2) क्या यह सही है कि सीमा सड़क संगठन उक्‍त सड़क का रख रखाव सही तौर पर नहीं कर पा रहा है ?

  (3) क्‍या सरकार इस हिस्‍से को सार्वजनिक निर्माण विभाग को पुन: सुपुर्द करने का विचार रखती है यदि हां, तो कब तक व नहीं तो क्‍यों ?

सार्वजनिक निर्माण मंत्री (श्री राजेन्‍द्र राठौड़): (1) जी हां, उक्‍त सड़क की सामान्‍यत: स्थिति संतोषजनक नहीं है।

  (2) जी हां। वर्तमान में ग्रेफ के अधीन इस सड़क का रख रखाव सही तरीके से नहीं किया जा रहा है। सड़क का रख रखाव सीमा सड़क संगठन के पास होने से रक्षा मंत्रालय के पास उपलब्‍ध वित्‍तीय संसाधनों एवम पारस्‍परिक प्राथमिकता पर निर्भर करता है।

  (3) सार्वजनिक निर्माण विभाग को इस हिस्‍से की पुन: सुपुर्दगी केन्‍द्रीय सरकार की नीति पर निर्भर करेगी।

 

दुर्गा/चौहान 020407 1130 1d

 

श्री अध्‍यक्ष: माननीय मंत्रीजी, रक्षा मंत्रालय के पास वित्‍तीय संसाधनों और पारस्‍परिक प्राथमिकता की, आपको क्‍या तकलीफ हो रही है इन बातों की जो आप यह जवाब दें। आप उनको दिखाओ कि यह सड़कें खराब हैं, करो ठीक इन्‍हें।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, हमने एक-दो बार नहीं, 20 पत्र लिखे हैं। मुख्‍य मंत्रीजी से मिलकर मेरे स्‍तर पर और मुख्‍य अभियंता स्‍तर पर और उसके बाद जो उनका जवाब आता है, जवाब में वे यह कहते हैं कि हमारी...।

श्री अध्‍यक्ष: तो जिम्‍मेदारी उनकी है तो फिर उनके वित्‍तीय संसाधनों की यहां पर क्‍यों दुहाई दें।

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): अध्‍यक्ष महोदय, यह सड़क स्‍थानान्‍तरित क्‍यों हुई और कब हुई और इसकी लम्‍बाई कितनी है। सबसे बड़ी बात यह है कि जब स्थिति संतोषजनक नहीं है तो सरकार या विभाग ने इस हेतु क्‍या कार्यवाही की। इसी प्रकार से आपने कहा कि यदि रक्षा मंत्रालय के पास संसाधन नहीं हैं तो हमारी सड़क को स्‍थानान्‍तरित करने के पीछे हेतु क्‍या था। पारस्‍परिक प्राथमिकता, इसका क्‍या तात्‍पर्य है, मैं नहीं समझ पाया, पारस्‍परिक प्राथमिकता। एक और प्रश्‍न पूछ लूं, उसके बाद दूसरे पर आता हूं। और आपने कहा कि यह केन्‍द्र सरकार की नीति पर आधारित है। और यदि केन्‍द्र सरकार की नीति हमारे अनुकूल नहीं है तो इस नीति को बदलने के लिये हमने केन्‍द्र सरकार पर क्‍या-क्‍या दबाव डाला, या उनसे बातचीत क्‍या की?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, यह सड़क राजस्‍थान के अन्‍दर सामरिक महत्‍व की सड़क है। सेना विभाग और सेना का ग्रेफ (GREF) है, जो जनरल रिजर्व इंजीनियरिंग फोर्स, जिन पर सेना का आवागमन ज्‍यादा होता है।

श्री अध्‍यक्ष: इसलिये चिन्‍ता की बात है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): जी, अध्‍यक्ष महोदय। उन सड़कों का अधिग्रहण वे करते हैं और इसके अधिग्रहण से पहले जब सेना के उच्‍चाधिकारी हमें लिखते हैं उसके बाद एक समिति बनी हुई है, सी.एम.एल.सी., सिविल मिलिट्री लाइजिनिंग कमेटी, इस कमेटी में बैठकर विचार होता है और उसके बाद जो सामरिक महत्‍व की सड़क है यह उनको स्‍थानान्‍तरित की जाती है।

जिस सड़क का जिक्र माननीय सदस्‍य कर रहे हैं यह स्‍टेट हाइ-वे 16 है। इसकी दूरी कुल मिलाकर 98 किलोमीटर है और इस में से बाड़मेर जिले में 16 किलोमीटर है जो ग्रेफ को 10.06.2002 को स्‍थानान्‍तरित की गई थी, और 83 किलोमीटर जालोर जिले में है। यह 29.01.2003 को स्‍थानान्‍तरित की गई। अध्‍यक्ष महोदय, यह सही है कि इन 98 किलोमीटर सड़क में से 47 किलोमीटर सड़क ऐसी है जो क्षतिग्रस्‍त है। यह क्षतिग्रस्‍त, अगस्‍त 2006 के अन्‍दर जब अतिवृष्टि हुई, बाड़मेर और जालोर जिले में, उसके कारण से क्षतिग्रस्‍त हुई और इसमें 591 लाख की जरुरत है। और यह सारा चूंकि हमारे आधिकारिक क्षेत्र में नहीं है, यह पूरा का पूरा ग्रेफ, भारत सरकार का है और उसके लिये हमने बारबार पत्र लिखे हैं। अध्‍यक्ष महोदय, इसमें मुख्‍य मंत्रीजी ने स्‍वयं ने भी पत्र लिखे, रक्षा मंत्रालय और रक्षा मंत्री प्रणव मुखर्जी को 19.12.2004 को, 12.2.2005 को मैंने भी पत्र लिखा। 20 पत्र ऐसे हैं जो बारबार लिखने पर भी इस सड़क का संधारण नहीं हुआ और यही सड़क नहीं, अध्‍यक्ष महोदय, हमारे बोर्डर से लगने वाले जिले हैं जिनमें 3850 किलोमीटर सड़क ग्रेफ के पास है, जिनके संधारण का काम और रखरखाव का काम वही करते हैं।

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह पूछ रहा हूं कि क्‍या आपका और केन्‍द्र सरकार के बीच कोई करार होता है या सिर्फ अधिग्रहित की जाती है, एक आदेश से ही हो जाता है। और करार होता है तो कुछ उसके अन्‍दर शर्तें होती होंगी। उन सड़कों पर सामरिक महत्‍व की सड़क होते हुए मानो कि सेना के काम में आती हैं लेकिन सामान्‍य वहां के रहने वाले, वहां पर जो नागरिक हैं, वह भी आवागमन करते हैं। आज आपने स्‍वयं ने स्‍वीकार किया, 43 किलोमीटर सड़क खराब है, आज स्थिति यह है कि वहां टायर फटते हैं, एक्‍सीडेंट होते हैं, लोग चल नहीं पाते हैं इस स्थिति के कारण हमारा कर्तव्‍य क्‍या है। हमारे क्षेत्र के अन्‍दर है यह और  अगर कोई करार, और कोई शर्त है तो उसके तहत हम बात करें। और यह बात नहीं करें तो उनसे कहें कि हमारे लोग कष्‍ट देख रहे हैं, असुविधा भोग रहे हैं तो केन्‍द्र सरकार इसके अन्‍दर तुरन्‍त कार्यवाही करे कोई न कोई। या फिर उनकी कोई बैठक बुलायें, जो पहले इनकी कौनसी बैठक, आपने नाम लिया है, उस बैठक को बुलाएं। बैठक के अन्‍दर हमारे भी लोग भागीदारी करें तो कोई बात बने। मैं क्‍या कहूं, अध्‍यक्ष महोदय, वहां डामर बिकता है, डीजल बिकता है, केरोसिन बिकता है, कंकरीट बिकती है, सारा सब कुछ बिकता है, उस सड़क की तो हालत क्‍या है, हम जानते हैं। सामरिक महत्‍व की है, सामरिक महत्‍व की सड़क ऐसी होती है क्‍या। इसलिये हमको पुरजोर विरोध करना पड़ेगा इस प्रकार की सड़कों के लिये।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, मैंने पहले निवेदन किया यह सारी सडकें, एक कमेटी बनी हुई है, सी.एम.एल.सी., सिविल मिलिट्री लाइजिंग कमेटी, पहले भारत सरकार के सेना के उच्‍चाधिकारी हमें लिखते हैं, इन सड़कों पर सेना का आवागमन बढ़ रहा है और इन सड़कों का संधारण विभिन्‍न कारणों से हम लेना चाहते हैं उसके बाद इस कमेटी में मामला आता है और उसके बाद हम उनको सौंपते हैं। उनको सौंपते हैं तब शर्त निश्चित तौर पर यह रहती है कि सड़क का रखरखाव और सड़क की चौड़ाई करना और सुदृढ़ीकरण यह सारा सेना अपने संसाधनों से करती है, करना चाहिए उनको। अध्‍यक्ष महोदय, यह भी सही है कि इन सड़कों की आयु भी निर्धारित है। यह स्‍टेट हाइ-वे है, 6 से 8 वर्ष के बीच में इसका पूरा रिन्‍यूवल हो जाना चाहिए और जितनी सड़कें मिलिट्री के पास हैं उसमें 500 किलोमीटर सड़कें ऐसी हैं जिनका रिन्‍यूवल प्रतिवर्ष होना चाहिए। अध्‍यक्ष महोदय, पिछले वर्ष भी, बारबार हमने लिखा तो 2006-07 में सिर्फ 262 किलोमीटर सड़क का इन्‍होंने रिन्‍यूवल किया और 2005-06 में 246 किलोमीटर का किया। इसलिये अध्‍यक्ष महोदय, हम तो बारबार लिख ही सकते हैं। चूंकि सेना का मामला है और इन सड़कों का सामरिक महत्‍व है, इसलिये हम यह तो कह नहीं सकते हैं कि यह सड़क हम उनको नहीं दे रहे हैं। परन्‍तु यह आपके माध्‍यम से माननीय सदस्‍यों को विश्‍वास दिलाना चाहता हूं, आप कहें तो मैं वह सारे लैटर टेबल करने को तैयार हूं, एक बार नहीं, दो बार नहीं, इसके लिये हमने बैठक भी की। एडिशनल चीफ सेक्रेटरी स्‍तर पर भी बैठक हुई और लगातार हमारा दबाव है। मुख्‍य मंत्रीजी ने प्रणव मुखर्जी को पत्र भी लिखा है कि यह जितनी सड़कें आपने ले रखी हैं और इन सड़कों की लम्‍बाई भी 3850 किलोमीटर है, कई और माननीय सदस्‍यों के क्षेत्र में भी है। निश्चित तौर पर मैं पुन: सदन की भावना के अनुसार प्रणव मुखर्जी साहब को भी लिखूंगा और कोशिश करुंगा कि इन सड़कों का रखरखाव, केन्‍द्र सरकार हमें या तो पैसा दे और हम इसकी भी कोशिश करेंगे, उनको कहेंगे...।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, यह बनाते तो आप ही हो ना।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): जी, बनाते हैं।

श्री अध्‍यक्ष: पैसा वहां से आता है, बनाते आप हो।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): हां, नहीं, नहीं, अध्‍यक्ष महोदय, नहीं।

श्री अध्‍यक्ष: तो यह एजेंसी कौन है फिर बनाता कौन है, सड़कों को ठीक कौन करवाता है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, यह सड़कें, जिन सड़कों को ग्रेफ हमसे लेता है, वह सड़कें पहले से बनी हुई होती हैं। कहीं, बहुत कम ऐसे स्‍ट्रेचेज होते हैं जहां ग्रेफ खुद कहता है कि हम इन नई सड़कों का निर्माण कराना चाहते हैं, इसलिये हम बनाते हैं और उसके बाद उनको सौंप देते हैं।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, मेंटिनेंस करने की जिम्‍मेदारी उनकी है, रखरखाव की, यह आपने कहा।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उनकी जिम्‍मेदारी है।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, लेकिन वह रखरखाव वही करते हैं कि पैसा देकर के और आपसे करवाते हैं?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): नहीं, अध्‍यक्ष महोदय, उनकी इंजीनियरिंग की अलग से विंग है। जो जनरल रिजर्व इंजीनियरिंग फोर्स, इनका टोटल अलग से सिस्‍टम है। यह अलग से अपने ठीक कराते हैं। अपने हिसाब से काम करवाते हैं तो हम उनको कहते जरुर रहते हैं क्‍योंकि वहां सिविलियन भी उन्‍हीं सड़कों पर चलते हैं। इसलिये निश्चित तौर पर यह सड़कें क्षतिग्रस्‍त हैं, अध्‍यक्ष महोदय, और कुल मिलाकर 925 किलोमीटर सड़कें क्षतिग्रस्‍त हैं राजस्‍थान के अन्‍दर 3850 किलोमीटर में, बारबार लिखने के बाद भी नहीं करते हैं। अब चूंकि इन सड़कों का महत्‍व सेना की दृष्टि से महत्‍वपूर्ण है, इसलिये हम उनको यह भी नहीं कह सकते हैं कि हम सड़कें वापस लेंगे। परन्‍तु मैं, आपके माध्‍यम से माननीय सदस्‍यों को यह विश्‍वास जरुर दिलवाना चाहूंगा कि इस बार हम उनको लिखेंगे या तो निश्चित समयावधि के अन्‍दर इनका संधारण करने का काम आप करें, वरना यह सड़कें, जिस रूप में हैं पुन: सौंप दें ताकि हमारा विभाग इनका संधारण करे। (व्‍यवधान)

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): यह सामरिक महत्‍व का जहां तक प्रश्‍न है साहब, सामरिक महत्‍व का मतलब इस देश को बचाने के लिये सड़कें बढि़या होनी चाहिए, इतनी अच्‍छी होनी चाहिए कि सेना के टेंक वगैरह उस पर चल सकें। सड़कें ऐसी हैं कि हमारे ट्रेक्‍टर भी खराब हो रहे हैं। इसलिये मेरे कहने का तात्‍पर्य यह है कि सामरिक महत्‍व का कहकर हम छोड़ नहीं सकते हैं, सामरिक महत्‍व का, हमारी सुरक्षा इसके साथ जुड़ी हुई है। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: सेना का आवागमन जब वहां होता है तो सेना ने भी तो लिखा होगा उन्‍हें।

श्री अमराराम (धोद): यह रिपेयर करायें तो सेना मना नहीं करती है। अगर राजस्‍थान का सार्वजनिक निर्माण विभाग उन सड़कों को रिपेयर करता है तो मना नहीं करता है कोई।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): नहीं, नहीं करवा सकते हैं।

श्री अमराराम (धोद): लेकिन यह तो बचने का एक बहाना है कि उनको दी हुई है।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, नहीं, बचने का नहीं है। यह लिखना चाहिए था कि यदि आप ठीक नहीं करवायेंगे तो हम ठीक करवा रहे हैं और पैसा आपको देना पड़ेगा। (व्‍यवधान)

श्री जीवराम चौधरी (सांचौर): अध्‍यक्ष महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र में, जालोर जिला हेडक्‍वार्टर जाने की मुख्‍य सड़क जो सांचोर से.....(व्‍यवधान) होते हुए जालौर आती है।

श्री गुरजंट सिंह बराड़ (संगरिया): अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से, जो हमारे हनुमानगढ़ को...(व्‍यवधान) एक मिनट, एक मिनट, आप दूसरों को बोलने दें।

हनुमानगढ़ को, जो डिस्ट्रिक्‍ट से जोड़ती है, सांगरिया को, वह पहले पी.डबल्‍यू.डी. की सड़क बनी हुई थी, और कुछ 5-10 साल पहले, उन्‍होंने, ग्रेफ वालों ने ले ली। अब ग्रेफ वालों ने दूसरा रास्‍ता बना लिया, कहीं उन्‍होंने हनुमानगढ़ से या दूसरे रास्‍ते से सीधे रोड बना दी उनके बोर्डर को जाने के लिये। अब 4-5 साल से उसमें इतने खड्डे पड़े हैं, पिछले 2-3 महीनों में 32 एक्‍सीडेंट हुए वहां और 5 आदमी मर गये उन एक्‍सीडेंट्स में। मंत्री महोदय खुद संगरिया पधारे थे और वादा करके भी आये थे। मेरा आपसे निवेदन है कि जो रोड वहां बनी हुई है, वह पी.डबल्‍यू.डी. की बनी हुई है। अगर उन्‍होंने नहीं सम्‍भाली तो इसका मतलब यह नहीं कि हमारे तहसील हेडक्‍वार्टर को जो सड़क जोड़ती है, हमारी सड़क, हमारी खुद की बनाई हुई है, हमने उनको दी थी, अगर उन्‍होंने छोड़ दी तो हम लोगों को भूल थोड़ी जाएंगे जो वहां के लाखों लोग बसने वाले हैं। वह सड़क पंजाब को लिंक करती है, हरियाणा को लिंक करती है। मेरा आपसे एक ही निवेदन है कि उन सड़कों को, पी.डबल्‍यू.डी. की पुरानी सड़क बनी हुई है।                                

 

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तो आप उसको जैसे भी हो सके, उसकी मरम्‍मत, उसके खड्डे, वहां लोगों को ट्रेक्‍टर-ट्रोली और छोटे व्हिकल्‍स को तो इतना नुकसान है कि वहां चल ही नहीं सकते, मेरा आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय को यह निवेदन है।

श्री अध्‍यक्ष: अब आपका क्‍या है?

श्री जीवराम चौधरी (सांचौर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र में यह की यह समस्‍या है। रानीवाड़ा-सांचौर-से जालौर जिला हैडक्‍वार्टर जाने वाल सड़क 47 किलोमीटर इतनी टूटी हुई है कि वहां कोई गाड़ी चलने लायक रस्‍ता ही नहीं है।

श्री अध्‍यक्ष: वह सीमा सुरक्षा से थोड़े ही है? ... (व्‍यवधान)

श्री जीवराम चौधरी (सांचौर):  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वह भी ग्रेफ में है इ‍सलिए मेरा मंत्री महोदय से यह निवेदन है कि कम से कम वह पेचवर्क तो करवा कर खड्डे तो बुरवायें ताकि वहां एक सामान्‍यत: साधन तो चल सके। ... (व्‍यवधान)

श्री अशोक नागपाल (सूरतगढ़): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र  की एक प्रमुख सड़क सूरतगढ़ से अनूपगढ़ वह भी ग्रेफ के पास है।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप विराजिये। बात यहां है सीमा सड़क संगठन की है। ... (व्‍यवधान)

श्री अशोक नागपाल (सूरतगढ़): उस 76 किलोमीटर सड़क के लिए, तीन घंटे का सफर, तीन घंटे में सफर पूरा होता है माननीय मंत्री महोदय ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आपकी बात, वह बात ठीक है पर ... (व्‍यवधान)

श्री मुरारी लाल मीणा (बांदीकुई): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा सड़क मेंटिनेंस के संबंध में एक जनरल क्‍वेश्‍चन है। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जनरल क्‍वेश्‍चन है मेरा। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सड़क मेंटिनैंस के संबंध में मेरा जनरल क्‍वेश्‍चन यह है कि अपने सड़क मेंटिनेंस का पीरियड फिक्‍स है। यहां विलेज रोड्स के जो मेंटिनैंस का पीरियड है यह 10 साल, 12 साल है लेकिन राजस्‍थान की भौगोलिक स्थिति अलग-अलग है। अब पूरे राजस्‍थान में किसी सड़क पर कहीं ज्‍यादा बरसात होती है और उस पर ट्रेफिक भी ज्‍यादा चलता है तो वह जल्‍दी उखड़ जाती है और जहां पर बरसात कम होती है और ट्रेफिक नहीं चलता है वह उखड़ नहीं पाती और एक भी गड्डा नहीं होता। इन सबका नम्‍बर 10 साल और 12 साल में आता है।

श्री अध्‍यक्ष: यह मूल प्रश्‍न जो है ... (व्‍यवधान)

श्री मुरारी लाल मीणा (बांदीकुई): तो सड़क की स्थिति को देखते हुए रिन्‍युअल पीरियड अलग-अलग होना चाहिए।

श्री अध्‍यक्ष: यह प्रश्‍न सीमा सड़क संगठन की सड़कों का है। आप में नहीं आता है यह। ... (व्‍यवधान) 

श्री मुरारी लाल मीणा (बांदीकुई): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जनरल प्रश्‍न है यह ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आपके इलाके में नहीं है यह।  कृपया, स्‍थान ग्रहण करें। ... (व्‍यवधान)

श्री मुरारी लाल मीणा (बांदीकुई): यह जनरल क्‍वेश्‍चन है। जनरल पॉलिसी है कि 10 साल से, 12 साल में मेंटिनैंस होती है सबकी चाहे कोई सड़क उखड़े या मत उखड़ो ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: नैक्स्ट क्‍वेश्‍चन। श्री चन्‍द्रशेखर बैद।

श्री मुरारी लाल मीणा (बांदीकुई): और जहां पर बरसात ज्‍यादा होती है तो ज्‍यादा उखड़ जाती है और जहां पर बरसात कम होती है वहां पर कम उखड़ती है तो सड़कें ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: यह सीमा सड़क संगठन का प्रश्‍न है। आपके इलाके में नहीं है यह। नैक्स्ट क्‍वेश्‍चन।

स्‍थगित प्रश्‍न

(बुधवार, दिनांक 21 मार्च, 2007)

जननी सुरक्षा योजनान्‍तर्गत व्‍यय राशि

 

197. डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): क्‍या चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

(1) जननी सुरक्षा योजनान्‍तर्गत वर्ष 2005 से अब तक आवंटित राशि के विरुद्ध कितनी राशि व्‍यय कर कितनी जननियों को लाभान्वित किया गया ? वर्षवार व जिलेवार संख्‍या विवरण सदन की मेज पर रखें।

(2) क्‍या यह सही है कि उक्‍त योजनान्‍तर्गत नियम विरुद्ध रजिस्‍ट्रेशन से अधिक महिलाओं को राशि का वितरण किया गया? यदि हां, तो जिलेवार रजिस्‍ट्रेशन की संख्‍या तथा लाभार्थियों की संख्‍या सूची सदन की मेज पर रखें।

(3) क्‍या यह भी सही है कि उक्‍त योजनान्‍तर्गत अनटाइड फंड के रूप में प्रत्‍येक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र पर 10,000/- रुपये की राशि उपलब्‍ध कराई गई? यदि हां, तो कौन-कौन से स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र पर किस प्रकार राशि का उपयोग किया गया? विवरण सदन की मेज पर रखें।

(4) क्‍या यह भी सही है कि उक्‍त योजनान्‍तर्गत राष्‍ट्रीय ग्रामीण स्‍वास्‍थ्‍य मिशन की ओर से हैल्‍प लाइन योजना प्रारम्‍भ की गई है? यदि हां, तो उक्‍त में कितनी राशि व्‍यय कर क्‍या-क्‍या सुविधाएं उपलब्‍ध कराई जा रही हैं? जिलेवार विवरण सदन की मेज पर रखें।

(5) उक्‍त योजनान्‍तर्गत कितनी महिलाओं को सरकारी अस्‍पताल में जाने के लिए यातायात सुविधा उपलब्‍ध कराने हेतु कितनी राशि व्‍यय की गई? जिलेवार संख्‍या सूची सदन की मेज पर रखें। 

चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री (डा. दिगम्‍बर सिंह): (1) जननी सुरक्षा योजना के अन्‍तर्गत वित्‍तीय वर्ष 2005-06 से अब तक 51 करोड़ 25 लाख 53 हजार रुपये जिलों को आवंटित किये गये जिसके विरुद्ध अभी तक लगभग 28 करोड़ 65 लाख 70 हजार रुपये व्‍यय का विवरण प्राप्‍त हो चुका है तथा 3 लाख 9 हजार 330 महिलाओं को लाभान्वित किया गया। जिलेवार विवरण परिशिष्‍ट-   पर उपलब्‍ध है।

(2) जी, नहीं।

(3) जी, नहीं।

(4) जी, हां। हैल्‍प लाइन योजना में जनवरी, 2007 तक 19 लाख 49 हजार 84 रुपये की राशि व्‍यय की गई है। योजनान्‍तर्गत राज्‍य में निम्‍न सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं:-

* गर्भवती माताओं हेतु टेलीफोन पर मार्ग-दर्शन।

* संस्‍थागत प्रसव हेतु टेलीफोन मांग पर वाहन की व्‍यवस्‍था।

* निजी वाहन मालिकों के साथ मिलकर सभी गांवों के निकट के अस्‍पताल तक परिवहन हेतु दरों का निर्धारण, जिसमें प्रसूता को निश्चित दर पर तुरन्‍त निकटतम अस्‍पताल तक पहुंचने हेतु वाहन उपलब्‍ध हो सके।

* अस्‍पताल को महिला के पहुंचने से पूर्व टेलीफोन द्वारा सूचित करना, जिससे प्रसव की तैयारी में होने वाले विलम्‍ब से बचा जा सके।

* गर्भवती महिलाओं के पंजीकरण में आशा सहयोगिनियों के साथ सहयोग।

* मातृ मृत्‍यु की सूचना।

व्‍यय राशि का जिलेवार विवरण परिशिष्‍ट पर उपलब्‍ध है।

(5) इस योजना में 22,806 महिलाओं को सरकारी चिकित्‍सा संस्‍थानों में जाने के लिए परिवहन सुविधा उपलब्‍ध कराने हेतु राशि रुपये 87.03 लाख व्‍यय की गई है। जिलेवार विवरण परिशिष्‍ट- पर उपलब्‍ध है।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्रीजी से यह पूछना चाहता हूं कि खंड एक के अन्‍दर आपने यह कहा है कि 51 करोड़ 25 लाख 53 हजार रुपये जिलो को आवंटित किये गये। अब मेरा प्रश्‍न यह है कि आपको केन्‍द्र सरकार से 2005-06 के अन्‍दर और 2006-07 में अब तक जननी सुरक्षा योजना के अन्तर्गत कितनी राशि प्राप्‍त हुई, पहला।

दूसरा, 2005-06 में और 2006-07 में आपने कितनी-कितनी राशि जननी सुरक्षा योजना के अन्‍तर्गत व्‍यय की? क्‍योंकि मेरी जो सूचना है उसमें पहले साल आपने सिर्फ 10 प्रतिशत राशि व्‍यय की और दूसरे साल आपने इसमें टोटल जो आपने बताया है 51 करोड़ 25 लाख रुपये में से आपने 28 करोड़ 65 लाख रुपये ही व्‍यय किये हैं अभी तक, आवंटित किये हैं।

दूसरा प्रश्‍न यह है कि 2005-06 के अन्‍दर कितने बच्‍चे राजस्‍थान में पैदा हुए? अमूमन 15 लाख बच्‍चे राजस्‍थान में पैदा होते हैं जिसमें 11 लाख तो ग्रामीण एरिया में होते हैं चार 4 लाख शहर के अन्‍दर होते हैं तो जहां 15 लाख बच्‍चे पैदा हो रहे हैं और आपने 3 साल, 2 साल के अन्‍दर सिर्फ 3 लाख 9 हजार 330 महिलाओं को ही लाभान्वित किया है तो ऐसा क्‍या कारण हो गया कि आपने इतनी कम महिलाओं को लाभान्वित किया?

एक जो हैल्‍प लाइन योजना है। उसमें सारे जिलों में, जो आपने सूची दी है उसमें 32 जिलों में से 28 जिलों के अन्‍दर आपने हैल्‍प लाइन शुरू कर दी। अब आपकी यह टोंक में, चूरू में, बूंदी में और धौलपुर, इसमें चूरू भी आ गया और धौलपुर भी आ गया और बूंदी भी आ गया और टोंक भी आ गया, इन्‍होंने ऐसा क्‍या गुनाह कर दिया कि यहां पर आपने हैल्‍प लाइन नहीं शुरू की? और आखिरी प्रश्‍न मेरा यह है कि आपने पांचवें खंड में बताया है कि जब जननी सुरक्षा योजना के अन्‍तर्गत ग्रामीण महिलाओं को दूरदराज इलाके से अस्‍पताल में पहुंचाने के लिए जो वाहन की सुविधा है वह भी उपलब्‍ध करायी जाती है तो जब 15 लाख बच्‍चे एक साल के अन्‍दर हो रहे हैं और आपने यह सुविधा दी है सिर्फ 22806 महिलाओं को। ऐसा क्‍या कारण रहा जबकि महिलाएं बारबार फोन करती हैं कि हमारे प्रसव के लिए हमको दूसरे अस्‍पताल में, अमुक अस्‍पताल में भेज दो, राशि उपलब्‍ध करायी जाती है तो राशि उपलब्‍ध क्‍यों नहीं करायी गयी?

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पहला सवाल तो माननीय सदस्‍य का था कि सन 2005-06 में कितनी राशि और 2006-07 में कितनी राशि केन्‍द्र सरकार से प्राप्‍त हुई?

श्री अध्‍यक्ष: इनका कहना है कि 2005-06 में तो 10 परसेंट ही खर्च किया आपने। ... (व्‍यवधान)

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): कितनी राशि प्राप्‍त हुई केन्‍द्र सरकार से क्‍योंकि केन्‍द्र सरकार तो, आप ज्‍यादा चिंतित हैं न उसके लिए इसलिए पूछ रहे थे तो मैं आपको निवेदन कर रहा हूं माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 2005-06 में 5.43 करोड़ और 2006-07 में 35.5 करोड़ की राशि प्राप्‍त हुई।

श्री अध्‍यक्ष: 10 परसेंट ही हुआ, ठीक कह रहे हैं वह। सही। ... (व्‍यवधान)

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): अब मैं आपको निवेदन करना चाहूंगा कि आपने जननी सुरक्षा के बारे में और हैल्‍प लाइन के बारे में जो बात कही कि इतने बच्‍चे गांव में पैदा होते हैं, इतने शहर में पैदा होता हैं ... (व्‍यवधान)

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): नहीं-नहीं, इसमें खर्च कितनी की, साहब, इसी में बताओ, साहब। 5 करोड़ और 35 करोड़ मिले न इसमें से पहले साल कितनी खर्च की? ... (व्‍यवधान)

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): मैं वह ही निवेदन कर रहा हूं, सर। आप विराजिये तो सही। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह जननी सुरक्षा योजना शुरू हुई 9 सितम्‍बर, 2005 को और जब इसको शुरू किया गया तो ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: हां।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): तो इसके पीछे केवल आशय इसका केवल बी.पी.एल. महिलाओं को लाभ देने के लिए था इसलिए आप जो कह रहे हैं न कि खर्च की और उसकी बात वह इस बात से स्‍पष्‍ट हो जाएगी। उसके बाद माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसमें इसको चेंज किया गया, इस आदेश को और इसमें ए.पी.एल. और बी.पी.एल. दोनों को सम्मिलित किया गया और यह पहली अप्रैल, 2006 से शुरू किया गया जिसमें ए.पी.एल. महिलाओं को भी शामिल किया गया। उस समय भी उसमें कुछ राइडर्स थे कि महिला की उम्र 19 साल होनी चाहिए। दो बच्‍चे से ज्‍यादा पर यह राशि देय नहीं होगी और तीसरे बच्‍चे पर अगर राशि देय होगी तो यह उसी स्थिति में जबकि वह नसबंदी का आपरेशन कराने के लिए तैयार हो। इसके बाद इस राइडर को भी समाप्‍त किया गया और 700 रुपये शुरू-शुरू में पेमेंट, 700 रुपये था इसको 1400 रुपये किया गया और ए.पी.एल., बी.पी.एल. सब कैटेगरी की महिलाओं को इस योजना का लाभ देने का तय किया गया। चाहे उसके कितने भी बच्‍चे हो, उसको भी यह लाभ देने का तय किया गया। उसके नसबंदी आपरेशन से भी उसको नहीं जोड़ा गया। उसकी एज का जो राइडर था उसको भी इसमें से हटा लिया गया इसलिए माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं कि शुरू में केवल बी.पी.एल. महिलाओं के लिए था इस वजह से खर्चे में जो आप कह रहे हैं और इसके बाद जो हमारी स्‍पीड आयी है इस जननी सुरक्षा योजना की जो हमारी सफलता इस राज्‍य में आयी है माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अपने आप में एक बहुत बड़ा उदाहरण है क्‍योंकि 40 परसेंट से ज्‍यादा का हमारा इन्‍क्रीज है। हमारी इंस्‍टीट्यूशनल डिलीवरीज का और हमारा जो मातृ मृत्‍यु दर है, हमारी शिशु मृत्‍यु दर है उसमें भी जो डिक्‍लाइन इतना शार्प हो रहा है माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वह इसी के कारण से है और निश्चित रूप से गरीब लोगों को बहुत मदद इस योजना के माध्‍यम से हम दे रहे हैं।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हैल्‍प लाइन के बारे में मैं आपको निवेदन करना चाहूंगा कि हैल्‍प लाइन का निश्चित रूप से, यह शुरूआत हमने की है जिससे, और इसके कई फायदे भी लोगों को, हमारी गरीब जनता को कम से कम इसके फायदे जो मिलते हैं।

 

spp/usc/11.50/1f/2.4.2007(1)

 

क्‍योंकि अस्‍पतालों में भी व्‍यवस्‍थाएं हैल्‍प लाइन के थ्रू पहले हो जायें, जो मरीज का ट्रांसपोर्टेशन होना है, गर्भवती महिला का, जैसे पेन होने के बाद गांव में ट्रांसपोर्टेशन की उसको प्रॉब्‍लम होती है। उसकी व्‍यवस्‍था तुरन्‍त हैल्‍पलाइन करे तो निश्चित रूप से उससे काफी कुछ हम गर्भवती महिलाओं को लाभ देने में सफल हुए हैं। आपने कहा है कि कुछ जिलों में यह हैल्‍पलाइन की सुविधा उपलब्‍ध नहीं है और खासकर के चूरू का आपने बताया। मैं आपको निवेदन करना चाहता हूं कि चूरू में आपका एक जाक बोरूका ट्रस्‍ट वहां पर काम कर रहा है और यह नवयुवक मंडल, एक संस्‍था है चूरू में, इन्‍होंने राजगढ्, जो आपका ब्‍लॉक है, उसमें काम करना शुरू किया है और अध्‍यक्ष महोदय, मैं तो एक बार कहीं से आ रहा था और मुझे बोरूका ट्रस्‍ट पर रूकने का मौका मिला And It was up to the my surprise  कि जब मुझे बोरूका ट्रस्‍ट वालों ने बताया कि हमारे राजगढ़ ब्‍लॉक की मैटरनल मोर्टेलिटी, इस लैस दैन द नेशनल एवरेज, फिर मैंने अपने अधिकारियों को कहा। मैंने कहा एक बार, क्‍योंकि उनके कहने पर विश्‍वास हमने नहीं किया। हमने अपने अधिकारियों को कहा कि एक बार उस राजगढ़ ब्‍लॉक की पूरी अपने स्‍तर पर हमने जाचं करायें कि वास्‍तव में वहां पर मैंटरनल मोर्टेलिटी की रेट अगर इतनी अच्‍छी है तो इस मॉडल को हम पूरे राजस्‍थान में भी लागू करें। जहां तक चूरू और बूंदी में, दोनों में जी.एस.वाई. की फण्डिंग है, परन्‍तु कलक्‍टर द्वारा इस व्‍यवस्‍था को वहां पर किया गया है। टोंक और धौलपुर में हमारी जी.एस.वाई.की फण्डिंग नहीं है। टोंक और धौलपुर में यूनिसेफ की फण्डिंग है और यूनिसेफ ही हैल्‍पलाइन का काम कर रहा है और काफी अच्‍छा काम टोंक और धौलपुर में यह लोग कर रहे हैं।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): माननीय अध्‍यक्ष जी, इसमें जो सबसे महत्‍वपूर्ण चीज है, आपने कहा कि पहले साल पाँच करोड़ 43 लाख रुपये आपको मिले और दूसरे साल 35 करोड़ 01 लाख रुपये मिले। पहले साल आपने कितने व्‍यय किये और दूसरे साल आपने कितने व्‍यय किय ? दूसरी चीज मेरी जहां तक जानकारी है पहले साल जननी सुरक्षा योजना के अन्‍तर्गत जो महिलाएं आती थीं, उनको अगले साल आपने पेमेन्‍ट किया है। दूसरा यह कि आपने अभी तक कहा एक साल  में 15 लाख बच्‍चे पैदा होते हैं तो आपने दो साल में 3 लाख 9 हजार 330 महिलाओं को ही लाभान्वित किया है और यह तो जो आपने फीगर दिये हैं उससे स्‍पष्‍ट है कि अभी भी आपने जो राशि आवंटित की है, वह टोटल आपने 51 करोड़ 25 लाख की है जिसमें से खर्चा हुआ है सिर्फ 28 करोड़ । मेरे कहने का मतलब यह है कि जब केन्‍द्र सरकार से ठीक समय पर समुचित राशि आपको उपलब्‍ध करा दी गयी तो आप उस राशि का उपयोग नहीं कर रहे हैं, इसका मतलब उसका दुरूपयोग हो रहा है। कम महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं, कम राशि खर्च हो रही है। हर मद के अंदर कम खर्च हो रहा है तो ऐसे क्‍या कारण हैं कि कम खर्चा हो रहा है और आप यह देखिये लास्‍ट में आपने जो जवाब दिया है कि आपने सिर्फ 22 हजार 806 ..(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: आप प्रश्‍न पूछिये न ।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): महिलाओं को खाली आपने वाहन की सुविधा दी, जबकि जैसलमेर, बाड़मेर और चूरू में गांव इतनी दूर दूर हैं जहां कि वाहन की सुविधा उपलब्‍ध होनी चाहिये तो 30 लाख महिलाओं ने प्रसव किया, उसमें से लाभान्वित किया सिर्फ 22 हजार को।

श्री चांदनाथ  (बहरोड़): आप प्रश्‍न तो पूछ नहीं रहे, इन्‍फोर्मेशन दे रहे हैं।

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): इससे यह स्‍पष्‍ट हो गया कि कम महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं और राशि का दुरुपयोग हो रहा है।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, ट्रांसपोर्टेशन की व्‍यवस्‍था हमने जननी सुरक्षा योजना में रखी है । अगर पेशेंट खुद अपने ट्रांसपोर्ट की व्‍यवस्‍था करके आता है तो हम पेशेंट को 300 रुपये पेमेंट कर रहे हैं। यह जो फीगर दिया है, यह हमारी हैल्‍पलाइन के थ्रू जो व्‍यवस्‍था है, उसका फीगर आपको दिया है और मैं आपको निवेदन करना चाहूंगा कि कोई चीज जब नई शुरू की जाये, क्‍योंकि मेरे ख्‍याल से एक लाभदायक योजना राजस्‍थान में तो पहली बार शुरू हुई है और निश्चित रूप से गरीब महिलाओं को इसका बहुत बड़ा लाभ भी मिल रहा है। आप जो कह रहे हैं पैसे का ...(व्‍यवधान)...

श्री प्रभुलाल वर्मा (पीपल्‍दा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसी से जुड़ा हुआ मेरा प्रश्‍न है कि बिना सहयोगिनी और आशा के अस्‍पताल में जो डिलीवरी होती है, उनको कोई रुपये नहीं दिये जाते हैं ....(व्‍यवधान)...

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, हम तो बी.पी.एल. की जो महिलाएं हैं ...(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: मंत्रीजी को जवाब  तो देने दें। ...(व्‍यवधान)..

श्री प्रभुलाल वर्मा (पीपल्‍दा): अध्‍यक्ष महोदय, गरीबों के लिये बहुत जरूरी बात है। जो डिलीवरी अस्‍पताल में होती है यदि उसके साथ आशा या सहयोगिनी नहीं है तो उसको 1400 रुपये नहीं दिये जाते और वह इधर-उधर धक्‍का खाता फिरता है। मेरा मंत्री महोदय से निवेदन है कि 700 से 1400 आपने किये, यह बहुत अच्‍छी बात है लेकिन यह भी उसमें से निकालें कि सहयोगिनी नहीं हों तब भी उसको 1400 रुपये दिये जायें। ...(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष:  सरकार की तरफ से सुविधा है, कोई न ले तो नहीं लेगा। ...(व्‍यवधान)..

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आप जो पर्चेज करना है, राजस्‍थान मेडिकल हैल्‍थ में दो प्रोग्राम आ रहे हैं एक वर्ल्‍ड बैंक का प्रोग्राम है और राजस्‍थान रूरल हैल्‍थ एम्‍बीशन का प्रोग्राम है, इन दोनों प्रोग्रामों में जो प्रिक्‍योरमेंट करने हैं इक्विपमेंट्स, उसमें तो अचीवमेंट 60 प्रतिशत से ऊपर है और जिसमें लोगों को मदद करनी है उसमें आपका प्रतिशत 10 प्रतिशत भी नहीं है। यह आपकी एफिशियेंसी शो नहीं करता? 

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जननी सुरक्षा योजना की बात चल रही थी, माननीय सदस्‍य ने एक बात बीच में, पता नहीं कहां से लेकर आ गये ।...(व्‍यवधान)..

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): I am sorry, अलग नहीं है। राजस्‍थान सरकार, भारत सरकार और वर्ल्‍ड बैंक के जो पैसे आ रहे हैं उसमें प्रिक्‍योरमेंट जो करोड़ों रुपये का प्रिक्‍योरमेंट करनी है मशीन, उसमें तो आपका अचीवमेंट है। जहां जनता को लाभ देना है उसमें आपका अचीवमेंट है ही नहीं। यह आपका माध्‍यम नहीं है क्‍या ? आप डिपार्टमेंट की एफिशियेंसी बता रहे हो । राजस्‍थान सरकार को जितना पैसा भारत सरकार से मिल रहा है,आज 24 प्रतिशत पैसा ज्‍यादा मिल रहा है, जननी सुरक्षा के अंदर मिल रहा है। आपको वर्ल्‍ड बैंक में 400 करोड़ रुपये मिल रहा है, उसमें जो पर्चेज करने हैं, चाहे फ्रिज पर्चेज करने हैं, चाहे दूसरी मशीन पर्चेज करनी हैं, चाहे दूसरी मशीन पर्चेज करनी है, उसमें अचीवमेंट 60 प्रतिशत से ज्‍यादा है। जहां लोगों को हैल्‍प करनी है उसमें 20 प्रतिशत अचीवमेंट नहीं है आपकी ...(व्‍यवधान)..

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, यह जो आर.एच.डी.एस.पी.प्रोजेक्‍ट की बात की है, वर्ल्‍ड बैंक का एक प्रोजेक्‍ट है, निश्चित रूप से लोन का प्रोजेक्‍ट है, वर्ल्‍ड बैंक ने हमाने ऊपर अहसान तो किया है नहीं। इतना निवेदन करना चाहता हूं कि हमने पहले फैसेलिटीज, जहां पर इक्विपमेंट की जरूरत है, सिटी स्‍कैन हमने लगाई तो सिटी स्‍कैन लगाने के लिये पहले कमरा बनवाया। इंजीनियर से बकायदा नक्‍शा बनवाकर कमरा बनवाने के बाद सिटी स्‍कैन मशीन सप्‍लाई की। ऐसा नहीं है ... ...(व्‍यवधान)..

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): डॉ0 साहब, माफ करना। 90 प्रतिशत जगह इक्विपमेंट्स को प्रिक्‍योर किया है, वहां पैरा मेडिकल स्‍टाफ के रिक्रूटमेंट ने किया है, फिर वहां इक्विपमेंट क्‍या काम आ रहे हैं ? खाली आपने पर्चेज कर लिया, न पैरा मेडिकल स्‍टाफ है, न उनके काम करने की कोई व्‍यवस्‍था है और आप कह रहे हो हमने कमरा बनवा दिया, प्रिक्‍योर कर लिया। आप पैरा मेडिकल स्‍टाफ लगाये  बिना करोड़ों रुपये की मशीन किसके लिये खर्च करना चाहते हैं ?

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): जो भी इक्विपमेंट पर्चेज किये हैं, पहले अपने स्‍टाफ को ट्रेनिंग के लिये भेजा है। ...(व्‍यवधान)..

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): पैरा मेडिकल स्‍टॉफ को आपने भेजा ही नहीं। ...(व्‍यवधान)..

श्रीमती ममता शर्मा(बूंदी) : माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से पूछना चाहती हूं कि जहां गायनिकालोजिस्‍ट नहीं है तो जननी सुरक्षा योजना का उन हास्पिटल्‍स में कोई मतलब ही नहीं हुआ। आप क्‍या इरादा रखते हैं कि वहां प्राइवेट हास्पिटल्‍स के अंदर जो वैल इक्विप्‍ड हैं, उनको यह सुविधा प्रदान करेंगे कि वह वहां पर प्रसव कराये और उनको जननी सुरक्षा योजना के तहत पैसा मिले ? दूसरी बात आबू रोड में भाजपा के पदाधिकारी से व्‍यथित होकर जिस डॉक्‍टर अग्रवाल ने आत्‍महत्‍या की, क्‍या आप उसकी विधवा के लिये कुछ करना चाह रहे हैं। उसकी विधवा को कुछ देना चाह रहे हैं आप ? तीसरा, माननीय मंत्री महोदय, बूंदी अस्‍पताल में करीब 8 दिन से खबर आ रही है कि चद्दरों की धुलाई में घोटाला चल रहा है। उसके विषय में आपने क्‍या किया ? आप यह देखिये वहां पर भी भारत विकास परिषद् के पास ही है वह तो यह जो भाजपा का एक नाटक हो रहा है इस‍के लिये आप क्‍या कर रहे हैं ? इसके लिये मैं आपसे पूछना चाहूंगी ।

श्री अध्‍यक्ष: माहिर आजाद।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह जननी सुरक्षा योजना में जो आर्थिक सहायता दी जाती है उसके लिये माननीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रीजी ने अभी यह जानकारी दी कि पहले जो शर्तें थीं कि दो बच्‍चों से ज्‍यादा तीसरा होगा या चौथा होगा तो छूट नहीं दी जायेगी। उसमें आपने नसबंदी थी, राइडर, वह भी हटा दी। लेकिन एक बात आपने कही कि मिनिमम 19 साल की जो राइडर थी, इसको भी आपने हटाने का काम किया है। मैं, माननीय अध्‍यक्ष जी, आपके माध्‍यम से माननीय चिकित्‍सा मंत्रीजी से यह जानना चाहता हूं कि इस ऐज को आपने कितनी कर दी 19 साल के राइडर को हटाकर ? क्‍योंकि एक तरफ तो आप मिनिमम लड़की की शादी की आयु 18 वर्ष निर्धारित किये हुए हैं । लड़का 21 साल का होना चाहिये और लड़की 18 साल की होनी चाहिये तो 18 साल की लड़की की उम्र होगी मिनिमम तब शादी होगी तो फर्स्‍ट डिलीवरी होगी तो 9-10 महीने मानते हैं, तो 19 साल हो गये, उसको क्‍या आपने कम कर दी 18 से ? अगर ऐसा किया है तो आपने गलत किया है इसलिए इस पर जरा कुछ बताइये।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, नगर से आने वाले माननीय सदस्‍य की बात से मैं पूरी तरह सहमत हूं और यह बात सब लोग जानते हैं कि बहुत अरली ऐज में महिला की डिलीवरी नहीं होनी चाहिये और शादी की उम्र 18 वर्ष हमारे कानून के हिसाब से भी 18 साल है और इस हिसाब से पहले  राइडर इसमें लगाये हुए थे, पर इसका जवाब मेरे पास केवल यह है कि इसको पूछने के लिये आपको केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रीजी से ही बात करनी पड़ेगी, क्‍योंकि वहां के डायरेक्‍शन के ऊपर ही हमने यह किया है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): आप मुझे एम.पी. बना दो, मैं उनसे पूछ लूंगा।

 

Msr/usc/1200/1g/02042007

 

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे चार प्रश्‍न में से एक का भी जवाब नहीं आया। ...(व्‍यवधान)...

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): आपका जो कपड़े धोने का सवाल है, मैं जवाब दे रहा हूं न। आप विराजें तो सही। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: तो इसका क्‍या जवाब देंगे जिसमें आपने कहा है यह भाजपा का नाटक है? इसका क्‍या जवाब देंगे? अभी उन्‍होंने कहा है यह भाजपा का नाटक है ...(व्‍यवधान)...

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, स्‍पष्‍ट है, भारत विकास परिषद के पास ही वहां का सारा ठेका है और उन्‍होंने ही सब चद्दरों के घोटाले कर रखे हैं। आप एक बार जाकर तलाश तो करवाएं कि क्‍या है।

एक माननीय सदस्‍य: 1400 रुपये सभी को देना चाहिए।

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): दूसरा, डाक्‍टर अग्रवाल की पत्‍नी के लिए आपने क्‍या प्रावधान किया?

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह बात मैं बताना चाह रहा हूं, बी.पी.एल. के परिवार की महिलाओं के लिए अभी भी अगर इंस्टिट्यूशनल डिलीवरी नहीं होती है, घर पर भी डिलीवरी होती है तब भी हम वहां पर 500 रुपये एक बी.पी.एल. के परिवार की महिलाओं को ...(व्‍यवधान)...

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): नहीं, आप तो यह बताओ कि इसको 18 कम कर दिया क्‍या आपने?

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): हां, कर दिया। ...(व्‍यवधान)...

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): चाहे किसी के कहने से किया है 18 से कम, केन्‍द्र सरकार जो भी कहती है वो सारे मानते हो क्‍या?

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): यह केन्‍द्र सरकार के डाइरेक्‍शंस पर है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): नहीं, तो 18 से कम किया है क्‍या आपने? इस पर पुनर्विचार कीजिए। 18 से कम किया है, चाहे किसी के भी कहने से किया हो ...(व्‍यवधान)... यह तो आपकी जिम्‍मेदारी है, इसमें क्‍या बात हुई?

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): मैं बिलकुल आपकी इस बात से सहमत हूं ...(व्‍यवधान)...

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक तरफ हम कानून बना रहे हैं कि 18 साल से कम उम्र की बच्‍ची की शादी नहीं होनी चाहिए और अब 17 साल की बच्‍ची को, 16 साल की बच्‍ची को डिलीवरी हो जाए, मां बन जाए उसको सहायता दे रहे हो। ...(व्‍यवधान)...

