Gpc/akt/1100/1a

अशोधित प्रति/ प्रकाशनार्थ नहीं

 

राजस्‍थान विधान सभा की कार्यवाही का वृत्‍तान्‍त

 

 

अंक  5    बारहवीं विधान सभा के पांचवें सत्र का दूसरा दिवस   संख्‍या  2

 

 

 

बुधवार,

01 मार्च, 2006

राजस्‍थान विधान सभा की बैठक 1100 बजे

विधान सभा भवन, जयपुर में प्रारम्‍भ हुई।

 

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

 

श्री अध्‍यक्ष: बारहवीं विधान सभा के इस पांचवें सत्र में मैं आप सबका स्‍वागत करती हूं और उम्‍मीद करती हूं कि आप सार्थक बहस करेंगे और हो-हल्‍ला नहीं करेंगे। श्री बहादुर सिंह गोदारा।                   

तारांकित प्रश्‍नोत्‍तर

 

वाहन संचालन क्षमता में सुधार हेतु कार्य-योजना

1. श्री बहादुर सिंह गोदारा (नोहर): क्‍या यातायात मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

  (1) क्‍या सरकार वाहन चालकों/परिचालकों की कार्यकुशलता में वृद्धि हेतु प्रशिक्षण एवं योग्‍यता निर्धारित करने का विचार रखती है? यदि हां, तो क्‍या, कब तक व नहीं, तो क्‍यों?

  (2) क्‍या सरकार उन यात्री वाहन जो 50 प्रतिशत से अधिक नाकारा हो चुके हैं एवं निर्धारित मानदण्‍डानुसार नहीं हैं तथा प्रदूषण फैलाते हैं, को सुधारने/बदलने का विचार रखती है? यदि हां, तो कब तक व नहीं, तो क्‍यों?

 

यातायात मंत्री (श्री यूनुस खान): (1) चालकों/परिचालकों को लाइसेंस दिये जाने के संबंध में केन्‍द्र सरकार ने नियम बनाये हुए हैं जिनके तहत वाहन चालक/परिचालकों को लाइसेंस हेतु पाठ्यक्रम और योग्‍यता निर्धारित की हुई है। निजी वाहन चलाने हेतु आवेदक की आयु 18 वर्ष, 50 सीसी. से कम क्षमता वाली वाहन चलाने हेतु 16 वर्ष एवं परिवहन यान चलाने हेतु 20 वर्ष की आयु होनी आवश्‍यक है। उक्‍त योग्‍यता वाला व्‍यक्ति लर्नर्स लाइसेंस प्राप्‍त करने का पात्र है। चालक लाइसेंस के लिए आवेदक को परीक्षण टेस्‍ट देना होता है एवं परिवहन यान के मामलों में लर्निंग लाइसेंस से पूर्व राज्‍य सरकार द्वारा अधिकृत ड्राइविंग स्‍कूल से ड्राइविंग प्रमाण पत्र प्राप्‍त करना होता है। केन्‍द्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 31 के अंतर्गत ड्राइविंग स्‍कूलों या संस्‍थानों के मोटर यानों के चालकों को अनुदेश देने के लिए पाठ्यक्रम निर्धारित किया हुआ है।

       परिचालक लाइसेंस प्राप्‍त करने के लिए आवेदक को आवेदन प्रारूप आर.एस. 31 में प्रस्‍तुत करना होता है जिसके साथ चिकित्‍सकीय प्रमाण-पत्र, प्ररूप आर.एस. 3.9 में सेंट जान एम्‍बुलेंस एसोसिएशन आफ इंडिया द्वारा जारी विधिमान्‍य प्राथमिक सहायता प्रमाण-पत्र होना आवश्‍यक है। प्रार्थी की आयु 18 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए तथा उसकी शैक्षणिक योग्‍यता दसवीं कक्षा या उसके समकक्ष या उच्‍चतर परीक्षा उत्‍तीर्ण होना आवश्‍यक है और उसे परिचालक के रूप में कार्य करने के लिए उस क्षेत्र की भाषा या भाषाओं का सामान्‍य ज्ञान होना चाहिए।      चालक/परिचालक के लिए पृथक से कोई योग्‍यता और प्रशिक्षण कार्यक्रम निर्धारित करने का राज्‍य सरकार का क्षेत्राधिकार नहीं है। वह केवल केन्‍द्र सरकार द्वारा विनिर्मित नियमों के अन्‍तर्गत वाहन चालक व परिचालक को ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने का कार्य करती है।    राज्‍य पथ परिवहन निगम के चालकों/परिचालकों को पेट्रोलियम कन्‍जर्वेशन रिसर्च एसोसिएशन के समन्‍वयन में अजमेर, जयपुर, जोधपुर एवं बीकानेर केन्‍द्रों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके अतिरिक्‍त केन्‍द्रीय कार्यशाला अजमेर केन्‍द्र पर भी चालकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

       (2) 50 प्रतिशत से अधिक नाकारा हो चुकी, प्रदूषण फैलाने वाली निर्धारित मानदण्‍ड रहित वाहनों के सुधारने/बदलने जैसे विषय पर अलग से कोई कार्ययोजना विभाग के विचाराधीन नहीं है, तथापि मोटर वाहन अधि‍नियम, 1988 की धारा 56 के अंतर्गत वाहनों को फिटनेस प्रमाण-पत्र जारी किये जाने का प्रावधान है। जो परिवहन वाहन इन प्रावधानों के अंतर्गत निर्धारित मानदण्‍डों की अनुपालना नहीं करते हैं उन्‍हें विभाग द्वारा फि‍टनेस प्रमाण-पत्र जारी नहीं किया जाता है।

       वाहनजनित प्रदूषण को नियंत्रित करने एवं प्रदूषण जांच केन्‍द्रों को प्राधिकृत करने एवं उनके कार्यसंचालन की प्रक्रिया निर्धारित करने हेतु राज्‍य सरकार ने मोटरयान प्रदूषण जांच स्‍कीम, 2005 बनाई हुई है। इस परिप्रेक्ष्‍य में विभाग द्वारा 410 प्रदूषण जांच केन्‍द्रों को प्राधिकृत किया हुआ है। ये प्रदूषण जांच केन्‍द्र वाहनों के प्रदूषण स्‍तर की जांच करके उन्‍हें प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण-पत्र जारी करते हैं। विभाग में 20 पाल्‍यूशन फ्लाइंग स्‍क्‍वैड कार्यरत है। विभाग के सभी उड़नदस्‍ते वाहनों के प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण-पत्रों की नियमित जांच करते हैं।  अपने वाहनों को नाकारा घोषित करने हेतु राजस्‍थान राज्‍य पथ परिवहन निगम के अपने मानदण्‍ड निर्धारित हैं जिनके अनुसार 6.00 लाख किलोमीटर अथवा 7 वर्ष में जो भी पहले जो उसके आधार पर निगम की पुरानी वाहनों को नाकारा घोषित कर दिया जाता है तथा वाहनों की नियमित मेंटीनेंस/पीरियोडिकल निर्धारित प्रक्रियानुसार आगार कार्यशाला एवं केन्‍द्रीय कार्यशालाओं में की जाती है जिसमें वाहनों के प्रदूषण नियंत्रण/डीजल औसत का विशेष ध्‍यान रखा जाता है।

श्री बहादुर सिंह गोदारा: क्‍या माननीय मंत्रीजी यह बतलाने की कृपा करेंगे कि आपने जो लाइसेंस जारी करने के मापदण्‍ड तय कर रखे हैं उसके अनुसार आपके विभाग में लाइसेंस एजेंटों के मार्फत् जारी किये जाते हैं और गलत और गैर जिम्‍मेदार लोगों को लाइसेंस दे दिये जाते हैं। उसके लिए फीस थोड़ी ज्‍यादा वसूल कर ली जाती है। यह सरेआम हो रहा है। इसको रोकने के लिए आप क्‍या उपाय कर रहे हैं? समाज के निर्दोष लोगों की, हजारों लोगों की जानें सालाना आपके इस डिपार्टमेंट की लापरवाही की वजह से जाती है उसे रोकने के लिए आप क्‍या उपाय कर रहे हैं?

श्री यूनुस खान: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, परिवहन विभाग में कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिसमें एजेंट रखे जाएं। जहां तक एजेंटों के माध्‍यम से लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया है, कुछ अनपढ़ लोग किसी व्‍यक्ति विशेष से अपना लाइसेंस बनाने के लिए उनसे फार्म वगैरह फिलअप करवाते हैं, बाकी यहां इस तरीके का प्रावधान नहीं है।  जहां तक लाइसेंस जिन ड्राइवर्स को हम देते हैं उनके द्वारा दुर्घटना पर पिछले एक साल से हमने रोक लगाने के लिए विशेष रूप से अभियान चलाया हुआ है और हमारे ड्राइवरों को प्रशिक्षित करने के लिए अलग-अलग एन.जी.ओज. के माध्‍यम से हम प्रशि‍क्षण शिविर दे रहे हैं और पिछले साल की तुलना में इस साल दुर्घटनाओं में कमी आई है।

श्री रामनारायण मीणा (नैनवां): अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से एक प्रश्‍न पूछना चाहूंगा, क्‍या माननीय मंत्रीजी यह बताने की कृपा करेंगे, क्‍या यह सही है कि आपके सारे जिला परिवहन कार्यालयों में एजेंट बैठते हैं? आप आज ही जाकर चैकिंग कर लें। इसलिए सरकार इस बात की जानकारी नहीं है, यह कहकर निपटाना चाहती है या इस बारे में दुरुस्‍ती करना चाहती है? माननीय मंत्रीजी, जब आप निकलते हैं... (व्‍यवधान)

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी: माइक ठीक नहीं है । माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माइक गूंज रहे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: आपके कान गूंज रहे हैं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: माइक गूंज रहे हैं, अध्‍यक्षजी।

श्री रामनारायण मीणा: माननीय मंत्रीजी, ऐसे वाहन, आपकी रोडवेज की बात नहीं करता, सरकारी संस्‍था है, लेकिन जीप हो, दूसरे वाहन हों, आप चलते हों तो आपको यह लगता है या तो मैं पीछे रह जाऊं या इसके आगे निकल जाऊं। प्रदूषण की वजह से आप चल नहीं सकते। इसलिए विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र में बसें जिस तरह से चलती हैं आम नागरिक को, यात्रियों को असुविधा होती है। ये दोनों बातें आप जांच कर लें और जांच करने की आवश्‍यकता नहीं है, मंत्रीजी को मालूम है कौनसा परिवहन कार्यालय है जो एजेंटों से मुक्‍त है ।

श्री यूनुस खान: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नैनवां से आने वाले माननीय सदस्‍य ने जो बात उठायी है, मैं यह कह सकता हूं परिवहन कार्यालय में किसी प्रकार के एजेंट नहीं बैठते हैं। चूंकि परिवहन कार्यालयों के बाहर इस तरीके का काम लोग अनधिकृत तरीके से कर रहे हैं उसके लिए मैंने एक तीन सदस्‍यीय कमेटी बनायी हुई है उसके तहत अगर कानून के दायरे में रहकर किसी डिप्‍लोमाधारी या लॉ किया हुआ लॉ ग्रेजुएट का हम इस तरीके का कोई लाइसेंस दे सकते हैं जिस तरीके से कोर्ट में लोग प्रेक्टिस कर रहे हैं उसके लिए तीन सदस्‍यीय जांच कमेटी बिठायी हुई है, कानून के दायरे में अगर इस तरीके का कोई प्रावधान आया तो निश्चित रूप से सरकार कार्यवाही करेगी। जहां तक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की बात है हमारे पास डीजल के लगभग 187 प्रदूषण जांच केन्‍द्र हैं और पेट्रोल के 223, लगभग 410 इस तरीके के प्रदूषण केन्‍द्र काम कर रहे हैं । वैसे ही जिला मुख्‍यालय पर काम करने वाले प्रदूषण जांच दल ग्रामीण क्षेत्र में जो व्‍हीकल चलते हैं उनकी जांच करते हैं और उनकी जांच कराना छह महीने में अनिवार्य है। छह महीने के अंदर अगर वह जांच नहीं करवाते हैं तो उसके खिलाफ कार्यवाही की जाती है।

श्री अध्‍यक्ष: श्री हरिमोहन शर्मा। (व्‍यवधान) नेता प्रतिपक्ष कोई सवाल थोड़े ही पूछते हैं। (व्‍यवधान) नेता प्रतिपक्ष सवाल नहीं पूछा करते।

डा. श्रीगोपाल बाहेती (पुष्‍कर): मंत्रीजी यह कह रहे हैं परिवहन कार्यालय के बाहर अवैध रूप से लोग बैठते हैं। तो क्‍या उनको सरकार नहीं रोक सकती?

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि माह जनवरी, 2006 व फरवरी, 2006 में डीलक्‍स बसें और सेमी डीलक्‍स बसों का चुपचाप किराया बढ़ाने का निर्णय आपने लिया है छह पैसे प्रति किलोमीटर ?

श्री अध्‍यक्ष: अलग से प्रश्‍न। अलग से प्रश्‍न है। नो, नो । (व्‍यवधान) आप लोग बीच में क्‍यों खड़े हो गये ? क्‍या आवश्‍यकता है आपके खड़े होने की ? माननीय सदस्‍य, आपका प्रश्‍न अलग से है । किराये का प्रश्‍न अलग से है। आप बाद में दूसरे प्रश्‍न के रूप में पूछ लें।

श्री हरिमोहन शर्मा: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, चुपचाप छह पैसे प्रति किलोमीटर किराया बढ़ा दिया और उससे हुआ क्‍या ?

श्री अध्‍यक्ष: यह अलग से प्रश्‍न है।

श्री हरिमोहन शर्मा: उससे क्‍या हुआ कि प्राइवेट ओनर्स की जो डीलक्‍स बसें कोटा, बूंदी, जयपुर तक चलती हैं वह 100 रुपये में कोटा ले जाती है। पहले 120 में ये भी ले जाती थीं और अब वे 140 लेते हैं तो उसमें कोई नहीं बैठता। आपने बिना डीजल, पेट्रोल की वृद्धि हुए सन् 2006 में किस आधार पर किराया बढ़ाया? आपके डिपो लगातार प्रोफिट में हैं। (व्‍यवधान)

 

mlb/akt/1110/1b/1.3.2006

 

 

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा(हिण्‍डौली): इसके बाद भी आपने क्‍यों किराया बढ़ाया ?

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, सवाल तो था प्रदूषण का, सवाल था योग्‍यता का, आप ले गये किराये पर उसे ।

श्री कैलाश त्रिवेदी: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक मिनट साहब, माननीय मंत्री महोदय ने बताया कि 50 प्रतिशत खटारा वाहन हैं जिनकी हम फिटनैस कराते हैं और फिटनैस से जो सही वाहन होते हैं उनको हम सड़क पर चलने देते हैं । माननीय मंत्री महोदय यह बताएं कि राजस्‍थान परिवहन में जितनी बसें हैं जिनको कंडम करके और कबाडि़यों को आप बेचते हैं, विद रजिस्‍ट्रेशन आप बेचते हैं उनमें ऐसे कितने रजिस्‍ट्रेशन हैं जो राजस्‍थान में सन् 1960 की मॉडल की गाडि़यों पर ठप्‍पे लगकर और वह वाहन रोडवेज के नाम पर चल रहे हैं और सारी प्रदूषण की व्‍यवस्‍था खराब करा रखी है पूरे राजस्‍थान की, ऐसे कितने वाहन हैं आपके जो फिटनैस पर ठप्‍पे लगते हैं उनके चेचिस कौन से हैं, इंजन कौन से हैं, मॉडल कौन से हैं, बॉडी कौन सी है और वे वाहन आपकी सड़कों पर दौड़ रहे हैं और वह प्रदूषण फैला रहे हैं और आप फिटनैस किस बेस पर कर रहे हैं, फिटनैस खाली आप चेचिस से कर रहे हैं, क्‍या कर रहे हैं ?

श्री अध्‍यक्ष: भाषण नहीं, जवाब अब हो रहा है, आने दीजिए जवाब ।

डॉ. चन्‍द्रशेखर बैद(तारानगर): जवाब दो, मंत्री जी।

श्री अध्‍यक्ष: Do you want to give any reply?

श्री युनूस खान: यह अलग से आपने प्रश्‍न पूछा है तो आपको अलग से इंफार्मेशन भेज दी जाएगी।(व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा: आप यह तो बताइये कि किराया बढ़ाया कि नहीं बढ़ाया आपने।

श्री अध्‍यक्ष : श्री नन्‍दलाल पूनिया जी।

श्री बृजकिशोर शर्मा(जयपुर ग्रामीण): माननीय अध्‍यक्ष  महोदय, यह प्रश्‍न पूरा नहीं हुआ, मैं उसके पहले एक प्रश्‍न पूछना चाहता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: यह देखना मेरा काम है कि पूरा हुआ कि नहीं हुआ।

 

राजगढ़ (चूरू) में स्‍थानीय विधायक कोष से स्‍वीकृत कार्य

 

2. श्री नन्‍दलाल पूनिया(सादुलपुर): क्‍या ग्रामीण विकास मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

   (1) गत 8 वर्षों में पंचायत समिति राजगढ़ (चूरू) में स्‍थानीय विधायक विकास कोष से कितने कार्य स्‍वीकृत किये गये ? सूची सदन की मेज पर रखें।

   (2) उक्‍त कार्यों में से कितने कार्य पूर्ण हो गये तथा कितने अपूर्ण हैं तथा कितने प्रारंभ नहीं हुए ? विवरण सदन की मेज पर रखें ।

   (3) उक्‍त कार्यों के अपूर्ण एवं प्रारम्‍भ नहीं होने के क्‍या कारण रहे ?

   (4) क्‍या सरकार अपूर्ण एवं प्रारम्‍भ नहीं हुए कार्यों को पूर्ण कराने का विचार रखती है ?

   (5) क्‍या सरकार जिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण कार्य सम्‍पन्‍न नहीं हुए उनके विरुद्ध कार्यवाही करने का विचार रखती है ? यदि हां, तो क्‍या व नहीं तो क्‍यों ?

ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री (श्री कालूलाल गुर्जर): (1) जिला परिषद् चूरू से प्राप्‍त सूचनाओं के अनुसार गत 8 वर्षों में पंचायत समिति राजगढ़ (चूरू) में विधायक कोष से कुल 682 कार्य स्‍वीकृत किये गये हैं जिसमें 596 कार्य विधान सभा क्षेत्र राजगढ़ के तथा 86 कार्य विधान सभा तारानगर के हैं। सूची संलग्‍न क्रमश: परिशिष्‍ठ- एवं पर उपलब्‍ध हैं।

      (2) उक्‍त स्‍वीकृत कार्यों में से 664 कार्य पूर्ण हो गये हैं तथा 17 कार्य अपूर्ण एवं 1 कार्य निरस्‍त किया गया है। विवरण परिशिष्‍ठ- पर उपलब्‍ध हैं।

   (3) उक्‍त 17 कार्य के अपूर्ण रहने के कारण। परिशिष्‍ठ पर अंकितानुसार है !

      (4) जी हां।

   (5) जी हां। कार्य समय पर सम्‍पन्‍न नहीं होने के लिए जिम्‍मेदार अधिकारियों के विरूद्ध जांच करने के निर्देश जारी किये हैं।

श्री नन्‍दलाल पूनिया: अध्‍यक्ष महोदय, आज जो झूठ का पुलिंदा मुझे दिया गया है, मुझे यह दिख रहा है।

एक माननीय सदस्‍य: झूठ असंसदीय है।

श्री नन्‍दलाल पूनिया: झूठ और असत्‍य एक ही बात है।

एक माननीय सदस्‍य: असत्‍य कह दो आप।

श्री नन्‍दलाल पूनिया: असत्‍य का जो पुलिंदा पेश किया गया है, यह बहुत ही इनका जो जवाब है उससे बहुत दूर है, परसों ही मेरे को एक दिया गया था, पंचायत समिति की तरफ से कहा कि आपके ये काम अधूरे हैं जिनमें 8 काम अधूरे बताये हैं और उन अधूरे कार्यों को पंचायत समिति के ग्राम सेवक ने जो लिखकर दिया है आपके विकास अधिकारी को उसकी फोटो कॉपी मेरे पास है लेकिन आज उन कामों का इस पुलिंदे में कोई विवरण नहीं है, कोई विवरण नहीं है और जो अधूरे काम बिजली के है, जो इन्‍होंने पीछे 2004 में लिस्‍ट पेश की थी और वह जो काम है 7 काम उनका भी इसमें कोई विवरण नहीं है। मैं अध्‍यक्ष महोदय, आपको याद दिलाऊं फर्स्‍ट कि मैंने इस 12वीं विधान सभा के प्रथम बजट सत्र में एक मुद्दा उठाया था और आपने माननीय तिवाड़ी जी को यह कहा था कि ऐसा मामला है तो आप इन कामों को दिखाएं । मैंने पिछली बार भी इस काम को लेकर विधान सभा में धरना दिया था और माननीय सार्वजनिक निर्माण मंत्री जी ने मुझे धरने पर से उठाया था और यह आश्‍वासन दिया था कि आपके काम अतिशीघ्र हो जाएंगे। आज बहुत ताज्‍जुब की बात है कि 2003 के काम आज तक पूरे नहीं हुए और इनके ही हिसाब में कहीं है ही नहीं रिकार्ड में तो मैं समझता हूं कि यह क्‍या है ? पंचायती राज एक ढकोसला है, इससे तो कंजूस का गल्‍ला ही अच्‍छा है जिसमें पैसे का हिसाब तो मिल जाता है। कोई हिसाब नहीं है, पंचायत समिति कुछ कह रही है, आपका विभाग, हमारे मंत्री जी कुछ कह रहे हैं, बड़े ताज्‍जुब की बात है, बड़े शर्म की बात है, मैं तो यह कहता हूं आज बहुत असत्‍य है, मैं तो कहता हूं मंत्री जी के खिलाफ या तो यह जवाब दे रहे हैं अधूरे काम पूरे कर दिये उन्‍होंने या तो मैं इस्‍तीफा देता हूं या मंत्री जी इस्‍तीफा दें। बिजली के काम दिख रहे हैं रिकार्ड पर नहीं हैं, पिछली बार जवाब दिया था कि हम यह पूरे कर देंगे, आज उनका कोई रिकार्ड नहीं है, कहीं कहीं खम्‍भे पड़े हैं उनमें, रोजाना बिजली बोर्ड जाता हूं, रोकर वापस आ जाता हूं, आज तीन साल हो गये मुझे।

श्री अध्‍यक्ष: आप प्रश्‍न पूछिए, भाषण क्‍यों दे रहे हैं ?

श्री कैलाश त्रिवेदी: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री महोदय यह बताएं कि माननीय सदस्‍य को कार्य....

श्री कालूलाल गुर्जर: मूल प्रश्‍नकर्ता का तो जवाब दे दूं।

श्री कैलाश त्रिवेदी: इसके साथ ही आप दे दें, दोनों दे दें।

श्री कालूलाल गुर्जर: आप विराजिए, आपसे पहले मूल प्रश्‍नकर्ता के जवाब देने हैं।

श्री अध्‍यक्ष: यदि प्रश्‍न के उत्‍तर से आप संतुष्‍ट नहीं हैं तो नियमों में आइए, उसके और भी प्रावधान हैं।

श्री नन्‍दलाल पूनिया: मैं मंत्री जी से पूछना चाहता हूं क्‍या विभाग ने...

श्री अध्‍यक्ष: भाषण तो दे दिया, अब क्‍या पूछना चाहते हैं आप ?

श्री नन्‍दलाल पूनिया: क्‍या विभाग ने एम.एल.ए. लैड से स्‍वीकृत कार्य करने एवं पूर्ण करने की कोई सीमा तय कर रखी है ? यदि हां, तो क्‍या और नहीं तो क्‍यों ? क्‍या 2003 में अपूर्ण कार्यों को पूर्ण कराने की किसकी जिम्‍मेदारी है बताएं ? क्‍या पूर्ण कराने का विचार रखती है सरकार ? क्‍या आपने अब तक जिन अधिकारियों की जिम्‍मेदार  थी उनके खिलाफ कोई कार्यवाही की है और नहीं की है तो क्‍यों नहीं की, जवाब दें ?

श्री कालूलाल गुर्जर: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने जैसा कहा उसमें काफी सत्‍यता है और मैंने स्‍वयं ने जवाब में भी लिखा है । अध्‍यक्ष महोदय, आपने अभी जो एक ऊल-जुलूल आरोप लगाया कि पंचायत समिति में इतने काम पैंडिंग हैं और झूठी जो सूचना दी है।

श्री नन्‍दलाल पूनिया: ऊल-जुलूल क्‍या होता है ?

श्री कालूलाल गुर्जर: जिसका कोई बेस नहीं हो।

श्री नन्‍दलाल पूनिया: अध्‍यक्ष महोदय, मेरा पूरा बेस रिकार्ड पर आधारित है।

श्री अध्‍यक्ष: ऊल-जुलूल का मतलब होता है बेबुनियाद।

श्री कालूलाल गुर्जर: ऊल-जुलूल का मतलब बेबुनियाद, बेबुनियाद संसदीय शब्‍द है।

श्री अमराराम(धोद): अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री महोदय ने यह मान लिया कि सदस्‍य का आरोप सही है । मंत्री महोदय ने यह कहा है कि सदस्‍य का जो आरोप है उनसे मैं सहमत हूं तो फिर ऊल-जुलूल कहां रह गया ?

श्री संयम लोढ़ा: फिर क्‍या मतलब है ?

श्री अमराराम(धोद): आरोपों से तो सहमत हैं और ऊल-जुलूल की बात करते हैं।

श्री कालूलाल गुर्जर: आप सुनिए अमराराम जी, आप विराजिए, आप सुन लेंगे तो आपकी समझ में आ  जाएगा।

     अध्‍यक्ष महोदय, कुल मिलाकर जितने कार्य स्‍वीकृत हुए उनमें पंचायत समिति में 368 कार्य स्‍वीकृत हुए थे और 368 पूर्ण हो गये हैं । माननीय सदस्‍य को मैं कहता हूं कि अगर बाकी हैं और मेरे को सूचना देते हैं तो आपके पास जो भी रिकार्ड आप दे दें तो मैं सारी जांच कराऊंगा और गलत सूचना देने वाले अधिकारी को कतई नहीं बख्‍शा जाएगा, उसके खिलाफ कठोर कार्यवाही करूंगा। एक मिनट, अध्‍यक्ष महोदय, मैं पहले पूरा जवाब दे दूं। अध्‍यक्ष महोदय, उसके बाद नम्‍बर दो...

श्री अध्‍यक्ष: उनका पूरा जवाब सुन लें।

श्री कालूलाल गुर्जर: अध्‍यक्ष महोदय, जो आपने अनुशंसा की उसके अनुसार जन स्‍वास्‍थ्‍य अभियांत्रिकी विभाग में 158 कार्य आपने स्‍वीकृत करवाए, उसमें से 155 पूरे हो गये और 3 कार्य अपूर्ण हैं। इसी तरह से, सार्वजनिक निर्माण विभाग में 11 आपने अनुशंसा की, 10 पूरे हो गये एक बाकी है, नगरपालिका में 92 आपने दिये उसमें से 90 पूरे हो गये और 2 बाकी हैं और विद्युत विभाग में 52 में 40 दिए, 11 बाकी हैं। इस तरह से कुल 17 कार्य अपूर्ण हैं और एक कार्य आपका निरस्‍त हो चुका है। अध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं आपने पूछा कि किस कारण से यह जो बाकी रहे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, निरस्‍त इन्‍होंने खुद ने किया या वहां उन्‍होंने कर दिया है, इसका भी जवाब दीजिएगा।

श्री कालूलाल गुर्जर: मैं बता रहा हूं, अध्‍यक्ष महोदय, उसके मेरे पास ऑर्डर भी हैं। अध्‍यक्ष महोदय, इन्‍होंने जो पूछा है अभी कि कब इन्‍होंने अनुशंसा की और कब उसकी स्‍वीकृति जारी हुई और कब उसको पूरा होना था। उसके लिए मैं बता रहा हूं, अध्‍यक्ष महोदय, कि जितने इनके कार्य थे उसमें से काफी कार्य सन् 2003 के हैं जो बिजली विभाग के कार्य हैं और एक कार्य 2005 का है जो जून,2005 में पूरा होना था, एक 19.3 को इन्‍होंने दिया और जून,2005 को पूरा होना था, एक मई, 2005 में पूरा होना था और एक 30.6.2003 में पूरा होना था । इसी तरह से 2004 के भी तीन चार कार्य हैं जो 2004 में पूरे होने थे।

                                                                 

skp/akt/1120/1c

 

   लेकिन वास्‍तव में विद्युत विभाग के जितने कार्य हैं उनको 12 महीने से ज्‍यादा का समय हो गया और पूरे नहीं किये गये....

श्री नन्‍दलाल पूनियां: तीन साल हो गये।

श्री कालूलाल गुर्जर: अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य द्वारा प्रश्‍न पूछने पर हमको जानकारी हुई। चूंकि इम्‍प्‍लीमेंट करने वाली एजेंसी अन्‍य विभाग है, हमारा विभाग स्‍वीकृति करके स्‍वीकृति भेजता है और लैटर भी लिखता है कि आप इस कार्य को समय पर सम्‍पादित करें लेकिन जिस विभाग ने नहीं किया उसके लिए मैंने जवाब में लिखा है कि कलेक्‍टर को हमने लैटर लिखा है कि किन-किन विभाग के अधिकारियों की गलती से ये काम समय पर नहीं हुए और उनके खिलाफ में हम एक्‍शन ले रहे हैं। हमने स्‍वयं ने लिखा है। अध्‍यक्ष महोदय, मैं समझता हूं कि इसके बाद तो आपको इतना कहने की आवश्‍यकता नहीं है, हमने खुद ने लिखा है कि जो-जो दोषी हैं हम उनको निश्चित रूप से बख्‍शेंगे नहीं, उनको सजा देंगे। उसकी जांच के लिए मैंने कलेक्‍टर को पत्र लिख दिया है और जिन-जिन का जितना दोष बनता है उसकी रिपोर्ट आने पर कार्यवाही कर दूंगा।

श्री खुशवीर सिंह जोजावर (खारची): अध्‍यक्ष महोदय, मेरी पंचायत समिति मारवाड़ जंक्‍शन की....

श्री अध्‍यक्ष: श्री प्रद्युम्‍न सिंह।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह (राजाखेड़ा): अध्‍यक्ष महोदय, प्रश्‍न यह पैदा होता है, ऐसा ही एक सवाल इसमें आगे और लगा हुआ है महुवा का और मेरा आपसे निवेदन है कि आम तौर स यह देखा जाता है कि जब विधायक अनुशंषा कर देते हैं उसके उपरांत एडमिनिस्‍ट्रेटिव सैंक्‍शन और फिर फाइनेंशियल सैंक्‍शन, इन दोनों के अन्‍दर बड़ा वक्‍त लगता है।

श्री अध्‍यक्ष: लगता है।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह: पार्लियामेंट के अन्‍दर एक पार्लियामेंट की कमेटी बनी हुई है, एम.पी. लैड के कामों के अन्‍दर जो स्‍वीकृति में देरी होती है या गड़बड़ी होती है उसकी अगर वहां शिकायत की जाए तो उसकी जांच की जाती है। अब कब तक तो विधान सभा का इंतजार करें कि विधान सभा हो तो प्रश्‍न उठाएं या मंत्री जी को लिखें। होता क्‍या है कि यहां आप डिपार्टमेंट्स को वर्क्‍स देते हैं, हम एम.पी. की तरह एन. जी. ओज. को दे नहीं सकते, एम. पीज. तो एन. जी. ओज. को भी दे देते हैं। सरकारी एजेंसी के माध्‍यम से ही एम. एल. एज. को कार्य कराने पड़ते हैं। अब प्रश्‍न यह होता है कि समय पर होते नहीं है। आप पी एच ई डी को दे दीजिये, इर्रिगेशन को दे दीजिये, पी डब्‍ल्‍यू डी को दे दीजिये, किसी को भी दे दीजिये, जो काम समय पर पूरे हो जाने चाहिए वो नहीं होते हैं और फिर पैसा लैप्‍स होने की दिक्‍कत आती है कि पैसा लैप्‍स होगा।

श्री अध्‍यक्ष: लैप्‍स नहीं होता है, कैरी फारवर्ड होता है।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह: मेरा आप निवेदन तो सुन लें पूरा। यह सरकार की स्‍वीट विल के ऊपर है। हमारे वक्‍त में हमने निकाला था कि यह पैसा लैप्‍स नहीं होगा, अगले साल में कैरी फारवर्ड हो जाएगा जो पैसा बच जाएगा। (व्‍यवधान) अब आप सुन लें मेरी बात। मैं सब के हित की बात कर रहा हूं। यह मेरा आपसे अनुरोध है कि आप कृपा इसके ऊपर गंभीरतापूर्वक विचार करें। माननीय मुख्‍य मंत्री महोदया यहां बैठी हुई हैं, मैं उनसे भी निवेदन करना चाहूंगा कि इसका कोई मैकेनिज्‍म तो हो, उसकी कोई कमेटी आप बना दें। असेम्‍बली की कमेटी बन जाएगी और किसी को शिकायत करनी है तो असेम्‍बली की कमेटी के समक्ष जब यह शिकायत आएगी पार्लियामेंट की तरह तो उसके ऊपर कार्य के अन्‍दर निश्चित रूप से गति आयेगी और यह जनता का पैसा है, सरकारी पैसा है, जनता का पैसा है, जनता के हित में खर्च होता है तो इसके अन्‍दर देरी है तो आपको कोई न कोई प्रक्रिया अपनानी पड़ेगी जिससे कि समय पर कार्य सम्‍पादित हो सके और निष्‍पक्षता के आधार पर आपसे अनुरोध करूंगा कि मुख्‍य मंत्री जी, इसको स्‍वीकार करें, आप असेम्‍बली की किसी भी कमेटी को, नई कमेटी न बनाकर के जो एग्‍जिस्टिंग कमेटी है, किसी को भी आप कार्य सौंप दें जो इस कार्य की देखरेख करेगी तो इससे सारे ही विधायकों को बहुत सुविधा रहेगी, मेरा यही आपसे अनुरोध है।

श्री अध्‍यक्ष: लीडर ऑफ द हाउस।

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍यों की पीड़ा को हम समझ सकते हैं क्‍योंकि यह जायज प्राब्‍लम है और सब की है इसलिए स्‍पीकर साहब से बाद में बात करके, आप लोगों से बात करके इसमें जो भी अपने को करने की बात होगी, अपन कर लेंगे।

श्री अध्‍यक्ष: नैक्‍स्‍ट क्‍वेश्‍चन। श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल।

जिला बीकानेर के कृषि कनेक्‍शन

3. श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल (लूणकरणसर): क्‍या ऊर्जा मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

   (1) क्‍या यह सही है कि प्रदेश में कृषि कनेक्‍शन देने हेतु नीति बनायी गयी है, यदि हां, तो क्‍या ? निर्धारित नीति की प्रति सदन की मेज पर रखें।

   (2) जिला बीकानेर में दिनांक 01 जनवरी, 2000 से अब तक किसानों द्वारा कृषि कनेक्‍शन हेतु किस-किस वर्ष में कितने-कितने आवेदन किये तथा कितने कनेक्‍शन जारी किये गये व आगामी वर्षों में कितने-कितने कनेक्‍शन जारी करने की योजना है ? विवरण सदन की मेज पर रखें।

   (3) क्‍या सरकार सेम प्रभावित क्षेत्रों में बिना वरीयता के कृषि कनेक्‍शन जारी करने का विचार रखती है ? यदि हां, तो कब से व नहीं, तो क्‍यों ?

राज्‍य मंत्री, ऊर्जा (श्री गजेन्‍द्र सिंह): (1) जी हां। कृषि कनेक्‍शन देने हेतु कृषि कनेक्‍शन नीति 2004 (संशोधित - 31.12.2005) जारी की गई है जिसकी निर्धारित नीति की प्रति परिशिष्‍ट 'अ' पर उपलब्‍ध है।

   (2) जिला बीकानेर में दिनांक 1 जनवरी, 2000 से अब तक किसानों द्वारा कृषि कनेक्‍शन हेतु किये गये आवेदनों तथा जारी किये गये कनेक्‍शनों का विवरण परिशिष्‍ट 'ब' पर उपलब्‍ध है। वर्ष 2006-07 में कृषि कनेक्‍शन देने का लक्ष्‍य अभी निर्धारित करना शेष है।

   (3) सेम प्रभावित क्षेत्रों में बिना वरीयता के कृषि कनेक्‍शन जारी करने का वर्तमान में कोई प्रस्‍ताव विचाराधीन नहीं है।

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल: अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री महोदय से जानना चाहता हूं कि एक ओर सेम प्रभावित क्षेत्र में काश्‍तकारों को समाधान देने के लिए सरकार करोड़ों रुपये प्रति वर्ष खर्च करती है। काश्‍तकार सेम प्रभावित क्षेत्र के अन्‍दर जो वाटर लॉगिंग के कारण पानी ऊपर आ जाता है उसको डीजल इंजन के मार्फत् पम्‍प आउट करने में लाखों रुपया खर्च करता है, इन परिस्थितियों को ध्‍यान में रखते हुए क्‍या सरकार सेम प्रभावित क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर कृषि कनेक्‍शन जारी करने का विचार रखती है ? यदि हां, तो कब तक और यदि नहीं, तो क्‍यों ?

श्री गजेन्‍द्र सिंह: अध्‍यक्ष महोदय, कृषि कनेक्‍शन की खाली तीन श्रेणियां हैं, एक तो जनरल, एक स्‍पेशल और एक फार्म हाउस। अभी सरकार के पास कोई ऐसा विचाराधीन नहीं है कि कनेक्‍शन की कोई एक्‍स्‍ट्रा कैटेगरी बनाई जाए जिससे सेम प्रभावित क्षेत्र के अन्‍दर पानी पम्‍प आउट किया जाए।

श्री देवीसिंह भाटी (कोलायत): अध्‍यक्ष महोदय, सवाल इतना ही है कि जो वाटर लॉग्‍ड एरिया है, यह सारा पानी सीपेज होकर फ्लो बैकवर्ड टुवर्ड पाकिस्‍तान है, यह पानी व्‍यर्थ जा रहा है और पाकिस्‍तान में इस पानी का उपयोग हो रहा है। इसलिए हम कह रहे हैं कि यह नहीं है कि ग्राउंड वाटर लेवल नीचे जा रहा है, यह दिक्‍कत नहीं आयेगी, सवाल यह है कि जो पानी सीपेज से ऊपर हो रहा है, वाटर लॉग्‍ड हो रहा है तो उस समस्‍या का निदान हो जाएगा और एक आप स्‍पेशल कैटेगिरी कर दें तो यह पानी जो हमारा बह कर पाकिस्‍तान की ओर जा रहा है वह सारा रूक जाएगा। इसलिए मैंने पहले मुख्‍य मंत्री महोदया को भी पत्र लिखा था पर यही एक जनरल जवाब आ गया कि यह कोई नीति में नहीं आता है, अभी हमारा ऐसा कोई विचार नहीं है। इसके ऊपर कृपया ध्‍यान दें तो निश्चित तौर पर समस्‍या का समाधान होगा और लोगों को लाभ भी मिलेगा।

श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल: अध्‍यक्ष महोदय, मेरा इसी सन्‍दर्भ में पुन: मंत्री महोदय से प्रश्‍न है कि नीति बनाना राज्‍य सरकार की जिम्‍मेदारी है। कृषि क्षेत्र के अन्‍दर फार्म हाउस नीति, विशेष कनेक्‍शन की नीति और साधारण कनेक्‍शन की नीति, यह राज्‍य सरकार की देन है। आज इतनी बड़ी समस्‍या है जिस समस्‍या के समाधान के लिए राज्‍य सरकार चिंतित है और करोड़ों रुपये प्रति वर्ष खर्च किये जा रहे हैं उसी कड़ी में अगर हम प्राथमिकता के आधार पर कनेक्‍शन दें तो काश्‍तकारों को राहत होगी। क्‍या विभाग इस बारे में अपना मानस रखता है ? यदि हां, तो कब तक और यदि नहीं, तो क्‍यों ?

श्री अध्‍यक्ष: जवाब आने दीजिये।  Let the reply come. जवाब आने दीजिये।

श्री गजेन्‍द्र सिंह: अध्‍यक्ष महोदय, हमारी सरकार ने जो कनेक्‍शन रिलीज किये हैं, यह पूरा हाउस स्‍वीकार करेगा कि हमने एक ऐतिहासिक नम्‍बर ऑफ कनेक्‍शंस रिलीज किये हैं। पहले वर्ष के अन्‍दर जो हमारा लक्ष्‍य था 40 हजार कनेक्‍शन का वह हम रिलीज कर चुके हैं और दूसरे वर्ष के अन्‍दर भी 40 हजार कनेक्‍शन हम ऑलरेडी जनवरी महीने तक रिलीज कर चुके हैं। कांग्रेस सरकार पांच साल के टर्म के अन्‍दर 111000 कनेक्‍शन....

श्री अध्‍यक्ष: अब आप सेम की बात बतायें।

श्री गजेन्‍द्र सिंह: वही बता रहा हूं। अभी जो हम कनेक्‍शन रिलीज कर रहे हैं, अभी विद्युत की भी थोड़ी कमी है तो इसलिए प्रायोरिटी जनरल कैटेगरी को दी है, हमारा जो लक्ष्‍य है उसको अभी तोड़ नहीं सकते हैं।

श्री अमरा राम (धोद): अध्‍यक्ष महोदय, मैं मंत्री महोदय से जानना चाहूंगा कि जो कृषि कनेक्‍शन नीति 2004 आपने घोषित की है उसमें डी. एन. जमा होने के बाद 120 दिन में कनेक्‍शन किसान को जारी होने के लिए घोषित किया था, क्‍या बीकानेर में आपने कृषि नीति घोषित होने के बाद जितने भी डी. एन. जमा हुए हैं उनमें से कितने कनेक्‍शन ऐसे हैं जो 120 दिन के बाद किये हैं। 120 दिन ही नहीं, 8 महीने और एक साल के बाद कनेक्‍शन जारी हुए हैं तो उन नीति को तोड़ने वाले अधिकारियों के खिलाफ आप कोई कार्यवाही करने का इरादा रखते हैं? और आइंदा से जिनके डिमांड नोटिस जमा हैं, क्‍या उनको 120 दिन के अन्‍दर कनेक्‍शन जारी हो जाएंगे ? मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करें।

श्री अध्‍यक्ष: जवाब आने दीजिये। पहले जवाब आने दीजिये। बीच में नहीं बोलें आप। आप विराजें, पूछ लिया आपने।

श्री सांवर लाल (सिंचाई मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कोलायत से आने वाले माननीय सदस्‍य ने जो चिंता प्रकट की है, निश्चित रूप से उसके सम्‍बन्‍ध में हम सब को मिल बैठकर विचार करने की आवश्‍यकता है। यह सेम की समस्‍या नहरी क्षेत्र में है। कुछ जमीन की प्रकृति है और कुछ फ्लड इर्रिगेशन की वजह से यह सीपेज, ड्रेनेज की वजह से होती है तो मैं माननीय सदस्‍य को आश्‍वस्‍त करना चाहता हूं कि हम सब मिल बैठकर जो भी विचार आप और हम निकालेंगे, निश्चित रूप से सरकार कार्यवाही करेगी।

 

Vkj/akt/1130/1d

 

श्री देवीसिंह भाटी: वाह साहब, वाह साहब।

श्री मंगलाराम गोदारा: अध्‍यक्ष महोदय, सामान्य श्रेणी के जो कनेक्‍शन हैं, मेरे विधान सभा क्षेत्र में रोक लगा रखी है। मंत्रीजी से मैं यह पूछना चाहता हूं कि खाली एक डूंगरगढ़ में ही रोक लगा रखी है या राजस्‍थान में और कहीं पर भी रोक लगा रखी है। जो कट आफ डेट में कनेक्‍शन रूके हैं, सारे कनेक्‍शनों पर रोक लगा रखी है, इसका क्‍या कारण है? (व्‍यवधान)

श्री गजेन्‍द्र सिंह: अध्‍यक्ष महोदय, हमारा जो लक्ष्‍य था 60,000 डिमाण्‍ड नोट और 40,000 कनेक्‍शन, वह पहले वर्ष में मैटीरियलाइज हो चुका है और दूसरे वर्ष के अन्‍दर भी हम आगे ही चल रहे हैं।  इस वर्ष के अन्दर 40,000 कनेक्‍शन रिलीज करने के लिए हमारे खाली 1400-1500 कनेक्‍शन रह गये हैं। अभी जो कनेक्‍शनों का मैटीरियलाइजेशन है क्‍योंकि हमारी जो कृषि नीति है, उसका इतना सरलीकरण हो गया है, इतना अफोर्डेबल हो गया है कनेक्‍शन देने में, मैटीरियलाइजेशन डिमाण्‍ड नोट देने में नार्मली जो होता है, उससे बहुत अधिक ज्‍यादा है। (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान: अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या 120 दिन से ज्‍यादा समय लेते हैं तो क्‍या उन लोगों को ब्‍याज देंगे? क्‍या फीस जमा कराने में लेट हो जाते हैं तो आप पैनल्‍टी लेते हैं, ब्‍याज वसूल करते हैं, जब किसान से आप लाखों रुपया डिमांड नोट के नाम पर जमा कर लेते हैं और समय सीमा में कनेक्‍शन नहीं दें तो क्‍या आपको किसान को ब्‍याज नहीं देना चाहिए? क्‍या सरकार विचार करती है, किसान को समय सीमा से अधिक समय में यदि कनेक्‍शन दिया जाता है तो उस समय के लिए ब्‍याज देय होना चाहिए ? सरकार को यह घोषणा करनी चाहिए। (व्‍यवधान)

श्री मंगलाराम गोदारा: अध्‍यक्ष महोदय, डिमाण्‍ड नोट जमा होने के बाद भी रोक लगा रखी है और नये डिमाण्‍ड नोट निकालने पर भी रोक लगा रखी है।

श्री रामप्रताप कासनिया: अध्‍यक्ष महोदय, अध्‍यक्ष महोदय।

श्री मंगलाराम गोदारा: अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्रीजी से पूछना चाहता हूं कि खाली एक डूंगरगढ़ में ही रोक लगा रखी है या और कहीं भी रोक लगा रखी है?

श्री अध्‍यक्ष: आप बैठ जाइये। मैंने नाम पुकारा है रामप्रताप कासनिया। आप विराज जाएं ।

श्री रामप्रताप कासनिया(पीलीबंगा): अध्‍यक्ष महोदय, मांगा उसी से जाता है जो देता है। सरकार ने कृषि कनेक्‍शन बहुत ज्‍यादा संख्‍या में किये हैं, इसमें कोई संदेह नहीं है। अध्‍यक्ष महोदय, मेरा यह सरकार से निवेदन है कि सेमग्रस्‍त क्षेत्र के अन्‍दर काश्‍तकारों को कनेक्‍शन देने में छूट...

श्री अध्‍यक्ष: उसका जवाब तो दे दिया सिंचाई मंत्रीजी ने, अब उस बात को क्‍यों दोहरा रहे हैं आप ? आप बिजली की बात आने दीजिये।

श्री रामप्रताप कासनिया: बात कनेक्‍शन की है, उसमें और इसमें फर्क है।

श्री गजेन्‍द्र सिंह: अध्‍यक्ष महोदय, 1,70,000 कनेक्‍शन जो 15 सालों में पेंडिंग हैं, हमारा लक्ष्‍य इनको इस साल में पूरा करने का है, यह हमारा ऐतिहासिक रिकार्ड रहेगा।

श्री अमराराम(धोद): अध्‍यक्ष महोदय, मैंने जो पूछा है स्‍पेसिफिक बीकानेर का, जो डिमाण्‍ड नोट जमा हुए हैं इनकी कृषि नीति घोषित होने के बाद 120 दिन से ज्‍यादा समय कितने कनेक्‍शनों में लगा है, उसके खिलाफ क्‍या कार्यवाही कर रहे हैं और आइन्‍दा जो डिमाण्‍ड नोट जमा है, क्‍या वह 120 दिन में हो जायेंगे कनेक्‍शन? (व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, मैंने पूछा है, बीकानेर में जो डिमाण्‍ड नोट जमा हुए हैं और 120 दिन में नहीं हुए, कितने कनेक्‍शन हैं स्‍पेसिफिक, वह बता दें? कितने कनेक्‍शन हैं जिनको इनकी नीति के अनुसार नहीं करवाये गये?