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): मैं आपकी इस बात से पूरी तरह सहमत हूं।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): तो आप गैर-कानूनी काम करने का काम कर रहे हो।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): मैं आपकी बात से पूरी तरह सहमत हूं परन्‍तु केन्‍द्र सरकार के डाइरेक्‍शंस हैं इसीलिए मैंने आपके सामने यह बात रखी है। ...(व्‍यवधान)...

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): आप टेबल करिये केन्‍द्र सरकार के डाइरेक्‍शंस को। टेबल कर दीजिए।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): हां, टेबल करे दूंगा।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): अगर केन्‍द्र सरकार कोई गलत निर्देश दे रही तो आप उस पर चलते रहोगे क्‍या?

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): वो टेबल कर दूंगा।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप स्‍वयं बताएं, मैं तो आप से पूछ रहा हूं, आपके माध्‍यम से पूछ रहा हूं कि एक तरफ हम कह रहे हैं 18 साल से कम उम्र की बच्‍ची की शादी नहीं होनी चाहिए और फिर हम 16 साल की बच्‍ची को डिलीवरी होने पर, मां बनने पर सहायता दे रहे हैं तो यह गैर-कानूनी काम हो रहा है या नहीं हो रहा है? तो चाहे किसी के  भी दबाव में हो रहा है, इसको आप देख कर के और इसको रोकने का काम कीजिए। ...(व्‍यवधान)...

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): माननीय मंत्रीजी, केन्‍द्र सरकार ने तो आपको कहा है ...(व्‍यवधान)... इंस्टिट्यूशंस में पैरामेडिकल स्‍टॉफ की जिम्‍मेदारी दे रखी है ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: मंत्रीजी।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): आप कर नहीं रहे हो। इसके बारे में भी तो आप बताइये न। पैसा वहां से आ रहा है, सब-कुछ वहां से आ रहा है।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय मंत्रीजी, क्‍या यह बात सही है कि 16 साल की लड़की को आपने यह सुविधा री है?

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पहले राइडर था कि 19 साल से कम उम्र की अगर किसी महिला के डिलीवरी होती है तो उसको इस सुरक्षा योजना का लाभ नहीं दिया जायेगा परन्‍तु केन्‍द्र सरकार ने फिर जो डाइरेक्‍शंस इश्‍यू किये उनमें से सारी राइडर्स विथ्‍ड्रा कर लिये बाकी मैं व्‍यक्तिगत रूप से इस बात से सहमत नहीं हूं कि 19 साल की, महिला की उम्र कम हो उसमें डिलीवरी हो। क्‍योंकि इससे, निश्चित रूप से इस राइडर को हटाने से केन्‍द्र सरकार से भी हम बात करेंगे पर माननीय सदस्‍य की बात से मैं भी सहमत हूं कि 18 साल से हम शादी की उम्र मानते हैं लड़की की तो एक साल का, 19 साल पर कम से कम उसकी डिलीवरी हो, इससे कम उम्र पर डिलीवरी होना ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: बीच में नहीं बोलें।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): इससे कम उम्र में डिलीवरी होना उसके स्‍वास्‍थ्‍य के लिए भी ठीक नहीं है उस महिला के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए पर लीगली ...

श्री अध्‍यक्ष: स्‍वास्‍थ्‍य की बात छोडि़ये आप, आप तो यह बताइये कि भारत सरकार का काई ऐसा निर्देश है क्‍या?

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): हां है न भारत सरकार के निर्देश।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): टेबल करिये। कब आया, अब तक बात क्‍यों नहीं कही आपने?

डा. चन्‍द्रशेखर बैद (तारानगर): टेबल करिये।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): भारत सरकार का निर्देश है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): अगर दो साल पहले, तीन साल पहले आया, आप उस पर लागू कर रहे हो?

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): भारत सरकार का निर्देश है ...(व्‍यवधान)...

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): आपने क्‍या इसका विरोध किया क्‍या बीईंग ए डाकटर? आप खुद इस बात से सहमत हो तो अगर कोई निर्देश आया भी था तो आपको वापस लिख देना चाहिए था कि यह व्‍यावहारिक नहीं है, इसको नहीं लागू करेंगे। ...(व्‍यवधान)...

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): ग्रामीण महिलाओं के साथ में 16 और 17 के चक्‍कर में गरीब लड़की का आप गला घुटवा दोगे ...(व्‍यवधान)...

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): मैं इस बात से सहमत हूं ...(व्‍यवधान)...

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): सदन को गुमराह मत कीजिए। केन्‍द्र सरकार की आड़ में सदन को गुमराह करने का काम मत कीजिए।

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले कई आदिवासी परिवार हैं उसमें सभी लोगों को जो नियम और कानून हैं, हमारे कहां पर जन्‍म तिथि लिखी हुई है, आदिवासी इलाके में कहां से जन्‍म तिथि लिखी हुई है? यह 16 और 17 के इस चक्‍कर में हम लोगों के गले मत कटवा देना। गरीबों को फायदा मिल रहा है वह फायदा मिलने दीजिए।

श्री अध्‍यक्ष: यह गलत बात है। ...(व्‍यवधान)... गलत बात है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): यह काई सवाल नहीं है इनका।

श्री अध्‍यक्ष: आप जवाब सुन लीजिए, प्‍लीज। प्‍लीज बैठें आप।

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): नहीं, हमारा कहां पर रजिस्‍ट्रेशन किया हुआ है?

श्री अध्‍यक्ष: बैठें, आप बैठें।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह जो केन्‍द्र सरकार के डाइरेक्‍शंस हैं इनको टेबल कर रहा हूं, आप एक बार इसको फरमा लें।

श्री अध्‍यक्ष: हां, कर दीजिए।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): नहीं, आप पहले बता भी दें कब के हैं, क्‍या हैं? पहले बता भी दें।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): इसमें लिखा है (a) age restrictions removed.  यह पहला पहला इन्‍होंने लिखा है (b) the  restricting benefits of JSY upto two births removed. In other words the benefits of the schemes are exended to all pregnant women in LPS states irrespective of birth orders. (c) No need for any marriage or BPL certification provided woman delivers in Govt. or accreted private health institution. यह मैं टेबल करता हूं।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): यह तो बी.पी.एल. और ए.पी.एल. का आ गया, इसमें दो बच्‍चों वाला आ गया ...(व्‍यवधान)... इसमें एज का रिलैक्‍सेशन कहां आया? और यह कितनी तारीख का है, यह भी बताइये।

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह गरीब के साथ अन्‍याय हो जायेगा।

श्री अध्‍यक्ष: प्रश्‍न काल समाप्‍त हुआ।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): हां, यह बताइये कि कौनसी तारीख का है?

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): इसको टेबल पर रखिये।

श्री अध्‍यक्ष: प्रश्‍न काल समाप्‍त हुआ। वह टेबल पर रखने की कह तो दी इन्‍होंनें।

डा. दिगम्‍बर सिंह (चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं इसको टेबल कर रहा हूं।

(चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री, डा. दिगम्‍बर सिंह ने प्रति सदन की मेज पर रखी)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): कौनसी तारीख का है, माननीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रीजी, यह है कौनसी तारीख का? ...(व्‍यवधान)...

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह आसन पैरों पर है और आफीसर्स गैलेरी में देखिये।

श्री अध्‍यक्ष: प्रश्‍न काल समाप्‍त हुआ।

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): डाइरेक्‍शन दिया हुआ है उसके मुताबिक ग्रामीण इलाके की गरीब महिला को आपा सहायता देंगे क्‍या? ...(व्‍यवधान)...

श्री अमराराम (धोद): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, स्‍वायत्‍त शासन मंत्रीजी आराम से घूमते हुए जा रहे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: धोद से आने वाले माननीय सदस्‍य।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आसन पैरों पर है, मंत्रीजी जा रहे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: कौन गये हैं?

श्री अमराराम (धोद): यह स्‍वायत्‍त शासन मंत्रीजी आराम से घूमते हुए जा रहे हैं और आसन पैरों पर है।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): आपने इसका गलत इण्‍टरप्रिटेशन किया है।

श्री अमराराम (धोद): सरकार में बैठे हुए मंत्री आसन का नहीं करेंगे तो फिर ...

श्री अध्‍यक्ष: उनको संसदीय नियमों की इतनी ही जानकारी है। इतनी ही जानकारी है संसदीय नियमों की।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): यह गलत है।

श्री अमराराम (धोद): नियमों की जानकारी कराएं आप। ...(व्‍यवधान)...

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): नहीं, यह इण्‍टरप्रिटेशन गलत है। ...(व्‍यवधान)...

स्‍थगन प्रस्‍तावों पर अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍था

श्री अध्‍यक्ष: स्‍थगन प्रस्‍तावों पर व्‍यवस्‍था।

मुझे माननीय सदस्‍यों को सूचित करना है कि निम्‍नांकित स्‍थगन प्रस्‍तावों की सूचना प्राप्‍त हुई है:-

1. श्री बाबूलाल एवं आठ अन्‍य सदस्‍यों की ओर से अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति की भर्ती व पदोन्‍नति के बैकलॉग की पूर्ति, आरक्षण एवं कतिपय अन्‍य विषयों के सम्‍बन्‍ध में।

2. डा. बुलाकीदास कल्‍ला, सदस्‍य की ओर से निजी शिक्षण संस्‍थाओं को मिलने वाले अनुदान में कटौती के सम्‍बन्‍ध में।

उपरोक्‍त प्रस्‍तावों के सम्‍बन्‍ध में विभिन्‍न अवसरों पर चर्चा हो चुकी है। बारबार चर्चा की अनुमति देना सम्‍भव नहीं है अत: अनुमति देने में असमर्थ हूं।

3.  डा. श्रीगोपाल बाहेती, सदस्‍य की ओर से महावीर जयन्‍ती के पावन पर्व पर शराब एवं मांस की खुली बिक्री के सम्‍बन्‍ध में।

इस विषय को पर्ची के माध्‍यम से भी उठाया जा रहा है अत: अनुमति देने में असमर्थ हूं लेकिन माननीय सदस्‍य को उस समय दो मिनट बोलने की अनुमति होगी।

4. श्री खुशवीर सिंह एवं 19 अन्‍य सदस्‍यों की ओर से राज्‍य सरकार द्वारा निर्धारित प्रोटोकोल के अनुसार प्रदत्‍त सुविधाओं में अन्‍तरविरोध होने के सम्‍बन्‍ध में।

5. श्री जुबेर खान, सदस्‍य की ओर से नगर विकास न्‍यास अलवर द्वारा अपने नाम भूमि हस्‍तान्‍तरित कराये जाने के सम्‍बन्‍ध में।

उपरोक्‍त प्रस्‍ताव भी ऐसे नहीं हैं कि सदन की पूर्व निर्धारित कार्यवाही को रोक कर इन पर विचार किया जाए अत: अनुमति देने में तो असमर्थ हूं। फिर भी माननीय सदस्‍य श्री खुशवीर सिंह एवं श्री जुबेर खान को अपने-अपने प्रस्‍ताव की विषयवस्‍तु पर दो-दो मिनट बोलने की अनुमति होगी।

 

प्रक्रिया के नियम 295 के अन्‍तर्गत प्राप्‍त विशेष उल्‍लेख की सूचनाएं

प्रक्रिया के नियम 295 के अन्‍तर्गत जो सूचनाएं प्राप्‍त हुई हैं।

मैंने पूर्व में भी कहा है कि 250 शब्‍दों तक सीमित नहीं रहते हैं, माननीय सदस्‍य, बहुत विस्‍तृत रूप में लिख कर यहां पढ़ना चाहते हैं लेकिन उसका पालन नहीं किया जा रहा है तो जो बहुत विस्‍तृत हैं उन्‍हें बड़ा मुश्किल है मेरे लिए अनुमति देना।

  1. श्री जगसीराम कोली, सदस्‍य की ओर से रेवदर तहसील में महाविद्यालय खोलने के सम्‍बन्‍ध में।
  2. श्री बद्रीलाल जाट, सदस्‍य की ओर से विधान सभा क्षेत्र कपासन में सरसों की समर्थन मॅल्‍य पर खरीद आरम्‍भ करने के सम्‍बन्‍ध में।

3.श्री लक्ष्‍मीनारायण बैरवा, सदस्‍य की ओर से तहसील फागी एवं चाकसू में मुंसिफ न्‍यायालय खोलने के सम्‍बन्‍ध में।

4. श्रीमती राजकुमारी शर्मा, सदस्‍य की ओर से सीकर नगर परिषद में सफाई कार्मिकों की नियुक्ति के सम्‍बन्‍ध में।

5. श्री जयराम जाटव, सदस्‍य की ओर से पंचायत समिति कोटकासिम के ग्राम नांगल सालिया में 33 के.वी. सब-स्‍टेशन बनाने के सम्‍बन्‍ध में।

6. श्री टीकम चन्‍त कान्‍त, सदस्‍य की ओर से चिकित्‍सालयों में अंशकालीन कार्यकर्ता वार्डब्‍याय/धोबी/कूक/स्‍वीपर को स्‍थायी कर नियमान्‍तर्गत वेतन देने के सम्‍बन्‍ध में।

7. श्री रामनारायण मीणा, सदस्‍य की ओर से जिला बूंदी के लाखेरी, नैनवां, इन्‍द्रगढ़, हिण्‍डौली क्षेत्र के जनस्‍वास्‍थ्‍य अभियांत्रिकी विभाग के कार्यालयों में फेबरीकेशन एवं परिवहन के कार्यों में भ्रष्‍टाचार पनपने के सम्‍बन्‍ध में।

8. श्री बाबूसिंह राठौड़, सदस्‍य की ओर से कृषि उपजमण्‍डी समिति, जोधपुर की मिसिंग लिंक सड़कों की स्‍वीकृति के सम्‍बन्‍ध में।

9. श्री बीरूसिंह राठौड़, सदस्‍य की ओर से लालकोठी योजना कच्‍ची बस्‍ती के वर्ष 1081-82 में आवंटित भूखण्‍डों के लीजडीड पट्टे जारी करने के सम्‍बन्‍ध में।

10. श्रीमती स्‍नेहलता, सदस्‍य की ओर से विधान सभा क्षेत्र डग में संचालित रोडवेज बसों के संचालन में सुधार करने के सम्‍बन्‍ध में।

11. श्री सी.डी. देवल, सदस्‍य की ओर से राज्‍य में पूर्व विधायकों को प्राप्‍त सुविधाएं अन्‍य राज्‍यों की तुलना में नगण्‍य होने के सम्‍बन्‍ध में।

12. श्री धर्मेन्‍द्र कुमार मोची, सदस्‍य की ओर से जिला हनुमानगढ़ में राजस्‍व सम्‍बन्‍धी समस्‍याओं का समाधान करने के सम्‍बन्‍ध में। 

 

Ars/usc/1210/1h/02042007/1

 

माननीय सदस्‍यों को उपरोक्‍त विषयक सूचना को मैं सदन में पढ़ा हुआ मान लेती हूं क्‍योंकि आज और भी बिजनस बहुत है। श्री खुशवीर सिंह ।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: केवल अंकित वही होगा जिस माननीय सदस्‍य का नाम मैंने पुकारा है  ...(व्‍यवधान) अंकित नहीं हो।

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): 000

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): नहीं, मैं तो दूसरी बात कह रहा हूं माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके संरक्षण में राजस्‍थान विधान सभा एकादश क्रिकेट टीम ने कल भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारियों की क्रिकेट टीम को मैत्रीपूर्ण क्रिकेट मैच में सात विकिट से हराकर शानदार जीत हासिल की है। इसके लिए आपको और सदन के सभी सदस्‍यों को, कप्‍तान युनूस खान जी को, उप कप्‍तान रघुवीर मीणा जी को बहुत बहुत बधाई देना चाहता हूं। 

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यों को मेरी ओर से सदन की ओर से बहुत बहुत बधाई।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): खास तौर से मैन आफ दी मैच रहे संयम लोढ़ा जी को, जिन्‍होंने मैच जिताया।

 श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): 000

श्री अध्‍यक्ष: जब नाम मैंने नहीं पुकारा है ...(व्‍यवधान) क्‍यों अंकित ?

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): 000

श्री अध्‍यक्ष: पहले कितनी बार आप यह प्रश्‍न उठा चुके हैं। नौ, नौ,अंकित नहीं होगा ...(व्‍यवधान) अंकित नहीं हो रहा है।

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): 000

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप स्‍थान ग्रहण कीजिये, कितनी बार आप उठा चुके हैं।

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): 000

श्री अध्‍यक्ष: आप सदन का समय जाया कर रहे हैं।

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): 000

श्री अध्‍यक्ष: मैंने आपका नाम नहीं पुकारा। आप सदन का समय न लें, मेहरबानी करें, आप इस प्रश्‍न को कई बार उठा चुके हैं। सरकार की तरफ से कई बार जवाब दिया जा चुका है।

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): 000

श्री सुरेश मीणा (करौली): 000

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो रहा है।

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): 000

श्री सुरेश मीणा (करौली): 000

श्री अध्‍यक्ष: अंकित हो ही नहीं रहा, सदन का समय इस प्रकार से फालतू ...(व्‍यवधान)

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): 000

श्री अध्‍यक्ष: नौ,नौ। आसन की अवहेलना न करें।

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): 000

श्री अध्‍यक्ष: दूदू से आने वाले माननीय सदस्‍य, आसन की अवहेलना लम्‍बे समय तक बर्दाश्‍त नहीं होगी।

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): 000

श्री अध्‍यक्ष: आप स्‍थान ग्रहण करें, प्‍लीज स्‍थान ग्रहण करें। आप कैसे खड़े हैं गंगापुर से आने वाले माननीय सदस्‍य, आप क्‍यों खड़े हैं, किसलिए खड़े हैं ? प्‍लीज सिट डाउन।

श्री सुरेश मीणा (करौली): 000

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): 000

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, स्‍थान ग्रहण करें, स्‍थान ग्रहण करें।

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): 000

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, स्‍थान ग्रहण करें, आज नोन आफिशियल डे है, आपको लाना चाहिए था बिल।

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): 000

श्री अध्‍यक्ष: स्‍थान ग्रहण कर लें आप। मैं आपसे पुन: आग्रह कर रही हूं, स्‍थान ग्रहण करें।

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): 000

श्री अध्‍यक्ष: मैं आपसे निवेदन कर रही हूं स्‍थान ग्रहण करें, दूदू से आने वाले माननीय सदस्‍य,

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): 000

श्री अध्‍यक्ष: यहां आपकी आपाधापी नहीं चलेगी। स्‍थान ग्रहण करें।

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): 000

श्री अध्‍यक्ष: आप मुझे मजबूर न करें नाम से पुकारने के लिए।

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): 000

श्री सुरेश मीणा (करौली): 000

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): 000

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): 000

श्री मुरारी लाल मीणा (बांदीकुई): 000

श्री निर्भय लाल (रूपवास): 000

श्री मांगीलाल गरासिया (गोगुन्‍दा): 000

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): 000

श्री जयराम जाटव (खैरथल): 000

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो रहा है।

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): 000

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): 000

श्री गोविन्‍द राम मेघवाल (नोखा): 000

श्री सुरेश मीणा (करौली): 000

 श्री बाबूलाल नागर (दूदू): 000

 

vns/usc/12.20/1j/2.4.2007/1

 

श्री अध्‍यक्ष: कृपया स्‍थान ग्रहण कर लें। माननीय सदस्‍यगण, कृपया स्‍थान ग्रहण कर लें। जो-जो माननीय सदस्‍य खड़े हैं कृपया स्‍थान ग्रहण कर लें। ... (व्‍यवधान) कृपया स्‍थान ग्रहण करें। मैं आपसे कह रही हूं स्‍थान ग्रहण करें। मिस्‍टर मीणा, स्‍थान ग्रहण करें। ... (व्‍यवधान) करौली से आने वाले माननीय सदस्‍य, आप लोगों को जो बात कहनी थी, आपने कह दी, सरकार ने सुन ली। इसीलिये मैंने आपको इतनी देर का मौका दिया। आपकी सुन ली ... (व्‍यवधान) प्‍लीज स्‍थान ग्रहण करें। स्‍थान ग्रहण करें आप। ... (व्‍यवधान) आप माननीय सदस्‍यगण, आसन ने जो व्‍यवस्‍था दी है वह आप ... (व्‍यवधान) जो माननीय सदस्‍य खड़े हैं अपने-अपने स्‍थानों पर मैं उनसे पूछना चाहती हूं कि क्‍या आसन ने जो व्‍यवस्‍था दी है आपको वह मान्‍य नहीं है ... (व्‍यवधान)

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): 000 

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): 000

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): 000

श्री सुरेश मीणा (करौली): 000

श्री निर्भय लाल (रूपवास): 000

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): 000

श्री अध्‍यक्ष: स्‍थान ग्रहण करें। प्‍लीज स्‍थान ग्रहण करें आप। गुढ़ामालानी से आने वाले माननीय सदस्‍य, आपको कह रही हूं। दूदू से आने वाले माननीय सदस्‍य, स्‍थान ग्रहण कर लें। करौली से आने वाले माननीय सदस्‍य, स्‍थान ग्रहण कर लें। आसन पांवों पर है ... (व्‍यवधान) आसन पांवों पर, स्‍थान ग्रहण कर लें उचित रहेगा। ... (व्‍यवधान) अब आप क्‍यों खड़े हो गये ? खुशवीर सिंह ... (व्‍यवधान) खुशवीर सिंह ... (व्‍यवधान) 

श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (गंगापुर): 000

श्री सुरेश मीणा (करौली): 000

श्री निर्भय लाल (रूपवास): 000

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): 000

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): 000

श्री जयराम जाटव (खैरथल): 000

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): 000

श्री अध्‍यक्ष: चूंकि असेम्‍बली आज और कल दो दिन ही चलेगी इसलिये मैं नहीं चाहती कि ... (व्‍यवधान) आप दोनों क्‍यों खड़े है ? Why are you standing? फिर आप खड़े हो गये। आसन पांवों पर क्‍या मतलब है इस बात का ? आसन पांवों पर है ... (व्‍यवधान) I say sit down. आपसे कह रही हूं बैठिये। आसन पांवों पर है। कितना ही गंभीर मामला हो आसन जब पांवों पर होता है तो खड़ा नहीं हुआ जाता। मैं नहीं चाहती आज नोन आफिशियल डे था लोग ... (व्‍यवधान) पिछले पाँच साल की अवधि में पिछले टर्म में एक दिन भी नोन आफिशियल डे नहीं था, मैंने जान-बूझकर के कि लोगों को एक दिन तो आखिर मैं इस बात का दूं कि लोग अपने-अपने विषयों को नोन आफिशियल डे पर बोल सकें इसीलिये मैंने नोन आफिशियल डे रखा और उसको जिस तरीके से आप समय को व्‍यर्थ गंवा रहे हैं। जब मैंने कह दिया कि अंकित नहीं हो रहा है और आपने कह दिया तो प्रेस तो लिख देगा। यही तो मतलब था ना ? वह तो आपका मकसद पूरा हो गया। अब आप चलने दो आगे ... (व्‍यवधान) असेम्बली को चलने दो। अब विधान सभा को चलने दो ... (व्‍यवधान) 

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): 000 

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): 000

श्री सुरेश मीणा (करौली): 000

श्री अध्‍यक्ष: मैं आपसे निवेदन कर रही हूं इस विषय को आप कई बार उठा चुके हैं। कई बार चर्चा हो चुकी है। कई बार सरकार की तरफ से जवाब दिया जा चुका है ... (व्‍यवधान) 

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): 000

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): 000

श्री सुरेश मीणा (करौली): 000

श्री निर्भय लाल (रूपवास): 000

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): 000

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

श्री अध्‍यक्ष: आप जिस तरह से व्‍यवधान डाल रहे हैं और सदन की गरिमा गिरा रहे हैं। आसन के अनुशासन में आप रह नहीं रहे हैं। मैं नहीं चाहती कि दो दिन के लिये मैं किसी को बाहर निकालूं। मैं यही लिहाज करके और बार-बार आपसे कह रही हूं अब कृपा करके आप चलने दें। कार्यवाही आगे चलने दें।

श्री सुरेश मीणा (करौली): 000

श्री रणवीर सिंह गुढ़ा (गुढ़ा): 000

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  इम्‍पोर्टेंट सवाल है यह और जिसके द्वारा आपके भी आ जाती है ... (व्‍यवधान) 

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या इम्‍पोर्टेंट है ... (व्‍यवधान) क्‍या इम्‍पोर्टेंट सवाल आपने उठाया ? क्या उठाया ? तो पूछ रही हूं ना ... (व्‍यवधान) पूछ रही हूं ... (व्‍यवधान) 

श्री सी. डी. देवल (रायपुर):  000

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): 000

श्री अध्‍यक्ष: पूछ रही हूं। तो इनसे पूछ रही हूं ... (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍य इस सवाल के ऊपर उद्वेलित हैं और सरकारी पक्ष की तरफ से न कोई मंत्री बोल रहे हैं, न कोई विधायक बोल रहे हैं। इसका अर्थ समझा जा सकता है कि कुछ भी नहीं बोल रहे हैं ... (व्‍यवधान) 

श्री अध्‍यक्ष: किस बात पर ... (व्‍यवधान) 

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): क्‍या कह दिया ? मुख्‍यमंत्री ने क्‍या कह दिया बजट भाषण में ? बजट भाषण में क्‍या कह दिया ? रिकार्ड कर लो क्‍या कह दिया ... (व्‍यवधान) 

श्री अध्‍यक्ष: हां, माननीय नेता प्रतिपक्ष ... (व्‍यवधान) 

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

श्री अध्‍यक्ष: नेता प्रतिपक्ष खड़े हैं कम से कम उनकी बात तो सुन लीजिये। नेता प्रतिपक्ष खड़े हैं, कम से कम उनकी बात तो सुन लीजिये। नेता प्रतिपक्ष खड़े हैं अब तो सुन लो क्‍या कह रहे हैं वह ... (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): क्‍या कह दिया ऐसा बता दीजिये आप ... (व्‍यवधान) 

श्री अध्‍यक्ष: आप क्‍या उठा रहे हैं प्रश्‍न आप तो बताओ मुझे। आप क्‍या कहना चाह रहे हैं आप तो बताओ क्‍या कह रहे हो ... (व्‍यवधान) 

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  एस.सी.,एस.टी. 28 परसेंट हैं ... (व्‍यवधान) 

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

श्री अध्‍यक्ष: नेता प्रतिपक्ष खड़े हैं प्‍लीज ... (व्‍यवधान) 

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  एस.सी., एस.टी. 28 परसेंट हैं जिसके बारे में आप भी चिंतित हैं।

 

श्‍याम/अरूण     02.04.2007    12.30   1k 

 

पूरा सदन चिंतित है और सत्‍ता पक्ष मौन है, यह बैकलॉग पूरा होना चाहिए। इस सरकार का क्‍या पक्ष है, क्‍या कहना चाहती है या तो वह वक्‍तव्‍य दे दे या अपने कमेंटस दे और आपके साइलेंस को यह समझा जाये कि आप कुछ कहेंगे नहीं, पक्ष में नहीं हैं ...(व्‍यवधान)

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री सुरेश मीणा (करौली): 000

श्री अध्‍यक्ष: नेता, प्रतिपक्ष बोल रहे हैं ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): पार्लियामेंट्री अफेयर मिनिस्‍टर का यह आरोप है इससे मैं इंकार करता हूं, मैंने अक्षरश: मुख्‍यमंत्री जी के भाषण को सुना था ...(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अब आप बात तो सुनिये, एक बार कह दिया तो क्‍या होगा, यह ऐसा ज्‍वलंत मामला है कि यह बार-बार उठेगा। यह तो ज्‍वलंत मामला है, एक बार कह दिया तो क्‍या संतोष हो जायेगा। कोई कार्यवाही कीजिये तब संतोष होगा ना, मुख्‍यमंत्री जी ने इतनी बड़ी-बड़ी घोषणाएं कर दी, आप पूर्ति कर देंगे।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): 000

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

श्री अध्‍यक्ष: माननीय नेता, प्रतिपक्ष विधान सभा में एक बार जिस बात की चर्चा हो जाती है दुबारा वह मामला नहीं उठाया जाता है ...(व्‍यवधान)

श्री सुरेश मीणा (करौली): 000

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): 000

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): सुनिये आप, विधान सभा में तो माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने चर्चा कर दी तो इसका मतलब है कि हम चुप हो जायें, ऐसा हुक्‍म तो मत दें।

श्री अध्‍यक्ष: आप तो चुप मत होवें, आप तो बोलें ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): ऐसा तो मत कहें, यह तो चर्चा का ही प्‍लेटफार्म है, चर्चा का ही मंच है। अगर चर्चा नहीं होगी तो इसको कौन पूछेगा विधान सभा को। जनता की ज्‍वलंत समस्‍याओं पर चर्चा होनी चाहिए, सार्थक चर्चा होनी चाहिए और सरकार की तरफ से रिएक्‍शन आना चाहिए और सरकार मौन बैठी रहे तो यह शोभनीय बात नहीं है। निंदनीय है और दु:खदायी है।

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): 000

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (सरकारी उप मुख्‍य सचेतक): 000

श्री सुरेश मीणा (करौली): 000

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): 000

श्री सी. डी. देवल (रायपुर): 000

डा. ओ. पी. महेन्‍द्रा (सरकारी उप मुख्‍य सचेतक): 000

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): 000

श्री अध्‍यक्ष: नेता, प्रतिपक्ष के बोलने के बाद किसी को आवश्‍यकता होती है क्‍या बोलने की, नेता प्रतिपक्ष बोल गये।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): 000

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अध्‍यक्ष महोदय, सत्‍ता पक्ष से यह जानना चाहता हूं कि आपका क्‍या इरादा है, जोन ऑफ कंसीडरेशन भारत सरकार की तरह करने का है कि नहीं है और रोस्‍टर प्रणाली जो है ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: इनका इरादा तो मौन बैठे रहने का है, अब कहिये, आगे बोलिये।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

श्री अध्‍यक्ष: जब तक हाउस आर्डर में नहीं आयेगा, तब तक किसी की बात नहीं लिखी जायेगी। पहले आर्डर में आये हाउस।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): 000

श्री अध्‍यक्ष: हाउस आर्डर में आये ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): लिखा नहीं जा रहा है क्‍या ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: हाउस आर्डर में हो ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): लिखा नहीं जा रहा है क्‍या ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: यह पहले आप कहें, बाकी माननीय सदस्‍य मुझे यह एश्‍योर करें कि आपके बोलने के बाद कोई नहीं बोलेगा और फिर यह विषय नहीं उठेगा तो बोल दीजिये।

श्री अमराराम (धोद): 000

श्री सुरेश मीणा (करौली): 000

श्री अध्‍यक्ष: सरकार को मैं यह नहीं कह सकती हूं कि सरकार बोलेगी कि नहीं बोलेगी ...(व्‍यवधान) यह आसन नहीं कह सकता है, ‘Aasan’ cannot compel. आसन किसी को भी इस बात के लिए कम्‍पेल नहीं कर सकता है कि आप इस बारे में जवाब दें ...(व्‍यवधान)

श्री सुरेश मीणा (करौली): 000

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): 000

श्री अध्‍यक्ष: ‘Aasan’ cannot compel anybody.

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): सरकार को आपको बुलवाना चाहिए ...(व्‍यवधान) इस कुर्सी की शोभा बढ़ेगी सरकार से बुलवायें। यह सरकार में सब *** क्‍यों बैठे हैं ...(व्‍यवधान) यह तो कोई मतलब नहीं होता, पार्लियामेंट्री अफेयर मिनिस्‍टर बैठे हैं, ग्रेट शिक्षा मंत्री बैठे हैं ...(व्‍यवधान)

श्री सुरेश मीणा (करौली): 000

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आखिर यह क्‍या है ...(व्‍यवधान)

श्री सुरेश मीणा (करौली): 000

श्री अध्‍यक्ष: नेता, प्रतिपक्ष, एक ही काफी था यहां तो हर शाख पर बैठा है ...(व्‍यवधान)

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अगर सत्‍ता पक्ष कुछ भी नहीं बोलता है, आश्‍वासन नहीं देता है तो अध्‍यक्ष महोदय, हम अपने आपको इस चर्चा से विद्ड्रा करते हैं और बहिर्गमन करते हैं।

(कांग्रेस के माननीय सदस्‍यों द्वारा सदन से बहिर्गमन)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 000

श्री मुरारी लाल मीणा (बांदीकुई): 000

श्री जयराम जाटव (खैरथल): 000

श्री अध्‍यक्ष: अब आप तो बिराजें।

श्री जयराम जाटव (खैरथल): 000

श्री अध्‍यक्ष: अब आप बिराजें।

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): 000

श्री अध्‍यक्ष: जब इस बात की चर्चा हो चुकी है, माननीय सदस्‍य जिस बात की चर्चा हो चुकी है ...(व्‍यवधान)                                        

 

jyg/akt/2.4.7/12.40/1l

 

           (अध्‍यक्ष पीठ द्वारा अंकित नहीं होने के निर्देश: जारी...)

श्री मुरारी लाल मीणा (बांदीकुई): 000

श्री जयराम जाटव (खैरथल): 000

श्री अध्‍यक्ष: अब आप तो विराजो, स्‍थान ग्रहण करो।

श्री जयराम जाटव (खैरथल): 000

श्री बाबूलाल नागर (दूदू): 000

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, जिस बात की चर्चा हो चुकी है, आपने विरोध दर्ज करवा दिया, आप बहिर्गमन कर गए। अब आप पुन: इस बात को न उठाएं। ...(व्‍यवधान)... नो, नो, अब आप स्‍थान ग्रहण करें।

श्री टीकम चन्‍द कान्‍त (सिवाना): 000

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): 000

श्री अध्‍यक्ष: आप प्रस्‍ताव क्‍या था? आप वैश्‍म में बात करना।

श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (गंगापुर): 000

श्री अध्‍यक्ष: जीरो ऑवर में न पाइण्‍ट ऑफ ऑर्डर होता है और न पाइण्‍ट ऑफ इन्‍फोर्मेशन होता है।

श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (गंगापुर): 000

श्री अध्‍यक्ष: अभी अंकित नहीं किया जा रहा है। जब तक मैं नाम न पुकारूं तब तक अंकित नहीं होगा इसलिए आपको समय बाद में दिया जाएगा, आप बैठें। श्री खुशवीर सिंह।

 

स्‍थगन प्रस्‍ताव आदि पर चर्चा

प्रोटोकाल अनुसार प्रदत्‍त सुविधाओं में अन्‍तरविरोध

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आज हमारा देश सैंकड़ों वर्षों की गुलामी के बाद...।

श्री अध्‍यक्ष: तीन मिनट का समय है, यदि आप गुलामी में चले जाएंगे तो आपकी बात ही रह जाएगी।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बहुत महत्‍वपूर्ण बात है। बहुत मुश्किल के बाद तो हमारा देश आजाद हुआ था और आजादी के बाद सबसे बड़ी खुशी इस बात की हुई कि प्रजातंत्र की स्‍थापना हुई है और प्रजातांत्रिक मूल्‍यों की रक्षा अगर जनप्रतिनिधि ही नहीं करेंगे तो फिर कौन करेगा? माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसलिए मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं...।

श्री अध्‍यक्ष: आप रक्षा के साथ वह सम्‍मान की बात भी करो फटाफट।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रजातंत्र के सम्‍मान की ही बात है। 26 जनवरी को हमारा गणतंत्र दिवस होता है और मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि सरकार ने प्रोटोकाल की एक वरीयता बना रखी है और उस वरीयता के अनुरूप माननीय सांसदों और माननीय विधायकों को सुविधा प्राप्‍त नहीं हो रही है। मैं निवेदन करना चाहता हूं कि 26 जनवरी को तहसील हैडक्‍वाटर्स और उप खण्‍ड कार्यालयों पर जहां कहीं भी ध्‍वजारोहण होता है तो माननीय विधायक पंक्ति में खड़ा रहता है और वहां उससे प्रोटोकाल की वरीयता सूची में बीच नीचे का एस डी एम या तहसीलदार द्वारा झण्‍डारोहण किया जाता है। यह बहुत ही शर्मनाक बात है।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं दूसरा निवेदन करना चाहता हूं कि प्रत्‍येक सी एच सी पर मेडिकल रिलीफ सोसायटी गठित है और वहां उसका एस डी एम अध्‍यक्ष होता है जबकि एक विधायक के कार्यकाल में तीन एस डी एम बदले जाते हैं और वह विधायक मात्र सदस्‍य बनकर एस डी एम के अधीनस्‍थ साइड में बैठा रहता है। यह प्रोटोकाल की वरीयता के हिसाब से उचित नहीं है।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं तीसरा निवेदन करना चाहता हूं कि जिन माननीय विधायकों के निवास स्‍थान जिला मुख्‍यालयों पर है और जो अधिकारी, तथाकथित अधिकारी जो कार्मिक है या सरकारी कर्मचारी, उनके भी निवास जिला मुख्‍यालय पर है लेकिन वह तो सर्किट हाउस में रुक सकता है और सारी सुविधा प्राप्‍त कर सकता है और प्रोटोकाल की वरीयता में विधायक उनसे बहुत ऊपर है, उसके बावजूद भी उन विधायकों से पूरा का पूरा पैसा वसूल किया जाता है और वहां के मैनेजर अपनी इच्‍छा से सुओमोटो डिसीजन ले लेते हैं कि नहीं आपका यहां निवास है इसलिए हम आपसे पूरा पैसा वसूल करेंगे जबकि ऐसे कई उदाहरण हैं, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अजमेर जिला कलेक्‍टर एक वर्ष तक सर्किट हाउस में रुके जबकि उनके नाम से सरकारी निवास अलॉट था । टोंक में भी, और भी ऐसे कई प्रकरण हैं। जयपुर की बात मैं निवेदन करना चाहता हूं कि चेयरमैन, रेवेन्‍यू बोर्ड, वह भी एक वर्ष तक सर्किट हाउस में रुके।

दूसरी बात, जो जयपुर के अंदर जो अधिकारी हैं, तथाकथित अधिकारी, अधिकारी शब्‍द भी बहुत गलत है लेकिन वह आज सर्किट हाउस में रुकने के लिए एनटाइटल है जयपुर में, उनका निवास, उनकी पोस्टिंग और रिटायर जितने भी अधिकारी हैं, वह तो रुक सकते हैं लेकिन माननीय अध्‍यक्ष महोदय, विधायक नहीं रुक सकते और पूर्व विधायक की बात तो आप छोड़ो, वह तो कहीं भी रुकने के लिए नहीं है। मैं निवेदन करना चाहता हूं कि इनके ऊपर सरकार का इतना व्‍यय हो रहा है, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारी विधान सभा की कमेटियों के जितने भी चेयरमैन है, वह सरकारी यात्रा पर जब जाते हैं तो वह सैकण्‍ड ए सी के लिए एनटाइटल हैं, जितने भी अधिकारी तथाकथित हैं वह जाते हैं फस्‍ट ए सी में, हम नहीं कहते कि हमें फस्‍ट ए सी के लिए एनटाइटल करो पर सरकार के ऊपर व्‍यय बढ़ रहा है, इसलिए उनको भी बाध्‍य किया जाए कि सैकण्‍ड ऐसी में ही यात्रा करो।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पूर्व विधायक राजस्‍थान हाउस और सर्किट हाउस में नहीं ठहर सकते हैं तो मैं चाहूंगा कि पूर्व मंत्री और जितने भी सेवानिवृत्‍त अधिकारी हैं, राजस्‍थान हाउस और सर्किट हाउस की सुविधा उन्‍हें भी उपलब्‍ध नहीं होनी चाहिए, सरकार के ऊपर फिजूलखर्ची और भार बढ़ रहा है।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, साथ ही मैं एक निवेदन और करना चाहूंगा कि अधिकारी जो चार-चार बीघा की आलीशान, बड़ी-बड़ी कोठियां लेकर जयपुर में विराजमान हैं, मैं चाहूंगा कि करोड़ों रुपए का व्‍यय उन पर हो रहा है मैंटीनेंस का तो...।

श्री अध्‍यक्ष: आप प्रोटोकाल की बात करते-करते कहां आ गए?

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रोटोकाल में एम एल की वरीयता उनसे ऊपर है और उनको सर्वेण्‍ट जैसे क्‍वाटर मिले हुए हैं जबकि एम एल ए जो जनप्रतिनिधि है उनके पास लोग मिलने आते हैं, लोग उम्‍मीद लेकर आते हैं और हमारे कार्यकर्ता होटलों में और सड़कों पर ठोकरें खाते हैं और सरकारी अधिकारियों के पास मिलने के लिए कोई नहीं आता है, इसलिए मैं चाहूंगा कि फ्लैट बनाकर उनको अलॉट किए जाएं और यह बड़ी-बड़ी राजशाही कोठियां मिली हुई है, यह उनसे तुरन्‍त खाली करवाई जाए। आप सरकार को निर्देश दें माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कि इसके ऊपर कुछ न कुछ प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त करे और रिटायर अधिकारियों की सुविधा पूरी समाप्‍त करे। हम यह नहीं कह रहे हैं कि आप हमारे रिटायर और एक्‍स एम एल ए को सुविधा दो।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अंत में मैं निवेदन करना चाहूंगा कि लाल बत्‍ती अधिकारियों के तो बंद करवाइए कम से कम, मंत्रियों के चाहिए, आपके चाहिए, मुख्‍य मंत्री के चाहिए लेकिन अधिकारियों को लाल बत्‍ती लगाकर आप इस आजाद भारत की जनता को क्‍या मैसेज देना चाहते हैं? ...(व्‍यवधान)... इनकी लाल बत्‍ती बंद करवाइए, कोई आवश्‍यकता नहीं है लाल बत्‍ती लगाने की, मात्र जनप्रतिनिधि के होनी चाहिए। धन्‍यवाद। 

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह सरकूलर है, इसी सम्‍बन्‍ध में है। इसमें है कि अगर विधायक का नाम वोटर लिस्‍ट में जिला मुख्‍यालय पर है तो वह नहीं ठहर सकता है। उसका मकान होगा तो भी नहीं ठहर सकता और सरकारी अधिकारी वह वहां के रहने वाले हों उनके मकान हों और सरकारी आवास भी उनको उपलब्‍ध हो तो वह भी ठहर सकते हैं, वह लगातार आपके निर्देशों के बाद हाउसिंग कमेटी के निर्देशों के बाद इस परिपत्र को वैसे का वैसे ही रखा हुआ है। इन्‍होंने आदेश दे रखे हैं कि सरकारी गाडि़यां उपलब्‍ध नहीं होने पर निजी गाडि़यों की व्‍यवस्‍था करवाई जाएगी। सरकार ने डाइरेक्‍शन दे रखे हैं लेकिन एक भी कलेक्‍टर इस परिपत्र की अनुपालना में गाडि़यां उपलब्‍ध नहीं करवा रहा है।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, विधान सभा सचिवालय से आज ही पत्र प्राप्त हुआ है, गाडि़यों के लिए, सरकारी वाहनों के लिए,...(व्‍यवधान)... मंत्रीजी, आप भी कभी न कभी भूतपूर्व बनेंगे, सोचो आप, आज इनकी तरफ मत देखो।

श्री अध्‍यक्ष: संसदीय कार्य मंत्रीजी, यह बात तो बिलकुल सही है कि जिला मुख्‍यालयों पर जहां सर्किट हाउस है वहां पर जब आपने कोई अलोट नहीं कर रखा, आपका कोई अहसान नहीं है, यदि उसका घर का कोई मकान है तो होगा, आपको उससे क्‍या लेना देना है, वह रहना चाहता है सर्किट हाउस में यदि वह एनटाइटल है सर्किट हाउस में रहने का इसलिए यह जो भेदभाव है कि सरकारी कर्मचारी का तो मकान है तो भी वह सर्किट हाउस में वहां पर ठहर सकता है और विधायक के लिए नहीं हो, यह गलत है, इसका तो आप दूर करवाइए।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सरकारी कर्मचारी जो जिला मुख्‍यालय पर जिसका मकान है वह भी नहीं रुक सकता है। आपने जो..।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): मंत्री महोदय, मैं आपको उदाहरण प्रस्‍तुत कर दूं, जयपुर के अंदर..।

श्री अध्‍यक्ष: आपने अलॉट थोड़ा कुछ मकान कर रखा है, आपने जहां जैसे जयपुर में अलॉट कर रखा है, वहां जयपुर के सर्किट हाउस में मत रहने दीजिए, ठीक बात है और कहीं जहां पर उसको मकान अलॉट नहीं है, मान लीजिए उसकी बीबी प्रमुख है, उसको अलॉटमेंट है, वहां पर मकान किया हुआ तो उस आदमी को मत रुकने दीजिए अगर कोई व्‍यक्ति है और उसकी बीबी यहां पर है, वह रुकना चाहे तो उसे मत रुकने दीजिए क्‍योंकि वहां उसको हाउस अलॉट है लेकिन जिसको कोई अलॉट नहीं कर रखा है उसको आप इस आधार पर कि आपका एनसेस्‍ट्रल मकान होगा

 

Gpc/akt/ 02042007/1250/1m

 

उसमें कोई और रहता होगा, जनता से मिलने के लिए, आम अवाम से मिलने के लिए वहां पर कोई सुविधा नहीं होगी, ऐसी हालत के अंदर यह सरकार का जो अब का निर्णय है यह मैं समझती हूं उचित नहीं है। इसको ठीक करिए आप।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): मंत्री महोदय, 26 जनवरी पर ध्‍वजारोहण की बात भी तो आप करें।

श्री अध्‍यक्ष: 26 जनवरी और 15 अगस्‍त पर भी एसडीओ करे उसकी बजाय विधायक अवेलेबल है तो विधायक को प्राथमिकता होनी चाहिए। झण्‍डारोहण की विधायक को प्राथमिकता होनी चाहिए। ..(व्‍यवधान)..

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अध्‍यक्ष महोदय, आपकी भावनाओं के प्रति हम आभारी हैं, लेकिन हमें इस बात का दुःख है कि *** जितना आपको करना चाहिए। अभी एससी, एसटी के बैकलॉग और उनके जॉन आफ कंसीडरेशन पर आपसे जद्दोजहद की ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: आसन के ऊपर एस्‍पर्शन कास्‍ट किया, ठीक नहीं है, उचित नहीं है, यह गलत बात है नेता प्रतिपक्ष की।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मेरी बात सुनो साहब।

श्री अध्‍यक्ष: मैं आपको उस पर कह रही हैं ..(व्‍यवधान)..

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मेरी बात सुनें।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, आपकी यह गलत बात है, आप आसन के ऊपर यह आक्षेप लगाएं ***, यह गलत बात है। मैं पूरा ध्‍यान रखती हूं, खास तौर से आपका तो पूरा रखती हूं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मेरी सुनो। मेरी सुन लो आप।

श्री अध्‍यक्ष: बाकी भी मैं जानती हूं प्रतिपक्ष को बोलने का पूरा मौका देती हूं, उसके बाद आप इस तरह की बात कर रहे हैं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मेरी सुनो तो सही आप दो बात। ..(व्‍यवधान).. हमने इतना जद्दोजहद किया, आपसे निवेदन किया, लेकिन माननीय मंत्री लोग *** बैठे हों, आप इनको कह नहीं सकते हो? लेकिन आपने ..(व्‍यवधान)..

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): यह *** क्‍या होता है ? ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: *** का अर्थ है उल्‍लू।

श्री जीतमल खांट (बागीडोरा): राजस्‍थान के एक विचित्र पक्षी का नाम है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): अध्‍यक्ष महोदय, हम बहिर्गमन कर गये, हमारे पीछे से यह गरज रहे थे।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): अध्‍यक्ष महोदय, मैं चाहूंगा सरकार इसके बारे में कुछ आश्‍वासन तो दें।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): हमारे पीछे से ये गरज रहे थे। इसलिए मान्‍यवर, इनका हमारे पीछे से गरजना आपका अपमान है। जब आप विराजी हुई थीं, बुलवाना चाहती थीं तब तो बोले नहीं और हम बाहर चले गये उसके बाद में किसको सुना रहे थे?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आप ही को।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): पार्लियामेंटरी मिनिस्‍टर साहब बहादुर, थोड़ी शर्म करो कि प्रतिपक्ष चला गया, उसके बाद में आप गरज रहे हो। आपको तो कुछ नहीं बोलना चाहिए और बोलते तो आप पहले बोलते। बाद में कह रहे थे, हमारे मुख्‍यमंत्री, हमारे मुख्‍यमंत्री। मुख्‍यमंत्री तो राजस्‍थान के हैं या आपके अकेले के हैं? मुख्‍यमंत्री तो राजस्‍थान के हैं। हमारे मुख्‍यमंत्री, हमारे मुख्‍यमंत्री। ..(व्‍यवधान)..

श्री कालूलाल गुर्जर  (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री): आप भी प्रतिपक्ष के नेता राजस्‍थान के हैं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): आप हमारे सामने ही कह दो।

श्री अध्‍यक्ष: हमारे में आप भी आते हैं, आप भी हमारे में सम्मिलित होते हैं।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): वे तो राजस्‍थान के हैं। न हमारे हैं, न आपके हैं, राजस्‍थान के मुख्‍यमंत्री हैं। यह शपथ ली है उन्‍होंने मुख्‍यमंत्री की। यह नहीं ली कि आपके हैं।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): ये हमारे भी हैं और आपके भी हैं।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): हम आपके आभारी हैं, आसन के आभारी हैं कि आसन ने ..(व्‍यवधान)..

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): मुख्‍यमंत्री हैं राजस्‍थान के।

श्री अध्‍यक्ष: हमारे, आपके, सबके हैं वो मुख्‍यमंत्री। ..(व्‍यवधान)..

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, प्रतिपक्ष के नेता का आप कितना सम्‍मान करते हो यह राजस्‍थान की जनता जानती है, झुंझु नू की जनता तो बहुत अच्‍छी तरह जानती है। अध्‍यक्ष महोदय, आपने दो-तीन निर्देश आसन से दिये ..(व्‍यवधान)..

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): अध्‍यक्ष महोदय, यह जो पार्लियामेंटरी अफेयर मिनिस्‍टर ने ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: ये बोल रहे हैं। देखो, यह गलत बात है।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): एक मिनट। आधा मिनट में ..(व्‍यवधान).. आप अलाऊ करें तो मैं बोलूं।

श्री अध्‍यक्ष: मंत्रीजी बोलने के लिए खड़े हैं उसके बाद भी आप सुझाव दे सकते हैं, लेकिन मंत्रीजी खड़े हैं।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): पार्लियामेंट्री अफेयर मिनिस्‍टर जवाब दे दें, मैं आधा मिनट के लिए निवेदन करना चाहूंगा, क्‍योंकि हाउस में कोई भी चीज आ जाती है तो हाउस की प्रोपर्टी हो जाती है। अब जब हाउस की प्रोपर्टी है, यह बहुत महत्‍वपूर्ण मसला है, छोटा-मोटा मामला नहीं है, प्रोटोकोल का मामला है। लोकतंत्र और जनतंत्र, इसका मतलब यह है कि लोकतंत्र यानी लोक का तंत्र है यह।

अध्‍यक्ष महोदय, जितने भी कानून बने हुए हैं ये पुराने जमाने के अंग्रेजों के जमाने के बनाये हुए हैं और वे लोग हमारे पर राज करते थे इसलिए आफिसर्स को वेटेज देने के लिए उन्‍होंने इस तरह की परिपाटी डाल रखी थी। अध्‍यक्ष महोदय, आज भारत आजाद है, स्‍वतंत्र है और आज भी जैसे भारत सरकार ने कुछ नियमों में परिवर्तन किये हैं, मैं आपका ध्‍यान दिलाना चाहूंगा आज भारत सरकार का सेक्रेट्री भी एक फ्लेट में रहता है, उसको कोई कोठी अलॉट नहीं ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: आप किस विषय पर बोल रहे हैं, मेरी समझ में नहीं आया।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): मैं निवेदन करना चाहता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: काहे पर बोल रहे हैं आप।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): आपने दो चीजों के डाइरेक्‍शन दिये। मेरा निवेदन यह है कि दो चीजें नहीं, मैं पार्लियामेंट्री ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: वे जवाब दे रहे हैं, फिर आप क्‍या कह रहे हैं।

डा. एन. एस. गुर्जर (टोडारायसिंह): मैं सरकार से और आपसे अनुरोध करना चाहूंगा कि जितनी भी चीजें है इन सबको लेकर आप बैठें और विचार करें और विचार करने के बाद आप उचित समझते हैं कि कहां लोक को महत्‍व दिया जाना चाहिए और कहां तंत्र को महत्‍व दिया जाना चाहिए, इस पर आप विचार कर लें और उसके बाद इसमें संशोधन करें, जहां आपको उचित लगता हो। मैं यह नहीं कहता कि इसमें करें या इसमें नहीं करें, यह जो सदन की भावना है या कभी इस पर चर्चा करवा लें ताकि इस संबंध में बार-बार एमएलए खड़े होकर छोटी-छोटी चीजों को हाउस में उठाते हैं और अखबारों में उसकी आलोचना होती है, कभी लाल बत्‍ती के लिए एमएलए झगड़े, कभी स‍र्किट हाउस के लिए एमएलए झगड़े, कभी इसके लिए एमएलए झगड़े। हम कोई भीख मांग रहे हैं क्‍या अध्‍यक्ष महोदय? यह कोई भीख नहीं है, यह आम जनता के लिए फेसेलिटीज का सवाल है। एमएलए अपने लिए कुछ नहीं मांगता है। इसलिए निवेदन करना चाहता हूं सरकार इन सारे मुद्दों पर एक साथ विचार कर लें और एक साथ कुछ करें। आपने मुझे अलाऊ किया इसके लिए आपके प्रति आभार प्रकट करता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: सरकार पता नहीं कब करेगी, दो बातें महत्‍वपूर्ण थीं जो कुछ मैं कह रही हूं। फिर इस पर क्‍या कहना है ..(व्‍यवधान)..

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): अध्‍यक्ष महोदय, मैं एक लाइन में कहूंगा। 1992 में माननीय पार्लियामेंट्री अफेयर मिनिस्‍टर महोदय, यह था कि केवल राजस्‍थान में जहां सरकार ने क्‍वार्टर अलॉट कर रखा है वहां के अलावा सब जगह रुकते थे। यह बीच में बदला है, आप देख लीजिए। मेरे पास दोनों कॉपी हैं, आप कहें तो आधा घण्‍टे में ला दूंगा। ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है, हो गई ना बात। फिर इसके बारे में आप कह रहे हैं ..(व्‍यवधान)..

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): इसलिए कृपा करके अध्‍यक्ष जी, हम आपके आभारी हैं आपने भावना व्‍यक्‍त की। अध्‍यक्ष जी की भावना के मुताबिक आप सदन को आश्‍वस्‍त कर दें और नियमों में अमेण्‍ड कर दें हम तो इतना सा चाहते हैं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): यह सही है तंत्र लोक के लिए बनता है और आपने जो कुछ बात कही विशेष तौर पर आपने दो निर्देश दिये हैं, एक निर्देश तो यह दिया है कि उपखण्‍ड पर 15 अगस्‍त और 26 जनवरी को झण्‍डारोहण जनप्रतिनिधि और विशेष तौर पर विधायक से कराया जाए। अध्‍यक्ष महोदय, इसके लिए झण्‍डा एक्‍ट बना हुआ है, फ्लेग एक्‍ट है। मैं फ्लेग एक्‍ट को दिखवा लूंगा, क्‍योंकि भारत सरकार का वह फ्लेग एक्‍ट है, उसमें कोई इस तरह का प्रोविजन न हो जिसमें प्रतिबंध हो। तो निश्चित तौर पर उसमें अगर कोई संशोधन की जरूरत पड़ी तो संशोधन करेंगे।

  दूसरा, आपने यह कहा कि जिला मुख्‍यालय के जो विधायक हैं, जिनको मकान आवंटित नहीं हुआ, अध्‍यक्ष महोदय, यह 1992 नहीं, पहले से परिपाटी चली आ रही है, लेकिन आपने निर्देश दिये हैं निश्चित तौर पर दिखवाकर और जिला मुख्‍यालय के विधायक को वहां सर्किट हाउस में रुकने की दो या तीन दिन जितने भी हो सकेंगे उतनी अनुमति दी जाए, उसके लिए निश्चित तौर पर कहूंगा।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): मंत्री महोदय, माननीय अध्‍यक्ष महोदय ने निर्देश दिये थे सरकारी वाहन के बारे में।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): मंत्रीजी, आपको भी अच्‍छी तरह से याद है और अध्‍यक्षजी ने सही कहा है कि 1990 तक एमएलए जब मौजूद होता था तो 15 अगस्‍त, 26 जनवरी को तो झण्‍डारोहण वही करता था।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): कभी नहीं।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): क्‍या बात करते हो आप?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आप और हम एमएलए थे।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): यह तो उसके बाद में चेंज कर दिया।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आप और हम भी एमएलए रहे हैं, 90 से हैं, कभी नहीं रहा। मैं दिखवा लूंगा, निश्चित तौर पर दिखवा लूंगा।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): अध्‍यक्ष महोदय ने सरकारी वाहन के बारे में मंत्री महोदय को कुछ निर्देश दिये, इसके बारे में कहूंगा कि सरकारी वाहन विधायकों को उपलब्‍ध नहीं हो रहे हैं। जितने भी वाहन यहां से भेजे गये वे वाहन जिला कलकटर ने एसडीएम को अलॉट कर दिये नियमों के विरूद्ध। इसलिए मैं चाहूंगा ..(व्‍यवधान)..

श्री अध्‍यक्ष: माननीय जुबेर खान। अब नहीं बोलें। ..(व्‍यवधान)..

 

नगर विकास न्‍यास, अलवर का भूमि हस्‍तांतरण प्रकरण

श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से गरीब किसानों की ऐसी समस्‍या सरकार के सामने लाना चाहूंगा कि हाल ही में राज्‍य सरकार ने आदेश भेजे हैं कि शहर की पेराफेरी में जो गांव आते हैं उन गांवों की सरकारी भूमि को और सिवाय चक भूमि को यूआईटी के नाम दर्ज करा दिया जाए, उनकी एंट्री चेंज कर दिया जाए। मैं निवेदन करना चाहूंगा अलवर में 1998 में मास्‍टर प्‍लान बना और उसके बाद उसी को 2011 तक एक्‍सटेंड कर दिया। अध्‍यक्ष महोदय, जो आवंटन कमेटी ने गरीब लोगों को खासतौर से एससी के लोगों को जो आवंटन किये थे 1964 में आवंटन कमेटी की प्रोसीडिंग है, जब कुमारी उमा माथुर रामगढ़ से विधायक होती थी, आप भी इतने वरिष्‍ठ हैं, आपको भी ज्ञात होगा 1964 में गरीब लोगों को जिनके पास भूमि नहीं थी, उन्‍होंने भूमि का आवंटन किया 1964 में। यह शर्त रखी कि 10 वर्ष तक इनके कब्‍जा रहने के बाद इनको खातेदारी अधिकार मिल जाएंगे। अध्‍यक्ष महोदय, इनमें जो पढ़े-लिखे लोग थे उन्‍होंने तो खातेदारी ले ली और जमीनें बेच भी दीं और जो गांव के गरीब व इनोसेंट लोग थे वे आज भी उस जमीन पर काबिज हैं। 91 की रसीदें उनकी कट रही हैं, गिरदावरी में उनके नाम आ गये हैं, जोत में उनके नाम हैं, जिस तरह से 1975 और 77 के बीच में इंदिराजी के 20 सूत्री कार्यक्रम के तहत लोगों को जमीनें आवंटित हुईं। उसके बाद 1985-86 में जमीनों का आवंटन हुआ, इन आवंटनों के आधार पर गांव के गरीब और किसान लोग इन जमीनों पर बैठे हुए हैं। लोगों ने वहां मकान बना लिये, आवास बना लिये, कुए भी खोद लिये, धर्मशालाएं बना लीं और यथास्थिति से 30-40 साल से लगातार रह रहे हैं, किसी कारणवश उनको खातेदारी नहीं मिल पायी। अब अगर यूआईटी के नाम सिवाय चक का जहां 30-40 साल से गरीब बैठे हैं अगर वो यूआईटी के नाम म्‍युटेशन खुल गया तो उनके लिए भारी समस्‍या हो जाएगी और अध्‍यक्ष महोदय, आप तो स्‍वयं किसान की बेटी हैं, किसान अपना कब्‍जा जो 40 साल से जमीन ही जोत रहा है।                                           

 

मोहन/अरूण/अशोधित प्रति प्रकाशनार्थ नहीं/02042007/1300/1n

 

वह मरने को तैयार हो जाएगा, जमीन का कब्‍जा नहीं छोड़ेगा, इससे लॉ-एण्‍ड-ऑर्डर की सिचुएशन और बिगड़ेगी। वहां 20-25 गांव हैं ढाढोला, बहाला, सांखला, देसूला, अग्‍यारा जहां यह समस्‍या आ रही है। मैं आपके माध्‍यम से सरकार से निवेदन करना चाहूंगा कि आप यह दिखवा लीजिए, जो लोग सवाईचक के ऊपर काबिज हैं, पिछले 30-40 साल से उनको आप खातेदारी दिलाने के लिए कार्यवाही करें और यूआईटीज को आप सर्कूलर भेजें कि ऐसे लोगों को चिन्‍हीत करें और उनकी जमीन को यूआईजी के नाम हस्‍तांतरण नहीं करें ताकि वहां के गरीब किसानों को, उनके पास भूमि नहीं है, इसमें तो बहुत सी तो विधवा हैं और एस.सी. के लोग हैं 90 परसेंट, कोई और जमीन उनके पास है नहीं। इसके अलावा, उन्‍होंने सोचा कि हम 40 साल से इस जमीन पर बैठे हैं, हमारी जमीन हो गई होगी, आज जब पटवारी उनको जाकर के बताता है कि इस जमीन को तो हम यूआईटी के नाम दर्ज कर रहे हैं तो उनमें बैचेनी हुई है। मेरा आपसे निवेदन है कि सरकार को इस महत्‍वपूर्ण सवाल के ऊपर जहां गरीब लोग हैं, ध्‍यान देकर उनकी भूमि जो आपने आवंटन कमेटी को भी उनको अलाट किये हैं, उस भूमि का नियमन कराएं, जो आवंटन कमेटी पर आज रोक लग गई क्‍योंकि यह पेराफेरी में आ गये तो अब आवंटन कमेटी ने भी यह रिकमण्‍डेशन दी है कलक्‍टर को क्‍योंकि इसमें पेराफेरी में हम आवंटन नहीं कर सकते हैं लेकिन हम इस बात से सहमत हैं कि इन आदमियों के नाम इनकी भूमि का नियमन होना चाहिए। मैं आपसे यह निवेदन करता हूं सरकार इसके ऊपर उचित कार्यवाही करे।

श्री अध्‍यक्ष: आप बोल तो नियमन की बात कर रहे हैं और आपने जो स्‍थगन प्रस्‍ताव दिया, वह दिया है कि आवासन मण्‍डल ग्रहण कर रहा है, वह तो आपने वह दिया है। ...(व्‍यवधान)... आपने आवासन मण्‍डल लिखा है ...(व्‍यवधान)...

श्री जुबेर खान (रामगढ़): नगर विकास न्‍यास है, अध्‍यक्ष महोदय।

श्री अध्‍यक्ष: हां, नगर विकास न्‍यास।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): हां, राजस्‍व मंत्री जी, लॉ-एण्‍ड-ऑर्डर की सिचुएशन बिगड़ जाएगी, आप इसके ऊपर कोई उचित कार्यवाही कराइए।

श्री अध्‍यक्ष: जानकारी लेंगे तो, एक सैकण्‍ड में ऐसे थोड़े ही बोल देंगे, यह उनको थोड़े ही मालूम है कि इसके बारे में क्‍या है, क्‍या नहीं है। खैर, मंत्री जी, आप इस बात पर अपना गौर करिए कि पता लगाओ, क्‍या है, क्‍या नहीं, देख लो, क्‍या किया जा सकता है। श्री मदन राठौड़। ...(व्‍यवधान)...

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): और उसके अन्‍दर पेराफेरी क्षेत्र के अन्‍दर जो ग्रामीण आ गये हैं और उनके अलाटमेंट के मामले का जो मामला उठाया है, उसके बाबत देख लेते हैं कि पुराना मामला है और पेराफेरी के अन्‍दर नियमन यूडीएच, नगर परिषद् और नगर पालिका के लागू होते हैं।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): नगरपालिका के कैसे होंगे, मंत्री महोदय, यह नगरपालिका यह तो ग्राम पंचायत है। ...(व्‍यवधान)... ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और तहसील है।...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: हकदार तो हैं नहीं वह। ...(व्‍यवधान)...

श्री जुबेर खान (रामगढ़): आप यह मत कहिए क्‍योंकि 91 में पेराफेरी में आए हैं। ...(व्‍यवधान)... लोगों को 1964, 1975 में अलाटमेंट हुए हैं, पेराफेरी में आने के पहले अलाटमेंट हो चुके हैं, लोगों को कब्‍जा दिया गया है आपके तहसीलदार द्वारा।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): यह सारा मामला दिखवा लेंगे। वैसे तो कोई है यदि तो यह सारा मामला दिखवा लेंगे, दिखवाने के बाद ही कहने की स्थिति में रहेंगे।

श्री अध्‍यक्ष: अलाटमेंट कब किया गया, किसने किया व वैधानिक तौर पर बैठे हुए हैं कि नहीं बैठे हुए हैं, वह सब दिखवा लेंगे, क्‍या दिक्‍कत है। श्री मदन राठौड़। 

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): 50 साल का कब्‍जा काश्‍तकारों का यदि उन पर है। ...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: कहने को कह देते हैं 50 साल का होता तो अब तक खातेदारी नहीं ले लेते क्‍या यह। ...(व्‍यवधान)...

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): यह दी नहीं, वह यूआईटी ने।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): 64 में उमा माथुर जी एमएलए थी तब अलाटमेंट कमेटी के कागज भी लोगों के पास हैं।

श्री अध्‍यक्ष: यदि कमेटी ने बिलकुल वैधानिक तौर पर अलाटमेंट किया है तो निश्चित रूप से  अब तक उनको मिल जाती खातेदारी।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): यूआईटी ने किया है, उमा जी माथुर जब थी। ...(व्‍यवधान)... रिकार्ड है वह तो गवर्नमेंट का रिकार्ड है, देख लो।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): रिकार्ड है ?

श्री अध्‍यक्ष: हां, तो वही तो बात है। वही तो बात है कि कमेटी ने अलाटमेंट किया है तो ठीक है।

श्री रामनारायण चौधरी (नेता, प्रतिपक्ष): और यह पेराफेरी तो आप रोज नगरपालिकाओं की सीमा बढ़ा रहे हैं, पेराफेरी तो आज नहीं तो कल आ जाएगी।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं तो, वह तो हो  गयी न बात, उमा माथुर के समय का है, उमा माथुर तो 62 में थी।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, 1964 के अलाटमेंट हैं।

श्री अध्‍यक्ष: 62 से लेकर के 67 तक थीं वो।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): पर इसमें से, अध्‍यक्ष महोदय, जो पढ़ें लिखे लोग थे उन्‍होंने खातेदारी ले ली जमीनें बेच दीं, यह बेचारे इनोसेंट जो हरिजन थे, ये किसी कारण से, वैसे तो पटवारी को स्‍वत: ही 10 साल बाद खातेदारी दे देनी चाहिए थी, तहसीलदार को दे देनी चाहिए थी, चलो गांव के अनपढ़ लोगों से कोई गलती हो गई, नहीं करा पाये तो तहसीलदार की जिम्मेदारी है, एक जब आवंटन में शर्त थी कि 10 साल इनका रेगुलर कब्‍जा रहने के बाद ...(व्‍यवधान)... इनको खातेदारी दे दी जाएगी और आपके तहसीलदारों ने नहीं दी।

श्री अध्‍यक्ष: अलाटमेंट कैसे है, किसने किया, कब हुआ, देख लीजिएगा। श्री मदन राठौड़।

कश्‍मीर में तैनात सेना की संख्‍या कम नहीं करने का भारत सरकार से आग्रह

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से केन्‍द्र सरकार को आगाह करवाना चाहता हूं जो इन दिनों कश्मीर में सेना हटाने की बात कर रही है। 

श्री अध्‍यक्ष: तो केन्‍द्र सरकार को आगाह कर रहे हो आप ?

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): मैं आपके माध्‍यम से करवाना चाहता हूं, अध्‍यक्ष महोदय, कश्‍मीर में ...

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): इसमें राजस्‍थान प्रदेश का क्‍या लेना देना है ?

श्री अध्‍यक्ष: विषय नहीं है इसीलिए तो आगाह कर रहे हैं।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): देश का नागरिक हूं ...(व्‍यवधान)... साहब, देश का नागरिक हूं, देश की सुरक्षा से जुड़ा हुआ प्रश्‍न है ...(व्‍यवधान)... और मैं सोचता हूं कि आपने थोड़ी गंभीरता यदि राखी होती तो निश्चित रूप से  मेरे बोलने से पहले ही आप आगाह कर चुके होते लेकिन आपको कश्‍मीर की चिंता नहीं है।

श्री अध्‍यक्ष: आप उन्‍हें जवाब देने के बजाय अपनी बात कहो।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): हां, तो अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह निवेदन कर रहा था।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): जिन्‍ना साहब की मजार पर धोक करने अपने कुछ कह कर आए थे।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): कांग्रेस ने वहां कह दिया कि वहां से सेना नहीं हटाई जाएगी।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अध्‍यक्ष महोदय, यह नियमित रूप से दूरदर्शन और समाचार पत्रों में आ रहा है कि वहां के पूर्व मुख्‍य मंत्री मुफ्ती मोहम्‍मद सईद वहां की सरकार पर दबाव डाल रहे हैं कि यदि केन्‍द्र सरकार से वहां से सेना नहीं हटाई तो सह समर्थन वापस ले लेंगे और समर्थन वापस लेने के डर से वहां के मुख्‍य मंत्री ने भी सीधा हिन्‍दुस्‍तान के प्रधान मंत्री से आग्रह किया है कि वहां से सेना हटाई जाए। अध्‍यक्ष महोदय, हम अच्‍छी तरह से इस बात को जानते हैं।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आदर के साथ कह रहा हूं, नई नई परम्‍परा मत डालिए, फिर हम गुजरात के मुख्‍य मंत्री को भी डिस्‍कस करना चाहेंगे यहां तो कल आप अलाउ करेंगी क्‍या ? ...(व्‍यवधान)...

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): तो क्‍या हो गया ? ...(व्‍यवधान)... देश की सुरक्षा का मामला है। कई पंडित घाटियाँ छोड़कर चले जाते हैं। ...(व्‍यवधान)...

श्री जुबेर खान (रामगढ़): कौन से मुद्दों पर यहां चर्चा हो सकती है और कौन से मुद्दे पर नहीं हो सकती।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): कई कश्‍मीरी पंडित घाटी छोड़कर जा चुके हैं। ...(व्‍यवधान)...

श्री जुबेर खान (रामगढ़): आप नई परम्‍परा मत डालिए, आप इनसे कहिए कि ...(व्‍यवधान)...

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): देश की सुरक्षा का मामला है।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): आज मुझे यह समझ में नहीं आया कि आपको तकलीफ क्‍या हो रही है। ...(व्‍यवधान)...

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): घाटी के कश्‍मीरी पंडित छोड़ चुके हैं घाटी ...(व्‍यवधान)... 

श्री अध्‍यक्ष: राजसमंद से आने वाले माननीय सदस्‍य ...(व्‍यवधान)... स्‍थान ग्रहण करिए।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): और जब मैं इस बात को रख रहा हूं कि देश का नागरिक होने के नाते आपको भी यह चिंता होनी चाहिए।

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): अध्‍यक्ष महोदय, और कोई मामला हो तो ठीक है लेकिन सेना तैनाती करने का मामला है, वह वहां की जम्‍मू कश्‍मीर की सरकार करे।...(व्‍यवधान)...

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): मुझे इस बात का दुःख है कि आपको चिंता क्‍यों नहीं हो रही है। ...(व्‍यवधान)...

श्री हेमाराम चौधरी (गुढ़ामालानी): यहां राजस्‍थान की सरकार और यहां के लोगों का क्‍या लेना देना है। ...(व्‍यवधान)...

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): आपको भी इस बात की चिंता करनी चाहिए। ...(व्‍यवधान)...

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): आप यदि सुन लेते तो शायद एतराज नहीं करते। मैंने यह कहा कि केन्‍द्र को हम आगाह करना चाहता हैं, राजस्‍थान की विधान सभा के माध्‍यम से केन्‍द्र को हम संकेत देना चाहते हैं कि केन्‍द्र इस प्रकार की धृष्‍टतापूर्ण कार्यवाही नहीं करे, इस प्रकार की कायरतापूर्ण कार्यवाही नहीं करे। यदि कश्‍मीर में सेना हटा ली गई तो क्‍या स्थिति बनेगी। इसके बारे में हर देश के नागरिक को सुझाव देने का अधिकार है और देश के नागरिक को कहने का अधिकार है, मुझे यह समझ में नहीं आ रही है कि आप एतराज क्‍यों कर रहे हैं। आज कश्‍मीर में स्थिति कितनी खराब है। ...(व्‍यवधान)...

श्री जुबेर खान (रामगढ़): इस विधान सभा के कुछ नियम और परम्‍पराएं हैं, आप उनको मत तोडि़ए, हमें एतराज इस पर बिलकुल नहीं है, हमको एतराज यह है कि राजस्‍थान विधान सभा के प्रक्रिया के संचालन के कुछ नियम बनाए हुए हैं। अध्‍यक्ष महोदय, कुछ परम्‍परा रही हैं यहां और इस सदन में भारत के राष्‍ट्रपति महामहिम जैसे आदमी यहां से गये हैं और यहां पर यह परम्‍परा नहीं रही है। ...(व्‍यवधान)... अगर आप इन परम्‍पराओं को तोड़ेंगे ...(व्‍यवधान)... तो यह ठीक नहीं है।

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह कश्‍मीर की बात कर रहे हैं। ...(व्‍यवधान)... बांग्‍लादेशियों को निकालिए उसके बाद कश्‍मीर की बात करिए।...(व्‍यवधान)...

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): यह कोई कांग्रेस की बपौती नहीं है। ...(व्‍यवधान)... 

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): यहां के मुद्दे तो आप रिजेक्‍ट कर देते हैं और कश्‍मीर का ले आए। ...(व्‍यवधान)...

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): और आपको नहीं है, मुझे इस बात का दुःख है और आप परम्‍पराओं की बात करते हैं। ...(व्‍यवधान)... मैं बोल रहा हूं तो आपको बोलने का कोई अधिकार नहीं है।

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): माननीय सदस्‍य, पहले बांग्‍लादेशियों को निकाल दीजिए, उसके बाद आप बात करिए। ...(व्‍यवधान)...

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): जरा अपनी गिरहबान में झांक कर के देखो पहले, आप दूसरों की चिंता मत करो। ...(व्‍यवधान)...

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): यहां तो बैठे हुए हैं उनको तो निकालने की बात करिए, आप सीधे कश्‍मीर पर जा रहे हैं। ...(व्‍यवधान)...

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): उन बांग्‍लादेशियों को बसाने का काम भी आप लोगों का है। ...(व्‍यवधान)...

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): हमें कश्‍मीर की चिंता है, कश्‍मीर हमारा मुकुट है, आप इस बात को नहीं समझ पाते होंगे, आपने कई बार तुष्टिकरण की नीति अपनाई होगी। ...(व्‍यवधान)...

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): अध्‍यक्ष महोदय, यह माननीय महिला सदस्‍य बोल रही हैं, बोल रहे हैं कि गिरहबान में झांक कर देखो।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): कई बार आप अपने दूसरों को खुश करने के लिए कुछ भी कर लेते हैं। ...(व्‍यवधान)...

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): क्‍या गिरहबान में झांक कर देखें, आपके गिरहबान में झांक कर देखें क्‍या ? ...(व्‍यवधान)... 

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): हां, बिलकुल। ...(व्‍यवधान)...

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): आप एक महिला सदस्‍य से कह रहे हैं कि गिरहबान में झांक कर देखो। ...(व्‍यवधान)...

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): हां, कांग्रेस अपने गिरहबान में झांक कर देखे। ...(व्‍यवधान)...

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): हम कुर्बानी देने के लिए आज भी तैयार हैं। ...(व्‍यवधान)...

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): एक नेता भ हो जिसने कुर्बानी दी हो, वह बताइए आप। ...(व्‍यवधान)...

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): इसका मतलब यह है कि कांग्रेस अपने गिरहबान में झांक कर देखे।

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): नहीं तो आपके कितने पार्टी के नेताओं ने देश के लिए कुर्बानी दी ? ...(व्‍यवधान)... आपके कितने नेता कुर्बानी में मरे हों तो नाम बताइए उसका सदन में।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): आप बैठिए, मैं बताता हूं अभी आपको।

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): मर गये नेता कुर्बानी से, कोई एक भी नेता मरा हो तो बताइए ? मर गये कुर्बानी से। 

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): आप बिराजें।

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): आप माननीय महिला सदस्‍य को कह रहे हैं कि गिरहबान में झांक कर देखें।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): हां, मै बोल रहा हूं। ...(व्‍यवधान)... 

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): आप अपमान करते हो महिलाओं का। ...(व्‍यवधान)...

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): बंशीलाल जी, मैं इनके लिए पर्याप्‍त हूं, आप बैठिए। ...(व्‍यवधान)...

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): आप तो गाय की बात करो, गाय के अलावा कोई बात मत करो आप। ...(व्‍यवधान)...

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): हां, मैं बताता हूं। ...(व्‍यवधान)...

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): इस बात को कौन सा मोड़ देना चाहते हैं ? ...(व्‍यवधान)... आपकी मानसिकता ही खराब है। ...(व्‍यवधान)...

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): मैं जो बात कहना चाहता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: राजसमन्‍द से आने वाले माननीय सदस्‍य, हर बात में बीच बीच में खड़े होकर बोलने लग जाते हैं। ...(व्‍यवधान)... नहीं, यह गलत बात है। आप क्‍यों प्रोटेक्‍ट कर रहे हैं ?  ...(व्‍यवधान)...

 

सुरेन्‍द्र/अरुण/02042007/1310/1o/1

 

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): ये कह रहे हैं कि महिला को कह रहे हैं कि गिरहबान में झांके जबकि माननीय सदस्‍य ने यह कहा कि कांग्रेस अपने गिरहबान में झांक कर के देखे कि पूर्व में इन्‍होंने क्‍या किया। इनका यह आशय था और ये स्‍टोरी कहां ले जा रहे हैं। (व्‍यवधान)

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): जब माननीय सदस्‍या बोल रही थीं, उन्‍होंने कांग्रेस का नाम नहीं लिया। (व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): मैंने कहा वो मैं फिर दोहराता हूं। आप बैठिये, मैं बताता हूं। (व्‍यवधान)

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): मैं बैठूंगा नहीं। राठौड़ साहब, आपके कहने से नहीं बैठने वाला मैं। (व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): आप बीच में खड़े भी नहीं हो सकते।

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): माननीय अध्‍यक्ष की इजाजत से बोल रहा हूं।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): जब मैं बोल रहा हूं तो आप बीच में खड़े मत होइये। आपको जो कहना है, जो करना है उसके बाद में कहिये। (व्‍यवधान)

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): आप बोल रहे हो तो क्‍या हो गया? आप बोल रहे हो तो कोई हिन्‍दुस्‍तान का दरबार बोल रहा है क्‍या? आप बोल रहे हैं। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बिठा सकते हैं मेरे को। (व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): हिन्‍दुस्‍तान का नागरिक बोल रहा हूं, एक जवाबदार नागरिक बोल रहा हूं। (व्‍यवधान)

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): आप तो गाय की बात करो बंशीलाल जी। (व्‍यवधान)

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ऐसे मामलों पर भी आप नहीं टोकते हो। ऐसे मौके पर भी आप नहीं टोकते। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप भी सुन रहे हैं, लगातार वो अनर्गल बातें किये जा रहे हैं। (व्‍यवधान) इर्रेलेवेंट बातें जिनका कोई महत्‍व नहीं है... (व्‍यवधान)

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): कोई भी माननीय सदस्‍य बोले, ये खड़े होकर के बोलने लग जाते हैं। (व्‍यवधान) ये बार-बार करते हैं। (व्‍यवधान)

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): जहां मर्जी होती है, कुछ भी बोल जाते हैं। (व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): ... या तो हिन्‍दू कट जाएंगे वहां से, वो कश्‍मीर चला जाएगा यदि सेना वहां से हट गई। सेना यदि हट गई तो वह खतरे में पड़ जाएगा। वैसे ही कश्‍मीरी पंडित कई जा चुके हैं। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, विराजें।

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): कहीं नहीं जाएगा कश्‍मीर, इनको भेज दो साहब।

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): घाटी खाली हो चुकी है कश्‍मीरी हिन्‍दुओं से। (व्‍यवधान)

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): एक संकल्‍प पारित करवाओ। (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): विधान सभा के सारे सदस्‍य वहां जाएंगे। आप यह संकल्‍प पास कराइये कि विधान सभा के 200 के 200 सदस्‍य कश्‍मीर की सीमा पर जाकर के देश की चौकसी करेंगे। यह सदन में पास कराओ संकल्‍प। कराइये पास। (व्‍यवधान)

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): .... यह संकल्‍प पास कराओ। माननीय संसदीय कार्य मंत्री जी, कश्‍मीर बचाने के लिए इनको भेजो आप। (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): राजस्‍थान विधान सभा के सभी सदस्‍य कश्‍मीर की सीमा पर जाकर के देश की रक्षा करेंगे, कराइये। (व्‍यवधान)

श्री बंशीलाल खटीक (राजसमन्‍द): तैयार हैं, कराइये। (व्‍यवधान)

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा (डेगाना): माननीय गृह मंत्री जी, आपको निवेदन कर रहा हूं, कराइये। (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): हम रहने को तैयार हैं, आप चलने को तो तैयार हो ही गये।

श्री अध्‍यक्ष: राजसमन्‍द से आने वाले माननीय सदस्‍य। (व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍य जानना चाहते हैं कि मैंने क्‍या किया, मैं इनको बताना चाहता हूं कि जब कश्‍मीर में आंदोलन हुआ तो सबसे पहले....

श्री अध्‍यक्ष: आपने आगाह कर दिया, बहुत है।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): ... वहां पर जब मुरली मनोहर जोशी के साथ में नेतृत्‍व करने वालों में मैं भी था और कश्‍मीर के श्रीनगर के लालचौक में झंडा फहराने के लिए गये तब मैं भी वहां गया था यह मैं बताना चाहता हूं। आप अपने गिरहबान में झांककर के देखें कि आपने क्‍या किया। आपने क्‍या किया कश्‍मीर के लिए यह मैं बताना चाहता हूं। आप किस बात को काट रहे हो, मैं गया था उस समय और कुछ लोगों का चयन हुआ था। माननीय गृह मंत्री जी यहां विराजमान हैं और माननीय तिवाड़ी साहब भी विराजमान हैं, इनको पता है कि जब वहां पर चयन हुआ और हमारी वाहिनी जा रही थी तब वहां पर घाटी में विस्‍फोट करके जब रास्‍ते रोक दिये गये थे तब कुछ लोगों का चयन किया गया उसमें मेरा भी चयन किया गया था और श्रीनगर के लाल चौक में जब मुरली मनोहर जोशी के नेतृत्‍व में जो झंडा फहराया गया था। उसमें मैं भी गया था और चारों ओर से गोलियां बरसाई जा रही थीं, गोले बरसाये जा रहे थे, उस समय मैं भी वहां गया था। किसको आप चुनौती देते हो? (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। सुमेरपुर से आने वाले माननीय सदस्‍य, आपने पर्ची के माध्‍यम से उठा दिया। (व्‍यवधान) बैठे-बैठे नहीं बोलें।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अध्‍यक्ष महोदय, मुझे यह कह रहे हैं कि आपने यह कहा। अध्‍यक्ष महोदय, उन्‍होंने कहा कि आपने कैसे कहा कि अपने गिरहबान में झांक कर के देखो। यह मैंने इसलिए कहा कि मैंने तो किया है, आप कुछ करके बताओ।

श्री अध्‍यक्ष: सुमेरपुर से आने वाले माननीय सदस्‍य, आपने पर्ची के माध्‍यम से भारत सरकार को आगाह कर दिया, सफिशिएंट है, बहुत है। (व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अध्‍यक्ष महोदय, मैं तो बात ही नहीं की। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: कर दी। आपका विषय है भारत सरकार सेना की संख्‍या को कम नहीं करे। भारत सरकार सेना की संख्‍या को कम नहीं करे इस बारे में भारत सरकार को आगाह कर दिया। (व्‍यवधान)

डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): .... यह राष्‍ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ विषय है। माननीय सदस्‍य ने इसका जिक्र किया है और प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍य इनके विदेशी नेता के सहारे बोलते हैं, केवल मुसलिम तुष्टिकरण से बोलते हैं। (व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, यह राष्‍ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ मामला है, आप उनको मौका दिये, ये बिल्‍कुल सही बात बोल रहे हैं। अध्‍यक्ष महोदय, इन्‍होंने बीच में टोका-टाकी की, इनका संरक्षण जरूरी है।

श्री अध्‍यक्ष: देखिये, सुनिये मेरी बात।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): इनको दर्द क्‍यों हो रहा है? अध्‍यक्ष महोदय, मैंने कोई गैर-जवाबदारी की बात नहीं उठाई। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप स्‍थान ग्रहण करें। कृपया स्‍थान ग्रहण कर लें। चूंकि यह विषय है वह राजस्‍थान से सम्‍बन्धित नहीं है लेकिन इतना आपका महत्‍वपूर्ण विषय था कि सेना की संख्‍या यदि कम हो जाएगी तो हो सकता है कि आतंकवादियों का भी जोर उसमें बढ़ जाएगा और हमारे भारत वर्ष को खतरा भी हो जाए उस वजह से मैंने केवल अलाऊ किया और केवल इतना ही कहने के लिए अलाऊ किया था कि सेना की संख्‍या को कम नहीं किया जाए। इसके लिए केन्‍द्र सरकार को आगाह करना था कि सेना की संख्‍या को कम मत करो और यह बात आपकी हो गई, चली गई। अब आप उसके ऊपर 50 तरह की 50 बातें कहें तो यह विषय-वस्‍तु यहां चर्चा करके लिए सदन का विषय नहीं है, इतना ही मुझे कहना है।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): मैंने तो अभी कहा ही नहीं।

श्री अध्‍यक्ष: आपने कह दिया और क्‍या कहेंगे अब आप? क्‍या कहेंगे आप? कह दिया।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): अध्‍यक्ष महोदय, मैंने तो कुछ कहा ही नहीं, मैं पूरा विषय ही नहीं बोल पाया।

श्री अध्‍यक्ष: हो गई बात।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): अध्‍यक्ष महोदय, काल्‍पनिक सवालों पर यहां चर्चा हो रही है। कोई निर्णय नहीं हुआ है फौज को कम करने का। पी.डी.पी. के नेता ने मांग की है लेकिन वैसा कोई निर्णय नहीं हुआ है। कांग्रेस के मुख्‍य मंत्री गुलाम नबी आजाद इसका विरोध कर रहे हैं1 काल्‍पनिक विषयों के ऊपर यहां पर चर्चा की जा रही है। कोई फौज तो कम हुई ही नहीं वहां पर। (व्‍यवधान) कहां कम हुई है वहां पर फोर्स?

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): यह आप घोषणा कर दो कि कम नहीं होगी। यह एश्‍योर कर दो कि कम नहीं होगी। आप कर दीजिये कि कम नहीं होगी सेना।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): कहां कम हुई है? हो गई क्‍या? अभी हुई कहां है?

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): यह तो बतायें, आप कह दें। आप सर्वश्रेष्‍ठ विधायक चुने हुए हैं, माननीय सदस्‍य सर्वश्रेष्‍ठ विधायक चुने गये हैं, आप घोषणा कर दें केन्‍द्र की कांग्रेस की तरफ से कि वहां सेना कम नहीं की जाएगी। (व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): हाइपोथेटिकल विषय पर, यहां पर ऐसे विषय पर चर्चा करके सदन का समय जाया किया जा रहा है। (व्‍यवधान) कहां कम हुई है? हो गई क्‍या? (व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): होने के बाद क्‍या है, होने के बाद क्‍या बचा है?

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): क्‍या बात हो गई। काल्‍पनिक सवालों के ऊपर चर्चा हो रही है।

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): काल्‍पनिक नहीं है। आप घोषणा करो, आप घोषणा कर दो कि कम नहीं होगी। (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): ... और भाजपा का राष्‍ट्रीय नेतृत्‍व इतना कमजोर हो गया है क्‍या कि मदन राठौड़ जी को आगाह करना पड़ रहा है केन्‍द्र सरकार को? भारतीय जनता पार्टी का राष्‍ट्रीय नेतृत्‍व इतना कमजोर हो गया क्‍या कि वो आगाह करने की स्थिति में नहीं है और इनको आगाह करना पड़ रहा है? (व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): हां, इस देश के प्रत्‍येक नागरिका को करना पड़ रहा है। आप जैसे गैर-जिम्‍मेदार लोग बैठे हैं इसलिए करना पड़ रहा है। मेरे समझ में नहीं आया कि मैं कश्‍मीर की बात कर रहा हूं तो आपके पेट में मरोड़े क्‍यों उठ रहे हैं। आपको दर्द क्‍यों हो रहा है यह मेरे समझ में नहीं आया। या तो आप यह घोषणा कर दें, यह सदन को आश्‍वस्‍त कर दें कि कम नहीं की जाएंगी और कम नहीं की जाएगी तो मुझे कोई बोलने की आवश्‍यकता नहीं है। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: ये कैसे कह देंगे कि कम नहीं की जाएगी? ये कौन हैं कहने वाले? (व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): तो फिर ये मेरी बात को काट कैसे रहे हैं कि काल्‍पनिक सवाल है। मैं आगाह करने के लिए कह रहा हूं, मैं सावधान करने की बात कह रहा हूं, इसमें गलत कहां हो गया?

श्री अध्‍यक्ष: आपने आगाह कर दिया अपनी बात उठाकर के। डाक्‍टर जालमसिंह रावलोत।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कश्‍मीर का मुद्दा इतना संवेदनशील है कि उसमें ऐसा मखौल करना, यह तो उचित नहीं है। (व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़ (सुमेरपुर): यह बहुत शर्मनाक बात है। ये मखौल बताते हैं, यह शर्मनाक स्थिति है।

श्री अध्‍यक्ष: सुमेरपुर से आने वाले माननीय सदस्‍य, पर्ची के माध्‍यम से आपने आगाह कर दिया भारत सरकार को कि सेना की संख्‍या कम मत करो। खत्‍म हो गई बात। डाक्‍टर जालमसिंह रावलोत।

प्रो. बीरूसिंह राठौड़ (बनीपार्क): धारा 370 असली झगड़े की जड़ है उसको हटवाइये आप।

श्री जुबेर खान (रामगढ़): आप राज में रहे, 6 साल क्‍या किया? वहां भाड़ झोंका था क्‍या 6 साल? (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): कमाने-खाने के अलावा क्‍या किया आपकी सरकार ने? (व्‍यवधान)

प्रो. बीरूसिंह राठौड़ (बनीपार्क): ..... कश्‍मीर में फैलाना चाहते हैं इसलिए आपके मिर्च लग रही है बार-बार। (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): जमीन बेचने के अलावा 6 साल में किया क्‍या था?

प्रो. बीरूसिंह राठौड़ (बनीपार्क): दारूल इस्‍लाम बनाना चाहते हैं पूरे जम्‍मू कश्‍मीर को आप लोग। इसको दारूल इस्‍लाम बनाना चाहते हैं इसलिए मिर्च लग रही है आपके। (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): यह 370 किसको कहते हैं पता है आपको? 370 के नाम पर खाया-कमाया है, देश को बर्बाद किया है। (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): सारे सरकारी होटल बेच दिये 6 साल में। 6 साल में धारा 370 याद क्‍यों नहीं आई? हटाना चाहिए था फिर। (व्‍यवधान)

प्रो. बीरूसिंह राठौड़ (बनीपार्क): जम्‍मू कश्‍मीर दारूल इस्‍लाम नहीं बनेगा।

श्री अध्‍यक्ष: डाक्‍टर जालमसिंह रावलोत। बैठे-बैठे नहीं।

बाड़मेर-जैसलमेर में डैजर्ट नेशनल पार्क से उत्‍पन्‍न समस्‍याएं

डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं कि राजस्‍थान के सीमावर्ती जिले बाड़मेर एवं जैसलमेर की एक विशेष परिस्थिति है जिससे वहां पर सामान्‍य जन-जीवन पूरी तरह से अस्‍त-व्‍यस्‍त हो चुका है। आपके माध्‍यम से मैं राज्‍य सरकार और केन्‍द्र सरकार से निवेदन करना चाहता हूं कि 1981 का वर्ष हमारे बाड़मेर-जैसलमेर की उन सीमावर्ती पंचायत समितियों सम और शिव के लिए एक दुर्भाग्‍यपूर्ण वर्ष रहेगा कि केन्‍द्र सरकार और तत्‍कालीन राज्‍य सरकार जो संयोग से दोनों कांग्रेस की थीं, उन्‍होंने बिना किसी सोच-समझ के, बिना किसी प्रकार का विचार-विमर्श किये एक डेजर्ट नेशनल पार्क घोषित किया जिसके कारण से उस क्षेत्र में रहने वाले बाड़मेर के 39 और जैसलमेर के 34 गांवों, 3162 वर्ग किलोमीटर जमीन और 50 हजार की आबादी का सामान्‍य जीवन जीना दूभर हो गया है। जहां सरकार की विभिन्‍न विकास योजनाएं राजस्‍थान और देश में फलीभूत हो रही है पर यह 50 हजार की आबादी का क्षेत्र पूरी तरह से केवल डेजर्ट नेशनल पार्क की समस्‍या के कारण बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। अध्‍यक्ष महोदय, पिछले 50 सालों से राजस्‍थान की राजनीति में विशेष स्‍थान रखा हुआ है। इन्दिरा गांधी नहर को बाड़मेर की गडरा रोड क्षेत्र तक ले जाने का जो सपना संजोया गया था और बाड़मेर जिले को पानी पिलाने की योजना थी वह सपना खत्‍म होते दिख रहा है। डेजर्ट नेशनल पार्क के नियमों के कारण वहां न पानी की टंकी बन सकती,......

 

Lpm/akt/1320/1p/2.4.2007(1)

 

ट्यूबवैल बनाना तो दूर की बात है, वहां बिजली के खंभे नहीं लग सकते, वहां स्‍कूल नहीं बन सकती, वहां नया राजस्‍व गांव नहीं बन सकता, वहां आबादी भूमि का विस्‍तार नहीं हो सकता, वहां टेलीफोन की कोई सुविधा नहीं पहुंच सकती, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की 32 सड़कें स्‍वीकृत हो चुकी है, ठेके हो चुके हैं लेकिन उनका निर्माण कार्य रुका गया है। सर्व-शिक्षा अभियान की स्‍कूले सब जगह बनी रही हैं लेकिन उस क्षेत्र में नहीं बन सकती, इन सब के कारण उस क्षेत्र में रहने वाली भोली-भाली गरीब जनता को बहुत ही दुःख हो रहा है और जबरदस्‍त आक्रोश व्‍याप्‍त हो रहा है। माननीय मुख्‍यमंत्री जी और हमारे मंत्रिमण्‍डल के वरिष्‍ठ सदस्‍यों को पूरी जानकारी है और मंत्रियों ने स्थिति की सुध भी ली है लेकिन मैं आपके माध्‍यम से यह निवेदन करना चाहता हूं कि अभी केन्‍द्र सरकार के अंतर्गत अभी जो भारतीय वन्‍य जीव अधिनियम लागू है उसकी धाराओं के तहत कुछ ऐसी ग़लतफ़हमियाँ पैदा हुई है जिसके कारण एक तरह से नये दिशा-निर्देश की जरूरत है। व्‍यवहार में वो डेजर्ट नेशनल पार्क है लेकिन कागजों में वह केवल डेजर्ट नेशनल सेंक्‍चुरी  है, नियम यह कहते हैं कि सेंक्‍चुरी  के अंदर किसी भी प्रकार का विकास कार्य चल सकता है केवल जिले के वन अधिकारियों से अनुमति लेकर सभी प्रकार के विकास कार्य बिना किसी रोक-टोक के हो सकते हैं लेकिन दुर्भाग्‍य स्थिति यह है कि हमारे वन विभाग के अधिकारी उसको सेंक्‍चुरी  न मानकर उसको पार्क बता रहे हैं और पार्क बताए जाने से जो नियम है और सुप्रीम कोर्ट का जो हवाला दिया जा रहा है जिसके तहत ये सारे विकास कार्य रुके पड़े हैं, जिसके कारण जनता में इतना आक्रोश है कि यदि तुरन्‍त स्थिति को नहीं सँभाला तो अन्‍य परिणाम भी भुगतने पड़ेंगे।

मैं निवेदन करना चाहता हूं प्रतिपक्ष के माननीय नेताजी से कि हमने केन्‍द्रीय वन मंत्री जी को यह सारा विषय बता दिया है और हमारे सांसदगण इस विषय को केन्‍द्रीय स्‍तर पर उठा चुके हैं। केन्‍द्रीय वन मंत्री जी को निमंत्रण दिया जा चुका है कि वो इस क्षेत्र का दौरा करें। हमारे माननीय मंत्रिमण्‍डल के सदस्‍य माननीय मुख्‍यमंत्री जी के निर्देश पर तीन माननीय मंत्री वन मंत्री जी के नेतृत्‍व में पी डब्‍ल्‍यू डी मंत्री जी और जलदाय मंत्री जी तुरंत उस क्षेत्र का दौरा करने वाले हैं। मैं आपके माध्‍यम से माननीय वन मंत्री जी से एक जानकारी चाहता हूं कि एक तो वो क्षेत्र में प्रवास की जल्‍दी तारीख तय करें, दूसरा अभी जो राष्‍ट्रीय रोजगार गारंटी कार्यक्रम लागू हुआ है वह एक ऐसा कार्यक्रम है कि उस क्षेत्र की जनता जो वर्षों से अकाल भुगत रही है, जहां किसी प्रकार की कोई सुविधा नहीं थी और अभी चूंकि लोकतंत्र में यह सारी सुविधाएं मिलने की जो आशा की किरण बंधी थी उन सब के तहत विशेष रूप से राष्‍ट्रीय रोजगार गारंटी कार्यक्रम के तहत जो रोजगार मिलने की संभावनाएं थी उन भूखे लोगों को, उस पर भी अभी वन विभाग के अधिकारियों ने सभी सरपंचों को और अन्‍य पंचायत समिति और जिला परिषदों को यह पत्र भेजकर कहा है कि आप राष्‍ट्रीय रोजगार गारंटी कार्यक्रम डीएनपी क्षेत्र में नहीं कर सकते, बहुत दुःख की बात है कि नियमों में ऐसा कुछ नहीं है, केवल वन विभाग के अधिकारी अपनी दादागिरी कर रहे हैं और हमने कई बार मंत्री जी को बताया जब ये मंत्रीगण उस क्षेत्र का ट्यूर करेंगे तो निश्चित रूप से यह समस्‍या उनकी जानकारी में आएगी।

मैं निवेदन करना चाहता हूं कि उस समय जब 1981 में बन रहा था, अभी दो दिन पहले स्‍वर्गीय हो चुके इस विधानसभा के सदस्‍य जैसलमेर के पूर्व विधायक श्री चन्‍द्रवीरसिंह जी ने यह आग्रह किया था लेकिन केन्‍द्र की कांग्रेस सरकार और राजस्‍थान की तत्‍कालीन कांग्रेस सरकार ने यदि इस ओर गौर किया होता तो आज बाड़मेर-जैसलमेर के उन 50 हजार लोगों की यह बुरी नहीं होती। अध्‍यक्ष महोदय, इतना महत्‍वपूर्ण मुद्दा है, मैं आपके माध्‍यम से पूरे सदन और मंत्रिमण्‍डल के सदस्‍यों का खासकर प्रतिपक्ष नेता महोदय का भी ध्‍यान आकर्षित करना चाहता हूं कि राजनीति अपनी जगह है, कांग्रेस और बीजेपी का सवाल नहीं है, यह उस क्षेत्र का सवाल है और खासकर बॉर्डर की पूरे 70 गांव है जहां राष्‍ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि वहां यदि नहर बनती है, वहां यदि विकास के काम होते हैं तो निश्चित रूप से राष्‍ट्रीय सुरक्षा के हिसाब से लोगों को राष्‍ट्र की भावना से जोड़ने के हिसाब से यह एक बहुत महत्‍वपूर्ण और बहुत ही आवश्‍यक होगा कि डीएनपी की वहां कोई आवश्‍यकता नहीं है, डीएनपी 1981 में बनी है, एक पैसे का खर्चा चाहे कांग्रेस सरकार हो, चाहे राजस्‍थान की सरकार हो डेजर्ट नेशनल...