श्री महावीर प्रसाद जैन: अध्‍यक्ष महोदय, 12 साल में जो काम इन्‍होंने नहीं किये, वह दो साल में कराये, यह तो इनको धन्‍यवाद देना चाहिए। (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा: अध्‍यक्ष महोदय, मेरा ऊर्जा मंत्रीजी से एक प्रश्‍न है।

श्री अमराराम(धोद): अध्‍यक्ष महोदय, इस बार स्‍पेसिफिक दे दें और पहली बार राजस्‍थान में शिड्यूल्‍ड कास्‍ट के पिछले छह महीनों में कनेक्‍शन जारी नहीं हो रहे हैं जब‍कि राजस्‍थान में बिजली के कनेक्‍शन शिड्यूल्‍ड कास्‍ट के अपडेट कभी भी, जब भी वह फाइल जमा करता है, उसी समय हो जाता था। पहली बार राजस्‍थान में पिछले छह महीनों से शिड्यूल्‍ड कास्‍ट के डिमाण्‍ड नोट पर भी रोक लगा रखी है। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: मंत्रीजी का जवाब सुनिये। (व्‍यवधान) बूंदी से आने वाले माननीय सदस्‍य, जवाब सुनिये आप मंत्रीजी का।

श्री गजेन्‍द्र सिंह: अध्‍यक्ष महोदय, कांग्रेस ने पाँच वर्ष के कार्यकाल में 12,000 शिड्यूल्‍ड कास्‍ट के कनेक्‍शन दिये हैं जबकि हमने दो साल के अन्दर 10,000 को पार कर लिया है। (व्‍यवधान)

श्री अमराराम(धोद): अध्‍यक्ष महोदय, मैंने जो सवाल पूछा है, उसका उत्‍तर नहीं आया है। मैं जो सवाल पूछ रहा हूं उसका उत्‍तर दिलाइये, जो मैंने सवाल पूछा है, उसका उत्‍तर नहीं आया है।

श्री रामचन्‍द्र जारोड़ा: अध्‍यक्ष महोदय, ये आंकड़ों की बात कर रहे हैं, क्रियान्वित कितने हुए? (व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, ये आंकड़ों की बात कर रहे हैं, क्रियान्वित कितने हुए?

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, माननीय सदस्‍य, स्‍थान ग्रहण करें। मिस्‍टर जारोड़ा, स्‍थान ग्रहण करें। स्‍थान ग्रहण करें। माननीय मंत्रीजी, प्रश्‍न बहुत सीधा-सा है। 120 दिन में आपने जो वादा किया डिमाण्‍ड नोट में, उसको या तो आप तरमीम कर लीजिये 120 दिन की बजाय इसको 150 करते हैं, 160 करते हैं और यदि सचमुच में आपके डिमाण्‍ड नोट में यह शर्त है तो उस शर्त की अनुपालना में क्‍या कमी है और किसकी वजह से कमी है, क्‍यों नहीं करते हैं, वह आप बता दीजिये। और क्‍या है इसमें। (व्‍यवधान) आप स्‍थान ग्रहण कर लें। आप स्‍थान ग्रहण करें, आप स्‍थान ग्रहण करें। मंत्रीजी जवाब दे रहे हैं।

श्री गजेन्‍द्र सिंह: अध्‍यक्ष महोदय, 31 जनवरी, 2006 को केवल 16,840 डिमाण्‍ड नोट रह गये हैं, हमारा जो टार्गेट इस साल का 40,000 कनेक्‍शन का है, हमें केवल 2,500 कनेक्‍शन देने हैं, लेकिन यह 16,840 कनेक्‍शन हम 30 जून तक पूरा कर देंगे और उसके बाद जब डिमाण्‍ड नोट इश्‍यु होगा, हम 90 दिन के अन्‍दर किसान को कनेक्‍शन देंगे।

श्री अमराराम(धोद): अध्‍यक्ष महोदय, हमने यह नहीं पूछा। (व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, आपके निर्देश को यह नहीं मान रहे हैं।

श्री रामचन्‍द्र जारोड़ा: ये आंकड़ों की बात कर रहे हैं।

श्री श्रवण कुमार: अध्‍यक्ष महोदय, पहले वाले का क्‍या हुआ, उसका जवाब नहीं आया।

श्री अध्‍यक्ष: आपको आवश्‍यकता नहीं बीच में खड़े होने की। माननीय श्री रिछपाल मिर्धा। मैंने नैक्‍स्‍ट प्रश्‍न पुकार लिया, श्री रिछपाल मिर्धा। (व्‍यवधान)

श्री अमराराम(धोद): अध्‍यक्ष महोदय, आपने जो उत्तर देने के लिए कहा, वह उत्‍तर तो नहीं आया अभी तक।

श्री अध्‍यक्ष: सारी, एक बीच में रह गया है। श्री अशोक कुमार नवलखा। मैंने नैक्‍स्‍ट प्रश्‍न पुकार लिया।

श्री श्रवण कुमार: अध्‍यक्ष महोदय, आसन ने जो पुकारा, वह नहीं हुआ है। आपने जो कहा था कि...

श्री अध्‍यक्ष: मैंने नैक्‍स्‍ट प्रश्‍न पुकार लिया।

श्री श्रवण कुमार: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने ही तो कहा था, आपने एक विसंगति के बारे में पूछा था। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने प्रश्‍न पूछा था न, आपकी बात भी तो खराब हो रही है।

श्री अशोक कुमार नवलखा: प्रश्‍न संख्‍या 4.

श्री अध्‍यक्ष: मैंने नैक्‍स्‍ट प्रश्‍न पुकार लिया। धोद से आने वाले माननीय सदस्‍य, कृपया स्‍थान ग्रहण कर लें।

श्री अमराराम(धोद): अध्‍यक्ष महोदय, आपके निर्देश पर भी उत्‍तर नहीं दें, आपके निर्देशों का भी उल्‍लंघन हो रहा है।

श्री अध्‍यक्ष: मैंने नैक्‍स्‍ट प्रश्‍न पुकार लिया, मैंने अगला प्रश्‍न पुकार लिया। मैंने अगला प्रश्‍न पुकार लिया है। मैंने अगला प्रश्‍न पुकार लिया है।

श्री श्रवण कुमार: आपके निर्देशों की अवहेलना हो रही है।

श्री अमराराम(धोद): क्‍या आसन के निर्देशों का भी मंत्रीजी पालन नहीं करेंगे, क्‍या मतलब है यह? (व्‍यवधान) अध्‍यक्ष महोदय, आपने निर्देश दिये, या तो मंत्रीजी यह कह दें कि मैं तैयार नहीं हूं, तैयार होकर नहीं आया। स्‍पेसिफिक आपकी तरफ से निर्देश दिये गये...

श्री श्रवण कुमार: अध्‍यक्ष महोदय, आपने निर्देश दे दिये कि 120 दिन में करने के। (व्‍यवधान)

श्री जीतमल खांट(बागीडोरा): ...मैं आपसे चाहूंगा, मैं मंत्रीजी से जानना चाहता हूं कि विद्यार्थियों के लिए आप क्‍या पुख्‍ता व्‍यवस्‍था कर रहे हैं ?

श्री अमराराम(धोद): 120 दिन के अन्‍दर नहीं दिये गये, अब क्‍या समय बढ़ायेंगे 120 दिन की?

पंचायत समिति छोटी सादड़ी के अनुसूचित जनजाति बाहुल्‍य ग्रामों का माडा योजना में चयन

4. श्री अशोक कुमार नवलखा(निम्‍बाहेड़ा): क्‍या जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

   (।) विधान सभा क्षेत्र निम्बाहेड़ा की पंचायत समिति छोटी सादड़ी में ‘’माडा योजना’’ के अन्‍तर्गत कितने गांव हैं? सामान्‍य आबादी मय अनुसूचित जन जाति की आबादी के गांवों की सूची सदन की मेज पर रखें।

   (2) क्‍या सरकार माडा योजना में मानदण्‍ड के अनुसार अन्‍य गांवों को भी सम्मिलित करने का विचार रखती है? यदि हां, तो कब तक व नहीं तो क्‍यों?

   (3) क्‍या सरकार पंचायत समिति छोटी सादड़ी को जनजाति क्षेत्र की श्रेणी में सम्मिलित करने का विचार रखती है? यदि हां, तो कब तक व नहीं तो क्‍यों?

जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री (श्री कनकमल कटारा): (।) विधान सभा क्षेत्र निम्‍बाहेड़ा की पंचायत समिति छोटी सादड़ी में माडा योजना के अन्‍तर्गत 79 ग्राम चयनित है। ग्रामों की सूची संलग्‍न है।

   (2) जी हां। माडा योजना में मानदण्‍ड के अनुसार अन्‍य गांवों को सम्मिलित करने का कार्य जनगणना निदेशालय द्वारा जनगणना वर्ष 2001 के अनुसार जिला जनगणना पुस्तिकाएं प्रकाशित होने के पश्‍चात् सम्‍पादित किया जायेगा।

   (3) जी हां। वर्तमान अनुसूचित क्षेत्र में विस्‍तार कर पंचायत समिति छोटी सादड़ी की 10 ग्राम पंचायतों को अनुसूचित क्षेत्र में सम्मिलित करने हेतु प्रस्‍ताव भारत सरकार को प्रेषित किये जा चुके हैं।

         भारत सरकार से स्‍वीकृति प्राप्‍त होने पर इन गांवों को अनुसूचित क्षेत्र में सम्मिलित कर लिया जायेगा।

श्री अशोक कुमार नवलखा: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से इतना ही जानना चाहता हूं कि जो प्रस्‍ताव अनुसूचित क्षेत्र घोषित करने के लिए पंचायत समिति छोटी सादड़ी के हैं, उन ग्राम पंचायतों के भेजे गये हैं, एक तो ये प्रस्‍ताव भारत सरकार को कब भेजे गये? दूसरी बात, भारत सरकार ने अब तक इन प्रस्‍तावों की स्‍वीकृति क्‍यों नहीं दी? और तीसरी बात, सरकार द्वारा अब तक इन प्रस्‍तावों की मंजूरी के लिए कब-कब क्‍या-क्‍या प्रयास किये गये?

श्री कनकमल कटारा: अध्‍यक्ष महोदय, माडा लघु खण्‍डों, माडा क्‍लस्‍टर यह जो विस्‍तार के लिए प्रस्‍ताव भेजे गये, उसकी भारत सरकार में दिनांक 30 दिसम्बर, 1989 को अनुमति माडा लघु खण्‍ड 36 और ग्रामों की संख्‍या 3189, कुल जनसंख्‍या 11.67 लाख और इसमें से जनजातीय संख्‍या 6.70 । इसके बाद में 22 सितम्‍बर, 1983 दो लघु खण्‍ड जिसके अन्‍तर्गत ग्रामों की संख्‍या 157, कुल जनसंख्‍या 0.47 लाख और जनजातीय संख्‍या 0.27... (व्‍यवधान)यानी कि मैं आपको पूरा ही बता दूं। उसके बाद 1987 में लघु खण्‍ड, ग्रामों की संख्‍या 236, जनसंख्‍या 1.07 लाख और जनजातीय संख्‍या 0.55, कुल माडा लघु खण्‍ड 44  और ग्रामों की संख्‍या 3592 कुल जनसंख्‍या 22 लाख 58 हजार 134 और जनजाति संख्‍या इसमें 12 लाख 49 हजार 231 । 

 

Jkj/akt/1140/1e

 

   माडा क्‍लस्‍टर के अंदर भी हमने 16 अप्रैल 1986 को कुल लघु खंड आठ, ग्रामों की संख्‍या 134, कुल जनसंख्‍या उसमें 49 हजार 565, जनजाति की संख्‍या 26 हजार 623 ।  ऐसे ही चार जनवरी, 1988 को दो लघु खंड, ग्रामों की संख्‍या 15, कुल जनसंख्‍या 13 हजार 975 और एस.टी. जनसंख्‍या 7 हजार 520 ।  25 मार्च, 1988- लघु खंड एक, ग्राम संख्‍या 9, कुल जनसंख्‍या 5 हजार 080 और जनजाति की संख्‍या 2 हजार 967 ।  आपने कहा कि प्रस्‍ताव कब-कब भिजवाये गये, जो भिजवाये गये प्रस्‍ताव, उसमें हम सूचना देंगे कि इसमें 29.4.2004 को हमने प्रस्‍ताव भेजा ।  एक 2002-03 में शासन सचिव द्वारा भेजा गया ।  इसमें 18.6.2004 को, इस तारीख को भिजवाया गया ।  इसमें 2002-03 में फिर 13.7.2004 को भिजवाया गया।  ऐसे ही 2002-03 में 18.12.2004 को, फिर 2002-03 में 13.7.2005 को , 2002-03 में मेरे स्‍वयं के द्वारा 10.8.2005 को हमने प्रस्‍ताव भिजवाये।  इसके बाद में 2002-03 में 3.1.2006 को हमने प्रस्‍ताव भिजवाये।  ऐसे ही 2002-03 में यानि 25.2.2006 तक यह प्रस्‍ताव हमने भिजवाये हैं।  अब यह भारत सरकार की स्‍वीकृति आने के बाद में हम निश्चित रूप से इसको सम्मिलित कर लेंगे, उसके भी मापदण्‍ड तय हैं, उस मापदण्‍ड के अनुसार निश्चित रूप से इसको सम्मिलित कर लिया जायेगा।

श्री जोगेश्‍वर गर्ग:  2004 में प्रस्‍ताव गये, भारत सरकार को फुर्सत नहीं मिली वापिस स्‍वीकृत करे।  2004 में प्रस्‍ताव गये, दो-दो साल हो गये, इतने संवदेनशील हैं आप एस.टी. के मामले में। शेम। (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद मा‍हिर आजाद:  जोगेश्‍वर गर्गजी, वह प्रस्‍ताव पर साइन नहीं थे।

श्री अध्‍यक्ष:  श्री रिछपाल मिर्धा।

मोहम्‍मद माहिर आजाद:  वह प्रस्‍ताव पर साइन ही नहीं थे इसलिए क्‍या विचार करेंगे उस पर ?

श्री अध्‍यक्ष:  आपस में बात नहीं करें। 

     

केन्‍द्रीय सहकारी बैंक नागौर के अवधि पार ऋणों की वसूली

 

5.श्री रिछपाल मिर्धा(डेगाना):  क्‍या सहकारिता मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

   (1) केन्‍द्रीय सहकारी बैंक नागौर और अन्‍य शाखाओं द्वारा पिछले पाँच वर्षों के दौरान किन-किन व्‍यक्तियों को मध्‍यकालीन और दीर्घकालीन ऋण स्‍वीकृत किया गया?  सूची पूर्ण विवरण सहित तहसीलवार सदन की मेज पर रखें।

   (2) क्‍या यह सही है कि तहसील डेगाना के कई सहकारी ऋणियों का ऋण अवधि पार हो गया है? यदि हां, तो किन-किन का?  विवरण सदन की मेज पर रखें।

   (3) उक्‍त डिफाल्‍टर ऋणियों से ऋण वसूल करने हेतु सरकार द्वारा अब तक क्‍या कार्यवाही की गई?  विवरण सदन की मेज पर रखें।

सहकारिता मंत्री (श्री मदन दिलावर):  (1) केन्‍द्रीय सहकारी बैंक नागौर की समस्‍त शाखाओं द्वारा पिछले 5 वर्षों (2000-01 से 2004-05) के दौरान स्‍वीकृत मध्‍यकालीन और दीर्घकालीन ऋणों का व्‍यक्तिवार व तहसीलवार विवरण परिशिष्‍ठ-एक सदन की मेज पर रख दिया गया है।

   (2) जी हां।  तहसील डेगाना के अवधिपार ऋण बकायादारों का विवरण परिशिष्‍ट-दो सदन की मेज पर रख दिया गया है।

   (3) डिफाल्‍टर ऋणियों से ऋण वसूली हेतु की गई कार्यवाही का विवरण परिशिष्‍ठ-दो सदन की मेज पर रख दिया गया है।

श्री रिछपाल मिर्धा:  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्रीजी से जानना चाहता हूं, पहले तो जो इन्‍होंने लिस्‍ट दी है, वह अधूरी लिस्‍ट दी है, अवधिपार ऋण जिनके हैं उन आधे लोगों के इस लिस्‍ट में नाम नहीं हैं।  नम्‍बर दो, जिनका लोन अवधिपार हो गया, उनके खिलाफ इन्‍होंने धारा 99 में नोटिस जारी किये, उसके बावजूद कितने लोगों के खिलाफ इन्‍होंने कुर्की की और इन्‍होंने जो प्रयास किये , इनके प्रयासों का क्‍या नतीजा आया और कितना ऋण वसूल हुआ, ऐसे कितने केस हैं।  नम्‍बर-तीन, मेरा माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से यह कहना है मंत्रीजी को कि यह जो अवधिपार ऋण की वसूली के लिए जो इन्‍होंने मापदण्‍ड अपनाये, इसमें भेदभाव बरता गया और दोहरे मापदण्‍ड अपनाये जबकि सब के लिए एक मापदण्‍ड होना चाहिए।  मैं यह जानना चाहता हूं कि कितने लोगों के खिलाफ कुर्की हुई और कितनी वसूली हुई ?

श्री अध्‍यक्ष:  बताइये मंत्रीजी।

श्री मदन दिलावर:  धारा 99 का नोटिस देने के बाद दस जो अवधिपार थे, दस लोगों का पैसा जमा हो गया है और हमने जो अवधिपार हमारे पास हैं, सबके खिलाफ हम कार्यवाही कर रहे हैं।

श्री अध्‍यक्ष:  अमाउंट बताइये, कितना अमाउंट रियलाइज हुआ।

श्री मदन दिलावर:  अमाउंट बता रहा हूं।

श्री अध्‍यक्ष:  रिकवरी बताइये। 

श्री मदन दिलावर:  अमाउंट बता रहा हूं, अवधिपार अमाउंट बता रहा हूं।

श्री रिछपाल मिर्धा:  यह तो बताओ कितनों  के खिलाफ कर रहे हैं आप कार्यवाही।

श्री रामनारायण चौधरी: दोहरे मापदण्‍ड का आरोप है आप पर।

श्री मदन दिलावर:  अवधिपार ऋणों की जो सूची है उसमें तीस लोग हैं अभी, जिनका पैसा आना शेष है।  मांगीलाल, भागीरथराम प्रजापत चोलवास के ऊपर है 25 हजार 790 रूपया, इसको धारा 99 का हमने नोटिस दे दिया है।  ओमप्रकाश, फूलचन्‍द....

श्री प्रद्युम्‍न सिंह:  यह पूछा ही नहीं है।  यह तो है, लिस्‍ट में है यह तो।

श्री मदन दिलावर:  आप पूरा पूछना चाहते हो कि एक-एक का पूछना चाहते हैं, बतायें।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह: यह तो लिस्‍ट में दिया हुआ है।

श्री मदन दिलावर:  यह पूरा 9 लाख 34 हजार 391 रूपया अवधि पार है।

श्री अध्‍यक्ष: कितनी रिकवरी हुई, वह पूछ रहे हैं वह।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह: यह तो लिस्‍ट के अंदर है आलरेडी।

श्री अध्‍यक्ष: कुल कितनी रिकवरी हुई, वह पूछ रहे हैं।

श्री मदन दिलावर: यदि आप डिटेल चाहते हैं तो मैं डिटेल बता देता हूं, एकमुश्‍त चाहते हैं तो एकमुश्‍त बता देता हूं।

मोहम्‍मद माहिर आजाद:  रिकवरी की डिटेल बताइये, रिकवरी कितनी हुई, कैसे हुई, यह तो लिस्‍ट में दे रखा है आपने।

श्री अध्‍यक्ष:  आप कुल रिकवरी कितनी हुई, यह बता दीजिये।

श्री मदन दिलावर:  मैं कह रहा हूं न।

मोहम्‍मद माहिर आजाद:  उसकी आपके पास जानकारी नहीं है।  आपको तो फुर्सत ही नहीं है।  आपको तो थॉमस से और इमानुअल से ही फुर्सत नहीं है।

श्री मदन दिलावर:  मैं कह रहा हूं, मेरे पास जानकारी है।  मेरे पास जानकारी है, आप सुनो तो सही.....

मोहम्‍मद माहिर आजाद:  वहां लगा रखी है सारी ताकत तो आपने।

श्री मदन दिलावर:  मेरी बात सुनो तो सही।  मेरे पास सब की जानकारी है।

श्री अध्‍यक्ष:  यह क्‍या तरीका है आपका? यह क्‍या तरीका हुआ?

मोहम्‍मद माहिर आजाद:  आपको तो थॉमस और इमानुअल के अलावा फुर्सत ही नहीं है कुछ भी।

श्री मदन दिलावर:  ओमप्रकाश, फूलचन्‍द नायक, खूड़ी कलां को कुर्की वारंट जारी कर दिया गया है।(व्‍यवधान) ओमप्रकाश, गुलाबचन्‍द ओझा, हरसोर...

श्री अध्‍यक्ष:  सुनिये, सुनिये।

श्री मदन दिलावर: .... को जो 25 हजार 991 रूपया है वह कुर्की वारंट जारी कर दिया गया है। मूलाराम, मेवसाराम, बनाराम जाट, लवादर के ऊपर 4500 रूपये बकाया हैं उसको धारा 99 का नोटिस दे दिया है।

श्री प्रद्युम्‍न सिंह:  यह लिस्‍ट में दिया हुआ है।  यह तो लिस्‍ट के अंदर है।  यह काहे को समय बरबाद कर रहे हैं सदन का, यह लिस्‍ट में आलरेडी है। (व्‍यवधान)

श्री मदन दिलावर:  शूरी, गनी खां, हरसोर को 6 हजार रूपये बकाया हैं, उसका नोटिस दे दिया गया है। (व्‍यवधान)

श्री श्रवण कुमार:  यह तो लिस्‍ट में नाम है उनके पास, यह तो लिस्‍ट आ चुकी इनके पास।

श्री मदन दिलावर:  कुल 9 लाख 24 हजार रूपये बकाया की वसूली हम ताकीद से कर रहे हैं।

श्री श्रवण कुमार: अब नाम लेने से फायदा क्‍या है।(व्‍यवधान)

श्री रिछपाल मिर्धा: जो प्रश्‍न पूछा गया उसका जवाब नहीं दे रहे हैं यह।

श्री मदन दिलावर:  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको यह निवेदन करना चाहता हूं...(व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद: आपको तो टिकट के योग्‍य ही नहीं समझा इन्‍होंने, आप क्‍या पक्ष ले रहे हैं। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष:  माननीय सदस्‍य, नगर से आने वाले माननीय सदस्‍य, आप प्रश्‍न पूछते नहीं हैं, एलीगेशन लगा रहे हैं उनके ऊपर, यह कौन सा तरीका है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद:  साहब, प्रश्‍न ही पूछ रहे हैं।

श्री श्रवण कुमार:  एलीगेशन कहां हैं, जवाब तो पूरा दें।

मोहम्‍मद माहिर आजाद:  प्रश्‍न का जवाब ही नहीं दे रहे वह, प्रश्‍न का जवाब देवें।  आपने कह दिया उसका भी नहीं दे रहे हैं यह तो।  हमको तो कितनी रिकवरी हुई है उसकी लिस्‍ट बताइये।

श्री अध्‍यक्ष: गलत बात, जरा स्‍थान ग्रहण कर लें।  स्‍थान ग्रहण करें।  स्‍थान ग्रहण कर लें।  आप, मंत्रीजी, केवल इतना बता दीजिये कि जो लम्‍बी-चौड़ी लिस्‍ट आपने दी है, रिकवरी कुल आपकी कितनी हुई है, बस इतना बता दें आप तो।

श्री मदन दिलावर:  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दस लोगों ने हण्‍ड्रेड परसेंट पैसा जमा करा दिया है, चालीस लोग थे।

श्री अध्‍यक्ष:  वही बात है।  आपके पास क्‍या सूची नहीं है, कुल कितनी रिकवरी हुई?

श्री मदन दिलावर: नहीं, मेरे पास अमाउंट नहीं है, लोगों की सूची है।

श्री सुभाष चन्‍द्र(कोटपूतली): आप कुल अमाउंट दीजिये, फिर किसलिए बैठे हैं यहां।  आप अमाउंट नहीं दे सकते तो फिर किसलिए बैठे हैं।  आप सूचना दे रहे हैं, क्‍या सूचना दे रहे हैं, अधूरी सूचना दे रहे हैं।(व्‍यवधान)

श्री मदन दिलावर:  अभी दे देता हूं।

मोहम्‍मद माहिर आजाद:  कोई सूचना नहीं है इनके पास।(व्‍यवधान)

श्री श्रवण कुमार:  आपके पास राशि कितनी आ गई, यह बताओ न। 

श्री सुभाष चन्‍द्र(कोटपूतली):  आपको, माननीय मंत्रीजी, पूरी सूचना सदन को देनी चाहिए, आप सदन में प्रश्‍न का जवाब दे रहे हैं तो आपके पास पूरे आंकड़े होने चाहिए।

श्री अध्‍यक्ष:  आप जवाब सुनिये।  मंत्रीजी का जवाब सुनिये।

श्री सुभाष चन्‍द्र(कोटपूतली):  और आपके पास अमाउंट होना चाहिए, आप अधूरी सूचना दे रहे हैं सदन में।

श्री अध्‍यक्ष:  जारोड़ा साहब, आप अपना स्‍थान ग्रहण करें।

श्री श्रवण कुमार:  आपके पास अमाउंट ही नहीं है, बात तो दुनिया भर की करते हैं, आप यह बताओ कितनी राशि....(व्‍यवधान)

श्री बृजकिशोर शर्मा:  माननीय मंत्रीजी तैयार होकर नहीं आते, इनको तैयार होकर आना चाहिए, सदन का समय बरबाद कर रहे हैं।(व्‍यवधान)

श्री मदन दिलावर:  पूरे जिले की भी बता रहा हूं।  जिले की भी सूची को, उसको दे सकता हूं, डेगाना की....(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष:  माननीय सदस्‍यगण, आप अपना स्‍थान ग्रहण करें, प्‍लीज।  स्‍थान ग्रहण करें।

श्री श्रवण कुमार:  राजकोष में कितना रूपया आया?

श्री अध्‍यक्ष:  आसन कह रहा है, स्‍थान ग्रहण कर लें।  जब मैंने प्रश्‍न पूछ लिया तो आप सब को क्‍या आवश्‍यकता हुई उसको दोबारा रिपीट करने की, वह जवाब दे रहे हैं, दे देंगे। (व्‍यवधान)  अब आप स्‍थान ग्रहण करें, प्‍लीज। (व्‍यवधान)

श्री अमरा राम (धोद):  आपका उत्‍तर देते ही नहीं है।  आपने स्‍पष्‍ट पूछा कि कितनी राशि रिकवर की, राशि बता दें, अभी तक नहीं बताई, मंत्री का हाल यह है कि पूरी तैयारी करके नहीं आते। (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद:  इनके पास जवाब ही नहीं है। (व्‍यवधान)

श्री बृजकिशोर शर्मा:  इनके पास जवाब ही नहीं है...(व्‍यवधान)

श्री मदन दिलावर:  मेरे पास पूरा जवाब है। (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद:  आसन ने पूछ लिया, उसके बाद भी जवाब नहीं है इनके पास।

श्री अध्‍यक्ष:  शांत रहें पहले, हां।

श्री मदन दिलावर:  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं पूरी तरह से अवगत कराना चाहता हूं, मेरा निवेदन यह है कि मैं हर तीन महीने इस बात की पूरी समीक्षा करता हूं....(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: शोर नहीं, शोर नहीं।

श्री मदन दिलावर:  और यह पहली बार हुआ है कि मैंने हर बैंक की दस-दस लोगों की, जो टॉप अवधिपार हैं...

श्री महावीर प्रसाद जैन:  हां, सब बताओ डिटेल।

श्री मदन दिलावर:  जो टॉप अवधिपार हैं, उनकी सूची मांगी है, उनके नाम अख़बार में साया किये हैं और उसके आधार पर उनकी सामाजिक प्रतिष्‍ठा न गिरे, इसलिए लोग आकर भाग-भाग कर जमा करा रहे हैं और आकर मेरे पास आग्रह कर रहे हैं कि हमारी सूची जारी मत करना, हम आपके पैसे दे देंगे।  लगातार इस प्रकार से और रिकार्डतोड़ वसूली हुई है, यह आदेश मैंने लगातार दिये हुए हैं और जो अवधिपार बकाया है, उसमें कोई भी एक लाख रूपये से ज्‍यादा का बकायादार नहीं है।

श्री अध्‍यक्ष:  नहीं, बीच में नहीं।  बीच में नहीं, बैठें।  कम्‍प्‍लीट होने दें।

श्री मदन दिलावर:  मैं यह निवेदन कर रहा हूं।  मैंने भूमि विकास बैंक में यह आदेश दिये हुए हैं, सेंट्रल कोआपरेटिव बैंक में आदेश दिये हुए हैं।  अब इनको तो पीड़ा है उसका मैं क्‍या करूं।  यह कहते हैं कि किसानों के आपने दस हजार रूपये से ज्‍यादा का कर्जा माफ क्‍यों किया

 

Bhs\akt\1150\1f

 

    एकमुश्‍त समाधान योजना हम लाये और एकमुश्‍त समाधान योजना में हमने यह कहा कि जो 1997 के पहले के बकायादार हैं और वो किसी कारणवश अकाल के कारण, घर की परेशानियों के कारण से अपना पैसा जमा नहीं करा पाये और यदि वो एकमुश्‍त पैसा जमा कराना चाहते हैं तो पिछले साले हमारी स्‍कीम थी कि वो एकमुश्‍त जमा कराने की हमारे यहां दरख्‍वास्‍त दे दे हम गणना कर देते हैं...।

श्री अध्‍यक्ष: बस हम संतुष्‍ट हैं, अब आप विराजें।

श्री मदन दिलावर: 2001 के बाद का सारा ब्‍याज हम छोड़ देंगे और ऐसे लगभग 50 लाख...।

श्री अमराराम (धोद): अध्‍यक्ष महोदय,  मंत्री महोदय राशि तो बतायें।

श्री अध्‍यक्ष:  श्री संयम लोढ़ा।

श्री अमराराम (धोद): कितनी अवधि पार ऋण की राशि वसूल की? आपके निर्देश ही नहीं मानते।

श्री मदन दिलावर, कांग्रेस के लोग यह कहना चाहते हैं कि 10 हजार रुपये से ज्‍यादा का कर्जा माफ क्‍यों किया, हम 10 हजार नहीं यदि किसान ....।

श्री अध्‍यक्ष: कृपया स्‍थान ग्रहण करिये।

श्री अमराराम (धोद): अध्‍यक्ष महोदय, आपके निर्देश ही नहीं मानते।  आपके निर्देशों की पालना मंत्री महोदय ही नहीं करेंगे तो हम क्‍या कहें।

श्री मदन दिलावर:  ... आता है एकमुश्‍त योजना में तो 10 हजार नहीं, 50 हजार करेंगे, 1 लाख करेंगे, 2 लाख करेंगे।

श्री अध्‍यक्ष: श्री संयम लोढ़ा।

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा:  अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके आदेश की पालना करूंगा पर एक बात कहना चाहता हूं..।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं मैं कह दूं न, आपकी बात को मैं कह रही हूं।

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा: माननीय मंत्री जी ने कहा कि इनको पीड़ा हो रही है मेरे को पीड़ा नहीं हो रही है पीड़ा मंत्री जी को हो रही है, मेरे को चिन्‍ता हो रही है काश्‍तकारों का बैंक है और काश्‍तकारों का बैंक डूबने के कगार पर है इसलिए मैं यह प्रश्‍न पूछ रहा हूं।  मेरे को पीड़ा नहीं है मेरे को काश्‍तकारों की पीड़ा है ।  यह पक्षपात कर रहे हैं आप नहीं चाहते तो मैं नहीं पूछता। 

श्री अध्‍यक्ष : डेगाना से आने माननीय सदस्‍य।

श्री रिछपाल सिंह मिर्धा:  मैं आसन का सम्‍मान करता हूं और आसन की इजाजत के बगैर नहीं पूछूंगा।

श्री अध्‍यक्ष:  यदि आप संतुष्‍ट नहीं हैं यदि आप प्रश्‍न के उत्‍तर से संतुष्‍ट नहीं हैं तो नियम 49 है , आधा घंटे की चर्चा आप लायें उसके ऊपर करें क्‍या दिक्‍कत है इसमें।   (व्‍यवधान) प्‍लीज।

श्री अमराराम (धोद): अध्‍यक्ष महोदय, आपने जो क्‍लेरिफिकेशन पूछा कि अवधिपार ऋण की कितनी राशि वसूल की है वो तो उत्‍तर दें।

श्री अध्‍यक्ष: मंत्री को मैं मजबूर नहीं कर सकती। यह आसन मंत्री को मजबूर नहीं कर सकता।

श्री अमराराम (धोद):  आपके सवाल का उत्‍तर तो दे दें।

श्री अध्‍यक्ष: यह आसन मंत्री को मजबूर नहीं कर सकता कि वो क्‍या जवाब दें क्‍या नहीं दें उन्‍होंने जो जवाब दिया वो सुन लिया मैंने और आपके पास विकल्‍प है नियम 49 में आइये आप।

श्री मदन दिलावर:  मैं दूंगा जवाब साहब। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं इनकी पीड़ा को कम करना चाहता हूं।  (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा (सिरोही): माननीय अध्‍यक्ष महोदय ने अगला प्रश्‍न पुकार लिया मंत्री जी।

श्री मदन दिलावर:  मैं इनकी पीड़ा को कम करना चाहता हूं।  अध्‍यक्ष महोदय हमने 30 बकायादार जो डेगाना बैंक के अन्‍दर थे उन सबको हमने नोटिस दिया है।

श्री संयम लोढ़ा: अध्‍यक्ष महोदय, ये मुख्‍यमंत्री जी विराजमान हैं  आपने अगला प्रश्‍न पुकार लिया है और मंत्री इस तरह से अनुशासनहीनता कर रहे हैं।

श्री मदन दिलावर:  और मैं एक-एक बताना चाहूंगा और ये जस्टिफाई करें कैसे डूबेगा बैंक। (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान (रामगढ़): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री के द्वारा आसन की अवहेलना की जा रही है ।

श्री संयम लोढ़ा: (व्‍यवधान) मुख्‍यमंत्री के इशारे पर मुझे सवाल पूछने से रोका जा रहा है।

श्री मदन दिलावर: (व्‍यवधान) वारंट जारी कर दिया गया है ।  मूलाराम मेवाराम के 5500 रुपये बकाया हैं उनको 12/99 का नोटिस जारी कर दिया है।...

श्री बृजकिशोर शर्मा(जयपुर ग्रामीण): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्रीजी को कहिये अगला प्रश्‍न पुकार लिया।

श्री जुबेर खान: आसन ने अगला प्रश्‍न पुकार लिया है मंत्रीजी आसन की अवहेलना कर रहे हैं प्रताड़ना दीजिये अध्‍यक्ष महोदय इनको। प्रताडि़त कीजिये इनको।

श्री रामचंद्र सराधना(जमुवारामगढ़): अध्‍यक्ष महोदय, मंत्रीजी को बैठाइये।

श्री मदन दिलावर: इनको हमने नोटिस जारी कर दिया है।  रघुनाथ पुत्र श्री हेमाराम मेघवाल, जालसूखुर्द के 45,574 रुपये हैं इनको नोटिस जारी कर दिया गया है।(व्‍यवधान)

श्री बृजकिशोर शर्मा:  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्रीजी क्‍या आपसे ऊपर हैं क्‍या?

श्री संयम लोढ़ा: राजस्‍थान की विधान सभा है इसको मदारियों का अखाड़ा मत बनाइये।

श्री मदन दिलावर: (व्‍यवधान) वारंट जारी कर दिये गये हैं। गंगाराम पांचूराम जाट...।

श्री अध्‍यक्ष:  माननीय मंत्रीजी, इस शोर-शराबे में आपकी आवाज तो सुनाई दे नहीं रही है आप क्‍या बोल रहे हैं ।  मैंने अगला प्रश्‍न पुकार लिया है अब आप शांति से बैठें।

श्री महावीर प्रसाद जैन (सरकारी मुख्‍य सचेतक): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ये तो माननीय सदस्‍य की पीड़ा को दूर करने का प्रयास कर रहे हैं।

श्री संयम लोढ़ा: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने अगला प्रश्‍न पुकार लिया है ।  प्रश्‍न संख्‍या-6 (व्‍यवधान) माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह सदन इस तरीके से नहीं चलेगा, मैं पहले कह देता हूं।

श्री हरिमोहन शर्मा (हिण्‍डौली): (व्‍यवधान) +++

श्री नरपतसिंह राजवी (उद्योग मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, (व्‍यवधान) बैंक के डूबने की बात कही है (व्‍यवधान) जस्टिफाई तो करना पड़ेगा।  यह हाउस में रिकार्ड पर आया है।

श्री बृजकिशोर शर्मा: प्रश्‍न संख्‍या 6 पुकारा जा चुका है यह सरकार इस प्रश्‍न से बचना चाहती है।

श्री जुबेर खान:  प्रश्‍न संख्‍या 6 का जवाब दिलवाइये।

श्री मदन दिलावर: इन्‍होंने बैंक के डूबने की बात कही है माननीय मिर्धाजी ने बैंक के डूबने की बात कही है मैं निवेदन करना चाहता हूं कि बैंक नहीं डूबेगा।

श्री संयम लोढ़ा:  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा हाउस टैक्‍स पर सवाल है आपने पुकार लिया है और सरकार उसका जवाब...। (व्‍यवधान)  मुख्‍यमंत्री के इशारे पर खड़े हो रहे हैं ये।

श्री अध्‍यक्ष: मैंने अगला प्रश्‍न पुकार लिया है। अब आप पूछिये।

 

प्रदेश में गृह कर हेतु निर्धारित लक्ष्‍यों की प्राप्ति

 

6.श्री संयम लोढ़ा(सिरोही): क्‍या स्‍वायत्‍त शासन राज्‍य मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे:-

    (1).क्‍या यह सही है कि सरकार प्रदेश में गृह कर समाप्‍त करने का विचार रखती है?

    (2). राज्‍य में वर्ष 2005-06 में गृहकर वसूली का कितना लक्ष्‍य निर्धारित किया गया था और कितना वसूल किया गया? विवरण सदन की मेज पर रखें।

    (3)राज्‍य के प्रत्‍येक निकाय का गृहकर वसूली का लक्ष्‍य व उपलब्धि का विवरण सदन की मेज पर रखें।

    (4)क्‍या यह सही है कि प्रदेश में वर्ष 2005 में गृहकर वसूली के विरोध में धरने व प्रदर्शन हुए? यदि हां, तो कहां-कहां? मय तिथि के विवरण सदन की मेज पर रखें।

राज्‍य मंत्री, स्‍वायत्‍त शासन (श्री प्रताप सिंह सिंघवी): (1) प्रकरण का परीक्षण किया जा रहा है।  परीक्षणोपरान्‍त कार्यवाही की जा जावेगी।

    (2).वर्ष 2005-06 में गृह कर वसूली का 150.90 करोड़ का लक्ष्‍य निर्धारित किया गया है तथा निर्धारित इस लक्ष्‍य के विरुद्ध दिनांक 15.02.06 तक 2612.60 लाख रुपये की वसूली हुई है। (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढा:  कितना ही धीरे बोलें जवाब लेकर छोडूंगा।

श्री अध्‍यक्ष: सुनिये तो सही शोर क्‍यों मचा रहे हैं?  सुनिये न, सुनिये आप।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी:  (3) राज्‍य की प्रत्‍येक निकाय के गृह कर वसूली के लक्ष्‍य एवं उपलब्धि का विवरण परिशिष्‍ट पर संलग्‍न है। (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या तरीका है आपका ? नेता प्रतिपक्ष, कंट्रोल करें लोगों को।  आप अपने सदस्‍यों को कंट्रोल करिये।

श्री प्रताप‍सिंह सिंघवी: (4) प्रदेश में वर्ष 2005-06 में गृह कर वसूली के विरोध में हुए धरने, प्रदर्शन का मय तिथि के विवरण परिशिष्‍ट के कॉलम संख्‍या 5 में वर्णित है।

श्री संयम लोढ़ा:  माननीय अध्‍यक्ष महोदय।

श्री प्रताप सिंह सिंधवी: अभी मुझे जवाब देने दें पूरा।

श्री संयम लोढ़ा: आ गया पूरा, आ गया न, जवाब आ चुका है पूरा।

श्री जुबेर खान:  यह कौन सा तरीका हुआ अध्‍यक्ष महोदय?

डॉ.सी.पी.जोशी: अध्‍यक्ष महोदय, मुख्‍यमंत्री जी बैठी हुई हैं ये क्‍या हो रहा है? आपके चैम्‍बर में क्‍या बात हुई थी अध्‍यक्ष महोदय?

श्री संयम लोढ़ा: आपने जवाब दे दिया है मंत्री जी अब आप विराजें।  आपका जवाब आ गया है।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी:  जवाब तो पूरा दूंगा माननीय अध्‍यक्ष महोदय।

श्री संयम लोढ़ा: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं ...।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी:  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे जवाब तो देने दीजिये। मैं जवाब दे रहा हूं।

श्री अध्‍यक्ष:  आप उनका जवाब तो सुन लीजिये पहले। सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य जवाब तो सुन लीजिये।  जवाब सुनने दें वो कुछ और कह रहे हैं।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य जो चाहें सवाल पूछ लें उसका मैं जवाब दूंगा।  मेरा पूरा जवाब तो एक बार सुन लें ये।

श्री नरपतसिंह राजवी: एक बार हाउस में प्रश्‍न पूछा जाता है तो वो व्‍यक्ति विशेष का प्रश्‍न नहीं रहता वो हाउस की संपत्ति है और मंत्री जी का अब हम जवाब सुनना चाहते हैं आप बहुत गंभीर हैं और आप सुनने ही नहीं दे रहे हैं आप कम से कम मंत्री जी को जवाब तो देने दीजिये हम भी उसमें पूछेंगे ऐसी क्‍या बात है?

श्री श्रवण कुमार (पिलानी):  माननीय मंत्री जी, यह धीमी गति का समाचार है यह उत्‍तर धीमी गति का समाचार है साहब।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी:  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उदयपुर में दिनांक 15-1-06 को जगदीश चौक से रैली।  दिनांक 16-2-06 को सविना चौराहे से रैली। फतेहनगर में कोई धरना प्रदर्शन नहीं।

श्री संयम लोढ़ा: जब यह कह दिया कि पूरा विवरण संलग्‍न है तो फिर पढ़ रहे हैं आप?

श्री प्रताप सिंह सिंघवी:  भीण्‍डर में कोई धरना नहीं, राज्‍यपाल के नाम ज्ञापन। कानोड़ में कोई धरना प्रदर्शन नहीं।  सलूम्‍बर में कोई धरना प्रदर्शन नहीं। बांसवाड़ा में जिला प्रशासन को ज्ञापन दिया। कुशलगढ़ में कोई धरना प्रदर्शन नहीं। डूंगरपुर में कोई धरना प्रदर्शन नहीं।

श्री बृजकिशोर शर्मा:  अब हमको सप्‍लीमेंट्री पूछने दीजिये।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी: सागवाड़ा में कोई धरना प्रदर्शन नहीं। चित्‍तौड़गढ़ में कोई धरना प्रदर्शन नहीं।  निम्‍बाहेड़ा में दिनांक 27-12-05 को पालिका के बाहर धरना।

 

Kas\usc\1200\1g

 

श्री प्रताप सिंह सिंघवी: ....जारी...प्रतापगढ़ कोई धरना नहीं । कपासन- दिनांक 6.12.05 को नगर पालिका के बाहर धरना । बडी सादड़ी दिनांक 15.2.05 को धरना दिया गया । छोटी सादड़ी कोई धरना नहीं । बेगूं- दिनांक 26.123.05 को धरना दिया गया ।

श्री अध्‍यक्ष: प्रश्‍नकाल समाप्‍त हुआ ।

श्री जुबेर खान: अध्‍यक्ष महोदय, यह सरासर गलत बात है । (व्‍यवधान) सदन ऐसे नहीं चलेगा ।  (व्‍यवधान)

डा.सी.पी.जोशी: अध्‍यक्ष महोदय, यह नहीं चलेगा ।

श्री जुबेर खान : सत्‍ता पक्ष का इस तरह का रवैया नहीं चलेगा । (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढा: (व्‍यवधान) यह इस तरह से लीपापोती कर रहे हैं ।  (व्‍यवधान)

डा.सी.पी.जोशी: आप इस प्रश्‍न को स्‍थगित‍कीजिए और दुबारा लगाइये । यदि सदन को मजाक समझना है.. (व्‍यवधान) सदन को मजाक बना रखा है । आपके सामने बात हुई है .. (व्‍यवधान)

श्री बृजकिशोर शर्मा: या तो इस प्रश्‍न को स्‍थगित किया जाये या यह जवाब पूरा आना चाहिये ।  (व्‍यवधान) ऐसा नहीं चलेगा ।

डा.सी.पी.जोशी: अध्‍यक्ष महोदय, आपको अधिकार है ।  (व्‍यवधान)

श्री जुबेर खान: यदि सदन चलाना है तो इस तरह से नहीं चलेगा ।

श्री श्रवण कुमार: जो मंत्री पढ़ नहीं सकता वह जबान क्‍या देगा । इनको पढ़ना ही नहीं आता ।   

श्री महीपाल यादव: अध्‍यक्ष महोदय, इस सदन में यह मजाक किया जा रहा है । एक मंत्री तैयार नहीं होकर आया आज ।

श्री संयम लोढा: अध्‍यक्ष महोदय, इससे ज्‍यादा अनफोर्च्‍युनेट कुछ नहीं हो सकता ।

श्री रामनारायण चौधरी: अध्‍यक्ष महोदय, ऐसा प्रतीत होता है कि मंत्री महोदय इसका स्‍पष्‍ट उत्‍तर देना नहीं चाहते और यह प्रयत्‍न कर रहे हैं कि किस प्रकार से समय पूरा हो जाये और प्रश्‍नकाल समाप्ति की आप घोषणा कर दें । मैं आपसे अनुरोध करुंगा .... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: नेता प्रतिपक्ष बोल रहे हैं कोई खड़ा नहीं होगा । नेता प्रतिपक्ष जब बोलते हैं तो कोई खड़ा नहीं होता है और जब सदन के नेता बोलते हैं तब भी किसको खड़ा नहीं होना चाहिये यह हमने तय किया है बी.ए.सी. में ।

श्री रामनारायण चौधरी: मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि मुख्‍य मंत्री जी की मौजूदगी में अपने तय हुआ था कि उत्‍तर बराबर दिया जायेगा लेकिन मंत्री महोदय जानबूझ कर उत्‍तर को टालना चाहते हैं । ऐसा ही सहकारिता मंत्री जी ने किया वह भी समय को टालना चाहते थे । यह मंत्री महोदय को पढ़ने की क्‍या जरूरत है इसमें साफ लिखा हुआ है कि सूची सदन की मेज़ पर रख दें । यह तो एक एक को पढ़ने लगे - वहां धरना नहीं, वहां धरना नहीं । यह किसने पूछा है । हमने तो यह पूछा कि कहां कहां हैं  इसकी सूची सदन की मेज़ पर रख दें फिर इनको पढ़ने की कहां जरूरत है ।

श्री अध्‍यक्ष: आपने पूछा है । धरने के लिये तो पूछा था तो बतायेंगे तो सही ।

श्री रामनारायण चौधरी: सूची मांगी है । सूची सदन की मेज़ पर रखें; इन्‍होंने तो पूरा पढ़ना शुरू कर दिया । एक घंटा लगेगा यह बताने में तो । मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि या तो आप इसको स्‍थगित कर दें या हमें इस पर आधे घंटे की चर्चा अलाउ कर दें ।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय नेता प्रतिपक्ष, आपने शायद प्रश्‍न पढ़ा नहीं। इसमें पूछा है, क्‍या यह सही है कि प्रदेश में वर्ष 2005 में गृह कर वसूली के विरोध में धरने व प्रदर्शन हुए हैं? यदि हां तो कहां-कहां, मय तिथि के विवरण सदन की मेज़ पर रखें ।

श्री संयम लोढ़ा: अब आप इसका उत्‍तर भी पढ़ लें क्‍या दिया है ।

श्री रामनारायण चौधरी: हमने पढ़ने के लिये थोड़े ही कहा है, हमने तो सदन की मेज़ पर रखने के लिये कहा है ताकि हम ले लेंगे ।

श्री महावीर प्रसाद: अध्‍यक्ष महोदय, मान लो अगर कोई शिकायत है तो प्रक्रिया और नियमों में बहुत प्रावधान हैं । यदि इसके बावजूद भी कोई शिकायत है तो प्रक्रिया नियमों में आया जा सकता है ।

श्री रामनारायण चौधरी: अध्‍यक्ष महोदय, प्रक्रिया और नियमों में तो तब आया जाता है जब ईमानदारी से सच्‍चाई के साथ उसका उत्‍तर दिया जाये । यह जानबूझ कर सहकारिता मंत्री जी ने....