(समय समाप्ति सूचक घंटी)

पार्क के नाम पर एक पैसा खर्च नहीं किया गया है। माननीय शिवचरण जी माथूर साहब जो उस समय तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री जी थे, संयोग से वह भी विराजमान है मैं उनको भी निवेदन करना चाहता हूं कि ऐसी क्‍या जरूरत थी कि उस क्षेत्र में डेजर्ट नेशनल पार्क बनाया गया है। अब हम मिलकर के कांग्रेस के लोग, बीजेपी के लोग, कांग्रेस की सरकार, राज्‍य सरकार मिलकर के ऐसा कोई प्रस्‍ताव बनाये कि डेजर्ट नेशनल पार्क की वहां कोई जरूरत नहीं है, वह पार्क वहां से हटाये। वहां किसी प्रकार के कोई वन्‍य जीव नहीं रहते हैं केवल हिरण रहते हैं तो वैसे भी आज की तारीख में कोई मूर्ख ही होगा जो इन वन्‍य जीवों की हत्‍या करता होगा। कोई डेजर्ट नेशनल पार्क की वहां जरूरत नहीं है, नहीं तो जनता बीजेपी और कांग्रेस के नेताओं को उस क्षेत्र में घुसने नहीं देगी। अध्‍यक्ष महोदय, आपने समय दिया उसके लिए धन्‍यवाद। मैं चाहूंगा कि माननीय मंत्री जी इस महत्‍वपूर्ण मुद्दे पर हमको अवगत कराये।

श्री अध्‍यक्ष: धन्‍यवाद। वो बोल रहे हैं न, आप क्‍यों खड़े हो गये, नो-नो मंत्री जी खड़े हैं, नो-नो मंत्री जी खड़े हो गये हैं।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, वन्‍य जीव अधिनियम,1972 धारा 28(ए) के तहत कार्यवाही प्रारंभ की गई है इसको सैंक्चुरी  के लिए, धारा 18 से धारा 25 तक और 26(ए) में नोटिफिकेशन जारी किया जाता है। माननीय सदस्‍य ने बताया मैं निवेदन करना चाहूंगा कि उच्‍चतम न्‍यायालय ने याचिका संख्‍या 377/95 दिनांक 13.11.2000 और एक दूसरी याचिका नम्‍बर 202/95 दिनांक 14.2.2000 में यह आदेश पारित किया कि अनारक्षित करने में प्रतिबंध लगाया गया था और एक नियम और प्रक्रिया जारी की गई थी, यह जिस डैजर्ट नेशनल पार्क की बात कर रहे हैं माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वास्‍तव में इस मामले में जहां वानिकी कार्य हैं वहां पर किसी तरह का कोई प्रतिबंध नहीं है, जहां गैर वानिकी कार्य है उस में एक प्रक्रिया है जो स्‍टेट वाइल्‍ड लाइफ बोर्ड के द्वारा प्रस्‍ताव आते हैं और उन प्रस्‍तावों को गवर्नमेंट आफ इण्डिया को भेजा जाता है,  नेशनल वाइल्‍ड लाइफ बोर्ड को और सुप्रीम कोर्ट के पास यह प्रस्‍ताव जाते हैं और प्रस्‍ताव वहां पारित होने के बाद में वह योजना स्‍वीकृत की जाती है। जिस पेयजल की योजना के बारे में माननीय अध्‍यक्ष महोदय इन्‍होंने निवेदन किया, 600 वर्ग किलोमीटर यह इर्रिगेशन की योजना है, इस 600 किलोमीटर के अंदर यह इर्रिगेशन की योजना है अगर संपादित की जाती है तो यह राष्‍ट्रीय महत्‍व का नेशनल डेजर्ट पार्क है जो मात्र भारतवर्ष में ही नहीं विश्‍व में प्रख्‍यात है माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अभी कुछ समय पहले प्रिंसीपल सेक्रेटरी इर्रिगेशन, हमारे फोरेस्‍ट सेक्रेटरी और चीफ वाइल्‍ड लाइफ के बीच में एक मीटिंग हुई थी और उनसे आग्रह किया था कि अगर पेयजल योजनाओं के प्रस्‍ताव अनारक्षण प्रस्‍ताव अगर आप प्रस्‍तुत करते हैं तो निश्चित रूप से राज्‍य सरकार इस पर विचार करेगी। मैं एक और निवेदन करना चाहता हूं माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कि कुल सड़कों के 8 प्रस्‍ताव जिसमें से 3 प्रस्‍ताव है स्‍टेट वाइल्‍ड लाइफ बोर्ड ने भारत सरकार को स्‍वीकृति के लिए भेजे हैं और अब 7.4.2007 को आगे और स्‍टेट वाइल्‍ड लाइफ बोर्ड की मीटिंग है, उस मीटिंग में यह प्रस्‍तावों के बारे में निश्चित रूप से निर्णय किया जाएगा। जहां तक सीडीपी के कार्य है वो इस क्षेत्र के अंदर सीडीपी कार्य निश्चित रूप से संपादित हो रहे हैं और गैर वानिकी के जो भी कार्य हैं, प्रस्‍ताव आएंगे, उन प्रस्‍ताव पर चर्चा कर इसको भारत सरकार को वाइल्‍ड लाइफ बोर्ड को और सुप्रीम कोर्ट के प्रस्‍तुत कर निश्चित रूप से जो जस्टिफाईड होंगे, उसको कराने का निश्चित रूप से हम प्रयास करेंगे।

डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी राष्‍ट्रीय रोजगार गारंटी कार्यक्रम के लिए क्‍या करेंगे? उन्‍होंने क्‍लीयर नहीं किया।

श्री अध्‍यक्ष: पर्ची के ऊपर इस तरीके से वाद-विवाद का कोई सिस्‍टम नहीं है....

डा. जालम सिंह रावलोत (शिव): रोजगार गारंटी कार्यक्रम अध्‍यक्ष महोदय एक मई से लागू हो रहा है।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, नहीं, श्री जयराम जाटव। वैसे तो देखिए पानी की डिमाण्‍ड भी आ चुकी थी, फिर भी आपको मौका है कल, अकाल के साथ-साथ बिजली, अकाल और पानी की चर्चा करने का फिर मौका है, इसलिए पर्ची के माध्‍यम से आपको नहीं उठाना चाहिए था यह और आपको 15 लाख रुपए इस पानी पर ही खर्च करने पड़ेंगे यह भी मुख्‍यमंत्री जी ने कह दिया, उसके बाद भी कहना चाहे तो दो मिनट में आप अपनी बात कह दे। 

खैरथल में विभिन्‍न स्‍कीमों के अन्‍तर्गत पेयजल व्‍यवस्‍था

श्री जयराम जाटव (खैरथल): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं आपके माध्‍यम से कि अलवर जिले में मेरा क्षेत्र जो खैरथल है उस खैरथल विधानसभा क्षेत्र में चार तरह की स्‍कीमों से ग्रामीणों को पीने के पानी की व्‍यवस्‍थाएं हैं, चार स्‍कीमों के माध्‍यम से जल स्‍वाथ्‍य अभियांत्रिकी, सेक्रट्री फार्म, स्‍वजल धारा, जनता जल योजना, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी बैठे हैं इनका मैं आभार व्‍यक्‍त करना चाहता हूं, धन्‍यवाद प्रस्‍तुत करना चाहता हूं कि इन तीन सालों में माननीय मंत्री जी ने हमारे क्षेत्र में लगभग 500 हैण्‍डपम्‍प लगवाए हैं.... 

 

Bhs/akt/2.4.07/13.30/1q

 

और चालीस गांवों में जनता जल योजना के माध्‍यम से वहां बोरिंग करवाये, टंकियां बना दीं और कुछ जो आज से बीस साल पहले जन स्‍वास्‍थ्‍य अभियांत्रिकी विभाग के माध्‍यम से पीएचईडी के बोरिंग थे वो बोरिंग सूख गये थे वहां अधिकांश बोरिंगों की व्‍यवस्‍था माननीय मंत्री जी ने करा दी लेकिन सन् 2000 में सैक्‍टर रिफार्म स्‍कीम आयी थी जिसमें अलवर, सीकर, जयपुर और राजसमंद को लिया गया था।  माननीय अध्‍यक्ष जी, आपके माध्‍यम से, माननीय मंत्री जी बैठे हैं, अलवर जिले में सैक्‍टर रिफार्म में ऐसे-ऐसे गांव हैं जो कस्‍बे टाइप हैं जैसे बहादुरपुर, चिकाणी है वहां की जो कमेटी गांव के लोगों की बनी थी, गांव की उस कमेटी के माध्‍यम से गांव के लोगों को पीने के पानी की सेक्‍टर रिफार्म कमेटी बना दी, बोरिंग हो गये, टंकी तो नहीं बनी, सीधी सप्‍लाई के माध्‍यम से। लेकिन आज मुझे बड़े अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है उन कमेटी के जो पदाधिकारी हैं जो सेक्‍टर रिफार्म कमेटी गांव के लोगों की बनी थी उनकी लापरवाही के कारण आज कई गांवों में जैसे चिकाणी और बहादुरपुर के बिजली के 5-5,6-6 लाख रुपये के बिल बकाया हैं इसलिए बिजली बोर्ड ने उनके कनेक्‍शन काट दिये और आगे आने वाला जो समय है जो गर्मी का समय है वहां लोग पानी के लिए तरस रहे हैं।

मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि एक तो जो सेक्‍टर रिफार्म की स्‍कीम हमारे जिले में और हमारे क्षेत्र में है इसको कृपा करके हमारे जिले में से और हमारे क्षेत्र में से आप पीएचईडी में लेने का आप अभी आश्‍वस्‍त करें मुझे।

(      बजे)

(श्री रामनारायण विश्‍नोई, उपाध्‍यक्ष, पदासीन।)

दूसरा मैं एक निवेदन और करना चाहता हूं माननीय मंत्री जी कि हमारे क्षेत्र में आप लोगों ने जनता जल योजना के माध्‍यम से खूब काम कराये हैं लेकिन कुछ ऐसे गांव ऐसे हैं, जो बड़ी-बड़ी ढाणियां हैं उनकी आबादी पन्‍द्रह सौ नहीं है जो क्राइटेरिया पन्‍द्रह सौ का है और पन्‍द्रह सौ से कम की जो ढाणियां हैं उन ढाणियों को चाहे सिंगल फेस के माध्‍यम से इस तरह की व्‍यवस्‍था भी वहां करायें।

तीसरा मैं माननीय मंत्री जी, आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि जो बीस साल पहले या पच्‍चीस साल पहले पीएचईडी के बोरिंग हुए, पाइपलाइन डल गयी और टं‍की बना करके पानी की व्‍यवस्‍था ग्रामीणों को कर दी गई लेकिन बीस साल के बाद में गांव की जनसंख्‍या डबल हो गयी और वो टंकियां छोटी पड़ गयी या निष्क्रिय हो गई और कई जगह गांवों में पाइपलाइन चौक हो गयी। जैसे मैं आपको गिनाना चाहता हूं मेरे क्षेत्र में ही धासोली, खानपुरमेवात, कारोली, हरसोली, इस्‍माइलपुर, खैरथल, किशणवास, वासकृपाल नगर, पाटन मेवात, जाट का कोलगांव, नांगल, सालियार, जटियाला इनमें ये स्‍कीमें लगभग बीस-पच्‍चीस साल पुरानी स्‍कीमें हैं। वहां पाइपलाइन अधिकांश चौक हो चुकी है और वहां जो पानी की टंकियां हैं वो इतनी छोटी हैं कि पूरे ग्रामीणों को पानी नहीं मिल पाता है।  मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं, मैं तो आभारी हूं आप हरसौली में खुद करके आये और आज भी मुझे विश्‍वास है आज जो मैं अपनी पर्ची के माध्‍यम से मेरा मूल जो मुद्दा था वो बहादुरपुर का था चूंकि बहादुरपुर, चिकाणी में इन दो गांवों की तो सैक्‍टर रिफार्म की कई बार आपसे चर्चा की थी। अलवर जिले में सैक्‍टर रिफोर्म योजना है उस योजना को कृपा करके आप पीएचईडी में ले लें चूंकि अब ग्राम पंचायतों को आप देना चाहते हैं ग्राम पंचायतों के सरपंच अपने सिर क्‍यों फुड़ाएंगे जब सैक्‍टर रिफोर्म की कमेटी तरफ से चार-चार, पाँच-पाँच लाख रुपये के बिजली के बिल बकाया है। सरपंच लेने को तैयार नहीं हैं तो इस तरह की जो स्‍कीमें हैं उन स्‍कीमों को आप पीएचईडी में लेने की कृपा करें और जो ढाणियां और गांव जो जनता जल योजना के माध्‍यम से पन्‍द्रह सौ की जनसंख्‍या में नहीं आ रहे हैं उन छोटे गांवों को, ढाणियों को भी उनसे पानी की व्‍यवस्‍था करायें कृपया। आपने बोलने का मौका दिया, बहुत-बहुत धन्‍यवाद। जय भारत। 

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री संयम लोढ़ा।

श्री जयराम जाटव (खैरथल): माननीय उपाध्‍यक्ष जी, मंत्री जी से थोड़ा सा तो कहलवा दें। ...(व्‍यवधान)...

महावीर जयन्‍ती दिवस पर प्रतिबन्धित गतिविधियां

होने से समाज में उत्‍पन्‍न रोष

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जोधपुर के प्रसिद्ध विधिवेत्‍ता और सोवियत लैंड नेहरू पुरस्‍कार से सम्‍मानित मरुधर मृदुल की कविता की दो पंक्तियां मुझे याद आ रही हैं,

कितना भी हो तम, आओ मशाल लें।

इस पर भी जो न मिटे तम, आओ हम खुद ही जलें।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, 2600 साल पहले हमारे देश में जब कर्मकांड का दौर था, हिंसा का दौर था, पशु बलि और नर बलि का दौर था ऐसे वातावरण से व्‍यथित होकर जिस व्‍यक्ति ने खुद की इच्‍छाओं पर विजय का संकल्‍प लिया और संयम का वृत धारण किया और अपने तप के बूते, अपनी सहनशक्ति के बूते वर्द्धमान नाम होने के बावजूद दुनिया ने उन्‍हें महावीर नाम दिया। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, समाज को हिंसा से दूर करके समाज में एक नैतिक बल जागृत करना, अहिंसा की भावना का विस्‍तार करना और हर आत्‍मा को इस बात का अहसास कराने का संकल्‍प लेकर जिन्‍होंने अपनी संन्‍यास यात्रा शुरू की कि हर आत्‍मा में परमात्‍मा बनने का सामर्थ्‍य है और वो मोक्ष की सोच इस भारतीय समाज को जिन्‍होंने दी जिस पर चल कर हजारों-हजार लोगों ने उस जीवनशैली को उस धर्म दर्शन को अपनाया और अपनी मुक्ति के लिए उसको एक रास्‍ते के रूप में स्‍वीकार किया। 

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इन 2600 सालों के दौरान हर शासन व्‍यवस्‍था ने सालों-साल भगवान महावीर की देशना को जन-जन तक पहुंचाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता हमेशा दर्शायी, दिखायी लेकिन मुझे बहुत खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, कि अभी परसों 31 मार्च को चैत्र सुदी, तेरस को भगवान महावीर का जन्‍म दिवस था और पूरे राजस्‍थान में जैन धर्मावलंबियों ने उनके जन्‍मदिवस के निमित्‍त अपने विभिन्‍न कार्यक्रम रखे थे। सरकार ने भी भगवान महावीर की देशना, सरकार में बैठे हुए लोग भी जिस-जिस रूप में प्रभावित रहे हैं समय-समय पर उन्‍होंने व्‍यवस्‍था की है और माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपकी जानकारी में होगा उन्‍हीं के बताये हुए अहिंसा के रास्‍ते पर चल कर हमारे मुल्‍क ने स्‍वाधीनता संग्राम को लड़ा, महात्‍मा गांधी ने अहिंसा के मत को आगे बढ़ाया और मद्यनिषेध का सोच भी मैं यह सोचता हूं कि भगवान महावीर की देशना का ही परिणाम था लेकिन इस 31 मार्च को राजस्‍थान की इस भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने न केवल जैन धर्मावलंबियों को बल्कि अहिंसा, शाकाहार और इस तरह के नैतिक मूल्‍यों में विश्‍वास रखने वाले हर राजस्‍थानवासी के मन को आहत किया। 

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं कि उदयपुर जहां से हमारे माननीय गृह मंत्री निर्वाचित होकर आते हैं वहां मत्‍स्‍य विभाग ने केजड़ तालाब से क्‍योंकि केजड़ तालाब में मछलियों के आखेट पर प्रतिबंध है। पिछले सोमवार को माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, म‍छलियां जब्‍त की थीं और इस राजस्‍थान सरकार को उन सूखी मछलियों को पाँच दिन रखने के बाद नीलामी के लिए जो दिन मिला वो महावीर जयंती का दिन था।  महावीर जयंती के दिन पाँच दिन उन मछलियों को रखने के बाद महावीर जयंती के दिन मत्‍स्‍य विभाग ने उन सूखी मछलियों को नीलाम करने का घृणित काम करके राजस्‍थान के ही नहीं हिन्‍दुस्‍तान के लाखों जैन धर्मावलंबियों को ठेस पहुंचाने का काम किया है। 

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं कि इसी तरीके से कोटा जिले के कैथून में मांस की दुकानें खुली हुई थीं और जैन मुनि चिन्‍मय सागर को व्‍यथित होकर वहां सड़क पर बैठना पडा क्‍योंकि रोक होने के बावजूद सरकारी आदेश होने के बावजूद प्रशासन ने किसी जगह पर, किसी बात की कोई परवाह नहीं की। इसी तरीके से नागौर जिले की कुचामन सिटी में माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, महावीर जयंती का जुलूस निकल रहा था और रास्‍ते में गंदगी और मरा हुआ जानवर तक पडा हुआ था और नतीजा यह हुआ कि चार घंटे तक सैकड़ों की तादाद में महिलाओं और जैन मुनि जो साथ थे वो कुचा‍मन सिटी के अन्‍दर वहां रास्‍ते के अन्‍दर धरने पर बैठे रहे और मैंने टीवी पर, ईटीवी पर वहां के अतिरिक्‍त जिला कलेक्‍टर का इंटरव्‍यु देखा, जिस बेशरमी के साथ उनके फेस एक्‍सप्रेशन थे, मुझे बहुत दुःख है माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, एक साधु जिसने अपना सब कुछ छोड़ दिया वो तो निर्वस्‍त्र रहता है। हाथ में सिर्फ एक लकड़ी का वो होता है और एक मोर पंखी का वो होता है क्‍या हम उनकी भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचे इस बात की भी व्‍यवस्‍था नहीं कर सकते

 

कैलाश/    2.4.07  13.40  (1)   2a

 

और इतना ही नहीं उपाध्‍यक्ष महोदय, जयपुर शहर में भी अंबाबाडी, ट्रांसपोर्ट नगर इन सारी जगहों पर रोक होने के बावजूद शराब की दुकानें खुली रहीं, धडल्‍ले से शराब बिकती रही । अजमेर में महावीर जयंती के दिन ही एक शराब की दुकान के उद्घाटन का प्रयास किया गया लेकिन लोगों ने रोका और लोगों के रोकने के बाद उपाध्‍यक्ष महोदय, धोलाभाटा रोड स्थित नागबाई हरिजन बस्‍ती के सामने ड्राइ डे लिखा हुआ है लेकिन शराब की दुकान के उद्घाटन की कोशिश कर रहे थे स्‍थानीय लोगों ने विरोध किया तो उद्घाटन नहीं हो सका । उपाध्‍यक्ष महोदय, धोलपुर में क्‍योंकि शराब के नये ठेके हो रहे हैं तो उन पुराने दुकानदारों की शराब कैसे ज्‍यादा से ज्‍यादा बिके, धोलपुर में तो आबकारी विभाग के अधिकारी ने कमाल किया शराब की दुकान पर जाकर शराब की दुकान को तो सील किया नहीं उसके पास जो जनरल स्‍टोर है उसको जाकर सील कर दिया जिससे कि जनरल स्‍टोर तो बंद रहे और पास की शराब की दुकान से शराब बिकती रही । उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से यह निवेदन करना चाहता हूं यह सरकार धर्मानुरागियों की सरकार है । यह सरकार धर्म में बहुत अटूट आस्‍था रखने वालों की सरकार है । मैं समझता हूं और गृह मंत्री जी मैं खास तौर से आपके नोटिस में लाना चाहूंगा आपके उदयपुर शहर में आज शाम को सर्वऋतु विलास महावीर जयंती समारोह समिति की बैठक है जो इस बात पर फैसला करेगी कि जो लोगों की भावनाओं को आहत करने का और ठेस पहुंचाने का काम इस सरकार ने किया है और जिन अधिकारियों ने किया है उसके खिलाफ संघर्ष की क्‍या रूप रेखा तय की जाये । इतना ही नहीं उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं कोटा में भी श्री आदिनाथ दिगम्‍बर जैन मंदिर सेवा समिति की आज रात को 8 बजे बैठक हो रही है । जिसमें इस बात की रूपरेखा तय की जायेगी कि यह पूरे राजस्‍थान में जिस तरह का घटनाक्रम सामने आया है और जिस ढंग से भगवान महावीर के जन्‍म दिवस के प्रति इस सरकार ने अनादर का भाव जाहिर किया है उसका कैसे जवाब दिया जाये । उपाध्‍यक्ष महोदय, आपकी जानकारी में होगा इसी 12वीं विधान सभा में मैंने आबकारी नीति के मसले पर सरकार का ध्‍यान आकर्षित किया था । जब इस सरकार ने शराब के ठेकेदारों के दवाब में आकर 7 शुष्‍क दिवस से घटाकर 3 शुष्‍क दिवस कर दिये थे । उसमें महावीर जयंती का भी शुष्‍क दिवस इस सरकार ने काट दिया था लेकिन हमारे विरोध करने पर इस सरकार को वापस 3 से बढाकर 4 शुष्‍क दिवस करने पडे और आज 4 शुष्‍क दिवस चल रहे हैं । मैं आपके माध्‍यम से सरकार का ध्‍यान आकर्षित करना चाहूंगा और मैं चाहूंगा हमारे गृह मंत्री जी भी एक धर्मानुरागी व्‍यक्ति है । समय समय पर धर्म प्रचार के कार्य में उनका भी पूरा सहयोग मिलता रहता है और आज जिन जिन अधिकारियों ने आपके, खास तौर से आपके अपने उदयपुर शहर में भी जिस ढंग का आचरण किया है गृह मंत्री जी मैं आपसे यह अपेक्षा करता हूं कि हमारे साधु संतों और जिन धर्मावलंबियों की भावनाओं को आघात लगा है आप सरकार की तरफ से उन सब के खिलाफ कठोर कार्यवाही की घोषणा करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि भविष्‍य में इस तरह की घटनाओं की कोई पुनरावृत्ति नहीं हो ।

श्री उपाध्‍यक्ष: धन्‍यवाद ।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य ने जो विषय उठाया वह अहिंसा के और भगवान महावीर को सम्‍मान देने वाले हर व्‍यक्ति के मन में इस बात का एक तरह से दुःख है इन घटनाओं को सुन कर और देख कर । राज्‍य सरकार किसी की भी रही हो लेकिन भगवान महावीर का सम्‍मान करने की दृष्टि से राज्‍य सरकार की तरफ से महावीर जयंती के दिन ड्राइ डे भी है और मांसाहार की बिक्री भी उस दिन बंद है । यह आदेश आज से नहीं बहुत प्रारंभ से है । इसकी पालना करने की जिम्‍मेदारी वहां के प्रशासनिक अधिकारियों की है । मैं सोचता हूं कि कुछ तो शायद लोगों के ध्‍यान में इस बात को लगातार रिपीटिशन नहीं होने के कारण से, समय पर सूचना नहीं जाने के कारण रूटिन में व्‍यक्ति महावीर जयंती के दिन ड्राई डे है यह उसके दिमाग से कई बार ओझल हो जाता है । एक तो यह है कि सरकार अब जब भी ड्राई डे होता है उसके समय के पहले प्रशासनिक आदेश निकाल कर वहां के सारे के सारे लोगों को भी इसकी बराबर सूचना समय से चार पाँच दिन पहले जरूर दे ताकि उनसे जाने अनजाने भी यह गलती नहीं हो । दूसरा जिन प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्‍मेदारी थी जैसे उदयुपर की घटना, निश्चित रूप से उदयपुर की घटना हुई है । कलेक्‍टर को स्‍वयं को मैंने इसकी जिम्‍मेदारी दी है क्‍योंकि यहां की नगर परिषद की जिम्‍मेदारी थी कि वहां किसी भी प्रकार की कोई मांस की दुकान न खुले, उस दिन प्रतिबंध रहे, निश्चित रूप से वह जांच कर के जिस अधिकारी की जिम्‍मेदारी थी और जिसने इसमें लापरवाही की उसके विरुद्ध कार्यवाही होगी । इसी तरह से विभूति सागर जी ने जैसे एक दम सड़क पर ही बैठ गये और कई घंटों तक वह वहीं बैठे रहे कुचामन में, केवल एक मात्र छोटी सी बात थी जिस सड़क से इस जुलूस को गुजरना था उस पर इतनी गंदगी थी, वह इस तरह से गंदा था कि उनका मन उद्वेलित हो गया और उस जुलूस में ही वह उस जगह बैठ गये । निश्चित रूप से सरकार इस बारे में भी जहां भी इस प्रकार के कार्यक्रम हो कम से कम उस रास्‍ते की सफाई और उसकी व्‍यवस्‍था भी ठीक प्रकार से हो इसकी भी व्‍यवस्‍था निश्चित रूप से करेगी । मैं माननीय सदस्‍य के माध्‍यम से संपूर्ण राजस्‍थान के महावीर के प्रति अनंत श्रद्धा रखने वाले लोगों को यह आश्‍वस्‍त करता हूं कि जहां कहीं भी प्रशासनिक कमी रही है उस प्रशासनिक कमी को सुधारा जायेगा और जिसने जान बूझ कर गलती की है, तीन चार जगहों की घटनाएं इस प्रकार की आई है, हो सकता है और कई जगह इस प्रकार की घटनाएं घटी होगी कि जहां शराब की दुकान किसी कोने में खुली रह गई होगी लेकिन जो केथुन के बारे में कहा उसमें केवल एक दुकान के बारे में शिकायत आई थी उसका घर भी वहीं है और उसकी दुकान भी वहीं पर है, वह खुली हुई थी और वह एक समाज विशेष का जो मांसाहार का व्‍यापार करता है उसके कारण वह विषय ध्‍यान में आया लेकिन उसकी दुकान और मकान का एक ही रास्‍ता था जिसके कारण से वह खुला था उसको भी हमने दिखाया है । फिर भी मैं आश्‍वस्‍त करता हूं और एक बार आदेश को दुबारा हम सरकार की तरफ से सभी जगह भेज कर, केवल इसी दिन नहीं जो बाकी ड्राई डे है, जहां मांसाहार का उपयोग उस दिन नहीं हो सकता, या उनकी दुकानें नहीं खुल सकती है उनको ठीक तरह से उसकी पालना हो उसकी भी व्‍यवस्‍था के लिये दुबारा सबको सूचित करेंगे और लोगों के मन में भी इस बात की किसी न किसी मीडिया के माध्‍यम से भी यह आये कि आज का दिन ड्राई डे है, कई बार जैसे मछली वाली आपने जो बात कही कि मछली पकडी थी, कई दिनों पहले पकडी थी लेकिन उसकी नीलामी, या तो नीलामी करने वाले को यह मालूम नहीं था कि आज महावीर जयंती के दिन यह जो कई दिनों से पकडी हुई मछली है उसको नीलाम की जाये या नहीं की जाये, गलती हुई है उससे उसका भी परिमार्जन करने के लिये जहां भी जिस अधिकारी के लेवल पर इसका ध्‍यान रखना चाहिये वह शायद इस कारण से नहीं रहा कि वह महावीर जयंती को मानने वाला व्‍यक्ति नहीं था, उसको यह नहीं मालूम कि आज की तारीख और उसकें बेचने का दिन एक ही हो लेकिन कहीं न कहीं इसमें भूल जरूर हुई है वह भविष्‍य में न हो उसकी पुख्‍ता व्‍यवस्‍था कर के निश्चित रूप से ऐसे जो ड्राई डे आते हैं सरकार के माध्‍यम से भी और मीडिया के माध्‍यम से भी दो चार दिन पहले इस प्रकार का प्रचार रहे, किसी प्रकार की कोई गलती नहीं हो । उदयपुर में जो गलती हुई है उसमें जिन के खिलाफ कार्यवाही करनी है कलेक्‍टर को मैंने कल ही इसके बारे में निर्देशित कर दिया जिसकी भी गलती होगी उसके खिलाफ कार्यवाही होगी।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से गृह मंत्री जी का ध्‍यान सिर्फ इस तरफ आकर्षित करुंगा आप स्‍वयं एडमिट कर रहे हैं उसके लिये आपका साधुवाद है, आपका अधिकारी पाँच दिन पहले पकडी हुई मछलियों को नीलाम करने के बाद भी यह दैनिक भास्‍कर का स्‍टेटमेंट मैं कोट कर रहा हूं मछलियों की नीलामी करना आवश्‍यक था नहीं तो मछलियां सड जाती और राजस्‍व की भी हानि होती । तो पाँच दिन पहले कर लेता ।

श्री उपाध्‍यक्ष: फाइनेंशियल ईयर खत्‍म हो रहा था, साधारण सी चिंता कर रहा था।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): नहीं, उपाध्‍यक्ष महोदय, आप इस बात को इस तरह से साधारण रूप में नहीं ले सकते ।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): मछलियों को प्रिजर्व करने के लिये सोमवार को जब्‍त की ।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य वह नासमझी थी ।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): आप मेरी बात सुन लें । मच्‍छी चौडे में तो पडी रहती नहीं है । मच्‍छी को रखने के लिये निश्चित रूप से बर्फ लगाई होगी । मच्‍छी बिनाबर्फ के रह ही नहीं सकत, वह एक दिन में खराब हो जायेगी । आपने जब बर्फ लगाई थी सोमवार से लेकर शनिवार तक It is a major lapse. होम मिनिस्‍टर साहब, यह कोई साधारण बात नहीं है कि कौन क्‍या करेगा यह मनोवृत्ति जो हमारे अधिकारियों में बढती जा रही है कि हमने कर दिया जो कर दिया । एक दिन और उसको प्रिजर्व कर सकते थे, एक दिन पहले बेच देते आप । माननीय गृह मंत्री जी मैं आपको बताऊं कि इस मामले की गहराई यह है कि Fishes cannot be  preserved. जब तक आप पूरी तरह बर्फ नहीं लगाओगे मच्‍छी प्रिजर्व हो नहीं सकती है । मैं आपसे निवेदन कर रहा हूं कि यह कोई साधारण चीज नहीं है, यहाँ पशु पालन मंत्री जी भी विराजमान है, शायद फिशरीज भी इनके पास ही है, यह कोई साधारण चीज नहीं है You must take action. जब तक आप एक्‍शन नहीं लेंगे, और आप जो कह रहे हैं कि ड्राई डे के दिन पुलिस के नोलेज में रहता है कि ड्राई डे कौनसे हैं पर खुली रहती हैं । बदकिस्‍मती क्‍या हुई है कि रेवेन्‍यु के चक्‍कर में, वैसे तो पुलिस आडे दिन घूमती रहती है लेकिन इंटरफेयर्स की जो बात है उसके अंदर ड्राई डे में कम से कम आप यह एश्‍योर तो कर ले ....

 

ans/akt  13.15  2b    2.4.2007

 

होम डिपार्टमेंट का सकुर्लर निकलवा दे आप, ड्राई डे के दिन तो कम से कम यह चीजें नहीं होगी। Police can interfere in that. यह तो आप कर सकते हैं, ड्राई डे का सकुर्लर तो आप निकलवा सकते हैं। बाकी रोजमर्रा की दुकानों की चैक रोक दें आप क्‍योंकि वहां पुलिसिंग अपने आप होगी लेकिन ड्राई डे वाले में तो आप पुलिस को पाबंद कर सकते हैं कि वह इस चीज को देखे, यह मेरा आपसे निवेदन है।

श्री उपाध्‍यक्ष: यह तो है साहब..(व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री):सकुर्लर परमानेंट निकला हुआ है। महावीर जयंती के लिए, अपना जो पर्युषण पर्व होता है उसमें तो हर बार निकलता है लेकिन महावीर जयंती ड्राई डे का परमानेंट निकला हुआ है। जब भी महावीर जयंती होगी ड्राई डे है लेकिन वापस उसके स्‍मरण में न दिलाने के कारण से कॉमन आदमी के तो ध्‍यान में नहीं रह सकता। मैं सोचता हूं कि मछली वाली में जो बात आई, मैं माननीय मंत्री महोदय से कहूंगा कि यह जानते हुए कि महावीर जयंती है, जिस अधिकारी ने  भी उस दिन उसकी नीलामी की उसको विरूद्ध, वह अपने विभाग के अधिकारी के विरूद्ध कार्यवाही करें।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): अब बता दीजिए मंत्री जी, क्‍या कार्यवाही करेंगे ?

श्री उपाध्‍यक्ष: संबंधित अधिकारी की लापरवाही है साहब, कार्यवाही...(व्‍यवधान)

श्री प्रभुलाल सैनी (कृषि मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं व्‍यक्तिश: भी भगवान महावीर स्‍वामी और अहिंसा का कट्टर समर्थक हूं। मन से, वचन से, वाणी से निश्चित रूप से यह प्रयास करते हैं कि हमें भगवान महावीर स्‍वामी के सिद्धान्‍तों पर चलना चाहिये। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह जो घटनाक्रम है ,एक खेजड तालाब है, उदयपुर में सहाडा तहसील का है, यहां पर मछलियों का ठेका नहीं दिया जाता है लेकिन पिछले दिनों एक शिकायत प्राप्‍त हुई, 30 तारीख को    जैन समाज के कुछ  सदस्‍यों द्वारा  शिकायत की गई  कि इस तालाब में कुछ लोग मत्‍स्‍याखेट कर रहे हैं। इस पर हमारा एक दल, हमारे दो निरीक्षक और 4-5 आदमियों ने जाकर मौका निरिक्षण किया। निरिक्षण करने पर उस तालाब से कोई भी मछली वगैरह बरामद नहीं हुई, वहां मात्र टायर वगैरह जिसका वह उपयोग करते थे, लेकिन यह सूचना मिली कि वहां से 6-7 किलोमीटर ले जाकर थूर घाटी एक जलाशय है, उसके पेटे में वहां पर छोटी छोटी म‍छलियां ले जाकर  सूखवाकर इस प्रकार का वह काम करते हैं। वहां पर ढाई से साढे तीन क्विण्‍टल  सूखी मछलियां, छोटे छोटे बच्‍चे के रूप में थी वह सूखाई जा रही थी, वहां सूखी हुई थी और कुछ मछलियां 30 तारीख को लाकर शायद वहां पर सुखाने के काम में ली जा रही थी, विभाग ने उसको जब्‍त किया। जब्‍त करने के बाद निश्चित रूप से  (व्‍यवधान) ले गए जैसा फोटो अखबर में छपा है, मैंने भी पूरा देखा, बड़ा चिंता का विषय है। मैं सहमत भी हूं कि इस प्रकार का महावीर जयंती जैसे अवसर पर सम्‍पूर्ण , हमारे जो ड्राई डे घोषित किया इस प्रकार का नहीं होना चाहिये फिर भी सारे विषय को मैं अध्‍ययन करवा रहा हूं। निश्चित रूप से अधिकारी द्वारा इस प्रकार की जानबूझकर कार्यवाही की गई है, इसमें यह पायाजाता है कि उसने उदासीनता बरती है, निश्चित रूप से कार्यवाही करूंगा, सदन को यह आश्‍वस्‍त करना चाहता हूं।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): स्‍टेटमेंट पढ़कर सुनाया। घटना होने के बाद, घटना होने के बाद भी उसको रियलाइजेशन नहीं है। आप  समझ नहीं रहे है इस चीज को। (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आ जाएगा (व्‍यवधान) चीजें ध्‍यान में रखी जाएगी। संबंधित अधिकारी की लापरवाही....

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): उपाध्‍यक्ष महोदय, आप अधिकारी का स्‍टेटमेंट पढि़ए, घटना होने के बाद भी वह क्‍या कह रहा है। (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: कंसीडर किया जाएगा..(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): कंसीडर क्‍या, आप कार्यवाही की बात करिये। मंत्री जी, आप कार्यवाही की घोषणा करो। जैसा गृहमंत्री जी ने आपसे कहा है, आप कार्यवाही की घोषण करो।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): क्‍या दिखवाओगे आप, इसमें क्‍या दिखवाओगे ?

श्री उपाध्‍यक्ष: कार्यवाही करने का..(व्‍यवधान)

श्री प्रभुलाल सैनी (कृषि मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, सदन में  कहने मात्र से ही ऐसा करना पड़ेगा या फलां आदेश, ऐसा नहीं है, निश्चित रूप से कार्यवाही होगी यह मैं सदन के बीच में कह रहा हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: कह दिया, आपने कह दिया।

श्री प्रभुलाल सैनी (कृषि मंत्री): एक बार विषय के प्राथमिक तथ्‍यों को हमको देखना होगा।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मंत्री जी यह पूरे राजस्‍थान के जैन समाज में आपकी सरकार की धज्जियां उड़ा रहा है यह स्‍टेटमेंट। आप समझने की कोशिश कीजिए, आपको रियलाइजेशन नहीं है इस बात का ? ( व्‍यवधान)

श्री प्रभुलाल सैनी (कृषि मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, यह जैन समाज की जो चर्चा हो रही है,  जैन समाज किसी के बाप की बपौती नहीं है। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय (व्‍यवधान) जैन समाज उसका है जो इसको धारण करता है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): कमाल कर रहे हैं आप। अगर आपको नहीं करना है तो आप बैठ जाइये।

श्री प्रभुलाल सैनी (कृषि मंत्री):जो भी इसको धारण करता है, मैं भी जैन समाज धारण करता हूं तो मैं भी जैन समाज का हूं..(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: यह तो जैन समाज को मानने वाले हैं।

श्री गोविन्‍द राम मेघवाल (नोखा): बहस करवा रहे हैं आप यह गलत परम्‍परा डाल रहे हैं। पर्ची के आधार पर बहस करवा रहे हैं।

श्री उपाध्‍यक्ष: बहस नहीं हो रही।

श्री गोविन्‍द राम मेघवाल (नोखा):बहस ही हो रही है। (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: कृपया स्‍थान ग्रहण कीजिए, बहस नहीं है।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): उपाध्‍यक्ष महोदय, यह घोर आपत्तिजनक बात है। एक घटना इस तरह की होने के बाद भी अधिकारी को रियलाइजेशन नहीं है कि उसने क्‍या किया (व्‍यवधान) मंत्री जी कह रहे हैं मैं दिखवा लूंगा, क्‍या दिखवा लेंगे, आप क्‍या दिखवा लेंगे ? (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, कार्यवाही करने का आश्‍वासन..(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): नहीं उपाध्‍यक्ष महोदय । गृहमंत्री जी ने एडमिट किया  कि सरकार कार्यवाही करेगी तो बताइये क्‍या कार्यवाही करेंगे आप ।

श्री उपाध्‍यक्ष: इससे ज्‍यादा आप क्‍या चाहत हैं? श्री गोपाल बाहेती।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मैं चाहता हूं कार्यवाही। माननीय सदस्‍य से पूछूंगा क्‍या माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय (व्‍यवधान) राजस्‍थान के लाखों लोगों की, हिन्‍दुस्‍तान के  लाखों लोगों की भावना को इस सरकार ने आघात पहुंचाया। क्‍या कहना चाहते हो आप ? (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): ऐसे नहीं चल सकता। सरकार को कार्यवाही की घोषणा करनी पड़ेगी। यह घटना होने के बाद भी इस तरह का वक्‍तव्‍य दे रहा है अधिकारी। शर्म की बात है यह सरकार के लिए। क्‍या दिखवायेंगे आप ? (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, सब चीजें ध्‍यान में रखकर कार्यवाही की जाएगी, इससे ज्‍यादा आप क्‍या चाहते हैं ?

श्री ज्ञानचन्‍द पारख (पाली): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जब अधिकारी यह एडमिट कर रहा है कि उसने यह किया फिर कार्यवाही करने में  देरी क्‍यों कर रहे हैं, कार्यवाही करनी चाहिये। खुद मान रहा है कि यह  कर दिया मैंने, वह खुद मान रहा है तो फिर अपन लेट क्‍यों करें।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

श्री ज्ञानचन्‍द पारख (पाली): जब कार्यवाही करनी है तो तत्‍काल कार्यवाही होनी चाहिये। मेरा बिल्‍कुल (व्‍यवधान) मंत्री महोदय, मेरा आग्रह है यह लाखों करोड़ों लोगों की आस्‍था का सवाल है। महावीर जयंती के पवित्र दिन पर अपनी सरकार के कार्यकाल में यदि कोई मच्छियों की नीलामी कर दे यह हमारे लिए शर्म की बात है, हमारी सरकार के लिए शर्म की बात है। इसलिए मेरा मंत्री महोदय से विनम्र निवेदन है कि इसमें आप देरी मत करो। अधिकारी ने जब एडमिट कर लिया, इस बात को एडमिट कर लिया, उसने स्‍वीकार कर लिया, वरना खराब हो जाती। (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: सही बात है आपकी।

श्री ज्ञानचन्‍द पारख (पाली): देरी क्‍यों करें अपन।

श्री उपाध्‍यक्ष: उसके लिए नोटिस देना पड़ेगा, जवाब लेना पड़ेगा, कार्यवाही होगी माननीय सदस्‍य।

श्री ज्ञानचन्‍द पारख (पाली): कब होगी कार्यवाही? (व्‍यवधान) जब मान रहे हैं कि गलती उसने कर दी, जब उसने स्‍वीकार कर लिया, कार्यवाही कर लो (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आप जानते हैं...(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): वह बेशर्मी कर रहा है, करने के बाद भी बेशर्मी से  कह रहा है कि हमारा रेवेन्‍यू लोस होता। (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: कोई गलती करेगा वह भुगतेगा।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): करो ना, भुगताओ फिर, क्‍या बात हुई फिर।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): आपको निर्देश देना चाहिये अधिकरी के खिलाफ  तत्‍काल  कार्यवाही की जाए, इसने कहा मैंने मछलियां बेची रेवेन्‍यू का लोस हो जाता।

श्री उपाध्‍यक्ष: एडमिट हो गई।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): यह देखिये, बिना कपड़ों के लोग बैठे है वहां सड़को के ऊपर। आप क्‍या चाहते हैं पूरे राजस्‍थान में लोग बैठे इस तरीके से। पूरे राजस्‍थान के लोग सड़क पर आए यह चाहते हैं आप ?

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): सरकार को निर्देश देना चाहिये ऐसे अधिकारी के खिलाफ तत्‍काल कार्यवाही की जाए।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): आसन की तरफ से निर्देश देना चाहिये। (व्‍यवधान)

श्री ज्ञानचन्‍द पारख (पाली): तत्‍काल कार्यवाही हो ।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): आपको तत्‍काल घोषण करनी चाहिये उसका निलम्बित किया जाता है। 

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): सस्‍पैण्‍ड करो उसको (व्‍यवधान) यह क्‍या बात हुई।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): उपाध्‍यक्ष महोदय, अब एडमिटेड फेक्‍ट्री के अधिकारी ने गलती की और अधिकारी बैठा हुआ है क्‍या वह जांच को प्रभावित नहीं करेगा ? माननीय मंत्री जी मैं विश्‍वास करता हूं कि आप अहिंसा के पुजारी हो लेकिन महावीर जंयती के दिन ऐसा कांड हो जाए, गृहमंत्री जी ने साफ कहा है, माननीय सदस्‍य कह रहे है, पारख साहब कह रहे है वह अधिकारी वही बैठा हुआ है, उसके खिलाफ आप कार्यवाही करने की बात करते हो तो (व्‍यवधान) सदन में जब कोई चीज उठ गई तो माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय मेरा तो आपके माध्‍यम से अनुरोध है मंत्री जी उसको वहां से हटाने की कार्यवाही(व्‍यवधान) सज़ा आप क्‍या देंगे यह आप जाने, कृपया करके आप तो उनके शिष्‍य हो जो वास्‍तव में अहिंसा के पुजारी है, कृपया करके कुछ न कुछ बोलिए। सदन का मामला है, सदन की भावना को समझिये और ऐसे मामलों में आइंदा से अधिकारियों में डर बैठे, यह काम आप कर दीजिए।

श्री उपाध्‍यक्ष: फिर कह दी बात, माननीय सदस्‍य।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): आपकी सरकार यह चाहती है राजस्‍थान में एजीटेशन हो, उसके बाद आप कार्यवाही करें तो आप वह बता दो। (व्‍यवधान) हम ऐसे नहीं करेंगे।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आपने विस्‍तृत से कह दिया।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): मैंने विस्‍तृत से कहा है, कार्यवाही नहीं होगी जब तक मैं बैठूंगा नहीं। उपाध्‍यक्ष महोदय, बाहर निकाल दो भले ही आप मुझे, मैं नहीं बैठूंगा। (व्‍यवधान) दोनों मंत्रियों ने जवाब दे दिया। कार्यवाही होगी।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): कार्यवाही करनी पड़ेगी सरकार को। (व्‍यवधान) आप दबाव डाल रहे हैं।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): संयुक्‍त उत्‍तरदायित्‍व है। गृहमंत्री जी बोले, गृहमंत्री जी आप स्‍वंय इस बात को मानते हैं, तो संयुक्‍त उत्‍तरदायित्‍व पर ही बता दीजिए, एक्‍च्‍युअल घोषणा कर दीजिए, बात खतम हुई। (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य बीच में नहीं।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मछली को प्रिजर्व एक दिन ज्‍यादा कर सकता था, एक दिन पहले डिस्‍पोज कर सकता था। यह काम नहीं करके गलती की(व्‍यवधान) इश्‍यू यह नहीं है, वह एक दिन ज्‍यादा कर सकता था, एक दिन पहले कर सकता था, यह काम नहीं किया यह प्राइमाफेसी गलती रह जाती है (व्‍यवधान) क्‍या तकलीफ है।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): मंत्री जी ने बताया कि म‍छलियां छोटी छोटी थी उनको सूखा रखा था, प्रिजर्व करने वाली बात नहीं है ।(व्यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): फिर तो और सीरियस बात है, सूखी मछलियों को ....(व्‍यवधान)

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): सूखी मछलियां तो एक दिन और रख सकते थे।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): फिर तो अब और  भी गम्‍भीर है, अगर मच्‍छी सूख गई डाक्‍टर साहब, मैं  वही आपसे कह रहा हूं, आप तो प्रोफेसर है, डाक्‍टर है, प्रिजर्व की हुई मछली एक दिन बाद कौनसी आफत आगई थी । अगर सूखा दी गई थी , सूखी हुई मच्‍छी की लाइफ वैसे भी ज्‍यादा है, यह कहकर तो, मेरी आपसे गुजारिश है, आप जिद में न पड़े, कृपया आप जिद में न पड़े, एक मैसेज जाएगा ..(व्‍यवधान) 

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा):Suspension is no punishment. You can announce the suspension. Suspension is no punishment.