श्री अध्‍यक्ष: प्रक्रिया और नियमों में जब भी आया जाता है जब आप कोई तथ्‍य छिपा रहे हों। आप संतुष्‍ट नहीं हो तो आप आ सकते हैं ।

श्री रामनारायण चौधरी: इस सदन की परम्‍परा रही है कि किसी का उत्‍तर नहीं आ रहा है तो आप सुमोटो स्‍थगित कर देते हैं । आधे घंटे की चर्चा की व्‍यवस्‍था आसन से बिना मांगे भी हुई है, वह दे दीजिए आप । आप आधे घंटे की चर्चा दे दीजिए, इसको स्‍थगित कर दीजिए ।आसन तो हमारा भी है, इनका भी है, आसन तो आसन है । हम समान व्‍यवहार के लिये आपसे अपेक्षा करते हैं, प्रार्थना करते हैं कि आप इसको स्‍थगित कर दीजिए ।

श्री अध्‍यक्ष: इस बारे में आप वैश्‍म में मिलियेगा मुझसे ।

डा.सी.पी.जोशी: अध्‍यक्ष महोदय, फिर निवेदन करना चाहते हैं यह आपके अधिकार में हैं प्रश्‍न के टाइम को आगे बढाने का । यह आपके अधिकार में है कि जब मंत्री सही ढंग से जवाब नहीं दे, आप इंटरवीन करते । यह दुर्भाग्‍य है आप खुद चेयर पर बैठे हुए हैं, आपके चैम्‍बर में फैसला हुआ, मुख्‍य मंत्री जी यहां बैठी हुई हैं  and we are patronizing to search something कि मंत्री जवाब नहीं दे । यह इतना महत्‍वपूर्ण प्रश्‍न है जिस पर सारे राजस्‍थान के लोग एजीटेटेड हैं । इसलिए अध्‍यक्ष महोदय, आज ही इसका जवाब दिया जाये, बाकी सदन की कार्यवाही में हम भाग नहीं लेंगे । आपको फैसला करना पडेगा । आगे एक महीने तक हाउस चलेगा। यही प्रेक्टिस रही तो, सरकार विरोध प्रदर्शन बंद करना चाहती है, यह हम अलाउ नहीं करेंगे । अध्‍यक्ष महोदय हम आपसे निवेदन करते हैं कि आप हाउस को एडजोर्न कीजिए, आपके चैम्‍बर में मीटिंग बुलाइए और सी.एम. से पूछिये कि किस तरह हाउस को चलाना चाहते हैं, बाकी हम हाउस को नहीं चलने देंगे । यदि आज फैसला नहीं होता है कि मुख्‍य मंत्री की उपस्थिति में यदि इस तरह की व्‍यवस्‍था होगी तो हम हाउस में भाग नहीं लेंगे । अध्‍यक्ष महोदय, आपको फैसला करना पड़ेगा। आप हाउस को 10 मिनट तक एडजोर्न कीजिए और सी.एम. और हमारे लीडर के साथ बैठकर फैसला कीजिए कि हाउस को कैसे चलाना है । मंत्री जवाब नहीं दें गृह कर जैसे मसले पर, आप खुद हँसते रहें, वहां मुख्‍य मंत्री बैठी रहें फिर काहे का हाउस चलाना है, बंद कीजिए इस हाउस को। इसकी कोई आवश्‍यकता नहीं है, बंद करिये सदन को । सदन का मखौल बनाना है तो बंद कीजिए । 6 महीने पहले हाउस चलाया नहीं । 6 महीने में इश्‍यू था उस समय हाउस चलाया नहीं । एक साल बाद हाउस चल रहा है और एक साल बाद भी यह स्थिति बनती है तो लोकतंत्र का इससे बड़ा मजाक और क्‍या हो सकता है । हम आपसे अपेक्षा करते हैं मुख्‍य मंत्री जी और आप बैठकर फैसला कीजिए आने वाले समय में एक महीने तक सदन इस तरह से चलाना है तो सदन को आज ही बंद कर दीजिए। हम सडक पर अपनी लडाई लड लेंगे ओर 5 साल का इंतजार कर लेंगे, लेकिन सदन का मखौल बनाकर आप लोकतंत्र की पार्टी बनना चाहते हैं तो कांग्रेस पार्टी इसमें भागीदार नहीं बनेगी । इसलिए हम आपसे निवेदन करना चाहते हैं आप हाउस को एडजोर्न कीजिए । जिस ढंग से मिनिस्‍टर ने जवाब दिया है, मुख्‍य मंत्री जी ने इंटरवीन नहीं किया, इससे बड़े दुर्भाग्‍य की स्थिति नहीं हो सकती । (व्‍यवधान)

श्री महावीद प्रसाद: कौनसी सूचना छिपाई है? सवाल का जवाब दिया गया है । (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढा: मजाक बना रखा है विधान सभा को, मंत्री तैयारी करके आते नहीं (व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद: मैं नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य से पूछना चाहता हूं कौनसी सूचना छिपाई गई है । (व्‍यवधान)

श्री प्रद्युम्‍न सिंह: अध्‍यक्ष महोदय, 200 से ऊपर नगरपालिकाएं हैं। अगर आप 200 से ऊपर के नगरपालिकाओं के नाम यहां पर पढेंगे... (व्‍यवधान) आप हमारी बात सुनें, आप हमको मौका दीजिए कि 200 से ज्‍यादा नगरपालिकाएं हैं। प्रश्‍न में साफ लिखा है सूची सदन के पटल पर रखें । यह तो एस्‍केप करने का, टाइम को बचाकर निकलने का, क्‍योंकि बड़ा इंबैरसिंग सवाल है सरकार के लिये, सरकार ने मैनीफेस्‍टो में कहा है कि हम गृह कर समाप्‍त कर देंगे । अब दबाव डाला जा रहा है कि जो नगरपालिका गृह कर को वसूल नहीं करेंगी उनकी ग्रांट-इन-एड बंद कर दी जायेगी । आज जनता इसके ऊपर बहुत ज्‍यादा उत्‍तेजित है। आपने एक इश्‍यू बनाकर वोट प्राप्‍त किये आज आप उसको फ्लोआउट करके आप लोगों के ऊपर जोर जबरदस्‍ती का डंडा दिखाकर कि आपकी ग्रांट-इन-एड बंद कर दी जायेगी, आप पैसा लेना चाहते हैं । सरकार जिस इंबैरसिंग पोजीशन में है उस इंबैरसिंग पोजीशन से बचने के लिये आप 200 की लिस्‍ट पढेंगे । आज पढना शुरू करेंगे कल सुबह तक आयेगी । फिर वहां क्‍या ज्ञापन में दिया है हरेक का ज्ञापन पढ़कर सुनायेंगे। यह तो लोकतंत्र का मजाक है, सदन के समय की बरबादी है । मैं आपसे निवेदन करूंगा, मुझे आपकी निष्‍पक्षता पर पूरा भरोसा है आप आधे घंटे की चर्चा दीजिए, यहीं घोषणा कीजिए कि मैं आधे घंटे की चर्चा देती हूं। अन्‍यथा इस सदन की कार्यवाही इस प्रकार से तो नहीं चलेगी । यही मेरा आपसे अनुरोध है । अध्‍यक्ष महोदय, समय की मांग है, राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण के बाद आज सदन का पहला दिन है आज पहले दिन से यह परम्‍परा डली तो फिर इसका अंत कहां होगा । चलने दीजिए जैसा चलेगा वैसे चलेगा । आप निर्णय दीजिए आधे घंटे की चर्चा का, आपको दिक्‍कत क्‍या आ रही है। बडे इंबैरसिंग प्रश्‍न आते हैं सदन में और सरकार बहादुरी से उसको फेस करती है । कहे कि हमने उस समय लिखा था कि हम गृह कर माफ करेंगे, अब हमारी मजबूरी है हम लगायेंगे। हिम्‍मत है तो कह दे, कहना क्‍यों नहीं चाहती। राजस्‍थान की जनता को सही स्थिति तो मालूम पड़े इसके ऊपर । (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद: अध्‍यक्ष महोदय, आपने एक स्‍पेसिफिक सवाल सहकारिता मंत्री जी से पूछा था... (व्‍यवधान) आपने प्रश्‍न पुकार लिया सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य का और वह मंत्री खड़े होकर जवाब दे रहे हैं ... (व्‍यवधान)

 

Ans\usc\1210\1h

 

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे(मुख्‍यमंत्री): माननीय सदस्‍य इतना अपसेट हो रहे हैं, जरा मैं  आपको बता दूं कि मेनीफेस्‍टो, कई चीजें अपन लिखते हैं और मेनीफेस्‍टो पाँच साल का डाक्‍यूमेंट होता है। मैं यह कहना चाहूंगी गर्व के साथ कि हम लोगों ने अपने मेनीफेस्‍टो के इश्‍यू में से बाकी बचते हैं करीबन 25 टू 30 परसेंट ही, बाकी बड़ी मुश्किल से बचते हैं। यहां एक अहम सवाल जिसको आप लोगों ने अभी उठाया, मैं आप लोगों को सबको यह कहना चाहूंगी कि अभी तो हमारे तीन साल और बाकी हैं। ऐसे मुद्दों के ऊपर हम लोग अपने बीच में अभी विचार विमर्श करेंगे और अगर हमको जो डिसिजन लेना है वह डिसिजन आप लोगों के सामने भी और जनता के सामने भी रखेंगे, कोई चीज हमें छिपानी नहीं है। परन्‍तु मेनीफेस्‍टो की जो चीजें होती हैं, वह एक साल, दो साल, तीन  साल के अंदर कोई सीमा नहीं बांधी जाती है। पाँच साल का मेनीफेस्‍टो है। और गृहकर का विषय आप लोगों ने उठाया है, हम जानते हैं कि एक ऐसा मुद्दा है जिसके ऊपर आपने भी बात उठाई, लोग भी उसके बारे में पूछते हैं। हम लोग डिसिजन लेंगे, विचार करेंगे इसके ऊपर डिसिजन लेकर आप लोगों के सामने रखेंगे।

श्री बृजकिशोर शर्मा(जयपुर ग्रामीण):माननीय मुख्‍यमत्री जी, लोगों के आगे ढोल और कुड़की बज रही है।(व्‍यवधान)

डा.सी.पी.जोशी: अध्‍यक्ष महोदय, मुख्यमंत्री जी के कथन से हमारी कोई असहमति नहीं है। हाउस के अन्‍दर जिस ढंग से मंत्री जवाब दे, समय को बाई करें, यह जो परम्‍परा है उसको प्रोटेस्‍ट कर रहे हैं हम। आपने पाँच साल के लिये प्रोमिज किया, तीन साल में करेंगे यह आपके ऊपर है। हम नहीं पूछ रहे आपसे। लेकिन सदन के अंदर  जो प्रश्‍न लगे उस प्रश्‍न का जवाब देने के लिये जिस तरह की टेक्‍टीक्स  अपनाई जाए, उस जवाब को अवाइड करने की कोशिश की जाये, मुख्यमंत्री जी बैठे रहे, अध्यक्ष बैठे रहे, इस परम्‍परा के खिलाफ प्रोटेस्‍ट कर रहे हैं। आप पाँच साल में करें, चार साल में करें, मत करें। लेकिन गृहकर के आधार पर  आप एक तरफ लोगों को डण्‍डा लगा दें, ग्रांट नहीं देंगे, दूसरी तरफ हाउस के अंदर जवाब को इस तरह से दें, यह क्‍या साबित करना चाहते हैं आप?(व्‍यवधान)

श्री सांवरलाल जाट(सिंचाई मंत्रि): अध्‍यक्ष महोदय, सारी बात हो गई।

डा.सी.पी.जोशी:आप करिये मत करिये आपके ऊपर है। लेकिन हाउस के अंदर यह प्रोपर्टी नहीं हो सकती।

श्री सांवरलाल जाट: मंत्री जी ने एक एक बिन्‍दु का जवाब दिया है।,

डा.सी.पी.जोशी: मुख्‍यमंत्री  के सामने हाउस का टाइम पास नहीं करें, जवाब नहीं दें...(व्‍यवधान)

श्री भवानीसिंह राजावत(लाडपुरा): कौनसे विषय पर चर्चा हो रही है?

डा.सी.पी.जोशी:यह मुख्‍यमंत्री और पार्टी की मर्जी से नहीं चलता।(व्‍यवधान)

श्री सांवरलाल जाट: एक-एक बिन्‍दु का जवाब दिया है।

डा.सी.पी.जोशी: आप इसको प्रोटस्‍ट करें, क्‍या करें. I am on the floor of House.

श्री सांवरलाल जाट: हर सवाल का जवाब दिया है।

डा.सी.पी.जोशी: मंत्री जी जवाब दे रहे हैं  अब क्‍या अध्‍यक्ष महोदय...(व्‍यवधान)

श्री सांवरलाल जाट: सारे सवाल का जवाब दिया है।

डा.सी.पी.जोशी:अध्‍यक्ष महोदय, विरोध का आगाज आप करें, बेईमानी आप करें, अन्याय आप करें, बोलने का मौका भी नहीं दें और आप भी प्रोटेक्‍ट नहीं करें...(व्‍यवधान)

श्री सांवरलाल जाट: इस प्रकार का रवैया नहीं चल सकता।

डा.सी.पी.जोशी: लोकतंत्र में हमारा अधिकार है प्रश्‍न पूछना और सही ढंग से जवाब दिलवाना यह अध्‍यक्ष का कर्तव्‍य बनता है, यह आपका कर्तव्‍य बनता है। मुख्‍यमंत्री जी को निर्देश दें ...(व्‍यवधान)... सदन का टाइम बाई नहीं करें।

श्री सांवरलाल जाट: इससे बढि़या जवाब क्‍या हो सकता है।

डा.सी.पी.जोशी: गृहकर आप  लगाइये(व्‍यवधान) हमें कोई इन्‍टरेस्‍ट नहीं है। सदन के अंदर जवाब देने की परम्‍परा है उसके अंदर यह काम नहीं कर सकते। इसलिये अध्‍यक्ष महोदय, फिर निवेदन करना चाहता हूं हमारा प्रोटेस्‍ट है, नियम और कानून का पालन नहीं होने का प्रोटेस्‍ट है। हमारा प्रोटेस्‍ट है कि  जो प्रश्‍न हमने पूछा उसका जवाब देने में जिस तरह का तरीका अपना रहे हैं उसका प्रोटेस्‍ट है। मुख्यमंत्री जी बैठे रहे सदन के अंदर और यह परम्‍परा बन जायेगी तो आने वाले एक महीने में सदन के अंदर किसी भी प्रश्‍न का जवाब नहीं आ पायेगा, यह प्रोटेस्‍ट कर रहे हैं अध्‍यक्ष महोदय। गृहकर, हमें कोई मतलब नहीं है। गृहकर लगायें, मत लगायें, चार साल में लगायें, पाँच साल में लगायें, दस साल में लगाइये। यह कोई इश्‍यू नहीं है। नियम और कानून को प्रोटेक्‍ट करने की जिम्‍मेदारी आपकी है। आपका मन कहता है, नौ बार एम.एल.ए रहे हैं, आपका मन कहता है, मंत्री इसका जवाब देंगे। एक पहली क्‍लास का लड़का क,ख,ग पढ़ता है वैसे पढ़ाई करने का काम है। यहां पर, अध्यक्ष महोदय, श्री गुलाबचंद कटारिया इम्‍पोरटेंट इश्‍यू है, यह टाइम पास की...(व्‍यवधान)...अध्‍यक्ष महोदय, फिर निवेदन करना चाहता हूं, आप हाउस को अपनी मेजोरिटी  के आधार पर, हमारे गले को नहीं दबा सकते। श्री गुलाबचंद कटारिया मेजोरिटी के आधार पर हाउस के नियम और कानून को नहीं बदल सकते। इसलिये हम आपसे प्रोटेक्‍शन चाहते हैं। या तो आज ही इस प्रश्‍न को लगाइये या आधे घण्‍टे की चर्चा की जाए अन्‍यथा हाउस को बंद कर दिया जाए।

श्री अध्‍यक्ष: नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्य, इतनी एक्‍सरसाइज तो आपके माननीय सदस्‍य भी करें  कि नियम 49 में आ जाए, मैं एक्‍सेप्‍ट कर लूंगी।

डा.सी.पी.जोशी: क्‍यों आयें? 49 का नियम तब लागू होता है जब मंत्री  सही जवाब दें। 49 का कोई संबंध नहीं है, मंत्री  के जवाब देने का जो तथ्‍य है...(व्‍यवधान)

श्री सांवरलाल जाट: कौनसा गलत जवाब दे रहे हैं?

 डा.सी.पी.जोशी: मंत्री ने जवाब किस ढंग से दिया है....

श्री सांवरलाल जाट: मंत्री ने एक-एक बिन्‍दु का जवाब दिया है कौनसा गलत जवाब दिया है।

श्री कालूलाल गुर्जर(ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री) अगर आप इसको सही नहीं मान रहे, 49 में आना पडे़गा।

श्री सांवरलाल जाट: एक-एक बिन्‍दु का जवाब दिया है।

श्री कालूलाल गुर्जर: जवाब नहीं  मान रहे तो 49 में आना चाहिये।

डा.सी.पी.जोशी: यह आर.एस.एस को दबा सकते हैं हमको नहीं दबा सकते। सांवर जी, आर.एस.एस को दबा सकते हैं, हमको नहीं दबा सकते।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, सदन की नेता खड़ी है, सदन की नेता खड़ी है कुछ बोलना चाह रही है।

डा.सी.पी.जोशी: अध्‍यक्ष महोदय, सदन की नेता खड़ी है, यह कोई तरीका नहीं है नेता बैठी है यह खड़े हुए हैं यह नहीं कहा आपने। नेता के सामने मंत्री बोले...(व्‍यवधान) आपने कहा था क्‍या  नेता बैठी थी और मंत्री बोल रहे थे तब । अब अध्‍यक्ष खड़े हैं, मुख्यमंत्री खडे़ हैं इनको बोला आपने, हम ही हैं डांट पड़ने के लिए...(व्‍यवधान) एक तरफ से काम करते हैं आप।

श्री महिपाल सिंह यादव(बानसूर): अध्‍यक्ष महोदय, जो भी सवाल किया उसका एक का भी जवाब नहीं आया।

श्री अध्‍यक्ष: सदन की नेता खड़ी है, क्या कर रहे हो आप, कम से कम इतना तो रखो कि सदन की नेता खड़ी हो तो आप बैठ जाये।

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे(मुख्‍यमंत्री): इसका जवाब मैंने तो दे दिया लेकिन माननीय सदस्‍य  इसके ऊपर ज्‍यादा उत्‍तेजित होकर ,उसको यह फील होता है कि  अपने को इसके ऊपर चर्चा करने की जरूरत है, तो कोई प्रोबलम नहीं है, चर्चा करना है आप चर्चा कर लो ।

डा.सी.पी.जोशी: चर्चा शुरू करवाइये अध्‍यक्ष महोदय, चर्चा शुरू करवाईये।

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे: कोई प्रोबलम नहीं है चर्चा करें।

श्री राजेन्‍द्र राठौड(सार्वजनिक निर्माण मत्री):अध्‍यक्ष महोदय, मुख्‍यमंत्री के इस कथन के बाद अगर इस विषय पर प्रतिपक्ष चर्चा करना चाहता है, अभी स्‍वायत्‍त शासन की मांग आई उस पर चर्चा करें।  प्रत्‍येक मंत्री अपना जवाब देने को, उत्‍तरदायित्‍वपूर्ण जवाब देते हैं। यह प्रश्‍न छठे नम्‍बर पर लगा है। इस सदन के अंदर  आप साक्षी रही है कई बार एक-एक सवाल पर पूरा क्‍वेश्‍चन आवर खतम हो जाता है। छठे नम्‍बर पर समय कम था सबको पता है।

डा.सी.पी.जोशी: सबको सिखा रहे हो, आप ही गुरु हो, चेले भी आप ही हो, सिखाने वाले भी आप ही हो।(व्‍यवधान) मुख्‍यमंत्री जी को एम्‍ब्रेस कर रहे हो, सिखाने वाले भी आप ही, बताने वाले भी आप। काहे को मुख्‍यमंत्री जी को एम्‍ब्रेस कर रहे हो, आप बहुत लायक हो। 

श्री ब्रजकिशोर शर्मा: अध्‍यक्ष महोदय, जब मुख्‍यमंत्री जी आधे घण्‍टे की चर्चा करने को तैयार है तो संसदीय कार्य मंत्री जी क्‍यों टालना चाह रहे हैं?

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे: मेरा यह कहना है कि बात हो गई, पूरी बात सेटल भी हो गई। मैंने कह दिया अभी आप लोगों को कोई चर्चा की जरूरत है तो करें, पर मैं तो इतना ही कहना चाहूंगी कि नाथद्वारा से आने वाले  माननीय सदस्‍य, अपना टेम्‍पर लूज नहीं करें।

डा.सी.पी.जोशी: टेम्‍पर लूज नहीं है. Don’t patronize.

  मुख्‍यमंत्री जी, मैं आपका सम्‍मान करता हूं। Don’t patronize for some wrong practices. आपकी उपस्थिति में गलत लोकतंत्र की परम्‍परा स्‍थापित हो, यह आपके लिये शोभा नहीं देता। आप दर्शक बनकर बैठे  हुये हैं आपको शोभा नहीं देता है। इस तरह से लोकतंत्र को कमजोर करके राजस्‍थान के सफल मुख्‍यमंत्री नहीं बन  सकते। आप पार्टी को दबा सकते हैं हमको नहीं दबा सकते।

श्री अशोक बैरवा(खण्‍डार): सारे प्रतिपक्ष के सदस्‍य अपसेट हैं। आप व्‍यवस्‍था करें सेट करने की।(व्‍यवधान)

श्री सांवरलाल जाट: अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य बार-बार यह बात कह रहे हैं लोकतंत्र को......(व्‍यवधान)

श्री सांवरलाल जाट:आप लोगों ने किया होगा, हमने तो घोषणा की.....(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन: यह हमारी उदारता है।

श्री सांवरलाल जाट: लोकतंत्र को कमजोर कर रहे हैं आप। आप दबाव दे रहे हैं -विधान सभा नहीं चलने देंगे।

डा.सी.पी.जोशी: नहीं चलने देंगे आपकी मर्जी पर।

श्री महावीर प्रसाद जैन: यह मंत्री महोदय जवाब नहीं देते थे और दादागिरी से  आपने  सदन को चलाया। हम कभी भी, हम चाहते हैं उदारतापूर्वक....(व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा: अध्‍यक्ष महोदय, मुख्यमंत्री के कथन के बाद आपकी इजाजत हो तो पूछ सकता हूं, आपकी आज्ञा हो तो पूछ सकता हूं?

श्री रामनारायण चौधरी(नेता प्रतिपक्ष):अध्‍यक्ष महोदय, सदन के नेता ने प्रस्‍ताव दे दिया कि आधे घण्‍टे की चर्चा में सत्‍तापक्ष को कोई आपत्ति नहीं है।

श्री अध्‍यक्ष: आधे घण्‍टे का नाम नहीं लिया उन्‍होंने।

श्री रामनारायण चौधरी: आप स्‍थगित कर दीजिये उसको, आधे घण्‍टे की चर्चा करवा दीजिये बाद में।  

श्री अध्‍यक्ष: नियम 49 में आइये आधे घण्‍टे  की चर्चा को मैं स्‍वीकृत करूंगी। आओ नियम 49 में।

श्री संयम लोढ़ा: सवाल पूछने की इजाजत दीजिये आप।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: अध्‍यक्ष महोदय ,आपने डेगाना से आने वाले सदस्‍य के सवाल पर आपने स्‍वंय ने सहकारिता मंत्री जी से आपने स्‍पेसिफिक उत्‍तर देने के लिये कहा, वह उन्‍होंने उत्‍तर दिया नहीं। आपने प्रश्‍न स्‍थगित करके इनको पुकार लिया फिर सहकारिता मंत्री जी खडे़ होकर जवाब देने लग गये। फिर इन्‍होंने प्रश्‍न पूछ लिया तो ऐसे पढ़ रहे थे जैसे धीमी गति के समाचार पढ़ रहे हों। क्‍या आप नहीं समझ रही थी समय टालने की कोशिश की जा रही है।

 

Ddm/usc/1220/1j

 

समय पूरा करने की कोशिश की जा रही है। सरकार अगर अपना समय पूरा करना चाहती है तो यह कोई बात थोड़े हुई । (व्‍यवधान)

 

श्री महावीर प्रसाद जैन: यह माइनस भाषण रिपिट हो रहा है कि नहीं हो रहा है ?

 

श्री रामप्रताप: अध्‍यक्ष महोदय, पक्ष को एतराज नहीं है, विपक्ष को एतराज नहीं है,

       पर बीच के आदमी को एतराज है । (व्‍यवधान)

श्री कालूलाल गुर्जर: उन्‍होंने पूरा पढ़ा तो उनका क्‍या दोष है ?

श्री अध्‍यक्ष: यह सदन कौनसे प्रश्‍न पर चाहता है आधे घण्‍टे की चर्चा, दो प्रश्‍न हैं ।

डा. सी.पी.जोशी: गृह कर वाला, जिस प्रश्‍न पर मंत्रीजी ने जवाब नहीं दिया, वह प्रश्‍न

      सबसे पहले । उसको हम बाद में ले आएंगे । आप तो उस में बात कर रहे हैं। श्री अध्‍यक्ष: जवाब तो को-आपरेटिव वाले का भी नहीं आया था ।

डा. सी.पी. जोशी: No, no. Don’t side-track Adhyakshji. हमारा सिम्‍पल है कि

    जिस ढंग से गृह कर का प्रश्‍न नम्‍बर 6 पर लगा हुआ है, आये, सबसे पहले ।

     वह हम बाद में लेंगे 49 में ।

श्री महावीर प्रसाद जैन: जवाब तो आया पर सप्‍लीमेंट्री पूछने का मौका नहीं मिला,

     उसका चाहते हैं, 6 नम्‍बर का।

श्री अध्‍यक्ष: ठीक है ।

डा. सी.पी. जोशी: हां, आप क्‍यों इण्‍टरफियर कर रहे हैं आधे घण्‍टे की चर्चा  करना, मुख्‍य मंत्री महोदय ने एग्री किया है । Do not interpret it. आप पूछिये,

    आधे घण्‍टे की चर्चा करके वाइण्‍ड-अप कर दीजिए, कोई तकलीफ नहीं है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: नहीं, मुख्‍यमंत्रीजी के कहने के बाद संसदीय कार्य मंत्री और        मुख्‍य सचेतक महोदय, आप उसको क्‍यों साइड-ट्रेक कर रहे हैं । जब सदन के नेता ने कह दिया और विपक्ष चाहता है तो फिर आसन को दिक्‍कत क्‍या है, करने दीजिए ।

डा.सी.पी. जोशी: हां, जवाब दिलवायें, जवाब दिलवायें ।

श्री रामनारायण चौधरी: चर्चा कब करनी है ? आप स्‍थगित कर दें और आधे घण्‍टे की चर्चा की तारीख अभी घोषित कर दें । आपके अधिकार में है, ऐसा हुआ है इससे पहले भी ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: अध्‍यक्ष महोदय, बिना कोई  प्रस्‍ताव आये आधे घण्‍टे की चर्चा, बिना नियमों और प्रक्रियाओं में आये आधे घण्‍टे की चर्चा ले लेंगे ।

डा.सी.पी. जोशी : आप तो प्रश्‍न का समय बढ़ा दो, कोई चर्चा की जरुरत नहीं है ।

श्री रामनारायण चौधरी: नियम और प्रक्रिया अपनी जगह है । नियम और प्रक्रिया अपनी जगह है । अध्‍यक्षजी विराजमान हैं । सदन की नेता का प्रस्‍ताव है, हम उसको स्‍वीकार करते हैं । स्‍थगित कर सकते हैं, आधे घण्‍टे की चर्चा की तारीख दे दीजिए ।

श्री सांवरलाल: नहीं, इस पर क्‍या चर्चा करना ? मुख्‍य मंत्रीजी ने कह दिया, हमारी घोषणा 5 साल के लिये है, 5 साल में फैसला कर लेंगे । इससे ज्‍यादा कर लेंगे आप ? क्‍या चर्चा करना चाहते हैं आप ? (व्‍यवधान) आपका इंटेंशन यही है कि हम.......(व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद: अगली बार पिफर मूर्ख बनाएंगे क्‍या ? जैसे राम मन्दिर बना रहे हैं आप 20 साल से, ऐसे हाउस टैक्‍स हर बार घोषणा करते जाएंगे क्‍या? (व्‍यवधान) आपकी घोषणाओं की पालना नहीं...सब जानते हैं कि आप नौटंकी करते हैं (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय मंत्रीजी, माननीय सदस्‍यगण, कम से कम चाहे सत्‍तापक्ष हो या प्रतिपक्ष हो, इतना तो ख्‍याल रखना चाहिए कि आसन जब पांवों पर हो तो बैठ जाएं ।

      माननीय सदस्‍यगण, यद्यपि नियमों तो यही प्रावधान है कि नियम 49 के अन्‍दर आप संतुष्‍ट नहीं हैं और उसके विषय में कुछ विवरण चाहते हैं तो आप 49 के अन्‍दर यहां पर आयें । फिर भी चूंकि दोनों ही पक्ष और प्रतिपक्ष इस विषय को बहुत अधिक गम्‍भीर मानते हुए चर्चा करना चाहते हैं, इसलिये मुझे, विधान सभा अध्‍यक्ष को जो अधिकार प्राप्‍त हैं, उन अधिकारों में मैं आधे घण्‍टे की चर्चा परसों इस पर हो, इसके लिये निर्धारित कर रही हूं समय । (व्‍यवधान) परसों, परसों, वह आ जाएगा जब बिजनस आयेगा, बिजनस में आ जाएगा ।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: अध्‍यक्ष महोदय, इसका कोई नोटिस तो मूव करेगा, आधे घण्‍टे की चर्चा किसने मांगी है, कौन प्रस्‍तावक है, कौन समर्थक है ?

श्री रामनारायण चौधरी: आप, पार्लियामेंट्री मिनिस्‍टर साहब ....

श्री अध्‍यक्ष: वह मैंने कह दिया है आपको, (व्‍यवधान) मैंने कह दिया है, नियमों में तो प्रावधान यह है कि 49 में आना पड़ता है लेकिन कोई ....

श्री प्रद्युम्‍नसिंह: पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्‍टर साहब, अध्‍यक्ष को यह पावर्स हैं कि..

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: यह पहली बार हुआ है ।

श्री अध्‍यक्ष: राजाखेड़ा से आने वाले माननीय सदस्‍य....

   लेकिन मैंने निवेदन किया ना आपसे, जैसा कि सत्‍तापक्ष और प्रतिपक्ष, दोनों ही इस बात पर सहमत हैं इसलिये मैं अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए इस पर आधे घण्‍टे की चर्चा का समय परसों के लिये नियत कर रही हूं ।

श्री रामनारायण चौधरी: यह सदन के नेता ने प्रस्‍ताव कर दिया और प्रतिपक्ष ने सहमति जाहिर कर दी और अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍था हो गयी उसके बाद पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्‍टर क्‍या आपत्ति करते हैं । इस पर तो व्‍यवस्‍था दे दीजिए । सदन का निर्णय हो गया, आपने स्‍वीकार कर लिया, फिर ये यहां पर खड़े हो रहे हैं ।

श्री अध्‍यक्ष: छोडि़ये, आप बैठिये ।

                        स्‍थगन प्रस्‍तावों पर अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍था

      मुझे माननीय सदस्‍यों को सूचित करना है कि निम्‍नांकित स्‍थगन प्रस्‍तावों की सूचना प्राप्‍त हुई है :-

            श्री हरिमोहन शर्मा, सदस्‍य की और से जिला बूंदी की तहसील हिण्‍डोली में अकाल की स्थिति के सम्‍बन्‍ध में ।

            श्री मोहम्‍मद माहिर आजाद एवं तीन अन्‍य सदस्‍यों की और से भरतपुर सहित प्रदेश के विभिन्‍न क्षेत्रों में पाले के कारण फसल को हुए नुकसान का मुआवजा देने के सम्‍बन्‍ध में ।

            श्री वीरेन्‍द्र बेनीवाल: एवं पाँच अन्‍य सदस्‍यों की और से राज्‍य में खरीफ एवं रबी दोनों ही फसलों को हुए नुकसान के कारण अकाल के हालात पैदा होने के सम्‍बन्‍ध् में ।

            श्री खुशवीर सिंह जोजावर, सदस्‍य की और से जिला पाली में 75 प्रतिशत से अधिक खराबा होने के उपरान्‍त भी इस क्षेत्र को अकालग्रस्‍त घोषित नहीं करने के सम्‍बन्‍ध में ।  

            डा. चन्‍द्रशेखर बैद एवं चौदह अन्‍य सदस्‍यों की और से राज्‍य में असामाजिक तत्‍वों द्वारा कानून और व्‍यवस्‍था तथा धार्मिक सौहार्दपूर्ण वातावरण को बिगाड़ने के सम्‍बन्‍ध में ।

            श्री संयम लोढा: एवं उन्‍तीस अन्‍य सदस्‍यों की और से राज्‍य में आपसी सद्भाव के बढ़ते खतरे पर प्रभावी रोकथाम के सम्‍बन्‍ध में ।

    कभी आपसी सद्भाव का बढ़ता खतरा होता है क्‍या, सद्भाव का ? सद्भाव   के बढ़ने का खतरा होता है क्‍या ?

            श्री जुबेर खान सदस्‍य की और से राज्‍य के पूर्वी जिलों में पाला पड़ने से फसलों को हुए नुकसान का मुआवजा देने के सम्‍बन्‍ध में ।

            श्री रामनारायण मीणा एवं ग्‍यारह अन्‍य सदस्‍यों की और से राज्‍य में बढ़ रही हिंसक घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रभावी कार्यवाही नहीं करने से उत्‍पन्‍न स्थिति के सम्‍बन्‍ध में ।

       

      सदन में राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण पर वाद-विवाद के समय बजट पर सामान्‍य वाद-विवाद व अनुदान की मांगों पर चर्चा के समय माननीय सदस्‍यों को उपरोक्‍त विषयों को उठाने के लिए पर्याप्‍त अवसर उपलब्‍ध रहेगा । इसलिये इन स्‍थगन प्रस्‍तावों के रूप में इन विषयों को उठाने की अनुमति, ...(व्‍यवधान) प्‍लीज, बीच में नहीं । आसन पावों पर है, इसका भी ध्‍यान नहीं देते हैं ।  इसलिये उठाने की अनुमति देने में असमर्थ हूं ।

 9. श्री महादेवसिंह एवं चार अन्‍य सदस्‍यों की और से राज्‍य में विद्युत वितरण 

      व्‍यवस्‍था में अव्‍यवस्‍था एवं किसानों को पर्याप्‍त बिजली उपलब्‍ध नहीं करवाने

      के सम्‍बन्‍ध में ।

      उपरोक्‍त प्रस्‍ताव स्‍थगन प्रस्‍ताव का विषय तो नहीं है इसलिये मैं अनुमति देने में तो असमर्थ हूं, फिर भी माननीय सदस्‍य महादेव सिंह को 2-3 मिनट में, क्‍योंकि आपने विषय वस्‍तु बतायी है, क्‍योंकि यह एक बहुत जिसे कहना चाहिए, ऐसा विषय है कि सारे ही राजस्‍थान के किसानों से सम्‍बन्धित है इसलिये उन्‍हें कुछ समय के लिये बोलने की अनुमति होगी । कृपया बोलें, महादेव सिंह ।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: हमारे यहां....(व्‍यवधान) 28 तारीख तक सरकार ने गिरदावरी रिपोर्ट मांगने के लिये कहा लेकिन 28 फरवरी निकल गयी । बाकी के राजस्‍थान में तो अकाल के अन्‍दर....(व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं किसी कारण से दो दिन नहीं रह पाऊंगा । अध्‍यक्ष महोदय, मुझे दो मिनट अपनी बात निवेदन कर लेने दीजिए ।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: लेकिन भरतपुर, अलवर और पूर्वी राजस्‍थान है वहां अकाल ...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: प्रक्रिया के नियम 295 के अन्‍तर्गत प्राप्‍त सूचनाएं ।

   1. श्रीमती राजकुमारी शर्मा, सदस्‍य की और से सीकर शहर की तीन मुख्‍य योजनाओं के क्रियान्‍वयन के सम्‍बन्‍ध में ।

   2. श्री जुबेर खान, सदस्‍य की और से ग्राम बिशनपुरा को जयपुर-रामगढ़ बाँध रोड से जोड़ने हेतु निर्मित की गई सड़क का निर्माण कार्य पूरा नहीं होने के सम्‍बन्‍ध में ।3. डा. चन्‍द्रशेखर बैद, सदस्‍य की और से जिला चूरू में पेयजल हेतु अधिक पानी के आबंटन के सम्‍बन्‍ध में ।

    4. श्री रामनारायण मीणा, सदस्‍य की और से जिला बूंदी के रामगंज बालाजी स्थित खाद्य तेल उद्योग बुंगे इण्डिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा फैलाये जा रहे प्रदूषण के सम्‍बन्‍ध में ।

    5. श्री लालचन्‍द कटारिया, सदस्‍य की और से राज्‍य में मैरिज गार्डन्‍स से आम नागरिकों को हो रही परेशानी के सम्‍बन्‍ध में ।

    6. श्री जोगाराम पटेल, सदस्‍य की और से लूणी में बिजली की सुचारू व्‍यवस्‍था हेतु नया उप खण्‍ड कार्यालय खोलने के सम्‍बन्‍ध में ।

      माननीय सदस्‍यों को उनके द्वारा दी गयी सूचना को पढ़ने की अनुमति होगी ।  श्री महोदव सिंह ।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारे भरतपुर और पूर्वी राजस्‍थान में अकाल नहीं होता है लेकिन हमारे सरसों का जो खराबा हुआ पूरे जिले के किसानों की इकॉनॉमी उस पर निर्भर करती है, जो फसलें थीं सरसों की, वह 70 प्रतिशत खराब हो गयीं, सरकार ने 28 तारीख तक उसकी रिपोर्ट आने के लिये कहा था.....

 

vps/usc/1230/1k

 

 

   किसान तबाह और बरबाद हो रहे हैं। माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप सिर्फ दो मिनट विषय-वस्‍तु को रखकर अगर इस पर मुझे भी बोलने की अनुमति दे दें तो आपकी बड़ी मेहरबानी होगी।

श्री महावीर प्रसाद जैन: यह सर्वदलीय बैठक में भी तय हो गया है और नियमों में भी यह व्‍यवस्‍था है कि एक से अधिक स्‍थगन प्रस्‍ताव पर अनुमति नहीं हो सकती है।  ... (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद: यह किसानों से जुड़ी हुई बात है इसलिए मेरा आपसे निवेदन है। ... (व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन: अब यह किस पर बोल रहे हैं, यह समझ में नहीं आ रहा है। कोई बात है तो आपके वैश्‍म में मिल सकते हैं । ... (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद: अध्‍यक्षजी से रिक्‍वैस्‍ट कर रहे हैं।

श्री महावीर प्रसाद जैन: यह सबका समय खराब कर रहे हैं। ... (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद: सबका क्‍या खराब हो रहा है ? यह किसानों का मामला है।

श्री हरिमोहन शर्मा(हिण्‍डौली): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं  संक्षेप में, दो मिनट में अपनी बात कहना चाहता हूं। ... (व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन: राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण पर बोलिये आप।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय श्री महादेव सिंहजी, बोलिये आप। आपको नहीं बोलना ? आपको नहीं बोलना है तो ठीक है, कोई बात नहीं। ... (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह अलवर, भरतपुर, धौलपुर में सारी फसल ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: मैं 295 शुरू करवाऊं, महादेव सिंहजी, यदि आपको नहीं बोलना है तो ... (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद: ... (व्‍यवधान) वह खराब हो गयी और किसानों से जुड़ा मामला है और आप दो मिनट का समय इसके ऊपर हमको भी दे दें तो आपकी मेहरबानी होगी। इतना ही आपसे निवेदन है हमारा तो । ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आपको पर्याप्‍त अवसर मिलेगा । मेरी बात सुनिये, नगर से आने वाले माननीय सदस्‍य। ... (व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद: नहीं, बिजली-पानी पर नहीं बोला करें ? राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण पर यह ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: सुनिये । इससे पहले सुन लीजिए। सुन लीजिए। स्‍थगन प्रस्‍ताव रिसेंट ऑकरेंस पर बहुत महत्‍वपूर्ण होता तब जाकर उसे लिया जाता है।

       जैसा कि मैंने आपको कहा कि आपको पर्याप्‍त अवसर मिलेगा । राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण पर  सामान्‍य वाद-विवाद पर जब आप करेंगे तब, बजट के सामान्‍य वाद-विवाद पर तब, जब आपकी मांगों का डिस्‍कशन होगा उस समय, इन सब समय पर। और फिर उसके बाद अकाल की चर्चा भी होगी उस समय भी आप यह बात कह दीजिएगा। आज ही क्‍या जरूरी है यह बात कहना ?

मोहम्‍मद माहिर आजाद: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 28 फरवरी को इन्‍होंने गिरदावरी के लिए कहा था और यह निर्देश दिये हैं कि 20 परसेंट से ज्‍यादा रिपोर्ट में  खराबा नहीं बताया जाए । जब रिपोर्ट गलत आ जाएगी तो फिर किसान को क्‍या मिलेगा ? किसान तो तबाह और बरबाद हो जाएगा इसलिए अगर आज यह बात होती तब तो कोई मतलब था इसका । इसलिए अर्जेंसी है। हमने इसीलिए आपसे निवेदन किया है। ... (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इन्‍होंने अपने सरकारी रिकार्ड में यह बताया है हिण्‍डौली के लिए कि 15391 हैक्‍टेयर में सारी फसल बरबाद हो गयी। लेकिन 4602 हैक्‍टेयर में चारे की फसल ठीक बताकर अकाल घोषित करने से रोका गया है। ... (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: अध्‍यक्ष महोदय, यह क्‍या हो रहा है ?

श्री अध्‍यक्ष: यह बिना पुकारे ही खड़े हो रहे हैं । ... (व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: काहे पर बोल रहे हैं यह ? ... (व्‍यवधान)

श्री हरिमोहन शर्मा: बरसात नहीं हुई है । पानी नहीं है। सारे बाँध खाली पड़े हुए हैं और सरकारी रिपोर्ट में  सरकार खुद मानती है ... (व्‍यवधान)

श्री कालूलाल गुर्जर: माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपकी इजाजत के बिना बोल रहे हैं यह तो । अंकित नहीं किया जाए इनको । इनको अंकित करने से रोका जाए ।... (व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन: सर्वदलीय बैठक में तय हुआ था ।

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो ।

श्री हरिमोहन शर्मा: ***

श्री मदन राठौड़: ***

श्री संयम लोढ़ा: ***

श्री अध्‍यक्ष: आपने धींगा-मस्‍ती की है। आपने धींगा-मस्‍ती की है। नियमों का पालन नहीं किया है। तय होने के बाद आप जबरदस्‍ती बोले हैं। इस तरह से धींगा-मस्‍ती ठीक नहीं  है आपकी। माननीय महादेव सिंहजी।

श्री हरिमोहन शर्मा:***

श्री संयम लोढ़ा: ***

श्री अध्‍यक्ष: सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य, कृपया, स्‍थान ग्रहण कर लें। कृपया स्‍थान ग्रहण कर लें।  ... (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा: ***

श्री अध्‍यक्ष: नहीं,  आप पहले मुझे सुन लीजिए। ... (व्‍यवधान)

श्री मदन राठौड़: ***

श्री संयम लोढ़ा: ***

श्री अध्‍यक्ष: आप मुझे सुनिये। कोई रिकार्ड नहीं किया जाए । ... (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा: ***

श्री मदन राठौड़: ***

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार):***

श्री अध्‍यक्ष: कोई रिकार्ड नहीं हो रहा है। ... (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा: ***

श्री अध्‍यक्ष: नेता प्रतिपक्ष, आपके सदस्‍य क्‍या कर रहे हैं ? मैंने इनके स्‍थगन प्रस्‍ताव को इसलिए अस्‍वीकृत किया है कि इनके स्‍थगन प्रस्‍ताव में इन्‍होंने यह कहा है - 'राज्‍य में आपसी सद्भाव के बढ़ते खतरे पर प्रभावी रोकथाम के संबंध में।' ... (व्‍यवधान)

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार):***

श्री संयम लोढ़ा: ***

श्री अध्‍यक्ष: राज्‍य में आपसी सद्भाव तो बढ़ना चाहिए । ... (व्‍यवधान)

श्री अशोक बैरवा: ***

श्री संयम लोढ़ा: ***

श्री अध्‍यक्ष: आपने जो मूल प्रस्‍ताव दिया है, वह आपका मूल प्रस्‍ताव पढ़कर सुना रही हूं । ... (व्‍यवधान)

श्री संयम लोढ़ा: ***

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): ***

श्री अध्‍यक्ष: सुनिये प्‍लीज। आप नहीं सुनेंगे ? सुनिये-सुनिये । आप भी विराजिये। मैं आपका मूल प्रस्‍ताव जो आपने दिया है, यह यहां की गलती नहीं है, आपने जो दिया है वह पढ़कर सुना रही हूं । सब ध्‍यानपूर्वक सुनिएगा। प्‍लीज, क्‍या हो गया अब आपको ? कुछ नहीं । प्‍लीज, बैठ जाइये आप । आसन पाँवों पर । अशोक बैरवा ।

       प्रक्रिया के नियम 50 के अन्‍तर्गत राज्‍य में आपसी सद्भाव के लिए बढ़ते खतरे को प्रभावी रोकथाम में राज्‍य सरकार की विफलता से उत्‍पन्‍न स्थिति को देखते हुए राज्‍य विधान सभा की बैठक की कार्यवाही स्‍थगित कर चर्चा कराने के संबंध में।

            मतलब सद्भाव जो बढ़ रहा है इनको इस बात से खतरा हो रहा है । क्‍या बोलेंगे अब ? सिट डाउन प्‍लीज।

श्री संयम लोढ़ा: ***

श्री अशोक बैरवा : ***

श्री अध्‍यक्ष: आपसी सद्भाव से इनको खतरा बढ़ रहा है। प्‍लीज, सिट डाउन।  अशोक बैरवा, मुझे नाम लेने के लिए मजबूर नहीं करें। मुझे आप नाम लेने के लिए मजबूर नहीं करें। आप मुझे नाम लेने के लिए मजबूर नहीं करें। No, I do not want to hear anything. मैं कुछ नहीं सुनना चाहती । मैं अब कुछ नहीं सुनना चाहती हूं। मैं कुछ नहीं सुनना चाहती हूं। नहीं-नहीं, मैं कुछ नहीं सुनना चाहती हूं।

डा. श्रीगोपाल बाहेती(पुष्‍कर): ***

श्री अध्‍यक्ष: मैं कुछ नहीं सुनना चाहती हूं । ... (व्‍यवधान) अंकित नहीं किया जाए ।

श्री संयम लोढ़ा: ***

श्री मदन राठौड़: ***

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): ***

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो।

श्री अशोक बैरवा (खण्‍डार): ***

श्री संयम लोढ़ा: ***

 

Spp/usc/1240/1L

 

 

डॉ.श्रीगोपाल बाहेती: ***

श्री संयम लोढ़ा: ***

श्री अध्‍यक्ष: आप अंकित नहीं करें। नो नौ, अंकित नहीं करेंगे।

श्री मदन राठौड़: ***

श्री संयम लोढ़ा: ***

श्री प्रेमसिंह बाजौर: ***

श्री दांताराम गुर्जर: ***

श्री भवानीसिंह राजावात: ***

श्री वासुदेव देवनानी: ***

श्री जालमसिंह रावलोत: ***

श्री संयम लोढ़ा: ***

श्री शंकरसिंह राजपुरोहित: ***

श्री अध्‍यक्ष: माननीय गृह मंत्रीजी कुछ कहना चाह रहे हैं। आप स्‍थान ग्रहण कर लें। माननीय गृह मंत्रीजी कुछ कहना चाह रहे हैं।

श्री गुलाबचन्‍द कटा‍रिया (गृह मंत्री): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य की मन की इच्‍छा है कि राजस्‍थान शांति, अमन-चैन से रहे, हमारी-आपकी, सबकी इच्‍छा एक ही है और कुछ ईश्‍वर योग से पिछला साल इस दृष्टि से काफी ठीक निकला। एक घटना ऐसी हुई जिसके कारण कुछ उद्वेलित हुआ । अगर आप चाहेंगे तो मैं पूरे तथ्‍य आपके सामने रखूंगा, कहीं किसी को बचाने का सवाल नहीं है। अगर किसी किताब लिखने वाले ने गलती की तो वह सज़ा पायेगा और किताब के आधार पर अगर कोई कानून तोड़कर किसी प्रकार की अप्रिय घटना उनके खिलाफ भी करेगा तो उसके खिलाफ भी उसी प्रकार की कानूनी कार्यवाही करेंगे, कहीं आपके मन में यह अंदेशा नहीं होना चाहिये। अभी हमने उस केस में जिन लोगों ने तोड़-फोड़ की, उसमें तीन लोग पुलिस कस्‍टडी में हैं, बाकी केसेज में, जिनमें जमानती बैलेबल आफेंस बने हुए हैं, मैं आपको यकीन दिलाता हूं आप और हम दोनों की इच्‍छा है कि अमन-चैन और शांति बनी रहे, इसको भड़काने वाली कार्यवाही नहीं करें, क्‍योंकि किताब को हमने बेन किया पहले। अगर वास्‍तव में वह समाज के लोगों के हाथ में चली जाती तो तूफान हो जाता। किसी तरह से उसको हमने समय रहते अपनी जानकारी के अनुसार पहले बेन करके समेटने की कोशिश की ताकि इस प्रकार की भावना समाज में लोगों में पढ़ने में आ जायेगी तो एक बहुत बड़ी अशांति फैलेगी । जितनी हम कोशिश कर सकते थे वह की है। अभी भी मेरी आपसे यही प्रार्थना है कि हम और आप सब मिलकर किसी तरह से शांत करके इस विषय को ठीक करें। अगर कोई घटना-दुर्घटना उसके रिएक्‍शन में हो रही है, हमने उनके खिलाफ भी 8-9-10 केस बनाये हैं। ऐसा नहीं है, हम कार्यवाही कर रहे हैं, जो हमारी सीमा है। मैं आपको इतना यकीन दिला सकता हूं फिर भी अगर सदन चाहे तो खुलकर चर्चा हो सकती है क्‍योंकि उसके जो अच्‍छे पक्ष हैं, वह भी आयेंगे, जो बुरे पक्ष हैं वह आयेंगे और उनको सुनने के बाद हाउस की चर्चा के बाद राजस्‍थान में अमन-चैन नहीं होगा, एक तरह से राजस्‍थान में विद्वेष फैल जायेगा। मैं सोचता हूं इससे लाभ नहीं निकलेगा, उससे नुकसान हो जायेगा। मैं इतना ही कहना चाहता हूं।

श्री संयम लोढ़ा: अध्‍यक्ष महोदय,......(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: इनका अंकित नहीं हों।

श्री संयम लोढ़ा: ***

श्री गुलाबचन्‍द कटारिया: आपकी बात का, मेरे पास विषय की जानकारी नहीं है। आप मुझे जानकारी दें। अगर किसी और ने इस प्रकार से समाज के अंदर विद्वेष फैलाने वाला लिखा होगा तो हम निश्चित रूप से उस पर भी कार्यवाही करेंगे, इतना मैं आपको भरोसा दिला सकता हूं।

श्री जुबेर खान: ***

श्री महावीर प्रसाद जैन: ***

श्री संयम लोढ़ा: ***

डॉ.श्रीगोपाल बाहेती: ***

श्री सांगसिंह भाटी: ***

श्री तगाराम चौधरी: ***

श्री दांताराम गुर्जर: ***

श्री ओम बिरला: ***

श्री मदन राठौड.: ***

श्री अध्‍यक्ष: अंकित नहीं हो रहा है। आसन की अनुम‍ति के बिना बोलेगा, वह अंकित नहीं किया जायेगा। इसलिये सभी माननीय सदस्यों से अपील कर रही हूं कि कृपया आसन की अनुमति से ही बोलें तो ही अंकित होगा।

डॉ.बुलाकीदास कल्‍ला: मैं बोलना चाहता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: हां, डॉ.बुलाकीदास कल्‍ला।

डॉ.बुलाकीदास कल्‍ला(बीकानेर): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय गृह मंत्री जी ने जो अभी बातें कहीं, मैं इस संबंध में यह कहना चाहता हूं कि यह कोर्स रीडर नवीं कक्षा की पुस्‍तक है, जो माध्‍यमिक शिक्षा बोर्ड ने प्रकाशित की है। इस पुस्‍तक में कृष्‍ण के भाई दाऊजी के बारे में क्‍या लिखा है, मुझे कहते हुए यहां शर्म आती है।

   इसी प्रकार....

श्री अध्‍यक्ष: क्‍या लिखा है दाऊजी के बारे में ?

डॉ.बुलाकीदास कल्‍ला: कल ही यह पुस्‍तक मैंने खरीदी है। आप चाहेंगे तो मैं आपको दिखा दूंगा।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, दाऊजी के बारे में लिखा क्‍या है ?

डॉ.बुलाकीदास कल्‍ला: इसमें दाऊजी के बारे में लिखा है कि वह शराब पीते थे, यह करते थे। इस तरह की अनर्गल बातें लिखी हुई हैं।

श्री अध्‍यक्ष: वह तो बंद कर दी ना।

डॉ.बुलाकीदास कल्‍ला: यह बिक रही है। मैं कल ही खरीद कर लाया हूं । आप कहो तो सदन की मेज पर रख दूंगा। (व्‍यवधान) आप बिराज जायें, मैं बोल लूं उसके बाद बोल लेना। यह एक्सिलेंट इंगलिश कोर्स, इस पुस्‍तक में क्‍या लिखा है, यह सब आपके सामने सदन के पटल पर रख देता हूं। इन सब पुस्‍तकों को, जो इस तरह की है, उनको बेन करना चाहिये। और जिस पुस्‍तक के बारे में, हकीकत नाम की पुस्‍तक के बारे में जो बातें हुई हैं, हमें उसका बहुत क्षोभ है, खेद है। ऐसी पुस्‍तक के लेखक और प्रकाशक के विरूद्ध कार्यवाही होनी चाहिये। लेकिन अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या भारतीय जनता पार्टी और उनके सहयोगी संगठनों को कोई इजाजत देगा कि वह कानून को हाथ में ले ले? आज जितनी भी मिशनरी स्‍कूल्‍स हैं, जितने भी चर्च हैं, आपके सिविल लाइन्‍स के पास वाला चर्च है वहां पर परसों शाम को पुलिस के सामने गण्‍डागर्दी हुई। वहां लोगों को प्रार्थना नहीं करने दी गयी। इसी प्रकार कोटा में तीन बसें जलाई गईं। जगह-जगह जो मिशन के इंस्‍टीट्यूट हैं उनके ऊपर हमले हो रहे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: आप डिमाण्‍ड्स पर बोलियेगा तब ....

डॉ.बुलाकीदास कल्‍ला: मैं बिल्‍कुल पाइंटेड बात कह रहा हूं । कानून हाथ में लेने की इजाजत किसी को देनी नहीं चाहिये।

श्री ओम बिरला: ***   (व्‍यवधान)

डॉ.बुलाकीदास कल्‍ला: यह दोनों खड़े होते हैं, इनको रोकते क्‍यों नहीं हैं?

श्री महावीर प्रसाद जैन (मुख्‍य सचेतक): उनका उदाहरण यहां नहीं देना चाहिये (व्‍यवधान) .. मोहम्‍मद साहब के बाल उड़ा दिये गये तो सारे हिन्‍दुस्‍तान में आग लग गयी एक बाल के लिये। यह हिन्‍दुस्‍तान इतना सेसेंटिव है। (व्‍यवधान)

डॉ.बुलाकीदास कल्‍ला: मैं आपके कहने से बोल रहा हूं और यह बीच-बीच में व्‍यवधान कर रहे हैं। (व्‍यवधान) हां, तो आप आग लगा रहे हो। मैं आपकी इजाजत से बोल रहा हूं।

डॉ.श्रीगोपाल बाहेती: ***

श्री ओम बिरला: ***   

श्री महावीर प्रसाद जैन: आपको शर्म नहीं आती, मोहम्‍मद साहब के बाल पर पूरे हिन्‍दुस्‍तान में आग लगा दी।

  

MSR/USC/1250/1M

 

डॉ.बुलाकीदास कल्‍ला: मैं आपके आदेश से डोर के पजेशन पर हूं।

      अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे यह निवेदन कर रहा था कि सरकार को एक सैकूलर गवर्नमेंट के हिसाब से हमने शपथ ली हुई है।

श्री अध्‍यक्ष: शिक्षा मंत्रीजी ने कहा हमने बंद कर दी है, आप फिर बोले जा रहे हो। 

डॉ.बुलाकीदास कल्‍ला: हम को सभी धर्मों को अपना संरक्षण देना चाहिए लेकिन पुलिस की उपस्थिति में...

श्री अध्‍यक्ष: शिक्षा मंत्रीजी, आपने किताब बंद कर दी न, यह किताब बंद हो गयी न?

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी: हां जी।

श्री अध्‍यक्ष: हां तो फिर क्‍या बोल रहे हो अब आप?

डॉ.बुलाकीदास कल्‍ला: यह बिक रही है, मैं आपको दे रहा हूं कल की रसीद, यह   सदन की मेज पर रख रहा हूं।

श्री अध्‍यक्ष: पहले की पड़ी हुई आप ले आये होंगे ...(व्‍यवधान)... बंद कर दी।

डॉ.बुलाकीदास कल्‍ला: कहां ले आये होंगे, मेरे पास रसीद है इन किताबों की जिसमें क्‍या लिखा हुआ है, अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे यह कहना चाहता हूं कि आप का अखाड़ा संघ, जागरण मंच, बजरंग दल या विश्‍व हिन्‍दू परिषद जिस तरीके से गुंडागर्दी कर रही है पुलिस के संरक्षण में...(व्‍यवधान)...

श्री अध्‍यक्ष: आपको क्‍या कहना है, शिक्षा मंत्रीजी?

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी: यह बैठें तब कहूं न।

श्री अध्‍यक्ष: यह बैठ जायेंगे अपने आप ...(व्‍यवधान)... मैंने आपको पुकार लिया। मैंने आपका नाम पुकार लिया।

डॉ.बुलाकीदास कल्‍ला: मुख्‍यमंत्रीजी को उनके खिलाफ एक्‍शन लेना चाहिए ...(व्‍यवधान)...

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी: यह सदन का समय जाया करते हैं।

श्री अध्‍यक्ष: अब अंकित नहीं हो।

श्री ओम बिड़ला: ***

श्री भवानी सिंह राजावत:***

डॉ.बुलाकीदास कल्‍ला:***

श्री जालम सिंह रावलोत:***

श्री महावीर प्रसाद जैन:***

श्री प्रेम सिंह बाजौर:***

डॉ.श्रीगोपाल बाहेती:***

श्री अध्‍यक्ष: इस विषय पर मैंने अनुमति नहीं दी है आपको, मैंने केवल इसलिए अनुमति दी है, इसका मतलब यह नहीं है कि आप अपनी कहते ही चले जाओ। शिक्षा मंत्रीजी, आप बोलिये। आप शिक्षा मंत्रीजी को बोलने दीजिए।

श्री श्रवण कुमार(पिलानी): ***

श्री अध्‍यक्ष: नौ, बैठ जाएं।

श्री रघुवीर सिंह मीणा (सराड़ा): ***

श्री हेमराज मीणा (किशनगंज): ***

श्री अध्‍यक्ष: शिक्षा मंत्रीजी के अलावा मेरी अनुमति के ‍बिना जो बोलेगा, अंकित नहीं होगा।

श्री श्रवण कुमार: ***

श्री अध्‍यक्ष: यह आप किस विषय पर बोल रहे हैं

श्री श्रवण कुमार: ***

श्री अध्‍यक्ष: आप क्‍यों बोल रहे हो, अंकित नहीं हो रहा है।

श्री श्रवण कुमार: ***

श्री अध्‍यक्ष: माननीय शिक्षा मंत्रीजी।

श्री श्रवण कुमार: *** 

श्री अध्‍यक्ष: आप जागते रहिये सरकार को सोने दीजिए। आप जागते रहिये।

श्री श्रवण कुमार: ***

श्री अध्‍यक्ष: आपको तो मक्‍खन लगा दिया, मुख्‍यमंत्रीजी।

श्री श्रवण कुमार: ***

श्री अध्‍यक्ष: बहुत हो गया, ठीक है। अब अंकित किया जाए।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): अध्‍यक्ष महोदय, माननीय कल्‍ला साहब ने जो नवीं की अंग्रेजी पुस्‍तक के बारे में कहा है वह पुस्‍तक पिछले साल ही चर्चा भी हो गयी थी। पिछले साल ही जो हो गयी थी, उस पुस्‍तक के वह चैप्‍टर भी हटा दिये गये हैं, नयी पुस्‍तक भी लिख दी गयी है, उसकी बिक्री पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। लेकिन बिक्री पर प्रतिबंध के बाद में ऐसी पुस्‍तक को खरीद कर लाना भी अपराध है, अब वह काम नहीं करना चाहिए था आपको।

      और, अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह भी नहीं कहूंगा कि पुस्‍तक कब छपी थी, कब यह रुकी थी। मैं इतना ही कह सकता हूं कि अब यह कोर्स में नहीं है। एक। और इसके बाद में हमने प्रदेश स्‍तर पर...

श्री अध्‍यक्ष: खरीद कर लाना अपराध है बैंड चीज को। बैन है, बैन। ...(व्‍यवधान)...

डॉ.बुलाकीदास कल्‍ला: ऐसा है, अध्‍यक्ष महोदय, मुझे बड़ा अफसोस है कि मंत्रीजी पूरी बात सुनते नहीं हैं। आपने क्‍या यह एक्‍सीलेंट इंग्लिश कोर्स को प्रतिबंध किया है? आपने यह संजीव इंग्लिश कोर्स को प्रतिबंध किया है क्‍या? मैंने यही बात आपको कही कि जिस किताब के बारे में, आपने जो किताब छापी थी उसके बारे में किताबें बिक रही हैं, और यह नयी किताबें हैं, इनको आपने प्रतिबंध नहीं किया है।

      और दूसरी बात मैं आपसे यह कहना चाहूंगा कि मान लीजिए यह किताबें गलत हैं। तो इस किताब के लेखक और प्रकाशक के खिलाफ आप कार्यवाही करें।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी: कार्यवाही कर दी है।

डॉ.बुंलाकीदास कल्‍ला: लेकिन आपको यह इजाजत नहीं दी जा सकती कि आप पूरे राजस्‍थान का साम्‍प्रदायिक सद्भाव कमजोर करें और आप लोगों को, पुलिस संरक्षण में जाकर के स्‍कूलों को तोड़ें। आज सेंट जेवियर स्‍कूल में लोग पढ़ते हैं, सभी सम्‍प्रदायों के लोग पढ़ते हैं।

श्री ओम बिड़ला: माननीय सदस्‍य, सदन के पटल पर गलत बयानी कर रहे हैं।

डॉ.बुलाकीदास कलला: और वहां पर जाकर तोड़फोड़ करें। सैंट पॉल की मूर्ती तोड़ी, यह कोई धर्म इजाजत नहीं देता है...(व्‍यवधान)... इसलिए ऐसे तत्‍वों के खिलाफ  सख्‍त से सख्‍त कार्यवाही की जाए और प्रदेश में साम्‍प्रदायिक सद्भाव को कायम किया जाए।

श्री गुलाबचंद कटारिया (गृह मंत्री):अध्‍यक्ष महोदय, अब हमारी भी सहनशीलता की क्षमता होती है। में सोचता हूं कि अपनी नेता को खुश करने के लिए इस प्रकार का सदन का दुरुपयोग करें, वहां केवल सोनिया गांधी को खुश करने की कोशिश मत करो। केवल सोनिया गांधी को खुश करने के लिए यहां खड़े होकर वकालत करना बंद करो ...(व्‍यवधान)...

श्री ओम बिड़ला: राजस्‍थान की जनता को जवाब देना पड़ेगा ...(व्‍यवधान)...

श्री गुलाबचंद कटारिया: इस सदन का दुरुपयोग करना चाहते हो, भड़काने वाला काम करना चाहते हो। हम तो कोशिश कर रहे हैं किसी तरह से शांत हो और इसको भड़काने वाला काम कर रहे हो...(व्‍यवधान)...

      अगर आप इस पर बोलेंगे न, जो कुछ इसमें लिखा है...(व्‍यवधान)... उसकी पैरवी करना चाहते हो?  क्‍या करना चाह रहे हो, क्‍या कहना चाहते हो?  इस किताबों को और हकीकत को, दोनों को बराबर की श्रेणी में रखना चाहते हो, यही कहना चाहते हो? ...(व्‍यवधान)...

डॉ.बुलाकीदास कल्‍ला: आप बिराजो।

डॉ.श्रीगोपाल बाहेती: आडवाणीजी और अटलजी चले गये, अब आप किस को खुश करना चाहते हो? ...(व्‍यवधान)... सोनियाजी तो राज़ी हैं, अब आप आगे की सोचो, राजनाथ सिंहजी...(व्‍यवधान)...

श्री गुलाबचंद कटारिया: हकीकत और यह नवीं की किताब है, इसका चैप्‍टर है यह दोनों बराबर हैं, आप यह कहना चाहे तो? सोनिया गांधी को यह बताना चाहते हो मैंने राजस्‍थान विधान सभा में यह जो हकीकत किताब लिखी है, उसकी पैरवी कर रहा था।

डॉ.श्रीगोपाल बाहेती: सोनिया गांधी ने तो आपको सड़क पर लाकर छोड़ दिया और अगली बार फिर छोड़ देगी आपको, यह मान कर चलो।

श्री गुलाबचंद कटारिया: दुर्भाग्‍य है अगर इस सदन का यह उपयोग करते है आप जैसा सीनियर मैम्‍बर तो मुझे अफसोस है इस बात का। अगर आप इसको चाहते हैं न तो मैं एक-एक परत खोल कर रख दूंगा, राजस्‍थान सारा जल जायेगा।

डॉ.बुलाकीदास कल्‍ला: क्‍या रख दोगे आप? उनके खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिए।

श्री गुलाबचंद कटारिया: उस समय ना आप बचा सकोगे ना मैं बचा सकूंगा। आप चाहते हो राजस्‍थान को जलाना, आप चाहते हो गांव-गांव और गली-गली लोग हथियार...(व्‍यवधान)...

डॉ.बुलाकीदास कल्‍ला: आप सरकार की तरफ से जो...(व्‍यवधान)...

श्री गुलाबचंद कटारिया: आप चाहते हो राजस्‍थान में विद्वेष फैल जाए...(भारी व्‍यवधान)...

एक माननीय सदस्‍य: अध्‍यक्ष महोदय, गृह मंत्रीजी का टैम्‍पर लूज हो गया।

श्री गुलाबचंद कटारिया: इसके बारे में तो कभी नहीं बोलते हो।

डॉ.बुलाकीदास कल्‍ला:मैंने सबसे पहले यह कहा था कि हकीकत के लेखक और प्रकाशक के खिलाफ कार्यवाही की जाए।

श्री गुलाबचंद कटारिया: सबसे पहले, केवल एक शब्‍द कह कर जो किताब बहुत खराब है, उसमें पढ़ा आपने? मुर्दे में भी जान आ जाए अगर उसको पढ़ें तो...(व्‍यवधान)...

डॉ.बुलाकीदास कल्‍ला: आप साम्‍प्रदायिक सद्भाव को कमजोर करना चाहते हैं, हम यह नहीं होने देंगे राजस्‍थान में। यहां हिन्‍दू, मुसलिम, सिख, ईसाई सब को बराबर जीने का अधिकार है।

श्री गुलाबचंद कटारिया:हमारे भगवान को वेश्‍या बताया...(व्‍यवधान)... अगर भगवान को वेश्‍या बता कर के कि वेश्‍याओं के साथ खेल खेलते थे, यह भगवान कृष्‍ण का चरित्र लिखा उसने। क्‍या चरित्र लिखा?

डॉ.बुलाकीदास कल्‍ला: कौन बचा रहा है उसको, मैंने कहा है इस बात की हम निन्‍दा करते हैं।

श्री गुलाबचंद कटारिया: हम तो शांत करने की कोशिश कर रहे हैं, उसको जलाये जा रहे हो...(व्‍यवधान)... केवल सोनिया गांधी को खुश करने के लिए इस सदन का दुरुपयोग मत करो...(व्‍यवधान)...

डॉ.बुलाकीदास कल्‍ला: उसके खिलाफ कार्यवाही की जाए।

श्री गुलाबचंद कटारिया: मजाक बना रखी है, अगर हम सीनियर मैम्‍बर ...(व्‍यवधान)... इसके कारण से आप इसका दुरुपयोग कर रहे हो।

डॉ.बुलाकीदास कल्‍ला: मैंने खुद ने कहा है कि हकीकत किताब के लिखने वाले को आप जेल में भेजें। हम उसकी निन्‍दा करते हैं।

श्री गुलाबचंद कटारिया: जिस दिन चाहोगे न उस दिन खोल कर रख दूंगा। आप समझते क्‍या हो?

डॉ.बुलाकीदास कल्‍ला: आप सरकार चलाने वाले लोग पुलिस के साथ +++ करोगे, स्‍कूलों को तोड़ोगे यह कतई बर्दाश्‍त नहीं होगा...(व्‍यवधान)...

श्री गुलाबचंद कटारिया: हम चाहते हैं कि किसी तरह से मामला शांत हो...(व्‍यवधान)... आप एक घंटे तक बोलें तो दो घंटे तक बोल सकते हैं। क्‍या चाहते हो आप?

डॉ.बुलाकीदास कल्‍ला: क्‍या बात करते हो?

श्री गुलाबचंद कटारिया: आप क्‍या चाहते हो? केवल अपनी नेता को खुश करने के लिए इस सदन का दुरुपयोग करना चाहते हो? ...(भारी व्‍यवधान)...

एक माननीय सदस्‍य: इनका टैम्‍पर लूज हो गया। समाज कल्‍याण मंत्री +++ बंद करें।

श्री गुलाबचंद कटारिया: यह तो हिन्‍दुस्‍तान है...(व्‍यवधान)...बाकी इस किताब को पढ़ने के बाद में लोग फाड़ देते अब तक। हिन्‍दुस्‍तान की अपनी मर्यादा है न इसलिए...(व्‍यवधान)...

      केवल एक कार्टून छप जाता है न डेनमार्क में तो उसका रिएक्‍शन यहां के लोगों की भावना को होता है,तो लोग खड़े होते हैं, क्‍यों नहीं होंगे? ...(व्‍यवधान)

डॉ.बुलाकीदास कल्‍ला: सरकार में बैठे हुए लोग सद्भाव को कायम रखें ...(व्‍यवधान)

   सरकार की जिम्‍मेदारी है।

श्री गुलाबचंद कटारिया: डेनमार्क में छपे कार्टून पर अगर यहां के लोगों की भावना आहत हो सकती है तो हकीकत किताब के आधार पर यहां हिन्‍दू मान्‍यता क्‍यों नहीं गर्मा पायेगी...(व्‍यवधान)...क्‍यों नहीं उसका विरोध होगा।  केवल इससे चिल्‍लाने से काम नहीं चल सकता। यह क्‍या मजाक बना रखी है? ...(व्‍यवधान);...

डॉ.बुलाकीदास कल्‍ला: अध्‍यक्ष महोदय, जिस तरीके से सरकारी तंत्र से +++ फैला रहे हो वह ठीक नहीं है...(व्‍यवधान)...

श्री गुलाबचंद कटारिया: इसी प्रकार से भगवान विष्‍णू के बारे में, भगवान राम के बारे में ...(भारी व्‍यवधान)...

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: कल्‍लाजी, आप क्षमा मांगिये, माफी मांगिये आप। ...(भारी व्‍यवधान)...

डॉ.बुलाकीदास कल्‍ला: बिल्‍कुल ठीक नहीं है।

श्री गुलाबचंद कटारिया: मजाक करा रखी है। हमने बात को संभालने की कोशिश की, हमने हर दृष्टि से इसको शांत करने का प्रयास किया।

एक माननीय सदस्‍य: +++ हो।

श्री गुलाबचंद कटारिया: हमने हर प्रकार से इस पर कार्यवाही करने की कोशिश की और उसके बाद भी आप उकसा रहे हो।

डॉ.बुलाकीदास कल्‍ला: राजस्‍थान की जनता से माफी मां‍गनी चाहिए आपको।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: नहीं तो क्‍या सुदर्शनजी को खुश करें? सोनिया गांधीजी के बजाय सुदर्शनजी को खुश करें क्‍या?

 

Ars/usc/1300/1n/01032006

 

श्री महावीर प्रसाद जैन: आप बैठ जाओ । बैठ जाओ ।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: आप धमका नहीं सकते । आसन से बात करो ।

श्री महावीर प्रसाद जैन: मोहम्‍मद साहब के बाल उखाड़ने थे तो ...

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे (मुख्‍य मंत्री ): ऐसे मामले बहुत संवेदनशील मामले होते हैं, इस एक पुस्‍तक के उुपर हम लोग जानते हैं कि जगह जगह पर कैसा रिएक्‍शन हो रहा है । गृह मंत्री जी ने खड़े होकर शुरुआत में ही सब लोगों को आगाह किया कि मेहरबानी करके जो चीजें हम लोगों के बीच में फूट डालने वाली होती हैं उनके बारे में हम लोगों को इस तरीके से विदाउट रेस्‍पांसिबिलिटी बात करनी ही नहीं चाहिए । इसलिए मेरा फिर आप सभी लोगों से हाथ जोड़कर निवेदन है, उन्‍होंने कह दिया है कि जिन लोगों ने भी इस तरीके की किताबें लिखी हैं उन लोगों को सख्‍त से सख्‍त यदि पनिशमेंट देने की जरूरत होगी उनको तो देंगे, उन्‍होंने यह आपके सामने क्‍लीयर कर दिया है कि जो इसके अन्‍दर कहीं भी किसी तरीके से भी लिप्‍त है उसको भी हम लोग छोड़ेंगे नहीं और मैं समझती हूं कि और भी कोई ऐसे केसेज हैं जो आपके सामने आये हुए हैं वे भी उन्‍होंने कहा । मंत्री जी ने भी कहा कि वे केसेज कोई  भी ऐसे हैं तो आप हमारे नोटिस में लाएं तो उसके ऊपर हम एक्‍श्‍न ले सकें । परन्‍तु मैं समझती हूं कि अननेसेसरिली इस चीज को इस तरीके से बढ़ाने में किसी के लिए फायदा नहीं है और इसीलिए मेहरबानी करके इस मामले को यहीं ड्राप करें तो मैं समझती हूं कि अच्‍छा है । हाउस के लिए अच्‍छा है, राजस्‍थान के लिए अच्‍छा है । यह मेरी आपसे प्रार्थना है ।

श्री अध्‍यक्ष: सिरोही से आने वाले माननीय सदस्‍य, आपकी कुर्सी में आज कोई कील-वील या कुछ ऐसा लग गया है क्‍या जो आप खड़े हो जाते हो, क्‍या बात है बैठ ही नहीं रहे हो ।

श्री संयम लोढ़ा: बहुत अच्‍छा होता, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कि मुख्‍य मंत्री महोदय यह भी कहतीं कि अल्‍पसंख्‍यक समुदाय के स्‍कूलों पर, जिन स्‍कूलों पर पुलिस के संरक्षण में हमले हुए हैं वे मैं नहीं होने दूंगी । यह कहतीं वह । (व्‍यवधान)

श्रीमती वसुन्‍धरा राजे: मैंने बहुत क्‍लीयर कर दिया है कि जिसने किताब लिखी उसको बख्‍शा नहीं जाएगा और इसकी रिएक्‍शन में किसी ने गड़बड़ किया उसको भी और कानून अपने हाथ में लिया तो उसको भी नहीं बख्‍शा जाएगा । यह होम मिनिस्‍टर जी ने भी कह रखा है और यह मेरे को कहने की जरूरत ही नहीं है, होम मिनिस्‍टर साहब ने विदिन फाइव मिनिट्स खड़े होकर यह बात कह दी तो यहां तो सब पढ़े लिखे लोग बैठे हुए हैं। सब माननीय सदस्‍य इस चीज को समझते हैं कि राजस्‍थान के अन्‍दर,राजस्‍थान की विधान सभा से यह बातें जाएंगी तो इससे राजस्‍थान के लोगों के बीच में दीवारें खड़ी हो जाएंगीं, फूट पड़ जाएगीIt is not a question

कि क्रिश्चियन है, मुसलमान है कि हिन्‍दू है। यह पूरे राजस्‍थान का परिवार है। राजस्‍थान के परिवार में किसी भी तरीके से हम लोग फूट नहीं डालना चाहते हैं और मैं समझती हूं कि आप हमको मदद करेंगे इसमें ।

श्री हरिमोहन शर्मा: आम आदमी मानसिक संतुलन खोए (व्‍यवधान) लेकिन गृह मंत्री संतुलन खो दे.

डा. श्री गोपाल बाहेती: मोहम्‍मद साहब की यह कह रहे हैं इस तरह से आप जो बात कह रहे हैं परिवार की वही हम कह रहे हैं आपसे कि जब लोग आपसे मिलने आते हैं तो मिलना चाहिए आपको।

श्री अध्‍यक्ष: अब इस पर कोई चर्चा नहीं होगी। श्री महादेव सिंह ।

श्री महादेव सिंह(खण्‍डेला): माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस समय फसल के पकने का टाइम है और पूरे राजस्‍थान में हमारे विद्यार्थियों की परीक्षा का समय भी है। बिजली जिस हिसाब से गांवों में दी जा रही है उस हिसाब को देखते हुए फसल के अन्‍दर पानी नहीं जा रहा है, बिजली समय पर नहीं मिल रही है और अनियमित रूप से...

श्री अध्‍यक्ष: आप यह तो बताओ इस समय कितनी मिल रही है, कितने घंटे यह बताओ पहले ।

श्री महादेव सिंह: अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको बताने जा रहा था कि निश्चित कोई टाइम ही नहीं है। अनाउंस तो छह घंटे का कर रखा है लेकिन कहीं तीन घंटे बिजली मिलती है ,कहीं साढ़े तीन घंटे मिलती है ,कहीं पाँच घंटे बिजली मिलती है और कहीं छह घंटे तक बिजली मिलती है लेकिन निश्चित समय, निश्चित जगह ऐसी हालत कर रखी है कि गांवों में आधा घंटे बिजली दे दी और उसके बाद में फिर कटौती कर दी इसलिए पानी सही रूप से फसल में जा भी नहीं सकता है। सुबह परीक्षा का टाइम है। लड़के जब परीक्षा देने के लिए जाते हैं उनको भी समय पर बिजली नहीं मिल रही है। ट्रांसफार्मर जब जल जाता है, किसान अपने साधन से जब वहां कार्यालय तक लेकर जाता है और उनको बुला लिया जाता है उसके बावजूद भी ट्रांसफार्मर तीन-तीन, चार-चार, पाँच-पाँच रोज तक बदल कर नहीं देते हैं क्‍योंकि लम्‍बी लाइनें हैं, लोड ज्‍यादा पड़ता है और ट्रांसफार्मर ज्‍यादा जलते हैं। 33 के वी के जो सब ग्रिड स्‍टेशन हैं उनके बनने में भी देरी हो रही है। इसकी वजह से हमारी लाइनें जल रही हैं। तो मेरा निवेदन है कि इस समय फसल का टाइम है। ज्‍यादा से ज्‍यादा आप अपने अधिकारियों से कह कर समय पर बिजली दिलाएं, नियमित रूप से दिलाएं जिससे किसानों की फसल आसानी से पक सके और विद्यार्थियों को भी पढ़ने के लिए बिजली मिल सके। अच्‍छी तरह से मालूम है आपको कि हमारे राजस्‍थान में लगातार अकाल पड़ते आ रहे हैं और पिछली बार भी भयंकर अकाल था लेकिन अब किसान की फसल अब भी नहीं होगी तो किसान की कमर टूट जाएगी। इसलिए मेरा आपसे निवेदन है कि किसानों को ज्‍यादा से ज्‍यादा बिजली दिलाई जाए,ट्रांसफार्मर जल जाए तो उनको भी समय पर तुरन्‍त बदलवाया जाए और सिंगल फेस की बिजली बच्‍चों के लिए सुबह जल्‍दी से जल्‍दी दिलाएं और शाम को दस बजे तक दिलाएं।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय मंत्री जी, आप चार बजे इस बारे में आपने क्‍या व्‍यवस्‍था इस समय कर रखी है वह जवाब दें। अभी तैयार हैं तो अभी दे दें आप।

श्री गजेन्‍द्र खींवसर: अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से यह बताना चाहूंगा कि कांग्रेस के पाँच वर्ष के कार्यकाल में ...

श्री अध्‍यक्ष: ना,ना अब आप इस बातको छोड़ो। इस समय क्‍या व्‍यवस्‍था है आप वह दो ना ।

श्री श्रवण कुमार: यह जरूरत क्‍या है, पुरानी बात क्‍यों कर रहे हैं।

श्री लालचंद कटारिया: कांग्रेस ने कुछ नहीं किया तो हम इधर बैठे हैं ना (व्‍यवधान)

श्री श्रवण कुमार: राज कौन कर रहा है, आप कर रहे हो ना।

श्री लालचंद कटारिया : आप बीस होना चाहते हो क्‍या मंत्री महोदय..(व्‍यवधान)

श्री महादेव सिंह: पुरानी सरकार ने क्‍या किया इससे कोई मतलब नहीं है मतलब है इस समय किसानों को बिजली चाहिए (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य गण, माननीय सदस्‍य गण...

एक माननीय सदस्‍य : फसल पकने पर आयी है और आप लोग ट्रांसफार्मर उतार रहे हो।

श्री अध्‍यक्ष: मेड़ता से आने वाले माननीय सदस्‍य, आप इसको कांग्रेस से शुरू नहीं करके बी.जे.पी. से शुरू करो।

श्री श्रवण कुमार: आप अपनी बात बताइये गजेन्‍द्र सिंह जी।

श्री अमराराम (धोद): अध्‍यक्ष महोदय, मन्‍त्री जी, क्‍लेरिफिकेशन दें उसमें दो-तीन चीजें मैं आपके सामने दो-तीन मिनट में रख देता हूं फिर मन्‍त्री जी..

श्री अध्‍यक्ष: यह गलत बात है। वह केवल इस समय यह बताएंगे कि इस समय वह कितनी बिजली दे रहे हैं, किस प्रकार से दे रहे हैं, कितनी शार्टेज है, कहां से मंगा रहे हैं और किस भाव से लेकर कितनी सस्‍ती आपको दे रहे हैं। यह सब बातें बता दीजिए।

श्री अमराराम (धोद): अध्‍यक्ष महोदय, दो चीजें हैं।

श्री रामनारायण चौधरी: आपने चार बजे का टाइम दिया।

श्री अध्‍यक्ष : वह कह रहे हैं कि मैं अभी तैयार हूं।

श्री रामनारायण चौधरी: अभी कहां से तैयार हैं पता ही नहीं है उन्‍होंने कागज दे दिया।

श्री अध्‍यक्ष: नहीं, वह खुद कह रहे हैं।

श्री रामनारायण चौधरी: हमारी बात तो सुनिय

श्री अध्‍यक्ष: नेता प्रतिपक्ष, वह खुद कह रहे हैं कि मैं अभी तैयार हूं देने के लिए।

श्री अमराराम (धोद): तैयार हैं जब ही तो हम पूछ रहे हैं वह बता देंगे।

श्री रामनारायण चौधरी: अध्‍यक्ष महोदय, आपके सामने हमने यह बात उठाई है और हमें सुनो तो सही पहले।

श्री अध्‍यक्ष: आपको क्‍या सुनेंगे ।

श्री रामनारायण चौधरी: टाइम दो हमको पहले ।

श्री अध्‍यक्ष: नौ, नौ, यह केवल स्‍थगन प्रस्‍ताव था, इस स्‍थगन प्रस्‍ताव को मैंने इस समय फसल को बचाने के दृष्टिकोण से कि ऐसा अवसर है कि कुछ न कुछ विद्युत मंत्री जी अपनी ओर से दें, बताएं कि वह क्‍या क्‍या व्‍यवस्‍थाएं कर रहे हैं इसलिए मैंने कह दिया वरना स्‍थगन प्रस्‍ताव को...उन्‍होंने कहा मैं अभी तैयार हूं तो मैंने कहा अभी तैयार हैं तो अभीदे दीजिए (व्‍यवधान) बात बोलने की बोल दें।

श्री हेमाराम चौधरी: अभी क्‍या जवाब इनके पास नहीं है,कांग्रेस ने(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: वह तैयार हैं।

श्री हेमाराम चौधरी: कांग्रेस ने क्‍या किया वह लेकर आए हैं। इन्‍होंने खुद ने क्‍या किया इनको पता नहीं है।

श्री अध्‍यक्ष:आप चाहो तो चार बजे दे सकते हो।

श्री गजेन्‍द्र खींवसर: अभी देना चाहता हूं।

श्री महावीर प्रसाद जैन: अध्‍यक्ष महोदय, यह अभी तैयार हैं और दे रहे हैं पिफर भी आप सुनना नहीं चाहते।

श्री हेमाराम चौधरी : इनको कांग्रेस ने क्‍या किया वह मालूम है सिर्फ इन्‍होंने खुद ने क्‍या किया, क्‍या कर रहे हैं, क्‍या करने जा रहे हैं यह इनको पता नहीं है,क्‍या जवाब देंगें, चार बजे का टाइम दो ना।

श्री अध्‍यक्ष: आपको क्‍या पता इन्‍हें मालूम नहीं है,ऊर्जा मंत्री हैं सब मालूम है इनको। आप कैसे कह सकते हो उन्‍हें मालूम नहीं है।

श्री हेमाराम चौधरी: पहले से शुरू किया है बात आज की है और दो साल पहले से शुरू कर रहे हैं।

श्री अमराराम(धोद): अध्‍यक्ष महोदय, ऊर्जा मंत्री जी को यह पता नहीं है कि बीकानेर में कनेक्‍शन कब हुए तो बिजली का क्‍या पता लगेगा।

श्री हेमाराम चौधरी: इनकी शुरूआत से लगताहै कि इनको अभी तक जानकारी नहीं है।

श्री अमराराम (धोद): बीकानेर में जो कनेक्‍शन हुए दो साल में, कितने दिनों में कनेक्‍शन हुए उनका पता नहीं है तो बिजली का क्‍या पता है।

श्री महादेव सिंह : आपने पूछ लिया उसका जवाब ही उन्‍होंने नहीं दिया तो हमारा तो क्‍या देंगे। अध्‍यक्ष महोदय, छह घंटे से ...

श्री अध्‍यक्ष : आप यहां किसी की नालेज को चैलेंज नहीं कर सकते। आप विराजें।

श्री अमराराम(धोद): नालेज नहीं, जो सूचनाएं उनके पास हैं ...

श्री अध्‍यक्ष : आप तो सब अपने मन की करने लगे।

श्री अमराराम(धोद): अध्‍यक्ष महोदय, मैं चैलेंज नहीं कर रहा।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप स्‍थान ग्रहण कर लें,आप स्‍थान ग्रहण करें, आप भी विराज जाओ।

श्री गजेन्‍द्र खींवसर : अध्‍यक्ष महोदय, पिछले दो वर्ष के अन्‍दर हमारी सरकार ने 31 हजार मिलियन यूनिट सप्‍लाई की है जो कि कांग्रेस की पाँच साल के अन्‍दर..(व्‍यवधान)   

Vns/usc/1o/1310/1.3.2006

 

श्री महोदव सिंह: साफ-साफ पूछ रहे हैं आपसे..(व्‍यवधान)

श्री हेमाराम चौधरी: इस साल की बताओ ना, पिछले दो साल की..(व्‍यवधान)

श्री गजेन्‍द्र सिंह: आप सुनो तो सही, आप ही की बात कर रहा हूं मैं यहां..(व्‍यवधान)

श्री महादेव सिंह: यह कौन पूछ रहा है। इस समय बिजली की आवश्‍यकता है, हम आपसे बिजली के लिये कह रहे हैं..(व्‍यवधान)

श्री श्रवण कुमार: आप यह बताइये अक्‍टूबर के बाद मार्च तक आपकी क्‍या परफोरमेंस रही..(व्‍यवधान)

श्री हेमाराम चौधरी: जनवरी-फरवरी की बता दो इस साल 2006 की। या 2005-2006 की बता दो..(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप बहुत तैयारी के साथ 4.00 बजे जवाब दे देना, बस ठीक है।

श्री श्रवण कुमार: अक्‍टूबर के बाद मार्च तक आपकी क्‍या परफोरमेंस है, क्‍या देना चाहते हो..(व्‍यवधान)

श्री हेमाराम चौधरी: पहले तो मिली या नहीं मिली, वह मामला तो आया गया हुआ..(व्‍यवधान)अब इस समय क्‍या है ?