 

दुर्गा/चौहान 020407 1400 2c

 

फाल्‍ट नहीं हो तो वापस लेना आप। सस्‍पेंशन में क्‍या तकलीफ है। उसमें क्‍या तकलीफ है आपको।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): अगर डिटेल इंक्‍वायरी में आपको लगता है तो आप बहाल कर देना। यह तो प्राइमा फेसी सस्‍पेंशन का मामला है। आगे आपकी मर्जी है। आप यदि जैन मत के मामने वाले हो, जो अपमान हुआ है इससे, और वह भी महावीर जयन्‍ती के दिन। आप जैन नहीं है, आप जैन धर्म के....(व्‍यवधान) सुनिये, एक बात सुनिये आप। (व्‍यवधान) मन, वचन, कर्म कह रहे हैं तो अगर आप होते ना तो आप यह जिद नहीं करते। आप सस्‍पेंड करिये। आपके इतने वरिष्‍ठ सदस्‍य हैं, पारख साहब, यहां बैठे हुए वह कह रहे हैं। सभी लोग कर रहे हैं, यहां पर सभी लोग कह रहे हैं, आप इसके सस्‍पेंशन की घोषणा करेंगे इससे आप का कद ही बढ़ेगा। इससे और कुछ नहीं होने वाला है, आपका कद बढ़ेगा।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): गृह मंत्रीजी कह रहे हैं, गृह मंत्रीजी को कहने दें।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): मैंने शायद, उपाध्‍यक्ष महोदय, जिस समय बात कही थी, मैंने उदयपुर के दोनों कैसेज, जो मांस की दुकान खुली हुई थी वह भी और यह मछलियां उसी दिन नीलाम कीं, उसको भी, दोनों के लिये मैंने जिला कलक्‍टर को पहले से ही बता दिया। उनकी जैसे ही रिपोर्ट आयेगी, जिस अधिकारी ने मांस की दुकान खुलाने के लिये जो जिम्‍मेदार था उसके खिलाफ भी कार्यवाही होगी और जिस अधिकारी ने यह इसी दिन नीलामी लगाई उसके खिलाफ भी कार्यवाही होगी। मैंने पहले ही बता दिया था। मैंने किसी अधिकारी का नाम नहीं लिया, न मैं यह जानता हूं कि इसकी जिम्‍मेदारी किसकी थी। क्‍योंकि मेरे सामने यह सारा विषय नहीं था। मैंने यह जरुर कहा, आपने तो आज विषय उठाया, मैंने कल ही, जैसे ही इस विषय की जानकारी हुई उसके साथ ही जिला कलक्‍टर को इन दोनों चीजों की जांच करके जो अधिकारी इसमें आते हैं उनके विरुद्ध निश्चित रूप से कार्यवाही होगी। माननीय मंत्रीजी से भी यही, क्‍योंकि इनके विभाग का था तो उसके बारे में वह, लेकिन मैंने जांच दोनों की कलक्‍टर को दे दी पहले कि वह इसकी तुरन्‍त रिपोर्ट करें कि इसमें किस अधिकारी का जिम्‍मा होता है, जिसको इस बात को देखना था और जिसकी इस गलती के कारण से लोगों की भावनाओं को इस प्रकार से ठेस पहुंची है। यह मैं पहले कह चुका हूं।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मान्‍यवर, हाउस चल रहा है, हाउस चलने के बाद, यदि आप स्‍वयं इस बात से भलीभाँति सहमत हैं कि वहां दुकान खुली औरयह हुआ तो एक्‍शन लेने में कहां तकलीफ है। फिर हम किसका इंतजार कर रहे हैं। तो फिर हम किसका इंतजार कर रहे हैं। फिर हम एक्‍शन के लिये किसका इंतजार कर रहे हैं। 48 घण्‍टे हाँ गये, यह माननीय कटारिया साहब, आज के युग में इलेक्‍ट्रानिक मीडिया में, कोई टीवी पर आता है तो सरकार कोग्‍नीजेंस लेती है, प्रिण्‍ट मीडिया में आता है तो कोग्‍नीजेंस लेती है। आप स्‍वयं उदयपुर में थे, अख़बार में यह आ गया। आपके नोटिस में आ गया, फिर आज का दिन और 24 घण्‍टे निकल गये। मैं समझता हूं, हक एक गलत मैसेज अपने सरकारी अधिकारी को दे रहे हैं कि हम विधान सभा की प‍रवाह नहीं कर रहे हैं। मैं समझता हूं सुओ-मोटो आपके जैसे सेंसेटिव आदमी को तो खड़े होकर कहना चाहिए कि इमीडिएटली दोनों को सस्‍पेंड करते हैं। Suspension is not punishment. अगर वह गिल्‍टी नहीं हो तो वापस ठीक कर लें, लेकिन हम यह निर्णय कर लें कि नहीं साहब, विधान सभा में प्रतिपक्ष के सदस्‍यों ने प्रश्‍न उठाया इसलिये नहीं करेंगे तो मैं समझता हूं कि यह भी हमारी जो भावना है, वह ठीक भावना नहीं है। मैं फिर अनुरोध करुंगा आपसे कि आप मेहरबानी करके आप सदाशयता बढ़ायें, यह धार्मिक मामला है, और धार्मिक मामले में धर्म के लोगों की निष्‍ठा को, लोगों की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचे। यह हम सबकी जिम्‍मेदारी बनती है। इसलिये आपको खुद को खड़े होकर कहना चाहिए। और आप कलक्‍टर को कहोगे, कलक्‍टर को कहने के बाद एक्‍शन तो डिपार्टमेंट लेगा, डी.ओ.पी. लेगा। फिर होम मिनिस्‍टर के कहने से क्‍या होगा। आपने एक्‍शन ले लिया, एक्‍शन लेने के लिये तो आप कोम्‍पीटेंट नहीं हैं। एक्‍शन तो फिशरीज डिपार्टमेंट लेगा, दूसरा लेगा। मैं समझता हूं कि सदन में आपकी सामुहिक जिम्‍मेदारी मंत्रिमण्‍डल की है। न केवल होम मिनिस्‍टर के रूप में, एक जिम्‍मेदार मंत्री के रूप में आपको खड़े होकर कहना चाहिए कि हम तुरन्‍त उनको सस्‍पेंड करते हैं। फिर आपको लगे तो आप वापस ले लेना। लेकिन यह जो जिद कर रखी है सरकार ने, मैं समझता हूं कि कटारिया साहब, आप जैसे आदमी को, इस धार्मिक मामले में, मैं अभी भी याद दिलाना चाहता हूं आपको, आपको याद है जालोर का किस्‍सा, जालोर के किस्‍से के समय में आप विधान सभा में थे, हम तो विधान सभा में नहीं थे। हमने तो खाली सुना है, आप जब इतने भावुक हो गये थे जालोर वाली घटना में, आज आप भावुक क्‍यों नहीं हो रहे हैं। मंत्री बन गये इसलिये..।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): उस समय भी मंत्री थे।

श्री गोविन्‍द राम मेघवाल (नोखा): उपाध्‍यक्ष महोदय, क्‍या आप पर्ची पर उलाऊ कर रहे हैं क्‍या डिबेट। (व्‍यवधान) उपाध्‍यक्ष महोदय, क्‍या आप पर्ची पर डिबेट अलाऊ कर रहे हैं क्‍या? (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आप उस वक्‍त क्‍यों भावुक हो गये थे। लोग आज भी कोट करते हैं कि भैरोंसिंहजी शेखावत जैसे मुख्‍य मंत्री होने के बाद भी कटारियाजी इतने भावुक हो गये थे। आज भावुक होने की आवश्‍यकता ज्‍यादा जरुरी है कि सरकार के इतने... 24 घण्‍टे निकलने के बाद भी यदि हम कार्यवाही नहीं कर रहे हैं तो मैं समझता हूं यह ठीक नहीं है। 

श्री गोविन्‍द राम मेघवाल (नोखा): उपाध्‍यक्ष महोदय, आप गलत परम्‍परा डाल रहे हैं। (व्‍यवधान) उपाध्‍यक्ष महोदय, आप गलत परम्‍परा डाल रहे हैं। (व्‍यवधान) आप पर्ची पर कर रहे हैं। आप पर्ची पर डिबेट करवा रहे हैं। मंत्रीजी ने जवाब दे दिया और पर्ची पर आप डिबेट करवा रहे हैं।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मंत्री के जवाब से मतलब तो नहीं हुआ ना, जवाब का क्‍या मतलब हुआ। (व्‍यवधान) क्‍या हुआ जवाब का मतलब। (व्‍यवधान)

श्री गोविन्‍द राम मेघवाल (नोखा): नहीं, नहीं, पर्ची के अन्‍दर आप डिबेट कर रहे हैं। हम लोग बोलते हैं उस टाइम आप नियम लगाते हैं। (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): इन्‍होंने जवाब दिया, इनसे पूछिये।

श्री गोविन्‍द राम मेघवाल (नोखा): जब मंत्रीजी ने जवाब दे दिया, जोशीजी। (व्‍यवधान) आप पर्ची पर गलत परम्‍परा डलवा रहे हैं। (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मंत्रीजी का जवाब नहीं, हम एक्‍शन चाहते हैं। एक्‍शन चाहते हैं हम।

श्री गोविन्‍द राम मेघवाल (नोखा): एक्‍शन, मंत्रीजी ने जवाब दे दिया। आपके कहने से कैसे वह एक्‍शन कर लेंगे।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, बैठिये, बैठिये।

श्री गोविन्‍द राम मेघवाल (नोखा): मंत्रीजी ने जवाब दे दिया। यह काहे को बारबार धमका रहे हैं खड़े होकर। यह खड़े होकर कैसे धमका रहे हैं। (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): नहीं, आपका विषय नहीं है। मंत्रीजी जवाब देंगे, आप विराजें। (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, बैठिये आप।

श्री गोविन्‍द राम मेघवाल (नोखा):  आप गलत परम्‍परा डाल रहे हैं, उपाध्‍यक्ष महोदय। जो माननीय सदस्‍य खड़े हुए उनको 3 मिनट में बैठा दिया। पर्ची पर जब मंत्रीजी ने जवाब दे दिया तो ये बारबार क्‍यों धमका रहे हैं। मंत्रीजी ने जवाब दे दिया उस बात का।

श्री उपाध्‍यक्ष: मानननीय सदस्‍य, विराजिये।

श्री प्रभुलाल सैनी (कृषि मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह सारा मामला अहिंसा से जुड़ा हुआ है और निश्चित रूप से महावीर जयन्‍ती के उपलक्ष्‍य में ड्राई-डे के दिन इस प्रकार की घटनाएं होती हैं तो निश्चित रूप से अहिसां के सभी पुजारियों के मन में पीड़ा होती है। मैं सदन में यह घोषणा करना चाहूंगा कि निश्चित रूप से जिस अधिकारी ने यह स्‍वीकार किया है और ड्राई-डे के दिन उसने इस प्रकार का किया है तो निश्चित रूप से उसको निलम्‍बन की आज मैं घोषणा करता हूं, सस्‍पेंड करेंगे। और मैं यह भी सदन को जानकारी देना चाहूंगा कि इस मामले की एफ.आई.आर. दर्ज कराने के डाइरेक्‍शंस मैंने जारी कर दिये हैं। मुकदमा भी दर्ज होगा। निश्चित रूप से जितने भी दोषी व्‍यक्ति होंगे, सबके विरुद्ध कठोर कार्यवाही की जाएगी।

श्री उपाध्‍यक्ष: डाक्‍टर श्रीगोपाल बाहेती।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): उपाध्‍यक्ष महोदय, अब तो बात हो ही गयी, अब क्‍या बोलना, बात हो ही गई अब तो। इसी विषय पर मेरा स्‍थगन था, यह बात तो पूरी हो गई। लेकिन मैं इस बात को इस रूप में कहना चाहता हूं कि महावीर जयन्‍ती जैसे पावन अवसर पर यदि ड्राई-डे की खुली अवहेलना हो...।

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): अब क्‍या, जब विषय पूरा हो गया।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): मैं वही कह रहा हूं, मंत्री महोदय, मैं बात दूसरी कह रहा हूं, मेरा स्‍थगन प्रस्‍ताव था। मैं दूसरी बात कह रहा हूं कि महावीर जयन्‍ती के अवसर पर, ड्राई-डे की अवहेलना हो और मांस की बिक्री हो, इसमें कहीं न कहीं सरकार की कार्य मानसिकता, सरकार का उपेक्षापूर्ण व्‍यवहार यह बीच में आता है कि इतने खुले आम अजमेर, उदयपुर, नागौर, कोटा सब जगह यह हो।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, इस पर चर्चा हो चुकी ओर बहुत विस्‍तृत तरह से हो चुकी है। इसमें आगे कोई गुंजाइश नहीं है।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): एक मिनट, मेरी बात पूरी सुन लीजिये। नहीं, मैं यह कहना चाहता हूं कि ऐसे मौजूं अवसर पर, एक महावीर जयन्‍ती ही नहीं, और दिनों पर भी सरकार को इस बात की पुख्‍ता व्‍यवस्‍था करनी चाहिए कि आइन्‍दा के लिये इस प्रकार की घटनाएं न हों जिससे धर्म प्रेमी बंधुओं की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचे। मेरा कहना यह है।

श्री उपाध्‍यक्ष: आपकी भावनाओं का आदर किया जाएगा।

श्री प्रभुलाल सैनी (कृषि मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं कहना चाहूंगा कि यह भगवान महावीर जयन्‍ती का ही अवसर नहीं है। मैं तो कहता हूं कि पूरेसदन के लोगों को संकल्‍प लेना चाहिए कि इस प्रकार की अहिंसा के जो हम पुजारी हैं, हम सबको संकल्‍प लेना चाहिए कि इस प्रकार की हिंसा का कार्य कम से कम हम तो नहीं करें, सब मिलकर यह संकल्‍प...। (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): सरकार की ओरसे संकल्‍प रखवाओ आप, तैयार हैं।

श्री प्रभुलाल सैनी (कृषि मंत्री): ऐसे ही कर लो आप संकल्‍प।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): आप संकल्‍प लाएं, बूचड़खाने बंद करने का प्रस्‍ताव ला दो। (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): संकल्‍प रखवाओ, तैयार हैं हम।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): सरकार का यह संकल्‍प स्‍वीकार हो जायेगा।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): कम से कम जिन्‍होंने बोला है वह तो संकल्‍प ले लें कि हम पियेंगे भी नहीं और खाएंगे भी नहीं।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): हमने तो संकल्‍प लिया हुआ है। (व्‍यवधान) हमने तो संकल्‍प लिया हुआ है, न खाएंगे, न पियेंगे। (व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): यह संकल्‍प ले लीजिये।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): आप मत शुरू कर देना।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): माननीय मुख्‍य सचेतकजी, आप प्रस्‍ताव ले आएं। आप तो अहिंसा के पुजारी हो। कथनी और करनी में अन्‍तर मत लाओ। बूचड़खाने बंद करने का प्रस्‍ताव लाओ, हम साथ देंगे। (व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): अहिंसा के पुजारी से हिंसा करवा तो दी, और क्‍या चाहिए।

श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (गंगापुर): माननीय सदस्‍य, बैठिये, बैठिये। (व्‍यवधान)

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): हम साथ देते हैं, आप लाइये ना। हाथी कं दांते खाने के और, दिखाने के और हैं, लाओ प्रस्‍ताव आप।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, इस पर चर्चा समाप्‍त हुई, आप स्‍थान ग्रहण कीजिये।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): यह बूचड़खाने बंद करने का प्रस्‍ताव लाना चाहते हैं, हम साथ देंगे।

श्री उपाध्‍यक्ष: आपको सुझाव दिया है। मानें नहीं मानें, वह अलग बात है।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): हम साथ देंगे। मेरे विपक्ष की ओर से मैं आपको आश्‍वस्‍त करता हूं, आप लाइये। नहीं तो गुरुजी नाराज हो जाएंगे तो मत्रिमण्‍डल छिन जाएगा। आप प्रस्‍ताव लाइये। खड़े होकर बोलिये।

श्री गोविन्‍द राम मेघवाल (नोखा): बड़े-बड़े लोग, सारे मछली और मीट खाते हैं, 80 प्रतिशत यहां बोलने वालों में। यह काहे को इतना हल्‍ला कर रहे हैं, इसमें कौनसी प्रलय हो गयी है।

श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (गंगापुर): उपाध्‍यक्ष महोदय, अध्‍यक्ष महोदय ने मुझे अलाऊ किया था।

श्री उपाध्‍यक्ष: किस बात पर, किस बारे में। (व्‍यवधान)

श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (गंगापुर): अध्‍यक्ष महोदय ने मुझे अलाऊ किया था, पाइण्‍ट आफ इंफार्मेश्‍ंन पर अलाऊ किया था, वही बात मैं कहना चाहता हूं।

उपाध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान में भी यू.पी. की तरह निठारी काण्‍ठ की पुनरावृत्ति होने जा रही है। मैं आपको सूचना देना चाहता हूं कि राजस्‍थान में पिछले 3 साल के अन्‍दर करीब 509 बच्‍चे गुमशुदा हुए और पुलिस ने आज तक कोई एक भी बच्‍चे को अभी तक बरामद नहीं किया।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, यह कोई रिसेण्‍ट घटना नहीं है।

श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (गंगापुर): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं इंफार्मेशन देना चाहता हूं कि अभी हाल में 2 जनवरी को एक बच्‍चे, मनीष गोयल, जयपुर में पेंइग गेस्‍ट की हैसियत से, एक पेंइग गेस्‍ट हाउस में रह रहा था। वह गुम हो गया। घर वालों ने 3-4 दिन तक उसकी तलाश की, फिर 5 तारीख को सांगानेर, पूर्व थाने में उसकी रिपोर्ट कराई।

श्री उपाध्‍यक्ष: इंवेस्‍टीगेशन में चल रहा होगा मामला। माननीय सदस्‍य, यह पाइण्‍ट आफ इंफार्मेशन पर नहीं है।

श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (गंगापुर): नहीं, इन्‍वेस्‍टीगेशन नहीं हो रही, तीन साल हो गये, तीन साल हो गये।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): आप सुनो तो सही।

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): ऐसे सैंकड़ों कैसेज हैं। (व्‍यवधान)

 

Vps-usc-02042007-1410-2d-1

 

श्री उपाध्‍यक्ष: इंवेस्‍टीगेशन पर चल रहा होगा मामला। माननीय सदस्‍य, यह पाइंट आफ इन्‍फोरमेशन पर बात हो गयी ... (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): आप सुनो तो सही।

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): इतना महत्‍वपूर्ण केस है। राजस्‍थान से बच्‍चे गायब हो रहे हैं। बोलने दीजिए। ... (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो।

श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (गंगापुर): 000    

श्रीमती ममता शर्मा (बूंदी): 000

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: पिछले तीन महीने से ... (व्‍यवधान) इंवेस्‍टीगेशन चल रही है। माननीय सदस्‍य। माननीय सदस्‍य, आपका अंकित नहीं होगा। माननीय सदस्‍य।

श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (गंगापुर): 000

श्री महीपाल सिंह यादव (बानसूर): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, यह अंकित नहीं हो रहा है। आपको मैं अलाऊ नहीं कर रहा हूं। ... (व्‍यवधान) सब हो रही है। एफ.आई.आर. दर्ज हो गयी, उस पर कार्यवाही होगी। माननीय सदस्‍य, आपका अंकित नहीं हो रहा है। अंकित नहीं हो। माननीय सदस्‍य। अंकित नहीं हो। माननीय सदस्‍य, आप बीच में नहीं। ... (व्‍यवधान) फिर आप बीच-बीच में? माननीय सदस्‍य, आपका अंकित नहीं होगा। यहां पर कोई अंकित नहीं होगा ... (व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, बहुत ही, विषय तो बहुत गम्‍भीर है और मैंने जिस दिन से यह बच्‍चा गायब हुआ, मैंने स्‍वयं ने कम से कम इसके बारे में 15 बार मेरे अधिकारियों से लेकर, आई.जी. से लेकर अलग-अलग टीम बनाकर मैं जितना प्रयास कर सकता था, मैंने उनके घर वालों के सामने और लास्‍ट में जब मैं सब तरफ से निराश हो गया कि इस बच्‍चे को अभी तक ढूंढने में मैं सफल नहीं हुआ तो मैंने एस.ओ.जी. टीम को यह केस अभी आज से कोई आठ दिन पहले उसको दिया कि अलग से टीम गठित करके इस बच्‍चे की जानकारी करें। जहां तक रहा सवाल राजस्‍थान के जो बच्‍चे गायब हुए हैं अगर एकदम तो मेरे पास एटरेंडम नहीं है लेकिन बच्‍चे गये हैं। कुछ मिले हैं, कुछ अभी भी मिसिंग हैं। यह नहीं है कि वह सेंट-परसेंट जितने बच्‍चे गये और जिनकी रिपोर्ट दर्ज हुई वे सारे के सारे बरामद हो गये या मिल गये, ऐसा नहीं है लेकिन उनमें से 60 परसेंट से अधिक बच्‍चे वापस आये भी हैं। मिले भी हैं। कुछ अभी भी मिसिंग हैं और इस बच्‍चे के बारे में तो मैं व्‍यक्तिगत रूप से कह सकता हूं क्‍योंकि उसका परिवार इतना व्‍यथित है कि वह लगभग सदमे की स्थिति में आज भी जब भी वह मिलता है तो उसके पिताजी बात करने में भी समर्थ नहीं हैं। मैंने उनकी पीड़ा को समझकर मैं जिस लेवल पर भी, मैं अभी तक जो कुछ कर सकता था वह मैंने किया और अन्‍त में जब मुझे सब तरफ से निराशा लगी तो मैंने एस.ओ.जी. की टीम को इस काम को दिया है और भगवान करेगा तो हमें इसमें सफलता जरूर मिलेगी। ... (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: नहीं, माननीय सदस्‍य, स्‍थान ग्रहण करें। इस पर नहीं। गृह मंत्रीजी ने कह दिया। आगे कोई चर्चा नहीं। अंकित नहीं हो रहा। माननीय सदस्‍य, इस पर, अब  इसका कोई अन्‍त नहीं होगा। ... (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): 000

श्री दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (गंगापुर): 000

श्री उपाध्‍यक्ष: अब आप विराजिये। सारे पहलुओं की जांच होगी। ... (व्‍यवधान)

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): उन सबसे हमने, अब तक उनके परिवारजनों को जितने भी, जिन लोगों पर भी संदेह था उन सबको हम लाये हैं। पेइंग गेस्‍ट वालों को भी लाये हैं। उसके जितने मित्र मंडली है, जिनके साथ वह रहता है उनको भी लाये हैं। जो कुछ भी अभी तक किया है उसमें से यह चीज निकल कर नहीं आयी कि वह कहां गया? आज भी वह मैं सोचता हूं कि जो आपके मन का कष्‍ट है वह मेरा भी है क्‍योंकि मेरा भी बच्‍चा अगर इस तरह से इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ने वाला बच्‍चा अगर इस तरह मिसिंग हो जाए तो स्‍वाभाविक है और इसलिए मैंने अन्‍त में यह एस.ओ.जी. की नई टीम गठित करके फिर एक बार शुरू से लेकर आखिरी तक इस केस को ढूंढने का प्रयास करेंगे। जहां से भी जिस तरह से हमको लाइन मिलेगी हम पूरी कोशिश करेंगे कि उस बच्‍चे को ढूंढें। ... (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: : श्री गुलाब चन्‍द कटारिया ... (व्‍यवधान) माननीय सदस्‍य।

श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली): मेरा बहुत इम्‍पोर्टेंट मामला है। केवल ध्‍यानाकर्षण के लिए, मैं तो गृह मंत्रीजी का ध्‍यान दिलाना चाह रहा हूं। ... (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री गुलाब चन्‍द कटारिया, गृह मंत्री एक अधिसूचना सदन की मेज पर रखेंगे। बैठिये। थोड़ा बैठिये।

श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र के

श्री उपाध्‍यक्ष: बैठिये, पहले मैंने उनका नाम पुकार लिया है। उनके बाद कह देना आप, ठहरिये थोड़ा । ... (व्‍यवधान)

 

अधिसूचना

गृह विभाग की अधिसूचना संख्‍या- एफ 33(5) होम-9/2005

श्री गुलाब चन्‍द कटारिया (गृह मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से अधिसूचना संख्‍या- एफ 33(5) होम-9/2005, दिनांक 11.10.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान प्राइवेट सुरक्षा एजेंसी (विनियमन) नियम, 2006 विरचित किये गये हैं, सदन की मेज पर रखता हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: अब कहिये आप।

श्री सुभाष चन्‍द्र शर्मा (कोटपूतली): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय गृह मंत्रीजी का ध्‍यान आकर्षित करना चाहता हूं कि मेरे विधान सभा क्षेत्र कोटपूतली के गांव कोजोता महरूमपुर के पास से दो महिलाओं का पाँच दिन पूर्व अपहरण हो गया। उनको अगवा कर लिया गया है और अभी तक उनका कोई सुराग नहीं लगा है। दोनों तरफ के परिवार बड़े पीडि़त हैं। आपके 24 घंटे वह थाने के ऊपर बैठे हुए हैं। मेरा आपके माध्‍यम से माननीय गृह मंत्रीजी से यह आग्रह है कि वह इस मामले को बहुत गम्‍भीरता के साथ लेकर और उन दोनों महिलाओं को बरामद करने की कार्यवाही करायें। ... (व्‍यवधान)

 


याचिकाओं का उपस्‍थापन

श्री उपाध्‍यक्ष: याचिकाओं का उपस्‍थापन।

श्री गोविन्‍दराम मेघवाल, सदस्‍य विधान सभा दो याचिकाएं उपस्‍थापित करेंगे। There will be no end bhai.  इस तरह से उसका क्‍या होगा? दो-दो मिनट, तीन-तीन मिनट बात आये एकदम से और गृह मंत्रीजी से कुछ भी पूछ रहे हैं यहां, यह क्‍या है? ... (व्‍यवधान)

श्री गोविन्‍द राम मेघवाल (नोखा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से कार्य सूची में किये गये उल्‍लेख के अनुसार निम्‍नांकित दो याचिकाएं उपस्‍थापित करता हूं:-

  1. इंदिरा गांधी नहर से नागौर पेयजल योजना में नोखा के गांवों को भी सम्मिलित कर पेयजल की पूर्ति करने बाबत, एवं
  2. बीकानेर ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालयों में अध्‍यापकों की नियुक्ति करने बाबत। 

 

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री केसर देव बाबर, सदस्‍य, विधान सभा दो याचिकाएं उपस्‍थापित करेंगे।

श्री केसर देव बाबर। (अनुपस्थित)

डा. सुरेश चौधरी, सदस्‍य, विधान सभा एक याचिका का उपस्‍थापित करेंगे।

डा. सुरेश चौधरी। (अनुपस्थि‍त)

श्री हरलाल सिंह खर्रा, सदस्‍य, विधान सभा एक याचिका उपस्‍थापित करेंगे।

श्री हरलाल सिंह खर्रा (श्रीमाधोपुर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से कार्य सूची में किये गये उल्‍लेख के अनुसार श्रीमाधोपुर(सीकर) से अजीतगढ़ सड़क मार्ग की चौड़ाई दोगुनी करने बाबत् पाँच व्‍यक्तियों द्वारा हस्‍ता‍क्षरित एक याचिका का उपस्‍थापन करता हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री वीरेन्‍द्र मीणा, प्रभारी मंत्री प्रस्‍ताव करेंगे कि राजस्‍थान मूल्‍य परिवर्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2007 को विचारार्थ लिया जाए। ... (व्‍यवधान)

 

व्‍यवस्‍था का प्रश्‍न

मनी बिल की परिभाषा विषयक

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, पाइंट आफ आर्डर।

श्री उपाध्‍यक्ष: पहले रखने तो दो, माननीय सदस्‍य।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): इसमें पाइंट आफ आर्डर इसी पर है, रखने पर ही है। ... (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: नहीं, इस पर तो ... (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मेरा रखने पर ही तो पाइंट आफ आर्डर है। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आप सुनेंगे तब है न। ... (व्‍यवधान)

 श्री उपाध्‍यक्ष: पुर:स्‍थापित तो हो चुका है, माननीय सदस्‍य। ... (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): तो इसी पर जो आप बिल यहां पर रख रहे हैं, उसी पर तो मैं अपना पाइंट आफ आर्डर उठा रहा हूं। आप सुन तो लें एक मिनट। ... (व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): सुन लीजिए।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका ध्‍यान संविधान के आर्टिकल 199 पर आकर्षित करना चाहता हूं। 199-Definition of Money Bills. For the purposes of this Chapter, a Bill shall be deemed to be a Money Bill, if it contains only provisions dealing with all or any of the following matters, namely:- (a) the imposition, abolition, remission, alteration or regulation of any tax;. This is (a) I am not going to “a,b,c,d,e,f” of this proviso but I am going ‘g’ also.  (g) any matter incidental to any of the matters specified in sub-clauses (a) to (f).  माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, 199 डिफाइन करता है कि मनी बिल क्‍या है? यह जो बिल माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यहां रख रहे हैं, माननीय मंत्रीजी, यह मनी बिल है क्‍योंकि it regulates. Regulation of any tax.  राजस्‍थान का जो टैक्‍स है, स्‍ट्रक्‍चर, उसको रेगुलेट करने के लिए आप वैट का यह बिल ला रहे हैं इसलिए जो आर्टिकल 199 का जो पार्ट है उसकी केटेगरी में आता है। Regulation of any tax माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इस आर्टिकल 207, कांस्‍टीट्यूशन का आर्टिकल “A Bill or amendment making provision for any of the matters specified in sub-clauses (a) to (f) of clause (1) of Article 199 shall not be introduced or moved except on the recommendation of the Governor and a Bill making such provision shall not be introduced in a legislative Council.” माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह जो बिल माननीय मंत्रीजी यहां पर अभी डिस्‍कस करने के लिए रख रहे हैं यह मनी बिल की केटेगरी में आता है और मनी बिल की केटेगरी में इसलिए आता है माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, कि यह रेगुलेट करता है टैक्‍स को और जब यह रेगुलेट टैक्‍स को करता है तो कांस्‍टीट्यूशन की धारा 207 के अन्‍तर्गत गवर्नर साहब कि इसमें एसेन्‍ट होना जरूरी था और यह जो बिल आप इस सदन में आप जो चर्चा कर रहे हैं इसमें गवर्नर साहब की एसेन्‍ट नहीं है, नम्‍बर एक।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका ध्‍यान इस ओर भी आकर्षित करना चाहता हूं, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह पार्लियामैंट, प्रेक्टिसेज एण्‍ड प्रोसीजर आफ पार्लियामैंट इसके पेज 523 पर भी, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं, 524 पर भी माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका ध्‍यान आकर्षित करना चाहता हूं। यह पार्लियामैंट प्रेक्टिसेज के चैप्‍टर-22 लेजिस्‍लेशन में भी लिख रखा है A Money Bill has been defined as under; (1) A Bill shall be deemed to be a Money Bill if it contains only provisions dealing with all or any of the following matters, namely; (a) the imposition, abolition, remission, alteration or regulation of any tax; इसमें भी वही है जो मैंने कोट किया है माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, ‘regulation of any tax’ इसमें भी माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, रेगुलेशन आफ एनी टैक्‍स लिख रखा है और जो जी क्‍लॉज है माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, पार्लियामैंट प्रेक्टिसेज, उसमें लिखा है कि “Any matter incidental to any of the matters specified in sub-clauses (a) to (f). यह मैटर इंसीडेंटल की केटेगरी में नहीं है माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह केटेगरी के अन्‍दर भी ... (व्‍यवधान)  लिखा है। रेगुलेट करने के लिए है। माननीय मंत्रीजी खड़े होकर यह बता दें, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह मनी बिल है या नहीं? यदि माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह मनी बिल है तो बिना गवर्नर साहब की कंसेट किये हुए मनी बिल को हाउस में डिस्‍कस नहीं किया जाए और मैं समझता हूं माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह दुर्भाग्‍य है राजस्‍थान का, राजस्‍थान का दुर्भाग्‍य है, जब कभी भी वित्‍तीय विधेयक की चर्चा होती है तो मुख्‍य मंत्री यहां पर उपस्थिति नहीं रहते हैं।

 

spp/usc/14.20/2e/2.4.2007(1)

 

और जब कभी भी माननीय वित्‍त राज्‍य मंत्री प्रस्‍तुत करते हैं तो पार्लियामेंट अफेयर्स मिनिस्‍टर उनको बोलने का मौका ही नहीं देते हैं और वह खुद जाकर उनको गाइड करने की कोशिश करते हैं। इससे बड़ा दुर्भाग्‍य नहीं हो सकता कि तीन साल तक जिस आदमी को वित्‍त राज्‍य मंत्री का पद दे रखा है, उसकी कोम्‍पीटेंस के बारे में पार्लियामेंट अफेयर्स मिनिस्‍टर को ज्ञान नहीं है। उपाध्‍यक्ष महोदय, सबसे पहले पार्लियामेंट अफेयर्स मिनिस्‍टर इस बात के लिये रेस्‍पांसिबल हैं क्‍योंकि कोई भी बिल पास होकर आता है तो सबसे बड़ी आवश्‍यकता इस बात की है कि इसकी जांच की जाये कि यह मनी बिल है या नहीं है। मेरा पुरजोर शब्‍दों में आपसे निवेदन है कि यह सरकार लम्‍बे समय से संविधान का उल्‍लंघन कर रही है। प्रभारी मंत्री बनाना हो, प्रभारी इंचार्ज बनाना हो, पार्लियामेंट अफेयर्स मिनिस्‍टर को स्‍टेट मिनिस्‍टर का दर्जा देना हो, इस राजस्‍थान की सरकार ने संविधान की सारी व्‍यवस्‍थाओं का मखौल उड़ा रखा है । आज आवश्‍यकता इस बात की है, उपाध्‍यक्ष महोदय, आप खुद वकील हैं, आप खुद पढ़ लें इस बात को, कि मैंने जो कोट किया है कांस्‍टीट्यूशन का प्रोविजन, यह रेगुलेट के अंदर आता है या नहीं वेट। वेट यदि रेगुलेट करने के अंदर आता है तो मैं समझता हूं कि सरकार की इससे बड़ी दुर्भाग्‍यपूर्ण स्थिति नहीं हो सकती। मेरा आपसे पुरजोर शब्‍दों में निवेदन है कि संविधान की रक्षा करने का उत्‍तरदायित्‍व आपका है, आप चेयर पर बैठे हुए हैं, उपाध्‍यक्ष महोदय, आपका है। पक्ष और प्रतिपक्ष बहुमत के आधार पर, विरोध के आधार पर अपने कर्तव्‍यों का निर्वहन करता है पर जो कुर्सी पर बैठा हुआ है, उसका धर्म बनता है कि हमने संविधान के प्रति शपथ ली है, संविधान के जो प्रोविजन हैं, उनका ठीक ढंग से पालन किया जाये। यह सरकार गैर संवैधानिक काम कर रही है इसलिए मैं आपका ध्‍यान आकर्षित करता हूं कि सरकार को निर्देश दें आप, कि इस बिल को गवर्नर साहब से असेंट करवा कर लाये, फिर हाउस में डिस्‍कस करे। तब तो यह बिल संवैधानिक व्‍यवस्‍थाओं का पालन होगा और बहुमत के आधार पर खोटे पार्लियामेंट अफेसर मिनिस्‍टर की खोटी राय के आधार पर यदि सरकार की चलाने की अपनी जिम्‍मेदारी निभा रखी है तो मैं समझता हूं कि हमें हमारे राइट्स टू प्रोटेक्‍ट करने का अधिकार है, उस अधिकार को हम छोड़ेंगे नहीं और आपसे निवेदन करना चाहते हैं कि पहले आप इस पर निर्णय करें कि यह मनी बिल की कैटेगिरी में आता है कि नहीं ? यदि यह मनी बिल की कैटेगिरी में आता है और गवर्नर साहब की असेंट नहीं है तो मेहरबानी करके इस बिल को विद्-ड्रा करें और कल वापस गवर्नर साहब के साइन कराने के बाद हाउस में चर्चा करायें। तब तो मैं समझता हूं कि संवैधानिक व्‍यवस्‍थाओं का पालन करेंगे। मैं आशा करता हूं, आपसे आशा करता हूं, उपाध्‍यक्ष महोदय, कि आप कानून के जानकार व्‍यक्ति हैं और कानून का जानकार व्‍यक्ति भी यदि कानून की पालना के बारे में नहीं कहेगा तो फिर राजस्‍थान की जनता में यह मैसेज जायेगा कि कानून की पालना करना जरूरी नहीं है। यदि आप कानून की पालना इस सरकार से नहीं करवा सकते तो जनता से कानून की पालना के बारे में अपेक्षा करें, यह भी ठीक नहीं है। मैं आशा करूंगा कि पहले आप निर्णय करें कि यह बिल मनी बिल है और मनी बिल होने के अन्‍तर्गत गवर्नर साहब के इस पर साइन नहीं है, इसलिए सदन में बिना गवर्नर साहब के साइन किये हुए हाउस में इसकी चर्चा नहीं की जा सकती।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): माननीय मंत्रीजी, आप यही कहेंगे न कि it is replacing the Ordinance.  

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): Yes.

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): आप यही तो कहेंगे न ? अब आप बिराजें एक मिनट ...(व्‍यवधान)..

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): एक मिनट, पहले मैं बात कह दूं। ...(व्‍यवधान)..

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): नहीं, जब आपको पता है कि यह सही बात कहेंगे तो फिर यह सही बात कहेंगे, इसमें विवाद फिर कहां है।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): मैं उसका डिस्टिंगविस कर रहा हूं। ...(व्‍यवधान)..

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य, अगर ...(व्‍यवधान)..

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): आप यही कहेंगे कि It is replacing an Ordinance. आप यही कहेंगे? मेरा सजेशन यह है ...(व्‍यवधान)..

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आप एक मिनट, मेरी बात तो सुन लीजिये। नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य निश्चित तौर पर ...(व्‍यवधान)..

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आपकी हर चीज संवैधानिक ...(व्‍यवधान).. इस राठौड़ी में कहीं पर लिखा हुआ है कि ओर्डिनेंस पर गवर्नर ने साइन कर दिये, इसलिए बिल में जरूरत नहीं है तो मैं अपने आपको विद्-ड्रा कर लूंगा। किसी प्रोविजन में कानून के अन्‍तर्गत यह छूट नहीं है। आपने ओर्डिनेंस पर गवर्नर ने साइन किये, बिल के संबंध में कोई प्रोविजन लागू नहीं होता, जो ओर्डिनेंस पर लागू होता है। बिल के संबंध में यदि बिल आ रहा है तो बिल पर अलग गवर्नर साहब से असेंट लेने की आवश्‍यकता है।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): माननीय संसदीय कार्य मंत्रीजी, यह बड़ा वैलिड सवाल है। हमने इसका अध्‍ययन किया है, देखा है इसको। कोल एण्‍ड शकधर में बड़ा क्लियर लिखा हुआ है। अब आप खड़े रहेंगे तो आपको देखने के उपरान्‍त मेरे मुंह से बोली ही नहीं निकलेगी।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): किस कारण से ?

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): आप राठौड़ जो हैं। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, सिर्फ सवाल इसमें इतना सा है जो बिल ओर्डिनेंस को रिप्‍लेस करेगा, क्‍या उसके अंदर गवर्नर की असेंट लेने की आवश्‍यकता है या नहीं। हमारा कहना है आवश्‍यक है यह भी। आप कहेंगे नहीं है, क्‍योंकि आप इससे बचना चाहें तो आप नहीं बच सकते। Since it regulates, it is a Finance Bill. उपाध्‍यक्ष महोदय, फाइनेंस बिल की तारीफ में आता है। कोल एण्‍ड शकधर पढ़ लीजिये पूरा उठाकर। मैंने कोल एण्‍ड शकधर को पूरा पढ़ा है। यह मनी बिल की डेफिनेशन के अदंर आता है और आप रूक जाइये, गवर्नर साहब से असेंट लीजिये इसके ऊपर, आप कल इंट्रोड्यूज कर सकते हैं, अन्‍यथा यह हाई कोर्ट में चैलेंज होगा बिना गवर्नर की असेंट के और आपके स्‍ट्राइक डाउन कर देगा, हाई कोर्ट मानेगा ही नहीं इसको और जो भी इसके तहत असेसमेंट वगैरह होंगे, सारे के सारे इल्‍लीगल हो जायेंगे। यह मैं आपसे निश्चित रूप से कह रहा हूं और राजस्‍थान की जनता का बहुत बड़ा अहित होगा। राजस्‍थान की जनता लिटिगेशन में फंस जायेगी, इसलिए मेहरबानी करके जल्‍दी के अंदर कोई काम ना करायें। आप लोग देखते तो हैं नहीं इसको, पूरा अध्‍ययन नहीं करते हैं। उन्‍होंने कहा ओर्डिनेंस का रिप्‍लेस हो रहा है इसलिए आवश्‍यकता नहीं है। नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य ने जो कहा, बिलकुल सही कहा है। ऐसा आप बता दीजिये ओर्डिनेंस को जो बिल रिप्‍लेस करेगा, उस पर गवर्नर के असेंट की जरूरत होगी, नहीं होगी। आप किसी चीज में उठाकर दिखा दीजिये ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, अभी नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य ने जो आर्टिकल 199 का हवाला देकर यह कहा कि यह मनी बिल है। मनी बिल है। उपाध्‍यक्ष महोदय, एक बार नहीं, शायद राजाखेड़ा से आने वाले मानननीय सदस्‍य अपने उस रोल को भूल गये जो यहां से आप किया करते थे। कई बार, कई बार क्‍या उपाध्‍यक्ष महोदय, कई उदाहरण हैं ओर्डिनेंस जारी हुआ ...(व्‍यवधान).. एक मिनट ...(व्‍यवधान)..

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): उदाहरण कानून बन जाते हैं क्‍या, अजी बात है। कोई कानून, उपाध्‍यक्ष महोदय, आपका आफिसियो प्रोफिट बिल कोई पचास साल से पडा हुआ था और जब इंटरप्रियेट किया तो असेंट हुआ उस पर। अब हमने नहीं किया, यह कोई कानून का मामला है क्‍या ? हमने नहीं किया पाचं साल तक, आप नींद निकाल रहे थे,आप अपोजिशन में थे, आपको पाइंट आउट करना चाहिये था उस समय । आप क्‍या कर रहे थे पाँच साल तक ? उपाध्‍यक्ष महोदय, रेलेवेंट क्‍लॉज कोट करवाइये। पांइट आफ आर्डर पर व्‍यवस्‍था यह है कि रेलेवेंट क्‍लॉज्‍में बता दीजिये इस पर गवर्नर के साइन के बाद, बिल में जरूरत नहीं है। वह कोई क्‍लॉज बता दीजिये, हम मान लेंगे।

श्री उपाध्‍यक्ष: आप जवाब सुनिये।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, 27 दिसम्‍बर को यह ओर्डिनेंस जारी हुआ और महामहिम राज्‍यपाल की स्‍वीकृति मिली, 28 दिसम्‍बर को हमने गजट में इसको नोटिफाई कर दिया। आज उसका रिप्‍लेसिंग बिल लेकर आ रहे हैं। महामहिम राज्‍यपाल महोदय की आज्ञा से ही सारी चीज निकलती है। उन्‍होंने जिस चीज का अनुमोदन पहले कर दिया, आज वह रिप्‍लेसिंग बिल आया। उस पर किसी तरह की आपत्ति मैं समझता हूं एक बार, दो बार नहीं कई बार, कई मर्तबा राजाखेड़ा से आने वाले माननीय सदस्‍य और यहां पूर्व मुख्‍य मंत्री, शिवचरण जी भी बिराज रहे हैं, इनसे पूछ लें रिप्‍लेसिंग बिल के लिये, मनी बिल की परिभाषा में आता है, मैं मानता हूं कि मनी बिल की परिभाषा में आता है और मैं यह भी मानता हूं .. ...(व्‍यवधान)..

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): आप कोई ऐसा उदाहरण तो बता दीजिये। आप कोई एक उदाहरण इस सदन का बता दीजिये। आप कह रहे हो आप करते थे तो आपने पाइंट आउट नहीं किया। आपको एतराज करना चाहिये था।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): किस चीज का एजराज ? कानून सम्‍मत ...(व्‍यवधान)..

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): नम्‍बर दो आप कोई नियम बता दीजिये, कोई कानून बता दीजिये, इस हाउस का कोई उदाहरण बता दीजिये।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय राठौड़ साहब, इस ओर्डिनेंस पर साइन करना गवर्नर साहब का कांस्‍टीट्यूशनल राइट है। बिल पर डिस्‍कस करना हमारी असेम्‍बली का राइट है Don’t mix up two things together. ओर्डिनेंस आये, कांस्‍टीट्यूशन में प्रोविजन है, ओर्डिनेंस बिना गवर्नर के साइन के नहीं आ सकता That is a different issue. बट जब बिल हाउस में आयेगा That is my prerogative as a Member कि बिल डिस्‍कस करने में जो कांस्‍टीट्यूशन में प्रोविजन है, वह लागू होंगे इसलिए कोई भी रेलेवेंसी ओर्डिनेंस में गवर्नर के साइन के हिसाब से इसमें नहीं है। उपाध्‍यक्ष महोदय, दो चीज बिलकुल साफ है। मैं आपको फिर निवेदन करना चाहता हूं कि ओर्डिनेंस में बिना गवर्नर के साइन के कोई ओर्डिनेंस नहीं आ सकता। ओर्डिनेंस पर मस्‍ट हैं गवर्नर के साइन होना, उसकी कोई नहीं है। यहां विधान सभा में जब बिल आता है एवरी ओर्डिनेंस, ओर्डिनेंस का परपज क्‍या है, उपाध्‍यक्ष महोदय,  जब इन्‍टरवेनिंग असेम्‍बलि के बीच में बिल नहीं ला सकते हैं,ओर्डिनेंस आयेगा, गवर्नर साइन करेगा That is a limited purpose. बट हाउस का बिल का जो परपज है, उसकी कोई रेलेवेन्‍सी नहीं है कि गवर्नर साहब ने साइन किये कि नहीं किये । गवर्नर का परपज ओर्डिनेंस के संबंध में यह लेजिस्‍लेटर का अधिकार है कि बिल जब डिस्‍कस होगा और यदि वह मनी बिल है तो निश्चित तौर पर गवर्नर की कन्‍सर्ट उस बिल के लिये मस्‍ट है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैंने पहले निवेदन किया और आर्टिकल 207 में गवर्नर साहब की स्‍वीकृति आवश्‍यक है। यह दोनों संवैधानिक जो आवश्‍यकताएं थीं, जिनको पूरा कर लिया गया है, इसलिए इसमें कोई ... ...(व्‍यवधान)..

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): कहां कर लिया, कागज बताइये ? उपाध्‍यक्ष महोदय, इसमें फोरमेट होता है, यह फोरमेट कर लिया गया है तो फोरमेट बतायें। इस बिल के साथ कोई फोरमेट नहीं है। आप यह बताइये मुख्‍य मंत्रीजी, वित्‍त मंत्रीजी कहां हैं ? गवर्नर का कोई लिखा हुआ नहीं है। आप इसके एम्‍स एण्‍ड ओब्‍जेक्टिव देखिये, एम्‍स एण्‍ड ओब्‍जेक्टिव हैं, स‍बसे विचित्र बात, उपाध्‍यक्ष महोदय, इतनी जल्‍दी में लाये हैं एम्‍स एण्‍ड ओब्‍जेक्टिव को स्‍टार्ट किया है दी प्रोविजन आफ दिस एक्‍ट  इसमें कोई चीज मेंशन भी नहीं की है । एम्‍स एण्‍ड ओब्‍जेक्टिव में ऐसा खोटा बिल  आज दिन तक नहीं आया है जिसमें एम्‍स एण्‍ड ओब्‍जेक्टिव में कोई चीज मेंशन नहीं कर रखी हो Right from the start it is a first sentence. उपाध्‍यक्ष महोदय, कोई भी बिल आप पढ़े, इसको एम्‍स एण्‍ड ओब्‍जेक्टिव को लिखते हैं फिर नीचे भी लिखते हैं एक भी पैराग्राफ, किस प्रकार पैराग्राफ में which pertains to the Aims and Objectives. इस एक्‍ट में नहीं लिखा हुआ है। मैं समझता हूं उपाध्‍यक्ष महोदय, इस लोकतंत्र में एक लिमिट हो जायेगी राजशाही की बात को एग्री करने के लिये। पार्लियामेंट अफेयर्स मिनिस्‍टर अपने अपने हितों को साधने के लिये इस असेम्‍बलि के जो नियम और कानून हैं, उनको यदि आप सरकमेंट कर रहे हैं तो मैं समझता हूं दुर्भाग्‍यपूर्ण स्थिति बनेगी। आपने एम्‍स एण्‍ड ओब्‍जेक्टिव में इसको मेंशन नहीं किया है। आप खोटा-खोटा बिल लाकर इस राजस्‍थान की जनता के साथ अन्‍याय कर रहे हैं । ..

 

Msr/usc/1430/2f/02042007

 

और यह बिल जो टैक्‍सेशन बिल है, जैसे राजाखेड़ा से आने वाले माननीय सदस्‍य ने कहा है, यह लिटिगेशन में जायेगा और लिटिगेशन में जायेगा उसके बाद, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, हम तो आपसे निवेदन करना चाहते हैं, हम अपने प्रतिपक्ष की भूमिका निभा कर गवर्नर साहब और प्रेसिडेंट साहब को बतायेंगे कि यह सरकार गैर-कानूनी काम कर रही है और जनता को भी मालूम पड़ेगा कि ऐसा बिल जो बिल गवर्नर से पास नहीं है उसके आधार पर टैक्‍सेशन लगायेंगे तो टैक्‍सेशन सारे गलत हो जायेंगे और जनता लिटिगेशन में जाकर के फस जायेगी।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कोई तर्क के आधार पर तर्क करे ...(व्‍यवधान)...

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): This is a constitutional failure. यह संवैधानिक दायित्‍व निभाने में यह सरकार असफल रही है और प्रशासनिक दृष्टि से it is a major lapse on the part of the government कि यह भेजा नहीं वहां पर। लॉ डिपार्टमेंट का तो भट्ठा बैठ गया है यहां पर। ...(व्‍यवधान)...

श्री उपाध्‍यक्ष: आप जवाब सुनिये।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, बड़ा कहना आसान है। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, तर्क के नाम पर तर्क कर के हम किसी बात को कितनी ही बढ़ाते रहें। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहूंगा कि इस बिल को अगर आप पढ़ेंगे, इसके किसी भी खण्‍ड में कोई भी नया कर नहीं लगाया गया है। यह तो जो व्‍यापारी हैं उनकी सुविधा के लिए कुछ संशय थे, उन संशय को दूर करने के लिए लाया गया है जिससे राजस्‍थान का एक तरफ राजस्‍व बढ़ेगा दूसरी तरफ इसमें जो संशय हैं उन संशयों को दूर करने का काम है। कहीं कोई नया टैक्‍स की बात नहीं है। ...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): इसमें रिट्रोस्‍पेक्टिव डेट से, कितना खोटा बोल रहे हैं, शिड्यूल में रिट्रोस्‍पेक्टिव डेट से प्रोस्‍पेक्टिव डेट से टैक्‍स लगा रहे हो और कह रहे हो हम कुछ नहीं कर रहे। ...(व्‍यवधान)...

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इतना खोटा पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्‍टर बोलेंगे, इसमें रिट्रोस्‍पेक्टिव डेट से, प्रोस्‍पेक्टिव डेट से टैक्‍स लगाये, यह प्रोविजन है और आप बातें कर रहे हैं इसमें खाम खां में, बिलकुल अनपार्लियामेंट्री बात कर रहे हैं।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं पढ़ कर सुनाता हूं आपको।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): शिड्यूल यह दे रखा है, रिट्रोस्‍पेक्टिव डेट से टैक्‍स लगायेंगे आप प्रोस्‍पेक्टिव डेट से टैक्‍स लगायेंगे और आप कह रहे हो कि इसमें कुछ है ही नहीं। हद हो गयी बिलकुल ही।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं पढ़ कर सुनाता हूं. Money Bill and Finance Bill. A Money Bill has to be decided…

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, वो ही बात जो डा.सी.पी. जोशी ने कह दी, नयी बात क्‍या कह रहे हैं।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): अब आप एक मिनट रुक जाएं। आपने यह कहा कि वो तो यह किया है कि “ … a Bill shall be deemed to be a Money Bill if it contains only provisions dealing with all or any of the following matters, …”

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आप पढ़ कर वो सुना दो कि आर्डिनेन्‍स पर रिप्‍लेसिंग बिल से पहले फिर परमिशन की जरूरत है उसके बाद। यह आर्टिकल 199 दोबारा पढ़ कर सुना रहे हैं। क्‍या मतलब की बात है? 