श्री अध्‍यक्ष: स्‍थान ग्रहण कर ले। अब आप स्‍थान ग्रहण करें। प्‍लीज मैंने कहा स्‍थान ग्रहण कर लें..(व्‍यवधान) वह 4.00 बजे जवाब देंगे..(व्‍यवधान)

श्री श्रवण कुमार: सरकार कांग्रेस की क्‍या, कांग्रेस वाली इधर आकर बैठ गयी। कांग्रेस ने बुरा किया, अच्‍छा नहीं किया..(व्‍यवधान)

श्री महावीर प्रसाद जैन ( सरकारी मुख्‍य सचेतक ): अपने स्‍थान पर नहीं हैं..(व्‍यवधान)

श्री श्रवण कुमार: मैं वहीं जाता हूं।

श्री अध्‍यक्ष: मैं तो इन झुंझुनूं वालों से ही परेशान हूं, क्‍या करूं..(व्‍यवधान) आप 4.00 बजे दीजियेगा। आप कृपया 4.00 बजे जवाब दीजियेगा इसका।

श्री गजेन्‍द्र सिंह: मैं तो पहले ही..(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: मैं आपसे कह रही हूं 4.00 बजे, बस ठीक है..(व्‍यवधान) यह अंकित नहीं हो रहा है।

श्री श्रवण कुमार:     ***

श्री अध्‍यक्ष: बिना अनुमति के जो कोई बोलता है उसका अंकित नहीं होता है।   प्रक्रिया के नियम 295 में विशेष उल्‍लेख, श्रीमती राजकुमारी शर्मा।

श्री महादेव सिंह: ***

 

श्री अध्‍यक्ष: 4.00 बज देंगे वह। 4.00 बजे का टाइम दे दिया, 4.00 बजे देंगे।

 

नियम 295 के तहत विशेष उल्‍लेख के प्रस्‍ताव

 

श्रीमती राजकुमारी शर्मा(सीकर): प्रक्रिया के नियम 295 के अन्‍तर्गत विशेष उल्‍लेख प्रस्‍ताव। सीकर शहर की मुख्‍य तीन योजनाएं यथा सीवरेज, पेयजल एवं नवलगढ़ रोड से गंदे पानी की निकासी योजनाओं के क्रियान्‍वयन बाबत।

      महोदय, मैं राजस्‍थान विधान सभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन सम्‍बन्‍धी नियमावली के नियम 295 के तहत विशेष उल्‍लेख के जरिये सीकर शहर के लिये तीन महत्‍वपूर्ण स्‍वीकृत योजनाओं के क्रियान्‍वयन के लिये निवेदन करना चाहूंगी

(समय:           )

(श्री रामनारायण विश्‍नोई, उपाध्‍यक्ष, पदासीन)

      सीकर शहर के लिये 65.00 करोड़ रुपये की सीवरेज योजना लगभग 2 वर्ष से स्‍वीकृत है जिसमें से 15.00 करोड़ रुपये की वित्‍तीय स्‍वीकृति भी जारी हो चुकी है परन्‍तु स्‍वीकृत योजना का क्रियान्‍वयन नहीं हो रहा है संभवत: इसका मुख्‍य कारण प्रशासनिक शिथिलता है। इसी प्रकार सीकर शहर के लिये 11.00 करोड़ रुपये की पेयजल योजना भी अधूरी है, इन योजनाओं में जिन टंकियों का निर्माण हुआ है उनसे अभी तक पेयजल सप्‍लाई नहीं हो रहा है तथा कई टंकियां नहीं है तथा अण्‍डरग्राउण्‍ड वाटर टेंक भी नहीं बने हैं। इस पेयजल योजना के पूर्ण नहीं होने से एक तरफ से काफी मोहल्‍लों में ट्यूबवेल्‍स से डायरेक्‍ट सप्‍लाई है तथा एक तरु मोहल्‍लों  में पेयजल की कमी है। इसी प्रकार सीकर शहर की नवलगढ़ रोड, रेल्‍वे क्रासिंग के पास गन्‍दे पानी की निकासी हेतु लगभग 30.00 लाख की योजना स्‍वीकृत है। इस योजना की क्रियान्विति नहीं होने के कारण नवलगढ़ रोड पर नागरिकों एवं वाहनों को आवागमन में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है, वर्षा ऋतु में तो आवागमन ठप्‍प सा हो जाता है। प्रकरण के सम्‍बन्‍ध में मैंने इस स्‍वीकृत कार्य को कराने के लिये गत बजट सत्र में भी  राजस्‍थान विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्‍बन्‍धी नियमों के नियम 295 से माननीय अध्‍यक्ष महोदय से निवेदन किया था तथा प्रकरण में माननीय सचिव, राजस्‍थान विधान सभा, जयपुर को शासन उप सचिव, स्‍वायत्‍त शासन विभाग, राज. जयपुर के प.4(क)(5)विस/एलएसजी/05/1254 दिनांक 21-3-05 को जवाब भी दिया है जिसमें उल्‍लेख किया है कि गन्‍दे पानी की समस्‍या के निराकरण के लिये प्रभावी कार्यवाही कर दी गयी है, स्थिति ज्‍यों की त्‍यों है, अंत: इस कार्य को पूरा कराने हेतु भी माननीय अध्‍यक्ष महोदय से मेरा निवेदन है।

      अंत में, मैं पुरजोर शब्‍दों में सीकर शहर की महत्‍वपूर्ण स्‍वीकृत सीवरेज योजना राशि रुपये 65.00 करोड़, स्‍वीकृत पेयजल योजना राशि रुपये 11.00 करोड़ तथा स्‍वीकृत नवलगढ़ रोड पर रेल्‍वे क्रासिंग के पास गन्‍दे पानी की निकासी हेतु योजना राशि रुपये 30.00 लाख के क्रियान्‍वयन हेतु निवेदन करती हूं। धन्‍यवाद। जय भारत।

श्री उपाध्यक्ष: श्री जुबेर खान।

 

श्री जुबेर खान (रामगढ़): राजस्‍थान विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्‍बन्‍धी नियम 295 के अन्‍तर्गत विशेष उल्‍लेख की सूचना।

      महोदय, निवेदन है कि ग्राम बिशनपुरा, तहसील जमवारामगढ़, जिला जयपुर स्थित श्री रघुनाथजी व बालाजी के मन्दिर के साथ ही आस-पास के गांवों को जय पुर से रामगढ़ बाँध की और जाने वाली मुख्‍य सड़क से जोड़ने के लिये जयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा लगभग डेढ़-दो वर्ष पूर्व उक्‍त सड़क स्‍वीकृत की गयी थी। जिसका निर्माण कार्य काफी विलम्‍ब से शुरू हुआ। इस सड़क कर निर्माण आज दिन तक पूरा नहीं हुआ है। थोड़ा बहुत कार्य हुआ है, वह भी बहुत घटिया स्‍तर का है जो कि निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है। इस निर्माण कार्य की यदि उच्‍चस्‍तरीय जांच करवायी जाये तो मान्‍यवर, स्‍पष्‍ट घोटाला उजागर होगा और राज्‍य सरकार द्वारा आबंटित राशि का जिस तरह से दुरुपयोग किया गया है, वह स्‍पष्‍ट होगा। कुछ उदाहरण स्वरूप दीवारों की चुनाई में सीमेंट का अनुपात बहुत कम है, चुनाई की प्रक्रिया ठीक नहीं है तथा कंकरीट व मोरम भी निर्धारित  प्रक्रिया व अनुपात के विपरीत है जिससे जरा सी बारिश में ही जगह-जगह गड्ढे हो गये हैं और दीवार में दरारें आ गयी है। इस सम्‍बन्‍ध में स्‍थानीय ग्रामीणों द्वारा उच्‍चाधिकारियों से भी शिकायत की गयी है, लेकिन आज दिन तक कोई कार्यवाही नहीं हुई।

      यहां यह भी उल्‍लेखनीय है कि उक्‍त सड़क के निर्माण कार्य पर स्‍थानीय ग्रामीणों ने मजदूरी की है, लेकिन अभी तक ठेकेदार द्वारा मजदूरों को उनकी मजदूरी का भुगतान तक नहीं किया गया है। मजदूरों को उनकी मजदूरी का भुगतान नहीं किये जाने से उन्‍हें ऋण लेकर आजीविका चलानी पड़ी है जिससे उनकी आर्थिक स्थिति दयनीय हो गयी है। इस सम्‍बन्‍ध में मजदूरों ने आयुक्‍त, जय पुर विकास प्राधिकरण से शपथपूर्वक शिकायत कर मजदूरी के भुगतान हेतु निवेदन किया है, लेकिन आज दिन तक उन्‍हें मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया है। जिससे ग्रामीणों में काफी आक्रोश व असंतोष है। अंत: मैं, राजस्‍थान विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्‍बन्‍धी नियम 295 के तहत उक्‍त सड़क का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं किये जाने तथा मजदूरों को उनकी मजदूरी का भुगतान नहीं किये जाने से उत्‍पन्‍न स्थिति की और माननीय स्‍वायत्‍त शासन एवं नगरीय विकास मंत्रीजी का ध्‍यान आकर्षित करना चाहता हूं।

श्री प्रताप सिंह सिंघवी(नगरीय विकास एवं आवासन राज्‍य मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने जो भी कहा है यह पूरी सूचना मुझे दे दें, जो भी कार्यवाही होगी मैं निश्चित रूप से करवाउंगा।

श्री उपाध्‍यक्ष: डा. चन्‍द्रशेखर बैद।

 

डा. चन्‍द्रशेखर बैद(तारानगर): राजस्‍थान विधान सभा प्रक्रिया एवं कार्य संचालन सम्‍बन्‍धी नियम 295 के अन्‍तर्गत चूरू जिले में पेयजल हेतु अधिक पानी के आबंटन तथा आपणी योजना के द्वितीय चरण को प्रारम्‍भ करने के सम्‍बन्‍ध में चर्चा के लिये।

      मान्‍यवर, चूरू जिले में पेयजल की समस्‍या दिन प्रतिदिन विकट होती जा रही है यदि समय रहते प्रभावी कदम उठाकर समस्‍या के हल हेतु उचित निर्णय नहीं लिये गये तो आने वाले समय में चूरू जिले के अधिकांश हिस्‍से को पेयजल की गम्‍भीर समस्‍या से जूझना पड़ेगा। चूरू जिले के अधिकांश हिस्‍से में भूमिगत जल फ्लोराइड युक्‍त है तथा पीने योग्‍य नहीं है। इस समस्‍या को मददेनजर रखते हुए पूर्ववर्ती सरकारों ने इंदिरा गांधी नहर परियोजना से पानी लेकर चूरू जिले की पेयजल समस्‍या को हल करने का प्रयास किया। इसी प्रयास के तहत आपणी योजना का प्रथम चरण प्रारम्‍भ कर जिले की तारानगर, सरदारशहर व राजगढ़ तहसीलों को राहत दिलाने का प्रयास किया गया। वर्तमान में आपणी योजना के प्रथम चरण के अन्‍तर्गत तारानगर तहसील, राजगढ़ तहसील(आंशिक) तथा सरदारशहर तहसील(आंशिक) को पेयजल उपलब्‍ध कराया जा रहा है। प्रथम चरण में कुछ गांवों व ढाणियों को त्रुटिवश वंचित रख दिया गया था। इस बाबत संशोधित योजना राज्‍य सरकार के पास विचाराधीन है। यदि सरकार इन वंचित गांवों और ढाणियों को शीघ्र पानी पहुंचाने का निर्णय ले तो पूरे प्रदेश के लिये अनुकरणीय उदाहरण प्रस्‍तुत हो सकता है।

      आपणी योजना के दूसरे चरण में रतनगढ़ तहसील, सुजानगढ़ तहसील और राजगढ़ तहसील(आंशिक) लाभान्वित होंगे। प्रथम चरण सरकार द्वारा जर्मन की के.एफ.डब्‍ल्‍यू. कम्‍पनी तथा गैर सरकारी संस्‍थाओं से मिलकर सम्‍पूर्ण किया गया है। द्वितीय चरण के लिये के.एफ.डब्‍ल्‍यू. धन व्‍यय करने को तैयार है...

                                                ...

ssy/usc/1320/1p

 

 

(डॉ. चन्‍द्रशेखर बैद...जारी... )

लेकिन सरकारी तंत्र की शिथिलता और इच्‍छा शक्ति के अभाव में अभी तक इसे हरी झंडी नहीं मिली है । चूरू जिले के पेयजल संकट को मद्देनजर रखते हुए तुरंत इसे मंजूरी दी जानी चाहिए । इसी प्रकार चूरू बिसाऊ योजना के अंतर्गत चूरू तहसील के बचे हुए हिस्‍से को शामिल कर आपणी योजना के निर्धारित मापदंडों के आधार पर कार्य संपूर्ण किया जाना चाहिए । चूरू बिसाऊ योजना में संपूर्ण चूरू शहर व रतननगर को भी शामिल किया जाना आवश्‍यक है । इन पेयजल योजनाओं के लिए इंदिरा गांधी नहर परियोजना का 42 क्‍यूसेक पानी आबंटित है लेकिन पिछले कुछ महिनों से 30 क्‍यूसेक पानी ही दिया जा रहा है । मैं सरकार से पूरजोर मांग करता हूं कि चूरू जिले की इन योजनाओं के लिए 42 क्‍यूसेक पानी सुनिश्चत किया जाये और चूंकि इन योजनाओं के बनने के पश्‍चात कुछ हिस्‍सों को बाद में पेयजल योजना में शामिल किया गया है तथा आगे भी चूरू तहसील के वंचित गांवों को शामिल किया जायेगा इसलिए पानी के आबंटन को 42 क्‍यूसेक से बढ़ाकर 60 क्‍यूसेक कर दिया जाये ।

श्री नरपत सिंह राजवी: उपाध्‍यक्ष महोदय, सूचना यही देनी थी कि यह मैच फिक्सिंग का काम चल रहा है । स्‍वीकृति हो चुकी है, राजेन्‍द्र जी क्रेडिट लेना चाह रहे हैं, उनके माध्‍यम से लेना चाहते हैं ।

एक माननीय सदस्‍य: मेरे बीच में क्‍यों बोल रहे हैं आप ।

श्री उपाध्‍यक्ष: अच्‍छी बात है ।

श्री नरपत सिंह राजवी: एक निवेदन और करना चाहूंगा आपके माध्‍यम से कि आप इनको ज्ञान दीजिये । यह दोनों चूरू जिले के अलावा बाहर निकलना ही नहीं चाहते । डॉ.साहब भी हमारे मित्र हैं और इधर भी हमारे मित्र हैं लेकिन चूरू जिले के बाहर और विधान सभा क्षेत्र के बाहर वह पनपना नहीं चाहते हैं । राजस्‍थान का अनुकरणीय उदाहरण यही होगा क्‍या ? चूरू का ही डिवीजन बीकानेर भी है वहां भी पानी की कमी है । उसका भी नाम वह साथ में लेते । यह मैच फिक्सिंग नहीं करें ।

श्री रामनारायण मीणा: चूरू का ही संभाग बीकानेर है । चूरू का ही डिवीजन बीकानेर है ।

श्री उपाध्‍यक्ष: राजवी साहब पहले अपना घर संभालेंगे ।

श्री रामनारायण मीणा: चूरू का ही डिवीजन बीकानेर है और आपके अधीन है, आप ध्‍यान रखो दोनों का ।

श्री उपाध्‍यक्ष: पहले घर संभालना जरूरी है ।

श्री रामनारायण मीणा: यह नेता हैं दोनों के ।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री रामनारायण मीणा।

 

श्री रामनारायण मीणा(नैनवा): उपाध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍थान विधान सभा की कार्य संचालन एवं प्रक्रिया के नियम 295 के अंतर्गत निवेदन है कि रामगंज बालाजी(बूंदी) क्षेत्र के निवासियों द्धारा मेरी जानकारी में लाया गया है कि बूंदी के पास रामगंज बालाजी में संचालित तेल उद्योग बुंगे इंउिया प्राइवेट लिमिटेड तेल परिशोधन के काम में आने के बाद निस्रावित दूषित पानी का पूरा उपचार नहीं करके उसे उद्योग परिसर के बाहर बहा देती है। जिससे राष्‍ट्रीय राजमार्ग संख्‍या 12 के नीचे से निकल रहे नाले में बहने से दुर्गन्‍ध फैलती है तथा वातावरण खराब होता है । यह पानी मवेशियों द्वारा पिये जाने से उन्‍हें भी बीमारियां हो रही हैं । वायु प्रदूषण भी इस उद्योग द्वारा फैलाया जा रहा है। रात्रि के समय उद्योग द्वारा और अधिक दूषित वायु एवं जल निस्रावित किया जाता है। निर्धारित मापदंडों से कहीं अधिक प्रदूषण फैलने से क्षेत्र के लोगों तथा उक्‍त राजमार्ग से भारी संख्‍या में गुजरने वाले यात्रियों को भी परेशानी हो रही है। फैलाये जा रहे इस प्रदूषण से स्‍वास्‍थ्‍य को हानि पहुंचती है तथा कृषि उपज में भी नुकसान हो रहा है। क्षेत्र के ग्रामवासियान जिला प्रशासन को भी इस तथ्‍य से अवगत करा चुके हैं तथा अखबारों में कई बार इस संबंध में समाचार प्रकाशित हो चुके हैं । मेरे द्वारा भी पत्र दिनांक 27.2.2004 एवं 27.6.2005 के जरिये माननीय अध्‍यक्ष, राजस्‍थान राज्‍य प्रदूषण नियंत्रण मंडल को स्थिति की गंभीरता से अवगत कराया जा चुका है। प्रदूषण नियंत्रण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारियों को इस संबंध में पूरी जानकारी होने के बावजूद ठोस कार्यवाही नहीं किये जाने से स्थिति बदतर होती जा रही है,  काम करने वाले मजदूरों को भी उद्योग मालिक द्वारा वहीं बसाया हुआ है । उद्योग मालिक के द्वारा जान-बूझकर नियमों तथा पर्यावरण एवं जन स्‍वास्‍थ्‍य की अवहेलना की जा रही है ।    अंत: निवेदन है कि पर्यावरण एवं स्‍वास्‍थ्‍य की दृष्टि से संवेदनशील एवं अति महत्‍वपूर्ण इस प्रकरण में उक्‍त उद्योग द्वारा फैलाये जा रहे वायु एवं जल प्रदूषण को रोके जाने के लिए उद्योग को पाबंद करने तथा क्षेत्र में प्रदूषण रोकने के लिए जिम्‍मेदार राजस्‍थान राज्‍य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के संबंधित दोषी अधिकारियों के विरूद्व नियमानुसार कार्यवाही करवाने की कृपा करें ।

श्री ओम बिरला: उपाध्‍यक्ष महोदय, क्‍या कांग्रेस बायकाट कर गयी या गंभीर नहीं है सदन के प्रति। सब गायब हैं ...(व्‍यवधान) तीन ही बचे हैं ।

श्री श्रवण कुमार: तीन ही काफी हैं हम।

श्री ओम बिरला: स्थिति ऐसी ही होने वाली है क्‍या ?

श्री रामनारायण मीणा: मुझे ऐसा लगता है कि उन साथी के जाने के बाद आप फिर बढ़ना चाहते हैं। लाडपुरा के माननीय विधायक नहीं है इसलिए आप बोल रहे हो । रामगंज मंडी वालों को बुला लूंगा मैं ।

श्री ओम बिरला: बुलाओ ना । आप हरिमोहन जी को बुला लेना, ममता जी को भी बुला लेना साथ-साथ ।

श्री रामनारायण मीणा: हम सब आपको चाहते हैं ।

श्री ओम बिरला: हरिमोहन जी को बुला लें, ममता जी को बुला लें ।

श्री रामनारायण मीणा: कांग्रेस वाले आपको चाहते हैं पिफर आप हमसे दुर्भावना क्‍यों रखते हो । यह बतायें आप ।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री लालचंद कटारिया ।

 

श्री लालचंद कटारिया(आमेर): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं राजस्‍थान विधान सभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन संबंधी नियमों के नियम 295 के अंतर्गत निवेदन करना चाहता हूं कि पूरे राज्‍य के हर शहर में खास तौर से बड़े शहरों में तथा राजधानी जयपुर में हजारों की संख्‍या में ऐसे स्‍थल हैं चाहे वह धर्मशाला हो, मंदिर का स्‍थान हो या पिफर कम्‍युनिटी सेंटर अथवा मैरिज गार्डन या स्‍कूल-कॉलेज आदि हो जहां पर शादी-सगाई समारोह संपन्‍न होते हैं । ऐसे समारोहों के आयोजनों से आसपास रह रहे नागरिकों को भारी परेशानियां झेलने के लिये मजबूर होना पड़ता है । एक तरफ तो वाहनों की रेलमपेल हो जाती है दूसरी और गंदगी एवं कचरे के ढेर इक्‍टठे हो जाते हैं जिनके निस्‍तारण की माकूल व्‍यवस्‍था नहीं होती है साथ ही इन समारोहों में बजने वाले तेज आवाज के संगीत से आम जन का जीना दूभर हो जाता है । इसके साथ ही इन स्‍थलों पर आग लगने से दुर्घटना हो जाने पर बचाव के कोई पुख्‍ता इंतजामात भी नहीं होते जिससे जनता की जान हमेशा सांसत में रहती है ।

      जयपुर शहर में विभिन्‍न आवासीय इलाकों में ऐसे स्‍थल हैं जिनके कारण लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है । छोटी-छोटी सड़कों पर सैकडों-हजारों वाहन बेतरतीब तरीके से खड़े हो जाते हैं, पार्किंग की पर्याप्‍त व्‍यवस्‍था नहीं होती । आसपास की वायु इतनी प्रदूषित हो जाती है कि लोगों का दम घुटने लगता है । इसी प्रकार इन स्‍थलों के बाहर गंदगी व कूड़े-करकट के ढेरों से सारा वातावरण बदबूमय हो जाता है, हर गुजरने वाले व्‍यक्ति को नाक बंद कर निकलने को मजबूर होना पड़ता है । इसी के साथ सबसे भयंकर समस्‍या तब उत्‍पन्‍न होती है जब इन स्‍थलों पर दिन में ही नहीं अपितु देर रात तक डी.जे.सेट से तेल ध्‍वनि निकलती रहती है । पड़ौस में रहने वाले नागरिकों के इससे कान तक बहरे होने का खतरा बना रहता है ।

      अंत‍: मैं राज्‍य सरकार को इस समस्‍या से निजात दिलाने बाबत ध्‍यानाकर्षित करते हुए निवेदन करता हूं कि राज्‍य में एक मैरिज गार्डन्‍स कंट्रोल एक्‍ट बनाकर आम नागरिकों को रोजमर्रा में हो रही परेशानियों से छुटकारा दिलाने की व्‍यवस्‍था करें । धन्‍यवाद ।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री जोगाराम पटेल । 

 

श्री जोगाराम पटेल(लूणी): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं राजस्‍थान विधान सभा के संचालन एवं प्रक्रिया नियम 295 के अंतर्गत निवेदन करना चाहता हूं कि बिजली विकास एवं प्रगति की रीढ़ है । माननीय यशस्‍वी मुख्‍यमंत्री महोदया श्रीमती वसुन्‍धरा राजे जी के नेतृत्‍व में भाजपा सरकार ने प्रदेश की सत्‍ता संभालने के पश्‍चात् बिजली उत्‍पादन व वितरण व्‍यवस्‍था में सराहनीय प्रगति हुई है । चुनावी घोषणा पत्र में किये गये वायदे के अनुरूप किसानों,उद्योगों, कल-कारखानों,घरेलू उपभोक्‍ताओं को बराबर समय पर आवश्‍यकतानुसार बिजली की सुविधा उपलब्‍ध करवाने हेतु यशस्‍वी मुख्‍यमंत्री जी व सरकार साधुवाद की पात्र है । बिजली उत्‍पादन के क्षेत्र में भी नया कीर्तिमान स्‍थापित कर प्रदेश बिजली के मामले में आत्‍मनिर्भरता की और अग्रसर है जो कि प्रदेश की जनता व सरकार के लिए गौरव की बात है । माननीय मुख्‍यमंत्री के बागडोर संभालने के बाद प्रदेश के सभी वर्गों ने राहत की सांस ली है । अपने दो वर्ष के कार्यकाल में राजे सरकार ने वास्‍तव में जन कल्‍याणकारी सरकार की छवि बनाई । पूर्ववर्ती सरकार द्वारा किसानों व बिजली उपभोक्‍ताओं को दिये गये जख्‍मों पर मरहम लगाकर सच्‍चे जनसेवक के रूप में अपना परिचय दिया है ।

      आज के आधुनिक युग में लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍था के तहत जनता को आधारभूत सुविधाएं-सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, चिकित्‍सा आदि उपलब्‍ध करवाना चुनी हुई सरकार का परम दायित्‍व है । इन सुविधाओं की निगरानी, रख-रखाव प्रबन्‍धन करना भी संबंधित विभाग का ही दायित्‍व बनता है जबकि मेरे विधान सभा क्षेत्र लूणी में विधुत विभाग तो राम भरोसे ही चल रहा है । लगता है जसे कोई अधिकारी, कर्मचारी कार्यरत है ही नहीं ।

      मेरे विधान सभा क्षेत्र लूणी के डिसकाम में एक ही उपखण्‍ड होने से रख-रखाव, आपूर्ति, कनेक्‍शन, हेमलेट व अन्‍य योजनाओं के कार्यों में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ता है । अधिकतम उपभोक्‍ता भार, व्‍यापक क्षेत्रफल, अधिकतम राजस्‍व बकाया, नये कनेक्‍शनों की अधिक मांग, हेमलेट योजनाओं की अत्‍यधिक मांग के आधार पर तुरंत लूणी को दो उपखंडों में विभक्‍त कर देना न्‍यायसंगत व जनहित में अति आवश्‍यक है । इीस संबंध में मैंने पूर्व में विभागीय अधिकारियों व माननीय मंत्रि महोदय से निवेदन किया है। विभाग स्‍तर पर कार्यवाही अइंतिम स्‍तर पर है । जनता को सुचारू बिजली की सुविधा उपलब्‍ध करवाने हेतु तुरंत प्रभाव से लूणी में एक नया उपखंड बनाने की स्‍वीकृति सरकार प्रदान करेगी । ऐसा मुझे पूर्ण विश्‍वास है

 

Jyg//1330/1q

 

श्री उपाध्‍यक्ष: पर्ची के माध्‍यम से उठाए जाने वाले विषय। श्री सांग सिंह भाटी।

श्री सांग सिंह भाटी: माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से हमारे सम्‍माननीय शिक्षा मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहता हूं कि आपने पिछले दो साल में पूरे राजस्‍थान और हमारे जैसलमेर ज़िले को अग्रणी रखा, उसके लिए जैसलमेर ज़िले की जनता की तरफ से आभार और धन्‍यवाद। इसके साथ-साथ मैं यह जानना चाहूंगा कि आज के दिन हमारी सैकण्‍डरी और हायर सैकण्‍डरी स्‍कूलों में काफी पद रिक्‍त पड़े हैं, उन पदों को आप तत्‍काल भरें, इससे शिक्षा में बिलकुल त्रुटि हो रही है। आपने जो नोर्म्‍स तय किए हैं कि हर एक किलोमीटर, दो किलोमीटर, तीन किलोमीटर में विद्यालय खोले जाएंगे, जैसलमेर ज़िले की भौगोलिक परिस्थिति को देखते हुए जैसे जयपुर में आपने लागू किए वैसे ही नोर्म्‍स जैसलमेर में भी लागू करना जनहित में नहीं रहेगा। मैं इस पर्ची के माध्‍यम से आपसे निवेदन करना चाहूंगा कि जैसलमेर ज़िले का भू-भाग नहरी क्षेत्र का है जिसमें अभी 65 हजार हमारे नए    फार्म भरे हैं और नया नहरी इलाका जो आबाद होगा उसमें नए विद्यालयों की जरूरत पड़ेगी। विशेष अलोटमेण्‍ट और नए सिरे से जो एरिया आबाद हो रहा है उसमें भी नए विद्यालयों की जरूरत पड़गी।  शिक्षा में जैसलमेर जिला हमेशा से पिछड़ा रहा है इसलिए जो नोर्म्‍स आपने जयपुर और उदयपुर जिलों के लिए तय किए हैं वह जैसलमेर ज़िले में लागू न करें और एक-ए‍क किलोमीटर, आधा-आधा किलोमीटर की दूरी  पर ये स्‍कूल खोलें और सदियों से पिछड़े हुए ज़िले को अग्रणी रखें, धन्‍यवाद।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी (शिक्षा मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं सांग सिंहजी भाटी की एक बात से तो सहमत हूं कि एक किलोमीटर का जो हमने क्राइटेरिया तय किया है, जैसलमेर और बाड़मेर में वास्‍तव में एक किलोमीटर से कम का हो तो खोलने में राज्‍य सरकार को कोई आपत्ति नहीं है और अगर आप प्रस्‍ताव देंगे, लेकिन पढ़नेवाले लड़के-लड़कियों की संख्‍या, 10 और 15 के बीच कम से कम हो, एक बात।

            दूसरी बात, इन्‍होंने अध्‍यापकों की जो कमी की बात बताई है, उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं एक बात बहुत स्‍पष्‍ट करना चाहूंगा कि अगर सरसरी तौर पर देखें तो आज राजस्‍थान में अध्‍यापकों की कमी नहीं है, 1 करोड़ 14 लाख बच्‍चे हमारे यहां  हैं और 3 लाख के करीब अध्‍यापक हैं, अगर उनका भाग दें तो 40 का एवरेज आता है जो राष्‍ट्रीय एवरेज है और एक आदर्श स्थिति है। हमारे आने के बाद में 38,602 प्राथमिक, माध्‍यमिक और संस्‍कृत शिक्षा के अध्‍यापकों की राजस्‍थान पब्लिक सर्विस कमीशन के माध्‍यम से नियुक्ति की है जो अपने आप में एक रिकार्ड है। इसी प्रकार से 982 मृतक आश्रितों को डाइरेक्‍ट विभाग द्वारा और नियुक्ति दी गई है। लोक जुम्बिश, डी पी ई पी का जो फस्‍ट स्‍टेज था, शिक्षा कर्मी, जिनकी अवधि खतम हो गई थी, उनको समायोजित करने के बाद में 51,201 लोगों को हमारी सरकार आने के बाद में हमने 8,500 के स्‍केल में नियुक्ति दी है। यह ऐतिहासिक काम हुआ है जो राजस्‍थान के अलावा किसी भी स्‍टेट में नहीं हुआ है, फिर भी मैं यह स्‍वीकार करता हूं कि अध्‍यापकों की कमी है।

श्री उपाध्‍यक्ष: जगह नहीं भर रहे हैं।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी: जो कमी है, वह मैं बता रहा हूं। उपाध्‍यक्ष महोदय, वह कमी है सैकण्‍डरी और सीनियर सैकण्‍डरी स्‍कूलों में।

श्री लालचन्‍द कटारिया (आमेर): वह पैसा कहां से आया?

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी: उसका पैसा राजस्‍थान और हिन्‍दुस्‍तान के लोगों ने टैक्‍स दिया उसमें से आया। पैसा आया, इनकी नियुक्ति राज्‍य के कोष से भी हुई है और सर्व शिक्षा अभियान के अन्‍तर्गत भी हुई है, उसमें भारत सरकार का भी पैसा है। यह कहने में मुझे कोई आपत्ति नहीं है कि सर्व शिक्षा अभियान में भारत सरकार से सब प्रान्‍तों से ज्‍यादा पैसा राजस्‍थान को मिला है।

डॉ.सी.पी. जोशी (नाथद्वारा): उससे सम्‍बन्धित मैं आपसे बहस नहीं करता, खाली एक चीज मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि पिछली सरकार राजीव गान्‍धी पाठशालाओं को सतत शिक्षा केन्‍द्र डिक्‍लेयर नहीं करती तो क्‍या सर्व शिक्षा अभियान में 2 साल बाद थर्ड ग्रेड की पोस्‍टें आप ले पाते, नम्‍बर एक। नम्‍बर दो, जिन 51,000 टीचर्स की भर्ती आपने की, उसके लिए धन्‍यवाद, साधुवाद, लेकिन क्‍या इसमें वह नियम नहीं था कि 50 प्रतिशत फीमेल टीचर ली जाएंगी, फीमेल जेण्‍डर इक्विटी के लिए। इन सारे प्रयासों के लिए आपको बहुत-बहुत धन्‍यवाद, साधुवाद। मेहरबानी करके आप पिछली सरकार को धन्‍यवाद दें कि 26,000 राजीव गांधी पाठशालाओं को जो पांचवीं तक के स्‍कूल हैं, नहीं खोलते, टैक्‍नीकली हमने गलती की कि फाइनेन्‍स लेने के लिए हमने पाँच सौ रुपए में उनको सतत शिक्षा केन्‍द्र डिक्‍लेयर किया, उसका फायदा उठाकर तीसरे साल जब आपकी सरकार आ गई, हमारी सरकार ने जाते हुए 30 हजार पोस्‍टें थी, कोर्ट में स्‍टे आ गया, आपने प्रयास करके कोर्ट से स्‍टे को वैकेट कराकर यह काम किया, उसके लिए धन्‍यवाद, लेकिन आपको यह भी अवश्‍य कहना चाहिए कि अशोकजी गहलोत की सरकार यदि यह काम नहीं करती तो आप इतने पदों पर आज की डेट में अपोइण्‍टमेण्‍ट नहीं कर सकते थे।

श्री उपाध्‍यक्ष: अब यह तो सतत प्रक्रिया है।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी: उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं जोशीजी को धन्‍यवाद दूंगा, यह बात ठीक है कि राजीव गांधी पाठशालाएं जो खोली उनको आज क्रमोन्‍नत करते हैं, वह हमने भी 3-4 हजार क्रमोन्‍नत की है, उसके 3-4 हजार पद हमको मिले हैं और मुझे यह कहने में कोई हिचक नहीं है कि कोई दूसरा गलती करे तो उसका राजनीतिक फायदा अगर मैं उठा सकता हूं तो मैं जरूर उठाऊंगा और मैंने उठाया है, इसमें क्‍या बात है (व्‍यवधान)। लेकिन इसके साथ ही मैं यह भी कह रहा हूं।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): धन्‍यवाद किसको देना है, अशोकजी गहलोत को दें कि आपको दें?

डॉ.सी.पी.जोशी: मैं तो देना चाहता हूं घनश्‍यामजी को, आप वसुन्‍धराजी को देना चाहते है या घनश्‍यामजी को, जवाब दें आप, आप नहीं बोल सकते।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी: मैं यह स्‍पष्‍ट कर रहा हूं कि सैकण्‍डरी और हायर सैकण्‍डरी स्‍कूलों में टीचर्स की कमी है, उसका कारण यह है कि उनमें कुछ ऐसे पद हैं जिनको हम डाइरेक्‍ट भर्ती नहीं कर सकते, उनको राजस्‍थान पब्लिक सर्विस कमीशन के माध्‍यम से ही भर्ती करना पड़ता है और राजस्‍थान पब्लिक सर्विस कमीशन को अभ्‍यर्थना भजी हुई है, लेकिन उसमें विलम्‍ब हो रहा है इसलिए मैं आज सदन को यह सूचित करना चाहता हूं कि हमने तय कर लिया है कि एक बार इमर्जेन्‍सी परमोशन के रूप में राजस्‍थान में कार्यरत टीचर्स का जुलाई के महीने तक हण्‍डरेड परसेण्‍ट परमोशन करेंगे ताकि खाली स्‍थान जुलाई में भर जाए। उसके बाद पुरानी प्रक्रिया चालू रहेगी, उसकी कमी पूर्ति के लिए 7,222 शिक्षकों की नई भर्ती राजस्‍थान पब्लिक सर्विस कमीशन से कराने के लिए अभ्‍यर्थना एक-दो दिन में राजस्‍थान पब्लिक सर्विस कमीशन को भेज दी जाएगी। मैं आशा करता हूं कि इसके बाद आने वाले समय में टीचर्स की कमी राजस्‍थान में नहीं रहेगी और सरकार इसके लिए दृढ़ संकल्‍प होकर काम करेगी, इतना ही मैं आपको बता सकता हूं।

डा.सी.पी.जोशी: टीचर्स की कमी है वह मेथेमेटिक्‍स और इंग्लिश की है, यह मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं। हमारी जो सैकण्‍ड ग्रेड टीचर रिक्रूटमेण्‍ट की पॉलिसी है उसमें रिजर्वेशन एक इश्‍यू है, कुछ डिस्ट्रिक्‍ट्स ऐसे हैं जहां 75 प्रतिशत से ज्‍यादा सैकण्‍ड ग्रेड टीचर्स का रिजर्वेशन है और कोर्ट में लोग लिटिगेशन में गए हुए हैं कि वहां इतना नहीं होना चाहिए। तो मेरा आपसे निवेदन है कि यह सब्‍जेक्‍ट टीचर्स खास तौर से मेथेमेटिक्‍स और इंग्लिश के टीचर्स की कमी है सैकण्‍ड ग्रेड के और लैकचर्स की, उसमें नियमों में यदि हम परिवर्तन नहीं करेंगे तो भले ही आप हमको कहें कि भर्ती करेंगे, यह करेंगे, आप सैकण्‍डरी और हायर सैकण्‍डरी स्‍कूलों में इन सब्‍जेक्‍ट टीचर्स को नहीं भर सकेंगे और सबसे ज्‍यादा सैकण्‍डरी और हायर सैकण्‍डरी स्‍कूलों में तकलीफ है वह राज्‍य सरकार दूर करे।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी: उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं सी.पी. जोशी साहब की इस बात से सहमत हूं कि सब्‍जेक्‍ट टीचर्स की हमारी जो सबसे बड़ी समस्‍या है, अंग्रेजी, साइन्‍स और मेथेमेटिक्‍स, इसलिए हमने तय किया है कि हमारे जो कार्यरत अध्‍यापक हैं उनका हम परमोशन करेंगे और सब्‍जेक्‍टवाइज करेंगे और उन सब्‍जेक्‍ट के जितने टीचर अवेलेबल हैं इमर्जेन्‍सी परमोशन , नियमों में संशोधन करके हम करेंगे और एक बार हण्‍डरेड परसेण्‍ट फुलफिल करेंगे। इसी प्रकार से दूसरा हमने तय किया है कि फिर भी यदि कहीं कोई कमी रहेगी तो अभी  जो 38000 लोगों की भर्ती की थी.......।

 

Gpc/akt/1340/2a

 

   उसमें नेट पास, स्‍लेट पास, एम.एससी., बी.एससी. किये हुए लड़के थर्ड ग्रेड में लगे हैं उनको हम विद्यार्थी मित्र योजना के अंतर्गत जब तक नयी भर्ती नहीं होती तब तक सीनियर सैकण्‍डरी स्‍कूलों में उनको लगाएंगे। जुलाई से स्‍कूल खुलने पर हम ऐसी व्‍यवस्‍था करने की कोशिश करेंगे कि इस बार सारे स्‍थानान्‍तरण, स्‍कूल खोलने का काम और जो भी काम हैं वे जुलाई से पहले पूरे हो जाएं और एक जुलाई से किसी भी प्रकार से शैक्षणिक व्‍यवस्‍था में दिक्‍कत नहीं हो इसके लिए निश्चित रूप से मैं आपको आश्‍वस्‍त करता हूं कि पूरा प्रयत्‍न करेंगे, यही मैं आपसे कह सकता हूं।(व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: आ गया, पूरा आ गया।

श्री सांग सिंह भाटी: मंत्री महोदय, स्‍थानांतरण के संबंध में मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं, जैसलमेर जिले में पहले सरकार की रोक लगायी हुई थी कि शिक्षा विभाग में जैसलमेर जिले से स्‍थानान्‍तरण नहीं करेंगे, लेकिन रोक के बावजूद भी मेरे जैसलमेर जिले से स्‍थानान्‍तरण हुए हैं और पद खाली हैं। अगर स्‍थानान्‍तरण होने लगे तो सारी स्‍कूलें खाली हो जाएंगी, सारे अध्‍यापक बाहर के हैं, जैसलमेर जिले के नहीं हैं।

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी: उपाध्‍यक्ष महोदय, आठ जिलों में प्रतिबंध लगा हुआ है, जैसलमेर, बाड़मेर, जालौर, सिरोही, उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, झालावाड़। उन जिलों से किसी प्रकार का स्‍थानान्‍तरण नहीं हुआ है। 46 ऐसे लोग थे जो मैरिट के आधार पर दूसरे जिलों में आये थे, लेकिन मैरिट गलत होने के कारण से उन दूसरे जिलों में चले गए। वे लड़कियां थीं। उनका मैरिट का संशोधन राजस्‍थान पब्लिक सर्विस कमीशन से हुआ। कोई ट्रांसफर नहीं हुआ है।

श्री उपाध्‍यक्ष: धन्‍यवाद। श्री धर्मपाल चौधरी।

श्री बंशीलाल खटीक: माननीय शिक्षा मंत्रीजी, इस नियम में राजसमंद जिले को भी जोड़ दीजिए।

श्री उपाध्‍यक्ष: जब शिक्षा पर चर्चा होगी तब कह देना। शिक्षा पर चर्चा होगी बजट के टाइम में, उस वक्‍त कर लेंगे। श्री धर्मपाल चौधरी। (व्‍यवधान)

श्री रमेश खींची: आपने तृतीय सत्र में आश्‍वासन दिया था। क्‍या मंत्री महोदय आश्‍वासन देना चाहेंगे कि गये सत्र में नहीं हुए वो इस सत्र में खोलेंगे।

श्री धर्मपाल चौधरी (मुण्‍डावर): जैसा आपने कांग्रेस के राज में किया था वैसा आपके साथ में हो रहा है और ऐसा ही होगा। पहले आपने किया था, इधर बैठे थे। हमारे साथ जो किया था वह आपके साथ हो रहा है, चिन्‍ता मत करो।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री धर्मपाल चौधरी।

श्री धर्मपाल चौधरी: उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से सरकार का ध्‍यान बानसूर में हो रहे अतिक्रमण के माध्‍यम से जो अन्‍याय हो रहा है उसके बारे में आकर्षित करना चाहता हूं। बानूसर में सन् 1957 में सड़क बनी, ग्रामीण सड़क थी उसके बाद में पूरा कस्‍बा बस गया और कस्‍बा बसने के बाद में अब अतिक्रमण के नाम पर वहां पर 150 खोखे वालों को उजाड़ दिया गया और आज तक उन लोगों को सड़क का मुआवजा नहीं मिला। गांव वालों को पता नहीं कब ग्रामीण सड़क स्‍टेट हाईवे के रूप में क्रमोन्‍नत हुई। उसका मुआवजा किसी को दिया नहीं। एक तरफ हमारी लोक कल्‍याणकारी सरकार यहां पर जो बांग्‍लादेशी हैं, जो झुग्‍गी-झौपड़ी वाले हैं, गांव में रहने वाले गरीब आदमी को बसाने की बात करती है और दूसरी तरफ जो गरीब आदमी अपना रोजगार कर रहे थे उन 150 लोगों को वहां से उजाड़ दिया और उसके बाद में जिस तरीके का वातावरण वहां पर बना रखा है, लगभग 450 दुकानें तो बानसूर में टूटेंगी और उसके बाद में 13-15 गांवों में, जिन गांवों में वह सड़क गुजरती है वहां पर कितने ही लोग बेघर हो जाएंगे, कितने ही गरीब लोगों का रोजगार खत्‍म हो जाएगा।

       वहां पर ऐसे अधिकारी हैं जिनका सरकार द्वारा ट्रांसफर तो कर दिया गया वे अधिकारी जहां-जहां भी रहे चाहे सोहेला काण्‍ड में रहे, सोहेला काण्‍ड में उनको 302 में मुलजिम बनाया गया। उससे पहले वे कुम्‍हेर में रहे, उससे पहले बहरोड़ में रहे। जहां भी उनका कार्यकाल रहा उन्‍होंने इसी तरह का काम किया। अब यहां पर पी.डब्‍ल्‍यू.डी. मिनिस्‍टर साहब भी हैं उनसे भी हमने चर्चा करके कहा कि कब आपने यह सड़क बनायी, सड़क बनाकर कब इसको आपने ओ.डी.आर. से एम.डी.आर. में किया और एम.डी.आर. से स्‍टेट हाईवे में कब किया? यहां पर आपने लोगों को मुआवजा दिया या नहीं दिया? अब इन सारी बातों पर जब सरकार की तरफ से जवाब आये और आगे आश्‍वासन मिले सरकार की तरफ से कि वहां पर जो लोग अपना व्‍यापार कर रहे थे, जो अपना छोटा-मोटा काम कर रहे थे उन लोगों को वापस वहां पर कहीं जगह दी जाएगी। दूसरा वहां पर जो दहशत का वातावरण उन गांवों में है उस वातावरण में माननीय पी.डब्‍ल्‍यू.डी. मिनिस्‍टर यह बताएंगे कि इनके द्वारा उसमें क्‍या-क्‍या कार्यवाही की जा रही है, क्‍योंकि आज भी वहां लोगों में इतना बड़ा दहशत का वातावरण है कि 80 फीट तक हम सड़क को चौड़ा करेंगे तो कई-कई जगह तो 40 फीट सड़क भी नहीं है। अब 80 फीट सड़क बनाने में कहीं होस्पिटल की दीवार टूट रही है, कहीं स्‍कूल टूटेंगे, अलग जगह पर जो सार्वजनिक स्‍थान हैं वे भी टूंटेंगे। वहां पर मंदिर को भी तोड़ दिया।

      मैं ग्रामीण विकास मंत्रीजी का भी ध्‍यान दिलाना चाहता हूं कि ग्राम पंचायत में एस.डी.एम. को कोई अधिकार नहीं है, ग्राम पंचायत में 91 के नोटिस जबर्दस्‍ती दिये गये। वहां पर सरपंच एक महिला है उसको एस.डी.एम. द्वारा बार-बार धमकाया गया और ऐसा वातावरण पैदा करने की कोशिश की गई। गांव के अंदर सारी कार्यवाही सरपंच करता है उसमें सरपंच ही नोटिस देता है और उसके बाद में कोई कार्यवाही नहीं होती तब वह एस.डी.एम. को लिखकर देता है। आप दोनों मंत्री यहां पर विराजमान है जिन 150 लोगों को बेघर किया है उन लोगों को वहां पर कोई छोटी-मोटी गुमटी बनाने की जगह मिले जिससे उनको वहां पर व्‍यवसाय करने का मौका मिले और ऐसा वातावरण नहीं हो। माननीय पी.डब्‍ल्‍यू.डी. मिनिस्‍टर साहब यहां पर अपना आश्‍वासन देंगे जिससे कि वहां पर शांति बनी रहे और जो लोग बेघर हुए हैं उनको भी कोई न कोई जगह मिले, मेरा आपसे यही निवेदन है।

श्री जुबेर खान: मुण्‍डावर से आने वाले माननीय सदस्‍य, हमारे इलाके में अगर मंदिर का कोई रास्‍ता चलता जानवर भी तोड़ जाए तो आप हंगामा कर देते हैं और सरकार से जुड़े हुए संगठन आंदोलन और वातावरण खराब कर देते हैं। बड़े दुर्भाग्‍य की बात है कि (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। अंकित नहीं हो।

श्री जुबेर खान: xxx

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। माननीय सदस्‍य। अंकित नहीं होगा।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने इस अतिक्रमण हटाने के नाम पर सड़क को चौड़ा करने के नाम पर अतिक्रमण हटाने की चर्चा की है वो स्‍टेट हाईवे नम्‍बर 52 है। उपाध्‍यक्ष महोदय, यह आनन्‍दपुर से चालू होकर थानागाजी तक जाता है और यह सड़क 13 कस्‍बों तक जाती है। यह सही है कि सड़क जब प्रारंभ में बनी थी उस समय यह विलेज रोड थी और उसके बाद धीरे-धीरे क्रमोन्‍नत होकर स्‍टेट हाईवे बना है। स्‍टेट हाईवे के नोर्म्‍स के अनुसार 80 फीट रोड होनी चाहिए, पर यह भी सही है वर्तमान में जिन 13 कस्‍बों से यह गुजर रही है वहां कहीं 40 फीट भी है, कहीं 50 फीट भी है, कहीं 55 फीट भी है। 80 फीट अगर हम सड़क को चौड़ी करते हैं तो इसमें पहले जो अभियान चलाया गया था तब लगभग 47 छोटी-मोटी दुकानें तोड़ी गई थीं और वर्तमान में 103 लोगों को नोटिस जारी किये हैं। नोटिस जारी करने का अधिकार लैण्‍ड रेवेन्‍यू एक्‍ट में तहसीलदार को भी है, ग्राम पंचायत को भी है और इसके तहत जो नोटिस दिये गये और जब यह बात ध्‍यान में आयी कि यह सड़क पीछे से कम चौड़ी है और एक कस्‍बे में आते हुए इसको चौड़ा करने के नाम पर कुछ लोगों को विस्‍थापित किया जा रहा है तो मैंने वह सारी पत्रावली मंगायी है और मैं आपके माध्‍यम से माननीय सदस्‍य को आश्‍वस्‍त करना चाहूगा कि इसमें किसी के साथ अन्‍याय नहीं हो, सड़क की चौड़ाई बराबर-बराबर सब जगह से रहे। निश्चित तौर पर पूरी चीज देखकर फिर इस अभियान को आगे चलाने की आवश्‍यकता पड़े तो आगे चलाएंगे वरना इस अभियान को रोकने की आवश्‍यकता पड़ी तो रोकेंगे। इसमें निश्चित तौर पर बाईपास पूर्व में बना हुआ है, बानसूर से अलवर सड़क को जोड़ने वाला बाईपास पहले से बना हुआ है, इसलिए नये बाईपास की आवश्‍यकता नहीं है। अब इसमें कितने लोगों को नोटिस दिया गया, इसमें भी शक नहीं है इसमें 4-5 विद्यालय जो बीच में आते हैं अगर हम 80 फीट पर करते हैं तो फिर हरसौरा, बानसूर, नारायणपुर और गूताशाहपुर इन चार में विद्यालयों के भवनों को भी हमें तोड़ना पड़ेगा। इसलिए मैं इतना ही निवेदन करना चाहूंगा माननीय सदस्‍य को कि यह सारी बात ध्‍यान में रखते हुए पत्रावली मंगाकर अध्‍ययन करके और आपसे भी चर्चा कर लेंगे, बानसूर के माननीय सदस्‍य से भी चर्चा कर लेंगे और सर्वमान्‍य हल ऐसा निकले कि सड़क में अतिक्रमण भी हट जाए और लोगों का ज्‍यादा नुकसान भी नहीं हो, लोगों की दुकानें भी नहीं टूटें।

श्री कालूलाल गुर्जर: उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा भी इसमें आया है। पंचायत राज का मामला था और आपने मांग की थी।

श्री उपाध्‍यक्ष: आप विराजिए थोड़ा।

श्री कालूलाल गुर्जर: बोलना जरूरी है, उन्‍होंने कहा है (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: आप विराजिए।

श्री कालूलाल गुर्जर: उपाध्‍यक्ष महोदय, इन्‍होंने यह कहा है कि हमारे वहां पर सरपंच को धमकाया गया और उसके साथ में बदतमीजी की गई है उसके संबंध में मैं निवेदन यह कर रहा हूं कि माननीय सदस्‍य उस सरपंच से मुझे लिखाकर दें, जिसने भी ऐसा किया होगा हम भी हमारे विभाग से कार्यवाही कराएंगे।

श्री जुबेर खान: xxx

 

mlb/akt/2b/1350/1.3.2006

 

 

श्री अशोक (खंडार):***X X X

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, आपकी कोई बात अंकित नहीं हो रही है।

श्री अशोक (खंडार): X X X

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: आपके निर्वाचन क्षेत्र में कहां कहां अतिक्रमण हटाना है, जरा बोल दो, वह भी हटा देंगे। 103 दुकानें टूटी हैं वहां बानसूर में।

श्री अशोक (खंडार): X X X

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, कोई आपकी बात अंकित नहीं हो रही है।

श्री अशोक (खंडार): X X X

श्री उपाध्‍यक्ष: कुछ मुआवजा पाने के भी अधिकारी हैं, अगर हैं, किसी की घर की जमीन है और टाइटल है और उनको मुआवजा देने के लिए भी...

श्री धर्मपाल चौधरी: मैं, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी से पहले अपनी बात कहना चाहूंगा।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़:1988 में मुआवजा तय किया गया था, 1993 में अवार्ड जारी करके जिनकी जमीन थी उनको मुआवजा वितरीत भी किया गया था परन्‍तु मुआवजे की राशि उस समय लोगों ने ली नहीं थी पोटेस्‍ट के रूप में, मैं दुबारा दिखवाकर दुबारा करूंगा और मैं निवेदन करना चाहूंगा कि इसके पीछे मंतव्‍य यह नहीं है कि अतिक्रमण हटाना नहीं चाहते पर अतिक्रमण हटने से पहले एक बार हम सब लोगों से बैठकर चर्चा करना चाहते हैं । सड़क अगर पीछे 50 फीट है और एक कस्‍बे में हम 80 फीट कर देंगे उसका लाभ नहीं, अगर सड़क को 80 फीट करना है तो फिर सब जगह ही 80 फीट करेंगे इसलिए मैंने निवेदन किया कि इसको पूरी चीज को देखकर और सब को चर्चा करके अतिक्रमण रोकने की कोई मंशा नहीं है, किसी को लाभ पहुंचाने की मंशा नाहीं है, सी.पी. साहब शायद एप्रिशिएट करें 103 दुकानें टूट रही हैं, 47 पहले दुकानें तोड़ी जा चुकीं हैं। अगर इसमें इस तरह टूटी...

श्री उपाध्‍यक्ष: बस आ गया धर्मपाल जी।

श्री धर्मपाल चौधरी: नहीं, साहब, इन्‍होंने जो कहा है यह अलवर के रहने वाले हैं नहीं, मैं सबसे पहले जिला परिषद् का...

श्री उपाध्‍यक्ष: अब छोड़ो उनकी बात।

श्री धर्मपाल चौधरी: नहीं, नहीं, साहब, एक मिनट जो उन्‍होंने बीच में कहा । आप सुनें साहब, उनकी बात से नहीं है, उनकी बगल में बैठे वह माननीय विधायक तो आए नहीं हैं।

श्री अशोक (खंडार):*** X X X

श्री धर्मपाल चौधरी: राजस्‍थान में नहीं हैं आपको राजस्‍थान बानसूर का  नहीं पता।

श्री अशोक (खंडार): X X X

श्री धर्मपाल चौधरी: आपको, कहां धरना लगा था, आपको नहीं पता।

श्री अशोक (खंडार): X X X

श्री धर्मपाल चौधरी: ऐसा है, जो आप बिलकुल कह रहे हो, असत्‍य बात करने लग रहे हो और आपके जो साथी विधायक वहां बैठे हैं। (व्‍यवधान) एक मिनट, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जो इन्‍होंने बात कही है ये मिलकर....

श्री उपाध्‍यक्ष:माननीय सदस्‍य, इनकी बात रिकार्ड पर नहीं है ।

श्री धर्मपाल चौधरी: रिकार्ड पर मत आओ चाहे। हमको रिकार्ड पर नहीं लेना। आज जो बात इन्‍होंने कह दी वह तो रिकार्ड पर आपके माध्‍यम से जाय कि इन्‍होंने मिलीभगत करके, आज अगर पूरे राजस्‍थान का सर्वे करा लिया जाए, इनकी विधान सभा क्षेत्र का सर्वे करा लिया जाए कि जिन सड़कों पर अतिक्रमण आज यहां पर फैसला हो जाय कि राजस्‍थान सड़कों पर कितना अतिक्रमण है।

श्री अशोक (खंडार): X X X

श्री धर्मपाल चौधरी: ये माननीय सदस्‍य आज सोनिया जी को खुश करने के लिए यहां से समाचार भेजने के लिए बार बार उठ उठकर बोलने लगे।

श्री रामनारायण मीणा: X X X

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य। श्री शंकरसिंह राजपुरोहित। आप अपना स्‍थान ग्रहण कीजिए।

श्री रामनारायण मीणा: X X X

श्री उपाध्‍यक्ष: नहीं, नथिंग, नो पाइंट ऑफ आर्डर।

श्री रामनारायण मीणा: X X X

श्री उपाध्‍यक्ष: पाइंट ऑफ आर्डर नथिंग, शून्‍यकाल है, नाम पुकार लिया।

श्री रामनारायण मीणा: X X X

श्री उपाध्‍यक्ष: सब चलेगा। शून्‍यकाल में पाइंट ऑफ आर्डर नहीं होता।

श्री शंकरसिंह राजपुरोहित(आहोर): मेरा नाम पुकार दिया, रामनारायण जी।

श्री रामनारायण मीणा: X X X

श्री उपाध्‍यक्ष: आप क्‍या कहना चाहते हैं?

श्री रामनारायण मीणा: मेरा अर्ज करना यह है कि आपने, माननीय सदस्‍य ने कहा कि आपका रिकार्ड नहीं हो रहा है उसके बाद भी आप बोलने की इजाजत उनको दे रहे हो, उनके खिलाफ कोई एक्‍शन नहीं ले रहे हो, ऐसा क्‍यों होता है, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय ?

श्री उपाध्‍यक्ष: मैं उनको यह कहा था कि इधर से जो बोल रहे हैं वह रिकार्ड नहीं हो रहा है।

श्री धर्मपाल चौधरी: अब कौन श्री पूछकर बोल रहे हो ?  एक्‍शन ले रहे हो, आपके पास एक्‍शन हो तो सब को बाहर निकाल दो। वह पूछ कर बोल रहे थे।

श्री रामनारायण मीणा: यह तो सत्‍ता पक्ष के लोग जैसे माघ के महीने में ऊँट के यहां फूटता है ना ? इतने मदांध हो रहे हैं ये।

श्री उपाध्‍यक्ष: आप काहे के लिए परेशान हो रहे हो ?

श्री रामनारायण मीणा: और हमको विश्‍वास है चेयर के ऊपर।

श्री धर्मपाल चौधरी: आपको तो सब बोलने का अधिकार है और दूसरा बोले तो आपको तकलीफ होती है।

श्री रामनारायण मीणा: इनको कब्‍जे में करो मदांध हो रहे हैं ये तो।

श्री धर्मपाल चौधरी: अपने आप को संभालो, अपने +++ को संभालो।

श्री रामनारायण मीणा: केशर कस्‍तूरी नहीं पी है इसलिए केशर कस्‍तूरी का मद आपको दिया इसलिए कृपा करके बिराजो।(व्‍यवधान)

श्री रामप्रताप कासनियां: सुन्‍न में कोई पाइंट ऑफ आर्डर नहीं होता, सुन्‍न ही हो तब काहे का पाइंट ऑफ आर्डर होता है ?

श्री शंकरसिंह राजपुरोहित(आहोर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं कुछ मेरे विधान सभा क्षेत्र की कुछ हकीकत आपके सामने रखूंगा । हकीकत से मत डरो भाई।

श्री उपाध्‍यक्ष: यहां तो हकीकत ही रखी जाती है।

श्री शंकरसिंह राजपुरोहित: अब ये हकीकत के नाम से डर रहे हैं तो मैं क्‍या करूं? हकीकत को सत्‍य बताऊंगा।

श्री उपाध्‍यक्ष: सदन में हकीकत ही रखी जाती है।

श्री शंकरसिंह राजपुरोहित: जी। मेरे विधान सभा क्षेत्र में 136 गांव हैं लगभग सभी एक फसली  गांव हैं और ऐसे  22 गांव जो पाली जिले से जुड़ें हुए हैं,नजदीक में हैं और पहली बार 8 वर्षों के बाद उनको जवाई बाँध से सिंचाई की गई। मान्‍यवर, मैं आपके माध्‍यम से गृह मंत्री महोदय को निवेदन करना चाहता हूं कि मेरे जो 23-23 गांव हैं जो सुमेरपुर कृषि उपज मंडी के 25 किलोमीटर के रेडियस के अन्‍दर आए हुए हैं उन गांवों की कृषि उपज का 90 प्रतिशत माल बिकने को सुमेरपुर कृषि मंडी में जाता है इसलिए मेरा निवेदन यह है कि बाकी मेरे आहोर तहसील में कोई मंडी है नहीं, उन गांवों को जबकि माल सुमेरपुर कृषि मंडी में जाता है, सुमेरपुर कृषि मंडी से जोड़ दिया जाय जिससे वहां पर हुई आय का कुछ फायदा मेरे किसानों को भी मिल जाए, ऐसा मेरा निवेदन है और यह बहुत मौलिक विषय है। पूर्व सरकारों ने बिलकुल नजरअंदाज कभी नहीं किया था, वहां की जनता केउ साथ अन्‍याय किया है, उस अन्‍याय की भरपाई के लिए मैं माननीय मंत्री महोदय, आपके माध्‍यम से निवेदन यही कहना चाहता हूं कि मेरे इन 22-23 गांवों को पूरा न्‍याय मिले और सुमेरपुर कृषि उपज मंडी से इन्‍हें जोड़ा जाए।

श्री उपाध्‍यक्ष: अभी कौन सी मंडी से जुड़े हुए हैं ?

श्री शंकरसिंह राजपुरोहित: अभी वह जालौर से हैं जहां से 50 किलोमीटर की दूरी पर है, 90 प्रतिशत माल सुमेरपुर कृषि उपज मंडी में जाता है।

श्री उपाध्‍यक्ष: वहां कोई रूकावट थोड़े ही है जाने में ?

श्री प्रभुलाल सैनी(कृषि मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि माननीय सदस्‍य यह विषय ध्‍यान में लाये हैं, कृषि उपज मंडी जालौर में इनके विधान सभा क्षेत्र के 20 गांव लगे हुए हैं और आपने चाहा है कि ये सिरोही में शामिल किये जाएं।

श्री उपाध्‍यक्ष: जिला भी जालौर ही है।

श्री प्रभुलाल सैनी: सारे प्रकरण का परीक्षण कराया जाएगा क्‍योंकि जब यह जालौर की मंडी बनी यह 1997 में बनी और उसके बाद से सीमाओं का निर्धारण किया गया, सीमाओं का पुनर्निधारण करने के लिए सारे विषय का परीक्षण कराके किसानों के हितों को ध्‍यान में रखते हुए मैं आपके माध्‍यम से विश्‍वास दिलाना चाहूंगा कि निश्चित रूप से किसानों की मांग को समस्‍या को देखते हुए यदि विधि सम्‍मत हुआ तो समुचित कार्यवाही करके किसानों को राहत पहुंचा जाएगी।

श्री शंकरसिंह राजपुरोहित: शिवगंज के गांवों को सुमेरपुर मंडी से जोड़ा गया क्‍योंकि सुमेरपुर मंडी में उसका माल जाता है जबकि वहां मंडी मेरे आहोर में मंडी नहीं है और उन गांवों को जोड़ने की मैं सिफारिश करता हूं।

श्री संयम लोढ़ा: शिवगंज ही नहीं सिरोही भी जोड़ा जाए तीनों तहसीलें।

श्री हरिमोहन शर्मा: ये दो साल निकल गये, पहले अन्‍याय के निकल गये, दो साल आपके निकल गये, उनके साथ अन्‍याय करते रहोगे क्‍या ?

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री हेमराज मीणा।

श्री संयम लोढ़ा: आप तो घोषणा करो, जोड़ देंगे मंत्री जी, किसानों का भला हो जाएगा।

श्री हेमराज मीणा(किशनगंज): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से जन स्‍वास्‍थ्‍य अभियांत्रिकी विभाग मंत्री जी का ध्‍यान आकर्षित करना चाहूंगा कि बारां जिले में जितने हैण्‍डपम्‍प लगे हैं उनकी स्थिति के बारे में आपको जानकारी दूना चाहूंगा। वैसे तो मंत्री जी को मैं बधाई दूंगा कि उन्‍होंने पिछले 2 सालों में एक हजार करीबन हैण्‍डपम्‍प बारां जिले में लगाये हैं और बारां जिले की बहुत सारी पेयजल योजनाएं भी मंजूर की हैं परन्‍तु मैं कुछ तकलीफ भी मंत्री जी, आपके सामने रखूंगा। जो मेरे इलाके में हैण्‍डपम्‍प लगे हैं, वह हैण्‍डपम्‍प आपने मंजूर तो किये उनको लगना था 90 मीटर का लेकिन हैण्‍डपम्‍प पूरे खुदाई नहीं हुए।                                                                                                      

skp/akt/1400/2c

 

   कम खुदाई होने से वे सब हैण्‍ड पम्‍प ड्राई हो गये। इसकी जांच भी मैंने तहसीलदार के द्वारा करवाई, अधिशाषी अधिकारी के द्वारा भी जांच कराई और जांच में भी यह तथ्‍य साबित हुआ है कि हैण्‍ड पम्‍प का जितना भुगतान उठा है उतने हैण्‍ड पम्‍प नहीं खुदे। उसके बाद भी वहां के जो नीचे के छोटे कर्मचारी थे वे उसमें शामिल हैं और उनके खिलाफ अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री महोदय का ध्‍यान इस ओर भी आकर्षित करूंगा कि कुछ ट्यूबवैल्‍स भी छबड़ा और छीपाबड़ौद में लगे हैं वो सामान्‍य ट्यूबवैल थे लेकिन वहां के अधिकारियों ने बहाना बनाया कि यहां पर सामान्‍य ट्यूबवैल सफल नहीं हैं तो उन्‍होंने एक टेलिस्‍कोपिक बोर का भुगतान किया और डेढ़-दो गुना भुगतान उठाया और देखा गया, जब जांच हुई तो पाया गया कि वास्‍तव में सामान्‍य बोर ही वहां पर लगे हैं तो यह भी बहुत बड़ी लापरवाही और अनियमिता हुई है। इस सम्‍बन्‍ध में माननीय मंत्री महोदय के ध्‍यान में भी मैं यह बात लाया और माननीय मंत्री जी, सरकार और माननीय मुख्‍य मंत्री जी भी इस मामले में बहुत गंभीर रहीं, उन्‍होंने उस एक्‍स. ईएन. के खिलाफ तगड़ी कार्यवाही की। विजिलैंस भी यहां से भेजी और एक्‍स. ईएन. के खिलाफ कार्यवाही हुई, उस एक्‍स. ईएन. को वहां से हटाया। लेकिन, उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से यह कहना चाहूंगा कि उसमें अकेला एक्‍स. ईएन. दोषी नहीं है, उसके खिलाफ जो कार्यवाही हुई है वह पर्याप्‍त नहीं है अपितु उसके खिलाफ निलम्‍बन की कार्यवाही हो और नीचे के अधिकारी भी उसमें बहुत शामिल हुए हैं। उसमें जे. ईएन. भी शामिल है, ए. ईएन. भी शामिल है और मैं यह भी कहना चाहूंगा कि जो हैण्‍ड पम्‍प लगाने वाला कांट्रेक्‍टर था वो भी उससे मिला हुआ है तभी वह भुगतान उठा लेकिन ठेकेदार के खिलाफ भी अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है। उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से कहना चाहूंगा कि पेयजल का इस समय सारे जिले में बहुत क्राइसेस है, यहां सरकार की ओर से माननीय मंत्री जी ने केवल एक-एक गाड़ी वहां पर लगा रखी है। आज सारे हैण्‍ड पम्‍प मृत पड़े हैं। मैं मंत्री महोदय के ध्‍यान में यह भी लाना चाहूंगा कि कई हैण्‍ड पम्‍प नये लगे हैं लेकिन वो हैण्‍ड पम्‍प ड्राई हो गये। ड्राई होने के बाद भी वहां के अधिकारियों के द्वारा ठेकेदारों को भुगतान किया गया है। इसमें यह भी प्रावधान है कि ड्राई हैण्‍ड पम्‍प का भुगतान नहीं किया जाता है जब तक उसमें पानी नहीं होगा। लेकिन ड्राई हैण्‍ड पम्‍प का भुगतान हुआ और जो ड्राई ट्यूबवैल थे उनका भी भुगतान हुआ। तो मैं आपके माध्‍यम से मंत्री जी से निवेदन करना चाहूंगा कि आप ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्यवाही करें और जो प्रकरण जांच का विचाराधीन है उसमें कौन-कौन अधिकारी दोषी हैं, कौन-कौन ठेकेदार दोषी हैं उन ठेकेदारों के खिलाफ कार्यवाही करें और उन ठेकेदारों को ब्‍लेक लिस्‍टेड करें, ऐसा मेरा आपसे निवेदन है। बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

श्री सांवर लाल (जन स्‍वास्‍थ्‍य अभियांत्रिकी मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने आज इस बात को उठाया उसके पहले मेरे से मिले और लिखित मे भी आपने इस सम्‍बन्‍ध में शिकायत मुझे दी है और मैंने आपको आश्‍वस्‍त किया है कि इसकी जांच करवा देंगे और जांच चल रही है। आपने 2-3 बिन्‍दु उठाये हैं कि एक तो हैण्‍ड पम्‍प कम गहराई पर खोदे गये हैं तो अमूमन लगभग शिकायत रहती है क्‍योंकि हैण्‍ड पम्‍प खुदने और लगाने के बाद हमारे विभाग के अधिकारियों के अलावा कोई इंडिविजुअल जाकर के देखता नहीं है। अब वे ठेकेदार से मिले हुए हैं या नहीं मिले हुए हैं या आपकी शिकायत बिल्‍कुल दुरुस्‍त है या नहीं है यह पूरी जांच रिपोर्ट आने के बाद पता चलेगा और अगर जो आप कह रहे हैं वह ठीक है तो इसमें कोई संशय नहीं है कि जो कार्यवाही नियम कानून से होनी चाहिए वह चाहे नीचे का अधिकारी हो चाहे अधिशाषी अधिकारी हो, सबके विरुद्ध हम करेंगे। अब ठेकेदार की गलती है, निश्चित रूप से खोदना चाहिए और उसने अगर नहीं खोदा है तो उससे ज्‍यादा गलती जो हमारे अधिकारी नाप-जोख करने के लिए, एम. बी. भरने के लिए हैं वो भी दोषी ज्‍यादा हैं। तो ठेकेदार के खिलाफ भी हम उसकी रिपोर्ट के आधार पर देखेंगे कि क्‍या कार्यवाही हो सकती है। बाकी पानी की समस्‍या का जहां तक सवाल है, माननीय सदस्‍य सब चिंता करते हैं। पीने के पानी और खेती-बाड़ी के पानी का जिस तरीके के हालात राजस्‍थान और देश में हो रहे हैं, बरसात कम हो रही है, लगातार अण्‍डर ग्राउंड वाटर का दोहन हो रहा है, सरफेस वाटर कम है, देश का 10 प्रतिशत एरिया है और 1.16 प्रतिशत सरफेस वाटर है तो यह आपकी चिंता वाजिब है पर मैं आपको यह कह सकता हूं कि दो साल के अन्‍दर पीने के पानी के सम्‍बन्‍ध में राजस्‍थान सरकार के द्वारा जो व्‍यवस्‍था की गई है इससे विशेष कोई असामान्‍य परिस्थिति पैदा नहीं हुई है, लोगों को पीने का पानी हमने मुहैया कराया है। जहां तक हैण्‍ड पम्‍प मरम्‍मत का सवाल है, हमने दो गाडि़यों के आर्डर कर दिये हैं। अगर आपके नहीं लगी है तो हम फटाफट लगवा देंगे। यह भी पूरे राजस्‍थान के लिए लगाई है, आप क्‍यों खड़े हो रहे हो, आपके भी लग जाएगी पंचायत समिति में। हर जगह पंचायत समिति में 2-2 गाडि़यों की व्‍यवस्‍था हमने की है और अगर कहीं ऐसा क्रिटिकल एरिया है, पहाड़ी एरिया है जहां आने-जाने में ज्‍यादा टाइम लगता है, अब हैण्‍ड पम्‍प ड्राई होना, यह स्‍वाभाविक है, मैंने कहा कि दोहन ज्‍यादा हो रहा है, रिचार्ज कम हो रहा है इसलिए माननीय मुख्‍य मंत्री महोदया ने जल अभियान शुरू किया है उसमें सारे माननीय सदस्‍य जो सदन के हैं उन सब से भी मैं अनुरोध करना चाहूंगा कि अपन जहां पर भी जाएं, कम से कम अपना सहयोग दें जिससे राजस्‍थान में आने वाले समय में जल का संकट नहीं हो। अब ड्राई हैण्‍ड पम्‍प के भुगतान का जो निर्णय है, यह हमारी नीति निर्धारण समिति में हुआ है उसकी पालना हम कर रहे हैं। पालना इसलिए कह रहे हैं कि कई जगह ऊंचा खोदकर के वो पैसा ले लें इसलिए रखा है बा‍की जहां तक मेरा जो व्‍यक्तिगत मत है इसमें ड्राई रहना या नहीं रहना अगर पूरी गहराई तक खोदे तो किसी ठेकेदार की गलती नहीं है, हमारा हाइड्रोजियोलॉजिस्‍ट पाइंट देता है उसके बाद में ठेकेदार पाइंस बनाता है चाहे हैण्‍ड पम्‍प का हो चाहे ट्यूबवैल का हो। पर चूंकि फैसला पहले का है इसलिए हम उस फैसले के हिसाब से चल रहे हैं और अगर उसमें कहीं पर आपको यह शिकायत है तो हम उसकी जांच करायेंगे। जो आपने आज सदन में उठाया है इसी की प्रोसीडिंग लेकर के उसके आधार पर जांच करा देंगे, आपसे अलग से लिखित में लेने की आवश्‍यकता नहीं है।

श्री उपाध्‍यक्ष: सदन की मेज पर रखे जाने वाले पत्रादि। श्री घनश्‍याम तिवाड़ी, शिक्षा मंत्री एक अधिसूचना सदन की मेज पर रखेंगे।

सदन की मेज पर रखे गये पत्र

अधिसूचना

श्री युनुस खान (श्री घनश्‍याम तिवाड़ी के स्‍थान पर): उपाध्‍यक्ष महोदय, आपकी अनुमति से मैं शिक्षा विभाग की अधिसूचना संख्‍या एफ.3(18) शिक्षा-4/2004 दिनांक 7.6.2005 जिसके द्वारा राजस्‍थान प्राइवेट विश्‍वविद्यालय नियम, 2005 विरचित किये गये हैं, सदन की मेज पर रखता हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री राजेन्‍द्र राठौड़, सार्वजनिक निर्माण मंत्री एक अधिसूचना सदन की मेज पर रखेंगे।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं सार्वजनिक निर्माण विभाग की अधिसूचना संख्‍या एफ.8(21) पी.डब्‍ल्‍यू./2004/पार्ट-1 दिनांक 3.9.2005 जिसके द्वारा राज्‍य सरकार ने रोड इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर डवलपमैंट कम्‍पनी ऑफ राजस्‍थान के साथ कतिपय सड़कों के विकास के लिए करार किया है, को सदन की मेज पर रखता हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री कालूलाल गुर्जर, पंचायती राज मंत्री दो अधिसूचनाएं सदन की मेज पर रखेंगे।

श्री कालूलाल गुर्जर (पंचायती राज मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं पंचायती राज विभाग की निम्‍न दो अधिसूचनाएं सदन की मेज पर रखता हूं।

I

अधिसूचना संख्‍या-एफ.4(5)स्‍था.स.चु./पंरावि/विधि/2001/ 1045 दिनांक 5.4.2005 जिसके द्वारा राजस्‍थान पंचायती राज (स्‍थायी समिति गठन) नियम, 2000 में संशोधन किया गया है।   

II

अधिसूचना संख्‍या-एफ.37(6)पीआरडी/एडीएम-2/क्‍लास-IV/ प्रोम/प्‍लान/03/2031 दिनांक 20.7.2005 जिसके द्वारा राजस्‍थान पंचायती राज नियम,1996 में संशोधन किया गया है।

 

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री रामनारायण डूडी, राजस्‍व मंत्री 11 अधिसूचनाएं सदन की मेज पर रखेंगे।

श्री रामनारायण डूडी (राजस्‍व मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं राजस्‍व विभाग की निम्‍न 11 अधिसूचनाएं सदन की मेज पर रखता हूं।

I

अधिसूचना संख्‍या-एफ.6(7)राज-6/95/21 दिनांक 29.9.2005 जिसके द्वारा भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी श्री ए.श्रीनिवासन को उनके क्षेत्र अधिकार के भीतर सहायक कलेक्‍टर नियुक्‍त किया गया है ।  

 

II

अधिसूचना संख्‍या-एफ.16(1)राज-6/04/22 दिनांक 1.10.2005 जिसके द्वारा श्री पूनमचन्‍द शर्मा को जिला बीकानेर हेतु भू-आवंटन सलाहकार समिति का सदस्‍य नियुक्‍त किया गया है ।

 

III

अधिसूचना संख्‍या-एफ.6(12)राज-6/99/पार्ट/23 दिनांक 13.10.2005 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्‍या- प.6(12)राज-6/99/30 दिनांक 18.9.1999 को अतिष्ठित करते हुए अनाधिमुक्‍त सरकारी भूमि के आवंटन हेतु निबंधन और शर्तें जारी की गई है ।

 

IV

अधिसूचना संख्‍या-एफ.9(21)राज-6/05/24दिनांक 20.10.2005 जिसके द्वारा राजस्‍थान भू-राजस्‍व (पापर खार तथा सज्‍जी उत्‍पादन क्षेत्रों का पट्टा) नियम, 1968 में संशोधन किये गये है ।

V

अधिसूचना संख्‍या-एफ.6(14)राज-6/95/25 दिनांक 21.10.2005 जिसके द्वारा अधिसूचना संख्‍या-एफ.6(14)राज-6/95/9 दिनांक 28.4.2004 में संशोधन किया गया है ।

VI

अधिसूचना संख्‍या-एफ.14(1)राज-6/2005/26 दिनांक 9.11.2005 जिसके द्वारा सार्वजनिक उपयोग के भवन निर्माण हेतु नियमों के अधीन जिला कलेक्‍टर दिनांक 31.3.2006 तक माननीय उच्‍च न्‍यायालय द्वारा प्रतिबंधित भूमि को छोड़कर भूमि आवंटन कर सकेंगे ।

VII

अधिसूचना संख्‍या-एफ.6(9)राज-6/96/पार्ट/10 दिनांक 6.1.2006 जिसके द्वारा स्‍थानीय निकायों को राजकीय भूमि के हस्‍तांतरण के संबंध में लिये जाने वाली दर का निर्धारण किया गया है ।

VIII

अधिसूचना संख्‍या-एफ.15(5)राज-6/94/22 दिनांक 20.1.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान पास बुक (कृषि जोत अधिनियम)1994 को अजमेर जिले की तहसील नसीराबाद में लागू करने के लिए दिनांक 1.4.2006 की तिथि नियत की गई है ।

IX

अधिसूचना संख्‍या-एफ.16(1)राज-6/04/23 दिनांक 27.1.2006 जिसके द्वारा श्री अर्जुनराम पुरोहित, पूर्व सरपंच को जिला सिरोही हेतु भू-आवंटन सलाहकार समिति का सदस्‍य नियुक्‍त किया गया है । 

X

अधिसूचना संख्‍या-एफ.2(4)राज-6/2001/25 दिनांक 10.2.2006 जिसके द्वारा ग्रामदानी गांव आंकल जिला जैसलमेर की ग्रामदानी भूमि पर राजस्‍थान अक्षय ऊर्जा निगम को विंड पावर प्रोजेक्‍ट की स्‍थापना हेतु ग्राम सभा के अधिकार को समाप्‍त किया गया है ।

XI

अधिसूचना संख्‍या-एफ.11(1)राज-6/04/26 दिनांक 17.2.2006 जिसके द्वारा राजस्‍थान औद्योगिक क्षेत्र आवंटन नियम, 1959 में संशोधन किया गया है ।

 

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री भवानी सिंह राजावत, संसदीय सचिव दो अधिसूचनाएं सदन की मेज पर रखेंगे।

श्री भवानी सिंह राजावत (संसदीय सचिव): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं अधिसूचना संख्‍या-प.2(1)(1)रोल/ निर्वा/2005/3165 दिनांक 8 अगस्‍त, 2005 एवं अधिसूचना संख्‍या-.2(1)(1)रोल/निर्वा/2004/172 दिनांक 25.1.2006 जिसके द्वारा भारत परिसीमन आयोग की लोकसभा/विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों की वर्ष 2001 की जनगणना के आधार पर परिसीमन आयोग के सदस्‍यों की विमत टिप्‍पण तथा लोकसभा/विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्सीमांकन किया गया है, सदन की मेज पर रखता हूं।

प्रतिवेदन एवं लेखे

श्री उपाध्‍यक्ष: प्रतिवेदन एवं लेखे। श्री नरपत सिंह राजवी, उद्योग मंत्री, सांभर साल्‍ट्स लिमिटेड का 40वां वार्षिक प्रतिवेदन सदन की मेज पर रखेंगे।

श्री नरपत सिंह राजवी (उद्योग मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं कम्‍पनी अधिनियम, 1956 की धारा 619-ए के अंतर्गत सांभर साल्‍ट्स लिमिटेड का 40वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2004-2005 सदन की मेज पर रखता हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री राजेन्‍द्र राठौड़, सार्वजनिक निर्माण मंत्री राजस्‍थान स्‍टेट रोड डवलपमेंट एण्‍ड कंस्‍ट्रक्‍शन कॉरपोरेशन लिमिटेड का 5वां वार्षिक प्रतिवेदन एवं लेखे सदन की मेज पर रखेंगे।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़ (सार्वजनिक निर्माण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं कम्‍पनी अधिनियम 1956 की धारा 619(ए)(3) के अंतर्गत राजस्‍थान स्‍टेट रोड डवलपमेंट एण्‍ड कंस्‍ट्रक्‍शन कॉरपोरेशन लिमिटेड का 5वां वार्षिक प्रतिवेदन एवं लेखे वर्ष 2004-2005 सदन की मेज पर रखता हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री युनुस खान, यातायात मंत्री राजस्‍थान राज्‍य पथ परिवहन निगम का अंकेक्षण प्रतिवेदन व प्रमाण पत्र सदन की मेज पर रखेंगे।

श्री युनुस खान (यातायात मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं सड़क परिवहन निगम अधिनियम, 1950 की धारा 33(4) के अंतर्गत राजस्‍थान राज्‍य पथ परिवहन निगम के लेखों का 31 मार्च, 2004 को समाप्‍त हुए वर्ष के लिए अंकेक्षण प्रतिवेदन व प्रमाण पत्र सदन की मेज पर रखता हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे, वन एवं पर्यावरण मंत्री राजस्‍थान राज्‍य प्रदूषण नियंत्रण मण्‍डल के पांच वार्षिक लेखे एवं राजस्‍थान प्रदूषण नियंत्रण मण्‍डल का वार्षिक प्रतिवेदन सदन की मेज पर रखेंगे।

श्री लक्ष्‍मीनारायण दवे (वन एवं पर्यावरण मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1974 की धारा 40 (7) के अंतर्गत राजस्‍थान राज्‍य प्रदूषण नियंत्रण मण्‍डल के वार्षिक लेखे वर्ष 1996-97, 1997-98, 1998-99, 1999-2000 एवं 2000-2001; एवं जल अधिनियम, 1974 की धारा 39 (2) के अन्‍तर्गत राजस्‍थान राज्‍य प्रदूषण नियंत्रण मण्‍डल का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2004-2005 सदन की मेज पर रखता हूं।

 

.....

Vkj/akt/1410/2d

 

श्री उपाध्‍क्ष: श्री प्रभुलाल सैनी, कृषि मंत्री, राजस्‍थान राज्‍य भण्‍डार व्‍यवस्‍था निगम का 47वां वार्षिक प्रतिवेदन एवं राजस्‍थान स्‍टेट एग्रो इण्‍डस्‍ट्रीज कारपोरेशन लिमिटेड का 35वां वार्षिक प्रतिवेदन सदन की मेज पर रखेंगे।

श्री प्रभुलाल सैनी(कृषि मंत्री): उपाध्‍यक्ष महोदय, दी वेयरहाउसिंग कारपोरेशन एक्‍ट, 1962 की धारा 31(11) के अन्‍तर्गत राजस्‍थान राज्‍य भण्‍डार व्‍यवस्‍था निगम का 47वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2004-2005 एवं कम्‍पनी अधिनियम, 1956 की धारा 619-ए(3) के अन्‍तर्गत राजस्‍थान स्‍टेट एग्रो इण्‍डस्‍ट्रीज कारपोरेशन लिमिटेड का 35वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2003-2004 सदन की मेज पर रखता हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री वीरेन्‍द्र मीणा, वित्‍त राज्‍य मंत्री, राजस्‍थान राज्‍य गंगानगर शुगर मिल्‍स लिमिटेड जयपुर का वार्षिक प्रतिवेदन सदन की मेज पर रखेंगे।

श्री रामनारायण डूडी(राजस्‍व मंत्री) (श्री वीरेन्‍द्र मीणा के स्‍थान पर): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपकी अनुमति से मैं कम्‍पनी अधिनियम, 1956 की धारा 619-ए(3) के अन्‍तर्गत राजस्‍थान राज्‍य गंगानगर शुगर मिल्‍स लिमिटेड जयपुर का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2004-2005 सदन की मेज पर रखता हूं।

 

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री गजेन्‍द्र सिंह, ऊर्जा राज्‍य मंत्री , राजस्‍थान अक्षय ऊर्जा निगम लिमिटेड का 10वां वार्षिक प्रतिवेदन सदन की मेज पर रखेंगे।

श्री गजेन्‍द्र सिंह(ऊर्जा राज्‍य मंत्री): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं कम्‍पनी अधिनियम, 1956 की धारा 619-ए के अन्‍तर्गत राजस्‍थान अक्षय ऊर्जा निगम लिमिटेड का 10वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2004-2005 सदन की मेज पर रखता हूं।

कार्य सलाहकार समिति के 11वें प्रतिवेदन का उपस्‍थापन

श्री उपाध्‍यक्ष: श्री महावीर प्रसाद जैन, सरकारी मुख्‍य सचेतक, कार्य सलाहकार समिति के 11वें प्रतिवेदन का उपस्‍थापन करेंगे।

श्री महावीर प्रसाद जैन(सरकारी मुख्‍य सचेतक): मैं कार्य सलाहकार समि‍ति के 11वें प्रतिवेदन का उपस्‍थापन करता हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: सरकारी मुख्‍य सचेतक यह भी प्रस्‍ताव करेंगे कि यह सदन कार्य सलाहकार समिति के 11वें प्रतिवेदन पर अपनी सहमति प्रकट करता है।

श्री महावीर प्रसाद जैन(सरकारी मुख्‍य सचेतक): माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूं कि यह सदन कार्य सलाहकार समिति के 11वें प्रतिवेदन पर अपनी सहमति प्रकट करता है।

 

डा. सी.पी.जोशी: माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा पाइंट आफ आर्डर है। यह जो प्रतिवेदन रख रहे हैं, उसमें राज्‍यपाल के अभिभाषण पर डिबेट का उल्‍लेख किया गया है। मैं उपाध्‍यक्ष महोदय, आपका ध्‍यान आकर्षित करना चाहता हूं कि कांस्‍टीट्यूशन की धारा 174 एण्‍ड 175, 174 का हैडिंग है ‘Sessions of the State Legislature, prorogation and dissolution’ और 175 का है ‘Right of Governor to address and send messages to the House or Houses’ और 176 का है ‘Special Address by the Governor’. उपाध्‍यक्ष महोदय, राजस्थान विधान सभा को जो आहूत किया गया है, वह माननीय चौधरी साहब, जो हमारे सचिव महोदय है, गवर्नर साहब के एड्रेस में 174 का उन्‍होंने उल्‍लेख किया है कि ‘’भारत के संविधान के अनुच्‍छेद 174 के खण्‍ड (1) द्वारा प्रदत्‍त शक्तियों का प्रयोग करते हुए मैं, प्रतिभा पाटील, राज्‍यपाल राजस्‍थान एतद् द्वारा 12वीं राजस्‍थान विधान सभा का पंचम् अधिवेशन मंगलवार दिनांक 28 फरवरी, 2006 को 11.00 बजे पूर्वान्‍ह राजस्‍थान विधान सभा भवन ज्‍योति नगर जयपुर में आहूत करती हूं।‘’

        माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह 174 में आहूत किया गया है और 175 में नहीं किया गया है और यह हमारी परम्‍परा रही है कि हम परम्‍पराओं के शैल्‍टर में रहकर बात करते हैं। उपाध्‍यक्ष महोदय, विधान सभा के बुलेटिन संख्‍या-2 में  विधान सभा के कार्य तथा अन्‍य विषयों के बारे में जानकारी दी। उसमें उल्‍लेख है कि 12वीं विधान सभा का पंचम् सत्र होगा, उसमें विधान सभा के समक्ष महामहिम राज्‍यपाल महोदय का अभिभाषण होगा। उसमें न आर्टिकल 174 मेंशन है, न 175 मेंशन है। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, 174 आर्टिकल में सेशन के सम्‍बन्‍ध में यह व्‍यवस्‍था की गई है कि छह महीने के अन्‍दर सेशन होना चाहिए, यह अधिकार गवर्नर साहब का है। 175 में स्‍पेसिफिक हैडिंग दिया गया है कि गवर्नर साहब को राइट किया है एड्रेस करने का और 176 में यह कहा गया है कि स्‍पेशल सेशन गवर्नर साहब बुला सकते हैं। इसका मतलब गवर्नर की पावर को 174 में डिफाइन किया गया है। 175 में स्‍पेसिफिक किया गया है कि 175 में गवर्नर साहब हाउस को बुला सकते हैं और 176 में यह कहा गया है कि स्‍पेशल परपज के लिए भी गवर्नर साहब बुला सकते हैं और मैं माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, कौल एण्‍ड शकधर की जो किताब है पार्लियामेंट प्रेक्टिसेज एण्‍ड प्रोसीजर आफ पार्लियामेंट, उसमें यह लिखा है उपाध्‍यक्ष महोदय, “In the States it is the Governor who delivers the Address to the State Legislature informing it “of the causes of its summons”.” My contention is, इसमें काजेज आफ सम्‍मन्‍स का कहीं उल्‍लेख नहीं है। यह आगे लिखा हुआ है उपाध्‍यक्ष महोदय कि “Being a statement of policy of the Government, the Address is drafted by the Government: it is not the President but the Government who are responsible for the contents of the Address.” उपाध्‍यक्ष महोदय, यह जो सदन आहूत करने की जिसकी हम चर्चा कर रहे हैं इसमें काजेज आफ सम्‍मन्‍स नहीं है। 174 के अन्‍तर्गत क्‍यों बुलाया, 175 के अन्‍तर्गत क्‍यों नहीं बुलाया? 175 के अन्‍तर्गत बुलायें तो इसमें काजेज आफ सम्‍मन्‍स लिखा जाना चाहिए था कि यह सदन जो बुलाया गया है इसमें काजेज आफ सम्‍मन्‍स यह हैं। उपाध्‍यक्ष महोदय, 174 में लिखा हुआ है कि छह महीने में एक बार सदन होगा, यह तो 174 में है और यह 175 में आपको यह बाइंड किया हुआ है कि आपको काजेज आफ सम्‍मन्‍स लिखने पड़ेंगे कि आपने इस सत्र को क्‍यों बुलाया, सत्र का क्‍या उद्देश्‍य है? नया सत्र है तो बजट पास कर रहे हैं, आपकी क्‍या पालिसीज हैं? इसका कहीं न कहीं आपको इसमें बुलाने के सम्‍बन्ध में उल्‍लेख करने की आवश्‍यकता है उपाध्‍यक्ष महोदय। मैं नहीं समझता उपाध्‍यक्ष महोदय कि प्रेक्टिस के आधार पर, परम्‍पराओं के आधार पर संविधान की जो व्‍यवस्‍था है, उन व्‍यवस्‍थाओं का हम पालन नहीं करें।

        मैं आपका ध्‍यान आकर्षित करना चाहता हूं कि यदि हमने परम्‍पराओं के आधार पर संविधान में उल्‍लेखित जो हमारे एक्‍ट में प्रोविजन हैं, उनका यदि हमने पालन नहीं किया तो जो डिबेट हम कर रहे हैं माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, वह असंवैधानिक डिबेट होगी, संवैधानिक डिबेट नहीं होगी इसलिए उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं, विनम्र शब्‍दों में करना चाहता हूं कि आप खुद वकील हैं, आप लर्नेड वकील हैं, हाईकोर्ट में आप प्रेक्टिस करते हैं, मुझे बता दें कि 174 के अन्‍दर ही यदि गवर्नर को बुलाना था और गवर्नर को बुलाकर ही एड्रेस करना था तो 175 क्‍लाज की संवैधानिक जरूरत ही नहीं थी, 176 की भी जरूरत नहीं थी इसलिए माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं यह कहना चाहता हूं कि 176 को आप देखें। 176 में स्‍पेशल मेंशन कर रखा है कि “Provision shall be made by the rules regulating the procedure of the House or either House for the allotment of time for discussion…” मतलब स्‍पेशल सेशन बुलाने के सम्‍बन्‍ध में गवर्नर जब एड्रेस करेंगे तो उसके लिए नियम बनाने पड़ेंगे अन्‍यथा जो हमारी पार्लियामेंट प्रेक्टिस की जो बुक्‍स हैं, उसके आधार पर गवर्न होंगे इसलिए माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं कहना चाहता हूं कि 174 के अन्‍तर्गत माननीय गवर्नर साहब ने खाली यह कहा है कि यह उनका अधिकार है कि छह महीने में सेशन बुलाना चाहिए, बिलकुल ठीक है। पर 175 बाउंड करता है आपको कि गवर्नर साहब जो एड्रेस करेंगे उस एड्रेस को सरकार उनको जो लिखकर भेजती है, उसमें कंटेन्‍ट्स क्‍या है, काज आफ सम्‍मन  क्‍या है? आप नया सेशन बुलाना चाहते हैं, बजट पर डिस्‍कस करना है, यह आपको काजेज आफ सम्‍मन्‍स में मेंशन करना चाहिए, यह पार्लियामेंट प्रेक्टिस में उसको कोट किया है। माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह पेज नम्‍बर 197, इसमें क्लियरली मेंशन किया हुआ है, मैं दुबारा रिपीट कर रहा हूं ““In the States it is the Governor who delivers the Address to the State Legislature informing it “of the causes of its summons”.” आगे लिखा है माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपने यह जो बुलेटिन में लिख रखा है “Therefore, after the Address, a separate paragraph giving details of the government business expected to be taken during the session … published in the Bulletin …” यह एक्‍सपेक्‍टेड टू बी टेकन आपने लिखा है, इसमें मुझे बता दें, आप बुलेटिन-2 को उठाकर देख लें, न इसमें 175 का उल्‍लेख है, न 174 का उल्‍लेख है। उपाध्‍यक्ष महोदय, हम परम्‍पराओं के आधार पर यदि संविधान का उल्‍लंघन करना चाहते हैं तो यह हमारा सबका धर्म बनता है कि कानून बनाने वाले यदि कानून की पालना नहीं कर रहे हैं तो मैं समझता हूं, इससे ज्‍यादा दुर्भाग्‍यपूर्ण स्थिति नहीं हो सकती इसलिए मेरा विनम्र शब्‍दों में निवेदन है उपाध्‍यक्ष महोदय, आप कृपया यह परम्‍पराओं के आधार पर सदन को चलाने की बनिस्‍बत संवैधानिक व्‍यवस्‍थाओं के अन्‍तर्गत सदन चलायें और इस सदन को आप साइनेडाई बन्‍द करिये और 175 के अन्‍दर दुबारा गवर्नर साहब काज आफ सम्‍मन लिखें, उसके बाद सदन को आहूत करें तब यह जो हमारा सदन है वह संवैधानिक उत्‍तरदायित्‍व का निर्वहन कर पायेंगा अन्‍यथा यह गैर संवैधानिक काम करके हम राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण पर डिबेट करवा रहे हैं, उपाध्‍यक्ष महोदय, यह संविधान का खुला उल्‍लंघन होगा और मैं समझता हूं कि संविधान के प्रति निष्‍ठा ली है, इस सरकार ने ली है, संविधान के प्रति मंत्रियों ने निष्‍ठा ली है, संविधान के प्रति हम सबने निष्‍ठा ली है इस हाउस के अन्दर तो हमारा ज्‍यादा धर्म बन जाता है कि जनता के जो इग्‍नोरेंट आदमी हैं, जो कानून नहीं जानते हैं, उनको यह मैसेज हो कि यह राजस्‍थान विधान सभा जो सबसे बड़ी सर्वोच्‍च संस्‍था है, यह संविधान का पालन करती है और पालन करने के लिए माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि आप 174 को दुबारा देख लें, 175 को दुबारा देख लें और यदि इसमें कोई करेक्‍शन करने की आवश्‍यकता हो तो इसमें कोई हैठी नहीं होती है, सरकार सदन को साइनेडाई करके 175 के अन्‍तर्गत काजेज आफ सम्‍मन्‍स के आधार पर हमें इन्‍फोर्म करना चाहिए कि हमको इस सदन में इस परपज के लिए बुलाया है। आप केवल मात्र यह कहकर शैल्‍टर नहीं कर सकते कि छह महीने में हमको सदन बुलाना था, वह तो छह महीने का मेण्‍डेटरी है। यह तो गवर्नर ने अपने रोल का काम किया है, वह तो सरकार को इन्‍फोर्म किया है कि छह महीने में सदन बुलाया जाये, लेकिन किसलिए बुलाया है सदन, इसके लिए काजेज आफ सम्‍मन्‍स का उल्‍लेख करना जरूरी है उपाध्‍यक्ष महोदय, यह पार्लियामेंट प्रेक्टिस का सिस्‍टम रहा हुआ है इसलिए मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि कृपया आप इसमें यह व्‍यवस्‍था दें, जो डिबेट हम प्रारम्भ करना चाह रहे हैं, यह संवैधानिक डिबेट हो, 175 के अन्‍तर्गत डिबेट हो और इस सरकार ने काजेज आफ सम्‍मन्‍स नहीं दिये हैं और केवल मात्र इसलिए गवर्नर साहब से अभिभाषण दिला दिया। कल बड़ी तकलीफ हुई माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, डेढ़ घंटे तक गवर्नर साहब से अभिभाषण दिलाया, तीन-तीन महिला हैं, महिला मुख्‍य मंत्री, महिला अध्‍यक्ष और महिला गवर्नर के साथ ज्‍यादती कर रहे हैं और जो गैर संवैधानिक काम हैं तो यह तो हमारी ज्‍यादा ड्यूटी बन जाती है कि इस गैर संवैधानिक काम के लिए हम जनता को यह बतायें कि यह सरकार संवैधानिक दृष्टि से काम नहीं कर रही है, संविधान का पालन नहीं कर रही है और गवर्नर जैसे पद वाली से यह कराया है, वह भी गैर संवैधानिक काम कराया है इसलिए इस सदन को तुरन्‍त साइनेडाई  डिक्‍लेयर किया जाये और दुबारा 175 के अन्‍तर्गत काज आफ सम्‍मन के आधार पर हाउस को बुलाकर डिबेट करवाई जाये...... .......

 

Jkj/akt/1420/2e

 

डा.एन.एस.गुर्जर:  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आर्टिकल 174 एण्‍ड 175 जिसका जिक्र नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य ने किया, उपाध्‍यक्ष महोदय, आप वकील हैं और आप अच्‍छी तरह जानते हैं कि 174 किसके लिए है, “Sessions of the State Legislature, prorogation …” यह सेशन को बुलाने के लिए है, आहूत करने के लिए है और 175 आर्टिकल है, यह गवर्नर साहब एड्रेस करेंगे हाउस को, उसके लिए है।  दो डिफरेंट चीजें हैं।  एक तो हाउस को सम्‍मन करना, एक हाउस को एड्रेस करना।  सम्‍मन करने के लिए आर्टिकल 174 है कांस्‍टीट्यूशन का और एड्रेस करने के लिए आर्टिकल 175 है कांस्‍टीट्यूशन का और स्‍पेशल सेशन अगर गवर्नर साहब बुलाते हैं, उसके लिए आर्टिकल 176 है। This is not special session, this is regular Budget Session.  तो इसमें 174 लागू होगा।

श्री सी.पी.जोशी:  क्‍यों?

डा.एन.एस.गुर्जर:  क्‍योंकि this is regular session, Budget session.

डा.सी.पी.जोशी:  Why not 175?