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): अब आप सुन लें गौर से जरा. “ … a Bill shall be deemed to be a Money Bill if it contains only provisions dealing with all or any of the following matters, …” All or any. “…imposition, abolition, remission, alteration or regulation of any tax ..”

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, ऐसी कोई व्‍यवस्‍था ...(व्‍यवधान)...

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): आप आप गौर से सुन लें। इस एक्‍ट के तहत “…imposition, abolition, remission, alteration or regulation of any tax ..” अगर आप रेगुलेट भी करते हैं, अब अपील का मैटर भी तय होगा, अपील इस हिसाब से डिस्‍पोजऑफ होगी। इसमें आगे व्‍याख्‍या में दिया हुआ है यह मनी बिल की तारीख में आता है और जो कोई भी मनी बिल बिना राज्‍यपाल महोदय की ...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): किस ने मना किया? किस ने मना किया? ...(व्‍यवधान)... रूल 199 में आता है।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह काई एक नजीर बता दें कि आर्डिनेन्‍स, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, पहले यह मामला केबिनेट में, केबिनेट के बाद में इसमें गवर्नर साहब की असेण्‍ट से आर्डिनेन्‍स जारी होता है, आर्डिनेन्‍स जारी होने के बाद विधान सभा में रिप्‍लेसिंग बिल आया, अगर आर्डिनेन्‍स जारी करने के बाद दोबारा हमें, पहले परमिशन जो हमने ले रखी है, पुन: राज्‍यपाल महोदय की स्‍वीकृति की आवश्‍यक है, कहीं उल्‍लेख है तो बता दो मुझे। ...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इस पूरे संविधान में, आप पढ़ लीजिए, आप कानूनविद् हैं, इस पूरे संविधान में आर्डिनेन्‍स का कोई उल्‍लेख नहीं है। आर्डिनेन्‍स का सम्‍बन्‍ध केवल मात्र यह है कि विधान सभा जब नहीं चल नहीं हो तब आपको कोई चीज लानी है तो गवर्नर साइन कर के आये. That is the only purpose of the Ordinance. बाकी जो सारे कांस्टिट्यूशन में प्रोविजन है उसमें जो हमारा अधिकार है बिल में, उस बिल में मनी बिल यदि है, जैसा खुद माननीय पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्‍टर मान रहे हैं कि मनी बिल है, मनी बिल है तो  गवर्नर की इसमें असेण्‍ट का कागज चाहिए हम को। बताइये कागज कहां है? इस बिल के साथ बताएं कागज इन्‍होंने लगाया?

 

व्‍यवस्‍था

मनी बिल की परिभाषा विषयक

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, जहां तक आपके आब्‍जैक्‍शन का प्रश्‍न है, पहली बात तो यह है कि बिल जो है वो पुरस्‍थापित हो चुका, उस वक्‍त आपने किसी भी प्रकार का कोई आब्‍जैक्‍शन किया नहीं। उसके अलावा उसी आर्डिनेन्‍स को ही वापस बिल के रूप में पेश किया गया है और आप 207 का प्रोविजन भी देखेंगे, माननीय सदस्‍य, आर्टिकल 207 में भी दिया है – “Special provisions as to financial Bills. – (1) A Bill or amendment making provision for any of the maters specified in sub-clauses (a) to (f) of clause (1) of Article 199 shall not be introduced or moved except on the recommendation of the Governor, and a Bill making such provision shall not be introduced in a Legislative Council:  Provided that no recommendation shall be required under this clause for the moving of an amendment making provision for the reduction or abolition of any tax.” यह रिडैक्‍शन और अबोलिशन के लिए प्रोविजन दिये हैं इसलिए इसमें कोई आवश्‍यकता नहीं रहेगी। कोई नया टैक्‍स नहीं लगा रहे हैं यह। ...(व्‍यवधान)...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): इसके साथ में आर्डिनेन्‍स में असेण्‍ट है, आर्डिनेन्‍स जो जारी किया है वो गवर्नर साहब की असेण्‍ट है ...(व्‍यवधान)...

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं समझता हूं कि मुझे हालांकि आपने व्‍यवस्‍था दे दी है, यह प्रोविजो जो है, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, वो रेगुलेट करने के सम्‍बन्‍ध में नहीं है। यह जो बिल है आपका वैट का, इस बिल में रेगुलैट कर रहे हैं आप टैक्‍स को।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): हां कर रहे हैं न।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अबोलिशन और उसका यह पार्ट भी उसका रेगुलेशन का पार्ट होता है. So it cannot be in isolation.

मैं समझता हूं कि, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपने मुझे व्‍यवस्‍था दे दी, जिस सरकार के सारे काम गैर-कानूनी चल रहे हों, गैर-संवैधानिक चल रहे हों उससे मैं कोई संवैधानिक व्‍यवस्‍था की आशा करूं, सम्‍भव नहीं है इसलिए, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं फिर निवेदन करना चाहता हूं कि यह सरकार गैर-संवैधानिक काम कर के इस विधान सभा के बिल ला कर हमारे अधिकार का हनन करना चाहती है, हम इसका खुला विरोध करते हैं।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री जोगाराम पटेल।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, एक मिनट। मैं आपके निर्णय को चुनौती नहीं देता हूं। ...(व्‍यवधान)...

श्री उपाध्‍यक्ष: आसन से व्‍यवस्‍था दी जा चुकी है।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): लेकिन आपने यह कहा है कि जो वैट का यह बिल आ रहा है उसमें ना तो सरकार कोई नया टैक्‍स लगा सकती है ना घटा सकती है, ऐसी बात नहीं है। इसमें जो अमेण्‍डमेंट है उसमें वैट के मामले में किसी को भी सरकार एग्‍जम्‍प्‍शन दे सकती है और किसी का भी गजट नोटिफिकेशन के आधार पर टैक्‍स घटत-बढ़त कर सकती है। इसलिए यह प्रोविजो इसमें लागू नहीं होता है, आपको पुनर्विचार करना चाहिए।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आप कर लेना न। बिल के स्‍कोप में इन्‍हें कुछ कहना है तो कह दें न, कहां मनाही है। बिल के स्‍कोप में कुछ कहना है तो कहें यह।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): और मनी बिल के रूप में इन्‍होंने माना है कि इसकी गवर्नर साहब से असेण्‍ट लेनी चाहिए।

 

विधायी कार्य : विधेयक पर विचार

राजस्‍थान मूल्‍य परिवर्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2007

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, व्‍यवस्‍था दी जा चुकी है।

प्रभारी मंत्रीजी प्रस्‍ताव करेंगे कि राजस्‍थान मूल्‍य परिवर्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2007 को विचारार्थ लिया जाय।

श्री वीरेन्‍द्र मीणा (राज्‍य मंत्री, वित्‍त एवं करारोपण): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से प्रस्‍ताव करता हूं कि राजस्‍थान मूल्‍य परिवर्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2007 को विचारार्थ लिया जाय।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री जोगाराम पटेल।

विधेयक को जनमत जानने हेतु परिचालित किये जाने का संशोधन प्रस्‍ताव

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, प्राइवेट मैम्‍बर्स डे है तो इस पर चर्चा तो पहले क्‍या लम्‍बी-चौड़ी है, वापस लेना है सब को तो कर दें।

श्री उपाध्‍यक्ष: होनी तो नहीं चाहिए वैसे तो। ...(व्‍यवधान)...

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, अभी जो कानूनी मुद्दा माननीय सदस्‍य ने उठाया था, हालांकि आपकी व्‍यवस्‍था हो चुकी है पर मैं एक बात पुन: निवेदन करूंगा माननीय सदस्‍य से कि किसी विधेयक को विचारार्थ स्‍वीकार करना और किसी विधेयक को, जो वर्ड है हिन्‍दी का पुरस्‍थापित करना, उसमें फर्क है और जो संवैधानिक व्‍यवस्‍था बता रहे थे, चाहे आर्टिकल 207 की हो या आर्टिकल 199 की हो, वो व्‍यवस्‍था अगर उस दिन जिस दिन स्‍टेज थी इंट्रोड्यूज करने की और इंट्रोड्यूज करने की स्‍टेज पर थी, वो एक अलग मुद्दा था। आपने विचारार्थ, जब आलरेडी इंट्रोड्यूज हो चुका है तो विचारार्थ लिये जाने वक्‍त अगर ऐसा कंसेण्‍ट माननीय राज्‍यपाल महोदयजी की जरूरी हो, वैसी इसमें लैंग्‍वेज नहीं है, न ऐसी काई भाषा है पर चूंकि ऐसी व्‍यवस्‍था हो चुकी, वो विषय समाप्‍त हो चुका है। और इसमें दो पहले व्‍यवस्‍था भी है।

जहां तक यह राजस्‍थान मूल्‍य परिवर्धित कर (संशोधन) विधेयक 2007 का प्रश्‍न है, इसमें जो-जो, जिन-जिन धाराओं, उप-धाराओं में संशोधन किया गया है वो किस तरह व क्‍योंकर आवश्‍यक रहा है, इसका उन्‍हीं धाराओं में उसके साथ में दिये गये में बहुत विस्‍तृत विवरण किया गया है। राजस्‍थान में इस विधेयक के आने के बाद राजस्‍थान की जो आर्थिक व्‍यवस्‍था है उसमें भारी आमूल-चूल परिवर्तन हुआ है और उसका हित राजस्‍थान की आम जनता को मिला है, उसका लाभ राजस्‍थान की आम जनता को मिला है और इस व्‍यवस्‍था के माध्‍यम से इस वैट रूपी जो कानून जा कर के जो व्‍यवस्‍था के माध्‍यम से राजस्‍थान की सरकार ने जो ऐतिहासिक कार्य किया है उस ऐतिहासिक व्‍यवस्‍था के तहत बजट भाषण के दौरान माननीय गवर्नर की स्‍पीच के दौरान जो कुशल वित्‍तीय प्रबन्‍धन हुआ उसके बारे में विस्‍तृत जानकारियां दी गयीं। कितना लाभ हुआ, इसकी विस्‍तृत जानकारियां दी गयीं। कितना करों में बिना कर लगाये लाभ हुआ, इसकी विस्‍तृत जानकारी दी गयी।

उन सारे विषयों में मैं आज नहीं जाऊंगा पर मैं इतना निवेदन अवश्‍य करूंगा कि इसके द्वारा यह जो वैट का टैक्‍स प्रारम्‍भ किया उसके बाद सरकार ने व्‍यापारियों की, उपभोक्‍ताओं के हितों की रक्षा करते हुए ऐसी-ऐसी व्‍यवस्‍था की, उस व्‍यवस्‍था से व्‍यापारियों को लाभ हुआ, उपभोक्‍ताओं को लाभ हुआ और इस तंत्र के माध्‍यम से सरकार ने उन सब की सहायता की जो इनसे प्रभावित होने वाले थे या प्रभावित हो रहे हैं।

सबसे पहले सरकार ने विभागीय हैल्‍प लाइन कायम की। इस एक्‍ट के आने के बाद नया-या एक्‍ट था, राजस्‍थान में व्‍यापारी इतने तकनीकी ज्ञान के जानकार भी नहीं हैं, उनको कोई तकलीफ नहीं हो, उनकी तकलीफ होने की स्थिति में उसका तुरन्‍त निराकरण हो और इसमें सबसे पहले सरकार ने जो विभागीय हैल्‍प लाइन कायम की।

 

 

 

 

 

Ars/usc/2g/1440/02042007/1

 

उसके द्वारा फ्रेंकली आस्‍क क्‍वश्‍चन, सरल भाषा में जिसका जवाब दिया जा सकता है। जो व्‍यापारी अपनी भाषा में कोई प्रश्‍न करता था, अपनी समस्‍या बताता उसका तुरन्‍त ही निराकरण किया जाने लगा और इससे आम उपभोक्‍ता और व्‍यापारी को फायदा हुआ। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इतना ही नहीं डिवीजनल कमिश्‍नर लेवल पर कमेटियां बैठाकर, मीटिंग आयोजित कर व्‍यापारियों के साथ बैठकर सरकार के अधिकारियों ने उन व्‍यापारियों की उन सब शंकाओं का समाधान किया, उन सब तकलीफों को दूर किया जो उनको समय समय पर इस एक्‍ट के माध्‍यम से हो रही थीं या इस एक्‍ट के प्रावधानों की पालना में जो उनको तकलीफ हो रही थी उनका सब निराकरण किया। यह भी एक विशेष बात है।

उपाध्‍यक्ष महोदय, जैसा मैंने अभी आपसे निवेदन किया इस वैट के विधिक प्रावधानों की जानकारी हेतु क्‍योंकि हमारे जो अधिकारी हैं, उनको भी अभी यह नया नया एक्‍ट आया था, इतनी तकनीकी जानकारी नहीं थी, इतने एक्‍सपर्ट नहीं थे। कोई भी वयक्ति किसी भी कानून में तब तक एक्‍सपर्ट नहीं होता है जब तक उसका दो या चार बार प्रयोग नहीं हो जाता है। मात्र पढ़ने से उस एक्‍ट के तकनीकी विषयों की जानकारी नहीं हो सकती और हमारे विभाग के अधिकारियों ने ज्‍यों ज्‍यों इनको जानकारी मिली, इसके अलावा सरकार ने इसमें ट्रेनिंग देकर, उनको इस विषय की ट्रेनिंग दी गयी कि यह इस तरह के इसके प्रावधान हैं, इसकी पालना इस तरह से की जानी है, ऐसे फार्म भरे जाने हैं, व्‍यापारियों की इस तरह की शिकायत की जानी है, इससे भी व्‍यापारियों को बहुत फायदा हुआ।

इतना ही नहीं, उपाध्‍यक्ष महोदय, व्‍यावहारिक कठिनाइयों को दूर करने हेतु प्रशासन को कौनसी कठिनाई आ रही है, व्‍यापारी को कौनसी कठिनाई आ रही है और इन दोनों को कौनसी कठिनाई है, आपस में बैठकर सुलझाई जा सकती है, आपसी संवाद कायम कर, मीटिंग कायक कर जो दूर किया गया उससे भी बहुत ज्‍यादा फायदा हुआ।

इतना ही नहीं, उपाध्‍यक्ष महोदय, जो राजस्‍व प्राप्ति का प्रतिशत बढ़ा, मैं आंकड़ों में नहीं जाकर सिर्फ आपको इतना ही निवेदन करूंगा जहां 1999-2000 में राजस्‍व प्राप्ति 5.97 प्रतिशत थी वह धीरे धीरे प्रतिवर्ष बढ़ते बढ़ते 2006-07 में 6.80 के परसण्‍टेज में इन्‍क्रीज हुई और इस एक्‍ट की वजह से राजस्‍व प्राप्ति जो हुई उसमें एक बहुत ज्‍यादा बड़ा लाभ राजस्‍थान की सरकार को हुआ वैट की वजह से।

उपाध्‍यक्ष महोदय, इतना ही नहीं यह जो राजकोषीय घाटा था, जो एक समस्‍या बनी हुई थी राजस्‍थान सरकार के लिए और उस राजकोषीय घाटे को भी इस एक्‍ट के आने के बाद व्‍यापारियों के सहयोग, अधिकारियों की कार्य कुशलता और सरकार के कुशल वित्‍तीय प्रबन्‍धन के कारण इसमें बहुत सुधार हुआ और 2002-03 में 64.34 यानि 65 परसेंट जो करीब राजकोषीय घाटे की प्रवृत्ति थी वह धीरे धीरे इस वर्ष आकर गत वर्ष के फाइनेंशियल बिल में 0.84 हो गया और फिर सरप्‍लस में जाने की स्थिति जो बनी है वह सब इसी कारण से बनी है। इसके लिए मैं सरकार को साधुवाद देते हुए इसकी कुछ व्‍यवहारिक कठिनाइयां जो आ रही हैं व्‍यापारियों को, उसकी ओर  मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करूंगा कि कुछ ऐसी व्‍यवहारिक कठिनाइयां व्‍यापारियों को आ रही हैं जिनका निराकरण किया जाना भी बहुत आवश्‍यक है जिससे कार्य कुशलता भी व्‍यापारियों की बढ़ने के साथ साथ जो अधिकारियों को भी परेशानी हो रही है, जो अनावश्‍यक रूप से थोड़े से सरलीकरण के कारण सुलझाई जा सकती हैं उसकी ओर मैं ध्‍यान दिलाना चाहूंगा। उस सम्‍बन्‍ध में सबसे पहले मैं निवेदन करना चाहता हूं इसके सैक्‍शन 27, 28 और रूल 53 की ओर, जहां एक टैक्‍स लगाने की प्रवृत्ति नहीं है, पहले आप जमा कराओगे फिर आप फार्म भरोगे, फिर रिफण्‍ड होगा, उस सम्‍बन्‍ध में। उससे एक समस्‍या यह पैदा हो गई है कि आपके रूल्‍स हैं, आपके प्रोवीजन्‍स हैं सैक्‍शन 27 और 28 जिसके तहत नोन टैक्‍सेबल आइटम अगर आपका है तो उसका असेसमैंट करके आप जमा कराओगे और फिर वह फार्म भरकर आपको रिफण्‍ड मिल जाएगा।

इस जमा करवाने और रिफण्‍ड लेने की कार्यवाही के दौरान स्‍पेशली मैं उदाहरण देकर बताना चाहूंगा जोधपुर में स्‍टेनलैस स्‍टील की जो पट्टी है या हैण्‍डीक्राफ्ट हैं, इनके करीब करीब तीस करोड़ से पचास करोड़ के बीच में इन दोनों विभागों को, करीब तीस करोड़ स्‍टैनलैस स्‍टील विभाग का और करीब पचास करोड़ जो रुपया है वह इन व्‍यापारियों का जमा करता है। हालांकि सरकार ने प्रयास किया है कि इनके रिफण्‍ड की कार्यवाही तुरन्‍त की जाय पर फिर भी अधिकारियों को भी बहुत परेशानी हो रही है। वह जमा करना, वापस रिफण्‍ड देना, हिसाब रखना, तुरन्‍त रिफण्‍ड करना, व्‍यापारी का तीस करोड़, पचास करोड़ का अमाउंट जमा रह जाना, उससे उसके व्‍यापार पर बुरा असर पड़ता है। इसलिए मेरा निवेदन है कि इस बिंदु की बाबत, इस व्‍यवस्‍था की बा‍बत कोई न कोई सरलीकरण करने की आवश्‍यकता है। पहला मेरा निवेदन यह था।

इसमें हमने जितना महसूस किया है, हमारे व्‍यापारियों ने महसूस किया है वह अपनी तरफ से दो सुझाव हैं वह कितने व्‍यावहारिक हैं वह उसकी जांच करें। एक तो यह है कि इसमें अभी जीरो परसेंट टैक्‍स है, इस जीरो परसेंट सी. एस. टी. टैक्‍स को आधा परसेंट कर दें, एक परसेंट कर दें और इस जमा कराने और रिफण्‍ड करने की प्रवृत्ति है वह बंद हो जाएगी। तो सरकारी अधिकारियों को इतना बड़ा लवाजमा इसमें लगाना पड़ता है, हिसाब रखना पड़ता है, देना पड़ता है, लेना पड़ता है, वह व्‍यवस्‍था खतम हो जाएगी और व्‍यापारी सहर्ष आधार परसेंट, एक परसेंट टैक्‍स दे देंगे और उसका रिफण्‍ड भी नहीं लेंगे। तो जहां तक मेरा मानना है इससे गवर्नमैंट की रेवेन्‍यू इन्‍क्रीज होगी, गवर्नमैंट को अधिक रेवेन्‍यू मिलेगी। अगर यह व्‍यावहारिक हो तो इसको एक्‍जामिन किया जाय और यह लागू किया जाना चाहिए। पहला मेरा निवेदन यह था।

दूसरा, राजस्‍थान में एक्‍सपोर्ट का सबसे बड़ा जो महकमा है तो वह हैण्‍डीक्राफ्ट है और उसका सबसे बड़ा स्‍थान है तो जोधपुर है। हैण्‍डीक्राफ्ट सबसे ज्‍यादा फोरेन एक्‍सचैंज दिलवाता है, फोरेन रेवेन्‍यु दिलवाता है और अरबों रुपए का एक्‍सपोर्ट हैण्‍डीक्राफ्ट के मार्फत हो रहा है। हैण्‍डीक्राफ्ट में जो टैक्‍स का स्‍लैब है और उसके अन्‍दर जो छोटे छोटे आइटम आते हैं जिसके सम्‍बन्‍ध में मैं आपकी मार्फत निवेदन करना चाहूंगा, उसमें जो व्‍यवहारिक कठिनाइयां हैं, सबसे पहली कठिनाई जो है यह निल टैक्‍स प्रमाण पत्र है, उस प्रमाण पत्र में आइटम वाइज इतने ज्‍यादा हैं और एक आपका फार्म- 9 है, वह इतना काम्‍पलीकेटेड फार्म है कि साधारण व्‍यापारी को उसमें बहुत कठिनाई आ रही हैं। उसमें जो नेसेसरी इन्‍फार्मेशन है वह विभाग जरूर लें पर उसको जितना सरल कर सकें फार्म- 9 को, क्‍योंकि इतना काम्‍पलीकेटेड फार्म है कि उस फार्म को भरने में व्‍यापारियों को बहुत ज्‍यादा तकलीफ आ रही है। एक तो मेरा निवेदन यह है।

दूसरा इसमें ई. ओ. यू. जो आपका प्रोवीजन आपने बनाया है उस प्रोवीजन में आपने निल टैक्‍स के प्रमाण पत्र हैण्‍डीक्राफ्ट खरीद पर लागू कर दी है जबकि इसके तीन या चार जो आइटम हैं, जैसे लकड़ी, लकड़ी पर आपका वैट जो है वह है साढ़े बारह परसेंट और उसकी जगह आपने चार परसेंट किया पिछली बार, अगर यह संभव हो तो उसमें से लकड़ी के दो हैं। बबूल की लकड़ी भी है जो अपने यहां हर जगह उपलब्‍ध होती है और इसमें शीशम की भी है और कीमती लकडि़यां भी हैं, उसको अलग अलग अगर बबूल की लकड़ी को एग्‍जम्‍प्‍ट कर दें और बाकी लकड़ी पर आप अगर टैक्‍स अलग कर दें तो जो साधारण छोटे छोटे व्‍यापारी हैं, जैसे हैण्‍डीक्राफ्ट में सुथार हैं, छोटे आइटम बनाने वाला है वह अपनी बबूल की लकड़ी को काम में लेता है, उसकी कठिनाई खतम हो जाएगी, एक निवेदन तो यह था। उसमें शीशम, नीम, वह, वह भले ही आप अलग रख दें और उसमें भले ही आप चार परसेंट टैक्‍स कर दें, यह हमारी आपसे प्रार्थना है।

उपाध्‍यक्ष महोदय, इसी से जुड़ता हुआ स्‍टैनलैस स्‍टील से संबंधित है। स्‍टैनलैस स्‍टील में सी एस टी जीरो परसेंट है परन्‍तु स्‍टेनलैस स्‍टील पट्टी और पट्टा यह दो तरह के आइटम होते हैं और उसमें क्‍वाटरली रिफाइन के जो अलाऊ करके रिफन वाली बड़ी जो है उसको बचाने के लिए पट्टी पट्टा को एक करके जैसा मैंने अभी आपसे निवेदन किया कि इसमें आप भले ही टैक्‍स का स्‍लैब बढ़ा दें, आधा परसेंट, एक परसेंट या जो भी संभव हो पर लेने देने की वजह से जो खरबों रुपए का, जोधपुर जोधपुर में करीब तीस करोड़ और पचास करोड़ छह महीने के अन्‍दर हो जाते हैं तो पूरे राजस्‍थान लेवल पर बहुत बड़ा अमाउण्‍ट जो है वह व्‍यापारियों का जमा रहता है, उससे व्‍यापारी की कमर टूट जाती है, वह इसी के आधार पर बिजनस करता है और जब इतना अमाउंट तीस करोड़, पचास करोड़, अस्‍सी करोड़, सौ करोड़ रुपये उसके जमा रह जाते हैं और उसको दो महीने, छह महीने और बारह महीने में अगर वापस मिलता है तो उस दौरान इतने अमाउंट की व्‍यवस्‍था वह नहीं कर पाता है। इसलिए मेरी प्रार्थना है कि इस दृष्टि से देखा जाए।

अगला मेरा निवेदन था कि वैट में साढ़े बारह परसेंट से आठ परसेंट कई आइटम किये हैं परन्‍तु उसमें रेवेन्‍यू बढ़ाने की संभावना, मैं आपसे निवेदन करता हूं जो जो आइटम हैं, जो मैंने आपको मेरे ज्ञान के अनुसार बताये हैं जिससे रेवेन्‍यू बढ़ेगा और टैक्‍स स्‍लैब कम होगा। जैसे पहले हस्‍त उद्योग में आपने लकड़ी में काम आने वाले लिए हैं, उसमें वर्तमान साढ़े बारह परसेंट है और अगर इसको चार परसेंट कर दें तो छोटे छोटे जो व्‍यापारी हैं, जो अपने छोटे छोटे खिलौने घोड़े वगैरह, वगैरह बनाकर के हैण्‍डीक्राफ्ट वालों को सप्‍लाई करते हैं तो वह उनका जो अमाउंट है, जो वह वर्क करते हैं वह ज्‍यादा बढ़ जाएगा और वर्क ज्‍यादा बढ़ जाएगा तो टोटल जो रेवेन्‍यू मिलेगी वह आपको बराबर मिल जाएगी।

साथ ही साथ इण्‍डस्ट्रियल एसेसरीज हैं, इसमें वुड ग्‍लुब हैं, हाल ही में आपने इसको चार परसेंट किया है लेकिन हैण्‍डीक्राफ्ट को इण्‍डस्ट्रियल इन्‍पुट की तरह इसको कंसीडर अगर किया जाय तो इसमें भी रेवेन्‍यू अधिक होगी।

 

vns/usc/14.50/2h/2.4.2007/1

 

आपने पेंट और थिनर इस पर फर्क किया है। पड़ोसी राज्‍यों में पेंट और थिनर पर कोई टैक्‍स नहीं है। आप किसी भी स्‍टेट को लेंगे तो अब क्‍या हो रहा है कि वहां जो पेंट और थिनर है व्यापारियों को मजबूरन बाहर से मंगाना पड़ा है। तो यह जो रेवेन्‍यू मिलने वाला था राजस्‍थान को वह रेवेन्‍यू हमारा जा रहा है। क्‍योंकि पेंट और थिनर पर सिवाय राजस्‍थान के पूरे किसी भी प्रदेश में इस पर टैक्‍स नहीं है। इसलिये भी मेरा निवेदन है कि आप इसको भी कंसीडर करेंगे। 

अब पापड़ का खार लीजिये। पापड़ के खार पर साढ़े बारह परसेंट टैक्‍स है लेकिन टैक्निकली सब लोग जानते हैं राजस्‍थान वाले कि यह जो बनता है इसमें एक मूंग या उसका कोई आटा लगता है, साथ में उसकी साजी लगती है जो खार दिलाने के लिये लगती है। अब टैक्निकली साजी है उस पर चार परसेंट टैक्‍स है। साजी पर तो चार परसेंट टैक्‍स और साजी का उपयोग करके अगर पापड़ बना देते हैं तो साढ़े बारह परसेंट टैक्‍स, तो मेरा आपसे निवेदन है कि इस और भी ध्‍यान देंगे तो आप यह पायेंगे कि यह टैक्निकल मिस्‍टेक की वजह से हुआ है। पापड़ और साजी में कोई फर्क नहीं है। वह साजी और आटा मिलकर पापड़ बनता है। अब उसके एक पार्ट पर साढ़े बारह परसेंट टैक्‍स और एक पार्ट पर चार परसेंट टैक्‍स, तो इसलिये यह व्‍यवहारिक कठिनाई भी आ रही है। यह टैक्निक मिस्‍टेक भी है। 

इसी तरह गमछा, तौलिया है। इसमें से अब आपने गमछे, तौलिये में एक आइटम गमछे पर हटा दिया और तौलिये पर नहीं हटाया। तो गमछा, तौलिया इससे मिलते जुलते जितने भी आइटम हैं मेरा निवेदन है कि उन पर भी वह टैक्‍स जो रेट गमछा, तौलिये की है, इक्‍वीलेंट होनी चाहिये। 

इसके साथ ही मेरा आपसे निवेदन है कि यह टैक्‍स इवेजन रोकने के लिए जो इमारती पत्‍थर है। इमारती पत्‍थर की भी कई कैटेगरी हैं पर उसमें एकरूपता नहीं है। उसकी वजह से भी कई बार कंफ्यूजन व्‍यापारियों में होता है। एक सबसे बड़ी व्‍यवहारिक कठिनाई जो आ रही है माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, कि बिजली पूरी नहीं मिलती है और बिजली पूरी नहीं मिलने से उद्योगपति हैं या व्‍यापारी हैं वह उसकी जगह डीजल इंजन चलाकर अपने प्रोडक्‍शन को कंटीन्‍यू रखने का प्रयास करते हैं। जितने घण्‍टे बिजली मिली उतना बिजली से ही उद्योग चला दिया और बिजली नहीं मिली तो वह डीजल इंजन लगाकर, डीजल पर टैक्‍स लगने से उसका जो प्रोडक्‍शन है वह बहुत हाईली कोस्‍ट हो जाता है इसलिये मेरा निवेदन है कि उस व्‍यापारी को चूंकि बिजली पूरी देना, अब 24 घण्‍टे बिजली देना संभव नहीं है। जितने पीरियड़ तक वह बिजली के अलावा अपने डीजल इंजन चला कर अपने उद्योग के काम में लेता उस पर उसके टैक्‍स नहीं लगे तो वह व्‍यापारी राजस्‍थान में बराबर-बराबर दूसरे व्‍यापारियों के साथ टिक पायेगा। क्‍योंकि दूसरे प्रदेशों में बिजली ज्‍यादा मिलती है तो बिजली की खपत से उसकी प्रोडक्‍शन रेट डाउन आती है और यहां डीजल लगाने से प्रोडक्‍शन रेट ज्‍यादा आ जाती है इसलिये राजस्‍थान का व्‍यापारी पिटता है। इस सम्‍बन्‍ध में भी मेरा आपसे निवेदन है और मैंने जैसा आपसे निवेदन किया कि तौलिये पर तो आपने बारह से चार परसेंट कर दिया, पर गमछा इस सम्‍बन्धित जो आइटम हैं उस पर नहीं किया। यह निवेदन था।

लास्‍ट में, मैंने आपसे निवेदन कर दिया फार्म नम्‍बर 7 और 9 की बाबत इसमें जितनी इन्‍फोर्मेशंस मांगी गयी हैं वह अनावश्‍यक हैं। जरूरी-जरूरी टैक्‍स से संबंधित जरूरी इनफोर्मेशन ली जावे यह स्‍पेशली मैं आपसे और निवेदन करना चाहूंगा आपके माध्यम से कि इस फार्म नम्‍बर 7 और 9 की बाबत विशेष ध्‍यान दिया जावे कि टैक्निकली एग्‍जामिन करवा कर या व्‍यवहारिक रूप से एग्‍जामिन करवा कर जो जरूरी इन्फोर्मेशंस हैं वह जरूर ली जाए। जो व्‍यवहारिक सूचनाएं नहीं है, अनावश्‍यक रूप से कहीं से एडोप्ट करके इतना लम्‍बा-चौड़ा बना दिया गया है उसको ठीक किये जाने की आवश्‍यकता है। 

आपसे मेरा निवेदन है कि टाइम-टाइमली जो नोटिफिकेशन हुए हैं उनको कंसोलिडेट करना भी बहुत जरूरी है। इससे बहुत व्‍यवहारिक कठिनाई आ रही है। समय-समय पर इस टैक्‍स से संबंधित कई नोटिफिकेशन हुए हैं वह आथोरिटी को भी, कंजूमर को और व्‍यापारी को, इन तीनों को ही कठिनाई कर रहे हैं इसलिये मेरा आपसे निवेदन है कि इसको कंसोलिडेट करके एक बार जारी हो जावे ताकि कंफ्यूजन नहीं रहे कि उस समय तो यह नोटिफिकेशन था। उसके बाद यह आ गया। टैक्‍स रेट में है या आइटम में हो या उसका मैन्यूफैक्चर में हो, उस सम्‍बन्‍ध में भी निवेदन है।

अंत में मेरा आपसे यह निवेदन भी रहेगा कि कुछ ऐसी व्‍यवहारिक कठिनाईयां हैं फार्मों से संबंधित, सी फार्म से संबंधित, टैक्‍स से संबंधित, सी.एस.टी. टैक्‍स से संबंधित, उसके कई एक्‍सपर्टस व्‍यापारी भी हैं और वह व्‍यवहारिक जानकारी देना भी चाहते हैं और उनकी एक बार फिर आपकी जो कमेटी है उसके लिये मैं बहुत-बहुत साधुवाद और धन्‍यवाद दूंगा कि आपकी जो कमेटी है एस.एन.गुप्‍ता जी की अध्‍यक्षता वाली वह इसमें बहुत बढि़या काम कर रही है। जहां तक हो सके इसमें सरलीकरण हुआ है। फिर भी आप अब चूंकि यह कानून नया है। व्‍यापारी अभी तक पूरे रूप से परिचित नहीं हो पाये हैं इसलिये इसको थोड़ा और अधिक व्‍यवहारिक करने के लिये हो सके तो डिस्ट्रिक्‍ट लेवल पर, संभाग लेवल पर जितना संभव हो पाये उतनी और मीटिंग एक बार रख करके आपके सामने बहुत लम्‍बे-चौड़े सुझाव हैं, मैं इनको संक्षिप्‍त में आपके सामने निवेदन करना चाहता हूं। 

 मैं पुन: आपके माध्‍यम से यह निवेदन करना चाहता हूं कि इस वैट एक्‍ट के माध्‍यम से जो राजस्‍थान का आर्थिक ढांचा सुधरा है उसके लिये सरकार को बहुत-बहुत धन्‍यवाद और समय-समय पर आपने सरलीकरण करने के जो प्रयास किये हैं उसके लिये सरकार को बहुत-बहुत धन्‍यवाद पर इसमें और अभी गुंजाइश है सरलीकरण की उसका सरकार प्रयास करेगी।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैंने अधिनियम बाबत जो अपना प्रस्‍ताव दिया है जनमत जानने हेतु मैं आपसे इसको वापस लेने की अनुमति की प्रार्थना करता हूं। आपने समय दिया उसके लिये बहत-बहुत धन्‍यवाद।

श्री उपाध्‍यक्ष: डा.सी.पी.जोशी।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जैसा मैंने पहले आपसे निवेदन किया, आपने व्‍यवस्‍था दे दी। मैं फिर आपका ध्‍यान आकर्षित करना चाहता हूं राजस्‍थान वैल्‍यू एडेड टैक्‍स, 2003।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, 2003 में यह सरकार किसकी थी ? इसके हिस्‍टोरिकल बैक ग्राउण्‍ड को समझने की आवश्‍यकता है। तत्‍कालीन एन.डी.ए. सरकार के वित्‍त मंत्री यशवन्‍त सिंह जी ने सारे हिन्‍दुस्‍तान के फाइनेंस मिनिस्‍टर्स को बुलाकर यह कहा कि देश के हित में वैट को लागू किया जाए। हमारे तत्‍कालीन वित्‍त मंत्री प्रद्युम्‍न सिंह जी उसमें गये। बंगाल के वित्‍त मंत्री उस कमेटी के चेयरमैन थे और यह जो एक्‍ट बनाया 2003 का, यह कांग्रेस की देन है कि कांग्रेस ने उस समय वैट के सम्‍बन्‍ध में राजनीतिक आधार पर नहीं पर राजस्‍थान का हित इस बात में है कि वैट लागू होने से राजस्‍थान की रेवेन्‍यू जनरेट होगी इसलिये 2003 में यह एक्‍ट बनाया। पर दुर्भाग्‍य है सरकार को पलटने के बाद उसी सरकार के वित्‍त मंत्री जिन्‍होंने वैट का कंसेप्‍ट हिन्दुस्तान में दिया। जब हिन्‍दुस्‍तान में मनमोहन सिंह जी प्रधानमंत्री हुए और यू.पी.ए. की सरकार बन गयी तो सारे हिन्‍दुस्‍तान के भारतीय जनता पार्टी शासित राज्‍यों के मुख्‍यमंत्रियों की मीटिंग बुलायी गयी और कहा गया कि वैट लागू नहीं किया जायेगा। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, और दो साल तक इसी बात पर चर्चा चलती रही कि वैट लागू किया जाए या नहीं लागू किया जाए, पर जो हिस्‍टोरिकल स्थितियां बनी उन स्थितियों के कारण भारतीय जनता पार्टी की राजस्‍थान सरकार को भी वैट स्‍वीकृत करना पड़ा, देर से करना पड़ा। उनको इस बात के लिये राजस्‍थान की जनता से माफी मांगनी चाहिये।

आप याद करें माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, हरियाणा की सरकार चोटाला साहब की सरकार थी, मुख्‍यमंत्री थे। उन्‍होंने सबसे पहले वैट लागू किया और वैट लागू करने के बाद हिन्‍दुस्‍तान में सबसे ज्‍यादा यदि कहीं रेवेन्‍यू जनरेशन हुआ तो हरियाणा में जनरेट हुआ और आज उसको करीब तीन-चार साल हो गये। तीन-चार साल में उसके रेवेन्‍यू के कुमुलेटिव फिगर्स को हम देखें माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इतना बड़ा वैट के माध्‍यम से हरियाणा में पैसा इकट्ठा कर लिया गया। हम दो साल बाद भी यह कमेटी बनाकर वाहवाही लेना चाहते हैं कि वैट के माध्‍यम से हम राजस्‍थान की स्थिति ठीक करेंगे पर राजस्‍थान की, जैसा मैंने कहा कि यह सरकार संवैधानिक दृष्टि से काम नहीं करना चाहती है, यह सरकार अपने मनमाने ढंग से काम करना चाहती है। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह जानकार आश्‍चर्य करेंगे, मैं चाहता हूं कि मंत्री महोदय ध्‍यान दें। यह प्रिंसिपल एक्‍ट है। इस प्रिंसिपल एक्‍ट के सेक्‍शन- 8 में मैं चाहता हूं कि उसको देखें कि कितनी हेस्‍ट में इस चीज को लाये हैं। यह सेक्‍शन-8 में लिखा हुआ है एग्‍जम्‍प्‍शन आफ टैक्‍स। इसमें एक भी सेक्‍शन नहीं है। मैं चाहता हूं कि आप भी इसको ध्‍यान से देखें। फिर आप जो रूलिंग देंगे वह माननी पड़ेगी मुझे। पर सेक्‍शन 8 जो प्रिसिंपल एक्‍ट है, 2003 का इसके अन्‍दर एक भी सेक्‍शन नहीं है और आप अमेंडमैंट कर रहे हैं। सेक्‍शन-8 के अन्‍दर अमेंडमैंट कर रहे हैं। अमेंडमैंट सेक्‍शन-8 में लिखा है कि “After the existing sub-section (3) and before the existing sub-section (4), the following sub-section shall be inserted and shall be deemed to have been inserted….” अब माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इस प्रिंसिपल एक्‍ट के अन्‍दर सेक्‍शन-8 के अन्‍दर कोई भी सब सेक्‍शन नहीं है और यह अमेंडमैंट कहां से ला रहे हैं मुझे समझ में नहीं आता। मैं समझता हूं कि राजस्‍थान की जनता, विधान सभा को भी समझ रखा है कि किसी एक व्‍यक्ति को खुश करके हम जैसा चाहे वैसा पास कर लेंगे। मंत्री महोदय जब जवाब दें तब बतायें कि प्रिंसिपल एक्‍ट के सेक्‍शन-8 के अन्‍दर कोई सब-सेक्‍शन है क्‍या? जब सब-सेक्‍शन नहीं तो अमेंडमैंट किस पर ला रहे हैं। यह जो अमेंडमैंट आप ला रहे हैं, इसमें लिख रखा है अमेंडमैंट इज सेक्‍शन-4, एक्‍ट नम्‍बर-2003, सेक्‍शन-8, यह सेक्‍शन-8 मैंने पढ़ा। यह एग्‍जम्‍प्‍शन ऑफ टैक्‍स लिखा हुआ है इसमें एक भी सेक्‍शन नहीं है। मैं चाहता हूं माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, सबसे पहले आप इसको देख लें कि इसमें सब-सेक्‍शन तक नहीं है। कितनी हेस्‍ट के अन्‍दर इसको लाये हैं। सबसे पहला उदाहरण दिया मैंने और मैं चाहता हूं कि मंत्रीजी इस प्रिंसिपल एक्‍ट का सेक्‍शन-8 उठाकर देख लो। दो बार, तीन बार, चार बार और पाँच बार इसमें कहीं भी सेक्‍शन लिखा हो तो बता दें मुझे और आप अमेंडमैंट ला रहे हैं यह पेज बीस में 4. Amendment of section 8, Rajasthan Act No. 4 of 2003. अब यह किस एक्‍ट में अमेंडमैंट हो रहा है? चार, तीन, पाँच, जब प्रिंसिपल एक्‍ट में प्रोविजन नहीं है तो अमेंडमैंट किसमें कर रहे हैं? माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, और अमेंडमैंट भी कर रहे हैं देखिये आप “afer the existing sub-section (3) and before the existing sub-section (4).

 

श्‍याम/चौहान  02.04.2007   15.00  2j 

 

वह हाइपोथेटिकली पता नहीं कहां से था”..the following sub-section shall be inserted and  shall be deemed to have been inserted with effect from the Ist day of April, 2006; namely:-  “(3A) subject to such conditions as it may impose, the State Govt. may, if it considers necessary so to do in the public interest, by notification in the Official Tazette, add to or omit from, or otherwise amend or modify the Schedule-II…” Where is Schedule –II? प्रिंसिपल एक्‍ट के अंदर शिड्यूल सैकण्‍ड नहीं है, यह जो प्रपोज कर रहे हैं उसके अंदर शिड्यूल सैकण्‍ड नहीं है Our Schedule is a part of the statuette. इस स्‍टेच्‍यूट के शिड्यूल के अंतर्गत हम किसी एक्‍ट का पार्ट नहीं बन सकते हैं, मैं चाहता हूं कि यह प्रिंसिपल एक्‍ट में मंत्री जी खड़े होकर के बतायें कि इसमें शिड्यूल फर्स्‍ट कौनसा है, शिड्यूल सैकण्‍ड कौनसा है, इसमें अमेंडमेंट करना है, क्‍योंकि अमेंडमेंट एक कमेटी से कराना है, अपने आदमी से कराना है, उसकी जेब में पडा हुआ है शिड्यूल सैकण्‍ड, वह जिसको चाहेगा उसको निकाल देगा, जिसको चाहेगा उसको छोड़ देगा। इसमें लिखा है कि शिड्यूल सैकण्‍ड प्रोसपेक्टिवली और रेस्‍ट्रोक्टिवली...।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): इसमें आपको क्‍या तकलीफ है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मुझे तकलीफ नहीं है। तकलीफ तो आपको होनी चाहिए। मुझे क्‍यों होगी। मुझे डेढ़ साल तो तकलीफ नहीं है। डेढ़ साल तो तकलीफ आपको ही होनी है। शिड्यूल सैकण्‍ड पहले रखा नहीं, शिड्यूल सैकण्‍ड के अंदर प्रोसपेक्टिवली और रेस्‍ट्रोक्टिवली “….prospectively or retrospectively, and thereupon the Schedule shall be deemed to have been amended accordingly.” सैकण्‍ड शिड्यूल इसमें है नहीं, शिड्यूल सैकण्‍ड में में प्रोसपेक्टिवली और रेस्‍ट्रोक्टिवली अमेंडमेंट करा लिया, अमेंडमेंट कितने लाखों का, करोड़ों का किया, क्‍या व्‍यवस्‍था की है, इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है, ना तो इसमें प्रिंसिपल एक्‍ट में है, ना इस अमेंडमेंट में हैं, मैं चाहूंगा कि मंत्री जी जवाब दें तब बतायें कि शिड्यूल सैकण्‍ड कहां पर है और शिड्यूल सैकण्‍ड में क्‍या चीजें लिखी हुई हैं। इसी प्रकार इस सैक्‍शन 3 में राजस्‍थान एक्‍ट में एक अमेंडमेंट किया है, इसमें भी आप देख लें, आपने 2 में लिखा है “Notwithstanding anything contained in sub-section (1), a dealer, other than that enumerated in clause (b) of sub-section (i),..” अब इसमें प्रिंसिपल एक्‍ट में क्‍लॉज सी और है, क्‍लॉज सी के बारे में इन्‍होंने कुछ भी नहीं कहा है, मैं चाहूंगा जब माननीय मंत्री जी जवाब दें तो इस सैक्‍शन में क्‍लॉज सी है या नहीं है, क्‍लाज सी में लिखा है “Incidence of tax” प्रिंसिपल एक्‍ट का 3 पढ़ रहा हूं मैं “Subject to the provisions of this Act; (a) every dealer who is an importer of the goods, or (b) whose is a manufacturer of goods and whose annual turnover exceeds Rs. 2 lac, or (c) whose annual turn- over exceeds Rs. 5 lac. यह सी है, सी के संबंध में इन्‍होंने कुछ नहीं कहा है, ए और बी के बाद में कहा है कि हम नई चीज एड कर दें, उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं चाहूंगा कि जब माननीय मंत्री जी जवाब दें, आपने यह बताया कि उसमें सी क्‍लॉज एपलिकेबल है या नहीं है, सी को आपने डिलीट किया है या सी को आपने रखा है। उपाध्‍यक्ष महोदय, इसमें अच्‍छा किया है “..who purchases goods from a registered dealer of the State and sells such goods within the State, may opt for payment of tax on his turnover excluding the turnover of the goods specified in Schedule-I. Where is the Schedule-I? शिड्यूल 1 में आप बतायें कि, शिड्यूल 1 में कहा, हमने देखा है कि प्रिंसिपल एक्‍ट में अदर शिड्यूल 1 है, इस एक्‍ट के अंदर शिड्यूल 1 है, शिड्यूल 1 आपने लिखा नहीं, शिड्यूल 2 आपने लिखा नहीं Schedule I pertains to the goods. Schedule II pertains to the persons. Neither you have mentioned the persons nor have you mentioned the goods. अब आपने गुड्स कौन-कौनसे हैं, किसमें छूट दे रहे हैं, क्‍या कर रहे हैं, वह चिट्ठी लेकर के आयेगा जिसको हम धन्‍यवाद दे रहे हैं, वह हमारा बहुत कांपिटेंट चेयर पर्सन है, उनकी कांपिटेंट के बिना सरकार चलती नहीं है। सारे मंत्री एक तरफ बैठे हुए हैं। मंत्रियों को मालूम नहीं है कि क्‍या हो रहा है, क्‍या नहीं हो रहा है। यह कैबीनेट में पास हुआ, उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि यह कैबीनेट के मंत्री क्‍या कर रहे थे। कैबीनेट के मंत्रियों की डयुटी नहीं बनती थी कि शिड्यूल 1 कहां है, शिड्यूल सैकण्‍ड कहां है, यह मालूम नहीं करना  चाहिए हमें कि शिड्यूल फर्स्‍ट के अंदर कौनसी चीज आयेगी, शिड्यूल सैकण्‍ड के अंदर कौनसी चीज आयेगी। कौनसे गुड्स को हम देंगे, किसको प्रोसपेक्टिव देंगे, किसको रेस्‍ट्रोक्टिवली देंगे। यह इसमें नहीं बताया गया है। केवल मात्र विधान सभा में भी आई वाश करके कि हम किसी तरह से पास करा लें और जो कुछ हमने किया है उसको एक सर्टिफिकेट मिल जाये। इसको पास करने के लिए इन्‍होंने यह व्‍यवस्‍था की है।