डा.एन.एस.गुर्जर: नहीं-नहीं, 175 एड्रेस करने की पावर देता है गवर्नर साहब को, हाउस को।  174 में हाउस को आहूत करने का प्रोवीजन है।  मैं, उपाध्‍यक्ष महोदय, आपका ध्‍यान एक और दिलाना चाहूंगा कि यह जो सम्‍मन निकाला, यह जो आज्ञा निकाली यहां से, अधिसूचना निकाली है, इसमें यह साफ लिखा हुआ है- “In exercise of the powers conferred upon me by cl. (1) of Art. 174 of the Constitution of India …” जिसमें उनको पावर है हाउस को सम्‍मन करने की, “ … I Pratibha Patil, Governor of Rajasthan, do hereby summon the 5th session of the 12th RajasthanLegislative Assembly at 11.00 A.M. on Tuesday, the 28th February, 2006 at the Rajasthan Vidhan Sabha Bhawan, Jyoti Nagar, Jaipur.   (Pratibha Patil). साफ है, लोक सभा के अंदर भी जितने सम्‍मन होते हैं उसका भी पैटर्न यही है, राज्‍य विधान सभा के अंदर अब तक मैंने देखे हैं, पढ़ता रहता हूं, आप निकलवा लें रिकार्ड, उनमें भी सेम...

श्री सी.पी.जोशी:  यह पढ़ लिया करो, यह पढ़ लिया करो।

डा.एन.एस.गुर्जर:  हां, मैं बता रहा हूं अभी।  मैं कोल एण्‍ड शकधर पर भी आ रहा हूं, उपाध्‍यक्ष महोदय। (व्‍यवधान)

श्री सी.पी.जोशी:  आपको पढ़ाते तो अच्‍छा है, आप तो पढ़े हुए हैं यह।

डा.एन.एस.गुर्जर:  एक सेट पैटर्न है,क्‍योंकि क्लियर है, हाउस को सम्‍मन करने के लिए, Art. 175 is not for that. Art. 174 is related for the summoning of the House. And Art. 175 is related to the Address to the House.  तो एड्रेस द हाउस के लिए नहीं है, सम्‍मन किया है उसको, उसके बाद जब सम्‍मन करेंगे बजट सेशन के लिए तो एड्रेस का राइट अपने आप हो जाता है इसलिए 174 में महामहिम राज्‍यपाल महोदय ने हाउस को आहूत किया और यह कांस्‍टीट्यूशन में है।  अब आप कोल एण्‍ड शकधर को कोट कर रहे थे नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य, वह अच्‍छी तरह से जानते हैं कि कांस्‍टीट्यूशन को कोई भी, न कोल एण्‍ड शकधर और न कोई नियम की पुस्‍तक, ओवररूल नहीं कर सकता, कांस्‍टीट्यूशन के प्रोवीजन्‍स को।

श्री सी.पी.जोशी:  सिवाय नाथू सिंहजी के।

डा.एन.एस.गुर्जर:  आज कोल शकधर के आधार पर अगर आप कांस्‍टीट्यूशन के किसी भी आर्टिकल को उड़ाना चाहो, आप कोल एण्‍ड शकधर के आधार पर कांस्‍टीट्यूशन के किसी भी प्रोवीजन को उड़ाना चाहो, आप नहीं उड़ा सकते। The Constitution of India is above all. The book of Kaul & Shakdhar give directions under the Constitution of India. Kaul & Shakdhar and our rule book, they give directions to the Houes under the Constitution of India.  इसलिए कांस्‍टीट्यूशन आफ इंडिया से ऊपर कोल एण्‍ड शकधर नहीं हो सकता।  इसलिए इसको रिजेक्‍ट किया जाय नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य नरे जो प्‍वाइंट आफ आर्डर उठाया है।  यही मैं आपसे अपील करना चाहता हूं।

श्री जोगेश्‍वर गर्ग:  माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, कल महामहिम गवर्नर महोदया ने कृपा करके इस हाउस को सम्‍बोधित किया।  आज नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य को अच्‍छी तरह से मालूम है कि टोडाराय सिंह से आने वाले माननीय सदस्‍य धन्‍यवाद प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत करने वाले हैं, उनको यह भी मालूम है कि वह कितने प्रभावशाली ढंग से धन्‍यवाद प्रस्‍ताव रखेंगे और इसलिए यह प्‍वाइंट आफ आर्डर एक साजिश के तहत उठाया गया है ताकि इनका ध्‍यान भंग हो जाय और उसमें वह कामयाब हो गये।

श्री सी.पी.जोशी:  उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं सप्‍लीमेंट करूंगा एक मिनट।  174 के पीछे मंशा यह है कि कोई भी सरकार पिछले समय में वेस्‍ट बंगाल में भी हुआ, कभी यह भी हुआ, छह महीने तक हाउस को सम्‍मन नहीं करे, यह चुनी हुई सरकार की मनमरजी पर नहीं है, इसलिए 174 में यह बाउंड किया है कि सक्‍स मंथ्‍स में गवर्नर हाउस को बुला सके, यह 174 का क्‍लाज है।  आधे वकील साहब और एडवोकेट जनरल बोलोगे तो डूबोगे, 174 के क्‍लाज की मंशा यह है उपाध्‍यक्ष महोदय, कि गवर्नर को  यह मेंडेटरी है कि यदि सिक्‍स मंथ्‍स के अन्‍तर्गत चुनी हुई सरकार हाउस को नहीं बुलाये तो गवर्नर प्रोरोगेट कर सकता है, यह पावर 174 में दी है।  175 में तो यह है कि एड्रेस कैसे करेंगे और एड्रेस करने में मुझे याद है उपाध्‍यक्ष महोदय, 1980 में हम एम.एल.. जीतकर आये थे, तब तत्‍कालीन प्रतिपक्ष के नेता भैरोंसिंहजी ने यह प्रश्‍न उठाया था, जो आज भी आपके इसमें, रूल्‍स में है कि काजेज ऑफ सम्‍मन मेंशन करना जरूरी है।  काजेज ऑफ सम्‍मन मेंशन नहीं करते हैं तो जो गवर्नर एड्रेस कर रहे हैं वह एड्रेस का कोई मतलब नहीं है।  तो 175 इसलिए रेलेवेंट है माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय।  174 तो यह है कि सरकार, जो सरकार वसुंधराजी मुख्‍य मंत्री की सरकार है, यह छह महीनरे में नहीं बुलाये, जैसे पिछली बार भी नहीं बुलाया, आखिरी दिन बुलाया उन्‍होंने, उसका सेफगार्ड करने के लिए कानून में व्‍यवस्‍था कर रखी है कि इनकी मनमरजी से छह महीने में यदि सरकार नहीं बुलायेगी तो गवर्नर उसको डाइरेक्‍शन देगा कि आपको इसमें करना पड़ेगा। That is the provision in Art. 174. 175 क्लियरली मेंशन करता है कि जब एड्रेस करेंगे तो एड्रेस करने के लिए उन्‍होंने 175 कर रखा है और इसमें हैडिंग दे रखा है।  अब नाथू सिंहजी जिस तरह से एलएल.एम. किये और जैसे एडवोकेट जनरल हैं, ऐसी राय दें, मुझे कोई तकलीफ नहीं है, मुख्‍य मंत्रीजी और सरकार इनकी राय की माने, हमें कोई तकलीफ नहीं है(व्‍यवधान)  आप बोलना, आप बिराजो।  आप, कोई फिल्‍म का डायलाग तो है नहीं कि अपन मुद्रा रचकर बोल लें फिल्‍म में, फिल्‍मों में डायलाग में कोई संविधान नहीं होता है, जो अपन बोलते हैं, वही तो लोगों को देखना पड़ता है, यहां तो संविधान की व्‍यवस्‍था के अन्‍दर काम करना पड़ता है उपाध्‍यक्ष महोदय।  इसलिए, उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं, यह कोल एण्‍ड शकधर की किताब में क्लियर मेंशन है कि  “In the States it is the Governor who delivers the Address to the State Legislature informing it “of the causes of its summons”.”  175 का उल्‍लेख करना मस्‍ट है उपाध्‍यक्ष महोदय, 174 तो केवलमात्र गवर्नर को यह अधिकार देता है कि यदि सरकार रिकमंडेशन नहीं करे, असेम्‍बली नहीं बुलाये, सरकार बुला सकती है, पहले भी बुला सकती है, तीन-तीन सेशन भी होते हैं, लेकिन 175 में काजेज आफ सम्‍मन करने का प्रोवीजन दे रखा है उपाध्‍यक्ष महोदय और 176 में कर रखा है स्‍पेशल सेशन बुलाने के लिए, इसलिए उपाध्‍यक्ष महोदय, 174 का शेल्‍टर इसलिए नहीं ले सकते हम, यह तो गवर्नर ने हाउस को इनफोर्म कर दिया कि हाउस होगा, लेकिन 175 में सरकार का धर्म बनता है, गवर्नर साहब को एड्रेस करने के लिए जो उन्‍होंने लिखा, उसके काजेज आफ सम्‍मन का इस बुलेटिन में कहीं न कहीं उल्‍लेख करते।  यदि बुलेटिन को आप मानते हैं तो।  जो बुलेटिन की कोई वेलेडिटी नहीं है।  बुलेटिन की वेलेडिटी कानून के ऊपर नहीं हो सकती।  इस बुलेटिन के अंदर जिसके आधार पर हमको कहा गया है, उसमें भी कहीं 174 का, 1275 का मेंशन नहीं है, आप कृपया नाथू सिंहजी, आप बड़े विद्वान हैं, इसीलिए आप यहां बैठे हुए हैं, आपकी विद्वता कम होती तो यहां बैठते, आगे बैठते आप, जितनी विद्वता आप में है, उस विद्वता के आधार पर हम देखें उपाध्‍यक्ष महोदय, तो 174 बिलकुल अलग है, 175 अलग है, 176 अलग है, इसलिए उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं, आप इस पर गम्‍भीरता से लें, यह परम्‍पराओं के आधार पर हाउस भी चलता है....

मोहम्‍मद माहिर आजाद:  आप लोगों को कह रहे हैं।

श्री सी.पी.जोशी:  लेकिन परम्‍पराएं,ख्‍जब यदि कानून की बात को कोई प्‍वाइंट आउट कर दे तो संविधान की जो व्‍यवस्‍था है उसका उल्‍लंघन नहीं होना चाहिए, यह धर्म बनता है आप और हम सब का, इसलिए उपाध्‍यक्ष महोदयस, आपसे फिर निवेदन करना चाहता हूं, आप अपनी रूलिंग रिजर्व कर लें, आप एडवोकेट जनरल को बुला लें, आप इसमें राय ले लें कि 174 ओनली बाइंडस द गवर्नर कि जब इलेक्‍टेड गवर्नमेंट यदि सम्‍मन नहीं करती है हाउस को तो 174 में गवर्नर बुला सकता है, चीफ मिनिस्‍टर की रिकमंडेशन की आवश्‍यकता भी नहीं है।  बाकी अदरवाइज और सब चीजों में गवर्नमेंट की रिकमंडेशन पर गवर्नर काम करता है।  174 में यह बाइंडिंग नहीं है।  आल द रिकमंडेशंस काउंसिल ऑफ मिनिस्‍टर्स की एडवाइस पर गवर्नर काम करता है, 174 का पावर, काउंसिल ऑफ मिनिस्‍टर्स की एडवाइस मेंडेटरी नहीं है।  यह प्रोवीजन 174 के अन्‍तर्गत किया गया है उपाध्‍यक्ष महोदय, इसलिए मैं निवेदन करना चाहता हूं, यह इसके साथ लिंक है, आप फिर मेहरबानी करके देख लें। Art. 174 debars the Council of Ministers to recommend to the Governor. Anf for all other purposes, the Governor is bound to act on the advice of the Council of Ministers. यह 174 को काउंसिल आफ मिनिस्‍टर्स एडवाइस नहीं भी करे तब भी गवर्नर हाउस को सम्‍मन कर सकता है, यह प्रोवीजन है।  175 का प्रोवीजन बहुत क्लियर है कि सरकार जब भी बुलायेगी तो सरकार को काजेज ऑफ सम्‍मन इसके बारे में लिखना पड़ेगा।  इस सरकार ने काजेज ऑफ सम्‍मन लिखा नहीं उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं गवर्नर की डिबेट पर बोलना चाहता नहीं, आप पूरी डिबेट को उठाकर देख लें, पिछले साल का हिसाब-किताब लगा लिया, 2006-07 में क्‍या करेंगे, कोई मेंशन ही नहीं है।  यहां 2012 में क्‍या करेंगे, वह मेंशन है।  2012 में इतनी बिजली पैदा करेंगे लेकिन 2006-07 में क्‍या करेंगे, इसका किसी डिपार्टमेंट का उल्‍लेख नहीं है।  डिपार्टमेंट की सारी सूचना  को इग्‍नोर कर दिया इन्‍होंने,

   काज ऑफ एक्‍शन का मेंशन करना जरूरी है, बिना काज ऑफ एक्‍शन के बुलेटिन में मेंशन किये हुए, आप  जिस राज्‍यपाल के भाषण का डिबेट करा रहे हैं, उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं फिर निवेदन करना चाहता हूं, यह गैर संवैधानिक व्‍यवस्‍था होगी, इसलिए मेहरबानी करके आप इस पर गंभीरता से सोचकर निर्णय करें, बाकी आप परम्‍पराओं के आधार पर, पचास साल से चल रही है, आज भी डिबेट करा देंगे, कोई फर्क नहीं पड़ता, जब गैर संवैधानिक काम हम करते ही आ रहे हैं, एक काम और कर दें, क्‍या फर्क पड़ता है, इसमें कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन हमारा धर्म बनता है कि जो हम कानून बनाने वाले आदमी आपका ध्‍यान आकर्षित कर रहे हैं, आपसे अपेक्षा करते हैं कि संविधा की रक्षा करेंगे आप और संविधान की रक्षा का एक ही तरीका है, इस हाउस को शाइने-डाई बंद करें, 175 में काल करें, सरकार से काज ऑफ सम्‍मन लें, उनको मेंशन करके आप हाउस में डिबेट करायेंगे तो यह संवैधानिक डिबेट होगी उपाध्‍यक्ष महोदय।

डा.एन.एस.गुर्जर:  उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं पुन: आर्टिकल 174 को पढ़कर सुनाना चाहता हूं आपको। “The Governor shall from time to time summon the House or each House of the Legislature of the State to meet at such time and place …”

                                                     ...

Bhs\akt\1430\2f

 

      टाइम एंड प्‍लेस इसमें दे रखा है “….at such time and place as he thinks fit, but six months shall not intervene between its last sitting in one session and the date appointed for its first sitting in the next session.

    (2) The Governor may from time to time,-….” यस बोल रहा हूं न “… (a) prorogue the House or either House; (b) dissolve the Legislative Assembly.” यानी यह गवर्नर साहब को समय पर टाइम बतायेंगी, स्‍थान बतायेंगी और हाउस को सम्‍मन करेंगी जबकि 74 में, 75 तो टोटली डिफरेंट है।  75 में अगर काउन्सिल है किसी स्‍टेट में और असेम्‍बलि है तो दोनों के ज्‍वाइंट सेशन को एड्रेस गवर्नर साहब करेंगे।  75 में एड्रेस करने का है और यह अच्‍छी तरह से जानते हैं।

डॉ.सी.पी.जोशी: 174 में नहीं है।  174 में दोनों हाउस को एड्रेस करने का नहीं है।

डॉ.एन.एस.गुर्जर: आप सुनिये, 75 है सम्‍मन का।  75 में कहीं नहीं लिखा हुआ है उपाध्‍यक्ष महोदय, कहीं भी (व्‍यवधान) हां, मैं बोल रहा हूं, please don’t disturb. आप कहीं भी उठाकर देख लें 75 में कहीं भी सम्‍मन शब्‍द नहीं है, पूरे आर्टिकल 175 में देख लें कहीं भी  सम्‍मन शब्‍द नहीं है और अगर आप इसको देखना चाहें तो वसु का जो कांस्टिट्यूशन है उसकी कमेंटेटरी देख लें। मेरी पढ़ी हुई है अभी लाया नहीं हूं आज मैं नहीं तो बता देता आपको।  इसका मतलब क्‍या है वसु की कमेंटेटरी पढ़ लें और उपाध्‍यक्ष महोदय, आपको यह अच्‍छी तरह पता है कि हाउस तब बुलाया जाता है जब गवर्नमेंट रिकमंड करके गवर्नर साहब को भेजती है कि हम इस समय हाउस बुलाना चाहते हैं उसके बाद क्‍योंकि एक ऑथोरिटी है कांस्टिट्यूश्‍नल ऑथोरिटी गवर्नर साहब इसलिए जब गवर्नमेंट रिकमंड करती है कि हम इस समय यह हाउस बुलाना चाहते हैं इस परपज से उसके बाद ही गवर्नर साहब यह आदेश प्रदान करते हैं हाउस सम्‍मन करने का इसलिए मैं समझता हूं कि इसमें अनकांस्टिट्यूश्‍नल कुछ नहीं है और जब से यह विधान सभा बनी है यह चल रहा है पार्लियामेंट में भी वो ही पैटर्न है हर विधान सभा में भी वो ही पैटर्न है इसलिए this is not unconstitutional at all. This is totally constitutional. इसलिए सही हुआ है जो भी हुआ है, न किसी को बुलाने की जरूरत है न किसी की राय करने की जरूरत है, आप इस पर अपनी राय दें और इस पाइंट ऑफ ऑर्डर को रिजेक्‍ट करें, I will request the hon’ble Chair.

 श्री महावीर प्रसाद जैन (सरकारी मुख्‍य सचेतक):  माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि जैसा नाथूसिंह जी ने कहा और नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य ने जो ऑब्‍जेक्‍शंस उठाये इस प्रकार के ऑब्‍जेक्‍शंस समय समय पर ये उठाते रहे हैं  इस विधान सभा में और वो हमारी परम्‍पराएं हैं जो अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍था है उसमें उसको रिजेक्‍ट किया जा चुका है पहले।  तो मैं इस सदन का ज्‍यादा समय नहीं लेना चाहता हूं यह जो प्रथम खंड है इसमें जो पेज 19 है अध्‍याय-4 में इसमें स्‍पष्‍ट तौर से कई बार सतीशचंद्र जी अग्रवाल ने इस प्रकार के प्रश्‍न उठाये और उसमें यह कहा कि 176 में कारण बताना आवश्‍यक है और इसलिए वो करना चाहिए तो इन बातों को रिजेक्‍ट करते हुए पहले ये निर्णय किये जा चुके हैं इसलिए इस पर पुनर्विचार करने की आवश्‍यकता नहीं है और इसे रिजेक्‍ट करने की आवश्‍यकता है।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍यगण, नाथद्वारा से आने वाले माननीय सदस्‍य ने ये जो आपत्ति उठायी है उस आपत्ति को मैं निराधार मानता हूँ क्‍योंकि जो 7 फरवरी, 2006 को आदेश राज्‍यपाल महोदय ने दिया था वो इस तरह से है, भारत के संविधान के अनुच्‍छेद 174 के खंड (1) द्वारा प्रदत्‍त शक्तियों का प्रयोग करते हुए मैं प्रतिभा पाटिल, राज्‍यपाल, राजस्‍थान एतद्द्वारा 12वीं राजस्‍थान विधान सभा का पंचम अधिवेशन मंगलवार, दिनांक 28 फरवरी, 2006 को 11.00 बजे पूर्वान्‍ह राजस्‍थान विधान सभा भवन, ज्‍योति नगर, जयपुर में आहूत करती हूं  उसके नीचे उसी दिन सचिव महोदय ने यह सूचना दी सदस्‍यों को मुझे आपसे निवेदन करना है कि आप तदनुसार विधान सभा के सत्र में भाग लें उसके बाद संविधान के आर्टिकल 175 के मुताबिक राज्‍यपाल महोदय ने सदन को अपना अभिभाषण दे दिया उसके बाद अब इस प्रकार का एतराज उठा रहे हैं कि सदन की कार्यवाही नियमानुसार नहीं हुई है।

डॉ.सी.पी.जोशी: तो कब उठायें फिर गवर्नर के सामने तो बोल नहीं सकते।  मौका तो यही है।  मौका कब है गवर्नर के बोलने के बाद? मौका तो अभी है तभी बोला हूं।

श्री उपाध्‍यक्ष: राज्‍यपाल महोदय के एड्रेस की 175 के अनुसार कार्यवाही हो चुकी है और अब उसके लिए आप...। (व्‍यवधान)

श्री जोगाराम पटेल:  आप सुन लें आप यों मत रहो कि आप ही विद्वान हो आप यह दिमाग  से निकाल लें।

डॉ.सी.पी.जोशी:  अभी रखा है डिस्‍कस अभी हो सकता है। 

श्री जोगाराम पटेल:  ऐसा है आप कभी सुनने का प्रयास तो करें।  कभी आप सुनें तो सही दूसरों को कभी आप सुनें तो सही। (व्‍यवधान)

डॉ.सी.पी.जोशी: आप दो साल नहीं हुए बैठो सीखो अभी।

श्री जोगाराम पटेल:  आप यह भूल जाओ दिमाग से 2 साल, 10 साल, 50 साल से अगर उलटा सीखेंगे तो उलटा ही अच्‍छा और सुनें तो सही यह कांस्टिट्यूश्‍नल अगर आपका ऑब्‍जेक्‍शन है यह कांस्टिट्यूशन के अकॉर्डिंग आहूत नहीं हुआ है तो फिर गवर्नर का एड्रेस कैसे हो गया आप बोलते गवर्नर के सामने की साहब आपने हाउस को अकॉर्डिंग टू कांस्टिट्यूशन आहूत नहीं किया है।

डॉ.सी.पी.जोशी: गवर्नर साहब के सामने बोलेंगे क्‍या? क्‍या बात कर रहे हो? 

श्री जोगाराम पटेल: तो कैसे बोलेंगे, किसके सामने बोलेंगे? गवर्नर का एड्रेस तो हो गया। (व्‍यवधान)

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य, संविधान के आर्टिकल 175 के मुताबिक the Governor may address the Legislative Assembly. And when the Governor has addressed the Legislative Assembly, now the procedure has started कि उसके ऊपर अब चर्चा होनी है। Therefore at this stage, this objection has got no meaning.

डॉ.सी.पी.जोशी: What was that stage where I should have raised it? आज पहली बार आपने रखा है पहले प्रश्‍न ऑवर था ।  गवर्नर एड्रेस था कल हाउस खतम हो गया. What was that stage? अच्‍छा उपाध्‍यक्ष महोदय, आप इस पर व्‍यवस्‍था दे दें कि वो कौनसी स्‍टेज थी जिसमें मुझे उठाना चाहिए था?

श्री उपाध्‍यक्ष:  गवर्नर एड्रेस होने के बाद किस बात का ऑब्‍जेक्‍शन?

डॉ.सी.पी.जोशी: उपाध्‍यक्ष महोदय, आप बतायें मैं किस स्‍टेज पर उठा सकता हूं?

श्री उपाध्‍यक्ष:When the Governor has addressed the House, …

डॉ. सी.पी. जोशी: उपाध्‍यक्ष महोदय, मुझे आप माफ करें मैं...।

श्री उपाध्‍यक्ष: माननीय सदस्‍य जब गवर्नर ने 175 के तहत एड्रेस कर दिया हाउस को अब आप कह रहे हैं कि एड्रेस गलत हो गया उसके लिए सूचना होना चाहिए था.  It has got no meaning.

श्री महावीर प्रसाद जैन:  अब आपने व्‍यवस्‍था दे दी।

डॉ.सी.पी.जोशी: उपाध्‍यक्ष महोदय, आपकी आज्ञा शिरोधार्य ।  गवर्नर के एक्‍शन को क्‍या हम डिस्‍कस कर सकते हैं हाउस में?

श्री उपाध्‍यक्ष: नहीं कर सकते।

डॉ.सी.पी.जोशी: तो फिर स्‍टेज कौनसी बची है? स्‍टेज बची जब हाउस में आप ले कर रहे हैं डिबेट को ले रहे हैं तभी तो बची है बाकी गवर्नर साहब के सामने बोल सकते नहीं और यह पहली बार ले हुआ है तब बात कर रहे हैं।  तब क्‍या बात करें बतायें मुझे, कब बात करें? What stage we should have spoken at? आप बतायें उपाध्‍यक्ष महोदय, मुझे किस स्‍टेज पर बोलना चाहिए था? मैं आपकी आज्ञा मानता हूं आप मुझे यह ज्ञान करा दें कि मुझे किस स्‍टेज पर बोलना चाहिए था?

श्री महावीर प्रसाद जैन: माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आप स्‍वयं मानते हैं कि गवर्नर के किसी भी एक्‍शन पर हम चर्चा नहीं कर सकते तो स्‍वयं उस पर चर्चा करके गलती कर रहे हैं।

डॉ.सी.पी.जोशी: मैं गवर्नर के एक्‍शन पर नहीं कर रहा हूं गवर्नमेंट के एक्‍शन पर कर रहा हूं ।

श्री महावीर प्रसाद जैन: यह गवर्नर का ही एक्‍शन है।

डॉ.सी.पी.जोशी: आप हाउस में जब ला रहे हैं डिस्‍कस करने के लिए उसको डिस्‍कस कर रहा हूं मैं। गवर्नर के एक्‍शन को डिस्‍कस नहीं कर रहा हूं मैं।

श्री महावीर प्रसाद जैन:  यह गवर्नर का ही एक्‍शन है 174 के तहत गवर्नर ने...।

डॉ.सी.पी.जोशी: आदरणीय जैन साहब, मैं गवर्नर के कृत्‍य पर डिस्‍कस नहीं कर रहा हूं आपने जो रखा है...।

श्री महावीर प्रसाद जैन: यह किसने बुलाया है?

डॉ.सी.पी.जोशी: आपने बिजनस एडवाइजरी कमेटी की जो रिपोर्ट रखी है उस पर डिस्‍कस किया है उसको. I have not discussed the Governor’s action. I have discussed the report which you have placed. आपने जो हाउस में रख दी है उस पर डिस्‍कस किया है मैंने।

श्री महावीर प्रसाद जैन:  वो रख रहा हूं जो सब पार्टियों के नेताओं ने तय किया है।

डॉ.सी.पी.जोशी: वो कृत्‍य आपका है चीफ व्हिप का वो गवर्नर का नहीं है।  यह कृत्‍य आपका है कि बिजनस एडवाइजरी कमेटी की रिपोर्ट हाउस में रखें।  उस पर डिस्‍कस कर रहा हूं मैं.  I am not discussing the Governor’s Address.

श्री महावीर प्रसाद जैन:  जब मान्‍यवर महामहिम  ले एड्रेस कर दिया उसके बाद मुझे बिजनस एडवाइजरी कमेटी की रिपोर्ट को रखने में कोई रोक नहीं सकता और न ही इस कार्यवाही से कोई रोक सकता इसलिए मेरे पर न तो आपने कोई ऑब्‍जेक्‍शन किया और यदि किया है तो वो अवैधानिक है ।

डॉ.सी.पी.जोशी: आप स्‍पीकर बन जाइये।

श्री उपाध्‍यक्ष:  माननीय सदस्‍य, जैसा मैंने निवेदन किया कि हाउस को आहूत करने के लिए आर्टिकल 174 के अंदर ही फिर से 175 के अंदर कोई अलग से एड्रेस करने के लिए दुबारा आहूत करने की आवश्‍यकता नहीं है और यह की यह परम्‍परा लोकसभा में भी है लोकसभा के आर्टिकल 85 में संविधान के अनुच्‍छेद 85 के मुताबिक the same procedure is there.  और अब जो है अब तो यह प्रक्रिया राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण पर वाद-विवाद के लिए प्रक्रिया शुरू हो रही है अब आप यह एतराज उठा रहे हैं कि नहीं साहब अभिभाषण गलत हो गया उसके ऊपर यह प्रक्रिया वाद-विवाद की नहीं होनी चाहिए, it has got no meaning and I reject it.

डॉ.सी.पी.जोशी: फिर वो आपकी रिपोर्ट पास तो कराइये महावीर जी।

श्री महावीर प्रसाद जैन: माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं इसको पूरा पढ़ भी देता हूं, कार्य सलाहकार समिति क बैठक दिनांक 28 फरवरी, 2006 को मध्‍यान्‍ह पश्‍चात् माननीय अध्‍यक्ष महोदय के वेश्म में हुई।  समिति ने यह निर्णय लिया है कि दिनांक 1 मार्च, 2006 से 16 मार्च, 2006 तक सदन में लिये जाने कार्य का बंटवारा निम्‍न प्रकार किया जाए:                                                                 

kas\usc\1440\2g

 

श्री महावीर प्रसाद:......जारी

बुधवार दिनांक 1 मार्च, 2006

गुरूवार, दिनांक 2 मार्च,2006

शुक्रवार, दिनांक 3 मार्च,2006                 

राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण पर प्रस्‍तुत धन्‍यवाद प्रस्‍ताव पर वाद विवाद

शनिवार,दिनांक 4 मार्च, 2006    

राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण पर प्रस्‍तुत धन्‍यवाद प्रस्‍ताव पर अग्रेत्‍तर वाद विवाद एवं मध्‍यान्‍ह पश्‍चात् 5.00 बजे सरकार की ओर से उत्‍तर

रविवार, दिनांक 5 मार्च,2006

सोमवार, दिनांक 6 मार्च,2006

मंगलवार, दिनांक 7 मार्च,2006   

बैठक नहीं होगी ।

बुधवार, दिनांक 8 मार्च,2006     

आय व्‍ययक अनुमान वष्‍र्ा 2006-07 का उपस्‍थापन

गुरूवार, दिनांक 9 मार्च,2006

शुक्रवार , दिनांक 10 मार्च,2006शनिवार, दिनांक 11 मार्च,2006

 

आय व्‍ययक अनुमान वर्ष 2006-07 पर सामान्‍य वाद विवाद

रविवार, दिनांक 12 मार्च,2006सोमवार,दिनांक 13 मार्च,2006मंगलवार, दिनांक 14 मार्च,2006बुधवार, दिनांक 15 मार्च,2006  

 

बैठक नहीं होगी ।

 

गुरूवार, दिनांक 16 मार्च,2006

आय व्‍ययक अनुमान वर्ष 2006-07 पर अग्रेत्‍तर सामान्‍य वाद विवाद एवं मध्‍यान्‍ह पश्‍चात् 5.00 बजे राज्‍य सरकार की ओर से उत्‍तर ।

     

   कार्य सलाहकार समिति ने राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण पर वाद विवाद एवं आय व्‍ययक अनुमान वर्ष 2006-07 पर सामान्‍य वाद विवाद में भाग लेने हेतु माननीय सदस्‍यों को अधिक से अधिक समय मिले, इस हेतु सदन के 2 घंटे अतिरिक्‍त  रूप से बैठने की अनुशंसा की है ।

श्री उपाध्‍यक्ष: सरकारी मुख्‍य सचेतक यह भी प्रस्‍ताव करेंगे कि यह सदन कार्य   सलाहकार समिति के 11वें प्रतिवेदन पर अपनी सहमति प्रकट करता है ।

श्री महावीर प्रसाद: उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूं कि यह सदन कार्य सलाहकार समिति के 11वें प्रतिवेदन पर अपनी सहमति प्रकट करता है ।

श्री उपाध्‍यक्ष: प्रश्‍न यह है कि यह सदन कार्य सलाहकार समिति के 11वें प्रतिवेदन पर अपनी सहमति प्रकट करता है ।                                                            (स्‍वीकृत)

   सदन द्वारा प्रतिवेदन पर सहमति प्रदान की गई ।

विधायी कार्य

   श्री गुलावचन्‍द कटारिया प्रभारी मंत्री प्रस्‍ताव करेंगे कि राजस्‍थान सूचना का अधिकार (निरसन) विधेयक, 2006(2006का विधेयक) को पुर:स्‍थापित करने की आज्ञा प्रदान की जाये ।

श्री गुलाबचन्‍द कटारिया: उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं राजस्‍थान सूचना का अधिकार (निरसन)विधेयक,2006 को पुर:स्‍थापित करने की आज्ञा के लिये प्रस्‍ताव करता हूं ।

श्री उपाध्‍यक्ष: प्रश्‍न यह है कि राजस्‍थान सूचना का अधिकार (निरसन) विधेयक,2006 को पुर:स्‍थापित करने की आज्ञा प्रदान की जाये ।                         (स्‍वीकृत)   

    विधेयक को पुर:स्‍थापित करने की आज्ञा प्रदान की गई ।

   प्रभारी मंत्री विधेयक को पुर:स्‍थापित भी करेंगे ।

श्री गुलावचन्‍द कटारिया: उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं राजस्‍थान सूचना का अधिकार (निरसन) विधेयक,2006 को पुर:स्‍थापित करता हूं ।

श्री उपाध्‍यक्ष: राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण पर वाद विवाद । मुझे सदन को सूचित करना है कि राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण पर धन्‍यवाद प्रस्‍ताव पर वाद विवाद के लिये सदन 2 घंटे अतिरिक्‍त रूप से बैठे । इस समय को सम्मिलित करते हुए कुल 24 घंटे उपलब्‍ध है । उपलब्‍ध समय में सरकार द्वारा उत्‍तर दिये जाने का समय भी सम्मिलित है । मैं विभिन्‍न पार्टियों के लिये समय का बंटवारा निम्‍न प्रकार करता हूं:-   

भारतीय जनता पार्टी                          14 घंटे 30 मिनट   

इण्डियन नेशनल कांग्रेस                       6 घंटे 36 मिनट

इण्डियन नेशनल लोकदल                     29 मिनट         

जनता दल युनाइटेड                          15 मिनट

बहुजन समाजवादी पार्टी                       15 मिनट

कम्‍युनिस्‍ट पार्टी                             7 मिनट

लोकजन शक्ति पार्टी                          7 मिनट

राजस्‍थान सामाजिक न्‍याय 

मंच                     7 मिनट

निर्दलीय                  1 घंटा 34 मिनट

 

    डा. एन.एस. गुर्जर , सदस्‍य विधान सभा धन्‍यवाद प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत करेंगे ।

डा. एन.एस. गुर्जर: उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूं कि राज्‍यपाल महोदय को निम्‍नांकित रूप में धनयवाद समावेदन प्रस्‍तुत किया जाये । इस सत्र में एकत्रित हम राजस्‍थान विधान सभा के सदस्‍यगण राज्‍यपाल द्वारा इस सदन में दिये गये अभिभाषण केप्रति उनके आभारी है ।

श्री घनश्‍याम तिवाडी: उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं चाहूंगा कि डाक्‍टर एन.एस.गुर्जर साहब का भाषण भी सुने और उनके केश का अवलोकन भी करें और उनकी ड्रेस का अवलोकन भी करें ।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: आप इनसे यही यही कराते रहो और आगे आप बैठो । मतलब उनका जो उपयोग लेना वह तो आप पूरा लेओ ।

श्री हरिमोहन शर्मा: अच्‍छी शक्‍लों को बाहर रखो और आप यही जमे रहो, वाह भाई वाह ।

(समय:    )

(श्रीमती सुमित्रा सिंह, अध्‍यक्ष, पदासीन)

डा. एन.एस. गुर्जर: अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके प्रति आभार व्‍यक्‍त करता हूं कि यह प्रस्‍ताव रखने का मुझे आपने अवसर दिया ।

श्री अध्‍यक्ष: अवसर तो आपको इन्‍होंने दिया है मैंने कब दिया ।

डा. एन.एस. गुर्जर: अभी तो आपने ही नाम पुकारा है इसलिए परम्‍परा यही है कि आपके प्रति आभार व्‍यक्‍त करूं ।

श्री जुबेर खान: धन्‍यवाद मत दो वरना अगले 3 साल भी आप से ही शुरू करायेंगे यहीं से ।

श्री अध्‍यक्ष: आप इन्‍हें सीरियसली बात कहने दे, बोलने दें उन्‍हे ।

डा. एन.एस. गुर्जर: अध्‍यक्ष महोदय, मैं सबसे पहले तो माननीय राज्‍यपाल महोदय के प्रति जो हमारे राजस्‍थान से जुडी हुई हैं, महाराष्‍ट्र में विभिन्‍न पदों पर रहीं, केन्‍द्र में विभिन्‍न पदों पर रही राजस्‍थान से लगाव रहा उन्‍होंने यहां पधार कर इस सदन को सम्‍बोधित किया, मैं पुन: आभार व्‍यक्‍त करता हूं ।

      इसी समय पिछले 2 साल में कांग्रेस पार्टी में हमारे माननीय प्रतिपक्ष के नेता के पद पर 2 साल में पहले माननीय कल्‍ला साहब थे अब मंडावा से आने वाले माननीय सदस्‍य श्री रामनारायण चौधरी प्रतिपक्ष के नेता बनकर आये हैं । मैं उनका भी अभिनंदन करता हूं । उनको बधाई देता हूं वह बुजुर्ग हैं, बहुत अनुभवी हैं उनके ज्ञान का भी सदन और हमको लाभ मिलेगा 

श्री अध्‍यक्ष: अब अभिनंदन अपनी पार्टी का करो तो ज्‍यादा अच्‍छा है ।

श्री हरिमोहन शर्मा: पार्टी का अभिनंदन करते तो अभी तक कुछ बन ही जाते ।

डा. एन.एस. गुर्जर : अध्‍यक्ष महोदय, लोकतंत्र में हमारी पार्टियां हैं लेकिन उससे भी हमारे सदन की कुछ अच्‍च परम्‍पराएं हैं मैं उनका ही पालन कर रहा हूं । यह इनके ऊपर है किसको बनाये किस को नहीं बनाये लेकिन इनकी असफलता तो इसी से प्रदर्शित हो गई कि इनको लीडर आप अपोजीशन भी 2 साल में 2 बनाने पड गये ।

      मैं कहना चाहूंगा हमारे इस अभिभाषण के माध्‍यम से माननीय मुख्‍य मंत्री जी ने एक नया सोच राजस्‍थान को दिया है ।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: अध्‍यक्ष महोदय यह आब्‍जेक्‍शनेबल बात है । आप उनका अभिनंदन करें लेकिन यह इनकी असफलता है, इनको दो बनाने पड गये एक तरफ तो आप कह रहे हो इनका आन्‍तरिक मामला है । आपके एक एक राज्‍य में 5 साल में तीन तीन चीफ मिनिस्‍टर बदलते हैं वह असफलता होती है क्‍या । आपने केन्‍द्र में लीडर आफ अपोजीशन कितनी बार बदला था । कभी अटल जी, कभी आडवाणी जी और कभी कोई, आप इसमें मत जाइए, आप इस गहराई में मत जाइए आपको जो धन्‍यवाद प्रस्‍ताव के लिये खडा किया है आप अपना ज्ञान उसी में लगाओ, आप इस पर मत बोलिये ।

डा. एन.एस. गुर्जर :अच्छा अब आप विराजो ।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: अध्‍यक्ष महोदय, यह इनकी असफलता है कि हमारी सफलता है आप अपने राज की सफलता गिनाओ ना, आप विषय से अलग बात करते हो इसीलिए आपका चेंज उसमें नहीं हुआ है ।

डा. एन.एस. गुर्जर : आपको असफलता के लिये कहा ही नहीं मैंने तो । उनके बनने से आपको क्‍या परेशानी हो गई ।

श्री अध्‍यक्ष: नगर से आने वाले माननीय सदस्‍य अब आप स्‍थान ग्रहण करें, अब शांति से सुने उन्‍हें ।

डा. एन.एस. गुर्जर : उनके बनने से आपको क्‍या परेशानी हो गई ।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: हमें कोई परेशानी नहीं है लेकिन आप यह कह रहे हो, कुछ भी है चुन लिया नेता इससे क्‍या मतलब हुआ ।

डा. एन.एस. गुर्जर : मुझे मालूम है आप भी दावेदार थे ।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: नहीं मैं कहीं दावेदार नहीं था आप इस बात को भूल जाइए। आप केवल उनका स्‍वागत कीजिए ।

श्री अध्‍यक्ष: नगर से आने वाले माननीय सदस्‍य सुनिये आप उन्‍हें । अब कोई बीच में नहीं बोलेगा, कोई बोलने लायक बात नहीं है यह ।

डा. एन.एस. गुर्जर : अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मुख्‍य मंत्री जी ने इस अभिभाषण के द्वारा एक आधुनिक राजस्‍थान की तस्‍वीर पेश की है, 21 वीं सदी के राजस्‍थान की, विकसित राजस्‍थान की एक नये सोच के साथ, नये अंदाज के साथ राजस्‍थान को आधुनिक बनाने का सपना लेकर नई कार्यशैली के साथ, रीजलटोरिएन्‍टेड कार्यशैली अपनाकर दो साल में राजस्‍थान जो बीमारू राज्‍य की श्रेणी में था उसको आगे खींचकर विकसित राज्‍यों की श्रेणी में लाने का एक सराहनीय प्रयास किया है ।

                                               

Ans\usc\2h\1450

 

    इसलिये मैं माननीय मुख्‍यमंत्री जी का अभिनंदन करना चाहता हूं। अध्‍यक्ष महोदय,यह तो शुरूआत है  कि नाम बाकी है,काम बाकी है,अंतिम मुकाम बाकी है,रात बिती है अभी तो भोर बाकी है,यह तो प्रारम्‍भ है। यह तो बीमारू राज्‍य को खींचकर विकसित राज्‍य की श्रेणी में सम्मिलित किया है और अब इस अभिभाषण के माध्‍यम से संकेत दिया है राजस्‍थान की जनता को और सदन को कि अगले तीनसाल में राजस्‍थान, जो विकसित प्रदेश है उनमे सबसे अग्रणी श्रेणी में राजस्‍थान आकर खड़ा हो जायेगा। मैं इसलिये कहना चाहता हूं,यह मैं निहीं कह रहा,योजना आयोग ने राजस्‍थान सरकार की किन-किन चीजों के अंदर बेहतर वित्‍तीय प्रबंधन,मिड डे मिल,जल अभियान,निजी क्षेत्र में भागीदारी,सरकारी नौकरियों में भर्ती,ग्रामीण विकास कार्य,बालबाड़ी योजना,फीड़र सुधार योजना इन मामलों में योजना आयोग निे राजस्‍थान सरकार की सराहना की है,यह मैं नहीं कह रहा यह योजना आयोग कह रहा है।

            इसके अलावा उद्योगों में भारी निवेश,शिक्षा,सिंचाई,पेयजल,सड़क,सड़क में  पूरे देश में राजस्‍थान ने पहला स्‍थान प्राप्‍त किया है। आई.टी.,ऊर्जा क्षेत्र इन मामलों में राजस्‍थान ने तकनीकी संस्‍थान खोले,केन्‍द्रीय प्रवर्तित योजनाओं में राज्‍य का हिस्‍सा 25 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत करने,ग्‍वार,मोठ,ईसबगोल,मैथी आदि का समर्थन मूल्‍य तय  करने की पहल करके पिछली सरकार को बहुत पीछे छोड़ दिया। अब मैं इसलिये कहना चाहता हूं मैं आलोचना नहीं कर रहा हूं पिछली सरकार की,आलोचना इसलिये नहीं करना चाहता जो भी सरकार बनती है बेस्‍ट पोसीबल करने का प्रयास करती है,आप लोगों ने भी बहुत अच्‍छा  काम करने की कोशिश की अपनी तरफ से। मुझे बोलने दीजिये Let me tell in my way.

श्री अध्‍यक्ष: बीच में कोई टोके नहीं,बीच में नहीं बोले।

डा.एन. एस.गुर्जर: Let me tell in my style.

sश्री अध्‍यक्ष:ना इधर से बोले,ना उधर से बोले।(व्‍यवधान)

डा.एन.एस.गुर्जर: यह मुझे मालूम नहीं था आंतरिक मामला ऐसा है क्‍या। आपने भी बहुत प्रयास किया राजस्‍थान का विकास करने का लेकिन अध्‍यक्ष महोदय,मैं आपको याद दिलाना चाहूंगा,आप क्रिकेट मैच देखती होंगी,क्रिकेट में हर खिलाड़ी शतक बनाने का प्रयास करता है,कई दोहरा शतक बनाने की कोशिश करते हैं लेकिन वह कोशिश तो करते हैं लेकिन कई खिलाड़ी जाते ही जीरो पर आउट हो जाते हैं,जैसे आपकी सरकार,जीरो पर ही आउट हो गई।(व्‍यवधान) मेरी चिंता छोडिये आप।

श्री अध्‍यक्ष: बीच में नहीं बोले।

श्री जुबेर खान: पाँच साल खेली पूरा टेस्‍ट मैच।

डा.एन.एस.गुर्जर: पाँच साल तक क्रिज पर बने रहे लेकिन एक रन नहीं बनाया ,यह रिकार्ड है। अध्‍यक्ष महोदय,एक तरफ हमारी मुख्‍यमंत्री जी को देखिये जाते ही दो साल में, दोहरे शतक जमाये। शतक ही नहीं दोहरे शतक।(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: बीख्‍में नहीं टोके आप।

डा.एन.एस.गुर्जर: मुझे बोलने दीजिये प्‍लीज। यह है अंतर सरकार की कार्यशैली का अंतर,मोनीटरिंग का अंतर,पहले कभी भी साल में, दो-दो,तीन-तीन बार मोनिटरिंग नहीं होती थी किसी भी विभाग की। माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने आते ही एक नई कार्यशैली को प्रारम्‍भ किया और मोनीटरिंग की समय के अंदर। हमको केवल पैसा ही खर्च नहीं करना। आप लोगों का बजट भी मैंने देखा है,कई साल से सदन में रहा हूं। बजट के अंदर आंकड़े होते थे इतना पैसा इस पर खर्च किया और मैदान में जाकर देखते थे तो इसलिये केवल आंकड़ेबाजी में विश्‍वास नहीं है। जो पैसा जा रहा है वह जनता के काम आ रहा है या नहीं,वह योजना ठीक ढंग से लागू हो रही है कि नहीं इसके लिए आन्‍सरेबल बनाया आफिसर्स को। सबकी अलग-अलग जिम्‍मेदारी तय की और मोनीटरिंग का काम शुरू करके एक नई पहल  राजस्‍थान में शुरू की,उसका परिणाम आया,परिणाम इसलिये आया कि  परिणाम दी रिजल्‍ट ओरियन्‍टेड,आते ही इन्‍होंने,अशोक जी मुख्‍यमंत्री बने,मुझे उनके बारे में कुछ नहीं कहना व्‍यक्तिगत रूप से,मेरे अच्‍छे मित्र भी है,अच्‍छे व्‍यक्ति है,प्रयास भी उन्‍होंने खूब किया लेकिन जैसा मैंने कहा हर खिलाड़ी शतक बनाने की कोशिश करता है जीरो पर आउट हो जाता है,उनका दोष नहीं मानता। आते ही उन्‍होंने अपने घोषणा पत्र की किताब को वाइबल की तरह,हनुमान चालीसा की तरह अधिकारियों को पकड़ा दिया सेक्रेटेरियट,पकड़ा दिया और कहा कि इसको रटो और इसको रटकर इसको पूरा करो,उन्‍होंने खूब रटा,,खूब पूजा भी की उसकी और  रट रटकर खूब प्रयास भी किया लेकिन हुआ क्‍या 147  वायदे इन्‍होंने घोषणा पत्र में,जिसमें से 108 वायदे तो टच ही नहीं कर पाये  और दूसरी और हमारी माननीय मुख्‍यमंत्री महोदय ने,यह तो पाँच साल का कह रहा हूं।(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: यह क्‍या दिखा रहे हैं नगर से आने वाले माननीय सदस्‍य?

डा.एन.एस.गुर्जर:  आ रहा हूं,अभी आ रहा हूं,आप बोलना,कल जवाब देना  जो मैं बोल रहा हूं नोट करते जाओ।(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: यह क्‍या दिखा रहे हैं, गलत बात है।

डा.एन.एस.गुर्जर: दूसरी और हमारी मुख्‍यमंत्री जी ने,हमारा घोषणा पत्र जारी हुआ....(व्‍यवधान)

मोहम्‍मद माहिर आजाद: घोषणा पत्र दिखा रहा हूं।

श्री अध्‍यक्ष: क्‍यों दिखा रहे हैं आप?