 उपाध्‍यक्ष महोदय, इसमें रजिस्‍टर्ड डीलर्स के साथ धंधा करेगा वह तो आयेगा, जो रजिस्‍टर्ड डीलर्स के साथ में गुड्स नहीं लेगा, उसके बारे में क्‍या करेंगे। दो तरह के डीलर्स कर दिये। रजिस्‍टर्ड डीलर्स एक कर दिये, जो रजिस्‍टर्ड डीलर्स नहीं हैं और वह 2.5 प्रतिशत देंगे तो उसको भी आप कंसीडर कर लेंगे। दो तरह की इसमें व्‍यवस्‍था कर ली। एक तो होंगे रजिस्‍टर्ड डीलर्स, आपको रजिस्‍टर्ड डीलर्स के गुड्स से ही काम लेना है, जबकि आप जानते हैं मॉल प्रेक्टिसेज, राजस्‍थान में छोटा व्‍यापारी रजिस्‍टर्ड डीलर्स से सामान नहीं लेता है वह थर्ड और फोर्थ आदमी से माल लेकर के धंधा करता है। जहां आप इंटीरियर में किसी हैमलेट में दुकान खोल रखी है वह किसी रजिस्‍टर्ड डीलर्स से सामान लेकर के नहीं जा रहा है। वह एक सब आदमी से लेकर के जा रहा है। लेकिन आपने तो कह दिया कि रजिस्‍टर्ड डीलर्स से सामन लेगा उसको तो छूट देंगे और रजिस्‍टर्ड डीलर्स से सामान नहीं लेगा उसको छूट नहीं देंगे। अब रजिस्‍टर्ड डीलर्स को मजा आ गया, 50 लाख की छूट तो दे दी, 50 लाख की छूट पर वह रजिस्‍टर्ड डीलर्स जो एंट्री करेगा अपनी उसका तो फायदा मिल जायेगा और जो दूसरा डीलर है इसके अंदर उसका गला पकड़कर के हिसाब-किताब करेंगे इंसपेक्‍टर से कि इतना पैसा ला, इतना हिसाब लगेगा। आपने एक तो रजिस्‍टर्ड डीलर्स की व्‍यवस्‍था की, एक नॉन रजिस्‍टर्ड डीलर्स की व्‍यवस्‍था की। यदि मैं आप्‍ट कर लूं, आपको 2.5 प्रतिशत टैक्‍स मैं दे दूंगा तो मुझे रजिस्‍टर्ड डीलर्स होने की जरूरत भी नहीं है ना मुझे सी.ए. से कोई व्‍यवस्‍था करने की जरूरत है। दोहरी व्‍यवस्‍था है, रजिस्‍टर्ड डीलर्स को तो सी.ए. से तो अकाउंट को वैरीफाई कराना पड़ेगा पर जो आदमी रजिस्‍टर्ड डीलर्स नहीं है और 2.5 प्रतिशत का टैक्‍स दे रहा है आपके हिसाब से 50 लाख के ऊपर उसको सी.ए. से हिसाब-किताब कराने की जरूरत नहीं है। उसका हिसाब एस.एन. गुप्‍ता साहब भी कर लेंगे। कोई सी.ए. की जरूरत नहीं है, बाकी तो सी.ए. 50 चाहिंए लेकिन ऐसे डीलर्स के लिए एक ही काफी है। ऐसे डीलर्स के लिए और किसी से बात करने की जरूरत नहीं है, एक ही आदमी, सी.ए., गवर्नमेंट के जो रजिस्‍टर्ड हैं, सिंगल विंडो सिस्‍टम जो कर रखा है, इससे बड़ा आपका सिंगल विंडो सिस्‍टम नहीं हो सकता है। जो आदमी उनसे बात कर ले, उनसे हिसाब-किताब कर ले उसकी तो व्‍यवस्‍था हो जाये दूसरे की व्‍यवस्‍था नहीं होगी। यह आपने ओपन रखा है। आपको सारे व्‍यापारियों को एक ही केटेगिरी में रखना चाहिए था या तो रजिस्‍टर्ड डीलर्स की केटेगिरी में रखते या आप देखते कि जो उनका टर्न ओवर है उस पर छूट देंगे, उसको रखेंगे। दो तरह की व्‍यवस्‍था करे और नीचे के लेवल पर जो सबसे छोटा फोर्थ केटेगिरी का जो शॉपकीपर है वह जो सामान लेकर के आयेगा, नॉन रजिस्‍टर्ड डीलर्स के साथ में तो उसको फायदा नहीं मिलेगा, यह आपने क्‍लॉज किया है।

उपाध्‍यक्ष महोदय, इन्‍होंने कहा है सैक्‍शन 8, सैक्‍शन 8 में कोई प्रोविजन नहीं, फिर भी आपने यह प्रोविजन कर दिया, आपने पता नहीं कहा से व्‍यवस्‍था की है, अमेंडमेंट है सैक्‍शन 15 और एक्‍ट के अंदर 2003 में, इसमें इनीशियल सिक्‍योरिटी का वर्ड आया है, आपने इसमें यह व्‍यवस्‍था कर दी कि सिक्‍योरिटी की जरूरत नहीं है। दो रजिस्‍टर्ड डीलर्स जब साइन कर देंगे तो वह व्‍यवस्‍था भी चल जायेगी। आप पूरी व्‍यवस्‍था को ओपनिंग रखकर के भ्रष्‍टाचार की व्‍यवस्‍था करने का काम करना चाहते हैं। आपने सारे डीलर्स में सिक्‍योरिटी का प्रोविजन कर दिया, जब आपने यह व्‍यवस्‍था क्‍यों कि कि कुछ डीलर्स को सिक्‍योरिटी की जरूरत नहीं है।  उनसे कोई डीलर्स गारंटी देंगे तो उसको भी हम मान लेंगे, यह भी प्रोविजन आपने किया है।

उपाध्‍यक्ष महोदय, सैक्‍शन 18 में अमेंडमेंट किया है। उसके पहले 17 में अमेंडमेंट किया है, इसको आप देखें, बड़ा इंट्रेस्टिंग अमेंडमेंट है, उसमें मेन एक्‍ट में जो प्रोविजन था “..the Commissioner after recording reasons for doing so may, by a general or specific order, direct to grant such refunds even earlier.” यदि किसी इनपुट सब्सिडी के आधार पर किसी आदमी का एक साल का टैक्‍स बनता था वह यदि ठीक नहीं हो रहा है तो अगले साल कैरी आउट करने का आपने प्रोविजन किया। यह अच्‍छा किया आपने लेकिन यह जो नीचे वाला पार्ट है इसको आपने इनटैक्‍ट रखा, इसका मतलब जिस व्‍यापारी से ज्‍यादा पैसा बन गया उसको अगले साल कैरी आउट करने का प्रोविजन भी कर दिया, कमिश्‍नर को अधिकार भी दे दिया कि वह चाहे तो बीच में भी उसका पेमेंट कर सकता है। यह दोहरी व्‍यवस्‍था कर दी, यह पिक एंड चूज डिस्क्रिशन करने का कमिश्‍नर को अधिकार दे दिया। आप यदि यह व्‍यवस्‍था करते कि हम उसको कैरी फारवर्ड अगले तीन-पाँच सालों में करेंगे तो समझ में आता है। आपने नियम यह भी कर दिया कि तीन-चार साल और साथ में कमिश्‍नर का जो प्रोविजन था वह भी आपने रखा है। इसलिए कमिश्‍नर जिसको चाहेंगा उससे पैसा ले लिया, जिसको व्‍यवस्‍था करनी है उसको एडजस्‍ट भी कर लें। यह भी प्रोविजन कर दिया।

उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं कह रहा हूं कि यह जल्‍दी में लाया गया है, यह बिल आपने दिया है, मंत्री जी जवाब दें, यह जो आपने हमें पीछे दिया है ओरिजनल एक्‍ट, इसमें कोई सैक्‍शन 20 मेंशन है क्‍या, आप पेज खोलकर देख लें जिसमें आपने अमेंडमेंट किया है, एस्‍ट्रेक्‍ट आपने लिखा Extracts taken from the Rajasthan Value Added Tax Act, 2003. यह पीछे हमें दिया है, इसमें सैक्‍शन 20 भी लिखा हुआ है, मेन एसट्रेक्‍ट में, आप इतनी जल्‍दी में थे, आपके पास समय ही नहीं है, आपके 17,18, 33 और 58, 20 का कोई सैक्‍शन आपने एसट्रेक्‍ट में दिया ही नहीं है और आपने इसमें अमेंडमेंट सैक्‍शन 20 में भी किया है। सैक्‍शन 20 में अमेंडमेंट यह किया है “Notwithstanding anything contained in this Act, the State Government may, by notification in the Official Gazette, allow the dealer…” उपाध्‍यक्ष महोदय, सुनना आप “…availing the facility of deferment under sub-section (3) to  make prepayment of the amount of deferred tax on such terms and conditions includig the condition of remission from a part of deferred tax, as may be specified in such notification.” यह आपका खुला खाता है, जिस बिजनिस मैन से आप चाहेंगे उससे एडवांस टैक्‍स ले लेंगे और ऐसी कंडीशन डाल देंगे, उससे व्‍यवस्‍था करेंगे कि इतना पैसा पार्टी फंड में दे दे तो इतने पैसे की व्‍यवस्‍था कर देंगे। यह क्‍लॉज भी आपने एड कर दिया। आपने इतनी अच्‍छी व्‍यवस्‍था कर दी। आप एडवांस टैक्‍स भी ले लेंगे और उसके बाद उसको कैसे एडजस्‍ट करेंगे, उसकी कंडीशन को भी आप निर्णय करेंगे। यह निर्णय करने का अधिकार भी सब्‍जेक्टिव कर लिया गया है कि हम कैसे निर्णय करेंगे कि उसका कोई आब्‍जेक्टिव क्राइटेरिया नहीं है। आप टैक्‍स लेंगे, किससे लेंगे, आप लेंगे 50 करोड़ रूपये, 100 करोड़ रूपये, सीमेंट फैक्‍ट्री के एसोसिएशन या ऐसे बड़े-बड़े जो कंसर्न हैं उनसे लेंगे, छोटे-मोटे से एडवांस लेंगे नहीं, एडवांस लेकर के उसमें आप कंडीशन डालेंगे कि हम आपका मेन में एडजेंस्‍टमेंट कर देंगे। क्‍या आवश्‍यकता पड़ी है यह अमेंडमेंट जो मेन एसट्रेक्‍ट है उसका पार्ट नहीं है। आप देख लीजिये, सेक्‍शन 20 उसमें नहीं लिखा हुआ है। लेकिन आपको बाद में याद आया कि चुनावों के समय चंदा लेना पड़ेगा। चंदा लेने के लिए क्‍या करेंगे, इस अमेंडमेंट को इसमें ठोक दें। मैं समझता हूं सरकार इस बात का जवाब दे कि आपने एसट्रेक्‍ट में तो सैक्‍शन 20 लिखा नहीं और अमेंडमेंट में सैक्‍शन 20 लिखा और 20 में यह प्रोविजन किया है कि आप एडवांस टैक्‍स लेंगे, यह एडवांस टैक्‍स की व्‍यवस्‍था करने का ख्‍याल आपके किस स्‍टेज पर आया है।

 

jyg/akt/2.4.7/15.10/2k  

 

मैं समझता हूं कि इस सम्‍बन्‍ध में माननीय मंत्रीजी जवाब देंगे। यह सेक्‍शन 20, यह गली है जो भ्रष्‍टाचार पनपाएगी, यह एक गली है जो बड़े बिजनसमैंनों से पैसा लेकर सेटलमेंट करेगी और सेटलमेंट करने के बाद कंडीशन लगाने का अधिकार आपने ले लिया है कि मनमर्जी से उनको एडजस्‍ट करेंगे और मनमर्जी से उस पैसे को अपनी पार्टी फण्‍ड में उपयोग लेंगे। यह एक प्रोविजन इसके अंदर आपने किया है।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका ध्‍यान आकर्षित करना चाहता हूं कि महावीरजी जैन, चीफ व्हिप साहब, जब भी पढ़ते हैं तो किताब से पढ़ते हैं, इसमें उठा कर देख लें, एक भी सेंटेंस एम्‍स एण्‍ड ऑब्‍जेक्टिव के बारे में लिखा हुआ हो तो पढ़ें। मैं समझता हूं कि इतनी हेस्‍ट में, यह जो स्‍टेटमेंट ऑफ एम्‍स एण्‍ड रीजन लिखा है, स्‍टार्ट में - “The provisions of sub-section (2) of section 3 of the Rajathan Value Added Tax Act, 2003 hereinafter referred to as the Act ..” बताइए इसमें कहां एम लिखा हुआ है?

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आप तो वकील हैं। पहले सेंटेंस में, दूसरे, तीसरे, चौथे सेंटेंस में भी लिखा हो जिसमें इसका ऑब्‍जेक्‍ट लिखा हो, इसका ऑब्‍जेक्‍ट एण्‍ड रीजन माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, लिखने की इनकी हिम्‍मत ही नहीं है, इनकी अण्‍डरलाइंग एम्‍स एण्‍ड ऑब्‍जेक्‍ट है चन्‍दा इकट्ठा करना, पैसा इकट्ठा करना और मनमानी करना, यह कैसे लिखें? माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इन्‍होंने ईमानदारी से अपना काम किया, इसके अंदर एम्‍स एण्‍ड ऑब्‍जेक्टिव, कोई भी चीज मेंशन नहीं कि यह पहला बिल है, पहला बिल, जिसमें एम्‍स एण्‍ड ऑब्‍जे‍क्टिव के बारे में यह सरकार साइलेंट है और साइलेंट क्‍यों है क्‍योंकि यह उसका हिडन एजेण्‍डा है, हिडन एजेण्‍डा क्‍यों है माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान सरकार के मंत्री कॉम्‍पीटेंट नहीं है, राजस्‍थान सरकार में एक ही व्‍यक्ति कॉम्‍पीटेंट है, वही वैट के बारे में निर्णय करेगा।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं कि वैट के सम्‍बन्‍ध में अब राजस्‍थान में ही नहीं, हिन्‍दुस्‍तान के दूसरे स्‍टेटों में भी नई बहस शुरू हो गई है। वैट आपने निश्चित किया फ्लोर रेट के आधार पर, दूसरे स्‍टेट भी फ्लोर रेट के आधार पर करेंगे। केरल सरकार ने पहली बार यह किया है कि फ्लोर रेट के आधार पर वैट का निर्णय करना सरकार के फायदे में नहीं है इसलिए उन्‍होंने फैसला किया कि लक्‍जरी टैक्‍स उन्‍होंने ज्‍यादा बढ़ाया और लक्‍जरी टैक्‍स ज्‍यादा बढ़ा कर उन्‍होंने अपनी रेवेन्‍यू जनरेट करने का काम किया। मैं भी कहना चाहता हूं माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, कि राजस्‍थान सरकार...।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): इसमें अमेंड नहीं है एडेड है। ...(व्‍यवधान)... आपने पहले सेक्‍शन 20 बोला था न। एम्‍स एण्‍ड आब्‍जेक्‍ट्स में नहीं है, यह अमेंडमेंट सेक्‍शन 20 में है, उसमें लिखा है, “ … the following sub-section shall be added, …” एडेड है संशोधन नहीं हुआ।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): एडेड है मान्‍यवर, तो इसका मेंशन करते एब्‍सट्रेक्‍ट में। आप मेंशन के लिए हरेक सेक्‍शन देख लीजिए, 18, 15, 17, जो भी मेंशन किया है, मेंशन कर रखा है। आपने मेरा ध्‍यान आकर्षित किया, धन्‍यवाद, क्‍योंकि आपका यह ध्‍यान आकर्षित करना जरूरी था। यही वह क्‍लॉज है जिसमें हिडन एजेंडा छिपा हुआ है इसलिए आपने इसको किया, इसका बहुत-बहुत धन्‍यवाद। इसमें हिडन एजेंडा छिपा हुआ है। इसी क्‍लॉज के अंदर आप देखिए माननीय मंत्रीजी, घनश्‍यामजी, मुझे खुशी होगी, आप देखिए, एब्‍सट्रेक्‍ट में, सेक्‍शन 3, 5, 8, 15, 17, 18, 33, 58, 68, सब मेंशन है, नोट 20...।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): 20 में एडीशनल है।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): 20 में एडीशनल है, यही एडीशनल, हमको कमजोर करेगा, मैं तो इस सरकार की इनकम्‍पीटेंस पर सरकार को धन्‍यवाद देता हूं कि इतने सीनियर मिनिस्‍टर होने के बाद भी उनके मंत्रियों के सामने इन चीजों को नहीं लाकर शिड्यूल वन इसमें नहीं, शिड्यूल सैकण्‍ड इसमें नहीं, सेक्‍शन 20 में इसमें अंतर किया। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं कि राजस्‍थान में रेवेन्‍यू पिछले दो साल में बढ़ जाती यदि राजस्‍थान में वैट लागू कर दिया जाता। 2003 में यह सरकार जिसके वित्‍त मंत्री माननीय मुख्‍य मंत्रीजी हैं, दो साल तक भारत सरकार से विरोध नहीं करते तो यह राजस्‍थान सरकार का रेवेन्‍यू दो साल पहले बढ़ जाता। आज माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जिस आधार पर किया है उसमें राजस्‍थान का रेवेन्‍यू उतना नहीं बढ़ा जितना बढ़ना चाहिए, दूसरा रेवेन्‍यू बढ़ रहा है, उस रेवेन्‍यू को जो अनअकाउण्‍टेबल बढ़ रहा है, उसके लिए वैट में संशोधन करने का यह काम करे इसलिए मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि इसको जनमत जानने के लिए प्रसारित किया जाए।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं कि राजस्‍थान के हित में भी य‍ही है कि हम उन चीजों को आइडेण्‍टीफाई करें, उन आर्टिकल्‍स को आइडेण्‍टीफाई करें जहां दूसरे स्‍टेट से फ्लोर रेट के आधार पर यदि हम करेंगे तो राजस्‍थान का नुकसान होगा। केरल ने यह स्‍टार्ट किया है और केरल ने पहली बार भारत सरकार से यह कहा है कि यह जो वैट कानून है, वह हमारे हित में नहीं है, लक्‍जरी टैक्‍स लगाकर केरल गवर्नमेंट ने अपना पैसा बढ़ाया है। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, पश्चिम बंगाल के वित्‍त मंत्री जिनकी कमेटी ने हिन्‍दुस्‍तान में वैट लगाया, वहां की सरकार भी नई चीजों को सोच रही है तो राजस्‍थान की सरकार को भी नई चीज सोचकर राजस्‍थान के हित का ध्‍यान रखना पड़ेगा। मैं सोचता हूं कि सरकार यह जो बिल लाई है वह बिल न तो संवैधानिक दृष्टि से अप्रूव्‍ड है, यह बिल हेस्‍ट में लाया गया है, इस बिल में न शिड्यूल फस्‍ट है, न शिड्यूल सैकण्‍ड है, शिड्यूल फस्‍ट और शिड्यूल सैकण्‍ड पार्ट होता है, एक्‍ट के स्‍टेच्‍यू का पार्ट होता है,  बिना शिड्यूल फस्‍ट और सैकण्‍ड के रेट्रोस्‍पेक्टिव डेट से इन्‍होंने जो अमेंडमेंट किया है और व्‍यापारियों को जो लाभ दिया है उसको रेगूलराइज करने का काला धंधा कर रहे हैं। मैं इसके खिलाफ माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि इस बिल को जनमत जानने के लिए प्रसारित किया जाए ताकि जनता के साथ न्‍याय हो सके।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री हरिमोहन शर्मा।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान मूल्‍य परिवर्धित कर विधेयक, 2007 पर नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य ने...।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): इनके भाषण के पश्‍चात् कोई बात रह गई क्‍या?

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): मैं उन चीजों को नहीं छुउंगा जिन चीजों पर विशेष रूप से नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य ने प्रकाश डाला है।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): आप अनछुई चीजों को ही छूते हैं।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): अनछुई चीजों को छूता हूं वही आदमियों को थोड़ी चुभती है इसलिए उसी में आनंद की अनुभूति होती है।  

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): यह जो आरोप लगा है अभी आपके ऊपर, काला धन कमाने का तरीका ढूंढा है, उस पर नहीं जाएंगे, वह तो इन्‍होंने कह दिया।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): हमारे ऊपर तो आरोप लगता ही नहीं आप समझ लो।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): वह कौनसा पक्ष काला धन ज्‍यादा कमा रहा है, आप लोगों में से, आपके तो पक्ष और विपक्ष है, इतना तो बता दो आप। आप तो प्रखर आदमी हो, संत आदमी हो, कह दो, हमें भी जानकारी हो जाए, कुछ बोलो।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इस संशोधन विधेयक पर मैं कुछ बातों की ओर सरकार का और माननीय मंत्रीजी का ध्‍यान आकर्षित करना चाहता हूं। सबसे पहले तो यह निर्विवाद है कि जिन राजनीतिक कारणों से मौजूदा भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्‍व और सरकार ने राजनीतिक उद्देश्‍यों की पूर्ति के खातिर दो साल तक वैट अधिनियम नहीं लगाकर राजस्‍थान के हितों की अनदेखी की है उससे ज्‍यादा शर्म की बात मौजूदा नेतृत्‍व के लिए कोई दूसरी हो नहीं सकती है। इसके साथ ही माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका ध्‍यान आकर्षित करना चाहता हूं कि सन् 2005-06, 2006-07 का बजट इन्‍होंने प्रस्‍तुत किया उसमें इन्‍होंने वैट लागू करने के सम्‍बन्‍ध में जिन-जिन चीजों को प्रस्‍तावित किया था या तो वे वस्‍तुएं जो इन्‍होंने निर्धारित दर उसमें रखी, औचित्‍यपूर्ण तरीके से, विवेकपूर्ण तरीके से किसी ठोस आधार पर नहीं रखी और इस कारण लगातार इन्‍होंने जो टैक्‍स नीति  और टैक्‍स रेट लगाई उसमें समय समय पर इतने व्‍यापक रूप से परिवर्तन किया कि उससे यह आश्‍चर्य होता है और सुखद आश्‍चर्य कि वर्तमान वित्‍त मंत्रालय राजस्‍थान सरकार का और वित्‍त मंत्रालय से सम्‍बन्धित जो भी बुद्धिजीवी वर्ग है उन्‍होंने यह नहीं सोचा कि जिस समय वैट एक्‍ट के तहत उन्‍होंने कर प्रस्‍तावित किया उसमें इतने व्‍यापक संशोधन एक साल की अवधि के अंदर करने पड़े कि जिसकी कोई कल्‍पना नहीं की जा सकती।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जिस समय इन्‍होंने प्रावधान किया 1 अप्रैल, 2006 को, उसके बाद माननीय मुख्‍य मंत्रीजी ने सदन में विचार विमर्श होने के पश्‍चात् करीब 28 वस्‍तुओं की कर नीति और कर रेट में परिवर्तन किया, वहां तक भी ठीक है। वित्‍त मंत्री जब सदन में कोई सदस्‍य विचार करे और उनमें गुण और अवगुण के आधार पर उसमें रेट में अंतर करे यहां तक तो समझ में आता है लेकिन सबसे बड़ा आश्‍चर्यजनक घटनाक्रम यह है कि 1.4.6 के बाद राजस्‍थान की विधान सभा में वैट एक्‍ट पास होने के बाद और माननीय मुख्‍य मंत्रीजी की घोषणा कर देने के बाद राजस्‍थान विधान सभा का सत्र समाप्‍त होने के पश्‍चात् से आज तक, नवम्‍बर माह तक, इन्‍होंने 64 वस्‍तुओं पर कर की नीति में परिवर्तन किया और लगभग 33 वस्‍तुओं पर इन्‍होंने कर लगाने के बाद इस दौरान कर मुक्ति की घोषणा की और लगभग इतनी ही शेष बची है, इनकी कर रेट में अंतर किया गया। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आप जानते हैं कि इतनी ज्‍यादा 64 वस्‍तुओं पर कर निर्धारण में या तो इन्‍होंने गलतियां की है कि पहले जो गलत कर निर्धारण किया उसको यह स्‍वीकार करें करे लेकिन इसके पीछे एक महत्‍वपूर्ण बात है माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, .....।

 

Gpc/akt/ 02042007/1520/2l

 

इन 64 वस्‍तुओं के लिए स्‍थानीय स्‍तर पर अलग-अलग संघों द्वारा अलग-अलग व्‍यापारियों द्वारा अलग-अलग प्रभावित लोगों द्वारा स्‍थान-स्‍थान पर आंदोलन करवाये गये, उन स्‍थानों पर मांग की गई। मांग करने के बाद वहां पर जनांदोलन करवाये गये, वहां की दुकानें बंद करवायी गईं और इसके बाद जिस प्रकार से यह सरकार नियमित और लगातार अनकांस्‍टीट्युशनल काम करने में माहिर है एक ऐसी सस्‍था खड़ी कर दी जिसका नाम है जन अभाव अभियोग निराकरण संस्‍था। जन अभाव अभियोग निराकरण संस्‍था में उन व्‍यापारियों से आप पर्ची दिलवाओ, उनसे अपनी मांगों के मामले में कहलाओ, फिर जन अभाव अभियोग निराकरण संस्‍था वित्‍त मंत्री को अलग रखते हुए, सरकार को अलग रखते हुए सरकार के कुछ जो उनके प्रभाव के नीचे के लोग हैं उनको उस समिति में अपने साथ रखते हुए जगह-जगह जाएंगे। जगह-जगह जाकर जन अभाव अभियोग निराकरण समिति के नाम से वे वहां पर सभा करेंगे, फिर उन व्‍यापारियों को बुलवाएंगे, व्‍यापारियों से ज्ञापन लेंगे और व्‍यापारियों से ज्ञापन लेने के बाद आपसी चर्चाएं करेंगे और उसी स्‍थान पर यह आश्‍वासन देंगे कि हम आपका यह काम इतना कर देंगे, इसमें इतना प्रतिशत कर देंगे और इसमें इतना प्रतिशत कर देंगे यह जन अभाव अभियोग निराकरण समिति के माध्‍यम से राजस्‍थान सरकार जिस प्रकार के टैक्‍स के मामले में व्‍यापारियों से जो ब्‍लैकमेलिंग कर रही है और जिस प्रकार से आर्थिक दृष्टिकोण से, जिस प्रकार का घालमेल इन सब बातों में हो रहा है, सबसे ज्‍यादा माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, चिन्‍ता का विषय यह है। आप आश्‍चर्य करेंगे आज तक के इतिहास में कभी भी शराब पर कोई टैक्‍स माफ नहीं हुआ, लेकिन यह सरकार है और यह कमेटी है, यह पब्लिक ग्रीवेंस कमेटी है और यह राजस्‍थान सरकार के उसमें तथाकथित मंत्री हैं जो उनके साथ हैं। आप आश्‍चर्य करेंगे इन्‍होंने रिकार्ड कायम किया है। इसमें इन्‍होंने चौसठवें कालम पर लिखा है, जिस पर इन्‍होंने 12.5 परसेंट टैक्‍स लगाया था, country liquor, Indian made foreign liquor and beer, 12.5 परसेंट का टैक्‍स इस सरकार ने लगाया, लेकिन शराब की बड़ी-बड़ी कंपनियों से मिले होने के कारण, शराब के ठेकेदारों से मिले होने के कारण इन्‍होंने चुपचाप इस 12.5 परसेंट टैक्‍स को इस विधान सभा का सत्र खत्‍म होने के बाद शराब पर पहली बार राजस्‍थान के इतिहास में जो 12.5 परसेंट टैक्‍स इस सरकार ने लगाया पूरा का पूरा उन शराब माफियाओं के लिए और उन शराब कंपनियों के लिए करमुक्‍त कर दिया। जो 32, 34 और 40 चीजें हैं जिनको इन्‍होंने एक्‍जम्‍प्‍ट किया, इस सरकार ने जिस पर 12.5 परसेंट का टैक्‍स लगाया उस समिति ने उसको समाप्‍त कर दिया। जो-जो समितियों ने सिफारिश की और जिस-जिस प्रकार के समितियों ने निर्णय लिये और जिस प्रकार की चर्चा चाहे कोटा हो, चाहे बीकानेर हो, चाहे जयपुर हो और अन्‍य स्‍थानों पर उन समितियों के मामले में आज चर्चा हैं और व्‍यापारी आकर कहते हैं इस समिति के माध्‍यम से हमने यह आश्‍वासन दिया, हम यह करेंगे, वह करेंगे उसके आधार पर सारे राजस्‍थान के आर्थिक दृष्टिकोण पर इस वैट एक्‍ट के तहत जो निर्णय राजस्‍थान सरकार ने लिया है उससे ज्‍यादा शर्म की बात दूसरी नहीं हो सकती। अगर इन्‍होंने विवेकपूर्ण तरीके से वैट एक्‍ट में अपनी बात लिखी होती और वैट एक्‍ट के बाद 75-75 चीजों में सारा ही रिशफल जिसमें 40 एक्‍जम्‍प्‍ट और किसी में कितना, किसी में 5 परसेंट कम और किसी में क्‍या किया।

  कोटा स्‍टोन के मामले में जिस प्रकार का आंदोलन हुआ, आखिर उस समिति की सिफारिशों के मामले में और कोटा स्‍टोन के मामले में कोटा, झालावाड़, रामगंजमण्‍डी, बूंदी में जो कोटा स्‍टोन का मामला है आखिरकार माननीय मुख्‍य मंत्रीजी को अपने बजट भाषण के जवाब में प्रहलाद जी गुंजल को संतुष्‍ट करने के लिए कहना पडा कि हम कोटा स्‍टोन पर कुछ रिवाइज करने पर विचार कर रहे हैं। मेरा आपसे विनम्र अनुरोध है कि विधान सभा को विश्‍वास में रखे बिना इतना कर दिया। ठीक है, सरकार का अधिकार है वैट एक्‍ट के तहत सरकार अधिकार ले सकती है, कुछ चीजों में रिवाइज कर सकती है, लेकिन 75-75 वस्‍तुओं में। पूरा ही आमूलचूल परिवर्तन। इस सरकार को यह मानना पड़ेगा यहां के वित्‍त मंत्रालय को, यहां के वित्‍त मंत्रीजी को और यहां के वित्‍त मंत्रालय से जुड़े सभी लोगों को कि ये सार्वजनिक रूप से स्‍वीकार करें कि हमसे भयंकर गलती हो गई, हमने 31 मार्च, 2006 को जो बजट पास करवाया था उसमें बिना सोचे-समझे अविवेकपूर्ण तरीके से उन वस्‍तुओं को सम्मिलित कर लिया जिनको हमें नहीं करना चाहिए था। उन वस्‍तुओं को हमने इसलिए सम्मिलित कर दिया कि आगे जाकर कोई प्रेशर टेक्टिक्‍स करके इन संस्थाओं को बुलाकर इनसे राजनैतिक दृष्टिकोण से, आर्थिक दृष्टिकोण से वार्तालाप करके सारा का सारा परिवर्तन कर दें यह सोच होगा, यह स्‍वीकार करना पड़ेगा। अब या तो अपनी गलती स्‍वीकार करो या इस बात को आपको अस्‍वीकार करना है तो यह कहो कि हमने इस प्रकार के कारणों से नहीं किया। आप सार्वजनिक रूप से क्षमायाचना करें कि इतनी मेजर भूल हमारे वित्‍त मंत्रालय और हमसे हुई है इस कारण जनता हमको माफ करे। या तो माफी मांगो।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आप बड़े जोरदार तरीके से भाषण दे रहे हो, शराब पर किस दिन सेल्‍स टैक्‍स था आपको मालूम है क्‍या? 1987 के बाद में एक्‍साइज टैक्स में इसको शामिल कर दिया। आज तक 1987 के बाद शराब पर कभी सेल्‍स टेक्‍स रहा ही नहीं।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): बजट में रखा ही क्‍यों, आपको मालूम था तो। आपको मालूम था तो नहीं रखना चाहिए था। बातें कर रहे हो खामख्‍वाह।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): यह शराब माफिया वाली बात तो आप छोड़ो, इसको इससे रिलेटेड ही रहने दें, लेकिन जिस प्रकार से शराब की कंपनियों से इन ठेकेदारों को एक तरफ ले जाकर उन कंपनियों से ..(व्‍यवधान)..

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): अब आपको बोलना है उसका तो कोई इलाज नहीं है। उपाध्‍यक्ष महोदय, इनको बोलना है, कुछ कहना है, उसका तो इलाज नहीं है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): जिस प्रकार से उन मामलों में करोड़ों रुपया अप्रत्‍यक्ष रूप से इस सरकार ने वसूल किया है ..(व्‍यवधान).. करोड़ों रुपया वसूल किया है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, जो चीज बुनियादी तौर पर नहीं है, 1987 के बाद सेल्‍स टैक्‍स अगर शराब पर कभी लगा है ..(व्‍यवधान).. इसलिए उस स्‍लेब में यह आता ही नहीं था।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आप इससे अंदाज लगा लो केवल मात्र एक मंत्री बैठा है केबिनेट का, बाकी पूरी केबिनेट नहीं है। वैट में कितना घपला है इसका उदाहरण है केवल एक मंत्री बैठा हुआ है जस्‍टीफाई करने के लिए। पूरी केबिनेट आउट है, इससे अंदाज लगा लो आप। आपकी इस वैट की कमेटी के अध्‍यक्ष हैं उन्‍होंने पूरी केबिनेट को नेगलिजेंस कर रखा है। उसको अकेला मंत्री जस्‍टीफाई नहीं कर सकता, यह प्रजेंस शॉ कर रही है। केवल महावीर जी बैठे हुए हैं नोट करने के लिए कि आपके एक्‍शन कैसे हैं। That’s all. 

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): महावीर बजरंगी हैं।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): वह बजरंगी है ध्‍यान रखना, आज हनुमान जयंती है। बजरंगी को याद मत दिलवाओ। बहुत महंगा पड़ेगा, ध्‍यान कर लेना।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): यह घोटा तो आपको ही महंगा पड़ेगा।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): आपकी इस दिखावटी, प्रदर्शित करने वाली एकता के लिए आप सभी बधाई के पात्र हैं, आप अपने मनों में टटोलें कि कौन कहां और किस-किस जगह से, कहां-कहां कैसे चल रहा है। आपकी एकता चलती रहे, हम तो कायल हैं आपकी एकता के।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): एकता किस बात के लिए?

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): सरकार चलाने के लिए।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): हम चलाएंगे ना।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): मैं यही तो कह रहा हूं, लेकिन जिस ढंग से वर्तमान परिप्रेक्ष्‍य में आपकी सरकार चल रही है और जो चलाने के तरीके का विरोध माननीय महावीरजी आपने समय-समय पर प्रदर्शित किया है हम तो उन बातों से कभी-कभी प्रभावित हो जाते हैं कि सच कह रहे हैं, क्‍या है, लेकिन अंततोगत्‍वा उस सारे भ्रष्‍टाचार की नदी में आप दूर से बैठे-बैठे देखकर उसका समर्थन करोगे तो दोषी आप भी होंगे, बच नहीं पाओगे।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): ऐसा है भ्रष्‍टाचार की जननी यदि कोई है तो वह कांग्रेस पार्टी है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): यह आप सब हमारी पैदाइश हो, इसमें दिक्‍कत ही नहीं है, लेकिन यह तो मानो ..(व्‍यवधान)..

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): ये सारे अमेण्‍डमेंट आज तक किये हैं ..(व्‍यवधान)..

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): कांग्रेस और बीजेपी में क्‍या अंतर है वह यह सरकार बता रही है पार्टी में डिफरेंस, पूरी केबिनेट एक तरफ बैठी रहे और कुछ आदमी फैसला करें ऐसा पार्टी में डिफरेंस कोई नहीं है। पार्टी में डिफरेंस। मंत्री को मालूम नहीं क्‍या हो रहा है यह डिफरेंस। चीफ व्हिप को मालूम नहीं है और चीफ व्हिप ख्‍ंड़ा होकर जस्‍टीफाई कर रहा है।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): आपकी पार्टी में डिफरेंस है और यह डिफरेंस रहेगा।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): ‘Party with difference’ and party with difference, both.

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): यह अंग्रेजी समझते कम हैं।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): महावीर जी, आप तो सत्‍यवादी आदमी हो मान लो सारी बात।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): क्‍या बात मान लो?

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): यह मान लो कि हमारे साथ अन्‍याय हो रहा है।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): किसके साथ अन्‍याय हो रहा है?

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): आप तो आंसू पोंछते हो।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): हमारे साथ तो कोई अन्‍याय नहीं हो रहा है।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): नहीं हो रहा है तो आपकी यह स्थिति क्‍यों हो रही है? आपका नाम ही नहीं है पार्टी में आजकल। विधान सभा में जरूर चीफ व्हिप का नाम है, इसके अलावा नहीं है। आप इतने सीनियर मेम्‍बर हो, आपको कोने में डाल रखा है। आप रात को रोते हो और दिन में हंसते हो।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): आप यहां बाहर क्‍या कहते हो? आप बाहर कहते हो नेता बनने का अधिकार तो मेरे को है।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): आप रात को रोते हो या नहीं रोते हो?

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): आप कहते हो कि इनके हाथ-पैर चलते नहीं हैं जिनको नेता बनाया है।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): कोई बात नहीं, आप हमारे भाई हो, आप हमसे प्‍यार से रहते हो इसलिए आपको याद दिला रहे हैं, नहीं तो हमें कोई मालूम नहीं है।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): आपने नहीं कहा कि मैं ही केवल कंपीटेंट पर्सन हूं जो यहां विपक्ष का नेता बन सकता हूं?

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): हम तो मानते हैं, लेकिन ये संसदीय कार्य मंत्री नहीं मानते।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): मैं हूं जो तो आप सबको मानना पड़ेगा।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): राजस्‍थान की जनता तो सक्षम मानती है, ये अक्षम मानते हैं, इतना अंतर है।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): मुझे अक्षम कैसे मानते हैं? मुख्‍य सचेतक अक्षम होता है क्‍या?

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): शेर मूंछों को इधर-उधर नहीं करता, दहाड़ता भी है। आज तो आपने दहाड़ना ही बंद कर दिया।

श्री रामप्रताप कासनिया (पीलीबंगा): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इस बहस से कोई राजस्‍थान का भला होने वाला नहीं है।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): बहुत ही संक्षेप में मैं दो-तीन चीजें और निवेदन करना चाहता हूं। सेक्‍शन 18 में input tax credit and stock on the date of commencement of this Act, यह आपने प्रोविजन किया है।

 

मोहन/अरूण/अशोधित प्रति प्रकाशनार्थ नहीं/02042007/1530/2m 

 

यह आपने प्रोविजन किया है और इस प्रोविजन के तहत ही आपने जब इसमें छूट का प्रावधान किया गया है तो वाणिज्‍य कर आयुक्‍त ने 1.7.2007 को इस एक्‍ट की मूल भावनाओं के विपरीत एक सर्कुलर निकाल दिया और एक सर्कूलर निकाल कर के जो लाभ मिल सकता था व्‍यापारियों को वह लाभ इन्‍होंने कम कर दिया। जैसे पेडी पर तो आपने छूट दे दी और चावल के स्‍टॉक पर आपकी छूट नहीं है लेकिन चावल के स्‍टॉक वाला व्‍यापारी अगर उस चावल को दूसरों को बेच देता है तो उसको छूट प्राप्‍त है। इसी प्रकार खादी और ग्रामोद्योग में आपने छूट दे दी लेकिन राजस्‍थान में अगर वह कच्‍चा माल खरीदता है तो उनको छूट नहीं है। इसी प्रकार पोहा के मामले में उसको कर मुक्‍त कर दिया लेकिन अगर वह उसके ऊपर जो गल्‍डे की खरीद पर जो आईटीसी छूट नहीं दे रहे हैं, फिर राजस्‍थान में इस परिस्थिति में कौन उनका माल खरीदेगा, यह कुछ इनकंसीसटेंसी जो हैं, इन सब बातों के साथ जो परिस्थितियां हैं, उनमें मेरा आप सब से अनुरोध है, सरकार से अनुरोध है कि हमने जो आपके सामने विचारों की अभिव्‍यक्ति की इस संबंध में इस बिल को जनमत जानने के लिए आप प्रसारित करें।

श्री उपाध्‍यक्ष: धन्‍यवाद। श्री गोपाल बाहेती।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, वैट के बिल पर चर्चा के दौरान जो तथ्‍य सामने आए उससे स्‍पष्‍ट है कि सरकार किस तरह विधान सभा को एक तरफ रखकर छिपकर काम करना चाहती है। जो बिल संविधान सम्‍मत नहीं हो, जिस बिल के अन्‍दर एम्‍स एण्‍ड आब्‍जेक्‍ट्स नहीं हों, जिस बिल में शिड्यूल वन और टू नहीं हो उस बिल को सदन से पास करवाना पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है। उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे यह यह निवेदन करता हूं कि गत सत्र से यह बिल लाने के बाद सत्र के बाहर जिस तरह से बदलाव किया गया समय समय पर और जिस तरह की चर्चा राजस्‍थान में हुई वह अपने आप में एक बहुत बड़ा प्रश्‍न चिन्‍ह है। कब, कौन व्‍यक्ति किससे मिल लिया और किस प्रकार से जिंस वैट से मुक्‍त हो गई, वह पता न मंत्री मंडल को, न पता दूसरों को और पता पड़ता है सिर्फ अख़बार से जब फोटो छपती है अख़बार में कि बहुत बहुत धन्‍यवाद मुख्‍य मंत्री जी का और इन मंत्री जी का, उसमें हमारे मंत्री जी का फोटो आता ही नहीं है तो इससे सिद्ध होता है कि ...

श्री वीरेन्‍द्र मीणा (राज्‍य मंत्री, वित्‍त एवं करारोपण): कल ही आया है फोटो।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): अजी, एक आया होगा, साहब। इससे सिद्ध होता है कि सरकार किस तरह वैट के मामले में छिपकर काम कर रही है और मुझे तो लगता है कि वैट इनके पास एक ऐसा हथियार के रूप में आ गया है कि जिसके माध्‍यम से सरकार अपने आप में किस तरह से काम कर ही है, यह कल्‍पना ही नहीं कर सकते आप। उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे यह भी कहना चाहता हूं कि जिस प्रकार राजस्‍थान की भा.ज.पा. सरकार ने इसको दो साल लेट किया, यह राजस्‍थान की जनता का सबसे बड़ा नुकसान था, इस वैट के बिल को और केवल राजनीति आधार पर एन.डी.ए. सरकार ने इस बिल को बनाया, लागू किया, प्रस्‍ताव किया और ज्‍यों ही विपक्ष में आए उसका विरोध किया तो जिस पार्टी को शुरू से बिल को लेकर के राजनीति करनी थी, वह पार्टी आज भी इसमें राजनीति कर रही है। उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको एक उदाहरण देना चाहता हूं कि बांस जैसी एक छोटी सी चीज जिसको गूंथ कर घुमंतू जाति के लोग दाढ़ी बनाते हैं, झाड़े बनाते हैं, वह तो वैट में है और बड़ी बड़ी चीजें वैट से बाहर हैं, चूंकि वह छोटे लोग इनको खुश नहीं कर सकते, जिस टर्म्‍स से हम बात करते हैं, उस टर्म में वह बात नहीं कर सकते, वह केवल हाथ जोड़कर रिक्‍वेस्‍ट कर सकते हैं तो यह बिल वैट इसलिए बनाया गया था कि वैट के बाद कानून कैसे बनेगा कि जिसमें जो टैक्‍स लगेंगे उस टैक्‍स के अन्‍दर एक सिमेट्री आएगी, एक साम्‍यता आएगी और उसमें एक ऐसी नार्मल्‍सी आएगी कि जिससे यहां के व्‍यापार में बढ़ोत्‍तरी हो। मैं आपको एक उदाहरण देना चाहता हूं कि छोटे व्‍यापारी को 5 लाख के टर्न ऑवर पर वैट से मुक्‍त करते हो, आप यह देखिए इस जमाने में 5 लाख का टर्न ऑवर तो बहुत छोटी सी बात है, इसको 10 लाख का करते। आज हम देखते हैं कि गली कूचे में बैठा व्‍यापारी भी आज दुकान खोलता है तो 4-5 लाख का माल रखता है, उस व्‍यापारी को भी आर्थिक वैट से मुक्‍त नहीं करोगे तो किस तरह दूर होगी बेरोजगारी ? एक मेरा इसमें निवेदन यह था। इसी प्रकार से, यह पहले जो सी फार्म और डी फार्म जमा कराते थे तो उसमें दो दो साल का समय भी लगता था, अब इसमें समय दिया है तो 3 महीने का और आज की तारीख में भी आपके 2003-04 2004.05 और 2005-06 इनके टैक्‍स का असेसमेंट अब भी बाकी पड़ा है और यदि इसके अन्‍दर इन्‍होंने सी फार्म और डी फार्म को जमा कराने में और समय नहीं दिया तो बहुत से व्‍यापारी जिन्‍होंने अपना असेसमेंट नहीं कराया, वह घाटे में रहेंगे क्‍योंकि इसके अन्‍दर असेसमेंट तो नहीं हो रहा है, अब तक हुआ नहीं है और हम इसको उस दृष्टि से देखते हैं कि जिनमें सैल्‍स टैक्‍स प्राप्‍त था, वह वैट में ले लिया, जैसे आपकी रद्दी और आपकी यह यूज में आपका यह प्‍लास्टिक उसमें सैल्‍स टैक्‍स प्राप्‍त था और वैट आपका चार परसेंट है, आप उसमें माफ कर सकते हैं तो लोगों को ठीक लगेगा इससे। आज हम गुलकंद पर गुलाब जल पर माफ कर दिया लेकिन गुलाब का जो सूखा फूल है उन पर वैट है तो एक व्‍यापारी जो गुलाब जल बनाएगा, गुलकंद बनाएगा, वह गुलाब का फूल भी रखेगा तो किसी प्रकार से आप व्‍यापारी को अपने कब्‍जे में रखना चाहते हैं तो यह कुछ बातें इस प्रकार की हैं जो आपको इसके अन्‍दर बहुत ही पुनर्विचार करने की बात है। मैंने पूर्व में बताया कि फार्म न. 7 और 9 वह वास्‍तविकता में इतना काम्‍प्‍लीकेटेड है, उसमें होनी चाहिए सरलता ताकि व्‍यापारी खुद भर सके। ताकि उसको इसमें कोई कन्‍फ्यूजन नहीं हो और न वह टैक्‍स की चोरी करे और न वह इंस्‍पेक्‍टर राज के चंगुल में आवे, दोनों बातों से वह बच जाएगा। इसके साथ साथ, उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा निवेदन आपसे यह भी है कि यह बहुत बड़ी चिंता की बात है कि जो मेरे पूर्व वक्‍ता बोल रहे थे कि 60-60, 70-70 चीजों को वैट से कम कर देने, वैट से फ्री करने और आउट साइड द मिनिस्‍ट्री, यह अपने आप में एक बहुत बड़ी चिंता की बात है और यदि हमको इसी प्रकार का बिल बनाना है तो फिर तो आपका आर्डिनैंस ही काम कर रहा है फिर किसलिए इस खोटे बिल के अन्‍दर हमको पार्टनर बनाते हो और विधान सभा की सील लगवाते हो तो मेरा आपसे निवेदन यह है कि एक बार पुन: इस बिल को जनमत जानने के लिए परिचालित करें और इस बिल पर टैक्‍सेशन, व्‍यापारी औरा जनता मिलकर के खुले मन से पुनर्विचार करें ताकि इसके अन्‍दर एकरूपता आ सके। धन्‍यवाद, जयहिन्‍द।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री संयम लोढ़ा। - अनुपस्थित।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): उपाध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान मूल्‍य वर्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2007 को जनमत जानने के लिए परिचालित किया जाए, इसके बारे में मैं अपने विचार रखता हूं। सबसे पहले जर्मनी में एफ वॉन साइमंस ने 1918 में जर्मनी में टर्न-ओवर टैक्‍स को सब्‍स्‍टीट्यूट करने के लिए इस विचार को आगे बढ़ाया और उसके बाद फ्रांस पहला देश था, उपाध्‍यक्ष महोदय, जिसने वैट को लागू करने के लिए आगे आकर अपना एक स्‍थान बनाया। आज संसार के 120 देशें में वैट सिस्‍टम लागू है जिसके अन्‍दर सेल्स टैक्‍स को वैट के रूप में वसूल किया जाता है, यह वैल्‍यू एडेड टैक्‍स है और इसमें वसूल करने वाली संस्‍था को हर पाइंट पर टैक्‍स मिलता है। इसके कारण से सन् 1918 के बाद भारत बहुत पीछे रह गया। 1992 में राना चलैया नाम की एक कमेटी बनी, उस कमेटी ने यह सुझाव दिया कि तमाम प्रकार से टोल-टैक्‍स, एंट्री टैक्‍स अथवा सैस वगैरह इनको टर्न-ऑवर टैक्‍स वगैरह में हटा कर एक इक्‍जाई टैक्‍स लगाया जाए जिसको वैट के रूप में परिभाषित किया और उसके बाद हमारे देश में वैट का प्रादुर्भाव हुआ और धीरे धीरे हमारे अन्‍य प्रदेशों में यह प्रारंभ हुआ।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): देखो, संसदीय कार्य मंत्री जी, कितनी तैयारी है, कहां कहां से जानकारी, फ्रांस की, जर्मनी की, सारे देशों की, देखो। आप बातें करने में लग रहे हो। ये सुनो बहुमूल्‍य सुझाव। ...(व्‍यवधान)...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): दुःख तो इस बात का है न उनकी विद्वता को आप ही नहीं मानते हैं। ...(व्‍यवधान)...

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): और कोई विद्वता मान न माने लेकिन आपकी विद्वता का स्‍तर पता लग गया, आप विद्वता की जगह किसको खुश करने के लिए क्‍या करते रहते हो और नारद मुनि का रोल यदि किसी ने वास्‍तव में किया है तो आपने किया है, बस एक चोटी की जरूरत है अगर वह लग जाए तो पक्‍के नारद बन जाएं आप। तो मैं उपाध्‍यक्ष महोदय, आपसे यह कह रहा था कि भारत में फिर राजस्‍थान में कैसे लेख हुए इसके बारे में लोग कह चुके हैं लेकिन मैं खास तौर से आपसे यह कहना चाहता हूं कि राजस्‍थान में जब वैट लागू हुआ उस समय राजस्‍थान में और देश में 6 अनुसूचियां बनाई गईं।

 

सुरेन्‍द्र/अरुण/02042007/1540/2n/1

 

उन अनुसूचियों के बारे में आपको खासतौर से बताना चाहता हूं कि धारा 8 (1) के अन्‍तर्गत फर्स्‍ट अनुसूची जारी की गई जिसमें उन वस्‍तुओं पर टैक्‍स एग्‍जैम्‍प्‍ट किया गया है उसकी सूची दी गई है उसमें खासतौर से कृषि उपकरण, हमारे पशुओं से ढोने वाले वाहन हैं उनके बारे में है और हमारे पावर से चलने वाले जो ट्रैक्टर वगैरह हैं उनके बारे में सूची दी गई है। जिनके ऊपर टैक्‍स एग्‍जैम्‍प्‍ट किया गया था उसकी अनुसू‍ची है। दूसरी अनुसूची वह है जिसमें वैट माफ किया गया है। इसमें ऐसे व्‍यक्तियों की सूची है जैसे यू एन ओ, डिप्‍लोमेट्स और इससे सम्‍बन्धित संस्‍थाएं। तीसरी अनुसूची वो है जिसमें एक प्रतिशत वैट लगाया गया है। चौथी अनुसूची वो है जिसमें 4 प्रतिशत वैट लगाया गया है। 5वीं अनुसूची वो है जिसमें एक और चार प्रतिशत पर जो कवर नहीं किये जाते हैं उन पर 12.5 प्रतिशत टैक्‍स लगाने की बात कही गई है और छठी अनुसूची वो है जिसमें विशेष कर लगाया गया है जिसमें खासतौर से 6 वस्‍तुएं हैं। उसमें मोलासेस, भाँग, ओपियम, फोरेन लिकर, एवियेशन से सम्‍बन्धित स्प्रिट और हाई डीजल स्प्रिट, ये 6 वस्‍तुएं ऐसी हैं जिनके ऊपर विशेष प्रकार से कर लगाया गया है। इसमें फोरेन लिकर के ऊपर 20 प्रतिशत, भाँग के ऊपर 50 प्रतिशत, ओपियम के ऊपर 50 प्रतिशत और एवियेशन डीजल के ऊपर 20 प्रतिशत। उपाध्‍यक्ष महोदय, इस प्रकार से ये विशेष प्रकार की वस्‍तुएं हैं जिनके ऊपर इतना-इतना लगाया गया है। इसमें डीजल और पैट्रोल को भी लिया गया है जिसमें डीजल के ऊपर 20 प्रतिशत और पैट्रोल के ऊपर 28 प्रतिशत टैक्‍स लगाया गया है।

  उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं खासतौर से आपसे यह कहना चाहता हूं कि मेरे से पूर्व वक्‍ताओं ने जैसा सदन को बताया कि आपने कंट्री मेड जो फोरेन लिकर है उसके ऊपर वैट नहीं लगाया जबकि भाँग के ऊपर, ओपियम के ऊपर, अन्‍य चीजों के ऊपर 50 प्रतिशत टैक्‍स लगाया है। क्‍या वे एक्‍साइज के आइटम नहीं हैं? वे एक्‍साइज के आइटम हैं। इसलिए मेरा आपसे कहना है कि या तो जो कंट्री-मेड फोरेन लिकर है उसके ऊपर भी आप 50 प्रतिशत लगायें और नहीं तो कम से कम भारत सरकार की गाइड लाइन है कि आप समान चीजों के ऊपर समान करें। ये सब नशे की चीजें हैं और इनके ऊपर जितना लगाया जाए, मैं समझता हूं वो कम है पर इनके ऊपर एक जैसा टैक्‍स लगना चाहिए।

  दूसरी बात, मैं आपसे कहना चाहता हूं कि वैट का जब कंसेप्‍ट आया था उस समय यह कहा गया था कि पूरे देश में 46 प्रकार की ऐसी वस्‍तुएं हैं जो स्‍टेट के ऊपर छोड़ दी गई थीं जिनको स्‍टेट अपनी मर्जी से छोड़ दे। लेकिन इन्‍होंने अब तक 72 जिन्‍सों के ऊपर टैक्‍स एग्‍जैम्‍प्‍ट कर दिया। एक *** कमेटी बनी उसको जो माला पहना दे, अब माला कौनसी थी, क्‍या थी वो आप रोज अखबारों में पढ़ते हैं, नोटों की माला पहनाओ और टैक्‍स माफ कराओ। खुलेआम यह वन विंडो सर्विस हो गई कि *** को माला पहनाओ और टैक्‍स माफ कराओ।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, यह बिना आधार के अंकित नहीं होगा।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, जो सदन के सदस्‍य नहीं हैं और बिना किसी प्रमाण के आप आरोप लगा रहे हैं, मैं समझता हूं कि कांग्रेस के अध्‍यक्ष हैं, वरिष्‍ठ सदस्‍य हैं, इस तरह चलते-चलते ही किसी पर आरोप लगा देना बिना किसी कारण से, यह ठीक नहीं है। इसको एक्‍सपंज कराओ उपाध्‍यक्ष महोदय। इसको एक्‍सपंज कराओ।

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): क्‍या एक्‍सपंज कराओ। सारा राजस्‍थान जानता है। (व्‍यवधान) मैं तथ्‍यों के आधार पर बता रहा हूं कि 46 वस्‍तुओं पर ये टैक्‍स एग्‍जैम्‍प्‍ट कर सकते थे पर आज तक इन्‍होंने 72 वस्‍तुओं पर टैक्‍स एग्‍जैम्‍प्‍ट कर दिया।

श्री उपाध्‍यक्ष: यह अंकित नहीं होगा वो।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): संसदीय कार्य मंत्री जी, इसकी जांच करवा लें वास्‍तविकता पता चल जाएगी। रोजाना अखबारों में आ रही हैं ये बातें तो। (व्‍यवधान)

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): उपाध्‍यक्ष महोदय, 72 वस्‍तुओं के ऊपर इन्‍होंने टैक्‍स एग्‍जैम्‍प्‍ट कर दिया। किस आधार पर किया? इन्‍होंने जिस तरीके से इस मामले में धांधलेबाजी की है, मैं संसदीय कार्य मंत्री जी और वित्‍त राज्‍य मंत्री जी से यह जानना चाहता हूं कि आपने कौनसे एक्‍ट के आधार पर इन जिंसों को जिसको चाहा उसको माफ कर दिया? अमेंडमेंट तो आप आज ला रहे हो और पावर ले रहे हैं रेट्रोस्‍पेक्टिव इफेक्‍ट से कि यह अप्रेल, 2006 से लागू होगा। आपको कोई अधिकार नहीं था। जो वैट के मामले में पूरे राष्‍ट्र में आम सहमति बनी थी उसके अनुसार 46 वस्‍तुओं से ज्‍यादा कहीं पर भी टैक्‍स एग्‍जैम्‍प्‍शन का कोई इनको अधिकार नहीं था लेकिन इन्‍होंने उससे ज्‍यादा वस्‍तुओं को, दुगुने के करीब ये पहुंच गये हैं जिन पर इन्‍होंने टैक्‍स एग्‍जैम्‍प्‍ट कर दिया और उससे राजस्‍थान का रेवेन्‍यू लोस हुआ, राजस्‍थान का नुकसान हुआ।

उपाध्‍यक्ष महोदय, इसके अलावा मैं आपके माध्‍यम से यह कहना चाहता हूं कि जो अमेंडमेंट ये लेकर के आये हैं। खासतौर से amendment of section 3, Rajasthan Act No. 4 of 2003, इसमें इन्‍होंने किया है “Notwithstanding anything contained in sub-section (1) a dealer other than that enumerated in clause (a) or clause (b) of sub-section (1), who purchases goods from a registered dealer of the State and sells such goods within the State, may opt for payment of tax on his turnover excluding the turnover of the goods specified in Schedule I, at the rate as may be notified under sub-section (3) of section 4, subject to the condition that such annual turnover does not exceed  rupees fifty lacs in a year.” उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं इस सम्‍बन्‍ध में यह कहना चाहता हूं कि 50 लाख का टर्न ओवर जिसका होगा और वह कोई चीज इम्‍पोर्ट कर रहा है, अब इम्‍पोर्ट करने वाले व्‍यक्तियों को इतना लाभ मिलेगा कि 2 प्रतिशत गजट नोटिफिकेशन से इन्‍होंने टैक्‍स की सीमा निर्धारित कर दी है। आज थाइलैण्‍ड से, चाइना से और आस-पास के देशों से हमारे यहां सामान आ रहा है उसके ऊपर केवल 2 प्रतिशत टैक्‍स लगेगा और देश की उत्‍पादित वस्‍तुओं पर 4 प्रतिशत, 12.5 प्रतिशत टैक्‍स लगेगा। इसलिए यह आयातित वस्‍तुओं को लाभ देने के लिए नोटिफिकेशन निकलेगा और उसका लाभ निश्चित रूप से आयातित वस्‍तुओं का व्‍यापार करने वालों को मिलेगा, देश में उत्‍पादित वस्‍तुओं के लिए इससे कोई लाभ नहीं मिलेगा।

इसके अलावा एक बात इसमें और है कि जो व्‍यापारी अपना हिसाब-किताब नहीं रखते हैं उनको लम्‍पसम यह छूट देना चाहते हैं। वह छूट 50 लाख के व्‍यापारी को क्‍यों, कम से कम इसकी एक सीमा बनाई जानी चाहिए थी और आयातित व्‍यापार करने वाले को इस श्रेणी से अलग रखना चाहिए था।

इसके अलावा दूसरा अमेंडमेंट जो ये लेकर के आ रहे हैं खासतौर से सैक्‍शन 8 का, इसमें “(3A) Subject to such conditions as it may impose, the State Government may, if it considers necessary so to do in the public interest, by notification in the Official Gazette, add to or omit from, or otherwise amend or modify the Schedule-II, prospectively or retrospectively, and thereupon the Schedule shall be deemed to have been amended accordingly.” इसमें यह पावर ले रहे हैं कि अनुसूची 2 में जिन संस्‍थाओं को और जिन व्‍यक्तियों को यह रेट्रोस्‍पेक्टिव इफेक्‍ट से और आगे से कभी भी चाहे जब उनको करों में छूट दे सकते हैं। उपाध्‍यक्ष महोदय, इसमें यू एन ओ है, अन्‍तरराष्‍ट्रीय संस्‍थाएं हैं, डिप्‍लोमेट्स हैं और उनसे सम्‍बन्धित संस्‍थाएं हैं। ये अपने गजट नोटिफिकेशन के आधार पर किसी को भी यह कोई भी छूट दे सकते हैं। यह इतनी बड़ी भारी छूट लेने का मतलब यह है कि सरकार इस पावर का दुरुपयोग करेगी और जिसको चाहे उसको करों में छूट देगी। इसके लिए इसका मैं विरोध करता हूं।

इसके बाद amendment of section 15, Rajasthan Act No. 4 of 2003. “In sub-section (3) of section 15 of the principal Act, for the existing expression ‘the initial security shall be’, the expression ‘ the initial security shall be in the form of surety of two dealers registered under this Act, and where the dealer is not in a position to furnish such surety, he shall submit security’ shall be substituted and shall be deemed to have been substituted with effect from the 1st day of April, 2006.” उपाध्‍यक्ष महोदय, कोई भी कानून बनता है उस कानून में हरेक में इन्‍होंने रेट्रोस्‍पेक्टिव इफेक्‍ट से इसको लागू करने की बात की है, यह मूल रूप से विधिमान्‍य सिद्धांतों के विपरीत है। दूसरी बात, इस कानून के अन्‍तर्गत जो बहुत छोटे व्‍यापारी हैं, पान का व्‍यापारी है, मान लीजिये कोई छोटा टॉफी बेचने वाला है, उन सब को 10 हजार की एन एस सी लेनी पड़ेगी या उनको बैंक गारंटी देनी पड़ेगी अथवा दो व्‍यवहारी जो रजिस्‍टर्ड हैं उनसे प्रतिभूति या श्‍योरिटी दिलानी पड़ेगी। ये प्रावधान जो किये गये हैं, मैं समझता हूं कि इन प्रावधानों को घटाने की आवश्‍यकता है। जब आप धारावाइज इसके ऊपर बात करेंगे तो मेरे अमेंडमेंट हैं उनके बारे में मैं अपनी बात रखूंगा।....

 

Lpm/akt/1550/2o/2.4.2007 (1)

 

लेकिन खासतौर से छोटे व्‍यापारियों के लिए यह राशि बहुत ज्‍यादा है, इसके अलावा मैं आपके सामने इस एक्‍ट के बारे में जब आप विचार कर रहे है तो उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं राज्‍य सरकार को यह सुझाव देना चाहता हूं कि हमारे पड़ोसी राज्‍यों में जिन वस्‍तुओं का वैट हमारे से कम है, उनके बराबर यदि आप नहीं लाएंगे तो वैट की भावना और वैट का कोई महत्‍व नहीं रहेगा। इस वैट को इसलिए लाया गया था कि पूरे देश में सैल्‍स टैक्‍स एक जैसा हो और खासतौर से पड़ोसी राज्‍यों में वैट की जो दर है वह एक जैसी रहे ताकि व्‍यापार एक दूसरे राज्‍य का प्रभावित नहीं हो। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, हमारे राज्‍य में आज 28 प्रतिशत की दर से पेट्रोल के ऊपर वैट लग रहा है, 20 प्रतिशत की दर पर हमारे यहां डीजल के ऊपर टैक्‍स लग रहा है और 50 प्रतिशत सेस लग रहा है। वैट में स्‍पष्‍ट कहा गया है कि वैट लगने के बाद कोई टर्न-ओवर टैक्‍स, कोई सेस, कोई अन्‍य प्रकार की चीजें नहीं रहेंगी, एंट्री टैक्‍स नहीं लगेगा तो इसमें पेट्रोल और डीजल पर सेस क्‍यों लगाया जा रहा है? इसको खत्‍म किया जाना चाहिए। यह वैट की भावना के विपरीत है और इसमें एक बात और मैं कहना चाहूंगा कि जब हमारे पड़ोसी राज्‍यों में वैट 28 प्रति‍शत से कम है, उसके बराबर आपको करना चाहिए और जितनी भी वस्‍तुएं हैं जिनके ऊपर चाहे चार प्रतिशत टैक्‍स लगा रहा है, चाहे साढ़े बारह प्रतिशत लग रहा है पड़ोसी राज्‍यों के मुकाबले में हमारा जो वैट है, उन्‍हीं की दर के बराबर लगना चाहिए।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं कई बार आगरा वगैरह गया हूं, वहां मैंने देखा वहां वाहन मेला लगता है और धौलपुर और आसपास के लोग वहां जाते हैं और वही से जाकर के वाहन खरीद लाते हैं क्‍योंकि वहां पर वाहन के ऊपर टैक्‍स कम था और यहां पर हमारे राजस्‍थान में टैक्‍स ज्‍यादा होता था इसलिए लोग वहां जाकर के वाहन खरीदते थे। राजस्थान के हितों का नुकसान होता था, आज भी बहुत सी ऐसी कंपनियां हैं जो जैसे हमारे यहां गंगानगर में हैं, हनुमानगढ़ में डीज़ल और पेट्रोल लोग पड़ोसी पंजाब से लेकर आते हैं। हरियाणा के पड़ोस में जो लोग है वह हरियाणा से पेट्रोल और डीज़ल लेकर आते हैं, सीमेंट कंपनियां पेट्रोल और डीज़ल सी फार्म के ऊपर पड़ोसी राज्‍यों से लेकर आ रही है इससे हमारे राजस्‍थान के सैल्‍स टैक्‍स का वैट का नुकसान हो रहा है। वैट सैल्‍स टैक्‍स का ही पर्याय है। इसलिए मैं आपके माध्‍यम से सरकार को कहना चाहूंगा कि अलग-अलग वस्‍तुओं पर पड़ोसी राज्‍यों में जो टैक्‍स है उसके बराबर टैक्‍स लगाया जाए। मैं एक उदाहरण देकर आपको मेरे तथ्‍यों की पुष्टि करना चाहूंगा कि दालों के ऊपर हमारे यहां 4 प्रतिशत पहले टैक्‍स था और पड़ोसी राज्‍यों में और प्राय: पूरे भारत में दालों के ऊपर कोई टैक्‍स नहीं है उसके बाद सरकार के पास लोग गये अभी भी दालों पर एक प्रतिशत टैक्‍स है, उसके कारण पड़ोसी राज्‍य जो हैं उनका व्‍यापार ज्‍यादा होता है और आसपास के ज़िले तो एक प्रतिशत पर तो सारा व्‍यापार हो जाता है। इसलिए पूरे राज्‍य में ऐसी-ऐसी वस्‍तुओं का वर्गीकरण हमको निर्धारित करना चाहिए कि पड़ोसी राज्‍यों के मुकाबले में जो टैक्‍स जिन वस्‍तुओं का हम ज्‍यादा ले रहे हैं उनको उनके बराबर हमको लेना चाहिए। इसके अलावा वैट का रेश्‍नलाइजेशन करना बहुत जरूरी है, जब तक हम रेश्‍नलाइजेशन नहीं करेंगे तब तक वैट के माध्‍यम से हमको जो फायदा होने वाला है, वह फायदा हम नहीं ले पाएंगे और इसके साथ-साथ जो छोटे व्‍यापारी है जो दो लाख का, पाँच लाख का, दस लाख का, पन्‍द्रह लाख का जो काम करते हैं उनको वैट से पूरा-पूरा एग्‍जैम्‍पट करना चाहिए। इन्‍हीं शब्‍दों के साथ मैं पुन: आग्रह करता हूं कि इस वैट के बिल को जनमत जानने के लिए परिचालित किया जाए।

श्री उपाध्‍यक्ष: धन्‍यवाद।

     श्री विरेन्‍द्र बेनीवाल अनुपस्थित।

     डा. समरजीत सिंह, अनुपस्थित।

     डा. चन्‍द्रशेखर बैद, अनुपस्थित।

     डा. एन.एस गुर्जर, अनुपस्थित।

     श्री मदन राठौड़, अनुपस्थित।

प्रश्‍न यह है कि श्री जोगाराम....

डा. बुलाकीदास कल्‍ला (बीकानेर): ऐसा है माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जनमत जानने के लिए हमने प्रस्‍ताव रखा, उसके बाद में हमेशा जवाब की परम्‍परा रही है।

श्री उपाध्‍यक्ष: जवाब दे रहे हैं, प्रश्‍न यह है कि जो संशोधन श्री जोगाराम ने प्रस्‍तुत किए हैं उनको वापिस लेने की अनुमति प्रदान की जाए?

(स्‍वीकृत)

संशोधन वापिस लेने की अनुमति प्रदान की गई।

माननीय मंत्री महोदय।

श्री वीरेन्‍द्र मीणा (वित्‍त एवं करारोपण राज्‍य मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आज जो राजस्‍थान वैल्‍यू एडेड टैक्‍स अमेंडमेंट बिल,2007 जो इस सदन में लाया गया है, उसके बारे में आज विस्‍तार से चर्चा हुई और प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों ने कई बातें कहीं कि एक कमेटी बना दी है और उसके अंदर वैट आइट्म्‍स में छूट दे दी जाती है, वैट टैक्‍स के अंदर और भी कई प्रकार के अनर्गल आरोप लगाये हैं यहां पर, इसके बारे में मैं बताना चाहूंगा माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय कि वैट टैक्‍स 1 अप्रैल,2006 से हमारे प्रदेश में लागू हुआ और माननीय सी.पी.जोशी जी बिलकुल सही फरमा रहे थे कि वैट एक्‍ट कांग्रेस सरकार में 2003 में बना था और इसका विरोध भारतीय जनता पार्टी शासित राज्‍यों ने किया, निश्चित किया इसके बारे में मैं बताना चाहता हूं माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, कि केन्‍द्र सरकार का वित्‍त विभाग जब अपना व्‍हाइट पेपर लेकर के आया, जिसके अंदर क्‍योंकि स्‍टेट एम्‍पावर्ड कमेटी में स्‍टेट फाइनेंस मिनिस्‍टर होते हैं और उस मीटिंग में मैं भी गया था और वहां पर जो व्‍हाइट पेपर केन्‍द्र सरकार द्वारा लेकर आया उसके अंदर उन्‍होंने यह तो कह दिया कि सीएसटी को हम लोग हटाएंगे परंतु उस सीएसटी का रोड मैप जो है वह नहीं बताया तो उस व्‍हाइट पेपर लाने के बाद सारे भाजपा शासित राज्‍य, भाजपा शासित राज्‍य ही नहीं, इसके अलावा हमारे साथ और भी 25 में से मैं आपका माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, बताऊं कि 25 स्‍टेट के अंदर से 18 स्‍टेट हमारे साथ थे जिन्‍होंने वैट का विरोध किया और बस उस में यही बात थी कि आप वैट का रोड मैप बता दे क्‍योंकि केन्‍द्र सरकार की नीति के अंदर फर्क था, वह कह क्‍या रहे थे और वैट का रोड मैप जो उसको क्‍लीयर नहीं कर रहे थे। इसी वजह से केन्‍द्र सरकार की नीयत में खोट होने की वजह से यह वैट हमने देरी से लागू किया और जब उन्‍होंने क्‍लीयर किया कि हम इसको चार प्रतिशत से तीन प्रतिशत करेंगे, जो अभी कल ही किया है, कल से 1 अप्रैल,2007 से लागू हुआ है उसके बाद हमने हमारे प्रदेश के अंदर वैट लगाने की घोषणा की है क्‍योंकि माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, एक प्रतिशत कम करने से हमको 300 साढ़े 300 करोड़ रुपए का घाटा होता था उसकी जब तक भरपाई क्‍योंकि राज्‍यों के पास इतने ज्‍यादा संसाधन नहीं है, राज्‍य में काफी सीमित संसाधन है तो जब तक केन्‍द्र सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं होती तो राज्‍यों के लिए संभव नहीं था इतने बड़े घाटे को झेलना, इस वजह से हमने वैट लगाने में देरी हुई। आज माननीय सी.पी.जोशी साहब ने कई बातें यहां पर कही, उसके बारे में सी.पी.जोशी साहब और कल्‍ला साहब सबके बारे में विस्‍तारपूर्वक मैं बताना चाहूंगा कि शिड्यूल 2 के अंदर जो आइटम्‍स के बारे में इस एक्‍ट के अंदर हमने बताये नहीं है तो इसमें तो कल्‍ला साहब ही कह गए थे कि शिड्यूल में जो-जो आइटम्‍स है शिड्यूल-1 के अंदर आपने अपने मुंह से खुद ने बता दिए थे तो अब मेरे को यह समझ में नहीं आ रहा है कि कल्‍ला साहब और जोशी साहब आप दोनों ही बैठकर के तय कर ले, उनको बता दे कि शिड्यूल-1 में कौन-कौन से आइटम है? आप दोनों ही एक दफा फैसला करे कि शिड्यूल-। में कौन-कौन से आइटम है? खुद बता रहे थे सारे....

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): वह बता रहे हैं अच्‍छा है, एक्‍ट के अंदर ऐसा थोड़े ही होता है अध्‍यक्ष महोदय वह बता रहे हैं क्‍या तकलीफ है? Schedule is a part of the Act. आप मना कर दीजिए, आप मना कर दीजिए कि शिड्यूल एक्‍ट का पार्ट नहीं है।

श्री उपाध्‍यक्ष: आपकी राय लेना चाहते हैं।

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): इनकी सीट का तो महावीर प्रसाद जी ठीक है, आपको हम आगे की सीट पर देखना चाहते हैं।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): अध्‍यक्ष महोदय, आप रूलिंग कर दे, आप बता दे कि शिड्यूल इसका पार्ट होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए।

श्री उपाध्‍यक्ष: वह तो अब आप खुद देखे।

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): आप भी तो कानूनविद् है बताइए आप अगर कानून में कोई पार्ट बना रहे है तो उसका शिड्यूल उसका स्‍ट्रेच्‍यूट का पार्ट है या नहीं है।

श्री उपाध्‍यक्ष: नहीं है पर मंत्री महोदय ने (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): मंत्री महोदय तो आरती उतारेंगे, हम भी आरती उतारेंगे क्‍या? कानून किसी से नहीं चलता है, किसी की मन-मर्जी से, कानून के अपोजिट में मुझे बता दीजिए आप कानून में प्रोविजन है कि नहीं कि  Schedule is part of the statute? शिड्यूल पार्ट है, ऐसे थोड़े ही होगा मेरे को कोई जानकारी है तो मैं बोल दूंगा, ऐसे थोड़े ही होगा, जानकारी तो 50 हो सकती है मेरे पास, आप जो नया एक्‍ट लेकर आये हैं 2007 में तो 2007 के अंदर एक्‍ट के शिड्यूल-। और ।। को आपको जोड़ना पड़ेगा, ऐसे थोड़े ही हो सकता है कि 2003 में कल्‍ला साहब बता रहे थे, कल्‍ला साहब कह रहे थे, ठीक है कल्‍ला साहब को अपनी जानकारी होगी पर मैं एज ए एमएलए आपसे यह जानना चाहता हूं आप बताइए कि क्‍या शिड्यूल-। और ।। जो एक्‍ट 2007 आ रहा है उसका पार्ट होना चाहिए या नहीं होना चाहिए बताइए आप।

श्री उपाध्‍यक्ष: बता रहे हैं मंत्री जी।

श्री वीरेन्‍द्र मीणा (राज्‍य मंत्री, वित्‍त एवं करारोपण): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इसी प्रकार आपने धारा 20 के अंदर कोई प्रावधान संशोधित नहीं किया गया है उसके  बारे में आपने विस्‍तार से (व्‍यवधान)

डा. सी. पी. जोशी (नाथद्वारा): सेक्‍शन-8 बोले पहले तो. What about section 8? 

श्री उपाध्‍यक्ष: बता देंगे, बीच में नहीं।

श्री वीरेन्‍द्र मीणा (राज्‍य मंत्री, वित्‍त एवं करारोपण): इसी प्रकार धारा 20 में आपने बताया धारा 20 के अंदर माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, कोई प्रावधान संशोधित नहीं किया गया है अपितु इसमें नई धारा 20(6) जोड़ी गई है। अत: एक्‍स्‍ट्रेट के अंकन की आवश्‍यकता नहीं है। इसी प्रकार धारा 8 के बारे में भी आपने कहा.....

 

Bhs/akt/2.4.07/16.00/2p

 

धारा-8 को 8.3.06 को संशोधित किया जाकर शिड्यूल्‍ड-1 एवं 2 अंत:स्‍थापित किये गये। 

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): मंत्री जी, मैं माफी चाहता हूं। आप एक्‍ट 2003 का अमेंडमेंट ला रहे हैं कि 2006 का ला रहे हैं? राजेन्‍द्र जी, इससे बड़ा और कोई दुर्भाग्‍य नहीं होगा। आप पढ़ लीजिये इसका टाइटल यह अमेंडमेंट है 2003 के एक्‍ट का । आप बातें कर रहे हैं।  जो आर्डिनेंस में आप अमेंडमेंट लाये हैं, आपने रेफरेंस आर्डिनेंस का नहीं दिया है आपने रेफरेंस दिया मेन एक्‍ट 2003 का तो 2003 के एक्‍ट के अन्‍दर आप बातें करिये। आप जो बात कोट कर रहे हैं वो आर्डिनेंस के 2006 के पार्ट कर रहे हैं। 2006 का पार्ट नहीं है आप अमेंडमेंट मैन एक्‍ट में लाये हैं। आप खोटी-खोटी बातें करवा रहे हैं बिलकुल ही। मैं समझता हूं उपाध्‍यक्ष महोदय, आप कुर्सी पर बैठे हुए हैं पास करवा दीजिये वैसे ही आप यह गलत पास करवा दीजिये। 2003 का एक्‍ट है 2003 के एक्‍ट के जो प्राविजन हैं उनमें अमेंडमेंट हो रहा है। यहां जो कोट कर रहे हैं वो 2006 का आर्डिनेंस का जो अमेंडमेंट है उसको कोट कर रहे हैं। How is it relevant with this?

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आर्डिनेंस में तो अमेंड ले आये थे न।

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): ये नहीं रखा आपने। 

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 2003 के एक्‍ट में अमेंडमेंट लेकर आये हैं पहले आर्डिनेंस आ गया था इसलिए उन्‍होंने कोट कर दिया।

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): ...(व्‍यवधान)... आप अमेंडमेंट किस पर कर रहे हैं राठौड़ साहब, ऐसे नहीं होता है। उपाध्‍यक्ष महोदय, आप जवाब दीजिये मुझे। I don’t want go into all this.

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, 2003 के ...(व्‍यवधान)... 2003 के एक्‍ट में अमेंडमेंट है।

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): उपाध्‍यक्ष महोदय, ये जो बिल है वो 2003 का एक्‍ट है ये 2003 के एक्‍ट में अमेंडमेंट हो रहा है आप फिर दुबारा पढ़ लीजिये इसको। आप जो लेकर आये हैं 2003 के प्रिंसिपल एक्‍ट में अमेंडमेंट हो रहा है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): हां सही है न ...(व्‍यवधान)...

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): ये जो कोट कर रहे हैं वो कोट कर रहे हैं आर्डिनेंस का क्‍या रिलेवेंस है इससे? आपको कोट करना चाहिए, फिर लिखिये 2006 के आर्डिनेंस के अनुसरण में बिल ला रहे हैं।  ये तो लिखा नहीं आपने। अध्‍यक्ष महोदय, आपने हमको दिया है 2003 के प्रिंसिपल एक्‍ट के अमेंडमेंट का। पढि़ये मं‍त्री जी आप।  मंत्री महोदय, आप किसमें अमेंडमेंट कर रहे हैं। ऐसे राजेन्‍द्र जी, खोटे पढ़-पढ़ कर आप अपने मंत्री को डिमोर्लाइज मत करिये। आप गलत बातें कर रहे हैं बिलकुल ही। मैं समझता हूं माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपके पास ज्‍युडिशियरी का आदमी सेकेट्री है आप फैसला करवा दीजिये इस पर। वैसे गैरकानूनी पास करना चाहते हैं तो करवा दीजिये। बाकी यह अमेंडमेंट है 2003 के एक्‍ट का अमेंडमेंट है, which is the principle Act. ये जो कोट कर रहे हैं वो आर्डिनेंस 2006 को कोट कर रहे हैं। 2006 का कोई रिलेवेंस नहीं है आप प्रिंसिपल एक्‍ट में अमेंडमेंट ला रहे हैं और प्रिंसिपल एक्‍ट में बता दीजिये प्रिंसिपल एक्‍ट के सैक्‍सन 8 को कहां लिखा हुआ है बता दीजिये सैक्‍सन 3 का है, 4 का है, 5 का है, बता दीजिये मुझे।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, यह सही है कि 2003 के एक्‍ट में अमेंडमेंट लेकर आये हैं और उपाध्‍यक्ष महोदय, यह भी सही है इससे पहले जब आर्डिनेंस आया था तब इन्‍होंने एक्‍ट की धारा 8(4) के रूप में एक नयी धारा को जोड़ दिया था और उसमें शिड्यूल्‍ड I और शिड्यूल्‍ड IV उसका पार्ट थे इसलिए कोई दिक्‍कत नहीं है ...(व्‍यवधान)...

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): आप अमेंडमेंट किसमें ला रहे हैं? मुझे आश्‍चर्य है...।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): 2003 में ला रहे हैं।

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): 2003 में है तो 2003 के प्रिंसिपल एक्‍ट के सैक्‍सन 8 में कोई प्रोविजन नहीं है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, इससे पहले आर्डिनेंस आ गया था ...(व्‍यवधान)...

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं भूख हड़ताल पर बैठ जाऊंगा यहां पर. I will sit on hunger strike. I will not allow this wrong legislation to be passed. इस तरह गंदा कानून पास नहीं होने दूंगा मैं। I will sit here. आप प्रिंसिपल एक्‍ट में 2003 में अमेंडमेंट ला रहे हैं और खोटा कोट कर रहे हैं। आप करायें कोट, I will sit here.

(माननीय सदस्‍य, डॉ.सी.पी. जोशी द्वारा सदन कूप में धरना।)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आपने अपनी बात रख दी, अब आप जवाब ही नहीं सुनना चाहते। यह कोई बात नहीं है उनका जवाब तो सुनें वो कह रहे हैं 2003 का आर्डिनेंस में अमेंडमेंट हुआ है

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, एक मिनट। उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रार्थना यह कर रहा था कि निश्चित तौर पर नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य सही कह रहे थे अमेंडमेंट जो लेकर आ रहे हैं प्रिंसिपल एक्‍ट 2003 का उपाध्‍यक्ष महोदय, जो यह प्रिंसिपल एक्‍ट है इसमें एक आर्डिनेंस के द्वारा पहले हम अमेडमेंट ले आये थे । मंत्री महोदय अपनी बात कहते-कहते जो अमेंडमेंट हम आर्डिनेंस में लेकर आये थे जिसको आज कानूनी जामा पहना रहे हैं उसका उन्‍होंने उल्‍लेख कर दिया तो उसमें उत्‍तेजित होने की बात नहीं है इसलिए मैं निवेदन करना चाहूंगा कि निश्चित तौर पर आपकी बात सही है हम जो भी बात कहेंगे अगर आपको इस बात से नाराजगी है कि आर्डिनेंस की चर्चा ही यहां न करें, आर्डिनेंस जो लेकर आये हैं, अब इनके मुंह में शब्‍द डालना चाहें उपाध्‍यक्ष महोदय, ये तो न्‍याय की बात नहीं है इसलिए मेरी प्रार्थना है कि सी.पी. जोशी साहब आप विद्वान आदमी हैं।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय जोशी जी। माननीय जोशी जी। आर्डिनेंस के जरिये हो रहा है।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैंने पहले ही निवेदन किया है निश्चित तौर पर ये अमेंडमेंट जो लाया गया है प्रिंसिपल एक्‍ट 2003 का था उसी एक्‍ट के अन्‍दर अमेंडमेंट जो लाने के लिए माननीय मंत्री जी ने प्रस्‍ताव मूव किया है उपाध्‍यक्ष महोदय, ये भी सही है कि चूंकि इसमें पहले आर्डिनेंस के द्वारा अमेंडमेंट ले आये थे उसका रिप्‍लेसिंग बिल आज ले आये इसलिए इन्‍होंने आर्डिनेंस की बात कह दी। अब दुबारा बात करेंगे तो 2003 के प्रिंसिपल एक्‍ट की बात कहते हुए अमेंडमेंट की बात कह देंगे।

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): मैं आपको फिर निवेदन कर रहा हूं। नया आदमी जीतकर आया है। हम गलत काम नहीं करें। आपको सुओमोटो 2003 के प्रिंसिपल एक्‍ट से सैक्‍शन 8 में अमेंडमेंट लाना चाहिए। उसका आर्डिनेंस से कोई रिलेवेंस नहीं है। मुझे बतायें कि किसको पास कर रहे हैं? आपने हमको मूव किया है 2003 के प्रिंसिपल एक्‍ट अमेंडमेंट को, पढि़ये 2003 के प्रिंसिपल एक्‍ट के सैक्‍सन 8 में यह सैक्‍शन है ही नहीं।  जो आप कोट कर रहे हैं आर्डिनेंस में, तो क्‍या संबंध है इसका? मैं समझता हूं कि इतना हम कानून बनाने में हमारा काम लेजिस्‍लेशन है हम इतना खोटा काम कर रहे हैं मैं समझता हूं कि इससे बड़ा दुर्भाग्‍य नहीं हो सकता।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): मैं प्रार्थना करूं कि शायद आपको याद नहीं होगा 2006 में, 2003 प्रिंसिपल एक्‍ट था, 2006 में हम इसी हाउस में इसका अमेंडमेंट पहले लोकर आये थे उसकी बात आप कर रहे हैं। तो अब उपाध्‍यक्ष महोदय, कंफ्यूजन यहां हो गया प्रिंसिपल एक्‍ट 2003 का है 2006 में अमेंडमेंट हुआ था जिसको इसी हाउस में रखा था पास किया था उसके बाद एक आर्डिनेंस हम लेकर आये थे।  आर्डिनेंस का रिप्‍लेसिंग बिल आज लाये हैं इसलिए यह कंफ्यूजन हो रहा है।

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): मैं मंत्री जी, फिर कह रहा हूं नहीं हो रहा है कंफ्यूजन । I am very sorry. फिर आपको निवेदन कर रहा हूं ज्‍युडिशियरी सर्विस के आदमी बैठे हुए हैं फिर निवदेन करना चाहता हूं मैं आप 2003 के प्रिंसिपल एक्‍ट में अमेंडमेंट ला रहे हैं और आप 2003 के सारे  ...(व्‍यवधान)...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): नहीं-नहीं, 2006 में एक बार इसी सदन में, मैं आपको तारीख बता देता हूं। 

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): आप मेरी बात सुनिये पहले।  मुझे मालूम है और 2006 में आप आर्डिनेंस लाये वो 2006 का और अमेंडमेंट जो आर्डिनेंस है आपको यदि यह बिल लाना था तो आप लिखते 2006 के अमेंडेड एक्‍ट में प्राविजन ला रहे हैं यह आपको मूव करना चाहिए था।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय जोशी साहब। 

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): आपने 2003 को मूव किया और 2006 की बातें कर रहे हैं। अभी भी आप गलत बातें कोट करते जा रहे हैं।  मैं समझता हूं उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं फिर कहना चाहता हूं कि यह कानून बनाना हमारा अधिकार है उसमें खोटा कानून बनाने के लिए हम बैठे हुए हैं क्‍या? आप फैसला करवायें। 

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय जोशी जी, इसको स्‍पष्‍ट कर रहे हैं।

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): इनको नहीं करना है माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, माफी चाहता हूं। यह विधान सभा के सेकेटेरिएट को मैं पूछ रहा हूं। मैं इनसे नहीं पूछ रहा हूं मैं आपसे पूछना चाहता हूं विधान सभा के उपाध्‍यक्ष महोदय, आज बिल 2003 के मैन एक्‍ट में अमेंडमेंट है आर्डिनेंस का नहीं है।  आप आर्डिनेंस का मेंशन करते, कहां लिख रखा है? बतायें मुझे। आपने जो कॉपी दी है हमको, आप पूछ लेना आप फैसला कर देना। पाइंट ऑफ ऑर्डर है।

श्री उपाध्‍यक्ष: दे रहे हैं स्‍पष्‍टीकरण।

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): उपाध्‍यक्ष महोदय, आपसे मैं चाहता हूं इसका सोल्‍यूशन। 

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, उनका कहना यह है कि 2006 में अमेंडमेंट हो चुका था इसका आप स्‍पष्‍टीकरण सुनें तो सही ।

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे निवेदन कर रहा हूं यह 2006 में हो गया मुझे जानकारी है। आप जो अमेंडमेंट ला रहे हो उसमें टाइटल डालिये कि राजस्‍थान वैट एक्‍ट, 2006 के अमेंडेड एक्‍ट के अनुसर यह लिखिये न आप। आपने टाइटल जो लिखा है उसको अमेंडेड करिये न आप। आप बातें कर रहे हैं। 

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): मेरा आपसे निवेदन यह है कि ये अपने जनमत जानने के प्रस्‍ताव पर बोल रहे हैं उसका उत्‍तर माननीय मंत्री जी को देना है अब इन्‍होंने जो पाइंट उठाया है उस पर जो आपको व्‍यवस्‍था देनी है, मेरा आपसे निवेदन है कि इसको पहले आप एग्‍जामिन करवा करके व्‍यवस्‍था रिजर्व रख लें और व्‍यवस्‍था दे दें इसमें। मतलब, अभी ये केवल जनमत जानने के प्रस्‍ताव पर बोल रहे हैं और जनमत जानने के प्रस्‍ताव पर मंत्री जी उत्‍तर देंगे और उसके बाद जो इसका निर्णय है वो करके व्‍यवस्‍था दे दें।

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): मैं सहमत हूं आपकी बात से उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं टाइटल पढ़ देता हूं एक मिनट, आपको ध्‍यान रहेगा.  “The Rajasthan Value Added Tax (Amendment) Bill, 2007. (To be introduced in the Rajasthan Legislative Assembly). A Bill further to amend the Rajasthan Value Added Tax Act, 2003.” There is no reference to amended ordinance of 2006. That you have to do it.

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): एक मिनट मैं निवेदन करूं उपाध्‍यक्ष महोदय, ..।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): आज महावीर जी ने जो बात कही है ...(व्‍यवधान)... आपकी बात का समर्थन है। 

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, ये जो प्रिंसिपल एक्‍ट 2003 है इसमें जब 2006 के अन्‍दर हम अमेंडमेंट ले आये और वो अमेंडमेंट इसका पार्ट बन गया तो आज हम इसको यह कह सकते हैं, The Rajasthan Value Added Tax, 2003, as amended from time to time.

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): Yes.

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): तो उसका पार्ट बन गया 2006 के अन्‍दर जो अमेंडमेंट लाये 2003 में तो लेकर आये थे नहीं।

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): यह कहां लिखा हुआ है आप जो बोल रहे हैं मान्‍यवर, कहां लिखा हुआ है? 

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): इसमें लिखने की जरूरत नहीं है ये तो अपने समझने की बात है।

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): क्‍या बातें कर रहे हैं ये पोस्‍टेरिटी तो इसकी जांच करेगी. Posterity will evaluate this. What Rathore sahib is saying, इससे नहीं होगा।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, आप जैसा कानून विज्ञ ...।

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): राठौड़ साहब, ऐसे नहीं होगा। 

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): आपके जैसे कानून विज्ञ विराजे हुए हैं तो इसकी कोई समस्‍या नहीं है ये तो सुओमोटो ही अपने आप ही हो गया। ...(व्‍यवधान)...

डॉ. सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): उपाध्‍यक्ष महोदय, चीफ व्हिप साहब की उस बात पर सहमत हैं आप डिस्‍कसन करवा लीजिये और दिखवा लीजिये हम गलत होंगे तो विदड्रा कर लेंगे, माफी मांग लेंगे आपसे पर खोटा कानून पास नहीं होने देंगे हम।    

 

कैलाश    2.4.07  16.10  2q

 

माफी मांग लेंगे आपसे पर खोटा कानून पास नहीं होने देंगे हम । मैं फिर आपसे कह रहा हूं हम अगर गलती पर हैं तो हम माफी मांग लेंगे लेकिन खोटा कानून पास नहीं होने देंगे ।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): आसन को असीमित अधिकार है और उन अधिकारों के प्रति यदि आसन को कोई निर्णय लेना है तो ले लेंगे, खोटा कानून पास नहीं होगा ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, प्रिंसिपल एक्‍ट, 2003 ही कहलायेगा । 2003 में, 2006 में यह 8 मार्च, 2006 को इसी सदन में कुछ अमेंडमेंट लेकर आये थे जो इसमें सम्मिलित हो गये वह प्रिंसिपल एक्‍ट 2003 ही कहलायेगा और अब यह जो आर्डिनेंस लेकर आये थे जिसको हमने गजट में 28 दिसम्‍बर, 2006 को इसमें साया किया था जिसको आज रिप्‍लेसिंग बिल के माध्‍यम से ला रहे हैं, यह कन्‍फ्युजन की बात है और कोई बात नहीं है ।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे फिर निवेदन करना चाहता हूं आपको यह लाना चाहिये था. The Rajasthan Value Added Tax Amended, 2006. This was the right title. There was no relevance. 2003 की कोई रेलेवेंसी नहीं है । इसलिए जो माननीय चीफ व्‍हिप  ने कहा मैं निवेदन करना चाहता हूं आप जिद में खोटा कानून पास नहीं कराएं, आप चैक कर लें । हम यदि गलती पर होंगे तो खडे होकर माफी मांग लेंगे कोई तकलीफ नहीं है लेकिन आपके गलत तर्क से, गलत आर्ग्‍युमेंट के आधार पर इस खोटे बिल को पास नहीं करेंगे । आप चैक कर लें हमें क्‍या तकलीफ है । आप रूलिंग बाद में दे दीजिए, डिबेट करा दीजिए क्‍या तकलीफ है पर खोटे बिल को कैसे पास करेंगे आप ।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य ।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): यह आप इंटरप्रिएट करेंगे क्‍या, गलती भी आप करें (व्‍यवधान) तो पास कराइए फिर ।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): सारे इंटरप्रिटेशन इनके समझ लें क्‍या या आपने कह दिया जो पत्‍थर की लीक हो गई ।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): हां कर दीजिए क्‍या तकलीफ है । यह हमारा अधिकार है खोटा कानून नहीं पास होने देंगे । यह हमारा राइट है हम नहीं पास होने देंगे. We will go to the Hon’ble Governor. आप पास कराओ क्‍या तकलीफ है । आप कोई गैर कानूनी काम करें, यह हमारा अधिकार है हम नहीं रोकेंगे क्‍या ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य आपको करेक्‍ट करने का हम प्रयास कर रहे हैं ।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): मेरे को करेक्‍ट होने में, माफी मांगने में कोई तकलीफ नहीं है । मैं फिर कहना चाहता हूं यह आपका टाइटल छोटा टाइटल है, इस टाइटल से पास नहीं कर सकते आप ।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): करेक्‍शन तो सरकार को करना है, हमको क्‍या करेक्‍ट कर रहे हैं आप । करेक्‍शन तो आपको खुद को करना है ।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): उपाध्‍यक्ष महोदय, अगर गलती हो गई हो तो जैसे होम मिनिस्‍टर साहब स्‍वीकार कर लेते हैं आप स्‍वीकार कर लो । इसको अभी आप वापस ले लो ।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, संविधान में  कितने संशोधन आ गये संविधान तो उसी समय का कहलाया जायेगा । (व्‍यवधान) मूल कानून में ही संशोधन है । (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): इसमें आदमी को शर्म नहीं आनी चाहिये । कोई गलती हो गई तो उसको स्‍वीकार कर लो । (व्‍यवधान)

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): किसी चीज की लीमिट होती है । (व्‍यवधान) ऐसा कभी होता है क्‍या ।

मोहम्‍मद माहिर आजाद (नगर): आज प्राइवेट मेम्‍बर डे है हमारे संकल्‍पों पर चर्चा करा लीजिए । कोई गलती हो गई तो उसको मान लेना चाहिये जिद करने से थोडे ही काम चलता है ।

श्री उपाध्‍यक्ष: आप जवाब तो सुनिए । माननीय सदस्‍य संसदीय कार्य मंत्री जी द्वारा जो जवाब दिया गया है 2006 के अमेंडमेंट के द्वारा 2003 के एक्‍ट में अमेंडमेंट हो चुका है । अब इसमें उस बात का मेंशन किया जाता है तो यह कोई ऐसी त्रुटि नहीं है जिसके बिना एक्‍ट पास होने की आगे की कार्यवाही नहीं चले इसलिए मैं आपका आब्‍जेक्‍शन ओवर रूल करता हूं ।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): उपाध्‍यक्ष महोदय, छोडिए आप, मैं फिर निवेदन करना चाहता हूं टाइटल नहीं बदलेंगे तब तक खोटा कानून पास करवा रहे हैं आप । आप क्‍या बात कर रहे हो इसमें टाइटल 2003 का है. There is no word like ‘amended’. अमेंडमेंट कहां लिखा हुआ है ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): प्रिंसिपल एक्‍ट तो 2003 का ही रहेगा। अनादि समय तक जब तक यह एक्‍ट है 2003 ही कहलायेगा ।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): जो भी अमेंडमेंट हुए समय समय पर मूल एक्‍ट में उनका समावेश हो जाता है । इसलिए जो भी नया अमेंडमेंट होगा 2003 में होगा ।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): माननीय सांवर मल जी फिर एक्‍स्‍ट्रेक्‍ट में मेंशन कर देना, इसको एक्‍स्‍ट्रेक्‍ट में मेंशन क्‍यों नहीं किया । उपाध्‍यक्ष महोदय, why have you not mentioned in extracts? Why have you not mentioned it? Who stopped you from mentioning it? आज जो यह अमेंडमेंट किया 2006 में यह एक्‍स्‍ट्रेक्‍ट में मेंशन क्‍यों नहीं किया । आप जो अमेंडमेंट करवा रहे हो उसका रेलेवेंट एक्‍स्‍ट्रेक्‍ट  दे रखा है आपने । रेलेवेंट एक्‍स्‍ट्रेक्‍ट में क्‍या लिखा रखा है बता दीजिए आप । Where is it mentioned? रेलेवेंट एक्‍स्‍ट्रेक्‍ट में कहां मेंशन कर रखा है बता दीजिए आप ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, लैंड रेवेन्‍यु एक्‍ट का बना था 1956 में ।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): क्‍या बातें कर रहे हैं 1956-55 की आप रेलेवेंस बताइए इसकी । (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, प्रिंसिपल एक्‍ट 1956 का था इसलिए लैंड रेवेन्‍यु एक्‍ट 1956 ही कहलायेगा । टीनेंसी एक्‍ट अगर 1955 में बना था तो टीनेंसी एक्‍ट 1955 ही कहलायेगा । इसलिए यह 2003 ही कहलायेगा ।

श्री जोगाराम पटेल (लूणी):उपाध्‍यक्ष महोदय, अगर आप परमिशन दें तो मैं कुछ कहना चाहता हूं ।

डा.सी.पी.जोशी(नाथद्वारा): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके हाथ जोडता हूं आप मेरी बात सुन लीजिए. Why do you submit extracts with the Amendment Bill? आपने जो हमको यह बिल दिया इसके साथ साथ एक्‍स्‍ट्रेक्‍ट लगा रखा है, प्रिंसिपल एक्‍ट के एक्‍स्‍ट्रेक्‍ट में यदि आपने 2006 में अमेंडमेंट किया तो आपको मेंशन कर देना चाहिये था क्‍या तकलीफ थी । आपने यह मेंशन नहीं किया । मैंने यह कहा है कि सैक्‍शन 8  प्रिंसिपल एक्‍ट में जो है वह इसमें नहीं है ।

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): उपाध्‍यक्ष महोदय, पुरःस्थापन के समय इस प्रकार की कोई आपत्ति नहीं उठाई जा सकती क्‍योंकि नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य अपने प्रस्‍ताव पर बोल रहे हैं। जो उन्‍होंने आपत्तियां उठाईं उसके जवाब में और उसके बाद जब यह आयेगा तो जब जब एक्‍ट बने हैं 1956 एक्‍ट बना है उसके बाद उसमें अमेंडमेंट आते रहे हैं, वह क्‍या कहलाते रहे हैं, वह एक्‍ट 1956 1953 जितने एक्‍ट हैं उन्‍हें उसी नाम से पुकारा जाता है । अमेंडमेंट में क्‍या हुआ क्‍या नहीं हुआ उसको बाद में देख लिया जायेगा । अभी केवल आपका प्रस्‍ताव इसको जनमत जानने के लिये भेजा जाये उस पर आप मंत्री महोदय का जवाब सुन कर इसमें फैसला कीजिए कि इसको रिजेक्‍ट किया जाये या मंजूर किया जाये और इसमें यदि कहीं मतदान की आवश्‍यकता है तो वह भी हो जायेगा ।

श्री जोगाराम पटेल (लूणी): उपाध्‍यक्ष महोदय, यह एतराज किया गया कि अमेंडमेंट जो मांगा गया है वह ओरिजनल एक्‍ट or the principal act, whatever maybe, उसको लीगली प्रिंसिपल एक्‍ट कहते हैं । प्रिंसिपल एक्‍ट में अमेंडमेंट मांगे गये हैं और आर्डिनेंस का हवाला दिया गया है क्‍योंकि जो ड्युरिंग द आर्डिनेंस और प्रिंसिपल एक्‍ट के बीच में जो अमेंडमेंट हुआ है उसका हवाला दिया गया । मैं निवेदन करना चाहता हूं सबसे पहले प्रिंसिपल एक्‍ट में एक अमेंडमेंट हुआ राजस्‍थान मूल्‍य परिवर्धन कर संशोधन अध्‍यादेश 2006 और उसको इस हाउस में पास कर