मोहम्‍मद माहिर आजाद: वह कांग्रेस का दिखा रहे हैं हम बीजेपी का...(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: किसी का हो बीजेपी का हो चाहे  कांग्रेस का इस तरीके से दिखाना सदन की गरिमा के अनुरूप नहीं है।

डा.एन.एस.गुर्जर: ऐसा है, घोषणा पत्र मेरे पास भी है,क्‍या दिखा रहे हैं,घोषणा पत्र मेरे पास भी है,आपका भी और हमारा भी,दोनों घोषणा पत्र मेरे पास है इसलिये मुझे दिखाइये मत,मेरे पास है।आपको तो सारा बता ही दिया जनता ने 156  से 56 पर ला टिकाया यह सबसे बड़ा घोषणा पत्र का परिणाम है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: और आप 32 पर पहुंचे थे जो।

डा.एन. एस.गुर्जर: अध्‍यक्ष महोदय,मुझे प्रोटेक्‍ट करिये,बीच-बीच में टोक रहे हैं ,सर्वदलीय बैठक में यह तय हुआ था कि टोका-टाकी नहीं करें। अध्‍यक्ष महोदय,147में से 108 वायदे पूरे नहीं हुये और हमने 243 वायदे किये,243 वायदे ,उनका क्‍या हुआ केवल दो साल के समय में,पाँच  साल का नहीं केवल दो साल में 243 में से क्रियान्वित घोषणाओं की संख्‍या,क्रियान्वित हो चुके 115,प्रगति पर 70,आंशिक क्रियान्विति 6 की और लंबित केवल 52,सिर्फ 52 लंबित है,243 में से केवल 52लंबित है दो साल में। इनके 147 में से पाँच साल में 108 वायदे पूरे नहीं हुये,अब यह तुलना स्‍पष्‍ट रूप से दर्शाती है कि पुराना शासन क्‍या है और अब का शासन क्‍या है।

      अध्‍यक्ष महोदय,इतना ही नहीं कांग्रेस शासन काल में क्‍या हुआ उसके बारे में  मैं नहीं बताना चाहूंगा क्‍योंकि कितनी बार न्‍यायालय ने  इनको कहां-कहां फटकार लगाई,कहां-कहां इन्‍होंने क्‍या-क्‍या किया,सुप्रीम कोर्ट ने क्‍या किया वह बताऊंगा लेकिन उसके पहले अध्‍यक्ष महोदय एक निवेदन और करना चाहता हूं.....(व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: उप‍लब्धि बताई है सरकार की,आप भी अपनी उपलब्धि बताइये।

डा.एन.एस.गुर्जर: उपलब्धि बता रहा हूं। यह उपलब्धियों का ब्‍यौरा दे रहा हूं अभी देख लीजिये उपलब्धियां बता रहा हूं। इंडिया टूडे का,यह हमारे आंकड़े हमारे आंकडे वह भी दूंगा,पाँच साल बनाम दो साल में क्‍या हुआ पाँच साल में क्‍या हुआ ले किन उसके पहले ओवर आल रेंकिंग आल इण्डिया के हर स्‍टेट का सर्वे किया एक  इनडिपेंडेंट एजेंसी ने,इण्डिया टूडे ने,तीन एजेंसी ने मिलकर सर्वे किया और उन्‍होंने राजस्‍थान को रेकिंग दी वह मैं बताना चाहता हूं,20 बडे़ राज्‍य। राज्‍यों की दशा और दिशा यह उनका विषय था,बड़े 20 और छोटे राज्‍य 10,केन्‍द्र शासित 5 और  जो बडे़ राज्‍यों का आंकलन,बड़े राज्‍यों का उन्‍होंने किया उसका मैं आपको निवेदन करना चाहता हूं।

 

Ddm/usc/1500/2j

 

डा.एन.एस.गुर्जर.....जारी...

 

ओवर आल रेंकिंग 2004 के अन्‍दर 3 से 4 में आ गया, 13वें नम्‍बर पर राजस्‍थान था  और 2005 में, एक साल के अन्‍दर एक रेंक कम हो गयी, प्रगति की दृष्टि से 12वें स्‍थान पर आ गया, 13 से आकर के, कहां 13, उसके पहले 17वें नम्‍बर पर था । 17वें नम्‍बर से पहले हमारा शासन आया 5वें नम्‍बर पर हम लाये, ये 9 नम्‍बर पर ले गये, 9 से 13 पर ले गये और आज जब सत्‍ता में आये तो एक साल के अन्‍दर ही 13 से 12 पर उसको ले गये । यह भी मुख्‍यमंत्रीजी की एक सफलता है ओवर आल रेंकिंग में ।

      केरल और तमिलनाडु, कानून व्‍यवस्‍था का मुद्दा आयेगा तो उसमें मैं आंकड़े दूंगालेकिन कानून व्‍यवस्‍था पर भी ये बोलेंगे, उस पर भी उन्‍होंने रेंकिंग दी है । 2004 में चौथी रेंकिंग थी जो 2005 में आते आते तीसरी रेंकिंग हो गयी । 1.43 अंक थे 2004 में, 2005 में 1.38 हैं । इसका मतलब हमारे यहां अपराध कम हुए हैं । निवेश के माहौल में सुधार, 2004 में 1.02 था, 2005 में 1.09 यानि +0.07, यह अंक है और जो क्रम है वह +2 निवेश के माहौल में सुधर कर 15वें नम्‍बर पर राजस्‍थान था उसको माननीय मुख्‍य मंत्रीजी ने निवेश के माहौल में सुधार करके 13वें नम्‍बर पर लाकर खड़ा कर दिया, 13वें स्‍थान पर । और जिसके कारण जो आप अभी यह तुलना करेंगे, कभी आप सेज उठाएंगे, कभी दूसरी बात करेंगे, इकानामिक जॉन कैसे घोषित कर दिया, नॉलेज कारिडोर कैसे कर दिया, यह कैसे कर दिया, 10 हजार करोड़ का निवेश होगा, अध्‍यक्ष महोदय, 10 हजार करोड़ का ।

श्री हरिमोहन शर्मा: इकानामिक जोन हमने नहीं उठाया, यह तो आपसी विवाद है।

मोहम्‍मद माहिर आजाद: ये चाहते हैं उठे।

डा.एन.एस.गुर्जर: हां ठीक है । मैं जवाब दे रहा हूं । आप उठा लेना । एक लाख 14 हजार को रोजगार मिलेगा और इसके अन्‍दर जो निवेश होगा, सबसे बड़ी बात, 10 हजार करोड़ का निवेश होगा । (व्‍यवधान) 14 हजार करोड़ का ओवर आल मिलाकर । (व्‍यवधान) देखिये अलग अलग उसमें होता है । अभी मंत्री हैं उनकी अलग-अलग असेसरीज होंगी, उनको जोड़कर बताया है । मैं तो जो आ‍ेरिजनल है, वह बता रहा हूं, असेसरीज मिल गयीं, 14 हजार करोड़ हो गया, बहुत अच्‍छी बात है, इसमें खराब क्‍या बात हुई । मैं समर्थन कर देता हूं इस बात का और क्‍या होगा ।

        इस तरह से बुनियादी ढांचा है, बुनियादी ढांचें के अन्‍दर भी सुधार हुआ । शिक्षा के अन्‍दर भी सुधार हुआ । यह मैं नहीं कह रहा हूं । यह इण्डिया टूडे और दो एजेंसी और थीं जिन्‍होंने सर्वे किया, यह रिपोर्ट कह रहा हूं । अध्‍यक्ष महोदय, इसी तरह से वित्‍तीय प्रबन्‍धन, मैं नहीं कह रहा हूं, औसतन वार्षिक योजना का बजट, मैं आगे एनुअल प्‍लान आपको बताउंगा, वह मैं डिटेल में नहीं जाना चाहता, बजट पर जब आयेंगे तो बोलूंगा । औसतन आपके समय में दिसम्‍बर, 98 से नवम्‍बर, 2003 तक 4614 करोड़ रुपये, औसत आपकी रही । और औसतन दिसम्‍बर, 2003 से अक्‍टूबर, 2005 तक, दो साल में सिर्पु 2 साल का औसत यह रहा 7574 रुपये, यानि 1.6 गुना ज्‍यादा । यह 2 साल में हुआ । यानि इन्‍होंने जब शासन छोड़ा था 4 महीने बाकी थे । दिसम्‍बर, 2003 में शासन सम्‍भाला था उस समय 4200 करोड़ के आसपास आपकी योजना और 4 महीने के अन्‍दर ही मुख्‍य मंत्रीजी ने, हमारी सरकार ने 4 महीने में छलांग लगायी 5500 करोड़ का लक्ष्‍य रखा और जब समाप्‍त हुई, 4 महीने में 6044 करोड़ की योजना जाकर समाप्‍त हुई । तो कहां 4258 करोड़ और कहां 6044 करोड़, यह 4 महीने में कितना जम्‍प लगाया । उसके बाद भी आज 2 साल के अन्‍दर अन्‍दर ही 8500 करोड़ के ऊपर हमारी वार्षिक योजना पहुंच गयी । यह एक बहुत बड़ा अचीवमेंट है और इसका परिणाम क्‍या होगा कि हमारी जो दसवीं पंचवर्षीय योजना जो 2007 में समाप्‍त होगी, नवीं पंचवर्षीय योजना साढे 27 हजार करोड़ की बनायी थी, आपके सालों के अन्‍दर उस साढे 27 हजार करोड़ में से घटाकर 19900 और कुछ खर्च किया और इन दो सालों में, यह सरकार आयी, 2 सालों में इतना इम्‍प्रूवमेंट किया । अगर आप रहते तो ज्‍यादा से ज्‍यादा 25हजार करोड़ से ऊपर नहीं पहुंचते लेकिन अब यह पंचवर्षीय योजना जाकर के 33 हजार करोड़ से ज्‍यादा योजना का पैसा खर्च होगा । कितनी तेजी से राजस्‍थान विकास कर रहा है, इसका आप अंदाज लगाइये ।

      कर राजस्‍व में इसका परिणाम हुआ कि आपकी जो सरकार ािी 5 साल में आप 702 दिन ओवर ड्राफ्ट में रहे,ह मारी सरकार फरवरी, 2004 के बाद एक दिन ीाी ओवर ड्राफ्ट में नहीं रही । आज राजस्‍थान का रिजर्व बैंक में जो खाता है, हमेशा सरप्‍लस में रहा । यह मैं कह रहा हूं ।

श्री श्रवण कुमार: आपको नुकसान हो रहा है बोलने से । अगर आगे आप अच्‍छा बोलते हैं तो बोलने के लिये अलग रखा है आपको, वरना मंत्री बना देते ।

श्री अध्‍यक्ष: बीच में इंटरप्‍ट नहीं करें, माननीय सदस्‍य ।

श्री रामनारायण मीणा: इंटरप्‍ट तो नहीं कर रहे हैं, एक मिनट सुन लीजिये ।

श्री अध्‍यक्ष: माननीय उप नेता, बीच में इंटरप्‍ट न करें । बीच-बीच में नहीं करेंगे आप।

श्री रामनारायण मीणा: ये सारी जमीनें बेचकर खा गये और ओवर ड्राफ्ट की बात करते हैं । गावों में खलिहान नहीं छोड़े । बैंक के नाम पर सारी जमीनें बेचकर खा गये ।

डा.एन.एस.गुर्जर: चह अभी बताउंगा, अभी आ रहा हूं, उस पर भी आउंगा ।

श्री अध्‍यक्ष: अब आप बीच में बोल रहे हैं । आपका नम्‍बर जब आये तब आपको सब अधिकार है कहने का, लेकिन बीच में नहीं बोलें आप ।

डा.एन.एस.गुर्जर: मैं उस पर भी आउंगा ।

            कर राजस्‍व में वृद्धि की । अब इसकी योजना राशि बढ़ाई, पंचवर्षीय योजना में खर्चा बढ़ाया । कर राजस्‍व में जहां 2001-2002 में 7 प्रतिशत था, 2004 में उसको बढ़ाकर 15.88 प्रतिशत कर दिया और 2004-05 में 16.13 प्रतिशत कर दिया । और पूंजीगत परिव्‍यय पर व्‍यय की गयी, ऋणों के ऊपर यह आपके समय 2001-02 में 29.82 प्रतिशत था और 2002-06 की बी.ई. में 64.43 था एक रिकार्ड कायम किया । इस तरह से राजकोषीय घाटा डी.एस.डी.पी. का वह घटाया, वह जहां आप जब थे 98-99 में 7.02 प्रतिशत था, 2002-03  में 7.15 प्रतिशत था 2005-06 के अन्‍दर 5.09 प्रतिशत रह गया । इसी तरह से रेवेन्‍यु डेफिसिट, पर्सेंटेज आफ रेवेन्‍यु डेफिसिट का जो रेवेन्‍यु डेफिसिट है वह 99-2000 में रेवेन्‍यु डेफिसिट था 37.18 और 2005-06 में सम्‍भावित है केवल 7 प्रतिशत, 2004-05 में 12 प्रतिशत और 2005-06 के अन्‍दर केवल 7 प्रतिशत सम्‍भावित है । अब कहां तो 37 प्रतिशत और कहां रेवेन्‍यु डेफिसिट 7 प्रतिशत । इसी तरह से फिस्‍कल डेफिसिट पर 11वें और 12वें वित्‍त आयोग ने रिकमण्‍ड किया कि आप रेवेन्‍यु डेफिसिट कम करिये, आप फिस्‍कल डेफिसिट कम करिये और अगर ये कम करेंगे तो ऋणों के अन्‍दर, ऋणों की ब्‍याज के अन्‍दर और दूसरी कई चीजें हैं, योजना आयोग आपको इंसेंटिव देगा और वह सब आपको इंसेंटिव फाइनेंस कमीशन की तरफ से, केन्‍द्र सरकार की तरफ से मिलेंगे । राज्‍य ने रेवेन्‍यु डेफिसिट कम किया, फिस्‍कल डेफिसिट कम किया और वह पात्रता अर्जित कर ली और पात्रता अर्जित करके जो पैसा लाये वह आपको अच्‍छी तरह से मालूम है कि कितना पैसा इतनी योजनाओं में लाये हैं और जो बकाया था अध्‍यक्ष महोदय, जो पुराना बकाया था, वह राशि भी हम लाये । अब फिस्‍कल पहले आप ग्रिप में आ गये थे कुछ साल पहले, जब इनका शासन था, फिस्‍कल स्‍ट्रेस बोलते हैं उसको, फिस्‍कल स्‍ट्रेस में इसलिये आ गये कि रेवेन्‍यु डेफिसिट,फिस्‍कल डेफिसिट यह सब ज्‍यादा थे । उसका एक फार्मूला दिया हुआ है । और उससे निकलकर के वापस 2 साल के अन्‍दर यह सरकार लायी है । मैं आपसे यह भी निवेदन करना चाहूंगा, क्‍योंकि बजट में आयेगा तो मैं ज्‍यादा बोलूंगा, इनके समय में जो कर्जा था 18.5 प्रतिशत बढ़ता रहा, यह पाइण्‍ट भी लायेंगे, कर्जा बढ़ गया, कर्जा बढ़ गया, उसका प्रतिशत नहीं देख रहे, हमारी योजना का आकर कितना बढ़ गया । और खर्च कितना हो रहा है तो उसका जो कर्जा बढ़ा, इनके समय में वह 18.5 प्रतिशत और 2 साल में कर्जे को घटाकर 12.5 प्रतिशत, यह सरकार ले आयी, 6 प्रतिशत नीचे, डाउन उसको ले गयी । यह प्रतिशत के हिसाब से अगर आप देखेंगे तो आपको मिलेगा । तो इस तरह से चाहे फाइनेंशियल, वित्‍तीय प्रबन्‍धन में देखें, दूसरी चीजों में देखें और इंसेंटिव के रूप में जो यह 12वें वित्‍त आयोग की रिलीफ थी, डेट रिलीफ, उसमें हमने पैसा लिया, सेविंग आफ इण्‍ट्रेस्‍ट एग्रीगेटिंग टू रूपिज 700 परसेंट, यह सब लिया ।                                       

                                                       

vps/usc/1510/2k

 

    तो यह सारा का सारा मैं ज्‍यादा डिटले में, क्‍योंकि मैं बारबार कह रहा हूं कि बजट के अन्‍दर फिर हम इसको डिटेल के अन्‍दर बताएंगे लेकिन मैं मोटा-मोटा आपको कुलमिलाकर इसलिए बताना चाहता हूं कि हमने इस साल के अन्‍दर, कुछ सालों के अन्‍दर, दो साल के अन्‍दर वित्‍तीय प्रबंधन के कारण हम बहुत आगे चले गये । इन्‍होंने 8000 करोड़ का कर्जा हमारे ऊपर, हमको मिला था जब आप 1990 में गये । हम जब 1998 में छोड़कर गये तो 23000 करोड़ का कर्जा हमने छोड़ा । आप जब वापस 2003 में हमको सम्‍भलाकर गये तो लगभग 53 से 55 हजार करोड़ के आस-पास का कर्जा हमको आपने सम्‍भलवाया। हम 23 हजार करोड़ का कर्जा छोड़कर गये तो साढ़े अठारह हजार करोड़ की परिसम्‍पत्तियां देकर गये और आप 55 हजार करोड़ का कर्जा छोड़कर गये तो 24 हजार करोड़ की परिसम्‍पत्तियां हमको छोड़कर गये तो क्‍या दिया आपने ?  परिसम्‍पत्तियां कम और कर्जा ज्‍यादा1 कर्जा लेते गये। उसका हिसाब-किताब भी आपने नहीं लगाया इसलिए जितना भी चाहे हम इण्‍ट्रेस्‍ट पे कर रहे हैं वह अब कम आ गया। पहले आप 2001-02 के अन्‍दर 32 परसेंट कर रहे हैं । 2005-06 में केवल 26 परसेंट हो रहा है तो हर चीज के अन्‍दर आपसे आगे वित्‍तीय प्रबंधन में यह सरकार रही है । यह कर्जा लेते रहे और लायबिलिटी बढ़ाते रहे और असेट्स अनुपात में कम होते गये ।

         मैं ज्‍यादा नहीं कहते हुए, क्‍योंकि यह बजट में मामला आयेगा तो उस समय मैं कहूंगा । हाई फिस्‍कल स्‍ट्रेस में यह स्‍टेट को ले गये क्‍योंकि रेवेन्‍यू एक्‍सपेंडिचर का अगर 19 परसेंट से ज्‍यादा, टेंथ फाइनेंस कमीशन की रिकमण्‍डेशन थी, केटेगरीराइज किया है उन्‍होंने स्‍टेट्स को तो रेवेन्‍यू एक्‍सपेंडिचर अगर 19 परसेंट से ज्‍यादा हो जाता है, “The interest payment would thus be above 19% of the revenue expenditure the state has thus crossed even the high fiscal stress limit.” यह स्थिति है। 17 परसेंट से एक्‍सीड करते हैं फिस्‍कल उसमें आ जाता है और यह 19 परसेंट से भी बहुत ज्‍यादा आगे चले गये थे इसलिए फिस्‍कल स्‍ट्रेस में इन्‍होंने स्‍टेट को पहुंचाया है । उसके बाद राजस्‍थान की हालत खराब होती गयी और राजस्‍थान की हालत खराब हो गयी और हमारी प्रति व्‍यक्ति आय घट गयी । राजस्‍थान का विकास अवरुद्ध हो गया और अवरुद्ध होने के कारण यह दो साल का जो टैक्‍स था, इस सरकार ने टैक्‍सों का सरलीकरण किया । सरलीकरण करके, एक थ्‍योरी है टैक्‍स कलेक्‍शन की कि टैक्‍स को कम करो और सरल करो, टैक्‍स ज्‍यादा आएगा तो टैक्‍स का परसेंट बहुत ज्‍यादा बढ़ गया । आपने टैक्‍स को कई चीजों में, भवन निर्माण सामग्री को  14 से घटाकर 9 कर दिया । कर दरें 15 से घटाकर 12 चीज में ही कर दी। सरलीकरण किया । स्‍टाम्‍प शुल्‍क में कमी की। इसका परिणाम क्‍या हुआ कि हमारा जो टैक्‍स कलेक्‍शन 26.58 परसेंट तक बढ़ गया।

श्री अध्‍यक्ष: बजट में क्‍या बोलेंगे आप ? यह सब बात आप कह रहे हो तो बजट पर फिर क्‍या बोलेंगे ?

डा. एन.एस.गुर्जर: मैं मोटी-मोटी चीज बता रहा हूं और इसलिए दो साल के ऊपर कमेंट्स करते हुए प्रोफेसर लक्ष्‍मीनारायण नाथूरामका जी, जो कि अर्थशास्‍त्री हैं, उन्‍होंने कहा है कि निवेश के प्रयास सराहनीय है। कांग्रेस को सकारात्‍मक सहयोग करना चाहिए। यह उनकी टिप्‍पणी है, मेरी टिप्‍पणी नहीं है। यह उनकी टिप्‍पणी है। इसलिए यह हमारी स्थिति है इसकी । मैं इस पर ज्‍यादा नहीं बोलते हुए बताना चाहूंगा कि पाँच साल के अन्‍दर और दो साल में अब यह वित्‍तीय प्रबन्‍धन का असर, मैं इस पर क्‍यों स्‍ट्रेस दे रहा था, अध्‍यक्ष महोदय, बजट और फिस्‍कल स्‍ट्रेस पर, इण्‍ट्रेस्‍ट पर, ब्‍याज पर, सेण्‍ट्रल से पैसा मिलने पर, योजनाओं पर और इन योजनाओं पर मैं क्‍यों स्‍ट्रेस कर रहा था क्‍योंकि इसका ओवर आल इम्‍पैक्‍ट आता है सारी योजनाओं के ऊपर । सारे विभागों के ऊपर और सारे वर्गों के ऊपर ।

        माननीय मुख्‍य मंत्रीजी परिवर्तन यात्रा में घूमीं तो उन्‍होंने  गरीब की झोंपड़ी का दु:ख देखा। उन्‍होंने महिलाओं का दु:ख देखा। बेरोजगारों का दु:ख देखा। किसानों का दु:ख देखा। व्‍यापारियों का दु:ख देखा । एस.सी., एस.टी. का दु:ख देखा।

श्री जुबेर खान: घनश्‍यामजी तो गर्दन हिला रहे हैं।

श्री अध्‍यक्ष: आप बीच में बोलकर बेकार में डिस्‍टर्ब कर रहे हैं। सचेतक प्रतिपक्ष, आप फालतू में ... (व्‍यवधान)

श्री घनश्‍याम तिवाड़ी: आपकी नजर मेरी गर्दन पर है, उसको तो छोड़ो ।

डा. एन.एस.गुर्जर: और उसके आधार पर जब उन्‍होंने वह चीज देखी तो आकर वित्‍त को भी उसी तरह से मैनेज किया और अगर वित्‍त मैनेज हो जाता है तो घर की आर्थिक स्थिति ठीक हो जाती है।  उसी तरह से आपने राजस्‍थान के वित्‍त को मैनेज किया और उसका असर क्‍या हुआ ? उसका असर हर विभाग पर पडा और जैसा कि आप माननीय घनश्‍यामजी का जिक्र कर रहे थे, शिक्षा के बारे में भी मैं बताना चाहता हूं, शिक्षा के अन्‍दर कांग्रेस ने दिसम्‍बर, 1998 से नवम्‍बर, 2003 तक और भाजपा ने दिसम्‍बर 2003 से अक्‍टूबर, 2005 तक, मैं केवल इस समय की तुलनात्‍मक स्थिति सदन के अन्‍दर पेश करना चाहता हूं। औसतन वार्षिक बजट आपके समय में था 344.38 करोड़ और औसतन वार्षिक बजट हमारा, औसतन वार्षिक बजट बता रहा हूं, भाजपा के अन्‍दर 563.56 करोड़ रुपये। नये प्राथमिक विद्यालय आपने केवल 550 खोले। शिक्षा मंत्रीजी और इस सरकार ने आते ही 3343 विद्यालय नये खोले। आपने राजीव गांधी पाठशालाओं को एक भी प्राथमिक शालाओं में क्रमोन्‍नत नहीं किया। हमने 4254 विद्यालयों को क्रमोन्‍नत किया। प्राथमिक विद्यालयों को, जो सैकण्‍डरी में करते हैं मिडल से, सैकण्‍डरी विद्यालयों को सीनियर सैकण्‍डरी में 767 विद्यालयों को किया है और दो साल में ही इस सरकार ने 541 सीनियर सैकण्‍डरी को किया, केवल दो साल में, आपने पाँच साल में किया 700 और इस सरकार ने केवल दो साल में 500 से ऊपर। यह मैं तुलनात्‍मक दृष्टि से पाँच साल बनाम्  दो साल । राज्‍य स्‍तरीय ओपन विद्यालय, आपके एक भी नहीं और हमने एक खोला। नये विश्‍वविद्यालय, आपने दो खोले और हमने छह खोले। कम्‍प्‍यूटर शिक्षा की फीस आपके समय में सारी देनी पड़ती थी अब 50 परसेंट की छूट है।

        आपने मिड डे मील में केवल घूंघरी का वितरण किया और अब गर्म पका हुआ खाना मिलता है । इसके अलावा कम्‍प्‍यूटर शिक्षा में जन सहभागिता से, जैसे माइक्रोसॉफ्ट, अजीत प्रेमजी फाउण्‍डेशन प्रोग्राम, सिस्‍को, आई.वी.एम., इण्‍टेल आदि कम्‍प्‍यूटर दक्ष सहभागियों को, ट्रेनर्स को, अंग्रेजी में कम्‍प्‍यूटर प्रशिक्षण कार्यक्रम से जोड़ा। यह सरकार की एक बहुत अनूठी पहल थी। जिसके कारण अब आज राजस्‍थान के बच्‍चे नेशनल लेवल पर ही नहीं अन्‍तरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर कम्‍पीटीशन के अन्‍दर आगे आएंगे। यह एक बहुत बड़ी अनूठी पहल है। महाविद्यालय,  आपके समय पर आपने पाँच साल में पाँच राजकीय महाविद्यालय खोले और 102 निजी महाविद्यालय खोले। हमारे समय में दो साल में ही पाँच नये राजकीय महाविद्यालय और 343 निजी महाविद्यालय खोले हैं। महाविद्यालयों में नवीन विषय आपने 33 राजकीय महाविद्यालयों में प्रारम्‍भ किये, 189 निजी महाविद्यालयों में प्रारम्‍भ किये और दो साल में ही 3 राजकीय में प्रारम्‍भ किये और 185 निजी में प्रारम्‍भ किये । यानि, पाँच साल में आपने 189 में और दो साल में 185 में, यह एक बहुत बड़ा एचीवमैंट है। राजकीय एवं निजी महाविद्यालयों में सीटे आपके समय में पाँच साल में 7447, पाँच साल में केवल 4747, रामनारायणजी साहब, बता रहा हूं, और इस सरकार ने दो साल के अन्‍दर ही 34000 सीटें, 34000 सीटे, यह एक बहुत बड़ा एचीवमैंट है। मैं दो साल और पाँच साल का आपको निवेदन करना चाह रहा हूं। स्नातकोत्तर स्‍तर के प्राचार्यों को व्‍यय करने की सीमा, वहां पर जो उनको ठीक ठाक करने के लिए आपने उनको केवल दस हजार रुपये दे रखे थे और इस सरकार ने पाँच लाख रुपये दिये। स्‍नातकोत्‍तर स्‍तर के प्राचार्यों को 20 हजार... (व्‍यवधान)    

श्री हरिमोहन शर्मा: यह सरकार की उपलब्धियां तो आपको बतानी ही चाहिए लेकिन जो ज्‍यादतियां पंचायती राज मंत्रीजी ने आपकी पंचायत समिति में की, कुछ उस पर भी बोलना । ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: आप बीच में नहीं बोलें। ... (व्‍यवधान)

डा.एन.एस.गुर्जर: हमारा यह इण्‍टर्नल मामला है, उसमें बीच में आप कहां आ रहे हो? ... (व्‍यवधान)

श्री अध्‍यक्ष: हिण्‍डौली से आने वाले माननीय सदस्‍य, आपको क्‍या हो गया है ? आज आपको कुछ तकलीफ लगी मुझे ।

श्री संयम लोढ़ा: इतनी उपलब्धियां आपके बिना हो रही हैं तो फिर इस सरकार को आपकी याद कैसे आएंगी ? अपने लिए भी इसमें छोड़ो ताकि आप कुछ आगे और कर सको । यह सब आपके बिना अच्‍छा हो रहा है तो फिर आपको कौन पूछेगा ?

डा. एन.एस.गुर्जर: मैं भी सरकार का भाग हूं, अलग नहीं हूं। मैं सरकार का भाग हूं, अलग नहीं हूं । ... (व्‍यवधान)

श्री जोगाराम पटेल: इनके राज में अलग हो जाते थे यह। यह लड़ते थे इसलिए इनको याद आती है कि यह लड़ते क्‍यों नहीं हैं ?

 

... ...

Spp/usc/1320/2 L

 

श्री रामनारायण मीणा: मुझे डिस्‍टर्ब तो नहीं करना चाहिये लेकिन सदन को सोच लेना चाहिये उनकी काबिलियत को निश्चित तौर पर परखा जायेगा, मौका दिया जायेगा। क्‍यों तिवाड़ी साहब ?

डॉ.एन.एस.गुर्जर: मेरी वकालत के लिये आपको बहुत-बहुत धन्‍यवाद। स्‍नातकोत्‍तर स्‍तर के प्राचार्यों को व्‍यय करने की सीमा 20 हजार रूपये थी, उसको बढ़ाकर 8 लाख रूपये इस सरकार ने किया। इससे महाविद्यालय का आधारभूत संरचनात्‍मक ढांचा था उसका विकास हुआ । इसलिये यह सब और नि:शुल्‍क कक्षा 1 से 12 तक की कक्षा के विद्यार्थियों को 120 करोड़ रूपये की नि:शुल्‍क पुस्‍तकें दी गयीं। इस तरह से शिक्षा में मैंने पाँच और दो साल का अन्‍तर बताया।

      इसके अलावा अध्‍यक्ष महोदय, ग्रामीण छात्राओं को, आप महिला हैं, ग्रामीण छात्राओं को नि:शुल्‍क बस यात्रा का प्रावधान किया। हर एक किलोमीटर पर प्राथमिक विद्यालय खोला। सर्व शिक्षा अभियान के उत्‍कृष्‍ट वित्‍तीय प्रबन्‍धन हेतु प्रदेश को पूरे देशभर में ए ग्रेड मिला। पूरे देश के अन्‍दर ए ग्रेड मिला है। जीवन कौशल शिक्षा प्रदेश में पहली बार तकनीकी विश्‍वविद्यालय के लिये दिशा-निर्देश दिये। पॉच नये- फैशन टैक्‍नोलॉजी, आटोमोबाइल इंजीनियरिंग, बॉयो मेडिकल इंजीनियरिंग, इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग एण्‍ड मैनेजमेंट एण्‍ड एम्‍प्‍लाइड इलैक्‍ट्रोनिक्‍स इंन्‍सट्रूमेन्‍टेशन में डिग्री पाठ्यक्रम का संचालन करने का निर्णय लिया गया है। यूनिवर्सिटी में जो साधारण सब्‍जैक्‍ट्स पढ़ाये जाते हैं उसके अलावा यह टैक्‍नीकल सब्‍जैक्‍ट्स, क्‍योंकि आजकल इनकी मांग ज्‍यादा हो रही है। सरकार ने यह स्थिति भी समझी और इसका ध्‍यान रखा।

      अब आता हूं अध्‍यक्ष महोदय, स्‍वास्‍थ्‍य के ऊपर। सामाजिक और सामुदायिक क्षेत्र में इस सरकार ने अच्‍छा काम किया। उसके साथ आधारभूत ढांचे को भी विकसित करने के लिये काम किया। यह सामाजिक और सामुदायिक विकास, जिसमें शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य, ग्रामीण विकास, रोजगार यह सब चीजें आती हैं, इसलिये मैं निवेदन करना चाहता हूं आपके शासन काल में स्‍वास्‍थ्‍य बीमा की तरु कोई रूचि नहीं थी। इस सरकार ने आते ही राजस्‍थान स्‍वास्‍थ्‍य सेवा विकास कार्यक्रम का शुभारम्‍भ करने के साथ-साथ इससे 248 अस्‍पतालों को मजबूत करने का निर्णय लिया। इसी तरह से 50 सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र विशेष इमरजेंसी ओब्‍सट्रिक्‍ट केयर सेन्‍टर के रूप में सशक्‍त करने का निर्णय लिया। 200 उप स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों पर प्रसूति कक्षों का निर्माण कराया जा रहा है। आप जानते हैं कि एक महीने के अंदर-अंदर जो नये बच्‍चे पैदा होते हैं, एक महीने में ही उनमें से कई बच्‍चे समाप्‍त हो जाते हैं। इसलिये प्रसूति गृह का निर्माण का निर्णय इस‍सरकार ने लिया। 200 उप स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों पर प्रसूति केन्‍द्रों का निर्माण किया जा रहा है और आगे और बढ़ाने की सोच रही हैं। 2004-05 का बजट, जो 722 करोड़ का था, जो हमने ही बढ़ाया था, उसको और बढ़ाकर 2005-06 के अंदर 850 करोड़ कर दिया ताकि राजस्‍थान की स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं अच्‍छी हों। इसी तरह से आपने जितना बजट किया था जस्‍ट उससे डबल और इसी तरह से राष्‍ट्रीय राजमार्गों पर दुर्घटनाएं होती थीं। हम रोज अखबारों में पढ़ते थे आज वहां इतने आदमी मरे गये, आज वहां इतने आदमी मर गये, उसको रोकने के लिये, उसमें कमी करने के लिये 6 स्‍वास्‍थ्‍य संस्‍थाओं को सुदृढ़ कर ट्रोमा यूनिट स्‍थापित की गयी और मेरे यहां देवली में भी की, इसके लिये भी मैं सरकार को धन्‍यवाद देना चाहता । अब तक सिजेरियन सुविधा केवल जिला स्‍तरीय अस्‍पतालों में ही उपलब्‍ध थी, अब यह सुविधा राज्‍य के 150 सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों पर भी उपलब्‍ध होगी। इस सुविधा के अभाव में महिला मर जाती थी, बच्‍चे मर जाते थे। यह सुविधा देखिये आप।

      आधारभूत स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के लिये स्‍थानीय जनता में आशा का चयन किया गया। अब तक आधारभूत स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं का सुदृढीकरण के लिये 16,558 आशाओं का चयन कर लिया गया। संभाग मुख्‍यालयों को छोड़कर शेष जिला मुख्‍यालयों पर 1.1.2004 से कितना इम्‍पोर्टेन्‍ट डिसीजन है अगर कोई आयुर्वेद का इलाज कराना चाहता है तो आयुर्वेद नहीं, एलोपैथी इलाज का कराना चाहता है तो एलोपैथी नहीं, कोई होम्‍योपैथी का इलाज कराना चाहता है तो होम्‍योपैथी नहीं, मैं बधाई देना चाहता हूं मुख्‍य मंत्रीजी को, स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रीजी को, इन्‍होंने 1.1.2004 से एलोपैथी के साथ, आयुर्वेद, यूनानी एवं होम्‍योपैथी चिकित्‍सा पद्धति में से किन्‍हीं दो पद्धतियों की सुविधा एक ही स्‍थान पर उपलब्‍ध कराने की व्‍यवस्‍था की, एक ही छत के नीचे। इसलिये मैं बधाई देना चाहता हूं।

श्री टीकमचन्‍द कान्‍त: स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रीजी बड़े खुश हो रहे हैं।

डॉ.एन.एस.गुर्जर: इसी तरह से टेलीमेडिसन की सेवाओं का भी शुभारम्‍भ किया गया है। टेलीमेडिसन सेवाएं, संजीवनी कार्यक्रम, जनजाति एवं मरू क्षेत्रों में, हमारे मीणा साहब बैठे हुए हैं, मरू क्षेत्र में विशेषज्ञ चिकित्‍सकों की सेवाएं उपलब्‍ध कराई जाएंगी। इस तरह का निर्णय भी इन्‍होंने लिया है और इसी तरह से महिला होने के नाते बच्‍चों का दु:ख, महिलाओं का दु:ख भी जानती हैं और इन्‍होंने महिलाआंे के लिये 99,318 स्‍वयं सहायता समूह का गठन कराया, 33075 समूहों को बैंकों से जोड़ा, 5627 करोड़ रूपये की साख सुविधाएं इन समूहों को मुहैया कराई।    16 नवम्‍बर,2005 से तीन से छह आयु वर्ग के बच्‍चों को केन्‍द्रों पर गर्म भोजन उपलब्‍ध कराने की व्‍यवस्‍था की गयी। 1130 आदर्श आंगनबाड़ी केन्‍द्रों की स्‍थापना की गयी, 500 ग्रामीण महिला समूहों के काम के समय उनके शिशुओं की सार-संभाल के लिये शिशु बाल गृहों की स्‍थापना की भी पहल की गयी। जब ग्रामीण महिलाएं काम करती हैं तो उनके बच्‍चे सड़क पर पड़े रहते हैं। उनका भी ध्‍यान रहा। जब परिवर्तन यात्रा में देखा कि बच्‍चे सड़के पर पड़े हैं, गर्मी में हम देखते हैं, मैं मंत्री था, झण्‍डारोहण करने जा रहा था अध्‍यक्ष महोदय, सड़क के ऊपर दो साल के बच्‍चे को तड़पते हुए देखा, महिला काम कर रही थी मजबूरी में, मैंने उसी समय बहुत ही करूणात्‍मक एक कविता लिखी थी मुझे याद है, मैं वह कविता नहीं सुनाना चाहता लेकिन मेरा दिल पसीज गया।

श्री राजेन्‍द्र राठौड़: आप सुना ही दो।

श्री अध्‍यक्ष: बच्‍चे को गोद में तो नहीं उठाया।

डॉ.एन.एस.गुर्जर: और जब वह कविता मैंने भरतपुर में सुनाई तो नीरज जैसे कवि ने मेरी पीठ थपथपाई। ग्रामीण साथिनों का मानदेय 1 अप्रैल, 2004 से 350 से बढ़ाकर 500 रूपये प्रतिमाह किया गया ।

श्री संयम लोढ़ा: नाथूसिंह जी, आपकी कविता से मालूम पड़ेगा कि राजस्‍थान की पीड़ा को किस रूप में अनुभव करते हैं, यह कविता पढ़ो आप।

डॉ.एन.एस.गुर्जर: अति कुपोषित बच्‍चों बच्‍चों के प्रबन्‍धन की कार्य योजना यूनीसेफ के सहयोग से की जाकर अजमेर, अलवर, टोंक, जोधपुर, राजसमन्‍द, धौलपुर, झालावाड़ जिलों में इस योजना को कार्यान्वित किया जा चुका है।   इसी तरह से जनजाति विकास में, यहां रघुवीर जी बैठे हुए हैं, सरकार ने 9 से 12 की 12,300 जनजाति छात्राओं को साइकिलों का वितरण किया। सैकण्‍डरी परीक्षा में 75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्‍त करने वाली जनजाति छात्राओं को स्‍कूटी का प्रावधान किया। 17 हजार जनजाति परिवारों को भूमि आंवटन का लाभ दिया गया। सिविल सेवा के आरम्भिक मुख्‍य परीक्षा में सफल एस.सी.,एस.टी.छात्रों को अनुप्रति योजना के अन्‍तर्गत वित्‍तीय सम्‍बल दिया गया। दो या इससे अधिक विकलांग वाले परिवारों को आस्‍था योजना के अन्‍तर्गत बी.पी.एल. जैसी सुविधाएं दी गयीं। विधवा, विकलांग, पेंशनर्स को प्रति माह 10 किलो गेहूं नि:शुल्‍क, अब देखिये रेवड़ वाले लोग होते थे, जिनकी कोई सुनता ही नहीं था। आज यहां कल वहां, उनके लिये घुमन्‍तू, पशुपालक परिवार के बच्‍चों को स्‍कूल में पढ़ने की सुविधा प्रदान की गयी। रेवड़ वाले घुमन्‍तू व उनके पशुओं को बीमा सुविधा में लिया गया और इस वर्ष 1 करोड़ 50 लाख भेड़-बकरियों और 90 हजार घुमन्‍तू पशुपालकों को लाभान्वित किया गया। इसलिये आम आदमी यानि समाज का कोई वर्ग नहीं छोड़ा जिनको कुछ न कुछ नहीं दिया गया हो, जिसके इम्‍पैक्‍ट नहीं आया हो और जो वित्‍तीय प्रबन्‍धन किया है उसका।      इसी तरह से रोजगार के बारे में निवेदन करना चाहूंगा। आपके राज में शिक्षकों की नियुक्ति कोई नहीं, जीरो और इस राज के आने के बाद 32,933 शिक्षकों की नियुक्ति हुईं। विधवा एवं परित्‍यक्‍ता महिलाओं की नियुक्ति आपके राज में कोई नहीं, जीरो, 2732 प्राचार्यों एवं उप प्राचार्यों की पदोन्‍नति, 137 आपके राज में अब 631, ए.एन.एम. की नियुक्ति जनजाति क्षेत्रों में 935 मरू क्षेत्रों में 670, सहयोगिनों की नियुक्ति 22912, महिला सिपाहियों की नियुक्ति 1200, साथिनों की नियुक्ति 7674 इतना अगर हम देखें तो शिक्षा विभाग में अकेले 51000 से ज्‍यादा नौकरियां दी गयीं और रोजगार के अवसर दूसरी योजना में उपलब्‍ध कराये गये हैं। मैं आगे आना चाहूंगा यह तो केवल सरकारी नौकरियों की चर्चा कर रहा था।

                                                      ....        

MSR/USC/1530/2M

 

   इस तरह लघु उद्योगों का पंजीयन आपके राज में 48122 हुआ, इस राज में दो साल में 22149, दो साल में और इसके कारण इन उद्योगों में रोजगार आपके समय में1,72,676, पाँच साल में और दो साल में ही 83,864 लोगों को रोजगार प्रदान किया गया है।यह दो साल की उपलब्‍धी है। आर्टिजन इकाइयों में रोजगार आपके समय में 61 हजार को पाँच साल में और यहां दो साल में ही 28,606, लघु उद्योग इकाइयों में रोजगार सृजन आपके समय में 1,11,648 पाँच साल में और दो साल में 55,258 का रोजगार सृजन किया गया। प्रधानमंत्री रोजगार योजना में कि करीब 49,428 को रोजगार प्रदान किया गया जबकि आपके समय में पाँच साल में केवल 1,25,648 को किया गया था, यानि दो साल में ही 50 हजार पर गया।

      इसलिए रोजगार में भी आगे, महिलाओं के कल्‍याण में भी आगे, बच्‍चों के कल्‍याण में भी आगे, जनजाति के कल्‍याण में भी आगे।

      अब मैं ग्रामीण विकास के मामले में निवेदन करना चाहता हूं कि ग्रामीण क्षेत्र के अन्‍दर जब तक विकास नहीं होगा, कृषि का विकास नहीं होगा, इन वर्गों को सहायता देने के साथ उनका विकास नहीं होगा तो कैसे चलेगा? अभी औसतन वार्षिक बजट ग्रामीण विकास का 433.72 करोड़ रुपया आपका, हमारा रहा 693.31 करोड़ रुपया और यह जनवरी, 2006 में 774.9 करोड़ रुपये प्राप्‍त हो गया 717.44 करोड़ खर्च हो गया, प्रतिशत खर्च 92.58 प्रतिशत। आपके समय यह मानीटरिंग नहीं होती थी और जिसके कारण लास्‍ट की तिमाही में खर्चा होता था, उसके पहले कोई खर्चा नहीं होता था।

      सम्‍पूर्ण ग्रामीण रोजगार, स्‍वर्ण जयंती ग्रामीण रोजगार योजना जनवरी, 2006 से 22,297 बी.पी.एल. परिवार लाभान्वित हुए हैं। 25 हजार के स्‍थान पर 30,809 रुपये एकम परिवार को, पहले बी.पी.एल. परिवार को 25 हजार रुपये दिये जाते थे स्‍वर्ण जयंती ग्रामीण रोजगार योजना में अब इसको बढ़ा कर 30,809 कर दिया। सम्‍पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना में जनवरी, 2006 में 166.35 करोड1 रुपये का व्‍यय हुआ, राष्‍ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना में 100 दिवस रोजगार उपलब्‍ध कराये। इंदिरा आवास योजना में 58.58 करोड़ रुपये खर्च, डांग क्षेत्रीय विकास योजना में 5 करोड़ का प्रावधान मगरा क्षेत्र विकास योजना में जिसमें राजसमन्‍द, पाली, भीलवाड़ा, अजमेर, चित्‍तौड़गढ़ की पंचायत समितियां हैं, उनके गांवों को जोड़ कर उनमें विकास की योजना बनायी गयी। राष्‍ट्रीय परिवार लाभ योजना जनवरी, 2006 तक 10,389 बी.पी.एल. परिवार लाभान्वित । राष्‍ट्रीय सम विकास योजना, बांसवाड़ा, डुंगरपुर, झालावाड़, 105 करोड़ रुपये के विरुद्ध 93 करोड़ रुपये का व्‍यय हो चुका, कृषि उत्‍पादक वृद्धि और रोजगार के अवसर इसके तहत उपलब्‍ध होंगे। राष्‍ट्रीय पोषाहार मिशन में डूंगरपुर, बांसवाड़ा में 81 हजार किशोरियां लाभान्वित हुई हैं।

      इस तरह से अब तक यह तो यह सरकार कर रही है, इसके अलावा और छोटे-छोटे काम हैं, काम के बदले अनाज योजना राष्‍ट्रीय कार्यक्रम था, एस.जी.आर.वाई और दूसरी चीजें हैं लेकिन मैं एक निवेदन करना चाहता हूं कि केन्‍द्र सरकार क्‍या कर रही है? 190 करो़ रुपये ग्रामीण विकास का रोक कर बैठी हुई है दूसरी और। यह केन्‍द्र सरकार रोक कर बैठी है, हमारे समय आप तो हमारे ऊपर आरोप लगाते थे कि आप लोग उनको भेजने नहीं देते हो। कृषि में देखें, 261 सरसों केन्‍द्र स्‍थापित कर के 2400 करोड़ की 14 लाख टन रिकार्ड सरसों की खरीद पिछले साल की गयी जो कि एक ऐतिहासिक रिकार्ड है।

श्री रघुवीर सिंह मीणा: 190 करोड़ काहें के रोके हैं?

डॉ.एन.एस.गुर्जर: 190 करोड़ रुपये ग्रामीण विकास की विभिन्‍न योजनाओं के।

      किसान जीवन कल्‍याण योजना, जनवरी, 2006, 1282 मजदूरों, काश्‍तकारों को 429 लाख रुपये की सहायता दी गयी। गोवंश संवर्धन हेतु गौशालाओं को अनुदान दिया गया। राष्‍ट्रीय बागवानी मिशन में 13 जिलों में 41 करोड़ के कार्यक्रम बनाये और ओलावृष्टि में किसानों का चार माह को बिजली का बिल माफ किया।

      बी.पी.एल. की रियायतें हैं, बी.पी.एल. को जो रियायतें मिलती हैं और कई ए.पी.एल.परिवार के गरीब होते हैं लेकिन बी.पी.एल. मेंनहीं आ पाते हैं, सरकार ने सिफारिश की है कि ए.पी.एल. के गरीब परिवारों को भी वही रियायतें दी जाएं।

      राष्‍ट्रीय कृषि बीमा योजना के अन्‍दर 6 लाख किसानों को 2005 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया खरीफ 05 में। एक और निवेदन करना चाहता हूं कि बिजली की स्थिति पर सुबह डिस्‍कस हो रहा था, बिजली की स्थिति पर जब मैं आऊंगा तब भी बताऊंगा लेकिन मैं यहां भी इसको पाइंट आउट करना चाहूंगा कि पहली बार पौने तीन लाख हैक्‍टेयर रबी की फसल में पौने तीन लाख हैक्‍टेयर जमीन में ज्‍यादा बुवाई हुई है और उसका असर यह हुआ, अध्‍यक्ष महोदय, उसमें 50 प्रतिशत ट्यूबवैल पर आधारित कृषि है और उनमें लगातार बिजली दी गयी। कहीं भी बिजली को लेकर बहुत ज्‍यादा कोई आन्‍दोलन की स्थिति नहीं हुई।

श्री अध्‍यक्ष: यह बì